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अपडेट 64स (दीदी नहीं ऋचा रंडी बोल)
जहां एक तरफ शाम होते hi घर की साडी गदरायी घोड़िया अपनी जवानी को छलकते हुवे आस पड़ोस के लोगो और रिश्तेदारों का पायजामे में तम्बू बना रही थी तो वही उनमे से एक की बेटी ऋचा आज औरत बनने के लिए लालायित थी/…. पूल का ठंडा पानी भी अब इनदोनो के सुलगते जिसमे से भाप बनने के उड़ने लगा था और आज ये दोनों एक दूसरे में समां जाने के लिए पूरी तरह से तैयार थे… जहां विशाल का विकराल लुंड घर की गदर्यी ोर्टो की चीखे निकल चुक्का था आज उसी लुंड को निगलने के लिए उसकी बहन पूरी तरह से तैयार थी उसके अंदर इस लुंड को देख के गाला तो सुच रहा था लेकिन उसके गले का सारा पानी मनो उसके छूट में उतर आया हो जो लगातार अपना कामर्स बहाये जा रही थी…

विशाल का लुंड तन के बिलकुल किसी रोड की तरह ऋचा के छूट को सलामी दे रहा था तो वही अपने भाई विशाल के लुंड की प्यासी ऋचा उसे देख के अपनी दोनों टंगे खोल के हवा में लहरा देती है और अपने छूट को मसलने लग जाती है…
विशाल- बहुत गीली हो रही है तेरी छूट मेरी रांड
ऋचा- है नाब दाल न क्यों तड़पा रहा है ….
विशाल को ऋचा का ऐसे तड़पता देख बहुत मजा आ रहा था ो ऋचा की टंगे फैला के अपना गरमा गरम सरिये की तरह तने हुवे लुंड को उसके छूट के मुहाने पे रख के घिसने लगता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कितना गरम है रे तेरा लोढ़ा uuuuuuuuffffffffff आराम से डालना मेरी छूट तो आज फटने वाली है
विशाल- साली कुटिया चुदाई भी चाइये और दर भी लग रहा है
ऋचा- दर तो लगेगा hi न कितना बड़ा और मोटा है तेरा इतना बड़ा तो पुरे घर में किसी का नहीं
विशाल- लगातार अपने लुंड को ऋचा के छूट पे रगड़ते हुवे उसकी प्यास को बढ़ा रहा था और लुंड अंदर डालने की जगह उस से बाटे कर रहा था लगता है आपने सभी का देख रखा है…
ऋचा सिसकते हुवे- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh जो नज़ारा तूने देखा है उसके बाद भी तुझे कोई शक है क्या iiiiiiiiiiiiiiiiisssssssssssssssssssssssssss
विशाल- शक तो नहीं है पर मुझे लगता है इस घर के और भी राज़ है और आप उन्हें जानते हो..
ऋचा- haaaaaaaayyyyyyyyyeeeeeeeeeeee बाटे बनाना बंद कर और छोड़ मुझे मेरी छूट में चीटिया रेंग रही है uuuuuuuuuufffffffffffffffffffffffff
और वो खुद अपने हाथ से विशाल के लुंड को पकड़ के अपने छूट में धकेलने लग जाती है…

विशाल का लुंड आज ऋचा के कलाइयों से भी मोटा लग रहा था पता नहीं ये फूल सी नाजुक लड़की इस बेरहम लुंड क कैसे झेल पायेगी…
ऋचा- क्या गांडमस्ती कर रहा है दाल न मादरचोद रंडी की औलाद…
वासना में जल रही ऋचा को ऐसे तड़पता देख और उसके के मुँह से ऐसे गली सुन को विशाल को बड़ा आनंद मिल रहा था…
विशाल- मैं रंडी की औलाद फिर तू कौन है साली कुटिया तेरी माँ तो सबसे बड़ी वाली रैंड है…
ऋचा- तो मुझे भी अपनी रांड बना ले और छोड़ अपनी बहन को जैसे मेरा बाप हर दिन तेरी माँ को छोड़ता है खेतो में ले जा के…
ऋचा ने एक और राज़ उगल दिया था जिसे सुन विशाल का खून एक बार फिर अपनी राफ्तेर पकड़ लेता है और वो ऋचा के बातो से गुस्सा होते हुवे वो ऋचा के दोनों पैरो को पूरा ऊपर उठाते हुवे एक करारा झटका ऋचा की छूट में दे मरता है…

ऋचा की छूट किसी कागज की तरह चर्चारते हुवे फैट जाती है उसकी चीख पुरे पूल वाले एरिया में गूंज जाती है अब तक जो पानी उसके छूट से बह रहा था ो उसके आँखों में तैरने लग जाता है…
Richa-aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaderrrrrrrrrrrrrrrrrrrrcccccccccccccchooooooooooooooooooddddddddd nnnnnnnnnnnnnneeeeeeeeeeeeeee mmmmmmmmmeeeeeeeerrrrrrrrrriiiiiiiiii ccccccchhhhhhhhhhhhuuuuuutttttttttttt pppppppppphhhhhhhhhhaaaaaaaadddddddddddd daaaaaaaaaaaaaaalllllllllllaaaaaaaaaaaaaaaaaa
ऋचा को इस दर्द का अंदजा सईद बिलकुल भी न था वो रोने लग जाती है और विशाल को रुकने का कहती है विशाल भी ऋचा के दर्द का अंदाज़ा लगते हुवे रुक जाता है और ऋचा को हस्ते हुवे कहता है
विशाल- चीख मत साली वर्ण पुरे रिसोर्ट कोप ता लग जायेगा तू यह चुदाई करवा रही है…
ऋचा- मा cchoooooooooodddddddd दी तूने एक hi झटके में बहनचोद धीरे से डालता ऐसे में तो मर hi डालेगा हाईमज़ादे
विशाल- ऐसे कैसे अभी तो आधा भी नहीं गया है अउ अभी से मरने लगी??? तुझे तो रैंड बनना है न आज तुझे मैं पहले औरत और फिर अपनी रखैल बनाऊंगा
आधे लुंड जाने का सुन ेके ऋचा की तो गांड hi पहात जाती है वो चोकते हुवे निचे हाथ लगते हुवे पूछती है
ऋचा- क्या अभी आधा hi गया है…?
विशाल- निचे हाथ लगा के देख ले
इस्पे ऋचा निचे हाथ ले जा के विशाल के लुंड को टटोलती है तो पति है की सच में अभी लुंड का टोपा और उसका थोड़ा part hi अंदर था और च खासा लुंड उसके छूट के बहार hi था…

ऋचा- omg विशु तू तो मेरी जान निकल लेगा मेरे पेट इ अभी से दर्द होने लगा है तेरे एक hi झटके ssssseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee oooouuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa maderchoddddddddddddddddd माआआआआररररररररर dddddddaaaaaaaalllllllllllllllll\
इस से पहले ऋचा अपनी बात पूरी कर पाती विशाल एक दूसरा झटका उसके छूट में दे मरता है…

उड़ान ऋचा के मुँह को अपने होंठो से दबा देता है और उसकी चीख उसके गले में hi घूंट के रह जाती है…
ऋचा- uuuuuuuuuuuggggggggggggguhhhhhhhhhhhhhhhhhhhugggggggghhhhhhhhhhhhhh
विशाल एक बार फिर से थोड़ी देर के लिए रुक जाता है और ऋचा के नार्मल होने का इंतजार करने लग जाता है…
उधर ऋचा के आँखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहा था विशाल ने सच में पहले दो झटको में hi उसे चाँद तारा दिखा दिया था वो बेहोशी के कगार तक पहुंच गयी थी लेकिन विशाल लगातार उसे चूमते छत्ते हुवे नार्मल करने की कोशिश कर रहा था और एक लम्बे अंतराल तक यूँही चूमते चूसते हुवे ऋचा का दर्द थोड़ा काम होने लग जाता है जिसका इशारा वो अपनी गांड उठा के दे रही थी…

ऋचा का इशारा पते hi विशाल धीरे धीरे अपना लुंड अंदर बहार करना शुरू कर देता है और ऋचा भी बराबर विशाल के लुंड को अंदर लिए जा रही थी… उसकी चीख अब सीत्कारी और मॉनिंग में बदल चुक्का था और वो विशल को देखते हुवे अपनी को मसल रही थी और उसका लुंड अपने छूट के अंदर बहार करवा रही थी
ऋचा - aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh mammmmmmmmmmaaaaaaaaaa ये कही मेरे मुँह से न निकल aayyyeeeeeeeeeeeeeee इंसान का है या गधे का सेल कुत्ते
ऋचा की ऐसी बात पे विशाल हसने लगता है और अगले hi पल ऋचा को उठा के अपनी गॉड में भर लेता है और उसे जोर जोर से अपने लुंड पे पटकने लगता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmaaaaaaaaaaa कैसे कैसे छोड़ रहा है ये बहनचोद मैं इसे छोटू समझती थी ये तो मादरचोद खिलाडी निकला
ऋचा- खान से सीखा विशु ऐसे सेक्स करना uuuuuuuuuuuufffffffffffffffffffffffff मेरे पुरे पेट को मैथ रहा है तेरा ये अजगर उतर दे भाई मई नहीं ले पाऊँगी ऐसे ….
पर विशाल को तो तड़पने में मजा आता है ऋचा जितना उतरने को कहती ये उतना जोर से उछाल के इसे अपने लुंड पे पटक रहा था… हर जम्प के साथ ऋचा के छूट का कचूमर बन रहा था
ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh मादरचोद सनटैन क्यों नहीं उतर मुझे मेरे कमर में दर्द होने लगा hai….sale कुटिया के पिल्लै…..
विशाल- मैं तो ऐसे hi छोडूंगा क्युकी मैं धक्के नहीं लगूंगा अब…
ऋचा- ठीक है भाई तू लेट जा मैं कूदूंगी तेरे इस अजगर पी बी उतर मुझे इस बिच ऋचा विशाल को बहुत गन्दी गन्दी गालिया देती है खासकर अलका के नाम जोड़ के…
ऋचा के इतना कहने के बाद भी विशाल उसे उतरने की जगह और तेज तेज छोड़ने लगता hai..aur अंत में ऋचा के छूट में एक करा झटका ऐसा लगता है की ऋचा छूट का बांध टूट पड़ता है और वो लगभग रट हुवे चीखती है…

ऋचा- ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह mmmmmaaaaaaaaaa मैं gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ……… उतर दे न रंडी के बचे अब क्या जान लेगा मेरी ह्ह्ह्हह्हआआयययययययीईईई किस मादरचोद के चंगुल में फास गयी मैं…
ऋचा के छूट से ढेर सारा पानी वो पानी जो उसे कई दिनों से परेशां कर रखा था ो बहने लगता है और उसे जिस बांध ने अब तक रोक रखा था उसे विशाल ने अपने लुंड के लगातरा प्रहार से तोड़ देता है…
ऋचा- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह hhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaa मई मर जाउंगी आज इस मादरचोद को मेरी रुलाई भी नहीं सुनाई दे रही है… विशाल उतर दे वर्ण आज के बाद हाथ भी नहीं लगाने दूंगी कुत्ते
विशाल कुछ और देर इसी तरह छोड़ने के बाद ऋचा को उतर देता है और उसके गांड पे एक छठा लगते हुवे चल मेरी रांड अब तेरी बरी है…
ऋचा- uuuuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffff अब जा के छूट खली खली सा लग रहा है सेल छूट का भी डैम घोट दे तू वैसा इंसान है bhnchod…aur ऋचा अपनी छूट को मसलते हुवे देखने लग जाती है जिसे विशाल ने फाड् दिया था…
वो विशाल की तरफ अपनी गांड कर के अपनी छूट को फैलते हुवे दिखती है और बोलती है..

ऋचा- देख बहनचोद कितनी टाइट छूट थी एक hi बार में पूरा खोल दिया तूने uuuuuuuufffffffffffff और उसपे उंगलिया फेरने लगती है जिस से उसकी छूट से एक पतली सी धार फुट पड़ती है और वो विशाल के ऊपर hi मूतने लगती है…
ऋचा की छूट सच में सूज गयी थी वो बिलकुल लाल गुलाबी हो गयी थी उसके होंठ खुल चुके थे पर खेल अभी बाकि था क्युकी मैदान में दूसरा खिलाडी अभी भी टिका हुआ था…
विशाल- uuuuuuuuuffffffffffffffff कितनी लाल छूट है तेरी चाट जाने को दिल हो रहा है..
ऋचा- लाल है नहीं लाल तूने कर दिया है अपने अजगर से पेल के
विशाल- पर अभी प्लेन तो बाकि है मेरी जान चल आजा तुझे सवारी करवौ अब..
ऋचा दरी सेहमी वापस से विशाल के लुंड पे बैठने लग जाती है…

ऋचा विशाल के लुंड पे बैठ के अपनी गांड जोर जोर से हिला रही थी पर लुंड अंदर लेने के बजाये अपनी छूट को दुबारा उसके लुंड के लिए तैयार कर रही थी उसका पीठ और गांड विशाल के तरफ था जबकि उसकी चुचिअ सामने के तरफ थी और इस अवस्था में ऋचा लगातार विशाल के लुंड पे अपनी छूट रगड़ रही thi…uska इस तरह से छूट रगड़ने से विशाल का लुंड और उतावला होने लगता है एक बार फिर से ऋचा के लाल सूजी हुई छूट में समां जाने के लिए… और विशाल इस बार ऋचा को कमर से पकड़ के अपना लुंड उसके छूट पे टिकता है और एक झटका निचे से लगा के अपना लुंड उसके छूट में फिर से घुसेड़ देता है…

झटका बड़ा करारा था लुंड सिद्ध ऋचा के बच्चेदानी को टटोल रहा था और अभी अभी उसके छूट ने जो रास बहाया था उसके वजह से उसकी पहले से hi काफी सेंसिटिव हो रही थी उसपे ऐसा बेजोड़ धक्का पड़ते hi ऋचा के छूट से तेज़ पेशाब की एक धार फुट पड़ती है….

ऋचा एक बार फिर से चीख पड़ती है उसके पेशाब की धार कई फ़ीट दूर तक जा के गिर रही थी… सही मायने में आज ऋचा को चुदाई का मतलब पता चल रहा था जहां वो विशाल क ीक धक्के को भी नहीं झेल पा रही थी उसके पुरे शरीर में कम्पन आ गयी थी अब उसकी चीख में भी लड़खड़ाहट आने लगी थी और विशाल वो लेते लेते ऋचा के छूट से बह रहे धार पे अपने लुंड से एक के बाद एक वॉर कर के थप थापा रहा था…

ऋचा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh mmmmmmaaaaaaaaaaaaa मर गयी मैं अब और नहीं झेल पाऊँगी मैं तेरा ये अजगर मुझे बख्स दे मेरी छूट झनझनाने लगी है hhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyeeeeeeeeeeeee ये अलका रंडी का बीटा भी अपनी माँ एप hi गया है बहनचोद… और ऋचा अपने कांपते पैरो से उठने की कोशिश करने लगती है की विशाल उसे वापस से पकड़ लेता है और अपना लुंड फिर से उसके छूट में पेल देता है…

विशाल- भगति खान है साली तेरा हुआ है मेरा नहीं बहन की लोदी तुझे hi रंडी बनना था न फिर ा बीआरओ क्यों रही है आज तुझे छोड़ रहा हु कल तेरी माँ को छोडूंगा साली कुटिया..
ऋचा- हाँ छोड़ लेना वही तुझे झेल पायेगी मई तो मर गयी uffffffffff और ये कैसे पकड़ रखा है मेरी कमर तोड़ दी तूने सेल कुत्त्तीये
विशाल ऋचा के दोनों जांघो और घुटने के बिष से हाथ ले जा के उसके कंधे के पीछे से फसा के पकड़ा रखा था जिस से वो खुद को छुड़ा पाने में लचर थी एक तो वो पहले से बेजान हो चुकी थी ऊपर से विशाल के ये अत्याचार उसे झेल पाने में ऋचा की साडी हड्डिया अकड़ने लगी थी…
अब विशाल उसे उठा के वह पड़े बेंच पे घोड़ी बना के लेता देता है..

और पीछे से सटासट उसके छूट में झटके लगाने लग जाता है.. काफी देर से विशाल भी उत्तेजित हो रहा था और अगले कुछ झटके उसके आखरी होने वाले थे पर ऋचा बिलकुल बेसुध हुवे बेंच को पकड़ के यूँही अपनी गांड उठा के अपनी छूट विशाल को परोस देती है.. उसे अपना कोई सुध बुध न था विशाल के धक्को से अब उसकी आंखे पलटने लगी थी और अगर इसी तरह उसकी चुदाई थोड़ी देर और हुई तो वो पक्का बेहोश होने वाली है…
ऋचा- मरे आवाज़ में बक्श दे मेरे छूट में अब कुछ भी पता नहीं चल रहा है ये बिलकुल सुंनंन हो गयी है ऐकोर दे मुझे मई मर जाउंगी … काम से काम थोड़ा पानी पीला दे aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmaaaaaaaa tttttteeeeerrrrrrrrrriiiiiiiiii beeeeerrrrrttttttttttttiiiiiiiiiiiiii aaajjjjjjjjjjjjj रंडी बन गयी खुले आसमान में अपने भाई के लुंड से चुद रही है uuuuuuuufffffffffffffffffffff
विशाल- बस मेरी कुटिया मेरा भी होने hi वाला है…
ऋचा- अंदर नहीं विशु तूने कंडोम नहीं पहना है मैं प्रेग्नेंट हो जाउंगी बहार निकलना प्लस..
पर विशाल उसके छूट को अपने पानी से भर देता है

ऋचा- aaaaaaaaaaaaahhhhhh कितना गरम है uuuuuuuuufffffffffffffffff मन किया था फिर भी अंदर hi भर दिया तूने सेल हरामी..
विशाल ऋचा की हालत देख के हसने लगता है और अपने लुंड के बाकि बचे पनि को ऋचा के मुँह पे गिराने लगता है….

randomizer 1 to 20 with dice
विशाल- ये ले कुटिया तेरे आज शाम का इनाम बहुत प्यास लग रही थी न तुझे अब पीजा इसे
ऋचा अपने चेहरे पे फैले विशाल के पानी को अपने हाथो से पोछते हुवे सब चाट जाती है और वही जमीं पे गिर के तेज तेज हाफने लगती है….
तो बे छॉंट....
जहां एक तरफ शाम होते hi घर की साडी गदरायी घोड़िया अपनी जवानी को छलकते हुवे आस पड़ोस के लोगो और रिश्तेदारों का पायजामे में तम्बू बना रही थी तो वही उनमे से एक की बेटी ऋचा आज औरत बनने के लिए लालायित थी/…. पूल का ठंडा पानी भी अब इनदोनो के सुलगते जिसमे से भाप बनने के उड़ने लगा था और आज ये दोनों एक दूसरे में समां जाने के लिए पूरी तरह से तैयार थे… जहां विशाल का विकराल लुंड घर की गदर्यी ोर्टो की चीखे निकल चुक्का था आज उसी लुंड को निगलने के लिए उसकी बहन पूरी तरह से तैयार थी उसके अंदर इस लुंड को देख के गाला तो सुच रहा था लेकिन उसके गले का सारा पानी मनो उसके छूट में उतर आया हो जो लगातार अपना कामर्स बहाये जा रही थी…

विशाल का लुंड तन के बिलकुल किसी रोड की तरह ऋचा के छूट को सलामी दे रहा था तो वही अपने भाई विशाल के लुंड की प्यासी ऋचा उसे देख के अपनी दोनों टंगे खोल के हवा में लहरा देती है और अपने छूट को मसलने लग जाती है…
विशाल- बहुत गीली हो रही है तेरी छूट मेरी रांड
ऋचा- है नाब दाल न क्यों तड़पा रहा है ….
विशाल को ऋचा का ऐसे तड़पता देख बहुत मजा आ रहा था ो ऋचा की टंगे फैला के अपना गरमा गरम सरिये की तरह तने हुवे लुंड को उसके छूट के मुहाने पे रख के घिसने लगता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कितना गरम है रे तेरा लोढ़ा uuuuuuuuffffffffff आराम से डालना मेरी छूट तो आज फटने वाली है
विशाल- साली कुटिया चुदाई भी चाइये और दर भी लग रहा है
ऋचा- दर तो लगेगा hi न कितना बड़ा और मोटा है तेरा इतना बड़ा तो पुरे घर में किसी का नहीं
विशाल- लगातार अपने लुंड को ऋचा के छूट पे रगड़ते हुवे उसकी प्यास को बढ़ा रहा था और लुंड अंदर डालने की जगह उस से बाटे कर रहा था लगता है आपने सभी का देख रखा है…
ऋचा सिसकते हुवे- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh जो नज़ारा तूने देखा है उसके बाद भी तुझे कोई शक है क्या iiiiiiiiiiiiiiiiisssssssssssssssssssssssssss
विशाल- शक तो नहीं है पर मुझे लगता है इस घर के और भी राज़ है और आप उन्हें जानते हो..
ऋचा- haaaaaaaayyyyyyyyyeeeeeeeeeeee बाटे बनाना बंद कर और छोड़ मुझे मेरी छूट में चीटिया रेंग रही है uuuuuuuuuufffffffffffffffffffffffff
और वो खुद अपने हाथ से विशाल के लुंड को पकड़ के अपने छूट में धकेलने लग जाती है…

विशाल का लुंड आज ऋचा के कलाइयों से भी मोटा लग रहा था पता नहीं ये फूल सी नाजुक लड़की इस बेरहम लुंड क कैसे झेल पायेगी…
ऋचा- क्या गांडमस्ती कर रहा है दाल न मादरचोद रंडी की औलाद…
वासना में जल रही ऋचा को ऐसे तड़पता देख और उसके के मुँह से ऐसे गली सुन को विशाल को बड़ा आनंद मिल रहा था…
विशाल- मैं रंडी की औलाद फिर तू कौन है साली कुटिया तेरी माँ तो सबसे बड़ी वाली रैंड है…
ऋचा- तो मुझे भी अपनी रांड बना ले और छोड़ अपनी बहन को जैसे मेरा बाप हर दिन तेरी माँ को छोड़ता है खेतो में ले जा के…
ऋचा ने एक और राज़ उगल दिया था जिसे सुन विशाल का खून एक बार फिर अपनी राफ्तेर पकड़ लेता है और वो ऋचा के बातो से गुस्सा होते हुवे वो ऋचा के दोनों पैरो को पूरा ऊपर उठाते हुवे एक करारा झटका ऋचा की छूट में दे मरता है…

ऋचा की छूट किसी कागज की तरह चर्चारते हुवे फैट जाती है उसकी चीख पुरे पूल वाले एरिया में गूंज जाती है अब तक जो पानी उसके छूट से बह रहा था ो उसके आँखों में तैरने लग जाता है…
Richa-aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaa mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaderrrrrrrrrrrrrrrrrrrrcccccccccccccchooooooooooooooooooddddddddd nnnnnnnnnnnnnneeeeeeeeeeeeeee mmmmmmmmmeeeeeeeerrrrrrrrrriiiiiiiiii ccccccchhhhhhhhhhhhuuuuuutttttttttttt pppppppppphhhhhhhhhhaaaaaaaadddddddddddd daaaaaaaaaaaaaaalllllllllllaaaaaaaaaaaaaaaaaa
ऋचा को इस दर्द का अंदजा सईद बिलकुल भी न था वो रोने लग जाती है और विशाल को रुकने का कहती है विशाल भी ऋचा के दर्द का अंदाज़ा लगते हुवे रुक जाता है और ऋचा को हस्ते हुवे कहता है
विशाल- चीख मत साली वर्ण पुरे रिसोर्ट कोप ता लग जायेगा तू यह चुदाई करवा रही है…
ऋचा- मा cchoooooooooodddddddd दी तूने एक hi झटके में बहनचोद धीरे से डालता ऐसे में तो मर hi डालेगा हाईमज़ादे
विशाल- ऐसे कैसे अभी तो आधा भी नहीं गया है अउ अभी से मरने लगी??? तुझे तो रैंड बनना है न आज तुझे मैं पहले औरत और फिर अपनी रखैल बनाऊंगा
आधे लुंड जाने का सुन ेके ऋचा की तो गांड hi पहात जाती है वो चोकते हुवे निचे हाथ लगते हुवे पूछती है
ऋचा- क्या अभी आधा hi गया है…?
विशाल- निचे हाथ लगा के देख ले
इस्पे ऋचा निचे हाथ ले जा के विशाल के लुंड को टटोलती है तो पति है की सच में अभी लुंड का टोपा और उसका थोड़ा part hi अंदर था और च खासा लुंड उसके छूट के बहार hi था…

ऋचा- omg विशु तू तो मेरी जान निकल लेगा मेरे पेट इ अभी से दर्द होने लगा है तेरे एक hi झटके ssssseeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee oooouuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa maderchoddddddddddddddddd माआआआआररररररररर dddddddaaaaaaaalllllllllllllllll\
इस से पहले ऋचा अपनी बात पूरी कर पाती विशाल एक दूसरा झटका उसके छूट में दे मरता है…

उड़ान ऋचा के मुँह को अपने होंठो से दबा देता है और उसकी चीख उसके गले में hi घूंट के रह जाती है…
ऋचा- uuuuuuuuuuuggggggggggggguhhhhhhhhhhhhhhhhhhhugggggggghhhhhhhhhhhhhh
विशाल एक बार फिर से थोड़ी देर के लिए रुक जाता है और ऋचा के नार्मल होने का इंतजार करने लग जाता है…
उधर ऋचा के आँखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहा था विशाल ने सच में पहले दो झटको में hi उसे चाँद तारा दिखा दिया था वो बेहोशी के कगार तक पहुंच गयी थी लेकिन विशाल लगातार उसे चूमते छत्ते हुवे नार्मल करने की कोशिश कर रहा था और एक लम्बे अंतराल तक यूँही चूमते चूसते हुवे ऋचा का दर्द थोड़ा काम होने लग जाता है जिसका इशारा वो अपनी गांड उठा के दे रही थी…

ऋचा का इशारा पते hi विशाल धीरे धीरे अपना लुंड अंदर बहार करना शुरू कर देता है और ऋचा भी बराबर विशाल के लुंड को अंदर लिए जा रही थी… उसकी चीख अब सीत्कारी और मॉनिंग में बदल चुक्का था और वो विशल को देखते हुवे अपनी को मसल रही थी और उसका लुंड अपने छूट के अंदर बहार करवा रही थी
ऋचा - aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh mammmmmmmmmmaaaaaaaaaa ये कही मेरे मुँह से न निकल aayyyeeeeeeeeeeeeeee इंसान का है या गधे का सेल कुत्ते
ऋचा की ऐसी बात पे विशाल हसने लगता है और अगले hi पल ऋचा को उठा के अपनी गॉड में भर लेता है और उसे जोर जोर से अपने लुंड पे पटकने लगता है…

ऋचा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmaaaaaaaaaaa कैसे कैसे छोड़ रहा है ये बहनचोद मैं इसे छोटू समझती थी ये तो मादरचोद खिलाडी निकला
ऋचा- खान से सीखा विशु ऐसे सेक्स करना uuuuuuuuuuuufffffffffffffffffffffffff मेरे पुरे पेट को मैथ रहा है तेरा ये अजगर उतर दे भाई मई नहीं ले पाऊँगी ऐसे ….
पर विशाल को तो तड़पने में मजा आता है ऋचा जितना उतरने को कहती ये उतना जोर से उछाल के इसे अपने लुंड पे पटक रहा था… हर जम्प के साथ ऋचा के छूट का कचूमर बन रहा था
ऋचा- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh मादरचोद सनटैन क्यों नहीं उतर मुझे मेरे कमर में दर्द होने लगा hai….sale कुटिया के पिल्लै…..
विशाल- मैं तो ऐसे hi छोडूंगा क्युकी मैं धक्के नहीं लगूंगा अब…
ऋचा- ठीक है भाई तू लेट जा मैं कूदूंगी तेरे इस अजगर पी बी उतर मुझे इस बिच ऋचा विशाल को बहुत गन्दी गन्दी गालिया देती है खासकर अलका के नाम जोड़ के…
ऋचा के इतना कहने के बाद भी विशाल उसे उतरने की जगह और तेज तेज छोड़ने लगता hai..aur अंत में ऋचा के छूट में एक करा झटका ऐसा लगता है की ऋचा छूट का बांध टूट पड़ता है और वो लगभग रट हुवे चीखती है…

ऋचा- ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह mmmmmaaaaaaaaaa मैं gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ……… उतर दे न रंडी के बचे अब क्या जान लेगा मेरी ह्ह्ह्हह्हआआयययययययीईईई किस मादरचोद के चंगुल में फास गयी मैं…
ऋचा के छूट से ढेर सारा पानी वो पानी जो उसे कई दिनों से परेशां कर रखा था ो बहने लगता है और उसे जिस बांध ने अब तक रोक रखा था उसे विशाल ने अपने लुंड के लगातरा प्रहार से तोड़ देता है…
ऋचा- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह hhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaa मई मर जाउंगी आज इस मादरचोद को मेरी रुलाई भी नहीं सुनाई दे रही है… विशाल उतर दे वर्ण आज के बाद हाथ भी नहीं लगाने दूंगी कुत्ते
विशाल कुछ और देर इसी तरह छोड़ने के बाद ऋचा को उतर देता है और उसके गांड पे एक छठा लगते हुवे चल मेरी रांड अब तेरी बरी है…
ऋचा- uuuuuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffff अब जा के छूट खली खली सा लग रहा है सेल छूट का भी डैम घोट दे तू वैसा इंसान है bhnchod…aur ऋचा अपनी छूट को मसलते हुवे देखने लग जाती है जिसे विशाल ने फाड् दिया था…
वो विशाल की तरफ अपनी गांड कर के अपनी छूट को फैलते हुवे दिखती है और बोलती है..

ऋचा- देख बहनचोद कितनी टाइट छूट थी एक hi बार में पूरा खोल दिया तूने uuuuuuuufffffffffffff और उसपे उंगलिया फेरने लगती है जिस से उसकी छूट से एक पतली सी धार फुट पड़ती है और वो विशाल के ऊपर hi मूतने लगती है…
ऋचा की छूट सच में सूज गयी थी वो बिलकुल लाल गुलाबी हो गयी थी उसके होंठ खुल चुके थे पर खेल अभी बाकि था क्युकी मैदान में दूसरा खिलाडी अभी भी टिका हुआ था…
विशाल- uuuuuuuuuffffffffffffffff कितनी लाल छूट है तेरी चाट जाने को दिल हो रहा है..
ऋचा- लाल है नहीं लाल तूने कर दिया है अपने अजगर से पेल के
विशाल- पर अभी प्लेन तो बाकि है मेरी जान चल आजा तुझे सवारी करवौ अब..
ऋचा दरी सेहमी वापस से विशाल के लुंड पे बैठने लग जाती है…

ऋचा विशाल के लुंड पे बैठ के अपनी गांड जोर जोर से हिला रही थी पर लुंड अंदर लेने के बजाये अपनी छूट को दुबारा उसके लुंड के लिए तैयार कर रही थी उसका पीठ और गांड विशाल के तरफ था जबकि उसकी चुचिअ सामने के तरफ थी और इस अवस्था में ऋचा लगातार विशाल के लुंड पे अपनी छूट रगड़ रही thi…uska इस तरह से छूट रगड़ने से विशाल का लुंड और उतावला होने लगता है एक बार फिर से ऋचा के लाल सूजी हुई छूट में समां जाने के लिए… और विशाल इस बार ऋचा को कमर से पकड़ के अपना लुंड उसके छूट पे टिकता है और एक झटका निचे से लगा के अपना लुंड उसके छूट में फिर से घुसेड़ देता है…

झटका बड़ा करारा था लुंड सिद्ध ऋचा के बच्चेदानी को टटोल रहा था और अभी अभी उसके छूट ने जो रास बहाया था उसके वजह से उसकी पहले से hi काफी सेंसिटिव हो रही थी उसपे ऐसा बेजोड़ धक्का पड़ते hi ऋचा के छूट से तेज़ पेशाब की एक धार फुट पड़ती है….

ऋचा एक बार फिर से चीख पड़ती है उसके पेशाब की धार कई फ़ीट दूर तक जा के गिर रही थी… सही मायने में आज ऋचा को चुदाई का मतलब पता चल रहा था जहां वो विशाल क ीक धक्के को भी नहीं झेल पा रही थी उसके पुरे शरीर में कम्पन आ गयी थी अब उसकी चीख में भी लड़खड़ाहट आने लगी थी और विशाल वो लेते लेते ऋचा के छूट से बह रहे धार पे अपने लुंड से एक के बाद एक वॉर कर के थप थापा रहा था…

ऋचा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh mmmmmmaaaaaaaaaaaaa मर गयी मैं अब और नहीं झेल पाऊँगी मैं तेरा ये अजगर मुझे बख्स दे मेरी छूट झनझनाने लगी है hhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyeeeeeeeeeeeee ये अलका रंडी का बीटा भी अपनी माँ एप hi गया है बहनचोद… और ऋचा अपने कांपते पैरो से उठने की कोशिश करने लगती है की विशाल उसे वापस से पकड़ लेता है और अपना लुंड फिर से उसके छूट में पेल देता है…

विशाल- भगति खान है साली तेरा हुआ है मेरा नहीं बहन की लोदी तुझे hi रंडी बनना था न फिर ा बीआरओ क्यों रही है आज तुझे छोड़ रहा हु कल तेरी माँ को छोडूंगा साली कुटिया..
ऋचा- हाँ छोड़ लेना वही तुझे झेल पायेगी मई तो मर गयी uffffffffff और ये कैसे पकड़ रखा है मेरी कमर तोड़ दी तूने सेल कुत्त्तीये
विशाल ऋचा के दोनों जांघो और घुटने के बिष से हाथ ले जा के उसके कंधे के पीछे से फसा के पकड़ा रखा था जिस से वो खुद को छुड़ा पाने में लचर थी एक तो वो पहले से बेजान हो चुकी थी ऊपर से विशाल के ये अत्याचार उसे झेल पाने में ऋचा की साडी हड्डिया अकड़ने लगी थी…
अब विशाल उसे उठा के वह पड़े बेंच पे घोड़ी बना के लेता देता है..

और पीछे से सटासट उसके छूट में झटके लगाने लग जाता है.. काफी देर से विशाल भी उत्तेजित हो रहा था और अगले कुछ झटके उसके आखरी होने वाले थे पर ऋचा बिलकुल बेसुध हुवे बेंच को पकड़ के यूँही अपनी गांड उठा के अपनी छूट विशाल को परोस देती है.. उसे अपना कोई सुध बुध न था विशाल के धक्को से अब उसकी आंखे पलटने लगी थी और अगर इसी तरह उसकी चुदाई थोड़ी देर और हुई तो वो पक्का बेहोश होने वाली है…
ऋचा- मरे आवाज़ में बक्श दे मेरे छूट में अब कुछ भी पता नहीं चल रहा है ये बिलकुल सुंनंन हो गयी है ऐकोर दे मुझे मई मर जाउंगी … काम से काम थोड़ा पानी पीला दे aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmmmmaaaaaaaa tttttteeeeerrrrrrrrrriiiiiiiiii beeeeerrrrrttttttttttttiiiiiiiiiiiiii aaajjjjjjjjjjjjj रंडी बन गयी खुले आसमान में अपने भाई के लुंड से चुद रही है uuuuuuuufffffffffffffffffffff
विशाल- बस मेरी कुटिया मेरा भी होने hi वाला है…
ऋचा- अंदर नहीं विशु तूने कंडोम नहीं पहना है मैं प्रेग्नेंट हो जाउंगी बहार निकलना प्लस..
पर विशाल उसके छूट को अपने पानी से भर देता है

ऋचा- aaaaaaaaaaaaahhhhhh कितना गरम है uuuuuuuuufffffffffffffffff मन किया था फिर भी अंदर hi भर दिया तूने सेल हरामी..
विशाल ऋचा की हालत देख के हसने लगता है और अपने लुंड के बाकि बचे पनि को ऋचा के मुँह पे गिराने लगता है….

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विशाल- ये ले कुटिया तेरे आज शाम का इनाम बहुत प्यास लग रही थी न तुझे अब पीजा इसे
ऋचा अपने चेहरे पे फैले विशाल के पानी को अपने हाथो से पोछते हुवे सब चाट जाती है और वही जमीं पे गिर के तेज तेज हाफने लगती है….
तो बे छॉंट....





























































































