Incest Katha Chodampur Ki - Page 18 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

दोस्तों अगली अपडेट पर काम चल रहा है पर जब तक मैं अगली अपडेट लिखूं आप लोग भी थोड़ा इंटरेस्टिंग सा काम कर लीजिये..

1. कर्मा की माँ सभ्य

2.बुआ

3. बड़ी बुआ

4.ममता चची

5.मंजू Tai(Jaggu की मम्मी)

6.प्रेमा भाभी.

आप लोग अपने अकॉर्डिंग इन चरक्टेर्स के लिए इंडियन आंटी और भाभी की पिक्स या gif अपलोड कीजिये.. चाहे वो एक्ट्रेस हो या ऐसे hi इंटरनेट पर मिली पिछ.. पर साथ में करैक्टर का नाम भी डालिये की आपके अकॉर्डिंग वो किस करैक्टर से रेसेम्ब्ले करती है...

प्लीज टेक part गाइस... बहुत बहुत शुक्रिया
 
इसी के साथ हमने अपने कपडे पहने और दोनों बहार निकल गए और गाओं में घूमने लगे...

अपडेट 109

थोड़ी. बहुत देर तक गाओं में घूमने के बाद और आज जो कुछ भी हुआ उसको पचने के बाद हम लोग अपने अपने घर की और चल दिए...

घर पहुंचा तो देखा सब लोग आंगन में थे और किसी गंभीर बात पर चर्चा हो रही थी. . मैं भी एक खत पर जाकर बैठ गया .

पापा- नहीं हो सकता क्या शैलेश?

मौसा- भाईसाब बड़ी मुश्किल से तो एक दिन माँगा है वो ज़मीन का बोलकर इससे आगे एक भी दिन की मंजूरी देने को तैयार नहीं हैं..

मौसी- तो छोड़ क्यों नहीं देते ऐसी नौकरी को... यहाँ खेती करके अपना पेट पाल लेंगे हम...

Mausa-are तुम भी न कैसी बात करती हो... नौकरी क्या छोड़ने के लिए पकड़ी थी...

Mausi-to मुझसे शादी क्या अकेला छोड़ने के लिए की थी?

माँ- अरे बस शालू हो गया इसमें उनकी क्या गलती है?

मौसी- तो जीजी तुम hi बताओ क्या करें... दो दिन में हमें उपाय के लिए निकलना है.. और ये उससे पहले hi जाने की कह रहे हैं...

मौसा- अरे तो तुम अकेली थोड़ी hi हो यहाँ भैया हैं भाभी हैं बच्चे हैं... और मैं कोई जानकार थोड़े hi जा रहा हूँ अब नौकरी है तो आज नहीं तो कल जाना hi था अब आर्डर आ गया तो जाना तो पड़ेगा hi..

मौसी- हाँ तुम्हे तो बस नौकरी की पड़ी है.. अब वहां जाना है उपाय के लिए कुछ ऊपर नीचे हुआ तो..

Maa-zyada मत सोचो शालू हम लोग हैं न और उन्हें क्यों परेशां करके भेजना छह रही है....

मौसा- जाना मैं भी नहीं चाहता पर ककम तो काम है न.. पर हाँ कोशिश यही रहेगी की जल्द से जल्द छुट्टी लेकर आऊं..

पापा- हाँ शालू उनकी भी मजबूरी है..

मौसी- मैं समझती हूँ जीजाजी पर मन नहीं मंटा..

माँ- अरे हम लोग हैं न मन भी मान जायेगा...

में- बाप्सी का आर्डर आ गया क्या मौसाजी.?

Mausa-haan बीटा परसो hi रिपोर्ट करने को बोलै है... तू अब सब का ख्याल रखिओ और वहां का भी तुझे hi देखना है ..

में- आप चिंता मत कीजिये मौसा जी... मौसी का और साडी चीज़ों का ध्यान मैं अचे से रखूँगा...

खैर इसी तरह बातचीत में खाना खाने का समय हो गया था तो माँ और मौसी ने मिलकर खाना बनाया सबने खाया पिया थोड़ी बहुत देर बातें हुईं... और फिर सब अपने अपने बिस्तर की और बढ़ लिए.....

खैर बिस्तर पर लेटकर मैंने मोबाइल निकला और मश्ग वगेरा देखने लगा तो एक जोके था जो विनीत ने भेजा हुआ था मैंने उसे जवाब दिया की सेल ये hi सब करता रहिओ न फ़ोन न मश्ग घुसा रहता है अपनी माँ की गांड में...

फिर इसके बाद जग्गू का मश्ग था- भाई कहीं हमने कुछ गलत या ज़्यादा तो नहीं कर दिया... जबसे घर आया हूँ भाभी बात तक नहीं कर रही... मुझे तो लगा था आज रात उनके साथ सोऊंगा पर यहाँ तो मामला hi अलग है..

में- उन्हें बस थोड़ा खोलने की ज़रुरत है.. अभी भी झिझक हैं उनको बस थोड़ा खोलने का तरीका ढूंढना होगा.

जग्गू- ढूंढ भाई मेरा तो सोच सोच कर बुरा हाल है...

में- आज रात उन्हें अकेला रहने दे कल देखते हैं...

Jaggu-theek है..

जागहु का मश्ग आया की तभी विनीत का मश्ग भी आ गया..

विनीत- आजा तू भी घुसजै मेरी माँ की गांड में तुझे तो बहुत पसंद है न...

(साथ में एक फोटो भी भेजी थी)





जिसे देखते hi मेरा लुंड तनतना गया...

फोटो में बुआ घोड़ी बानी हुई थी और उनका बड़ा सा पिछवाड़ा दिख रहा था जिसमे उनके दो पतीले जैसे चूतड़... पाव जैसी फूली हुई छूट और भूरा गांड का छेड़ सब देख रहा था... बुआ की गांड देखते hi मेरा लुंड फुंकारें मरने लगा....

मैंने विनीत के मश्ग का रिप्लाई किआ- भाई मज़े हैं तेरे... जलन हो रही है मुझे तुझसे...

विनीत- हेहेहे और जालौन तुझे...

Me-aur कैसे...

व्- रुक

और फिर एक मिनट बाद एक और मश्ग आया जिसमे एक छोटी सी वीडियो थी जिसे खोल कर देखा तो मेरे दिल की धड़कन बढ़ गयी .

दिल की क्या लुंड की भी बढ़ गयी अगर होती है तो...

वीडियो में एक के साथ एक तीन औरतें घोड़ी बानी हुई अपनी बड़ी बड़ी गांड दिखा रही थी... हाय क्या नज़ारा था मन कर रहा था की फ़ोन में घुस जॉन और तीनो गैंडों को बारी बारी से खूब छोडूं...





में- पूर्वी दीदी भी आ गयी हैं... सेल सही ऐश है तेरी...

व्- बड़ा कमीना है तू भाई.... चूतड़ देख कर पहचान गया... की पूर्वी दीदी हैं...

में- जिस गांड को एक बार मार लेता हूँ उसे कभी नहीं भूलता मैं...

व्- अबे आजा एक दो दिन के लिए मज़े करेंगे...

Me-aa जाता पर यहाँ भी ज़रूरी काम है मौसी मौसा भी आये हुए हैं...

व्- उनके साथ आजा...

में- नहीं यार उनका hi काम है कल फ़ोन पर बताऊंगा अचे से...

V-theek है कोई टेंसन तो नहीं?

में- नहीं रे कोई टेंसन नहीं... ाचा अभी वहां क्या हो रहा है एक वीडियो बना के भेह छोटा सा पर किसी को पता नहीं चलना चाहिए...

व्- ठीक है रुक.....

एक मिनट के इंतज़ार के बाद विनीत का मश्ग आया जिसमे एक वीडियो था..

वीडियो खोल के देखा तो मेरा लुंड जो अब तक फुंकारे मार रहा था वो लोहे का बन कर ऊपर की और तन गया और मुझे तुरंत अपना पजामा उतर के उसे बहार निकलना पड़ा...

वीडियो में एक तरफ बुआ एक करवट पर लेती थी और उनकी गांड में उनके जेठ जी यानि बड़े फूपाजी का लुंड अंदर बहार हो रहा था... बीच में विनीत की तै यानि बड़ी बुआ अपनी गांड में उंगलियां दाल कर लुंड के लिए तैयार कर रही थी और उनकी आवाज़ भी आ रही थी की

बड़ी बुआ- ायजा बच्चा विनीत दाल दे अपना गरम लोढ़ा अपनी तै की गांड में...

व्- आया तै जी...

और बड़ी बुआ के बगल में अपनी माँ की तरह hi पूर्वी दीदी भी एक तरफ करवट लेकर लेती थी और अपने पापा के लुंड से अपनी गांड मरवा रही थी.





इसके बाद वीडियो ख़तम हो गया... कुछ देर तक तो मैं वीडियो देखकर मुठियाता रहा पर फिर बंद करके फ़ोन साइड में रख दिया और सोचने लगा की कितने खुश हैं सब वहां और कुछ Hi टाइम में कितने खुल गए हैं एक दुसरे से...

तभी अचानक से मेरे दिमाग में एक बात आई...

और मैंने जल्दी से फ़ोन उठाया और दो तीन मश्ग किये... और रिप्लाई आने का इंतज़ार करने लगा...

और फिर साडी बात करके फ़ोन रख दिया... लुंड खड़ा था तो उसका जुगाड़ ढूँढा था अभी सोचा देखता हूँ क्या पता माँ के साथ कुछ हो सके तो कमरे से निकल कर चुपचाप उनके कमरे की तरफ गया तो दरवाज़े के बहार कान लगाकर सुना ठप्प्प ठप्प्प और माँ की आह्हः अह्ह्ह्ह की आवाज़ आ रही थी... मतलब माँ पापा की चुदाई चल रही थी तो कुछ नहीं हो सकता था... बापिस अपने कमरे की तरफ आते हुए न जाने क्यों. मौसा मौसी के कमरे की आवाज़ भी सुनने की कोशिश की तो वहां भी यही माहौल था और हो भी क्यों न मौसा को जाना था जल्दी hi...

खैर किस्मत में अभी कुछ नहीं था तो कमरे में आकर चुपचाप लेट गया और सोने लगा... थोड़ी देर बाद नींद भी आ गयी और सो गया...

सुबह मौसी के जगाने पर उठा वो हाथ में चाय लिए कड़ी थी और मुझे उठाने की कोशिश कर रही थी...

मौसी- कर्मा बीटा उठ जा अब कितना सोयेगा ले चाय पि...

में- क्या टाइम हो गया मौसी

मैंने अंगड़ाई लेते हुए पुछा..

मौसी- सात बज गए hain...jeeja को पता चला तो चिल्लाने लगेंगे अभी... की रात को देर तक जागता है..

में- हाँ मौसी लाओ चाय दो चलो आँगन में बैठ कर hi पि लेता हूँ...

Mausi-haan चल..

फिर मैं और मौसी बहार आँगन में आये और बैठ कर चाय पीने lage...sab लोग बहार hi the...chai नाश्ता चल रहा था...

फिर वहीं मौसा और पापा आज मौसा के गाओं जाने वाले थे ज़मीन के काम के लिए तो उसी बारे में बात चल रही थी.. चाय वे पि कर मैं बाघ की और निकल गया... भैंसो और गाय को खाना डाला उनका गोबर साफ किआ और भी बाकि सरे काम निपटाए...... घर आया तो 10 बज चुके थे पापा और मौसा जा चुके थे..

माँ ने खाना दिया तो माँ और मौसी के साथ बैठकर खाना खाया...

फिर माँ खाने के बाद बर्तन रखने रसोई में गयी मौसी अब भी खा रही थी मैं हाथ धोने के लिए रसोई में गया... माँ गंदे बर्तनो को धोने के लिए रख रही थी मैंने माँ को अकेला पाकर पकड़ लिए और घुमा कर खुद से चिपका लिए...

माँ- कर्मा क्या कर रहा है छोड़ अभी शालू या अनुज आ जायेंगे घर पर hi हैं..

मैंने जवाब में माँ के होंठों को अपने होंठों के बीच दबा लिए और चूसने लगा... माँ थोड़ा झटपटई पर फिर साथ देने लगी..

उनकी जीभ और होंठों को चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था... और अपनी माँ के होंठों को चूसने में तो अलग hi मज़ा साथ hi पकडे जाने का दर हो तो ये मज़ा अपने आप बढ़ जाता है..

मैं माँ के होंठों को चूसते हुए उनकी कमर और पेट को मसलने लगा... कुछ पल बाद जब हमारे होंठ अलग हुए तो मैं थोड़ा नीचे बढ़ा और माँ की गर्दन और छाती को चाटने लगा माँ अब मुझे नहीं रोक रही थी...





मैंने माँ के गर्दन और छाती को चूमते हुए अपने हाथ उनकी कमर से नीचे सरका कर उनके भरे भरे चूतड़ों पर ले गया हाय अपनी माँ के भरे हुए चूतड़ों को मसलने का अलग hi मज़ा है...

माँ के दोनों पतीले जैसे चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से hi हाथ में भरकर मैं मसलने लगा... मेरा लुंड कड़क होकर माँ की छूट और निचले पेट के हिस्से पर ठोकर मार रहा था.. जिससे माँ भी उत्तेजित होती जा रही थी... उनकी साँसे तेज़ चलने लगी थी और माँ के हाथ मेरी पीठ पर चलने लगे थे...

माँ कभी मेरे गाल को चूमती तो कभी कान पर हलके से काट कर अपनी उत्तेजना दिखा रही थी...





माँ और मैं एक दुसरे की बाहों में उलझे हुए एक दुसरे के बदन से अपनी ओएस बुझाने की पूरी कोशिश कर रहे थे की तभी बहार से मौसी की आवाज़ आई- जीजी कहाँ हो?

और मैं और माँ झट से अलग हो गए....

और माँ तुरंत भाग गयी बहार ... मैंने भी किसी तरह से खड़े लुंड को पाजामे में नीचे की तरफ एडजस्ट किआ और फिर रसोई से बहार निकल गया....

खाना पीना खा hi लिए था अब ऐसा कुछ काम नज़र आ नहीं रहा था... तो अब जो रात को प्लान बनाया था उसको पूरा करने का टाइम आ गया था...

मैंने फ़ोन निकला और फ़ोन किआ- hello... क्या खबर है जैसा चाहिए था हुआ?

उधर से कुछ जवाब आया..

में- बहुत बढ़िया फिर आधे घंटे बाद आता हूँ मैं..

ये कहकर मैंने फ़ोन रख दिया...

आधे घंटे बाद मैं और अनुज एक दरवाजे के बहार खड़े थे... और कुछ पल बाद hi वो दरवाज़ा खुला और सामने........ संतरो जैसी छूछीयो वाली... बलखाती कमर और कासी हुई मगर अकार लेती गांड वाली.... .......

पल्ली थी... पल्ली ने दरवाजा खोला और हमें अंदर आने दिया... और दरवाज़ा बंद कर दिया जिसके बंद होते hi अनुज पल्ली पर टूट पड़ा.. और उसके होंठों को चूसने लगा... और पल्ली तो पीछे रहने वालों में से थी नहीं तो वो भी उसका पूरा साथ दे रही थी...

उनकी इस बेताबी पर मुझे हंसी आ गयी पर मैं आगे बढ़ता हुआ ममता चची के कमरे में गया तो देखा चची बिस्तर पर बैठी हुई साड़ी में फॉल लगा रही थी...

मुझे देखते hi मुस्कुरा कर बोली- अरे आ गया हमर बच्चा आ जा बैठ...

मैं आगे बढ़ कर बिस्तर पर hi लेट गया ... चची ने अपनी फॉल और साड़ी उठा कर साइड रख दी और मेरे सर पर हाथ फिरने लगी...

मैंने देखा चची मेरे सर पर हाथ फिरते हुए कुछ सोच रही थी...

Me-kya हुआ चची क्या सोच रही हो...

म चची- वही बीटा जो हम सब करने वाले हैं... मुझे दर लग रहा है..

में- डरो मत चची, कुछ गलत नहीं होगा...

म चची- तूने सोच लिए है न क्यूंकि तुझे भी पता है न की अगर कुछ भी गलत हुआ तो क्या अनर्थ हो जायेगा...

में- जनता हूँ चची और सब सोचा hi है... मुझे विश्वास है कुछ गलत नहीं होगा..

म चची- फिर भी मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है...

में- मेरी प्यारी चची अगर तुम्हे अजीब लग रहा है तो नहीं करते हैं तुम परेशां मत हो..

चची कुछ बोलने hi वाली थी की कमरे में अनुज और पल्ली आ गए... और किस अंदाज़ में आये थे...

पल्ली की स्कर्ट उसकी कमर के ऊपर थी कमर के पीछे अनुज था जिसकी पंत घुटनो में थी और अनुज का लुंड पल्ली की छूट में अंदर बहार हो रहा था.... कपडे किसी के भी पूरे उतरे नहीं थे बस इतने खुले थे की लुब्द छूट में घुस सके...

म चची- अरे ढैय्या इनसे तो ज़रा भी सबर नहीं होता दोनों बेसब्री हैं पूरे...

चची की बात सुनकर अनुज और पल्ली मुस्कुराये पर तब तक अनुज ने पल्ली को बिस्तर के बगल वाली दीवार से चिपका दिया और सटासट छोड़ने लगा...





म चची- क्या करें चची लुंड और छूट की तड़प hi ऐसी है...

उन दोनों की चुदाई देखकर मेरा लुंड भी तन gaya...to मैंने उसे मसलते हुए चची से कहा..

म Chachi-par बाकि सब भी देखा जाता है कहीं कोई गड़बड़ हो गयी तो...

में- कोई नहीं चची मन कर देता हूँ हम नहीं करते हैं...

म चची- मैं मन नहीं कर रही बस दर लग रहा है..

चची ने ये बोलते हुए अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरा पजामा नीचे खिसका कर मेरा लुंड बहार निकल लिए और उसपर हाथ फिरने लगी...

म चची- ाचा तुम दोनों का ख्याल है इस बारे में... हमें आगे बढ़ना चाहिए या नहीं..

चची ने पल्ली और अनुज से पुछा...

Anuj-hmmm अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह चची मुझे तो लगता है की हमें बढ़ना चाहिए...

पल्ली- ुह्ह्ह्हह्ह ुह्ह्हह्ह हांण मुम्ममय मुझे भी यही सही लग रहा है कर्मठ भैया ने कुछ सोच समझ कर hi बोलै होगा...

पल्ली और अनुज अब काफी तेज़ और ज़ोरदार चुदाई की और बढ़ गए थे अनुज जहाँ पूरा नंगा हो चूका था वहीं पल्ली के बदन पर बस उसकी टीशर्ट थी नीचे से वो पूरी नंगी थी...





दोनों की चुदाई देखकर मैं और ममता चची उत्तेजित होते जा रहे थे वहीं उनका जवाब सुनकर चची ने कुछ सोचा और फिर अपना सर आगे लेजाकर मेरे लुंड के ऊपर लेकर अपनी जीभ निकली और धीरे से मेरे टोपे पर चलने लगी...

मेरे मुँह से एक राहत भरी आअह्ह्ह्हह निकल गयी...

वहीं चची अब मेरे पूरे टोपे पर जीभ फिरते हुए मेरे ांडो को टटोल रही थी...

मैंने अपने हाथ थोड़ा आगे बढ़ाये और चची की छूछीयो पर ब्लाउज के ऊपर से hi रख दिए... और मसलने लगा..

चची अपना मुँह खोलके ज़्यादा से ज़्यादा लुंड मुँह में लेकर चूस रही थी... और फिर उन्होंने लुंड बहार निकला गहरी सांस ली और फिर लुंड को बापिस मुँह में भर कर गले तक भर लिए.... मेरा पूरा लुंड चाची के मुँह के अंदर था...

पल्ली ने भी अपनी चुदाई से ध्यान हटा कर अपनी मम्मी के कौशल को देखा और मन hi मन सीख भी ली...





चची ने लुंड को गले तक भर के रखा और नज़र उठा कर मेरी नज़रों से नज़र मिले...

अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह वैसे किसी औरत के मुँह में तुम्हारा पुण्ड घुसा हुआ हो और फिर वो तुमसे नज़र मिला कर देखे तो अपग hi नज़ारा होता है वैसा hi अभी मुझे देखने को मिल रहा था...

चची मेरी तरफ देखती रही और कुछ पल और लुंड को गले तक रखा और फिर अपना चेहरा बापिस खींच कर लुंड को मुँह से निकल दिया.. हुए तेज़ तेज़ हांफने लगी...

और कुछ पल बाद हांफते हुए बोली...:-

हांण हनननन कर्मा बच्चा माना मत कर जो होगा देखा जायेगा... जैसा तूने बोलै है वो hi करेंगे...

चची की बात सुनकर मैं खुस हो गया और ख़ुशी में अपना लुंड एक बार फिर से चची के मुँह में जड़ तक एक बार लुंड और घुसेड़ दिया और कुछ पल तक घुसाए रखा और फिर निकल लिए.... उसके बाद मैं जल्दी से उठा और अपने कपडे उतरने लगा.. मुझे देखकर चची भी अपनी साड़ी खोलने लगी... अपने कपडे पूरे उतरने के बाद... मैंने चची को नंगा किआ ...

जब तक हम कपडे उतर रहे थे तब तक अनुज और पल्ली की चुदाई दीवार की जगह बिस्तर पर आ गयी थी और अनुज बिस्तर पर लेता था पल्ली उसके ऊपर चढ़ कर उसका लुंड अपनी गरम छूट में भर के उछाल रही थी...

चची और मैं नंगे होने के बाद बापिस बिस्तर पर चढ़ गए और मैं भी अनुज की तरह नीचे लेट गया और चची को अपने ऊपर खींच लिए और उल्टा घुमा दिया जिससे उनका चेहरा मेरे पैरों की तरफ हो गया वहीं चची के चूतड़ों को पकड़ कर मैंने अपने चेह्रर के ऊपर रख दिया और उनकी गरम रसीली छूट और भूरा गांड का कैसा हुआ छेड़ चाटने लगा वहीं चचो ने आगे झुककर मेरे लुंड को थम लिए और मुँह में भर लिए... अब मैं और चची 69 के आसान में थे.... और एक दुसरे को अपने मुँह से सुख दे रहे थे...

जहाँ मैं माँ की छूट चाट रहा था वोजिन बगल में बेटी अनुज से चुदाई करवा रही थी ...





हम दोनों भाई माँ बेटी दोनों के साथ अलग अलग तरह से मगन थे...

वहीं दोनों माँ बेटी भी साथ देने मैं कोई कसार नहीं छोड़ रही थी....

हम चारो hi मस्ती में मगन थे की अचानक से दरवाज़े पर खटखटाने की आवाज़ आई... और हम चारो hi जैसे थे वैसे रुक गए...

तो कौन था दरवाज़े पर और क्या है कर्मा का प्लान जिसके लिए अब चची भी मान गयी हैं....

ये सब अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया...
 
वहीं दोनों माँ बेटी भी साथ देने मैं कोई कसार नहीं छोड़ रही थी....

हम चारो hi मस्ती में मगन थे की अचानक से दरवाज़े पर खटखटाने की आवाज़ आई... और हम चारो hi जैसे थे वैसे रुक गए...

अपडेट 110

चची जल्दी से मेरे ऊपर से उठी वहीं पल्ली और अनुज भी अलग हो गए..

म चची- पल्ली जल्दी से मैक्सी दाल और दरवाज़ा खोल तब तक हम सब कपडे पहन लेते हैं... और सुन अंदर आने से पहले आवाज़ लगा डीओ...

पल्ली- ठीक है मम्मी..

पल्ली ने मैक्सी पहनते हुए कहा हालाँकि अधूरी चुदाई का दुःख उसके चेहरे पर साफ़ दिख रहा था ..

मैंने और अनुज ने जल्दी जल्दी से अपने कपडे पहने वहीं चची ने दोबारा से अपने कपडे पहने पर बिना ब्रा और पेटीकोट के... सिर्फ साड़ी और ब्लाउज पहना तभी पल्ली की आवाज़ आई मम्मी..

म चची- हाँ बीटा आजा अंदर..

कुछ पल बाद पल्ली अंदर घुसी और उसके साथ दो साये और थे जिसमे एक औरत का था और एक मर्द का...

वो दोनों साये और कोई नहीं बल्कि जग्गू और प्रेमा भाभी थे...

जिन्हे चची पल्ली ने एक खत बिछाकर बैठाया... भाभी मुझे और अनुज को देखकर थोड़ी हैरान थी... वहीं जग्गू भी थोड़ा असमंजस में था..

प भाभी- चची तुमने तो बोलै था की सिलाई सीखनी है पल्ली को तो जग्गू भैया को साथ क्यों बुलाया...

म चची- अरे तू पहले आराम से बैठ बहु...

भाभी और जग्गू एक खाट पर बैठे थे और मैं चची और अनुज एक पर पल्ली पानी लेने गयी थी और फिर खत के बगल में तक लगा कर कड़ी हो गयी

म Chachi-are पल्ली चाय भी रख लेती...

प भाभी- नहीं नहीं चची चाय क्या तुम तो मेहमान बना कर छोड़ोगी... ाचा पल्ली मशीन कहाँ है निकल ले...

म चची- अरे बहुरिया मशीन तो निकलती रहेगी इतने दिनों बाद मिली है तो थोड़ा हालचाल hi ले ले गप्पें लड़ाई जाएं...

प Bhabhi-are चची तो ये तीनो भी हम औरतों के साथ गप्पें लड़ाएंगे..

Me-kyun नहीं लड़ा सकते...

प भाभी- औरतों के बीच में मर्दों का क्या काम...

में- औरतों के साथ hi मर्दों का काम होता है क्यों चची...

म Chachi-are तुम लोग तो बहस करने लगे... अरे बहुरिया रहने दे इन बछुओ को भी यही का पता कुछ सीख लें अपने ब्याह के लिए...

चची की बात पर भाभी और पल्ली हंसने लगी वहीं हम सब शर्म से मुस्कुरा रहे थे... सबसे ज़्यादा असमंजस में जग्गू था क्यूंकि चची के ये बोलते hi वो जाने को उठने लगा वो तो मैंने उसे आँख से इशारा करके बैठने का इशारा किया... और वो बैठ गया...

प Bhabhi-to बताओ चची कैसा चल रहा है सब...

म Chachi-are बहुरिया क्या बताएं वही रोज़ की बातें उठो घर का काम करो करते करते शाम हो जाती है फिर पद के सो जाओ... चक्की के पैट की तरह घुमते रहो...

प Bhabhi-bilkul सही कहा चची रोज़ का एक hi काम है बस उसे hi कर कर के ऊब जाते हैं...

म Chachi-tabhi तो सोचा तुझे बुलाके थोड़ा मन लग जायेगा.. वैसे तो आना होता नहीं सिलाई का hi बहाना सही...

प Bhabhi-are चची तुम्हे बुलाने के लिए बहाने की जरुरत नहीं बस आदेश दो...

म Chachi-are बहुरिया ये तो तेरा बड़प्पन है पर मैं भी जानती हूँ की कितना काम होता है कीर्त्ति भर समय निकलना मुश्किल है...

प Bhabhi-aur क्या चची हम औरतें तो बस इसी में रह जाती हैं ये मर्द लोग जब चाहा जहाँ चाहा घूम लिए...

भाभी हमारी तरफ देखते हुए बोली..

में- भाभी ऐसा नहीं है परेशानी मर्दो को भी बहुत होती है...

Palli-kitni भी होती है औरतों से ज़्यादा नहीं सहना पड़ता होगा..

मैं और सब हैरान रह गए की अभी तक उछाल उछाल कर चुद रही थी पल्ली अब औरतों के लिए बोलने लगी सही बात है की त्रिया चरित्र को समझना बहुत मुश्किल काम है...

प Bhabhi-aur क्या...

अनुज- तुम्हे कैसे पता की मर्दों की जिंदगी आसान होती है.. बहुत मुश्किल होती है..

मज़ाक मज़ाक में बात औरतों और मर्दों की कभी न ख़त्म होने वाली बहस पर पहुंच गयी थी...

म Chachi-are बस किसकी आसान किसकी मुश्किल के चक्कर में समय बर्बाद मत करो... थोड़ा मन लगे इसलिए तुम्हे बुलाया है और तुम लोग फिर से वही सब लेकर बैठ गए...

प भाभी- कह तो सही रही हो चची अब समय मिला है तो उसे क्यों बेकार की बातों पर बर्बाद करें पर इन लोगों को भी पता होना चाहिए न की औरतों का जीवन कितना कठिन होता है...

म चची- वो सब पता लग जायेगा अभी बताओ कुछ खाओगे तुम सब...

प भाभी- अरे चची अभी तो बोल रही थी काम से ऊब गयी हो और अब फिरसे काम करने को कह रही हो आराम से बैठो यहीं सब...

में- अरे अगर कुछ खाना hi है तो लाला की दुकान से ले आऊं कुछ..

म Chachi-kya लाओगे?

में- भाभी बोलो?

प भाभी- तुम सब जो खाओगे वहीं खा लुंगी...

पल्ली- समोसे और ठंडा हो जाये तो मज़ा आ जाये...

प Bhabhi-are हाँ ये ठीक रहेगा...

म चची- तो ये hi माँगा लो या किसी की कोई और फरमाइश है?

में- मेरी तो नहीं..

Jaggu-main भी ये hi खा लूंगा...

अनुज- तो लेकर आऊं मैं??

म चची- हाँ बचुआ जा भाग जा तनिक सा...

में- ले पैसे ले जा...

Anuj-hain मेरे पास...

पल्ली- ओह्हो बड़े लोग....

ये कहकर पल्ली अनुज को चिढ़ाने लगी जिससे सब हंसाने लगे वहीं अनुज मुँह बनता हुआ निकल गया...

पल्ली- ाचा खाने का तो हो गया अब ये बताओ न की करेंगे क्या?

प भाभी- हाँ सोचो ये की करना क्या है...

भाभी भी घर से थोड़ा ख़ुशी जे माहौल में अलग और अच्छा महसूस कर रही थी तो खुल कर हिस्सा ले रही थी...

में- कोई खेल खेलते हैं?

प भाभी- कौनसा?

में- ये सोचना पड़ेगा...

पल्ली- लूडो खेलें?

प Bhabhi-par उसमे 4 hi लोग खेल पाएंगे और हम तो अनुज को मिलकर 6 हैं...

म Chachi-are हमें नहीं आता ये लूडो फुदो... पता नहीं मुआ कैसा खेल है..

प भाभी- हाँ लूडो नहीं कुछ और सोचो..

में- खो खो.

म Chachi-hatt बेशर्म अब इस उम्र में खो खो खेलने हम...

प Bhabhi-are चची क्या हुआ तुम्हारी उम्र को...

म Chachi-are बहुरिया बचपन में पूरे दिन खेला करते थे कभी पेड़ पर चढ़े तो कभी नदी में तैर रहे पर अब ये नहीं होता खेलने की उम्र अब तुम बच्चन की है...

Me-aisa नहीं है चची सबकी उम्र खेलने की होती है... और अभी तुम्हारी उम्र hi क्या है भाभी से दो चार साल छोटी hi होगी...

सब हंसने लगे...

म Chachi-hattt नालायक मजाक बनता है हमारा...

Jaggu-ye तो बताओ खेलना क्या है...

में- अरे ये बोलता भी है.... बधाई हो...

सब तेज़ी से हंसने लगे वहीं जग्गू शर्माने लगा...

Palli-haan जग्गू भैया तबसे चुप चाप बैठे थे...

म Chachi-are मजाक मत बनाओ बेचारे का थोड़ा शरमीवा है...

प Bhabhi-are चची इतने शर्मीले हैं की अभी ब्याह करवादो तो 9 महीने में छोटा जग्गू हाथ में दे दें....

ये मारा भाभी ने चौका... और सब खिल खिलाकर कलहंसने लगे वहीं जग्गू मुँह नीचे किये शर्मा रहा था..

जग्गू- बचना भाभी कहीं ब्याह होने से पहले न हो जाये छोटा जग्गू...

म Chachi-hey ढैय्या कैसे बेशरम हो तुम सब...

प Bhabhi-kyun चची ये शर्मीले लग रहे थे तुम्हे...

Palli-acha अब कोई ये भी बताएगा की खेलना क्या है...

Me-kuch समझ hi नहीं आ रहा...

Palli-amtakshari खेलें...

प Bhabhi-antaakshari?

पल्ली- हाँ भाभी उस दिन कर्मा भैया जे यहाँ मौसा मौसी ताऊ तै मम्मी पापा सबने मिलकर खेली थी कितना मजा आया था न.. हैं न मम्मी...

प भाभी- अंताक्षरी लोग शुरू तो ठरक से करते हैं पर बाद में ऐसे hi मजे में ले लेते हैं..

Palli-nahi भाभी जो नहीं गए पायेगा उसे सजा मिलती है... नाचना पड़ता है...

प भाभी- नाचना... ये सही है जो न गए वो नाचे...

जग्गू- पर वो सिर्फ 6 बार के लिए hi होगी न एक एक बार सब नाच लिए फिर सब बेकार बार बार थोड़े hi नाचते रहेंगे...

म Chachi-are बात तो सही है उसके बाद क्या करेंगे...

में- इसका उपाय है मेरे पास और सिर्फ नाचना hi क्यों... पल्ली एक काम कर कॉपी और पेन निकल और साथ में 3 कटोरी भी ले आए...

म Chachi-are ये सब किसलिए...

में- आज कुछ नए तरीके की अंताक्षरी हो जाये... पुराने तरीके से तो बहुत बार खेल ली..

प Bhabhi-naye तरीके से वो कैसे..

में- सब समझाऊंगा पहले सब को आनेदो तो एक बार में hi समझ जायेंगे तब तक ये पर्चियां फाड़ो तुम बर्बर नाप की...

प Bhabhi-theek है कुछ मज़ेदार लग रहा है...

पल्ली- हाँ मजा आये तो बढ़िया है..

और फिर सब पर्चियां फाड़ने लगे... इतने में अनुज भी समोसे और ठंडा लेकर आ गया...

तो फिर सबने फैसला किआ की पहले खा पि लिया जाये खेल तो न जाने कब तक चले...

तो सबने मस्त समोसे और ठन्डे का मज़ा लिए... और फिर सब खा पि के खेलने को तैयार हो गए...

Palli-ab बताओ भी भैया कैसे खेलना है...

में पहले ये खत हटाओ और नीचे बैठते हैं...

प Bhabhi-haan नीचे ठीक रहेगा खेलने में...

तो जग्गू और अनुज ने खत कड़ी की और साइड में रख दी और जगह बनाई मैं रसोई में जाकर एक बोतल ढूंढ लाया...

प भाभी- अरे इसमें क्या दारू पिकाओगे लल्ला?

में- तुम पिताजी तो दारू भी पीला देंगे भाभी...

प Bhabhi-are रहने दो और ये बताओ की करना क्या है...

में- पहले सब लोग गोला बना कर बैठ जाओ...

सब लोग गोला बना कर बैठ गए मैंने बोतल को बीच की खली जगह पर रखा और bola-to ये वैसी अंताक्षरी नहीं है जैसी अब तक हम खेलते the...ya यूँ कहें की ये अलग खेल है..

प Bhabhi-acha कैसे खेलेंगे इसे?

Anuj-haan भैया बताओ..

में- तो देखो हम 6 लोग हैं गोले में बैठे हैं मतलब हर एक के सामने कोई है...

तो सुनो अब करना क्या है... पहले ये बोतल घुमाई जाएगी और जिसकी तरफ बोतल का सिरा यानि ढक्कन की तरफ वाला हिस्सा आके रुकेगा उसे फिर आगे काम करना हैं.. यहाँ तीन कटोरियाँ राखी हैं... जिसमे एक में सब के नाम की पर्ची है... दूसरी अक्षर यानि अल्फाबेट की और तीसरी पर शरीर के अंगो के नाम लिखे हैं...

अब जिस पर बोतल का सिरा आ कर रुकेगा उसे इन तीनो में से एक एक पर्ची निकालनी है... पहली कटोरी में से अपने अलावा जिसका भी नाम निकलेगा वो होगा तुम्हारा दुश्मन... दूसरी कटोरी में अल्फाबेट हैं ा से ज़ तक तो उसमे जो भी अल्फाबेट निकलेगा तुम्हे उसी ाखशर से गण गण है... तीसरी पर्ची है ट्विस्ट की जिसमें शरीर के अंगो के नाम हैं... इसमें जो भी अंग निकलेगा उसका इस्तेमाल करके तुम्हारा दुश्मन तुम्हे गाने से रोकेगा..

पल्ली- भैया ठीक से समझाओ थोड़ा..

में- मान ले बोतल घूमी और सिरा मेरे पर आया ठीक... मैंने पहली पर्ची निकली और उसमे तेरा नाम आया ... तो तू हुई मेरी दुश्मन दूसरी पर्ची में ा अल्फाबेट निकला और तीसरी में कमर...

तो मुझे तीन मिनट तक ा से कोई गण गण है पर दुश्मन को यानि तुझे मुझे गाने में डिस्टर्ब करना है या रोकना है पर तू सिर्फ अपने शरीर का वही अंग इस्तेमाल कर सकती है जो तीसरी पर्ची में निकला यानि अगर कमर निकला तो तू मुझे सिर्फ अपनी कमर से छू सकती है और कोई अंग से नहीं और उसी से तुझे मुझे डिस्टर्ब करके गाने से रोकना है..... अगर गण पूरा कर लिए तीन मिनट तक बिना रुके तो बोतल आगे घुमाई जाएगी नहीं तो जो गण पूरा नहीं कर पाया उसे फिर दुश्मन के बताये हुए गाने पर नाचना होगा....

पल्ली- लग तो ाचा रहा है पर कई साडी चीज़ें हैं खेलके hi पता चलेगा..

प Bhabhi-haan समझ तो आया है थोड़ा बाकि खेलते खेलते आ जायेगा..

म Chachi-are हमें तो नहीं आया समझ पर तुम बच्चे बताते रहोगे तो सीख जायेंगे..

Jaggu-par बीच में कोई नहीं ये नहीं करेगा की मैं ये नहीं करूँगा ये नहीं करुँगी..

Anuj-haan ये बात सही है बीच में छोड़ना नहीं है..

में- तो शुरू किया जाये सब बैठ जाओ... और बोतल बीच में रखो...

सब लोग गोला बना कर बैठ गए और बोतल को बीच में रख दिया...





मैं मेरे एक तरफ पल्ली और दूसरी तरफ अनुज अनुज के बगल में चची उनके बगल में जग्गू और फिर उसके बगल में भाभी और फिर भाभी के बगल में पल्ली...

Palli-to फिर शुरू करें... मैं बोतल घुमाऊँगी..

Anuj-tu क्यों मैं क्यों नहीं...

प Bhabhi-are बाबा कोई भी घुमाओ जिसपर आकर रुकेगी बरी तो उसकी है न...

म Chachi-ye दोनों तो तुरंत लड़ने लगते हैं..

में- चलो शुरू करो पल्ली घुमा बोतल...

खेल शुरू हुआ पल्ली ने बड़े जोश से बोतल घुमाई... बोतल घूमने लगी तो सबकी नज़र उस पर थी की कहाँ रुकेगी... कुछ पल घूमने के बाद बोतल धीमी हुई और फिर जग्गू पर जाकर रुकी..

पल्ली- अरे वाह जग्गू भैया की बरी.. अब मज़ा आएगा... चलो भैया पर्ची निकालो...

जग्गू- अरे यार पहले मुझे hi आना था... ाचा रुको निकलता हूँ...

जग्गू ने पहली पर्ची निकली और उसे खोल कर देखा और फिर सबको दिखाया उसमे पल्ली का hi नाम था...

Palli-Khushi से उछाल पड़ी.. मतलबब मैं हूँ जग्गू भैया की दुश्मन और मुझे इन्हे रोकना है.... मज़ा आएगा...

प भाभी- देखले पल्ली गण पूरा नहीं होना चाहिए...

प Bhabhi-tnsn मत लो भाभी.. अब देखना मेरा कमाल...

फिर जग्गू ने दूसरी कटोरी से पर्ची निकली तो उसमे टी आया...

पल्ली- चलो भैया टी से गण शुरू करो..

Jaggu-ruk तो तीसरी पर्ची तो निकलने दे...

जग्गू ने तीसरी कटोरी से पर्ची निकली तो उसमे कोहनी लिखा था...

अनुज- मतलब तू सिर्फ कोहनी का इस्तेमाल कर सकती है... जग्गू भैया को रोकने के लिए

म चची- ाचा ऐसे है अब तो मैं भी समझ गयी.. चल जग्गू बीटा..

जग्गू उठ. कर थोड़ा साइड जाकर खड़ा हुआ और गण शुरू किआ

इधर पल्ली भी शुरू हो गयी और अपनी कोहनी को जग्गू के शरीर पर घूमने लगी पहले तो थोड़ी देर जग्गू पर कोई खास असर नहीं हुआ पल्ली की कोहनी का पर फिर पल्ली जब उसकी पीठ पर अपनी कोहनी रगड़ने लगी तो जग्गू को मुश्किल होने लगी.. पर फिर भी जग्गू किसी तरह ऐडा रहा...

प Bhabhi-are पल्ली पेट पर करना पीठ पर कुछ नहीं होगा ..

पल्ली भाभी की बात सुनकर जग्गू के पेट में कोहनी रगड़ने लगी.. जग्गू की हालत ख़राब होने लगी पर फिर भी बेचारा टिका रहा और कुछ देर में अनुज ने समय पूरा होने का इशारा किआ और जग्गू की जान में जान आई...

प Bhabhi-kya पल्ली रोक hi नहीं पाई तू...

पल्ली- क्या करू भाभी सब तो किआ भैया हरे नहीं..

म Chachi-chalo आ जाओ दुबारा घूमते हैं बोतल

जग्गू और पल्ली बापिस अपनी अपनी जगह पर आकर बैठ गए...

फिर से बोतल घुमाई गयी और इस बार अनुज पर आकर रुकी...

Palli-ab आएगा मज़ा...

अनुज मुँह बनाते हुए बोलै- देख अभी कर के दिखता हूँ..

और झट से पहली कटोरी से पर्ची निकली और उसे खोला तो उसमे भाभी का नाम था...

प भाभी- अब कैसे बचोगे छोटे लल्ला..

पल्ली- भाभी हरा के hi मानना इसे नाचना है...

म चची- दूसरी पर्ची उठा बीटा...

अनुज ने दूसरी पर्ची निकली जिसमे क था.. और फिर तीसरी जिसमे घुटना लिखा था...

प Bhabhi-are अब घुटने से कैसे रोकूंगी...

Palli-bhabhi कुछ न कुछ तो करना पड़ेगा... इसे नाचना है..

अनुज- अरे जा जा तेरी बरी में देखना क्या होता है...

अनुज खड़ा हुआ और गण शुरू किआ कुर भाभी भी जाकर अपने घुटने से उसे छेड़ने लगी पर अनुज पर कोई ज़्यादा असर नहीं हो रहा था..

पल्ली- ओह्हो भाभी कुछ और करो न और ये कहते हुए पल्ली ने अपने चूतड़ों की और इशारा करके बताया भाभी को...

भाभी भी अनुज के पीछे गयी और घुटने को अनुज के चूतड़ों पर रगड़ने लगी जिससे कुछ पल बाद hi अनुज थोड़ा असहज सा होने लगा... भाभी इसे देखकर और अचे से अपने घुटने को उसके चूतड़ों पर रगड़ने लगी चची जग्गू पल्ली मैं सब हंस रहे थे और मजे ले रहे थे... वही अनुज की असहजता का कारन धीरे धीरे हमें भी दिखने लगा था जो उसके पाजामे में तम्बू बनाने लगा था..

भाभी के घुटने के चूतड़ों पर रगड़ने का असर अनुज के लुंड पर हो रहा था जो की खड़ा होता जा रहा था जग्गू की नज़र भी जब उसपर पड़ी तो थोड़ा वो भी हैरान हुआ ..

वही. भाभी इस सब से बेखबर होकर अपना काम करने में लगी thi.....phir भी अनुज किसी तरह टिका हुआ था... और कुछ पल बाद जग्गू ने समय पूरा होने का इशारा किआ और भाभी हैट गयी..

और अनुज जल्दी से भाग कर अपनी जगह बैठ गया जिससे उसका पाजामे में बना तम्बू न दिखे

पल्ली- अरे भाभी ाचा खासा मौका चला गया..

प भाभी- अरे क्या करती सब तो किआ जितना घुटने से कर सकती थी.. भाभी ने अपनी जगह बैठते हुए बोलै..

पल्ली वैसे खेल मज़ेदार है मज़ा आ रहा है ..

प भाभी- हाँ मुझे ब्बि ाचा लगा...

फिर से बोतल घुमाई गई और इस बार उसका मुँह पल्ली पर आकर रुका... जिसे देखते hi अनुज उछाल पड़ा...

Anuj-ab आएगा मज़ा बीटा बहुत बोल रही थी....

Palli-chal चल अभी कर लुंगी मैं आराम से..

पल्ली ने पहली पर्ची निकली जिसमे जग्गू का नाम निकला...

Anuj-bhaiya अब बदला लेने का मौका मिल गया...

पल्ली ने दूसरी पर्ची निकली जिसमे ो से गण था और तीसरी में लिखा था नितम्भ...

जग्गू अबे नितम्भ मतलब..

म चची- तुहार चूतड़ बच्चा...

सब हंसने लगे चची की बात सुनकर..

जग्गू-. वो तो पता है चची पर उनसे कैसे रोकूंगा इसे..

प भाभी- अरे वो तो अब तुम जानो..

पल्ली कड़ी हुई और जाकर गाने लगी

Anuj-are जग्गू भैया जाओ न टाइम निकल जायेगा...

Jaggu-haan हाँ जाता हूँ..

जग्गू बेचारा शर्माता हुआ गया उसने एक मिनट तो ये सोचने में hi निकल दिया क्या करे और फिर घूम कर अपने चूतड़ों को पल्ली के शरीर से घिसने लगा... वो ऐसे करते हुए बड़ा अजीब लग रहा था जिससे देखकर सबके हंस हंस के पेट में दर्द होने लगा... पल्ली को भी हंसी आ रही थी पर वो किसी तरह रोक कर गए रही थी...

और अंत में अनुज ने टाइम पूरा होने का इशारा किआ और पल्ली ने रहत की साँस ली पर पल्ली से भी ज़्यादा रहत जग्गू को मिली... और दोनों बापिस अपनी जगह आकर बैठ गए..

फिर से बोतल घूमी और इस बार मेरे ऊपर आ कर रुकी...

प Bhabhi-are अब फंसे हो लल्ला...

Me-main तो अब भी नहीं फंसा भाभी..

पल्ली- वो तो पता चलेगा पर्ची तो निकालो...

मैंने पहली पर्ची निकली उसमे चची का नाम था...

Palli-mummy अब ज़िम्मेदारी तुम्हारे पर है..

म चची- देखते हैं क्या होता है काम से काम बरी तो आई

प Bhabhi-Chachi पूरा फायदा उठाना बरी का..

मैंने दूसरी पर्ची निकली जिसमे ा था और फिर तीसरी जिसमे सीना लिखा था...

प Bhabhi-are ये क्या बात हुई सीने से कैसे करेंगी..

Jaggu-jaise मैंने चूतड़ों मतलबब नितम्बों से किआ था...

सब खिलखिलाकर हंसने लगे..

म चची- अरे चिंता मत कर बहुरिया.. औरत की छाती ने कितने देश हिला दिए ी तो हमर बच्चा है...

प Bhabhi-are गजब चची क्या बायत कही है दिखा दो अपना कमाल...

मैं खड़ा हुआ और गण गाने लगा उधर चची आई और मेरी पीठ पर अपनी बड़ी बड़ी छुछियां रगड़ने लगी... वैसे तो मैंने खुद को काबू किया और गण जारी रखा पर चची की छूछीयों की मुलायम चुभन से मेरा लुंड सर उठाने लगा और पजामा लुंड के ऊपर उठने लगा...

उधर भाभी और पल्ली चची को उकसा रही थी.. और चची भी पूरे जोश में मेरी पीठ पर अपनी छूछीयो को रगड़ रही थी...

प Bhabhi-Chachi कुछ और करो ौसे तो टाइम निकल जायेगा...

चची कुछ सोचकर जल्दी से मेरे सामने आ गयी और अब अपनी छूछीयो को मेरे सीने से घिसने लगी... हाय मैं तो धीरे धीरे मदहोश होने लगा पर किसी तरह से खुद को काबू में रखते हुए गता रहा...

कुछ देर तक भी जब मेरा गण नहीं रुका तो चची ने और चल चली और पीछे होकर अपना पल्लू सीने से हटा दिया जिसके हटते hi अनुज और पल्ली ने ओह्ह्ह्ह करके शोर मचाया वहीं भाभी और जग्गू तगड़ा हैरान हो गए और मैं परेशां हो गया..

क्योंकि सिर्फ स्पर्श तो सह भी लेता पर साथ hi पल्लू हटने से उनकी छूछीयों आधी दिखने लगी ऊपर से वो उन्हें मेरे सीने पर घिस रही थी मेरा लुंड पूरी तरह खड़ा हो चूका था और बीच बीच में चची के पेट और जांघो से टकरा दबा रहा था...

वहीं चची ने. एक और गहरी चल चली और वो मेरे पेट और सीने पर अपनी छूछीयो को घिसते हुए और नीचे सरक गयी और पाजामे में बने मेरे तम्बू के ऊपर भी घिसने lagi...chachi ऊपर छाती से घिसती हुई नीचे जाती और मेरे लुंड को अपनी छूछीयो से सहलाते हुए ऊपर आ जाती... मेरे लिए सहना बहुत मुश्किल हो गया.. चची की ऐसी कामुक हरकतें देखकर मेरा hi नहीं अनुज और जग्गू का भी यही हाल था और दोनों अपनी गॉड में हाथ रखकर अपने अपने तम्बुओ को छुपा रहे थे.. जब चची नीचे की और जाती मेरी आह निकलने को होती और फिर न जाने कब मुझे खुद hi पता नहीं चला और मैंने गण बंद कर दिया..

भाभी और पल्ली ख़ुशी से चिल्ला पड़ी.. वहीं चची ने मुस्कुराते हुए मेरी आँखों में देखते हुए अपना पल्लू ऊपर किआ और हैट गयी..

पल्ली- कमाल कर दिया मम्मी...

प भाभी- पर चची ये खेल में ऐसे ये सब कुछ ठीक तो है न...

म Chachi-are बहुरिया खेल खेलो तो अचर से तभी मज़ा आता है आधे मन से क्या खेलना जो जीतने के लिए करना पड़े करो हमतो ये hi मानते हैं..

प भाभी- ग चची... भाभी ने कुछ सोचते हुए बोलै...

Palli-mummy तो भैया को कौनसे गाने पर नछाओहि...

में- यार नाचना भी पड़ेगा अब..

प Bhabhi-aur क्या नियम तो ये hi है.. चची तुम बताओ न गण...

म Chachi-kya बताऊँ कुछ समझ hi नहीं आ रहा...

में- नाचने की जगह कुछ और करवालो...

पल्ली- कुछ और क्या करोगे... भैया

प भाभी- और कुछ तो है hi नहीं..

म Chachi-bahuriya सही कहूं तो ये नाचने वाला हमको भी नहीं पसंद कुछ और hi रखो...

प Bhabhi-kuch और क्या रखें पल्ली, अनुज जग्गू भैया बोलो ?

पल्ली- कर्मा भैया तुम्हारे पास है कुछ उपाय...

Me-upay तो है पर थोड़ा वैसा है...

प Bhabhi-kaisa है...

ंव- थोड़ा बड़ों वाला है..

Palli-to यहाँ सब बड़े hi हैं भैया बताओ न..

में- चची सच में बताऊँ?

म चची- बता तो दे hi देखते हैं क्या होता है..

में- तो जहाँ से मैंने ये खेल देखा था उसमे ये अंत में नाचने की सजा की जगह कुछ और सजा थी.. मैंने नाचना इसलिए लगाया क्यूंकि मुझे लगा यौम सब उसके लिए मनो या न मनो..

Jaggu-kya सजा थी?

में- उस में तो जो गण नहीं गए पता था उसे सजा के तौर पर अपना एक कपडा उतरना होता था और फिर वैसे hi खेल में आगे बढ़ता था..

प Bhabhi-are ढैय्या ये कैसी सजा है...

पल्ली- थोड़ी अजीब है पर मज़ेदार है...

Jaggu-haan अजीब तो है..

प भाभी- अरे पल्ली कहे की मज़ेदार इसमें तो नंगा होना पद रहा है..

पल्ली- जो हारेगा उसे और वो भी एक hi कपडा उतरना है भाभी...

जग्गू- बात तो सही है कितनी देर में कब मौका आये क्या पता...

Me-dekhlo अगर सब को ठीक लगे तो ये hi रखलो..

प Bhabhi-kya कहती हो Chachi...kya करना चाहिए...

म Chachi-waise तो तुम सब hi समझदार हो तो मेरे हिसाब से रखने में कोई बुराई नहीं है बस इसे खेल की तरह लो और जब खेल ख़तम हो जाये तो भूल जाओ...

Me-kya बात कही है चची...

प भाभी- हाँ अगर तुम सब लोग कह रहे हो तो ठीक है पर ये बात बहार नहीं जनि चाहिए..

म Chachi-are सब अपने हैं कौन बहार बताएगा..

प Bhabhi-theek है फिर रखलो .

हालाँकि भाभी न नुकुर कर रही थी पर उत्सुकता उनकी आँखों एयर बातों में साफ़ दिखाई दे रही थी...

में- ठीक है फिर शुरू करते हैं बोतल घुमाओ .

प Bhabhi-are ऐसे कैसे पहले अपनी सजा तो पूरी करो...

Palli-haan भैया कोई एक कपडा उतरो ..

Me-theek है रुको तो..

और ये कहकर मैंने अपनी t-shirt उतर दी और ऊपर से नंगा हो गया...

भाभी मुझे तिरछी निगाहों से देखकर शर्मा रही थी वहीं बाकि सब ब्बि हंस रहे थे..

Palli-to खेल आगे बढ़ाया जाये...

सबने हामी भरी और एक बार बोतल फिर से घूमी...

ये बोतल किसपर आके रुकी और आगे खेल में क्या क्या होता है ये सब अगली अपडेट में आप लोग अपने सुझाव ज़रूर रखें की क्या क्या हो सकता है आगे कैसी लगी अपडेट प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं... तभी अपडेट जल्दी और अछि लिखी जाती है. बहुत बहुत शुक्रिया
 
Hello दोस्तों.. तो कुछ लोगो का सुग्गेस्टिव था की मैं किस फीमेल करैक्टर के लिए कौनसी पोर्नस्टार को इमेजिन करता हूँ या gif उसे करता हूँ तो वो लिस्ट विथ पिक्टुरेस और गिफ्स अपलोड करूँ...

तो कोशिश की है आप लोगो को अगर और भी अछि पिक्चर मिले तो आप भी ज़रूर बताएं...

सभ्य (कर्मा की माँ)- लिसा अन्न













ममता Chachi-Diamond फॉक्सक्सक्स









पल्ली- ऑटम फाल्स













शशि बुआ- कार्मेला बिंग













पूर्वी दीदी - फ्रांसेस्का जेम्स













सावित्री (बड़ी Bua)-jasmine ब्लैक









रिमझिम- रोमी रेन













चारु Mami-Chloe लमौर













गया- गया दर्ज़ा













जग्गू की मम्मी (मंजू तै)- ारिएल्ला फर्रेरा













प्रेमा भाभी- काग्नेय लीन कार्टर













कजरी- वॉइलेट म्येर्स













रज्जो चची- अवा एडम्स













नीतू- मिया मल्कोवा













Laado-Riley रेड













अंजलि- वैलेंटिना नैप्पी













शालू Mausi-Angela वाइट













सविता (अंजलि की माँ)- जूलिया अन्न





अगर किसी करैक्टर का मिस हुआ हो तो ज़रूर बताएं और अगर आपको ऐसा लगता है की कोई और पोर्नस्टार किसी करैक्टर से ज़्यादा रेसेम्ब्ले करती है तो बता सकते हैं या पिछ या gif अपलोड कर सकते हैं..

बहुत बहुत शुक्रिया कमेंट करके ज़रूर बताएं कैसी लगी लिस्ट...
 
और ये कहकर मैंने अपनी t-shirt उतर दी और ऊपर से नंगा हो गया...

भाभी मुझे तिरछी निगाहों से देखकर शर्मा रही थी वहीं बाकि सब ब्बि हंस रहे थे..

Palli-to खेल आगे बढ़ाया जाये...

सबने हामी भरी और एक बार बोतल फिर से घूमी...

अपडेट 111

(मेगा अपडेट)


पर मैंने बोतल को घुमते हुए बीच में hi पकड़ लिए...

में- तो सब अभी सोचलो की इसी सजा के साथ आगे बढ़ना है या नहीं... क्यूंकि फिर बाद में मत बोलना की मुझे ये नहीं करना शर्म आ रही है वगेरा वगेरा...

म Chachi-are हाँ बात तो सही है अभी बतादो सब लोग...

पल्ली- नहीं मम्मी मैं तैयार हूँ..

अनुज- मैं भी..

फिर सबकी निगाहें जग्गू पर गयी जिसने मेरी आँखों में देखकर कुछ समझते हुए हाँ कह दिया... और फिर सब भाभी की तरफ देखने लगे... भाभी ने भी सबकी तरफ देखा और फिर धीरे से नज़रो को झुकाते हुए बोलै- ठीक है...

तो फिर सब खुश हो गए और खेल शुरू हो गया... बोतल फिर से घूमी और इस बार चची पर आकर रुकी...

अनुज- आखिर चची की बरी आ hi गयी...

पल्ली- देखो मुनमय क्या है पर्ची में...

म Chachi-are रुक तो सही तू तो चालू हो जाती है... देखने तो दे...

पल्ली को रोकते हुए चची ने पहली कटोरी से पर्ची निकली तो उसमे पल्ली का hi नाम निकला..

पल्ली- मुम्ममय मैं हूँ तुम्हारी दुश्मन... हे हे..

म चची- हाँ तू hi है मेरी दुश्मन...

Palli-ab तो हार पक्की है मम्मी तुम्हारी...

म Chachi-dekhte हैं

और इसके साथ hi चची ने दूसरी पर्ची निकली जिसमे टी लिखा था और तीसरी पर्ची जिसमे पेट लिखा हुआ था...

प Bhabhi-are अब पेट से कैसे रोकेगी पल्ली..

Palli-haan यार समझ hi नहीं आ रहा...

म चची- अभी तो बहुत उछाल रही थी की हार पक्की है तुम्हारी अब क्या हुआ...

पल्ली- वो तो मैं हरा कर hi रहूंगी देखलेना...

म चची मुस्कुराते हुए कड़ी हुई और जगह पर जाकर गाने लगी इधर पल्ली भी जल्दी से गयी और अपनी मम्मी के पीछे जाकर अपने पेट को उनकी पीठ पर रगड़ने लगी पर सिर्फ पेट तो रगड़ा नहीं जायेगा तो साथ hi सीना यानि अपनी दोनों छूछीयो को अपनी मम्मी की पीठ पर रगड़ने लगी...

एक मिनट हो गया चची पर कोई असर नहीं हुआ तो पल्ली झल्लाकर आगे आई और फिर चची के सीने पर अपने पेट और छाती को रगड़ने लगी जिससे घिसने से चची का पल्ली नीचे गिर गया और चची का गोरा पेट गहरी नाभि सबके सामने आ जाती पर अभी उनके सामने पल्ली थी जो अपनी मम्मी के सीने पर अपना सीना घिस रही थी दोनों माँ बेटी की छुछियां आपस में रगड़ रही थी जिसका थोड़ा बहुत असर होता देख पल्ली को न जाने क्या सूझा और उसने अपनी t-shirt के छोर को पकड़ा और उसे सीने तक अचानक से उठा दिया...

और अपनी नंगी छूछीयो को बहार निकल लिए और उन्हें अपनी मम्मी के सीने पर रगड़ने लगी... क्यूंकि अनुज और पल्ली... मैं और चची सरे लोग भाभी और जग्गू के आने से पहले चुदाई hi कर रहे थे तो जल्दबाज़ी में कपडे पहनने के कारन ब्रा पल्ली ने पहनी नहीं थी... पल्ली की पीठ हमारी तरफ थी और अभी पूरी गोरी मखमली पीठ नंगी होकर हमारे सामने थी.. वहीं चची मेरा और अनुज का भी यही हाल था हमने ऊपर के कपडे तो पहने थे पर अंदर कुछ नहीं था...

पल्ली की हरकत को देखकर भाभी और जग्गू चौंक गए... भाभी ने अपने मुँह पर हाथ रख लिए था वहीं हमारे लुंड माँ बेटी के ऐसे नज़ारे देख कर पूरे तन चुके थे...

पल्ली अपनी नंगी छूछीयो को चची की छूछीयों पर ब्लाउज के ऊपर से और नंगे पेट पर रगड़ने लगी...

अपनी बेटी की बड़ी और कोमल छूछीयो को नंगा देखकर ऊपर से उनका स्पर्श अपने बदन पर पाकर चची भी बहकने लगी थी... वहीं चची को बहकता देखकर पल्ली का आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था और वो अपनी छूछीयो को अपनी माँ के पेट पर घुमा रागी थी उत्तेजना से कड़क हो चुके पल्ली के निप्पल उसकी माँ के शरीर पर मीठी चुभन दे रहे थे....

पीछे से हमें पल्ली की नंगी कामुक पीठ बलखाती हुई नज़र आ रही थी... जो ऊपर नीचे हो रही थी पल्ली ने एक आखिरी तीर चलते हुए अपने कड़क निप्पल को नीचे होकर अपनी माँ के पेट पर घुमाया और फिर घूमते हुए उनकी नाभि में घुसा कर घिसने लगी... जिसके साथ hi चची के मुँह से एक मीठी सी सिसकी निकल गयी उनकी छुछियां उठ कर तन गयी... माँ बेटी का ऐसा कामुक खेल देखकर हम सबका गाला सूख रहा था भाभी की तो नज़र नहीं हैट रही थी और जग्गू तो अपने लुंड को दबाये मुँह फाड़े हुए देख रहा था...

सिसकी के साथ hi चची का गण भी रुक गया... और कुछ पल बाद पल्ली पीछे हैट गयी और अचानक से उसकी नंगी गोरी पीठ पर फिर से टीशर्ट का पर्दा पद गया...

पल्ली मुड़ी और खुसी से हाथ ऊपर उछाले मैं जीत गयी मैं जीत गयी...

Palli-dekha मम्मी हरा दिया न...

म Chachi-are हाँ बिटिया हरा दिए तूने अब खुश...

Palli-dekha भाभी...

भाभी हैरत में थी जो हुआ उसे देखकर पर चची और पल्ली बिलकुल साधारण थी की जैसे कोई बड़ी बात न हो जिससे भाभी को भी ज़्यादा अलग या अजीब नहीं लगा..

प भाभी- हैं??? हाँ हाँ देखा तू जीत गयी...

पल्ली- मैंने बोलै hi था ...

में- कमाल कर दिया पल्ली मुझे लगा नहीं था चची हारेंगी.. है न जग्गू?

जग्गू- अण्णन हाँ हाँ कमाल कर दिया यार...

अनुज- तो अब चची की सजा की बरी...

ये बात सुनकर सब एक दुसरे की तरफ देखने लगे भाभी की नज़र चची पर तिकी हुई थी की आया वो सच में ये सजा पूरी करेंगी क्या सच में ये खेल आगे खेलेंगी..

म चची- हाँ भाई कर रही हूँ पूरी सजा...

पल्ली- मज़ा आया...

तभी चची कड़ी कड़ी घूम गयी और हमारी तरफ पीठ कर ली...

और कुछ करने लगी पीठ हमारी तरफ होने से कुछ साफ़ नहीं दिख रहा था पर कुछ पल बाद चची का ब्लाउज ढीला होता हुआ नज़ारा आया और फिर ढीला हुआ और फिर एक बाजू से निकला और फिर doosri...aur जहाँ अब तक बेटी की पीठ नंगी नज़र आ रही थी वहीं अब माँ की पीठ नंगी हमारे सामने आ गयी... सब लोग हैरत से और उत्तेजित होकर इस नज़ारे का लुत्फ़ उठा रहे थे..

भाभी को यकीन नहीं हुआ रहा था की चची सच में इसके लिए मान गयी और बिना किसी विरोध के कर भी रही हैं तब तक चची का ब्लाउज नीचे था और चची ने साड़ी बापिस अपने शरीर पर लपेट ली...

चची को मैंने न जाने कितनी बार hi छोड़ा हो पर अभी इस अवस्था में उनका इतना कामुक रूप देखकर मन किआ अभी जाकर लुंड पेल दूँ उनकी गांड में...

और ऐसा सोचना सिर्फ मेरा hi नहीं अनुज और जग्गू का भी था दोनों मुँह खोले चची के साड़ी में से झांकते हुए शरीर को देख रहे थे..





उनकी नंगी पीठ देखकर सिर्फ लड़के hi नहीं बल्कि भाभी और पल्ली भी उत्तेजित हो रही थी... एक तो जो अभी पल्ली ने किआ था... अपनी माँ के साथ वो देखकर तो कोई भी गरम हो जाये और यहाँ तो सब जवान और हवस से भरे हुए थे...

खैर ऐसे hi बदन पर साड़ी को लपेटे हुए चची अपनी जगह पर आ कर बैठ गयी...

म चची- चलो भाई करदी मैंने अपनी सजा पूरी अब बोतल घुमाओ...

चची के कहने पर सब का ध्यान खेल पर आया और उनके साड़ी में से झांकते हुए बदन से हटा...

बोतल फिर से घूमी और इस बार जग्गू पर ruki...jaggu...na जाने उसमे इतना जोश कहाँ से आया जल्दी से पहली पर्ची खोली जिसमे भाभी का नाम निकला..

पल्ली- अरे वाह देवर भाभी की जोड़ी...

जिसे सुनकर भाभी और जग्गू दोनों hi शर्मा गए शायद जो घर पर हम तीनो के बीच हुआ था उसको याद करके...

जग्गू ने दूसरी पर्ची निकली जिसमे म था और फिर तीसरी जिसमे कमर लिखा था...

पल्ली- भाभी दिखाओ अब अपनी कमर का जलवा..

प Bhabhi-bilkul वैसे hi न जैसे तूने अपने पेट का दिखाया था अभी...

Anuj-haan भाभी बिलकुल वैसे hi...

Bhabhi-muskurate हुए अनुज को देखने लगी...

पर जब अनुज को अपनी और भाभी की बात का मतलब समझ आया तो शर्मा गया...

म Chachi-chal जग्गू बच्चा हो जा शुरू...

साला एक तो चची इतनी मस्त लग रही थी की उनसे नज़र नहीं हैट रही थी लुंड बिलकुल कड़क हो चूका था... और रह रह कर नज़र उनके ऊपर hi जा रही थी उनकी साड़ी थोड़ी सी पारदर्शी थी जिससे उनका बदन चमक रहा था...





जग्गू शर्माता हुआ और किसी तरह से अपने पाजामे के उभर को छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए अपनी जगह जाकर खड़ा हुआ और गण शुरू किआ तभी भाभी भी उसके बगल में जाकर कड़ी हो गयी.. और अपनी कमर को उसके कूल्हों पर घिसने लगी या कहें तो ठुमके मरने लगी... जग्गू जो पहले से hi उत्तेजित था वो भाभी के बदन को खुद पर छूटे hi और उत्तेजित होने लगा...

पर किसी भी तरह गण गता रहा.. थोड़ी देर तक कुछ न होने पर भाभी भी परेशां होने लगी...

पल्ली- अरे भाभी सामने से करो न कुछ फायदा होगा...

भाभी पल्ली की बात मानते हुए जग्गू के सामने की तरफ आ गयी... और अपनी कमर उसके पेट पर घिसने लगी जिसका नतीजा ये हुआ की जग्गू का लुंड जो पाजामे में पहले से hi खड़ा हुआ था वो और तन गया और भाभी के घिसने से उनकी जांघ पर टक्कर मरने लगा जिसका एहसास भाभी को भी हुआ पर भाभी रुकी नहीं अगला एक मिनट भी ऐसे hi hi बीत गया मुश्किलों के बाद भी जग्गू ने गण बंद नहीं किआ..

पल्ली- भाभी कुछ करो न...

भाभी ने अपनी आखिरी चल चलते हुए अपना पल्लू नीचे गिरा दिया जिसके सरकते hi उनके ब्लाउज से झांकती छुछियां, उसके नीचे सपाट और चिकना पेट और उसके बीच में रसीली गहरी नाभि आ गए... सबकी नज़रें भाभी के नंगे बदन पर टिक गयी... अनुज तो देखकर मुँह फाडे रह गया... वैसे किसी ने सोचा नहीं था की भाभी ऐसा करेंगी पर जो हो रहा था ाचा हो रहा था... बस जग्गू के लिए नहीं क्यूंकि..

भाभी की जांघ के लुंड पर बार बार रगड़ने से जग्गू का पहले hi बुरा हाल था वो भाभी के नंगे पेट को देखकर और बुरा हो गया और जग्गू गण तो दूर सांस लेना तक थोड़ी देर के लिए भूल गया.....

Palli-are वाह भाभी तुम जीत गयी कमाल कर दिया...

भाभी ने मुस्कुराते हुए अपना पल्लू ऊपर करते हुए कहा- अरे बस वो तो ऐसे hi.. और अपनी जगह पर आकर बैठ गई..

Anuj-nahi भाभी सच में कमाल कर दिया अब जग्गू भैया करो सजा पूरी...

म Chachi-jaggu चल उतार एक कपडा क्यों लड़कियों की तरह शर्मा रहा है...

Jaggu-utar तो रहा हूँ चची...

जग्गू ने शरमाते हुए अपनी शर्ट उतर दी और ऊपर से वो भी मेरी और चची की तरह नंगा हो गया...

जग्गू बापिस आकर बैठा बोतल दोबारा घूमी और इस बार अनुज पर जा कर रुकी...

Palli-ho जा बीटा नंगा होने के लिए..

Anuj-tu चुप कर मैं हारूंगा hi नहीं...

अनुज ने पहली पर्ची निकलते हुए कहा जिसमे चची का नाम था ..

Palli-ab तो तू ज़रूर हारेगा है न मम्मी

म चची- बिलकुल... हारेगा और कहकर हंसने लगी..

अनुज ने मुँह बनाते हुए दूसरी परवही खोली उसमे प था और फिर तीसरी जिसमे पीठ लिखा था...

पल्ली- चल जा अब...

Anuj-ja तो रहा हूँ ये कहते हुए अनुज फिर से लुंड को छुपाते हुए खड़ा हुआ और जाकर गण शुरू किआ इधर चाची भी उठी सिर्फ एक साड़ी लपेटे हुए जो उनके बदन को छुपा काम और दिखा ज़्यादा रही थी... खैर अनुज ने गण शुरू किआ और चची सीढ़ी गयी अनुज के सामने और उसकी तरफ अपनी नंगी पीठ करके उसके सीने से लगा दी और घिसने लगी..

चची को इस हालत में देखने भर से hi कोई भी मर्द अपना नाम भूल जाये वहां अनुज को तो उनका स्पर्श भी मिल रहा था फिर भी अनुज ने गण जारी रखने की कोशिश की इधर चची अपनी नंगी पीठ को घिसते हुए नीचे होती गयी और नीचे होने पर अनुज का लुंड पाजामे के अंदर से hi उनकी कमर और पीठ पर घिसने लगा और यही काफी था अनुज के लिए वो चुप हो गया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा मुझे लगा कहीं झाड़ न जाये पंत में hi...

पल्ली- क्यों बच्चू निकल गयी हेकड़ी...

म चची- ऐसे नहीं कर पल्ली.. खेल में जीत हार तो लगी रहती है...

चची ने पलट कर अनुज के सर पर हाथ फेरते हुए कहा...

प Bhabhi-aur क्या बस अब छोटे लल्ला कपडा उतरो..

अनुज ने बिना किसी इंतज़ार के अपनी टीशर्ट उतर दी और अपनी जगह आकर बैठ गया...

अब हम तीनो लड़के ऊपर से नंगे थे चची एक साड़ी में लिपटी हुई थी...

पल्ली- चलो शुरू करते हैं...

और बोतल एक बार फिर से घूमी और भाभी पर आकर रुकी..

पल्ली- भाभी अब तुम्हारी बरी है...

Anuj-maja आएगा.

प भाभी- ाचा छोटे लल्ला तुम बड़े मज़े ले रहे हो..

भाभी की बात सुनकर अनुज शर्मा गया

म Chachi-maje तो सब hi ले रहे हैं

Palli-bhabhi पर्ची निकालो न...

प भाभी- निकल रही हूँ पल्ली बेसब्री है तू बिलकुल...

और भाभी ने पहली पर्ची निकली जिसमे किस्मत से अनुज का hi नाम निकला...

पल्ली- बड़े मजे कर रहा था अब देखते हैं क्या करता है...

Anuj-haan हाँ देख लिओ...

म चची- बहुरिया तू पर्ची निकल ये दोनों तो ऐसे hi लड़ते रहेंगे...

भाभी ने हँसते हुए पर्ची निकली जिसमे क आया और फिर तीसरी जिसमे मुँह लिखा था....

अनुज- इसका मतलबब सिर्फ मुँह का इस्तेमाल कर सकता हूँ मैं...

Me-haan सिर्फ मुँह का..

Palli-chalo भाभी हो जाओ शुरू...

भाभी- हाँ जा रही हूँ..

भाभी जगह पर जाकर कड़ी हुई और अनुज भी तुरंत बगल में जाकर खड़ा हो गया...

इधर भाभी ने गण शुरू किआ और अनुज ने अपना काम अनुज भाभी के पीछे गया और ब्लाउज और साड़ी के साइड से जो गर्दन का हिस्सा नंगा होता है उसे चूमने लगा..

जिसके साथ hi हम सब के मुँह से आह्हः निकल गयी और भाभी की सांसे थोड़ी बढ़ती हुई महसूस हुई... जग्गू थोड़ा असहज दिखा पर कुछ कहा नहीं ..

उधर अनुज और भाभी अपने काम में लगे हुए थे भाभी गण गए रही थी वहीं अनुज अब उनकी गर्दन को चूमते हुए आगे की तरफ आ गया था और उनके सीने के ऊपर हिस्से को चाट रहा था.. भाभी कुछ असहजता हो रही थी पर वो गण नहीं छोड़ रही थी...

वहीं काम न बनता देख अनुज ने उपाय सोचा और दांतो से भाभी के पल्लू को पकड़ कर नीचे गिरा दिया जिसके साथ hi एक बार फिर भाभी का नंगा चिकना पेट सामने आ गया.. और सबके मुँह से आह निकल गयी..

पल्ली- अरे वाह बहुत बढ़िया...

उधर भाभी पल्लू के गिरने से थोड़ी चौंकीजरूर पर गण नहीं रोका, वहीं अनुज को तो जैसे खुली छूट मिली गयी हो वो भाभी के सीने को चूमने चाटने लगा... ब्लाउज के बहार छूछीयो का जितना भी हिस्सा था उसे चाट कर गीला कर दिया जग्गू भाभी को इस हालत में देखकर बेहद उत्तेजित हो गया था वहीं थोड़ा चिंतित भी था.. पल्ली और चची इस नज़ारे का मज़ा ले रही थी...

भाभी मुश्किलों से अपने बदन पर अनुज की जीभ और होंठों के बार सह रही थी..

अनुज की तो जैसे किस्मत खुल गयी हो और नीचे झुककर अब वो भाभी के नंगे चिकने पेट को चूम चाट रहा था...

भाभी मुश्किलों से खुद को संभाले हुए थी... उत्तेजना और विवस्ता उनके चेहरे पर झलक रही थी...





भाभी की भी हिम्मत थी जो खुद को अब तक संभाले हुए थी पर फिर अनुज ने कुछ ऐसा किआ की भाभी की साडी सहनशक्ति ने जवाब दे दिया और एक आह्ह्ह्हम्म्म की आवाज़ के साथ उनका गण बंद हो गया...

अनुज ने पेट को चाटते हुए अपनी जीभ को नुकीला करके भाभी की गहरी रसीली नाभि में घुसा दी और चाटने लगा था जिससे भाभी की हिम्मत ने जवाब दे दिया और भाभी हार गयी..

पल्ली- कमाल कर दिया लड़के भाभी को हरा दिया..

अनुज- मैंने तो पहले hi बोलै था..

Me-haan भाभी भी हार गयी आखिर...

म Chachi-to क्या हुआ ये तो खेल है हार जीत चलती रहती है...

जग्गू बिना कुछ बोले सिर्फ भाभी की तरफ देख रहा था उसके मन में भी यही सवाल था जो हमारे मन में था... क्या सच में भाभी सजा पूरी करके आगे खेलेंगी या यहीं रुक jayengi...kya सच में वो यहाँ इतने लोगो क्व बीच अपना कपडा उतरेंगी....

वहीं भाभी की साँसे अब तक. शांत हो चुकी थी और वो शरमाते हुए सबको देख रही थी...

Palli-bhabhi सजा पूरी करो..

भाभी ने नज़रें उठा कर एक बार पल्ली को देखा और फिर हम सबको और बोली- मैं एक मिनट में आई...

और बाथरूम में घुस गयी..

Anuj-inhe क्या हुआ..

जग्गू- पता नहीं कहीं बुरा तो नहीं मान गयी...

म Chachi-are आ जाएगी अभी क्यों परेशां होते हो..

में- हाँ रुको तो सही..

हम सब बात hi कर रहे थे की बाथरूम का दरवाज़ा खुला और फिर उसमे से भाभी निकली.. पर भाभी को देखकर सबकी आँखें बड़ी हो गयी क्यूंकि भाभी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी इसका मतलब भाभी साड़ी अंदर hi उतर आई थी





भाभी शरमाते हुए आई और अपनी जगह पर बैठ गयी वहीं हमारी नज़रें भाभी पर hi तिकी हुई थी...

जग्गू को तो यकीन नहीं हो रहा था की भाभी मान गयी...

Palli-kya भाभी सामने उतरनी थी साड़ी..

प Bhabhi-are ये थोड़ी न तय हुआ था बात थी एक कपडा उतरने की न की सामने उतरने की...

म Chachi-chalo अब बहस बंद करो और आगे खेलो...

भाभी के साड़ी उतरने से कमरे का माहौल और गरमा गया था...

बोतल फिर से घूमी और इस बार पल्ली पर आकर रुकी..

अनुज- अरे वाह...

प भाभी- अब आएगा मज़ा क्यों पल्ली बहुत मज़े ले रही थी न...

पल्ली- मैं नहीं हरने वाली..

और फिर पल्ली ने पर्ची निकली जिसमे मेरा नाम था...

Anuj-bhaiya हरा के रहना है इसे..

प Bhabhi-haan लल्ला छोड़ना मत..

साड़ी के साथ साथ भाभी भी अब थोड़ा और खुल गयी थी और खुल कर खेल में हिस्सा ले रही थी..

पल्ली ने दूसरी पर्ची निकली जिसमे व् निकला और फिर तीसरी जिसमे हाथ लिखा था..

Anuj-ab तो तू गयी हाथ से तो हारना hi पड़ेगा..

Palli-dekhte हैं आ जाओ भैया...

पल्ली जोश में जगह पर जाकर कड़ी हो गई और गण शुरू कर दिया मैं भी लुंड को दबाते हुए खड़ा हुआ पर कितना भी दबाओ वो साफ दिख रहा था

मैं पल्ली के पीछे जाकर खड़ा हो गया और फिर अपने हाथ उसकी पीठ पर फिरने लगा... पीठ पर हाथ फिरते हुए... मैं पीछे से उससे सात गया और अपने खड़े लुंड को उसके चूतड़ों की दरार में फंसा दिया...

और हाथ पीठ से सहलाते हुए आगे कमर और पेट पर ले जाने लगा... पल्ली की साँसे थोड़ी भरी ज़रूर हुई लेकिन उसने गण नहीं रोका...

पल्ली के पेट और कमर को टीशर्ट के ऊपर से सहलाते हुए मैं हलके हलके धक्के अपने लुंड से उसके चूतड़ों में माँ रहा था...

पर पल्ली लगातार गए जा रही थी तो ये देखकर भाभी बोल पड़ी- लल्ला कुछ और करो इससे कुछ नहीं हो रहा ये सुनकर मैंने अपने हाथों को थोड़ा ऊपर खिसकाया और हलके हलके से उसकी चूचियों पर टीशर्ट के ऊपर से hi फिरने लगा...

मेरी इस हरकत से जग्गू और भाभी दोनों हैरान रह गए और कभी चची की और तो कभी हमारी और देखते की चची मुझे रोक क्यों नहीं रही हैं..

इधर छूछीयो के दबाये जाने से पल्ली थोड़ा भटक रही थी पर अभी भी उसने गण नहीं छोड़ा था तो मैंने उसे हारने के लिए और थोड़ा दबाव डाला और कास कास के उसकी छूछीयो को गूंथने लगा..





मेरे हाथों से छुछियां मसलने से पल्ली बहकने लगी और गेट हुए रुकने लगी... इधर मेरी हरकत को देखकर भाभी और जग्गू का बुरा हाल था उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की मैं सबके सामने यहाँ तक चची के सामने उनकी लड़की की छूछीयों को मसल रहा हूँ और चची ये सब होने दे रही है एक खेल के नाम पर... और जितनी hi उन्हें हैरानी हो रही थी उससे कहीं ज़्यादा ये सब देखकर उत्तेजित हो राहु थे..

वहीं पल्ली की नरम मुलायम छूछीयो पर मेरे हाथ का कमाल रंग लाया और पल्ली का गण रुक गया जिसके होते hi सबसे पहले ख़ुशी जताई...

अनुज- बहुत बढ़िया भैया मजा आए गया आखिर हार hi गयी ये...

में- लगता नहीं रहा था पर आखिर...

म Chachi-are लगा तो मुझे भी नहीं था पर अंत में हिम्मत हार गयी...

पल्ली- भैया..

इधर जग्गू और भाभी हम सब की खासकर चची की बात सुनकर हैरान थे की उन्होंने इसे इतनी साधारण बात की तरह लिए जबकि उनकी बेटी के उनके hi सामने छुछियां रागादि गयी...

Anuj-ab भैया क्या... हार गयी तो सजा...

जग्गू और भाभी पहले से hi हैरत में थे जो हुआ उसे लेकर ऊपर से एक और धमाका अनुज ने कर दिया सजा का नाम lekar...ab दोनों ये सोचकर परेशां थे की क्या सच में पल्ली सजा पूरी करेगी और अगर करेगी तो क्या चची करने देंगी या खेल रोक देंगी... वैसे इतनी हैरानी के बाद भी कोई नहीं चाहता था की खेल रुके.. क्यूंकि सबकी हवस और उत्तेजना बढाती जा रही थी...

खैर अब सवाल ये था की क्या पल्ली सजा पूरी करेगी भाभी सोच रही थी की पल्ली ने ब्रा भी नहीं पहनी अगर वो टीशर्ट उतारेगी तो पूरी नंगी हो जाएगी ऊपर से...

भाभी और जग्गू के मन में कई सवाल घूम रहे थे..

खैर पल्ली ने अनुज की बात को सुना और फिर मुस्कुराते हुए अपनी मम्मी की तरफ देखा फिर मेरी तरफ और फिर एक नज़र कमरे में सब पर डाली और फिर उसके हाथ उसकी कमर पर पहुँच गए जिसके साथ hi कई लोगो के दिल की धड़कने बढ़ गयी...

और फिर अचानक से पल्ली ने अपने लोअर में हाथ फंसाया और सबको हैरान करते हुए और नीचे की और सरका दिया और जल्दी से दोनों टैंगो से उसे निकल दिया...





इससे पहले कोई कुछ समझ पता लोअर नीचे पड़ा था और सबकी आँखें खासकर जग्गू और भाभी की फटी हुई थी..

भाभी का तो लग रहा था चक्कर खा कर गिर जाएँगी वहीं जग्गू का भी वही हाल था...

पहली बात तो पल्ली ने सबको चौंकाते हुए टीशर्ट की जगह पजामा उतरा और दूसरी जो जग्गू और भाभी के लिए सबसे चौंकाने वाली बात थी की उसके ुरारते hi पल्ली नीचे से पूरी तरह नंगी हो गयी थी हमें तो पता था पल्ली ने चड्डी नहीं पहनी पर भाभी और जग्गू को नहीं पता था जिससे वो पल्ली के नंगे गदराये चूतड़ों को देखकर और चकित थे...

भाभी ने पल्ली को देखा और फिर तुरंत पलट कर चची की तरफ देखा की उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी... चची जो खुद इस खेल से इतनी उत्तेजित हो गयी थी उनके चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कान थी और कुछ नहीं...

जिसे देखकर भाभी और हैरान थी की आखिर चची उनकी बेटी को सबके सामने नंगा क्यों होने दे रही हैं,

फिर पल्ली हलके से हमारी तरफ घूमी जिससे उसकी नंगी छूट भी सबके सामने आ गयी जिसे देखकर जग्गू के मुँह से तो मनो लार टपकने लगी और वो सब भूल गया की ये क्या हो रहा है उसकी नज़रें तो पल्ली की छूट पर टिक गयी...

पल्ली के मुड़ते hi अनुज ने सीटी मरी ख़ुशी से जिससे सबका ध्यान टूटा और फिर पल्ली जैसे कुछ हुआ hi नहीं वैसे hi नंगी आकर अपनी जगह पर बैठ गयी..

में- चलो बोतल घुमाई जाये...

मैंने अपने लुंड को पाजामे के ऊपर से सहलाते हुए कहा...

म चची- हाँ घुमाओ...

जग्गू और भाभी ने भी पल्ली की और तिरछी नज़रों से देखते हुए हाँ कहा... कमरे का माहौल बेहद गरमा गया था...

फिर बोतल घूमी और इस बार अनुज पर जाकर रुकी जिसके रुकते hi पल्ली खुसी से चिल्लाई - बेटे अब आएगा मजा जब तुझे मिलेगी सजा...

अनुज- ऐसे कैसे हारूंगा तो मिलेगी सजा.. नहीं तो मुझे आएगा मज़ा..

म Chachi-are शायरी छोड़ और पर्चियां निकल...

सब थोड़ा हांसे... फिर अनुज ने पहली पर्ची निकली जिसमे जग्गू का नाम निकला...

Me-Jaggu है तेरा दुश्मन...

Palli-bhaiya छोड़ना मत इसे..

जग्गू ने किसी तरह पल्ली के चहरे पर मुश्किल से देखा क्यूंकि नज़रें तो बस छूट पर hi तिकी हुई थी...

Jaggu-haan कोशिश पूरी रहेगी...

और फिर अनुज ने अगली पर्ची निकली जिसमे ी लिखा था और तीसरी जिसमे मुँह लिखा था...

Palli-ab आएगा मज़ा देखते हैं कैसे रोकते हैं... क्यों भाभी?

प भाभी- हैं हाँ हाँ देखते हैं भाभी ने थोड़ा हिचकते हुए कहा वो अब भी थोड़ा सा अचंभित थी इस खेल में जो भी हो रहा था उससे..

म चची- चल अनुज हो जा shuru...jaggu तू भी दिखादे..

Jaggu-haan देखता हूँ कैसे रोकता हूँ...

जग्गू परेशां था की लड़की या औरत होती तो मुँह का प्रयोग कर पता पर अनुज के साथ कैसे करे..

अनुज जगह पर जाकर खड़ा हुआ और गाने लगा.. जग्गू उसके बगल में जाकर खड़ा हो गया और कुछ सोचते हुए उसकी नंगी पीठ पर मुँह से फूंकने लगा... घूम कर कभी पीठ पर फूंकता तो कभी पेट की तरफ... उसे देखकर सब खिलखिलाकर हंसने लगे...

भाभी भी सब कुछ भूल कर हंस रही थी...

पर अनुज का गण नहीं रुक रहा था काफी देर हो गयी थी समय समाप्त होने hi वाला था की जग्गू ने आखिरी कोशिश करते हुए अनुज के कान में फूंकमारी जिससे अनुज तुरंत चौंक कर रुक गया और सब ताली पीटने लगे..

Palli-bahut बढ़िया जग्गू भैया..

म Chachi-akhir में दिमाग लगा लिया तूने..

में- हाँ मुझे तो लगा था गया टाइम...

प भाभी- सही में...

Jaggu-laga तो मुझे भी यही था हे हे हे..

ये कहकर जग्गू अपनी जगह आकर बैठ गया...

Palli-haan अब सजा की बरी...

अनुज- हाँ टोडरता थोड़े hi हूँ सजा से अभी पूरी करता हूँ...

ये कह कर अनुज ने अपने पाजामे में हाथ फंसाया इसके आगे क्या होने वाला था ये हम तो जानते थे पर भाभी और जग्गू नहीं...

अनुज ने बिलकुल साधारण होकर अपने पाजामे को नीचे सरका दिया जिसके सरकते hi उसका खड़ा लुंड स्प्रिंग की तरह उछाल कर सामने आ गया जिससे भाभी और जग्गू दोनों चौंक गए





और अनुज ने बात करते हुए hi जैसे की ये बिलकुल आम बात हो उसे दो तीन बार मुठिया कर छोड़ दिया...

भाभी का तो जैसे गाला hi सूख गया अनुज का खड़ा और लम्बा लुंड देखकर वहीं चची और पल्ली के मुँह में भी पानी आ गया...

जग्गू हैरान था की कितनी आसानी से अनुज सबके सामने पूरा नंगा हो गया है वो कभी सबकी तरफ तो कभी अनुज की और देखता भाभी की नज़र तो अनुज के लुंड पर hi तिकी हुई थी...

और लग रहा था की अब उनकी हवस उनकी शर्म और हिचकिचाहट पर हावी होने लगी थी...

इधर अनुज पूरा नंगा हो कर अपनी जगह पर आ कर बैठ गया...

क्यूंकि अनुज भाभी के सामने की तरफ बैठा था तो भाभी अब भी उसके लुंड पर नज़रें मार रही थी चुप चुप के वहीं जग्गू कनखियों से पल्ली की छूट को देखने की कोशिश कर रहा था...

चची ने सबकी तरफ देखा और फिर मुस्कुरा कर बोलै की चलो बोतल घुमाओ फिर...

एक बार फिर से बोतल घूमी और जग्गू पर आकर रुकी..

जग्गू- ये भी बदला लेती है...

अनुज- हाँ भैया अभी तुमने मुझे हराया न अब तुम्हारी बरी है...

पल्ली- उठाओ फिर पर्ची..

जग्गू ने पर्ची निकली और उसमे चची का नाम निकला... अगली में डी और आखिरी में सीना...

जो जग्गू की हालत थी मुझे नहीं लग रहा था वो गण पूरा गए पायेगा सामने पल्ली की छूट साथ में चची का अधनंगा बदन ...

खैर जग्गू जगह पर गया और गण शुरू किआ उधर चची ने साड़ी के साथ hi अपनी भरी भरकम छूछीयो को उसकी पीठ पर फेरना शुरू किआ जिससे जग्गू पहले hi बहकने लगा फिर चची अगले hi पल आगे आ गयी और उसके सीने पर अपनी छूछीयो को घिसने लगी जग्गू का बुरा हाल होने लगा उसका खड़ा लुंड चची के पेट से टकराने लगा...

और फिर चची ने आखिरी पत्ता खोलते हुए अपनी साड़ी को छूछीयों से हटा कर जग्गू के सीने पर रख दिया चची की नंगी छूछीयो को देखते hi जग्गू का गण रुक गया और गण रुकते hi चची ने फिर से अपनी छूछीयों को धक् लिया......

जग्गू बेचारा हार कर चुपचाप अपने पाजामे को उतरा कच्चे में उसका लुंड तम्बू बना कर खड़ा था जिसे दबाते हुए वो अपनी जगह पर जाकर बैठ गया...

अगली बार बोतल घूमी और इस बार मुझ पर आ कर रुकी...

पल्ली- भैया बड़ी देर से छुपे हुए थे अब आई न बर्री...

में- हाँ यार इस बार पकड़ा गया...

Anuj-to निकालो पर्ची..

अनुज ने अपने खड़े लुंड को सहलाते हुए कहा

पहली पर्ची निकली जिसमे किस्मत से पल्ली का hi नाम निकला...

पल्ली- अब तो भैया पक्का हरे...

म Chachi-acha इतना विश्वास है तुझे... मुझे नहीं लगता की हारेगा वो..

Anuj-mujhe भी नहीं लगता...

प Bhabhi-dekh लेते हैं अभी...

दूसरी पर्ची में बी लिखा था और तीसरी में हाथ...

खैर मैं जगह पर जाकर खड़ा हुआ और गाने लगा... पल्ली मेरे बगल में आई और अपने हाथों को मेरे बदन पर फेरने लगी मुझे थोड़ी सी गुदगुदी हो रही थी पर इतनी नहीं की गण रुके... फिर पल्ली मेरे निप्पल्स को कुरेदने लगी जिसे देखकर सब हंसाने लगे पर मैंने गण नहीं रोका जग उसे कुछ नहीं सूझा तो पीठ पर हाथ फेरते हुए हाथ नीचे लेजाकर पाजामे के ऊपर से hi मेरे चूतड़ों को दबाने लगी मैं बहकने सा लगा गाने से पर फिर भी गण जारी रखा..

पल्ली के हाथों का असर मेरे लुंड पर हो रहा था जो पाजामे में ठुमके मार रहा था जो सबको दिख रहा था...

पल्ली ने काम न बनता देख तरकीब सोची और फिर एक उंगली को मेरी गांड की दरार में घुसा दिया जिससे मैं उछाल पड़ा और गण रुक गया...

पल्ली- बल्ले बल्ले भैया हार गए ..

म Chachi-are वाह बिटिया तूने तो सच में हरा दिया...

Anuj-kya भैया थोड़ा सा टाइम बचा था रुक जाते...

में- क्या करूँ रुका hi नहीं गया...

प भाभी- चलो अब सजा की बरी उतरो कपडा...

भाभी ये बोलकर खुद hi शर्मा गयी... अब उन्हें भी खेल में मज़ा आ रहा था और किसको नहीं आएगा...

म चची- अरे बहुरिया क्यों शर्माती हो खुल के खेलो...

प भाभी- ग चची

और फिर मैंने अपना पजामा नीचे खिसका कर अपने लोहा बन चुके लोडे को आज़ाद किआ...





जिसके बहार निकलते hi कई आहें कमरे में सुनाई दी... एक भाभी की एक पल्ली की और हलकी सी चची की भी हालाँकि तीनो hi मेरा लुंड पहले देख चुकी थी यहाँ तक की चुद भी चुकी थी पर इस खेल ने सबको इतना गरम कर दिया था की खड़े लुंड को नंगा देखकर hi आह निकल जाये...

और आह्हः मेरी थी जो सुकून की थी लुंड को पाजामे से बहार निकल कर जो सुकून मिला था मुझे क्या hi बताऊँ...

खैर मैंने पाजामे को और नीचे खिसका कर पूरी तरह से पैरों से निकल दिया...

पल्ली- मज़ा आ रहा है खेल में... क्यों भाभी...

प भाभी जिनकी नज़र मेरे लुंड पर तिकी हुई थी उन्हें खुद भी पता नहीं था क्या बोल रही है पल्ली की हाँ में हाँ मिले..

Jaggu-aajkal सबने hi कच्चे पहनना छोड़ दिया है क्या...

में- और क्या बीजा कच्चे के खुला खुला लगता है...

मैंने मजाक करते हुए कहा...

में- चलो फिर बोतल घुमाई जाये...

Palli-haan घुमाओ न

पहिए बोतल घुमाई गयी और इस बार चची पर रुकी...

में- अब तुम फांसी चची

म Chachi-are जब सबकी बरी आएगी तो मेरी भी आएगी...

Palli-itani देर बाद आई है...

अनुज- हाँ चची अब पर्चियां निकल कर दिखाओ..

प Bhabhi-haan चची देखें क्या लिखा है...

चची ने पर्ची निकली जिसमे अनुज का नाम था..

Anuj-qre वाह अब देखना मेरा कमाल...

दूसरी पर्ची में ा लिखा था और तीसरी में पेट...

अनुज पढ़ कर कुछ सोचने लगा..

Palli-abhi तो उछाल रहा था अब क्या सोच रहा है अब नहीं दिखायेगा कमाल...

Anuj-haan दिखाऊंगा बस देखती जा...

इधर चची उठी और साड़ी में लिपटे हुए अधनंगे बदन को लेकर जगह पर कड़ी हो गयी और गण शुरू कर दिया अनुज पहले तो उनके सामने गया और अपना नंगा बदन उनके बदन से रगड़ने laga...chachi और अनुज के बीच में बस एक पतली सी साड़ी थी... अनुज का लुंड कभी चची के पेट से टकराता तो कभी उनकी छूट पर ठोकर मरता. जिससे चची थोड़ा मचलती पर गण नहीं रुकता...

अनुज ने कुछ सोचा और फिर चची के पीछे से जाकर चिपक गया और अपने पेट को उनकी पीठ पर घिसने लगा जिससे उसका लुंड चची के दोनों बड़े बड़े चूतड़ों की दरार में घिसने लगा





और चची बहकने लगी अपनी तरकीब को कामयाब होता देख अनुज ने आगे बढ़ने का सोचा और नीचे जाकर एक दो कमर के झटके आगे को और मर्डर जिससे उसका लुंड साड़ी के ऊपर से hi चची की गांड और छूट से टकरा गया और चची की आठ निकल गयी.. ये सब देख कर कमरे के बाकि सब लोग भी बेहद गरम हो चुके थे मैं अपने लुंड को बार बार मसलकर शांत कर

अनुज ख़ुशी से उछाल पड़ा- देखा बोलै था न की मैं चची को हरा दूंगा..

Jaggu-haan भाई तूने कमाल कर दिया...

पल्ली- हाँ मन्ना पड़ेगा...

प Bhabhi-are वो सब तो ठीक है चची अब सजा की बारी...

भाभी की बेसब्री सब समझ सकते थे इसलिए किसी ने कुछ नहीं कहा ताकि वो शर्माएं न ज़्यादा..

म चची- हाँ भाई हरी हूँ तो दंड भी भरूंगी...

और इसी के साथ चची ने अपना हाथ अपनी साड़ी के पल्लू पर रखा जिसके साथ hi सबकी साँसे थम गयी...

क्या सच में चची अपनी साड़ी उतरेंगी भाभी और जग्गू यही सोच रहे थे और दुआ कर रहे the...ki वो ऐसा करें.

चची ने भी ज़्यादा देर इंतज़ार नहीं कराया और धीरे धीरे से साड़ी को अपने बदन से घुमा घुमा कर खोलने लगी हर खोलती हुई परत चची के बदन को नंगा करके हमारे सामने ला रही थी...

और फिर साड़ी उनके बदन से अलग होकर नीचे गिर गयी और चची पूरी नंगी होकर हमारे सामने कड़ी थी...

जग्गू और भाभी का तो मुँह खुला का खुला रह गया शायद उन्होंने सोचा था अंदर चची ने कछहि पहनी होगी... पर यहाँ तो चची पूरी नंगी थी जग्गू तो मुँह से पानी बहा रहा था और उसका हाथ खुद बा खुद अपने लुंड को मसल रहा था ... वहीं भाभी भी मुँह फाड़े देख रही थी और अपनी दोनों टैंगो को चिपकाये हुए बैठी थी...

वहीं सामने चची का पूरा नंगा बदन था हो चमक रहा था...





जिसे देखकर हम सबके hi लुंड झटके मार रहे थे..

वहीं भाभी भी आँखें फाड़ कर चची के गदराये हुए कामुक जिस्म को देख आहें भर रही थी...

सबका बुरा हाल था ये सोचकर की एक मा सब लोगो के सामने जिसमे एक उनकी बेटी भी है बिलकुल नंगी होकर कड़ी है...

ये बात सोच सोच कर भाभी की छूट गीली हो रही थी जिसे वो अपनी दोनों जांघो को घिस कर रहत देने की कोशिश कर रही थी

इधर चची अपनी जगह पर आकर बैठ गयी पर सबकी नज़रें उनपर hi तिकी हुई थी उनके हिलने से उनकी बड़ी बड़ी छुछियां झूल रही थी जो सबकी उत्तेजना को और बढ़ा रहे थे...





पल्ली- चलो भाभी निकालो पर्ची...

प Bhabhi-haan बाबा निकल रही हूँ..

ये कहकर भाभी ने पहली पर्ची उठाई जिसमे मेरा नाम था

Palli-are वाह भैया अब होगी टक्कर...

अनुज- और जीतेगा कौन

म चची- कोई भी जीते हमें तो खेल से मतलब है...

प Bhabhi-bilkul सही कहा चची

और इसके साथ hi भाभी ने अगली पर्ची निकली जिसमे टी था और उससे अगली में था हाथ...

में- चलो ाचा है हाथ से तो काम आसान हो जाता है..

Palli-dekhna भैया कहीं आसान के चक्कर में बजी न पलट जाये...

Me-dekhti जा

भाभी अपनी जगह पर जाकर कड़ी हो गयी और गण शुरू किआ मैं उनके पीछे गया और झुककर अपने दोनों हाथ उनकी मखमली कमर पर रख दिए और धीरे धीरे से घूमने लगा..





भाभी मेरे हाथों के स्पर्श से थोड़ा सा हिचकिचाई पर गण जारी रखा और मैंने अपना काम..

एक तो कमरे में अब तक जो भी हुआ था उससे भाभी पहले से hi बेहद उत्तेजित हो चुकी थी सामने अनुज और चची पूरे नंगे बैठे थे पल्ली नीचे से नंगी अपनी छूट पर हाथ फिरा रही थी...

वहीं बगल में मैं खड़ा था पूरा नंगा मेरा लोढ़ा रह रह कर उनके बदन पर ठोकर मर रहा था जिससे भाभिचुलबुला रही थी...

मैंने अपने हाथों को अब नीचे से ऊपर ले जाना शुरू किआ और धीरे धीरे उनकी छूछीयों की तरफ बढ़ने लगा भाभी की साँसे भरी होने लगी और उनका शरीर सिकुड़ता हुआ सा महसूस हुआ..

कमरे में सबकी नज़रें हम पर तिकी थी जग्गू का तो अपनी भाभी और मुझे देखकर बुरा हाल था वहीं चची और पल्ली नंगी थी उसने तो जो हो रहा था वो कभी सपने में भी नहीं सोचा था..

मेरे हाथ भाभी के ब्लाउज तक पहुंच गए थे और फिर धीरे धीरे से मैंने भाभी की मस्त बड़ी बड़ी छूछीयों को अपने हाथों से ब्लाउज के ऊपर से hi धक् लिए और सहलाने लगा जिसके होते hi भाभी थोड़ा मचलने लगी फिर भी किसी तरह गण जारी रखा मैंने धीरे धीरे से अपने हाथों का दबाव बढ़ाना शुरू किआ और उनकी मदमस्त कोमल बड़ी बड़ी छूछीयों को मसलने लगा भाभी मदहोश होने लगी उनके मुँह से शब्द धीरे धीरे निकलने लगे...

जग्गू हैरान था अपनी भाभी की छूछीयों का मर्दन सबके सामने देखकर मेरा लुंड बार बार पीछे से उनके उभरे हुए चूतड़ों को भेदने की कोशिश कर रहा था जिससे भाभी और गरम हो रही थी कुछ पल बाद मैंने उनकी छूछीयों से एक हाथ को धीरे से हटाया और उनके पेट और कमर पर फिरते हुए नीचे लाया और उनके एक पतीले जैसे चूतड़ पर रख दिया और दबाने लगा भाभी के मुँह से एक आह निकल गयी और मुझे कुछ पता चला जिससे मैं हैरान भी हुआ खुश भी .. भाभी ने पेटीकोट के अंदर कच्ची नहीं पहनी थी मतलब अंदर से वो भी बिलकुल नंगी थी...

ये पता चलते hi मैं संयम खो बैठा और ज़ोर ज़ोर से भाभी की छूछीयों और चूतड़ों को मसलने लगा जिसका नतीजा हुआ की भाभी हवहद उत्तेजित हो गयी और गण तो न जाने कब का रुक गया मैं फिर भी नहीं रुका और उनके शरीर को अपने हाथों से गूंथ रहा था.... भाभी भी मुझे मन नहीं कर रही थी...

पल्ली- भैया जीत तो गए अब छोडो भाभी को...

तब मुझे और भाभी दोनों को कुछ ख्याल आया और मैं भाभी से अलग हुआ... भाभी बुरी तरह से हांफ रही थी मेरा लुंड बिलकुल तन कर ऊपर की और था जिसे छुपानी की बिलकुल भी न कोशिश करते हुए मैं अपनी जगह पर बैठ गया....

भाभी अपनी जगह पर कड़ी हुई लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी...

अनुज- भाभी सजा...

Palli-haan भाभी दंड दो अब..

जग्गू और हैरान परेशां हो गया की क्या भाभी सच में चची और पल्ली की तरह अपने कपडे और उतरेंगी...

इसक जवाब जग्गू को जल्दी hi मिल गया जब भाभू जे नीचे देखते हुए शरमाते हुए अपने हाथ धीरे धीरे उठाने शुरू किये और अपने ब्लाउज पर रखे...

सबकी सांसे थम गयी और सबके हाथ अपने अपने लिंग और योनि को सहला रहे थे और भाभी को देख रहे थे... भाभी ने पहले हुक को पकड़ा और थोड़ा खोलने की कोशिश की पर फिर रुक गयी...

हम सब थोड़ा निराश हुए की क्या भाभी अब आगे नहीं बढ़ना चाहती ..

भाभी ने फिर एक लम्बी साँस ली और अपने हाथों को ब्लाउज के हुक से हटा दिया...

हम सब निराश हो गए की सब सही जा रहा था और अब भाभी रुक गयी.. यहाँ तक की जग्गू भी निराश था उसे भी ये उत्तेजित करने वाला खेल बहुत पसंद आ रहा था भले hi क्यों. न उसकी अपनी भाभी को सबके सामने नंगा होना पड़े.. उसे ये बहुत उत्तेजित कर रहा था और हम सब को भी...

भाभी के हाथ नीचे लटके हुए थे..

म Chachi-are बहुरिया अगर नहीं करना तो रहने दे आजा बैठ जा...

तभी भाभी हम लोगो से दूसरी तरफ मुँह करके कड़ी हो गयी... और पीठ हुनरी तरफ कर्ली और फिर उनके हाथ भी साइड उठकर उनके पेट की तरफ गए जिससे हम बापिस खुस हो गए की शायद भाभी आगे खेलेंगी और उनके ब्लाउज खुलने का इंतज़ार करने लगे तभी अचानक से कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी और सबके यहब तक की मेरा भी मुँह खुला का खुला रह गया...

भाभी वैसे hi हमारी तरफ पीठ करके कड़ी थी और अचानक से उनका पेटीकोट उनकी कमर से नीचे सरका और एक पल में hi उनके पैरों में जा गिरा ऊपर नज़र उठाई तो जान लेवा नज़ारा था भाभी के दोनों बड़े बड़े चूतड़ पूरे नंगे हमारी आँखों के सामने थे..

नीचे से भाभी अब पूरी नंगी जो चुकी थी काछी का नमो निशान नहीं था... मेरे लुंड ने एक दो बूँद रास की छोड़कर उनकी गांड का स्वागत किआ.... वही हाल सबका था जग्गू तो लग रहा घ झाड़ न गया हो भाभी थोड़ा सा झुकी और झुककर अपने पैरों में पड़ा पेटीकोट उठाया





उनके झुकने से भाभी की गांड और बड़ी होकर हमारे सामने आ गयी... अनुज तो जैसे पागल हो रहा था भाभी की गांड देखकर और उसका बस चलता तो अभी जाकर भाभी की गांड में अपना लुंड पेल देता...

पल्ली और चची भाभी के चूतड़ों को देखकर अपनी छूट सहलाते हुए होंठों पर जीभ फिरा रही थी...

इतने में भाभी सीढ़ी होकर पलटी और हमारे सामने उनकी रसीली चिकनी छूट आ गयी एक पल को भाभी वहीं रुकी मनो... हमें उनकी छूट को अचे से देखने का मौका देना चाहती हो और फिर धीरे से आकर अपनी जगह पर बैठ गयी...

सब खामोश थे जो हुआ वो किसी ने नहीं सोचा था सबको लगा था की भाभी अपना ब्लाउज उतरेंगी क्यूंकि उन्होंने अंदर ब्रा पहनी हुई थी पर भाभी ने सबकी सोच के पलट पेटीकोट उतरा और नीचे से पूरी नंगी हो गयी...

शायद ये खेल की उत्तेजना और अभी मेरे द्वारा किये गए उनकी छूछीयों का मर्दन का नतीजा था की भाभी इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की वो जल्दी से नंगी होना चाहती थी.....

भाभी ने अपनी जगह बैठ कर सबकी तरफ देखा तो सब नज़रें उनकी तरफ hi थी खास कर उनकी छूट पर...

प Bhabhi-are अब सब लोग मुझे देखते रहोगे या आगे खेलोगे भी...

खैर आगे खेल शुरू हुआ बोतल घूमी और पल्ली पर जा कर रुकी...

पल्ली ने पहली पर्ची निकली जिसमे अनुज का नाम था...

Anuj-ye हुई न बात..

दूसरी में ी था और तीसरी में मुँह ...

अनुज ये सुनकर खुश हो गया...

और पल्ली से pahle.nanga जाकर जगह पर खड़ा हो गया...

प Bhabhi-are देखो तो बेसब्री को...

भाभी को ऐसे साधारण देख हम सब भी खुश huye...aur खेलमेईन ध्यान लगाया..

म चची- हाँ दोनों कुत्ते बिल्ली की तरह लड़ते hi रहते हैं...

में- बचपन की ाअदत है दोनों की...

खैर पल्ली जगह पर जाकर कड़ी हो गयी.. और गण शुरू कर दिया

अनुज तो जैसे पहले से hi सोच कर आया था की क्या करना है और पल्ली के पीछे जाकर बैठ गया और अचानक से अपना चेहरा उसके चूतड़ों के बीच घुसा दिया और चाटने लगा





जिससे पल्ली की आअह्ह्ह्हह निकल गयी और बाकि लोग भी सब हैरान रह गए.... भाभी का भी मुँह खुला था और बड़े ध्यान से देखते हुए वो दुसरे हाथ से अपनी छूछीयों को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी...

चची अपनी छूट सहलाते हुए अपनी बेटी की गांड चटाई देख रही थी जग्गू भी कच्चे के ऊपर से hi लुंड को सहला रहा था... मैं भी अपने लुंड को मुठियाते हुए देख रहा था...

अनुज लगातार कहते जा रहा था वोजिन पल्ली लड़खड़ाते हुए गए रही थी अभी तक किसी तरह से खुद को संभाले हुए. तह...

कुछ पल बाद hi एक ाः के साथ पल्ली का गण बंद हो गया और वो रुक गयी उसके हाथ पीछे चला गया और अनुज के सर को पकड़कर उसने पीछे से अपनी गांड में दबा दिया और कुछ पल बाद hi उसका शरीर कंपनी लगा और वो झड़ने लगी उसके शरीर को अनुज ने पकड़ कर संभाला और जब पल्ली का झड़ना बंद हुआ तो अनुज ने उसकी छूट का सारा रास चाट लिए और अलग हो गया इधर भाभी के मुँह से भी एक आह निकली उनकी तरफ देखा तो अब उनका हाथ उनकी छूट को सहला रहा था...

कहिअर तूफ़ान थमा तो अनुज अपनी जगह पर आकर बैठा पल्ली ने बिना किसी के बोले hi अपने दंड के अनुसार अपने शरीर पर बचे आखिरी कपडे यानि उसकी t-shirt को भी उतर दिया





जिसके साथ hi पल्ली की संतरे जैसी छुछियां नंगी हो गयी जिन्हे देखकर हम लड़को के क्या भाभी और चची के मुँह में भी पानी आ गया...

जग्गू ने पहली बार देखा था तो वो तो बस उन्ही पर अटक गया...

पल्ली पूरी नंगी होकर अपनी माँ की तरह अपनी जगह आकर बैठ गयी अब माँ बेटी और हम दोनों भाई पूरे नंगे हो चुके थे... भाभी नीचे से नंगी होकर अपनी छूट के दर्शन करवा रही थी और जग्गू ने सिर्फ कच्चा पहना हुआ था...

प भाभी- चलो फिर बोतल घुमाओ आगे...

म Chachi-haan घुमाओ देखो किसकी बरी आती है..

बोतल घूमी और इस बार जग्गू पर आकर रुकी बेचारे को देखकर नहीं लग रहा था की ये गए भी पायेगा पर खेलना तो है hi तो जग्गू ने पर्चियां निकली पहली में चची का नाम था...

अनुज- जग्गू भैया तो गए..

इस पर हंसाने लगे खैर अगली पर्ची में ल था और उससे अगली में होंठ...

खैर जग्गू का हारना तय था क्यूंकि चची के नंगे शरीर को देखकर उसका गण निकलजाये बहुत बड़ी बात थी ऊपर से चची उसे रोकने भी वाकई ठगी तो बस ये देखना था की किस तरह हारता है...

खैर जग्गू अपनी जगह जाकर खड़ा हुआ... और जिम्मात दिखते हुए गण शुरू किया.. चची भी उठकर गयी और सामने जाकर जग्गू की छाती पर चूमा तो उसकी आह्हः निकल गयी...

चची चूमते हुए नीचे की तरफ बढ़ने लगी और जग्गू की साँसे ऊपर की तरफ चची ने उसकी नाभि के पास चूमा तो जग्गू काँप गया और फुर चची नीचे बैठ गयी.. कच्चे में जग्गू का लुंड तन कर ठुमके मार रहा था चची अपने चेहरे को जग्गू के लुंड के सामने ले गयी और फिर धीरे से जीभ निकली और कच्चे के ऊपर से hi लुंड को चाटने लगी...





जग्गू तो जैसे बेहोशी की हालत में जाने लगा... उसका गाला सूखने लगा और गण क्या होता है वो भूल hi गया चची ने कुछ बार और hi अपनी जीभ फिरै थी की जग्गू की एक चीख निकली और फिर उसकी कमर झटके खाने लगी और उसका कच्चा गीला होने लगा.. मतलब वो झड़ने लगा .. चची ने अपनी जीत होते देख मुस्कुरा कर अपना सर पीछे कर लिए और बड़ी शांति से अपनी जगह पर आकर बैठ गयी... जब कच्चे में जग्गू की पिचकारी निकालनी बंद हुई तो वो थोड़ा शांत हुआ पूरा कच्चा भीग गया बेचारे का सब उसकी तरफ देखकर थोड़ा मुस्कुरा रहे थे...

जग्गू ने दंड के तौर पर वही गीला कच्चा उतर दिया... और पूरा नंगा हो गया उसका लुंड वीर्य से सना हुआ था...

म Chachi-are ये गन्दा लेकर hi खेलेगा क्या आगे जा धोके आ इसे... हर जगह टपकता फिरेगा...

सब चची की बात पर खिलखिलाकर हंसने लगे...

जग्गू भाग कर बाथरूम गया और जल्दी से लुंड धोकर अपनी जगह आकर बैठ गया... झड़ने के बाद भी उसका लुंड वैसे hi खड़ा था जी दर्शाता था की वो कितना उत्तेजित था..

म Chachi-chalo बोतल घुमाई भाई

फिर से बोतल घुमाई और मुझ पर आकर रुकी...

Anuj-are भैया पर तो कपडे hi नहीं बचे अब सजा क्या मिलेगी...

पल्ली- हाँ यार...

प Bhabhi-are ऐसा करते हैं जो दुश्मन होगा अगर उसने हरा दिया तो दुश्मन का दिया हुआ एक काम करना पड़ेगा...

म चची- हाँ ये सही रहेगा...

अनुज- हाँ मुझे भी सही लगा..

Palli-haan ठीक तो है..

जग्गू- जैसा सब चाहें..

Me-mujhe. भी कोई परेशानी नहीं है...

पल्ली- तो फिर तय रहा..

चलो भैया पर्ची निकालो...

मैंने पर्ची निकली जिसमे नाम भाभी का निकला

..

Palli-kya बात है भाभी बदले का मौका मिल गया तुम्हे...

प भाभी- और क्या...

पल्ली- हरा के hi रहना...

प Bhabhi-bilkul... चलो लाल पर्ची निकालो अगली...

भाभी पूरे जोश में लग रही थी..

मैंने दूसरी पर्ची निकली जिसमे य था और तीसरी जिसमे नितम्भ लिखा था ..

अब ये मज़ेदार होने वाला था की भाभी के चूतड़ तो नंगे थे और मैं पूरा नंगा था तो भाभी के नंगे चूतड़ मेरे शरीर से चिपकने वाले तव मुझे तो सोचकर hi ाचा लगने लगा.

...

पल्ली- भाभी है कोई तरकीब..

प Bhabhi-are वही सोच रही हूँ

Anuj-sochlo भाभी

मैं चुपचाप अपनी जगह जाकर खड़ा हुआ और गण शुरू किआ तुरंत hi भाभी आई और मेरी तरफ पीठ करके मुझसे चिपक गयी और अपने दोनों चूतड़ों के बीच मेरे लुंड को फंसा लिए मेरी आह निकल गयी... ाः क्या मज़ेदार अनुभव था उसके बाद भाभी मेरे लुंड पर अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे घिसने लगी...





मेरा लुंड उनके चूतड़ों के बीच घिस रहा था जो कभी छूट से टकराता तो कभी गांड के छेड़ से...

मुझे कैसा महसूस हो रहा था ये शब्दों में बयां करना मुश्किल है जग्गू अनुज हुए चची पल्ली सब आँखें चौड़ी कर के देख रहे थे... मैं तो जैसे स्वर्ग में था... भाभी के दोनों चूतड़ों के बीच समाया हुआ मेरा लुंड आह्ह्ह्ह इससे ाचा क्या हो सकता था...

की तभी भाभी थोड़ा आगे को झुक गयी और तेज़ी से ऊपर नीचे होकर अपनी गांड को मेरे लुंड पर घिसने लगी...

अनुज और जग्गू ज़रूर hi मेरी किस्मत से जल रहे होंगे... जो मज़ा मुझे मिल रहा था वो उन्हें नहीं...

मेरी आँखें बंद थी और कमर अपने आप थोड़ा सा हिल रही थी बाकि का सारा काम भाभी के चूतड़ कर रहे थे...

मेरा गण कबका रुक चूका था पर गाने की पड़ी किसको थी न भाभी को ध्यान था न मुझे और नहीं कमरे में किसी को...

भाभी की छूट इतनी गीली हो गयी थी की उसका पानी रह रह कर मेरे लुंड पर घिसते हुए लग रहा था और मेरा पूरा लुंड गीला हो चूका था... भाभी पूरे जोश में थी मैं भी बहकने लगा था भाभी अपनी गांड को पूरा ऊपर उठती और नीचे लती वहीं मैं भी नीचे से अपनी कमर घूमते हुए झटके दे रहा था यूँ hi करते हुए अचानक ऐसा हुआ की मैं कुछ ज़्यादा hi नीचे की तरफ हो गया और जैसे hi भाबी की गांड नीचे आई मेरा लुंड उनकी छूट से टकराया और होंठों को चीरता हुआ अंदर घुस गया...

जिसके साथ hi भाभी की चीख निकल गयी और मेरी आअह्ह्ह्हह वहीं कमरे में भी सबकी साँसे चढ़ गयी...

कुछ पल मैं और भाभी यूँ hi थामे रहे पर फिर अपने आप hi भाभी की गांड उठाने लगी और जैसे hi मेरा लुंड निकलने को हुआ बापिस नीचे हो गयी.. भाभी सब भूल कर की वो कहाँ हैं कैसे हैं अपनी गांड उठाकर मेरे लुंड को अपनी छूट में अंदर बहार करने लगी..





कुछ पल तो मैं बस खड़ा रहा और भाभी को जो करना था करने दिया पर फिर मेरी कमर भी अपने आप चलने लगी और मैं भाभी की कासी हुई छूट में लुंड पेलने लगा...

हमारी हरकतें देखकर कमरे में सब बहुत गर्म हो गए थे और अपने अपने छूट और लुँडो से खेल रहे थे..

इधर मैं और जोश में आ गया और हाथ बढाकर भाभी के ब्लाउज को पकड़ कर खींच दिया जिससे वो हुक टूट कर अलग हो गया भाभी ने उसे अपने बदन से दूर कर दिया ब्रा को भी मैंने पकड़ कर नीचे कर दिया और फिर भाभी की कमर पकड़ कर उन्हें और फिर उन्हें पकड़ कर पीछे से तेज़ तेज़ धक्कों से छोड़ने लगा





हर धक्के के साथ भाभी की आह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह की आवाज़ निकल रही थी...

कमरे में हमारी चुदाई देखकर सब बेहद उत्तेजित हो चुके थे अनुज ने हाथ बढाकर चची का सर पकड़ा और उन्हें अपने लुंड पर झुका लिया चची ने भी अपने होंठों को खोलकर अनुज के सुपडे को मुँह में भर लिए और चूसने लगी.

उन्ही के बगल में बैठी पल्ली दोनों जगह के नज़ारे का लुत्फ़ उठाते हुए अपनी छूट से खेल रही थी... उसके सामने जग्गू भी नज़ारा उठता हुआ दोनों तरफ देख कर अपने लुंड को मसल रहा था...

चची ने एयर जोश में आते हुए थोड़ा सा अनुज की और और बढ़ाया और अनुज के लुंड को अपनी दोनों छूछीयों के बीच फंसा लिए और छूछीयो के बीच से निकलते टोपे को जीभ से चाटने लगी...

अनुज भी नीचे से झटके दे कर चची के मुँह और छूछीयों को छोड़ रहा था...





वहीं कमरे के दूसरी तरफ एक अलग तूफ़ान आया हुआ था मेरे और भाभी के बीच मैं तूफानी रफ़्तार से भाभी को छोड़ रहा था और भाभी भी पूरा साथ डेरे हुए छुड़वा रही थी ये शायद इतनी उत्तेजना का hi असर था की एक इज्जतदार घर की बहु इस तरह से नंगी होकर छुड़वा रही है..

भाभी की उत्तेजना किस चरम पर थी इसका अंदाज़ा हो गया जब भाभी का शरीर कंपनी लगा और वो मेरे लुंड पर झड़ने लगी... बार बार उनकी छूट मेरे लुंड पर कास रही थी और झटके खा रही थी उनका पूरा शरीर ककड़ा जिसे मैंने कसकर थाम लिए और फिर ढीली होकर भाभी नीचे की तरफ झुक कर बैठ गयी जिससे मेरा लुंड उनकी छूट से निकल गया..

भाभी नीचे बैठ कर हांफने लगी पर साथ hi एक हाथ से मेरे लुंड को भी पकड़ लिए जैसे कहीं जाने न देना चाहती हो कुछ पल बाद जब सांसे दुरुस्त हो गयी तो भाभी ने अपना चेहरा लुंड की तरफ आगे बढाकर लुंड को मुँह में ले लिया...

भाभी को लुंड चूसता देख पल्ली जो अब तक अपनी छूट में उंगली कर रही थी उठकर भाभी के बगल में आकर बैठ गई और भाभी को लुंड चूसते हुए देखने लगी





वहीं भाभी मेरी आँखों में देखते हुए मेरा लुंड चूस रही थी......

जैसे hi भाभी ने मेरा लुंड अपने मुँह से निकला तो पल्ली ने लपक कर उसे अपने मुँह में भर लिए...

जिसे देखकर भाभी को थोड़ी हैरानी हुई पर इतनी नहीं की वो वहां से हैट जाएं... ये सब भाभी के लिए बहुत नया था... कहाँ भाभी के साथ उनका पति भी ठीक से चुदाई नहीं करता था कहाँ आज वही भाभी हम सब के बीच नए नए तरह के खेल देख रही थी तो उसी की हिचक भाभी में अब भी थी..

लेकिन उत्तेजना हिचक से कहीं ज़्यादा थी... पल्ली ने मेरा लुंड कई बार चूसा और फिर अपने मुँह से निकल कर भाभी के मुँह की तरफ बढ़ा दिया जिसे भाभी ने पल्ली की आँखों में देखते हुए अपने मुँह में भर लिए...

वहीं कमरे के दूसरी तरफ भी माहौल बदल रहा था अनुज ने चची के मुँह से ोुण्ड निकला और उन्हें पकड़कर बिस्तर पर ले गया और चची को एक करवट लिटा कर उनके पीछे लेट गया और पीछे से hi लुंड को चची की गरम छूट में घुसा दिया...

भाभी और पल्ली को मेरा लुंड चूसते देख साथ hi अनुज को चची की छूट में लुंड पेलते हुए देख कर जग्गू से भी रुका नहीं गया और वो भी अपने बगल में बीएड पर चढ़ गया और हिचकिचाते हुए अपने लुंड को चची की तरफ बढ़ा दिया... चची ने जग्गू के लुंड को देख कर उसकी तरफ मुस्कान दी और फिर करीब खिसका कर अपने सर के पास बिठा लिए और फिर जग्गू के लुंड पर अपने चेहरे को झुका दिया...

चची के होंठों का स्पर्श लुंड पर होते hi जग्गू सिसक उठा और ऐसा लगा की अगर वो थोड़ी देर पहले न झाड़ा होता तो अभी झाड़ जाता चची के गरम मुँह में...

चाची ओस वक़्त दो दो लुन्डों से मज़े ले रही थी या यूँ कहें की दो दो लुंड चची के शरीर में आवाजाही कर रहे थे..





चची अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए दोनों को पूरे मज़े दे रही थी...

उनकी छुछियां अनुज के द्वारा लगाए गए हर धक्के के साथ झूल रही थी...

वहीं मैं तो दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान था...

दो इतनी गरम और कामुक हसीनाएं मेरे लुंड को एक साथ चूसने में लगी हुई थी... दोनों की खूबसूरती और कामुकता का कोई जवाब नहीं था...

मेरे लुंड को चूसते hi एक पल को भाभी और पल्ली के होंठ करीब आ गए जिसका फायदा उठाते हुए पल्ली ने भाभी के होंठों को चूम लिए... भाभी को थोड़ा अजीब लगा पर पल्ली पीछे हटने वालों में से कहाँ थी वो और जोश के साथ भाभी के होंठों को चूसने लगी जिसमे भाभी भी साथ देने लगी...





भाभी के लिए ये शायद पहला hi मौका रहा होगा जब उन्हें किसी औरत या लड़की ने इस तरह चूमा होगा उनके रसीले होंठों को चूसा होगा... औरत के साथ ये करने में अपनी hi तरह किसी लड़की या औरत के होंठों को चूसने में भाभी को बिलकुल नया अहसास मिला इसलिए वो भी खुल कर पल्ली का साथ दे रही थी...

भाभी के लिए ये सब नया था इसलिए पल्ली भाभी को सम्भोग के नए नए आयामों से परिचित करवा रही थी जिससे भाभी भी पूरी तरह से उसका मज़ा ले ...

उम्र में छोटी पल्ली भाभी को बड़े बड़े सबक सीखा रही थी और भाभी भी किसी अचे और तेज़ विद्यार्थी की तरह सब सीखती जा रही थी...

दूसरी तरफ बिस्तर पर जग्गू और अनुज चची के मदमस्त बदन से खेल रहे थे..

चची अब जग्गू को भी वही सेवा दे रही थी जो थोड़ी देर पहले अनुज को दे रही थी.. जग्गू का लुंड अपनी दोनों छूछीयों के बीच फंसा कर उसके सुपडे को जीभ से चाट रही थी...

जग्गू तो माज़र से पागल होता जा रहा था और चची के सर को पकड़ कर नीचे से उनकी छूछीयों को छोड़ रहा था...

उनसे कुछ दूर hi मैं पल्ली और भाभी ने थोड़ा आगे बढ़ने का सोचा था और मैं वहीं चटाई पर जहाँ खेल रहे थे वहीं बोतल और पर्चियां हटाकर लेट गया...

भाभी को पल्ली ने मेरी कमर के डुबो तरफ तंग रख कर खड़ा कर दिया और फिर नीचे बिठा दिया भाभी की छूट में मेरा लुंड फंसा कर जिसपर भाभी धीरे धीरे ऊपर नीचे होकर छोड़ने लगी... वहीं पल्ली भाभी की तरफ चेहरा करके मेरे ऊपर अपनी गोल मटोल चूतड़ रख कर बैठ गयी. मैंने जीभ निकल कर और उसकी छूट और गांड को चाटकर उसका स्वागत किआ...





भाभी मेरे लुंड को अपनी गरम छूट में लेकर उछाल रही थी पल्ली अपनी गांड में मेरी जीभ को महसूस कर कुलबुला रही थी...

दोनों कामुक गदरायी हुई हसीनाएं मेरे से आनंद की प्राप्ति कर रही थी...

मैं पल्ली के भरे हुए चूतड़ों को थामे अपनी जीभ को उसकी गांड की गहराई में घुसा रहा तौर पल्ली कभी अपनी आँखें बंद करके आहें भर्ती तो कभी अपनी छूछीयों को मसल रही

थी...

उसके सामने hi मेरे लुंड पर उछलती हुई भाभी का भी यही हाल था दोनों एक दुसरे की आँखों में देखते हुए ये अद्भुत मज़ा ले रही थी.. आँखों में देखते हुए hi कब उनके चेहरे और होंठ मिल गए पता hi नहीं चला और एक जोश के साथ एक दुसरे के होंठों को और फिर जीभ को चूसने लगी...

साथ hi हाथों से एक दुसरे की छूछीयो को मसलने का काम भी साथ hi हो रहा था...

हमसे थोड़ा सा हैट कर बिस्तर पर अब तस्वीर थोड़ी बदल चुकी थी

अनुज और चची ने जग्गू पर दया करते हुए अब चची की गरम छूट का सुख भोगने का मौका जग्गू को दिया था... जग्गू नीचे लेता हुआ चची की छूट की कारीगरी के मज़े ले रहा था और अपनी किस्मत को शुक्रिया कर रहा था..





वहीं अनुज चची के बगल में खड़ा था और चची अनुज के लुंड पर अपने रसीले होंठों और बलखाती जीभ का जादू चला रही थी...

वहीं उनके बगल में उनसे थोड़ी सी दूर कुछ बदलाव हो रहा था पल्ली मेरे मुँह से उठगयी और भाभी मेरे लुंड से और दोनों ने अपनी जगह एक दुसरे के साथ बदल ली और अब पल्ली ने मेरा लुंड अपनी छूट में समां लिए और भाभी मेरे मुँह पर बैठ गयी... और मैं अपनी जीभ भाभी की अनछुई गांड में घुसा दी...

जिसके साथ hi भाभी मज़े से मचलने लगी... पल्ली मेरे लुंड पर कूदने लगी... मैं तो बस लेते हुए इस आनंद का सुख भोग रहा था..

अनुज ने थोड़ी देर चची से लुंड चुसवाया और फिर चची को जग्गू के लुंड पर उछाला हुआ छोड़ काट बिस्तर से उतर कर हमारे पास आ गया उसकी नियत भाभी पर ख़राब हो रही थी क्यूंकि उसने भाभी को अब तक नहीं चखा था...

अनुज पास में आया और मेरे बगल में खड़ा हो गया वो भाभी और पल्ली दोनों के बीच में खड़ा हो गया पल्ली ने चेहरा आगे कर उसके लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी... कुछ पल चूसने के बाद मुँह से लुंड निकल कर पल्ली ने भाभी की तरफ किआ तो भाभी थोड़ा हिचकिचाई और कभी अनुज तो कभी पल्ली को देखने लगी.. पल्ली ने भाभी को सर हिलाकर अलगे बढ़ने का इशारा किया तो भाभी थोड़ा हिचकिचाहट के साथ आगे हुई और अनुज के लुंड पर जीभ फिरै...

अनुज आह्ह्ह्ह करके रह गया... ऐसा hi भाभी ने फिर से किआ और कुछ पल बाद भाभी का आत्मविश्वास बढ़ता गया और वो अनुज के लुंड को अचे से चूसने लगी और फिर पल्ली ने भी मेरे लुंड पर उछालते हुए hi आगे होकर भाभी के साथ साथ लुंड को चेतना चूसना शुरू कर दिया... मैं भाभी की छूट और गांड दोनों पर जीभ फेर रहा था......

कुछ देर तक दोनों भाभी और पल्ली से लंड चुसवाने के बाद भाभी को मेरे मुँह से उठाया और मेरे बगल में hi लिटा लिए और उनके ऊपर आकर उनकी बड़ी बड़ी छूछीयों को चूसने लगा...

भाभी के मेरे मुँह से हटने पर मैं थोड़ा फ्री हो गया और पल्ली को थोड़ा अपनी और झुका लिया और नीचे से तगड़े धक्कों से उसे छोड़ने लगा.....

वहीं अनुज ने भी भाभी की टंगे खोल दी और फिर बिना किसी देरी के अपना लुंड उनकी छूट में घुसा दिया.. जिसका स्वागत भाभी ने अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की सिसकियों के साथ किआ... और फिर शुरू हो गया चुदाई का खेल ज़ोरदार तरीके से...

अनुज ने भी ज़्यादा देर न करते हुए तगड़ी गति पकड़ ली और भाभी को चीखें निकलने पर मजबूर कर दिया वहीं मैं भी पल्ली की छूट की कुटाई ज़बरदस्त तरीके से कर रहा था...





भाभी पल्ली और चची की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी...

पल्ली को छोड़ने में बहुत मज़ा आ रहा था कुछ तो खास था उसकी छूट में की जितना भी छोड़ लो कासी हुई hi रहती थी... बिल्किल माँ की तरह...

भाबी ने आज यहाँ आने से पहले शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा की ये सब उनके साथ होगा इतनी सी देर में वो दुसरे लुंड से सबके सामने चुद रही होगी...

पर ऐसा सच में हो रहा था... भाभी एक माँ और बेटी ीो साथ चुड़ते देख कर बहुत गरम हो गयी थी ऊपर से अनुज तेज़ी से भाभी को छोड़ रहा था...

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दूसरी तरफ बीएड पर से भी बड़ी तेज़ तेज़ गुर्राने की आवाज़ आ रही थी उधर देखा तो पाया की चची बीएड के किनारे पीठ लार लेती हुई थी और उनके पैरों को ऊपर करके पकड़े हुए जग्गू नीचे खड़ा खड़ा तेज़ी से उन्हें छोड़ रहा था...





चची भी हर धक्के के साथ आठ अह्ह्ह अहह की उत्तेजित करने वाली आवाज़ निकल रही थी... जग्गू चची को ज़ोरदार धक्के के साथ छोड़ते हुए उनकी नाचती हुई छूछीयों को देख कर और उत्तेजित होता जा रहा था...

चची और जग्गू दोनों hi बेहद गरम हो चुके थे और ऐसे स्टार पर पहुँच चुके थे की अब चाहे कुछ भी हो जाये वो चुदाई नहीं छोड़ सकते थे...

कुछ पल बाद जग्गू के धक्के और तेज़ होने लगे साथ hi उसकी हम्म हम्म्म करके गुर्राने की आवाज़ आने लगी...

वहीं चची भी अपनी छूछीयों को मसलते हुए ओह्ह्ह्ह और तेज़ बीटा और तेज़ करके उसे उकसाने लगी और फिर कई तेज़ झटको के साथ जग्गू की ाः निकली और सर ऊपर की और उठ गया और लुंड को उसने जड़ तक चची की छूट में गाड़ दिया और फिर अपने रास की धार छोड़कर चची की छूट को भरने लगा...

वहीं चची भी जग्गू की धार अपनी छूट में महसूस करके और इतनी देर की उत्तेजना से और नहीं रुक पाई और उनका शरीर भी ऐंठने लगा और फिर उनकी छूट ने भी पानी छोड़ जिअ जो जग्गू के रास के साथ मिल कर बहार आने लगा... दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे..

उनकी चीखें सुनकर हम लोगो का ध्यान भी उधर गया तो देखा दोनों झाड़ कर अलग हुए हैं तो पल्ली ने बिस्तर पर चलने को बोलै उधर अनुज भी भाभी को लेकर चल दिया...

बिस्तर पर जाकर पल्ली ने मुझे लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरी तरफ पीठ करके बैठ गयी... वहीं मेरे बगल में अनुज भी मेरी तरह लेट गया और भाभी ने भी पल्ली की नक़ल करते हुए वही आसान अपनाया और अनुज का लुंड छूट में लेकर उछलने लगी...

चची और जग्गू बगल में बैठे हुए हम चारो की चुदाई देखते हुए आराम कर रहे थे...

थोड़ी देर बाद hi बिस्तर पर ज़बरदस्त चुदाई शुरू हो गयी... कुछ देर तो भाभी और पल्ली हमारे लोदों पर उछाल रही थी पर थोड़ी देर के बाद हम दोनों नीचे से सटासट उन्हें छोड़ने लगे...

हर पल के साथ हमारी गति बढाती hi जा रही थी भाभी और पल्ली आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह मा ऐसी सिसकियाँ लगातार ले रही थी...

इधर हम लोग भी बेहद उत्तेजित हो गए थे और अपनी पूरी शक्ति से दोनों को छोड़ रहे थे...

मैंने नीचे से झटके देते हुए अपना एक हाथ पल्ली की छूट पर लेजाकर उसके डेन को रगड़ते हुए दो उंगलियां लुंड के साथ साथ उसकी छूट में घुसेड़ दी जिसका असर ये हुआ की पल्ली ज़्यादा देर टिक नहीं पाई और भर भरा के झड़ने लगी...





वहीं पल्ली की चीख के साथ hi भाभी की चीख भी गूंजी और साथ में अनुज के गुर्राने की आवाज़ भी आई... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाभी...

अनुज भाभी और पल्ली तीनो एक साथ झाड़ रहे थे... मैं भी अपने शिखर के करीब था इसलिए और तेज़ी से पल्ली को छोड़ने लगा जिससे उसका झड़ना और ज़ोरदार हो गया... भाभी और अनुज झाड़ चुके थे और वैसे hi हांफ रहे थे भाभी अब भी अनुज के ऊपर पड़ी थी उसका लुंड अब भी भाभी की छूट में था जिसमे से दोनों का रास रिस रिस कर बहार ा रहा था...

कुछ पल बाद भाभी अनुज के ऊपर से हटकर बगल में लेट गयी मेरी और पल्ली की और बढ़कर..

जैसे hi भाभी हटी और अनुज का लुंड उनकी छूट से निकला चची उठकर आई और तुरंत अनुज का लुंड मुँह में भर लिए और चाटकर साफ़ करने लगी...

भाभी और जग्गू चची को हैरत से देख रहे थे सब कुछ उनके लिए आज नया हो रहा था... वहीं भाभी का ध्यान अब हमारी तरफ था जहाँ पल्ली मेरे ऊपर लेती हुई थी झाड़कर और हांफ रही थी साथ hi मेरे झड़ने के इंतज़ार में थी... मैं नीचे से उसकी छूट की कुटाई कर रहा था और कुछ देर बाद hi मुझे मेरा वीर्य मेरे लुंड में भरता हुआ महसूस हुआ और फिर कुछ तगड़े करारे झटको के बाद मैंने अपने लुंड को जड़ तक पल्ली की छूट में गाड़ दिया और फिर उसे खुद से चिपका लिए और अपने रास की धार उसकी छूट में भरने लगा . आह्हः क्या सुकून मिल रहा था ... एक के बाद एक धार मरता रहा जब तक एक एक बूँद न निचुड़ गयी हो... और फिर पल्ली मेरे ऊपर से सरक गर बगल में लेट गयी मेरा लुंड दोनों के रास से सना हुआ उसकी छूट से निकल गया जिसपर मुझे एक जीभ के रेंगने का एहसास हुआ सर उठाकर देखा तो थोड़ी हैरानी भी हुई और थोड़ी ख़ुशी भी क्यूंकि भाभी चची की देखा देखि मेरा लुंड चाट कर साफ़ कर रही थी जयपर मेरा और पल्ली का रास लगा हुआ था...

वहीं चची ने जैसे hi अनुज का लुंड साफ़ कर लिए वो भाभी के पीछे आ गयी और उनकी टंगे खोलदी इससे पहले भाभी कुछ समझ पति चची की जीभ भाभी की छूट के ऊपर रेंगने लगी जिससे भाभी की एक पल को आँखें बंद हुई पर अगले hi पल याद करते हुए वो मेरे लुंड को साफ़ करने के काम पर जुट गयी.. चची भाभी की छूट से अनुज का रास चाट चाट कर पीने लगी...





वहीं भाभी मेरा लुंड चाटते हुए मज़े से दूभर हो रही थी पहली बार अपनी छूट में किसी औरत की जीभ को महसूस करके पर जैसे hi मेरा लुंड साफ़ सा हुआ पल्ली ने तुरंत मुझे हटा दिया और मेरी जगह लेट गयी और भाभी का सर पकड़ कर अपनी छूट पर झुका दिए.. और भाभी ने भी बिना किसी झिझक के अपना सर झुकाते हुए पल्ली की छूट पर रख दिया और जीभ निकल जार चाटने लगी...

भाभी मन hi कण सोच रही थी क्या दिन है आज का और न जाने क्या क्या दिखायेगा.. भाभी दोनों माँ बेटी के बीच में फांसी ही थी एक तरफ से माँ उनकी छूट चाट रही थी ीोहिं वो बेटी की...

हम तीनो लड़के औरतों के इस आपसी मेल मिलाप का आनंद ले रहे थे दूर से hi.....aise hi कुछ देर और चला और फिर जब भाभी और चची अपने अपने काम से संतोष हो गए तो हैट कर लेट गए सबके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे और कुछ सवाल भीम...

तो क्या थे वो सवाल जानिए अगली अपडेट में... दोस्तों मेगा अपडेट दिया है तो आपसब भी मेगा कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत लम्बी बड़ी म्हणत से लिखी है कमेंट ज़रूए करें... बहुत बहुत शुक्रिया
 
हम तीनो लड़के औरतों के इस आपसी मेल मिलाप का आनंद ले रहे थे दूर से hi.....aise hi कुछ देर और चला और फिर जब भाभी और चची अपने अपने काम से संतोष हो गए तो हैट कर लेट गए सबके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे और कुछ सवाल भीम...

अपडेट 112
सब लोग कुछ देर यूँ hi लेते रहे, चुदाई और खेल की थकान मिटते रहे.. कुछ देर बाद अनुज bola-yaar भूख लग आई...

पल्ली- तू तो है hi भुक्कड़..

म Chachi-are भूख लगी है तो लगी है बढ़ता बच्चा है खायेगा नहीं तो बढ़ेगा कैसे.. जा कुछ बना ले सबके लिए... अनुज क्या खायेगा बच्चा?

में- हलवा हो जाये क्या?

Palli-haan हलवा सही रहेगा गरम चाय के साथ..

जग्गू और भाभी हम लोगो को ऐसे बात करता देख रहे थे पर कुछ बोल नहीं रहे the...shayad झड़ने के बाद और थोड़ी उत्तेजना शांत होने के बाद उनके मन में जो अभी हुआ वो घूमने लगा...

म Chachi-are बहुरिया खायेगी न हलवा की कुछ और बनाएं?

प Bhabhi-haan चची हलवा hi खा लुंगी लाओ मैं hi बना देती हूँ...

म Chachi-nahi चुपचाप बैठ यहाँ पर आज तू काम करने थोड़े hi आई है यहाँ पर.. पल्ली जा बिटिया हलवा बनाले और अनुज जा कर मदद करवा इसकी...

चची की बात सुनकर अनुज और पल्ली नंगे hi उठे और रसोई की तरफ चले गए अनुज जाते हुए पल्ली के गदराये चूतड़ों को मसल रहा था...

भाभी उठी और उठ कर अपने कपडे उठाने लगी तो चची ने उन्हें रोक दिया..

म चची- देख बहुरिया और जग्गू हम जानते हैं की तुम्हारे मन में बहुत कुछ चल रहा होगा.. तो बैठो और ध्यान से सुनो...

प भाभी- क्या चची...

म चची- सब बताती हूँ जग्गू तू भी सुन..

और फिर चची ने उन्हें शुरू से सब बता दिया की कैसे मेरी और उनकी चुदाई हुई और फिर उसमे अनुज और पल्ली कैसे शामिल हुए कबसे हम सब साथ में कर रहे हैं... फिर कर्मा ने जग्गू और तेरे बारे में बताया और फिर हमने तुम्हे भी अपने साथ करने का सोचा और ये सब नाटक किआ...

चची की पूरी बात सुनकर भाभी और जग्गू कुछ देर शांत रहे और कुछ सोचते रहे फिर भाभी बोली

प भाभी- चची मुझे इस बात का तो यकीन हो गया था की ये तुम सब लोग पहली बार तो नहीं कर रहे.. क्यूंकि पहली बार में कोई भी इस तरह से इतनी आसानी के साथ तो ये सब नहीं कर सकता था...

म Chachi-to बता बहुरिया जग्गू तुम दोनों क्या सोचते हो अब ? ऐसा तो नहीं ख्याल है की की कैसी औरत है जो अपनी बेटी के साथ hi अपनी उम्र के आधे लड़को के साथ ये सब करती है...

प भाभी- चची नहीं ऐसा मत सोचो बस सब कुछ बिलकुल नया है तो थोड़ी झिझक है पर तुम्हारे होने से बहुत सहारा मिला.. बाकि रही बात सही गलत की तो अगर तुम गलत हो तो मैं भी हूँ..

में- और चची सही गलत की किसको पड़ी है बस ये देखो की खुश हो की नहीं.. अगर ये सब करके दुखी हो ाचा नहीं लगता तो मत करो पर ाचा लगता है तो सही गलत को छोडो और ज़िंदगी के मज़े लो..

म Chachi-bilkul सही क्यों जग्गू तू क्या कहता है बच्चा?

जग्गू- मैं भी कर्मा की बात से सहमत हूँ और मुझे मज़ा भी आया तो सही गलत से फ़र्क़ hi नहीं पड़ता..

प भाभी- पर इस बात का ध्यान रखना की किसी को पता न चले..

म चची- हाँ बिलकुल... वैसे सब बच्चे समझदार हैं ऐसा कुछ नहीं होगा..

पल्ली- कैसा नहीं होगा माँ..

पल्ली ने रसोई से आते हुए कहा..

म Chachi-are वो सब छोड़ ये बता बना की नहीं हलवा?

पल्ली- ले तो हूँ ये रहा अनुज चाय लेकर आ रहा है...

में- लाओ यार भूख लगी है...

Jaggu-sahi में यार..

में- चुदाई के बाद भूख लग hi जाती है...

मेरी बात सुनकर भाभी शर्माके हंसाने लगी..

Palli-are भाभी अब भी शर्मा रही हो...

अनुज- शर्म तो औरत का गहना होता है..

अनुज हाथ में चाय लेकर आया और सबको देते हुए बोलै..

सब उसकी बात पर हंसाने लगे..

Palli-are पर अभी तो भाभी नंगी हैं तो गहना किस काम का...

Me-ye बात तो है..

प Bhabhi-tum लोग भी न क्या क्या बोलते हो...

म Chachi-are इनका ऐसे hi चलता है बहुरिया तू हलवा खा और देख कैसा बना है..

प भाभी- हाँ चची...

ये कहकर भाभी ने हलवा लिए साथ hi हम सबने भी लिए...

हलवा बकै में बहुत स्वादिष्ट बना था..

प Bhabhi-waah पल्ली बहुत ाचा बना है हलवा तो..

Palli-maine जो बनाया है भाभी..

Anuj-are चल मैंने मदद की है इसलिए...

म Chachi-are तुम दोनों हमेशा शुरू हो जाते हो..

प भाभी- चची दोनों में प्यार ज़्यादा है न इसलिए..

पल्ली- छू प्यार और इससे...

अजीब hi थे दोनों नंगे थे सब अभी पल्ली चूड़ी थी अनुज से और लड़ते ऐसे जैसे एक दुसरे की जान के दुश्मन हो ..

खैर इसी हंसी मज़ाक में सबने हलवा और चाय का मज़ा लिए सब नंगे थे.. भाभी और जग्गू को भी अब कोई हिचक नहीं हो रही थी... खैर हलवा ख़तम हुआ थोड़ी देर बातें चलती रही पर नंगे जिस्मों ने अपना काम करना शुरू कर दिया और गर्मी कमरे में एक बार फिर से बढ़ने लगी... जग्गू ने इस बार पहल करते हुए पल्ली को अपनी तरफ खींच लिए और उसके चेहरे को अपने करीब करके उसके होंठों पर रख दिए ा हुनर उसके रसीले होंठों का रास पिने लगा...

जग्गू की पहल और जोश देखकर बाकि सब में भी जोश भर gaya...aur गरम हो गए...

अनुज ने भाभी को अपनी तरफ खींच लिए और उन्हें अपनी गॉड में बिठाकर पीछे से उनकी छूछीयों को मसलने लगा





भाभी भी बिना किसी भी विरोध के सिसकियाँ लेती हुई अनुज से अपनी छूछीयों को मसलवाने लगी...

भाभी अब पहले से काफी ज़्यादा खुल चुकी थी क्यूंकि अनुज के उन्हें खींचने से लेकर अपनी गॉड में बिठाने तक और फिर उनकी भरी हुई छूछीयों को मसलने तक भाभी ने ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाओ थी... बल्कि उल्टा ऐसा प्रतीत हो रहा था की उन्हें इसमें बेहद मज़ा आ रहा है और वो खुद साथ दे रही थी अनुज का...

वहीं उनके बगल में जग्गू भी पल्ली के होंठों को चूसते हुए पल्ली की खूबसूरत छूछीयों को गूंथ रहा था...

सिर्फ मैं और चची hi बचे थे जो की पल्ली और जग्गू साथ hi भाभी और अनुज की हरकतों से और उत्तेजित होने लगे... खैर मेरा लुंड बुरी तरह से तना हुआ था तो मुझसे भी ज़्यादा सबर नहीं हुआ और मैं भी चची के पास जाकर झुक गया और नीचे बैठ कर उनकी बड़ी बड़ी छूछीयों को एक एक करके मुँह में भरकर चूसने लगा..





म चची- हाँ मेरे लाल ऐसे hi चॉऊस खा जा अपनी चची की छूछीयो को... पि जा इनका सारा दूध... अह्ह्हम्म्म...

चची मेरे सर को अपनी छूछीयों में दबाते हुए बोल रही थी...

मैं उनका जवाब और तेज़ से चूचियों को पीते हुए अहंम ुह्मणं करते हुए दे रहा था एक छुच्छी के रास को पीटा तो दूसरी को मसलता...

वहीं बिस्तर के दूसरी तरफ माहौल काफी गरमा चूका था...

अनुज और जग्गू दोनों hi खड़े थे और उनके सामने भाभी और पल्ली अपने अपने घुटनों पर बैठे हुए थे..

अनुज ने भाभी की दोनों छूछीयों को अपने हाथों से थमा हुआ था और उनकी घाटी में अनुज का लुंड अंदर बहार हो रहा था जिसका टोपा भाभी की बड़ी छूछीयों की घाटी से जब जब निकल रहा था तो भाभी उसे अपने रसीले होठों में फंसा कर चूस रही थी... अनुज के लुंड का सूपड़ा रेल की तरह भाभी की छूछीयों की घाटी से निकलता और उनके होठों की सुरंग में समां जाता





वहीं उनके ठीक बगल में जग्गू और पल्ली भी उसी हालत में थे जग्गू का केला भी पल्ली के मदमस्त संतरों के बीच में घिस रहा था जिसके टोपे के निकलने पर पल्ली बार बार उसे चाट और चूस रही थी...

अनुज- aahhhhhhhhhh भाभी बहुत मज़ा आ रहा है कभी सपने में भी nahiiiiiiiiiiiii सोचा था की तुम्हारीई छुछियां छोड़ने को मिलेंगी अह्ह्ह्हह्हह... जग्गू भैया बहुत मुठियाँ मरी हैं भाभी के नाम की मैंने...

अपनी भाभी के बारे में ऐसी बात सुनकर जग्गू ज़रूर गुस्सा हो जाता अगर और कोई समय होता तो पर अभी तो वो साथ देते हुए बोलै...

जग्गू- हाँ अनुज्ज्ज्ज मैंने भीईईई न जाने कीत्नीईई पिचकारियां छोड़ी हैं पल्ली के नाम की अह्ह्ह्हह क्या गरम दूध हैं आह्ह्ह्ह...

जग्गू और अनुज की बातों का जवाब देते हुए भाभी और पल्ली ने अपनी छूछीयों और होंठों को और कास लिए.....

मैं भी अब आगे बढ़ गया था और खड़ा हुआ था चची मेरे बगल में बैठी हुई मेरा लुंड अपने मुँह में भरकर चूस रही थी और मुझे जन्नत का मज़ा दे रही थी...





में- हाँ चाची आईसीईई hiiiiiiiiiii चूऊओसो.... पूरा लुंड खा जाओ मेराआआह्ह्ह्ह...

चची ने मेरी आँखों में देखते हुए मेरा लुंड मुँह से निकला और फिर मेरी गोलियों को मुँह में भर लिए जिससे मेरी आँखें बंद हो गईं.. चची मेरे ांडो को चूस रही थी... और मैं जन्नत की सैर कर रहा था...

में- आह्ह्ह्हह chachhhhhiiiiiiiiiiii मज़ाहा आआ रहा हैईईई करती राहूऊ....

चची और जोश के साथ मेरी गोलियों को मुँह में भरकर चूसने लगी.. ..

वहीं दूसरी तरफ काफी प्रगति हो चुकी थी...

जग्गू तो आज काफी जोश में था और पल्ली को बिस्तर पर लिटा कर उसका सर बिस्तर से नीचे लटका दिया था और फिर नीचे खड़े होकर झुककर उसके मुँह में अपने लुंड को घुसा के चुसवा रहा था, साथ hi खुद आगे झुककर उसकी छूट चाट रहा था... एक तरह के 69 के आसान में थे दोनों... पल्ली भी हमेशा की तरह पूरे जोश में थी और जग्गू का पूरा साथ देते हुए उसके लुंड से अपना मुख छोडन करवा रही थी...





ठीक उनके बगल में बिस्तर पर hi अनुज ने भाभी को उनकी पीठ पर लिटा लिए और उनके दोनों पैरों को फैलाकर.. खुद बिस्तर से नीचे घुटनो पर बैठ कर उनकी टैंगो के बीच में अपना लुंड भाभी की छूट में फंसकर धीरे धीरे धक्के लगाके भाभी को छोड़ रहा था...

भाभी आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह करती हुई खुल कर छोड़ने का मज़ा लेते हुए अपनी बड़ी बड़ी छूछीयों को मसल रही थी...

अनुज- कसम से भभठियईईईई बहुतत्त मस्त हैईईई tumhariiiiiiiiii छुट्ट्ट्ट अह्ह्ह्ह ऐसा लग रहा है पिघल कर लुंड गिर न जाये तुम्हारी छूट में इतनी गरम छूट है तुम्हारी...

अनुज भाभी को गरम और उत्तेजित करने केलिए जानकार ऐसी उत्तेजित करने वाली बातें करते हुए उन्हें छोड़ रहा था और जिसका असर भी हो रहा था..

प भाभी- आह्ह्ह्ह और छोड़ो छोटे लल्ला अह्ह्ह्ह... क्या बड़ा हथियार है तुम्हाराहहहह अह्ह्ह्ह .. मज़ा आ रहा है...

अनुज- हथियार नहीं भाभी उसे लुंदड़ कहते हैं...

प Bhabhi-haan लल्ला बहुतत्त मस्त लुंडडडड है तुम्हारा... भर दो मेरी चूऊऊत में अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जड़ तक....

बिस्तर के दूसरी तरफ मैंने एयर चची ने भी काफी बदलाव कर लिए थे और अब मैं लेता हुआ था और चची मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर मेरे ऊपर उछाल कूद कर रही थी...





चची की छूट मेरे लुंड पर गज़ब ध रही थी... वैसे कोई तो बात होती है बड़ी उम्र की औरतों में उन्हें छोड़ने का मज़ा hi अलग होता है.. छोड़ने का और साथ hi छुड़वाने का अनुभव उन्हें अधिक होता है जिससे उनकी छूट भी कई कलाएं सीख जाती है जिससे लुंड को और मज़ा मिलता hai...kab छूट की मांसपेशियों को कसना है कब चूतड़ों को घूमना है कब तेज़ उछालना है ये सब चची को पता था और चची उसी अनुभव का पूरा उपयोग करते हुए मुझे और मेरे लुंड को सुख दे रही थी...

Me-aahhhhh अह्ह्ह chachhhhhiiiiiiiiiiii... क्या गज़ब का छोड़तीय हो तुमममममम अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह शहर की बड़ी बड़ी रंडिया भी फ़ैल हैं तुम्हारी इस कारीगरी के आगे... अह्ह्ह्हह्हह...

Anuj-haannnn भैय्यावहः सही कहा मस्त छूट है चची की पर इधर भाभी भी काम नहीं हैंण्ण्ण्न आह्ह्ह्ह लग hi नहीं रहा मैं पहली बार छोड़ रहा हूँ...

म चची- छोडो कमीनो ऑरररर अचे से छोड़ड़ड़ड़ूऊओ न जानिए क्या खा कर तुम्हारी माँ ने अपनी चूऊऊत से निकला था जो इतने बड़े बड़े लोडे लेकर पैदा हुआ...

माँ का नाम सुनकर मैं और अनुज और उत्तेजित हो गए और तेज़ झटके मरने लगे...

जग्गू- सिर्फ माँ hi नहीं बेटीईई भीई उतनी hi चुदक्क्क्कड़द्द है भईईई ाः क्या मज़ाआ देती है.....

जग्गू ने भी अब पल्ली को नीचे लिटा लिए था और ऊपर से उसकी छूट में दनादन धक्के पेल रहा था...

पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह छोड़ सेल और तेज़ धक्के मार... aahhhhhhhhhh देख अनुज तेरी भाभी को कैसे छोड़ रहा hai...ahhh..

जग्गू पल्ली की ऐसे बोलने से और साथ hi अनुज को भाभी की छूट में तूफानी धक्के मरते देख और उत्तेजित हो गया और करारे धक्के लगाने लगा...

अनुज के तेज़ धक्कों से भाभी ज्यादा देर नहीं टिक पाई और अनुज के लुंड पर उनकी छूट ने पानी छोड़ दिया और वो हांफने लगी...

वहीं बिस्तर के दूसरी और मैं अब भी लेता हुआ था और चची मेरे ऊपर थी पर आसान बदला जा रहा था.. चची ने अपना चेहरा मेरे पैरों की तरफ किआ और फिर नीचे होते हुए मेरे लुंड को पकड़ा और फिर अपनी छूट और गांड पर टोपे को एक दो बार घिसा फिर लुंड को लेजाकर अपनी गांड के कैसे हुए छेड़ पर रोक दिया और फिर धीरे धीरे से नीचे होने लगी और मेरा लुंड धीरे धीरे से उनकी मखमली गांड में समता गया... धीरे धीरे से ऊपर नीचे होकर आखिर चची ने मेरा पूरा लुंड गांड में ले लिए





उनकी गांड में लुंड के समाते hi मेरा सबर ख़तम हो गया और मैं चची के गोल मटोल नितम्बों को पकड़ कर नीचे से तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए चची की गांड मरने लगा....

Me-hannn chachhhhhiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह हुण्णं इतनी कासी हुई गांड है tumhariiiiiiiiii साला लगता है पहली बार लुंड घुस रहा है...

म चची- यहीइ तो कमाल है गानन्द का राजाझ कितना बड़ा भीई लुंडडडड ले ले बापिस अपने अकार में आए hi जाती है....

उधर मुझे चची की गांड मरता देख और हमारी बातें सुन जग्गू और उत्तेजित हो गया और उसे लगा की कहीं वो झाड़ न जाये इसलिए उसने खुद को रोका और पल्ली की छूट से लुंड को निकल लिए इधर भाभी भी झड़ने के बाद अनुज के लुंड से फिसल कर बगल में लेट गयी...

और हांफने लगी... जग्गू और भाभी में अभी अनुभव की कमी नज़र आ रही थी पर सीख ज़रूर जल्दी रहे थे...

जब जग्गू ने लुंड छूट से निकल लिए तो पल्ली उठी और अनुज को खली देख उसके पास चली गयी और अपनी मम्मी को देखकर उनकी नक़ल करते हुए अपनी पीठ अनुज की तरफ करके उसके लुंड को पकड़ कर अपनी गांड के छेड़ पर लगा कर बैठ गई और अनुज के लुंड को अपनी गांड में समां lia...aur उछलने लगी...

वहीं माँ बेटी दोनों को हम दोनों भाइयों से गांड मरवाता देख जग्गू और भाभी बिना उत्तेजित हुए न रह सके और जग्गू ने भी अनुज की तरह आसान लिए और भाभी को पीठ करके अपने ऊपर बिठा लिया भाभी ने भी अपने देवर के कड़क लुंड को पकड़ा और उसे अपनी छूट में भिड़ा दिया जिसके बाद जग्गू ने नीचे से धक्का मार्के उसे अंदर धकेल दिया और अपनी गदरायी हुई भाभी को दनादन छोड़ने लगा...





पल्ली और भाभी दोनों बिस्तर पर बैठ कर एक hi तरह के आसान में चुद रही थी बस फ़र्क़ सिर्फ इतना था की पल्ली की गांड में लुंड था और भाभी की छूट में....

Palli-ahhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अनुज आईसीईई hiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह मा देखो न अनुज ने मेरी गांड hi फाड़ दी आह्ह्ह्हह

Anuj-sali तेरी गएआडद है hi आईसीईई की जब तक लुंडडडड डाआआअह्ह्ह्हह दाल कर इसे अचे से कूटो न तब तक चैत्र नहीं मिलताहहह..

पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआअह्ह्ह...

अनुज- साली क्या माह माँ कर रही है... तेरी माँ खुद मेरे भाई से रंडी की तरह गएआडद मरवा रही है... अह्हह्ह्ह्ह वो क्या तुझे बचाएगी...

म चची- हाँ साले मरवा रही हुण्णनं तू भीईईई मार मेरिइइइइ randiiiiiiiiiiiiiii बेटी की गएआडद अपने तगड़े लोडे से.... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह दोनों भाई फाड़ कर रख दो हम माँ बेटीईई की गांड...

हमारी ऐसी बातें सुनकर भाभी और जग्गू और गरम होते जा रहे थे...

प Bhabhi-haan ऑर्डर छोड़ और ज़ोर से छठुड्ड्ढ अपने भड़वे भाई की बीवी कोऊ... ुसस्स सेल से तो कुछः होता नहीं...

जग्गू- उससे कुछ नहीं होता तो क्या हुआ मेरी सहुदड़ो भाभी... मेराआआह्ह्ह्ह लुंदड़ है नाआ तुम्हारी लिए... साडी छूट की गर्मी निकाल दूंगा...

जग्गू ने भाभी की छूट में धक्के लगते हुए कहा...

उनसे थोड़ा सा hi दूर मैं चची की गांड में दनादन लुंड पेल रहा था...





चची और मैं दोनों अपनी अपनी करवट पर एक तरफ लेते थे मैं चची के पीछे था और मेरा लुंड पीछे से hi चची की गांड में अंदर बहार हो रहा था..

चची मेरा लुंड गांड में पाकर बहुत उत्तेजित हो गई थी और अपने एक हाथ से अपनी छूट रगड़ रही थी.... और मुझे और तेज़ी से गांड मरने को उकसा रही थी..

म Chachi-are लल्लाहाहहह मज़ा आ रहा है ऐसे hi पेल अपनी चची की कमीनी गांड को... कूट कूट के इसका भरता बनादे अपने मूसल से... चची दुसरे हाथ से अपनी छूछीयो को मसलते हुए बोली...

मेरी गति चची के उकसाने से और बढाती जा रही थी...

और मेरी जांघें थप थप थप की आवाज़ के साथ चची के चूतड़ों से टकरा रही थी.... जो पूरे कमरे को और संगीत मई बना रही थी...

जहाँ चची और मैं गुदा छोडन का आनंद ले रहे थे वही बिस्तर पर काफी बदलाव आ चूका था...

भाभी जग्गू से हटकर एक बार फिर से अनुज के लुंड पर अपनी छूट पटक रही थी वहीं ...

पल्ली उनके बगल में जग्गू के लुंड पर उछाल रही थी पर अचानक से hi जग्गू ने पल्ली को रोक दिया... पल्ली ने जग्गू की तरफ सवालिया नज़रो से देखा तो जग्गू ने उसे थोड़ा सा उठने का इशारा किआ तो पल्ली जैसे hi ऊपर हुई जग्गू का लुंड पल्ली की छूट से निकल गया और जग्गू ने उसे थमते हुए तुरंत hi टोपे को पल्ली की चपेट से हटाकर पल्ली की गांड के टाइट भूरे छेड़ पर रख दिया.. पल्ली ने मुड़कर जग्गू की तरफ देखा और मुस्कुराई और फिर सीढ़ी होकर जग्गू के लुंड पर अपनी गांड को धीरे धीरे नीचे सरकने लगी...

जग्गू जीवन में पहली बार पल्ली जैसी कासी हुई लड़की की गांड मरने जा रहा था और जैसे hi गांड में लुंड का टोपा पल्ली की गांड के चले में घुसा तो जग्गू का तो पूरा शरीर जैसे अकड़ सा गया... गांड में लुंड घुसाने की सनसनी पाकर जग्गू और आक्रामक हो गया और पल्ली को कसकर पकड़ लिए और नीचे से उसकी गांड में धक्के लगाने लगा... उसने पल्ली के हाथों के नीचे से अपना दोनों हाथ निकल कर गर्दन से पकड़ लिए... और पल्ली की गांड मरने लगा...





जग्गू का ये जोश कुर आक्रामकता देखकर सबका जोश बढ़ रहा था..

जग्गू को अपने लुंड पर पल्ली की गांड बेहद कासी हुई महसूस हो रही थी और जग्गू नीचे से धक्के धक्के लगाकर पल्ली की गांड की कसावट के मज़े ले रहा था...

भाभी भी दोनों माँ बेटी को गांड मरवाता हुआ देख बहुत उत्तेजित हो गयी थी और अनुज के लुंड पर अपनी छूट घुमा रही थी...

इधर मैं चची की गांड की कुटाई कर रहा था... और चची भी हर बढ़ाते पल के साथ गरम होती जा रही थी...

और बड़बड़ा रही थी... म Chachi-ahhhhhhh कुर तेज़ कर्मा आज मेरिइइइइ गांड की धागे खोल के रखदे... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अनुजजज्जजज बाछहाआअ यहां आए...

म चची ने अचानक से अनुज को अपने पास बुलाया तो पहले तो अनुज का ध्यान नहीं गया वो भाभी की चुदाई में मगन था... तभी चची ने दोबारा बुलाया तो भाभी ामूज के ऊपर से उठ गयी और अनुज भाभी की छूट से लुंड निकल कर मेरे कुर चची के पास आ गया...

अनुज को अपने पास खड़ा देख चची ने उसे उसका लुंड पकड़ कर करीब खींच लिए और उसके लुंड को मुँह में भर लिए... और मुझसे गांड मरवाते हुए अनुज का लुंड चूसने लगी...

उधर भाभी भी उठकर हमारे पास आ गयी कुर देखने लगी की चची ने अनुज को क्यों बुलाया है... जग्गू हुए पल्ली बिना किसी रूकावट के लगे हुए थे...

इधर चची जे थोड़ी देर लुंड चूसा और फिर निकल दिया और भाभी को बगल में खड़ा पाया तो उन्हें अपने पास बुला कर एक पल को उनके होंठों को चूसा और फिर उनके चेहरे को पकड़ कर नीचे की तरफ धकेल दिया भाभी भी समझ गयी जल्दी hi...

और नीचे आते हुए चची की छूछीयो को चूमने लगी इधर अनुज ने चची का मुँह खली देख एक बार फिर से लुंड चची के मुँह में घुसा दिया और चची उसे बापिस चूसने लगी...

भाभी चाची की छूछीयों को चूसने के बाद नीचे बड़ी और उनके पेट को चूमते हुए... चची की नाभि में जीभ घुसके चूसने लगी...

भाभी को पहली बार ऐसे किसी औरत का जिस्म चूमने में बहुत मज़ा आ रहा था...

वहीं चची तीन तीन लोगो से सेवा करके आहें भर रही थी मैं लगातार चची की गांड में झटक्व दे रहा था. अनुज लुंड से मुँह छोड़ रहा था और भाभी उनके जिस्म को चाट रही थी...

चची को बहुत मज़ा आ रहा था जो उनके अंग अंग से दिख रहा था.. भाभी नाभि को चाटती हुई थोड़ी और नीचे खिसकी और फिर धीरे धीरे çहाचि की गीली छूट के पास पहुंच गयी और ध्यान से मेरे लुंड को चची की गांड में अंदर बहार होता हुआ देखने लगी... क्यूंकि भाभी झुकी हुई थी तो अनुज ने पीछे से एक हाथ भाभी की गांड पर रखा और उनकी छूट सहलाने लगा.. जिससे भाभी उत्तेजित हो गयी और अपने आप उनके होंठ चची की छूट से टकरा गए और फिर जीभ से चची की छूट को चाटने लगी...





भाभी की जीभ छूट पर पड़ते hi चची सिहर उठी और उनके मुँह से घुटी हुई सिसकियाँ निकलने लगी जो की अनुज के लुंड के मुँह में होने की वजह से घुटी हुई थी... भाभी पूरी लगन से चची की छूट चाट रही थी और चची उतनी hi लगन से अनुज का लुंड अपने गले तक भर के चूस रही थी...

वहीं मैं पूरे मन से चची की मखमली गांड में लुंड पेल रहा था... अचानक से मुझे कुछ सूझा और मैंने चची की गांड मरते हुए अचानक से लुंड निकल लिए और उसे भाभी के मुँह के पास कर दिया.. लुंड को देखते हुए भाभी ने एक बार कुछ सोचा और फिर अपना मुँह खोलकर अपने मुँह में भर लिए और चूसने लगी...





भाभी लुंड चूसते हुए और ये सोचकर बेहद उत्तेजित हो गयी और अपनी छूट में दो उंगलियां घुसेड़ दी की वो किसी की गांड से निकले हुए लुंड को मुँह में लेकर चूस रही हैं एक पल पहले hi जो लुंड चची की गांड में था अब वो मेरे मुँह में है... भाभी ये सोच सोचकर गरम होती जा रही थी और मेरे लुंड को और गहराई तक चूस रही थी... ये जितना गन्दा और अश्लीक काम था भाभी को उतना hi उत्तेजित कर रहा था...

कुछ देर भाभी ने लुंड को चूसा और फिर पकड़कर बापिस चची की गांड पर लगा दिया जिसके बाद का काम धक्का देकर मैंने किआ और उसे अंदर धकेल दिया.. भाभी बापिस चची की छूट चाटने लगी... और मन hi मन सोचने लगी की आज का दिन उन्हें कितना बदल देगा... जिसके बारे में कभी सोच भी नहीं सकती थी वो सब कर रही हूँ और सबसे बड़ी बात की मुझे ाचा भी लग रहा है... ये सब सोचते हुए भाभी चची की छूट चाटती रही...

मैं कुछ देर चची की गांड मरता और फिर लुंड निकल कर भाभी के मुँह में घुसा देता और भाभी भी पूरी तन्मयता से उसे चूसकर बापिस चची की गांड पर रख देती ऐसा मैंने कई बार किआ..

कुछ देर बाद अनुज ने चची के मुँह से लुंड निकला और भाभी को चची की छूट से हटा दिया साथ hi मुझे सीधा होने का इशारा किआ मैं समझ गया और चची को पकड़ कर सीधा लेट गया बिना उनकी गांड से लुंड निकले उधर अनुज हाथ से लुंड को मुठियाते हुए मेरी और çहाचि के पैरों के बीच आया...

भाभी सवालिया नज़रो से ये सब देख रही थी और समझने की कोशिश कर रही थी की ये क्या कर रहे हैं... साथ hi अपनी छूट सहला रही थी...

अनुज ने चची की टैंगो को ऊपर उठाया और फिर पीछे की तरफ मोड़ दिया फिर

जिन्हे मैंने पकड़ लिया और फिर अनुज ने अपना लुंड चची की छूट के ऊपर रखा तो भाभी की नज़रें बड़ी हो गयी वो हैरानी से कभी चची के चेहरे को देखती तो कभी उनकी छूट पर अनुज के लुंड को...

फिर अनुज ने धक्का देकर अपने लुंड को चची की छूट में घुसा दिया जिसके साथ hi चची के मुँह से एक आअह्ह्ह्हह निकल गयी... एयर साथ hi भाभी के मुँह से भी...

आवाज़ सुनकर जग्गू और पल्ली ने भी हमारी तरफ देखा और चची को इस हालत में देखकर जग्गू रुक गया और एक तक हमें देखने लगा पर पल्ली ने उसे हिलाकर उसका ध्यान अपनी तरफ किआ और वो फिर पल्ली की गांड मरते हुए हमें देखने लगा...

अनुज ने पूरा लुंड घुसाने के बाद हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये साथ hi मैं भी नीचे से कमर हिलाकर चची की गांड में लुंड फिर से चलने लगा..





चची तो मज़े के कारन आसमान में थी और अपने हाथ से अपनी छूट के डेन को कुरेदते हुए हम दोनों भाइयों से एक साथ चुद रही थी...

भाभी की तो आँखें हम दोनों के लुंड जो चची की छूट और गांड में अंदर बहार हो रहे थे उसपर लगी हुई थी..

चुदाई का ऐसा मजनार, ऐसा खेल ऐसी हवस की एक औरत एक साथ दो दो लुंड एक छूट में और एक गांड में लेकर चुद रही थी उससे कुछ hi दूर उसकी बेटी गांड में लुंड लेकर गांड मरवा रही थी ... औरत को छोड़ने वाले दोनों लुंड भाइयों के थे जो औरत को चची बोलते थे...

ऐसा मंजर भाभी ज़िन्दगी में पहली बार देख रही थी और इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की तीन तीन उँगलियों से अपनी छूट की प्यास बुझाने की नाकाम कोशिश कर रही थी..

जग्गू पल्ली को उसकी माँ की दोहरी चुदाई देखते हुए घोड़ी बनाकर उसकी गांड मार रहा था...

पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआअह्ह्ह और तेज़ जग्गू भैया और तेज़ देखु कैसे वो दोनों भाई मेरिइइइ माँ की गांड और छूट फाड़ रहे हैं वाईसीएईठहह hiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह मेरिइइइ मारूऊईहहह..

Jaggu-saaliiii तुम दोनों मा बेटटीई एक नंबर की चुड्दाकाड निकलीईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह..

म Chachi-are बाछहाआअ हर औरतट चुदक्क्क्कड़द्द होतियई हैईईई बस अचे और दुमदार लुंड मिलने aahhhhhhhhhh चाहिए... फिर देख औरतट का असली roop...phir चाहे वो तेरी माँ hi क्यों न हो...

जग्गू अपनी माँ का जीकर सुनकर और जोशीला हो गया और इस बात पर सबका hi ध्यान गया खासकर पल्ली और मेरा...

मैं और अनुज एक अछि ले बनाकर चची को छोड़ रहे थे...

अनुज- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह chachhhhhiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्हह छूट कितनी कासी हुई है tumhariiiiiiiiii..

म चची- कमीनो इतने बड़े बड़े दो दो लुंड एक साथ घुसेंगे तो मेरी क्या तुम्हारी माँ की छूट भी कासी हुई लगेगी...

में- आह्ह्हह्ह्ह्ह चची गंडड के तो क्या कहने आअह्हह्ह्ह्ह

इधर अनुज माँ का नाम सुनकर और उत्तेजित हो गया और तगड़े धक्कों से चची की छूट की कुटाई करने लगा...

मैंने भी उसकी ले पकड़ली इस नयी गति से चची का बुरा हाल हो गया और वो ज़्यादा देर झेल नहीं पाई और वहारभारती हुई एक चीख के साथ झड़ने लगी... पर हम दोनों भाई नहीं रुके और उन्हें फिर भी छोड़ते रहे.... कुछ देर बाद अनुज बोलै- भैया चची की गांड मुझे भी मारनी है...

मैंने भी अपने छोटे भाई की इच्छा को पूरा करने के लिए हाँ का इशारा किआ तो अनुज ने चची की छूट से लुंड निकला तभी वो हुआ जो किसी ने सोचा भी नहीं था अनुज ने जैसे hi लुंड निकला तो भाभी जो हमारे बगल में बैठ कर चची की दोहरी चुदाई देख रही थी उन्होंने जल्दी से आगे बढ़कर अनुज का लुंड मुँह में भर लिए और चूसने लगी जो ये दिखा रहा था की भाभी कितनी गरम हो चुकी थी ..

अनुज के हटने पर चची मेरे ऊपर से हटी और मेरा लुंड उनकी गांड से निकल गया जिसके निकलतर hi भाभी ने अनुज का लुंड निकला और फिर मेरे लुंड को मुँह में भर लिए और चूसने लगी.. भाभी का ये जोश और लुंड की प्यास देखकर मुझे बहुत ाचा लग रहा था... भाभी मेरे लुंड से चची की गांड के रास को चाट कर साफ़ करने लगी...

वहीं थोड़ा सा हटके अनुज ने चची को पकड़ा और घुटनो पर बिठाकर आगे झुककर घोड़ी बना लिए और खुद उनके पीछे से जाकर अपना लुंड उनकी गांड में घुसा दिया... चची जो अभी अभी झाड़ के शांत हुई थी एक बार फिर से बहकने लगी... वहीं अनुज बिना किसी देरी के तेज़ी से चची की गांड मरने लगा..





चची एक बार फिर से आअह्ह्ह्हह अह्ह्ह करके अनुज का उत्साह बढ़ा रही थी...

म Chachi-haan आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह आईसीईई hiiiiiiiiiii बेटाःह्ह्ह्हह्ह..

अनुज- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह chachhhhhiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह हुण्णनं लो अपनीईई गंडड में मेराआआह्ह्ह्ह लुंदड़....

यहाँ माँ अपनी गांड मरवा रही थी वहीं बेटी कुछ दूरी पर जग्गू से गांड मरवा रही थी... और जग्गू तो जैसे पल्ली की गांड के पीछे hi पड़ा हुआ था...





जग्गू- हम्म्म्म अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआअह्ह्ह पल्ली क्या गंड़द पाई है तूने.... आह्ह्ह्ह न जाने कबसे मरना चाहता था.. अह्ह्ह आज्ज मिली है साली ली randiiiiiiiiiiiiiii बेटी randiiiiiiiiiiiiiii मा कीइइइइइइ...

पल्ली- तो आज छोड़ न साली मादरचोद.

. निकल ले साडी भड़ास मेरी गांड पर... अह्ह्ह्हह मायआ तो मेरिइइइइ है hi randiiiiiiiiiiiiiii साली देखो कैसे गांड मरवा रही है...

म चची- अह्ह्ह्ह तो तू कौनसी काम है चुदड़ो माँ की चुड्दुओझठ बेटी...

अह्ह्ह्ह ढैय्या रे...

उधर माँ बेटी एक दुसरे से गन्दी और उत्तेजित करने वाली बातें कर रही थी... वहीं भाभी ने जी भर के मेरा लुंड चूस लिए तो दोनों माँ बेटी को गांड मरवाता हुआ देखने लगी...

मैंने भाभी को पकड़ा और पल्ली और जग्गू के बगल में लेजाकर उन्हें खुका दिया और उनके चूतड़ों को ऊपर हवा में उठा दिया जिससे उनकी बड़ी गांड और खुल कर मेरे सामने आ गयी जिस पर झुककर मैंने अपने होंठ टिका दिए और उनकी छूट और गांड पर जीभ फेरने लगा..... भाभी सिसक उठी और हाय दिया लल्ला मर गयी मैं ऐसे आवाज़ें निकलने लगी...

मैं भाभी के गांड के छेड़ पर ध्यान केंद्रित करते हुए उसे चाटने लगा...





मैं अपनी जीभ को नुकीला करके भाभी की गांड में घुसाने लगा जिससे भाभी सिसक रही थी...

प भाभी- हाँ लल्लाहाहहह हाय ऐसे hi...karte राहूऊ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

मैंने एक हाथ का उपयोग करते हुए साथ hi मैं उनकी छूट को भी सहलाने लगा

पूरे कमरे में ठप्प ठप्प और आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह की आवाज़ें आ रही थी...

चची घोड़ी बनाकर थक गयी थी और आगे होकर पेट पर लेट गयी थी अनुज उनके ऊपर पीछे से लेट कर लगातार उनकी गांड मार रहा था...

पल्ली और जग्गू अभी भी उसी आसान में लगे हुए थे...

साथ hi साथ दोनों एक दुसरे को गली देते हुए भड़का रहे थे... जग्गू काफी जोश में आ चूका था और लग रहा था की कभी भी झाड़ सकता है...

इधर मैंने भाभी के गांड जे छेड़ को कुछ देर छठा और फिर मुँह हटाकर पीछे हो गया और उनके चूतड़ों और गांड को देखने लगा... क्या खूबसूरती से बनाई हुई चीज़ थी भाभी की गांड और इस बात का समर्थन मेरे लुंड ने भी किआ भाभी की गांड में सलामी देकर ठुमके मरते हुए... पर असली परीक्षा तो अब थी...

मैंने अपने लुंड को पकड़ा और पीछे से भाभी से सात गया और अपने लुंड को भाभी की छूट और गांड पर घिसने लगा...

भाभी आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह करने लगी ोहिर मैंने लुंड की भाभी की छूट में लेकजार अंदर घुसा दिया और एक धक्का मार कर प्पोरा अंदर धकेल दिया

प Bhabhi-haaye ढैय्या लल्ला आराम से पर मैंने कुछ और hi सोच रखा था और भाभी की कमर को पकड़ा और बहुत तेज़ धक्को से उन्हें कोदंड लगा... इतनी तेज़ की सब लोग रुक कर हमारी तरफ देखने लगे ..

भाभी के मुँह से तो कुछ निकल hi नहीं पा रहा था करीब 4-5 मीन्स तक लगातार उसी तूफानी गति से छोड़ता रहा और फिर अचानक से लुंड निकला और भाभी की गांड के छेड़ पर रख दिया और एक हल्का सा धक्का देकर टोपा अंदर घुसा दिया और भाभी की कमर और गांड को मजबूती से पकड़ लिया..

गांड में टोपा घुसते hi भाभी बिलबिलाने लगी और चीखने लगी...

प Bhabhi-haaaye दिया ammaaaaaaaaaaahhhhhh मार डाला ओह्ह्ह मायआ लल्लाहहहहहह दर्द हो रहा है निकालो आह्ह्ह्हह...

भाभी की चीख सुनकर सब चौंक गए और रुक कर हमारी तरफ देखने लगे.. अनुज और चची ने ध्यान से देखा की भाभी किस वजह से चीखी हैं तो फिर मुस्कुरा कर मुझे आगे बढ़ने का इशारा किआ...

वहीं जग्गू ने जब मेरा लुंड अपनी भाभी की गांड में फॉब्स देखा तो उससे और न सहा गया और वो पल्ली की गांड में झड़ने लगा....

इधर मैं भाभी को शांत करने की कोशिश करने लगा

में- बस हो गया भाभी.. अब दर्द नहीं होगा आराम से लम्बी लम्बी साँसे लो...

प भाभी- nahiiiiiiiiiiiii लल्लाहाहहह हाय निकालो अपने लुंड को बहुत बड़ा है मेरिइइइ गांड फैट जाएगी...

में- कुछ नहीं होगा भाभी बस थोड़ी देर रुको तो सही और ये कहकर मैं उनकी छूट पर हाथ फिरने लगा...

म Chachi-arw बहुरिया कुछ नहीं होगा जब पल्ली ले सकती है तो तू क्यों नहीं थोड़ा ढीला छोड़ बदन को...

भाभी ने लम्बी लम्बी साँसे भरते हुए चची की बात सुनकर अपने बदन को ढीला छोड़ा और कुछ शांत हुई जिसका फायदा उठाते हुए मैंने धीरे धीरे लुंड उनकी गांड में चलना शुरू कर दिया... भाभी को तकलीफ हुई पर उन्होंने मुझे रुकने के लिए नहीं बोलै तो इसका फायदा उठाते हुए मैं धीरे धीरे आधे से ज़्यादा लुंड को उनकी गांड में अंदर बहार करने लगा....





भाभी ने कुछ और नहीं बोलै बस लम्बी लम्बी साँसे भरते हुए आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह कर रही थी... शायद उन्हें अब गांड में लुंड का एहसास ाचा लग रहा था...

इसके आगे क्या हुआ सब अगली अपडेट में कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया
 
भाभी ने कुछ और नहीं बोलै बस लम्बी लम्बी साँसे भरते हुए आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह कर रही थी... शायद उन्हें अब गांड में लुंड का एहसास ाचा लग रहा था...

अपडेट 113

मैं हलके हलके धक्कों से उनकी ुंचुड़ी गांड में अपने लुंड को सैर करने लगा...

जब जग्गू का झड़ना ख़तम हुआ तो वो पल्ली के ऊपर से हैट गया और उसका लुंड पल्ली की गांड से निकल गया और वो बगल में लेट गया... वहीं पल्ली कुछ देर लेट कर अपनी साँसे दुरुस्त करती रही और फिर कमरे में देखा जहाँ एक तरफ अनुज उसकी माँ की गांड की कुटाई कर रहा था और दूसरी तरफ मैं भाभी की गांड खोलने की कोशिश कर रहा था...

पल्ली उठी और उठ कर जल्दी से हमारे पास आ गयी यानि मेरे और भाभी के और भाभी की पीठ को सहलाते हुए हाथ नीचे लेजाकर भाभी की छूछीयों को मसलने लगी जिससे की भाभी का ध्यान थोड़ा बाटे...

मैंने भी अपने धक्के थोड़े तेज़ कर दिए थे और उसके कारन भाभी की सिसकियाँ भी तेज़ होने लगी थी.....

प भाभी- आह्ह्ह्ह ह्म्मम्म्म्म अह्ह्ह्हह लल्लाहाहहह आराम से करतीए रहो...

में- bhabhiiiiiiiiii क्याःह्ह्ह गांड haiiiiiiiiiii आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मन करताआआआ है मार्ताआ hi राहूणंण मख्खन सी गरमममम ..

वैसे भाभी के इस तरह सिसकियों से ये तो पता चल रहा था की उन्हें भी अब गांड मरवाने में मज़ा आ रहा था.. और उनकी गांड भी मेरे लुंड के लिए जगह बनती जा रही थी...

तभी भाभी ने पीछे मुड़कर घुटने दुखने का इशारा किआ तो मैंने कुछ सोचा क्यूंकि किसी भी हालत में मैं अभी भाभी की गांड से लुंड निकलने देना नहीं चाहता था... तो मैंने भाभी को कमर से पकड़ा और एक तरफ को उन्हें लेकर लुढ़क गया हम दोनों एक करवट पर लेट गए और जैसा मैंने सोचा था मेरा लुंड भाभी की गांड से नहीं निकला...

मैंने भाभी की टैंगो को पकड़ कर फैला दिए और साथ hi ऊपर कर दिया जिससे उनकी बड़ी बड़ी गांड और चूतड़ खुल कर सामने आ गए... मैंने भी बिना किसी देरी के भाभी की गांड में लुंड पेलना शुरू कर दिया साथ hi गति भी अछि पकड़ ली क्यूंकि मुझे लगने लगा था की अब भाभी सह सकती हैं...

पल्ली ने जब भाभी की खुली छूट देखि तो वो वहीं बिस्टेर के बगल में बैठ गयी और अपने चेहरे को भाभी की छूट के पास लेकर उनकी छूट को अपने एक हाथ से सहलाने लगी साथ hi उनकी गांड से मेरे लुंड को अंदर बहार होता हुआ भी देख रही थी....





प Bhabhi-haaye लल्लाहाहहह ये क्याःह्ह्ह करररर दिया है तुमने आज मेरे साथ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआअह्ह्ह....

में- वही bhabhiiiiiiiiii जो बहुतत्त पहले तुम्ही करवा लेना चाहिए था.... अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

पल्ली- क्यों भाभी मज़ा आरहा है न गांड में लुंड लेकर...

पल्ली ने भाभी की छूट को सहलाते हुए बोलै...

प Bhabhi-haaye ढैय्या पल्ली अह्हह्ह्ह्ह ऐसा लग रहा हैईईई की बता नहीं saktiiiiiiiiiii सोचती हुण्णनं पहली क्यों nahiiiiiiiiiiiii मरवाली गांडडडड...

भाभी की बात सुनकर दूसरी और से चची बोली जो खुद अनुज से दनादन गांड मरवा रही थी....

म Chachi-are बहुरिया एक बार करवा लेगी तो dobaraaahhhhhhhhhhhhh बिना मरवाये रह hi nahiiiiiiiiiiiii पायेगी...

अनुज- ऑरररर क्याःह्ह्ह bhabhiiiiiiiiii जैसी तुम्हारी गंडड हैईईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह गोल मटोल बड़ी बड़ी उसे तो मरवाना बाँटाआ हैईईई... चाची को hiiiiiiiiiii देखलु...

म Chachi-haan बहुरिया न मरवाओ तो मेरिइइइइइ गांड खुजाने लगती है...

Palli-meri भी...

में- जैसी मटकी जैसीईई गांड होती hi हैईईई लुंड डालके मरने के लिए हीइइइइइइइ..

प Bhabhi-toooo मारूऊईहहह नाआ लल्लाहाहहह आह्हः...

जग्ग्गु- पहली पता होता तो न जानी कितनी बार मार चूका होता भाभी तुम्हारी गड्ड्ढड...

पल्ली- तो अब्ब्ब मार लेना जग्गू भैयाआ दिन भर तुम्हारे पास hi रहती है उठाओ साड़ी और घुसा दो लुंड जब चाहो....

इधर भाभी की गांड मरी जा रही थी तो चची की गांड भी चैन में नहीं थी और अनुज ताबड़तोड़ तरीके से लुंड से उनकी गांड की कुटाई कर रहा था.. उसकी गति से तो यही लग रहा था की वो अपने चरम से ज़्यादा दूर नहीं है





म Chachi-haan आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह आईसीईई hiiiiiiiiiii बेटाःह्ह्ह्हह्ह मार माआआअह्ह्ह मार मकई साआरीई प्यास बुझा आआ अड़े

Anuj-ahhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह chachhhhhiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह हुण्णनं लो आआह्ह्ह्हह्ह सरई खुजलीइइइइइइइ मिटाआ डूंगाआआ...

म Chachi-haan बेटाःह्ह्ह्हह्ह... मेरिइइइ सुखिइइइइ गांड कोऊ अपने रास से सिंचईई करडीई... जोट दे अपनीईई चाची की गंडड का खेत्तत....

Anuj-ahhhhhhhhh chachhhhhiiiiiiiiiiii मेरा हल घपाघप चलल रहा है तुम्हारी गांड के खेत मेंननं बस पनीइ लगने की hi देर हैईईई...

म चची- तो लगादे पानीयी बेटाःह्ह्ह्हह्ह मार दियाए आह्ह्ह्ह हाईए...

ऐसे hi उत्तेजक बातें करते हुए अनुज गुर्राने लगा और çहाचि की गांड में जड़ तक लुंड घुसेड़ कर झड़ने लगा... अपनी गांड में रास की फुहार पड़ती हुई महसूस कर चची भी खुद को न रोक पाई और झड़ने लगी... दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे...

इधर मैं भाभी की ताबड़तोड़ गांड चुदाई कर रहा था...

आसान और गति दोनों hi बदल चुके थे... मैं बिस्तर से पेअर नीचे लटका कर बैठा था भाभी मेरे ऊपर थी और अपने दोनों हाथों को पीछे बिस्तर पर टिका रखा था मेरा लुंड भाभी की गांड में नीचे से बड़ी तेज़ी से अंदर बहार हो रहा था...

भाभी की गांड अब खुल चुकी थी और मैं उसका पूरा मज़ा ले रहा था और बिना किसी रहम के या ये सोचे की भाभी पहली बार गांड मरवा रही है पूरी लगन और गति से धक्के लगा रहा था...





भाभी भी पूरी चुदक्क्क्कड़द्द थी भले hi पहली बार थी पर वो भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रही थी और गांड चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी.. वहीं पल्ली बगल में बैठ कर भाभी की गोल मटोल छूछीयों को चूस कर उनकी उत्तेजना और बढ़ा रही थी...

प Bhabhi-aahhhh ह्म्मम्म्म्म अह्ह्ह्हह लल्लाहाहहह हाय ागररररर पता होताहा की गांड मरवाहाहहने में इतना मज़ाआहहह हैईईई टूओ कबकाआअह्ह्ह्ह मारवाह लेती...

Me-toohhhh अब बी क्या देर हुई हैईईई bhabhiiiiiiiiii... अब से एकककक भीई दिन बिना तुम्हारिई गांड में लुंड जाए मत निकलने देना...

Palli-uhmmmm सच में गांड मरवाने में अलग hi मज़ा आता हैई..

प भाभी- nahiiiiiiiiiiiii लल्लाहाहहह अब तो रोज़ज छोड़ना मेरिइइइइ गांड को... मार मार कर सरीई बेटी समय की कसार निकल लेनाःह्ह्ह...

बाकि सब लोग हमारी चुदाई देख रहे थे और भाभी को इस तरह खुलता देख हैरान भी थे और खुश भी... गांड में एक लम्बा लुंड किसी भी औरत को अचे से खोल सकता है... वही भाभी के साथ हो रहा था...

भाभी उसी उत्तेजना में बहती जा रही थी और एक समय पर अपने चरम पर पहुँच गयी और गांड मरवाने से झड़ने लगी... उनका पूरा शरीर बुरी तरह अकड़ने लगा साथ hi आँखें ऊपर की और चढ़ गयी और आवाज़ तो जैसे मुँह में hi घुट गयी हो कमर तेज़ी से झटके खैर लगी...

मैंने और पल्ली ने उन्हें थामे रखा नहीं तो वो गिर जाती... सब लोग भाभी का इतना तगड़ा स्खलन देख हैरान थे... खैर कुछ समय बाद भाभी थोड़ी शांत हुई और लुढ़क कर एक तरफ गिर गयी मेरा लुंड उनकी गांड से निकल गया वो ज़ोर ज़ोर से साँसे लेने लगी... पल्ली ने मेरा लुंड खली देख अपने मुँह में भर लिए और मेरे लुंड से भाभी की गांड का रास चाटने लगी... कुछ देर यूँ hi चाटने के बाद मैंने पल्ली को पकड़ कर एक करवट पर लिटा लिए और पीछे लेटकर उसकी गांड में लुंड घुसा दिया...

पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैया ऐसे hiiiiiiiiiii मारूऊईहहह अब...

मैं पीछे से पल्ली की गांड मरने लगा तब तक भाबी भी शांत हो गयी थी और पल्ली और मुज्जे देखकर हमारे पास बिस्तर के बगल में बैठ गयी और हाथ बढाकर एक हाथ से पल्ली की छूट को सशलाने लगी ... मैं छोटे छोटे झटको से पल्ली की गांड मार रहा था..





पल्ली- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैया ऐसे hiiiiiiiiiii करते राहू भाभी aahhhhhhhhhh घिसो मेरीए चूऊऊत को अह्ह्ह्हह माहहह ..

भाभी ने आगे चेहरा करके पल्ली के होंठों को अपने होंठ में भर लिए और चूसने लगी पल्ली भी तुरंत साथ देने लगी... और दोनों खूबसूरत हसीनाएं होंठों को चुस्त्र हुए कब एक दुसरे की जीभ चूसने लगी पता hi नहीं चला.

. भाभी का हाथ लगातार पल्ली की छूट पर चल रहा था और मेरा लुंड पल्ली की गांड में लगातार जगह बना रहा था...

बस्स्स थप थप थप थप की आवाज़ आ रही थी साथ hi दोनों को घुटी हुई सिसकियों की जो एक दुसरे के मुँह में घुट रही थी..

खैर कुछ देर में उनके होंठ अलग हुए तो भाभी मेरे चेहरे के पास आई और मेरे होंठों पर अपने रसीले होंठ रख दिए... जिसमे थोड़ा उनका तो थोड़ा पल्ली का स्वाद भी आ रहा था.. मैंने और भाभी ने भी जीभ लड़ाई पर मेरा लुंड लगातार पल्ली की गांड में अंदर बहार हो रहा था... उधर पल्ली ने भाभी का सर पकड़ कर मेरे चेहरे से हटाया और अपनी छूट पर टिका दिया भाभी भी बिना हिचकिचाहट के अपनी जीभ निकल कर पल्ली की छूट चाटने लगी...

पल्ली दोहरे मज़े से हवा में उड़ने lagi...choot में जीभ और गांड में लुंड होने से पल्ली वासना के आस्मां में उड़ रही थी...

Palli-ahhhhhhhhh भाभी भैय्यावहः आईसीईई hiiiiiiiiiii चूऊओसो aahhhhhhhhhh मरूवू मेरिइइइ गँड्ड़डडडडड अह्ह्ह्ह मुम्ममय मैं गयी...

और अगले hi पल पल पल्ली झड़ने लगी मैंने उसके शरीर को कसके पकड़ कर अपने शरीर से चिपका लिए.... वहीं भाभी ने भी कसकर अपने होंठ पल्ली की छूट से और जीभ अंदर दाल कर पल्ली की छूट से निकलता सारा रास चातगयी... एक भी बूँद बहार नहीं जाने दिया पल्ली की तो जैसे जान hi निकल गयी और वो वहीं लेट गयी पर भाभी ने उसे पकड़ कर उठाया और खुद उसकी जगह लेकर लेट गयी.. हाथ नीचे लेजाकर मेरा लुंड पकड़ा और अपनी गांड पर लगाया और चूतड़ पीछे करके टोपा गांड में घुसा लिए.

चची अनुज जग्गू पल्ली मैं भाभी की इस उत्सुकता को देख कर मुस्कुराने lage...ki इतनी गांड मरवणे के बाद और झड़ने के बाद भी भाभी का मन नहीं भरा गांड मरवाने से....

मैंने भी पीछे से पकड़ कर धक्के लगाने शुरू कर दिए और इस बार फुल स्पीड में थप थप थप भाभी की गांड मरने लगा ...भाभी ने पल्ली की जगह ली थी तो पल्ली भी शांत होकर भाभी की जगह आकर बैठ गयी और भाभी की तरह hi उनकी छूट को घिसने लगी जिससे भाभी का मज़ा और बढ़ गया...





मेरे धक्के तूफानी होते जा रहे थे... क्यूंकि मैं भी अब अपने शिकार से ज़्यादा दूर नहीं था...

भाभी- आह्ह्ह्ह ह्म्मम्म्म्म अह्ह्ह्हह लल्लाहाहहह हाय अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह chachhhhhiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह बचाऊऊऊओ...

पल्ली- ुह्मणं मेरीए रंडी भाभी तुम्हे hi गांड मरवाने का शौक़ था न तो अब क्या बचाओ... और तेज़ मारो भैया रंडी भाभी की गांड और भर दो अपने रास से... इतनी खोल दो की dobaraaahhhhhhhhhhhhh लुंड डॉनर में तकलीफ न हो...

में- हांण bhabhiiiiiiiiii लोओओओओह्ह अपनी गांड में अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरा लोढ़ा साआईईई randiiiiiiiiiiiiiii टीरियइ मा कूऊऊऊओ छ्हूओडनणणन..

प भाभी- आह्ह्ह्ह ह्म्मम्म्म्म आआह्ह्ह्हह्ह छहोड़ड़सदस नाहा सआईईई निकाळ ले अपनी सआरईई गर्मीःइइइइइइइ मेरिइइइइइइइ गांड पररररररर दिखा टीरियइ मा की छूछीयों के दूध में कितना दम हैईईईई .....

भाभी और मैं दोनों हो बेहद गरम हो गए थे और एक दुसरे को गली देते हुए भड़कते हुए अपनी हवस दिखा रहे थे...

मुझे अपना रास लुंड में भरता हुआ महसूस होने लगा तो मैंने कास कास के जड़ तक धक्के भाभी की गांड में लगाने शुरू किये और जिसका असर ये हुआ की भाभी उन धक्को के प्रहार को नहीं सह पाई और झड़ने लगी वहीं मैं भी अब अपने चरम पर पहुँच गया और मेरे लुंड ने भाभी की उबचुडी गांड जो अब तो ुंचुड़ी नहीं रही थी उसमे रास की वर्षा शुरू कर दी...... एक के बाद एक न जाने कितनी धारें मेरे लुंड से निकल कर भाभी की गांड में समां गयी... और जब कुछ नहीं बचा तो पल्ली ने मेरा लुंड पकड़ कर भाभी की गांड से निकला और अपने मुँह में भरकर चाट कर साफ़ किआ साथ hi भाभी की दोनों टैंगो को ऊपर की तरफ कर दिया जिससे मेरा रास भाभी की गांड से बाह न जाये...

मेरा लुंड चाट कर साफ़ करने के बाद पल्ली ने अपना ध्यान भाभी की गांड पर लगाया जिसमे से धीरे धीरे बहकर मेरा रास बहार आ रहा था जिसे पल्ली चाटने लगी...





मैं हैट कर साइड में लेट कर आराम कर रहा था वहीं पल्ली भाभी की गांड में जीभ डालकर मेरा तस निकल कर चाट रही थी और पि रही थी... अंत में जब थोड़ा रास बचा तो उसने उसे अपने मुँह में भर लिए और फिर अपने मुँह को भाभी के मुँह से मिला दिया और उनके मुँह में उढेल दिया जिससे भाभी को भी उनकी गांड और मेरे रास का मिला जुला स्वाद मिल सके..

भाभी ने भी बड़े चौ से सब जातक लिए साथ hi पललितके होंठों और जीभ को चूस कर साफ़ कर दिया...

खैर चुदाई का एक और दौर पूरा हो गया था अब सब आराम कर रहे थे भाभी और पल्ली भी एक दुसरे की बाहों में लेट गयी थी मैं उनके बगल में hi थी...

अनुज अह्ह्ह मज़ा hi आ गया ..

अनुज ने अंगड़ाई लेते हुए कहा..

Jaggu-ab तो भाभी की गांड मैं भी मार सकता हूँ...

अनुज- नहीं भैया पहले मैं तुम्हारे तो घर में hi है जब चाहे मार लेना...

प Bhabhi-are अब थोड़ा आराम भी करने दो तुम लोग तो मेरी गांड के पीछे hi पद गए हो...

म Chachi-haan जब तक बहुरिया न चाहे कोई उसकी गांड छुएगा तक नहीं...

प Bhabhi-waise चची कोई छुए न छुए मुझे लगता है मैं hi नहीं रह पाऊँगी बिना मरवाये..

भाभी ये बोलकर हंसने लगी उनके साथ hi सब भी हंसने लगे...

म Chachi-are पल्ली ज़रा पानी पीला दे ...

Palli-laai मम्मी...

Me-mere लिए भी .

Anuj-mere लिए भी..

Palli-acha नौकरानी हूँ मैं तेरी चुपचाप उठकर आ और मेरी मदद कर....

अनुज- अकेले तुझसे कुछ होता भी है...

अनुज उठा और पल्ली के साथ चल दिया दोनों लड़ते झगड़ते जा रहे थे... खैर वो सब के लिए पानी लेकर आये और सबने पानी पिया

पल्ली- अभी भी काफी टाइम बचा है अब क्या करें...

म Chachi-are तुझे अब भी कुछ करना है...

Palli-kyun मम्मी थक गयी क्या?? मैं तो नहीं ताकि... तुम थकी हो भाभी...

प Bhabhi-are अब मज़े के आगे थकावट नहीं देखि जाती... वैसे थकने न थकने का तो लड़को से पूछो थकने के काम तो ये hi करते हैं...

पल्ली,- क्यों लड़को अभी भी बन्दूक में दम बाकि है या गोलियां ख़तम...

में- इसकी गोलियां ख़तम नहीं होती मेरी जान..

Anuj-tu बोल तुझे कितनी गोलियां कहानी हैं..

पल्ली- बीटा तू और तेरी बन्दूक दोनों फ़स हो जाओगे पर मुझे गोलियां नहीं खिला पाओगे..

जग्गू- तुम लोग भी न क्या गोलियां गोलियां लगा रखा है...

में- फिर तुझे क्या लगाना है...

जग्गू- इतनी सुन्दर सुन्दर छूछीयो के होते हुए कुछ और क्या लगाना...

जग्गू ने मुस्कुराते हुए कहा...

प भाभी- आये हाय हमारे देवर बड़े हो गए लगता है...

जग्गू शर्मा गया...

Palli-tum लोग बातों में टाइमपास करो मैं तो लगी काम पर..

और ये कहकर वो मेरे पैरों के बीच बैठ गयी और मेरा लुंड चूसने लगी..

भाभी थोड़ा ऊपर हो गयी और मेरा हाथ चेहरा अपनी छूछीयों में घुसा दिया जिन्हे मैं चूसने लगा...

पल्ली का मुँह पड़ते hi मेरा लुंड मस्त अकड़ गया...

उधर हमें देखकर बाकि लोग भी कहाँ चुप रहने वाले थे..

जग्गू उठ कर आया और मेरे और भाभी के सर के पास आकर खड़ा हो गया और भाभी के होंठों पर अपना लुंड रख दिया जिसे मुँह खोलकर भाभी ने मुँह में भर लिए... और चूसने लगी साथ hi मुझसे अपनी छुछियां भी चुसवा रही थी वहीं नीचे की तरफ पल्ली मेरे लुंड को अपने गले तक ले रही थी...

अनुज भी चची का मुँह छोड़ रहा था...





कुल मिलकर लुंड एक बार फिर से तन चुके थे छूटें गीली हो चुकी थी और माहौल गरमा गया था...

जो आगे आने वाले चुदाई के एक और घमासान खेल के संकेत थे...

पल्ली ने मेरा लुंड अचे से चूसकर गीला किआ और फिर मेरे दोनों तरफ पेअर करके बैठने hi जा रही थी की मैंने उसे रोक दिया...

में- पल्ली रुक ऐसे नहीं....

पल्ली- फिर कैसे?

में- अकेली अकेली चुदाई तो बहुत हो गयी... अब कुछ और किया जायेगा...

प भाभी- क्या??

अपना मुँह जग्गू के लुंड से हटते हुए कहा...

Me-abhi बताता हूँ और ये कहकर मैं उठा और पल्ली से फिर से पर्ची निकलने को बोलै....

उसने पर्चियां बनाई मैंने उनपर कुछ लिखा सब लोग रुक कर मेरी तरफ हैरानी से देख रहे थे...

जब पर्चियां बन गयी तो मैंने सबको देखा और कहा...

में- साधारण चुदाई तो बहुत हो गयी अब होगी टिहरी चुदाई...

पल्ली- टिहरी मतलब...

म Chachi-are एक एक लुंड तीनो छेड़ में...

Palli-are वाह मज़ा आएगा... क्यों भाभी..

प भाभी- यार पता नहीं मैं कर भी पाऊँगी की नहीं मुझे दर सा लग रहा है...

म Chachi-are बहुरिया दर मत कर लेगी तू...

प भाभी- चलो कोशिश तो ज़रूर करुँगी..

में- ये हुई ना बात...

अनुज- भैया फिर वो पर्ची किसलिए...

में- वो हमारे लिए.

Jaggu-humare लिए मतलब...

Me-abhi पता चल जायेगा पहले ये बताओ की सबसे पहले कौन करवाएगा..

पाली- मम्मी की करो वो सबसे बड़ी हैं...

म Chachi-are ये क्या बात हुई पर कोई नई मुझे कोई दिक्कत नहीं है...

हाँ तो पहले चची की बरी अब हम तीनो को इस कटोरी में से पर्ची निकालनी है जिसकी पर्ची में जो छेड़ आएगा वो उसे मिलेगा...

Anuj-haan ये ठीक है

Jagggu-mere लिए भी...

तो हम सबने एक एक पर्ची निकली जिसमे मेरे में छूट लिखा था... जग्गू की में गांड और अनुज को मिला मुँह...

Me-to सब समझ गए न पर शुरू करने से पहले भाभी और पल्ली तुम दोनों चची की छूट और गांड को थोड़ा चाट कर गीला कर दो जिससे कोई परेशानी न हो...

भाभी और पल्ली तुरंत काम पर लग गए और भाभी चची की गांड और पल्ली अपना जन्मस्थान चाटने लगी... चची केयह से सिसकियाँ निकलने लगी...

कुछ देर बाद दोनों अलग हुए तो मैंने नीचे अपनी पीठ पर लेट गया... चची आई और मेरे दोनों तरफ पेअर किये और फिर नीचे होकर अपनी छूट से मेरे लुंड को भिड़ाया और बैठ गयी ..मैंने उन्हें पकड़ कर आगे की और झुका लिए और नीचे से दो चार धक्के लगा कर अपना लुंड चची की छूट में फिट कर लिए...

फिर जग्गू मेरी और çहाचि की टैंगो के बीच आया और घुटनो पर बैठकर अपने लुंड को चची की गांड के छेड़ पर रखा और एक धक्के के साथ अंदर धकेल दिया चची के मुँह से आअह्हह्ह्ह्ह निकल गयी पर अगली सिसकी निकलती उससे पहले hi अनुज ने अपना लुंड उनके मुँह में फंसा दिया... जिसे चची बिना देरी के चूसने लगी..

वहीं नीचे से मैंने धक्के लगाने शुरू किये और जग्गू ने भी मेरी ले पकड़ी और उसी अनुसार धक्के लगाने लगा...

जिस मज़े से चची के मुँह से अनुज का लुंड निकल गया...





म Chachi-ahhhhh आराम बच्चो... अह्ह्ह्हहगह्मह्हह्ज

चची इसके आगे कुछ बोल नहीं पाई क्यूंकि अनुज ने बापिस लुंड उनके मुँह में घुसा दिया था...

भाभी और पल्ली एक दुसरे की छूट सहलाते हुए ये नज़ारा देख रही थी और गरम हो रही थी और अपनी बरी का इंतज़ार कर रही थी...

पल्ली- हाय मेरी माँ कितनी चुदक्क्क्कड़द्द हैईईई एक साथ तीन तीन लुंड ले रही है अपनी बेटी के सामने..

अनुज- तू भी तो तेरी माँ जितनी चुड़क्कड़ है... साली जैसी माँ वैसी बेटी...

पल्ली- तो बेटी को तो माँ जैसा hi होना चाहिए क्यों भाभी...

प Bhabhi-hmmmm बिलकुल होना चाहिए.......

दोनों एक दुसरे की छूट को घिसते हुए और Çहाचि की टिहरी चुदाई देखकर बड़बड़ा रही थी...

उधर हम तीनो चची की जान निकलने पर लगे हुए थे.... चची भी मस्त होकर अनुज के लुंड पर ुघ्हहहह ुघ्हहहह की आवाज़ें कर रही थी....

जग्गू को चची की गांड मरने में बहुत मज़ा आ रहा था एक तो गांड पहले से hi कासी हुई ऊपर से छूट में मेरा लुंड होने की वजह से लुंड और कास के घिसता हुआ अंदर बहार हो रहा था... जिससे जग्गू को एक अलग hi आनंद मिल रहा था...

अनुज पूरी लगन से से चची का मुँह छोड़ रहा था और मुँह क्या यूँ कहें की गले को hi छोड़ रहा था.....

मैं नीचे से चची की दोनों भरी भरकम छूछीयो का भर अपने हाथों में उठाये हुए... उनकी छूट में करारे धक्के लगाए जा रहा था...

करीब 20 मीन्स की धुआंधार टिहरी चुदाई के बाद चची ने हार मान ली और झड़ने लगी... पर ये 25 मीन्स भी काफी आसान नहीं थे वो तो चची थी इसलिए झेल पाई...

खैर चची के झड़ने के दौरान हम उन्हें छोड़ते रहे और जब उनका काम पूरा हो गया तो पहले अनुज ने उनके मुँह से लुंड निकला फिर जग्गू ने गांड से और फिर चची को उठाकर साइड लिटा दिया और वो आराम करने लगी...

में- तो अगला नंबर किसका है?

मैंने भाभी और पल्ली की तरफ देखते हुए पुछा...

Palli-jaogi भाभी तुम पहले..

प भाभी- क्या करूँ दर सा लग रहा है..

Palli-are भाभी डरने की क्या बात है...

प भाभी- फिर भी ऐसा करो तुम जाओ पहले मैं थोड़ी देर और देखूंगी...

पल्ली- ठीक है...

पल्ली ये कहती हुई उठी और भाभी के सामने अपनी गांड करदी जिसपर भाभी ने ढेर सारा थूक अपनी जीभ से लगा दिया...

इधर हमने फिर से पर्चियां निकली तो मेरे हिस्से में पल्ली की गांड आई... अनुज के छूट और जग्गू के मुँह...

अनुज लेता और पल्ली जल्दी से उसके ऊपर चढ़ कर लुंड छूट में लेकर बैठ गयी...

और आगे की तरफ झुक गयी.. मैं पल्ली और अनुज के पैरों के बीच आया और पल्ली के गांड के छेड़ को देखा जो भाभी के थूक से गीला होकर चमक रहा था मैंने बिना किसी देरी के अपने लुंड को उसकी गांड के छेड़ पर रखा और धक्का देकर टोपा अंदर घुसा दिए

पल्ली के मुँह से एक हलकी सी आह्हः निकल गयी... इधर हम दोनों भाइयों ने धीरे धीरे रदम बनाना शुरू भी कर दिया क्यूंकि हमें इतना अनुभव तो आसानी हो गैस था की किस ले और गति से इस तरह की चुदाई करनी होती है.... कुछ hi पल बाद जग्गू ने भी आगे बढाकर पल्ली को चुप करा दिया... और मुँह में लुंड घुसा दिया





भाभी बगल में लेती हुई छूट से खेलती हुई पहले माँ और अब बेटी की टिहरी चुदाई देख रही थी और सोच रही थी की दोनों माँ बेटी कितनी चुदक्क्क्कड़द्द हैं एक दुसरे के सामने hi तीन तीन लुंड लेकर मज़े से चुदाई करवा रही है...

चची भी आराम करती हुई अपनी बेटी को तीन लुंड लेते हुए देख रही थी और शायद गर्वित hi महसूस कर रही होंगी की उनकी बेटी इस उम्र में भी तीन तीन लुंड एक साथ झेल सकती hai...aur पूरे मज़े भी ले सकती है..

मेरा लुंड पल्ली की कासी हुई गांड में घिस घिस कर जा रहा था जिससे मुझे और पल्ली दोनों को hi बहुत मज़ा आ रहा था साथ hi मुझे अपने लुंड पर छूट में अनुज का लुंड भी महसूस हो रहा था... जो मज़े के और बढ़ा रहा था और शायद इसी मज़े के कारन हमारी गति भी बढाती जा रही थी.. और पल्ली की हालत ख़राब होती जा रही थी...

लेकिन वो भी हार मरने वालो में से नहीं थी... मुझे भी गांड मरने में एक अलग hi सुख मिलता है जो अभी मिल रहा था....

अपनी मम्मी की तरह पल्ली भी 20-25 मिनट की धुआंधार चुदाई के बाद हार मान गयी और अनुज के लुंड पर उसकी छूट पानी बहाने लगी उसका शरीर अकड़ने लगा और वो झड़ने लगी... फिर भी अपनी माँ के आस पास तक टिकना पल्ली के लिए बहुत बड़ी बात थी जो उसकी चुड़क्कड़ होने की योग्यता को दर्शाता था..

खैर मैंने पल्ली की गांड से लुंड निकला और जग्गू ने मुँह से और उसे अनुज के ऊपर से हटाकर साइड में लिटा दिया गया..

अब सिर्फ भाभी बची थी और सबकी निगाहें भाभी पर थी और सवाल भी था की क्या सच में भाभी टिहरी चुदाई के लिए राज़ी होंगी...

असमंजस और दर भाभी के चेहरे पर साफ़ दिख रहा था...

अनुज- लो भाई पर्चियां निकालो..

सबने पर्ची निकली तो मेरे हिस्से में भाभी का मुँह आया जग्गू के छूट और अनुज के हिस्से में गांड जिसे पाकर वो बहुत खुश भी हो रहा था...

खैर आगे की ख़ुशी भाभी पर निर्भर करती थी... हमें पर्चियां निकलते हुए भाभी काफी ध्यान से देख रही थी...

म चची- क्या हुआ बहुरिया.. करेगी या नहीं..

प भाभी- दर लग रहा है चची...

Palli-bhabhi तुम hi बोल रही थी की कोशिश ज़रूर करुँगी... तो करके देखलो न हो पाए तो हैट जाना..

पल्ली ने हांफते हुए कहा...

प भाभी- ठीक है तुम सब कहते हो तो...

सब के उकसाने पर भाभी राज़ी हुई और उठ कर झुक गयी चची ने उनके पीछे जाकर उनकी गांड को अपने थूक से गीला कर दिया छूट तो पहले से hi इंतज़ार में गीली थी..

जग्गू अपनी जगह ले चूका था भाभी धीरे धीरे बढ़कर आगे आई और जग्गू के दोनों तरफ पेअर करके उसके लुंड को अपनी छूट पर टिका कर बैठ गयी और जग्गू का लुंड उसकी भाभी की छूट में जड़ तक समां गया...

भाभी थोड़ा आगे को झुकी तो उनकी गांड का छेड़ नज़र आया. और अनुज उनके पीछे बैठ गया... इस पल का वो बहुत बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था...

खैर अनुज ने भाभी के गांड के छेड़ को देखा जो मेरे द्वारा अच्छी खासी कुटाई के बाद भी बापिस अपनी साधारण अवस्था में आ चूका था और बंद हो चूका था... जिसे अनुज को खोलना था dobara..aur इस काम के लिए अनुज बहुत उत्सुक था तो अनुज ने बड़ी ख़ुशी से बिना किसी देरी के अपने लुंड के टोपे को भाभी के कैसे हुए गांड के छेड़ पर टिकाया जिसका एहसास होते hi भाभी ने अपने दांतो को पीस लिए... और शरीर को कास लिए जिसे देखकर अनुज ने भाभी को समझाया - भाभी ऐसे शरीर को कसोगी तो तकलीफ होगी आराम से ढीला छोड़ दो और मज़े लो बहुत मज़ा आएगा...

म Chachi-are सही कहा बचुआ..

सब अनुज के इस ज्ञान को सुनकर हैरान थे खैर भाभी ने कहे अनुसार शरीर को ढीला छोड़ने की कोशिश की और फिर अनुज ने देर न करते हुए सुपडे को भाभी की गांड में फंसा दिया... और भाभी की एक चीख निकल गयी...

पल्ली और चची बगल में आ कर बैठ गयी और भाभी को सहारा दिया समझने लगी... इसी का फायदा उठाते हुए अनुज ने दो तीन तेज़ धक्के लगाकर अपने आधे लुंड को भाभी की गांड में घुसा दिया...

जिससे भाभी को ज़्यादा तकलीफ तो नहीं हुई थी पर उनके शब्दों में कहें तो भरा भरा ज़रूर महसूस हो रहा था...

अनुज ने आधा लुंड घुसा के बहार निकल लिए और फिर अंदर घुसाया और फिर बहार निकला... और ऐसा बार हार करने लगा





वो ऐसे करके भाभी के गांड के छेड़ को खोल रहा था... कहने की बात तो थी की अनुज चुदाई की कला में ाचा कलाकार बनने की दिशा में अग्रसर था उसे वो सब ज्ञान था जो चुदाई के दौरान किसी स्त्री को खुश करने के लिए चाहिए होता है... कारन था काफी परिश्रम और अभ्यास जो वो बहुत करता था..

भाभी के मुँह से बस आराम से आराम से निकल रहा था...

अनुज हर धक्के के साथ लुंड का थोड़ा सा हिस्सा और बढाकर भाभी की गांड में घुसा दे रहा था और कुछ देर बाद hi अनुज का पूरा लुंड भाभी की गांड में समाया हुआ था और भाभी को ज़्यादा तकलीफ भी नहीं हुई थी....

पल्ली - कैसा लग रहा है भाभी...

प भाभी- ऐसा कभी महसूस नहीं किआ बहुत भरा हुआ लग रहा है..

म चची- तकलीफ तो नहीं हो रही...

प भाभी- थोड़ी बहुत पर इतनी खास नहीं की सहन न हो...

म चची- ाचा किआ जो कर्मा ने तेरी गांड पहले मार ली इसलिए खुल गयी है तो तकलीफ नहीं हुई..

पल्ली- हाँ सही कह रही हो मम्मी कर्मा भैया का लुंड भी तो कितना बड़ा है.. पूरा खोल देते हैं गांड को..

Anuj-ab आज्ञा हो तो आगे बढ़ें?

Jaggu-haan भाई बता दो कबसे चुपचाप लेता हूँ...

प Bhabhi-theek है पर आराम से hi करना..

अनुज- ठीक है..

और फिर अनुज और जग्गू दोनों ने hi धीरे धीरे अपनी कमर हिलनी शुरू की और भाभी को छोड़ने लगे...

शुरू में भाभी थोड़ी असहज ज़रूर दिखी पर धीरे धीरे उनकी असहजता आनंद में बदलने लगी... दो लुंड लेने का सुख उनके शरीर को गुदगुदाने लगा...

धीरे धीरे अनुज और जग्गू ने भी अछि ले पकड़ ली और गति को बढ़ाते हुए भाभी को छोड़ने लगे..

प भाभी- आह्ह्ह्ह ह्म्मम्म्म्म आआह्ह्ह्हह्ह छहोड़ड़सदस आआह्ह्ह्हह्ह मज़ाहा आआ रहा हैईईई माआआअह्ह्ह ऐसा मज़ा काभीई nahiiiiiiiiiiiii मिलाः chachhhhhiiiiiiiiiiii अह्ह्ह्हह्हह...

भाभी की बात सुनकर मुझे लगा अब मेरे लिए सही समय है और मैंने अपना लुंड भाभी के होंठों पर रख दिया जिसे उन्होंने देखा और फिर मुँह खोलकर मुँह में भर लिए और चूसने लगी... आखिर भाभी ने भी टिहरी चुदाई का आनंद ले hi लिए...

अनुज- वाआअह bhabhiiiiiiiiii ऐसी गांड हैईईई tumhariiiiiiiiii अब तक क्युन्न्न्नन बचाआ के राखी थीईई आअह्ह्ह्हह बहुत्तत्त मज़ाआ आ रहा हैईईईई..

जग्गू- मैं भी आज एक बार ज़रूर मरूंगा...

Palli-bhaiya अभी छूट पर ध्यान दो....

भाभी के मुँह में मेरा लुंड था इसलिए वो कुछ बोल नहीं सकती थी ..

अनुज और जग्गू ने अपनी गति थोड़ी और बढ़ा दी थी जिससे भाभी का मज़ा और बढ़ गया और उनके मुँह से मेरा लुंड निकल गया और वो सिसकियाँ लेने लगी पर उनका हाथ अब भी मेरे लुंड को मुठिए रहा था..

शायद पहली बार की वजह से भाभी अपना ध्यान तीनो लुंड पर एक साथ नहीं लगा प् रही थी...





जग्गू- आह्हः आज घर सीईए निकलते हुए सपने में भी नहीं सोचायहहह था की ऐसा होगा...

जग्गू ने नीचे से भाभी की छूट में धक्के लगते हुए कहा...

पल्ली- ज़िंदगी कभी भी पलतजाति है भैया और किस्मत कभी भी खुल जाती है... समझलो तुम्हारी खुल गयी...

Anuj-are किस्मतत्तत्त तो मेरिइइइइइ खुललललल गयीईइ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाभी की गांड मारकर अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या माखन जैसी गांड है भाभी...

पर भाभी जवाब नहीं दे पाई क्यूंकि मैंने फिर से अपना लुंड उनके मुँह में घुसा दिया था......

चची और पल्ली दोनों माँ बेटी आराम से लेटकर भाभी की टिहरी चुदाई देख रहे थे...

अनुज और जग्गू की गति बढाती जा रही थी जो मुझे अपने लुंड पर महसूस हो रही थी जितनी तेज़ उन दोनों के धक्के होते भाभी मेरा लुंड उतनी hi तेज़ी से चूसती...

और दोनों को देखकर लग रहा था की वो भी अपने अपने चरम की तरफ चल पड़े हैं... वैसे भी काफी देर से चुदाई कर रहे थे.. इससे पहले चची और पल्ली का भी काम निपटाया था और दूसरा अनुज तो वैसे भी भाभी की गांड पर फ़िदा था तो कैसे रोक पता खुद को ज़्यादा देर...

और दोनों धीरे धीरे हर धक्के के साथ साथ गुर्राने लगे और धक्के भी तगड़े हो गए... पर भाभी को अब कोई तकलीफ नहीं थी और बहुत मज़े के साथ वो दोनों के धक्को का आनंद लेते हुए मेरा लुंड चूस रही थी....

फिर कुछ hi देर बाद जब ये स्पष्ट हो गया की अनुज और जग्गू झड़ने वाले हैं तो भाभी के मुँह से मेरा लुंड निकल गया और भाभी आँखें बंद करके आहें भरने लगी... ..

प भाभी- आह्ह्ह्ह ह्म्मम्म्म्म आआह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआअह्ह्ह ohhhhhhhhhhhh मैंनं गयईईईई..

ऐसी सिसकियाँ भाभी लेने लगी जिसका मतलबब वो भी झड़ने वाली थी...

और कुछ पल बाद hi वो झड़ने भी लगी एक चीख के साथ और उनके झड़ने ने hi लगता है अनुज और जग्गू को उनके चरम पर पहुंचा दिया और वो दोनों भी अपनी अपनी धरा भाभी के छेदों में भरने लगे...

भाभी तो झड़ने के बाद जग्गू के सीने पर गिर गयी और अनुज और जग्गू अपने लुंड को भाभी के अंदर निचोड़ रहे थे...

जब अनुज का झड़ना ख़त्म हुआ तो उसने भाभी की गांड से लुंड निकला और उसके लुंड के निकलते hi भाभी की गांड से अनुज का रास बहकर बहार आने लगा साथ hi भाभी जग्गू के लुंड से भी आगे होकर उठी तो उसका लुंड छूट से निकल गया और उसका रास भाभिब के खुद के रास के साथ मिलकर बहकर बहार आने लगा...





जिसे देखते hi पल्ली और चची फुर्ती में आगे आये और जग्गू से हटाकर भाभी को चची ने अपने मुँह पर बैठा दिया और उनकी छूट चाटकर साफ़ करने लगी... वहीं पल्ली ने अपनी मम्मी के होंठों के पास भाभी की गांड से अपने होंठ चिपका दिए और गांड से बहते रास को चाटने लगी...

चची और पल्ली भाभी की छूट और गांड से रास को ऐसे चाट रही थी जैसे. वो अमृत हो ये दोनों माँ बेटी की छुडास को दर्शाता था की दोनों कितनी छुडासी हैं...

अनुज और जग्गू खिसक कर साइड हो कर बैठ गए मैं पलंग के बगल में खड़ा था... हम तीनो चची और पल्ली को भाभी की छूट और गांड चाटता हुआ देख रहे थे....

और उन्होंने तब तक भाभी को नहीं छोड़ा जब तक वो संतुस्ट न हो गए की अब भाभी की गांड में कुछ नहीं बचा...

तब तक भाभी भी शांत हो चुकी थी.. उनके चेहरे पर भी संतुष्टि के भाव थे पूरे कमरे में बस एक hi इंसान ऐसा था जो असंतुष्ट था और वो था main...kyunki मैं अब तक नहीं झाड़ा था.. जब चची और पल्ली भाभी के पास से हैट गए तो मैंने भाभी को पकड़ा और उन्हें बिस्तर पर ले गया वो मेरा खड़ा लुंड देखकर हैरानी से boli-haaye ढैय्या लल्ला तुम्हारा अभी खड़ा hi है... निकला नहीं तुम्हारा...

में - नहीं भाभी अब तुम निकलोगी..

और मैंने खुद लेटते हुए भाभी को अपने ऊपर खींच लिए भाभी की पीठ मेरी तरफ थी और अपने ऊपर लेने के बाद मैंने हाथ नीचे लेजाकर अपने लुंड को भाभी की गांड में फंसा दिया और बिना किसी देरी के धक्के लगाने लगा... भाभी आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह करने लगी...

क्यूंकि अब मैं झड़ना चाहता था तो मैं अपने पूरे दम ख़म से भाभी की गांड की धज्जियाँ उड़ने लगा... और शायद सच में hi काफी तगड़े धक्के लगाने लगा क्यूंकि एक बार को तो जग्गू ने मुझे रोकने के लिए इशारा किआ पर चची ने उसे रोक लिए... इधर मैं ताबड़तोड़ झटको से भाभी की गांड में लुंड पेल रहा था.. मैंने भाभी का एक पेअर ऊपर की तरफ करके पकड़ रखा था जिससे उनकी गांड मेरे लिए और खुली हुई थी.....

भाभी लगातार आअह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआअह्ह्ह ohhhhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऐसी आवाज़ निकल रही थी पर उनके मुँह से कुछ भी शब्द ठीक से नहीं निकल पा रहे थे...





मैं नीचे से तूफानी गति से भाभी की गांड मार रहा था मैं इतना उत्तेजित हो चूका था की मैं छह कर भी रुक नहीं सकता था ..

ये नज़ारा कमरे में सब देख रहे थे.

पल्ली- आज तो मज़े आ गए भाभी के...

म चची- अरे मज़े तो आ गए पर देख क्या हालत कर दी है मुये ने और अब भी झड़ने का नाम नहीं ले रहा...

Palli-nahi मम्मी अब जल्दी hi झड़ने वाले हैं... इतनी तेज़ भैया तब hi छोड़ते हैं जब उनका निकलने वाला होता है..

उधर ये लोग बातें कर रहे थे और वहीं मैं बिस्तर पर उन सब से बेखबर भाभी की गांड बजा रहा था और फिर एक पल ऐसा आया जब मुझे लगा की मेरा निकलने वाला है तो मैंने किसी तरह खुद को रोका और भाभी को अपने ऊपर से उठाकर नीचे बिठा दिया और उनके मुँह में लुंड घुसा दिया ये सब इतनी जल्दी में हुआ की भाभी को कुछ प्रतिक्रिया करने का मौका hi नहीं मिला और मुँह में लुंड घुसते hi मैंने वीर्य की धार उनके मुँह में छोड़नी शुरू कर दी जिससे भाभी का मुँह भरने लगा पर उन्हें जैसर hi समझ आया वो सारा रास गटकने लगी न जाने कितना रास मेरी गोलियों से निकला और भाभी उसकी एक एक बूँद पि गयी... और जब आखिरी बूँद भी निचोड़ ली तो मेरी आँखों में देखते हुए मेरे टोपे को चूसने लगी..





और कुछ देर बाद उसे मुँह से निकल दिया मैं तो बिस्तर पर पसर गया वहीं भाभी तेज़ तेज़ सांसे ले रही थी बैठे बैठे.. मेरे रास की कुछ बूंदे जो भाभी के होंठों से बहकर बहार आ गयी थी वो उनके गाल पर चिपकी हुई अब भी दिख रही थी...

जिसे ज़्यादा देर भाभी ने रहने नहीं दिया और उंगली से पांच कर चाट लिए...

इसके बाद वो भी लेट गयी...

म चची- थका दिया न बेचारी बहुरिया को इतनी तेज़ मरी गांड...

पल्ली- मम्मी ज़्यादा बनो मत मन तो तुम्हारा भी कर रहा था की भाभी की जगह तुम होती...

म चची- तू चुप कर...

सब बैठ कर आराम hi कर रहे थे की मेरा फोर बजा देखा तो पापा का था मैंने सबको चुप रहने का इशारा किआ और फ़ोन उठाया....

पापा ने कुछ काम बोलै और उसके बाद फ़ोन रख दिया...

में- चल अनुज जाना होगा पापा ने बुलाया है...

अनुज- पर पापा तो मौसा के साथ गए हैं न...

में- हाँ वहीं जाना है मौसी और माँ को लेकर..

म Chachi-kya हुआ बचुआ सब ठीक तो है न...

में- हाँ चची सब ठीक है बस कुछ ज़मीन जो मौसी के नाम थी उसके लिए उनके हस्ताक्षर लगेंगे... माँ को भी बुलाया है...

म चची- ठीक है जाओ तुम दोनों आराम से..

जग्गू- हम भी निकलते हैं भाभी..

प भाभी- भैया मेरे बस की नहीं है अभी कहीं जाना.

म चची- ऐ जग्गू तुझे जाना है तो जा.. बहुरिया को आराम करने दे शाम को आ जाएगी पल्ली के साथ...

जग्गू- ठीक है चची भेज देना...

इसके बाद मैं जग्गू और अनुज निकल गए चची के यहाँ से कपडे पहन कर... घर पर आया तो देखा माँ और मौसी पहले से hi तैयार थे जाने के लिए... तब तक अनुज भी किसी दोस्त से एक मोटरसाइकिल और मांग लाया एक तो अपनी थी तो हम लोग चल पड़े.. जग्गू को बाघ में नज़र मरने को मैंने बोल hi दिया था...

मैंने माँ को बिठाया और अनुज ने मौसी को और हम निकल पड़े..

एक घंटे का रास्ता था आराम से पहुँच गए...

इसके बाद क्या हुआ जानिए अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया....
 
तब तक अनुज भी किसी दोस्त से एक मोटरसाइकिल और मांग लाया एक तो अपनी थी तो हम लोग चल पड़े.. जग्गू को बाघ में नज़र मरने को मैंने बोल hi दिया था...

मैंने माँ को बिठाया और अनुज ने मौसी को और हम निकल पड़े..

एक घंटे का रास्ता था आराम से पहुँच गए..

अपडेट 114

शहर में पापा और मौसा पहले से hi इंतज़ार कर रहे थे... ज़मीन खरीदने वाले ने पहले hi देख राखी थी... तो सिर्फ बस कागज़ो पर हस्ताक्षर करने थे और पैसे लेने थे... पापा और मौसा के साथ हम लोग खरीददार के पास गए जहाँ कागज़ बन कर तैयार थे.. दो मोठे मोठे लाला किस्म के लोग थे.. सैलून की आँखें माँ और मौसी को देखकर hi चौड़ी हो गयी थी...

दोनों नज़र चुराकर माँ और मौसी पर नज़र मर रहे थे और दोनों के जिस्म को देख रहे थे... जब तक काम पूरा न हो गया दोनों अपनी अपनी नज़रें सकते रहे..

खैर थोड़ी बहुत देर में सारा काम ख़तम हो गया तो मौसा ने कहा चलो यही कहीं खाना खा लेते हैं किसी रेस्टोरेंट में... सबको उनका सुझाव पसंद आया तो हम सब एक रेस्टोरेंट में गए और मनपसंद खाना खाया... मौसी काफी खुश लग रही थी क्यूंकि उन्हें अब वहां नहीं रहना पड़ेगा अकेले कभी और हम सबको भी ख़ुशी थी.. की मौसी हमारे साथ रहेगी...

मौसा को सुकून था की अब चैन से ड्यूटी पर जा पाएंगे क्यूंकि मौसी के लिए हम लोग हैं यहाँ पर...

सबने खाना खाया फिर मौसा के कहने पर थोड़ी देर शहर ghoome...kyunki मौसा की गाड़ी आज रात को शहर से hi जाने वाली थी तो वो अपना सामान साथ लेकर hi आये थे और इसीलिए हम सबको खासकर मौसी को खुश रखने के लिए ये सब कर रहे थे... क्यूंकि उन्हें पता था अभी जाते वक़्त मौसी ज़रूर उदास हो जाएँगी.. माँ ने ममता चाची को बोल दिए की वो भैंसो को चारा वगेरा दाल दें हमें आने में देरी हो जाएगी...

हम लोग कई जगह गए खूब घूमे बहुत साडी चीज़ें खाई... माँ पापा, मौसा मौसी बिलकुल नए जोड़ो की तरह घूम रहे थे हालाँकि हम बच्चों की वजह से थोड़ा शर्मा ज़रूर रहे थे...

खैर इतने अचे समय के बाद बुरा समय आ hi गया, हमें घर जाना था और मौसा को रेलवे स्टेशन.. मौसी की आँखों में आंसू थे माँ ने उन्हें संभाला...

मौसा ने उन्हें ख्याल रखने को कहा और खुश रहने को कहा... इसके बाद मैंने और अनुज ने उनके पेअर छुए तो मौसा ने आशीर्वाद के तौर पर हमें पैसे दिए जिसे लेने में हमने न नुकुर की तो दांत कर हमें पकड़ा दिए और फिर सबसे विदा लेकर चले गए इधर हम लोग भी भरी दिल के साथ चल दिए.. परिवार का कोई भी दूर जाये तो बिलकुल भी ाचा नहीं लगता...

मौसी का मन ज़्यादा भरी था खैर जाना तो था hi तो माँ पापा के साथ बैठ गयी.. मौसी मेरे साथ आउट और हम चल पड़े... क्यूंकि अनुज के साथ जानकार कोई नहीं बैठना चाहता था... मजबूरी अलग बात है..

थोड़ी दूर आगे गए तो मैंने ध्यान दिया की मौसी कुछ बोल नहीं रही है..

में- मौसी तुम्हे मोटरसाइकिल चलनी आती है??

मौसी- हैं क्या ??

मौसी ने अपने ध्यान में आते हुए पुछा..

में- अरे मोटरसाइकिल चलाओगी मौसी?

Mausi-hattt मैं क्यों चलने लगी मोटरसाइकिल...

में- चला के देखो मौसी बड़ा मज़ा आएगा..

मौसी- नहीं पागल थोड़े hi हूँ मैं, बैठने में दर लगता है मुझे तू चलने की बात कर रहा है..

में- अरे मौसी अभी तुम्हे आती नहीं न इसलिए दर लगता है... सीख जाओगी तो मज़ा आएगा...

Mausi-acha और सीख कर मैं क्या करुँगी भला..

Me-agali बार जब मौसा आएं तो उन्हें घूमने ले जाना... देखना कितने खुश होंगे वो...

मौसी- नहीं रहने दे

Me-are मौसी सीख कर तो देखो...

Mausi-pagal मत बन इस उम्र में कहीं गिर गिरा गयी तो हड्डी टूट जाएगी...

Me-umar का मत बोलो मौसी और गिरेगी क्यों मैं हूँ न सँभालने के लिए.. मैं सिखाऊंगा..

मौसी- और साड़ी में सीखूंगी मैं... इसमें दोनों तरफ पेअर करके बैठते हैं...

में- तो साड़ी थोड़ी मोड़ लो Mausi...ghutno तक कर लेना..

Mausi-acha और आने जाने वाले देखेंगे उनका क्या..

में- कोई नहीं देख रहा मौसी. कोई गाड़ी तक तो है नहीं हमारे अलावा...

मौसी- नहीं रे ऐसे रोड पर साड़ी ऊपर करके मैं नहीं बैठने वाली...

में- कुछ नहीं होगा मौसी...

मौसी- नहीं किसी ने देख लिया तो मैं तो शर्म से मर जाउंगी...

में- ाचा ठीक है तुम बस कोई देख लेगा इसलिए मन कर रही हो न मौसी? वैसे सीखने को तैयार हो न..

मौसी- नहीं.. हाँ वैसे तो कोई दिक्कत नहीं है..

में- फिर ठीक है...

और ये कहकर मोटर साइकिल मैंने आगे बढ़ा दी..

पर अब मौसी बात कर रही थी तो हम लोग बातें करते हुए गाओं की तरफ बढ़ रहे थे अनुज और माँ पापा मुझसे थोड़ा पीछे the...andhera हो चला था तो रोड सुनसान हो गया था...

जब हम गाओं के करीब पहुंचे और गाओं के रोड पर मुड़ने लगे तो मैंने देखा की मोड़ पर बस अड्डे के सहारे एक साया खड़ा है.. मैंने गाड़ी धीरे करके और ध्यान से देखा तो किसी औरत का साया था जो पेड़ के पास खड़ा था..

मुझे अजीब लगा की इस वक़्त अकेले में कोई औरत यहाँ क्या करेगी.. ये सोचते हुए मैंने गाड़ी रोकड़ी..

Mausi-kya हुआ रोकी क्यों..

में- मौसी देखो अड्डे पर कोई औरत कड़ी है इस वक़्त अकेली .. कहीं गाओं की कोई हो..

मौसी- अरे गाओं की औरत अकेली क्यों आएगी और यहाँ क्यों कड़ी रहेगी...

इतने में उस औरत की नज़र हमपर पद गयी और वो हमारी तरफ आने लगी...

अँधेरे के कारण चेहरे तो नहीं दिख रहा था..

Mausi-karma ये तो हमारी तरफ आ रही है मुझे दर लग रहा है..

Me-kis बात का दर मौसी..

Mausi-kahi भूत चुड़ैल हुई तो..

Me-are मौसी तुम भी न...

मौसी- सचमें ऐसा होता है मैंने सुना है...

में- कुछ नहीं है पास तो आने दो डरो मत तुम..

तब तक वो औरत पास आ गयी.. तभी पीछे से मोटरसाइकिल की आवाज़ आई मैंने मुद कर देखा तो अनुज था और फिर पापा और माँ भी आ gaye..humein रुका देखकर वो लोग भी रुक गए..

मौसी को थोड़ी रहत मिली की चलो भूत चुड़ैल नहीं है... अँधेरे में इतना साफ़ तो नहीं दिख रहा था पर फिर भी उसका चेहरा दिखा हल्का सा कपड़ो से तो अचे घर की लग रही थी पर उसे पहली बार देख रहा था इसलिए गाओं की तो नहीं लग रही थी...

पापा माँ और अनुज भी रुक कर पूछने लगे क्या हुआ मैंने उन्हें रुकने को बोलै और उस औरत से पुछा..

में- आप कौन हैं और इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हो..

औरत- अरे बीटा मायके से आ रही थी... उतरना अगले अड्डे पर था अँधेरे में यहाँ उतर गयी गलती से मुये कंडक्टर ने भी नहीं बताया... अब समझ नहीं आ रहा कैसे जॉन

Maa-are ऐसे अकेले में रहना नहीं

चाहिए tha..phone करके बुला लेती घर से..

औरत- अरे क्या बताऊँ बहन जी जाना तो नहीं चाहिए.. एक तो मुआ फ़ोन बंद हो गया तो घर से किसी को बुला भी नहीं सकीय..

माँ- अगले अड्डे मतलब गैंदपुर की हो क्या?

गैंदपुर सुनकर मेरे कान खड़े हो गए...

Aurat-haan बहन जी गैंदपुर के hi हैं...

माँ- ऐसा करो लो हमारे फ़ोन से फ़ोन करलो और बुला लो किसी को घर से..

औरत- अरे बहन जी नंबर याद नहीं हमें और ये मुआ बंद है..

पापा- अरे तो एक काम करते हैं कर्मा तू इन्हे गैंदपुर छोड़ आ कहाँ बेचारी अकेली कड़ी रहेगी..

Me-haan अभी छोड़ आता हूँ.. अनुज तू मौसी को ले जाना..

Anuj-theek है...

Aurat-bahut धन्यवाद बहन जी भाई साहब ऐसे समय में मदद करने के लिए..

Maa-are धन्यवाद् की बात का अब आराम से घर छोड़ आएगा आपको ये..

औरत- अरे बहन जी चिंता के मरे प्राण सूख रहे थे... अँधेरे में एक आदमी तक का निशान नहीं था मेरी तो हिम्मत न पड़ी की एक कदम भी badhaun..acha हुआ आप लोग आ गए न जाने कब तक कड़ी रहती यहाँ...

Papa-are बहन जी ये सब छोड़िये और अब आराम से घर जाइये..

Aurat-bilkul भाईसाब पर बहन जी एक और विनती है..

माँ- अरे बहन जी विनती क्या आप बताएं क्या चाहिए..

औरत- आप लोगो को हमारे घर ज़रूर आना होगा...

माँ- अरे बहन जी इसकी क्या ज़रुरत है..

Aurat-nahi बहन जी आपको मेरी बात माननी hi पड़ेगी..

बीटा कल hi मम्मी पापा और इन बहन जी को लेकर घर आना

औरत ने मेरी तरफ देखते हुए कहा..

माँ- बहन जी कल तो नहीं पर हाँ हम ज़रूर आएंगे ऍकर घर ..

औरत- पक्का न..

माँ- हैं बहन जी बिलकुल पक्का... अब आप आराम से जाएं.

इतनी बातों के बाद उस औरत ने सब को हैरान करते हुए माँ के गले से लग गयी..

माँ भी एक पल के लिए चौंक गयी पर फिर अपनी बाहें उसकी पीठ पर रखकर प्यार से थपथपाया.. और फिर वो औरत अलग होते हुए.. मेरी मोटरसाइकिल पर आकर बैठ गयी...

इधर माँ और मौसी भी पापा और अनुज की मोटरसाइकिल पर बैठ गयी और सब चल दिए...

गाड़ी आगे बढ़ाते हुए पापा माँ से बोले..

पापा- थोड़ी ज़्यादा मिलनसार नहीं थी ये औरत..

माँ- हाँ थोड़ी सी पर अछि थी..

Papa-humein तो थोड़ी अजीब लगी.. इतनी जल्दी में कोई घर आने का न्योता देता है क्या और तो और गले ऐसे मिल रही थी जैसे न जाने कबसे जानती हो..

माँ- बिलकुल दिल के अचे लोग देते हैं और तुम्हे अजीब इसलिए लगी क्यूंकि वो मेरे गले लगी तुम्हारे नहीं ..

ये कहकर माँ हंसने lagi..papa भी मुस्कुराते हुए बोले

पापा- अरे तुम भी न कहाँ की बात कहाँ ले जाती हो..

Maa-acha अगर वो तुम्हारे गले लगती तो तुम्हे ाचा नहीं लगता..

पापा - अरे हमारे गले क्यों लगती वो?

माँ- क्यों लगती वो छोडो ये बताओ ाचा लगता या नहीं...

Papa-are तुम तो पीछे hi पद गयी...

Maa-nahi जवाब तो देना पड़ेगा... बताओ..

पापा- ाचा हाँ ाचा लगता... अब खुश...

Maa-acha मैं खुश या तुम खुश ये सोच कर hi...

पापा और माँ ऐसे hi बातें करते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे.. अनुज तो तेज़ी से मौसी को घर भी पहुंचा चूका था...

पापा- अरे अब बस भी करो गले तुम्हे लगाया उस औरत ने तंग हमारी खींच रही हो...

माँ- अरे तो क्या हुआ उसने घर बुलाया है न कल तब मिल लेना तुम भी..

माँ ने हाथ पापा की कमर से सरकते हुए आगे की और ले जाते हुए उनकी जांघ पर रख दिया..

पापा- नहीं भैया हमें नहीं मिलना अभी मिले नहीं तो इतनी तंग खींच रही हो...

माँ- तभी तो बोल रही हूँ मिल लेना घर जायके उसके अगर इतना दुःख है तो..

माँ ने जांघ से हाथ सहलाते हुए पापा की पंत के ऊपर से hi लुंड पर रख दिया...

Papa-are ये क्या कर रही हो.. गाड़ी नहीं चला पाउँगा मैं..

पापा ने मुस्कुराते हुए bola..aur गाड़ी और धीरे धीरे चलने लगे...

माँ- मैं तो देख रही थी बस वैसे जो देखना था वो सच निकला उसकी याद में तुमने ये खड़ा करके रखा है..

पापा- अरे धत्त्त पागल ये उसकी वजह से नहीं ये तो तुम्हारी बातों से हो गया है.

माँ- बातें तो मैंने बस उस औरत की hi की हैं... वैसे सख्ती से तो ये hi लग रहा है काफी पसंद आई वो..

पापा- तुम तो न जाने शहर में क्या खा लिए जो ऐसी बहकी बहकी बातें कर रही हो...

माँ- बहकी बहकी क्या सही कर रही हूँ...

माँ ने पापा की पंत की चैन खोलकर उनके लुंड को बहार निकल लिए और मुठियाने लगी... पापा तो अह्ह्ह्ह अह्ह्ह करने लगे और बाइक लड़खड़ाने लगी तो उन्होंने रोक दी... क्यूंकि अँधेरा हो चूका था दूर दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा था तो देखे जाने का दर भी नहीं था...

Papa-ahhhhhhhhh क्या कर रही हो रानी...

माँ- अरे देख रही हो की उस औरत के लिए कितना तड़प रहे हो तुम...

पापा- तुम तड़पा रही हो ये कहकर पापा ने मोटरसाइकिल को स्टैंड पर लगाया और फिर माँ का हाथ हटा दिया लुंड से और उतर gaye..papa को उतरता देख माँ भी उतर गयी पापा ने माँ को अपनी बाहों में भर लिए और उनके होंठ चूसने लगे..

माँ भी बिना किसी झिझक के पूरा साथ दे रही थी...

पापा ने माँ के होंठों को चूसते हुए hi उनके पल्लू को नीचे गिरा दिया और उनके पेट और कमर को मसलने लगे...

कुछ देर बाद पापा और माँ के होंठ अलग हुए तो पापा नीचे हो गए और माँ के पेट और नाभि को चूमने चाटने लगे... माँ पापा के बालों में हाथ फिरा रही थी..

माँ- आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हम्मण ऐसा मत करो भाई साहब.. तुम्हारी पत्नी को बुरा लगेगा..

माँ ने जान बूझ कर भाई साहब शब्द पर ज़ोर दिया जिससे पापा और उत्तेजित हो गए और वहीं बीच रोड पर hi माँ की नाभि को चूसते हुए हाथ ऊपर ले जाकर माँ के ब्लाउज के बटन को खोलने लगे और पूरा ब्लाउज खोल दिया उसके पत् अलग करने के बाद पापा ने माँ की ब्रा नीचे करके अपना मुँह माँ की चुकी पर लगा दिया और चूसने लगे...

माँ- भाईसाब मेरिइइइ छूछीयो को मत छूओसिये.. अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह छोड़िये मुझे..

माँ न जाने क्यों उस औरत की तरह बोल कर पापा को भड़का रही थी और पापा भी उत्तेजित हो रहे the...badal बदल कर माँ की छूछीयो को पि रहे थे उनका खड़ा लुंड माँ के पेट से तो कभी जांघों से टकरा रहा था...

फिर पापा ने माँ के कन्धों पर दबाव डालते हुए उन्हें घुटनो के बल नीचे बिठा दिया और अपने लुंड को माँ के चेहरे पर फिरने लगे... माँ अब भी पूरे नाटक के मूड में थी...

माँ- हाय ढैय्या भाई साहब अपने अपना ये बहार क्यों निकल दिया है हाय कितना बड़ा है ये...

पापा- बहार इसलिए निकला है ताकि तुम इसे चूस सको अपने गरम मुँह के अंदर ले कर इसे गीला कर सको..

माँ- छहिए मैं ये गंदे काम नहीं करती ...आप ने ये सॉबब्बप्पपगममम

माँ आगे बोलती उससे पहले hi पापा ने लुंड मुँह में घुसा दिया और फिर माँ का सर पकड़ कर अपनी कमर हिलाकर माँ के मुँह को छोड़ने लगे...

क्या नज़ारा था मेरी माँ रोड के बीच में छूछीयो को बहार नंगा करके घुटनो के बल बैठकर अपना मुँह छुड़वा रही थी.... पापा भी इतने उत्तेजित हो गए थे की पूरा लुंड माँ के गले तक घुसा के छोड़ रहे थे...

पापा- ले साली अह्ह्ह्हह्हह क्या गरम मुँह है तेरा मेरी रानी अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पूरा लुंड समां ले...

माँ के मुँह से गुछ्ह गुच्छहहह की आवाज़ आ रही थी थूक निकल कर नीचे टपक रहा था... पर पापा अपनी मस्ती में मगन अपने लुंड से माँ का मुँह चोदे जा रहे थे...

Papa-ahhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ले साआईईई रआआआन्द्ड़ड़सद्द्द

और इसी के साथ पापा के लुंड से रास की धार निकलने लगी जिसे माँ गटकने लगी पापा का जब झड़ना बंद हुआ तो माँ ने उनका लुंड चाटकर साफ़ करने के बाद बहार निकला... लुंड मुँह से निकलने के बाद माँ मुस्कुरा रही थी..

Papa-haaye रानी आज तो मज़ा आ गया ऐसे खुले में तुमसे लुंड चुसवाने का अलग hi मज़ा है..

माँ कड़ी होकर अपने ब्लाउज के बटन को बंद करते हुए boli-acha मुझसे या उससे क्यों भाई साहब..

Papa-are तुम अब भी उस पर अटकी हुई हो..

Maa-kyun मेरा मुँह तो उसे hi समझ कर छोड़ रहे थे...

Papa-are मैं तो बस.

Maa-koi बात नहीं किसी और से भी लुंड चुसवाना हो तो बता देना मैं वो भी बन जाउंगी ठीक है भैय्या..

माँ ने जानकार भैया कहा जिसे सुनकर पापा के कान खड़े हो गए और साथ hi लुंड भी... और वो सोचने लगे..

माँ- अरे अब खड़े क्यों है चलो नहीं तो लेट हो जायेंगे वैसे भी हो चुके हैं..

पापा- अण्णन हाँ चलते हैं

फिर सोच में डूबे हुए hi पापा ने मोटरसाइकिल चालू की और माँ को बिठाकर घर की और चल दिए...

उधर माँ पापा घर पहुंच रहे थे मैं उस औरत को लेकर गैंदपुर की तरफ चल पड़ा...

Aurat-kya नाम बताया बीटा तुमने?

में- ग कर्मा..

औरत- अरे वाह बहुत ाचा नाम है Karma...matlab करम का फल देने वाला.. वैसे क्या करते हो...

में- ग कॉलेज में हूँ बा का आखिरी साल है...

औरत- ाचा इसके आगे क्या सोचा है...

में- ग टीचर बनने का सोचा है...

औरत- बहुत hi ाचा सोचा है .. शिक्षक hi तो हमारा भविष्य बनाते हैं...

मैंने मन में सोचा ये डायलॉग तो कहीं सुना सुना सा लगता है ..

में- ग यही बात है मुझे काफी पसंद है शिक्षक का काम उनकी ज़िम्मेदारी..

औरत- बहुत अछि बात है बीटा म्हणत करो तो ज़रूर बनोगे...

तब तक हम गैंदपुर पहुंच चुके थे..

में- आप रास्ता बताती रहना अब की आप का घर किधर है..

औरत- हाँ बीटा वो खम्बा पगा है न उस गली में ले लो...

Me-theek है...

वैसे मैंने सोचा इस तरफ से तो मेरी जान अंजलि के घर भी जाते हैं... और चेहरे पर हलकी मुस्कराहट आ गयी..

औरत- अब आगे से बाएं ले लेना...

मन में- आगे से बाएं उसके बाद तो अंजलि की hi गली आती hai...kahin ये उसी गली में तो नहीं रहती अगर ऐसा है तो मज़ा आ जायेगा इससे अछि जान पहचान करनी होगी जिसे आना जाना लगा रहेगा और इसी बहाने मेरी जान के दर्शन भी हो जाया करेंगे...

मेरे मन में पूरा प्लान बन चूका था....

औरत- बस यहाँ से सीधे हाथ पर मुड़ना है...

मैं निश्चित हो गया की ये उसी गली में रहती है और मोड़कर अपनी जान की गली में धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा और फिर उसका घर आया मैं बड़े प्यार से मंत्रमुग्ध होकर उसके घर को निहारे जा रहा था.... वैसे ये बात सत्य है की किसी से प्रेम हो तो उससे जुडी हर चीज़ प्यारी लगने लगती hai...wo hi मेरे साथ हो रहा था...

मैं पागलों की तरह उसके घर को देखे जा रहा था की तभी एक आवाज़ से मेरा ध्यान टूटा..

Aurat-roklo बीटा...

में- क्या यहाँ?? क्यों?

Aurat-are क्यों क्या बीटा ये hi मेरा घर है... ये सामने...

उसकी बात सुनकर तो मेरे रौंगटे खड़े हो गए और न जाने क्या क्या खड़ा हो गया..

मैंने मोटरसाइकिल को रोका और वो आराम से उतरी...

औरत- आओ..

में- मैं...

मैं इसके आगे कुछ बोल नहीं पाया उसे लगा मैं जाने को बोल रहा हूँ पर मेरे मुँह से तो अनायास hi कुछ भी निकल रहा था...

Aurat-main वािण कुछ नहीं चलो आओ मेरे साथ...

मैं भी उतरा एयर उनके पीछे पीछे चल दिया... दिल की धड़कन तेज़ होती जा रही थी.. कई सरे ख्याल मन में आ रहे थे.. की कौन हैं ये क्या अंजलि की कोई रिश्तेदार या माँ... ये सोचकर तो और धड़कन तेज़ हो गयी की ये अंजलि की माँ है मेरी प्यारी अंजलि की माँ मतलब मेरी सासु माँ...

न जाने क्यों मैं ड्रामेटिक होता जा रहा था... खैर दरवाज़ा खटखटाया और कुछ पल बाद hi दरवाज़ा खुला और दरवाज़ा क्या खुला समझो मेरी किस्मत खुली दरवाज़ा खोलने वाली और कोई नहीं अंजलि hi थी.. मेरी नज़र उसके खूबसूरत चेहरे पर एक बार फिर अटक सी गयी..

उसने दरवाज़ा खोलकर उस औरत को देखा और फिर मम्मी चिल्लाकर उनके गले लग गयी..

जिससे सरे अनुमान यकीन में बदल गए ये औरत तो मेरी सासु माँ hi थी...

अंजलि- मम्मी कहाँ रह गयी थी पता है तबसे फ़ोन लगा रही हूँ कितनी चिंता हो रही थी...

औरत- अरे मेरी लाडो.. सब बताती हूँ पहले अंदर तो आ जॉन..

फिर अंजलि ने अपनी मम्मी के पीछे मुझे देखा और मुझे देखकर थोड़ा हैरत में पद गयी..

पर फिर उसकी मम्मी उसे और मुझे लेकर अंदर ले आई और मुझे बिठा दिया साथ hi खुद भी बैठ गयी...

अभी तक तो सिर्फ अँधेरे में hi देखा था पर अभी उजाले में देखकर पता चला अंजलि को खूबसूरती कहाँ से मिली है.. वही मैं सोचूं की बाप इतना खड़ूस बेटी इतनी सुन्दर पर सच्चाई अब नज़र आई...

अछि खासी लम्बी हैं अंजलि की मम्मी भरा हुआ बदन साड़ी में सरे कटाव निखार कर आ रहे थे दूध सा गोरा रंग, हंसमुख चेहरा... मुस्कराहट बिलकुल अंजलि जैसी... गोल बड़े बड़े नितम्भ और भरी हुई छुछियां...









https://imgbb.com/

( आप लोगो को भी इंट्रो दे देता हूँ

अंजलि की मम्मी का नाम सविता है,

उम्र 44, लम्बाई- 5.7 इनके नाम की जगह मैं सासुमा लिखूंगा)

फिर बोली- बीटा ज़रा पानी ला...

अंजलि दौड़ कर पानी लेने गयी

तभी मुझसे बोली- बीटा ये है हमारा घर.

मैं कुछ बोलने hi वाला था की अंजलि पानी लेकर आ गयी एक अपनी मम्मी को दिए और फिर मुझे..

उन्होंने पानी पिया और बोली- अरे बिटिया आज तो परेशां hi हो गयी पहले जाम की वजह से लेट हो गए अँधेरा हो गया... और फिर अँधेरे में बस से गलती से एक अड्डे पहले उतर गयी.. मुआ फ़ोन भी बंद हो गया था. इसको दिखाना पड़ेगा..

अंजलि- अरे बस वाले ने बताया नहीं कौनसा बड अड्डा है..

Aurat-nahi बताया होता तो गड़बड़ hi नहीं होती.. उतर गयी तो फिर देखा की ये तो हमारा गाओं नहीं है मैं परेशां हो गयी ऊपर से इतना अँधेरा... और पूरा रास्ता सूनसान...

अंजलि- हे भगवन मम्मी फिर.

Aurat-are भगवन की कृपा से ये बीटा आ रहा था शहर की तरफ से तो मिल गया तो फिर छोड़ने चला आया... बीटा ये मेरी प्यारी बिटिया है अंजलि और...

इससे पहले hi अंजलि बोल पड़ी- अरे मुम्ममय मैं इन्हे जानती हूँ ये पहले भी कई बार हमारे घर आ चुके हैं..

औरत- हैं सच्चीई, कैसे?

अंजलि- नीतू है न उसके भैया हैं उसको लेकर आये हैं एक दो बार उसकी गली में hi रहते हैं...

Aurat-are वाह ये तो बहुत ाचा हुआ देखो तो दुनिआ कितनी छोटी सी है जो मिले वो भी जान पहचान के... कर्मा बीटा तुमने भी नहीं बताया..

में- अरे मैं बताने वाला था की..

अंजलि- मम्मी ने मौका hi नहीं दिया होगा हहै हे.. मम्मी बोलने का मौका hi नहीं देती किसी को..

मैं और अंजलि खिलखिलाकर हंसने लगे वहीं औरत ने झूठा गुस्सा दिखते हुए अंजलि को डांटा.

औरत- हैट बावरी कुछ भी बोलती है.. बता बीटा तू hi मैं कहीं ज़्यादा बोलती हूँ.

में- बिलकुल नहीं... मौसी... मैं आपको मौसी बुला सकता हूँ न?

Aurat-bilkul तेरी मम्मी मेरी बहन सामान hi हैं...

इतने में एक कमरे का दरवाज़ा खुला और जिसको नहीं आना था वो आ गया यानि अंजलि का बाप...

ससुरा- अरे आ गयी तुम और इतनी लेट क्यों कर दिया यहाँ चिंता हो रही थी...

औरत- अरे क्या करती कुछ परेशानी हो गयी थी..

ससुरा- क्या परेशानी ?

फिर सासुमा ने साडी बात फिर से बताई...

ससुरा- गलती तुम्हारी है मैं हमेशा बोलता हूँ कहीं जाना हो तो जल्दी निकला करो...

औरत- अरे कितनी भी जल्दी करो न न करते दोपहर हो hi जाती है...

ससुरा- तभी तो देर होती है...

फिर मेरी तरफ देखा और बोलै- भाई बहुत बहुत धन्यवाद तुम्हारा... इतने अँधेरे में अकेली औरत इतनी परेशां हो जाती..

सासुमा- अरे मैं तो इसके मुम्ममय पापा से भी मिल ली... बहुत अचे लोग हैं बहुत सदा..

ससुरा- ाचा वोभी साथ थे क्या..

सासुमा- हाँ और मैंने तो उन्हें अपने घर आने का न्योता भी दे दिया है..

Sasura-ye बहुत ाचा kia...tumne..

सासुमा- अरे अंजलि बीटा ज़रा चाय रख ले सर घूम रहा है मेरा और सुनो ग तुम तब तक कर्मा से बात करो मैं कायदे बदल कर आती हूँ..

Me-main भी निकलता हूँ..

हालाँकि मेरा मन नहीं था पर फिर भी कह दिया..

सासुमा- ख़बरदार जो अगर बिना चाय पिए गया तो मैं आ रही हूँ बैठो तब तक...

सासुमा ने दन्त कर बिठा दिया अंजलि ये देखकर हंसती हुई चली गयी. उन दोनों के जाते hi ससुरे ने पकाना शुरू कर दिया.. कहाँ से आ रहे थे कौन था क्या था बूम भोसड़ा...

मैंने सही सही जवाब दिया सबका.. जब पकाना ज़्यादा हो गया तो मैंने एक तरीका निकला और सोचा इसी बहाने अंजलि भी दिख जाएगी और बोलै- ग आपका बाथरूम किधर है...

Sasura-acha बाथरूम जाना है ये गैलरी दिख रही है इसमें सीधे हाथ पर दूसरा दरवाज़ा..

में- ग ठीक है और मैं उठ कर चल दिए सोचा जान बची काम से काम...

देखने लगा कहीं अंजलि दिख जाये पहले कमरे में तो नहीं दिखी मैं थोड़ा आगे बड़ा तो दूसरा दरवाज़ा आ गया जिधर ससुरे ने बाथरूम बताया की था पर उसके ठीक सामने एक कमरा था जिसका दरवाज़ा खुला हुआ था वैसे तो कमरे में कोई नहीं दिखा पर जैसे hi मैं मुड़ने को हुआ अचानक से एक साया नज़र आया मुद कर देखा तो आँखें चौड़ी हो गयी सामने अंजलि की मम्मी यानि सासु माँ सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी... ब्लाउज से हहर झांकती छुछियां देखकर मैं गरम होने लगा उसके नीचे गदराया हुआ सपाट पेट मॉंसल कमर, पेट के बीच में एक गहरी नाभि हाय लुंड तुरंत hi खड़ा हो गया उनके हाथ में एक साड़ी थी जिसे वो पहनने लगी मैं पागलो की तरह खड़ा खड़ा उनके मादक जिस्म को घूरे जा रहा था





फिर अचानक दे ख्याल आया क्या क्र रहा है कर्मा अगर किसी ने देख लिए तो अंजलि की शकल भी नसीब नहीं होगी देखने को और मैं जल्दी से बाथरूम में घुस गया... थोड़ा बहुत मूट आया उसके बाद खड़े लुंड को इस तरह से एडजस्ट किआ की वो दिखे न और फिर बहार निकला तो सामने कमरे में कोई नज़र नहीं आया..

और फिर सीधा बहार आ गया जहाँ ससुरा और सासुमा दोनों पहले से hi बैठे थे मेरे पहुँचते hi अंजलि भी चाय लेकर आ गयी.. और फिर सबको दी... हमेशा की तरह वही स्वादिष्ट चाय बानी थी मन कर रहा था बनाने वाली के हाथ उंगलियां होंठ सब चूम लूँ.

सासुमा- बताओ हमें पता hi नहीं था की तुम हमारा घर जानते हो..

में- मुझे भी नहीं पता था वैसे भी पहले कभी देखा भी नहीं था घर में..

सासुमा- अरे एक महीने से मैं अपने मायके गयी हुई थी...

Me-acha तभी तो.. वैसे आपके दोनों बेटे भी नहीं दिख रहे..

सासुमा- अरे वो होते तो परेशानी hi क्या थी कोई भी आकर ले आता और मुझे अकेले नहीं आना padta...Bada बीटा शहर में नौकरी करता है न तो वो और बहु वहीं रहते हैं छोटा भी कुछ दिन के लिए अपने भैया भाभी के पास गया है...

मैंने मन में सोचा एक और माल है घर में...

में- हाँ तभी परेशानी हो gayi...acha अब मैं चलता हूँ काफी टाइम हो गया है..

सासुमा- ठीक है बीटा जाओ अगर देर नहीं हो रही होती तो बिना खाना खाये नहीं जाने देती...

में- जी फिर कभी ज़रूर...

सासुमा- फिर कभी नहीं तुम्हारी मम्मी को न्योता दिया है तुम्हारी ज़िम्मेदारी है सबको लेकर आना..

में- मैं ज़िम्मेदारी निभाने की पूरी कोशिश करूँगा.

ससुरा- बिलकुल पूरे परिवार को लाना...

में- ग बिलकुल अब चलता हूँ...

मैंने दोनों को नमस्ते किआ और चल दिए सासुमा और अंजलि दोनों दरवाज़े तक छोड़ने आये अंजलि अकेली होती तो सोचा कुछ बसस्ट होती पर ऐसा मौका hi नहीं मिला... अपनी मोटरसाइकिल पर बैठकर दोनों को देख कर हाथ हिलाया दोनों मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे और फिर चल पड़ी अपनी गाडी ..

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट बहुत बहुत शुक्रिया...
 
मैंने दोनों को नमस्ते किआ और चल दिए सासुमा और अंजलि दोनों दरवाज़े तक छोड़ने आये अंजलि अकेली होती तो सोचा कुछ बसस्ट होती पर ऐसा मौका hi नहीं मिला... अपनी मोटरसाइकिल पर बैठकर दोनों को देख कर हाथ हिलाया दोनों मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे और फिर चल पड़ी अपनी गाडी ..

अपडेट 115

जहाँ कर्मा अपनी अंजलि के ख्यालों में डूबा हुआ घर की तरफ बापिस लौट रहा था, आज जहाँ कर्मा और उसका पूरा परिवार शहर में घूम कर मस्ती कर रहा था वहीं चोदामपुर में भी कुछ घटित हो रहा tha...waise भी चोदामपुर में कुछ घटना न हो ऐसा कैसे हो सकता है...

कर्मा और अनुज के बाद जग्गू भी चची के यहाँ से निकल गया था घर में चची पल्ली और भाभी थी..

भाभी- पल्ली ज़रा मेरे कपडे दे दे..

Palli-are भाभी अभी थोड़ी hi जा रही हो अभी आराम करलो बाद में पहन लेना कपडे...

प Bhabhi-are तो क्या नंगी सोती रहूं..

म चची- पल्ली ऐसा कर भाभी को अपनी टीशर्ट वगेरा दे दे जिसे पहनकर आराम से सो जाएगी..

प भाभी- अरे चची पल्ली की T-shirt पहनूंगी मैं... तुम भी कैसी बात करती हो..

म चची- तो क्या हो गया यहाँ कौन है देखने वाला तेरे चाचा रात को आएंगे तब तक पहनकर आराम कर...

प भाभी- शादी से पहले पहनी थी आखिरी बार टीशर्ट अब तो न जाने कैसे लगेगी..

Palli-ohho भाभी कौनसा कहीं जाना है सोना hi तो है ...रुको लेकर देती हूँ..

पल्ली भाग कर गयी और एक खुले गले की T-shirt और एक छोटी सी अपनी कच्ची भाभी को लेकर दे दी..

प भाभी- ये कच्ची किस लिए...

पल्ली- तो नीचे से नंगी रहोगी तो मत पहनो..

प भाभी- ाचा ठीक है अब ले आई है तो पहन लेती हूँ...

भाभी ने जल्दी से पल्ली की T-shirt और कच्ची पहन ली अब ये कहने की बात तो नहीं थी की भाभी का शरीर पल्ली से ज़्यादा गदराया हुआ था तो टीशर्ट और कच्ची दोनों hi काफी कास के आ रही थी पर टीशर्ट खुले गले की थी इसलिए ज़्यादा परेशानी नहीं हो रही थी पर कछहि में भाभी की गांड पूरी तरह बहार को निकल रही थी..

प भाभी- देखो तो कैसी कासी कासी आ रही है ये मेरे ऊपर..

पल्ली- भाभी मस्त तो लग रही हो मैं लड़का होती तो अभी छोड़ देती तुम्हे...

प भाभी- मेरे पास भी लुंड होता तो तुम्हे बिस्तर से उतने नहीं देती नन्द रानी...

पल्ली ने भाभी की बात सुनकर उन्हें बाँहों में भर लिए और..

पल्ली- हाय मेरी चुड़क्कड़ भाभी...

और ये कहकर भाभी के होंठों से अपने होंठ लगा दिए और चूसने लगी भाभी भी पूरा साथ दे रही थी दोनों ने एक दुसरे के होंठों और जीभ को काफी देर तक चूसा छठा...

चची तब तक नहाने चली गयी थी इसके बाद जब पल्ली और भाभी अलग हुए तो दोनों hi हांफ रहे थे...

पल्ली- अरे भाभी अब आराम करो ऐसे तो हमारा चलता hi रहेगा मैं भी नहाने जाती हूँ..

प भाभी- चची के साथ hi..

Palli-kyun अपनी माँ के साथ नहाने में क्या बुराई..

इसके साथ hi पल्ली भाभी को आंख मार के चली गयी और भाभी भी आज जो भी हुआ अब तक ये सोचकर बदन में मीठी सी थकन के साथ लेट गयी और कुछ hi देर में उनकी आँख लग गयी...

कुछ देर बाद दोनों माँ बेटी साथ में नाहा धोकर निकली, और सिर्फ नहीं hi हो ऐसा मुश्किल hi था,

चची और पल्ली कपडे पहन कर तैयार हो गयी और भाभी को चुदाई से संतुष्ट होकर मीठी नींद लेते हुए देखकर दोनों मुस्कुराने लगी... और फिर घर के काम में लग गयी..

ऐसे hi थोड़ा समय बीता घर के काम करते हुए की चची के पास माँ( कर्मा की माँ) का फ़ोन आया जिसमे उन्होंने उनकी भैंसो को चारा पानी डालने के लिए बोलै क्यूंकि वो लोग देरी से आने वाले थे...

चची ने पल्ली को बताया और boli-tu भी साथ चल अपनी भैंसों को भी देना है और जीजी की भी अकेले तो नहीं हो पायेगा..

पल्ली- फिर भाभी..?

म Chachi-are वो तो सो रही है सोने दे थोड़ी बहुत देर में बापिस आ hi जायेंगे

पल्ली- ठीक है मम्मी..

इसके बाद दोनों माँ बेटी दरवाज़े को बहार से कुण्डी लगा कर निकल गए इधर भाभी मस्ती से सो रही थी...

उधर चची और पल्ली बाघ में पहुंचे hi थे इस बात से बेखबर की पल्ली के पापा यानि चाचा काम ख़तम करके जल्दी hi बापिस आ गए थे और घर पहुँच गए थे...

चाचा ने बहार कुण्डी लगी देखि तो अंदाज़ा लगा लिए की शायद पल्ली और çहाचि भैंसों को चारा डालने गए होंगे..

चाचा ने कुण्डी खोली और नल के पास जाकर हाथ पेअर धोये अपने गंदे वहीं नल के पास उतर कर दाल दिए और सिर्फ कच्चे को पहने हुए पहले रसोई में जाकर पानी पिया साफ़ फिर कपडे पहनने के लिए अपने कमरे में गए.. पहले तो अँधेरा सा लगा फिर जब उनकी आँखें अँधेरे की अभ्यस्त हो गयी तो कमरे में उन्हें दिखना शुरू हो गया कपड़ो के लिए नज़र फिरते हुए अचानक से उनकी नज़र बिस्तर पर एक साये पर गयी पहले तो वो चौंक गए की ये कौन हो सकता है पर फिर ठीक से देखने पर उनकी आँखें चौड़ी हो गयी और उसी जगह तिकी रह गयी...

उन्होंने देखा की बिस्तर पर कोई सोया हुआ है जिसकी पीठ उनकी तरफ है, चाचा की नज़र टीशर्ट पर गयी तो पहचान गए की ये पल्ली है और फिर एक छोटी सी कच्ची में फांसी गांड पर गयी तो चाचा की हालत ख़राब होने लगी..

उनका लुंड उनके कच्चे में सर उठाने लगा... छोटी सी कच्ची में से बहार को निकले हुए चूतड़.. उनका गोल गोल आकार देखकर चाचा मंत्र मुग्ध होते जा रहे थे..

फिर उनके मन में ख्याल आया की कैसे बाप हैं वो जो बेटी को इस हालत में देख रहे हैं... मन में द्वन्द था पर नज़र हटने का नाम नहीं ले रही थी.... दोनों चूतड़ों की खूबसूरती hi ऐसी थी की नज़र हैट hi न पाए..

खासकर चाचा को तो ये बात और उत्तेजित कर रही थी की ये चूतड़ उनकी अपनी बेटी के हैं ये सोच सोचकर hi चाचा का लुंड ठुमके मार रहा था,

चाचा के मन में पिछली साडी बातें वो कब से मन में दवाये बैठे थे वो सब दौड़ने लगी... उनका और पल्ली के बीच बाथरूम में वो सब होना और फिर कर्मा के यहाँ अंताक्षरी की रात को उन्हें शक था की जिसे उन्होंने छोड़ा था वो और कोई नहीं बल्कि उनकी बेटी थी.. ये साडी बातें सोचते हुए चाचा सिहरने लगे.. उनकी हवस उनके संस्कारों और सही गलत की पहचान पर भरी पड़ने लगी अपनी hi बेटी को वो एक सम्भोग के लिए उपयुक्त साथी की तरह देखने लगे चाचा की नज़र गांड से हैट नहीं रही थी..

और गांड को देखते देखते वो न जाने कब बिस्तर के करीब पहुँच गए उन्हें पता hi नहीं चला दिल की धड़कन बढाती जा रही थी मन कह रहा था ये महापाप है लुंड कह रहा था ये महासुख है...

चाचा बिस्तर के बिलकुल करीब पहुंच गए और गांड को करीब से देखने लगे..

मन में सोचने लगे की बिना कपड़ो के पल्ली की गांड और ज़्यादा बड़ी लगती है... उनकी बेटी दिन प्रतिदिन गडराती जा रही थी... उसके दोनों नितम्बों की गोलाई देखकर चाचा का खुद से काबू ख़त्म होता जा रहा था उनका मन कर रहा था की अभी इन चूतड़ों में अपना मुँह फंसा दूँ.. और सारा रास जी भर के चाट लूँ... उन्हें अपने दोनों हाथों से मसलन उनके बीच में अपनी जीभ दाल कर चातुन..

चाचा इन्ही खयालो में मगन बाकि दुनिया को भूल चुके थे...

चाचा का मन हुआ की वो इस मादक गांड को छू कर देखें... भीतर से उन्हें दर भी लगने लगा की कहीं पल्ली जाग गयी तो क्या होगा क्या मुँह दिखाएंगे वो किसी को पर सामने ऐसे चूतड़ थे की बाँदा अपनी ज़िंदगी भी दांव पर लगा दे उन्हें छू लेने के लिए वही हाल चाचा का भी था..

आख़िरकार चाचा की हवस ने उनके ऊपर काबू प् लिए और उन्होंने खुद को मन लिए की सिर्फ हाथ लगाने से क्या होगा..

ये hi सोचकर अपने सूखे गले में थूक गटककर उन्होंने अपना एक हाथ बढ़ाना शुरू किआ.. हाथ कांपते हुए धीरे बढ़ने लगा... और कुछ hi पालो में हाथ चूतड़ों के बिलकुल करीब ोाहुन्छ गया और जैसे hi वो उन मांसल गोल गोल पटेलों को छूने वाला था चाचा ने हाथ पीछे खींच लिए.. एक बार फिर से उनका दर उनपर हावी हो गया.. उनका मन उनसे एक बार फिर सोचने को कहने लगा... पर जैसे hi चाचा की नज़र दोबारा चूतड़ों पर पड़ी उनका फैसला हो गया..

एक बार फिर से हाथ अपने लक्ष्य की और बढ़ने लगा... चाचा की धड़कनें भी बढ़ने लगी और फिर दोबारा हाथ चूतड़ों के बेहद करीब पहुँच गया

और इस बार चाचा ने हिम्मत करके हाथ को लक्ष्य से भिड़ा hi दिया और एक चूतड़ पर रख दिया... हाथ रखते hi चाचा के शरीर में जैसे बिजली दौड़ने लगी... उनका दिमाग सुन्न हो गया लुंड ऊपर नीचे होने लगा... चूतड़ को छूने पर जो मखमली एहसास चाचा को हुआ तो वो उसे बिना थोड़ा दबाये रह नहीं पाए...





चाचा का हाल पहले से बुरा हो गया था चूतड़ पर हाथ पड़ते hi उनकी हवस की भूख और बढ़ गयी उनका नियंत्रण अपने आप से खोने लगा सही गलत का बोध धुंधला होने लगा...

चाचा ने सब छोड़ कर चूतड़ पर ध्यान लगाया और उसे धीरे धीरे से मसलने लगे... उन्होंने सोचा पल्ली गहरी नींद में है तभी तो इतना करने पर भी जग नहीं रही है... इससे उन्हें और छूने का बहाना मिल गया अब चाचा धीरे से बिस्तर पर बैठ गए और फिर दुसरे हाथ को भी उस असीम सुख से वंचित नहीं जार सके और दोनों हाथों को दोनों चूतड़ों पर हल्का हल्का फिरने लगे... उनकी आँखें इन एहसास से बंद होने लगी.. चूतड़ों की मखमली त्वचा हाथों में पिघल सी रही थी...

कुछ देर तक दोनों चूतड़ों को अपने हाथों से सहलाने के बाद चाचा का लालच और बढ़ने लगा उन्हें लगा पल्ली गहरी नींद में है इतनी जल्दी नहीं जागेगी...

चाचा ने कुछ नहीं सोचा और फिर अचानक से बिस्तर पर चढ़ कर पल्ली के पीछे लेट गए, और उसकी गांड देखने लगे.. धीरे धीरे से सरकते हुए चाचा पल्ली के करीब होने लगे और कुछ hi पालो में जो चाचा के लिए दिन के बराबर थे वो पल्ली से बिलकुल सात गए... ऐसा पाप करते हुए चाचा की हिम्मत नहीं हो रही थी की वो अपनी बेटी के चेहरे की और देखें और न hi उन्होंने कोई कोशिश की.. उनके मन पर तो बस उनकी बेटी का कामुक बदन छाया हुआ था...

और कुछ पल बाद hi चाचा का बदन पल्ली के बदन से छूने लगा जिसका एहसास होते hi चाचा पागल से होने लगे उनका लुंड बगावत करने लगा...

चाचा की आँखें खुद बा खुद बंद हो गयी... चाचा थोड़ा सा सरक कर और आगे हो गए जिससे ुबके और उनकी बेटी के बीच की साडी दूरी मिट गयी... चाचा अपने बदन पर अपनी बेटी के बदन को छूने के एहसास से फूले नहीं समां रहे थे.. ान तो चाचा का दर भी गायब हो चूका था वो किसी भी दर की वजह से इस खूबसूरत एहसास को छोड़ना नहीं चाहते थे... चाचा ने अपना एक हाथ उठाया और धीरे से लेजाकर पल्ली के पेट पर रख दिया और फिर उसे खुद से पीछे की तरफ चिपका लिए.. चाचा का लुंड उसके चूतड़ों के बीच धंस गया.... चाचा इस आनंद से पगला उठे... अपने लुंड पर इतने नरम मुलायम चूतड़ों का एहसास उन्हें पागल करने लगा...

चाचा ने जो हाथ पल्ली के पेट पर रखा था उसे धीरे धीरे से उसके पेट पर टीशर्ट के ऊपर से hi फिरने लगे...

चाचा इस समय जन्नत में थे... पूरी दुनिया से बेखबर, इस बात से बेखबर के वो जिसे अपनी बेटी समझ रहे हैं जिसको अपनी बेटी का जिस्म समझकर लुत्फ़ उठा रहे हैं वो कोई और है..

वहीं प्रेमा भाभी भी बेखबर होकर एक मीठी नींद में थी इस बात से बेखबर की पल्ली के पापा उन्हें पल्ली समझकर उनके मादक बदन को भोग रहे हैं... पल्ली के पापा जो भाभी के रिश्ते में ससुर hi लगते थे... दोनों hi सच्चाई से बेखबर अपनी अपनी दुनिया में थे...

जहाँ चाचा को भाभी के बदन से परम आनंद मिल रहा था वहीं भाभी की नींद और गहरी होने लगी थी किसी के छूने के एहसास से वो नींद में hi छह रही थी की कोई उन्हें जकड कर अपनी बाहों में भर कर सोये.. इसलिए उन्हें नींद में hi चाचा का बदन अपने बदन सतना ाचा लग रहा था..

वहीं चाचा तो चूतड़ों में लुंड होने के कारन जन्नत में थे ...

वहीं क्यूंकि भाभी ने पल्ली की T-shirt पहनी थी तो आगे के बटन भाभी ने बंद नहीं किये थे क्यूंकि भाभी की छुछियां पल्ली से बड़ी थी तो वो बटन बंद भी नहीं हुए थे और टीशर्ट दोनों तरफ फैली हुई थी जिससे भाभी की आधी से ज़्यादा छुछियां बहार hi थी...

इधर चाचा के अंदर उत्तेजना का तूफ़ान आया हुआ था वो धीरे धीरे से अपनी कमर को आगे पीछे करके अपने लुंड को भाभी की गांड में घिस रहे थे साथ hi उनका हाथ अब भाभी के पेट को सहलाते हुए ऊपर की तरफ बाद रहा था और कुछ hi देर में भाभी की बड़ी बड़ी चूचियों तक पहुँच गया अपने हाथों पर छूछीयो का एहसास होते hi चाचा पागल होने लगे और बिना कुछ सोचे समझे वो टीशर्ट के ऊपर से hi एक छुच्छी को मसलने लगे...





चाचा को नरम और बड़ी बड़ी छुच्छी को मसलने में एक अलग hi आनंद मिल रहा था उन्हें अपनी बेटी की छुच्छी पहले की तुलना में उसकी गांड की तरह hi बड़ी लग रही थी...

इधर भाभी छुच्छी के मसाले जाने से थोड़ा कुनमिनाइ पर उन्हें ये एहसास ाचा लग रहा था तो वो जगी नहीं वहीं चाचा पर कोई असर नहीं था अब उन्हें पल्ली के जागने की या किसी भी चीज़ की कोई फ़िक़र नहीं थी... थी तो बस अपनी हवस की... चूतड़ों के बीच में घुसे हुए अपने लुंड की...

चाचा और शिद्दत से भाभी की छुच्छी को गूंथने लगे... और इस एहसास से भाभी की नींद टूटी ज़रूर और उन्हें ये अंदाज़ा भी हुआ की कोई उनके पीछे लेता है पर उन्होंने सोचा कर्मा अनुज या जग्गू में से कोई बापिस आ गया होगा और यही सोचकर उन्होंने आँखें नहीं खोली और साथ hi अपनी मंज़ूरी देते हुए अपना सर पीछे करके चाचा के कंधे से लगा dia..sath hi खुद को पीछे करके चाचा से चिपका लिए.. इस बात से बेखबर की वो जिसे समझ रही थी उनमे से कोई और था...

चाचा को तो जैसे मनचाही मुराद मिल गयी उन्हें लगा की पल्ली भी यही चाहती है या नींद में hi उनका साथ दे रही है दोनों में hi उनके मज़े थे...

चाचा ने देर न करते हुए तशीर को थोड़ा सा एक तरफ करके एक छुच्छी को बहार निकल लिए और फिर नंगी चुकी को गूंथते हुए चाचा उसके एहसास से गंगानने लगे... वो अपने होंठों से भाभी की गर्दन को चूमने चाटने लगे जिससे भाभी भी धीरे धीरे गरम होने लगी...





वहीं चाचा के धक्के भाभी की गांड पर और तेज़्ज़ होने लगे दोनों के कच्चे न होते तो अब तक तो लुंड किसी छेड़ में घुस गया होता.. चाचा को भी इस बात का एहसास हुआ और उन्होंने भाभी की चुकी से हाथ हटाया और नीचे लेजाकर अपने कच्चे के नाड़े को पकड़ कर उसे खोल दिया और फिर नीचे सरका कर पूरी तरह से निकल diya...aur पूरे नंगे हो गए...

चाचा इस बात को सोचकर नेहड़ उत्तेजित हो रहे थे की वो अपनी बेटी के बगल में. बिलकुल नंगे लेते हैं... और फिर कुछ ख्याल उनके मन में आया जिसे सोचकर hi उनके दिल की धड़कने बढ़ गई...

चाचा एक बार हाथ फिर से नीचे ले गए... और भाभी के चूतड़ों पर फिरते हुए जो उन्हें पल्ली की लग रही थी अपनी उँगलियों को उसकी कच्ची की लास्टिक में फंसा दिया और धीरे धीरे नीचे सरकने लगे..

अपनी बेटी की कच्ची उतरने के ख्याल से hi वो पागल से हो रहे थे जैसे जैसे उनका हाथ नीचे जा रहा था पल्ली की कच्ची नीचे जा रही थी... और फिर कच्ची जांघ में जाकर फंस गयी जहाँ बिना भाभी की गांड उठाये निकलना संभव नहीं था तो चाचा ने भाभी के चूतड़ों को पकड़ कर थोड़ा सा ऊपर ज़ोर लगाया जिस बात का एहसास भाभी को व्ही हुआ की कोई उनकी कच्ची उतरने की कोशिश कर रहा है उन्हें ये रोमांच ाचा लग रहा था तो भाभी ने भी अपनी बड़ी सी गन्डको थोड़ा सा ऊपर उठाकर कच्ची निकलने में मदद की..

भाभी क्क इस तरह साथ देना चाचा के लिए एक अलग hi इशारा बन गया.. वो निश्चित हो गए की उनकी बेटी भी वही चाहती है जो वो चाहते हैं और इसीलिए कच्ची उतरने में उनका साथ दे रही है..

चाचा के लिए तो इससे बड़ी ख़ुशी की बात hi क्या थी बस उन्होंने बिना किसी देरी के पल्ली की कच्ची को भाभी की जांघों से नीचे सरका दिया और फिर टैंगो से पूरी तरह निकल कर भाभी को और उनकी नज़रो में अपनी बेटी को नीचे से नंगा कर दिया...

इस एहसास के साथ की उनकी बिटिया रानी की छूट और गांड बिलकुल नंगी है वो उत्तेजना में बहने लगे...

चाचा के मन में इस वक़्त अलग अरमानो का सैलाब आया हुआ था... कभी उनका मन कह रहा था की बेटी की छूट को करीब से देखूं आखिर कैसी है मेरी बेटी की छूट और गांड, एक मन कर रहा था हाथ से टटोलकर अपनी उँगलियों से उसकी गहराई माप लूँ और एक मन कह रहा था अपने होंठो को लगाकर अपनी बेटी की जवानी का सारा रास पि जॉन...

चाचा इसी उधेड़बुन में थे और भाभी भी थोड़ी सी नींद में इस रोमांच से उत्तेजित हो रही थी की कोई उनके शरीर को अपनी मर्ज़ी से इस्तेमाल कर रहा है हालाँकि उन्हें लग रहा था की हम तीनो में से hi कोई है पर कौन है बिना आँख खोले जानने का रोमांच अलग hi मज़ा दे रहा था...

चाचा को समझ नहीं आ रहा था कैसे आगे बढ़ें मिठाई की दुकान में भूखे बच्चे की तरह हालत थी बेचारे चाचा की... और फिर आखिर चाचा ने फैसला ले hi लिए उन्होंने समय और हालात को देखकर जो सबसे उपयुक्त लगा वो चुना...

चाचा बापिस पहले की तरह भाभी पीछे से चिपक कर लेट गए और फिर से अपने खड़े लुंड को भाभी के चूतड़ों के बीच फंसा दिया बस फ़र्क़ इतना था की इस बार दोनों के बीच कोई कपडा नहीं था... जहाँ भाभी अपने चूतड़ों की दरार में नंगे लुंड जा एहसास होते hi उत्तेजित हो गयी और उनकी छूट पानी बहाने लगी...

वहीं चाचा तो अलग hi दुनिआ मेइब थे अपनी बेटी के नंगे चटादो पर अपने नंगे लुंड को रगड़ने के सुख का आनंद ले रहे थे... साथ hi हाथ आगे बढाकर फिर से एक छुच्छी को मसल रहे थे... चाचा के लुंड का टोपा भाभी की गांड के छेड़ से लेकर छूट तक घिस रहा था जिसकी वजह से चाचा और भाभी दोनों hi तड़प रहे थे...

चाचा तो अपनी बेटी की छूट पर लुंड घिसने का सोच सोच कर पागल हुए जा रहे थे... एक एक पल उनके लिए मुश्किल होता जा रहा था और फिर एक पल ऐसा आया की चाचा के हाथ भाभी की एक छुच्छी और कमर पर कास गए और फिर वो हुआ जो किसी ने आज से पहले सोचा भी नहीं था...

चाचा के लुंड का टोपा भाभी की छूट में फंस गया... दोनों की साँसे एक जगह रुक गयी चाचा की तो खासकर... अपने लुंड का टोपा अपनी बेटी की छूट में फंसे होने का एहसास जैसे चाचा के लिए सबकुछ था... कमरे में सिवाए हांफने के और कोई आवाज़ नहीं हो रही थी दोनों कुछ देर ऐसे hi रुके रहे जब चाचा ने उस पल का भरपूर आनंद ले लिए तो फिर आगे बढ़ते हुए उन्होंने एक धक्का मारा और चाचा का लुंड भाभी की छूट में पूरा समां गया...





चाचा अपनी बेटी की छूट में लुंड घुसने के एहसास को सह नहीं पाए और पल्ली को जकड लिए और उनके मुँह से एक आह्ह्ह्हह के साथ आवाज़ निकल गयी..

र चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह पल्ली बितीयआह्ह्हह्ह्ह्ह...

चाचा की आवाज़ और पल्ली का नाम सुनकर भाभी के कान खड़े हो गए

इधर चाचा की आँखें ख़ुशी से फटी हुई थी उन्हें यकीन नहीं हो रहा था की उन्होंने अपना लुंड अपनी बेटी की छूट में घुसा दिया है...

पर इतने में भाभी ने चाचा की आवाज़ सुनकर चेहरा घुमा कर देखा और जैसे hi दोनों की नज़रें एक दुसरे पर पड़ी तो दोनों के hi होश उड़ गए...

दोनों hi एक दुसरे के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकते थे और अभी चाचा का लुंड भाभी की छूट में था दोनों जैसे वहीं जैम गए...

भाभी के तो होश hi उड़ गए की ये क्या हो गया.. आज का दिन उन्हें क्या क्या दिखा रहा था आज ये चौथा लुंड था जो उनकी छूट में घुसा था.. बेचारी भाभी की हालत पतली हो गयी

उधर चाचा भी अपनी बेटी समझ रहे थे वो तो भग्गू की बहु निकली..

प भाभी- छहहाछहा ाअप्प्प... एई सबब

भाभी के मुँह से मुश्किल से ये शब्द निकले..

वहीं चाचा ने भी हिम्मत की बोलने की- बहुरिया टट्टुओ यहाँन kaise...maine तो सोचा की... और फिर चाचा कहते हुए चुप हो गए क्यूंकि उनके मुँह से पल्ली का नाम पहले hi निकल चूका था और ये बात किसी को पता चले की वो अपनी बेटी को छोड़ना चाहते हैं सपने में भी नहीं सोच सकते थे.. और यहाँ उन्होंने किसी परै बहु के सामने नाम ले दिए था...

इतनी देर में भाभी को थोड़ा होश आया और उन्हें कुछ कुछ बात समझ आई तो उन्होंने हिम्मत करते हुए चाचा से कहा- चाचाजी छोड़िये...

चाचा को एक पल तो भाभी क्या कह रही है ये hi समझने में लगा.. और चाचा भी उसका जवाब देते हुए बोले- हनन?? हाँ बहुरिया...

और फिर चाचा ने अपनी पकड़ भाभी की चुकी और कमर से थोड़ी ढीली की साथ hi कमर भी पीछे की जिससे उनका लुंड भी भाभी की छूट से बहार आने लगा...

चाचा भले hi कितने hi शरीफ क्यों न हो थे तो एक मर्द hi और सोचने लगे की क्या ऐसे गदराये जिस्म वाली औरत को यहाँ तक आने के बाद बिना कुछ किये ठीक होगयाही सब सोचते हुए ...जब लुंड सुपडे तक बहार आ गया तो वो रुक गए एक पल के लिए कुछ सोचा और फिर धक्का लगाकर लुंड बापिस अंदर भाभी की छूट में घुसा दिया...

प Bhabhi-aahhhh चच्चा जीईई बहररर निकालिये...

इधर चाचा ने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए...

चाचा ने अपने दिमाग से बाकि बातों को निकला और अभी सामने जो गदराया माल था उसे भोगने की तयारी की..

र चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुरिया अब मुझसे रुका नहीं जायेगा.. अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

प Bhabhi-aahhhh नाहीई चचाजीइइइइइ एई गलतततत है निकालिये

हालाँकि चाचा के लगातार लग रहे धक्को से भाभी भी गरम होती जा रही थी

र चाचा- ारीये बहुरियाआह्ह आईसीईई कैसी निकल दुनननन आअह्ह्ह्हह बिनाआह्ह्ह्ह अपनाए काम पूरा kiyeee...ahhhh

भाभी भी अब चुदाई के मज़े में खोटी जा रही थी वहीं उन्होंने सोचा की जब लुंड छूट में चला hi गया है तो अभी निकले या कुछ देर बाद क्या फर्कक पड़ता है चाचा को अपना कान निपटा hi लेने दिया जाये... ये सोचकर विरोध छोड़कर भाभी भी चुदाई का मज़ा लेने लगी...

प Bhabhi-aahhhh अह्ह्ह्हह चचहहआजीई मज़ाआहहह आए रहा हैईईई ऐसी हीईई कर्रूआ

चाचा भाभी की सिसकियों और बातों को सुनकर खुश हो गए और अपने धक्को की गति बढ़ा दी

चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुरियाआह्ह क्या छःहोंऊऊत है रे टेरिइइइइइइइ इतनीई garam...aur कासी हुइइइइइइ...

प Bhabhi-aahhhh और तेज़ करिये चचाजीइ..

भाभी चाचा को उकसाते हुए बोली तो चाचा ने भी उन्हें छोड़ते हुए भाभी के ऊपरी हिस्से को अपनी तरफ पलट लिए और भाभी की टीशर्ट को पकड़ कर नीचे खींच दिया जिससे भाभी की दोनों छुछियां नंगी हो गयी और चाचा नीचे से भाभी की छूट में धक्के लगते हुए एक हाथ से भाभी की एक छुच्छी को मसलने लगे वहीं दूसरी को मुँह में भर के चूसने लगे...





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चाचा ने सपने में भी नहीं सोचा था की वो भग्गू की बहु को ऐसे नंगा कर के कबि छोड़ सकेंगे पर होनी को कौन ताल पाया है..

यही हाल भाभी का था जो अपने ससुर सामान चाचा से चुद रही थी... और सोच रही थी अभी कुछ और होना रह गया है क्या...

चाचा के मन में कई सवाल चल रहे थे वहीं भाभी के मन में भी...

चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुरिया टट्टुओ यहाँ इस्सस हालत में कैसी आए... और यहाँ पल्ली के कपड़ो में कैसे सो रही थीईई...

चाचा ने भाभी की छूट में धक्के लगते हुए पुछा..

प Bhabhi-aahhhh ह्म्मम्म्म्म चच्चा जीई वो मैं chachhhhhiiiiiiiiiiii आप अभी कररर करर्ते राहू मैंनं बाद में सबबबबबब बता डूंगीए अह्ह्ह...

चाचा- ीीीरी भीईईई ठीक है...

चाचा को हालाँकि दुःख हुआ था की वो पल्ली को नहीं छोड़ पाए पर भाभी जैसी गदराई हुई घोड़ी को छोड़ने का मौका पाकर उनके सरे दुःख दूर हो गए थे.. भाभी का बदन hi कुछ ऐसा था की दुनिया का कोई भी मर्द उन्हें एक बार नंगा देखकर बिना छोड़े नहीं छोड़ पायेगा...

चाचा ने अब कमान सँभालते हुए भाभी के पीछे से उठे पर उनके चूतड़ों के पास बैठ गए पर बिना लुब्द को भाभी की कासी हुई छूट से निकले और हाथों को उनकी दोनों छूछीयों पर रखकर भाभी को सटासट छोड़ने लगे...





भाभी भी आह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह करके सिसकियाँ लेती हुई चाचा से चुद रही थी.... ..

चाचा तो घपाघप लुंड भाभी की छूट में पेले जा रहे थे...

अपने पति और भाभी के खेल से बेखबर चची और पल्ली कर्मा की भैंसो को चारा पानी देने में लगे हुए थे... उन दोनों के चेहरे पर भी संतुष्टि के भाव थे क्यूंकि दोनों की hi जमकर चुदाई हुई थी... खासकर टिहरी चुदाई ने तो उन्हें पूरा संतुष्ट कर दिया था...

इधर कमरे में भाभी और चाचा की चुदाई की रफ़्तार हर घटते पल के साथ बढाती जा रही थी...





चाचा ने भाभी को सीधा करके उनकी पीठ पर लिटा लिए था और खुद उनके पैरों के बीच में बैठकर उनके कंधो को पकड़ कर सटासट लुंड को उनकी छूट में पेल रहे थे..

ये बात तो सच है की भले hi बीवी कितनी hi कामुक और खूबसूरत क्यों न हो जो मज़ा परै स्त्री को छोड़ने में है वो अलग hi है... उसी मज़े को चाचा भरपूर तरीके से ले रहे थे क्यूंकि जिस परै स्त्री को वो छोड़ रहे थे वो रिश्ते में उनकी बहु लगती थी... जवान और गदराई हुई स्त्री वो भी ऐसे बदन वाली की देखकर मुर्दे का लुंड भी अकड़ने लगे

चाचा- ीीीरी लेटी बहुरियाआह्ह अह्ह्ह्हह क्या कासी हुई छूट है रे टेरिइइइइइइइ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआअह्ह्ह ohhhhhhhhhhhh धननया हो गया मैं तो तेरे जैसी चुत छोड़ कर अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

प भाभी- हम्म्म्म अह्ह्ह चचहहआजीई बससससस अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह छोड्दिईए...

भाभी भी पूरे जोश में थी... और चाचा का हौसला बढ़ा रही थी...

इधर चाचा भी अब अपने काबू से बहार निकल चुके थे और अपने चरम की और बढ़ रहे थे भाभी भी चाचा के तेज़ तेज़ धक्कों के साथ आगे बढाती जा रही thi...aur अपनी उत्तेजना के शिखर के करीब hi थी...

चाचा अपनी उत्तेजना के वेग में आकर और तेज़ धक्के लगाने लगे जिससे भाभी की सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगी... भाभी की सिसकियाँ चाचा को और उत्तेजित कर रही थी और उतनी hi तेज़ी से वो भाभी की छूट में लुंड पेल रहे थे





चाचा के हर धक्के पर भाभी की छुछियां झूल रही थी जिसे चर्चा मंत्र मुग्धा होकर देख रहे थे..

इसी गति से चाचा ने कुछ देर छोड़ा होगा की उनकी गति और बढ़ गयी और 1-15 झटके गुर्राते हुए उन्होंने लम्बे लम्बे भाबी की छूट में लगा दिए और फिर भाभी को कसके जकड लिया और फिर उनके लुंड ने रास की धार भाभी की छूट में छोड़ने लगे....

इधर भाभी भी ने भी जब अपने ससुर सामान चाचा जी का वीर्य अपनी छूट में बहता महसूस किआ तो वो भी भरभरा के झड़ने लगी... आज के दिन में भाभी न जाने कितनी बार झाड़ चुकी थी उन्हें खुद भी अंदाज़ा नहीं था झड़ने के बाद चाचा भाभी के बगल में अपनी पीठ पर लेट कर हांफने लगे... वहीं भाभी का भी यही हाल था कुछ पल बाद जब झड़ने का सुरूर हटा तो भाभी को एक बार फिर से ग्लानि और शर्म ने घेर लिए और वो जल्दी से उठी अपने कपडे बटोरने लगी...

वहीं चाचा ने भाभी को उठते हुए देखा तो वो भी कुछ सोच में पद गए और भाभी को रोकने लगे की बहुरिया सुन तो सही पर भाभी ने जल्दी जल्दी अपने कपडे उठाये और दुसरे कमरे में भाग गयी और दरवाज़ा बंद कर दिया..

चाचा भी उठे और अपनव कपडे पहनकर बहार आये और बंद दरवाज़े की और देखा और फिर कुछ पल बाद दरवाज़ा खुला तो भाभी ने अपने पूरे कपडे पहन रखे the...bhabhi चाचा को देखकर सर झुककर उनसे दूर होकर आंगन में जाने लगी... चाचा ने उन्हें रोकने के लिए मुँह खोला hi था की दरवाज़ा खुल गया और सामने देखा तो चची और पल्ली अंदर आ रहे थे..

म चची- ऐ ग तुम कब आये??

चाचा थोड़ा सा झिझकते हुए बोले

Chacha-bas अभी थोड़ी देर पहले..

प भाभी- चची अब मुझे जाना है पल्ली चल साथ में..

म चची- हाँ बीटा अभी छुड़वाती हूँ... पल्ली बीटा छोड़ आ भाभी को और आते वक़्त दुकान से चाय पट्टी ले आइओ..

Palli-theek है मम्मी आओ भाभी...

पल्ली भाभी को लेकर चली गयी वहीं चची अंदर आकर बैठ गयी आंगन में..

म चची- तुम तो रात तक आने वाले थे काम जल्दी हो गया क्या...

र चाचा- हाँ ख़त्म हो गया तो आ गया..

म चची- तुम आये तो बहुरिया सो रही थी क्या?

र chacha-haan न नहीं नहीं जगी हुई थी.. वैसे वो यहाँ क्यों सो रही थी..

म Chachi-are सिलाई सिखवानेके लिए आई थी जग्गू छोड़ गया था दोपहर में थोड़ी तबियत ख़राब हो गयी तो मैंने बोलै तू यहीं आराम करले शाम को पल्ली के साथ चली जाना..

र chacha-acha हाँ सही किआ...

म Chachi-kuch खाने को लगाऊं तुम्हारे लिए..

र चाचा- नहीं पल्ली आ जाये तो चाय रख लेना..

म Chachi-theek है

इसके बाद चची घर के कामो में लग गयी और चाचा अपने अलग ख्यालों में...

ये हुई अतीत की बात अब बापिस लौटते हैं वर्त्तमान में जहाँ हमारा दोस्त कर्मा अपने घर पहुँच कर मोटरसाइकिल कड़ी करके अंदर आ रहा था..

बाकि सब लोग आंगन में hi बैठे हुए बातें कर रहे थे.. मेरे पजंचते hi माँ ने पुछा- छोड़ आया उन्हें बड़ी देर करदी...

में- हाँ उन्होंने बिना चाय पिए नहीं आने दिया...

Mausi-waise है बड़ी मिलनसार औरत..

माँ- हाँ बिलकुल बहुत hi मिलनसार है मुझे बहुत पसंद है क्यों कर्मा के पापा..

माँ ने जानकार पापा को छेड़ते हुए कहा पापा भी समझते हुए मुस्कुरा दिए और बोले- हाँ सही बात है.. वैसे घर कहाँ है उनका.?

Maa-haan हाँ बीटा बता घर कहाँ है उनका..

माँ ने एक और तीर छोड़ा जिस पर पापा झेंप गए वहीं हम सब अनजान थे

Me-are माँ मैं उनका घर पहले से hi जनता था..

माँ- हैं कैसे..

फिर मैंने सबको नीतू की दोस्त है अंजलि ऐसे करके पूरी बात बताई... थोड़ी देर ऐसे hi हंसी मज़ाक चलता रहा और फिर थोड़ी देर में सब अपने अपने कमरे में चल दिए सोने के लिए....

इसके आगे क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट...
 
गाइस प्लीज कमैंट्स करिये एंड सपोर्ट करते रहिये
 
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