Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 26 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 206

दोस्त 3 ......ये काम तो मैं चुटकियो में कर दूंगा बस तू देखता जा पैर प्लान क्या है मुझे भी तो बता यार हम पार्टनर है दोनी

दोस्त 2 दोस्त 3 सारा प्लान समजा देता है जिस से दोस्त 3 भी त्यार हो जाता है

दोनों वही आस पास गुजरने वालो पे नजर रखे हुए थे की किसका फ़ोन उड़ाना है

कुछ हे देर में उन्हें एक बकरा मिल जाता है

दोस्त 2 ......वो देख मिल गया बकरा अभी ये फ़ोन पे लगा हुआ है मैं बाइक उसके पास से निकलूंगा तुम निकलते वक़्त फ़ोन मर लेना

दोस्त 3 ....... ठीक है भाई

दोनों प्लान को अंजाम दे वह से निकल जाते है पीछे से फ़ोन वाला लोंदा चोर चोर चिलता रहा ...............

अब आगे .........

सूर्यगढ़ ......... सुबह सुबह सूर्य के कानो में खनकती हुई आवाज से आँखे खुली तो सामने किरण का खूबसूरत उजला हुआ चेहरा सूर्य के चेहरे पे जखन हुआ था

किरण के लम्बे रेशमी बाल भीगे हुए थे उनके से तप तप गिरीति पानी की बुँदे सूर्य के चेहरे को भिगो रही थी

किरण ......सुभप्रभात कुंवर जी सुबह हो गई है आपके ध्यान करने का समय हो गया है

सूर्य ........ सुभप्रभात स्वीटी उम्म्म्मः ध्यान हे तो कर रहा हूँ स्वीटी

किरण ........ कुंवर जी छोड़िये हमें हम सनान कर चुके है

आपके ऐसा करने से हमें फिर सनान करना होगा हमें पूजा करनी है माँ सा के साथ

सूर्य ........ स्वीटी यायार सभी लड़किया ऐसे होती है क्या सदी हुई नहीं की दूर दूर भागने लगती है

किरण ......... अले अले कुंवर जी नाराज हो गए वो क्या है न कुंवर सा पहले लड़की आज़ादी पंछी की तरह होती है किन्तु विवाह के पश्चात उसके दायित्व भाड़ जाते है एक पत्नी एक बहु आवर एक बेटी के रूप में सभी रिस्तो में संतुलन बना कर रखना उसकी प्रत्मिक्ता होती है

सूर्य ....... इतना लम्बा छोड़ना भवन सुबह सुबह सर के ऊपर से गया कोई नहीं आप अपनी पूजा कीजिये मैं अपनी पूजा के लिया किसी आवर को दंड लेता हूँ

किरण ...... मेर्री जी है न या फिर मेनका बुआ जी भी तो है

सूर्य ....... नहीं नहीं मेरा वो मतलब नहीं था बस थोड़ी शरारत करने का दिल था

किरण ....... पहले जा कर अपना ध्यान पूरा कीजिये

सूर्य ...... जो हुकुम बेगम साहिबा

सूर्य बाथरूम में गुस्स कर अपने कार्य निपटा हवेली के पीछे जा ध्यान करने लगता है

कुछ 2 हर तक ध्यान में रहने के बाद सूर्य ध्यान से बहार निकलता है

सूर्य ........ शुबप्रभात वयोम भाई

व्योम ..... सुभप्रभात सूर्य भाई

सूर्य ....... क्या खबर है कुछ हुआ है क्या आपके चेहरे को देख कर तो यही लगता है

वयोम ....... है भाई आपके कहने पे मैंने उस पे नजर राखी हुई है पैर कल से थोड़ा अजीब ऊर्जा की आदिकता मह्सुश हुई है मुझे

सूर्य ....... कोई बात नहीं वो सब मैं देख लूंगा फ़िलहाल मैं u.s.a जरा हूँ सकती भी कुछ देर में परीलोक से लौट आएगा वैसे मेरे जाने के बाद कुछ हुआ है क्या

वयोम ....... मैं कुछ समजा नहीं भाई आपको उसके विषय में पता हे है

सूर्य ....... वो मैं जनता हूँ आवर उसे जो करना है करने दो पैर उसके अलावा भी कोई आवर है जो हमारी खोजबीन में लगा हुआ है

वयोम ........ मैं पता करता हूँ भाई

सूर्य ....... नहीं अभी तुम वही पे नजर रखो पल की खबर मुझे मिलनी चाइये

वयोम ......जी भाई मैं चलता हूँ

सूर्य ...... रुको वयोम भाई

सूर्य की बात सुन वयोम वही रुक जाता है

सूर्य आगे भाड़ वयोम के सीने पे हाथ रख कुछ करता है जिस से सूर्य के हाथ से एक ऊर्जा निकल कर वयोम में समाहित हो जाती है

कुछ पल वयोम के सरीर पे चमक सी रही फिर सब पहले की तरह हे सामान्य हो गया

वयोम ....... थैंक यू भाई इस से मुझे बहुत सहायता मिलेगी

सूर्य .......जनता हूँ अब तुम अपनी इच्छा से अपने ऊर्जा अंश को छुपा सकते हो कोई भी तुम्हारी इच्छा के बिना तुम्हारी ऊर्जा को मह्सुश नहीं कर पायेगा

वयोम ......... जी भाई मैं चलता हूँ

सूर्य ......... ठीक है वयोम भाई

वयोम के निकलते हे सूर्य हवेली की तरफ बढ़ा तो सामने से राधिका आवर दीप्ती आते हुए नजर आई

सूर्य ....... गुड मॉर्निंग भाबी जी

राधिका जी ....... गुड मॉर्निंग देवर जी कैसे है आप ध्यान पूरा हो गया

सूर्य ........ जी भाबी जी गुड मॉर्निंग दीप्ती जी

दीप्ती ...... ये जी कोण है कॉल में दीप्ती हम दोस्त है न

दीप्ती की बात सुन सूर्य मंद मंद मुस्कुराने लगती है आवर साथ हे राधिका भी

दीप्ती ....... तो u.s.aja रहे हनीमून के लिया स्वीटी के साथ

सूर्य ...... जी अब सदी स्वीटी से हुए है तो ुशी के साथ जाऊंगा न आपको तो ले जा नहीं सकता

राधिका जी ...... क्यों नहीं ले जा सकते दीप्ती दीदी भी तो आपकी दोस्त है

सूर्य ....... है वो तो है पैर मैं गुमने नहीं जा रहा हूँ वह पे

राधिका जी .......रोहन ने सब तयारी कर ली है दोपहर को फ्लाइट है यही बताने आयी थी आपको

सूर्य ....... आवर कुछ भी कहना है तो कह दीजिये भाबी जी दिल का बोझ हल्का हो जाये

राधिका जी थोड़ा सूर्य के पास आ कर उसकी आँखों में देखते हुए

राधिका जी ........बाकि हनीमून पे अभी नहीं देवर जी अपना वादा याद है न

सूर्य ....... कोनसा वादा मुझे तो कुछ याद नहीं आ रहा ( मज़ाक )

राधिका जी ......... स्वीटी सब याद दिला देगी

सूर्य .......सोच लीजिये अभी भी वक़्त है क्यों दीप्ती जी

दीप्ती ....... किस बारे में बात कर रहे हो मुझे क्या मालूम

सूर्य ......... इतना पोलिकेया दिमाग उसे किया प्लान बनाने में आवर इतनी जल्दी भूल भी गई आप हाहाहाहा

सूर्य हस्ते हुए हवेली की तरफ भाड़ जाता है

दीप्ती ......भाबी क्या रोहन भाई ने सूर्य से बात की थी

राधिका जी ......नहीं दीप्ती दी मैंने उन्हें मन कर दिया था

दीप्ती जी .......फिर सूर्य को प्लान के बारे में कैसे पता अब प्लान छोड़िये आवर सामने से क्लियर बात कीजिये की आपको उनसे क्या चाइये आवर उन्हें कैसे पता चला इस सब के बारे में

वही सूर्य वह से निकल तो गया हस्ते हुए पैर उसके दिमाग में कुछ आवर हे चल रहा था

शालिनी जी ......क्या हुआ बीटा कहा खोये हुए हो

सूर्य ......उम्म्म्म गॉड मॉर्निंग माँ ी लव यू कैसे है आप

शालिनी जी .....गुड मॉर्निंग बीटा एंड ी लव यू तू मई बिलकुल ठीक हूँ पैर तुम कुछ परेशान लग रहे हो कोई बात है क्या

सूर्य .... .. नहीं माँ वो आपसे एक बात करनी थी समाज नहीं आ राग कैसे कहूं

शालिनी जी ....... चल अब बोल भी दे अपनी माँ से कब संकोच करने लगा तू

सूर्य .......वो माँ स्वीटी हमारे u.s.a वाले घर को देखना चाहती है आवर ..

शालिनी जी ....... आवर तुम लोग हनीमून के लिया वही जा रहे हो यही न ये तो अच्छी बात है बीटा इस बहाने घर भी देख लेगी स्वीटी आवर तुम दोनों कुछ दिन एकांत भी में साथ समय बिता पाओगे

सूर्य ......... वो माँ रोहन भाई आवर राधिका भाबी भी जा रहे है

शालिनी जी ......ये तो अच्छी बात है न बीटा चारो साथ में गुमनाम फिरना आवर खूब मस्ती करना आवर स्वीटी को ज्यादा तंग मत करना

सूर्य .....जी माँ आपकी लड़की को बिलकुल तंग नहीं करूंगा ok

शालिनी जी ...... जा जाकर के त्यार हो जा कब निकलना है

सूर्य ......... दोपहर की फ्लाइट है माँ दिल्ली के लिया

शालिनी जी ......ठीक है मैं u.s.a कॉल कर देती हूँ

सूर्य ......माँ स्वीटी कहा है

अलीना ....... आपके रूम में है स्वीटी

सूर्य ऊपर की आवर निकल जाता है

अलीना .....मम्मी इन्हे क्या हुआ

शालिनी जी ......कुछ नहीं बेटी लगता है हनीमून पे जाने की कुछ ज्यादा हे जल्दी है

अलीना ......क्या हनीमून पे हमें तो बताया हे नहीं किसी ने

शालिनी जी ........ तेरी बरी में तू भी मत बताना

अलीना शालिनी जी की बात सुन उन्हें ऐसे देखती है जैसे वो किसी अन्य ग्रह से आयी हो

शालिनी जी को भी अपने कही बाटी का अहसास होता है तो वो वह से बिना कुछ कहे निकल लेती है

अलीना .......ये मम्मी को क्या हुआ है आज इनका एक अलग हे रूप सामने आ रहा है

किरण ........ आ गए आप

सूर्य रूम को लॉक कर किरण के सामने जा बैठा

सूर्य ......स्वीटी कुछ बात करनी थी

किरण ....... है कहिये न कुंवर जी क्या बात है

सूर्य ....... स्वीटी मैं दुसरो के दिमाग में जनकः सकता हूँ वो भी बिना किसी सकती का उसे किया बस कुछ पल किसी के चेहरे को गौर से देखने पे उसके मंद में पहुंच सकता हूँ ये क्या है

किरण ....... किसकी बात कर रहे है आप आवर ऐसा क्या जान लिया आपने उसके मंद से

सूर्य .....राधिका भाबी से मिला अभी अभी चयन के बाद मैं उन्हें देखते हुए बात कर रहा था की अचानक से मैं उनके दिमाग में पहुंच गया जहा मुझे कुछ बाते अनजाने में पता चल गई

किरण ........ मैं ये तो नहीं जानती की ये हो क्यों रहा है

पैर आप ने ऐसा क्या जान लिया जो परेशान हो गए

सूर्य ......... राधिका भाबी मुझे बचा चाहती है. ी मैं वो चाहती है की मैं उन्हें प्रेग्नेंट कृ क्युकी रोहन भाई अपनी ताकत एक एक्सीडेंट में खो चुके है

किरण ........ ये आप क्या कह रहे है

सूर्य .....जो मुझे पता चला वही कह रहा हूँ आवर रोहन भाई दीप्ती राधिका भाबी की माँ भी ये बात जानती है हनीमून के पीछे एक वजह ये भी है इसके लिया दीप्ती आवर राधिका भाई ने प्लान बनाया था यहाँ आने से पहले. ............

सूर्य किरण को राधिका दीप्ती का पूरा प्लान बताता है

किरण ........ ये तो बड़ी अजीब बात है वो चाहे तो बचा एडॉप्शन का ऑप्शन भी ले सकती थी या कोई आवर तरीका भी तो अपना सकती थी फिर यही क्यों

सूर्य ......वो वो राधिका भाबी लिखे करती है मुझे स्वीटी

किरण ....... तो ये बात है आप चिंता न कीजिये मैं बात कर लुंगी भाबी से आपके चेहरे पे टेंशन अच्छी नहीं लगती आप फ्रेश हो लीजिये मैं कपडे निकलती हूँ

सूर्य ......... उम्म्म्मः थैंक यू जान

किरण ......... उम्मम्मम्हा अब जाइये आवर माँ से मैंने u.s.a के लिया बात कर ली है

सूर्य ........सॉरी मैं तो बताना भूल गया दोपहर को फ्लाइट है दिल्ली के लिया आवर साम को u.s.a के लिया

किरण ......ok मैं देख लुंगी

सूर्य बाथरूम में गुस्स जाता है

वही किरण कुछ देर कड़ी सोचती रही आवर फिर किसी को याद करती है

कुछ हे देर में वह 2 परिया प्रकट होती है

जिसका अहसास सूर्य को भी हो गया था

किरण उन्हें कुछ समजा कर भेज देती है

दोनों परिया किरण को सलाम कर वह से निकल जाती है

U.s.a. ..............

केविन स्मिथ के पास अब पूरी तरह से ठीक हो चूका था जंगम लगभग भर चुके थे

केविन ......मुझे अब जाना होगा थैंक्स आपने जो हेल्प की उसके लिया

स्मिथ ....... केविन अभी भी तुम उस सकती का सामना नहीं कर सकते हो तुम्हे कुछ आवर समय चाइये होगा मैं जितना कर सकता था कर चूका हूँ

केविन ....... स्मिथ मुझे जाना होगा भले हे मैं उसे रोक नहीं सकता पैर उसका कार्य तो कठिन कर हे सकता हूँ गॉड ने साथ दिया तो कोई न कोई रास्ता अवश्य निकलेगा

स्मिथ .......ठीक है केविन अपना ख्याल रखना गॉड विल बे प्रोटेक्ट यू माय सोन

केविन कुछ सामान ले कर वही से कार ले सहर की तरफ भाड़ जाता है मार्क के रस्ते की रुकावट बनने

कुछ 3 जानते के सफर के बाद केविन सहर के सीमा में प्रवेश किया

सहर पहुंचते हे केविन अफसर 1 को कॉल कर पीछे कुछ दिनों को जानकारी लेता है केस वह मर रिलेटेड जहा केविन को उन 3 लड़को को विषय में पता चलता है

केविन तीनो की जानकारी ले उन एड्रेस की आवर निकल जाता है

केविन जब पहले एड्रेस पे पंहुचा तो उसे वही लड़का मिला केविन ने अपने बारे में जानकारी दी आवर कुछ जूथ का सहारा लिया

केवल ........ रोमी मुझे सब सच जानना है don't वोर्री तुम्हे किसी आवर को कुछ भी बताना की जरुरत नहीं आवर न तुम्हारी आइडेंटिटी किसी के सामने आएगी

रोमी ........ सर मैंने आपको कुछ बताया तो वो मुझे फिनिश कर देगा जिसने दद गैंग को ख़तम किया था

केविन ........ रोमी तुमने अगर सच नहीं बताया तो किसी आवर की जान भी खतरे में पद सकती या फिर तुम्हारी भी क्युकी फबि को आज नहीं तो कल पता चल हे जायेगा ऐसे में तुम्हे जेल हो सकती है किसी क्रिमिनल के क्राइम को छुपाने के लिया

रोमी ....... नहीं नहीं सर मैं बताता हूँ आपको पैर मुझे इन सब से दूर रखिये सर

केविन ........ ी वेल फुल सपोर्ट यू रोमी don't वोर्री ok तेल्ल में एवरीथिंग

रोमी केविन को जो कुछ वह हुआ उसकी आँखों के सामने सब बताया

केविन ....... क्या तुम उस लड़की के बारे में कुछ जानते हो

रोमी अपने लोटोप में पायल की फब अकाउंट दिखता है केविन को

केविन किसी को कॉल कर उस अकाउंट की पूरी जानकारी लेता है साथ हे जेनी पायल की पिछ भी

केविन ......थैंक रोमी ये मेरा कांटेक्ट no..hai कभी भी कोई भी हेल्प चाइये अन्य्तिमे कॉल में

रोमी ......थैंक यू सर

केविन वह से सीधा पायल के एड्रेस पे पंहुचा जहा सिक्योरिटी से पता चला की पायल इंडिया सिफत हो चुकी है विथ फॅमिली

केविन को निराशा हुई पैर केविन हर मैंने वालो में से नहीं था

केविन ......... क्या पायल का no. मिल सकता है

सिक्योरिटी ......सर हमारे पास नहीं है मिस पायल का no. आप उनकी फ्रेंड्स जेनी से कंटेंट कीजिये अब वही यहाँ इस विला में रहती है आवर उनके बिज़नेस हेंडल करती है

केविन जेनी की तस्वीर सिक्योरिटी को दिखता है

सिक्योरिटी ........ यस सर यही जेनी है पायल फ्रेंड्स

केविन जेनी का no. ले कर वह से निकल जाता है

( यहाँ मार्क को मार्क आवर बाकियो को शया 1 .2 .3 4 के रूप में लिखूंगा )

वही रियल मार्क के घर पे मार्क आवर उसके बाकि चारो साथ मौजूद थे आवर वो जेनी के विषय में हे चर्चा कर रहे थे

शया 1 ....... एक बात समाज नहीं आ रही हम इतना समय क्यों ले रहे है उसे उठा लेते है या फिर बाकियो की तरह उसके मंद से जो जानकारी चाइये वो ले लेते है

मार्क ........ तुम्हे क्या लगता है में तरय नहीं किया

इतने समय से उस पे नजर रखे हुए हूँ वो को सदन मानवी कन्या नहीं है वो हमेशा किसी की सुरक्षा में रहती है जिसका पता नहीं चल रहा है

शया 4 ....... कही हम गलत रस्ते पे तो नहीं है क्युकी हम सब पिछले कुछ समय से सभी की नजर केवल यही पे है पृथ्वीलोक पे यही तो ऐसी ऊर्जा है नहीं बहुत से स्थानों पे दिव्या ऊर्जा मौजूद है हमें उन स्थानों पे भी नजर रखनी चाइये थी

शया 2 ..... हमें इस किस्से के जल्दी ख़तम करना होगा ताकि हम बाकि स्थानों पे उसकी तलाश कर सके

मार्क ....... तुम लोग उचित कह रहे हो हमें सिगरा हे इस कार्य को अंजाम देना होगा कल रात्रि हे इस कार्य को अंजाम दिया जायेगा कल काली अवश्य है आवर उस दौरान हम असुरवंस असुरो की तामसिक ऊर्जा अपने चरम पे होती है आवर दिव्या ऊर्जा मंद पद जाती है

शया 1 ...... जैसा आप उचित समजे

मार्क ....... शया 1तुम्हे इस स्त्री दीपिका को अपने सम्मोहन सकती में बंद कर उसके माध्यम से इस कन्या जेनी को सन्देश भेज अपने गुप्त स्थान पे बुलवाना है

शये 2 तुम्हे उस समय जेनी के वहां चालक (/ड्राइवर ) के स्थान पे होना है आवर ये कार्य मध्यरात्रि को होना चाइये

शया 1.2 .......जी जैसा आप कहे किन्तु क्या वो कन्या इस स्त्री के सन्देश पे वह आने को सज होगी

मार्क ....... उसका इंतजाम मैंने कर दिया है

वो अपने कुछ अंगरक्षकों के साथ आएगी जिसकी की चिंता नहीं है शया 3,4 उन्हें संभल लेंगे

सभी अपने प्लान के तहत कार्य करने में लग जाते है

ीदार सूर्य दिल्ली से u.s.a के लिया रवाना हो चूका था रोहन राधिका आवर स्वीटी के साथ अपने हनीमून के लिया .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..................
 
hello दोस्तों आप सभी से माफी चाहता हूँ

कुछ दिन सायद कोई अपडेट पोस्ट नहीं कर पाउँगा इस लिया आप सभी को पहले हे सूचित कर रहा हूँ

आज साम से कुछ प्रॉब्लम हो रही थी तो डॉक्टर से जाँच करवाई है उन्हें बड़े हॉस्पिटल का रिफरेन्स दिया है

सब ठीक रहा तो परसो अपडेट देने की कोशिश करूंगा

नहीं तो कुछ समय आप सभी को वेट करना होगा

थैंक यू दोस्तों ........
 
भाई Sadhu baba आपने जो सवाल पूछा था उसका जबाब ये है

सूर्य जब अपने बेस पापा के घर पहुँचता है तब सबसे पहले कामिनी जी की नजर पड़ती जिन्हे एक पल नहीं लगा सूर्य को पहचानने में आवर उन्होंने गुस्से में सूर्य को 2 चांटे भी मर दिए थे

एक तो यहाँ जो हुआ वो वजह था किसी अनजान को ऐसे कमीं द्वारा थपड मरते देख सभी को जतका लगा था की कामिनी ने उसे तपाद क्यों मारा

आवर जब गले लग कर कामिनी जी दोने लगी तब प्रिय ने सूर्य को गोली लगने के विषय में जानकारी दी

तो सभी का ध्यान कामिनी जी के साथ साथ बाकि लोगो का ध्यान भी सूर्यापे फिर से केंद्रित हो गया था

आवर दूसरी बात जब डॉक्टर घर पे आया बिना किसी के कॉल किये तो कुछ तो पूछा हे होगा घर पे सबने इस बारे में पैर मैं उस वाक्य को ऐड नहीं किया

फिर सूर्य की सचाई सामने आना ये सब मेउस आवर ध्यान नहीं गया जितना यहाँ होना चाइये

अब उस टाइम मंद में कुछ आवर बुइ हो सकता है स्टोरी अपडेट रिलेटेड पैर फ़िलहाल जो मुझे सही लगा ुशी अनुसार आपके सवाल का जबाब दे रहा हूँ
 
अपडेट. 207

शया 1.2 .......जी जैसा आप कहे किन्तु क्या वो कन्या इस स्त्री के सन्देश पे वह आने को सज होगी

मार्क ....... उसका इंतजाम मैंने कर दिया है

वो अपने कुछ अंगरक्षकों के साथ आएगी जिसकी की चिंता नहीं है शया 3,4 उन्हें संभल लेंगे

सभी अपने प्लान के तहत कार्य करने में लग जाते है

ीदार सूर्य दिल्ली से u.s.a के लिया रवाना हो चूका था रोहन राधिका आवर स्वीटी के साथ अपने हनीमून के लिया .............

अब आगे ...........

रात्रि के समय सक्तिपुर से कुछ हे कम दूर दुर्जन सिंह का फार्महाउस में विक्रम सरब की बोतल मुँह से लगाए गट्टा घाट पिए जा रहा था

कुछ हे देर में एक 30 के आसपास की महिलाये विक्रम के रूम में आती है जिसके हाथो में बड़ी से प्लेट थी उसमे कुछ मांसाहारी खाना था

महिला ने जैसे हे निचे झुख कर विक्रम के सामने राखी सोफा टेबुल पे वो प्लेट राखी

विक्रम की निगाहे उसके सीने पे जुलती बड़ी बड़ी चूचियों पे जा अटकी

विक्रम किसी भूखे भेड़िये के जैसे नजरो से हे उस महिला को निर्वस्त्र कर रसपान कर चूका हो जैसे

महिला ........ ठकुराइन सबब आवर कुछ चाइये आपको या मैं जॉन

विक्रम ...... तुम्हारा नाम क्या है

महिला ....... जी मल्टी ठकुराइन सबब

विक्रम ........ अभी नहीं अभी यही रुको फिर चाक जाना वैसे आवर कोण कोण है परिवार में तुम्हारे

मल्टी ...... जी मैं मेरा मर्द एक छोटी बहन आवर एक बूढी सास आवर कोई नहीं

विक्रम ...... क्यों कोई बचा नहीं हुआ क्या

मल्टी ......जी वो डॉक्टर से उनका इलाज चल रहा है

विक्रम इस दौरान सराह के साथ साथ उस मांसाहारी भोजन का भी लुत्फ़ उठा रहा था

विक्रम ......तुमने खाना खाया क्या मल्टी

मल्टी ......जी नहीं वो मैं अपनी बहन आवर सास के साथ हे खाउंगी

विक्रम ......ठीक है फिर उन्हें खाना खिलाफ कर चाक आना मैं थमा हुआ हूँ तुम मेरी मालिश कर देना

मल्टी ......जी पैर मैं कैसे

विक्रम ......जो कहा है वो करो जाओ यहाँ से आवर 10 मिनट्स में वापिस चली आना

नहीं तो कल से कही आवर नौकरी देख लेना

बेचारी मल्टी नौकरी से निकले जाने की दमकी सुन कर विक्रम के पेअर पकड़ लेती है

मल्टी .....माफ कर दो ठाकुर सबब आप जो कहेंगे मैं करूंगी बस नौकरी से मत निकलना

विक्रम ...... ठीक है अब जाओ उनके लिया खाना ले जाओ आवर जल्दी लौट आना उन्हें दे कर के

मल्टी .....जी ठकुराइन सबब

मल्टी जल्दी से खाना निकलती है अपनी सास वह अपनी बहन के लिया ीदार विक्रम की सराह की बोतल ख़तम हो जाती है

तो वह बार का डोर खोल कर देखता है वह भी लगभग सभी बोतल खली हे थी

क्युकी दुर्जन सिंह के करने के बाद यहाँ ज्यादातर अजय अपने दोस्तों के साथ मस्ती करता था तो उन सब ने लगभग सब स्टॉक को ख़तम कर दिया था

तभी विक्रम को कुछ नजर आता है जिसे देख उसके दिमाग में कुछ खुराफात जनम लेती है

विक्रम उस चीज़ को ले कर बहार जाता है जहा मल्टी खाना निकल चुकी थी वह बस देने हे जा रही थी

विक्रम ....... मल्टी मेरी कार में सराह राखी है वो ले कर आना जरा जाकर के

मल्टी विक्रम की ाजाज्ञा मन वह से बहार निकल जाती है

विक्रम मल्टी के निकलते हे उस खाने में वो चीज़ मिला देता है

इस बात से अनजान की दो आँखे उसे ऐसा करते देख रही है

कुछ हे देर में मल्टी विक्रम को सरब ला कर देती है आवर खाना ले कर चल देती है

विक्रम फिर से सरब में दुब जाता है ीदार जो अदृश्य रूप में विक्रम पे नजर रखने हुए था वो किसी गहन विचार में दुब जाता है

कुछ हे हे समय में मल्टी फिर से फार्महाउस की तरफ आती हुई दिखाई देती है

तभी वह कोई आता है जो की अदृश्य रूप में हे था

( जो अभी आया उसे आदमी 2 आवर जो पहले से मौजूद है उसे आदमी 1 लिखूंगा )

आदमी 2 ....... क्या हुआ मुझे कैसे याद किया

आदमी1 ......... यहाँ कुछ गलत होने वाला है मुझे उसे रोकने में आपकी मदद चाइये

आदमी 2 ....... तुम सक्षम हो फिर मेरी जरुरत कहा आ गई

आदमी 1 आदमी 2 को कुछ बताया है जाए सुन कर आदमी 2 को भी बात समाज आआ जाती है

आदमी 2 ......ठीक है जो भी करना है जल्दी करो यहाँ कोई आवर भी मौजूद है

आदमी 1 ....... ठीक है तुम उन दोनों को सम्भालो मैं मल्टी को संभालता हूँ

आदमी 2वह से उस तरफ निकल जाता है जहा से मल्टी आई थी

ीदार आदमी 1 भी मल्टी के पीछे पीछे विक्रम के रूम में जाता है

कुछ देर बाद आदमी 2 भी वही आ जाता है

आदमी 2 ......तुम ठीक कह रहे हो ये तो पूरी तरह बदल चूका है

आदमी 1...... काम जो गया

आदमी 2 ......है उन्हें ठीक जगह पंहुचा दिया है अब मल्टी की बारी है

आदमी 2 आगे भाड़ कुछ करता है

ुशी दौरान रूम की लाइट कुछ पल के लिया चाक गई ुशी दौरान आदमी 2 ने अपना काम कर दिया था

आदमी 2 ..... मैं चलता हु. बहार जो है उस से संभाली कर रहना

आदमी 1. .....जब तक कोई परेशानी नहीं होती तब तक हे वो आजाद है

आदमी 2 वह से गायब हो जाता है

ीदार विक्रम सरब के नशे में पूरी तरह चूर हो चूका था

विक्रम ....... तुम खाना क्या कर आप तब तक मैं भी खाना क्या लेता हूँ

मल्टी वह से चलो जाती है आवर चिप चाप खाना क्या कर लौट आती है मल्टी अंदर से पूरी गबरा रही थी सायद कुछ बुरा होने का संकेत उसके सिक्स सेंस ने उसे दे दिया था

पैर मल्टी थी गरीब मजबूर औरत जिसे अपनी बहन आवर सास के साथ साथ अपना पेट भी पलना था

ीदार विक्रम इस बिच अपने कपडे उतर कर सरब की बोतल लिया नंगा हे बीएड पे जा बैठा

जैसे हे मल्टी अंदर आई उसकी आँखे फटी की फटी रह गई

विक्रम...... दूर बंद कर के यहाँ आओ आवर मेरी मालिश करो

मल्टी डरते हुए विक्रम की किसी सवचलित गुलाम की तरह आदेश पूरा करती है आवर कांपते हुए ाथो से वही राखी आयल की सीसी से आयल ले कर विक्रम की मालिश करने लगती है

इतने दोनों बाद विक्रम अपने सरीर पे नारी स्पर्श को मह्सुश कर रहा था जिस से उसका लिंग कुछ हे पालो में पुरे ोकत पे चूका था

विक्रम अपना हाथ आगे बढ़ा मालिटी की 36 की कठोर चूचियों को बेहरमी से दबाने लगता है

इस बिच मल्टी निरंतर विक्रम का विरोध करती रही

विक्रम अपने आकड़े हुए 8 ,सादे 8 इंच काळा बुजंग नाग का फैन मल्टी के हाथो में पकड़ा देता है

मल्टी ......ठाकुर सबब मुझे जाने दीजिये

विक्रम ......चुप चाप वही कर साली रंडी विक्रम ठाकुर को मन करती है

कहते हुए विक्रम जबरदस्ती अपना बुसनद नाग मल्टी के मुँह में थुश देता है

मल्टी की आँखों से आँशु निकलने लगते है

वही जो आदमी 1 था इस अदृश्य को देख कर गुस्से में आग बबूला hi रहा था पैर वो भी पता नहीं क्यों मल्टी की कोई मदद नहीं कर प् रहा था

विक्रम मल्टी के सरीर से उसका घागरा चोली ब्रा पेंटी सब फाड़ कर बिलकुल नंगा कर अपने बीएड पे गिरा कर अपने लॉन्ग को आयल में भिगो कर

मल्टी की योनि से सत्ता कर 2 हे देखो में पेल देता है

दर्द के मरे मल्टी चीखती चिलाती बेहोश हो गई

पैर विक्रम नाम के इस जानवर ने उस मूर्छित सरीर पे कोई रागम नहीं किया आवर बेदर्दी से जब तक भोगता रहा जब तक उसे सन्ति नहीं मिली

कुछ हे डिअर बाद एक बाद फिर से विक्रम पे हवश स्वर हुई इस बार उसने मल्टी के कुंवारे गुदाद्वार की शील भांग की मल्टी रोटी रही रहम की भीख मांगती रही पैर विक्रम के सीने में जैसे दिल हे नहीं था उल्टा उसे सुकून मिल रहा था ऐसा करने में

आदि रात तक मल्टी को भोगने के बाद विक्रम वैसे हे नंगा बहार निकला आवर रूम को बहार से लॉक कर मल्टी के घर की तरफ बढ़ा जहा उसकी सास आवर छोटी बहन सुमन सोये थे

विक्रम जब वह पंहुचा तो दोनों बहार हे सोये हुए थे गर्मी के चलते

विक्रम सुमन के खटिया के पास पंहुचा आवर उसके पुरे जसम को अच्छे से टटोल कर देखता है जैसे वो पूरी तरह निश्चित हो की ये दोनों नहीं उठने वाली

विक्रम कुछ देर सरीर को सहलाने के बाद सुमन को अपने कंधे पे उठा कर फार्महाउस के दूसरे रूम में ले जाता है

जहा वो गहरी नीड में सोई सुमन को निर्वस्त्र कर उसके 20, 22 सांवले पैर खूबसूरत नयन नकाश मेहनतकश सरीर को भोगने लगता है

सुमन को अपनी योनि में पीड़ा का अनुभव होते हे उसकी आँखे खुल जाती है

वह विक्रम के बहुपस से बहुत कोशिश करती है बचने की पैर आज सायद उसकी किस्मत में यही लिखा

( आदमी 2 ........ ये तुमने बहुत गलत किया मन तो करता है की अभी तुम्हारे पापी सरीर से तुम्हारी काली आत्मा को मुक्त कर जहनुम की आग में जला दू पैर मेरे हाथ बन्दे हुए है तुम्हारी दर्दनाक लौट किसी आवर के हाथो लिखी है )

रात भाड़ विक्रम सुमन वह मल्टी के सरीर के साथ साथ आत्मा को भी जख्मी कर चूका था दोनों एक दूसरे से अनजान अलग अलग रूम में विक्रम के वहशीपन को झेल न पाने के कारन मूर्छित निर्जीव सरीर सामान पति थी

विक्रम तब तक उन्हें निर्जीव सरीर समाज कर भोगता रहा जब तक सुबह न हो गई

U.s.a .......... सूर्य किरण राधिका भाबी जी रोहन भाई

चारो करीब सुबह के वक़्त एयरपोर्ट पहुंचे जहा पहले से हे शिव ने सब इंतजाम कर रखा था

इतने सालो u.s.a में रहे थे तो उन्हें यहाँ के विषय में सब जानकारी थी

सूर्य u.s.a की डर्टी पे पेअर रखते हे उसे यहाँ कुछ जनि पहचानी से तामसिक ऊर्जा का अहसास हुआ

( सूर्य ....... लगता है किसी का अंत समय निकट है सायद जल्दी हे मुलाकात हो जाये )

ऐसा हे किरण ने भी मह्सुश किया था पैर जितना स्ट्रांग सूर्य ने फील किया उतना किरण मह्सुश नहीं कर प् रही थी

किरण एक बार सूर्य को देखती है जो पलकों से हे उसे सन्ति रहने का इसरा दे देता है

ारिपोर्ट से बहार निकलते हे सामने सूर्य शिव ठाकुर के नाम प्लेट लिया कोई बाँदा खड़ा था

सूर्य ......... Hello आपको किसने भेजा है मैं सूर्य शिव ठाकुर

आदमी ....... सर मुझे होटल की तरफ से आपको रेसिवेद करने के लिया भेजा है

रोहन ........ भाई ये क्या चाकर है हम तो घर पे रुकने वाले थे

सूर्य ......लगता है ये पापा का काम है खेर हम बुकिंग कैंसिल नहीं करते है आज होटल में रुकते है

कल सुबह घर पे सिफत हो जायेंगे क्यों स्वीटी

किरण .......जैसा आपको ठीक लगे

चारो ड्राइवर के साथ होटल की तरफ निकल जाते

कुछ आड़े घाटे बाद एक आलीशान 7 स्टार होटल के सामने कार रूकती है

रोहन ....... भाई अंकल जी ने बहुत खर्चा किया है हनीमून के लिया वैसे अच्छा है यही पास में मेरा एक दोस्त भी रहता है उस से भी मुलाकात हो जाएगी

सूर्य जो पहले हे प्लान जनता था उसे रोहन की बात सुन कर हंसी आ जाती है आवर वह राधिका को देखता है

तो राधिका भाबी जी सरम से अपनी गर्दन निचे कर लेती है

सूर्य अपने आवर रोहन के रूम की के ले कर रूम की तरफ निकल जाता है जो 11 फ्लोरे पे था दोनों के रूम बिलकुल टच में थे सबसे मजेदार बात ये की दोनों रूम एक दूसरे से कनेक्ट थे बस बिच में एक दूर था जिसे खोल कर एक से दूसरे रूम में जाया जा सकता है

किरण ........ वाओ कुंवर जी ये तो बहुत खूबसूरत रूम है जैसा परीलोक में था





सूर्य ....... अच्छी चॉइस है पापा की किसी वही महल सा रूम है

किरण ......... पैर जो सुकून अपने घर में अपने रूम में मिलता है वो यहाँ नहीं मिल सकता बेसक ये हमारी हवेली के मुकाबले काफी खूबसूरत है पैर .....

सूर्य ........ वो घर है स्वीटी आवर ये होटल यही फरक है यहाँ सब पैसो की माया है

पैर घर प्यार का वो मंदिर जिसे हमारे बड़े बुजुर्ग अपनी म्हणत से वह प्रेम से सोचते है घर की तुलना होटल से कभी नहीं होने सकती

किरण ........ आप फ्रेश जो लीजिये कुंवर जी फिर मैं भी फ्रेश हो लेती हूँ वैसे आपने भी वो मह्सुश किया कुंवर जी

सूर्य ........ है मैं जनता हूँ वो ऊर्जा कैसे थी आवर ऐसे ऊर्जा किसकी हो सकती है ये भी अंदाजा है मुझे

किरण ........आपको कुछ करना चाइये कुंवर जी

सूर्य .......नहीं स्वीटी अभी नहीं जब तक नियति संकेत न दे किसी तरह का तब तक बिना किसी वजह के किसी भी मामले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं अगर उन्होंने कुछ गलत किया आवर उन्हें दंड मेरे हाथो से मिलना लिखा है तो संकेत मुझे अवश्य मिलेगा

किरण ......... जी कुंवर जी काफी समझदार हो गए है मुझसे विवाह करके

सूर्य ........ अच्छा जी रुको अभी बताता हूँ तुम्हे तो

सूर्य किरण को उठा कर सीधा उस बड़े से बाथरूम में ले जाता है

जो रूम में मौजूद था किरण कुछ कहती उस से पहले हे सूर्य उसे लिया हुए उस छोटे से स्विमिंग पूल में उतर गया कहने तो वो बाथ तब हे था पैर काफी बड़ा आवर खूबसूरत

सूर्य किरण के सरीर से एक एक अंग वस्त्र उतर उतर कर बहार फेंख देता है

आवर खुद भी नंगा hi किरण के साथ मस्ती करने लगता है

उदार दूसरे रूम रोहन आवर राधिका अभी एक दूसरे को चुम रहे थे एक दूसरे से लिपटे हुए नरम बिस्तर पे अटखेलिया कर रहे थे

कुछ देर मस्ती करने के बाद राधिका रोहन के सीने पे सर रख अपना हाथ रोहन की पेण्ट में दाल उसके डस्ट लिंग को सहलाने लगती है

रोहन ......... रइधू तुम जानती हो न वह म्हणत करना बेकार है मैं तुम्हे संतुस्ट नहीं कर सकता पहले की तरह

राधिका जी ........जानती हूँ रोनी ( प्यार से राधिका रोहन को रोनी बुलाती है ) पैर उम्मीद बंद जाती है

रोहन ........सब सच जानते हुए भी उम्मीद करना गलत है रइधू सायद कोई बुरा करम किया था मैंने जो अपनी हे बीबी कोई सुख नहीं दे प् रहा हूँ न उसे शारीरिक सुख दे सकता हूँ आवर न आत्मिक सुख

कहते कहते रोहन अपनी बेबशी पे रोने लगता है

राधिका रोहन को अपने सीने से लगा लेती जैसे एक माँ अपने बचे को अपने ाचल में छुपा उसे हर दर्द हर तकलीफ से बचती है

ठीक ुशी तरह राधिका रोहन को एक नवजात बचे सामान उसे सन्ति करती है

स्त्री जहा माँ है बहन है पुत्री है पत्नी है वही देवी भी है अतः प्रेम का जीता जगती प्रतिमूर्त होती है स्त्री जिसका हृद्या इतना विसुअल होता है की आकलन करना भी संभव नहीं

तभी तो देव भी स्त्री को पूज्य मानते है

जगत जननी सृस्टीकर्ता की उपदि केवल स्त्री को प्राप्त है क्युकी कोई पुरुष प्रधान स्त्री के त्याग का आकलन नहीं कर सकता

किन्तु आज आज पुरुष सवयं को इस्वर आवर स्त्री को अपनी दासी भोग की वास्तु समझता है

स्त्री के त्याग को कोई नहीं समझता एक जाये जीवन को जनम देने के लिया कितनी पीड़ा सहन करनी होती है इसका आकलन भी पुरुष कर नहीं सकता

राधिका जी .......... आप मेरे साथ है बस आवर मुझे कुछ नहीं चाइये मेरे लिया सब कुछ आप है आपसे भाड़ कर कुछ नहीं

रोहन ....... जनता हूँ मैं अपनी रइधू को जो आज भी उतना हे प्यार करती है जितना सदी से पहले पैर मैं तुम्हे गूथ गूथ कर तड़पता नहीं देख सकता रइधू अब जो सोचा है वही होगा

राधिका .......... ठीक है पैर केवल बचे के लिया

रोहन ........उम्मम्मम्हा नहीं रइधू तुम्हे ख़ुशी मिले तो आगे भी तुम मेरे भाई से सम्बंद जाती राखी सकती हो मुझे बस अपनी रइधू के चेहरे पे हमेशा वही हस्ती खेलती मुस्कान चाइये जिसे देख मैं खुद को भूल जाता था उम्म्म्मः

अभी ये लोग बात हे कर रहे थे की सूर्य दोनों रूम का दूर खोल कर किरण के साथ अंदर आ दमकता है

सामने रोहन आवर राधिका को ऐसे एक दूसरे से चिपका देख किरण तो वापिस रूम में गुस्स गई पैर सूर्य वही नजरे गुमा लेता है

सूर्य ....... सॉरी भाई मुझे पता नहीं था ऐसा होगा

रोहन ....... अरे भाई ऐसा वैसा कुछ नहीं है हम बस बाते कर रहे थे आवर कुछ नहीं ज्यादा न सोच आवर किरण को ले आ

सूर्य वापिस जा कर किरण को ले कर आता है

सूर्य ......भाई अभी तो कही बहार जाना नहीं है अभी नास्ता कर के रेस्ट करते है फिर दोपहर बाद गुमने चलते है

रोहन ........ है ये ठीक रहेगा किरण आवर राधिका तो फ्लाइट में भी सो चुकी है फिर भी सरीर को आराम देना भी जरुरी है

सूर्य ......वो सब तो ठीक है पैर आप लोग अभी तक फ्रेश भी नहीं हुई है लगता है

राधिका जी ........ रोहन आप यही का बाथरूम उसे कर लीजिये मेल किरण वाला उसे कर लेती हूँ

आवर आप तब तक अपनी पसंद का ब्रेकफास्ट ऑर्डर्स कीजिये

राधिका अपने कपडे ले कर वह से निकल जाती है

रोहन भी है में गर्दन हिला बाथरूम में गुस्स जाता है

ीदार सूर्य किरण ब्रेकफास्ट का आर्डर दे देते है कुछ 20 मिनट्स में रोहन त्यार हो कर किरण वह सूर्य को ज्वाइन करता है राधिका अभी भी नहीं आई थी

वही राधिका जब सूर्य के बाथरूम में पहुंची तो वह किरण आवर सूर्य के पुरे कपडे ुशी हालत में पेस थे भोगने हुए

राधिका ......... लगता है दोनों ने आते हे बाथरूम से सुरुहत कर ली हनीमून की

अच्छा है कस हमारी किस्मत भी ऐसे होती राधिका सभी कपडे उठा कर एक तरफ उसे लांड्री बॉक्स में दाल देती है

आवर अच्छे से जहा धो कर तीनो को ज्वाइन करती है

जल्दी हे सबने अच्छे से ब्रेकफास्ट किया सबने खाने की टैरिफ की करे भी क्यों नहीं आखिर इतने बड़े 7 स्टार होटल में सब बेस्ट हे होना था 7 स्टार का तमगा ऐसे हे तो मिल नहीं जाता

किरण ......कुंवर जी आपको आराम करना है तो आप आवर रोहन भाई यही आराम कीजिये मुझे भाबी के साथ बात भी करनी है आवर उनके साथ रेस्ट कर लुंगी

सूर्य .......OK स्वीटी बूत ज्यादा बात ी नहीं रेस्ट भी करना है साम को बहार चलना है न

किरण ......OK कुंवर जी

राधिका ........एक बात बताओ स्वीटी तुम सूर्य को कुंवर जी क्यों बोल रही हो पहले तो ऐसा नहीं था

रोहन ......है भाई ये माजरा क्या है मैंने भी गौर नहीं किया

सूर्य ....... बोलो स्वीटी तुम हे जबाब दो अब

किरण ......भाबी वो क्या है की विवाह के बाद लड़की अपने पति का नाम नहीं लेती है हमारे यहाँ पति को कुंवर जी या कुंवर सा कह कर हे पुकारा जाता है

रोहन ...... देख रही हो रइधू अभी अभी सदी हुई आवर किरण कितनी समझदार हो गई

किरण उसे भी कुछ समजाओ जरा

राधिका ......आपको रात को देखती हूँ मैं

राधिका किरण को अपने साथ ले सूर्य वाले रूम में चली जाती है

किरण अंदर से रूम को लॉक कर देती है

रोहन आवर सूर्य कुछ देर बात कर सो जाते है

ीदार किरण राधिका से बात करते हुए डेरे डेरे रोहन के विषय में पता कर लेती है राधिका सब सच बता देती है की कैसे क्या हुआ आवर इसका क्या असर हुआ इस दौरान राधिका बहुत दुखी भी हो गई थी जिसे किरण ने संभाला

पायल विला .......

जेएनय रेडी हो कॉलेज के लिया निकली साथ में 2 कार आवर थी जिनमे जेनी के आर्म्ड गार्ड्स थे सिक्योरिटी के लिया

जैसे हे जेनी विला की बाउंड्री से बहार निकली कुछ हे दुरी पे उसे वही कार नजर आई जो उसकी कंपनी के बहार नजर आती थी

जेनी ...... ड्राइवर ये कार हमारी कंपनी के बहार भी थी आवर यहाँ भी

ड्राइवर .....मेम ये कार तो हर रोज यही पे देखता हूँ सायद किसी की होगी

जेनी ........ सायद यही हो सकता है चलो कॉलेज की तरफ

अभी के लिया तो जेनी ने कार का इग्नोर कर दिया था

पैर जब वो कॉलेज पहुंची तो वह दीपिका में को देखते उसे दीपिका में की चेतावनी याद आ जाती है

जेनी कॉल कर ड्राइवर को उस कार के बारे में इनफार्मेशन निकलने को कहती है आवर दीपिका में के साथ क्लास की आवर निकल जाती है

ड्राइवर कॉलेज से कार का पता करने के लिया निकल गया सिक्योरिटी जेनी के साथ कॉलेज में हे रुकी हुई थी उसकी सिक्योरिटी के लिया

अभी ड्राइवर कॉलेज से महज 2 कम हे गया होगा की उसे रस्ते में किश का एक्सीडेंट हुआ मिला

बेचार मदद के इरादे से कार रोक कर बहार निकला ठीक ुशी वक़्त किसी ने पीछे से उसके मुँह पे कपडा दाल दिया कुछ हे पल में ड्राइवर का सरीर मूर्छित जमीं पे पड़ा था

शया 1 ........ शया 2 जल्दी से इसका रूप धारण कर लो आवर इसके मस्तिष्क से इसकी सभी यादे भी अपना लो

ये तब तक मूर्छित रहेगा जब तक हमारा कार्य सिद्ध नहीं होने जाता है

शया 2 कुछ हे पल में ड्राइवर का रूप दर्जन कर उस से उसकी यादे ले वह से ड्राइव करते हुए निकल जाता है

वही शया 1 ड्राइवर को ले कर गायब हो जाता है

कोई एक हर के बाद ड्राइवर फिर से कॉलेज लौट आता है आवर जेनी को एक जूठी लव स्टोरी सुना देता है जैसे की वो कार वाला जेनी को लिखे करता है बस इस लिया उसे देखने के लिया वह सुबह साम कंपनी आवर घर के बहार इन्तजार करता था पैर अब से वो आपके वास् पास भी नहीं दिखेगा

जेनी भी ड्राइवर के जूठी स्टोरी को सच मन लेती है

क्युकी ऐसे मजनू वो पहले भी देख चुकी थी

ड्राइवर को मार्क दवारा कहे सब्दो का अहसास तब हुआ जब वो जेनी के करीब था तब जेनी के सुरक्षा कवच की पुरे ऊर्जा से उसे भी बैचेनी होने लगी थी

दोपहर तक जेनी कॉलेज ख़तम कर कंपनी की आवर निकल गयी दीपिका में के साथ हे पैर अलग अलग कार से

कंपनी का काम जोर शोर से चल रहा था जिस से कंपनी की मार्किट वैल्यू भी भाड़ रही थी आवर डेरी डेरी कंपनी का नाम भी भाड़ रहा था

सूर्य होटल रूम .....

किरण ....... भाबी आपकी तकलीफ मैं समाज सकती हूँ मैं भी एक स्त्री हूँ मेरी तरफ से आपको ग्रीन सिग्नल है पैर उनसे बात आपको हे करनी होगी

राधिका जी ....... क्या तुम्हे इस से दुःख नहीं होगा स्वीटी सब कुछ जान कर भी तुम कह रही हो की तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं है

किरण ........ ऐसा नहीं है भाबी मैं भी औरत हूँ मेरे सीने में भी दिल है जो सब मह्सुश करता है ख़ुशी होना गम हो दुःख दर्द सब पैर ये भी जानती हूँ की बिना वजह वो किसी के नजदीक नहीं जाते आपके बारे में वो पहले से हे जानते है आवर मुझे बता भी चुके है जो आपने बताया उन्हें कैसे पता चला मैं नहीं जानती

बस आप जो चाहती है उस पे बात आपको हे करनी पड़ेगी मेरा फुल सपोर्ट है आपको आखिर छोटी मम्मी तो मैं भी बानगी न है आप चाहो तो मस्सी भी कहलवा सकती हो

राधिका की आँखे नाम हो चुकी थी किरण की बात सुन बस वो एक तक किरण के हस्ते हुए चेहरे को देख रही थी

किरण ......ऐसे क्या देख रही भाबी आप

राधिका ....... तुम्हारे त्याग को स्वीटी जिसने एक हे पल में मेरा आँचल खुशियों से भर दिया खुद से मेरे सेफ सुख दर्द सवयं उठा लिया ऐसा क्यों स्वीटी

किरण ........ क्युकी मेरा सुख आपकी ख़ुशी के सामने कुछ भी नहीं है भाबी जब तक औरत संतान को जनम न दे तब तक अधूरी रहती है

ये समाज उसे चैन से जून भी नहीं देता बांज अभागी पापी कुलटा न जाने क्या क्या उपाधि दे डालता है आवर उसे टिल टिल कर गूथ गूथ कर मरने के लिया विवश कर देता है आप जिस बचे को जनम देंगी वो मेरा भी तो बीटा होगा न फिर चाहे वो जनम आपकी कोख से ले या फिर मेरी कोख से अंश तो आपका आवर कुंवर जी का हे होगा न

राधिका किरण को अपने गले से लगा लेती है

राधिका ......तुम दांया hi मेरी बहन आज समाज आ रहा है की क्यों सूर्य तुम्हे इतना प्यार करता है क्यों बाकि सब तुम्हे बहु न कान कर बेटी से भध कर प्यार करते है

सभी तुमसे बड़ी होने के बाद भी क्यों तुम्हे बड़ा मानते है

किरण ..... बस बस भाबी इतने बड़ी बड़ी बारे मेरे सर में दर्द करने लगेगी

आवर अब उन्हें नाम से बुलाना बंद कीजिये

राधिका जी ...... तो क्या उन्हें अब तुम्हारी तरह मैं भी कुंवर जी कह कर पुकारू

किरण. ....... मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है बस रोहन भाई को संभल लेना

आवर उन्हें कुछ बताने की जरुरत नहीं है इस बारे में

राधिका ......पैर उन्हें तो सब पता है स्वीटी इस बारे में

किरण ...... जो पता है वो तो ठीक है पैर आगे मत बताना इस बारे में क्युकी वो एक मर्द है जब उन्हें इस बारे में पता चलेगा तो वो मुझसे या कुंवर जी से नजरे नहीं मिला पाएंगे

राधिका जी .......फिर भी पता तो चल हे जाना है उन्हें

किरण .......वो सब बाद में देख लेंगे वैसे आपकी ननद भी लाइन में लगी है इनके पीछे

राधिका जी .....ये भी पता है क्या

किरण .......वो मुझसे कुछ नहीं छुपाते है भाबी वैसे कब आ रही है वो यहाँ पे ओपनिंग के लिया

राधिका जी .....2 .3 दिन बाद

किरण ......फ़िलहाल उन्हें मन कर दीजिये यहाँ से जाने के बाद कुछ दिन दिल्ली वाले घर पे रहेंगे फिर सूर्यगढ़ जायेंगे तो उन्हें जो करना है वही करे यहाँ आप को फुल टाइम मिलना चाइये

राधिका जी ........ हनीमून तुम्हारा है उनके साथ मेरा नहीं

किरण ......फिर आप भी सोच लीजिये की ये आपका भी हनीमून है ज्यादा फरक नहीं उनके साथ

राधिका जी ......क्या मतलब मैं कुछ सामजी नहीं

किरण .......जब वो साथ होंगे तब समाज जाएँगी अभी सरम कीजिये आवर साम को रोहन भाई के साथ आप तुमने जाना ताकि उन्हें अच्छा लगे

राधिका जी ......थैंक यू स्वीटी तुम वाकई बहुत स्वीट हो ुम्मम्हा

राधिका स्वीटी को दोनों गलो को प्यार से चुम लेती है

किरण .......बस बस आगे कुछ न कहना भाबी आवर मैं स्वीट सर्फ उनके लिया हूँ मुझे ये वाला सोक नहीं है हेहेहे

किरण को इस तरह किसी मासूम बची के जैसा हस्ते देख राधिका के होंटो पे भी प्यारी सी हाशि उभर आती है

राधिका जी प्यार से किरण का साद अपनी गॉड में रख सहलाने लगती है जिस से किरण को बहुत अच्छा लगता है आवर वह सुकून से राधिका जी की ग्लैड में सर रखने मिटटी नींद में दुब जाती है

साम को किरण के कहे अनुसार राधिका रोहन को ले कर गुमने चल देती है

सूर्य होटल स्टाफ को कुछ समजा कर किरण को ले कर बहार तुमने निकल जाता है जहा दोनों ने मिल कर अपने से कुछ शॉपिंग की मस्ती करते हुए ऐसे हे करीबन 8 बजे राधिका जी का फ़ोन आने पे सूर्य किरण होटल लौट आये

सबने मिल कर निचे हे होटल एरिया में डिनर किया

राधिका जी ...... आल थे बेस्ट फॉर योर लवली हनीमून बेस्ट विशेष फॉर नई मैरिड कपल

सूर्य .......थैंक यू भाबी जी एंड आपको भी सेकंड हनीमून की ढेरो सुभकामनाये आपके जीवन में हर वो ख़ुशी मिले जो आपको मिलनी चाइये

रोहन ....... उम्मीद पे दुनिया कायाक है भाई चलो अब अपने रूम में जाओ मैं चला अपनी रइधू को ले कर के

सूर्य रोहन अपने अपने रूम में निकल जाते है

जैसे हे किरण रूम को ओपन कर अंदर आती है तो देखती की पूरा रूम बहुत प्यारी खुसबो से महल रहा है पुरे रूम में रंग बिरंगी केंडल कल रही थी जगह जगह खूबसूरत खुसबूदार पुष्पों से रूम को सजाया हुआ था





सूर्य ......... क्या हुआ स्वीटी पसंद नहीं आया क्या





किरण........ बहुत ज्यादा पसंद आया तो आपका ये प्लान था बहार गुमने के पीछे

सूर्य ........ भूल गई क्या आज हमारा हनीमून है तो थोड़ा बहुत तो स्पेशल करना बनता है

सूर्य किरण के सामने एक बॉक्स करता है

किरण ......इसमें क्या है

सूर्य .......मैं अपनी स्वीटी को इस ड्रेस में देखना चाहता हूँ उसे जी भर के प्यार करना चाहता हूँ

किरण ........ उम्मम्मम्हा आपकी हर खवाहिश पूरी होगी

किरण सूर्य के हाथ से बॉक्स ले कर सीधा बाथरूम में चल देती है

कुछ 20 मिनट्स के बाद किरण बहार निकलती है







सूर्य का मुँह खुला का खुला रह जाता है किरण के ऐसे अवतार को देख कर कपड़ो के बहार से भी किरण का अंग अंग अपने निखार से सूर्य को सम्मोहित कर रहा था

किरण ........ ऐसा न देखिये कुंवर जी हमें लाज आती है

सूर्य पे जैसा इसका कोई असर हे नहीं हुआ

सूर्य ुशी तरह देखता हुआ किरण के पास पंहुचा आवर उसके चारो तरफ गम कर अच्छे देखता है

सूर्य किरण को अपनी बहो में उठा हनीमून के किये सजाये हुए बीएड पे लिटा देता है

किरण आवर सूर्य दोनों की धड़कन हलकी तेज चल रही थी

किरण ने खुद से पहल करते हुए अपने खूबसूरत मधभरे अमृत प्याले सूर्य के होंटो से लगा दिए कब सूर्य की आँखे बंद हुए आवर कब दोनों के जिसम से एक एक अंग वस्त्र विलख हुआ किसी को कोई ज्ञान नहीं

सूर्य ने किरण के खूबसूरत जिसम के हर हिस्से में अपने चुम्बनों से बरसात कर दी थी जैसे सूर्य चुम्बनों से किरण के जिसम में अपने प्यार के अपने होने का अहसास भर रहा हो ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................

अपडेट थोड़ा लम्बा होगा दोस्तों इस लिया नेक्स्ट अपडेट में पोस्ट करूंगा किरण का हनीमून फर्स्ट नाईट एंड मार्क की भिड़त .........

सायद नाईट तक पोस्ट करूँगा या फिर कल सुबह ...............
 
अपडेट. 208

सूर्य पे जैसा इसका कोई असर हे नहीं हुआ

सूर्य ुशी तरह देखता हुआ किरण के पास पंहुचा आवर उसके चारो तरफ गम कर अच्छे देखता है

सूर्य किरण को अपनी बहो में उठा हनीमून के किये सजाये हुए बीएड पे लिटा देता है

किरण आवर सूर्य दोनों की धड़कन हलकी तेज चल रही थी

किरण ने खुद से पहल करते हुए अपने खूबसूरत मधभरे अमृत प्याले सूर्य के होंटो से लगा दिए कब सूर्य की आँखे बंद हुए आवर कब दोनों के जिसम से एक एक अंग वस्त्र विलख हुआ किसी को कोई ज्ञान नहीं

सूर्य ने किरण के खूबसूरत जिसम के हर हिस्से में अपने चुम्बनों से बरसात कर दी थी जैसे सूर्य चुम्बनों से किरण के जिसम में अपने प्यार के अपने होने का अहसास भर रहा हो ..............

अब आगे ............

साम को जब जेनी अपने ऑफिस से निकली तो उसकी आँखे अनन्याश हे उस कार को खोजती है

किन्तु कार वह मौजूद न देख उसे रहत मिलती है

ये सोच कर की जो भी था उसने उसका पीछा करना छोड़ दिया खतरे की कोई बात नहीं

जेनी ऑफिस से घर न जा कर कही आवर के निकल जाती है

दरहाल जेनी अपने किसी फ्रेंड की बर्थडे पार्टी में जाना था तो वह घर न जा कर मॉल की तरफ निकल जाती है वह वो अपनी फ्रेंड के लिया गिफ्ट लेती है आवर अपने लिया कुछ पार्टी वियर ड्रेस परचेस करती है जिसके उसे काफी टाइम लगता है

शॉपिंग करने के बाद जेनी घर की तरफ निकल जाती है

जहा उसकी ेल आवर फ्रेंड ुशी के साथ रहती है

जेनी अपनी शॉपिंग बेग में से 2 बैग अपने फ्रेंड्स को देती है आवर उसे भी पार्टी में अपने साथ चलने का आग्रह करती है

फ्रेंड बिना किसी आना की बैग ले कर त्यार होने चल देती है

जेनी भी अपने रूम में जा कर पार्टी के लिया त्यार होने लगती है

इन सब में दोनों को करीबन एक घंटे से भी ऊपर का समय लग जाता है करीबन 8 बजे के करीब दोनों अपने फ्रेंड्स की बर्थडे पार्टी की तरफ निकल गई

जेनी की जो फ्रेंड्स थी वो रिच फॅमिली से थे तो उसने बर्थडे पार्टी एक आलीशान होटल में राखी जहा जेनी ने आवर उसकी फ्रेंड्स ने बर्थडे गर्ल को विष किया आवर गिफ्ट दिया

इस दौरान जेनी आवर उसकी फ्रेंड्स ने काफी ड्रिंक्स भी की थी जो की आजकल पार्टीज में लड़कियों के लिया ये नार्मल बात थी

ऐसे हे पार्टी एन्जॉय करते करते रात 11:30 से भी ऊपर टाइम हो चला था

जेनी आवर उसकी फ्रेंड्स ने अपनी दोस्त से वीसा ले घर की तरफ निकल पड़े

घर पहुंचे पहुंचते जेनी को आधा जानता लग गया

जेनी पे ड्रिंक्स का असर कुछ ज्यादा हे था j.friend से जेनी अपने रूम में आते हे ुशी अवस्था में बीएड पे लेट जाती उन्हें कपड़ो में जल्दी हे नशे को वजह से जेनी को नींद आ जाती है

उदार मार्क कंपनय से लगते बंद पड़ी एक पुराणी कार मैन्युफैक्चरिंग कंपनय में सब तयारी कर चूका था प्लान के हिसाब से

मार्क ......... शया 1 काली अमावश्या की सुरुहत हो चुकी है पूर्ण मध्यरात्रि यही उचित समय है हमारे कार्यो को अनजान देने कैसे समय आसुरी सकती अपने चरम में होती है आवर दिव्या सकती तेजहीन

शया 1 ....... जैसा आप कहे मैं उस स्त्री के माध्यम से योजना अनुसार कार्य करता हूँ

शया 1 वह से गायब हो दीपिका मेम के घर उसके रूम में अप्पेअर होता है

इस वक़्त दीपिकापने हस्बैंड के साथ नैत्य में सोये हुए थे जिसके गदराये हुसैन को देख एक बार शया 1 भी अपने गुप्तांग को सहलाते बिना न रहा पैर अपने योजना को रूप देते हुए आगे भाड़ वह दीपिका के सर पे हाथ रख मंत्र उच्चारण करता है

अगले हे पल दीपिका मेम की आँखे खुल जाती है

उसकी आँखे पूरी तरह काली पद चुकी थी जैसे दीपिका किसी शैतान में बदल गई हो बिलकुल काली आँखे

शया 1 वह से बहार निकलता है दीपिका मेम भी उसके पीछे पीछे चल देती है

शया 1 रूम से निकल कर दूसरे खली रूम में चला जाता है

दीपिका किसी रोबोट की तरह उसके सामने जा कड़ी होती है अपनी गर्दन जुखाये

शया 1 ........ तुम इस वक़्त मेरी गुलाम हो स्त्री तुम्हारे यौवन को देख तुम्हे भोगने की तीव्र इच्छा hi रही है किन्तु इस समय तुम्हारे यौवन को भोगने से भी आदिक महत्वपूर्ण कार्य तुम्हे करना

दीपिका .......आज्ञा दीजिये मालिक आपकी गुलाम आपकी सेवा में हाजिर है

शया1 ..... ..... अपने वस्त्र उतरो हमें तुम्हारे यौवन को निर्वस्त्र देखने की इच्छा हो रही है

दीपिका मेम बिना किसी सरम या वध विवाद के अपने सरीर को निर्वस्त्र कर गुथनो पे आ जाती है





शया 1दीपिका को हवश भरी नजरो से अच्छे से उसके निर्वस्त्र सरीर कावलोकन करता है

शया1 दीपिका को अच्छे से देखने के बाद दीपिका को उसका फ़ोन देता है जो वो रूम साथ ले कर आया था

शया1 ...... जेनी को कॉल करो आवर उसे कंपनी में प्रॉब्लम बोल कर वह आने के लिया कहो जल्द से से जल्द

दीपिका .....जो आज्ञा मालिक

दीपिका जेनी को कॉल करती है 3 ,4बार पूरी रिंग होने के बाद जेनी की तरफ से कॉल रेसिवेद हुआ दरशल जेनी सरब के नशे में सो गयी थी फ़ोन की लगातार रिंग होने से ुनिधि में हे उसनेफोने उठाया था

दीपिका...... जेनी मेम आपको जल्द से जल्द कंपनी आना होगा वह कोई बड़ी प्रॉब्लम हो गई है

जेनी कुछ जबाब देती उस से पहले हे कट हो गया

उदार जेनी का एक हे पल में सारा नशा साडी नींद काफूर हो गई वो ुशी हालत में मुँह दो कर तेजी से बहार निकलती है आवर ड्राइवर को कंपनी चलने का बोलती है

ड्राइवर भी जल्दी से कार निकलता है साथ हे सिक्योरिटी भी रेडी हो कंपनी की तरफ निकलते है

योजना अनुसार जिस रस्ते रोज जेनी कंपनी जाती थी उसपे वर्क प्रोग्रेस का बोर्ड लगा देख ड्राइवर दूसरे रास्ता ले लेता है जो की थोड़ा गम कर कंपनी के पीछे की तरफ से आता है

जैसे हे कंपनी के पास कार पहुंची कार बंद हो गई

जेनी ......क्या हुआ ड्राइवर कार क्यों बंद कर दी

दिवेर .......मेम सायद कोई प्रॉब्लम हुआ है कार में

जेनी ....... आज हे सब प्रॉब्लम होनी थी क्या

ड्राइवर .......मेम अभी चेक करता हूँ

ड्राइवर बहार निकल किसी को इसरा करता है ये कोई आवर नहीं शया 3,4 थे जिन्होंने दोनों कार में मौजूद सभी सिक्योरिटी को अपनी आसुरी माया से भरमजाल में फशा कर उन्हें वापिस भेजा दिया जैसा वो क्यों आवर जिसके साथ आये थे ये भी भूल गए हो

शया 3 सामने आ कर शया 1 पे वॉर करने का नाटक करता है जिस से उसके सर से खून गहने लगता है जिसे देख जेनी फार के मरे कार से उतरती है तब तक दोनों सिक्योरिटी कार जा चुकी थी जेनी खुद को खतरे में मह्सुश कर वह से भागना सुरु कर देती है थोड़ा आगे चलने पे वही बंद पड़ी पुराणी कंपनी में लीगत जल्दी देख उम्मीद में उस आवर दौड़ लगा देती है

ीदार शया 1 अपने वास्तविक रूप में लौट आता है आवर जेनी के पीछे लग जाता है

जेनी दौड़ते हुए मार्क के सामने जा पहुंची

जेनी ........ प्लेसेस हेल्प में कुछ लोग मेरा पीछा कर रहे है

मार्क .......don't वर्य ी ऍम फबि अफसर मार्क

जेनी को घोड़ी रहत मिलती है तभी वह शया 1,2,3,4 चरोखुद के चेहरे नकाब में छुपाये हुए जेनी के सामने आते है

जेनी ....... यही लोग है वो प्लेसेस हेल्प में सेव में

जेनी की बात सुन चारो जोर जोर से ठहाके लगा हसने लगते है जिसे देख मार्क भी हसने लगता है

मार्क .......... वेल दोने बॉयज बहुत अच्छा काम किया सब प्लान के अनुसार हे

मार्का आगे भध जेनी को हाथ पकड़ता है तभी उसे एक तेज बिजली का जतका लगता है जिस से मार्क दूर जा कर पुराने कबाड़ में गिरता है

एक हे पल में चारो शया की हंशी आश्चर्य में बदल जाती है

कुछ पल मार्क को जटके लगते रहे पैर जल्दी हे वो संभल गया अगर काली अमावश्या न होती तो मार्क को इस झटके से उभरने में टाइम लगता

मार्क ......... अह्ह्ह्हह कोण हो तुम ये कैसे सकती है तुम्हारे पास

तभी मार्क की नजर उस गोल्ड पेंडेट पे पड़ती है जिसे देख मार्क समाज जाता है की सकती उस पेंडेट में है

जेनी ........ तुम लोग कोण हो आवर मुझसे क्या चाहते हो

मार्क .......तुम्हारे गले में जो गोल्ड पेंडेट है उसे उतर कर फेंक दो

तभी एक आवाज जेनी को सुनाई देती है

आवाज ......नहीं जेनी उस सुरक्षा कवच को मत उतरना तुम्हे इनसे जबरन की जरुरत नहीं ( ये आवाज एक लड़की की थी )

जेनी फ़ौरन अपने हाथ से पेंडेट को कवर कर लेती है

जेनी ..... को कोण है यहाँ सामने आओ प्लेसेस हेल्प में

तभी वह अंदर में से दो परछाई निकल कर बहार आती है जो की कोई आवर नहीं किरण आवर सूर्य थे

थोड़ा पीछे चलते है ............

सूर्य हनीमून रूम ...... सूर्य सवयं आवर किरण को निर्वस्त्र कर किरण के कोमल गुप्तांग योनि को अपने मुँह में भर के चूस रहा था





किरण के मुँह से हलकी हलकी कामुक सिसकारियां सूर्य के जोश बढ़ा रही थी

डेरी डेरी किरण की योनि से अमृत का रिसाव होना सुरु हो जाता है

जिसे सूर्य बड़े हे मज़े से अपनी जुबान से चाट चाट कर साफ कर देता है

किरण सूर्य को अपनी योनि से जाता कर सूर्य के दहकते लाल लिंग मुंड को अपने कोमल हाथो में थम अपनी जुबान निकल कर फिरने लगती है





सूर्य की आँखे इस मज़े के आलम में मदहोशी से बंद हो जाती है

किरण अपनी जुबान को उस 9 इंच से कुछ बड़े लिंग पे ऊपर से निचे फिरने लगती है

साथ हे डेरे डेरी सूर्य की गोल्फ बॉल से कुछ बड़ी दोनों अंडकोष को अपने कोमल ऊँगली के नाखुनो से कुरेदने लगती है

जैसे जैसे किरण के नाख़ून सूर्य के अंडकोष पे चलते सूर्य के सरीर में तिरकन से दौड़ जाती

किरण सुपडे को अपने गर्म मुँह में भर उसे गर्माहट देने लगती है





सूर्य की कमर अपने आप हे एक तय सुधा ताल में किरण के मुह्चोड़ें करने लगती है

सूर्य किरण के पितय को सहलाते हुए अपने लिंग पे किरण के सर को दबाने लगता है

किरण कभी लिंग को पूरा भीतर लेंस की कोशिश करती तो कभी बाहरी उन उभरी हुए नीली नशो पे अपनी जीब फिरती

कुछ समय बाद किरण के मुँह में जकड़न से होने लगती है इस लिया किरण सूर्य के लिंग को मुँह से बहार निकल कर बीएड पे लेट जाती है





सूर्य होटल स्टाफ की तरफ से राखी क्रीम को उठा कर अच्छे से अपने वह किरण की अंग पे लगता है

क्युकी दोनों हे जानते थे ऐसे बिना किसी क्रीम के कितनी तकलीफ हो सकती है सूर्य के बुजं नागराज को भतार लेने में

सूर्य किरण के पैरो को हल्का विपरीत डिस्था में फाइल्स कर अपने लिंग मुंड को किरण की योनि शेफ पे रख पुस करता है

जो की क्रीम की वजह से बिना ज्यादा दर्द तकलीफ के अंदर पुस जो जाता है एक माध्यम. ....पुच्छ .....की आवाज के साथ





किरण को एक पल पीड़ा का अनुभव हुआ जब उसने अपनी योनि में सूर्य के लिंग मुंड को मह्सुश कर अपनी योनि की मस्पेसियो में खिचाव मह्सुश किया

सूर्य ........ स्वीटी थोड़ा पैन होगा पैर पहले मिलान से बहुत काम

किरण ........ आप मेरी चिंता न करे कुंवर जी मैं पहले भी इसको अपने भीतर मह्सुश कर चुकी हूँ जल्दी हे ये इस के अनुकूल हो जाएगी

सूर्य अपने हाथो से किरानी की खूबसूरत काली के लिप्स अपनी उंगलियों से विपरीत दिशा में फाइल्स कर लिंग को पुस करता है





जो लिंग मुंड सहित 4 सादे 4 इंच किरण की गहराही में जा फशा

सूर्य उतने हे लिंग से किरण के साथ मिलान करने लगता है

डेरी डेरी जैसे हे किरण की योनि खिचाव काम करती सूर्य थोड़ा हलके तेज फ़ख़े के साथ अपने लिंग को पुस करता

जिस से किरण को बहुत काम दर्द होता आखिर सूर्य अपनी जान को दर्द कैसे देदे सकता था

इस दौरान किरण की योनि में बार बार खिचाव होने लगता है अब तक सूर्य का 7 इंच तक लिंग किरण की खूबसूरत योनि में जगह बना चूका था

जैसे हे किरण अपने चरम पे पहुंच योनि कुंड से कामराश की बरसात सूर्य के आगरा भाग पे की ठीक ुशी वक्त सूर्य अपने तेज प्रहार से किरण की योनि में अपना समूचा लिंग गुस्सा चूका था जो सीधा किरण की बच्चेदानी के मुँह से होते हुए लिंग का सूपड़ा किरानी की गर्भाशय में फिट हो गया

किरण दोहरे मज़े से सूर्य को अपने बहो में जोरो से कस्ते हुए एक बार फिर से डिस्कार्गेड होने लगी





किरण सूर्य के पुरे चेहरे पे चुमबन की बौछार कर देती है

कुछ देर बाद जब किरण की सांसे संतुलित हुए तो

किरण सूर्य को निचे पलट कर उसे अवस्था में बिना योनि से लिंग बहार निकले सूर्य के ऊपर आ गयी





किरण ....... उम्म्म.. अह्ह्ब्हहहह अभी भी दुख्तक है ये आपका बड़ा लिंग

सूर्य ......हाहाहा आम भाषा में उसे लैंड बोल्ट्स है

किरण .......जो भी हो पैर आप ऐसा न बोलिये कुंवर जी

किरण डेरी डेरी सूर्य के लिंग पे अपनी योनि ऊपर निचे करने लगती है

सूर्य भी डेरी डेरे किरण की स्तनों को थम योनि में अपने लैंड को पुस करने लगता है





कभी किरण सूर्य को चूमती कभी सूर्य किरण को ऐसे हे इन दोनों ने अलग अलग अवस्था में अपने हनीमून की पहली रात का भरपूर आनद लिया

सूर्य भी किरण की योनि में अपने नागराज का विष उगल कर संत हो चूका था दोनों एक दूसरे के बहो में निर्वस्त्र सुकून ले रहे थे

किरण .......... बुआ सा आवर पायल प्रीती दीदी का घर भी यही है न

सूर्य ....... है पैर तुम क्यों पूछ रही हो स्वीटी

किरण .....जाने से पहले मुझे देखना है सूर्य ......अगली बार चलते है न

किरण ...... क्यों जेनी से दर रहे है क्या आप

सूर्य ......है क्युकी इस बार वो मानेगी नहीं जो मैं नहीं चाहता की ऐसा कुछ हो

किरण...... आप अपने वादे से मुकर नहीं सकते कुंवर जी वो भी एक लड़की से किया वादा

सूर्य ........ तुम सब जानती हो न स्वीटी

किरण ........जानती हूँ आवर ये भी के जोश भी होगा फर्स्ट आवर लास्ट होगा उसके साथ आपका फिर आपने बड़ा भी किया है आवर वो कुंवारी भी नहीं भले हे उसने किसी से सम्बंद न रखे हो

सूर्य .......ठीक है फिर जब मिलेंगे तब देखेंगे कल घर चलना है

किरण ........ तो आपने घर पे सब इंतजाम पहले हे कर दिए काफी समझदार हो गए है आप

अभी सूर्य कुछ जबाब देता तभी उसे जेनी का खतरे में होने का अहसास होता है

किरण ....... ये क्या था कुंवर जी कुछ अजीब सा दृश्य

सूर्य ......जेनी खतरे में है स्वीटी ये ुशी का संकेत था मुझे जाना होगा

किरण .......मैं भी चलूंगी आवर आज सीकर काल नहीं मैं करूंगी आपने पायल को भी तो मौका दिया है

सूर्य ......OK त्यार हो जाओ तुम्हे हे सब कुछ हेंडल करना है मैं सामने नहीं आऊंगा मुझे पता है तुम सब संभल लोगी

सूर्य जादू से अपने आवर स्वीटी के कपडे बदल देता है

किरण .....चले कुंवर जी

सूर्य ......रुको स्वीटी

सूर्य कुछ मंत्र का उच्चारण करता है तभी सूर्य के हाथ में एक ऊर्जा एकति होने लगती है

जो देखते हे देखते एक सोर्ड में बदल जाती है





सूर्य के हाथ में सोर्ड देख किरण उस सोर्ड के पड़ती खिचाव सा मह्सुश करती है

सूर्य .......ये तुम्हारी हे सोर्ड है किरण अभी तक इसकी जरुरत नहीं थी इस लिया मैंने तुम्हे नहीं दी थी

किरण .....अभी चाइये कुंवर जी इस बारे में बाद में बात करते है

सूर्य किरण को ले होटल रूम से गायब हो जाता है जहा जेनी इस वक़्त मौजूद थी

प्रेजेंट टाइम ........ तभी किरण मुँह पे नकाब डेल जेनी के सामने आती है.

किरण ....... गैब्रो नहीं जेनी तुम अब सेफे हो इस पेंडेट की वजह से

मार्क .........जिसे हम दंड रहे वो एक टच लड़की है

किरण ....... मूर्क असुर जिसे तुम तूच कह रहे हो आज तुम सबका अंत ुशी के हाथो होगा

( सूर्य .....स्वीटी ये सब नरकासुर के गुप्तचर है जो मेरे विषय में जानने पृथ्वीलोक पे ए है असुरगुरु ने मुझे सन्देश के माध्यम से पहले हे सुच आईटी किया था )

किरण ........ तो तुम लोग उस सद्यात्राकारी कायर आदर्मी नरकासुर के गुप्तचर हो बहुत जल्द उस नरकासुर का अंत भी होगा मेरे हाथो

किरण नरकासुर के बारे में जान कर पुरे गुस्से में आ चुकी थी क्युकी ुशी की वजह से उसनेपिछले जनम में सूर्य को खोया था

किरण पूरी कंपनी को हे अपनी शील्ड से सील कर देती है ताकि कोई भी बहार न जा पाए

मार्क .......मूर्क लड़की तुम्हारी इतनी हिमायत की असुरराज को कायर कहो देख क्या रहे हो मर डालो दोनों को

मार्क अपने साथियो के साथ किरण की तरफ भाड़ा किरण अपनी सोर्ड निकल कर उनके सामने तेजी से दौड़ लगा दी

किसी को कुछ समाज आता या दिखाई देता उस से पहले मार्क सहित 5 के एक एक हाथ उनके सरीर से अलग जमीं पे गेरे हुए थे

पैर कुछ हे देर चीखने छिलने के बाद उनके सरीर से उनके हाथ फिर से जुड़ उतने

किरण एक बार फिर से उन सभी के सरीर से उनके हाथ अलग कर देती है इस बार दोनों हाथ पैर फिर वही होता रहा

जेनी ये सब देख दर के मरे बेहोश हो चुकी थी कोई आवर भी था जो दर से बेहोश नहीं हुआ पर फैट उसकी भी पूरी तरह से गई थी ये कोई आवर नहीं अपने फबि अफसर केविन था जो मार्क पेनजर रखे हुए था

मार्क ......हाहाहाहा मूर्क लड़की तुम हमें नहीं मार सकती कोई भी हमें नहीं मार सकता जब तुम हमें नहीं मार सकती तो असुरराज नरकासुर को क्या मरोगी

5 किरण को चारो तरफ से घेर लेते है किरण अनगिनत बार उन 5 के सरीर के छोटे छोटे टुकड़े कर देती है पैर हर बार वही होता

ीदार केविन ऐसा दृश्य देख उल्टिया करने लगता है साथ हे बिचारे की सुसु भी पेण्ट में हे निकल गयी

( सूर्य .......स्वीटी गुस्से को काबू में रखो आवर बूढी से काम लो

किरण ........ मुझे समाज नहीं आ रहा है कुंवर जी

सूर्य .....अगर एक तरीका काम नहीं करता तो दूसरा तरीका उसे करो न की ककुद की गुस्से के अग्नि में खुद को जलाओ

किरण ......जी कुंवर जी )

सूर्य किरण को इसरा दे चूका था की क्या करना है जिस से ये मरे जाये

किरण खुद को पूरी तरह से संत कर लेती है आवर अपनी गोल्डन सोर्ड को अग्नि में बदल उन सभी पे प्रहार करती है जिस से उन सभी की दर्दनाक चीखे उस बंद कंपनी में गूंजने लगती है

इस बार आसुरी के अंग उनके सरीर से नहीं जज जिसे देख अब हसने की बारी किरण की थी

किरण की हाशि में मार्क आवर उसके साथियो को अपनी लौट नजर आने लगती है किरण के रूप में

वो सभी वह से गायब होने की कोशिश करते है पैर कामयाब नहीं होते

किरण .....मूर्क असुर तुम्हारा अंत आज तय है कोई भी यहाँ से अपने सरीर का त्याग किये बिना मुक्त नहीं होने सकता तुम सब को जहनुम की आग में जलना होगा

किरण उन आसुरी की कटे हुए अंग को अपनी सोर्ड की अग्नि से जलने लगती है जिसका असर एक बार फिर 5 असुरो के लिया पीड़ादायक होता है

किरण अपनी सकती का प्रयोग कर 5 असुरो को अदृश्य राशि से बंद कर लटका देती

किरण ....... तुम जिसे दंड रहे हो उन तक इनकी मर्ज़ी के बिना कोई नहीं पहुंच सकता फिर तुम आसुरी ने कैसे सोच लिया की तुम उन तक पहुंच सकते हो तुम जैसी दुरात्माओं के लिया वो सवयं काल है

नरकासुर ने ये नहीं बताया क्या तुम्हे की वो जिसके अंश है

किरण आगे भाड़ शये 5 के सीने में मल्टी हुए सोर्ड उतर देती है उसका मानवी रूप भांग hi अपने वास्तविक असुर रूप में आ सोर्ड की अग्नि से जलने लगता है

अपने साथी की दर्दनाक लौट देख चारो की चुके आवर तेज होने लगती है इनकी छटपटाहट भाड़ जाती है पैर वो उस अदृश्य दिव्या पास ( कैद ) से मुक्त नहीं हो पते

उनकी क्या बिसात खुद सूर्य किरण की सकती को चुनौती नहीं देता फिर ये तो सामान्य असुर थे

सूर्य किरण के सामने प्रकट होता है

सूर्य ......स्वीटी खेल बहुत होती गया इन सभी को इनके जीवन से मुक्त कर दो तुम लोग मुज तक पंहुचा चाहते थे न बहुत जल्द तुम्हारे बाकि असुर भाइयो को भी तुम्हारे पास नरक में पंहुचा दूंगा नरकादुर के साथ तब बताना उसे की कोण है सूर्य शिव ठाकुर

किरण बाकि चारो को भी ुशी तरह अग्नि के हवाले कर देती है

सूर्य अपने वह किरण की ऊर्जा वह यहाँ होने का अहसास तक मिटा देता है

सूर्य ......स्वीटी जेनी को उसके घर पंहुचा कर मैं एक छोटा सा काम ख़तम कर अभी आया तुम चल कर आराम करो

किरण ......जी कुंवर जी

किरण एक नजर जेनी पे दाल वह से गायब हो गई

सूर्य केविन के पास जाता है जिसे देख केविन दर जाता है

सूर्य ....... गबराहो नहीं केविन तुम्हे मुझसे डरने की जरुरत नहीं है तुम एक अच्छे इंसान हो इस लिया मैं तुम्हे कुछ नहीं करूंगा पैर मुझे तुम्हारी यदि मिटानी होगी यहाँ जो कुछ भी देखा था वो सब एंड दीद गैंग को ख़त्म करने वाला भी मैं हे हूँ उस केस को भी क्लोज कर दो क्युकी तुम्हे या किसी को कोई साबुत नहीं मिलेगा

सूर्य आगे भाड़ केविन के मंद से यहाँ आवर उस दद केस या फिर मार्क की सचाई सभी यादे मेटा देता है

सूर्य ......बहार कार कड़ी है मार्क अपने हे घर के गुप्त कक्ष में बंदी है उसे वह से निकल कर हॉस्पिटल सिफत कर देना

सूर्य ने केविन की हालत भी सुंदर दी थी केविन चिप चाप वह से कार ले मार्क के घर की आवर चल दिया उसे बस इतना याद था की मार्क को मुक्त करना है

सूर्य जेनी को ले कर बहार कड़ी कार सहित पायल विला पंहुचा आवर चुपचाप जेनी को उसके रूम में सुला कर उसके मंद से आज रात की सभी यादे मिटा देता है

मार्क आवर बाकि 4 आसुरी के करते हे उनका मायाजाल भी ख़तम हो चूका थे ड्राइवर दीपिका सिक्योरिटी सभी असुर माया से मुक्त हो चुके थे

सूर्य वह से सीधा होटल रूम पंहुचा आवर किरण को बहो में भर सीने पे लिटाये सुकून की नींद सो गया ..................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................

नेक्स्ट अपडेट कल साम को या परसो ......
 
चलो भाई लोगो स्टोरी अपडेट लिखना सुरु करता हूँ

बाकि हाशि मज़ाक बाद में करेंगे
 
अपडेट. 209

सूर्य ......बहार कार कड़ी है मार्क अपने हे घर के गुप्त कक्ष में बंदी है उसे वह से निकल कर हॉस्पिटल सिफत कर देना

सूर्य ने केविन की हालत भी सुंदर दी थी केविन चिप चाप वह से कार ले मार्क के घर की आवर चल दिया उसे बस इतना याद था की मार्क को मुक्त करना है

सूर्य जेनी को ले कर बहार कड़ी कार सहित पायल विला पंहुचा आवर चुपचाप जेनी को उसके रूम में सुला कर उसके मंद से आज रात की सभी यादे मिटा देता है

मार्क आवर बाकि 4 आसुरी के करते हे उनका मायाजाल भी ख़तम हो चूका थे ड्राइवर दीपिका सिक्योरिटी सभी असुर माया से मुक्त हो चुके थे

सूर्य वह से सीधा होटल रूम पंहुचा आवर किरण को बहो में भर सीने पे लिटाये सुकून की नींद सो गया ..................

अब आगे .........

परीलोक ......... सुबह कोई यही 4 सादे 4 का समय रहा होगा पारिजात अपने सही कक्ष में चैन की नींद सोये हुए थी





तभी वह पारिजात के रूम में सूर्य अप्पेअर होता है

सूर्य की नजरे पारिजात पे पड़ती है तो उसके होंटो पे हलकी से मुस्कान फ़ैल जाती है

सूर्य आगे भाड़ पारिजात के बीएड पे बेथ पारिजात के खूबसूरत मासूम चेहरे को निहारने लगता है





सूर्य अपने चेहरे को पारिजात के चेहरे के करीब कर हलके से उन मुलायम गालो को चुम लेता है

ये चुम्बन का असर था या सूर्य का आने का अहसास पारिजात को नींद में हे हो गया था

चुम्बन करते हे पारिजात के सुराख़ पिंकस होंटो पे पहले से जो मुस्कान थी वो आवर गहरी हो जाती है

पारिजात अपनी झील से गहरी नीली आँखे खोलती है तो सर्वपार्ट्म उसकी नजरे सूर्य के मुस्कुराते चेहरे पे पड़ती है

पारिजात एक बार देख कर फिर से आँखे बंद कर लेती है जैसे की वो कोई सपना देख रही हो सूर्य का

इस बार सूर्य अपने होंठ पारिजात के होंटो से मिला कर उनके भरा होनेरश पिने लगता है

पारिजात फ़ौरन अपनी आँखे खोल सूर्य को देखती है

सूर्य अपनी पलके जफका कर पारिजात को अपने सच में होने का संकेत देता है

इतना काफी था पारिजात की नींद उड़ाने के लिया

पारिजात किसी अम्बेरबेल की तरह सूर्य की जिसम से लिपट जाती है आवर इतने हे बॉस से सूर्य की जुबान अपने मुँह में भर कर चूसने लगती है

काफी देर दोनों उसे तरह एक दूसरे का रसपान करते रहे फिर सूर्य को हे मजबूरन अलग होना पड़ा

पारिजात ....उन्न्नन उन्न्नन आप कब आये स्वामी

सूर्य ....... अभी अभी आया परिधि तुम्हे इस तरह सुकून से सोया देख खुद को तुम्हे किश करने से रोक नहीं पाया

पारिजात ........ अच्छा किया आपने जो मुझे किश कर के उठा दिया वो क्या कहते है है है आज तो आपने मेरी सच में मॉर्निंग गुड कर दी शुबप्रभात सूर्य

सूर्य .......उम्म्म्मः शुबप्रभात परिधि

पारिजात .......क्या आपके साथ में स्वीटी दीदी भी आई है यहाँ

सूर्य ......नहीं वो अभी u.s.a है

पारिजात .......आपको उन्हें साथ ले कर आना चाइये था न

सूर्य .....एक काम करो मैं कुछ समय यही हूँ परीलोक वो होटल रूम में अकेली है तुम जा कर अचे से मिल लेना ुम्मम्हा

सूर्य परिधि को होटल से जुड़े दृश्ये दे पारिजात को एक छोटा सा किश कर कक्ष से बहार निकल जाता है रिद्धि के कक्ष की आवर

सूर्य जब कक्ष में पंहुचा तो वह रिद्धि आवर जूलिया दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए सोये थी

सूर्य ........ इन दोनों में कही वो वाला प्यार तो नहीं होने लगा है

रिद्धि ......... सुबह सुबह अच्छा नहीं सोच सकते क्या आप

सूर्य .......ओह तो आप जाग चुकी है फिर भी सोने का अभिनय कर रही है

रिद्धि .......क्यों मैं आपकी पत्नी नहीं क्या मुझे भी वही चाइये जो आपने परिधि को दिया

इस दौरान जूलिया भी उठ चुकी थी पैर रिद्धि ने उसे वैसे जाखडे रखा आवर न अपनी आँखे खोली

सूर्य आगे भाड़ दोनों के बिच जा लेता आवर रिद्धि को अपनी आवर करते हुए अपने सीने पे ले लिया आवर रिद्धि के फड़फड़ाते खूबसूरत लिप्स से अपने लिप्स जोड़ते हुए किश करने लगता है

जूलिया दोनों को देख कर अपने सूखे होंटो पे जुबान फिर उन्हें गिला कर रही थी आवर अपनी बारी का इन्तजार भी

6,7 मिनट्स रिद्धि के लिप्स पिने के बाद जैसे हे सूर्य हटा जुली किसी घायल शेरनी की तरह एक हे झटके में सूर्य को अपने ऊपर खींच उसे किश करने लगती है जूलिया ठोस वाइल्ड तरीके से सूर्य के होंटो को चूस रही थी

सूर्य पूर्णतया जूलिया का साथ दे रहा था उसे मनमर्जी करने से बिलकुल नहीं रोका इस दौरान सूर्य के होते भी हलके से जख्मी हो गए जब जूलिया को इसका अहसास हुआ तो उसकी आँखों से असुरधरा फुट पड़ी

सूर्य जुली के आंसू अपने होंटो से चुम कर साफ करता है आवर उसे न में गर्दन हिला कर रहने को कहता है

जुली ......मुझे माफ कर दीजिये पता नहीं मुझे क्या होगा गया था मैं खुद को कण्ट्रोल नहीं कर प् रही थी

रिद्धि .......इस्सस संत हो जा जुली कुछ नहीं हुआ है सब ठीक है

सूर्य अपने स्थान पे दोनों के बिच लेट जाता है आवर दोनों को अपने से चिपका लेता है

सूर्य ......... जो कुछ हुआ भूल जाओ जुली ये कोई बड़ी बात नहीं आवर इसमें तुम्हारी कोई गलती भी नहीं है

रिद्धि ......सूर्य सच कह रहे है जुली

सूर्य आवर रिद्धि जुली को समजा रहे थे पैर उसे जैसे समजने से कोई फरक नहीं पड़ा जुली के उद्देश चेहरे को देख सूर्य ने उसे सच बताना हे बेहतर समजा

सूर्य ......जुली ये तुम्हारी वजह से नहीं हुआ इसके पीछे कोई आवर वजह है इस लिया तुम चिंता न करो आवर आज साम गुरुदेव के साथ परतविलोक चले जाना मैं भी जल्द हे वापिस लौट आऊंगा

रिद्धि ......क्या मतलब क्या वजह है जुली के ऐसा करने के पीछे

सूर्य जुली के पेट पे हाथ रख उसे प्यार से सहलाने लगता है जिस से जुली भी संत हो जाती है

सूर्य ......रिद्धि जुली प्रेग्नेंट है इसके पेट में मेरा अंश है सब ुशी की वजह से हुआ है सायद मेरा जुली से दूर रहना उसे पसंद नहीं इन दो दोनों में जुली जब भी एकांत रही उसे बस मेरा हे ख़तम रहा जिसे सायद वो ऊर्जा अंश भी मह्सुश कर प् रहा था इस लिया उसने ऐसा किया

रिद्धि .....क्या सच में ऐसा मुमकिन है आवर जुली तुमने कुछ भी नहीं बताया हमें अब तुम्हे कोई भी अकेला नहीं छोड़ेगा मैं रैंक माँ को बताती हूँ

सूर्य ......संत साध्वी जी संत किसी को कुछ नहीं बताना है फ़िलहाल जब उचित समय आएगा तो मैं सवयं सबने सामने इसका खुलाशा करूंगा आवर तुम भी इतना गुस्सा नहीं किया करो ( ये बात पेट को सहलाते हुए कही सूर्य ने ) तुम्हारी माँ को हे परेशानी होती है

ऐसा कहने पे एक पल को जुली की आँखे सुनहरी हुई जैसे ये कोई संकेत था

सूर्य ......समझदार हो जल्दी तुम्हे तुम्हारे दादा दादी के पास जाना है

जुली ......... आप भी न वो अभी आपको थोड़े समाज सकता है जो उसे समजा रहे हो

सूर्य ...... तुम नहीं संजोगी वैसे गुरुदेव मंदिर में मिलेंगे या कही बहार है आवर जिनिशा जिनात वो कहा है

रिद्धि ......दोनों अपने अपने लुक में है आवर बाबा मंदिर में हे है उनका ज्यादातर समय वही गुजरता है

सूर्य .....उम्म्म्मः उम्मम्मम्हा अच्छा मैं चलता हूँ तुम लोग भी जाओ आवर अपना ध्यान करो

जुली तुम्हे लम्बे समय तक ध्यान करना होगा वार्न्स तुम अपनी ऊर्जा को परतविलोक पे छिपा नहीं पाओगी जो फ़िलहाल ठीक नहीं है ( जूथ )

सूर्य वह से निकल कुछ देर रैंक पारी से बात कर मंदिर की आवर निकल जाता है

जहा गुरुदेव अपनी पूजा कर रहे थे

सूर्य भी उनके साथ पूजा में शामिल हो जाता है कुछ देर बाद पूजा ख़तम होने के बाद सूर्य गुरुदेव के चरण स्पर्श कर ासुरवाद लेता है

गुरुदेव .....कल्याण हो पुत्र चिरंजीवी भाव

सूर्य ........ कैसे है गुरुदेव आप

गुरुदेव .......परबु कृपा से सब अच्छा है पुत्र सूर्य तो कल रात्रि नरकादुर के गोचरो को पुत्री किरण के हाथो मुक्ति प्रदान कर दी

सूर्य ....... आपसे क्या छुपा है गुरुदेव स्वीटी को बिच में लाना आवशयक था गुरुदेव आवर ये क्यों था आप मुझसे बेहतर जानते है

गुरुदेव...... उचित किया पुत्र तुमने इस से पुत्री किरण को भिवष्य के लिया त्यार भी कर पेज आवर साथ हे नरकासुर की आँखों में धूल भी जोंक सकते हो किन्तु........

सूर्य ......किन्तु क्या गुरुदेव आप कुछ विचलित क्यों है गुरुदेव

गुरुदेव ......... पुत्र अब नरकासुर अपने आसुरी को परतविलोक की आवर तब तक भेजता रहेगा जब तक की तुम्हारी वास्तविकता उसे पता नहीं चल जाती ऐसे में सामान्य जब का जीवन संकट में पद जायेगा आवर पुत्री किरण को भी खतरा होगा क्युकी वो अभी पूर्णतया त्यार नहीं है

सूर्य ......... मैं जनता हूँ गुरुदेव आवर आपका विचलित होना भी सव्भाविक है किन्तु मैंने कल रात्रि हे इसका सरल मार्ग निकल लिया था है इसमें सामान्य जब को घोड़ी बहुत पीड़ा होगी किन्तु ये आवशयक भी है गुरुदेव परतविलोक पे पाप दिन प्रतिदिन भड़ता जा रहा है ऐसे में उन सभी पापियों के मन भय होना आवशयक है जो आँखे बंद किये पाप पे पाप करम कर रहे है

गुरुदेव......... पुत्र कहना क्या चाहते हो तुम साफ साफ कहो

सूर्य ........ गुरुदेव नरकासुर संत बैठने वाक में से नहीं है ये हम अच्छे से जानते है सर्वपार्ट्म जिनलोक और नागलोक से नरकासुर के गुप्तचरों का ख़तम करना होगा एक साथ इसके लिया मुझे आपकी आज्ञा चाइये ताकि मैं वाइट ड्रैगन आवर सुनहरे ड्रैगन को दोनों लोक में छुपे असुरो का ख़तम कर सकू इस से नरकासुर का ध्यान केवल परतविलोक पे हे नहीं रहेगा इन दो लोको में बात जायेगा

गुरुदेव ......किन्तु इस से दोनों लुक के जिन वह नाग संकट में पद जायेंगे

सूर्य ......नहीं गुरुदेव क्युकी इन दोनों लोक की सुरक्षा का दायित्वा वाइट ड्रैगन आवर सुनहरे ड्रैगन पे होगा जिनकी इच्छा के विरुदे कोई असुर इन लोक में पेअर तक नहीं रख सकता

गुरुदेव ......उत्तम योजना है पुत्र सूर्य किन्तु परतविलोक का क्या

सूर्य ....... परतविलोक का दायित्व ब्लैक ड्रैगन का होगा फिर परतविलोक पे बाकि सभी भी तो है

जिनके हाथो असुरो का संघार होगा इस से एक पंथ दो काज होंगे गुरुदेव असुरो का अंत भी होगा आवर सभी लड़किया इन छोटे छोटे योध से प्रसिक्षित भी हो जायेंगे भविष्य के लिया

गुरुदेव ........ उत्तम पुत्र हम तुम्हारी सोच को जाना चांटे थे पुत्र जो की हमारे सोच के अनुकूल रही अब हमारी बात ध्यान से सुनो पुत्र सूर्य परतविलोक को सुरकक्षा कवच प्रदान करो जिस से असुर जब भी परतविलोक में प्रवेश करे तुम्हे उनके विषय में ज्ञान हो जाये जिनका संघार तुम्हारी संगिनियों के हाथो हो तुम केवल उनका मार्गदरान करोगे आवर उन्हें योध कला में नपुण होने की शिक्षा वयोम आवर सकती दे देंगे

सूर्य ....... जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

गुरुदेव कुछ मंत्र उच्चारण करते है तभी उनके हाथ में एक बहुत पुराणी बुक प्रकट होती है

गुरुदेव ......पुत्र ये पुस्तक सदर्न पुस्तक नहीं है इसमें अंको प्राचीन योध कला वह मंत्र सीधी हे रहश्य है तुम्हे इस पुस्तक को सिफ करना होगा साथ हे तुम्हारी संगिनियों को क्युकी भविष्य में बहुत बड़ा योध होने वाला है जिसका अनुमसं भी नहीं लगाया जा सकता है

सूर्य ....... जी गुरुदेव

गुरुदेव ....... कुछ आवर भी जानना है पुत्र

सूर्य .....जी गुरुदेव कुछ समय से असुरगुरु से संपर्क स्थापत नहीं कर प् रहा हूँ गुरुदेव

गुरुदेव ....... जनता हूँ पुत्र किन्तु तुम इनकी सहायता नहीं कर सकते

सूर्य .....अथार्त असुरगुरु किसी संकट में है क्या गुरुदेव

गुरुदेव ....... है पुत्र उन्हें असुरलोक में चाल से बंदक बनाया हुआ है एक बहुत बड़े सद्यन्त्र के तहत तुम्हारे आवर पुत्री किरण के विवाह से पूर्व हे उन्हें बंदी बना लिया था

सूर्य ......क्या हमें उनकी सहायता नहीं करनी चाइये गुरुदेव

गुरुदेव ........ नहीं पुत्र क्युकी नियति यही चाहती है अन्यथा असुरगुरु देवी माँ के परम भक्त है वो चाहती तो उन्हें पल में मुक्त कर सकती थी किन्तु त्रिदेव भी नियति के विरुद्ध नहीं जा सकते है आवर तुम भी कोई पर्यटन नहीं करना पुत्र उन्हें मुक्त करने का ानयता नियति के दंड के भागी बनोगे वो सवयं हे उचित समय पे मुक्त हो जायेंगे बहुत जल्द उनसे तुम्हारी भेट होने वाली है

सूर्य ......... जो आपकी आज्ञा गुरुदेव

गुरुदेव .....अब तुम्हे परतविलोक लौट जाना चाइये पुत्र आवर जुली की चिंता न करना पुत्र उसे हम परतविलोक पंहुचा देंगे

सूर्य .....जी गुरुदेव आज्ञा दीजिये परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ........यसस्वी भाव पुत्र सभी की मनोकामना पूर्ण करो पुत्र प्रेम पे सबका अदिकार होता है पुत्र किसी को निराश नहीं करना

सूर्य .....जी गुरुदेव

सूर्य गुरुदेव से पुस्तक ले अपना सर खुजाता हुआ मंदिर से निकल जाता है

गुरुदेव सूर्य को ऐसे किसी सोच में तुबे जाता हुआ देख पीछे से मुस्कुराने लगते है

जैसे उन्हें यकीं था की सूर्य उनके आशीर्वाद को समाज नहीं पायेगा सूर्य परीलोक से सभी से मिल u.s.a के लिया निकल चूका था .............

सक्तिपुर विक्रम फार्महाउस ..........

सुबह जब मल्टी की आँखे खुली तो उसका पूरा सरीर घायल था जगह जगह उस काली हैवानियत भरी रात की हैवानियत से मल्टी का पूरा सरीर तप रहा था

मल्टी किसी तरह खुद को सँभालते हुए अपने निर्वस्त्र जख्मी सरीर पे कपडे पहनती है जो कुछ जगह से फैट चुके थे

मल्टी लड़खड़ाते हुए किसी तरह रूम से बहार निकलती है

मल्टी के सरीर में बिलकुल भी जान नहीं थी कल तक जो चेहरा गरीबी की फटी हुई चदार में भी अपनी चमक बरक़रार रखने हुए था आज ुशी मल्टी के चेहरे से लग रहा था जैसे उसने जीने की उम्मीद तक छोड़ दी हो

मल्टी किसी तरह दिवार का सहारा ले पीछे की तरफ खुलने वाले गेट को खोलती है तभी उसकी नजर सामने जमीं पे गिरे हुए कपडे पे पड़ती है जो की कुछ आवर नहीं एक दुपटा ( चुनी ) था

उसे देखते हे मल्टी के चेहरे पे जहा पहले दुनिया भर का दर्द था वही अब उसके चेहरे पे फार ने कब्ज़ा कर लिया था

मल्टी गिरती पड़ती जितना तेजी से चल सकती थी इतनी तेजी से पीछे की तरफ चल दी जहा उसकी सास आवर उसकी छोटी बहन के साथ वह रहती थी

मल्टी ने दोनों रूम छान मरे पैर सुमन का कुछ पता नहीं चला

मल्टी ......माँ सुमन कहा है

सास ......... मल्टी बहु क्या हुआ तू इतनी गबरा क्यों रही है

मल्टी की सास मल्टी की गाब्री हुई आवाज सुन खटिया को टटोलते हुए उठ बैठी अभी सुबह हुई थी तो मल्टी की सास लेती हुई थी जब मल्टी यहाँ पहुंची

मल्टी ...... माँ सुमन कहा जल्दी बताइये

सास .....बहु मुझे क्या पता जंगल गई होगी अभी आ जाएगी मैं तो सोये हुए थी मुझे क्या पता बहु ऊपर से ये ाण्डपाण कुछ देख भी नहीं सकती

मल्टी ीदार उदार देखने के बाद तेजी से फार्महाउस की आवर दौड़ लगा देती है

अपनी बहन को खोने का दर आवर दर्द से मल्टी की आँखों से निरंतर आंसू निकल रहे थे बदहवाश सी मल्टी फार्महाउस के सभी रूम को बड़ी बड़ी से खोल कर देखती है

एक रूम का जैसे हे दरवाजा खोला साम्बा विक्रम लेता हुआ था आवर उसकी बगल में सुमन दोनों हे निर्वस्त्र थे

अपनी बहन को इस हालत में देख मल्टी की आँखों के सामने अँधेरा चा जाता है आवर वह वही ददम से गिर बेहोश हो जाती है

एक तो रात भर विक्रम की हैवानियत को भोगा आवर सुबह सुबह अपनी बहन की इज्जत लूटी हुई देख मल्टी वही सदमे से मूर्छित हो गई

आखिर जितना बर्दास्त कर पति बिचारि

करीबन 11 बजे विक्रम की आँखे खुली तो वह उठा आवर बाथरूम में गुस्स गया नहाने धोने के बाद विक्रम जब बहार निकला तब उसकी सबसे पहले निर्वस्त्र सुमन पे पड़ती है जैसे हे विक्रम सुमन की आवर भद्दा आयाश हे उसकी नजर गेट की तरफ जाती है जहा नजर मल्टी के मूर्छित सरीर पे पड़ती है

विक्रम जब पास आ मल्टी को चेक करता है तो उसकी सांसे बंद हो चुकी

मतलब उस सदमे ने मल्टी की जीवन चक्र को हे ख़तम कर मुक्त कर दिया था

विक्रम ........ ये साली रंडी तो मर गई अब क्या कृ सोच विक्रम सोच कही किसी ने देख लिया तो नहीं नहीं

विक्रम जल्दी से मल्टी की निर्जीव सरीर को खुश कर बहार लता है आवर उस रूम को बहार से लॉक कर देता है

विक्रम ....... ये साली तो मर गई कुछ भी हो साली को भोगने में मज़ा बहुत आया सदी सुधा हो कर भी कुंवारी जैसे थी मरना हे था तो कुछ दिन बाद मर जाती अभी भी इसकी बहन है पैर साली का कुछ करना पड़ेगा

विक्रम मल्टी के सरीर को स्टोर रूम में ले जाता है जहा पुराण सामान रखा था वह मल्टी को एक चार पे बैठा कर बंद देता है

फिर अपने रात वाले रूम. ( जहा मल्टी का रपे किया )में जा कर अपना मोबाइल ले कर आता है आवर कुछ फोटोज क्लिक करता है आवर एक सॉर्ट वीडियो भी बनता है जिसमे वह मल्टी की निर्जीव सरीर को करता है पता नहीं विक्रम की दिमाग में क्या चल रहा था

विक्रम ....... ये साली मर तो गई है एक बार आवर रगड़ देता हूँ

क्या पता रात जैसा हे मज़ा फिर से मिल जाये साँसे हे तो निकली है सरीर तो वही है न

विक्रम जो की नंगा हे था एक बार फिर अपनी हैवानियत का नंगा नाच उस सरीर के साथ करता है

एक घाटे में 2 बार भोगने के बाद विक्रम अपने रूम. से कपडे पगन कर मल्टी को ग्रसित कर पीछे की तरफ ले जाता है आवर एक खड़ा खोद कर उसमे मल्टी की लाश को डील देता है

विक्रम ........ लाश कभी किसी की नजर में आ सकती है उसको जलना हे बेहतर रहेगा

विजडम जल्दी से फार्महाउस से पेट्रोल केन ला कर मल्टी पे पेट्रोल दाल आग लगा देता है

इस दौरान विक्रम चिप कर सब तरफ नजर रखता है

जब सब डेरी डेरी संत हो गया तो विक्रम खड़े में मिटटी दाल कर फार्महाउस की आवर चल देता है जिसकी भिड़त रस्ते में मल्टी की एंड hi सास से जो जाती है

(विक्रम ...... क्या हुआ मल्टी मर गई ये बुढ़िया भी कुछ काम नहीं है बस मम्मी से घोड़ी ज्यादा ुमार की है अब ये मल्टी का काम करेगी )

विक्रम ....... तुम कोण हो आवर यहाँ क्या कर रही हो

विक्रम की आवाज शूम मल्टी की सास पहले तो दर जाती है

पैर मल्टी की कल की बात याद आती तो संत हो कर हाथ जोड़ लेती है

सास ....... छोटे ठाकुर मैं मल्टी की सास हूँ आप छोटे ठाकुर विक्रम सिंह जी है न बड़े मालिक दुर्जन सिंह जी के बेटे

विक्रम ...... .. है मैं विक्रम ठाकुर हूँ आप यहाँ क्या कर रही है

सास....... वो मैं मल्टी बहु को ढूंढ़ने आई थी

विक्रम ....... ओह अच्छा चलिए वो फार्महाउस में है अभी खाना बना रही है अपनी बहन के साथ

सास ......बागवान का सुकुर है सुमन मिल गई

विक्रम ...... क्या मतलब मिल गई से आपका

सास ......वो सुबह मल्टी बहु ने बहुत डुंडा पैर वो नहीं मिली थी मैं ठहरी अंधी तो मुझे कुछ दिखा नहीं की वो कहा गई सुबह सुबह

विक्रम ......अरे वो दोनों अंदर हे है चाइये मैं ले चलता हूँ

विक्रम मल्टी सास को फार्महाउस में ले जाता है आवर उसे वही जोर जबरदस्ती से स्टोर room.me बंद देता है जहा कुछ चेंज पहले विक्रम ने मल्टी को बाँदा था आवर उसके निर्जीव सरीर को भोगा था अपनी हवश में ..........

असुरलोक ...........

शिष्य 2 वातापी को परतविलोक से सीधा ुशी गुप्त स्थान पे ले कर पंहुचा जहा दोनों मध्यरात्रि को मिला करते थे

वातापी अपने वास्तविक रूप में आ चुकी थी किन्तु सुरक्षा कवच के जटके का असर उस पे अभी भी था

शिष्य 2 .......यौवरानी जी आप स्वस्थ तो है न क्या हुआ था आपको जो आप वह परतविलोक पे मूर्छित हो गई थी

आवर आपने ये स्वान ( कुत्तिया ) का रूप दर्जन क्यों किया था

वातापी अभी भी परतविलोक. की घटना के विषय में सोच रही थी की कैसे उसका चीरहरण होते होते बचा आवर कैसे अच्चानक अदृश्य सकती ने उसे उठा कर फेंक दिया

शिष्य 2 को जब वातापी की आवर से कोई जबाब नहीं मिला तो उसने हिमत कर वातापी को हिलाया तब जा कर वातापी वास्तविक दुनिया में लौटी अपनी सोच से निकल कर

वातापी .......क्या हुआ

शिष्य 2 ...... आपने बताया नहीं परतविलोक पे आप पे किसी ने हमला किया था क्या स्वान रूप में जब आप सूर्यौदय होने पे भी नियत स्थान पे नहीं पहुंची तो मुझे आपकी चिंता होने लगी इस लिया मैं आपकी तलश में सूर्यगढ़ निकला जहा आप सावन रूप में मुझे मूर्छित अवस्था में मिली थी

वातापी ........ हमें कुछ ज्ञात नहीं की हम पे किध सकती ने प्रहार किया था हम परतविलोक के सवानो से बच कर भाग रहे थे फिर अच्चानक किसी अदृश्य सकती ने प्रहार किया जिस से हम दूर जा हिरे आवर मूर्छित हो गए उसके बाद का हमें कुछ पता नहीं

शिष्य 2 ........आपको सिगरा महल लौट जाना चाइये सभी राजकुमारियों के विवाह में संलग्न है इस लिया आपको भी वह होना चाइये

वातापी ........ हमारी इच्छा नहीं है इस विवाह में सम्मिलित होने की हमारे लिया ये विवाह केवल एक सडयंत्र है आवर कुछ नहीं

शिष्य 2 .......फिर भी आपको जाना होगा यौवरानी हम आपको कोई आदेश नहीं दे रहे है केवल वास्तविकता समजा रहे है दुश्मनो के बिच रह कर हे उनके भेद जान सकते है आपको अपने गुस्से को छुपा कर हंसी का मुखौटा दाल कर इस विवाह में शामिल होना चाइये

वातापी ........ आप उचित कह रहे है धन्यवाद हमारी इतनी सहायता करने के लिया

शिष्य 2 ......ये हमारे लिया गौरव की बात है यौवरानी जी की हम गुरुदेव को मुक्त करने हेतु अपना पूर्ण प्रयाश कर पेज किन्तु नियति को सायद कुछ आवर हे मंजूर होगा

वातापी ........ उचित कहा हम महल लौट रहे है रात्रि में फिर से यही भेट होगी

वातापी वह से गायब हो असुर महल की आवर निकल गयी

वही शिष्य 2 कुछ देर वही खड़ा सोचता रहा फिर वो भी निकल गया

ीदार असुर महल में नगीना विसुद्धि की विवाह की तयारी जोर शोर से चल रही थी

m.asurguru अपनी देख रेख में असुविधि अनुसार विवाह की तयारी कर रहे थे

( भाई लोगो असुरविवाह के विषय में कुछ भी पता नहीं है तो शार्ट में हे उसे निपटा रहा हूँ )

कुछ हे समय में विसुद्धि नगीना के गंध्रवा विवाह का मुहूर्त सुरु हो जाता है

m.asurguru के आदेश पे नगीना नागसूर वह विसुद्धि विकटासुर दोनों के जोड़े को अलग अलग कक्ष में भेजा दिया जाता है

वही m.asurguru के इस अरे पे कंटकासुर कुछ देर के लिया गायब हो जाता है

कोई एक चेंज बाद दोनों जोड़े अपने अपने कक्ष से बहार निकल

इस बिच कंटकासुर भी लौट आता है

असुरगुरु गन्ध्र्व विवाह विधि आराम करते है तामसिक मंत्रो उच्चारण के साथ

जहा विक्तसिर वह नागसूर नगीना विसुद्धि की मान्य भरते है अपने रकत से ( ये रकत कंटकासुर का था न की नागसूर आवर विकटासुर का )

असुर विधि अनुसार m.asurguru विवाह पूर्ण होने की घोषणा करते है

नरकासुर ....... गुरुदेव आज मेरे सभी पुत्र पुत्रियों को अपने जीवन साथी मिल चुके है अब बस मेरा एक हे लक्ष्य है उस अंश का पता लगाना उसका ख़तम कर अमर होना

m.asurguru ........अत्यदिक सिगरता कभ कभी सवयं को संकट में डील देती है असुरराज बिना किसी सुदृढ़ ( मजबूत ) योजना के उठाया हर करम आपके लिया हे घातक सिद्ध हो सकता है

नरकासुर ........फिर आप हे कोई उचित मार्ग का सुझाव दीजिये गुरुदेव

m.gurudev ......... हम कुछ समय के लिया तप पे निकल रहे है तब तक संत रहिये तप पूर्ण कर आपको इस विषय में उचित मार्ग अवश्य दिखाएंगे असुरराज

नरकासुर ......जी गुरुदेव जैसा आप उचित समजे

m.asurguru ........... पुत्री नगीना विसुद्धि पुत्र विकटासुर नागसूर तुम चारो को भी किसी गुप्त लोक में रह कर तप करना होगा तभी भविष्य में असुरराज नरकासुर के सहायक सिद्ध हो पाओगे

विकटासुर ......जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश किन्तु हम चाहते है की जीएस्ट भरतश्री कंटकासुर भी हमारे साथ तप करे हमें अतिप्रशंता होगी

नरकासुर .........है क्यों नहीं पुत्र विकटासुर विवाह के पश्चात तुम भी इस कुल के सदश्य हो आवर पार्टम बार कुछ इच्छा जताई है पुत्र कंटकासुर तुम्हे भी अपनी बहनो के संग तप के लिया निकलना होगा

कंटकासुर ........जैसा आपका आदेश पिता श्री आपके आदेश का पालन कर मुझे अतयंत ख़ुशी होगी

m.asurguru ......... तो आज मध्यरात्रि तुम पाछो अज्ञान लोक के लिया निकल रहे हो जब तक तप पूर्ण नहीं होता तुम किसी से कोई सम्पर्क नहीं कर सकते हो न हे अधूरे तप से लौट सकते हो

कनकसुर ......... जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

m.asurguru कंटकासुर विसुद्धि नगीना विकटासुर नागसूर द्वारिका सब अपनी योजना को सफल होते देख मन हे मन परशान हो रहे थे

वही वातापी अंदर हे अंदर गुस्से की आग में जुलाश रही थी

उस से आवर ज्यादा ये आदमभर नहीं देखा गया तो वह अपने कक्ष में लौट गई

नरकासुर ........ पुत्र कंटकासुर पुत्रबधु वातापी के साथ समय वयतीत करके जाना पता नहीं तप कब पूर्ण होगा जितना समय लग सकता है

कंटकासुर ......जी पिता श्री

कंटकासुर वह से अपने कक्ष की आवर लौट जाता है

वही द्वारिका चारो वर वधु को अपने साथ ले जाती है अपनी बाकि पुत्र वधु के साथ

वही असली असुरगुरु हवन अग्नि में असुरमहल में हो रही घटना को देख कर अत्यंत क्रोध में थे किन्तु वो विवश थे वही उन्हें अच्छा भी लगा की वातापी एक अच्छी पुत्रवधु का कर्त्तव्य निभाने का पूर्ण पर्यटन कर रही है आवर उसके शिष्य वातापी का पूर्ण साथ दे रहे है इस कार्य में ......................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................

कल के लिया माफी चाहता हूँ दोस्तों अचानक से काम से बहार जाना पद गया तो अपडेट नहीं लिख पाया........ 🙏🙏🙏
 
अपडेट 210

नरकासुर ........ पुत्र कंटकासुर पुत्रबधु वातापी के साथ समय वयतीत करके जाना पता नहीं तप कब पूर्ण होगा जितना समय लग सकता है

कंटकासुर ......जी पिता श्री

कंटकासुर वह से अपने कक्ष की आवर लौट जाता है

वही द्वारिका चारो वर वधु को अपने साथ ले जाती है अपनी बाकि पुत्र वधु के साथ

वही असली असुरगुरु हवन अग्नि में असुरमहल में हो रही घटना को देख कर अत्यंत क्रोध में थे किन्तु वो विवश थे वही उन्हें अच्छा भी लगा की वातापी एक अच्छी पुत्रवधु का कर्त्तव्य निभाने का पूर्ण पर्यटन कर रही है आवर उसके शिष्य वातापी का पूर्ण साथ दे रहे है इस कार्य में ..................

अब आगे ..........

u.s.a .......... सूर्य परीलोक से सीधा होटल रूम में पंहुचा जहा पारिजात वह किरण दोनों अपनी अपनी बातो में लगी हुई थी

किरण ......कुंवर जी आपने बताया क्यों नहीं हमें की आप परीलोक जा रहे है

सूर्य ........ उम्म्म्मः तुम सो रही थी स्वीटी आवर मैंने तुम्हे उठाना उचित नहीं समजा

किरण ......आपके हाथ में ये पुस्तक कैसे कुंवर जी

सूर्य ....... गुरुदेव ने दी है ये पुस्तक इसमें प्राचीन गुप्त योध कला वह सिद्ध मंत्र है जिन्हे मुझे आवर आप सभी को सिद्ध करने है

पारिजात ......हम चलते है कुंवर जी हेहेहे माता श्री हमारी प्रतीक्षा कर रही होंगी

सूर्य ....... जी भावी मालिकाये परिस्थान गुलाम कल फिर सेवा में हाजिर होगा

किरण .......आप दोनों हमारा मजाक ुधा रहे है

सूर्य ......हाहाहा ऐसा कुछ नहीं है स्वीटी उम्म्म्मः हम ऐसा कर सकते है क्या

पारिजात ......अच्छा दीदी मैं चलती हूँ आप भी आना कल इनके साथ

किरण .......अभी नहीं परिधि हवेली पहुंचने के बाद सभी बहनो के साथ हे आउंगी उनके बिना नहीं

पारिजात .....OK दीदी ुम्मम्हा bye कुंवर जी उम्म्म्मः

पारिजात किरण के गलो को आवर सूर्य के होंटो को चुम कर गायब हो जाती है

सूर्य ......स्वीटी अब हमें घर चलना चाइये मैं रोहन भाई आवर भाबी को बोल कर आता हूँ रेडी होने को

किरण .......पहले मुझे मेरे गुड मॉर्निंग किसी तो दीजिये बाकि सब को दे आये आवर मुझे नहीं ुन्नन

सूर्य ......अरे बाबा नाराज क्यों होती हो कहो तो किश के आगे का कार्यक्रम भी कर लेता हु सुबह सुबह अब जिसकी बीबी इतनी हसीं हो वो भला रुक सकता है क्या

किरण ....... ची सुबह सुबह आप भी कैसे बाते कर रहे है

सूर्य ......अच्छा जी रात को क्या कह रही थी डेरी डेरी बस मैं गई ये आपका यहाँ लगता है

किरण ...... वो वो तो रात को मुँह से निकल गया था उम्म्म्मः

किरण सरमते हुए छोटा सा किश कर बाथरूम की आवर भाग जाती है

सूर्य ...... ले बीटा ज्यादा होश्यारी के चाकर में किश भी ठीक से नहीं मिला अब तो रात को हे भरपाई होगी

सूर्य कपडे बदल रोहन के दूर को नॉक करता है

कुछ मिनट्स बाद डोर खुला तो सूर्य का मुँह भी खुला का खुला रह गया सामने का नजारा हे कुछ ऐसा था





सूर्य बस एक तक सुबह सुबह के इस खूबसूरत नज़ारे में मनो पूरी तरह से खो चूका था

राधिका को अपने अर्दनागेपन का बहन तब हुआ जब अनजाने में हे उसने साड़ी का पलु ठीक करने के लिया हाथ अपने सीने लिया





राधिका जी ..... ओह्ह सॉरी देवर जी मुझे लगा किरण है डोर पे

सूर्य क्या जबाब देता उसका ध्यान तो अभी भी काली ब्रा में कैद राधिका की उभरे हुए खूबसूरत घोड़े सीने पे था

सूर्य को इस तरह खुद में खोया देख राधिका के होंटो पे मिश्रित मुस्कान तैर जाती है

जैसे उसे सूर्य से यही उम्मीद थी

( राधिका जी .......वेल दोने राधिका प्लान काम कर रहा है सूर्य तुम्हारे खूबसूरत सीने को हे देख रहा है )

राधिका जी .....क्या हुआ देवज जी कहा खो गए मैंने सॉरी बोलै न

राधिका अपनी शर्ट्स टाइप नाईट को आगे अपने पेट पे बंडे हुए पलट जाती है

जिस से सूर्य के आँखों के सामने एक बार फिर राधिका के खूबसूरत नितम अपनी थिरकन से अपनी आवर आकर्षित करने में कामयाब होगा जाते है

सूर्य .....भाबी जी मैं चलता हूँ आप सब पैकिंग कर लीजिये हम यहाँ वाले घर चल रहे है

सूर्य जल्दी से रूम से निकल अपने रूम में चल देता है

ीदार रोहन बाथरूम से बहार निकलता है

रोहन ...... रइधू कुछ असर हुआ

राधिका ....... जैसे आने देखा नहीं मुझे कितनी सरम आ रही थी सूर्य के सामने इस तरह से जाने में आपको अंदाजा भी नहीं है जब सूर्य मेरे सीने से अपनी नजरे नहीं हटा प् रहा था

रोहन ......सॉरी रइधू पैर ये जरुरी है सूर्य को अपनी आवर आकर्षित करने के लिया

राधिका ....... पता नहीं देवर जी क्या सोच रहे होंगे मेरे बारे में की राधिका भाबी कैसे बेसरम बे जाया है जो इस तरह से अपने नंगे पैन को दिखा रही थी राधिका की आँखे दबदबा आई थी ये कहते हुए

रोहन आगे भाड़ राधिका को अपने गले से लगा लेता है

राधिका ........ आप मेरी एक बात मानेगे रोनी

रोहन .....है बोलो रइधू आज तक कोई बात टॉक है क्या मैंने तुम्हारी

राधिका ......... मुझे अपने हिसाब से सब करने दीजिये प्लेसेस मैं इस तरह उनसे बचा नहीं चाहती बेसरम बेहया बन कर देवर जी बहुत अच्छे इंसाने है वो हमारी मज़बूरी समझेंगे

रोहन ......ठीक है रइधू तुम जैसा चाहती हो वैसा करो मैं तुम्हारे साथ हूँ

राधिका ......आपको आज साम को हे जाना होगा

रोहन .......ठीक है मैंने अपने रहने के पहले हे बुकिंग कर राखी है मैं साम को कोई बहाना कर चला जाऊंगा

राधिका .....कोई आवर बहाना क्यों आपने पहले हे बहाना बनाया हुआ है न अपने दोस्त का बस ुशी का बोल देना

रोहन ....है ये भी ठीक है चलो जा कर रेडी होने जाओ हमें होटल से सूर्य के घर भी सिफत होना है

कुछ एक चेंज बाद सूर्य रोहन राधिका किरण चारो होटल से कार में बेथ घर की तरफ निकल जाते है

होटल से कुछ 40 ,45 मिनट्स की दुरी पे सूर्य का पुराण घर था ( मतलब की जहा सूर्य पहले रहता था अपने माँ डैड के साथ )

सूर्य को घर पहुंचे पहुंचे करीबन 11 :00 बन गए

गेट पे हे सूर्य को उसके पडोशी ने घर की के सौंप दी

सूर्य उन्हें hi hello कर किरण रोहन राधिका का परिचय अपना भाई भाबी आवर वाइफ के रूप में देता है

गेट का लॉक खोल सूर्य कार आगे बढ़ा देता है





सूर्य का ये घर 2 मंजिला था जिसमे 6 रूम थी 3 ऊपर 3 निचे विथ बाथरूम पीछे की तरफ एक अच्छा सा स्विमिंग पूल कार गेराज आवर एक छोटा सा लोने जहा सूर्य खेल खुद कर बड़ा हुआ

तीन रूम निचे किचन हाल के साथ एक छोटा सा खूबसूरत पूजा घर आवर 3 रूम ऊपर एक खूबसूरत बालकनी के साथ

सूर्य आगे भाड़ घर का गेट खोलता है अंदर की सजावट देख राधिका किरण रोहन तीनो हे चौंक जाते है सामने तजा पुष्पों से बानी रंगोली आवर उसके बिच चावल से भरा कलश रखा था







रोहन ......भाई ये क्या है हमें तो लगा साफ सफाई हमें हे करनी होगी पैर यहाँ अंदर तो कुछ आवर हे नजारा है

राधिका जी .....अच्छा है देवर जी किरण का एक बार फिर ग्रहपरवेश जो जायेगा

सूर्य ......ुशी लिया तो सब इंतजाम किये है भाबी जी इस घर में मेरा बचपन बिता है फिर किरण बिना ग्रहपरवेश की रसम किये कैसे अंदर जा सकती है

राधिका जी .....किरण कलश को पेअर से टच कर ग्रहपरवेश की इच्छा पूरी कर दो देवर जी की दोनों विवाहित जोड़े के जैसे हे प्रवेश करो एक साथ





किरण सूर्य एक दूसरे का हाथ थान आगे बचे किरण कलश को पेअर से घिरा कर घर में प्रवेश करती है

रोहन राधिका भी एक दूसरे का हाथ थान अंदर आते है

तभी वह सूर्य के पदोष में रहने वाली महिला आती है

सूर्य .....hello मरथा आंटी हाउ अरे यू

मरथा .....hi सूर्य माय सोन ी ऍम फाइन एंड यू माय सोन

सूर्य ......ी ऍम फाइन करता आंटी स्वीटी उनसे मिले ये है हमारी पडोशी मरथा आंटी मरथा आंटी ये मेरे बड़े भैया रोहन आवर ये भाबी जी राधिका है आवर ये मेरी वाइफ किरण

किरण आगे भाड़ उनके पेअर चुने के लिया जुख़ी तो उन्होंने उसे बिच में रोक कर गले से लगा लेती है

मरथा ....... लकी बॉय शी इस वैरी क्यूट ब्यूटीफुल गर्ल थैंक तो गॉड माय सोन

राधिका आवर रोहन भी ुशी तरह गले लग मिलते है

मरथा आंटी कुछ देर चारो से बात कर ब्लेस्सिंग्स दे कर अपने घर लौट जाती है

सूर्य किरण राधिका रोहन को पूरा घर दिखता है

किरण ने तो सूर्य वाले रूम में रहने का फैसला किया

सूर्य ने रोहन राधिका को अपनी माँ के रूम में रहने को

पुरे घर को अच्छे से देखने के बाद किरण काफी ख़ुशी थी जैसे उसे मनचाहा खजाना मिल गया हो इन सब में उन्हें एक घंटे से ऊपर समय लग जाता

रोहन ....भाई खाने का क्या है झुख लग रही है

सूर्य .....सब सामान किचन में है भाई

राधिका जी ......आप लोग हेट कीजिये मैं खाना त्यार करती हूँ

किरण .....चाइये भाबी मैं भी हेल्प करती हूँ आपकी

राधिका जी .....चल आना स्वीटी जल्दी त्यार होना जायेगा

राधिका आवर किरण दोनों किचन में लग जाती है दोपहर का खाना त्यार करने के लिया

सूर्य सकती को बोल पहले हे सब सामान रकवा चूका था सकती ने हे यहाँ की साफ सफाई आवर सजावट की थी

सूर्यगढ़ .........

सूर्य किरण को यहाँ से गए हुए आज तीसरा दिन था

सदी में पूरी हवेली में चहल पहल थी पैर अब मानव मानसी सोफिया सोनिया माया सुनिधि फातिमा जी दीप्ती दीप्ती माँ सूर्यकांत सर सोहेल .सोहेल अब्बू

हवेली में जो बहरी लोग थे जो सूर्य के विवाह में शामिल हुए थे वो सब जा चुके थे

अब फॅमिली मेंबर्स हे बचे हुए थे

साम को दादा जी बहार बे थे हुए थे तभी मन जी संजय सन्ति जी सपना चारो हवेली पहुंचे

सपना सन्ति जी तो दादा जी के पेअर छू आशीर्वाद ले कर अंदर चल दिए

नाना जी आवर संजय वही लोने में रखने खूसरषियो पे बेथ जाते है

दादा जी ......आवर बीटा संजय काम कैसा चल रहा है तुम्हारा राजनीती का जहा

संजय ...... बाउजी सब अच्छा चल रहा है भाई सा के साथ रह रह कर काफी जान पहचान भी हो गई है आवर पार्टी में भी अच्छी पकड़ बन रही है

दादा जी .....अच्छी बात है बीटा पैर दोनों भाई राजनीती में रहोगे तो पीछे से घर कोण संभालेगा मेरे दोस्त की तो अब ुमार हो गई है

नाना जी .....ुमार तो तुम्हारी भी हो गयी है मेरे यार पोते की सदी हो गई तो संजो बुढ़ापा आ गया

दादा जी ...... ये भी सही है पैर मुझे क्या चिंता मेरा शेर बीटा जो साथ है अभी अभी फ़ोन आया था बोल रहा था की दादा जी बुडगे हो गए है आप पेग सेज काम लगाया करो

नाना जी ......सही तो कहा सूर्य बेटे ने सुबह बात हुए थी मेरी भी शिकायत कर रहा था की आप दादा जी से मिलने जाते हे नहीं

दादा जी ......अच्छा तो तुम ीउसके दर से आये हो अच्छा है किसी बहाने तो याद आई

राधा ......बाउजी लीजिये आपकी चाय आवर आपकी कॉफ़ी मां जी

संजय ...... थैंक्स राधा पैर मैं मां कैसे हुआ

राधा ........ ये आप जानो

राधा तो जतका दे कर चली गई ीदार मन जी आवर दादा जी दोनों के हंशी चुत गई

संजय ...... ये क्या था बाउजी

दादा जी ......बीटा वो भविष्य का रिस्ता जोड़ गई तुम्हारे साथ में चलो अच्छा है मुझे दादा ससुर नहीं कहा अभी से हाहाहा

संजय .....मतलब कन्यादान पका करवाएगी मेरे हाथो

दादा जी ...... न बीटा न कन्यादान तो महेंद्र हे करेगा इसका वो पहले हे बोल चूका है वैसे भी उसने हमेशा राधा को छोटी बहन नहीं बड़ी बेटी मन है फिर उस से उसका हक़ कैसे चीन सकता हूँ

नाना जी ...... इस नाती पोते ने तो रिस्तो की खिचड़ी हे पका दी हाहाहा अच्छा है मेरी वाली बूढी हो गई

दादा जी ....हाहाहा नहीं तो तेरे हाथो हे संदन का हाथ मैग लेता

संजय को वह से उठाना हे ठीक लगा वो अपनी कॉफ़ी का मग लिया अंदर चल दिया

नाना जी ....... स्वीटी के बिना यार मेरा घर तो सुना सुना हो गया है

दादा जी .....घर तो मेरा भी सुना सुना लगता है सूर्य के बिना भले हे सब ख़ुशी का मुखौटा ओढ़े हुए हस्ते हुए नजर आते है पैर सबकी जान ुशी में अटकी है

सबको ुशी पल का इन्तजार है की कब सूर्य इन सबकी आँखों के सामने होगा

नाना जी ...... ये तो सच कहा यार तुमने कभी कभी तो अपने हे फैसले में खुद को सरमसर मह्सुश करता हूँ की काश हमने शिव शालू को समजा होता तो सूर्य आँखे बंद करते समय उसका बचपन तो साथ होता

दादा जी .....ये बात तो मुझे भी कचोटती रहती है भाई मेरे पैर उम्मीद है आँखे बंद होने से पहले मेरे पड़पोते के साथ वो अरमान पूरा जरूर होगा

नाना जी .....बिलकुल सही यार उस दिन का तो मुझे भी बेसब्री से इन्तजार है जब दोनों हवेली में बचे की खुशियों भरी किलकारियां गूंजेगी

दादी जी .....अभी से इतने सपने सजाये बे थे हो क्या भाई सबब

नाना जी ....... क्या करे इंसान की इच्छाएं कभी करम होती है का संदन जी अंतिम सांता पे हे उनका अंत होता है जीते जी तो नहीं

अंदर सपना पायल प्रीती कोमल अलीना मानसी सभी गैप सैप में लग जाती है ुशी बिच

किरण का कॉल आ जाता है तो सभी वीडियो कॉल पे u.s.a वाला घर देखने लगते है आवर वह की ढेरो बाते करते है

ीदार सन्ति जी मेनका शालिनी जी तीनो शालिनी जी के रूम में चर्चा में लगी हुई थी वही मेर्री जी आवर रेखा जी किचन में कुछ कर रही थी

मेर्री का सूर्य के जाने के बाद ज्यादातर समय रूम में या किचन में हे निकलता थे

शालिनी जी कुछ उदाश सी नजर आ रही थी सन्ति जी काफी देर से पूछना चाहती थी पैर हिमायत नहीं हुई आखिर में पीछे बिना रह भी नहीं पाई

सन्ति जी .....क्या बात है दीदी आप उदाश क्यों है

शालिनी जी ......नहीं तो भाबी मैं कहा उदाश हूँ

सन्ति जी .......दीदी भले हे हमने साथ में वक़्त काम बिताया है पैर आपके चेहरे को देख कर बता सकती हूँ की आप उदाश है

मेनका जी ...... सूर्य को याद करके उदाश है आवर क्या सुबह से समजा रही हूँ शालिनी को पैर ये समझती हे नहीं है पहले भी तो वो बहार जा चूका कितने समय के लिया

सन्ति जी .....ज्यादा हे याद आ रही है तो कॉल कर लो न दीदी

मेनका जी ......रुको मैं बुलाती हु उसे अब वही उन्हें समजायेगा

मेनका जी बहार निकल कर मानसी को कुछ कहती है

मानसी ....जी बुआ मैं अभी कहती हूँ उन्हें

मेनका जी फिर से शालिनी जी के पास लौट आई

शालिनी जी उत्सुकता से मेनका जी के पीछे देखती है पैर वह कोई नहीं था

कुछ 2 किन्तु बाद हे सूर्य वह अपनी माँ के रूम में प्रकट होता है

सूर्य को देखते हे शालिनी जी किसी छोटे बचे के जैसे तेजी से बीएड से उठ सीधा सूर्य के सीने से जा लगती है

सूर्य अपने सीने से लगते हे शालिनी जी के बेचैनी समाज जाता है

सूर्य ......माँ आप ठीक है न

सूर्य की बात सुन शालिनी जी आवर जोर से सूर्य को अपने सीने में कक्ष लेती है शालिनी जी की नरम मुलायम चूचियों सूर्य के चोसे सीने में सब कर फ्लैट से हो जाती है

सूर्य अपनी माँ के चेहरे को प्यार से ऊपर करता है तो शालिनी जी के आँखे नाम थी आवर अंश उसके गालो तक बाह निकले

सूर्य उन्हें फिर से वैसे हे सीने से लगा लेता है आवर प्यार से उनके सर आवर पीठ को सहलाने लगता है

माँ बेटे का ऐसा मिलान देख न मेनका जी ने उन्हें टोका आवर न सन्ति जी ने

5,6 मिनट्स सूर्य के सीने से लगे रहने के बाद शालिनी जी ने सुबकना बंद किया अब कही जा कर खुद को हल्का मह्सुश कर रही थी जैसे सूर्य से मिलते हे हे उन्हें सीने पे रखा बोझ उतर गया हो

सूर्य ......माँ क्या हुआ आपको

मेनका जी ......... पहले चुकी पिले अपनी माँ की मुँह लगा कर सुबह से उनमे ढूढ भर के बैठी है उदाश

सूर्य .......बुआ सा

मेनका जी ......क्या बुआ सा सुबह से उदाश बैठी है कितना संजय उसे समझती हे नहीं सुबह से एक निवाला तक नहीं खाया है इसने गुस्सा न कृ तो क्या कृ मैं

सूर्य ......माँ क्या बुआ सच कह रही है ीदार देखिये मेरी तरफ

शालिनी जी सूर्य से नजरे चुराने लगती है

सूर्य .....बुआ सा खाना ले कर आइये

मेनका जी ......अभी लती हूँ ठीक से समजा उसे बीटा ऐसे तो खुद को बीमार कर लेगी

मेनका जी बहार जा राशोषी से खाना ले कर आती है

सूर्य ......ममी जी आप भी बेटीये कड़ी क्यों है

सन्ति जी .......मैं ठीक हूँ जमाई सा

सूर्य .....ममी जी

सन्ति जी चुपचाप बीएड पे बेथ जाती है

मेनका जी खाने की थाली सूर्य के सामने छोटे टेबुल पे रख देती है

सूर्य अपने हाथो से निवाला बना कर खिलता है

शालिनी जी बिना किसी विरोध के खाना खाने लगती है

ीदार जैसे हे बाकि सभी लड़कियों को सूर्य का यहाँ होने का अहसास होता है वो सब भी शालिनी जी के रूम में आ जाती है

पैर कोई कुछ कहता नहीं सभी बस चुप चाप सूर्य शालिनी जी के अगल बगल में सन्ति से बेथ जाती है बिना कोई आवाज किये

सूर्य किसी पे ध्यान दिए बिना बन अपनी माँ को खाना खिलता रहा जब तक थाली में रखा खाना ख़तम नहीं होने गया

पानी का गिलाश उठा के सूर्य शालिनी जी के होंटो से लगा देता जिसमे से शालिनी जी कुछ गुनत पानी पे कर मुँह हटा लेती है सूर्य अपने हाथो से अपनी माँ का होंटो पे लगा पानी साफ करता है

सूर्य ....... माँ ये गलत बात है ऐसे तो आप अपनी सेहत ख़राब कर लेंगी आपको पता है न मैं आपको ऐसे नहीं देख सकता दुबारा ऐसा कभी नहीं करना आवर तुम सब क्या कर रही थी mom.subha से भूखी थी किसी ने भी उन्हें खाना क्यों नहीं खिलाया

कोमल ......... मैंने बहुत कोशिश की पैर....

सूर्य .....काम से काम मुझे तो बता सकती थी आप सब

सूर्य की गुस्से में कही बात से कोमल की आँखे नाम हो गई थी जिसे देख शालिनी जी ने न जाने क्यों सूर्य को चाहता मार दिया

कोई रक्त तब तक तो चांटा पद चूका था सूर्य शालिनी जी को देखता अपना हाल सहला रहा था

शालिनी जी ....... बेटी है वो मेरी तुम्हारी हिमायत कैसे हुए उसपे गुस्सा करने के दुबारा ऐसा फिर मेरी किसी बेटी के साथ किया न तो फिर से चांटा याद रखा चल ीदार आ मेरी बची रोटी नहीं

कोमल चुपचाप शालिनी जी के गले से लग जाती है रेखा जी ये सब देख रही थी गेट पे कड़ी जो कर उनके आँखे तो नाम थी पैर होंटो पे मुस्कान

सूर्य ......बड़ी मम्मी

रेखा जी ......है मेरे बेटे

सूर्य .....देखो न बड़ी मम्मी माँ ने मुझे चांटा मारा

रेखा जी .....शालिनी ये क्या है तुमने सूर्य को चांटा मारा

दादी जी .....अब तुम माँ बेटे का नाटक ख़तम करो फिर से मेरी बेटी को उदाश करना है क्या

सूर्य ..... हाहाहा सॉरी मम्मी सॉरी कोमल तुमपे गुस्सा होने के लिया

दादी जी ........ बहुत शैतानी करने लगा है क्या जरुरत थी ये सब नाटक करने की मिल गया न पार्षद

शालिनी जी ......क्या मतलब माँ

दादी जी ......ये सब इसका नाटक था ताकि तुम इसे दांतो

सूर्य ......सॉरी माँ आवर आप सब भी काम से काम मुझे एक कॉल तो कर सकती थी न

शालिनी जी .....उन्हें कुछ मत बोल वो मेरा हे मन नहीं था

जा सब से मिल ले आवर वापिस जा मेरी बेटी अकेली होगी

सूर्य .... जी माँ उम्म्म्मः बस ऐसे हे रहा कीजिये ऐसे हे पसंद हो आप मुझे माँ ी लव यू ुम्मम्हा ुम्मम्हा

शालिनी जी .......सॉरी बीटा एंड ी लव यू ुम्मम्हा जा अब मिल ले सब से अपने रूम में

सूर्य मेनका जी रेखा जी सन्ति जी दादी जी से मिल अपने रूम की तरफ निकल गया बाकि सभी लड़किय भी

सूर्य सभी से कुछ देर बात चित कर एक एक कर मेर्री जी के रूम में जाता है जहा वो अकेली बैठी कोई बुक पद रही थी सूर्य जाते हे रूम लॉक कर मेर्री जी को बहो में भर किश करने लगता है

साथ हे साथ मेर्री जी के सीने को सहलाते हुए उसके सॉफ्ट बूत टाइट नितम्बो को ाचे से मसलता है 7,8 मिनट्स की इस किश आवर रगड़ने से मेर्री जी अपने पेंटी में डिस्चार्ज हो जाती है

सूर्य ......अभी चलता हूँ कल दोपहर को आऊंगा बाकि काम पूरा करने आपके रूम में

मेर्री जी ......उम्म्म्मः मुझे इन्तजार रहेगा सूर्य उस पल का

सूर्य वह से गायब हो निकल गया अपने u.s.a वाले घर की आवर .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................

दोस्तों कल कोई अपडेट नहीं आएगा कल हॉस्पिटल जाना है चेकउप के लिया डॉक्टर के पास तो उम्मीद न रखना अपडेट की 🙏
 
अपडेट 211

सूर्य सभी से कुछ देर बात चित कर एक एक कर मेर्री जी के रूम में जाता है जहा वो अकेली बैठी कोई बुक पद रही थी सूर्य जाते हे रूम लॉक कर मेर्री जी को बहो में भर किश करने लगता है

साथ हे साथ मेर्री जी के सीने को सहलाते हुए उसके सॉफ्ट बूत टाइट नितम्बो को ाचे से मसलता है 7,8 मिनट्स की इस किश आवर रगड़ने से मेर्री जी अपने पेंटी में डिस्चार्ज हो जाती है

सूर्य ......अभी चलता हूँ कल दोपहर को आऊंगा बाकि काम पूरा करने आपके रूम में

मेर्री जी ......उम्म्म्मः मुझे इन्तजार रहेगा सूर्य उस पल का

सूर्य वह से गायब हो निकल गया अपने u.s.a वाले घर की आवर .............

अब आगे ...........

सक्तिपुर ....... विक्रम को हवेली वे निकले आज 2 दिन हो गए थे न कोई फ़ोन कॉल न किया न कोई खबर की

रुक्मणि जी ने एक दो बार विक्रम की खबर भी में गीता ठाकुर से गीता ठाकुर में साफ साफ कह दिया की उनका ान एक हे बीटा है आवर सो अजय है विक्रम उनके लिया मर चूका है

रुक्मणि जी रात का खाना खाने में बाद अपने सर पे लगी चोट पे दवाई लगवा विधि से दूसरी साफ पट्टी कर्मा कर लेते हुए

अपनी भूतकाल को याद कर रही थी

साथ हे सवयं को कोष भी रही थी विक्रम को ले कर क्युकी कही न कही रुक्मणि जी खुद को गलत मान चुकी थी

आखिर उसने भी तो विक्रम को सेक्स ड्रग्स के जरिये अपने सरीर सौंप कर काबू करना चाहा थे

आज कल विक्रम में वही तो किया जो रास्ता रुक्मणि में त्यार किया था विक्रम को फसने के लिया

विधि ........ क्या हुआ माँ आप किन खयालो में खोयी है आपको रेस्ट कर्मा चाइये न आपके सर पे चोट लगी

रुक्मणि ........ तुम कब आई बीटा

विधि ......जब आप किन्ही गहरे विचारो में खोये हुए थी वैसे क्या सोच रही थी माँ आप जो आपको मेरे आने तक का पता नहीं चल पाया

रुक्मणि ........कुछ नहीं बेटी है पुराने जिंदगी में किये पाप सामने आ खड़े हुए कुछ अच्छे करम तो किये नहीं मैंने अपनी जिंदगी में मोह माया सडयंत्र दुश्मनी यही सब तो किया था अभी तक

विधि ........माँ जखम जितने कुरेड़ोगी उतने हरे होंगे ान आप सब छोड़ चुकी है तो फॉर सो सब याद कर खुद को क्यों तकलीफ दे रही है बुल जाये सब कुछ है आगे आपकी या हमारी वजह से किसी को कोई तकलीफ न हो यही नाम करना है

विधि आगे भाड़ अपनी माँ के नरम सिम्स पे सर रख उन्हें बहो में काश चिपक जाती है

रुक्मणि जी ........ बहुत समझदार हो गई मेरी नन्ही विधि तो सूर्य से बात करनी होगी जल्दी हे सदी की हहहहहए

विधि .......मैं आपको छोड़ कही नहीं जाने वाली माँ बता देती हूँ

रुक्मणि जी .......वैसे उस से बात नहीं हुई क्या तुम्हारी

विधि ......सो दोपहर को हुई थी माँ अभी सो अपने घर पे है किरण दीदी राधिका भाभी आवर रोहन भाई के साथ किरण दीदी आवर राधिका भाबी से भी बात हुई थी मेरी

रुक्मणि जी ...... तूने सूर्य को विक्रम के बारे में तो नहीं बताया न जो कुछ भी यहाँ हुआ उसके बारे में

विधि ......... माँ मैंने उन्हें बता दिया होता तो सायद विक्रम को सो मार भी चुके होते

रुक्मणि जी ......ऐसा नहीं बोलते बीटा सो बड़ा भाई है तुम्हारा गुस्से में गलत सही का फरक नहीं कर पाया

विधि ........ मेरा भाई नहीं है वो मेरी माँ के साथ ऐसा करने के बाद तो बिलकुल भी नहीं ान मुझे नींद आ रही है प्लेसेस अब भी सो जाइये मैं आपके साथ हे सोने वाली हूँ

रुक्मणि .....थिंक है बीटा गुड नाईट

विधि ......गुड नाईट माँ

उधर विक्रम तेजी से अंदर में कार को दौड़ता हुआ सिटी 1 की आवर जा रहा था िषज बिच राणा की नजर विक्रम की कार पे पद जाती है राणा जो इस वक़्त सिटी 1 के बहरी रोड पे सरब की दुकान पे सायद अपना कोटा ले रहा था

राणा जल्दी से पॉज दे एक बॉटल ले कर विक्रम के पीछे अपनी कार लगा देता है

अभी यही कोई रात के 9 बजे के आसपास समय हुआ था

कुछ हे देर में राणा को विक्रम की कार धूल ुढती हुई नजर आती जो राणा से 400 से 450 मीटर की दुरी पे थी

राणा ......... माजरा क्या है विक्रम इस तरह तो कभी घडी नहीं चकता आवर से सहर से बहार की तरफ क्यों जा रहा है

कुछ 10 ,12 मिनट्स के बाद विक्रम की कार थोड़ी स्लो होती है आवर कुछ अचे जा कर मैं रोड से निचे उतर जाती है कच्चे टास्ते जो की बहार से सहर के अंदर की तरफ जाता था

राणा तय दुरी से विक्रम के पीछे लगा रहा कुछ देर बाद विक्रम एक नव निर्माण अधूरी बिल्डिंग के सामने कार रोकता है

विक्रम चारो तरफ नजर डालने के बाद एक छोटा सा बेग कार से निकलता है आवर अपनी कार के देश बोर्ड से गन भी गन को चेक करता है तो उसमे 4 हे गोली थी

विक्रम अपनी कमर में शर्ट के निचे रिवॉल्वर छुपा लेता है

तभी उसके फ़ोन पे कॉल आता है

विक्रम ......hello कहा हो तुम मैं तुम्हारी बताई जगह पे पहुंच गया हूँ पैसे के साथ

दूसरी तरफ से किसी आदमी की भरी भरकम आवाज अस रही थी

फ़ोन कॉल ....... जिंतने बताये उतने ले कर आये हो न एक भी पैसा काम हुआ तो जानते हो न

विक्रम ......पुरे 5 लाच है जितने तुमने मैनेज थे

फ़ोन कॉल ...... ठीक है अपनी कमर में जो गन है उसे आवर पॉज को अपनी कार में रखो के मत निकलना

विकरण सामने वाले के कहे अनुसार हे गन आवर पैसे कार में फिर से रख देता है

विक्रम ....... तुमने जैसा कहा मैंने वही किया अब मुझे वो रिकॉर्डिंग आवर फोटोज चाइये जो तुम्हारे पास है

फ़ोन कॉल ....... चुपचाप बिल्डिंग में जाओ छठ पे वही तुम्हे बताऊंगा की फोटोज आवर रिकॉर्डिंग कहा है

विक्रम एक बार कार की तरफ देखता है फिर चुप चाप बिल्डिंग के अंदर चला जाता है फ़ोन अभी भी कान से लगा रखा था

विक्रम छठ पे पंहुचा आवर ीदार कोई उसकी कार स्टार्ट कर वह से निकल लेता है

ये कोई आवर नहीं अजय के उन्हें दो दोस्तों में से एक कॉस्ट था जभी दूसरा वह से थोड़ी देय खड़ा विक्रम से बात कर रहा था फ़ोन पे सॉफ्टवेयर से आवाज बदल कर

विक्रम ......तुमने मुझे धोखा दिया किन्दा नहीं छोड़ूंगा तुम्हे

दोस्त 2 ...... मैंने कोई धोखा नहीं दिया है अपने दूसरी तरफ देखा वह कुछ सीमेंट ब्रिक्स रखे उन्हें हटाओ वह फोटो आवर रिकॉर्डिंग राखी है चलता हूँ तुम्हारे साथ अच्छा बिज़नेस रहा

विक्रम .......हरामजादे एक बार हाथ आ गया न तो सेल हेरे पुरे खंडन की माँ बहन एक कर दूंगा

दोस्त 2 .....जैसे सूर्य तुम्हारी दोनों बहनो की कर रहा है चल फ़ोन रख

विक्रम कुछ कहता उस से पहले हे फ़ोन काट गया

विक्रम वह से सीमेंट के ब्रिक्स हैट्स कर देखता है तो वह एक छोटा सा बैग था जिसमे कुछ दो लिफाफे आवर साथ में एक मेमोरी कार्ड था

विक्रम वह आवर तलाशी करता है की कही आवर भी तो कुछ पिछ नहीं छुपाई है

ीदार दोनों दोस्त विक्रम की कार ले ुढे थे 5 लाच के साथ साथ कुछ देय जाने के बाद कार टास्ते में छोड़ वो लोग अपनी बाइक से निकल गए

विक्रम बिल्डिंग से बहार निकला आवर पैदल सहर की तरफ चल दिया ुशी रस्ते जिस रस्ते विक्रम की कार है थी

राणा दूर से हे सब देख रहा था आवर किसी से फ़ोन बात भी कर रहा था कुछ देर बात करने के बाद राणा वही से कार गुहा कर निकल जाता है

विक्रम बिल्डिंग से कोई 1 कम आगे आने पे उसे अपनी कार दिखाई दी

विक्रम जा कर देखता है तो के लगी हुई थी पैर आगे का तैयार पंचर था जो की जानबूझ कर किया गया था

विक्रम गुस्से में तैयार पे लात मरता है आवर डिक्की खोल कर त्येर निकल चेंज करने लगता है

15 मिनट्स बाद विक्रम कार ले कर निकल गया सहर से कुछ सामान लेने के बाद फार्महाउस की आवर निकल गया

u.s.a सूर्य हाउस .........

साम के वक़्त प्लान अनुसार रोहन सूर्य को बोल कर अपने दोस्त से मिलने का बहाना कर निकल गया

सूर्य जनता था की रोहन जूथ बोल रहा है आवर क्यों बोल रहा है

सूर्य ने भी जाने से रोहन को नहीं रोका

अब घर में 3 लोग हे बचे थे सूर्य किरण राधिका जी

सूर्य ....... आप दोनों त्यार होना जाइये हम लोग बहार हे डिनर करने चलते है

राधिका जी ...... बहार जाने की क्या जरुरत है यही घर में करते है न

सूर्य ........ चिंता न कीजिये भाबी जी बहुत मोके मिलेंगे आपको अपने हाथो से खाना खिलने का चलिए त्यार होना जाइये आवर किरण तुम भी रेडी हो जाओ अच्छे से

किरण ......... जी कुंवर जी

किरण राधिका जी को ले कर अंदर चली जाती है

किरण ........... भाबी जी अच्छा मौका है आपके पास कुंवर जी से अपने दिल की बात कहने का

राधिका जी .......स्वीटी कही ये जल्दबाज़ी तो नहीं है वो क्या सोचेंगे की पति के जाते हे....

किरण .......आप भी न भाबी जी वो सब जानते है आवर न इनकी सोच इस तरह की है

राधिका जी ......... किरण मेरी हिमायत नहीं हो रही है सूर्य से बात करने की

किरण ....... वो आप मुझपे छोड़ दीजिये बस आवर आज नाईट के लिया त्यार रहिये

राधिका जी .....क्या मतलब

किरण ........वक़्त आने दीजिये सब समाज जाओगी आप वैसे भी आपकी इच्छा पूरी करने का वादा किया था

भूल गई क्या अपने वादे को

किरण राधिका दोनों त्यार होने लगती है ीदार सूर्य भी दूसरे रूम में त्यार हो जाता है









जहा किरण ने बिना ज्यादा मेकउप के साड़ी पहनी वही राधिका जी टाइट जीन्स वह पतली सरीर से चिपकती हुई T-shirt पहनी थोड़ा मेकउप के बाद

राधिका जी को देख कर कोई नहीं कह सकता था की ये सदी सुधा भी है

अभी अभी जैसे कॉलेज ज्वाइन किया हो

सूर्य बहार कार निकल उनका इन्तजार कर रहा था

तभी दोनों घर को लॉक कर कार की तरफ आती है

सूर्य दोनों देख कुछ पल उन्हें हे निहारता है

किरण .......चले कुंवर जी

सूर्य ....... है स्वीटी पैर तुम चाहो तो नार्मल मॉडर्न कपडे पगन सकती हो स्वीटी जैसे भाबी ने पहना है

किरण ........ आज नहीं फिर कभी कुंवर जी वैसे भाबी भी साड़ी हे पहनने वाली थी पैर मैंने हे कहा उनसे ऐसा करने को

ौर्य दोनों के लिया कार का डोर खोल देता है

किरण आगे सूर्य के साथ राधिका जी पीछे की सीट पे

सूर्य दोनों को ले कर डिनर के लिया निकल जाता है

कुछ देर अच्छे से गुमने फिरने के बाद सूर्य दोनों को बुक किये होटल में ले कर जाता है

जहा सूर्य ने पहले हे टेबिल बुक कर रही थी तीनो के लिया

सूर्य दोनों को चेयर पीछे खिंच कर बैठने का इसरा करता है

इस दौरान किरण अपने फ़ोन में कुछ पल वयस्थ रही

कुछ हे देर में वेटर आ कर कुछ गिलास आवर आवर मदिरा की बोतल रख जाता है

सूर्य ......मैंने तो इसका आर्डर नहीं दिया था

किरण ....... इसका आर्डर मैंने दिया था कुंवर जी आपके आवर भाबी के लिया क्यों भाबी आप ड्रिंक करती है न

राधिका जी ........ है स्वीटी कभी कभी करती हूँ पैर दल्ली नहीं पैर तुम्हे भी करनी होगी तभी करूंगी

किरण एक बार सूर्य को देखती है जैसे वो परमिशन मांग रही हो सूर्य भी अपनी पलके जपका देता है

राधिका जी. ....... स्वीटी ये शैम्पेन है कोई सरब नहीं

सूर्य ......है स्वीटी तुम्हे भी तरय करना चाइये

सूर्य खुद से तीन गिलास में शैम्पेन डालता है सूर्य खुद से दोनों को गिलास देता है

तीनो एक साथ चियर्स कर अपने अपने मुँह से लगा लेते है

जैसे हे सूर्य ने शैम्पेन की पहली शिप ले उसे गड़बड़ लगी तो उसने किरण की आवर देखा जिसने डेरी से मुस्कुराते हुए आँख दभा दी

राधिका जी ........ ये कोनसी शैम्पेन है ये तो बहुत हे अच्छी है खुसबू भी आवर टेस्ट भी पहले तो कभी ऐसा टेस्ट नहीं मिला

सूर्य ........ स्वीटी से हे पूछो ुशी ने आर्डर की है

डेरी डेरी राधिका जी आवर सूर्य लगभग पूरी बॉटल खली कर देते है इस दौरान किरण सिर्फ दूसरे पेग के साथ हे लगी हुई थी

किरण के इसारे पे वेटर वह एक आवर शैम्पेन की बॉटल रख जाता है सूर्य आवर राधिका उस से भी पेग लेने सुरु कर देते है

किरण ने इसमें से भी बस 2 हे पेज लिया बाकि सूर्य आवर राधिका जी ने हे फिनिश किया

कुछ देर बाद सूर्य किरण राधिका दोनों को ले कर वही पास में बज रहे माध्यम अंग्रेजी संगीत पे दोनों के साथ डांस करने लगता है

किरण पे ड्रिंक का असर नहीं था न सूर्य पे ज्यादा असर हुआ था किन्तु राधिका जी जुमने लगी थी नशे में हालत को देखते हुए सूर्य दोनों को फिर वही टेबुल पे ले आता है आवर खाना सर्व करने का इसरा करता है

कुछ हे देर में पूरी मेज खाने से सजी हुई थी

तीनो ने अपनी इच्छा अनुसार डिनर किया

आवर तीनो कार स्व घर की आवर निकल गए

किरण ......आप भाबी को रूम में छोड़ आइये इनको कुछ ज्यादा हे नशा हो गया है

सूर्य .......वो तो होना हे था आपने कब प्लान किया ये सब

किरण ......क्या ये जरुरी है

सूर्य चुपचाप राधिका को सहारा दे कर अपने बगल वाले रूम में ले कर जाता है जिस रूम में राधिका जी रुकने वाली थी

जैसे हे सूर्य राधिका को बीएड पे लिटाया राधिका जी ने सूर्य को अपने ऊपर खुश लिया किरण ये सब दूर पे कड़ी देख रही थी

राधिका की आँखे नशे में बंद हो चुकी थी

अभी भी सूर्य लगभग राधिका के ऊपर हे लेता था पैर अपनी हाथो की कोहनी के भर पे

राधिका ......... सूर्य ी लव यू मुझे प्यार करो न

सूर्य राधिका जी के सरीर से उतने लगा तो किरण को आगे आ सूर्य को रोकना पड़ा

किरण ........ आप सब जानते है फिर भी भाबी की इच्छा पूरी क्यों नहीं कर देते हो

किरण भी राधिका की बगल में लेट जाती है अब सूर्य भी मजबूरन दोनों के बिच में लेट जाता है

राधिका सूर्य को टटोलते हुए उसे अपनी बहो में काश लेती है दूसरी तरफ से किरण भी सूर्य से एक तरफ से चिपक जाती है

सूर्य .......स्वीटी ये इतना आसान नहीं सदी के पहले बात कुछ आवर थी पैर अब ये सब करना गलत लगता है

किरण ......... कुछ गलत नहीं है कुंवर जी प्यार पाने का हक़ सभी को होता है फिर इनके साथ अन्याय क्यों भाबी आपसे केवल माँ बनने के लिया रिस्ता नहीं जोड़ रही है वो दिल से आपको पसंद करती है या फिर ये कहूं की वो आपको रोहन भाई से ज्यादा प्यार करती है पैर अपने दिल की बात जुबा पे नहीं ला पति आपने बुआ सा के प्यार को अपना मेर्री जी को भी अपनाया फिर इनके साथ ऐसा क्यों

सूर्य .......इनकी बात अलग है स्वीटी

किरण ........ कुछ अलग नहीं है कुंवर जी जिस तरह हवा आवर पानी आकाश डर्टी पे मनुष्य का सामान अदिकार है वैसे हे आपसे जो भी स्त्री कन्या पर्म करती है उन्हें प्रेम पाने का अदिकार है वचन दीजिये आप किसी के प्यार को ठुकरायेंगे नहीं

राधिका ........ ी लव यू सूर्य ुम्मम्हा

नशे की वजह से होंटो पे किश करने के स्थान पे राधिका ने सूर्य की थोड़ी पे हे किश कर दिया

सूर्य ........ठीक है जहा जरुरी होगा मैं निराश नहीं करूंगा किसी को भी

किरण .......उम्मम्मम्हा ये हुई न बात कुंवर जी भाबी सामने से पहल करने की हिम ात नहीं जूता पायेगी आपको हे सब करना होगा

सूर्य ......पैर मैं कैसे स्वीटी

किरण .......वो आप जानो कुंवर जी मैं चली अपने रूम में इनके कपडे चेंज कर दीजिये

सूर्य आगे कुछ कहता उस से पहले हे किरण वह से गायब हो गई

सूर्य जादू का प्रयोग कर राधिका को उंडेर्गारमेंट में सुला कर ऊपर से चादर दाल कर बहार जाने को हुआ

फिर कुछ सोच कर राधिका के होंटो पे किश कर प्यार से सर सहला कर दूर लॉक कर अपने रूम की आवर चल दिया

रूम में पहुंच सूर्य अपने कपडे निकल पूरी तरह से नंगा किरण को बहो में भर किश करने लगता है

देखते हे देखते कब एक दूसरे अंगो से खेलते हुए एक दूसरे के जिसम में समाये हुए मिलान में खो गए

ये परीलोक की मदिरा का असर था या कुछ आवर सूर्य किसी बे लगाम घोड़े की तरह किरण संग तब तक मिलान में लगा रहा जब तक अपने घड़े वीर्य से किरण की योनि को लबा लैब नहीं कर दिया

कुछ देर सुस्ताने के बाद सूर्य हे किरण की योनि को कपडे साफ कर उसे अपने बहो में भर लेट जाता है

सुबह सूर्य की आँखे अपनी लिंग के इर्द गिर्द हो रहे गीलेपन वह कसाव से खुलती है

सामने देखा तो किरण सूर्य के लिंग को पूरा गिला कर अपनी योनि में लेने की कोशिश कर रही थी

सूर्य ......स्वीटी ये क्या आज तो बिना मैनेज हे सुबह सुबह सवरग के शेर करवा रही हो

किरण. ....... ये सब आपके इसकी वजह से हो रहा उसे देख रुका नहीं गया

सूर्य डेरी डेरी अपनी कमर हिला कर किरण की योनि में अपने पुरे लिंग को उतर देता है

कोई आधे घंटे चले इस कार्य करम के बाद सूर्य ने सुबह सुबह अपना गरम लावा किरण की योनि में भर देता है

सूर्य ....... मैं परीलोक जा कर आता हूँ स्वीटी

किरण. .....ुण्णं ठीक है कुंवर जी

सूर्य वह से त्यार हो परीलोक निकल जाता है

जहा आज जिनिशा आवर जीनत भी उसके इन्तजार में थी जुली कल साम को परतविलोक जा चुकी थी गुरुदेव के साथ में .......

असुरलोक .........

विसुद्धि नगीना विकटासुर कंटकासुर नागसूर पाछो मध्यरात्रि को अत्यंत स्थान के लिया निकल गए थे

वही दृश्टिका भी उचित समय देख महल से निकल गई

कुछ दूर जाने के बाद उसे वही काळा कपड़ो में महामहिम के सेवक मिलते है जिनके साथ मूर्छित अवस्था में असली द्वारिका भी थी

दृश्टिका ........ इसे यहाँ क्यों ले कर आये hi तुम लोग उसे तो गहरी नींद में मायावी कैद में होना चाइये था

शया ....... महामहिम का आदेश है उन्हें इनके उचित स्थान तक पहुंचने का

हम वही कर रहे है जो महामहिम का आदेश है

दृश्टिका ........ महामहिम ऐसी मूर्खता कैसे कर सकते है ये असुरमहल पहुंची तो पूरी योजना विफल हो जाएगी अगर इसने सत्य किसी को बताया तो

तभी एक कला दुहा कही से आता है आवर दृश्टिका से जा टकराता है दृश्टिका की दर्द भरी चीख उस अंदर में गूंज उठी

प्रहार इतना तेज था की दृश्टिका के मुँह से रकत की पुहार फुट पड़ी

तभी वो कला दुहा एक परछाई का रूप लेता है जो की महामहिम का हे अक्ष था

महामहिम ........ मुर्ख दृश्टिका तुम्हारा दशांश कैसे हुआ हमारे निर्णय पे संदेह करने का

दृश्टिका ......कसंहा महामहिम गुलाम से भूल हुई हमें कसंहा कर दे महामहिम

महामहिम ......... ये तुम्हारी पहली आवर अंतिम भूल है दृश्टिका वो भी इस लिया की तुमने हमेशा हमारे आदेश की पलना की है इस लिया

उस अक्ष से कला दवा निकल कर दृश्टिका में समाहित हो जाता है कुछ हे देर में दृश्टिका उस अक्ष के सामने घुटनो पे थी किसी गुलाम की तरह

महामहिम ......द्वारिका को सकुसल असुरमहल पंहुचा दो दृश्टिका इस से कोई खतरा नहीं इसके मस्तिष्क से सभी यादे मिटा दी गई है इसे अपनी वो यादे जो तुम्हे असुरमहल से द्वारिका के स्थान पे मिली है योजना की यादो को छोड़ कर

दृश्टिका वैसा हे करती है आवर महामहिम को परनाम कर द्वारिका को ले असुरमहल के लिया निकल गई

द्वारिका की महल से जुडी यादे दे कर उसे ुशी के कक्ष में सुला कर दृश्टिका वह से गायब हो जाती है

जैसे हे दृश्टिका असुरलोक का त्याग कर असुरलोक से निकली ठीक ुशी समय असुरगुरु को कैद में रखे मायावी कवच भी नस्ट हो गया

असुरगुरु अब कंटकासुर दृश्टिका की कैद से मुक्त थी

जैसे हे वो मुक्त हुए उन्हके शिष्यों को भी उनका असुरलोक में होने का आभाष हो जाता है

चारो शिष्य अगले हे पल असुरगुरु के समकक्ष थे

चारो ......परनाम गुरुदेव आप कहा थे हमने आपसे संपराज करने का कितना पर्यटन किया किन्तु आप तक पहुंच नहीं सके

असुरगुरु .....कल्याण हो पुत्री हम किसी अज्ञान्त स्थान पे थी हम नहीं चाहते थे की कोई हमारी साधना में विघ्न डेल इस लिया हमने सवयं को सुरक्षा घेरे में कैद कर लिया था

शिष्य 2 सब जानते हुए भी खामोश था

असुरगुरु ......शिष्य 1 कहा है शिष्य 2

शिष्य 2 ........ गुरुदेव वो परतविलोक पे है

फिर विस्तार से साडी बात असुरगुरु को बताता है

असुरगुरु ........... विनाश काळा विपरीत बूढी .अब उसका जीवन काल इतना हे है तो नियति को तो मैं भी नहीं बदल सकता तुम लोगो ने उचित किया जो उसके साथ नहीं गए अब तुम लोग परतविलोक लौट जाओ हम कुछ समय बाद परतविलोक आएंगे शिष्य 2 तुम यही असुरलोक में रहो

तीनो शिष्य तो वह से निकल गए किन्तु शिष्य 2 अभी भी वैसे हे असुरगुरु के सामने था परनाम करने की मुद्रा में

असुरगुरु ..........पुत्र तुमने जो पुत्री वातापी की सहायता की उस से हम परशान है हम जानते है तुम्हे असुरमहल में हो रही गतिविधियों के विषय में बहुत कुछ ज्ञात है

किन्तु तुम्हे उन्हें अपने तक हे सिमित रखना होगा

शिष्य 2 ......जी गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा किन्तु ....

असुरगुरु ......निसंकोच हो कर कहो पुत्र

शिष्य 2 ........ गुरुदेव आप इतने तपोबल के धनि हो कर भी कैद से मुक्त नहीं हो प् हमें इस सत्य पे यकीं नहीं है

गुरुदेव ........ पुत्र कभी कभी नियति के आगे त्रिदेव भी विवश हो जाते है फिर हम तो उनके समकक्ष सामान्य पुराणी है हर घटना के पीछे नियति अपनी माया रचती है इस बार हमें नियति के आगे जखन पड़ा

शिष्य 2 ...... हम समजे नहीं गुरुदेव

असुरगुरु ......... पुत्र नियति की इच्छा के विरुद कोई नहीं जा सकता नियति ने पहले हे इस घटनाक्रम को नियति कर दिया था हमारे चाहने या न चाहने से इस घटना करम को रोका नहीं जा सकता था

शिष्य 2 .......जी गुरुदेव

तभी असुरगुरु के समकक्ष रकत सन्देश प्रकट होता है आवर सूर्य का सन्देश देता है

रकत सन्देश को केवल असुरगुरु हे देख सकते थे आवर सुन सकते थे

असुरगुरु ........ पुत्र परतविलोक जा कर एक उचित स्थान का चयन करो

शिष्य 2 ......क्यों गुरुदेव

असुरगुरु ........ विवाह के लिया पुत्रपुत्री मानसी का विवाह होना है वह

शिष्य 2 ....... वो तो काल से प्रेम करती है तो उनका विवाह काल .....

असुरगुरु ....... है पुत्र मानसी पुत्री का विवाह पुत्र काल से होना है कुछ दिन बाद उनके विवाह होना है

शिष्य 2 .......किस विधि से तयारी कृ गुरुदेव

असुरगुरु ....... असुविधि से पुत्र क्युकी पुत्री मानसी असुरकन्या है

शिष्य 2 ........ जो आज्ञा गुरुदेव आज्ञा दीजिये परनाम गुरुदेव

असुरगुरु ........ कल्याण हो पुत्र

शिष्य 2 वह से परतविलोक निकल गया उचित स्थान की खोज वह मानसी काल के विवाह की तयारी करने

असुरगुरु वातापी की रक्तसंदेश के माध्यम से सवयं के मुक्त होने का सन्देश देते है

कुछ हे देर में वातापी असुरगुरु के समकक्ष थी

वातापी ......परनाम पिता श्री

असुरगुरु ........कल्याण हो पुत्री वातापी

वातापी ......हमें कसंहा कर दीजिये पिता श्री

असुरगुरु ........पुत्री तुम्हे कसंहा मांगने की आव्सय्कता नहीं है जो भी घटना पिछले कुछ समय से तुम्हारे या हमारे साथ घाटी उसमे तुम्हारा कोई दोष नहीं है ये हम जानते है पुत्र कंटकासुर ने जो भी किया वो सब अनुचित किया ये भी हम जानते है पुत्री उसके मन में सर्वसक्तिसाली बनने का लोभ आ गया है अब वो किसी की अच्छे किसी के प्रेम के योग्य नहीं है समय आने पे अपने हे पिता के साथ ज्ञात करने का पुत्रद्रोह का दंड उसे अवश्य प्राप्त होगा पुत्री भले हम उसे कसंहा कर दे पैर कोई अवश्य उसे दंड देगा

वातापी ....... क्या उन्हें फिर से मार्ग पे लेन का कोई मार्ग नहीं पिता श्री

असुरगुरु ........पुत्री रात्रि में रौशनी उन्हें दिखाई जाती है जो देख शामे आँख के अंधे को रौशनी दिखने का कोई लाभ नहीं

कंटकासुर किसी के बहकावे में आ कर ये सब नहीं कर रहा है अपितु भोग विलाश मोह माया मध् में चूर हो कर कर रहा है उसे फिर से उचित मार्ग पे नहीं लाया जा सकता उसने पुरवा में हे बहुत पाप करम किये जिन्हे हमने नजरअंदाज कर दिया आवर उसे जीवन दान दिया किन्तु अब हम कुछ नहीं कर सकते पुत्री बस इतना ख्याल रखना की वो कभी पुत्र काल की नजरो में न आये अनयथा उसके पाप करम काल से छुपे रह नहीं पाएंगे आवर काल उसका अंत कर देगा

वातापी ......नहीं नहीं पिता श्री ऐसे वचन न बोलिये हम उनसे आज भी उतना हे प्रेम करते है

असुरगुरु ........ तुम्हारे प्रेम ने हे उसकी सांसो की डोर जोड़ राखी है पुत्री अनयथा इतने पापो के पश्चात तो उसका अंत कब का हो चूका होता आवर पुत्री एक अनुरोध भी है भविष्य में पुत्र काल तक पहुंचने की कोशिश न करना जब तक हम सवयं तुम्हारी भेट नहीं करवाते उसे पसंद नहीं कोई उसकी इच्छा के विरुद्ध उस के समीप पहुंचे

वातापी .....जी पिता श्री हमें कसंहा करे भविष्य में हम आपके वचन का मान रखेंगे

किन्तु आपने कभी हमें मानसी के विषय में नहीं बताया पिता श्री

असुरगुरु ....... पुत्री एक सत्य है जो मैंने सभी से छुपाया है पुत्री मानसी मेरी नहीं नरकासुर की पुत्री है

वातापी .......क्याआआ पैर ये कैसे संभव है पिता श्री

असुरगुरु ........ ये पाप हमसे क्रोधवश हुआ पुत्री किन्तु आज नियति ने हमारे पाप को पुण्य में बड़ा दिया असुरमहल में पुत्री मानसी वो प्राप्त नहीं कर पति जो आज उसे प्राप्त है

वातापी ......ऐसा क्या प्राप्त कर लिया मानसी ने पिता श्री जो वो असुरमहल में प्राप्त नहीं कर पति

असुरगुरु ........काल उसने पुत्र काल को पा लिया पुत्री वातापी जो असुरमहल में पुत्री मानसी कभी पा नहीं सकती आज वो केवल पुत्री मानसी नहीं रही बल्कि वो ब्लैक ड्रैगन प्रिंसेस बन चुकी जिसके एक इसारे पे पूरा असुरलोक नस्ट हो जाये

वातापी .......पिता श्री हम पहले से हे जिज्ञासु है आप उनके विषय में बता जार हमारी जिज्ञाषा आवर न बढाइये

असुरगुरु....... ये सत्य है पुत्री अब तो लगता है जैसे नियति ने बहुत पहले हे पुत्री मानसी के भाग्य में पुत्र काल की अर्धागिनी होना लिख दिया था

वातापी ....... पिता श्री कहे काल आवर मानसी से मिलना है

असुरगुरु ....... सिगरा हे पुत्री मानसी का विवाह पुत्र काल से होना है पुत्री हम काल से इस विषय पे चर्चा करेंगे अभी तुम महल लौट जाओ पुत्री हमें भी कुछ विश्राम की आव्सय्कता है

वातापी .....जी पिता श्री आज्ञा दे परनाम

असुरगुरु ....... कल्याण हो पुत्री

सक्तिपुर फार्महाउस............

विक्रम अपने रूम में बैठा सरब पि रहा था वही मेज पे बहुत सी नंगी तस्वीरें पड़ी थी

यही वो तस्वीरें थी जिसकी कीमत विक्रम ने 5 लाच दी थी

दरशल आज दोपहर को विक्रम को एक no. से कॉल आता है जिसमे अजय के दोनों दोस्तों ने किसी सॉफ्टवेयर के मदद से आवाज बदल कर विक्रम से बात की वह कुछ पिछ भेजी जिसमे सूर्य विधि आवर गायत्री के साथ सेक्स करते हुए नजर आ रहा था आवर कुछ पिछ में विधि गायत्री आवर कोमल के साथ अलग अलग पिछ थी

विक्रम जहा पहले रिकॉर्डिंग सुन कर गुस्से में था ( ये वही रिकॉर्डिंग थी जो दोस्त 2 ने अजय के साथ हवेली में सरब पिटे हुए की थी )

वही अब विक्रम विधि आवर गायत्री की नंगी तस्वीरें देखते हुए अपने नागराज को सहला रहा था

सुमन दरी सहमी बीएड के एक कोने में बैठी हुए थी पूरी नंगी हो कर

कभी विकर्म के चेहरे पे हवश नजर आती तो कभी विक्रम उन तस्वीरों में सूर्य को विधि आवर गायत्री के साथ सेक्स करता देख गुस्सा होता

20 25 मिनट्स तक यही सब चलता रहा फिर विक्रम सभी तस्वीरें उठा अलमारी में लॉक कर सुमन के पास जा पंहुचा

जो विक्रम को पास आता देख खुद को डरने वह रोने से नहीं रोक पाई पैर विक्रम वो शैतान था जिसपे इसका राति भर भी असर न हुआ

आवर जबरदस्ती अपना अकड़ा हुआ लिंग सुमन की जख्मी सूजी हुई गांड में पेल देता है

सुमन चिक्ति चिलाती रही पैर कोई उसे इस हैवान से बचने वाला नहीं था

रात भर अनगिनत बार भोगने के बाद सुबह के वकत विक्रम सो गया

सुमन बहुत ज्यादा टूट चुकी थे विक्रम की हैवानियत से जैसे उसमे जीने की इच्छा हे ख़तम हो गई हो

सुमन किसी तरह से रेंगते हुए मेज तक पहुंची जहा विक्रम की आधी खली सरब की बॉटल राखी थी

सुनाम पता नहीं क्या सोच कर बॉटल उठा कर अपने मुँह से लगा लेती है

कुछ सरब हलक में उतारते हे उसे उबकाई आती है पैर फिर भी बची हुई सरब पूरी पि कर वह खली बॉटल ले सोये हुए विक्रम के पास जा पूरी रकत से बॉटल विक्रम के सर पे दे मरती है

विक्रम के जोर की चीख के साथ उठा बैठा सामने सुमन के हाथो में टूटी हुई बॉटल थी जिसका फिर से वो विक्रम पे बार करने वाली थी की विक्रम तेजी से अपने दर्द की भुला कर सुमन को दबोचता है आवर ुशी के हाथ में पकड़ी टूटी हुई बॉटल को सुमन के पेट में अनगिनत बार गुस्सा देता है

सुमन खून से लत पथ जमीं पे गिरे हुए चीख आवर तड़प रही थी

विक्रम गुस्से में सुमन के सर पे लत मरता है

एक ....काट .....की आवाज आवर सब संत हो गया

विजडम के वॉर से सुमन की गर्दन की हड्डी टूट जाती है जिससे उसके प्राण निकल जाते है

विक्रम सुमन को ऐसा हे छोड़ बाथरूम जाता है आवर अपने सर से बाह रहे खून को साफ करते हुए सुमन को न जाने क्या क्या गली देता है

कुछ देर बाद सर पे पट्टी बंद विक्रम बहार निकलता है

आवर सुमन की लाश को उठा कर पीछे ले जा कर जला देता है

घर पहुंचते हे विक्रम मल्टी की सास का भी खून कर सुमन की जलती हुई लाश में दाल देता है

विक्रम की नजरो में तो किसी ने उसे नहीं देखा पैर 2 आँखे उसे निरंतर देख रही थी पीछे कुछ दिनों से

विक्रम फिर से सरब पीना सुरु कर देता है

कुछ देर बाद विक्रम अपनी अलमारी खोल कर उन तस्वीरों को बहार निकलता है आवर उनकी अपने मोबाइल से कुछ पीछे खीचता है

जैसे उसके मंद में कुछ शैतानी चाल चल रही थी ..................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............
 
अपडेट 212

विक्रम सुमन को ऐसा हे छोड़ बाथरूम जाता है आवर अपने सर से बाह रहे खून को साफ करते हुए सुमन को न जाने क्या क्या गली देता है

कुछ देर बाद सर पे पट्टी बंद विक्रम बहार निकलता है

आवर सुमन की लाश को उठा कर पीछे ले जा कर जला देता है

घर पहुंचते हे विक्रम मल्टी की सास का भी खून कर सुमन की जलती हुई लाश में दाल देता है

विक्रम की नजरो में तो किसी ने उसे नहीं देखा पैर 2 आँखे उसे निरंतर देख रही थी पीछे कुछ दिनों से

विक्रम फिर से सरब पीना सुरु कर देता है

कुछ देर बाद विक्रम अपनी अलमारी खोल कर उन तस्वीरों को बहार निकलता है आवर उनकी अपने मोबाइल से कुछ पीछे खीचता है

जैसे उसके मंद में कुछ शैतानी चाल चल रही थी ..................

अब आगे .........


सूर्य सुबह परीलोक जा कर पारिजात रिद्धि जीनत जिनिशा चारो से मिल उनके साथ कुछ लम्हे प्यार भरे बिता कर

वापिस u.s.a लौट आया था आते हे किरण ने सूर्य को गरमा गरम कॉफ़ी थमते हुए सूर्य की गॉड में जा भेथी

सूर्य भी उतने हे प्यार से अपनी स्वीटी के होंटो को चुम कर कॉफ़ी की चुस्की ले कॉफ़ी मग स्वीटी के होंटो से लगा देता है

किरण भी कॉफ़ी की चुस्की ले फिर से सूर्य के होंटो से लगा देती है

ये करम तब तक चलता रहा जब तक कॉफ़ी फिनिश न हुई

किरण ....... मिल आये अपनी बाकि सभी प्रेमिकाओ से

सूर्य .....सभी से नहीं स्वीटी बस उन्ही से जो परीलोक में मौजूद थी

किरण ......मतलब उन दोनों को भी सन्देश भिजवा दिया था परिधि ने

सूर्य ......है तभी तो वो दोनों भी पहले वह मौजूद थी

ये दोनों अभी बात कर हे रहे थे की तभी वह राधिका जी भी आ पहुंची

किरण .....उठ गई भाबी आप यहाँ बैठिये मैं आपके लिया कॉफ़ी पति हूँ

राधिका ......मैं ले लेती हूँ तुम बैठी स्वीटी

पैर तब तक किरण किचन में जा चुकी थी

सूर्य ......... अब कैसा लग रहा है आपको

राधिका .....मुझे क्या हुआ था मैं तो बिलकुल ठीक हूँ

सूर्य ......अच्छा है रात में इतनी ड्रिंक करने बाद भी

राधिका .......पता नहीं पैर मुझे अभी भी अच्छा फेल हो रहा है पहले वार्न्स पहले जब भी कभी रोहन के साथ ड्रिंक्स करती थी तो सुबह पूरा सरीर भरी भरी लगता था

पैर आज बिलकुल उल्टा हो रहा पूरा सरीर फ्रेश आवर हल्का फेल हो रहा है

सूर्य ......सायद वो शैम्पेन का असर है

राधिका जी ..... नहीं सूर्य मैंने पहले भी ये सब तरय कर चुकी हूँ

सूर्य ...... अच्छी बात है की आपको अच्छा फेल हो रहा है

किरण .....ये लीजिये कॉफ़ी भाबी आवर आप जाइये आवर गर्दन के लिया अच्छे फूल पौधे ले कर आइये

सूर्य ...... ठीक है मुझे कुछ आवर काम भी है तो आने में थोड़ा लेट हो सकता है

किरण ......OK तब तक हम आपसे पे बात चित कर लेते है आवर घर पे भी

सूर्य वह से बहार निकल गायब हो जाता है आवर सीधा सूर्यगढ़ पंहुचा मेर्री जी की रूम में

रूम को अंदर से लॉक देख कर सूर्य समाज जाता है की मेर्री जी अंदर हे है सायद बाथरूम में

सूर्य वही अपनी t-shirts निकल कर बीएड से सहारा बेथ कर वही राखी बुक उठा कर देखने लगता है

तभी मेर्री जी अपने गीले बालो को पोछती हुई

बाथरूम गाउन में बाथरूम से बहार निकली

सामने सूर्य को देख कर रुक जाती है

ीदार सूर्य को भी नजरे मेर्री जी से टकरा जाती है

मेर्री जी मुस्कुराते हुए अपने सरीर को सूर्य के सामने be-parda करने लगती है





सूर्य वैसे हे बैठा रहा आवर मेर्री जी को गदराये यौवन का आँखों हे आँखों से रसपान करने लगता है

मेर्री जी .....मुझे पहले पता होता की आप आ रहे हो तो आपके साथ हे बाथ लेती

सूर्य ......कोई बात नहीं अभी भी आपकी इच्छा पूरी होगी सकती है

सूर्य बीएड से उठा आवर अपने सरे कपडे निकल मेरी जी की तरफ बढ़ा मेरी जी की नजर सूर्य के जांघो के जोड़ पे उस मुसल पे पड़ती है जो किसी वाच के पेंडुलम की तरह सूर्य के सरीर से जुड़ा जल रहा था

सूर्य मेर्री जी के नंगे बदन को अपनी गॉड में उठा लेता है

मेर्री जी भी मुस्कुराते हुए उस मुसल के ऊपर बेथ सूर्य की कमर में अपने पेअर बंद लेती है

जैसे जैसे सूर्य चल रहा था सूर्य का कामदण्ड मेर्री के हैंड के बंद छेद पे अपनी आकद में टपकी मार कर मेर्री जी को अपनी आकड़ां का अहसास करवा रहा था

सूर्य बाथरूम में लेना कर मेर्री जी को निचे उतरता है आवर शावर चली कर नाइट्स हुए किश करने लगता है

जल्दी हे किश ख़तम कर सूर्य मेर्री जी को पीछे से बहो में भर गर्दन को चूमते हुए उसके सुडोल उभारो पे अपने डॉन हाथ जमा देता है

मेर्री जी बेंड शावर से खुद की उभारो को भिगोते हुए अपनी योनि को सहलाने लगती है





सूर्य .......क्या बात है ममी जी आपकी चूचियों तो दिन प्रतिदिन बड़ी होती जा रही है

मेर्री जी .......कैसे लड़के हो तुम जो मेरी ब्रैस्ट को मसलते हुए भी मुझे ममी बोल रहे हो





सूर्य ....... क्या कृ रिस्ता भी तो यही होने वाला है भले हे ममी की चित मैंने हे क्यों न खोली हो मां से पहले हाहाहा

मेर्री जी ....... फिर भी अभी ममी बानी तो नहीं न अभी तो तुम मेर्री की चित मारो जैम कर ममी की बाद में मरना हेहेहे

मेर्री जी सूर्य के बहुपस से निकल कर मेर्री जी उस 9 इंच से बड़े अस्वलिंग को अपने हाथो में थम लेती है





सूर्य ....... अब क्या इसे ऐसे हे सहलाते रहना है ऐसे तो आपकी इस फुल्ली हुई शवेद छूट की प्यास बजने वाली है नहीं

मेर्री जी ....... जानती हूँ पैर जी भर के देख तो लेने दे मुझे जो मेरे अंग अंग में उमंग भरने वाला है

मेर्री जी डेरी से अपने गुथनो के बल बेथ सूर्य के अस्वलिंग के सुपडे पे आस पास उभरी नीली नशो को चुम कर उस लिंग मंद को अपने मुँह में भर अपनी जीब पुराने लगती है मुँह के अंदर हे





मेर्री जी ......उम्म्म्मः आज इसका टेस्ट कुछ अजीब है सालती सालती कही किसी आवर की छुम का टेस्ट तो नहीं है

सूर्य को याद आता है की सुबह सुबह किरण की योनिरस में ये जहा चूका है

सूर्य .....सॉरी जल्दी में ध्यान नहीं गया वो सुबह सुबह स्वीटी के साथ

मेर्री जी .......उम्मम्मम्हा नीस टेस्ट ुम्मम्हा

सूर्य दिवार पे हाथ रख हलके हलके अपनी कमर से मेर्री के में मुख की चुदाई करने लगता है





मेर्री जी बड़े मज़े से सूर्य के अंडकोष को सहलाते हुए सूर्य के लिंग को मुँह में ीदार से उधर गुमा फिर कर चुस्ती है तो कभी कभी अपने हलके दांतो से लिंग मुंड को दबती तो सूर्य के मुँह से सिसकारी निकल जाती

मेर्री जी के ऐसा करने से सूर्य का आगरा भाग अत्यदिक मंत्र में फूलने लगता है

कुछ देर बाद सूर्य मेर्री जी के मुँह से अपना लैंड निकल वही फर्श पे लेट जाता

मर्य्य जी सूर्य की कमर के दोनों तरफ पेअर कर सूर्य के लिंगमुण्ड पे अपनी लाप्लाटि योनि राश छोड़ती योनि को उस बड़े से लाल सुपाते पे टिका देती है आवर निचे को तरफ खुद को पुस करती है





ुशी वक़्त सूर्य भी निचे से थोड़ा तेज जतका लगाया है उसे अंदाजा नहीं था की मेर्री जी खुद को निचे पुस करेगी

मेर्री जी के मुँह से हलकी से चीख के साथ हे सूर्य का लिंग मेर्री जी की योनि को चीरते हुए 6 सादे 6 इंच उस गरम गुफा में जा गुस्सा जिसमे से तप तप कर गरम लावा बाह रहा था

सूर्य मेर्री जी की कमर थम थोड़ा पीछे की आवर कर हलके हलके देखो से चुदाई सुरु करता है





3,4 मिनट्स में हे मेर्री जी का सरीर सूखे पते की तरह कपङे लगता है

मेर्री जी जल्दी चरम सुख पाने के अपनी उंगलियों से योनि के लिप्स आवर डेन को तेजी से सहलाते हुए सूर्य के लिंग पे झड़ने लगती है

सूर्यक मेर्री को खड़ा कर दिवार से लगा पीछे से एक हे बार में अपना घोडा उस हलकी खुलती बंद होती गुफा में दौड़ा दिया





सूर्य के बढ़ते प्रहार के साथ हे मेर्री जी की मुँह से कामुक सिसकारियां भी निरंतर भड़ती जा रही

मेर्री जी .....उम्मम्मम्हा उफ्फ्फ्फ़ सूर्य मेर्री जान छोड़ अपनी ममी को उम्म्म्मः निकल दे साडी गर्मी अपने इस लैंड से बहुत तड़पती है मुझे उगलिया भी दर्द करने लगती है

सूर्य मेर्री जी की गर्दन को अपने डाँडो में दबोचे हुए आवर तेजी से उस बे लगाम घोड़े को उस चिकनी गुफा में बे .लगाम छोड़ देता है दौड़ने के लिया

दोनों की सांसे निरंतर तेज होती जा रही थी

वही मेर्री जज फिर से त्यार होना रही थी कंझावला रूपी लावा अपने भीतर से निकलने के लिया





जैसे हे मेर्री जी फिर से झड़ने को हुई बदहवाशी में न जाने क्या क्या बड़बड़ाने लगी साथ हे नहीं सूर्य के सर को सहलाती तो कभी अपनी योनि के डेन को

जल्द हे मेर्री जी के पेअर कपङे लग जाते है

मेर्री जी की बॉडी थोड़ी होते देख सूर्य समाज जाता है की मेर्री जी की गर्मी लगभग निकल चुकी है

सूर्य कुछ देर मेर्री जी के अंगो को चुम चाट कर फिर से मेर्री जी को त्यार करता है

मेर्री जी को सीधा खड़ा कर सूर्य मेर्री जी की योनि राश से सना लिंग मेरी जी की मजबूत पैर मांश से भरी नरम दोनों जांघो के बिच योनि पे रगड़ने लगता है

कुछ देर ुशी तरह करने के बाद सूर्य मेर्री जी की एक पेअर को उठा लेता है मेर्री जी सूर्य के लिंग को थम अपनी योनि छेद पे भिड़ा देती है

सूर्य मेर्री जी की नरम गांड को अपने मजबूर पंजे में भर काश कर रखा लगाया है

सभी रुकावट पहले हे हैट चुकी थी सर सरता हुआ लिंग मेर्री जी की गर्भाशय से जा टकराया मेर्री जी के मुँह से सिसकारी निकल जाती है वही उनकी आँखों के सामने तारे तैरते हुए नजर आते है





सूर्य मेर्री जी के बेजोड़ सरीर को अपने बहुपस में लिया एक के बाद एक जतका करते हुए मेर्री जी की गांड के उस हलके लाल वह बुरे चढ़ को भी कुरेदने लगता है

मेर्री जी मज़े के आलम में सूर्य को काश कर चिपकते हुए चूमने लगती है

ीदार सूर्य का लिंग निरंतर खटोर होता जा रहा था उसकी नशे बुरी तरह से उभर आई थी जो मेर्री जी को अत्यंत सुख का अनुभव करवा रही थी

मेर्री जी .....उम्मम्मम्हा अह्ह्ह्हज्ज सूर्य ऐसे हे छोड़ो अअअअअ बहुत अच्छा लग रहा तुम्हारा ये मोटा मुसल मेरी छूट के हर हिस्से में रगड़ खा रहा है मैं फिर से झड़ने के करीब हूँ अह्ह्ह्हहजह

सूर्य .....उनमममम अह्ह्ह्हह इस बार मैं भी झड़ने वाला हूँ अह्ह्ह्हहब बस कुछ लम्हे आवर ममी जी

सूर्य द्वारा फिर ममी कहने पे मेर्री जी तुनकते हुए सूर्य केअण्डकोष को दबती देती है

सूर्य ......अह्हह्ह्ब्ब्ब्ब मेर्री उखाड़ने का इसरा है क्या उम्म्म्मः.

मेर्री ....उम्म्म्मः अभी क्या कहा अह्हह्ह्ह्ह मैं झाड़ रही हूँ सूर्य ुम्मम्हा

सूर्य भी कुछ देखो के बाद अपना सारा जहर मेर्री की फड़फड़ाती गुफा में भर देता है

मेर्री जल्दी से निचे बेथ सूर्य के स्प्रिंग्स के जैसे उछलते लिंग को मुँह में भर लेती है





सूर्य के लिंग से अभी भी रुक रुक कर कुछ करते मेर्री जी के मुँह में जा रागे थे वीर्य के

मेर्री जी अच्छे से पुरे लिंग को चाट आउच कर साफ कर देती है आखिर म लिंग के उस छेद पे अपने होंठ लगा अंदर की आवर खींचती है जिसमे रुकी 2,3 बुँदे भी मेर्री जी की मुँह में ा रुकी





मेर्री जी अपने मुँह में एकटे वीर्य के करते करते को एकता कर अपनी जुबान पे ले सूर्य को दिखती है आवर हस्ते हस्ते उसे जातक जाती है

मेर्री ......टेस्टी क्रीम

सूर्य ......आपने तो मुझे पूरा निचोड़ लिया ममी जी

मेर्री जी सूर्य के स्थितल पेस लिंग को पकड़ कर मरोड़ देती है आवर शावर ों कर नहाने लगती है

सूर्य भी कुछ मेर्री जी साथ जहा कर वह से कपडे पहन गायब हो गया

कुछ देर में मेर्री जी त्यार होना सभी लाड़जियो के साथ चहकते हुए गैप सैप में लग जाती है सूर्य वापिस जा चूका था u.s.a

ीदार सक्तिपुर हवेली से गीता ठाकुर अपनी कार से तेजी से सिटी 1 की आवर निकल गई किसी से फ़ोन पे बात करते हुए

सायद काफी जल्दी में थी गीता ठाकुर जो सिटी 1 का आधे जानते से ऊपर का सफारी 20 मिनट्स में हे पूरा कर लिया दोपहर बाद का 4 बजे का ये गर्मी का समय जिसमे ज्यादा तर लोग विश्राम करते है

ऐसे वक़्त में गीता ठाकुर को पूरा रास्ता खली सुनसान मिला

गीता ठाकुर कुछ देर बाद एक घर के सामने कार रोकती है आवर सीधा उस घर में दनदनाते हुए जा पहुंची

गेट नॉक करते हे सामने एक 40 से 45 के बिच की उम्र की महिला कड़ी थी जिसकी आँखों में दर आवर आंसू से

गीता ठाकुर को देखते हे औरत हाथ जोड़ उसके पैरो में गिर जाती है सामने छोटे से हॉल में राणा अजय के दोस्त 1 को अपने पैरो के निचे डेल हाथ में गन किये एक सोफे पे बैठा हुआ था उस से कुछ हे दुरी पे एक 45 की उम्र का आदमी आवर एक 19 ,20 साल की साडी सहमी लड़की बैठी थी जिन दोनों के हाथ बन्दे हुए थे

गीता ठाकुर अपने पैरो में गिरी उस औरत को उठा कर साइड कर गेट लॉक करती है

आवर आगे भड़ती है

राणा सोफे से उठ वो स्थान गीता ठाकुर को देता है गीता ठाकुर सोफे पे बेथ दोस्त 1 को जोरदार लत मरती जिस से उसकी पसलियों में काफी दर्द होता है

गीता ठाकुर ....... तुम और तुम्हारा परिवार कल का सूरज देखना चाहते है तो सब सच सच बताओ मुझे उस रात हवेली में क्या क्या हुआ था एक जूथ बोलै तो तुम्हारे परिवार में से एक की लाश गिरेगी

औरत ......पंकज बीटा सब सच बता दे मैं तेरे आगे हाथ जोड़ती हूँ

( दोस्त 1 पंकज )

गीता ठाकुर .........राणा उन्हें खोल दो आवर कोई भी जरा से भी चालाकी करे गोली मर देना

राणा ......... जी ठकुराइन ऐसा हे होगा

हाथ खुलते हे आदमी आवर लड़की पंकज के पास आ उसे समजने लगती है

गीता ठाकुर ये ड्रामा देख गुस्से में सीलेंसर लगी गन से एक फेयर कर देती है

गीता ठाकुर ........ टाइम नहीं है मेरे पास मुझे असली रूप में आने को विवश मत करो जो काम छोड़ चुकी हूँ फिर से वही करने को मजबूर कर रहे होंगे तुम मुझे

पंकज ....... आंटी जी मैं सब सच बताता हूँ प्लेसेस किसी को कुछ मत कीजिये

गीता ठाकुर राणा ये जो भी कहे सब रिकॉर्ड करो किसी आवर की भी खली उतरनी है

राणा ...... जी ठकुराइन

राणा अपना फ़ोन निकल वीडियो रिकॉर्डिंग सुरु कर देता है

ीदार पंकज किसी रतु तोते की तरह उस रात जो भी हुआ सब वर्ड बी वर्ड बता देता है

लास्ट में उन दोनों का प्लान सुन गीता ठाकुर अपना आपका खो देती है

आवर जैम कर पंकज की ढुलाई करती है गुस्सा तो राणा की भी बहुत ज्यादा आया जब उसने वो प्लान सुना जिसमे विधि आवर गायत्री के साथ क्या करने वाले थे वो दो कमीने दोस्त

उसे फिर एक बार अपनी मासूम बहन का रात भर रोका आँखों के सामने चलने लगा

गुस्से में राणा अपनी गन निकल गोली मरने हे वाला था की गीता ठाकुर ने उसका निशाना बदल दिया

गीता ठाकुर ......नहीं राणा जब अपना हे सिक्का खोता हो तो किसी आवर को डिश नहीं दे सकते

पंकज ......आंटी जी मैंने उन दोनों को दोस्तों की दुबई भी दी पैर वो नहीं मने वो विक्रम भाई सा को सूर्य ठाकुर के खिलाफ भड़काने वाले है

गीता ठाकुर ......सूर्य कोई बकरी का बचा नहीं जो कोई भी उसका सीकर कर ले वो बब्बर शेर है उसकी एक दहाड़ विक्रम जैसे कुत्तो पेण्ट पिली कर देती है उसका समजा करेंगे ये लोग

सुकुर करो तुम भी की मैं पहली वाली गीता ठाकुर नहीं हम मेरे बेटे सूर्य ने बदल दिया वर्ण तुम्हारे साथ साथ तुम्हारे परिवार की भी लाशे बिछा देती अब तक

आवर तुम्हारे जो दोस्त मेरी बेटियों की ेजात से झेलना चाहते थे न दोस्ती आध में उनका अनजान लौट से भी बदतर होगा क्युकी उनकी बुरी नजर उनपे पड़ी है जानकी तरफ बुरी सोच तो बहुत दूर उनकी तरफ देखने वाले की सांसे भी चीन लेगा वो

सूर्य का प्यार है विधि आवर गायत्री तुम लोगो ने ुशी पे बुरी नजर डाली जिंदगी प्यारी है आवर अपना परिवार तो जा कर माफी मांग ले उसके किसी अपने से अब तुम्हे वही बचा सकते है चलो राणा यहाँ आवर उन दोनों को उठा कर लाओ

आदमी ........ ठकुराइन मेरे बेटे से बहुत बड़ी गलती हो गई हमें बचा लीजिये मैं इसे बहुत दूर भेज दूंगा

गीता ठाकुर बहार जाते जाते रुक जाती है

गीता ठाकुर ....... खुद सोचो तुम्हारी भी एक जवान खूबसूरत बेटी है कोई इसके साथ वो सब करे तो क्या तुम सहन कर पाओगे तुम्हारे बेटे का ज्यादा दोष नहीं है इस लिया मैंने इसे जिन्दा छोड़ दिया पैर इसने गलती की जो उनके मंसूबो को जान कर भी चुप रहा

जाओ सूर्यगढ़ बाउजी ठाकुर परताप सिंह जी की हवेली अब वही है जो तुम्हारे बेटे आवर परिवार को उसके गुस्से से बचा सकता है

गीता ठाकुर तो निकल गई राणा के साथ उन बाकि 2 का पता करने

ीदार पंकज का बाप अपना बेल्ट निकल लगा पंकज की चमड़ी उतरने

औरत ....... क्या करते हो जी बीटा है ये हमारा एकलौता गलती हो गई उस से

आदमी ....... तुम्हारे इस एकलौते चिराग ने मेरी पुरे परिवार की जान खतरे में दाल दी है इस से अच्छा होता की ये जनम हे न लेता

लड़की ......पापा पहले सूर्यगढ़ चलिए मुझे दर लग रहा है आप जानते है उसके गुस्से को कैसे सूर्य ठाकुर ने दुर्जन सिंह आवर सकती सिंह को बाकि उत्सव में मारा था आवर उस m.l.a को तो पुरे गैंग के सामने ......

आदमी उठा इस नालायक को आवर साथ ले चलो इसे भी मुझे अपने परिवार को बचने के लिया चाहे इसकी हे बाकि क्यों न देने पड़े अपने हाथो से

औरत आवर लड़की जख्मी पंकज को उठा कर बहार लती है आदमी अपनी कार निकल तीनो को बैठा तेजी से सूर्यगढ़ की आवर निकल लेता है

करीबन 04: 40 पे हवेली के बहार कार रूकती है

दरबान ......जी आप कोण किस से मिलना है

आदमी .....हमें बड़े ठाकुर जी से मिलना है

दरबान ......वो तो कुछ देर पहले हे निकल गए सूरजगढ़ की तरफ कुछ जरुरी है तो ठकुराइन जी है हवेली पे

औरत ......भाई हमें उनसे हे मिला दीजिये आपकी बहुत मेहरबानी होगी बड़ी मुसीबत में है

दरबान कार में लहूलुहान लड़के को आवर उसके साथ बैठी औरत आवर लड़की को इस तरह रोटा देख गेट खोल देता है

आप लोग अंदर चलिए मैं ठकुराइन को खबर देता हूँ

औरत ......बहुत बहुत धन्यवाद भाई आपका

दरबान .....भाई भी कहती हो बहन आवर धन्यवाद भी करती हो ये कैसा रिवाज है जाओ बहन यहाँ से कोई खली हाथ नहीं जाता है आप भी नहीं जाओगी

आदमी नमस्ते कर कार आगे बढ़ा देता है

दरबान अपने साथी को ध्यान रखने का बोल कर अंदर की तरफ चल देता है

दरबान ...... चलिए आप सब अंदर चलिए अभी सायद सभी आराम कर रहे होंगे मैं खबर देता हूँ उन्हें

दरबान दादी जी के रूम के बहार से हे दस्तक देता है कुछ देर बाद दादी जी बहार निकलती है

दादी जी ......रामु क्या हुआ बीटा कुछ चाइये क्या

रामु ...... ठकुराइन कुछ लोग आये है बड़े ठाकुर से मिलने सायद वो बहुत परेशान है आवर एक लड़का जख्मी भी है

दादी जी .....तुम उन्हें पानी वगेरा दो आवर डॉक्टर को कॉल कर हवेली आने को कहो जल्द से जल्दी

रामु .....जी ठकुराइन जी

कुछ देर बाद दादी जी जैसे हे हॉल में पहुँचती है तो औरत रोटी हुए उनके पेअर पकड़ लेती है

दादी जी ......अरे बेटी ये क्या कर रही हों तुम उठी बेटी

औरत ......मेरे बेटे को बचा लीजिये माँ जी

दादी जी ........चिंता न कर बेटी उसे कुछ नहीं होगा चल कड़ी हो जा

औरत .....जब तक आप वचन नहीं देती माँ जी मैं आपके पेअर नहीं छोड़ूंगी

औरत का रोना सुन कर बाकि सभी भी अपने अपने रूम से निकल आये कुछ अभी अभी उठे थे जो अपनी आँखे मसलते हुए बहार आये

दादी जी ...... ठीक है बेटी मैं वचन देती हूँ किसी को कुछ नहीं होगा अब उठो बेटी चिंता की कोई बात नहीं है

औरत दादी जी के पैरो में से उठ कड़ी हुई शालिनी जी आगे भाड़ नन्हे पानी का गलाश थमा देती है

शालिनी जी ....... कोमल बेटी जरा डॉक्टर को कॉल कर हवेली आने का कहो बेटी

कोमल ......जी मम्मी

शालिनी जी ......आप सबकी ऐसे हालत किसने की आवर आप लोग हो कोण

आदमी ....... जी मेरा नाम राजेश आवर ये मेरी पत्नी मधु आवर ये मेरी बेटी नंदिता है आवर ये नालायक मेरा बीटा पंकज हम सिटी 1 में रहते है

शालिनी जी ...... आप आने हे बेटे को नालायक कह रहे है कुछ समजे नहीं

इतने में हवेली में 2 डॉक्टर आते है एक मेल डॉक्टर आवर एक फीमेल डॉक्टर

दादी जी ...... इस बचे का इलाज करना है आपको

डॉक्टर .....जी ठकुराइन सा क्या कोई रूम मिल सकता है

दादी जी ......है क्यों नहीं ीदार से तीसरा रूम गेस्ट रूम है वगैसका इलाज कर सकते है आप

आदमी पंकज को सहारा दे कर उस room.me ले जाता है

दादा जी ......बेटी तुमने बताया नहीं की ये तुम्हारे बेटे की हालत किसने की

मधु ......माँ जी इसकी हालत उसके पापा आवर गीता ठाकुर ने की है

दादी जी .....क्या पैर उन्होंने ऐसा क्यों किया एक बाप भला अपने बेटे को क्यों मरेगा वो भी इस तरह से

मधु ....... माँ जी उसने गलती हे ऐसे की है की वो तो गीता ठाकुर ने जान बकश दी वर्ण

दादी जी ...... बेटे साफ साफ पूरी बात बताओ मुझे की गीता बेटी ने ऐसा क्यों किया जरूर कोई वजह है जो तुम चूका रही हो

नंदिता .......दादी जी मैं बताती हूँ आपको इसकी वजह

नंदिता जो कुछ भी पंकज ने बताया वो सब कुछ सभी को बता देती है

शालिनी जी ......ये तो बहुत गलत किया तुम्हारे भाई ने बेटी मन की वो उनका साथ नहीं दे रहा था पैर बात दो लड़कियों की जिंदगी से जुडी थी उसे काम से काम अपनी तरफ से कोशिश तो करनी चाइये थे एक बार गीता या रुक्मणि को या फिर जिसे दोस्त मन उसे सचेत कर देना चाइये था

जितना पाप करने वाला पापी होता है उतना हे उसे देख कर छुपाने वाला भी दोषी होता है

मधु .....जानती हूँ बहन जी पैर माँ हूँ अपने हे सामने अपने खोख को उजड़ते हुए देख नहीं सकती आप भी एक माँ है आप समाज सकती है

शालिनी जी ....... एक माँ की ममता समाज सकती हूँ पैर बीटा गलत करे तो उसे सजा भी देने की हिमत रखनी चाइये

दादी जी ......शालिनी बेटी सही कह रही है बेटी बचे गलती करे तो उन्हें सजा मिलने चाइये न की हम उनकी गलतिया छुपाये व नजर अंदाजा कर दे पैर तुम सब यहाँ क्यों आये ये अभी भी समाज नहीं पाई मेल आवर आपको यहाँ किसने भेजा

मधु ....... हमें गीता जी ने भेजा यहाँ अब आप हे बचा सकती है माँ जी

दादी जी ....... पैर किस से बचाना है ये तो बताओ बेटी हमने तुम्हे वचन दिया है तुम्हारी तरफ आने वाले हर खतरे से मेरा बीटा सूर्य रक्षा करेगा

मधु ......जी माँ जी जानते है इस लिया तो यहाँ आये है अब आप हे मेरे बेटे को बचा सकती है आपके पोते सूर्य ठाकुर के गुस्से से

कुछ लोगो को ये बात अजीब लगी की सूर्य भला क्यों करेगा इनके बेटे को पैर कुछ लोग समाज गए थे की यहाँ सूर्य का भन्दा पुतने वाला है

दादी जी ........ मैं कुछ सामजी नहीं मेरा पोता सूर्य क्यों तुम्हारे बेटे को नुकसान पहुचायेगा

शालिनी जी ....... मैं समाज गई माँ सा उन्होंने पहले आपसे वचन क्यों नंगा क्यों सूर्य के गुस्से से डरके ये लोग यहाँ आये है

दादी जी ......फिर मुझे भी समजाओ बेटी आखिर पूरा माजरा क्या है

कोमल ......मैं बताती हूँ माँ सा क्युकी विधि आवर गायत्री उनसे प्यार करती है आवर ये भी उन्हें पसंद करते है

कोमल ने बिना नाम लिया हे दादी जी को क्लीन बोल्ड कर दिया था

दादी जी ...... शक भरी नजरो से शालिनी जी को देखती जो है में गर्दन हिला देती है

दादी जी ....... बागवान हे जाने ये कहा जा कर रुकेगा ( ये सब बहुत डेरे से कहा जो सिर्फ पास कड़ी कोमल को हे सुनाई दिया )

कोमल ......ये तो वही जाने माँ सा

दादी जी ........पानी दे बेटी

कोमल जल्दी से पानी दाल कर गिलास उन्हें देती है

दादी जी ........... इतना सब हो गया आवर मुझे खबर तक नहीं

शालिनी जी ........ मुझे भी कहा पता था माँ सा पैर अब मुझे यकीं हो गया है आवर इनका दर भी जायज है आप तो जानती है सूर्य को वो अपनी के पार्टी कैसे भाव रखता फिर उसे आवर कुछ समाज नहीं आता है

राजेश ......माँ जी अब आप हे बचा सकती है मेरे परिवार को मैं इसे बहुत दूर भेज दूंगा

दादी जी ......... बीटा मैंने वचन दिया है मेरे वचन का मान मेरा बीटा रहेगा पैर दुबारा ऐसा हुआ तो मैं भी कोई मदद नहीं करूंगी रही बात दूर भेजने की तो उस की नजरो से वही बच सकता है जो इस दुनिया से जा चूका हो कोशिश करना की फिर से कोई गलती न हो उस से सूर्य को इस बार तो मैं रोक लुंगी

मधु ........ जी माँ जी मैं इसका ध्यान रखूंगी

नंदिता जो कुछ परेशान से लगी

दादी जी ......क्या हुआ बेटी तुम क्यों परेशान हो

नंदिता ......वो दादी जी वाशरूम.....

कोमल ....... आप मेरे साथ आइये मैं ले चलती हूँ .

नंदिता कोमल के साथ चल देती है

दादी जी ......बीटा तुम भी एक जवान बेटी के पिता हो तुम्हे इसका ख्याल रखना चाइये की बचे कैसे सोबत में उठ बेथ रहे है

देखा कैसे किसी आवर के साथ साथ तुम्हारा बीटा भी आ गया लपेटे में आ गया किया किसी आवर ने सजा इसकी भुगतनी पड़ी ये भी सुकर करो की सस्ते में मामला निपट गया

राजेश ......... जी माँ जी आपने बिलकुल सही कहा

कुछ देर में पंकज को सहारा दे कर डॉक्टर ले कर आता है

पंकज सीधा दादी जी के पेअर पकड़ अपनी गलती मंटा है

दादी जी ........ भी उसे थोड़ा बहुत समजा कर माफ कर देती है

पायल सभी को कॉफ़ी देती है

मधु ......ये नंदिता नहीं लौटी बाथरूम से

दादी जी....... हम उम्र बछिया है बात चित करने लग गई होंगी

मधु .....आपका पोता सूर्य ठाकुर नहीं दिख रहा माँ जी

दादी जी ....... बहु के साथ हनीमून पे गया है अमेरिका 3,4 दिन में लौट आएगा

मधु ......... अभी मुझे याद आया कुछ दिन पहले उनकी हे सदी थी न सूरजगढ़ के मंत्री जी के घर

दादी जी ......है बेटी ुशी की सदी थी लो

रेखा जी ............कोमल आवर नंदिता बेटी भी आ गई

कोमल बीटा काफी टाइम लगा दिया

कोमल ......मम्मी वो हम लोग कुछ बात करने लग गए थे

मधु जी .......कोमल तो इनकी बेटी है न फिर आपको मम्मी

रेखा जी ......हेहेहे सभी लड़किया हमारी बेतिया है भले हे जनम हम से किसी ने भी दिया हो वैसे कोमल मेरी बेटी है आवर शालिनी की लाड़ली वैसे हे सूर्य को जनम शालिनी ने दिया पैर वो लाडला हम सब का है

उदार राणा आवर गीता ठाकुर दोस्त 2 एंड 3 को सिटी 1 में उनके घर पे आवर जहा कही वो हो सकते थे सब जगह तलाश की पैर वो नहीं मिले

राणा उनके घरो पे नजर रखने के लिया अपने आदमी छोड़ कर हवेली लौट आया गीता ठाकुर के साथ

हवेली में कदम रखते हे गीता ठाकुर की गुस्से में भरी दहाड़ सुन अजय अपने रूम आवर बाकि तीनो ( विधि गायत्री रुक्मणि जी ) भागते हुए बहार आते है

एक पल को तो राणा भी सोच में पद गया की कही गीता ठाकुर सराफत का चोला उतर तो नहीं दिया

अजय जैसे हे गीता ठाकुर के सामने आया गीता ठाकुर दे दाना दान लात गुस्से थपड से अजय की अगले 5 मिनट्स ऐसे ढुलाई की की बैश हवेली में चीखे आवर .....बचाओ .....बचाओ की आवाज हे गूंजती रही

रुक्मणि विधि गायत्री किसी की हिमत न हुई की वो आगे भाड़ गीता ठाकुर को रोके

राणा आगे भद्दा पैर गीता ठाकुर की जलती आँखे देख अपने कदम पीछे ले लेता है

गीता ठाकुर ........... मैंने मन किया था न उन सपोलो से दूर रहने का देख अब उनसे दूर न रहने का नतीजा वो तुम्हारी हे बहनो की ेजात के साथ खेलने की सोचे बैठे है एक को तो सीधा कर दिया पैर 2 बच गए

अजय ........बड़ी मम्मी मैंने क्या kiya.....ahhhhhh

रुक्मणि जी ......रुक जाइये दीदी आखिर बात क्या है

गीता ठाकुर वो रिकॉर्डिंग रुक्मणि को दिखती है जिसे विधि आवर गायत्री भी गौर से देखते है

जैसे हे वीडियो एंड हुआ वही गेट के पास रखे डांस से रुक्मणि जी बे थषा अजय की ढुलाई करने लगती है

पर कब तक एक माँ अपने हे खून को पानी की तरह बहती रुक्मणि जी के हाथ से डंडा चुत कर निचे गिर जाता है रुक्मणि भी फुट फुट कर रोने लगती है विधि आवर गायत्री दोनों उसे संभालती है

रुक्मणि जी .......गंदे खून की नेसल भी गन्दी हे निकली आज तूने मेरे ढूढ को पानी कर दिया अजय

गीता ठाकुर ...... वो अनजान हो कर भी माँ बहन सामान ेजात देता रहा आवर ये हमारी खोख से जानने सपोले उसके किये हे मन में जहर भरे बे थे है हमारी हे परवरिश नीच थी जो ऐसे औलाद को 9 मशीन गर्हब में रख हर दर्द सहा ये सोच कर की बुढ़ापे में हमारा सहारा बनेगा पैर जैसा उनका खून हे ग्रांडे नीच दर्जे का हो

रुक्मणि जी ......निकल जा इस घर से मर गया है तू भी हम सब के लिया बस अब मेरी दो हे औलाद है मेरी दोनों बेतिया पता होता की तू ऐसा निकलेगा तो तुझे जनम देते हे गाला चोट देती

अजय दर्द के बाद भी रेंगता हुए रुक्मणि जी के पैरो को पकड़ अपना सर उनके पैरो में रख देता है

अजय ......मम्मी मुझे माफ कर दीजिये मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी आपकी बात न मन कर मुझे माफ कर दीजिये जैसा आप कहेगी वही करुगा मम्मी आपकी सौगंध आज के बाद आपका लायक बीटा बन कर दिखाऊंगा बस एक आखिर मौका दे दीजिये मम्मी या फिर मुझे जान से मार दीजिये

अजय दिल से माफी मांग रहा था उसकी आँखों से जो आँशु बाह रहे थे वो उसकी पश्चाताप के आंसू थे एक माँ भला कैसे अपने बेटे की तपिश को नहीं पहचानती

रुक्मणि जी ....... तुम्हारा फैसला दीदी करेगी की तुम्हे आखिर मौका देती है या सजा

अजय गीता ठाकुर के पैर पकड़ अपने आसुओ से पैरो को भिगोने लगता है

गीता ठाकुर की भी आँखे आंसूहो से सजल हो उठी थी

गीता ठाकुर एक बार विधि गायत्री आवर रुक्मणि को देखती है जो उम्मीद से गीता ठाकुर को देख रही थी

गीता ठाकुर ...... तुम्हे एक हे शर्त पे माफ करूंगी अजय वर्ण अभी तुम यहाँ से जा सकते

अजय ......मुझे आपकी हर शर्त मंजूर है मम्मी बस आखिर मौका दे दीजिये

गीता ठाकुर .......कल से तुम कॉलेज जाओगे वह सीधा हवेली आवर हवेली से सीधा खेत में मजदूरों के साथ मजदुर बन कर काम करोगे एक छोटी से भी गलती की तो इस हवेली का द्वार हमेशा के लिया बंद आवर विक्रम से कोई रिस्ता नहीं रखोगे न उस से बात करोगे जब तक सुधर नहीं जाते नोकरो के साथ हे रहोगे उनके हे जैसा बन कर

अजय ........मुझे सब मंजूर है मम्मी आपको कोई ऐसा मौका नहीं दूंगा जिस से आपको फिर कभी मेरी वजह से तकलीफ हो

गीता ठाकुर ..........राणा इसे हवेली के पीछे बने रूम में छोड़ आओ आवर इसका इलाज भी करवा देना ठीक होते हे इसकी जिम्मेदारी तुम पे होगी आज से ये जब तक खुद को बदल नहीं लेता एक नौकर की तरह हर वो काम करेगा जो करना चाइये

राणा .......जी ठकुराइन जैसा आप कहे

राणा अजय को ले कर चला जाता है

ीदार गीता ठाकुर भी रुक्मणि को साथ ले ऊपर रूम चल देती है ..............

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