Incest kahani - Shikari Ki Bimari - Page 4 - SexBaba
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Incest kahani - Shikari Ki Bimari

अपडेट 25
“सुलभ भाग गया , ये कैसे हो सकता है ??”

मेरी माँ बहुत hi जयदा दरी हुई थी उन्हें मैंने सांत्वना दी और डॉ. के तरफ रुख दिया जो किसी सोच में पड़े हुए थे

“ये सुलभ का काम नहीं हो सकता , सेंट्रल जेल से भागना वो भी अकेले , वो hi उसे तोड़ कर … जरूर अंदर का कोई आदमी मिला होगा, और सुअलभ के पास अभी इतना पावर नहीं है की वो किसी को पता भी सके , जरूर कोई इन्फ्लुएंटीएल आदमी ने उसकी मदद की है , या ये कह सकते है की किसी ने सुलभ को जेल से निकलवाया है ..”

“डॉ. रंडी ??’ मेरे मुँह से अनायास hi निकल गया

“हो सकता है , उसके पास इतना पावर तो है की वो ऐसे काम को चुटकियो में कर सकती है और किसी को भी भनक तक नहीं लगेगी … लेकिन सवाल है की क्यों , सुलभ के गांव वाले उसे नहीं चाहते , रिद्धिमा अब गद्देदार बनाने वाली है तो सुलभ के पास कोई पावर भी तो नहीं बचेगी , मतलब साफ़ है की वो बस सुलभ का इस्तमाल करना चाहते है ..”

“हुम्म्म जरूर जिस जंग की बात डॉ. ने उस समय की थी ये उसका पहला वार है “मैंने अपनी शंका जताई

“है मुझे भी यही लगता है “

मैंने जमुना की तरफ देखा , सुलभ के भाग जाने की खबर से उसका चेहरा hi पीला पद गया था

“तुम्हे क्या हुआ तुम तो उसे कण्ट्रोल कर सकती हो न “

“पहले कर सकती थी लेकिन अब नहीं , मैं खुद आपके कण्ट्रोल में हु मालिक .. मुझे बस इस बात का दर है की अगर सुलभ को पता चल गया की मैंने रिद्धिमा और उसके साथ क्या किया है तो … तो वो मुझे जान से मार देगा “

मैंने एक गहरी साँस छोड़ी

“फ़िक्र मत करो जमुना तुम्हे कुछ नहीं होगा .. लेकिन आज से हमारे घर का कोई सदैस बिना सुरक्षा के बहार नहीं जायेगा , सुलभ जंगली आदमी है वो किसी पर भी हमला कर सकता है .. वो बदले की आग में जल रहा होगा “

मैंने बड़ी hi गंभीरता से ये बात कही थी , वही माँ बोल उठी

“बीटा मेरे ख्याल से अब तुम्हे जल्द से जल्द hi गद्दीदार बन जाना चाहिए इससे गांव वालो का भी तुम्हे साथ मिल जायेगा , तुम नए मुखिया होंगे तो गांव के फैसले भी तुम कर सकोगे , “

“लेकिन माँ मैं अभी तैयार नहीं हु “

मेरी बात सुनकर डॉ. मुस्कुराने लगे ..

“कोई कभी तैयार नहीं होता , जो करना है पहले उसमे कूद जाओ , रास्ता अपने आप मिलने लगेगा “

“है डॉ. साहब आप सही कह रहे है आज नहीं तो कल इसे ये करना hi है , कब तक अपनी जिम्मेदारियों से भागेगा .. कल hi इसे यंहा का गद्दीदार बनाया जायेगा “

माँ की बात सुनकर मैं बस सबके चेहरे देखने लगा था ..

*************

इधर

बादलखेड़ा का थाना इंचार्ज हाथ बंधे खड़ा था सामने दो सिंहासननुमा कुर्शियो पर दो बहुत hi प्रभावशाली दिखने वाले लोग बैठे हुए थे ..

उनके एक और वीरेंदर और रहमत खड़े थे वही दूसरी और सोनी और हिना ..

आस पास कई बंदूख धरी लोग खड़े थे हुए सभी के सभी किसी पहलवान से काम नहीं दिख रहे थे ..

वही पास में एक सफारी सुईठे पहने एक आदमी आँखों में चश्मा लगाए हुए खड़ा हुआ था जिसके हाथो में कुछ फाइल्स थे ..

उस ख़ुर्शी में बैठे दो लोग बादलखेड़ा के सबसे प्रभावशाली लोग थे एक था मला बुलंद सिंह और दूसरा था वंहा के गैर कानूनी धंधो का राजा और बुलंद का पार्टनर शरीफ खान जिसे दुनिया शरीफ भाई बुलाती थी ..

“सर दोनों लड़को के साथ कुंदन और जाफर की लड़ाई जरूर हुई थी लेकिन उन्होंने उन्हें मारा नहीं था , उनकी जान लेने वाला कोई दूसरा hi है , और जिसे सोनी और हिना बता रहे है की वो लड़का अजय एक शिकारी है तो मुझे लगता है की चुड़ैल भी होती होंगी , हमने तो बचपन से hi उनकी बहुत कहानिया सुनी है “

इंस्पेक्टर रविंद्र तिवारी बोल उठा …

अभी अभी हिना और सोनी ने अपने तरफ से खोजबीन करके ये कन्फर्म पाया था की अजय सच में एक शिकारी है , और वो सीधे अपने पिता के पास पहुंची थी , इस बारे में चर्चा करने के लिए एक मेटिंग बुलाई गयी जंहा पर दोनों के भरोसेमंद लोग मौजूद थे ..

“है मुझे पता है की वो लड़के ऐसा नहीं कर सकते ..”

बुलंद सींग ने इंस्पेक्टर की बात का समर्थन किया था

“लेकिन पापा इससे क्या फर्क पड़ता है उन्होंने हमारे भाई से लड़ाई की थी इसकी सजा तो उन्हें मिलनी hi चाहिए न “

बुलंद का बीटा वीरेंदर गुस्से में कह रहा था , उन्हें अब भी विस्वास नहीं हो प् रहा था की साला ये अजय बच कैसे गया ..

उसकी बात सुनकर बुलंद एक गहरी साँस लेने लगा ..

“तुम लोगो ने उसे किडनैप किया था , इतना मारा था की कोई दूसरा होता तो कब की उसके प्राण पखेरू उड़ गए होते , लेकिन क्या हुआ .. बीटा वो शिकारी है उससे टकराने से हमें hi नुक्सान होने वाला है “

उसकी बात सुनकर शरीफ का बीटा रहमत और भी गुस्से में आ गया

“आप कहना क्या चाहते है अंकल की हम नामर्दो की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे “

उसकी बात सुनकर बुलंद जोरो से हंस पड़ा और शरीफ की तरफ देखने लगा ,लेकिन इस बार उसके चेहरे में कोई हंसी नहीं थी बल्कि वो थोड़ा गंभीर हो चूका था ..

“शरीफ हमने ये साम्राज्य ये नाम बहुत hi म्हणत से बनाया है , याद है जब मैं और तुम झोपड़ी में रहा करते थे “

“याद है भैया , कैसे भूल सकता हु उन दिनों को , कितने पापड़ बेले तब जाकर ये सब बनाया और इन सेल चुतियो को ये सब फ्री में मिल रहा है , इसीलिए इनके पास अकाल की कमी है “

शरीफ की बात सुनकर उनके बच्चे बिलकुल चुप hi हो गए वो बस एक दूसरे को देख रहे थे ..

“सही कहा तुमने , लेकिन इन्हे सीखना तो हमें hi पड़ेगा न , आखिर आगे जाकर इससे सम्हालना तो इन्हे hi है , और इस सिचुएशन से अच्छा क्या होगा इन्हे समझने के लिए “

“ये आप लोग क्या बोल रहे हो पापा” सोनी बड़ी hi उत्त्सुकता से बोली

और बुलंद ने बड़े hi प्यार से उसे देखा , बुलंद का चेहरा शांत था

“बीटा ईगो इंसान की बुद्धि को मार देता है , हम तुम दोनों लड़कियों की तारीफ करते है की तुमने एक बात सुनी , उसकी गहराई को समझा और फिर उस पर छानबीन करके एक नतीजे में पहुंची … लेकिन ये सेल चूतिये .. बस मसल्स बनाने से काम नहीं होता दिमाग भी लगाना पड़ता है , अपना ईगो साइड में रखो और दिमाग लगाओ , खासकर जब ऐसा दुश्मन तुम्हारे सामने हो जो की तुम्हारा दुश्मन hi नहीं है , लेकिन ताकतवर जरूर है , उससे लड़ने जाओगे तो अपना hi नुक्सान होगा ..”

“लेकिन पापा ..”वीरेंदर कुछ बोलने hi वाला था की बुलंद ने उसे चुप करवा दिया

“जो उसने किया उसकी सजा तुम उसे दे चुके हो अब बात को यही ख़त्म करो “

“लेकिन पापा वो दूसरा लड़का “

“नहीं बोलै न बात यही ख़त्म करो , उस दूसरे लड़के के चक्कर में तुम अजय से फिर से भीड़ जाओगे , और शायद तुम्हे उनके गांव की हिस्ट्री का नहीं पता , वो तीन गांव है और उसमे से अजय एक गांव का मुखिया है और दूसरा लड़का दूसरे गांव के मुखिया का बीटा … “

“लेकिन हमारे पास क्या नहीं है , हमारे पास पैसा है , लोग है पुलिस हमारी है फिर हमें किस बात का दर ..”

बुलंद ने एक गहरी साँस ली

“डॉ. चुटिया को जानते हो …”

सभी के चेहरे में थोड़ा आश्चर्य आ गया

“वो कौन है ..??”

“और डॉ. रंडी को जानते हो ??“

“ये आप किनके नाम ले रहे है कितने अजीब नाम है ये ..”

“ये वो लोग है जो अभी उन गांव वालो के साथ है , हमारा पैसा किसी काम का नहीं है , हमारे लोग उनके लोगो के सामने नहीं टिक पाएंगे , क्योकि हमारे पास सिर्फ गुंडे है लेकिन उनके पास वो लोग है जो उनके एक इशारे पर जान दे भी सकते है और जान ले भी सकते है … तो हमारे पास बचता है सिर्फ पोलिटिकल पावर और पुलिस … लेकिन इन दोनों के गांव में आने से वो भी हमारे काम नहीं आने वाली ..

अगर हमने कोई गैर कानूनी कदम उठाया तो ये दोनों हमें घेर लेंगे , केंद्र से मीडिया और फाॅर्स आ सकती है , या फिर हाई कमांड से हमारे ऊपर प्रेशर बनाया जा सकता है , पॉलिटिक्स में ये लोग मंझे हुए खिलाडी है और इनसे फालतू में पन्गा लेना सिर्फ मूर्खता hi होगी ..

अगर ये डॉन लड़के हमारे बच्चो के कातिल होते तो बात और थी लेकिन हमें बस इतना पता है की उन लोगो से इनकी लड़ाई हुई थी , अब लड़ाई तो वो लोग किसी से भी करते रहते थे छोटी छोटी बात पर लड़ते रहते थे .. तो क्या बस अपने ईगो को संतुष्टि करने के लिए हम अपने इतने म्हणत से बनाये साम्राज्य में आंच आने दे …

तुम लोग भी उन्हें भूल जाओ आयी बात समझ में ..”

बुलंद ने सीधे आदेश सुना दिया ..

वही इंस्पेक्टर रविंद्र तिवारी उसकी बात से थोड़ा आश्चर्य में पद गया था ..

“सर आपको कैसे पता चला की डॉ. चुटिया और डॉ. रंडी गांव आये हुए है “

बुलंद के चेहरे में मुस्कान आ गयी

“तिवारी इतनी खबर तो हम भी रखते है उन लोगो के बारे में , सभी को उन गांव वालो का पागलपन पता है , और वो तीनो गांव आपने आप में इतने स्वाभिमानी है की हमारी पॉलिटिक्स वंहा पर काम hi नहीं करती , उन तीनो गांव से सत्ता हुआ बड़ा सा जांगले है और जांगले में है बहुत से मिनरल्स का भण्डार … अभी तक जीतनी भी सरकार आयी सब ने उस पर नजर गली लेकिन गांव वालो के विरोध से कुछ नहीं कर पाए , मिनरल्स का मतलब है पैसा लेकिन साथ hi साथ उसका मतलब है जंगलो का खत्म , जब बात जांगले की आती है तो तीनो गांव वाले एक हो जाते है , उनकी परमपरा भी कुछ ऐसी है की शिकारी और चुड़ैलों की बाटे होती है , और अब तो हम भी देख रहे है की ये कितनी सही है ..

इसलिए उन गांवो का पोलिटिकल महत्वा बहुत जयदा है , हमें और हमसे पहले आयी कई सरकारों ने वंहा के मुखिया लोगो को पैसे या डरा धमका कर खरीदने की कोशिस की थी लेकिन , लेकिन सेल सभी एक no. के ईमानदार है अपने जंगलो से उन्हें बहुत hi प्यार है … अपनी परम्पराओ को वो छोड़ना नहीं चाहते ..

लेकिन हम चाहते है की जो काम कोई नहीं कर सका वो हम करेंगे और इसलिए हमें वंहा अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया , कुछ लोग जो पैसो में बिक गए और वंहा की घबरा हमारे तक पहुंचने लगी ..

हमने कुछ ऐसा किया की तीनो गांव में दरार पद जाये खुद hi वो एक दूसरे से लड़ कर मर जाये , लेकिन कोई शिकारी आकर उस अजय को बचा ले गया और लड़ाई वही रुक गयी , सोचा था की अजय काम आएगा वो ठीक होकर अपने पिता और चाचाओं का बदला लेगा लेकिन वो साला भी निकम्मा निकला , फिर हमारे बच्चो से उनकी लड़ाई , मुझे तब पता चला की उस अजय के पास सच में कितनी ताकत है .. बस दिमाग नहीं था , सोचा था की इसी बात का फायदा उठाया जाये, लेकिन दिमाग देने ये सेल पता नहीं क्यों डॉ. चुटिया को अपने साथ ले आये …

लेकिन फिर इतने सालो के बाद फिर से एक उम्मीद दिखाई दे रही है , दोनों गांवो को लड़ने की , जंहा अजय डॉ. चुटिया को ले आये है वही साहनपुर वाली लड़की ने डॉ. रंडी को अपने साथ ला लिया है , शायद कोई ऐसी बात हुई है अजय और उस लड़की के बिच जो थोड़ी पर्सनल है , लेकिन जो भी हो जैसे ये दोनों गट एक दूसरे से मिले हमें समझ आ गया की इन दोनों गुटों के बिच कोई लड़ाई तो होने वाली है , अब ऐसा मौका सामने है और ये चूतिये सालो की म्हणत को बर्बाद करने में तुले हुए है , अगर तीनो गांवो में से किसी पर भी मुसीबत आयी और कोई बहार वाले के कारण आयी तो ये तीनो गांव एक हो जायेंगे , इसलिए बहुत जरुरी है की इन तीनो गांवो के लोगो को आपस में hi लड़ाया जाये … और यही वो मौका है , हमें तो बस दर्शक बनकर मजे लेने है … समझ गए तुम लोग “

बुलंद की बात सुनकर सभी ख़ामोशी थे …

“अंकल तो आपको पहले से पता था की अजय एक शिकारी है “हिना की बात सुनकर बुलंद मुस्कुरा

“है मेरी बच्ची मैंने ये बात पहले से सुनी थी लेकिन कभी विस्वास नहीं हुआ था , लेकिन जब तुम लोगो ने बताया तो विश्वास भी हो गया, मैं तो इस शिकारी और चुड़ैलों की मान्यत्ता को महज कहानिया hi मान रहा था .. लेकिन हमारे बच्चो की मौत और उस लड़के का तुम लोगो के मरने के बाद भी बच जाना hi इसी बात का सबूत है की ये शक्तिया भी है , और हमें अगर अपना मकसद पूरा करना है तो बल से जयदा हमें दिमाग की जरुरत पड़ेगी .. और इसलिए मैं तुम चारो को ये स्ट्रिक्टली हिदायत दे रहा हु की तुम लोग कोई ऐसा कदम नहीं ुतहोगे जिससे उनके गांव वालो से हमारी लड़ाई हो , अभी वो लोग एक दूसरे से लड़ने की तयारी में है हमें देखना है , और सही मौके पर जब वो कमजोर हो जाये तब वार करना है ”

सभी बच्चो ने हां में सर हिलाया ..

“लेकिन सर , गॉव. के पास तो इतनी पावर होती है की वो जिस जमीं को चाहे अधिग्रहित कर ले , और ये जमीं तो गॉव की hi है .. जंगल के अंदर बस कुछ आदिवासी कबीले hi रहते है , उन्हें वो कंपनसेशन दिया जा सकता था ..”

“हुम्म्म बात जीतनी सीधी दिखती है उतनी होती नहीं न , है गॉव. के पास पावर है लेकिन ये डेमोक्रेटिक कंट्री है , सरकारी जनता से hi चलती है , और उन तीनो गांवो का प्रभाव ऐसा रहा है की आसपास ले लोग भी उनकी hi बात सुनते है , वो कबीले वाले भी उनकी hi बात सुनते है , और सोने पर सुहागा वो डॉ. चुटिया और डॉ. रंडी … एक बार सर्कार ने थोड़ी कड़ाई दिखाई थी , उस समय मैं पार्टी का कार्यकर्ता हुआ करता था गुंडा गर्दी का काम मेरे और शरीफ के हाथो में hi था , सब तरीके का जोर लगाने को तैयार थे हम , केंद्र की सर्कार भी हमारे साथ थी , लेकिन क्या कर पाए … ऐसा आंदोलन चला की पूरा राज्य hi हमारी सर्कार के खिलाफ खड़ा हो गया , विपक्छा चढ़ गयी , हमें उन्हें पैसो का अस्वासन भी दिया लेकिन जब जनता hi जाग जाये तो ब्रिटिश साम्राज्य जैसी तकते सामने नहीं टिक पति तो हम क्या चीज थे , तानाशाहो को भी जनता उखड कर फेक देती है ये तो डेमोक्रेटिक कंट्री है भाई, उस आंदोलन में तीनो गांवो के प्रमुखों के अलावा डॉ. चुटिया और डॉ. रंडी का भी बहुत बड़ा योगदान था , प्रेस को लेकर छोटी छोटी चीजों को इंटरनेशनल न्यूज़ बनाने तक सब काम उनके hi जिम्मे में था, तभी से मैंने जान लिया था की काम सिर्फ पैसे और पावर से नहीं होता , ये तो बस टूल्स है असली खेल तो दिमाग का hi है … इन टूल्स को इस्तमाल करने के लिए दिमाग जरुरी है …और यंहा पर बात सिर्फ मिनरल्स की खानो से मिलने वाले पैसो की नहीं है बल्कि पुरे एरिया में कण्ट्रोल की भी तो है , अगर हमें वो कर लिया तो समझो यंहा का अगला कम मैं hi बनूँगा ”

सभी के चेहरे में सहमति के भाव आ गए थे …….

***********

वीरेंदर , रहमत , हिना और सोनी चारो एक जगह पर बैठे हुए गहरी चिंता में बैठे थे ..

“पापा से बोलना hi मूर्खता था वो तो बस डिप्लोमेसी hi खेलते रह जायेंगे , हमें hi कुछ करना चाहिए .. सेल दोनों लावांडो को तो घेर कर मार देना चाहिए और जंगल में जाकर उस चुड़ैल की खोज करनी चाहिए ,मैं ऐसे नपुंसक की तरह बैठ कर सब बस देखता नहीं रह सकता, और शरीफ अंकल वो तो बस पापा के है में hi है मिलते रहते है ,क्या मतलब जो इतने बड़े डॉन है “ वीरेंदर गुस्से में आ गया था और अपने सामने रखे व्हिस्की की गलास को एक hi झटके में खली कर गया

“भाईजान शांत हो जाओ , अंकल ने क्या कहा था की ईगो में आकर कोई गलत काम नहीं करना है , सच में वो इन सबकी प्लानिंग कई सालो से कर रहे है, हमारा एक गलत कदम उनके पुरे मेहनत पर पानी फेर सकता है ..” हिना वीरेंदर को समझा रही थी

“लेकिन ..”

वीरेंदर कुछ बोलता उससे पहले सोनी ने उसे टोका

“भैया शांत हो जाओ आपको उससे बदला चाहिए न हम दिलवेनेगे .. ऐसे भी हमें उस शिकारी और उसके दोस्त की मजबूरी का पता चल चूका है “

सोनी के होठो में एक रहस्य्मयी मुस्कान आ गयी , वो दोनों लड़किया कई दिनों से अजय , परिमल और उनकी बहनो और रिद्धिमा के बारे में पता कर रही थी …

“kya???”Virendra के साथ रहमत भी चिल्ला पड़ा

“वो हम पर छोड़ दो अरु आप दोनों दूसरे कामो में ध्यान दो , आप दोनों hi गरम खून के हो न जाने क्या गलत कर दो जिससे पापा का प्लान बिगड़ जाये, हम पर भरोषा रखो हम उनसे हमारे भाइयो का बदला जरूर लेंगे , लेकिन पापा वाले स्टाइल में दिमाग से “सोनी मुस्कुराते हुए बोली

उसकी बात सुनकर वीरेंदर थोड़ा शांत हुआ
 
अपडेट 26
रत के 2 बजे चुके थे जमुना और मर्री दोनों hi पास्ट हो चुके थे , मुझे शारीरिक सुख तो मिल रहा था लेकिन सेक्स मुझे आज संतुष्टि नहीं दे प् रहा था , मैं बस इसलिए सेक्स कर रहा था ताकि वो दोनों ओउरते जो मुझसे खेल रही थी वो शाट हो जाये , ये ऐसा था जैसे बिना भूख के खाना , कभी भूख जगती भी थी तो 10-15 धक्को के बाद मेरे आँखों के सामने रिद्धिमा का चेहरा नाच जाता था ..

उसके वो प्रेम से भरे हुए नयन मुझे बेताब करने के लिए काफी थे ..

मिलान की आग भड़क उठी थी लेकिन ये मिलान जिस्मो का नहीं बल्कि रूह का होना था , मैं मचल गया था रिद्धिमा को पाने के लिए ..

लेकिन ये वो पाना ऐसा पाना नहीं था जिसे मैं अभी तक जनता था ये तो किसी और hi तरह का पाना था ..

2 बज चुके थे , न जिस्म में शांति थी और न hi मन में .. मैं बेचैनी से कमरे में hi इधर उधर घूम रहा था और मेरे आँखों के सामने बार बार रिद्धिमा का चेहरा घूम रहा था ..

आखिर मैंने एक सिगरेट सुलगायी और गहरे कास खींचता हुआ अपनी गैलरी में खगड़ा होकर अपने बगीचे को देखने लगा ..

लेकिन फिर भी बेचैनी बढ़ते जा रही थी , न बिस्टेर मुझे शांत कर पा रहा था न hi ये सिगरेट ,न hi इन दो मादक हसीनाओ का जिस्म ..

मैंने जैक डिनायल की बोतल निकली और सीधे अपने मुँह से लगाकर पिने लगा …

आधी बोतल अंदर जाने के बाद नशे का हल्का हल्का सुरूर सा चढ़ाने लगा था , आंखे थोड़ी छोटी हो गयी लेकिन ऐसा लगा जैसे दिल के दर्द में मैंने गहि दाल दी हो ..

मैं तुरंत hi अपने बुलेट की चाबी उठाकर घर से निकल गया , और सीधे शाहनपर के लिए निकल गया ..

मेरे दिमाग ने मनो बगावत की लेकिन दिल के हाथो वो भी मजबूर होकर चुप हो चूका था , मैं अपने लोअर अरु स्पोर्ट बनियाइन पहने हुए अपने प्यार से मिलाने निकल पड़ा था ..

पूर्णिमा की रात थी और चाँद की रोशनी फैली हुई थी , मैं हलके नशे में था , एक हाथ में अब भी वो बोतल थी और कभी मेरे घर से रिद्धिमा के घर की दुरी लगभग 20 कम की ..

आधे रिश्ते भी नहीं पंहुचा था की बोतल ख़त्म हो चूका था ..

और अब मैंने गाड़ी की स्पीड को फुल कर दिया , दिमाग शांत था बस एक hi तड़प अंदर मची हुई थी वो थी रिद्धिमा को एक बार देखने की तड़प …

जमुना से मैंने बातो hi बातो में कभी रिद्धिमा के घर के बारे में बात किया था , वो सभी बाटे अब मेरे दिमाग में घूम रही थी मैं खुद से अपने प्लान बना रहा था ..

गाड़ी गांव के अंदर गई और मैंने गाड़ी को रिद्धिमा के घर से थोड़ी hi दूर में खड़ा कर दिया ..

घर के पीछे के तरफ रिद्धिमा के कमरे की बालकनी थी और पूरा घर मेरे घर की तरह से एक बड़े से जमीं के बीचो बिच बना हुआ था ,उस जमीं को बगीचे की शक्ल दी गयी थी और पूरा बगीचा आदमकद के दिवार से घिरा हुआ था ….

मैंने वो दिवार पार की और रिद्धिमा के कमरे की बालकनी की तरफ बढ़ा ..

सामने देख कर मैं ठहरा गया था , रत के 3 बजने को हो रहे थे लेकिन रिद्धिमा मुझे बालकनी से चाँद को निहारती हुए दिखी , पूनम की रत की रोशनी में रिद्धिमा का दूधिया शरीर चमक रहा था , उसने एक सफ़ेद रंग नाईट सूट पहन रखा और वो किसी पारी की तरह खूबसूरत लग रही थी , उसे देख कर मेरी निगाहे बस उसपर hi टिक गयी , क्या हुश्न था , क्या सूरत थी वो तो प्रेम की मूरत थी ..

मैं उस बालकनी तक पहुंचने की जुगत लगाने लगा मुझे बस थोड़ी खुद फंड करनी पड़ी और मैं बालकनी में रिद्धिमा के सामने खड़ा था …

“तुम …??? “ वो बुरी तरह से चौक गयी

“इतनी रत को क्या सोने की जगह मेरे बारे में सोच रही हो , क्या करू तुम्हारी hi आवाज से मैं खिंचा चला आया हु “

मेरी बात सुनकर वो मुझे ऐसे देख रही थी जैसे मैंने सच कह दिया हो ..

“तुम यंहा पर क्या कर रहे हो “ वो इधर उधर देखने लगी मैंने उसकी कमर को पकड़कर अपनी और खींच लिया ..

हम दोनों के चेहरे के बिच बस थोड़ी सी hi दुरी बची थी ,एक दूसरे की गर्म और तेज सांसे हमारे चेहरे पर पद रही थी ..

मैं उसके धड़कनो की आवाज बहुत hi आसानी से महसूस कर सकता था , मेरे दिल की भी धड़कने बढ़ी हुई थी ..

हमारे होठो एक दूसरे के पास आने लगे ..

“नहीं अजय ..”

वो मुझे दूर हटते हुए बोली ..

“आखिर क्यों नहीं रिद्धि , मैं तुमसे प्यार करता हु ी लव यू रिद्धि “

“मैं जानती हुई अजय लेकिन तुम भी जानते हो मेरी मजबूरी को “

“तुम समझ क्यों नहीं रही हो … तुम्हे लगता है की मैं तुम्हारे साथ ऐसा कुछ करूँगा की तुम मेरी गुलाम बन जाओ “

रिद्धिमा के चेहरे में एक फीकी सी मुस्कान आयी

“अजय मैं जानती हु की तुम नहीं करोगे लेकिन .. लेकिन हम कोई आम लोगो जैसे नहीं है जो अपने आप को कण्ट्रोल कर सके , हमारी नियति यही है और चुड़ैल सम्बन्ध के बाद शिकारी की गुलाम बन hi जाती है , यही नियति है “ उसके स्वर बहुत hi ठन्डे थे

“तो मैं नियति को hi बदल दूंगा रिद्धि “

मेरी बात को सुनकर वो जोरो से हंस पड़ी

“पहले खुद को तो कण्ट्रोल कर लो अजय , नियति के तुम भी गुलाम बने घूम रहे हो …अब जाओ यंहा से “

मैंने फिर से उसे अपनी और खींच लिया , उसकी आंखे बड़ी हो गयी थी वो मुझसे दूर होना चाहती थी लेकिन उसका एक मन मेरे और भी करीब आना चाहता था ..

“हैट जाओ प्लस “

उसने गिड़गिड़ाने वाले अंदाज में कहा

“हैट जाओ अजय मैं खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पाऊँगी “

उसने जोर लगाया और … उसने मुझे बहुत hi जोर का धक्का दे दिया मेरे पेअर लड़खड़ाए और मैं बालकनी से सीधे निचे गिर गया ..

“अजय ..”

उसकी हलक से एक हलकी सी चीख निकल गयी , मैं जमीं में पड़ा था लेकिन दर्द का कोई भी आभास रिद्धिमा को अपना बनाने के बेचैनी से जयदा नहीं था मैं फिर से उठा और कूद फंड कर ऊपर जाने की कोशिस करने लगा ..

रिद्धिमा मुझे ऐसा करते देख कर हँसाने लगी , जैसे hi मैंने बालकनी में बानी लोहे की छदो वाली दिवार को पकड़ा रिद्धिमा ने बड़े hi शरारती अंदाज में मेरी उंगलिया उस पकड़ से हटा दी ..

“आह्ह्ह्ह “ मैं फिर से निचे गिरा पड़ा था और वही रिद्धिमा खिलखिला कर हंस रही थी

“तेरी तो अभी बताता हु ..” मैं फिर से ऊपर चढ़ा इस बार मैंने ध्यान रखा और जैसे hi मेरा सर ऊपर हुआ ..

धड़ाम … एक लकड़ी का डंडा सीधे मेरे मुँह में पड़ा , मेरा कण्ट्रोल फिर से बिगाड़ा और मैं फिर से जमीं पर , मेरे नाक से खून आने लगा था , मुझे बहुत गुस्सा आया और जब मैंने ऊपर देखा तो सामने डॉ. रंडी डंडा लिए हुए कड़ी थी ..

“क्यों बे कुत्ते यंहा क्या करने आया है तू , इसे अकेली मत समझना मैं इसके साथ कड़ी हु “

डॉ. की बात सुनकर मेरा तो मनो खून hi खोल गया था , ये होती कौन है मुझे ऐसा बोलने वाली , आज मुझे पता चला की गुस्सा मेरे अंदर क्या परिवर्तन कर सकता है , एक तो मेरा प्यार सामने खड़ा था और ये ायरत मुझे उससे मिलने नहीं दे रही थी ..

“साली रंडी कही की तेरे अंदर इतनी हिम्मत की तू मुझे मेरे प्यार से अलग करेगी , काट दूंगा तुझे अगर तू मेरे और रिद्धिमा के बिच आयी तो ये हमारे बिच का मामला है “

मैं चिल्लाया पुरे माहौल में मेरी आवाज गूंज गयी थी ,रिद्धि के घर की लाइट्स जलने लगी थी ..

“अजय जुबान सम्हाल कर , एक ायरत से तुम ऐसे बात नहीं कर सकते , और तब तो बिलकुल भी नहीं जब वो मेरी मेहमान हो “

रिद्धिमा मुझे गुस्से से घर रही थी , उसे देखते hi मैं थोड़ा शांत हुआ

“रिद्धि यही है जिसके कारन हम एक दूसरे से अलग हुए जा रहे है , इस रंडी की बात बिलकुल मत सुन्ना रिद्धि ये हमें अलग कर देगी “

“अजय जुबान को सम्हाल कर बात करो , और इनके नहीं हम उस कुटिया जमुना के कारन जिसने मुझे भड़काया और अब तुम्हे भड़का रही है “रिद्धि का इतना गुस्सा मैं जीवन में पहली बार देख रहा था ..

“रिद्धिमा तुम अंदर जाओ इस कुत्ते के मुँह मत लगो मैं देखती हुई की ये शिकारी तुम्हारा क्या बिगड़ता है “

डॉ. ने एक पिस्तौल मेरे ऊपर तान दी थी ..

उसे देखकर मैं गुस्से से जलने लगा था , आज तो मेरे हाथ भी नहीं बंधे थे जो मैं हर चीजों को बस सहता जाऊ ..

“चला गोली मादरचोद ,तुझे तो मैं अपनी रंडी बनाकर रखूँगा समझती क्या है तू अपने आप को “ मैं चिल्लाया hi था की

‘धाय ..’ एक गोली मेरे पैरो के पास आकर लगी ..

“ये बार एक वार्निंग है अगर ज्यादा नाटक किया न तो ..”डॉ. कुछ बोल पति उससे पहले hi मैंने जमीं में पड़ा एक पत्थर उठा लिया और सीधा डॉ. के ऊपर फेक दिया , वो पत्थर सीधा उनके सर को लगा और वो लड़खड़ा गयी ..

“तुम्हारी इतनी हिम्मत “

रिद्धिमा ने आव देखा न ताव वो सीधे निचे कूद गयी , लेकिन सीधे अपने पैरो के बल पर .. मैं बस उसे देखता रहा जो लड़की कुछ देर पहले पारी जैसी प्यारी लग रही थी अब वो किसी डायन से काम नहीं लग रही थी ..

“चले जाओ यंहा से वर्ण अच्छा नहीं होगा अजय ..” उसकी आंखे लाल हो चुकी थी जैसे जलता हुआ कोयला हो , उसके खुले हुए बाल ऊपर से कूदने की वजह से बिखर गए थे ..

“उस रंडी के कारन तुम ..”

मैं कुछ भी कर पता उससे पहले hi वो तेजी से आगे आयी और मेरी गर्दन पकड़ कर मुझे हवा में hi उठा दिया ..

“शायद तुम जानते नहीं की शिकारियों से जयदा ताकतवर चुड़ैल होती है , सिर्फ अपने हवस के आकर्षण के डैम पर तुम जीत नहीं सकते अजय , चले जाओ यंहा से ..”

वो मुझे छोड़ी और थोड़ी पीछे हो गयी ..

“तुम गलत कर रही हो रिद्धिमा , उस रंडी को तो बताऊंगा “

रिद्धिमा फिर से तेजी से घूमी और इस बार उसका मुक्का सीधे मेरे गाल पर पड़ा

“क्या बार बार उसे रंडी कह रहा है तू , सेल .. लोग सही कहते है तू शिकारी है हवस से भरा हुआ कीड़ा है तू , जिसके सामने जो भी आएगी तू उसे hi अपनी हवस का शिकार बनाएगा .. कही तूने अपनी माँ को भी अपनी हवस का शिकार तो नहीं बना लिया “

“रिद्धिमा तुम अपनी लिमिट्स क्रॉस कर रही हो “

“क्यों तेरी माँ के बारे में बोलै तो बुरा लगा , सेल कीड़े “

वो नफ़रत से भरी हुई थी उसके होठ काँप रहे थे ,आँखों से जैसे अंगारे बरस रहे हो ..

“रिद्धि मैं तुमसे प्यार करता हु “

“ये प्यार नहीं ये बस तुम्हारा हवस है , एक आकर्षण , इससे पहले मैं तुम्हे कुछ कर दू “

“खड़ा हु मैं सामने देखता हु तुम क्या कर सकती हो “

मैंने अपने अंदर हवस को ढूंढने की कोशिस की जो मेरी शक्ति को बढ़ा देता था .. लेकिन रिद्धि के सामने मैं हवस से जैसे मुक्त hi हो गया था ..

“रिद्धिमा तुम ऊपर आओ इसे मैं देख लुंगी “ ऊपर से डॉ. रंडी चिल्लाई उसे नहीं पता था की रिद्धिमा क्या चीज है वो तो बस इतना जानती थी की मैं एक शिकारी हु, और उन्हें लगा की मैं रिद्धिमा को अपनी हवस का शिकार बनाने यंहा पर आया हु उन्होंने बंदूख मेरे ऊपर तान दी थी ,उन्हें देखकर फिर से मेरा गुस्सा सातवे आसमान में चढ़ गया ..

“कुटिया साली तू हमसे दूर hi रह “

मैंने नफरत भरे शब्दों में डॉ. को गली दे दी

“तू सच में एक कीड़ा है अजय , जा और जाकर अपनी माँ बहनो के साथ अपनी हवस मिटा मेरे सामने किसी ायरत के लिए गलत बोलै तो “

रिद्धिमा ने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी की मैं पहली बार उसकी बात से गुस्से से भर गया और सीधे जाकर एक तमाचा उसके गलो में धार दिया ..

“बस कर साली चुड़ैल तेरे प्यार में था इसलिए तेरी हर बात सुन रहा था लेकिन अब नहीं देखता हु तू मुझसे कैसे बचेगी , साली तुझे तेरे घर में सबके सामने hi पटक कर छोडूंगा मैं “

मेरी बात थी की रिद्धिमा एक्शन में आग गयी और सीधे मेरा गाला पकड़ लिया ..

“आ गया न शिकारी अपनी ावुकत में “ वो गरजते हुए बोली थी की मैंने एक लात उसके पेट में लगा दिया , मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा खून hi खोल रहा हो , किसी ने आज तक इतनी हिम्मत नहीं दिखाई थी लेकिन आज रिद्धिमा की बात से शायद मेरे अंदर का सोये हुए शिकारी का असली रूप मुझे देखने को मिल रहा था ..

वो भी मेरे ऊपर झपट पड़ी हम एक दूसरे में गुथे हुए जमीं पर गिर गए थे , डॉ. रंडी भी बालकनी से निचे कूद गयी थी , घर के सभी लोग वंहा आ चुके थे और कोतुहल से हमें hi देख रहे थे ..

“सेल तेरी तो ..” हाथ में डंडा लिए बड़े आगे आया था , मैं और रिद्धिमा एक दूसरे के खून के प्यासे से एक दूसरे के सामने खड़े थे , बड़े ने डंडा मेरे ऊपर घुमाया और डंडा सीधा मेरे सर पर लगा , लेकिन उसकी चोट ऐसी थी जैसे किसी ने मेरे सर पर एक ककड़ी मार दी हो , मैं पलटा बड़े आश्चर्य से मुझे hi देख रहा था मैंने उसकी गर्दन और कमर को पकड़कर उसे हवा में उठा दिया और दूर फेक दिया , डॉ. रंडी मेरे ऊपर बंदूख तने थी और उन्होंने एक फायर कर दिया जो सीधे मेरे पेट में लगा ..

उस फायर से मैं और भी गुस्से से भर गया था ..

“aaaaaaaaaaaaa” मैं चिल्लाते हुए डॉ. की तरफ बढ़ा उनके चेहरे में दर आ गया था और उन्होंने एक के बाद एक मुझपर फायर कर दिया जिनमे से दो गोलिया मुझे लगी लेकिन दौड़ता हुआ उनके पास पहुंच चूका था और उनके गले को पकड़ कर हवा में उठा चूका था ..

मैं उनकी गर्दन hi तोड़ देता लेकिन तब तक रिद्धिमा मेरे पास आ गयी थी और वो घुटी उसका लात मेरे चेहरे में लगा , मेरे हाथो से डॉ. की गर्दन छूट गयी और मैं हलके से लड़खड़ा गया ..

मैं फिर से सम्हल पता उससे पहले hi रिद्धिमा मुझे लोहे के रोड से मरने लगी थी ..

“aaaaaaaaaaaaa कुत्ते ..” वो चिल्ला कर मुझे मार रही थी लेकिन मैं तुरंत hi थोड़ा सम्हाल कर उसके ऊपर झपट पड़ा मैंने उसके पेट में 2-3 तेज घुसे लगा दिए , अपनी कुस्ती की कला दिखते हुए उसके पैरो को अपने पैरो में फंसा कर उसे जमीं पर गिरा दिया ..

लेकिन वो भी तेज निकली और मेरे सर को पकड़ कर मेरे कानो में अपने दन्त से काट चुकी थी , मैं दर्द से बुरी तरह से छटपटाया और उसे करवट बदलते हुए उसे अपने निचे ले आया और उसके होठो को अपने दांतो से कटाने लगा उसका खून मेरे जीभ में जा चूका था और ऐसी शांति मेरे और उसके अंदर उतर गयी जैसा की कुछ हुआ hi न हो ..

होठो को काटते काटते मैंने अपनी जीभ उसके जीभ में घुसा दी , उसने मेरी जीभ को भी काट दिया था , उसकी नाईट जगह जगह से फैट चुकी थी और मेरी स्पोर्ट बनियाइन तो पुरे तरह से मेरे शरीर से ललग थी , मेरे जिस्म में 3 गोलिया लगने के कारन खून बहुत hi बाह रहा था और वही खून रिद्धिमा के शरीर पर भी लग चूका था , हमारे उसने मेरे जीभ को बुरी तरह से कटा लेकिन थोड़े दर्द के बाद मैंने फिर से उसके चेहरे को पकड़कर उसके होठो में अपने होठ डालने लगा , मैं उसके ऊपर पूरी तरह से छ चूका था , पीछे से बड़े खड़ा होकर मेरे ऊपर डंडे बर्षा रहा था लेकिन मेरी जान को किश करने का मजा इतना था की मुझे उसके डाँडो की जरा भी भनक नहीं लग रही थी ..

रिद्धिमा ने मेरे बालो को अपने हाथो में भर लिया और जोरो से मेरे होठो को अपने होठो से किश करने लगी , हमारे जीभ एक दूसरे से मिल चुके थे , मेरी जीभ उसके कटाने के कारन खून से तर थी वही उसके होठो से मेरे कटाने के कारन खून बाह रहा था , हमारे खून और हम दोनों hi एक दूसरे से मिल रहे थे , और एक दूसरे में जैसे खो से गए थे …

न जाने कितने देर तक हम एक दूसरे के होठो को hi चूसते जा रहे थे , वंहा कई लोग आ चुके थे और सभी मिलकर हमें अलग करने की कोशिस कर रहे थे लेकिन न तो मैं रिद्धि को छोड़ रहा था न hi रिद्धि मुझे …

अचानक से मुझे एक जोरो की लात पड़ी और मैं रिद्धिमा से अलग होकर दूर जा गिरा , ये लात खुद रिद्धिमा ने मुझे मारी थी ..

वो उठ कर कड़ी हो गई थी सभी आश्चर्य से हम दोनों को hi देखे जा रहे थे , रिद्धिमा की सांसे तेज थी वो मुझे थोड़ी देर तक घूरने लगी और तेजी से अंदर भागी , वही उसे ऐसा करते देख कर मैं ख़ुशी से जैसे पागल hi हो गया था …..

“याहूऊऊ “ मैं चिल्लाते हुए नाचने लगा , मैं पागलो की तरह नाच रहा था , बदन में बस मेरा एक शार्ट था जो मैंने पहना हुआ था , रिद्धि आज थोड़ी सी पिघली थी मुझे उम्मीद थी की वो और भी पिघलेगी , मेरे प्यार को समझेगी , बदन में 3 गोलिया लगी थी लेकिन मुझे उनका पता तक नहीं चल रहा था … रिद्धिमा के अंदर जाते hi डॉ. रंडी भी उसके पीछे चली गयी , वही बड़े और बाकि के नौकर मुझसे डरे हुए हाथो में डंडा लिए खड़े थे ,

“भाई गोली लगी है जाकर इलाज करवा ले “

बड़े ने थोड़ी हिम्मत करके मुझसे कहा

“अबे बड़े लैंडवाले जब तक मेरा प्यार मेरे साथ है मुझे कुछ नहीं होने वाला “

मैं वैसे hi नाचता हुआ अपने बुलेट तक आया और घर के लिए निकल गया ……
 
अपडेट 27
“क्या हुआ भैया आपको आप ठीक तो है न ..”

जैसे hi मैं अपने घर के मैं गेट से अंदर प्रवेश हुआ मेरी सबसे छोटी बहन ऋतू दौड़ते हुए मेरे पास पहुंची , शायद उसने अपने कमरे की बालकनी से मुझे आते हुए देख लिया था ..

मैं खून से लथपथ था और प्रेम का नशा थोड़ा उतरने के बाद दर्द से मारा जा रहा था , कोई और इंसान होता तो 3 गोलिया लगने के बाद और इतना खून बहाने के बाद वो परलोक सिधार चूका होता ..

मैंने गाड़ी वही पटक दी और लड़खड़ाता हुआ घर के मुख्या ईमारत की और बढ़ने लगा , ऋतू ने मुझे अपने कंधे का सहारा दिया ,

“ये क्या हो गया है भैया आपको ??”

उसके प्यारे से चेहरे में आंसुओ की बुँदे थी , मैंने बड़े hi स्नेह से उसे देखा ..

“तू मुझे छोड़ और जाकर डॉ. को बुला ला जल्दी से “

मेरा कहना था और वो तुरंत hi भागी , मैं केवल एक शार्ट में था ऊपर से नंगा , और खून से सना हुआ ,मेरे सरे जखम साफ साफ दिखाई दे रहे थे , जंहा गोलिया लगी थी वो जगह थोड़ी नीली पढ़ रही थी .. फिर भी मैं लड़खड़ाते हुए hi सही लेकिन आराम से चल पा रहा है , शरीर में ताकत की थोड़ी कमी तो महसूस होती लेकिन रिद्धिमा की याद आते hi मेरे होठो में एक मुस्कान जरूर फ़ैल जाती थी ..

मैं सिख रहा था शिकारी होने के फायदे मुझे समझ आ रहे थे, और ये भी की इस मुझमे कितनी ताकत हो सकती है , कहते है की ताकत तो हर इंसान के अंदर इतनी है की उसकी कोई भी सिमा नहीं है लेकिन बस उसे जागृत करना हमें नहीं आता , हम उस ताकत से केवल इसलिए hi महरूम रह जाते है क्योकि हमें उसका पता hi नहीं है , हमने अंदर ढूंढा hi नहीं है ..

शिकारी होने से मेरी कुछ तकते जाग गयी थी, लेकिन अभी भी मुझे उन्हें ढूंढना बाकि था , ऐसे किसी हालत में मैं उन्हें धुंध पा रहा था , धीरे धीरे hi सही मैं उन्हें खोज रहा था … आज मुझे मेरे गुस्से की ताकत का पता चला , मुझे मेरे हवस की ताकत का पता पहले से चल चूका था , लेकिन इसका इस्तमाल करना मुझे अब भी सीखना था ..

थोड़ी hi देर हुए थे की डॉ. वंहा मौजूद हो गए , कुछ नौकरो की मदद से मुझे मेरे कमरे में लिटा दिया गया , और पूरा घर मेरे इर्दगिर्द खड़ा हुआ मेरे हालत को देख रहा था , सभी के आँखों में अपने घर के इकलौते लड़के की इस हालत को देखकर आंसू थे , मैं अपने घर वालो का अपने प्रति प्रेम देख रहा था , आज मुझे अपनी जिम्मेदारी का अहसास हो रहा था , मेरी माँ ने मुझे जिन्दा रखने के लिए इतना बड़ा फैसला लिया था , मैं इन लोगो के लिए कितना महत्वपूर्ण हु इसकी समझ मुझे आज हो रही थी , मेरी चाचियों में खुद की अस्मिता को मेरे लिए कुर्बान किया , मेरी हर बात मेरे घर वाले आँख मूंदकर मानते रहे और मैं …

मैं हमेशा hi अपनी जिम्मेदारियों से भागता रहा , इनके स्नेह और प्रेम के बदले मैंने इन्हे क्या दिया था ??

बस दुःख ..??

मेरी सांसे थोड़ी धीमी हो रही थी और आँखों में आंसू की बुँदे आ रही थी , शायद रिद्धिमा के होने का ये नतीजा था की मैं प्रेम को महसूस करने लगा था , मेरे प्रति मेरे परिवार का प्रेम वो अपना पैन ..

डॉ. अपने काम में लग चुके थे और वो बिना कुछ बोले पहले मेरे शरीर में लगी साडी गोलिया निकाल दी , और पट्टी लगाकर घावों को भरने के लिए छोड़ दिया, अभी तक मेरे परिवार के किसी सदस्य ने मुझे कुछ भी नहीं कहा था सभी बस आँखों में आंसू लिए मेरे पास खड़े थे ..

“आप सभी जाइये इसे थोड़ा आराम करने दीजिये “

डॉ. ने आखरी में कहा ..

सभी जाने को हुए लेकिन ऋतू अभी भी वही कड़ी थी ..

“तू भी चल ऋतू भाई को आराम करने दे “ रानी चची बोल उठी

“मैं कही नहीं जाने वाली आप लोग जाओ , मैं भाई के साथ hi रहूंगी , उन्हें बिलकुल भी डिस्टर्ब नहीं करुँगी प्रॉमिस .” ऋतू की बात सुनकर सभी थोड़ा दर से गए , उनका दर भी स्वाभाविक hi था , आजकल मेरी कोई भी बहन मेरे पास भी नहीं फटकती थी , या शायद उन्हें मेरे पास आने से थोड़ी मनाही घर वालो ने hi कर दी थी …

“ऋतू तू ..” इससे पहले की रानी चची कुछ बोलती मैंने उन्हें आँखों से जाने का इशारा कर दिया और ऋतू के मेरे पास रहने पर सहमति भी दे दी ..

“ठीक है लेकिन भाई को डिस्टर्ब मर करना उसे सोने दे “ माँ ने ऋतू को आँख दिखते हुए कहा , ऋतू ने भी बस मासूमियत से हां में सर हिला दिया ..

“लेकिन अभी थोड़ी देर के लिए तुम भी बहार जाओ मुझे अजय से अकेले में कुछ बात करनी है … “डॉ. ने आदेश सुनाया तो ऋतू भी मेरे बाजु से उठ कड़ी हुई लेकिन जमुना अभी भी वही बैठी थी ..

“क्यों महासय, ये क्या है ????? और कहा गायब थे तुम …???”

मैंने साडी बात डॉ. को बता दी ,मेरी बात सुनकर उनका चेहरा गंभीर हो गया ..

“रंडी को नहीं पता था की रिद्धिमा एक चुड़ैल है लेकिन अब उसे भी पता चल जायेगा … यार जब तक ये रंडी है न तुम दोनों का कुछ नहीं होने देगी ये “

“लेकिन डॉ. आज मैंने उसे किश किया “ मेरे सामने रिद्धिमा का चेहरा घूम गया और मैंने अपने होठो को थोड़ा चाट लिया ..

“है और उसके आवाज में 3 गोली भी खा ली “

“3 क्या कोई 100 गोली मार दे लेकिन मुझे मेरी रिद्धिमा दे दे “

“अबे मजनू तू शिकारी है लेकिन तुझे भी मारा जा सकता है , अभी तुझे hi अपनी पावर्स का कोई पता भी नहीं है , ऐसे दिल से काम लेगा तो रंडी तुझे उदा hi देगी “

डॉ. थोड़ा हसते हुए बोले

“आपकी उस रंडी की तो … आपको उससे प्यार कैसे हो गया डॉ. , इतनी खतरनाक कुछ समझने को तैयार hi नहीं होती “

डॉ. बस सुण्या को देखने लगे

“यद् लागल गए याद लागल गए, रंगल तुझ्यात यद् लागल गए “

डॉ. सैराट movie(marathi ) का एक गण गुनगुनाने लगे (ये सांग सुन्ना समझ भले hi न आये लेकिन दिल जरूर खुस हो जायेगा :अप्प्रोवे: ऐसे यद् लागला का मतलब होता है की मैं पागल हो रहा हु , मैं दीवाना हो रहा हु , .

इस लाइन का मतलब है की , मैं पागल हो रहा हु , दीवाना हो रहा हु, तेरी यादो में मैं पागल हो रहा हु .. )

“अब आप अपने खयालो में मत खो जाओ इसका कोई समाधान बताओ “

मैंने डॉ. को खोये हुए देख कर कहा , वो जैसे फिर से वापस आये ..

“है कुछ तो करना पड़ेगा , चलो तुम आराम करो मैं चलता हु … “

डॉ. वंहा से बहार निकल गए और मैं …

“यद् लागल गए याद लागल गए, रंगल तुझ्यात यद् लागल गए “ गुनगुनाने लगा … मेरे होठो में एक मुस्कान आ गयी थी ..

*************

मैंने अपनी आँखे बंद hi की थी की मेरे माथे पर एक कोमल हाथो का स्पर्श हुआ , मैंने आंखे खोली तो मेरे सामने मेरी सबसे पैरी बहन ऋतू का मुस्कुराता हुआ चेहरा था ,उसके प्यारे चेहरे को देखकर मेरे होठो में भी मुस्कान आ गयी

“भैया क्यों आये दिन ऐसे कारनामे करते रहते हो ठीक से नहीं रह सकते क्या , जानते हो न सभी लोग आपसे कितना प्यार करते है “

“जनता हु मेरी जान “ मैंने अपना हाथ उठाकर उसके कोमल पहले हुए गलो को हलके से सहलाया

“सभी मुझे आपसे दूर रहने के लिए क्यों कहते है , आप शिकारी बन गए हो तो क्या अपनी बहन को hi खा जाओगे “

उसकी बात सुनकर मैं थोड़ा हंस भी पड़ा और थोड़ा उदास भी हो गया , जब सब ठीक था तो मैं ऋतू के साथ बहुत समय बिताया करता था, ऋतू सभी बहनो में मेरी सबसे लाडली थी, सबसे छोटी और सबसे नटखट भी , अन्य दीदी थोड़ी गंभीर किस्म की थी वही वही शिरीन मेरी बहन काम दोस्त जैसे थी , वो ऋतू hi थी जो मुझपर पूरा अधिकार रखती थी और उसकी कोई बात मैं कभी ताल भी नहीं पाया , वो अपनी हर बात मुझसे मनवा hi लेती … उस घटना के बाद से मैं जैसे ऋतू से दूर hi हो गया था , शायद माँ , चचिया और अन्य दीदी ने hi ऋतू को मुझसे दूर रहने को कहा था ,और मैं भी नहीं चाहता था की मेरी बीमारी का साया मेरी इस मासूम सी बहन पर पड़े …

“ठीक है अब नहीं रहूँगा तुझसे दूर .. “

“है बोल तो ऐसे रहे हो जैसे उस मैरी और जमुना को यंहा से भगा डोज , मैं अब बड़ी हो गयी हु भाई , इतना तो समझती हु की आपकी जरूरते क्या है , और उसे पूरा करना आपके लिए कितना जरुरी है लेकिन काम से काम हमें भी तो थोड़ा समय दे दिया करो … मैं ये नहीं कहती की पहले की तरह आप मुझे समय दो लेकिन मुझे आपकी बहुत याद आती है , मैं अपने भाई को मिस करती हु जो मुझे इतना प्यार करता था “

ये कहते कहते ऋतू की आंखे hi नाम हो गयी , मैंने अपने हाथो से उसके आँखों में आये उन मोतियों को पोछ लिया ..

“पागल मैं अभी भी तुझसे बहुत प्यार करता हु, लेकिन ..”

“है जानती हु बताने की जरुरत नहीं है , मैं बड़ी हो गयी हु “

उसने बड़ी hi ऐडा से ये बात कही थी , मेरी नज़ारे एक बार उसके चेहरे से हैट कर उसके जिस्म के बाकि हिस्सों में चली गयी , सच में वो बड़ी हो गयी थी , लेकिन उसने मेरे मुँह को पकड़कर घुमा दिया

“नज़ारे यंहा रखो मेरे चेहरे पर , वर्ण फिर आपका शिकारी जाग गया तो मुझे यंहा से जाना पद जायेगा , अन्य दीदी ने समझा कर भेजा है की कुछ भी गड़बड़ हो तो तुरंत hi भाग जाना और जमुना को भेज देना “

वो खिलखिला कर हंस पड़ी , लेकिन मेरे होठो में बस एक उदासी भरी मुस्कान hi आयी , ऋतू की नज़ारे जैसे hi मेरे चेहरे की उस मुस्कान पर गयी वो जैसे चुप hi हो गयी …

“क्या हुआ भाई ..”

“मैं सच में तुम लोगो से कितना दूर हो गया हु “

मेरी आंखे अब भी उसके उस हसते हु चेहरे को देख रही थी , अपनों के पास होने के बावजूद उनसे दूर होने का अहसास मेरे दिल में किसी कांटे की तरह चुभ रहा था , वो मेरे गलो को सहलाने लगी और बड़े hi प्यार से उसने मेरे माथे को चुम लिया .. इस बीमारी ने मुझे क्या कुछ नहीं लिया था, सबसे बड़ी चीज जो उसने मेरे अंदर से ले ली वो थी भावनाये , हवस की आग ने जैसे मेरे अंदर की भावनाओ को hi जला दिया था , लेकिन अब धीरे धीरे मेरे इमोशंस मेरे अंदर वापस आने लगे थे , शायद ये रिद्धिमा से प्रेम का hi नतीजा था , या कुछ और ..??

“हम सभी जानते है भाई की आप किस प्रॉब्लम से गुजर रहे हो लेकिन आप इसमें खुद को अकेला कभी महसूस मत करना हम सभी आपके साथ है ,क्या हुआ की आप अपनी बहनो के लिए भी उस फेल्लिंग से भर जाते हो जो एक भाई बहन के बिच नहीं होना चाहिए, ये आपकी गलती तो नहीं है न , और हम सभी बहने इस बात को अच्छे से समझती भी है , लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं की हम आपसे दूर हो जाये , ऐसे भी जो आपको चाहिए उसके लिए तो यंहा अब बहुत लोग हो गए है, maa(rani चची ) , और बड़ी माँ (रेवती चची ) के साथ साथ अब जमुना और वो मर्री भी तो है , फिर मुझे किस बात का दर ..”

उसकी बात सुनकर आश्चर्य से मेरी आंखे बड़ी हो गयी , मुझे लगता था की जो मैं अपने कमरे के अंदर करता हु तो काम से काम ऋतू से तो छिपा होगा , वो मेरे इस एक्सप्रेशन को देखकर खिलखिला कर हंस पड़ी थी ..

“ऐसे क्यों देख रहे हो बोली न की बड़ी हो गयी हु , सब पता है और इसके लिए आपको चिंता करने की कोई भी जरुरत नाह है ..”

मैं कुछ बोल पता उससे पहले hi दरवाजा फिर से खुल गया और शिरीन भी वंहा आ गयी ..

“ये क्या बार बार बोल रही है की बड़ी हो गयी हु , अभी भी तू वही छोटी और मोती hi है “

शिरीन ने आते हुए मुस्कुराते हुए कहा , उसकी बात से जंहा मैं हँसाने लगा वही ऋतू ने अपने चेहरे में गुस्सा ला लिया

“न तो मैं छोटी हु और न hi मोती , आप hi मुझसे जलती रहती हो , भाई के साथ थोड़ा समय अकेले भी नहीं बिताने दे रही , खुद भी आ गयी “

“तो क्यों नहीं आउंगी मेरा भी तो भाई है “

शिरीन आकर मेरे दूसरे बाजु में बैठ गयी थी , ऐसे इन दोनों की मेरे लिए ये लड़ाई नयी नहीं थी , या हमेशा से होती रही थी , शिरीन और ऋतू एक दूसरे को छिडहणे का कोई भी मौका नहीं छोड़ती थी लेकिन जैसे कोरोना संक्रमण और लोखड़ौन ने बिज़नेस को बर्बाद कर दिया वैसे hi इस शिकारी की बीमारी ने हमारे इस प्यारे रिश्ते को बर्बाद कर दिया था ..

मैंने अपने एक हाथ से शिरीन का हाथ थम लिया वही दूसरे हाथ से ऋतू का , दोनों बड़े hi प्यार से मुझे देख रही थी वही हम तीनो के आँखों में एक साथ होने के इस अहसास के कारन आंसू थे , मेरी प्यारी बहाने मेरे साथ थी और मैं इनपर अपनी बीमारी का कोई भी साया नहीं पड़ने देना चाहता था लेकिन फिर भी इनके साथ रहना चाहता था …

“सही कहती थी मम्मी , तुम लोग मुझे आराम करने नहीं डोज “

आँखों में आंसू लिए मैं बोल पड़ा और सभी हंस पड़े , जैसे अचानक से शिरीन और ऋतू के अंदर का जवाला फुट पड़ा था वो दोनों जोरो से रोटी हुई मुझसे लिपट गयी ..

“ी मिस यू भाई ..” दोनों एक साथ बोल उठी थी ,

मेरे जखम अभी भरे नहीं थे और वो दोनों मेरे साइन से लगे हुए थे , मेरे झख्मो के ऊपर उनका चेहरा था , मैं दर्द से छटपटा सा गया लेकिन मैं उन्हें अपने से अलग नहीं होने देना चाहता था , इतने दिनों के बाद वो मिली थी , मैंने बस उनके प्रेम को महसूस किया और मेरा दर्द न जाने कहा चला गया, अब मैं अलग था और मेरे जखम अलग थे मैं प्रेम से भरा हुआ था और मेरे जखमो का दर्द कही अलग जगह पर होता हुआ मुझे अहसास हुआ जिस्सको मैंने बिलकुल hi इग्नोर कर दिया था (जो लोग ध्यान करते हो वो लोग ये फेल्लिंग समझ सकते है , जब शरीर का कोई दर्द बना हुआ भी हो लेकिन आप अपने शरीर से अलग हुए महसूस कर रहे हो , दर्द शरीर को हो रहा होता है लेकिन आप शरीर नहीं होते :अप्प्रोवे: )

मैंने मुस्कुराते हुए दोनों को अपनी बांहो में भर लिया था
 
असल में बीमारी बोले तो सिम्पटम्स का समूह , दर्द एक सिम्पटम्स बस है , और एकाग्रता का अभ्यास hi ध्यान है , असल में नहीं है लेकिन अभ्यास जब हम करते है तो उसे ध्यान करना कहा जाता है , और जब हम उस अवश्था में होते है तो उसे ध्यान का लग्न कहा जाता है , जब सब कुछ हो लेकिन अंदर सब सुण्या हो ... और उसी पल का ये आभास होता है की शरीर और दर्द या कोई भी संवेदनाये को की शरीर या मन के लेवल में चल रही है वो आप नहीं हो , वो आपसे अलग है :अप्प्रोवे:

शयद आपने ध्यान से पढ़ा नहीं जो मैंने लिखा था , मैंने लिखा है कोरोना संक्रमण और लोखड़ौन ... मैंने ये नहीं लिखा की लोखड़ौन ने ये कर दिया ..

और मैं लोखड़ौन के न विरोध में हु न hi समर्थन में क्योकि अभी तक तो लोखड़ौन से उचित परिणाम आये नहीं है , सभी पावर में बैठे लोगो की मनमानी सी hi चलते आ रही है और लोगो की मूर्खता देख कर लगता है की लोखड़ौन ऐसे तो सफल नहीं होने वाला ... बेसिक चीज इसमें मिस है और वो है लोगो के अंदर चेतना का आभाव ..

और कोई मने या न मने लोखड़ौन से बुसिनेस्स और प्रिवेट सेक्टर में काम करने वालो की अच्छी लगी है , खासकर वो लोग जिन्होंने अभी अभी अपना काम शुरू किया है , और उनमे से एक मैं भी हु , नौकरी तो पहले छोड़ चूका था अपना खुद का क्लिनिक डालने के लिए , अब 3 महीने से बस किराया दिए जा रहा हु , पूरा काम बचा हुआ है , जब लोखड़ौन खुला तो मजदूर अपने घर जा चुके थे , लागबहग मुझे 3 महीने और किराया देना है बिना किसी कमाई के ... घर से ठीक थक सम्पन्न हु और पहले की कमाई रखा हु इसलिए सर्वाइव कर प् रहा हु वर्ण अपना हाल बहुत गन्दा हो जाता ..

बड़ा बुसिनेस्स चलता है लोने और उधारी पर और काम बंद होने पर वही चीजे आदमी को ले डूबती है , ऐसे कई उदहारण मेरे सामने आ चुके है मेरे आसपास के लोगो के साथ ये घटनाये हो रही है , इनमे से कुछ मेरे खास भी है ... खैर बुसिनेस्स में रिस्क फैक्टर तो होता है और होती है उम्मीद इसलिए सभी बस उम्मींद में बैठे है की सब ठीक हो जायेगा और घटा कवर हो जायेगा धीरे धीरे hi सही ..

प्रिवेट सेक्टर में काम करने वाले कई दोस्तों की जॉब जा चुकी है खासकर आईटी वालो की वो या तो किसी बड़े सिटीज में अपने घर में पड़े है या फिर यंहा आकर क़ुरान्टिने में , पैसा है लोगो के पास जमा इसलिए वो भी सर्वाइव कर रहे है ..

लेकिन दिहाड़ी मजदूरों की सोचो की उनका क्या हल है , मालिक ने भगा दिया , किराये के माकन में थे उन्होंने भी निकाल दिया , कमाई का साधन ख़त्म हो चूका है और जो बचे पैसे थे वो भी , अब वो क्या करेंगे .... गॉव. भीख नहीं दे रही है वो हमारा hi पैसा हमें देती है , गॉव. के पास पैसे का कोई झाड़ नहीं है वो लोगो के टैक्स से hi पैसा घेरते करते है , है सभी योजनाए कभी सही नहीं होती लेकिन सभी गलत भी नहीं होती :अप्प्रोवे:

और आप विकासवाद और विनाशवाद की बात कर रहे थे , तो मेरे खेल से दोनों की अति नुकसानदेह है , असल में कोई भी चीज जब बिना किसी चेतना के की जाती है तो वो लॉन्ग टर्म में नुकसान hi पहुँचती है ... एक बहुत hi मस्त नावेल है इंग्लिश में बेस्ट सेलर भी है अमिश त्रिपाठी की शिवा ट्रिओलोग्य ... उसमे एक मस्त चीज कही गयी है की हर अच्छी एक समय के बाद गलत उपयोग के कारन बुराई बन जाती है ... मुझे ये बात और ये विचार पसंद आया क्योकि मैंने इतिहास में कई बार ऐसा होते हुए देखा है ...

और लास्ट में भैया जी कैंसर कोई वायरस वाली डिजीज नहीं है और वो आज से नहीं है हमेशा से एक्सिस्ट करता है , कर्क रोग के नाम से पुराने ग्रंथो में भी मिल जायेगा ..

वही कोरोना वायरस से फ़ैलाने वाली डिजीज है जैसे की एड्स या फिर हिपेटीटीएस वगैरह , और इसका एंटीडोट्स बनाया जा सकता है और वैक्सीन भी :अप्प्रोवे:
 
अपडेट 28
इधर

रिद्धिमा जब अजय से लड़कर अपने कमरे में वापस आगयी तो उसके पीछे डॉ. रंडी भी आ गयी ……

डॉ. बस रिद्धिमा को घर कर देख रही थी , रिद्धिमा की सांसे तेज थी वो खुद को सम्हालने में लगी हुई थी …

“तुम अगर मुझसे बाटे छिपाओगी तो मैं तुम्हारी मदद कैसे कर पाऊँगी .. तुम उस लड़के से प्यार करती हो ??? या तुम खुद एक चुड़ैल हो ..”

डॉ. की बात सुनकर रिद्धिमा कुछ देर तक बस उन्हें निसबड देखते रह गयी ..

फिर एक गहरी साँस छोड़ते हुए बोली ..

“दोनों …”

डॉ. रंडी बस उसके पास जाकर उसके पीठ को सहलाने लगी और रिद्धिमा उनसे लिपट कर रो रही थी …….

रिद्धिमा ने उन्हें सब कुछ फिर से बताया की कैसे जमुना ने उसे चुड़ैल बनाया था , और ये भी की वो अजय से बचपन से प्यार करती है लेकिन सिर्फ चुड़ैल होने के कारन उससे दूर रहना चाहती थी , लेकिन जब वो उसके बारे में सोचती है तो उसे ये बर्दास्त नहीं हो पता …

“रिद्धिमा प्रेम दुधारी तलवार की तरह होता है और कभी कभी ये खुद है हाथ भी काट लेता है , तुम तो और बुरी तरह से फांसी हुई हो , एक तरफ तो तुम उसके बिना जीना भी नहीं चाहती और दूसरी तरफ अगर तुम्हारा प्रेम अंजाम तक पंहुचा तो तुम अपने जीवन की मालकियत से hi हाथ धो बैठोगी , यंहा तुम्हे खुद का सम्मान भी बचाना है और प्रेम भी निभाना है …. बड़ी समस्या हो गयी है ये तो ..”

डॉ. ये बोल कर थोड़ी चिंता में पद गयी वही रिद्धिमा उन्हें देख कर मुस्कुराने लगी ..

“मेरी छोड़िये आप क्यों डॉ. चुटिया का सुनकर यु बौखला जाती है “

डॉ. रंडी ने छोटी सी सिमिले के सब बस एक गहरी सांसे ली ..

“जो तुम्हारे साथ हो रहा है वही मेरे साथ भी हुआ , प्रेम तो था लेकिन बात सम्मान की थी , अधिकारों की थी ,खैर छोडो लड़ने का भी अपना hi मजा है , और प्रेम शरीर की दुरी को नहीं देखता बल्कि मन से करीब होने को मंटा है , हम कितना भी लड़ ले मैं उसके ऊपर कितना भी गुस्सा दिखा दू लेकिन असल बात तो यही है की हम दोनों hi एक दूसरे से जुड़े हुए है … “

डॉ. रंडी जैसे किसी ख्वाब में खो गयी थी , उसे देखकर रिद्धिमा की आंखे बड़ी हो गयी ..

“हाउ रोमांटिक डॉ. साहिबा , फिर ऐसे क्यों पेश आती हो बेचारे डॉ. से “

डॉ. खिलखिलाकर हँसाने लगी

“क्योकि वो चुटिया हमेशा से चुटिया hi था, उसे दुनिया की इतनी पड़ी रहती है की मेरा ख्याल hi नहीं रहता था , और उसके काम … ऊफ्फ .. हमेशा ऐसे काम करता है जिससे मुझे चिढ होती है , एक तो उसकी सेक्रेटरी को देखकर मेरा खून जल जाता है और दूसरी उसकी वो शिष्य काजल , सब कामिनियों को तो खुद उसने hi पाल कर रखा है “

“अच्छा तो आप भी तो बड़े को साथ लेकर घूमती हो “

“लेकिन बड़े बेचारा तो मासूम है , उस मर्री की बच्ची ने उसे कितना घुमाया है , वो तो तब भी इतनी hi कामिनी थी जब शादी सुदा थी , वो डॉ. के एक दोस्त इमरान की पत्नी है और बड़े इमरान का शार्प शूटर हुआ करता था , इमरान एक जाना मन डॉन था ,और ये साली मर्री ने बेचारे मासूम बड़े को hi फंसा लिया , और वो चुटिया डॉ. उसने भी इन दोनों को सपोर्ट किया और उसे अपनी सेक्रेटरी बना लिया … मुझे तो तभी मन किया था की उसे वही मार दू ..”

“आपका मन किया और आपने उन्हें मारा नहीं ये तो हो नहीं सकता :डी “ रिद्धिमा मुस्कुराने लगी

“है डॉ. दो महीने तक हॉस्पिटल में भर्ती था “ दोनों hi ठहाके मार कर हँसाने लगी थी…

“डॉ. आप लोगो की लव स्टोरी तो ऐसे hi चलने वाली है , लेकिन मुझे अपनी लव लाइफ बर्बाद नहीं करनी , मुझे तो मेरा अजय भी चाहिए और मेरा सम्मान भी , मैं उसकी गुलाम बन कर नहीं उसकी प्रेमिका बनकर रहना चाहती हु ..”

“हुम्म्म अभी तो बस ऐसे hi चलने दो , है उसे खुद को मत सौपना वर्ण फिर सम्हालना मुश्किल हो जायेगा, उसे बदलने दे मुझे लगता है की वो बदल जायेगा और अगर वो बदल गया तो तुम भी बदल सकती हो .. ऐसे चेहरे में थोड़ा गुस्सा रखना लड़कियों के लिए जरुरी होता है , वर्ण लोग उन्हें कमजोर hi समझ लेते है “

इधर

जब मेरी आंखे खुली तो वंहा कोई भी नहीं था , खिडख़ी से सूरज की तेज किरणे कमरे में आ रही थी, मैं अलसायी सी अंगड़ाई लेने लगा , जखमो में हलके से दर्द की अनुभूति से मैं थोड़ा सजग हुआ ..और कल की याद करके होठो में एक मुस्कान आ गयी ..

कल का दिन या कहु की आज की सुबह (रत12 बजे के बाद से ) मेरे लिए बहुत hi अच्छी रही थी , एक तरफ मुझे रिद्धिमा के प्यार का अहसास मिला तो दूसरी और मेरी बहाने फिर से मेरे पास आ गयी , बस मुझे अपनी हवस पर कण्ट्रोल रखना था ..

लेकिन क्या हवस को कण्ट्रोल करना सही होगा ??

और कैसे ये संभव हो पायेगा …??

दोनों का एक hi जवाब मेरे जेहन में घूम रहा था , शिकारी बाबा जिन्होंने खुद को इस अभिश्राप से मुक्त किया है …

मैं जल्दी से तैयार होकर डॉ. के पास पहुंच गया .. और उन्हें शिकारी बाबा के बारे में बताया ..

“ठीक है चलते है , लेकिन वो मिलेंगे कहा “

“मुझे क्या पता ??? सुना है की जंगलो के अंदर कही वो मिल सकते है “

“ठीक है चलते है , लेकिन तुम्हारे जखम ”

“उसकी चिंता मत कीजिये ये तो मेरे लिए मामूली बात है ठीक हो जायेगा “

डॉ. ने थोड़े आश्चर्य से मुझे देखा ..

“ठीक है कल चलते है परिमल को भी साथ ले लेना किसी ायरत को नहीं ले जायेंगे ..”

मैंने है में सर हिलाया

******************

हम दूसरे दिन सुबह से hi जंगल की और निकल पड़े , जाना कहा था और जिससे मिलना था वो कौन है ये कुछ भी हमें पता नहीं था , बस हम एक मान्यत्ता के पीछे चल रहे थे जिसका or-chhor भी हमें नहीं पता था ..
 
अपडेट 29
पूरा दिन निकल गया चूका था और मंजिल का तो पता hi नहीं था ..

“भाई और कितने दूर चलना होगा” परिमाल थक कर एक पेड़ के निचे बैठ गया …..

“हमें बस नार्थ की और चलते जाना है , “ डॉ. बोल उठे और बोलते गए

“मैंने गूगल से मैप निकल लिया है , जंगल के सेण्टर तक पहुंचने के लिए हमें बस नार्थ की और hi चलते जाना होगा …”

“अरे कोई हेलीकाप्टर तो मंगवा लेते डॉ. , इस सेल के पास पैसो की क्या कमी है जो हमें बस पैदल चलवाये जा रहा है “ परिमल की बात सुन कर डॉ. के चेहरे में एक मुस्कान आ गयी

“अरे बीटा हेलीकाप्टर से तुम्हे इतने घने जंगल में कैसे दीखता की वो शिकारी कहा है …????”

“सेल इतना जवान तो है तू , डॉ. नहीं थके और तू थक कर बैठ गया है , ऐसे भी आज की रात हमें यही गुजारनी होगी , कल सुबह से फिर से निकलना होगा “

मेरी बात सुनकर अजय ने बस एक गहरी साँस ली और वही बैठ गया ….

दो दिन हो चुके थे और हमारी हालत बेहद hi ख़राब थी , आशा की कोई किरण कही भी नजर नहीं आ रही थी ,

निराशा और नाकामी क्या होती है इसका अहसास मुझे होने लगा था , मन भर रहा था और सभी बुरी तरह से मानसिक और शारीरिक रूप से भी थक चुके थे ..

मुझमे शारीरिक थकन तो नहीं आयी थी लेकिन मानसिक थकन ने मुझे भी घेर लिया था …

अजीब बात थी की मेरे साथ कोई औरत नहीं थी , मैं दवाइया तो ले hi रहा था लेकिन फिर भी मेरे अंदर कोई वासना का जवार अभी तक नहीं आया था, पहले रोज hi मैं सेक्स किया करता था और फिर भी मेरी वासना शांत नहीं होती थी और अब 3 दिनों से मैंने वासना का कोई झोका भी मेरे मन में नहीं उठा था, हलाकि मैं डॉ. की दी गयी दवाइया ले रहा था , लेकिन मन में भी लाखो ख्याल चल रहे थे जो मुझे परेशां किये हुए थे……….

रत हो चुकी थी , घाना सन्नाटा चारो और पसरा हुआ था, सभी टेंट में सो रहे थे और मैं बहार हाथ में एक सिगरेट लिए हुए आधे चाँद को निहार रहा था ..

“मैं तुम्हे प् कर रहूँगा रिद्धि चाहे जो भी हो जाये मैं उस शिकारी बाबा को धुंध कर रहूँगा जो मुझे इस हवस की बीमारी से मुक्ति दिलाएंगे और मैं तुम्हे अपना बना लूंगा “ मैं आधे चाँद को देखकर बोल रहा था ,मैं जनता था की यंहा मुझे सुनने वाला कोई भी नहीं है लेकिन दिल कह रहा था की जैसे वो मेरी बातो को सुन रही होगी , जैसे वो मेरे सामने hi कड़ी है , जैसे चाँद उसकी आंखे हो और मैं उसकी आँखों में आंखे डालकर उससे बात कर रहा हु ,प्रेम की एक bayar(thandi हवा) चल पड़ी थी , भावनाओ ने अंगड़ाई ली और मैं उस चाँद रूपी आँखों में देखता हाउ थोड़ी ऊँची आवाज में बोलने लगा

“रिद्धिमा कहा हो तुम , क्यों दूर हो मुझसे , तुम तो मेरे लिए hi बानी हो फिर क्यों … तुम्हे क्यों लगता है की एक होने के बाद मैं तुमसे गलत वयवहार जरुँगा , क्यों लगता है की तुम मेरी गुलाम बन जाओगी, क्या तुमने मेरे आँखों के ये आंसू नहीं दीखते जो चीख चीख कर मेरे प्रेम को बयां कर रहे है ……. प्रेम में कैसी हार और कैसी जीत मैं तो खुद hi तुम्हारे प्रेम में हु खुद hi तुम्हारा गुलाम हुआ बैठा हु, तुम क्यों मुझपर भरोषा नहीं कर पा रही हो “

मेरे आँखों में आंसू थे जो दिल की गहरी से निकले थे ..

“मुझे तुमपर पूरा भरोषा है अजय लेकिन खुद पर नहीं है , तुम्हारी इस बीमारी पर नहीं है , मेरी उस ताकत पर नहीं है ….”

एक प्यारी सी आवाज मेरे कानो से टकरा गयी , मैं झट से पलटा और सामने मेरे सपनो की रानी कड़ी थी …….
 
अपडेट 30
कुछ देर तक मैं अवाक बस उसे hi निहारता रहा , उसकी बड़ी बड़ी काली आंखे डबडबाई हुई थी ,

“कैसी अजीब बात है अभी तो ये चाँद मुझे तुम्हारी आंखे लग रही hi और अब तुम सामने कड़ी हो “

मैं बिलकुल सम्मोहित सा उसे देख रहा था वो मेरे पास आयी और उसने मेरे गलो को हलके से सहलाया ..

“मैं तुम्हारे सामने hi हु “

उसके स्पर्श ने जैसे मुझे होश में ला दिया था , मैं थोड़ा हड़बड़ाया ..

“तुम .. तुम यंहा ?? तुम यंहा क्या कर रही हो ???”

मेरी हड़बड़ाहट देख कर वो हंस पड़ी , और मैं जो अभी उसे सम्मोहित सा देख रहा था वो अब बुरी तरह से आश्चर्य से भर चूका था …

“पहले तुम बताओ की तुम यंहा क्या कर रहे हो ??”

वो बस मुस्कुराते हुए बोली

“ मैं तो … मैं तो उस शिकारी बाबा से मिलने आया हु जो मुझे इस हवस की बीमारी से निजात दिला सके ..”

“अच्छा लेकिन ये हवस की बीमारी तुम्हे ताकत भी तो देती है “

“ताकत का क्या अचार डालना है , जब इसने मुझे तुमसे दूर कर दिया .. मुझे ऐसी कोई ताकत नहीं चाहिए जो मुझे तुमसे दूर कर दे ..”

वो बड़े hi प्यार से मुझे देख रही थी , उसकी आँखों में जैसे ममता नाच रही हो , वो मुस्कुराते हुए मेरे गलो को सहलाने के साथ साथ मेरे आँखों में आये आंसुओ को पोछने लगी , उसकी कोमल उंगलियों का अहसास मिलना मेरे लिए कितना सुखद था की मेरी आंखे hi बंद हो गयी , मैंने उसके हाथो को हलके से चुम लिया और वो जयदा मुस्कुरा उठी …

“इतना प्यार भी मत करो की मुझे बुरा लगने लगे “

उसने झूठे शिकाऱ्यात वाले स्वर में कहा

“अब मैंने क्या कर दिया ??” मेरी आंखे थोड़ी बड़ी हो गयी थी

“अच्छा अब मैं ये भी बताऊ की तुमने क्या किया है ??? ऐसे पागलो की तरह कोई जंगल के इतने अंदर आता है क्या ?? 3 दिन से खुद भी भटक रहे हो और बेचारे डॉ. और परिमाल को भी भटका रहे हो , क्या जरुरत है तुम्हे ये सब करने की ..”

उसके अधिकार भरे इन शब्दों ने जैसे मुझे उसके अपनत्व का अहसास करवा दिया था , उसने ये बात इतने अपनत्व से कही थी की मन किया उसे अपनी अपने बांहो में भर लू ..

मैं बस खड़े खड़े उसे देखता हु मुस्कुरा रहा था

“अब ऐसे दन्त क्यों दिखा रहे हो “

“मैंने दन्त कब दिखाया “

वो मुझे झूठे गुस्से से घूरने लगी

“क्या हुआ ..” मेरी आंखे भी उसके आँखों से मिली हुई थी

“मन कर रहा है चुड़ैल बैंकर तुम्हारा दिल hi खा जाऊ “

उसने फिर से अपनी आंखे बड़ी कर दी

“तो खा जाओ न , तुम्हारा hi तो दिल है और दिल में भी तो तुम्ही हो “

“ओह्ह फिल्मी डीएलओगे “

“दिल से निकली बात है …”

हम दोनों बस एक दूजे की आँखों में hi देख रहे थे और धीरे धीरे न जाने कब दुनिया हमारे लिए खोते जा रही hi, हमारा चेहरा एक दूसरे के बिलकुल hi पास आ चूका था और एक दूसरे की सांसे सांसो से टकराने लगी थी , चेहरा हलके से तिरछा हो चूका था और होठ फड़फड़ाते हुए पास आ रहे थे , मैंने फिर से उस नाजुक होठो का अहसास अपने होठो से किया , दोनों hi लैब मिल गए थे और एक दूसरे में घुलने लगे थे , मेरी झिबह उसके जीभ से टकराने लगी थी और अचानक hi उसने मुझे और भी जोरो से कास लिया , वो मेरे जीभ को अपने मुँह में खिंच रही थी , मेरे सार को अपने हाथो से थामे हुए अपनी और पूरी ताकत से खिंच रही थी और मेरे होठो को किसी मिट्ठी चीज जैसे चूस रही थी , होठ गीले हो चुके थे जिस्म एक दूसरे से सात चुके थे लार की अधिकता के कारन चाप चाप की आवाजे भी आने लगी थी , मैंने उसे पूरी तरह से जकड़ लिया था और वो भी मेरे आगोश में घुलने लगी थी ..

‘धय धय धय ‘ तीन गोलियों की आवाज से सारा वातावरण गूंज गया

सामने डॉ. रंडी गुस्से से आग बबुली हुई कड़ी थी

“तू फिर इस कमीने से चिपक गयी , पहले hi कहा था की इससे दूर रह , तुझे गुलाम बना कर रखेगा ये लेकिन तू हमें इनके पीछे यंहा तक ले आयी , वो सब ठीक hi था लेकिन अब तो हद हो गयी …”

हम दोनों hi एक दूसरे से अलग हुए

डॉ. रंडी को देखकर मेरी आंखे गुस्से से लाल हो चुकी थी दिमाग में बस एक hi बात बार बार आ रहा था की यही वो ायरत है जो मुझे मेरे प्यार से जुड़ा करना चाहती है ..

मैं गुस्से से उन्हें ऐसा घुरा की वो भी थोड़ी सहम सी गयी और मेरे उप्पेर बंदूख तान दी ..

“नहीं अजय इनके मुँह मत लगो , ये हमारे प्यार को क्या समझेगी जो खुद कभी अपने प्यार को नहीं समझ सकीय ..”

रिद्धिमा ने एक बार डॉ. चुटिया और परिमल को देखते हुए कहा जो की अब तक गोलियों की आवाज सुनकर वंहा आ चुके थे

रिद्धिमा की बात सुनकर डॉ. रंडी कैंप सी गयी थी उनकी पिस्तौल निचे हो गयी और वो एक तक रिद्धिमा की और देखने लगी

“तू पागल हो गयी है क्या “ इस बार डॉ. रंडी का स्वर थोड़ा धीमा था

“नहीं डॉ. साहिबा असल में अभी तो मुझे होश आया है , मुझे मेरे प्यार की पहचान हुई है “

रिद्धिमा ये बोलते हुए मुझसे और भी सात गयी थी जैसे डॉ. रंडी को जलना चाहती हो

“बेटी प्यार का भूत उतार कर देख ये तुझे गुलाम बना लेगा “

रिद्धिमा थोड़ा सा हंस पड़ी थी लेकिन उसकी हंसी में भी एक अजीब सा दुःख नाच रहा था , वो मुझसे अलग हुई और डॉ. रंडी की और थोड़ी सी बाद गयी ..

“प्रेम गुलामी और मालकियत दोनों से परे है डॉ. , जिसे आप गुलामी कह रही है वो प्रेम की भाषा में समर्पण कहलाता है , और क्या अजय का मेरे लिए समर्पण काम है ??

वो तो अपनी उस ताकत को hi त्याग देना चाहता है जिससे वो मुझे गुलाम बनता , लेकिन अब नहीं … अब मैं उसे उस ताकत को छोड़ने नहीं दूंगी चाहे इसके लिए मुझे जिंदगी भर उसकी गुलाम hi बनकर क्यों न रहना पड़े , और ये मेरे प्रेम के लिए मेरा समर्पण होगा , मैं तो खुद को अजय के लिए कब का हार चुकी थी , लेकिन ये मन और मन की संकाय … इन संकाओ ने hi मुझे अब तक बंधे रखा था लेकिन अब मैं आजाद हु, हर उस जांगिड़ से जो मुझे मेरे प्रेम से अलग करना चाहती है , हर उस मर्यादाओ से जो मुझे निति के नाम पर स्वार्थ सिखाती है , अब मैं इसकी और ये मेरा हमारे बिच अब कोई भी नहीं आएगा , न कोई इंसान , न कोई समाज , न hi कोई नियम और न hi ये तकते ………..”

रिधिममा ने जैसे दृढ निश्चय किया हो , सभी शांत हो चुके थे , चुप… कोई आवाज कही से नहीं आ रही थी , मैं भी प्रेम से भरा हुआ आँखों में आंसू लिए बस उसे hi देखे जा रहा था , हृदय प्रसन्न था मन में एक प्रफुल्लता सी एक उमंग सी उठ रही थी , मेरी रिद्धिमा मेरी थी और इतने सहस से वो इस बात को स्वीकार भी रही थी , वो मेरे लिए खुद की खुद्दारी को भी त्यागने को तैयार थी ये उसका प्रेम था ये उसका समर्पण था , मैं आगे बढ़ा और सिद्धि जाकर उससे लिपट गया , हमारे होठ एक दूसरे के होठो में मिल गए थे …

अब हमें कोई भी रोकने और टोकने वाला वंहा नहीं था ..

डॉ. रंडी जैसे टूट सी गयी थी और वो वंहा से निकल गयी , उसके साथ hi डॉ. चुटिया भी चले गए , परिमल हम दोनों को अकेले छोड़कर खुद फिर से सोने चले गया था ………..
 
अपडेट 31
भोर होने को था , सूरज की लालिमा ने आकाश को घेरना शुरू कर दिया था , मैं अपने महोब को अपने बांहो में लिए उसके स्पर्श के आनंद में डूबा हुआ पास में बहती हुई एक नदी के किनारे बैठा था , रिद्धि भी मुझमे सिमटी हुई अपने प्रेम का अहसास मुझे करा रही थी , ऐसा लग रहा था जैसे जन्मो की छह पूरी हो रही हो , वो मेरी थी जिसे मैंने अपना मन था ..

“रिद्धि मुझे फिर भी शिकारी बाबा से मिलना है और इस ताकत से निजात पाना है “ मैं उसके बालो को हलके हलके से सहलाते हुए बोलै , वो अपने मासूम आँखों से मुझे hi देख रही थी

“मैं तुम्हारी गुलाम बनना पसंद करुँगी लेकिन ये कभी नहीं चाहूंगी की मेरे कारन तुम इस ताकत को छोड़ दो …..”

“लेकिन मैं तुम्हे गुलाम नहीं बनाना चाहता और मेरी हवस … उसका क्या करूँगा “

रिद्धिमा हलके से मुस्कुराई

“अरे पागल मैं हु न , वैसे एक चीज क्या तुमने नोटिस की … अभी तक तुम्हारे हवस का वो जानवर जाएगा नहीं , मेरे साथ रहते हुए भी “

रिद्धि की बात बिलकुल सही थी , उलटे उसके पास होते हुए मुझे हवस की झलकियां तक नहीं आती थी ..

“है कही ये कहानिया झूटी तो नहीं???”

एक प्रश्न हमारे दिमाग में घूम गया था ..वही रिद्धिमा

“नहीं अजय जब शिकारी होना सही है चुड़ैल होना सही है तो फिर ये कहानिया भी सही होंगी “

“लेकिन अगर ऐसा होता तो हम एक दूसरे में अभी तक खुद गए होते “

मेरी बात सुनकर रिद्धि जोरो से हंस पड़ी

“है तुम्हे तो बस कूदना hi सूझेगा …”

वो शरारत भरी निगाहो से मुझे देख रही थी , उसकी हिरानी जैसे चंचल आंखे मुझे जैसे अपने अंदर उतरने को बेताब थी , मैं प्रेम में भरकर उसके होठो को पूरी ताकत से चूमने लगा था , हमारा जिस्म नदी के रेट में गिर चूका था और उप्पेर खुला आश्मान बांहे फैलाये हुए हमें अपने में सीमेंट रहा था , नदी की धार का कलवार माहौल की शांति को भांग कर रही थी और साथ hi दो जवान और गर्म जिस्म एक दूसरे में लिपटे हुए रेट में अटखेलिया करने लग थे ..

जिस्म और मन के बिच की दूरिया काम हो रही थी , सांसे जैसे एक दूसरे में घुल रही हो , उसके जिस्म की नाजुकता को मैं अपने जिस्म में महसूस कर रहा था वही मेरे हाथ उसके गोलाइयों की और बढ़ गए , कैसे हुए सलवार में उसके जिस्म का हर उभर जैसे और भी उभरा हुआ मालूम होता और मेरे हाथ उसके उन उभारो को सहलाते हुए उन उठे हुए उभारो की कोमलता को महसूस करके तृप्त से महसूस करते थे …

“आह्हः “

जैसे hi मेरे हाथ उसके यौवन से भरे हुए छाती में उभरे गोलाइयों पर गए वो चुहक उठी , और मेरे सर को कसकर मेरे मुँह में अपने मुँह को दाल दिया , सूरज भी लालिमा बिखेर रहा था और साथ hi मेरे महबूब का चेहरा और भी दिपत प्रकाश से खिलता हुआ मेरे समन उभर रहा था , उसके कोमल मांस से भरे हुए मखमली गलो पर मैंने अपने दांतो को हलके से गदा दिया , क्या मिठास थी क्या कोमलता थी और क्या खुसबू थी उसकी ..

“ऊम्मम क्या कर रहेह हो दांतो का निशान पद जायेगा “

उसने मदहोशी में लिपटे हुए हलके गुस्से के साथ कहा , मैंने एक बार उसके उस कोमल मासूम चेहरे को देखता रहा , गोर रंग में पड़ती सूर्य महाराजा की लालिमा भरी किरणों से वो चेहरा और भी खिला हुआ लग रहा था, ताजगी और यौवन दोनों hi जैसे फुट पड़ने को बेकरार थे , चंचल बड़ी बड़ी आंखे काजल के लग जाने से और भी आकर्षक लग रही थी और बस उसकी पुतलियों में मेरा hi अक्ष दिखाई पढ़ रहा था , कोमल गुलाबी होठ हलके हलके से फड़फड़ा रहे थे जो मुझे उन्हें चूमने और चूसने को आमंत्रित करने को काफी थे, हमारी आंखे एक दूसरे में ऐसे खोयी थी जैसे दुनिया में अब देखने को कोई और चीज बची hi नहीं हो …

समां में मदहोशी और बेकरारी घुल गयी थी , बेताबियाँ मन को विचलित करने लगी hi , दोनों hi जिस्म और मन एक दूसरे में डूबने को बेकरार हो रहे थे और तभी ……

“साला ये क्या है “ परिमल ऐसे चिल्लाया था की हम दोनों के कानो तक उसकी आवाज पद गयी , उसका यु हमें बिच में टोकना हमें अच्छा तो नहीं लगा लेकिन अनायास hi हम उसकी आवाज की और मुद गए वो झाड़ियों के पास खड़ा हुआ सामने नदी के पार देख रहा था , सायद झाड़ियों से छिपकर वो हमारी प्रेम लैला देखने की कोशिस कर रहा हो लेकिन बात ये नहीं थी बात ये थी की वो अभी क्या देख रहा है ..

हमारी नज़ारे भी उस और देखने लगी जनाः परिमल देख रहा था , और हम दोनों के प्रेम का सुमार तुरंत hi उतर गया ..

सामने एक औरत और एक आदमी नदी के उप्पेर चलते हुए हमारे पास आ रहे थे ,उन्हें पानी में चलते देख कर हमारी आंखे फटी की फटी रह गयी ..

वो एक कसाव लिए जिस्म का मर्द था जिसकी विशाल भुजाये और शरीर की बनावट hi उसके शक्तिशाली होने का सबूत दे रही थी , खुले लम्बे बल और पूर्ण नंग ..

वही साथ आने वाली महिला का रूप देख कर जैसे मैं और रिद्धि दोनों hi मंत्रमुग्ध हो गए , उसकी नग्न अवस्था भी दिव्या लग रही थी , खुले हुए काळा काळा बाल कमर से निचे तक लटक रहे थे , भरे हुए जिस्म की मलिका थी वो, हर कटाव उभर कर सामने आ रहे थे लेकिन शरीर से मादकता नहीं बल्कि एक दिवव्यता झलक रहा था , पैरो में चंडी की पायल और कमर में एक चंडी की करधन के अलावा उसने कुछ भी नहीं पहना था …

दोनों हमारे hi पास आने लगे जिन्हे देखकर अनायास hi हमें उन्हें नमन करने का मन करने लगा था , वो जैसे जैसे करीब आते हमारे सर बरबस hi झुकते जा रहे थे ..

उनहोंने बस एक नजर परिमल की और देखा और परिमल वही बेहोश होकर गिर पड़ा ……..

वो अब हमारे सामने hi खड़े थे

“हे देव हे देवी कौन है आप लोग “

हम दोनों hi उनके सामने हाथ जोड़े खड़े थे ..

“मैं वही हु अजय जिसे तुम ढूंढते हुए यंहा तक ए हो “

उस पुरुष के चेहरे में असीम शांति थी और एक मनमोहक सी मुस्कान

“शिकारी बाबा ..??”

हम दोनों hi एक साथ बोल उठे

“है शायद दुनिया हमें इसी नाम से जानती है , और ये मेरी प्रियसी , मेरी प्रियतमा है , चुड़ैलों में भी सबसे खास स्थान रखने वाली मेरी संगनी “

उन्होंने अपने साथ आयी महिला की तरफ इशारा किया , हम दोनों ने उन्हें भी प्रणाम किया …

मन में कई संदेह और सवाल अब भी उमड़ रहे थे लेकिन उनसे आगे से कुछ पूछ सकू ऐसी हिम्मत भी नहीं हो रही थी , मैं तो बस सीतल चेहरे के सीतलता में खुद को सीतल करने की कोशिस कर रहा था , अनायास hi मन में एक प्रेम और आनंद का भाव उमड़ पड़ता था …

“क्यों धुंध रहे थे अजय तुम हमें ??”

उनके चेहरे में वो प्यारी सी मुस्कान अब और भी थोड़ी बढ़ गयी थी ..

“आप तो सर्वज्ञ है क्या आपको नहीं पता ..”

वो दोनों फिर से मुस्कुरा पड़े

“अजय , रिद्धिमा मन के सरे संदेह को धो डालो, है कहानिया झूठी नहीं है लेकिन वो महज प्रतीकात्मक जरूर है … एक शिकारी तब hi पूरा होता है जब वो किसी चुड़ैल से सम्भोग करे लेकिन वो सम्भोग महज जिस्म का मिलान नहीं बल्कि जिस्म और मन से उप्पेर उठकर रूह का मिलान होता है , जब कोई शिकारी और चुड़ैल एक दूजे के प्रेम में पूरी तरह से गिरफ्तार हो जाये और वो समर्पण का भाव उनके अंदर उमड़ने लगे , तभी उस समर्पण के छान में हुआ मिलान hi दोनों hi मुक्त कर जाता है और एक दिव्यता उनके अंदर उतरती है ..” इस बार उस चुड़ैल ने अपनी कोमल वाणी से ये बात कही थी ..

“लेकिन क्या सच में सम्भोग मुझे अजय की गुलाम बना देगा “ रिद्धिमा ने झट से कहा , और वो फिर से मुस्कुरा उठी

“इसका उत्तेर तो तुम जानती hi हो रिद्धिमा , गुलामी नहीं समर्पण , जब तुम खुद को अजय के प्रति समर्पित करने को तैययर हो जाओ और अजय खुद को तुम्हारे प्रति समर्पित करने को तैययर हो जाये तभी वो समर्पण घटेगा , जैसे की तुम दोनों तैययर हो गए हो … तुम्हारे बिच समर्पण घाट चूका है इसलिए तुम्हारी खोज अब ख़त्म हो गयी हमें तुम्हारे सामने आना hi पड़ा … तुम मिलान को तैययर हो .. तुम उन खुशनशीब शिकारी और चुड़ैलों में से हो जिन्हे उनका प्रेम उन्हें मिल पता है , तुम एक दूसरे के लिए hi बने हो .. जिन्हे उनका प्यार नहीं मिल पता वो तो जिंदगी भर बस अपने ताकत को शांत करने के लिए hi भटकते रहते है , उन्हें किसी चुड़ैल की जरुरत होती है और वो उसका शिकार करते है जबरदस्ती उनसे सम्भोग करके उन्हें अपना गुलाम बनाने की कोशिस करते है .. तुम्हारे सामने भी ये परीक्षा थी जिसमे तुम दोनों hi पास हो गए हो ………”

ऐसा लगा जैसे जीवन धन्य हो गया हो , लेकिन तभी पास की झाड़ियों से कुछ और लोगो के आने की आवाजे सुनाई दी , हमसे थोड़ी hi दुरी पर कई जंगली से दिखने वाले लोग नंग धडंग लोग हाथो में हथियार लिए हमारी और hi आ रहे थे ,उनमे कई महिला और कई पुरीष शामिल थे , हम कुछ समझ पते उससे पहले hi शिकारी बाबा ने हमारे हाथो को थम लिया ..

“अब हमें चलना चाहिए बाकि की बाटे बाद में “

और वो फिर से हम दोनों को लेकर नदी के दूसरी तरफ भागे , आश्चर्य जनक रूप से हम दोनों भी पानी के उप्पेर दौड़ रहे थे …

तभी उन महिलाओ और पुरुष के झुण्ड से किसी के चिल्लाने की आवाज आयी

“रुक जाओ इसे हमने बनाया है इन पर हमारा अधिकार है ………”

लेकिन तब तक हम उनकी पहुंच से बहुत दूर निकल चुके थे
 
अपडेट 32
“ये सब आखिर हो क्या रहा है ये लोग कौन थे “

हम थोड़े दूर चले गए थे , घने जंगल वो बहुत hi सहज तरीके से आगे बढ़ रहे थे , मेरी बात का उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया थोड़ी hi देर में वंहा उनके hi जैसे और भी कई लोग आ चुके थे , वो एक विशाल समूह था जिसमे कुछ 50 कपल थे , हम बस आंखे फाडे सभी को देख रहे थे , थोड़ी देर में वो हमें एक गुफा नुमा स्थान पर ले गए , मसलो से hi वो गुफा रोशन थी बहार चिड़िया बोल रही थी और पेड़ो से छनती हुई वो शीतल हवाएं , मौसम बड़ा hi सुहाना था और प्रकृति की गॉड में ऐसी शांति की मन hi राम जाये , लेकिन बाहरी शांति का कोई असर हमारे मानसिक कोलाहल पर नहीं हो रहा था , हम अब भी बेचैन थे , मैं तो एक शिकारी को ढूंढने निकल था जो हमारी मदद कर सके लेकिन यंहा तो उसके साथ मुझे के चुड़ैल भी मिल गयी और उन जैसे कई और भी …

“शांत हो जाओ अजय थोड़ा आराम कर लो फिर बात करते है “

शिकारी ने बड़े hi प्यार से मुझसे कहा

“लेकिन आखिर वो लोग थे कौन ,और वो ऐसा क्यों बोल रहे थे की उन्होंने हमें बनाया है … और हमारे दोस्त वही रह गए है उनकी सुरक्षा ??”

मेरे उतावलेपन को देख कर वो बस मुस्कुरा उठा

“कुछ नहीं होगा उन लोगो को , है वो जरूर इस चिंता में रहेंगे की तुम दोनों कहा चले गए , और जो लोग हमें पकड़ने की कोशिस कर रहे थे वो लोग भी शिकारी और चुड़ैल hi है , जैसे की हम .. और उनमे से एक ने hi तुम्हे बनाया है और उन्ही चुड़ैलों के समूह में से कुछ ने रिद्धिमा को बनाया है …”

“लेकिन वो लोग यंहा क्यों??? “

“जब तक तुम्हारा प्रेम मुकम्मल नहीं था तब तक उन्हें तुम लोगो से कोई मतलब नहीं था , तुम उनके लिए वैसे hi थे जैसे बाकि होते है लेकिन जैसे hi रिद्धिमा और तुमने अपने को एक दूसरे के प्रति समर्पित कर दिया उन लोगो के लिए तुम आम से खास हो गए … उन्होंने तो तुम्हे आम `शिकारी और चुड़ैल hi बनाया था लेकिन तुम दोनों ने अपने प्रेम के बल पर खुद को खास बना लिया ..

अब भी तुम्हारे अंदर वही हवस है और अब भी रिद्धिमा के अंदर वही जलन जो किसी शिकारी के सम्भोग से hi मिट सकती है , लेकिन न तो तुम न hi रिद्धिमा दोनों hi एक दूसरे का इस्तमाल खुद के लिए नहीं कर रहे और यही तुम्हारी ताकत बन गयी ….

वो तो अच्छा हुआ की तुम दोनों के बिच अभी तक कोई सम्भोग नहीं हुआ , और जब तुम दोनों एक दूसरे के प्रति समर्पित हुए हम तुम तक पहुंच गए , वर्ण उस अंतहीन हवस से थोड़ी रहत पाने के लिए वो लोग तुम दोनों को उठा लेते और एक विशेष क्रिया तुम दोनों को उप्पेर करके तुम्हे अपने सम्मोहन में ले लेते , और फिर हवस का खेल चलता ……..

सभी शिकारी रिद्धिमा से और सभी चुड़ैल तुम्हारे साथ सम्भोग करते , क्रिया के द्वारा तुम्हारे मन को बांध दिया जाता जिससे तुम दोनों को यही लगता की तुम अपने प्रेम से hi सम्बन्धः बना रहे हो , और उसी समर्पण का फायदा उठा कर वो लोग अपनी आग हमेशा के लिए कुछ काम कर पते ..”

मेरा और रिद्धिमा का मुँह खुला का खुला रह गया था …….

“वो लोग ऐसा कैसे कर सकते है ??”

रिद्धिमा तो ये सुनकर सकते में आ गयी थी , अभी साथ आयी चुड़ैल ने बड़े hi प्रेम से उसके बालो को सहलाया

“हवस की आग जीतनी मनमोहक दिखाई देती है उससे कही जयदा पीड़ा दायक है , जब कोई इस आग में जलता है तो वो खुद का आप hi खो बैठता है ,ये तो तुमने सामान्य जीवन में hi देखा होगा … अब सोचो की शिकारियों की हवस की आग सामान्य मनुष्य से सैकड़ो गुना जयदा होती है वैसे hi एक चुड़ैल की शिकारी से अपनी हवस शांत करने की इक्छा भी समांन्य महिला से सैकड़ो गुना जयदा होती है … हम उन लोगो को दोष नहीं देते , वो भी बेचारे इस बीमारी के मारे है और अंतहीन सम्भोग भी उन्हें संतुष्ट नहीं कर पता , संतुष्टि का एक hi राष्ट है वो है प्रेम ….

वो तुम दोनों से उसी प्रेम की हलकी सी झलक और अहसास के लिए सम्बन्ध बनाना वाले थे , ताकि उस प्रेम की हलकी सी आहात से भी उनके जिस्म के आग को थोड़ी ठंडक मिले …

वो ऐसा हर उस शिकारी और चुड़ैल की जोड़ी के साथ करना चाहते है जो की प्रेम में पढ़कर समर्पण के भाव से एक दूसरे के हो जाते है ..”

रिद्धिमा और मैं दोनों hi शांत हो गए थे …

“अब हम क्या करे …???”

हम दोनों का एक hi प्रश्न था ..

“बस सही घडी का इंततजार जब तुम दोनों को नियम के साथ एक किया जा सके , तुम दोनों के बिछ उस प्रेम की घडी में सम्भोग हो जाये तो तुम्हारे पास ऐसी शक्तिया आ जाएगी जिससे तुम उन लोगो से हमेशा बच पाओगे … “

“वो लोग भी तो हमारे जैसे hi है , फिर वो क्यों इस पीड़ा में जल रहे है , क्या आप लोगो को उनके लिए कुछः करना नहीं चाहिए ..”

रिद्धिमा की बात सुनकर मैं जंहा आश्चर्य से उसे देखने लगा वही दोनों मुस्कुरा रहे थे

“प्रेम किसी के मन में डाली नहीं जा सकती , वो तो बस होता है , और इंसान कितनी भी कोशिस करके भी किसी के प्रेम में नहीं पद सकता … जब प्रेम hi नहीं होगा वो समर्पण का तो सवाल hi नहीं उठता , और जब प्रेम और समर्पण न हो तो जो होता है उसे सौदेबाजजी कहा जाता है , सौदेबाजी कभी संतुस्ती नहीं देती , बस आग को और भड़का देती है ……”

उनकी बात सुनकर हम बस सहमति में सर हिलाते रह गए , उन्होंने हमें आराम करने के लिए अकेले छोड़ दिया था ……
 
:थैंक्स:

सभी दोस्तों का बहुत बहुत धन्यवाद् :thank_you:

सॉरी टाइम की कमी के कारन थोड़ा लेट उपदटेस आ रहे है , और किसी को पर्सनल कमैंट्स का रिप्लाई नहीं कर प् रहा हु .....

अभी मेरे पास लिखने का बिलकुल भी टाइम नहीं रहता न hi साइट में आने का और ज्यादा समय बिताने का , लेकिन कोशिस यही है की स्टोरी अधूरी न रह जाये, इसलिए थोड़ा थोड़ा रोज लिखने का टाइम निकलने की कोशिस करता हु और जब अपडेट कम्पलीट हो जाये तो पोस्ट कर देता हु ... :अप्प्रोवे:

होप आप सभी इस चीज को समझेंगे , उपदटेस सप्ताह में 1 या 2 hi आ पायेगा अब , साथ बने रहे या फिर स्टोरी कम्पलीट हो जाने के बाद पढ़े आप चॉइस कर सकते है , मुझे अपने दोस्तों को इस तरह वेटिंग करवाना बिलकुल अच्छा नहीं लगता इसलिए ये बात मैं क्लियर कर रहा हु की उपदटेस लेट आया करेंगे... आपकी चॉइस है की आप किस तरह से पढ़ना पसंद करेंगे ........

धन्यवाद दोस्तों ......

थोड़े देर में अपडेट देता हु
 
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