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- Dec 5, 2013
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मैं सोच में पद गया क्या हो गया इसे.. खैर जल्दी से घर से निकला तुबेल के लिए....
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तुबेल मेरे खेत पर hi लगा था ये खेत मेरे बाघ के सबसे दूर वाले छोर पर था, वहां एक झोपडी पड़ी हुई थी और वहीं हम दोस्त वगेरा मिलकर अपनी दोपहर गुज़रते थे और बकचोदी करते थे... और गर्मियों में तुबेल की हौदी में नहाकर गर्मी शांत करते थे...
मैं घर से निकल कर सीधा तुबेल पर पहुंचा तो देखा एक बाँदा हौदी के किनारे बैठा हुआ सोच रहा है मैं चुपचाप पीछे से गया और उसे झकझोर दिया तो वो चौंक गया...
वो- aaaahhhhhhhhhhhhh साले चूतिया डरा दिया मुझे...
Me-benchod दर खुद रहा है और चूतिया मुझे बोल रहा है...
(अरे मैं इससे मिलवाना तो भूल hi गया आपको तो ये है मेरा जिगरी और सबसे ाचा दोस्त जग्गू पूरा नाम तो जगत है पर सब जग्गू बुलाते हैं मेरे से कुछ महीने बड़ा है हर काम में मेरे साथ रहता है और हमारी वजह से हमारे परिवार भी काफी करीब हैं मेरा इसके घर खाना पीना सोना या इसका मेरे घर रोज़ की बात है.. मेरे साथ hi पढता था पर अब पढाई छोड़ दी है...
जग्गू का घर मेरे घर से दो गली छोड़कर है... इसलिए आना जाना लगा रहता है
इसके घर में 5 लोग हैं..
जग्गू के पापा राजपाल उम्र- 48 खेती करते हैं, अपने काम से काम रखने वाले बेहद सीधे साढ़े इंसान हैं, किसी भी तरह अपने परिवार को संभल के रखना चाहते हैं...
जग्गू की मम्मी- मंजू तै उम्र- 45
क्यूंकि जग्गू के पापा मेरे पापा से बड़े हैं तो उन्हें मैं ताऊ तै बुलाता हूँ.
एक दम गाओं की गंवार औरत हैं, भोली भली हैं, बदन भरा हुआ मांसल गदराया हुआ है, अपने बच्चों की चिंता में hi रहती हैं थोड़ी बातूनी हैं, इनके बारे में ये पूरा गाओं जनता है की इनके पेट में एक बात नहीं पचती... बाकि शरीर का नाप आप खुद देख लीजिये.

ये हैं मंजू तै.
राजपाल ताऊ के दो बेटे हैं बड़े बेटे का नाम है भगत जिसे सब भग्गू कहते हैं.. उम्र 25 साल ये पूरे घर की परेशानी का कारण है, घर में कलेश करना, दारू वगेरा पीना फिर पीकर घर में या बहार लड़ना, शादी हो चुकी है, घरवालों के लालः समझने के बाद भी नहीं सुधरता... पढ़ाई तो कभी की hi नहीं..
भग्गू की बीवी और जग्गू की भाभी- प्रेमा उम्र 23 साल, एक दम मस्त गदराया हुआ माल, 10वि तक पढ़ी hai...shadi को 5 साल हो गए हैं अब तक कोई बच्चा नहीं है इसी वजह से सास से बनती नहीं है, इसके भी कुछ अलग किस्से हैं जो बाद में पता चलेंगे... पर कुछ भी हो प्रेमा भाभी का बदन ऐसा है की लुंड खड़ा होकर पिचकारी छोड़ दे, कभी कभी तो समझ नहीं आता भग्गू का नसीब इतना कैसे खुल गया..
आप लोग भी देख लीजिये कुछ ऐसी हैं प्रेमा भाभी-

घर का सबसे छोटा सदस्य है जग्गू जिससे आप मिल hi चुके हैं तो ये था जग्गू का परिवार अब बापिस चलते हैं तुबेल पर)
जग्गू- सेल तू समझ नहीं रहा...
में- भेंचो मां की लड़की की शादी से आया है पूरा परिवार और खुशी होने की जगह गांड सी शकल बना राखी है तूने.. मुझे लगा अपने बाप से मिलकर तू खुश होगा थोड़ा..
जग्गू- हरामी सेल मज़ाक मत कर बोलै न..
में- ाचा बता न हुआ क्या क्यों गांड सा मुँह बना कर घूम रहा है...
जग्गू- यार भग्गू ने परेशां कर रखा है वहां पर भी दारू पीकर हंगामा कर दिया सेल ने ऊपर से मम्मी और भाभी की लड़ाई, पापा बेचारे और परेशां हैं..
में- भग्गू चूतियापा कर रहा था तो भाभी और तै की लड़ाई क्यों हो रही थी...
जग्गू - अरे वो hi यार मम्मी भाभी को सुनाने लगती है की मेरे लल्ला को संभल नहीं प् रही, न जाने कैसी औरत है और कुछ नहीं मिले तो एक hi बात के एक बच्चा नहीं दे पाई.. उधर भाभी भी काम नहीं है की अपने लड़के को देखो उससे कुछ होता नहीं है अगर और कहीं ब्याह होता मेरा तो खुसी से रह रही होती.. नसीब hi फूट गया मेरा तो...
में- बूटा मत मानिओ पर बोल तो तेरी भाभी सही रही है... भग्गू जैसे के लिए प्रेमा भाभी..
Jaggu-bhai पता है पर अब करूँ क्या?
में- अरे चिंता मत कर सेल भग्गू को सुधरते हैं हो जायेगा सब ठीक... एक काम करें?
Jaggu-kya?
में- भग्गू को नशा मुक्ति केंद्र में दाल दें?
जग्गू- डाला तो था पिछली बार याद नहीं क्या हुआ, वहां से भाग आया था और कितना कलेश किआ था घर आकर,
Me-phir कुछ और सोचते हैं..
Jaggu-aur सिर्फ भग्गू की hi परेशानी होती तो चल भी जाता,
में- और कोई भी परेशानी है क्या?
Jaggu-haan यार पर बड़ी वैसी बात है कर्मा..
Me-kaisi बात तुझे बवासीर है क्या.. हेहेहे..
जग्गू- भेंचो मैं नहीं बता रहा यहाँ परेशां हूँ तुझे मज़ाक सूझ रहा है...
में- ाचा बता न बुरा मत मान बता क्या बात है.
जग्गू- यार बात कुछ ऐसी है कर्मा अगर फ़ैल गई तो हमारी बहुत बदनामी हो जाएगी...
Me-aisa क्या हो गया बे..
जग्गू- तू किसी को बताइयेगा तो नहीं न...
Me-bhencho तू चुटिया है क्या? इतना भरोसा नहीं है.. भोसड़ी के तेरा मेरा परिवार अलग है क्या?
Jaggu-baat वो नहीं भाई पर बात ऐसी है इसलिए बोल रहा था..
Me-wo सब छोड़ बात बता..
जग्गू- यार देख शक तो मुझे पहले भी था पर शादी में मुझे यकीन हो गया..
Me-kis बात पर...
जग्गू- यार भाभी को मैंने कई बार फ़ोन पर बात करते पाया पहले भी जब भी पूछता था तो भाभी बात ताल देती थी या बोलती थी अपने मायके बात कर रही थी... पर सामने कभी नहीं करती थी तुरंत फ़ोन काट देती थी... शादी में भी मैंने कई बार छुप छुप के मैंने दुख उन्हें बात करते हुए... तो एक बार जब वो किसी काम में लगी थी मैंने फ़ोन चुरा लिया और जिस नंबर से बात करती थी वो अपने फ़ोन में रख लिए... फ़ोन के साथ साथ कुछ मश्ग भी थे उसी नंबर के कब मिलोगी वगेरा वगेरा..
Me-ACHA किसका नंबर था वो तूने पता किआ?...
Jaggu-yaar वो भें का लोढ़ा है न मेरी पिछली गली वाला कल्लू उसका...
में- वो भें का लुंड कालिया.. उसकी इतनी हिम्मत, सेल की गांड पहाड़ दूंगा मैं.
जग्गू- भाई मरने को तो हम अभी जाकर पेल दें, पर लोग पूछेंगे क्यों मारा तो क्या बोलेंगे... भाभी की नाम आएगा और सबकी बदनामी हो जाएगी..
में- बात तो सही है तेरी...
Jaggu-yaar भाभी ने ये सही नहीं किआ..
में- देख जग्गू सही कहूं तो साडी गलती भाभी की भी नहीं है, हर औरत की शादी के बाद कुछ ख्वाहिशें और ज़रूरतें होती हैं जो उसके पति को पूरी करनी होती हैं पर भग्गू से उन्हें मिला क्या.. कुछ नहीं ऊपर से तै के तने...
Jaggu-main समझ रहा हूँ यार पर घर की इज़्ज़त का तो सोचा होता...
में- सच कहूं तो तेरा भाई लोदु है और उससे बड़ा लोदु तू है...
Jaggu-main कैसे?
में- तुझे नहीं दिखा घर में प्यासी भाभी है, तू hi मदद कर देता..
जग्गू- सेल क्या बोल रहा है भाभी है मेरी वो..
में- तभी तो तू लोदु है, मतलब वो भें का लोढ़ा केलिए तेरी भाभी को चोदे तो चलेगा पर तू नहीं छोड़ सकता क्योंकि वो तेरी भाभी है...
जग्गू- कर्मा ये नहीं हो सकता..
Me-kyun लुंड खड़ा नहीं होता तेरा?
जग्गू- वो बात नहीं है सेल..
में- तो क्या बात है चूतिये, ाचा एक बात बता तुझे प्रेमा भाभी कैसी लगती हैं?
Jaggu-achi लगती हैं, भाभी है मेरी अछि तो लगेगी hi..
में- लोदुचंद उनका बदन कैसा लगता है,
जग्गू - बदन भी ाचा लगता है बहुत सूंदर हैं भाभी...
में- तूने कभी उन्हें उस नज़र से देखा है..?
Jaggu-kis नज़र से.
में- अबे एक मर्द की नज़र से, मतलब सीधा सीधा बोलूं तो कभी तेरा मन किआ है उन्हें छोड़ने का?
जागहु- सेल हरामी पागल हो गया है क्या, घर तुड़वायेगा मेरा,
Me-drame मत कर और रही बात घर की तो अभी बड़ा जुड़ा हुआ है... अब जो पूछ रहा हु सच सच बात..
जग्गू- हाँ यार किआ है वो इतनी सूंदर हैं गदराई हुई हैं किसका मन नहीं करेगा,
में- ये hi तो लवडे तो अबतक कोशिश क्यों नहीं की...
जग्गू- पागल है घर में किसी को पता चल जाता तो, क्या होता, और वो तो सीधे मुँह मुझसे बात तक नहीं करती...
में- जो भी होता जो अभी हो रहा है वो तो नहीं होता, सेल तेरी भाभी की प्यास बुझ जाती और तुझे एक मस्त छूट मिल जाती घर पर hi... और क्या पता वो पेट से भी हो जाती उनकी ज़िन्दगी कितनी सुधर जाती... सबसे बड़ी बात घर की बात घर में रहती कोई बदनामी का दर नहीं...
मैंने देखा साला जग्गू भाभी की बात सुनकर hi पंत के ऊपर से लुंड को बार बार मसल रहा था, साला ऊपर से शरीफ बन कर दिखा रहा था...
में- सेल भाभी के नाम से तेरा लुंड खड़ा होने लगा और अभी तक शरीफ का लुंड बन रहा था...
जग्गू- वो बात नहीं भाई सच में मन तो कई बार करता है भाभी को... छोड़ने का,
Me-aur क्या क्या मन करता है तेरा खुल के बता,
जग्गू- बस यार बोल तो दिया और क्या?
में- सेल खुल के बता एक एक चीज़ तभी मैं कुछ कर पाउँगा.
Jaggu-wo मन करता है उनकी बड़ी बड़ी छूछीयों को मसल मसल कर पियून,
Me-aur?
जग्गू- उनके मस्त रसीले होंठों में अपना लुंड डालकर चुसवाउन, उनकी मस्त बड़ी सी गांड में लुंड घुसा के पटक पटक कर छोडूं..
Me-ye हुई न बात तो अब ये बता तू सच में ये सब करना चाहता है?
जग्गू- तुझसे क्या छुपा सकता हूँ मैं.. हाँ चाहता हूँ..
में- तो बस जो मैं कहूं वो करता जा और तेरे नीचे तेरी भाभी होगी...
जग्गू- वो सब तो ठीक है इस कल्लू का क्या करें?
में- देख कल्लू से निपटने से पहले हमें भाभी से बात करनी होगी...
Jaggu-pagal है क्या उनसे क्या बात करेंगे...
Me-beta ये hi तो बात है यहीं तुझे हिम्मत दिखानी होगी नहीं तो भाभी को छोड़ने का सपना भूलजा.
जग्गू- पर कैसे और क्या बात करेंगे..
Me-wo मैं सब समझा दूंगा.. तू बस मुझे उस वक़्त बुला लिओ जब ताऊ तै घर न हो... भाभी अकेली हो...
जग्गू- ऐसा तो दोपहर में होता है जब मुम्ममय पापा को खाना देने जाती है खेत पर...
Me-to ठीक है बता दियो मैं आ जाऊंगा...
Jaggu-theek है किसी तरह इस कल्लू से भाभी का पीछा छुड़ा..
में- हो जायेगा बीटा सब हो जायेगा चिंता मत कर बस काम पर lagja..bhabhi के थोड़ा करीब जाने की कोशिश कर उनसे बात कर..
Jaggu-thoda मुश्किल है पर करूँगा...
में- बस यही चाहिए...
जग्गू- चल घर जाता हूँ मैं और सही मौका देखकर तुझे बुलाता हूँ..
में- ठीक है और सुन एक काम और करना है तुझे..
Jaggu-kya...
मैंने उसे समझाया क्या करना है और घर भेज दिया... मैं क्या कैसे करना है ये सोचते हुए अपने बाघ के अंदर चलने को हुआ तो देखा सड़क पर कोई जाना पहचाना दिखा दूर से जिसे देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी...
मैंने दूर से आवाज़ लगाई तो उसने देखा और फिर ख़ुशी से मेरी तरफ आने लगी ये और कोई नहीं बल्कि मेरी प्यारी पल्ली थी अपने स्कूल से आ रही थी...
स्कूल ड्रेस में पल्ली इतनी मासूम और सुन्दर लग रही थी की इसे देखकर कोई कह hi नहीं सकता था की ये कभी चूड़ी भी नहीं होगी... पल्ली खेत के बीच से दौड़ती हुई मेरे पास आई और मेरे गले से लग गयी...
पल्ली- भैया इतने दिनों बाद याद आई तुन्हे मेरी...
Me-are याद तो रोज़ आती थी बस मैं आज आया हूँ...
और मैंने पल्ली को बाँहों में कास लिया और थोड़ा बाघ के अंदर ले आया ताकि सड़क से आने जाने वाले लोग न देख पाएं...
Palli-rahne दो भैया तुमने बिलकुल याद नहीं किआ मुझे...
ये कहकर पल्ली झूठे गुस्से में मेरे सीने पर मरने लगी... उधर जग्गू से भाभी की बात करके और अब पल्ली के गले लगने से मेरा लुंड खड़ा हो गया और पल्ली को चुभने लगा...
में- नहीं पागल ऐसा नहीं है मैं तो तुझसे कितना प्यार करता हूँ.....
पल्ली- हाँ भैया तुम्हारा प्यार मुझे दिख भी रहा है और मेरे पेट में चुभ भी रहा है...
Me-kya करूँ तू है hi इतनी सूंदर के तुझे देखकर ये अपने आप खड़ा हो जाता है...
पल्ली- ाचा तो ये मेरी वजह से है. .
में- हाँ तेरी वजह से है.. और तुझे इसे ठीक भी करना होगा... पर उससे पहले मेरा मुँह मीठा करवा...
और मैंने पल्ली के होंठों को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगा.. आह्ह्ह्हह उसके मुलायम होंठो का रास मेरे मुँह में घुलने लगा...
थोड़ी देर बाद मैंने उसके होंठों को छोड़ा...
पल्ली- मममम भैया यहाँ कोई देख लेगा.. और लेट भी हो रही हूँ घर पहुँचने का टाइम हो गया पापा पूछेंगे
Me-koi नहीं देखेगा मेरी जान और चाचा को मैं संभल लूंगा तू अभी मुझे संभल..
ये कहकर मैंने एक बार और उसके होंठों को चूसा... इसके बाद पल्ली खुद मेरे सामने नीचे बैठ गयी और मेरी पंत खोलने लगी अगले hi मिनट में उसने मेरा कड़क लुंड बहार निकल लिए और जीभ से सुपडे को चाटने लगी... मेरी तो आह्ह्ह्हह निकल गयी...
Me-aahhh बीटा ऐसे hi...
पल्ली- हम्म्म भैया ये तो और बड़ा लग रहा है...
में- तेरी याद में बड़ा हो गया पल्ली..
पर इसे क्या पता इसने वहां कितनी छूट और गांड का रास पिया है और सबसे खास तो अपनी माँ का भी...
पल्ली मेरी आँखों में देखते हुए लुंड को चाटने लगी.. और फिर मुँह में भर कर चूसने लगी... मैं पल्ली के मुँह का मज़ा लेने लगा पल्ली पहले से काफी ज़्यादा अचे से चूसने लगी थी शायद अनुज के साथ काफी प्रैक्टिस की थी उसने..
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था ऐसे खुले में लुंड चुसवाने में पेड़ों के बीच और लुंड चूसने वाली जब पल्ली जैसी कमसिन काली हो तो बात hi क्या है...
पल्ली बाघ में पेड़ों के बीच बैठकर मेरा लुंड चूस रही थी.. उसका सर आगे पीछे होता हुआ मेरे लुंड पर बहुत प्यारा लग रहा था

पल्ली के मुँह में मेरा लुंड और कड़क होता जा रहा था और मैं मज़े से आहें भर रहा था..
मैंने पल्ली के सर को पकड़ लिया और अब खुद अपनी कमर हिला हिला कर अपना लुंड उसके मुँह में अंदर बहार करने लगा.. पल्ली के मुँह से घुग्घु गग्गूऊ की आवाज़ निकलने लगी...
में- ले साली रंडी और अंदर तक ले तेरे मुँह में अगर तुझे तेरी माँ जैसी रंडी बनना है तो अंदर तक ले कर चूस...
और मैंने पल्ली को अपने लुंड पर दबा दिया कुछ पल ऐसे hi दबाये रखने के बाद छोड़ा तो उसकी आँखों में आंसू थे, मैंने पल्ली के मुँह से लुंड निकला और उसे पेड़ के सहारे खड़ा करके झुका दिया और उसकी स्कर्ट को कमर तक कर दिया..
और पंतय को पकड़कर नीचे खिसका दिया और उसके पीछे खड़ा होकर लुंड को उसकी गीली छूट पर लगाया और फिर एक झटका मार के अंदर सरका दिया....
Palli-ahhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa कीटनाआए badaaaaaaaaaa है तुम्हारायआ..
में- चुपपपपपप सलीई रनडीईईई पहली बार थोड़े hi ले रही है...
और ये कहकर एक और धक्का मारा और आधा लुंड पल्ली की कमसिन छूट में समां गया...
Palli-ahhhhhhhh पहलिई बार nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii है पर हर बार ये जान तो निकाल देता है न... इतना बड़ा मुसलललल दाल दिया meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot में...
मैं हलके हलके धक्कों से छोड़ने लगा... पल्ली की जवान छूट मरने का अलग hi मज़ा था... पल्ली पेड़ को पकड़े हुए हर झटके के साथ ाआहें भर रही थी...

धीरे धीरे करके मैंने पूरा लुंड उसकी छूट में घुसा दिया था और उसकी छूट ने भी मेरे लुंड के लिए अपने अंदर जगह बना दी थी...
पल्ली- aahhhhhhhhhhhhhhhh भैया bahuttttttttttttttt badaaaaaaaaaa है तुम्हारायआ.... अंदर तक भर देता हीी...
में- तेरी छूट भी तो bahuttttttttttttttt टाइट है पॉलीईई लुंडडडड को निचोड़ लेटीईई है...
मैं थप थप थप थप पल्ली को चोदे जा रहा था... पल्ली बेचारी पेड़ का सहारा लिए स्कूल की ड्रेस में झुककर अपनी छूट में मेरा लुंड ले रही थी...

मैं पल्ली के कंधे पकड़ कर सटासट धक्के मार रहा था मेरा लुंड पल्ली की छूट से पिस्टन की तरह अंदर बहार हो रहा था ..
पल्ली को छोड़ ते हुए मेरी नज़र उसकी गोल मटोल गांड पर गयी और फिर उसके गांड के छोटे से छेड़ पर मैं खुद को रोक नहीं पाया मैंने एक हाथ आगे लेजाकर अपना अंगूठा पल्ली के मुँह में दिया जिसे वो तुरंत चूसने लगी जैसे hi अंगूठा गीला हो गया मैंने बापिस निकल लिए और पीछे लेकर उसकी गांड के छोटे से छेड़ को कुरेदने लगा... और फिर अंगूठा उसकी गांड में घुसा दिया...
पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भैया... अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्ह
मैं तेज़ धक्को के साथ पल्ली को छोड़ रहा था साथ hi अंगूठा उसकी गांड में अंदर बहार कर रहा था.. जिससे पल्ली इस दोहरे हमले को सह नहीं पा रही थी और चिल्लाये जा रही थी...
Palli-ahhhhhhhh एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii चूड्डड्डूओ भैया मेंनननननन gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii...
पल्ली ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ने लगी मैंने उसके शरीर को कसकर पकड़ लिया नहीं तो वो गिर जाती... पर मैं लगातार उसे छोड़ता रहा..
और जब उसका झड़ना बंद हुआ तब तक मैं उसकी छूट मरता रहा और फिर अपना लुंड उसकी छूट से निकल लिए और अंगूठा गांड से...
पल्ली झुकी हुई अपनी साँसे ठीक कर रही थी वहीं मैंने झुककर उसकी गांड के छेड़ पर थूका और तुरंत एक हाथ से उसकी कमर पकड़ कर और एक हाथ से लुंड पकड़ कर उसकी गांड के छेड़ पर लगाया धक्का देकर कछह से उसकी गांड के कैसे हुए भूरे छेड़ में घुसेड़ दिया...

लुंड गांड में जाते hi हम दोनों के मुँह खुल गए, पल्ली की गांड कासी होनी की वजह से मेरा लुंड बहुत घिस कर जा रहा था.. और उसे दर्द भी हो रहा था मेरे अचानक लुंड घुसेड़ने से...
पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह माआआआआ मर gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr दालायआ aahhhhhhhhhhhhhhhh भैया...
मैंने हाथ से उसका मुँह दबा कर उसकी चीख बंद की...
में- बस मेरी बहाना हो गया घुस गया मेरा लुंड तेरी कासी हुई गांड में आह्ह्ह्हह्ह कितनी कासी हुई गाब्द है तेरी पल्ली...
Palli-ahhhhhh माआआआआ भैया ारायअम्म्मम्म्म्म सीईए नही कर आआआहहहहहहह सकते थे.... मेरी जान निकाल डीई...
में- पल्ली तेरी गांड देखकर रोक hi नहीं पाया खुद को.... आह्ह्ह्ह इतने दिनु बाद मिली हैईईई..
अब पल्ली का दर्द भी थोड़ा काम हुआ तो अपने चूतड़ हिलाकर मुझे इशारा किआ...
तो मैंने उसकी गांड में लुंड चलना शुरू किआ और कुछ hi देर में अछि गति पकड़ ली... और लम्बे लम्बे झटको से पल्ली की गांड मरने लगा...

पल्ली की गांड इतनी कासी हुई थी की लुंड निचुड़ता जा रहा था... और उसी वजह से मेरी गति अपने आप बढाती जा रही थी... कुछ hi देर में मेरे धमके तूफानी हो गए और आस पास थप थप थप थप थप की आवाज़ गूंजने लगी... मुझे मेरा रास मेरी गोलियों से लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा था... और कुछ 8-10 झटके बाद मैंने अपना लुंड जड़ तक पल्ली की गांड में गाड़ दिया और झड़ने लगा... एक के बाद एक धार से मैंने पल्ली की गांड को भर दिया और जब मेरे रास की एक एक बूँद पल्ली की गांड ने निचोड़ ली तो मैंने अपना लुंड उसकी गांड से बहार निकला.. तो मेरा रास बहकर उसकी गांड से बहार निकल कर उसकी जांघों पर बहने लगा... पल्ली ने जल्दी से अपनी पंतय ऊपर खिसकाई और घूम कर बैठ गयी मेरे लुंड को चाट कर साफ़ करने लगी जो अभी उसकी गांड से निकला था...
मुझे यही अदा तो पल्ली की पसंद थी, उसका लुंड के लिए प्यार चाहे वो गांड से निकला हो या छूट से... पल्ली ने चाट चाट कर पूरा लुंड साफ़ किआ और अचे से मेरे कच्चे में डालकर मेरी पंत बंद करके अंदर कर दिया और खुद कड़ी हुई ..
मुस्कुरा कर बोली- अव्हा भैया अब लेट हो रही हूँ घर जाती हूँ तुम घर आना माँ तुमहु याद करती है बहुत...
में- ठीक है आऊंगा मेरी प्यारी चची से मिलने...
इसके बाद पल्ली गले लगी मेरे और खिलखिलाते हुए भाग गयी...
मैंने भी सोचा क्या लड़की है ये... और मैं कितना खुशनसीब हूँ जो इसे जब चाहे छोड़ पता हूँ....
खैर इसी ख्याल के साथ मैं बापिस बाघ के अंदर चल दिया...
इसके आगे क्या हुआ जानिए ऊगली अपडेट में और प्लीज कमैंट्स ज़रूर करते रहिये तभी स्टोरी लिखने का मज़ा आता है.. बहुत बहुत शुक्रिया
अपडेट 79
तुबेल मेरे खेत पर hi लगा था ये खेत मेरे बाघ के सबसे दूर वाले छोर पर था, वहां एक झोपडी पड़ी हुई थी और वहीं हम दोस्त वगेरा मिलकर अपनी दोपहर गुज़रते थे और बकचोदी करते थे... और गर्मियों में तुबेल की हौदी में नहाकर गर्मी शांत करते थे...
मैं घर से निकल कर सीधा तुबेल पर पहुंचा तो देखा एक बाँदा हौदी के किनारे बैठा हुआ सोच रहा है मैं चुपचाप पीछे से गया और उसे झकझोर दिया तो वो चौंक गया...
वो- aaaahhhhhhhhhhhhh साले चूतिया डरा दिया मुझे...
Me-benchod दर खुद रहा है और चूतिया मुझे बोल रहा है...
(अरे मैं इससे मिलवाना तो भूल hi गया आपको तो ये है मेरा जिगरी और सबसे ाचा दोस्त जग्गू पूरा नाम तो जगत है पर सब जग्गू बुलाते हैं मेरे से कुछ महीने बड़ा है हर काम में मेरे साथ रहता है और हमारी वजह से हमारे परिवार भी काफी करीब हैं मेरा इसके घर खाना पीना सोना या इसका मेरे घर रोज़ की बात है.. मेरे साथ hi पढता था पर अब पढाई छोड़ दी है...
जग्गू का घर मेरे घर से दो गली छोड़कर है... इसलिए आना जाना लगा रहता है
इसके घर में 5 लोग हैं..
जग्गू के पापा राजपाल उम्र- 48 खेती करते हैं, अपने काम से काम रखने वाले बेहद सीधे साढ़े इंसान हैं, किसी भी तरह अपने परिवार को संभल के रखना चाहते हैं...
जग्गू की मम्मी- मंजू तै उम्र- 45
क्यूंकि जग्गू के पापा मेरे पापा से बड़े हैं तो उन्हें मैं ताऊ तै बुलाता हूँ.
एक दम गाओं की गंवार औरत हैं, भोली भली हैं, बदन भरा हुआ मांसल गदराया हुआ है, अपने बच्चों की चिंता में hi रहती हैं थोड़ी बातूनी हैं, इनके बारे में ये पूरा गाओं जनता है की इनके पेट में एक बात नहीं पचती... बाकि शरीर का नाप आप खुद देख लीजिये.

ये हैं मंजू तै.
राजपाल ताऊ के दो बेटे हैं बड़े बेटे का नाम है भगत जिसे सब भग्गू कहते हैं.. उम्र 25 साल ये पूरे घर की परेशानी का कारण है, घर में कलेश करना, दारू वगेरा पीना फिर पीकर घर में या बहार लड़ना, शादी हो चुकी है, घरवालों के लालः समझने के बाद भी नहीं सुधरता... पढ़ाई तो कभी की hi नहीं..
भग्गू की बीवी और जग्गू की भाभी- प्रेमा उम्र 23 साल, एक दम मस्त गदराया हुआ माल, 10वि तक पढ़ी hai...shadi को 5 साल हो गए हैं अब तक कोई बच्चा नहीं है इसी वजह से सास से बनती नहीं है, इसके भी कुछ अलग किस्से हैं जो बाद में पता चलेंगे... पर कुछ भी हो प्रेमा भाभी का बदन ऐसा है की लुंड खड़ा होकर पिचकारी छोड़ दे, कभी कभी तो समझ नहीं आता भग्गू का नसीब इतना कैसे खुल गया..
आप लोग भी देख लीजिये कुछ ऐसी हैं प्रेमा भाभी-

घर का सबसे छोटा सदस्य है जग्गू जिससे आप मिल hi चुके हैं तो ये था जग्गू का परिवार अब बापिस चलते हैं तुबेल पर)
जग्गू- सेल तू समझ नहीं रहा...
में- भेंचो मां की लड़की की शादी से आया है पूरा परिवार और खुशी होने की जगह गांड सी शकल बना राखी है तूने.. मुझे लगा अपने बाप से मिलकर तू खुश होगा थोड़ा..
जग्गू- हरामी सेल मज़ाक मत कर बोलै न..
में- ाचा बता न हुआ क्या क्यों गांड सा मुँह बना कर घूम रहा है...
जग्गू- यार भग्गू ने परेशां कर रखा है वहां पर भी दारू पीकर हंगामा कर दिया सेल ने ऊपर से मम्मी और भाभी की लड़ाई, पापा बेचारे और परेशां हैं..
में- भग्गू चूतियापा कर रहा था तो भाभी और तै की लड़ाई क्यों हो रही थी...
जग्गू - अरे वो hi यार मम्मी भाभी को सुनाने लगती है की मेरे लल्ला को संभल नहीं प् रही, न जाने कैसी औरत है और कुछ नहीं मिले तो एक hi बात के एक बच्चा नहीं दे पाई.. उधर भाभी भी काम नहीं है की अपने लड़के को देखो उससे कुछ होता नहीं है अगर और कहीं ब्याह होता मेरा तो खुसी से रह रही होती.. नसीब hi फूट गया मेरा तो...
में- बूटा मत मानिओ पर बोल तो तेरी भाभी सही रही है... भग्गू जैसे के लिए प्रेमा भाभी..
Jaggu-bhai पता है पर अब करूँ क्या?
में- अरे चिंता मत कर सेल भग्गू को सुधरते हैं हो जायेगा सब ठीक... एक काम करें?
Jaggu-kya?
में- भग्गू को नशा मुक्ति केंद्र में दाल दें?
जग्गू- डाला तो था पिछली बार याद नहीं क्या हुआ, वहां से भाग आया था और कितना कलेश किआ था घर आकर,
Me-phir कुछ और सोचते हैं..
Jaggu-aur सिर्फ भग्गू की hi परेशानी होती तो चल भी जाता,
में- और कोई भी परेशानी है क्या?
Jaggu-haan यार पर बड़ी वैसी बात है कर्मा..
Me-kaisi बात तुझे बवासीर है क्या.. हेहेहे..
जग्गू- भेंचो मैं नहीं बता रहा यहाँ परेशां हूँ तुझे मज़ाक सूझ रहा है...
में- ाचा बता न बुरा मत मान बता क्या बात है.
जग्गू- यार बात कुछ ऐसी है कर्मा अगर फ़ैल गई तो हमारी बहुत बदनामी हो जाएगी...
Me-aisa क्या हो गया बे..
जग्गू- तू किसी को बताइयेगा तो नहीं न...
Me-bhencho तू चुटिया है क्या? इतना भरोसा नहीं है.. भोसड़ी के तेरा मेरा परिवार अलग है क्या?
Jaggu-baat वो नहीं भाई पर बात ऐसी है इसलिए बोल रहा था..
Me-wo सब छोड़ बात बता..
जग्गू- यार देख शक तो मुझे पहले भी था पर शादी में मुझे यकीन हो गया..
Me-kis बात पर...
जग्गू- यार भाभी को मैंने कई बार फ़ोन पर बात करते पाया पहले भी जब भी पूछता था तो भाभी बात ताल देती थी या बोलती थी अपने मायके बात कर रही थी... पर सामने कभी नहीं करती थी तुरंत फ़ोन काट देती थी... शादी में भी मैंने कई बार छुप छुप के मैंने दुख उन्हें बात करते हुए... तो एक बार जब वो किसी काम में लगी थी मैंने फ़ोन चुरा लिया और जिस नंबर से बात करती थी वो अपने फ़ोन में रख लिए... फ़ोन के साथ साथ कुछ मश्ग भी थे उसी नंबर के कब मिलोगी वगेरा वगेरा..
Me-ACHA किसका नंबर था वो तूने पता किआ?...
Jaggu-yaar वो भें का लोढ़ा है न मेरी पिछली गली वाला कल्लू उसका...
में- वो भें का लुंड कालिया.. उसकी इतनी हिम्मत, सेल की गांड पहाड़ दूंगा मैं.
जग्गू- भाई मरने को तो हम अभी जाकर पेल दें, पर लोग पूछेंगे क्यों मारा तो क्या बोलेंगे... भाभी की नाम आएगा और सबकी बदनामी हो जाएगी..
में- बात तो सही है तेरी...
Jaggu-yaar भाभी ने ये सही नहीं किआ..
में- देख जग्गू सही कहूं तो साडी गलती भाभी की भी नहीं है, हर औरत की शादी के बाद कुछ ख्वाहिशें और ज़रूरतें होती हैं जो उसके पति को पूरी करनी होती हैं पर भग्गू से उन्हें मिला क्या.. कुछ नहीं ऊपर से तै के तने...
Jaggu-main समझ रहा हूँ यार पर घर की इज़्ज़त का तो सोचा होता...
में- सच कहूं तो तेरा भाई लोदु है और उससे बड़ा लोदु तू है...
Jaggu-main कैसे?
में- तुझे नहीं दिखा घर में प्यासी भाभी है, तू hi मदद कर देता..
जग्गू- सेल क्या बोल रहा है भाभी है मेरी वो..
में- तभी तो तू लोदु है, मतलब वो भें का लोढ़ा केलिए तेरी भाभी को चोदे तो चलेगा पर तू नहीं छोड़ सकता क्योंकि वो तेरी भाभी है...
जग्गू- कर्मा ये नहीं हो सकता..
Me-kyun लुंड खड़ा नहीं होता तेरा?
जग्गू- वो बात नहीं है सेल..
में- तो क्या बात है चूतिये, ाचा एक बात बता तुझे प्रेमा भाभी कैसी लगती हैं?
Jaggu-achi लगती हैं, भाभी है मेरी अछि तो लगेगी hi..
में- लोदुचंद उनका बदन कैसा लगता है,
जग्गू - बदन भी ाचा लगता है बहुत सूंदर हैं भाभी...
में- तूने कभी उन्हें उस नज़र से देखा है..?
Jaggu-kis नज़र से.
में- अबे एक मर्द की नज़र से, मतलब सीधा सीधा बोलूं तो कभी तेरा मन किआ है उन्हें छोड़ने का?
जागहु- सेल हरामी पागल हो गया है क्या, घर तुड़वायेगा मेरा,
Me-drame मत कर और रही बात घर की तो अभी बड़ा जुड़ा हुआ है... अब जो पूछ रहा हु सच सच बात..
जग्गू- हाँ यार किआ है वो इतनी सूंदर हैं गदराई हुई हैं किसका मन नहीं करेगा,
में- ये hi तो लवडे तो अबतक कोशिश क्यों नहीं की...
जग्गू- पागल है घर में किसी को पता चल जाता तो, क्या होता, और वो तो सीधे मुँह मुझसे बात तक नहीं करती...
में- जो भी होता जो अभी हो रहा है वो तो नहीं होता, सेल तेरी भाभी की प्यास बुझ जाती और तुझे एक मस्त छूट मिल जाती घर पर hi... और क्या पता वो पेट से भी हो जाती उनकी ज़िन्दगी कितनी सुधर जाती... सबसे बड़ी बात घर की बात घर में रहती कोई बदनामी का दर नहीं...
मैंने देखा साला जग्गू भाभी की बात सुनकर hi पंत के ऊपर से लुंड को बार बार मसल रहा था, साला ऊपर से शरीफ बन कर दिखा रहा था...
में- सेल भाभी के नाम से तेरा लुंड खड़ा होने लगा और अभी तक शरीफ का लुंड बन रहा था...
जग्गू- वो बात नहीं भाई सच में मन तो कई बार करता है भाभी को... छोड़ने का,
Me-aur क्या क्या मन करता है तेरा खुल के बता,
जग्गू- बस यार बोल तो दिया और क्या?
में- सेल खुल के बता एक एक चीज़ तभी मैं कुछ कर पाउँगा.
Jaggu-wo मन करता है उनकी बड़ी बड़ी छूछीयों को मसल मसल कर पियून,
Me-aur?
जग्गू- उनके मस्त रसीले होंठों में अपना लुंड डालकर चुसवाउन, उनकी मस्त बड़ी सी गांड में लुंड घुसा के पटक पटक कर छोडूं..
Me-ye हुई न बात तो अब ये बता तू सच में ये सब करना चाहता है?
जग्गू- तुझसे क्या छुपा सकता हूँ मैं.. हाँ चाहता हूँ..
में- तो बस जो मैं कहूं वो करता जा और तेरे नीचे तेरी भाभी होगी...
जग्गू- वो सब तो ठीक है इस कल्लू का क्या करें?
में- देख कल्लू से निपटने से पहले हमें भाभी से बात करनी होगी...
Jaggu-pagal है क्या उनसे क्या बात करेंगे...
Me-beta ये hi तो बात है यहीं तुझे हिम्मत दिखानी होगी नहीं तो भाभी को छोड़ने का सपना भूलजा.
जग्गू- पर कैसे और क्या बात करेंगे..
Me-wo मैं सब समझा दूंगा.. तू बस मुझे उस वक़्त बुला लिओ जब ताऊ तै घर न हो... भाभी अकेली हो...
जग्गू- ऐसा तो दोपहर में होता है जब मुम्ममय पापा को खाना देने जाती है खेत पर...
Me-to ठीक है बता दियो मैं आ जाऊंगा...
Jaggu-theek है किसी तरह इस कल्लू से भाभी का पीछा छुड़ा..
में- हो जायेगा बीटा सब हो जायेगा चिंता मत कर बस काम पर lagja..bhabhi के थोड़ा करीब जाने की कोशिश कर उनसे बात कर..
Jaggu-thoda मुश्किल है पर करूँगा...
में- बस यही चाहिए...
जग्गू- चल घर जाता हूँ मैं और सही मौका देखकर तुझे बुलाता हूँ..
में- ठीक है और सुन एक काम और करना है तुझे..
Jaggu-kya...
मैंने उसे समझाया क्या करना है और घर भेज दिया... मैं क्या कैसे करना है ये सोचते हुए अपने बाघ के अंदर चलने को हुआ तो देखा सड़क पर कोई जाना पहचाना दिखा दूर से जिसे देखकर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी...
मैंने दूर से आवाज़ लगाई तो उसने देखा और फिर ख़ुशी से मेरी तरफ आने लगी ये और कोई नहीं बल्कि मेरी प्यारी पल्ली थी अपने स्कूल से आ रही थी...
स्कूल ड्रेस में पल्ली इतनी मासूम और सुन्दर लग रही थी की इसे देखकर कोई कह hi नहीं सकता था की ये कभी चूड़ी भी नहीं होगी... पल्ली खेत के बीच से दौड़ती हुई मेरे पास आई और मेरे गले से लग गयी...
पल्ली- भैया इतने दिनों बाद याद आई तुन्हे मेरी...
Me-are याद तो रोज़ आती थी बस मैं आज आया हूँ...
और मैंने पल्ली को बाँहों में कास लिया और थोड़ा बाघ के अंदर ले आया ताकि सड़क से आने जाने वाले लोग न देख पाएं...
Palli-rahne दो भैया तुमने बिलकुल याद नहीं किआ मुझे...
ये कहकर पल्ली झूठे गुस्से में मेरे सीने पर मरने लगी... उधर जग्गू से भाभी की बात करके और अब पल्ली के गले लगने से मेरा लुंड खड़ा हो गया और पल्ली को चुभने लगा...
में- नहीं पागल ऐसा नहीं है मैं तो तुझसे कितना प्यार करता हूँ.....
पल्ली- हाँ भैया तुम्हारा प्यार मुझे दिख भी रहा है और मेरे पेट में चुभ भी रहा है...
Me-kya करूँ तू है hi इतनी सूंदर के तुझे देखकर ये अपने आप खड़ा हो जाता है...
पल्ली- ाचा तो ये मेरी वजह से है. .
में- हाँ तेरी वजह से है.. और तुझे इसे ठीक भी करना होगा... पर उससे पहले मेरा मुँह मीठा करवा...
और मैंने पल्ली के होंठों को अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगा.. आह्ह्ह्हह उसके मुलायम होंठो का रास मेरे मुँह में घुलने लगा...
थोड़ी देर बाद मैंने उसके होंठों को छोड़ा...
पल्ली- मममम भैया यहाँ कोई देख लेगा.. और लेट भी हो रही हूँ घर पहुँचने का टाइम हो गया पापा पूछेंगे
Me-koi नहीं देखेगा मेरी जान और चाचा को मैं संभल लूंगा तू अभी मुझे संभल..
ये कहकर मैंने एक बार और उसके होंठों को चूसा... इसके बाद पल्ली खुद मेरे सामने नीचे बैठ गयी और मेरी पंत खोलने लगी अगले hi मिनट में उसने मेरा कड़क लुंड बहार निकल लिए और जीभ से सुपडे को चाटने लगी... मेरी तो आह्ह्ह्हह निकल गयी...
Me-aahhh बीटा ऐसे hi...
पल्ली- हम्म्म भैया ये तो और बड़ा लग रहा है...
में- तेरी याद में बड़ा हो गया पल्ली..
पर इसे क्या पता इसने वहां कितनी छूट और गांड का रास पिया है और सबसे खास तो अपनी माँ का भी...
पल्ली मेरी आँखों में देखते हुए लुंड को चाटने लगी.. और फिर मुँह में भर कर चूसने लगी... मैं पल्ली के मुँह का मज़ा लेने लगा पल्ली पहले से काफी ज़्यादा अचे से चूसने लगी थी शायद अनुज के साथ काफी प्रैक्टिस की थी उसने..
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था ऐसे खुले में लुंड चुसवाने में पेड़ों के बीच और लुंड चूसने वाली जब पल्ली जैसी कमसिन काली हो तो बात hi क्या है...
पल्ली बाघ में पेड़ों के बीच बैठकर मेरा लुंड चूस रही थी.. उसका सर आगे पीछे होता हुआ मेरे लुंड पर बहुत प्यारा लग रहा था

पल्ली के मुँह में मेरा लुंड और कड़क होता जा रहा था और मैं मज़े से आहें भर रहा था..
मैंने पल्ली के सर को पकड़ लिया और अब खुद अपनी कमर हिला हिला कर अपना लुंड उसके मुँह में अंदर बहार करने लगा.. पल्ली के मुँह से घुग्घु गग्गूऊ की आवाज़ निकलने लगी...
में- ले साली रंडी और अंदर तक ले तेरे मुँह में अगर तुझे तेरी माँ जैसी रंडी बनना है तो अंदर तक ले कर चूस...
और मैंने पल्ली को अपने लुंड पर दबा दिया कुछ पल ऐसे hi दबाये रखने के बाद छोड़ा तो उसकी आँखों में आंसू थे, मैंने पल्ली के मुँह से लुंड निकला और उसे पेड़ के सहारे खड़ा करके झुका दिया और उसकी स्कर्ट को कमर तक कर दिया..
और पंतय को पकड़कर नीचे खिसका दिया और उसके पीछे खड़ा होकर लुंड को उसकी गीली छूट पर लगाया और फिर एक झटका मार के अंदर सरका दिया....
Palli-ahhhhhhhh bhaiyyyyyaaaaaaaaaaaaaa कीटनाआए badaaaaaaaaaa है तुम्हारायआ..
में- चुपपपपपप सलीई रनडीईईई पहली बार थोड़े hi ले रही है...
और ये कहकर एक और धक्का मारा और आधा लुंड पल्ली की कमसिन छूट में समां गया...
Palli-ahhhhhhhh पहलिई बार nahiiiiiiiiiiiiiiiiiiii है पर हर बार ये जान तो निकाल देता है न... इतना बड़ा मुसलललल दाल दिया meriiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii choooooooooot में...
मैं हलके हलके धक्कों से छोड़ने लगा... पल्ली की जवान छूट मरने का अलग hi मज़ा था... पल्ली पेड़ को पकड़े हुए हर झटके के साथ ाआहें भर रही थी...

धीरे धीरे करके मैंने पूरा लुंड उसकी छूट में घुसा दिया था और उसकी छूट ने भी मेरे लुंड के लिए अपने अंदर जगह बना दी थी...
पल्ली- aahhhhhhhhhhhhhhhh भैया bahuttttttttttttttt badaaaaaaaaaa है तुम्हारायआ.... अंदर तक भर देता हीी...
में- तेरी छूट भी तो bahuttttttttttttttt टाइट है पॉलीईई लुंडडडड को निचोड़ लेटीईई है...
मैं थप थप थप थप पल्ली को चोदे जा रहा था... पल्ली बेचारी पेड़ का सहारा लिए स्कूल की ड्रेस में झुककर अपनी छूट में मेरा लुंड ले रही थी...

मैं पल्ली के कंधे पकड़ कर सटासट धक्के मार रहा था मेरा लुंड पल्ली की छूट से पिस्टन की तरह अंदर बहार हो रहा था ..
पल्ली को छोड़ ते हुए मेरी नज़र उसकी गोल मटोल गांड पर गयी और फिर उसके गांड के छोटे से छेड़ पर मैं खुद को रोक नहीं पाया मैंने एक हाथ आगे लेजाकर अपना अंगूठा पल्ली के मुँह में दिया जिसे वो तुरंत चूसने लगी जैसे hi अंगूठा गीला हो गया मैंने बापिस निकल लिए और पीछे लेकर उसकी गांड के छोटे से छेड़ को कुरेदने लगा... और फिर अंगूठा उसकी गांड में घुसा दिया...
पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह uhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भैया... अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह अह्हह्ह्ह्ह
मैं तेज़ धक्को के साथ पल्ली को छोड़ रहा था साथ hi अंगूठा उसकी गांड में अंदर बहार कर रहा था.. जिससे पल्ली इस दोहरे हमले को सह नहीं पा रही थी और चिल्लाये जा रही थी...
Palli-ahhhhhhhh एससीईईई hiiiiiiiiiiiiiiiiiiii चूड्डड्डूओ भैया मेंनननननन gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii...
पल्ली ज़्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और झड़ने लगी मैंने उसके शरीर को कसकर पकड़ लिया नहीं तो वो गिर जाती... पर मैं लगातार उसे छोड़ता रहा..
और जब उसका झड़ना बंद हुआ तब तक मैं उसकी छूट मरता रहा और फिर अपना लुंड उसकी छूट से निकल लिए और अंगूठा गांड से...
पल्ली झुकी हुई अपनी साँसे ठीक कर रही थी वहीं मैंने झुककर उसकी गांड के छेड़ पर थूका और तुरंत एक हाथ से उसकी कमर पकड़ कर और एक हाथ से लुंड पकड़ कर उसकी गांड के छेड़ पर लगाया धक्का देकर कछह से उसकी गांड के कैसे हुए भूरे छेड़ में घुसेड़ दिया...

लुंड गांड में जाते hi हम दोनों के मुँह खुल गए, पल्ली की गांड कासी होनी की वजह से मेरा लुंड बहुत घिस कर जा रहा था.. और उसे दर्द भी हो रहा था मेरे अचानक लुंड घुसेड़ने से...
पल्ली- अह्हह्ह्ह्ह माआआआआ मर gayiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii reeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrr दालायआ aahhhhhhhhhhhhhhhh भैया...
मैंने हाथ से उसका मुँह दबा कर उसकी चीख बंद की...
में- बस मेरी बहाना हो गया घुस गया मेरा लुंड तेरी कासी हुई गांड में आह्ह्ह्हह्ह कितनी कासी हुई गाब्द है तेरी पल्ली...
Palli-ahhhhhh माआआआआ भैया ारायअम्म्मम्म्म्म सीईए नही कर आआआहहहहहहह सकते थे.... मेरी जान निकाल डीई...
में- पल्ली तेरी गांड देखकर रोक hi नहीं पाया खुद को.... आह्ह्ह्ह इतने दिनु बाद मिली हैईईई..
अब पल्ली का दर्द भी थोड़ा काम हुआ तो अपने चूतड़ हिलाकर मुझे इशारा किआ...
तो मैंने उसकी गांड में लुंड चलना शुरू किआ और कुछ hi देर में अछि गति पकड़ ली... और लम्बे लम्बे झटको से पल्ली की गांड मरने लगा...

पल्ली की गांड इतनी कासी हुई थी की लुंड निचुड़ता जा रहा था... और उसी वजह से मेरी गति अपने आप बढाती जा रही थी... कुछ hi देर में मेरे धमके तूफानी हो गए और आस पास थप थप थप थप थप की आवाज़ गूंजने लगी... मुझे मेरा रास मेरी गोलियों से लुंड में भरता हुआ महसूस हो रहा था... और कुछ 8-10 झटके बाद मैंने अपना लुंड जड़ तक पल्ली की गांड में गाड़ दिया और झड़ने लगा... एक के बाद एक धार से मैंने पल्ली की गांड को भर दिया और जब मेरे रास की एक एक बूँद पल्ली की गांड ने निचोड़ ली तो मैंने अपना लुंड उसकी गांड से बहार निकला.. तो मेरा रास बहकर उसकी गांड से बहार निकल कर उसकी जांघों पर बहने लगा... पल्ली ने जल्दी से अपनी पंतय ऊपर खिसकाई और घूम कर बैठ गयी मेरे लुंड को चाट कर साफ़ करने लगी जो अभी उसकी गांड से निकला था...
मुझे यही अदा तो पल्ली की पसंद थी, उसका लुंड के लिए प्यार चाहे वो गांड से निकला हो या छूट से... पल्ली ने चाट चाट कर पूरा लुंड साफ़ किआ और अचे से मेरे कच्चे में डालकर मेरी पंत बंद करके अंदर कर दिया और खुद कड़ी हुई ..
मुस्कुरा कर बोली- अव्हा भैया अब लेट हो रही हूँ घर जाती हूँ तुम घर आना माँ तुमहु याद करती है बहुत...
में- ठीक है आऊंगा मेरी प्यारी चची से मिलने...
इसके बाद पल्ली गले लगी मेरे और खिलखिलाते हुए भाग गयी...
मैंने भी सोचा क्या लड़की है ये... और मैं कितना खुशनसीब हूँ जो इसे जब चाहे छोड़ पता हूँ....
खैर इसी ख्याल के साथ मैं बापिस बाघ के अंदर चल दिया...
इसके आगे क्या हुआ जानिए ऊगली अपडेट में और प्लीज कमैंट्स ज़रूर करते रहिये तभी स्टोरी लिखने का मज़ा आता है.. बहुत बहुत शुक्रिया
























