Incest Deewanapan... - Page 21 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

फ्रेंड्स कैसे हो , सॉरी बिना बताये चला गया , थोड़ी हेल्थ ख़राब थी , उफ़ में स्टोरी भूल गया यार , हम्म रीड कर रहा हु , मंडे से रीस्टार्ट कर दूंगा , शुक्रिया , रत को 9 बजे अपडेट पोस्ट कर दूंगा...
 


अपडेट-101

अभ अग्गे...

रवि जैसे hi वापिस आया , वोह पीछे की तरफ जमीन पर गिर गया , उसका पूरा शरीर जल सा गया था , रमा यह सब देख रही थी , पर वोह न तोह कुछ बोल रही थी , न कुछ कर रही थी ,

आखिर रवि , सुहाना से मिल आया था , लेकिन देर भी हुई थी , क्यों की यह बतिअन उसे , सुहाना से तब करनी थी , जब वोह पारी लोग में था , अभ उसने सुहाना को सवीकार कर लिया था , लेकिन अभ शयद कही न कही देर हो चुकी थी ,

आखिर कुछ पल बीते , और रवि अपनी शक्ति से खुद बा खुद ठीक हो गया , जो जलने के निशान थे , वोह भर गए , रवि अपना सार पकड़े खड़ा हो गया , क्यों की उसका सार थोड़ा दर्द कर रहा था ,

"अप्प ठीक हो भाई , माँ को होश कब आएगा..." रमा बेहद चिंता में रवि के करीब आकर बोली , उसने चिंता भरी निगाहो से सीमा की तरफ देखा ,

"अह्ह्ह उफ़ , सीमा ठीक हो जाएगी..." रवि अपने सार का दर्द महसूस करते हुए बोलै ,

"लेकिन हुआ क्या माँ को (थोड़ा गुस्से में) , माँ इक डैम से बेहोश क्यों हो गई , अगर मेरी माँ को कुछ हुआ..." रमा गुस्से में अभी बोल hi रही थी , के रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"कुछ नै हुआ तुम्हारी माँ को , वोह अपने पिछले रूप में परवर्तित हो रही है , वोह सुहाना का रूप धारण कर रही है , पता नै क्या होगा , जब उसे होश आएगा..." रवि बेहद चिंता में सीमा के पास बीएड पर बैठते हुए बोलै ,

"यह , यह , नै हो सकता , कभी नै हो सकता , सुहाना की यैदान बस रिंग में कैद हैं , और रिंग माँ से दूर है , यह नै हो सकता..." रमा बेहद गुस्से में चीला कर बोली ,

"वही तोह में सोच रहा हु , बिना रिंग पहने सीमा पर सुहाना की यैदान हावी कैसे हो रही हैं , शयद उस नकाबपोश कामिनी औरत का हाथ होगा , वही आयी थी घर में..." रवि , रमा के चेहरे को शक भरी निगाहो से देखते हुए बोलै ,

"उनका कोई हाथ नै , बात कुछ और है..." रमा अपने भाई से नज़रियन चुरा कर बोली ,

"रमा , मुज़से नज़रियन मत चुराओ , बताओ वोह औरत कोण ही , उसे मैप से मतलब है , वोह किसी भी हद तक जा सकती है , वोह बेहद कामिनी औरत है , में उसे तबाह कर दूंगा , अगर सीमा को कुछ हुआ तोह..." रवि बेइंतहा गुस्से में उठ कर रमा की आँखों में आँखें दाल बोलै , बेपनाह गुस्से में रवि का रूप बदलने लगा , आँखें लाल हो गई , और जिस्म डेविल का आकर ले गया ,

"ऐसा सोचना भी मत , उनका अप्प कुछ नै भिगाड सकते , और रही बात माँ की , में अपनी माँ को फिर से बचा लुंगी , वैसे भी इस सब में आपकी गलती है..." रमा भी वैसे hi गुस्से में दहाड़ते हुए बोली , उसके लाल जादुई बाल चारो तरफ फैलने लगे ,

"मेरी गलती , तुम पागल हो..."

"हाँ , हाँ , आपकी गलती , अपने रूही (कोमल) को प्यार किया , सुहाना को नकार दिया , अगर अप्प सुहाना को प्रेम करते , तोह अभ यह दिन न देखने पढ़ते , लेकिन नै , आपको बस रूही चाहये , अभ भी वही हालत हैं , कोमल , कोमल करते रहते हो , बस कोमल से प्यार करना है , आपकी जिद्द हम सब का विनाश कर देगी..." रमा और भी गुस्से में एते हुए चीला कर बोली ,

"ओह्ह्ह , मेरी जिद्द नै थी वोह , मुझे प्रेम था रूही से , और सुहाना ने अपना प्रेम अपने दिल में दबाये रखा , मुझे नै पता था , वोह मुझे चाहती है..." रवि बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै ,

"ओह्ह तोह अप्प चाहते थे , सुहाना आपसे कहती के में प्यार करती हु आपसे , इक लड़की आपसे बोलती , wtf , यह इस ब्रह्माण्ड का सबसे बड़ा जोके है , जो में सुन रही हु , असल बात पता है क्या थी , आपकी जिद्द के अग्गे आपको कोई दूसरा दिखा hi नै , न किसी का प्यार , न किसी का दर्द , न किसी के असनु , अप्प रूही के लिए अंधे हो चुके थे , और रूही से आपको मिला भी क्या , पारी लोग से निकल दिए गए अप्प , डेविल बन गए , लेकिन तब भी , आपको सुहाना का प्रेम दिखाई न दिया , उसने शेतीअन को पिता मन लिया , सिर्फ आपको पाने के लिए , वोह रूही बनने पर आतुर हो गई , सिर्फ आपके लिए , पूरा पारी लोग तबाह हो गया , जल कर रख हो गया , इस सब के जिम्मेदार अप्प थे , पर आपको इस बात का कोई पछतावा नै , बस रूही , रूही करते रहे , और अभ कोमल , कोमल कर रहे हो..." रमा अपने मन के गुस्से को शबदो के जरिये बहार निकलते हुए बेहद गुस्से में बोली , उसकी इक इक बात सच थी ,

"तुम , तुम मेरे प्रेम को नै समाज सकती रमा..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"वोह प्रेम नै जिद्द थी , इक जिद्दी इंसान सिर्फ विनाश की तरफ जाता है , उसे दुनिआ की तबाही से कोई मतलब नै होता , उसे लगता है , वही सही है , में मानती हु , रूही आपकी मंज़िल थी , आपका प्रेम था , पर उसे पाने का रास्ता गलत था , जिद्द से प्रेम नै प् सकते , पिता जी ने आपको सही सजा दी , आपकी जिद्द ने आपको डेविल बना दिया , इक बदसूरत इंसान..." रमा बेहद रट हुए दर्द भरे शबदो में बोली ,

"चत्ताककक..." इक जोरदार थपड रमा के चेहरे पर ाँ पढ़ा , जो रवि ने मारा था ,

"देखा , में सही थी , गुस्सा , बेपनाह गुस्सा , इस गुस्से को लेकर अप्प कोमल का प्रेम पाओगे , कभी नै , जब तक आपके दिल में गुस्सा है , जिद्द है , नफरत है , तब तक अप्प कोमल को छू भी नै सकते , अभ इक hi रास्ता है भाई..." रमा अपने असनु साफ करते हुए बोली ,

"क्या..." रवि नज़रियन ज़ुका कर बोलै ,

"सुहाना को माफ़ कर दो , उसकी यादिओं को मिटने का शयद इक मटर रास्ता यही है , अभ जब वोह ए , तब उससे माफ़ी मांग लेना , और उसे वोह प्यार देना , जिसके लिए वोह पारी लोग में तड़फती रही , वार्ना वोह बार बार आएगी , हर जनम में , जब तक उसे उसका प्रेम नै मिल जाता , उसकी नफरत को काम करो , और रिंग का नाश करो , हम सब साथ मिलकर शेतीअन को पराजित करेंगे , रिंग को तबाह कर देंगे , तब सीमा माँ और सुहाना इक हो जाएगी , बस यही रास्ता है..." रमा ने अपने मन में आयी कुछ बातिओं को रवि के सामने रखते हुए बोलै ,

"तुम डेविल को झुकने को बोल रही हो , में हेलल का प्रिंस हु , में नै कर सकता यह , डेविल कभी नै बदल सकता , वैसे भी में सीमा को प्यार दे रहा हु , वही तोह सुहाना है , यह बात मने सुहाना को बता दी है , वोह समाज जाएगी इस बात को..." फिर रवि ने रमा को साडी बात बता दी , जो कुछ देर पहले उसने सुहाना से की थी ,

"हहै , अपने सुहाना से बात की , मतलब कुछ भी , सुहाना ने मरते वख्त यह श्राप दिया था , के वोह आपका पीछा कभी नै छोड़ेगी , जब तक वोह आपका प्रेम और रूही का स्थान नै प् लेती , इस ब्रह्माण्ड में अप्प hi जिद्दी नै हो , और भी जिद्दी लोग हैं , लेकिन जिद्द से हमेशा हार मिलती है , कभी कुछ परापत नै होता..." रमा बेइंतहा हस्ते हुए बोली ,

"चलो मेरा प्रेम जिद्द है तोह जिद्द hi सही , में कोमल को पाकर रहुगा , चाहे यह दुनिआ भी तबाह क्यों न हो जाये , डेविल तोह बन चूका हु , इस से बदतर अभ कुछ नै होगा..." रवि लाल चमकती आँखों से मुस्कराते हुए बोलै ,

"अप्प समाज नै रहे हो , आपको कुछ नै मिलेगा , हर इंसान आपसे दूर हो जायेगा , दर्द में रहोगे हर पल , कोई प्रेम नै करेगा आपसे , और इस रस्ते पर कोमल भी नै मिलेगी आपको , क्यों की जिद्द से कुछ नै मिलता कभी , इक इक करके सब लोग आपका साथ छोड़ देंगे..." रमा बेहद नाम आँखों से बोली ,

"ाहः , पहले भी अकेला था , दर्द में था , कोई साथ नै था , लोग मतलबी होते हैं , वादे तोड़ देते हैं , और में , में जिससे भी वादा करता हु , आखिर तक निभाता हु , ऐसी लिए लोग मुझे डेविल कहते हैं , क्यों की में अलग हु , पर मने जो वादा किसी को कर दिया , उस वादे से पीछे नै पलट सकता , अभ कोमल से वादा किया है , चाहे दुनिआ को जला कर भी उसे पाना हुआ तोह प् लूंगा , पर खुद को कभी झुकने नै दूंगा , और वोह भी ें बेदर्द इंसानो के अग्गे , जिनकी जुबान की कोई कीमत नै..." रवि बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"ओह्ह मतलब यह दुनिआ भी तबाह हो जाएगी , उफ़ भाई अभ भी समाज जाओ..." रमा ने बेहद प्रेम भाव से रवि के कंडे पर हाथ रखते हुए बोलै ,

"दुनिआ की बात मत करो , दुनिआ अपने मतलब के लिए जीती है , दुसरो को टाइमपास की चीज़ समज़ती है , लोग मुझे कमज़ोर कहते हैं , वोह खुद कितने कमज़ोर हैं जिंदगी में , इस बात का अंदाज़ा नै उनको , इक राज़ की बात बताऊ , कभी भी अपने दिल के राज़ किसी इंसान के अग्गे मत खोल देना , क्यों की तुम कोई समाज नै पायेगा , न तुम , न तुम्हारे मकसद को , इंसान रिश्तो में बंधे बहुत कमज़ोर से जीव हैं , यह पालक झपकते hi तुमसे वादा करते हैं , फिर पालक झपकते hi उस वादे को तोड़ देते हैं , फिर सामने आकर तुम कहते हैं , सॉरी मने कल hi बता दिया था मने वोह वादा तोड़ दिया है , अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह लेकिन में डेविल हु , देवीलललललललल , में इंसानो जैसा कमज़ोर नई हूउउ , में कोमल को पाकर रहुगा , किसी भी तरह , चाहे पूरी दुनिआ को तबाह hi क्यों न करना पढ़िए..." रवि बेहद दर्द भरी आवाज़ में बेइंतहा गुस्से में चीख कर बोलै ,

"यह , यह आपकी ईगो है , आपका घमंड है , इस तरह आपको मंज़िल नै मिलेगी भाई , प्लस खुद को बदल लो , प्लस..." रमा बेहद नाम आँखों से बोली ,

"यह ईगो लगती तुम , यह मेरा घमंड , मेरी ईगो नै , यह मेरा सेहभाव है , में किसी के कहने पर खुद को बदल नै सकता , यह दुनिआ वदो पर चलती है , इक माँ अपनी बेटी से वादा लेती है , के उसकी बेटी अपनी इज्जत बचा कर रखेगी , इक बीटा अपने पिता से वादा करता है के वोह कभी बदनाम नै होगा , इक भाई अपनी बहिन से वादा करता है , के वोह उसकी रक्षा करेगा , इक बहिन अपने भाई से वादा करती है के वोह उसका man-saman इस समाज में बनाये रखेगी , इक दोस्त दूसरे दोस्त से वादा करता है , के वोह उसकी हर बात मानेगा , जो उसका दोस्त कहेगा , लेकिन इनमे से इक भी वादा टूट जाये , तोह उसका दर्द बहुत पीड़ा देता है , बेइंतहा गुस्सा अत है , कई राशन तक नंद नै अति , बस , बस , रमा , मैं थक चूका हु , लोग की बतिअन सुन सुन कर , अभ और सेहन नै होता मुज़से , में , में अंदर से टूट चूका हु , मुझे कोमल का प्यार चाहये , में और कुछ नै चाहता , में किस पर विश्वास करू , किस पर न करू , लोग चेहरे पर कुछ बोलते हैं , लेकिन पीठ पीछे कुछ करते हैं , उफ्फ्फ , इक बात कहु , अगर दुनिआ में रहना ऐसा है , तोह में डेविल hi ठीक हु , काम से काम खुद में खुश तोह हु , ाचा अगर सामने वाला वादा तोड़ दे , तोह मुझे क्या करना चाहये..." रवि बेहद नाम आँखों से दर्द भरे शबदो में बोलै , जाने अनजाने में उसने समाज की क्रूर सचाई बयान कर दी थी ,

"भाई आपको भी उससे किये वादे तोड़ देने चाहिए , हिसाब बराबर कर दो..." रमा बेहद उदास लफ़्ज़ु में बोली ,

"नईईई , में वादे नै तोड़ता हु , चाहे हालत कैसे भी हो जाये , में ोरु जैसा नै हु , वादा तोड़ने वाले को क्या पीड़ा होती है , यह जनता हु में , पर में उसके दिए वादे तोड़ दू , तोह उसका दर्द हज़ार गुना बढ़ जायेगा , मेरी दुआ यही रहती है , वोह खुश रहे , जो मुझे रुला कर गया हो , उसकी हर ीचा पूरी हो , जिसने मुझे दिल की गहरायी तक दर्द दिया हो..." रवि बेइंतहा दर्द में बोलै , लेकिन वोह बोल किसके बारे में रहा था , आखिर कोण था , जिसने वादा तोड़ कर , उसे फिर से दर्द दिया था , कोण ,

अभ रमा खामोश थी , उसका तेज़ दिमाग भी डेविल को समाज नै पाया था , उसे पता था , कोमल का हसीं , खूबसूरत जिस्म , रवि को अपनी और आकर्षित कर रहा था , रवि पागल था कोमल के लिए , पिछले जनम और अभ का जनम , यह बस कोमल के लिए था उसके भाई का , लेकिन क्या कोमल के जिस्म का पवितर तेज़ उसका भाई सेहन कर पता , यह तोह ऐनी वाले वख्त की बात थी , पर हाँ , दुनिआ जरूर खतरे में पढ़ चुकी थी ,

क्यों की जब कोई जिद्द करता है किसी को पाने की , तब उसके जिस्म से निकलती ऊर्जा , दुनिआ पर प्रभाव जरूर डालती है , ऐसा होता आया है और होता रहेगा ,

वही दूसरी तरफ...

ख़ुशी ने बेहद कंपते हुए , अपनी आँखों के सामने देखा , सुहाना , इक ब्लैक ड्रेस में उसकी और बढ़ रही थी , उसके बड़े बड़े ब्लैक पंख थे , तभी उस बेजान आसमान में इक अँधेरा सा चने लगा ,



सुहाना ने ऊपर नज़रियन उठा कर देखा , तोह काळा रंग के पंछी आसमान में हाहाकार मचने लगे , जैसे वोह सदियों से भूके थे , और सुहाना से चीला चीला कर खाने की मांग कर रहे थे ,

सुहाना उनकी तरफ देख मुस्कराने लगी , और धीरे धीरे ख़ुशी के पास आकर रुक गई , सुहाना , ख़ुशी की आँखों में आँखें दाल देख रही थी , कुछ देर बाद वोह बोली ,

"तामस , मेरे भाई की पालतू सेवक , उम् , हासष्ठ , कितना सकूं है इस खुली हवा में , साँस लेने में जरा सी भी तकलीफ नै होती , हहै , पर तामस जानती हो , यह जगह कोनसी है..." सुहाना , ख़ुशी के शरीर का चाकर लगते हुए इक डैम से उसके चेहरे के पास अपना चेहरा कर बोली ,

"अह्ह्ह्हह (डरकर) mm...muze..jj ..जाने दोऊ..." ख़ुशी बेहद डरते हुए बोली , क्यों की उसका शरीर शक्तिहीन था , वोह इंसान थी , पर क्यों ,

"हम्म , दर लग रहा है , तामस यह कोई जमीन नै , न ऊपर कोई आसमान है , यह सुहाना की यदिअण है , यहाँ सुहाना भटक रही है , सुहाना कैद है यहाँ , सदियों से , उम्म्म्म , देखो न , अगर तुम कुछ पलु में इतना दर गई हो , में तोह अपनी hi यादिओं में सदियों से कैद हु , उफ्फ्फ मुझे सीमा का शरीर चाहये..." सुहाना मुस्कराते हुए बोली ,

"zz...zuth बोल रही हो , ye...yeh मायाजाल hai...tt...tumara..." ख़ुशी हकलाते हुए बोली ,

"ओह्ह हूँ , तुम इंसान भी न , जब तक चमत्कार न देखो , तब तक किसी चीज़ पर विश्वास नै करते , यह देखो , मेरी यदिअण..." सुहाना ने मुस्कराते हुए अपने दये हाथ की चुटकी बजाते हुए बोलै ,

सुहाना के चुटकी बजाते hi , वह का मासूम , वह की जमीन , सब कुछ बदल गया , हर तरफ हरे भरे पेड़ , सफेद बदल , चमकता आसमान , प्यारे सफेद पंछी , ख़ुशी को ऐसा महसूस हुआ , जैसे वोह किसी जादुई दुनिआ में ा चुकी थी ,



"yy...yeh..kk...kya...hh..hai..." ख़ुशी मुस्कराते हुए और थोड़ा हरिजन होकर बोली ,

"तामस , यह पारी लोग हैई , मेरी यदिअण का हम हिस्सा , और तुम्हारे पीछे है , मेरा प्यारा खूबसूरत झरना , देखो पीछे पलट कर..." सुहाना ने बेहद रहस्मयी मुस्कान के साथ बोलै ,



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"ओह माय गोड़ , कितना प्यारा है , इसका पानी तोह इक डैम साफ है और इतना नीला , वाओ , मुझे बहुत प्यास लगी है , में पानी पे लेती हु..." ख़ुशी जो पिछले कई घंटो से प्यासी थी , भागते हुए पानी के पास गई , और घुटनो के बल बेथ पानी पीने लगी ,



ख़ुशी पानी पीकर जैसे hi उठी , और उसने पलट कर पीछे देखा , और पीछे देखते hi उसकी आँखों में फिर से दर के बदल मंडराने लगे.....

तो बे कुनिटेड....

 
फ्रेंड्स अपडेट 428 पेज पर वापिस पोस्ट कर दिया है , मुझे थोड़ा प्लाट में कन्फूसिओं थी , तोह पूरा दिन सोच कर , अग्गे का प्लाट रेडी किया , और अपडेट वही पर पोस्ट कर दिया ,

नेक्स्ट अपडेट कल रत को आएगा.. शुक्रिया उन 4 , 5 रीडर्स का जिन्होनो रिप्लाई दिया :डी
 


अपडेट-102

अभ अग्गे... [4rth day Continue]

ख़ुशी को बेहद प्यास लगी थी , उसने सुहाना के मायावी जरने से बेहटा पानी पिया , और अपनी प्यास बजा कर , उठ कर मुस्कराने लगी ,

पर जैसे hi ख़ुशी ने नज़र घुमा कर पीछे देखा , वोह जैसे hi पीछे पलटी , तब उसकी आँखों में दर के बदल मंडराने लगे ,

ख़ुशी ने देखा , यहाँ पहले hara-bhara जंगल था , अभ वह वही काली अंधकार से भरी जमीन थी , सब कुछ गयाब हो गया था , फिर ख़ुशी ने जरने की तरफ देखा , उफ़ अभ वह कोई जर्ना नै था , सिर्फ दूर तक फैली वेरियन काली जमीन थी , जिस पर काफी अँधेरा चाय हुआ था ,

ख़ुशी ने चारो तरफ नज़र डोडे , पर अभ वह सुहाना भी नै थी , पता नै , पालक झपकते hi सुहाना कहा गयाब हो गई थी , इस बात से ख़ुशी और घबरा गई , क्यों की अभ मायाजाल गहरा होता जा रहा था ,

"सुहाना , सुहाना , कहा हो तुम , सामने ायो , कहा हो..." ख़ुशी बहुत तेज़ तेज़ आवाज़ देते सुहाना को पुकारते हुए चलने लगी ,

तभी उसके पेअर से कुछ टकरा गया , ख़ुशी ने निचे जमीन की तरफ नज़र डोडा कर देखा , तोह उसकी सांसे थमने को ा गई , क्यों की जिस चीज़ से उसका पेअर अभी टकराया था , वोह इक इंसानी खोपड़ी थी ,

"ओह्ह्ह नू यह क्या..." अभी ख़ुशी इतना hi बोली थी , के जमीन पर शया अँधेरा इक डैम ख़तम हो गया , पर जो नज़ारा ख़ुशी की आँखों के सामने था , वोह बेहद डरावना और ब्यांक परतीत हो रहा था ,

"naiiiiiiiiiiii..." ख़ुशी दर से चीला उठी , क्यों की उसकी खूबसूरत , दरी , सेहमी , आँखों के सामने , जमीन पर खोपड़ियाँ भिखरी हुई थी ,



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यहाँ तक ख़ुशी की नज़र जाती , वह तक सिर्फ इंसानी खोपड़ियाँ किसी बेजान पत्थर की तरह जमीन पर पढ़ी चमक रही थी ,

"अह्हह्ह्ह्ह रविइइइइ..." अपना डेमों रूप भूल चुकी ख़ुशी बेहद जोर से चीख उठी , उसकी चीख में बेहद दर था , शरीर पर पसीने की बूंदे टपकने लगी थी ,

ख़ुशी वह से भागने लगी , पर तभी उसके सामने , इक दीवार ा गई , जिसे देख ख़ुशी के रोंगटे खड़े हो गए ,



क्यों की वोह पूरी दीवार खोपड़ियाँ से बानी हुई थी , जिनकी आँखों के स्थान पर , बेहद अँधेरा सा दिख रहा था ,

"रविइइइइ बचावूओ प्लसस..." ख़ुशी वापिस पलट भागने लगी , पर तभी वोह यहाँ थी वही रुक गई , उसके पेअर वही जैम सा गए , हाथो और पैरो में इक कम्पन सी होने लगी , होंठ थार थार कम्पनी लगे ,



उसके डरने का कारन सेहभाविक था , क्यों की वोह खोपड़ियाँ आपस की और खिसकती हुई , इक परताब का निर्माण कर रही थी , वोह बड़ा सा खोपडियों से बना परताब अभ ख़ुशी की तरफ बढ़ने लगा था ,

"हे भगवन अभ क्या करू मी , माआ..." ख़ुशी बेहद रट हुए मन hi मन बोली , क्यों की वोह सुहाना के मायाजाल में धस चुकी थी ,

ख़ुशी के पीछे खोपडियों की दीवार थी , और उसके सामने खोपड़ियाँ इक परताब की रूप में उसकी तरफ धीरे धीरे बढ़ रही थी , अचानक ख़ुशी यहाँ कड़ी थी , वह से ढाई तरफ भागने लगी , पर तभी ,

"अह्ह्ह्हह्हह ..." पर तभी ख़ुशी दर्द से कहरहटी हुई जमीन पर गई , उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसका पेअर पकड़ कर गिरा दिया हो ,

"अह्ह्ह्हह मेरा साररर..." ख़ुशी निचे गिरी कहरहते हुए अपना माथा सहलाने लगी , जो उसके गिरने से जमीन पर पढ़ी इक खोपड़ी से टकरा गया था ,

वोह आँखें बंद कर अपना माथा सहलाती रही , पर तभी वोह चौंक गई , क्यों की जैसे hi ख़ुशी ने अपनी आँखें खोली , वोह दर के अंतिम शिकार पर पहुँच गई , उसके मन से इक बेहद दर्दनाक चीख उत्पन हुई , जो उसके गले को फाड़ती हुई , इक आवाज़ का रूप ले गयी ,

"aaaaaaaahhhhhhhhhhhnnnhhh...." ख़ुशी ने अपनी पूरी जान लगा , अपने दर को अपनी चीख से बहार निकलना चाहा , पर ऐसा हुआ क्या था ,

हुआ यह था के जिस चीज़ ने उसे गिराया था , वोह इक कंकाल था , जो खोपड़ियाँ वह बेजान पढ़ी हुई थी , अभ वोह पूरा का पूरा कंकाल बन चुकी थी , उनके हाथ और पेअर भी थे , बस इक जिस्म hi नै था उनके पास ,



वोह इंसानी कंकाल निचे गिरी ख़ुशी की तरफ चारो तरफ से जमीन पर रेंगते हुए अग्गे बढ़ने लगे ,

ख़ुशी अपने हाथ पेअर पटकने लगी , उठने की कोससिह करने लगी , पर सब व्यर्थ था ,

"रविइइइ बचावू प्लसे , में मर जोगीइ बचावू , मा आअह्हह्ह्ह्ह..." ख़ुशी दर से चीखते हुए रवि को पुकारने लगी , पर इस जगह से उसकी आवाज़ रवि तक नै पहुँच प् रही थी ,



धीरे धीरे वोह कंकाल बुरी आत्मायिओं में बदल गए , वोह ख़ुशी पर हावी होने लगी , उसके पोरे जिस्म को जकड़ने लगी , और ख़ुशी बेबस और लचर जमीन पर पढ़ी रही , अभ उससे हिला भी नै जा रहा था ,

उसकी आँखें बंद होने लगी , आँखें बंद होते hi वोह किसी सपने में खो गई ,

"प्रिंस , जुंग पर जा रहे हो , में भी साथ चलुगी , मुझे हर मायाजाल का तोड़ अत है.." तामस बेहद गुस्से में बोली ,

"तामस , हर मायाजाल इक जैसा नै होता , और हम कभी पुरे नै हो सकते , कुछ न कुछ कमी हम में हमेशा रह जाती है.." डेविल अपने सिंघासन पर बैठा दहाड़ कर बोलै , उसकी आवाज़ बेहद भरी थी , और आँखें और जिस्म बिलकुल लाल ,

"हहै , ऐसा कोई मायाजाल नै जो तामस कभी तोड़ न पाए , हर मायाजाल का तोड़ जानती है तामस..." तामस बेहद मुस्कराते हुए बोली ,

"यादिओं का मायाजाल , इक ऐसा मायाजाल यहाँ में भी कैद हो जाऊ , तोह सदियों तक भटकता राहु..."

"यादिओं का मायाजाल , हम्म , लेकिन ऐसा मायाजाल मने कभी नै सुना , बताओ न उसके बारे में..." तामस उत्सुकता वश बोली ,

"यह ब्रह्माण्ड बहुत विशाल है , इस ब्रह्माण्ड की हर चीज़ इक मायाजाल है , और इस मायाजाल की रचना किसी बेहद शक्तिशाली ऊर्जा ने की है , हम सब उसके सामने खिलोने हैं , वोह खेलता है हमारे साथ , किसी मायाजाल से बहार निकलना , मुमकिन तोह है पर नामुमकिन भी नै , में तुम यादिओं के मायाजाल के बारे में बता रहा था है न..." प्रिंस डेविल मुस्कराते हुए बोलै ,

"हाँ , वही जानने के लिए उत्सुक हु..."

"यादिओं का मायाजाल बेहद गहरा और विशाल होता है , वह से जितना बहार निकलना चाहो , हम और अंदर धसते जाते हैं , अभ दुनिआ को देख लो , हर इंसान यादिओं से घिरा हुआ है , जो उसे ाचा लगता है वोह उसकी यादिओं का हिस्सा बन जाता है , अछि यदिअण दुःख नै देती , पर बुरी यदिअण बहुत दुःख देती हैं , वोह हावी होती रहती हैं , जब तक आखरी साँस न निकल जाये , इंसान यादिओं से बहार नै निकल सकते , लेकिन हम निकल सकते हैं ..." प्रिंस डेविल बेहद सोचते हुए बोलै ,

"हाँ , वोह कैसे..."

"यादिओं के मायाजाल से निकलने का इक hi रास्ता है , जिसका मायाजाल है उसकी तरह सोचो , और फिर महसूस करो की तुम वही हो , जिसका यह सारा मायाजाल है , तुम आज़ाद हो जोगी..." डेविल यह बोल उठ खड़ा हुआ ,

तभी ख़ुशी ने अपनी आँखें खोली , उसकी आँखें सफेद रौशनी में चमक रही थी ,

"में हु सुहानाआआआअह्ह्ह..." ख़ुशी जोर से चीखती उठ कड़ी हुई , इक तेज़ तूफान सा उठा , साडी कंकाल के रूप में जो बुरी आत्मायें थी , वोह जल कर रख हो गई ,



ख़ुशी जमीन से उड़द रही थी , उसने इक ब्लैक ड्रेस पहन राखी थी , पर अजीब बात यह थी , उसकी आँखें गुलाबी रंग में चमक रही थी , उसके as-pas तेज़ तूफान उठने लगे थे ,



कुछ वख्त बीता था , के सुहाना इक चेयर पर बैठी हुई थी , उसके पीछे आसमान में वही काळा पंछी उड़द रहे थे , उसके होंठो पर इक मुस्कान थी , और पृथ्वी पर वंश जंगल के उस कबीले में , ख़ुशी अपने बीएड पर चैन की नंद सो रही थी , लेकिन कुछ तोह अजीब हुआ था...

वही दूसरी तरफ....

बेबी और काट हॉस्पिटल पहुँच चुकी थी , डॉक्टर नीलम ने फर्जी को एडमिट करवा दिया था , उसका इलाज चल रहा था , वही काट और बेबी , रूम के बहार बैठी रो रही थी ,

उनकी हालत हर कोई नै समाज सकता , वोह दोनों अभ माँ थी , बेटी पर जरा सी भी आंच ए तोह माँ का दिल जल उठता है , असनु खुद बा खुद बहने लगते हैं , और जो अंदर से , दिल में तकलीफ होती है , उसका शबदो में बयान नै हो सकता ,

बेटी अपने बाप की लाड़ली होती है , पर माँ अपना प्रेम अपने दिल में छुपाये रखती है , लेकिन उसका प्रेम बाप से काम नै होता , लेकिन कुछ लड़कियाँ इस बात को जिंदगी भर समाज नै पति , के उनकी माँ उनको कितना प्यार करती है , वोह रोटी है , हस्ती है , अपनी बेटी को अपनी तरह बनाना चाहती है , जो बेटी अपनी माँ के गहरे प्रेम को समाज गई , समझो उसने सब प् लिया अपनी जिंदगी में ,

"काट चुप हो जाओ , कुछ नै होगा फर्जी को..." बेबी अपने असनु अपने अंदर hi समेत कर , काट को संभालते हुए बोली ,

"कैसे , कैसे , चुप हो जाऊ , मेरी बेटी बेहोश पढ़ी है , पर , पर , तुम , तुम यह बताओ , तुम रमा को जानती हो पहले से , बोलो न यह सच है , तुम पता था रमा वह रहती है..." काट बेइंतहा रट हुए बोली , उसका रोना सेहभाविक था , क्यों की उसका दिल अभ पानी की तरह नरम हो चूका था , उसके दिल शुन्य (0) की स्थिति पर पहुँच चूका था ,

"काट , मत सोचो उसके बारे में , वोह बतिअन तुम दर्द देंगी , बस फर्जी के बारे में सोचो..." बेबी फिर से रट हुए बोली ,

"मत सोचो , तुम पागल हो , उस शेतीअन को देख , मेरी बेटी बेहोश हो गई , वोह बेमतलब बात नै है , बस इतना बताओ तुम जानती थी रमा को या नई..." काट इस बार रट हुए थोड़ा गुस्से में बोली ,

"वोह , वोह , रमा , वोह , रमा , रवि की बहिन है , पर वोह शेतीअन नै है , वोह अछि है..." बेबी बिन मतलब बातिओं में उलज़ते हुए रो कर बोली ,

"हम्म , तुमने गुनाह किया है , अपनी बेटी को उस शेतीअन के साये में रखा , जानती हो , इसकी कीमत कितनी बड़ी होगी , में क्यों आयी , में पागल थी , में वही रहती शहर में , काम से काम मेरी बेटी तोह मेहफ़ूज़ रहती , इक बात ध्यान से सुन लो , में किसी को माफ़ नै करुँगी , न तुम , न रवि को , न किसी और को , में अपनी बेटी को वापिस उस शेतीअन के साये में नै जाने दूंगी , यह मेरा आखरी फैसला है , और अगर कोई मेरे और मेरी बेटी के बेच आया , तोह इसका अंजाम बहुत बुरा होगा..." काट इक डैम से तेज़ तेज़ रट हुए अपने गुस्से की आखरी सीमा तक पहुँचते हुए बोली , उसका गुस्सा अभ पूरी दुनिआ को दर्द दे रहा था , खास कर बेबी को , बेबी के जिस्म में दर्द उठने लगा था ,

"अह्ह्ह्ह प्लस गुस्सा मत कारु , तुम जो कहुगी वैसा hi होगा , प्लस शांत हो जाओ , कटत रोना बंद कारु , तुम मेरी कसम , हमारे प्यार की कसम , प्लस कटत..." बेबी उस लकड़ी के बेंच से निचे गिरते हुए दर्द से कहरहते हुए , बेइंतहा रट हुए बोली ,

"रास्ता चुनो , कोई इक रास्ता , मेरे साथ रहूगी , या रवि के साथ , जल्दी बोलो..." काट और भी रट हुए , और भी गुस्सा करते हुए बोली ,

"rr...r..ravii...kk..kee...ss...ss...sathhhh..." बेबी अपनी उखड रही सांसो को संभालते हुए बोली , उसका जिस्म जलने लगा था , जिस्म का मास्स भी फैट रहा था ,

"तोहह जोऊ यहां सीए , दूर हो जाओ मेरी नज़रिओं सी , धोकेबाज , जाओ..." काट बेइंतहा रट हुए गुस्से में चिकटे हुए बोली , उसका शरीर फैट गया , लेकिन उसका असली रूप बेबी ने देख लिया , बेबी से उसके असली जिस्म का तेज़ सहा न गया , उसने अपनी आँखों पर हाथ रख लिए , पर जैसे hi उसने अपनी आँखें खोली , वोह घर पर थी , अपने रूम में बीएड पर लेती हुई , वोह रोने लगी , बेइंतहा रोने लगी , पर इस घटना से काट खुद को पहचान गई थी , लेकिन क्या वोह , किसी को भी अभ , फर्जी के करीब ऐनी देती , यह तोह ऐनी वाले वख्त की बात थी....

तो बे कुनिटेड.....

 
फ्रेंड्स 20 मिंट में अपडेट पोस्ट करता हु , इक बार स्पेलिंग मिस्टेक्स चेक कर लू... शुक्रिया सभी का..
 


अपडेट-103

अभ अग्गे... [5th day starts]

[5th Day subah ke 6 baje...]

कल का दिन कुछ अजीब सा गुजरा था , बहुत कुछ हुआ था , अकेले रवि के साथ नै , हर किसी के साथ , बहुत कुछ ज्ञात हुआ सबको , और कुछ लोग इक दूसरे से रूत भी गए ,

रूठना , यह शब्द प्यार करने वालो और दोस्तों के लिए है , बहुत छोटा सा शब्द है , लेकिन क्या दो जिस्मो को अलग किया जा सकता है , किसी का प्रेम दिल से निकला जा सकता है , मेरे ख्याल से यह संभव नै है , जब हम किसी से रूत जाते हैं , तब खुद को भी दर्द देते हैं , और अपने चाहने वालो को भी , ruthna-manana , यह जिंदगी का इक हम हिस्सा है , और यह पूरी जिंदगी सामान रूप से चलता रहता है ,

कई बार हम किसी से अनंत काल के लिए रूत जाते है , और कई बार कुछ दिनों तक , रूठने के बाद जब हम किसी से बात करना चाहते हैं , तब ईगो का जनम होता है , हम घमंड से भर जाते हैं , के पहले वोह बात करे , फिर हम करेंगे , बिना यह जाने , उस इंसान पर क्या गुजर रही है , ें सब बातिओं का असल मतलब यह है , रूत जाओ , लेकिन कुछ पालो के लिए , कही ऐसा न हो , जब आपकी ईगो , आपका गुस्सा शांत हो , तब वोह इंसान जिन्दा hi न रहे , जिसे अप्प प्यार करते हो ,

काट , बेबी से रूत गई , लेकिन क्या वोह गलत थी , मेरे ख्याल से नै , माँ की ममता , प्रेम से अधिक होती है , इक औरत अगर माँ बन जाये तोह , प्रेम का पलड़ा हमेशा बचो की तरफ अधिक रहता है ,

कुछ लोग कहते हैं , पति पत्नी में उनका बचना ऐनी के बाद , पत्नी का प्रेम दो हिस्सों में बाँट जाता है , यह सरासर झूठ है , प्रेम हमेशा इक सामान रहता है , इसको बाँट नै सकते , अगर ऐसा करोगे , तोह रिश्तो में दरार पढ़ने लगेगी , हाँ ऐसा कह सकते हैं , पत्नी की जिम्मेदारी बाँट जाती है , पर प्रेम नै ,

इंसानी रिश्ता इक बारीक़ धागे की तरह होता है , जायदा खींचने पर टूट जाता है , और अगर ढेला छोड़ देंगे तोह कमज़ोर होकर झुक जायेगा , ऐसी लिए धागा इक सामान रहे , तोह वोह ताकतवर भी रहता है , ज़ुकता भी नै और टूटता भी नै , ऐसी तरह रिश्तो में अगर खिचाव ए , या वोह नरम पढ़ जाये , तोह रिश्ते कमज़ोर हो जाते हैं , किसी से प्रेम पूर्वक रिश्ता निभाना , नंगी तलवार पर चलने जैसा होता है , जिसके लिए मन में विश्वास होना बेहद जरुरी है , तोह अभ अग्गे...

कल पहले रवि , फर्जी और कोमल के साथ चाचा जी के घर गया , वह सोनल को शादी का वादा किया , फिर घर आकर ख़ुशी के साथ शराब का सेवन किया , रत को असलम खान को वेह्शी तरीके से मर दिया , फिर सुहाना से मिलने पारी लोक गया , ख़ुशी मायाजाल से मुकत हो गई , और काट ने बेबी को अपना रूप दिखा दिया , और अपनी बेटी पर खुद का हुक समाज कर , सबको उससे इक पल में दूर कर दिया , वही वोह नकाबपोश औरत शेतीअन के सेवक से मिलने गई और उससे पृथ्वी का रक्षा कवच तोड़ कर , दानवी सेना को पृथ्वी पर लेन का , इक मटर जरिया , वोह शक्तिशाली पत्थर लेकर आयी , जो किसी भी रक्षा कवच को भेद सकता था , खैर अभ अग्गे..

"अह्ह्ह्ह हमारा सार , कितना दर्द कर रहा है , अरे यह कोनसा स्थान है , हम यहाँ कैसे ा गए..." सीमा अपना सार दोनों हाथिओं में दबती उठ कर रूम में as-pas देखते हुए बोली ,

सीमा जैसे तैसे बीएड से उठी , और उठ कर रूम से बहार ा गई , उसे यह सब अजीब लग रहा था ,

"कोई ही , हम कहा ा गए हैं , यह कोनसा मायाजाल है , सामने ायो..." सीमा बहुत जोर से चिलाती हुई बोली ,

तभी रमा इक डैम से उसके सामने ा गई , रमा को देख सीमा थोड़ी हरिजन हो गई , पर उसके चेहरे पर दर का कोई निशान नै था ,

"मायआ..." रमा बेहद प्यार से सीमा को बोली ,

"यह किसकी अजीब से बची हैई , कोण है इसकी मा..." सीमा जोर से छीलते हुए बोली ,

सीमा की जोरदार आवाज़ सुन सब अपने अपने रूम से बहार ा गए , लारा , एलिज़ा , रिमी , शूरति , और रवि ,

रिमी तोह रमा को देखते hi घबरा गई , वोह शूरति के पीछे चिप कर कड़ी हो गई , उसे बेहद दर सा लग रहा था , रमा से , खैर जो कल रत रमा ने किया था , उससे सबका डरना सेहभाविक था ,

"अरे अप्प हो मेरी माँ..." रमा मुस्कराते हुए बोली ,

"हम , हम मलिका सुहाना , जिनकी अभी तक शादी भी नै हुई , और उनकी इतनी बड़ी बेटी , अप्प जरूर कोई जादूगरनी हो , अपना नाम बताओ , क्या यह आपका मायाजाल है..." सीमा बेहद ऐडा और अकड़ के साथ बोली ,

"उफ़ ओह्ह्ह , हो गया सब सतयानाश..." रमा यह बोल अपने रूम में वापिस चली गई ,

"कहा जा रही हो जादूगरनी , हमें वापिस पारी लोग जाना है , हम तुम्हारी कैद में नै रह सकते , हमें प्रिंस से मिलना है , कही रूही उनको फिर से अपने वश में न कर ले..." सीमा बेहद तेज़ी से रमा के पीछे जाते हुए बोली , पर तभी रवि ने अग्गे बढ़ उसका हाथ पकड़ लिया , सीमा ने पलट कर रवि की तरफ देखा , फिर वोह बेहद खुश हो गई ,

"प्रिंस अप्प , मतलब यह कोई सपना तोह नई , कही यह कोई मायाजाल तोह नई , और यह क्या अजीब से कपडे पहन रखे अपने , और मने भी , हमें कोई बताएगा , हम अपना महल छोड़ कर यहाँ क्या कर रही हैं..." सीमा जो सुहाना के रूप में थी , थोड़ी ख़ुशी और थोड़े गुस्से में बोली ,

"हाँ बताता हु , चलो मेरे साथ..." रवि , सीमा का हाथ पकड़े उसे खींचते हुए वापिस रूम में ले गया और दरवाजा बंद कर दिया ,

बाकि लड़कियाँ सोफे पर बेथ गई , शूरति उनके लिए छाए बनाने लगी , कोमल अभी तक सो रही थी ,

रवि , सीमा को अपने साथ लेकर बीएड पर बेथ गया , और उसके खूबसूरत चेहरे को देखने लगा , उसके बाल खुले हुए थे , आँखें बिलकुल काली थी , और आँखों के as-pas कला मेकअप सा किया हुआ था , जिससे उसकी आँखें बेहद खूबसूरत लग रही थी ,

"हम्म , तोह तुम ा hi गई , में तुमसे मिलने गया था , मुझे पता था तुम जरूर ायुगी..." रवि , सीमा के होंठो को चूमते हुए बोलै , सीमा की आँखें खुली की खुली रह गई , क्यों की अभ वोह खुद को सुहाना समाज रही थी , जिसको कभी प्रिंस ने चूमा नै था ,

"प्रिंस अपने हमें चूमा , यह तोह अजीब हुआ , मतलब पारी लोग में अपने ऐसा कुछ नै किया , मुझे लगता अप्प प्रिंस नै हो..." सीमा बेहद नाम आँखों से बोली ,

"ेहडेर अपने दोनों हाथ मेरे हाथो में दो , और आँखें बंद कर मुझे महसूस करो , करती जाओ , जब तक सब जान न लो , धीरे धीरे रवि का जिस्म वापिस डेविल रूप में ा गया , उसका जिस्म आग की तरह गरम होने लगा , सीमा से रवि के जिस्म का तेज़ सेहन नै हो रहा था , पर वोह अपनी आँखें बंद किये हर दर्द को महसूस करते हुए , डेविल के जिस्म का तेज़ और तपश को महसूस करने लगी ,

फिर धीरे धीरे सुहाना को सब यद् ऐनी लगा , उसके अतीत से जुडी इक इक बात , उसकी आँखों के सामने किसी मूवी की तरह पेश होने लगी , सुहाना अपनी यादिओं को फिर से अपने समक्ष पाकर बेहद पर्सन हो गई , दिलकश होंठो पर इक मुस्कान भिकर्ति चली गई , और खूबसूरत चेहरे की हसन सुंदरता , अपने वजूद से बहार आकर , चेहरे के चमक को बढ़ाने लगी ,



सबसे पहले सुहाना ने पारी लोग का प्रवेश दुआर (दरवाजा) देखा , जिसके बहार कुछ परयाण उड़द रही थी , उनमे से कुछ जवान खूबसूरत लड़के भी थे , प्रवेश दुआर बेहद सुन्दर था , रंग बिरंगे बदलो के बेच , इक बेहद बड़ा , मायाजाल से उत्पन हुई , गोल लम्बी सलाखों से बना हुआ था ,



फिर सुहाना की आँखों के सामने पारी लोग का अध्भुत महल ा गया , जो हवा में उड़ता हुआ महसूस हो रहा था , इक बेहद शक्तिशाली परबत पर निर्मित यह महल , कई जादुई शक्त्यिओन से घिरा बेहद मेहफ़ूज़ था , ऐसी महल में सुहाना ने अपना बचपन गुजरा था ,



फिर सुहाना की आँखों के सामने उसकी माँ की तस्वीर उमड़ कर आयी , जो दिखने में बेइंतहा खूबसूरत थी , उनके बाल सुनहरी थे , और उनके एंगल पंखो पर भी सुनहरी परत छड़ी हुई थी , वोह मलिका थी पारी लोक की , उसकी सुनहरी बालो के कारन , उनका नाम सोना रखा गया था ,

सुहाना अपने बचपन को अपनी आँखों के सामने बीत रहा देख रही थी , अपने माँ बाप और अपनी बहिन के लिए उसकी इर्षा अभ बढ़ रही थी , सुहाना अपने बचपन के हर दर्द को अपनी आँखों के सामने फिर से जीवट होते महसूस कर रही थी , अभ सुहाना अपनी जवानी के दिनों में पहुँच चुकी थी ,



सबसे पहले उसकी आँखों के सामने रूही का , बेइंतहा सुंदरता से भरा खूबसूरत चेहरा सामने आया , जिसके सामने सफेद रौशनी भी शर्मसार हो जाये , खूबसूरती भी उसके कदमो में अपना सार ज़ुका दे , जो कुदरत की संतान थी , जिसमे कुदरत की हर खूबसूरती समायी हुई थी , वोह इस ब्रह्माण्ड की सबसे खूबसूरत लड़की परतीत होती थी , जो थी मलिका रूही (कोमल) ,



फिर वख्त बीतता गया , और सुहाना अपने अकेलेपन में अपनी जिंदगी गुजरती गई , उसका कोई दोस्त भी नै था , पूरा दिन कभी यहाँ तोह कभी वह बैठी रहती , अकेले अपने रूम में बैठी रोटी , अपने बहिन से इर्षा करना , अभ उसकी फितरत बन चूका था ,



कभी महल में बैठी रहती , कही किसी परबत की छोटी पर , लेकिन ें सब के बेच उसने इक खास तरह के पंछी को अपना दोस्त बना लिया था , जिसकी रचना उसने खुद की थी , उन्ही से हमेशा बतिअन करती रहती ,



सुहाना को भी रूही की तरह चाँद देखना बहुत पसंद था , इक तरफ रूही अपने भाई के साथ यह प्रेम भरे लम्हे गुजर रही होती , वही सुहाना अपने पंछी दोस्तों के साथ महल की दीवार पर बेथ पोरे हो चुके चाँद को देख कर , अपना मन बेहला रही होती ,

यह पंछी दिखने में मासूम थे , लेकिन इनमे बहुत सी खूबियाँ भी थी , यह सुहाना की अपनी सेना थी , जो जुंग होने पर , या कोई खतरा होने पर , किसी भी चीज़ का रूप धारण कर लेते थे , यह सुहाना की रक्षा करने के लिए , किसी भी हद तक जा सकते थे , क्यों की इनको पैदा करने वाली सुहाना इनकी माँ थी ,

धीरे धीरे सुहाना सब देखती गई , उस बुध्दि जादूगरनी से मिलना , अपने पिता शेतीअन से मिलने की बेपनाह ीचा रखना ,



इक के बाद इक लड़कयों की बलि देना , अपने भाई को महल से निकलवा देना , उसको डेविल रूप में सजा दिलवाना ,



इक के बाद इक , उसे सब दीखता गया , उसके पिता द्वारा इक ऊर्जा का निर्माण करना , जो डेविल समेत हर जीव को कमज़ोर करती थी ,



फिर आखिरी जुंग से पहले की यदिअण , जुंग की खुनी लड़ाई , फिर उसकी मौत , सब कुछ सुहाना को यद् ा गया ,

"ahhhhhhhhhhhhhhh...." इक लम्बी दर्दनाक चीख मरते सुहाना बीएड पर इक तरफ गिर गई , लेकिन खास बात यह थी , उसकी आँखों में असनु थे , लेकिन वोह असनु खून के थे , मतलब पछतावा तोह हो रहा था सुहाना को , उसने जाने अनजाने में , शेतीअन को इस ब्रह्माण्ड में घुसने का मौका प्रधान कर दिया था ,

जो बस अभ कोमल की बलि न होने से रुका हुआ था , शेतीअन इस समस्त ब्रह्माण्ड पर राज़ करने की ीचा रखता था , लेकिन पोरे ब्रह्माण्ड पर उसका अधिकार तभी होता , जब कोमल की बलि सुहाना अपने हाथो से दे देती ,

लेकिन कोमल की बलि से शेतीअन के ऐनी का क्या लॉजिक था , इसका साफ उतर था , कोमल कुदरत की बेटी थी , वोह अपने अप्प में कुदरत थी , और कुदरत पोरे ब्रह्माण्ड का इक हम हिस्सा है , हम कुदरत को ब्रह्माण्ड कह सकते हैं , और ब्रह्माण्ड को कुदरत ,

इक आम सी बात है , कुदरत और ब्रह्माण्ड इक hi चीज़ है , लेकिन शबदो के उच्चारण ने ें दोनों को अलग कर दिया , आम लोग के लिए as-pas की हर चीज़ कुदरत है , और ज्ञानी लोग के लिए ब्रह्माण्ड ,

तोह अगर कुदरत की इक मटर , उसकी प्यारी बेटी की बलि , अगर शेतीअन के नाम पर चढ़ जाती , तोह पोरे ब्रह्माण्ड पर शेतीअन का कला अँधेरा मंडरा जाता , इक बेहद बड़ा पाप होता , जिसका परिणाम पोरे ब्रह्माण्ड को भुगतना पड़ता ,

कोमल की बलि कोई छोटा पाप नै था , यह बेहद बड़ा पाप था , इक पवितर लड़की को शेतीअन के नाम पर अर्पित कर देना , और जितना बड़ा पाप होगा , शेतीअन की ताकत उतनी बाद जाएगी , कुदरत की बेटी ख़तम , तोह कुदरत का रक्षा कवच भी ख़तम , तब शेतीअन अपना कब्ज़ा समस्त ब्रह्माण्ड पर जमा लेता ,

शयद अभ सुहाना को अपनी गलती का एहसास हो गया था , लेकिन यह सब तोह उसके होश में ऐनी पर hi पता चलता , लेकिन रवि ने इक जोखिम उठाया था , कहीं सुहाना फिर से इर्षा और जलन के भाव मन में ले आयी तोह....

वही दूसरी तरफ...

"उफ़ में कहा हु..." ख़ुशी अपना सार दबाते उठ कर बेथ गई , और अपने as-pas देखते hi उसके होंठो पर इक मुस्कान भीकर गई ,

"वाओ , नै यह तोह कमल हो गया , में घर ा गई , माँ कसम , अभ में किसी बेहोश इंसान को देखूँगी भी नै , गाला सुख रहा , पहले कुछ पे लेती हु , कहा है मेरी दारू..." ख़ुशी बीएड से उठते खुद से hi बोली , और दारू की बोतल दंड कर फिर से बीएड पर बेथ कर , दारू पीने लगी ,

"अह्ह्ह अभ जान में जान आयी , वोह कमीना कहा है , उसे भी धोना है , साला मुझे बचने भी नै आया , इसकी तोह में , साला खुद को डेविल बोलता , मेरी बंद बजी थी , और यह यहाँ आराम कर रहा था , रुका नै जाता , पहले पीट अति हु उसको..." ख़ुशी िका इक पूरी बोतल खली करती खुद से hi बतिअन करती बोली , और फिर रूम से बहार निकल गई...

वही दूसरी तरफ...

बेबी रत भर सो नै पायी थी , उसने रवि को क्यों चुना था , इसका उसे एहसास था , काट की शक्ति देख उसे महसूस हो गया था , काट अपनी और फर्जी की रक्षा खुद कर लेगी , पर रवि को उसकी जरुरत थी , वोह रवि से प्यार करती थी , और उसका साथ कैसे छोड़ देती ,

बेबी में कही न कही जूही का अंश अभी मज़द था , वोह खुद को बेबी कहती थी , पर थी वोह रूही , कोमल के लॉकेट ने उसकी ताकत को बड़ा दिया था , पर लॉकेट का अतीत अभी वोह जान नै पायी थी , उसके लिए यह जानना जरुरी थी , पर वोह अभी रिश्तो में उलझी हुई थी , ें बातिओं पर उसका अभी ध्यान भी नै था...

वही दूसरी तरफ..

काट , फर्जी के रूम के बहार बैठी थी , उसने रोना बंद कर दिया था , पर दिल के इक हम हिस्से में बेपनाह दर्द मज़द था , यह दर्द था रवि और बेबी से दूर होने का ,

पर हो न हो काट खुद को पहचान गई थी , अपनी शक्ति को भी , अभ वोह फर्जी को अपने जैसा बनाने का सोच रही थी , तेन की कोई शेतीअन उसकी बेटी को छू भी न पाए , पर क्या रवि ऐसा होने देता , दोनों में जुंग होने के असर नज़र ा रहे थे , क्यों की जो काट करने का सोच रही थी , उससे रवि अपनी बेटी से दूर हो जाता...

वही इक और वोह नकाबपोश औरत वंश जंगल के केले परबत पर , रत से बैठी लगातार कुछ मंत्रो का उच्चारण कर , पृथ्वी के रक्षा कवच को भेदने की असीम कोससिह कर रही थी ,

इक तरफ रवि का परिवार भीकृ हुआ था , दूसरा तरफ शेतीअन की कहकर सेना , पृथ्वी पर ऐनी के लिए मचल रही थी , सिर्फ सेना hi नै , शेतीअन के कुछ अंश , जो दानवो जैसे थे , वोह इस सेना की कमान सम्बल इंतज़ार में थे , कब वोह रवि से बदला लेकर उससे उसकी प्यारी चीज़ चीन अपने पिता को सौंप सके , लेकिन वोह प्यारी चीज़ थी क्या....

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-104

अभ अग्गे....

सुबह के 7 बज रहे थे , काट अभी भी इस इंतज़ार में निगाहे जमाये बैठी थी , कब उसकी बेटी को होश ए , और वोह उसे मिल पाए , काट को खुद में अभ बेइंतहा ऊर्जा का संचार होता परतीत हो रहा था , इक शक्तिशाली ऊर्जा उसके जिस्म की राग राग में दौड रही थी ,

अभ उसका अपने इमोशंस पर पूरा कण्ट्रोल था , लेकिन पारी लोक का उसे अभी कुछ यद् आया था , या नै , यह अभ काट के लफ्ज़ो पर निर्भर करता था , जो उसके और रवि की मुलाकात में बोले जाने थे ,

पूरी रत जागते हुए निकल गई थी , इक गुस्सा था , उसके मन में , क्यों की उसे लगता था , बेबी उसे प्यार करती है , पर अज्ज शयद वोह यह महसूस कर रही थी , इक मर्द का स्थान वोह कभी नै ले सकती , काट को अज्ज महसूस हो रहा था , वोह इक मर्द के हाथो फिर से हार चुकी थी ,

काट अभी अपनी सोचु में गुमसुम थी , तभी फर्जी के रूम से इक नर्स बहार निकली , उसके चेहरे पर इक दिलकश मुस्कान थी , वोह काट के करीब आकर बोली..." मम आपकी बेटी को होश ा चूका , अप्प मिल लो उसे..."

बस यह चाँद शब्द सुनने के लिए वोह रत भर जगती रही थी , काट की आँखों से असनु चालक ए , वोह मुस्कराते रट हुए , उस रूम में घुस गई , यहाँ फर्जी लेती थी ,

रूम के अंदर जाते hi काट ने देखा , उसकी बेटी उसकी तरफ देख मुस्करा रही थी ,

"फरीय..." काट रट हुए इतना hi बोल पायी , और भाग कर फर्जी को अपनी बहु में भर लिया , उसका चेहरा चूमने लगी , माँ के आगोश में आकर , फर्जी को भी , इक सकूं सा मिल रहा था ,

"माँ , पापा कहा हैं , उस बहुत ने पापा को मारा तोह नई... " फर्जी अपनी माँ से अलग होकर बेहद नाम आँखों से बोली , काट को ऐसा महसूस हुआ जैसे वोह अभी रो देगी ,

"नई , मेरा बचा , सब ठीक हैं , मेरी प्यारी बेटी उम्मा , अभ हम वह नै जायेगे , अभ हम शहर जायेगे अपने घर , मेरे साथ जोगी न तुम..." काट बेहद रट हुए बोली , उसका दिल धक् धक् कर रहा था , मनो उसकी पूरी जिंदगी फर्जी के जवाब पर निर्भर करती थी ,

"पर मुम्मा , क्या पापा भी साथ आएंगे हमारे..." फर्जी बेहद मसोमीयत से बोली ,

"नै बेटी , कोई साथ नै आएगा , बेटी वोह भट्ट लड़की तुम्हारे पापा की बहिन है , और में तुम वह नै रहने दूंगी , अगर तुम्हारे पापा उस भट्ट लड़की को छोड़ हमारे साथ शहर रहेंगे , तोह में त्यार हु , लेकिन अगर उनहोनु मन कर दिया , फिर तुम मेरे साथ जोगी..." काट ने बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"उम् , ठीक है , में जानती हु , पापा मेरे साथ जरूर आएंगे..." फर्जी मुस्कराते हुए बोली ,

"अगर वोह न ए तोह , अगर तुम्हारे पापा ने मन कर दिया , तोह तुम मेरे साथ रहूगी , वार्ना में अपना शरीर नष्ट कर दूंगी , मेरी बची , में तुम खोना नै चाहती हु , बोलो क्या फ़ासिला है तुम्हारा..." काट फिर से रट हुए बोली ,

"नई मुम्मा , पापा जरूर आएंगे , अगर न ए , तोह अप्प जो कहुगी में वही करुँगी , पर अप्प खुद को कुछ मत करना.." फर्जी , काट के गले लगती रट हुए बोली ,

"ओह्ह मेरी बची , मेरी बेटी , ठीक है , हम शाम तक वेट करेंगे तुम्हारे पापा का , उसके बाद कोई सवाल नै , में उनको फ़ोन कर देती हु .." काट , फर्जी का माथा चूमते हुए बोली , और फिर बेबी को फ़ोन लगाने लगी , पर रिंग जा रही थी , कोई फ़ोन उठा नै रहा था , ऐसा क्या हो रहा था वह...

वही दूसरी तरफ...

"ोुछःह खुशी ढेरी ोुछहहह , हुआ क्या तुम..." यह आवाज़ रवि की थी , जिसे ख़ुशी अपने रूम में पीट रही थी ,

कुछ वख्त पहले ख़ुशी नशे में धुत , बेहद गुस्से में , रवि को अपने साथ ले आयी थी , और अपना भरपूर गुस्सा उस बेचारे पर निकल रही थी ,

"सेल , में उस काली जमीन पर पानी पानी चिलाती रही , और तू यहाँ ें माखन मलाई जैसी , लड़कयों के साथ मस्ती कर रहा था..." ख़ुशी ने इक जोरदार पंच रवि के चेहरे पर जड़ते हुए बोलै ,

"ोुछः खुशी , देखो मेरी बात तोह सुनो , तुम गलत सोच रही हो , डेविल ऐसा नै है..." रवि अपने चोट लगे गाल को सहलाता हुआ बोलै ,

"तेरी तोह में , कमीने ..." ख़ुशी इतना बोल रवि के चेहरे पर ताबड़तोड़ पंच जड़ने लगी , इक के बाद इक , पंच लगते गए , रवि का चेहरा पूरा चील गया , आखिर उसका इंसानी रूप जो था , और इंसानी रूप में चोट लगने पर खून भी बेहटा है ,

"ोुछः मेरा मोह तोड़ दिया कम्बख्त लड़की , अभी में लास्ट टाइम बोल रहा हु..." रवि अपने होंठो से बहते खून को जीभ से छत्ते हुए बोलै ,

"क्या कर लेगा तू , कमीने तू किसी काम का नै..." ख़ुशी ने इतना बोलै और इक जोरदार मुक्का रवि के पेट में जड़ दिया ,

"याहहहहहहह , बस बहुत हुआ , अभ इक बार और मारा (तभी ख़ुशी इक जोरदार पंच जड़ती है..) , देखो अगर इक बार और...( अभी रवि बोल hi रहा था के ख़ुशी ने उसकी जांगू के बेच घुटना जड़ दिया...) अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ साली फोड़ दिया हथियार , अह्हह्ह्ह्ह बेबी यहाँ नै मरते , ओह्होऊ उफ्फ्फ्फ़ , इसकी सजा अह्ह्ह्ह तुम मिलेगीइ..." यह बोलते hi रवि ने इक जोरदार पंच ख़ुशी के पेट में जड़ दिया ,

"आईईईई मा..." ख़ुशी उड़ती हुई दीवार से जा टकराई और दीवार के साथ रखे लकड़ी के टेबल पर गिर गई ,

"आह्ह्ह्हन्णम ाहहननंम (तेज़ तेज़ हफ्ते हुए) , कुत्ते कमीने मुझे मारा ..." ख़ुशी अपने मोह से बहते खून को थूकते हुए बेहद गुस्से में बोली , और टेबल के ऊपर से hi रवि पर छलांग लगा , इक जोरदार सुपरमैन पंच रवि के चेहरे पर जड़ दिया ,

बस फिर क्या था , इसके बाद सब गोल गोल होने लगा , पहले ख़ुशी मरती , फिर रवि मरता , फिर ख़ुशी मरती , फिर रवि मरता , आधे घंटे बाद , दोनों के चेहरे खून से साणे हुए थे , और दोनों से खड़ा भी नै हुआ जा रहा था ,

"एहहहहह एहहहहह..." ख़ुशी बेहद हफ्ते हुए रवि को मरने लगी , पर तभी रवि ने उसका हाथ पकड़ लिया ,

"बस यार , में थक गया हु , कुछ देर टाइम ब्रेक लेते हैं , उसके बाद बाकि की फाइट होगी , ोुछःह तुम्हारा रूम..." रवि अपने जख्मी , फाटे होंठो पर जीभ फिरते हुए बोलै ,

"ठीक है ब्रेक लेते हैं , हुण्णं उफ्फ्फ में भी थक गई हु..." ख़ुशी इतना बोलै अपने टूटे हुए बीएड पर बैठने लगी , पर तभी वोह निचे गिर गई ,

"ोुछःह मेरे हिप्स टूट गए ..." ख़ुशी अपने हिप्स को सहलाते थोड़े दर्द में बोली ,

"ाहः , तामस तुम किसी ने बताया नै , बंद रूम में नै लड़ा करते ोुछःह , मेरा इक दन्त भी हिला दिया , देखो अपने रूम का हाल .." रवि बेहद हस्ते हुए बोलै ,

तभी ख़ुशी ने बड़ी मुश्किल से खड़े होते हुए , अपने रूम पर नज़र डाली , उसकी आँखें खुली की खुली रह गई , पोरे रूम में इक भी चीज़ ऐसी नै थी , जो टूटी न हो , सब सामान टूट कर भिकारा हुआ था ,

"गेट ोुट्ट्ट्ट , दफ़ाअ हो जाओ मेरे रूम सीए..." ख़ुशी इक लकड़ी का टुकड़ा उठा रवि को मरने अग्गे बड़ी , पर तभी रवि हस्ता हुआ रूम से बहार निकल गया ,

ख़ुशी अपना सार पकड़ जमीन पर बेथ गई ,

वही दूसरी तरफ...

बेबी भी रत भर सोई नै थी , जब काट ने फ़ोन किया तब , बेबी नाहा रही थी , नाहा कर बहार एते hi बेबी ने अपना फ़ोन चेक किया तोह , काट की मिस कॉल्स देख , वोह बेइंतहा खुश हो गई ,

बेबी ने मुस्कराते हुए काट को फ़ोन लगा दिया , कुछ hi रिंग्स गई होंगी , तभी काट ने फ़ोन पिछ उप कर लिया , वोह फर्जी के साथ बीएड पर लेती हुई थी ,

"हलो काट..." बेबी बेहद नाम आँखों से बोली ,

"बेबी वोह , मने तुम फ़ोन किया , असल में , वोह फर्जी को होश ा गया है..." काट अभी बोल hi रही थी के बेबी बेच में बोल पढ़ी ,

"कैसी है मेरी बची..." बेबी बेहद रट हुए बोली ,

"शह्ह्ह्ह मेरी पूरी बात सुनो , फर्जी ठीक है , देखो मने रत hi तुम अपना डिसिशन बता दिया था , फर्जी मेरे साथ शहर जाएगी , बूत फर्जी चाहती है , इक बार रवि उससे बात करले आकर , में शाम तक इंतज़ार करुँगी , अगर रवि नै आया तोह में और फर्जी शहर चली जाएगी , और फर्जी मेरे साथ जाने को त्यार है..." काट बेहद नाम आँखों से बोली ,

"अरे यह तोह अछि बात है , तुम फर्जी का ख्याल मुज़से जायदा रख सकती हो , में रवि को बता दूंगी , मेरी बेटी को प्यार देना..." बेबी ने अपने दिल पर पत्थर रख यह बोलै , और फ़ोन कट कर बेइंतहा रोने लगी ,

दूसरी तरफ काट भी फ़ोन कट कर रोने लगी , और रट हुए फर्जी को अपनी बहु में भर , अपना दर्द हल्का करने लगी ,

वही बेबी कुछ देर रोटी रही , और फिर हिमेट जूता रवि से बात करने अपने रूम से बहार निकल गई , अज्ज उसे ऐसा लग रहा था , जैसे उसकी निशा फिर से उससे दूर चली गई , निशा जो मरकर काट के रूप में वापिस आयी थी , अभ शयद फिर से मर गई थी...

रवि , ख़ुशी के रूम से बहार आया , तोह वोह सीधा सेड्यां चढ़ कोमल के पास चला गया , लेकिन जाते जाते उसका खून उसके जिस्म ने वापिस सोख लिया , पर छोटू के निशान अभी बाकि थी , जिनको भरने में अभी कुछ वख्त लग्न था ,

रवि रूम में आया तोह कोमल अभी भी सो रही थी , कल रत कोमल से हुई बातिओं ने , रवि को यह विश्वास दिला दिया था , उसकी कोमल हमेशा उसके पास है , बस वोह खुद अभी अपने असली रूप में नै रहना चाहती थी , पर क्यों ,

इसके दो कारन थे , पहले रवि अपने डेविल रूप में रहे और उसको न छू पाने के कारन , खुद को बेबस और लचर न समझे , दूसरा सुहाना उसकी बलि न दे पाए , जब तक वोह अपने इस बचे वाले मायाजाल में कैद रहे , लेकिन कोमल की यह हालत , कही न कही , रवि को पीड़ा तोह पहुंचा रही थी ,

"अरे कोमल मोती उठ जा , 8 बजने को ए हैं , इतना नै सोते , उठ जा..." रवि , प्यार से कोमल के बालो को सहलाते हुए बोलै ,

कोमल ने धीरे धीरे अपनी आँखें खोली , और अपने भइआ को अपने पास पाकर मुस्कराने लगी ,

"ढय्या तेन उठ दे (गई) ..." कोमल अपनी बच्चू जैसी आवाज़ में तुतला कर बोली और उठ कर बेथ गई ,

"वैरी गुड , मेरी कोमल सयानी हो गई है , चलो में तुम्हारे लिए छाए लेकर अत हु , तुम मोह धो लो , ठीक है..." रवि प्यार से कोमल का माथा चुम कर बोलै ,

"हाँ ढय्या , गलम गलम तये लाना , अले आप्टे ठहरे (चेहरे) तोह तय हुआ.." कोमल बेहद नाम आँखों से बोली ,

"अले कुछ नै , बस खेल रहा था , ख़ुशी के साथ , अभी कुछ देर में पहले जैसा हो जाउगा.." रवि मुस्कराते हुए बोलै तोह कोमल भी मुस्कराने लगी ,

फिर रवि रूम से बहार ा गया और शूरति और रिमी के पास जाने लगा , तभी बेबी उसके सामने ा गई , जिसकी आँखें थोड़ी नाम थी , रवि समाज गया , कुछ तोह बात हो , जो बेबी को दर्द दे रही है , बेबी , रवि को अपने साथ अपने रूम में ले आयी , पर रूम में काट और फर्जी को न देख , रवि थोड़ा परेशान हो गया...

"हम्म , अभ बताओ बेबी क्या बात है , फर्जी कहा है , फर्जी फर्जी (फर्जी को आवाज़ लगा कर) , कही गई है वोह काट के साथ , बताओ न , तुम्हारी यह ख़ामोशी मेरे दिल की धड़कन बड़ा रही है..." रवि अपनी बेटी को वह न पाकर थोड़ा बेचैन होता हुआ बोलै ,

"वोह , वोह , रवि , में तुम , अह्ह्ह्ह कैसे कहु में , मुज़से बोलै नै जा रहा..." बेबी बोलते बोलते रोने लगी ,

"अह्हह्ह्ह्ह यह लड़कयों वाला दारमा बंद करो , और बताओ मेरी बेटी कहा है , और तुम रो क्यों रही हो..." रवि , बेबी के कण्डु पर हाथ रख , बेहद गुस्से में उनको जिज्डोटे हुए बोलै ,

"ाचा बताती हु (अपने असनु साफ कर) , वोह कल रत फर्जी ने रमा को देख लिया था , रमा का रूप देख , उसे गहरा सदमा लगा और वोह गिरकर बेहोश हो गई , में और काट , dr.nelam जी को साथ लेकर , उसे हॉस्पिटल ले गए..." अभी बेबी बोल hi रही थी के इक जोरदार थपड उसके चेहरे पर ाँ पढ़ा ,

"चट्टाअक्कक्क , मेरी बेटीई हॉस्पिटल में एडमिट हैईईई , ऑर्डर तुमने मुझे बताना जरुरी नै समझा , तुम दोनों की इतनी हिमेट , तुमई पता था मेरिइइइ बेटीइ सी मी कितना प्याररर करता हुऊ..." रवि बेइंतहा गुस्से में चीखता हुआ बोलै , उसका रूप बदल गया , आँखें लाल रौशनी में चमक उठी , जिस्म लाल रंग का होकर आग जैसे तपने लगा ,

बेबी , रवि का डेविल रूप देख , अंदर तक कम्प गई , उसके पेअर थार थार कम्पनी लगे , ऐसा गुस्सा उसने रवि का पहले कभी नै देखा था , अभ उसे काट की चिंता भी होने लगी थी ,

"बताऊओं मेरीए बेटीई अभ कैसीई हैईईई..." रवि गुस्से में चीख कर बोला , तोह बेबी फिर से रोने लागीयी ,

"वोह (रट हुए) अभ ठीक है , पर काट का फ़ोन आया था , तुम बुला रही है वोह , जाओ मिल ायो अपनी बेटी से..." बेबी बेइंतहा रट हुए डरते हुए नज़रियन ज़ुका कर बोली ,

"मेरीए बेटीई मई आ रहा हुऊ , तुम कोमल को छाए पिलाओ वोह उठ गई हैईईई..." रवि इतना बोल वह से गयाब हो गया... और सीधा इंसानी रूप में उस हॉस्पिटल के पार्किंग एरिया में प्रकट हो गया , रवि अपनी बेटी से मिलने के लिए हॉस्पिटल के अंदर की और जाने लगा...

लेकिन क्या काट , रवि की भावनायिओं को समाज पति , यह रवि , काट की भावनायिओं को , फर्जी , रवि की अपनी बेटी थी , उसकी बड़ी बहिन रेखा की बेटी , रवि इक पिता तोह था hi , पर ईगो में लिपट इक दरिंदा भी था , जिसे अपनी हर चीज़ प्यारी थी ,

अगर वोह रूही के प्यार में डेविल बन सकता था , सदियों तक नाराज की आग में जल सकता था , तोह फर्जी तोह उसका अपना खून थी , उसके लिए वोह किसी भी हद तक जा सकता था , पर क्या होगा दोनों की मुलाकात में , यह ऐनी वाले वख्त में छिपा था...

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-105

अभ अग्गे...

रवि धीरे धीरे अपने कदम बढ़ाता , उस रूम के सामने पहुँच गया , यहाँ उसकी बेटी एडमिट थी , उसके दिल में इक गुस्सा , इक दर्द सा था , वोह इतना बेचैन कभी नै हुआ था , मनो फर्जी , उसकी जिंदगी का सबसे हम हिस्सा बन चुकी थी , यह बेचैनी तभी दूर होनी थी , जब रवि उसे अपनी बहु में भर लेता ,

रवि ने दरवाजा खोला और अंदर घुस गया , काट और फर्जी दोनों बीएड पर लेती हुई थी , काट ने फर्जी को अपनी बहु में भर रखा था , जैसे कोई उसे चीन का ले जाना चाहता हो , माँ की ममता थी या यु कहलो इक दर था उसकी आँखों में ,

काट , रवि को देख उठ कर बेथ गई , फर्जी अपने पापा को देख बेइंतहा खुश हो गई , उसके मासूम चेहरे पर इक मुस्कान भीकर गई ,

"मेरी बची..." रवि इतना बोल तेज़ी से अग्गे बड़ा , और फर्जी को अपने आगोश में ले लिया , उसका चेहरा चूमने लगा , अपनी बेटी को हॉस्पिटल में देख , उसकी अखन बेहद नाम हो गई ,

"पापा में ठीक हु..." फर्जी मुस्कराते हुए बोली , उसे एहसास हो गया था , उसके पापा रो रहे हैं , वैसे भी फर्जी का दिमाग अभ इक आम लड़की से जायदा तेज़ था ,

"तुम , तुम , ओह्ह्ह , तुम यहाँ कैसे ा गई , मेरी बेटी उम्मा , अभ में तुम कोई तकलीफ नै होने दूंगा..." रवि बेहद नाम आँखों से फर्जी का माथा चूमते हुए बोलै ,

"पापा , रोना बंद करो , में ठीक हु , बस जरा सी बेहोश हुई थी , बेबी और काट मुम्मा मुझे हॉस्पिटल ले आयी , अभ डरने की बात नै है..." फर्जी बेहद नाम आँखों से बोली , अपने पापा का दर्द , उससे बर्दाश्त नै हो रहा था ,

"दारू नई , फर्जी कैसे न दारू मेरी बेटी , तुम जरा सी भी आंच अति है , मेरा दिल दर्द से भर जाता है , अगर कोमल को यह पता चल जाता , वोह कितना रोटी , तुम हमारी जिंदगी का सबसे हम हिस्सा हो , तुम्हारे पापा तुम्हारे बिना कुछ नै , उनकी कोई कीमत नै..." रवि बेहद नाम आँखों से दर्द भरे शबदो में बोलै , यह शब्द दिल की गहरायी से फुट रहे थे ,

"ओह्ह हो , पापा में ठीक हु , काट मुम्मा अप्प बताओ न पापा को , मेरी तोह बात नै सुन रहे वोह.." फर्जी मुस्कराते हुए काट की तरफ देखते हुए बोली ,

"हाँ रवि , फर्जी सही बोल रही है , वोह अभ बिलकुल ठीक है , हम शाम को शहर जा रहे हैं , अपने घर , क्यों है न फर्जी..." काट मुस्करा कर बोली , पर फर्जी खामोश हो गई , वोह ख़ामोशी से रवि की तरफ देखने लगी , मनो उससे जवाब मांग रही हो ,

"घर , कोनसे घर , हमारा घर तोह कबीले में है , वही तोह है हमारा पूरा परिवार , तुम , तुम कहना क्या चाहती हो..." रवि इक डैम से चौंक कर बोलै ,

काट मुस्कराते हुए रवि की बात सुन खामोश हो गई , उसे पता था , यही होगा , बूत फर्जी के सामने वोह ऐसी बतिअन नै करना चाहती थी , क्यों की जब दोनों गुस्से में बात करते तोह , फर्जी रोने लगती ,

अभी काट कुछ बोलने hi जा रही थी के dr.nelam अंदर ा गई , रवि उसे देख बहुत खुश हुआ , कुछ पल रवि ने dr.nelam से बतिअन की , पर उसने महसूस किया , फर्जी और काट खामोश है , उनके चेहरों पर इक उदासी , इक दर्द , इक अकेलापन सा दिख रहा था ,

"dr.nelam अप्प जरा फर्जी का ख्याल रखना , में और काट अभी एते हैं , मुझे फर्जी का कुछ सामान खैरड़ कर लाना है..." रवि , काट के मन के हालत समज़ते हुए बोलै ,

"अरे यह कोई कहने वाली बात है , में हु न अपनी बेटी के पास , तुम दोनों जा ायो... " dr.nelam मुस्कराते हुए बोली ,

dr.nelam की बात सुन रवि और काट मुस्कराने लगे , फिर वोह दोनों रूम से बहार ा गए , अभ दोनों को कोई ऐसी जगह चाहये थी , यहाँ उनको कोई परेशान न करे , वोह दोनों हॉस्पिटल से बहार आकर , थोड़ी दूर बने इक गार्डन में जाकर बेथ गए , वह लोग तोह थे , पर इतने नै थे ,

"शुक्रिया..." रवि मुस्करा कर बोलै ,

"किस बात का..."

"अरे तुम , मेरी बेटी को हॉस्पिटल ले आयी , उसका ख्याल रखा , इस लिए.." रवि , काट की आँखों में देखते हुए बोलै , जब की काट थोड़ा सकपका गई , रवि के होंठो से "मेरी बेटी" सुन कर ,

"वोह मेरी बेटी भी है रवि , में माँ हु उसकी , में ख्याल नै रखूगी , तोह कोण रखेगा..." काट अपनी भावनायिओं को छुपा मुस्कराते हुए बोली ,

"मने कब कहा के नै है , बूत शहर जाने वाली बात मेरी समाज में नै आयी , मतलब क्या है इसका..." रवि बहुत गहरी नज़रिओं से काट का चेहरा देखते हुए बोलै ,

"मतलब , मतलब , हम्म , तोह यह बात है , समज़ती हु इक पिता के दर्द को , पर रवि , तुम , तुम अपनी बेटी की जान खतरे में दाल रहे हो , वह चुड़ैल जैसी तुम्हारी बहिन है , जब तक वोह उस घर में है , फर्जी वह नै जाएगी..." काट मुस्कराते हुए बेहद गुस्से में बोली ,

"शट उप , मेरी बहिन कोई चुड़ैल नै है.." रवि इक डैम से उठते हुए बोलै , उसे बेइंतहा गुस्सा ा रहा था काट पर ,

"ओह्ह हो , मतलब उसने चुड़ैल का मेकअप किया था , लेकिन , लेकिन , अह्ह्ह रावी , सचाई को तुम नकार नै सकते , तुम्हारी बहिन ने सब पर हमला किया , उनको दर्द दिया , अगर भगवन न करे , फर्जी उस वख्त हमारे साथ होती , तोह , इसका जवाब है तुम्हारे पास कोई..." काट बेहद गुस्से में बोली , वोह रवि द्वारा रमा का पक्ष लेने से बेहद नाराज़ हो गई थी ,

"नै है , कोई जवाब नै है , लेकिन रमा को अपनी गलती का एहसास हो जायेगा , दुबारा कभी वोह ऐसा नै करेगी , में वादा करता हु तुमसे , अभ प्लस घर चलो , सब इंतज़ार कर रहे हैं..." रवि , बेहद नरम सेहभाव से बोलै ,

"तुम , तुम , बेवकूफ हो , में कब से समझा रही हु , तुम , ओहूऊऊ , तुम कुछ समाज नै अत , तुम्हारी बहिन नार्मल नै है , वोह गुस्से में आकर तबाही मचा सकती है , तुम , तुम , इस बात को सवीकार क्यों नै करते , देखो , थोड़ा ठन्डे दिमाग से सोचो , हमारे साथ शहर चलो , देखो अगर तुम नै ा सकते , तोह में , में हु न फर्जी के साथ , तुम मिलने ा जाया करना..." काट बेहद प्रेम से रवि के गालो को सहलाते हुए बोली ,

"ाहः , मेरी बेटी , मेरा खून , और हुक किसी और का , यह संभव नै है , में खुद उसकी रक्षा कर सकता हु , और में अपने परिवार से उसे अलग नै होने दूंगा , तुम लगता है , वोह तुम्हारे साथ खुश रहेगी , जो प्यार उसे परिवार में मिला है , वोह तुम अकेले नै दे सकती , काट , मेरी बेटी मेरे साथ जाएगी , यह मेरा आखरी फैसला है..." रवि गुस्से के अंतिम शिकार तक पहुँचते हुए बोलै ,

"यहहहह , यह कभी नै होगा , वोह मेरे साथ रहेगी , उस चुड़ैल के साये में , मेरी बेटी कभी नै जाएगी , में ऐसा होने नै दूंग़ीीी..." काट बेइंतहा गुस्से में बोली , उसका शरीर फटने लगा , आँखों से असनु बहने लगे ,

"अह्हह्ह्ह्ह तुम , तुम पागल हो गई हूँ , रोना बन्द्द करूओ , अह्ह्ह्हह कटत रोना बंद कारु , में , में कमज़ोर हो रहा हूँ..." रवि , काट के बेइंतहा गुस्से की तपश को बर्दाश्त न करते हुए जमीन पर घुटनो के बल बेथ गया , काट के जिस्म से निकलती तेज़ ऊर्जा , रवि के जिस्म को जलने लगीई ,

"मी जीविका हूँ , काट नईईई , में हर जीव का अंश हूँ , ब्रह्माण्ड के हर जीव की ऊर्जा की शक्ति है मुझ मी , में तुम ख़तम कर डूंगीए देवीललललल , जो कम् पारी लॉग में अधूरा रह गया , वोह अभ पूरा करुगीीी..." काट और भी गुस्से में चीखते हुए बोली ,

तेज़ हवा चलने लगी , आसमान में बदल गरज़ उठे , पृथ्वी कम्पनी लगी , काट पूरी पृथ्वी के जीवो की ऊर्जा खींच रही थी , जिससे उसके जिस्म का तेज़ अभ बढ़ता जा रहा था , ऐसा गुस्सा उसे पारी लोग में भी कभी नै आया था ,

"अहहहआ , तुम , तुम हार जोगीइ जीविका , तुम अह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ तुम डेविल से नै जीत सकती , डेविल का गुस्सा अभी तुमने देखा hi कहा हीी , अह्ह्ह्हह्हह तुम इंसानो को कमजोर्र करररर रही हूँ , मी नई मर्डर सकता , मुझे शाप मिला हैई पिता जी सी..." रवि अपने जिस्म में होते बेइंतहा दर्द को महसूस करते हुए बोलै , रवि का जिस्म फटने लगा था , वोह कमज़ोर हो होकर जमीन पर गिर गया , उसके मोह से खून बहने लगा ,

कुछ चीज़ो का निर्माण ऐसी लिए होता है , तेन की वोह चीज़े कण्ट्रोल में रहे , एर्थ को ग्रेविटी कण्ट्रोल में रखती है , और समाज के बनाये नियम , परिवार को , ऐसी तरह डेविल को कण्ट्रोल करने के लिए जीविका का निर्माण हुआ था , जीविका इक ऊर्जा थी , उसने जनम नै लिया था , वोह ब्रह्माण्ड की सबसे बड़ी ऊर्जा का इक अंश था , जिसे मरना कठिन था ,

"अह्ह्ह मेरी बैठत मन जोऊ , दूरर हो जाओ मेरीए बेटीइ सीए , वर्णा मर्डर जोगी..." बेइंतहा तेज़ चलते तूफान के बेच काट , रवि को बेहद कमज़ोर करते हुए बोली ,

"ाहः , मर दू , कोइई बैठत नयी , पर ज़ुकूगा नयी , अह्हह्ह्ह्ह में अपनीइ बेटी के लिये जान दिए सकता हूँ कतलीनंण..." रवि दर्द में कहरहते हुए बेइंतहा हस्ते हुए बोलै ,

"तुम मर्डर नई सकती में जान्तीय हूँ , पररर में तुम सदियों तक ऐसे hi तड़फा सकतीई हूँ..." काट और भी गुस्से में अपने जिस्म से निकलती रौशनी से रवि को जलाते हुए बोली ,

"तोह तुम भी अह्ह्ह दूररर रहुगीय मेरीए बेटीइ सी , में नयी जुकूगा , चाहे सदयों तक यह दर्द सहना पढ़िए , पृथ्वी के अंत आअह्हह्ह्ह्हह की तुम जिम्मेदार होगीयी , सिर्फ तुम..." रवि और भी दर्द में कहरहते हुए बोलै , डेविल बने रहना उसके लिए शाप था ,

"तुम जिद्दी हूँ , उस वख्त रूही से दूर नई हुए , और अभ मेरी बेटी से दूर नै हो रहे हो , में तुम्हारी जिद्द तोड़ दूंगी डेविल , तुम झुकना होगा जीविका के अग्गे..." काट बेहद गुस्से में बोली ,

"पागल लड़कियी , अह्ह्ह डेविल को झुकना चाहती हो , तुम , अह्ह्ह , तुम , कुछ नै कर सकतीई , मेरीए जिद्द्द तुम भी फरीय से दूर रखेगीइ , कोई न कोइई उसे घर ले hi जाएगा , तुम हार जोगीइ कटत..." रवि बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,

तभी इक डैम से वह इक ब्लैकहोल बना , और ख़ुशी , रवि को उठा , वह से गयाब हो गई , कटत धीरे धीरे शांत होने लगी , लेकिन गुस्सा अभी भी वही था ,

"यहहहहहह , तमासस्स तुम भी मरुगीय मेरी हांथो सी..." काट जोर से चीखते हुए बोली , तभी कुछ पलु बाद , वह सब नार्मल हो गया , तूफान शांत हो गया , लेकिन उस तूफान ने कुछ hi पलु में , सब चीज़ो को tehas-nehas कर दिया था ,

काट वह से उदास सा चेहरे लिए हॉस्पिटल की तरफ बढ़ने लगी , जिसका बोर्ड तूफान में टूट कर निचे गिरा हुआ था , और कुछ खिड़कियों का कांच भी टूट चूका था , काट यह सब देख और भी उदास हो गई , वोह उदास चेहरा और उदास मन लिए हॉस्पिटल के अंदर चली गई..

वही दूसरी तरफ...

ख़ुशी ने अपनी टेलिपोर्ट करने की शक्ति से , रवि को काट की कैद से मुकत कर दिया था , अभ वोह रवि को वंश जंगल में ले आयी थी ,

रवि जमीन पर पढ़ा हुआ था , वोह डेविल रूप में था ,

"रावी , रावी , प्लस उठो न , क्या हुआ वह पर , काट से दूर रहना था तुम , वोह कमज़ोर करती है तुम , क्यों गए उसके नज़दीक..." ख़ुशी बेहद प्रेम से रवि के चेहरे को चूमते हुए बोली , डेविल का चेहरा बहुत घिनोना था , पर प्रेम में सूरत का कोई महत्व नै होता ,

"अह्ह्ह ठीक हु में तामस , उफ्फ्फ्फ़ उसे जान से मर दूंगा मी , मेरी बेटी को चीन लिया उसने , और , और तुम मुझे वह से क्यों ले आयी , में मर नै सकता , तुम पता था..." रवि जमीन पर लेते लेते hi आँखें खोल कर बोलै , उसकी आँखें लाल रौशनी में चमक रही थी ,

"वोह , वोह , रवि इक मुसीबत ा रही ही , दानवी सेना , उठो तुम , में दिखती हु तुम..." ख़ुशी बेहद नाम आँखों से बोली ,

रवि उठने की कोससिह करने लगा , कुछ hi पलु में वोह ठीक हो गया , और उठ कर खड़ा हो गया , और ख़ुशी ने उसे वंश जंगल के उस परबत पर , उस नीले पत्थर से निकलती ऊर्जा , रवि को अपनी शक्ति से दिखा दी , जो अभ बेइंतहा फैल चुकी थी ,

"यह संभव नै है , पृथ्वी का रक्षा कवच कोई कैसे तोड़ सकता है..." रवि , ख़ुशी की आँखों में देखते हुए बोलै ,

"रावी , तुम इंसानी रूप में ायो , हम घर चलते हैं पहले , फिर कोई प्लान बना कर उनसे लड़ेंगे , इसका जवाब ढूंढ़ना होगा तुम..." ख़ुशी , डेविल के लाल चेहरे को हाथ से सहलाते हुए बोली ,

"में ा तोह चूका हु इंसानी रूप में .." इतना बोल जैसे hi रवि ने अपने हाथो को उल्टा करके उनकी चमड़ी देखि , वोह चौंक सा गया ,

"यह सब जीविका (काट) ने किया है , तेन की तुम , फर्जी से दूर रहो , ओह्ह्ह अभ क्या होगा..." ख़ुशी बेहद सेहमी सी बोली ,

"katttttttttttttt (बेइंतहा गुस्से में ) , में तुम तबाह कर दूंगा , मेरा रूप चीन लिया तुमनेई..." रवि गुस्से की अंतिम शिकार तक पहुँचते हुए बोलै , उसकी तेज़ चीख से उसके चारो और जंगल में आग लग गई , सब कुछ जलने लगा , आसमान से बिजलियाँ गिरने लगी पृथ्वी पर , पूरी पृथ्वी कम्प सी गई ,

"रावी शांत हो जाओ , कोई रास्ता होगा , किसी न किसी को पता होगा , तुम पहले जैसे हो जाएगा..." ख़ुशी प्यार से रवि को शांत करने लगी ,

"नयी आएगा मेरा वोह इंसानी रूप , में अभ यह लाल दरिंदा बन कर रहुगा , जिसको छूटे hi इंसान जल जायेगे , अगर , अगर कोई इंसान मुझे देखेगा , तोह वोह , वोह दर से मर जायेगा , उस जीविका ने मुझे हरा दिया , मेरा रूप चीन लिया , में अपनी बेटी के सामने कैसे जा पाउगा , मेरी बेटीइ , fariiiiiiiiiii , तमासस्सस मेरा इंसानी रूप वापिस लयू वरना सब कुछ जला दूंगा , किसी को जिन्दा नै छोड़ूगा मी , मुझे मेरीए बेटी से मिलना हैईईईई..." रवि डेविल रूप में और भी गुस्से में अत हुआ दर्द भरे शबदो में बोलै , उसके जिस्म से आग निकलने लगीई , उसका जिस्म फैट कर गरम जवालामुखी के लावे जैसा हो गया , ऐसा महसूस हो रहा था , वोह आग का बना हुआ था...

तामस बेहद दर गई , इक तरफ रवि का गुस्सा शांत नै हो रहा था , और दूसरी तरफ , पृथ्वी का रक्षा कवच टूटने वाला था , क्या होना था अभ , अगर इतने गुस्से में रावी , दानवी सेना से लड़ता , तोह वोह पूरी मानव जाती के लिए खतरा बन जाता...

"कड़ी कड़ी मेरा मोह क्या देख रेहीइ हूँ , मेरीए बेटीइ को लयू , जोऊ तमस , तुम मेरे साथ थी न हर पल , सदियों तक नाराज में जलता रहा , पर रूही नई मिली , क्यों कोई जीविका (काट) थी वह , अभ यहाँ मेरीए बेटी मुज़से दूर हो गइईईई , तमासस्स तुम मुज़से प्याररर करतीय हो ना , फिरर जाओ मेरीए बेटीइ को लयू..." रवि बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए दर्द भरे शबदो में बोलै , उसके दर्द भरे बेपनाह गुस्से ने तामस को अंदर तक हिला दिया था ,

"रवीए (रट हुए) शांत हो जाओ , फर्जी तुम इस रूप में देखते hi मर जाएगी , प्लस शांत हो जाओ , हम कोई रास्ता निकल लेते हैं ..." ख़ुशी , रवि के सामने घुटनो के बल बैठते हुए बोली , रवि के जिस्म से निकलती गरम आग से , ख़ुशी का जिस्म भी लाल होने लगा था , पर वोह डेविल की तपश को सेहन कर सकती थी ,

"हाँ , मेरी बेटीइ मर्डर जाएगीइ , मेरे इस रूप को देखते होई , पर मेरा गुस्सा काम नै हो रहा , मुझे पृथ्वी छोड़नी होगई , हमें वापिस हेलल जाना होगा तामस , और कोई रास्ता नयी हैई , मेरा गुस्सा अभ सदियों तक शांत नै होगा , हमें हेलल जाना होगा..." रवि अपने सार को दोनों हाथो में दबाते हुए बोलै , उसकी आँखों के सामने उसकी बेटी का चेहरा बार बार ा रहा था , लेकिन इस बात का उसे एहसास हो गया था , वोह कभी अपनी बेटीइ से मिल नै पायेगा...

"रविइइइ , हम जायेगे हेलल , बस इक आखरी काम कर ले , इक ाचा काम , हम दोनों ने पिछले पोरे जनम में , पिता जी के बनाये निज़मो का तोडा , अभ ें मासूम लोग की रक्षा कर , इक अंतिम ाचा काम कर लेते हैं , और यह फर्जी के लिए भी जरुरी है , फर्जी को बचाना है हमें , रवीए उस दानवी सेना का अंत कर , वोह रिंग उनसे चीन लो..." तामस बेइंतहा गुस्से और दर्द भरे शबदो में बोली ,

"वोफ्फफ्फ्फ़ वूफफ (घूरते हुए) , तुम ठीक कह रेहीइ हूँ तमस , में उस रिंग का किस्सा अभ यही ख़तम कर दूंगा , में लडूगा शेतीअन की सेना सी , पररर यह कोइई अच्छा काम नईईई होगा , सुनाए तुमनेई पिता जीईई , में डेविल हुऊ , डेविल था , और डेविल hi रहुगाआ , अपनीई बेटीइ को बचना हैई म्युज़िए , चालू तमासस्सस..." रविइइइ अपने डेविल रूप में और भी गुस्से में एते हुए बोलै , खास कर जब उसने अपने पिता को यद् किया था... अभ शयद जुंग होने वाली थी , इक अंतिम जुंग , और इसका अंत इक दर्दनाक रूप में होने वाला था...

[me samazta hu ke es update me pics ki jarurat nai hogi , bus mehsus karna update ko :) ]

तो बे कुनिटेड....

 


अपडेट-106 (आल अपडेट -798)

अभ अग्गे...

रवि जंगल के बेचू बेच , नदी किनारे , अपने बेइंतहा गुस्से में देहक रहा था , जिस्म से आग निकल रही थी , और गरम लावे जैसी बूंदे जमीन पर गिर रही थी , जिस कारन ऐसा पार्टेट हो रहा था , जैसे रवि के पैरो में किसी ने जवालामुखी से निकलता गरम लावा दाल दिया हो ,

as-pas के पेड़ रवि के गुस्से भरी आग से जल रहे थे , रवि का बेशुमार गुस्सा , उस hare-bhare जंगल का विनाश कर रहा था , यह सब क्यों हुआ था , इक जिद्द के कारन ,

जिद्द , इक छोटा सा लफ़ज़ है , पर अगर यह किसी के मन में घर कर ले , तोह वोह इंसान कामयाब भी हो सकता है , दुनिआ की हर ताकत हासिल कर सकता है , पर अगर जिद्द गलत हो मन में , तब हर तरफ विनाश होता है , रिश्ते- नाते , दोस्त , प्यार , सब तबाह हो जाते हैं , जिद्द करो तोह अछि करो , वार्ना जिद्द को 4 शब्द समाज कर इससे दूर रहो ,

यह सब कहा से सुरु हुआ , इक छोटी सी बची फर्जी के कारन , जिसकी खेलने कूदने की उम्र थी , वोह रिश्तो में उलझी पीड़ा सेहन कर रही थी , उसे यह भी नै पता था , उसके पापा डेविल हैं , उसका पूरा परिवार इक शाप से जुड़ा हुआ है , खैर अग्गे ,

"रवीए , प्लस शांत हो जाओ , तुम्हारा गुस्सा पूरा जंगल जला देगा , प्लस में हाथ जोड़ती हु , अगर तुम शांत न हुए , तोह जंगल के साथ साथ , पूरा कबीला और कोमल भी जल जाएगीइ , प्लस , प्लस..." ख़ुशी अपने घुटनो के बल बैठी रट हुए बोली , उस से रवि का दर्द सेहन नै हो रहा था , ऐसा दर्द उसने पारी लोक में देखा था , जब रवि को डेविल बना कर हेलल में दाल दिया गया था ,

"नआईईई हूँ सकता शांततः , में नयी हो सकता , तुम , तुम जाओ , सबको जुंग के लिए त्यार करूओ , में यही मिलुंगा तुम्ही , जाओ तमस , वख्त बहुत काम हीी , हमें पृथ्वी छोड़ कर जाना हैईईई..." रवि अपने आग से लथपथ रूप में ख़ुशी के चेहरे को देखते हुए बोलै ,

ख़ुशी ने कुछ पल रवि की आँखों में देखा , और फिर वह से गयाब हो गई , तेन की सबको त्यार कर सके , ऐनी वाली बेहद बड़ी मुसीबत के लिए , सबका त्यार रहना बेहद जरुरी था ,

ख़ुशी के जाते hi रवि अकेला पढ़ गया , वोह कुछ नै सोचना चाहता था , पर मन में एते विचार कभी रुकते नै , दिमाग में उत्पन होती तस्वीरें कभी थमती नै , फर्जी का चेहरा , उसकी बतिअन , बार बार रवि को यद् ऐनी लगी , और फिर कोमल की यदिअण भी ,

"अभ में कोमल से कैसी मिलुंगा , में , में , अपनी कोमल से और दूर हो गया , कोमलललललल , हम फिर से उसी स्थान पर आ गयी , हम फिररर से दूररर हो गयी , कटत तुमई मरना होगा..." रवि बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै , उसका गुस्सा अपनी अंतिम शिकार पर पहुँच तांडव कर रहा था , इतना ब्यांक गुस्सा , उसने कभी महसूस नै किया था , उसका हर रिश्ता , इस गुस्से भरी आग में जल रहा था ,

तभी उसके as-pas इक सफेद रौशनी फैल गई , रवि अपने तपते शरीर के साथ , कुछ समाज न पाया , उसे लगा काट फिर से ा गई है , वोह और भी गुस्से में घूरने लगा , उसे नफरत हो गई थी इस सफेद रौशनी से , वोह इस रौशनी को नष्ट कर देना चाहता था , पर वोह जितना भी अधिक गुस्सा कर लेता , पर पवितर तेज़ का विनाश नै हो सकता था ,

"कटत , तुम फिर से ा गइईईई , इस बार्डर डेविल झुकेगा नईईई , तुम मर देगा देविल्ल , तुम्हारा अंततः मेरी हाथों होगा..." रवि बेइंतहा गुस्से में उस रौशनी पर अपनी तपश का प्रभाव डालते हुए बोलै , तेन की वोह सफेद रौशनी उसका तेज़ बन जाये , उसका रंग सफेद से लाल पढ़ जाये ,

"रवीए , इतना अधिक गुस्सा , तुम्हारे लिए ाचा नई , शिव ने यह रूप तोह नै दिया था तुम..." इक बेहद पवितर आदमी रवि के समक्ष आकर खड़ा हो गया , उसकी आवाज़ बेहद नरम थी , इक मटर अंश भी नै था उसमे , किसी भी बुराई का ,

"पुजारी बाबा अप्प , शिव ने सब चीन लिया मुज़से , में इस बार फिर हार गया , मेरा प्यार और मेरी बेटी , दोनों मुज़से दूर हो गए , do-do दर्द मिले म्युज़िए , क्या शिव यही चाहते हैं मुज़से , वोह बार बार मुझे hi क्यों दर्द देते हैं..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै , पर उसका गुस्सा जरा सा भी काम नै हुआ था ,

"कोण कहता है , वोह दर्द देते हैं , तुमने खुद इस दर्द को जनम दिया ही , प्रेम पाना गलत नै ही , पर प्रेम पाने का रास्ता गलत नै होना चाहये , कोमल तुमसे दूर है , क्यों की तुम ब्रह्माण्ड के सबसे बुरे जीव हो , तुम इक डेविल हो मेरे बचे , तुम्हारी जिद्द , तुम्हारा घमंड , तुम बेपनाह शक्ति देता है , पर जब शक्ति मिलती है , तब दर्द भी मिलता है , प्रेम से दूर तोह वोह भी रहे थे , पर उनहोनु वेरीआग का रास्ता चुना था , गुस्सा तोह वोह भी हुए थे , जब वोह अपने प्रेम को जलने से बचा न पाए , पर गुस्सा शांत भी किया था उनहोनु , तुम अपना गुस्सा शांत नै कर रहे हो , अभ भी बदले की भावना दिल में बसाये बैठे हो..." बाबा ने बेहद नरम बातिओं से रवि का गुस्सा शांत करने का परियस करते हुए बोलै ,

"में , में , अपनी बेटी से भी दूर हो गया , नै कर सकता , में कुछ नै कर सकता , यह रूप मेरा शाप बन चूका है , मुझे हेलल जाना होगा , वही होगा मेरा गुस्सा शांत..." रवि बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"बेटी , तुम्हारी बेटी , तुम्हारा hi इक अंश है , लेकिन उसमे गुस्सा का कोई अंश नै , क्यों की वोह मन के भेटेर सोचती है , और तुम बिना सोचे हर कदम उठे लेते हो , कैटलीन इक पवितर ऊर्जा है , वोह प्रेम से वंशित रही है हमेशा , माँ का प्रेम नै प् सकीय , बाप का प्रेम नै मिला , दोस्त का प्रेम नै मिला , लेकिन बेबी ने उसको प्रेम दिया , उसमे बदलाव ऐनी लगा , लेकिन जब फर्जी उसके पास आयी , तोह वोह इक माँ के रूप में बेहद भावुक औरत बन गई , उसमे इक ीचा ने जनम लिया , जो वोह जिंदगी में पाना चाहती थी , जो उसे न मिला , वोह सब वोह अपनी बेटी को देना चाहती है , अछि शिक्षा , अचे संस्कार , ाचा सेहभाव , ाचा जीवन , कैटलीन इक ऊर्जा थी , पारी लोग में उसमे कोई ीचा नै उत्पन होती थी , पर बेबी से मिले प्रेम ने उसकी शक्ति को बदल दिया , और फर्जी को पाकर , उसके मन में िचाईओं ने जनम लेना सुरु कर दिया , कैटलीन गलत नै है , वोह माँ है , उसके लिए ब्रह्माण्ड में उसकी बेटी hi सब कुछ है , उसे तुम फर्जी से अलग नै कर सकते..." बाबा ने रवि को सम्पूर्ण सचाई बताते हुए कहा ,

"लेकिन वोह मेरा खून है , मेरी अपनी बेटी , मेरे कारन उसका जनम हुआ , में उसका पिता हु , में अलग नै हो सकता , मुझे मेरी बेटी वापिस चाहये , अगर मुझे मेरी बेटी न मिली , तोह विनाश कर दूंगा , शिव को मेरी यह ीचा पूरी करनी होगी , मेरी बेटी मुझे चाहये..." रवि अपनी जिद्द पर कायम रहते हुए बेपनाह गुस्से में चीखता हुआ बोलै ,

"क्या डोज अपनी बेटी को , तुम उसे कोई संस्कार नै दे सकते , अगर तुम्हारी बेटी तुम्हारे करीब रहेगी , वोह तुम्हारे जैसी बन जाएगी , इक जिद्दी , संस्कारहीन , बेहद घमंडी , डेविल के पास उसके बची डेविल hi बनेगी , और पवितर तेज़ के पास पवितर , काट के पास उसे ाचा और सुखी जीवन मिलेगा , तुम्हारे पास बस दर्द , यह फ़ासिला तुम करना है , जल्दबाज़ी मत करना , तुम्हारी बेटी की जिंदगी का सवाल है , जो वोह चाहते हैं तुम कर नै रहे , और जो तुम चाहते हो वोह हो नै सकता , इस तरह हज़ारो जनम लेकर भी तुम कोमल से मिल नै पाओगे , कोमल को पाना है , तोह अपनी डेविल ऊर्जा को पवितर ऊर्जा में बदल लो , जिद्द , घमंड का त्याग करो , तुम ब्रह्माण्ड की सबसे बड़ी शक्ति के मालिक हो , पर लोग तुमसे डरते हैं , क्यों की तुम डेविल हो , अपने नाम का शाप ख़तम करो , बस करम करते रहो , इक दिन फल मिल जायेगा..." बाबा ने मुस्कराते हुए बोलै , उनके रूप से इक रहस्मयी तेज़ उत्पन हो रहा था ,

"बाबा शेतीअन की सेना ा रही है पृथ्वी पर , कैसे रोकू उसे में..." रवि बात बदलते हुए बोलै ,

"तुमने तोह बातिओं का रुख hi पलट दिया , सचाई डेविल को हज़म नै होती , इक वख्त आएगा जब डेविल को सब ज्ञात हो जायेगा , जब ब्रह्माण्ड की सचाई जान लोगे , तब खुद को इक कीड़े के सामान पाओगे , दानवी सेना को तुम रोक लोगे , तुम्हारी परीक्षा होगी , इक सही फैसला करना होगा , वार्ना सब तबाह हो जायेगा , इस बार आचायी और बुराई दोनों सामान रूप से ताकतवर है , ध्यान रहे , कुछ खोना पढ़े तोह डरना नै , क्यों की शिव के मायाजाल से निकल पाना आसान नै..." बाबा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"मायाजाल कैसे मायाजाल..." रवि थोड़ा चौंक कर बोलै ,

"अभी रहने दो रवि , अगर उनके मायाजाल को अभी से जान लोगे , तोह ब्रह्माण्ड में तुम्हारी शक्ति इक टारे (स्टार) के सामान रहेगी , और टारे (स्टार) तोह अनंत हैं ब्रह्माण्ड में , बस अपने करम करो , गुस्से को शांत रखो , जिद्द का त्याग करो , घमंड का विनाश करो , जुंग में जीत तुम्हारी होगी , अंतिम वख्त में परीक्षा देनी होगी , यह यद् रखना मेरे बचे , उस वख्त मन में दर होगा , सब कुछ खोने का एहसास होगा , उस वख्त तुम्हारी सचाई की परीक्षा लेंगे वोह ..." इतना बोल बाबा गयाब हो गए , लेकिन रवि को इक दुविद्या में दाल गए , किसको खोने का दर था , लेकिन रवि ने मन में सोच लिया , वोह सबकी रक्षा करेगा , किसी को मरने नै देगा , चाहे कुछ भी हो जाये , लेकिन जो उनहोनु उसकी किस्मत में लिखा है , वोह उसे पूरा भी करवाते हैं , नै तोह दर्द सहना पड़ता है , शयद कोई बेहद बड़ी घटना रवि के समक्ष ऐनी वाली थी ,

कुछ घटनयिअन इंसान को सुधर देती हैं , कुछ भिगाड देती हैं , कुछ रहस्मयी घटनयिअन होती हैं जीवन में , तब कोई इंसान किसी रास्ता भटक रहे इंसान की जिंदगी में प्रवेश करता है , तब वोह सही गलत का एहसास करवाता है , रवि को बस उसी इक इंसान का इंतज़ार था , जो रवि की जिंदगी सही रस्ते पर लाये , तेन की कोमल उसकी हो सके , उसकी बेटी उसे मिल जाये , पर कब आएगा वोह इंसान ,

वही दूसरी तरफ...

ख़ुशी वह से गयाब होकर सीधा घर में जा उत्पन हुई , उसकी आँखों में इक उदासी थी , अपने प्यार को फिर से टूटते हुए देख कर आयी थी , पर होनी को कोण ताल सकता है ,

"अरे तामस अप्प..."

इक आवाज़ आयी , ख़ुशी ने पलट कर देखा , सीमा , नै नै , सुहाना कड़ी थी , अपने असली रूप में , ख़ुशी बेहद घबरा सा गई , वोह नै जानती थी , सुहाना अछि है या बुरी ,

"वोह , वोह , सुहाना अप्प..." ख़ुशी जबरन मुस्कराते हुए बोली ,

"हाँ हम , हमें सब यद् ा गया , यह हमारा दूसरा जनम है , हमने सब प् लिया , प्रिंस का प्यार भी , ओह्ह हम तोह भूल hi गए , हमारे प्रिंस कहा हैं..." सुहाना बेहद मुस्कराते हुए बोली ,

"वोह , वोह , मलिका सुहाना , हम आपको साडी बात बताते हैं , पर अप्प अपना गुस्सा शांत रखना , प्रिंस को हमारी जरुरत है इस वख्त..." ख़ुशी बेहद नाम आँखों से बोली ,

"तामस , क्या बात है , प्रिंस किसी मुसीबत में तोह नै , तामस अप्प रोटी नै कभी , बताओ न हमें बहुत पीड़ा हो रही है दिल में .." सुहाना बेहद उदासी में ख़ुशी के करीब आकर बोली ,

"हाँ..." फिर ख़ुशी ने फर्जी के कारन काट और रवि की लड़ाई का जीकर किया , कैसे काट ने रवि को अपनी ऊर्जा से गुस्सा दिलाया , उसे कमज़ोर करना चाहा , पर उसने रवि को टेलिपोर्ट कर लिया , लेकिन रवि का इंसानी रूप उससे चीन गया , और वोह इक आग से लथपथ डेविल बन गया , और पृथ्वी पर ा रही दानवी सेना के बारे में भी बता दिया ,

"नईईई , जीविका ऐसी है , हम सोच भी नै सकते थे , हमने कितनी बड़ी गलती कर दी , हम प्यार में अंधे हो चुके थे , हमने प्रिंस की जिंदगी नाराज बना दी , और प्रिंस ने हमें इतना प्यार दिया , हमारे कहने पर hi पिता जी ने जीविका की रचना की , अज्ज वही जीविका ने हमसे हमारा प्यार चीन लिया , जैसे हमने प्रिंस का चीन था उसे रूही से अलग करके , अज्ज हमें वोह पीड़ा वोह दर्द महसूस हो रहा है , हम लड़ेंगे , अपनी मौत तक , हम प्रिंस को कुछ नै होने देंगे , हम वादा करते हैं , प्रिंस और अपने सच्चे प्रेम से..." सुहाना बेहद नाम आँखों से दर्द भरे शबदो में बोली ,

"शुक्रिया , मलिका सुहाना , हम लारा , एलिज़ाबेथ और बेबी को लड़ाई के लिए त्यार करते हैं , अप्प अपनी बेटी रमा से बात कर लो.." ख़ुशी इतना बोल बेबी के रूम की तरफ चली गई ,

सुहाना ने रमा के रूम का दरवाजा खटखटा दिया , रमा दरवाजा खोलते hi सुहाना से लिपट कर रोने लगी , उसकी आँखों से काळा रंग का पानी असनु बन कर बह रहा था ,

"हमारी बची , हमारी रमा , आपको में पहचान गई , अप्प सुमों हो , पारी लोक की सबसे बड़ी जादूगरनी , पर वख्त कितना अजीब है , आपको हमारी बेटी बना दिया इस जनम में , हम आपसे बहुत प्यार करते है रमा , हमें सब यद् ा गया है..." सुहाना , रमा के चेहरे को चूमते हुए बोली ,

"माँ , मुझे लगा मने आपको खो दिया , में भी आपसे बहुत प्यार करती हु , में आपके बिना नै जी सकती माँ.." रमा बेहद नाम आँखों से रट हुए बोली ,

"शांत हो जाओ हमारी बची , अभ हम आपके साथ है , और हमेशा रहेंगे , ाचा रमा , हमने सुना है जुंग होने वाली है , अप्प किसका साथ डौगी जुंग में , हमारा या उस शेतीअन की सेना का..." सुहाना मुस्कराते हुए रमा की आँखों में देखते हुए बोली ,

"माँ , हम जुंग नै लड़ेंगे , अप्प भी हमारी माँ हो , और दूसरी तरफ वोह रिंग पहने औरत भी हमारी माँ है , हम अप्प दोनों के खिलाफ शास्त्र कैसे उठा सकती हैं , हम नै लड़ सकते माँ..." रमा बेहद भावुक होकर बोली ,

"रमा बेटी , अभी वख्त है अप्प सोच लेना , आपको एहसास हो जायेगा , आपको किस माँ का साथ देना है , हम रूही से मिलकर एते हैं , अप्प आराम से सोचो इस बारे..." सुहाना , रमा का माथा चुम कर सेड्यां चढ़ कोमल के पास चली गई , और रमा ने उदास मन से रूम का दरवाजा बंद कर दिया ,

रूही और सुहाना की मुलाकात , जो पारी लोग में कभी नै संभव हुआ , अभ वोह होने जा रहा था , क्या कोमल का बच्चू वाला मायाजाल सुहाना के सामने टिक पता , यह तोह ऐनी वाले वख्त की बात थी ,

ख़ुशी , बेबी , लारा और एलिज़ाबेथ से क्या बात करेगी , क्या वोह जुंग के लिए त्यार होंगी , क्या बेबी , जो इस वख्त बहुत पीड़ा और दर्द सेह रही थी , वोह लड़ने जाएगी , बेबी का प्यार , उसकी बेटी , उसकी काट , सब उससे अलग हो चूका था , इस हालत में , वोह शेतीअन के सबसे ताकतवर दानवो से लड़ पायेगी , जो सदियों से इक भी जुंग नै हरे थे , यह ख़ुशी और बेबी की मुलाकात पर निर्भर करता था...

तो बे कुनिटेड... [Note:- Friends es lambi fight ka pora plot soch liya hai , eska end bhi , lekin eske end ke sath , yeh part close nai hoga... kyu ki abhi 5th day chal reha hai , 2 din abhi bhi rehte hain , jung kuch 10 , 15 updates tak sochi hai.. shukriya.. or kal update karne ki pori kossih karuga.. ]

 
सॉरी फ्रेंड्स... बूत अभ यह थ्रेड क्लोज हो चूका है... मुझे लगता है.. यह स्टोरी ष्प के साथ hi ख़तम हो चुकी है...

फिर भी इसको कम्पलीट करके इसकी pdf फाइल बना दूंगा , वह अप्प सब रीड कर लेना... लेकिन थ्रेड पर कोई अपडेट नै आएगा... इसके लिए तेह दिल से माफ़ी चाहता हु.. इस स्टोरी के साथ hi , सब रीडर्स भी में खो चूका हु.. और इतनी बड़ी स्टोरी पर रीडर्स नै मिले पते... लेकिन इसको कम्पलीट जरूर करुगा , बूत आपको सिर्फ pdf फाइल hi मिलेगी , उसके लिए इंतज़ार करो.. शुक्रिया..

अभ नयी स्टोरी स्टार्ट करुगा.. लेकिन जायदा बड़ी नै.. क्यों की बड़ी स्टोरी कम्पलीट करना आसान नै होता... जब कोई स्टोरी पूरी लिख लूंगा तब स्टार्ट करुगा... केओ
 
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