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अपडेट-69
लुंड मसलते हुवे विशाल जैसे hi आवाज़ की दिशा में गार्डन उठा के देखता है तो उसकी बड़ी माँ रागिनी बिलकुल नंगी बाथरूम के दरवाजे पे कड़ी हो के उसे आवाज़ दे रही थी…
रागिनी- विशु
विशाल हड़बड़ाते हुवे- है है हाँ बड़ी माँ
विशाल के हालत देख रागिनी बाथरूम से निकल के बीएड की तरफ नंगे हालत में hi उसकी तरफ बढ़ने लगती है और रागिनी को ऐसे नंगे अपन सामने आता देख विशाल का गाला सूखने लगता है तो वही विशाल की हालत देख रागिनी की हसी छूट जाती है वो मुस्कुराते हुवे विशाल से कहती है
Ragini-bête मेरा हाथ पीछे यही जा रहा है और घी पुरे कमर और पीठ में फ़ैल गया है क्या तू साबुन लगा देगा…..???
विशाल के लिए तो ये लाटरी hi समझो निकल गयी थी जिसके नाम का वो मुठ मार रहा था वही औरत बिलकुल नंगी उसके सामने कड़ी थी और उसे बाथरूम में अपने कामुक बदन पे साबुन लगा ने के लिए बुला रही थी..
विशाल- हाँ बड़ी माँ क्यों नहीं अभी आया…
रागिनी दूसरे शब्दों में- हाँ और अपना तलवार पंत में दाल लेना कही मुझे घायल न कर दे और उसके लुंड की तरफ घूरते हुवे थोड़ा आगे बढ़ती है जिस से विशाल लेते लेते hi एक कदम पीछे को हो जाता है..

रागिनी- हाहाहा इतने में hi दर गया बच्चू अपनी बड़ी माँ से चल जड़ी से आजा और ये घी चुरा दे…
और फिर रागिनी अपनी गांड मटकते हुवे वापस बाथरूम के तरफ चली जाती है..
विशाल- uuuuuuuuuuufffffffffff कितनी बड़ी गांड है बड़ी माँ के एक डैम आग है साली चिनार..
रागिनी अंदर बाथरूम में जा के विशाल का वेट कर रही होती है की उसके इंतजार को जल्दी hi समाप्त करते हुवे विशाल बाथरूम में पहुंच जाता है जिस औरत को छोड़ने के लिए वो कब से तड़प रहा था ो अभी उसके सामने बिलकुल नंगी थी और विशाल का गाला सूखा जा रहा था जिसे देख रागिनी की एक बार फिर से हसी छूट जाती है….
बाथरूम के अंदर आते hi विशाल रागिनी को आवाज़ देता है
रागिनी- बड़ी माँ मई आ गया
अंदर रागिनी बाथटब में लेती अपने गरम छूट के ऊपर तप खोल के उसपे पानी के धार से अपने छूट में जल रही आग को बुझाने की कोशिश कर रही थी और इसी दौरान विशाल की आवाज़ सुन के वो विशाल के तरफ hi उसे मुस्कुराते हुवे देखने लग जाती है…

रागिनी- आ गया तू
विशाल रागिनी को प्यासी नज़रो से घूरते हुवे- हाँ बड़ी माँ
रागिनी एक डैम से बाथटब से निकल जाती है उसके शरीर में शावर जेल से बना फोम लगा हुआ था फिर भी वो शॉवेरगेल एंड लूफाह विशाल की तरफ बढ़ाते हुवे उसे अपने पीठ पे मलने को कहती है…
रागिनी- ये ले जेल और लूफाह और फिर पीठ विशाल की तरफ कर के खुद सामने के तरफ मुँह कर कैग हम जाती है…
रागिनी के सामने की तरफ चेहरा होने के बावजूद भी उसकी बड़ी बड़ी चुचिअ विशाल को पीछे से hi अचे से नज़र आ रही थी जिसे देख विशाल का मन ललचा रहा था उसका लुंड फिर से अकड़ने लग जाता है और मनो रागिनी के नंगे चूतड़ों में समां जाना छह रहा था बस विशाल क ीक कदम आगे बढ़ने की देर थी…
बाथरूम में अब थोड़ी देर के लिए सन्नाटा च गया था बस दोनों चची और भतीजे के तेज़ षाले सांसो की ौज़ बाथरूम में गूंज रही thi..ragini भी दूसरे तरफ चेहरा कर के अपने होंठो को चबाते हुवे विशाल के छुवन का इंतजार कर रही थी…
विशाल पानी की कुछ बुँदे पहले रागिनी के पीठ पे डालता है और अपने हाथ जैसे hi रागिनी के पीठ पे रखता है रागिनी की धड़कने पुरे गति से बढ़ के उसकी छाती और दोनों चूचिया ऊपर निचे होने लगता है… उसके शरीर में तेज़ सुरसुरी होने लग जाती hai…aur वो अपने हाथ पीछे ले जा के विशाल के जांघो को जोर से अपने मुठी में भींच लेती है…
रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh
विशाल पुरे लगन से रागिनी के पीठ और कमर को जेल लगा के मसल रहा था और वही उसके हर छुवन से रागिनी पिघलती जा रही थी और वो खुद अप्पनइ गांड पीछे कर लेती है जिस से विशाल का तना हुआ लोड रागिनी के चूतड़ों के बिच बने घाटियों में फिट हो जाता है जैसे वो जगह उसके लुंड के लिए hi बानी हो..

रागिनी ने बेशक अपना एक कदम आगे बढ़ा लिया था और अपने गांड को अपने भतीजे के लुंड पे रगड़ते हुवे उसे अपने अंदर जल रहे आग के बारे में हिंट देना सुरु कर दिया था पर विशाल अब भी कोई जल्दबाजी किये बिना रागिनी के पीठ को अपने जेल से साणे हाथो को रागिनी के पीठ पे रगड़ रहा था…
विशाल पीछे से हाथ रगड़ते हुवे उसके कंधे और गार्डन को साबुन से मलने लगता है..
रागिनी- aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi रगड़ रगड़ के सारा मेल छुड़ा दे bête…
विशाल- हाँ बड़ी माँ बहुत मेल है पीछे लेकिन आज इसे पूरा साफ़ कर दूंगा तुम्हारे गोर बदन पे मेल की एक बून्द नहीं बचेगी
रागिनी- ठीक है bête अचे से साफ़ कर दे अपनी बड़ी माँ के गांड को मेरा मतलब है गंदगी को…
विशाल भी रागिनी के बातो को अचे से समझ रहा था और वो ये भी समझ चुक्का था की अगर उसके आग को थोड़ा और भड़काए तो रागिनी भी अपने बेटी की तरह खुद चाक इ उसके लुंड को पकड़ के अपने छूट में भर लेगी…
रागिनी- विशु थोड़ा साइड में भी सफाई कर देना bête आज तेरी बड़ी माँ अक ये बदन तेरे हाथो में है और अपनी बड़ी माँ के शरीर को अचे से चमका देना…
विशाल रागिनी के कहे बातो को अचे से समझ रहा था और वो रागिनी के बातो पे हामी भरते हुवे जी बड़ी माँ कह की आगे उसके पेट की तरफ जेल लगाने लग जाता है…

विशाल रागिनी के कमर पेट और नाभि को अचे से मलते हुवे बिच बिच में रागिनी के छूट के ऊपर हाथ फेर देता था लेकिन वो ऐसे रियेक्ट कर रहा था मनो उसे पता hi न ह की उसका हाथ रागिनी के छूट को टच कर रहा था.
रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi सफाई कर अचे से और फिर वपणी गांड को और पीछे धकेल देती है….
रागिनी- खड़े खड़े ेरे पैरो में दर्द होने लगा है मई यही लेट जाती हु तू अचे से साबुन लगा के धो दे मेरे शरीर को
विशाल- जो बड़ी माँ
और फिर रागिनी वही फर्श पे लेट जाती है… और उसकी चूचिया और उसकी छूट अब विशाल के आँखों के सामने बिना किसी परदे के थी…

विशाल शावर जेट से रागिनी के गोर कामुक बदन पे पानी की बौछार करने लगता है और फिर लूफाह के फोम को उसके शरीर पे डालते हुवे उसके बदन को फोम से भर देता है..
रागिनी को आज ये हलका सा फोम भी अपने बदन पे बहुत भरी लगने लगा था..
रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi अचे से साबुन लगा दे
विशाल- हाँ बड़ी माँ अचे से मॉल मॉल के साबुन लगाऊंगा और आप बस देखते जाओ..
और फिर विशाल पाहे तप रागिनी के पिण्डलिओ को माल्टा है फिर उसके जांघो से होते हुवे उसके पेट को को मुथिओ में भर के मसलने लगता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh मममममममअअअअअअअअ रागिनी आंखे बंद किये अपने भतीजे से अपने शरीर को मसलवा रही थी बहुत ाचा लग रहा है विशु.. तोडा ऊपर भी हाथ चला वहां भी गंदगी है
विशाल अचे से समझ रहा था ऊपर मतलब खा कह रही थी फिर भी वो जान बुझ कर रागिनी के पेट को मसलते हुवे कहता है..
विशाल- ऊपर किधर बड़ी माँ…
रागिनी- कंगनी में जलते हुवे विशाल के बात पे उसके तरफ कामुक मुस्कान के साथ देखते हुवे कहती hai…apne गुलाब जामुन के तरफ साफा नै करेगा और उसके हाथ को पकड़ के अपने चुचिओ पे रख देती है..

विशाल भी अब रागिनी के पेट के साथ साथ रागिनी के चुचिओ को भी मसलन मासा के साफ़ करने लगा था.
विशाल- कितना बड़ा गुलाब जामुन है आपकी बड़ी माँ
रागिनी- आआआआअह्हह्ह्ह्ह विशु थोड़ा आराम से bête

विशाल अब रागिनी के चुचिओ को अचे से मसलने लग जाता है और उसके निप्पल को चुटकिओ में भर के निचोड़ने लग जाता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmaaaaaaaaaaaaa
विशाल- बड़ी माँ ये तो टाइट होने लगा है
रागिनी- इतने जोर से मैलेगा तो टाइट hi होगी न bête
विशाल- तो क्या आपको दर्द हो रहा है
रागिनी- माने ये कब खा… uuuuuuffffffffff तूने मेरे शरीर को इतना छेड़ा की देख मेरी पेशाब निकल गयी…

और फिर रागिनी के छूट से एक धार फुट पड़ती है और रागिनी उठ के बैठ जाती है और फिर वो तेज़ धार के साथ मूतने लगती है
विशाल रागिनी के छूट से निकल रहे हलके सुनहरी पेशाब की धार देख मदहोश होने लगता है रागिनी भी विशाल के चेहरे के भाव को पढ़ते हुवे समझ जाती है की उसे मुत्ता देख विशाल के अंदर कामाग्नि भड़कने लगी है…
रागिनी- सॉरी bête मेरे से रोका नहीं गया
विशाल- कोई बात नहीं बड़ी माँ इतस नेचुरल
रागिनी- हाँ ये तो है… च लगा दिया साबुन तो चल मैं नहा लू
विशाल- पर बड़ी माँ पीछे लगे साबुन को धोया तो है नहीं बस साबुन लगा के साफ़ किया है
रागिनी- ओह हाँ और वो तो सुख भी गया होगा चल कोई बात नहीं उसे जल्दी से पानी से साफ़ कर दे और रागिनी अपनी गांड विशाल की तरफ कर कैग हम जाती है..
सईद रागिनी के छूट की आग उसके पेशाब के साथ निकल चुक्का था इसलिए वो अब जल्दी से सब ख़तम कर के बहार निकलने की सोच रही थी पर विशाल इस मोके को इतनी आसानी से जाने नहीं देना छह रहा था इसलिए रागिनी के पीछे मुड़ते hi वो थोड़ा जेल और रागिनी के पीठ और चूतड़ों पे लगा देता है और ढेर सारा झाग रागिनी के शरीर पे फैला देता है..

और अब वो रागिनी के चूतड़ों को अपने दोनों हाथो में भर के अचे से मसलने लग जाता है
रागिनी- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशु और रागिनी अपने हाथो को विशाल के मरदाना छाती पे रख देती है और अपने नाख़ून विशाल के छाती पे गदा देती है….
विशाल चूतड़ों को मलते हुवे गले hi पल निचे बैठ जाता है और रागिनी के दोनों कूल्हों को फैला के उसमे अपनी ऊँगली दाल देता है…

रागिनी- ुउउइइइइइइइइ माआ ये तू क्या कर रहा है विशु
विशाल- साबुन लगा रहा हु बड़ी माँ और विशाल अपने झाग से भरे उंगलिओ से रागिनी के गांड के छोटे और तंग भूरे छेद को कुरेद कुरेद कर उसके आग को और जयदा भड़काने की कोशिश कर रहा था तो वही दूसरी तरफ शावर के निचे कड़ी रागिनी अपने बेकाबू होते सांसो को काबू में करने की नाकाम कोशिश कर रही थी....
रागिनी- uuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffff ऐसे जगहों पे भी लगते है क्या bête??
विशाल- हाँ बड़ी माँ घी यहां भी फ़ैल गया है उसे भी साफ़ किये देता हु…
रागिनी- ाचा वह तक घी चला गया क्या
विशाल- हाँ बड़ी माँ
रागिनी- ठीक है bête फिर अचे से साफ़ कर दे आज
और रागिनी एक बार फिर से मचलने लग जाती है और वो अपनी गांड पीछे धकेलने लग जाती hai..vishal भी मोके को देखते हुवे रागिनी के चूतड़ों को फैलते हुवे अपना मुँह लगा देता है…

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh विशु ये क्या कर रहा है bête
विशाल- सफाई बड़ी माँ
रागिनी- अपनी बड़ी माँ की गांड इतनी अछि लगी तुझे की मुँह hi लगा दिया
विशाल- हाँ बड़ी माँ कितनी अछि खसबू आ रही है ufffffffffffffffffffffff
रागिनी- oooooooooooohhhhhhhhhhh विशु ऐसे तो मैं बेकाबू हो जाउंगी bête ये तू क्या कर रहा है मेरे साथ और इतना कह के रागिनी अपनी एक तंग उठा देती है/…

पैरो के उठते hi रागिनी की छूट पूरी खुल चुकी थी और विशाल अब रागिनी कैग एंड के छेद को छोड़ उसके छूट के गीले होठो को चूसने लग जाता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ये सब खान से सीखा तू uuuufffffffffff बहुत ाचा लग रहा है bête ऐसे hi चूस अपनी बड़ी माँ को…
विशाल बिना कुछ बोले जोर जोर से रागिनी के छूट को चूसने लगा था और फिर छूट को चूसते हुवे विशाल अपनी एक ऊँगली रागिनी के छूट में पेल देता है…

अब तक जहां विशाल रागिनी के छूट में अपनी जीभ दाल के अपने जीभ से उसके छूट को छोड़ रहा था तो अब वो जीभ के साथ दो अपनी ऊँगली भी रागिनी के छूट में पेल के अंदर बहार करने लगा था
रागिनी अपने शरीर से हो रहे खेलवाड़ से सम्भली भी नहीं थी और अभी इस दोहरे हमले से बेकाबू होती रागिनी जोर जोर से अपने छूट को विशाल के चेहरे पे दबा के मनो उसे अपने छूट में घुसा लेना छह रही हो की विशाल एक कदम और आगे बढ़ाते हुवे रागिनी के चुचिओ को मुट्ठी में भर के दबाने लग जाता है..

रागिनी बिलकुल पागल और बेकाबू हो उठती है और इस तरह एक के बाद एक हुवे हमले से उसके छूट की धार एक बार फिर से बहने लगती है और रागिनी अपना कामर्स चोर्ने लग जाती है…
रागिनी के छूट से बेहटा कमरस अब सिद्ध विशाल के मुँह में जाने लगा था जिसे रागिनी चुराने की कोशिश तो कर रही थी पर विशाल उसे चोर्ने को राजी न था और वो विशल के मजबूत पकड़ से बेबस हो के अंत में आत्मसमर्पण कर देती है और मचलते हुवे पने भतीजे के यह में अपना कामर्स बहाने लग जाती है…

विशाल कामिनी के छूट से बेहटा उसके कामर्स का ेके क बून्द चूस लेता है और उंगलिया चला चला के उसके छूट के नाजुक नसों को और ज्यादा संवेदनशील बना देता है.. कामिनी बेजान सी कड़ी जोर जोर से हाफ रही थी छूट से बहते कामर्स से मिला सुच उसके चेहरे पे साफ़ झलक रहा था अब वो विशाल से छूटना छह रही थी लेकिन विशाल उसे अब भी चोर्ने को राजी न था वो लगातार ऊँगली अंदर बहार करते हुवे रागिनी के छूट को चूस रहा था…
रागिनी के छूट में एक बार फिर से झनझनाहट होने लगी थी उसके छूट से पेशाब की धार बहने लग जाती है पर विशाल उसे अब भी कास के पकडे हुवे था जब उसे कोई रास्ता नहीं दीखता तो वो बेबस हो के उसे लात मार के उस से दूर हैट जाती है और अपनी एक तंग उठा के पेशाब की तेज़ धार मरते हुवे विशाल की तरफ बेशरम भरे नज़रो से देखने लगती है…

रागिनी- ले देख अपनी बड़ी माँ के छूट से बेहटा उसका पेशाब और उसमे सना हुआ उसका कॉमर्स जोट ेरे म्हणत से निकला hai…ise भी पीना छह रहा था तू गंदे
विशाल- हाँ बड़ी माँ आज तेरे गुलाब जामुन के साथ तेरा पूरा रास निचोड़ के पि जाऊंगा..
रागिनी- जो और जितना मिलना था मिल गया और ले लिया तूने अब जा और मुझे नहाने दे..
रागिनी के इस तरह पलटने से विशाल को अपने साथ धोका फील होने लगता है इसलिए विशाल रागिनी की तरफ बढ़ते हुवे उसके करीब जाता है और उसके पेशाब बहते छूट में अपनी उंगलिया पेल देता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है मूतने तो दे uuuuuufffffffffffffff
पर विशाल उसकी एक नहीं सनटैन और तेज़ तेज़ ऊँगली अंदर बहार करने लग जाता है जिस से रागिनी वही जो अब तक कड़ी हो के मूत रही थी वो जमीं पे गिर जाती है लेकिन विशाल की उंगलिया अब भी उसके छूट से नहीं निकलती…

विशाल- क्या बोलै तुमने जितना होना था हो गया?? खुद का काम बन गया तो धोका??
अब तू देख बड़ी माँ मैं क्या करता हु
रागिनी- क्या कर रहा है गधे चोर बस कर मैं फिर से झाड़ जाउंगी…
विशाल- पहले बोल्ट ेरे गुलाब जामुन मुझे खिलाएगी
रागिनी- हाँ खा लेना गुलाब जामुन
विशाल- बोल्ट ु कभी नहीं रोकेगी..
रागिनी- नहीं रोकूंगी पक्का uuuuuuuuuffffffffffffffffff
और फिर रागिनी विशाल के ऐसे तेज़ तेज़ ऊँगली करने से एक बार और झड़ने लगती है और हफ्ते हुवे विशाल की तरफ देखते हुवे बोलने लगती है तेरा hi है ये गुलाब जामुन और उसका ये सारा रास भी पि जाना मैं तो मज़ाक कर रही थी bête uuuuuuuuuuuffffffffffffffffff तूने तो मेरी जान hi निकल दी
और फिर रागिनी वही जमीं पे गिर जाती है और जोर जोर से हाफने लगती है…..

रागिनी- हां हां hahhhhhhhhhhhhh कुत्ते मर डाला तूने
विशाल- क्या हुआ बड़ी माँ अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं अभी से ये हाल हो गया तुम्हारा
रागिनी- वही सोच रही हु बिना कुछ किये तूने ये हाल कर दिया अगर कुछ करने लग गया तो मेरा क्या हाल कर देगा
विशाल- कुछ क्या बड़ी माँ
रागिनी- चुप कर जैसे तुझे पता नहीं सारा कांड कर के भोला बन रहा है
विशाल- बोलो न बड़ी माँ
रागिनी- मैं नहीं बोलती अब जा और मुझे नहाने दे बहुत देर हो गयी शाम होने को है
विशाल- और मेर गुलजामूं??
रागिनी- हाँ खा लेना अब तो ये तेरा hi है पर अभी के लिए जा मुझे नहाने दे
विशाल- पर इसका क्या करू??? विशाल ने अपने खड़े लुंड की तरफ दिखते हुवे खा
रागिनी- ओहो थोड़ा सब्र कर ले रात का करवाती हु कुछ अभी के लिए जा प्लस और रागिनी विशाल को वह से भगा के नाहने लग जाती है.....
लुंड मसलते हुवे विशाल जैसे hi आवाज़ की दिशा में गार्डन उठा के देखता है तो उसकी बड़ी माँ रागिनी बिलकुल नंगी बाथरूम के दरवाजे पे कड़ी हो के उसे आवाज़ दे रही थी…
रागिनी- विशु
विशाल हड़बड़ाते हुवे- है है हाँ बड़ी माँ
विशाल के हालत देख रागिनी बाथरूम से निकल के बीएड की तरफ नंगे हालत में hi उसकी तरफ बढ़ने लगती है और रागिनी को ऐसे नंगे अपन सामने आता देख विशाल का गाला सूखने लगता है तो वही विशाल की हालत देख रागिनी की हसी छूट जाती है वो मुस्कुराते हुवे विशाल से कहती है
Ragini-bête मेरा हाथ पीछे यही जा रहा है और घी पुरे कमर और पीठ में फ़ैल गया है क्या तू साबुन लगा देगा…..???
विशाल के लिए तो ये लाटरी hi समझो निकल गयी थी जिसके नाम का वो मुठ मार रहा था वही औरत बिलकुल नंगी उसके सामने कड़ी थी और उसे बाथरूम में अपने कामुक बदन पे साबुन लगा ने के लिए बुला रही थी..
विशाल- हाँ बड़ी माँ क्यों नहीं अभी आया…
रागिनी दूसरे शब्दों में- हाँ और अपना तलवार पंत में दाल लेना कही मुझे घायल न कर दे और उसके लुंड की तरफ घूरते हुवे थोड़ा आगे बढ़ती है जिस से विशाल लेते लेते hi एक कदम पीछे को हो जाता है..

रागिनी- हाहाहा इतने में hi दर गया बच्चू अपनी बड़ी माँ से चल जड़ी से आजा और ये घी चुरा दे…
और फिर रागिनी अपनी गांड मटकते हुवे वापस बाथरूम के तरफ चली जाती है..
विशाल- uuuuuuuuuuufffffffffff कितनी बड़ी गांड है बड़ी माँ के एक डैम आग है साली चिनार..
रागिनी अंदर बाथरूम में जा के विशाल का वेट कर रही होती है की उसके इंतजार को जल्दी hi समाप्त करते हुवे विशाल बाथरूम में पहुंच जाता है जिस औरत को छोड़ने के लिए वो कब से तड़प रहा था ो अभी उसके सामने बिलकुल नंगी थी और विशाल का गाला सूखा जा रहा था जिसे देख रागिनी की एक बार फिर से हसी छूट जाती है….
बाथरूम के अंदर आते hi विशाल रागिनी को आवाज़ देता है
रागिनी- बड़ी माँ मई आ गया
अंदर रागिनी बाथटब में लेती अपने गरम छूट के ऊपर तप खोल के उसपे पानी के धार से अपने छूट में जल रही आग को बुझाने की कोशिश कर रही थी और इसी दौरान विशाल की आवाज़ सुन के वो विशाल के तरफ hi उसे मुस्कुराते हुवे देखने लग जाती है…

रागिनी- आ गया तू
विशाल रागिनी को प्यासी नज़रो से घूरते हुवे- हाँ बड़ी माँ
रागिनी एक डैम से बाथटब से निकल जाती है उसके शरीर में शावर जेल से बना फोम लगा हुआ था फिर भी वो शॉवेरगेल एंड लूफाह विशाल की तरफ बढ़ाते हुवे उसे अपने पीठ पे मलने को कहती है…
रागिनी- ये ले जेल और लूफाह और फिर पीठ विशाल की तरफ कर के खुद सामने के तरफ मुँह कर कैग हम जाती है…
रागिनी के सामने की तरफ चेहरा होने के बावजूद भी उसकी बड़ी बड़ी चुचिअ विशाल को पीछे से hi अचे से नज़र आ रही थी जिसे देख विशाल का मन ललचा रहा था उसका लुंड फिर से अकड़ने लग जाता है और मनो रागिनी के नंगे चूतड़ों में समां जाना छह रहा था बस विशाल क ीक कदम आगे बढ़ने की देर थी…
बाथरूम में अब थोड़ी देर के लिए सन्नाटा च गया था बस दोनों चची और भतीजे के तेज़ षाले सांसो की ौज़ बाथरूम में गूंज रही thi..ragini भी दूसरे तरफ चेहरा कर के अपने होंठो को चबाते हुवे विशाल के छुवन का इंतजार कर रही थी…
विशाल पानी की कुछ बुँदे पहले रागिनी के पीठ पे डालता है और अपने हाथ जैसे hi रागिनी के पीठ पे रखता है रागिनी की धड़कने पुरे गति से बढ़ के उसकी छाती और दोनों चूचिया ऊपर निचे होने लगता है… उसके शरीर में तेज़ सुरसुरी होने लग जाती hai…aur वो अपने हाथ पीछे ले जा के विशाल के जांघो को जोर से अपने मुठी में भींच लेती है…
रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh
विशाल पुरे लगन से रागिनी के पीठ और कमर को जेल लगा के मसल रहा था और वही उसके हर छुवन से रागिनी पिघलती जा रही थी और वो खुद अप्पनइ गांड पीछे कर लेती है जिस से विशाल का तना हुआ लोड रागिनी के चूतड़ों के बिच बने घाटियों में फिट हो जाता है जैसे वो जगह उसके लुंड के लिए hi बानी हो..

रागिनी ने बेशक अपना एक कदम आगे बढ़ा लिया था और अपने गांड को अपने भतीजे के लुंड पे रगड़ते हुवे उसे अपने अंदर जल रहे आग के बारे में हिंट देना सुरु कर दिया था पर विशाल अब भी कोई जल्दबाजी किये बिना रागिनी के पीठ को अपने जेल से साणे हाथो को रागिनी के पीठ पे रगड़ रहा था…
विशाल पीछे से हाथ रगड़ते हुवे उसके कंधे और गार्डन को साबुन से मलने लगता है..
रागिनी- aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi रगड़ रगड़ के सारा मेल छुड़ा दे bête…
विशाल- हाँ बड़ी माँ बहुत मेल है पीछे लेकिन आज इसे पूरा साफ़ कर दूंगा तुम्हारे गोर बदन पे मेल की एक बून्द नहीं बचेगी
रागिनी- ठीक है bête अचे से साफ़ कर दे अपनी बड़ी माँ के गांड को मेरा मतलब है गंदगी को…
विशाल भी रागिनी के बातो को अचे से समझ रहा था और वो ये भी समझ चुक्का था की अगर उसके आग को थोड़ा और भड़काए तो रागिनी भी अपने बेटी की तरह खुद चाक इ उसके लुंड को पकड़ के अपने छूट में भर लेगी…
रागिनी- विशु थोड़ा साइड में भी सफाई कर देना bête आज तेरी बड़ी माँ अक ये बदन तेरे हाथो में है और अपनी बड़ी माँ के शरीर को अचे से चमका देना…
विशाल रागिनी के कहे बातो को अचे से समझ रहा था और वो रागिनी के बातो पे हामी भरते हुवे जी बड़ी माँ कह की आगे उसके पेट की तरफ जेल लगाने लग जाता है…

विशाल रागिनी के कमर पेट और नाभि को अचे से मलते हुवे बिच बिच में रागिनी के छूट के ऊपर हाथ फेर देता था लेकिन वो ऐसे रियेक्ट कर रहा था मनो उसे पता hi न ह की उसका हाथ रागिनी के छूट को टच कर रहा था.
रागिनी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi सफाई कर अचे से और फिर वपणी गांड को और पीछे धकेल देती है….
रागिनी- खड़े खड़े ेरे पैरो में दर्द होने लगा है मई यही लेट जाती हु तू अचे से साबुन लगा के धो दे मेरे शरीर को
विशाल- जो बड़ी माँ
और फिर रागिनी वही फर्श पे लेट जाती है… और उसकी चूचिया और उसकी छूट अब विशाल के आँखों के सामने बिना किसी परदे के थी…

विशाल शावर जेट से रागिनी के गोर कामुक बदन पे पानी की बौछार करने लगता है और फिर लूफाह के फोम को उसके शरीर पे डालते हुवे उसके बदन को फोम से भर देता है..
रागिनी को आज ये हलका सा फोम भी अपने बदन पे बहुत भरी लगने लगा था..
रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh हाँ ऐसे hi अचे से साबुन लगा दे
विशाल- हाँ बड़ी माँ अचे से मॉल मॉल के साबुन लगाऊंगा और आप बस देखते जाओ..
और फिर विशाल पाहे तप रागिनी के पिण्डलिओ को माल्टा है फिर उसके जांघो से होते हुवे उसके पेट को को मुथिओ में भर के मसलने लगता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh मममममममअअअअअअअअ रागिनी आंखे बंद किये अपने भतीजे से अपने शरीर को मसलवा रही थी बहुत ाचा लग रहा है विशु.. तोडा ऊपर भी हाथ चला वहां भी गंदगी है
विशाल अचे से समझ रहा था ऊपर मतलब खा कह रही थी फिर भी वो जान बुझ कर रागिनी के पेट को मसलते हुवे कहता है..
विशाल- ऊपर किधर बड़ी माँ…
रागिनी- कंगनी में जलते हुवे विशाल के बात पे उसके तरफ कामुक मुस्कान के साथ देखते हुवे कहती hai…apne गुलाब जामुन के तरफ साफा नै करेगा और उसके हाथ को पकड़ के अपने चुचिओ पे रख देती है..

विशाल भी अब रागिनी के पेट के साथ साथ रागिनी के चुचिओ को भी मसलन मासा के साफ़ करने लगा था.
विशाल- कितना बड़ा गुलाब जामुन है आपकी बड़ी माँ
रागिनी- आआआआअह्हह्ह्ह्ह विशु थोड़ा आराम से bête

विशाल अब रागिनी के चुचिओ को अचे से मसलने लग जाता है और उसके निप्पल को चुटकिओ में भर के निचोड़ने लग जाता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmaaaaaaaaaaaaa
विशाल- बड़ी माँ ये तो टाइट होने लगा है
रागिनी- इतने जोर से मैलेगा तो टाइट hi होगी न bête
विशाल- तो क्या आपको दर्द हो रहा है
रागिनी- माने ये कब खा… uuuuuuffffffffff तूने मेरे शरीर को इतना छेड़ा की देख मेरी पेशाब निकल गयी…

और फिर रागिनी के छूट से एक धार फुट पड़ती है और रागिनी उठ के बैठ जाती है और फिर वो तेज़ धार के साथ मूतने लगती है
विशाल रागिनी के छूट से निकल रहे हलके सुनहरी पेशाब की धार देख मदहोश होने लगता है रागिनी भी विशाल के चेहरे के भाव को पढ़ते हुवे समझ जाती है की उसे मुत्ता देख विशाल के अंदर कामाग्नि भड़कने लगी है…
रागिनी- सॉरी bête मेरे से रोका नहीं गया
विशाल- कोई बात नहीं बड़ी माँ इतस नेचुरल
रागिनी- हाँ ये तो है… च लगा दिया साबुन तो चल मैं नहा लू
विशाल- पर बड़ी माँ पीछे लगे साबुन को धोया तो है नहीं बस साबुन लगा के साफ़ किया है
रागिनी- ओह हाँ और वो तो सुख भी गया होगा चल कोई बात नहीं उसे जल्दी से पानी से साफ़ कर दे और रागिनी अपनी गांड विशाल की तरफ कर कैग हम जाती है..
सईद रागिनी के छूट की आग उसके पेशाब के साथ निकल चुक्का था इसलिए वो अब जल्दी से सब ख़तम कर के बहार निकलने की सोच रही थी पर विशाल इस मोके को इतनी आसानी से जाने नहीं देना छह रहा था इसलिए रागिनी के पीछे मुड़ते hi वो थोड़ा जेल और रागिनी के पीठ और चूतड़ों पे लगा देता है और ढेर सारा झाग रागिनी के शरीर पे फैला देता है..

और अब वो रागिनी के चूतड़ों को अपने दोनों हाथो में भर के अचे से मसलने लग जाता है
रागिनी- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह विशु और रागिनी अपने हाथो को विशाल के मरदाना छाती पे रख देती है और अपने नाख़ून विशाल के छाती पे गदा देती है….
विशाल चूतड़ों को मलते हुवे गले hi पल निचे बैठ जाता है और रागिनी के दोनों कूल्हों को फैला के उसमे अपनी ऊँगली दाल देता है…

रागिनी- ुउउइइइइइइइइ माआ ये तू क्या कर रहा है विशु
विशाल- साबुन लगा रहा हु बड़ी माँ और विशाल अपने झाग से भरे उंगलिओ से रागिनी के गांड के छोटे और तंग भूरे छेद को कुरेद कुरेद कर उसके आग को और जयदा भड़काने की कोशिश कर रहा था तो वही दूसरी तरफ शावर के निचे कड़ी रागिनी अपने बेकाबू होते सांसो को काबू में करने की नाकाम कोशिश कर रही थी....
रागिनी- uuuuuuuuuuuuuffffffffffffffffffffffff ऐसे जगहों पे भी लगते है क्या bête??
विशाल- हाँ बड़ी माँ घी यहां भी फ़ैल गया है उसे भी साफ़ किये देता हु…
रागिनी- ाचा वह तक घी चला गया क्या
विशाल- हाँ बड़ी माँ
रागिनी- ठीक है bête फिर अचे से साफ़ कर दे आज
और रागिनी एक बार फिर से मचलने लग जाती है और वो अपनी गांड पीछे धकेलने लग जाती hai..vishal भी मोके को देखते हुवे रागिनी के चूतड़ों को फैलते हुवे अपना मुँह लगा देता है…

रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh विशु ये क्या कर रहा है bête
विशाल- सफाई बड़ी माँ
रागिनी- अपनी बड़ी माँ की गांड इतनी अछि लगी तुझे की मुँह hi लगा दिया
विशाल- हाँ बड़ी माँ कितनी अछि खसबू आ रही है ufffffffffffffffffffffff
रागिनी- oooooooooooohhhhhhhhhhh विशु ऐसे तो मैं बेकाबू हो जाउंगी bête ये तू क्या कर रहा है मेरे साथ और इतना कह के रागिनी अपनी एक तंग उठा देती है/…

पैरो के उठते hi रागिनी की छूट पूरी खुल चुकी थी और विशाल अब रागिनी कैग एंड के छेद को छोड़ उसके छूट के गीले होठो को चूसने लग जाता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ये सब खान से सीखा तू uuuufffffffffff बहुत ाचा लग रहा है bête ऐसे hi चूस अपनी बड़ी माँ को…
विशाल बिना कुछ बोले जोर जोर से रागिनी के छूट को चूसने लगा था और फिर छूट को चूसते हुवे विशाल अपनी एक ऊँगली रागिनी के छूट में पेल देता है…

अब तक जहां विशाल रागिनी के छूट में अपनी जीभ दाल के अपने जीभ से उसके छूट को छोड़ रहा था तो अब वो जीभ के साथ दो अपनी ऊँगली भी रागिनी के छूट में पेल के अंदर बहार करने लगा था
रागिनी अपने शरीर से हो रहे खेलवाड़ से सम्भली भी नहीं थी और अभी इस दोहरे हमले से बेकाबू होती रागिनी जोर जोर से अपने छूट को विशाल के चेहरे पे दबा के मनो उसे अपने छूट में घुसा लेना छह रही हो की विशाल एक कदम और आगे बढ़ाते हुवे रागिनी के चुचिओ को मुट्ठी में भर के दबाने लग जाता है..

रागिनी बिलकुल पागल और बेकाबू हो उठती है और इस तरह एक के बाद एक हुवे हमले से उसके छूट की धार एक बार फिर से बहने लगती है और रागिनी अपना कामर्स चोर्ने लग जाती है…
रागिनी के छूट से बेहटा कमरस अब सिद्ध विशाल के मुँह में जाने लगा था जिसे रागिनी चुराने की कोशिश तो कर रही थी पर विशाल उसे चोर्ने को राजी न था और वो विशल के मजबूत पकड़ से बेबस हो के अंत में आत्मसमर्पण कर देती है और मचलते हुवे पने भतीजे के यह में अपना कामर्स बहाने लग जाती है…

विशाल कामिनी के छूट से बेहटा उसके कामर्स का ेके क बून्द चूस लेता है और उंगलिया चला चला के उसके छूट के नाजुक नसों को और ज्यादा संवेदनशील बना देता है.. कामिनी बेजान सी कड़ी जोर जोर से हाफ रही थी छूट से बहते कामर्स से मिला सुच उसके चेहरे पे साफ़ झलक रहा था अब वो विशाल से छूटना छह रही थी लेकिन विशाल उसे अब भी चोर्ने को राजी न था वो लगातार ऊँगली अंदर बहार करते हुवे रागिनी के छूट को चूस रहा था…
रागिनी के छूट में एक बार फिर से झनझनाहट होने लगी थी उसके छूट से पेशाब की धार बहने लग जाती है पर विशाल उसे अब भी कास के पकडे हुवे था जब उसे कोई रास्ता नहीं दीखता तो वो बेबस हो के उसे लात मार के उस से दूर हैट जाती है और अपनी एक तंग उठा के पेशाब की तेज़ धार मरते हुवे विशाल की तरफ बेशरम भरे नज़रो से देखने लगती है…

रागिनी- ले देख अपनी बड़ी माँ के छूट से बेहटा उसका पेशाब और उसमे सना हुआ उसका कॉमर्स जोट ेरे म्हणत से निकला hai…ise भी पीना छह रहा था तू गंदे
विशाल- हाँ बड़ी माँ आज तेरे गुलाब जामुन के साथ तेरा पूरा रास निचोड़ के पि जाऊंगा..
रागिनी- जो और जितना मिलना था मिल गया और ले लिया तूने अब जा और मुझे नहाने दे..
रागिनी के इस तरह पलटने से विशाल को अपने साथ धोका फील होने लगता है इसलिए विशाल रागिनी की तरफ बढ़ते हुवे उसके करीब जाता है और उसके पेशाब बहते छूट में अपनी उंगलिया पेल देता है..
रागिनी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh क्या कर रहा है मूतने तो दे uuuuuufffffffffffffff
पर विशाल उसकी एक नहीं सनटैन और तेज़ तेज़ ऊँगली अंदर बहार करने लग जाता है जिस से रागिनी वही जो अब तक कड़ी हो के मूत रही थी वो जमीं पे गिर जाती है लेकिन विशाल की उंगलिया अब भी उसके छूट से नहीं निकलती…

विशाल- क्या बोलै तुमने जितना होना था हो गया?? खुद का काम बन गया तो धोका??
अब तू देख बड़ी माँ मैं क्या करता हु
रागिनी- क्या कर रहा है गधे चोर बस कर मैं फिर से झाड़ जाउंगी…
विशाल- पहले बोल्ट ेरे गुलाब जामुन मुझे खिलाएगी
रागिनी- हाँ खा लेना गुलाब जामुन
विशाल- बोल्ट ु कभी नहीं रोकेगी..
रागिनी- नहीं रोकूंगी पक्का uuuuuuuuuffffffffffffffffff
और फिर रागिनी विशाल के ऐसे तेज़ तेज़ ऊँगली करने से एक बार और झड़ने लगती है और हफ्ते हुवे विशाल की तरफ देखते हुवे बोलने लगती है तेरा hi है ये गुलाब जामुन और उसका ये सारा रास भी पि जाना मैं तो मज़ाक कर रही थी bête uuuuuuuuuuuffffffffffffffffff तूने तो मेरी जान hi निकल दी
और फिर रागिनी वही जमीं पे गिर जाती है और जोर जोर से हाफने लगती है…..

रागिनी- हां हां hahhhhhhhhhhhhh कुत्ते मर डाला तूने
विशाल- क्या हुआ बड़ी माँ अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं अभी से ये हाल हो गया तुम्हारा
रागिनी- वही सोच रही हु बिना कुछ किये तूने ये हाल कर दिया अगर कुछ करने लग गया तो मेरा क्या हाल कर देगा
विशाल- कुछ क्या बड़ी माँ
रागिनी- चुप कर जैसे तुझे पता नहीं सारा कांड कर के भोला बन रहा है
विशाल- बोलो न बड़ी माँ
रागिनी- मैं नहीं बोलती अब जा और मुझे नहाने दे बहुत देर हो गयी शाम होने को है
विशाल- और मेर गुलजामूं??
रागिनी- हाँ खा लेना अब तो ये तेरा hi है पर अभी के लिए जा मुझे नहाने दे
विशाल- पर इसका क्या करू??? विशाल ने अपने खड़े लुंड की तरफ दिखते हुवे खा
रागिनी- ओहो थोड़ा सब्र कर ले रात का करवाती हु कुछ अभी के लिए जा प्लस और रागिनी विशाल को वह से भगा के नाहने लग जाती है.....






















































































































