Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 14 - SexBaba
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Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

अपडेट ~ 87 - थे पास्ट एंड थे प्रॉमिस

अब तक...

श्रेया : वो सब में देख लुंगी... तुम बताओ न, फिर मिल जाएगा न पैसा?

आयुषी : उम्... येह ी गेस...!? ः!?

श्रेया (स्माइल्स) : थैंक्स!!! M-Mein तरय करुँगी... 2-3 लाख भी मिलेंगे तोह चलेगा.

श्रेया (मैं में) : िफ़ ी कैन पुल्ल 4 तो 5 लक्ष फ्रॉम हेरे... तोह दी ने भी 7 लाख जमा कर लिए है. फड़ भी तुड़वा ली थी उन्होंने एक. थें टोटल 12-13 हो hi जाएगा. बूत 50 लाख... बाद की बाद में देखि जाएगी... कही न कही से... हो जाएगा... I'll बोर्रोव सम फ्रॉम फ्रेंड्स... टुमारो थें!!!!


अब आगे...

Nidhi's अपार्टमेंट...

मॉर्निंग ~ 8:05 ऍम


"श्रेया! अभी तक तुम नाहा के नहीं आयी? और ये क्या? नाश्ता पहले hi शुरू हो गया तुम्हारा?"

आवाज़ थी निधि की, जो कुछ देरर पहले hi नाहा के बाहर निकली थी. उसके लम्बे बाल अभी भी गीले थे और भीगने के कारण काले घने रंग की दमक और भी बढ़ा रहे थे.

उन् प्यारी आँखों में बनावटी गुस्सा था श्रेया के प्रति और उसके हाथो में पूजा के लिए कुछ सफ़ेद फूल. बदन पे कस्सी हुई एक नारंगी रंग की साड़ी जो उसके नग्न पेट की मखमली त्वचा को उजागर कर रही थी.

कोई कह सकता था की ऐसी स्त्री, ऐसी औरत को कोई पति अपने पास रखने में असफल रहा? क्युकी, उससे देख अच्छे अच्छे नौजवानो की नियत बिगड़ जाती थी. फिर ऐसी औरत यदि आपकी अपनी पत्नी हो, तोह आप भला कैसे उससे अपने क़रीब से जाने दे सकते हो?

पर ऐसा हुआ था. रजत! निधि के पति ने अपनी घिनौनी फतीशेस के चलते, अपनी पत्नी को खो दिया था. दुसरो को दर्द देने में, खासकर औरतो को फिजिकली हरम पहुचाने में, रजत को आनंद आता था.

एक ऐसा आनंद, जिसका वो कायल हो चूका था. निधि को मारना, पीटना, बदन पे गरम पिघलती हुई मॉम गिराना, बालो को जोरर से खींचना, इत्यादि. इन् सब पीड़ाओं से निधि को गुज़ारता था वह. और निधि का वो बिलखता हुआ, दर्द से पीड़ित चेहरा देख उससे एक असीम सुख प्रदान करता था. पागलो जैसे वो हस्ता, मुँह से जीभ निकाल, जानवरो की तरह उसके भाव हो जाते थे. सरल शब्दों में, वो एक दरिंदा था. जिसके पिंजरे में, निधि जैसी मासूम कोयल, आके फस्स चुकी थी.

इधर निधि आज शायद नाश्ता बना के नाहा के बाहर आयी थी पूजा करने और श्रेया को उसने जब बिना नहाये hi नाश्ता करते हुए देखा तोह उससे डाटने लगी.

श्रेया : उघ! प्लीज दी! पहले पेट पूजा फिर काम दूजा. बाद में नहाने जाउंगी आज. आज बोहत भूख लगी है.

निधि : तुम भी न. देरर रात तक जागती रहोगी, पूरी नींद नहीं लोगी और फिर पूरा रूटीन बिगाड़ लोगी अपना.

श्रेया : सूवीएएए~ लास्ट टाइम बस. ः~

निधि (सर्र हिलाते हुए) : जाओ अब जल्दी. जूही से सीखो कुछ. वो इतनी छोटी होने के बावजूद नाहा धो के चली गयी स्कूल.

श्रेया : हाँ हाँ~ बिकॉज़ it's अप्रैल. जूही को पता है की बस कुछ दिन और. फिर तोह गर्मियों की छुटिया. पर मेरा ऐसा नहीं है न दीदी~ ी हैवे तो वर्क आल थे टाइम.

निधि : यही होती है लाइफ मिस श्रेया!! लाइफ इस हार्ड. ऑलवेज!!!

श्रेया निधि की बात पर कुछ न बोली, पर अंदर hi अंदर वो पूरी तरह से सहमत थी. लाइफ कैन बे ा बीच सोमेतिमेस. It's हार्ड. ऑलवेज!!!

वो अपनी hi सोच में कही डूब गयी,

'Don't वोर्री दी! I'll फिक्स एवरीथिंग फॉर यू. No! वे कैन दो थिस!! टुगेदर!!! मेने माँ को भी मन लिया है. इवन डॉक्टर से भी बात कर ली है. ी जस्ट हैवे तो सबमिट मेडिकल सीकिंग एप्लीकेशन टुडे. उसके बाद, कंपनी कुछ न कुछ राशि ज़रूर देगी.'

श्रेया, एक अच्छे और पॉजिटिव मंद सेट के साथ घर से निकली और कंपनी पहुची.

उसने अपनी कलेग आयुषी से भी कंसल्ट कर लिया था तोह अब बस एप्लीकेशन देने की hi देररि थी.

उसके बाद, श्रेया की माँ के बारे में चेकिंग होएगी की वाक़ई वो हॉस्पिटल में एडमिट है या नहीं? और बस, उसके बाद कंपनी कुछ मेडिकल फी ऑफर कर देगी.

यही था सिंपल सा श्रेया का प्लान. ऑफ़ कोर्स, ये चीटिंग थी एक प्रकार से. पर, आज के ज़माने में कौन चीट नहीं करता?

तो सर्वाइव, ओने मस्ट चीट.

***

Ragini's होम...

वीर के इस घर में, सुबह सुबह वीर नींद की वादियों में था, साथ hi सिस्टम भी स्लीप मोड में था. कुल मिलाके, वो एक चेन्न की नींद सो रहा था.

कॉलेज से आने के बाद वीर का पूरा फोकस निधि के ऊपर hi था और वो बस उसी के लिए अब अपनी नयी प्लानिंग को अंजाम देने वाला था.

सिस्टम का सबसे पहला मिशन ~ 'सोल्वे Nidhi's प्रॉब्लम' जो अब तक पेंडिंग पड़ा हुआ था. एक साल का वक़्त दिया गया था सिस्टम द्वारा. और अभी केवल अराउंड 4 महीने बचे हुए थे इस मिशन को.

रही बात पेनल्टी की? तोह सिस्टम hi पेनल्टी थी. यदि वीर निधि को रजत के चंगुल से चुर्राने में नाकामयाब रहा, तोह वह सिस्टम को खो देगा. हमेशा हमेशा के लिए.

*क्रियाआकककककककक*

इधर उसके रूम का दरवाज़ा खुला और कोई अंदर आया. वीर हमेशा अपने रूम का दरवाज़ा खुला hi रखता था जब जब वो अकेला सोता था. ताकि आभा या सुमन को जब भी आना हो वो आ जा सके.

पर फिलहाल अंदर आने वाला शख्स उन् दोनों में से कोई नहीं था. ये कोई और नहीं, श्वेता थी.

आहिस्ता आहिस्ता वो अंदर आयी, गेट को अंदर से hi बंद किया और वीर के बीएड के पास आकर बैठ गयी.

झुकते हुए वो वीर के सोते हुए उस चेहरे को देख जैसे कही खो गयी. कोमलता से हाथ उसके चेहरे पर फेरर, श्वेता वीर को सोते हुए निहार रही थी. जैसे वो किसी और को नहीं, अपने बच्चे को निहार रही हो.

उसके dil-o-dimaag में यही बस चूका था की वीर उसकी hi संतान है. कोई जरर नहीं, वीर उसका बच्चा है.

वीर का उसकी जान बचाना, अपने लोगो से धुत्कार दिए जाने के बाद वीर का उससे सहारा देना, अपनी एकमात्र होटल को खो देने के बाद, वीर का उससे वापस से दिलवाना. उसके इन् सभी एक्शन्स ने, श्वेता के मैं और ह्रदय में एक गहरी छाप चोरर दी थी.

उसकी नज़रो में वीर अब वह वीर नहीं था. वीर का ओहदा अब बोहत बढ़ चूका था दोनों hi श्वेता और भूमिका के मैं में. खासकर श्वेता के.

"केवल तुम्हे एक माँ का प्यार चाहिए था. जो में तुम्हे कभी न दे सकीय. केवल... केवल एक माँ का प्यार. कितनी गयी गुज़री हु न में? मेरे पास एक बेशक़ीमती हीरा जब से मौजूद था. और में वह उन् चाँद रुपयों के लिए मर्डर रही थी. न केवल मेने उन् रुपयों को खोया, बल्कि उस अनमोल हीरे को भी खो दिया. सही कहते है लोग, लालच बुरी बाला है. है न!? मेरे बच्चे!?"

वीर के बालो पर हाथ फेरर श्वेता आज अपनी मैं की बात बोलती जा रही थी.

*पूछ*

अपने गहरे लाल रंग से सजे होंठो से उसने वीर के गाल चूमे, फिर माथा, उसकी चीन और फिर अपने गालो से उसके गाल रगड़ने लगी. उसी के संग उसके बगल से झुक के बैठ गयी वह.

"पर अब में... तुम्हे सब कुछ दूंगी. एक माँ का प्यार जो तुम्हे कभी न मिल सका. वो में दूंगी तुम्हे... मेरा बच्चा... *पूछ* में निभाऊंगी तुम्हारी माँ की भूमिका... में मेरे बेतु... *पूछ* ""

भरपूर कोशिश के बाद भी वो रोक न पायी खुद को, और उसकी आँखों से ासु छलक उठे.

*टिप* *टिप*

आसुओ की बूंदे वीर की t-shirt पर गिर रही थी और श्वेता किसी अतीत में खो गयी.

20 इयर्स एगो...

ये बात थी तब की, जब भूमिका केवल 5 साल की थी. श्वेता एक खुश हाल जीवन व्यतीत कर रही थी.

उसके पास लगभग सब hi कुछ था. एक पति, एक अच्छा घर, एक फूल जैसी सुन्दर बेटी. और क्या hi चाहिए था उससे? यदि कमी थी तोह बस एक चीज़ की. उसके पास एक बीटा नहीं था.

पर शायद उसकी ये ख्वाइश भी पूरी होने जा रही थी. 9 महीने अपने गर्भ में बच्चे को रखने के बाद, आज उसके पेट में अचानक hi दर्द उठा. और श्वेता का पति, हितेश फटाफट श्वेता को लेकर फौरन hi अस्पताल पहुँच गया.

श्वेता स्ट्रेचर पर लेती नर्स के द्वारा अंदर भेजी जा रही थी और हितेश के हाथो को वो जोरर से थामी हुई थी. हितेश भी श्वेता का हाथ थामे, रूम के बाहर तक उसके साथ साथ आया.

और फिर...

डिलीवरी की प्रोसेस शुरू हुई. हर्र गुज़रते पल, श्वेता की ज़ररदार चींखे हॉस्पिटल के उस वार्ड में बिखरती गयी.

दर्द से बिलबिलाती श्वेता सब कुछ सहते जा रही थी. क्युकी, अगले hi पल उससे अपनी एक और संतान देखने को मिलने वाली थी. उसके जन्म और ख़ुशी के लिए श्वेता कुछ भी करने को तैयार थी.

अत्यंत पीड़ा हो या कुछ भी, वो सब सहते जा रही थी. मैं में केवल अच्छे विचार hi आ रहे थे.

भूमिका अब अकेली नहीं रहेगी, उसके साथ उसका एक भाई या बहिन रहेगी अब. उसका पति और भी खुश हो जाएगा अपना वारिस पाने के बाद. बड़ा होक वो अपने माँ बाप के सपने पूरे करेगा. अभी से hi वो इन् ख्वाबो में खो गयी.

"Aaaaaaaaaaaaaa माआआआ~"

दर्द पे दर्द, असहनीय एकदम. माँ होना अपने आप में सुख तोह होता है पर माँ bann'ne का जो रास्ता होता है, उस रास्ते से गुज़रते वक़्त जो पीड़ा होती है, उससे केवल एक महिला hi समझ सकती है. पुरुष नहीं!

आखिर कार, उन् चींखों पर विरहां लगा.

और कुछ अंतराल के बाद, श्वेता की आँखें धीरे धीरे खुली.

'!!!???'

सामने hi हितेश उसका पति बैठा हुआ था. सर्र झुकाये. और अपनी पत्नी की हरकत महसूस करते hi वो उठ के उसके पास आ गया.

श्वेता कुछ न बोली. उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी. ऐसा महसूस हो रहा था उससे जैसे वो एक जुंग में लड़ के आयी हो. जिधर अब उससे सांस लेने के अलावा और कुछ नहीं सूझ रहा था.

हितेश जान गया की श्वेता क्या पूछना चाहती है इसलिए उससे अब बोलना hi पड़ा.

हितेश : W-Wo...

श्वेता : !!????

पर वो बोलता की तभी डॉक्टर अंदर आ गया और...

हितेश : D-Doctor साहब!

डॉक्टर (नॉड्स) : J-Jiii!

श्वेता (हफ्ते हुए) : M-Mera... मेरा बच्चा??

श्वेता के मुँह से सबसे पहले शब्द यही निकले. उससे अपनी हालत की परवाह नहीं थी. पहला ख़याल आया तोह बस अपनी संतान का.

डॉक्टर : ....

हितेश : ...

श्वेता : ???

डॉक्टर : ी... I'm सो सॉरी मिस बूत... समथिंग तेर्रिब्ले एंड अनवांटेड हप्पेनेड.

श्वेता : ??

डॉक्टर : W-We... वे couldn't सेव योर सोन. He's no मोरे!!! We're सो सॉरी!!

ये सुनते hi, श्वेता कुछ पालो के लिए सन्न रह गयी.

श्वेता : हँ!?

डॉक्टर : डिलीवरी वास् ा फेलियर. वे अरे एक्सट्रेमेली सॉरी.

श्वेता : H-Hitesh!?? D-Dekhiye... Y-Ye क्या कह रहे है?

ये खबर श्वेता को अभी नहीं दी जाने वाली थी. पर अंत में सभी ने यही डीडे किया की अभी देना hi बेहतर थी. यदि इन केस श्वेता को झटका लगने से उसकी हालत बिगड़ती भी है तोह वह वैसे भी डॉक्टर्स की निगरानी में hi रहने वाली थी. इसलिए, ये दुखद समाचार उससे अभी hi दिया गया.

कितनी आस लिए थी वह, क्या क्या सपने नहीं सजाये थे उसने? अपनी कोख से एक नयी संतान को जन्म देने जा रही थी वह.

बेहोशी के बाद अपनी आँखें खुलते hi अपने बच्चे को देखना चाहती थी वह. पर उससे मिला क्या?

जिस संतान को उसने जन्म दिया, उसका बच्चा...

वो छोटी सी नन्ही जान पहले hi जा चुकी थी?

श्वेता को उस शान कितनी पीड़ा महसूस हुई थी, ये कोई भी शब्दों में बया नहीं कर सकता.

खबर सुनते hi उसकी कंडीशन हाइपर हो गयी और एक बार फिर, वह बेहोशी की हालत में चली गयी.

जब उससे पुनः होश आया. तोह उसकी आत्मा से जैसे कुछ गायब हो चूका था. वो एक ज़िंदा लाश की तरह हो चुकी थी. सांस तोह लेती थी, पर कोई जवाब नहीं, आँखों से बस आसुओ की धरा, और sunn'na तोह जैसे चोरर hi दिया था उसने.

इतना बड़ा सदमा लगा था. समय तोह लग्न hi था उभरने में.

9 महीने! 9 महीने तक उसने अपने बच्चे को गर्भ में रख इतना कष्ट उठाया. पर...

सब कुछ ख़तम हो चूका था अब उसके लिए.

बस यही एक अधूरी इच्छा तोह थी उसकी. एक बेटे का होना. बीटा आ भी गया था. पर अंतिम चरण पर जैसे किसी की नज़र लग गयी उसकी खुशियों को और एक झटके में सब कुछ छीन गया उस से.

कुछ समय बीत गया श्वेता को हॉस्पिटल में डॉक्टर्स की निगरानी में. जब उसकी कंडीशन स्टेबल हुई और वो घर जाने की स्थिति में आयी तोह...

एक और बड़ा झटका जैसे उससे लग्न बाकी था.

"हमने आप से एक बात और छिपाई है. उस वक़्त हमारी हिम्मत नहीं हुई आपसे बताने की पर अब चुकी आपकी हालत बेहतर है और आप sunn'ne समझने की हालत में है तोह ये हमारी जॉब है की हम आपको बताये. एक्चुअली... वो... I'm वैरी सॉरी तो तेल्ल यू मिस श्वेता... पर... पर अब आप माँ नहीं बन्न सकती..."

*बुम्म्म्म*

एक और विस्फोट हुआ उसके अंदर. इतना दुःख काम था जो उस से ये भी छीन लिया गया? इससे सुनते hi बची कुछ कसार जो थी, वो भी पूरी हो गयी. पूरी तरह टूट पड़ी वह.

उससे डॉक्टर्स से और जानकारी में फिर पता लगा की, डिलीवरी के वक़्त कुछ ऐसे सरकमस्टान्सेस बन्न गए थे जिसके चलते न केवल उसके बच्चे की जान गयी बल्कि श्वेता की जान बचाने के लिए भी उन् लोगो ने एक्सट्रीम मेझस लिए थे. श्वेता के अंदर कुछ ऐसा बॉडी part था, जो शायद दमगढ़ या रुपतुरेद हो चूका था उस फेल्ड डिलीवरी के वक़्त.

जिसकी वजह से, वह दुबारा माँ bann'ne में असक्षम होक रह गयी.

उस बेचारी से एक माँ bann'ne का सुख भी छीन लिया गया.

श्वेता महीनो तक इतना गंभीर रही, उसकी हालत देख आस पास के लोग बस तरस hi जताते थे. हर्र वक़्त रोना, उदासी में डूबे रहना, किसी काम में मैं न लग्न. श्वेता जैसे छोपे उप नहीं कर पा रही थी.

पर जैसे तैसे, उपरवाले के चमत्कार से, उसने हिम्मत बाँधी. जो हुआ, सो हुआ. उससे आगे बढ़ना था अब. उसके पास एक हस्ता खेलता परिवार था. हितेश और भूमिका. वो अपने चलते उन्हें उदास नहीं रखना चाहती थी.

आखिर कार वो अपनी उस हालत से थोड़ा ठीक हुई. पर...

पर जैसे वाक़ई उसकी खुशियों को किसी की नज़र लग चुकी थी. एक दिन, जब वो बैठी हुई, भूमिका के लिए ठण्ड में स्वेटर बुन्न रही थी. तब एक लेटर आया उसके नाम पे.

घर की नौकरानी उससे वो लेटर देने आयी. लेटर खोलते hi जैसे hi उसने पूरा पढ़ा वो हड़बड़ा की चींखते हुए उठ गयी.

"Aaaaaaaaaa~"

आस पास रखे बर्तन भी गिर पड़े. और कमरे में उनका शोर फेल गया. उसके थार ठहराते हाथो से वो चिट्ठी ज़मीन पर गिर गयी.

जो उसने अपने कभी जीवन में भी नहीं सोचा था वो हो गया.

हितेश, उसका पति...

पहले से hi...

शादी शुदा था!!!!!!

लेटर उसी की ऑर्डर से था. और बस चाँद शब्द hi लिखे हुए थे~

"श्वेता! मुझे माफ़ कर देना. मेने तुम्हे पहले नहीं बताया. कभी हिम्मत hi नहीं हुई. पर सच बात ये है की, में शादी शुदा हु. तुम मेरी पहली नहीं, दूसरी पत्नी हो. में जानता हु तुम्हे झटका लगा होगा ये पढ़ के. पर यही सच्चाई है. तुमसे मिलने के बाद मुझे नहीं लगा था की हमारी शादी इतनी जल्दी हो जाएगी. खासकर ऐसे की तुम भाग के मुझसे शादी करोगी. और में खुद को रोकक भी न पाया. मेरे पास कोई वारिस नहीं था. पहली पत्नी से भी 2 लड़किया थी मुझे. और तुमसे भी भूमिका हुई. में इस बार बोहत hi सकारात्मक था. सोचा था इस बार हमारा एक बीटा होगा. पर एक दुखद समाचार hi मिला. वही मेरी पहली पत्नी ने... मुझे इस बार एक बीटा दे दिया. मुझे माफ़ करना. अब में तुम्हारा देख भाल नहीं रख पाउँगा."

"तुम एक बेहद hi ख़ूबसूरत और प्यारी औरत हो श्वेता. यदि मुझे पहले तुम मिली होती, तोह में दूसरी शादी कभी नहीं करता. अपनी गलतियों की सजा के तौर पर... तुम्हारे लिए वो घर तुम्हारे नाम कर के जा रहा हु. कुछ पैसे भी है अलमारी में. भूमिका के नाम भी कुछ पैसे है. ये मेरे ग्लानि के चलते तुम्हारे लिए. मुझे ढूंढ़ने की कोशिश न करना. में नहीं मिलूंगा कभी. मेरा नाम, हितेश नहीं है. और न कभी था. तुम चाहो तोह पुलिस में कंप्लेंट कर सकती हो. पर कोई फायदा नहीं होगा. में बोहत दूर जा चूका होऊंगा तब तक. इसलिए खुद को परेशां मत करना. तुम जानती हो की में भी कोई इतना अमीर नहीं की दो दो परिवार संभाल सकू. अब चुकी मेरा बीटा मेरे पास है. तोह में उसकी पढ़ाई और भविष्य के लिए पैसे जोड़ना चाहूंगा. भूमिका के लिए में एक अच्छा बाप न बन्न सका. माफ़ कर देना मुझे श्वेता. माफ़ कर देना. ~ हितेश!"

बस! यही चाँद शब्द थे उस खत में.

श्वेता सोच रही थी की वो अपने दुःख से बाहर आ पाएगी. और अब? ये क्या था? भगवन तोह जैसे उस से सुख chheen'ne पर hi तुले हुए थे. इस बार तोह उसका पूरा संसार hi उजाड़ गया.

डाट देने पड़ेगी श्वेता की, जो इतना सब कुछ सहने में बावजूद अपना मानसिक संतुलन नहीं खोयी. बेशक, वो बेहद रोई, टूट टूट के रोई, विलाप किया, और न जाने किन किन हालातो से गुज़री. पर अभी भी उसने अपना आप और संतुलन नहीं खोया था.

उससे इतना बड़ा धोका मिला था. इतना बड़ा धोका. उस दिन से hi, भूमिका उसके लिए एक बेटी तोह थी hi पर एक बीटा भी बन्न गयी. वही सब कुछ थी उसका.

श्वेता ने उन् पैसो से भूमिका को पढ़या लिखाया. खुद उसने होटल मैनेजमेंट के लिए कोर्स किया. सब कुछ उन्ही पैसो से.

पर पैसे तोह पैसे थे. एक न एक दिन तोह ख़तम होने hi थे. श्वेता काम भी करती थी पर उसकी आए इतनी नहीं थी की वो भूमिका की फीस के साथ साथ घर के सारे खर्चे उठा पाए.

नतीजा? उससे अपना घर भी बेचना पड़ गया. वो सड़क पर आ चुकी थी. Be-sahaara एकदम. जब दर दर वो भटक रही थी.

तब... तब उसकी मुलाक़ात एक शख्स से हुई.

बृजेश!!!

श्वेता चाहती नहीं थी. पर... पर अपनी भूमिका के लिए जैसे वो सब कुछ करने को राज़ी थी. उससे पता लगा की बृजेश भी एक औरत की तलाश में था. तोह बस, श्वेता ने कोई कसार नहीं छोर्री, बृजेश के संग अपना रिश्ता जोड़ने में.

और जल्द hi दोनों की शादी भी हो गयी. कुछ इस तरह श्वेता ने फिर बृजेश के घर में क़दम रखा.

उससे समझ आ चूका था की खुद की संपत्ति होना कितना ज़रूरी होता था. मैं में वो ठान चुकी थी, की...

की वो हमेशा अपने और भूमिका के बारे में hi सोचेगी. क्युकी कोई किसी का अपना नहीं होता. भूमिका को भी वह वही सिखाती. अपनी दास्तान के बारे में बताती.

और इस घर में आते hi उसकी पहचान हुई फिर वीर से.

"वीर!!! आज से में तुम्हारी माँ हु. ठीक है?"

वीर से उसने कहा, तोह वीर ने कुछ न कहा. वो उससे देखा और रट हुए अपने स्कूल का बैग लिए अपने कमरे में घुस गया.

'क्या हुआ इस लड़के को?'

श्वेता आये दिन वीर से बात करने का तरय करती, पर वीर कुछ न कहता. उसने सोचा था की वीर को प्यार से रखे. बेटे की कमी उससे हमेशा महसूस होती थी. और अब रिश्तो के चलते, वीर तोह उसका hi बीटा था न? तोह वीर को अपना maan'ne में क्या बुराई थी?

पर... श्वेता का ये विचार din-ba-din बदलता गया. जब आये दिन वीर के किस्से उसके कानो में पड़ने लगे.

"आज वीर ने क्लास में पंत में hi सुसु कर ली. हाहाहा~"

प्रांजल आये दिन कुछ न कुछ बताता.

"अरे... हाहाहा~ आज वीर को सर से मार पड़ी. सर का दिया हुआ होमवर्क hi नहीं किया इसने हेहेहे~"

"पता? पता? आज क्या हुआ? वीर ने आज क्लास के लड़को से झगड़ा कर लिया और फिर उन् लोगो ने इससे धो दिया. हहै"

"दादा जी! वीर न ऑटो में... एक लड़की की स्कर्ट खींच रहा था आज. वो बोहत रोई थी. आप चाहो तोह मेरे दोस्तों से पूछ लेना."

तोह कही विवेक की शिकायते,

"वीर ने तोह मेरी इज़्ज़त hi डवा दी कॉलेज में. में इससे टचफ़ेस्ट दिखाने ले गया था और ये... उघ! अब क्या बोलू में, मेरे दोस्तों के सामने मज़ाक बना दिया. आखिरी साल है मेरा, अब क्या सोचेंगे वो मेरे बारे में."

तोह कही आस पड़ोस के लोग,

"आप अपने वीर को समझाइये. कल मेरे आँगन में डेल हुए कपड़ो में कीचड उछाल के गया है ये."

"अरे ये तोह कुछ भी नहीं है. एक दिन इसने कॉलोनी के उस सब्ज़ी वाले के सर्र में पत्थर मार के उसका सर्र फोड़ दिया था. मेने और नीलम ने पट्टी करि थी उनकी. और ये? ये भाग गया था वह से."

"केवल इतना hi नहीं, अरे एक दिन इसने वो क्या कहते है... कौन सा खेल रहता है? मार गेंद!?? गेंद से मारते है जिसमे? अरे इसने उस ठोस गेंद से उस कोष्टा साहब के छोटे बच्चे को मार दिया था. कोष्टा साहब ने इससे मेरे सामने थप्पड़ मारा था."

"देखिये दादा जी! हम सब आपको अपने दादा जी जैसा मानते है. पर अपने इस पोते को समझाइये. क्रिकेट खेलते वक़्त, रैकवार साहब का बच्चा आँगन में था तोह इसने ऐसी गेंद फेकि की उसके सर्र को जा लगी. रैकवार जी की पत्नी ने इससे मारा था फिर."

और न जाने क्या क्या... ये तोह 1% भी नहीं था उन् शिकायतों में से.

और ऐसे hi, श्वेता का लगाव वीर के प्रति कमज़ोर होता गया, उसका विचार वीर के लिए बदलने लगा. वो वीर को प्यार तोह देना चाहती थी, पर...

आये दिन ऐसी घटनाओ से वीर जैसे उस से दूर जाता चला गया. वो यदि वीर को देखती तोह बस उससे सर्र झुका के अपने कमरे में जाता हुआ.

*थुड़*

और एक तेज़्ज़ आवाज़ के साथ उसका कमरा बंद हो जाता.

ज़्यादा समय नहीं लगा, जब श्वेता की नज़रो में वीर मात्र एक अजनबी के सामान बन्न के रह गया.

और श्वेता ने वीर के प्रति प्यार, इज़्ज़त, लगाव, चिंता सब कुछ जैसे नज़र अंदाज़ कर दिया. कही लुप्त हो गयी जैसे.

फिर आया वो समय, जहा श्वेता ने अपनी सूझ बूझ से एक होटल अपने नाम करवाई.

कितना ज़रूरी था ये सब. यदि उससे धोका मिला भी तोह काम से काम जीने के लिए उसके पास कोई सहारा तोह रहेगा.

पर उससे और चाहिए था. जितना मिल सके उतना बेहतर. खबर मिली, मनोरथ की प्रॉपर्टी की. जब दो प्राणी किसी एक चीज़ का शिकार करते है तोह अक्सर वो रास्ते में एक दूसरे से मिल hi जाते है.

यहाँ भी वही हुआ, श्वेता जाके मिल चुकी थी विवेक और प्रांजल से. फिर वो समय आया जहा प्रॉपर्टी के नाम पर वो वीर को घर से बाहर निकलवाने के प्लान में भी पीछे न हटी.

ये सब ज़रूरी था. उसके लिए केवल भूमिका hi सब कुछ थी. तोह उसने ये किया.

पर मिला क्या? ठेंगा! प्रॉपर्टी हाथ से निकल गयी. फिरसे, उससे धोका मिला. अपने नए परिवार से.

वो वक़्त आया, जिधर वो अपनी जान पर खेल रही थी. और अपनी साड़ी उम्मीद खो चुकी थी. सोच रही थी की कितना व्यर्थ बीता उसका जीवन. पर उस वक़्त तब...


उसी ने उससे बचाया. उसी वीर ने जिससे वो शुरू से अंत तक नेग्लेक्ट करती आयी. उसी शान, श्वेता के अंदर का वो ग्लानि का बाँध टूट गया. और उसके मैं ने ये बैठा लिया की वीर उसकी hi तोह संतान है.

हाँ! जिस संतान के लिए वो इतना तदपि, वो जैसे यही था. जब वीर ने कहा था की वो उसकी माँ नहीं, तब...

इसलिए बोहत ज़्यादा पीड़ा हुई थी उससे. वीर कुछ भी छीन ले उस से. पर... पर कभी भी ये हक़ न छीने उस से. वीर की माँ होने का हक़.

एक बीटा उससे मिल चूका था. अपना बीटा. अपनी संतान. और अब उससे कुछ नहीं चाहिए था.

कुछ भी नहीं. न पैसा... न शोहरत... न कोई प्रॉपर्टी...

बस... वीर!!!

*टिप* *टिप*

ासु जब उसके हाथ पर गिरे, तोह श्वेता एकदम से जैसे अपने अतीत से बाहर आयी.

यही था उसका अतीत. वीर अभी भी सो रहा था. वो तोह भूल hi गयी थी की वो यहाँ वीर को निहारने आयी थी. अतीत को जितना भी भुला दो, एक न एक बार सामने आ hi जाता है.

"मेरा बच्चा...!!!"

*पूछ*

आसुओ को पॉच, उसने वीर के सर्र को उठाया और उसके चेहरे को अपनी छथि में समां लिया.

जैसे hi वीर का चेहरा उसके अध् नग्न ूरोज़ से टकराया, एक सिहरन उसके पूरे बदन में फेल गयी. एक चिंगारी... भड़क उठी.

और उसकी रुलाई चूत गयी. वीर के चेहरे को कस के पूरी ताक़त से उसने अपने स्तनों में दबा लिया. पल्लू तोह पहले hi गिर चूका था. उन् बड़े दूध की दरार में वीर का चेहरा छुप चूका था.

"मेरा बच्चा.. *सुबुक* ओह्ह मेरा बच्चा ♡ *सुबुक* मुझे माफ़ कर दे वीर... इस औरत को माफ़ कर दे... *सुबुक* में कसम खाती हु, आज से ये श्वेता तुझपे कोई हानि नहीं आने देगी मेरे बच्चे... अहह~ मेरा बेतु... *मुआअह्ह्ह्ह* *सुबुक* ी स्वेअर वीर... माफ़ कर दे इस औरत को... माफ़ कर दे... *सुबुक* "

वो बड़बड़ाती रही. जब तक की उसने वीर के पूरे चेहरे पर अपनी चुम्बनों की बरसात नहीं कर दी. और फिर be-mann वो उससे चोरर के अपने कमरे में गयी.

***

इवनिंग ~ 7:44 पं

वीर दिन भर के कुछ काम निपटा के जब घर आया तोह अपने कमरे में जा के उसने हाथ मुँह धोये.

और बाहर आते hi नीचे से उससे रागिनी की आवाज़ सुनाई दी,

"वीर! तुमसे मिलने श्रेया आयी है."

'हम्म? श्रेया जी?'

सवाल लिए वो नीचे आया तोह श्रेया ऑफिस के hi कपड़ो में बैठी हुई थी. और वीर को देख एक फीकी सी स्माइल पास की उसने.

श्रेया : उम्... वीर... K-Kya हम अकेले में बात कर सकते है थोड़ा?

ये सुनते hi वीर को आश्चर्य हुआ हो या न हुआ हो, पर रागिनी के कान ज़रूर खड़े हो गए थे. वो एक तीखी नज़र से श्रेया को देखि पर श्रेया के उसके देखने पर फ़ौरन hi रागिनी ने अपनी आँखों के एक्सप्रेशन बदल लिए.

रागिनी (स्माइल्स) : वीर! अपने रूम में ले जाओ. श्रेया को शायद कुछ पर्सनल बात करनी होगी.

रागिनी की वो स्माइल देख वीर समझ गया. वो जैसे कहना चाह रही थी, 'जाओ! जाके बात करो. और बाद में मुझे सब कुछ बताना क्या क्या हुआ उस बंद कमरे में. यदि एक भी डिटेल छूटहि तोह देखना फिर.'

वीर हाँ में सर्र हिलाते हुए उठा और श्रेया को अपने कमरे में लेके गया. अभी वह आके अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया hi था की...

श्रेया पीछे से उस पर टूट पड़ी. उसकी पीठ को जोरर से जकड श्रेया के हाथो ने उसके पेट को कस लिया.

"हँ?"

वीर सोचा शायद ये फन वे में था पर... लेकिन श्रेया के अगले पल hi सुबुकने की आवाज़ और हिचकियो ने वीर को हैरानी में दाल दिया.

वीर : Sh-Shreya जी!? क्या हुआ?

और श्रेया ने सब कुछ बता दिया...

सब कुछ. जो आज उसके साथ हुआ. सुनते सुनते वीर की आँखें फैलती चली गयी और मुट्ठी कस्सति गयी.

बस बचा था तोह...

*डिंग*

[Mission : 1) Rescue the prey from the p
रेडिटोर.

2) कॉन्कर निहारिका बंसल.

रिवार्ड्स : 1) ???? पॉइंट्स.

2) 3 फ्री क्वेस्ट हंट अत्तेम्प्ट्स.

वेन्यू : क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कंपनी.

टाइम लिमिट : 2 डेज.

मिशन फेलियर पेनल्टी : 8000 पॉइंट्स.]

वीर पलटा और उसने श्रेया को अपने सीने से लगा लिया,

"Don't वोर्री! ी प्रॉमिस! 2 दिन के अंदर hi अंदर... I'll टर्न थे इवेंट्स. एंड, you'll बे फाइन."

.

.

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.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

नई अर्च पास आते जा रहा है. ी थिंक, उसकी स्टार्टिंग से पहले अभी मोरे थान 5 उपदटेस तोह लग जाने hi चाहिए, कुछ मैटर्स को सॉर्ट आउट होने में. बाकी, लिखे ठोकने का और रेवोस रखने का. और सोचने का, की ऐसा क्या हुआ होगा श्रेया के साथ? :स्माइल2:


धन्यवाद! ✨
 
अपडेट 88 विल अर्रिवे @ नाईट ों 25तह मई.
 
अपडेट - 88 ~ इंटिमीडेटिंग प्रजेंस

अब तक...

*डिंग*

[Mission : 1) Rescue the prey from the


प्रिडेटर.

2) कॉन्कर निहारिका बंसल.

रिवार्ड्स : 1) ???? पॉइंट्स.

2) 3 फ्री क्वेस्ट हंट अत्तेम्प्ट्स.

वेन्यू : क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कंपनी.

टाइम लिमिट : 2 डेज.

मिशन फेलियर पेनल्टी : 8000 पॉइंट्स.]

वीर पलटा और उसने श्रेया को अपने सीने से लगा लिया,

"Don't वोर्री! ी प्रॉमिस! 2 दिन के अंदर hi अंदर... I'll टर्न थे इवेंट्स. एंड, you'll बे फाइन."


अब आगे...

व्हाट रियली हप्पेनेड?

यही सवाल था अभी. ऐसा क्या हुआ था श्रेया के साथ जो वो अचानक hi वीर से मिलने आ पहुची. वो भी ऑफिस से छूटने के तुरंत बाद. और ऊपर से रट हुए वीर की बाहो में आ धमकी.

कुछ बेहद hi चिंताजनक विषय था. कुछ ऐसा, जिस से श्रेया बोहत डर चुकी थी.

और ये सब कुछ श्रेया ने अपनी ज़ुबानी में कल रात वीर को बता दिया था. जिसका नतीजा? वीर का वह मिशन मिलना.

श्रेया! जो सब कुछ प्लान कर के कंपनी से पैसे लेने की सोच रही थी, उसके पूरे प्लान पर पानी फिर चूका था.

दरअसल कल हुआ यु था की...

'ऑलराइट!!! आज मेडिकल एप्लीकेशन सबमिट कर दूंगी. उसके बाद डेफिनिटेली पैसे मिल जाएंगे.'

श्रेया अपने ऑफिस के क्यूबिकल में बैठे बैठे hi सोच रही थी. प्लान में कोई कमी नहीं थी उसके. वैसे भी उसकी माँ रिसेंटली एडमिट थी hi हार्ट अटैक की वजह से. श्रेया को बस अपनी माँ की साड़ी मेडिकल फाइल्स दिखानी थी. बस, एक hi चेंज करना था उसमे. डेट्स का चेंज. डेट्स अभी की होनी चाहिए.

और वो काम करने के लिए उसने अपने फॅमिली डॉक्टर से बात भी कर ली थी, जिन्होंने उसकी माँ को अभी रीसेंट में hi ट्रीट किया था. प्लान तोह एकदम सॉलिड था. कही कोई ज़्यादा लूपहोल्स नहीं थे.

खर्र! रेसस्स का वक़्त हुआ, और श्रेया अपने लंच के बाद चाय की चुस्की लेने बाहर गयी.

अभी वो लंच ब्रेक के बाद अपने क्यूबिकल में वापस जा hi रही थी जब,

"श्रेया!? मिस निहारिका तुम्हे अपने केबिन में बुला रही है."

श्रेया : हँ!?

श्रेया के बगल में बैठने वाली एक कलेग ने उससे इन्फॉर्म किया. ये आयुषी नहीं थी. कोई और थी.

श्रेया : उम्... मिस निहारिका!?

कलेग : अरे हाँ! हर हेड अपनी.

श्रेया : O-Ohhh! वह... सूरे! थैंक यू!

कलेग : It's okay!

श्रेया बिना कुछ ज़्यादा सोचे समझे उठी. बल्कि ये अच्छा hi था उसके लिए. वैसे भी उससे अपनी एप्लीकेशन सबमिट करने तोह जाना hi था. इसी बहाने वो जान भी लेगी की हर हेड को उस से क्या काम ाँ पड़ा.

एक होप लिए वो सीधा हर डिपार्टमेंट की ऑर्डर गयी, और वह साइड में hi एक केबिन था बड़ा सा जो केवल और केवल हर डिपार्टमेंट की हेड, मिस निहारिका को ाललटेड था.

दरवाज़ा खोलते हुए श्रेया ने अपना सर्र अंदर किया और परमिशन ली,

"मई ी के इन ma'am?"

"यस! के इन!!!"

और अंदर से एक मधुर आवाज़ ने उससे अंदर आने की रज़ामंदी दी.

अंदर आते hi, श्रेया को निहारिका ने इशारा कर बैठने के लिए कहा. उसके होंठो पर एक कुटिल मुस्कान थी. हाथो में पेन लिए वो उससे टटोल कर श्रेया को एक शरारत भरी मुस्कान से देख रही थी. जैसे मानो उसके पिंजरे में कोई नया शिकार आके फस्सने वाला हो.

श्रेया की नज़र सबसे पहले सामने की टेबल टॉप पर रखे उस नाम टैग पर गयी.

'हम्म? निहारिका बंसल? मेरे इंटरव्यू के टाइम किसी और ने मेरा हर राउंड लिया था. ऑफ़ कोर्स, ये हेड है तोह छोटे मोठे इंटरव्यूज में इनका क्या काम? बूत व्हाई दीद शी कॉल में?'

वो मैं में सोच रही थी. पहले कभी उसने इस निहारिका को नहीं देखा था. और इधर, निहारिका ने उससे ऐसे देख फिर बात करना शुरू की.

निहारिका : यू मस्ट बे थिंकिंग व्हाई दीद ी कॉल यू. राइट!?

श्रेया : हँ? यह! यस ma'am!

निहारिका (स्माइल्स) : अपने अच्छे एम्प्लाइज की कंपनी क़दर नहीं करेगी तोह कौन करेगा मिस श्रेया? Isn't आईटी?

श्रेया : M-Mein कुछ समझी नहीं!?

निहारिका (स्माइल्स) : अरे बाबा! यू अरे दोंग सुच ा गुड जॉब, तोह तुम्हे अप्प्रेसियते कर रही हु. Don't यू थिंक यू डेसेर्वे ा प्राइसे?

श्रेया : H-Huh!? O-Ohhh... ी...

निहारिका अगले hi पल अपनी चेयर से उठी और टेबल के उस पार से निकलते हुए बाहर आयी और श्रेया के इर्द गिर्द टहलने लगी.

निहारिका : एक अच्छे एम्प्लोयी के वर्क को तोह हमेशा hi सराहा जाना चाहिए. कंपनी को तुमपे कितना प्राउड होगा नहीं?

श्रेया : !!!??

निहारिका : की तुम्हारे जैसे एम्प्लाइज के कारण कितना प्रॉफिट हो रहा है कंपनी का. राइट?

श्रेया : ी...

निहारिका : ओह्ह ये लो... में भी न... यू मस्ट बे कन्फ्यूज्ड है न? की में किस टॉपिक को लेकर बात कर रही हु. Don't वोर्री! I'll तेल्ल यू. No वेट! It's बेटर तो शो. राइट?

कहते हुए उसकी मुस्कान और भी ज़्यादा बढ़ गयी.

वो श्रेया की चेयर के पीछे आयी और झुकते हुए उसने अपने हाथो में लिया हुआ फ़ोन लैंडस्केप मोड में किया और एक क्लिप प्ले की...

"ओह्ह्ह! That's सो गुड... हे मुझे भी पैसो की ज़रुरत है."

"ओह्ह! दीदी के लिए क्या?"

"उम्... हाँ! उनके hi लिए. क्या में ऐसा कर सकती हु?"

"व्हाट?"

"मेरी माँ को हार्ट अटैक आया था रीसेंट में. तोह में एक फेक तरीके से यू क्नोव... उन्हें यदि फॅमिली डॉक्टर के यहाँ एडमिट करवा के...!?"

"ओह्ह्ह्ह!!! बूत रिस्की नहीं होगा?"

"वो सब में देख लुंगी... तुम बताओ न, फिर मिल जाएगा न पैसा?"

"उम्... येह ी गेस...!? ः!?"

"थैंक्स!!! M-Mein तरय करुँगी... 2-3 लाख भी मिलेंगे तोह चलेगा."

*क्लिप एंड्स*

*साइलेंस*

क्लिप के ख़तम होते hi एक घनघोर सन्नाटा छा गया.

श्रेया अपनी आँखें फाड़े एक सदमे में जा चुकी थी. क्लिप में मौजूद पूरा वार्तालाप श्रेया का खुद का और उसकी कलेग आयुषी का था. ये तोह वही बातें थी जो उसने कल आयुषी से की थी.

और ये वीडियो देख के लग रहा था की, किसी ने ऐसे एंगल से इससे रिकॉर्ड करि थी जैसे उससे पता था की क्या होने वाला था.

श्रेया के चेहरे से उसका पूरा रंग उड़द चूका था. घबराते हुए उसने पीछे मुद निहारिका को देखा, जो अपने होंठो पर एक कपटी मुस्कान बिखेरे हुए थी.

भले hi निहारिका बेहद ख़ूबसूरत थी. पर इस समय, उसके होंठो की मुस्कान, श्रेया को केवल भयानक डर का आभास करवा रही थी.

निहारिका (स्माइल्स) : केसा था? गुड राइट? कंपनी का कितना पैसा नेक काम में जा रहा है. कितना प्रॉफिट होएगा हमे इस से. Shouldn't ी शेयर थिस विथ एवरीवन? की हमारी एम्प्लोयी श्रेया कितना महान काम करने जा रही है.

श्रेया : Ma'am... *स्निफ्फ* ी... न्यूऊऊऊ~ प्लीीाएससीई~

और बस रो पड़ी श्रेया. क्या करती? ठहरी एक ईमानदार लड़की. आज तक कभी न किसी के साथ धोका किया था और न hi छल. पहली बार वो कोई ऐसा काम कर रही थी. वो भी खुद के लिए नहीं, किसी की भलाई के लिए. अपनी बहिन को उसका बच्चा वापस दिलवाने के लिए. पर बेचारी फस्स गयी.

एक ईमानदार व्यक्ति, कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले, वह कभी धोका दे hi नहीं पाटा. और उसकी यही आदत कभी कभी उसके लिए एक अभिशाप साबित होती है. श्रेया के साथ आज यही हुआ था.

मदद करने के लिए एक बेईमानी का रास्ता चुना था, और नतीजा? वो बुरी तरह फस्स चुकी थी.

श्रेया : न्यूऊऊ~ M-Ma'am *स्निफ्फ* में आपके परर पड़ती हु. पलायसी~ Don't दो थिस. *स्निफ्फ* प्लीएआस्सीए~ मुझे माफ़ कर दीजिये... *स्निफ्फ* I'll नेवर दो आईटी अगेन... *सुबुक* प- प्लीहासी~ *हइच* Ma'am... *स्निफ्फ*

निहारिका : अरे अरे!? बेबी? रो क्यों रही हो? ाररी...!? टच टच टच... डिअर, जो एंड ब्रिंग में थे मेडिकल एप्लीकेशन.

श्रेया : H-Huh!??? *स्निफ्फ*

निहारिका : येह!! जाओ जल्दी! C'mon! जो नाउ.

श्रेया : T-Toh क्या आप वो... *स्निफ्फ* आपने मुझे माफ़ कर दिया? Y-You won't शो तहत वीडियो राइट?

इस समय, श्रेया को यदि सबसे ज़्यादा किसी बात की फ़िक़र थी तोह वह थी निधि और वीर की. निधि की इसलिए क्युकी, यदि उसकी ये करतूत सामने आयी, तोह निधि से बुरा कोई नहीं होने वाला था. क्या hi इज़्ज़त रह जाएगी उसकी?

अपनी सही सलामत माँ की झूठी मेडिकल फाइल बनवा के लिए गए पैसे. क्या निधि लेगी? जब उससे पता चलेगा ये!? बिलकुल नहीं! ऊपर से वो तोह श्रेया का मुँह भी देखना पसंद नहीं करेगी, की उसकी छोटी बहिन ने ये कदम उठाया. क्या इतनी लाचार है उसकी बड़ी बहिन उसकी नज़रो में!? की इस रास्ते पर उतर आयी उसकी छोटी लाड़ली?

दूसरी चिंता थी वीर की. वीर! उसका एकमात्र साथी. उसका दोस्त. उसी की वजह से तोह उससे ये जॉब मिली थी. जब उससे पता लगेगा की जॉब में उसने ये कारनामा कर के दिखाया तोह क्या मुँह दिखाएगी वो वीर को? फिर वीर की क्या इज़्ज़त रह जाएगी इस कंपनी के परिचित व्यक्ति से!?

सब कुछ ख़तम हो जाएगा. सब कुछ डूब जाएगा.

श्रेया को इतनी घबराहट पहले कभी महसूस नहीं हुई थी. उसका कलेजा बाहर आने को हो रहा था.

वो उठी और बाहर जाने के लिए हुई, जब...

निहारिका : अरे अरे? टिश्यू से ासु तोह पॉच लो डिअर. वर्ण बाहर सभी क्या सोचेंगे? सोचेंगे की निहारिका ma'am ने बुली किया एक एम्प्लोयी को. है न? ौलेलेलेलेलेले बूत ी didn't बुली यू राइट? राइट बेबी?

श्रेया बस सुबकते हुए हाँ में hi सर्र हिला पायी. यदि ये बुली करना नहीं था तोह और क्या था?

और टिश्यू से अपने ासु पॉच वो फ़ौरन hi बाहर निकल गयी.

कांपते हाथो से अपने बैग से मेडिकल सीकिंग एप्लीकेशन निकाल, वो जल्दी जल्दी वापस से निहारिका के केबिन में गयी.

और उसने वो एप्लीकेशन निहारिका को थमा दिया.

श्रेया : Y-Ye एप्लीकेशन... M-Mom सच में... उनको हार्ट अटैक आया था... रीसेंट में... S-So? क्या अब!!!? K-Kya अब अमाउंट मिलेगा?

निहारिका : हम्म? व्हाट अमाउंट?

श्रेया : अहह! N-Nothing... It's नथिंग. W-Wo वीडियो... यू विल डिलीट आईटी राइट?

निहारिका : ओह्ह्ह! सो यू वांट मनी राइट? के के! टेक आईटी! हेरे!!!

निहारिका उससे बुलाने लगी. श्रेया आहिस्ता आहिस्ता सहमे हुए आगे गयी तोह निहारिका ने खाली हाथ उसके हाथो में रख दिया.

निहारिका (स्माइल्स) : हेरे! थिस इस योर मनी! नाउ जो!

श्रेया : हँ?

निहारिका (स्माइल्स) : नाउ जो! इस से पहले की में ये वीडियो कंपनी के सभी ऑफिशल्स को फॉरवर्ड करू.

श्रेया के मैं में जो एक आखिरी आस थी वो भी टूट गयी. क्या करती अब? यहाँ रूकती तोह निहारिका उसका वह वीडियो सबको भेज देती और उसकी जॉब चली जाती. एक hi चारा था. निहारिका की बात maan'ne का.

वो एक कठपुतली की तरह बन्न चुकी थी. जिधर निहारिका उससे नाचने कहती, उससे मजबूरन नाचना पड़ता. और अभी भी, बेमानन से उससे केबिन के बाहर जाना पड़ा. श्रेया बेचारी रट रट बाहर निकल गयी.

'You'll बे माय नेक्स्ट बीच. हाहाहाहा~' निहारिका को जैसे अपना नया खिलौना मिल गया था.

श्रेया के जाते hi, 2 मिनट बाद केबिन का दरवाज़ा पुनः खुला और एक जाना माना शख्स अंदर आया.

निहारिका : ओह्ह! It's यू! यू दीद ग्रेट!!! हाहाहा~

सामने खड़ा वह शख्स कोई और नहीं बल्कि श्रेया की अपनी वही कलेग, आयुषी थी.

निहारिका : अब उधर कड़ी कड़ी देख क्या रही हो? यू दीद ग्रेट टुडे. के, I'll गिव यू समथिंग स्पेशल. सूचक माय चूंट.... बीच!!!!

कहते हुए निहारिका ने अपने परर चेयर पर ऊपर कर, अपनी साफ़ शवेद छूट के दर्शन दे दिए.

आयुषी : Y-Yes ma'am!!!

'I'm सो सॉरी श्रेया! I'm सो सॉरी!!!!'

और आयुषी मैं में सोच, अपनी आँखों से ासु बहाते हुए निहारिका के पास गयी और ज़मीन पर बैठ उसकी छूट में अपना मुँह देदी.

केबिन में फिर बस, निहारिका की मुफ्फलेड सिसकियों की आवाज़ hi रह गयी.

एव्री पर्सन कैन बे कंट्रोल्ड. िफ़ यू कैप्चर थेइर वीक पॉइंट्स.

यही था... निहारिका का प्रिंसिपल.

***

ये पूरी आप बीती, श्रेया ने फिर रात में वीर के साथ साझा की थी. किस्से बताती आखिर वह? वही तोह था उसका एक दोस्त.

रात में उसकी पीठ से लगे हुए वो रोटी रही बस. भरपूर ासु बहाये उसने.

श्रेया : *स्निफ्फ* I'm सो सररररययययय~ I'm सरररयययय... मेने... *स्निफ्फ* मेने सब गड़बड़ कर दिया. I'm सुच ा मेस... *स्निफ्फ* मुझसे कुछ नहीं होता... *हइच* I'm डम्ब!!!! *स्निफ्फ* केवल एक बार मदद करना चाहती थी में दी की... बस एक बार... एंड... *स्निफ्फ*

वीर : Don't वोर्री...!

श्रेया : हाउ कैन ी नॉट वोर्री वीर? हाउ कैन ी? *स्निफ्फ* सब ख़तम हो गया. नथिंग कैन बे दोने नाउ. *स्निफ्फ* शी... शी है तहत रिकॉर्डिंग. यू अरे माय बेस्ट फ्रेंड... ी जस्ट वांटेड तो शेयर विथ यू... *स्निफ्फ* It's ओवर वीर! *हइच* It's वीरररर!!!

वीर : दो यू ट्रस्ट में?

श्रेया : *स्निफ्फ* ी... ी दो!

वीर : तोह बस! Don't वोर्री! I'll फिक्स थिंग्स फॉर यू!

श्रेया : हे... *स्निफ्फ*

वीर : हम्म?

श्रेया : होल्ड में टाइट!!!

वीर : वह...!?


श्रेया : ी साइड होल्ड में टाइट~

वीर : Okay~

वीर ने मुड़ते हुए फिर श्रेया को हुग कर लिया. पर श्रेया का मैं इतने से नहीं भरा था जो,

श्रेया : टिघटेर!!!

वीर : !???

श्रेया : होल्ड में टिघटेर!!!

वीर : वेल...

एक बार फिर, वीर ने उससे कस के भींच लिया.

श्रेया : तिघ्टरररर~

वीर : इस से टाइट करूँगा तोह आपको चोट लग जाएगी.

श्रेया : It's okay! में सेह लुंगी.

वीर : वोअहहह!! No!! बस इतना hi, यदि ज़्यादा टाइट किया तोह कुछ और टाइट हो सकता है.

श्रेया वीर की बात सुन्न न hi उस पर भड़की और न hi कुछ बोली. वो बस मुस्कुरायी और अपने गाल उसकी छथि में रगड़ने लगी.

श्रेया : थैंक यू!!! ♡

वो सही थी. जो उसने वीर के साथ कोई धोका नहीं किया. वीर ने उसकी जॉब लगवाई, तोह अब ये उसका फ़र्ज़ बनता था की वो इस जॉब को गवाए न.

वो सब सहने तैयार थी.

***

ा डे आफ्टर टुमारो.

क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कंपनी.

नाईट ~ 8:38 पं

अपने केबिन में गुनगुनाती हुई इस समय निहारिका कुछ फाइल्स को अर्रंगे कर रही थी. वो अक्सर लेट hi जाय करती थी घर. पर आज, उससे कुछ ज़्यादा hi देरर हो गयी थी.

वो निकलने hi वाली थी जब,

*क्रियाक्क्क्क*

उसके केबिन का दरवाज़ा इस समय खुला और कोई अंदर आया.

निहारिका : हम्म!?

निहारिका ने देखा की एक नौजवान अपनी जेब में हाथ डाले अंदर आ चूका था. पहले कभी उसने इस लड़के को नहीं देखा था. और पहली नज़र में उसने उससे देख एक एम्प्लोयी समझा.

निहारिका : व्हाट इस आईटी!?

"You'll क्नोव आईटी सून!!!"

उसकी आवाज़ सुन्न निहारिका इस बार थोड़ी ध्यान से उससे घुरि. एक बेहद hi हैंडसम लड़का खड़ा था उसके सामने. और उसका दिमाग फ़ौरन hi चलना शुरू कर दिया.

ये कंपनी का आदमी नहीं था. यदि होता, तोह ज़रूर ऐसी शकल उससे भली भाति याद होती. और ऐसी शकल उसकी नज़रो से बच के निकल जाए? इम्पॉसिबल!!!

तोह दो hi अर्थ निकल रहे थे. या तोह ये लड़का किसी ऑफिसियल के द्वारा भेजा गया था. या फिर ये कोई और hi था. एकदम स्ट्रेंजर.

निहारिका : कौन हो तुम? क्या काम है?

"कौन हु में? वेल! You'll के तो क्नोव. और क्या काम है? हम्म! इसका जवाब तोह तुम्हे पता होना चाहिए."

निहारिका : हँ!?

वो नौजवान चलते चलते अंदर आया और उसके सामने लगी हुई चेयर पर अदब के साथ बैठ गया. और कौन हो सकता था वह? नोने इतर थान वीर!!!

इस बार निहारिका बॉहे सिकोड़ते हुए उसकी इस हरकत जो देखि और बेहद hi बेकार सा मुँह बनायी. शी वास् गेटिंग पिस्सेद. किसी की हिम्मत कैसे हुई उसके केबिन में आकर इस तरह का ऐटिटूड दिखाने की? और वो भी एक मर्द की!??

निहारिका : No! ी don't रिकॉल की मेने क्या काम दिया था. ी don't क्नोव यू! सो तेल्ल में फ़ास्ट. क्या काम है और यहाँ क्यों आये हो?

वीर : व्हाट ा बमर!!! और मुझे लगा की तुम इंटरेस्टिंग रहोगी. वेल, I'll कट तो थे चेस. डिलीट थे रिकॉर्डिंग. सिंपल!

निहारिका : हँ?? व्हाट रिकॉर्डिंग?

वीर : वही रिकॉर्डिंग जिस से तुम अपनी डिअर एम्प्लोयी श्रेया को अपने हाथो में नचाने का काम करने वाली हो.

जैसे hi निहारिका ने ये सुना, अगले hi शान उससे सारा माजरा समझ में आ गया, और वो खिलखिलाते हुए हस्ते हुए अपनी सीट पर बैठ गयी.

निहारिका : हहहहहहहहह~

वीर : ....

निहारिका : हाहाहाःहाहा~ ओह्ह्ह्ह हाहाहा~ तोह तुम हो. उसके द्वारा भेजे गए उसके बॉयफ्रेंड? हम्म! Maan'na पड़ेगा, शकल तोह तुम्हारी ठीक है. पर परर तुम्हारे ज़मीन पर नहीं, आस्मां में है. हाहाहाहा~

वीर यहाँ अपने आप को शांत दिखा रहा था पर, अंदर hi अंदर उसकी पूरी प्लानिंग बिछ रही थी.

अंदर आते hi और निहारिका को देखते hi उसने वो कर लिया था.

'चेक!!!!'

*डिंग*

[Name : Niharika Bansal.


आगे : 33

बायो : निहारिका बंसल! विकास बंसल की पत्नी.

शी है ा 4 ईयर ओल्ड सोन नेम्ड, तन्मय.

क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कंपनी में, अस ा हेड ऑफ़ हर

डिपार्टमेंट काम करती है. नारी शक्ति

संस्था की हेड भी है. शी हट्स में.

अकॉर्डिंग तो हेर, में अरे इंकपेटेन्ट

एंड अरे ट्रैश. ओनली वीमेन शुड बे ों

टॉप. निहारिका एक क्रूर और कट्टर नेचर की

है. शी लव्स लक्ज़री एंड हेर प्राइड थे

मोस्ट.

फवौराबिलिटी : -6

रिलेशनशिप : स्ट्रॉन्गेर्स]

बायो पढ़ते hi वीर को एक झटका लग चूका था. उसके सामने कड़ी ये बोम्ब्शेल उससे सरप्राइज पर सरप्राइज दे रही थी.

वीर कभी खुश होता तोह कभी कन्फ्यूज्ड तोह कभी चिंतित. बेशक इसमें कोई शक नहीं था की निहारिका एक टॉप टियर गदराया माल थी. ा बोम्ब्शेल इनडीड.

पर वीर दूसरी बातो से हैरान था.

नारी शक्ति संस्था की हेड??? ये पढ़ते hi उसकी आँखों में एक अलग hi चमक आ चुकी थी.

'नाउ ी क्नोव व्हाई सिस्टम वांटेड में तो कॉन्कर हेर!!!!'

[👀]

वीर के होंठो की मुस्कान बढ़ती hi जा रही थी.

फिर दूसरी बात...

निहारिका बंसल! विकास बंसल की पत्नी.

ये देखते hi वीर अपने चिंतन में डूब गया.

'विकास बंसल!??? Don't तेल्ल में...!!!'

वीर : वैसे...

निहारिका : हम्म?

वीर : योर हस्बैंड! इस हे ा प्रोफेसर इन क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कॉलेज?

निहारिका उसके सवाल पर उससे घूर के देखि, फिर बोली,

निहारिका : यस! इस तेरे अन्य प्रॉब्लम? और वैसे भी, तुम जहा से आये हो वही से निकल जाओ. तुम्हारी अच्छी सूरत के चलते, में ये जाने दूंगी.

उसके जवाब ने जैसे एक और धमाका किया वीर के मैं में.

'IT'S हिम!!!! तहत मोथेरफुकेर...!!!! विकास!!!!'

वीर की मुट्ठी गुस्से और एक्ससिटेमेंट में कस्सति गयी और होंठो पर मुस्कान हैवानो की तरह फेल रही थी.

ये निहारिका किसी और की नहीं, विकास की पत्नी थी. वही विकास, जिसने एक बार निधि ma'am को शॉपिंग के दौरान चेररने की कोशिश की थी. वही विकास, जिसके सामने आके वीर ने अपनी ma'am को ह्रास होने से बचाया था. वही विकास, जिसके चलते वीर को निधि ma'am से शॉपिंग मार्ट में गलती से एक थप्पड़ खाना पड़ा था.

वीर को वह पूरा का पूरा इंसिडेंट याद आ गया. और वो ख़ुशी से फुला नहीं समां पा रहा था.

वो आया तोह यहाँ बिना प्लान के था. पर अब...

जैसे सब कुछ ा तो ज़ उससे समझ आ चूका था. एवरीथिंग!!!

निहारिका बंसल! एक फेमिनजी थी. फेमिनिस्ट नहीं! एक फेमिनजी!!! दोनों में अंतर होता था. फेमिनिस्ट जहा इक्वल राइट्स और इक्वल बेहेवियर की मांग करते है, वही फेमिनजिस का अलग hi था.

ये वो औरते होती है जो आदमियों को फसाने का काम करती है फेमिनिज्म के नाम पे. यदि बस में सीट नहीं मिली, तोह बैठे हुए आदमी को लेक्चर दे देके उससे फेमिनिज्म के नाम पर उठवा देंगी. और यदि खुद किसी सीट में बैठी हो, और कोई अपाहिज आदमी खड़ा हो तोह उससे सीट देने का प्रयास भी नहीं करेंगी. क्यों???

क्युकी सीट देने के लिए बाकी मर्द है. वो दे सीट. हम क्यों? हम लड़किया है. ये कहलाती थी फेमिनजिस. फेमिनिज्म के फायदे तोह सारे चाहिए पर जब खुद से वही काम करने की नौबत आयी तोह हम लड़किया है का टैग दिखा के पीछे हट जाना. बस, यही काम था इनका.

और, निहारिका इसी केटेगरी से बिलोंग करती थी. वीर की सब समझ आ चूका था.

शादी भी निहारिका ने शायद तक मजबूरी में की थी. एक बीटा पैदा किया और फिर वो अपनी लाइफ में बिजी हो गयी. वीर को अब समझ आ रहा था की क्यों उस दिन विकास शॉपिंग कर रहा था. निहारिका क्यों नहीं?

प्रॉबब्ली, निहारिका उससे घर में दबा के रखती होगी. अपनी पेर्रो की जूती के सामान व्यवहार रखती होगी उस से. सीन्स, शी हट्स में, आईटी वास् आल क्लियर. आखिर, वो अपने पति से भी ज़्यादा कमा रही थी. विकास का क्या हाल होता होगा घर पे, ये तोह कोई नहीं बता सकता.

'सो that's व्हाई तहत बास्टर्ड विकास.... इसलिए वो निधि ma'am पर डोरररे दाल रहा था उस दिन. निधि ma'am जेंटल है बोहत. और उस कमीने को ma'am को देख अलग hi एक्सपीरियंस मिला होगा. कहा उसकी गुंडे जैसी पत्नी और कहा पारी जैसी निधि ma'am. तहत श्लय बास्टर्ड...!'

[You have a chance now master! Teach her!]

'ओह्ह्ह्ह!! ी डेफिनिटेली विल! I'll टीच हेर ा लेसन she'll रेमेम्बेर फॉर हेर लाइफटाइम. बूत उसके पहले, पारी!!!! शो में माय फुल स्टेटस.'

[There you go Master!!]






'वेट! व्हाट थे...!?'

[I just changed the background and theme a little bit. Aapko pasand aayi?]

'फ़क ी didn't कनेव ऐसा भी कुछ हो सकता था. थिस इस गुड. बूत पूरा स्टेटस कहा है?'

[This is page 1 master. Swipe right!]

और बेशक, वीर के स्वाइप करते hi,






'गॉड दमन! थिस इस गुड! ी लव आईटी! ऑलराइट! सो ी हैवे 5892 पॉइंट्स. क्वेस्ट हंट की प्राइस बढ़ के कितनी हो गयी है.'

[200 points se ab cost 500 points ho gayi hai master.]

'डारन आईटी!!! ऑलराइट! इस मिशन को कम्पलीट करते hi 3 क्वेस्ट हंट त्रिएस मिलेंगे मुझे. पारी! में चाहता हु, जैसे hi मिशन कम्पलीट होये, क्वेस्ट हंट में उन् सारे अत्तेम्प्ट्स का इस्तेमाल कर लेना. और पॉइंट्स में से, ात मोस्ट 2000 पॉइंट्स का उसे कर लेना.'

[Toh kul milaake, 7 tries. Alright master! I'll do it.]

'गुड it's टाइम तो बबीसीत थिस बीच!!!'

वीर उठा और चलते हुए निहारिका के नज़दीक आया.

वीर : तुमने मेरी फ्रेंड को क्लिप दिखा के कितना दर्रा दिया. नाउ! लेट में शो यू ा क्लिप तू.

उसने उसके बगल से झुकते हुए अपने फ़ोन पे एक वीडियो प्ले कर दी.

क्लिप में दो व्यक्तियों के बीच की कन्वर्सेशन थी. जो साफ़ साफ़ सुनाई दे रही थी और उन् दो व्यक्तियों के चेहरे भी साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे.

"तुम ज़्यादा एम्प्लोयी मत फसाओ अपनी hi कंपनी के. कही दिक्कत न हो जाए."

"हम्फ~ अस एक्सपेक्टेड फ्रॉम यू! तुम मर्द इतने फत्तू क्यों होते हो?"

"तुम्हे चेतावनी देते हुए कह रहा हु."

"ओह्ह रियली? जेब में जब वो 20% माल घुसाते हो तब कहा जाती है तुम्हारी ये चेतावनी? हँ?"

"W-Wo..."

"ट्रैश! हम्फ~ शुक्रिया कहो मुझे जो इतना मिल पा रहा है तुम्हे. और बताओ, पैसे लाये हो न?"

"हाँ लाया हु. ये रहे."

"हाहाहाहाहा~ ये हुई न बात. कितने है!?"

"तुमने 6 लाख देने की मांग करवाई थी. उसमे से 20% मेरा, तोह बाकी का बचा हुआ 4 लाख, 80 हज़ार ये तुम्हारे इसमें है."

"गुड गुड! बैठे बैठे तुम्हे 1 लाख 20 हज़ार मिल गए. उसके बाद भी मुँह चलाना है तुम्हे."

"कही हम फस्स गए तोह?"

"हाहाहाहा~ और कैसे फसेंगे? उन् एम्प्लाइज के सारे वीक पॉइंट्स है मेरे पास. फस्सने का सवाल hi नहीं. वो मेरे चंगुल में आके फस्स्ते है तभी तोह में कमा पाती हु हाहाहा~"

*क्लिप एंड्स*

वीडियो के समाप्त होते hi, इस बार निहारिका के चेहरे से उसका रंग उदा हुआ था.

व्हाट ा क्राफ्टी प्लान आईटी वास्. निहारिका ने जान बूझ के श्रेया से एप्लीकेशन ली थी. उस एप्लीकेशन को बाद में उसने फाइनेंस डिपार्टमेंट के हेड को फॉरवर्ड किया.

दोनों hi एक दूसरे से पहले से hi मिले हुए थे. कल रात को hi दोनों मिले थे और फाइनेंस डिपार्टमेंट के उस हेड ने 6 लाख में से 4 लाख 80 हज़ार निहारिका को सौपे थे.

ये 6 लाख की पूरी रकम, श्रेया को मिलने वाली थी. उसके मेडिकल एप्लीकेशन की वजह से. निहारिका ने उसकी एप्लीकेशन तोह एक्सेप्ट कोई थी, पर एक रूपया नहीं दिया. वो 80% पैसा हड़प चुकी थी. ये कंपनी का पैसा था.

और ये काम शायद वो पहले से hi करते आ रहे थे. न जाने कितने एम्प्लाइज इनकी चपेट में आ चुके थे अब तक. आखिर ऐसे hi थोड़ी उसने अपनी गांड से लैंड रोवर निकाल दी थी!?

इतना पैसा हड़प हड़प के अपनी पूरी लाइफस्टाइल लक्ज़री कर चुकी थी वह. और आज तक किसी ने भी उससे नहीं पकड़ा था.

सिवाए आज के इस नौजवान ने. वीर!!!!

वीर को असल में 2 दिन पहले तक कोई क्लू नहीं था. पर उसका इंटेलिजेंस ऐसे hi दिखाने के लिए नहीं 120 पर था.

थे स्किल तहत मेड हिम कपबले तो अचीव थिस वास् नोने इतर थान... बेसिक एनिमी ट्रैकर!!!

सीन्स, मुंबई में उसके कोई दुश्मन नहीं थे. इतर थान प्रांजल. पर बेसिक एनिमी ट्रैकर बॉस एनिमी को ट्रैक नहीं करती थी. यही तोह था उसका डिमेरिट. लेकिन बॉस एनिमी के आस पास मौजूद उनके चलो को तोह ट्रैक करती hi थी. जैसे स्टीव को किया था.

प्रांजल को ट्रैक करने का सवाल hi नहीं उठता क्युकी वह तोह बॉस एनिमी था. तहत मीन्स...

जैसे hi वीर ने स्किल उसे की थी. उससे उस फाइनेंस डिपार्टमेंट के हेड की लोकेशन मिल गयी थी. ऑफ़ कोर्स, स्किल ने निहारिका की लोकेशन ट्रैक नहीं की थी. क्युकी, निहारिका... एक बॉस एनिमी की केटेगरी में जुड़ चुकी थी. बिकॉज़ ऑफ़ थे मिशन.

किस्से पता था, एक मामूली स्किल, वीर के इतने काम आने वाली थी. उसके बाद तोह सब साफ़ था. वीर ने उनकी रिकॉर्डिंग की और नतीजा सामने.

निहारिका के हाथ फ़ोन को लिए काँप रहे थे. उसने हड़बड़ा के फौरन hi क्लिप को डिलीट कर दिया.

निहारिका : हहह!!! It's... It's गॉन... ः~ ी देलेटेड आईटी.

वीर (स्माइल्स) : ावववव!!! सो क्यूट!!!

वीर ने उसके हाथ से से अपना फ़ोन छिनाय और एक और क्लिप निकाली. ये भी वही क्लिप थी.

वीर : यू थिंक I'm ान इडियट? हँ? इमेजिन! यदि तुम श्रेया का वीडियो फॉरवर्ड कर भी डौगी तोह श्रेया ात मोस्ट अपनी जॉब खोएगी. शी कैन सर्च फॉर ा डिफरेंट जॉब. बूत व्हाट अबाउट यू? व्हाट विल हैपन िफ़ ी फॉरवर्ड थिस तो योर कंपनी ऑफिशल्स!? यू विल लूज़ एवरीथिंग. योर जॉब, योर प्राइड, एवरीथिंग.

निहारिका : Y-Youuuuuuu!!!!

वीर कुछ न बोलै. वो सामने जाके सीट पर बैठा, उसने अपनी जीन्स की चैन खोली और... निहारिका के सामने एक विशाल रोड जैसी सख्त चीज़ उभर कर नज़र आयी.

निहारिका : हँ!!!!? Wh-Wha...!??

और फिर वीर की एक hi आवाज़ आयी,

"सूचक!!!"

निहारिका के पूरे बदन में सिहरन दौड़ गयी.

निहारिका : Y-Youuuu ोूउउ... बास्टर्ड्ढड्डड़!!!!!

*वहूऊऊससस्शह्ह्ह*

और उसने अपनी टेबल पर रखा पेपर वेट वीर की ऑर्डर जोरर से फेक दिया.

अपने एक हाथ से वीर ने उस पेपर वेट को कैच किया और फिरसे बुलंद आवाज़ में बोलै,

"के हेरे एंड सूचक!!!"

एक बार फिर, निहारिका का पूरा बदन काँप उठा. आज उससे समझ आ रहा था की उन् एम्प्लाइज को केसा लगता होगा जिन्हे वो अपनी छूट और गांड चाटने कहती थी.

उससे उसकी hi दवाई का दोसे दिया जा रहा था.

निहारिका : यौऊ बास्टर्ड्ढ!!! ी विल फूकिंग किल यू....

"के हेरे बीच!!!"

फिरसे वो मौन रह गयी.

वीर (स्माइल्स) : िफ़ यू अरे नॉट किंग, तोह ये क्लिप जा रही है ऑफिशल्स के पास.

मजबूरन, निहारिका को चलके आगे आना पड़ा. उसकी पूरी इज़्ज़त मिटटी में मिल चुकी थी. शी हॉटेड में. और आज उसी मन के लुंड को चूसने जा रही थी वह.

ज़मीन पर बैठ, उसकी आँखों में नमी तोह थी, पर वो वीर को खा जाने वाली नज़रो से घूर रही थी.

वीर ने अगले hi पल उसके बाल पकडे और खींचे,

निहारिका : आअह्हह्ह्ह्ह~

वीर : ा श्लय वुमन लिखे यू डेसेर्वेस no रेस्पेक्ट!!! नाउ सूचक!!!!

निहारिका : यूउऊउउउउउ...!!!!!

वीर आगे उसके कान की तरफ झुका. और धीरे से एक बात कहा,

वीर : िफ़ यू अरे वॉन्डरिंग की सिक्योरिटी कामर्स ों होंगे. थें... यू अरे रॉंग!!!

और एक अंतिम उम्मीद भी निहारिका की टूट गयी. उसके ासु छलक उठे.

थार ठहराते होंठो से वो किसी और मर्द के लुंड का स्वाद चखने जा रही थी.

बेकार सा मुँह बनाते हुए उसने वीर के लुंड को जैसे hi मुँह में रखा, वीर ने उसका सर्र पकड़ एकदम नीचे कर दिया.

निहारिका : मममपहहहह!!??????

वीर (स्माइल्स) : यू दो हैवे ा नीस माउथ!!!

वीर के लुंड की वो महक, वो ढांचा, वो बनावट, और वो स्वाद... निहारिका कभी जीवन में नहीं भूल पाएगी.

रट रट वो चूसती रही, उसके पूरे केबिन में आज, उसके एम्प्लाइज की नहीं, बल्कि उसकी खुद की रोने की आवाज़ गूंजती रही.

वीर उसके गले में एक चोकर बाँध रहा था.

वीर (स्माइल्स) : ा स्लेव मस्ट वियर थिस. राइट?

वो उठा तोह निहारिका ने चोकर अपने गले से निकाल के फेक दिया.

निहारिका (चिल्लाते हुए) : यू बास्टर्ड्ढ!! ी विल सूए यू!!! यू थिंक I'LL ओबेय यू!?? जस्ट यू वेट... जस्ट यू...

वीर चुप चाप बाहर जाने लगा. पर जाने से पहले, उसने एक अंतिम बार मुद में पीछे देखा. होंठो पर एक हैवानो वाली मुस्कराहट थी. और बोलै,

"ओह्ह्ह!!! यू विल ओबेय में!!!"

बिकॉज़....

*डिंग*

[You have received a Legendary Card.]






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आज के लिए इतना hi गाइस!

थिस अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ 4.8क वर्ड्स. ऑलमोस्ट लिखे ा मेगा अपडेट. एस्टीमेट के अनुसार, अपडेट 96 या 97 के बाद से नया अर्च स्टार्ट हो जाना चाहिए. बाकी, लिखे ठोकने का और रेवोस रखना का.


धन्यवाद!!! ✨
 
एंड अबाउट अपडेट. यदि रीड किया होगा तोह समझ आएगा व्हाई आईटी टैक्स टाइम तो पोस्ट ान अपडेट. थे पिक्टुरेस यू सी, वो सब में बनाता हु. No ओने हेल्प्स में विथ आईटी. ी अलोन एडिट एंड क्रिएट थम. आईटी टैक्स टाइम. नाउ थे क्वेश्चन. क्यों बनाऊ में वो कार्ड की पिक्स? व्हाई शुड ी? खाली डिस्क्रिप्शन भी दे सकता हु. बूत विल आईटी बे थे शामे? विल यू एन्जॉय तहत? केवल रीडर्स के लिए hi में इतनी माथापच्ची करता हु.

प्लस, अभी में काफी स्ट्रेस वाले फेज से गुज़र रहा हु. सो, अभी समय को लेके कोई बकचोदी नहीं. यदि टाइम के इतनी hi पुनक्तुअल हो तोह I'll बे योर रीडर. मेक ा मैसिव प्रोजेक्ट लिखे थिस एंड व्रिठे आईटी. में आऊंगा रेवो देने. फिर एक भी दिन मुझे अपडेट लेट मिला थें I'll बेहवे लिखे यू गाइस (जस्ट सम पीपल नॉट आल).

सो, जितना अभी मेरी सिचुएशन के हिसाब से मिल रहा है. Co-operate विथ आईटी.
 
अपडेट - 89 ~ कपुलसीओं एंड रएमोर्से

अब तक...

वो उठा तोह निहारिका ने चोकर अपने गले से निकाल के फेक दिया.

निहारिका (चिल्लाते हुए) : यू बास्टर्ड्ढ!! ी विल सूए यू!!! यू थिंक I'LL ओबेय यू!?? जस्ट यू वेट... जस्ट यू...

वीर चुप चाप बाहर जाने लगा. पर जाने से पहले, उसने एक अंतिम बार मुद में पीछे देखा. होंठो पर एक हैवानो वाली मुस्कराहट थी. और बोलै,

"ओह्ह्ह!!! यू विल ओबेय में!!!"

बिकॉज़....

*डिंग*

[You have received a Legendary Card.]


अब आगे...

में मौन बैठी थी. दर्पण के सामने...

कब शुरू हुआ था ये सिलसिला!? कैसे हो गया ये सब!? में... एक अभागन... किस तरह ज़िन्दगी के इस मोड़ पर आ गयी, की मुझे अब यहाँ से अपना भविष्य भी नज़र नहीं आ रहा!? बस, एक धुंदलापान सा छाया हुआ है.

क्या ये कष्ट मेरे जीवन में पहले से hi लिखा हुआ था? या ये मेरे बुरे कर्मो का नतीजा है? या ये मेरे पिछले जनम के पापो का बदला ले रहा है ऊपरवाला मुझसे?

क्यों? क्यों होता है मेरे साथ ऐसा? अब में इस चरण पर आ चुकी हु जहा में अपनी ख़ुशी की मनोकामना भी नहीं करती. अपनी ख़ुशी की परवाह hi नहीं करती.

मेरी रूचि अब अपनी hi ख़ुशी के लिए समाप्त हो चुकी है. में अपनी सुख की उमीदें, अब चोरर चुकी हु.

दो hi चीज़ चाहिए मुझे बस!!! मेरा बच्चा! बस मुझे मेरा बच्चा वापस मिल जाए और मेरी जूही और पूरा परिवार सुख और शान्ति से रहे. बस! यही दो िछाये है मेरी. क्या इतनी इच्छा रखने का भी मुझे हक़ नहीं है!?

जो ऊपरवाला मुझे बार बार, मेरी हर्र कोशिशों को नाकाम कर देता है!? दुसरो का कभी बुरा नहीं चाहा मेने और न hi कभी चाहूंगी. हमेशा औरो की तरफ मदद का हाथ hi आगे बढ़ाया मेने.

पर क्या मिला मुझे?

मदद पाने के बाद, लोग कछार कर आगे बढ़ जाते है. पर में फिर भी उनकी मदद करती हु. तुमने मुझे इस तरह क्यों बनाया भगवान्?

और एक बार फिर, गहराई में इन् बातो के बारे में सोच, मेरी आँखों से ासु बह चले.

"डीईई~ सुन्न रही हो!?????? में जा रही हूउउ~"

पर अचानक आयी श्रेया की आवाज़ ने मुझे मेरे होश में लाया. अपनी हथेलियों से मेने अपने ासु फटाफट पोछे और उठ के बाहर आ गयी.

ये नादान लड़की. हर्र रोज़ देरर रात तक जागती रहेगी, सुबह फिर देरर से उठेगी, जल्दी जल्दी करेगी और फिर इस चक्कर में अपना लंचबॉक्स ले जाना भूल जाएगी.

पर में इससे दोष दे भी नहीं सकती ज़्यादा. आखिर, ये मेरी hi तोह छोटी बहिन है. जब मेने कॉलेज में शुरू शुरू में पढ़ाना स्टार्ट किया था तब... आखिर, में भी तोह ऐसी hi थी न? तोह में इससे भी ज़्यादा बातें नहीं सुना पाती.

"अच्छा बाबा~ और ये टिफ़िन रख पहले. वर्ण कल की तरह भूल जाओगी."

मेने उससे याद दिलाते हुए टिफ़िन उसके हाथ में hi थमा दिया.

"ओह्ह थैंक यू सो मच दी~ यू अरे थे बेस्ट!!! ी लव यू सो मच मऊआह्हः~"

"A-Arreeee!!!???"

"हहहहए B-Bye!!!"

और निकल गयी ये लड़की. पगली कही की. इस लड़की की तुलना तोह बस बुलेट ट्रैन से hi की जा सकती थी. दोनों hi एकदम तेज़्ज़ भागती है.

अपने गाल पर हुए गीलेपन को साफ़ कर में किचन में गयी तोह एक और बुलेट ट्रैन का ख़याल आया मेरे मैं में.

सामने फ्रिज के दूर पर स्टिकी नोट चिपका हुआ था. उस नोट को निकाल मेने देखा तोह उस पर ब्लैक स्केच पेन से लिखा हुआ था...

'पाव भाजी! (◍•ᴗ•◍)'

और में मुस्कुरा उठी.

जूही!! मेरी बच्ची! ये उसकी आदत थी. शाम को खाने में जब भी उससे कुछ स्पेशल खाना होता था, वो इन् स्टिकी नोट्स में डिश का नाम लिखती और फ्रिज पे चिपका के स्कूल भाग जाती. ताकि, में कॉलेज जाने से पहले देख लू और फिर शाम को आने से पहले डिश के लिए सारा सामान पहले से लेकर औ. ताकि फिर बाद में बहाना न बना सकू.

नटखट कही की. जितनी इसकी उम्र है, उस से ज़्यादा का तोह दिमाग लिए फिरती है ये छोटी सी नन्ही बच्ची. बोहत शरारती है ः~

पर...

मेरी जान है ये.

इसके बिना... में 'में' नहीं.

इसकी हस्सी, किलकारियां आवाज़ें जो पूरे घर में बिखरती है, उन्ही के सहारे तोह में यहाँ तक आ पायी हु वर्ण में तोह कब का...

एक गहरी सांस लेते हुए मेने जूही के स्टिकी नोट को अपने पर्स में दाल लिया और में कॉलेज के लिए तैयार होने लगी.

*क्लिक*

दरवाज़ा लॉक कर में स्कूटी लिए कॉलेज निकल पड़ी. कुछ hi देरर में पहुँच भी गयी.

नई सेमेस्टर को स्टार्ट हुए थोड़ा hi वक़्त हुआ था तोह इस समय में ज़रा भी लेट नहीं हो सकती थी. टाइम बोहत hi क्रुशल था मेरे लिए.

कॉरिडोर से गुज़रते हुए, में देख पा रही थी. कॉलेज के लड़को की नज़रे... मेरे बदन पर...

अपने पल्लू को सरकाते हुए मेने अपनी छाती को अच्छे से ढाका और चलती बानी. ये रोज़ का था. में भली भाति जानती थी उन् लड़को के मैं में मेरे लिए क्या था. गुड मॉर्निंग, मैथ प्रॉब्लम के बहाने से मेरे क़रीब आने की कोशिशे... सब... में जानती थी. समझती थी.

बेशक, सब ऐसे नहीं थे. पर अधिकतर... अधिकतर की आँखों में में वो हवस देख पाती थी.

"बहनचोद आज क्या लग रही है!!!"

"ससससस~ हॉट एंड सेक्सी भाई!!!"

"पति चुटिया है साला जो ऐसी को जाने दिया."

और सुन्न भी पाती थी. अक्सर...

पर चुप चाप, अपने काम से hi मतलब रखती थी और कुछ नहीं. पर क्या मेने कभी इसका विरोध नहीं किया? किया था न. लेकिन लड़के शातिर थे.

मेरा नाम लेके, या मुझे सम्बोधित करके मेरे बारे में बातें नहीं करते थे. जिसके कारण, में कोई आरोप भी नहीं लगा सकती थी.

और बिना सबूत के कोई आरोप... एक गुनाह था.

पर में जानती थी. वो सब. वो सब मेरी hi बातें करते थे. और मेने उन् तानो, अफवाहों, पीठ पीछे बजती सीटियों और हूटिंग को नज़र अंदाज़ कर जीना सीख लिया था. मुझे नहीं पता था ये दुनिया औरो की नज़रो से किसी दिखती थी. पर मेरी नज़रो से... ये दुनिया...

"आज क्या पटाखा लग रही है बी~"

कुछ ऐसी थी.

अपना पहला पीरियड अटेंड करते हुए में क्लास में मैथ के प्रोब्लेम्स सोल्वे करवा रही थी.

एंड, के तो थिंक ऑफ़ आईटी. वह... आज भी नहीं आया.

मेरी नज़रे अनायास hi उस खाली बेंच पर चली गयी.

वीर!!!

व्हेन वास् थे फर्स्ट टाइम!? जब में उस से मिली थी!? राइट! ी रेमेम्बेर नाउ!

जब में पिछले साल... नहीं! पिछले के पिछले साल. इनफैक्ट साल का एन्ड था वह समय. अगस्त का महीना था. मुझे याद है.

नए स्टूडेंट्स आये थे. नई सेशन था. नई एडमिशंस. और मुझे खुद को 2 महीने hi हुए थे यहाँ आये.

में इन् नई क्लास के बच्चो को मैथ्स पढ़ा रही थी. पहले दिन, मेने सभी से इंट्रो लिया था. तब मुझे वीर के बारे में पता चला था. पर, उस दिन के बाद तोह में उसका नाम भूल hi गयी थी.

वो तोह जब...

मेने उससे नोटिस किया तब उसके बारे में थोड़ा जान पायी. मुझे आज भी याद है. एक महीना hi हुआ था मुझे इन् बच्चो को पढ़ाते हुए पर सबसे साइड की रौ में लास्ट बेंच पर हमेशा एक लड़का बैठता था जो हमेशा अकेला रहता था. न hi मेने उसके साथ कभी किसी को बैठे हुए देखा था और न hi किसी के साथ बात करते हुए.

पर्सनली, मुझे इन् बातो से फ़र्क़ नहीं पड़ना चाहिए था. और न hi ये सन मेरे दिमाग में बैठना चाहिए था. पर उस दिन के बाद से मेने उससे और भी नोटिस करना शुरू कर दिया था.

वह आता, चुप चाप बैठा रहता, कभी हेड डाउन किये रहता, तोह कभी कही खोया हुआ कुछ सोचता रहता. होमवर्क भी नहीं कर के आता था और में उससे गुस्से में आकर पनिशमेंट दे देती.

जब 5-6 बार पनिशमेंट दे चुकी थी में उससे तोह अब मुझसे और रहा नहीं गया. रोज़ रोज़ एक hi क्वेश्चन बस होमवर्क में देती थी और ये उससे भी करके नहीं आता था. और मेने...

*चाताआयकककक*

एक थप्पड़ उसकी पीठ पे मार दिया. जोरर से. गाल पर नहीं. वह भी किसी की संतान था. में किस हक़ से उससे मार देती!? इसलिए... केवल पीठ पे hi मारा मेने. ताकि उससे ज़्यादा बुरा भी न लगे. उसके भले के लिए hi उससे सुधार रही थी में. और आज भी...

"गेट आउट!! गेट आउटसाइड एंड स्टैंड तेरे."

वो होमवर्क करके नहीं आया. मेने उससे बाहर निकाल दिया. पूरा लेक्चर में पढ़ाती रही और वह बाहर खड़ा रहा. उसने न hi मुझसे बैठने की ज़िद्द की न hi सॉरी बोलै. बिना कुछ कहे वो एक बार में बाहर निकल गया. मुझे उसकी इस बात से अच्छा भी लगता था और बुरा भी.

अच्छा इसलिए, क्युकी इसने कभी मुझे पलट के जवाब नहीं दिया था. उसमे कोई ऐटिटूड नहीं था. वह मेरी हर्र एक बात मानता. में कहती बाहर जाओ, तोह वह चला जाता, में कहती बोर्ड साफ़ करो तोह वह करता, में कहती बोर्ड में आकर क्वेश्चन सोल्वे करो तोह वो उससे भी करता. भले hi उससे सोल्वे करते नहीं बनता था पर वो मेरी बात कभी नहीं टालता था. भले hi बाकी स्टूडेंट्स के सामने उससे एक मज़ाक का पात्र hi क्यों न bann'na पड़े पर वो मेरा कहा हमेशा मानता. और में उसकी इस बात पर खुश थी.

पर गुस्सा भी आता था. अरे इस लड़के को अपने फ्यूचर की कोई टेंशन थी भी या नहीं? यदि ये तरय hi नहीं करेगा तोह आगे कैसे बढ़ेगा? ऐसे में तोह ये पीछे hi जाता जाएगा.

*त्रीीिंगगगगगगगग*

और लेक्चर ख़तम होते hi सारे बच्चे अगले लेक्चर के लिए लैब में भाग गए. वीर बाहर hi था. में अपनी बुक और सामान उठाते हुए बाहर आयी.

सर्र झुकाये वो खड़ा था बाहर hi.

और मेरी आहात पाते hi उसने जैसे hi सर्र ऊपर किया. मुझे एक झटका लगा. वो रो रहा था. उसके गालो पर आसुओ की बूंदे सजी हुई थी.

हे भगवन! ये क्या कर दिया मेने. पर मेने तोह उससे पीठ में थोड़ा सा hi मारा था. क्या इतनी जोरर से मार दिया मेने. में बेचैन हो उठी. अंदर मैं बोहत तड़प रहा था मेरा.

"H-Hey... T-Tum रो क्यों रहे हो? V-Veeer!!! देखो बीटा!!! मेने तोह बस तुम्हारे भले के लिए तुम्हे डाटा था... मेने मार दिया क्या इसलिए..."

पर मेरे वाक्य के पूरा होने से पहले hi उसने ना में सर्र हिला दिया. हास्सःहः! इसका मतलब वो मेरी मार को लेकर नहीं रो रहा था.

"कुछ भी नहीं ma'am! आपकी वजह से नहीं है ये."

"T-Toh क्या बात है वीर! क्यों रो रहे हो? रोना अच्छी बात नहीं होती. देखो बाकी क्लास के स्टूडेंट्स निकल के जा रहे है. तुम्हे देखेंगे ऐसे तोह क्या सोचेंगे? रौ मत अब okay? और जाओ लैब में. देखो तुम्हारे सभी फ्रेंड्स चले गए है."

"वह मेरे फ्रेंड्स नहीं...!"

"हँ!?"

मेरी बातो का जवाब दिया बिना hi वह अंदर गया, अपना बैग उठाया और लैब की ऑर्डर निकल गया. और में इधर बस सोचती रह गयी. एक चिंता मेरे मैं में समां गयी. क्या करू में इस लड़के का? क्या वो लोनली था? क्या उसका वाक़ई कोई भी फ्रेंड नहीं था? यदि ऐसा था तोह...

ओह no! थिस वास् सीवियर थान ी थॉट.

उस दिन के बाद से, मेरे और वीर के बीच अक्सर बात होती. और फिर आया वह दिन. जब में माँ को देखने हॉस्पिटल गयी थी. उनके हार्ट अटैक की वजह से.

जिधर मेने वीर को िक में देखा था. उसके बाद से तोह सब कुछ एक अतीत बन्न के रह गया. उसका मेरे संग मेरे घर में आना, हमारे बीच एक नया रिश्ता bann'na, स्टूडेंट टीचर से ज़्यादा एक दोस्त का रिश्ता, साथ में घूमना फिरना, खाना पीना, जूही को भी जैसे एक नया दोस्त मिल गया था. एक बड़े भाई जैसा. श्रेया की वजह से जूही का उससे मामू कहके पुकारना. सब कुछ बेहतर होता जा रहा था. हम सब के लिए.

उसके आने से घर में एक रौनक आ गयी थी. घर सवार रहा था. पनप रहा था. में उसके बारे में और अच्छे से जान रही थी. पर फिर...

वो चला गया. और वापस से ज़िन्दगी मुझे मेरे मुँह पे एक तमाचा मार के मुझे होश में लायी. मुझे बताया की हर्र एक शुरुआत का अंत भी होता है. वीर अब अपनी भाभी के घर रहने लगा था. और हमारे बीच वो रिश्ता. वो कही जैसे लुप्त होता जा रहा था. किसी न किसी दिन हमारे बीच विवाद होता hi था.

पर ऐसा क्या था उसमे जो में उस से बात करने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाती थी. ी कनेव थे आंसर.

उसकी नज़रे. जहा सब मुझे खा जाने वाली नज़रो से देखते थे. उसने आज तक, आज तक मुझे उन् नज़रो से नहीं देखा था. बल्कि, वो मेरे टच, मेरी नज़रो से भागता था. पर उसके एक्सीडेंट के बाद से एक बेहद hi बड़ा बदलाव आया उसमे.

और उसकी फीलिंग्स... में कुछ कुछ समझने लगी थी. हद्द तब हुई जब,

'It's बिकॉज़... यू!!!!!! यू लिखे में!!!!'

'एंड लेट में तेल्ल यू ओने मोरे थिंग... वो ये की... ी लिखे यू अस वेल!!!'

जब उसने ये बातें मुझसे कही.

नहीं!!! ये झूठ था. में... में और उससे लिखे? N-Nahiii! हरगिज़ नहीं! ऐसा पॉसिबल hi नहीं है. I'm हिज टीचर. वो मेरा स्टूडेंट है. सवाल hi पैदा नहीं होता हमारे बीच कुछ भी ऐसा होने का. ये मज़ाक था.

राइट! मेने उसके टफ टाइम्स में उसका थोड़ा साथ दिया इसलिए वो मुझे इमोशनल सपोर्ट के रूप में देख रहा है और बस ये एक इन्फैटुएशन है. एक अट्रैक्शन. धीरे धीरे उसका अट्रैक्शन ख़तम हो जाएगा और उससे बात समझ आ जाएगी. That's राइट! वो राह भटक गया है. उसकी टीचर होने के नाते ये मेरा फ़र्ज़ बनता है की में उससे सही रास्ता दिखाऊ.

वो बस वर्थिंकिंग कर रहा है. हे थिंक्स ी लिखे हिम व्हिच इस नॉट ट्रू ात आल. में आलरेडी एक मैरिड लेडी हु. हाउ कैन ी लिखे हिम? हर्र बार वही बातें कह के वो मुझे नर्वस कर देता है और फिर सोचता है की में उससे लिखे करती हु. T-That's इम्पॉसिबल. राइट? में...

"Ma'am!!! Ma'am!!??"

और एक आवाज़ मुझे पुनः होश में लायी.

"हँ?"

में तोह क्लास में लेक्चर ले रही थी. ये वीर के ख़याल कहा से आ गए मेरे मैं में?

सामने बैठे स्टूडेंट्स मुझे hi देख रहे थे. और नेक्स्ट प्रॉब्लम को सोल्वे करवाने के लिए कह रहे थे.

में भी ना! कहा खो गयी थी? मेने लेक्चर में अच्छे से उन्हें पढ़ाया. और इसी के साथ इन्ही भाग दौड़ में, आज का दिन समाप्त हो गया.

आईटी वास् टाइम तो जो.

अरे हाँ! याद आया, जूही के लिए मुझे पाव भाजी का सामान भी लेना था.

मेने सोचा की घर के एकदम पास जो शॉपिंग मार्ट पड़ता है वही से सारा सामान ले लुंगी.

वह पहुची तोह मुझे एक और झटका लगा. मेरी किस्मत इतनी बुरी क्यों थी?

दूर से hi मुझे वो घिनौना चेहरा नज़र आ गया. विकास सर!!!

चाहती तोह थी में सामान लेना पर मुझे वह से निकलना पड़ा. इस आदमी के में पास भी नहीं भटकना चाहती थी.

पर अभी में बाहर आयी hi थी की...

"जी! आप मिस निधि!?"

एक काले सूट में आदमी ने मेरे पास आके मुझसे पूछा.

"Y-Yes ी ऍम... P-Par आप कौन!?"

"आप चलिए तोह सही. आइये! कार में बैठिये."

"W-Whaaatttt?"

में डर गयी. ये सब क्या था? कौन था ये आदमी? और इसकी ये बड़ी सी काली गाडी? क्या ये मुझे कही किडनैप...!?

"जैसा आप सोच रही है वैसा कुछ भी नहीं है. आइये अंदर बैठिये और कुछ देरर में hi आपके सारे सवालो के जवाब मिल जाएंगे.""

"में कैसे मान लू!? की तुम एक किडनैपर नहीं हो?"

"यदि में किडनैपर होता तोह क्या इतने पॉलिटेली आप से पेश आता!?"

उसकी बात में पॉइंट था. और अंत में में उसकी गाडी में सवार हो गयी.

"आप अपनी स्कूटी की चिंता मत करिये. मेने एक आदमी उधर खड़ा कर दिया है. वह आपकी स्कूटी पे नज़र रखेगा."

मैं मार के में तैयार हो गयी.

मुझे कुछ नहीं पता था क्या चल रहा है, कौन थे ये आदमी? मुझे कहा ले जा रहे थे?

पर मेरे सारे सवालों के जवाब जैसे अब मिलने वाले थे.

गाडी सीधा कोर्ट के बाहर जाके रुकी.

"हँ?"

"आइये! उतरिये!!!"

हम अंदर गए जहा... वेट... एक मिनट!!!

ये तोह... ये तोह मेरे लॉयर की जगह थी. मेरा लॉयर जो मेरे पति के खिलाफ मेने रखा हुआ था.

मेरे वह पॅहुचते hi वो लॉयर ख़ुशी से झूम उठा.

"हाहाहाहा~ सब कुछ हो गया मैडम. सब हो गया. आइये जल्दी. इधर इनमे सिग्न कर दीजिये."

व्हाट!? व्हाट वास् हप्पेनिंग!!!???

क्या चल रहा था ये सब?

"D-Dekhiye! मुझे बताइये यहाँ क्या चल रहा है? और में किसी पर भी सिग्न नहीं करने वाली बिना बात जाने."

"अरे मैडम! सब हो गया. केस साल्व्ड ः! समझौता जो हुआ था वह कम्पलीट हो गहा. ख़तम बात!!! और वो देखिये."

"हँ!??"

में पीछे मुड़ी तोह तड़प उठी. ध्रुववव!!!!!

मेरा बच्चा! एक औरत की गॉड में था. न्यूऊऊओ!!! व्हाट वास् हप्पेनिंग!!????

में दौड़ के उस के पास गयी और उस औरत से छिनाते हुए मेने उससे अपने सीने से लगा लिया. उससे भींच लिया.

"ओह्ह्ह्ह मेरा बच्चा!!!! ध्रुववववव~"

"मैडम! समझौता आपके पक्ष में हुआ. अब से आपका बीटा आपके साथ hi रहेगा. आप इन् पर सिग्न कर दीजिये."

में सिसक सिसक रोटी रही. भावुक हो उठी. कही ये सब कुछ एक सपना तोह नहीं था!?

"यह~"

ध्रुव ने जब मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे ूरोज़ को काटा तोह मुझे यकीन हो गया. ये सपना नहीं था. ये सपना नहीं था निधि. तेरा ध्रुव, तेरे हाथो में था.

"धररॄणुववववव!!!!"

में काफी देरर तक्क रोटी रही. नहीं! एक मिनट! समझौता पूरा हो गया मतलब? समझौता तोह तब hi पूरा होना था जब में अपने पति रजत को 50 लाख रुपये की रकम जमा करू. तोह फिर... तोह फिर ये!!?

"सिग्न कर दीजिये मैडम जल्दी. तोह फिर आपकी में डाइवोर्स की कार्यवाही शुरू करू."

लॉयर की बात सुन्न, मेने उसके हाथो से वह पेपर्स छिनाये और बारी बारी उन्हें पढ़ने लगी. मेरे हाथ हर्र पैन को पढ़ते हुए काँप रहे थे. ये सच था.

पेपर्स नकली नहीं थे. मेने दुबारा चेक किये और सब सही था. अंततः मेने सिग्न कर दिए.

मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. में लॉयर तोह कही उस आदमी से लाख बार पूछ चुकी थी, पर उन् दोनों का hi जवाब यही था की मुझे अभी थोड़ी देरर में सब पता चल जाने वाला था.

ये सब... ये सब इतनी आसानी से कैसे हो सकता था भला!?

और ऊपर से... उन् बाकी के पेपर्स पर... रजत के सिग्नस थे!??? मतलब वो इस समझौते से अंत में राज़ी हो गया!? ध्रुव को यु सौप दिया उसने? उसकी माँ, छाया. उन्होंने कैसे ध्रुव को आसानी से जाने दे दिया?

A-Aur सबसे बड़ा सवाल. 50 लाख का क्या हुआ? किसने चुकाए वह?

गाडी में बैठ हम वह से निकल गए. सर्र चक्र रहा था मेरा. कही ये सपना न निकले बस.

और फिर गाडी से उतरने से पहले,

"मैडम! अपनी आँखों पर ये पट्टी बाँध लीजिये."

"क्या!?"

वही आदमी मुझे अपनी आँखों पर पट्टी बाँधने कह रहा था. पता नहीं क्यों, पर मुझे उसकी बात पर विस्वाश था. मेने बाँध ली.

और वो मुझे कही ले जाने लगा.

"अब आप पट्टी हटा सकती है."

और मेने पट्टी हटा दी.

हँ!!!!?????

!!!!?????????

N-Noo!!!! आईटी can't बे!!!! मेरे बदन के रोये खड़े हो गए. आँखों से ासु जहर जहर बहने लगे.

सामने...

मेरे सामने... वो सभी खड़े हुए थे.

श्रेया, जूही, वीर, रागिनी जी, सुमन जी, आभा, सोनाली, वीर की स्टेपमॉम? उसकी स्टेपसिस्टर? उसकी बहने!??? काव्य, आरोही!!??

ऊपर 'वेलकम ध्रुव तो थे फॅमिली' की हैंगिंग राइटिंग लगी हुई थी.

नूवो!!! प्लीज!!! Don't!!!! में खुद को नहीं संभल पाऊँगी.

वीर!!! मुस्कुरा रहा था. मेरे पास वो चलते हुए आया और,

"It's दोने ma'am! एवरीथिंग इस साल्व्ड. ध्रुव अब से आपके साथ hi रहेगा."

में रोटी रही. मुझे संभालने के लिए वह मौजूद हर्र औरत मुझे हौसला देने लगी. अपने से गले लगाने लगी. पर मेरी रुलाई... बंद होने का नाम hi नहीं ले रही थी.

और में अभी वीर के बगल से hi बैठी थी जब एक आदमी आया और वीर के बगल से झुकते हुए उसने कुछ कहा, जो मेने सुन्न लिया.

"बॉस! बाकी की फ्लैट की 45 लाख रकम. ये रही!!! कॅश में है. ये लीजिये!!!"

उसने एक सूटकेस वीर के हाथ में थमा दिया.

हँ!!!? Don't तेल्ल में...

में स्तब्ध निगाहो से वीर को देखि, जो मेरी नज़रो से बच के खुद को छिपा रहा था. नहीं!!!! Don't तेल्ल में हे...

और मेरा शक जैसे सही निकला.

हे दीद आईटी!!!!

वह 50 लाख, ये सब प्लानिंग... आईटी वास् हिम!!!

में कुछ न बोली. सर्र झुकाये शुरू से अंत तक शांत थी. ध्रुव सो चूका था. सुमन जी ध्रुव को लेकर इस होटल के रूम में चली गयी.

और में और वीर, हम दोनों hi एकदम शांत बाहर hi लॉन साइड बैठे रहे.

तोह ये सब कुछ किया धरा वीर का था.

"एक्सप्लेन!!!" मेने जोरर से कहा.

और उसने एक गहरी सांस लेते हुए बोलना शुरू किया,

"ी क्नोव आप गुस्सा है. और होना भी चाहिए आपको. बूत ी दीद व्हाट वास् नेसेसरी."

व्हाट वास् नेसेसरी? व्हाट वास् नेसेसरी!!!?????? क्या मतलब नेसेसरी??? आईटी वास् माय जॉब!!!!! माय जॉब तो गेट बैक माय सोन!!!!!

"ी दीद आईटी, फॉर थे पर्सन ी केयर अबाउट ा लोट!!!"

Don't!!! Don't से आईटी!!! मत बोलो ये सब!!! में खुद में hi अंदर से बातें करती रही. नाहीई!!!! चुप हो जाओ वीर. चुप हो जाओ!!!

"अब सब कुछ पहले की तरह हो चूका है ma'am. फ्रॉम नाउ ों, यू कैन लुक फॉरवर्ड."

नाहीई!!! प्लीसीईए!! ी बेग यू!!!! स्टॉप आईटी!!!! म
ात कहो ये सब!!! वर्ण में... Don't दो आईटी!!! प्लीज!!!!

में खुद का न रोक पायी,

*चाताआगआकककककक*

और एक थप्पड़ उसको खींच के मार दिया मेने. इस बार... गाल पे...

वह इस बार भी कुछ न बोलै. सर्र नीचे था उसका. उसके बालो से उसकी आँखें ढकी हुई थी. ी couldn't सी हिज एक्सप्रेशंस.

"वहहहहययययययय!!??? क्यू किया तुमने ये सब!!!???"

में जोरर से चिल्लाई. मेरी आवाज़ तेज़्ज़ थी. और आँखें पूरी आसुओ से भीगी हुई.

"फॉर व्हाट पर्पस ी वास् लिविंग!!!??? इन् बीते महीनो में में केवल और केवल *स्निफ्फ* केवल अपने बच्चे को पाने के लिए लड़ती रही. ी केपट ों स्त्रुग्ग्लिंग!!!! और फिर तुम आते हो अचानक से और कहते हो... It's दोने!!!?? It's फिनिश्ड!!!? फॉर व्हाट पर्पस ी वास् फाइटिंग थें!!!!???? *स्निफ्फ* K-Kisne!? किसने तुम्हे कहा की तुम मेरी तरफ से पैसे चूका के मेरे लिए ध्रुव को चुर्रा सकते हो? किस हक़ से???? *स्निफ्फ* क्या लगती हु में तुम्हारी!!??"

और में उसकी छथि पर अपने हाथो से घुसे बरसाने लगी. पीटने लगी उसकी छथि को. वह मज़बूत फौलाद की तरह वही टिका रहा.

"केवल आपके hi लिए नहीं था ये."

"हँ!!!?"

व्हाट!? व्हाट दीद हे मैं?

"क्या आपको याद है!? जब भी जूही बात नहीं मानती थी. तोह में उसके कानो में कुछ कहा करता था!? जिसके बाद वह मेरी हर्र बात मान जाती थी!?"

"हँ!!!!??"

वो मेरी तरफ मुस्कुराते हुए मुद के देखा.

No!!! Don't तेल्ल में...

"में उससे इसी दिन का वादा देता था. की यदि वो मेरी बात मान लेगी तोह में एक दिन उसके छोटे भाई को उससे लाके दूंगा."

और बस... मेरे आसुओ का बाँध टूट गया. एक सैलाब आ गया. में सुबकते हुए रो पड़ी. और वीर ने... झट्ट से मुझे अपने आलिंगन में ले लिया.

यदि ये पहले होता, तोह मेने उससे अपनी बाहो से अलग कर दिया होता. पर इस बार... मेरे हाथ कमज़ोर पद गए. उनमे ताक़त hi नहीं बची. उल्टा मेरे हाथ... उसकी पीठ पर जा कर कस गए. नाहीई!!! ये गलत था!!! ी shouldn't.... पर मेरे हाथ मेरी न सुने. वो उसकी पीठ पर कस्ते चले गए.

हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए थे. में बस रोटी जा रही थी. और वह, बस मेरी पीठ को सहलाते जा रहा था. में अपने इतने सालो के दुःख दर्द को जैसे एक बार में निकाल रही थी और वह सब कुछ एक्सेप्ट करता जा रहा था.

और उसके बोल मेरे कानो में पड़े,

"थिस... इस थे रियल यू. अब से ऐसे hi रहना ma'am. ऐसे hi..."

में कुछ न बोली. बस रोटी रही. जब अलग हुई उस से तोह...

हम दोनों की hi आँखें एक दूसरे से भिड़ी हुई थी. चेहरे एकदम क़रीब... और...

वो झुका, और उसने मेरे गाल पर...

*पूछ*

एक किश कर दी...

में हक्की बक्की सी, मूर्ति की तरह वही जमी बैठी रही. उससे रोक तक न सकीय. वह जैसे जानता था, की...

ी wouldn't स्टॉप हिम िफ़ हे वेंट फॉर माय चीक्स. इंस्टेड ऑफ़ माय लिप्स. और वही हुआ...

में उससे न रोक सकीय. बस भूत बने वही बैठी रही.

उसने मुझे एक बार फिर अपने सीने से लगा लिया और उसके अगले शब्दों ने मेरे पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ा दी,

"ओने डे, I'll मेक यू माइन."

.

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.

आज के लिए इतना hi गाइस!!!


लिखे ठोकने का और रेवोस रखने का. धन्यवाद! ✨
 
इस अपडेट की शुरुआत हुई थी वीर और बलहार के सन से, जहा वीर अपना फ्लैट बेचता है. वह पूरा सीक्वेंस, उसके बाद नई कार्ड के बारे में थोड़ी सी डिटेल्स और फिर निहारिका का थोड़ा सा ज़िक्र. इन् सब के बाद निधि का पोव स्टार्ट होना था. बूत, अस ी मेंशनएड एअरलिएर. ी देलेटेड थिस व्होले सीक्वेंस. और सीधे, निधि के पोव से hi शुरुआत की और अंत भी.

ी थॉट की बीच में यदि पोव चेंज होये, तोह वह ले टूट जाती है. इसलिए, शुरू से hi निधि के पोव में मेने रीडर्स को यहाँ घुसाया ताकि वह ले न टूटे. और रही बात वीर के फ्लैट बेचने वाले सन की तोह उसका ज़िक्र मेने निधि के पोव में दिखा दिया.
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 90 ~ थिस इस हाउ यू दो थिंग्स.

अब तक...

में हक्की बक्की सी, मूर्ति की तरह वही जमी बैठी रही. उससे रोक तक न सकीय. वह जैसे जानता था, की...

ी wouldn't स्टॉप हिम िफ़ हे वेंट फॉर में चीक्स. इंस्टेड ऑफ़ माय लिप्स. और वही हुआ...

में उससे न रोक सकीय. बस भूत बने वही बैठी रही.

उसने मुझे एक बार फिर अपने सीने से लगा लिया और उसके अगले शब्दों ने मेरे पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ा दी,

"ओने डे, I'll मेक यू फॉल फॉर में."


अब आगे...

निधि को अपना ध्रुव मिल चूका था. श्रेया, निहारिका के चंगुल से आज़ाद हो चुकी थी. रजत, निधि के पति ने इतनी आसानी से ध्रुव को जाने दे दिया था. उसकी माँ छाया ने कोई रोक टोक नहीं की थी. पर...

आखिर कैसे!???

इतना बड़ा मटर, इतनी hi आसानी से कैसे सॉर्ट आउट हो गया!?? सच तोह ये था की... ये मटर...

आसानी से नहीं, बोहत hi बड़े धमाके के बाद सॉर्ट आउट हुआ था. निधि को तोह कुछ न पता चला. केवल इतना hi पता था उससे की वीर ने पैसे देके उसके बच्चे को चुर्रा लिया था. पर कैसे!!?

ये jaan'ne के लिए, समय के पहिये को दो दिन पहले घुमाना होगा. और हमे चलना होगा वक़्त के उस मंज़र पर जिधर वीर अपने प्लान को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था.

Ragini's होम.

मॉर्निंग ~ 8:12 ऍम

ये सुबह भी हर्र रोज़ की hi तरह थी. रागिनी, श्वेता और सुमन किचन में. भूमिका, आभा और सोनाली नीचे डाइनिंग टेबल पर. और हमारा वीर ऊपर अपने कमरे में.

जब वो फ्रेश उप होक नीचे आया तोह नाश्ते की ज़ोरदार सुगंध को सूंघ उसके मुँह में पानी आ गया. शायद श्वेता आज भी उसके लिए कुछ बेहतरीन बना रही थी.

जब से वह यहाँ ठहरी हुई थी, रोज़ रोज़ वीर शाही भोज का लुत्फ़ उठा रहा था. क्या इतालियन, क्या चिनेसे, क्या मेक्सिकन!?? श्वेता को तोह जैसे कई साड़ी फेमस किसिन्स की बेहतरीन डिशेस बनाना आता था.

और श्वेता का दिल तोह वीर को ऊँगली चाट चाट के खाता देख के hi आधा खुश हो जाता था. बात नहीं करता था वीर तोह क्या हुआ, काम से काम उसके हाथो का बना खाना खा रहा था, यही बोहत था श्वेता के लिए अभी.

धीरे धीरे, वो वीर को बात करने के लिए भी मन hi लेगी. उससे अपने आप पर पूरा भरोसा था.

नाश्ते में श्वेता ने स्वादिष्ट सैंडविचेज़ बनाये हुए थे. थोड़ा पास्ता और साथ में सासर सलाद, जिससे वह बड़ी hi खूबसूरती से प्लेट में सजा के लायी थी. ख़ास वीर के लिए.

वीर ने चुप चाप नाश्ता किया. श्वेता चुपके चुपके उससे देखती, पर वीर ने इस बार भी उससे कोई घास नहीं डाली.

जब नाश्ता उसका ख़तम हो चूका था तभी, श्वेता हाथ में एक कटोरी लिए आयी और वीर के बगल से आके खड़े होते हुए बोली,

"V-Veer बीटा!!! ये... ये मेने गुलाब जामुन बनाये है. तुम्हारे लिए."

चम्मच से आधा गुलाब जुमान kaat'te हुए उसने वीर की तरफ वह चम्मच बधाई.

पर वीर उससे घूर के देखने लगा. न केवल वीर hi, बल्कि वह मौजूद बाकी सब भी उन् दोनों को hi देख रहे थे. देख रहे थे की वीर अब क्या करेगा?

पर वीर ने वही किया... जो वह करता था...

इग्नोर!!!

श्वेता का हाथ हवा में hi रह गया. वीर ने जब अपना मुँह उसकी चम्मच से फेरर लिया. और सामने बैठी भूमिका ने जब ये देखा तोह उसका दिल पसीज उठा अपनी माँ के लिए. कितने दिनों से लगी हुई थी वीर को मनाने, पर वह एक बार भी रेस्पोंद नहीं कर रहा था.

भूमिका : V-Veer... P-Please... खा लो न!? प्लीज!!!

इस बार वह बेचारी खुद को न रोक पायी. और वह एक बार फिर कुछ शानो के लिए एक ख़ामोशी छा गयी. रागिनी भी चुप चाप किचन की देहलीज़ से सब कुछ देख रही थी. और सुमन भी. पर दोनों ने कुछ नहीं कहा.

अंत में... वीर ने फाइनली भूमिका का चेहरा देख, श्वेता के हाथ से वह चम्मच ली और अपने हाथ से hi वह गुलाब जामुन खा लिया.

धन्यवाद था भूमिका का, जो उसने वीर से गुहार लगाई. वर्ण शायद रोज़ रोज़ की ये बेरुखी, अब श्वेता शायद बर्दाश्त न कर पाती और रो पड़ती. इस बार वीर के खाने से, दोनों hi माँ बेटी बेहद खुश हो पड़ी. श्वेता का तोह जैसे आज दिन hi बन्न गया था.

भूमिका (स्माइल्स) : थैंक यू~

श्वेता भी मुस्कुराते हुए अंदर चली गयी. यदि वीर ने उसके हांथो से नहीं खाया तोह क्या? काम से काम उसके हाथो से बना आज गुलाब जामुन तोह खा लिया. एक दिन उसके अपने हाथो से भी खा लेगा.

इधर नाश्ता ख़तम होते hi, वीर ने सोनाली को साइड में बुला के कुछ बातें की,

वीर : मेने 2 और फ़ूड ट्रक्स लिए है.

सोनाली : क्याआ??? T-Tum पागल हो क्या? एक तोह पहले hi इतना बड़ा फ़ूड ट्रक मेरे ऊपर थोप के गायब हो गए. और अब दो और ले लिए? मेरी जान लोगे क्या? मुझसे एक hi बड़ी मुश्किल से संभालता है तोह 3-3 क्या ख़ाक संभाल पाऊँगी में?

वीर : शांत मैडम! शांत!!!

सोनाली : हँ?

वीर : उनका सारा काम हो चूका है. वर्कर्स भी हिरे कर लिए है उनके लिए. तुम्हे बस उन्हें डिशेस से रूबरू करवाना है ताकि वह अच्छे से समझ जाए.

सोनाली : O-Ohhh ऐसा है. F-Fir ठीक है. में उन्हें समझा दूंगी.

वीर : ऑलराइट बस यही कहना था. चलता हु!!

सोनाली : T-Theek है!

वीर जैसे hi मुदा तोह सोनाली ने कुछ बोलना चाहा,

सोनाली : वो...

वीर : हम्म?

सोनाली : तोह अब तुम फ़ूड ट्रक में नहीं आओगे? पहले की तरह?? साथ में?

वीर : उम्... नहीं!!! इसलिए तोह तुम्हे संभालने दिया है.

सोनाली (मुँह फुलाते हुए) : और मुझसे पूछा भी नहीं की में ये काम... ये काम करना चाहती भी हु या नहीं. ज़िम्मेदारी बाँध दी मेरे सर्र पहले hi...

वीर : ओह्ह्ह! मुझे लगा तुम्हे पसंद था ये काम. इसलिए... यदि तुम्हे नहीं पसंद तोह...

सोनाली : N-Nahi!!! वो बात नहीं है. ुरररग्ग्गहह!!! तुम जाओ... हम्फ~

वीर : ेहठ!??

और वो चिढ़ते हुए मुँह फुला के अंदर भाग गयी. न जाने क्या चल रहा था उसके मैं में. खर्र अभी समय उस बारे में सोचने का नहीं था.

वीर (आवाज़ लगाते हुए) : सुमन जी!! चले???

सुमन (किचन से) : बस आयी वीर जी!!!

अंदर से सुमन जल्दबाज़ी में बाहर आयी तोह पीछे पीछे रागिनी भी अपनी कमर में साड़ी के छोर्र को बांधते हुए निकली. जहा सुमन ने गाढ़े नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी तोह वही रागिनी ने हरे रंग की जिसका ब्लाउज मैरून रंग का था. दोनों hi क़यामत लग रही थी.

रागिनी : वीर? सुमन जी को कहा ले जा रहे हो?

वीर : भाभी इन्हे कुछ सामान लेना था. में बाजार से होक निकलूंगा hi वैसे भी. सोचा इन्हे वही ड्राप कर दूंगा.

रागिनी : K-Kesa सामान!?

सुमन : उम्... वो...

रागिनी : ???

सुमन ने झुकते हुए फिर रागिनी के कानो में कुछ खुसपुसाया. तोह रागिनी झटके से हैरानी के चलते पीछे हो गयी,

रागिनी : अह्ह्ह! B-Bra!!???

फिर जैसे उससे ध्यान आया की वीर सामने hi खड़ा हुआ था. इधर सुमन शर्माने का नाटक करने लगी. और वीर ने भी नज़रे फेरर ली.

अब दिखाना तोह ऐसा hi ज़रूरी था. सुमन आखिर बस एक घर में रह रही औरत थी वीर के लिए, रागिनी की नज़रो में. उससे क्या पता था की यही शर्माने वाली औरत, वीर के लुंड को अपनी छूट में उचक उचक कर आये दिन रात में लेती थी? और सबसे बड़ी बात की वह उसकी दासी थी.

इन् बातो से अनजान रागिनी ने बात को संभालते हुए कहा,

रागिनी : अहह! वो मेरा मतलब था... ओह no! I'm सो सॉरी सुमन जी! में... में आपके लिए इस बार एक साइज बड़ा hi लायी थी. मुझे लगा था ये वाला हो जाएगा पर शायद...

सुमन (ब्लशेस) : कोई बात नहीं रागिनी जी! में जाके धुंध लुंगी.

रागिनी : यह! पर... पर... मेरे साथ क्यों नहीं चलती आप? वीर के साथ...!?

सुमन (ब्लशेस) : N-Nahi!!! वीर जी तोह मुझे केवल बाजार चोररेंगे. वो फिर निकल जाएंगे. में फिर अपनी संतुष्टि से khareed-daari कर पाउंगी.

रागिनी : पर फिर भी... मेरा साथ में चलना बेहतर होगा न!?

सुमन : अह्ह्ह! नहीं नहीं! में... में इस बार अकेले hi करना चाहती हु... रागिनी जी... बुरा मत मानियेगा.

रागिनी : O-Ohhh!!! नहीं! कोई बात नहीं सुमन जी! में समझ सकती हु. Okay!!! ठीक है फिर...

वीर : उम्... में लेट हो रहा हु. हम चले?

सुमन (स्माइल्स) : जी बिलकुल!!

सुमन हामी भर आगे बढ़ गयी. पीछे उसके जैसे hi वीर मुड़कर बाहर जाने के लिए हुआ तोह वीर के पीछे कड़ी रागिनी ने उसकी कलाई थाम झटके से उससे अपनी ऑर्डर खींच लिया.

वीर : हँ!!!???

रागिनी : तुम्हे नहीं लगता तुम फिरसे कुछ भूल रहे हो?

वीर : अहह! तहत...

रागिनी : वीर! तुम्हे रोज़ रोज़ याद दिलाना पड़ेगा क्या?

वीर : नहीं वो में जल्दबाज़ी में...

रागिनी : सस्शह्ह्हह्ह!!!!

रागिनी ने उसके होंठो पर ऊँगली रख उससे चुप कराया और उसकी चीन को पकड़ उसके मुँह को फेर्रा और...

*छू~ ♡*

उसके गालो पर एक मीठी मीठी पप्पी चिपका दी. हर्र रोज़ जाने से पहले ये होता hi था. वीर भले भूल जाए, पर रागिनी को हमेशा याद रहता था.

रागिनी : और अब...

पर आज एक ट्विस्ट था. रागिनी ने अपना चेहरा फेरर इस बार अपना गोरा गोरा गाल आगे कर दिया.

इशारा साफ़ था. व्हाट शी वांटेड.

वीर बिना घबराये आगे बढ़ा और रागिनी के गोर गोर चिकने गाल को अपने होंठो से चूम लिया.

*पूछ~*

रागिनी (स्माइल्स) : ये हुई न बात! जाओ अब!!

उसने मुस्कुराते हुए वीर के शर्ट की कालर ठीक की और उससे जाने के लिए बोली. दोनों यही सोच रहे थे की उन्हें ऐसा करते किसी ने नहीं देखा. पर सुमन, जो आगे जा रही थी. उसके होंठो पर एक अजीब सी मुस्कान सजी हुई थी.

और कुछ वक़्त के अंदर hi, वीर वह से निकल चूका था.

***

xxxxxxxxxx कंपनी.

मॉर्निंग ~ 11 : 14 ऍम

हर डिपार्टमेंट.

अपने केबिन में निहारिका बंसल, कंप्यूटर की स्क्रीन पर अपनी आँखें चिपकाए हुए थी. हाथ कीबोर्ड पर चल रहे थे.

उसके सामने एक एम्प्लोयी खड़ा हुआ था.

"ये फाइल, सर को दे देना."

उसने उस सामने खड़े एम्प्लोयी से कहा तोह वह एम्प्लोयी जी मैडम बोल, फाइल उठा के बाहर निकल गया.

*सिघ*

थकान के मारे वो कीबोर्ड चोरर अपनी बैक स्ट्रेच करने के लिए पीछे सीट पर झुकी. कई दिनों से उसकी नींद हराम हो चुकी थी. कारण था वह लड़का! वीर!!! उस अनजान लड़के ने आके एकदम से उसकी ज़िन्दगी में बवाल मचा दिया था.

कैसे भी करके निहारिका उस वीर से बदला लेना चाहती थी. और उसी की टेंशन के चलते, वो रात रात भर ठीक से सो नहीं पा रही थी.

पर जैसे शैतान के बारे में सोचा hi और शैतान हाज़िर,

*क्रीअअआंक्क्क्क*

दरवाज़ा खुला और वीर अंदर दाखिल हुआ.

उससे अचानक देखते hi निहारिका की सिटी पित्ती गुल हो गयी. और वह अपनी सीट पर से झटके से कड़ी हो गयी.

निहारिका : T-Tummmmm!!!!!!?????

वीर (पीछे देखते हुए) : हम्म? येह.. फिलहाल तोह में hi नज़र आ रहा हु जो अभी एंटर किया. राइट?

निहारिका : बकवास बंद करो... तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इधर आने की... तुम...

वीर : व्हेन दीद ी स्टार्ट टेकिंग पेर्मिशन्स फ्रॉम माय स्लेव्स?

निहारिका : हहहहह!!!??

इस बार वीर अपने जेब में hi हाथ डाले आगे बढ़ा, निहारिका का शरीर अपने आप hi झटके से पीछे हो गया. पर पीछे दीवार थी. उस से पीछे अब वह नहीं जा सकती थी.

मजबूरन, उससे वही खड़े रहना पड़ा. केवल वीर को अपने क़रीब आता hi देख सकती थी वह. इस समय वो एक चूहे के सामान थी जो अपने क़रीब एक खूंखार बिल्ली को आता देख रहा था. कुछ ऐसी hi दशा थी उसकी.

*सलाआआआअम्म्मम्म*

"Ahhhhhhhhhhhhhhh!!"

वीर का दाया हाथ जोरर से निहारिका के सर्र के बगल से होकर गुज़रा और पीछे की दीवार पर जोरर से भिड़ा. बेचारी निहारिका की हालत hi पतली हो गयी.

वीर झुका और अपने दूसरे हाथ के अंगूठे से वह निहारिका के उन् प्लम्प मैरून कोलोउरेड लिप्स के साथ खेलने लगा.

निहारिका (गुस्से में) : Y-Youuuuu... गेट योर फिल्थी डर्टी हैंड ऑफ ऑफ़ में...

पर निहारिका के होंठ आज बड़े hi रसीले लग रहे थे वीर को. वो बड़बड़ाती रहे. वीर क्या पीछे हटने वाला था? बिलकुल नहीं!!!

फिर...

"Mmmmphhhhhhhhhhh!!!??????"

निहारिका की आँखेइम फैलती चली गयी. जब वीर ने फोरस्फुल्ली अपने होंठ उसके होंठो से भिड़ा दिए. वह वीर को धकेलने की भरपूर कोशिश करने लगी, पर वीर की मज़बूत पकड़ के आगे उसकी एक न चली. अंत में वो एक छटपटाती मछली की तरह बन्न के रह गयी जिससे मछवारे ने पानी से पकड़ के बाहर निकाला हो.

4 से 5 मिनट तक इनका ये होंठ चूसने का सेशन चला. वीर बेरहमी से और पूरे हक़ से निहारिका के होंठो का स्वाद चखता रहा. उसके रस को पीटा रहा. जब तक की उससे थोड़ी संतुष्टि नहीं मिल गयी. साथ hi उसने निहारिका के ब्लाउज के ऊपर से hi उसके रसीले ामो को भी दबाया.

पर इस चक्कर में एक दिक्कत हो गयी. निहारिका एक माँ थी. उसका बीटा 4 साल का था. जूही के जितना. और 3 साल तक अपनी माँ का दूध पीटा था.

पर निहारिका के थानों में अब भी दूध आता था. कारण था निहारिका का लेस्बियन प्ले करना. वो अक्सर अपनी स्लेव्स से अपने दूध चुस्वाति थी जिसके चलते उसके थानों से दूध की धाराएं निकलना बंद नहीं हुई थी. उसके दूध अभी भी रिस्ते थे.

शी वास् ा वुमन विथ लैटटिंग ब्रेअस्ट्स.

और वीर के कंटीन्यूअस हमलो से, उसके दूध दबाने से, निहारिका के थानों के निप्पल्स ने दूध की पिचकारियां चोरर दी.

नतीजा? निहारिका का वो निप्पल वाला एरिया एकदम गीला हो गया. और वीर ये देख थोड़ा चकित रह गया.

वीर : यू लैटते?????

निहारिका : (अपनी सासें दुरुस्त करते हुए)

वीर (स्माइल्स) : मुझे नहीं पता था मेरे हाथ इतना बढ़िया माल लगेगा. पर ये क्या? ऐसे में तोह दूध के चलते ब्लाउज गीला पद जाएगा राइट? अब एक hi काम हो सकता है.

निहारिका : *हफ़* *हफ़* !!!???? *हफ़*

वीर ने उसके बाद कुछ नहीं बोलै.

एक hi झटके में उसने निहारिका की साड़ी के पल्लू को हटाया, उसके ब्लाउज को जोरर से खींच नीचे किया, सफ़ेद ब्रा नज़र आते hi वीर ने उससे कस के थामा और उससे भी नीचे खींच निहारिका की बड़ी बड़ी छूछीयो को हवा में आज़ाद कर दिया.

"Ahhhhhhhhhhnnnnnnn!!!??"

उसके सामने निहारिका के बड़े बड़े स्तन थे. लाल और गुलाबी रंग के मिश्रण के निप्पल्स जो एकदम खड़े हुए थे और उनके मुँह पर दूध की चीते लगे हुए थे. जैसे मानो चीख चीख कर पुकार रहे हो की आओ और चूसो इन्हे. पी जाओ सारा दूध.

और वीर ने वही किया. निहारिका के दोनों थानों को कस के हाथ में थाम के वीर ने निप्पल्स को मुँह में भर वो मीठा दूध पीना शुरू कर दिया. ऐसे पकड़ा था वह जैसे मानो नारियल पकड़ के उसमे से नारियल पानी पी रहा हो.

निहारिका झटके पर झटके खाती रही. वीर का ये पहला स्तनपान था. शायद!!! उससे नहीं पता था की उसकी माँ भावना ने उससे स्तनपान करवाया भी था या नहीं कभी? या बिना करवाए hi चोरर के चली गयी थी उससे? क्या उससे किसी और स्त्री का स्तनपान करना पड़ा था बचपन में? उससे कुछ नहीं पता था.

बस इतना पता था की... अभी वो निहारिका के स्तनों से स्तनपान कर रहा था. और अभी के लिए यही उसका पहला स्तनपान था.

*स्लुर्प* *लीक* *सलररररररपपपपल*

"अह्हह्ह्णण~"

"ममममममम~"

*सूचक* *शह्ह्ह्हुपपपप*

निहारिका के केबिन में एक बार फिर, उसकी सिसकियाँ बिखर गयी.

जब ये समाप्त हुआ तोह उसकी हालत देखने लायक थी. पूरे कपडे उसके अस्त व्यस्त हो चुके थे. बाल बिखर चूजके थे. आँखों में मदहोशी छायी हुई थी. पर कुछ hi सेकण्ड्स में उसने अपने आप को रिकवर किया और अब आँखों में खुमारी की जगह घनघोर गुस्सा और नफरत नज़र आ रही थी.

निहारिका : यौऊ!!!! I'll किल यू!!! यू बास्टर्ड!!!!! You'll रिग्रेट आईटी... हर्र एक चीज़... का हिसाब चुकता करुँगी में... I'll मेक यू लीक माय फीटस... नंगा करके तुम्हे सड़को पर घुमवाउंगी... मार्क माय वर्ड्स... *हफ़* रेमेम्बेर आईटी... *हफ़*

वीर : अव्व्व! हाउ क्यूट!!!

वीर ने हस्ते हुए उसके निप्पल को जोरर से खींच दिया,

"आआआआह्ह्ह्ननंत्र~"

और निहारिका तिलमिला उठी.

वीर : खुद की हालत ठीक करो. वे अरे लीविंग.

वो कुछ न कह पायी. वैसे भी उसका पूछना व्यर्थ hi जाता. वो जानती थी वीर उससे कुछ बताने वाला था नहीं.

खुद की हालत को सही करने के बाद जब वो केबिन से निकली तोह वही बैठे एम्प्लोयी ने उससे देख सवाल कर लिया की वह कहा जा रही थी.

निहारिका : फोकस ों योर वर्क इंस्टेड. हम्फ!!! में इम्पोर्टेन्ट काम से कुछ देरर के लिए बाहर जा रही हु. कोई पूछे तोह बता देना.

एम्प्लोयी : यस ma'am!

और निहारिका खुद को प्रोफेशनल लेडी की तरह दिखाते हुए बाहर निकल गयी. जैसे मानो अंदर तोह कुछ हुआ hi नहीं था उसके साथ.

वीर पीछे से जब उसकी गांड देखा तोह उससे यकीन हो गया था. ये सबसे फैली हुई और बड़ी गांड देखि थी उसने अब तक अपने जीवन में.





सुमन की भी गांड बड़ी थी, पर निहारिका की कुछ ज़्यादा hi बड़ी थी. सुमन एक hi डिपार्टमेंट में सबसे आगे थी. दूध के डिपार्टमेंट में. भले hi उसकी छूछीयो से दूध नहीं आता था पर उसके जितने बड़े दूध अभी तक किसी के पास नहीं देखे थे वीर ने.

बाहर आते हुए, वीर ने अपनी कार की तरफ इशारा किया बैठने का तोह निहारिका बिना कोई सवाल किये कार का दरवाज़ा खोली और अंदर बैठने लगी.

पर... अंदर घुसते hi उससे कार के दूसरी विंडो सीट पर में कोई बैठा नज़र आया..

निहारिका : Wh-Whaaattttt!!!???

अंदर सुमन बैठी हुई थी. उसके गदराये बदन को देख निहारिका चुप चाप अंदर बैठ गयी. वही यहाँ सुमन भी तीखी नज़रो से निहारिका के गदराये बदन को ऊपर से नीचे तौल रही थी.

सोच रही थी की इस औरत का उसके मालिक के साथ क्या रिश्ता था? सुमन ये नहीं जानती थी अभी की उसके मालिक इस गदराये जिस्म को मसलने के बारे में सोच रहे थे.

अभी वीर बैठने जा hi रहा था जब उसके पास एक लड़का आया.

लड़का : बॉस!!! बलहार बॉस ने ये पैकेट भेजा है.

ये बलहार के चलो में से एक था.

वीर ने जैसी hi पैकेट के अंदर देखा तोह, पाया की अंदर 50 लाख रुपये नगद पड़े हुए थे.

और उसी वक़्त बलहार का फ़ोन भी आ गया.

वीर : Hello?

बलहार : बॉस! आपको रकम मिल गयी?

वीर : हम्म!

बलहार : ठीक है! बॉस! बाकी के 45 लाख जो बचे है वह कह रहा था की शाम तक देगा. में खुद लेके आपको दे जाऊंगा. आप कहा मिलोगे मुझे?

वीर : शाम को में क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स होटल में रहूँगा.

बलहार : ठीक है बॉस! वैसे... आपको इतने पैसो की क्यों ज़रुरत ाँ पड़ी? मुझसे मांग लिए होते बॉस. ये फ्लैट बेचने की क्या ज़रुरत थी?

वीर (स्माइल्स) : नहीं! ये काम मुझे खुद करना है. तभी इसका फल अच्छा मिलेगा. अच्छा ठीक है रखता हु.

बलहार : जी बॉस!!!

*कॉल एंड्स*

वीर की बात सही थी. मिशन ~ सोल्वे Nidhi's प्रॉब्लम.

सिस्टम का सबसे पहला मिशन. वीर जानता था की उससे ये प्रॉब्लम खुद से hi सोल्वे करनी थी. तभी तोह रिवार्ड्स अच्छे मिलते. यदि वह बलहार से पैसे ले लेता तोह भला उससे उतने अच्छे रिवार्ड्स कैसे मिलते? फ्लैट गया तोह गया, कल और फ्लैट्स आ जाएंगे. पर एक बार मिशन हाथ से गया तोह... वह दुबारा नहीं आएगा. और पारी को खोने का अलग डर.

पारी से hi याद आया. वीर का सिस्टम दो लगातार मिशंस को कम्पलीट करने के बाद अपग्रेड हो चूका था.

वही दो मिशन ~ श्वेता का 'रेस्क्यू श्वेता बिफोर शी डीएस' और श्रेया का 'रेस्क्यू थे प्रेय फ्रॉम थे प्रिडेटर.' वाले.

इन् दो के कम्पलीट होते hi सिस्टम लेवल 7 पर आ चूका था. नोटिफिकेशन वीर को तब hi आ गया था जब वीर ने निहारिका के गले में अपनी कालर बाँधी थी.

*डिंग*

[Mission : Rescue prey from the predator has been completed.]

*डिंग*

[3000 Points have been rewarded.]

*डिंग*

[3 Free Quest Hunt tries have been alloted.]

*डिंग*

[System has reached Level 7.]

*डिंग*

[Scroll Hunt has been unlocked.]

वीर को 3 क्वेस्ट हंट के त्रिएस मिले थे. एकदम फ्री. पर उनका कुछ हुआ नहीं. क्युकी तीनो hi त्रिएस में उससे ट्रैश कार्ड hi मिला था.

उसके पास 5892 पॉइंट्स थे पहले से hi. जो की अब 3000 और मिलने से 8892 हो चुके थे.

इसलिए वीर ने 2000 पॉइंट्स को डाव पे लगाया. क्वेस्ट हंट खेलने के लिए. और बेशक, चौथे तरय में hi उससे लीजेंडरी कार्ड मिल चूका था.

इंटिमीडेटिंग प्रजेंस!!!

वीर ने आलरेडी इक्विप कर लिया था इससे जिसके कारण निहारिका पर इसका असर काफी कुछ देखने को मिल रहा था.

वो मर्दो से नफरत करती थी और उन्हें अपने परर की जूती के बराबर समझती थी. पर वीर को देखते hi उसकी हालत पतली हो जाती थी. इंटिमीडेटिंग प्रजेंस अपना काम बखूबी कर रहा था.

एक और बात हुई थी. वो है...

[Maaaaaaastttteeerrrrrrrrr~ Ehehehehe~ Did you miss me??? I missed you so muchhhh!!! Muuuaaahhhh~ ( ˘ ³˘)♥]

'हँ!!!?'

[Tell me you missed me!!! Tell me... Tell me... TELLLLL MEEE!!!!!]

'वोअहहह!!! कलम डाउन!! वेल येह!! ी दीद मिस यू. सो यू अरे थे इतर पर्सनालिटी. हम्म??'

[Yup yup!!!! (~ ̄³ ̄)~]

'फेव!!! अब में पिछली पारी को मिस करने लगा हु.'

[Whattttt??? Matlab mein acchi nahi??? You bad master!!!! Hmph~ .·´¯`(>▂<)´¯`·.]

और कुछ इसी तरह वीर का सिस्टम नए अपग्रेड से होक गुज़रा था.

खर्र!! बलहार के द्वारा भेजे गए पैसे लेने ले बाद, वीर ने उस लड़के को एक काम और दे दिया. ड्राइवर का काम.

और वह पीछे जा कर दोनों hi औरतो के बीच में बैठ गया.

कार स्टार्ट हुई और चल दी. और कुछ देरर बाद hi, निहारिका ने मौके का फायदा देख अपनी चाल चली,

वो सोच रही थी की सुमन के सामने वीर की गन्दी पर्सनालिटी को सामने लाये. इससे ये नहीं पता था की सुमन वीर को hi दासी थी. वह समझ रही थी की सुमन किसी बिज़नेस के काम से कार में मौजूद थी. तोह ये मौका उसके लिए बेस्ट था.

निहारिका : ी वास् राइट... आल में अरे ट्रैश. लुक ात यू!!! क्या कर रहे थे तुम मेरे साथ!!?? छ्हीईई!!! इतनी घिनौनी हरकत? हर्र मर्द एक जैसे hi होते है.

वीर उससे देख मंद मंद मुस्कुरा रहा था और सुमन सब कुछ देख रही थी.

तभी,

वीर ने निहारिका को उसके बालो से पकड़ा और...

अपना जीन्स नीचे कर,

वीर : यू टॉक तू मच!!!

अपना लुंड उसके मुँह ठूस दिया. ये उम्मीद के बाहर था. करीब 5 मिनट तक वीर ने निहारिका को ऐसे hi रखा. बगल में बैठी सुमन निहारिका को खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी.

*कुघ* *कुघ*

निहारिका : Y-Youuuuu....

वीर : सुमन!!!

सुमन अगले hi पल उठी और निहारिका के कानो के नज़दीक जाके उसने हौले से कहा,

"वह... मेरे मालिक है."

जिससे सुन्न निहारिका का बदन लैंप उठा.

निहारिका : Wh-Whaaaatttttt!!!!???

सुमन वीर के सामने बैठी, हाथ में टिश्यू लिए वो वीर के लुंड से निहारिका का थूक साफ़ करने लगी. वैसे तोह वह अपने मुँह से hi साफ़ करने वाली थी. पर जैसे निहारिका का गन्दा थूक उससे अपने मुँह में नहीं लेना था. क्युकी, उससे देख के hi सुमन को गुस्सा आ रहा था. वीर ने इधर पहले सुमन के होंठ चूमे और फिर उससे उसके हाल चोरर दिया. यही छोटी छोटी बातें उसकी सुमन का दिल जीत लेती थी. वह चाहता तोह सीधा सुमन के बाल पकड़ अपने लौड़े को उसके मुँह में घुसा सकता था. और सुमन मन भी नहीं करती. पर... उसने पहले होंठ चूमे. और सुमन को पहले अपनी इच्छा पर चोरर दिया.

इधर सुमन ने टिश्यू का उपयोग किया. और उसके बाद, उसने वीर के लुंड को मुँह में ले लिया. अपने थूक से रंगने लगी वह वीर के लौड़े को. और जब अच्छे से पूरा लौड़ा गीला कर दिया. तोह सुपाड़ी को चूमने लगी. निहारिका यहाँ एकदम हक्की बक्की सी मानो सदमे में जा चुकी थी.

तोह इसका मतलब... ये औरत... पहले से hi इस वीर की नौकरानी थी!!???

वीर : सुमन!!!

सुमन : जी मालिक?

वीर : तुम रेडी हो न???

सुमन : जी मालिक!!!

वीर : हम पहुँच गए है. जाओ!!! और दिखा दो आज. क्या हो तुम!!!

सुमन : J-Jii मालिक!!!!

बेचारी सुमन भावुक हो उठी. अपने पूरे चेहरे पर उसने वीर के लुंड को फिराया. जैसे मानो उसकी गंध से अपने आप को नहलाना चाह रही थी. बगल में बैठी निहारिका का मुँह फटा के फटा hi रह गया था.

निहारिका : यू... यू अरे क्रैजीयययय!!!

वीर (स्माइल्स) : जाओ!!!

सुमन (स्माइल्स) : ममम~ *पूछ~♡*

एक अंतिम बार अपने मालिक के लिंग के सुपाड़ी को चूम वह कार के बाहर निकल गयी.

उनकी कार कड़ी हुई थी, कोर्ट के बाहर.

वीर (स्माइल्स) : और तुम... नारी शक्ति समिति की हेड...

निहारिका : हूऊऊह्ह्ह्हह्ह??? H-How दीद यौऊ?????

वीर (स्माइल्स) : मुझे सब पता है. बी थे वे, गले में पत्ता बाँधा था मेने. कहा गया? अगली बार यदि मुझे नज़र नहीं आया तोह तुम्हारा वीडियो ऑफिशल्स के पास जाएगा सीधे. में तुम्हे वार्निंग भी नहीं दूंगा.

निहारिका : यूउउउउ.... तछः!!!! बास्टर्डड!!!!!

वीर : नाउ कॉल थम.

निहारिका : !!!???

वीर : नारी शक्ति समिति को फ़ोन लगाओ और उनसे कहो की इस कोर्ट के बाहर एक औरत को उनकी मदद की सख्त ज़रुरत है. हर्र हाल में उसकी मदद करनी hi है.

निहारिका : Wh-Whaaatttt!!!!???

वीर (स्माइल्स) : दो आईटी!!!

मजबूरन, निहारिका को वो सब कुछ करना पड़ा जो वीर कहता गया. उसने ंसस (नारी शक्ति समिति) में फ़ोन भिड़ाया और... वैसा hi कहा जैसा वीर ने करने को कहा था.

और अब शुरू हो रहा था. थे ग्रैंड शो.

सुमन का दिल भी ज़र्रों से धड़क रहा था. कार के बाहर आ तोह गयी थी, पर अपने मालिक से बिछड़ते hi अब उसका आत्मविस्वाश डगमगा रहा था. जब जब वो अपने मालिक के पास रहती थी तोह कभी उससे ये महसूस नहीं होता था. पर आज... वो थोड़ा घबराई हुई थी. लेकिन, पहली बार उसके मालिक ने उससे कोई काम सौपा था. और वह अपने मालिक को निराश नहीं करने वाली थी.

वो दिखाने वाली थी आज की वो हर्र एक रूप से अपने मालिक के काम आ सकती थी. केवल शारीरिक रूप से hi नहीं.

और मैं में हौसला बाँध वो आगे बढ़ी और शुरू किया उसने अपना खेल,

"निकल बाहर कायर वकील!!!! अरे कहा छुप के बैठा है...!!?? बाहर निकल रजत!!!! ोोू रजत!!!! बड़ा मर्द बना फिरता है... पर हरकते तोह तेरी औरतो जैसी है... बाहर निकल... में कहती हु बाहर निकल!!!! क्या चुडिया पहने अंदर बैठा है... अरे एक माँ को दर्द पहुचाया है तूने. एक माँ hi दूसरी माँ का दर्द समझ सकती है. में चुप नहीं बैठूंगी. तेरी हर्र करतूते सामने लाऊंगी. मेरी सखा को जो तूने दर्द दिया है... वो सब सच सामने ला के रहूंगी..."

और शुरू हो गया. सुमन का खेल. वो चींख चींख के कोर्ट के बाहर hi चिल्लाने लगी.

और बेशक, उसके ऐसा करते hi साड़ी पब्लिक अत्त्रक्ट होक वह जमा हो गयी. सब तमाशा देखने खड़े हो गए. और आपस में सवाल करने लगे.

सुमन की ये हरकत, वह मौजूद पुलिस को पसंद न आयी और जो दो पुलिस कर्मी बाहर hi मौजूद थे वह सुमन के पास आके उससे बोल कर हटाने की कोशिश करने लगे. पर आज सब व्यर्थ था. सुमन नहीं रुकी. और ताने पे ताने चींख चींख पर मारती रही.

जैसे hi ये खबर अंदर रजत के पास पहुची, वो अपने एक सेह कर्मी के साथ भागा भागा बाहर आया.

रजत : Y-Ye सब क्या हो रहा है?

सुमन : क्यों रे!!?? नादान बना फिरता है?? हाँ? तुम सब देख रहो हो??? देख रहे हो न आप सब इस चेहरे को??? यही हरामखोर अपनी गाय जैसी पत्नी पर क्या क्या अत्याचार करता है आपको पता है? में बताती हु. ये कमीना न केवल अपनी पत्नी को मारता है बल्कि, उसके जिस्म पर गर्म पिघलती हुई मॉम गिराता है, उससे टार्चर करता है, मारता है पीटता है, और सबसे बड़ी बात...

साड़ी पब्लिक सुमन के कारनामे को देखने में लगी हुई थी.

सुमन : इस कमीने ने अपनी पत्नी से उसका बीटा छीन लिया और अपने घर में रखे हुए है. और उस से 50 लाख की मांग कर रहा है ताकि वो अपना बच्चा ले जा सके. वो बच्चा बेचारा... एक नवजात शिशु... उससे तोह एक माँ के दूध की ज़रुरत रहती है की नहीं...!!?? बताइये!!?

सुमन की बात सुन्न वह सभी हाँ में सर्र हिलाने लगे जो पास में खड़े हुए थे.

सुमन : और इस कमीने ने एक माँ को अपने बेटे से अलग कर दिया. बताइये अब... कैसे उस नवजात शिशु को एक माँ का दूध प्राप्त होगा जो उसके लिए बेहद ज़रूरी है. बोलिये!!!?? मेरी सखा... बेचारी... इसके चंगुल में फस्स गयी... उसकी आर्थिक स्थिति का फायदा उठा रहा है ये निर्लज... ऐसे दरिंदे को क्या हमे माफ़ करना चाहिए!!!??

रजत : ैय्येई औरत... T-Tum कौन हो?? में तोह तुम्हे जानता तक नहीं. निकल जा यहाँ से. बकवास करना बंद कर दे. वर्ण सीधे अंदर करवा दूंगा तुझे. और आप लोग खड़े खड़े क्या देख रहे है? इससे लेके जाइये... बकवास कर रही है पागल कही की...

रजत ने गुस्से में पुलिस से कहा तोह पुलिस केवल समझा hi सकती थी. एक फीमेल कांस्टेबल को hi महिला को पकड़ के ले जाने की अनुमति थी. मेल इंस्पेक्टर्स को नहीं. मजबूरन वो कह hi सकते थे पर सुमन न रुकी.

15 मिनट तक सुमन बवाल खड़ा करती रही. और जब रजत खुद आके उससे घसीट के ले hi जाने वाला था तभी...

"नहीं चलेगी... नहीं चलेगी... तानाशाही नहीं चलेगी... नहीं चलेगी... नहीं चलेगी... तानाशाही नहीं चलेगी... हमे हमारे हक़ दो... हमे हमारे हक़ दो..."

भारी मात्रा में नारी शक्ति समितीत की आधे से ज़्यादा औरते वह हाथो में पोस्टर्स और प्रोटेस्टींग बोर्ड्स लिए जमा हो गयी. और अब पहली बार, रजत की गांड फटी.

ंसस बोहत hi प्रमुख नारी समिति थी. बेहद प्रमुख. उनके कारनामे पूरे शहर में मशहूर थे.

और वह पॅहुचते hi उन् सभी नारियो को सुमन की परेशानी के बारे में पता चल चूका था. अब तोह जैसे उन्हें यहाँ से हटाना नामुमकिन सा हो चूका था.

सुमन : मेरी सखा का बच्चा लौटाओ... तुम्हे 50 लाख में दूंगी... पर उसका बच्चा उससे वापस दो.

"वापस दो... वापस दो... !!!" वो नारे लगाने लगी.

और इधर रजत का मुँह सिकुड़ के निम्बू की तरह हो चूका था. उसके सेह कर्मी ने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा,

"सर!!! ले दे के रफा दफा करो वर्ण बोहत दिक्कत हो जाएगी. ये ंसस वाले बोहत ुचि चीज़ है. इनसे न भिड़ो. रश्मि मैडम को कौन नहीं जानता? आपके hi जैसे कोर्ट में वो भी बोहत ुचे दर्ज़े की वकील है. और वो भी... इसी ंसस का एक हिस्सा है. अभी तक तोह बात आपके घर के दरवाज़े के अंदर थी. पर अब बाहर आ रही है. फसेंगे आप hi."

"और... भगवान् न करे की ये ंसस वाले रश्मि ma'am को लॉयर के रूप में लेले आपके खिलाफ. फिर तोह दिक्कत हो जाएगी. 50 लाख तोह मिल hi रहे है. अभी 50 लाख लेके रफा दफा कर दो मामला. बाद में आप अपना बच्चा और भी तरीक़ो से ले सकते हो."

न चाहते हुए भी रजत को सहमत होना पड़ा. और ऐसे hi सब कुछ समाप्त हुआ. ऐसे hi पूरी घटना को अंजाम दिया था वीर ने.

वो अंदर कार में बैठे सब कुछ देख रहा था. और नीचे उसके लौड़े को मुँह में भरे हुए थी, निहारिका बंसल. उसी ंसस की हेड...

यदि ये अचीवमेंट नहीं था तोह और क्या था?

उधर सुमन की हिम्मत की सब दाद देने में लगे थे. उन्हें क्या पता था की वही हिम्मत वाली औरत... कुछ देरर पहले hi अपने मालिक के लौड़े को चूस के कार से बाहर निकली थी और इस वक़्त उसका चेहरा अपने मालिक की लिंग की गंध से पता हुआ था. सब लोग इस बात से अनजान थे.

वही वीर, कार के अंदर से सुमन को एक प्राउड नज़रो से देख रहा था. अब बाकी था... निधि को सुप्रिसे देना.

***

क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स होटल.

इवनिंग ~ 7:46 पं

इसके बाद जो कुछ भी हुआ था. वो निधि के साथ हुआ था. वीर यहाँ सबको इन्विते कर चूका था. और वो मैं hi मैं सोच रहा था की निधि किन इमोशंस के साथ गुज़र रही होगी इस वक़्त.

"माहामुउउउउ~"

जूही भी आ चुकी थी. उसकी गॉड में घुमते हुए वो वीर से सरप्राइज के बारे में पूछती जा रही थी. पर सरप्राइज तोह सरप्राइज था.

और फिर आया वह पल...

जब निधि वह आयी. आँखों में पट्टी बांधे.

जैसे hi उसने सब कुछ देखा. वो रो पड़ी. और वीर को आज निधि को इस हाल में देख, खुद रोना आ गया. कितना कुछ सहा था उसने. फाइनली, आज इसका ध्रुव उसके हाथो में था.

"छोटा भैयाआ.... माहामुउउउउ~ छोटा भैयाआ आ गया...!!!!"

जूही दौड़ते हुए गयी, ध्रुव के पास जो सोफे पर लेते सो रहा था और उसके गालो को टटोलने लगी. इस से ज़्यादा ख़ुशी की बात वीर के लिए हो hi नहीं सकती थी.

वीर ने सभी के लिए आज रूम्स बुक करवाए हुए थे. यही पर खाना पीना और सोना. सुबह का चेक आउट था उनका.

जब सब कमरे में चले गए. तब... वह निधि के संग लॉन में आया. और उसने अपने दिल की बात कह डाली.

निधि तोह रोटी रही. स्वीकार कहा करती थी वह? आदत hi थी उसकी. पर वीर ने ठान लिया था. एक न एक दिन, निधि को अपना बना के hi रहेगा.

उन् दोनों के बीच ज़्यादा बातें नहीं हुई. निधि उस हालत में नहीं थी. लेकिन, दोनों एक दूसरे की बाहो में ज़रूर बोहत देरर तक रहे थे. ये भी अपने आप में एक अचीवमेंट था.

जब निधि भी रूम में चली गयी. तोह बलहार जो जाने वाला था वो वीर के पास आया,

बलहार : क्या इस काम के लिए आपने फ्लैट बेचा था बॉस?

वीर : हम्म!!!

बलहार : पर ऐसे में... उनके पति का क्या? उससे तोह फ्री का रोकड़ा मिल गया. क्या आप अपने हाथ से जाने देंगे फ्लैट और पैसे?

वीर : तुमने सोच भी कैसे लिए?

बलहार : हहहह?

वीर : शेर का शिकार करने के लिए थोड़ी देरर के लिए बकरी को सामने रखना पड़ता है बलहार.

बलहार : !!!???

वीर की आवाज़ बदली हुई सी थी. और उसके हाथो में वाइन का एक गिलास था.

बलहार : इसका मतलब...!?

वीर : ी विल टेक एवरीथिंग फ्रॉम हिम!!!

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आज के लिए इतना hi गाइस!

थिस अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ 5.7क वर्ड्स. कम्पलीट मेगा अपडेट. सो, लिखे ठोकने का और रेवोस रखने का.

धन्यवाद!!!!
 
अपडेट - 91 ~ मोमेंट्स

अब तक...

वीर : शेर का शिकार करने के लिए थोड़ी देरर के लिए बकरी को सामने रखना पड़ता है बलहार.

बलहार : !!!???

वीर की आवाज़ बदली हुई सी थी. और उसके हाथो में वाइन का एक गिलास था.

बलहार : इसका मतलब...!?

वीर : ी विल टेक एवरीथिंग फ्रॉम हिम!!!


अब आगे...



Niharika's होम.

मॉर्निंग ~ 10:47 ऍम

संडे~

हर्र संडे का दिन, आराम फरमाने का hi होता था. निहारिका के अपने घर में भी यही हो रहा था. वह एक आलिशान डबल बीएड पर अकेली लेती हुई थी. सिल्क की एक महंगी रेड निघ्त्य उसके गदराये बदन को ढके हुए थी.

अभी तक नींद की वादियों में थी वह. और जब आठवीं बार उसका अलार्म बजा, तोह आखिर कार अलार्म क्लॉक को बंद कर वो अंगड़ाई लेते हुए उठी. बदन को स्ट्रेच करते हुए, उसकी बड़ी बड़ी छुछिया भी अपना प्रदर्शन करने लगी.

*यौन*

इतने बड़े बिस्तर पर, वह अकेली सो रही थी. न उसका पति विकास था, न hi उसका बीटा, ऋत्विक.

विकास नीचे अलग एक रूम में सो रहा था. और उसी के संग उसका लड़का. केवल निहारिका hi थी जो अकेले सो रही थी. और ये आज का नहीं था. शादी के बाद से hi ऐसा चलता आ रहा था.

ऋत्विक के हो जाने के बाद, निहारिका ने 3 साल तक तोह उससे अपने hi रूम में रखा, अपना दूध पिलाया, पर 3 साल के बाद hi, उसने ये साड़ी ज़िम्मेदारी विकास को सौप दी थी.

विकास hi था, जो ऋत्विक का ध्यान रखता. उससे खाना खिलाता, उससे सुलाता. इतने आलिशान घर में एक माइड भी थी. जो घर का काम करती थी, खाना बनाती थी, ऋत्विक को स्कूल के लिए तैयार भी वही करती थी. उसका ध्यान भी रखती थी.

और जब विकास थक हार के कॉलेज से घर आता तोह ऋत्विक की देखभाल में लग जाता.

निहारिका को कोई मतलब नहीं रहता था दोनों बाप बेटे से. वह तोह जैसे अपनी अलग दुनिया जी रही थी. सुबह काम पर जाती, और फिर रात को hi घर आती.

घमंड था उससे. और क्यों न हो? विकास से कई गुना ज़्यादा पैसा कमा रही थी वह. समाज वाले क्या सोचते होंगे की पति से ज़्यादा, एक पत्नी पैसा कमा रही है.

विकास फस्स चूका था बुरी तरह. शादी के पहले उससे नहीं पता था की निहारिका इस किस्म की औरत निकलेगी.

निहारिका को शुरू से hi एक ऐसा मर्द चाहिए था जो उस से डर के रहे. और विकास के रूप में वो उससे मिल गया. विकास की जॉब प्रोफाइल निहारिका की जॉब प्रोफाइल से बोहत hi नीचे थी. कहा वो एक सिंपल सा प्रोफेसर, और कहा निहारिका? एक मंच की हर हेड.

निहारिका को शादी अपने घरवालों के प्रेशर में आके करनी पड़ी थी. यहाँ तक की बच्चा भी उसने इसलिए hi पैदा किया था. विकास के माँ बाप दूसरे शहर में थे. तोह कही कोई रेस्ट्रिक्शन्स नहीं थे निहारिका के पास.

वो एक आज़ाद पंछी की तरह थी जो अपनी मनमानी कर सकती थी. कोई रोक टोक नहीं.

विकास निहारिका के हुस्न में फसा...

शादी हुई...

ऋत्विक हुआ...

और 3 साल बाद...

निहारिका ने अपने असली रंग दिखा के विकास की वात hi लगा डाली.

अब चाह के भी विकास उससे तलाक नहीं दे सकता था. क्युकी, उसके बच्चे का सवाल था. वो यही चाहेगा की कैसे भी कर के निहारिका सुधर जाए. पर जो औरत मर्दो से hi नफरत करती हो, वो भला कहा से विकास की बात मानती!?

पर सवाल ये था की निहारिका मर्दो से इतनी नफरत क्यों करती थी? जवाब था निहारिका का बाप.

जी हाँ! निहारिका के पिता, अपनी पत्नी पर अत्याचार करते थे. और यही देखते देखते hi निहारिका बड़ी हुई. उसकी सोच मर्दो के प्रति बदलती चली गयी. और उसने ठान लिया था की यदि वह शादी करेगी तोह अपने मर्द को दबा के रखेगी. और वही हुआ...

निहारिका ने महिला मंडल उर्फ़ नारी शक्ति समिति ज्वाइन की, देखते hi देखते वह अपने पड़, अपने ओहदे, और अपनी निडरता के चलते उधर की हेड भी बन्न गयी. कमी थी तोह बस एक चीज़ की...

निहारिका को हमेशा से एक बेटी चाहिए थी. पर उससे मिला एक बीटा. तोह अपने बेटे के प्रति एक माँ का रुझान उसका काम हो गया. और वो अपने परिवार को नेग्लेक्ट करते चली गयी.

और आज वह इस मुकाम पर थी.

बाथरूम में जाते हुए उसने अपने आप को निघ्त्य से आज़ाद किया तोह उसका गदराया गरम बदन सामने आया. आईने में खुद के जिस्म को निहारते हुए वह शावर लेने लगी. पूरी तरह से नाहा लेने के बाद जब वह बाहर एक बाथरोब में बाहर आयी तोह दरवाज़े के बाहर से hi उससे विकास की आवाज़ सुनाई दी,

"वो... निहारिका... निहारिका!??? तुम... तुम उठ गयी क्या?"

निहारिका : हाँ उठ गयी हु. नाहा रही थी. क्या है?

विकास : वो... वो आज माइड चली गयी है. उसकी तबियत खराब है. 4-5 दिन नहीं रहेगी.

निहारिका : हाँ तोह मुझे क्यों बता रहे हो? एक मिनट! मतलब नाश्ता रेडी नहीं हुआ अभी तक? तुम कर क्या रहे हो जबसे? तुमने नाश्ता बनाया या नहीं?

विकास : में वही तोह बता रहा हु की... माइड नहीं आयी है और नाश्ता bann'na अभी बाकी है. तोह क्या तुम...!?

निहारिका : हँ!!!? में? में नाश्ता बनाऊ? अरे यू फूकिंग नट्स? हँ? ये तुम्हारे काम है. जाओ जाके फटाफट नाश्ता रेडी करो. और हाँ, मुझे सलाद भी चाहिए. जो नाउ!!!

दरवाज़े की दूसरी तरफ से फिर कदमो के जाने की आवाज़ आयी. विकास जा चूका था.

*क्लिक*

अपना वार्डरॉब खोल, निहारिका ने अपना बाथरोब निकाल के फेक दिया और नंगी hi ऐसे खड़े हुए वो वार्डरॉब में से अपने कपडे ढूंढ़ने लगी आज के pehn'ne के लिए.

तभी उसकी नज़र एक चीज़ पर पड़ी...

उससे हाथ में लेते hi निहारिका का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुँच गया.

"तहत बास्टर्ड...!!!!"

उसके हाथ में वही चोकर था जो वीर ने उससे पहनाया था उस दिन उसके hi ऑफिस के केबिन में. कैसे वो कुटिया बने नीचे बैठी हुई थी, आँखों में ासु लिए, और वीर उसकी गर्दन पर पत्ता बाँध रहा था.

मजाल थी की कोई मर्द उसके साथ ऐसा करने के बारे में सोच भी सके? पर वीर ने न केवल वह किया, बल्कि उसके गले में एक ओनर का टैग भी बाँध दिया. की अबसे वो उसकी अमानत थी. जैसे मानो निहारिका कोई इंसान नहीं कोई वास्तु थी, जिससे वीर ने खरीद लिया हो.

अभी वो गुस्से में आग बबूला हो hi रही थी जब बगल से hi उसके किसी के सीटी बजाने की आवाज़ आयी,

*विस्सल*

"हहहहहह!!!?"

झटके से वो मुड़ी और मुड़ते hi उसने जो देखा, उसकी आँखें हैरानी और शॉक के मारे फैलती चली गयी.

सामने वीर दीवार से ठीके हुए हाथो में हाथ बांधे खड़े हुए था. और उसके नंगे जिस्म को बड़े hi चाव से देख रहा था.

"Aaaahhhhhhhhhhh!!!!"

निहारिका हड़बड़ाते हुए अपने बाथरोब को उठायी और अपने नंगे बदन को धक् ली,

निहारिका : T-Tuuummmmm!!????

वीर (स्माइल्स) : मुझे नहीं पता था, कपड़ो के पीछे इतना गरम जिस्म छिपा हुआ होगा.

निहारिका : तुम.... H-How दीद ोूउउ!???

निहारिका की नज़रे इधर उधर गयी तोह उससे समझ आ गया की वीर उसके कमरे के अंदर कैसे आया था. बगल में hi बालकनी थी. और बालकनी का गेट उसने सुबह उठाते hi खोला था. पर वो हैरान इस बात से थी की वीर इतनी ऊपर चढ़ के कैसे आ गया भला? और तोह और एंट्री गेट पर गार्ड्स क्या कर रहे थे? क्या उन्होंने वीर को नहीं देखा?

निहारिका : तुम... तुम अंदर कैसे आये??? और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इधर आने की... K-Kya... क्या चाहते हो तुम??

वीर (स्माइल्स) : हम्म? अपनी स्लेव के घर जाने के लिए मुझे परमिशन लेने की क्या ज़रुरत!? और ज़रा देखो तोह... क्या तुम ये मेरे लिए कपडे उतार रही थी? हम्म?

निहारिका : यू फुकेररर!!!! गेट लॉस्ट!!! गेट लॉस्ट राइट नाउ!!! वर्ण में... में चींख दूंगी और सबको चौकन्ना कर दूंगी...

वीर : जो ों!!! हाहाहा~ क्या होएगा जब तुम्हारा पति ये डिस्कवर करेगा की तुम किसी और मर्द के साथ अंदर बैडरूम में सो रही थी.

निहारिका : Wh-Whaaaattt!???

वीर (स्माइल्स) : में तोह यही जवाब दूंगा न...

निहारिका : यौऊ... यू फूकिंग...

वीर : सस्शह्ह्हह्ह... ज़रा में भी तोह देखु पास से की केसा बदन है मेरी स्लेव का कपड़ो के पीछे...

कहते हुए वीर आहिस्ता आहिस्ता जब निहारिका की ऑर्डर बढ़ने लगा तोह वह घबराते हुए पीछे की ऑर्डर जाती गयी और दीवार से भीड़ गयी.

निहारिका : Wh-What अरे यू दोंग?? H-Huhh?? D-Don't यू डरे... ऐसी कोशिश भी मत करना... T-Tum जानते नहीं हो इसका अंजाम क्या होगा. में... में तुम्हारे साथ बोहत कुछ कर सकती हु समझे? K-Kuch बोल नहीं रही हु इसका मतलब ये नहीं की तुम...

पर उसकी आवाज़ बीच में hi कही गायब हो गयी जब वीर ने अचानक hi अपने मुँह में उसके होंठ भर लिए.

"मंममपहह्हह्ह्ह्ह!!!???"

*स्लुर्प* *स्लुर्प* श्लोक*

*सूचक* *लीक* *मुआहहहह*

"अह्ह्ह्णण~"

और बेरहमी से उन् होंठो को चूसते चूसते वीर ने निहारिका के जिस्म से वो बाथरोब खींच के अलग कर दिया. निहारिका एकदम नंगी वीर की बाहो में थी.

वीर का एक हाथ उसकी थानों को मसलने में लगा हुआ था, तोह दूसरा उसकी गांड के पतों को सहलाने में. और उसके होंठ निहारिका के होंठो से उनका रस पीने में बिजी थे.

विरोध तोह करती रही निहारिका, पर वीर आज रुकने वाला नहीं था. धीरे धीरे निहारिका का विरोध कमज़ोर सा होता चला गया.

*हफ़* *हफ़* *हफ़*

निहारिका : तुममम... *हफ़* में तुम्हे... में तुम्हे जान से मार दूंगी... *हफ़*

वीर : अव्व्व... सो क्यूट~

"अह्ह्ह्हह्हह्ह्णणणणणण~"

वीर ने अगले hi पल उससे अपनी गॉड में उठाया और वही रखे एक रेड लक्ज़री सोफे पर उससे उछालते हुए फेक दिया.

"Aaaaaaaaaa~"

निहारिका : यू बास्टर्डड! हरामखोर...

वीर ने सब अनसुना किया और निहारिका के बदन को मोड़ते हुए उसने अपने दोनों हाथो से उसकी गांड के पतों को चीरते हुए खोला.

तोह एक अध्भुत दृश्य उसकी आँखों के सामने आया. खिचाव के चलते निहारिका की छूट के होंठ एक दूसरे से अलग हो गए और उसकी गांड का छेड़ फेल गया.

दृश्य इतना आकर्षक था की वीर की उत्तेजना बोहत ज़्यादा बढ़ गयी और उसका लुंड अपनी सलामी दे दिया. मतलब वो रेडी था. अपना काम करने के लिए.

वीर : गॉड दमन!!!!! इतनी सॉफ्ट... उफ्फफ्फ्फ़~ ऐसा लग रहा है में आता गूंथ रहा हु... जिधर भी दबाओ... बस... उस शेप में hi ये बदल जाती है...

और फिर...

*चाताआगआककककक*

"Ayyyyyyiiiiiiiiiiiiiii~"

एक ज़ोरदार छाता वीर ने उसकी गांड पर दे मारा. तोह निहारिका की गांड पानी के सामान लहरें खाते हुए हिल पड़ी.

वीर : डमनणणन! नाउ... स्प्रेड योर अस्स...

*चाताआआककककककककक*

"आअह्हह्ह्णणणण~"

मजबूरन, निहारिका को अपने हाथो से अपनी गांड को चीरते हुए खोल के दिखाना पड़ा. उसकी सासें बोहत तेज़्ज़ हो चुकी थी.








वीर के सामने फिरसे वो मनमोहक दृश्य आ गया...

वीर : उफ्फ्फ्फ़~ लुक ात तहत नाउ... स्प्रेड मोरे...

*चाताआकककककक*

"अहहह्णणणणंग्गघहहह~"

और निहारिका गुस्से में hi सही पर अपनी गांड को और चीरने लगी.








वीर (स्माइल्स) : हम्म... तोह तुमने पहले hi इधर का उद्धघाटन करवा लिया है हाँ? शायद डिलडो का hi काम होगा. क्युकी, तुम मर्दो से तोह करवाने से रही. वैसे अच्छा hi है मेरे लिए... हाहाहा~

निहारिका : हहहह!!!!??

*चाताआगआककककक*


निहारिका : आअह्ह्णण माआआआ~

वीर : स्प्रेड मोरे....






वीर : गॉड दमन ित्तत्त!!!

वीर ने उससे दुबारा गॉड में उठाया और वाशरूम की ऑर्डर ले गया.

वीर (स्माइल्स) : अकेले अकेले तुमने नाहा लिया? ऐसा कैसे हो सकता है भला? पनिशमेंट तोह मिलेगी hi.








निहारिका : N-Nahiiii चोररररररओओओओ...

*चाताआआकककककक*

निहारिका : Aaaaaaaaaahhhhhhhhhh~

वीर ने वाशरूम के क्यूबिकल में घुसते hi शावर ों कर दिया, और निहारिका का नंगा बदन पूरा गीला होने लगा.

पानी की बूंदे उसके बदन पर सज्ज चुकी थी.






और वीर ने उसके गदराये जिस्म को मसल के थामा और दीवार से लगा दिया. शावर से गिरता पानी दोनों को भीगा रहा था.

वीर ने अपना पहला वार किया. सीधा निहारिका के थानों पर. और दूध चूसने लगा,

वीर : आखिर इनमे से दूध तोह निकालना hi पड़ेगा न!? तोह मेरी ज़िम्मेदारी है ये की में इन् दूध की थैलियों को खाली करू. राइट?

*सूचक* *सलरररररपपपप*

वीर निहारिका के थानों से दूध चूस चूस कर पीने लगा. इस से बेहतर और क्या हो सकता था उसके लिए? उससे एक ऐसी स्लेव मिल गयी थी जो अपने थानों से दूध बहाती थी. इस से ज़्यादा उत्तेजना सा भरी बात और क्या हो सकती थी? वीर जब चाहे उसके थानों को मसल उनमे से दूध पी सकता था.

वीर : *सलूररररपपपपपप* उफ्फ्फ्फ़~ क्या स्वाद है...

निहारिका : अह्ह्ह्णण मा~ *हफ़* *हफ़* कुत्ते... कमीनी.... हरामखोर.... चोररर... *हफ़* *हफ़* चोररररर मुझी... आह्ह्ह्हन्णन~

लेकिन वीर चूसता रहा. उसकी उंगलिया नीचे निहारिका की छूट को मसलती रही जिसके चलते निहारिका पानी पानी हो चुकी थी. छूट से रस ऐसे बह रहा था जैसे मानो पानी का बाँध टूट गया हो.

भले hi निहारिका का दिल और मैं मर्द को न पसंद करे, पर उसका बदन तोह एक मर्द के टच के लिए तड़प hi रहा था न?

उसकी बॉडी अपने आप रिस्पांस दे रही थी.

जब वो पूरी तरह से गीली हो गयी तोह वीर ने मौका देखा और...

"Aaaaaaaayyyyiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaa~"

अपना लुंड निहारिका की गुफा में पेल दिया. एक बच्चे को जन्म दे चुकी थी निहारिका. तोह दर्द तोह हुआ उससे पर उतना नहीं जितना एक वर्जिन लड़की महसूस किया करती है. वीर के झटके और उसकी लेंथ के चलते निहारिका की आँखें पलटने लगी.

*पहहहहहातटटटट*

*फहहतत्तत्त*

*पहहहहातटटटटट*

बस शावर के पानी गिरने की और वीर की कमर निहारिका की गांड पर पड़ने की hi आवाज़ गूँज रही थी पूरे बाथरूम में.

छोड़ छोड़ के वीर ने निहारिका का हाल बेहाल कर दिया था.

निहारिका : Noooooooooo~ न्यूऊऊ~ अह्ह्ह्हह्ह्णणणणणणण Wh-What इस थिस.... Ssssssssssss~ *हफ़* *हफ़* ाह्णण~

उसकी आँखें बंद होती तोह कभी आँखों की पुतलिया पलटने लगती... धक्के का कारण पूरा शरीर उसका हिचकोले खा रहा था. दूध की थैलिया इधर से उधर झूम रही थी और निप्पल्स से दूध की बूंदे रिस रही थी. छूट उसकी कस कस के वीर के लुंड को खाने की कोशिश कर रही थी और गांड का छेड़ बार बार उकसा उकसा के खुल और बंद हो रहा था.

आखिर लेस्बियन सेक्स, एक लेस्बियन सेक्स hi होता है. रियल सेक्स नहीं. आज जब वीर ने निहारिका को एक मर्द की तरह छोड़ा. तोह निहारिका का रोम रोम खिल उठा. उसका पूरा अस्तित्व hi हिल गया. ऐसी चुदाई उसने आज तक अपने जीवन में नहीं की थी.

पर तभी,

"निहारिकाआआ~"

कमरे के बाहर से विकास की तेज़्ज़ आवाज़ आयी.

निहारिका : H-Huhhh!??

इस से पहले की वो आवाज़ दे पाती, वीर ने उससे गॉड में उठाया और छोड़ते छोड़ते hi वो उससे बाहर ले आया.

"आअह्हह्णन्नन्नन्न~"

विकास (बाहर से) : निहारिका...!?

वीर निहारिका को दरवाज़े से टिका के hi छोड़ रहा था. दरवाज़े पर अपने दोनों हाथ टिकाये, झुके हुए निहारिका अपनी छूट में वीर से लुंड पिलवा रही थी.

निहारिका : अह्ह्ह्नणन्गग्गहह~

विकास : निहारिका!???

निहारिका : H-Haan... *हफ़* *हफ़* K-Kya है!!??

*पहहहहतत्तततत* *पहहहहाआटट*

*पहहहहाआटट* *पहहहहतत्ततततततत*

विकास : वो...

निहारिका : क्या हीी!!?? B-Bolo जल्दी... *हफ़* *हफ़* नंनगहःह~

विकास : वो... ब्रेकफास्ट रेडी है.

निहारिका : ओह्ह अच्छा!! H-Haan तोह चलो... *हफ़* M-Mein नाहा के आ रही हु.

*फट्ट्ट्ट* *पहहहहातटटटट*

विकास : पर तुम तोह नाहा चुकी थी न?

निहारिका : ननंग्घहहह~ ममममम~ H-Haan... फिरसे नाहा रही हु... तुम्हे कोई दिक्कत!!?? *हफ़*

*पहहहहतत्तततत* *पहहहहाआटटट*

विकास : नहीं!!! बस यही कहना था जल्दी नीचे आ जाना. ऋत्विक नीचे वेट कर रहा है.

और विकास वह से चला गया.

उससे इस बात का अंदाजा तक नहीं था की उसकी पत्नी ठीक उसी दरवाज़े के पीछे खड़े होक अपनी छूट में एक जरर मर्द का लुंड ले रही थी. वही छूट जिस से ऋत्विक का जन्म हुआ था, उस गुफा को वीर अब अपने नाम कर चूका था.

वह छेड़ अब पूरी तरह से वीर का हो चूका था. केवल वही छेड़ नहीं. बाकी सभी छेड़ भी.

वीर ने छूट में जैसे hi अपना पानी चोर्रा, छूट से लुंड निकाल उसने निहारिका की गांड के अंदर पेल दिया. और इस हमले से निहारिका की मानो जान hi निकल गयी. वो एकदम तिलमिला उठी.

चींख को वीर ने अपने हाथो से रोका और दनादन उसकी गांड में लुंड पेलने लगा. लुंड इतना गीला था की गांड को गीला करने की ज़रुरत hi नहीं पड़ी.

जीभ निकाले, अधखुली आँखों से निहारिका ऐसे चुद रही थी जैसे कल संसार का अंत होने वाला था.

वीर : लुक ात यू... सुच ा नास्तय बीच...

*पहहहहातटटटट* *फट्ट्ट्ट*

अलग अलग पोसिशन्स में वीर ने निहारिका को इतना छोड़ा की बेचारी निहारिका की हिलने तक की हिम्मत न बची...








कही बालो से पकड़ के तोह कही उसके चेहरे को पकड़ के.

बस छोड़ता रहा.








जब तक की वीर सटिस्फीएड नहीं हो गया. निहारिका के होश उड़द चुके थे. वो ज़मीन पर कुटिया बने लेती हुई थी. बेचारी की पेशाब तक छूट गयी थी उधर hi ज़मीन में जिसका उससे कोई होश नहीं था. उसकी छूट पर पेशाब और कामरस की बूंदे सजी हुई थी.

और इतना लव्ड दृश्य था वह. दोनों छेड़ो में वीर का वीर्य छपा हुआ था. वो निहारिका के सर्र के पास गया और उसके मुँह में अपना लुंड ठूस दिया. तब तक उसके मुँह को छोड़ा, जब तक उसका लुंड साफ़ नहीं हो गया.

चुदाई के बाद, वीर ने अपना जीन्स पहना और निहारिका को उसके बालो से खींच उसके कानो में बस एक hi बात बोली,

"तुम्हारा अगला काम है, सुमन को ंसस में जगह देना. उससे एक सदस्य बनाना. और हाँ, मुझे आज भी चोकर नहीं दिखा तुम्हारे गले में. नेक्स्ट टाइम, कहूंगा नहीं. चोकर गले में होना चाहिए और नीचे... तुम आज से पंतय नहीं पहनोगी. गुड डे!!!"

और बस... वीर वह से जैसे आया था वैसे hi निकल गया. निहारिका बेसुध सी वही पड़ी रही. फर्श पर कामरस और मूट पड़ा हुआ था. उससे कोई होश तक नहीं था अब. और नीचे उसका पति और बच्चा उसका इंतज़ार कर रहे थे.

***

दिन भर वीर लगा रहा अपने कामो में. कही कारन से मिलके कुछ बिज़नेस डिसकस करता, तोह कही बलहार से मिलके कुछ बातें और होती.

कुल मिलाके, पूरा दिन बीत गया था और रात के 10 बज चुके थे.

सिस्टम से वीर को निधि का मिशन कम्पलीट करने के लिए 6000 पॉइंट्स मिले थे. अब तक के सबसे ज़्यादा. और उसके पास अब 12,892 पॉइंट्स थे.

जिसका इस्तेमाल वीर ने सभी स्टैट्स की लिमिट को अनलॉक करने में कर लिया था.

हर्र एक स्टेट की लिमिट को अनलॉक करने के लिए उससे टोटल 8000 पॉइंट्स गवाने पद गए.

और अब उसके टोटल पॉइंट्स थे ~ 4892.

स्क्रॉल हंट भी अनलॉक हो चूका था. जैसे क्वेस्ट हंट में कार्ड्स मिलते थे, इसमें कार्ड्स जगह स्क्रोल्स मिलते थे.

वीर अभी जा hi रहा था की,

[You fucked her too hard Master! (◍•ᴗ•◍)]

'व्हाट थे...!? तुम स्लीप मोड में नहीं गयी? तुम सब कुछ देख रही थी?'

[Ehehehe~ Yes yes!!! (〃゚3゚〃)]

'तुम...'

[Ye gandi baat hai master. Sleep mode me mujhe bhejna jab aap masti kar rahe ho. I want to see it too... I want to see it tooo

(✿ ♡‿♡)]

'थे हेलल!? तुम्हे शर्म नहीं आती? दो लोगो को सेक्स करते देखते हुए?'

[Huh!!? W-Why would I feel ashamed? It was so beautiful... (~ ̄³ ̄)~ Ehehehe~]

'Wtf? ये पारी को क्या हुआ? ये पर्सनालिटी तोह...'

[Ehehehehehee~ ♡(˃͈ દ ˂͈ ༶ ) ]

'फूऊक्कक्क्क्क!!!!!'

[Maaaashhhteeerrrr~ Muuuaaahhhhh ❤ I love youuuu~ (~ ̄³ ̄)~]

'ओह्ह्ह्ह फूऊखककककक!!!!'

पारी को इग्नोर कर वीर जैसे तैसे पहुचा...

निधि के घर. शाम को श्रेया का कॉल आया था उससे की जब वह घर लौटे तोह मिलता हुआ जाए.

तोह वीर हाज़िर था. दरवाज़ा अटका हुआ था निधि के घर का तोह वीर ने दरवाज़ा पुश कर दिया.

धकेलते hi दरवाज़ा खुल गया और वो अंदर आ गया. पर...

"अह्ह्ह्हहननननन!!!!"

निधि जो दीवान पर बैठी ध्रुव को स्तनपान करवा रही थी वह अचानक hi वीर को देखते hi अपना पल्लू ध्रुव के सर्र पर दाल दी ताकि अपने स्तनों को वह छिपा सके.

वीर : अह्ह्ह सॉरी... वो में...

निधि (ब्लशेस) : It's... It's okay. आ जाओ...

वही श्रेया जो सोफे पर बैठी थी वो अपनी जीभ निकालते हुए दरवाज़ा बंद करने गयी. और निधि ने ये देख लिया.

निधि : क्यों? श्रेया? तुमने hi गेट खोल के रखा था न!?

श्रेया : ाहः~ ऊप्स गलती हो गयी.

(*´ω`*)

निधि : गलती हो गयी की बच्ची... गेट लगा के रखना चाहिए न.

श्रेया : अब मुझे लगा वीर आएगा hi तोह खोलना तोह पड़ेगा hi. इसलिए फिर खुला hi रखा. मुझे नहीं पता था आप... एहम...

निधि (ब्लशेस) : It's okay... तुम दोनों अंदर जा सकते हो यदि बात करनी है तोह...

श्रेया (स्माइल्स) : हम्म हम्म...

श्रेया आगे बढ़ी, पर उस से पहले वो पलटी और वीर को देख खुसपुसाते हुए बोली,

"ोये... पस्ससतत~ तुम नॉक करके नहीं आ सकते थे?"

वीर : वेल वो...

श्रेया : It's okay. अच्छा वो चोर्रो और अंदर आओ जल्दी.

अपने कमरे में ले जाते हुए वो वीर को अंदर लायी और अंदर से hi उसने गेट बंद कर दिया.

वीर : जूही कहा है? कही नज़र नहीं आ रही.

श्रेया : वह बगल वाले फ्लैट में गयी है. उधर कोई बच्ची आयी हुई थी उसकी उम्र की तोह दोनों साथ में खेल रही है.

वीर : ओह्ह्ह्ह~ पर इतनी रात गए?

श्रेया : हाँ बच्चे है. 12 बजे के पहले कहा सोते है!?

वीर : ओह्ह्ह! तोह!? मुझे ऐसे अचानक क्यों..!?

तभी श्रेया ने एक पैकेट खोला और उसमे से कुछ निकाला.

और अपने हाथो में उससे लेके वह वीर के नज़दीक आयी और उसकी छथि पर उससे लगाया.

एक टी शर्ट!!!

वीर : ये...!?

श्रेया (ब्लशेस) : ये तुम्हारे लिए...

वीर : रियली? फॉर में...!?

श्रेया (ब्लशेस) : यस इडियट!!!

वीर : पर... इसकी क्या ज़रुरत थी!??

श्रेया (ब्लशेस) : स्टुपिड...

वीर : हँ?

श्रेया (ब्लशेस) : It's... It's ा रेतुर्न गिफ्ट यू स्टुपिड. थैंक यू!!! मेरी हेल्प करने के लिए..

दी की हेल्प करने के लिए... ध्रुव को वापस लाने के लिए... जूही को उसका छोटा भाई दिलवाने के लिए... उस रजत से दी को बचाने के लिए... थैंक यू. थैंक यू फॉर एवरीथिंग. थैंक यू फॉर किंग इन माय लाइफ... ी... ी... मैं... फॉर किंग इन आवर लाइफ.

वीर (स्माइल्स) : थैंक्स...

वीर ने टी शर्ट देखि तोह एक वाइट कलर की हाफ टी शर्ट थी जिसपर लिखा हुआ था, 'व्हाट यू अरे सर्चिंग फॉर इस राइट बिफोर योर आईज.'

श्रेया का दिल जोरर जोरर से धड़क रहा था.

श्रेया (मैं में) : दीद हे फंड आउट!??

वीर (स्माइल्स) : वाक़ई बोहत अच्छी है. सुच ा मोटिवेशनल कोटे...

श्रेया (मैं में) : ओह्ह्ह गॉड थिस स्टुपिड गाए!!!!

श्रेया (ब्लशेस) : पहन के देखो न.

वीर : ेहः!? यहाँ!??

श्रेया (ब्लशेस) : तोह और कहा स्टुपिड? ऑफ़ कोर्स यही पर... अब ये मत कहना की शर्म आती है.

वीर : नहीं वो बात नहीं है...

श्रेया : थें दो ित्त्त!!!!

वीर : वोह!!! Okay okay... कलम डाउन... पहनता हु.

और वीर ने अपनी टी शर्ट उतार दी. उतारते hi जब उसकी बॉडी सामने आयी तोह बेचारी श्रेया का पूरा चेहरा लाल पद गया. आँखें फाड़े वह बस वीर की बॉडी देखती रही. जैसे मानो पढ़ रही हो उसकी बॉडी. कहा कहा उसके बदन पर टिल है, कौन सी जगह कितनी ख़ूबसूरत है, कितने कट्स है बॉडी में... सब कुछ.

खुद वह वीर को शर्माने के लिए कह रही थी पर इधर उसकी खुद की हालत hi खराब थी.

जब वीर ने टी शर्ट पहनी तोह श्रेया की आँखों में चमक आ गयी. और वो अपने आप hi उसकी बाहो में कूद पड़ी,

वीर : H-Heyyy....

श्रेया : .....

वीर : उम्....

श्रेया : ....

वीर : समथिंग हप्पेनेड!?

श्रेया : सस्शह्ह्ह!!! बस मुझे ऐसे hi रहने दो.

वीर : A-Alright!!!

श्रेया (मैं में) : टुडे तू, ी फेल्ड. *सिघ*

बाहर आ कर जब वीर जाने को हुआ तोह निधि ने भी उससे अपने गले से लगा लिया.

निधि : वीर... में... तुम्हारे पैसे... जल्द hi लौटा दूंगी...

वीर : कर दिया न फिरसे पराया... आप उस बारे में सोच रही हो... बताओ...

निधि : वो... पैसे तोह लौटाने hi पड़ेंगे. 50 लाख कोई छोटी मोती रकम नहीं. और में किसी से भी...

वीर : मुझे तोह लगा था में आपका ख़ास था.

निधि : ी...

वीर : तोह में जरर निकला हां?

निधि : नाहीईई! ऐसी बात नहीं है. तुम गलत सोच रहे हो.

वीर : यदि पैसो की hi बात करनी है तोह में यहाँ नहीं रुकूंगा. चलता हु.

निधि : N-Nooooo वीएररर... सुनुऊ!!!!

पर वीर तब तक जा चूका था.

***

घर आते आते उससे रात के 11:30 बज चुके थे. वह खाना पीना निधि के घर से hi करके आया था. और अंदर आते hi, गेट खुला हुआ था.

'हम्म्म? सब सो गए क्या?'

बस किचन से... दीवार पर पद रही, पीले रंग की मद्धम मद्धम रौशनी hi आ रही थी. ऐसा लग रहा था की अँधेरे में कोई मोमबत्ती जल रही थी अंदर.

बाकी हॉल में पूरी तरह अँधेरा था.

'स्ट्रेंज! सब इतनी जल्दी सो गए!?'

वीर ने किचन में जाने का डीडे किया. आहिस्ता आहिस्ता वह गया और किचन के जैसे hi वह अंदर आया तोह उसने देखा...

रागिनी... किचन के प्लेटफार्म के ऊपर बैठी हुई थी. केवल ब्लाउज और पेटीकोट में. उसके गोर परर नीचे झूल रहे थे. हाथो में उसके एक बड़ा सा कांच का गिलास था जिसमे कुछ भरा हुआ था. शायद बियर थी.

बगल में एक मोमबत्ती जल रही थी. और वीर की नज़रे जब उसके चेहरे पर गयी तोह वह दांग रह गया...

वो... रो रही थी...

उसने वीर को हौले से मुड़ते हुए देखा. और फिर हाथ में लिया हुआ गिलास आगे करते हुए बोली,

"मेरा साथ नहीं डोज वीर!!!???"

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!!!

आने वाले 4-5 अपडेट काफी इम्पोर्टेन्ट रहेंगे. इनके बाद hi नया अर्च शुरू होएगा. ये उपदटेस अहम् इसलिए रहेंगे क्युकी यही से वीर वाक़ई में अपनी लव लाइफ के बारे में सोचना शुरू करेगा. बाकी, लिखे ठोकने का, रेवोस रखने का. बने रहिएगा!


धन्यवाद!!! ✨
 
अपडेट - 92 ~ थे मन बिहाइंड

अब तक...

रागिनी... किचन के प्लेटफार्म के ऊपर बैठी हुई थी. केवल ब्लाउज और पेटीकोट में. उसके गोर परर नीचे झूल रहे थे. हाथो में उसके एक बड़ा सा कांच का गिलास था जिसमे कुछ भरा हुआ था. शायद बियर थी.

बगल में एक मोमबत्ती जल रही थी. और वीर की नज़रे जब उसके चेहरे पर गयी तोह वह दांग रह गया...

वो... रो रही थी...

उसने वीर को हौले से मुड़ते हुए देखा. और फिर हाथ में लिया हुआ गिलास आगे करते हुए बोली,

"मेरा साथ नहीं डोज वीर!!!???"


अब आगे...

वीर की आँखों के सामने इस समय उसकी अपनी भाभी केवल और केवल एक लाल रंग के पेटीकोट और हर्रे रंग के ब्लाउज में बैठी हुई थी.

किचन के प्लेटफार्म पर बैठे हुए रागिनी के कोमल परर नीचे झूल रहे थे. बगल में एक मोमबत्ती थी और हाथो में शराब का प्याला.

शराब तोह नहीं कहेंगे... बियर थी... विदेशी...

आँखें नम्म थी. और वीर उससे इस हाल में देख के ताजुब में था. उसने रागिनी को इस अवस्था में देखते hi नज़रे फेरर ली.

वीर : भाभीई!??? ये आप...!? इस हाल में!!? यहाँ!!? इतनी रात गए?

रागिनी : मेरे सवाल का जवाब दो वीर. Won't यू ज्वाइन में?

वीर ने पुनः जब उससे देखा तोह एक बार फिर उससे देख कही खो गया वह.

रागिनी के नैन भीगे तोह थे hi, पर उन् नैनो में नशा भी था. उसका यौवन, आज पूरे शबाब में था, वीर को आमंत्रण दे रहा था.

कही न कही, वीर आज इतना ज़रूर भांप गया था की उसकी भाभी किसी ग़म में डूबी हुई थी.

रागिनी : कहो न... वीर!? *सबस* Won't यू ज्वाइन में?

कोई जवाब दिए बजर्र, वीर आगे बढ़ा, उसके समीप आया. पास से इस हाल में रागिनी की आँखों से आँख मिलाना और भी मुश्किल हो रहा था उसके लिए. या यु कहे की वह खुद hi देखना नहीं चाहता था. इसलिए फिरसे एक बार... वीर ने चेहरा फेरर लिया. लेकिन रागिनी को ये पसंद न आया.

रागिनी : मुँह क्यों फेरर रहे हो वीर? देखो मुझे! मेरी तरफ देखो...

वीर : भाभी...!!! में...

रागिनी : लुक ात में...!!!

वो रोटी रही और मजबूरन वीर को उसकी बात maan'ni पड़ी.

एक दुसरे की नज़रो में दोनों देख रहे थे. मोमबत्ती से आती हलकी हलकी पीली रौशनी रागिनी के चेहरे पर पद रही थी. ये वह हुस्न था जो धोके के चलते एक बार फीका पद चूका था. पर दुबारा से एक प्यार की आस ने उसके इस हुस्न को पहले से और भी उत्कृष्ट कर दिया था.

वीर : भाभी...!?

रागिनी : मुझे मेरे रूम में ले चलो वीर.

एक हामी भर, वीर ने सहारा देते हुए रागिनी को थामा और वही उसके रूम में उससे ले जाने लगा.


*क्लिक*

उसके बैडरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद हुआ और उसके बदन को बीएड पर लिटा कर वीर फ़ौरन hi जाने के लिए हुआ तोह रागिनी ने उसकी कलाई थाम ली.

रागिनी : क्या तुम... मेरे साथ थोड़ी देरर वक़्त गुजारोगे?

मन तोह करना चाहता था वीर. ये सही वक़्त नहीं था. एक देवर का अपनी भाभी के साथ ऐसे होना. पर... रागिनी अकेली थी. दर्द में थी. अंधरुनि दर्द. जिस से वीर भली भाति परिचित था. वह दिल की पीड़ा. शायद उससे बीते लम्हे याद आ रहे थे. जिस कारण उसने शराब को hi आज रात के लिए अपना यार बनाना सही समझा!?

वीर कुछ सोच के रागिनी के बगल से लेत गया. रागिनी करवट ली हुई थी. केवल उसकी पीठ hi वीर की नज़रो के सामने थी.

जीरो वाट के बल्ब में हलकी हलकी रौशनी hi थी. उसी रौशनी में दोनों बिस्तर पर लेते हुए थे. और रागिनी ने फिर कहना शुरू किया,

रागिनी : तुम्हारी टी शर्ट कहा है वीर!?

उसने वैसे hi बिना मुड़े पूछा.

वीर : वो... निधि Ma'am के यहाँ. ये टी शर्ट श्रेया जी ने गिफ्ट में दी है.

रागिनी : ी सी... *स्निफ्फ*

वीर : भाभी!!! A-Aap रो रही है. क्यों?

रागिनी : क्या तुम सुनोगे वीर? Jaan'na चाहोगे?

वीर : ज़रूर...! कहिये...!

*कुछ देरर बाद*

रागिनी : देखो! मेरी दीवानगी भी तोह देखो वीर... ाहः~ *स्निफ्फ* हाहाहा~ *सबस*

अचानक hi रट रट वह हस्सन लगी. जैसे एक व्यर्थ कोशिश कर रही थी, अपने ग़म को छुपाने की. पर वीर की नज़रो से कुछ न छुपा. सब भांप लिया उसने. एक खुली हुई किताब की तरह पढ़ रहा था वह रागिनी को.

रागिनी : दिल के अरमानो को समझने वाला कोई होना चाहिए वीर...! है न?

वीर : हम्म...!

रागिनी : क्या करू वीर!? कुछ बताओ... रातें बेचैन हो रही है... *स्निफ्फ* तेल्ल में!!!

वीर : में...

रागिनी : यू क्नोव... उलझी सी रह गयी में!!! अपनी इस ज़िन्दगी में... जिसको प्यार किया... उसने बस खेल किया... हाहाहा~ *स्निफ्फ* जिसका ज़िक्र होता था मेरी ज़िन्दगी में... हर्र लम्हा... बूत... तहत बास्टर्ड नेवर लव्ड में. *स्निफ्फ*

वीर : आप अब भी विवेक भैया के बारे में सोच रही हो!?

रागिनी : नेवर!!! में अपने व्यर्थ में गुज़र चुके समय के बारे में सोच रही हु वीर. उस समय को मेने बचा के किसी अपने को प्यार दिया होता तोह कितना अच्छा होता... *स्निफ्फ* है न? *स्निफ्फ*

वीर : हम्म...!

रागिनी : और मेने वो समय गवाया नहीं होता. में फिर... उसके साथ वक़्त गुज़ारती जिस से में असल में प्यार करती हु. है न? *स्निफ्फ*

वीर : आप... यू लव समवन!??

रागिनी : *स्माइल्स*

वीर : भाभी?????

रागिनी (स्माइल्स) : और मुझे वह मिला भी. समवन ेल्स चामे ईंटो माय लाइफ... जिसने मुझे जीने की एक राह दी. हु सेव्ड में... हु लिस्टनेड तो में... हु शोवेद में लव... हु गावे में रेस्पेक्ट... *स्निफ्फ*

इस बार अचानक hi... रागिनी ने करवट बदली... वीर की आँखों में आँख दाल के वो देखि...

वीर : !!!!!????

रागिनी : एंड...

वीर : !!??

रागिनी : तहत समवन इस...

वीर : .....!!!!

रागिनी : यू!!!!! It's यू!!!! तुम... वीर...

वीर बस हैरत अंगेज़ में मौन रह के रागिनी को देखे जा रहा था. वो हैरान था.

और रागिनी आहिस्ता आहिस्ता... सरकते हुए... क़रीब आती जा रही थी...

वीर : .....!!!

रागिनी : यू चामे ईंटो माय लाइफ. और मेरी दुनिया hi बदल गयी. मुझे पता चला... की जीवन क्या होता है. प्यार क्या होता है.

वीर : .....??????

रागिनी : वीर!!! यू कैन थिंक व्हाटएवर यू वांट... थिंक ऑफ़ में अस िफ़ I'm स्टुपिड... हाँ! बेवक़ूफ़ hi क्यों न समझो मुझे... बूत I'll से आईटी टुनाइट...

वीर : भाभी... आप...!!??

रागिनी उसके एकदम क़रीब आ चुकी थी. उसका चेहरा वीर के इतने नज़दीक था की दोनों एक दूसरे की गरम सासें भी अपने चेहरों पर महसूस कर पा रहे थे.

इस बार जब रागिनी की आँखों से ासु की बूँद निकली तोह वीर को अंदर hi अंदर एक अजीब सी पीड़ा हुई. बॉहे सिकोड़े वह मौन रहा. इंतज़ार करता रहा... आने वाले पल का... मैं कर रहा था की वह पी ले उन् आसुओ की बूंदो को. रागिनी को तोह वह पहले hi माफ़ कर चूका था. रागिनी उसकी सखा से भी बढ़ के थी. उससे दर्द में देख, वीर को पता नहीं क्यों, पर ज़रा भी अच्छा नहीं लगा रहा था. खुद के दिल में कष्ट महसूस कर पा रहा था वह.

और फिर रागिनी ने झकझोर कर रख देने वाले वह शब्द आखिर कह hi दिए.

रगीन (स्माइल्स) : वीर....

वीर : ....

रागिनी (स्माइल्स) : ी लव यू!!!

'!!!!??????'

वो आगे बढ़ी... वीर के होंठो की तरफ... रागिनी के लैब वीर के निचले लबो के बेहद क़रीब पहुचे...

पर जैसे hi उन् लबो पर उसके लैब सज्ज पाते...

रागिनी ने अपने होंठो का रुख बदल दिया और उसके लाल होंठ वीर के होंठो के ठीक बगल से उसकी चीन पर जा लगे.

शायद!!!! रागिनी वीर के चेहरे पर मौजूद असमंजस भांप गयी थी!?

रागिनी : मुझे अभी जवाब देने की ज़रुरत नहीं है वीर.

कहते हुए वो फिरसे पलट के लेत गयी. और कमरे में एक ख़ामोशी छ गयी. क्या हुआ अभी अभी? वीर के दिल की धड़कन तोह ट्रैन के माफिक तेज़्ज़ थी.

लेकिन रागिनी की अब ख़ामोशी उससे और भी सत्ता रही थी. ऐसा महसूस हो रहा था उससे जैसे उसने कोई गलती कर दी हो.

और इस बार बिना कुछ कहे hi, वीर अपनी तरफ से आगे बढ़ा. रागिनी के नग्न पेट में हाथ दाल कर उससे थाम कर अपने सीने से लगा लिया उसने.

और ये रात कुछ इस तरह hi बीत गयी. रागिनी ने अपने दिल की बात कह दी थी. जिसके चलते वीर के दिमाग में उथल पुथल तोह मची hi थी पर उससे एक उत्तर मिल गया था, रागिनी की तरफ से. अब उस पर सोच विचार वीर को hi करना था.

***

नेक्स्ट डे...

आफ्टरनून ~ 2:37 पं

"तुम उम्र में इतनी बड़ी हो और फिर भी ये तुम्हे तुम्हारे नाम से बुला रहा है. तुम में कोई सेल्फ एस्टीम नाम की चीज़ है भी या नहीं!?"

आवाज़ थी निहारिका की, जो कार में बैठी हुई थी. और उसका तीखा सवाल था सुमन से, जो वीर के दाए से बैठे हुए थी.

सुमन (स्माइल्स) : तोह इसमें गलत क्या है? में उनकी दासी हु. वो मेरे मालिक. ये तोह ज़ाहिर सी बात है की वह मुझे नाम से hi बुलाएंगे. इसमें उम्र से क्या लेना देना?

सुमन ने एकदम स्पष्ट रूप में अपना उत्तर रख दिया. आज वह यहाँ अपने मालिक के कहने पर ंसस की एक सदस्य bann'ne आयी हुई थी.

तोह वही निहारिका का अब भी वही बर्ताव चालु था. बल्कि उसका रवैय्या और भी बत्तर हो चूका था. गले में चोकर तोह पहनी हुई थी वह वीर की वजह से. यहाँ तक की उसने नीचे पंतय भी नहीं डाली हुई थी. पर... इसका मतलब ये नहीं था की उसने वीर को सरेंडर कर दिया था. बदले की आग उसके अंदर कूट कूट कर भरी हुई थी.

जिस दिन वीर के पास से उसकी वह रिकॉर्डिंग गयी, उस दिन कैसे वह अपने पंजे उस पर मारेगी, बस इसी दिन का इंतज़ार कर रही थी वह. और प्लानिंग भी...

निहारिका : हम्फ~ तुम मर्दो को जानती नहीं हो. शायद तुम्हे पता नहीं है पर, जब तुम्हारा ये मालिक तुमसे बोर हो जाएगा न तोह तुम्हे धक्के मार के तुम्हे दूर कर देगा.

सुमन (स्माइल्स) : ऐसा हरगिज़ नहीं होगा. मुझे इस बात पर पूरा विशवास है.

ये सुनते hi, निहारिका के चेहरे पर गुस्सा साफ़ साफ़ झलकने लगा.

निहारिका : तोह... तोह ये आदमी तुम्हारे लिए इतना ज़रूरी है!?? हाँ?

और एक बार फिर, सुमन ने बिना हिचकिचाते हुए कह दिया,

सुमन : बिलकुल! मुझे मालिक से कोई भी जुड़ा नहीं कर सकता. स्वयं भगवान् भी नहीं.

निहारिका तोह स्तब्ध थी hi, पर उस से भी ज़्यादा वीर स्तब्ध था. न जाने ये औरत और कितने सुरपरिसेस देने वाली थी उससे की अब सीधा भगवान् को hi चुनौती देने की हिम्मत ले आयी थी वह. और अभी तोह फवौराबिलिटी सिर्फ 150 पर hi पहुची थी सुमन की. न जाने 200 तक क्या क्या देखने को मिलने वाला था.

निहारिका इस बात पर हस्स पड़ी. जैसे दिखाना चाह रही थी की सुमन एक बेवक़ूफ़ इंसान थी.

निहारिका : अरे यू ान इडियट और व्हाट? मर्दो को सिर्फ सेक्स करना आता है. थे जस्ट वांट तो फ़क यू. तुम्हारा मालिक आज तुम्हारे साथ खेलेगा, फिर कल को फेक देगा.

सुमन : बस! अब और नहीं. मेरे मालिक के बारे में अब में और कोई गलत बात नहीं सुनूंगी. वो उस किसम के इंसान नहीं है. एक बेहद hi ईमानदार व्यक्ति है वह.

ईमानदार शब्द सुनते hi वीर को न जाने कैसे खासी आ गयी. ईमानदार!? क्या निहारिका को फसा के छोड़ना एक ईमानदार व्यक्ति की निशानी थी? एहम!!! इस विचार को यही रोकना ठीक था. वह तोह आज बस बीच में बैठे इन् दोनों की कैट फाइट देख रहा था.

वही निहारिका भी जोरर जोरर से हस्सन लगी.

निहारिका : हाहाहाःहाहा~ ये...!? ये और ईमानदार? हाहाहाःहाहा~

सुमन (स्माइल्स) : हम्म~ ईमानदार! में अपनी पूरी ज़िन्दगी उनकी सेवा करती रहूंगी, उन्हें चाहती रहूंगी, और...

वीर : !!!??

सुमन (ब्लशेस) : उनके बच्चे को जन्म दूंगी. मेने सोच लिया है...

वीर : सुमन...!!!

सुमन (स्माइल्स) : जब आपका मैं करे मालिक.

निहारिका : उग्गहह!!! यदि मेने एक और पल तुम्हारी बातें सुनी, तोह मुझे उलटी हो जाएगी.

सुमन (बॉहे सिकोड़ते हुए) : इतनी भी क्या नफरत है तुम्हे मर्दो से?

निहारिका : इतनी भी क्या नफरत? अरे नफरत नहीं करू तोह क्या करू? किस काम के है ये आदमी? नाले है एकदम!!! हर्र काम तोह हम औरते करती है...

वीर : विल यू एक्सप्लेन प्लीज!?

निहारिका : हम्फ~ हम औरते महीनो महीनो तक पीरियड्स का शिकार होती है... हम खून बहाते है, कष्ट उठाते है. 9 महीने तक पेट में बच्चा लेके कौन घूमता है? मर्द??? थू!!! हम औरते घूमती है... जो काम मर्द करता है वह तोह औरते भी कर रही है. पर हम औरते उस से भी कही ज़्यादा करते है. तोह फिर इन् मर्दो के हिसाब से क्यों दुनिया चले??? इन्हे क्यों फायदे मिले?? क्या hi करते है ये!?? में जस्ट... हम्फ... थे जस्ट एक्सिस्ट्स.

वीर खामोश था. और सुमन हैरानी में निहारिका को देख रही थी.

सुमन : बिलकुल नहीं! मर्द... तोह कितनी सुन्दर चीज़ बनायी है उपरवाले ने. एक औरत को मर्द का साथ चाहिए hi चाहिए होता है. और मर्द भी बिना औरत के नहीं रह सकता. दोनों एक दूसरे को पूर्ण करते है. मर्द... बोहत hi प्यारी रचना है. उन्हें बस प्यार hi करना चाहिए... उन्हें समझना चाहिए... क्युकी एक मर्द... अपना दुःख कभी भी सामने नहीं दिखाता... यही तोह फ़र्क़ है हम औरतो में और मर्दो में. तुम यहाँ इन् बातो को लेकर रो रही हो तोह वही मर्द इन् छोटी छोटी बातो के बारे में सोच भी नहीं रहे. वो किसी और चिंता में डूबे होते है... अपने घर में माँ बाप की चिंता, बाहर दोस्तों की चिंता... अपने छोटो तथा बड़ो की चिंता... सब का ध्यान रखते है वह. और चेहरे पे एक शिकन आने नहीं देते...

निहारिका : ओह c'mon... शट उप आलरेडी!!!

सुमन (नाराज़ होते हुए) : काश तुम समझ पाती.

वीर अभी भी खामोश था. वो जैसे इंतज़ार कर रहा था की किस तरह से निहारिका की बातो का जवाब दिया जाए. आखिर आज निहारिका ने पूरी मर्द जाती पर दाग लगाया था. जवाब तोह बनता था.

और अगले hi पल, वीर को उसका जवाब मिल गया. उसने एक झटके में निहारिका को पीछे उसकी गर्दन से पकड़ा तोह निहारिका सकपका सी गयी,

"आह्ह्ह्हह्हह्हंणन्न!!!?"

वीर ने उसकी गर्दन बाहर की ऑर्डर करते हुए दिखाया और तेज़्ज़ आवाज़ में बोलै,

वीर : बाहर देखो!!! ऊपर... खम्बे पे... कौन दिख रहा है?

निहारिका : अह्ह्ह्णण चोर्रो...

वीर : से आईटी!!!!!

निहारिका : आअह्ह्णण... एक... एक आदमी...

वीर : क्या कर रहा है वह?

निहारिका : B-Bijli की तारे सुधार रहा है...

वीर : हम्म! यदि वह ये काम चोरर दे और न करे तोह क्या होगा?

निहारिका : ी... अह्ह्ह्णण!!!! तोह... लाइट नहीं आएगी उस एरिया में...

वीर : कौन है वह!!??

निहारिका : H-How वोउल्ड ी क्नोव??? आअह्ह्ह्ह

वीर : मर्द है या औरत?

निहारिका : उग्गघहहह!!!!! M-Mard...!!!

वीर : हम्म्म!! अब उधर देखो...!!!

निहारिका : ोूछह!!!!! ससससस.....

वीर : क्या दिखाई दिया?

निहारिका : F-Fire एक्सटीन्गुइशेर ट्रक...

वीर : यदि ये फ़िरेफिघ्टर्स आग लगने पर न जाए तोह क्या होगा?

निहारिका : आह्ह्ह्हहनननन ch-chorrooo मुझे.... ाररह्ह्ह...

वीर : से!!!

निहारिका : ुघ्हहह... आग लग जाएगी... अहहह्ण

वीर : कौन है ये!!??

निहारिका : M-Mard....!!!!

वीर : हम्म!! तोह कुल मिलाके सब मर्द hi कर रहे है. अब देखा तुमने...

निहारिका : ऐसा नहीं है... तुम...

वीर : शट उप एंड लिसेन!!! जिस गाडी में तुम घूम रही हो, जो पर्स हाथ में लेके चलती हो, जिस फ़ोन से बात करती हो, ये सब कुछ... हमारी hi दें है. और कब से शुरू हुआ ये सिलसिला? सीन्स थे डौन ऑफ़ सिविलाइज़ेशन. जब औरते जॉब के बारे में जानती भी नहीं थी. तब से... दुनिया की कमान हम संभालते आ रहे है. जैसा की सुमन ने कहा. दोनों hi मर्द और औरते ज़रूरी है. पर इसका मतलब ये नहीं... की तुम हम मर्दो की भावनाओ को ठेस पहुचाओ... एंड don't यू एवर बेलिटले अन्य मन...!!!

वीर की बात सुन्न, निहारिका इस बार तोह शांत हो चुकी थी. उसकी गर्दन में दर्द जो बढ़ गया था. पर वह आज के इस किस्से को भी याद रखने वाली थी.

खर्र! सुमन को ंसस के कार्यालय में चोरर वीर निकल गया अपने काम पर. शाम को उसने कुछ khareed-daari की. और फिर चल दिया वह निधि के घर.

वह पॅहुचते hi उसका स्वागत हुआ जूही के द्वारा.

जो आते hi उसकी गॉड में उचक के बैठ गयी. वीर आज नयी नयी चीज़ें लाया हुआ था.

ध्रुव के लिए प्यारा सा झूला जिसमे निधि उससे सुला सकती थी. जूही के लिए एक छोटी साइकिल. तोह वही ध्रुव और जूही दोनों के hi लिए कुछ कपडे.

निधि जो सब कुछ देख रही थी वह खाली वीर की भावना मात्र देख के रो उठी. इतना आजकल कौन सोचता था भला?

खुद को कोसस्ती भी जा रही थी. की हर्र गुज़रते दिन, वह अपने इस स्टूडेंट की ृदि होती जा रही थी.

50 लाख तोह एक बार वह इखट्टा कर के दे भी देगी उससे, पर इन् छोटे छोटे रीद का क्या?? वह तोह इन्हे जीवन भर भी नहीं चूका पाएगी.

आज श्रेया, जूही और वीर को साथ में हस्ता देख, उसका दिल भर आया. सब कुछ पहले की तरह लगने लगा उससे. फ़र्क़ ये था की तब उसकी गॉड में ध्रुव नहीं था. और अब वह है...

काश ये लम्हा यही थम जाए. निधि मैं में एक गुहार लगा रही थी.

तभी वीर उठ के आया और उसके बगल से बैठ गया.

वीर : ध्रुव सो गया?

निधि : ममम~

वीर : यह आपके लिए.

उसने अपने हाथो से इस बार एक पैकेट निधि को थमा दिया. ताजुब में निधि ने वो पैकेट खोला तोह वह बस देखती hi रह गयी. कोई ऐसी बोहत ख़ास चीज़ नहीं थी अंदर. पर सवालों की झड़ी लग चुकी थी उसके मैं में.

निधि : वीर... ये...

अंदर... एक साड़ी थी. और वह भी ऐसी वैसी नहीं. एक ब्लैक साड़ी.

वीर : वो... मेने कभी आपको इस रंग की साड़ी में नहीं देखा. सो...

निधि (सर्र झुकाते हुए) : तुम्हे पता है ये साड़ी क्यों पहनती है लड़किया?

वीर : हँ!!? No ी don't... में तोह बस आपको इस रंग में देखना चाहता था इसीलिए...

निधि : तुमने सवाल का जवाब दे दिया.

वीर : हहहह!!?? ओह्ह्ह्ह!!! इसका मतलब... वेट!!! व्हाट????

वीर ने खुद hi उत्तर दे दिया था. ब्लैक साड़ी यदि कोई लड़की पहनती थी तोह केवल दो hi कारणों से. पहला या तोह मर्दो को लुभाने के लिए. या फिर उनके hi कहने पर उनकी इच्छा के लिए.

काली साड़ी में जो बदन का गोरा रंग निखार के आता है, उसके hi तोह कायल होते है मर्द. वीर भी उनमे से hi था.

वह भी इस से न बच सका.

निधि ने फिर भी वह साड़ी अपने हाथो में लेली.

निधि (ब्लशेस) : पर ये... तुमने ब्लाउज भी बनवा लिया!!!??? H-How???? तुमने मेरा साइज किसने दिया?

वीर : एहम... केवल आपको hi मेरा साइज नहीं पता है. ी क्नोव तू.

निधि (ब्लशेस) : Wh-Whaaaattt???

वीर : अह्ह्ह!!! नहीं नहीं... ी मैं... मेने श्रेया जी से पूछा था.

निधि : श्रेया तुम....

श्रेया : ेहेहेहे~ ऊप्स!!!! मुझे मेरा गिफ्ट मिल गया. हे ब्रौघत में ा नीस टॉप. लुक दी!!!! हेहेहे~ अब आपका साइज नहीं बताती तोह मुझे ये घोंचू गिफ्ट भी नहीं देता.

निधि (ब्लशेस) : T-Tum....

श्रेया : में चली में चली... देखो प्यार की काली... लललललला~

और वह निधि को जान बुझ के इग्नोर कर अंदर उसकी दांत से बचने भाग गयी.

निधि (ब्लशेस) : ये... ये लड़की भी...

वीर : ः~

निधि : तुम्हे इतना सब कुछ करने की क्या ज़रुरत थी? इतना खर्चा... अननेसेसरी...

वीर : ज़रुरत हो केवल तभी अपनों को उपहार नहीं दिया जाता Ma'am.

निधि : हाँ पर... इतना खर्चा...

वीर : आपने भी तोह किया था न?

निधि : हँ???

वीर (स्माइल्स) : जब में आपके घर था. तब मेरे लिए कपडे... खाना पीना... नहीं किया था आपने? तब आपने ये सवाल अपने आप से क्यों नहीं पूछा था? की इतना खर्चा क्यों?

निधि : क्युकी तुम मेरे...

वह कहते कहते hi ृक्क गयी.

वीर : हम्म? में आपका... क्या?

निधि : K-Kuch नहीं...!!!

वीर : कहिये!!! प्लीज!!!

निधि : ....

वीर : प्लीज?

निधि : क्युकी... क्युकी मेने तुम्हे अपना इस परिवार का एक हिस्सा hi माना है. अपनी ज़िम्मेदारी. उस वक़्त तुम अकेले थे. और मदद करना मेरा फ़र्ज़ था.

वीर : तोह मेरा आपसे क्वेश्चन है...

निधि : ?

वीर : यदि मेरी जगह कोई और होता... या आने वाले समय में क्लास का कोई और लड़का मेरे जैसी स्थिति में फस्स जाए और आप इत्तेफ़ाक़ से उस से मिल जाओ. तोह क्या आप फिरसे वही करोगी? जो आपने मेरे साथ किया था? या उस समय मेरी जगह कोई और होता तोह क्या आपने उससे भी मेरी hi तरह अपने घर में पनाह दी होती?

निधि : ी... ऑफ़ कोर्स... ी... में... वो...

और उसके मुँह से उत्तर hi न निकल सका. कैसे निकलता??? क्युकी उसने ये कभी किसी और के लिए किया hi नहीं होता. वीर के संग कॉलेज में, उससे दांत दांत के, उससे समझा समझा के एक स्पेशल रिश्ता बन्न गया था निधि का.

तोह भला अन्य लड़के के लिए वह कैसे ये सब कर देती??

केवल और केवल वीर के लिए hi उसने ये किया था. केवल वीर.

निधि को मौन देख, वीर को अपना जवाब मिल गया. और वो मुस्कुरा दिया.

वीर (स्माइल्स) : सो आईटी वास् ओनली में... राइट?

निधि (सर्र झुकाते हुए) : ....

वीर : अब बताइये... क्या आप ये साड़ी पहनेंगी?

निधि : ये... पर ये... ब्लाउज... It's स्लीवलेस... ये बोहत hi... सच सच बताओ. तुम मुझे इसमें क्यों देखना चाहते हो?

वीर : अहह! वह... ाहः~ आपको बस ब्लैक कलर में नहीं देखा. इसलिए...

उसके जवाब पर संतुष्ट न होते हुए, निधि ने अगले hi शान उसका कान पकड़ ले खींच दिया.

वीर : ोूछहः!!!! Ma'am...!

निधि : अपनी ma'am को इस रूप में देखना चाहते हो हाँ? क्या चल रहा है तुम्हारे दिमाग में?

वीर : M-Mene बताया तोह. आठ! Ma'am सॉरी! कान चोरडिये न...

वीर भी एक नादान स्टूडेंट बनते हुए एक्ट करने लगा. समां बिलकुल पहले की तरह hi हो चूका था. जैसे निधि उसके कान पकड़ उससे दांत लगाती थी. आज उन् यादो को याद करके निधि की रुलाई चूत पड़ी. वह सबसे कीमती पल थे उसके जीवन काल में अब तक के.

उसने अपनी ऊँगली से अंगूठी निकाली. वही अंगूठी जिससे वो जान बुझ के पेहेन के वीर से खुद को दूर करना चाह रही थी. शादी की वही अंगूठी.

उसने अंगूठी निकाली और वीर के हाथ में थमा दी.

वीर : ???

निधि : थ्रो आईटी!!!

वीर : व्हाटटटटट??

निधि : इससे फेक दो...

वीर : ेहठ!? No ma'am!!! ी क्नोव... आप इससे pehn'na नहीं चाहती पर ये... It's गोल्ड यू क्नोव...

निधि : कष्ट देने वाला सोना भी... कोई सोना नहीं होता वीर... मेरे लिए ये सोना... किसी कचरे से भी काम है. इससे फेक दो.

वीर : ी... *सिघ* ऑलराइट!!!

और वीर ने बालकनी में hi जाते हुए उस अंगूठी को कस के थामा और...

'रजत की पहनाई गयी शादी की अंगूठी... टाइम तो जो...!!!'

*वहुवुस्सशहठ*

और उसने पूरी ताकत के साथ उससे फेक दिया.

जब वो लौट के आया तोह निधि के होंठो पर हलकी सी एक स्माइल थी. जैसे एक चेन्न की सांस ली थी उसने.

*डिंग*

[Nidhi's Favourability : 71]

'हहहह!!!?'

***

मुंबई...

क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स सोसाइटी...

फ्लैट No. 17...

एक वेल फर्निश्ड फ्लैट में इस समय एक लक्ज़री सोफे पर एक शख्स बैठा हुआ था.

*रिंग* *रिंग*

सामने कांच की टेबल पर रखा उसका फ़ोन बजा तोह उसने वह फ़ोन उठाया.

लड़का : Hello?

दूसरी तरफ से एक आदमी ने जवाब दिया.

आदमी : Hello!!! मेरे पैसे पूरे नहीं मिले है.

लड़का : जानता हु वकील साहब जानता हु... हाहाहा~ पर क्या करू? थोड़ा समय रुकिए. पैसे मिल जाएंगे. साला जिसके लिए केस लड़ा था, वही हाथ से निकल गयी. तोह समय तोह लगेगा hi न?

आदमी : क्या मतलब?

लड़का : केस किसके लिए लड़ा था?

आदमी : होटल पाने के... ओह्ह्ह्ह!!!

लड़का : हम्म्म! होटल मेरे अंडर नहीं है. छीन ली गयी मुझसे.

जी हाँ! ये लड़का कोई और नहीं प्रांजल hi था. और उस से बात कर रहा फ़ोन पे आदमी कोई और नहीं... रजत था!!!

रजत : तोह दूसरा केस कर दो...

प्रांजल : हाहाहा~ नहीं नहीं वकील साहब. में फस्स चूका हु. घर से निकाल दिया गया हु. आप चिंता मत करिये. पैसे आपके भिजवा दूंगा. जितने भी बचे हुए है.

रजत : हम्म! पैसो की ज़रुरत है मुझे... तोह जल्द hi भिजवा देना...

प्रांजल : बिलकुल! पर आप इतने टेंशन में क्यों लग रहे हो? इतने बड़े वकील होक, इतना पैसे होने के बावजूद आप मेरे से वह बची हुई मामूली रकम मांग रहे हो? वह भी इतनी जल्दी में? ः~

रजत : कभी कभी इंसान अपना hi केस हार जाता है. जैसे तुम हार गए.

प्रांजल : हहहहह!!? जहा तक में जानता हु... आपका अपनी पत्नी के साथ कुछ विवाद था न?

रजत : पर्सनल लाइफ के अलावा कुछ हो तोह हम बात करे!!?

प्रांजल : हाहाहाहा~ क्या वकील साहब? औरो की पर्सनल लाइफ की वजह से hi तोह आपका धंधा चलता है. तोह यदि आप ज़रा सी पर्सनल लाइफ अपने क्लाइंट के साथ शेयर कर देंगे तोह उसमे बुरा क्या है?

रजत : *सिघ* हम्म!!! में अपना वारिस अपनी पत्नी के हाथो खो चूका हु. मेरा बीटा उसके पास चला गया है. पैसे मुझे इसलिए चाहिए क्युकी बिना पैसो के आजकल कुछ नहीं होता...

प्रांजल : सही बात! वैसे क्या नाम है आपकी पत्नी का?

रजत : निधि!!!!

प्रांजल : हहहहहहह!!!!??? क्या नाम बताया आपने???

रजत : निधि!!!

प्रांजल : निधि... वो जो क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कॉलेज में है???

रजत : तुम्हे कैसे पता?

और अगले hi पल... प्रांजल जोरर जोरर से हस्सन लगा.

रजत : तुम हस्स क्यों रहे हो? इसमें हस्सन वाली क्या बात है?

प्रांजल : हाहाहाहाहा~ नाउ ी चामे तो क्नोव... इस हिसाब से आप और में... एक hi शख्स से धुल खाये बैठे है.

रजत : हहहह??

प्रांजल : वो कहते है न. दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है. और इस वक़्त... आपका और मेरा दुश्मन एक hi है.

रजत : व्हॉट??

प्रांजल (स्माइल्स) : साड़ी बातें यहाँ नहीं बताऊंगा. में एड्रेस मैसेज करता हु आपको. इधर आइये. आपके पैसे भी दे दूंगा और बात भी बता दूंगा. ऑलराइट?

रजत : हँ!! लेकिन...

*कॉल एंड्स*

प्रांजल फ़ोन कट करके वही सोफे पर सर्र टिकाये बैठ गया. हस्ते हुए...

उसके सामने एक आदमी भी बैठा हुआ था. वो उठा और बाहर जाने लगा.

आदमी : में जा रहा हु. और अब कोई फस्सने वाले काम नहीं करना.

प्रांजल : हाँ हाँ!!!! अब संभल के hi कदम रखना होगा. ये बात जान गया हु में.

आदमी : कुछ ज़रुरत हो तोह बता देना. यदि तुमने मेरी बातें सुनी होती तोह ये सब होता hi नहीं. अपनी अपनी मैं की जो करनी थी. काम ऐसे नहीं किया जाता...

प्रांजल : येह!!! ी क्नोव...!!!

आदमी : अब जब तक में न कहु... कोई भी बेफालतू हरकत नहीं करोगे तुम.

प्रांजल : हम्म!!!

आदमी : चलता हु...

और वह आदमी दरवाज़ा खोल वह से निकल गया. प्रांजल केवल उससे देखता रहा.

उसी के कारण तोह वह यहाँ ऐशो आराम से जी रहा था. कोई दिक्कत नहीं थी उससे.

कोई और नहीं था वह...

वह शख्स था...

करुणेश!!!!!!

.

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.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!!!

फन फैक्ट : रागिनी जब बियर पी रही थी उसके पहले उसने सभी को नींद की काम मात्रा में चोरी छिपे एक दोसे दिया था. ताकि वो वीर के संग अकेले में कुछ पल बिता सके और उससे कोई भी डिस्टर्ब न करे. 😁

बाकी, लाइक्स ठोकने का, रेवोस रखने का...


धन्यवाद!!!! ✨
 
अपडेट - 93 ~ ा ब्यूटी विल ऑलवेज हैवे सुइटोरस.

अब तक...

आदमी : अब जब तक में न कहु... कोई भी बेफालतू हरकत नहीं करोगे तुम.

प्रांजल : हम्म!!!

आदमी : चलता हु...

और वह आदमी दरवाज़ा खोल वह से निकल गया. प्रांजल केवल उससे देखता रहा.

उसी के कारण तोह वह यहाँ ऐशो आराम से जी रहा था. कोई दिक्कत नहीं थी उससे.

कोई और नहीं था वह...

वह शख्स था...

करुणेश!!!!!!


अब आगे...

"उग्गहहूऊऊऊ~~ अभी तक मुझे किसी ने विश क्यों नहीं किया!??? ी हेट आईटी सोऊ मछःह~"

आवाज़ थी काव्य की, जो सुबह उठकर बोहत hi खराब मूड में थी. आज उसका जन्मदिन था. कल से hi वह इतनी एक्ससिटेड थी अपने बर्थडे को लेकर पर सुबह उठी तोह क्या देखती है?

किसी ने उससे विश hi नहीं किया? Wtf? क्या सब उसका बर्थडे भूल गए थे? हर्र कोई पहले की तरह hi बेहवे कर रहा था. और काव्य को पक्के से यकीन हो गया था की किसी को भी उसका b'day याद नहीं है.

उसकी कुछ कॉलेज फ्रेंड्स ने ज़रूर उसके लिए इंस्टा पर स्टोरी दाल के उससे विश किया था, पर जो उसके ख़ास लोग थे उनका क्या???

उनकी hi विशेष का तोह वह इंतज़ार कर रही थी. उसकी अपनी आरोही दी, माँ, पापा, वीर भैया, उसके दादा जी, रागिनी भाभी, सुमन आंटी, आभा दीदी, भूमिका दीदी, सोनाली, कुटी जूही, निधि आंटी, श्रेया दी, तै जी, ताऊ जी, विवेक भैया, कृतिका.

यही तोह उसका परिवार था. सबसे ज़्यादा तोह वह इन्हे hi चाहती थी. हलाकि उससे अपने विवेक भैया की सच्चाई नहीं पता थी वह बात अलग थी.

लेकिन इन् लोगो को चोरर कर आज उससे बाकी सभी ने विश किया था.

'हे भगवान्! क्या ये लोग सच में मेरा b'day भूल गए?'

वह कॉलेज की ड्रेस में तैयार होक आरोही के बगल से बैठी थी, डाइनिंग टेबल पर.

और बार बार अपनी आरोही दी को देखती जा रही थी. उससे ऐसे अपनी तरफ देखता पाके आरोही ने उससे सवालिया नज़रो से देखते हुए पूछा,

आरोही : क्या हुआ?

काव्य : उम्... दी!!!

आरोही : हाँ?

काव्य : आप को नहीं लगता आज कुछ ख़ास है?

आरोही : आज?

काव्य (उठाते हुए) : हाँ हाँ!!! आज!!! (✯ᴗ✯)

आरोही : हम्म? आज? आज क्या ऐसा ख़ास है? ओह्ह्ह रिग्गघटटत!!!!

काव्य : हाँ... व्हाट व्हॉट???? (☆▽☆)

आरोही : आज तोह मुझे कॉलेज में चैस का सर्टिफिकेट मिलने वाला है.

काव्य : :संत:

और बेचारी काव्य डाइनिंग टेबल पर अपने हाथ फैला कर सर्र झुकाये बैठ गयी.

आरोही : हँ!?? क्या हुआ?

काव्य : हम्फ~ नथिंग!!!

आरोही : हम्म?

वह दोनों hi कार में बैठ के कॉलेज पहुची. कॉलेज में भी काव्य को काफी लोगो ने विश किया. पर ये क्या???

उसकी बेस्ट फ्रेंड कृतिका तोह आज आयी hi नहीं? इस से बुरी दिन की शुरुआत काव्य के लिए हो hi नहीं सकती थी.

'व्हाट थे हेलल?? आज सब कुछ बुरा hi बुरा क्यों हो रहा है मेरे साथ? और ये कृतिका??? अभी कॉल करती हु. खबर लेती हु उसकी.'

*कॉल्स*

कृतिका : Hello? हाँ बोल!

काव्य : हाँ बोल क्या हाँ बोल? हाँ? बोल!!!!!

कृतिका : व्हाटट!!?? :वैतवहत:

काव्य : उग्गघठ!!! तू आज कॉलेज क्यों नहीं आयी? कहा पर है? मुझे बताया क्यों नहीं कॉल करके?

कृतिका : शांत बाबा शांत. मुझे सुबह hi माँ ने बताया की आज कही रिलेटिव्स के यहाँ जाना है ुरगेंटली और बस में तैयार होने लग गयी. में भूल hi गयी तुम्हे बताना.

काव्य : हम्फ~ भूल गयी तुम्हे बताना... बड़ी आयी...

कृतिका : पर हुआ क्या? एक दिन मेरे बिना कॉलेज में नहीं रह सकती क्या?

काव्य : हम्फ~ आज hi जाना था तुम्हे भी. कल तक क्या कर रही थी?

कृतिका : हँ? यार अब मुझे क्या पता था मम्मी सुबह सुबह ऐसा कह देंगी.

काव्य : घुसी रह वही अपने रिलेटिव्स के यहाँ... हम्फ~

कृतिका : व्हाटट?

काव्य : ी don't वांट तो टॉक तो यू!!!

कृतिका : ओह्ह रियली नाउ!? तोह चल अच्छा में रख रही हु. मुझे निकलना भी है.

काव्य : E-Ehhhhh!?? व्हाटट??? W-Waiiittt!!! ⊙﹏⊙

कृतिका : हहहह? क्या हुआ?

काव्य : उम्... वो...

कृतिका : बोल न!!!

काव्य : उम्... आज कुछ स्पेशल नहीं है!?

कृतिका : स्पेशल? व्हाट स्पेशल? इन व्हाट सेंस?

काव्य : उह्ह्ह... लिखे... ा स्पेशल डे!!! Don't यू थिंक?

कृतिका : हम्म? आज क्या स्पेशल है? आज तोह फ्राइडे है. संडे भी नहीं. कोई फेस्टिवल भी नहीं. कोई मूवी भी नहीं निकली. कोई सेल भी नहीं है. हमारे सर्किल में किसी का बर्फ भी नहीं बना है. येह, नथिंग स्पेशल ात आल.

काव्य : उम्... No! लिखे... किसी का कोई ख़ास दिन हो?

कृतिका : हँ? नहीं तोह! ऐसा क्या ख़ास है? अच्छा चल में रख रही हु. मुझे जाना भी है. B-bye!!!

काव्य : एहहहह!? नहीं... सुन्न तोह... वह में...

*कॉल एंड्स*

"ाआरररग्ग्घहहहहह!!!!! यू इडियट डुबो कृतिकाआआ--!!!!"

और बेचारी काव्य खीजते हुए अपने फ़ोन को कस के थाम ली. वह फेकने hi वाली थी अपना फ़ोन को पर उसने अपने गुस्से को काबू में कर लिया. आज हो क्या रहा था उसके साथ ये सब?

तभी उसके बगल में उसकी क्लास का एक लड़का आके खड़ा हुआ और बोलै,

"हे काव्य!!! आज पारुल ma'am ने असाइनमेंट कर के लाना बोलै था. कम्पलीट किया???"

पर उसकी बात सुनते hi काव्य उससे ऐसे देखि जैसे उससे वही ज़िंदा दफना देगी.

"ाअरररह्ह्ह्ह!!! भाड़ में गया असाइनमेंट!!! जो ावआयीय!!!"

"E-Ehhhhhhh!??? (ꏿ﹏ꏿ) "

वह जोरर से चिल्लाई तोह बेचारे लड़के की गांड hi फट गयी. और वह वह से भाग गया.

आज पूरा दिन बेचारी काव्य का ऐसे hi गुज़रा. उसने वीर को भी कॉल किया था. पर वीर ने ये कह के कॉल कट कर दिया की वह अभी किसी ज़रूरी काम में व्यस्त है. शाम को बात करेगा.

और जब शाम हुई तोह काव्य अकेले hi पैदल टहलते टहलते घर के पास मौजूद पार्क में आ गयी.

उसने अच्छी सी प्यारी सी एक ड्रेस पहनी हुई थी. सब उससे hi देख रहे थे. पर केवल उसके चहीते hi उस पर ध्यान नहीं दे रहे थे. जबकि अनजान लोग उससे पूरा भाव दे रहे थे.

वह झूले पर उदास सी बैठी हुई थी. मैं पूरा निराश हो चूका था बेचारी का.

'बताओ... ये अनजान लोग भी मुझ पर ध्यान दे रहे है. और मेरे अपने मुझ पर ध्यान hi नहीं दे रहे. सब गंदे है! उग्गहहु~'

सर्र झुकाये वह बैठी hi हुई थी अकेले झूले पर जब अचानक hi उसके झूले को किसी ने पीछे से आगे की ऑर्डर धकेल दिया.

"ुह्ह्ह्हह्ह!????"

वह फ़ौरन hi पलट के देखि... की आखिर किसने उसके झूले को धक्का दिया?

और पीछे पलट के जैसे hi उसने देखा, वह खड़े उस शख्स को देखते hi काव्य की आँखों में तुरंत hi चमक आ गयी. और फिर ासु भी...

वह रो पड़ी.

"भाइईयययआआआ~"

वह चिल्लाई!!! पीछे वीर मुस्कुराते हुए खड़ा हुआ था.

उसने hi काव्य का झूला झुलाया था.

काव्य का झूला जब एक बार हवा में झूल के वापस आया तोह वह फ़ौरन hi उस पर से उत्तरी और तेज़्ज़ कदमो के साथ भागते हुए पीछे वीर के पास आयी और,

वीर (स्माइल्स) : हेय.... ुघ्हहहह!!!!?

काव्य ने अपना पूरा शरीर वीर के ऊपर दे मारा. उसके पनपते ूरोज़ वीर की छथि में जोरर से घुस गए.

काव्य : भैया... भैयाआ! Bhaiyaaaaaaaaaa~ ( ≧Д≦)

वीर : आराम से काव्य... इतनी जोरर से मत पकड़...

काव्य : न्यूऊऊओ~ ी विल!!!!

वीर (स्माइल्स) : सब यही देख रहे है!

काव्य : देखने दो!!! ी don't केयर!!

उसकी इस चंचल हरकत पर वीर बस मुस्कुरा उठा.

काव्य : आपने मेरा कॉल बीच में क्यों काटा? क्योऊ? ुघ्हूउउ!!! ी हेट ोूउउ!!! ी हेट ोुउउउउ!!!! *स्निफ्फ*

वीर (स्माइल्स) : अच्छा? चलो ठीक है!! हम अभी बढ़िया सी होटल चलते है. आज में अपनी बहना को डिनर के लिए ले जाऊंगा.

जैसे तैसे काव्य मानी, और उसके संग उसकी बाइक के पीछे चिपक के बैठ गयी.

वह ये किसी को भी अपने मुँह से नहीं बताना चाहती थी की उसका जन्मदिन है. और वैसे उसकी जगह कोई भी होता तोह यही करता. हम अक्सर अपने मुँह से ये बात कभी नहीं बताते की आज हमारा जन्मदिन है.

हम जैसे इंतज़ार करते है अपने जन्मदिन के ख़तम होने का. ताकि बाद में जब कोई हमे विश करे तोह हम उस से ये कह सके की 'अब क्या? अब तोह निकल गया b'day!!!'

काव्य के साथ भी कुछ ऐसा hi था. वह इंतज़ार कर रही थी. अपने जन्मदिन के ख़तम होने का. ताकि बाद में वह अपने सभी घरवालों को खरी खोटी सुना सके. वह सबसे नाराज़ थी. वीर से भी.

पर हो न हो, वह वीर से उतना नाराज़ नहीं थी जितना बाकी सभी से थी. क्युकी, भले hi वीर उसका जन्मदिन भूल गया हो. पर काम से काम वह समय निकाल के उस से मिलने आया और उससे अब वह डिनर पर लेके जा रहा था.

देखा जाए तोह... वैसे... ये जन्मदिन काव्य के लिए उतना बुरा भी नहीं था. वह खुद यही सोच रही थी अभी.

वीर और केवल वह... दोनों अकेले... डिनर पे... उसके b'day पर... आईटी वास् लिखे... ा... डेट!!!

ये सोचते hi काव्य के गाल गुलाबी हो उठे, जो वीर की पीठ पर कस के दबे हुए थे. वह अचानक से hi अपने मैं में आये खयालो को सर्र हिला के भगाने लगी.

'No No No... व्हाट ऍम ी इवन थिंकिंग??? वह मेरे भैया है....!!!! B-But... Didn't ी किश हिम? ों हिज लिप्स??? कृतिका ने कहा था की केवल कपल्स hi एक दूसरे के होंठो को चूमते है. तोह यदि मेने भैया के होंठो को... न्यूऊऊओ~ ( ≧Д≦) व्हाट ऍम ी थिंकिंग???? कलम डाउन!! कलम डाउन!!!'

वह सोचती hi रही और यहाँ देखते hi देखते एक बेहद hi बड़ा सा होटल आ चूका था.

वीर : उतरो मोहतरमा!!!

काव्य : I'm नॉट मोहतरमा!!!!

वीर : अच्छा जी... अब चले!!?

काव्य : हम्म!!!

वीर का हाथ थामे वह हामी भरते हुए उसके संग ऊपर फ्लोर पर गयी.

ऊपर सेकंड फ्लोर पर आते hi वीर और काव्य एक एंट्रेंस की ऑर्डर जाने लगे.

काव्य : हम्म? भैया उधर तोह अँधेरा सा लग रहा है. यही फ्लोर है न?

वीर : ऑफ़ कोर्स!!! अंदर तोह चलो...

काव्य : Okay!!

और दोनों hi दरवाज़े के अंदर जब आये. तोह चारो तरफ अँधेरा hi अँधेरा छाया हुआ था. और वीर के हाथ पर काव्य की पकड़ मज़बूत हो गयी.

काव्य : Bh-Bhaiya!! ी थिंक हम रॉंग फ्लोर पर है. इधर कोई नहीं है.

पर वीर कुछ न बोलै, उसने अपने हाथ पर काव्य की पकड़ ढीली की और अचानक hi उससे जोरर से धक्का देते हुए थोड़ा आगे धेकेल दिया.

"अह्हह्ह्णण!!! B-Bhaiyaaaaa!??"

बेचारी हड़बड़ाते हुए पीछे वीर को देखि पर तभी...

*पॉप*

*क्लिक*

*पोपपपपप*

काव्य : ुह्ह्ह्ह?

अचानक hi वह की साड़ी लाइट्स जगमगा उठी और काव्य ने जैसे hi सामने देखा. आश्चर्य के मारे उसकी आँखें फैलती चली गयी.

काव्य : A-Ahhh!!??

सामने हर्र एक शख्स मौजूद था.

उसकी आरोही दी, मम्मी पापा, विवेक भैया, दादा जी, रागिनी भाभी, निधि आंटी, जूही, सुमन आंटी.... सब लोग... सब लोग वह मौजूद थे. यहाँ तक की उसकी कॉलेज की सहेलिया और अन्य दोस्त भी. कृतिका भी!!!!

और भी अन्य लोग थे जिन्हे वह जानती तक नहीं थी. इतना भव्य कार्यक्रम? और उससे पता तक नहीं था?

सभी अच्छे खासे कपडे पहने हुए थे और उन् सभी के हाथो में उसके लिए तोहफे थे.

काव्य : Y-Ye...!? हँ!!? A-Aap सब????

मनोरथ : हाहाहाहा~ मेरी पोती को जन्मदिन की बोहत बोहत शुभकामनाये. और ये सब तेरे भैया वीर के कहने पर किया है हमने. तुम्हे जान बुझ के अँधेरे में रखा. तोह शुक्रिया उससे कहो.

दादा जी की बात सुनते hi काव्य पीछे मुड़ी जहा वीर वैसे hi खड़ा हुआ था. उसकी तरफ स्माइल करते हुए.

और एक बार फिर... उसकी आँखें नम्म हो उठी.

"भाआईयीयीयाआ~"

वह पुनः पुकारते हुए दौड़ के आयी और वीर की बाहो में समां गयी.

काव्य : ी लूववीई ोूउउ~ ी लव यू सोऊ मऊछहह!!!!

वीर (स्माइल्स) : थोड़ी देरर पहले तोह ी हेट यू कह रही थी??

काव्य : W-Who साइड तहत? *स्निफ्फ* आपके कान खराब है. *स्निफ्फ*

वीर : हाहाहाहाहा~

और यहाँ उन् दोनों को सभी ख़ुशी ख़ुशी देख रहे थे की अचानक hi यहाँ जूही जो श्रेया की ऊँगली पकडे हुए थी वह चिल्लाई,

"ारररीीे!!! केक कब कटेगा????"

एक बार फिर... सभी मौजूद वह उसकी बात सुन्न ठहाके लगाने लगे.

सेलिब्रेशन शुरू हुआ. बोहत hi अच्छे से इस फंक्शन को अंजाम दिया था वीर ने.

काव्य को इतना बड़ा सरप्राइज मिला था आज. आज वह इतनी खुश थी की चेन्न से सांस भी नहीं ले पा रही थी. हर्र कोई उसके पास आके उससे कोंग्रटुलते कर रहा था, या सेल्फीज़ ले रहा था. या फिर कैमरामैन उसकी फोटोज उतारने में लगे हुए थे.

वीर चुप चाप पीछे खड़े सब कुछ शान्ति से देख रहा था.

तभी, उसने देखा की दूर से बृजेश उससे hi देख रहा था.

'हँ!!!?'

मानो जैसे वह कुछ कहना चाह रहा था. पर अचानक hi उसके पास आके कोई बात करने लगा तोह उसका ध्यान भटक गया.

उसने ये भी देखा की विवेक कैसे दूर से रागिनी को ताड़े जा रहा था. पर रागिनी थी जो उससे घास तक नहीं दाल रही थी. वह विवेक को चोरर बार बार उससे देख रही थी. और हर्र बार नज़रे मिलते hi वह उसकी तरफ एक प्यारी सी स्माइल पास कर देती.

वीर ने ये भी स्पॉट किया की निधि ध्रुव को लेके एक चेयर पर बैठी हुई थी. जूही इधर से उधर खाने के काउंटर्स पर अपनी मैं पसंद चीज़ खाने में लगी हुई थी. तोह वही श्रेया निधि को कोल्ड ड्रिंक्स लाके दे रही थी.

उन्हें ऐसा देख वीर आहिस्ता से निधि के पास पहुचा और धीरे से वह उसकी बगल वाली चेयर पर बैठ गया.

"I'm ग्लैड यू चामे!!!"

निधि : अह्ह्ह!!?

अकस्मात् आती आवाज़ से निधि थोड़ा हिचक उठी.

फिर वीर को बगल में पाते hi वह शांत हो गयी.

निधि : O-Ohhh!!! वीर!!!

वीर : आपने... वो ब्लैक साड़ी नहीं पहनी?

निधि (ब्लशेस) : अह्ह्ह!? W-What!??

वीर : ः~

वीर के सवाल का जवाब इस से पहले की वह दे पाती... की वह श्रेया आ गयी...

श्रेया : ओह्ह्ह! हे वीर!!! क्या बातें हो रही है?

वीर (स्माइल्स) : नथिंग! में बस पूछ रहा था ma'am से. डेकोरेशन और वेन्यू केसा है?

निधि : हँ!?

श्रेया : अहह! रियली नीस!!! ऊपर से खाना भी. ी मस्ट से, बोहत अच्छा ओर्गनइजे किया है.

निधि (चढ़ते हुए) : तोह तुम्हारी शादी भी यही से करवाए क्या फिर? हम्म?

श्रेया (ब्लशेस) : K-Kyaaaaa???? E-Ek मिनट... M-Meri शादी कहा से बीच में आ गयी?

निधि : इतनी पसंद है तुम्हे तोह माँ से बोलती हु. की श्रेया की शादी यही से करवाई जाए.

श्रेया : व्हाटट!? N-Noooo वेट!!! डीई!!!!

वीर दोनों बहनो की हलकी फुलकी नोक झोक बड़े hi प्यार से देख रहा था की इतने में जूही कप में आइस क्रीम लेते हुए आयी और अपने मामू को देख फ़ौरन hi उसकी गॉड में चढ़ गयी.

अपने hi कप से उसने वीर को आइस क्रीम भी खिलाई और फिर जैसे उससे किसी की प्लेट में कुछ नया आइटम दिख गया तोह उठ के फिर भाग गयी.

निधि : देखो तोह इससे... कैसे खा रही है. सुबह कहेगी मेरा पेट दुःख रहा है.

वीर (स्माइल्स) : हाहाहा~ खाने दीजिये! मुझे ऐसे hi बच्चे पसंद है.

निधि : !!???

निधि ने अपने आप hi वीर की आँखों में देखा. जिसमे उससे जूही के प्रति बस प्रेम hi प्रेम नज़र आ रहा था. आज तक उसने कभी किसी को जूही के प्रति इतने प्रेम से देखते हुए नहीं पाया था.

उसके दिल की धड़कन एकदम से तेज़्ज़ हो गयी और उसने वीर की तरफ से अपनी नज़रे जान बूझ के फेरर ली. शायद, वीर की आँखों में वो असीम प्रेम hi उसका कारण था.

पर तभी...

इधर, वीर की नज़रो ने कुछ ऐसा देखा जिससे देख उसकी बॉहे सिकुड़ उठी.

'हम्म?'

और वह अचानक hi उठ खड़ा हुआ.

वीर : में... आता हु थोड़ी देरर में.

निधि : O-Okay!!!

वो तेज़्ज़ कदमो के साथ एक दिशा की ऑर्डर आगे बढ़ने लगा. सामने आरोही मौजूद थी.

पर वह अकेली नहीं थी. उसके आस पास कुछ लड़के तोह कुछ लड़किया कड़ी हुई थी. और उसके फेसिअल एक्सप्रेशंस को देख ऐसा लग रहा था जैसे मानो वह किसी बोहत बड़ी दुविधा में थी.

वीर : हम्म??? क्या हुआ?

वीर की आवाज़ सुन्न जैसे hi आरोही ने उससे अपने पास पाया तोह उसका चेहरा खिल उठा और वह अपना हाथ आगे बढ़ा के वीर के हाथ को थाम ली.

तभी उस ग्रुप से एक लड़का आगे आया,

लड़का : प्लीज!!! आरोही!! तुम जानती hi हो... में कितने प्यार से लाया हु.

कहते हुए उसने अपने हाथ में पकड़ा एक बॉक्स खोला जिसमे बेहद hi ख़ूबसूरत इयररिंग्स मौजूद थी.

आरोही : आकाश!!! M-Mene कहा न... ी रियली don't नीड आईटी. और बर्थडे काव्य का है. मेने उसके बर्थडे के लिए तुम सबको यहाँ इन्विते किया है.

बस! इतने से हुए कन्वर्सेशन एक्सचेंज से hi वीर को समझ आ चूका था की माजरा क्या था.

'ओह्ह्ह!!! थिस गाए... प्रॉबब्ली ा क्लासमेट!!'

वीर देख पा रहा था की कैसे आरोही इतनी देरर से इस आकाश नाम के बन्दे को मन करती जा रही थी पर आकाश था की maan'ne को तैयार hi नहीं था.

आखिर कैसे आरोही उसका ये गिफ्ट ले सकती थी? गिफ्ट भी ऐसा वैसा नहीं था. इयररिंग्स थी. कान की बालिया. और यदि वह इन्हे एक्सेप्ट करती तोह इसका मतलब क्या होता? एक लड़की एक लड़के से इस तरह का गिफ्ट कब एक्सेप्ट करती है? जब लड़का उसका बर्फ हो, या bann'ne जा रहा हो. या फिर पति हो.

तोह भला आकाश के हाथो ये गिफ्ट आरोही कैसे ले सकती थी? और इसलिए वह मन कर रही थी. पर आरोही उन् लड़कियों में से नहीं थी जो चिल्ला कर काम करे. जब मन करने के बाद भी आकाश ज़िद्द पे ऐडा रहा. तोह आरोही उलझन में फस्स गयी थी.

और वीर को आता देख जैसे उसकी साड़ी उलझन hi दूर हो गयी. खुद को पूरी तरह से उसने वीर को सौंप दिया.

इधर आकाश जैसे थोड़ा हैरान हुआ, आरोही के यु वीर से चिपकने पर. पर वह जानता था की वीर आरोही का भाई था. तोह उसने ज़्यादा कुछ सोचा नहीं इस बारे में. और सीधे वीर को इग्नोर hi कर दिया.

आकाश : में जानता हु काव्य का b'day है आरोही. पर, उसके लिए में अच्छा सा गिफ्ट लाया हु. ये तोह तुम्हारे लिए है. मेरी तरफ से. प्यार से लाया हु, मन मत करो.

आरोही जो पहले से hi आकाश से तंग आ चुकी थी वह अब और भी ज़्यादा गुस्सा हो गयी. इस आकाश की हिम्मत कैसे हुई की उसके भाई वीर को वह इग्नोर करे. वह भी तब जब वीर उसके जस्ट सामने खड़ा हो!?

वीर : हम्म? ओह्ह! इयररिंग्स!!! सॉरी बरोथेर! बूत मेरी दी के पास आलरेडी बोहत hi प्यारी सी इयररिंग्स है.

आकाश : H-Huhh? क्या? कहा है? बकवास मत करो. में आरोही को पिछले दो सालो से देखता आ रहा हु. I-I मैं... मेने उससे नोटिस किया है. उसने कभी कानो में बाली नहीं पहनी. इसलिए में उसके लिए ये लेके आया था.

वीर (स्माइल्स) : वेल... शी डस हैवे इयररिंग्स.

उसने मुस्कुराते हुए अपने ब्लेजर के अंदर हाथ डाला और एक छोटा सा बॉक्स निकाल के उससे खोलते हुए अंदर मौजूद इयररिंग्स सबको दिखा दी.

इयररिंग्स इतनी ख़ूबसूरत थी की आरोही क्या वह मौजूद सभी देखते रह गए.

दरअसल हुआ ये था की...

वीर काव्य की b'day पार्टी होटल में ओर्गनइजे करने के बाद सीधा उसके लिए एक गिफ्ट देखने गया था. और वह ज्वेल्लेरी शॉप में जाती hi एक फीमेल अटेंडेंट ने उससे अटेंड किया.

अटेंडेंट : सर!!! हमारे पास ऑलमोस्ट सभी ज्वेल्लेरी अवेलेबल है. कहिये! क्या चाहिए आपको?

वीर : मुझे... एक पेंडंट दिखाइए. गले के लिए.

अटेंडेंट : सूरे सर! प्लीज के विथ में!!!

और वो उससे ले जाते हुए एक काउंटर पर ले आयी.

अटेंडेंट : सर!!! इन व्हिच मेटल यू वांट? गोल्ड? सिल्वर? डायमंड?

वीर : गोल्ड ओने!!!

अटेंडेंट : Okay सूरे सर!!!

उसने फिर एक hi बार में एक ऐसा सेट दिखाया जिससे देखते hi वीर को वह एक hi नज़र में पसंद आ गया.

वीर : ओह्ह्ह्ह नीस!!!

अटेंडेंट : सर! यदि आप इसके साथ इसकी इयररिंग्स भी लेते है. थें आपको वह वाक़ई काफी लेस्स में पद जाएगी. बूत यदि अलग अलग खरीदेंगे तोह महंगी पड़ेगी.

वीर : हम्म?

अटेंडेंट : I'll सुग्गेस्ट यू तो प्लीज कंसीडर थिस. थोड़े से और पैसे इन्वेस्ट करके आपको ये पूरा कॉम्बो मिल जाएगा.

वीर : ओह्ह्ह्ह!!! ऑलराइट!!! दो आईटी!!

अटेंडेंट (स्माइल्स) : अहह! थैंक यू सर! कॅश और कार्ड?

वीर (स्माइल्स) : कार्ड प्लीज!

और कुछ इसी तरह उसने ये दो ज्वेल्लेरी सेट खरीदे थे. जिसमे से वह दोनों hi काव्य को देने वाला था. पर...

उसने इस सिचुएशन को देख फ़ौरन hi वह इयररिंग्स निकाल के आरोही के सामने रख दी.

स्तब्ध निगाहो से आरोही मौन रहते हुए कुछ पल उन् इयररिंग्स को देखती रही. जो लाइट्स के चलते इतनी चमक रही थी की उसकी चमक के आगे आकाश की इयररिंग्स फीकी पद चुकी थी.

आकाश : !!???

और फिर एक पल नहीं गवाया आरोही ने...

उसने झट्ट से वीर के हाथो से वह बॉक्स लिया और जोरर से उस से चिपक गयी.

वीर (स्माइल्स) : सी? शी डस हैवे इयररिंग्स!!!

आकाश : टच....!!!!!!!

आकाश दांत मीस्ते हुए वह से पीछे हट गया तोह वही आरोही और वीर वह से निकल के आ गए.

वही काव्य भी अपनी क्लास के लड़को से बचते हुए आयी और वीर के दूसरे हाथ को थाम उस से चिपक गयी.

'ग्रेट!! मेरी दोनों hi बहनो के पीछे आज लड़के पड़े हुए है. पर हाथ कुछ नहीं आने वाला उनके...'

[Well... Maaasteeerrr!! A beauty will always have suitors!!!]

'यू अरे राइट पारी!!!'

[Hehehe~]

फंक्शन ख़तम होने को हो रहा था. सोनाली जहा खाने के व्यंजनों पर ध्यान दे रही थी तोह वही आभा सुमन के संग hi अलग अलग मेहमानो से बातें कर बोल चाल में निपुड़ हो रही थी.

रागिनी समय समय पर वीर को देखती तोह कभी आये हुए मेहमानो से बातें करने लग जाती. मनोरथ, और सुमित्रा hi वीर के परिवार से ऐसे थे जो रागिनी से मिलने आये और उस से बात किये. विवेक के ऊपर कई सारे सवाल उठ रहे थे आज. की उसकी बीवी उसके संग क्यों नहीं है. और विवेक ने भी जैसे दूसरी शादी करने का प्लान बना लिया था.

प्रांजल को चोरर कर सभी मौजूद थे. वीर ने सुहाना को भी इन्विते किया था. यहाँ तक की करा, कारन और सोनिआ को भी.

पर कोई न आया.

सुहाना किसी काम में फास्सी हुई थी तोह वही, करा और सोनिआ दोनों hi बाहर थी और कल आने वाली थी. कारन खुद अपने डैड के किसी काम में बिजी था.

रही बात कृतिका की, तोह काव्य ने उसकी खूब टांग खींची. उसकी बेस्ट फ्रेंड होक उससे कुछ बताया तक नहीं? जैसे तैसे कृतिका ने फिर उससे मनाया.

कुल मिलाके, काव्य का आज ये जन्मदिन बोहत hi यादगार रहा. सब कुछ वीर के कारण.

***

दो दिन देखते hi देखते गुज़र गए. और वीर आज एक सीरियस थॉट में डूबा हुआ था.

सबसे बड़ा मुद्दा था ये उसके लिए. उसकी लाइफ का शायद सबसे बड़ा डिसिशन होने वाला था ये.

सवाल था उसकी लव लाइफ का...

[Toh aapne socha kuch Master?]

'हाह!!!! ी रियली don't क्नोव'

[You don't know who you love?]

'येअहहह!!!'

[Nidhi ma'am se kya aap pyaar karte ho?]

'हम्म? ी दो लिखे हेर!!'

[Nahi! Like nahi... Pyaar!! Do you love her or not? I mean, Kya unke prati aapko boht zyaada kuch feel hota hai? Jese maano dil tezz dhadakne lagta ho? Ya saasein tezz ho jaati ho? Ya, Aapko harr jagah phulo ke bageeche dikhte ho? Harr jagah unka hi chehra!]

'व्हाट थे हेलल?'

[Ughh! Don't worry masterrrr!!! Mein hu na!!! I will be your love guide. (◍•ᴗ•◍)]

'एक्चुअली, में उन्हें लिखे करता हु. यस! ी वांट तो कीप हेर बेसीडे में. उन्हें प्रोटेक्ट करना चाहता हु. ी वांट तो सी हेर हैप्पी. बूत प्रॉब्लम ये है की...'

[Huh?]

'ी फील थे शामे फॉर मिस करा ी थिंक? में उन्हें भी प्रोटेक्ट करना चाहता हु. उन्हें खुश देखना चाहता हु. ी don't क्नोव... ी थिंक वो मेरे जेसो के लिए बोहत बड़ी हस्ती है!? मय्बे? थें भाभी... वह मुझे मुश्किल में दाल रही है पारी.'

[I think I get it now Master!!]

'हँ क्या?'

[Samay aane par, I'll tell you!]

'वेट व्हाट??'

[Filhaal aap ye janiye. Scroll Hunt!!!]

'ओह्ह येह! तेल्ल में...!'

[Scroll Hunt is similar to Quest Hunt master. But there's a twist.]

'!!!!??'

[Quest Hunt me aap normal points se Cards khareeb sakte ho. But Scroll hunt me aisa nahi kar sakte.]

'इसका मतलब...'

[Yes!!! Those Fame Points. 500 Fame Points par... Aapko ek try milega. Scroll Hunt use karne ka. Scrolls aap keval Fame Points se hi paa sakte ho.]

'ी सी!!!'

[So??? Do you want to open one? Aapke paas currently 600 fame points hai. Ek baar use kar sakte ho aap.]

'इसमें भी कोई चांस वाला सिस्टम तोह नहीं है न? कही इसमें भी कोई ट्रैश स्क्रॉल तोह नहीं हाथ लगने वाला?'

[No master! Isme aisa kuch bhi nahi hai.]

'गुड थें!'

[Toh use karu?]

और काफी कुछ सोच विचार के बाद... वीर ने जवाब दे दिया,

'यस! जो अहेड!!!'

***

*क्लिक* *क्लिक* *क्लिक*

*क्लिक* *क्लिक* *क्लिक*

सुहाना अपने घर में लैपटॉप पर कुछ काम कर रही थी रात्रि में.

जब उसका फ़ोन बज उठा,

और स्क्रीन पर न उसकी एकमात्र खासी सहेली का था.

दिव्या~

सुहाना : Hello?

दिव्या : Hello सुहाना!

सुहाना : बोलो? कैसे याद किया अब?

दिव्या : यू विल हैवे तो के!!!!

सुहाना : व्हाट!!!???

दिव्या : मेने तुम्हे बताया था न. ी नीड यू सुहाना!

सुहाना : व्हाट? पर ऐसे अचानक से...!?

दिव्या : मेरे पास ज़्यादा डिटेल्स में बताने के लिए समय नहीं है सुहाना. It's सीरियस!!! एंड हूजे...

सुहाना : !!!??

दिव्या : आल्सो... एक क्लाइंट वो भी है.

सुहाना : हहहहह!!???

दिव्या : ी क्नोव अब तुम मन नहीं करोगी. राइट? और हो सके... तोह प्रिपरेशन के साथ आने. यू क्नोव व्हाट ी मैं राइट?

सुहाना : दिव्या तुम...

दिव्या : में कुछ नहीं कर सकती सुहाना. ओने लास्ट टाइम. प्लीज!!! के!!! इसके बाद ी प्रॉमिस... I'll नेवर आस्क यू फॉर सुच रिक्वेस्ट्स.

सुहाना (शिघ्स) : में तुमसे दो दिन में बात करती हु. ी हैवे तो थिंक. मेरा मंद काम करना बंद हो गया तुम्हारे कारण...

दिव्या : दो दिन केवल... ी don't हैवे मच टाइम सुहाना... ी कैन ओनली वेट फॉर 4 डेज ात मैक्स. पर दो दिन के अंदर मुझे तुम्हारा आंसर चाहिए hi चाहिए. No... यदि तुम नहीं आयी तोह में तुम्हे लेने आ जाउंगी.

सुहाना : ी... I'll थिंक!!!

दिव्या : यू हैवे तो के!!!!

*कॉल एंड्स*

और कॉल कट हो गया. सुहाना!!! गहरे चिंतन में डूब गयी.

इस नयी खबर ने... उससे पूरा दुविधा में दाल दिया था. समथिंग... मस्ट बे दोने!

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आज के लिए इतना hi गाइस!

2 मोरे तो जो. बाकी, लाइक्स ठोकने का और अपने अपने रेवोस रखने का. आल्सो, एक क्वेश्चन. हु was/is थे बेस्ट विलन अंटिल नाउ? इसका जवाब भी रखियेगा! 😁 मिलते है नेक्स्ट अपडेट में.


धन्यवाद!!! ✨
 
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