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- Dec 5, 2013
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Part - 27
माणिक ने पारी की सलाह को गंभीरता से लिया. उसने पारी की मदद से अपनी एक अच्छी प्रोफाइल बनायीं, जिसमे उसने अपनी पढाई के saath-saath अपने शौकों (जैसे, रात में तारे देखना और पुराणी हिंदी फिल्में देखना) का भी ज़िक्र किया.
अगले कुछ घंटों तक, माणिक, जो आमतौर पर घंटों जटिल समीकरणों (काम्प्लेक्स एक्वेशन्स) को हल करने में बीतता था, अब सावधानी से alag-alag प्रोफाइल्स को 'स्वाइप' कर रहा था. यह उसके लिए एक बिलकुल नयी दुनिया थी.
शाम hote-hote, जब माणिक अपने कमरे में बैठा अपनी केमिस्ट्री की किताब खोलने hi वाला था, तभी उसके फ़ोन पर एक नोटिफिकेशन आया.
"कोंग्रटुलतिओन्स! You've गोत ा नई मैच!"
माणिक का दिल ज़ोर से धड़का. उसने जल्दी से फ़ोन उठाया. उसका पहला मैच!
पारी कमरे में चाय लेकर आयी और उसने माणिक को लगभग जमे हुए देखा.
पारी: (हँसते हुए) क्या हुआ? क्या कोई नया ग्रेविटी फार्मूला मिल गया?
माणिक ने बिना कुछ कहे, पारी की तरफ फ़ोन घुमा दिया.
पारी: (ख़ुशी से चिल्लाते हुए) ओह माय गॉड! मैच! बधाई हो भाई! मेरी सलाह काम कर गयी!
प्रोफाइल पर एक लड़की की तस्वीर थी, जिसका नाम आस्था था. वह एक ग्राफ़िक डिज़ाइनर थी और उसने अपने बायो में लिखा था की उसे कला और विज्ञानं के बीच संतुलन पसंद है.
पारी: (Manik ko ut उत्साहित karte hue) Wah bahut acchi lag rahi hai! Ab der kis baat ki? Jaldi se message karo!
माणिक: (घबराते हुए) मैसेज? क्या लिखूं? मैं क्या बात करून? मुझे नहीं आता! यह कोई प्रयोगशाला (लैब) की रिपोर्ट नहीं है!
पारी: (आँखें घूमते हुए) बस वही लिखो जो तुम सोचते हो! चलो, मैं बताती हूँ.
पारी ने फ़ोन लिया और टाइप किया:
पारी (माणिक): "Hi आस्था! आपकी प्रोफाइल अच्छी लगी. खासकर कला और विज्ञानं वाला पॉइंट. एक वैज्ञानिक होने के नाते, मैं अक्सर संतुलन खोजने की कोशिश करता हूँ. आपकी डिज़ाइन की दुनिया कैसी है?"
पारी ने मैसेज भेज दिया.
माणिक: (चिंता से) तुमने भेज दिया! क्या यह ज़्यादा 'किताबी' नहीं है?
पारी: यह 'माणिक' जैसा है, जो सही है! वह जानती है की वह एक साइंटिस्ट से बात कर रही है. अब ज़्यादा मत सोचो.
माणिक को अभी भी असहजता महसूस हो रही थी, लेकिन एक हलकी सी उत्तेजना भी थी. उसे एहसास हुआ की यह रास्ता, जो पारी ने दिखाया, अकेले कमरे में मचलने से कहीं ज़्यादा स्वस्थ और सही था. अब उसकी साड़ी निराशा एक नयी उम्मीद में बदल रही थी.
माणिक: अच्छा, अब क्या? क्या तुम मुझे आगे भी सलाह देती रहोगी?
पारी: (मुस्कुराते हुए) ज़रूर, भाई. मैं तुम्हें 'डेटिंग गुरु' बनकर गाइड करती रहूंगी. पर याद रखना, असली खेल तुम्हें खुद hi खेलना है. अब यह फ़ोन रखो और चाय पियो. और हाँ, अगर उसका रिप्लाई आये तो सीधे मेरे पास आना!
माणिक ने चाय का कप पकड़ा, पर उसकी आँखें baar-baar फ़ोन पर जा रही थीं. उसका मैं अब केमिस्ट्री की किताब में नहीं, बल्कि आस्था के रिप्लाई का इंतज़ार कर रहा था. एक नया, अंजना सफर शुरू हो चूका था.
माणिक और पारी, दोनों hi बेताबी से फ़ोन की स्क्रीन घूर रहे थे. कुछ देर की चुप्पी के बाद, जैसे hi माणिक ने हिम्मत हारकर चाय का आखरी घूँट लिया, फ़ोन की घंटी बजी.
पारी: (ख़ुशी से uchhal-kar) आ गया! रिप्लाई आ गया!
माणिक ने लगभग झपटकर फ़ोन पकड़ा. उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था.
आस्था का मैसेज:
"Hi माणिक!
थैंक्स! मुझे भी तुम्हारी प्रोफाइल पढ़कर अच्छा लगा. संतुलन तो हर जगह ज़रूरी है, खासकर डिज़ाइन में! मेरे लिए डिज़ाइन की दुनिया साइंस से ज़्यादा आर्ट है... पर हाँ, बिना लॉजिक के कुछ नहीं चलता. अच्छा बताओ, स्टरगाजिंग के लिए तुम्हारी पसंदीदा जगह कौन सी है?"
माणिक ने मैसेज को काम से काम तीन बार पढ़ा. वह मुस्कुराया.
माणिक: उसने जवाब दिया! और उसने सवाल भी पूछा है!
पारी: (ख़ुशी से) हाँ! यह बहुत अच्छा संकेत है! वह तुममें दिलचस्पी ले रही है. अब ज़्यादा 'वैज्ञानिक' मत बन जाना, थोड़ा रोमांटिक और कासुअल जवाब दो.
माणिक: रोमांटिक? मैं क्या लिखूं? की मुझे उसके साथ स्टरगाजिंग करनी है?
पारी: (माणिक को एक halka-sa धक्का देते हुए) नहीं! अभी नहीं! थोड़ी मिस्ट्री रखो! चलो, मैं बताती हूँ.
पारी ने फ़ोन लिया और टाइप किया:
पारी (माणिक): "मेरे लिए सबसे अच्छी जगह वह है जहाँ आसमान साफ़ हो, लेकिन अगर आप साथ हों तो शायद कोई भी जगह परफेक्ट होगी!
मेरी पसंदीदा जगह मेरे शहर से थोड़ी दूर एक पहाड़ी है. पर मुझे लगता है की मैं आपकी दुनिया (डिज़ाइन) के बारे में और जानना चाहूंगा. आप कहाँ से हैं?"
पारी ने मैसेज भेज दिया.
माणिक: (आँखें चौड़ी करते हुए) तुमने स्माइली और आँख मारने वाला इमोजी क्यों भेजा?
पारी: (हँसते हुए) क्यूंकि तुम एक बोरिंग साइंटिस्ट नहीं हो! तुम एक हैंडसम लड़का हो जो फ़्लर्ट कर सकता है! यह ज़रूरी है, भाई.
माणिक को अपनी बेहेन की यह 'डेटिंग एक्सपर्ट' वाली भूमिका बहुत मज़ेदार लग रही थी. उसे लग रहा था जैसे वह कोई नया, रोमांचक प्रोजेक्ट शुरू कर रहा हो. कुछ देर में आस्था का फिर से जवाब आया.
आस्था का मैसेज:
"ः! मुझे यह पसंद आया. और मैं इस शहर के पास hi रहती हूँ. डिज़ाइन की दुनिया तो कमल है, यहाँ हर रोज़ कुछ नया होता है. मैं आपको अपनी कुछ वेब्सीटेस दिखा सकती हूँ.
"
पारी: (विनिंग स्माइल के साथ) अब! अब मौका आ गया है! अब तुम उसे सीधे कॉल या मिलने का पूछो!
माणिक: (थोड़ा हिचकिचाते हुए) कॉल... या मिलना?
पारी: मिलना! कॉफ़ी पर. और अब यह तुम्हारा काम है! मेरे पास मेरे खुद के प्रोजेक्ट्स हैं. जाओ, भाई. अपनी किस्मत आज़माओ!
माणिक ने पारी की तरफ देखा, जिसने उसे हिम्मत और एक सही राह दिखाई थी. उसके दिल में एक अजीब सी शांति थी. वह अब निराशा के अँधेरे में नहीं था, बल्कि उम्मीद की रौशनी में एक नया कदम उठाने को तैयार था.
माणिक और पारी को खुद भी अंदाज़ा नहीं हुआ की कब डेटिंग अप्प पर आस्था से बात करने के बहाने, वे दोनों ek-doosre के और क़रीब आ गए. हर नया मैसेज, हर नया 'चैटिंग सेशन', दोनों bhai-behen के बीच एक अनकहा तालमेल बन गया था.
Baat-cheet का यह सिलसिला रोज़ शाम को शुरू होता था, जब माणिक अपने कमरे में होता एरा. पारी, माणिक के बीएड पर बैठ जाती थी, और दोनों फ़ोन की स्क्रीन पर झुके होते थे. जब पारी तेज़ी से आस्था के लिए कोई मज़ेदार या फ्लिर्टी मैसेज टाइप कर रही होती थी, तो माणिक उसके कंधे पर झुक जाता था. उसका एक हाथ अक्सर अनजाने में पारी के कंधे पर टिका होता था, और उनके शरीर सटे हुए होते थे.
माणिक की नज़रें पारी की उँगलियों की हरकत पर होती थीं, लेकिन उसका ध्यान पारी की मौजूदगी के ताप और नज़दीकी पर भी होता था. पारी को भी यह नज़दीकी अच्छी लगती थी. उसे माणिक के शरीर का सहारा, उसकी गर्म साँसों का एहसास, एक अजीब सी सुरक्षा और अंतरंगता (इंटिमेसी) देता था.
दोनों, इस सब में इतने सहज हो गए थे की उन्होंने कभी इस बात पर ध्यान hi नहीं दिया की उनके बीच की शारीरिक दूरी लगभग ख़त्म हो चुकी थी. वे इस नज़दीकी को केवल 'मैसेज टाइप करने में मदद' का हिस्सा मानते थे, जबकि यह उनके बीच का नया, अनकहा और सहज स्नेह बन चूका था.
करीब दो हफ़्तों की लगातार चैटिंग, वर्चुअल डेट्स और लम्बी baat-cheet के बाद, आस्था आख़िरकार पहली मुलाकात के लिए तैयार हो गयी.
आस्था का मैसेज:
"माणिक, मुझे लगता है की हमने ek-doosre को फ़ोन पर काफी जान लिया है. अगर तुम कल शाम फ्री हो तो मैं कॉफ़ी के लिए मिलना चाहूंगी. एक ख़ास कैफ़े है, वहां मिलते हैं."
माणिक यह मैसेज देखकर ख़ुशी से उछाल पड़ा.
माणिक: (पारी को झकझोरते हुए) पारी! उसने हाँ कर दिया! उसने हाँ कर दिया!
पारी: (खुश होते हुए) हाँ! मैंने कहा था न, मेरी सलाह कभी गलत नहीं होती! अब तुम खुद hi रिप्लाई करो!
माणिक ने तुरंत जवाब देने के लिए फ़ोन पकड़ा. तभी आस्था का एक और मैसेज aaya—yeh एक चेतावनी थी, जो माणिक को थोड़ी असहज कर गयी.
आस्था का मैसेज:
"पर माणिक, एक शर्त है. मैं जानती हूँ की तुम बहुत इंटेंस हो सकते हो, और तुम्हारी प्रोफाइल में लिखा है की तुम ज़िन्दगी में 'रोमांस' ढून्ढ रहे हो. लेकिन पहली मुलाकात में तुम्हें 'लिमिट' में रहना होगा. मेरा मतलब है... कोई हाथ पकड़ना नहीं, कोई ख़ास नज़दीकी नहीं. बस बात करेंगे, ek-doosre को व्यक्तिगत रूप से जानेंगे. अगर तुम यह वादा कर सकते हो, तभी हाँ कहना. ठीक है?"
माणिक ने यह मैसेज ज़ोर से पढ़ा. उसका उत्साहित चेहरा अचानक गंभीर हो गया.
माणिक: लिमिट? इसका क्या मतलब है? क्या वह डर रही है?
पारी: (आराम से समझते हुए, माणिक के कंधे पर हाथ फेरते हुए) नहीं, भाई. वह डर नहीं रही है. वह सिर्फ यह जानना चाहती है की तुम कितने रिस्पेक्टफुल हो. इसका मतलब है की तुम्हें जेंटलमैन बनकर रहना है. कोई जल्दी नहीं. वह तुम्हारी परीक्षा ले रही है.
पारी ने मैसेज टाइप किया:
माणिक: "शर्त मंज़ूर है, आस्था. मैं 'लिमिट' का पूरा सम्मान करूँगा. मैं तुम्हें परेशां करने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हें जान्ने के लिए मिल रहा हूँ. कल शाम 5 बजे, मैं वहीँ मिलूंगा."
मैसेज भेजकर पारी ने माणिक की तरफ देखा.
पारी: देखो, माणिक. यह अच्छा है. यह तुम्हें सिखाएगा की अपनी इच्छाओं को कैसे काबू में रखा जाता है. अब जाओ और अपने लिए अच्छे कपडे निकालो. यह तुम्हारा पहला ऑफिसियल डेट है!
माणिक ने अब मुस्कुराते हुए, एक गहरी सांस ली. वह जानता था की यह पहली मुलाकात उसके लिए एक बड़ी परीक्षा थी, लेकिन वह इस नए सफर के लिए अब पूरी तरह तैयार था.
माणिक ने पारी की सलाह को गंभीरता से लिया. उसने पारी की मदद से अपनी एक अच्छी प्रोफाइल बनायीं, जिसमे उसने अपनी पढाई के saath-saath अपने शौकों (जैसे, रात में तारे देखना और पुराणी हिंदी फिल्में देखना) का भी ज़िक्र किया.
अगले कुछ घंटों तक, माणिक, जो आमतौर पर घंटों जटिल समीकरणों (काम्प्लेक्स एक्वेशन्स) को हल करने में बीतता था, अब सावधानी से alag-alag प्रोफाइल्स को 'स्वाइप' कर रहा था. यह उसके लिए एक बिलकुल नयी दुनिया थी.
शाम hote-hote, जब माणिक अपने कमरे में बैठा अपनी केमिस्ट्री की किताब खोलने hi वाला था, तभी उसके फ़ोन पर एक नोटिफिकेशन आया.
"कोंग्रटुलतिओन्स! You've गोत ा नई मैच!"
माणिक का दिल ज़ोर से धड़का. उसने जल्दी से फ़ोन उठाया. उसका पहला मैच!
पारी कमरे में चाय लेकर आयी और उसने माणिक को लगभग जमे हुए देखा.
पारी: (हँसते हुए) क्या हुआ? क्या कोई नया ग्रेविटी फार्मूला मिल गया?
माणिक ने बिना कुछ कहे, पारी की तरफ फ़ोन घुमा दिया.
पारी: (ख़ुशी से चिल्लाते हुए) ओह माय गॉड! मैच! बधाई हो भाई! मेरी सलाह काम कर गयी!
प्रोफाइल पर एक लड़की की तस्वीर थी, जिसका नाम आस्था था. वह एक ग्राफ़िक डिज़ाइनर थी और उसने अपने बायो में लिखा था की उसे कला और विज्ञानं के बीच संतुलन पसंद है.
पारी: (Manik ko ut उत्साहित karte hue) Wah bahut acchi lag rahi hai! Ab der kis baat ki? Jaldi se message karo!
माणिक: (घबराते हुए) मैसेज? क्या लिखूं? मैं क्या बात करून? मुझे नहीं आता! यह कोई प्रयोगशाला (लैब) की रिपोर्ट नहीं है!
पारी: (आँखें घूमते हुए) बस वही लिखो जो तुम सोचते हो! चलो, मैं बताती हूँ.
पारी ने फ़ोन लिया और टाइप किया:
पारी (माणिक): "Hi आस्था! आपकी प्रोफाइल अच्छी लगी. खासकर कला और विज्ञानं वाला पॉइंट. एक वैज्ञानिक होने के नाते, मैं अक्सर संतुलन खोजने की कोशिश करता हूँ. आपकी डिज़ाइन की दुनिया कैसी है?"
पारी ने मैसेज भेज दिया.
माणिक: (चिंता से) तुमने भेज दिया! क्या यह ज़्यादा 'किताबी' नहीं है?
पारी: यह 'माणिक' जैसा है, जो सही है! वह जानती है की वह एक साइंटिस्ट से बात कर रही है. अब ज़्यादा मत सोचो.
माणिक को अभी भी असहजता महसूस हो रही थी, लेकिन एक हलकी सी उत्तेजना भी थी. उसे एहसास हुआ की यह रास्ता, जो पारी ने दिखाया, अकेले कमरे में मचलने से कहीं ज़्यादा स्वस्थ और सही था. अब उसकी साड़ी निराशा एक नयी उम्मीद में बदल रही थी.
माणिक: अच्छा, अब क्या? क्या तुम मुझे आगे भी सलाह देती रहोगी?
पारी: (मुस्कुराते हुए) ज़रूर, भाई. मैं तुम्हें 'डेटिंग गुरु' बनकर गाइड करती रहूंगी. पर याद रखना, असली खेल तुम्हें खुद hi खेलना है. अब यह फ़ोन रखो और चाय पियो. और हाँ, अगर उसका रिप्लाई आये तो सीधे मेरे पास आना!
माणिक ने चाय का कप पकड़ा, पर उसकी आँखें baar-baar फ़ोन पर जा रही थीं. उसका मैं अब केमिस्ट्री की किताब में नहीं, बल्कि आस्था के रिप्लाई का इंतज़ार कर रहा था. एक नया, अंजना सफर शुरू हो चूका था.
माणिक और पारी, दोनों hi बेताबी से फ़ोन की स्क्रीन घूर रहे थे. कुछ देर की चुप्पी के बाद, जैसे hi माणिक ने हिम्मत हारकर चाय का आखरी घूँट लिया, फ़ोन की घंटी बजी.
पारी: (ख़ुशी से uchhal-kar) आ गया! रिप्लाई आ गया!
माणिक ने लगभग झपटकर फ़ोन पकड़ा. उसका दिल ज़ोरों से धड़क रहा था.
आस्था का मैसेज:
"Hi माणिक!
माणिक ने मैसेज को काम से काम तीन बार पढ़ा. वह मुस्कुराया.
माणिक: उसने जवाब दिया! और उसने सवाल भी पूछा है!
पारी: (ख़ुशी से) हाँ! यह बहुत अच्छा संकेत है! वह तुममें दिलचस्पी ले रही है. अब ज़्यादा 'वैज्ञानिक' मत बन जाना, थोड़ा रोमांटिक और कासुअल जवाब दो.
माणिक: रोमांटिक? मैं क्या लिखूं? की मुझे उसके साथ स्टरगाजिंग करनी है?
पारी: (माणिक को एक halka-sa धक्का देते हुए) नहीं! अभी नहीं! थोड़ी मिस्ट्री रखो! चलो, मैं बताती हूँ.
पारी ने फ़ोन लिया और टाइप किया:
पारी (माणिक): "मेरे लिए सबसे अच्छी जगह वह है जहाँ आसमान साफ़ हो, लेकिन अगर आप साथ हों तो शायद कोई भी जगह परफेक्ट होगी!
पारी ने मैसेज भेज दिया.
माणिक: (आँखें चौड़ी करते हुए) तुमने स्माइली और आँख मारने वाला इमोजी क्यों भेजा?
पारी: (हँसते हुए) क्यूंकि तुम एक बोरिंग साइंटिस्ट नहीं हो! तुम एक हैंडसम लड़का हो जो फ़्लर्ट कर सकता है! यह ज़रूरी है, भाई.
माणिक को अपनी बेहेन की यह 'डेटिंग एक्सपर्ट' वाली भूमिका बहुत मज़ेदार लग रही थी. उसे लग रहा था जैसे वह कोई नया, रोमांचक प्रोजेक्ट शुरू कर रहा हो. कुछ देर में आस्था का फिर से जवाब आया.
आस्था का मैसेज:
"ः! मुझे यह पसंद आया. और मैं इस शहर के पास hi रहती हूँ. डिज़ाइन की दुनिया तो कमल है, यहाँ हर रोज़ कुछ नया होता है. मैं आपको अपनी कुछ वेब्सीटेस दिखा सकती हूँ.
पारी: (विनिंग स्माइल के साथ) अब! अब मौका आ गया है! अब तुम उसे सीधे कॉल या मिलने का पूछो!
माणिक: (थोड़ा हिचकिचाते हुए) कॉल... या मिलना?
पारी: मिलना! कॉफ़ी पर. और अब यह तुम्हारा काम है! मेरे पास मेरे खुद के प्रोजेक्ट्स हैं. जाओ, भाई. अपनी किस्मत आज़माओ!
माणिक ने पारी की तरफ देखा, जिसने उसे हिम्मत और एक सही राह दिखाई थी. उसके दिल में एक अजीब सी शांति थी. वह अब निराशा के अँधेरे में नहीं था, बल्कि उम्मीद की रौशनी में एक नया कदम उठाने को तैयार था.
माणिक और पारी को खुद भी अंदाज़ा नहीं हुआ की कब डेटिंग अप्प पर आस्था से बात करने के बहाने, वे दोनों ek-doosre के और क़रीब आ गए. हर नया मैसेज, हर नया 'चैटिंग सेशन', दोनों bhai-behen के बीच एक अनकहा तालमेल बन गया था.
Baat-cheet का यह सिलसिला रोज़ शाम को शुरू होता था, जब माणिक अपने कमरे में होता एरा. पारी, माणिक के बीएड पर बैठ जाती थी, और दोनों फ़ोन की स्क्रीन पर झुके होते थे. जब पारी तेज़ी से आस्था के लिए कोई मज़ेदार या फ्लिर्टी मैसेज टाइप कर रही होती थी, तो माणिक उसके कंधे पर झुक जाता था. उसका एक हाथ अक्सर अनजाने में पारी के कंधे पर टिका होता था, और उनके शरीर सटे हुए होते थे.
माणिक की नज़रें पारी की उँगलियों की हरकत पर होती थीं, लेकिन उसका ध्यान पारी की मौजूदगी के ताप और नज़दीकी पर भी होता था. पारी को भी यह नज़दीकी अच्छी लगती थी. उसे माणिक के शरीर का सहारा, उसकी गर्म साँसों का एहसास, एक अजीब सी सुरक्षा और अंतरंगता (इंटिमेसी) देता था.
दोनों, इस सब में इतने सहज हो गए थे की उन्होंने कभी इस बात पर ध्यान hi नहीं दिया की उनके बीच की शारीरिक दूरी लगभग ख़त्म हो चुकी थी. वे इस नज़दीकी को केवल 'मैसेज टाइप करने में मदद' का हिस्सा मानते थे, जबकि यह उनके बीच का नया, अनकहा और सहज स्नेह बन चूका था.
करीब दो हफ़्तों की लगातार चैटिंग, वर्चुअल डेट्स और लम्बी baat-cheet के बाद, आस्था आख़िरकार पहली मुलाकात के लिए तैयार हो गयी.
आस्था का मैसेज:
"माणिक, मुझे लगता है की हमने ek-doosre को फ़ोन पर काफी जान लिया है. अगर तुम कल शाम फ्री हो तो मैं कॉफ़ी के लिए मिलना चाहूंगी. एक ख़ास कैफ़े है, वहां मिलते हैं."
माणिक यह मैसेज देखकर ख़ुशी से उछाल पड़ा.
माणिक: (पारी को झकझोरते हुए) पारी! उसने हाँ कर दिया! उसने हाँ कर दिया!
पारी: (खुश होते हुए) हाँ! मैंने कहा था न, मेरी सलाह कभी गलत नहीं होती! अब तुम खुद hi रिप्लाई करो!
माणिक ने तुरंत जवाब देने के लिए फ़ोन पकड़ा. तभी आस्था का एक और मैसेज aaya—yeh एक चेतावनी थी, जो माणिक को थोड़ी असहज कर गयी.
आस्था का मैसेज:
"पर माणिक, एक शर्त है. मैं जानती हूँ की तुम बहुत इंटेंस हो सकते हो, और तुम्हारी प्रोफाइल में लिखा है की तुम ज़िन्दगी में 'रोमांस' ढून्ढ रहे हो. लेकिन पहली मुलाकात में तुम्हें 'लिमिट' में रहना होगा. मेरा मतलब है... कोई हाथ पकड़ना नहीं, कोई ख़ास नज़दीकी नहीं. बस बात करेंगे, ek-doosre को व्यक्तिगत रूप से जानेंगे. अगर तुम यह वादा कर सकते हो, तभी हाँ कहना. ठीक है?"
माणिक ने यह मैसेज ज़ोर से पढ़ा. उसका उत्साहित चेहरा अचानक गंभीर हो गया.
माणिक: लिमिट? इसका क्या मतलब है? क्या वह डर रही है?
पारी: (आराम से समझते हुए, माणिक के कंधे पर हाथ फेरते हुए) नहीं, भाई. वह डर नहीं रही है. वह सिर्फ यह जानना चाहती है की तुम कितने रिस्पेक्टफुल हो. इसका मतलब है की तुम्हें जेंटलमैन बनकर रहना है. कोई जल्दी नहीं. वह तुम्हारी परीक्षा ले रही है.
पारी ने मैसेज टाइप किया:
माणिक: "शर्त मंज़ूर है, आस्था. मैं 'लिमिट' का पूरा सम्मान करूँगा. मैं तुम्हें परेशां करने के लिए नहीं, बल्कि तुम्हें जान्ने के लिए मिल रहा हूँ. कल शाम 5 बजे, मैं वहीँ मिलूंगा."
मैसेज भेजकर पारी ने माणिक की तरफ देखा.
पारी: देखो, माणिक. यह अच्छा है. यह तुम्हें सिखाएगा की अपनी इच्छाओं को कैसे काबू में रखा जाता है. अब जाओ और अपने लिए अच्छे कपडे निकालो. यह तुम्हारा पहला ऑफिसियल डेट है!
माणिक ने अब मुस्कुराते हुए, एक गहरी सांस ली. वह जानता था की यह पहली मुलाकात उसके लिए एक बड़ी परीक्षा थी, लेकिन वह इस नए सफर के लिए अब पूरी तरह तैयार था.