Incest Katha Chodampur Ki - Page 13 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

मैं सोच में पद गया क्या हो गया इसे.. खैर जल्दी से घर से निकला तुबेल के लिए....

अपडेट 79

तुबेल मेरे खेत पर hi लगा था ये खेत मेरे बाघ के सबसे दूर वाले छोर पर था, वहां एक झोपडी पड़ी हुई थी और वहीं हम दोस्त वगेरा मिलकर अपनी दोपहर गुज़रते थे और बकचोदी करते थे... और गर्मियों में तुबेल की हौदी में नहाकर गर्मी शांत करते थे...

मैं घर से निकल कर सीधा तुबेल पर पहुंचा तो देखा एक बाँदा हौदी के किनारे बैठा हुआ सोच रहा है मैं चुपचाप पीछे से गया और उसे झकझोर दिया तो वो चौंक गया...

वो- aaaahhhhhhhhhhhhh साले चूतिया डरा दिया मुझे...

Me-benchod दर खुद रहा है और चूतिया मुझे बोल रहा है...

(अरे मैं इससे मिलवाना तो भूल hi गया आपको तो ये है मेरा जिगरी और सबसे ाचा दोस्त जग्गू पूरा नाम तो जगत है पर सब जग्गू बुलाते हैं मेरे से कुछ महीने बड़ा है हर काम में मेरे साथ रहता है और हमारी वजह से हमारे परिवार भी काफी करीब हैं मेरा इसके घर खाना पीना सोना या इसका मेरे घर रोज़ की बात है.. मेरे साथ hi पढता था पर अब पढाई छोड़ दी है...

जग्गू का घर मेरे घर से दो गली छोड़कर है... इसलिए आना जाना लगा रहता है

इसके घर में 5 लोग हैं..

जग्गू के पापा राजपाल उम्र- 48 खेती करते हैं, अपने काम से काम रखने वाले बेहद सीधे साढ़े इंसान हैं, किसी भी तरह अपने परिवार को संभल के रखना चाहते हैं...

जग्गू की मम्मी- मंजू तै उम्र- 45

क्यूंकि जग्गू के पापा मेरे पापा से बड़े हैं तो उन्हें मैं ताऊ तै बुलाता हूँ.

एक दम गाओं की गंवार औरत हैं, भोली भली हैं, बदन भरा हुआ मांसल गदराया हुआ है, अपने बच्चों की चिंता में hi रहती हैं थोड़ी बातूनी हैं, इनके बारे में ये पूरा गाओं जनता है की इनके पेट में एक बात नहीं पचती... बाकि शरीर का नाप आप खुद देख लीजिये.





ये हैं मंजू तै.

राजपाल ताऊ के दो बेटे हैं बड़े बेटे का नाम है भगत जिसे सब भग्गू कहते हैं.. उम्र 25 साल ये पूरे घर की परेशानी का कारण है, घर में कलेश करना, दारू वगेरा पीना फिर पीकर घर में या बहार लड़ना, शादी हो चुकी है, घरवालों के लालः समझने के बाद भी नहीं सुधरता... पढ़ाई तो कभी की hi नहीं..

भग्गू की बीवी और जग्गू की भाभी- प्रेमा उम्र 23 साल, एक दम मस्त गदराया हुआ माल, 10वि तक पढ़ी hai...shadi को 5 साल हो गए हैं अब तक कोई बच्चा नहीं है इसी वजह से सास से बनती नहीं है, इसके भी कुछ अलग किस्से हैं जो बाद में पता चलेंगे... पर कुछ भी हो प्रेमा भाभी का बदन ऐसा है की लुंड खड़ा होकर पिचकारी छोड़ दे, कभी कभी तो समझ नहीं आता भग्गू का नसीब इतना कैसे खुल गया..

आप लोग भी देख लीजिये कुछ ऐसी हैं प्रेमा भाभी-





घर का सबसे छोटा सदस्य है जग्गू जिससे आप मिल hi चुके हैं तो ये था जग्गू का परिवार अब बापिस चलते हैं तुबेल पर)

जग्गू- सेल तू समझ नहीं रहा...

में- भेंचो मां की लड़की की शादी से आया है पूरा परिवार और खुशी होने की जगह गांड सी शकल बना राखी है तूने.. मुझे लगा अपने बाप से मिलकर तू खुश होगा थोड़ा..

जग्गू- हरामी सेल मज़ाक मत कर बोलै न..

में- ाचा बता न हुआ क्या क्यों गांड सा मुँह बना कर घूम रहा है...

जग्गू- यार भग्गू ने परेशां कर रखा है वहां पर भी दारू पीकर हंगामा कर दिया सेल ने ऊपर से मम्मी और भाभी की लड़ाई, पापा बेचारे और परेशां हैं..

में- भग्गू चूतियापा कर रहा था तो भाभी और तै की लड़ाई क्यों हो रही थी...

जग्गू - अरे वो hi यार मम्मी भाभी को सुनाने लगती है की मेरे लल्ला को संभल नहीं प् रही, न जाने कैसी औरत है और कुछ नहीं मिले तो एक hi बात के एक बच्चा नहीं दे पाई.. उधर भाभी भी काम नहीं है की अपने लड़के को देखो उससे कुछ होता नहीं है अगर और कहीं ब्याह होता मेरा तो खुसी से रह रही होती.. नसीब hi फूट गया मेरा तो...

में- बूटा मत मानिओ पर बोल तो तेरी भाभी सही रही है... भग्गू जैसे के लिए प्रेमा भाभी..

Jaggu-bhai पता है पर अब करूँ क्या?

में- अरे चिंता मत कर सेल भग्गू को सुधरते हैं हो जायेगा सब ठीक... एक काम करें?

Jaggu-kya?

में- भग्गू को नशा मुक्ति केंद्र में दाल दें?

जग्गू- डाला तो था पिछली बार याद नहीं क्या हुआ, वहां से भाग आया था और कितना कलेश किआ था घर आकर,

Me-phir कुछ और सोचते हैं..

Jaggu-aur सिर्फ भग्गू की hi परेशानी होती तो चल भी जाता,

में- और कोई भी परेशानी है क्या?

Jaggu-haan यार पर बड़ी वैसी बात है कर्मा..

Me-kaisi बात तुझे बवासीर है क्या.. हेहेहे..

जग्गू- भेंचो मैं नहीं बता रहा यहाँ परेशां हूँ तुझे मज़ाक सूझ रहा है...

में- ाचा बता न बुरा मत मान बता क्या बात है.

जग्गू- यार बात कुछ ऐसी है कर्मा अगर फ़ैल गई तो हमारी बहुत बदनामी हो जाएगी...

Me-aisa क्या हो गया बे..

जग्गू- तू किसी को बताइयेगा तो नहीं न...

Me-bhencho तू चुटिया है क्या? इतना भरोसा नहीं है.. भोसड़ी के तेरा मेरा परिवार अलग है क्या?

Jaggu-baat वो नहीं भाई पर बात ऐसी है इसलिए बोल रहा था..

Me-wo सब छोड़ बात बता..

जग्गू- यार देख शक तो मुझे पहले भी था पर शादी में मुझे यकीन हो गया..

Me-kis बात पर...

जग्गू- यार भाभी को मैंने कई बार फ़ोन पर बात करते पाया पहले भी जब भी पूछता था तो भाभी बात ताल देती थी या बोलती थी अपने मायके बात कर रही थी... पर सामने कभी नहीं करती थी तुरंत फ़ोन काट देती थी... शादी में भी मैंने कई बार छुप छुप के मैंने दुख उन्हें बात करते हुए... तो एक बार जब वो किसी काम में लगी थी मैंने फ़ोन चुरा लिया और जिस नंबर से बात करती थी वो अपने फ़ोन में रख लिए... फ़ोन के साथ साथ कुछ मश्ग भी थे उसी नंबर के कब मिलोगी वगेरा वगेरा..

Me-ACHA किसका नंबर था वो तूने पता किआ?...

Jaggu-yaar वो भें का लोढ़ा है न मेरी पिछली गली वाला कल्लू उसका...

में- वो भें का लुंड कालिया.. उसकी इतनी हिम्मत, सेल की गांड पहाड़ दूंगा मैं.

जग्गू- भाई मरने को तो हम अभी जाकर पेल दें, पर लोग पूछेंगे क्यों मारा तो क्या बोलेंगे... भाभी की नाम आएगा और सबकी बदनामी हो जाएगी..

में- बात तो सही है तेरी...

Jaggu-yaar भाभी ने ये सही नहीं किआ..

में- देख जग्गू सही कहूं तो साडी गलती भाभी की भी नहीं है, हर औरत की शादी के बाद कुछ ख्वाहिशें और ज़रूरतें होती हैं जो उसके पति को पूरी करनी होती हैं पर भग्गू से उन्हें मिला क्या.. कुछ नहीं ऊपर से तै के तने...

Jaggu-main समझ रहा हूँ यार पर घर की इज़्ज़त का तो सोचा होता...

में- सच कहूं तो तेरा भाई लोदु है और उससे बड़ा लोदु तू है...

Jaggu-main कैसे?

में- तुझे नहीं दिखा घर में प्यासी भाभी है, तू hi मदद कर देता..

जग्गू- सेल क्या बोल रहा है भाभी है मेरी वो..

में- तभी तो तू लोदु है, मतलब वो भें का लोढ़ा केलिए तेरी भाभी को चोदे तो चलेगा पर तू नहीं छोड़ सकता क्योंकि वो तेरी भाभी है...

जग्गू- कर्मा ये नहीं हो सकता..

Me-kyun लुंड खड़ा नहीं होता तेरा?

जग्गू- वो बात नहीं है सेल..

में- तो क्या बात है चूतिये, ाचा एक बात बता तुझे प्रेमा भाभी कैसी लगती हैं?

Jaggu-achi लगती हैं, भाभी है मेरी अछि तो लगेगी hi..

में- लोदुचंद उनका बदन कैसा लगता है,

जग्गू - बदन भी ाचा लगता है बहुत सूंदर हैं भाभी...

में- तूने कभी उन्हें उस नज़र से देखा है..?

Jaggu-kis नज़र से.

में- अबे एक मर्द की नज़र से, मतलब सीधा सीधा बोलूं तो कभी तेरा मन किआ है उन्हें छोड़ने का?

जागहु- सेल हरामी पागल हो गया है क्या, घर तुड़वायेगा मेरा,

Me-drame मत कर और रही बात घर की तो अभी बड़ा जुड़ा हुआ है... अब जो पूछ रहा हु सच सच बात..

जग्गू- हाँ यार किआ है वो इतनी सूंदर हैं गदराई हुई हैं किसका मन नहीं करेगा,

में- ये hi तो लवडे तो अबतक कोशिश क्यों नहीं की...

जग्गू- पागल है घर में किसी को पता चल जाता तो, क्या होता, और वो तो सीधे मुँह मुझसे बात तक नहीं करती...

में- जो भी होता जो अभी हो रहा है वो तो नहीं होता, सेल तेरी भाभी की प्यास बुझ जाती और तुझे एक मस्त छूट मिल जाती घर पर hi... और क्या पता वो पेट से भी हो जाती उनकी ज़िन्दगी कितनी सुधर जाती... सबसे बड़ी बात घर की बात घर में रहती कोई बदनामी का दर नहीं...

मैंने देखा साला जग्गू भाभी की बात सुनकर hi पंत के ऊपर से लुंड को बार बार मसल रहा था, साला ऊपर से शरीफ बन कर दिखा रहा था...

में- सेल भाभी के नाम से तेरा लुंड खड़ा होने लगा और अभी तक शरीफ का लुंड बन रहा था...

जग्गू- वो बात नहीं भाई सच में मन तो कई बार करता है भाभी को... छोड़ने का,

Me-aur क्या क्या मन करता है तेरा खुल के बता,

जग्गू- बस यार बोल तो दिया और क्या?

में- सेल खुल के बता एक एक चीज़ तभी मैं कुछ कर पाउँगा.

Jaggu-wo मन करता है उनकी बड़ी बड़ी छूछीयों को मसल मसल कर पियून,

Me-aur?

जग्गू- उनके मस्त रसीले होंठों में अपना लुंड डालकर चुसवाउन, उनकी मस्त बड़ी सी गांड में लुंड घुसा के पटक पटक कर छोडूं..

Me-ye हुई न बात तो अब ये बता तू सच में ये सब करना चाहता है?

जग्गू- तुझसे क्या छुपा सकता हूँ मैं.. हाँ चाहता हूँ..

में- तो बस जो मैं कहूं वो करता जा और तेरे नीचे तेरी भाभी होगी...

जग्गू- वो सब तो ठीक है इस कल्लू का क्या करें?

में- देख कल्लू से निपटने से पहले हमें भाभी से बात करनी होगी...

Jaggu-pagal है क्या उनसे क्या बात करेंगे...

Me-beta ये hi तो बात है यहीं तुझे हिम्मत दिखानी होगी नहीं तो भाभी को छोड़ने का सपना भूलजा.

जग्गू- पर कैसे और क्या बात करेंगे..

Me-wo मैं सब समझा दूंगा.. तू बस मुझे उस वक़्त बुला लिओ जब ताऊ तै घर न हो... भाभी अकेली हो...

जग्गू- ऐसा तो दोपहर में होता है जब मुम्ममय पापा को खाना देने जाती है खेत पर...

Me-to ठीक है बता दियो मैं आ जाऊंगा...

Jaggu-theek है किसी तरह इस कल्लू से भाभी का पीछा छुड़ा..

में- हो जायेगा बीटा सब हो जायेगा चिंता मत कर बस काम पर lagja..bhabhi के थोड़ा करीब जाने की कोशिश कर उनसे बात कर..

Jaggu-thoda मुश्किल है पर करूँगा...

में- बस यही चाहिए...

जग्गू- चल घर जाता हूँ मैं और सही मौका देखकर तुझे बुलाता हूँ..

में- ठीक है और सुन एक काम और करना है तुझे..

Jaggu-kya...

मैंने उसे समझाया क्या करना है और घर भेज दिया... मैं क्या कैसे करना है ये सोचते हुए अपने बाघ के अंदर चलने को हुआ तो देखा सड़क पर कोई जाना पहचाना दिखा दूर से जिसे देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी...

मैंने दूर से आवाज़ लगाई तो उसने देखा और फिर ख़ुशी से मेरी तरफ आने लगी ये और कोई नहीं बल्कि मेरी प्यारी पल्ली थी अपने स्कूल से आ रही थी...

स्कूल ड्रेस में पल्ली इतनी मासूम और सुन्दर लग रही थी की इसे देखकर कोई कह hi नहीं सकता था की ये कभी चूड़ी भी नहीं होगी... पल्ली खेत के बीच से दौड़ती हुई मेरे पास आई और मेरे गले से लग गयी...

पल्ली- भैया इतने दिनों बाद याद आई तुन्हे मेरी...

Me-are याद तो रोज़ आती थी बस मैं आज आया हूँ...

और मैंने पल्ली को बाँहों में कास लिया और थोड़ा बाघ के अंदर ले आया ताकि सड़क से आने जाने वाले लोग न देख पाएं...

Palli-rahne दो भैया तुमने बिलकुल याद नहीं किआ मुझे...

ये कहकर पल्ली झूठे गुस्से में मेरे सीने पर मरने लगी... उधर जग्गू से भाभी की बात करके और अब पल्ली के गले लगने से मेरा लुंड खड़ा हो गया और पल्ली को चुभने लगा...

में- नहीं पागल ऐसा नहीं है मैं तो तुझसे कितना प्यार करता हूँ.....

पल्ली- हाँ भैया तुम्हारा प्यार मुझे दिख भी रहा है और मेरे पेट में चुभ भी रहा है...

Me-kya करूँ तू है hi इतनी सूंदर के तुझे देखकर ये अपने आप खड़ा हो जाता है...

पल्ली- ाचा तो ये मेरी वजह से है. .

में- हाँ तेरी वजह से है.. और तुझे इसे ठीक भी करना होगा... पर उससे पहले मेरा मुँह मीठा करवा...

और मैंने पल्ली के होंठों को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगा.. आह्ह्ह्हह उसके मुलायम होंठो का रास मेरे मुँह में घुलने लगा...

थोड़ी देर बाद मैंने उसके होंठों को छोड़ा...

पल्ली- मममम भैया यहाँ कोई देख लेगा.. और लेट भी हो रही हूँ घर पहुँचने का टाइम हो गया पापा पूछेंगे

Me-koi नहीं देखेगा मेरी जान और चाचा को मैं संभल लूंगा तू अभी मुझे संभल..

ये कहकर मैंने एक बार और उसके होंठों को चूसा... इसके बाद पल्ली खुद मेरे सामने नीचे बैठ गयी और मेरी पंत खोलने लगी अगले hi मिनट में उसने मेरा कड़क लुंड बहार निकल लिए और जीभ से सुपडे को चाटने लगी... मेरी तो आह्ह्ह्हह निकल गयी...

Me-aahhh बीटा ऐसे hi...

पल्ली- हम्म्म भैया ये तो और बड़ा लग रहा है...

में- तेरी याद में बड़ा हो गया पल्ली..

पर इसे क्या पता इसने वहां कितनी छूट और गांड का रास पिया है और सबसे खास तो अपनी माँ का भी...

पल्ली मेरी आँखों में देखते हुए लुंड को चाटने लगी.. और फिर मुँह में भर कर चूसने लगी... मैं पल्ली के मुँह का मज़ा लेने लगा पल्ली पहले से काफी ज़्यादा अचे से चूसने लगी थी शायद अनुज के साथ काफी प्रैक्टिस की थी उसने..

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था ऐसे खुले में लुंड चुसवाने में पेड़ों के बीच और लुंड चूसने वाली जब पल्ली जैसी कमसिन काली हो तो बात hi क्या है...

पल्ली बाघ में पेड़ों के बीच बैठकर मेरा लुंड चूस रही थी.. उसका सर आगे पीछे होता हुआ मेरे लुंड पर बहुत प्यारा लग रहा था





पल्ली के मुँह में मेरा लुंड और कड़क होता जा रहा था और मैं मज़े से आहें भर रहा था..

मैंने पल्ली के सर को पकड़ लिया और अब खुद अपनी कमर हिला हिला कर अपना लुंड उसके मुँह में अंदर बहार करने लगा.. पल्ली के मुँह से घुग्घु गग्गूऊ की आवाज़ निकलने लगी...

में- ले साली रंडी और अंदर तक ले तेरे मुँह में अगर तुझे तेरी माँ जैसी रंडी बनना है तो अंदर तक ले कर चूस...

और मैंने पल्ली को अपने लुंड पर दबा दिया कुछ पल ऐसे hi दबाये रखने के बाद छोड़ा तो उसकी आँखों में आंसू थे, मैंने पल्ली के मुँह से लुंड निकला और उसे पेड़ के सहारे खड़ा करके झुका दिया और उसकी स्कर्ट को कमर तक कर दिया..

और पंतय को पकड़कर नीचे खिसका दिया और उसके पीछे खड़ा होकर लुंड को उसकी गीली छूट पर लगाया और फिर एक झटका मार के अंदर सरका दिया....

Palli-ahhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa कीटनाआए badaaaaaaaaaa है तुम्हारायआ..

में- चुपपपपपप सलीई रनडीईईई पहली बार थोड़े hi ले रही है...

और ये कहकर एक और धक्का मारा और आधा लुंड पल्ली की कमसिन छूट में समां गया...

Palli-ahhhhhhhh पहलिई बार nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii है पर हर बार ये जान तो निकाल देता है न... इतना बड़ा मुसलललल दाल दिया meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot में...

मैं हलके हलके धक्कों से छोड़ने लगा... पल्ली की जवान छूट मरने का अलग hi मज़ा था... पल्ली पेड़ को पकड़े हुए हर झटके के साथ ाआहें भर रही थी...





धीरे धीरे करके मैंने पूरा लुंड उसकी छूट में घुसा दिया था और उसकी छूट ने भी मेरे लुंड के लिए अपने अंदर जगह बना दी थी...

पल्ली- aahhhhhhhhhhhhhhhh भैया bahuttttttttttttttt badaaaaaaaaaa है तुम्हारायआ.... अंदर तक भर देता हीी...

में- तेरी छूट भी तो bahuttttttttttttttt टाइट है पॉलीईई लुंडडडड को निचोड़ लेटीईई है...

मैं थप थप थप थप पल्ली को चोदे जा रहा था... पल्ली बेचारी पेड़ का सहारा लिए स्कूल की ड्रेस में झुककर अपनी छूट में मेरा लुंड ले रही थी...





मैं पल्ली के कंधे पकड़ कर सटासट धक्के मार रहा था मेरा लुंड पल्ली की छूट से पिस्टन की तरह अंदर बहार हो रहा था ..

पल्ली को छोड़ ते हुए मेरी नज़र उसकी गोल मटोल गांड पर गयी और फिर उसके गांड के छोटे से छेड़ पर मैं खुद को रोक नहीं पाया मैंने एक हाथ आगे लेजाकर अपना अंगूठा पल्ली के मुँह में दिया जिसे वो तुरंत चूसने लगी जैसे hi अंगूठा गीला हो गया मैंने बापिस निकल लिए और पीछे लेकर उसकी गांड के छोटे से छेड़ को कुरेदने लगा... और फिर अंगूठा उसकी गांड में घुसा दिया...

पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भैया... अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्ह

मैं तेज़ धक्को के साथ पल्ली को छोड़ रहा था साथ hi अंगूठा उसकी गांड में अंदर बहार कर रहा था.. जिससे पल्ली इस दोहरे हमले को सह नहीं पा रही थी और चिल्लाये जा रही थी...

Palli-ahhhhhhhh एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii चूड्डड्डूओ भैया मेंनननननन gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii...

पल्ली ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ने लगी मैंने उसके शरीर को कसकर पकड़ लिया नहीं तो वो गिर जाती... पर मैं लगातार उसे छोड़ता रहा..

और जब उसका झड़ना बंद हुआ तब तक मैं उसकी छूट मरता रहा और फिर अपना लुंड उसकी छूट से निकल लिए और अंगूठा गांड से...

पल्ली झुकी हुई अपनी साँसे ठीक कर रही थी वहीं मैंने झुककर उसकी गांड के छेड़ पर थूका और तुरंत एक हाथ से उसकी कमर पकड़ कर और एक हाथ से लुंड पकड़ कर उसकी गांड के छेड़ पर लगाया धक्का देकर कछह से उसकी गांड के कैसे हुए भूरे छेड़ में घुसेड़ दिया...





लुंड गांड में जाते hi हम दोनों के मुँह खुल गए, पल्ली की गांड कासी होनी की वजह से मेरा लुंड बहुत घिस कर जा रहा था.. और उसे दर्द भी हो रहा था मेरे अचानक लुंड घुसेड़ने से...

पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह माआआआआ मर gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr दालायआ aahhhhhhhhhhhhhhhh भैया...

मैंने हाथ से उसका मुँह दबा कर उसकी चीख बंद की...

में- बस मेरी बहाना हो गया घुस गया मेरा लुंड तेरी कासी हुई गांड में आह्ह्ह्हह्ह कितनी कासी हुई गाब्द है तेरी पल्ली...

Palli-ahhhhhh माआआआआ भैया ारायअम्म्मम्म्म्म सीईए नही कर आआआहहहहहहह सकते थे.... मेरी जान निकाल डीई...

में- पल्ली तेरी गांड देखकर रोक hi नहीं पाया खुद को.... आह्ह्ह्ह इतने दिनु बाद मिली हैईईई..

अब पल्ली का दर्द भी थोड़ा काम हुआ तो अपने चूतड़ हिलाकर मुझे इशारा किआ...

तो मैंने उसकी गांड में लुंड चलना शुरू किआ और कुछ hi देर में अछि गति पकड़ ली... और लम्बे लम्बे झटको से पल्ली की गांड मरने लगा...





पल्ली की गांड इतनी कासी हुई थी की लुंड निचुड़ता जा रहा था... और उसी वजह से मेरी गति अपने आप बढाती जा रही थी... कुछ hi देर में मेरे धमके तूफानी हो गए और आस पास थप थप थप थप थप की आवाज़ गूंजने लगी... मुझे मेरा रास मेरी गोलियों से लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा था... और कुछ 8-10 झटके बाद मैंने अपना लुंड जड़ तक पल्ली की गांड में गाड़ दिया और झड़ने लगा... एक के बाद एक धार से मैंने पल्ली की गांड को भर दिया और जब मेरे रास की एक एक बूँद पल्ली की गांड ने निचोड़ ली तो मैंने अपना लुंड उसकी गांड से बहार निकला.. तो मेरा रास बहकर उसकी गांड से बहार निकल कर उसकी जांघों पर बहने लगा... पल्ली ने जल्दी से अपनी पंतय ऊपर खिसकाई और घूम कर बैठ गयी मेरे लुंड को चाट कर साफ़ करने लगी जो अभी उसकी गांड से निकला था...

मुझे यही अदा तो पल्ली की पसंद थी, उसका लुंड के लिए प्यार चाहे वो गांड से निकला हो या छूट से... पल्ली ने चाट चाट कर पूरा लुंड साफ़ किआ और अचे से मेरे कच्चे में डालकर मेरी पंत बंद करके अंदर कर दिया और खुद कड़ी हुई ..

मुस्कुरा कर बोली- अव्हा भैया अब लेट हो रही हूँ घर जाती हूँ तुम घर आना माँ तुमहु याद करती है बहुत...

में- ठीक है आऊंगा मेरी प्यारी चची से मिलने...

इसके बाद पल्ली गले लगी मेरे और खिलखिलाते हुए भाग गयी...

मैंने भी सोचा क्या लड़की है ये... और मैं कितना खुशनसीब हूँ जो इसे जब चाहे छोड़ पता हूँ....

खैर इसी ख्याल के साथ मैं बापिस बाघ के अंदर चल दिया...

इसके आगे क्या हुआ जानिए ऊगली अपडेट में और प्लीज कमैंट्स ज़रूर करते रहिये तभी स्टोरी लिखने का मज़ा आता है.. बहुत बहुत शुक्रिया
 
गाइस प्लीज कीप थे सुग्गेस्टियन्स किंग आपको कमैंट्स करने में ज़्यादा टाइम नहीं लगता बूत आपके कमैंट्स हमें आगे लिखने की लिए इनसपिरे करता है.. ान मेरे जैसे अलसी के लिए तो इंस्पिरेशन बहुत ज़रूरी है सो प्लीज रिव्यु देते रहे...
 
हैप्पी होली तो आल ऑफ़ यू
 
मैंने भी सोचा क्या लड़की है ये... और मैं कितना खुशनसीब हूँ जो इसे जब चाहे छोड़ पता हूँ....

खैर इसी ख्याल के साथ मैं बापिस बाघ के अंदर चल दिया...

अपडेट 80

बाघ के अंदर जाते हुए मेरे दिमाग में फिर से जग्गू की कही हुई बातें और प्रेमा भाभी घूम रहे थे.. मुझे कुछ न कुछ तो करना hi होगा ऐसे जग्गू के परिवार की बदनामी होते हुए नहीं देख सकता मेरे सबसे अचे दोस्त के साथ ऐसा कुछ हो जाये और मैं कुछ न कर पौन तो क्या फायदा मेरी दोस्ती का..

पर कैसे करूँ क्या करूँ इसी उधेड़बुन में इधर उधर टहल कर सोच रहा था... कुछ समझ नहीं आ रहा था फिर भी एक आईडिया आया दिमाग में पर वो कितना काम करेगा इसका भरोसा नहीं था...

पर खली पेट तो कोई काम नहीं कर सकता न और पल्ली की चुदाई करके मुझे भूख लगने लगी थी.. तो मैं बाघ से सीधा घर की और चल दिया..

घर पर पापा अनुज माँ सब पहले से hi थे... मैंने माँ से खाना माँगा और पेट भर खाया... माँ के सामने होने से मेरा मन और लुंड बहक रहे थे पर पापा और अनुज के होने की वजह से कुछ नहीं कर सकता था... माँ तो बिलकुल साधारण लग रही थी जैसे कुछ हुआ hi न हो... कोई कह hi नहीं सकता था की ये औरत रात को अपने बेटे का लुंड छूट में लेकर उछाल रही थी... इस वक़्त माँ पहले की तरह एक संस्कारी पतिव्रता औरत थी...

खैर अभी कुछ करने को नहीं था तो टीवी देखने बैठ गया... साथ में सब लोग भी देखने लगे. मैं टीवी देखते हुए जग्गू के फ़ोन का इंतज़ार कर रहा था की वो बुलाएगा तो आज भाभी से बात होगी पर टीवी देखते देखते शाम हो गयी पर उसका फ़ोन नहीं आया... लगता था भाभी से बात hi नहीं कर पाया...

मेरे दिमाग में यही चल रहा था की प्रेमा भाभी को कल्लू के चक्कर से कैसे छुड़ाया जाये क्यूंकि कल्लू मुझे भी पसंद नहीं था और एक दो बार तो मेरी उससे लड़ाई भी हो चुकी थी... सेल की ाअदत hi थी दूसरो की बहु बेटियों पर नज़र मरने की...

मैंने सोचा कर्मा इसका जल्दी से कुछ न कुछ करना पड़ेगा उधर जग्गू से जो होता है वो करे पर मुझे भी अपमी तरफ से दिमाग लगाना पड़ेगा...

ये सोच hi रहा था की पापा ने बोलै कर्मा बाघ से 3 सेर आम तोड़ ला बीटा...

में- 3 सेर आम किस लिए...

पापा- अरे वो लालसिंह मिला था बोल रहा था चाहिए कजरी के लिए जहाँ बात पक्की हुई है तो उनके यहाँ भिजवाने हैं....

कजरी का नाम सुनते hi मेरे कान खड़े हो गए... और जैसे मुझे जग्गू की मदद करने का तरीका मिल गया...

में- ठीक है पापा तौल कर दे भी आऊंगा...

Papa-theek है जा..

मैं बाघ की और निकल गया बाघ में पहुंचने hi वाला था की एक आवाज़ आई पीछे से- ओह्ह लात साब..

मैं आवाज़ सुनते hi समझ गया की कौन है... मैं पीछे मुदा..

में- नमस्ते चची...

सामने ममता चची थी मैंने झुककर उनके पेअर छुए...

म चची- जग जग जिओ मेरे लाल... है रे कर्मा बड़ा नासपीटा है तू... चची की याद न आई तनिक भी तुझे...

में- अरे मेरी पये चची तुम्हारी याद न आये ये कैसे हो सकता है...

म चची- तो कल से आया हुआ है एक बार भी खबर लेने आया तू...

में- चची मैं अभी आने hi वाला था घर पर खबर लेने भी और वो लेने भी...

म चची- ( मुस्कुराते हुए) और का लेगा...?

में- आशीर्वाद तुम्हारा...

म Chachi-badmash है पूरा तू... अरे सुन भैंस ब्याही रही न सुबह...

Me-haan चची चलो बच्ची दिखता हूँ...

मैं और चची बाघ के अंदर आये और बच्चे के पास पहुंचे..

में- चची तुम देखो ये रही बाछहियी...

म चची- खूब तंदरुस्त बछिया है रे.... भैंसिया की तरह hi...

में- हाँ चची जैसी माँ वैसी beti...acha चची थोड़ी देर रुको मैं आम तोड़ लूँ...

म चची- किसके लिए आम तोड़ रहा है बच्चा...

में- वो हैं न लाल सिंह उनके लिए...

म चची- उस नासपीटे को का काम पद गया आम से...

मैंने बोरा उठाया और आम तोड़ कर भरने लगा चची भी बछिया के सर पर हाथ फिरते हुए मुझसे बात करने लगी....

में- कजरी की बात पक्की हुई हैं कहीं उनके यहाँ भिजवाने के लिए..

म चची- ईश्वर की कृपा hi है जो कजरी का ब्याह हो जाये नहीं तो कितने hi नाते वाले आये और मन कर गए...

में- क्यों चची?

म चची- अरे लडकवा है न उसका का नाम है कलमुहे का... उसकी हरकतों की वजह से.. कौनसा ऐब नहीं है उसमे कौन नाता रखना चाहेगा ऐसी परिवार से...

में- कल्लू है चची नाम...

(हाँ ये वही कल्लू है जो जग्गू की भाभी प्रेमा से बात करता है... इसके बाप का नाम hi लाल सिंह है.. माँ को गुजरे कई साल हो गए और एक छोटी बहिन है

कजरी- उम्र 28-29 की हो चुकी है शादी नहीं हो रही थी अभी रिश्ता तय हुआ है... शरीर पर जवानी पूरी तरह से चढ़ी हुई है.. शरीद बेहद गदरा गया है.. बड़े बड़े तरबूज़ जैसे चूतड़... पापीती जैसी छुछियां... कुल मिलकर गद्देदार माल है पर बेचारी की जवानी ख़राब हो रही है अपने भाई की हरकतों के कारन..

ये है कजरी





अभी जाकर रिश्ता तय हुआ है आगे देखते हैं क्या होता है)

म चची- हाँ वही मुआ कल्लू... जुआ खेलता है दारू पाइक पड़ा रहता है और तो और गाओं की औरतों को ऐसे घूरता है जैसे पिछवाड़े में घुस hi जायेगा...

में- बच के रहना चची तुम्हारे पिछवाड़े में न घुस जाये.. वैसे भी तुम्हारा पिछवाड़ा बहुत बड़ा है...

म चची- हम उसकी हड्डी नहीं तोड़ देंगे हमारे साथ बदतमीज़ी की तो...

ऐसे hi बातें करते करते मैंने आम तोड़ कर भर लिए... काम तो हो गया था पर ममता चची के सामने होने से अब मेरा दूसरा काम करने का मन होने लगा था... वैसे भी दोपहर से माँ को देख देख कर लुंड खड़ा हो रहा था...

मैंने बोर को बांध कर साइड में रखा और चची को जाकर पकड़ लिया...

म चची- अरे कर्मा बचा छोड़ कोई आ जायेगा...

में- नहीं चची तुम्हे छोड़ने का नहीं छोड़ने का मन करता है...

म चची- अह्ह्ह्ह बच्चा यहाँ कोई आ सकता है...

मैंने भी सोचा चची सही कह रही हैं तो मैंने चची का हाथ पकड़ा और उन्हें बाघ के अंदर ले आया जहाँ किसी के इस समय आने की संभावना बहुत काम थी...

और पजंचते hi मैंने ममता चची के होंठों को अपने होठों में भर लिए और चूसने लगा... चची भी मेरा पूरा साथ दे रही थी..

चची के होंठों को छूटे hi मेरा लुंड बिलकुल कड़क हो गया था... मैं साड़ी के ऊपर से hi चची के बड़े बड़े चूतड़ों को मसलते हुए उनके होंठो को चूस रहा था... और होंठों के साथ साथ अब जीभ भी हम एक दुसरे के मुँह में घुसेड़ कर चूस रहे थे मैंने चची का पल्लू गिरा दिया.. और उनके लाल ब्लाउज के ऊपर से उनकी छुछियां दबाने लगा...

म चची- hmmmmmmmmmmmmmmm... थोड़ी देर तक ऐसे hi होंठों की जुगलबंदी से मेरा लुंड फटने को होने लगा तो मैंने वक़्त की नज़ाकत को समझते हुए चची को नीचे बिठा दिया अपने सामने जिससे मेरा लुंड चची के मुँह के सामने आ गया पाजामे के अंदर तम्बू बना के खड़ा था... आगे का काम चची को पता था क्या करना है उन्होंने तुरंत मेरा पजामा और कच्चा नीचे खिसकाया और पाजामे में क़ैद लुंड को बहार निकल लिए...

लुंड बहार निकलते hi चची ने उसे पकड़ लिया..

म चची- aaahhhhhhhhhh कितना तदपि हूँ तेरे इस मुसल के लिए re...aaj मेरी तड़प मिटी है इसे हाथो में लेकर...

और ममता चची ने प्यार से लुंड को देखते हुए टोपे पर चूम लिया...





चची के होंठ लुंड पर पड़ते hi मेरा लुंड झटके खाने लगा.. चची लुंड की तड़प को और बढ़ने लगी और जीभ निकल कर टोपे पर फिरने लगी...

में- अह्हह्ह्ह्ह छाछठीइइइइइइइ... ऐसी hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii...

चची ने टोपे पर जीभ फिरते हुए मेरे लुंड को मुँह में भर लिए.... और चूसने लगी....

मैं तो जैसे जन्नत में पहुंच गया चची का गरम मुँह और टोपे पर घूमती हुई जीभ बहुत अछि महसूस हो रही थी...

में- क्या जादू है छाछठीइइइइइइइ तुम्हारे मुँह में आअह्ह्ह्हह.... थोड़ा और अंदर लूओ..

चची मेरा लुंड और अंदर लेने की कोशिश करने लगी और तब तक पीछे नहीं हटी जब तक गले तक न ले लिए हो...





मैं धीरे धीरे से कमर हिलाकर अपने लुंड को ममता छाछठीइइइइइइ के मुँह में अंदर बहार करने लगा... ममता चची मुझे अपना मुँह छोड़ने का भरपूर सुख दे रहे थी...

पर हर पल के साथ शाम होती जा रही थी जिसका मतलब ये था की मेरे पास ज़्यादा समय नहीं था और मैं सिर्फ चुसवाने से काम नहीं चलना चाहता था तो न चाहते हुए भी मैंने... चची के मुँह से अपने लुंड को खींच लिए... और उन्हें सीधा खड़ा कर दिया...

न जाने क्यों उस समय मुझे इतनी ठरक चढ़ी की ये जानते हुए भी की इसमें खतरा है मैं चची के कपडे उतरने लगा...

मैंने चची की साड़ी पकड़ी और खींच के उतर दी..

म चची- अह्ह्ह्हह्हह बचुआआआ क्या कर रहा है सारी रहने दे रे.....

पर मैंने चची की नहीं सुनी...

Me-are चची इतने दिनों बाद तुम्हारे इस गदराये बदन को देखने का बड़ा मन है...

और ये कहते hi मैं उनके ब्लाउज पर झपट पड़ा...

म चची- बछहहआ समझ कोई देख लेगा... ऐसी hi कर्ली..

Me-koi नहीं आ रहा चची परेशां मत हो...

तबतक मैं चची का ब्लाउज खोल कर अलग कर चूका था और अब ब्रा भी नीचे पड़ी हुई थी... चची के रसीले ामो को देखकर मैं खुद को रोक नहीं पाया और एक छुच्छी को चूसने लगा तो दूसरी को दबाने लगा...

म चची- बछहहआ पीजा सारा दुध अपणीइइइइइइइ छाछठीइइइइइइइ काआअह्ह्ह्ह... आह्ह्ह्ह... बहुत दिनों सीईई भरा है रे teriiiiiiiiiii खातिर...

मैं मस्ती में चूस रहा था छूछीयो को बदल बदल कर... और दुसरे हाथ का फायदा उठा कर मैंने चची के पेटीकोट के नाड़े को खींच दिया और पेटीकोट भी नीचे गिर गया अब चची पूरी नंगी मेरे सामने थी...

फिर मैंने चची के छूछीयो से मुँह हटाया और उन्हें पास hi पेड़ को पकड़ कर खड़ा कर दिया और जल्दी से उन्हें थोड़ा सा झुककर अपने कड़क लुंड को चची की प्यासी छूट पर लगाया और बिना देरी किये एक धक्का लगाया और लुंड चची की छूट में कछह से घुस गया...

म Chachi-aaaaaahhhhhhh बछहहजूऊऊऊआआआ कितना badaaaaaaaaaa है तेराआआआ लोड़ाआआ.....

Me-aurrrrrrrrrrr तुम्हारीई choooooooooot किटनीय गरम है छाछठीइइइइइइइ.. मज़ाआ आ रहा है...

मैं चची की छूट में लुंड अंदर बहार करने लगा और हर झटके के साथ थोड़ा और लुंड अंदर सरका देता... कुछ hi झटको में मेरा पूरा लुंड चची की छूट से अंदर बहार होने लगा..





म चची- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh ैससससीईए hiiiiiiiiiii बच्चा मिटाआआआ अपनी चची की choooooooooot की तड़प..... कब्ज़ीयी पीएसीईई थीई तेरे लुंड की लिए...

चची अपनी छूछीयो को मसलते हुए मुझे उकसा रही थी.... जिससे उनकी उत्तेजना का अंदाज़ा लगाया जा सकता था..

में- हननननननन छाछठीइइइइइइइ आअज तुम्हारी छूवूँत की सआरईईईई प्यासस मिटाआ दूंगा अपने लोडे से..... अह्ह्ह

मैं चची को छोड़ते हुए सोचने लगा की कल शाम से अब तक ये तीसरी छूट है जिसमे मेरा लुंड बाघ के अंदर जा रहा है... ये बाघ न जाने कितनी चूड़ियों का गवाह बनेगा... अभी चची की उससे पहले पल्ली की और सबसे पहले मेरी प्यारी माँ की छूट....

माँ की छूट का ध्यान आते hi मेरे धक्के और तेज हो गए...

म चची- अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ummmmmmmmmmmmmm आअह्ह्ह्हह बच्चा मैं थक रही हुण्णनं...

मैंने ये सुनते hi जल्दी से लुंड निकला और चची की साड़ी को वहीं बिछा दिया... और उसपर सीधा लेट गया चची ने भी बिना देर किये अपने दोनों पेअर मेरे कमर के दोनों तरफ किये और नीचे बैठ कर मेरे लुंड को पकड़ा और अपनी छूट पर टिकाया और नीचे सरक गयी मेरा लुंड भी चची की छूट में घुसता चला गया... और फिर चची अपने चूतड़ों को उछाल उछाल कर मेरा लुंड अपनी चुत में अंदर बहार करने लगी..





म Chachi-ahhhh कर्मा बच्चा कितना तदपि है तेरी चचईई तेरे इस मुसल के liye...ahhh अह्ह्ह अह्ह्ह...

में- तो आज साडी तड़प मिटा लो न चची... अपनी छूट की भी और मेरे लुंड की भी जो इतने दिनों बाद तुम्हारी छूट का सफर कर रहा है...

म चची- बछहहआ सबबबब मिटाऊँगी आअज जितना कर सकीय करुँगी अब तो रोजज़्ज़ लुंगी इसे अपने अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अंदर...

मैं चची की उछलती हुई छूछीयो को मसलते हुए उन्हें देखकर मुस्कुरा रहा था... और उनकी चुदाई का मज़ा ले रहा था...

म Chachi-ahhhh ऐसी क्या देख रहा है बचाआ..

में- देख रहा हूँ की तुम माँ बेटी कितनी बडीइइइइ चुड़क्कड़ हूँ.... दोपहर में इसी बाघ में बेटी को छोड़ा और अब माँ मेरे लुंड पर उछाल रही है....

म चची- हाआनंनं दोन्यू मा बेटी चुड़क्कड़ है बाछहा... मेरी बेटी रंडी माआआअह्हह्ह्ह्ह की रनडीईईई बेटीई हैंण्ण्ण्न और हम दोनों teriiiiiiiiiii रनडीईईई हैंण्ण्न....

चची की बात सुनकर मैं थोड़ा ज़्यादा उत्तेजित हो गया और तुरंत चची को पलट कर लिटा दिया और खुद उनकी साइड में लेटकर उनकी एक तंग उठाकर लुंड उनकी चुत में पेलने लगा... मेरे धक्के तेज़ होते जा रहे थे..





Me-le साली रनडीईई टूओ फिररररररर रनडीई की तरह लुंडडडड ली.....

म Chachi-ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh ैससससीईए hiiiiiiiiiii और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ मा aahhhhhhhhhhhhhhhh

हर झटके के साथ उनकी बड़ी बड़ी छुछियां हवा में उछाल कूद कर रही थी... मैंने चची के मज़े को और बढ़ने के लिए अपने एक हाथ को उनकी छूट के पास लेजाकर अंगूठे से उनकी छूट के डेन को सहलाने लगा... जिससे चची तो जैसी पागल हो गयी...

मैं तेज़ तेज़ झटको से उन्हें छोड़ रहा था साथ hi छूट के डेन को छेड़ रहा था...

म Chachi-ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh बछहहजूऊऊऊआआआ आआआहहहहहहह मेंनननननन gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii...

और कुछ पल बाद hi चची भरभरा के झड़ने लगी... मैं और तेज़ झटको से उनकी गीली छूट में लुंड पेल रहा था.... मुझे अपने लुंड पर चची का रास बहता हुआ साफ़ महसूस हो रहा था...

म चची कुछ न कुछ बोलते हुए झड़े जा रही थी...

जब उनका झड़ना बंद हुआ तो कुछ पल जे बाद वो उठी और मेरा लुंड उनकी चुत से निकल गया चची ने मुझे सीधा लिटा दिया और आगे झुककर मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिए और अपनी छूट का रास मेरे लुंड से चाटने लगी





Me-aahhhhhhhhhhhhhhhh चूऊउससस सआईईईई कुटिया रनडीईईई अचे से चॉऊस मेरा लुंड...

चची बस हम्म्म करके मेरा लुंड चूसे जा रही थी...

फिर चची ने अपने मुँह से मेरा लुंड निकला और बोली.... अब दूसरी तड़प भी था मिटा दे बछहहए...

और खुद hi घूम कर मेरी कमर के दोनों तरफ पेअर करके बैठ गयी... पर इस बार उनका चेहरा मेरी पीठ की तरफ था और मेरे सामने थे उनके बड़े बड़े चूतड़... चची फिर से नीचे हुयी और मेरा लुंड पकड़ा और फिर उसे अपनी गांड के छेड़ पर लगा लिए और फिर नीचे होने लगी... मेरा लुंड चची की कासी हुई मखमली गांड में सरकने लगा... और मैं जन्नत में जाने लगा...

एक एक इंच करके मेरा लुंड चची की गांड में समता जा रहा था और मुझे तो जैसे स्वर्ग का द्वार मिल गया हो... और फिर एक ठप्प के साथ चची पूरी तरह मेरी जांघों पर बैठ गयी मेरा लुंड पूरा चची की गांड में समां गया....

Me-saaaaliiiiiiii क्या गड्ड्ढड है teri...poora लुंड समां गईइइइइइइइइ....

म चची- हाआनंनं बेताआए अब अपनी चची की गांड की तड़प भी मिटा दे...

में- अपनी रंडी की तरप तो मिटाऊंगा hi साली रांड....

मैंने चची की कमर पकड़ी और फिर नीचे से धक्के लगाने लगा... और तेज़ तेज़ चची की गांड मरने लगा...





म Chachi-ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh ैससससीईए hiiiiiiiiiii saaaaaaleeeeeeeeeeee मादरचोद आआह्ह्ह्हह फायडडड डीएई meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd अपने लोडे सीईई...

Me-to लेईईईई राआडडडडड आअज teriiiiiiiiiii gaaaaamnnddddddddddd hi फ़ायद कर रहूंगा.... Saaaaallllliiiiiiiiiiiii kutiyaaaaaaaaaaa चुड़क्कड़ छाछठीइइइइइइइ....

चची की आँखें बंद थी और वो मेरे लुंड का अपनी गांड में लेने का भरपूर सुख ले रही थी

मुझे भी चची की गांड काफी मस्त और कासी हुई अपने लुंड पर महसूस हो रही थी...

म Chachi-ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh ैससससीईए hiiiiiiiiiii saaaaaaleeeeeeeeee..

मैं लगातार छोड़ रहा था और हर पल के साथ मेरी गति भी बढतीजा रही थी ... कुछ पल बाद hi मुझे मेरा रास मेरी गोलियों से लुंड में भरता हुआ महसूस हुआ तो मैंने झट से बुआ को नंगा hi अपने ऊपर से उठाया और खड़ा करके पेड़ के सहारे झुका और अपना लुंड एक बार फिर से चचईई की गांड में पेल दिया और तूफानी झटको से चची की गांड का कचूमर बनाने लगा....

चची भी अपने चूतड़ को मेरे लुंड पर मार मार कर गांड चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी....

ऐसे hi कुछ डेट बाअद मेरा रास मुझे लुंड में बहता महसूस हुआ मैं और तेज़ी से झटके मरने लफा ऐसे hi कुछ और झटके मरने के बाद मैंने लुंड चची की गांड में जड़ तक गाड़ दिए





और फिर पिचकारी छोड़ने लगा.. धार के बाद धार मेरा रास चची की गांड को तो रास से भर दिया.... और जब झड़ना बंद हुआ तो मैंने अपना लुंड चची की गांड से भर निकल लिए जी वेसके निकलते hi चची ने गुप्प्प से भर लिए ... और चाट चाट कर मेरे लुंड को साफ़ कर दिया...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
और जब झड़ना बंद हुआ तो मैंने अपना लुंड चची की गांड से भर निकल लिए जी वेसके निकलते hi चची ने गुप्प्प से भर लिए ... और चाट चाट कर मेरे लुंड को साफ़ कर दिया...

अपडेट 81
चची मेरा लुंड साफ़ करने के बाद उठी और बोली- अब तो खुश है न बचुआ खुले में नंगा कर दिया मुझे... और चुदाई भी करदी...

ये कहते हुए चची अपने कपडे पहनने लगी और मैं भी

में- मज़ा नहीं आया चची..

म चची- बछहहआ मज़ा तो इतना आया की मन hi नहीं करता तेरे ी लोडे को छोड़ कर कहीं जाएं... पर सब काम ज़रूरी है न...

में- कोई नई चची ये मज़ा तुम्हे हमेशा मिलता रहेगा...

तब तक हम दोनों ने hi कपडे पहन लिए थी... और बात करते हुए बहार आये फिर चची घर की और निकल गयी और मैं आम का बोरा उठा कर लालसिंह के घर की और चल दिया...

गेट पर जाकर आवाज़ लगाई तो कुछ पल बाद गेट खुला सामने कजरी थी.. मुझे देखते hi थोड़ा मुस्काई.. एक सूट और सलवार में बहुत खूबसूरत लग रही थी.. सूट भी इतना टाइट था की आधी छुछियां तो जैसे बहार hi राखी हुई थी.. मैं सोचने लगा साला कल्लू जो बहार हर जगह मुँह मारता फिरता है घर पर ऐसा माल होते हुए कुछ नहीं करता क्या...

कजरी- ारी कर्मा आ अंदर आ..

मैं और वो अंदर आये तो कजरी ने दरवाजा फेर दिया..

में- दीदी वो ताऊजी ने आम मंगवाए थे... वो hi लाया हूँ...

कजरी- हाँ बताया था बापू ने रखदे यहीं... और बैठ...

मैंने आम का बोरा रख दिया और वहीं खाट पर बैठ गया... इतने में कजरी भाग कर अंदर गयी और पानी का गिलास लेकर आई.. और मुझे दिया..

Kajri-le पानी पि... वैसे कर्मा तू तो हमारे घर का रास्ता hi भूल गया रे...

में- ऐसा नहीं है दीदी...

Kajri-aisa hi है पता नहीं कितने दिनों बाद देखा है आज तुझे मैंने... न तू आता है न चची को देखा कबसे... एक hi गाओं में रहकर भी ये हाल है...

में- अरे ऐसा नहीं है दीदी मैं शशि बुआ के यहाँ था कुछ दिन से उनकी जेठानी की लड़की की शादी थी इसलिए नहीं आ पाया.. और दीदी तुम भी तो नहीं आती घर... माँ तो बुलाती है...

कजरी- अरे तुझे पता है अकेली काम करने वाली घर में काम से फुर्सत मिले तब न...

में- हाँ अब तो ब्याह होने वाला है अब हमारे घर कहाँ तुम तो अपने पति के घर जाओगी...

कजरी- हत्तत्त नष्पिते ऐसा कुछ नहीं है... बहुत बोलने लगा है तू... चची से शिकायत करदूंगी...

में- शिकायत क्या दीदी सच बोलै मैंने तो... और ताऊ जी और कल्लू भैया नहीं दिख रहे...

कजरी- बापू तो खेत पर होंगे और वो मुआ तो मद्र रहा होगा कहीं... इस लड़के ने तो नाक में दम कर रखा है...

Me-kya हुआ दीदी सब ठीक तो है..

कजरी- अरे तुझे तो सब पता है इसकी हरकतें... कभी कोई सही करम करता कहाँ है... तू भी तो लड़का है. मजाल है कोई पूरे गाओं में गलत बोलदे तुझे एक वो है हर कोई गली देता है उसे कोई सामने तो कोई पीठ पीछे..

ये कहकर कजरी मेरे सामने नीचे बैठ गयी और बोर में से आजम निकलने लगी... बैठने से फिर से उसकी छुछियां सूट के बहार झलकने लगी और इस नज़ारे को देखकर मेरा लुंड सर उठाने लगा... अभी से कुछ महीने पहले की बात होती तो मैं शर्मिंदा होता पर पिछले दिनों की इतनी चुदाई और अपनी माँ को छोड़ने के बाद मुझे किस औरत के साथ क्या करना है ये थोड़ा बहुत तो समझ आ hi गया था... तो मैं भी मन hi मन कुछ जुगाड़ लगाने लगा..

में- हाँ किस्से तो सुनने में आते रहते हैं...

कजरी- सरे गाओं वाले hi सुनते हैं कर्मा... मुझे तो चिंता होती है की मेरे जाने के बाद इस घर का क्या होगा....

में- हाँ दीदी मैंने भी कई बार उन्हें कुम्हारों की लड़की के साथ कहे..

इतना कहकर मैं जान बूझ कर चुप्प हो गया...

कजरी- क्या हुआ रुका क्यों बोल...

me-kuch नहीं दीदी...

कजरी- कर्मा मैं समझती हूँ तू पूरी बात बता दर मत..

me-wo खेत में कुम्हारों की लड़की के साथ कर रहे थे...

ये बोलकर मैंने कजरी की आँखों में देखा वो कुछ बोल नहीं रही थी बस नीचे आम पर नज़र गड़ाए कुछ सोच रही थी मैंने थोड़ा और आगे बढ़ते हुए कहा..- वो दोनों पूरे नंगे थे और कल्लू भैया उस लड़की के ऊपर थे ... और उनका पिछवाड़ा ऊपर नीचे हो रहा था और लड़की आह्हः अह्हह्ह्ह्ह करके आवाज़ें निकल रही थी...

मैं जनता था कजरी कितना भी न चाहे पर इस जवानी भरी उम्र के जिस पड़ाव में वो थी ऐसी बातें सुनकर उसकी उत्तेजना बढ़ी तो ज़रूर होगी... और उसका सबूत उसकी लम्बी लम्बी सांसों के साथ ऊपर नीचे होती हुई चूचियां दे रही थी.. मैं समझ गया तीर निशाने पर लगा है.....

में- क्या हुआ दीदी कुछ बोल क्यों नहीं रही???

कजरी- अरे वो कुछ नहीं.... क्या करूँ कर्मा ये कहीं मुँह दिखने लायक नहीं छोड़ेगा हमें...

मैंने सोचा कजरी की गर्मी को और बढ़ाया जाये इसलिए फ़ोन जेब से निकलने के बहाने खड़ा हो गया... और मेरा लुंड जो पहले से hi पाजामे में तम्बू बनाये हुए था उसके सामने आ गया पर मैंने ऐसे जताया जैसे मई ध्यान फ़ोन पर है...

वहीं कजरी की का ध्यान जैसे hi मेरे उठे हुए पाजामे पर गया पहले तो वो थोड़ा असमंजस में दिखी पर अगले hi पल जैसे hi उसे ये समझ आया की ये क्या है उसकी आँखें बढ़ी सी हो गयी और वो घूर घूर काट मेरे उभर को देखने लगी...

मैंने अचे से उसे देखने दिया और फिर बापिस खाट पर बैठ गया..

में- दीदी ब्याह कहाँ तय हुआ है?

कजरी- अरे वो मां है न मेरे उनके hi जानने वाले हैं.. वहीं पास hi गाओं है...

कजरी बोलती जा रही थी पर बार बार उसकी नज़र मेरे पाजामे पर hi जा रही थी...

में- ाचा है दीदी पर बुरा भी लग रहा है की तुम चली जाओगी...

कजरी- जाना तो मैं भी नहीं चाहती कर्मा पर क्या करें जैसी समाज की रीत... चलना तो पड़ता hi है...

तभी मेरे दिमाग में एक और आईडिया आया क्यूंकि कजरी का घर इतनी अछि तरह नहीं बना था तो उनके यहाँ टॉयलेट वगेरा भी सही से नहीं बना था नल के बगल में दीवार के किनारे दो तरफ से तीन की दीवार बना राखी थी और परदे का दरवाज़ा था... मैंने सोचा ये और करके देखते हैं...

में- दीदी पेशाब करके आता हूँ मैं...

कजरी ने एक बार मेरे पाजामे पर नज़र डाली और फिर बोली- हाँ जा करले...

अब मुझे पता था की तीन में कई छेड़ हैं जिससे अंदर का दीखता है अगर पर्दा न गिराया जाये तो मुझे बस ये देखना था की क्या कजरी मेरे लुंड को देखने की कोशिश करेगी... अगर देखना होगा तो उसे नल के पास आना पड़ेगा..

मैं उठ कर सीधा टॉयलेट की तरफ गया... अंदर घुस कर पाजामे को नीचे सरका कर लुंड बहार निकला जो बिलकुल रोड की तरह कड़क होकर खड़ा था... और मैं जान बूझ कर अपने हाथ से आगे पीछे करने लगा...

मैंने साइड से झांक कर देखा तो कुछ नहीं दिखा पर कुछ पल बाद एक साया सा हिलता हुआ महसूस हुआ... मैंने तिरछी नज़र से देखने की कोशिश की तो एक छेड़ से कजरी का सूट नज़र आया जो उसने पहना हुआ था मैं समझ गया कजरी यहीं है तो उसकी उत्तेजना को और बढ़ने के लिए और अपने लुंड का प्रदर्शन करने के लिए मैं धीरे धीरे लुंड को मुठियाने लगा... मुझे कजरी तो नहीं दिख रही थी पर महसूस ज़रूर हो रहा था की वो यहीं है...

खैर थोड़ी देर मैंने लुंड को सहलाया फिर बड़ी मुश्किल से जितना मूट सकता था मोटा और लुंड अंदर कर के बहार निकला तो जो देखा उसे देखकर मुझे ाचा लगा क्यूंकि कजरी सामने नल के पास hi कड़ी थी... और सांसे तेज़ और माथे पर पसीना था...

Me-kya हुआ दीदी तुम यहाँ?

कजरी जैसे होअह में आते हुए बोली- अरे वो मैं न वो हाथ धोने आई थी.. तेरे लिए चाय बनाने जा रही थी..

मैं समझ गया पर बात आगे बढ़ाते हुए बोलै- दीदी मुझे तो चाय से ज़्यादा दूध पसंद हैं...

Kajri-to दूध पीला देती हूँ..

कजरी खुद hi बात बोलकर थोड़ा शर्मा गयी जब उसे अंदाज़ा हुआ क क्या बोल रही है वो ..

में- पीला दो दीदी दूध...

और ये बात मैंने सीधा उसके सूट में से झांकते हुए छूछीयो को देखकर कही...

कजरी थोड़ा और शर्मा गयी...

कजरी- वो आजा बैठ जा कब तक यहाँ खड़ा रहेगा...

कजरी ने मेरे लुंड पर नज़र डालते हुए कहा और मुद कर खाट की और बढ़ गयी मैं भी पीछे पीछे उसके मटके जैसे चूतड़ों को देखते हुए खत पर आके बैठ गया...

कजरी- अब बता चाय पियेगा या दूध...

में- दीदी अभी तो जाना पड़ेगा पर तुम्हारा दूध पिने किसी दिन ज़रूर आऊंगा...

कजरी- अभी तो बोल रहा था की पियेगा...

में- दीदी अभी थोड़ा लेट हो रहा है भैंस के बछिया हुई है तो दूध वगेरा भी निकलना है..

कजरी- सच्चीई बछिया हुई है कब??

में- कल रात को...

कजरी- मुझे बछिया बड़ी प्यारी लगती हैं.. मुझे कब दिखायेगा..

Me-abhi चलो...

कजरी- अभी नहीं कर्मा अभी तो घर के बहुत काम हैं... कल दोपहर को ठीक रहेगा?

Me-are दीदी टुंगरा बाघ है जब चाहे आओ...

कजरी- नहीं तू भी रहिओ न साथ में..

में- ठीक है दीदी दोपहर में चलेंगे... ाचा अब मैं निकलता हूँ...

कजरी- ठीक है पर तेरा दूध उधर है..

में- बिलकुल दीदी बहुत जल्दी तुम्हारा दूध पियूँगा..

कजरी मेरी बात सुनकर थोड़ा शर्मा गयी... और मैं भी उसे बोलकर उसके घर से निकल गया.. रस्ते मैं माइनर सोचा ये तो सही लाइन पर जा रही है बस अब सावधानी से आगे क्या कर है ये सोचना है... मैं घर की तरफ जा hi रहा था की तभी मेरा फ़ोन बहने लगा... उठाया तो देखा पापा का था...

Papa-are कर्मा दे दिए आम लाल सिंह के यहाँ...

में- हाँ पापा देकर hi निकला हूँ.

पापा- ाचा सुन मैं अनुज को लेकर बीज लेने जा रहा हूँ आधा एक घंटा लग जायेगा तू बाघ चला जा तेरी माँ भी आ रही है दूध निकल लेना भैंस का...

में- ठीक है पापा पहुंच रहा हूँ...

मैं सीधा बाघ की तरफ चल दिया बाघ में पंहुचा hi था की माँ भी बाल्टी लेकर आती हुई दिखी... माँ मेरे पास आई तो उन्होंने भी वही बताया जो पापा ने बोलै था वगेरा वगेरा...

पापा ने माँ को इसलिए बोलै था की माँ और पापा को दूध निकलना अचे से आता था जबकि मेरी और अनुज की प्रैक्टिस थोड़ी काम थी...

जहाँ भैंस बंधी थी वहां पहुँच कर माँ बोली- कर्मा बाल्टी में थोड़ा पानी भरले.. और बच्चियया( भैंस की बच्ची) को लगा दे मैंने बाल्टी ने पानी भरा और बछिया को खोल दिया वो भगति हुई भैंस के थानों पर टूट पड़ी और दूध पिने लगी... उधर मैंने जल्दी से माँ को पकड़ लिए और उन्हें अपनी और खींच कर अपने होंठ उनके होठों पर रखकर चूसने लगा..

माँ ने थोड़ा हाथ से हटाने की कोशिश की पर उनका विरोध ना के बराबर था... मैं हाथ नीचे लेजाकर माँ की छूछीयो को मसलने लगा...

जब हमारे होंठ अलग हुए तो..

माँ- aahhhhhhhhhhhhhhhh बेताऑ बास अभी काम करने दे......

में- माँ ये भी तो काम hi है.

माँ की छूछीयो को दबाते हुए बोलै...

माँ- अभी समझा कर कर्मा और जा बच्चियया को बांध नहीं तो सारा दूध पि जाएगी..

न चाहते हुए भी मैं माँ से अलग हुआ और बाछहिया को पकड़ कर बांध दिया..

इसके आगे क्या हुआ सब अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत शुक्रिया..
 
नए चरक्टेर्स की डिटेल्स फर्स्ट पेज पर ऐड कर दी है... फ्यूचर में भी जो चरक्टेर्स ऐड होंगे उनकी डिटेल्स फर्स्ट पेज पर अपडेट हो जाएगी...
 
माँ- अभी समझा कर कर्मा और जा बच्चियया को बांध नहीं तो सारा दूध पि जाएगी..

न चाहते हुए भी मैं माँ से अलग हुआ और बाछहिया को पकड़ कर बांध दिया..

अपडेट 82
माँ भैंस की टैंगो के बीच और थानों के सामने बैठ गयी और बाल्टी के पानी से थानों को साफ़ करने लगी... इधर मेरा लुंड इतना कड़क हो गया की फटने को हो रहा था.. जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने पजामा नीचे खिसका कर लुंड बहार निकल लिए... पर माँ के सामने होने से लुंड फूलता जा रहा था... माँ अपने काम में लगी हुई थी...

मैं भी भैंस के पास और माँ के बगल में जाकर खड़ा हो गया और फिर अपना खड़ा लुंड माँ के गाल पर सत्ता दिया.. माँ ने अचानक चौंक कर चेहरा घुमा कर देखा तो आँखों के सामने मेरा कड़क लुंड सर उठाये खड़ा...

माँ- है डययययययआआ लललललाहा क्या कर रहा है ये तू... इसे बहार क्यों निकला.. कोई देख लेगा तो...

में- कोई नहीं देख रहा माँ... और माँ इतना कड़क हो गया है पाजामे में दुःख रहा था... कुछ करो न...

माँ- बेटा अभी दूध निकलना है तेरे पापा भी आते होंगे.. फिर पूछेंगे दूध क्यों नहीं निकला और देर की तो भैंस दूध चढ़ा लेगी ऊपर...

में- तो अभी इसका क्या करूँ...

माँ- शांत कर लल्ला इसे...

मैं पीछे हैट कर खड़ा हो गया और लुंड को हाथ से हिलने लगा और माँ को दूध निकलते हुए देखने लगा..





पर जितना माँ को देखता लुंड उतना hi कड़क होता जा रहा था.. उनकी साड़ी में से झांकती नंगी कमर और पीठ देखकर मैं और उत्तेजित होता जा रहा था... जब मुझसे रहा नहीं गया तो माँ के पास पंहुचा और झुककर माँ को कमर से पकड़ कर थोड़ा उठाने लगा...

माँ- क्या हुआ कर्मा परेशां मत कर बीटा...

में- माँ बस एक मिनट..

मैंने ये बोलकर माँ की साड़ी और पेटीकोट को नीचे से पकड़ा और घुटनो से ऊपर उठाते हुए कमर पर लेकर इकठा करके पकड़ लिया माँ के बड़े बड़े चूतड़ और नीचे का हिस्सा नंगा हो गया...

में- माँ अब बैठ जाओ...

Maa-pagal हो गया है क्या ऐसे नंगी बैठ जॉन... अभी कोई आ गया तो...

Me-maa हमारे बाघ में कोई आता है तो हमें पता नहीं चल जायेगा क्या... बैठ जाओ और दूध निकालो...

माँ हिचकिचाते हुए बैठ गयी और बापिस दूध निकलने लगी पर अभी उनकी कमर के नीचे का हिस्सा नंगा था..

माँ उसी पोजीशन में बैठी थी जैसे औरतें पेशाब करने के लिए बैठती हैं...

मैंने माँ की साड़ी और पेटीकोट को कमर पर लपेट सा दिया और फिर उनके पीछे बैठ कर उनकी नंगी गांड पर हाथ फिरते हुए दुसरे हाथ से लुंड हिलने लगा..

दूध निकलने की वजह से माँ हिल रही थी और उसी वजह से उनकी गांड आगे पीछे हो रही थी...

मैं माँ के चूतड़ों को मसलते हुए मुठियाने लगा...

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh बेताऑ आराम से... दूध फ़ैल जायेगा...

Me-kya करूँ माँ क्या मस्त बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ हैं तुम्हारे...

माँ- हाँ पता है तभी तो तू घुसा जा रहा है मेरे चूतड़ों में... अभी दूध निकलने दे वैसे भी नंगा कर रखा है यहाँ खुले में...

Me-nikal तो रही हो मैंने कब रोका है...

मैं माँ की गांड मसलते हुए अपने लुंड पर हाथ चला तो रहा था पर मेरे हाथ से मुझे कोई खास मज़ा नहीं आ रहा था... जिसके सामने माँ जैसी गदराई खूबसूरत औरत आधी नंगी बैठी हो उसे भला हाथ से लुंड हिलने में क्या मज़ा आएगा...

मैं थोड़ा आगे बढ़ा और जिस पोजीशन में माँ बैठी थी वैसे hi उनके पीछे से चिपक कर बैठ गया अब मेरा लुंड माँ के चूतड़ों पर घिसने लगा... जिसके छूटे hi मेरे लुंड ने एक बूँद रास उगल दिया जो माँ की गांड पर लग गया...

माँ- हाय लल्ला क्या कर रहा है ये टूना परेशां hi करता रहेगा मुझे...

में- माआआ तुम्हारीइइइइइइइ गांड बड़ी masstttttttttttttttttt है मज़ा आ रहा है...

माँ- ठीक है पर मुझे दूध निकलने दे...

माँ दूध निकलते हुए हिल रही थी और मेरा लुंड माँ की गांड की दरार में आगे पीछे हो रहा था.. जिससे मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था....

Me-aahhhhh मा ऐसे हीई... अपनी गांड घिसो मेरे लुंड पर....

माँ- बेटा ज़रा भी सबर नहीं होता तुझसे..

माँ सच hi कह रह थी सबर तो मुझसे बिलकुल नहीं हो रहा था और न hi मन मान रहा था... मैंने माँ के चूतड़ों को थोड़ा सा ऊपर उठाया और खुद आगे सरक गया और अपने पेअर जितने हो सके फैला दिए... और सरक कर माँ के चूतड़ों के नीचे अपना लुंड कर लिए और फिर अपने लुंड को पकड़ कर सीधा किया और निशाने पर लेकर माँ के चूतड़ों को नीचे किया जिससे मेरा लुंड माँ की छूट के होंठों से टकरा गया और अगले hi पल माँ के थोड़ा और नीचे होने से लुंड का टोपा माँ की छूट में घुस गया....

Maa-ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh मममममम है डययययययआआ लललललाहा... कर hi लीईई तुणीऐ अपनी मन्न्नन कोई...

Me-kyaa करूँ माँ रुका hi नहीं गया... तुम्हारी गांड देखकर...

माँ- ahmmmmmmmmmmm अब ज़्यादा हिल मत्तट दुध निकलने दे...

मेरा लुंड छूट में जाने से माँ नहीं न चाहते हुए भी गरम हो गयी थी और हो भी क्यों न ऐसे खुले में साड़ी उठाकर बेटे का लुंड छूट में लेकर बैठना और साथ में भैंस के दूध निकलना.. और माँ न चाहते हुए भी बेहद गरम होती जा रही थी... बेहद उत्तेजक दृश्य था...

मेरी तो जैसे मन चाही मुराद पूरी हो गयी थी... माँ की छूट में लुंड और मुझे दोनों को सुकून मिल गया... हालाँकि जिस पोजीशन में मैं था वो ज़्यादा आरामदेह तो नहीं थी पर मेरा लुंड माँ की छूट में था... मेरे लिए सबसे ख़ुशी की बात ये hi थी...

माँ किसी भी तरह ध्यान लगा कर दूध निकल रही थी पर उसकी वजह से वो थोड़ा आगे पीछे हो रही थी और मेरे लुंड पर उनकी छूट भी आगे पीछे हो रही थी





बाकि का काम मेरी कमर अपने आप कर रही थी... माँ जितना ध्यान लगाकर दूध निकलने की कोशिश कर रही थी उतना hi मुश्किल उन्हें हो रहा था... आखिर हो भी क्यों न जब छूट में अपने hi बेटे का इतना बड़ा मूसल होगा तो दूध निकलने पर कैसे ध्यान लगेगा पर माँ पूरी लगन से अपने काम में लगी हुई थी और मैं अपने काम में... माँ के मुँह से हलकी हलकी सिसकियाँ निकल रही थी.. हम माँ बेटे इस धीमी चुदाई का आनंद ले रहे थे..

Maa-hmmm अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह कर्मा बेटा दूध निकलने दे...

में- ओह्ह्ह्हह्ह माँ तुम्हारी छूट कितनी भी मरू मन नहीं भरता... लुंड खड़ा रहता है तुम्हारे लिए...

माँ तो जैसे अपनी hi धुन में थी और भैंस का दुध निकलते हुए अपने बेटे के लुंड पर ऊपर नीचे होती जा रही थी..

उधर मेरी उत्तेजना बढाती जा रही थी... मैंने माँ के चूतड़ों को पीछे से थाम लिए नीचे से तेज़ तेज़ धक्के लगाने लगा... और माँ की छूट में लुंड पेलने लगा... और माँ की जबरदस्त चुदाई करने लगा...





Maa-aaaaaahhhhhhh आआआहहहहहहह डययययययआआ reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee डययययययआआ लललललाहा मार दालायआ aahhhhhhhhhhhhhhhh बेताऑ...

में- आअह्ह्ह्हह saaaaallllliiiiiiiiiiiii kutiyaaaaaaaaaaa चुड़क्कड़ maaaahhhhhhhhhhhhhhhh ले meraaaaaaaaaa लुंडडडड....

माँ ने अपने दोनों हाथ भैंस के थान से हटाकर पीछे टिका लिए जिससे गिरे न और मेरे लुंड की मार सहने लगी...

माँ- हैं betaaaaaaaaaaaaahhhh मादरचोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़ और मार meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot को कुओट डीई अपने भूऊऊओसेललललल सीईए.....

माँ और मैं दोनों hi बेहद उत्तेजित हो गए थे और ऐसी बातें करके एक दुसरे को उकसा रहे थे...

माँ की बात सुनकर मेरे धक्के और तेज़ हो गए थे और थप्प्प्पप्प थप्प्प्पप्प की आवाज़ आस पास गूँज रही थी.... मुझे भी अपना रास लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा था और माँ की हालत देखकर भी कुछ ऐसा hi लग रहा था की वो भी चरम सुख से ज़्यादा दूर नहीं हैं... मैं और माँ इस समय इतने उत्तेजित थे की अगर कोई आ भी जाता तो हम खुद को रोक नहीं पाते... 10-15 तगड़े झटके जड़ तक माँ की छूट में मरने के बाद मैंने अपना रास माँ की छूट में छोड़ना शुरू कर दिया... उधर उसी वक़्त माँ की छूट भी पानी बहाने लगी.... और मैं और माँ एक साथ झड़ने लगे... मैंने माँ को कसकर पकड़ कर खुद से चिपका लिए था... माँ आंखें बंद किये हुए मेरे लुंड पर झाड़ रही थी... जब मेरे रास की एक एक बूँद माँ की छूट में निचुड़ गयी तब तक मैंने माँ को खुद से चिपका कर रखा... और जब हम दोनों hi शांत हो गए तो माँ थोड़ा उठी और मेरा लुंड उनकी छूट से निकल गया जिससे अब मेरा और माँ का मिलाजुला रास बहकर बहार आ रहा था... माँ ने फिर सीधा होकर अपनी साड़ी नीचे की..

माँ- वाह रे कर्मा ऐसा दूध तो कभी नहीं निकला था मैंने...

में- बस देखती जाओ माँ और क्या क्या होगा ब्वू5

मैं भी नीचे से उठ कर खड़ा हुआ अपने लुंड को देखा जो रास में भीगा हुआ चमक रहा था माँ ने साड़ी और कपडे ठीक किये और फिर एक ज़िम्मेदार माँ होने के नाते मेरा लुंड मुँह में भर लिए और साफ़ किआ और फिर छोड़ दिया... और मेरा पजामा ऊपर खिसका कर मेरा लुंड अंदर कर दिया और कड़ी होकर दूध से भरी बाल्टी उठा hi पाई थी...

की पापा और अनुज बाघ में आ गए... मैं और माँ थोड़ा चौंक गए माँ की नज़र मेरे पर hi गयी... जैसे आँखों आँखों में hi कह रही हो की बच गए बीटा अगर दो मिनट भी लेट होता तो पकड़े जाते... पर माँ के चेहरे पर एक दबी हुई मुस्कान भी थी जो ये बता रही थी की जो कुछ हुआ माँ को पसंद आया था...

पापा- निकल लिया दूध...

माँ- हाँ देखो... सही निकल गया...

पापा- हाँ बाल्टी भर दूध निकला है...

अनुज- मैं पि जाऊंगा सारा...

Me-haan है ये तू भुक्कड़..

माँ- तुम दोनों फिर शुरू हो गए...

मैं माँ को देखते हुए सोचने लगा की क्या माँ है मेरी अभी देखो तो बिलकुल पतिव्रता संस्कारी... कोई कह नहीं सकता की 5 मीन्स पहले hi ये अपने बेटे से चुद रही थी और अभी मेरा रास भी माँ की जांघो और पैरों पर बाह रहा होगा... अपने सेज बेटे का लुंड रास छूट के साथ साथ जांघों पर बाह रहा है और माँ पति और दुसरे बच्चे से बिलकुल नार्मल होकर बात कर रही थी...

खैर इसी तरह हंसी मज़ाक में थोड़ा टाइम कट gaya...aur हम लोग घर की तरफ निकल लिए साथ में... पर अभी मुझे कुछ काम नहीं था और खाना बनने में भी टाइम था तो मैं माँ को बोलकर की थोड़ी देर में आऊंगा दूसरी तरफ चल दिया...

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
खैर इसी तरह हंसी मज़ाक में थोड़ा टाइम कट gaya...aur हम लोग घर की तरफ निकल लिए साथ में... पर अभी मुझे कुछ काम नहीं था और खाना बनने में भी टाइम था तो मैं माँ को बोलकर की थोड़ी देर में आऊंगा दूसरी तरफ चल दिया...

अपडेट 83

बाघ से निकल कर मैं सीधा मैदान की तरफ पंहुचा वहां पहले से hi बात बॉल खेल रहे थे तो मैं भी शामिल हो गया और खेलने लगा. वैसे तो जग्गू भी हमेशा मेरे साथ खेलता था... पर आज नहीं था.. हम लोग अँधेरा होने तक खेलते रहे और फिर.. बापिस चल दिए बापिस आते हुए घर जाने से पहले मैंने सोचा जग्गू के घर होते हुए चलता हूँ..

मैंने जग्गू के घर जाकर दरवाज़ा खटखटाया तो भग्गू ने खोला और मुझे घूरता हुआ हाथ से साइड किआ और गेट से बहार निकल गया...

मैंने भी सोचा साला चूतिया hi है ये... पता नहीं किस बात का घमंड है सेल में... जग्गू का भाई नहीं होता तो इसकी गांड तोड़ देता अब तक तो... खैर मैंने सोचा क्या इस के बारे में सोचना और अंदर घुस गया...

आँगन में खत पर राजपाल Tau(Jaggu के पापा) और मंजू तै (जग्गू की मम्मी) बैठे थे ताऊ जी खत पर बैठे चाय की चुस्कियां ले रहे थे वहीं तै नीचे बैठी पालक साफ़ कर रही थी.. तै जी हमेशा की तरह एक दम खुलकर बैठी थी टंगे फैलाकर पल्लू नीचे गिरा हुआ पेट और आधी छुछियां बहार झांकती हुई ब्लाउज से... तै को हमेशा घर में मैंने ऐसे hi देखा था उन्हें कपड़ो का कोई ध्यान नहीं रहता था.. और आज भी वो कुछ ऐसी hi बैठी हुई थी..





आधी छुछियां बहार निकली हुई मसल पेट और कमर नंगा दिख रहा था पर मेरे लिए पहले की बात और थी अब जब इतनी चुदाई करने के बाद और अपनी सगी बुआ और माँ को छोड़ने के बाद मेरा नजरिया बदलना hi था और बदल भी गया था.. मंजू तै को ऐसे देखकर मेरा लुंड पाजामे में अकड़ने लगा.. मैंने फिर भी आगे बढ़ा और जाकर दोनों के पेअर छुए..

राजपाल ताऊ- अरे कर्मा खुश रह बीटा...

मंजू तै- आजा मेरा लाल जग जग जिओ.. जल्दी ब्याह हो तेरा.. चाँद सी दुल्हनिया आये...

में- बस बस तै अभी से सब करवादो...

मंजू तै- तो कब करेगा मेरे लाल.. अब करले..

में- पहले जग्गू की होगी फिर मैं करूँगा...

राजपाल ताऊ- अरे बीटा पहले बैठ जा नहीं तो ये खड़े खड़े hi तेरा ब्याह करवा देगी...

मैं वहीं खत पर बैठ गया और तै की छूछीयो को देखते हुए बात करने लगा...

मंजू तै- अरे तुम तो काम hi बोलो बेचारी सभ्य कब तक पूरे घर का काम करेगी उसे भी तो आराम चाहिए..

में- तो मैं कह तो रहा हूँ पहले जग्गू की करवाओ मैं भी करलूँगा...

मंजू Tai-ye दोनों भी न हर चीज़ hi साथ करनी है इन्हे... अरे नासपीटों दुल्हनिया तो अलग अलग होगी या एक hi लड़की से करलोगे ब्याह भी...

में- वो तो तुम ढूँढोगी तै...

राजपाल ताऊ- अरे ब्याह hi करवाती रहेगी या इसे चाय पानी भी देगी कुछ?

मंजू तै- अरे ये नाश्पीटी कहाँ मर गयी... बता लल्ला कबसे आके बैठा है ये नहीं की चाय पानी ला दे..

में- अरे तै तुम भी हमेशा भाभी पर चिल्लाती रहती हो...

मंजू तै- का करू बीटा उस कलमुही के करम hi ऐसे हैं...

में- ऐसे hi गुस्सा करोगी तो जल्दी बुद्धि हो जाओगी..

मंजू तै- हैं ऐसे कैसे...

में- मैंने किताब में पढ़ा है की गुस्सा करने से त्वचा ख़राब होती है और इंसान बूढ़ा हो जाता है जल्दी.. बाल सफ़ेद होने लगते हैं..

मंजू तै- हाय दय्या सच्ची लल्ला?

Me-haan तै सछही..

मंजू तै- न रे अब से मैं भी न गुस्सा karungi...waise भी कल hi देखव मैंने 4 सफ़ेद बाल... इस नासपीटी की वजह से बुद्धि और हो जाउंगी मैं...

राजपाल ताऊ- अभी भी तो बूढी है तू...

मंजू तै- अरे जाओ अभी अगर मैं भी करीम पोडर लगा कर निकलूंगी न तो उस कलमुही की छोटी बहन लगूंगी..

राजपाल ताऊ- तू उसकी सास hi बनले ठीक से..

उन दोनों की ते नोकझोक देखकर मैं हंस रहा था..

में- जग्गू कहाँ है तै..

मंजू tai-abhi तो यहीं था देख ऊपर छत पर होगा...

में- ठीक है..

मैंने एक नज़र अचे से तै की छूछीयो और कमर को देखा और फिर सीढ़ियों की तरफ चल दिया....

सीढ़ियों के ऊपर पहुंचा hi था की मुझे एक तरफ की दीवार से टिका हुआ बैठा था और जैसे hi मैंने एक कदम छत पर कदम बढ़ाया की अचानक से बारिश शुरू हो गए... थोड़ी हैरानी हुई की अभी तक तो मौसम ठीक था और अचानक बारिश..

पर मैं फिर भी जग्गू के पास पंहुचा गया भीगते हुए hi..

में- क्या बात है आज तो तेरे साथ बदल भी रो रहे हैं...

जग्गू थोड़ा चौंक गया..

जग्गू- अरे तू कब आया...

Me-main तो कबसे आया हुआ हूँ तू hi न जाने कबसे देवदास बना हुआ पता नहीं कहाँ खोया है...

Jaggu-acha चल नीचे भीग जायेंगे...

में- अबे कोई नई भीगने दे आज बारिश का मज़ा लेते हैं...

Jaggu-nahi याररर..

जग्गू इतना बोलते hi चुप हो गया मैंने उसकी तरफ देखा तो वो एक तरफ देख रहा था.. मैंने उसकी नज़र का पीछा किआ तो देखा प्रेमा भाभी भीगती हुई छत पर भाग रही thi...bhagne से उनकी साड़ी का पल्लू एक साइड को हो गया था जिससे उनका गोरा पेट और कमर और नाभि नज़र आ रही थी मेरी नज़र तो उसी पर टिक गयी...





भाभी की बलखाती कमर देखकर मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई....

में- क्या हुआ भाभी कैसी दौड़ लगा रही हो....

प्रेमा भाभी- ारी भैया बड़े ख़राब हो तुम लोग देख रहे हो कपडे भीग रहे हैं उतरने की जगह खुद भी भीग रहे हो खड़े खड़े...

में- तो तुम भी भीगलो भाभी बड़ी अछि बारिश हो रही है...

प्रेमा भाभी- न भैया न... कपडे भीग जायेंगे तो और काम बढ़ जायेगा...

में- आधी तो भीग hi गयी हो भाभी और भीग जाओगी तो क्या हो जायेगा...

जग्गू बिना कुछ बोले हम दोनों की बातें सुन रहा था और नज़र भाभी के बदन पर गड़ाए हुए था.

प्रेमा Bhabhi-haan भीग तो गयी हूँ पर ये कपडे तो इकट्ठे करलूं...

ये बोलकर भाभी ने अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी कमर में ठूंस लिए जैसे औरतें कोई काम करने से पहले अक्सर करती हैं.. पर उसका असर हमपर ऐसा हुआ की बारिश में भी मेरे तन बदन में आग लगने लगी.. भाभी की कमर और गोल नाभि उनका गोरा पेट और उसपर फिसलती हुई बारिश की बूंदे आअह्हह्ह्ह्ह कुछ पल के लिए तो लगा वक़्त थम hi गया...





मैं ये तो जनता था की प्रेमा भाभी खूबसूरत हैं पर इतनी कामुक होंगी इसका अंदाज़ा नहीं था... बदल हमपर बारिश कर रहे थे और बिजलियाँ प्रेमा भाभी गिरा रही थी...

में- ठीक है भाभी करलो...

इतना कहकर मैं भाभी के हुस्न में खो सा गया उधर भाभी कपडे इकठे करने लगी भीगने की वजह से उनकी साड़ी उनके शरीर से चिपकने लगी और उनके एक एक उभर को अचे से दिखने लगी.. उनका ब्लाउज उनकी रसीले आम जैसी छूछीयो से चिपक कर उनके अकार का अनुमान देने लगा... कुछ पल के लिए तो मैं भूल hi गया... की जग्गू भी वहीं खड़ा hai...udhar भाभी की आवाज से मैं थोड़ा होश में आया...

प्रेमा भाभी- और भैया सुना है बुआ यहाँ गए थे...

में- हाँ?? हाँ हाँ भाभी वो रिमझिम दीदी है न बुआ की जेठानी की लड़की उनका ब्याह था न इसलिए...

प्रेमा भाभी- हाँ पता चला, तो कैसा रहा सब...

में- सब बहुत ाचा हुआ bhabhi...byah लगन सब अचे से निपट गया...

प्रेमा भाभी कपडे इकट्ठे करते हुए मुझसे बात करती जा रही थी और मैं तो उनके भीगे बदन को अपनी आँखों में समां रहा था... एक एक बूँद जो उनके जिस्म पर गिर कर उनकी चिकनी कमर पर फिसल रही थी .. मन कर रहा था अभी जाकर चाट लूँ और उनकी बदन पर जितनी भी बूंदे हैं सबको पि जॉन.... मेरा लुंड मेरे गीले पाजामे में खड़ा हो रहा था... भाभी की बलखाती कमर मेरे लुंड पर क़हर ध रही थी...





मैंने अपने पाजामे पर किसी तरह हाथ रखकर लुंड को छुपाने का प्रयास किआ.. वहीं मेरी नज़र जग्गू पर गयी तो उसका भी यही हाल था उसके पंत में भी तम्बू बना हुआ था और वो तो सम्मोहित सा भाभी के बदन को देख रहा था...

मैंने उसे कोहनी मरकर थोड़ा होश में लाया...

प्रेमा भाभी- चलो वहां सब ठीक तो हुआ... हमारे यहाँ तो इन्होने क्या हाल hi कर दिया..

Me-koi नई भाभी तुम पुराणी बातों को छोडो और इतनी अछि बारिश हो रही है उसपर ध्यान दो...

प्रेमा Bhabhi-haan भैया सही कह रहे हो... बारिश भी अछि हो रही है...

ये कहकर भाभी खड़े होकर पूरा बारिश का मज़ा लेते हुए भीगने लगी...

वो छत पर घूम घूम कर नाहा रही थी जिससे हमें उनके पूरे बदन के दर्शन हो रहे थे.. गीली होने की वजह से साड़ी उनके बड़े बड़े चूतड़ों से चिपक गयी थी... जिससे उनकी गांड का उभर साफ़ नज़र आ रहा था और लुंड को बढ़ता जा रहा था...

मेरा लुंड इतना टाइट हो गया था की पाजामे के अंदर दर्द कर रहा था और ये भी दर था की कहीं भाभी की नज़र न पद जाये उसपर... उधर जग्गू ने भी अपने हाथो से अपने उभर को छुपा रखा था...

थोड़ी देर बाद भाभी भीगती हुई बोली- चलो भाई हम तो नाहा लिए अब कपडे बदल कर काम भी करना है तुम भी चलो और बदल लो कपडे ज़्यादा भीगोगे तो बीमार पद जाओगे.

Me-chalo भाभी हम आते हैं....

भाभी कपडे लेकर नीचे जाने लगी और हम दोनों उनके बड़े चूतड़ों को हिलते हुए देखते रहे तब तक जब तक दिखना बंद नहीं हो गया...

मेरा लुंड बेहद कड़क हो गया था और पाजामे के अंदर दुखने भी लगा था... तो मैंने भाभी के नीचे जाते hi पजामा नीचे खिसका कर लुंड बहार निकल लिए...

जग्गू ने मेरे हाथ में मेरा नंगा लुंड देखा तो मेरी ये हरकत देख कर चौंक गया..

जग्गू- सेल ये क्या कर रहा है... लुंड बहार क्यों निकला है.. कोई देख लेगा तो बवाल हो जायेगा...

में- अबे कौन आ रहा बारिश में... सेल भाभी ने इतना टाइट करवा दिया पाजामे के अंदर दुखने लगा था...

जग्गू- सेल भाभी के बारे में ऐसे मत बोल..

Me-ohh सेल सरीफ के लुंड... बात तो ऐसे कर रहा है जैसे तू तो देख hi नहीं रहा था न hi तेरा खड़ा हुआ...

जग्गू- वो बात नहीं है पर फिर भी वो भाभी हैं मेरी..

में- लुंड खड़ा हुआ की नहीं...

Jaggu-haan वो हाँ... अबे लोदु चाँद अगर इतना आहारमायेगा तो छोड़ेगा कैसे... इसलिए बोलता हूँ बेशर्म बन मन के जज़्बात बहार ला छुपा के मत रख...

जग्गू- हाँ वो तो सही कह रहा है तू... पर..

Me-par क्या..

जग्गू ने एक मिनट कुछ सोचा और फिर जो किआ उससे मुझे हैरानी हुई जग्गू ने भी अगले hi पल अपना पजामा नीचे खिसका कर अपने लुंड को बहार निकल लिए... जग्गू का लुंड लम्बाई में मेरे लुंड से छोटा था पर हाँ मोटा मेरे लुंड जितना hi था.. तो वो भी भीगते हुए लुंड को हाथ में लेकर हिलने लगा..

Me-kya सोच रहा है खुलकर बता..

जग्गू- यार कर्मा क्या माल हैं भाभी मन कर रहा था अभी पटक कर यहीं छोड़ दूँ...

Me-ye मेरा शेर ये हुई न बात...

जग्गू- क्या गांड है भाभी की यार मन कर रहा था की अभी लुंड घुसेड़ कर पहचा पहच मरता रहूं जब तक रास से भर न दूँ पूरा...

में- भरेगा मेरे दोस्त ज़रूर भरेगा टेंसन मत ले थोड़ा बेशरम बन जा...

जग्गू- भाभी की गांड के लिए तो मैं कुछ भी बन जॉन...

Me-kuch मत बन जप बोलूं वो करता जा बास.

Jaggu-bas अब तू hi संभालेगा...

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जग्गू- भाभी की गांड के लिए तो मैं कुछ भी बन जॉन..

Me-kuch मत बन जप बोलूं वो करता जा बास

Jaggu-bas अब तू hi संभालेगा..

अपडेट 84

में- वो सब तो ठीक है पर ये बता तू कबसे है भाभी की गांड के पीछे पहले तो बड़ा शरीफ बन रहा था की वो भाभी है मेरी वगेरा वगेरा?

जग्गू- सच कहूं तो मैं तो न जाने कबसे भाभी को छोड़ना चाहता था पर ये बात सामने लेन की कभी हिम्मत hi नहीं हुई..

में- लोदु मुझसे भी छुपा रहा था...

Jaggu-main क्या बताता यार मैंने सोचा तू सोचेगा की मैं कितना घटिया इंसान हूँ...

में- अबे लोदु वो तो मुझे पहले भी लगता था.. हे हे हे..

Jaggu-Karma यार मज़ाक मत कर...

में- अबे इसमें घटिया की क्या बात भाभी होने से पहले वो एक मस्त गदराई हुई औरत है और तू जवान मर्द तो एक दुसरे के लिए ऐसा महसूस होना गलत नहीं है... सीधे शब्दों में कहूं तो उनके पास छूट है और तेरे पास लुंड.. और लुंड का काम होता है छूट में घुसना और छोड़ना.. अब चाहे वो छूट किसी की भी ho...hai तो छूट hi वैसे hi लुंड.

Jaggu-jai हो बाबा कर्मानन्द की...

में- खुश रहो मुर्ख बालक...

जग्गू- ग बाबा अब ये बताओ आगे क्या करना है...

में- जो तुझसे बोलै था वो किआ तूने? भाभी से कल्लू के बारे में बात करने के लिए..

Jaggu-nahi भाई अभी तो नहीं कर पाया तबसे कोई न कोई घर पर hi था... और भाभी भी तो हमेशा चिढ़ी रहती है..

में- बात तो करनी पड़ेगी बीटा.. नहीं तो कुछ नहीं कर पाएंगे...

Jaggu-bhai मैं पूरी कोशिश करूँगा जल्दी से जल्दी करने की...

Me-rahne दे तू मत कार्यो जब भी तुझे लगे बात हो सकती है तो मुझे बुला लिओ...

Jaggu-theek है भाई.. ये भी ठीक है..

Me-chal अब लुंड अंदर कर और चलते हैं नीचे.. मैं भी घर जाता हूँ कपडे बदलने हैं..

जग्गू- ठीक चल...

फिर हम दोनों नीचे आये और मैं ताऊ तै को बोलकर अपने घर आ गया.. घर आके माँ पापा ने पुछा भीगा क्यों तो उन्हें बता दिया और नहाकर कपडे बदले... इतने में खाना भी बन गया था तो खाना खाया...

खाना खाने के बाद अपने कमरे में पंहुचा hi था की विनीत का फ़ोन आ गया उससे बात करने लगा पर बीच बीच में थोड़ी आहें भी भर रहा था तो मैंने पुछा क्या क्र रहा है तो बोलै मम्मी लुंड पर बैठ कर कूद रही हैं...

में- सही है बीटा असली मज़े तो तेरे हैं...

विनीत- सिर्फ मेरे नहीं भाई सबके hi हैं और सब तेरी वजह से...

में- चल इमोशनल मत हो और एक काम कर वीडियो कॉल कर मुझे भी देखना है...

विनीत ने वीडियो कॉल किआ पहले तो खुद को हँसता हुआ दिखाया बीएड पर सिरहाने से टिक कर लेता हुआ था फिर पीछे का कैमरा ों करके दिखाया बुआ को जो अपने बेटे के लुंड पर उछाल रही थी..





बुआ की बड़ी बड़ी छुछियां ऊपर नीचे हो रही थी और उनके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी

माँ बेटे की चुदाई देखकर मेरा लुंड भी एक दम तुरंत टाइट हो गया..

मैंने विनीत से बोलै बुआ से बात करवाने को तो उसने सामने का कैमरा ों करके फ़ोन बुआ को पकड़ा दिया.. बुआ फ़ोन पर मुझे देखते hi खुश हो गए और उछालना बंद कर दिया...

बुआ- अरे मेरा लाल कर्मा कैसा है...

में- ाचा हु बुआ... तुम तो मज़े ले रही हो...

बुआ- हाँ बच्चा सब तेरी वजह से hi है... बता बाकि सब कैसे अह्ह्ह्हह्हह हैं...

मैं समझ गया विनीत नीचे से झटका मार रहा होगा इसलिए बुआ की सिसकियाँ निकल रही है ..

बुआ- विनीत रुक जाए बात करने दे..

में- बाकि सब बढ़िया हैं बुआ...

बुआ- तूने फ़ोन नहीं किआ पहुंच के एक भी बार...

में- मैंने मश्ग करके विनीत को बता दिया था बाकि मैंने सोचा अब तुम्हे बहुत तंग कर लिया थोड़ा आराम करने दूँ..

Bua-maar खायेगा तू कमीने... ये बता खाना पीना हो गया...

Me-haan और तुम लोगो का?

बुआ- हाँ खा पिके सोने आ गए हैं हम तो...

में- सोओगे कहाँ अभी.. बाकि सब लोग कहाँ है?

बुआ- पूर्वी और दामाद जी तो और उसकी सास आज दिन में निकल गए बाकि मेहमान तो पहले hi चले गए थे... अब तो घर सूना सूना हो गया है हम लोग hi बचे हैं..

में- फूपाजी बड़े फूपाजी कहाँ हैं?

Bua-aahhhhhhh विनियेटटटटटट अहह कर्मा बीटा वो आज जीजी संभल रही हैं दोनों भाइयों को... और मैं अपने बेटे को...

में- बढ़िया है चलो बुआ अब तुम लोग मज़े लो मैं देखूंगा तो मेरा खड़ा हो जायेगा...

बुआ- हाय याद मत दिला तेरे लुंड की.. रहा नहीं जायेगा...

Me-ek लुंड छूट में है फिर भी याद आ रही है मेरे लुंड की...

Bua-beta तेरा लुंड hi कुछ ऐसा है... और जो एक लुंड से hi संतुष्ट हो जाये वो तेरी बुआ कहाँ...

में- हाँ पता है मेरी बुआ.. चलो अब रखता हूँ नमस्ते बुआ...

Bua-namaste मेरे लाल और सुन अभी दो चार दिन में रिम्मी आएगी पग फेरे की रस्म के लिए तो फ़ोन करवाउंगी..

Me-theek है बुआ...

ये कहकर मैंने फ़ोन रख दिया पर बुआ और विनीत की चुदाई देखकर और उससे पहले प्रेमा भाभी के जलवो से लुंड पूरी तरह तना हुआ था.. अब इसका एक hi सहारा था... माँ..

मैं जल्दी से लुंड को पाजामे में एडजस्ट करके कमरे से बहार निकला और आंगन में देखा तो पापा टीवी देख रहे थे अनुज कहीं नहीं दिख रहा था और देखने पर पता चला माँ रसोई में बर्तन मंझ रही थी...

मैं टहलता हुआ रसोई में पहुंचा माँ ने मुझे देखा और बोली- कुछ चाहिए लल्ला..?

में- हाँ माँ चाहिए तो..

मैं माँ के बगल में जाकर खड़ा हो गया एक नज़र आंगन में पापा की और डाली तो टीवी में लगे हुए थे एक बात ये अछि थी की टीवी रसोई से दूसरी तरफ थी मतलब टीवी देखने बैठो तो पीठ रसोई की तरफ हो जाती थी और ऐसा माँ ने hi करवाया था क्यूंकि वो रसोई में काम करते हुए भी टीवी देख पाएं इसलिए... तो उसी से अभी पापा की पीठ हमारी तरफ थी पर हाँ सर ज़रा सा घुमाकर रसोई में आराम से देख सकते थे.

माँ- क्या चाहिए बीटा?

माँ बर्तन मांझते हुए बोली..

में- ये चाहिए माँ..

मैंने धीरे से बोलै और अपना हाथ माँ के चूतड़ों पर रख दिया..

माँ ने गुस्से में आँख दिखाकर पापा की तरफ इशारा किया.. और धीरे से boli-pagal हो गया है क्या? पापा सामने हैं..

में- एक बार मेरी हालत तो देखो माँ..

ये कहकर मैंने अपना रोड जैसा लुंड बहार निकल लिए...

माँ ने एक बार लुंड को देखा और चैंकते हुए फुसफुसाते हुए बोली- अंदर कर इसे... तेरे पापा यहीं हैं दोनों मरे जायेंगे...

में- कुछ नहीं होगा माँ पापा टीवी देख रहे हैं और ये कहकर मैं पीछे से माँ से चिपक गया और लुंड को उनके दोनों चूतड़ों की दरार में साड़ी के ऊपर से hi सेट कर दिया... और कमर हिलाकर घिसने लगा ..

माँ मुझे पीछे धकेलने की कोशिश करने लगी...

माँ- कर्मा समझा कर पागल पैन मत कर.. देखलिए न उन्होंने तो सब बंद...

पर मेरा दिमाग तो अभी लोडे पर सवार था मैं अपने हाथ आगे लेजाकर कपड़ो के ऊपर से hi माँ की छूछीयो को मसलने लगा...

माँ चाहते हुए भी कुछ नहीं कर प् रही थी उन्हें दर था कहीं पापा मुद कर न देखलें..

मेरा लुंड माँ के पटेलों के बीच घिसकर और कड़क हो गया... मैंने एक कदम और बढ़ने का सोचा और माँ की साड़ी को नीचे से उठाने लगा...

Maa-karma मत करररर

में- माँ रुको तो सही और मैंने साड़ी उठाते हुए माँ के चेहरे को एक तरफ घुमाकर अपने होंठ उनके होठों पर रख दिए और एक 2-3 सेकंड का चुम्मा लिए...

Maa-mat मान जब फंसेंगे न तब पता चलेगा..

मैंने माँ की बात का कोई जवाब नहीं दिया पर माँ से पीछे हैट गया..

माँ ने रहत की सांस ली की मैं हैट गया पीछे.. पर अगले hi पल मैंने माँ की साड़ी को पेटीकोट के साथ कमर तक उठा दिया और मेरे सामने माँ के मांसल गद्देदार छुटद आ गए... पर मेरी हरकत से माँ चौंक गयी और उनका मुँह खुला का खुला रह गया इस बार तो माँ ने कुछ बोलै भी नहीं बस पापा की तरफ देखती जा रही थी पर अछि बात ये थी की सिंक की वजह से कमर के नीचे का हिस्से वैसे भी नहीं दीखता पापा को पर फिर भी माँ को दर था...

मैं साड़ी को कमर तक उठाकर नीचे घुटनो पर बैठ गया और माँ की गांड की नायब खूबसूरती को आँखों से पीने लगा...





तरबूज़ जैसे गोल गोल चूतड़... उन्दोनो के बीच की दरार जो लगता था कभी ख़त्म hi नहीं होती... चूतड़ इतने मांसल और गद्देदार की गांड का छेड़ तो चुप hi गया था...

मैं माँ की गांड को देखने में खो सा गया...... याद hi नहीं रहा की इस वक़्त कहाँ हूँ और क्या करना है... खैर माँ ने अपने आपको छुड़ाने के लिए थोड़ा हिलाया तो होश में आया और मैंने साड़ी और पेटीकोट को कमर पर फसकर अपने दोनों हाथों से माँ के दोनों बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ों को पकड़ लिए और मसलने लगा..

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh कर्मा बस्स्स अब छोड़ड़ड़...( माँ फुसफुसाते हुए बोल रही थी...)

और बोले भी क्यों न पति सामने थे और बीटा उनके नंगे चूतड़ों से खेल रहा था... मैंने माँ के दोनों तरबूज़ों को हाथ से फैलाया तो बीच की मांग दिखने लगी और उसमे से झांकता हुआ प्यारा सा भूरा छेड़...

मैं खुद को रोक नहीं पाया और अपने होंठ माँ की गांड के छेड़ पर टिका दिए.. फिरर जीभ निकल कर दरार को ऊपर से लेकर नीचे छूट तक छाता... तो पता चला माँ की छूट कितनी गीली हो चुकी थी उन्हें भी पति की मौजूदगी में बेटे के साथ ऐसा करने में एक अलग उत्तेजना और आनंद मिल रहा था.. ये सब जितना hi गलत था उतना hi उत्तेजक भी था..

माँ की छूट से रास को चाटते हुए मैं फिर ऊपर की और आया जीभ फिरते हुए और दरार के अंत तक छठा... और फिर से नीचे छूट तक.. माँ कड़ी कड़ी कुलबुला रही थी और अब तो मुझे रोक भी नहीं रही थी... ऐसा hi कई बार करने के बाद मैंने अपनी जीभ को उनकी गांड के कैसे हुए भूरे छेड़ पर रोक दिया और उसे जीभ से कुरेदने लगा....

माँ ने कसकर स्लिप को पकड़ लिया... और अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलने लगी...... मैंने भी जीभ को नुकीला करके उनकी गांड में घुसा दिया..

मेरी जीभ के अंदर होते hi माँ के मुँह से आअह्ह्ह्ह निकल गयी जिससे मैं भी दर गया के कहीं पापा ने सुनलें पर रहत की बात थी की पापा ने नहीं सुना... और मैंने अपना काम आगे जारी रखा..

मैं अपनी जीभ को माँ की गांड के छेड़ में अंदर बहार करने लगा...

माँ भी आगे स्लिप पर तक लगा कर थोड़ा झुक गयी और अपनी बड़ी सी गांड को पीछे मेरे मुँह पर और दबा दिया साथ hi अपने दोनों हाथों को पीछे लेकर अपने दोनों चूतड़ों को पकड़ कर फैला दिया जिससे मुझे और आसानी हो गई उनकी गांड में जीभ डालने में... मैं लगातार उनकी गांड को जीभ से कुरेदने लगा..





हर बढ़ते पल के साथ... माँ और गरम होती है रही थी और मेरा लुंड भी झटके पर झटके मार रहा था...

मेरी जीभ लगातार माँ की गांड में अंदर बहार हो रही थी माँ का शरीर भी अब काफी हिल रहा था तो मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी जांघों को जकड लिए और जीभ चलता रहा थोड़ी देर बाद hi माँ का शरीर कांपने लगा... और मुझे अहसास हुआ की माँ झाड़ रही हैं तो मैंने अपना मुँह उनकी गांड से खिसका कर छूट पर रख दिया और उनकी चुत का रास चाटने लगा...

माँ पापा की मौजूदगी के कारन इतनी गरम हो गए थी की खुद को संभल नहीं पाई और मेरी जीभ पर झाड़ रही थी... मैं लगातार माँ की छूट और उसमे से निकलते रास को कहते जा रहा था... कुछ पल बाद जब माँ का झड़ना ख़त्म हुआ तो वो शांत हो गए.

. इधर मेरे लुंड का भी बुरा हाल था मैंने सोचा माँ का काम हो गया अब मेरी बरी है मैं झट से खड़ा हुआ और माँ की कमर को पकड़ कर अपना लुंड माँ की गांड के छेड़ पर टिका दिया और जैसे hi धक्का लगाने को हुआ अचानक से टीवी की आवाज़ बंद हो गयी मैंने देखा पापा ने टीवी बंद कर दिया है और हमारी तरफ देखने hi वाले हैं तो मैंने झट से माँ की साड़ी और पेटीकोट को नीचे गिरा दिया और अपना पजामा भी ऊपर खिसका दिया ... मेरे साथ कलपद हो गया..

पापा- धुले नहीं अभी बर्तन अरे कर्मा तू क्या कर रहा है रसोई में..

में- वो पापा कुछ लेने आया था...

माँ- जो लेने आया था वो मिला नहीं धोखा हो गया...

मैं माँ को हैरानी से देखने लगा वहीं माँ मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी?..

Papa-aisa क्या लेना था कर्मा??

में- वो मुझे?

माँ- बोलता क्यों नहीं की शादी से जो मिठाई आई थी इसने सोचा की अभी भी राखी हैं पर वो पहले hi ख़त्म हो गए... तो धोखा हो गया ऐसे...

माँ मेरी तरफ देखकर बोल रही थी..

Me-haan papa...wo मिठाई चाहिए थी..

पापा- अरे तुम बच्चे भी न अब भी मिठाई से जी नहीं भरा तुम्हारा इतनी खाने के बाद...

में- वो मिठाई hi इतनी मस्त है की कितनी भी खालो मन hi नहीं भरता पापा...

माँ- चल अब सो जा जेक मैं दूध लेकर आती हूँ थोड़ी देर में...

Me-theek है माँ....

मैं लुंड को पाजामे में दबाये अपने कमरे में आ गया और लुंड को एक बार फिर पाजामे से निकल लिए और बिस्तर पर लेट कर हिलने laga...par कोई फायदा नहीं साला चुदाई की ऐसी लत लगी थी लुंड को अब हाथ से मज़ा hi नहीं आ रहा था... खैर फिर भी ऐसे hi हिलाते हुए लेता रहा.. ऐसे hi पड़े पड़े10-15 मिनट्स बीत गए.. की तभी अचानक से दरवाज़े पर किसी की आहात हुई मैंने जल्दी से चद्दर से लुंड को धक् लिया...

फिर अगले hi पल मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और हाथ में गिलास लिए हुए माँ अंदर आई माँ ने अब साड़ी की जगह एक मैक्सी पहनी हुई थी.. अंदर आते hi माँ ने गेट दोबारा धक् दिया... मैं तो ख़ुशी से उछाल पड़ा... और चद्दर को उछाल कर फ़ेंक दिया...

में- मा बिलकुल सही टाइम पर आई हो देखो इसका क्या हाल है...

माँ ने मेरे लुंड को देखा और बोली- सही हाल है और ये क्या बदतमीज़ी की तूने रसोई में अगर तेरे पापा देखलेते न तो पता चलता क्या हाल होता...

Me-offo माँ मज़ा तो तुम्हे भी आया खुद तो झाड़ गए यहाँ देखो क्या हाल है..

माँ ने मेरे लुंड को बीएड के पास आकर हाथ में पकड़ा

माँ- तुम दोनों बाप बेटे एक जैसे हो?

में- क्यों माँ?

Maa-wahan तेरे पापा अपना लुंड खड़ा करके बैठे हैं मेरे लिए... और यहाँ तू...

में- तुम हो hi ऐसी चीज़ माँ सबके लुंड खड़े करदेती हो बाप हो या बीटा...

मैंने माँ के हाथ से दूध लेकर साइड में रख दिया और उन्हें झुककर उनकी मक्सी उठाने लगा...

पर माँ ने खुद को मुझसे चुढ़लिअ

माँ- नहीं कर्मा अभी नहीं टाइम नहीं है तेरे पापा पूछने लगेंगे.. उन्हें बस5 मीन्स का बोल कर आई हूँ...

में- माँ हो जायेगा 5 मीन्स में तो..

Maa-rahne दे मुझे पता है अगर एक बार शुरू हो गया तू तो न जाने कितना टाइम लग जायेगा और तेरे पापक मुझे ढूंढते हुए यहाँ आ जायेंगे...

में- तो इसका क्या करूँ माँ?

मैंने अपनर लुंड को दिखता हुए कहा..

माँ- इसको शांत करने का रास्ता है मेरे पास...

में- क्या रास्ता...

Maa-ruk बताती हूँ और ये कहकर माँ मेरे सामने नीचे बैठ गयी और मेरा पजामा पकड़ कर नीचे खिसका दिया और फिर मैंने पूरी तरह से पाजामे को पैरों से अलग कर के फ़ेंक दिया साथ hi अपनी टीशर्ट भी उतर दी और माँ के सामने पूरा नंगा खड़ा हो गया...

माँ ने मेरे लुंड को पकड़ा और हाथो से हिलने लगी...

मैंने माँ को रोका..

Me-maa एक मिंट.

Maa-kya हुआ..

मैंने माँ के दोनों हाथो को सीधा किआ और उनकी मक्सी को कंधे से पकड़ कर उठाया और फिर उतार दिया... माँ मक्सी के नीचे पूरी नंगी थी... मेरा लुंड और फुदकने लगक..

माँ- ले मुझे भी नंगी करके hi मन तू अब जल्दी कर टाइम नहीं है..

और ये कहकर माँ ने बड़े hi कामुक धन से अपना मुँह खोला और जीभ बहार निकली..

मैंने भी ज़्यादा देर न करते हुए अपने लुंड को पकड़ा और माँ की जीभ पर मरने लगा और फिर अचानक से माँ के खुले हुए मुँह में लुंड के टोपे को फंसा दिया





और लुंड जो उनके होंठो पर मरने लगा माँ के मुँह से बबहहहबबबबबबबबबा जैसी अजीब आवाज़ें निकल रही थी जो मेरी उत्तेजना को और बढ़ने लगी...

कुछ भी हो पर अपने माँ से लुंड चुसवाने का मज़ा सबसे अलग है....

वो माँ जिसने मुझे जनम दिया जिससे मुझे लोरी गए कर सुलाया आज मैं उसी मुँह में अपना लुंड दाल रहा था... फिर मैंने अपने लुंड को माँ के मुँह में डालके निकलने लगा एक पल के लिए अंदर करता तो माँ चूसती और अगले hi पल बहार... जैसे hi मेरा लुंड मुँह में जाता माँ उसे चूस लेती





जैसे बच्चे को चम्मच से कुछ खिलते हैं मैं माँ कक अपना लुंड खिला रहा था और माँ भी बड़े चाव से खा रही थी...

मुझे माँ के गरम मुँह के साथ खेलने में बड़ा मज़ा आ रहा था वैसे भी ऐसे किसी के भी मुँह में लुंड डालना बहुत उत्तेजक होता है और जब वो मुँह अपनी माँ को हो तो कितना मज़ा आता होगा इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल है...

मैंने आगे बढ़ाते हुए माँ के सर को पकड़ लिए और लुंड को माँ के एक गाल की तरफ करके लुंड अंदर बहार लड़ने लगा...

गाल में अंदर से लुंड लगने से जैसे hi मेरा लुंड अंदर जाता माँ का गाल गुब्बारे की तरह फूल जाता जो बेहद कामुक लगता...

मैं झटके पर झटके देकर माँ के मुँह को छोड़ रहा था या यूँ कहें की अभी उनके गाल को





मैं लगातार अपने लुंड की मशीन माँ के मुँह में घपाघप chala.raha ....

अब लूँ बहार नहीं ला रहा था बल्कि अंदर hi अंदर झटके दे रहा था..

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था..

मैं माँ के चेहरे को देख रहा था और सोच रहा था की माँ को ऐसे अभी कोई गाओं वाला देखले तो बेहोश hi हो जायेगा की इतनी संस्कारी औरत कैसे अपने बेटे के लुंड से मुँह छुड़वा रही hai..idhar मेरा लुंड और फुदकने लगा तो मैंने अब लुंड का निशाना गाल से हटा कर सीधा कर लिए और माँ के मुँह को छोड़ने लगा....





माँ अपना मुँह खोल कर मुझे छोड़ने में पूरी मदद कर ताहि थी इधर मेरे धक्के हर धकले के बाद तेज़ होते जा रहे थे और अब मैं अपना पूरा लुंड माँ के गले तक पहुंचा रहा था और माँ ग्ग्ग्गू गग्गू की आवाज़ कर रही थी... माँ मेरी आँखों में देख रही थी शायद जानना छह रही थी मैं कब जगदंगा... हालाँकि माँ का मुँह छोड़ने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था पर अभी मेरा कोई मूड नहीं था पर माँ को टाइम का अंदाज़ा था आखिर कर माँ ने लुंड मुँह से निकल दिया और बोली- कर्मा हुआ नहीं तेरा टाइम हो रहा है...

Me-maa तभी तो बोलै छोड़ने दो एक बार चूसने से नहीं निकलेगा...

Maa-beta मैं भी तेरी माँ हूँ देख कैसे निकलता है..

माँ ने मुझे बीएड पर दूसरी तरफ घुमा कर घुटनो और हाथो पर कर दिए मेरे लिए थोड़ी अजीब पोजीशन थी अब तक मैं सको घोड़ी बना कर छोड़ता था और अभी मैं घोड़ी बना हुआ था और माँ मेरे पीछे थी.

माँ ने खुद पैरों के बीचा आकर लुंड को फिर से मुँह में भर लिए और एक दो बार पूरा गले तक लेकर चूसा और फिर निकल दिया... पोजीशन अलग थी पर मुझे मज़ा आ रहा था, माँ ने अब मेरी लटकती गोलियों को मुँह में भर लिए और साथ hi हाथ से लुंड हिलने लगी...

माँ के मुँह में गोलियां जाते hi मेरा लुंड उनके हाथ में झटकर मरने लगा...

माँ के गरम मुँह में गोलियां को बड़ा ाचा महसूस हो रहा था वहीं माँ भी जीभ से दोनों गोलियों को चाट रही थी...

मैं आराम से माँ की कलाकारी का मज़ा ले रहा था... मेरा लुंड पूरे तनाव था ऐसा जादू माँ के मुँह में की तभी अचानक से माँ ने मेरी गोलियों को मुँह से निकल दिया मैं थोड़ा निराश हो गया क्यूंकि मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन तभी अचानक से कुछ ऐसा हुआ जिससे मैं चौंक गया और न hi इससे पहले किसी ने मेरे साथ किआ था...

माँ की जीभ मेरे गांड के छेड़ के ऊपर घूमने लगी जिससे मेरे पूरे शरीर में सनसनी फ़ैल गई... ऐसा तो मुझे कभी महसूस नहीं हुआ था... मेरा खुद को संभालना मुश्किल हो गया ऐसा लगा कहीं मैं गिर न जॉन माँ का एक हाथ मेरे लुंड पर अब भी चल रहा था और फिर माँ अपनी जीभ नुकीली करके मेरी गांड को कुरेदने लगी.. उनके होंठ मेरी गांड के चारो और कास गए...





जैसे माँ की जीभ मुझे गांड के अंदर को घुसती हुई महसूस हुई मेरी गोलियां का सारा रास अचानक से मुझे मेरे लुंड में भरता हुआ लगा.. और हो भी क्यों न मेरी माँ अपने बेटे की गांड में जीभ डालकर चाट रही थी...

मेरी संस्कारी पतिव्रता मा की जीभ उनके सेज बेटे की गांड में अंदर बहार हो रही थी इससे उत्तेजित करने वाला दृश्य आजतक मैंने नहीं देखा था...

सिर्फ गोलियों का रास hi क्या पूरे शरीर का खून hi मनो मेरे लुंड में बहने लगा... उधर माँ लगातार अपनी जीभ को गांड में घुसेड़ने की कोशिश कर रही थी इधर मैं अपने चरम पर था... माँ की जीभ को मेरी गांड पर पड़े बस एक मिनट हुआ था और मेरा लुंड फटने को था...

में- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh maaaaaaaaaaaaaa..

मेरे मुँह से इतना सुनकर माँ समझ गयी और उन्होंने तुरंत पीछे हटकर मुझे घुमाकर बैठ पर बिठा दिया और अपना मुँह मेरे लुंड के टोपे पर रखा और और एक दो बार hi चूसा होगा की मेरा लुंड झटके खाने लगा और धार के बाद धार छोड़ने लगा...

माँ मेरे रास को पीने लगी कुछ धार तक तो वो पि गयी पर मेर रास इतना निकल रहा था की माँ का मुँह भर गया और उनके मुँह से बहार गिरने लगा.. माँ जितना पि सकती थी पि गयी अपने बेटे का लुंड रास बाकि का नीचे उनके होंठो से टपकता हुआ मेरी जांघ और चद्दर पर गिर गया...





माँ तब तक मेरा लुंड चूसती रही जब तक एक एक बूँद न निकल गए हो मेरे लुंड से और फिर एक बार पूरे लुंड को मुँह में लिए और चाट चाट कर साफ़ कर दिया..

मैं थोड़ा शांत हुआ...

में- वाह मा ते क्या था ऐसा तो कभी महसूस नहीं किआ मैंने...

माँ- बोलै था न बीटा मैं तेरी माँ हूँ..

ये बोलकर माँ कड़ी हुई और अपनी मैक्सी पहनी..

मैंने भी खड़े होकर माँ के होंठों को चूमा तो मुझे मेरे hi रास का स्वाद आया.. फिर माँ मुझे दूध पाइक सोने को बोलकर चली गई... मैंने जल्दी से दूध पिया और झड़ने के बाद चैन की नींद आई...

खैर देखते हैं अगली सुबह क्या लेकर आती है अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया

में- भरेगा मेरे दोस्त ज़रूर भरेगा टेंसन मत ले थोड़ा बेशरम बन जा...

जग्गू- भाभी की गांड के लिए तो मैं कुछ भी बन जॉन..

Me-kuch मत बन जप बोलूं वो करता जा बास

Jaggu-bas अब तू hi संभालेगा..

अपडेट 84

में- वो सब तो ठीक है पर ये बता तू कबसे है भाभी की गांड के पीछे पहले तो बड़ा शरीफ बन रहा था की वो भाभी है मेरी वगेरा वगेरा?

जग्गू- सच कहूं तो मैं तो न जाने कबसे भाभी को छोड़ना चाहता था पर ये बात सामने लेन की कभी हिम्मत hi नहीं हुई..

में- लोदु मुझसे भी छुपा रहा था...

Jaggu-main क्या बताता यार मैंने सोचा तू सोचेगा की मैं कितना घटिया इंसान हूँ...

में- अबे लोदु वो तो मुझे पहले भी लगता था.. हे हे हे..

Jaggu-Karma यार मज़ाक मत कर...

में- अबे इसमें घटिया की क्या बात भाभी होने से पहले वो एक मस्त गदराई हुई औरत है और तू जवान मर्द तो एक दुसरे के लिए ऐसा महसूस होना गलत नहीं है... सीधे शब्दों में कहूं तो उनके पास छूट है और तेरे पास लुंड.. और लुंड का काम होता है छूट में घुसना और छोड़ना.. अब चाहे वो छूट किसी की भी ho...hai तो छूट hi वैसे hi लुंड.

Jaggu-jai हो बाबा कर्मानन्द की...

में- खुश रहो मुर्ख बालक...

जग्गू- ग बाबा अब ये बताओ आगे क्या करना है...

में- जो तुझसे बोलै था वो किआ तूने? भाभी से कल्लू के बारे में बात करने के लिए..

Jaggu-nahi भाई अभी तो नहीं कर पाया तबसे कोई न कोई घर पर hi था... और भाभी भी तो हमेशा चिढ़ी रहती है..

में- बात तो करनी पड़ेगी बीटा.. नहीं तो कुछ नहीं कर पाएंगे...

Jaggu-bhai मैं पूरी कोशिश करूँगा जल्दी से जल्दी करने की...

Me-rahne दे तू मत कार्यो जब भी तुझे लगे बात हो सकती है तो मुझे बुला लिओ...

Jaggu-theek है भाई.. ये भी ठीक है..

Me-chal अब लुंड अंदर कर और चलते हैं नीचे.. मैं भी घर जाता हूँ कपडे बदलने हैं..

जग्गू- ठीक चल...

फिर हम दोनों नीचे आये और मैं ताऊ तै को बोलकर अपने घर आ गया.. घर आके माँ पापा ने पुछा भीगा क्यों तो उन्हें बता दिया और नहाकर कपडे बदले... इतने में खाना भी बन गया था तो खाना खाया...

खाना खाने के बाद अपने कमरे में पंहुचा hi था की विनीत का फ़ोन आ गया उससे बात करने लगा पर बीच बीच में थोड़ी आहें भी भर रहा था तो मैंने पुछा क्या क्र रहा है तो बोलै मम्मी लुंड पर बैठ कर कूद रही हैं...

में- सही है बीटा असली मज़े तो तेरे हैं...

विनीत- सिर्फ मेरे नहीं भाई सबके hi हैं और सब तेरी वजह से...

में- चल इमोशनल मत हो और एक काम कर वीडियो कॉल कर मुझे भी देखना है...

विनीत ने वीडियो कॉल किआ पहले तो खुद को हँसता हुआ दिखाया बीएड पर सिरहाने से टिक कर लेता हुआ था फिर पीछे का कैमरा ों करके दिखाया बुआ को जो अपने बेटे के लुंड पर उछाल रही थी..





बुआ की बड़ी बड़ी छुछियां ऊपर नीचे हो रही थी और उनके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी

माँ बेटे की चुदाई देखकर मेरा लुंड भी एक दम तुरंत टाइट हो गया..

मैंने विनीत से बोलै बुआ से बात करवाने को तो उसने सामने का कैमरा ों करके फ़ोन बुआ को पकड़ा दिया.. बुआ फ़ोन पर मुझे देखते hi खुश हो गए और उछालना बंद कर दिया...

बुआ- अरे मेरा लाल कर्मा कैसा है...

में- ाचा हु बुआ... तुम तो मज़े ले रही हो...

बुआ- हाँ बच्चा सब तेरी वजह से hi है... बता बाकि सब कैसे अह्ह्ह्हह्हह हैं...

मैं समझ गया विनीत नीचे से झटका मार रहा होगा इसलिए बुआ की सिसकियाँ निकल रही है ..

बुआ- विनीत रुक जाए बात करने दे..

में- बाकि सब बढ़िया हैं बुआ...

बुआ- तूने फ़ोन नहीं किआ पहुंच के एक भी बार...

में- मैंने मश्ग करके विनीत को बता दिया था बाकि मैंने सोचा अब तुम्हे बहुत तंग कर लिया थोड़ा आराम करने दूँ..

Bua-maar खायेगा तू कमीने... ये बता खाना पीना हो गया...

Me-haan और तुम लोगो का?

बुआ- हाँ खा पिके सोने आ गए हैं हम तो...

में- सोओगे कहाँ अभी.. बाकि सब लोग कहाँ है?

बुआ- पूर्वी और दामाद जी तो और उसकी सास आज दिन में निकल गए बाकि मेहमान तो पहले hi चले गए थे... अब तो घर सूना सूना हो गया है हम लोग hi बचे हैं..

में- फूपाजी बड़े फूपाजी कहाँ हैं?

Bua-aahhhhhhh विनियेटटटटटट अहह कर्मा बीटा वो आज जीजी संभल रही हैं दोनों भाइयों को... और मैं अपने बेटे को...

में- बढ़िया है चलो बुआ अब तुम लोग मज़े लो मैं देखूंगा तो मेरा खड़ा हो जायेगा...

बुआ- हाय याद मत दिला तेरे लुंड की.. रहा नहीं जायेगा...

Me-ek लुंड छूट में है फिर भी याद आ रही है मेरे लुंड की...

Bua-beta तेरा लुंड hi कुछ ऐसा है... और जो एक लुंड से hi संतुष्ट हो जाये वो तेरी बुआ कहाँ...

में- हाँ पता है मेरी बुआ.. चलो अब रखता हूँ नमस्ते बुआ...

Bua-namaste मेरे लाल और सुन अभी दो चार दिन में रिम्मी आएगी पग फेरे की रस्म के लिए तो फ़ोन करवाउंगी..

Me-theek है बुआ...

ये कहकर मैंने फ़ोन रख दिया पर बुआ और विनीत की चुदाई देखकर और उससे पहले प्रेमा भाभी के जलवो से लुंड पूरी तरह तना हुआ था.. अब इसका एक hi सहारा था... माँ..

मैं जल्दी से लुंड को पाजामे में एडजस्ट करके कमरे से बहार निकला और आंगन में देखा तो पापा टीवी देख रहे थे अनुज कहीं नहीं दिख रहा था और देखने पर पता चला माँ रसोई में बर्तन मंझ रही थी...

मैं टहलता हुआ रसोई में पहुंचा माँ ने मुझे देखा और बोली- कुछ चाहिए लल्ला..?

में- हाँ माँ चाहिए तो..

मैं माँ के बगल में जाकर खड़ा हो गया एक नज़र आंगन में पापा की और डाली तो टीवी में लगे हुए थे एक बात ये अछि थी की टीवी रसोई से दूसरी तरफ थी मतलब टीवी देखने बैठो तो पीठ रसोई की तरफ हो जाती थी और ऐसा माँ ने hi करवाया था क्यूंकि वो रसोई में काम करते हुए भी टीवी देख पाएं इसलिए... तो उसी से अभी पापा की पीठ हमारी तरफ थी पर हाँ सर ज़रा सा घुमाकर रसोई में आराम से देख सकते थे.

माँ- क्या चाहिए बीटा?

माँ बर्तन मांझते हुए बोली..

में- ये चाहिए माँ..

मैंने धीरे से बोलै और अपना हाथ माँ के चूतड़ों पर रख दिया..

माँ ने गुस्से में आँख दिखाकर पापा की तरफ इशारा किया.. और धीरे से boli-pagal हो गया है क्या? पापा सामने हैं..

में- एक बार मेरी हालत तो देखो माँ..

ये कहकर मैंने अपना रोड जैसा लुंड बहार निकल लिए...

माँ ने एक बार लुंड को देखा और चैंकते हुए फुसफुसाते हुए बोली- अंदर कर इसे... तेरे पापा यहीं हैं दोनों मरे जायेंगे...

में- कुछ नहीं होगा माँ पापा टीवी देख रहे हैं और ये कहकर मैं पीछे से माँ से चिपक गया और लुंड को उनके दोनों चूतड़ों की दरार में साड़ी के ऊपर से hi सेट कर दिया... और कमर हिलाकर घिसने लगा ..

माँ मुझे पीछे धकेलने की कोशिश करने लगी...

माँ- कर्मा समझा कर पागल पैन मत कर.. देखलिए न उन्होंने तो सब बंद...

पर मेरा दिमाग तो अभी लोडे पर सवार था मैं अपने हाथ आगे लेजाकर कपड़ो के ऊपर से hi माँ की छूछीयो को मसलने लगा...

माँ चाहते हुए भी कुछ नहीं कर प् रही थी उन्हें दर था कहीं पापा मुद कर न देखलें..

मेरा लुंड माँ के पटेलों के बीच घिसकर और कड़क हो गया... मैंने एक कदम और बढ़ने का सोचा और माँ की साड़ी को नीचे से उठाने लगा...

Maa-karma मत करररर

में- माँ रुको तो सही और मैंने साड़ी उठाते हुए माँ के चेहरे को एक तरफ घुमाकर अपने होंठ उनके होठों पर रख दिए और एक 2-3 सेकंड का चुम्मा लिए...

Maa-mat मान जब फंसेंगे न तब पता चलेगा..

मैंने माँ की बात का कोई जवाब नहीं दिया पर माँ से पीछे हैट गया..

माँ ने रहत की सांस ली की मैं हैट गया पीछे.. पर अगले hi पल मैंने माँ की साड़ी को पेटीकोट के साथ कमर तक उठा दिया और मेरे सामने माँ के मांसल गद्देदार छुटद आ गए... पर मेरी हरकत से माँ चौंक गयी और उनका मुँह खुला का खुला रह गया इस बार तो माँ ने कुछ बोलै भी नहीं बस पापा की तरफ देखती जा रही थी पर अछि बात ये थी की सिंक की वजह से कमर के नीचे का हिस्से वैसे भी नहीं दीखता पापा को पर फिर भी माँ को दर था...

मैं साड़ी को कमर तक उठाकर नीचे घुटनो पर बैठ गया और माँ की गांड की नायब खूबसूरती को आँखों से पीने लगा...





तरबूज़ जैसे गोल गोल चूतड़... उन्दोनो के बीच की दरार जो लगता था कभी ख़त्म hi नहीं होती... चूतड़ इतने मांसल और गद्देदार की गांड का छेड़ तो चुप hi गया था...

मैं माँ की गांड को देखने में खो सा गया...... याद hi नहीं रहा की इस वक़्त कहाँ हूँ और क्या करना है... खैर माँ ने अपने आपको छुड़ाने के लिए थोड़ा हिलाया तो होश में आया और मैंने साड़ी और पेटीकोट को कमर पर फसकर अपने दोनों हाथों से माँ के दोनों बड़े बड़े गद्देदार चूतड़ों को पकड़ लिए और मसलने लगा..

Maa-aahhhhhhhhhhhhhhhh कर्मा बस्स्स अब छोड़ड़ड़...( माँ फुसफुसाते हुए बोल रही थी...)

और बोले भी क्यों न पति सामने थे और बीटा उनके नंगे चूतड़ों से खेल रहा था... मैंने माँ के दोनों तरबूज़ों को हाथ से फैलाया तो बीच की मांग दिखने लगी और उसमे से झांकता हुआ प्यारा सा भूरा छेड़...

मैं खुद को रोक नहीं पाया और अपने होंठ माँ की गांड के छेड़ पर टिका दिए.. फिरर जीभ निकल कर दरार को ऊपर से लेकर नीचे छूट तक छाता... तो पता चला माँ की छूट कितनी गीली हो चुकी थी उन्हें भी पति की मौजूदगी में बेटे के साथ ऐसा करने में एक अलग उत्तेजना और आनंद मिल रहा था.. ये सब जितना hi गलत था उतना hi उत्तेजक भी था..

माँ की छूट से रास को चाटते हुए मैं फिर ऊपर की और आया जीभ फिरते हुए और दरार के अंत तक छठा... और फिर से नीचे छूट तक.. माँ कड़ी कड़ी कुलबुला रही थी और अब तो मुझे रोक भी नहीं रही थी... ऐसा hi कई बार करने के बाद मैंने अपनी जीभ को उनकी गांड के कैसे हुए भूरे छेड़ पर रोक दिया और उसे जीभ से कुरेदने लगा....

माँ ने कसकर स्लिप को पकड़ लिया... और अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलने लगी...... मैंने भी जीभ को नुकीला करके उनकी गांड में घुसा दिया..

मेरी जीभ के अंदर होते hi माँ के मुँह से आअह्ह्ह्ह निकल गयी जिससे मैं भी दर गया के कहीं पापा ने सुनलें पर रहत की बात थी की पापा ने नहीं सुना... और मैंने अपना काम आगे जारी रखा..

मैं अपनी जीभ को माँ की गांड के छेड़ में अंदर बहार करने लगा...

माँ भी आगे स्लिप पर तक लगा कर थोड़ा झुक गयी और अपनी बड़ी सी गांड को पीछे मेरे मुँह पर और दबा दिया साथ hi अपने दोनों हाथों को पीछे लेकर अपने दोनों चूतड़ों को पकड़ कर फैला दिया जिससे मुझे और आसानी हो गई उनकी गांड में जीभ डालने में... मैं लगातार उनकी गांड को जीभ से कुरेदने लगा..





हर बढ़ते पल के साथ... माँ और गरम होती है रही थी और मेरा लुंड भी झटके पर झटके मार रहा था...

मेरी जीभ लगातार माँ की गांड में अंदर बहार हो रही थी माँ का शरीर भी अब काफी हिल रहा था तो मैंने अपने दोनों हाथों से उनकी जांघों को जकड लिए और जीभ चलता रहा थोड़ी देर बाद hi माँ का शरीर कांपने लगा... और मुझे अहसास हुआ की माँ झाड़ रही हैं तो मैंने अपना मुँह उनकी गांड से खिसका कर छूट पर रख दिया और उनकी चुत का रास चाटने लगा...

माँ पापा की मौजूदगी के कारन इतनी गरम हो गए थी की खुद को संभल नहीं पाई और मेरी जीभ पर झाड़ रही थी... मैं लगातार माँ की छूट और उसमे से निकलते रास को कहते जा रहा था... कुछ पल बाद जब माँ का झड़ना ख़त्म हुआ तो वो शांत हो गए.

. इधर मेरे लुंड का भी बुरा हाल था मैंने सोचा माँ का काम हो गया अब मेरी बरी है मैं झट से खड़ा हुआ और माँ की कमर को पकड़ कर अपना लुंड माँ की गांड के छेड़ पर टिका दिया और जैसे hi धक्का लगाने को हुआ अचानक से टीवी की आवाज़ बंद हो गयी मैंने देखा पापा ने टीवी बंद कर दिया है और हमारी तरफ देखने hi वाले हैं तो मैंने झट से माँ की साड़ी और पेटीकोट को नीचे गिरा दिया और अपना पजामा भी ऊपर खिसका दिया ... मेरे साथ कलपद हो गया..

पापा- धुले नहीं अभी बर्तन अरे कर्मा तू क्या कर रहा है रसोई में..

में- वो पापा कुछ लेने आया था...

माँ- जो लेने आया था वो मिला नहीं धोखा हो गया...

मैं माँ को हैरानी से देखने लगा वहीं माँ मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी?..

Papa-aisa क्या लेना था कर्मा??

में- वो मुझे?

माँ- बोलता क्यों नहीं की शादी से जो मिठाई आई थी इसने सोचा की अभी भी राखी हैं पर वो पहले hi ख़त्म हो गए... तो धोखा हो गया ऐसे...

माँ मेरी तरफ देखकर बोल रही थी..

Me-haan papa...wo मिठाई चाहिए थी..

पापा- अरे तुम बच्चे भी न अब भी मिठाई से जी नहीं भरा तुम्हारा इतनी खाने के बाद...

में- वो मिठाई hi इतनी मस्त है की कितनी भी खालो मन hi नहीं भरता पापा...

माँ- चल अब सो जा जेक मैं दूध लेकर आती हूँ थोड़ी देर में...

Me-theek है माँ....

मैं लुंड को पाजामे में दबाये अपने कमरे में आ गया और लुंड को एक बार फिर पाजामे से निकल लिए और बिस्तर पर लेट कर हिलने laga...par कोई फायदा नहीं साला चुदाई की ऐसी लत लगी थी लुंड को अब हाथ से मज़ा hi नहीं आ रहा था... खैर फिर भी ऐसे hi हिलाते हुए लेता रहा.. ऐसे hi पड़े पड़े10-15 मिनट्स बीत गए.. की तभी अचानक से दरवाज़े पर किसी की आहात हुई मैंने जल्दी से चद्दर से लुंड को धक् लिया...

फिर अगले hi पल मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और हाथ में गिलास लिए हुए माँ अंदर आई माँ ने अब साड़ी की जगह एक मैक्सी पहनी हुई थी.. अंदर आते hi माँ ने गेट दोबारा धक् दिया... मैं तो ख़ुशी से उछाल पड़ा... और चद्दर को उछाल कर फ़ेंक दिया...

में- मा बिलकुल सही टाइम पर आई हो देखो इसका क्या हाल है...

माँ ने मेरे लुंड को देखा और बोली- सही हाल है और ये क्या बदतमीज़ी की तूने रसोई में अगर तेरे पापा देखलेते न तो पता चलता क्या हाल होता...

Me-offo माँ मज़ा तो तुम्हे भी आया खुद तो झाड़ गए यहाँ देखो क्या हाल है..

माँ ने मेरे लुंड को बीएड के पास आकर हाथ में पकड़ा

माँ- तुम दोनों बाप बेटे एक जैसे हो?

में- क्यों माँ?

Maa-wahan तेरे पापा अपना लुंड खड़ा करके बैठे हैं मेरे लिए... और यहाँ तू...

में- तुम हो hi ऐसी चीज़ माँ सबके लुंड खड़े करदेती हो बाप हो या बीटा...

मैंने माँ के हाथ से दूध लेकर साइड में रख दिया और उन्हें झुककर उनकी मक्सी उठाने लगा...

पर माँ ने खुद को मुझसे चुढ़लिअ

माँ- नहीं कर्मा अभी नहीं टाइम नहीं है तेरे पापा पूछने लगेंगे.. उन्हें बस5 मीन्स का बोल कर आई हूँ...

में- माँ हो जायेगा 5 मीन्स में तो..

Maa-rahne दे मुझे पता है अगर एक बार शुरू हो गया तू तो न जाने कितना टाइम लग जायेगा और तेरे पापक मुझे ढूंढते हुए यहाँ आ जायेंगे...

में- तो इसका क्या करूँ माँ?

मैंने अपनर लुंड को दिखता हुए कहा..

माँ- इसको शांत करने का रास्ता है मेरे पास...

में- क्या रास्ता...

Maa-ruk बताती हूँ और ये कहकर माँ मेरे सामने नीचे बैठ गयी और मेरा पजामा पकड़ कर नीचे खिसका दिया और फिर मैंने पूरी तरह से पाजामे को पैरों से अलग कर के फ़ेंक दिया साथ hi अपनी टीशर्ट भी उतर दी और माँ के सामने पूरा नंगा खड़ा हो गया...

माँ ने मेरे लुंड को पकड़ा और हाथो से हिलने लगी...

मैंने माँ को रोका..

Me-maa एक मिंट.

Maa-kya हुआ..

मैंने माँ के दोनों हाथो को सीधा किआ और उनकी मक्सी को कंधे से पकड़ कर उठाया और फिर उतार दिया... माँ मक्सी के नीचे पूरी नंगी थी... मेरा लुंड और फुदकने लगक..

माँ- ले मुझे भी नंगी करके hi मन तू अब जल्दी कर टाइम नहीं है..

और ये कहकर माँ ने बड़े hi कामुक धन से अपना मुँह खोला और जीभ बहार निकली..

मैंने भी ज़्यादा देर न करते हुए अपने लुंड को पकड़ा और माँ की जीभ पर मरने लगा और फिर अचानक से माँ के खुले हुए मुँह में लुंड के टोपे को फंसा दिया





और लुंड जो उनके होंठो पर मरने लगा माँ के मुँह से बबहहहबबबबबबबबबा जैसी अजीब आवाज़ें निकल रही थी जो मेरी उत्तेजना को और बढ़ने लगी...

कुछ भी हो पर अपने माँ से लुंड चुसवाने का मज़ा सबसे अलग है....

वो माँ जिसने मुझे जनम दिया जिससे मुझे लोरी गए कर सुलाया आज मैं उसी मुँह में अपना लुंड दाल रहा था... फिर मैंने अपने लुंड को माँ के मुँह में डालके निकलने लगा एक पल के लिए अंदर करता तो माँ चूसती और अगले hi पल बहार... जैसे hi मेरा लुंड मुँह में जाता माँ उसे चूस लेती





जैसे बच्चे को चम्मच से कुछ खिलते हैं मैं माँ कक अपना लुंड खिला रहा था और माँ भी बड़े चाव से खा रही थी...

मुझे माँ के गरम मुँह के साथ खेलने में बड़ा मज़ा आ रहा था वैसे भी ऐसे किसी के भी मुँह में लुंड डालना बहुत उत्तेजक होता है और जब वो मुँह अपनी माँ को हो तो कितना मज़ा आता होगा इसका अनुमान लगाना भी मुश्किल है...

मैंने आगे बढ़ाते हुए माँ के सर को पकड़ लिए और लुंड को माँ के एक गाल की तरफ करके लुंड अंदर बहार लड़ने लगा...

गाल में अंदर से लुंड लगने से जैसे hi मेरा लुंड अंदर जाता माँ का गाल गुब्बारे की तरह फूल जाता जो बेहद कामुक लगता...

मैं झटके पर झटके देकर माँ के मुँह को छोड़ रहा था या यूँ कहें की अभी उनके गाल को





मैं लगातार अपने लुंड की मशीन माँ के मुँह में घपाघप chala.raha ....

अब लूँ बहार नहीं ला रहा था बल्कि अंदर hi अंदर झटके दे रहा था..

मुझे बहुत मज़ा आ रहा था..

मैं माँ के चेहरे को देख रहा था और सोच रहा था की माँ को ऐसे अभी कोई गाओं वाला देखले तो बेहोश hi हो जायेगा की इतनी संस्कारी औरत कैसे अपने बेटे के लुंड से मुँह छुड़वा रही hai..idhar मेरा लुंड और फुदकने लगा तो मैंने अब लुंड का निशाना गाल से हटा कर सीधा कर लिए और माँ के मुँह को छोड़ने लगा....





माँ अपना मुँह खोल कर मुझे छोड़ने में पूरी मदद कर ताहि थी इधर मेरे धक्के हर धकले के बाद तेज़ होते जा रहे थे और अब मैं अपना पूरा लुंड माँ के गले तक पहुंचा रहा था और माँ ग्ग्ग्गू गग्गू की आवाज़ कर रही थी... माँ मेरी आँखों में देख रही थी शायद जानना छह रही थी मैं कब जगदंगा... हालाँकि माँ का मुँह छोड़ने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था पर अभी मेरा कोई मूड नहीं था पर माँ को टाइम का अंदाज़ा था आखिर कर माँ ने लुंड मुँह से निकल दिया और बोली- कर्मा हुआ नहीं तेरा टाइम हो रहा है...

Me-maa तभी तो बोलै छोड़ने दो एक बार चूसने से नहीं निकलेगा...

Maa-beta मैं भी तेरी माँ हूँ देख कैसे निकलता है..

माँ ने मुझे बीएड पर दूसरी तरफ घुमा कर घुटनो और हाथो पर कर दिए मेरे लिए थोड़ी अजीब पोजीशन थी अब तक मैं सको घोड़ी बना कर छोड़ता था और अभी मैं घोड़ी बना हुआ था और माँ मेरे पीछे थी.

माँ ने खुद पैरों के बीचा आकर लुंड को फिर से मुँह में भर लिए और एक दो बार पूरा गले तक लेकर चूसा और फिर निकल दिया... पोजीशन अलग थी पर मुझे मज़ा आ रहा था, माँ ने अब मेरी लटकती गोलियों को मुँह में भर लिए और साथ hi हाथ से लुंड हिलने लगी...

माँ के मुँह में गोलियां जाते hi मेरा लुंड उनके हाथ में झटकर मरने लगा...

माँ के गरम मुँह में गोलियां को बड़ा ाचा महसूस हो रहा था वहीं माँ भी जीभ से दोनों गोलियों को चाट रही थी...

मैं आराम से माँ की कलाकारी का मज़ा ले रहा था... मेरा लुंड पूरे तनाव था ऐसा जादू माँ के मुँह में की तभी अचानक से माँ ने मेरी गोलियों को मुँह से निकल दिया मैं थोड़ा निराश हो गया क्यूंकि मुझे बहुत मज़ा आ रहा था लेकिन तभी अचानक से कुछ ऐसा हुआ जिससे मैं चौंक गया और न hi इससे पहले किसी ने मेरे साथ किआ था...

माँ की जीभ मेरे गांड के छेड़ के ऊपर घूमने लगी जिससे मेरे पूरे शरीर में सनसनी फ़ैल गई... ऐसा तो मुझे कभी महसूस नहीं हुआ था... मेरा खुद को संभालना मुश्किल हो गया ऐसा लगा कहीं मैं गिर न जॉन माँ का एक हाथ मेरे लुंड पर अब भी चल रहा था और फिर माँ अपनी जीभ नुकीली करके मेरी गांड को कुरेदने लगी.. उनके होंठ मेरी गांड के चारो और कास गए...





जैसे माँ की जीभ मुझे गांड के अंदर को घुसती हुई महसूस हुई मेरी गोलियां का सारा रास अचानक से मुझे मेरे लुंड में भरता हुआ लगा.. और हो भी क्यों न मेरी माँ अपने बेटे की गांड में जीभ डालकर चाट रही थी...

मेरी संस्कारी पतिव्रता मा की जीभ उनके सेज बेटे की गांड में अंदर बहार हो रही थी इससे उत्तेजित करने वाला दृश्य आजतक मैंने नहीं देखा था...

सिर्फ गोलियों का रास hi क्या पूरे शरीर का खून hi मनो मेरे लुंड में बहने लगा... उधर माँ लगातार अपनी जीभ को गांड में घुसेड़ने की कोशिश कर रही थी इधर मैं अपने चरम पर था... माँ की जीभ को मेरी गांड पर पड़े बस एक मिनट हुआ था और मेरा लुंड फटने को था...

में- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhjhh maaaaaaaaaaaaaa..

मेरे मुँह से इतना सुनकर माँ समझ गयी और उन्होंने तुरंत पीछे हटकर मुझे घुमाकर बैठ पर बिठा दिया और अपना मुँह मेरे लुंड के टोपे पर रखा और और एक दो बार hi चूसा होगा की मेरा लुंड झटके खाने लगा और धार के बाद धार छोड़ने लगा...

माँ मेरे रास को पीने लगी कुछ धार तक तो वो पि गयी पर मेर रास इतना निकल रहा था की माँ का मुँह भर गया और उनके मुँह से बहार गिरने लगा.. माँ जितना पि सकती थी पि गयी अपने बेटे का लुंड रास बाकि का नीचे उनके होंठो से टपकता हुआ मेरी जांघ और चद्दर पर गिर गया...





माँ तब तक मेरा लुंड चूसती रही जब तक एक एक बूँद न निकल गए हो मेरे लुंड से और फिर एक बार पूरे लुंड को मुँह में लिए और चाट चाट कर साफ़ कर दिया..

मैं थोड़ा शांत हुआ...

में- वाह मा ते क्या था ऐसा तो कभी महसूस नहीं किआ मैंने...

माँ- बोलै था न बीटा मैं तेरी माँ हूँ..

ये बोलकर माँ कड़ी हुई और अपनी मैक्सी पहनी..

मैंने भी खड़े होकर माँ के होंठों को चूमा तो मुझे मेरे hi रास का स्वाद आया.. फिर माँ मुझे दूध पाइक सोने को बोलकर चली गई... मैंने जल्दी से दूध पिया और झड़ने के बाद चैन की नींद आई...

खैर देखते हैं अगली सुबह क्या लेकर आती है अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
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