Incest Kamuk Alka - Page 7 - SexBaba
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Incest Kamuk Alka

अपडेट-37 (स्नीक पीक सीरीज-1, किचन)

समय बीतता गया और अलका कैग हाव् अब भने लगे थे यानि वो अब पहले से नार्मल हो चुकी थी लेकिन इस दौरान भी माँ bête की मस्ती रूकती नहीं है.. ये और बात है की विशाल अलका को छोड़ नहीं रहा था लेकिन मौका पाते hi उसके कामुक बदन के हर हिस्से को अपने हाथो से मालने का कोई मौका नहीं चोरता था.. अशोक का घर इ होना उसे और ज्यादा एडवेंचर्स एंड एक्ससिटेड बना रहा था…

पहले अशोक के होते हुवे उसकी पत्नी और अपनी माँ अलका को अपने कमरे में और फिर अगले दिन अशोक के सामने hi उसकी बीवी को रगड़ के छोड़ना इनसब ने विशाल और अलका के सेक्स एडवेंचर को एक अलग hi मुकाम पे ला दिया था… अब दोनों को hi अशोक के सामने उसके नाक के निचे एक दूसरे से छेद चढ़ करने में किक मिल रही थी…

हालाँकि अलका विशाल को बहुत कोशिश करती है रोकने का पर विशाल अब इनसब में आगे निकल चुक्का था ो अलका के लाख मन करने पे भी उसके साथ वो सब करता जो उसका मन होता..

ऐसे hi एक दिन अलका किचन में खाना बना रही थी… अशोक ड्राइंग रूम में बैठा टीवी देख रहा था और विशाल जस्ट कॉलेज से आया था…. कॉलेज से क्या आया था ो बंक कर के जल्दी आ गया था क्यूंकि उसका सारा दिमाग में तो अलका का मादक शरीर घूमता रहता है..






घर आते hi विशाल अपने बाप के बगल के कुर्सी पे बेथ जाता है.. उसके आने की आहात अलका को भी हो hi गयी थी और उसे पता था की अब विशाल जरूर आएगा किचन में किसी बहाने से पर अशोक तो सामने hi बैठा है उफ्फ्फ्फ़ ये लड़का किसी दिन पक्का मरवाएगा.. यही सब सोचते हुवे वो कनखियों से हॉल की तरफ देख भी रही थी और अपना काम भी कर रही थी…

घर आते hi उसने सब को hi हेलो किया और अशोक से बाटे करते हुवे भी उसकी नजरे हर वक़्त की तरह अभी भी अलका को धुंध रही थी… और जल्द hi उनकी निगाहे अपना शिकार ढूडन लेती है.. विशाल खान ेके बहाने से किचन में घुस जाता है…

विशाल किचन में घुसते hi अलका के पीछे जा के चिपक जाता है….

विशाल uuuuuuuuuuhhhhhhhhh माआ क्या खुसबू है तेरे बदन की एक पल के लिए भी दूर नहीं रहा जाता…

अलका- ह्ह्हह्हह्हुउउउउउउउ क्या कर रहा है विशु अशोक सामने hi hai..dekh लेगा … तू मंटा क्यों नहीं…

अशोक सामने है देख लेगा सुन के विशाल एक्ससिटेड हो जाता है और झटके से अपने माँ के ड्रेस को सोल्डर से निचे गिरा देता है…






ड्रेस के ऑफ सोल्डर होते hi अलका के चुके आज़ाद हो जाते है जिसे विशाल बड़े बेरहमी से मसलने लगता hai..vishal का इतने से भी मन नहीं भरता की वो अलका के ड्रेस को और ज्यादा निचे खिसकने लगता है अलका अपने ड्रेस को पकड़ के उसे उतरने से रोकने की पूरी कोशिश करती है पर विशाल देखते देखते अलका को किचन में बिलकुल नंगा कर देता hai..dress के उतर जाने से उसके चुचिओ के साथ उसकी छूट और गांड बिलकुल आज़ाद thi..alka किचन में बिलकुल नंगी अपने बेटे के लुंड पे अपनी गांड घिस रही थी और उसका बीटा अपना खड़ा लुंड अलका के के गहरे दरारों में घुसते हुवे अपनी माँ के गार्डन को चुम रहा tha.....ashok के मौजूदगी में अलका इतना आगे कभी नहीं निकली थी जिसके वजह से आज अलका के दिल की धड़कन बहुत तेज़ी से दौड़ने लगती है वो विशाल को जितना चोर्ने को कहती विशाल उतना hi आगे बढ़ता जाता है.. जिस से थक के वो विशाल के बहाव में बहने लगती hai…ashok इस बात ने अनजान की उसका बीटा अणि माँ को छोड़ रहा है वो अपने काम में व्यस्त था..

अलका- चोर दे विशाल वर्ण गज़ब हो जायेगा तेरी शरारतदीन पे दिन बढ़ती जा रही है…

विशाल अलका को चोर्ने की जगह निचे बेथ जाता है और अलका के छूट और गांड को चाटने के लिए अपनी जीभ निकल लेता है…






अलका को विशाल के इस हरकत से तेज़ गुदगुदी होती है जिसका असर ये था की वो जोर जोर से सब्जिया काटने लगती है… वो अपने छूट के गर्मी को और उस से निकल रहे ऊर्जा को चाकू पे लगाने लगती है…

अलका- aaaaaaaahhhhhhhhhhh aaaaaauuuuuuuuuuhcccccccccccchhhhhhh

तभी अशोक की आवाज़ आती है..

अशोक- अरे कितना जोर लगा के काट रही हो सब्जी काट रही होय ा लोहा???

अशोक के ावा कानो में पड़ते hi अलका विशाल को लात मार के खुद से दूर कर देती है..

अलका- वो चाकू में धार काम हो गयी है इसलिए डैम लगाना पड़ा रहा है

अशोक- ाचा रुको मैं ठीक कर देता हु..

ये सुनते hi अलका की तो मनो गांड hi फैट जाट है… वो बात को सँभालते हुवे कहती है नहीं नहीं अब तो हो गया आप अपना काम करो टेंसन न लो..

अशोक अलका से बात करते वक़्त मोबाइल पे ईमेल पढ़ रहा था जो उसके शिप कम्पनी से आया था.. अगर उसने एक बार भी नज़र घुमा लिया होता तो उसे पता लग जाता की जोर क्यों लगाना पद रहा है…

अलका फिर विशाल से कहती है अभी तू मरवा देता… कुछ तो शर्म कर ले भोसड़ीवाले बाप के सामने माँ को छोड़ने की सोच रहा है..

विशाल हस्ते हुवे अलका को पकड़ के उसके होंटो पे किश करने लगता है जिसका अलका विरोध कर रही थी तो विशाल उसे अपना लुंड दिखते हुवे कहता है इसका इलाज कर दो चला जाऊंगा..

अलका- इतनी जल्दी नहीं होता तेरा ..

विशाल- ाचा एक बार किश कर के मुँह में ले तो लो..

Alka-fir तू चला जायेगा न??

विशाल- हाँ..

अलका भी मज़बूरी में निचे बैठे के विशाल के खड़े लुंड को मुँह में भर के चूसने लगती है






..अभी उसने मुँह में डाला hi था की विशाल एक जोर का धक्का उसके मुँह में मर के लुंड अंदर कर देता है…

अलका गुस्से में लुंड को बहार निकल के कड़ी हो जाती है और फिर विशाल से कहती है.. चल कर लिया जितनी मस्ती करनी थी अब जा खान बन जाये तब आ जाना पर विशाल

विशाल बिना किसी दर उसे फिर से दबोच लेता है..

अलका- क्या कर रहा है हल चोर और जा तेरे पापा देख लेंगे कितनी बार समझौ तुझे..

विशाल- चोर दू??

अलका- हाँ चोर दे…

विशाल- फिर आज रात मेरे कमरे में आएगी न??

अलका- देखती हूँ अभी कैसे बता दू..

अलका ने ये कह के मनो गलती कर दी.. इतना सुनते hi विशाल अलका के पेअर को उठा के स्लैब पे रखता है और अपना लुंड अलका के छूट में पेल देता है…






अलका के मुँह से हलकी सी चीख निकल जाती है और विशाल हलके हॉथो से अलका को छोड़ने लगता है.. अलका भी छूट में लुंड का गर्माहट पते hi भूल जाती है अशोक को और अशोक के दर ko..use बिलकुल ख्याल नहीं रहता की वो कीतचन में बिलकुल नंगी अपने बेटे के लुंड से चुद रही है.. और उसका पति आज उसे रेंज हाथ भी पकड़ सकता hai..par जब सर पे वासना का बहुत सवार हो तो इन बातो का खान ध्यान रहता है

वो ऊपरी मन से तो चोर्ने को कहती है पर खुद अपने गांड को पीछे धकेल धकेल के लुंड अंदर ले रही thi…dono अभी थोड़ी देर के लिए चुदाई में खोये थे की अशोक का फोन बजता है..

अलका फिर अलग हो जाती है और विशाल का लुंड अपनी छूट से निकल के सीधी कड़ी हो जाती है..

फोन अशोक के गाओं से था सायद किसी शादी में इनविटेशन के लिए आया था पर नेटवर्क न मिल पाने के वजह से वो अपनी जगह से उठ के विंडो की तरफ जाने लगता hai..apne बाप को जाते देख विशाल वापस से उसकी बीवी अलका को दबोचता है और प्लेटफार्म पे झुका के फिर से लुंड पेल देता है और तेज़ तेज़ धक्का मरने लगता है…






बात थोड़ी लम्बी चलने लग जाती है जिसका आभाष अलका क ओहो गया था क्यूंकि फोन पे कामिनी थी और कामिनी हो तो अशोक जल्दी फोन रख दे ऐसा हो hi नहीं सकता था.. वो कामिनी के पास होने से सब भूल जाता था ये बात अलका अचे से जानती थी इसलिए अलका भी इस मोके का फायदा उठाते हुवे विशाल के लुंड पेग एंड पटक पटक के चुदाई का मजा लेने लगी थी…

पति के सामने होते हुवे किसी दूसरे मर्द का लोड लेना कोई मजाक की बात है नै और वो मर्द भी कोई और नहीं अपना खुद का सागा बीटा hi तो है.. और यही बात दोनों माँ bête को एक्ससिटेड कर रही थी..

विशाल- मा थोड़ा झुक मेरा हो जायेगा पापा के आने से पहले…

अलका- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह झुकी हुई तो हु जल्दी जल्दी निकल ले उउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ तू किसी दिन अपने हवस के चक्कर में मुझे मरवा देगा…

विशाल- तू तो मेरी रखैल है न फिर रखैल का तो काम होता है मालिक को खुश रखने का…

अलका- मादरचोद पति के सामने घोड़ी बन के तेरे से चुद रही हु और क्या खुसी चाइये तुझे…

विशाल- और तेरी गांड चाइये चिनार..

अलका- वो तो भूल जा और जल्दी कर..

विशाल- aaaaaaaaaaahhhhhhhhh हाँ अभी तो चोर दे रहा हूँ नेक्स्ट टाइम अशोक के सामने तेरी गांड मरूंगा ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh और विशाल अलका के छूट में hi जहर जाता है…

अलका तुरंत अपनी छूट से विशाल का लुंड निकल के अपने मुँह में भर लेती है और बाकि बचे पानी को पिने लगती है..






देख पति के सामने नंगी हो के चूड़ी हूँ और अब तेरे लुंड का पानी भी पी रही हु.. मिलेगी कोई इतना प्यार करने वाली तुझे...????

इतने में अशोक का फोन भी काट जाता है और वो अलका को ौज़ देते हुवे बालकनी से किचन में आने लगता है..





अलका और विशाल भी अशोक की आवाज़ सुनते hi अपने अपने कपड़ो को ठीक करने लगते है… विशाल एक hi झटके में चड्डी के साथ जीन्स पहन लेता है तो वही अलका भी अपने ड्रेस को ठीक करने लगती है पर इस बिच उसकी चूचिया अभी भी बहार थी जिसके वजह से वो अशोक की करफ पीते किये बात कर रही थी..

अशोक उसे बताता है की उन्हें गाओं जाना है गाओं में शादी है कामिनी का फोन आया था.. और फोन की बाटे बताने लगता है…

थोड़ी देर में खाना बन चुक्का होता है और पूरी फॅमिली खाना खान ेके लिए टेबल पे बेथ जाते है…






जहां अशोक खाना खा रहा था तो वही विशाल एंड अलका ने अपना अपना खान खा लिए था और दोनों के चेहरे पे अशोक को बेवकूफ बना के उसके नाक के निचे एक चुदाई कर लेने की जीत की झलक दिखाई दे रही थी… और आज दोनों ने अपनी चुदाई और हवस के खेल को एक स्टेप और ऊपर बढ़ा दिया था...

कुछ फोटो अलका के किचन से....
































 
अपडेट-38



अलका के जिंदगी में विशाल ने फिर से बहार ला दिया था अलका अब खुद को 40 की नहीं बल्कि किसी टीनएज की तरह महसूस करने लगती है विशाल उसका बॉयफ्रेंड एंड अशोक उसका पति न हो के पिता हो गया था.. जिस से चुप चुप के उसी के नाक के निचे ये दोनों पुरे घर में चुदाई का खेल खेल रहे थे… हर बार की चुदाई पिछले बार से ज्यादा रिस्की और रिवॉर्ड भी उतना hi बड़ा.. दोनों माँ bête किसी फिल्म के तरह लाइफ एन्जॉय कर रहे the…vishal भी अलका को अब माँ मंटा hi नहीं था ो उसपे बीवी गफ या रखैल वाला हक़ जमता था.. अपनी मन की करता था और जब दिल करे अपने और अपने लुंड की प्यास कभी अलका के छूट से तो कभी उसके मुँह से बुझा लेता था… विशाल का प्यास टी बुझ रहा था पर एक सख्स ऐसा भी था जिसकी प्यास दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही थी और उसका खामियाज़ा हर बार सारिका को भुगतना पड़ता है… जी हाँ यह बात कारन की हो रही है…

कारन अब किसी भी तरह अलका को छोड़ना चाहता था और इसी मक़सद से वो अब रेगुलर अलका के घर आने जाने लगा था.. और अलका के जिस्म को अपनी निगाहो से जाने कितनी बार छोड़ चुक्का था पर उसे हाथ लगाने की हिम्मत नहीं हो रही थी उसे समझ नहीं आता वो कहाँ से और कैसे शुरू करे… अलका भी कोई बेवकूफ तो थी नहीं जो कारन के हरक़ती से उसके इरादे को भाप न सके… लेकिन वो भांजा था ये सोच के नज़रअंदाज़ कर देती थी और साथ hi उसे तैसे लड़ने का कोई मौका भी नहीं चोरटी थी…

एक दिन कारन अलका के घर आया तब उसके घर पे कोई नहीं था सिवाए अलका के… तभी कारन वह पहुंच जाता है.. वो घर का काम करके नहाने hi जा रही थी और उसे ऑफिस के लिए भी निकलना था

वो किचन साफ करते हुवे कारन को विशाल के कमरे में बैठने को बोलके फिर अपने रूम में नहाने चली जाती है..









अलका को ऑफिस के लिए लेट हो रहा था एंड घर में कोई सो वो जल्दी जल्दी में टॉवल लिए बिना नहाने के लिए बाथरूम में घुस जाती hai…aur वैसे भी घर में कोई था नहीं ो उसे किसी बात का दर नहीं था क्यूंकि कारन को तो वो विशाल के रूम में बिठा के आयी थी…

ालके के बाथरूममे जाने के थोड़े देर बाद कारन भी अलका के रूम में घुस जाता है.. जहां पानी की आवाज़ से कारन को ये समझते देर नहीं लगती की अलका नाहा रही है..









अंदर का नज़ारा बड़ा कामुक था जिसे देख के कारन का गाला सूखने लगता है.. अंदर उसकी सपनो की रानी उसकी मासी अलका बिलकुल नंगी जेट से अपने छूट पे पानी बहा रही थी…

अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh कितना ाचा लगता है….

कारन चुपके से अलका को यूँ hi नाहटा देखता रहता है.. और जब अलका का नहाना ऑलमोस्ट हो जाता है तब वो अलका के रूम से जाने की सोचता है पर जाने के बजाय फिर वही थोड़ा हिमत कर के रुकने का फैसला लेता है… और बीएड पे बेथ जाता hai…alka का नहाना हो जाता है वो जैसे hi कमरे में आती है उसकी चीख निकल जाती है…









अलका- कारन तुम????? तुम यहां क्या कर रहे हो

अलका टॉवल ले के नहीं गयी थी जिसके वजह से वो बिलकुल नंगी hi अपने रूम में आ गयी thi…uska नंगा बदन पानी में भीगे होने से ज्यादा कामुक लग रहा था.. पानी की बुँदे उसके बालो से टपकते हुवे उसकी छाती से होते हुवे उसके गहरी नाभि में जलकुंड बना रही थी.. और उस जलकुंड से निकलती पानी की कुछ बुँदे उसके सुनहरे झांटो में फास के मनो ओस के बून्द जैसे चमक रहे हो…

कारन- सूर्य मासी वो मैं बोर हो रहा था तो आपके पास आ गया..

अलका भाग के बाथरूम में घुस जाती है और कारन से टॉवल मांगती hai…alka के भागने से उसके मादक शरीर का सबसे कामुक अंग की लचक कारन को ढेर कर कर रही थी.. वो बेचारा पहले से hi मारा हुआ था ऊपर से अलका कैग एंड के लचक से वो तो घ्याल hi हो गया..

अलका- कारन क्या कर रहे हो मैंने टॉवल माँगा hai…(wo च्चती तो कारन को कमरे से जाने को भी कह सकती थी पर जाने क्यों उसे जानो को न कह के टॉवल मांग लिया था)

कारन- सॉरी मासी अभी laya…aur फिर कारन टॉवल ले के अलका को देने बाथरूम में चला जाता है..

कारन अलका को टॉवल पकड़ा देता है और वही खड़ा रहता है..









अलका- अब क्या जाओ यहां से या और कुछ देखना बाकि रह गया है?

कारन (अभी तो सब कुछ बाकि है मासी)- नहीं मुझे लगा कुछ और चाइये होगा इसलिए..

इतना कह के कारन जाने hi वाला था की उसके मन में एक युक्ति आती है और वो पलट के अलका से बोलता hai….kya मैं आपकी पीठ पॉच दू??

अलका को भी कारन के इस बात और हिम्मत पे हैरानी होती है और वो कहती है नहीं इतनी महरबानी काफी है अब तू जा मई आती हूँ…

करण ने भी अपने हरामी दिमाग का पूरा इस्तेमाल किया था वो अलका को जान बुझ कर छोटा टॉवल दे के आया था जिस से की उसकी सिर्फ छूट चुप सकती थी ऊपर बांधना मुश्किल था..









अलका अपने बदन को पोछने के बाद जब टॉवल लपेटने जाती है तब उसे ख्याल आता hi की कारन ने गलत टॉवल दे दिया है… वो सोचने लगती है की कही वो ये सब जानबूझ के तो नहीं कर रहा है??? वो फिर से अंदर से आवाज़ देती है…

अलका- कारन ये तूने छोटा वाला टॉवल क्यों दिया इसे मैं कैसे लपेटो??

कारन के साइड से कोई जवाब नहीं मिलता.. लका को लगता है की सायद वो कमरे से निकल के चला गया हो इसलिए वो टॉवल को कमर तक बांध के hi कमरे में दाखिल होने लगती है..

पर सामने का जो नजारा था ो उसके दिमाग को हिला देने वाला था कारन का लुंड बिलकुल तना हुआ आसमान को सलामी दे रहा था और वो लेते लेते अपने लुंड को मसल रहा था..









अलका को समझते खान देर लग्न था की वो उसी के नाम की मुट्ठी लगा रहा है.. पर अलका अनजान बन के आवाज़ लगाती है..

अलका- तू यही है फिर जब मेरे बातो का जवाब क्यों नहीं दे रहा था…

अलका की आवाज़ कान में पड़ते hi कारन बगल में पड़े चादर को उठा के उस से अपने लुंड को धक् लेता है.. पर अलका तो सब देख चुकी थी.. ये और बात है की उसने न देखने का ड्रामा किया था…

कारन अलका की वो वीडियो देख के अपना लुंड हिला रहा था जो उसने उसके नहाते वक़्त शूट की थी..

कारन- वो मासी कण में ईरफ़ोन के वजह से नहीं सुन पाया होऊंगा..

Alka-aur तूने इस वक़्त चादर क्यों ओढ़ रखा है तेरी तबियत तो ठीक है न…

कारन- हाँ नहीं वो थोड़ी ठण्ड लग रही थी इसलिए तो आज कॉलेज नहीं गया..

ये साडी बाटे करते करे कारन का ध्यान अलका के चुचिओ पेट है क्यूंकि टॉवल के छोटा होने से वो सिर्फ अपने निचे के हिस्से को hi छुपा पायी थी ऊपर से पूरी नंगी hi थी.. उसके गीले बूब्स और उसके पानी की बुँदे मोती जैसे चमक रहे थे…

अलका जब कारन के नजरो का पीछा करती है तो पति है की कारन उसके नंगे चुचिओ को देख रहा था…

अलका- (गऊसे me)aise क्या देख रहा है देख तेरे छोटे टॉवल के वजह से मैं ऊपर से नंगी हूँ..









अलका के मुँह से ऐसे खुले शब् सुन के कारन की नसे और ज्यादा टाइट होने लगती है…

कारन हिम्मत जुटते हुवे कहता है- वैसे मासी सच कहु तो आप इसमें और ज्यादा हॉट लग रही हो..

अलका उसकी बातो पे है देती है और कहत hai—hot??? हम्म्म्म मासी को हॉट बोलता hai..Chal उठ और मेरे कपडे दे

कारन- कपडे मैं खान से दू वो तो आपके ड्रावर में होगा न…

अलका- तू मेरे ब्रा और पंतय पे लेता हुआ है चल उठ और दे जल्दी मैं लेट हो रही हु….

अलका के मुँह से ब्रा पंतय मांगने का सुन के कारन का लुंड जो काफी देर से खड़ा था ो प्रेकम चोर्ने लगता है.. क्यूंकि अलका के पंतय को hi तो वो अपने लुंड पे रख के मुठी मार रहा था…

कारन चादर के अंदर नंगा था ये बात अलका जानती थी पर कारन नहीं जनता था की अलका उसके नंगेपन को देख चुकी है इसलिए वो कहता है

कारन- मासी आप कुछ और ले लो न क्या लेते हुवे को उठा रहे हो..

अलका- देता है की नहीं इतना कहते hi चादर को खींच लेती है और चादर को खींचने के लिए उसे जब झुकना पड़ता है तो उसके झुकने से उसका टॉवल जो पहले hi बड़े मुश्किल से उसके कमर को थामे हुवे था ो खुल के गिर जाता है और अलका एक बार फिर से कारन के सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी…

कुछ यही हाल इधर कारन का भी था चादर के खींचे जाने से वो बिलकुल नंगा अलका के सामने आ जाता है..

अलका- कारन तुम नंगे क्यों है??

कारन- सॉरी मसि आपको ऐसे देख के ये दर्द होने लगा था तो इसलिए पंत उतर दिया..

अलका- उफ्फ्फ ये तुम क्या बकवास कर रहे हो…?

कारन- (भी आज हिमत जूता के अलका का सामना करा रहा तह… ) वैसे मासी आप भी नंगी हो गयी हो…

कारन की बात सुन के जब अलका का ध्यान अपने पे जाता है तो वो सच में खुद को नंगी पाती है वो शर्म के मरे अपने दोनों हाथो से अपने छूट और बूब्स को छुपाने की कोशिश करती है..









पर उसके चूचिया इतनी बड़ी थी की उसे छुपाने में उसका हाथ छोटा पद जाता hai..fir वो जैसे hi गिरे तौलिये को उठा के खुद को ढकने की कोशिश करती है.. कारन उस से टोलिया चीन लेता है..

अलका- ये काया कर रहा ै काल वापस दे

कारन- देखने दो न मासी बहुत हॉट लग रही ho..Kamre में दोनों मासी और भांजा नंगे थे… कमरे का तापमान बढ़ने लगा था .. कारन एक कदम और आगे बढ़ने का सोचता है और अलका के बालो में हाथ डालते हुवे ऊपर को करता है और अपने होंठ अलका के होंठो पे रख के उसे किश करने लगता है…

अचानक हुवे इस हमले के लिए अलका तैयार न थी.. वो छूटने की बहुत कोशिश करती है पर कारन उसे नहीं चोरता और मजबूती से किश करते हुवे उसके हाथ को पकड़ के अपने लोडे पे रख देता है.. पहले एक दो बार तो अलका विरोध करती है लेकिन लगातार हो रहे किश से वो भी कारन का साथ देने लगती है और उसके लुंड को मुट्ठी में भर के मुठियाने लगती है..









अलका- कितना बड़ा है रे तेरा.. उफ्फ्फ और सख्त भी…. ऑफिस के लिए लेट न हो रही होती तो आज तेरा लुंड जरूर अपने छूट में लेती …

कारन- ऐसी बात है तो लुंड तू आज hi ले ले मासी प्यार तुझे किसी और दिन करूँगा ईटा कहते hi कारन अलका को दीवार के सहारे खड़ा कर के झुकता है और अपना लुंड एक झटके में अलका के छूट में उतर देता है…









अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh मर गयी.. ये क्या कर रहा है..

कारन- तुझे छोड़ रहा हु मेरी सेक्सी मसि बहुत दिनों से मेरी नज़र थी फाइनली आज तू आयी है हाथ में..

अलका- चोर दे मुझे देर हो रही है…

पर कारन उसे चूर्ण था बल्कि धक्के पे धक्का लगत है जिसके वजह से अलका भी मस्त होने लगती है और वो कारन का सपोर्ट अपना गांड उठा उठा के देने लगती है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah छोड़ bête बहुत सही जा रहा है और तेज़ धक्के मारर

कारन फिर अलका को गॉड में उठा के बीएड पे पटक देता है और उसकी टंगे उठा के उसे पुरे स्पीड में छोड़ने लगता है..









कारन- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मासी कितनी गरम छूट है तेरी तू तो मेरी माँ से भी गरम है…

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh तो कर दे ठंडा लगा झटक्कीी तेज़ तेज़ छोड़ अपनी मासी की…

कारन अभी अलका को छोड़ने में बिजी hi था की उसे एक जोर का झटका लगता है.. उसे झटका देने वाला कोई और नहीं बल्कि अलका थी….

अलका- खान खो गया कब से बोल रही हु पंतय दे मेरी मुझे लेट हो रहा है.. और तू है की हाथ में लिए बूट बन के खड़ा है गधा कही का …

तब कारन का ध्यान टूटता है तो उसे समझ आता है की वो हकीकत में नहीं ख्यालो में अलका को छोड़ रहा था…

कारन- सॉरी मस्सी

अलका- सॉरी के बचे पंतय दे जो हाथ में लिए खड़ा है… अब क्या पुरे दिन से hi कड़ी राहु..?

कारन का ध्यान जब खुद पे जाता है तो वो देहता है की उसके हाथ में अलका की गुलाबी पंतय थी जिसे अलका कब से मांग रही थी..









कारन अनायास hi अलका के पंतय को अपने नाक के पास ले के चला जाता है और सूंघने लगता है..

कारन सच में बहुत गरम हो गया था तभी तो वो नंगा था फिर भी बिना किसी दर के अलका के सामने hi उसकी पंतय सूंघ रहा तह

अलका कारन से इस हरकत से शॉक्ड हो जाती है.. उसे यक़ीन नहीं हॉट की उसके बहन का बीटा उसके आँखों के सामने उसकी पंतय सूंघ रहा है वो भी बिलकुल नंगा…. वैसे वो खुद बी तो नंगी hi थी… कारन के इस रवैये ने कहहि न कही अलका के अंदर के चिंगारी को भी भड़का दिया था.. अभी अगर कारन के जगह विशाल होता तो वो पक्का अपने टंगे खोल देती.. पर अभी उसका भांजा है उसके सामने वो ऐसा कैसे कर सकती है… वो क्या सोचेगा उसके बारे me..aur चाहे जॉब hi सोचे वो विशाल के अलावा अब और किसी के साणे टंगे नहीं खोलेगी…

अलका फिर से कारन बोल के चिल्लाती hai…tujhe हो क्या गया है… ये क्या करा रहा है tu..ye कहते हुवे उसके हाथो से अपनी पंतय ले लेती है…

और अपनी गांड कारन की तरफ करते हुवे पंतय पहनने लग जति है…









अलका की बड़ी और मोती गांड देख के कारन का हाथ अपने आप hi उसके लुंड पे चलने लगता hai..jiska एहसास पा के अलका के चेहरे पे गुस्सा आना चाइये था गुस्सा के बदले कामुक मुस्कान आ जाती है…

पंतय अलका की इतनी छोटी होती है की उसके चूतड़ों में hi खो जाती hai..jo सिर्फ उसके छेद को धक् पा रही थी… अब वो ब्रा पहनना सुरु की hi थी की तभी अलका को शरारत सूझती है वो कारन को थोड़ा और तैसे करने का सोचती है और एक डैम से पलट जाती है.. उसकी बड़ी बड़ी चूचिया विशाल के आँखों के सामने the…bra डिज़ाइनर थी जो पीछे से नहीं आगे से लगता tha..wo कारन से पूछती है..









अलका- ये सही रहेगा या कोई और कलर का पह्नु??

कारन को अलका से ये उम्मीद नहीं थी वो तो पहले से hi उसके हुश्न के जाल में फसा फड़फड़ा रहता फिर ये करने की क्या hi जरूरत थी अलका को…

कारन देखता है अलका की पिंक पंतय उसके छूट से बिलकुल चिपकी हुईथी इतना कैसा हुआथा की उसके जांघो के मांस को दबा रहा था.. उसके ऊपर अलका की छूट जैसे कोई फुला हुआ डबल रोटी हो..

अलका- निचे खान देख रहा है ऊपर dekh..(man में- बड़ा सुख है न मुझे नंगा देखने का अब देख बच्चू तुझे कैसे तड़पती हूँ..)

कारन फिर ऊपर देखता है तो पता है अलका अभी ब्रा के हुक नहीं लगायी थी बल्कि दोनों कप खोल के कारन को अपनी चुचिओ के दर्शन करवा रही thi…kaan का इस वक़्त वैसा hi हाल था जैसा रेगिस्तान में कोई प्यासा हो जिसके सामने पानी तो है प् वप ी नहीं सकता.

कारन- बहुत सही है मासी…









फिर अलका उसके ऊपर पिंक ब्लाउज पहनती है.. ये सब कारन वही नंगा खड़े हुवे देख रहा था..

अलका- ऐसे क्या देख रहा है.. मुझे तेरे इरादे नेक नहीं lagte…aur तू हर बार मेरे नहाने के वक़्त यह क्यों होता है??

कारन (तुझे छोड़ने के लिए)- मुझे कैसे पता होगा मासी आपके नाने का टाइम ये तो बस इत्तेफ़ाक़ है…

फिर अलका पिंक साड़ी पहनते हुवे उसके और इसरा करते हुवे कहती है..









अलका- और ये जोट ु मेरे सामने खड़े हो के कर रहा है…??? ये भी इत्तेफ़ाक़ है??

कारन अभी भी नंगा खड़ा था और खुद को छुपाने की जगह अपने हाथो से अपने लुंड को मसल रहा था…









कारन (सकपकाते हुवे)- सॉरी मासी

अलका- no no छॉंट…. ी कैन अंडरस्टैंड योर इत्तेफ़ाक़.. जा वाशरूम में और हल्का कर ले खुद को.. ये आज कल के बचे भी न पता नहीं इन्हे क्या हो गया है..

कारन जाने को होता hi है की अलका फिर से एक देव खेल देती है और कारन को टोकते हुवे बोलती है.. अरे इतनी भी क्या जल्दी है अभी मई चली जाऊ तो पूरा घर तुम्हारा hi है जो मन करे करना विशाल और उसके पापा कल आएंगे तो तू आराम कर जब तक मैं ओफ्फ्स से ना औ.. और मैं तो कहती हूँ यही रुक जा मैं सारिका को बता dungi…ab चल देख और बता कैसी लग रही हु मैं??







पल्लू को अभी भी अलका ने निचे hi फैला रखा था वो अपने छाती के उभर को पल्लू से ढकने के बजाय छाती फैला के कारन के अंदर जल रहे आग में पेट्रोल दाल ने का काम कर देती है..

कारन- बहुत हॉट एंड..

अलका- एंड?

कारन- एंड सेक्सी मासी..

अलका- मासी को सेक्सी और हॉट बोलता है नालायक… आज क्या खिलाया है तेरी माँ ने

कारन- काश आप मेरी मासी न होती..

अलका- ाचा तो फिर क्या करता अगर मासी न होती..

कारन- रहने दो मासी आप बुरा मान जाओगे..

अलका- ठीक है अभी के लिए रहने देते है वैसे भी मैं लेट हो रही हूँ शाम को मिलते है इतना कह के अलका ओफ्फ्स चली जाती है और कारन अलका के घर में अलका के याद में अपने लुंड पे उसकी पंतय लगा के अपना लुंड हिला रहा था….
 
Part-39



वैसे तो अलका ने कारन के द्वारा किये गए गरम माहौल को बड़े अचे से हैंडल किया था.. पर ऐसा बिलकुल भी नहीं था की अभी जो कुछ भी अलका के बैडरूम में हुआ उस से सिर्फ वही गरम हुआ था… अलका का भी हाल बहु बुरा हो चुक्का था ो बड़े मुश्किल से उसने खुद के अरमानो के लगाम को खींच रखा tha…warna अगर कारन थोड़ा सा और हिम्मत दिखते हुवे उसके अंगो से खिलवाड़ कर देता तो फिर अलका खुद को नहीं रोक पति.. और वो खुद अपनी टंगे अपने भांजे के लिए खोल देती.. पर खैर जैसे तैसे सिचुएशन को कण्ट्रोल करते हुवे अलका घर से ऑफिस के लिए निकल चुकी थी…

ऑफिस पहुंच के भी आज उसका मन काम में नहीं लग रहा था.. कारन ने जो कामज्वाला उसके अंदर भड़का दिया था उसका नतीजा ये था की उसके ज्वालामुखी (छूट) से लावा रिसने लगा था और लगातार राइज जा रहा था.. उसे जरुरत थी तो एक कैटेलिस्ट की जो उस ज्वालामुखी यानि छूट में विस्फोट करे और जो लावा अभी सिर्फ रिस रहा है वो फैट के बाह जाये…









काफी देर से गिला महसूस होने के बाद जब वो अपने छूट पे हाथ फेरती है तो उसका प्रेकम एक तार की तरह उसके छूट और ऊँगली के बिच बन जाता है…

अलका काम में खुद को बिजी कर लेती है जिस से की उसके दिमाग से कारन निकल jaye…parhar थोड़ी डॉ बाद उसके दिमाग में कारन दौड़ने लग जाता hai..kabhi उसके पंतय को अपने लुंड पे रगड़ते हुवे.. तो कभी उसके पंतय को सूंघते हुवे तो कभी उसके आँखों के सामने मुठ मरते हुवे..

अलका के जिस्म की गर्मी बढ़ने लगी थी उस से अब रहा नहीं जा रहा था ओफ्फ्स में चल रहे एक के बावजूद उसके माथे पे पसीना था..

अलका- उउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ कारन ये तूने क्या कर दिया.. एक तो मैं वैसे hi इनदिनों खुद पे कण्ट्रोल नहीं कर पा रही हूँ उसके बाद विशाल और अशोक भी नहीं है… हाय मैं क्या करू अब कैसे शांत करू खुद ko…uski छूट में तरंगे चलने लगती है जब उसके दिमाग में ये ख्याल आता है की आज अलका वही पंतय पहनी है जो थोड़ी देर पहले करण अपने लुंड पे मसल रहा था….

अलका- मेरे सामने hi मेरे पंतय को अपने लुंड पे मसल रहा था मेरे पीछे जाने क्या क्या कर रहा होगा मेरे चीजों के साथ… ये लड़का कितना निडर हो गया है उसे मुझसे जरा भी दर नहीं लगा.. कही वो मुझे छोड़ना तो नहीं चाहता..? तो इसलिए वो पिछले कुछ दिनों से आ रहा है खास कर जब उसने लास्ट टाइम मुझे टॉवल में देखा था… ooghhhhhhhhhh गॉडडडडड

अलका से जब और कण्ट्रोल नहीं हुआ तो वो उठ के रेस्टरूम में चली जाती है और आज वो कारन के नाम की अपनी छूट में ऊँगली करने पे मजबूर हो जाती है…









छूट में ऊँगली घुसते hi उसके छूट से पेशाब की धार फुट पड़ती है.. और वो ऊँगली कर कर के mut-ti चली जाती hai…par ये अलका के संशय का समाधान नहीं था.. अब उसे कोई शांत कर सकता था तो केवल एक मोटा तगड़ा lund…aur उसे अपने लुंड से शांत करने वाला आज उसके पास नहीं tha..akhir अलका खुद को साफ़ करती है और वाशरूम से निकल के अपना बैग उठती है और घर को निकल पड़ती है..

आज उसका घर से बहार ज्यादा देर रहना उसके लिए थी नहीं था… वो जल्दी से घर पहुंचना चाहती थी और देखना चाहती थी की उसका बीटा (भांजा) उसके गैरमौजूदगी मेक्या कर रहा है..

अलका थोड़ी देर में घर पहुंच जाती है.. घर पहुंचते hi अपने बैडरूम का हाल देख के उसका सर चक्र जाता है…









वो जैसे hi अपनी गीली हो चुकी पंतय को बदलने के लिए दूसरे पंतय ढूढंती है तो देखती है उसका कोई भी पंतय उसके वार्डरॉब में नहीं hai..ek तो वो बहुत ज्यादा छुडासी हुई थी ऊपर से ये सब देखते hi उसे आहूत तेज़ गुस्सा आता hai..wo गुस्से में hi कारन के रूम में जाती है और दूर खोलती है तो सामने का नज़ारा बड़ा मादक था…









वो पति है की उसकी साडी पैंतीस लाल काली पर्पल सब को कारन उठा के ले आया था और सब को अपने जांघो पे और लुंड पे रख के अपने लुंड को मसल रहा था.. कमरे में एक अजीब सी भीं भीनी खुशबु थी जैसे अभी अभी hi किसी ने अपना माल बहाया हो…

अलका गुस्से में कारन को डांटते हुवे कहती है- कारन ये क्या है तुमने मेरा वार्डरॉब क्यों खोला.. पुरे कपडे बहार फैला दिए और मेरी साडी पैंतीस अभी मैं क्या पह्नु???…… तुम पागल हॉग ए हो चाहते क्या हो??? मैं सारिका को बताऊ तुम्हारी ये हरकत???

पर कारन को सारिका का खान कोई डार्ट ha....use दर था तो बस अपने मासी का बूत उसके साइड से सिर्फ हलकी फुल्की दन्त से कारन डरा नहीं बल्कि उसकी हिम्मत और बढ़ गयी.. उसे पता था की अगर अलका को कुछ करना होता तो वो सुबह hi कर चुकी होती बूत कुछ करने की जगह वो उसे अपना मादक शरर दिखा रही hti….aur अगर अलका को पाना है तो हिम्मत तो दिखानी hi होगी वैसे भी आज उसके पास बहुत ाचा मौका था अगर आज भी वो कुछ न कर पाया तो फिर जाने ये मौका कब उसके हाथ लगे

कारन- मासी आप इतनी जल्दी आ गए… बेचारे के मुँह से इतना निकला hi था की उसके लुंड से एक तेज़ पिचकारी निकलती है जो सिद्ध अलका के चेहरे पे पड़ती है…









अलका की नज़र जब विशाल पे पड़ती है तो गौर करने पिउ ो देखती है की विशाल उसी का hi एक पंतय पहने हुवे लुंड हिला रहा था.. और इस बात के लिए वो जैसे hi डांटने के लिए आगे बढ़ती है विशाल के लुंड से निकली पिचकारी सीधे अलका के चेहरे पे जा टकराता है…

अपने चेहरे पे विसाहल का गरम गरम पानी का एहसास पा के अलका का तो जैसे पूरा बदन सिहर जाता hai…wo पहले hi बहुत मुश्किल से अपने आप को काबू कर पा रही थी…

अलका- कारन हैवे यू लॉस्ट योर मंद

कारन- मासी पता नहीं मुझे सुबह से क्या हो गया है ये बैठ hi नहीं रहा है..

अलका कारन के मासूम फेस की आगे कुछ नहीं बोल पति और उसे साफ़ करने का कह के अपने रूम में चली gayi…sharir की गर्मी उस से बर्दाश्त हो नहीं रही थी वो विशाल को कॉल लगा देती है..

विशाल और अलका के बिच कामुक बाटे होने लगती है अलका जो पहले से छुडासी हो रही थी वो विशाल ालको को वीडियो कॉल कर देता है और उसके चूचियों से बानी घटिया उसे दिखने को कहता है… जिसे अलका दिखाना तो छह रही थी पर कारन के होने के वजह से वो नहीं दिखा पा रही थी.. लेकिन हालेशा की तरह विशाल ज़िद्द करने लगता है… और अलका उसके आगे हार hi जाती है..

अलका-








विशाल- की मम्मी धक् के दिखा रही हो पूरा दिखा न..

अलका- दिखती हु सब्र तो कर्त ेरे में सब्र hi नहीं hai…le देख









विशाल अलका को नंगा देख के मुठ मरने लगता है और अलका भी ऊँगली करने लगती है

अलका- विशाल बहुत मिस कर रहे हु तुझे

विशाल- क्यों जब सामने होता हु तब तो चोर दे करती रहती है अभी छूट में आग लगी है तो मुझे मिस करने लगी साली कुटिया चिनार

Alka-jo मर्जी बोल ले और हाँ लगी है आग मेरे छूट में ये देख..









इतना कह के अलका अपनी छूट कैमरा के सामने ले आती है और उस से निकल रहे पानी को ऊँगली से निकल के चाटने लगती है..

दोनों माँ bête की बाटे काफी इरोटिक हो रही थी की और अलका झड़ने के करीब आ गयी थी की तभी विशाल को कॉल कट कर के जाना पड़ता है… और अलका फिर से बिना झड़े और छुडासी हो जाती है…

वो वार्डरॉब से एक डाउन निकलती है और ब्रा पंतय न होने के वजह सिर्फ गाउन की क्नॉट बांध के कारन को बुलाने चल पड़ती है.. अलका गाउन के अंदर बिलकुल hi नंगी थी.. क्नॉट के खुलते hi उसके कामुक अंगो का दीदार हो जाना था…

कारन के न आने पिउ ो वापस उसे बुलाने जाती है…









वो देखती है कारन अभी भी अपना लुंड एक वीडियो देख के हिला रहा था अलका को नहीं पता था की ये वीडियो उसी का है…

अलका- आज तू यही करने आया है क्या इधर? कब से लगा हुआ है.. चल मेरे रूम में जो तूने सब फैलाया है उसे समेटने में मेरी मदद कर..

कारन- पर मासी मैं पेंट नहीं पहन पा रहा hu…ye बहुत टाइट लग रहा है..

अलका बड़े कामुक अंदाज़ से उसके लुंड को देखते हुवे उसे वैसे hi आने का कहती है









अलका- वैसे hi आजा … कुछ छुपाने लायक तेरा बचा भी नहीं…

गाउन इतना छोटा था की अलका की गांड कारन साफ़ साफ़ देख पा रहा tha…karan की तो मनो जान hi निकल जाती hai…wo तुरंत अलका के पीछे पीछे चल पड़ता है…

अलका- ये या ऐसे hi खड़ा रहेगा??

कारन- मासी मैं क्या करू मुझे क्या हो गया है मैं खुद समझ नहीं पा रहा हूँ प्लस आप कुछ करो न…

अलका- मैं क्या कर सकती हूँ इसमें?

Karan-pta नहीं बूत ी ऍम जस्ट सीकिंग फॉर हेल्प..

अलका को कारन के इस मासूमियत पे दया आ जाती है.. फिर वो दोनों मिल के कमरे को साफ़ करने लग जाते hai..tbhi करना को एक शरत सूझती है.. वो अलका से बातो hi बातो में उसके गाउन का क्नॉट खोल देता है जिसका पता अलका को भी लग पता है… और ये काम कारन 2-3 बार करता है अलका जब भी क्नॉट बांधती वो खोल देता है..

कारन- मासी इसे उतर hi दो न फिर काम हो जाये तब पहन लेना..

अलका- तू पागल है तेरे सामने ऐसे कैसे?

कारन- अरे मैं भी तो हूँ आपके सामने और वैसे भी इसके खुलने से सब तो दिख hi जा रहा है फिर क्या सोच रहे हो…

अलका- तेरी बात और है टब बचा है…

अलका अपने लुंड को दिखते हुवे कहता है इसे देख के आप को लगता है मैं बचा हूँ….









कारन के लुंड को देखते hi अलका के बदन की आग एक बार फिर से फड़फड़ने लगती है… देखना ये है की आखिर अलका कब ताका ने सब्र के बांध को रोक पति है…

अलका- जो भी है चल जल्दी हाथ बता काम ख़तम करते है रात होने को है…

कारन एक आखरी कोशिस करने की सोच क्र क्नॉट फिर से खींच देता hai..alka फिर से गाउन को सँभालने ले लग जाती है

कारन- मैंने खान ा इसेउतार दो वर्ण इसे सँभालने के चक्कर में हम रात भर यही करते रहेंगे…

अलका- तू सही कहता है लेकिन रुक एक mint…aur वो वार्डरॉब से स्टॉकिंग निकल के ले आती hai.aur गाउन उतर क ीक बार फिर से कारन की आगे नंगी हो जाती hai..aur कारन अपना लुंड मसलते हुवे अपने मासी की जवानी को अपने आँखों से पी रहा था..

अलका अब कारन के सामने बिलकुल नंगी थी वो जल्दी से लिंगरी को पहनने लगती है..







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अलका कारन के बिलकुल सामने बेथ के वो पारदर्शी लिंगरी पहन रही होती है जिसके पहनने और न पहनने से कोई अंतर नहीं पड़ने वाला था…. कारन अलका के आँखों झाकते हुवे लुंड हिला रहा था…

अलका की भी बेचैनी अभी बढ़ने लगी थी.. उसकी सांसे अब पहले से भरी होने लगती है.. आँखों में वासना साफ़ देखा जा सकता था.. उसका सब्र किसी भी वक़्त जवाब दे सकता था.. बस कारन को थोड़ी और हिम्मत दिखानी थी. अलका अब कारन के बगल में बैठ के लिंगरी को ठीक करने लगती है

कमरे में वार्म लाइट और सके ऊपर काळा कलर के मैचिंग लिंगरी में अलका का गोरा बदन पहले से ज्यादा कामुक लगने लगा tha..ye अलका ने अपने बदन को ढकने के लिए तो नहीं पहना था क्यूंकि इसमें ढकने जैसा कुछ भी नहीं था उल्टा ये कारन पे और ज्यादा वार कर रहा था जिसका असर होता भी hai…karan बैठे जो अपना लुंड मसल रहा था उसे से बर्दाश्त नहीं होता और वो अपने हाथो से अलका के चूतड़ों को मसल देता है…







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अलका का पूरा बदन एक बार फिर से सिहर जाता है फिर भी वो ऊपरी मन से कहती है..

अलका- ये क्या हरकत है कारन..?

कारन- सॉरी मसि आप इस ड्रेस में इतना सेक्सी दिख रहे हो की कण्ट्रोल नहीं हुआ

अलका- फिर से सेक्सी?? और कण्ट्रोल नहीं हुआ का क्या मतलब..? चलो अब काम करते hai(control तो मेरे से भी नहीं हो रहा है bête क्या करू…? काश तू मेरे बहन का बीटा न होता)

इतना कह के अलका जैसे hi उठती है कारन अलका का हाथ पकड़ लेता है और खींचता है जिस से अलका सिद्ध कारन के गॉड में जा गिरती hai…alka की पंतय इतनी परली थी जो उसके चूतड़ों के दरार में कही खो गयी थी यानि उसका गांड पूरा नंगा hi था अउ रेज में कारन के गॉड में गिरने से (कारन जो की पहले से hi नंगा अपने खड़े लुंड को मसल रहा था) कारन का तना हुआ लुंड उसके चूतड़ों में अपनी जगह बनता हुआ अलका कैग एंड में बिच समां जाता है… अलका की छूट जो पहले hi काफी टाइम से रिस रही थी इस तरह कारन के लुंड के ठोकर पड़ने से अलका के मुँह से सीकरी फुट पड़ती है….

अलका- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh karan(bahut धीमी आवाज़ में) क्या कर रहा है मत कर…

कारन- अब बर्दाश्त नहीं होता मासी प्लस कुछ करो वर्ण मेरा ये लुंड फैट जायेगा??

अलका जो अब छुडवासी हो चुकी थी वो बड़े भरी मन से कहती है जा क ीक बार फिर से हल्का हो ले

कारन- किया है न मासी फिर भी नहीं होता आप इसका पानी निकल दो एक बार (कारन पूरी हिम्मत जता क ीक साँस ने अलका के चुचिओ को दबाते हुवे बोल देता है.)

अलका का भी मन ए.बी.ए. आगे बढ़ने का होने लगा था पर बहन का बीटा है इस सोच से वो आगे बढ़ नहीं पा रही थी… कही किसी को पता चल गया तो क्या होगा… पर ये सब सोचते हुवे भी वो कारन के गॉड से उठी नहीं थी बलकि बैठी हुई thi..jo कारन के लिए एक हरी झंडी थी और उसका फायदा उठाते हुवे कारन ने अपने होंठ अलका के गार्डन पे रख देता है.. और अपनी गरम गरम साणे अलका के गार्डन पे चोर्ने लगता है…. अलका को एक पल के लिए कुछ समझ नहीं आता की कारन ने इतनी हिमत कैसे दिखा दी और वोन ा तो उसके किश का जवाब दे रही थीं ा उसके ऊपर से उठने की कोशिश किया था उसने…

अलका के तरफ से कोई रिएक्शन न पा के कारन अलका को पागलो की तरह चुम्मन और चाटने लगता है साथ अपना लुंड अलका के छूट वाले हिस्से पे रगड़ने लग जाता है.. इतने सरे हो रहे प्रहार से अलका के सब्र का बांध भी आखिर टूट hi जाता है और वो भी निचे से अपनी गांड कारन के लुंड पे हिला के उसके किश का जवाब देने लगती है..







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अलका पुरे गति से अपनी गांड कारन के लुंड पे रगड़ रही होती है और कारन भी अलका को चूमे जा रहा था.. जोश जोश में आके कारन अलका के ब्रा को खोल देता hai…bra के खुलते और चुचिओ के आज़ाद होते hi अलका का जैसे ध्यान टूट जाता है और वो खुद को कारन के गॉड में अधनंगी अपनी गांड रगड़ते हुवे पा के बहुत शर्मिंदा होती है.. वो कारन से नजरे मिलाये बिना उसके गॉड से उठ के जाने लगती है..

अलका अपने मन में (ये क्या कर दिया मैंने मैं कारन के साथ ऐसा कैसे कर सकती हूँ.. मैं कैसे बहक गयी वो बसहा है मैं तो नहीं हुन्न) अलका की छूट (अब इतना कर hi लिया है तो बाकि जो बचा है पूरा कर ले उसे जो सोचना है वो इतने में भी सोच लेगा.)

अलका अपने इसी कश्मकश में कड़ी थी उसकी गांड कारन के तरफ थी कारन जिसका अब रुकना मुश्किल लग रहा था ो एक बार फिर से अलका के हाथ पकड़ के अलका से बड़े प्यार से रेक करता है..

कारन- मासी प्लस इतना कर दिया है थोड़ा और कर दो निकल जायेगा तो मैं भी चैन से सो पाउँगा..

अलका कारन के बातो से मनो पिघलने लगती है वासना के साथ उसके अंदर ममता और डे अक भाव भी आ जाता है… वोट क बार कारन के तरफ देखती है और धीमे से कहती है

अलका- ये गलत है bête

कारन- मासी प्लस..

आखिर इसे अलका की ममता कहो या उसके अंदर की वासना जिसे वो सुबह से hi दबा रही थी वो हार जाती है और वो बिना कुछ बोले कारन के गॉड में बेथ जाती है…









अलका के कारन के गॉड में या यूँ कहो लुंड पे बैठते hi कारन के मुँह से एक आह निकल जाती hai…karan भी उसके दोनों जांघो में हाथ दाल के उसे अपने से बिलकुल चिपका के बिठा लेता है..

कारन- aaaaaaaaaahhhhhh मासी

अलका भी अपनी गांड को दये बाये हिलाते हुवे उसके लुंड को अपने दोनों कूल्हों के बिच एडजस्ट करने लग जाती है और अपना गांड हिला हिला के उसके लुंड को महसूस करने लगती hai..ek तो अलका की पंतय वैसे hi बहुत छोटी और पतली थी जो मुश्किल से hi उसके छूट को छुपा पा रही थी फिर भी उस औरत के अंदर इतनी आग लगी थी की वो अपने पंतय को और ऊपर खींच लेती है जिस से उसके छूट के दोनों फांक पंतय के बहार निकल जाता है और उसपे कारन का टाइट लुंड अपना स्पर्श देने लगता है….

अलका किसी प्रोफेस्टिवल स्ट्रिपर की तरह कारन के गॉड में अपनी गांड हिला के उसे मजे दे रही थी..









कारन का मजा इस वक़्त आसमान चुने लगता है…

कारन- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh mmmmaaaaaasssshhhiiiiiiiiii

कारन कैग गॉड में गांड हिलने से अलका जब जब थोड़ा भी निचे जाती थी कारन अलका के दोनों जांघो को पकड़ के अपने और ऊपर खिसका लेता है और अपने दोनों हाथ आगे कर के उसके सूचियों को पकड़ लेता hai.aur धीरे से उसे दबाने लग जाता है

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh कारन ये तू मुझसे क्या करवा रहा है bête किसी को पता लग गया तो कही मुँह दिखने लायक नहीं रहूंगी…

कारन- किसी को पता नहीं चलेगा मसि आप डरो नहीं….

लुंड के लगातार पद रहे ठोकरों से अलका बेकाबू होते हुवे कारन के पूरा ऊपर लेट जाती है उसका नंगा पीठ कारन के छाती पे था









कारन भी अब समझ गया था की बजी उसने मार ली है अलका को उसने काबू में कर लिया है. अलका के उसके ऊपर लेटते hi वो अलका के गार्डन को उसके कल्लोर नैक को तो कभी उसके आर्मपिट पे अपने जीभ और होंठो को फेरते हुवे गिला करने लगता है और उसपे पड़ती उसकी गरम सांसे अलका को थान और गर्मी का एहसास एक साथ करवा रही थी..

कारन- मासी मैं नंगा हु और आप कपडे में ये तो ठीक बात नहीं है.. प्लस उतर दो न क्या पता आपको नंगी देख के जल्दी हो जाये…

अलका जो खुद भी नंगी होना छह रही थी फिर भी ऊपरी मन से ये जताते हुवे की वो ये सब कारन के लिए कर रही है खुद के लिए नहीं मन कर देती है

पर कारन को पता था ये नान ा कर के फिर मान hi जाएगी इसलिए वो थोड़ा हिमत कर के ब्रा को उसके कंधे से खिसका देता है और उसके चुचिओ को आज़ाद कर देता है…

कारन – uuuuuuuuffffffffff मासी कितनी मस्त चूचिया है तुम्हारी….

अलका- uuuufffffffffffffff कारन ये तू कैसी बाटे कर रहा है..

Karan-Sach कह रहा हु और तुम कितना भी मन करो निचे तुम्हारी छूट बह बह के मेरे जांघो को जो गिला कर रही है उस से साफ पता लग रहा है की तुम भी वही चाहती हो जो मैं…

अलका- ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह कारन ये तुम क्या बकवास कर रहे हो….? और क्या चाहते हो तुम??

कारन- प्लस मासी उतर दो न..?

अलका- क्यों अब क्या देखना रह गया है सब कुछ तो देख लिया.. और अपने मन की कर भी रहा है..

कारन- अभी खान देखा है मासी और किया तो कुछ भी नहीं अभी तक…

अलका- ाचा फिर बताना क्या देखना hai…jab तक नहीं बताएगा तब तक तो नहु उतरूंगी…

Karan-fir आप गुस्सा नाह ो जाना..

अलका- अभी तक नहीं हुई तो अब क्या होउंगी.. बोल जोट ेरे मन में hai..vasna में बह के अलका भी अब अपने रंग में आने लगी थी और वासना में लिप्त हो के क्या बिना परिणाम के परवाह किये कुछ भी बोले जा रही थी..

कारन गहरी साँस लेता है और तेज धड़कनो पे काबू पते हुवे कहता है- तुम्हारी ये बड़ी सिग एंड और ये मखमली छूट..

कारन की बात सुनते hi अलका को एक बार सर से झुरझुरी समां गयी.. वैसे तो उसे पता hi था पंतय खोल के क्या देखना छह रहा था पर bête सामान कारन के मुँह से सुन के उसके अंदर एक अलग hi कामाग्नि भड़क रही थी तू मेरी गांड देखना चाहता है..??? ये कहते हुवे उसकी दिल की धड़कने बहार तक सुनाई दे इतनी जोर से धड़कने लगती है…

ठीक है ले टब hi क्या याद रखेगा इतना कहते hi अलका सामने के सोफे पे पीठ के बल लेट जाती है और अपनी दोनों टंगे उठा के कारन को अपनी फुल्ली हुई छूट और गांड दिखते हुवे अपने पंतय को उतरना शुरू कर देती है…









पंतय के उतर जाने से उसके छूट के पानी से सराबोर उसकी छूट चमकने लगती hai…wo पंतय को चाहती तो जमीन पे भी रख सकती थी पर उसे जाने क्या सूझता है की वो अपने छूट के पानी से सराबोर और गीली हो चुकी पंतय को कारन के चेहरे पे फ़ेंक देती है..

कारन उसकी पंतय को कैच कर लेता है और पहले सूंघते हुवे और फिर छूट के भाग पे लगे पानी को चाटने लग जाता hai…karane के इस हरकत से अलका और ज्यादा बहकने लगती है..

ब्रा जिसे कारन ने बहुत पहले hi उतर दिया था और बचे हुवे पंतय को अभी अलका खुद के अपने हाथो से उतर देने के बाद वो बिलकुल नंगी हो जाती है… अउ रेज hi नंगी कारन की तरफ आते हुवे दुबारा से उसके गॉड में बेथ जाती है…









और एक बार फिर से अपनी गांड उसके गॉड में उसके लुंड पे रगड़ने लगती है…

कारन- oooooohhhhhhhhhhhhhhh मासी कितनी हॉट हो आप

अलका कारन के बातो का अब भी कोई जवाब नहीं दे रही थी – aaaaaaaaaaahhhhhhhhh

अगले hi पल कारन अलका के जांघो में हाथ डालते हुवे उसे उठा के अपनी और घुमा लेता है…









और अब अलका का मुँह कारन की तरफ था कारन उसकी बड़ी सिग एंड पकड़ के अपनी और हिचता और फिर उसके होंठो पे अपने होंठ रख के चूमने लग जाता है… अलका की सांसे भी अब गरम होने लगी थी.. वो कारन के बहकावे में आ के उसके बहो में नंगी तो हो गयी थी पर अभी भी वो उस तरह खुल नहीं पा रही थी जैसे विशाल के sath…kamre का तापमान दोनों के वासना और गरम सांसो से काफी ज्यादा बढ़ गया था.. अलका क अगोरा बदन अब लाल पड़ने लगता है… कारन के लगातार कर रहे चुम्बन का असर लास्ट में अलका के बांध को तोड़ने का काम करता है..

अलका भी अब अपने आप को रोक नहीं पति और कारन को धक्का दे के उसके ऊपर लेट जाती है…









अब अलका कारन के किश का पूरा पूरा जवाब दे रही थी जोश में आके कारन भी अलका के चूतड़ों को मॉल मॉल के लाल कर चुक्का था..

कारन अलका के चूतड़ों को मसलने के साथ साथ वो उसके अंदर हाथ दाल के उसके तंग भूरी छेद को भी कुरेद देता है तो कभी उसके छूट में ऊँगली दाल देता hai…jiska अलका कोई विरोध नहीं कर रही थी..

दोनों ने सोफे को hi बिस्तर बना दिया था.. और एक दूसरे के अंगो के साथ पुरे जोश में खेल रहे थे…









एक दूसरे में मनो घुस जायेंगे कुछ ऐसे जकड़े हुवे थे…

कारन- oooooooooohhhhhhhhhhh maaaassssssssiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii कितनी गरम हो आपपपपपपपपप

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh फ़क और जाने अलका को क्या होता है वोट क डैम से उठ जाती है और कहती है ऐसे नहीं हो पायेगा ला मैं तेरा हाथ से निकल दू…

कारन जो की अलका को आज छोड़ने के मूड में था अचानक इस रवैये से निराश सा हो जाता है लेकि हाथ से कर दू का मतलब उम्मीद अभी भी बाकि thi….wo कहता है

कारन- क्या हुआ मासी कितना मजा तो आ रहा था..

अलका- मैं तुझे मजा नहीं रिलीफ देने के लिए ये कर रही हूँ पर ऐसे में तू बहुत टाइम लगा रहा है इसलिए अब तू लेट जा मैं हाथ से कर देती हु

अब कारन भी सिद्ध लेट जाता है जिस से उसका लुंड आसमान को सलामी देता हुआ अलका के सामने आ जाता है..

अलका कारन के मोठे तगड़े लुंड को अपने नाजुक हाथो के मुठी में भर लेती है…









कारन का लुंड इतना टाइट हो गया था की उसकी नसे चमकने लगी थी मनो वो पत्थर बन गया हो.. तना सख्त लुंड देख के अलका के छूट और मुँह दोनों में पानी आ गया था पर वो खुद पे काबू करते हुवे सिर्फ हाथ से हिलने का सोचती है.. और कारन के लुंड हाथो में ले के मुठियाने लगती है..

लुंड को हिलाते हिलाते काफी टाइम हो जाता है पर उसका पानी नहीं निकलता..

अलका- उउउउउफफ्फ्फ कितना टाइम लगता है तेरा मेरे हाथ में दर्द होने लगा है…

कारन- मासी मुँह में ले लो न प्लस

अलका- तू पागल है क्यात ु अपनी मसि के मुँह में ुण्ड डालना चाहता है…

अलका के मुँह से लुंड सुन के कारन का लुंड हिचकोले खान ेलगता है जिसे अलका नोटिस कर लेती है और वो समझ जाती है की गांड बाटे कर के इसे निकला जा सकता hai…aur यही सोच के वो कारन से उसके मन की साडी बाटे निकलवाने लगती है और करना भी हवस में बाह के सब बोलता जाता है…

कारन अपनी बातो को बोलने के साथ साथ अलका के जांघ और उसके आगे और पीछे वाले हिस्सों को भी मसल रहा था वो छूट को जब भी हाथ लगता अलका हटा देती थी ये कह के की यहां नहीं बाकि जहां हाथ लगाना है लगा ले नहीं रोकूंगी ….कारन इस उम्मीद से अलका के बदन को छेद रहा था की सायद अलका का फिर से मन बन जाये बन जाये पर अलका का मन बनने से पहले कारन के लुंड









देखते hi देखते अलका की ये योजना काम कर जाती है और कारन का लुंड अपना पानी चोर्ने लगता है…

कारन झड़ते हुवे जोर से अलका के छूट को मसल देता है… और चिल्लाते हुवे झाड़ता hai…uske लुंड की पिचकारी एक बार एक बार फिर अलका के चेहरे को अपने सगड़ पानी से भर देती है…

कारन- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मायआ मैं गया..

कारन का लुंड आज पहले से ज्यादा पानी निकला था सायद अलका के हाथो का जादू था..

अलका- जा अब साफ़ कर ले हो गया न tera…pura गांड कर दिया मुझे… अब फिर से नहाना पड़ेगा..

कारन भी शरमाते हुवे वाशरूम की और जाने लगता है…

कारन के जाते hi अलका के अंदर की रंडी बहार निकल आती है वो अपने चेहरे पे लगे कारन के पानी को पॉच के पिने लगती है..









अलका- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh कितना गरम है इसका पानी और स्वादिष्ट भी.. आखिर है तो मेरे hi बहन का बबीता …. काश मैं इसका लुंड ले पति मेरे छूट तो कब से कार टपका रही है इसके लुंड के लिए बस ये रिश्ता बिच में आ जार अहा है.. यही सब बडबडते हुवे अलका सारा पानी पि जाती है…

उधर कारन के लोड को संतुष्टि मिल चुकी थी बेशक वो अलका को छोड़ नहीं पाया लेकिन उसने एक दीवार तो तोड़ hi दिया और बाकि जो कुछ बचा है वो भी किसी न किसी दिन वासना के तूफान में बह jayega..akhir दोनों के रिश्ते की एक नयी सुरुवात हो चुकी है अब देखना ये है की ये रिश्ता कब करवट बदलती है…

 
Part-40

कारन को शांत करते करते अलका खुद गरम हो जाती है.. उसका आज छोड़ने का बहुत मन था पर उसका पति और बीटा दोनों घर पे नहीं थे.. वो ये सोच के विशाल को फोन मिलती है की सायद वो फ्री हो गया हो पर विशाल अभी भी बिजी था… निराश हो के वो फोन साइड रखने जाती है की फिर वो व्हट्सप्प खोल लेती है जहां कई सरे उंडेड मेस्सगेस थे उनमे से एक नाम अमन का भी था..

वो अमन के चैटबॉक्स खोलती है और उसके भेजे मश्ग पढ़ने लग अति है.. मश्ग के नाम पे बस डबल मीनिंग जोक्स मिलने की रेक और कुछ सॉफ्ट पोर्न थे इरोटिक वीडियो टाइप..

घर पे रहती तो कारन उसे अपने जाल में फिर से फ़साने की कोशिश करेगा और वो बार बार खुद को रोक नहीं पायेगी ये सोच के वो अमन से मिलने जाने का सोचती है.. सायद बहार निकलने से उसे थोड़ा हल्का फील हो.. अलका अमन के भेजे इरोटिक मंस का रिप्लाई अपनी सेल्ही भेज के करती hai..chudasi तो वो पहले से hi हो राखी थी






अलका- असली चीजों पे ध्यान डोज तो ये नकली चीजों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा…

अमन का जवाब तुरंत आजाता है…

अमन- तुम दिखती नहीं हर बार भाग जाती हो आधे में…

अलका- खान हो?

अमन- क्लब में हूँ… क्यों कोई काम था

अलका – नहीं बस सोचा था तुम्हारी ये शिकायत दूर कर दू पर तुम तो बिजी हो…

अमन- अरे नहीं नहीं तुम आओ मैं काउंटर जल्दी बंद कर दूंगा…

अलका- ः बड़े उतावले हो रहे हो…

अमन- तुम जैसी हसीं के लिए कोण उतावला नहीं hoga…ek तो तुम जब भी पास होती हो कुछ न कुछ गड़बड़ हो जाता है और हम अधूरे रह जाते है

अलका- ok फिर देखते है आज तुम्हारी किस्मत क्या रंग लाती hai…ye कह के वो फोन रख देती है और अपने नाजायज़ डेट के लिए तैयार होने चली जाती है….

तैयार हो के अलका बहार आती है तो कारन टीवी देख रहा था ो जाते जाते कारन से कहती है..

अलका- बीटा मुझे कुछ काम से जाना पद रहा है तुम खाना खा के आज यही सो जाना

अलका को देख कारन का लुंड फिर से अंगड़ाई लेने लगता है..

कारन- खान जा रही हो मासी?? मैं भी चालू क्या???

Karan-Nahi bête तू आराम कर तेरी तबियत वैसे भी थी नहीं और ऐन ओफ्फ्स के काम से जा रही हूँ एक मीटिंग है ुए फिनिश कर के जल्दी आ जाउंगी तू चलेगा तो बेकार में बोर हो जायेगा.. और कारन के जवाब सुने बिना वो निकल जाती hai….aman का बार उसके घर से कोई आधे घंटे का रास्ता था पर ट्रैफिक होने के वजह से उसे पहुंचने में पूरा घंटा लग जाता है… बार बंद हो चूका था अंदर बस अमन अलका वेट करते हुवे छोटे मोठे काम निपटा रहा tha…tabhi उसके कानो में एक मधुर आवाज़ जाती है…

अपना बार बंद नहीं करोगे तो ये बार कैसे खोलोगे…..???






अलका आज पुरे मूड में थे वो यहां अमन से चुद के अपनी आग शांत करवाने hi तो आयी थी इस लिए आते hi हमला करना शुरू कर दिया…

अमन जैसे hi आवाज़ का पीछा करते हुवे उस और देखता है तो बस देखता hi रह जाता है.

अलका एक ब्लू डेनिम और वाइट ट्रांसपेरेंट शर्ट में थी.. शर्ट इतना ट्रांसपेरेंट था की अंदर की उसकी नीली ब्रा साफ़ दिख रही thi…aman भी अलका के हमले का जवाब हमले से देता है..

अमन- अपना बार तो बंद कर दिया मैंने कब का बंद कर दिया आपके बार खुलने के चक्क्र में..

अलका- ये लो फिर खोल देते है तुम्हारे लिए तुम्हारा बार






इतना कहते hi अलका ने एक झटके में अपने शर्ट के बटन एक साथ खोल के पनि नीली ब्रा और उसमे क्वैड चूचिया अमन को द्ख के ललचाने लगती है…

Aman-ye तो अभी भी बंद hi है या फिर आधा खुला है.. इतने में खान प्यास बुझेगी…

अमन की बात सुन के अलका अपने जेन्स को भी उतर देती है और काउंटर पे घोड़ी बन की मन को अपने मादक जिस्म को दिखते हुवे आकर्षित करने लगती है..






अलका- ये लो पूरा खोल दिया तुम भी क्या याद रखोगे..

अमन- नाह खोला तो अभी भी आधा hi है..

अमन के इस चालाकी पे अलका मुस्कुराने लगती है.. वो कैसे बिना हाथ लगाए hi अलका को आधा तो नंगा कर hi दिया था बस उसके शरीर पे उसकी नीली ब्रा पंतय पड़ी थी जिसे पहन के वो काउंटर पे घोड़ी बानी हुई अपने आशिक़ का इंतजार कर रही थी..

अलका- ाचा जी तो ruko..fir अभी दिखती हु असली मजा






इस बार अलका अपनी बरपांती भी उतर के कही कोने में फ़ेंक देती है और बार कौंते पी मन की तरफ अपनी गांड कर के घोड़ी बन जाती है और एक हाथ से अपने छूट खोलते हुवे कहती है…

अलका- इतना hi खुल सकता है बस इस से आगे तुम्हे खुद खोलना पड़ेगा..

अला के तरफ से हो रह ीक के बाद एक हमले से अमन बिलकुल उतावला हो जाता है वो अलका के तरफ तेज़ कदमो से भागते हुवे जाता है..






और पागलो की तरह उसके होंठो को चूसने लगता hai..jisme अलका भी उसका पूरा साथ दे रही थी और दे भी क्यों न कारन से सुबह से उसका हाल hi कुछ ऐसा बना दिया था की आज उसे खुद अमन के लुंड क लिए आना पड़ा..

अलका- aaaaaahhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuummmmmmmmmmmmm

अमन- बहुत मुश्किल से हाथ आयी हो आज पूरी रात नहीं जाने दूंगा…

अलका- uuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhh क्यों क्या करोगे पूरी रत?

अमन- तेरी छूट में अपना लुंड पेलुँगा…

Alka-uuuuuhhhhhhhhhhh पहले अपना अमन स्पेशल पिलाओ फिर देखती हु कितना पलोगे..

ये बात सुन की मन शल्फ पे लगे बोतल की तरफ बढ़ता है. पर अलका उसे रोक देती है

अलका- खान चल दिए?

अमन- तुम्हे अमन सपकल पीना है न???

अलका- हाँ और वो मैं खुद पिछ लुंगी ये कह के वो निचे झुक जाती है और मन के लुंड को चाटने लगती hai…aur फिर धीरे धीरे पूरा लुंड अपने मुँह में भर लेती है






अमन- oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh फ़क इतस सो हॉट (अमन तो इस नए एक्सपीरियंस में खो hi गया था.. उसने लड़किया तो बहुत छोड़ी थी पर इतनी गरम औरत से उसका कभी सामना न हुआ था)

अमन के तरफ से कोई रिएक्शन न पा के अलका खुद अपना सर आगे पीछे कर की मन के लुंड से अपने मुँह कोछोड़ने लगती है… अगले hi पल अमन की ध्यान टूटता है तो देखता है साडी म्हणत अकेले अलका कर रही रहे.. वो अपना सर आगे पीछे करते हुवे अमन के लुंड को निगल रही थी.. िंचीजो को देख अमन अपने किये पे पाहे शर्मिंदा होता है (और सामने अलका जैसी औरत हो तो ख्यालो में खोना कोई बड़ी या नयी बात नहीं है) फिर एक डैम से एक करारा झटका अलका के मुहे में दाल देता है…






अमन मनो पिछली सरे घटनाओ का बदला इस बार अलका के मुँह को छोड़ के लेना च रहा था कुछ इस क़दर तेज़ राफ्तेर के साथ अलका के मुँह में अपना लुंड अंदर बहार करने लगता है

अलका- गगगगगगगगगगग गुगुणुग्ग करते हुवे उसके फंड को अपने नाखुनो से नोचने लगती hai…lund के बाहर निकलते hi अलका गहरी सांसे लेने लगती है उसके मुँह से ढेर सारा लार भी निकलने लगता है






अलका हफ्ते हुवे बोलती है आज तुम्हारा सारा रास निचोड़ लुंगी main..aur फिर बिना कुछ बोले दुबारा से पूरा लुंड एक hi बार में अपने मुँह में दबा लेती है…

काफी देर इसी तरह मुँह की गर्माहट देते हुवे अलका अमन के लुंड के पानी को उसके नसों से खींचने में कामयाब हो जाती है.. और मन गुरटी हुवे अलका के मुँह में hi झड़ने लगता है… इस दौरान वो लुंड निकलना चाहता तो था पर अलका उसके लुंड को अपने दांतो से दबा लेती है और उसके गांड का दबाव अपने मुँह में बना देती है जिस से अमन का लुंड निकलना तो दूर अलका के मुँह से खिसक भी नहीं पता है…






जब अलका का पूरा मुँह अमन के पानी से भर जाता है तब वो अमन के लुंड को चोरटी है जिस से लुंड के साथ उसका पानी भी निकल आता है और अलका के होंठो पे फ़ैल जाता है जिसे वो बड़े hi प्यासे भाव से पिने लग जाती है..

अमन- ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh क्या चीज हो यार तुम पूरा हिला दिया तुमने तो uuuuuuufffffffffffffffff ऐसा मजा तो आज तक नहीं आया…

अलका उसके लुंड के पानी को छत्ते हुवे उसके तरफ देखते हुवे जवाब देती है- ये था अमन स्पेशल मेड बी अलका…. Uuuuummmmmmmmmmm और वही ऊँगली अमन के मुँह में भी दाल देती है जिसे अमन बड़े प्यार से चूसने लगता है…

अमन धीरे धीरे अपने सांसो पे कण्ट्रोल करते हुवे अलका को उठता है और बार में रखे काउच पे लिटा देता है और फिर अलका के ऊपर आ के उसके बदन के हरे क अंगो को चूमने लगता है.. उसका माथा उसके गल उसके नरम गुलाबी होंठ गाला और फिर उसके बूब्स और उसपे लटक रहा स्ट्रॉबेरी को चूसने लग जाता है..

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh

अमन अब अलका के गरम जिस्म को तपने होंठो का ठंडक दे रहा था जो की अलका के लिए उल्टा आग में घी डालने का काम करता है.. अमन अब अलका के चुचिओ को चोर उसके पेट गहरी नाभि और फिर वो जगह जो अलका के बहकते कदम का जिम्मेदार था यानि उसकी छूट पे ाा जाता है…






अमन अलका के छूट के दोनों होंठो को एक साथ अपने मुँह में भर लेता है……

ये एहसास अलका के लिए बिलकुल hi नया था आज तक जिसने भी उसके छूट को छठा या चूसा था ो खोल के और उसके अंदर जीभ दाल के बूत अमन ने उसके छूट के दोनों पंखुडिओ को सत्ता क ीक hi बार में मुँह में भर लिया था मनो संतरा क ीक भाग को भर लिया हो.. अलका की छूट थी भी तो उतनी hi choti…alka एक डैम से सिहर उठती है.. वो सर उठके अमन को को देखने की कोशिश करती है तो अमन उसके चुचिओ को बहुत hi जालिमो की तरह मसलने लगता है मनो सारा दूध निकल लेगा…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh fffffffffffuuuuuuuccccccccccckkkkkkkkk

अमन अपनी पारी कंटिन्यू रखता hai…aur अलका के छटपटाहट के बावजूद उसके बुर को चूसना नहीं chorta…aur देखते hi देखते अलका अमन के मुँह में अपना पनु बहा देती है….

दोनों की सांसे बुलेट ट्रैन को भी पीछे चोर देने वाली स्पीड से चल रही थी.. पसीने से दोनों भीग चुके थे पूरा बार उनके सिसकारिओ से गूंज रहा था…

अमन उठ के शेल्फ से 2 गिलास में एक पेग बनता है और एक अलका को देता है दूसरा खुद पिता है…

दोनों ने अपना पानी ेके क बार निकल दिया था और शराब क ीक पेग के बाद वो दुबारा से खेल शुरू करना चाहते थे …

अमन अलका कोठा के अपने गॉड में बिठा लेता है और दुबारा से उसके होंठो को चूसने लगता है और लाक उसके होंठो को….






किश करते हुवे अलका लगातार अपने गांड को हिलाते हुवे अमन के लुंड में हलचल लेन काम कर रही थी और देखते hi देखते अमन का लुंड फिर से अपनी औकात में आ जाता है…

अमन- शुरू करे…???

अलका उसके होंठो ो चूमते हुवे बस hhhhhhhhhhmmmmmmmmm करती है..

अमन अलका के इस हम्म को उसकी स्वीकृति समझ के खुद लेट जाता है और अलका को अपने लुंड पे बिठा लेता है…

अलका के छूट में इतनी आग लगी थी की वो अमन के लेटते hi बिना देर किये एक hi बार में उसके लुंड बैठ जाती है… और मन के बिना म्हणत किये लुंड अलका के बुर में घुस जाता है…






अलका अपने दोनों हाथो को पीछे कर की मन के घुटनो पे रख के सपोर्ट लेते हुवे गार्डन को हवा में लहराते हुवे चुदाई का आनंद लेने लगती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh ffffffffffffuuuuuccccccccccckkkkkkkkkkk

अमन- यू अरे सो हॉट याआयररररर वैरी हार्ड तो हैंडल…

अलका- स्टॉप टॉकिंग जस्ट फ़क माय पुसी हर्डर uuuuuuuuuuuufffffffffffff और अलका खुद तेज़ तेज़ अमन के लुंड पे कूदने लगती है….

अलका मन hi मन अमन के लुंड का कपरिसों विशाल के लुंड से करने लगती hai..(vishal का लुंड होता तो पुरे गहराई में जा के पेट खंगाल देता ये उतना गहरा में भी नहीं जा रहा है न hi उतना मोटा है बस टाइमिंग काम न निकले वर्ण फिर से प्यासी रह जाउंगी)

काफी देर इसी तरह अमन के लुंड पे कूदने से अलका अब थक सी जाती है.. जिसके कारन वो आगे अमन की तरफ गिर जाती है पर उसका लुंड अभी भी अलका के छूट में hi था..






इस तरह से अलका के गिरने से अमन अलका को अपने बहो में दबोच के निचे से धक्को की बारिश कर देता hai.aur उसके लुंड के हर चोट अलका के छूट की दीवारों को घिसते हुवे जा रहा था.

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh ऐसे hi मारो तेज़ तेज़

अमन- हाँ मेरी जान ये लो उफ्फ्फफ्फ्फ़ तुम्हारी छूट कितनी कासी हुई है मेरे लुंड को कजाकड़ hi लिया है… मैं कभी भी आ सकता हूँ…

अलका- नहीं अमन थोड़ा वेट कर लो मेरा नहीं हुआ है अभी uuuuuuffffffffff और उसके होंठो को चूमने लगती hai….sathi अपने गांड को गोल गोल घुमा रही थी जिसके वजह से अमन के लुंड को और ह्यदा प्रेशर फील होने लगता है और अगले hi पल वो झरने लगता है..

अमन- मैं आने वाला हूँ…

अलका- मैं भी …….. आआआहहहहहहह तेज तेज मारो धक्के उउउउउफफ्फ्फ्फफ्फ्फ़

आमान- ऊऊऊह्ह्हह्ह गॉड मैं गया

अलका- रुको अंदर मत डालना (अंदर डालने की इजाज़त सिर्फ मेरे विशाल को है)

अमन- फिर???

अलका- अरे बहार निकालो

अमन अपना लुंड निकलता hi है की एक तेज़ पिचकारी मरते हुवे झड़ने लगता है..






अमन के लुंड का पिचकारी सिद्ध अलका के चेहरे पे गिरता है.. जिसकी गर्माहट और उसके छूट से बह रहे पानी को पाकर बहुत टाइम बाद उसके चेहरे पे संतुष्टि का भाव आता है…

अमन तेज़ी से बगल में लेट के हाफने लगता hai..aman बगल में लेते उसे देखते रहती है

अमन - वाओ मजा आ गया…

अमन- वापस शराब के दो पेग लता है दोनों के लिए ..

अलका एक hi घुट में पूरा पि जाती है और गिलास साइड में रख के अमन से गप्पे लगाने लगती है.. सायद अलका का अभी मन भरा नहीं था क्यूंकि जब से विशाल अलका को छोड़ने लगा था उसे 5-6 बार उसके छूट का पानी बहता था जब तक उसके छूट का पानी सुच न जाये और वो मूतने न लगे और अभी तो उसका 2 hi बार हुआ.. पर अलका इस बार आगे बढ़ने से संकोच कर रही थी कही वो उसे चूड़ाकड औरत टाइप जज न कर ले वैसे करता तो कोई गलत बात न होती क्यूंकि अलका चुड़क्कड़ तो थी hi फिर भी उसके अंदर की औरत उसे इस बार आगे बढ़ने की इजाज़त नहीं दे रही थी… अलका चाहती थी की इस बार अमन सुरुवात करे और अलका के ना करने के बवजूद उसे चोदे..

इन्ही उम्मीदों के साथ वो नंगी बैठी अमन से बाटे किये जा रही थी की तभी अमन का फोन बजता है फोन उसके घर से था उसके ना आने के कारन..

अमन- ओह्ह्ह गॉड 1 बज gaye…kash थोड़ा टाइम होता तो एक राउंड और हो jata..but अभी के लिए सॉरी पापाजी वेट कर रहे है मैं तुम्हे ड्राप करते हुवे निकला जाऊंगा घर में सभी परेशां हो रहे है.


अमन के इस बात पे अलका हसने लगती है और ऊपरी मन से कहती है - कोई नहीं नेक्स्ट टाइम के लिए उधर रहा तुम्हारा ये राउंड .

अलका का सारा मूड किरकिरा हो गया वो वैसे hi नंगी एक और पेग पिने का रेक करती है अमन उसे पिलाता है उसके बाद अलका 2 पेग और पीती है और फिर दोनों कपडे पहन के अपने अपने घर ो निकल जाते hai….alka पे थोड़ा थोड़ा शराब का नशा चढ़ने लगता है उसके कदम डगमगाने लगते है..

अलका मन hi मन- साला आधा अधूरा चुदाई किस काम का उउउउउफफ्फफ्फ्फ़???? चलो आज लगता है ऐसे hi सोना है और वो लड़खड़ते कदमो से घर में एंटर करती है.. दूर बेल्ल नहीं बजती क्युकी चाबी उसके पास भी था वो लॉक खोल के घर में जाती है तो कारन कही भी नहीं था.. फिर वो अपने बैडरूम में जाती है तो देखती है कारन उसके कमरे में सोया है…

अलका कारन को नींद में समझ वाशरूम जाने की जरुरत नहीं समझती के और बैडरूम में hi कपडे चेंज करने लगती है






अभी उसने अपने ड्रेस को उतरना शुरू hi किया था की पीछे से कुछ हलचल की आवाज़ आती है.. जिस से वो पलट के देखती है तो उसे वैसे कुछ नहीं लगता.. कारन अभी भी सो hi रहा tha..use लगता है सायद शराब के नशे में उसके कान बज रहे है और वो कपडे उतरना वापस से जारी कर देती है...





और देखते hi देखते वो पूरी नंगी हो जाती है.. उसका शरीर अब कपड़ो से आज़ाद हो चूका था उसका दिल करता है वो वैसे hi अंगी बिस्तर पे जा के सो जाये.. पर कारन के होते कैसे सो सकती है.. अगर कारन न होता तो जरूर सो jati..abhi वो िंह चीजों में उलझी थी की विशाल का वक आ जाता है..

अलका के चेहरे पे चमक आ जाती है वो फ़ौरन फोन पिक करती है और बिस्तर पे लेट के बाटे करने लगती है.. विशाल के प्यार में वो इतना पागल हो गयी थी की वो भूल hi जाती है की इस वक कमरे में कोई और भी है और वो बिलकुल नंगी है....
 
Episode-41

विशाल के वक से अलका के चेहरे पे चमक आ जाती है वो फ़ौरन फोन पिक करती है और बिस्तर पे लेट के बाटे करने लगती है.. विशाल के प्यार में वो इतना पागल हो गयी थी की वो भूल hi जाती है की इस वक कमरे में कोई और भी है और वो बिलकुल नंगी है....

अब आगे……

अलका विशाल का नाम स्क्रीन पे देखते hi ख़ुशी से झूम उठती है और बिना वक़्त गवाए कॉल अटेंड कर के विशाल के साथ बाटे करना शुरू कर देती hai….couch पे पड़े गाउन जिसे शाम को अलका ने विशाल को संतुष्ट करने के लिए उतरा था ो अब भी वही पड़ी थी.. अलका उसे उठा के पान लेती है और ब्लैकट के अंदर घुस के अपने bête से बाटे करती hai…screen पे विशाल अपना लंड हिलाते हुवे अलका से बाटे कर रहा था..






अलका जो पहले से hi प्यासी थी विशाल के लुंड को देखते hi उसका गाला सूखने लगता है… काश विशाल पास होता तो वो उसके पानी से अपने छूट और अपने गले का प्यास बुझा लेती.. हलाकि एक लुंड से वो चुद के आयी थी पर उसने तो अलका को आधे में hi चोर दिया और दूसरा लुंड उसके बगल में लेता हुआ है पर वो लेना चाइये या नहीं इस बात की दुविधा उसे आगे नहीं बढ़ने दे रही थी..

कारन के कमरे में होने से अलका बहुत फुसफुसा के बोल रही थी और ये तो ाचा हुआ उसने एअरबुद्स लगा लिए थे वर्ण कारन को विशाल का आवाज़ जरूर सुनाई दे जाता और दोनों के बिच इस वक़्त क्या बात हो रही है वो भी समझते देर न लगती..

विशाल बातो hi बातो में अलका से कोई ड्रेस पहनने का डिमांड करता है… और अलका भी एक अछि गफ कहो माँ कहो या जॉब hi नाम दिया जाये इस रिश्ते को विशाल की बायत मानते हुवे ड्रेस डालने के लिए बीएड से उठ के वार्डरॉब की तरफ चल पड़ती है….

काफी खंगालने के बाद अलका को वो ड्रेस मिल जाता है जिसे पहनने के लिए विशाल मिन्नतें कर रहा tha..dress एक फ्लोरल ब्रा डेट एंड वाइट डेनिम शार्ट था…






चेंज करने के बाद अलका एक बार कारन की तरफ देखती है तो पति है की वो जग चुक्का था और अलका को कपड़े बदलते देख रहा था.. इस पर अलका बहुत कोल्ड रिएक्शन देते हुवे कमरे से बहार चली जाती जिस से की वो आराम से विशाल से बात ार सके…

काफी देर विशाल से बात करने के बाद अलका जब कमरे में आती है तो पति है की कारन अभी भी जगा हुआ है और उसका ऊपर बॉडी नंगा था.. अलका मन hi मन सोचती है (ये बलंकत के अंदर नंगा है क्या??)

अलका- कारन तुम सोये नहीं नींद नहीं आ रही है क्या?

कारन- आयी थी मासी बूत अब नहीं आ रही है..

अलका- क्यों क्या हुआ..

कारन- वही शाम वाली प्रोब और ये कहते हुवे ब्लँक हटा देता है जिस से की उसका फुफकारता हुआ लुंड अलका को hi देख रहा था…

अलका- कारन तुम नंगे क्यों सोये हो मेरे बैडरूम में??

कारन- कुछ पह्नु तो स्क्रैच हो रहा है मासी क्या करू…

अलका- ओह्ह्ह्हह गॉड तुम्हारी प्रोब hi नहीं रेसोल्वे हो रही है.. एक काम करो अभी ऐसे hi सो जाओ और सुबह कुछ करते है इसका… इतना कह के अलका भी पहले अपनी ब्रा की डोरी खोलती है और फिर पंतय के साथ hi शार्ट को खींच के उतर देती…..






अगले hi पल अलका बिना समय गवाए बलंकत से अपने गोर बदन को धक् लेती है और कारन के अपोजिट करवट ले के सोने की कोशिश करने लगती hai..halanki नींद उसे आ नहीं राइ थी और कारन के होने से अपने छूट में ऊँगली भी नहीं कर पा रही थी..

अलका को कपडे उतारते हुवे कारन देख रहा था ो देख लेता है की अलका बलंकत के अंदर पूर्ण नंगी hai…jiske वजह से उसकी धड़कने दुगनी राफ्तेर से बढ़ने लगती है.. वो ब्लैकट को हल्का सा उठा के अपनी निगाहो को जब अंदर की तरफ दौड़ता है तो देखता है की अलका सच में बिलकुल नंगी उसके तरफ गांड कर के लेती है..






कारन अलका के गोर भरवाडार गांड को देख के अपने लुंड को हिलने लगता hai…wo लगातार अलका पतली सी कमर और उसके निचे उसकी गोरी कासी हुई गांड को देख के अपने लुंड को मुठिया रह था..

कारण द्वारा बलंकत के उठाने से अलका को अपने गांड पे ठंडक जैसा लगता है जिस से वो पलट के देखती है तो पति है की कारन उसके गांड को देखते हुवे मुठ मार रहा है…

अलका- कारन ये क्या कर रहे हो तुम मेरे अस्स को देख के मस्टरबूते कर रहे हो?? इसे फ़ौरन बंद करो

Karan-maasi आप ऐसे सामने रहोगे तो कैसे कण्ट्रोल होगा … और ये बाटे कहते हुवे भी वो अपने लुंड को हिला रहा था.. उसे कोई परवह नहीं थी की उसकी मासी उसके इस हरकत को देख रही है…

अलका- थोड़ा कण्ट्रोल करना सिख bête… समझ सकती हु प्रोब हो रही है बूत सुबह तक वेट करना होगा..

कारन- मासी शाम की तरह एक बार फिर से अपना हाथ लगा दो न प्लस

अलका- no वे ज ओहो गया सो हो गया अब सजा और मुझे भी सोने दे.. इतना कह के अलका वापस से पलट के यानि अपनी गांड कारन की तरफ दोबारा से कर के लेट जाती है…

कारन अब भी यूँ hi अलका के गांड को देखते हुवे अपना लुंड हिला रहा tha..karan का हाल कुछ ऐसा hi था जैसे किसी भूके के सामने 56भोग रखा हो पर उसे खाना तो दूर चुने की भी इजाज़त न हो…. पर भूक आखिर कब तक कण्ट्रोल करेगा.. कभी तो उसके सब्र का बंद टूटेगा hi और यह भी कारन के साथ कुछ वैसा hi होता hai..alka की फूली हुई गोरी चिकनी गांड को देख वो अपने आप को रोक नहीं पता और अपने पत्थर जैसे सख्त बन चुके लुंड को अलका के चूतड़ों के बिच फसा के उनमे घिसने लगता है…






अलका के छूट मनो किसी भाप इंजन की तरह गर्म गर्म भाप चोर रही thi..jiske चुने मात्रा से लुंड क्या लोहा भी पिघल हाय..

कारन पुरे जोश में अपने लुंड को उसके कूल्हों में फसा के रगड़ रहे था… अलका अभी सोई नहीं थी पर जगी बह नहीं थी वो आधे कच्ची नींद में थी… इतनी मुश्किल से तो खुद पे काबू पा के सोई थी की छूट पे किसी हार्ड चीज के दबाव से उसकी नींद खु जाती है…

अलका- wtf कारन ये तू क्या कर रहा है तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतना आगे बढ़ने की.. मेरी hi गति है तुम्हे बचा समझ के छूट देती रही…

कारन- क्या करू मासी अब मेरे से रहा नहीं जार है है ऊपर से तुम बगल में नंगी लेती ho(vishal अब जान बुझ कर खुले शब्दों का प्रयोग करने लगा था और अलका के जिस्म का टैरिफ करता है..).. तुम्हारी ये गांड मुझे पागल करती है मैं क्या करू…. ये तुम्हारी चुचिओ के देख के मेरे हाथो पे कण्ट्रोल नहीं हो रहा है मन कर रहा है इन्हे दबाता राहु… ये बोलके कारन अलका के चुचिओ को मसल देता है..






कारन के शब्दों का जादू अपना काम करने लगा था कारन के बोले शब्द अलका को गुस्सा नहीं दिला रहा था बल्कि उसके कानो में सहद घोल रहा tha…aur उसके बाद यूँ अचानक उसके चुचिओ को मसल देने से अलका के अंदर से एक aaaaaaaaaaaaaaahhhhhh निकल पड़ती hai…wo डांटती नहीं तो कारन एक बार और उसके चुचो को मसल देता है…

अलका- ooooooooohhhhhhhhhhhh कारन प्लस bête मान जाओ गलत है ये मैं तुम्हे कैसे समझौ..

इस बार ालको के बातो में को दन्त नहीं था बल्कि उसके टूटते सब्र का एक संकेत था जो बड़े मुश्किल से वो शब्दों में बयां कर पा रही थी…

कारन- कुछ न समझाओ मासी… एक बार इसका पानी निकल दो अपने हाथो से फिर आप सो जाना..

अलका से अब बिलकुल भी रुका नहीं जा रहा था उसके छूट की गुदगुदी अब खुजली बनने लगी थी..

अलका- तुझे जो करना है कर मुझे सोने दे और ये कह के वो ब्लैकट को पूरा ओढ़ लेती है यानि की उसी में घुस जाती है…

कारन- अभी भी उसी तरफ देखते हुवे अपने लुंड को हिला रहा था और सोच रहा था की कैसे आगे बढ़ा jaye..aur तभी उसे बलंकत के अंदर हरकत दिखाई देती hai..wo एक झटके से बल्कणत को हटा देता hai…aur फिर जो वो देखता है वोट क अद्भुत नजारा था…






अलका बलंकत के अंदर घुस के अपने छूट को सेहला रही thi…aur होठो को भींच के अपने अंदर की निकलते आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही thi…lekin बलंकत के अचानक हटा लेने से ये नज़ारा कारन को दिख जाता है..

कारन- मासी आप ऊँगली कर रहे हो???

अलका- ये क्या बोल रहा है तू ऐसा कुछ नहीं है..

कारन- नहीं मैंने देखा आप कर रहे थे. ये देखो आपकी ऊँगली आपके छूट के पानी से चमक रही है और उसके हाथ के उंगलिओ को चूस लेते है…

अलका- uuuuuuuuuhhhhhhhhhhhh ये लड़का मुझसे क्या करवा के मानेगा..

कारन- कितनी नमकीन पानी है तेरे छूट की … क्यों झूट बोलै किट ु ऊँगली नहीं कर रही थी….

अलका- अरे तू सुबह से ऐसी हरकते कर रहा है कितना कण्ट्रोल करू मैं भी…

कारन- तो मत करो कण्ट्रोल होने दो जो होता है…

अलका- यानि तुझे वो करने दू जोट ु चाहता है?

कारन- हाँ इसमें बुराई क्या है तुम भी तो चाहती हो तुम्हारी छूट बता रही है तुम मुँह से चाहे जितना भी झूट बोलो..

अलका- नहीं कारन ये तो नहीं हो सकता जोट ु चाहता है…

कारन- तो एक काम हो सकता है..

अलका- वो क्या?

कारन- जो मजे आप खुद को बल्कणत के अंदर दे रहे थे वो आप खुले में दो आपका भी काम हो जायेगा और मेरा भी..

अलका पहले तो बहुत इंकार कर्त है प् एरान के बातो के आगे एप और अपने छूट में हो रहे खुजली की आगे मजबूर हो जाती hai…use खुद भी पता नहीं चलता की कब उसका मुँह तो न न कर रहा था पर उसकी उंगलिया अपना काम करना शुरू कर चुक्का था…

अलका- ok बस तू मुझे हाथ नहीं लगएगा वर्ण मैं तेरा साथ नहीं दे पाऊँगी.

कारन- ok






कमरे ा नज़ारा बहुत कामुक और गरम हो चला था जहां एक मासी अपने bête के सामने अपनी छूट में उंगलिया घुमा रही थी तो वही उसका बीटा अपना लुंड अपने मसि के कामुक जिस्म को देख के मासा रहा था… कामाग्नि दोनों में भड़की थी लेकिन रिश्ता नाम का एक डोर ने दोनों को बांध रखा था…

कारन- uuuuuuuuuuuuuuffffffffffff मासी टी कितनी हॉट है मेरा लुंड पागल हुवे जा रहा है तुम्हे देख के..

Alka-ooooooooooooohhhhhhhhhh कारन ये तू मेरे से क्या करवा रहा है… मैं तेरे सामने ये कैसे कर सकती हुन्न्न.. कितनी गन्दी औरत हु मैं ….

karan-gandi नहीं मेरा ख्याल रखने वाली हॉट एंड सेक्सी मासी हो…

अलका शर्म से आँखे बंद किये अपने छूट को सेहला रही थी.. जिए देख कारन एक डैम से उठ के अलका के छूट प मुँह रख देता है और उसकी दोनों तागे फैला के अलका की छूट कहते लगता hai..aur अपने चुटकियो से उसके निप्पल को भिचने लगता है..






अलका ो पहले hi कारन को हाथ न लगाने की चेतावनी दे चुकी थी.. पर यहां तो कारन ने हाथ नहीं मुँह hi लगा दिया था वो भी अलका के छूट में.. पहले तो अलका सिहर उठती है और खुद को चुराते हुवे बोलती है तुझे हाथ लगाने से मन किया था ये तू क्या किया.. चल हैट अब यहां से..

अलका उसे खुद से दूर कर देती है.. कारन उस से माफ़ी मांगने लगता है गिड़गिड़ाने लगता है तो अलका लास्ट में हर मान के कहती है रुक मैं तुझे ठंडा कर du…aur उसके लुंड को एक बार फिर से अपने हाथो से मसलने लगती है…

कारन को अब रह रह के गुस्सा आने लगता है अगर मासी न होती तो अब ताका पटक के छोड़ दिया होता पर रिश्ते के हाथो मजबूर था..

अलका के द्वारा लगातार हाथो से लोड को मसलने से कारन का लोड को काफी देर से खड़ा था ो ालक के हाथो में hi एक बार फिर से झड़ने लगता है..






कारन के लुंड से निकलते पानी को देख अलका का जीभ ललकाने लगता है उसका मन होता है की वो कारन के लोडे को मुँह में भर ले और सारा रास्प ी जाये पर वो ऐसा कर नहीं पाती लेकिन हाँ झड़ने के दुराण कुछ बुँदे जरूर उसके मुँह पे गिरती है जिसे वो साफ़ नहीं करती…

कारन आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह करते हुवे एक बार फिर से अलका के हाथो में झाड़ गया tha..aur उसका लुंड फ़िलहाल के लिए शांत हो चुक्का था..

अलका- ले अब सजा चुप से और मुझे भी सोने दे.. सुबह तुझे डॉक्टर के पास ले जाउंगी अगर दुबारा हहआ to..aur फिर अलका वापस अपने जगह पे जा के लेट जाती है..

अलका की आज जितनी टैरिफ की जाये वॉक ऍम थी वो हर बार अपने बहकते कदम को रोक लेती है और अपने और अपने रिश्ते को शर्मशार होने से सुबह से बचा रही थी फिर चाहे उसकी जिस्म की भूख ने उसे कितना बह मजबूर किया हो…. पर ये रात अभी तो गेहरानी सुरु hi होती है.. अभी बहुत हमले झेलने बाकि है और ऊपर वाला hi जाने आखिर ये कब तक खुद को रोक पायेगी…

अपनी जगह पे लेटने के बाद अलका अपने हाथो में लगे कारन का पानी को चाटने लगती है साथ hi उसके चेहरे पे जो पानी फैला था उसे भी अलका पॉच के अपनी उंगलया चाटने लगती hai…ungli को छत्ते chat-te उसका हाथ उसके छूट पे चला जाता hai…jo बहुत hi ज्यादा गीली हो चुकी थी…






अलका जब अपने छूट को सहलाने के लिए उंगलिया उसपे फेरती है और हटती है तो उसके छूट और ऊँगली बिच एक तार जैसा कनेक्शन बन जाता है जो उसके छूट के पानी से बना होता है… अलका सारा पानी ऊँगली में भर के निकलती और चूस leti…y सील सिला काफी देर से चल रहा था जी से जब वो उंगलिया मुँह में ले के चुस्ती थी तब एक ूमममममममम की आवाज़ उसके मुँह से निल रही hi.

आवाज़ सुनते hi कारन समझ जाता है की मासी फिर ऊँगली कर रही है.. वो मन में सोचता है एक बार हिमत दिखा hi देता हु जो होगा देखा jayega…aur इधर अलका भी बड़े नाजुक सिचुएशन पी ा गयी थी लगातार काफी देर से छूट में ऊँगली करने और चूसने से उसका छूट भी अब एक कसके रगड़े धुंध रही रही जिस से उसका लावा फुट के बहार निकल सके लेकिन कारन के होने से वो अपने छूट को खुल के मजा दे नहीं पा रही थी…

इधर कारन का लुंड फिर से खड़ा हो गया था और साथ hi इस बार खड़ा हुआ था उसके अंदर का जिद्दी मर्दानगी जो इस बार आर या पार के लिए तैयार था..

कारन एक बार फिर से अपने खड़े लुंड के साथ अलका से चिपक जाता है.. कारन का लुंड फिर से अलका कैग एंड में थोड़के मरने लगता है… लेकिन मदहोश हुई अलका इस बार उसे हटती नहीं बल्कि उसका लुंड हाथो में भर के मसलने लगती है..






अलका- कितनी जेल खड़ा कर लेता है कारन तू uuuuuuuuuuuffffffffffffff कब शाट होगा तू… ये बात अलका दीवार के उस तरफ देखते हुवे और उसके लुंड को अपने हाथो में मसलते हुवे बोलती है…

कारन- भी हिमत जोड़ के कहता है- ये तो अब तेरे अंदर जा के hi शांत होगा maasi..aur अलका के छूट पे हाथ रख के उसके दानो को मसल देता है..

अलका कोई विरोध नहीं करती न रोकती है आखिर कितना और कब तक रोके वो खुद को और वो वैसे घडी में जब उसका छूट पहले से hi पानी बहा रहा हो…

अलका- तू जनता है तू क्या कह रहा है?

कारन- तुझे छोड़ने को कह रहा हु मासी तेरे छूट में अपना लुंड डालने को कह रहा हु…

अलका- uuuuuuuuuuuufffffffffff त्रि बाटे भी तेरे इस लुंड की तरह गरम है… मेरे से अब रुका भी नहीं जायेगा तू अगर ऐसे hi करता रहा

कारन- अलका के चुचिओ के मसल के बोलता है तो मत रोक न मासी ले ले अपने अंदर और मेरे साथ खुद को भी शांत कर ले… और अपनी दो ऊँगली अलका के हूत में दाल के उसके पानी को निकलता है और अलका के मुँह में दाल के अलका के पीठ को चुम लेता है.. ये वो आखरी वॉर ता जहां अलका आखिर कर ढेर हो गयी.. और अपने हाथो से कारन का लुंड पकड़ के अपने छूट के मुहाने पे घिसते हुवे एक तंग ऊपर उठा के अंदर दाल लेती है…






पीछे से कारन भी एक झटका देता है और लुंड अलका के छूट में प्रवेश कर जाता है.

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh

कारन- कितनी गरम और गीली छूट है तेरी मासी ूफूऊऊऊफफफफ

Alka-hhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmmmm थोड़ा धक्के लगन ा अब दाल hi दिया है तो..

कारन धक्का नहीं लगता- तुमने डाला है तुम hi लगाओ मैं डालूंगा तब मैं लगाऊंगा..

अलका- उउउउउफफ्फ्फ कितना ज़िद्दी है तू पहले अंदर घुसना था अब घुसा लिया तो अलग डिमांड

इतना कह के अलका खुद hi अपनी गांड को घुमा घुमा के पीछे धकेलने लगती है..






कारन भी अलका के कमर सेहला के अपनी और खींचता है पर खुद से धक्के नहीं लगता.. अलका का उतावलापन देख के वो समझ जाता है की अलका ढीली पद गयी है और यही वक़्त है उसे अपने काबू में करने का वर्ण एक बार उसके छूट ने अपना पानी निकल दिया तो फिर से रिश्ते की दुहाई देने lagegi…isliye कारन अलका के छूट से लुंड खींच लेता है.. जिस से अलका गुस्से में तिलमिला जाती hai..aur पलट के गुस्से में कहती है…

अलका- अब क्या हुआ?? निकला क्यों??

अलका का चेहरा शर्म से लाल हो चुक्का था.. सुबह से न न करती हुई उसकी मासी अभी खुद से लोड मांग रही थी…

Karan-kya?

अलका- तुझे नहीं पता क्या..

कारन उसके करीब जा के उसके पेट और छाती पे हाथ फेरते हुवे उसके गले को चूमते हुवे फिर से पूछता है नहीं टब ता क्या…

अलका- बहुत शैतान है… लुंड क्यों निकला मेरे छूट से??

कारन- क्यूंकि मुझे पाहे तेरी छूट चटनी है.. इतना कह के कारन अलका के चूतड़ों में हाथ डालते हुवे अपनी और खींच लेता है और अपना मुँह वापस से अलका के छूट पे रख देता है…






अलका भी अपनी दोनों टंगे हवा में उठा के कारन को उसका रास्ता दे देती है..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaaaa मर गयी…

कारन अलका के छूट को छत्ते हुवे उसके चुकी को मसलता है और उसके छूट के पतली चमड़ी को अपने होठो से खींच के बहार तक ले आता है…

अलका जो पहले hi झड़ने के करीब थी ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पति है और कारन का सर अपने छूटे प दबाते हुवे उसके मुँह में अपने छूट की धार चोर देती है….

अलका- oooooooooooohhhhhhhhhhh कारन ये क्या कर दिया तूने अअअअअअअअजज्जजजज्जजज उउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ माआआआ सारिका तेरा बीटा मेरी छूट चाट रहा है….






अलका अपने दोनों पेअर को हवा में hi पटकने लगती है.. जिस ओर्गास्म के लिए वो घंटो सेपरेशन थी उसे पा लेने से उसके चेहरे पे ख़ुशी छुपाये नहीं छुपने वाली thi…wo छटपटाते हुवे अपनी गांड उठा उठा के अपने छूट का पैन ऐकोर देती है..

पर कारन अभी भी अलका के छूट को चाट hi रहा था…..

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अब तो चोर दे कर लिया न अपने मन की. पि लिया मेरे छूट का रास..

कारन- अभी खा मासी अभी तो पहला स्टाप hi चुवा है..

अलका कारन के बातो से अनजान बनते हुवे- तो अब और क्या ??

कारन- अभी तो तेरा हुआ है मेरा बाकि है ये कहते हुवे वो उठ के बिना किसी चेतवानी के अलका के मुँह में अपना लुंड पेल देता है…

अलका उसके लुंड को मुँह से निकल देती है और फिर बड़े अदाओ से उसे छत्ते हुवे कहती है..






अलका- अरे रुक जा इतना उतावला क्यों हो रहा है.. करती हु तुझे भी khush…alka को अचानक से कारन पे प्यार आने लगा था..

औरत को अगर को जिस्मानी सुच दे दे तो कही न कही औरत के दिल में उसके लिए एक जगह बन hi जाती है और सायद कारन ने अलका के दिल में वो जगह बना लिया था..

अलका कारन के लुंड को हाथो में भर के सहलाती है और अपना मुँह आगे कर के उसके लुंड के जगह उसके बॉल्स को मुँह में भर के चूसने लगती है.. कारन को ये अनुभव सारिका से कभी नहीं मिला था…. अलका के ऐसे करते hi कारन हवाओ में उड़ने लगा था… वो आगे बढ़ के अलका के पीठ और गांड को सहलाने लगता है और अलका उसके बॉल्स तो कभी लुंड को चूसना जारी रखती है… और साथ hi अपने छूट को भी अपने दूसरे हाथ से सहलाती है… कारन अलका को ऐसा करता देख अलका को घुमा देता है और उसका मुँह अपने लुंड की तरफ तो अपना उसके छूट की तरफ कर देता है..






काफी देर ईसिस तरह एक दूसरे को चूसने के बाद वो समय भी आ गया था जिसके लिए कारन जाने कब से परेशां था..

कारन- चल मासी सीधी हो जा अब..

अलका चुटकी लेते हुवे क्यों?

Karan-tujhe नहीं पता?

अलका- no

कारन- अब ये लुंड डालूंगा तेरे इस माखन जैसे छूट में मेरी मासी तब जा के शांत होगा ये भी और तेरी छूट भी…

अलका- तू पक्का ये चाहता है..

कारन अलका के इस बात का जवाब मुँह से नहीं बल्कि अलका के छूट में अपना लुंड दाल के देता है






अलका- sssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaahhhhhhhh

कारन धीरे धीरे धक्के लगाने लगता hai..alka के सपाट पेट के ऊपर बड़ी बड़ी चूचिया देख कारन का मन ललचाने लगता है और वो अलका के छूट में लुंड डालते हुवे जोर जोर से उसके चुचिओ को मसलता है..

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaahhhhhhhh धीरे दबा

कारन- बहुत मोठे चुके है तेरे मासी…

अलका- तेरे माँ के भी है न मोठे..

कारन- उसका कभी देखा नहीं…

अलका- इसलिए मासी को छोड़ ने आ गया तू…. Uuuuffffffffff

कारन- मासी तू है hi इतनी हॉट…

दोनों चुदाई तो कर रहे थे पर उस तरह के भाषाओ का उसे नहीं कर पा रहे थे जैसे विशाल अलका आपस में करते है …

और एक लम्बी चुदाई के बाद कारन और अलका एक साथ झाड़ जाते है…

कारन के लुंड को अब जा के कही शांति मिली थी और अलका को भी.. उस रात कारन अलका को 2 बार और छोड़ता है और फिर वही उसके मुँह में अपना मुठ गिरा के सो जाता है…






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अलका को भी अब जा के शांति मिलती है और वो भी कारन के बाँहों में hi सो जाती है…

विशाल को अलका से अलग हुवे अभी एक दिन भी पूरा नहीं हुआ था की इस बिच अलका ने दो नए लुंड जातक liye..halaki ये बात और है की हर चुदाई में वो विशाल को hi मिस कर रही thi...lekin आज ये बात भी तय हो गयी की विशाल अगर अलका के लाइफ से कुछ दिनों के लिए चला गया तो अलका अपने कामुक बदन और जवानी को सायद नहीं संभल पायेगी.. वो विशाल hi तो है ज उसे राउंड के रखता है जिसके कारन वो बहार नहीं देखती.... पर देखते आगे अलका की जिस्मानी गर्मी और क्या क्या गुल खिलाती है...
 
बे रेडी गाइस ओने ऑफ़ थे बिग्गेस्त धमाका ऑफ़ स्टोरी इस ों थे way...be प्रेपरेड़ फॉर शॉक एंड एक्ससिटेमेंट ात थे शामे टाइम
 
Episode-42

विशाल और अशोक के आने तक विशाल अलका को घर के हारक ओने में छोड़ चुक्का था और अलका भी एक नए जवान लुंड को ले के चहकने लगी thi…sab कुछ फिर वही रोज की तरह चलने लगता है विशाल का चुप चुप के सेक्स अशोक का बैडरूम सेक्स.. और उधर कारन भी थोड़ा ज्यादा ओपन एंड बोल्ड होने लगा था नतीजा ये निकला की सारिका को कभी भी नंगा हो जाना पड़ता था… दोनों बहनो की छूट में लुंड कभी भी दस्तक दे देता था….

इसी तरह शादी को एक महीना बचा था लेकिन आईएसएम एक मुशीबत ये आ गयी की अशोक को अपने शिप पे जाना पद रहा था वो भी एक वीक पहले यानि की वो शादी ज्वाइन नहीं कर सकता tha…isliye अलका उसकी मौजूदगी में hi साडी शॉपिंग कर लेना चाहती थी..

एक दिन अशोक और अलका शादी के लिए लेहंगा वगैरह लेने जयपुर जाते है और साडी खरीदारी कर के वापस आ रहे होते है की तभी अशोक अलका के छूट में हाथ दाल देता है…






अलका जवाब में अपनी टंगे खोल देती है जिस से अशोक अचे से उसके छूट को छेद सके…

अँधेरा होने को था दोनों के मन में एक एडवेंचर करने का दिल होने लगता और वो था रोड पे खुले में सेक्स …

अशोक अब कार चलते चलते अलका को खींच के अपने लुंड पे उसका सर दबा देता hai….alka भी बिना बोले अशोक का लुंड चूसना शुरू कर देती है…






अशोक एक हाथ से स्टेयरिंग और दूसरे से अलका के साड़ी को ऊपर कर के पीछे से उसकी छूट में ऊगली करना शुरू कर देता है… एक तो शाम होने के वजह से अंधेर हो रहा था उसके ऊपर बदल च जाने से आज अँधेरा जल्दी हो गया था... हवा में भीनी भीनी खुसबू के साथ ठंडक आ गयी थी जो शरीर को छूटे hi उसमे सैकड़ो चीटिया रेंगने लग जाये और उसके ऊपर ये दोनों चुदाई के मूड इ भी थे…

अशोक ने अलका को कार से बहार निकल दिया और खुद कार चला की आगे चला जाता है..






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अलका जो सफ़ेद रंग की टॉप और स्कर्ट पहनी थी बारिश में भीग जाने से कुछ ज्यादा hi सेक्सी लगने लगती है.. उसकी दोनों चूचिया टॉप से बहार थी स्कर्ट इतना छोटा था की उसके गांड को छुपाने नहीं पा रहा था…

थोड़ी दुरी पे जा के अशोक वापस आता है और स्तरंगेर की तरह बेहवे करता है.. अलका समझ जाती है ये रोल्पाली कर रहा है… और वो भी बड़े कॉक अंदाज़ में जवाब देने लगती है..

काफी गर्मागर्म बाटे हो जाने के बाद अशोक से अलका कहती है.. साडी बाटे कार में बेथ के hi करोगे या मेरे इस जवानी को भोगने के लिए बहार आओगे…

अशोक भी बिना देर किये बहार जाता है और दोनों में तेज़ चुम्बन होने लगती है…






अशोक आज कुछ ज्यादा वाइल्ड हो रहा था जो अलका नोटिस कर लेती है सायद मौसम और चुदाई की खुमारी था जो वो अनजान सड़क पर कर रहे थे.. और यही बात अलका को भी एक्ससिटेड कर रही थी.

अशोक अब अलका को चूमते हुवे उसके स्कर्ट को पूरा उसके कमर तक उठा देता है जिस से उसकी गांड जिसे उसका स्किट पहले hi नहीं छुपा पा रहा था अब अशोक के उठा देने से पूर्णतः आज़ाद हो चुक्का tha..ashok जोर जोर से अलका के दोनों चूतड़ों को मसल रहा था

अलका- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh दबाओ अशोक ाचा लग रहा है

अशोक भी अलका को मसाने में कोई कसार नाह ऐकोर रहा था… अलका का बदन जल्दी hi अपनी गर्मी चोर्ने लगती है जिसपे गिरती बारिश की बुँदे मनो भाप बन के उड़द रही हो/…

बहुत देर टेक क दूसरे के होंठो को चूसने के बाद अलका झुक के निचे बेथ जाती है और अशोक के बेल्ट और जीन्स को खोल के उसके कच्चे के साथ निचे सरका देती है जिस से की अशोक का लुंड किसी स्प्रिंग की तरह उछाल के अलका के होंटो से जा मिलता है जो की उसके लुंड की मंजिल थी भी..

अलका पुरे जैसे में अशोक का लुंड चूस रही थी की तभी एक बहुत तेज़ बिजली उसपे गिरती है और ये बिजली आसमान से नहीं अशोक के मुँह से गिरी थी….






अशोक- अलका मैं सब जानता हु..

अलका मुँह में लुंड भरे अशोक की तरफ देखते हुवे आँखों से िश्रे में मनो पूछती है क्या जानते हो???

अशोक जवाब में कहता है- तुम्हारे और विशाल के बिच जो चल रहा है…

अशोक के मुँह से निकला ये सब्द आसमान से गिरते बिजली से भी ज्यादा झटके देने वाला था अलका शोकेड हो जाती है वो लुंड मुँह से निकल के कुछ कहना की कोशिस करती है पर अशोक उसका मुँह और ज्यादा जोर से दबा देता है जिसके वजह से वो अपना मुँह हटा नहीं पति और न चाहते हुवे भी लुंड मुँह में भरे उसके पकड़ धीरे होने का वेट करने लगती है…

अलका के साइड से कोई हरकत न पा के अशोक खुद अलका के मुँह को छोड़ने लगता है वो भी बहुत बुरी तरह जैसे आज तक नहीं छोड़ा था..






अपनों अपने अंदर का गुस्सा निकल रहा हो.. अलका की तो गांड hi फैट गयी थी उसे समझ नहीं आता वो क्या बोले.. पर जो किया है उसका सामना तो करना hi था… इस बेरहमी से मुँह चुदाई से अलका का डैम घुटने लगा था.. चुदाई की भूक तो उसकी कब की मिट चुकी थी अब वो बस अगले हमले का वेट कर रही थी जो उसे झेलना था और उसके पास अशोक के किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं था..

काफी देर बेरहमी से मुँह छोड़ने के बाद अशोक अपना लुंड अलका के मुँह से निकल लेता है…

अलका को जैसे hi साँस लेने में थोड़ी आसानी होती है मनो उसके मरे हुवे शरीर में जान आ जाती है.. वो रट हुवे अशोक को गले लगा लेती है और सॉरी बोलने लगती है..

अलका- सॉरी अशोक मुझसे गलती हो गयी मुझे माफ़ कर दो…

अशोक जवाब में उसे कंसोल करते हुवे कहता hai..koi बात नहीं मैं तुमसे नाराज़ नहीं हु तुम रो नहीं… मैं समजह सकता हु मैं तुम्हारे पास सालो साल नहीं होता तुम्हारे भी कुछ नीड hai…ye बात अशोक उसके जिस्म को सहलाते हुवे और चूमते हुवे बोल रहा था..

अलका- नहीं अशोक मैंने गलती की है तुम गुस्सा करो मुझे maro..par प्लस मुझे चूर्ण नहीं और उस बेचारे विशाल को कुछ न कहना वो तो बचा है..

बेशक अलका के कदम बहक गए थे बेशक वो दुसरो से चुदती है पर प्यार वो अशोक से बहुत करती थी और अशोक उसके साथ..

अशोक- बेबी मैंने खा न मुझे बुरा नहीं लगा मैं तुम्हारी सिचुएशन नहीं समझूंगा तो कौन समझेगा ा बीआरओ नहीं.. ये बाटे घर पे नहीं हो सकती थी इसलिए यह बोलै पड़ा मुझे..

और वापस से उसकी चूचियों को मसलने लगता है.. ालका कोई खास जोश नहीं दिखा पा रही थी लेकिन अशोक को रोक भी नहीं रही थी..

अशोक फिर से कहता है- मैंने खान ा अपना मूड ख़राब मत करो ये सब ok है… तुम्हारी ख़ुशी में मैं खुश हु.. तुम खुश रहो बस चाहे जैसे रहो बस ख्याल रहे तुम्हारी बदनामी न हो तुम सेफ रहो…

सेक्स का उत्साह तो अशोक ने अलका के ऊपर बिजली गिरा के ख़तम hi कर दिया था.. सो वो वापस गाड़ी में बेथ के घर आने लगते है..

पुरे रस्ते अलका गुमसुम रहती है.. उसका चहकता हुआ चेहरा पीला पद गया था.. आंखे रो रो के लाल हो गयी थी,, अहॉक का कोल्ड रेक्शन उसे और ज्यादा परेशां कर रहा था..

घर पहुंच के वो सारा सामान निकलते है और गिला हो जाने के वजह से अशोक अलका अपने रूम में चेंज करने चले जाते है..

अलका चेंज करने के बाद घर का बाकि काम निपटने के लिए किचन में आती है जहां उसका बीटा उसे दबोचने के लिए तैयार था पर आज अलका उसको चुने भी नहीं देती..

विशाल अलका के चेहरे को देख समझ जाता है की जरूर कुछ हुआ है इसलिए उसकी माँ परेशां है इसलिए वो और चेरना ठीक नहीं समझता और उसके उदासी का कारन पूछने लगता है… पर अलका ये थोड़े न बताएगी की उसके पापा को उनके में पता चल गया है..

इधर कमरे में अशोक को भी आत्मा गलानि हो रही थी की कही उसने कुछ गलत तो नहीं कर दिया आखिर वो भी अलका से भरपूर प्यार करता था,…

काम ख़तम होते hi अलका अपने बैडरूम में एंटर करती है जहां अशोक उसके लिए माहौल सेट किये हुवे था….






कमरे का माहौल देख के अलका चौंक जाती है और सवालिया नज़रो से अशोक की और देखने लगती hi.. अशोक बड़े प्यार से उसे अपने गॉड में बिठा लेता है और दुलारते हुवे कहता है

अशोक- तुम क्यों इतना परेशां हो रही हो जब मैंने खा मुझे कोई दिक्कत नहीं मई तुम्हे समझता हु..

अलका- पर अशोक गलती तो हुई है न..

अशोक- देखो मेरे साइड से तुम्हे कोई रोक टोक नहीं है तुम अपनी लाइफ अपने तरह से जियो अपने एडवेंचर्स पुरे करो.... और चीजों से मुझे कुछ लेना देना nahi..aur दूसरी बात तुम्हे पता है मैंने जाने वाला हु फिर जाने कब आऊंगा तो क्या अपना ये साद फेस के साथ मुझे भेजेगी…??

अलका ना में सर हिलती है..

अशोक उसे लाइट करने के लिए एक ड्रिंक देता है जिसे पहले तो वो मन करती है फिर अशोक के फाॅर्स करने पे पि जाती है और फिर शुरू होता है उनके पिने का दौर…. दोनों एक के बाद कई पेग पी चुके थे .. नशा दोनों को होने लगा था.. अलका अब हल्का महसूस करने लगी थी… तभी अशोक उसके होंटो को चुम लेता है जिसका पहले तो अलका विरोध करती है पर बाद में वो खुद hi खुद को नहीं रोक पाती है और अपने पति अशोक के बहाव में बहने लगती है…

अशोक- तो फिर आज एक बार पलंगतोड़ प्यार करे क्या??

अलका- बात पहले की होती तो खुद अपने और अशोक के कपडे कब का उतर देती पर उसके मन में गीत का भाव अब भी था तो जवाब में वो बस हाँ में गार्डन हिला के अपना स्वीकृति दे देती hai..aur फिर पूरी रात अशोक अलका को रौंदता है अलका भी हर चुदाई के बाद पहले की तरह खुलने लगी thi..subah तक अशोक अलका के छूट से विशाल जितना तो नहीं पर 3 बार पानी निकल चुक्का था.. और फिर थक के दोनों मिया बीवी सो जाते है..

अगले दिन एक नयी सुबह बाये उम्मीदों के साथ होती है.. ऊपर से तो घर में सब पहले की तरह था.. पर भीतर से अलका अब अशोक की बीवी थी बस उसका वो रोमांच कही डैम तोड़ चुक्का था..

अलका को इस तरह उदास देख के विशाल को भी कुछ ाचा नहीं लग रहा था और पूछने पे अलका वैसे भी नहीं बता रही थी तो उसे ये भी समझ नहीं आ रहा था की वो करे तो क्या करे.. खैर जैसे तैसे दिन गुज़रता चला जाता है और इस बिच अलका विशाल को हाथ तक नहीं लगाने देती एक तरह से उस से दुरी बना लेती hai..is बात को अशोक नोटिस कर चुक्का था..

एक रात अशोक और अलका आपस में बात कर रहे होते है..

अशोक- तुम विशाल को और खुद को दोनों को पुनीश क्यों कर रही हो अलका?

अलका- क्या मतलब???

अशोक- उसका विशाल के लिए बदलाव को ले के बात करता है… और कहता है देखो पहले तुमने उसपे इतना कुछ लुटाया और बी एक डैम से बदल जाओगी तो वो मेंटली परशान hoga..tum पहले की तरह एन्जॉय कर सकती हो इतस तोत्तालय फाइन मैं तुम्हे नहीं रोक रहा हु इस बात को समझो..

अलका- (अलका को भी अब पहले से बहुत हल्का महसूस होने लगता है वो पूछती है) पर अशोक तुम्हे कोई परेशानी नहीं होगी??

अशोक- पर वॉर कुछ नहीं तुमने उसके अंदर के बचपने को ख़तम कर के एक मर्द को जगा दिए है अब अगर तुम्हारा बर्ताव इस तरह का रहा तो वो नशा वगैरह न करने लग जाये.. तुमने जो ब्रेकअप कर लिया है उस से..

अलका- कह तो तुम सही रहे हो एंड सच कहु तो मुझे भी ाचा नहीं लग रहा है पर मैं क्या करू..?

अशोक- पहले की तरह hi पेश आओ उसके साथ

अलका- तुम्हारे होते??

अशोक- पहले भी मेरे होते hi तो तुम करते थे न अब भी एन्जॉय करो मैं नहीं रोकूंगा..

अलका- वैसे एक बात कहु

अशोक- हम्म बोलो

अलका- ाचा तो मुझे भी उसके साथ बहुत लगता है. और हसने लगती है..

अशोक- तो बस तुम वो करो जो तुम्हे ाचा लगे… और फिर वो अलका के होंठो को चुम लेता है और उसे अपने गॉड में बिठा के उसके अंगो के साथ खिलवाड़ करने लगता hai…alka भी इसमें उसका पूरा पूरा साथ दे रही थी…

अलका- अशोक तुम बहुत अचे हो … कोई और होता तो बहुत ड्रामा होता पर तुमने सब संभाल लिया थैंक यू एंड ी लव यू…

अशोक हस्ते हुवे अपना काम जारी रखता है…






अलका अशोक के बहो में बिलकुल नंगी अपने जिस्म के साथ हो रहे खेलवाड़ को एन्जॉय कर रही थी.. अशोक अलका के चुचिओ को मसलते हुवे उसके पीठ और गार्डन पे चुंबनों का बौछार कर देता है…

Alka-aaj मैं तुम्हे ऐसा ब्लोजॉब दूंगी की तुम्हारा दिल खुश हो जायेगा.. ये कह के उसके लुंड के सबसे सेंसिटिव पॉइंट यानि छेद पे जीभ फेरने लग जाती है






अशोक- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh wwwwwwwwwwooooooooowwwwwww तुम सच इ जादूगरनी हो मर्द को खुश करना आता है तुम्हे…. uuuuuuuuffffffffff

Alka-abhi खान कुछ किया है अशोक अभी तो जादू दिखाना बाकि है इतना कह के वो अशोक के लुंड को मुँह में भर लेती है और पुरे जोश में उसका लुंड एक hi बार में अपने गले तक उतर लेती है…






अशोक मनो जैसे सातवे आसमना पे चला जाता है.. अलका अपने मुँह का का दबाव बढ़ाते हुवे अपने मुँह को आगे पीछे कर रही थी…

अशोक- ooooooooooohhhhhhhhhhh फ़क.. ु फूकिंग व्होरे..

अलका- यस ी ऍम योर व्होरे…

अशोक- उसे जश दिलाते huwe..teas करता है सिर्फ मेरी या….?

अलका- हाँ अशोक तुम्हारे bête की भी रैंड हु में… यही सुन्ना छह रहे थे न…

Ashok-uuuuuuufffffffffffff अब तुम आ रही हो अपने पूरे अंदजा में रॉकिंग अलका… ऐसे hi चुसो मेरी जान…

अपनी टैरिफ सुन के अलका को खुसी होती hi है पर अब वो अशोक से पहले से भी ज्यादा प्यार करने लगी थी,.. जिसके लिए वो अपना जान भी न्योछावर कर दे…

अलका- जान नहीं बेबी मुझे गली दो रंडी बोलो चिनार बोलो जो मन आये बोलो एब्यूज me…main तुमपे लूट गयी अशोक तुमने जीत लिया है मुझे.. तुमपे अपनी जान भी दे दू अगर मानगो तो..

अशोक को समझ नहीं आता वो अब जवाब में क्या बोले पर कही उसके मन में एक फंतासी ने जन्म ले लिया था वो आज मौका ाचा है देख के बोल देने की सोचता है…

अशोक- जान नहीं पर कुछ और मांगू तो दे पाओगी…

अलका- तुम जॉब hi मानगो उसके लिए हाँ है..

अशोक- बिना सुने हाँ कर रही हो सुन तो लो…

अलका- मुझे उसकी जरुरत नहीं लगती, तुम्हे लगती है तो बोलो

ashok-meri एक फैंटसी है पूरी कर पाओगी… ??

अलका- हाँ क्यों नहीं बताओ कैसे छोड़न चाहते हो अपनी अलका ko…(alka को लगा सायद फिर से हाथ पेअर बंधेगा या उसी टाइप का कुछ)

ashok-himat जुटते हुवे बोलता है.. मई चाहता हु तुम मेरे सामने यानि मेरे होश में विशाल से चूड़ो …

अलका के ऊपर अशोक ने आज दूसरी बार बिजली गिरा दिया था…

अलका- ये क्या कह रहे हो तुम्हे पता तो है…?

अशोक- हाँ प्लस

अलका- नहीं नहीं अशोक ये न करवाओ मुझसे plss...mujhse ये नहीं हो पायेगा समझो तुम मेरी जान ले लो पर ये नहीं हो पायेगा

अशोक- हो जायेगा अलका तुम्हे मेरे लिए करना hi पड़ेगा ये... मैंने तुमदोनो के पहले भी देखा है पर इस बार चुप के नहीं देखना चाहता हु सामने से तुम्हे चुड़ते देखना चाहता हु..

अलका के ज़िन्दगी में ये दिन तो आना hi था पर ऐसा ये कभी उसने सोचा न था....

Alka-kaise करू तुम्ही बताओ तब की बात कुछ और थी अब की और है मुझे पता होगा तुम मुझे देख रे हो फिर मैं कैसे कर पाऊँगी…

अशोक ेमोतनली ब्लक्मैल करे लगता है- एक बस यही ख्वाईस थी मेरी और ये फंतासी जगाई भी तुम हो और जो मैं मांग रहा हु तुमने मन कर दिया..

अलका को भी अशोक को ऐसे मना करना ाचा नहीं लग रहा था पर उसकी मांग hi ऐसी थी की पूरा कर पाना मुश्किल tha…isliye अलका टॉपिक बढ़ने से ज्यादा अशोक को डिस्चार्ज करने पे फोकस करने lagi..aur मुँह के दबह अशोक के नसों में बढ़ने लगती है…

अशोक इतना तो जनता था की एक बार में ये मान जाने वाली बात नहीं है और अगर अलका से उसकी बात मनवानी है तो उसकी प्यास बढ़ानी पड़ेगी तब जा कर उसके अंदर की रंडी बहार niklegi…is लिए अशोक भी अपने लुंड के झटके मरना जारी रखता है इनफैक्ट उसे झटके लगाने की भी जरुरत नहीं थी क्यूंकि वो काम भी अलका hi कर दे रही थी..

अलका के मुँह के कसाव और गर्मी ने अशोक के लुंड को जल्दी hi पिघलने लगती है..

अशोक- मेरा हो हाय मैंने आने वाला हु…. ये सुन के अलका उसके लुंड को अपने मुँह से निकल लेती है और अपने दोनों भरी चुचिओ के बिच दबा के अपने चुचिओ को छोड़ने लगती है..

अशोक बेचारा इतना कुछ झेल नहीं पता और उसके लुंड से पिचकारी निकल पड़ती है…






अशोक के झाड़ जाने के बाद वो पष्ट पड़ने लगता hai…aur अलका को डिस्चार्ज किये बिना सो जाता है.. जो की इस से पहले उसने कभी नहीं किया tha…alka को दुःख भी होता है अश्क ने उसकी इतनी बड़ी गलती माफ़ कर दी पर वो उसके लिए कुछ कर नहीं पा रही hai…alka फिर वही अशोक से चिपक के सो जाती है…

अलका- अशोक ी व यू..

अशोक ी लव यू तू बेबी






अलका- फिर मुझसे नाराज क्यों हो रहे हो??? नाराज मत हो न प्लस… और कहहुद hi अपनी गांड हिला के अशोक का जोश बढ़ने लगती है… पर अशोक कोई खास इंटरेस्ट नहीं दिखा रहा था..

अलका- ाचा बाबा मुझे थोड़ा टाइम दो मैं देखती hun…aur फिर अलका वैसे hi अशोक से चिपक के सो जाती hai…ye बात बोल के अलका ने कही न कही अपनी स्वीकृति दे दी थी और साथ hi अशोक को दिया था एक नया उम्मीद…

नेक्स्ट नाईट…

आज एक बार फिर से अलका और अशोक के कमरे में दोनों मिया बीवी एक दूसरे के बदन से चिपके हुवे थे…

अलका घोड़ी बानी हुई थी और अशोक पीछे से धक्का लगा रहा tha…aur पूछता है तो तुमने फैसला कर लिया?

अलका- किस बारे में…?

अशोक जिसके लिए तुमने कल टाइम माँगा था.. अलका तुम टाइम मांग रही हो लेकिन मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं है तुम्हे देने को तुम्हे जल्दी hi कुछ करना hoga..waise भी मेरे जाने के बाद विशाल को hi तुम्हे संभालना है…

अशोक झटके लगा रहा था और अपनी बात मनवाने की ज़िद कर रहा था.. उसे पता था की ये अलका की सबसे कमजोर घडी है इस वक़्त उस से कुछ भी करवाया जा सकता है और अलका भी जो की वासना के नशे में कुछ भी कर सकती है किसी भी हद तक जा सकती है सिसकते हुवे पूछती है तुम सच में ऐसा चाहते हो....?

अशोक- हाँ

अलका- ठीक है करती हु कुछ..

अशोक अलका की हामी सुन के तेज़ तेज़ झटके मरता है…

Alka-uuuuuffffffffff अशोक ये क्या मांग रहे हो तुम्हारे होश में होते हुवे मैं कैसे शुरू कर पाऊँगी उसके sath…aur झटके मत रोकना प्लस कल भी तुम मुझे ऑर्गज़्म दिए बिना सो गए थे…

पर अशोक और अगले hi पल उसके छूट में अपना पानी चोर देता है… और बगल में लेट जाता है…

अलका- हो गया तुम्हारा???

अशोक- हाँ

अलका- पर मेरा क्या…?

अशोक- तभी तो कह रहा हु बुला लो.. वैसे भी मुझे नींद आ रही है तुम उसी के साथ कर लो आज और जब पक्का मन बन लो तब बता देना मैं शो देखने के लिए जग जाऊंगा

अलका- मुझे पता है तुम ये जान बुझ के मुझे आधे में चोर रहे हो..

अशोक झाड़ जाने के बाद अलका से चिपक के सो जाता है और आज एक बार फिर से अलका को प्यासा hi चोरड एटा है जो की उसके प्लान का एक part था…

अशोक ने कल भी अलका के छूट का पानी नहीं निकला था और आज भी बिना निकले सो गया था…

अलका एक अलग कश्मकश में फांसी हुई थी… अंदर की औरत उसे ये करने की इजाज़त नहीं दे रही होती है पर जिस्म की भूख उसे आगे बढ़ने को कहती है..

अलका इस असमंजस में फास्ट हुवे अपने छूट में ऊँगली करने लगती है…






uuuuuffffffffff अशोक ये क्या मांग रहे हो तुम्हारे होश में होते हुवे मैं कैसे शुरू कर पाऊँगी उसके साथ…

अलका- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उउउउउउउफ्फ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ और हफ्ते हुवे कहती है ठीक है फिर और इतना कह के कांपते हुवे हाथो से मोबाइल उठा के उसे मैसेज करने लगती है...

मैसेज काफी देर तक सीन नहीं देख के अलका विशाल का नंबर डायल कर देती है.. आज उसके दिल की धड़कने कई गुना तेज़ राफ्तेर से बढ़ी हुई थी.. डायल करने में उसके हाथ कैंप रहे थे उधर अशोक कल hi की तरह खर्राटे लेने लगा था.. उसे खर्राटे लेते हुवे कोई आधा घंटा हो चुक्का था जिस से अलका को ये भरोसा हो जाता है की अशोक सो गया है और फिर वो कॉल कर hi देती है..






उधर से आवाज़ आती है जिसका जवाब अलका अशोक की तरफ देखते हुवे देती है hello विशु पापा सो गए आजा…

आज बहुत दिनों बाद अलका ने विशाल को बुलाया था ो बिना रुके भागते हुवे अलका के कमरे में जाता hai..jhan अलका एक काळा रंग की पारदर्शी ड्रेस में उसका वेट कर रही थी..






ड्रेस इतना पारदर्शी था की उसका ान गैंग दिख रहा था उसकी पतली कमर गोल गोल संतरे जैसी चूचिया और उसकी पतली धारीदार छूट..

अलका- कैसी लग रही है ये ड्रेस?

विशाल- अभी तो बेकार लग रही है ये… उतर दो…

अलका किसी अछि घुलम की तरह अपने मालिक के बात को मानते हुवे एक hi झटके में अपने गोर गुलाबी जिस्म को उस काळा पारदर्शी कपडे से आज़ाद कर लेती है…






विशाल- माँ आज बड़े दिनों बाद बुलाया..

अलका- अरे तेरे पापा चोरे तब न तुझे bulau…tum दोनों बाप bête ने मिल के मेरी ऐसी की टेसी कर दी है… च लैब और समय मत बर्बाद कर बहुत तरसी हूत ेरे लिए/….

विशाल- मेरे लिए या मेरे इस लुंड के लिए…

अलका- हाँ बीटा तेरे इस लुंड के लिए जोट ेरे पास है/…. आना विशु कितना तड़पाएगा मुझे…

उसके बाद अलका खुद विशाल के पास चल के जाती है और उसे सोफे पे धक्का मर के गिरा देती है और फिर उसके लुंड को मुँह में भर के चूसने लगती है…






विशाल भी टंगे फैलाये आराम से अपना लुंड चुसवा रहा था.

विशाल- ooooooooohhhhhhhhhhhhh कितने दिनों से तरस तरह था मैं इसके लिए….

अलका- अब नहीं तरसने दूंगी मेरे bête…aur पुरे जोर जोर से विशाल का लुंड चूसने लगती है..

विशाल- बड़े जोश में लग रही हो माँ

अलका- इतने दिनों बाद जो िला है तू मेरे बचे…

विशाल- हाँ माँ ऐसा लग रहा है सालो बाद मिल रहा हु.. और मेरे से रहा भी नहीं जा रहा अब..

अलका- तो रुका क्यों है कर ले अपने मन की आजा दाल दे अपना लोढ़ा मेरे छूट me..ye कह के अलका सोफे पे hi उसके सपोर्ट को पकड़ के झुक जाती है






विशाल अलका को अपने आगोश में भरते हुवे एक करार झटका मरता है और एक बार फिर से अलका के छूट में खलबली मचा देता है.. आज बहुत दिनों नाद कोई इतने अंदर तक गया था जितना विशाल का लुंड जाता है…

अलका- uuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मर गयी कितनी बार कहु आराम से किया कर.

विशाल- अब आराम से नहीं होता माँ तुझे देख ke..aur विशाल झटको की बारिश कर देता है…

अलका भी पुरे जोश में विशाल का साथ दे रही थी और उसके हर झटके के बदला अपनी गांड को पीछे झटक के देती है….

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh अब जा के मेरे छूट को लुंड फील हो रहा है ऐसे hi छोड़ bête uuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffff

विशाल- धीरे बोल रंडी तेरा पति सोया है जग जायेगा…

अलका- जागने दे मैं नहीं डर्टी तू छोड़ फाड् मेरी छूट को…

विशाल- ठीक है फिर ले मेरी रंडी मा अब तू ले मजा मेरे धक्को का uuuuuuuffffffffff

और कर्मा अलका के चूतड़ और विशल के जांघो के टकराने से पहात पहात की आवाज़ के साथ गूंजने लगता है…. काफी देर तक ऐसे झुक के छोड़ने से अलका के कमर में दर्द होने लगा था,,.. वो विशाल से बीएड पे चले को कहती है.. विषा भी अलका को गॉड में उठा के बीएड पे ले जाता ै और पहुंचते hi बीएड में किसी पुतले की तरह फेंक देता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh आराम से तू तो जानवर hi बन जाता है.

विशाल- बिना कुछ बोले अलका क टंगे उठा के उसकी छूट पे अपनी जुबान रख के चूसने लगता है…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh चाट कुत्ते ऐसे hi चाट मेरी छूट… बहुत फड़क रही है ईई

विशाल- आज तेरे छूट के फड़क गायब कर दूंगा मेरी जान चिंता मत कर.. और जोर से उसके चुचो को मसल देता है…






अलका इस तरह चुचिओ के मसलने से चिहुँक उठती है…

अलका- aaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuucccccccccccccchhhhhhhhhhh ुकड़ेगा hi लेगा क्या अब दाल भी दे या फिरफ चुस्त hi रहेगा…

विशाल- बहुत तडपयी है तू मुझे कुछ दिनों से जब तक तू चुदाई की भीख नहीं मांगेगी नहीं डालूंगा…

अलका- ufffffffffff विशु छोड़ दे bête अपने माँ को क्यों तड़पा रहा hai…dekh मेरी छूट पानी बहा रही है तेरे लुंड के लिए.. अब दाल के छोड़ अपनी अलका को…

विशाल- ये हुई न बात मेरी रंडी maa…aur विशाल एक करारा झटका मरता है की अलका की जोर की चीख निकल जाती है…






चीख को दबाने के लिए विशाल अपने होंठ अलका के होंठो पे रख देता है.. और पुरे जोश में अलका के छूट में अपना लुंड डालता है.. अलका भी जवाब में अपनी गांड उठा उठा के चुदाई करवा रही थी … अलका जोश इ के फिर से अपना आप खोने लगती है और अशोक का नाम ले ले छोड़ने लगती है… (अगर सोया रहा तो अलका की फंतासी पूरी होगी और जगा तो अशोक की.. और वायदे के मुताबिक अलका को आवाज़ दे के जगाना था अब जाए या नहीं ये उसकी जिम्मेदारी थी..)

अलका- देखो अशोक तुम्हारे सामने आज फिर विशाल मुझे छोड़ रहा है…. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ बिलकुल मर्द बन गया hai…..dekho कैसे अपनी माँ और तुम्हारी बीवी को छोड़ रहा है..






पर अशोक के साइड से कोई हरकत नहीं होती उसका खर्राटा बजता hi रहता है.. जिस से अलका कन्फर्म हो जाती है की एटलीस्ट 2-3 घंटे के लिए ये नहीं जागने वाला और इतने में वो अपनी प्यास बुझा hi लेगीइ

विशाल- आज फिर से सुला दिया है क्या??

अलका- नहीं आज नहीं..

विशाल- फिर चिल्ला क्यों रही है साली जग गया तो..

अलका- शराब पि थी और 2 बार पानी निकला था इस लिए थक के सोया है ये नहीं जगता अभी और इस राउंड के बाद तेरे कमरे में चलेंगे जहां मुझे तू एक बार रगड़ के छोड़ना की मेरी ये बुर शांत हो जाये…

विशाल- ाचा फिर ठीक है…

अलका- तू कब से डरने लगा.. तू तो जानबूझ के इनके सामने मुझे नंगी कर के छोड़ा है कई बार..

विशाल- अरे डरता नहीं हु बस मजा खराब न हो जाये…. और फिर विशाल अलका को चूमने और छोड़ने लगता है..

अशोक के तरफ से कोई हरकत नहीं होता अलका को विस्वास हो जाता है की अशोक सच में नींद में hai…isliye वो एक कदम आगे बढ़ाते हुवे अशोक के लुंड को सहलाने लगती है.. और सहलाते सहलाते चाटने और फिर मुँह में भर लेती है…..






अशोक के साइड से कोई खास प्रतिकिर्या नहीं nikalti…aur विशाल अलका कैग एंड पे कहते मरने लगता है उउउउउउउउफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ साली रैंड दोनों लुंड लेने का इरादा है क्या???

अलका- हाँ दोनों hi मेरे लुंड है मैं दोनों लुंगी इतना कह के वो अशोक के लुंड को चूसना जारी रखती है और आगे से विशाल अपने धक्के..

पूरा बीएड हिल रहा था और हिल रहा… माँ अब घोड़ी बन जा सामने से बहुत देर से छोड़ रहा हु अब पीछे से लूंगा तेरी…

अलका- ठीक है रुक.. कह के पोजीशन चेंज करने के लिए अशोक का लुंड निकलती है पर निकल नहीं पति उसके सर पे एक बहरी दबाव था जो उसके माथे को अशोक के लुंड की तरफ दबा के रखा था… अलका को लगता है विशाल ने उसका सर दबाया है वो बोलती है

अलका- क्या कर रहा है …..?/ तू क्यों मेरा सर दबा रहा है…? छोड़ेगा तभी पलटूँगी न…

विशाल- मैंने क्या दबाया है ये कहते hi जब उसकी नज़र अलका के माथे की तरफ जाती है तो विशाल की गांड फैट जाती hai….uske मुँह से बस maaaaaaaaaaaa निकल पता है…

विशाल की आवाज़ से अलका जब नज़रे उठती है तो पति है वो हाथ विशाल का नहीं अशोक का था…

अब अशोक उठ के अपना लुंड अलका के मुँह में पेल देता hai…aur उसके मुँह को छोड़ने लगता है.






विशाल लुंड निकल के जैसे hi भागने को सोचता है अशोक उसका हाथ पकड़ के रोक देता है..

अशोक- don’t स्टॉप… जो सुरु किया है उसे ख़तम करो पहले…

मरता क्या न करता विशाल डरते डरते झटके लगाना जारी रखता है…

एक बार को अलका भी चटपटा के हटने की कोशिश करती लेकिन अशोक के चंगुल से निकल नहीं पाती और लास्ट में अपना हथ्यार दाल देती है….

विशाल सवालिया नज़रो से अलका को देखता है…. मनो पूछ रहा हो क्या जरुरत थी लुंड चूस के जगाने की.. अब मैं क्या करू????

अलका- आँखों से इशारे में कहती है धक्के लगता रह अब पकडे गए है बच तो नहीं पाएंगे..

और विशाल भी हालत को समझते हुवे जोर जोर से झटके मरने लगता है.. वो बस कैसे भी अब डिस्चार्ज होना चाहता tha…kamre में सन्नाटा फ़ैल गया था हर तरफ बस ुबकि चढ़ी हुई सांसो की गूंज थी.. एयर तीनो अपने अपने पोजीशन पे लगे हुवे थे पर कोई कुछ बोल नहीं पा रहा tha..ki रभी ……विशाल के हिमायत के आगे अलका भी तब सर झुका लेती है जब इस ावक्वर्ड सिचुएशन में भी अशोक से कह देता है

विशाल- पापा अब मम्मी को घोड़ी बना do…is पोजीशन में काफी देर से कर रहा हु…

अशोक हस्ते हुवे कहता है हाँ क्यों नहीं लो मैंने चोर दिया तेरी माँ को बना ले घोड़ी…

अलका अशोक के गिरफ्त से छूटे hi सिद्ध घोड़ी बन जाती है और विशाल के लुंड को पकड़ के अपने छूट में ले लेती है और अशोक के लुंड को मुँह में… अलका झड़ने के बहुत क़रीब थे… वो शोक थी पर दरी नहीं थी इसलिए चुदाई के मजे ले रही थी..

पर विशाल जिसे इस सिचुएशन का बिलकुल भी पता नहीं था ो शोक भी था और डरा हुआ भी लेकिन काफी देर से चल रहे चुदाई से अब वो भी झरने के करीब आ गया था..

विशाल अब हैवानी को किट रह अलका को तेज़ तेज़ छोड़ने लगता है और अलका भी अशोक के लुंड को कास के चूसने लगती है उसके बॉल्स को चुस्ती है…










और फिर व घडी भी आ जाती है जिसका इंतजार उन्दोनो को tha…dono माँ bête बिना कुछ बोले निढाल हो के बीएड पे गिर जाते है… आगे दो तीन चूसै में अशोक भी अपना पानी बहा देता है…

अलका पीठ के बल लेट के हाफने लगती है की तभी उसे अपने पेट और छाती पे गर्माहट का एहसास होता है.. ये गर्माहट उसे विशाल और अशोक से मिल रहा था… दोनों बाप bête अपना पानी अलका के छाती और पेट पे गिरा रहे थे और अलका आंख बंद किये इस पल का आनंद ले रही थी…






ight dice roller

तीनो का पानी निकल जाने से बदन काफी हल्का हो गया था लेकिन मन अभी बह भरी था खास कर के विशाल का जो इनसब बातो से अनजान था… और बी वो आगे होने वाले रिएक्शन के बारे में सोच रहा था की वो क्या करे??? कैसे खुद को और अलका को बचाये अशोक से…

माहौल को लाइट करते हुवे अशोक hi बात शुरू करता है और सब कुछ विस्तार से समझाता है की तुम दोनों को डरने की ज़रूरत नहीं है… उसने बात इस तरह से राखी की विशाल कोप ता hi नहीं चला की अलका को इसके बारे में पहले से पता था.. उसके हिसाब से अलका भी पकड़ी गयी है उसके साथ…

अशोक की बता से कमरे का माहौल लाइट होने लगता है और विशाल दुबारा से अलका को छोड़ने की सोचता है वो व्ही अशोक के सामने उसके होशोवास me…aur फिर जल्द hi वो अलका को उठा के वापस घोड़ी बनता है और दूसरा राउंड भी लगाने की सोचता है और अलका भी अपनी गांड फैलाये लुंड लेने को तैयार थी बूत अशोक उन्हें रोक देता है..

अशोक- मैं चाहता हु किट ु अपनी ये एक्ससिटेमेंट अगले कुछ दिनों के लिए बचा के रखो… तुम्हारा माँ अक पहला थ्रीसम होने वाला है.. पहली बार वो दो दो लुंड लेने वाली है तो जगह और सिचुएशन भी अछि होनी चाइये…. इसलिए कल मॉर्निंग में हम अपने छतरपुर वाले फार्महाउस पे एक वीक के लिए षाले है और वहां इस रंडी को छोड़ना तुम जितना मन करे.. वहां इसके चीखो को सुनने वाला कोई नहीं होगा फिर चाहे जैसे मर्जी छोड़ लेना…

विशाल अब अशोक की बात काट तो सकता नहीं था इसलिए ठीक है बोल के अलका को चोर देता है..

और फिर तीनो लोग नंगे hi बीएड पे सो जाते है..






ये सोना अलका पे बहुत भरी पद रहा था क्यूंकि उसकी प्यास बुझी नहीं थी और आज वो अपने पति और bête के बहो में नंगी सोई है जो उसके जिस्म के साथ हर तरह का खेलवाड़ कर के उसकी प्यास बढ़ा रहे थे बस छोड़ते नहीं है….

सो जस्ट वेट फॉर थे नेक्स्ट....... हेर फर्स्ट थ्रीसम एडवेंचर….
 
Hello गाइस ी कण्व इस बार अपडेट डिले हो गया है एंड म सॉरी फॉर तहत अभी बिजी हूँ थोड़ा फ्री होते धमाकेदार अपडेट देता हूँ तब तक के लिए स्टे तूने
 
Episode-43

आने वाले सुबह के रोमांच के बारे में सोच सोच कर नींद तीनो के आँखों से धूल hi गयी thi..koi भी सो नहीं पा रहा था और दोनों बाप bête के बिच में फांसी अलका जल बिन मछली की तरह फड़फड़ा रही thi..jiska वजह भी दोनों बाप bête hi थे… जो अलका की प्यास को जितना ज्यादा हो सके बढ़ने पे लगे हुवे थे…. वो एक बार छोड़ना चाहती थी और बार बार अशोक और विशाल का लुंड अपने छूट में लेने की कोशिश करती तो है पर दोनों अपना लुंड वापस खींच लेते है… और वो तिलमिला के पेअर पटकती उन्हें नोचती पर दोनों बाप bête के इरादे तो स्पष्ट दिख रहा था…






अलका- प्लस एक बार छोड़ दो तुम दोनों में कोई भी मेरे से रहा नहीं जा रहा है.. ऊपर से तुम खिलवाड़ कर रहे हो मेरे साथ… विषा टब hi अशोक के साथ मिल गया bête…

विशाल बड़े hi हरामीपन से कहता है- अब उनकी बीवी छोड़ रहा हु तो मिलना पड़ेगा hi न

अलका- सिर्फ उसकी बीवी छोड़ रहा है अपनी माँ नहीं छोड़ रहा है भड़वे मादरचोद..

अलका का ये पागलपन देख के दोनों बड़े खुश होते है…

अशोक- विशाल और तड़पने दे इस रंडी को काली स्की साडी प्यास बुझानी है तुझे…

विशाल- क्यों पापा आप भी तो रहोगे..

अशोक- हाँ पर तेरी माँ को तेरा लुंड ज्यादा पसंद आ गया है सायद…

अलका- तुम दोनों मादरचोदो लुंड बुर कर रहे हो और सामने नंगी औरत टंगे उठा उठा के बोल रही है मुझे छोड़ो तो छोड़ा भी नहीं जा रहा है हिजड़ो…

अशोक- आज तुम्हारे शब्दों का जादू नहीं चलेगा अलका… जितनी मर्जी गली दो जितना मर्जी उकसाओ..

लास्ट में अलका मजबूर हो के अपनी उंगलिओ से अपनी छूट को रगड़ने लगती है की तभी विशाल उसके दोनों हाथो को पकड़ के ऊपर कर देता है और उसके छूट पे दो चार थप्पड़ मर देता है..






अलका बेचारे चटपटा के गिड़गिड़ाने लगती है और विशाल को गालिया देने लगती है..

अलका- बड़ा मादरचोद बीटा पीड़ा किया है मैंने… इसका बदला मैं तुमसे जरूर लुंगी विशाल देख लेना…

थोड़ी देर बाद अलका बीएड से उतरने लगती है तो विशाल फिर से उसे पकड़ लेता है

विशाल- अब खान चली माँ

अलका- चोर सुसु तो करने जाने दे

विशाल- तू सुसु नहीं ऊँगली करने जा रही है हमे पागल समझ है… यही मूत…

अलका- पागल हो गया है तू पूरा चल चोर… पर विशाल चोर्ने की जगह उल्टा उसे बीएड पे खींच लेता है और सच में अलका को बहुत तेज़ सुसु आयी थी… अउ रेज बीएड पे गिरने से उसका कण्ट्रोल खो जाता है और उसके छूट से पानी की धार फुट पड़ती है…






प्रेशर इतना जोरदार था की सीधे अशोक के मुँह पे जा के टकरा जाता है…

अलका- ooooooohhhhhhhhhhhooooooooo पि जाओ अब इसे तुम बाप bête…uuuuffffffffffff

छूट से बहती ये गर्मी से अलका को थोड़ी राहत तो मिलती है.. और फिर वो धीरे धीरे नींद के आगोश में चली जाती है.. कल बहुत बड़ा दिन होने वाला था इसलिए अशोक और विशाल भी अपनी एनर्जी बचा के रखना चाहते थे और वे दोनों भी सो जाते है…

अगली सुबह

सुबह सुअभ एक के लौ टेम्परेचर से कमरे का तापमान काफी गिर गया था अलका ज की बिलकुल अनंगी थी उस ठंड के मरे अपने bête के जिस्म से चिपक जाती है.. अलका के इस तरह चिपकने से विशाल भी अलका को अपनी आगोश में भर लेता है और अपनी एक तंग अलका के जांघो पे रखते हुवे उसे अपने अंदर में समेत लेता है जिस से उसका लुंड सिद्ध अलका के छूट को ठोकर मरने लग जाती hai…udhar अशोक को भी ठंड का अनुभव होने लगता है तो वो भी अलका से चिपक जाता है जिस से उसका लुंड अलका कैग एंड में धसने लगता है.. अलका दोनों बाप bête के बिच मनो सैंडविच बन गयी थी.

कमरे के ये दृश्य एक अत्यंत दुर्लभ दृश्य था जहां एक औरत संपूर्ण नग्न अवस्था में अपने hi पति और bête के बिच लेती हुई थी.. तीनो एक दूसरे के जिस्म को रगड़ क ीक दूसरे को गर्मी देने की कोशिस कर रहे थे… इसी तरह एक दूसरे के अंगो के साथ काफी देर तक खेलवाड़ करने के बाद अशोक उठ बैठता है और उन्दोनो को भी उठ जाने को कहता है…

अशोक- चलो उठ जाओ हमे फार्महाउस के लिए भी निकलना hai…jaldi जायेंगे तो ट्रैफिक नहीं मिलेगी

विशाल कोई और दिन होता तो जरूर नखरे करता लेकिन आज उसे अपनी नींद सैक्रिफीसे कर के जो रिवॉर्ड मिलने वाला था उसके लिए वो बिना समय गवाए उठ जाता है और सिद्ध अपने रूम में रेडी होने चला जाता है…

थोड़ी देर बाद विशाल रेडी हो के वापस अलका के रूम में आता है जहां अलका अभी भी सो रही थी जिसे देख विशाल अलका को जगाने लग जाता है….

विशाल- उठो माँ हमे निकलना है मैं और पापा रद्द भी हो गए अब बस तुम बाकि हो…

अलका भी अब उठ के बैठ जाती है एक नज़र घडी और विशाल की तरफ देखने के बाद उठ कड़ी होती है और अंगड़ाई लेते हुवे अपने मादक जिस्म की नुमाईश करते हुवे इठलाती हुई अपने bête की तरफ मुस्कुराते हुवे कहती है…

अलका- तू आज कुछ ज्यादा hi एक्ससिटेड हो रहा है…






सुबह की पहली किरण जब अलका के गोर नग्न मादक शरीर पे पड़ती है तो ऐसा लगता है जैसे मनो कोई स्वर्ण हिरन लेती हो… ये किरणे उसके शरीर के चमक को कुछ ज्यादा hi बढ़ा रही थी मनो कोई स्वर्ण आभूषण….. विशाल अलका के हुस्न में मनो खो hi जाता है.. अलका ने क्या खा उसने सुना भी नहीं बस मुँह फाडे अलका के हुस्न को घर रहा tha..alka अपने bête के हालत पे है देती है और गांड मटकते हुवे फ्रेश होने के लिए वाशरूम चली जाती है…

जल्दी hi अलका तैयार हो के हॉल में पहुंच जाती है जहां अशोक और विशाल पहले से hi उसका इंतजार कर रहे थे.. हल में प्रवेश करते hi विशाल और अशोक की नजरे एक बार फिर से हुश्न की मलिका कामदेवी अलका पे गड जाती है जो हटाए नहीं हैट रही थी और हेट भी तो कैसे अलका इस वक़्त इतनी कामुक और यौवन से लबालब लग रही थी… जिसके हरे क पोर से उसका यौवन चालक रहा था और उस यौवन को पिने के लिए बाप bête दोनों लालायित थे..






अलका इस वक़्त एक टाइट ब्लैक जीन्स और उसके ऊपर ब्राउन क्रॉप टॉप पहनी हुई थी.. टॉप इतना टाइट था की उसे दोनों चुचो के कसाव साफ़ झलक रहे थे और उसके बाद वो इतनी छोटी थी की उसमे से अलका क अगोरा चर्बीदार पेट और उसमे उसकी गहरी नाभि जो आकर्षण का मुख्या केंद्र थी विशाल और अशोक को ललचा रही thi…pet से नज़र निचे डालने पे टाइट जीन्स में उसकी जंघे और उसकी कसावट और फिर पीछे से उसकी निकली हुई गोल कासी हुई गांड uuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffff ऐसे हुस्न के मार को कोई कैसे बर्दाश्त करे….

विशाल- वाओ माँ लुकिंग सो हॉट

अलका- थैंक यू वैसे ब्रेकफास्ट का क्या सन है ??

अशोक- बेबी हम बहार hi कुछ हल्का फुल्का खा लेंगे अभी तुम उनसब के चक्कर में न पदों

अलका- हाँ ये भी ठीक है..

और फिर तीनो फार्म हाउस के लिए निकल पड़ते है…

रस्ते में हाईवे पे एक रेस्टोरेंट में रुक के तीनो नाश्ता कर ेके लिए गाड़ी से उतारते है.. रेस्त्रो में सभी की नजरे अलका पे hi जैम जाती hai…najro hi नजरो में अलका को कई लोगो ने छोड़ भी दिया था ये बात अलका और विशाल भी नोटिस कर चुके the…ki तभी विशाल अलका से उसकी कुछ पिक्स लेने को कहता hai..aur ालकभी मान जाती है और पोज़ बदल बदल के पैसा लेने लगती है…














रेस्त्रो के गेस्ट के साथ साथ स्टाफ और वेटर भी अलका से अपनी नजरे नहीं हटा पा रहे थे…. और कोई हटाए भी तो कैसे अलका का साधारण रूप भी किसी पे भी बिजली गिरा सकती thi..aur यह तो वो इतने भड़काऊ कपड़ो में थी जिस से उसका ान गैंग अपनी बनावट और उभर से लोगो को ललचा रहा था…

नाश्ते के बाद तीनो वापस गाड़ी में जाने लगते है की तभी विशाल को एक शरारत सूझती है और वो भाग के गाड़ी में बेथ जाता है और गेट लोक कर देता है.. अलका जो बहार कड़ी थी उसके लाख कहने पे भी गेट नहीं खोलता और बदले में अलका को एक टास्क देता है..

विशाल- गेट तभी खुलेगी जब आप अपनी ब्रा उतर के सिर्फ टॉप में आओगी…

अलका- तू पागल है??? यह दिन में इतने लोगो के बिच तू क्या कह रहा है

विशाल- फिर नहीं खोलूंगा ये गेट

अलका अशोक से कंप्लेंट करती है लेकिन अशोक भी उसकी कोई नहीं सनटैन और विशाल के हाँ में हाँ मिला देता है..

अलका- तुम लोग पागल हो गए हो… मुझे बदनाम कर डोज क्या

विशाल- बहन मत बनाओ या हिम्मत नहीं है तो हार मन जाओ

अलका हार मैंने वालो में से तो थी नहीं और हिम्मत की बात हो जाये तब तो बिलकुल भी नहीं..

अलका- ok लेकिन फिर जो होगा उसके जिम्मेवार तुम दोनों होंगे..

अशोक & विशाल- ok

अलका आखिर अपने bête और पति के जिद के आगे हार मन के हथ्यार दाल देती है और वो करने को राजी हो जाती है जो करना किसी भी औरत के लिए कोई आसान काम नहीं था… अलका का दिल बड़े जोरो से धड़कने लगा था.. इस तरह दिन दहाड़े पब्लिक प्लेस पे ब्रा उतरना उसे रोमांच भी दे रहा था और साथ hi दर bhi..akhir कर अलका तेज़ धड़कनो पे काबू करते हुवे अपना हाथ अपने टॉप के अंदर डालती है और ब्रा के हुक को खोल के उसे निकले की कोशिस करने लगती है.. उसके चेहरे का भाव बता रहा था की वो इस काम को करते हुवे कितना घबरा रही थी और साथ hi कितना एक्ससिटेड भी थी..






और अंत में अलका अपने कपकपाते हाथो से अपनी ब्रा को अपने टशरत से बहार निकल लेती है… उसके चेहरे पे कामुकता की लकीरे फ़ैल रही थी चेहरा बिलकुल लाल सा पद गया था… जोश और उत्तेजना में उइके दोनों पैरो के बिच जो लकीर थी यानि की उसकी छूट बहना सुरु कर देती ही…

ब्रा के निकलते hi अलका की बड़ी बड़ी जामुन के आकर के निप्पल उसके टॉप के अंदर मनो बगावत करने लगे हो… मनो वो भी अब आज़ाद होना छह रहे हो…






अलका एक कदम और आगे बढ़ाते हुवे सामने लगे एक पोल को अपने दोनों चुचिओ के बिच दबा देती है.. जिस वजह से उसके उभर ज्यादा अचे से दिखने लगे the…restro में बैठे सरे लोगो की नजरे अलका के ऊपर hi टिक जाट है तो वही पास खड़े कुछ आवारा लड़के सिटी बजा देते है जिस से अलका का ध्यान टूटता है और वो तेज़ कदमो से भागते हुवे वापस गाड़ी में बैठ जाती है…

गाड़ी में बैठते hi अलका की तेज़ सांसो से उसकी चुचिअ ऊपर निचे होने लगती है..

Alka-tum दोनों पागल हॉग ए हो ये सब क्या काया करवा रहे हो..?

अशोक- अरे चिल बेबी तुम्हे भी तो कुछ न्य अनुभव मिला न

अलका- मुझे नहीं चाहिए ऐसा कोई नया अनुभव दिन दहाड़े सबके सामने नंगी कर रहे हो मुझे..

विशाल तुरंत अपने हाथ अलका के टॉप में दाल देता है और उसके चुचिओ को दबाने लगता hi…

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है हाथ निकल…

विशाल- माँ तेरी चुचिओ को आज़ाद कर रहा हु….

अलका इस से पहले कुछ बोलती विशाल उसके टॉप को फाड़ देता है जिस से अलका की मोती और भरी चुचिअ बहार लटक जाती hai…aur इस से पहले अलका कुछ समझती या कुछ कर पति विशाल उसे सीट पे लिटा के उसके कमर को उठाते हुवे उसके जेन्स को खींच क ीक झटके में उतर देता है…






अलका विशाल के उतावले पैन को देखते हुवे खुद hi अपनी गांड और एक पेअर हवा में उठा देती हैए ुर विशाल अपना मुँह अलका के छूट पे रख के चूसने लगता है…

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है थोड़ा तो सब्र कर ले बस पहुंचने hi वाले है,,

विशाल- मुझसे सब्र नहीं होता माँ मेरा तो मन हो रहा है तुझे यही पे छोड़ना सुरु कर दू और छोड़ते छोड़ते फार्म हाउस ले जाऊ…

अशोक- दोनों की बाटे सुन के मुस्कुराते हुवे कहता hai....bahut आग लगी है तुम दोनों माँ bête में…

अलका- शट उप अशोक तुम समझाओ इसे ये पागल हो गया है…

अशोक- तुम्हारा हुस्न है hi इतना कामुक कोई भी पागल हो जाये और ये तो अभी अभी जवान हुआ hi है करने दो जो कर रहा है….

विशाल- माँ नखरे मत करो तुम्हारी इ बहती हुई छूट बता रही है तू कितना एन्जॉय कर रही हो…

अलका इस्पे कुछ नहीं बोलती… और विशाल जो की अलका को पूरी तरह से नंगा कर चुक्का था वो अलका को अपने गॉड में बिठा लेता है…






अलका जो की रात से hi वासना की आग में जल रही थी वो फ़ौरन विशाल के लुंड को अपने छूट में भर के बैठ जाती है और उसे गॉड में उछलने लगती hai..gadi अपनी राफ्तेर से फार्म की तरफ बढ़ रही थी और उसी राफ्तेर से विशाल अलका की छूट में अपने लुंड कोप ेल रहा था.. गाड़ी में अलका की सिसकारियां गूंजने लगी थी जिसे सुन अशोक भी अपने लुंड को बहार निकल के मुठ मरते हुवे ड्राइव कर रहा था…

थोड़ी दे में गाड़ी एक ऑफरोड पे चल पड़ती है ये रास्ता फार्महाउस तक जाता था और फार्महाउस एक सुनसान एरिया में होने के वजह से इधर किसी के होने का काम hi चांस था….

अचानक अशोक गाड़ी रोक देता है और अलका को बहार निकलने को कहता है… अलका सायद संकोच करती पर चुदाई की खुमारी में अब उसे किसी बात का संकोच नहीं था ो बिना समय गवाए कार से उतर जाती है साथ hi विशाल भी उतरने लगता है पर अशोक उसे गाड़ी में hi रोक देता है और अलका को गाड़ी के सहारे झुका के घोड़ी बना देता है और एक hi झटके में अपना लुंड अलका के छूट में उतर देता है…






अलका को भी कोई फ़र्क़ नहीं पद रहा था की उसकी छूट में विशाल का लुंड है या अशोक का वो फुल जोश में अपनी गांड अशोक के लुंड पे पटक पटक के अपनी चुदाई करवा रही thi…aur अशोक भी पुरे जोश में जटके लगा रहा था…

अशोक- देख विशाल कैसे तेरी माँ चुद रही है इस सुनसान सड़क पे कितनी बेशरम है तेरी माँ…

अलका- हाँ विशु देख तेरी माँ को तेरा बाप कैसे खुले में छोड़ रहा है uuuuuuuuuuufffffffffff

विशाल अपना लुंड हिलाये दोनों की बाटे सुन रहा था जब उस से बर्दाश्त नहीं होता तो वो भी फिर गाड़ी से निकल पड़ता है और अपना लुंड अलका के मुँह में दाल देता है..






अलका भी बिना किसी नखरे के अपने दोनों छेद को अपने पति और बेटे के लुंड से भर लेती है... जहां अशोक अपना लुंड उसके छूट के अंदर बहार कर रहा था तो वही विशाल उसकी मुँह को चोदे जा रहा tha..aur अलका पुरे जोश में अपनी गर्मी शांत करने के रस्ते पे आगे बढ़ चुकी थी की तभी अशोक अपना लुंड अलका के छूट से बहार निकल लेता है और

बोल पड़ता है.. अब जल्दी चलो गाइस बाकि का प्रोग फार्म पे जा के करते है…

अलका एक बार झड़ना छह रही थी पर अशोक भी जान बुझ कर अलका को आधे में चोर के गाड़ी में बैठ जाता है और अलका भी जा के विशाल के बागा में बैठ जाती है और फिर आखरी 500 मत्र का रास्त तय करते hi उनका फार्म हाउस आ जाता है जहां आज अलका को वो मिलने वाला था जिसका सोच सोच के उसकी छूट अपना पानी चोर रही थी….
 
अपडेट-44

फार्म हाउस पे पहुंचते hi अलका अपने कपडे ढूंढने लगती है पहनने के लिए पर वो ये तो भूल hi गयी थी की विशाल ने उसके कपडे उतरे नहीं थे बल्कि फाड् के फेंक दिया था हलति कार से अब अलका कार के अंदर बिलकुल hi नंगी थी और विशल और अशोक भी

अलका- (गुस्से में) ये जोट ु जोश जोश में कांड करता है न मुझे किसी दिन भरी कीमत चुकानी पड़ेगी तेरे चक्कर में

विशाल- मैंने क्या किया अब???

Alka-tune मेरे कपडे फ़ेंक दिए अब कैसे निकलू गाड़ी से

विशाल- के ों माँ पुरे रस्ते छुड़वाते आयी हो और बी फार्महाउस में जाने क लिए तुम्हे कपडे चाइये…

अलका- हाँ क्यूंकि अंदर स्टाफ भी है…

अशोक- अरे स्टाफ को मैंने छुट्टी दे दिए है तुम बेफिक्र हो के जाओ..

अलका के जान में जान आती है और वो फिर नंगी hi कार से बहार निकल जाती hai…aur घर के अंदर की तरफ बढ़ने लगती है…






अलका के गोल मटकते गांड के थिरकन को देख अशोक और विशाल दोनों की आए निकल जाती है…

विशाल- पापा एक बात बोलू..

अशोक- हम्म्म बोलो

विशाल- आप के बीवी की गांड बहुत कातिलाना है…

अशोक- हाँ यार पर साली मरना तो दूर चुने भी नहीं देती

विशाल- (आपको नहीं देती मैंने तो फाड़ बी दिया है आपके बीवी की गांड) तो क्यों न आज इसकी गांड गाड़ी जाये..

अशोक- मुझे नहीं लगता वो गांड मरने देगी

विशाल- तरय तो करते है न…

और फिर दोनों बाप bête भी अलका के पीछे पीछे घर के अंदर चल पड़ते hai..alka की जब नज़र दोनों बाप bête पे पड़ती है और जब उसे एहसास होता है की दोनों उसकी गोल मटोल गांड को देख रहे है तो अलका और भी ज्यादा अपनी गांड को हिलोरे लगाने लगाने लगती है…






देखते hi देखते तीनो हॉल में पहुंच जाते है और फिर सोफे पे बैठ थोड़ी नाश्ता वगैरह करते हुवे आगे का प्लान डिस्कस करने लगते है.. नाश्ता ख़तम होते hi अशोक अलका से कहता है

अशोक- अलका तुम्हारे बैग में मैंने कुछ रखा है मैं चाहता हु तुम वो पहन के आओ..

अलका- क्या है?

अशोक- देख लो तुम्हारे लिए hi है तब तक हम तुम्हारा वेट करते है.. अलका भी अशोक की बाटे मानते हुवे अपने कमरे में चली जाती है जहां अशोक ने एक बैग में उसके लिए कुछ रखा था..

इधर हॉल में अशोक और विशाल बाटे कर रहे थे और अलका का वेट कर रहे थे पर अलका अभी भी अपने कमरे में hi थी वो बहार नहीं आयी थी जिस से विशाल उतावला हुवे जा रहा था वो अशोक से पूछता है की जा के देखु ????? पर अशोक उस से वेट करने को कहता है.. विशाल बोरियत से बचने के लिए मोबाइल निकल के उसमे किसी से चाट करने लगता है अउ रेज hi थोड़ा और समय निकल जाता है की तभी उनके कानो में एक आवाज़ गूंजती hai…Hello गुयस्सस्स्स्स….

विशाल और अशोक जब नज़रे उठा के दखते है तो सामने कामदेवी अलका थी






अलका इस वक़्त एक काळा रंग की लिंगरी में थी जिसमे उसका गोरा बदन अपने bête और पति पे बिजली गिरा रही थी… अशोक और विशाल मुँह खोले अलका के हुस्न में खो गए थे…

अलका- ऐसे क्या देख रहे हो…..?

विशाल- माँ आप सेक्स बम लग रही हूँ

Ashok-wow अलका यू अरे सेंसेशनल..

अलका- अभी तुमने सेंसेशंस देखे hi खान है… इतने में hi तुम दोनों का ये हाल हो gaya…itna कहते hi अलका अपनी दोनों चूचिया ब्रा से बहार निकल लेती है..






अलका की दोनों कासी हुई चुचिअ ब्रा से बहार आते hi थिरकन के साथ अशोक और विशाल को ललचाने लगती है… उसपे उसकी गुलाबी स्त्रव्बेर्री जैसी निप्पल्स मनो जैसे उनमे से कभी भी दूध टपकने को बेकरार tha..chuchiya बह इतनी कसी हु और उसपे तना उसका निप्पल जैसे दबा दो तो दूध की नदिया बहा दे..

अलका- क्या देख रहे हो आज रात ये सब तुम्हारे लिए है पीना नहीं चाहोगे इनके रास को..??? ये कहते हुवे अलका बड़े कामुक अंदाज़ में डांस करने लगती है और अपनी चुचिओ को मसलते हुवे उन्हें ललचाने लगती है..






विशाल- क्यों नहीं आज तो तेरे चुचिओ का सारा रास निचोड़ लेंगे हम…

अलका- इसी के लिए तो आयी हूँ यहां तुम दोनों के साथ… ये कहते हुवे अलका उनकी तरफ अपनी गांड घुमा देती है और क पतली सी पंतय जो मात्रा एक डोरी जितनी पतली थी और ऊके दोनों चूतड़ों के बिच धसी हुई थी उसे उतरने लगती है…






पंतय के उतारते hi उसके गांड में कुछ घुसा हुआ नज़र आता है जिसमे लिखा था Don’t स्टॉप फ़क में हार्ड…

अलका का ये अंदाज़ देख के दोनों बाप bête के गाला सूखने लगता है और खून दोगुनी राफ्तेर से दौड़ने लगता है.. अभी अलका ने अपनी पंतय को पूरी तरह से उतरा भी नहीं था की विशाल किसी शिकारी जानवर की तरह अलका पे झपट्टा है और उसे वही पड़े सोफे पे लिटा देता है और उसके गांड में हाथ डालते हुवे उसके कमर को उठा के उसकी पंतय एक झटके में खींच के उतर देता है…






अलका भी अपने bête के उतावले पैन को देखते हुवे अपनी गांड उठा लेती है जिस से विशाल को उसकी पंतय उतरने में कोई दिक्कत न ho…aur अलका खुद भी तो 2 रात से कामवासना की आग में जल रही थी जहां हर बार अशोक उसे गरम कर के चोर दे रहा था.. आज वो मौका आ गया था जब अलका अपने बदन में जल रही आग को शांत कर ले और पूरी जी खोल के है अपनी चुदाई करवाए क्यूंकि अब न उसे किसी से पकडे जाने का डार्ट है ने है उसकी चीखो को सुनने वाला कोई tha…aaj अलका यहां किसी की माँ या बीवी बन के नहीं एक रंडी बन के आयी थी जिसे बस मतलब था तो अपने जिस्म की गर्मी को शांत करने से फिर चाहे वो उसके पति के पानी से शांत हो या उसके bête के पानी से…

अपने bête के उतावले पैन को और बीवी के गर्मी को देख अशोक का लुंड भी हरकत करने लगता है पर वो अभी बहार बैठ के इसका मजा लेना छह रहा था…

विशाल अलका के छूट पे अपनी जीभ रख के उसे चाटने लगता है… और अलका भी जलबिन मछली की तरह तड़पते हुवे विशाल का सर अपने छूट में दबाने लगती है मनो आज उसे वापस से अपनी गीली छूट में घुसा लेगी…






अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ऐसे hi चाट इसे uuuuuuuuuuufffffffffffff बहुत तड़पाया है तुम बाप bête ने कल से आअज्ज्ज्ज पिजा इसका सारा रास

विशाल बिना कुछ बोले बस अलका के छूट पे अपनी जुबान फेर रहा था.. अलका को भी विशाल के जुबान के छुवन मात्रा से एक अनोखी राहत मिलने लगती है जिसके लिए 2 रात से वो तड़प रही थी… और अशोक ने भी सायद इस वजह से hi उसको तड़पा रहा था ताकि अलका खुल के चुदाई करवा सके बिना किसी लाज शर्म के

अलका- देखो अशोक तुम्हारा बीटा कैसे तुम्हारी बीवी की छूट में घुसे जा रहा है uuuuuuuuuffffffffffffff

अशोक- मैं देख रहा हु bête को भी और उसकी माँ को भी…

अलका- तो देखो न इसी के लिए तुम मुझे तड़पा रहे थे न 2 रातो से लो आज तुम्हारे मन की भी हो गयी… पति के सामने bête से छुड़ेगी आज एक बीवी uuuuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffff

काफी देर तक लगातार छूट चाटने से अलका का साबरा का बांध टूट पड़ता है और अलका के शरीर में अकड़न आने लगती है और वो एक जोरदार चीख के साथ विशाल का सर अपने छूट में दबाते हुवे विशाल के मुँह में hi अपना कामर्स बहाने लगती है…






और विशाल किसी कुत्ते की पिल्लै की तरह वो तब तक छत्ता रहता है जब तक उसका आखरी बून्द अलका के छूट से बहना बंद न हो गया हो…

सामने बैठा अशोक ये सारा तमाशा देख रहा था… कैसे उसकी बवि खुल के उसके सामने hi bête के मुँह में अपना पानी बहा रही है.. कितनी बेशरम औरत हो जाती है ये जब इस्पे वासना का बहुत स्वर हो जाता है…

अलका बीएड पे पड़े पड़े हाफ रही थी और विशाल भी उसके बगल पे लेट के अलका का काबू में आने का वेट करने लगता है साथ hi उसके चुचिओ से उसके चूतड़ों से खेलने लगता है…

काफी समय बीत जाने के बाद अशोक उठ खड़ा होता है और अलका को बीएड से उठा के खड़ा कर देता है और अलका को किश करने लगता है…






अलका भी पागलो की तरह अशोक के किश का जवाब देने लगती है और साथ hi उसके लुंड को हाथो में भर के मुठियाने लगती है… अलका तो आज यहां छोड़ने hi आयी थी उसे इस बात का कोई फ़र्क़ खान पड़ने वाला था की बीटा उसे चम रहा है या पति…

अशोक अपनी बीवी अलका को किश करते हुवे उसके चुचिओ को मसल रहा होता है तो अलका अशोक के लुंड को दोनों एक दूसरे में खो से गए the…ki तभी विशाल उठ खड़ा होता है और पीछे से अलका से चिपक जाता है…






अलका अब दोनों हाथो से दोनों बाप bête के लुंड को सेहला रही थी और दोनों बाप bête उसके गार्डन को तो कभी छाती को चुम रहे थे…

अलका- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh तुम दोनों आज मुझे पागल कर डोज… कितना सख्त लुंड हो रहा है तुम दोनों का मेरे छूट का कचूमर निकलने वाला है आज तो…

विशाल- तू है hi इतनी कमल की माँ इसमें हमारा क्या दोष..

अब विशाल अलका का सर दबाते हुवे निचे बिठा देता है और अलका से अपना लुंड चूसने का इशारा करता है..

अलका फ़ौरन विशाल का लुंड पकड़ के अपने चेहरे पे रगड़ने लगती है…






अलका- uuuuuuuufffffffffffff कितना बड़ा लुंड है तेरा एक डैम गधे के लुंड के जैसा uuuuuuuuuufffffffffffff मन करता है खा hi जाऊ इसे…

और फिर अलका विशाल के लुंड को मुँह में भर के चूसने लगती hai…gugguugguuuuuuggug की आवाज़ के साथ कमरे में अलका के मुहचुड़ै की आवाज़ गूंजने लगती है … अशोक भी अलका के सामने खड़ा हो के अपने लुंड को मसल रहा था जिसे देख अलका को और भी ज्यादा जोश बढ़ रहा था और वो जोर जोर से विशल का लोड चूसने लगती है…

अशोक अलका के इस हरकत को देख उत्तेजित होने लगता है और वो विशाल के लुंड के साथ अपना लुंड भी अलका के यह में पेलने लग जाता है…






अलका जिसपे वासना का बहुत सवार था ो भी दोनों क्क लुंड मुँह में भर के चूसने लग जाती है.. अशोक और विशाल अब पुरे जोश में अलका के मुँह को छोड़ रहे थे और अलका भी आज जैसे दोनों के लुंड को एक साथ खा hi जाने के इरादे से मैदान में उत्तरी थी…

अलका- ुगगगगगगगगगग ुग्ग्गूगुगुग्गु आराम से करो सालो एक साथ दो दो लुंड दाल के मर डालोगे क्या…

अशोक- तू इतने से नहीं मरने वाली मेरी जान ..

अलका- अशोक तुमने तो सिर्फ देखने को कहा था और तुम भी आ गए साथ में…?

अशोक- हाँ पर तुम दोनों को देख के मुझसे रहा नहीं गया ..

अलका- वो ठीक है पर इस से आगे की उम्मीद मत रखना की मैं दोनों को एक साथ ले पाऊँगी … ऐसा ख्याल आये भी तो दिमाग से निकल देना..

अशोक- हाँ हाँ मेरी जान तुम अभी से क्यों दर रही हो तुम बस चुदाई के मजे लो… और फिर अशोक अलका को उठा के बीएड पे ले जाता है ार लिटा देता है…

अलका और अशोक की बाटे सुन के विशाल अपना लुंड अलका के मुँह से निकल लेता है और अलका को खड़ा कर देता है अलका जिसका मुँह अशोक की तरफ था वो अशोक के लुंड को सहलाते हुवे वापस से अशोक को किश करने लगती है की तभी पीछे से विशाल एक करारा झटका मरता है और अपना लुंड अलका के छूट की गेहराइओ में उतर देता है….






अलका की चिक्ख निकल जाती है और वो झुकने की कोशिश करती है पर विशाल उसे झुकने नहीं देता और खड़े खड़े hi पेलने लगता है..

अलका- oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh ffffffffffuuuuuuuuuuccccccccccckkkkkkkk माँ छोड़ दी तूने आज आराम से कर मादरचोद कही भाग नहीं रही हु जानवर बन जाता है बहनचोद.

विशाल- अभी से तेरे नखरे सुरु हो गयी माँ अभी तो तुम्हे पुरे दिन पूरी रात छोड़ना है…

अलका- तो छोड़ न रोका किसने है दिखा अपना दम uuuuuuuuuuuuuuffffffffffff गधे जैसा लुंड है तेरा एक hi बार में घुसा देता है उउउउउउउउउफ्फ्फ्फ्फ़ मेरी छूट फाड् दी कुत्ते ने

काफी देर इसी तरह खड़े हदे छोड़ने से अलका के कमर और छूट में जलन और दर्द होने लगती है और वो जब भी झुक के घोड़ी बनने की कोशिश करती है विशाल उसके कमर से पकड़ के वापस खड़ा कर दे रहा था ..इसी तरह चुदाई के बाद लास्ट में अशोक अलका का सर अपने लुंड पे वापस झुका देता है जिस से अलका फ़ौरन झुक के अशोक का लुंड अपने मुँह में भर लेती है और चूसने लग जाती है…






अब सन ये था की पीछे से विशाल उसकी छूट मार रहा था तो आगे से अशोक उसके मुँह क छोड़ रहा था और अलका दोनों के बिच फांसी हुई अपने दोनों छेड़ो में लुंड पेलवा रही थी…

अशोक- तेरे मुँह बह तेरे छूट जैसा hi गरम है uuuuuuuuffffffffffffff और अलका के मुँह में झटके मरने लगता है

अलका- मेरे कमर में दर्द हो रहा है बीएड पे चलो मेरे से नहीं झुका जायेगा अब…

विशाल अलका को गॉड में उठा के बीएड पे ले जाता है और लिटा के बिना समय गवाए वापस से पेलने लगता है..

अलका के मुँह से तेज सीत्कारिया निकलने लागत है और वो अपने गांड उठा उठा के विशाल का लुंड अपने छूट में भरने लगती है

अलका- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh हाँ ऐसे hi छोड़ तेज़ तेज़ ऊऊफुफ्फूऊऊऊफुफु और तेज़ झटके मार ओहोह माआआ

इधर अशोक भी वापस अपना पोजीशन सँभालते हुवे वापस से अलका के मुँह में अपना लुंड दाल के उसके मुँह को छोड़ने लगता है….






पुरे घर में चुदाई किट है थप और चीखे गूंज रही थी किसी को किसी बात की कोई खबर या परवाह नहीं थी,… अलका जो एक बार फिर से झड़ने के करीब थी तो वही विशाल और अशोक भी किसी भी वक़्त अपना पपनी िकल सकते थे… की तभी अलका के फोन की घंटी जो काफी देर से बज रही थी की आवाज़ अलका के कानो में जाती है वो नज़रे उठा के देखती है तो उसके ओफ्फ्स से लगातार फोन आ रहा tha…par अभी वो इस सुख के बिच में कोई अशांति नहीं चाहती थी…

पर लगातार बज रहे फोन को वो ज्यादा देर तक इग्नोर नहीं कर पति और वो आखिर में फोन उठा लेती hai…phon उसके ओफ्फ्स से उसके सेक्रेटरी का था






इधर वो फ़ोन पे बात कर रही थी पर विशाल उसे छोड़ना बंद नहीं करता बल्कि और ज्यादा जोर से झटके मारने लगता है…

अलका- hello

सेक्-….

Alka-kya बोल रहे हो…

सेक्- …….

अलका- नहीं नहीं होल्ड ों मैं अभी निकलती हूँ और आती हूँ तुम घबराओ नहीं…

अशोक- क्या हुआ?

Alka-offce में आग लग गयी है कुछ स्टाफ जल गए है और बहुत डाक्यूमेंट्स वगैरह भी फायर ब्रिगेड एंड पुलिस आयी हुई है मुझे जाना होगा अर्जेंट है..

विशाल- पर माँ

अलका- अब इसमें क्या कर सकते है विशु तुम लोग थोड़ा वेट करो मैं जल्द से जल्द निपटा के आती हु..

विशाल- जब तू जाएगी तो जाना पर अभी जो सुरु किया है उसे तो ख़तम कर लू और ये कह के तेज़ तेज़ अलका के छूट में लुंड पेलने लगता है…

अलका का चुदाई का सारा मजा hi खराब हो चुक्का था पर झड़ना तो वो भी चाहती थी इसलिए वो भी विशाल का साथ देने लगी थी और अशोर भी फिर अलका के मुहे क चोदे जा रहा था

अलका जानती थी की जल्दी निकलना है तो इनको हुमिलियते कर के गालिया दे के hi निकला जा सकता है इसलिए वो गालिया दी सुरु करदेती है

अलका- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh डैम नहीं बचा है क्यात ेरे में माड़ेछोड जो इतना धीरे धीरे छोड़ रहा है… दो लोग मिल के भी मेरा नहीं निकल पाए अभी तक हिजड़ो…

अलका की बाटे सुन के विशाल तेज़ तेज़ छोड़ना सुरु कर देता है और वही हाल अशोक का भी था…

अलका के गालिओ ने अपना जादू दिखा दिया और अगले hi पल तीनो एक साथ झाड़ गए अशोक और विशाल अपना पनि अलकै के गोर बदन पे बहाने लगते है….






जिसे अलका जीभ निकल के चाटने लगती hai….offce का काम न होता तो सायद अभी यहां का माहौल कुछ और होता लेकिन अब अलका जल्दी से फ्रेश हो के ओफ्फ्स के लिए निकल जाती hai…ashok अलका को उसके ओफ्फ्स चोर्ने जाता है और फिर उस से फोन कर के अपडेट देने को कहता है… विशाल इस बिच फार्म हाउस पे hi रुकने का फैसला करता hai…aur अशोक अलका के साथ उसके ओफ्फ्स में उसकी हेल्प कर रहा होता है

विशाल अशोक को फोन कर के जानकारी मांगता है तब पता लगता है की अलका को यह रुकना पड़ेगा और अशोक अलका के लिए रुका हुआ है पर मामला थोड़ा सेरियस होने के वजह से वो कब फ्री हँगे खा नहीं जा सकता है…. हलाकि अलका के लिए कोई डेंजर नहीं था बूत क्यूंकि वो मार्केटिंग हेड और पार्टनर भी थी इसलिए उसका रुकना जरुरी था

विशाल के पूछने पे अशोक विशाल से कहता है

अशोक- पता नहीं bête मुझे तो लगता है रात हो जाएगी पूरी बिल्डिंग जल गयी है साडी फॉर्मलिटीज पुलिस वर्क जो स्टाफ होस्पिटलिसे है उन्हें देखने के लिए तुम्हारी माँ अक यह होना जरुरी है


अलका सेफ है सुन के विशाल को राहत मिलती है और वो वापस से अपनी ठरक मिटने का प्लान बनता है क्यूंकि अभी दोपहर के 1 hi बजे थे और जैसा की अशोक ने बताया था की रात हो सकता है यानि इतने देर में वो कोई प्लान बना सकता है यही सोच के विशाल सारिका को फोन मिला देता है…

काफी देर तक अलका और अशोक के न आयने से विशाल अकेले अकेले फह (फार्महाउस) में बोर होने लगता है तो वो सारिका को कॉल कर देता है…


सारिका- क्या बात है विशु आज मासी की कैसे याद आ गयी

विशाल- याद तो तुम हमेसा रहती हो मासी पर थोड़ा बिजी हो गया था पापा के आने से

सारिका- हाँ ये तो है और गर पे सब

विशाल- घर वॉर चोरो मासी मेरा ख्याल कर लो कब से तड़प रहा हु आपसे मिले के लिए..

सारिका- तड़प तो मैं भी रही हु विशु पर कारन के होते कुछ हो नहीं सकता न

विशाल- मासी फह आजा न यहां कोई नहीं है..

सारिका- क्या फह???


विशाल सारिका को कुछ भी नहीं बताता की यहां क्या हुआ बस उसे अपनी बातो में फंसा के फह बुला लेता है.. उधर सारिका को भी विशाल से मिले काफी दिन हॉग ए थे और उसकी रहदै जो विषा करता है वो कारन नहीं कर पता जिसकी कमी उसकी छूट को हमेसा महसूस होती है और ईसिस विचार में वो विशाल से हेंक यह देती है और फह के लिए निकल पड़ती है…
 
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