Incest Katha Chodampur Ki - Page 19 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

अपडेट पोस्ट की हैं परिवारिक चुदाई संग्रह में अपना प्यार दिखाएं और प्यारे प्यारे कॉमेंट्स करके उत्साह बढ़ाते रहें।
 
परिवारिक चुदाई संग्रह

अपडेट पोस्ट की हैं कृप्या आनंद लें और अपने सुझाव ज़रूर दें।
 
मां का प्यार





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ज़्यादा समय नहीं मिल प् रहा आज रात को पूरी कोशिश रहेगी....
 
फिर मैंने सबको नीतू की दोस्त है अंजलि ऐसे करके पूरी बात बताई... थोड़ी देर ऐसे hi हंसी मज़ाक चलता रहा और फिर थोड़ी देर में सब अपने अपने कमरे में चल दिए सोने के लिए....

अपडेट 116

पापा और माँ अपने कमरे में चल दिए, और फिर कमरे में पहुँच कर पापा ने कमरे का दरवाज़ा बंद किआ और फिर माँ को बाहों में भर लिए..

Maa-are क्या कर रहे हो इतने बेसब्री क्यों बन रहे हो?

Papa-jiski ऐसी बीवी हो वो सबर कैसे कर सकता है...

माँ- ाचा सच में?

पापा- हाँ मेरी रानी सच में ये देखो सबूत.

पापा ने माँ का हाथ अपने सख्त लुंड पर रखते हुए कहा..

माँ ने पापा के लुंड को पाजामे के ऊपर से hi पकड़ लिए और दबाते हुए बोली- ये मेरी वजह से है या किसी और के ख्यालों का असर है...

पापा- थोड़ा सा चौंकाते हुए अरे आज तुम्हे हुआ क्या है कैसी बातें कर रही हो..

माँ- अछि बातें कर रही हूँ तभी तो देखो तुम्हारा छोटा उस्ताद कैसे ठुमके मार रहा है मेरे हाथ में...

पापा- ये तो तुम्हारे इस गदराये बदन का जादू है...

माँ- ये मेरे बदन का नहीं तुम्हारे ख्यालों की वजह से है...

Papa-tum कहना क्या चाहती हो?

पापा ने माँ को बाहों में भरे भरे hi बिस्तर पर बिठा दिया और खुद भी बैठ गए..

माँ- यही की आदमी कितना भी मन करे पर शादी के बाद धीरे धीरे रोज़ एक hi चपेट लेकर ऊबने लगता है..

Papa-kaisi बातें कर रही हो रानी तुमसे मैं कभी नहीं ऊब सकता और क्या आजतक कभी ऐसा हुआ है?

माँ- हाँ नहीं हुआ है और मैं ये भी मानती हूँ की शादी के बाद शायद hi कोई रात रही होगी अब तक की जिसमे तुम्हारा ये सांप मेरे किसी बिल में न घुसा हो पर फिर भी?

पापा- फिर भी क्या?

Maa-phir भी ये की तुम ये मत सोचो की मुझे कहीं बुरा तो नहीं लगेगा बस इतना बताओ की तुम्हारे मन में उस औरत को देखकर क्या क्या ख्याल आ रहे थे..

Papa-are तुम तो उस औरत के पीछे पद गयी ho...mere पास इतनी सुन्दर और गदरायी बीवी है मैं क्यों किसी औरत के बारे में सोचूंगा...

माँ- अरे ये आदर्श पति वाली बातें छोडो सच सच बताओ..

पापा- आज न जाने कौनसा भूत सर पर बैठ गया है तुम्हारे...

माँ- सच का भूत, देखो शादी के इतने साल बाद भी अगर हम अपने दिल की बात एक दुसरे को बता न पाएं और समझ न पाएं तो सही नहीं है.. और मैं जानती हूँ की मर्द कितना भी ाचा क्यों न हो पर परै औरत को देखकर एक बार कुछ न कुछ ख्याल ज़रूर आता है वो बिलकुल साधारण है तो बस वही जानना चाहती हूँ.

पापा-. अरे तुम तो मास्टरनी बन गयी बिलकुल वैसे hi बोल रही हो..

इतना बोल कर पापा सिरहाने से तक लगा कर लेट गए...

माँ- अरे अब मज़ाक नहीं बताओ न.....

माँ ने उनके सीने पर सर रखकर लेटते हुए कहा...

पापा- बिना सुने तुम मानोगी नहीं... वैसे जो भी तुमने कहा वो बिलकुल सही है मैं तुम्हारी बात मंटा हूँ... पति पत्नी को एक दुसरे का बहुत ाचा दोस्त होना चाहिए जिससे एक दुसरे ऐ हर तरह की बातें साँझा कर सकें. पर.

माँ- पर क्या पर ?

पापा- दर यही आ जाता है मेरी रानी की सच बताने के चक्कर में अचे खासे रिश्ते में खटास न आ जाये क्यूंकि सच बताना एक चीज़ है और सच सुनकर समझना, बिना अपनी राइ बनाये अलग चीज़ है.

माँ- हाँ जी ये तो तुम सही कह रहे हो तो तुम्हे क्या लगता है मैं सच सुन सकती हूँ और सह सकती हूँ की नहीं..

Papa-abhi तक तो जितना कहा है तुमने कभी कुछ गलत प्रतिक्रिया नहीं दी... पर बाकि आगे देखेंगे..

माँ- ठीक है जी जब तुम्हे लगे की तुम बता सकते हो और मैं सुन सकती हूँ तो मुझे ज़रूर बताना..

पापा- ऐसी बात नहीं..

Maa-are बस अब पर अभी के लिए उस औरत के बारे में जो ख्याल हैं वो सच जानने हैं मुझे..

Papa-tum घूम कर उस औरत पर hi आ गयी

माँ- वो औरत चाबी है तुम्हे और हम दोनों के बीच की झिझक को खोलने की.. वैसे तुम्हे उसकी जगह किसी और को लाना हो तो भी मुझे कोई परेशानी नहीं है...

पापा- नहीं बाबा किसी को नहीं लाना..

Maa-to उसी के बारे में बताओ..

पापा- इतने अचे से तो नहीं देख पाया पर जितना लगा की ाचा खासा भरा हुआ शरीर था उसका...

माँ- ाचा और क्या देखा माँ ने पापा के लुंड को हाथ से सहलाते हुए पुछा..

पापा- चौड़े चूतड़, गदराया हुआ सपाट पेट... भरी छुछियां..

Maa-aur बोल रहे हो की देख नहीं पाया ठीक से..

पापा- फिर मैं नहीं बता रहा ऐसे छेड़ेगी तो..

Maa-acha ाचा बताओ na...ab नहीं करुँगी..

गांड से लग रहा था की गांड मरवाने की शौक़ीन होगी... वैसे पूरा शरीर hi कामुक था, ऐसा शरीर जिसे मौका मिलते hi मसलने को हर कोई बेताब रहे...

माँ- अह्ह्ह्ह और आगे..

माँ ने पापा के लुंड को मुठी में कस्ते हुए poocha..jisse पापा की भी हलकी सिसकी नहीं गयी..

मन कर रहा था की दोनों हाथों से उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा कर अपने होंठों से उसके गोर पेट और नाभि को चाट लूँ...

माँ - हम्मन चाट लो...

फिर माँ को अचानक जैसर कुछ याद आया वो बोली- सुनो ग मेरे पास एक उपाय है..

पापा- क्या..

माँ- तुम जो भी उसके साथ करना चाहते थे वो बताने की जगह मेरे साथ करके दिखते जाओ. . और मैं उस औरत की तरह अभिनय karungi..isse तुम्हे ऐसा लगेगा मुझे नहीं उसे hi कर रहे हो...

पापा- सच में क्या!?

माँ- मज़ाक थोड़े hi करुँगी बताओ करोगे न?

पापा भी ाव माँ की बातों और उस औरत के बारे में सोच कर उत्तेजित हो गए थे और माँ भी..

पापा- पर मेरे ख्यालों के अनुसार चलें तो मैंने तो उसके साथ जो भी कर्मा चाहा वो खुले आस्मां के नीचे करना चाहा था..

माँ- खुले आसमान के नीचे.... माँ ने कुछ सोचा और बोली... बस इतनी सी बात मिल गया उपाय ये बोलकर कड़ी हो गयी इधर पापा थोड़े हैरान थे की कौनसा उपाय मिल गया...

पापा- अरे पर कहाँ क्या कैसा उपाय मिल गया...

माँ- अरे ये सब तुम छोडो और बस चलो मेरे साथ

माँ ने पापा को खींचते हुए बीएड से उठा दिया और खड़ा कर लिए और फिर धीरे से दरवाज़ा खोल कर सर निकल कर आँगन में झाका और फिर पापा का हाथ पकड़ कर बहार ले आई...

जहाँ यहाँ पति पत्नी का खेल चल रहा था यहाँ से थोड़ा सा दूर कुछ घर छोड़ कर ममता चची बिस्तर पर पूरी नंगी होकर घोड़ी बानी हुई थी और उनके पीछे से उनकी गांड में एक लुंड अंदर बहार हो रहा था और वो लुंड उनके पति परमेश्वर का था जो चची के गदराये चूतड़ों को थामे सटासट अपनी बीवी की गांड मार रहे था.. उनके चेहरे से लग रहा था की वो झड़ने से ज़्यादा दूर नहीं हैं...

वहीं चची का भी यही हाल था, अपने डेंटन को मीस्ते हुए चीखने से खुद को रोक रही थी पर ज़्यादा देर नहीं रोक पाई और aahhhhhhhhhh के साथ झड़ने लगी जैसे hi चाचा को चची का बदन कंपता हुआ महसूस हुआ वो भी खुद को रोक नहीं पाए और चची की गांड को अपने रास से भर दिया... और फिर कुछ पल बाद चची के बगल में लेट गए....

दोनों अपनी अपनी सांसो को दुरुस्त करने लगे...

चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी रानी तुम्हारी गांड मार्के मज़ा आ जाता है एक जादू है इसमें...

चची- सछही?

चाचा- झूठ कहे बोलेंगे मेरी रानी..

चची- ाचा भग्गू की दुल्हिन की छूट से भी ज़्यादा जादू है क्या...

चाचा के कानो में जैसे hi ये शब्द पड़े उन्हें दिल का दौरा पड़ते पड़ते बचा... चाचा की सांसें थम सी गयी मनो और चेहरे पर हवाइयन उड़ने लगी...

चाचा स्थिति को सामान्य करने की आखिरी कोशिश करते हुए बोले- यह येअहहहह तुम क्या कह रही हो मंमता.. मैं भग्गू की दुल्हिन के वो साथ...

चाचा ने बड़ी मुश्किल से ये शब्द अपने मुँह से निकले...

चची ने तगड़ा धमाका किआ था.. धमाके के बाद का सन्नाटा पूरे कमरे में फ़ैल गया था...

वहीं रात के सन्नाटे में कर्मा के घर बापिस देखते हैं क्या हो रहा है तो यहाँ माँ का ब्लाउज खुला हुआ है पैट दोनों तरफ फैले हुए हैं दोनों छुछियां बहार हैं जिन्हे कोई गूंथ रहा है

माँ- अह्ह्ह्ह भाई साहब क्या कर रहे हैं इतनी बेरहमी से क्यों मसल रहे हैं... छोड़िये कोई देख लेगा...

पापा- ऐसे कैसे छोड़ दूँ बहन जी चाँद की रौशनी में तुम्हारी छुछियां इतनी चमक रही हैं मन करता है इन्हे खा जॉन...

माँ- नहीं भाई साहब ऐसे खुले में ये सब ठीक नहीं कोई देख लेगा तो मैं तो बदनाम हो जाउंगी...

ग हाँ माँ और पापा का ये रंगीन और कामुक खेल खुले आसमान के नीचे छत पर चल रहा था जहाँ चाँद की रौशनी में दूर दूर तक खेत hi खेत दिखाई दे रहे थे तो दूसरी तरफ नींद में खोया हुआ गाओं...

माँ भी सविता का पूरा अभिनय कर रही थी जिससे पापा को और मज़ा आ रहा था और वो खुल के बिना किसी झिझक के माँ को वो औरत समझते हुए भोग रहे थे..

Maa-aahhhhh भाई साहब काटिये मत मेरी छूछीयो को ये बहुत संवेदनशील हैं...

पापा- क्या करूँ बहन ग मन तो कर रहा है इन्हे खा जॉन...

Maa-kha जाइये भाईसाब पर आराम से ऐसे निशान पद गए तो मेरे पति को पता चल जायेगा....

पापा- क्या करूँ बहन जी काबू नहीं होता तुम्हारे इस मखमली बदन को देखकर..

माँ- काबू तो करना होगा भाई साब नहीं तो अनर्थ हो जायेगा...

पापा- ऐसा अनर्थ हो जाने दो बहन जी अब मुझे मत रोको देखो मेरी क्या हालत जो चुकी है ये कहकर पापा माँ का हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर रख देते हैं....

माँ एक बार लुंड को महसूस करती है और फिर छोड़ देती है

Maa-haay दिया नहीं भाई साहब मैंने आज तक अपने पति के अलावा किसी पराये मर्द का लिंग देखा तक नहीं और आप मुझे ये हाथ में पकड़वा रहे हैं..

पापा- मैं तो आपको अपना हाल बता रहा हूँ बहन ग देखिये न ये कितना कड़क हो गया है..

ये कहकर पापा ने फिर से माँ का हाथ पकड़ कर लुंड पर रख दिया और अपने हाथों से सहलवाने लगे..

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाई साहब ये तो कितना कड़क हो रखा है..

Papa-sab आपकी वजह से है बहन ग..

Maa-meri वजह से कैसी...

पापा- आपका ये बदन ये गोल गोल संतरे जैसी छुछियां ये पतीले जैसे चूतड़.. मांसल कमर देखकर hi मेरा लुंड खड़ा हो गया है...

माँ- छी भाई साहब कितना गन्दा बोलते हैं आप..

पापा- बहन जी लुंड को लुंड hi तो बोलूंगा न और आप वो सब छोड़िये और मुझे इससे आराम दिलाइये..

Maa-main कैसे आराम दिलों...

पापा- बस आपको मेरा लुंड मुँह में लेकर चूसना होगा..

माँ- छहिए ये भी कोई मुँह में लेता है ये तो पेशाब करने के लिए होता है...

Papa-are बहन जी एक बार लेकर तो देखिये आपको पता चल जायेगा मुँह में लेने की चीज़ है की नहीं..

माँ- नहीं नहीं मैंने कभी अपने पति का भी नहीं लिए मुँह में..

Papa-to आज कोशिश कर के देख लीजिये ाचा लगे तो उनका भी चोप्स देना

ये कहते हुए पापा ने माँ को नीचे घुटनो पर दबा दिया और माँ के होंठों पर अपने सुपडे को फिरने लगे..

माँ- नहीं मुझे ये सबबबहुपपपप

Papa-bahan जी अभी बातों का नहीं कुछ करने का समय है और ये बोलकर माँ के बालों को पकड़ कर अपने लुंड से माँ के गरम मुँह को छोड़ने लगे...

वहीं दो गलियां छोड़कर एक घर के कमरे में भग्गू बिस्तर पर नशे में पड़ा हुआ था उसे कोई खबर नहीं थी की वो कहाँ कैसे है वहीं उसके ठीक बगल में उसी बिस्तर पर उसकी बीवी पूरी नंगी अपनी टंगे खोल कर लेती हुई थी और उसकी टैंगो के बीच भग्गू का सागा छोटा भाई जग्गू था जिसका लुंड अपनी भाभी की छूट से अंदर बहार हो रहा था और दोनों hi मज़े से आहें भर रहे थे...

उधर भग्गू इस बात से बेखबर की उसका सागा भाई उसके बगल में उसकी बीवी को छोड़ रहा है नशे में धुत्त पड़ा हुआ था..

प Bhabhi-ahhhhhhhhh माआआअह्ह्ह ohhhhhhhhhhhh आईसीईई hiiiiiiiiiii छठुड्ड्ढ दोऊ जग्ग्गु भैय्या आह्हः अपने भाई की बीवी को उसके बगल में...

जग्गू भाभी को छोड़ते हुए अपना हाथ बढ़ता है और अपने बेहोश पड़े भाई को हिलता है और कहता है..

जग्गू- ुह्ह्ह्ह देख भाई आह्ह्ह्ह अगर तू सही होता तो आअज तेरे hi बिस्तर पर तेरे बगल में तेरी बीवी मुझसे न चुद रही होती...

प भाभी- ये hi अचे आह्ह्ह्ह होते तो बात hi क्या थी भैय्यावहः सारा रोना तो ये hi है... पर अब बहुत रो लिए मैंने अब मैं हर वो सुख लुंगी जो मुझे लेना चाहिए...

जग्गू- ुह्ह्ह्ह बिलकुल bhabhiiiiiiiiii तुम्हारा पूरा हक़ बनता है... और सरे सुख मिलेंगे भी तुम्हे...

इसके बाद जग्गू ने भाभी की छूट में कसकर 10-12 धक्के लगाए और अपना रास भाभी की छूट में भर दिया.... और फिर दोनों एक दुसरे से चिपक कर सोने लगे...

इधर ममता चची और चाचा के बीच क्या हुआ ये देखते हैं...

म चची- क्या हुआ पल्ली के पापा.. बताओ भग्गू की दुल्हिन से भी ज़्यादा मज़ा आया क्या...

चाचा- वोऊ मैं क्या...

म Chachi-are ये क्या मैं वो लगा रखा है... जो पूछ रही हूँ वो बताओ न. भग्गू की दुल्हिन को छोड़कर कैसा लगा..

चची ने चाची को मुस्कुराते हुए देखा तो चाचा को कुछ हिम्मत बंधी और बोले..

चाचा- वो अच्छा लगा...

म Chachi-sirf ाचा.. या बहुत ाचा...

चची ने चाचा के लुंड को जो अब तक मुरझाया हुआ था उसे सहलाते हुए कहा..

चाचा- हाँ बहुत ाचा लगा...

म चची- और खुल कर बताइये न पल्ली के पापा क्या ाचा था

चची ने ये कहकर चाचा के लुंड को जीभ निकल कर चाट लिए...

चाचा के अंदर जो दर आया था वो धीरे धीरे निकलने लगा और वो उत्तेजित होने लगे...

चाचा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत मस्त संतरे जैसी छुछियां थी उसकी, दो तरबूज जैसे गोल मटोल चूतड़ और बीच में छूट और गांड जो जन्नत के सीधे द्वार मालूम पड़ते हैं...

म चची- अह्ह्ह्हह और बताओ...

चची ने चाचा की गोलियों को चूसते हुए कहा...

चाचा- जब लुंड उसकी छूट में डाला तो ऐसा लगा किसी गरम माखनं की पोटली में दाल दिया हो अह्ह्ह्हह्हह अब रहा नहीं जा रहा... आजा मेरी रानी...

म चची- मैं तो तुम्हारे लिए हमेशा तैयार हूँ राजा..

चाचा का लुंड फिर से खड़ा हो गया तो चाचा ने चची को पीठ पर लिटाते हुए उनके ऊपर आ गए और अपने लुंड को चची की छूट के होंठों पर रखते हुए धक्का मारकर अंदर घुसा दिया और फिर चुदाई का खेल शुरू हो गया...

म Chachi-ahhhhhhhhh साजन जी ऐसे hiiiiiiiiiii मज़ा आ रहा है...

चाचा- क्या छूट पाई है तूने रानी कितना भी छोडूं कासी हुई hi लगती है...

म Chachi-to और तेज़ छोड़ो राजा और टांके खोल दो मेरी छूट के...

इधर छूट और लुंड का खेल शुरू हो गया था और दोनों लोग ख़ुशी से चुदाई कर रहे थे तो वहीं कर्मा के घर में एक सख्स ऐसा भी था जो उदास था.

वो थी मौसी... आखिर पति से जुदाई का दुःख उनके मन को मसोस रहा था कोस रही थी फ़ौज की नौकरी को तो कभी खुद ko..khair सोना छह रही थी बेचारी पर कई बार करवटें बदलने के बाद भी नींद का नमो निशान नहीं था आँखों में... कुछ देर लेटने के बाद भी नींद नहीं आई तो हार कर बिस्तर सेठ और कमरे से बहार आ गयी देखा तो पूरा आँगन सूनसान पड़ा था, मौसी जाकर आंगन में पड़ी खत पर बैठ गयी फिर वही सब उनके दिमाग मैं घूमे जा रहा था.. उठ कर रसोई मैं जाकर पानी पिया और गले को तैरकर लिए... पर सूखे दिल का क्या करें ये hi सोचते हुए उनके कदम सीढ़ियों की तरफ चल पड़े... मौसी ने सोचा कुछ देर छत पर टहलेंगी तो शायद उसके बाद नींद आ जाये..

और एक एक करके वो सीढ़ियां ऊपर चढ़ने लगी जब कुछ अंतिम सीढ़ियां बची थी तो मौसी का ध्यान अचानक से आ रही आवाज़ पर गया... जो की साफ़ मालूम पद रहा था की किसी की सिसकियों की आवाज़ थी...

मौसी को थोड़ी सी हैरानी हुई और मन में सवाल भी आया की ये आवाज़ कहाँ से और कैसे आ रही है तो मौसी में कदम और ऊपर बढ़ा दिए पर बहुत आराम से बिना किसी आवाज़ के साथ मौसी ऊपर चढ़ने लगी और आवाज़ साफ़ होने लगी हर कदम के साथ...

जैसे hi मौसी का चेहरा सीढ़ियों से ऊपर आया और उन्होंने नज़र घुमा कर छत के चरों और देखा तो एक कोने पर उनकी नज़रें टिक गयी... जहाँ उनकी बहन छत की मुंडेर को पकड़ कर झुकी हुई हैं उनकी साड़ी और पेटीकोट उनकी कमर से ऊपर इकठ्ठा हो रखा है और पीछे से जीजाजी ठप्प ठप्प ठप्प्प लगातार धक्के लगाए जा रहे हैं..

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माआआअह्ह्ह ohhhhhhhhhhhh भईईई साहब अह्हह्ह्ब्ब्ब्ब बस्सस भी कीजिये...

Papa-nahi बहन अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जी अब nahiiiiiiiiiiiii रुक्खक्क सकताआआअह्ह्ह्हह अब तो आपके खेत मेंननं बारिश कार्की hiiiiiiiiiii छोडूंगा....

माँ- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाई साहब अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अच्छा लग रहा है....

मौसी कोई बच्ची तो थी नहीं जो ये नहीं जान पति की यहाँ क्या चल रहा है पर वो इस बात से हैरान थी की ये जीजी और जीजाजी एक दुसरे को बहन ग और भाई साहब क्यों कह रहे हैं...

उधर इससे बेखबर की कोई उन्हें देख रहा है पापा माँ की कमर को पकड़े हुए थप थप थप माँ की चूतड़ों पर अपनी जांघें मार रहे थे...

मौसी ने एक पल को सोचा की वो बापिस नीचे लौट जाएं पर उनके मन की जिज्ञासा और उत्तेजना ने उन्हें जाने नहीं दिया और वो hi टिक गयी साथ hi अपने जीजी और जीजाजी की चुदाई देखकर गरम होने लगी और ब्लाउज के ऊपर से hi अपनी छूछीयो को मसलने lagi....aur सोचने लगी काश अभी कोई उनकी छूछीयों को मसलता या काश जीजी की जगह मैं होती और वो लुंड मेरे अंदर बहार हो रहा होता..

मौसी इन्ही ख्यालों में डूबी हुई थी की अचानक से एक आवाज़ आई नीचे से जिसे सुनकर मौसी चौंक गयी उन्होंने सँभालने के बाद बापिस छत पर देखा तो माँ पापा मस्त होकर लगे हुए थे इसका मतलब ये आवाज़ उन्होंने नहीं सुनी...

मौसी न चाहते हुए भी सीढ़ियों से नीचे आ गयी और देखा रसोई में गिलास गिरा हुआ था और सामने देखा तो मैं खड़ा था...

मौसी- कर्मा गिलास तूने गिराया की?

में- वो गलती से गिर गया मौसी... तुम उसी से जग गयी क्या? मैं तो पानी पीने आया था..

Mausi-nahi नहीं मैं तो जगी हुई hi थी इसलिए आवाज़ सुनकर आ गयी देखने..

Me-kyun नींद नहीं आ रही क्या मौसी?

मौसी- हाँ बीटा न जाने क्यों आ hi नहीं रही..

में- मौसा की वजह से?

Mausi-ab क्या बताऊँ तुझे..

में- मुझे पता है क्यों नहीं आ रही मौसी.. तुम्हे मौसा के साथ सोने की आदत पद गयी थी कुछ दिन से और आज अकेली हो इसलिए नहीं आ रही..

Mausi-shayad ऐसा hi है..

में- मौसी अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे साथ सो सकता हूँ...

मौसी- अरे सच्चीई मेरा प्यारा लल्ला कितना सोचता है तू मौसी के बारे में...

Me-isme सोचने की क्या बात है मौसी चलो सोतेहैं..

मौसी- ठीक है... चल...

मैं और मौसी उनके कमरे के दरवाज़े तक पहुंचे hi थे की पीछे से एक आवाज़ आई..

हमने मुड़कर देखा तो अनुज था...

अनुज- क्या हुआ भैया मौसी सोये नहीं तुम लोग..

में- तू जाग कर क्या कर रहा है...

Anuj-main तो पानी पीने आया था..

Mausi-are वो मुझे अकेलेपन की वजह से नींद नहीं आ रही थी तो कर्मा मेरे साथ सोयेगा आज.

अनुज- ाचा फिर तो मैं भी सोऊंगा मौसी तुम्हारे साथ..

मौसी- ये तो और अछि बात है दो से भले तीन. चल आजा अब..

खैर मैं मौसी और अनुज उनके कमरे में आ गए अब दो लोगो के लिए तो बिस्तर ठीक था पर तीन का मतलब था थोड़ा चिपक कर सोना पड़ता...

खैर हम तीनो लेट गए मौसी बीच में थी और हम दोनों भाई उनके एक एक तरफ मौसी एक एक हाथ से हम दोनों के बालों को सहला रही थी...

मौसी- कितना ाचा लग रहा है ऐसे तुम दोनों के साथ लेते हुए..

में- मुझे भी बहुत ाचा लग रहा है मौसी..

और ये कहकर मैंने उनकी तरफ करवट ले ली और अपना चेहरा उनके कंधे से सत्ता कर रख दिया..

Anuj-mujhe भी.

और हमेशा की तरह मेरी नक़ल करते हुए अनुज ने भी वही किआ..

में- मौसा की याद आ रही है न...

ये कहकर मैंने अपना हाथ मौसी के पेट पर रख दिया लेटने की वजह से साड़ी पेट से हैट गयी थी जिसका फायदा उठाते हुए मैं मौसी के पेट को सहलाने लगा..

मौसी माँ और पापा की चुदाई देखकर पहले hi गरम थी मेरा हाथ पेट पर पड़ने से थोड़ा सिहर गयी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी...

मौसी- हाँ बीटा अब याद तो आएगी hi क्या करें उनकी ड्यूटी hi ऐसी है...

Me-are मौसी हम लोग हैं न तुम्हारे साथ .

मौसी- तुम लोग hi तो मेरा सहारा हो मेरे बच्चों... मौसी ने हम दोनों के गाल पर हाथ फिरते हुए कहा...

में- हमेशा मौसी हमेशा..

साथ hi मैं अपने हाथ को मौसी के चिकने कोमल और मांसल पेट पर फेर रहा था...

मौसी- मैं जानती हूँ बच्चों... मैंने तुम्हे अपना दूध भले hi न पिलाया हो पर तुम दोनों hi मेरी गॉड में खेले हो...

में- दूध भी पीला देती न मौसी...

मेरे मुँह से अचानक से निकल गया

मौसी- अरे बीटा इतनी अच्छी किस्मत कहाँ मेरी की मेरे दूध आये आता तो ज़रूर पिलाती मौसी ये कहकर उदास हो गयी..

में- मौसी तुम उदास मत हो हम बाबा के उपाय के लिए जाने hi वाले हैं फिर सब ठरक हो जायेगा...

मौसी- भगवन करे ऐसा hi हो... हर औरत चाहती है की उसके बच्चे उसका दूध पिएं...

में- बस इतनी सी बात ये तो मैं अभी पूरी किये देता हूँ..

मौसी- कैसे?

में - तुम मुझे अपना बच्चा मानती हो की नहीं मौसी?

मौसी- मानती हूँ ये भी कोई पूछने वाली बात है...

ये सुनते hi मैंने दोनों हाथ लिए और मौसी के ब्लाउज के हुक को खोलने लगा...

मौसी थोड़ा चौंक कर boli-ye क्या कर रहा है कर्मा...

जब तक मौसी थोड़ा और संभालती तब तक तो उनकी एक छुच्छी बाहर आ चुकी थी और मई. उसे चूस रहा था...

में- अपनी माँ का दूध पि रहा हूँ..

मैंने छुच्छी को मुँह से निकल कर कहा और बापिस मुँह में दाल ली..

मौसी को थोड़ी हैरानी हुई पर मेरे द्वारा उनका दूध चूसे जाना उन्हें भने लगा और वो मेरे सर पर हाथ फेरते हुए मुझे उकसाने लगी...

अनुज ने मुझे मौसी की छुच्छी को चूसते देखा और हैरान रह गया पर फिर बिना रुके दूसरी छुच्छी को बहार निकलकर उसे पीने लगा...

मउआइ तो मज़े में आसमान की सैर करने लगी एक hi साथ दोनों छूछीयों को चूसे जाने का मज़ा मिल रहा था...

मैं और अनुज भी जन्नत में थे मौसी की कोमल और बड़ी छुच्छी को चूसते हुए... माध्यम आकर के निप्पल को मुँह में लेकर कुरेदने में बहुत मज़ा आ रहा था....

मैं और अनुज पूरी शिद्दत से मौसी का दूध पि रहे थे... मौसी की छूछीयो की मिठास कहो या दिन में इतनी चुदाई की थकावट कहो पर मौसी की छुच्छी को चूसते चूसते में सो गया...

इसके बाद में क्या हुआ अगली अपडेट में प्लीज कमैंट्स करके ज़रूर बताएं कैसी लगी अपडेट
 
पारिवारिक चुदाई संग्रह में अपडेट दी है, लुत्फ उठाएं और अपना साथ बनाते हुए कॉमेंट्स और प्रतिक्रिया देते रहें। Dhanywaad।
 
मैं और अनुज पूरी शिद्दत से मौसी का दूध पि रहे थे... मौसी की छूछीयो की मिठास कहो या दिन में इतनी चुदाई की थकावट कहो पर मौसी की छुच्छी को चूसते चूसते में सो गया...

अपडेट 117
सुबह मेरी नींद दर्द से खुली उठ कर देखा तो लुंड बिलकुल कड़क हो चूका था और पाजामे से बहार निकला हुआ था बड़ी तेजी से मूट लगा हुआ था आँखें मलते हुए खोला तो देखा की बिस्तर पर सिर्फ मैं और अनुज सो रहे हैं मौसी नहीं थी, कब उठी कब गयी कोई अंदाज़ा नहीं था.. खैर लुंड को दबाये हुए मैं उठा और बाथरूम की तरफ भगा और बाथरूम में घुसकर जल्दी से मूतने लगा ऐसा लग रहा था की एक पल की भी देरी हो जाती तो पहले hi निकल जाता...

सुबह के कामों को पूरा करके और पेट खली करके, मंजन वगेरा किआ और फिर बाहर आँगन में पहुंचा और सुबह सुबह एक आँखें खोल देने वाला नज़ारा दिखा...

मैंने देखा की आँगन में ज़मीन पर चटाई बिछी हुई है और उस पर पापा अपनी पीठ पर लेते हुए थे और वो भी उनके पूरे शरीर पर बस सिर्फ कच्चा था... और उनके बगल में मौसी बैठी हुई थी उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा हुआ था और पेट और ब्लाउज से बहार झांकती छुछियां बहार दिख रही थी..

मैं जहाँ था वहीं रुक कर ये नज़ारे को देखने लगा मौसी का हाथ पापा के नंगे पेट पर था और उससे थोड़ा सा नीचे पापा के कच्चे में तम्बू बना हुआ था जो साफ़ साफ़ दिख रहा था.. मुझे समझ नहीं आ रहा था ये हुआ क्या है...

तभी पीछे से मेरे कंधे पर किसी ने थपथपाया मुद कर देखा तो माँ थी

माँ- अरे यहाँ क्यों खड़ा हुआ है चल बैठ कर चाय पि ले..

माँ ने अपने हाथ में पकड़ी हुई चाय की तरफ इशारा किआ और फिर आगे आँगन में मौसी और पापा की तरफ जाने लगी...

माँ- आजा बीटा चाय ठंडी हो जाएगी..

मैं माँ की बात सुनकर आगे बढ़ा और आँगन में पड़ी खत पर जाकर माँ के बगल में बैठ गया और माँ से इशारे से पुछा ये क्या हो रहा है

माँ- अरे बीटा तेरे पापा को सुबह से पेट दर्द है तो शक है कहीं नाभि तो नहीं खिसक गयी और तेरी मौसी को देखनी आती है तो वो hi देख रही है..

में- ाचा ाचा...

पर पापा के कच्चे में बना तम्बू सब को दिख रहा था और मौसी को तो और अचे से क्यूंकि बिलकुल करीब जो बैठी थी पर कोई भी कुवह प्रतिक्रिया नहीं दे रहा था..

जहाँ मौसी पापा की नाभि देखने में व्यस्त थी तो मैंने मौके का फायदा उठाते हुए मैंने जल्दी से अपना हाथ माँ की नंगी कमर पर रखते हुए उनके पेट और कमर को मसलने लगा..

माँ थोड़ा सा चौंकी और मुझे आँख दिखते हुए पापा और मौसी की तरफ इशारा करने लगी...

पर मैंने माँ को इशारे से समझाया की वो व्यस्त हैं और माँ के कोमल पेट और नाभि को मसलना जारी रखा...

में- क्या लग रहा है मौसी..? नाभि खिसकी है क्या?

मैंने माँ के पेट को सहलाते हुए पुछा..

मौसी- लग तो नहीं रही लल्ला की गयी हुई है.. मुझे तो सब ठीक hi लग रहा है...

मौसी ने वैसे hi अपना हाथ चलते हुए जवाब दिया...

मैं किसी का ध्यान न होने का पूरा फयसा उठाते हुए माँ के गदराये जिस्म को मसल रहा था, माँ थोड़ा सा दर रही थी पर उन्हें भी पता था की मौसी और पापा का ध्यान हमारी तरफ नहीं था..

क्यूंकि पापा का ध्यान तो मौसी के नंगे गोर पेट और ब्लाउज में झूलती मौसी की बड़ी बड़ी छूछीयों पर था...

वहीं मौसी का ध्यान पापा के कच्चे में बने हुए तम्बू पर था जो बार हिल झटके लगा रहा था..

मैंने माँ के चेहरे को अपनी तरफ मोड़ लिए और उनके होंठों को चूसने लगा कुछ पल में hi माँ ने खुद को छुड़ा लिए और मुझे धक्का देकर उठ कर कड़ी हो गयी... मेरी चाय गिरते गिरते बची... माँ के उठने से मौसी का ध्यान भी हटा और वो भी उठाते हुए बोली- नहीं जीजाजी नाभि तो ठीक है शायद गैस वगेरा की वजह से होगा दर्द..

मौसी ने अपनी साड़ी के पल्लू को बापिस अपने कंधे पर डालते हुए कहा..

माँ- हाँ कुछ गैस वगेरा hi होगी, सुनो मैं खिचड़ी बना दूंगी. वो खाना तुम कल शाम को बाहर का खाया है शायद इसीलिए हो गया होगा..

मौसी- हाँ जीजी ये हो सकता है..

पापा- सही कह रही हो तुम ये hi होगा..

खैर फिर मौसी भी बिस्तर पर आकर बैठ गई पापा ने भी उठ कर कपडे पहने और फिर सबने चाय ली तब तक अनुज भी उठ कर आ चूका था साथ में बातें करते हुए सबने चाय पि...

और फिर चाय पी कर ख़तम hi हुई थी की पापा बोलने लगे की कर्मा आज बीज लेने जाना है शहर फिर तुम लोग उपाय के लिए चले जाओगे.

में- ठीक है चला जाता हूँ लिख कर दे दो क्या क्या लाना है..

माँ- अरे ऐसा करो तुम भी चले जाना उसे अभी बीज की इतनी पहचान नहीं है तुम देखकर तब भी ले आओगे.

में- हाँ मुझे पहचान बता देना तो अगली बार से मैं hi ले आया करूँगा..

पापा- चलो ठीक है साथ चल लेंगे..

इतने में दरवाज़े पर खटखटाने की आवाज़ आई अनुज ने दरवाज़ा खोला तो मंजू तै थी और अंदर आ गयी.

माँ- अरे आओ आओ जीजी बैठो..

पापा- पाय लागु भौजी..

मंजू तै- पाय लगो अपनी अम्मा के बाबू.. हमरे काहे लगोगे..

Papa-kyun भाभी तुम्हारे लगने में कोई दिक्कत है क्या?

पापा और मंजू तै का हमेशा से hi मज़ाक चलता रहता है.. जब मंजू तै ब्याह के घर आई थी तब पापा बहुत छोटे थे तो तबसे hi मंजू तै और पापा का मज़ाक का रिश्ता चला आ रहा है दोनों में से कोई एक दुसरे की बात का बुरा नहीं मंटा...

मंजू तै- इतना hi शौक है लगने का बाबू तो शशि को बुलालें..

तै की बात पर माँ और मौसी खिलखिलाकर हंसने लगी..

पापा- नहीं भाभी जब सामने ऐसी भाभी हो तो किसी को बुलाने की क्या ज़रुरत है... तुम काम थोड़े hi न हो...

मंजू तै- अरे बहूनि ी बाबू तो मज़ाक में. Hi लगे रहेंगे... हम जिस लिए आये थे वो भूल जायेंगे..

तै माँ को बहूनि कह कर hi बुलाती थी..

माँ- हाँ जीजी बोलो न... क्या हुआ?

मंजू तै- अरे उपाय के लिए जाने का बखत भी आ गया है और शहर से कछु ज़रूरी सामान लाना है... तो सोच रही थी तुझे ले चलूँ बहूनि...

माँ- अरे जीजी सही बखत आई हो कर्मा और उसके पापा आज शहर hi जायेंगे बीज लेने तो तुम भी साथ हो लो.. वैसे क्या सामान लाना है

मंजू तै- माँ को इशारा करते हुए अरे बहूनि है कुछ ज़रूरी सामान..

माँ- अरे अच्छा तो चली जाओ अपने देवर के साथ दिलवा देंगे..

माँ ने हँसते हुए कहा..

मंजू तै- सही में बाबू जाओगे क्या शहर..

Papa-haan भाभी चलो सुनेमा दिखा देंगे तुम्हे शहर में..

मंजू तै- अपनी बहनिया को दिखाओ सिनेमा.. हमें शौक नहीं हैं...

पापा- तो अपनी बहन को hi बुला दो भाभी उसे दिखाड़ेंगे..

मंजू तै- बहूनि सम्भालो इन्हे ज़्यादा hi जवानी फुट रही है..

माँ- वो जाने और उनकी भाभी जाने जीजी हमको मत घसीटो बीच में...

मंजू तै- ले चलना बाबू हमको भी पर एक मोटरसाइकिल पर तीन जाने चले जायेंगे क्या..

पापा- अरे सब चले जायेंगे भाभी चिंता मत करो...

मंजू तै- चलो फिर बखत रहते बता देना हमको भी ...

पापा- दोहपहार बाद hi निकलेंगे...

मंजू Tai-dopahar बाद hi ठीक है, घर के काम भी निपट जायेंगे तब तक.. कर्मा बचुआ बुलाने आ जाना

पापा- अरे भाभी कर्मा क्यों हम खुद आ जायेंगे बुलाने..

मंजू तै- तुम जाओ अपनी बहनिया को लेने...

ऐसे hi हंसी मज़ाक करते हुए तै चली गयी और बाकि सब भी काम में लग गए...

पापा और मैं बाघ की तरफ निकल आये... एक खेत की जुताई करनी थी तो मैं और पापा उसी में लग गए... बड़ा खेत था तो समय तो लग्न था, जब काम पूरा हुआ तो 4 बज चुके थे, और हम लोग बुरी तरह से थक चुके थे खैर काम ख़त्म करके घर आये तो देखा मंजू तै पहले से hi हमारा इंतज़ार कर रही थी...

मंजू तै- क्यों बाबू तुम तो सिनेमा दिखने वाले थे..

पापा- चलो भाभी हमने कब मन किया चलते हैं अभी..

मंजू तै- इतनी देर कर दिए और कैसे मन करोगे...

पापा- अभी आया नहाकर..

इसके बाद पापा नहाने चले गए मैं भी दुसरे बाथरूम में घुस गया 15 मीन्स बाद दोनों नाहा कर तैयार थे माँ और मंजू टी बातों में लगी हुई थी.. मौसी ने हमें खाना दिया और फिर खा पि कर हम लोग निकल पड़े...

अब एक मोटरसाइकिल थी ऊपर से तीन लोग जिसमे भी एक मंजू तै जैसी गदराई घोड़ी.. उनके बड़े बड़े चूतड़ और इतनी सी मोटरसाइकिल की सीट.. ऊपर से तै ने पीछे बैठने से साफ़ इंकार कर दिया बोली- की हमें दर लगता है कहीं गिर गिरा गए तो..

फिर ये फैसला हुआ की पापा मोटरसाइकिल चलाएंगे, तै बीच में और मैं सबसे पीछे...

सबसे बड़ी दिक्कत ये थी की तै दोनों पेअर एक तरफ करके बैठी थी क्यूंकि साड़ी पहनी थी तो ऐसे तो और जगह उनकी बड़ी सी गांड ने घेर ली.. खैर किसी तरह से उनके पीछे मैंने खुद को एडजस्ट किआ और तीनो बैठ गए.. मैं तै से बिलकुल चिपका हुआ था और तै पापा से मेरा लुंड तै के एक चूतड़ पर साइड से लगा हुआ था जो शुरू के 4 मिम्स में hi उनके चूतड़ का स्पर्श पाकर कड़क हो चूका था और तै के चूतड़ में घुसने लगा मुझे पता नहीं था की तै को पता चल रहा है या नहीं क्यूंकि उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी..

मेरा एक हाथ तै की पीठ और एक आगे से उनकी जांघ पर था लुंड कड़क होने के बाद मैंने धीरे से अपने हाथों को चलना शुरू कर दिया और एक हाथ से उनकी पीठ को सहलाने लगा आहिस्ता से जिससे तै को कुछ गलत न लगे और ये लगे की मोटरसाइकिल चलने की वजह से है वहीं दुसरे हाथ को मैंने उठा कर और ऐसे जताते हुए की थोड़ा असहज हूँ उठाकर तै के पेट पर रख दिया पल्लू के साइड से निकल कर और मेरा स्पर्श सीधा तै के नंगे पेट से हुआ..

तै ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, पापा गाड़ी आराम से चला रहे थे... वहीं तै के चूतड़ से टकरा कर मेरे लुंड का बुरा हाल हो रहा था और मैं गरम होता जा रहा था... और उसी उत्तेजना में मेरे हाथ अपने आप hi काम करने लगे थे..

मेरी पीठ वाला हाथ कब सरकता हुआ तै के चूतड़ों पर साड़ी के ऊपर से hi पहुँच कर सहलाने लगा मुझे पता hi नहीं चला...

वहीं मेरे पेट वाला हाथ भी हरकत कर रहा था और तै के मांसल गदराये पेट को सहला रहा था.. कसम से इसमें भी मुझे बेहद मज़ा आ रहा था... मेरा लुंड तो तै के चूतड़ों में घुसने को बेताब हो रहा था...

उसका बस चलता तो अभी मेरे और तै के कपडे चीयर कर अपने घुसने की जगह ढूंढ लेता...

तै ने सहारे के लिए मेरे एक साइड से हाथ निकल कर पीछे से मेरी पीठ को पकड़ रखा था... मेरा चेहरा तै के कंधे पर छू रहा था और मेरी सांसे उनके गले पर पद रही थी...

मैं अपनी हरकतें करते हुए उनके चेहरे को ध्यान से देख रहा था ताकि कोई भी प्रतिक्रिया पर खुद को रोक लूँ.. पर उम्मीद के अनुसार तै ने अब तक कुछ नहीं कहा या किया था जिससे मेरा हौंसला बढ़ता जा रहा था...

मैं पूरे आराम के साथ तै के पेट को मसल रहा था बैठने की वजह से पेट में जो बल पद रहे थे उन्हें मसलने में और मज़ा आ रहा था..

मैं कभी तै की नाभि में उंगली डालता तो कभी पूरे पेट को पकड़ कर दबा रहा था वहीं पीछे वाले हाथ से मौका देखकता जैसे hi कोई गाड़ीवाला आस पास नहीं दीखता तो तै के चूतड़ों को हलके से दबा देता... साथ hi उनके भावों को पढ़ने की कोशिश करता जो की तबसे एक जैसे hi थे बस बीच बीच में पापा और तै बात कर रहे थे.. हालाँकि तै की गर्म होती हुई साँसे मुझे महसूस हो रही थी... क्यूंकि आगे वाला हाथ उनकी साड़ी के पल्लू से ढाका हुआ था तो मुझे देखे जाने का दर भी नहीं था तो मैं खुल कर तै के गदराये बदन का मज़ा उठा रहा था...

हर बीतते हुए पल के साथ मेरी उत्तेजना बढाती जा रही थी और साथ hi मेरी हिम्मत भी... मेरा हाथ तै के गदराये पेट से थोड़ा ऊपर की और बढ़ने लगा और तै की बड़ी बड़ी चूचियों को छूने लगा था... पहले तो मैंने सिर्फ ऐसे छुआ की तै जी को लगे की गलती से या अनजाने में hi मेरा हाथ उनकी छूछीयों को छू रहा है पर कोई प्रतिक्रिया न होने पर मेरी हिम्मत बढाती गयी और मैं ब्लाउज के ऊपर से तै की छूछीयो को दबाने लगा...

तै फिर भी कुछ नहीं बोली न hi कुछ ऐसा जताया की कुछ हो रहा है बस पापा से बातें किये जा रही थी मुझे उनकी बातों में कोई दिलचस्पी नहीं थी... मेरी दिलचस्पी तो बस तै की बड़ी गुब्बारे जैसी छूछीयों में थी.. जिन्हे मैं खूब मसल रहा था...

दोस्तों अभी समय काम होने से छोटी सी hi अपडेट दे पाया हूँ अगली कड़ी बहुत जल्दी hi देने की कोशिश है तब तक साथ बनाये रखें... बहुत बहुत धन्यवाद्
 
दोस्तों आप सभी को कहानी के 400 पेज होने पर बहुत बहुत बधाई, इसी तरह साथ बने रहें और हम साथ में आगे बढ़ते रहेंगे।
 
दोस्तों पारिवारिक चुदाई संग्रह में एक नए प्रकार की अपडेट दी है, यहां पर क्लिक करके देखें और रिव्यू दें, और अपना स्नेह बरसाएं।

बहुत बहुत धन्यवाद।
 
दोस्तों आप सभी को और परिवार जनों को चोदमपुर ओर से दीपावली के पावन त्यौहार की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

आशा है कि ये दिवाली आपके दुखों का अंधेरा हर कर आपके जीवन में सुखों और खुशियों का उजाला फैलाएगी।

दीपावली की वजह से काफ़ी व्यस्त हूं तो अपडेट देने का भी समय नहीं मिल पा रहा है फ्री होते ही एक तड़कता फड़कता अपडेट आपके सामने परोस दूंगा तब तक जैसा की आप सबने हमेशा ही साथ दिया है वैसा ही बनाए रखें, खुश रहें।

और एक और बेहद ज़रूरी बात अपने आस पास में जो भी गली में घूमने वाले हमारे बेजुबान साथी हैं कुत्ते बिल्ली और गाय, उनका ख़ासकर ध्यान रखें आपसे हाथ जोड़ कर निवेदन है उनको किसी भी तरह की तकलीफ न होने दें। दिवाली का त्योहार उनके साथ मनाएं, अपनी खुशियां उनके साथ भी बांटें, मेरा दावा है आपकी खुशियां दोगुनी चौगुनी हो जाएंगी।

बहुत बहुत धन्यवाद

दीपावली की शुभकामनाएं
 
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