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part-21
दोनों के शरीर की हवस इतना बढ़ चुक्का था की क्लब से होटल तक का रास्ता भी दोनों से कटा जाना मुश्किल होने लगा था…. विशाल टैक्सी में hi अपनी माँ अलका की जांघो को सहलाने लगता है अलका भी अपने bête का साथ देते हुवे अपने पेअर फैला लेती है जिस से उसकी गीली छूट विशाल के नजरो के सामने आ जाती है विशाल लालच और खा जाने वाली नज़रो से देखते हुवे अलका के जांघ को मसलते हुवे उसके उसके ड्रेस को ऊपर की और खिसका देता है और अलका के छूट पे अपना हाथ रख देता है

अलका जो इस वक़्त कामवन की आग में जल रही थी जिसे इस वक़त किसी भी हालत में चुदाई चाइये थी विशाल के इस हरकत से उत्तेजित होने लगती है..
विशाल धीरे धीरे अलका के ड्रेस को ुकि छाती से निचे खिसका देता है जिस से अलका की चूचिया बहार आ जाती है

अब अलका का ड्रेस सिर्फ उसके पेट के पास फंसा हुआ था ो ऊपर और निचे दोनों तरफ से नंगी थी… वासना में दोनों माँ bête को इस बात की कोई परवाह नहीं थी की ड्राइवर उन्हें ये सब करता हुआ देख रहा है और अपना लुंड मसल रहा है… पर विशाल को इस बात की खान फ़िक्र थी वो तो अपनी माँ अलका के चूचियों से जैसे दूध निकलने की कसम खा राखी हो कुछ इस तरह मसल रहा होता है..

अलका से भी जब रहा नहीं गया तो वो विशाल का लुंड उसके पंत से बहार निकल कर उसपे अपना हाथ फेरने लगती है या तुन कहो अपने bête का मुठ मार रही thi…alka का गोरा कामुक बदन कार की धीमी रौशनी में भी चमक रही thi..baat जब लोडे पे हाथ सहलाने से भी न बानी तो अलका झुक के विशाल का लंड अपने मुँह में भर लेती है और लोल्लयपोप की तरह चूसना शुरू कर देती है….

विशाल- aaaaaaaaaahhhhhhhhh माँ क्या जादू है आपके मुँह में
अलका बस उसकी आँखों में देख क एक समयले पास करती है और लुंड चूसना जारी रखती है.. वो लुंड को ज्यादा से ज्यादा मुँह में भरने लगती है.. विशाल को इसमें बहुत मजा आ रहा था ो अलका के मुँह को अपने लुंड पे ज्यादा से जयादा दबाने लगता है और अलका भी भुकी कुटिया की तरह उसके लुंडपे टूट पड़ती हो मनो कुटिया को हड्डी मिल गयी हो…
विशाल- माँ
अलका- hmmmmm(muh में लुंड भरे हुवे)
विशाल- मेरे गॉड में बैठो न
अलका- तेरी गॉड में या तेरे लोडे पे
विशाल- हाँ मेरी जान मेरे लोडे पे बैत न
फिर अलका उठ के विशाल के लुंड पे बैठ जाती है बूत लुंड छूट में नहीं लेती बसा उसके लंड पे अपनी गीली छूट रगड़ते रहती है और अपनी गोरी गोरी गांड विशाल की तरफ कर के कमर हिलने लगती है

विशाल मनो मस्ती के सातवे आसमान में था… उसका दिल कर रहा था अभी यही अलका को पटक पटक के चोदे लेकिन उसे होटल में अलका के गोर बदन को नोचना था ये गली में उतनी जगह नहीं थी..
धीरे धीरे एक दूसरे के अंगो के साथ खेलते हुवे दोनों होटल पहुंच जाते है…
अलका विशाल को उसका लोढ़ा पकड़ के रूम के अंदर लती है और बड़े अदाओ के साथ अपने कपडे उसके सामने उतरने लगती है मनो कोई बाजारू औरत अपने आज रात के ग्राहक को खुश करना छह रही हो

कपडे के उतारते hi अलका विशाल के सामने पूरी तरह से नंगी हो जाती है और फिर वो बड़े अदाओ से अपनी गांड विशाल की तरफ घुमा के अपने दरस जो उसके पैरो में फंसा हुआ था वो उतर के फ़ेंक देती है

. अब अलका अपने bête या अपने आशिक़ के सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी उसकी सांसे उसके काबू में न थी हर साँस के साथ उसकी चूचिया भी ऊपर निचे हो रही थी… विशाल उसके गार्डन को पकड़ उसे दीवार की तरफ धकेलते हुवे दिवार के सहारे खड़ा कर देता है और उसके होंटो को चूमना और उसकी भरी भरी चुचिओ को मसलना सुरु कर देता है

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh धीरे
विशाल- अभी तो धीरे hi हाथ रखा है मेरी जान अभी से गांड फैट गयी तेरी
अलका- मेरी गांड चोर मेरे छूट की आग शांत कर उसे फाड् हिमत है तो
विशाल हस्ते हुवे अलका को देखता है और उसकी चुचिओ पे एक जोरदार थपड मार देता है…

एक hi थपड में उसकी गोरी गोरी कासी हुई चूचिया अगले hi पल लाल हो जाता है… जिसे देख के विशाल एक के बाद एक 4-5 थपड और लगा देता है…

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh इतस हर्टिंग विशु
विशाल- अभी खान हर्ट किया है मेरी सेक्सी माँ
अलका भी उसकी बात सुन के मुस्कुरा देती है उसकी मुस्कराहट बहुत कामुक थी…
विशाल अलका का सर पकड़ के निचे दबाने लगता है.. अलका भी समझ जाती है अपने bête के इशारे को और घुटनो के बल बैठ जाती है विशाल के दोनों जगहों के बिच और विशाल के लुंड को पकड़ की उसे किश कर लेती है और उसपे अपनी जुबान फेरने लगती है..

देखते hi देखते वो विशाल के पुरे लुंड को अपने मुँह में भर लेट है जो बड़े मुश्किल से उसके मुँह में समां पा रहा था पर औरत के हवस की आगे किसी भी लुंड की क्या औकात….

विशाल भी अलका का सर अपने लुंड पे पूरा दबा देता है जिस से की उसका लुंड पुरे जड़ तक अलका के गए में चला जाता है उसकी आवाज़ घुट घुट की ा रही थी लेकिन विशाल अभी भी उसका मुँह अपने लोड पे दबाये रखा था… धीरे धीरे विशाल अलका के मुँह को छोड़ने लगता है वो अपना कमर आगे पीछे करते हुवे अपनी माँ के मुँह में झाके मार रहा था…


जब उसने अलका के मुँह से लुंड निकला तो मनो उसके मुँह से कोई सांप निकला हो इतना लम्बा और मोटा लुंड पता नहीं कैसे ये औरत अपने छेद में हज़म कर जाती है फिर चाहे वो मुँह होय ा उसकी chut…lund के साथ ढेर सारा लार और थूक भी अलका के मुँह से बहार गिरने लगता है जो विशाल के ाँद और अलका के चुचिओ पे फ़ैल जाता है…
विशाल अपना लुंड अलका के होंटो पे मरने लगता है अलका भी उसका लुंड मुँह में भरने के लिए तड़पने लगती है और अपने होंठ खोल के अंदर लेने की कोशिस करने लगती है…

अलका की ये हालत देख के विशाल को बहुत मजा आता है वो छठा था की अलका को इतना गरम कर दे की वो लुंड की भीख मांगे और अलका जैसी औरत को छोड़ने का मजा तो तभी है जब वो लंड के लिए रंडी तक बनने को राजी हो जाये..
विशाल अलका के चुचिओ को मसलते हुवे उसके गाल पे एक थप्पड़ लगा देता है जो की बहुत धीमी थी.

अलका- मरना है तो जोर से मर न ये औरतो की तरह क्या मार रहा hai…alka ने ये बोल के मनो विशाल के मर्दानगी को उकसाया हो विशाल भी उसके बाल को बड़े बेरहमी से पकड़ के खींचता है और उसके चेहरे पे 4-5 थपड एक के बाद एक जड़ देता है…

अलका को इस दर्द में भी मजा आ रहा था…
अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh हिट में................ हिट में हार्ड यू मोथेरफुकेर
विशाल और तेज़ मरता है अलका के आँखों में आंसू आ जाते है उसके गालो पे मनो खून उतरा आया हो जो कह रहे हो और नहीं प्लस और न मारो लेकिन अलका की हवस तो कुछ और hi कह रही थी
अलका- ओने मोरे ओने मोरे विशु और तेज़ मार माँ के लोडे मर्द नहीं है क्या
विशाल समझ जाता है उसकी माँ अब गरम हो गयी है और उसका ये वासना में जलता बदन वो सरे जुल्म और दर्द सहने को तैयार है जो उसे चुदाई के दौरान मिलने वाला था…
विशाल अलका को अपनी गॉड में उठता है और उसे बीएड पे लिटा देता है और अपनी जुबान अलका को छूट पे रख के उसके दानो को चाटने लगता है

अलका भी मस्ती में अपनी दोनों टंगे पूरी तरह से खोल के हवा में लहरा देती है जिस से की विशाल अचे उसके छूट को चूस और चाट सके वो विशाल के चाटने से मचलने लगती है उसका चेहरा अपने छूट पे दबाने लगती है…

अलका वासना की आग में इस तरह जल रही थी की वो उसमे आज विशाल के लुंड को भी पिघला degi..vishal पुरे शिद्दत से अपनी माँ अलका के छूट को चाट रहा था और साथ hi उसकी चर्बीदार मगर सपाट पेट क तो कभी अपनी माँ की चुचिओ को मसल रहा होता है जिसमे अलका को दर्द के साथ मजा का एक मिलजुला सुख मिल रहा था
विशाल चूसने के साथ साथ उसके दानो को काट भी रहा था और थोड़ा जोर से काट रहा था जिस से दर्द के मरे अलका चटपटे हुवे ऊपर को सरकने लगती है तो विशाल वापस से उसकी जांघो को पकड़ के अपनी और खींचता है और दुबारा से उसके छूट के दानो को चाटने काटने लग जाता है.. अलका जब जब चटपटा की आगे की और खिशक्ति है

विशाल अलका को किसी गुड़िया की तरह अलका की टंगे पकड़ के अपनी और खींचता है अलका भी विशाल के हाथो की कठपुतली बन गयी थी वो जैसे नचा रहा था अलका वैसे hi नाच रही थी
अलका- विशाल अब बर्दाश्त नहीं होता दाल दे न
विशाल- अपना चेहरा अलका के छूट से निकल के उसकी तरफ देखता है और पूछता है क्या खुल के बोलो?
अलका- दाल दे अपना लुंड मेरी छूट में बहुत खुजली हो रही है और मत तड़पा मुझसे बर्दाश्त नहीं होता…
विशाल चुदाई में अपनी माँ को आज और ज्यादा हुमिलियते करना छह रहा था इसलिए वो अलका से दूर हटकर खड़ा हो जाता है.. अलका हैरानी भरे नजरो से देखती है मनो पूछ रही हो की क्या hua….chod दे न अब और कितना तड़पाएगा अपनी माँ को… पर विशाल अलका को अपना लुंड दिखा के हिला रहा था मनो किसी कुटिया को हड्डी दिखा के ललचा रहा हो… जब अलका से बर्दाश्त न हुआ तो वो काउच से उठ के विशाल की तरफ बढ़ जाती है पर हरामी विशाल के दिमाग में तो कुछ और hi चल रहा था उसने अलका को रोकते हुवे खा
विशाल- अहा न न ऐसे नहीं आज तुझे अपनी कुटिया बनाऊंगा..
अलका- हाँ तो हु न मैं तेरी कुटिया तेरी पालतू अब चल दाल दे अपना लुंड मेरी छूट में ले मैं बन गयी कुट्टी तेरी माँ अलका तेरे लुंड लेने के लिए कुट्टी भी बन जाएगी और अलका दोगी पोज़ में बैठ जाती है विशाल को अपना गांड दिखते हुवे….

विशाल- नान ा वो तो तू बनेगी hi आज पर तुझे कुछ और करना होगा अपने छूट में मेरा लुंड लेने के लिए..
अलका- अब क्या करना होगा मत तड़पा न बहुत जोर से खुजली हो रह मेरी छूट में तू नहीं छोड़ेगा तो मैं ऐसे hi बहार चली जाउंगी नंगी फिर कोई और तेरी माँ छोड़ेगा और तू ऐसे लुंड पकड़ के देखते रहना….
विशाल- साली रंडी मेरे होते किसी और से छुड़ेगी???
अलका – तो तू छोड़ ले बाटे क्यों बना रहा है
विशाल- तुझे मेरा लुंड चाइये तो आ के ले ले लेकिन ऐसे चाक इ नहीं
अलका- फिर कैसे??
विशाल- कुटिया है न मेरी फिट कुट्टी की तरह चाक के आ अपने मालिक के पास …. विशाल के इस डोमिनेटिंग नेचर पे अलका मुस्कुराते हुवे उसे देखती है और फिर किसी कुटिया की तरह 4 पैरो पे चलते हुवे और अपनी मखमली गांड मटकते हुवे अपने मालिक के पीछे पीछे जाने लगती है

विशाल- शाबाश मेरी कुटिया आजा ऐसे hi आ और मांग अपने मालिक से लुंड बोल की वो तुझे चोदे..
अलका- यस प्लस विशाल अपनी माँ को छोड़ दे bête ये लुंड अपनी माँ के बुर में दाल के उसकी बुर फाड़ दे आअह्ह्ह कितना कदल लोढ़ा है तेरा आजा छोड़ अपनी माँ को दूर दूर क्यों जा रहा है देख तेरी माँ कुट्टी की तरह अपनी छूट लिए तेरे पीछे पीछे आ रही है छोड़ेगा नहीं अपनी अलका को??

विशाल अलका को धक्का दे के काउच पे लिटा देता है और फिर उसके चुचो को मसलते हुवे कहता
विशाल- बहुत आग लगी है तेरे छूट में साली की मैं नहीं छोडूंगा तो किसी और का लुंड ले लेगी
अलका- हाँ लगी है बुझा दे मादरचोद

विशाल अलका के ऊपर आ जाता है और अलका के गोर बदन जिसको नोच नोच के विशाल ने लाल कर दिया था वो होंठ जिस से मनो ा बरस टपक पड़ेंगे को वापस से अपने मुँह में भर लेता है.. नाजुक सी अलका उसके मस्कुलर बॉडी में मनो खो सी जाती है….
अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh फ़क में bête
विशाल अपना लुंड अलका के छूट के मुहाने पे रगड़ने लगता है जो उसकी माँ की कामाग्नि को और भड़का रही थी…
और फिर उसके छूट के पानी से विशाल का लुंड गिला होने लगता है विशाल से भी कण्ट्रोल कर पाना मुश्किल था ो लुंड को रगड़ते रगड़ते अपना टोपा अलका के छूट में घुसा देता है
अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaa फ़क में ुर अपनी चुकी को अपने hi हाथो से मसलने लगती है

तो बे छॉंट.............
दोनों के शरीर की हवस इतना बढ़ चुक्का था की क्लब से होटल तक का रास्ता भी दोनों से कटा जाना मुश्किल होने लगा था…. विशाल टैक्सी में hi अपनी माँ अलका की जांघो को सहलाने लगता है अलका भी अपने bête का साथ देते हुवे अपने पेअर फैला लेती है जिस से उसकी गीली छूट विशाल के नजरो के सामने आ जाती है विशाल लालच और खा जाने वाली नज़रो से देखते हुवे अलका के जांघ को मसलते हुवे उसके उसके ड्रेस को ऊपर की और खिसका देता है और अलका के छूट पे अपना हाथ रख देता है

अलका जो इस वक़्त कामवन की आग में जल रही थी जिसे इस वक़त किसी भी हालत में चुदाई चाइये थी विशाल के इस हरकत से उत्तेजित होने लगती है..
विशाल धीरे धीरे अलका के ड्रेस को ुकि छाती से निचे खिसका देता है जिस से अलका की चूचिया बहार आ जाती है

अब अलका का ड्रेस सिर्फ उसके पेट के पास फंसा हुआ था ो ऊपर और निचे दोनों तरफ से नंगी थी… वासना में दोनों माँ bête को इस बात की कोई परवाह नहीं थी की ड्राइवर उन्हें ये सब करता हुआ देख रहा है और अपना लुंड मसल रहा है… पर विशाल को इस बात की खान फ़िक्र थी वो तो अपनी माँ अलका के चूचियों से जैसे दूध निकलने की कसम खा राखी हो कुछ इस तरह मसल रहा होता है..

अलका से भी जब रहा नहीं गया तो वो विशाल का लुंड उसके पंत से बहार निकल कर उसपे अपना हाथ फेरने लगती है या तुन कहो अपने bête का मुठ मार रही thi…alka का गोरा कामुक बदन कार की धीमी रौशनी में भी चमक रही thi..baat जब लोडे पे हाथ सहलाने से भी न बानी तो अलका झुक के विशाल का लंड अपने मुँह में भर लेती है और लोल्लयपोप की तरह चूसना शुरू कर देती है….

विशाल- aaaaaaaaaahhhhhhhhh माँ क्या जादू है आपके मुँह में
अलका बस उसकी आँखों में देख क एक समयले पास करती है और लुंड चूसना जारी रखती है.. वो लुंड को ज्यादा से ज्यादा मुँह में भरने लगती है.. विशाल को इसमें बहुत मजा आ रहा था ो अलका के मुँह को अपने लुंड पे ज्यादा से जयादा दबाने लगता है और अलका भी भुकी कुटिया की तरह उसके लुंडपे टूट पड़ती हो मनो कुटिया को हड्डी मिल गयी हो…
विशाल- माँ
अलका- hmmmmm(muh में लुंड भरे हुवे)
विशाल- मेरे गॉड में बैठो न
अलका- तेरी गॉड में या तेरे लोडे पे
विशाल- हाँ मेरी जान मेरे लोडे पे बैत न
फिर अलका उठ के विशाल के लुंड पे बैठ जाती है बूत लुंड छूट में नहीं लेती बसा उसके लंड पे अपनी गीली छूट रगड़ते रहती है और अपनी गोरी गोरी गांड विशाल की तरफ कर के कमर हिलने लगती है

विशाल मनो मस्ती के सातवे आसमान में था… उसका दिल कर रहा था अभी यही अलका को पटक पटक के चोदे लेकिन उसे होटल में अलका के गोर बदन को नोचना था ये गली में उतनी जगह नहीं थी..
धीरे धीरे एक दूसरे के अंगो के साथ खेलते हुवे दोनों होटल पहुंच जाते है…
अलका विशाल को उसका लोढ़ा पकड़ के रूम के अंदर लती है और बड़े अदाओ के साथ अपने कपडे उसके सामने उतरने लगती है मनो कोई बाजारू औरत अपने आज रात के ग्राहक को खुश करना छह रही हो

कपडे के उतारते hi अलका विशाल के सामने पूरी तरह से नंगी हो जाती है और फिर वो बड़े अदाओ से अपनी गांड विशाल की तरफ घुमा के अपने दरस जो उसके पैरो में फंसा हुआ था वो उतर के फ़ेंक देती है

. अब अलका अपने bête या अपने आशिक़ के सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी उसकी सांसे उसके काबू में न थी हर साँस के साथ उसकी चूचिया भी ऊपर निचे हो रही थी… विशाल उसके गार्डन को पकड़ उसे दीवार की तरफ धकेलते हुवे दिवार के सहारे खड़ा कर देता है और उसके होंटो को चूमना और उसकी भरी भरी चुचिओ को मसलना सुरु कर देता है

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh धीरे
विशाल- अभी तो धीरे hi हाथ रखा है मेरी जान अभी से गांड फैट गयी तेरी
अलका- मेरी गांड चोर मेरे छूट की आग शांत कर उसे फाड् हिमत है तो
विशाल हस्ते हुवे अलका को देखता है और उसकी चुचिओ पे एक जोरदार थपड मार देता है…

एक hi थपड में उसकी गोरी गोरी कासी हुई चूचिया अगले hi पल लाल हो जाता है… जिसे देख के विशाल एक के बाद एक 4-5 थपड और लगा देता है…

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh इतस हर्टिंग विशु
विशाल- अभी खान हर्ट किया है मेरी सेक्सी माँ
अलका भी उसकी बात सुन के मुस्कुरा देती है उसकी मुस्कराहट बहुत कामुक थी…
विशाल अलका का सर पकड़ के निचे दबाने लगता है.. अलका भी समझ जाती है अपने bête के इशारे को और घुटनो के बल बैठ जाती है विशाल के दोनों जगहों के बिच और विशाल के लुंड को पकड़ की उसे किश कर लेती है और उसपे अपनी जुबान फेरने लगती है..

देखते hi देखते वो विशाल के पुरे लुंड को अपने मुँह में भर लेट है जो बड़े मुश्किल से उसके मुँह में समां पा रहा था पर औरत के हवस की आगे किसी भी लुंड की क्या औकात….

विशाल भी अलका का सर अपने लुंड पे पूरा दबा देता है जिस से की उसका लुंड पुरे जड़ तक अलका के गए में चला जाता है उसकी आवाज़ घुट घुट की ा रही थी लेकिन विशाल अभी भी उसका मुँह अपने लोड पे दबाये रखा था… धीरे धीरे विशाल अलका के मुँह को छोड़ने लगता है वो अपना कमर आगे पीछे करते हुवे अपनी माँ के मुँह में झाके मार रहा था…


जब उसने अलका के मुँह से लुंड निकला तो मनो उसके मुँह से कोई सांप निकला हो इतना लम्बा और मोटा लुंड पता नहीं कैसे ये औरत अपने छेद में हज़म कर जाती है फिर चाहे वो मुँह होय ा उसकी chut…lund के साथ ढेर सारा लार और थूक भी अलका के मुँह से बहार गिरने लगता है जो विशाल के ाँद और अलका के चुचिओ पे फ़ैल जाता है…
विशाल अपना लुंड अलका के होंटो पे मरने लगता है अलका भी उसका लुंड मुँह में भरने के लिए तड़पने लगती है और अपने होंठ खोल के अंदर लेने की कोशिस करने लगती है…

अलका की ये हालत देख के विशाल को बहुत मजा आता है वो छठा था की अलका को इतना गरम कर दे की वो लुंड की भीख मांगे और अलका जैसी औरत को छोड़ने का मजा तो तभी है जब वो लंड के लिए रंडी तक बनने को राजी हो जाये..
विशाल अलका के चुचिओ को मसलते हुवे उसके गाल पे एक थप्पड़ लगा देता है जो की बहुत धीमी थी.

अलका- मरना है तो जोर से मर न ये औरतो की तरह क्या मार रहा hai…alka ने ये बोल के मनो विशाल के मर्दानगी को उकसाया हो विशाल भी उसके बाल को बड़े बेरहमी से पकड़ के खींचता है और उसके चेहरे पे 4-5 थपड एक के बाद एक जड़ देता है…

अलका को इस दर्द में भी मजा आ रहा था…
अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh हिट में................ हिट में हार्ड यू मोथेरफुकेर
विशाल और तेज़ मरता है अलका के आँखों में आंसू आ जाते है उसके गालो पे मनो खून उतरा आया हो जो कह रहे हो और नहीं प्लस और न मारो लेकिन अलका की हवस तो कुछ और hi कह रही थी
अलका- ओने मोरे ओने मोरे विशु और तेज़ मार माँ के लोडे मर्द नहीं है क्या
विशाल समझ जाता है उसकी माँ अब गरम हो गयी है और उसका ये वासना में जलता बदन वो सरे जुल्म और दर्द सहने को तैयार है जो उसे चुदाई के दौरान मिलने वाला था…
विशाल अलका को अपनी गॉड में उठता है और उसे बीएड पे लिटा देता है और अपनी जुबान अलका को छूट पे रख के उसके दानो को चाटने लगता है

अलका भी मस्ती में अपनी दोनों टंगे पूरी तरह से खोल के हवा में लहरा देती है जिस से की विशाल अचे उसके छूट को चूस और चाट सके वो विशाल के चाटने से मचलने लगती है उसका चेहरा अपने छूट पे दबाने लगती है…

अलका वासना की आग में इस तरह जल रही थी की वो उसमे आज विशाल के लुंड को भी पिघला degi..vishal पुरे शिद्दत से अपनी माँ अलका के छूट को चाट रहा था और साथ hi उसकी चर्बीदार मगर सपाट पेट क तो कभी अपनी माँ की चुचिओ को मसल रहा होता है जिसमे अलका को दर्द के साथ मजा का एक मिलजुला सुख मिल रहा था
विशाल चूसने के साथ साथ उसके दानो को काट भी रहा था और थोड़ा जोर से काट रहा था जिस से दर्द के मरे अलका चटपटे हुवे ऊपर को सरकने लगती है तो विशाल वापस से उसकी जांघो को पकड़ के अपनी और खींचता है और दुबारा से उसके छूट के दानो को चाटने काटने लग जाता है.. अलका जब जब चटपटा की आगे की और खिशक्ति है

विशाल अलका को किसी गुड़िया की तरह अलका की टंगे पकड़ के अपनी और खींचता है अलका भी विशाल के हाथो की कठपुतली बन गयी थी वो जैसे नचा रहा था अलका वैसे hi नाच रही थी
अलका- विशाल अब बर्दाश्त नहीं होता दाल दे न
विशाल- अपना चेहरा अलका के छूट से निकल के उसकी तरफ देखता है और पूछता है क्या खुल के बोलो?
अलका- दाल दे अपना लुंड मेरी छूट में बहुत खुजली हो रही है और मत तड़पा मुझसे बर्दाश्त नहीं होता…
विशाल चुदाई में अपनी माँ को आज और ज्यादा हुमिलियते करना छह रहा था इसलिए वो अलका से दूर हटकर खड़ा हो जाता है.. अलका हैरानी भरे नजरो से देखती है मनो पूछ रही हो की क्या hua….chod दे न अब और कितना तड़पाएगा अपनी माँ को… पर विशाल अलका को अपना लुंड दिखा के हिला रहा था मनो किसी कुटिया को हड्डी दिखा के ललचा रहा हो… जब अलका से बर्दाश्त न हुआ तो वो काउच से उठ के विशाल की तरफ बढ़ जाती है पर हरामी विशाल के दिमाग में तो कुछ और hi चल रहा था उसने अलका को रोकते हुवे खा
विशाल- अहा न न ऐसे नहीं आज तुझे अपनी कुटिया बनाऊंगा..
अलका- हाँ तो हु न मैं तेरी कुटिया तेरी पालतू अब चल दाल दे अपना लुंड मेरी छूट में ले मैं बन गयी कुट्टी तेरी माँ अलका तेरे लुंड लेने के लिए कुट्टी भी बन जाएगी और अलका दोगी पोज़ में बैठ जाती है विशाल को अपना गांड दिखते हुवे….

विशाल- नान ा वो तो तू बनेगी hi आज पर तुझे कुछ और करना होगा अपने छूट में मेरा लुंड लेने के लिए..
अलका- अब क्या करना होगा मत तड़पा न बहुत जोर से खुजली हो रह मेरी छूट में तू नहीं छोड़ेगा तो मैं ऐसे hi बहार चली जाउंगी नंगी फिर कोई और तेरी माँ छोड़ेगा और तू ऐसे लुंड पकड़ के देखते रहना….
विशाल- साली रंडी मेरे होते किसी और से छुड़ेगी???
अलका – तो तू छोड़ ले बाटे क्यों बना रहा है
विशाल- तुझे मेरा लुंड चाइये तो आ के ले ले लेकिन ऐसे चाक इ नहीं
अलका- फिर कैसे??
विशाल- कुटिया है न मेरी फिट कुट्टी की तरह चाक के आ अपने मालिक के पास …. विशाल के इस डोमिनेटिंग नेचर पे अलका मुस्कुराते हुवे उसे देखती है और फिर किसी कुटिया की तरह 4 पैरो पे चलते हुवे और अपनी मखमली गांड मटकते हुवे अपने मालिक के पीछे पीछे जाने लगती है

विशाल- शाबाश मेरी कुटिया आजा ऐसे hi आ और मांग अपने मालिक से लुंड बोल की वो तुझे चोदे..
अलका- यस प्लस विशाल अपनी माँ को छोड़ दे bête ये लुंड अपनी माँ के बुर में दाल के उसकी बुर फाड़ दे आअह्ह्ह कितना कदल लोढ़ा है तेरा आजा छोड़ अपनी माँ को दूर दूर क्यों जा रहा है देख तेरी माँ कुट्टी की तरह अपनी छूट लिए तेरे पीछे पीछे आ रही है छोड़ेगा नहीं अपनी अलका को??

विशाल अलका को धक्का दे के काउच पे लिटा देता है और फिर उसके चुचो को मसलते हुवे कहता
विशाल- बहुत आग लगी है तेरे छूट में साली की मैं नहीं छोडूंगा तो किसी और का लुंड ले लेगी
अलका- हाँ लगी है बुझा दे मादरचोद

विशाल अलका के ऊपर आ जाता है और अलका के गोर बदन जिसको नोच नोच के विशाल ने लाल कर दिया था वो होंठ जिस से मनो ा बरस टपक पड़ेंगे को वापस से अपने मुँह में भर लेता है.. नाजुक सी अलका उसके मस्कुलर बॉडी में मनो खो सी जाती है….
अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh फ़क में bête
विशाल अपना लुंड अलका के छूट के मुहाने पे रगड़ने लगता है जो उसकी माँ की कामाग्नि को और भड़का रही थी…
और फिर उसके छूट के पानी से विशाल का लुंड गिला होने लगता है विशाल से भी कण्ट्रोल कर पाना मुश्किल था ो लुंड को रगड़ते रगड़ते अपना टोपा अलका के छूट में घुसा देता है
अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaa फ़क में ुर अपनी चुकी को अपने hi हाथो से मसलने लगती है

तो बे छॉंट.............











































































































































