अपडेट-106 (आल अपडेट -798)
अभ अग्गे...
रवि जंगल के बेचू बेच , नदी किनारे , अपने बेइंतहा गुस्से में देहक रहा था , जिस्म से आग निकल रही थी , और गरम लावे जैसी बूंदे जमीन पर गिर रही थी , जिस कारन ऐसा पार्टेट हो रहा था , जैसे रवि के पैरो में किसी ने जवालामुखी से निकलता गरम लावा दाल दिया हो ,
as-pas के पेड़ रवि के गुस्से भरी आग से जल रहे थे , रवि का बेशुमार गुस्सा , उस hare-bhare जंगल का विनाश कर रहा था , यह सब क्यों हुआ था , इक जिद्द के कारन ,
जिद्द , इक छोटा सा लफ़ज़ है , पर अगर यह किसी के मन में घर कर ले , तोह वोह इंसान कामयाब भी हो सकता है , दुनिआ की हर ताकत हासिल कर सकता है , पर अगर जिद्द गलत हो मन में , तब हर तरफ विनाश होता है , रिश्ते- नाते , दोस्त , प्यार , सब तबाह हो जाते हैं , जिद्द करो तोह अछि करो , वार्ना जिद्द को 4 शब्द समाज कर इससे दूर रहो ,
यह सब कहा से सुरु हुआ , इक छोटी सी बची फर्जी के कारन , जिसकी खेलने कूदने की उम्र थी , वोह रिश्तो में उलझी पीड़ा सेहन कर रही थी , उसे यह भी नै पता था , उसके पापा डेविल हैं , उसका पूरा परिवार इक शाप से जुड़ा हुआ है , खैर अग्गे ,
"रवीए , प्लस शांत हो जाओ , तुम्हारा गुस्सा पूरा जंगल जला देगा , प्लस में हाथ जोड़ती हु , अगर तुम शांत न हुए , तोह जंगल के साथ साथ , पूरा कबीला और कोमल भी जल जाएगीइ , प्लस , प्लस..." ख़ुशी अपने घुटनो के बल बैठी रट हुए बोली , उस से रवि का दर्द सेहन नै हो रहा था , ऐसा दर्द उसने पारी लोक में देखा था , जब रवि को डेविल बना कर हेलल में दाल दिया गया था ,
"नआईईई हूँ सकता शांततः , में नयी हो सकता , तुम , तुम जाओ , सबको जुंग के लिए त्यार करूओ , में यही मिलुंगा तुम्ही , जाओ तमस , वख्त बहुत काम हीी , हमें पृथ्वी छोड़ कर जाना हैईईई..." रवि अपने आग से लथपथ रूप में ख़ुशी के चेहरे को देखते हुए बोलै ,
ख़ुशी ने कुछ पल रवि की आँखों में देखा , और फिर वह से गयाब हो गई , तेन की सबको त्यार कर सके , ऐनी वाली बेहद बड़ी मुसीबत के लिए , सबका त्यार रहना बेहद जरुरी था ,
ख़ुशी के जाते hi रवि अकेला पढ़ गया , वोह कुछ नै सोचना चाहता था , पर मन में एते विचार कभी रुकते नै , दिमाग में उत्पन होती तस्वीरें कभी थमती नै , फर्जी का चेहरा , उसकी बतिअन , बार बार रवि को यद् ऐनी लगी , और फिर कोमल की यदिअण भी ,
"अभ में कोमल से कैसी मिलुंगा , में , में , अपनी कोमल से और दूर हो गया , कोमलललललल , हम फिर से उसी स्थान पर आ गयी , हम फिररर से दूररर हो गयी , कटत तुमई मरना होगा..." रवि बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै , उसका गुस्सा अपनी अंतिम शिकार पर पहुँच तांडव कर रहा था , इतना ब्यांक गुस्सा , उसने कभी महसूस नै किया था , उसका हर रिश्ता , इस गुस्से भरी आग में जल रहा था ,
तभी उसके as-pas इक सफेद रौशनी फैल गई , रवि अपने तपते शरीर के साथ , कुछ समाज न पाया , उसे लगा काट फिर से ा गई है , वोह और भी गुस्से में घूरने लगा , उसे नफरत हो गई थी इस सफेद रौशनी से , वोह इस रौशनी को नष्ट कर देना चाहता था , पर वोह जितना भी अधिक गुस्सा कर लेता , पर पवितर तेज़ का विनाश नै हो सकता था ,
"कटत , तुम फिर से ा गइईईई , इस बार्डर डेविल झुकेगा नईईई , तुम मर देगा देविल्ल , तुम्हारा अंततः मेरी हाथों होगा..." रवि बेइंतहा गुस्से में उस रौशनी पर अपनी तपश का प्रभाव डालते हुए बोलै , तेन की वोह सफेद रौशनी उसका तेज़ बन जाये , उसका रंग सफेद से लाल पढ़ जाये ,
"रवीए , इतना अधिक गुस्सा , तुम्हारे लिए ाचा नई , शिव ने यह रूप तोह नै दिया था तुम..." इक बेहद पवितर आदमी रवि के समक्ष आकर खड़ा हो गया , उसकी आवाज़ बेहद नरम थी , इक मटर अंश भी नै था उसमे , किसी भी बुराई का ,
"पुजारी बाबा अप्प , शिव ने सब चीन लिया मुज़से , में इस बार फिर हार गया , मेरा प्यार और मेरी बेटी , दोनों मुज़से दूर हो गए , do-do दर्द मिले म्युज़िए , क्या शिव यही चाहते हैं मुज़से , वोह बार बार मुझे hi क्यों दर्द देते हैं..." रवि बेहद नाम आँखों से बोलै , पर उसका गुस्सा जरा सा भी काम नै हुआ था ,
"कोण कहता है , वोह दर्द देते हैं , तुमने खुद इस दर्द को जनम दिया ही , प्रेम पाना गलत नै ही , पर प्रेम पाने का रास्ता गलत नै होना चाहये , कोमल तुमसे दूर है , क्यों की तुम ब्रह्माण्ड के सबसे बुरे जीव हो , तुम इक डेविल हो मेरे बचे , तुम्हारी जिद्द , तुम्हारा घमंड , तुम बेपनाह शक्ति देता है , पर जब शक्ति मिलती है , तब दर्द भी मिलता है , प्रेम से दूर तोह वोह भी रहे थे , पर उनहोनु वेरीआग का रास्ता चुना था , गुस्सा तोह वोह भी हुए थे , जब वोह अपने प्रेम को जलने से बचा न पाए , पर गुस्सा शांत भी किया था उनहोनु , तुम अपना गुस्सा शांत नै कर रहे हो , अभ भी बदले की भावना दिल में बसाये बैठे हो..." बाबा ने बेहद नरम बातिओं से रवि का गुस्सा शांत करने का परियस करते हुए बोलै ,
"में , में , अपनी बेटी से भी दूर हो गया , नै कर सकता , में कुछ नै कर सकता , यह रूप मेरा शाप बन चूका है , मुझे हेलल जाना होगा , वही होगा मेरा गुस्सा शांत..." रवि बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,
"बेटी , तुम्हारी बेटी , तुम्हारा hi इक अंश है , लेकिन उसमे गुस्सा का कोई अंश नै , क्यों की वोह मन के भेटेर सोचती है , और तुम बिना सोचे हर कदम उठे लेते हो , कैटलीन इक पवितर ऊर्जा है , वोह प्रेम से वंशित रही है हमेशा , माँ का प्रेम नै प् सकीय , बाप का प्रेम नै मिला , दोस्त का प्रेम नै मिला , लेकिन बेबी ने उसको प्रेम दिया , उसमे बदलाव ऐनी लगा , लेकिन जब फर्जी उसके पास आयी , तोह वोह इक माँ के रूप में बेहद भावुक औरत बन गई , उसमे इक ीचा ने जनम लिया , जो वोह जिंदगी में पाना चाहती थी , जो उसे न मिला , वोह सब वोह अपनी बेटी को देना चाहती है , अछि शिक्षा , अचे संस्कार , ाचा सेहभाव , ाचा जीवन , कैटलीन इक ऊर्जा थी , पारी लोग में उसमे कोई ीचा नै उत्पन होती थी , पर बेबी से मिले प्रेम ने उसकी शक्ति को बदल दिया , और फर्जी को पाकर , उसके मन में िचाईओं ने जनम लेना सुरु कर दिया , कैटलीन गलत नै है , वोह माँ है , उसके लिए ब्रह्माण्ड में उसकी बेटी hi सब कुछ है , उसे तुम फर्जी से अलग नै कर सकते..." बाबा ने रवि को सम्पूर्ण सचाई बताते हुए कहा ,
"लेकिन वोह मेरा खून है , मेरी अपनी बेटी , मेरे कारन उसका जनम हुआ , में उसका पिता हु , में अलग नै हो सकता , मुझे मेरी बेटी वापिस चाहये , अगर मुझे मेरी बेटी न मिली , तोह विनाश कर दूंगा , शिव को मेरी यह ीचा पूरी करनी होगी , मेरी बेटी मुझे चाहये..." रवि अपनी जिद्द पर कायम रहते हुए बेपनाह गुस्से में चीखता हुआ बोलै ,
"क्या डोज अपनी बेटी को , तुम उसे कोई संस्कार नै दे सकते , अगर तुम्हारी बेटी तुम्हारे करीब रहेगी , वोह तुम्हारे जैसी बन जाएगी , इक जिद्दी , संस्कारहीन , बेहद घमंडी , डेविल के पास उसके बची डेविल hi बनेगी , और पवितर तेज़ के पास पवितर , काट के पास उसे ाचा और सुखी जीवन मिलेगा , तुम्हारे पास बस दर्द , यह फ़ासिला तुम करना है , जल्दबाज़ी मत करना , तुम्हारी बेटी की जिंदगी का सवाल है , जो वोह चाहते हैं तुम कर नै रहे , और जो तुम चाहते हो वोह हो नै सकता , इस तरह हज़ारो जनम लेकर भी तुम कोमल से मिल नै पाओगे , कोमल को पाना है , तोह अपनी डेविल ऊर्जा को पवितर ऊर्जा में बदल लो , जिद्द , घमंड का त्याग करो , तुम ब्रह्माण्ड की सबसे बड़ी शक्ति के मालिक हो , पर लोग तुमसे डरते हैं , क्यों की तुम डेविल हो , अपने नाम का शाप ख़तम करो , बस करम करते रहो , इक दिन फल मिल जायेगा..." बाबा ने मुस्कराते हुए बोलै , उनके रूप से इक रहस्मयी तेज़ उत्पन हो रहा था ,
"बाबा शेतीअन की सेना ा रही है पृथ्वी पर , कैसे रोकू उसे में..." रवि बात बदलते हुए बोलै ,
"तुमने तोह बातिओं का रुख hi पलट दिया , सचाई डेविल को हज़म नै होती , इक वख्त आएगा जब डेविल को सब ज्ञात हो जायेगा , जब ब्रह्माण्ड की सचाई जान लोगे , तब खुद को इक कीड़े के सामान पाओगे , दानवी सेना को तुम रोक लोगे , तुम्हारी परीक्षा होगी , इक सही फैसला करना होगा , वार्ना सब तबाह हो जायेगा , इस बार आचायी और बुराई दोनों सामान रूप से ताकतवर है , ध्यान रहे , कुछ खोना पढ़े तोह डरना नै , क्यों की शिव के मायाजाल से निकल पाना आसान नै..." बाबा ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"मायाजाल कैसे मायाजाल..." रवि थोड़ा चौंक कर बोलै ,
"अभी रहने दो रवि , अगर उनके मायाजाल को अभी से जान लोगे , तोह ब्रह्माण्ड में तुम्हारी शक्ति इक टारे (स्टार) के सामान रहेगी , और टारे (स्टार) तोह अनंत हैं ब्रह्माण्ड में , बस अपने करम करो , गुस्से को शांत रखो , जिद्द का त्याग करो , घमंड का विनाश करो , जुंग में जीत तुम्हारी होगी , अंतिम वख्त में परीक्षा देनी होगी , यह यद् रखना मेरे बचे , उस वख्त मन में दर होगा , सब कुछ खोने का एहसास होगा , उस वख्त तुम्हारी सचाई की परीक्षा लेंगे वोह ..." इतना बोल बाबा गयाब हो गए , लेकिन रवि को इक दुविद्या में दाल गए , किसको खोने का दर था , लेकिन रवि ने मन में सोच लिया , वोह सबकी रक्षा करेगा , किसी को मरने नै देगा , चाहे कुछ भी हो जाये , लेकिन जो उनहोनु उसकी किस्मत में लिखा है , वोह उसे पूरा भी करवाते हैं , नै तोह दर्द सहना पड़ता है , शयद कोई बेहद बड़ी घटना रवि के समक्ष ऐनी वाली थी ,
कुछ घटनयिअन इंसान को सुधर देती हैं , कुछ भिगाड देती हैं , कुछ रहस्मयी घटनयिअन होती हैं जीवन में , तब कोई इंसान किसी रास्ता भटक रहे इंसान की जिंदगी में प्रवेश करता है , तब वोह सही गलत का एहसास करवाता है , रवि को बस उसी इक इंसान का इंतज़ार था , जो रवि की जिंदगी सही रस्ते पर लाये , तेन की कोमल उसकी हो सके , उसकी बेटी उसे मिल जाये , पर कब आएगा वोह इंसान ,
वही दूसरी तरफ...
ख़ुशी वह से गयाब होकर सीधा घर में जा उत्पन हुई , उसकी आँखों में इक उदासी थी , अपने प्यार को फिर से टूटते हुए देख कर आयी थी , पर होनी को कोण ताल सकता है ,
"अरे तामस अप्प..."
इक आवाज़ आयी , ख़ुशी ने पलट कर देखा , सीमा , नै नै , सुहाना कड़ी थी , अपने असली रूप में , ख़ुशी बेहद घबरा सा गई , वोह नै जानती थी , सुहाना अछि है या बुरी ,
"वोह , वोह , सुहाना अप्प..." ख़ुशी जबरन मुस्कराते हुए बोली ,
"हाँ हम , हमें सब यद् ा गया , यह हमारा दूसरा जनम है , हमने सब प् लिया , प्रिंस का प्यार भी , ओह्ह हम तोह भूल hi गए , हमारे प्रिंस कहा हैं..." सुहाना बेहद मुस्कराते हुए बोली ,
"वोह , वोह , मलिका सुहाना , हम आपको साडी बात बताते हैं , पर अप्प अपना गुस्सा शांत रखना , प्रिंस को हमारी जरुरत है इस वख्त..." ख़ुशी बेहद नाम आँखों से बोली ,
"तामस , क्या बात है , प्रिंस किसी मुसीबत में तोह नै , तामस अप्प रोटी नै कभी , बताओ न हमें बहुत पीड़ा हो रही है दिल में .." सुहाना बेहद उदासी में ख़ुशी के करीब आकर बोली ,
"हाँ..." फिर ख़ुशी ने फर्जी के कारन काट और रवि की लड़ाई का जीकर किया , कैसे काट ने रवि को अपनी ऊर्जा से गुस्सा दिलाया , उसे कमज़ोर करना चाहा , पर उसने रवि को टेलिपोर्ट कर लिया , लेकिन रवि का इंसानी रूप उससे चीन गया , और वोह इक आग से लथपथ डेविल बन गया , और पृथ्वी पर ा रही दानवी सेना के बारे में भी बता दिया ,
"नईईई , जीविका ऐसी है , हम सोच भी नै सकते थे , हमने कितनी बड़ी गलती कर दी , हम प्यार में अंधे हो चुके थे , हमने प्रिंस की जिंदगी नाराज बना दी , और प्रिंस ने हमें इतना प्यार दिया , हमारे कहने पर hi पिता जी ने जीविका की रचना की , अज्ज वही जीविका ने हमसे हमारा प्यार चीन लिया , जैसे हमने प्रिंस का चीन था उसे रूही से अलग करके , अज्ज हमें वोह पीड़ा वोह दर्द महसूस हो रहा है , हम लड़ेंगे , अपनी मौत तक , हम प्रिंस को कुछ नै होने देंगे , हम वादा करते हैं , प्रिंस और अपने सच्चे प्रेम से..." सुहाना बेहद नाम आँखों से दर्द भरे शबदो में बोली ,
"शुक्रिया , मलिका सुहाना , हम लारा , एलिज़ाबेथ और बेबी को लड़ाई के लिए त्यार करते हैं , अप्प अपनी बेटी रमा से बात कर लो.." ख़ुशी इतना बोल बेबी के रूम की तरफ चली गई ,
सुहाना ने रमा के रूम का दरवाजा खटखटा दिया , रमा दरवाजा खोलते hi सुहाना से लिपट कर रोने लगी , उसकी आँखों से काळा रंग का पानी असनु बन कर बह रहा था ,
"हमारी बची , हमारी रमा , आपको में पहचान गई , अप्प सुमों हो , पारी लोक की सबसे बड़ी जादूगरनी , पर वख्त कितना अजीब है , आपको हमारी बेटी बना दिया इस जनम में , हम आपसे बहुत प्यार करते है रमा , हमें सब यद् ा गया है..." सुहाना , रमा के चेहरे को चूमते हुए बोली ,
"माँ , मुझे लगा मने आपको खो दिया , में भी आपसे बहुत प्यार करती हु , में आपके बिना नै जी सकती माँ.." रमा बेहद नाम आँखों से रट हुए बोली ,
"शांत हो जाओ हमारी बची , अभ हम आपके साथ है , और हमेशा रहेंगे , ाचा रमा , हमने सुना है जुंग होने वाली है , अप्प किसका साथ डौगी जुंग में , हमारा या उस शेतीअन की सेना का..." सुहाना मुस्कराते हुए रमा की आँखों में देखते हुए बोली ,
"माँ , हम जुंग नै लड़ेंगे , अप्प भी हमारी माँ हो , और दूसरी तरफ वोह रिंग पहने औरत भी हमारी माँ है , हम अप्प दोनों के खिलाफ शास्त्र कैसे उठा सकती हैं , हम नै लड़ सकते माँ..." रमा बेहद भावुक होकर बोली ,
"रमा बेटी , अभी वख्त है अप्प सोच लेना , आपको एहसास हो जायेगा , आपको किस माँ का साथ देना है , हम रूही से मिलकर एते हैं , अप्प आराम से सोचो इस बारे..." सुहाना , रमा का माथा चुम कर सेड्यां चढ़ कोमल के पास चली गई , और रमा ने उदास मन से रूम का दरवाजा बंद कर दिया ,
रूही और सुहाना की मुलाकात , जो पारी लोग में कभी नै संभव हुआ , अभ वोह होने जा रहा था , क्या कोमल का बच्चू वाला मायाजाल सुहाना के सामने टिक पता , यह तोह ऐनी वाले वख्त की बात थी ,
ख़ुशी , बेबी , लारा और एलिज़ाबेथ से क्या बात करेगी , क्या वोह जुंग के लिए त्यार होंगी , क्या बेबी , जो इस वख्त बहुत पीड़ा और दर्द सेह रही थी , वोह लड़ने जाएगी , बेबी का प्यार , उसकी बेटी , उसकी काट , सब उससे अलग हो चूका था , इस हालत में , वोह शेतीअन के सबसे ताकतवर दानवो से लड़ पायेगी , जो सदियों से इक भी जुंग नै हरे थे , यह ख़ुशी और बेबी की मुलाकात पर निर्भर करता था...
तो बे कुनिटेड... [Note:- Friends es lambi fight ka pora plot soch liya hai , eska end bhi , lekin eske end ke sath , yeh part close nai hoga... kyu ki abhi 5th day chal reha hai , 2 din abhi bhi rehte hain , jung kuch 10 , 15 updates tak sochi hai.. shukriya.. or kal update karne ki pori kossih karuga.. ]