Incest kahani - Shikari Ki Bimari - Page 6 - SexBaba
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Incest kahani - Shikari Ki Bimari

अपडेट 40
मैं और सुप्रिया दोनों hi अपने यौवन के मौज में मस्त थे , दो जवान नंगे जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए आनंद उठा रहे थे , तभी मैंने पाया की सुप्रिया मुस्कुराते हुए कही और hi देख रही है ..

मैंने उसकी नजर का पीछा किया तो पाया की झोपड़ी के अंदर खड़ा पुष्पक हमें देख रहा है , उसकी नजर बस सुप्रिया के जिस्म में hi जमी हुई थी …..

“तुम यंहा क्या कर रहे हो “

मैं थोड़ा गुस्से में बोलै

“तो कहा जाऊ , ये मेरी hi झोपड़ी है , रात हो चुकी है और बहार जंगली जानवर घूमते है “

उसकी बात सुनकर मुझे कुछ बोलते नहीं बना लेकिन मैंने देखा की झोपड़ी का दरवाजा अभी भी खुला हुआ था

“दरवाजा तो खुला हुआ है फिर जंगली जानवर अंदर नहीं आ जायेंगे ??”

वो कुछ सोच पता उससे पहले hi मेरी बात सच हो गयी , किसी भरी पैरो की आवाज हमें आने लगी देखा तो सामने बब्बर शेर खड़ा था और अंदर hi झांक रहा था ..

“आआ” पुष्पक की नजर जैसे hi उसपर पड़ी वो दौड़ता हुआ हमारे पीछे आ गया , सुप्रिया जल्दी से मुझसे अलग होकर पास रखे एक लकड़ी को उठा चुकी थी और हमले वाली पोजीशन बना कर कड़ी हो गयी थी ..

मैंने जीवन में ऐसा शेर पहली बार देखा था , हमारे यंहा हमने शेर बस ज़ू में देखे थे जो की थोड़े मरे हुए टाइप के होते थे , जंगल में घूमते हुए शेर की बात hi अलग थी , उसकी चमक और शरीर की बनावट hi ऐसी थी की देखकर मुझे भी पसीने आ गए ..

“ये कहा से आ गया ..??”

मैंने दबे हुए आवाज में पुष्पक से कहा

“मुझे क्या पता , आज सुप्रिया को देखने के चक्कर में alaw(aag) भी नहीं जलाया था , शायद घूमते फिरते या सूंघते हुए यंहा पहुंच गया होगा ..”

“तो इसे यंहा से भगाओ न “

“शिकारी तो तुम हो तुम भगव , मैं तो एक सामान्य सा नौकर हु वो भी वैद्य का “

हम दोनों की ये हालत देखकर सुप्रिया के चेहरे में थोड़ा गुस्सा आ गया

“चुप रहो तुम दोनों , और तुम कैसे शिकारी हो जो सहम कर बैठा है , खड़े हो जाओ और मेरे साथ इसका मुकाबला करो “

वो तो ऐसे बोल रही थी जैसे हम दोनों मिलकर इस शेर को मार hi डालेंगे

“मैं शिकारी हु लेकिन मैंने जीवन में कभी किसी जानवर का शिकार नहीं किया है , मैं लोगो से जरूर लड़ा हु लेकिन शेर से तो क्या मैं आज तक किसी कुत्ते से भी नहीं लड़ा हु “

मेरी बात सुनकर सुप्रिया हसने लगी

“तो आज लड़ लो , वंहा शेर नहीं मिलते क्या ??”

“मिलते है न लेकिन ज़ू में “

“वो क्या होता है “

“अरे चिड़िया घर “

“वो क्या होता है ??” इस बार दोनों hi एक साथ बोल उठे , अब इस समय इन्हे कैसे समझाता की चिड़िया घर क्या होता है ,

मैंने बस आसपास देखा मेरे लिए कोई भी हथियार वंहा मौजूद नहीं था ..

“बहार एक बहला है “ पुष्पक बोल उठा

“सेल अभी बहार जाऊ क्या , दरवाजे में तो ये खड़ा है “ मैं थोड़ा चिढ़ते हुए बोलै

“ये सेल क्या होता है ??” उसने बड़े hi मासूमियत से मुझसे पूछा लेकिन मैं चुप hi रहा और ध्यान शेर पर लगा दिया ..

शेर जैसे हमारी बातो का मजा ले रहा था , बड़े hi आराम से हमें निहार रहा था उसे कोई भी जल्दबाजी नहीं थी चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे मुस्कुरा रहा हो , उसने एक जम्हाई ली जैसे जनता हो की ये पीद्दे मेरा क्या बिगड़ लेंगे और आज उसे एक नहीं बल्कि 3 हट्टे काटते लोगो का तजा मांस खाने को मिलने वाला था ..

वो बड़े hi शान से अंदर की और बढ़ा लेकिन …..

सुप्रिया ने अपने हाथ में रखे डंडे से उसपर झपट्टा मार दिया , उसने पूरी ताकत लगाई थी और डंडा घुमा कर शेर के चेहरे पर hi निशाना लगाया था लेकिन वो जैसे शेर के लिए बस कोई फूल से वार हो वो जैसे हंसा हो और उसने सर झटका दिया और जोरो की दहाड़ लगा दी सुप्रिया का तो पता नहीं लेकिन मैं और पुष्पक जरूर काँप गए थे ..

“उठो और कुछ करो वर्ण ये हमें खा जायेगा सब मिलकर लाडे तो शायद जान बच जाये “

सुप्रिया हलके से फुसफुसाई

मरता क्या न करता की तर्ज पर मैं और पुष्पक खड़े हो चुके थे

“तुम शिकारी हो तो तुम्हारे पास ताकत भी बहुत है , मेरी योनि को देखो सहलाओ और खुद का लिंग खड़ा करते हुए अपने अंदर के शिकारी को जगाओ “

सुप्रिया ने साफ साफ कहा था , मुझे याद आया की मेरे अंदर उत्तेजना आने से मेरी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है , लेकिन अभी अभी घंटो तक एक चुड़ैल से किये सम्भोग के बाद मन तृप्त हो गया था कोई उत्तेजना बाकि नहीं रह गयी थी लेकिन मैंने फिर भी कोशिस की और सुप्रिया को पास जाकर उसके योनि को सहलाने लगा ..

कुछ hi सेकंड का वक़्त लगा था मेरे लिंग को फिर से उत्तेजित होने में … मैं इतना उत्तेजित हो गया था की पीछे से hi सुप्रिया के योनि में अपना लिंग घुसाने लगा

“अभी लड़ने के लिए उत्तेजित होना था सम्भोग के लिए नहीं , कैसे शिकारी हो तुम तुम्हे किसी ने इतना भी नहीं शिखाया ..”

वो मुझे झड़ते हुए बोली लेकिन तब तक मैं दो तीन धक्के लगा चूका था ..

इतने में शेर फिर से दहाड़ा और हमारे उप्पेर hi आक्रमण कर दिया ..

लेकिन इस बार मैं जोश में था मैंने शेर के खुले हुए मुँह को पकड़ लिया और दोनों हाथो से उसे फाड़ दिया जैसे की उसका दन्त गईं रहा हु ..

शेर में अपने पंजो से मुझपर वार किया मैं उसके नाखुनो से तो बच गया थे लेकिन पंजे के गद्देदार भाग का वार भी इतना तगड़ा तह की मैं दूर जा गिरा वो सुप्रिया के उप्पेर अपने पंजो से वार करने वाला था की मैं चिल्लाया

“नहीं …”

और …

और ये क्या मैंने एक मुद्रा बनायीं जैसे मैं उसे धकेलना चाहता हु ताकि वो सुप्रिया से दूर हैट जाये और शेर सच में दूर हैट गया ..

मैंने एक बार अपने हाथो को देखा , ये कैसी ताकत थी …

मैंने देर न करते हुए फिर से हाथो को आगे किया और इस तरह से चलाया जैसे मैं शेर को हवा में उठाना चाहता हु और सच में शेर हवा में तैर रहा था वो दहाड़े जा रहा था मैंने उसे लेते लेते hi वंहा से दूर फेक दिया ..

सुप्रिया के साथ साथ पुष्पक भी बड़े hi गौर से ये सब देख रहा था , दोनों hi आश्चर्य से भरे हुए थे ..

दोनों के मुख से एक hi चीज निकली

“शक्तिशाली शिकारी ……???”

मैंने उनके बातो पर ध्यान नहीं दिया क्योकि शेर फिर हमारी और दौड़ लगा चूका था मैंने फिर से उसे बिना छुए hi हवा में उठा दिया था …और इस बार उसे घुमाकर जोरो से फेक दिया …

“वाओ ी हैवे पावर … तो क्या माता चुड़ैल सच थी की प्यार में अपने प्रेमिका चुड़ैल से सम्भोग के बाद कुछ तकते आ जाती है ..”

मैं खुद से hi बोल पड़ा था , मुझे यद् आया की कैसे सनपोंगा वाले आराम से पानी में चल प् रहे थे वही बदरंग वाले शिकारियों के लिए ये सब करना मुमकिन नहीं था …

शेर तो भाग चूका था लेकिन ये दोनों मेरे पैरो में गिर गए थे साथ hi झोपड़ी के बहार खड़े वैद्य और उनकी पत्नी भी मुझे आश्चर्य से देख रहे थे जो शायद शेर की दहाड़ सुनाने के बाद यंहा आये थे ………

“ये तुम लोग क्या कर रहे हो ??”

मैं उनके व्यवहार से चकित था और चकित होकर मैंने वैद्य जी की टाफ देखा

“इनके समूह में एक मान्यता है की एक शक्तिशाली शिकारी आएगा जिसके पास अलौकिक शक्तिया होंगी और जो शिकारी और चुड़ैलों के नए युग का प्रारम्भ करेगा “

वैद्य जी ने बड़े hi आराम से कहा साथ hi वो आगे कहते गए

“सभी इन्हे मात्रा एक कहानी hi मानते थे लेकिन आज लगता है की तुम hi वो शिकारी हो “

“अजीब बात है इनके समाज में कितनी मान्यताये है … एक प्रमुख शिकारी की मान्यता मेरे समय में थी जिमे उन्होंने कहा था की कोई महापुरुष आएगा जो सबको प्रेम शिखायेगा और अब यंहा आकर पता चला की यंहा पहले से एक मान्यता है की कोई शक्तिशाली शिकारी आएगा “

मैंने अपनी बात वैद्य जी के सामने राखी तो वो बड़े hi प्यार से मुझे देखने लगे ……

“मैंने पहले hi कहा था की तुम्हारा यंहा आना विधि का विधान है … अभी तक यंहा कोई भी प्रमुख शिकारी का जन्म नहीं हुआ है, न hi किसी महापुरुष की मान्यता hi है … लेकिन शक्तिशाली शिकारी की मान्यता जरूर है …

मुझे तो लगता है की तुम्हारा यंहा आना उस शक्तिशाली शिकारी की मान्यता को पूर्ण करता है और तुम्हारे कारन hi प्रमुख शिकारी का जन्म होगा जो की महापुरुष की मान्यता को बनाएगा “

वैद्य जी की बात सुनकर सभी कभी मुझे तो कभी वैद्य जी को देख रहे थे ..

मुझे भी उनकी बात समझ में आ रही थी, और मैंने कई हॉलीवुड की फिल्मे भी देखि थी जिसमे मैंने ये शिखा था की टाइम ट्रेवल वर्तमान को किस तरह से इफ़ेक्ट कर सकता है ..

इसमें सबसे अच्छी मूवी तो प्रेडेस्टिनशन थी (कृपया जरूर देखे हिंदी में शायद न मिले लेकिन सुबतीतल के साथ देखकर भी समझ आ जाएगी ? ))

“मतलब की मैं hi वो शक्तिशाली शिकारी हु जो इनके समाज में कोई नया परिवर्तन लेन वाला हु “

“लगता तो ऐसा hi है , क्योकि अभी इनका समाज बहुत hi तकलीफो से गुजर रहा है , सरदार पर जानलेवा हमले हो चुके है कोई इनके विरासत को हड़पना चाहता है ऐसे में तुम्हारा आना इनके लिए सहयोगी है “

वैद्य चक्र बिलकुल डॉ. चुटिया के जैसे hi बात करते थे और उन्ही की तरह सबकी फटी में तंग अदने की भी आदत रखते थे ..

मैंने सुप्रिया और पुष्पक को देखा जो की मेरे पैरो में सर गड़ाए हुए थे

“अरे अब उठ भी जाओ “

दोनों उठे

“इसका तो समझ आता है की ये चुड़ैल है लेकिन तुम क्यों मेरे पेअर में गिर रहे हो “

पुष्पक का वयवहार देखकर मुझे हंसी आ गयी

“वो क्योकि मैंने भी ये कहानिया ाजन्य से सुनी हुई है , और जब सुप्रिया ने ऐसा किया तो मैं भी कर बैठा “

हम सभी उसकी बात सुनकर हंस पड़े थे

सभी थोड़े शाट होकर बैठे थे , वैद्य की पत्नी महाऋषि जी ने हमारे लिए एक गर्म काढ़ा बनाया था जो आज के आयुर्वेदिक चाय की तरह hi लग रहा था उसमे शहद मिलाया गया था …

रात बहुत हो चुकी थी लेकिन नींद किसी की आँखों में नहीं था ..

“अभी इस बात को बहार आने नहीं देना की शक्तिशाली शिकारी आ चुके है “

वैद्य जी ने सुप्रिया और पुष्पक से कहा

“क्यों वैद्य जी “ सुप्रिया जैसे अभी तक उस उत्तेजना से बहार नहीं आयी थी जो उसे शक्तिशाली शिकारी को देखकर हुई थी

“क्योकि अभी तुम्हरे पिता शिकारी सरदार के दुशमन बहुत hi बढ़ गए है और सबसे बड़ी बात ये है की उनका दुश्मन कौन है ये अभी तक किसी को नहीं पता … इसलिए इसका किसी भी रूप में बहार आना खतरे से खली नहीं है .. वो लोग बहुत hi चालक है , सिर्फ ाजन्य को ये बात पता होनी चाहिए और किसी को नहीं , अब तो भोर भी होने वाली है ाजन्य भी आता hi होगा तुम लोग थोड़ा आराम कर लो मैं और महाऋषि ब्रम्हामुहुर्त का स्नान करके आते है “

वैद्य जी की बात सुनकर सभी ने हामी में सर हिलाया

“तो अब मैं तुम्हे क्या बोलू शिकारी … मैं तो तुम्हे एक मुर्ख सा शिकारी समझती थी लेकिन तुम तो शक्तिशाली शिकारी निकले … अगर मुझसे कोई गलती हुई हो तो माफ़ कर देना “

सुप्रिया ने हाथ जोड़े बदले में मैंने उसके योनि को हलके से सहला दिया

“तुम अब भी मेरी बहन hi हो सुप्रिया , तुम्हे माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं है , है चाहो तो हम फिर से सम्भोग कर सकते है क्योकि शेर को भागने के वक़्त आयी उत्तेजना अभी भी काम नहीं हुई है “

मैंने अपने फनफनाते हुए लिंग की और इशारा किया , सुप्रिया जंहा मेरी बात सुनकर उछाल गयी वही पुष्पक का चेहरा थोड़ा उतरा हुआ दिख रहा था …….
 
अपडेट 41
वो दोपहर का वक़्त था , नदी के कलरव के बिच ाजन्य के दिल में एक अजीब सी हलचल मची हुई थी , वो बस बाह रही नदी की धार को निहारे जा रहा था ,

सुप्रिया सुबह से उसका इन्तजार कर रही थी लेकिन जब वो नहीं आया तो आखिर कर हम दोनों hi उसके पास पहुंच गए ..

“भाई ऐसा क्यों बैठा है , लगता है की किसी बड़ी परेशानी में है “

उसने एक बार हमें देखा तो जैसे उसका ध्यान बहंग हुआ

“अरे तुम लोग यंहा .. मैं तो आने hi वाला था वैद्य जी की कुटिया में “

“है वो तो दिख hi रहा है , भोर को आने वाले थे अभी तो सूर्य देवता सर पर चढ़ चुके है और आप यंहा पता नहीं किस सोच में दुबे हुए बैठे हो “

(नोट- यंहा लिखते हुए मैं अरबी, फारसी ,तुर्की, purtgali,english और उर्दू के शब्दों से बचने की कोशिस कर रहा हु ताकि उस समय का कुछ रियल फील मिल सके लेकिन ये लास्ट लाइन लिखने के बाद मुझे समझ आया की अब हमारी भाषा में ये सब शब्द इतने मिल चुके है की बहुत hi मुश्किल काम होगा इन्हे निकल पाना.. तो कही अगर संस्कृत और हिंदी शब्दों के अलावा भी कोई शब्द मिल जाये तो माफ़ कीजियेगा … उस समय ये सब्द नहीं हुआ करते थे लेकिन अब कौन शब्द कहा का है ये समझना मेरे लिए थोड़ा कठिन हो रहा है ……… जैसे डूबना किस भाषा का है मुझे पता नहीं :डी तो उतना चला लेना

क्योकि उस समय की रियल भाषा क्या रही होगी ये समझ पाना भी कठिन है क्योकि हिंदी का जन्म उस समय तक नहीं हुआ था , पाली प्राकृत उत्तेर भारत की भाषा थी लेकिन वो भी ख़त्म होने के कगार पर थी …संस्कृत था लेकिन वो भी उपयोग में काम hi आता था उस समय तक .. तो मैं सामान्य हिंदी का hi प्रयोग कर रहा हु उस समय के लोगो के बातचीत के लिए जिसमे कई भाषाएँ मिक्स मिल सकती hai,lekin फिर भी ध्यान रखूँगा की थोड़ा रियल hi लगे :अप्प्रोवे:

)

ाजन्य को जैसे अपनी गलती का अहसास हुआ

“ओह्ह माफ़ करना वो मैं ..”

वो इतना hi बोलकर चुप हो गया

“आखिर बात क्या है भैया ??”

सुप्रिया उसे देखकर थोड़ी व्याकुल हो गयी ,वही ाजन्य मुझे देखने लगा

“ये प्रेम कैसा होता है अजय ..”

उसने बहुत hi हलके आवाज में मुझसे कहा ,पहले तो मुझे समझ hi नहीं आया की वो क्या बोलना चाहता है लेकिन फिर मुझे कुछ समझ आया

“प्रेम की परिभाषा करना मुझ जैसे सामान्य मनुष्य के लिए कठिन है ाजन्य , और प्रेम किसी परिभाषाओ के परे है इसे कोई परिभाषा बांध नहीं सकती इसे बस महसूस किया जा सकता है ..”

“तो ये महसूस कैसा होता है “

ाजन्य अब भी जैसे किसी और hi दुनिया में खोया हुआ था ,इससे पहले मैं कुछ बोलता सुप्रिया के चेहरे में चिंता की लकीरे गहरा गयी

“भाई क्या हुआ है तुम्हे ये बावलो जैसी बाटे क्यों कर रहे हो, क्या प्रेम कैसा प्रेम … हम shikari-chudail है हम प्रेम में नहीं पड़ते “

सुप्रिया की बात सुनकर मैं हंस पड़ा वो मुझे गुरने लगी जैसे पूछ रही हो की आखिर मैं हंस क्यों रहा हु

“सुप्रिया तुम अपने भाई के लिए जो चिंता दिखा रही हो यही तो प्रेम है “

मेरी बात सुनकर दोनों hi थोड़े चौक गए , सुप्रिया ने तो हाथ hi जोड़ लिया

“शस्क्तिशाली शिकारी हमरे उद्धार करने वाले कितने आसानी से आप मन बदल देते है “ सुरप्रिया के ऐसा करने पर मैं थोड़ा असहज हो गया वही ाजन्य थोड़े आश्चर्य के भाव से उसे देखने लगा

“तुम क्या कह रहे थे अजय ??” वो सुप्रिया की बातो पर ध्यान न देते हुए बोलै

“यही की प्रेम की कोई परिभाषा नहीं होती , और प्रेम बस महसूस किया जाता है , वो सर्वत्र फैला hi हुआ है , बहन भाई के प्रेम में , माँ बेटे के प्रेम में , पिता पुत्र के प्रेम में कही भी तुम्हे वो मिल सकता है ….”

“है अजय लेकिन क्या एक ायरत और एक मर्द भी प्रेम कर सकते है , हमारे समूह में तो प्रेम कोई जनता भी नहीं …

मैं शिकारियों को देखता आ रहा था और खुद भी इंसान से शिकारी होने का मुझे अहसास था , मैं प्रेम को पहचान पाया था क्यों की पहले मैं इंसान था मुझे रिश्तो की मर्यादाओ का भान था और पहले भी मुझे प्रेम की झलकियां मिल चुकी थी लेकिन अब इन्हे मैं कैसे समझाता ..

जिन्होंने कभी गुड़ नहीं चखा हो उन्हें मैं उसकी मिठास कैसे समझौ , और यही सबसे बड़ी दिक्कत मेरे सामने आ रही थी , और यही दिक्कत डॉ. चुटिया के सामने भी रही होगी जब उन्हें महापुरुष समझ कर शिकारी और चुड़ैलों को प्रेम सीखने भेज दिया गया …..

डॉ. चुटिया ने क्या किया होगा?????

अब डॉ. चुटिया तो यंहा थे नहीं जिनसे मैं ये पूछ सकू की आपने क्या किया और उसका क्या रिजल्ट आया लेकिन एक दूसरे रूप में डॉ. साहब यंहा मौजूद थे वैद्य जी के रूप में , लेकिन क्या वो मेरी मदद कर सकते है ???

“वो सब छोडो ाजन्य ये बताओ की आखिर ऐसा क्या हुआ की तुम ये प्रश्न पूछ रहे हो “

“कुछ नहीं आज एक चुड़ैल को देखा , हमेशा से hi उसे देखता हु बचपन से hi , कई बार हमने यही इसी नदी के किनारे सम्भोग भी किया है लेकिन वैसे hi जैसे की हर चुड़ैल के साथ मैं करता हु , जब हवस की आग बढ़ती है तो कोई न कोई तो चाहिए hi होता है उस आग को मिटने के लिए फिर जो सामने मिल जाये हम शिकारी उससे hi सम्भोग कर लेते है .. ये हमारे समझ में आम सी बात है ..

लेकिन उस एक के लिए पता नहीं क्यों कुछ अलग hi संवेदना मन में उठने लगी है “

ाजन्य की बात सुनकर मुझे रिद्धिमा की याद आ गयी , हो न हो इस जन्म में भी रिद्धिमा और मेरा कोई रिश्ता रहा होगा ..

“कौन है वो लड़की यानि चुड़ैल ..” मैंने झट से पूछा

“ऋतुपर्ण ..”

ाजन्य के मुख से निकला नाम सुनकर सुप्रिया का चेहरा तमतमा गया ..

“कितनी बार तुम्हे कहा है भाई की तुम उससे और उसकी दोनों बहनो से तो दूर hi रहा करो , लेकिन तुम मानते hi नहीं वो और उसके पिता बम्बाता … उसका पूरा परिवार मिलकर हमारे पिता के पद को छीनना चाहता है ताकि बाहरी दुनिया के लोगो पर आक्रमण कर उनकी सम्पत्ति को और ओउरतो को लाया जा सके, ज्यादा से जयदा इंसानो को शिकारी और चुड़ैल बनाया जा सके .. और वो स्वर्ण ..”

सुप्रिया बस इतना hi बोली थी की ाजन्य ने हाथ दिखा कर उसे रोक दिया साथ hi साथ उसे गुस्से से देखने लगा जैसे सुप्रिया ने कुछ ऐसा कह दिया हो जो उसे नहीं कहना चाहिए था ..

“क्या ऋतुपर्ण की दो बहाने भी है ..और ये स्वर्ण की बात पर तुमने इसे क्यों रोक दिया ??”

ये सवाल मैंने पूछा था

“है उसकी दो बहाने भी है रारुका और अनुष्का … और यंहा तक स्वर्ण की बात है वो हमारे समुदाय का मामला है तुम इस में ना पदों …”

ाजन्य ने गंभीर स्वर में कहा

“लेकिन भैया ये तो शक्तिशाली शिकारी है और यही वो है जो हमारा उद्धार करने यंहा आया है ..”

सुप्रिया ने चहकते हुए कहा था वही ाजन्य मुझे थोड़े आश्चर्य से लेकिन भेदने वाली निगाहो से देखने लगा ………

 
अपडेट 42
सभी फिर से वैद्य जी के पास थे , मैं चीजे हवा में उठा देने का करतब दिखा रहा था ….सभी खुश भी दिख रहे थे सिवाय ाजन्य के , पता नहीं वो किस सोच में डूबा हुआ था ..

वही पर ये भी फैसला किया गया की मुझे अभी सभी के नजरो से दूर hi रखा जायेगा …

मैं और ाजन्य अकेले थे उसी नदी के किनारे बैठे हुए थे

“तुम इतना दर क्यों रहे हो ,अगर प्रेम हो गया है तो इसे स्वीकार करो “

मेरी बात सुनकर ाजन्य के चेहरे में एक फीकी सी मुस्कान उभर गयी

“हमारे समझ में सम्भोग करना नहीं प्रेम करना पाप है अजय , तुम किसी दूसरे काल से हो तुम ये सब बाटे नहीं समझ पाओगे ..”

“लेकिन क्यों ??”

“क्योकि हम दूसरे दुनिया से अलग है ..प्रेम हमें बांध देता है , किसी एक स्त्री या पुरुष में … लेकिन हमारे समाज में एक स्त्री या पुरुष पर सभी समूह का अधिकार होता है , जो जिसके साथ सम्भोग करना चाहे वो कर सकता है “

मैं थोड़ा चौका जरूर लेकिन उतना नहीं क्योकि मैंने ये पहले भी देखा था

“लेकिन शादी तो होती है न फिर क्या करते है “

उसने मुझे अजीब दृष्टि से देखा

“शादी ?? ये क्या होता है ??”

“शादी …गठंधन , जिसे तुम्हारे माता पिता ने किया होगा …आखिर तुम्हे कैसे पता की तुम अपने पिता के पुत्र हो और सुप्रिया तुम्हारी बहन है ??”

“ऐसा कोई गठबंधन हमारे समाज में नहीं होता , बच्चे पैदा करने के लिए दो लोग एक विशेष ायसार में मिलते है , और उन जोड़ो से होने वाले संतान उन जोड़ो के पिता और माता कहलाते है , माता और पिता होना भी सभी के भाग्य में नहीं होता , इसका निर्णय करने के लिए एक युद्ध होता है , जैसे मेरी माँ को 2 बार हमारे पिता ने जीता था जिससे मैं और मेरी बहन का जन्म हुआ , एक विशेष परवा में चुड़ैलों को माँ बनाने के लिए युधः किया जाता है , जिसमे जो चुड़ैल माँ बनना चाहे वो hi हिस्सा लेती है , उसके बाद हर चुड़ैल के लिए कोई शिकारी बाकि शिकारियों को ललकारता है , अगर कोई दूसरे शिकारी उस चुड़ैल को माँ बनाने की इक्छा रखता है तो वो उस ललकार को स्वीकार कर लेता है और दोनों के बिछ युद्ध होता है …

इस तरह से जो भी युद्ध में जीतता है वो शिकारी उस चुड़ैल से सम्भोग कर उसे माँ बनता है और वो दोनों होने वाले बच्चो के माँ और पिता होते है”

मैं उसकी बात को ध्यान से सुन रहा था बहुत hi इंटरेस्टिंग तरीका था ये भी..

“लेकिन ऐसा भी होता होगा की एक चुड़ैल कई शिकारियों से गर्भवती हो जाये , मतलब कई शिकारियों के बच्चो को जन्म दे “

एक उत्सुकता सी मेरे मन में जाएगी थी

“है यंहा कई शिकारी और चुड़ैल ऐसे है जिनके कई साथियो से बच्चे है … हमारी माँ को अगर दूसरे बार किसी दूसरे शिकारी ने जीता होता तो कोई दूसरे शिकारी उन्हें गर्भवती करता … मेरी माँ पुराने सरदार की बेटी थी और हमारे समूह की सबसे सूंदर, ताकतवर और यौवन से भरपूर चुड़ैल भी , इसलिए उनको पाने के लिए कई शिकारियों ने युधः की ललकार की थी लेकिन जब मेरे पिता सामने आये तो सभी पीछे हैट गए , मेरे पिता एक महँ योद्धा है , उनके सामने केवल बम्बाता ने hi मेरी माता के लिए ललकार को स्वीकार किया था “

“बम्बाता ..??”

“है बम्बाता वही था जिसने दोनों hi बार माता के लिए पिता जी की ललकार को स्वीकार किया था और दोनों hi बार युधः में हार गया “

“उह तो कोई चुएल या शिकारी कितने बार बच्चो के लिए युधः कर सकते है “

“जित्नेर उनका मन चाहे “

“ओह्ह तो क्या ऋतुपर्ण की दोनों बहाने एक hi पिता और माता से है ..”

“नहीं पितुपर्ण हमारे पिता जी के मित्र से पैदा हुई लेकिन उसकी बाकि की दोनों बहाने अलग अलग शिकारियों से है , वो तीन बार संतान उत्पत्ति के लिए आयी और तीनो hi बार अलग अलग शिकारियों ने उन्हें जीता “

उसकी बात सुनकर मेरे चाहर में एक मुस्कान स्वाभाविक रूप से खिल गयी थी , बड़ा अजीब समाज था या शायद बहुत hi साफ़ समाज था जंहा किसी प्रकार का कोई भी भेद यया दुर्व्यवहार एक दूसरे के प्रति नहीं था ..

“तो तुम ऋतुपर्ण से मिले ..”

मेरी बात सुनकर ाजन्य ने मुझे देखा उसके चेहरे में अब भी वही फीकी सी मुस्कान थी

“है मिला था लेकिन … उसके पास जाने से hi मेरे हृदय में कुछ अजीब सा होने लगता है , इसलिए बस उसे दूर से देखा करता हु ..अब पास जाने से भी दर लगता है ..”

उसकी बात सुनकर मैं हंस पड़ा

“मैं उसे देखना चाहता हु “

मेरी बात सुनकर वो होंडा चौका

“आखिर क्यों ??”

“क्योकि तुम और मैं एक hi है , मुझे शक है की हो न हो वो वही है जिससे में उस काल में मैं प्रेम में पड़ा , मेरी रिद्धिमा “

वो मुस्कुरा उठा

“और अगर इस काल में भी तुम उसके प्रेम में पद गए तो “

मैं हंस पड़ा था

“मैं तो हर काल में उसके hi प्रेम में पड़ना चाहूंगा इसे hi तो प्रेम कहते है , कब मिलवा रहे हो उससे “

“मिलवा तो दूंगा लेकिन तुम्हे छिपकर hi रहना होगा , अभी हम तुम्हे सामने नहीं ला सकते हमें नहीं पता की हमारे पिता से किसकी दुश्मनी है लेकिन वो जो भी है वो हमारे पुरे समूह का दुश्मन होगा “

मैंने हामी भर दी

“तो चलो ..”वो उठ खड़ा हुआ था

“अभी ??”

“है अभी , वो आम के बगीचे के तालाब में अपनी बहनो के साथ नाहा रही होगी , वही जंहा मैंने उससे पहली बार सम्भोग किया था “

हम दोनों hi चल पड़े थे , यंहा सम्भोग पहले होता था लेकिन प्रेम से डरते थे और मैं और रिद्धिमा प्रेम में पढ़कर भी सम्भोग नहीं कर पाए थे, जब किया तो साला मैं hi ट्रांसपोर्ट हो गया, मुझे अचानक रिद्धिमा की याद आ गयी थी , मुझे अहसास हुआ की चुड़ैलों से सम्भोग करने से एक नयी ऊर्जा प्राप्त होती है , यंहा के शिकारी मुझे अपनी तरह हवस में पागल नहीं दीखते थे, क्योकि ये आम स्त्रियों से नहीं बल्कि चुड़ैलों से सम्भोग किया करते थे … हवस तो शिकारियों वाला hi था लेकिन चुड़ैलों में मजा भी बहुत था और उससे एक शांति सी भी महसूस होती थी , जैसे आज सुपररिया से सम्बन्ध बना कर मुझे होने लगा …

वो गजब की जगह थी , दूर दूर तक आम hi आम के पेड़ थे , ये बगीचा नहीं बल्कि जंगल की तरह था , बहुत दूर तक अंदर जाने पर हमें एक तालाब दिखाई दिया , कुछ लड़कियों के हँसाने की आवाजे हमें सुनाई दे रही थी ाजन्य ने खुद को और मुझे भी एक झड़ी में छिपा लिया और उस और देखने लगा …

तालाब का दृश्य देखकर मैं मोहित hi हो गया लेकिन साथ साथ hi साथ आश्चर्य से भी भर गया……

वो रिद्धिमा hi थी , मेरी रिद्धिमा .. वो नग्न अपनी बहनो के साथ पानी में अटखेलिया कर रही थी , ाजन्य भी बड़े hi मोहित दृस्टि से उसे देख रहा था , पुरे बदन में बस एक फूलो की माला थी उसका नग्न देह जैसे संगमरमर का बना हो, बिलकुल कैसा हुआ, जैसे मेरी रिद्धिमा का था , हर अंग अपने hi स्वरुप में खिला हुआ था बिलकुल तेज से चमकता हुआ ..

लेकिन मेरे आश्चर्य का कारन था उसकी दोनों बहाने असल में ये दोनों मेरी बहाने ऋतू और अन्य दीदी थे …इस काल में वो दोनों रिद्धिमा की बहाने थी लेकिन अलग अलग पिता से …

ये एक सुखद आश्चर्य भी था अपने प्रिय जानो को देखना , वो दोनों भी नग्न होकर स्नान कर रही थी और बहुत hi मजे से एक दूसरे के साथ पानी से खेल रही थी ..

इस दृस्य को देखकर मेरा लिंग अकड़ने लगा था लेकिन फिर मेरी नजर रिद्धिमा पर चली जाती मैं प्रेम से भर जाता लेकिन लिंग की अकड़न काम नहीं होती थी ..

मैं बेकाबू होने लगा था ,

शायद वही हाल ाजन्य का भी हो रहा था ..

हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुराये

“हमें सुप्रिया को साथ लाना था , ये उत्तेजना हमें मार hi डालेगी , मैं तो तालाब में जाकर तीनो के साथ सम्भोग कर लूंगा लेकिन तुम क्या करोगे “

ाजन्य के चेहरे में एक हंसी आ गयी ..

मैं कुछ कह पता उससे पहले hi हमें एक और आवाज सुनाई दी कोई उत्तेजना में सिसकी ले रहा था , हम दोनों का ध्यान उस और गया …

हमसे थोड़े hi दूर एक झुरमुट में एक तगड़ा मर्द एक कमसिन सी लड़की को अपनी गॉड में बिठाया हुआ उसे राउंड रहा था , दोनों hi अपनी मस्ती में लीं थे , वही वो मर्द अपनी गॉड में बैठी हुई लड़की की जगह रिद्धिमा या कहे ऋतुपर्ण को देखे जा रहा था ..

उस मर्द का चेहरा देखते hi जंहा ाजन्य चौका वही मैं भी चौक गया ..

“बम्बाता ..??”

“बुलंद सिंह “ ाजन्य और मैं एक दूसरे को देखने लगे

“तो क्या यही बम्बाता है “

“है यही बम्बाता है ये हमेशा से ऋतुपर्ण के साथ सम्भोग का इक्छुक रहा है लेकिन उसने कभी भी इस अधेड़ उम्र के शिकारी से सम्भोग को स्वीकृति नहीं दी , और देखो ये ऋतुपर्ण को देखते हुए अपनी hi बेटी सवारी से सम्भोग कर रहा है “

मैं ध्यान से उस लड़की की और देखा और मेरे चेहरे में मुस्कान गहरा गयी

“ये उसकी बेटी है और उस काल में भी ये उसकी बेटी थी नाम था सोनी … और मजे की बात ये है की जब इतना सब कुछ उस काल और इस काल में मिल रहा है तो मैं दावे के साथ कह सकता हु की तुम्हारे पिता का दुश्मन और कोई नहीं बल्कि ये hi है बम्बाता और उस काल का बुलंद सिंह …”

ाजन्य ने मुझे ध्यान से देखा फिर रिद्धिमा की और देखा

“वो सब बाद में करेंगे अभी मुझे ऋतुपर्ण से सम्भोग करना है मैं तो चला “

वो जाने को हुआ तभी मैंने उसका हाथ पकड़ लिया

“तुम तो चले जाओगे लेकिन मेरा क्या होगा “

वो हँसाने लगा था

“मेरे पास एक योजना है ……”

वो मुझे देख कर मुस्कुराया ………
 
अपडेट 43
ाजन्य मुझे वही रुकने का इशारा करके खुद थोड़ी देर चला गया और एक अजीब सी हुंकार भरी , माहौल में उसकी आवाज गूंज गयी , और वंहा थोड़ी हलचल मच गयी , बुलंद सिंह जो की सम्भोग करके चूर हो चूका था वो एक्टिव हो गया और तुरंत hi खड़ा होकर उस जंगल से बहार भगा , वही रिद्धिमा के अलावा दोनों लड़किया भी भने को तैयार हो रही थी लेकिन रिद्धिमा के चेहरे में मैंने एक मुस्कान देखि ..

शायद ये ाजन्य का कोई संकेत थे रिद्धिमा उर्फ़ ऋतुपर्ण के लिए , दोनों ने ऋतुपर्ण से कुछ कहा लेकिन वो उन्हें कुछ बोलकर जाने को कहा ..

ाजन्य ने मुझे पहले hi कह दिया था की जैसे hi वो दोनों लड़किया तालाब छोड़कर थोड़ी दूर जाये मैं उन्हें खिंच कर झाड़ियों में ले जाऊ , वो दोनों तुम्हे ाजन्य समझेगी और तुम उनसे सम्भोग कर पाओगे ..

एक तरफ मुझे अपनी इस काल की दोनों बहनो से सम्भोग की बात सुनकर hi अजीब लगा लेकिन वही मेरा लिंग अब अपने पुरे ताकत में खड़ा होकर झटके मरने लगा था , कुछ देर अगर मैं उसको और शांत न करता तो वो फटने को तैयार हो जाता …और खासकर अपनी दोनों बहनो से सम्भोग की बात सुनकर मैं और भी उत्तेजित हो रहा था ..

ाजन्य ने जैसे कहा था वैसा hi हुआ बालंद भी वंहा से चला गया था वही वो दोनों लड़किया भी उसे वही छोड़कर जाने लगी थी ..

वो थोड़ी दूर hi गयी थी मैंने उनका हाथ पकड़ कर झाड़ियों में खींच लिया ..

वो दोनों मुझे देखकर आश्चर्य में भर गयी

“ाजन्य तुम … तुम्हे अभी सम्भोग करने की सूझ रही है सुना नहीं विशालकाय शेरो का झुण्ड आ रहा है , और तुम तो ऋतुपर्ण के साथ आने वाले थे , तुम उसे अकेला छोड़ कर यंहा क्या कर रहे हो “

“किसने कहा ??”

“अरे जिसने भी देखा होगा उसने hi तो आवज निकली है, और ऋतुपर्ण कहा है , उसने तो कहा था की उसने तुम्हे देखा है और वो तुम्हारे साथ आएगी “

“वो तो दूसरे रिश्ते से चले गई और मुझे तुम दोनों के साथ आने को कहा , अभी वो झुण्ड बहुत दूर है तुम दोनों को देख कर देखो मेरा क्या हाल हो गया है “

मैंने रेणुका अर्थात मेरी इस काल की प्यारी बहन ऋतू से कहा था ..

वो दोनों hi हँसाने लगे

“तुम सच में इस समूह के सबसे ताकतवर शिकारी हो और तुमसे तो सम्भोग करने के लिए हर चुड़ैल हमेशा से उत्सुक रहती है लेकिन वो शेरो का झुण्ड ??“

“मैं हु न … किसका है ये तुमको इन्तजार मैं हु ना..”

मैंने शाहरुख़ खान के स्टाइल में हाथ फैलते हुए कहा

दोनों hi मुझे अजीब नजरो से देखने लगे , मैं शाहरुख़ जैसे हाथो को फैलाये हुए पूरा नंगा खड़ा था और मेरा लिंग मेरे जांघो के बिच खड़ा था …

वो दोनों hi मुझे देख कर हँसाने लगे थे

“तुम ये पागलो जैसे हरकत क्यों कर रहे हो और ये तुमने क्या कहा “ मेरी बड़ी बहन अन्य उर्फ़ इस काल की अनुष्का बोल उठी , मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ और मैंने अभी जरुरी काम को पूरा करना hi ठीक समझा और उनके उप्पेर झपट पड़ा

मैंने अनुष्का को निचे जमीं में लिटा दिया था ,मेरी सबसे बड़ी बहन इस काल में भी वैसे hi दिख रही थी और लगभग उसी उम्र की अन्य दीदी उस काल में मेरी सगी बहन थी लेकिन इस काल में रिद्धिमा की सौतेली बहन , मैं अभी उनके उप्पेर लेता था और वो दोनों भी खिलखिलाते हुए मुझसे लिपट गयी थी ..

एक बार मैंने उनके चेहरे को देखा

“माफ़ कर देना दीदी “

मैंने फुसफुसाया

“ऐसे क्यों पागल कर रहा है जल्दी कर न “

उन्होंने मेरे लिंग को अपने हाथो में भर लिया था और अपने योनि में रगड़ने लगी थी

मैंने भी अपने होठो को उनके होठो में मिला दिया और उनके होठो को चूसते हुए अपने लिंग को उनकी योनि के भीतर प्रवेश करवा दिया ..

“आह्ह्ह्ह तुम थोड़े अलग लग रहे हो ाजन्य “ उन्होंने हलके से कहा

है मैं तो अलग hi हु लेकिन मेरे लिए ये किसी चुड़ैल से सम्भोग नहीं था बल्कि अपनी hi सगी बहन से सम्भोग था , मेरे मन में बार बार अन्य दीदी घूम जाती थी ,,

आश्चर्य इस बात का था की इससे मेरा लिंग और भी अकड़ जाता और मैं और भी जोरो से उनके योनि में धक्के लगाने लगता ..

वही ऋतू उर्फ़ रारुका भी मेरे होठो में अपने होठो को दाल कर अपने कमसिन जिस्म को मेरे बदन में मसलने लगी थी..

हवस सब कुछ भुला देता है और मैं अब हवस में डूब चूका था वही हाल उन दोनों का भी था ..

पहले अनुष्का के साथ जिस्म का मन भर के सुच बोगने के बाद मैं रारुका के उप्पेर आ गया , मेरा लिंग भी मेरा भरपूर साथ देते हुए अब भी बिलकुल hi ताव में तना हुआ था , मेरी छोटी प्यारी सी बहन मेरी दुलारी ऋतू का चेहरा सुख से भर जाता था जब जब मेरा लिंग उसके योनि की दीवारों पर वार करता , सुख से खिला उसका चेहरा देखकर और उसकी मादक सिसकिया सुनकर मेरे मन को एक अलग hi तरह की ख़ुशी मिल रही थी ..

एक घंट में दोनों hi शांत हो चुकी थी लेकिन मैं नहीं …

दोनों ने एक दूसरे को देखा और मुस्कुराते हुए अपनी टंगे चौड़ी करके एक दूसरे के आजु बाजु सो गयी ..

मैं कभी दो चार धक्के एक की योनि में मरता था फिर दो चार धक्के दूसरे की योनि में, अपनी दो बहनो को एक साथ भोगने का अजीब सुख मुझे मिल रहा था वही वो भी मेरी मस्ती से अलग hi दुनिया में पहुंच गयी थी ..

वो खिलखिला कर मेरे लिंग का स्वागत करती और मजे से अपनी कमर ुछका कर मेरा साथ देती …

तभी दोनों उठकर अपने घुटनो के बल बैठ गयी और मुझे मुख मैथुन का मजा देने लगी .

अभी अन्य दीदी मेरे लिंग को अपने मुँह में भर्ती तो कभी ऋतू ..ऐसा मजा और ऐसे नज़ारे के बारे में मैंने अपने इस जीवन में भी नहीं सोचा था ..

कुछ hi देर में मेरा लावा फुट पड़ा जिसे दोनों ने प्रसाद की तरह थोड़ा थोड़ा अपने मुँह में इसे गिराया और जीभ में लेकर इसे अमृत की तरग बड़े hi प्यार से निगल लिया ..

ये देखकर hi मेरा लिंग वीर्य के गिराने के बाद भी उछलने लगा ..

वो दोनों मेरे लिंग की इस हरकत से खिलखिला उठे ..

“अब बहुत हो गया हम चले , तुम अब शांत हो गए हो , तुम्हारा वीर्य गिर गया है , अब कुछ घंटो तक तुम्हे सम्भोग की जरुरत नहीं पड़ेगी , अब जाकर तुम सुप्रिया और ऋतुपर्ण से सम्भोग करना जिससे सम्भोग करना तुम्हे सबसे प्रिय है “

इतना कहकरर वो खिलखिलाते हुए वंहा से निगल गई ..

मैं मन मार कर वापस तालाब के पास आया और उसी झुरमुट से तालाब में देखने लगा, जंहा मुझे लगा था की ाजन्य और ऋतुप्रिया दोनों hi सम्भोग में डूबे होंगे लेकिन वो दोनों एक दूसरे की बांहो में बांहे डाले बस एक दूसरे को सहला रहे थे , ऋतुपर्ण रो रही थी वही ाजन्य भी जैसे किसी दूसरे दुनिया में खोया हुआ हो …..

मैं उन्हें आश्चर्य से देख रहा था की तभी माहौल में एक आवाज गरजी उन दोनों का भी ध्यान भांग हुआ और मेरा भी ..

उन दोनों के चेहरे में एक दर साफ़ झलक रहा था ..

तालाब के पास 20 विशाल काय शेर खड़े उन्हें घर रहे थे……….
 
अपडेट 44
मैं उन्हें आश्चर्य से देख रहा था की तभी माहौल में एक आवाज गरजी उन दोनों का भी ध्यान भांग हुआ और मेरा भी ..

उन दोनों के चेहरे में एक दर साफ़ झलक रहा था ..

तालाब के पास 20 विशाल काय शेर खड़े उन्हें घर रहे थे……….

वो शेर कोई आम शेर नहीं थे बल्कि बहुत hi खूंखार और विशालकाय लग रहे थे , ाजन्य और ऋतुपर्ण का ध्यान जब उधर गया तो वो भी सतर्क हो गए , ाजन्य ने तो बस मजाक किया था की ये शेर आ रहे है लेकिन ये तो सच में आ रहे धमके ..

दोनों hi लड़ाई की अवश्था में आ चुके थे , लेकिन शायद उन्हें hi पता था की इतने शेरो से लड़ पाना उनके बस का नहीं है…

एक बार ाजन्य ने मेरी और देखा , शायद उस झुरमुट से उसने मुझे देख लिया, वो हाथ हिलाकर मुझे बहार आने को बोलने लगा , लेकिन एक समस्या थी की उसके साथ ऋतू भी थी और मेरे बहार आने का साफ़ मतलब था की उसे मेरी सच्चाई का पता चल जाता …

शायद मेरा ये संसय ाजन्य भी समझ गया था वो वही से चिल्लाया

“आ जाओ इसे मैंने सब कुछ बता दिया है “

तब तक वो शेरो का झुण्ड उनके और भी करीब पहुंच गया ..

मैं भी तुरंत hi एक्टिव हुआ और झुरमुट से बहार आ कर उनके और बढ़ा , ऋतुपर्ण बस मुझे hi निहार रही थी आश्चर्य से वो मुझे hi देख रही थी लेकिन अभी इन सभी चीजों के लिए समय नहीं था , मैंने बस एक हाथो से उस शेर को उठाने की मुद्रा बनाई जो की उनके सबसे करीब था , वो हवा में उठने लगा , शायद वो भी आश्चर्य से पागल हुए जा रहा था सभी शेर अब मेरी और hi देखने लगे थे , हवा में लटका हुआ शेर दहाड़ा वही मेरे सबसे करीब जो शेर था वो मेरे उप्पेर हमला बोल दिया , लेकिन मैंने तुरंत hi हवा वाले शेर को उस शेर के उप्पेर पटक दिया शेरो के समूह में खलबली मच गयी थी वो सभी मेरे उप्पेर hi हमला कर रहे थे लेकिन मैं उन्हें दूर से hi हवा में इधर उधर फेक देता किसी को तालाब के बहार जंगलो की तरफ तो किसी को तालाब के अंदर फेक दिया , 2 मिनट में hi 20 शेरो का खूंखार समूह भीगी बिल्ली की तरह वंहा से जान बचा कर भाग लिया …

“वाह अद्भुत , सक्तिसाली शिकारी , मेरे दोस्त मेरे हमरूप , मेरा अगला जन्म … तुम कमाल के हो वाह ..”

ाजन्य आकर सीधे मेरे गले से लग गया , वही ऋतुपर्ण भी मेरे पास आयी और आश्चर्य से मेरे जिस्म को छूने लगी ..

“हर एक चीज एक जैसी है … ोूह देखो इसके लिंग में भी वही टिल है जंहा तुम्हारे लिंग में है “

ऋतुपर्ण मेरे लिंग को सहलाते हुए उसे देखने लगी जिससे मेरा लिंग जो की अभी अभी झाड़ा था लेकिन जान बाकि थी , और वो फिर से तन्ने लगा, मुझे उसे देखकर मेरी रिद्धिमा की याद आ रही थी असल में वो थी भी तो वही , बस जन्म दूसरा था …….

“उसका लिंग छोडो तुम अभी तो हमने वडा किया था न की हम एक दूसरे के अलावा और किसी से सम्भोग नहीं करेंगे “

मैंने आश्चर्य से ाजन्य की और देखा

“है मुझे समझ आ गया की प्रेम क्या है और हम एक दूसरे से प्रेम करते है , हम एक दूसरे के hi है अजय ..”

ाजन्य जैसे सफाई देता हुआ बोलै ..

“ओह्ह तो ये बात है , तभी तुम सम्भोग न करते हुए एक दूसरे की बांहो में मचल रहे थे “

रिद्धिमा उह सॉरी ऋतुपर्ण के चेहरे में एक स्वबाह्विक सी शर्म आ गयी … लेकिन फिर वो खुद को सम्हालते हुए मेरे पास आने लगी और आकर मुझसे लिपट गयी…

“तुम्हारा धन्यवाद् अजय , वर्ण ाजन्य कभी इस प्रेम को समझ नहीं पता “

क्या बताऊ की कैसा लगा , मन कर रहा था की अभी उसके होठो में होठ दाल दू लेकिन वो मेरी होते हुए भी मेरी नहीं थी

ाजन्य ने तोडा गुस्से से उसे देखा

“हमने वडा किया था न ??”

उसने हलके आवाज में कहा और ऋतुपर्ण हंस पड़ी

“ये और तुम तो एक hi हो , फिर मैं इसके साथ सम्भोग करू या तुम्हारे बात तो एक hi है न “

ऋतुपर्ण ने बड़े hi ऐडा से कहा और ाजन्य उसे देख कर गुस्से में आ गया ,

“तो करो इसी से सम्भोग मैं चला “

वो जाने लगा था , ऋतू उसके पीछे दौड़ी और उसे अपनी और खिंच कर उसके होठो में अपने होठो को दाल दिया ..

दोनों के होठो मिल चुके थे मैं उन्हें देख कर उत्तेजित होने लगा था लेकिन ये प्रेम में पड़े शिकारी और चुड़ैल थे ये दूसरे साथी के साथ सम्भोग नहीं करते , है मैंने दूसरे साथी के साथ सम्भोग जरूर किया था क्योकि उस समय मेरी साथी मेरे पास नहीं थी , फिर भी मैं उनके पास गया और रिद्धिमा की सूरत वाली उस लड़की को देखकर मेरा खुद को रोक पाना बहुत hi मुश्किल हो रहा था ,

ाजन्य ने अपने हाथ उसके कमर से लगा कर उसे खुद से सत्ता लिया था वही ऋतू भी उससे बिलकुल चिपके हुए थी , दोनों hi प्रेम में फिर से डूब रहे थे और ये देख कर मैं उत्तेजित हुआ जा रहा था , जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं भी ऋतू के पीछे जाकर खड़ा हो गया , बार उसने मुझे प्यार से देखा और हाथो के इशारे से मुझे और पास बुलाया , मैं जाकर उससे चिपके चूका था ाजन्य अब उसके गले को चुम रहा था और वो पीछे मुड़कर अपने होठो को मेरे सामने ला दी ..

मैं उसके होठो में अपने होठो को दाल कर उसे चूसने लगा , वो मचलती हुई ाजन्य का सर निचे दबाने लगी , अन्य उसके वक्षो से खेलता हुआ उसके नाभि तक पहुंच चूका था ,

मुझे मेरी रिद्धिमा के नाजुक शरीर से खेलने का अहसास हो रहा था मेरा लिंग भी अकड़ा हुआ ऋतू के कूल्हों में रगड़ खा रहा था वो मुझे अपने अंदर लेना चाहती थी लेकिन अभी उसका प्रेमी उसके योनि को अपनी जीभ से सहलाने लग गया था ,

“आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाजनयाआआआ”

वो सिसकी और मेरे होठो को काट दिया उस शरारत का बदला मैंने उसके कंधे को चूमते हुए उससे अलग होकर लिया ,

मैंने अपने हाथो को घुमाया और ऋतुपर्ण आकाश में उड़ाने लगी ,

ाजन्य आश्चर्य से मुझे देख रहा था , मैं मुस्कुराते हुए ऋतू को आकाश में सुला दिया , वो मेरी इस हरकत से खिलखिला कर हँसाने लगी वही ाजन्य के होठो में भी मुस्कान आ गयी वो अपने घुटनो के बल बैठ चूका था और हवा में लटकी ऋतू की योनि उसके सामने थी वही उसका सर मेरे तरफ था , मैंने उसे पलटा अब वो पेट के बल सोने वाली पोजीशन में हवा में लटकी हुई थी , ाजन्य अब भी उसके गद्देदार कूल्हों को मसलता हुआ उसकी योनि चूस रहा था वही मैं उसके बालो को अपने हाथो में लेकर अपने लिंग को उसके चेहरे में रगड़ने लगा ..

ाजन्य की झिबह ने योनि को पूरी तरह से गिला कर दिया था , ऋतू भी मजे में चहक रही थी और मेरे लिंग को पकड़े हुए अपने होठो में घुमा रही थी ..

आज मुझे अपनी एक और नयी शक्ति का पता चला था , किसी को हवा में उठाने के लिए मुझे हाथो की मुद्रा बनाना की भी जरुरत नहीं थी असल में मैं अपने मन से किसी वस्तु को उठाने के काबिल था , इसी शक्ति के बल पर शिकारी पानी में चल रहे थे , लेकिन ये शक्ति भी उन्हें hi मिलती थी जो प्रेम में पड़े हो …….

मैंने अपनी शक्ति की और भी परीक्षा करने की सोची और अपने मन को थोड़ा एकाग्र करके खुद के साथ ाजन्य और ऋतू को भी आकाश में उठाने लगा …

और ये क्या हम तीनो hi आकाश में उड़ रहे थे ….

“ये क्या कर रहा है तू , निचे उतार “

ाजन्य चिल्लाया ..

“आज तुम अपने प्रेम से पहली बार एक प्रेमी की तरह सम्भोग करोगे ये कुछ खास तो होना hi चाहिए , आज तुम आकाश में सम्भोग करोगे ..”

ये बोलते हुए मेरे होठो में एक मुस्कान आ गयी ..

हम बहुत ुचे उठ चुके थे , जंगल के पेड़ो से भी उप्पेर …

मेरी बात सुनकर ाजन्य के साथ साथ ऋतुपर्ण भी मुस्कुरा उठी थी ..

“बस गिरा मत देना “ ऋतू ने मुस्कुराते हुए कहा और फिर से मेरे लिंग को अपने मुँह में दाल दिया ..

“आअह्ह्ह्ह “ उसके इस हरकत से मैं मजे के सागर में तैरने लगा था वही ाजन्य ने अपने लिंग को उसके भीगे हुए योनि में दाल दिया ..

और इस बार सिसकी ऋतू की थी , ाजन्य उसके उप्पेर जैसे लेट गया और उसके पीठ को चूमते हुए धक्के लगाने लगा ..

वही मेरी हालत थोड़ी दूसरी थी , हम हवा में थे और मुझे इस उचाई से थोड़ा दर भी लग रहा था लेकिन इसे मुझे hi सम्हालना था , मैंने अपनी शक्तियों पर भरोषा किया और आंखे बंद कर लिंग के चूसै का मजा लेने लगा …..

उसके कोमल होठ जब जब मेरे लिंग की चमड़ियो को सहलाते हुए उसके जीभ और लार में खेलते थे तब तब मेरे मुँह से सिसकी निकल जाती , वही ऋतू भी ाजन्य के द्वारा लगाए जा रहे ताकतवर धक्को से मचल जाती थी और उत्तेजना में आकर और भी जोरो से मेरे लिंग को चूसती थी ..

ाजन्य को अब अपनी जान का चेहरा देखने का मन हुआ और उसने ऋतू को पलटा दिया , आकाश के बिस्टेर में सोई हुई ऋतू आराम से करवट बदल कर लेट गयी लेकिन इससे मेरा लिंग उसके मुँह से निकल गया था ,

ाजन्य उसके उप्पेर छ गया था और तेजी से धक्के लगाने लगा था , दोनों के hi होठ मिल चुके थे जैसे किसी गहरे अहसास में दोनों डूब रहे हो..

मैं समझता था की ये इनका प्रेमी प्रेमिका के रूप में पहला मिलान है और मैं hi यंहा बिना बुलाये आया हु , मैं दूर हटकर उन्हें देखने लगा ..

मुझे याद आया की शायद मैं और रिद्धिमा भी सम्भोग करते हुए ऐसे hi लगते होंगे , मुझे रिद्धि की तीव्र याद आने लगी थी , वो तो मेरे पास नहीं थी इस गम को भूलकर मैं इन प्रेमी युगलो के सम्भोग को और भी मनोरम बनाना की सोचने लगा ,

मुझे निचे तालाब दिखाई दिया और उप्पेर से hi आम के बगीचे में आम के फूल भी दिखाई दिए , वसंत का मौसम आ चूका था और आम के फूल जिसे मौर भी कहते है वो खिल रहे थे , उनकी गंध नथुनों में पढ़कर और भी मादकता ला रही थी ..

मैंने मन से hi उन फूलो को तोड़ने लगा और जब वो बहुत सरे हो गए तो मैंने उसे उड़ाकर ऋतू और ाजन्य के उप्पेर गिरा दिया ..

मेरी इस हरकत से प्रेम और सम्भोग के तीव्र आनंद में डूबे हुए दोनों के चेहरे पर एक मुस्कान खिल गयी , मौर की महक चारो और फ़ैल रही थी और माहौल को और भी रोमांटिक बना रही थी , वही मैं उनके पास hi लेता हुआ अपने लिंग को अपने hi हाथो से सहला रहा था ..

अजीब बात थी की इतनी उत्तेजना के बाद भी मैं आराम से उन्हें देख रहा था, मेरे चेहरे में उन्हें देखकर बस मुस्कान थी ……..

एक समय आया की दोनों hi अपने प्रेम को एक दूसरे में निछावर करके थक चुके थे लेकिन दोनों के नंगे जिस्म अब भी पसीने से नहाये हुए एक दूसरे से लिपटे हुए थे ..

थोड़े देर में hi ऋतू ने अपनी आंखे खोली , उसके आँखों से hi अभी अभी उसे मिला परम सुख साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था , उसने इशारे से मुझे अपने पास बुलाया और ाजन्य से अलग होकर मुझे खुद को बैठने का इशारा किया ..

मैं भी आसमान में hi पेअर मोड़कर बैठ चूका था और ऋतू को भी अपनी और खींचकर उसे अपने गॉड में बिठा लिया, उसके स्तन अब मेरे पीठ पर चुभ रहे थे वही हमारे होठो एक दूसरे के होठो से मिल चुके थे , ाजन्य भी अपने सुख के तूफ़ान से बहार आकर हमें hi देख रहा था , मेरा लिंग ऋतू के योनि में गया , मुझे वंहा मौजूद ाजन्य के वीर्य का अहसास हुआ लेकिन उत्तेजना और ऋतू के योनि से निकलने वाला पानी सभी एक साथ मिल चुके थे ..

मेरा लिंग आसानी से ऋतू के योनि में धसता चला गया और वो बस मुझे जोरो से जकड़कर सिसकिया लेती हुई मुझमे खोने लगी , जैसे जैसे उत्तेजना और मजा बढ़ रहा था मेरी पकड़ काम हो रही थी , हम अचानक hi थोड़े गिरे लेकिन ध्यान में आते hi मैंने खुद को सम्हाल लिया ……

“हमें ये निचे जाकर करना चाहिए, तुम्हारा ध्यान खो रहा है ..”

ऋतू ने हलके से कहा .. मुझे उसकी बात सही लगी मैं निचे जाने की सोची लेकिन मैं निचे नहीं जा प् रहा था , मैं बौखला गया तभी मेरी हालत देखकर ाजन्य हंस पड़ा , उसने हाथो से उप्पेर जाने का इशारा किया और हम उप्पेर उठ गए ..

ऋतू आश्चर्य से उसे देखने लगी

“ये शक्ति तुम्हारे काबू में कैसे ????”

“जो शिकारी और चुड़ैल प्रेम के बंधन में बांधकर सम्भोग करते है ये उनके अंदर अनायास hi आ जाता है “ मैंने उसके उत्त्सुकता का जवाब दिया

“तो क्या मेरे अंदर भी कोई शक्ति आयी होगी “

ऋतू ने भी वैसा hi कुछ कर के देखा लेकिन उससे वैसा कुछ नहीं हुआ .. वो मुझे घूरने लगी

“मुझे नहीं पता की चुड़ैलों के पास क्या शक्ति आती है , लेकिन कुछ तो आती hi होंगी , मुझे भी ये तब पता चला जब मैं यंहा आ पंहुचा था “

ऋतू मादक आँखों से मुझे देख रही थी

“तुम्हारा धन्यवाद् की तुम यंहा आये “

उसने फिर से अपने होठो को मेरे होठो में लगा दिया , ाजन्य अपने सकती से खेल रहा था , वो कभी कुछ उप्पेर उठता तो कभी कुछ , वो बेहद hi खुश था , वो मुझे और ऋतू को भी इधर उधर कर रहा था लेकिन मेरा लिंग ऋतू के योनि में गहराई से समाया हुआ था वही वो मेरे गॉड में बैठी थी इसलिए हमें उसकी हरकतों से मजे hi आ रहे थे ..

उसने हम दोनों को उल्टा hi कर दिया , लेकिन फिर भी ऋतू मेरे गॉड में खुद रही थी और मैं भी उसे जोरो के धक्के लगा रहा था ..

हम दोनों ुटले hi सम्भोग में लगे हुए थे , ऋतू ने अपने पैरो को मेरे कमर से फंसा लिया था और हम आराम से सम्भोग कर पा रहे थे , आज मुझे पता चला की आसमान में सम्भोग करना कितने मजेदार होता है , कोई भी पोजीशन बना लो कोई दिक्कत नहीं ..

थोड़ी देर में ाजन्य की भी शरारते ख़त्म हो गयी और वो भी आकर ऋतू से चिपके गया वो उसके पीठ को अपनी जीभ से चाट रहा है वही ऋतू भी अपना चेहरा उसके तरफ किये उसके होठो को अपने होतो में बाहरकर उसपर अपना प्यार जाता रही थी …….

ये सिलसिला चलता hi रहा , हम अलग अलग अलग जाकर सम्भोग करते कभी मैं तो कभी ाजन्य , तो कभी बस आसमान में घूमते रहते , कभी किसी पहाड़ की छोटी पर पहुंच जाते ..

रात होने को आयी थी लेकिन हमारा मन अब भी एक दूसरे से और अपनी ताकत को समझने और इस्तमाल करके देखने से नहीं भरा था ……

 
अपडेट 45


सुबह होने वाली थी जब मैं और ऋतू ने आखरी सम्भोग किया , हम उसी जगह पर थे जंहा मैं और रिद्धिमा सम्भोग कर रहे थे , उसी नदी के पास की रेट में लेते लेते हम सम्भोग में मगन हो गए ……..

आंखे खुली तो दिन निकल चूका था , निचे लेती ऋतू के चेहरे को मैंने प्यार से चूमा ..

वो भी अलसाई हुई लेकिन प्रेम से भरे नयनो से मुझे देख रही थी और सहला रही थी .

लेकिन तभी ….

मुझे अहसास हुआ की मैं रेट में नहीं बल्कि किसी बिस्टेर में लेता हुआ हु ..

मैं हड़बड़ाते हुए खड़ा हुआ तो चारो और शिकारी और चुड़ैले दिखे जो की नंग एक दूसरे में मस्त थे …

“क्या हुआ ऐसे क्यों चौक रहे हो , अरे यू ोकक बेबी..”

ये ऋतुपर्ण नहीं थी बल्कि ये तो सच में मेरी रिद्धिमा hi थी , मैं खुश होता या दुखी मुझे समझ hi नहीं आ रहा था , मेरा मन उस समय में राम hi रहा था की मैं फिर से इस समय में आ पंहुचा था …….

“क्या हुआ बताओ तो . ऐसे अजीब से क्या देख रहे हो “ रिद्धिमा के चेहरे में थोड़ी सी चिंता के भाव आये , मैंने मुस्कुराते हुए बस अपना सर ना में हिलाया और उसका हाथ पकड़ कर उसे वंहा से दूर ले गया …

“क्या हुआ “ वो हसते हुए बोली , मैंने बस उसकी आँखों में देखा

“तुम्हे जादू दिखता हु “ ये बोलकर मैंने उसे और खुद को हवा में उठा दिया …..

“ये क्या हो रहा है ..” वो ख़ुशी में चिल्लाने लगी और मुझे कास कर पकड़ लिया

“तुम मेरी बात का यकीं नहीं करोगी की मेरे साथ क्या हुआ “

मैंने उसे साडी घंटा के सबरे में बताना शुरू किया वो सच में हैरान थी

“तुमने अपनी hi बहनो के साथ सेक्स किया छी

“अरे यार लेकिन उस समय में इसे बुरा नहीं मन जाता था “

“तो क्या हुआ तुम्हे तो पता था की वो तुम्हारी बहाने है और इस समय में इसे बुरा मन जाता है”

“माफ़ कर दो तुम तो जानती हो की एक शिकारी के लिए ये कितने मुश्किल होता है ….”

मैंने अपने कण पकड़े और वो भी मान गयी ..

“लेकिन तुम्हारे आने के बाद क्या होगा ??”

“होगा नहीं हो चूका , शायद मेरा काम यही तक था की मैं उन्हें प्यार का अहसास दिलो और इस ताकत के बारे में बता कर वापस हो जाऊ .. वो हमारा पास्ट है , मैंने वंहा जाकर जो किया उसकी परिणीति हमें अब देखने को मिल रही है , दो अलग समूह बन चुके है , डॉ. के बारे में भविष्यवाणी भी ाजन्य ने hi की होगी , वही प्रमुख शिकारी बना होगा क्योकि उसके पास ऐसी तकते है जो की वंहा किसी के पास नहीं है , पहला शिकारी जो की प्रेम करना सीखता है “

“है और वो तुम hi थे “

रिद्धिमा ने मेरे गलो में एक प्यारा सा चुम्मन दिया

“और तुम भी मेरी जान “ मैंने भी उसे जकड लिया ……..

“लेकिन इससे बुलंद सींग का क्या वास्ता रहा होगा “

“जो भी रहा होगा न तो वो उस समय हमें पछाड़ पाया होगा न hi अब वो हमारा कुछ बिगड़ सकता है तो don’t वोर्री अबाउट हिम … और अगर सरे शिकारी और चुड़ैल प्रेम में पद जाये तो इस जंगल का भी कोई बल बांका नहीं कर पायेगा … एक ऐसी फौज तैयार हो जाएगी जिसे हरा पाना मुश्किल hi नहीं इम्पॉसिबल होगा “

मेरी बात सुनकर रिद्धिमा के चेहरे में मुस्कान और खिल गई वो मुझसे आकर लिपट गयी थी , एक कहानी ख़त्म हो चुकी थी और ये कहानी भी ……….

थे एन्ड
 
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