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तो लखन हसते हुअे जटसे बाथरुममे घुस गया.. ओर सृती अपनी चुत साफ करते कामुक नजरोसे उनकी ओर देखते हसती रही.. फीर अपनी सारी सही करते पुनमके पास बैठ गइ ओर उनकी आंखोमे देखते हसने लगी.. तो पुनम सरमके मारे सृतीके गले लग गइ.. तो सृती उनकी पीठ सहेलाने लगी..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. कैसी रही सुहागरात..
पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. पुछो ही मत.. आज मे बहुत खुस हु.. कास मेने भाइको पहेलेसे ही अपना लीया होता.. दोनोने खुब अन्जोय कीया.. भाइने आज मेरी सील खोलदी..
सृती : (जटसे अलग होते खुसीसे देखते) सील खोलदी..? मतलब..? पीछे..?
पुनम : (सरमाते हांमे गरदन हीलाते) येस.. अब मुजे कोइ अफसोस नही.. बहुत बहुत खुस हु..
सृती : (हसते) दीदी.. हमारा भाइ बडा ही कमीना हे.. देखना.. अब तो हर बार आपकी पीछेसे लेगा..
पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. ओर मे उसे खुसी खुसी दुगी.. दीदी.. अब ये तन सीर्फ हमारे भाइका हे.. मे उसे हर खुसी दुगी.. जो वो इसके हकदार हे..
सृती : (गले लगते) ओर मेभी.. दीदी.. हम कीतन खुस हेनां..? कल हम सबको जाना हे.. सहेर.. हमारे घर.. मोम भी आरही हे..
पुनम : (मुस्कुराते) अच्छा..? हमारे घर..?
सृती : नही.. उनके घर.. मतलब.. मेरे घर.. कल सबने डीसाइड कीया हे.. मोम.. नीर्मला आंटी.. अब मेरे घर ही रहेगी.. अभी तो उनके साथ भावनादी भी आ रही हे.. फीर वो हमारे साथ आजायेगी..
पुनम : (सामने देखते) तो फीर उनका घर..?
सृती : (मुस्कुराते) मंजु मोमने कहा हे.. वो हमारे जेठ उस घर ओर उनकी दुकानको बेचके सारा पैसा भावनादीको दे रहे हे.. ताकी उनकी जींदगी भी अच्छेसे कटे..
पुनम : (मुस्कुराते) चलो अच्छा हे.. अब वो भी हमारी जेठानीके साथ हमारी सौतन भी हे.. उसे अब कहा कोइ तकलीफ हे.. वोतो अब हमारे साथ ही रहेगी.. फीर भी मोमने सब सही कीया.. अेक बात ओर.. हमारे जेठजीने भानु भैयाको यहा जमीन दीला दी हे.. वो अब यही मकान बना रहे हे.. तो भावना दीदीका सहेरमे हमारे साथ रहेना ही बहेतर होगा..
सृती : (आस्चर्यसे देखते) हमारे गांवमे..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. उनके गांवमे सबकुछ बेचकर इधर आ रहे हे.. क्युकी रामुकाका भी चले गये तो अब हमारे खेतोकी रखवाली भानुभाइ ही करेगे.. ओर साथमे सरलाकाकाी भी..
सृती : (मुस्कुराते) तब तो सरलाकाकी ओर रमा भाभीके मजे हो जायेगे.. हें..हें..हें..
पुनम : (हसते धीरेसे) हां.. करनेदो मजे.. कमीनीओ वो भी हममेसे अेक हे..
सृती : (मुस्कुराते) ठीक हे.. तो फीर आप कंपलीट होजाइअे.. हम नीचे चलते हे..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही सृतीदी.. मे अभी नीचे जानेके लायक नही हु.. पीछे बहुत दर्द हे.. आज यही आराम करुगी.. अब रातको आपको ओर रजुदीको भी यही आना हे..
सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे हम वहा तो साथमे होगे.. आज यहा आप दोनो ही मजे करो..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही यार.. वो अेक बार उपर चडते हे तो बहार ही नही नीकालते.. हमे छोडते ही नही.. कल पहेली बार तीन बार करलीया.. तब जाके मुजे छोडा.. आप दोनो साथ होगी तो ठीक रहेगा..
सृती : (मनमे खुस होते) तो फीर ठीक हे.. रजुदीका तो पता नही मे आजाउगी.. फीर हम तीनो खुब मजे करेगे..
कहेते सृती नीचे चली गइ.. दीनमे बहुत कुछ हुआ.. लखनको देखते ही लता सर्मसार होगइ.. उसे दीलके अेक कोनेमे अपराधबोध महेसुस होने लगा.. वो बार बार लखनकी ओर दया भावसे देखती रही जैसे लखनकी माफी मांग रही हो.. लेकीन लखनने अेक बार भी लताकी ओर नही देखा..
सृती रजीयाने पुनम ओर उन दोनोकी सब पेकींग करली.. तो नीर्मला भुमीका ओर भावनाने पी अपनी अपनी पेकींग करली.. कल सुबह सबको आश्रमसे होकर सहेर जाना था.. तो दो पहोरको ही खानेके बाद सब आराम कर रहे थे तब मौका देखकर देवायतने नीर्मला ओर भुमीकाको अच्छेसे पेल दीया..
इस रात मंजुला चंदा भावना ओर लता.. सबने देवायतके साथ मजे कीये.. तो दुसरी ओर दया ओर रजीया साथमे सोइ.. इस रात भी लखन पुनम ओर सृतीको देर रात तक चोदता रहा.. फीर सुबह सब जल्दी तैयार होगये.. ओर आश्रमकी ओर नीकल गये..
सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. कैसी रही सुहागरात..
पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. पुछो ही मत.. आज मे बहुत खुस हु.. कास मेने भाइको पहेलेसे ही अपना लीया होता.. दोनोने खुब अन्जोय कीया.. भाइने आज मेरी सील खोलदी..
सृती : (जटसे अलग होते खुसीसे देखते) सील खोलदी..? मतलब..? पीछे..?
पुनम : (सरमाते हांमे गरदन हीलाते) येस.. अब मुजे कोइ अफसोस नही.. बहुत बहुत खुस हु..
सृती : (हसते) दीदी.. हमारा भाइ बडा ही कमीना हे.. देखना.. अब तो हर बार आपकी पीछेसे लेगा..
पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. ओर मे उसे खुसी खुसी दुगी.. दीदी.. अब ये तन सीर्फ हमारे भाइका हे.. मे उसे हर खुसी दुगी.. जो वो इसके हकदार हे..
सृती : (गले लगते) ओर मेभी.. दीदी.. हम कीतन खुस हेनां..? कल हम सबको जाना हे.. सहेर.. हमारे घर.. मोम भी आरही हे..
पुनम : (मुस्कुराते) अच्छा..? हमारे घर..?
सृती : नही.. उनके घर.. मतलब.. मेरे घर.. कल सबने डीसाइड कीया हे.. मोम.. नीर्मला आंटी.. अब मेरे घर ही रहेगी.. अभी तो उनके साथ भावनादी भी आ रही हे.. फीर वो हमारे साथ आजायेगी..
पुनम : (सामने देखते) तो फीर उनका घर..?
सृती : (मुस्कुराते) मंजु मोमने कहा हे.. वो हमारे जेठ उस घर ओर उनकी दुकानको बेचके सारा पैसा भावनादीको दे रहे हे.. ताकी उनकी जींदगी भी अच्छेसे कटे..
पुनम : (मुस्कुराते) चलो अच्छा हे.. अब वो भी हमारी जेठानीके साथ हमारी सौतन भी हे.. उसे अब कहा कोइ तकलीफ हे.. वोतो अब हमारे साथ ही रहेगी.. फीर भी मोमने सब सही कीया.. अेक बात ओर.. हमारे जेठजीने भानु भैयाको यहा जमीन दीला दी हे.. वो अब यही मकान बना रहे हे.. तो भावना दीदीका सहेरमे हमारे साथ रहेना ही बहेतर होगा..
सृती : (आस्चर्यसे देखते) हमारे गांवमे..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. उनके गांवमे सबकुछ बेचकर इधर आ रहे हे.. क्युकी रामुकाका भी चले गये तो अब हमारे खेतोकी रखवाली भानुभाइ ही करेगे.. ओर साथमे सरलाकाकाी भी..
सृती : (मुस्कुराते) तब तो सरलाकाकी ओर रमा भाभीके मजे हो जायेगे.. हें..हें..हें..
पुनम : (हसते धीरेसे) हां.. करनेदो मजे.. कमीनीओ वो भी हममेसे अेक हे..
सृती : (मुस्कुराते) ठीक हे.. तो फीर आप कंपलीट होजाइअे.. हम नीचे चलते हे..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही सृतीदी.. मे अभी नीचे जानेके लायक नही हु.. पीछे बहुत दर्द हे.. आज यही आराम करुगी.. अब रातको आपको ओर रजुदीको भी यही आना हे..
सृती : (सरमाते धीरेसे) अरे हम वहा तो साथमे होगे.. आज यहा आप दोनो ही मजे करो..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) नही यार.. वो अेक बार उपर चडते हे तो बहार ही नही नीकालते.. हमे छोडते ही नही.. कल पहेली बार तीन बार करलीया.. तब जाके मुजे छोडा.. आप दोनो साथ होगी तो ठीक रहेगा..
सृती : (मनमे खुस होते) तो फीर ठीक हे.. रजुदीका तो पता नही मे आजाउगी.. फीर हम तीनो खुब मजे करेगे..
कहेते सृती नीचे चली गइ.. दीनमे बहुत कुछ हुआ.. लखनको देखते ही लता सर्मसार होगइ.. उसे दीलके अेक कोनेमे अपराधबोध महेसुस होने लगा.. वो बार बार लखनकी ओर दया भावसे देखती रही जैसे लखनकी माफी मांग रही हो.. लेकीन लखनने अेक बार भी लताकी ओर नही देखा..
सृती रजीयाने पुनम ओर उन दोनोकी सब पेकींग करली.. तो नीर्मला भुमीका ओर भावनाने पी अपनी अपनी पेकींग करली.. कल सुबह सबको आश्रमसे होकर सहेर जाना था.. तो दो पहोरको ही खानेके बाद सब आराम कर रहे थे तब मौका देखकर देवायतने नीर्मला ओर भुमीकाको अच्छेसे पेल दीया..
इस रात मंजुला चंदा भावना ओर लता.. सबने देवायतके साथ मजे कीये.. तो दुसरी ओर दया ओर रजीया साथमे सोइ.. इस रात भी लखन पुनम ओर सृतीको देर रात तक चोदता रहा.. फीर सुबह सब जल्दी तैयार होगये.. ओर आश्रमकी ओर नीकल गये..