Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery - Page 17 - SexBaba
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Incest Baadshah ~ The Tales of Debauchery

अपडेट - 107 ~ थे सीक्रेट प्रैक्टिस

अब तक...

कार में घुसते hi उससे ऐसा महसूस हुआ जैसे उसने कुछ खो दिया था. ऐसा लग रहा था जैसे उसके दिल में कोई सुई चुभो रहा था. पीड़ा!!!

जैसे वह हिम्मत hi हार चुकी थी.

'N-Nooooo!!!!'

एक्सेलरेटर पर परर रख उसने एक झटके में गाडी आगे भगा दी,

*वरररररओओओओओओमममम*

अभी अभी...

ये क्या हो गया था?


अब आगे...

"हाह! हाह! हाहहहह! ुररगग्गहह!!"

*थुड़*

लड़खड़ा के एक शरीर अचानक नीचे ज़मीन पर गिरा. सासें तेज़्ज़, धड़कने तेज़्ज़, आँखें एकदम लाल, पूरा बदन पसीने से लथपत, आँखों में धुँधलापन्न और निरंतर खासे जा रहा था वह शख्स.

*कुघ* *कुघ*

*कुघ* *कुघ*

*ग्वाखहहहहहहहह!!*

खून!! मुँह से उसके धेरर सारा खून निकला.

[Nooooooooooo~ Masterrrrrrr!!!!!!!]

पारी जोरर से चींखी. बेशक, ये वीर hi था. वाइन पीने के कुछ देरर बाद hi वीर के शरीर के अंदर न जाने क्या कुछ होने लगा था.

वह जैसे hi गिरा, पारी की चींखे भी धीरे धीरे धीमी सुनाई पड़ने लगी उससे.

उसने अपने होंठ खोले कुछ कहने के लिए पर thar-tharaate हुए वह वापस बंद हो गए.

[Maaaaassssttttteeeerrrrrrrrr~]

एक दर्द भरी आखिरी आवाज़ hi पारी की सुन्न पाया वह. और अगले शान hi,

उसकी आँखें बंद हो गयी.

[Nooooooooooooooooooo!!!!!!]

***

"Aaaaaahhhhhhhhhhnnnnnnnn~"

अचानक झटके के साथ एक लड़की अपने बिस्तर से उठ गयी. दिन का समय था. लगभग 1 बज रहे थे. वह अपने कमरे में hi थोड़ा आराम फरमाने के लिए लेती हुई थी जब उसकी हलकी नींद लग गयी थी. और नींद में उसने न जाने ऐसा क्या देखा जिसके चलते वह हड़बड़ाते हुए उठ के बैठ गयी.

शायद, एक बुरा सपना था.

उसके कपडे पसीने से भीगे हुए थे. ख़ूबसूरत से चेहरे पर भी पसीने की बूंदे सजी हुई थी. हफ्ते हुए उसने अपने चेहरे पर से एक टॉवल से पसीना पोछा. और एक गहरी सांस लेते हुए वह किचन की ऑर्डर चल पड़ी.

एक गिलास ठंडा पानी पीने के बाद वह वापस आयी, कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और बिस्तर पर बैठ गयी.

'ये बेचैनी...!'

उससे कुछ ठीक नहीं लग रहा था. उसने फ़ौरन hi अपना फ़ोन उठाया, उसमे गैलरी खोली और उसकी नज़रे एक तस्वीर पर जाके ठहर गयी.

'थोड़े दिन और... थोड़े दिन में hi... तुम मेरी आँखों के सामने होंगे. और फिर उसके बाद... तुम्हे कही नहीं जाने दूंगी में!'

'हम फिरसे एक साथ रहेंगे. माँ से सारे राज़ खुलवा के रहूंगी में. जस्ट वेट ा बिट मोरे. ी विल के तो यू. वैरी सून! माय यंगर ओने!!'

और खुद मैं में एक लक्ष्य ठान, वह वापस से बिस्तर पर लेत गयी.

***

लॉस वेगास ~ 1:47 ऍम

*वरररररओओओओओओमममम*

एक गाडी sann-sanaati हुई रास्ते पर तेज़्ज़ रफ़्तार में भागती जा रही थी. देरर रात का समय था. लेकिन, रोड्स पर अभी भी कुछ गाड़िया आती जाती मालुम पद रही थी. ये वेगास था, जो जाना hi अपनी नाईट लाइफ के लिए जाता था.

दिव्या का परर एक्सेलरेटर पर था और वह saaye-saaye गाडी भगा रही थी. आँखों में एक नमी छायी हुई थी,

'व्हाई?? व्हाई वीर?? क्यों किया तुमने ऐसा? तुम बेवक़ूफ़ नहीं हो. यू साल्व्ड थे Nightwalker's केस. Th-Then हाउ कैन यू जस्ट...!? गॉड दमन आईटी!!! तुम ऐसा क़दम कैसे उठा सकते हो? J-Just व्हाई?? जस्ट तेल्ल में यू वेरे एक्टिंग. जस्ट तेल्ल में!! ी जस्ट can't...!!!'

अपने hi मैं में उठ रहे सवालों के वह खुद hi उत्तर देते जा रही थी. ये अचानक से क्या हो गया था? सब कुछ ठीक चल रहा था. फिर eka-ek फ्रेड की मौत और अब वीर की हालत ने उन्हें चिंता में दाल दिया था.

किसी ने भी वीर को गिलास से वाइन पीते नहीं देखा था. लेकिन सभी जानते थे की उसने क्या किया था. कैमरा उसकी चेस्ट की पॉकेट में लगा था. और जब उसने वाइन का गिलास नीचे रखा था. वह खाली हो चूका था. ज़ाहिर है की उसने वाइन पी थी. और फिर वह खून...!!

इतने लोगो के बीच भला कैसे किसी को मुर्ख बना सकता था वह?

और यही बात दिव्या को बेचैन करे जा रही थी.

जो दिव्या वीर की फिरकी लेने के लिए आतुर रहती थी, उससे चिढ़ाने का कोई मौका नहीं चोररटी थी, उसके साथ नकली फ्लिर्टिंग करते हुए ज़रा भी पीछे नहीं हटती थी, आज वही दिव्या उसके लिए ासु बहा रही थी. ये नैना रोये जा रहे थे उसके.

क्यों भला? दिव्या की खुद नहीं समझ आ रहा था. वह कबसे इतनी इमोशनल बन्न गयी? लेकिन फिर क्यों ये नैन बार बार आसुओ को पोछने के बाद भी भीग रहे थे?

एक जो कारण था वह था सुबह का उनका मिलान. भले hi बाहर से दिव्या कितना hi क्यों न कह दे की उसके और वीर के बीच ये सब नहीं होना चाहिए था. पर अंदर hi अंदर कही न कही जैसे वह खुद चाहती थी ये और खुश भी थी.

और संगम होने के बाद, थोड़ा सा भी प्रेम न जागे, ऐसा भला कैसे हो सकता था? उसके दिल में अब वीर के लिए एक अलग जगह बन्न चुकी थी. जिसकी जगह अब कोई दूसरा नहीं ले सकता था.

उसने तुरंत गियर नीचे कर गाडी चौथे गियर में डाली और स्पीड और बढ़ा दी.

और कुछ hi मिनट्स के अंदर वह दूरी भी तय कर ली.

*स्क्रीईएक्सक्कछहः*

ब्रेक्स मारते हुए जोरर से उसने गाडी रोकी.

*थुड़*

और दरवाज़ा बंद कर वह सीधा दौड़ी अंदर की ऑर्डर.

बाहर सिक्योरिटी गार्ड्स नहीं खड़े थे, और तोह और अंदर से कई लोग भागते हुए बाहर निकल रहे थे.

माइक टीम और पुलिस के संग शायद पहले hi अंदर घुस चूका था.

अंदर से बाहर निकलते लोगो को इग्नोर कर वह दौड़ते भागते हुए सीधा होटल में अंदर घुस गयी.

सामने का नज़ारा शांत पड़ा हुआ था.






नीचे तोह कोई चहल पहल hi समझ नहीं आ रही थी. बस ऊपर से नीचे आ रहे लोग hi दिखाई दे रहे थे उससे.

जो की स्वाभाविक था. वीर भी तोह सेकंड फ्लोर में hi गया था. ये ध्यान में आते hi दिव्या तेज़्ज़ क़दमों के साथ सीधा स्टैर्स की ऑर्डर भागी.

लिफ्ट लेने के लिए समय नहीं था. और वैसे भी, सेकंड फ्लोर पर जल्दी पहुचने के लिए खुद के परर hi सबसे अच्छा विकल्प थे.

अंदर घुसते hi दिव्या की आँखों के सामने chaka-chaundh कर देने वाला दृश्य था.

डिटेक्टिव्स और पुलिस की टीम सभी मौजूदा लोगो को रोक के उन्हें बैठने की कोशिश में लगी थी. सब के सब अंडर अरेस्ट में थे. नोलन के निर्देश के बाद hi माइक समेत सभी ने अंदर धावा बोल दिया था.

एक भी बच के जाने न पाए, जितने मास्क्स लगाए थे वह सभी इस पार्टी का हिस्सा थे. पुलिस की मदद से इन् सभी लोगो को गिरफ्त में ले लिया गया था.

दिव्या की नज़रे इधर से उधर दुविधा में दौड़ रही थी. और तभी उससे ध्यान आया,

'थे वाशरूम!!! राइट!!!!'

और वह फ़ौरन भागी...

आगे बढ़ते hi उससे माइक नज़र आया. तोह दिव्या ने एक तेज़्ज़ आवाज़ लगाई,

"मिइइइइइइकककके!!!!!"

माइक : वे गोत थिस!!!! जो एंड सर्च फॉर हिम इंस्टेड!!!

उसने चिल्लाते हुए बताया.

पुलिस और उसके सेह कर्मियों ने यहाँ की परिस्थिति संभाल ली थी. माइक ने फ़ौरन hi दिव्या को वीर को ढूंढने के लिए कहा.

और दिव्या तुरंत हां में सर्र हिलाते हुए सरपट दौड़ लगा दी,

समय बढ़ता जा रहा था. कही ऐसा न हो की वक़्त रेट की तरह उसकी मुट्ठी से फिसल जाए और वीर....!

'नाहीईई!!!! नहीं!!!! वीइरररर!!!'

वह मैं में चिल्लाई,

उसके दिल की धड़कन तेज़्ज़ हो राखी थी.

*थुड़*

पॅहुचते hi उसने वाशरूम का एक दरवाज़ा खोला. जिधर उससे कोई दिखाई न दिया.

'ये वाला नहीं...! दमन आईटी!!!'

और उसकी घबराहट और बढ़ गयी.

बेशक उसने स्क्रीन पर वीर को वाशरूम जाते देखा था. पर उससे ये याद नहीं था की वाशरूम कौन सा था. क्युकी यहाँ लाइन से 8 से 10 वाशरूम्स थे. और सभी के सभी बेहद बड़े.

"Veeeeeeeerrrrrrrrrr!!!!!"

वह उससे पुकारी!!! वीर का नाम ले ले कर वह दरवाज़े खोलती रही. एक न एक में तोह मिलेगा hi वीर.

*थुड़*

'गॉड दमन आईटी!!! वेयर अरे यू....!!???'

4 दरवाज़े खोल के उसने चारो वाशरूम्स चेक कर लिए थे, पर वीर कही भी नज़र नहीं आ रहा था.

*धक्* *धक्*

और न hi वह जवाब दे रहा था. उसकी बेचैनी और बढ़ गयी.

अगर उससे कुछ हो गया तोह? तोह क्या जवाब देगी वह सुहाना को? खुद दिव्या इस बुरी खबर के लिए तैयार नहीं थी.

"Veeeeeeeerrrrrrrrrr!!!!!???"

उसने पुनः पुकारा और जैसे hi उसने पांचवे दरवाज़े को खोलना चाहा,

*क्लिक*

दरवाज़ा अपने आप खुल गया.

दिव्या : हहहह??

और दिव्या की आँखों के सामने था, वीर!!

जीता जागता वीर. अपने जो के त्यों हाल में.

लेकिन बाल थोड़े बिखरे हुए थे उसके. साथ hi ऐसा लग रहा था जैसे कही भाग दौड़ करके आया था वह. आँखें भी हलकी हलकी लाल मालुम पद रही थी.

"ओह्ह्ह गॉड!!!"

जो बेचैनी, जो घबराहट, जो डर दिव्या को अभी इन् चाँद पल पहले परेशान कर रहा था. वह वीर को अपनी नज़रो के सामने देखते hi जैसे छूमंतर हो गया.

और अगले hi शान,

वह आगे बढ़ वीर से कस के लिपट गयी. अपने हाथ उसके बालो के पीछे ले जाते हुए उसने वीर के सर्र को जोरर से पकड़ अपने कंधे पर टिका लिया.

इस वक़्त ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे ये एक बड़ी बहिन का छोटे भाई के प्रति प्रेम था. दिव्या इस समय वीर की बड़ी बहिन की तरह hi लग रही थी.

दिव्या : ओह्ह्ह्ह थैंक गॉड!!! थैंक गॉड! You're okay!!!

और कुछ पल बस ख़ामोशी छायी रही. दिव्या और वीर एक दूसरे के आलिंगन में बने रहे.

कुछ देरर बाद आखिर कार उसने वीर को चोर्रा और उससे देखते हुए अपने सवालों की झड़ी लगा दी.

दिव्या : क्या था ये सब हाँ? वीररर??? बोलो कुछ? व्हाई दीद यू दो तहत?? क्यों किया ऐसा वीर??? कहो? व्हाट रियली हप्पेनेड? तेल्ल में!!!

वीर की आँखें अध् खुली थी. वह दिव्या को देख ज़रूर रहा था. पर जैसे उसके बोल पर उसका ध्यान hi नहीं था. उसका ध्यान तोह कही ऑर्डर hi था.

*डिंग*

[Mission : 'Assassinate the Pitcher' has been completed.]

*डिंग*

[4000 Points have been rewarded.]

*डिंग*

[500 Fame points have been rewarded.]

*डिंग*

[Scroll ~ Profit Path has been rewarded.]

[Maaaaaaaassssttttteeerrrrr~]

पारी की एक चिंताजनक पुकार उसके मैं में गूंजी.

[Why did you do that???? I told you not to-- ]

'पारी! I'm okay!' वीर ने आहिस्ता से जवाब दिया उससे.

न चाहते हुए भी पारी को शांत होना पड़ा. ऐसा लगा जैसे वह रो रही थी. वाक़ई में. उसकी उदासी और निराशा साफ़ उसकी आवाज़ में झलक रही थी.

और तभी,

"कहा खो गए??? वीरररर!???"

सामने से दिव्या की आवाज़ सुन्न वीर को होश आया. वह अपने खयालातों से बाहर आया.

दिव्या उस से जवाब मांग रही थी.

दिव्या : बोलो? क्या था ये सब वीर? क्यों पी तुमने वह वाइन??

वीर : क्या आपने मुझे वाइन पीते हुए देखा?

दिव्या (झेपते हुए) : हँ?

वीर : मेने पूछा की क्या आपने मुझे वाइन पीते हुए देखा?

दिव्या : ??? T-Tumne वाइन नहीं पी तोह क्या पिया था? बेवक़ूफ़ मत समझो वीर! वे आल सॉ आईटी. भले hi तुम्हे डायरेक्टली नहीं देख पाए हम क्युकी कैमरा तुम्हारी चेस्ट पॉकेट में था पर हमने देखा था कैसे तुमने गिलास हवा में ऊपर उठाया और वापस रखा तोह वाइन नहीं थी उसमे. वेयर दीद आईटी वेंट?

वीर : आईटी वेंट राइट हेरे!

वीर ने अपनी कोट की इनर चेस्ट पॉकेट के अंदर से कुछ निकालते हुए उससे दिखाया.

और उससे देखते hi दिव्या के होश उड़द गए.

दिव्या : T-This...!

वीर : यस!!!

दिव्या : Y-You--

उसके हाथो में एक छोटा सा कंटेनर था.

दिव्या : N-No!!!! तुम्हारा मतलब है...!?

वीर : हम्म!

किसने कहा वीर वाइन को पी रहा था? वीर मुँह में ज़रूर भर रहा था वाइन को लेकिन भरने के बाद वह ऐसे दिखाता जैसे वह वाइन को गुटक चूका है. पर मौका देखते hi वह अपनी इनर कोट की पॉकेट में उससे थूक के उस कंटेनर में दाल रहा था.

दिव्या उससे भूत बन्न के देखे जा रही थी. उससे विशवास hi नहीं हो रहा था.

दिव्या : T-Tumne ये किया था असल में!?

वीर : में पागल हु क्या जो वह वाइन पियूँगा? हम्म?

दिव्या : R-Right! T-That वास् रियली स्मार्ट! पर... पर इतने लोगो के बीच तुमने कैसे...!?

वीर : ी जस्ट गोत लकी!!!

दिव्या : I-I सी~ ये बोहत hi अच्छी बात है. किसी को कुछ पता नहीं चला तुम्हारे इस कंटेनर के बारे में. Y-You दीद ग्रेट वीर. जब स्क्रीन में तुम्हे वाइन पीते देखा तोह हम लोगो की जान हलक में अटक गयी थी. ी स्वेअर. सुहाना बेचारी तोह... ी होप she's ऑलराइट! It's... It's रियली गुड तहत you're फाइन.

उसने वीर के कंधे पर हाथ रख थोड़ी भीगी आँखों से जताया.






वीर ने हामी भरी.

दिव्या : बूत वेट!!!! Y-Your ब्लड!!! खून कैसे आया तुम्हे?? अगर तुमने नहीं पी तोह...

वीर : तहत वास् ा फसाड!!

दिव्या : Wh-What?

वीर : वह खून नहीं था!

दिव्या : तोह क्या था?

वीर : जस्ट सम कलर!

दिव्या : कलर???

वीर (नॉड्स) : राइट!!!

दिव्या : पर...

वीर : ी प्रेपरेड़ आईटी बेफोरेहंद.

दिव्या : K-Kya मतलब!?

वीर : वह इमरजेंसी के लिए था. ी नीडेड हेल्प. लेकिन ैंन वक़्त पे कम्युनिकेशन डिवाइस काम करना बंद कर दिया था. मेरी आवाज़ आप तक नहीं पहुँच रही थी. उसके लिए ये सब करना पड़ा ताकि डिपार्टमेंट फ़ौरन hi हेल्प भेज सके.

दिव्या : अह्ह्ह!!! I-I सी!!! T-Toh ये बात थी. थैंक गॉड!!! एवरीथिंग इस फाइन!

दिव्या ने कहते हुए उसके कोट से वह कम्युनिकेशन डिवाइस निकाल लिया और उससे हलकी मुस्कान देते हुए बोली,

दिव्या : यू don't नीड थिस नाउ.

वीर हाँ में सर्र हिलाते हुए आगे बढ़ गया.

वीर : के! और भी कुछ बातें jaan'ni है अभी.

दिव्या : राइट!!!

दिव्या उससे जाते हुए देखती रही. पर अकस्मात् hi उसका ध्यान वीर से लिए गए कम्युनिकेशन डिवाइस पर गया. और,

दिव्या : H-Hello? दिव्या स्पीकिंग!! कैन एनीवन हेरे में??

और उसके इतना बोलते hi,

"यस!!! वे कैन हेअर यू! लाउड एंड क्लियर!!!"

दूसरी ऑर्डर से डिपार्टमेंट के सेह कर्मी की स्पष्ट आवाज़ सुनाई दी. दिव्या हैरत में अपने हाथो में उस डिवाइस को देखती रह गयी.

'थिस... थिस इस वर्किंग फाइन!!!'

कभी वह वीर की पीठ को देखती जहा वीर धीरे धीरे अपनी जेबो में हाथ डाले आराम से कॉरिडोर में जा रहा था. तोह कभी उस डिवाइस को देखती.

अंततः उसने एक बार फिर दौड़ लगाई,

दिव्या : वीइरररररररर!!!!!

वह चिल्लाई,

वीर (palat'te हुए) : हम्म?

दिव्या : ये... ये तोह चल रहा है. It's वर्किंग फाइन!!!

वीर : ओह्ह!? इस आईटी? वेल that's गुड! कुछ देरर पहले नहीं चल रहा था.

कहते हुए वह एक बार फिर आगे बढ़ गया. मशीन थी. कभी चलती तोह कभी नहीं.

परन्तु, दिव्या उससे बस जाता हुआ देखती रही. उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था. व्हाट जस्ट हप्पेनेड?

भागते हुए वह भी वीर की चाल से चाल मिलाई और कॉरिडोर के बाहर निकल गयी.

***

बाहर आते hi नज़ारा कुछ ऐसा था की पुलिस ने सब अपने कण्ट्रोल में ले लिया था. और तोह और माइक ने उनके साथ मिलके कई राज़ भी खोल के रख दिए थे.

माइक फ़ौरन hi दिव्या के पास आया और उससे सब कुछ बताया.

जो लोग यहाँ मास्क्स पेहेन के पार्टी मनाने आते थे. ये दरअसल कोई और नहीं वही लोग थे जो निघतवलकेर के मेन्शन में हो रहे खून के खेल को लाइव देख उसका लुत्फ़ उठाते थे.

उधर निघतवलकेर का पूरा लाइव सेशन डार्क वेब पर डाला जाता था और इधर लोग आँखों देखि हत्या का मज़ा लेते थे. यही इनकी फेटिश थी. न केवल वह ये सब देखते थे बल्कि इस पर काफी पैसा भी फेकते थे. बेटस भी लगती थी. जिसका पूरा फायदा निघतवलकेर और पिचर को होता था.

पिचर की भी फेटिश थी जो उन् से और हटके थी. उससे सुन्दर से सुन्दर एक्ट्रेसेस, मॉडल्स और सेलिब्रिटीज को मारने का शौक था.

उधर निघतवलकेर का मौत का नंगा नाच जब ख़तम होता तोह इधर उसकी ख़ुशी में पिचर पार्टी रखता, जिसमे वह फिर किसी को मौत के घात उतारता.

यहाँ दो तरफी हत्या का काण्ड चालु था.

उधर से निघतवलकेर तोह इधर से पिचर.

दोनों hi एक दूसरे के संग बिज़नेस में भी थे. वह जो कामर्स मेन्शन में थे. वह इसलिए थे. उनके ज़रिये hi ये लोग मास्क्स पेहेन के यहाँ मासूम की बलि का मज़ा उठाते थे.

चुकी ऐसी फूटगेस किसी प्लेटफार्म पर नहीं डाली जा सकती थी इसलिए डार्क वेब का सहारा लिया जाता था.

और इन्ही कामर्स में से उन्हें वीर के बारे में पहले hi पता लग चूका था.

पर एक सत्य और था. जिसकी वजह से पूरा डिपार्टमेंट मात खा गया था.

वह ये की...

नट ने जो इनविटेशन कार्ड दिया था. उस पर एक सीरियल नंबर भी था. ये सीरियल नंबर कार्ड पर भी रहता था और...

और उनके पास डाटा शीट में भी फीड रहता था. जब फ्रेड उस कार्ड को लेके एंट्री किया था.

तोह सीरियल नंबर मैच करते hi उन्हें पता लग चूका था की फ्रेड के पास जो कार्ड था वह दरअसल नतालया को भेजा गया था.

पूरी चोरी यही पकड़ गयी थी उनकी. सिक्योरिटी ने पिचर को सचेत कर दिया था. लेकिन उसके बावजूद पिचर ने उससे बुलाया. अब कोई दरवाज़े तक आया हो तोह भला उसकी खातिर दारी कैसे भूल सकता था वह?

और फ्रेड भी...

मौत के घात उतार दिया गया. खेल ख़तम.

यही हाल वीर के संग भी हुआ. कार्ड तोह उसके पास भी वही था. नट का.

और उससे देखते hi उन्हें फिर आभास हो चूका था. साथ hi वीर की फोटो भी उनके पास थी.

लेकिन वीर के मैं में जो बात अभी भी खटक रही थी वह ये थी की उनको खबर किसने दी थी की वह यहाँ आने वाला है? और मास्क pehen'ne के बावजूद भला कैसे पहचान लिए वह उससे? इसका जवाब वह धुंध रहा था. और कुछ कुछ उससे समझ आ चूका था.

माइक ने ये साड़ी जानकारी जैसे hi बतायी तोह दिव्या एकदम गुस्से से लाल हो गयी. अब इनकी चोरी पकड़ी गयी थी तोह ज़ाहिर है किसी न किसी आदमी ने सारा सच उगल hi दिया था माइक को.

पर इस खेल में जिन मासूमो की जान गयी उनका क्या? डेनियल, चेस्टर, जैकब, फ्रेड जैसे कितने hi मारे गए. वह तोह अब वापस नहीं आ सकते थे न.

माइक : ी हैवे समथिंग तो शो यू! हुर्री!

माइक ने कहते हुए उन् दोनों को hi कही ले जाने के लिए कहा.

जल्दबाज़ी में वह उस डाइनिंग टेबल पर पहुचे जहा वीर पहले बैठा हुआ था.

पर जैसे hi वह वह आये,

दिव्या को एक बड़ा सा झटका लगा,

दिव्या : Y-Ye तोह...!!!

नीचे एक डेड बॉडी पड़ी थी. और ये कोई और नहीं था. वही था...

पिचर!!!!

मुँह से उसके धेरर सारा झाग निकला हुआ था. साफ़ था की वह ज़हर से मर्रा था.

दिव्या : Isn't हे थे...!?

माइक (नॉड्स) : यस!!! थे शामे गाए हु सेर्वेद थे वाइन.

दिव्या : थिस...!!

माइक : हे ुसेड पाइजन तो किल ओठेर्स. तहत वाइन बोतल कंटैन्स पाइजन.

माइक ने वही राखी वाइन बोतल की ऑर्डर इशारा करते हुए बताया जो पिचर ने वीर के लिए खोली थी.

दिव्या (बॉहे सिकोड़ते हुए) : वे अरे स्टिल मिसिंग समथिंग. हाउ दीद हे दिए?

वीर : ी क्नोव आईटी.

वीर के कहते hi सभी की नज़रे उस पर फोकस्ड हो गयी. हैरानी में वह सभी उससे देखे,

दिव्या : व्हाटट???

वीर : थे सीक्रेट प्रैक्टिस...!!!

माइक : सीक्रेट प्रैक्टिस?

दिव्या : वीर साफ़ साफ़ शब्दों में कहो!!! प्लीज बे क्विक!!!

वीर : वांनै क्नोव थे नाम?

दिव्या : *गुलप्स*

माइक : !!!???

और फिर वीर के मुँह से सिर्फ एक शब्द निकला,


"मिथ्रीडॉटिज़्म"

जिससे सुनते hi दिव्या के पूरे बदन के रौंगटे खड़े हो गए.

और उसके कांपते हाथो से वीर का वह डिवाइस गिर गया. क्युकी वह जानती थी. वह भली भाति जानती थी इस एक शब्द का मतलब क्या था.

माइक की समझ में न आया. उसने अपना फ़ोन निकाल गूगल कर उस एक शब्द का मतलब सर्च किया और जैसे hi उसने उसके बारे में जाना. उसका बदन खुद काँप उठा.

मिथ्रीडॉटिज़्म, एक ऐसी प्रैक्टिस जिसमे इंसान काम मात्रा में खुद ज़हर लेता है. मात्रा इतनी की जान के लिए घातक न बने.

मिथ्रीडेट्स वि जो पोंतुस के राजा थे. माना जाता है की वह अपनी मौत को लेकर इतने दर्रे हुए रहते थे की उन्हें हर्र समय यही लगता था की कोई उन्हें चालाकी से ज़हर देके मार देगा. ये पुरातन काल में एक आम बात थी. राजा महाराजाओ को ये भय अक्सर बना रहता था की कही कोई उनका अपना hi उनके साथ vishvaas-ghaat न कर दे.

तोह ज़हर उनका कुछ बिगाड़ hi न पाए इसलिए राजा मिथ्रीडेट्स वि ने काम मात्रा में खुद hi ज़हर लेना शुरू कर दिया था. इस उम्मीद में की ये काम ज़हर लेते लेते एक न एक दिन उनका शरीर इस ज़हर के खिलाफ रोग प्रतिरोधक शक्ति पैदा कर hi देगा. यानी की इम्युनिटी बना hi लेगा.

जैसे अक्सर हम नवजात शिशु को इंजेक्शंस लगवाते है, फिर चाहे वह पोलियो के हो या टिटनेस के या अन्य कोई. इनका उद्देश्य hi यही रहता है की शरीर इन् रोगो के खिलाफ एक इम्युनिटी बना ले. राजा मिथ्रीडेट्स ने भी यही करने का सोचा था.

ज़हर ले ले के उसके खिलाफ लड़ने की शक्ति बनाना. परन्तु ये डाव उल्टा पद गया था. ज़हर बार बार निरंतर लेने के बाद वही ज़हर उनके शरीर में इखट्टा होने लगा था, जो बाद में आगे चलके उनकी मौत का कारण बन्न गया.

पिचर का भी उद्देश्य वही था.

और पिचर...

ये करने में कामयाब हो गया था.






ऐसा नहीं था की आप यदि इस प्रैक्टिस को अपनाते हो तोह आपकी मौत निश्चित है.

हरगिज़ नहीं! यदि non-biological पोइसंस को लिया जाए तोह ये संभव है की आप कुछ पोइसंस के खिलाफ इम्युनिटी निर्मित कर सकते हो.

जो विष का प्याला हम दुसरो को देते है वह एक न एक दिन हमे खुद भी पीना पड़ता है. अब तक ये बात पिचर पर सही से लागू नहीं हो रही थी. पर वीर के आते hi...

काम तमाम हो चूका था.

दिव्या : क्विक!!! वे हैवे तो गेट बैक तो थे डिपार्टमेंट. तेरे अरे स्टिल मान्य क़ुएस्तिओन्स तहत अरे लेफ्ट ुनंस्वेरेद.

वह कहती हुए आगे बढ़ी, माइक भी हामी भरते हुए पीछे पीछे गया. परन्तु इधर वीर की आँखें पिचर की लाश पर hi तिकी हुई थी.

उन् आँखों में भयानक गुस्सा था. एकदम लाल हो राखी थी वह. ऐसा लग रहा था वीर अभी उसकी लाश पे भी टूट पड़ेगा और चीयर पहाड़ देगा.

'ी ऑलमोस्ट डीएड, यू बास्टर्ड!!!'

वह मैं में hi गुर्राया.

उसका हार्ट रेट भयंकर ज़्यादा हो रखा था. कंटेनर?? काहे का कंटेनर??

वीर दिव्या के जाते हुए फिगर को पीछे से देख रहा था. सिवाए मिथ्रीडॉटिज़्म के, जो कुछ भी उसने दिव्या को बताया था.

वह सब झूठ था.

उसका असल सच तोह उसके खुद के अंतर मैं की गहराइयो और उसके ज़हन में hi दफन होक रहने वाला था.

असली सच्चाई तोह कुछ और hi थी...

जब वीर होटल में घुस नीचे बोवुल्फ़ से चेक कर रहा था. तब उससे नहीं पता था की ऊपर बालकनी में उसकी फोटो को इधर से उधर किया जा रहा था.

परन्तु...

एक उस से भी बड़ी सनसनी मचा देने वाली खोज कर ली थी उसने.

नीचे उसकी नज़र दूर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी थी जो एक वाइन की बोतल में पाउडर जैसा कुछ मिला रहा था.

और ये क्या था ये बताने की ज़रुरत hi नहीं थी.

बेशक, ज़हर!!!!

वीर का मक़सद साफ़ था. न केवल उसने जा के इस बात का पता किया बल्कि, उसने उस व्यक्ति के जाते hi वही पौदेरेद सब्सटांस की मात्रा और बढ़ा के उस वाइन में दाल दी.

ये सब उसने तब किया था जब वह व्यक्ति अंदर कुछ लेने गया था.

भीड़ इतनी थी की किसी को कुछ नहीं पता था की क्या हो रहा है. सिर्फ पिचर hi वीर के बारे में जानता था और चाँद और लोग जिन्होंने वीर की लाइव फुटेज देखि थी. पर कुछ ऐसे भी थे जो वीर के पहले के मर्डर फूटगेस देखे हुए थे. वह भी पार्टी का हिस्सा थे.

[Maaastttteeerrrrr!!! Wh-Whaattt are you doing??? Aap usme kyu mila rahe ho?]

'अगर में सही हु, तोह आज पिचर नहीं बचेगा!!!'

[N-Noooo!!! Don't tell me you...!!]

'यस!! ी विल दो आईटी!!!'

वह वापस से अपनी जगह पर आया. और वीर ने देखा की कैसे वह व्यक्ति दुबारा से उस वाइन की बोतल में पैकिंग चढ़ा रहा था ताकि ऐसा लगे वाइन की बोतल एकदम नयी है.

'थिस मोथेरफुकेर...!!'

और इन् चाँद लम्हो में, वीर ने ये सारा काम इस प्रकार से किया था की उसके जेब का कैमरा सामने की ऑर्डर फोकस्ड था. डिपार्टमेंट वालो को स्क्रीन में देख ये कतई पता नहीं लग पाया था की वीर ने ऐसा भी कुछ किया था.

फिर आया वह वक़्त, जब पिचर ने वीर को बुलाया.

उसके साथ बैठ के जब उसने वीर को वह वाइन ऑफर की, पिचर के चेहरे पर हैवानो वाली कपटी मुस्कान थी. क्युकी वह जानता था ये वीर आज मररेगा hi उसके हाथो से.

पर वह ये नहीं जानता था... की वीर एक आम इंसान नहीं था.

वीर ने जैसे hi वाइन से भरे गिलास को चेक किया,

*डिंग*

[A glass full of poisoned wine. Don't drink it.]

सब कुछ सामने था. ये वही वाइन थी. जिसमे फेरर बदल किया गया था.

और इसलिए पिचर अब तक पकड़ा नहीं गया था. क्युकी वह भी शामे वाइन पीटा था.

परन्तु वह इस ज़हर से लड़ने में सक्षम था. लेकिन आम व्यक्ति नहीं.

और ऐसे hi सभी मौत के घात उतर रहे थे.

व्हाट ा होर्रिफ्यिंग वे तो किल.

वह अभी भी शैतानो की तरह मुस्कुरा के वीर को देख रहा था.

'थिस श्लय बास्टर्ड!!!'

लेकिन आज खेल कुछ अलग होने वाला था.

'पारी!!! ओपन थे शॉप!!'

[Yes Master!!!]

'फंड में ा स्किल व्हिच कैन क्योर थिस पाइजन.'

[Whaaaatttttt??? Nooooooooo!!! Maaassttteeerrrr!!! Aap aisa nahi kar sakte. I'm telling you please stop!!! Please!!! I'm begging you~]

'पारी...!!!'

[Nooo noooo nooooooo!!!!? How can I??? Mat kariye.... Please!!!! I...]

'दो आईटी!!!!!!'

जब वीर मैं में जोरर से चीखा तोह पारी एक बार फिर अपने मास्टर के सामने हार गयी.

[Master! This is the one but...]

'कितने पॉइंट्स? ओह्ह्ह! 5000 पॉइंट्स? ओने टाइम उसे ओनली? फाइन थें! परचेस थिस.'

[O-Okay but...]

'दो आईटी!!!!'

*डिंग*

['Sylvia's वेनोम क्योर' इस नाउ अवेलेबल.]

*डिंग*

[Host can only use this skill for one time only.

Warning : Beware of extreme pain, vomit and increased heart rate.]

*डिंग*

[Sylvia's Venom cure has been activated.]

और अगले hi पल, वीर के अंदर भारी मात्रा में वाइट ब्लड सेल्स bann'na शुरू हो गए. बन्न तोह पहले भी रहे थे पर उनकी प्रोसेस कई गुना बढ़ चुकी थी.

वीर ने फिर वह किया जो सबको हैरान कर दिया था.

उसने वाइन पी ली थी. पर वाइन तोह कंटेनर में गयी थी?

लौड़े का कंटेनर! वह कंटेनर तोह वाशरूम के सोप डिस्पेंसर का एक टूटा हुआ भाग था जो वीर ने वाशरूम से निकलने से पहले हथ्याया था.

वह कलर? घंटा कलर! वह तोह उसका खून था जो वाइट ब्लड सेल्स ने पाइजन के रूप में उससे बाहर फिकवाया था.

वाइट ब्लड सेल्स hi तोह इम्युनिटी का कारण है हमारे शरीर में.

और उसके बाद उठा था वीर को अत्यंत दर्द, उसका नर्वस सिस्टम इतने खतरनाक स्थिति से गुज़र रहा था की उसका अंधरुनि दर्द असीम होता जा रहा था.

ऐसा लगा था की वह अब नहीं बचेगा. और बेहोश होने से पहले उससे बस पारी के बोल याद थे.

"वीइरररररररर!!!???"

दिव्या की आवाज़ उससे फिरसे होश में लायी.

वीर : किंग!!!

वीर एक आखिरी नज़र पिचर पर दाल आगे बढ़ गया.

और बाहर आते hi,

*स्क्रीईएक्सक्कछहः*

गाडी रुकी और सुहाना और निक उसमे से बाहर निकले.

सुहाना की निगाहें जैसे hi वीर पर जा कर तिकी उसकी आँखें फैलती चली गयी,

"वीइररररररर!!!"

वह दौड़ते हुए आयी और जोरर से कूद के उसकी बाहो में उछाल गयी.

उसके बाद वही हुआ. सवाल पे सवाल. वीर ने जैसे तैसे मामला शांत किया.

पर...

वीर : हँ!!??

वह आश्चर्य चकित रह गया जब उसने अपने बगल में सुहाना को देखा तोह...






वह रो रही थी. उन् आँखों में पहली बार वीर ने कभी अपने लिए इतने स्ट्रांग इमोशंस देखे थे.

'मिस सुहाना...!?'

वीर : आप रो रही हो?

सुहाना (मुँह फरते हुए) : Who's क्राइंग? गेट लॉस्ट!

वीर : *स्माइल्स*

दिव्या : तुम दोनों! टेक माय कीस! मुझे आने में लेट हो जाएगा.

दिव्या ने कार की कीस फेकते हुए कहा.

और कुछ देरर में hi वीर और सुहाना दोनों दिव्या की कार में सवार होते हुए वह से रवाना हो गए. उधर की तहक़ीक़ात लम्बी चलने वाली थी.

इधर कार में,

सुहाना (स्माइल्स) : I'm हैप्पी!

वीर : व्हाई सो?

सुहाना : दुह!!! यू डम्ब! क्युकी तुम सही सलामत हो.

वीर : पर जब में वह से जा रहा था तब तोह आप गुस्सा होक भाग गयी थी बच्ची की तरह परर पटक के.

सुहाना (ब्लशेस) : Wh-What दो यू मैं बी बच्ची की तरह??? ी वास् लुकिंग आउट फॉर यू!! पर तुम हो की... खर्र! चोर्रो!!! वेट!!

वीर : क्या हुआ?

सुहाना : उधर पार्क है!

वीर : सो!?

सुहाना : स्टुपिड! स्टॉप थे कार! मुझे थोड़ी फ्रेश एयर चाहिए.

सुहाना की बात मान वीर ने गाडी पार्क के पास रोक दी.

ये एक ओपन पार्क था.

और दोनों hi उतर के कुछ देरर उस ख़ामोशी में टहलने लगे. कोई बातें नहीं.

जब अचानक hi,

सुहाना पलटी और वीर से जोरर से चिपक गयी.






'हँ?'

सुहाना : ी थॉट समथिंग विल हैपन तो यू!!!

उसने उससे देख के बोलै!!






वीर : बूत I'm राइट हेरे! है न?

सुहाना : हम्म! एंड that's व्हाट मैटर्स.

कहते हुए वह उसके कंधे पर सर्र रख उस से चिपकी रही.






जब अचानक hi उससे ध्यान आया...

की वीर उसका पति नहीं था.

सुहाना : अह्ह्ह!!! S-Sorry अबाउट तहत...!!

कहते हुए वह दूर हट गयी और मुद गयी.

वीर को यु अकेला चोरर वह वापस से कार की ऑर्डर चल दी.

इधर शीतल लेहेर में, हलकी हवाओ में वीर की लहराती ज़ुल्फ़ें उसकी आँखों के सामने फिर रही थी और नज़रे तिकी हुई थी सुहाना के जाते हुए फिगर पर.

'यू अरे हिडिंग समथिंग. Aren't यू? मिस सुहाना?'

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ ऑलमोस्ट 5क वर्ड्स. अगेन, नार्मल लेंथ से कही ज़्यादा बड़ा अपडेट.

लाइक्स ठोकने का और रेवोस रखने का यारा.

कीप सपोर्टिंग! ✨


धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 108 ~ थे लास्ट तवो फवोर्स

अब तक...

सुहाना : अह्ह्ह!!! S-Sorry अबाउट तहत...!!

कहते हुए वह दूर हट गयी और मुद गयी.

वीर को यु अकेला चोरर वह वापस से कार की ऑर्डर चल दी.

इधर शीतल लेहेर में, हलकी हवाओ में वीर की लहराती ज़ुल्फ़ें उसकी आँखों के सामने फिर रही थी और नज़रे तिकी हुई थी सुहाना के नाते हुए फिगर पर.

'यू अरे हिडिंग समथिंग. Aren't यू? मिस सुहाना?'


अब आगे...

ा डे बिफोर फ्लाइट...

आज वह दिन था जब सुहाना और वीर लॉस वेगास में अंतिम रात्रि के लिए रुकने वाले थे.

और कल hi उनकी फिर वापस अपने वतन लौटने की फ्लाइट थी.

इन् बीते दिनों में न जाने क्या क्या परेशानियों का सामना करना पड़ा था उन्हें. शुरुआत हुई थी जिम से जहा उन्हें इस हाउस ऑफ़ थे किलर्स गैंग का बोध हुआ, फिर निघतवलकेर के मेन्शन का मौत का वह नंगा नाच और अंतिम में पिचर का रहस्यमयी तरीके से सुन्दर हस्तियों को मौत की नींद सुलाना.

कुछ भी हो, इन् सब में सिर्फ वीर hi नहीं था स्ट्रेस में. सुहाना और दिव्या का भी यही हाल था. सुहाना तोह अब अपनी सीमा पर आ चुकी थी.

इतने दिनों की भाग दौड़ और हर्र तरफ मौत की खबरे सुन्न सुन्न के hi उसका दिमाग फटा जा रहा था. जल्द से जल्द एक रिफ्रेशमेंट चाहिए था उससे तोह अब.

और इसलिए, सुहाना ने दिव्या को बाकी सब कुछ से डील करने के लिए उससे अपने हाल पर hi चोरर दिया.

पिचर का राज़ खुलने के बाद, दिव्या के मैं में धेरर सारे सवाल थे, ख़ास कर वीर को लेकर. पर क्या करती बेचारी? वीर था, जो कभी भी अपना असली सच बताने नहीं वाला था. अंत में दिव्या को वही बातें स्वीकार करनी पड़ी जो वीर ने अपने मुँह से बतायी थी.

और आज तीनो दिव्या, सुहाना और वीर जिस मुसीबत से निजात पाए थे उसके लिए वसूली करने आये थे.

दूसरे शब्दों में, वह यहाँ नट से पैसे लेने आये थे. नट ने दिव्या को हिरे कर पैसे देने की बात की थी अपने कॉन्सर्ट के बाद.

और दिव्या अपने हाथ में आया पैसा चोरर दे? ऐसा कैसे हो सकता था!?

तीनो hi एक बार फिरसे बाहर बैठे हुए थे. और पिछली hi बार की तरह सुहाना का मुँह फुला हुआ था,

सुहाना : फिर वही सन.

दिव्या : हाहाहाहाहा~ क्या कर सकते है? सेलिब्रिटी है वह. हमे अपने hi पैसे लेने के लिए वेट करना होगा.

सुहाना : कितनी hi बड़ी सेलिब्रिटी हो. मुझे अभी भी उसका ऐटिटूड पसंद नहीं आया. हुम्फ~

वीर : वेल! ात लीस्ट, हमे बात करने का मौका मिल रहा है.

सुहाना : हँ? क्या मतलब बात करने का मौका मिल रहा है? वीर, वह सोनू के साथ बचपन में खेला करती थी. मेरे घर आती थी वह उछाल उछाल के. एंड लुक ात हेर नाउ. सच कहते है लोग. लोगो को बदलते देरर नहीं लगती.

दिव्या : हाहाहा~ ओह्ह! माय सोनि इस पिस्सेद!

सुहाना : शट उप! एंड don't कॉल में विथ तहत फूकिंग नाम.

दिव्या : हहै~

सुहाना : में वाशरूम से होक आती हु तब तक.

वह उठी और अपनी कमर मटकाते हुए बाहर निकल गयी. अब उधर सिर्फ और सिर्फ वीर और दिव्या hi बचे हुए थे.

वीर पारी से कुछ बातें करने hi वाला था जब अचानक hi,

*डिंग*

[Profit Path : Kiss Divya now.]

'ेहठ?'

उसके मैं में एक मैसेज आके पॉप हुआ.

[Aapko Divya ko kiss karna hai Master.]

'व्हाट थे फुक्ककककक!!??'

[Ahem!]

वीर ये पूछने hi वाला था की ये नए स्क्रॉल का काम क्या है और तभी इस नए स्क्रॉल ने एक पथ दे दिया.

"ये क्या बकचोदी है? पारी??? किश? ी मैं येह किसिंग हेर इस गुड एंड आल बूत..."

[Pffftttt~ Hahaha~ Toh kariye kiss fir.]

'पर इसका किश से क्या लेना देना. Wtf इस हप्पेनिंग?'

[Master~ Iss scroll ko underestimate mat kariye. Jesa naam hai wesa hi kaam hai iska. Time to time ye aapko profit paths show karta rahega. Aur yakeen maaniye, agar aap iske bataaye gaye path ko follow karenge toh aapko ameer bann'ne se koi nahi rok sakta.]

'हम्म! तोह ये बिज़नेस रिलेटेड है! राइट?'

[Jii haan Master! Ye aapki rich life ke liye hi hai. Dusre shabdo me jaha jaha profit hone ki possibility rahegi. Profit Path aapko paths de dega. Ab ye aapke upar hai ki aap uss path ko follow karke kuch earn karna chaahte ho ya nahi?]

'हम्म! ी सी! फिर भी, मिस दिव्या को किश करना और...!'

[Kar ke dekhiye! Tabhi hume pata chalega na.]

'ऐसा लग रहा है में सकाम के दलदल में डूबने जा रहा हु.'

[Hehe~ Nooo! Just trust me!]

'फाइन थें! मिस दिव्या! I'm सॉरी! बूत I'm अबाउट तो टास्ते यू~'

अगले hi पल उसकी निगाहें दिव्या के हुस्न पर टिक गयी. खुद के ऊपर नज़रे महसूस करते hi दिव्या ने वीर को देखा,

दिव्या : व्हाट?

वीर : हैः~ :हैः:

[Let's go~ :heh: ]

दिव्या (ब्लशेस) : Wh-What इस आईटी!?

दिव्या के बदन पर गूसबम्प्स आ रहे थे. ये वीर अचानक से उससे अजीब निगाहो से क्यों देखने लगा था? उसके अंदर जैसे खतरे की घंटी बज रही थी.

और तभी, वीर आगे बढ़ा और उसके गालो को चूमने लगा,





दिव्या : V-Veeeerrrr!!! Wh-What अरे यू दोंग!!!?

वीर (स्माइल्स) : टेकिंग माय रिवॉर्ड!

दिव्या (ब्लशेस) : K-Kaisa रिवॉर्ड?

वीर : ऑफ़ कोर्स! ये वाला...!

आगे बढ़ते hi उसने पल भर में दिव्या के रसीले होंठ अपने मुँह में भर लिए.

"ममममननननननननन~"

दिव्या फिरसे विरोध करती रही पर एक दो बार में hi जैसे वीर के होंठ उसके लबो को चूसना शुरू किये, दिव्या का विरोध सारा का सारा गायब होक रह गया. बल्कि, उसके हाथ khud-ba-khud वीर की कल्लोर को कस लिए,

"ननननननननंग्ग्ग्घहहहहहहहह~"

*स्लुर्प* *स्लुर्प*

उसकी सासें फूलने लगी, और उसने तुरंत hi धक्का देके वीर को अलग किया. थूक की एक पतली सी लकीर दोनों के मुँह से जुड़ गयी.

और तभी उन्हें किसी के आने की आहात आयी,

वीर ने मुस्कुराते हुए अपनी ऊँगली से उस लकीर को तोडा और वह चुप चाप एक सीधे बच्चे की तरह होक बैठ गया. तोह वही, दिव्या ने शर्माते हुए अपना मुँह हाथो से पोछा और अपनी ड्रेस दुबारा चेक करने लगी.

आने वाला शख्स और कोई नहीं, सुहाना थी. वाशरूम से आके वह वापस सोफे पर बैठ गयी.

कुछ चाँद देररि के बाद...

अभी यहाँ बातें हो hi रही थी जब एक केबिन से निकल के एक लड़की आयी और उन्हें देखते हुए बोली,

"मिस इस किंग!"

बोल कर वह वह से निकल गयी. और बस कुछ देरर में hi नट केबिन से निकली और बाहर आयी. काली ड्रेस में वह हर्र बार की तरह बेहद ख़ूबसूरत लग रही थी.





जितनी बार उससे देखो, उतनी बार मैं मचल जाए किसी भी आदमी का. और वीर भी उनमे से hi एक था.

नट को फिरसे देखते hi उसके दिल की घंटी बजने लगी थी.

'सो ब्यूटीफुल...!'

[Hmm! Hmm! She is indeed. I will agree here. :approve: ]

वह आके उनके सामने रुकी, उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी.

नट (स्माइल्स) : लुक्स लिखे, यू दीद थे जॉब!

दिव्या : ऑफ़ कोर्स!

नट : वेल! ये रहा चेक!

कहते हुए उसने दिव्या को एक चेक हाथ में थमा दिया.

दिव्या ने जैसे hi चेक देखा वह हैरत में रह गयी. चेक पर कीमत मिलियन डॉलर की थी. यानी करीब करीब 8 करोड़ के आस पास की रकम.

दिव्या : Th-This...!!!

दिव्या के हाव भाव देखते hi नट के चेहरे पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान सज्ज गयी,

नट : मेने पहले hi ये बात बोली थी. राइट? ी विल पाय यू ा हेफ्टी अमाउंट. तोह ये रहा! हैवे आईटी!

दिव्या : वेल...! इस बार. सारा क्रेडिट वीर को जाता है.

दिव्या की बात सुन्न, नट की नज़रे वीर पर टिक्क गयी और वह एक चाव के साथ उससे घूरने लगी,

वीर : ...!?

नट (स्माइल्स) : थें, ी मस्ट थैंक यू तू ी गेस.

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया तोह वीर ने अपनी तरफ से ज़र्रा सी भी देररि न दिखाई.

और हाथ मिलाते हुए दोनों ने hi हामी भर के एक दूसरे से मैं hi मैं बात कर ली.

सुहाना को कुछ ख़ास इंटरेस्ट नहीं था. वह बस हाथ बांधे अपनी आँखें घुमाते हुए जल्द से जल्द यहाँ से निकलने का इंतज़ार कर रही थी.

नट : ी होप वे विल मीट अगेन!

वीर : मय्बे!?

नट (स्माइल्स) : मय्बे हँ!!?

वीर : ...

नट : ी हैवे ान अपॉइंटमेंट. ी विल टेक माय लीव हेरे. थैंक्स वन्स अगेन दिव्या! यू वेरे ा बिग हेल्प!

दिव्या : That's माय जॉब!

नट ने एक अंतिम बार सर्र हिलाया और वह से वह निकल गयी.

सुहाना : ाआर्गग्घहहहह!!! शी पीसेस में सो मच! में जा रही हु बाहर! पार्किंग में मिलो तुम दोनों!

सुहाना यहाँ से निकली तोह वही दिव्या सोफे पर बैठ के अपने फ़ोन में किसी का कांटेक्ट धुंध रही थी.

और इधर वीर...! उसकी नज़रे अभी अभी नट के जाते हुए उस फिगर पर तिकी हुई थी. नट ने भी जैसे वीर के मैं की बात सुन्न ली, वह लिफ्ट में अंदर जाने से पहले एक बार पलटी,

वीर को देखि और,





मुस्कुराते हुए उसने एक इशारा किया. और फिर मुँह से 'bye' कहते हुए वह लिफ्ट में घुस गयी.

'हँ!?'

[Uske aur aapke beech kuch pakk raha hai kya Master? Why do I feel weird? Hmm!!! (⁠‘⁠◉⁠⌓⁠◉⁠’⁠) ]

'नाह! यू अरे वर्थिंकिंग!'

एक लम्बी सांस लेके वीर मुदा की तभी दिव्या उसके नज़दीक आयी,

दिव्या : अपना... अपना अकाउंट नंबर दो!

वीर : हम्म?

दिव्या (ब्लशेस) : इडियट! रिवॉर्ड नहीं चाहिए क्या? अभी इतना रिवॉर्ड रिवॉर्ड कर रहे थे. गिव में योर अकाउंट नंबर. I'll.. I'll ट्रांसफर हाफ ऑफ़ थे अमाउंट तो योर्स.

वीर : वोअहहह!

[Dekha! Mene kaha tha na? Profit Path par bharosa rakhiye.]

दिव्या : मुझे यहाँ से एक इम्पोर्टेन्ट काम से जाना है. आज में बिजी रहूंगी. तुम सुहाना को लेके कही अच्छी सी जगह जाओ. वैसे भी कल तुम दोनों की फ्लाइट है. जाने से पहले एक रिफ्रेशमेंट ज़रूरी है. एन्जॉय कर लो थोड़ा. इतने दिन फ़्रस्ट्राटे हो गए होंगे. सुहाना को भी थोड़ा अच्छा फील होगा.

वीर : अरे यू...!?

दिव्या : येह I'm सूरे! ये रही कीस! जो नाउ! उससे वेट करना पसंद नहीं है.

दिव्या वीर को गाडी की छवि थमा के वह से रवाना हो गयी.

और वीर भी निर्देश अनुसार सुहाना को लेके वह से निकल गया. प्रॉफिट पथ ने तोह सच में उसका फायदा करा दिया था. ऊपर से तरीक़ा भी बड़ा अच्छा था.

यदि वीर ने दिव्या को किश कर वह एहसास न दिलाया होता तोह शायद दिव्या ने पैसे नहीं दिए होते. और अगर देती भी तोह शायद आधी रकम साथ में नहीं बाटती.

वीर और सुहाना कार में बैठे हुए थे जब वीर ने सवाल किया,

वीर : तोह? कहा चलना है?

सुहाना : कहा चलना चाहते हो?





वीर : में?

सुहाना (स्माइल्स) : हां तुम! क्युकी मेने सब घूमा है यहाँ. तुम hi पहली बार आये हो.





वीर : ी...

वीर कन्फ्यूज्ड था और उसका ये कन्फूसिओं देख सुहाना khil-khila उठी.

सुहाना : मॉल चलते है. सोनू ने मुझसे कुछ अक्सेसरीज़ लाने को कहा था. आज लास्ट डे भी है हमारा यहाँ. हम भी कुछ शॉपिंग कर लेंगे? हाउ अबाउट तहत?

वीर : ओह्ह्ह!! राइट राइट!!! मुझे याद आया. में ये कैसे भूल सकता हु?

सुहाना : क्या?

वीर (स्माइल्स) : मेरी जूही के लिए मुझे चॉकलेट्स लेनी है.

सुहाना : जूही? ओह्ह तहत लिटिल किध? ी सी!

सुहाना एक सोच में डूब गयी. वीर यहाँ इतना सब कुछ होने के बाद भी उस छोटी सी बच्ची की लिए चॉकलेट्स लेना नहीं भुला? एक अजीब सी फीलिंग उसके दिल में जाएगी, जिससे वह समझ नहीं पायी की क्या थी.

दोनों ने धेरर साड़ी शॉपिंग की, हस्सी मज़ाक तोह कही एक दूसरे की टांग खींचने में दोनों का समय गुज़रा.

सुहाना जितना वीर के संग रहती वह खुद को उतना अच्छे से महसूस कर पाती. उससे ऐसा लग रहा था जैसे वह बिना किसी डर के वीर के सामने अपनी स्प्लिट पर्सनालिटी को बेकाबू भी होने दे सकती थी. जैसे उससे विस्वाश था की अगर वीर उसके सामने है. तोह उससे कोई चिंता नहीं रहेगी.

दोनों शॉपिंग के बाद स्ट्रीट पर रोडसाइड बैठे हुए थे. आज का दिन कितना खूबसूरती से बीता था उनका.

सुहाना : तोह? रात का क्या प्लान है? कही और घूमना है?





वीर : आज आप डिनर की पार्टी क्यों नहीं देती!?

सुहाना : अब डिनर पार्टी भी में hi दू? अभी इतनी शॉपिंग करवाई मेने!





वीर (स्माइल्स) : तोह दीजिये! वैसे भी! आपकी डिनर पार्टी सब को नसीब कहा होती है? लुक ात नट. उन्हें भी मौका नहीं मिलने वाला.

सुहाना प्यार से मुँह फरते हुए वीर के जोके पर मुस्कुरायी,





सुहाना : दुह! No वे!

वीर : फाइन थें! डिनर की पार्टी मेरी तरफ से.

सुहाना : एसससससस!!!!!





दोनों hi बेहद खुश थे. दिव्या के पास बदक़िस्मती से समय नहीं था तोह सिर्फ वीर और सुहाना hi इस डिनर का हिस्सा थे.

और केवल दो लोगो के होने के कारण, ये डिनर काम डिनर डेट ज़्यादा लग रही थी.

लउकीली, उन् दोनों का डिनर बेहद hi अच्छी तरह से हुआ. सुहाना में जो चेंज आया था वीर के प्रति वह ज़मीन आसमान का था.

वह अब वीर को अपने बराबर के दोस्त की निगाहो से देखती थी जो की एक बोहत बड़ी बात थी. साथ hi उन् आँखों में अब कही भी नफरत या चिढ नहीं थी वीर के लिए. बल्कि कुछ और hi था. कुछ ऐसा... जिस से सुहाना अभी अनिभिज्ञ थी.

वीर इस आलिशान होटल की फर्स्ट फ्लोर की बालकनी के पास खड़ा हुआ था, सुहाना का वह वेट कर रहा था. जब तभी अचानक नीचे के ग्राउंड फ्लोर पर उसकी नज़र गयी और उसने देखा की,

एक सूट पहने आदमी उससे hi पेनी नज़रो से घूर रहा था.

'हँ? चेक!!!'

*डिंग*

[No information available.]

मैसेज पढ़ते hi वीर की आँखें शॉक के मारे चौड़ी हो गयी.

'P-Pariiii!???'

ऐसा पहले आज तक नहीं हुआ था. ये सब क्या था? वीर ने करा को जब चेक किया था तब उससे "यू अरे नॉट एलिजिबल तो व्यू थिस person's स्टेटस." दिखाई दिया था.

पर ये?

No इनफार्मेशन अवेलेबल! यह क्या था? वह कुछ सोच पाटा की तभी वह व्यक्ति चलते हुए आगे आया, उसके हाथो में एक सिगरेट थी और वीर को देख एक कुटिल मुस्कान देते हुए वह वह नीचे से बायीं ऑर्डर मदद गया.





पल भर में hi वीर के बदन में रौंगटे खड़े हो गए.

'व्हाट!?? व्हाट इस हप्पेनिंग!?? कौन था ओह्ह्ह??? हु थे फ़क हे वासस्स??? पारी?!?'

[Yes master]

*डिंग*

[Basic Enemy Tracker is in use.]

*डिंग*

[16 enemies were found nearby.]

ये देखते hi वीर की बोलती बंद हो गयी.

'फुसक्ककककककक!!!!!'

और अगले hi पल वह मुद के तुरंत भागा, उधर सुहाना अपना make-up वाशरूम से चेक कर के निकल रही थी जब वीर की तेज़्ज़ आवाज़ उसके कानो में पड़ी,

"मिस सुहानाआ!!!!"

सुहाना : हम्म? K-Kya ह--???

वह कुछ कह पाती की उस से पहले hi वीर ने उसकी कलाई थामी और जोरर से उससे भगा के होटल के बाहर ले जाने लगा,

सुहाना : ाहनं!? V-Veeerrr? क्या हुआ? वेट!!! व्हाट थे हेलल?? हाह... हाह... तेल्ल में!!! हम भाग क्यों रहे है!?

वीर : पूछिए मत!!! जल्दी! कार में बैठिये!

उसने फुर्ती में सुहाना को कार के अंदर धकेला और खुद ड्राइवर सीट पर बैठ गया,

सुहाना : वीररर!! मुझे ये बिलकुल पसंद नहीं है okay? तेल्ल में! तेल्ल में क्या हुआ है!?

*वरररररओओओओओओमममम*

और वीर ने बिना कुछ कहे hi एक्सेलरेटर पर परर रख दिया.

सुहाना : Veeeeeeeeeerrrrrr!!!

वह चींखी.

[I was right!! Master!!! Koi hamaara peecha kar raha hai.]

वीर की नज़र जैसे hi रियर मिरर पे गयी, और पारी की बात उसके कानो में पड़ी, उसकी चिंता और बढ़ गयी. सुहाना साथ में थी. नहीं नहीं नहीं!!! ये लड़ाई लेने के समय नहीं था.

वीर ने स्किलफुल्ली गाडी को इधर से उधर निकाला पर वह गाडी अब भी पीछे बानी हुई थी. और वीर का शक अब यकीन में बदल गया था.

सुहाना (स्क्रीम्स) : वीइरररररररर!!!

वीर : हमारा कोई पीछा कर रहा है. वे अरे थे टार्गेट्स.

सुहाना (झेपते हुए) : व्हाटट???

वीर : येह!!! इसलिए... आपको लेके वह से भागना पड़ा.

सुहाना : Y-Ye सब चल क्या रहा है?

इधर सुहाना ने कॉल कर दिव्या को सब कुछ बता दिया. और यहाँ वीर ने कार में hi जीपीएस की मदद से सकरे रास्तो में गाडी डालनी शुरू कर दी थी.

पर वह गाडी अब भी पीछे लगी हुई थी.

'दमन आईटी! दमन आईटी! दमंत्र ित्त्त!!!!'

और फिर,

*बाआनंनगगग*

*कराअसशह्ह्हह्ह*

सुहाना : आअह्ह्ह्हह्ह्णणणण~

एक गोली आके सीधा उनकी कार के लेफ्ट मिरर को उखाड़ के अलग कर दी.

सुहाना : वीईएएररररर!!!!

वीर : Don't वोर्री!!!

सुहाना घबराते हुए कभी पीछे देखती तोह कभी सामने तोह कभी वीर को,

उसकी धड़कने ट्रैन के माफ़िक़ तेज़्ज़ हो चुकी थी. ये सब चल क्या रहा था?

वीर ने गाडी को सीधा ाल्लेस में घुसेड़ दिया. ये ाल्लेस बिलकुल वैसी hi थी जैसे जिम को पकड़ते वक़्त वीर और बाकी सब गए थे.

और उसने गाडी एक एले के मोड़ में रोकते hi सुहाना को उसमे से बाहर निकाला.

वीर : जब तक मिस दिव्या हेल्प लेके नहीं आ जाती हमे यही छुपना होगा. कार से दूर hi रहना चाहिए हमे. के!

सुहाना : ये तुम क्या कह रहे हो वीर? हम ृक्क क्यों रहे है?? हमे तोह... हमे तोह कार में होना चाहिए... It's रिस्की... वे अरे फूकिंग गेटिंग शॉट... Let's जो!!! हम उनसे बच के निकल सकते है.

वीर अब कैसे सुहाना को ये बताता की बेसिक एनिमी ट्रैकर ने पहले hi ये बता दिया था उससे की आगे 8 से 10 एनएमईएस हर्र डायरेक्शन में कड़ी होक उनका इंतज़ार कर रही थी.

आगे जाना मतलब मौत को आमंत्रण देना था.

वीर : ट्रस्ट में!!!

सुहाना : व्हाट ट्रस्ट में वीरररर??? वे विल... वे विल दिए...!!!

और अगले hi शान उसके आंसू छलक उठे.

वीर ने उससे इस हाल में देख उसके सर्र को अपने दोनों हाथ में थामा और उसकी आँखों में आँखें डालते हुए बोलै,





"नथिंग विल हैपन okay? हम सही सलामत इस से बाहर निकलेंगे. Okay?"

उसके दोनों हाथो को थाम वीर ने उससे आस्वाशन दिया.





सुहाना आज डर रही थी. दिव्या भी उसके साथ नहीं थी. उसके पास अपनी हैंडगन भी नहीं थी. वह दोनों hi निहत्थे थे. और तोह और अपने देश से बाहर. वह स्थिति को भली भाति भांप चुकी थी. और इसलिए उसके ासु निकल पड़े.

वीर : यू जो इन तेरे. उधर छुप जाइये! क्विक!

सुहाना : व्हाट अबाउट यू!?

वीर : में देख के आता हु वह निकले या नहीं! नाउ जो!!

न चाहते हुए भी वीर की बात मान वह एक छोटी सी जगह के पास जाके रात के उस अँधेरे में छिप गयी.

पर तभी,

"तेरे हे इस...!!!'

"कैच हिम!!!"

"Let's जो!!!"

कुछ अनजान आवाज़ें उसके कान में पड़ी, और सुहाना डर के मारे अपना मुँह बंद कर वही दुबक के बैठ गयी. वीर की सेफ्टी की एक आस लिए.

इधर वीर...!

*डिंग*

[Beowulf's Blessings has been turned ON.
]

और उसके बाद, सुहाना को सिर्फ मार धाड़ और न जाने किसी किसी चीखने चिल्लाने की आवाज़ें सुनाई देने लगी.

वह घबराते हुए अपनी जगह से बहार निकल सर्र से बाहर झांकते हुए देखि तोह उसके होश उड़द गए.

नीचे 7 से 8 लोग डेल हुए थे. तोह वही वीर दो और लोगो से लड़ने में लगा हुआ था.

वह बाहर निकली लेकिन अचानक से,

अपने पीछे से उससे एक गाडी की आवाज़ सुनाई दी. और उसकी खिड़की से एक मास्क पहने आदमी निकला. उसके हाथ में एक गन थी.

सुहाना ने जैसे hi ये देखा,

"Veeeeeeeeeerrrrrr!!!!" वह चिल्लाई और भागी.

पर तभी,

*बंग*

"अह्हह्हंन...!"

गुनशॉट की आवाज़ सुनते hi वीर के कान खड़े हो गए. उसने फ़ौरन अपना सर्र palat'te हुए पीछे देखा. उसके दोनों हाथ दो आदमियों के गले को जकड़े हुए थे.

पीछे मुड़ते hi, उसने देखा,

सुहाना की आँखें फटी की फटी हुई थी, वह धीरे धीरे एक कदम, दो कदम आगे उसकी ऑर्डर बढ़ाते हुए आ रही थी अपनी लड़खड़ाती चाल में.

तभी उसका काँपता हुआ हाथ अपने पीछे गया और उसने अपनी पीठ पर मुश्किल से फेर्रा. वापस जब उसने अपनी हथेली देखि तोह,

डर उसके चेहरे पर साफ़ झलका और एक एहसास हुआ. उसकी हथेली गहरे लाल रंग से सनी हुई थी.

"V-Veer!"

Thar-tharaate होंठो से उसने पुकारा और अगले hi शान, "हहहह!"

उसका शरीर सामने की ऑर्डर गिर गया. वीर की नज़रो में तब जाके सुहाना की पीठ सामने आयी, जो खून से लथपत थी और वह गहरा लाल रंग सुहाना के कपड़ो में हर्र गुज़रते पल फैलता जा रहा था.

खून!

"N-Noooooooooooooooo!!!!!" वह चिल्लाया.

*थम्प* *थम्प*

उसका दिल ज़र्रों से धड़का और उसने उन् दो आदमियों को पकड़ के कस के एक दूसरे के सर्र से भिड़ा दिया.

दोनों आदमी वही बेहोश होक नीचे ज़मीन पर गिर पड़े.

*व्हूश*

वह हवा के झोके की तरह सब कुछ चोरर सीधा सुहाना के पास आया.

"ोूउऊउउउ!!!!!!!" उसने गुर्राते हुए पीछे रोड्स पर उन् गाडी में बैठे लोगो की ऑर्डर देखा जो तुरंत hi गोली मार के रफू चक्कर हो गए वह से.

एक घबराहट वीर के ज़हन में जन्म ले उठी.

उसने फ़ौरन hi सुहाना पर फोकस किया.

*डिंग*

[Beowulf's Blessings has been turned OFF.]

उसने अपने कांपते हाथो से सुहाना को उठाया.

"न्यूऊऊओ!!!!! सुहाना!!! सुहाना!!!!"

घबराहट में वीर ये भी भूल चूका था की वह सुहाना को उसके नाम से पुकार रहा था.

अधखुली आँखों से सुहाना वीर को देखि. और अगले hi शान, उसके नैनो से धेरर साड़ी आसुओ की बूंदे निकल के गिरने लगी.

दर्द!

"मा!!!! Maaaaaaaaaaa~"

वीर की शर्ट को कस के हाथो में जकड़े हुए वह दर्द से बिलखने लगी,

वीर : सुहाना!!!!! N-Nothing विल हैपन तो यू!!! तुम्हे कुछ नहीं होएगा. Don't वोर्री! अभी... I'm टेकिंग यू तो हॉस्पिटल. होल्ड योर स्ट्रेंथ!!!

सुहाना : V-Veer!

वीर : हाँ?

सुहाना : I-I don't थिंक... ी विल मेक आईटी.

वीर : Don't टॉक नॉनसेंस! शट उप! You'll बे फाइन!!!

वीर ने फटाफट अपनी शर्ट उतारी और सबसे पहले सुहाना की चोट पर उससे बाँधने लगा. खून जितना बहना काम हो सके उतना hi बेहतर था. हलाकि ये तरीक़ा भी ज़्यादा कुछ काम नहीं आने वाला था. पर इस से कुछ पल के लिए तोह खून के बहाव को काम किया जा hi सकता था.

सुहाना के थार ठहराते होंठो से फिर से कुछ बोल निकले, "V-Veer!"

वीर : Don't टॉक!!! Didn't ी तेल्ल यू!?? जस्ट ब्रेथ!!!

सुहाना : Y-Your लास्ट तवो फवोर्स!

वीर : सुहाना शट उप!!! ये समय नहीं है इन् बातो का. लेट में टाई आईटी उप फर्स्ट!!

वह व्याकुलता में चिल्लाया,

सुहाना : नूवो! N-Now इस थे r-right टाइम. हाह... हाह... सेकंड फवौर! P-Promise में!!!

वीर : ...!!?

सुहाना के होंठो पर एक प्यारी मुस्कान सज्ज गयी,

सुहाना : यू विल प्रोटेक्ट सोनू!

वीर : यू दुमबस्स! ये कोई कहने की बात है? एंड शट उप! ऐसे मत कहो की ये तुम्हारे आखिरी बोल है. Don't एक्ट लिखे you're गोंना दिए. शट थे हेलल उप!!!!

वीर के हाँथ काँप काँप कर शर्ट पर गठान बाँधने में लगे हुए थे. उससे ये एहसास हो चूका था आज की सुहाना से भले hi उससे प्यार नहीं था पर वह क्या मायने रखती थी उसके लिए. ये बात भली भाति जान गया था वीर अभी. सुहाना एक दर्द भरी मुस्कान के साथ वीर के सारे एक्शन्स पर नज़र डाली हुई थी. दिल में एक ख़ुशी की लेहेर थी उसके, ये जान के की वीर के हाथ कैसे काँप रहे थे. एक संकेत था ये की वीर को भी उसकी परवाह थी अंदर से. और कितनी थी, ये तोह उसके चेहरे के हाव भाव hi सब बतला रहे थे.

सुहाना (स्माइल्स) : A-And फॉर योर थर्ड फवौर.

वीर : आल दोने!!! नाउ के...! जल्दी! वे can't बे लेट!!!

उसने सुहाना को अपनी गॉड में उठाया,

सुहाना : .....

पर, सुहाना ने बेहद धीमी आवाज़ में कुछ कहा. उसके इतने क़रीब होने के बाद भी वीर को सुहाना के वह बोल ढंग से सुनाई न दिए.

उसने sunn'ne के लिए अपना सर्र जैसे hi उसके चेहरे के पास लाके नीचे झुकाया की तभी,

*किश*

वीर : !!!??

सुहाना ने अपने होंठ वीर के होंठ से लगा दिए. बस चाँद सेकण्ड्स के लिए hi था ये. उन् कोमल होंठो का स्पर्श...!

क्युकी, अचानक सुहाना को दर्द के बाद पीठ में जो अभी तक नुंबनेस महसूस हो रही थी वह भी अब गायब हो गयी. और उसकी जगह एक अत्यंत पीड़ा दायक जलन महसूस होने लगी.

"नंनगहःहः!!!!" अपने होंठो को दातो टेल जोरर से दबाये और आँखों को मीस्ते हुए वह दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश करने लगी. उससे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे किसी ने एकदम गरम गरम लोहे की रोड उसकी पीठ में घोप दी हो. जलन इतनी ज़्यादा थी. उसका ब्लड प्रेशर कई गुना बढ़ चूका था. हार्ट रेट भी बोहत हाई हो चूका था.

ये तोह दिमागी संकेत थे. हमारा दिमाग अक्सर हमे बचाने के लिए हमारे शरीर को निर्देश देता है. हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट उसी का कारण थे.

जब बुलेट जैसे hi सुहाना की पीठ को चीरते हुए घुसी थी, चाँद सेकण्ड्स तक तोह उससे कुछ पता नहीं चला था. कोई अनुभूति भी नहीं हुई थी. ऐसा लगा था जैसे किसी ने उससे छोटा सा पत्थर फेक के मारा हो.

परन्तु ऐसा नहीं था,

मुज़्ज़ले से बुलेट जैसे hi निकली थी, वह साथ में एक एयर प्रेशर अपने इर्द गिर्द समेटे हुए थी जो की घुमावदार (स्पाइरल) था. और ये बुलेट जब इंसान की चमड़ी में घुसती है, तोह बुलेट तोह तबाही मचाती hi है पर साथ hi वह एयर प्रेशर पूरे अंधरुनि अंगो की धज्जिया उड़ा देता है.

बदक़िस्मती यहाँ ये की वह बुलेट रिसोचेट हो गयी.

रिसोचेट होने के बाद hi बुलेट ने अपनी दिशा बदली और सीधा सुहाना की पीठ को चीरते हुए अंदर जा घुसी.

और ये सब हुआ क्युकी सुहाना वीर को आहात करने के लिए उससे बचाने जा रही थी.

जैसे hi वीर को इस बात का बोध हुआ, उसकी आँखों में पीड़ा साफ़ झलकने लगी.

वीर (फ्रोंस) : K-Kyu!? व्हाई दीद यू--!?

सुहाना (स्माइल्स) : I-I don't क्नोव!!! M-Mere परर अपने आप दौड़ पड़े...!

उसका बस इतना कहना था की वीर की आँखें नम्म हो चली. और एक अश्रु की बूँद टपक के सुहाना के कोमल चेहरे पर जा गिरी.

अपने सीने से लगा के उसने सुहाना का माथा चूमा और एक दृढ़ता उसके मैं में जाग गयी.

जब अकस्मात् hi,

*टक* *टक* *टक*

'हँ!!?'

[Maaastttteerrr!!! T-This is bad!!! Run!!!]

सामने से एक आदमी अँधेरे में से चलते हुए आया. और रौशनी जैसे hi उसके चेहरे पर पड़ी, वीर के बदन में एक सिहरन दौड़ गयी.

ये वही व्यक्ति था. वही जो होटल में उससे नज़र आया था.

वीर : Y-You!!! व्हाट दो यू वाआनंततत???

वीर जोरर से गुर्राया,

*डिंग*

[Beowulf's Blessings has been turned ON.]

पर उस आदमी ने कुछ न कहा. वीर ज़्यादा समय वास्ते नहीं कर सकता था. सुहाना की हालत गंभीर थी. जल्द से जल्द यहाँ से निकलना था उससे.

उस आदमी ने अपना हाथ जेब से निकालते हुए हाथ पर बंधी घडी पर समय देखा और बोलै,

"क्लॉक इस टीकिंग! Aren't यू गेटिंग लेट?"

वीर ख़ामोशी में उससे घूरता रहा. इसकी कोई गारंट नहीं थी की वीर अगर यहाँ से मुद के जाने की कोशिश करे तोह पीछे से ये आदमी कुछ नहीं करेगा. ऊपर से पारी को भी कुछ एहसा हुआ था इस आदमी को लेकर.

[Maaasterrr!!! Y-Ye insaan mujhe bilkul theek nahi lag raha hai. There's... There's something wrong with him. Be careful!]

पारी के इतना कहते hi,

*टक* *टक* *टक*

वह इंसान धीरे धीरे चलते हुए आगे बढ़ा. वीर के माथे पर पसीना साफ़ झलक रहा था. उसका एक परर अपने आप पीछे हो गया.

जल्दी से उसने सुहाना पर एक नज़र मार के देखा तोह उसकी चिंता और बढ़ गयी. सुहाना बेहोश हो चुकी थी.

'डमनणणन ितत्तत्त!!!!!!!'

[Master!!!!]

वह इंसान वीर के एकदम नज़दीक आया,

"I'm जस्ट हेरे तो रेमिंद यू समथिंग!"

वीर : ???

वह वीर के गाल को thap-thapaaya जैसे वीर मानो कोई बच्चा हो और फिर उसके कान की तरफ आके सिर्फ एक बात बोली.

जिससे सुनते hi,

वीर के होश उड़द गए. उसका बदन ठंडा पद गया. वो भूत की तरह वही जम्म के रह गया. अगर बोवुल्फ़ एक्टिव न होता तोह शायद उसके हाथो से सुहाना भी चूत के गिर जाती. जैसे एक विस्फोट हुआ था उसके दिमाग में.

और अगले hi सेकंड, वह अनजान शख्स वीर को वही अकेला चोरर गुनगुनाते हुए वह से सीधा निकल गया जैसे वीर उसके लिए सिर्फ हवा के सामान था.

और एले में फिर एक बार शान्ति छा गयी,

पर उसके बोल अभी भी वीर के दिमाग में जोरर जोरर से गूँज रहे थे....

"यू अरे जस्ट में प्रेय!"

"आल्सो..."

"सिस्टम... सिर्फ तुम्हारे पास नहीं है! वीर!"

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आज के लिए इतना hi गाइस!

लिखे ठोकना न भूलना :हिट:

इस अपडेट को पढ़ने के बाद ये जान गए होंगे आप सभी की हाउस ऑफ़ थे किलर्स अर्च क्यों इम्पोर्टेन्ट था. देख सकते है आप की काफी भारी ट्विस्ट आया है. ः! अगले अपडेट भी इम्पोर्टेन्ट है. कुछ और राज़ खुलेंगे. बने रहिएगा!


धन्यवाद! ✨
 
ये अपडेट एडिट करते समय जो मेरा एक घंटा वास्ते हुआ है... 👁️_👁️

उस कष्ट के बारे में तुम लोग भी सुन्न के जाओ सालो. पिक्टुरेस का लफड़ा. That's राइट! ी वास् नॉट अबले तो अपलोड पिक्टुरेस. िंगबब पे पिछ अपलोड करते hi, एरर शो हो रहा था. आईटी साइड, I've बीन फोर्बिडन तो उसे तहत साइट. :जेरी:

Story Collector इसको देखने का मन! मेरा इशू कुछ अलग है. सर्वर डाउन का नहीं है.

उसके बाद अपुन ने दूसरी इमेज होस्टिंग साइट का सहारा लिया. पर पता नहीं मोबाइल से अपलोड करने में क्यों सनकने लगती है सभी. :मोनकचुनका:

एक बार में तोह गिफ्स अपलोड होते hi नहीं. :बंघेड: सीधा मुँह पे मन कर देते है, की 44% पर जा के hi हम अटकेंगे साले. :विस्सल:

(मेरे घर विफई लगा है. नेट इशू का ज्ञान मत देना कोई प्लीज. :प्लेअसेनो: )

उसके बाद इमेजेज को अपलोड करो, फिर बार बार एक एक बबकड़े कॉपी कर इधर आके पेस्ट करो. और चेक करो दिख रही है की नहीं!? पूरा एक घंटा चूस गया मेरा इसमें.

एंड नाउ, I've डीडेड. I'll मूव तो लैपटॉप. :डिक्लेअर: टाइपिंग मोबाइल में hi होएगी. बूत थें I'll मूव माय उपदटेस तो थे लैपटॉप एंड थें I'll पोस्ट विथ थे लैपटॉप. :गुड:
 
मेगा अपडेट

अपडेट - 109 ~ गुडबाय

अब तक...

और अगले hi सेकंड, वह अनजान शख्स वीर को वही अकेला चोरर गुनगुनाते हुए वह से सीधा निकल गया जैसे वीर उसके लिए सिर्फ हवा के सामान था.

और एले में फिर एक बार शान्ति छा गयी,

पर उसके बोल अभी भी वीर के दिमाग में जोरर जोरर से गूँज रहे थे....

"यू अरे जस्ट में प्रेय!"

"आल्सो..."

"सिस्टम... सिर्फ तुम्हारे पास नहीं है! वीर!"


अब आगे...

*चिर्प* *चिर्प* *चिर्प*

पक्षियों की cheh-chahahat ने नए सवेरे को इंगित किया. पलके झपकी, आँखों से धुंधलापन हटा और एक प्यारी सी लड़की की नींद में से आँख खुल गयी.

उससे बाहर से एक औरत की आवाज़ सुनाई दी, "सुहाना? ोू सुहाना? उठी की नहीं अभी तक? स्कूल नहीं जाना क्या? सोनू उठ गयी है!!"

अपनी माँ, नमृता की सुबह सुबह आवाज़ सुन्न सुहाना फ़ौरन hi बीएड से उठ के बैठ गयी और बदले में आवाज़ लगाते हुए बोली, "हाँ मां! उठ गयी हु! आयी बस."

वह बिना आलस दिखाए उठी, वाशरूम में जा के फ्रेश हुई और बाहर आके स्कूल की यूनिफार्म पेहेन के रेडी होने लगी. जब वह बाहर आयी तोह नमृता उसके टिफ़िन में उसके लिए लंच रख रही थी तोह वही एक माइड सोनिआ के बैग में उसका टिफ़िन रख रही थी.

सब कुछ लेके दोनों बहने बाहर निकली और एक कार जो पहले से hi लगी हुई थी गेट पर उसके अंदर जा के बैठ गयी.

सुहाना ने अपनी छोटी बहिन सोनू को देखा और मुस्कुरा के उस से पूछी, "होमवर्क कर लिया न सोनू?"

"दीदी वह तोह रात में hi कर लिया था!" वह जवाब में बोली.

"गुड!" और उनकी कार स्कूल की ऑर्डर चल दी.

जब गाडी उनके स्कूल के गेट के बाहर आके रुकी तोह दोनों बाहर निकल के अपनी अपनी सहेलियों का इंतज़ार करने लगी.

कुछ देरर बाद, 2 गाड़िया और आके वही नज़दीक रुकी और दोनों में से बेहद प्यारी प्यारी बच्चिया निकल के बाहर आयी. उन् दोनों को देखते hi इधर नन्ही सोनिआ के चेहरे पर मुस्कान बिखर गयी.

"कैराऑ~ ावाआ~" हाथ हीलाते हुए उसने जोरर से आवाज़ लगाई तोह दोनों लड़किया दौड़ते हुए उसके पास आयी.

"चले?" करा ने आते hi पूछा.

"हम्म! दीदी में जाऊ?" सोनिआ सुहाना से पूछी तोह सुहाना ने बदले में हां में गर्दन हिला दी.

"Hello दीदी! गुड मॉर्निंग~" दोनों hi करा और अवा ने सुहाना को ग्रीट किया.

"हम्म!" सुहाना ने भी हामी भरी.

"सोनिआआ~" बगल में कड़ी अवा तभी पुकारी, "ये देखो बटरफ्लाई. कितनी सुन्दर है न?"

"ओह्ह्ह्ह वऊवववव! दीदी देखो! इसके पंख कितने सुन्दर है न?"

सोनिआ ने सुहाना को एक ख़ूबसूरत सी तितली दिखाते हुए कहा जो वही एक फूल की पट्टी पर बैठी हुई थी.






"हम्म! ख़ूबसूरत है." सुहाना बोली.

पर तभी पीछे से उन्हें करा की आवाज़ सुनाई दी, "पैथेटिक! इन्सिग्नीफिकान्त! पिटिफुल!"

"यह!! ये तुम क्या कह रही हो करा? दीदी देखो करा बटरफ्लाई के लिए क्या कह रही है."

"तितलियाँ मुझे पसंद नहीं." करा उस तितली के नज़दीक आयी, "इनकी लाइफ सिर्फ 15 से 28 डेज तक की hi होती है. ये जल्दी मर्डर जाती है. ी हेट आईटी."

"अह्ह्ह!!! T-Toh ये तितली भी मर्डर जाएगी?" अवा बेचैन हो उठी.

"हम्म~" करा ने सोनिआ का हाथ पकड़ते हुए बोलै, "इसलिए तितलियाँ बेकार होती है. चलो असेंबली शुरू होने वाली है."

और वह वह से सोनिआ और अवा दोनों को लेके अंदर जाने लगी.

"आआआआ~ डीडीईई!!! तितलीय~"

सुहाना बस सोनिआ को जाते हुए देखती रही. उसकी निगाहें फिर उस फूल पर बैठी तितली पर जा के टिक गयी.

क्या उसकी ज़िन्दगी भी ऐसी hi थी? तितली भी अपनी ज़िन्दगी अकेले जीती थी. अपनी ज़िन्दगी के निर्णय अकेले लेती थी. कब मौत आ जाए किस्से पता? चाँद दिनों का hi जीवन रहता था उनका.

इन्ही बातो में वह खोयी हुई थी की वह तितली अगले hi पल वह से उड़द गयी. और सुहाना का ध्यान वापस से गेट के बाहर सड़क पर गया.

एक वन आके रुकी और उस से एक लड़की उतर के सुहाना की तरफ आयी,

"रोज़ रोज़ इतना लेट क्यों होती हो?" उस लड़की से सुहाना ने पूछा.

"अरे बाबा में वन से आती हु. तुम्हारी तरह कार नहीं है मेरे पास पर्सनल. और वन वाला दस जगह गाडी रोकता है."

उस लड़की ने अपनी मजबूरी व्यक्त करते हुए कहा. ये कोई और नहीं, बल्कि सुहाना की परम सखा दिव्या थी.

जहा सुहाना 7तह क्लास में थी तोह वही दिव्या का स्कूल में ये लास्ट ईयर था. वह 12तह में थी.

दोनों की दोस्ती भी बड़ी hi अजीब थी. ये वह समय था जब सुहाना अपनी सखा को 'आप' कह कर पुकारती थी. चुकी दिव्या उम्र में बड़ी थी उस से.

स्कूल में साड़ी लड़किया सुहाना को अजीब नज़रो से देखती. ये किसी लड़की है भला? खुद 7तह में है, पर दोस्ती 12तह क्लास की लड़की से करि हुई है?

यही हाल दिव्या का भी रहता. दिव्या की क्लास के लोग उससे ऐसे देखते जैसे वह खुद एक बच्ची हो. पर दोनों सहेलियों को इन् सब बातो से कोई मतलब नहीं था.

दोनों की दोस्ती अब आपस में हो गयी तोह क्या कर सकते थे इसमें भला? दिव्या का घर नज़दीक hi था सुहाना के घर से जिसके चलते दोनों में दोस्ती हो गयी थी.

अभी दोनों आगे बढ़ स्कूल के असेंबली हॉल में घुस hi रही थी जब पीछे से एक आवाज़ उन्हें सुनाई दी, "हलुओ दीदी!!! ेहेहे~"

एक नादान सा प्यारा लड़का दौड़ते हुए आया.

"पुष्कर? तुम आज भी लेट?" सुहाना ने आँख दिखाते हुए पूछा.

"हहै~ ऑटो लेट रहता है हमारा रोज़. और ये आपके लिए~"

उसने अपने हाथ से एक फूल सुहाना को थमा दिया और उछालते कूदते वह टाटा bye-bye कर भाग गया.

"ये छोटू भी नटखट है बड़ा! हम्म? सुहाना? कहा खो गयी?"

"N-Nahi! कुछ नहीं! चलिए! पर आपने सही कहा. ये लड़का पागल है पूरा."

***

कहते है समय भी एक पहिये की तरह होता है, जो निरंतर घूमता जाता है. सुहाना जो स्कूल में थी, देखते hi देखते कॉलेज में आ चुकी थी.

ज़माना बदल रहा था, दुनिया बदल रही थी. परिवार का माहौल बदल रहा था. और इसी बीच उसने एक बदलाव महसूस किया. अपनी छोटी बहिन सोनू में आया एक बदलाव.

और आज तोह उसने ठान ली थी इस बात को उठाने की, "में कब से देख रही हु तुम्हे! ये सब क्या चल रहा है सोनू?"

"क्या है दी?"

"तुम्हारी ये हरकते. न खाने में ध्यान रहता है तुम्हारा, न फॅमिली में किसी से बात करना है तुम्हे, कोई आता है तोह तुम उन्हें ग्रीट भी नहीं करती हो और बस पूरे दिन अलग अलग बुक्स लेके पढ़ने में लगी रहती हो? क्या है ये सब? पढ़ना अच्छी बात है पर ऐसे...!? बोलो! क्या चल रहा है ये सब?"

"आप जाइये दी, आप जाइये! आप नहीं समझेंगी!"

"क्या नहीं समझूंगी? हाँ? मेरी बात का जवाब दो सो--!?"

पर इसके पहले की वह अपनी छोटी बहिन के मुँह से उसका जवाब सुन्न पाती, सोनिआ अपने कमरे के अंदर चली गयी.

*थुड़*

और उसने अंदर से दरवाज़ा भी बंद कर लिया.

"सोनुउउउउउउ~" वह बेवजह hi पुकारती रह गयी.

दरार!

आज पहली बार सुहाना को ये अनुभूति हुई की उसके और सोनू के बीच कुछ मीलो का फासला आ चूका था.

और उनके बीच का ये गैप समय की तरह बढ़ता hi गया. जब भी कोई फॅमिली गाथेरिंग होती, दोनों की तुलना उसमे न हो ऐसा कही हो सकता था?

"अरे शैलेन्द्र साहब! आपकी छोटी बिटिया!! क्या कहने जी उसके. इतनी होशियार है. मेरी बेटी बोहत तारीफ करती है उसकी हाहाहा~"

"हाहाहा~ जी धन्यवाद!"

"वैसे बड़ी बिटिया क्या कर रही है अपनी?"

"बड़ी बिटिया कॉलेज में है अभी. सुहाना! ज़रा इधर तोह आना!"

"नमस्ते अंकल!"

"अरे अरे नमस्ते! तोह आप कॉलेज यही से कर रही हो बीटा? फॉरेन से नहीं!?"

"जी नहीं अंकल!"

"अरे...! आपकी छोटी बहिन का तोह एआईएम सेट है अभी से. वह बाहर जाने का प्लान बना रही है. फिर आप क्यों नहीं?"

"जी नहीं में न--"

"चलो कोई बात नहीं. हाहाहाहा~ शैलेन्द्र साहब बुलाइये ज़रा अपनी छोटी बिटिया को. मेरी बिटिया भी आयी है दोनों को कंपनी भी मिल जाएगी एक दूसरे की."

"हाहाहा~ क्यों नहीं... क्यों नहीं...! सोनिआ बीटा! ज़रा इधर आओ."

और देखते hi देखते सोनिआ, शैलेन्द्र और नमृता धेरर सारे मेहमानो के बीच सोनिआ की तारीफों में घूम हो गए.

उन् लोगो के बीच वह तीनो कही नज़र भी नहीं आ रहे थे. सभी ने उन्हें घेर रखा था और सब सोनू की तारीफ में लगे हुए थे.

सुहाना देख पा रही थी. सोनू के बगल से पुष्कर उसका दोस्त और उसकी अन्य सहेलिया, उसके रिश्तेदार कैसे उसके इर्द गिर्द सब खुश थे.

तोह वही, सुहाना अपने आप धक्का मुक्की में उस भीड़ से बाहर कर दी गयी. उसके अपने उस भीड़ में थे. फिर भी वह उनका एक हिस्सा होने के बावजूद, नकार दी गयी.

लेकिन,

जब उसकी नज़रे सोनू पर तिकी हुई थी. तब भी उसके होंठो पर मुस्कान सजी हुई थी.

कोई जलन नहीं, कोई घृणा नहीं, कोई तुलना नहीं. अपनी छोटी बहिन के प्रति, सिर्फ प्यार.

एक अश्रु की बूँद आँख से छलकती हुई उसके गालो से फिसल कर नीचे जा गिरी.

तब, उसके सर्र पर एक हाथ आके थमा.

"??? दादा जी?"

"हम्म! मेरी बच्ची! नाराज़ हो?"

"नहीं दादा जी!"

"तोह ये ासु कैसे?"

"बस ऐसे hi निकल आये... अभी बंद हो जाएंगे!"

"मेरी बेटी...! एक बात याद रखना. समय! घाव को ठीक नहीं करता. वह सिर्फ हमे उनके संग जीना सिखाता है."

"...."

"आओ मेरे साथ!"

"हम्म~"

और अपने दादा जी के संग वह भी उस भीड़ में चल दी. सोनू की khil-khilaati मुस्कान देख उसके ज़हन में बस एक hi बात आयी,

'यू विल ऑलवेज रेमें माय प्राइड! सोनू!'

***

वक़्त गुज़रा और दिव्या जो सुहाना की बचपन की सहेली थी वह अमेरिका की ऑर्डर निकल पड़ी थी. उससे क्राइम स्टडीज में इंटरेस्ट था और एक डिटेक्टिव या साइबर सिक्योरिटी में काम करना hi उसका लक्ष्य था.

उससे वह रहते अभी कुछ महीने hi हुए थे जब उसकी ज़िन्दगी भी पूरी तरह से बदल के रह गयी.

*रिंग* *रिंग*

सुहाना का फ़ोन बजा और स्क्रीन पर अपनी पुरानी सखा का नाम देख के hi उसका दिल खुश हो गया,

"Hello! बोलो दिव्या! किसी हो?"

"बोहत बड़ी गड़बड़ हो गयी है सुहाना!"

"K-Kya हुआ??"

"पुष्कर...!"

"हँ?"

"पुष्कर इधर वेगास में है. मेने खुद उससे देखा है. ड्रग्स डील करते हुए."

"क्याआ?????"

घबराते हुए वह उठ कड़ी हुई.

"पर... पर ऐसा कैसे हो सकता है?"

"तुमने hi मुझे कुछ हफ्ते पहले बताया था न सुहाना? की पुष्कर अपना घर चोरर के भाग गया है?"

"हाँ हाँ! वह भागा है. इसलिए तोह सोनू इतनी परेशान है. पर वह वह? ऐसे कैसे?"

"मेने अपनी आँखों से देखा है सुहाना! और सच कहु तोह वह उस दिन मेरे हाथो पकड़ा जाता. पर मेरी हिम्मत नहीं हुई उस पर गन taan'ne की. ी लेट हिम जो. जो मुझे नहीं करना चाहिए था. यू मस्ट के हेरे. उससे समझाना होगा. He's गोइंग ईंटो थे रॉंग बिज़नेस."

"Y-Ye लड़का... व्हाई दीद हे??? टच!!! सोनू को ये बात तोह नहीं बतायी न तुमने?"

"में पागल नहीं हु. तुम ये बताओ की तुम आ रही हो या नहीं? या फिर में अपने ढंग से डील करू इस मटर को?"

"N-Nahiii! में आती हु. I'll के! Don't दो एनीथिंग स्टुपिड."

"जल्दी आओ. कल की फ्लाइट लेके फ़ौरन आओ. मेरी मुलाक़ात निकोलस नाम के एक शख्स से हुई है. उसकी वजह से मुझे काफी कुछ एक्सेस मिल चुकी है डिपार्टमेंट में. पर अगर डिपार्टमेंट ने पुष्कर को धुंध निकाला तोह, में कुछ नहीं कर पाऊँगी सुहाना. में एक प्राइवेट डिटेक्टिव हु. ये निकोलस भी. लेकिन इसके बाद भी इसकी पकड़ गोवत. इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट में बोहत ज़्यादा है."

"No! Don't वोर्री! में कल hi फ्लाइट लेके आती हु."

"गुड! I'll वेट फॉर यू!"

*कॉल एंड्स*

एक नयी चिंता ने सुहाना को घेरर लिया. सोनिआ लंदन में अपनी पढ़ाई में व्यस्त थी और इधर ये पुष्कर...!

'ये तुम कहा आ गए पुष्कर? जस्ट... व्हाई??'

सोचते हुए वह अगले hi दिन फ्लाइट से वेगास की ऑर्डर रवाना हो गयी.

प्लेन वेगास की ज़मीन पर लैंड किया और सुहाना अपने वतन से दूर पहली बार आज यहाँ वेगास आयी.

एयरपोर्ट से बाहर निकलते hi उसकी नज़र अपनी सबसे अच्छी सहेली पर जा तिकी.






"फाइनली! यू अरे हेरे! वे don't हैवे अन्य टाइम. के! Let's जो!" दिव्या उससे देख बोली.

और उसके हाथ से उसका बैग थाम उसने अपनी गाडी के पीछे रखा और दोनों hi लड़किया वह से चल पड़ी.

"कुछ बताओगी अब? डिटेल्स में? मेरा तोह टेंशन के मारे सर्र फटा जा रहा है."

"बात सिंपल है. तुमने कहा था पुष्कर घर से भाग गया है. यू कैन ैसिलय कनेक्ट थे डॉट्स. वह यहाँ पर है और अपनी लाइफ में भटक चूका है. He's डीलिंग ड्रग्स विथ माफिया गैंग्स एंड आल. ऐसा क्या हो गया उस लड़के के साथ हाँ? बचपन में तोह... *सिघ* ज़िन्दगी कब कैसे मोड़ लेती है. It's ट्रैजिक."

"मुझे नहीं पता दिव्या. पर... पर हमे कैसे भी कर के उससे वह से निकालना पड़ेगा. सोनू ने बताया था की उसके घर वालो ने उससे निकाल दिया है. ऐसे में हम उसके घर में भी कांटेक्ट नहीं कर सकते... पर उससे इस हाल में चोरर भी नहीं सकते... करे तोह क्या करे?"

"देखते है हम क्या कर सकते है. अभी के लिए तुम मेरे घर चलो."

"तुमने घर भी ले लिया???"

"निकोलस का है. मेरा नहीं! पर जल्द hi ले लुंगी में. तुम देखना."

"वेट! तुम उस आदमी के साथ रह रही हो?"

"येह! अपना दिमाग गलत जगह चलाने की ज़रुरत नहीं है सुहाना. I'm ओनली लिविंग विथ हिम. नॉट दोंग अन्य डीड्स विथ हिम."

"हु कनौस? हम्फ~"

"Y-You...! तुम्हे में इतनी लालची दिखती हु."

"हर्र एंगल से."

"ुर्गघः!"

*स्क्रीईएक्सक्कछहः*

गाडी एक घर के सामने आके रुकी और वह दोनों उतर के अंदर गयी.

पर अभी वह हॉल का गेट खोलने hi वाली थी की वह अपने आप खुल गया, और एक आदमी उन्हें सामने दिखाई दिया.

"ओह्ह्ह! यू अरे हेरे? दिव्या! एंड शी इस...!?"

"She's सुहाना! माय फ्रेंड! ी टोल्ड यू एअरलिएर अबाउट हेर राइट?"

"ओह्ह्ह! नीस तो मीट यू!!! सुहाना! ी मैं सोनि!! हैः~"

"नीस तो मीट यू! एंड don't कॉल में विथ तहत नाम."

दोनों ने एक दूसरे के हाथ मिलाये पर निकोलस की नज़रे सुहाना के बदन पर नीचे से ऊपर फिर रही थी.

"थे ड्रग डीलिंग गैंग है बीन फाउंड. टुनाइट we're अबाउट तो कैच थम रेड हैंडेड. यू स्टे विथ योर फ्रेंड हेरे. िफ़ यू वांट, यू कैन के विथ उस इन नाईट. I'm लीविंग!"

कहते हुए वह वह से निकल गया. पर सुहाना के माथे पर शिकन छा गयी. दिव्या भी समझ चुकी थी की बात क्या थी.

"ी don't लिखे हिम ा बिट." अचानक hi सुहाना ने बोलै.

"वेल! वह ऐसा hi है. कुछ कर नहीं सकते. लेकिन तुमने सुना न? ड्रग डीलर्स का पता लग चूका है डिपार्टमेंट को. और हमे आज रात जाना पड़ेगा. मुझे डर है की कही पुष्कर...!"

"अहह! M-Mein भी आउंगी!"

"नाहीइ! सुहाना! वह जाना खतरे से खाली नहीं है."

"ी स्टिल वांट तो के!"

"फाइन! पर तुम मेरे साथ hi रहोगी. Okay?"

"Okay!"

"गुड! फ्रेश उप हो लो. हमे इवनिंग में निकलना होगा."

दिन भर की थकान के बाद वह वक़्त भी आया जब दोनों डिपार्टमेंट में पहुँच गयी. अंदर का नज़ारा देख सुहाना हैरत में थी.

"तुम यहाँ वर्क करती हो? अब तक कितना कमा लिया होगा तुमने?"

"तुम भी न सुहाना!? हर्र वक़्त पैसा पैसा पैसा... अपने आप को देखो ज़रा. खुद तोह अपने डैड के बिज़नेस में ऐसे घुसी हो और मुझे बोल रही हो."

"अन्य्वयस! वह सब चोर्रो. हमे यहाँ से कहा जाना है?"

"डिपार्टमेंट के साथ hi मूव करेंगे हम."

"Okay!"

जिस पल का इंतज़ार था, वह भी आ गया. इन्वेस्टीगेशन टीम ने शहर में फैले कुछ ड्रग डीलर्स का पता लगा लिया था.

दिव्या डिपार्टमेंट के बाहर सीटिंग एरिया में बैठी हुई थी. उसके हाथो में गन थी. फुल्ली लोडेड.





निक डिपार्टमेंट से बाहर आया और एक कठोर आवाज़ में बोलै, "Don't रोअम तेरे उन्नेससारिल्य. वे अरे लीविंग इन 5 मिनट्स."

दिव्या ने हामी भरते हुए सुहाना पर नज़र डाली जो बेहद चिंता में लग रही थी. अब न जाने क्या होने वाला था. ये बेचैनी...!

*थुड़* *थुड़*

टीम के रेडी होते hi सभी वह से निकल पड़े. उनके ठीक पीछे एक पुलिस की गाडी भी आ रही थी.

"काश वो वह न हो आज. काश...!" दिव्या धीमी आवाज़ में बोली.

अगर पुष्कर आज पकड़ा गया तोह...

"काश तुम्हारी टीम की जगह वह हमे पहले मिल जाए. ऐसा कहो...!"

"R-Right! मेरा मतलब वही था सुहाना."

*स्क्रीईएक्सक्कछहः*

*थुड़*

कई साड़ी गाड़िया रुकी और दरवाज़ा बंद कर सब कार्स से बाहर निकले.

"स्कैटर इन टीम्स. िफ़ थे इन्फो इस करेक्ट, वे मिगहत कैच ा फ्यू ऑफ़ थम टुनाइट. Let's जो!"

टीम लीडर ने उन्हें निर्देश दिया और कई सारे लोग छान बीन के लिए निकल पड़े. निक के संग दिव्या और सुहाना भी चल पड़ी.

पर ऐसे कुछ भी काम नहीं आने वाला था. निक के साथ होने से उन्हें अपनी चूत नहीं मिल पा रही थी. और दिव्या ने वही किया जो करना चाहिए था.

"माय फ्रेंड नीड्स तो जो तो वाशरूम. यू कंटिन्यू. We'll ज्वाइन यू इन ा फ्यू मिनट्स."

उसकी बात सुनते hi निक उससे आंखें चौड़ी करते हुए देखा, "व्हाटट? ात थिस टाइम? सोनि? व्हाई didn't यू दो आईटी एअरलिएर?"

सुहाना उससे आँख दिखाते हुए गुर्राई, "अबे चूतिये अभी आयी है तोह अभी जाउंगी न!"

"व्हाट इस शी सयिंग?" निक को हिंदी समझ न आयी. पर दिव्या को तोह भली भाति आ गयी थी.

"शी... एहम! She's सयिंग शी can't कण्ट्रोल आईटी एनीमोर."

"ुग्ग्ग्ठ!!! यू!!! ऑलराइट! जो! बूत don't हैंग आउट एनीवेयर ेल्स. यू कैन हेड तो थे मैं रोड. यू मिगहत फंड सम होटल्स तेरे."

निक ने समझाते हुए कहा और दोनों लड़किया उससे उसके हाल पर चोरर वह से निकल गयी.

"ये आदमी केसा चुटिया है? और ये तुम्हारे पीछे क्यों लगा है? उससे देख के hi में बता सकती हु की वह तुम्हे पाने की कोशिश में लगा है."

सुहाना का गुस्सा निक पर बढ़ता जा रहा था इसलिए उस से रहा न गया.

"तुम गलत नहीं हो. वह वाक़ई मेरे पीछे है. पर मुझे उसकी ज़रुरत है अभी. एक बार डिपार्टमेंट मेरे ऊपर कम्प्लेटेल ट्रस्ट करने लगे तोह में उस से अपना पीछा चुर्रा सकती हु."

दोनों लड़किया एले से निकल कर मैं रोड पर आयी और रोड के पार दूसरी एले में घुस गयी.

"होल्ड ओंठो थिस!" दिव्या ने एक हैंडगन सुहाना को देते हुए कहा.

"Y-Ye? गन?"

"हम्म! हमे लगेगी. इमरजेंसी के लिए है. लास्ट टाइम मेने उससे इसी जगह देखा था. ी होप वह यही होगा."

"पर मेने गन नहीं चलाई है कभी. तुम मुझे ये कैसे दे सकती हो? ऐसे में...!"

"सुहाना! अगर सिचुएशन हमारे हाथ से निकल जाए. तोह ध्यान रखना तुम्हे क्या करना है. हम दोनों की जान एक दूसरे के हाथ में है. नाउ let's जो~"

और वह सुहाना को खींचते हुए उस अँधेरे से डूबी हुई एले में घुस गयी.

किस्मत रंग लायी जब कुछ देरर की मशक्कत के बाद hi उन्हें जिसकी तलाश थी वह मिल गया.

सुहाना उससे एक नज़र में देख के hi पहचान गयी. ये वही था. वही पुष्कर...!

वही पुष्कर जो बचपन में उसके घर आके सोनू के संग खेलता था. वही जो स्कूल में सबसे बदमाश था और अपनी मीठी मीठी बातो से सबको मन लेता था. किन परिस्थितियों से वह गुज़रा था जो आज ज़िन्दगी की इस कगार पर आ गया था?

हाथो में से दो सुईटकासेस एक्सचेंज कर पुष्कर किसी अनजान लड़के से हाथ मिला रहा था. उन् सुईटकासेस के अंदर क्या था इस बात को बतलाने की ज़रुरत नहीं थी.

अजीब सा एक दर्द सुहाना के ज़हन में उठा.

'लुक ात यू नाउ! सोनू क्या सोचेगी जब उससे पता चलेगा? W-Why???'

सोचते हुए उसके परर अपने आप आगे बढ़ गए.

"नूवो! सुहाना!!" दिव्या खुसपुसाई पर तब तक देरर हो चुकी थी.

"तोह तुम यहाँ हो. हाँ? पुष्कर?" सुहाना अँधेरे में से बाहर आते हुए बोली.

पुष्कर और एक और अनजान लड़का, दोनों hi स्तब्ध होक सुहाना को घूरने लगे.

"सुहाना दीदी?" पुष्कर हैरत में सुहाना को देखे जा रहा था. उससे बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी की मुंबई से कोई पहचान का शख्स उससे यहाँ वेगास में दिखाई देगा.

लेकिन अगले hi शान उसकी आँखों में आश्चर्य की चमक गायब हो गयी और गुस्से की लाली छा गयी.

"चली जाइये यहाँ से. यही आपके लिए अच्छा होगा."

"क्यों? ताकि तुम अपनी ज़िन्दगी उजाड़ लो? बर्बाद कर लो? हाँ? सोनू पर क्या बीतेगी जब वह तुम्हारे बारे में जानेगी हां? क्या सोचेगी वह? बोलो! क्यों किया तुमने ऐसा? ऐसी भी क्या मजबूरी?"

सोनू नाम सुनते hi पुष्कर अचानक hi शांत हो उठा. उसका सर्र झुक गया, मुट्ठी कस उठी. सुहाना बस बोलती गयी. जैसे उससे ग्लानि से भरने की कोशिश कर रही थी. इस उम्मीद में की काश पुष्कर अपने किये पर पछतायेगा.

परन्तु,

"आप जानती HI क्या हो मेरे बारे में?"

वह जोरर से चिल्लाया. सुहाना का बदन काँप उठा.

"बचपन से देखती आ रही हु तुम्हे. में जानती हु की तुम्हारी फॅमिली में कुछ प्रोब्लेम्स है."

वह आगे आयी पर पुष्कर के बगल में खड़े लड़के ने अपनी जेब से गन निकाल के सुहाना पर तान ने की कोशिश की,

परन्तु, सुहाना उस से तेज़्ज़ थी. उसने अपनी खुद की गन निकाल उस अनजान लड़के पर तान दी.





"Don't इवन थिंक अबाउट आईटी. ी ओनली वांट तो टॉक विथ हिम."

वह गुस्से में उस लड़के को देखते हुए बोली और पुष्कर को देख पुनः आगे बढ़ी,

"में जानती हु पुष्कर, की तुम्हारे साथ कुछ हुआ है. पर हम उससे सुलझा सकते है. यू कन्नोत डिस्ट्रॉय योर लाइफ लिखे थिस एंड--"

कहते हुए उसने जैसे hi उसके कंधे पर हाथ रखा,

"यू DON'T क्नोव एनीथिंग!!!"

पुष्कर ने तभी जोरर से सुहाना को धकेलते हुए धक्का दिया और पलट के उसने अपनी साथी को इशारा किया, "रन!!!"

*थुड़*

"ाह्णण~"

सुहाना बगल में जाके गिरी और उसका माथा जा के सीधा एक ठोस चीज़ से भीड़ गया.

"सहित!!!" दिव्या ये देख अँधेरे में से निकल के बाहर आयी और उसने अपनी गन सीधा दोनों भागते हुए लड़को पर तान दी और चिल्लाई, "फ्रीज!!!"

दोनों hi लड़को के क़दम वही जम्म गए. पीछे मुद उन्होंने देखा तोह पाया की एक और औरत उन् पर गन एआईएम करके कड़ी हुई थी.

पुष्कर एक झटके में hi दिव्या को देख पहचान गया, "A-Aap!?"

"हाँ में! चुप चाप इधर आओ. अपने वेपन्स ड्राप करो."

दिव्या ने सोचा था पुष्कर उसकी बात मानेगा पर उससे इस बात की बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी की,

"शूट हेर!!!"

वह इतना निर्दयी हो जाएगा.

पुष्कर की बात सुन्न उस अनजान लड़के ने जैसे hi गन एक झटके में निकाल के दिव्या पर तानी की तभी,

*बंग*

"Aaaaaaaaaaaaaaaaa~"

दिव्या ने गोली चला दी. बुलेट सीधा जा के उस अनजान लड़के के परर में लगी और उसके हाथ से गन चूत के गिर गयी.

"यू बिटटकचछहहहह~" वह दर्द से बिलखते हुए गुर्राया.

गन गिरते hi पुष्कर उससे पाने के लिए दौड़ा और दिव्या भी हड़बड़ाते हुए उस ऑर्डर भागी. गन हाथ में आयी hi थी उसके की दिव्या की लात ने एक बार फिर उसके हाथ से गन छटका दी.

"Y-Youuuu~"

दोनों आपस में भीड़ गए. ज़ाहिर था की एक लड़के होने के नाते पुष्कर दिव्या पर भारी पड़ने लगा.

सुहाना ने जब अपनी दोस्त को उस हाल में देखा तोह वह भाग के पुष्कर के पीछे आयी और उससे पकड़ के खींचने लगी.

"चोरररूओ! चोर्रो उससे पुष्कर!!!"

बिना अपने माथे पर लगी चोट की परवाह किये वह लड़ाई में कूद गयी.

पुष्कर ने गुस्से में आके दिव्या के पेट में जोरर से एक लात मारी और पलट के उसने सुहाना को पकड़ नीचे गिरा दिया.

वह उसके ऊपर चढ़ा और अपने हाथो से उसका गाला जकड लिया,

"पुष्का-- ुररग़ह!!!!"

"वर्ल्ड इस क्रुएल. ी रेअलीसेड आईटी. आप जानती hi क्या हो मेरे बारे में हाँ??? बोलो!!!! NO ओने केयर्स! यू गेट तहत?"

"That's नॉट तरु- नंनगहहहहहहह!!!!"

"It's ट्रू!!! No ओने केयर्स. एक इंसान सिर्फ अपने बारे में hi सोच सकता है. किसी और के बारे में कभी नहीं."

उसकी पकड़ सुहाना के गले में और भी बढ़ गयी. सुहाना के परर छटपटाने लगे, उसकी सांस रुक रही थी.

"S-Sonu... won't बे हैप्पी... हहहहहह"

"कहा थी सोनू तब? वेयर थे हेलल वास् शी??? जब में अकेला था?? NO ओने केयर्स!!! NO ओने!!!!"

और उसने अपने पंजे पूरी तरह से गाड़ दिए सुहाना के गले में.

दिव्या जब यहाँ इम्पैक्ट से कड़ी होक सुहाना को बचाने जा hi रही थी की तभी वो अनजान लड़का उस पारर कूद पड़ा. दोनों एक दूसरे से छीना जप्ती कर गन हथियाने में लगे हुए थे.

समय रेट की तरह फिसल रहा था. सुहाना के परर छटपटा रहे थे. अगर ऐसे hi होता रहा तोह...!

'ी हैवे तो...!'

और दिव्या ने अपने डाट सीधा उस लड़के के कंधे पर जोरर से गाड़ दिए.

"Aaaaaaaaaaarrrrghhhhhh~"

वह चिल्लाया और उसका हाथ गन से हट गया. मौके का फायदा उठाते hi,

*बाहानगगगग* *बाजआनंणगगग*

उस अँधेरी गली में जोरर दार दो गुनशॉट्स की आवाज़ फेल गयी और फिर सब शांत पद गया.

"अहहह्ण???" सुहाना के गले से पुष्कर की पकड़ ढीली पड़ते hi वह ज़मीन पर लुड़कते हुए उसके नीचे से बाहर निकली पर तभी,

पुष्कर का शरीर धड़ाम से नीचे गिर गया. जैसे hi सुहाना ने पुष्कर की पीठ देखि उसके चेहरे से उसका रंग उड़द गया,

"N-Noooooooooo~" वह जोरर सेर चींखी.

इधर दिव्या के बाल को पकड़ वह लड़का उसके हाथ से गन की मुज़्ज़ले की दिशा बदल सीधा दिव्या के गले की ऑर्डर hi एआईएम कर रहा था.

"S-Suhaaaanaaaaaaa" वह छटपटाते हुए चिल्लाई. पर सुहाना तोह जैसे सदमे में जा चुकी थी.

उसके बगल से पुष्कर की लाश पड़ी हुई थी. दिव्या की जान इधर मुश्किल में पड़ी हुई थी.

दबी हुई आवाज़ों से वह सुहाना को पुकारती रही. मुज़्ज़ले धीरे धीरे उसके गले की ऑर्डर पलट रहा था. बस ट्रिगर दबाने की hi डीररी थी और दिव्या का काम तमाम.

"ी ुररगगह... can't...!!! S-Suhan...nnnghhhh!"

"यू मोथेरफुकींग बित्तक्छःह तस्सककक दिए नाउ!!!"

मुज़्ज़ले घूमा और उस लड़के का हाथ ट्रिगर पर गया. उसने ट्रिगर बस अभी छिया hi था की,

*बाजआनंनंगगगगग*

एक गुनशॉट की आवाज़ गूँज उठी.

वह लड़का धड़ाम से दिव्या पर गिर पड़ा. उस शरीर के बोझ को अपने ऊपर से हटाते हुए दिव्या ने जैसे hi सामने देखा तोह,

सुहाना के हाथ में गन थी. उसका हाथ काँप रहा था और उसके हाथ से गन छुटक कर नीचे गिर गयी.

वह सदमे में एक जगह नज़रे गड़ाए देखे जा रही थी.

दिव्या गहरी सास लेते हुए उठी hi थी की,

"ब्लडी हेलल!!!!"

एक आवाज़ ने उन् दोनों के बदन में रौंगटे खड़े कर दिए.

अँधेरे में से आना वाला शख्स कोई और नहीं, निक था.

"Y-You गर्ल्स...!!!'

उससे अपने सामने का नज़ारा देख यकीन hi नहीं हो रहा था. ये दो लड़किया दो लड़को की जान लेके बैठी हुई थी.

दिव्या फ़ौरन उठी और उसने अपनी साड़ी बात भयभीत होते हुए बतायी. जब निक ने उसकी बात सुनी तोह उससे मामला समझ आया.

"ओह्ह्ह! सो you're आस्किंग में तो सेव यू फ्रॉम थिस मेस? दो यू इवन क्नोव व्हाट यू गर्ल्स जस्ट दीद?"

"P-Please!!! O-Only यू कैन हैंडल थिस."

"ओह्ह्ह!! Okay! बूत ों ओने कंडीशन!"

"व्हाट इस आईटी??"

"मर्री में!! हैः~"

निक की बात सुनते hi दिव्या के चेहरे से उसका रंग उड़द गया. वह भौचक्की सी होक निक को घूरने लगी.

"व्हाट? It's थे फिनस्ट डील. नॉट ओनली यू विल बे सेव्ड फ्रॉम थिस मेस बूत आल्सो... वे कैन लाइव टुगेदर जस्ट लिखे वे अरे लिविंग राइट नाउ. ी कैन हेल्प यू अचीव योर गोल्स फास्टर. ी दो लिखे यू. यू क्नोव! वे कैन गेट फेमिलिअर विथ ौरसेल्वेस मोरे. हहै~"

निक की शर्त साफ़ थी. शादी करलो और इस मुसीबत से निजात पा लो.

दिव्या कभी सुहाना को देखती तोह कभी नीचे बिखरी उन् लाशो को तोह कभी निक को. उसके माथे पर पसीना साफ़ झलक रहा था. ये उसकी ज़िन्दगी का सबसे इम्पोर्टेन्ट डिसिशन जो होने वाला था.

और एक अंतिम बार गहरी सास लेने के बाद,

"फाइन! ी एग्री! नाउ प्लीज!"

वह हार गयी!!!

निक की तोह ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं था. वह तोह ख़ुशी के मारे फुला नहीं समां रहा था. दिव्या इधर सोच रही थी की उसने सब संभाल लिया है पर एक बम अभी और फटा उसके सर्र पे,

"बूत ी कैन ओनली वॉच फॉर यू! नॉट फॉर सोनि! सॉरी!"

"Wh-Whaaatttt?" दिव्या अचानक hi झेप गयी. ये क्या बकवास थी? एक तोह वह शादी करने के लिए राज़ी हो गयी और अब ऊपर से ये आदमी उस से कह रहा था की वह सिर्फ उससे hi बचा सकता है? सुहाना को नहीं? तोह मतलब क्या हुआ फिर?

"ी कैन ओनली सेव यू. She's ान आउटसाइडर. सो ी can't टेक रिस्क्स. नाउ डीडे क्विकली. ओठेर्स मिगहत बे काट्चिंग विथ उस."

एक बार फिर दिव्या परेशानी में फस्स गयी.

वह सुहाना के पास गयी और उससे खड़ा कर उठायी, "सुहाना? सुहाना!!! ध्यान दो!! देखो! निक कैन ओनली सेव में. कॉल तहत बास्टर्ड!! उसके पास ज़रूर कोई न कोई कनेक्शन होगा."

परन्तु सुहाना तोह जैसे अपने होश में hi नहीं थी.

"ुघ्घ! जस्ट गिव में योर फ़ोन!!" दिव्या खीजते हुए उसकी जेब से फ़ोन निकाली और एक नंबर डायल कर दी.

पर उस इंसान से बात करते hi, उससे एक और झटका लगा. ये व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि,

गौरव था!!!

"यू बास्टर्डड!!!" दिव्या जोरर से फ़ोन पर चिल्लाई,

तोह वही फ़ोन के दूसरे साइड से हस्सन की आवाज़ आयी.

"हाहाहाहाहा~ इसमें घाटा किसी का नहीं है. आज में इतना खुश हु की क्या बताऊ. खुश हु की वह का शेरिफ मेरे डैड का दोस्त है. और आप क्यों नाराज़ होती हो. सुहाना को तोह में कितना चाहता हु. कॉलेज में कितना मनाया उससे पर वह मेरी न मानी. और देखो... सच्चा प्यार ऐसा hi होता है. आज खुद भगवान् ने मेरी झोली में सुहाना को लाके रख दिया. में सुहाना को कैसे कुछ होने दे सकता हु? पर बदले में बस एक hi चीज़ की मांग है. सुहाना मेरी हो जाए!"

"Y-Youuu फुकेरररर!!!" दिव्या उसपे गरज उठी.

निक तोह निक था hi पर ये गौरव भी ऐसा निकलेगा किसने सोचा था...!?

उसके हाथ से फ़ोन अचानक hi सुहाना ने छिनाय और उस से बात की और अंत में उसके मुँह से यही निकला,

"ी एग्री!!!"

जिससे सुन्न दिव्या उसके गले से लग गयी. और वह रोने की कगार पे आ गयी.

"I'm सो सॉरी सुहाना~ I'm सो सॉरी! सॉरी सॉरी!!! We've गोटें ौरसेल्वेस इन सुच ा मेस. It's माय फाल्ट. *स्निफ्फ* I'm सॉरी!"

पूरी ज़िम्मेदारी निक और गौरव के हाथ में थी.

दोनों लड़किया जो अब तक अपना फ्रीडम एन्जॉय करती थी. पालक झपकते hi उनका फ्रीडम उनसे छीन चूका था.

गाडी में सुहाना को दिव्या ने पुचकार के समझाया, "I'll के वीथिन ान ऑवर okay? यू जो होम! और कुछ भी मत सोचना. में जल्द hi आती हु."

गाडी रवाना हुई, ड्राइव कोई और नहीं मिक कर रहा था. वह नया रिक्रूट था.

लेकिन उसने गाडी घर ले जाने की बजाये, किसी और जगह ला के रोक दी.






सुहाना ने जब उससे प्रश्न जनक नज़रो से देखा तोह वह बोलै, "टेकिंग यू तो थे इनफर्मरी फर्स्ट. यू अरे हर्ट."

उसने जवाब दिया. वह सुहाना के माथे पर लगी चोट की बात कर रहा था.

***

ये मामला रफा दफा तभी होने वाला था जब सुहाना अपनी गवाही देने वाली थी.

कार में वह किसी भूत की तरह बन्न के बैठी हुई थी. पुष्कर मर्डर चूका था. उससे अब भी यकीन नहीं हो रहा था.





क्या बोलेगी वह सोनू को?

निक ने सारा का सारा दोष दिव्या का अपने सर्र ले लिया था. उसका कहना था की उसने उन् दो लड़को को पकड़ लिया था पर मामला हाथ से निकल गया और अपने सेल्फ डिफेन्स के चलते उसने उस बन्दे पर गोली चलाई.

तोह वही सुहाना का सारा दोष शेरिफ के एक बन्दे ने अपने ऊपर ले लिया था. उसका कहना भी यही था. अब बस दिव्या और सुहाना को अपनी अपनी गवाही देनी थी की वह वह पर कर क्या रही थी.

दूसरे शब्दों में एक कहानी बना के बोलना थी.

चुकी निक और शेरिफ के बन्दे ने खुद hi क़ुबूल किया था की उन्होंने गोलिया सेल्फ डिफेन्स के चलते चलाई है. दिव्या और सुहाना बोहत hi भारी मुसीबत से बच चुकी थी.

वर्ण पूरी तहक़ीक़ात होती. फिंगरप्रिंट्स चेक किये जाते. लेकिन अब तोह सामने से hi क़ुबूल कर लिया गया था की गोली किसने चलाई है.

"जो एंड से योर थिंग. Don't मेस आईटी उप!"

पीछे से निक ने सुहाना को खुसपुसाते हुए कहा. वह पलट के उससे देखि.





ये ज़िन्दगी, कैसे अचानक से बदल चुकी थी उसकी. बिलकुल उस तितली की तरह.

सुहाना ने गवाही दी. केस ख़तम हुआ. पर एक नयी शुरुआत हुई.

उधर दिव्या को निक से शादी करनी पड़ी.

और इधर...

शेहनाईया बज्ज रही थी. भव्य तरीके से सब कुछ सजाया गया था.

मुंबई में एक बड़ी hi ख़ूबसूरत सजावट से पूरा शादी का स्थल सजाया गया था.

वर वधु दोनों hi एक दूसरे के अगल बगल खड़े हुए थे.

जहा वर की आँखों में गुरूर और ख़ुशी थी तोह वही वधु की आँखें...

नम्म थी.

और ऊपर बड़े hi निराले तरीके से लिखा हुआ था.


गौरव वेड्स सुहाना

सोनिआ अपनी बड़ी बहिन के नज़दीक आयी और उससे देख के पूछी, "दीदी! Y-You अरे okay न?"

"ममम~ मुझे क्या हुआ भला?" सुहाना जवाब दी.

"आप... मुझे ऐसा महसूस हुआ की आप साद हो. A-Are यू रियली okay?"

"नादान लड़की. यस! I'm आल फाइन!"

सोनिआ मुस्कुराते हुए उसके गले से लग गयी. पर इधर सुहाना की आँखों से ासु बहना बंद न हुए. और गले लगे लगे hi उसकी नज़रे दिव्या पर तिकी जो दूर खड़े उससे hi देख के रो रही थी.

दोनों का हाल एक जैसा था. उधर निक वाइन पी के अपने मज़े ले रहा रहा था और इधर दोनों सहेलिया अंदर hi अंदर अपने दुःख और ग्लानि से लड़ने में लगी हुई थी.

जो दोनों नहीं चाहती थी. वह हो गया.

सुहाना और गौरव की शादी भी संपन्न हो गयी.

***

"देखिये आपको दीद हुआ है."

एक फीमेल डॉक्टर ने सुहाना की तरफ देखते हुए कहा. वेगास की त्रासदी से उभरे अभी कुछ दिन hi हुए थे की सुहाना को अपने आप में एहसास हुआ की वह अक्सर बदला बदला सा महसूस कर रही थी.

"दीद मतलब?" उसने पूछा.

"दिसोसिएटिवे िडेंटीफ़्य डिसऑर्डर! दूसरे शब्दों में स्प्लिट पर्सनालिटी. अक्सर ये चाइल्डहुड एब्यूज या सेक्सुअल एब्यूज में एक्टिव होती है. पर कभी कभी किसी मेन्टल ट्रामा में भी ये जन्म ले लेती है."

"Th-Then...!?"

"ये एक तरीक़ा होता है जो ब्रेन आपसे आपको उस ट्रामा से दूर रखने के किये करवाता है."

"तोह इसका कोई सलूशन...!?"

"ये औरतो में ज़्यादा होता है पुरुषो के मुक़ाबले. सलूशन से पहले मुझे बताइये की क्या आपको कही कोई मेमोरी लोस्स की दिक्कतें तोह नहीं आ रही अभी कुछ दिनों से? या फिर डेलूशन्स होना? या एंग्जायटी? डिप्रेशन? खुद को चोट पहुचाने के विचार? ड्रग्स या अल्कोहल का ज़्यादा कोन्सुम्प्शन? क्या इनमे से कुछ भी हो रहा है?"

"N-Nahi! पर एंग्जायटी ज़रूर होती है."

"हम्म! अच्छा हुआ मामला इतना गंभीर नहीं है. देखिये, एंग्जायटी के लिए में मेडिकेशन्स दे सकती हु. लेकिन सबसे अच्छा ट्रीटमेंट साइकोथेरेपी hi है."

"S-So!?"

"इसके ज़रिये हम आपकी दूसरी पर्सनालिटी से फेमिलिअर हो सकते है."

"N-Nooo! मुझे सलूशन बताइये इसका. ी... ी can't लाइव लिखे थिस...! मुझे पता hi नहीं चलता में कब वीयर्ड बेहवे करना शुरू कर देती हु."

"देखिये में समझ सकती हु. पर इसका कोई इंस्टेंट सलूशन नहीं है. एक hi तरीक़ा है और वह है आपकी दोनों पर्सनालिटीज को मर्ज करके एक पर्सनालिटी में फॉर्म करना. और ऐसा करने में कितना समय लग जाएगा, ये कोई नहीं बता सकता."

"आईटी... आईटी चैंट बे...!"

सुहाना का तोह जीवन जैसे उजड़ते hi जा रहा था. दीद की शिकार हो चुकी थी अब वह.

कैसे जीएगी अब?

लेकिन उसने हार न मानी. वह दत्ती रही. खुद से उसने अपनी दूसरी पर्सनालिटी के ट्रिगर होने के रेअसोंस ढूंढे. जिसमे गुस्सा एक अहम् रीज़न था.

वह धीरे धीरे अपनी ज़िन्दगी व्यतीत करने लगी. गौरव के संग रहके वह उसकी कंपनी में भी उसका काम संभालती तोह साथ hi अपने पिता शैलेन्द्र के बिज़नेस में भी सोनिआ के साथ हाथ बताती.

अंदर से कितना तोह टूटी हुई थी वह. फिर भी उसी तितली की तरह वह अभी भी पंख फैलाये उड़द रही थी. जितना उड़द सकती थी.

कोई प्यार नहीं. शादी तोह बस एक समझौता थी. गौरव को जो चाहिए था वह उससे मिल चूका था. जिस लड़की को वह पाना चाहता था वह khud-ba-khud किस्मत के मारे उसके हाथो में आ गयी.

रात को वह धक्के लगाता और दिन में अपना गुरूर दर्शाता. उसकी ज़िन्दगी सेट हो चुकी थी. पर सुहाना को मजबूरी के चलते झुकना पड़ा. और दिव्या का भी यही हाल हुआ.

जब सुहाना अपनी बोरिंग लाइफ से थक चुकी थी. तब उसके जीवन में एक शख्स की एंट्री हुई.


"बोलो!? कभी देखि है ऐसी रिंग? रिंग चोर्रो कभी ज़िन्दगी में 1.57 क्रोर्स रुपये सुने है किसी के मुँह से? कभी इतना महंगा सामान देखा है?"

कुछ इसी तरह उसने उसकी बेइज़्ज़ती की थी. और बदले में,

"रेमेम्बेर! पैसो का घमंड हमेशा ले डूबता है."

उससे अपनी गलती का एहसास करवाया था उसने.

"यू हैवे किल्ड समवन before...Right?"

किस्से पता था की वही एक मात्र ऐसा होगा जो उसके राज़ को खोल पायेगा!?

यहाँ तक की उसकी स्प्लिट पर्सनालिटी का राज़ भी. जब से वह उसकी ज़िन्दगी में आया था.

उससे सब कुछ अब याद आ रहा था.

उड़ती हुई तितली के पंख, अब चोटिल हो चुके थे. मृत्यु सामने कड़ी हुई थी.


"तितलियाँ मुझे पसंद नहीं. ये जल्दी मर्डर जाती है."

आज उससे उसके ज़हन में बैठी साड़ी बातें एक एक कारकजे याद आ रही थी. और आज उससे ये भी एहसास हो गया की वह भी...

एक तितली hi थी.


"डीडीईई~ में फर्स्ट आयी. ेहेहेहे~"

हर्र एक याद... हर्र एक ख़ुशी के पल...

एक के बाद एक अपने परिवार वालो की छवि उसके मैं में आ रही थी.

ख़ास कर अपनी छोटी बहिन सोनू की...

'मां पापा... सोनू... एवरीवन ेल्स...!'

'ी गेस थिस वास् आईटी.'

'सोनू...! ी वांटेड तो सी यू गेटिंग मैरिड...!'

'करा, अवा... सोनू... तुम तीनो को एक बार फिरसे साथ देखना चाहती थी में. पर हर्र ख्वाइश पूरी कभी नहीं होती. ी रीलीज़ेड आईटी नाउ.'

'और तुम....! वीर!!!'

'यू वेरे सुच ा लवली पर्सन. तुम्हे पेहचान न सकीय में पहली मुलाक़ात में.'

'आईटी वास् माय फाल्ट. बूत ी don't रिग्रेट आईटी. आईटी वास् ा हैप्पी जर्नी विथ यू...'

उससे बीते दिनों बिठाये गए पल याद आने लगे. कैसे वीर ने उससे आइस क्रीम देके शांत किया था. कैसे वह इन् किलर्स के बीच सर्वाइव किये. कैसे वह दोनों साथ में डिनर और शॉपिंग पर गए थे.

'ठोस मोमेंट्स वेरे रियली ब्यूटीफुल...!'

'ी don't रिग्रेट एनीथिंग नाउ. सिवाए... सोनू की मैरिज... और तुम्हे ग्रो करता देखने के... स्टिल... ा जर्नी मस्ट के तो ान एन्ड. ी थिंक माइन... वास् शॉर्टर...!'

'गुडबाय~ एवरीवन!!!'

जो जो छवि उसके मैं में आ रही थी. धीरे धीरे अन्धकार उनको घेरर कर अपने अंदर समाने लगा.

वह अँधेरा सब कुछ ढकते जा रहा था. वह तितली रख की तरह हवा में उड़द के फेल रही थी. और सब कुछ उस्सद अन्धकार में समाहित हो गया.

जब आखिर में...


"वेक उप!!!!"

एक जानी पहचानी आवाज़ उसके मैं में आयी. अन्धकार के बीच एक रौशनी की बिंदु उससे दिखाई दी.

और अचानक hi,

वह बिंदु फेल के पूरे अन्धकार को रौशनी से गायब करती चली गयी. कोना कोना रौशन हो उठा. और एक हाथ आके उसकी कलाई को थामा और खींचते हुए....

"नंगहः!?"

"आह्ह्ह्ह! डीईई!!!!!!"

जोरर से एक आवाज़ उसके कानो में आयी.

"डैड!! माँ!!!! दीदी... दी को होश आ गया. *स्निफ्फ*"

"K-Kya कहा? M-Meri बच्ची!!! मेरी बच्ची!"

"S-Suhanaaaa~"

"ओह्ह्ह थैंक गॉड इडियट! यू अरे okay!!! यू सकारेद में तो थे डेथ."

"मेरी सुहाना!!! बाबीयीय!!! I'm हेरे लुक!!!"

उससे साड़ी परिचित आवाज़ें सुनाई दी. आँखें जब खुली तोह नज़ारा नज़र आया.

फिर हर्र एक शख्स उससे दिखाई दिया.

शैलेन्द्र, नमृता, सोनू... दिव्या, निक, गौरव...

सब के सब वही खड़े हुए थे.

पर...

'वेयर इस हे?'

वीर कही भी उससे नज़र नहीं आया.

सोनिआ : ओह्ह्ह थैंक गॉड दी! *स्निफ्फ* थैंक गॉड!!! अगर आपको कुछ हो जाता तोह... ी couldn't... *स्निफ्फ*

वह उस से चिपक के रोने लगी.

सोनिआ : अगर वीर न होता तोह...! *स्निफ्फ*

बातो hi बातो में उससे सब कुछ बताया गया.

बुलेट बेहद छोटी थी. और डायरेक्ट इम्पैक्ट नहीं था. बुलेट रिसोचेट हुई थी जिस वजह से सुहाना की जान बच गयी.

अक्सर बुलेट शरीर के अंदर जाके श्राप्नेल्स में टूट कर बिखर जाती है जो अंधरुनि अंगो को और घायल कर देती है.

पर, सुहाना लकी थी जो बुलेट न hi उसकी बोन या आर्टरी को चोट पहुचा पायी और न hi टूट के बिखर पायी.

और तोह और... समय रहते वीर उससे यहाँ ले आया था.

उससे ये भी पता चला की डिपार्टमेंट में एक ब्लैक शीप था. जो अंदर की इंटेल हाउस ऑफ़ थे किलर्स को पहुचा रहा था.

उससे भी कस्टडी में ले लिया गया था. वीर के कहने पर सुहाना की सिक्योरिटी के लिए 15 से भी ज़्यादा लोग मौजूद थे.

पर...

वह था कहा?

सोनिआ से उससे पता चला की वह जा चूका था. उसने ये भी बताया की वीर का एक मैसेज उसके फ़ोन में पड़ा हुआ था.

जब सुहाना ने उससे दिखाने के लिए बोलै तोह सोनिआ ने मैसेज खोल के स्क्रीन सुहाना के सामने कर दी.

और उसमे बस कुछ hi शब्द लिखे हुए थे.

'ी couldn't सेव यू. आईटी वास् माय फाल्ट! सॉरी! जब आप ये पढ़ रही होउंगी, में वह से जा चूका होऊंगा. ी विश यू रिकवर सून. वन्स अगेन, I'm सॉरी. टिल थें... गुडबाय!'

उससे पढ़ते hi सुहाना की आँखों से अपने आप ासु निकल आये. उसने अपनी आँखें बंद कर ली और ज़हन में एक hi बात गूंजी,

'यू दीद सेव में...! इडियट...!'

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

थिस मार्क्स थे एन्ड ऑफ़ थे हाउस ऑफ़ थे किलर्स अर्च. अगले अपडेट से विलेज अर्च शुरू हो जाएगा. लेकिन उसके पथ को बनाने में मुझे समय लगेगा. सो, ी मिगहत टेक ा week's ब्रेक. बाकी, लिखे थोक के जाने का और रेवोस रखने का.


धन्यवाद! ✨
 
ी हैवे क्रिएटेड ा फुल चरक्टेर्स गाइड.

It's स्टिल उप्दतिंग. थ्रेड के फर्स्ट पेज पर जा कर सबसे नीचे स्क्रॉल करिये.

गाइड दिख जाएगी. :डिक्लेअर:

 
अपडेट - 110 ~ ा थ्रेट

अब तक...

जब सुहाना ने उससे दिखाने के लिए बोलै तोह सोनिआ ने मैसेज खोल के स्क्रीन सुहाना के सामने कर दी.

और उसमे बस कुछ hi शब्द लिखे हुए थे.

'ी couldn't सेव यू. आईटी वास् माय फाल्ट! सॉरी! जब आप ये पढ़ रही होउंगी, में वह से जा चूका होऊंगा. ी विश यू रिकवर सून. वन्स अगेन, I'm सॉरी. टिल थें... गुडबाय!'

उससे पढ़ते hi सुहाना की आँखों से अपने आप ासु निकल आये. उसने अपने आँखें बंद कर ली और ज़हन में एक hi बात गूंजी,

'यू दीद सेव में...! इडियट...!'


अब आगे...

मुंबई ~

मॉर्निंग ~

एक नयी निराली सुबह. रागिनी के घर में रोज़ की hi तरह सब अपने अपने कामो में व्यस्त थे. वीर के जाने के बाद से उनकी दिनचर्या में काफी अंतर आ चूका था.

खासकर रागिनी, सुमन और श्वेता की ज़िन्दगियों में. रागिनी कैसे खुद को कण्ट्रोल में राखी हुई थी ये तोह सिर्फ वही जानती थी.

तोह वही सुमन का हाल भी बेहाल था. इतने दिनों से अपने मालिक से दूर रह के उससे भी वीर की याद सत्ता रही थी.

लेकिन श्वेता...!

उससे तोह कुछ और hi चिंता खाये जा रही थी. अपने बेटे की तरह देखने लगी थी वह वीर को उस दिन से hi जिस दिन से वीर ने उससे बचाया था. बेचैनी, तनाव, वीर को दुबारा देखने की तालाब.

ये कहना गलत नहीं था की अगर कोई सबसे ज़्यादा वीर को देखने के लिए तड़प रही थी तोह वह और कोई नहीं, श्वेता hi थी.

और जैसे उसकी ये मुराद पूरी भी होने जा रही थी. क्युकी घर के दरवाज़े के ठीक बाहर hi वीर खड़ा हुआ था. हाथो में अपना ट्रेवलिंग बैग लिए वह दरवाज़ा खोल hi रहा था जब ऊपर टेरेस पर से एक औरत नीचे आने के लिए हुई तोह दोनों की निगाहें एक दूसरे से जा टकराई.

"हम्म?" वह औरत हाथो में से बाल्टी रख हैरत में वीर को देखि और अगले hi पल उसके चेहरे पर प्यार भरी मुस्कान सज्ज गयी.

"M-Maalik!!!"

उसके thar-tharaate हुए होंठो से शब्द निकले. ये सुमन hi थी. सुबह सुबह कपडे धुलने के बाद उन्हें टेरेस पर फैलाने का काम उसका hi रहता था. उससे बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी की वह अपने मालिक को अचानक से ऐसे आते हुए देखेगी.

ये एक सरप्राइज था.

क्युकी वीर ने कोई खबर नहीं दी थी की वह घर लौट रहा है. अभी वह दौड़ के अपने मालिक के पास जाने hi वाली थी की वीर ने अपने होंठो पर ऊँगली रख उससे शांत रहने का इशारा कर दिया.

बात को समझते हुए उसने धीरे से हामी भरी. धड़कने तेज़्ज़ थी. अपने मालिक से इतने दिन दूर रहने के बाद उसका जिस्म हर्र रात उससे परेशां करता था. और उससे ऊँगली से hi अपना काम चलना पड़ता था. पर अब...!

अब और नहीं. उसके मालिक आ चुके थे. वह अभी से उनकी बाहो में कूदने के लिए मछली की तरह मचल रही थी. लेकिन उनके इशारे पर उसने खुद को कण्ट्रोल किया.

वीर ने आहिस्ता से दरवाज़ा खोला और वह दबे पाँव अंदर आया. मैं हॉल के गेट के पास आके उसने दरवाज़े को धक्का देके खोला तोह उससे अंदर का नज़ारा नज़र आया.

भूमिका घर पर नहीं थी. शायद होटल के लिए निकल चुकी थी. और सोनाली भी फ़ूड ट्रक के काम पर निकल गयी थी शायद.

श्वेता अंदर किचन में थी क्युकी बर्तनो की आवाज़ वीर को साफ़ सुनाई दे रही थी. तोह वही हॉल में आभा बस विराजमान थी.

उसकी पीठ वीर की तरफ थी जिस कारण से उससे ये पता न चला की वीर ठीक उसके पीछे वाले दरवाज़े के पास खड़ा हुआ था.

और तभी, किचन में से रागिनी बाहर आयी. पेर्रो में बंधी वह पायल की छनक, और उसके बदन से कस के लिपटी एक भूरे रंग की साड़ी. उसकी अदा अब भी वैसी hi थी. या शायद और भी क़ातिलाना हो चूका था उसका जिस्म.

"आभा! ज़रा चख के बताना तोह. किसी बानी है ये?"

वह एक कटोरी आभा के हाथो में थमाते हुए उस से बोली.

आभा ने जब कटोरी ली तोह देखा उसमे कई साड़ी नमकीन सलोनी थी. शायद रागिनी इन्हे बना रही थी. त्यौहार नज़दीक आ रहे थे. और ऐसे में घर के पकवानो की तैयारियां अक्सर hi कुछ हफ्ते पहले से hi शुरू हो जाय करती थी. हर्र बार जहा रागिनी रेडीमेड पकवान मंगवा लिया करती थी, सिवाए खुद के हाथो से बनाने के. तोह इस बार सुमन की बातें उसके ज़हन में बैठ गयी थी.

"त्योहारों में हमे हमेशा अपने हाथो से पकवान बनाने चाहिए रागिनी जी. तभी घर का स्वाद आता है. और हमारे चाहने वालो के साथ हमे इससे बाटना चाहिए. घर के पकवान की बात hi अलग होती है."

सुमन की ये बात उसके मैं में बैठ चुकी थी. और इसलिए वह अभी से इन् कामो में लग चुकी थी. क्युकी उसका चाहने वाला तोह एक hi था.

वीर!

क्या बोलेगा वह जब वह उसके हाथो से बानी इन् नमकीन सलोनी को चखेगा? क्या उससे पसंद आएगी? इन्ही सब सवालों में वह अंदर से जूझ रही थी. और ये एक माध्यम भी था वीर को जकड़ने की तालाब को कण्ट्रोल करने का.

इधर जब आभा ने नमकीन सलोनी खा के चखी तोह उससे बेहद पसंद आयी.

अभी : बोहत अच्छी बानी है. नमक एकदम सही मात्रा में है भाभी.

रागिनी (स्माइल्स) : S-Sach में? कुछ गड़बड़ तोह नहीं हुई न? अच्छी तोह लगेगी न सबको?

आभा : कोई गड़बड़ नहीं हुई है भाभी! ये बोहत अच्छी बानी है. और सबको बोहत अच्छी लगेंगी.

रागिनी (स्माइल्स) : थैंक गॉड! सब सही से बन्न गया. मुझे डर था की उससे बिलकुल पसंद नहीं आएगी.

अभी उसने इतना बोलै hi था की पीछे से एक आवाज़ आयी,

"किस्से पसंद नहीं आएगी?"

आवाज़ वीर के मुँह से निकली hi थी की इधर रागिनी का जिस्म काँप उठा.

क्या ये वही आवाज़ थी? ऑफ़ कोर्स ये वही आवाज़ थी. कोई डाउट hi नहीं था.

वह एक झटके में मुड़ी और पीछे जैसे hi उसने देखा, हैरत के मारे उसकी आँखें फेल गयी.

वीर उसके सामने था.

इसके पहले की उसका दिमाग साड़ी बातो को प्रोसेस करता. उसके पेर्रो ने उसकी एक न सुनी. वह झटपट दौड़ लगायी. वीर इधर रागिनी को अपने क़रीब इस क़दर आते देख चौंक गया. उससे मालुम था ये होएगा पर ऐसे...!?

इस बात का उससे बिलकुल भी अंदाजा नहीं था.

रागिनी सरपट भागते हुए आयी और...!

*सलाआआमममममम*

वह जोरर से वीर के सीने से जा भिड़ी. ऐसा लगा जैसे एक ट्रैन आके भीड़ गयी हो सीने से. उसकी नरम नरम छुछिया वीर के साने में धस्स गयी. और उसके हाथ वीर की पीठ पर कस के बांध गए. वह कुछ नहीं बोली. बस जोरर से लिपटी रही.

वही पीछे कड़ी आभा आँखें फाड़े सब कुछ देख रही थी. वीर को अचानक यहाँ पा के वह स्तब्ध तोह थी hi पर उस से भी ज़्यादा भौचक्की वह इस बात से थी की ये रागिनी भाभी भला किस तरह से लिपटी हुई थी उसके मालिक से? पहले भी रागिनी वीर को अपने गले से लगाती थी जो की आम बात थी पर आज जिस तरह से वह अमर बेल की तरह लिपटी हुई थी. और वह भी भाग के...!? ये सब, कुछ सवाल खड़े कर रहे थे.

इस तरह का मेल मिलाप तोह पहले उसने कभी नहीं देखा था उन् दोनों के बीच. आखिर ये चल क्या रहा था?

'B-Bhabhi इस तरह? मालिक से...!? K-Kya में hi कुछ ज़्यादा सोच रही हु?'

अपने अंदर उठ रही फ़ालतू की बात को आभा ने अपने मैं से निकाला और वह अपनी जगह से उठ के आगे दरवाज़े के पास आयी.

वीर के दोनों हाथ रागिनी की नग्न पीठ और कमर पर थे. इसमें कोई शक नहीं था की वीर को इस समाय मज़ा नहीं आ रहा था.

रागिनी जैसी औरत को कोई कैसे भला बाहो में नहीं भरना चाहेगा? वीर तोह अपने बड़े भाई विवेक के हाल के बारे में सोच कर hi दया जाता रहा था.

ऐसी गरम औरत, ये खूबसूरती की बाला उसने अपने हाथो से गवा बैठी. और यही जवान औरत अब वीर की खुद के सीने से लिपटी हुई थी.

'यू रेआप व्हाट यू सौ!' वीर ने मैं में खुद से कहा.

और उसके हाथ रागिनी की कमर पर और कस के जकड गए. पता नहीं क्यों, पर रागिनी को इस तरह से अपनी बाहो में लेना, उससे एकदम सही लगा.

शी बेलोंगस तो यू~

एक अजीब सी पोस्सेस्सिओं की लालच उसके मैं में आयी. और उससे ये बात तभी समझ आ गयी जब अचानक से,

*डिंग*

[Alpha Male instincts have grown stronger.]

[Sigma male instincts are now unlocked.]

[Sigma Male instincts have been activated.]

[Alpha Male and Sigma male instincts will now be in action.

Note : They won't always be in action. They will trigger during emotional, stress, love, insult, embarrassing, pride, sex, and thrill based conditions.]

[Ohhhh! Master!! Damn~]

पारी खुश थी. पर वीर टेंशन में था. ये अजीब सी भावना क्यों आ रही थी उसके मैं में? उसका हाथ रागिनी के ब्लाउज पर पीछे जा के थम गया. मैं कर रहा था अभी ब्लाउज के अंदर हाथ दाल के वह रागिनी को अपने से चिपकाए और उसके गुलाबी रस भरे होंठो को मुँह में भर ले. यही सबके सामने.

'Th-This...!! सहित!!!! ये सब क्या हो रहा है पारी?'

[It will get difficult for you now Master. Materialistic cheezo tak toh theek hai. Par...! Ab aapki possessiveness boht zyaada badh gayi hai. You will get jealous easily. Khaas kar jab baat Ragini jesi khubsoorat aurat ki ho toh.]

'Don't तेल्ल में...!'

[Yes master! Aapne khud padha abhi. Alpha male instincts strong ho chuke hai. Now you want to possess things. Be it an object or a person. I mean females. Samay ke saath aapki ye icchaaye badhti jaengi. System is growing. It wants more. And you'll want more too. Aapko aisi urges aaengi ki kisi khubsoorat ladki ko dekha nahi aur usse apna banaane ki sochoge aap.]

'व्हाट थे--!?'

[Kyuki Alpha instincts stronger hai Master! But thanks to Sigma instincts. Sigmas are different than Alphas. Although they both are equally strong. Dono hi ek dusre ke level ke hote hai. Sigmas apna path khud banaate hai. Ye materialistic cheezo se utna affect nahi hote. Kyuki unhe pata hai woh kaha stand karte hai. Toh bhale hi aapki urges strong hai. Sigma instincts will balance them out. Par dhyaan rahe master. Alpha is still stronger right now!! Aapko apni sigma side par focus karna hoga. To make it stronger. So that you can neutralize the effect. You getting na?]

'येह!! समझ गया में! दमन थिस फीलिंग-!'

वीर ने खुद को शांत कर रागिनी के कानो की ऑर्डर मुँह किया और आहिस्ता से बोलै,

"पीछे आभा कड़ी है भाभी."

और ये सुनते hi रागिनी जो अभी आँखें बंद कर दीं दुनिया से परे वीर की बाहो में खोयी हुई थी, उसकी आँखें एक झटके में खुल गयी. और खुलते hi तभी उससे बाहर ऊपर से सुमन नीचे आती हुई नज़र आयी. उसके होंठो पर एक अजीब सी मुस्कान थी.

'अह्ह्ह~!'

सुमन ने भी देख लिया. आभा ने भी देख लिया. क्या सोच रही होंगी दोनों माँ और बहु उसके बारे में!?

ये ध्यान में आते hi रागिनी तुरंत hi वीर से अलग हुई और अपने गालो की लाली छिपाए उसकी नज़रे शर्म के मारे झुक गयी.

सुमन : आप आ गए?? वीर जी!?

वीर : हम्म!

आभा : H-Hum- हम सब ने आपको बोहत याद किया.

वीर (स्माइल्स) : ओह्ह! सच में?

आभा (ब्लशेस) : जी!

सुमन ने अपने हाथ में ली हुई बाल्टी नीचे राखी और वह वीर के आगे आयी. तभी उसने वह किया जिससे देख के आभा तोह नहीं पर रागिनी ज़रूर स्तब्ध रह गयी.

सुमन कस के वीर को अपनी बाहो में भर ली. उसकी विशाल छुछिया ऐसे चिपकी हुई थी दोनों के शरीर के बीच की मानो लग रहा था दो बड़े बड़े गुब्बारे दो कागज़ के बीच में रख दिए हो.

सुमन कभी भी इस तरह से वीर के गले नहीं लगती थी सबके सामने. क्युकी सब जानते थे की सुमन एक बेहद भरी हुई औरत थी. सेक्स अपील की मल्लिका थी वह. काम रस उससे देख के hi बाहर फूटने लगता था. और उसका सबसे खतरनाक हथियार...!

उसके बेहद भारी विशाल मम्मी!

जो दूध की थैलिया सुमन अपने सीने पर लेकर घूमती थी उस तरह के दूध वीर ने तोह क्या, वह मौजूद किसी भी औरत ने फिलहाल असल ज़िन्दगी में कही नहीं देखे थे.

थे वेरे तू बिग!

और यही देख रागिनी चिंता में आ गयी. सुमन इस तरह वीर से क्यों गले लगी हुई थी? ऐसे में तोह सुमन के स्तन वीर को महसूस हो hi जाएंगे. क्या वीर के मैं में फिर कुछ आएगा? क्या वह सुमन के स्तनों की तुलना उसके स्तनों से करेगा? कही वह सुमन पे तोह ध्यान नहीं देने लगेगा न?

पल भर में hi रागिनी के अंदर ऐसी इन्सेक्युरित्य उत्पन्न हो चुकी थी. रागिनी को अपने हुस्न पर पूरा कॉन्फिडेंस था. वह जानती थी की वह खूसबूरत है. पर...!

अगर बात की जाए सुमन से तुलना की तोह...! एक डिपार्टमेंट में वह हमेशा hi मात खाने वाली थी. और वह था दूध डेरी डिपार्टमेंट.

'थे...! व्हाई अरे थे सो बिग? Y-Ye इतने बड़े कैसे हो गए आखिर-!? V-Veer!'

अपने निचले होंठ को जोरर से दातो टेल दबाये वह परेशान हो गयी. पर उसकी जान में जान आयी जब सुमन ने आगे कुछ न किया. वह वीर को चोरर पीछे हो गयी.

'Th-That's गुड! शायद वीर को सुमन जितनी उम्र की औरतो में इंटरेस्ट नहीं. हाशह! It's ा गुड न्यूज़! वर्ण लड़के सुमन को देख के hi...!'

सोचते हुए रागिनी ने एक राहत की सास ली. पर उससे क्या पता था... की यही वीर सुमन के दोनों छेड़ो की खुदाई जमके करता है.

वही इधर आभा भी आगे आके हलके से गले लगी वीर के. पर इस बार रागिनी को कोई दिक्कत नहीं हुई. वह जानती थी आभा से उसकी कोई टक्कर hi नहीं है. और वैसे भी, वीर ने कभी भी आभा की तरफ इंटरेस्ट नहीं दिखाया है. उसका रास्ता साफ़ था.

'She's जस्ट ा किध...! वीर को उसमे कोई इंटरेस्ट नहीं है. That's अगेन गुड!'

इनका भारत मिलाप हो hi रहा था की तभी किचन से घर में मौजूद आखिरी शख्स बाहर आया,

"रागिनी!? ये लो! ये मीठी वाली देखना तोह किसी बानी--!!?"

उसके कदम वही ठहर गए जैसे hi उसकी निगाहें दरवाज़े पर जाके तिकी तोह.

इधर बाकी सब भी उससे hi घूर रहे थे. वीर भी. अंदर से बाहर आयी कोई और नहीं उसकी सौतेली माँ श्वेता hi थी.

श्वेता ने देखा की कैसे आभा वीर के गले लगने के बाद दूर हो रही थी. तोह ये सभी गले मिल चुके थे यानी!?

उसके होंठ कुछ कहने के लिए खुले पर अपने आप बंद हो गए. और वह वही मूर्ति की तरह जम्म के कड़ी हो गयी.

हाथ में मीठी सलोनी की कटोरी लिए वह सर्र झुका के कड़ी रही. इतने दिनों से पागल थी वह वीर को देखने के लिए और अब जब वह सामने था तोह!? तोह श्वेता की आवाज़ निकालने की हिम्मत तक नहीं हुई.

कही वीर ने उससे धुत्कार दिया तोह? कही उससे कुछ कह दिया तोह? कही उस से और रूठ गया तोह!? तमाम सवालों ने उससे चुप्पी साधने पर मजबूर कर दिया.

उससे अब बस उनकी बाते hi सुनाई दे रही थी. क्युकी नज़रे तोह उसकी नीचे थी.

वीर : मेरा रूम साफ़ है क्या?

सुमन (स्माइल्स) : पूरा! में रोज़ सफाई करती हु उसकी.

वीर (स्माइल्स) : थैंक यू~

सुमन : धन्यवाद देने की कोई ज़रुरत नहीं वीर जी! ये तोह मेरा काम है.

रागिनी : ममम~ वीर! सुमन जी ने तुम्हारे कमरे को बोहत अच्छे से रखा है इतने दिन. तुम जाओ! फ्रेश हो लो! मेने और तै जी ने मिलके तुम्हारे लिए नमकीन और मीठी सलोनी बनायी है. त्यौहार आ रहे है न, इसलिए.

वीर : दोनों आप ने बनायी है?

रागिनी : N-Nahi! मेने ये नमकीन वाली बनायी है. और तै जी ने मीठी वाली.

रागिनी फटाफट टेबल पर से कटोरी उठाते हुए लायी और उसमे से एक सलोनी उठा के अपने हाथो से वीर के मुँह की तरफ करि.

वीर रागिनी की आँखों में hi देख रहा था. और उससे देखते देखते hi वीर ने अपना मुँह खोला. सलोनी को मुँह में भरा पर इस से पहले की रागिनी अपनी उंगलिया हटा पाती वीर ने अपना मुँह बंद कर लिया.

"ंघ~" रागिनी के बदन में एक सिहरन फेल गयी और उसने झटके से अपना हाथ पीछे खींच लिया. उसके गाल लाल थे. उंगलियों पर वीर का थूक साफ़ लगा हुआ था.

वीर मैं hi मैं मुस्कुराया,

वीर : हम्म~ बोहत अच्छी बानी है!

उसके मुँह से अपनी तारीफ सुनते hi रागिनी की ख़ुशी का ठिकाना न रहा. पूरी म्हणत उसकी सफल हो चुकी थी.

वीर : चलिए! में चेंज कर लू!

वह अपने बैग उठा के आगे बढ़ा तोह रागिनी भागते हुए उसके बगल से आयी,

रागिनी : अरे! ये- ये मीठी वाली भी तोह चखो. तै जी ने बोहत प्यार से बनायी है तुम्हारे लिए.

उसकी बात सुन्न वीर ने जब सामने कड़ी श्वेता को देखा तोह श्वेता को आभास हो गया की वीर उससे hi घूर रहा था. और बेचारी का चेहरा और झुक गया.

वीर ने आगे आते हुए उस कटोरी में से एक मीठी सलोनी निकाल के चखी. इधर श्वेता के दिल की धड़कने ट्रैन की रफ़्तार से भी तेज़्ज़ हो चुकी थी. क्या उससे पसंद आएगी या नहीं?

पर वीर के जवाब ने जैसे उससे पूरा तोड़ के रख दिया,

रागिनी : किसी है?

वीर ने श्वेता को देखा जो अभी भी सर्र झुकाये थी और आहिस्ता से बोलै,

"इनमे....!! मिठास नहीं है!"

और बस!

इतना बोल वह हवा के झोके की तरह श्वेता के बगल से निकल गया. श्वेता का पूरा जिस्म ठिठुर उठा. उसकी आँखें हैरत के मारे फैली हुई थी. मिठास नहीं है?

वीर के जाते hi सुमन एक हमदर्दी भरी नज़र से श्वेता को देख अपने मालिक के पीच पीछे चल दी. तोह वही आभा किचन में जा के घुस गयी.

रागिनी आश्चर्य में आगे आयी और उसने खुद एक सलोनी खा के चखी.

रागिनी : Y-Ye...! ये तोह बोहत अच्छी बानी हुई है. मिठास तोह एकदम परफेक्ट है फिर वीर ने--!?

कहते कहते वह खुद चुप रह गयी जब उससे समझ में आया की, वीर और श्वेता के बीच का रिश्ता केसा था. और अगले hi पल वह खुद खामोश पद गयी. उसके चेहरे पर भी हमदर्दी के भाव आ गए.

रागिनी : T-Tai जी-

पल भर के लिए तोह श्वेता को सच में लगा था की कही वह शक्कर डालना भूल तोह नहीं गयी? पर रागिनी की बातो ने सब कुछ बतला दिया. और उसकी आँखों से अपने आप ासु निकल पड़े जब उससे बात समझ आयी.

सलोनी में तोह मिठास थी. पर वीर का मतलब कुछ और था. मिठास उसमे नहीं थी. श्वेता में!! उसके हाथो में वह मीठा प्रेम नहीं था.

और ये बात पूरी तरह से तोड़ के रख दी उससे.

*क्लल्लाआआआंणगगगगग*

उसके हाथो से कटोरी गिरी और वह तेज़्ज़ कदमो के साथ बाहर निकल ासु छलकाते हुए ऊपर टेरेस की ऑर्डर भाग गयी.

"तै जी!!!!!" रागिनी चिल्लाई.

पर श्वेता तब तक जा चुकी थी.

नीचे झुक उसने गिरे हुए पकवान बटोरने शुरू किये और उसका मैं उदास हो उठा. ये अचानक से क्या हो गया? सब कुछ ठीक से हो रहा था फिर अचानक से ये-!?

इसके पहले भी तोह वीर ने श्वेता के हाथो से बना खाना खाया था कितनी बार. और उसने तारीफ भी की थी. फिर आज एकदम से ये बदला हुआ रवैय्या क्यों? आज उससे ऐसा क्या हो गया था? रागिनी की कुछ समझ में नहीं आ रहा था. काफी सवाल बचे हुए थे जो वह वीर से पूछने वाली थी.

पर बेचारी को क्या पता था की इसमें गलती वीर की भी नहीं थी. ये सब तोह नतीजा था~

[Alpha male instincts have become stronger.]

सब कुछ इसका किया धरा था. एक अल्फा मेल अपनी स्ट्रेंथ को सबके सामने शो ऑफ भी करता है और प्रोवे भी करता है की वह सबसे स्ट्रांग है. जो उसका है वह उसका है. किसी की भी इतनी औकात नहीं जो उसके हाथो से उसका सामान छीन सके और उससे बेइज़्ज़त कर सके. वह तोह अच्छा हुआ सिग्मा इंस्टिंक्टस भी एक्टिवेटिड थे. जिस कारण से वीर कूल हेडेड भी रहेगा. वर्ण अंजाम और बुरा हो सकता था.

जब वीर ने श्वेता को देखा था तोह पल भर में hi उससे श्वेता की करतूते याद आ गयी थी और वह खुद को उन् तीखे बोल बोलने से रोक न पाया. याद तोह उससे रागिनी की भी करतूते आयी थी पर रागिनी को वह अपने पूरे दिल से माफ़ कर चूका था. साथ hi उसके अंदर अब रागिनी को पाने की इच्छाएं जाग रही थी. उससे अपना बनाने की, उससे बाहो में दबोचने की, और उससे...!

***

इधर ऊपर श्वेता सिसक सिसक के रो रही थी. साड़ी के छोर्र को वह मुँह में भींचे फुफकार लगाती रही. ये पीड़ा असहनीय थी.

वह जितना वीर के पास आने की कोशिश कर रही थी. वीर उतना hi उस से दूर जा रहा था. क्यों? क्या गलती हो रही थी उस से अब? किसी को मनाने के लिए हम उनकी पसंद का खाना बनाते है. उन्हें खुश करने की कोशिश करते है. फिर क्यों??

वीर क्यों उस से भाग रहा था? आखिर वह कर तोह सब कुछ रही थी. हर्र वह प्रयास कर रही थी जिसमे उससे एक आस दिखाई देती वीर को खुश करने की. लेकिन फिर भी...!?

वीर क्यों उसके पास नहीं आ रहा था? श्वेता को कितना इंतज़ार था उससे देखने का. और वह आया भी. अचानक से. परन्तु..!? ये सब क्या हो गया?

***

हाल कुछ कुछ वीर का भी ऐसा hi था.

'दमंत्र ित्त्त!!! Y-Ye क्या किया मेने?'

[It's your emotions. They're stronger now. Alphas apne emotions ko boht strongly express karte hai Master. Basically, agar aapke dil me kisi ko apni jagah banaani hai toh ab unhe ek aur layer paar karni hogi. It has become tougher now.]

'पर... शायद मुझे वह नहीं कहना चाहिए था पारी. ी मैं... में अभी आया और घर का माहौल...!'

[Mat sochiye iss baare me. Dheere dheere aapko iski aadat pad jaegi Master! Aur logo ko bhi. Actually this is good. You won't get swayed easily. Aap apne decision par atal rahenge. Aur apne usoolo par bhi. Sigma aur alphas contrasting personality hai mere according. Alphas jaha dikha dikha ke ye bataate hai ki woh strong hai. Toh wahi sigmas shaant rehte hai aur jab unhe zaroorat padti hai tabhi woh bataate hai ki woh sabse strong hai. It's complicated.]

'तोह इसका रिजल्ट...!?'

[Hamare case me Alpha abhi stronger hai. So you will act rash. But Sigma usse kuch hadd tak balance kar dega. Toh overall dekha jaaye toh itni pareshaaniya nahi aani chahiye as long as you focus on enhancing your sigma side.]

'हम्म~ ी गेट आईटी!'

[Yes! Don't worry! Everything will be fine!]

हामी भरते हुए वीर अपने कमरे के अंदर आया तोह सुमन भी अंदर आयी और उसने दरवाज़ा लॉक कर दिया.

वीर ने अभी बैग रखा hi था की सुमन उसके पीछे से आके कस के उस से लिपट गयी.

"मालल्लीिक्कक्क~"

अपने होंठो को उसकी गर्दन पर चलाते हुए सुमन पूरी तरह मदहोश हो उठी.

वीर ने उसकी नंगी कमर पकड़ आगे किया और उससे सीधा खड़ा किया. उसके बाद अपने दोनों हाथ ले जाके उसका पल्लू गिराया और उसकी आँखों में देखते हुए उसके ब्लाउज के हुक्स खोलने लगा.

सुमन लम्बी लम्बी सासें लिए अपने मालिक को देख रही थी. हर्र हुक खुलते hi उसके तरबूज जैसे दूध का उभार बढ़ता जा रहा था.

*टक*

और आखिरी हुक खुलते hi, दो बड़े बड़े थान हवा में उछाल के झूल गए. सुमन ने ब्रा नहीं पहनी थी.

वीर : No ब्रा?

सुमन : आपने मन किया था न?

वीर : ओह्ह दीद ी? और यहाँ का क्या--?

वीर ने सुमन की साड़ी उठा के हाथ अंदर किया और उसकी टांगो के बीच ले गया.

*स्क्वैश*

छूट नंगी भी थी और गीली भी.

वीर : हँ? पंतय भी नहीं? मुझे नहीं लगता मेने तुम्हे पंतय न pehen'ne के लिए कहा था.

सुमन (लम्बी सासे लेते हुए) : आसानी के लिए.

वीर : आसानी?

सुमन : हम्म!

कहते हुए वह पीछे गयी और बीएड पर लेत के अपनी दोनों टाँगे चीयर के उसने अपनी छूट और गांड के दर्शन दिए.

सुमन : ताकि आप जब चाहे इनका इस्तेमाल कर सके.

अपनी छूट पर हाथ फरते हुए वह बोली. और बेशक, ये नज़ारा देख वीर के लुंड ने एक झटका मार दिया.

सुमन प्यासी थी.

सुमन : मालिक!! ममम~ आ भी जाइये न!! आइये और अपने इन् छेड़ो का... इस्तेमाल करिये!

वीर (स्माइल्स) : तुम जानती हो न सब मौजूद है घर में.

सुमन : आभा से हमे कोई डर नहीं. श्वेता जी तोह यहाँ अभी आएंगी hi नहीं. और रागिनी जी शायद उन्हें चुप कराने जाए. ऐसे में...! सिर्फ आप और में.

वीर : भाभी यहाँ आ सकती है सुमन. मुझे समझने के लिए. पर जो होगा देखा जाएगा.

वीर अगले hi शान आगे बढ़ा और अपने जीन्स, अंडरवियर को निकाल वह सुमन के दोनों दूध पर बैठ गया.

वीर (स्माइल्स) : सबसे अच्छी जगह बैठने की...!

सुमन मुस्कुरायी और लुंड लेने के लिए मुँह खोली,

वीर : न न न! जब तक में न कहु तब तक मुँह नहीं खोलना है.

वीर अपना लुंड सुमन के चेहरे पर रगड़ने लगा. उसके अंडकोष सुमन के होंठो पर फिर रहे थे और विशाल लुंड सुमन के पूरे चेहरे पर, जो उससे मदहोश करे जा रहा था.

सुमन : नंनगहःह~ क्यों तड़पाते हो मालिक? दाल दीजिये न मुँह में. मुझे चूसना है...! हाह!!!

बेचारी से अब रहा नहीं जा रहा था. लुंड की मदहोश कर देने वाली महक उससे और उत्तेजित कर रही थी. वह झट्ट से उससे मुँह में भर लेना चाहती थी.

वीर : तुम्हे पता है में अभी सफर से आया हु. नहाया भी नहीं हु अभी.

सुमन : इसलिए तोह कह रही हु...! मुँह में डालिये. और में... में साफ़ कर दूंगी!

उसका बस इतना कहना था की वीर से भी अब और रहा नहीं गया. एक झटके में उसने सुमन के मुँह में अपना लुंड डाला और उसका सर्र पकड़ वह धक्के मारने लगा.

सुमन का मुँह जैसे एक शार्पनर की तरह थी. जिसमे वीर पेंसिल दाल उससे साफ़ कर रहा था. लिखाई नहीं, चुदाई के लिए रेडी कर रहा था.

अच्छी तरह से धेरर सारे धक्के मुँह में लगाने के बाद उसने उसके मुँह से लुंड निकाला और उतर के उसकी दोनों टाँगे पकड़ के चीयर के देखा. सुमन की छूट पानी बहा रही थी. पर गांड सूखी थी.

अपने लुंड को सुमन की गांड पर एडजस्ट कर वीर ने कुछ hi धक्को में उससे अंदर दाल दिया.

"ननननननननन~"

सुमन : M-Maaalikkkk!!!

वीर : रात में समय नहीं मिलेगा. आज में अकेले hi सोऊंगा. इसलिए...! तुम्हारा दोसे अभी देता हु.

*फाआजततततत* *फायततततततत*

और बस, सुमन की गांड की ठुकाई शुरू हो गयी.

वीर उसके कूल्हों पर चपेट मार मार के उन्हें लाल कर रहा था और आगे झुक वह उन् थानों को निचोड़ रहा था. सुमन बस सिसकिया ले ले के अपनी छूट के दाने को तातूने में लगी हुई थी.

थोड़ी देरर इसी तरह धक्के मारने के बाद, वीर का वीर्य सुमन की गांड में hi निकल गया.

*प्लॉप*

जब वीर ने अपना लुंड गांड से निकाला तोह बिना कोई समय गवाए hi सुमन ने उससे मुँह में भर लिया. हर्र बार उसकी ये हरकते वीर को हैरान करने में मजबूर कर देती थी.

रात हुई, और सोनाली, भूमिका भी डिनर के वक़्त वीर से मिली. सोनाली तोह मुँह फुलाये हुए थी.

पूरे फ़ूड ट्रक का काम उससे संभालना पद रहा था.

वीर जानता था की सोनाली को खुश करने के लिए उससे क्या करना है.

अपने कमरे में वापस आके वह लेता तोह खयालो में खो गया.

हर्र जगह टेंशन hi टेंशन. हर्र मोड़ पे खतरा था. कभी वह राहत की सास ले भी पायेगा या नहीं?

सोचते हुए उसका हाथ अपने होंठ पर चला गया. सुहाना!!!

उसने जो किया था उसके लिए. वह वीर कभी भी नहीं भूल सकता था. वीर वह सुहाना के होश आने तक रुकना चाहता था. पर वह जानता था वह समय की बर्बादी थी.

ऊपर से सुहाना से तुरंत नज़रे नहीं मिलाना चाहता था वह.

पर एक बात साफ़ हो चुकी थी अब. की चाहे कुछ भी हो जाए... वीर हमेशा सुहाना को प्रोटेक्ट करने वाला था.

वह गहरी नींद में जल्द hi चला गया और अभी रात के 1:15 hi बज रहे थे की सुमन अपने कमरे से बाहर निकली. अपने मालिक के संग नग्न होक सोने का आनंद hi कुछ और था.

हलाकि वीर ने उससे मन किया था. फिर भी वह खुद को रोक न पायी.

अभी वह बढ़ी hi थी, की उससे किसी की ऊपर आने की आहात सुनाई दी.

*छम्म* *छम्म*

पायल की खनक सुनते hi सुमन के कान खड़े हो गए और वह तुरंत hi अपने कमरे के दरवाज़े के पीछे छुप गयी.

'इतनी रात में-!? भला कौन हो सकता है? रागिनी जी!?'

पर वह गलत थी. वीर के कमरे के बाहर कड़ी हुई थी...

'श्वेता जी!?'

श्वेता इधर उधर देख एक गहरी सांस ली और वीर के कमरे के अंदर घुस गयी. हर्र बार की तरह, इस बार भी वीर के कमरे का दरवाज़ा खुला हुआ था.

लेकिन श्वेता ने अंदर घुसते hi उससे बंद कर दिया. सुमन कुछ देरर तक कड़ी रही उसके बाद अजीब सी मुस्कान लिए वो अपने कमरे के अंदर हो गयी.

यहाँ वीर को सोता पा के श्वेता आहिस्ता आहिस्ता उसके क़रीब आयी.

वीर के बगल से बैठ वह उससे निहार रही थी.

'कितना प्यारा लगता है मेरा बच्चा सोते हुए!'

सोचते हुए उसने वीर के माथे पर बड़े hi प्यार से हाथ फेर्रा. एक ासु की बूँद अपने आप आँखों से निकल आयी.

"नहीं हुई में नाराज़. सुन्न रहा है न तू? नहीं हुई में नाराज़. धुत्कार ले मुझे जितना दुत्कारना है. M-Mein जानती हु...! में जानती हु तेरे दिल में भी मेरे लिए कुछ न कुछ भावनाये है. है न? मेरा दिल कहता है...! और मुझे पूरा विस्वाश है की में सही हु."

वह वीर के संग लेटते हुए उससे अपनी ऑर्डर खींची.

"में हार नहीं मानूंगी. कान खोल के सुन्न ले... *स्निफ्फ* तेरा दिल कितना hi कठोर क्यों न हो जाए. M-Mein उसमे अपनी जगह बना के रहूंगी. *स्निफ्फ* हाँ!"

और वह रो पड़ी.

वीर के चेहरे को थाम, उससे जगह जगह चूम के अपने सीने से लगा ली. पुचकार पुचकार के वह उससे अपने सीने के अंदर समाने की कोशिश कर रही थी.

"मेरा बच्चा...!"

*पूछ* *पूछ*

"काश... काश तू मेरी कोख से पैदा हुआ होता. N-Nahi! ये में फिरसे क्यों अतीत लेके बैठ गयी? मेरी अपनी कोख से नहीं हुआ तोह क्या-!? में तुझे असली माँ से भी बढ़ के प्यार दूंगी मेरे बच्चे! तू देखना... "

*मुआअह*

"आज नहीं तोह कल... तेरे मुँह से माँ कहलवा के hi रहूंगी..."

वह वीर के चेहरे को अपने थानों के बीच चिपकायी उससे निहार रही थी जब वीर का मुँह अपने आप खुल के उसके एक थांन के निप्पल को अपने अंदर भर लिया.

"आआह्ह्ह्णण~"

हैरान हुए वह नीचे देखि. वीर गहरी नींद में था. उसकी बॉहे कस्सी हुई थी. क्या एक बुरा सपना?

श्वेता एक बार फिर गलत समझ बैठी.

"में ये कैसे भूल गयी... तुम्हे तोह एक माँ के दूध का सही एहसास भी न मिला मेरे बच्चे. न जाने कैसे तुमने वह साल गुज़ारे होंगे... सुमित्रा ने तुम्हे अपना दूध पिलाया था क्या? काश... काश में होती तब वह. काश इनमे दूध होता... मेरे बच्चे की प्यास को तृप्त करने के लिए...!"

और ासु छलकाते हुए वह इस बार पीछे नहीं हटी.

"अगर तुम्हे मेरे इन् व्यर्थ उरोजों से hi संतुष्टि मिलती है... तोह वही सही मेरे लाल. ले!!! ले और खुद को संतुष्ट कर ले मेरे बच्चे! पी ले इन्हे~"

शर्माते हुए उसने अपने ब्लाउज के सारे हुक्स बारी बारी खोले और उसके खरबूजे जैसे थांन हवा में आज़ाद हो गए.

अपने एक दूध को हाथ से पकड़ उसने निप्पल को वीर के मुँह की तरफ किया और जैसे hi उसके होंठो से लगाया,

एक झटके में वीर ने उसके निप्पल को अपने मुँह में भर जोरर से चूसना शुरू कर दिया.

"आआह्ह्ह्णण~"

श्वेता का अंग अंग हिल के रह गया. ये अनुभव!

और उसकी आँखों से आसुओ की धराये बहने लगी.

"में सही थी... में सही थी... मेरे बेटे को माँ के दूध की तलाश थी... M-Mein सही थी!! ओह्ह्ह मेरे बच्चे ~ *मुआअह* पी ले बेतु~ पी ले... जी भर के पी!! मेरा बच्चा! अहह माँ!!! में धन्य हो गयी आज मेरे लाल!!! *स्निफ्फ* "

वह खुद से बाते कर उससे अपने थान चुसवाने में लगी रही. उससे पूरे समय वह चूमती रही, बालो पर हाथ फर्टी रही. उससे यकीन हो चूका था की वह सही थी. वीर एक माँ के दूध के लिए तड़प रहा था. और मैं में एक संकल्प लिए वह वीर से hi चिपक के उससे अपना दूध चुस्वाति रही.

पर वह ये नहीं जानती थी...

की वीर की परेशानी कुछ और hi थी.

वह तोह नींद में उससे सुमन समझ के उसके दोष चूस रहा था. जो चिंता थी... वह तोह कुछ और hi थी.

और वो थी...

उस आदमी का अननोन टेक्स्ट.

वही आदमी जिसने वीर के रौंगटे खड़े कर दिए थे.

टेक्स्ट सिंपल था. पर रूह हिला देने वाला था.

"एक अंतिम मैसेज तुम्हारे लिए वीर. Don't तरय तो ट्रैक थिस नंबर. तुम्हे कुछ हासिल नहीं होगा. समय की बर्बादी होगी. एन्जॉय योर रमैनिंग डेज विथ योर फॅमिली. दो व्हाटएवर यू वांट...! ी जस्ट वांट तो तेल्ल यू ओने थिंग एंड that's...!

ी विल किल यू ात थे Crimson's फेस्टिवल"

.

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.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

नया अर्च शुरू हुआ है. ये अपडेट 5.5क वर्ड्स का था. एक दो उपदटेस के बाद विलेज अर्च अपनी स्पीड पकड़ लेगा. अभी बस एक ब्रीफ था की क्या कुछ हाल है घर के. नया एडवेंचर इनकमिंग hi है. तोह लाइक्स ठोकने का और रेवोस रखने का गाइस! :डिक्लेअर:


धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 111 ~ कनेक्टिंग थे डॉट्स

अब तक...

वही आदमी जिसने वीर के रौंगटे खड़े कर दिए थे.

टेक्स्ट सिंपल था. पर रूह हिला देने वाला था.

"एक अंतिम मैसेज तुम्हारे लिए वीर. Don't तरय तो ट्रैक थिस नंबर. तुम्हे कुछ हासिल नहीं होगा. समय की बर्बादी होगी. एन्जॉय योर रमैनिंग डेज विथ योर फॅमिली. दो व्हाटएवर यू वांट...! ी जस्ट वांट तो तेल्ल यू ओने थिंग संद that's...!

ी विल किल यू ात थे Crimson's फेस्टिवल"


अब आगे...

*हफ़* *हफ़* *हफ़*

"गोड्डामण आईटी सुहाना!!!! Don't यू दिए ों में!!"

वीर की सासे तेज़्ज़ थी. स्टीयरिंग और गियर्स पर उसके हाथ फटाफट चल रहे थे, और गाडी रफ़्तार पकड़ सड़क पर भाग रही थी. सुहाना पीछे के सीट पर खून से लथपत बेहोश लेती हुई थी.

'व्हाट थे हेलल इस थिस पारी???'

[M-Master! I-I... M-Mujhe sach me nahi pata abhi abhi kya hua. It's not possible. H-How can it be? Uske paas system kese ho sakta hai?]

'यही तोह में तुमसे पूछ रहा हु पारी!!! तुमने कहा था की संसार का कोई भी व्यक्ति ये पता नहीं लगा सकता की तुम मेरे अंदर हो. थें व्हाट थे फ़क वास् तहत-!?'

वह जोरर से चिल्लाया. क्लेअर्ल्य, वह पारी पर गुस्सा था. पारी ने उस से झूठ बोलै? क्यों?

[M-Master-! I-I... ]

'तेल्ल में!!!!!'

[Woh meri dusri personality hogi Master. Trust me Master I-]

'शट थे फ़क उप पारी!!! शट उप!!!'

[Ahh!! M-Master!!! I really-]

'जस्ट शट उप! एक अनजान आदमी आता है और कठपुतली की तरह हमे नचाते हुए हमारे hi मेंबर को यु घायल करके आराम से निकल जाता है.'

[Th-That's--]

'और तुम्हे कुछ पता भी नहीं है. और जो पता है वह गलत है. व्हाट ा फूकिंग ग्रेट एन्ड आईटी इस तो आवर टूर.'

उसके जोरर से चिल्लाने पर एक ख़ामोशी छा गयी. और कुछ देरर बाद पारी की बोहत hi धीमी सी रुवासी आवाज़ उसके मैं में गूंजी.

[I'm sorry Master! I'm so sorry! I was a failure! Mujhe aapko aur pehle inform kar dena chahiye tha. I wasn't good enough. I'm sorry.]

और इस से पहले की वीर कुछ कह पाटा,

[I'm sorry Master~]

*डिंग*

[System has entered into the sleep mode.]

पारी स्लीप मोड में चली गयी.

'पारी ी...!'

वीर कुछ कह न पाया. सुहाना को फुर्ती में हॉस्पिटल पहुचाते हुए उसने साड़ी डिटेल्स फइलल इन की. दिव्या भी कुछ देरर में hi निक और बाकियो के संग पहुची. उसके चेहरे का रंग उदा हुआ था.

वीर के पास भागते हुए आके उसने उससे थामा,

दिव्या : K-Kya हुआए?? वीएरर??? हाउ इस शी???

वीर : ट्रीटमेंट चल रहा है!

दिव्या चिंता में आके वही हाथो में सर्र रख बैठ गयी.

तोह वही वीर अपने रवैय्ये को लेकर निराश था. पारी के साथ उससे ऐसा बेहवे नहीं करना चाहिए था. उसने तोह हमेशा से hi उसका भला चाहा है.

जैसे hi कुछ घंटो के बाद डॉक्टर से ये पता चला की सुहाना क्रिटिकल सिचुएशन से बाहर है. वीर के फ़ोन पर तभी वह टेक्स्ट आ गया. और उससे देखते hi, उसकी चिंताए और बढ़ गयी.

अब यहाँ रुकना ठीक नहीं था. सुहाना को अंतिम बार दूर से देख वह वह से निकलने लगा. सुबह हो hi चुकी थी. बाकी समय वह एयरपोर्ट पर hi गुज़ार सकता था.

दिव्या : तुम...! तुम जा रहे हो? अभी से? सुहाना से नहीं मिलोगे? हाउ कैन यू-!?

वीर : नहीं! मेरा काम यहाँ ख़तम है.

दिव्या : सुहाना को ऐसे चोरर के जा रहे हो वीर?

वीर : ी...

दिव्या : तुम ऐसा कैसे कर सकते हो?

वीर : शी विल बे फाइन! गलती मेरी है में उन्हें सेफ नहीं रख सका. ी don't वांट हेर तो सी में फर्स्ट. चलता हु! गुड लक विथ योर इन्वेस्टीगेशन!

और वह अपना बैग उठा के वह से निकल गया.

"वीईईईएररररर!!!"

दिव्या हॉस्पिटल के गेट तक आके उससे कई बार पुकारी, पर वीर न रुका.

और देखते hi देखते वह उसकी नज़रो से ओझल हो गया.

'विल वे मीट अगेन? वीर?'

***

उसके बाद से hi, वीर और पारी के बीच पूरी फ्लाइट भर कोई भी बात नहीं हुई.

जब वीर इंडिया पहुचा तब hi पारी रेअक्टिवाते हुई और वीर ने फ़ौरन hi अपनी माफ़ी रख दी.

"I'm सो सॉरी पारी!! M-Mein..."

[No! I'm sorry master! Galti meri thi. Mujhe aur attentive rehna chahiye tha. Lekin mein-]

'नहीं पारी! तुमसे जितना हुआ तुमने अपना बेस्ट दिया. और वैसे भी तुम मेरे अंदर हो. बाहर की साड़ी चीज़ो पर कण्ट्रोल रखना मेरे हाथो में है. एंड ी स्टिल-'

[It's... It's okay master! Please don't be sad. Chorriye woh sab. Ab hume uss unknown par focus karna hai.]

'येह!!!'

पारी से दुबारा सलाह होने के बाद, वीर और उसके बीच अब रिश्ता और भी मज़बूत हो चूका था. जो की दोनों के लिए hi अच्छा था.

***

पर अल्फा के स्ट्रांगर होने के बाद, मामला थोड़ा बिगड़ रहा था.

"दमन आईटी! दमन आईटी! दमन आईटी!!!!!!"

*बायंममममम*

वीर ने जोरर से अपना हाथ दिवार पर दे मारा. पूरी दिवार विबरते हो उठी.

"थे फूकिंग टाइमिंग-"

वह बेहद गुस्से में था. अपने सर्र को हाथो में लेके वह वही ज़मीन पर बैठ गया.

'P-Pari!! में सिर्फ एक khush-haal ज़िन्दगी जीना चाहता था. और देखो कहा आ गया में?'

[Master!]

'सुहाना वह घायल है. मिस करा अपनी उन्स्तब्ले कंडीशन में है, मिस सोनिआ को कुछ नहीं पता है, भाभी और बाकी सभी खतरे से अनजान है, प्रांजल ज़रूर कुछ पीठ पीछे कर रहा है, निधि ma'am और जूही उस रजत के लिए फिरसे रेडी नहीं है, निहारिका... शी मिगहत बे प्लॉटिंग समथिंग तू. और अब ये अननोन पर्सन..!'

बात सच थी. आखिर कहा कहा ध्यान दे वह?

[One at a time master. One at a time. Ek ek karke hum seedhiya chadhte hai. Theek hai? Agar uss unknown aadmi ne hume abhi freedom dii hai. Then yahi time hai ki hum jald se jald yaha ki problems solve kare. Let's start with Rajat. Usse handle karna hamare liye asaan hi hoga.]

'येह! थैंक यू पारी!'

[Don't mention it master~❤️]

वह अभी उठ hi रहा था जब अचानक उसके बगल से आके कोई वही ज़मीन पर बैठ गया.

'हम्म?'

उसके बगल से भूमिका बैठी हुई थी. कल रात में ठीक से बात भी नहीं हो पायी थी उस से वीर की.

भूमिका (स्माइल्स) : H-Hey!

उसने धीरे से कहा.

वीर : *नॉड्स*

भूमिका : मुझे लगा की तुम परेशां हो इसलिए में-

वीर : I'm फाइन!

भूमिका नज़रे चुरा चुरा के वीर को देख रही थी. उसकी ज़्यादा हिम्मत नहीं हुई वीर को देखने की और उस से डायरेक्टली बात करने की.

भूमिका : हमारे बीच...!

वीर : !??

भूमिका (सर्र झुकाते हुए) : हमारे बीच कभी ढंग से बातें hi नहीं हुई. है न!?

वीर (लम्बी सास लेते हुए) : कुछ लम्हे बने थे. मेने कोशिशे की थी. आपने pehchaan'ne से hi इंकार कर दिया...!

भूमिका : W-Woh-

वीर के एक एक शब्द सीधे भूमिका के दिल में छुरी की तरह जा के घुप गए. शब्द उसके गले में hi अटक के रह गए. वीर ने उससे वह पल याद दिला दिया जब वह होटल में वीर को pehchaan'ne तक से पीछे हट गयी थी. और इसके लिए ग्लानि तोह उसमे अभी भी कूट कूटकर भरी हुई थी. वीर के बोल जैसे ज़ख्म पर नमक छिड़कने का काम कर गए.

वीर : अब जब थोड़ी फुर्सत मिले, तोह ये सवाल खुद से करियेगा.

इस से पहले की भूमिका कुछ कह पाती,

"वीईईइरररररर!?? नाश्ता लग गया है. आ जाओ! भूमिका तुम भी!!!"

अंदर हॉल से रागिनी की आवाज़ ने उनका ध्यान खींच लिया.

वीर अगले hi शान उठा और बिना कुछ कहे या पीछे मुड़े वह भूमिका को वही चोरर वह से अंदर चल दिया.

भूमिका की आँखों में ासु पनप उठे. अगर वीर एक दो वाक्य और दिल को घायल करने वाले कहता तोह बेशक उन् आँखों में से ासु छलक उठाते.

डाइनिंग टेबल पर अपनी सीट पर विराजमान होते हुए उसने नाश्ता शुरू किया. पल पल रागिनी अंदर से बाहर होती और उससे अपनी क़ातिलाना नज़रो से देखती.

वीर (सोनाली से) : तुम्हारे लिए मेने कुछ सोचा है.

सोनाली : हम्म? क्या?

वीर : समय आने पर पता लग जाएगा.

सोनाली : एक और फ़ूड ट्रक?

वीर (स्माइल्स) : नहीं!

सोनाली : तोह?

वीर : मुझे समय दो थोड़ा. जल्द hi पता लग जाएगा. बिज़नेस में कोई दिक्कत तोह नहीं जा रही?

सोनाली : जा रही है न.

वीर : क्या हुआ?

सोनाली : यही समझ नहीं आता की में इस झमेले में क्यों फास्सी हुई हु.

वीर : वेल...

वीर के कुछ कहने से पहले hi सुमन ने सोनाली की प्लेट में एक पराठा रखा और साथ hi साथ उसके सर्र पर एक तपली भी दे मारी,

*बैंक*

सोनाली : माआआ!!????

सुमन : कही भी रहा जाता है तोह काम करना पड़ता है. क्या तुम अब मुफ्त में ऐशो आराम की ज़िन्दगी जीना चाहती हो? मेने तुम्हे ये सिखाया है? वीर जी ने तुम पे इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी सौपी है भरोसा कर के. उनका भरोसा मत तोडना. और लगन से काम करो. तुम्हे तोह खुश होना चाहिए की-

सोनाली : माँ तुम हमेशा ऐसा hi करती हो. हमेशा उसका पक्ष लेती हो. जब देखो तब-

सुमन : हाँ तोह क्यों न लू पक्ष? गांव का समय याद नहीं क्या? कैसे जीते थे हम हर्र रोज़? बोल! आज तू यहाँ चेन्न से बैठ के इस तरह शाही भोज कर पा रही है तोह वह किसकी बदौलत है? हाँ? लुंगी में पक्ष वीर जी का. और तू भी समझ जा इस बात को.

सोनाली (खुसपुसाते हुए) : अच्छे से जानती हु क्यों पक्ष लेती हो उसका.

बोलै तोह बड़ी hi धीमी आवाज़ में था सोनाली में. पर सुमन चुकी काफी नज़दीक कड़ी थी, उसने सब सुन्न लिया और पलट के सोनाली को उसने अपनी आँखें दिखाई. अंततः, सोनाली खीजते हुए शांत होक बैठ गयी. तोह वही सुमन का पूरा ध्यान वीर पर केंद्रित हो गया.

सुमन : एक पराठा और लीजिये न!

वीर : नहीं! हो गया मेरा!

सुमन (धीरे से) : लीजिये न मालिक! सेहत का ध्यान रखिये. अच्छे से नाश्ता करिये.

वीर : पेट आलरेडी भर गया है.

सुमन : एक और बस! मेरे लिए!?

वीर (शिघ्स) : रख दो!

सुमन (स्माइल्स) : में पानी लाती हु.

वह गुनगुना के अंदर चली गयी तोह वही रागिनी अंदर से बाहर आयी और आभा और सोनाली को सब्ज़ी परोसने लगी.

हर्र बार वह वीर को देखने से नहीं चूकती थी. उन्हें सर्वे करने के बाद जब उसने देखा की श्वेता और सुमन दोनों hi अंदर थी तो वह मौका देखा वीर के नज़दीक आयी,

रागिनी : M-Mein... में चाह रही थी की हम कल चले कही?

वीर (धीरे से) : किधर?

रागिनी : कही भी. जगा तुम ले जाना चाहो.

वीर : हाउ अबाउट बीच?

रागिनी (स्माइल्स) : अहह! वंडरफुल! मुझे कई महीने हो गए वह गए. I'll... I'll बे रेडी! कल शाम को. Okay?

वीर के हाथ को थाम हलके से दबा के वह मुस्कान लिए वह से अंदर हो गयी. कल की शाम, रागिनी के नाम पहले hi बूकेड हो चुकी थी.

जो आखिरी सदस्य था घर का, आखिर कार वह भी बाहर आया.

श्वेता एक प्लेट में कुछ मिठाईया रख के किचन से बाहर आयी. सभी को एक एक पीेछे देने के बाद वह आखिर में वीर के पास आयी. और झुक के उसने एक मिठाई वीर की प्लेट में राखी.

परन्तु उसने अपना पल्लू नहीं ओढ़ा हुआ था. ये मात्र एक इत्तेफ़ाक़ था. और इत्तेफ़ाक़ से hi, वीर की निगाहें उन् दो रसीले ामो पर जाके ठहर गयी.

जैसे hi श्वेता ने अपनी निगाहें ऊपर करि, वीर उसके उरोजों को घूरते हुए पकड़ा गया.

वीर ने श्वेता को देखा, उससे थोड़ा अजीब लग रहा था. गलती आखिर उसकी थी. पर और भी अजीब तब लगा जब श्वेता अगले hi पल मुस्कुराने लगी.

'हँ!?'

वह अजीब सी मुस्कान दिए, अपने थान के ऊपर हाथ रख उससे प्यार से सेहलायी और वह से निकल गयी.

'!!!??'

वीर की कुछ भी पल्ले न पड़ा की ये अभी अभी क्या हुआ था.

श्वेता अंदर किचन में आके अभी भी अपने स्तन पर हाथ फेरर रही थी धीरे धीरे. जैसे मानो उन्हें किसी चीज़ के लिए तैयार कर रही हो. उसके चेहरे पर एक संतुष्टि भरी मुस्कराहट थी.

अगर वीर थोड़ी देरर और यहाँ रुका तोह बेशक टेंशन और कन्फूसिओं से उसका सर्र खाप जाने वाला था.

वह नाश्ता करते hi घर से निकल गया. और रास्ते में hi उसकी बातें पारी से होती रही,

'पारी! फुल स्टेटस!'

[Right away Master!]

*डिंग*










वीर ने एक नज़र अपने स्टैट्स पर डाली. और हामी भरी. इतने पॉइंट्स होने के बाद भी उससे अभी भी ये काम मालुम पद रहे थे.

उससे अब अपने स्टैट्स बढ़ाने की भी ज़रुरत थी और साथ hi अब एक एडवांस्ड लेवल मार्टिकल आर्ट्स स्किल की भी.

लेकिन, उसके लिए भारी मात्रा में पॉइंट्स की आवश्यकता थी. फिलहाल, वीर ने लालच न दिखाते हुए अपने स्टैट्स को जो का त्यों hi रहने दिया. थोड़े और पॉइंट्स जब इखट्टा होंगे तब वह इन्हे बढ़ा लेगा. ये सोच वह चल दिया बलहार के हिडौट की ऑर्डर,

पहले hi वीर को उसका मैसेज आ चूका था और बलहार मिलना चाह रहा था.

अंदर आते hi बलहार के राइट हैंड आदमी अथवा गैंग के लोगो ने एक झलक में hi वीर को पहचान लिया और उससे अंदर आने के लिए रास्ता दिया. सभी जानते थे ये जवान लड़के की अहमियत क्या थी.

एक अच्छी सी लक्ज़री सीट पर वीर को बैठाया गया. और वह खड़े लोग उससे चाय कॉफ़ी के लिए पूछने लगे.

बलहार भी फ़ौरन hi हाज़िर हो गया और उसके सामने बैठ उसने अपने लोगो को बाहर जाने के लिए इशारा कर दिया.

वीर : ी गेस कुछ हुआ है मेरी gerr-maujoodagi में. ऍम ी राइट!?

बलहार : जी बॉस! आपका अंदाजा सही था. जैसा आप कह के गए थे. मेरे आदमी उन् जगहों पर पूरी निगरानी रखे हुए थे.

वीर : हम्म! तोह? क्या हुआ फिर...!?

बलहार : दरअसल बात ये है की...

उसने साड़ी बात समझायी तोह वीर के माथे पर शिकन आ गयी.

वीर : ठीक है! में देखता हु! तुम खबर बस देते रहना. और कुछ फिलहाल करने की ज़रुरत नहीं. अगर मुझे ज़रुरत होगी तोह में खुद बताऊंगा.

बलहार : J-Jii!

वीर उठा और जाने के लिए हुआ. पीछे बलहार उससे अजीब नज़रो से घूर रहा था.

उसके मैं में अलग अलग विचार आ रहे थे.

'इससे बॉस maan'ne की क्या ज़रुरत है मुझे? स्लोगन मर्डर चूका है. मुंबई का डॉन में हु. फिर भी एक बच्चे के नीचे काम क्यों कर रहा हु में? है तोह ये एक 21-22 साल का लड़का hi. क्या बिगाड़ लेगा मेरा? इतनी साड़ी गैंग्स है मेरे पास. साले को एक बार में भून देंगे. करोडो का कारोबार है मेरा. मेरे नीचे बड़े से बड़े आदमी भी काम करते है. रोज़ मेरा ओहदा बढ़ता जा रहा है. सिर्फ हाथ hi तोह मोड़ा था इसने. फिर इस लड़के के पीछे क्यों-'

वीर : ओह्ह बी थे वे~

बलहार (झेपते हुए) : H-Huhh?

वीर आहिस्ता से उसके कान के पास आया और धीमी पर बेहद बुलंद आवाज़ में उसके बोल बलहार के कानो में गूँज गए, जिससे सुनते hi बलहार के परर कमज़ोर पड़ गए.

"बिट्रेयल के बारे में सोचना भी मत! अगली बार हाथ मरोड़ूँगा नहीं. सीधा उखाड़ के शरीर से अलग कर दूंगा."

और इतना बोल, वह वह से निकल गया.

बलहार का चेहरा देखने लायक था. उसकी साड़ी हेकड़ी उतर चुकी थी. जो थोड़े बोहत भी उसके मैं में वीर को देगा देने के विचार आये थे, उनकी जगह अब वीर को बाप maan'ne के विचार पैदा हो चुके थे.

उससे समझ आ चूका था की भले hi ये लड़का 21-22 साल का hi था. पर इसमें कुछ ऐसी बात थी जो उससे गलती करने से बार बार रोक देती थी. उसके अंदर एक खतरे की घंटी बजा देती थी. की अगर वह इस लड़के के खिलाफ गया, तोह उसका सब कुछ ख़तम हो जायेगा.

*गल्प*

चेहरे पर से पसीना पॉच, बलहार बाहर निकल अपने कामो में लग गया.

***

मुंबई के hi एक क्षेत्र में एक मध्यम साइज्ड घर में तीन लोग आपस में बहस करने में लगे हुए थे.

ये और कोई नहीं, भावना तेजल और पूर्वी hi थी.

"इतनी बड़ी बात छिपाई आपने मुझसे? क्यूँउउउ? क्यों किया आपने ऐसा???"

आवाज़ थी तेजल की जो भावना पर भड़क रही थी.

उसकी आँखों में नमी भी थी. उसकी माँ ऐसा कैसे कर सकती थी भला?

भावना : M-Mein-

तेज : आप चाहती क्या है माँ?? क्या चाहती है आप? बता दीजिये आज मुझे!

भावना : मेरी बात सुनो तेज-

तेज : इतने दिनों से में पागलो की तरह dar-dar भटक के जानकारी बटोरने की कोशिश कर रही हु की कही से मेरे भाई के बारे में मुझे कुछ पता चल जाए और आप इतनी बड़ी इन्फो हाथ में रखे हुए मुझे बस देख रही थी? एक भी बार आपके मैं में ये नहीं आया की में अपनी बेटी को काम से काम बता तोह दू ये. आप जानती भी है मेरा हाल? किस हालत से गुज़र रही हु में अपने भाई को ढूंढ़ने के लिए?

भावना : सब समझती हु तेज! में सब समझती हु मेरी बच्ची! और वह तुम्हारा भाई है पर मेरे लिए तोह मेरा बीटा है. तुम समझती क्यों नहीं की-

तेज : बस!!! बोहत हो गया. दीजिये मुझे!! आपसे नहीं हो पायेगा! में खुद hi करुँगी.

भावना : N-Nahi! मुझे करने दो में-

तेज : इतने दिनों से तोह आपसे हुआ नहीं माँ. अब क्या करोगी आप?

पूर्वी जो अब तक शांत थी, आखिर कार उससे माँ बेटी के झगडे के बीच में आना hi पड़ा.

पूर्वी : तुम दोनों! ये क्या लगा रखा है? और भावना तुम!!! तुम ऐसा कैसे कर सकती हो? अपनी hi बेटी से बाते छिपाओगी तोह ऐसे कैसे चलेगा हाँ? यही तोह परिवार है तुम्हारा! इतनी बड़ी बात छिपाने की क्या ज़रुरत थी? हम दोनों hi देख रहे है की कैसे बेचारी तेज रोज़ रोज़ बाहर निकल विक्रम के लिए जानकारी ढूंढने जाती है. पर बेचारी लौटती खाली हाथ hi है. और तुम ऐसे में...!

भावना : ऐसा नहीं है पूर्वी! अगर मेने ये किया है तोह कुछ सोच के hi किया होगा न? तुम hi बताओ, क्या में कुछ भी किसी को कष्ट देने के लिए जान बूझ के करुँगी?

पूर्वी (शिघ्स) : भावना! तुम्हे अब समझना होगा की तुम्हारी बेटी अब बच्ची नहीं रही. अब अपने बच्चो से बातें छिपाना मतलब उन् पर भरोसा न करना जैसा है.

तेज : एक्साक्ट्ली!!!! मासी! मेरी बातो से तोह इन्हे फ़र्क़ तक नहीं पड़ता है. आप hi समझाइये प्लीज!

पूर्वी उठ के भावना के बगल से आके बैठी जो सोफे पर विराजमान थी और उसके कंधे पर हाथ रख उसने भावना को हौसला दिया.

पूर्वी : अब ज़्यादा मत सोचो और करो. वर्ण देररि न हो जाए भावना.

भावना : P-Par... अगर कुछ हुआ तोह!? पूर्वी मेरे हाथो में अब वह बल नहीं रहा. तुम जानती hi हो... वह सत्ता, वह शासन... तुम सब जानती हो क्या हुआ था. अगर कुछ हो गया तोह? में कभी अपने आप को माफ़ नहीं कर पाऊँगी पूर्वी! में उसपे आंच भी नहीं आने दे सकती.

इस बार अपनी माँ की बात तेज बड़ी hi ध्यान से सुन्न रही थी. ये क्या बातें हो रही थी?

तेज : केसा बल? किसी सत्ता? आप क्या कह रही है?

भावना : हँ!!? K-Kuch नहीं!

तेज : आप फिरसे कुछ छिपा रही है न? देखा! मासी!? देखा न आपने? ये फिरसे मुझसे कुछ छिपा रही है.

पूर्वी : अब तुम करती हो या नहीं भावना?

भावना : हम्म! M-Mein... करती हु!

कहते हुए उसने अपनी मुट्ठी खोल एक पर्ची निकाली और उससे खोला.

साड़ी बहस इसी के लिए hi तोह हो रही थी. उस पर्ची में एक hi चीज़ थी...

और वह था...

वीर का फ़ोन नंबर!

वही नंबर जो वीर ने खुद भावना को दिया था जब वह ेगीपत से लौट रहा था.

और अब तक, भावना उससे संभाल के राखी हुई थी. रोज़ रोज़ तेज बाहर निकल के किसी न किसी तरीके से वीर के बारे में इन्फो निकालने की कोशिश करती थी. पर बेचारी हर्र बार नाकाम हो जाती थी.

और क्यों न होती? मुंबई इतना बड़ा शहर था. वीर को वह ढूंढ़ना खेत में सुई ढूंढ़ने जैसा था. ऊपर से बेचारी को नाम भी गलत पता था. विक्रम तोह नाम hi नहीं था वीर का. साथ hi जो फोटो तेज के पास थी, वह एक साइड व्यू फोटो थी. तोह वीर को pehchaan'na और भी मुश्किल था उसमे.

लेकिन तेज ने एक भी दिन जाया नहीं जाने दिया. हर्र रोज़ वह निकलती, अपने भाई को ढूंढ़ने के लिए. कॉलेजेस में जाती, जितनी इन्फो मिलती उतनी पा के वापस आ जाती.

और भावना ये अब तक छिपाए हुए थी की उसके पास वीर का नंबर मौजूद था. उसका जी घबरा रहा था की अगर वीर से मुलाक़ात हुई तोह क्या होगा? एक डर था, जो सिर्फ वही जानती थी. और पूर्वी. तेजल तोह कई साड़ी बातो से अनिभिज्ञ थी.

और इतनी म्हणत करने के बाद उससे पता चला की उसकी अपनी hi माँ पहले से hi जानकारी दबाये बैठी हुई थी.

ज़ाहिर है की वह बोहत ज़्यादा गुस्सा थी. और अब बहस हो रही थी वीर को कॉल लगाने की.

पूर्वी के हौसला देने के बाद आखिर कार भावना ने मैं बना hi लिया और उसने अपना फ़ोन उठा के उस नंबर पर कॉल लगाया,

तेज : लाउडस्पीकर पर रखियेगा!

भावना : हम्म!

वह मौजूद सभी के दिल की धड़कने तेज़्ज़ हो गयी.

तेज अपने बिछड़े भाई की आवाज़ sunn'ne वाली थी. तोह वही भावना अपने बेटे की. और पूर्वी पहली बार वीर की आवाज़ से रूबरू होने वाली थी.

*रिंग* *रिंग*

*रिंग* *रिंग*

घंटी गयी और कुछ रिंग्स के बाद hi,

"Hello?"

एक आवाज़ आयी. जिससे सुन्न भावना का दिल जोरर से धड़क उठा. आवाज़ वही थी. वही शामे आवाज़. नंबर उसी का था मतलब.

तेज का खुद का मुँह खुला हुआ था.

भावना के होंठ thar-thara रहे थे. बेचारी के मुँह से शब्द hi नहीं निकल पाए.

"Hello?"

पुनः आवाज़ आते hi पूर्वी ने भावना के हाथो से फ़ोन छिनाय और खुद बात करना शुरू की,

पूर्वी : H-Hello!?

"जी कहिये! आप कौन?"

भावना और तेजल दोनों की hi हिम्मत नहीं हो रही थी अब बात करने की. तेजल तोह हज़ारो बातें कहना चाहती थी उस से. पर अब जब मौका आया तोह पता नहीं क्यों, उसकी हिम्मत नहीं हुई. बात को शुरू कैसे करे, उसकी अब कुछ समझ में नहीं आया. शायद ये सब कुछ एकदम से ज़्यादा hi हो गया था उसके लिए.

पूर्वी : क्या में विक्रम से बात कर रही हु?

"हम्म!? ओह्ह! येह!! जी हाँ! आप विक्रम से hi बात कर रही है. कहिये!"

पूर्वी : B-Beta में... एहम! मुझे आपसे कुछ ज़रूरी काम है.

"हम्म? पर आप है कौन?"

पूर्वी : बस यु समझ लो की में आपकी... आपकी कोई अपनी hi हु.

"और में कैसे मान लू?"

पूर्वी : ट्रस्ट में बीटा! में आपको जानती हु. K-Kya आप मुझसे कल मिल सकते हो?

"वेल! एक्चुअली नहीं! कल में कही बिजी रहूँगा."

पूर्वी : T-Toh परसो? परसो ठीक रहेगा?

"फाइन! परसो! कब और कहा?"

पूर्वी : परसो क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स होटल में. शाम को ठीक रहेगा?

"Okay! तहत साउंड्स फाइन."

पूर्वी (स्माइल्स) : G-Good!

"और में आपको पहचानूंगा कैसे?"

पूर्वी : Don't वोर्री! में तुम्हे कॉल कर दूंगी. पर नंबर डिफरेंट रहेगा. ये नहीं! में बता दूंगी में कहा पर बैठी होउंगी. Okay?

"ऑलराइट!"

पूर्वी : Th-Thank यू! विक्रम! I'll सी यू डे आफ्टर टुमारो! Bye!

"जी!"

*कॉल एंड्स*

कॉल कट होते hi पूर्वी ने एक लम्बी सास ली. उसकी खुद की धड़कने पूरे वार्तालाप के दौरान तेज़्ज़ थी.

भावना : थैंक गॉड तुमने उससे कुछ नहीं बताया अभी.

पूर्वी : में जानती हु सब. ऑफ़ कोर्स में उससे अभी से कुछ नहीं बताउंगी!

तेज : क्यूँउउ? क्यों नहीं बताया? अरे आपको कहना चाहिए था न की उसकी सगी माँ और बहिन यहाँ पर है. आप उसकी मासी हो. क्यों नहीं कहा आपने? हम अभी के अभी मिल सकते थे. क्यों किया आपने ऐसा?

पूर्वी : क्युकी तुम वह बातें नहीं जानती जो हम जानते है तेज.

तेज : तोह बताइये न मुझे!!!!

पूर्वी (शिघ्स) : इतना आसान नहीं है. अन्य्वयस! वह एग्री हो गया है. अगर परसो कुछ नहीं हुआ, इसका मतलब हम आगे प्रोसीड कर सकते है.

भावना : हम्म! और पूर्वी-

पूर्वी (स्माइल्स) : पता है मुझे! उस से मिलने सिर्फ में जाउंगी.

भावना (स्माइल्स) : हम्म!!

तेज : व्हाआआतततततत? क्या मतलब? क्या मतलब सिर्फ आप जाओगी? और हम?

पूर्वी : तुम दोनों यही पर रहोगी!

तेज : पर क्यूँउउउउ????

पूर्वी : बाद में तुम्हे सब पता लग जाएगा. कुछ दिन का इंतज़ार करो.

तेज : A-Aap लोग... आप लोग बोहत बुरे हो.

पूर्वी (स्माइल्स) : अहह! तोह ये बात थी. तेज! तुम्हारे नाकाम होने का राज़ पता लग गया.

बोलते हुए पूर्वी ने मोबाइल की स्क्रीन जैसे hi सामने की, तोह स्क्रीन पर एक नाम लिखा हुआ था.

वीर का पूरा नाम!

त्रुइकॉलेर पर वीर का ओरिजिनल नाम hi रजिस्टर्ड था. पूर्वी ने जैसे hi वह दिखाया तोह सारा माजरा समझ में आ गया की क्यों तेजल वीर को धुंध नहीं पा रही थी.

तेज : V-Veer!!!!

भावना : वीर! कितना... प्यारा नाम है.

वह अपने खयालातों में घूम हो गयी.

'ज़रूर वीर की दादी जी ने hi ये नाम रखा होगा. आपकी अब भी याद आती है मुझे, माँ जी! काश आप अब भी हमारे बीच होती!'

पूर्वी : डीडे हो गया है फिर. परसो! में जा के उस से मिल के आउंगी. अगर सब कुछ सही रहा तोह... तोह हम सब मिलेंगे उस से फिर.

पूर्वी और भावना अपनी बातो में लग गयी.

पर इधर, तेज के मैं में कुछ और hi बातें घूम रही थी. कुछ और hi तरकीबे...

वह चुप चाप बस वह से उठी और अपने लैपटॉप में लग गयी.

कुछ मिनट्स के बाद hi उसकी लैपटॉप की स्क्रीन पर एक विंडो खुली हुई थी.

एक सोशल मीडिया की विंडो. जिसमे वीर की अधिकतर डिटेल्स मौजूद थी.

'क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कॉलेज हँ!? ी क्नोव व्हाट ी हैवे तो दो नाउ! सॉरी मासी! लेकिन में आपके रूल्स के अकॉर्डिंग नहीं चलने वाली.'

.

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस.

फुल स्टेटस को एडिट करने में बोहत समय लगता है गाइस. मुझे पिछले पूरे 15-16 उपदटेस को थोरोगःली देखना पड़ा ताकि पता लग सके की कहा कहा पॉइंट्स में अंतर आया है. कोण सी नई चीज़े उनलॉकेड हुई है. उसके बाद जाके मुझे एडिट करना पड़ता है. आईटी टैक्स ा लोट ऑफ़ टाइम. विलेज अर्च पेस पकड़ता जा रहा है. तैयार रहिएगा!

धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 112 ~ एक्सटर्नल अफेयर्स

अब तक...

वह चुप चाप बस वह से उठी और अपने लैपटॉप में लग गयी.

कुछ मिनट्स के बाद hi उसकी लैपटॉप की स्क्रीन पर एक विंडो खुली हुई थी.

एक सोशल मीडिया की विंडो. जिसमे वीर की अधिकतर डिटेल्स मौजूद थी.

'क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कॉलेज हँ!? ी क्नोव व्हाट ी हैवे तो दो नाउ! सॉरी मासी! लेकिन में आपके रूल्स के अकॉर्डिंग नहीं चलने वाली.'


अब आगे...



"तोह? कहा थे तुम इतने दिन? में तुम्हारे घर पे भी एक दिन गया था. भाभी जी ने बताया था की तुम लॉस वेगास में हो? रियली? घूमना था तोह एक बार पूछ तोह लेते मुझसे? मय्बे ी वोउल्ड हैवे जोइनेड यू!? या में कुछ और इंटरेस्टिंग प्लेसेस सुग्गेस्ट कर देता. सीरियसली तुम-"

आवाज़ थी कारन की, जो अपनी कार ड्राइव कर रहा था और उसके बगल से बैठा हुआ था वीर.

वीर : तुम जैसा सोच रहे हो वैसा कुछ भी नहीं है. बस काम से गया था.

कारन : ओह्ह रियली नाउ? केसा काम? वेट! तुम्हे लॉस वेगास में क्या काम पद गया?

वीर (शिघ्स) : मिस सुहाना के साथ था में. उन्हें काम था. और वह मुझे बिज़नेस रिलेटेड टूर पर लेके गयी थी. ताकि में बिज़नेस के बारे में और जान सकू. अब खुश?

वीर ने सुहाना के इन्जुरेड स्टेट की बात को छिपाते हुए कहा.

कारन : व्हाटट? मिस सुहाना? सोनिआ दी की बड़ी बहिन? हँ!!? W-Wait!! वीर!? अरे यू... अरे यू ईंटो ओल्डर गर्ल्स?

वीर : शट उप! कीप ड्राइविंग!

कारन : एहम! वेल, तुम कोई भी बात शेयर कर सकते हो, यू क्नोव. I'm गुड ात कीपिंग सीक्रेट्स एंड-

वीर : कीप ड्राइविंग!!!

कारन : उघ! फाइन! नहीं बताना तोह मत बताओ. अल्थौघ, कोई भी बिलीव नहीं करेगा की तुम मिस सुहाना के साथ बिज़नेस टूर पर गए थे. वह और तुम्हे लेके जाए? सवाल hi पैदा नहीं होता. गिवेन हेर पर्सनालिटी, शी won't इवन लेट-

वीर : कारन!!??

कारन : F-Fine...! फाइन! चला रहा हु. ी won't टॉक नाउ. वैसे!?

वीर : फिरसे!?

कारन : नहीं वह बात नहीं कर रहा में. में बस क्यूरियस था उस दिन को लेकर. ी मैं... यू क्नोव... तुमने उस स्टील इंडस्ट्रीज पर स्टॉक इन्वेस्टमेंट की. मेने तुम्हे रोका था पर बाद में शेयर्स के रेट उसी के सबसे ऊपर गए. कैसे!?

वीर (स्माइल्स) : जस्ट माय हुन्छ!?

कारन : ओह के ों! पहली hi बार में इतना अच्छा तुक्का नहीं लगता. तेल्ल में! तुम्हे कैसे पता चला था की वह कंपनी डूबेगी नहीं? यू सॉ आईटी किंग राइट?

वीर (स्माइल्स) : वेल! ये एक सीक्रेट है!

कारन (शिघ्स) : और जो तुम कभी नहीं बताओगे!

वीर (स्माइल्स) : एक्साक्ट्ली!

कारन : मुझे लगा hi था. खर्र! हेरे वे अरे!

गाडी से उतारते हुए दोनों एक बड़ी सी बिल्डिंग के अंदर प्रवेश किये.

कारन : तुम जो भी चाहते हो यहाँ सब हो जायेगा. Don't वोर्री! यहाँ सब मुझे अच्छे से जानते है. और तुम्हारा काम बोहत अच्छे से कर देंगे वह. इसकी गारंटी मेरी.

वीर : हम्म!

कारन ने वीर की मुलाक़ात एक आदमी से कराई. वीर जहा था सिर्फ वही नहीं रह सकता था ज़िन्दगी भर. उससे काम समय में जल्द से जल्द आगे बढ़ना था.

और पैसा, एक अहम् भूमिका निभाता है समाज में. ये बात वीर भली भाति जानता था.

शेफ ों व्हील्स के लिए उसने कुछ नए चंगेस किये थे. उससे और ऊपर उठाने के लिए, वीर ने टोटल 8 फ़ूड ट्रक्स का एक सेट उप तैयार किया था.

ये जगह जगह मुंबई में अपनी एक चैन चला के नाम बनाने के लिए था. उसके पास अभी करोडो रुपये थे. इन्वेस्टमेंट में उसने कोई कमी नहीं जाने दी.

फ़ूड सर्विंग के दौरान उसने छोटी से छोटी चीज़ो पर ध्यान दिया. शेफ ों व्हील्स के नाम से hi नैपकिन्स, प्लेट्स, स्पूंस हो या कुछ और, सभी में उसके फ़ूड ट्रक की ब्रांडिंग लोगो के साथ करि गयी.

और इन् सब के प्रोडक्शन के लिए hi कारन उससे यहाँ इस आदमी के पास लाया था. डील पक्की हो जाने के बाद दोनों hi वह से चल दिए. मनोरथ की तरफ से जो फ्लैट्स उससे मिले थे, वीर ने उन्हें भी रेंट पर दाल दिए थे. वह एक hi साथ अलग अलग जगह पर फोकस रखे हुए था. एअर्निंग्स जहा से जितनी भी आ सके अभी, वही बोहत था.

कारन : तोह!? इससे तुम आगे और बड़ा बनाना चाहते हो?

वीर : ऑफ़ कोर्स! एक बार ये एनफ पॉपुलर हो जाए तोह होटल के बारे में सोचा है. फंडिंग बोहत लगेगी.

कारन : येह! वैसे मुझे गईं सकते हो. ी कैन बे ान इन्वेस्टर तू.

वीर : हम्म? रियली?

कारन : ऑफ़ कोर्स! थोड़ा बोहत में इन्वेस्ट कर hi दूंगा. बूत... मेरे ख्याल से तुम्हे दी से बात करनी चाहिए. क्युकी वह तुम्हे ज़्यादा इन्वेस्टमेंट प्रोवाइड कर सकती है. शी कंट्रोल्स मच बिग्गेर डील्स थान में.

वीर : तोह क्या अभी बात हो सकती है?

कारन : सूरे! वैसे भी वह मुझसे कुछ दिन पहले कह रही थी.

वीर : क्या!?

कारन : शी टोल्ड में तहत... "वीर शुड लेट में क्नोव ऑलवेज वेयर he's गोइंग. हे शुड टेक्स्ट में एंड कॉल में."

वीर : एहम! वेल!! Let's जो! में खुद hi उनसे बात करता हु.

अभी वह दोनों जा hi रहे थे की वीर के फ़ोन पर काव्य का कॉल आ धमका,

वीर : बोलो काव्य!

काव्य : आप लौट आये!?? आप लौट आये और आपने बताया भी नहीं भैया?? मुझे अभी अभी भाभी से पता चला.

वीर : कल hi आया हु मेरी माँ! सास तोह लेने दे. वैसे तुम कहा हो?

काव्य : ऑब्वियस्ली कॉलेज में होउंगी न! पर वह सब चोरडिये. आप बताइये आप कहा है?

वीर : में फिलहाल काम से बा--

काव्य : वंडरफुल! तोह में और आरोही दी! ोये कृतिका? तू जल्दी लीव लेकर चल रही है क्या? चल न पगली! वीर भैया रहेंगे यार और क्या...! एक तोह फ्री का ठूसने मिल रहा है और नखरे कर रही हो. हाँ कुछ नहीं बोलेंगी आंटी. उन्हें बताएगा hi कौन? चल रही है न? आरोही दी भी है न यार! Okay! हाँ न बाबा! हम्म~ Hello? Hello?? हाँ भैया! में, आरोही दी, और कृतिका, हम तीनो hi यहाँ से निकल के क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स कैफ़े पर जा रहे है. और आप वही मिल रहे हो हमे. Okay!?

वीर : H-Hey! कववया!! W-Wait! काव्य मेने कहा की में बाहर--

काव्य : थैंक यू सो मच भैया! B-Bye मममुहाः~

*कॉल एंड्स*

काव्य ने वीर की बात सुने बिना hi अपनी बात पूरी रख के मीटिंग भी सेट कर ली. वीर बेचारा बस अपना फ़ोन hi देखता रह गया. कुछ कामो में लड़किया कितनी आगे हुआ करती थी.

वीर (स्माइल्स) : ये लड़की भी पूरी कार्टून है!

कारन : तोह? अब कहा चलना है?

वीर : क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स स्क्वायर लेलो!

कारन : हँ!? वह क्यों? वह क्या है?

वीर : सोनाली!

कारन : ओह्ह!

और बिना कुछ सवाल किये कारन ने गाडी घुमा के उस चौराहे पर लगा दी.

शेफ ों व्हील्स का एक शानदार रेड ट्रक वही चौराहे के पास एक जगह खड़ा हुआ था. बाहर कुछ 2-3 कस्टमर्स थे जो फ़ास्ट फ़ूड का लुत्फ़ ले रहे थे.

वीर जैसे hi कार से उतर फ़ूड ट्रक के पास पहुचा, अंदर से hi सोनाली ने उससे आते हुए देख लिया,

सोनाली : आइये! आइये! पधारिये! महाराज! आज कैसे याद आ गयी आपको अपनी इस गाडी की?? किसी ने खबर दी क्या की आपका एक बिज़नेस भी है? जिससे पूरा एक साधारण सी लड़की कष्ट उठा उठा के संभाल रही है?

कारन : Okay! शी लुक्स पिस्सेद!

वीर हलके से मुस्कुराया. वह जानता था सोनाली कुछ ऐसा hi रियेक्ट करने वाली थी.

वीर : एक काम है.

सोनाली : में बताती हु क्या होगा. एक और नया ट्रक! है न?

वीर (स्माइल्स) : टोटल 8 रहेंगे. इसको और बाकियो को इन्क्लुडे कर के!

सोनाली : क्या कहा? मेरे कान तोह नहीं बज्ज रहे न? ोये! क्या तुम लोगो ने भी वही सुना जो में सुन्न रही हु?

वह ट्रक में मौजूद काम कर रहे वाले अपने सहकर्मियों से बोली, उसका ये अंदाज़ वीर को पता नहीं क्यों बड़ा लुभा रहा था. यही एक लड़की थी जो उस से इस अंदाज़ में बात करती थी. और असल में कितना hi क्यों न वह वीर को बुरा भला कह ले. वीर को इस पर कभी गुस्सा आता hi नहीं था. क्युकी वह जानता था की अंदर से सोनाली के मैं में उसके प्रति कोई मेल नहीं था.

वह बस मुस्कुराते हुए उसकी हर्र अदाओ को देख रहा था.

सोनाली : देख रहे हो तुमलोग? ये जो खड़ा है तुम्हारे सामने इतना सज्ज धज के. हाँ हाँ यही लड़का. अरे यही है सारे ट्रको का मालिक. ये सब इसी की तरकीबे है. और मुझ जैसी जवान सुन्दर लड़की को देखो तोह किन कामो में लगाया हुआ है.

कारन (स्माइल्स) : ः~

पीछे खड़े वर्कर्स भी वीर को शर्मिंदगी से देखने लगे. वह ये बात कैसे भूल सकते थे की वीर hi फ़ूड ट्रक और शेफ ों व्हील्स का ओनर था.

वीर : ये क्या बात हुई!? में तोह तुम्हारे लिए खुशखबरी लेके आया था. और तुम हो की sunn'na hi नहीं चाहती.

सोनाली : में जानती हु क्या खुशखबरी होगी. न बाबा न! तुम जाओ यहाँ से. वैसे hi मेरे ऊपर इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी थोप के रखे हो. सुबह से शाम इसमें सर्र खपाओ, और फिर घर जा के माँ से दांत खाओ. नहीं नहीं! तुम अभी के अभी जाओ. मुझे कोई बात नहीं sunn'ni है. हर्र महीने की तरह इस महीने भी सारे कमाए पैसे की लम्बी पर्ची मिल जाएगी तुम्हे. अब जाओ! और मुझे अपना काम करने दो!

वीर बिना कुछ कहे ट्रक के अंदर आया और उसने इशारा किया, तोह अंदर मौजूद वर्कर्स उसकी बात फ़ौरन समझ के बाहर निकल गए.

वह आहिस्ता से चलते हुए सोनाली के क़रीब आया तोह वह फिर भड़क उठी,

सोनाली : मेने कहा न तुम जाओ. में काम कर रही हु और-

वीर : तुम्हे अब ये काम करने की ज़रुरत नहीं!

उसके इतना कहते hi सोनाली का मुँह बंद हो गया.

सोनाली : !!??

वीर (स्माइल्स) : मेने कहा की तुम्हे अब काम करने की ज़रुरत नहीं! तुम पढ़ना चाहती थी न? में तुम्हे इस काम से आज़ाद करता हु. निधि ma'am से बात करके तुम्हारे लिए में पढ़ाई का कुछ प्रबंध करता हु. अब से तुम्हे ये सब करने की कोई ज़रुरत नहीं!

वीर ने कह तोह दिया था. और सोनाली भी कब से यही चाहती थी. पर...

अब जब अचानक से उससे ये प्राप्त हुआ. बेचारी कुछ कह न पायी. अब कही न कही उससे इतने दिन इस काम में लगे होने से एक लगाव सा हो गया था. लोगो को अपने हाथो से बना कुछ खिला के उनके चेहरे पर जब वह ख़ुशी देखती थी, या जब कोई उसके पास आके बिज़नेस की तारीफ करता था, तोह सोनाली का दिल खुश हो जाता था.

भले hi बिज़नेस वीर का था. पर उससे ऐसा महसूस होता था की वह भी एक हिस्सा hi है इन् सब का.

लेकिन अब जब जो उससे चाहिए था वह उससे पेश किया गया तोह,

वह मौन पद गयी.

सोनाली: में...!

वीर : ??

सोनाली : हाहाहा~ मुझे समझ hi नहीं आ रहा की में क्या करू. में-

वीर ने आगे बढ़ उसके कंधे पर हाथ रखा,

वीर : चिंता मत करो. जो तुम चाहती थी. वह अब तुम्हारे सामने है. आगे बढ़ो और स्वीकार करो. बिज़नेस की चिंता चोरर दो. वर्कर्स काफी है.

सोनाली : फिर भी... क्या वह मेरे बजर्र सब..

वीर (स्माइल्स) : हम्म! टेंशन मत लो. सब सही हो जायेगा. तोह में पढ़ाई के लिए हाँ समझू न?

सोनाली : मुझे सच में कुछ समझ नहीं आ रहा. में पढ़ना चाहती हु. वाक़ई! P-Par...

वीर : तोह बस फिर! आज से तुम पढ़ोगी!

वह इतना बोल वह से पलटा की इतने में पीछे से सोनाली की बड़ी धीमी और कमज़ोर सी आवाज़ उसके कानो में पड़ी,

सोनाली : S-Suno...!

वीर : ??

सोनाली : T-Tum... तुम इतने बुरे भी नहीं हो.

वीर मुस्कुराया,

सोनाली : Th-Thank यू!

और बस एक हामी भर वह वह से रवाना हो गया. सोनाली का पथ डीडे हो चूका था.

कार में बैठे बैठे hi उसकी बाते पारी से भी होती जा रही थी.

[Master! Rajat se hi pehle deal karna better hoga.]

'ऐसा क्यों पारी? में ये दावे के साथ कह सकता हु की मेरा प्यारा आस्तीन का सांप भाई भी अभी कही न कही कोई साज़िश रच hi रहा होगा मेरे खिलाफ.'

[Hmm! See! Rajat ko ek baar deal karne se aap Nidhi ma'am ke liye saare potential dangers ko dur kar denge. Hume uss ghar me kisi khatre ke hone ki fiqr karne ki zaroorat nahi fir.]

'एंड!?'

[And I believe ki Pranjal ke saath deal karne ke baad bhi, koi aur bhi hamaare haath se chooth raha hai.]

'तुम्हारा मतलब है कोई उससे back-up दे रहा है?'

[Exactly Master! Mujhe nahi lagta uss ghochu ne hi sab kuch akele kiya hai. There's something else going on here too. I have this feeling. Something much bigger is lurking in the shadows. I bet woh kisi ke back up ki wajah se hi itna ucchal raha hai. And we have only one task. And that is-]

'तो डिस्ट्रॉय तहत बैक उप!!!!'

[YES!]

'ी सी!'

[Aur isliye hum uss se baad me deal karenge. Because he isn't alone. Let's start with the easiest one Master! Rajat is the best choice to launch our attack.]

'इनडीड! रजत से डील करना आसान होगा.'

[Also, uski abhi ke harqat ke baad aap usse kese jaane de sakte ho?]

'येह! सुमन को भी मुझे पनिशमेंट देनी है.'

[Aur aap Rajat ko diye apne 50 lakh kese bhul sakte ho?]

'ओह्ह! Don't वोर्री! वसूलना, मुझे बोहत अच्छे से आता है पारी!'

[Yes! So let's focus on Rajat first.]

'हम्म!'

कारन : H-Hey!

वीर : हाँ?

कारन : में कह रहा था की अब तोह काम ख़तम है न? सो? अब? तुम्हे घर ड्राप करना है या तुम दी से मिलोगे?

वीर : गाडी क्सक्सक्सक्सक्सक्स स्क्वायर लगा लो.

कारन : ेहः? वह तोह उलटी साइड है. वह क्यों?

वीर : काव्य का फ़ोन था. उसने कहा है की वह और आरोही दी मिलना चाहती है.

कारन : Okay! दूसरे शब्दों में, मेरा वह कोई काम नहीं है. है न? तोह में तुम्हे ड्राप कर के वह से निकल-

वीर : कृतिका भी आ रही है.

कारन : -निकलूंगा नहीं. मेने कहा की में ड्राप करके वह से निकलूंगा नहीं. यू हर्ड में!? जस्ट फॉर यू okay!?

वह बिना वीर से नज़रे मिलाये बोलै. और वीर उसकी ये हरकत पर मंद मंद मुस्कुराया.

जब दोनों उस कैफ़े में पहुचे, तोह कैफ़े के अंदर मौजूद लोग सब उन्ही को घूरने में लगे हुए थे.

एक तोह कारन की लिमिटेड एडिशन की मेरसेदेज़, ऊपर से दोनों के हाई क्लास कपडे. कैफ़े में मौजूद अधिकतर कपल्स की नज़रे वीर और कारन पर hi तिकी हुई थी.

और उन्ही में से एक टेबल के इर्द गिर्द बैठी हुई थी काव्य, आरोही और कृतिका जो वही से उन्हें हाथ हिलाते हुए बुला रही थी.

कारन की नज़रे एक पल में hi कृतिका पर जा कर तिकी और उससे देखते hi एक झुरझुरी सी उसके शरीर में दौड़ गयी. यही हाल कृतिका का भी था.

वीर से तोह वह थी hi अत्त्रक्टेड. पर जैसे वह जानती थी की वीर के साथ उसका काटा भिड़ना मुश्किल था. जिस कारण से उसका रुझान धीरे धीरे कारन की ऑर्डर होना शुरू हुआ.

और अब कारन उसकी नज़रो में एक आइडियल लड़को में से एक बन्न चूका था.

कई बार तोह वह खुद की किस्मत पर hi हैरान रह जाती थी. कारन जैसा लड़का, उस से बात करने के लिए आतुर हो रहा था. क्या hi कहे इस बारे में अब तोह.

वही वीर की निगाहो ने भी अपनी दोनों बहनो को धुंध लिया था.

जैसे hi वीर उनके पास आया, काव्य अपनी कुर्सी से उठ झट्ट से वीर के गले लग गयी.

आरोही ने जब ये देखा तोह वह भी खुद का न रोक पायी और वीर से गले मिल वह अपनी सीट पर बैठ गयी. हलाकि उसकी हुग की टाइम लिमिट काव्य के मुक़ाबले बेहद hi काम थी. प्रॉबब्ली 1 से 2 सेकंड की hi थी उसकी हुग.

काव्य : आप भी आये हो हाँ? कैसे याद आ गयी आज?

कारन : अब प्लीज यार फिरसे टांग खींचना मत शुरू कर देना.

आरोही : *स्माइल्स*

कृतिका : M-Mujhe नहीं पता था की आप भी आ रहे हो.

कारन : हाँ! वह एक्चुअली में ः~ वह-

वीर : आ नहीं रहा था. पर तुम्हारा नाम सुन्न के भागा चला आया.

कृतिका : !!!?????

कारन : Wh-What? ाहः~ अरे नई नई! M-Mein तोह बस-

कृतिका (ब्लशेस) : वैसे, अच्छा किया आप आ गए.

कारन : O-Ohh!

काव्य : हँ!? ये आप दोनों के बीच क्या चल रहा है?

कृतिका (ब्लशेस) : आर्डर दो न तुम! मुझे ले आयी ज़बरदस्ती. अब कुछ खिलवाओगी नहीं क्या?

काव्य : आज वीर भैया देंगे न पार्टी. क्यों? भैया? आप खिलवा रहे हो न हमे?

वीर : ऑफ़ कोर्स! ऑफ़ कोर्स! मेरी छोटी बहिन जो खाना चाहेगी वह मिलेगा उससे. आज पार्टी मेरी ऑर्डर से.

काव्य ने बड़े hi प्यार से वीर के गाल नोचे और बोली,

काव्य : हेहेहे~ ये हुई न बात! ी लव यू~

आरोही : तुम इतने दिन क्यों थे बाहर वीर?

वीर : वर्क दी! वर्क! समझ लीजिये बिज़नेस रिलेटेड टूर था. यहाँ से वह होते रहे बस.

आरोही : Okay!

वीर : आप तीनो सीधे कॉलेज से यहाँ!?

आरोही : ममम~ काव्य को जब पता चला की तुम कल hi लौट चुके हो तोह वह तुमसे मिलने के लिए ज़िद्द करने लगी. और मुझे भी शामिल कर लिया.

वीर : क्या आपको नहीं मिलना था मुझसे?

आरोही : यह! O-Of कोर्स! *ब्लशेस* मुझे भी मिलना था. ये भी कोई पूछने वाली बात है? और तुम कॉलेज क्यों नहीं आते?

वीर : सिर्फ एक्साम्स देने जाऊंगा!

आरोही : ऐसा करोगे तोह दिक्कत जाएंगी. इंटरनल मार्क्स टीचर्स के हाथ में होते है वीर. अगर उनसे अच्छी बना के नहीं रखोगे तोह वह लौ मार्क्स दे देंगे.

वीर (स्माइल्स) : मेरी क्लास टीचर hi निधि ma'am है.

आरोही : अहहं! That's... पर फिर भी वीर. कॉलेज आया करो. ात लीस्ट थोड़ी देरर के लिए hi आओ. पर आया करो.

वीर : I'll तरय!

काव्य और कृतिका मेनू पकड़ वही आर्डर करने में लग गयी. इधर बीच बीच में कृतिका और कारन के नैन मटक्का चल रहे थे. तोह वही सामने बैठी काव्य वीर को पल पल उसकी आँखों में देखती.

बातें तोह वह कृतिका से कर रही थी पर टेबल के नीचे उसका परर वीर की जांघ पर था. और वीर बिना कोई आपत्ति जताये काव्य के मखमली पेर्रो पर अपने हाथ आहिस्ता आहिस्ता फरने लगा. तोह कभी उन्हें हलके हाथ से दबाता. जिसके बदले में काव्य के लबो पर एक मुस्कान सज्ज जाती.

खाना पीना जैसे hi हुआ, काव्य ने अपना नया प्लान पटक दिया,

काव्य : Okay! तोह अब हम चल रहे है मूवी!

वीर : बिलकुल नहीं! मुझे एक ज़रूरी काम है. में नहीं रहूँगा!

काव्य : व्हाटट!?? Noooooooooo! भैयाआ! आप से तोह सबसे ज़्यादा उम्मीद थी और आपने...

वीर : काव्याआ!

काव्य : जाओ नहीं बात करनी आप से. जब देखो तब काम काम काम! कभी हमारे साथ एक नाईट आउट भी नहीं किया होगा आपने. कभी घूमे भी नहीं होंगे हमारे साथ रात में. जाओ! हम्फ~

आरोही : यू जो! I'll हैंडल हेर!

वीर (स्माइल्स) : थैंक गॉड! आप न हो, तोह मेरा क्या हो!

आरोही (ब्लशेस) : डुबो! जो नाउ!

काव्य : हम्फ! जाओ जाओ! मुझे आप से अब बात नहीं करनी!

वीर : व्हाट अबाउट यू?

कारन : येह! वेल सूरे! में तुम्हे ड्राप कर देता हु.

वीर : नहीं! तुम कैर्री ों करो. में चला जाऊंगा. Don't वोर्री!

और उन्हें वही चोरर वीर वह से निकल आया.

कारन की बातें कृतिका से अच्छी खासी हो रही थी. ऐसे में वीर उससे डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था. और काव्य का क्या था? आज वह ी हेट यू बोल रही थी. कल सबसे पहला कॉल उसी का आने वाला था वीर को.

वीर जब घर पहुचा तोह हॉल में घुसते hi रागिनी भागती हुई उसके पास आयी,

वह अभी आवाज़ लगाने hi वाला था की रागिनी ने आके उसके होंठो पर ऊँगली रख उससे रोक दिया.

रागिनी : सस्शह्ह्ह्हह्ह!!!!

वीर : क्या हुआ?

रागिनी : मेने सुमन जी और तै जी को भेज दिया है बाहर.

वीर : कहा?

रागिनी (स्माइल्स) : शॉपिंग पे. और कहा!?

वीर : आप बेहद एक्ससिटेड लग रही हो.

रागिनी : ओह्ह ऑफ़ कोर्स! क्यों नहीं रहूंगी? आफ्टर आल... साथ में तुम रहोगे!

उसने आँखों में आँखें डालते हुए कहा,

वीर : एहम! सो?

रागिनी : बस! में रेडी hi हु. तुम जल्दी से चेंज कर लो. मेने आभा को ऊपर टीवी में मूवी लगा के दी है. घर पर वही रहेगी. और तुम और में-

वीर (स्माइल्स) : में आता हु चेंज कर के.

रागिनी : जल्दी आना!! I'm वेटिंग ~

वीर जब रेडी होक आया तोह रागिनी उसके समीप आके उसकी टी शर्ट पर झट्कारते हुए उससे चेक करने लगी. सब कुछ सही था या नहीं! वह मुस्कुरायी और आगे आके उसने एक चुम्बन वीर के गाल पर दे दिया.

रागिनी : चलो! इस से पहले की कोई आ जाए. तुम नहीं जानते मेने कल रात कैसे काटी है वीर!

वीर ने अपनी बाइक निकाली तोह रागिनी किसी बेल की तरह पीछे बैठ के उस से लिपट गयी. उसने साड़ी hi पहनी हुई थी.

वीर : आपको साड़ी में देख अच्छा लगा भाभी!

रागिनी : भाभी नहीं वीर! भाभी नहीं! में विवेक की पत्नी नहीं हु अब. रागिनी बुलाओ! K-Kaho न वीर! रागिनी! मेरा नाम लो! लो न नाम वीर!

वीर असमंजस में पद गया था. रागिनी उस से लगभग 8 साल बड़ी थी. खर्र जब अब वह सुमन को नाम से बुलाता था तोह रागिनी को बुलाने में कोई समस्या नहीं जानी चाहिए थी.

वीर : रागिनी!

उसके मुँह से निकला hi था की रागिनी का पूरा बदन काँप उठा. उसकी उंगलिया जोरर से वीर के कंधे पर कस गयी.

रागिनी : एक बार और...! P-Please!

वीर : रागिनी!!!

रागिनी : ओह्ह वीर!!!!

वह जोरर से अपने स्तनों को उसकी पीठ पर गाड़ते हुए उस से चिपक गयी.

*वररुआमममममम*

दोनों घर से निकले अपने इस सुहाने सफर के लिए. कितने दिनों बाद आज दोनों अकेले थे. हस्तक्षेप करने वाला अब कोई नहीं था. चेन्न से दोनों एक दूसरे को महसूस कस्र सकते थे.

मुंबई के बीचेस में भीड़ न हो ऐसा कैसे हो सकता था? ये गोवा नहीं था.

वीर और रागिनी हाथो में हाथ थामे समुन्दर किनारे रेट पर चल रहे थे. समुद्र का ठंडा पानी हर्र लहर के साथ आके उनके पेर्रो को भिगोता और वापस चला जाता.

दोनों यु hi चलते रहे. दोनों में से कोई कुछ नहीं कह रहा था. आस पास के जितने भी लोग उन्हें देख रहे थे, वह उन् दोनों को नेवली मैरिड कपल hi समझ रहे थे.

काफी देरर की इस शान्ति को रागिनी ने hi फिर भांग किया,

रागिनी : वीर!?

वीर : हम्म~

रागिनी : ी लव यू~

वीर : ...

वह कुछ न बोलै. बस मौन रहा!

रागिनी : में सिर्फ तुम्हे ये बताना चाहती हु आज. अपना दिल खोल के. क्या हम!? क्या हम कही शांत जगह पर चल सकते है?

वीर ने हामी भरते हुए अपने कदम आगे बढाए और वह बीच में किनारे की ऑर्डर चलते चलते एक बेहद hi सुनसान से स्पॉट पर पहुँच गए.

चट्टाने और पत्थर hi पत्थर थे आस पास और सामने विशालकाय नील समुन्दर.

दोनों hi एक बड़े से पत्थर पर बैठ गए. उनके हाथ अभी भी आपस में बंधे हुए थे.

रागिनी वीर के कंधे पर झुकी और सर्र रख बोलना शुरू की,

रागिनी : में तुम्हे बताना चाहती हु की, मेरे डाइवोर्स के बाद से, मुझे ऐसा कभी किसी और के लिए महसूस नहीं हुआ है वीर!

वीर : ....

रागिनी : यस! ी हैवे फालेन फॉर यू वीर! तुमने मुझे अपने दिल में पनाह दी, मुझे माफ़ किया, मेरी तुमने हर्र बात मानी. और तुम्हारे बड़े भाई की तलाकशुदा बीवी होने के नाते, मेरे मैं तुम्हारे प्रति ऐसा कुछ भी नहीं आना चाहिए था. लेकिन फिर भी... ये हुआ!

वीर : में-

रागिनी : नहीं! पहले मुझे कह लेने दो वीर! समाज की नज़रो से ये अपराध है. में तुम्हारे बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकती थी. लेकिन फिर भी ये सब हुआ. बुरा मत maan'na पर... शुरूआती दिनों में मेने विवेक को चोरर के दूसरी शादी लेने का फैसला पहले hi ले लिया था और उसके लिए मेने एक दो हम उम्र के लड़को से भी बात चीत की थी. डैड के कहने पर मेने बात की थी. पर मुझे उनमे इंटरेस्ट नहीं आया. और फिर तुम्हारे साथ वक़्त बिताने लगी.

वीर : !!?

रागिनी : जैसे जैसे समय गुज़र रहा था. मुझे तुम्हारे बारे में jaan'ne की और इच्छा होने लगी. तुम्हारी पसंद, न पसंद, तुम्हारी बातें, तुम्हारी पर्सनालिटी. और में अनजाने में hi इन् सभी की तरफ आकर्षित होती जा रही थी. जब डाइवोर्स हुआ, तब मुझे एहसास हो चूका था वीर की...

वीर : ??

रागिनी (स्माइल्स) : मुझे तुमसे मोहब्बत हो गयी है.

वीर : भभ-

रागिनी : रागिनी वीर! आज से में तुम्हारे लिए रागिनी हु. भाभी नहीं! सबके सामने तुम मुझे भाभी बुला सकते हो. पर अकेले में!? में तुम्हारे मुँह से अपना सिर्फ नाम sunn'na पसंद करुँगी.

वीर : J-Jii!!

रागिनी : जी नहीं! हाँ! ट्रीट में लिखे ान इक्वल पर्सन वीर!

वीर : I'll तरय!

उसने अपना सर्र उठा के वीर को देखा. ख़ास कर उसके होंठो को. और रागिनी की सासें तेज़ हो उठी.

रागिनी : क्या इन् होंठो को थोड़ी देरर के लिए चूम सकती हु?

वीर जो अब तक खुद को कण्ट्रोल किये हुए था, ऐसे शब्दों को सुन्न अपना आप आखिर खो hi दिया.

रागिनी की पतली गोरी मखमली कमर में हाथ दाल वीर ने उससे जकड़ा और अपने सीने से कस के लगा के पल भर में उन् रस्सभारे होंठो को अपने मुँह में भर लिया.

"नननंग्ग्ग्हःहःहः~"

*स्मूच* *स्लुर्प* *स्लुर्प*

कुछ शान भी नहीं गुज़रे थे जब दोनों की जीभ आपस में कुश्ती लड़ एक दूसरे के मुँह में घुस दबाव बनाने की कोशिश करने लगी.

वीर की जीभ रागिनी के मुँह के अंदर गयी और अंधरुनि मुँह को टटोल के उनका स्वाद लेने लगी, तोह वही रागिनी भी यही करने में लगी थी.

"ममममममममनननननन~"

वीर के हाथ उन् मुलायम ामो को निचोड़ने में भी लग गए. ब्लाउज के ऊपर से उन्हें जोरर जोरर से मसलने का मज़ा hi अलग था.

रागिनी डेस्पेरशन में वीर की गॉड में आके बैठी और वीर के शरारती हाथ तुरंत hi उसकी गांड पर चले गए.

"मममममननननन~" "आआह्णननननन~"

*स्लुर्प* *स्लुर्प*

रागिनी : ऐसे नहीं वीर... साड़ी उठाओ...

वह उत्तेजना भरी आवाज़ में बोली. वीर ने जैसे hi उसकी साड़ी पीच उसके कूल्हों पर ले जा कर उठायी तोह वह आश्चर्य में रह गया.

नीचे कोई पेटीकोट नहीं था. बस रागिनी की दूध जैसी गोरी जाँघे.

"ओह्ह वीर!"

"क्लेम में!!! चेरिश में वीर! लेट विवेक क्नोव हाउ यू शुड चेरिश ान एल्डर brother's वाइफ. नंनगहःहः~ ी लव यू बेबी!!!!"

वह पागलो की तरह वीर पर टूट पड़ी.

और दोनों की सिसकिया समुन्दर की लेहरो के शोर में घुल गयी.

***

मुंबई~

Nidhi's अपार्टमेंट ~

इवनिंग ~ 8:12 पं

निधि आहार के डब्बो में नए पैकेट खोल उनमे सामान भरने में लगी हुई थी.

जूही रोज़ की hi तरह टीवी में अपना फवौरीते कार्टून देख रही थी. और श्रेया अभी जॉब से लौट रही थी जब अचानक hi,

*डिंग* *डाँग*

उसके घर की दूर बेल्ल बजी और वह ये सोच के उठी की श्रेया आ गयी है.

निधि ने अभी दरवाज़ा खोला hi था की उसने देखा की सामने श्रेया नहीं थी. बल्कि, एक उसके hi जितने उम्र की लड़की कड़ी हुई थी.

निधि इस लड़की से वाकिफ नहीं थी. उसने सवालिया नज़रो से देखा तोह उस लड़की ने सवाल किया,

"मिस निधि!?"

निधि : H-Haan! निधि में hi हु. कहिये!

तोह सामने मौजूद लड़की ने एक hi वाक्य कहा,

"तेजल हेरे! क्या में अंदर आ सकती हु?"

निधि : हँ!!?

.

.

.

.

.

.

.

आज के लिए इतना hi गाइस!

थिस अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ 4.6क वर्ड्स. अस उसुअल लाइक्स थोक के जाने के भाइयो और रेवोस रखने का. उनके रिलीज में कल देना शुरू करूँगा. साथ बने रहिएगा!


धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 113 ~ ब्लंडर (1)

अब तक...

निधि इस लड़की से वाकिफ नहीं थी. उसने सवालिया नज़रो से देखा तोह उस लड़की ने सवाल किया,

"मिस निधि!?"

निधि : H-Haan! निधि में hi हु. कहिये!

तोह सामने मौजूद लड़की ने एक hi वाक्य कहा,

"तेजल हेरे! क्या में अंदर आ सकती हु?"

निधि : हँ!!?


अब आगे...

ख़ामोशी!

जो कमरे में छायी हुई थी. और इस कमरे की चार दीवारों में अगर कोई शोर था, तोह वह था ऊपर लगे पंखे का. जो मद्धम मद्धम घूम के हलकी कर्कश आवाज़ को अंजाम दे रहा था.

"क्या मेने जो कुछ भी अभी अभी सुना, वह सच था?" धीमी और थोड़ी लड़खड़ाती हुई एक लड़की की कोमल आवाज़ आयी.

आवाज़ थी तेजल की. सिंगल सीट सोफे पर वह विराजमान सामने दीवान पर बैठी निधि की ऑर्डर देख रही थी. आँखें पूरी नाम! जो कुछ भी अभी अभी सुना, उससे पचा पाना मुश्किल मालुम हो रहा था.

निधि के चेहरे पर भी मायूसी थी. उसने धीरे से सर्र हाँ में हिलाया और नज़रे झुका ली.

तेजल : ये आपकी बेटी है?

उसने कमरे के परदे की ऑर्डर इशारा करते हुए पूछा, जहा जूही उस परदे के पीछे छिप के कड़ी हुई थी. अपना थोड़ा सा मुख बस दिखाए वह झांक रही थी. अनजान लोगो के सामने वह अक्सर ऐसा किया करती थी.

निधि ने फिर हामी भरी और जूही को इशारे से अपने पास बुलाया. बेचारी जूही अपने नन्हे कदम लेते हुए सहमे सहमे दीवान से चिपक चिपक के निधि के पास आयी.

निधि ने उसकी पीठ पर हाथ रख तेजल की तरफ आगे किया तोह तेजल ने जूही के दोनों हाथ थाम लिए.

तेजल : क्या नाम है आपका?

"जूही!!!" वह धीमे से बोली!

तेजल (स्माइल्स) : जूही! बोहत प्यारा नाम है. आप मुझसे फ्रेंडशिप करोगी?

जूही बिना कुछ कहे आहिस्ता से सर्र हिलायी तोह तेज पुनः मुस्कुरायी.

तेजल : बोहत क्यूट है आपकी बेटी! तोह क्या आप अपनी बेटी की कसम खा के कह सकती है की आपने जो कुछ अभी अभी कहा वह सब... एक एक बात सच थी.

तेजल की बात पर निधि हक्की बक्की सी रह गयी.

निधि : हँ!!?

तेजल : मेरी बात का बुरा लगा हो तोह मुझे माफ़ करना. पर मुझे ये jaan'na बोहत ज़रूरी है. प्लीज! िफ़ यू कैन! अगर आपको दिक्कत है तोह में अभी इसी वक़्त यहाँ से चली जाउंगी.

निधि कुछ देरर शांत रही, फिर गहरी सांस लेते हुए बोली,

निधि : अगर कोई और होता, तोह मेने उससे घर से निकल दिया होता. पर आपने बताया की आप वीर की सगी बहिन है. और इस बात की भी पुष्टि नहीं हुई है अभी भी. सिर्फ आपके फोटो दिखाने से ये साबित नहीं हुआ है. मुझे अभी भी संशय है. तोह पहले आप-

इस से पहले की निधि आगे कह पाती तेजल ने उससे वही टोक दिया,

तेजल : ये रही मेरी माँ की एकमात्र दी हुई सोने की चैन.

उसने अपने गले से एक ख़ूबसूरत सी चैन उतारते हुए निधि के हाथो में थमा दी.

तेजल : मेरे पास अभी और कुछ नहीं है अपनी बात प्रोवे करने के लिए. जब तक में अपने भाई से मिल न लू और ये बात सच न साबित हो जाए की वह मेरा भाई है. ये चैन आपके पास रहेगी.

निधि : N-Nahi!! नहीं नहीं! इससे आप अपने पास hi रखिये!

निधि डर के मारे चैन वापस करने लगी. ढेर्रो फ्रॉड्स ऐसे होते है जिधर इंसान अपनी मर्ज़ी से आपको अपनी कीमती चीज़ देके जाता है और बाद में पुलिस कंप्लेंट कर आपको अंदर करवा देता है. कही ये लड़की भी उनमे से एक तोह नहीं थी!? निधि थोड़ा घबरा गयी.

तेजल : प्लीज!! मेरी बात का विशवास कीजिये! में आपकी बात अभी अपनी माँ से नहीं करा सकती. प्लीज! ट्रस्ट में! ट्रस्ट में ma'am! ी बेग यू! ये मेरे लिए बोहत इम्पोर्टेन्ट है.

वह घुटनो पे बैठ निधि को पकड़ते हुए बोली,

निधि : M-Mein ऐसे कैसे...!?

तेजल : P-Please!!!

उसके चेहरे के हाव भाव देख पता नहीं क्यों, निधि का मैं अंदर से कहने लगा. की ये लड़की शायद झूठ नहीं बोल रही थी.

जो डेस्पेरशन था इस लड़की में. उस डेस्पेरशन ने निधि को सोचने पर मजबूर कर दिया.

निधि : Th-Theek है!

और वह मान गयी!

तेजल (बीम्स इन जॉय) : थैंक यू सो मच!

निधि : पर आपको ये चैन देने की कोई ज़रुरत नहीं है. मुझे यकीन है!

तेजल : हँ!? पर!?

निधि : It's फाइन!

तेजल : O-Okay! नाउ प्लीज~ मुझे आपसे एक फवौर और चाहिए!

निधि : केसा फवौर?

तेजल : मेरे भाई का एड्रेस क्या यही है जो मेंशनएड है इधर!

उसने अपना फ़ोन दिखाते हुए पूछा. फ़ोन में वीर की सोशल मीडिया प्रोफाइल थी. और उस में कुछ डिटेल्स पड़ी हुई थी. एड्रेस उनमे से एक था.

निधि (नॉड्स) : ये उसके पुराने घर का एड्रेस है. वह अब वह नहीं रहता है. जैसा की मेने बताया वह अब अपनी भाभी के साथ दूसरे एड्रेस पर-

तेजल (स्माइल्स) : No! थैंक यू ma'am! मुझे यही jaan'na था. और यही चाहिए मुझे! थैंक यू सो मच वन्स अगेन एंड प्लीज एक लास्ट प्रॉमिस और~

निधि : !??

तेजल (स्माइल्स) : आप ये बात उससे... ी मैं मेरे भाई वीर को नहीं बताएंगी!

निधि : लेकिन क्यों? अगर आप उसकी बहिन हो तोह फिर इंतज़ार केसा? वह तोह जान के बेहद खुश-

तेजल (स्माइल्स) : कुछ चीज़ें सरप्राइज रहने दीजिये! ी होप आप अपना वादा रखेंगी! I'm लीविंग नाउ! टेक केयर!

वह पलटी और जाते जाते जूही के सर्र पर प्यार से हाथ फेरर वह से बाहर हो गयी.

निधि दौड़ के दरवाज़े पर आयी, लेकिन तब तक तेज अपनी तेज़्ज़ी में पहले hi लिफ्ट से नीचे जा चुकी थी.

'मेने सही तोह किया न? वीर की सगी बहिन...! इसका मतलब उसकी माँ भी यही आस पास...! क्या मेने सब कुछ बता के सही किया? कही कोई मुसीबत न कड़ी हो जाए! वीर...!'

वह मैं में सोच वही बस देखती रह गयी! न जाने क्या होने वाला था.

बाहर निकलते hi तेज ने कैब बुक करि और वापस पूर्वी के घर की ऑर्डर निकल पड़ी. गाडी तोह चलती जा रही थी. और मंज़िल पर पहुँच कर रुक भी जाएगी. पर इन् आसुओ का क्या? जो उसकी आँखों से निरंतर बहते जा रहे थे?

इन्हे कैसे रोके वह?

वह जितनी बार ासु पोछती, उतनी hi बार वह छलक उठाते.

निधि के घर में वह खुद को कैसे कण्ट्रोल की हुई थी ये वही जानती थी. अच्छा हुआ जो वह आज निधि से मिलने आ गयी. और उससे इतनी साड़ी बातें पता चल गयी. वर्ण न जाने और कितने समय तक वह अँधेरे में रहती.

कुछ देरर पहले...

"कॉलेज तोह यही दिखा रहा है प्रोफाइल में!"

कैब से उतारते हुए तेजल अंदर कॉलेज में गयी. कैंपस में उससे ढेर्रो लड़के लड़किया नज़र आये. कुछ कैंटीन में बैठे थे तोह कुछ प्लेग्राउंड में थे. कुछ आ रहे थे तोह कुछ जा रहे थे. एक चहल पहल वाला इलाका.

बिना देररि किये वह सीधा अंदर मैं बिल्डिंग में घुसी.

और सामने hi उससे फी काउंटर दिख गया.

तेजल : एक्सक्यूज़ में!? मुझे jaan'na था की ये पर्सन इसी कॉलेज में है न?

पर्सन : अंदर सर से मिलिए!

तेजल अंदर गयी तोह उससे एक पेओन नज़र आया,

तेजल : सुनिए! मुझे पता करना है की ये स्टूडेंट इसी कॉलेज से है या नहीं?

पेओन : मैडम ये तोह आपको सर लोग hi बता पाएंगे. या बच्चे लोग. किस डिपार्टमेंट में है?

तेजल : सॉरी! यहाँ ये तोह मेंशन नहीं है.

पेओन : आपको यही नहीं पता!?

'पता होता तोह में तुम से क्यों पूछती बेवक़ूफ़?' वह मैं में hi खुद से बोली और उससे एक लुक देते हुए निकल गयी.

'ऐसे नहीं होगा कुछ! मुझे खुद से hi कोंफ्रोंट करना होगा...!'

और वह डिपार्टमेंट तो डिपार्टमेंट जाने लगी. वह हर्र डिपार्टमेंट की क्लासेज में से किसी न किसी स्टूडेंट से पूछती और हर्र कोई उससे ना में hi उत्तर देता.

उम्मीद घटती जा रही थी.

पर तभी,

जब उसने एक रैंडम लड़की को पकड़ते हुए फोटो दिखाते हुए पूछा तोह वह एक बार में वीर को पहचान गयी,

लड़की : ये तोह वीर है! हमारी क्लास में hi है. पर रेगुलर नहीं आता. कुछ काम था क्या?

तेजल : ध्यान से देखो! क्या सच में यही है?

लड़की : अरे हाँ न बाबा! हहै~ में फॉलो करती हु उसको. तोह मुझे पता होगा न!

तेजल : Okay थैंक यू! क्या कोई टीचर नहीं है? वीर का कोई फ्रेंड है? या टीचर जिस से उसकी पहचान हो?

लड़की : वीर का फ्रेंड? टच!! उसका कोई फ्रेंड नहीं है. मेने तरय किया पर अब वह किसी से बात hi नहीं करता है. हाँ! मेने उससे निधि ma'am के साथ आते हुए ज़रूर देखा है. हेहेहे~ कितनी अफवाहे उड़ी थी तब तोह! पता है क्या हुआ था?

तेजल : निधि ma'am!? इनके साथ उसकी पहचान है?

लड़की : अरे हाँ! अरे मेने तोह ये भी सुना है की दोनों साथ में रहते थे. एक hi घर में. और ऊपर से आपको पता है? निधि ma'am का डाइवोर्स होने वाला था तब. हहै! एक टीचर और स्टूडेंट की-

तेजल : कहा मिलेंगी ये निधि ma'am?

लड़की : सॉरी! पर वह तोह अब निकल गयी. तू बाद! आज उन्होंने अर्ली लीव लिया था.

तेजल : T-Toh अब?

लड़की : अब कुछ नहीं हो सकता. कल आइयेगा! सिंपल!

कहते हुए वह पलटी,

लड़की : उनलेस यू क्नोव हेर एड्रेस! *यौनस*

और यु hi कारेफ़री अंदाज़ में वह निकल गयी. पर उसके मुँह से निकली ये आखिरी बात तेजल के कानो में घंटी ज़रूर बजा गयी.

"हेर एड्रेस हँ!?

पर साथ hi एक द्वेष की भावना भी जाग गयी.

'टॉप नौच कॉलेजेस में से एक है ये सिटी के अकॉर्डिंग तो थे गूगल. हम्म! इतना पैसा! ऊपर से रेगुलर नहीं आता... Ma'am के साथ रहने के चर्चे...! अगर मुझे इतनी फैसिलिटीज मिली होती तोह...! No! ी कैन नॉट...! तेजल! अतीत की बात अतीत में. Let's मूव फॉरवर्ड!' उसने एक गहरी सांस ली.

फिर शुरू हुआ झूठ का सिलसिला.

"सर! में वीर की सिस्टर हु. कॉलेज में स्टडीज से रिलेटेड निधि ma'am से आज बात होनी थी. पर वह आज चली गयी है. शायद भूल गयी."

"मेरी फ्लाइट है आज! जाने से पहले उनसे मिलना था."

"अगर आप मुझे उनका एड्रेस देदे तोह घर जाके अभी में उनसे मिल लुंगी!"

"नहीं नहीं! में समझती हु आप ऐसे hi किसी टीचर की डिटेल्स नहीं देते ः ~ पर अब सिचुएशन hi ऐसी बन्न गयी है सर!"

"उन्होंने तब अपने केबिन के फ़ोन से शायद मुझे कांटेक्ट किया था, अपने नंबर से नहीं! इसलिए ये प्रॉब्लम अरसे हो गयी. जी! तोह आप थोड़ा अगर~"

"थैंक यू सो मच सर!! अब में उनसे टाइम से मिल सकती हु. थैंक यू!"

बस!

कुछ झूठ की बातें, और उसका काम निकल चूका था.

एड्रेस मिलते hi तेजल निधि के बताये एड्रेस पर पहुची. रात के 8 बज चुके थे.

और निधि को साड़ी बातें बताने के बाद जैसे तैसे उसने उससे कन्विंस किया. निधि भी बेचारी आखिर कार सच बताने पर मजबूर हो गयी.

जो जो उससे पता था वीर को लेके, वह पूरा चिटठा खोल के रख दिया उसने.

निधि के बोल अब भी तेजल के मैं में गूँज रहे थे.

"मेने देखा है उससे. टूटते, हारते, रट, घायल होते!!! वीर...! सच में वीर है!! उसके जैसा मेने आज तक अपनी पूरी ज़िन्दगी में ऐसा लड़का नहीं देखा...!"

"पापी है वह लोग! उसके पिता...! शर्म आती है मुझे उसके पिता के बारे में सोचते हुए भी. छियई!! थू है ऐसे पिता पर!! वह लड़का... िक के वार्ड में कैसे तड़प रहा था मेने देखा है अपनी नज़रो से... *स्निफ्फ* पूछो मत!"

"कोई भी उससे देखने तक न आया! कोई भी नहीं! न उसके पिता, न सौतेली माँ, न बहने, न भाई, न उसके दादा जी! कोई भी नहीं! क्या फायदा ऐसे परिवार का जिधर... *स्निफ्फ* जिधर अपने hi न हो? धित्कार है ऐसे लोगो पे!"

"मेने उससे अपने साथ रखा था. पूरे 1 महीने 13 दिन रहा है वह इधर. उसके बाद वह अपनी भाभी के घर शिफ्ट हुआ. नादान है न. समझ रहा था की उसके रहने से मुझे आर्थिक रूप से दिक्कतें आ रही है. *स्निफ्फ* पागल कही का...! अब भी उससे t-toh एक लप्पड़ मारने का-"

और वह रो पड़ी.

बिलख बिलख के रोई!!! हथेली से ासु पॉच उसने आगे कहना जारी रखा,

"कोई कैसे... K-Koi कैसे इतना निर्दयी हो सकता है? *स्निफ्फ* न कोई दोस्त, न कोई अपना, न परिवार. अरे बोलने बताने वाला कोई भी नहीं था उसके पास. फिर भी उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी. *स्निफ्फ* यहाँ जब तक वह रहा... मुझे कभी भी वह बोझ की तरह नहीं लगा. हमेशा hi *स्निफ्फ* मेने उससे अपना hi माना है. इस घर का सदस्य!! आज वह क़ाबिल है. कमा रहा है. खुद का बिज़नेस भी शुरू किया है. तोह देख के... *स्निफ्फ* देख के अच्छा लगता है. दिल को सुकून मिलता है. ख़ुशी होती है."

वह रट हुए मुस्कुरायी,

"और ये सब जो में बता रही हु ये सब तोह सिर्फ बाहर की बातें है. न जाने अंधरुनि बातो में क्या क्या jaan'ne को मिलेगा. *स्निफ्फ* बेचारे ने कितना कुछ सहा होगा अतीत में. ये कोई नहीं जानता. मुझे भी नहीं बताया है उसने. और उसका परिवार...!"

"थू है ऐसे परिवार पर!! ख़ास कर वह प्रांजल! कलंक है वह कलंक! वीर ने मुझे सचेत किया है...! ये लड़का... उसका भाई नहीं आस्तीन का सांप है. क्या आप यकीन कर सकती हो? की एक लड़के ने अपने hi दादा जी का हादसा करवाया ताकि वह अपने भाई को जायदाद से बाहर कर सके. सोच सकती हो?"

"इसके काले कारनामे मुझे पता है. अच्छा हुआ की वीर ने इस घटिया इंसान की पोल खोल के रख दी. लेकिन अभी भी... *स्निफ्फ* अभी भी मुझे उसका परिवार कुछ ख़ास पसंद नहीं है."

"हम्म! उसकी भाभी पहले से काफी सुधर चुकी है. वह अब अच्छी है. समय रहते जाग गयी. यहाँ तक की... उसकी दो बहने काव्य और आरोही! ये दोनों भी बेहद अच्छी है. मेरी मुलाक़ात हुई है कई बार. शामे कॉलेज में है. लेकिन बाकी? उनके बारे में में कुछ नहीं कह सकती...!"

और फिर...!

ख़ामोशी!

जो कमरे में छायी हुई थी. और इस कमरे की चार दीवारों में अगर कोई शोर था, तोह वह था ऊपर लगे पंखे का.

*हॉंक* *हॉंक*

याददाश्त धुंधली हुई, और वापस से तेजल को सामने का नज़ारा दिखाई दिया. पूर्वी का घर आ चूका था.

अपने ासु पॉच वह उत्तरी और कैब वाले को पाय कर के वह अंदर सोसाइटी में जाने के लिए हुई.

चलते चलते, उसके हाथो में फ़ोन की स्क्रीन पर वही वीर की तस्वीर थी जो उसने चुपके से ेगीपत में खींची थी.

'और मुझे लगा था... की मेरी ज़िन्दगी hi बत्तर गुज़री है. नाउ तहत ी कपड़े माय लाइफ विथ योर्स. It's लॉघबले!'

'थे पैन you've ेंदुरेद...! तुम्हे ढूंढ़ने की तलाश तोह उसी दिन से थी जिस दिन तुम्हारे बारे में पता चला था. बचपन में मेने क्या कुछ नहीं झेला. माँ का अकेलापन, मेरा फॅमिली का न होना, और रोज़ रोज़ ताने sunn'na. फाइनेंसियल कंडीशंस, एंड व्हाट नॉट. और सोचती थी... की मेरे पास जब भाई है तोह उसकी ज़िन्दगी किसी गुज़र रही होगी? मिलना चाहती थी तुम से.'

'पर यहाँ आके पूर्वी मासी से पता लगा की तुम्हारी फॅमिली है. एक जॉइंट फॅमिली. और में अकेली... बस माँ के साथ... तुम हसोगे अगर मेने ये बात तुम्हारे सामने कही तोह. मुझ में जलन जाग गयी थी. हाँ! तुमसे जलन! और थोड़ी नफरत भी...!'

'में यहाँ अकेली और तुम्हे इतने बड़े परिवार के साथ रहने को मिला? इतना पैसा? इतना अच्छा कॉलेज? इतना प्यार!? पर अब...!'

'अब जब जानी हु... तोह खुद पर हस्सी आ रही है. थे पैन I've सुफ्रेड इस नथिंग कपरेड़ तो योर्स... हाउ मान्य वुंड्स अरे यू स्टिल हिडिंग? वीर!?'

सोचते सोचते वह गेट पर पोहसह दुर्बल बजायी तोह पूर्वी ने गेट खोला. और उससे देख खुश हो गयी.

पूर्वी (स्माइल्स) : आओ! तुम्हे hi याद कर रहे थे.

कहते हुए वह पलट के अंदर चली गयी. परन्तु, तेजल वही कड़ी रही. अपनी मासी को जाते हुए देखती रही,

'मासी! आप लकी हो! फिलहाल कल के लिए... में अपने प्लान को अंजाम नहीं दूंगी. बूत आफ्टर तहत...! ी विल दो आईटी!'

*क्लिक*

और उसने अंदर आके दरवाज़ा बंद कर दिया.

***

नेक्स्ट डे...

आफ्टरनून - 12:36 पं

महिला मंडल समिति...

"आज फिर वही हुआ है. हमने तोह वह पूरा सपोर्ट दिखाया था न? फिर वह के लोग हमारे खिलाफ ऐसा कैसे ~!?"

करीब एक 34-35 साल की औरत खीजते हुए बोली. दिखने में ठीक ठाक थी. पर महिला मंडल में औरतो में उसकी भूमिका भी अहम् थी.

"बात कुछ और भी है सारिका!"

एक विनम्रता भरी आवाज़ उसके बगल से आयी.

सारिका : और क्या बात हो सकती है सुमन जी?

सुमन मुस्कुरायी!

सुमन : अगर हमने उस क्षेत्र में अपना पूरा योगदान दिया है लोगो को. तोह वह कभी हमारे खिलाफ मोर्चा नहीं निकालेंगे. ऐसे आवाज़ नहीं उठाएंगे. पर आज ये दो बार हो गया है. कुछ दिन पहले भी हुआ था. तुम खुद सोचो!? की वह ऐसा क्यों कर रहे है? ज़ाहिर है की उन्हें भड़काया गया है.

सुमन की बात सुन्न, सारिका के माथे पर लकीरे छा गयी.

*क्लिक*

तभी, कमरे का दरवाज़ा खुला और एक ख़ूबसूरत सी साड़ी में एक खूबसूरती की बाला प्रवेश की. उसके जिस्म में मांस हर्र उस जगह में सही से भरा हुआ था जहा एक मर्द को चाहिए होता था.

चुत्तड़, थान, उन् दोनों जगहों में मांस की कोई कमी नहीं थी. शायद इसलिए वीर को इस औरत के जिस्म को चखने में इतना मज़ा आता था.

निहारिका रोज़ की तरह अपनी भारी गांड मटकाते हुए अंदर आयी और उसकी नज़रे सबसे पहले सुमन पर पड़ी,

निहारिका : सुमन का कहना सही है. मुझे एक घिनोने षडियंत्र की बू आ रही है.

सारिका : पर दीदी! हमने कभी किसी का बुरा जब किया hi नहीं तोह-

निहारिका : हमने नहीं किया. पर हमारे कारण कुछ लोगो को मिर्ची ज़रूर लगती है. ख़ास कर raaes-zaado को. कोई वजह होगी जिसके चलते हम आड़े आ रहे होंगे. बस! हमे हटाने का बहाना है ये.

सारिका : पर कौन हो सकता है आखिर!?

निहारिका : यही हमे पता लगाना है!

वह कुछ राय रखती की एक बार फिर दरवाज़ा खुला पर इस बार कोई महिला नहीं थी.

"जी सुमन जी से काम था. उनसे मिलना था थोड़ा. क्या में मिल सकता हु?"

किसी को झटका लगे या न लगे पर निहारिका को ये आवाज़ सुन्न के ज़रूर झटका लग चूका था.

वह भी हाई वोल्टेज वाला.

उसकी सिटी पित्ती गम हो चुकी थी. क्युकी आवाज़ किसी और की नहीं बल्कि, वीर की hi थी.

बेचारी निहारिका का गरम बदन पूरा एकबार में ठंडा पद गया. वह जानती थी वीर के साथ आखिरी बात क्या हुई थी उसकी. उसने वीर का फ़ोन हैक करना चाहा था. पर वह नाकाम थी. वीर ने कहा था की वह आके वह उसकी खबर लेगा. और अब उसकी रूह काँप रही थी.

सारिका : सुमन जी? ओह्ह! सुमन जी के घर से हो न?

वीर : जी!

सारिका : हाँ यही है सुमन जी! बात करलो!

वीर : वह ज़रा अकेले में बात करना थी.

सुमन भी खुद हैरत में अपने मालिक को देख रही थी.

'मालिक यहाँ? भला क्या काम होगा?'

उसके दिमाग में अभी ये नहीं आया था की वीर ने उसकी चोरी पहले hi पकड़ चुकी है.

सारिका : अकेले में? अच्छा ठीक है. पर ज़रा जल्दी!

निहारिका : सारिका! और बाकी सभी, चलो बाहर चलो. जल्दी!

कहते हुए वह सर्र झुकाये पलटी और तेज़्ज़ कदमो के साथ भागने लगी. उसकी नज़रे मिलाने तक की हिम्मत नहीं हो रही थी.

वीर (स्माइल्स) : मुझे आप से भी काम है निहारिका जी!

और बस, ये सुनते hi निहारिका के कदम वही ठहर गए. डर के मारे!

सारिका और बाकी सभी बाहर जैसे hi निकली.

*क्लिक*

वीर ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया.

और ये देखते hi निहारिका का बदन काँप उठा.

वीर (स्माइल्स) : सुमन! मेरी प्यारी सुमन!

सुमन (स्माइल्स) : मालिक~

वह बिना कुछ जाने खुश होते हुए दौड़ के वीर के नज़दीक आयी पर इसके पहले की वह खुद को उसकी बाहो में सौप पाती, वीर ने उस थामा और उससे पलट के दीवार से सत्ता दिया.

सुमन : मालिक!!??

वीर उसके कानो की ऑर्डर झुका,

वीर : इतनी बड़ी बात हो गयी और तुम्हारे मुँह से कुछ निकला तक नहीं? हम्म? अपनी सफाई में कुछ कहना चाहोगी?

सुमन : अह्ह्ह!

अब पता चलते hi सुमन की खुद की हाकत पतली हो गयी. उससे समझ आ गया था की क्यों मालिक नाराज़ थे. झूठ बोलेगी तोह सजा तोह मिलनी hi थी.

जब वीर ने सुमन से पूछा था की सब कुछ केसा चल रहा है? तोह सुमन ने वीर को कोई तकलीफ नहीं बतायी थी.

जबकि...

मुसीबतें तोह थी!

किसी बस्ती के लोग कुछ हफ्ते पहले एक दिन आके नारी शक्ति के खिलाफ हाय हाय के नारे लगा के गए थे.

सब कुछ अस्त व्यस्त कर दिया था. लोग ज़्यादा भी थे तोह महिला मंडल कुछ कर न सकीय. बस तमाशा देखती रही.

जहा उनकी इमेज की धज्जिया उड़ती रही. उस से बड़ी बात ये थी की ये वही क्षेत्र के लोग थे जहा महिला मंडल ने पहले अवैध रूप से पानी चोरी होने के लिए आवाज़ उठायी थी.

किसी महिला के घर पानी नहीं आ रहा था और उसने महिला मंडल से मदद मांगी थी. महिला मंडल ने पूरी मदद कर, आवाज़ उठा के ये मामला संभाला था और वह पानी की सही तरीके से सप्लाई चालू करवाई थी.

पर देखो. जिस थाली में खाया, उसी में छेड़ कर दिया.

वही बस्ती के लोग आज पूरे महिला मंडल को गाली दे रहे थे.

ख़ास कर सुमन को. क्युकी वही थी जो आगे थी उस वक़्त. तब सुमन नयी नयी थी. और उससे काम संभालना सिखाया जाए इसके चकते उससे ये ज़िम्मेदारी सौपी गयी थी.

और अब नतीजा? उससे गालिया खानी पद रही थी.

अपने मालिक को चिंता में न डाला जाए, इसलिए सुमन ने अपने मालिक से ये बात छिपा ली. पर वीर को ये बिलकुल भी पसंद न आया.

और कैसे आता? सुमन उसका परिवार थी. सिर्फ एक स्लेव नहीं! कोई मांस का टुकड़ा नहीं थी वह जिससे बस इस्तेमाल करने के लिए रखा जाए.

वीर ने सुमन की साड़ी उठायी और अगले hi पल उसके और निहारिका के सामने उसके नंगे नितम्भ उछाल के उजागर हो गए.

निहारिका हक्की बक्की सी सब देख रही थी.

निहारिका : Y-Ye!!? ये!? पंतय k-kaha है इसकी...!?

वीर (स्माइल्स) : तुमने आज भी पंतय नहीं पहनी है? न hi पेटीकोट? बोहत डेरिंग हो रही हो आजकल! बूत it's गुड फॉर में!

निहारिका : wh-what!!?

निहारिका को इग्नोर कर, वीर ने अपने जेब से एक छोटा व्हिप निकाला.

और फिर,

*चाताआआकककककक*

"आअह्हह्णनंमंममम~"

एक ज़ोरदार चींख गूंजती. अगर वीर उसका मुँह बंद न करता तोह. उसने जोरर से व्हिप घुमाते हुए सुमन के नंगे चुत्तड़ो पर एक के बाद एक वार किये. और हर्र बार, सुमन बेचारी का शरीर हिल के रह जाती.

बस कुछ hi मार में, उसकी चीखें उत्तेजना से भरी कामुक सिसकियों में बदल गयी.

*चाताआआकककककक*

*चाताआआकककककक*

उसके कूल्हे लाल पद गए. वीर ने अपने हाथो से उन् पतों को अलग किया तोह उससे मनमोहक दृश्य नज़र आया.

दो lazeez-daar छेड़!!

उसने सुमन की गड़ाई चमड़ी को फैला फैला के दर्शन लिए. उसकी छूट गीली हुई पड़ी थी.

मौका देख वीर ने अपना हथियार निकाला और सीधा सुमन की छूट में पेल दिया.

"ननननंग्ग्ग्हःहःहः~"

दरवाज़े के पीछे खड़े होक वह दोनों ताबड़तोड़ चुदाई में लग गए. और इधर बेचारी निहारिका का सिर्र फटा जा रहा था. वह स्तब्ध होये? या दर्रे? या फिर उत्तेजित होये? उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था.

*फट्ट्ट्ट* *फट्ट्ट्ट* की आवाज़ें उधर आ रही थी. वीर का लुंड जोरर जोरर से दोनों छेड़ो को भोगने में लगा हुआ था.

वीर : ये है तुम्हारी सजा!!

सुमन : M-Maalik!! ये सजा नहीं है... *हफ़* *हफ़* ये तोह इनाम है!!

वीर (स्माइल्स) : इनाम hi सही! इनाम से याद आया. नयी स्लेव को भी तोह इनाम देना है न?

निहारिका : A-Ahhh!

निहारिका का बदन ठिठुर उठा.

वीर के धक्के इधर तेज़्ज़ हुए और उसने पूछा,

वीर : शीट्ट्ट्ट!!!! I'm क्लोज!! किधर चाहिए तुम्हे सुमन!

*फट्ट्ट्ट* *फट्ट्ट्ट* *फट्ट्ट्ट*

सुमन : अह्ह्ह्णण~ मालिक!!! M-Maalik!!! दोनों छेड़ आपके है... नंनगहःहः!!!? J-Jidhar डालना हो. N-Nahi!!! रुकिए! मेने... *हफ़* मेने तय कर लिया है. छूट में मालिक. M-Meri छूट में डालिये...!

*सप्लरररटटटटटटट*

और एक धार निकलते हुई सुमन की अंधरुनि दीवारों को रंग दी.

*प्लॉप*

जैसे hi लुंड उस छेड़ से बाहर आया सुमन अगले hi शान पलट के घुटनो के बल बैठ लुंड मुँह में भर चूसने लगी. क्युकी वह जानती थी.

शी कनेव आईटी. ा कॉक्सलावे मस्ट क्नोव इतस प्लेस. No मटर फ्रॉम व्हिच होल Master's डिक चामे फ्रॉम. ा cocksleave's जॉब इस तो क्लीन आईटी थोरोगःली एंड कीप सकिंग आईटी मोस्ट ऑफ़ थे टाइम.

जब वीर ने निहारिका को पुनः देखा तोह वह घबराते हुए पीछे जा रही थी.

पर ऐसा हुआ न...

वीर ने उससे भी दबोचा और उसके दोनों छेड़ छोड़ छोड़ के अपने वीर्य से भर दिए.

उसकी चुत्तड़ लाल थे. ज़ाहिर है अच्छी खासी स्पैकिंग और व्हिप्पिंग हुई थी. बल्कि दीप्तरोात और सैंडविच ब्लोजॉब भी मिला था वीर को अपनी दोनों स्लेव्स से.

सुमन अपने मालिक के लिए पानी लेने गयी थी. पर दरवाज़ा लगाना भूल गयी. जैसे hi पता लगा की कोई आने वाला है. वीर ने अपनी दोनों नौकरानियों को टेबल के नीचे भेज दिया. और वह ऊपर राजा की तरह बैठा हुआ था.

दो औरते उसके लुंड अथवा तत्तो को चूसने में लगी हुई थी. तभी सारिका आ धमकी,

सारिका : हम्म? दीदी कहा है? और सुमन जी!?

*सलूररररपपपप*

'ओह्ह्ह फुसक्कखकक!!! सुमन धीरे!!! ुग्घ!!!'

वीर : वह दोनों बाहर गयी थी.

सारिका : तुम इधर क्या कर रहे हो? और एक मिनट! सुमन जी की कुर्सी पर क्यों बैठे हो?

*सलरररररपपपपपप* *सलरररररपपपप*

*किस्स्स्स* *लीक*

इधर वह बाते कर रही थी. पर उससे क्या पता था की उसकी महिला मंडल की हेड और नयी मेंबर सुमन, एक मर्द के सामने टेबल के अंदर घुस उसका लुंड चूसने में लगी हुई थी.

निहारिका थी मन हटर! और वह अपने hi एरिया में बैठ के, एक मर्द का लुंड चूस रही थी.

वीर (स्माइल्स) : में यहाँ? हाहाहा! एहम! मुझे सुमन जी hi बैठा के गयी है. आती hi होंगी.

बिना कुछ कहे सारिका तोह निकल गयी. पर इधर वीर उनके सर्र को बालो के बल पकड़ता और खिलौने की तरह इस्तेमाल कर उनके मुख्य को छोड़ता.

निहारिका का तोह पूरा चेहरा लुंड की महक से महक रहा था.

और झाररने के बाद उसने दोनों के hi मुँह में थोड़ा थोड़ा हिस्सा गिरा दिया. जिससे मजबूरन निहारिका को गटकना पड़ा.

ये सब समाप्त होते hi, वीर ने इम्पोर्टेन्ट बात राखी,

वीर : कोई है जो हमारे खिलाफ है. और अगर में सही हु. तोह जैसा कर रहा हु वैसा hi होना चाहिए. निहारिका तुम!

निहारिका : A-Ahnn? M-Mein ..!?

वीर : तुम!!! आज मेरे साथ कही चलोगी!

उसने इतना कहा hi था की तभी उसके फ़ोन पर दो मेस्सगेस आ गए.

वीर : हँ!?

वीर ने चेक किया तोह पाया की, एक पूर्वी का था और दूसरा... मिस करा का!!!

पूर्वी : हम शाम को 6 बजे मिलेंगे. विक्रम!

करा : टुनाइट!! के तो माय होम @ 7 पं!!!

'अहह! सहित!!! फिरसे नहीं! थे टाइमिंग...!'

[Oops!]

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आज के लिए इतना hi गाइस!

अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ 4.4क वर्ड्स. अब कोई सपोर्टिंग उपदटेस नहीं है. ये अपडेट पढ़ के समझ आ गया होगा. इस अपडेट से hi ये अर्च तेज़्ज़ पेस पकड़ चूका है. तोह लिखे थोक के जाने का. और रेवोस रखने का भाया.


बाकी, धन्यवाद! ✨
 
अपडेट - 114 ~ ब्लंडर (2)

अब तक...

उसने इतना कहा hi था की तभी उसके फ़ोन पर दो मेस्सगेस आ गए.

वीर : हँ!?

वीर ने चेक किया तोह पाया की, एक पूर्वी का था और दूसरा... मिस करा का!!!

पूर्वी : हम शाम को 6 बजे मिलेंगे. विक्रम!

करा : टुनाइट!! के तो माय होम @ 7 पं!!!

'अहह! सहित!!! फिरसे नहीं! थे टाइमिंग...!'

[Oops!]


अब आगे...

"ये तुम मुझे कहा लेके जा रहे हो?" निहारिका की घबराती हुई आवाज़ आयी.

वीर कार ड्राइव कर रहा था और वह सेहमी सी बगल से बैठी हुई थी. तोह वही पीछे वाली सीट पर सुमन विराजमान थी. होंठो पर अजीब सी एक मुस्कान सजाये.

वीर : ये समझ लो की तुम्हारे hi लिए चल रहे है. वैसे!? क्या हुआ? और कोई प्लान नहीं बना रही तुम मेरे खिलाफ? हम्म? हैकिंग didn't वर्क आफ्टर आल. राइट?

निहारिका : M-Mein...!

उसके चेहरे से उसका रंग hi उड़द गया. वीर ने कितनी कसुआलय उस बात को सामने रख दिया जिस के लिए वह इतना घबरा रही थी.

वीर : में!? में क्या? कुछ बोलो भी!

निहारिका : N-No!

वीर : ध्यान रहे! यू...

निहारिका : !!?

वीर (स्माइल्स) : ... अरे माय स्लेव!

सुनते hi निहारिका का बदन काँप उठा. वीर उससे याद दिला रहा था की भले hi वह कितनी रईस क्यों न हो, भले hi इतने बड़े महिला मंडल की हेड क्यों न हो, और भले hi किसी बड़ी कंपनी की हर हेड क्यों न हो. अंततः, वह थी तोह सिर्फ उसकी एक दासी hi. एक स्लेव!

कितना hi मर्दो से क्यों न नफरत रख ले. उसकी जगह वीर के लुंड के नीचे hi थी. जो की खुद एक मर्द था. ऑब्वियस्ली, वीर का ये नजरिया नहीं था हर्र औरत के प्रति. पर निहारिका जैसी औरत के लिए?

यही तरीक़ा सही था!

बेकार सा मुँह बनाये निहारिका विंडो के बाहर देखने लगी. उससे अभी घबराहट के साथ साथ इतना गुस्सा आ रहा था की अगर उसका बस चलता तोह यही वीर की जुबां खींच लेती. पर...

ऐसा करने की हिम्मत उसके पास हरगिज़ मौजूद नहीं थी. क्युकी उसके बाद के परिणाम के बारे में वह सोचना भी नहीं चाहती थी. जो धक्के फिर वीर बाद में लगाता, उसके उन् चुत्तड़ो पे जो ज़ोरदार थप्पड वह मारता, उससे इमेजिन कर के hi अचानक उसके गाल लाल पद गए.

निहारिका : G-Gaadi रोको दो मिनट!

वीर : हम्म?

निहारिका : M-Mujhe पीछे बैठना है.

वीर (स्माइल्स) : और क्यों भला?

वह अचानक hi उसके कान की ऑर्डर झुका,

वीर : डर लग रहा है?

निहारिका : A-Aisa कुछ भी नहीं है! G-Gaadi रोको फ़ौरन!

वीर एक शैतानी मुस्कान लिए गाडी को साइड में रोका तोह निहारिका फटाफट उठ के पीछे की सीट पर जा कर बैठ गयी जहा सुमन अकेली बैठी हुई थी.

कुछ देरर तक गाडी में यु hi ख़ामोशी छायी रही. और निहारिका खिसक के सुमन के क़रीब आयी,

निहारिका : T-Tum...!

पर सुमन को निहारिका की खुसपुसाहट सुणाई न दी.

निहारिका : H-Hey!! टच टच! ोये! तुम...

सुमन : हम्म?

निहारिका : सुनो!

सुमन : मम?

निहारिका (खुसपुसाते हुए) : तुम...! मेरे पास तुम्हारे लिए एक बोहोत अच्छा सुझाव है.

सुमन : सुझाव?

निहारिका : हाँ! एक सुझाव! तुम्हे ये एक नौकरानी की ज़िन्दगी पसंद आ रही है? में जानती हु अंदर hi अंदर तुम यहाँ से भागना चाहती हो. है न?

सुमन : हँ!!? T-Tumhe कैसे पता?

निहारिका सुमन का रिएक्शन देख मैं hi मैं खुश हुई,

निहारिका : ऑफ़ कोर्स! तुम जैसी प्रबल औरत एक तुच्छ मर्द के नीचे कैसे रह सकती है भला? में जानती हु तुम नाटक कर रही थी. ः!

सुमन : T-Toh अब?

निहारिका : में तुम्हे इस दलदल से बाहर निकाल सकती हु.

सुमन : K-Kaise?

निहारिका : मेरा साथ दो बस! में जैसा जैसा कहती हु बस वैसा वैसा करना. फिर देखना, तुम और में. हम दोनों hi इस चूतिये के चंगुल से बाहर होंगे.

सुमन : सच में?

निहारिका (स्माइल्स) : हाँ!

सुमन : T-Toh मुझे क्या करना होगा?

निहारिका : इसकी साड़ी खबर मुझे देती रहना बस. और तुम्हे एक काम और करना है. इसका मोबाइल खोल तुम्हे उसमे एक वीडियो ढूंढनी है.

सुमन : K-Kaisi वीडियो?

निहारिका : इस हराम खोर के पास एक वीडियो है मेरी. तुम्हे वह ढूंढनी है. और उससे ढूंढने के बाद तुम्हे उससे डिलीट करना है.

सुमन : उस से क्या होगा?

निहारिका : उस से क्या होगा? हाहाहा~ उस से hi तोह सब कुछ होगा. अगर तुमने ये कर दिया, तोह फिर देखना. में तुम्हे इस हरामी की पकड़ से आज़ाद कर दूंगी. बस! बस एक बार वह वीडियो हाथ लग जाए.

सुमन (नॉड्स) : ठीक है! M-Mein कोशिश करुँगी.

निहारिका : कोशिश नहीं! तुम्हे ये करना hi होगा.

सुमन : P-Par में ये कैसे मान लू की तुम अपनी बात से पलटोगी नहीं?

निहारिका : हम्फ! निहारिका बंसल नाम है मेरा. आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ की में अपनी कही गयी बात से मुकर जाऊ. एक बार जो जुबां दे देती हु तोह उस से पीछे नहीं hatt'ti कभी. और वैसे भी, तुम जैसी औरत तोह मेरे अंडर काम करनी चाहिए. उस चूतिये के नीचे नहीं. तुम देखना, तुम्हारी ज़िन्दगी बदल के रख दूंगी में. लाखो कमाओगी तुम, लाखो. आस पास नौकर घूमेंगे.

सुमन : अगर ऐसा है t-toh ठीक है.

निहारिका (स्माइल्स) : समझदार हो तुम! बस, लग जाओ अपने काम पे. ध्यान रहे उससे पता न लगने पाए.

सुमन (नॉड्स) : हम्म!

सुमन शांत रही. इधर वीर चुप चाप पीछे हो रहे दृश्य को मिरर में देख रहा था.

और अभी मुश्किल से 3-4 मिनट hi हुए थे जब सुमन ने शान्ति को भांग किया,

सुमन : मालिक! वह देखिये! कुल्फी वाले का ठेला. ज़रा रोकिये न गाडी.

वीर : हम्म? तुम्हे कुल्फी खानी है? इस मौसम में?

सुमन : जी! क्युकी जल्द hi ठण्ड आ जाएगी और फिर कुल्फी वाले दिखाई नहीं देंगे. क्या आप भी लेंगे?

वीर : नहीं!

सुमन ने फिर इशारे से निहारिका की ऑर्डर देखा और उस से पूछना चाहा तोह निहारिका ने भी सर्र हिला के मन कर दिया.

कुल्फी? और वह? बस्किन रोब्बिंस, क्वालिटी वाल्स जैसी ब्रांड्स की आइस क्रीम्स खाती थी वह. और ये सुमन क्या पूछ रही थी उस से? ठेले में राखी कुल्फी? सवाल hi पैदा नहीं होता. सोच भी कैसे लिया इस औरत ने की निहारिका बंसल ऐसे रोडसाइड छपरी ठेले पर खड़े होक कुल्फी खायेगी?

गरीब लोगो की छोटी पसंद पर पैसो की गुरूर वाली मुस्कान लिए वह सुमन को गाडी से उतारते हुए देखती रही,

सुमन उतर के कुल्फी खरीदी और वापस से अंदर आके बैठ गयी. उसके दोनों हाथो में एक एक कुल्फी थी.

निहारिका : हम्म? तुम दो दो खाओगी?

सुमन (स्माइल्स) : नहीं तोह!

निहारिका : तोह ये दूसरी?

सुमन (स्माइल्स) : बताती हु! मालिक! ज़रा पीछे आइये न!

वीर : क्या हुआ?

सुमन : आइये न! प्लीज!

सुमन की ज़िद्द मान वीर पीछे आया तोह निहारिका थोड़ी दूर सरक गयी और एकदम कार के दूर से चिपक के बैठ गयी.

सुमन ने दोनों कुल्फी वीर को थमाई और फिर आहिस्ता से उठी,

निहारिका : हँ!?

और अगले hi पल,

"अह्हह्ह्ह्ह!"

उसने निहारिका को जोरर से बाल पकड़ते हुए उससे घुमाया और उसका सर्र बैकरेस्ट पर दबा के उसकी साड़ी ऊपर चढ़ा दी,

निहारिका : आह्ह्हह्ह्ह्ह!! कुट्टी... Y-Ye तुम क्या कर रही हो? Ch-Chorro मुझे... ाररर्घः!!! नंनगहःह~ C-Chorr!! कमीनी...!!!

सुमन : अब एक शब्द भी तेरे मुँह से निकला न तोह अभी नंगा कर के तुझे गाडी से बाहर फेक दूंगी.

निहारिका : Wh-Whaaattt? Y-You डरे थ्रेटन म- आअह्हह्हंणन्न!!!!!

इसके पहले की वह कुछ बोल पाती सुमन ने उसके झुत्रे पकड़ उसका सर्र और जोरर से खींचा और दूसरे हाथ से उसकी साड़ी को पूरा ऊपर चढ़ा दिया. सामने अब केवल निहारिका की साफ़ सुथरी छूट दिख रही थी.

वीर आश्चर्य में अपने हाथो में कुल्फी लिए सब कुछ देख रहा था. और वह और चकित तब हुआ जब सुमन ने अपना अगला डाव खेला.

वीर के हाथ से एक कुल्फी लेते हुए सुमन ने निहारिका को देखा और फिर...

"आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह maaaaaaaaaa~"

वह ठंडी ठंडी कुल्फी सुमन ने,

सीधे निहारिका की ताप्ती गरम छूट के होंठो को फैला कर उसके अंदर पेल दी.

निहारिका : आअह्हह्हह्ह्ह्ह ननननननना m-maaaaaa स्स्स्सस्स्स्स~ N-Nikaaaloooo माआ~ नंनंगहःहःहः~ Ayyyyyiiiiiiiiiiii... उउउउउहुहुहुउउउ

उसकी छूट फ़फ़कार मारने लगी, वह मछली की तरह छटपटाते हुए अपनी कमर हिलाने लगी. उसकी गरम भट्टी में एक इतना ठंडा पदार्थ आके घुस गया था. कुल्फी भी छूट में जाते hi मोमबत्ती की माँ की तरह पिघलने लग गयी.

सुमन : बोहोत देरर से देख रही थी इस कमीनी को. मेरे मालिक को चुटिया कहती है? क्या कह रही थी? हराम खोर? हरामी? एक झापड़ दूंगी न रंडी कही की!!! पूरी अकाल ठिकाने आ जाएगी तेरी.

वीर हक्का बक्का होक सामने के दृश्य को देख रहा था. सुमन का ऐसा विकराल रूप आज वह शायद पहली बार देख रहा था. ऊपर से ये सन देख उसका नीचे का उस्ताद भी जोश में आ रहा था.

*चटाककककककक*

फिर एक ज़ोरदार थप्पड़ की आवाज़ कार में फेल गयी,

"आआअह्ह्ह्हहननननन~"

सुमन ने जोरर से एक छाता निहारिका के चुत्तड़ पर रसीद के मारा. वह गदरायी गांड भी दो से तीन बार लेहेर खाते हुए हिल के रह गयी.

निहारिका की आँखों से हलके हलके ासु भी गिरने लगे. परन्तु उसका मुँह अभी भी गुस्से से भरा हुआ था. चेहरा लाल, निचला होंठ दातो के नीचे, बाल सुमन द्वारा खींचे हुए और आँखों में ासु. यही कुछ हाल था अभी का उसका.

सुमन : क्या सोच रही थी कुटिया? गाली सिर्फ तुझे देना आती है? रंडी की बच्ची! तूने सुनी hi कहा है असली गालिया अभी. कभी गांव तरफ जाना. समझ आ जायेगा तुझे दो टक्के की औरत की गाली क्या होती है!

*चटाककककककक*

"ननननननगगगगगगठ्ह~"

सुमन : में सोच रही थी की अब तेरे इस दिमाग में कुछ अकाल आयी होगी पर नहीं. ये तोह अब भी गोबर से भरा हुआ है. तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे मालिक के खिलाफ ऐसा बोलने की हाँ? और तेरी औकात तोह देखो. मुझे अपनी बातो में फुसला के मालिक के खिलाफ धोका देने के लिए मन रही थी? वाह रे रांड!

*चटाककककककक*

"आअह्हह्ह्णण! Y-You विल रिग्रेट आईटी *स्निफ्फ* यू विल रिग्रेट आईटी फॉर s-sure!"

सुमन : चुप कर! अंग्रेजी की चुदान! छिपकली की भीगी छूट साली!! एक तोह मेरे मालिक तुझे इतने अवसर दे दे के तुझे अपने नीचे रखने का मौका दे रहे ऊपर से तू है की हर्र बार...! कुटिया! हज़ार लुंड दिलवाऊंगी तेरी गांड में में...! नाजायज़ पैदाइश कही की!! तुझ जैसी अमीर बाप की बिगड़ी औलादो को ठीक करना अच्छे से आता है मुझे.

वीर बगल में बैठे आँखें फाड़े सुमन को देख रहा था. ये भला कौन सा रूप ले लिया था उसकी प्यारी सुमन ने?

'D-Damn!'

[It's weirdly erotic!]

'हँ!?'

पारी की बात सुन्न वीर की नज़र फिर निहारिका की छूट पर गयी जिसमे कुल्फी छूट के पानी के संग पिघल के फिसलते हुए उसकी जांघो से बहना शुरू हो चुकी थी.

सुमन ने उसकी मुनिया पर हाथ रखा और कुल्फी की लकड़ी की सीक को खींच लिया. जिस से कुल्फी अंदर छूट में hi रह गयी पर लकड़ी बाहर आ गयी.

उसने अपने हैंडबैग में कुछ टटोला और फिर एक ब्रांडेड पंतय बहार निकाली,

*स्लैप*

"उग्गहह!"

वह पंतय सीधे सुमन ने निहारिका के मुँह पर दे मारी,

सुमन : चल पेहेन इससे. ध्यान रहे. कुल्फी तू निकालेगी नहीं. भले hi पिघल के तेरे पेर्रो से फिसल के गिरने लगे. चल पेहेन!!!

उसके चिल्लाने पर निहारिका सेहमते हुए पंतय pehen'ne लगी. पर गुस्सा अभी भी उसकी नाक पर धरा था.

सुमन : जब से देख रही थी में मालिक! मुझसे फिर और बर्दाश्त न हुआ. ये कमीनी कह रही थी की में आपके फ़ोन से इसकी कोई वीडियो डिलीट कर दू. हम्फ! तूने सोच भी कैसे लिया की में अपने मालिक के खिलाफ जाउंगी?

वीर (स्माइल्स) : सुमन! शांत!

'फ़क! थिस सुमन इस इंसाने!'

सुमन : J-Jii मालिक! माफ़ कीजियेगा! अगर आपको कुछ भी बुरा लगा हो तोह. में बस-

वीर : नहीं! कोई बात नहीं! मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगा.

सुमन : J-Jii!

*डिंग*

[Suman's favourability has reached 170]

'व्हाट थे फ़क??? पारी?? 170!? ये और कितना बढ़ेगी?'

[I really don't know! This woman! She's just- ... insane!]

सुमन मुस्कुरायी और सीट पर बैठ उसने फिर अपनी टाँगे खोली,

उसकी प्यारी मुनिया नंगी होक हवा में आज़ाद हुई.

सुमन : इस रंडी की सजा अभी ख़तम कहा हुई मालिक.

उसने वीर के हाथ से वह दूसरी कुल्फी ली जो पिघल hi रही थी.

सुमन : ममममन~ *स्लुर्प*

और उससे एक बार चूसा. उसके बाद,

"अह्ह्ह्णण मा~"

उस कुल्फी को अपनी छूट में अंदर दाल दिया. उससे ये भी समझ आ गया की छूट में कुल्फी डालने पर केसा महसूस होता था.

सुमन : ैय्यियी~ स्स्स्सस्स्स्स~ ठंडी है बोहोत... मेरी छूट सुन्नन पद रही है मालिक! उफ्फफ्फ्फ़ ~ स्स्स्सस्स्स्स~ हाय दिया~

उसने पुनः रोटी हुई निहारिका के बालो से उससे पकड़ा और सीधे उसका मुँह अपनी छूट पर दे दिया.

सुमन (स्माइल्स) : तुम पूछ रही थी न की दूसरी कुल्फी किस के लिए? ये रही तुम्हारी दूसरी कुल्फी!!

निहारिका : अह्ह्ह्हह्ह्णण~

निहारिका का मुँह सुमन की हलके झात से भरी छूट में घुस गया. जहा कुल्फी उसके छेड़ से पिघल के बह रही थी. और मजबूरन निहारिका को उससे चाट के पीना hi पड़ा.

सुमन का छूट रास और कुल्फी का मिश्रण, एक अजीब सा फ्लेवर बना रहा था. लेकिन निहारिका चाह के भी कुछ नहीं कर सकती थी. रट रट वह अपने नफरत की आग को लिए बस ज़बान उस छूट पर फिरती रही.

सुमन : देख रहे हो मालिक इस हराम ज़ादी को!

वीर : !!?

सुमन : इस कुटिया की छूट पानी चोरर रही थी जब मेने इसकी छूट में कुल्फी डाली. सोच सकते हो आप? कितनी hi गिरी हुई औरत है ये? खुद को शालीनता से भरी दिखती फिरती है. पर देखिये इससे मालिक. कैसे इसकी छूट सिर्फ एक कुल्फी डालने से गीली हो राखी है. ये औकात है इसकी मालिक! इस रंडी की औकात ये है. और नखरे तोह देखो इसके!!! चूस!!! जोरर से चूस चिरान!!!

*स्लुर्प* *स्लुर्प*

"हहह्णणणग्ग्गहह~"

वीर स्तब्ध होक पूरी घटना को देखता रहा. अंत में वह बस मुस्कुराया. ये सुमन उसकी सच में कुछ ज़्यादा hi लॉयल थी. वह ड्राइवर सीट पर जाने के लिए हुआ तोह पीछे से सुमन ने उसकी शर्ट पकड़ ली,

वीर : हम्म?

सुमन : M-Maalik!!! मुझे... मुझे चूमिए न!!

इस ज़िद्द के आगे वीर की एक न चली. वह अगले hi पल झुका और सुमन के रस भरे होंठो का कुछ देरर तक जैम के सेवन किया. तब तक, जब तक उसका जी नहीं भर गया.

और वापस आके अपनी सीट पर विराजमान हो गया.

सुमन : मालिक हम कहा चल रहे है?

वीर (स्माइल्स) : कहा चल रहे है? बताता हु!

*डिंग*

[Basic Enemy Tracker is in use.]

*डिंग*

[Enemy has been spotted.]

*डिंग*

[Laying down the path.]

*वरररररओओओओओओओओमममममम*

और वीर ने अपनी गाडी आगे बढ़ा दी!

***

"और ये, चिकमते!!! हाहाहा~" एक लड़के की आवाज़ आयी.

एक घर के लिविंग रूम में बीचो बीच एक टेबल राखी हुई थी. और टेबल पर रखा हुआ था शतरंज का खेल.

काली गोटियों ने सफ़ेद गोटियों पर विजयी प्राप्त कर ली थी.

और सामने बैठा वह लड़का मुस्कुरा रहा था.

"देखा आपने? ये डाव हमारा कितना इफेक्टिव था?" उसने पीछे सोफे पर अपनी पीठ टिकाते हुए कहा.

"देख रहा हु! फिर भी-"

"अधिवक्ता साहब! यही तोह दिक्कत है आपके साथ. आप हर्र परिस्थिति को नाप तौल के देखते हो. कभी कभी खुद पर कॉन्फिडेंस भी होना चाहिए. जो चाल हमने चली है, उस पर विशवास तोह रखिये! देखा नहीं आपने? कैसे पूरा महिला मंडल हिल चूका है!?"

बिलकुल! ये आवाज़ थी उसी व्यक्ति की जो वीर के खिलाफ षडियंत्र बचपन से hi रचते आ रहा था.

प्रांजल!! और उसके सामने था~ रजत!

रजत : मेरी समझ में ये नहीं आ रहा की अगर हमारी लड़ाई उस वीर नाम के गांडू से है तोह हम महिला मंडल से क्यों भीड़ रहे है?

'किस लोडे ने इससे अधिवक्ता बनाया है?' प्रांजल मैं hi मैं रजत को देख सोचा.

प्रांजल : आप समझे नहीं अधिवक्ता साहब! वीर के पास सुमन नाम की एक औरत है. मुझे नहीं पता वह उससे कहा से उठा के लेके आया है या कैसे उसने उसको अपने अंडर में काम करने के लिए मनाया है. पर वह औरत...!

रजत : ??

प्रांजल (फ्रोंस) : हमारे लिए एक बोहोत बड़ी समस्या है!

रजत : हम्म!

प्रांजल : वह औरत महिला मंडल की सदस्य है और ऊपर से आपके खिलाफ पहले भी मोर्चा निकल चुकी है. और उससे ऐसा करने के लिए किसने कहा होगा? ये आप भी जानते है और में भी.

रजत : उस हराम खोर वीर ने!

प्रांजल : एक्साक्ट्ली! तोह हमारी पहली चाल यही है. महिला मंडल को मुसीबतो में खड़ा करना. उन्हें बाकी चक्करो में उलझाना होगा ताकि उनका ध्यान हमारे पर से हट सके. और उसके बाद...!

रजत : ??

प्रांजल (स्माइल्स) : उसके बाद दूसरे प्लान को अंजाम देना होगा!

रजत : तुम्हारा मतलब -!?

प्रांजल : ऑफ़ कोर्स! ऑफ़ कोर्स! सुना है वीर आपकी पूर्व पत्नी जी से काफी क्लोज-

रजत (स्क्रीम्स) : नाम मत लो उस मादरचोद का!!!! साला सामने दिख गया न तोह भड़वे की खाल उधेड़ दूंगा में!!!

वह गुस्से में उठ के खड़ा हो गया. उससे वह पल याद आ गया जब वीर उसके घर में घुस के उससे कालर से पकड़ के धोया था. और निधि को अपने संग ले गया था.

रजत : मेरे सामने अगर वह आया न तोह-

प्रांजल (स्माइल्स) : वह यही है! मुंबई लौट चूका है. और हमारा अगला प्लान वही है.

रजत : सेक्स स्कैंडल?

प्रांजल (स्माइल्स) : एक्साक्ट्ली! जवान लौंडा है मेरी तरह. छूट देख के अच्छे अच्छे लोग फिसल जाते है तोह वीर किस खेत की मूली है? होटल में प्रबंध कर दिया गया है. आज रात वह अपनी आखिरी रात मज़्ज़े में गुज़ारेगा और सुबह- हाहाहाहाहा!!

रजत : सुबह उसका खेल ख़तम! मुँह दिखने लायक नहीं बचेगा वह.

प्रांजल : बिलकुल! बिलकुल! हाहाहाहा! पर आपको वह रहना होगा. हम में से किसी एक का रहना ज़रूरी है. ताकि देख सके सब कुछ सही से हो रहा है या नहीं. और में फिलहाल बिजी हु जैसा की आप देख hi सकते है. इसके बाद उसकी करतूते जाएँगी आपकी एक्स वाइफ के पास और तब उन्हें उसकी असलियत पता चलेगी. फिर आप अपना डाव लगाना. बेहला फुसला का अपनी पत्नी को वापस अपने करीब लाना और बीटा मिलते hi...!

रजत (स्माइल्स) : मुझे पता है क्या करना है!

प्रांजल : गुड! तोह फिर कर दीजिये शुरू!

रजत : ज़रूर!

वह मुस्कुराते हुए बाहर निकल गया और इधर अंदर प्रांजल बैठे हुए सामने शतरंज के खेल को देखता रहा जब,

*रिंग* *रिंग*

"हम्म? डैड का कॉल?"

प्रांजल : डैड?

उधर से करुणेश की आवाज़ आयी,

करुणेश : क्या चल रहा है तुम्हारा?

प्रांजल (स्माइल्स) : एक सूअर बोहोत दिनों से ghur-ghura रहा था. बस उसी की khatir-dari का इंतज़ाम किया है.

करुणेश : मेने तुम्हे मन किया था न? की अभी ये सब-

प्रांजल : Don't वोर्री डैड! इस बार इंतज़ाम तगड़ा है. अधिवक्ता भी है मेरे साथ. कुछ गड़बड़ हुई तोह ये चुर्रा लेगा मुझे. पर अब और उस कमीने को चेन्न से जीने नहीं दे सकते में.

करुणेश : ठीक है! जो करना है करो. पर ध्यान रहे-

प्रांजल : मुझे पता है! आपका नाम कही भी नहीं उछलेगा. और एक बात और-

करुणेश : ??

प्रांजल : मुझे ये घर कुछ ख़ास पसंद नहीं आ रहा है. कुछ ऐसा करिये की में वापस घर लौट सकू. माँ को तोह मिस कर hi रहा हु में. माइड के हाथ का खाना मुझे सूट नहीं करता.

करुणेश : जानते भी हो तुमने क्या काण्ड किया था? उसके बाद तुमने ये सोच भी कैसे लिया की घर में लोग तुम्हे आने देंगे? वही अमृत निवास में रुको. में देखता हु क्या करना है.

प्रांजल : टस्क! ठीक है!

*कॉल एंड्स*

फ़ोन रखते hi करुणेश वही खड़े खड़े कुछ सोचा और फिर कमरे के अंदर चला गया. पर वह नहीं जानता था की,

कोई था जो पीछे छुप के उसकी साड़ी बातो को सुन्न चूका था.

"अमृत निवास!!?"

***

*स्क्रीईएक्सक्कछहहह!*

गाडी आके रुकी और वीर और बाकी सभी कार से उतर के बाहर आये.

निहारिका : Y-Ye...! ये तोह वही बस्ती है.

सुमन : मालिक?

वीर : बस मेरे साथ आती जाओ!

वीर बस्ती में लोगो की घूरती हुई नज़रो से होते हुए आगे बढ़ता रहा और सिस्टम के बताये गए मैप को फॉलो करता गया.

लोकेशन थी बस्ती का पिछले इलाका जहा 3-4 लौंडे लेपादि नीचे चादर बिछाये जुआ खेलने में लगे हुए थे.

उनमे से कौन था जिससे वीर को पकड़ना था वह ये अच्छी तरह से जान गया. एक पल में hi वीर ने उस लड़के की कालर पकड़ उससे उठाया और,

*डिंग*

लीम्बो!!!

*क्रैक*

"Aaaaaaaaaaaarrrrrrrrrrrrrrrrhhhhh!"

एक दर्दनाक चींख वह फेल गयी.

वीर (स्माइल्स) : सीढ़ी तरह बताओगे या कुछ और तोडू मरोड़ू?

लड़का : K-Kaun है तू?? ायर्र्घः!!!!? N-Niharika मैडम?? M-Mahila मंडल...!?? S-Suman मैडम?

वीर : ओह्ह! तोह तू इन्हे जानता है. अब बोल! किसने तुझे पैसे दिए ये सब करवाने के? हाँ?

लड़का : M-Mujhe कुछ नहीं पता. Ch-Chorr मुझे!! साली!!!

*डिंग*

लीम्बो!!

*क्रैक*

इस बार उसका हाथ गया.

"Aayyyiiiiiiiiiii माआआ!!!!!"

लड़का : B-Bataata हु ुहुहुहू b-bataata हु!!! M-Mujhe अधिवक्ता साहब ने पैसे दिए थे.

वीर : कौन अधिवक्ता?

लड़का : R-Rajat नाम है उसका!

वीर (स्माइल्स) : हम्म! बस्ती के लोगो को इखट्टा करो और उनसे कहो की आज के बाद से बस्ती का कोई भी आदमी महिला मंडल के खिलाफ एक आवाज़ तक नहीं उठाएगा. अगर एक भी आदमी मुझे दुबारा वह नज़र आया. तोह...!

लड़का : H-Huhh!?

वीर : पूरी बस्ती गायब करवा दूंगा!

लड़का (गुलप्स) : N-Nahi! ऐसा नहीं होगा. बस्ती के लोग मेरे कहने पर गए थे. मेरे कहने पर hi पीछे हट जायेंगे. M-Mujhe चोरर दो अब!! मुझे जाने दो!

वीर ने धक्का देके उस नमूने को चोर्रा और अदब के साथ पलट के वापस चल दिया. साड़ी जनता वह की वीर के उस अंदाज़ को भयभीत होते बस देखती रह गयी. सुमन के होंठो पर गर्व की मुस्कान थी तोह वही निहारिका अजीब निगाहो से वीर की पीठ को घूर रही थी.

एक मर्द की ताक़त क्या होती थी ये जैसे उसने आज देखा था.

और इन्ही सब कामो में शाम के 5 बज चुके थे.

वीर : सुमन?

सुमन (स्माइल्स) : जी मालिक?

वीर : तुम दोनों को में वापस चोरर रहा हु. अहिंदा से परेशानी नहीं कड़ी होनी चाहिए. मुझे थोड़ा आज काम है. में देरर से आऊंगा. घर में भाभी को बता देना.

सुमन : जी मालिक!

और वीर ने उन् दोनों को वापस महिला मंडल के ऑफिस में उतार, वह उस होटल की ऑर्डर चल दिया जहा पूर्वी ने मिलने बुलाया था.

***

इवनिंग ~ 6:07 पं

रॉयल आर्किड

वीर को होटल पहुचने पर hi एक घंटे के ऊपर का समय लग गया. ट्रैफिक जो इतना था.

वह अपनी वही सुबह की एक ब्लू डेनिम शर्ट और ब्लैक स्किन टाइट जीन्स में था.

कार से उतर वह होटल की एंट्रेंस में गया. और वह से अंदर आया.

होटल आलिशान थी. और वीर के फ़ोन में पहले से hi एक मैसेज पड़ा हुआ था.

'आवर टेबल इस 4तह ओने. I'll बे जोइनिंग यू इन 10 मिनट्स. प्लीज बे तेरे!'

मैसेज पूर्वी का hi था. वीर जानता था की ये औरत ज़रूर उसकी माँ के साइड से hi थी. पर आखिर ये थी कौन?

न hi वह तेजल की आवाज़ थी और न hi उसकी माँ की. फिर थी कौन वह औरत?

वीर एक आह भरते हुए टेबल no. 4 पे जाके बैठ गया. तोह वह की एक सुन्दर सी वेट्रेस उसके पास आयी,

वेट्रेस : व्हाट विल यू हैवे सर?

वीर : I'm वेटिंग फॉर समवन! I'll थें कॉल यू!

वेट्रेस : Okay सर! I'll बे हेरे ओनली!

और वह वह से चली गयी. उसके जाते hi इधर होटल की एंट्रेंस से एक औरत प्रवेश की तोह वीर की नज़रे अकस्मात् hi अपने आप उस ऑर्डर चली गयी. और यही उस औरत के साथ भी हुआ.

दोनों की hi निगाहें एक दूसरे से टकराई और दोनों जैसे एक पल के लिए वही जम्म के रह गए. बिना कुछ कहे hi वह जान गए थे की यही वह शख्स है जिसकी उन्हें तलाश थी.

वीर ने देखते hi,

'चेक!'

*डिंग*

[Name : Purvi

Age : 42

Bio : Purvi, ek bohot hi mehanteey mahila hai saath hi ek housewife bhi. Pati ke sang vivaah ke baad hi woh Mumbai sheher me bas gayi. Pati, Arun sarkari school me adhyaapak hai. Parishkrat log hai kaafi aur suljhe hai insaan hai. Ek hi beta hai inka jiska naam hai, Ayush! Apni medical ki padhaayi ke liye baahar Delhi gaya hua hai. Bhavna ko apni badi behan maanti hai Purvi. Host ko bachpan me apni goad me bhi khilaaya hai kuch samay ke liye. Purvi ka itihaas bhi raazo se bhara hua hai. Pyaar dulaar bohot lutaati hai agar inhe apni orr kar liya toh.

Favourability : 36

Relationship : Assumed Maternal Aunt]

स्टेटस देखते hi वीर के मुँह से मैं में यही निकला,

'वोह!!!'

पर ये सिर्फ स्टेटस की वजह से नहीं था.

पूर्वी को देखते hi वीर हैरत में था.






'यू अरे टेलिंग में she's 42? फ़क ी don't बिलीव आईटी!!!'

पूर्वी वीर को देख खुद मंत्रमुग्ध सी रह गयी.

ये इतना सोना लड़का उसका वीर था?

वह झटपट तेज़्ज़ क़दमों के साथ उसके क़रीब आयी,

पूर्वी : विक्रम?

वीर : हँ? ओह्ह! यस!

पूर्वी (स्माइल्स) : या वीर कह के बुलाऊ?

'ओह्ह! तोह इन्हे पता है!?'

[Koi badi baat nahi hai Master!]

वीर (स्माइल्स) : आपको जो बुलाना हो!

वह मुस्कुराते हुए बैठी और अपना हाथ आगे कर बोली,

पूर्वी : I'm सो सॉरी फॉर थे वेट! में पूर्वी!

वीर ने पूर्वी के नरम हाथो को थामा और हैंडशेक किया और अपना नाम वीर hi बताया.

पूर्वी : वीर! क्या तुम्हे अंदाजा है की में कौन हु?

वीर ने पहले hi उससे चेक कर लिया था. वह तोह उसके बेटे और पति का नाम भी जानता था और बीटा कहा किस काम से बाहर था ये भी. उनके बीच क्या रिश्ता था ये भी. पर अगर वीर अभी उससे ये सब बताता तोह ज़ाहिर है पूर्वी बेहोश होक गिर पड़ती. इसलिए वह बस मुस्कुराया और बोलै,

वीर : जी नहीं! मुझे कोई अंदाजा नहीं है. पर में इतना कह सकता हु की आप... मेरी असल माँ की तरफ से हो!

पूर्वी की आँखों में एक चमक सी आयी और वह सर्र हिलाते हुए आगे को झुकी. उसने अपने अगल बगल देखा और फिर वह होटल के बाहर देखने लगी.

वीर : क्या हुआ?

पूर्वी : N-Nahi!! कुछ भी नहीं! वीर बीटा! सुनो!

वीर : ??

पूर्वी : में तुम्हारी मुँह बोली मासी हु वीर. मुँह बोली मासी!!! तुम्हारी सगी माँ को मेने बचपन से hi एक बड़ी बहिन माना है. बचपन में तुमने मेरा दूध भी पिया है और-

वीर : एहम!

वीर के टोकने पर पूर्वी को जब एहसास हुआ की वह फ्लो फ्लो में क्या क्या बोलती जा रही थी पहली मुलाक़ात में, तोह उसके खुद के गाल लाल हो गए.

पूर्वी : M-Maaf करना!

वीर : it's okay!

पूर्वी : वीर!!! तुम्हारी माँ! और बहिन!! वह मेरे hi घर पे ठहरे हुए है. तेजल तोह... पागल है तुमसे मिलने के लिए. ज़मीन आस्मां एक कर दिया उसने तुम्हे ढूंढने के लिए. अब जाके तुम्हारी माँ ने तुम्हारा नंबर बताया है. वह दोनों hi अब तुमसे मिलने के लिए बेकरार है.

वीर : एक सवाल था.

पूर्वी : पूछो न!

वीर : ये सब... इतने साल कहा थे मासी? मेरी माँ? बहिन? इतने सालो से क्या कर रहे थे? तब क्यों नहीं ढूंढने की कोशिश की?

इस सवाल से पूर्वी के दिल में जो घाव पहले से था उधर और चोट पहुँच गयी,

पूर्वी : कुछ बाते ऐसी होती है बीटा जो सामने hi करि जाती है. तुम्हारे सवाल एकदम सही है. पर उनके भी जवाब है. जो तुम्हे अपनी माँ से hi मिलेंगे. और प्लीज...! भगवन के लिए तेजल को मत दोष देना बीटा. उस बेचारी को तोह कुछ पता hi नहीं था. पिछले साल hi उससे ये पता चला था की तुम भी हो इस दुनिया में. उसका एक भाई भी है. उस बेचारी से सब कुछ छिपाया गया है. उस से नफरत मत करना बीटा. उस नकारना मत. मेने देखा है उससे दिन रात तुम्हे ढूंढने जाने के लिए. P-Please...!

'सो हेर कंडीशन वास् शामे अस माइन!?'

[It might be the case master!]

वीर (नॉड्स) : जी!

पूर्वी (स्माइल्स) : थैंक यू!

वीर : तोह? यहाँ किस लिए बुलाया मुझे? बस इसलिए?

पूर्वी : क्या तुम अपनी माँ से मिलना नहीं चाहते?

वीर : कौन बीटा अपनी माँ से मिलना नहीं चाहेगा? पर... उन्हें देख के लगता नहीं की वह मुझसे मिलने के लिए इतनी बेताब है.

[What are you saying Master??? Apne alpha Instincts ko haawi hone mat do. Try to act like Sigma.]

उसके इतना तंज कस्सणे पर hi पूर्वी ने अपनी हथेली उसके हाथ पर रख दी,

पूर्वी : N-Nahi!! नहीं मेरे बच्चे! ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो. वह दोनों hi तुमसे मिलने के लिए बेताब है. तुम्हारे इंतज़ार में पागल है बीटा. में बता नहीं सकती की आज मुझे तुम्हे अपनी आँखों के सामने देख के कितनी ख़ुशी हो रही है. और में ये दावे के साथ कह सकती हु की भावना तुम्हे देखते hi ख़ुशी के मारे खुद के मानसिक संतुलन को खो बैठेगी. मेरी बात का यकीन करो वीर!

वीर को तभी पूर्वी के स्टेटस की आखिरी लाइन याद आयी. की पूर्वी को अगर अपनी ऑर्डर किया तोह वह प्यार और दुलार खूब लुटाएगी.

वीर : ये तोह आप सांत्वना के लिए कह रही हो मासी!

'मासी' शब्द सुनते hi पूर्वी का बदन ठिठुर उठा. ये वही वीर था जिससे उसने अपनी गॉड में रख अपना दूध पिलाया था बचपन में. आज इतना बड़ा हो चूका था वह. पर सामने बैठे कितना अकेला मालुम पद रहा था.

पूर्वी का दिल पसीज उठा और उसकी हाथ की पकड़ वीर के हाथो में और मज़बूत हो गयी. बेचारी की आँखों में भी नमी पनपने लगी,

वीर : हु तोह में अकेला hi न? वर्ण अगर माँ को आना होता तोह आ न गयी होती कबका?

पूर्वी : N-Nahi! A-Aisa नहीं है मेरे बच्चे-

वीर : ऐसा hi है मासी!

*डिंग*

[Purvi's favourability has reached 39.]

वीर : अब देखिये न! में ेगीपत गया था. मुझे उनके बारे में खबर लगी थी. इतने सालो तक में उन्हें ढूंढता रहा. तब जाके कुछ पता चला उनके बारे में. उनसे मिलने गया. उन्होंने पहचाना तक नहीं. और कैसे पहचानती? मुझसे मतलब होता तोह न मेरी शकल के बारे में-

पूर्वी : N-Nahiiiiii!!!!

वह जोरर से चिल्लाई और उठ के वीर के बगल से आके बैठ गयी. वीर को उसने एक पल में अपनी बाहो में भर लिया और जोरर से चिपका लिया.

पूर्वी : नाहीई मेरे बच्चे! ये सब गलत है. ऐसा नहीं है.

वीर : हमदर्दी की ज़रुरत नहीं है माँ-

पूर्वी (क्रिस) : नहहहहयईईई! हमदर्दी नहीं है मेरे बच्चे!!! में हु न!!! में हु न..! में कुछ भी नहीं होने दूंगी. मेरी बात का यकीन कर मेरे बच्चे!

वीर : िफ़ यू से सो... मासी!!

*डिंग*

[Purvi's favourability has reached 45.]

और अगले hi शान,

*मुआअआआह्ह्ह्हह्ह*

पूर्वी ने वीर के माथे को प्यार से चूम लिया.

वीर का मोबाइल अगले hi पल विबरते हुआ और स्क्रीन पर मैसेज साफ़ साफ़ उससे दिखाई दे रहा था.

'10 मिनट्स अरे लेफ्ट फॉर 7.'

मैसेज था...

करा का!

'सीईट्टट्ट्ट्ट!!!!!'

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.

आज के लिए इतना hi गाइस!

थिस अपडेट कंसिस्ट्स ऑफ़ मोरे थान 4.9क वर्ड्स. नार्मल लेंथ से कही ज़्यादा बड़ा अपडेट है. कुछ पारिवारिक समस्याओ के चलते उपदटेस लेट है. आप समझ hi रहे होंगे घर की स्थिति क्या होती है जब कोई सदस्य संसार चोरर के चला जाता है. तोह बस उस से उभर रहे है. बाकी, हर्र बार की तरह hi, लाइक्स ठोकने का और रेवोस रखने का यारा!


धन्यवाद! ✨
 
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