Incest Katha Chodampur Ki - Page 41 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

अपडेट 252 पेज नंबर 1215 पर पोस्ट कर दी गई है, अच्छे से बड़े बड़े रिव्यू दें और लाइक्स की संख्या भी बढ़ाओ मित्रो। बहुत मेहनत से लिखता हूं।
 
औरत— बिल्कुल देखना भाई साहब, पर याद रखना इसके बाद बाहर की दुनिया में न आप हमें जानते हो न हम आपको। बाकी अगर और अच्छे से जानने का मन हो तो तरीका आप जानते हो।

औरत ने पर्चे की ओर इशारा किया और दोनों आगे बढ़ गए। आगे जाकर उन्होंने पीयूष से भी थोड़ी बात की और उन्हें भी पर्चा दिया और बाहर निकल गए। इसके बाद पहले महिपाल और फिर पीयूष भी बाहर निकल गए, बहुत से सवाल और मन में अनेक ख्यालों के साथ।

अपडेट 252

करीब आधे घंटे के बाद चारों लोग एक रेस्तराँ में थे, खाना खा रहे थे। खाते हुए भी ज्यादा बातचीत नहीं हो रही थी। सबके मन में बहुत कुछ था, पर शुरू कैसे करें ये नहीं पता था। अभी सब कितने साधारण और आदर्श परिवार की तरह लग रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है।

पीयूष ने महिपाल की ओर देखा और दोनों के बीच आँखों ही आँखों में इशारा हुआ।

पीयूष— फिल्म तो बड़ी मस्त थी।

पीयूष ने मुस्कुराते हुए कहा।

सविता और रानी ने उसकी बात सुनी और नजरें झुकाकर खाती रहीं।

महिपाल— हाँ भाई, ऐसी फिल्म तो आज तक नहीं देखी थी। बहुत मजा आया।

महिपाल ने हँसते हुए कहा, तो सविता और रानी भी मुस्कुरा दीं...

पीयूष— अरे सब लोग इतना चुप-चुप क्यों हो? जो हुआ सो हुआ, अब देखो आगे ये ही हो सकता है। अगर तुम लोगों को अच्छा न लगा हो तो आगे से नहीं करेंगे, पर चुप रहकर कोई फायदा थोड़ी है।

महिपाल— और अच्छा लगा हो तो?

महिपाल ने सविता और रानी की ओर देखते हुए कहा, तो दोनों ही इस बात से थोड़ी हैरान हुईं और एक-दूसरे की ओर देखने लगीं।

महिपाल— अरे इसमें सोचने वाली बात तो ये भी है न कि अच्छा नहीं लगा तो नहीं करेंगे, पर अच्छा लगा हो तो?

पीयूष— तो करेंगे।

पीयूष ने झटके से बोल दिया, तो दोनों औरतों की नजर उस पर पड़ गई।

पीयूष— अरे मुझे क्यों देख रहे हो? मैंने तो जो पूछा उसका जवाब दिया है।

सविता— तुम लोगों ने न जाने क्या-क्या कराया हमसे इस उम्र में। कोई ठीक-ठाक फिल्म नहीं देख सकते थे?

रानी भी अपनी सास की हाँ में हाँ मिलाते हुए बोली— हाँ मम्मी जी, हमें तो बस फिल्म देखनी थी और इन्होंने न जाने क्या-क्या करा लिया।

रानी ये बोलते हुए शर्मा गई।

पीयूष— अरे मैंने क्या करा लिया? सब सबकी मर्जी से हुआ है। अब सारा इल्जाम मुझ पर लगा रही हो। अच्छा, सच-सच बताओ, तुम्हें मजा नहीं आया?

महिपाल— हाँ ये बात सही कही। तुम भी बताओ, तुम्हें अच्छा नहीं लगा?

महिपाल ने सविता की ओर देखते हुए पूछा।

सविता— बात अच्छे लगने की नहीं है, बात सही-गलत की है। जो हुआ है वो गलत ही न?

महिपाल— अरे तुम भी न क्या लेकर बैठ गई। हम सब लोग व्यस्क हैं, जो कर रहे हैं मर्जी से कर रहे हैं, फिर ये गलत कैसे हुआ?

पीयूष— बिल्कुल सही बोला पापा ने।

सविता— अरे व्यस्क हैं फिर भी एक मर्यादा होती है। किसी को पता चला तो जानते हो कितनी बदनामी होगी।

महिपाल— अरे कौन बताने जा रहा है? समाज का सोचना छोड़ो, ये तो हमारी शादी के भी खिलाफ था। तब अगर सोचते तो आज तुम हमारे साथ नहीं बैठी होतीं।

सविता ये सुनकर चुप हो गई।

पीयूष— और क्या, हमारे लिए सबसे जरूरी है हमारा परिवार और हमारी खुशी। हम खुश हैं तो समाज की क्या चिंता करना?

महिपाल— और क्या, अब बच्चे इतना आगे बढ़कर खुल रहे हैं तो हमें भी आगे बढ़ना चाहिए और खुलकर जीना चाहिए।

रानी थोड़ा सकुचाते हुए बोली— मम्मी जी, मुझे लगता है ये और पापा जी सही कह रहे हैं।

सविता सोचने लगी और उसे फिर से अपने और निलेश व सभ्या के बीच की चुदाई याद आ गई। और फिर खुद से किया वो वादा भी कि अगर उसका पति चाहेगा तो वो वही करेगी, चाहे वो गलत ही क्यों न हो।

ये सोचते हुए उसने फैसला किया और फिर अपने पति और बेटे की ओर देख मुस्कुराई और बोली— ऐसा है तो सच में मजा तो आया।

पीयूष— ये हुई न बात!

पीयूष खुश होते हुए बोला। महिपाल और रानी के चेहरे पर भी मुस्कान थी।

महिपाल— चलो, पर अभी भी आधा दिन बाकी है? अब क्या करना है?

रानी— हाँ, अभी घर जाकर भी फायदा नहीं। कुछ और करते हैं?

सविता— और क्या? फिर से फिल्म देखें?

पीयूष— मेरे पास उससे अच्छा एक उपाय है।

पीयूष मुस्कुराते हुए कहता है।

चोदमपुर

इधर चोदमपुर में राजपाल खेतों का काम निपटाकर वापस अपने घर की ओर लौटे तो देखा दरवाजा खुला हुआ था। अंदर आकर देखा तो सभ्या को बरामदे में झाड़ू लगाते पाया।





राजपाल— अरे बहू, तुम कब आई?

राजपाल ने अपना गमछा एक ओर रखते हुए पूछा।

सभ्या— थोड़ी देर पहले ही आई भाई साहब। वो जीजी हमें एक चाबी दे गई थी न, तो उसी से खोल लिया। तुम बैठो भाई साहब, पानी लाती हूँ।

राजपाल— अरे बिल्कुल सही किया।

राजपाल पास में पड़ी खाट पर बैठ गया। इतने में सभ्या ने पानी लाकर उसे दिया और फिर झाड़ू लगाने लगी।

सभ्या— भाई साहब, खाना तो घर बन रहा है। अभी कुछ चाय वगैरह बना दूँ?

राजपाल— नहीं बहू, अभी थोड़ा ठंडा लूँ। फिर नहा कर ही पीयूँगा चाय वगैरह। अब पूरा बदन पसीना-पसीना हो रहा है।

सभ्या— हाँ सही में भाई साहब, गर्मी बहुत है आज। धूप तेज है न।

राजपाल— वहाँ क्या हुआ? पूजा हो गई? बात हुई तेरी शालू या किसी से?

राजपाल ने अपनी पसीने से भीगी बनियान को उतार कर एक ओर रखते हुए कहा।

सभ्या— हाँ भाई साहब, हुई थी। तब बोल रहे थे कि दोपहर का मुहूर्त है। अब तो शायद शुरू हो गई होगी।

सभ्या ने अपने चेहरे से पसीना पोंछते हुए कहा।





राजपाल की नजर सभ्या के चेहरे से होते हुए उसके गोरे कामुक पेट, और बीच में गोल गहरी नाभि पर फिसलने लगी जो पल्लू के पीछे से आंख मिचौली कर रही थी और छुप छुप के दर्शन दे रही थी, राजपाल के मन में एक सिहरन होने लगी।

राजपाल— चल बढ़िया है, फिर आज तो रुकेंगे ही वो लोग वहीं।

सभ्या— आज ही नहीं भाई साहब, कल भी रुकेंगे भैया आने ही नहीं दे रहे बोल रहे हैं एक दो दिन रुक कर ही जाओगे अब। फिर भी जीजी बोल रही थी परसों उजियारा होते ही निकल लेंगे।

राजपाल: चल ठीक भी है अब गए हैं तो एक आध दिन रुक भी आयेंगे। वैसे भी कहां इतनी जल्दी आना जाना होता है,

राजपाल ने सभ्या के पेट और कमर को निहारते हुए ही कहा, राजपाल सोचने लगे जबसे निलेश उसे लेकर यहां चोदमपुर में बसे तबसे ही सभ्या को देखा है जबसे वो बिल्कुल छरहरी सी सुंदर पतली सी दुल्हन थी। हमेशा से ही सभ्या के बदन में एक अलग सी सुंदरता रही है, कामुकता और सौंदर्य का अदभुत मिश्रण है सभ्या का बदन।

पर राजपाल ने हमेशा ही उसे छुपकर एक आध नज़र ही देखा, क्योंकि रिश्ते में जेठ जो लगते थे और रिश्ते की मर्यादा को भी निभाना तो सबसे जरूरी था, इसलिए जैसे ही वो सामने होती राजपाल मुंह दूसरी ओर कर लेते थे, पर अब जब उनके परिवार इतने खुल चुके थे और वो अपनी बहू तक को चोद चुके थे तो अब उनके ऊपर से मर्यादा का पर्दा हट चुका था, और छूट मिल चुकी थी, इसी छूट का फायदा उठाते हुए राजपाल उठे और सीधे सभ्या के पास गए और उसे पीछे से बाहों में भर लिया और अपने बदन को उसके बदन से पीछे से की ओर से चिपका दिया। राजपाल के ऐसा करते ही सभ्या भी सिसकी और उसके हाथ से झाड़ू छूट कर गिर पड़ी। राजपाल के हाथ सभ्या के पेट पर चलने लगे उसके मखमली पेट को हाथों से मसलने लगे। और साथ ही पेट से होते हुए ऊपर उसके ब्लाउज़ के ऊपर से उसकी चूचियों तक दबाने लगे।





सभ्या: आह भाई साहब।

सभ्या ने सिसकते हुए कहा,

राजपाल: ओह बहू तेरा पेट कितना मुलायम है मखमली है आह।

सभ्या: उम्म भाई साहब आराम से।

सभ्या ने अपने जेठ के हाथों को अपने बदन पर पाकर सिहरते हुए कहा, वो जेठ जिन्हे उसने हमेशा मर्यादा और सम्मान के घूंघट के पीछे से देखा था, काफी समय तो वो उनके सामने चेहरा ढंक कर रखती थी जब बच्चे बड़े हो गए तब से भले ही उसका घूंघट थोड़ा ऊपर हो गया था पर आज भी उनके सामने सिर पर हमेशा ही पल्लू रहता था,

तो अब तक जिन्हें इतने सम्मान से और मर्यादा में रहकर देखा आज उन्हीं के द्वारा अपना बदन मसल वाना सभ्या को उत्तेजित करने लगा, उसे अपने चूतड़ों के पीछे राजपाल की बढ़ती उत्तेजना का भी आभास हो रहा था जिसे वो धीरे धीरे से उसके चूतड़ों में घिस रहे थे।

राजपाल: आह बहू तेरा बदन मन करता है इसे मसलता रहूं, खेलता रहूं कितना कामुक है।

सभ्या: आह भाई साहब, ओह तुम्हारी बहू हूं जो चाहे करो, आह।

राजपाल ने ये सुना और सभ्या के चेहरे को अपनी ओर घुमाया और फिर अपने होंठों को उसके रसीले होंठों पर रख दिया और चूसने लगे, सभ्या भी उनका साथ देने लगी, राजपाल सभ्या के पेट को लगातार मसलते हुए उसके होंठों का स्वाद ले रहे थे वहीं सभ्या भी गरम होते हुए अपना पेट और कमर सहलाते हुए राजपाल का साथ दे रही थी।





राजपाल को इतने वर्षों बाद सभ्या के बदन को उसके रसीले होंठों को चखने का उनके रस को चूसने का मौका मिला था और इस मौके को वो ऐसे ही नहीं जाने देना चाहते थे, और सभ्या के होंठों को लगातार चूसे जा रहे थे, पेट को मसलते हुए उनके हाथ ब्लाउज़ के ऊपर से ही सभ्या की मोटी चूचियों को मसल रहे थे,

काफी देर बाद राजपाल ने सभ्या के होंठों को छोड़ा तो दोनों हाँफ रहे थे,

राजपाल: वाह बहू कितने रसीले होंठ हैं तेरे, मन ही नहीं भरता चूसने से।

राजपाल ने उसकी चूचियों को मसलते हुए कहा,

सभ्या: क्या भाईसाहब तुम भी न,

सभ्या ने शर्मा कर उनके सीने में मुंह छुपा लिया, राजपाल को उसकी ये अदा बहुत पसंद आई, और वो बेकाबू होते हुए उसकी गर्दन और सीने को चूमने लगे, चाटने लगे, सभ्या उनकी हरकतों से आहें भरने लगी, धीरे धीरे राजपाल नीचे की ओर उसे चूमते हुए सरकने लगे और ब्लाउज़ के ऊपर से ही उसकी चूचियों को चूमने लगे तो सभ्या ने भी अपना सीना उनके लिए उभार दिया,

उसके सीने को चूमते हुए राजपाल नीचे घुटनों पर बैठ गए और सभ्या के पेट को मसलते हुए अपने होंठ उसके पेट पर रख दिए और सभ्या की एक गहरी सिसकी निकल गई, एक हाथ से राजपाल ने सभ्या की कामुक कमर को थामा और दूसरे हाथ से उसके पेट को सहलाते हुए, होंठों से उसके मखमली कोमल पेट का स्वाद लेने लगे, सभ्या भी गरम होते हुए अपनी कमर और पेट मसलते हुए आहें भर रही थी





सभ्या: आह भाई साहब ओह ओहम आह।

राजपाल: ओह बहू तेरा पेट, तेरा ये बदन बिल्कुल मक्खन है आह ऐसा कोमल ऐसा स्वाद आज तक कहीं नहीं चखा।

सभ्या: ओह भाई साहब आज चख लो आह जितना चखना है, तुम्हारी सेवा करना तो मेरा कर्तव्य है।

राजपाल: हां बहू आज नहीं छोडूंगा, आज अपनी भूख तेरे बदन से ही मिटाऊंगा।

सभ्या: हां भाई साहब खा जाइए ओह आह उम्मम।

सभ्या बोलते बोलते रुक गई और सिसकने लगी जैसे ही राजपाल ने अपनी जीभ उसकी नाभि में घुसा दी, सभ्या के हाथ राजपाल के सिर पर कस गए और वो उनके सिर को अपने पेट में दबाने लगी, वहीं राजपाल ने अपने पंजों को सभ्या के चूतड़ों पर कस दिया, और उन्हें भी मसलते हुए सभ्या की नाभी में जीभ घुसा घुसा कर चूसने लगे,

सभ्या: अहम्म ऐसे ही आह।

राजपाल ने काफी देर तक उसकी नाभी को चूसा और उतनी देर तक सभ्या मचलती और सिसकती रही। राजपाल फिर उठे और एक बार फिर से सभ्या के पीछे से चिपक गए और हाथ आगे लेजाकर उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगे,

राजपाल: ये कितनी बड़ी बड़ी हैं बहू तेरी मोटी चूचियों का उभार तो मैं छुप छुप कर देखते आया हूं,

सभ्या: पर इन्हीं मोटी चूचियों को अपने हाथों में लेकर मसल रहे हो भाई साहब, आह ओह।

राजपाल: आह पर अब इन्हें छुप कर और सिर्फ इनके उभार को नहीं, तेरी चूचियों को नंगा देखना है बहू,

ये कहते हुए राजपाल सभ्या के ब्लाउज के हुक खोलने लगे, हर हुक के साथ सभ्या की मोटी चूचियों का दर्शन होने लगा था और जैसे ही आखिरी हुक खुला, राजपाल ने ब्लाउज़ के दोनों पाटों को पकड़ कर फैला दिया और सभ्या की कामुक मोटी चूचियों को देख उन पर अपने पंजे जमा दिए,

राजपाल: आह बहू क्या कामुक और मस्त चूचियां हैं तेरी जैसी सोची थी उनसे भी मस्त।

राजपाल सभ्या की चुचियों को मसलते हुए बोले,

सभ्या: ओह हां भाई साहब मुझे भी अपने पीछे की चुभन से पता चल रहा है कि तुम्हे कितना पसंद आ रही हैं।

सभ्या ने अपना हाथ पीछे ले जा कर राजपाल के मोटे लंड को धोती के ऊपर से ही सहलाते हुए कहा, वहीं राजपाल के हाथ लगातार सभ्या की चूचियों पर चल रहे थे।

सभ्या: आह ओह भाई साहब नहा लीजिए न तब तक मैं चाय रख देती हूं।

राजपाल: अरे चाय नहीं बहू अभी तो दूध पीने का मन है ये कहते हुए राजपाल ने सभ्या को घुमाया और उसकी एक चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगे तो दूसरी को लगातार मसल रहे थे।





सभ्या उनकी बाहों में सिसक रही थी,

दूसरी ओर शहर में महिपाल का परिवार एक टैक्सी में सवार होकर आगे बढ़ रहा था, कार एक बड़े से घर के सामने जाकर रुकी और सब उतरे,

महिपाल: ये ही पता है न?

पियूष: हां पता तो ये ही है, रुको फोन करता हूं

पियूष फोन लगाता है और फिर कुछ देर बाद घर का छोटा दरवाज़ा खुलता है और एक आदमी बाहर निकलता है ये वही आदमी था जो उन्हें फ़िल्म देखते हुए मिला था, वो उन्हें अंदर ले जाता है। और सोफे पर सबको बिठाता है, चारों घर को देख रहे थे जो काफी आलिशान बना हुआ था।

आदमी: वैसे उम्मीद नहीं की थी कि आप लोगों से इतनी जल्दी मिलना होगा, पर बहुत खुशी हो रही है कि अपने मेरा आग्रह स्वीकार किया,

महिपाल: दरअसल हम लोग यहां के नहीं है काफी दूर से आए हुए हैं और फिर आपका निमंत्रण मिला तो फिर सोचा कि न जाने फिर कब इस शहर में आना जाना हो इसीलिए सोचा आज ही क्यों नहीं।

आदमी: अरे बिल्कुल सही किया भाई साहब। वैसे आप इस नए जोड़े को पहले से जानते हैं या तभी मिले?

महिपाल: नहीं नहीं जिस तरह से आप से मिले उसी तरह इनसे भी।

पियूष: जी मैं और मेरी पत्नी भी दूसरे शहर में नौकरी करते हैं यहां एक दोस्त की शादी में आए थे फिर यहां घूमने निकले सोचा शहर घूम लेंगे फिर फ़िल्म का प्लान बन गया और बाकी फिर तो आप जानते ही हैं।

आदमी: देखा ये ही तो है किस्मत, आज आपको हमारा मेहमान बनाना था इसीलिए सही जगह ले ही आई,

इतने में ही एक औरत भी हॉल में कोलड्रिंक से सजी हुई ट्रे लेकर आती है जिसे देख सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है ये वही औरत थी जो उस समय आदमी के साथ थी।

आदमी: इनसे तो आप मिल ही चुके हैं ये हैं मेरी पत्नी।

औरत भी सबकी ओर देख मुस्कुराती है और कहती है: इतनी जल्दी कौन भूल सकता है मुझे, वैसे सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी आप सबको देखने का मौका मिलेगा, पर सच में आपने बहुत अच्छा किया जो हमारा निमंत्रण स्वीकार किया।

औरत ने महिपाल की ओर कोलड्रिंक बढ़ाते हुए कहा,

महिपाल: जी हमें भी बहुत इच्छा थी आप लोगों से फिर से मिलने की।

महिपाल ने कोलड्रिंक का गिलास हाथ में लेते हुए औरत की ओर देख कर कहा तो औरत ने एक कामुक मुस्कान दी।

आदमी: देखिए वैसे तो आप लोग खुद भी समझदार हैं फिर भी बता देता हूं कि हम लोग खुले विचारों के लोग हैं और हमारे शौक और अय्याशी तो आप ने देख ही ली है पर हमें भी समाज में सभ्यता और मर्यादा का मुखौटा पहन कर रहना पड़ता है, इसलिए इन बंद कमरों में जो होता है वो बाहर नहीं जाता, अपनी सुरक्षा और अपने मेहमानों की सुरक्षा के लिए ये बहुत ज़रूरी हो जाता है, इसलिए आप लोगों से भी यही प्रार्थना है कि जो यहां हो वो यहीं तक रखें और बाहर की दुनिया में हम अनजान ही रहें तो अच्छा है।

औरत: हां आपको इस तरह मिलना है तो कभी भी फोन कीजिए हम आपका स्वागत करेंगे।

महिपाल: जी नहीं आप लोग बिल्कुल सही कह रहे हैं, सम्मान और सुरक्षा के डर से ही हम लोग इतनी दूर हैं अगर आप हमारे आस पास के होते तो हम कभी आपके यहां नहीं आते।

पियूष: मेरा भी यही मानना है। हमें भी अपनी प्राइवसी को देखना पड़ता है।

औरत: बिल्कुल हमारा यही मानना है कि खुल कर मज़े करो पर एक दूसरे के बारे में जितना कम जानो उतना अच्छा है।

रानी: बिल्कुल सही कहा आपने।

औरत: इसीलिए तो देखिए हमने न आपसे आपके नाम पूछे और न अपने बताए।

पियूष: अजी छोड़िए नाम में क्या रखा है।

इस पर सब एक ठहाके के साथ हंस पड़े।

औरत: फिर भी बुलाने के लिए आप लोग हमें रीता और रवि कह सकते हैं ये हमारे असली नाम नहीं हैं।

आदमी: पर इंसान असली हैं हम लोग।

इस पर फिर से सब हंस पड़े।

दूसरी ओर चोदमपुर में राजपाल के घर में वो और सभ्या अब कमरे के अंदर आ चुके थे, सभ्या का ब्लाउज़ नीचे पड़ा हुआ था वहीं उसका पल्लू नीचे लटक रहा था और राजपाल अब भी उसके पीछे थे और उसकी मोटी चूचियों को मसलते हुए उसकी गर्दन और गालों को चूम रहे थे,





सभ्या: ओह भाई साहब तुम्हारा हथियार कितना कड़क होकर चुभ रहा है आह।

राजपाल: अरे बहू अब तुझे इस हालत में पाकर नहीं चुभेगा तो कब चुभेगा,

राजपाल ने गरम होते हुए सभ्या की चूचियों को मसलते हुए बोला,

सभ्या: पर भाई साहब पहले कुछ खा आह पी लेते तो अच्छा रहता न।

राजपाल: बहु अभी तो बस मुझे तेरी भूख है और कुछ नहीं चाहिए मन करता है तुझे ही खा जाऊं।

राजपाल ने सभ्या को पलटते हुए बोला,

सभ्या: तो खा ही लीजिए अब भाई साहब कम से कम भूखे तो नहीं रहोगे,

सभ्या ने राजपाल की आंखों में देखते हुए कहा, राजपाल ने भी उसके होंठों पर तुरंत अपने होंठ रख दिए और दोबारा से चूसने लगे,

राजपाल के हाथ सभ्या की नंगी पीठ और कमर की कामुक सिलवटों पर रेंग रहे थे, और फिर धीरे धीरे से हाथ नीचे खिसकने लगे, जल्दी दोनों हाथ सभ्या के गोल मटोल चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से ही सहला रहे थे, फिर धीरे धीरे राजपाल ने साड़ी और पेटिकोट को ऊपर खिसकाना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में राजपाल के हाथ सभ्या के नंगे चूतड़ों को मसल रहे थे, उनके पंजे सभ्या के मखमली चूतड़ों में गड़ रहे थे, पर तबसे फिर भी दोनों के होंठ अलग नहीं हुए थे और लगातार एक दूसरे को चूस रहे थे सभ्या की साड़ी को ऊपर कर राजपाल ने उसके पेटीकोट को नीचे खींच दिया तो उसका नाडा खुल गया और पेटीकोट सरकते हुए नीचे उसके पैरों में गिर पड़ा, राजपाल के हाथ दोबारा सभ्या के चूतड़ों को मसलने लगे।





सभ्या के बदन पर अब सिर्फ उसकी अधखुली साड़ी थी जिसे पीछे से राजपाल ने पीठ पर अटका दिया था और आगे से वो लटक रही थी

राजपाल ने कुछ देर सभ्या के चूतड़ों को हाथों से मसला और उसके होंठों को चूसते रहे फिर उसके होंठो को छोड़ा और उसकी पीठ को चूमते हुए नीचे की ओर बढ़ने लगे, कुछ ही देर में राजपाल अपने घुटनों पर थे और उनके चेहरे के सामने सभ्या के नंगे गोल मटोल उभरे हुए चूतड थे जिनकी दरार के बीच कुछ नहीं दिख रहा था, राजपाल ने दोनों चूतड़ों पर फिर से हाथों को जमाया और उन्हें फैलाया, सभ्या खुद ब खुद थोड़ा आगे को झुक गई, जिससे राजपाल के आगे उसके चूतड और फैल गए, उसके चूतड़ों की दरार के बीच उसकी गांड का भूरा छेद उसके नीचे गीली रस बहाती चूत को देख कर राजपाल के मुंह में पानी आ गया,

राजपाल: बहू मुझे यकीन नहीं हो रहा मैं तेरी नंगी चूत को देख रहा हूं, कितना सुंदर है तेरी चूत और गांड।

सभ्या: अब तो यकीन कर लो भाई साहब,

ये कहते हुए सभ्या ने अपने चूतड़ों को पीछे की ओर धकेल दिया तो राजपाल का चेहरा उसके चूतड़ों के बीच घुस गया, सभ्या ने हाथ पीछे लेजाकर राजपाल के चेहरे को पकड़ा और उसके मुंह पर अपने चूतड़ों को घिसने लगी अपनी कमर घुमा घुमा कर।

सभ्या: क्यों भाई आह साहब, अब तो आया न यकीन।

राजपाल ने जवाब में सिर्फ एक हुंकार भरी और फिर पागलों की तरह अपनी जीभ को बाहर निकाल कर सभ्या की चूत और गांड चाटने लगे।

जिससे सभ्या की भी सिसकियां निकलने लगी।

सभ्या: ओह भाई साहब ओह ओहम आह ऐसे ही।

राजपाल की जीभ सभ्या की चूत के होंठों पर चल रही थी तो सभ्या खुद ही अपने हाथों से अपनी चूचियों को मसल रही थी, राजपाल का लंड कड़क होकर ठुमके मार रहा था, उनके लिए अब और रुकना मुश्किल होता जा रहा था, और फिर राजपाल के सब्र का बांध टूटा तो वो फुर्ती में खड़े हुए और अपनी धोती को उतार फेंका और पूरे नंगे हो गए, अपने लंड को पकड़ कर उन्होंने सभ्या के चूतड़ों के बीच लगाया और उसे उसकी चूत के द्वार पर रखा तो दोनों की ही सिसकी निकल गई।

राजपाल: आह बहू घुसा दूं?

सभ्या: आह हां भाई साहब, चोद दो अपनी बहू को आह्ह्ह्ह,

सभ्या के इतने बोलने भर की देर थी कि राजपाल ने धक्का लहा कर सभ्या की चूत में लंड घुसा दिया और सभ्या की एक चीख निकल गई। सभ्या की गर्म चूत को अंदर से महसूस कर तो राजपाल उत्तेजना से पागल हो गए, और ताबड़तोड़ धक्के लगाकर उसे चोदने लगे, सभ्या की मोटी चूचियों को थाम कर वो लगातार धक्के लगा रहे थे, वहीं सभ्या भी अपने जेठ की चुदाई का मज़ा लेते हुए आहें भर रही थी।





राजपाल: ओह बहू ओह तेरी चूत कितनी गरम है अंदर से लग रहा है आह लग रहा है लोड़ा तप रहा है।

सभ्या: ओह भाई साहब ओह हां तुम्हारा कड़क मोटा लोड़ा भी मूसल की तरह आह बहू की चूत की कुटाई कर रहा है, आह कूटो ऐसे ही चटनी बना दो भाई साहब,

राजपाल: आह बहू ऐसे ही कुटुंगा आह और फिर अपनी दही भी तो मिलानी है तेरी चटनी से,

सभ्या: आह्ह्ह्ह ऐसे ही मारो भाई साहब, चोदो, चोदो।

सभ्या की बातों से जोश में आते हुए राजपाल और तगड़े धक्कों से उसे चोदने लगे, उत्तेजना का वेग और सालों बाद सभ्या के कामुक बदन को पाने के सुख ने उन्हें ज़्यादा देर टिकने नहीं दिया और कुछ देर बाद ही वो हुंकार मारते हुए सभ्या से पीछे से चिपक गए और अपने लंड से पिचकारी छोड़ने लगे। दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से लिपट गए। सभ्या की चूत से राजपाल का गाढ़ा वीर्य धीरे-धीरे बहकर बाहर आने लगा।

शहर में नाश्ते और बातों का दौर खत्म हो रहा था, महिपाल और उसका परिवार मेजबानों की ओर देख रहे थे कि आगे का क़दम क्या होने वाला है,

आदमी: चलिए बातें तो बहुत हो गईं, अंदर के कमरे में चलें?

औरत: और क्या ये लोग भी सोच रहे होंगे कि सिर्फ बातें करने के लिए ही बुलाया है क्या?

पियूष: नहीं नहीं जी ऐसी बात नहीं है, बातों में ही इतना अच्छा लग रहा है,

आदमी: अरे आगे इतना अच्छा लगेगा कि बातें भूल जाओगे छोटे भाई।

औरत: अरे पर इन्हें अंदर वाले कमरे में जाने का नियम तो समझा दो।

आदमी: अरे हां भाई हमारे अंदर वाले कमरे का नियम ये है कि वहां कपड़ों में प्रवेश नहीं मिलता,

ये सुन सब एक दूसरे की ओर देख मुस्कुराने लगे,

महिपाल: ये तो बढ़िया नियम है भाई साहब, और इसके अलावा भी कोई नियम है?

औरत: यही भाई साहब कि सब शर्म, समाज के नियम आदि को भूल कर खुल कर मज़ा लो, और तब तक लो जब तक बिल्कुल थक न जाओ।

पियूष: ये नियम मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया,

इस पर सब हंसने लगे,

औरत और आदमी उन्हें लेकर हॉल के अंदर घुसते हुए एक गैलरी और फिर एक कमरा पड़ा जहां आदमी ने सबसे कपड़े उतारने को कहा, और खुद भी कपड़े उतारने लगा, मर्दों ने तो तुरंत कपड़े उतार लिए और वो अंदर चले गए, अंदर जाकर महिपाल और पीयूष ने देखा कि बड़ा सा कमरा था जिसके एक तरफ एक बड़ा सा बेड पड़ा हुआ था अच्छे से मखमली बिस्तर से तैयार होकर, कमरे के दूसरी ओर सोफे लगे हुए थे बीच में कालीन बिछा था कोनों में रखी छोटी टेबलों पर पानी और हल्का फुल्के नाश्ते का सामान रखा था,

पियूष: कमरा तो बहुत अच्छा सजाया है भाई साहब,

महिपाल: हां काफी सुन्दर लग रहा है।

आदमी: ज़रूरत के हिसाब से ही बनवाया है भाई साहब, खुल कर मज़े लेने के लिए, इसे में और मेरी पत्नी कामभवन कहते हैं।

पियूष: अरे वाह नाम भी बहुत ही सोच समझ कर रखा है,

तीनों मर्द नंगे खड़े हुए बातें कर रहे थे, इतने में ही तीनों औरतें भी अंदर आईं और औरत ने दरवाज़ा लगा दिया।

आदमी: अब बातों में ज़्यादा समय नहीं लगाते और शुरू हो जाते हैं,

ये कह वो अपनी पत्नी को बाहों में भर लेता है और उसके होंठों को चूसने लगता है, उसकी देखा देखी, पियूष और महिपाल भी अपनी अपनी पत्नियों के साथ शुरू हो जाते हैं।

पियूष बेड पर चढ़ कर लेट जाता है वहीं रानी बिना झिझक के बिना शर्माए हुए उसकी टांगों के पास बैठकर झुक जाती है और उसके लंड को पकड़ कर सहलाने लगती है, और फिर मुंह में भर लेती है और पूरी लगन और जोश से चूसने लगती है





पियूष भी अपनी पत्नी के मुंह की गर्माहट पाकर सिहरने लगता है, रानी जिसके लिए आज का दिन बिल्कुल अलग ही जा रहा था, पहले जो फिल्म देखते हुए हुआ और फिर अब वो लोग अनजान आदमी के घर में बिस्तर पर नंगे थे ये सब अहसास से बहुत उत्तेजित हो रही थी और उसकी उत्तेजना उसके लंड चूसने में दिख रही थी।

उत्तेजना तो सविता की भी कम नहीं थी, जो अभी आंखें बंद कर के सोफे पर बैठी थी और आहें भर रही थी क्योंकि उसके पति महिपाल अभी उसके सामने अपने घुटनों पर बैठे थे और उसकी मोटी चूचियों को चूसते हुए उसकी चूत को सहला रहे थे जिस से उसका पूरा बदन मचल रहा था, उनके बगल में ही उसी की तरह ही रीता भी बैठी थी और रवि उसकी चूत चाट रहा था उसकी जांघो के बीच मुंह घुसा कर, पूरे कमरे से आहें और सिसकियों की आवाज़ आ रही थी जो कि सिर्फ अभी शुरुआत थी।


चोदमपुर

दूसरी ओर झड़ने के बाद राजपाल को सभ्या ने नहाने के लिए कहा था कि भाई साहब नहा लीजिए तब तक मैं चाय बना देती हूं तुम्हारे लिए पर सभ्या के लिए चाय बनाना भी मुश्किल हो रहा था क्योंकि राजपाल नहाने की जगह कुछ और तरीके से गर्मी शांत कर रहे थे,

चूल्हे पर चाय उबल रही थी तो वहीं चूल्हे के बगल में राजपाल का लंड सभ्या की गर्म चूत में तप रहा था, राजपाल सभ्या की कमर को पकड़ कर पीछे से दनादन धक्के लगा रहे थे,





सभ्या: आह भाई साहब तुम्हे नहाने को बोला था और तुम क्या करने लगे आह्ह्ह्ह।

राजपाल: बहू आज तेरी कोई बात मानने का मन नहीं है, आज तो मुझे अपनी सुननी है और तेरे साथ करनी है,

सभ्या: ओह इतने बेसब्र हो रहे हो भाई साहब कम से कम चाय तो बन जाने देते,

राजपाल: चाय से ज़्यादा गर्म तो तेरी चूत है बहू इसका स्वाद ही लेने दे पहले।

राजपाल ने धक्के मारते हुए कहा, हर धक्के पर सभ्या के चूतड़ लहरा रहे थे और चूचे झूल रहे थे।

दूसरी ओर शहर में कामभवन में नज़ारा थोड़ा बदल गया था और वहां का तापमान भी बढ़ता नज़र आ रहा था, तीनों जोड़े कामसुख के अद्भुत आनंद का मज़ा ले रहे थे, चुदाई करने का अपना अलग मज़ा है पर दूसरों के सामने सारी शर्म छोड़ कर चुदाई करने का मज़ा कुछ खास ही था जो इन्हें महसूस हो रहा था, महिपाल, सविता, पियूष और रानी के लिए तो खास कर क्योंकि वो तो अपने परिवार के सदस्यों के सामने ही इस अदभुत आनंद का स्वाद ले रहे थे जो उनकी उत्तेजना को और बढ़ा रहा था।

सोफे पर पीछे की के सविता थी जो अपने पति की ओर पीठ करके उनके लंड पर उछल रही थी वहीं महिपाल पत्नी की कमर को थामे उसे सहयोग कर रहे थे, उनके बगल में रीता, रवि के लंड पर उछल रही थी उनसे थोड़ा सा आगे ही एक छोटी कुर्सी पर रानी लेटी थी और उसकी चूत में पियूष का लंड अंदर बाहर हो रहा था।





रवि: क्यों भाई साहब कैसा लग रहा है काम भवन का मज़ा।

महिपाल: आह ऐसा मज़ा तो आज तक नहीं लिया आह इतना खुल कर अजनबियों के सामने करने में बहुत मजा आ रहा है।

रीता: क्या करने में, जब करने में नहीं शर्मा आह रहे तो बोलने में क्यों शर्मा रहे हो?

महिपाल: हां आह चुदाई करने में भाभी जी।

रवि: अरे सुनो भाई साहब और छोटे भाई थोड़ा सम्भल कर चुदाई करना, अभी झड़ना नहीं है,

महिपाल: क्यों रवि भाई साहब ऐसा क्यों?

रवि: अरे ओह रुक रुक करेंगे तो काफी देर तक कर पाएंगे, वैसे भी अभी तो बस शुरुआत है।

पियूष: बिल्कुल सही कहा भैया,

रवि: हां तभी जब लगे निकलने वाला है तो रुक जाना थोड़ा आराम कर लेना और फिर दोबारा शुरू हो जाना,

रीता: आह बहन जी पर हम औरतों के लिए ऐसा नहीं है हम जितना चाहे उतना कर सकते हैं।

सविता: पर मर्द ही रुक जाएंगे तो हम कैसे करेंगे रीता?

रीता: बस देखती जाओ बहन जी।

थोड़ी देर बाद ऐसा ही हुआ जब रवि को महसूस हुआ कि वो झड़ने वाला है तो वो रीता से दूर हो गया और कौने की टेबल से पानी लेकर पीने लगा अपनी सांसों को थामते हुए कमरे में चल रही चुदाई को देखने लगा, वहीं रीता थोड़ा आगे खिसक कर पियूष और रानी की चुदाई देखने लगी जहां रानी सोफे पर बैठे पियूष के लंड पर कूद रही थी, और दोनों ही पूरी तरह उत्तेजित होकर चुदाई कर रहे थे, रीता उन्हें देखते हुए अपनी चूत सहलाने लगी, कुछ पल बाद रीता ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और रानी की कमर पर रख दिया और उसकी कमर को सहलाने लगी, वहीं रानी लगातार उछल रही थी, रीता का हाथ भी रानी के पेट पर चलने लगा।

रानी भी एक औरत का हाथ अपने बदन पर यूं पाकर थोड़ा असहज हुई पर अभी चुदाई करते हुए ये उसके लिए ज़्यादा फ़र्क डालने वाली बात नहीं थी वो लगातार पीयूष के लंड पर उछल रही थी, रीता का हाथ उसके पेट पर से चलते हुए अगले ही पल रानी की चूची पर आ गया और वो उसे खुश होते हुए दबाने लगी उससे खेलने लगी, इस अहसास से रानी के बदन में एक अलग सिहरन होने लगी कि एक औरत उसके बदन से खेल रही है, वहीं रीत हंसते हुए उसका जोश बढ़ाते हुए उसकी चूची से खेल रही थी।





वहीं बिस्तर पर सविता झुकी हुई थी और पीछे से उसे महिपाल चोद रहा था, महिपाल सोफे पर अपने बेटे और बहू की छुड़ाई भी लगातार देख रहे थे और अब रीता का उनकी बहू के बदन से खेलते देख महिपाल के लंड में रस भरने लगा, और जैसे ही महिपाल को लगा कि वो झड़ने के करीब है तो उसने भी सविता की चूत से लंड निकाला और पीछे बैठ गया और हांफने लगा, सविता भी आगे की ओर लुढ़क गई और सांसे लेने लगी,

उधर पियूष को भी ये अहसास था कि रीता उसकी पत्नी के बदन से खेल रही है ये सोचते उसका भी जोश बढ़ रहा था,

रीता: आह बहन ऐसे ही उछल अपने पति के लंड पर, आह तेरी चूचियां कितनी मस्त लग रही हैं आह कितनी मखमली हैं।

रानी: आह ओह हां अह।

रीता: मज़ा आ रहा है?

रानी: आह हां बहुत मज़ा आअजज्ज आ रहा है,

रीता: और चाहिए?

रानी: अग्ह्ह्हः हां।

ये सुनते ही रीता ने अपने होंठ रानी की चूची पर रख दिए और पूरे जोश में उसकी चूची चूसने लगी वहीं रानी के लिए तो ये बहुत गरम करने वाला हो गया उसकी उत्तेजना और बढ़ गई। रीता बिना रुके पूरे जोश से रानी की चूची चूसने लगी, साथ ही दूसरी चूची को दबा रही थी, वहीं पियूष नीचे से लगातार धक्के लगा रहा था अपनी पत्नी की कसी हुई गरम चूत में,





महिपाल और सविता के लिए भी ये नया था कि कैसे एक औरत दूसरी औरत के साथ ये कर रही थी वो भी उनकी खुद की बहू के साथ, पीयूष के लिए तो ये और भी उत्तेजित करने वाला दृश्य था क्योंकि उसके इतने करीब जो हो रहा था पर इसका असर उस पर ऐसा हुआ कि वो खुद को रोक नहीं पाया और रानी की चूत में धक्के लगाता गया और फिर उसके लंड ने पिचकारी छोड़ना शुरू कर दिया एक के बाद एक, वहीं रानी पर भी दोहरा हमला हो रहा था, चूत में पति का लंड तो चूचियों पर रीता का मुंह तो वो भी पियूष के साथ ही झड़ने लगी चिल्लाती हुई, सिसकियां भरती हुई,

कुछ देर बाद पाती पत्नी दोनों ही हांफते हुए ढीले पड़ गए तो जाकर रीता ने रानी की चूची से मुंह हटाया और मुस्कुराते हुए देखा, जिससे रानी के चेहरे पर भी एक हल्की सी मुस्कान फैल गई।

रीता: क्यों बहन मज़ा आया?

रानी: आह पूछो मत आह ऐसा तो पहले कभी नहीं किया। कि किसी औरत ने मेरी चूची चूसी हो।

सविता: हां ये सब कुछ नया है हिम्मते लिए तो,

सविता ने बनते हुए बोला हालांकि वो सभ्या के साथ पहले भी एक बार सब कुछ कर चुकी थी,

रीता: अरे बहन जी तो फिर तुम अभी असली सुख से कोसों दूर हो और बहुत कुछ सीखना बाकी है, रीता ये कहते हुए उठी और सविता की ओर चल पड़ी और कुछ ही पलों में उसके बगल में बिस्तर पर थी।

रीता ने धीरे से हाथ बढ़ाया और सविता की कमर पर रख दिया, सविता ने भी एक मुस्कान दी उसे, बाकी सारे मर्द इस पल को गौर से देख रहे थे और उनके लंड ठुमके मार रहे थे, पियूष का लंड भी दोबारा कड़क होने लगा था,

रीता आगे झुकी और उसने अपने होंठों को सविता के पेट पर रख दिया और चूमने लगी, तो सविता का हाथ खुद ब खुद उसके सिर को सहलाने लगा, सविता का बदन सिहरने लगा, रानी, पियूष, महिपाल ध्यान से देख रहे थे तो रवि के चेहरे पर एक जानी पहचानी मुस्कान थी जैसे वो जानता हो कि उसकी पत्नी क्या कर रही है, रीता सविता के पेट को चूमते हुए ऊपर की ओर बढ़ने लगी, और कुछ ही पलों में वो सविता के ऊपर थी और फिर उसके होंठ सविता के होंठों में उलझे हुए थे, सविता ने भी एक पल को देर नहीं की और उसका साथ देने लगी, दोनों एक दूसरे के होंठों को उत्तेजना में चूसने लगी वहीं रीता ने सविता की टांगों को फैला दिया और अपनी टांगे उसके बीच में फंसा कर अपनी चूत को सविता की चूत से घिसने लगी।





इसका एहसास होते ही सविता का बदन मचलने लगा उसके हाथ रीता के चूतड़ों पर कसने लगे, वहीं वो रीता के होंठों को पूरे जोश के साथ चूसने लगी, बाकी सब सांसे थाम कर ये नज़ारा देख रहे थे, कुछ ही देर में सविता का बदन कांपने लगा और वो थरथरा कर झड़ने लगी और उसके साथ साथ रीता भी, दोनों औरतें एक साथ झड़कर ढीली होकर लेट गईं।

दोनों औरतें—सविता और रीता—अब एक-दूसरे से लिपटी हुईं, हाँफती हुईं, पसीने से तरबतर, बिस्तर पर लेटी हुई थीं।

उनकी साँसें अभी भी तेज़ चल रही थीं, जैसे अभी-अभी कोई तूफ़ान गुज़रा हो। सविता की आँखें आधी बंद, होंठों पर हल्की मुस्कान, और रीता का हाथ अभी भी सविता की कमर पर, धीरे-धीरे सहलाते हुए। दोनों की चूतें अभी भी गीली थीं, एक-दूसरे के रस से सनी हुईं।

कमरे में अब सन्नाटा नहीं था—सिर्फ़ भारी साँसों की आवाज़, कभी-कभी निकलने वाली हल्की सिसकी, और तीन मर्दों की तेज़ होती साँसें। महिपाल, पीयूष और रवि—तीनों नंगे, लंड कड़क, आँखों में भूख नजर आ रही थी।

उनकी नज़रें बार-बार सविता और रीता पर टिक रही थीं, फिर रानी की ओर, जो अब भी थोड़ी हाँफ रही थी, पियूष के वीर्य से भरी हुई, चेहरा लाल, आँखों में नई चमक।

रीता ने धीरे से सविता के कानों में फुसफुसाया,

"कैसा लगा बहन जी... पहली बार किसी औरत के साथ झड़ना?"

सविता ने आँखें खोलीं, शरमाते हुए मुस्कुराई,

"बहुत... बहुत अलग था। यक़ीन नहीं हो रहा हम दोनों एक साथ खड़े।"

उसकी आवाज़ में अभी भी काँपन था।

रीता हँसी, फिर उठी। उसके बदन पर पसीने की चमक, मोटी चूचियाँ हिल रही थीं। वो धीरे-धीरे कमरे के बीच में आई और बोली: हम औरतों का तो एक एक बार हो गया है तो थोड़ा नाश्ता हो जाए फिर आगे बहुत मेहनत करनी है।

इस पर सब मुस्कुरा पड़े।


चोदमपुर

चूल्हे पर चाय खौल चुकी थी पर सभ्या ने हाथ बढ़ाकर चूल्हे को बंद कर दिया था क्योंकि अभी चाय पीने के लिए समय ही कहां था क्योंकि एक बार फिर से सभ्या की चूत को राजपाल ने अपने रस से भर दिया था और दोनों हाँफ रहे थे, राजपाल ने सभ्या की कमर से हाथ हटाया तो सभ्या की टाँगें काँप रही थीं। उसकी चूत से राजपाल का गाढ़ा, गरम वीर्य धीरे-धीरे बहकर जांघों पर लकीरें बना रहा था। सभ्या ने हाँफते हुए, आँखों में अभी भी उत्तेजना की चमक लिए कहा—

"भाई साहब... अब तो सच में नहा लीजिए... पूरा बदन चिपचिपा हो गया है..."

राजपाल ने गहरी साँस ली, फिर मुस्कुराते हुए सभ्या के होंठों पर एक आखिरी, गहरा चुम्बन दिया।

"ठीक है बहू... लेकिन अकेले नहीं। आज तुझे भी साथ लेकर नहाता हूँ।"

सभ्या की आँखें चौड़ी हुईं, फिर शरमाते हुए मुस्कुरा दी।

राजपाल ने उसे गोद में उठाया—जैसे कोई दुल्हन को उठाता है—और आंगन की ओर ले गया। जहां किनारे पर पुराना सा नहाने का पत्थर और बाल्टी में पानी तैयार था। दोपहर की धूप अब थोड़ी नरम हो चुकी थी, पर हवा में अभी भी गर्मी थी।

राजपाल ने सभ्या को धीरे से नीचे उतारा।

आंगन में सभ्या पूरी नंगी खड़ी थी—गोरी त्वचा पर पसीने की चमक, मोटी चूचियाँ थोड़ी लटकी हुईं, गहरी नाभि, और जांघों के बीच से अभी भी सफेद धारियाँ बह रही थीं।

राजपाल ने बाल्टी से पानी निकाला और पहले खुद पर डाला। ठंडे पानी की बूँदें उसके बदन पर फिसलकर नीचे गिर रही थीं। फिर उसने सभ्या को पास खींचा।

"आ जा बहू... आज तुझे मैं नहलाता हूँ।"

सभ्या ने शरमाते हुए सिर झुका लिया। राजपाल ने साबुन उठाया और उसने पहले अपने हाथों पर साबुन लगाया, झाग बनाया, फिर दोनों हाथ सभ्या के पेट पर रख दिए।

सभ्या की सिसकी निकल गई।

"आह्ह... भाई साहब..."

राजपाल के हाथ धीरे-धीरे पेट पर घूम रहे थे। साबुन की नरमी और ठंडक से सभ्या का बदन सिहर उठा। राजपाल ने पेट से ऊपर बढ़ते हुए दोनों चूचियों को थामा। झागदार हाथों से चूचियों को मसलने लगा—गोल-गोल, ऊपर-नीचे, निप्पलों को अंगूठे से रगड़ते हुए। सभ्या की चूचियाँ साबुन से चमकने लगीं, फिसलन से भरी हुई।

"ओह्ह... कितनी नरम... कितनी मोटी... बहू, ये चूचियाँ।

सभ्या ने पीछे झुककर राजपाल के सीने से अपना सिर टिका दिया। राजपाल का लंड फिर से खड़ा हो चुका था। वो सभ्या के पीछे पूरी तरह चिपक गया। उसका कड़ा लंड सभ्या के चूतड़ों की दरार में फिसलने लगा।

राजपाल ने एक हाथ नीचे ले जाकर सभ्या की चूत पर रख दिया। साबुन लगे हाथों से चूत के होंठों को सहलाया, क्लिट पर अंगूठा घुमाया। सभ्या की कमर हिलने लगी।

"आह्ह... भाई साहब... वहाँ... ओह्ह..."

राजपाल ने पीछे से अपना लंड सभ्या की चूत के द्वार पर लगाया।

"बहू... फिर से अंदर डालूँ?"

सभ्या ने हाँ में सिर हिलाया, आवाज़ काँपती हुई—

"हाँ... डाल दो भाई साहब जब तक मन न भरे ..."

राजपाल ने कमर पकड़ी और धीरे से अंदर धकेला।

सभ्या की चूत अभी भी पहले की चुदाई से ढीली और गीली थी, लेकिन राजपाल के मोटे लंड ने फिर से उसे खोल दिया। एक लंबी सिसकी दोनों के गले से निकली।

अब राजपाल धीरे-धीरे धक्के देने लगा।

साथ-साथ उसके हाथ सभ्या के बदन पर साबुन मलते रहे। एक हाथ चूचियों पर, दूसरा पेट और नाभि पर। साबुन का झाग इतना हो गया कि दोनों के बदन फिसलने लगे। हर धक्के के साथ चूतड़ों पर थप्पड़ जैसी आवाज़ हो रही थी। पानी की बूँदें, साबुन का झाग और दोनों की आहें—सब मिलकर आंगन को कामुक ध्वनि से भर रहे थे।





राजपाल ने सभ्या का एक पैर थोड़ा ऊपर उठाया, एक पीढ़े के किनारे पर टिका दिया। अब चूत और खुलकर नजर आने लगी। धक्के और गहरे होने लगे।

"आह्ह... बहू... तेरी चूत... कितनी गरम... कितनी चिकनी... साबुन लगाकर और भी फिसलन भरी हो गई..."

सभ्या की चूचियाँ हर धक्के पर हिल रही थीं, साबुन की बूँदें उड़कर फर्श पर गिर रही थीं।

"ओह्ह... भाई साहब... और तेज़... आह्ह... फाड़ दो... अपनी बहू की चूत को..."

राजपाल ने गति बढ़ाई। उसके हाथ अब सभ्या की कमर पर कसकर थे। लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। चूत से साबुन और रस का मिश्रण बनकर सफेद झाग बन रहा था।

कुछ मिनट बाद राजपाल को फिर से वो सिहरन महसूस हुई।

"बहू... फिर निकलने वाला है... आह्ह..."

सभ्या ने पीछे हाथ बढ़ाकर राजपाल के चूतड़ पकड़े, उसे और अंदर खींचा।

"अंदर ही... भर दीजिए... आह्ह... अपनी बहू की चूत में फिर से..."

राजपाल ने आखिरी कुछ जोरदार धक्के मारे और फिर से हुंकार भरकर सभ्या की चूत के अंदर गाढ़ा वीर्य उड़ेल दिया।

दोनों एक साथ थरथराए। सभ्या की चूत से वीर्य और साबुन का मिश्रण बहकर जांघों पर गिरने लगा।

काफी देर तक दोनों ऐसे ही खड़े रहे—राजपाल सभ्या के पीछे चिपका हुआ, लंड अभी भी अंदर, दोनों हाँफते हुए।

फिर राजपाल ने धीरे से लंड बाहर निकाला। सभ्या की चूत से सफेद धार बहकर नीचे गिर रही थी।

राजपाल ने फिर बाल्टी से पानी उठाया और इस बार दोनों को साथ-साथ नहलाया।

साबुन से साफ़, पानी से धुली हुई सभ्या अब भी चमक रही थी। राजपाल ने उसे तौलिये से पोंछा, फिर अपनी बाहों में भर लिया।

सभ्या ने उसकी छाती पर सिर रखकर कहा— अब चाय पीएँगे।

जिसे सुनकर राजपाल हंस पड़े।

राजपाल: चल बहू अंदर चल कर कपड़े पहन ले आज चाय ही पीते हैं।

दोनों कमरे के अंदर चल दिए।


जारी रहेगी
 
राजपाल ने फिर बाल्टी से पानी उठाया और इस बार दोनों को साथ-साथ नहलाया।

साबुन से साफ़, पानी से धुली हुई सभ्या अब भी चमक रही थी। राजपाल ने उसे तौलिये से पोंछा, फिर अपनी बाहों में भर लिया।

सभ्या ने उसकी छाती पर सिर रखकर कहा— अब चाय पीएँगे।

जिसे सुनकर राजपाल हंस पड़े।

राजपाल: चल बहू अंदर चल कर कपड़े पहन ले आज चाय ही पीते हैं।

दोनों कमरे के अंदर चल दिए। आगे...



अपडेट 253


कामनगर में पूर्वी के ससुराल में पूर्वी रसोई में थी और चाय और पकोड़े बनाने की कोशिश कर रही थी, पर उसके लिए काम करना मुश्किल होता जा रहा था,

पूर्वी: अरे भाई आराम से, नाश्ता तो बनाने दे फिर खेल लेना मेरे साथ जितना चाहे उतना।

सागर: नहीं दीदी तुम्हे छोड़ने का बिल्कुल मन नहीं कर रहा,

सागर ने बोला जो कि जबसे आया था तब से पीछे से पूर्वी को देख कर ही पागल हुआ पड़ा था और अभी भी उससे पीछे से चिपका हुआ था और उसके पेट और चूचियों को मसल रहा था,





पूर्वी: तू भी न बिल्कुल पागल ही हो गया है,

सागर: ऐसी दीदी होगी तो कोई भी पागल हो जाएगा दीदी।

पूर्वी: अच्छा बातें बाद में बनाना अभी चलते हैं सबके लिए नाश्ता उठाने में मेरी मदद कर।

सागर: नाश्ता पकड़ने के लिए तुम्हे छोड़ना पड़ेगा,

सागर में मुंह बनाते हुए कहा,

पूर्वी: हट बदमाश कितनी बातें बनाता है चल प्लेट उठा।

सागर ने उसे छोड़ा फिर दोनों ही चाय और पकोड़े ले कर रसोई से हाल में आए पर हॉल में आते ही पूर्वी और सागर दोनों की ही आँखें चौड़ी हो गई।

सागर: क्या दीदी तुम तो मुझे बोल रही थी और यहां देखो कैसे सब मेल जोल बढ़ा रहे हैं,

पूर्वी: हो तो तुम लोग एक जैसे ही ना तू कम और न वो।

पूर्वी ने सामने देखते हुए कहा जहां सोफे पर अनुज कोने पर बैठा हुआ था और उसके आगे पूर्वी की ननद प्रीति थी, अनुज और प्रीति के होंठ आपस में जुड़े हुए थे और दोनों एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे, प्रीति कमर से ऊपर नंगी थी और उसके मध्यम आकर के चूचे रोशनी में बहुत सुंदर लग रहे थे वहीं उनके बगल में ही प्रीति की मां और पूर्वी की सास रेनू बैठी थी ब्लाउज खुला हुआ था और मोटी मोटी चूचियां बाहर झूल रही थी, अनुज और प्रीति एक दूसरे के होंठों को चूसते हुए रेनू के बदन को सहला रहे थे।





रेनू भी अपनी बेटी और अनुज को चूमते देख गरम हो रही थी और अपनी चूचियों को सहला रही थी,

पूर्वी: लो भाई मैं नाश्ता बना ला पाई हूं पर यहां तो मुंह मीठा पहले से ही हो रहा है,

पूर्वी ने प्लेट टेबल पर रखते हुए कहा,

रेनू: अरे बहू बच्चे शुरू हो गए तो हम रोक नहीं पाए,

पूर्वी: पर अब रुकना होगा सबको, अनुज, सीधा बैठ नाश्ता कर ले फिर चूस लेना अपनी दुल्हनिया और सासू मां को।

अनुज: क्या दीदी,

प्रीती: भाभी,

प्रीती बापिस अपनी टी शर्ट पहनते हुए चिल्लाई, और अनुज भी दोनों ने एक साथ शर्माते हुए बोला और सब हंसने लगे,

पूर्वी: अरे इसमें शर्माने वाली बात क्या है, क्यों मम्मी होने वाला दामाद पसंद नहीं क्या?

रेनू: पसंद क्यों नहीं बिल्कुल पसंद है,

अनुज: मुझे भी तुम बहुत पसंद हो चाची,

अनुज ने उनके होंठों को हल्का सा चूमते हुए कहा,

सागर: ये देखो मां बेटी दोनों के ही पीछे पड़ा है।

पूर्वी: चलो भाई पकोड़े खाओ सब ठंडे हो जायेंगे?

सागर: दीदी जीजाजी और इसके ससुर जी कहां हैं?

सागर ने हंसते हुए पूछा,

रेनू: वो दोनों लोग बाजार गए हैं बेटा, आते ही होंगे।

दूसरी ओर शहर में भी नाश्ते का दौर चल रहा था, महिपाल का परिवार रीता और रवि के साथ था, हल्की फुल्की बातें हो रही थी और लोग पिछली दौर की चुदाई की थकान को मिटाने की कोशिश कर रहे थे जिससे आगे का प्रोग्राम और अच्छा हो करीब आधे घंटे के आराम के बाद धीरे धीरे बेसब्री बढ़ने लगी थी, जिसे मेज़बान भी भांप गए थे,

रीता: अच्छा बहन जी इससे पहले कभी किसी औरत के साथ किया था कुछ भी?

रीता ने सविता से पूछा,

सविता ये सुन थोड़ा झिझकी और फिर मुस्कुराते हुए बोली: नहीं ऐसा कुछ तो कभी नहीं,

उसने झूठ बोला क्योंकि सभ्या और नीलेश के साथ के किस्से को बता नहीं सकती थी,

रीता: और तुमने छोटी? मैं तुम्हें छोटी कहूं तो कोई परेशानी तो नहीं?

रानी: बिल्कुल नहीं जो ठीक लगे वो बुलाओ।

रीता: तो ठीक है तुम छोटी और ये छोटू, क्यों ठीक है न?

रीता ने पीयूष से कहा,

पीयूष: अरे बिल्कुल वैसे भी हम यहां छोटे ही हैं तो ये नाम बिलकुल ही सही हैं हम दोनों के लिए.

रीता: तो छोटी बताओ न तुमने कभी इस तरह छुआ है किसी औरत को,

रानी: नहीं मेरा भी ये पहली बार ही था किसी औरत के साथ।

रीता: मज़ा आया?

रानी मुस्कुराते हुए और शर्माते हुए बोली: बहुत,

रीता: देखो बहन जी नंगी बैठी है और शर्मा रही है।

इस पर सब हंसने लगे,

रीता: अच्छा तो आओ हम लोग खेलना शुरू करते हैं तब तक मर्द लोग ये टेबल वगैरा हटाएंगे और ये सब रसोई में रख कर आयेंगे।

रवि: देखा पत्नी चाहे नंगी हो या कपड़ों में हुक्म चलाना नहीं छोड़ती,

इस पर सब फिर से हंसे,

पीयूष: और पति चाहे नंगा हो या कोट पैंट में, पत्नी का हुकुम बजाना ही पड़ता है, चलो भाई साहब लगाओ हाथ टेबल में।

पियूष ने एक ओर से टेबल पकड़ते हुए कहा,

महिपाल: मैं सामन बटोरता हूं,

तीनों मर्द बातें करते हुए समान लेकर कमरे से बाहर निकल गए तो वहीं औरतें एक दूसरे को देख रही थी मुस्कान के साथ।

बाहर टेबल और खाना रसोई में रखने के बाद रवि ने एक शीशी निकाली और एक गोली खुद खाई और एक एक महिपाल और पीयूष को दी।

पियूष: ये क्या है भैया?

रवि: जादुई गोली है छोटू, कितनी बार भी झड़ जाओ अगली बारी के लिए कुछ ही देर में फिर से तैयार हो जाओगे,

महिपाल: अरे ये तो बढ़िया चीज है,

महिपाल ने गोली निगलते हुए कहा,

रवि: और क्या भाई साहब औरतों से पीछे नहीं रहना हमें। और इसकी सबसे अच्छी बात बिल्कुल आयुर्वेदिक है कोई साइड इफेक्ट नहीं।

पियूष: फिर बढ़िया है चलो चलते हैं।

पियूष ने गोली गटकते हुए कहा।

थोड़ी देर बाद तीनों मर्द बाहर के काम निपटा कर कमरे में आए तो तीनों की आंखें सामने के नज़ारे पर जम गईं, और नज़ारा ही ऐसा था कि किसी की भी नज़र ठहर सकती थीं। सविता बिस्तर पर लेटी हुई थी रीता उसके ऊपर थी और उसकी मोटी मोटी और बड़ी चूचियां बारी बारी से मुंह में भर कर चूस रही थी वहीं रानी रीता और सविता की टांगों के ओर थी और रीता के चूतड़ों को सहलाते हुए उन्हें देख रही थी।





सविता: यहम्मम आह रीता ओह,

रीता: बहुत मस्त चूचियां हैं बहन जी तुम्हारी,

रीता ने चूची से मुंह हटाते हुए कहा और फिर बापिस मुंह में भर लिया,

रानी: आह रीता दीदी तुम्हारे चूतड़ भी बहुत मस्त हैं कितने गोल मटोल हैं,

रानी ने उसके चूतड़ों को मसलते हुए कहा तो रीता की सिसकी सविता की चूची में ही घुट गई,

पीयूष: आह यकीन नहीं हो रहा ये सब मेरे सामने हो रहा है,

पीयूष ने बिस्तर पर देखते हुए अपने कड़क हो चुके लंड को सहलाते हुए कहा,

रवि: हो तो रहा है यकीन कर लो छोटू, वैसे हर मर्द के मन में ये इच्छा ज़रूर होती है अपनी पत्नी को किसी औरत के साथ इस तरह देखने की।

उसका लंड भी पूरी तरह कड़क हो कर झूल रहा था,

महिपाल: ये बात तो सच कही, न जाने कब से थी ये इच्छा मेरे भी मन में,

रवि: तभी तो कहता हूं भाई साहब बहुत कम लोग हैं जो अपनी इस इच्छा को पूरा होता देख पाते हैं, इसलिए खुल कर जीने का यही मज़ा है, समाज के चक्करों और नियमों में पड़ेंगे तो इस अदभुत आनंद को खो देंगे, इसलिए सब भूल कर मज़ा लो, बाकी किसको क्या ही पता चल रहा है।

पीयूष: बिल्कुल जब तक पकड़े न जाए तब तक सब शरीफ़।

महिपाल कुछ कहने वाला होता है कि तभी रीता की आवाज़ आती है: अरे तुम लोग आज बस बातें ही करते रहोगे क्या? भाई साहब आ जाओ और चढ़ जाओ तुम्हारी घोड़ी तैयार है,

रीता ने सविता की ओर इशारा करते हुए महिपाल से कहा, सविता बिस्तर पर मचल रही थी और उसके चेहरे से ही उसकी उत्तेजना झलक रही थी।

रवि: जाओ भाई साहब,

महिपाल भी आगे बढ़ा और बिस्तर पर चढ़ गया, और अपनी पत्नी के होंठों को चूसते हुए उसके बदन को मसलने लगा,

इधर महिपाल जहां बिस्तर पर चढ़ गया था तो रीता रीना के साथ रवि और पीयूष के पास आ गई थी और कुछ पल बाद ही दोनों मर्दों के बीच में दोनों औरतें नीचे बैठी थी और अपने अपने पति का लंड चूस रहीं थीं





पियूष: आह ओह तुम्हारे गरम मुंह का जवाब नहीं मेरी जान,

पियूष ने रानी के मुंह में अपना लंड अंडे तक धक्के चलाते हुए कहा, वहीं रानी के ठीक पीछे रीता के सिर को थाम कर रवि उसका मुंह चोद रहा था, दोनों औरतों के मुंह ग़ुच्छ उक्क की आवाजें आ रहीं थीं।

इतने में दूसरी ओर से सविता की भी एक तेज़ आह सुनाई दी, पियूष ने और रवि ने उस ओर देखा तो पाया कि महिपाल ने सविता की चूत में फिर से लंड घुसा दिया था और दनादन चोद रहा था,

रवि: भाई साहब ने तो भाभी की चीख ही निकाल दी। दोनों ही बड़े मस्त हैं और चुदक्कड़ भी,

अब पीयूष कैसे कहता कि जिनके बारे में वो बोल रहा है वो और कोई नहीं उसके मां बाप हैं, इसलिए पियूष सिर्फ आहें भरते हुए सिर हिला कर रह गया,

इतने में ही रीता ने रवि का लंड मुंह से निकाला और बोली: अब बातें बहुत हो गई चलो अब,

रवि: नेकी और पूछ पूछ,

रवि ने पीयूष को आंख मारी और रीता को लेकर दूसरे बिस्तर की ओर बढ़ गया, तो पियूष ने भी रानी को उठाया और उनके पीछे चल दिया, कुछ देर बाद दोनों जोड़े बिस्तर पर थे, रवि अपनी पीठ पर लेटा हुआ था और रीता उसके ऊपर थी, रवि का लंड रीता की गांड में समाया हुआ था वहीं उनके बगल में ही पियूष और रानी लेटे हुए थे और पीयूष तिरछा लेट कर रानी को चोद रहा था।





रीता: आह आह आह आह ऐसे ही आह बहुत मोटा है आह मेरी गांड भर दी ओह।

रीता अपने पति से गांड मरवाते हुए बडबडा रही थी, वहीं उसका पति भी नीचे से धक्के लगाते हुए, आहें भर रहा था

रानी: ओह जी आह यहम्मम चोदते रहो ऐसे ही,

रानी भी गरम होकर अपने पति को उकसा रही थी, रानी का बदन चुदते हुए रवि के बदन से लग रहा था जो उसके लिए एक अलग ही उत्तेजना का विषय था, अपने पति से चुदते हुए किसी नंगे और गैर मर्द के बदन से स्पर्श होना ये हर रोज तो नहीं होता था, वहीं इसका एहसास रवि को भी था जो रानी के बदन की गर्मी महसूस कर और गरम हो रहा था, साथ ही उसकी पत्नी की गांड की कसावट और उसकी गांड उछालने का तरीका उसे और तड़पा रहा था और उसे अपना रस लंड में भरता महसूस हो रहा था, क्योंकि वो पहले भी झड़ा नहीं था तो उसके लिए ख़ुदको के रोकना मुश्किल हो रहा था और फिर वो ज़्यादा समय खुद को रोक भी नहीं पाया और झड़ने लगा, एक के बाद एक पिचकारी रीता की गांड में भरने लगा, झड़ने के बाद रीता तुरंत अपने पति के लंड से उतरी और घूम कर उसका लंड चूसने लगी और उसे चाट कर अपनी गांड और उसके रस से साफ किया, वहीं रवि उठा और उठ कर एक ओर जा कर बैठ गया और हांफने लगा,

रीता ने अपना ध्यान रानी और पीयूष की ओर किया और अपने होंठों को रानी के होंठों पर रख दिया, रानी अभी पीयूष के ऊपर बैठ कर उसकी सवारी कर रही थी जैसे ही रीता ने उसके होंठों को छुआ तो रानी भी तुरंत उसके होंठो को चूसने लगी वहीं रीता के हाथ रानी की चूचियों को मसलने लगे,





रानी को जैसे ही उसे एहसास हुआ कि रीता जीभ और होंठो पर रवि के रस का स्वाद है रानी का बदन सिहरने लगा इस एहसास से कि वो किसी गैर मर्द के रस का स्वाद चख रही है वो भी उसकी पत्नी के मुंह से ये अपने आप में नया और अनोखा आभास था, नया आभास तो पियूष के लिए भी था क्योंकि उसकी आंखों के ठीक सामने का नज़ारा ही कुछ ऐसा था,

पीयूष: ओह आह अहम्म करते रहो,

रानी और रीता भी लगातार लगे हुए थे, कुछ देर बाद रीता ने अपने होंठ अलग किए और नीचे होकर रानी की चूचियों को चूसने लगी, और रानी आहें भरने लगी, रानी की चूचियों को कुछ पल चूसने के बाद रीता और नीचे हुई और उसके पेट और नाभि को चूमने चाटने लगी, उसके थोड़ा नीचे रानी की चूत में पीयूष का लंड अंदर बाहर हो रहा था, रानी की उत्तेजना और बढ़ने लगी दोहरे हमले के कारण, रीता ने हाथ बढ़ाया और उसकी चूत के दाने को सहलाने लगी, तो रानी के लिए सहना मुश्किल हो गया और कुछ ही पलों में रानी का बदन थरथराते हुए कांपने लगा और वो झड़ने लगी, झड़ते हुए उसका बदन एक ओर सरक गया और वो पीयूष के लंड से हट गई और बिस्तर पर लेट कर हांफने लगी, वहीं उसके हटते ही रीता ने पीयूष के लंड को पकड़ा और बिना किसी हिच किचाहट के अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी, ये देखते ही पीयूष की आह निकल गई कि उसका लंड उसकी पत्नी के सामने कोई और औरत उसका लंड चूस रही है, उसने तुरंत रानी को देखा जो कि हांफते हुए ये देख रही थी, अपने पति का लंड गैर औरत को चूसते देख उसे अजीब सा तो लग रहा था पर जलन नहीं हो रही थी बल्कि एक सिहरन का अहसास हो रहा था, इसी बीच उसकी नजर पीयूष से मिली जो सवालिया आंखों से उसे देख रहा था, उसके चेहरे पर हैरानी साफ नज़र आ रही थी,

रानी ने हांफते हुए ही चेहरे पर एक कामुक मुस्कान के साथ उसे इशारा किया तो पियूष के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई, और वो रीता के गरम मुंह का मज़ा लेने लगा, वहीं पीयूष ने रवि की ओर देखा तो वो भी मुस्कुराते हुए उसे देख रहा था और उसने फिर उसे मजे लेने का इशारा किया तो पियूष को तो मानो क्या मिल गया,

इस नज़ारे को महिपाल और सावित्री भी देख रहे थे, और रीता को पीयूष का लंड चूसते देख पीयूष के मां और बाप दोनों ही बहुत उत्तेजित हो गए और महिपाल को तो अपना रस लंड में भरता हुआ महसूस हुआ तो उसने तुरंत लंड सविता की चूत से निकाला और आगे खिसक कर उसके पेट पर आ गया और सविता की चूचियों पर पिचकारी मारने लगा,





सविता जो कि पहले ही गरम थी अपने पति का रस अपनी मोटी चूचियों पर लेकर उसे और उकसाने लगी,

सविता: आह जी ऐसे ही नहला दो मेरी मोटी चूचियों को अपने रस से आह निचोड़ दो सारा रस आह कितना गरम है तुम्हारा रस।

वहीं महिपाल गुर्राते हुए आहें भरते हुए झड़ रहा था,

और झड़ने के बाद हांफते हुए वो भी एक ओर को सरक कर हांफने लगा,

बिस्तर पर रीता ने पीयूष का लंड रीता ने अपने मुंह से निकाल दिया था और पलट कर वो रानी के ऊपर चढ़ गई उसके बदन पर अपना बदन रख दिया और उसके होंठों को चूसने लगी मानो कह रही हो अपने पति के लंड का भी स्वाद चख ले।

रानी भी तुरंत उसका साथ देने लगी, कुछ पल बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो रीता उसके गाल, गर्दन और गले को चाटने लगी, अपनी जीभ उसके कान के आस पास घुमाने लगी तो रानी मचलने लगी, फिर रीता उसके कान में बहुत हल्के से फुसफुसाई: छोटी अपने पति से मुझे चुदते हुए देखेगी? उसका लंड मेरी गरम चूत में अंदर बाहर होता हुआ देख कर तुझे कैसा लगेगा।

रीता के इस प्रश्न पर तो रानी की आंखें चौड़ी हो गईं पर वो परेशान नहीं थी कहीं न कहीं वो ये चाहती थी वो अपने पति को रीता के साथ चुदाई करते हुए देखना चाहती थी और वही रीता ने खुद से बोल दिया था,

रानी: आह हां दीदी, मुझे देखना है आह अभी देखना है।

रानी भी फुसफुसाते हुए और गरम होते हुए बोली, रानी के मन की जानकर रीता ने पीयूष के लंड को पकड़ा और उसे अपने पीछे खींचा, पीयूष तो डोर के साथ पतंग की तरह खिंचता चला गया,

रीता ने उसे अपने पीछे आने का इशारा किया और पीयूष उत्सुकता वश तुरंत उसके और रानी की टांगो के पीछे आ गया। अब रीता जैसी औरत चोदने को मिले तो कौन उत्सुक नहीं होगा, रीता ने हाथ पीछे लेजाकर उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रखा और अपनी कमर पीछे सरका दी और पीयूष का गीला लंड उसकी चूत में घुस गया और दोनों के मुंह से ही आह निकल गई, कुछ देर बाद ही पीयूष उसकी कमर को थामे रीता को चोद रहा था, जबकि रीता रानी के ऊपर लेटी उसके होंठों को चूस रही थी, रानी अपने हाथ नीचे करके रीटेक चूत के दाने को रगड़ रही थी





रीता: ओह छोटी देख तेरे पति का लोड़ा मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा है आह मोटा है।

रीता ने अपने होंठ हटाते हुए कहा,

रानी: ओह आह दीदी ऐसे ही चुदती रहो,आह उन्हें अपनी गर्म चूत के मजे लेने दो आह।

रीता: आह ओह आह हां अब तो तेरे पति को निचोड़ कर के ही छोडूंगी।

रानी: आह सुनो जी ओह कैसा लग रहा है दीदी को चोद कर ओह?

रानी ने पीयूष से पूछा जो कि अपनी उत्तेजना के घोड़े पर तेजी से दौड़ रहा था, पहली बार वो अपनी पत्नी के अलावा किसी और को जो चोद रहा था वो भी सबके सामने।

पीयूष: ओह बहुत मजा आ रहा है आह क्या मस्त गरम चूत है आह ओह आह आह आह।।

दूसरी ओर रवि भी अपने कड़क हो चुके लंड को सहलाते हुए अपनी पत्नी को चुदवाते हुए देख रहा था,

सविता और महिपाल भी आराम से अपने बेटे को रीता की चुदाई करते देख रहे थे जो उन्हें भी गरम कर रहा था,

पीयूष के लिए बार पल उसे अपने चरम सुख के करीब ले जा रहा था, और फिर वो गुर्राते हुए आहें भरते हुए रीता की चूत में तेजी से तगड़े धक्के लगाने लगा और कुछ धक्कों के बाद एक तेज हुंकार के बाद वो झड़ने लगा रीता की चूत में, एक के बाद एक पिचकारी उसकी चूत में भरने लगी, झड़ने के बाद पीयूष रीता के पीछे से हटा और बिस्तर के सिरहाने टिक कर हांफने लगा, रीता थोड़ी देर तक रानी के ऊपर लेट कर उसे चूमती रही और फिर उसके ऊपर से खिसकते हुए उसके पैरों के बीच आ गई, और अपना मुंह रानी की चूत पर लगा दिया और चाटने लगी, रानी का बदन फिर से मचलने लगा उसकी चूत में फिर से वही खुजली और गर्मी बढ़ने लगी, रीता की चूत उसकी चूत पर ऐसा जादू कर रही थी जिसे उसने आज तक महसूस नहीं किया था कभी उसकी कमर तन जाती तो कभी वो अपना सिर उठा कर बापिस बिस्तर पर पटक देती। इसी बीच अचानक उसे रीता का मुंह उसकी चूत पर से हटता हुआ महसूस हुआ रीता ने चेहरा उठा कर उसकी ओर देखा और बोली: अब मेरी बारी छोटी,

और आगे बढ़ कर अपनी चूत को रानी के चेहरे पर रख दिया, रानी के लिए ये पहली बार था पर उसकी उत्तेजना उसे किसी भी कदम पर पीछे नहीं हटने दे रही थी और उसने तुरंत ही अगले पल अपनी जीभ रीता की चूत पर रख दी और उसे चाटने लगी, रीता उसके मुंह के ऊपर मचलते हुए आहें भरने लगी,

रानी ने जब उसकी आहें सुनी तो वो आत्मविश्वास से भर गई उसे अच्छा लग रहा था कि वो रीता को अपनी जीभ से ऐसा महसूस करवा रही है, इसी बीच रानी को अपनी चूत पर फिर से एक गरम एहसास हुआ और इससे पहले वो कुछ समझ पाती या देख पाती उसकी चूत फैली और एक गरम कड़क लंड उसकी चूत में समा गया, जिससे उसकी एक आह निकली जो रीता की चूत में ही घुट गई।

दूसरी ओर काम नगर में बाज़ार से दोनों बाप बेटे यानी पूर्वी के पति पंकज और ससुर प्रकाश घर के दरवाज़े को खोल कर अंदर आए तो सामने का नज़ारा देख उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई,





एक सोफे पर पंकज की मां रेनू बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी और उस बगल में ही सागर लेटा हुआ था जो रेनू के होंठों को चूसते हुए उसकी चूत में लंड पेल रहा था, साथ ही रेनू के बड़े चूचे को भी मसल रहा था, दोनों को खबर भी नहीं थी कि उन्हें कोई देख रहा है,

वहीं दूसरी ओर दीवान पर भी हाल कुछ ऐसा ही था, प्रीती पूरी नंगी अपनी टांगे खोल कर अपनी कोहनी पर पीछे टिक कर लेटी थी उसके बगल में उसकी भाभी पूर्वी थी जिसके बदन पर सिर्फ पेटीकोट था जो कि कमर में इकठ्ठा था, वहीं प्रीती के पैरों के बीच अनुज था जो अपने लंड को उसकी चूत पर मार रहा था और उसे तड़पा रहा था,

पूर्वी अपनी ननद और ममेरे भाई को देख कर गरम हो रही थी,

पूर्वी: अब कितना तड़पाएगा बेचारी को अनुज घुसा दे न,

अनुज: हां दीदी, घुसा दूं?

अनुज ने प्रीती से पूछा,

प्रीती: हां चोदो मुझे,

प्रीती का इतना कहना था कि अनुज ने धक्का देकर लंड अंदर घुसा दिया और प्रीती की हल्की चीख निकली वहीं पूर्वी के चेहरे पर खुशी आ गई, अनुज तुरंत ही धक्के लगा कर उसे चोदने लगा,





इसी बीच पूर्वी की नज़र अपने पति और ससुर पर पड़ी,

पूर्वी: अरे तुम लोग आ गए, कब से आए हो?

पूर्वी उठ कर उनके पास गई और पहले पति के होंठों को चूमा और फिर ससुर के,

प्रकाश: अरे बस अभी, अपने भाइयों की अच्छी खातिरदारी कर रही है तू,

अनुज और सागर ने भी उन्हें देखा और रुक कर प्रणाम किया,

प्रकाश: अरे रुको मत बेटा लगे रहो।

प्रकाश ने बैठते हुए कहा,

पंकज: क्यों भाई साले साहबों तुम तो आते ही मेरी मां और बहन चोदने लगे,

पंकज ने बैठते हुए मज़ाक करते हुए कहा।

सागर: तुम भी आ जाओ जीजाजी, साथ में चोदते हैं।

पंकज: अरे नेकी और पूछ पूछ,

पंकज ने तुरंत कपड़े उतारे और अपनी मां और सागर की ओर चल दिया तो पूर्वी अपने ससुर के सामने बैठ कर उनकी पेंट खोलने लगी,

कुछ देर बाद ही ऐसा नज़ारा था कि रेनू सोफे के नीचे झुकी हुई थी और पीछे से सागर उन्हें कसके पकड़ कर चोद रहा था वहीं पंकज सोफे पर खड़ा था और अपनी मां से अपना लंड चुसवा रहा था,





सागर: आह आह आह जीजा, ओह बुआ तो बहुत मस्त हैं आह क्या मस्त चूत है ओह।

पंकज: वो तो है साले साहब तभी तो मैं भी मम्मी को देख कर खुद को रोक नहीं पाता।

दोनों रेनू को चोदते हुए उसके बारे में बातें कर रहे थे पर रेनू सुन के भी अनसुना कर रही थी क्योंकि उसके अंदर अभी दो मोटे मोटे लंड अंदर बाहर हो रहे थे जिनमें से एक उसके बेटे का था तो एक बेटे से भी छोटे लड़के का जिससे न जाने वो पहले कब मिली थी उसे याद भी नहीं था, जबसे उसके परिवार में ये चुदाई का खेल शुरू हुआ था रेनू के जीवन में एक नयापन आ गया था उसका बदन भी कामुक होता जा रहा था, आस पड़ोस की औरतें उसके चेहरे की चमक और बदन की कसावट का राज़ पूछती थी तो वो सिर्फ मुस्कुरा कर टाल देती थी,

वहीं यही हाल उसके पति प्रकाश का भी था अभी उनका लंड उनकी बहू की गरम चूत में अंदर बाहर हो रहा था और उनके ठीक बगल में ही उनकी बेटी प्रीती भी उसी हालत में नंगी थी और उसकी चूत में अनुज का लंड अंदर बाहर हो रहा था,





पूर्वी: ओह पापा जी ऐसे ही चोदते रहो ओह अपनी बेटी को चुदते देख तुम्हारा लंड और कड़क हो जाता है,

प्रकाश: आह बेटा, पता नहीं उसे चुदते देख या तुझे चोदते हुए होता है पर ये तो कड़क ही रहता है।

प्रीती: आह पापा भाभी की बातों में मत आना आह ये गंदी बातें करके सबको जल्दी झड़ने पर मजबूर कर देती हैं, मुझे भी चाहिए तुम्हारा लंड।

प्रकाश: आह ज़रूर मिलेगा लाड़ो, तब तक अनुज तेरा खयाल रख रहा है न।

अनुज: बिल्कुल रख रहा हूं चाचा जी। आह इसकी चूत कितनी कसी हुई है आह।

प्रीती: तुम्हारा लंड भी कितना मोटा है आह मेरी चूत को चीर रहा है,

अनुज ने आगे बढ़ कर प्रीती के होंठों को चूसना शुरू कर दिया।

पूर्वी: लो पापाजी ये लैला मजनू फिर शुरू हो गए,

प्रकाश: आह काश हमारी उम्र में भी सब इतने खुले विचारों का होते तो मज़ा आ जाता।

पूर्वी: अरे पापाजी अभी कौनसी उम्र हो गई तुम्हारी, अभी भी बिल्कुल जवान हो।

प्रकाश: ये तो तूने बिलकुल सही कहा, मैं तो जवान ही हूं बूढ़ी तो तेरी सास है।

प्रकाश ने हंसते हुए उसकी चूत में धक्के लगाते हुए और कमरे में नजर घुमाते हुए कहा, जहां सोफे पर रेनू को उसका बेटा और सागर चोद रहे थे।

दूसरी ओर रानी को ये तो अंदाज़ा हुआ कि उसकी चूत में लंड घुसा था पर किसका इसका पता नहीं था, उसने रीता की जांघों को पकड़ कर हल्का सा उठाया और नज़र नीचे करके देखा तो पाया रवि उसकी टांगों के बीच था और उसका लंड उसकी चूत में घुसा हुआ था, रानी के पूरे बदन में ये देखते ही बिजली दौड़ गई, एक ग़ैर आदमी उसे चोद रहा था उसके पति और सास ससुर के होते हुए, एक पल को उसे लगा ये गलत है पर अगले ही पल उत्तेजना का नशा उसके बदन में फैल गया, ये अहसास जितना गलत था उतना ही उत्तेजित करने वाला भी था, रवि ने धीरे धीरे लंड चलाना शुरू किया तो रानी अब चाह कर भी कुछ नहीं कर सकती थी या सच में वो चाहती ही नहीं थी उसने अपना मुंह बापिस रीता की चूत में लगा दिया और उसे चाटने लगी वहीं रवि ने भी रानी की एक टांग को अपने कंधे पर रख कर उसे तेज़ धक्कों से चोदना शुरू कर दिया।





ये दृश्य पीयूष और महिपाल और सविता तीनों आंखे फाड़े देख रहे थे, पीयूष के लिए ये सबसे अजीब था अपनी पत्नी को एक गैर मर्द से चुदते देख रहा था। उसकी भोली भाली पत्नी रानी उन पति पत्नी के बीच थी दोनों हो उसके बदन से खेल रहे थे उसके बदन को मसल रहे थे।

रीता: आह ऐसे ही छोटी चाट मेरी चूत आह जब तक मेरे पति तेरी गरम चूत को चोद रहे हैं आह तेरी जीभ। ओह जी कैसी है छोटी की चूत।

रवि: आह बिल्कुल गरम मक्खन जैसी और बहुत ही कसी हुई आह लंड निचोड़ रही है बिल्कुल, मज़ा आ रहा है ओह आह आह आह।

रीता: आह बहुत जल्दी आह सीख रही है जीभ बिल्कुल सही जगह चला रही है।

उन्हें देख कर और उसकी पत्नी के बारे में बातें करते हुए सुनकर पीयूष ने सोचा कि उसे ये वैसा बुरा नहीं लग रहा था जैसा लगना चाहिए था बल्कि उसे बुरा नहीं लग रहा था बल्कि अलग और ये एक नया सा अहसास था, वो जानता था जिस राह पर वो और उसके पापा जाना चाहते थे वहां कुछ भी होना संभव था वैसे भी उसने भी रवि की पत्नी को चोदा था तो ये देखा जाए तो स्वाभाविक ही था, उसके मन में एक साथ बहुत से विचार चल रहे थे, पर उसका लंड बिल्कुल कड़क था और उसका हाथ उस पर चल रहा था यही हाल सविता और महिपाल का भी था अपनी बहू को गैर मर्द से चुदते देख कर उन्हें भी एक अलग सा एहसास हो रहा था वो एक चीज़ समझ चुके थे कि अब से उनका परिवार और जीवन पूरी तरह बदल गया था अब उनके पास दो रास्ते थे या तो वो खुश रहकर जो हो रहा था उसका लुत्फ़ उठा सकते थे या दुख जता सकते थे।

पियूष, महिपाल और सविता सोच में थे कि रीता रानी के मुंह से उठी और उनके पास आई, रीता के हटते ही रानी की आहें कमरे में गूंजने लगी जो रवि के हर धक्के पर निकल रही थी,

रानी: आह ओह आह भाई आह आज सा आह ब ओह ऐसे ही आह यहम्मम।

रवि: ओह छोटी आह तेरी छोटी सी चूत ओह कितनी मस्त है, ओह ओह आह।

इधर रीता महिपाल और सविता के पास पहुंच गई और उसे पकड़ कर उठाया और उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और चूसने लगी, सविता भी पहले से गरम थी तुंरत उसका साथ देने लगी,





महिपाल उन्हें देख अपना लंड सहलाने लगा, जीवन में पहली बार वो और उसका परिवार इस तरह की परिस्थिति में था इसलिए उसे खुद से आगे बढ़ने में झिझक हो रही थी, कुछ पल बाद ही दोनों का होंठ अलग हुए तो रीता ने सविता को महिपाल की ओर धकेल दिया और खुद भी उसकी टांगों के दूसरी ओर बैठ गई, और महिपाल के कड़क लंड को हाथ बढ़ा कर थामा तो महिपाल की सिसकी निकल गई।

रीता: आह कितना गरम है ये दीदी तुम्हारे पति का लंड, और मोटा भी है,

रीता अपने हाथ महिपाल के लंड पर चलाते हुए बोली,

सविता: ओह तुम्हारे हाथ में जाकर तो और गरम हो रहा है,

रीता: इसे चूसो न मुझे तुम्हे इसे चूसते देखना है,

सविता उसकी बात सुन झुकी और उसने अपने पति के लंड को मुंह में भर लिया,

रीता: और अंदर तक दीदी पूरा जड़ तक इसे अपने मुंह में समा लो दिखाओ तुम्हे लंड की कितनी भूख है,

सविता ने वैसा ही किया और अपना मुंह खोलते हुए पति के लंड को जड़ तक अपने मुंह में समा लिया, ये महसूस कर महिपाल की भी आह निकल गई,

रीता: बहुत अच्छे दीदी कहो भाई साहब कैसा लग रहा है,

महिपाल: आह बहुत अच्छा ओह ओह आह,

सविता को जब सांस लेने में दिक्कत हुई तब उसने उसे अपने मुंह से निकाला,





सविता के लंड निकालते ही रीता ने उसे मुंह में भर लिया और आक्रामक होकर चूसने लगी,

रीता के मुंह में लंड जाते ही महिपाल की आह निकल गई और उनका लंड भी ठुमके मारने लगा, सविता अपनी चूत सहलाते हुए उसे देखने लगी कुछ देर लंड चूसने के बाद रीता ने निकाला और सविता की ओर बड़ी और उसके होंठों को चूमा पल भर के लिए फिर महिपाल की आंखों में देखते हुए बोली: भाई साहब चोदो मुझे,

उसकी इतनी सीधी बात सुन कर महिपाल हैरान रह गए पर खुश भी हुए, ऐसी मस्त औरत सामने से बोले कि चोदो मुझे तो कौन खुश नहीं होगा,

महिपाल ने सविता को देखा तो सविता तो कब से यही चाहती थी वो तुरंत बोली: देख क्या रहे हो घुसा दो न अपना मोटा लंड इसकी गर्म चूत में, और चोदो जमकर,

बस महिपाल के लिए इतना काफी था और उसने अपना लंड पकड़ कर रीता की चूत पर रखा और एक धक्का देकर अंदर घुसा दिया, महिपाल की आह निकल गई, जीवन में पहली बार वो अपनी पत्नी के अलावा किसी और औरत को चोद रहे थे, इस एहसास से हो उत्तेजित होकर वो रीता की चूत में धक्के लगाने लगे, वहीं सविता अपनी चूचियों को रीता के मुंह के ऊपर लहरा रही थी जिसे रीता जीभ निकाल कर चाटने लगी।





महिपाल: आह ओह आह कितनी मस्त है तुम्हारी चूत रीता आह ओह

सविता: चोदो, और तेज चोदो इसे आह दिखा दो अपने लंड की ताकत,

सविता अपने पति को उकसाते हुए बोली क्योंकि रीता के मुंह में उसकी चूची थी और वो बोल नहीं सकती थी,

दूसरी ओर पीयूष उठा उसने अपने पापा को रीता को चोदते देखा और उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई, उसने सोचा शायद इसमें बुरा लगने वाला कुछ है ही नहीं, खुल कर जीना शायद यही है।

और ये सोच वो मूड कर आगे बढ़ गया जहां रवि उसकी पत्नी को चोद रहा था सोफे पर लिटा कर, पीयूष उनके पास गया, उसकी आँखें अपनी पत्नी से मिली और उसने एक सहज सी मुस्कान दी और फिर अपना लंड रानी के चेहरे के सामने कर दिया जिसे रानी ने तुरंत मुंह में भर लिया और चूसने लगी,

रवि: आह छोटू भाई तुम्हारी पत्नी बड़ी मस्त है ओह ऐसा मज़ा आ रहा है,

पीयूष को थोड़ा अजीब और नया लगा कि आदमी उसकी पत्नी को उसके सामने चोदते हुए उसकी तारीफ कर रहा था पर वो जानता था अब यही उसके लिए साधारण होने वाला था,

पीयूष:पत्नी तो आपकी भी मस्त हैं, देखो अभी भी कितनी मस्ती से चुदवा रही है,

रानी दोनों की बातें सुन रही थी और रवि से चुदते हुए अपने पति का लंड चूस रही थी,





रवि: आह जबसे हमने ये जीवन चुना है वो एक नई औरत बन गई है, उसकी चुदाई की भूख बढ़ती जाती है पर मुझे यही पसंद आ रहा है, तुम लोग भी अभी नए नए खुल रहे हो आगे देखना कितना मज़ा आता है तुम्हे।

पीयूष: उसी मज़े के लिए तो शुरू किया है भाई साहब।

रवि: लगे रहो देखो उन भाई साहब को कैसे मजे ले रहे हैं मेरी पत्नी के साथ,

पीयूष: जैसे आप ले रहे हैं मेरी पत्नी के साथ,

इस पर दोनों हंसने लगे, और महिपाल को चुदाई करते देखने लगे,

कामनगर में भी चुदाई का दौर लगातार जारी था बस थोड़े आसन बदल गए थे, रेनू अब दीवान पर पीठ के बल लेटी थी और पंकज उसका बेटा उसकी टांगों के बीच था और उसके एक पैर को कंधे पर रख कर दना दन धक्के लगाते हुए उसे चोद रहा था वहीं सागर का लंड उनके मुंह में था और वो उसे चूस रही थी





सागर: आह बुआ जी ओह बहुत मज़ा आ रहा है ऐसे ही चूसती रहो आह जीजा कितनी मस्त हैं तुम्हारी मम्मी।

पंकज: आह ओह आह मस्त हैं तभी तो बेटे से चुदवा रही हैं साले साहब, आह मम्मी ओह।

सागर: ओह जीजा कब से चाहते थे तुम अपनी मां चोदना?

अनुज: अबे तू चुप नहीं होता न चुदाई के समय पर भी।

अनुज ने प्रीती की चूत में धक्के लगाते हुए कहा तो सब हंसने लगे,

पंकज: अरे पूछने दे न अनुज क्या जा रहा है, और हां सागर चोदना तो बहुत पहले से चाहता था पर मौका काफी देर से मिला,

प्रीती: ओह तो अब भैया पूरी कसर निकाल रहे हैं उसकी,

पूर्वी: हां अबकोई दिन ऐसा नहीं जाता कि ये अपनी मम्मी को न चोदें।

पूर्वी ने अपने ससुर से चुदवाते हुए कहा,

पंकज: अब ऐसा मौका मिला है तो कोई बेटा कैसे एक भी दिन निकाल सकता है।

प्रकाश: ये तो सही कहा, हमें मौका मिलता तो हम भी अपनी अम्मा को जरूर चोदते।

प्रकाश ने पूर्वी की चूत में धक्के लगाते हुए कहा,

पूर्वी: कोई बात नहीं पापा तुम मेरी अम्मा को चोद लेना।

पूर्वी ने मजाक करते हुए कहा।

पूर्वी और प्रीती एक दूसरे के बगल में लेटी थी और प्रकाश और अनुज उन्हें चोद रहे थे,





ननद भाभी का ऐसा प्यार और जुड़ाव देखने लायक था

प्रीती: वैसे पापा दादी जवानी में कैसी दिखती थी,

प्रकाश: अरे पूछ मत बिटिया, मुझे याद है अम्मा जब गांव में सरकारी नल से पानी भरकर लाती थी तो मेरे दोस्त अपने लंड खुजाने लगते थे छुप चुप कर।

सागर: काश वो यहां होती तो मैं उन्हें भी चोद पाता।

सागर की इस बात पर सब हंसने लगे,

अनुज: ये पूरी दुनिया को ही चोद लेगा,

अनुज लगातार प्रीती की चूत चोदता हुआ बोला,

प्रीती: वैसे पापा दादी को याद करके जल्दी मत निकालना जैसे भैया को मम्मी को चोदना होता है डेली वैसे मुझे भी तुमसे चुदना होता है,

पूर्वी: अरे हां पति और पिता से एक साथ भी तो चुदना है अभी ननद रानी को।

प्रीती: भाभी। गंदी कहीं की।

प्रीती शर्माते हुए बोली।

जारी रहेगी।



(दोस्तों अपडेट तो बड़ी लिखी थी पर gif डालते समय गलती से आधी डिलीट हो गई तो अभी जितनी है उतनी अपलोड कर रहा हूं, रिव्यू ज़रूर देना, दोबारा मेहनत के लिए मोटीवेशन चाहिए़ ही चाहिए)
 
प्रीती: वैसे पापा दादी को याद करके जल्दी मत निकालना जैसे भैया को मम्मी को चोदना होता है डेली वैसे मुझे भी तुमसे चुदना होता है,



पूर्वी: अरे हां पति और पिता से एक साथ भी तो चुदना है अभी ननद रानी को।

प्रीती: भाभी। गंदी कहीं की।

प्रीती शर्माते हुए बोली।



अपडेट 254


काम नगर में अनुज और सागर की अच्छी खासी खातिरदारी हो रही थी तो रीता और रवि के काम भवन में भी प्रोग्राम पूरे रंग में था, बस आसन थोड़े बदले हुए थे जोश वैसा ही था, एक ओर महिपाल रीता और सविता एक साथ लगे हुए थे बस फर्क इतना सा था कि महिपाल का लंड अब रीता की चूत की जगह उसकी गरम और कसी हुई गांड में था, रीता सोफे पर उसका आगे घोड़ी बनी हुई थी वहीं रीता का मुंह सामने बैठी सविता की चूचियों के बीच था जिन्हें वो लगातार चूस रही थी, महिपाल का हर धक्का उसे सविता की चूचियों में घुसा रहा था,





सविता: आह जी कैसी है रीता की गांड कैसा लग रहा है तुम्हें?

सविता ने रीता के सिर पर हाथ फेरते हुए अपने पति से पूछा जो चेहरे पर कामुकता और आनंद के भाव लिए रीता की गांड मार रहा था,

महिपाल: ओह ओह ओह बहुत मज़ा आ रहा है, इसकी गांड तो बिल्कुल मक्खन जैसी है और बहुत कसी हुई भी, ओह आह आह।

सविता: तो और तेज मारो जी, ओह मथ दो इसकी गांड को, अपने लंड से कूटो इसकी गांड के मक्खन को,

सविता ने गरम होते हुए अपनी पति से कहा,

जिसे सुनकर महिपाल के धक्के और तेज हो गए और जोश में आ कर वो उसकी गांड मारने लगे,

वहीं दूसरे बिस्तर पर रानी एक ओर करवट लेकर लेटी थी रवि और पीयूष के बीच जहां पीयूष उसकी टांगों के बीच था और उसकी गांड में लंड चला रहा था वहीं रानी रवि का लंड चूस रही थी, रवि बिस्तर पर लेटा हुआ आहें भर रहा था,

रवि: आह ओह छोटी आह क्या गरम मुंह है तुम्हारा आह क्या चूसती हो अह लगता है जान ही निकाल लोगी।

पीयूष: सही बोला भाई साहब आह आह हम्मम आह मेरी पत्नी जानलेवा है,

पीयूष ने मुस्कुराते हुए रानी की गांड मारते हुए कहा। रानी को उनकी बातों से कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा था उसके बदन में दो लंड घुसे हुए थे जिनका वो लुत्फ उठा रही थी, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक की जगह दो लंड कितना मज़ा देते हैं।





रवि: ओह छोटू भाई बुरा न मानो तो तुम्हारी पत्नी की जानलेवा गांड का स्वाद मेरे लंड को भी मिल सकता है,

पीयूष: ओह इसमें बुरा मानने जैसा क्या है आओ न,

पीयूष ने अपना लंड रानी की गांड से निकाला और उसकी जगह रवि ने ली और अपना लंड रानी की गांड के खुले छेद पर रखा और अंदर सरका दिया, वहीं पियूष ने अपना लंड रानी के मुंह में दे दिया,

दूसरी ओर महिपाल हर बढ़ते पल के साथ हर धक्के के साथ अपने चरम पर पहुंच रहे थे वहीं रानी की चीखें भी बढ़ती जा रही थीं कुछ तगड़े धक्के मारने के बाद महिपाल ने हुंकार भरते हुए अपना लंड जड़ तक रीता की गांड में ठूंस दिया और दातों को भींचते हुए अपने रस की पिचकारी उसकी गांड में छोड़ने लगे। अपने रस को उसकी गांड में भरने लगे और जब एक एक बूंद निचोड़ दी तो लंड रीता की गांड से निकाला और पीछे की ओर बैठ कर बुरी तरह हांफने लगे, वहीं रीता तुरंत पीछे घूमी और महिपाल के रस से सने लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी चाटने लगी और उसे कुछ ही पलों में चाट कर साफ कर दिया और फिर लंड को मुंह से निकाल दिया, और घूम कर सविता के होंठों को चूसने लगी और उसे उसके पति के रस का स्वाद चखाने लगी।

रवि रानी की गांड मारते हुए आहें भर रहा था और बिल बिला रहा था,

रवि: आह ओह आह आह आह यहम्मम आह छोटी क्या मस्त गांड है तुम्हारी, ओह छोटू आह गजब है तुम्हारी पत्नी आह।

पीयूष: हां आह गजब तो है वैसे तुम्हारी पत्नी भी कम नहीं है देखो उन अंकल का रस निचोड़ लिया पूरा अपनी गांड में और अब भी मन नहीं भरा,

रवि: आह मन उसका नहीं भरता यार, वैसे अंकल को छोड़ो और आंटी को देखो क्या फैली हुई गजब के चूतड़ हैं, आह कितना मज़ा आएगा इनके बीच लंड घुसा कर गांड मारने में।

रवि ने सविता की ओर इशारा करते हुए कहा जो उसकी पत्नी के होंठों को चूसने में व्यस्त थी, वहीं पीयूष मन ही मन सोचने लगा साला मेरी पत्नी की गांड मार रहा है और मेरी मां की गांड मारने की सोच रहा है, पीयूष ने अपनी मां के चूतड़ों की ओर देखते हुए सोचा,

पीयूष: सच में यार हैं तो मस्त।

रवि: वैसे हर लड़का किसी न किसी आंटी को चोदना चाहता है कभी न कभी, ये आंटी वैसी ही है, बड़ी बड़ी चूचियां और फैले हुए चूतड, भरा हुआ बदन। बिल्कुल चोदने लायक बदन है।

रवि अनजाने में पीयूष की मां के बदन की तारीफ कर रहा था उसके बारे में गंदी बातें कर रहा था और ये पीयूष को और उत्तेजित कर रहा था,

उसका लंड रानी के मुंह में ठुमके मार रहा था और रानी अपने पति की हालत समझ रही थी, और कहीं न कहीं उसे अपनी सास के बारे में सुनकर अच्छा भी लग रहा था,

पीयूष: ओह हां बड़ी बड़ी चूचियां, मोटी गांड सब कुछ तराशा हुआ है बिल्कुल चोदने लायक बदन।

पीयूष अपनी मां के बदन को देखते हुए सम्मोहित सा होकर देख रहा था और रवि की बातें उसके दिमाग में घूम रही थी,

रवि: अरे छोटू भाई देख क्या रहा है अभी उनके पति भी झड़ कर आराम कर रहे हैं जा और चोद ले आंटी को, मैं तो छोटी की गांड के बाद ज़रूर चोदूंगा उन्हें।

रवि की बात सुनकर तो पियूष का दिमाग ही घूम गया, वो उसे उसकी मां को चोदने के लिए कह रहा था अनजाने में ही सही, और ये सोच कर पीयूष के बदन में बिजली दौड़ रही थी, उसका रोम रोम उत्तेजना से फड़क रहा था, उसे पता भी नहीं चला कि वो रानी के मुंह से लंड निकाल कर रीता और सविता की ओर चल दिया, सविता और रीता एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगी हुई थी,

पीयूष उनके पास जाकर खड़ा हो गया और उन्हें देखने लगा उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे तभी रानी ने उसे देख और हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़ लिया और उसके लंड को हिलाने लगी, और फिर अचानक से उसे पकड़ कर अपने चेहरे की ओर खींच लिया और अगले ही पल उसका लंड रीता और सविता के होंठों से टकराया, रीता तो तुरंत उसके टोपे को चाटने लगी वहीं सविता ने जैसे ही देखा कि कौन है वो हैरान रह गई उसकी आँखें बड़ी हो गईं, उसके बेटे का लंड उसके होंठों से लग रहा था, उसने तुरंत अपना मुंह पीछे कर लिया और रीता को उसके बेटे के लंड को चाटते हुए चूसते हुए देखने लगी अपनी आंखों से कुछ इंच दूर बस, रीता ने कुछ पल पीयूष का लंड चूसा और फिर मुंह से निकाल कर सविता के होंठों पर लगा दिया, जिसके लगते ही पीयूष और सविता दोनों के बदन में बिजली दौड़ गई,

दोनों पल भर के लिए ज्यों के त्यों रुक गए फिर अपने आप सविता का मुंह खुला और उसने बेटे के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी, पीयूष के मुंह से एक गहरी आह निकली, वज़न रानी अपनी गांड मरवाते हुए इस नज़र को बिना पलक झपकाए देख रही थी, वहीं महिपाल अपनी पत्नी को अपने बेटे का लंड चूसते देख रहा था और उसका लंड तुरंत कड़क हो चुका था,

कुछ पल बाद रीता ने पीयूष का लंड पकड़ कर सविता के मुंह से निकाल लिया और मुस्कुराते हुए बोली: गंदी बात है दीदी जवान लंड मिला तो अकेले ही मजे लेने लगी, बांट कर खाओ।

ये कह कर वो पीयूष के लंड पर जीभ चलाने लगी और सविता भी मुंह आगे कर बेटे का लंड चाटने लगी।





पीयूष तो जैसे जन्नत में था एक साथ उसके लंड पर दो मुंह चल रहे थे जिनमें से एक उसकी मां का था, उसके मुंह से लगातार आहें निकलने लगी, कुछ देर लंड चूसने के बाद रीता ने सविता को पीछे धकेल दिया और खुद पीयूष का लंड हाथ से सहलाते हुए सविता की चूत पर मुंह रख दिया और चाटने लगी, दोनों मां और बेटे अब रीता नाम की डोर से जुड़े हुए थे पीयूष सोफे के बगल में खड़ा था जिसका लंड रीता के हाथ में था जो बैठी हुई थी सोफे के नीचे उसका मुंह सोफे पर लेटी सविता की जांघों के बीच था और उसकी जीभ सविता की चूत पर चल रही थी, सविता अपनी टांगे फैलाए हुए अपनी चूत रीता से चटवा रही थी पर उसकी आँखें उसके बेटे पर टिकी हुई थीं।

कुछ पल बाद रीता ने अपना मुंह सविता की चूत से हटाया और हटाकर पीयूष के लंड पर रख दिया और उसे चूसने लगी और अपनी उंगलियों से सविता की चूत को रगड़ने लगी,

कुछ देर लंड चूसने के बाद रीता ने फिर से पीयूष का लंड निकाला और इस बार अपना मुंह सविता की चूत पर रखने की बजाय पीयूष का लंड सविता की चूत पर रख दिया और पीयूष को इशारा किया आगे बढ़ने का,

वहीं पीयूष और सविता तो बिल्कुल सुन्न पड़ गए उसके इस कदम से पीयूष का लंड वहीं अपनी मां की चूत के स्पर्श पाकर फुदकने लगा वहीं सविता को लग रहा था उसका पूरा बदन जल रहा है, दोनों की आंखें एक दूसरे पर थी, वहीं महिपाल और रानी की भी जो टक टकी लगा कर उन्हें ही देखे जा रहे थे,

फिर पीयूष को न जाने क्या हुआ उसने अपनी मां की जांघ को पकड़ा और धक्का देकर अपना लंड सविता की चूत में घुसा दिया जिसके साथ ही दोनों की तेज चीख निकल गई, और महिपाल और रानी की आह।

पीयूष धीरे धीरे अपनी कमर हिलाकर अपने लंड को अपनी मां की चूत में चलाने लगा, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वो अपनी मां को चोद रहा था ये तो जो उसने सोचा था जो योजना बनाई थी उससे भी कहीं ज्यादा था पर अपनी मां की गरम चूत का एहसास उसे ऐसा सुख ऐसा मज़ा दे रहा था जो आज तक उसे महसूस नहीं हुआ था। वहीं सविता अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में चलता महसूस कर उत्तेजना से बिलबिलाने लगी उसका बदन मचल रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था ये सब इतना गलत था जो हो रहा था फिर भी इतना अच्छा लग रहा था,

रीता उठ कर सविता के पीछे सोफे पर बैठ गई उसने सविता के सिर को गोद में रख लिया और उसकी मोटी चूचियों को सहलाते हुए उसे चुदते हुए देख रही थी वहीं अब सविता भी खुल कर बेटे से चुदाई का मज़ा ले रही थी।





महिपाल का लंड ये देख बिल्कुल कड़क हो चुका था उसका बेटा और उसकी पत्नी चुदाई कर रहे थे, और ये किसी के लिए भी देखना बहुत अजीब था, दूसरी ओर रानी तो ये देख झड़ने लगी थी, गांड में रवि का लंड और पति और सास की चुदाई देखने से वो अपने चरम पर पहुंच गई थी और उसके साथ साथ रवि भी उसकी गांड की गर्मी के आगे पिघल चुका था और अपना रस रानी की गांड में भर दिया था, दोनों एक दूसरे के बगल में चिपके हुए हांफ रहे थे,

रीता: कैसी है आंटी की चूत छोटू, मज़ेदार है न?

पीयूष: ओह आह आह हां बहुत मज़ेदार आह कितनी गरम है और गीली भी, ऐसा मज़ा कभी नहीं आया, ओह।

पीयूष ने किसी तरह से खुद को काबू में करते हुए बोला।

रीता: और दीदी तुम्हे कैसा लग रहा है जवान लंड से चुदकर।

रीता ने सविता की चूचियों को मसलते हुए पूछा,

सविता: ओह ओह आह बहुत मज़ा आ रहा हैओह बेटा ऐसे ही चोद अपनी मां आह आह आह मां जैसी आंटी को ओह और तेज भर दे मेरी चूत को अपने लंड से।

सविता उत्तेजना में मचलते हुए बोली, वहीं एक पल को तो पियूष और बाकी सब भी डर गए कि कहीं सविता सच न बोल दे।

पीयूष: ओह हां आह आह आंटी तुम्हारी चूत ओह आह कितनी गरम है मानो लंड निचोड़ रही है.

रीता: बिल्कुल सही कहा दीदी तुम्हारी उमर इसकी दुगुनी ही होगी, छोटू तेरी मां की उमर कितनी है?

रीता ने ये पूछा तो पियूष और सविता दोनों ही थोड़ा हैरान रह गए पर पीयूष ने धक्के लगाते हुए बोला: बिलकुल इन आंटी जितनी ही है आह। बिल्कुल इतनी आह आह आह।

पीयूष अपनी मां की चूत में थापें मारते हुए बोला,

रीता: आह तभी तो इतना मजा आ रहा है तुम्हें छोटू, तुम्हारी मां कैसी है देखने में छोटू आंखें बंद करके सोचो।

पीयूष: क्या मां क्यों?

रीता: सोचो तो सही...

पीयूष मन ही मन सोचने लगा सोचने की क्या जरूरत है मां तो मेरे सामने है मेरा लंड उसकी चूत में है फिर भी रीता की बात मानते हुए बोला: भरा बदन है, बड़ी बड़ी चूचियां हैं, और फैले हुए चूतड हैं,सुंदर चेहरा है।

रीता: ये तो बिल्कुल दीदी जैसी हुई,

पीयूष: मम्मी भी इनके जैसी ही है बिल्कुल।

रीता: ओह छोटू तो सोचो न तुम्हारा लंड तुम्हारी मां की चूत में है, आंटी को अपनी मां ही समझो।

पीयूष: ओह क्या मम्मी? आह पर कैसे?

रीता: अरे बस सोचना ही तो है सोचने में कैसी बंदिशें? क्यों दीदी चुदोगी इसकी मम्मी बनकर.

सविता जो पहले ही बेटे से चुद रही थी क्या बोलती उसने तुरंत हां में सिर हिला दिया,

रीता: छोटू अब चोदो अपनी मम्मी को खुल कर।

पीयूष को तो जैसे छूट मिली तो वो दनादन धक्के लगाने लगा सविता की चूत में,

पीयूष: ओह मम्मी आह ओह बहुत मज़ा आ रहा है तुम्हे चोदने में आह सोचा नहीं था कभी मौका मिलेगा ओह तुम्हारी चूत कितनी गरम है मन करता है चोदता रहूं।

सविता: आह आह आह आह बेटा चोदता रह ओह तेरा लंड भी बहुत सुख दे रहा है मुझे ओह चोद ले बेटा जितना मम्मी को चोदना है उतना चोद ले,

दोनों उत्तेजित होते हुए एक दूसरे की चुदाई में लगे हुए थे अब तो उन्हें मां बेटा बन कर चुदाई करने का मौका भी मिल गया था

इस मां बेटे की चुदाई का सब पर ही असर हो रहा था महिपाल तो लगातार उन्हें देख अपना कड़क लंड सहला रहा था, दूसरी ओर रानी अपने पति और सास की चुदाई देख और रवि से गांड मरवा रही थी और उसकी उत्तेजना चरम पर का जा रही थी, वहीं मां बेटे की चुदाई का रोलप्ले देख रवि भी खुद को रोक नहीं पाया बाकी का काम रानी की गांड ने कर दिया और रवि उसकी गांड में झड़ने लगा एक के बाद एक पिचकारी उसकी गांड में भरने लगा,

इधर जैसे ही झड़ने के बाद रवि ने रानी की गांड से लंड निकाला तो रानी तुरंत फुर्ती में उठ कर उसके पास से भागी, और उसने कुछ ऐसा किया जिससे सब हैरान हो गए, रानी सीधी अपने ससुर के आगे झुकी और उसका लंड अपने मुंह में लेकर पागलों की तरह चूसने लगी, महिपाल ये देख बिल्कुल हैरान रह गया अपनी बहू के मुंह में अपना लंड देख उसका पूरा बदन उत्तेजना में जल उठा वहीं रानी तो सब कुछ भूल कर उसका लंड ऐसे चूस रही थी मानो कब से भूखी हो, कुछ पल तो महिपाल स्तब्ध सा ही रहा फिर मानो धीरे धीरे से उसका दिमाग जो हो रहा था उसे समझा तो उसके हाथ रानी के सिर पर आ गए और उसे धीरे धीरे सहलाने लगे,





उसका मुंह आहें भरने के लिए खुलने लगा, उसने सिर उठाया तो उसकी नज़र बेटे से मिली जो उसकी पत्नी को चोदते हुए उसे ही देख रहा था, और कुछ पल बाद दोनों के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई, ये सफलता की मुस्कान थी, जो योजना उन दोनों ने मिलकर बनाई थी वो सफल हो गई थी और जो उन्होंने सोचा था उससे ज़्यादा उन्हें मिल गया था, दोनों जानते थे कि उनका जीवन अब पूरी तरह बदल चुका था, पीयूष ने सिर हिलाकर उसे आगे बढ़ने का इशारा किया तो उसने भी अपनी आंखों से उसे आगे बढ़ने का इशारा किया, और फिर दोनों ही अपने अपने काम में लग गए,

रीता और रवि अपनी अपनी जगह बैठे हुए दोनों जोड़ों की चुदाई देख रहे थे, पीयूष के लिए अपनी मां की चूत में धक्के लगाना बहुत उत्तेजित कर रहा था हर पल के साथ उसका पूरा बदन सिहर रहा था उसे लग रहा था मानो उसकी सारी ऊर्जा इकट्ठा होकर उसके लंड में भर रही है और फिर उसके धक्के बहुत तगड़े हो गए, इतनी तेज कि सविता की चीखें निकलने लगी और फिर पियूष ने अपना रस अपनी मां की चूत में आहें भरते हुए गुर्राते हुए छोड़ दिया, सविता भी बेटे की दमदार चुदाई के आगे टिक नहीं पाई और झड़ने लगी। दोनों मां बेटे एक सतझड़ गए।

पीयूष के झड़ने के साथ ही रीता अपनी जगह से उठी और उसने सविता की चूत से पीयूष के लंड को निकाला और चूसने लगी, उसका रस चाट कर साफ करने लगी, पीयूष का लंड अभी भी पूरी तरह कड़क था शायद मां को चोदने का खयाल झड़ने के बाद भी उसे उत्तेजित कर रहा था,

सविता उसी तरह लेटी हुई हांफ रही थी और जो कुछ हुआ उसके बारे में सोच रही थी कि तभी उसे अपनी गांड के छेद पर गरम एहसास हुआ, उसने तुरंत आंख खोल कर देखा तो रीता पीयूष के लंड को उसकी गांड के छेद पर घिस रही थी,

रीता मुस्कुराई और कहा: दीदी इसका लंड तो अभी भी खड़ा है तुम्हारे दूसरे छेद की भी सैर करवा दें?

सविता ने ये सुन उसे देखा और फिर पीयूष को और फिर अपनी जांघें और फैला दी,

सविता: बेटा अपनी मां की गांड मारेगा?

पीयूष: हां मम्मी तुम्हारी कसी हुई गांड मारने को कब से तड़प रहा हूं,

रीता: अब आए हो तुम लोग पूरे रोल में। चल छोटू घुसा दे अपना मोटा लंड अपनी मां की गांड में और अच्छे से मार।

पीयूष ने भी ऐसा ही किया और धक्का लगा कर अपना लंड अपनी मां की गांड में घुसा दिया जिसके घुसते ही दोनों के मुंह से आह निकल गई, फिर धीरे धीरे पीयूष लंड को अंदर बाहर करने लगा, वहीं रीता फिर से सविता के सिर की ओर बैठ गई और उसके होंठों को चूसने लगी,





वहीं पीयूष अपनी मां की गांड में लंड चलाते हुए उसकी खुली चूत को फैला फैला कर देखने लगा जिसे कुछ देर पहले उसने चोदा था, सविता अपनी गांड में बेटे का लंड चलता देख सिहर रही थी और आहें भर रही थी,

पीयूष: ओह मम्मी कितनी गरम है तुम्हारी गांड आह और कितनी कसी हुई भी ऐसा लग रहा है मेरे लंड को जकड़े हुए है।

सविता: आह बेटा तेरा लंड इतना मोटा है आह आह मेरी गांड को फैला रहा है ओह और अंदर तक घुसा मुझे तेरा लंड पूरा अपने अंदर महसूस करना है।

रीता: ओह तुम्हारी बाते सुन कर मेरा बुरा हाल हो रहा है आह ऐसे ही गांड मार अपनी मां की छोटू।

रीता अपनी चूत में उंगली करते हुए बोली, कि तभी उसे अपने कंधे पर हाथ महसूस हुआ उसने देखा वो रवि का था, जो अपना खड़ा लंड लेकर खड़ा था,

रवि: ये लोग तो व्यस्त हैं अपने पति का भी तो खयाल रखो,

रीता: नेकी और पूछ पूछ, पर तुम्हे भी मेरी गांड ही मारनी पड़ेगी

ये कह रीता तुरंत ही सविता और पीयूष के बगल में घोड़ी बन गई।

रवि: नेकी और पूछ पूछ। कहते हुए रवि ने अपना लंड अपनी पत्नी की गांड में घुसा दिया और उसकी गांड मारने लगा।

रवि: ओह तो कैसी लगी आंटी की गांड मेरा मतलब तुम्हारी मां की गांड?

रवि ने मुस्कुराते हुए पीयूष से पूछा जो सविता की गांड में लंड अंदर बाहर कर रहा था,

पीयूष: सच कहूं तो ऐसा कभी महसूस नहीं किया आह बहुत मज़ा आ रहा है।

रवि: इसी मज़े के लिए तो हम ये सब करते हैं छोटू,

रवि ने रीता की गांड मारते हुए कहा,

रीता: तुम लोगो की बातें हो गईं हो तो काम पर ध्यान दो।

रीता की डांट सुन दोनों मुस्कुराते हुए चुप हो गए और चुदाई पर लग गये।

तभी दूसरी ओर से आहें तेज हो गई दोनो ने ही बिस्तर की ओर देखा तो पाया कि रानी बिस्तर पर लेटी थी और महिपाल उसकी टांगों के बीच था और दनादन अपना लंड अपनी बहू की चूत में चला रहा था,





रानी का मुंह खुला हुआ था और लगातार आहें और सिसकियां निकल रही थी, उसका पूरा बदन अपने ससुर के झटकों से झूल रहा था मचल रहा था

रानी: आह आह आह आह पापा जी ओह ऐसे ही चोदो अपनी बहू को ओह ओह ओह।

महिपाल: ओह हां बेटा आह आह आह तेरी गरम चूत मुझे रुकने नहीं देगी।

रानी: रुकना नहीं पापा जी बस चोदते रहो ओह ओह ओह चोदते रहो,

उनकी बातें सुन रीता गांड मरवाते बोली: लगता है छोटी की भी अंदर की इच्छाएं जाग रही हैं।

रवि: सही है न रोलप्ले का असली मज़ा भी यही है, अब छोटू अपनी मां को चोद रहा है तो छोटी भी ससुर से चुदेगी ही ना।

पीयूष: मुझे लगता है तुम दोनों को भी हमारा कुछ बनना चाहिए?

रीता: पर क्या छोटू तुम ही बताओ?

रानी: तुम लोग मेरे मम्मी पापा बन जाओ।

रानी दूर से ही चिल्लाते हुए बोली और ये सुन रवि और रीता के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

रीता: आह देखो जी हमारी बेटी कैसे अपने ससुर से चुदवा रही है कितनी चुदक्कड़ है।

रवि: बिल्कुल अपनी मां पर गई है न, अभी कुछ देर पहले अपना बाप से गांड मरवाई और अब ससुर से चुदवा रही है।

रीता: बिल्कुल, वैसे कम तो समधन तुम भी नहीं हो अपने ही बेटे से गांड मरवा ली।

सविता: अब अपनी समधन की बराबरी तो करनी पड़ेगी ही न चुदने में, इसके लिए चाहे बेटे से चुदना पड़े या बाप से सबसे चुदुंगी।

एक तो बेटे से गांड मरवाने का सुख ऊपर से ऐसी गंदी बातें सुनकर सविता को भी मज़ा आ रहा था और वो भी पूरा खुलकर सबका साथ दे रही थी।

महिपाल अपनी पत्नी और बेटे की चुदाई देखते हुए अपनी बहू को चोद रहे थे और सोच रहे थे कि एक दिन में उनका परिवार कितना बदल गया है, और अभी तो बस शुरुआत थी।

दूसरी ओर काम नगर में भी चुदाई का खेल जोरों पर था पूरे घर में सिसकियों और थापें गूंज रही थीं, अनुज बिस्तर पर लेटा था और रेनू उसके ऊपर थी अनु का लंड रेनू की गांड में था और अनुज रेनू की मोटी चूचियों को मसलते हुए नीचे से ज़ोरदार धक्के उसकी गांड में लगा रहा था





जिन धक्कों से रेनू का पूरा बदन अंदर तक हिल रहा था, इस गांड फाड़ चुदाई से उसे बहुत मज़ा आ रहा था

रेनू: आह आह आह आह आह अनुज आह ऐसा लग रहा है गांड में आग लग रही है ओह।

अनुज: ओह चाची आह तुम्हारी गांड में ही आग है जिसे मैं अपने पानी से बुझाऊंगा ओह ओह बस ऐसे ही रहो।

पूर्वी: ओह ओह देख ओह प्रीती तेरा क्या ओह होगा जब ओह मम्मी जी अनुज का लंड ओह नहीं झेल पा रही तो।

पूर्वी ने कहा जो खुद अभी दो लंड के बीच पिस रही थी, अपने पति और ससुर के बीच।

प्रीती: ओह भाभी ओह तुम अभी अपनी गांड और चूत पर ध्यान दो, आह आह पापा भैया अच्छे से चोदो भाभी को कि ये चलने लायक न रह जाए,

सागर: अरे भाभी तुम भी मुझ पर ध्यान लगाओ न पूर्वी दीदी को छोड़ो,

सागर ने प्रीती को चोदते हुए उसकी चूचियों को मसलते हुए कहा,

प्रीती: धत्त अभी से मुझे भाभी मत बुलाओ सागर, ओह ओह आह आराम से ओह।

सागर: फिर क्या बुलाऊं? ओह भाभी ओह।

प्रीती: छोड़ो ओह जो मन करे बुलाओ बस ऐसे ही करते रहो।

पूर्वी: ओह आह हम्मम अच्छे से चोद सागर मेरी चुदक्कड़ ननद रानी को, दिखा इसे की देवर में कितना दम है, ओह ओह।

पूर्वी अपनी चूत अपने ससुर और गांड अपने पति से कुटवाते हुए बोली।





प्रकाश: इन ननद भाभी की छेड़छाड़ कभी नहीं रुकती।

पंकज: रुकनी भी नहीं पापा माहौल बना रहता है।

रेनू: सही कहा बेटा आह आह ये अपनों की छेड़छाड़ ही तो परिवार को बनाती है

रेनू ने अनुज के लंड से गांड मरवाते हुए कहा, माहौल देख कर लग रहा था कि ये दौर लंबा चलने वाला था।

चोदम पुर में सूरज ढल रहा था, लोग अपने घरों की ओर लौट रहे थे नीलेश के बाग में भी मज़दूर जा चुके थे वहीं नीलेश, नाना, राजन और जमुना(मामा) बैठ कर बातें कर रहे थे आगे का काम कैसे होगा उसकी योजना बना रहे थे, इसी बीच राजपाल और दीनू भी वहां पहुंच गए थे, राजपाल के चेहरे पर आज सभ्या को भोगने की खुशी अलग ही दिख रही थी,

नीलेश: आओ भैया, कहो जोड़ी कहां घूम रही है,

राजन: जरूर कोई चक्कर है।

दीनू: अरे कोई चक्कर नहीं है भैया बस तुमसे ही बात करने आए थे काम की।

नीलेश: हां बोलो न?

दीनू: आज राजपाल भाई साहब का घर खाली है,

जमुना: तो?

दीनू: तो आगे खुद समझ जाओ,

दीनू ने नाना को देख नज़रें नीचे कर के बोला,

नाना: अरे बाबू हमसे क्या लजा रहे हो, खुल कर बोलो।

राजन: अरे हम पहले ही समझ गए थे बाबा क्या बात है तभी तो बोला कोई न कोई चक्कर है।

राजपाल: तो फिर बनाया जाए क्या कहते हो नीलेश?

नीलेश: ठीक है बनाते हैं क्यों बाबा?

नाना: नहीं भैया तुम लोग ही बनाओ पिछली बार छोटी और बड़ी दोनों ने खूब सुनाया था।

राजन: थोड़ा भी नहीं?

नाना: अरे नहीं तुम लोग मजे करो,

राजन: ठीक है फिर बनाते हैं पर याद रखना बिना चूत के दारु का मज़ा नहीं है।

नीलेश: देख लेंगे, ऐसा करो तब तक समान लेने चले जाओ दो आदमी।

राजपाल: हां जमुना और दीनू ले आयेंगे।

योजना बना कर सब निकल जाते हैं करीब तीन घंटे बाद राजपाल के घर पर सब बैठे हैं बीच में दारू है और खूब हंसी मज़ाक के साथ दारू पी जा रही है, राजपाल, नीलेश, दीनू, राजन और जमुना सब हाथ में गिलास लिए दारू का लुत्फ़ उठा रहे हैं, तभी उन्हें आवाज सुनाई देती है और उनका ध्यान उधर जाता है। सामने देखते हैं तो उनकी पत्नियां थीं सिवाय राजपाल की पत्नी को छोड़ कर यानी सभ्या, ममता, रज्जो और गुंजन।

रज्जो: क्यों जी हमें इंतजार करवा कर कब तक दारू पियोगे तुम लोग।

गुंजन: हां अगर और पीनी है तो बताओ हम चले जाते हैं।

सभ्या: और क्या अगर दारू से रात काटनी है तो हमें क्यों लेकर आए।

नीलेश: अरे बस एक एक जाम और फिर आते हैं।

ममता: हर बार यही होता है भैया, चलो हम कमरे में चलते हैं।

दारू खत्म होने के बाद आ मत जाना।

राजन: नहीं नहीं मेरी जान ऐसा नहीं है लो छोड़ दी दारू, आ गए तुम्हारे पास, तुम्हारे बिना तो सारे नशे फीके हैं।

राजन ने उठते हुए कहा तो बाकी सारे मर्द भी उठ कर चल दिए,

आज की योजना यही थी सब मर्द अपनी अपनी पत्नियों को लाए थे सिवाय राजपाल के, नीलेश के घर पर नाना और किरन थे तो राजन के घर को बिरजू और पल्ली देख रहे थे वहीं सरजू के घर पर लाडो और सरजू थे। वहीं राजपाल के घर में एक लंबी चलने वाली रात शुरू हो चुकी थी,

राजन सबसे पहले आगे बढ़ा, उसकी आंखों में शराब की नशा और कामुकता का मिश्रण था। वो सीधा अपनी पत्नी ममता की तरफ बढ़ा, लेकिन रास्ते में गुंजन से टकरा गया। गुंजन ने हंसते हुए उसका हाथ पकड़ लिया और बोली, "जीजा, इतनी जल्दी क्या है जीजी के पल्लू में घुसने की आओ मैं दूदू पिला दूं।"

राजन: अरे गुंजन तुम्हारा तो दूदू क्या सब पी लेंगे हम, आओ न।

ये कहते हुए राजन ने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और चूसने लगे, गुंजन को उसके होंठों से दारू का स्वाद आ रहा था पर कामुकता का असर दारू के नशे से ज्यादा था,





राजन के हाथ लगातार गुंजन की कमर और पेट पर चल रहे थे, दोनों के होंठ लगातार एक दूसरे के होंठो को समाने की कोशिश कर रहे थे,

राजन: ओह गुंजन तुम्हारे होंठो में तो दारू की बोतल से ज़्यादा नशा है।

राजन ने उसके होंठो को छोड़ते हुए कहा,

गुंजन: तो दारू की जगह इन्हें ही चूस लिया करो जीजा, क्यों मुई दारू के पीछे लगे रहते हो।

राजन: अब से नहीं छोड़ेंगे सलहज रानी,

ये कह राजन ने दोबारा उसके होंठो को भर लिया और चूसने लगा।

उधर, ममता ने अपने पति को गुंजन के साथ देखा तो वो राजपाल जो कुर्सी पर बैठे थे उनकी ओर बढ़ गई,

ममता: भाई साहब अकेला तो महसूस नहीं हो रहा जीजी के बिना?

ममता ने राजपाल की नंगी छाती पर हाथ फिराते हुए कहा,

राजपाल: तुम लोगो के रहते हम कभी अकेले नहीं हो सकते बहू,

राजपाल ने हाथ बढ़ा कर ममता की कमर को सहलाते हुए कहा,

ममता: अच्छा हम या दारू?

राजपाल: अरे तुम लोगो की जगह दारू क्या कोई चीज नहीं ले सकती।

ये कहते हुए राजपाल ने ममता को अपने करीब खींच लिया और फिर दोनों के होंठ मिल गए। राजपाल ममता के होंठों का रस चूसने लगा।





राजपाल के हाथ अभी भी लगातार ममता की पीठ और कमर पर चल रहे थे और बीच बीच में नीचे उसके चूतड़ों को भी सहला रहे थे।

इधर नीलेश जो अब तक खाली थे उनके पास रज्जो पहुंच गई, और बोली: क्यों भाई साहब ऐसे अकेले क्यों खड़े हो, अपनी साली की याद आ रही है क्या?

नीलेश: तुम्हारे रहते किसी की याद आ सकती है क्या रज्जो रानी?

रज्जो: हां तभी तो हमारे रहते भी दारू को तो नहीं भूलते।

नीलेश: अरे दारू का क्या है अभी पिए और मूत दिए तुम लोग तो हमारी जान हो।

नीलेश ने नशे के सुरूर में कहा,

रज्जो: ये भी लगता है दारू ही बोल रही है,

नीलेश: अरे छोड़ो तुम दारू को आओ अपना रस पिलाओ,

ये कहकर नीलेश ने रज्जो को खुद से चिपका लिया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और चूसने लगा,





रज्जो भी उसका पूरा साथ दे रही थी, नीलेश के हाथ रज्जो के भरे और कामुक बदन पर फिसल रहे थे,

जहां रज्जो नीलेश के साथ थी तो उसके पति कैसे पीछे रहते वो नीलेश की पत्नी के साथ हो लिए और अभी उसकी कमर को मसल रहे थे

दीनू: ओह भाभी कितना मखमली बदन है तुम्हारा आह मन करता है खा ही जाऊं।

सभ्या: यहम्मम ये सब तुम नशे में ही बोल पाते हो दीनू भैया, वैसे कभी नहीं होती ऐसी बातें।

दीनू: नशे में तो हैं भाभी पर दारू के नहीं तुम्हारे इस कामुक बदन के नशे में हैं, आह इसका रस इतना नशीला है।

सभ्या: बस बस अब और रहने दो इतनी तारीफ बहुत है।

सभ्या ने हंसते हुए कहा पर उसकी हंसी आधी में ही रुक गई क्योंकि दीनू ने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया, और उसकी चूचियों को मसलने लगा,

कुछ देर तक होंठो को चूसने के बाद दीनू ने उसके होंठों को छोड़ा और उसकी एक चूची को ब्लाउज़ से बाहर निकाल लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा, इतने में जमुना भी उनके पास आ गया और अपनी बहन के चेहरे को अपनी ओर घुमा कर उसके होंठों को चूसने लगा





चोदम पुर की एक और कामुक रात की शुरुआत हो चुकी थी, राजपाल के घर में जहां ये सब इकट्ठे हो कर मजे कर रहे थे तो बाकी लोग भी पीछे नहीं थे, सभ्या नीलेश के यहां किरन अपने दादा का लंड चूस रही थी बिल्कुल नंगी हो कर वहीं कर्मा के नाना अपनी नानी के बदन को सहलाते हुए उसका मुंह अपने लंड पर चलता हुआ महसूस कर सिहर रहे थे,

राजन के घर में बिरजू और पल्लू भी लगे हुए थे, पल्ली बिस्तर के किनारे झुकी हुई थी तो बिरजू उसके पीछे था उसके चूतड़ों को फैलाकर उसकी गांड के छेद पर अपनी जीभ चला रहा था और पल्लू उसकी हरकतों से सिहर रही थी।

वहीं रज्जो और दीनू के घर में सरजू और लाडो थे, जहां सरजू अपने बड़े भाई होने का पूरा फर्ज निभा रहा था और अपनी छोटी बहन की चूत में अपना लंड डाल कर सफाई कर रहा था।

दूसरी ओर काम भवन में अब भी घमासान मचा हुआ था अब जब रिश्तों की मर्यादा तार तार हो चुकी थी, शर्म का पर्दा हट चुका था और इन सब की जगह वासना ने ले ली थी, सविता अभी रवि के लंड को अपनी गांड में लेकर धीरे धीरे उछल रही थी वहीं उसकी चूत पर रीता की जीभ चल रही थी, रीता के पीछे पीयूष था जो रीता की गांड में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था





सविता: ओह ओह ओह आह आह तुम दोनों आह एक साथ बहुत मज़ा आ रहा है, आह

रीता: अपनी समधन की सेवा तो करनी पड़ेगी न, तभी तो बेटी खुश रहेगी,

रीता ने रोलप्ले को जारी रखते हुए बोला।

सविता: ओह समधन जी ओह आह कितना अच्छा जीभ चलाती हो तुम, ओह और समधी जी का लंड भी कितना मोटा है।

पीयूष: ओह अच्छी और कसी हुई तो सासु मां तुम्हारी गांड भी है ओह कितनी गरम है, आह आह आह आह मज़ा आ रहा है।

पियूष रीता की गांड में पीछे से धक्के लगाते हुए बोला,

रीता: आह तुम्हारी सास चुदक्कड़ है जमाई बाबू, ओह मज़ा तो आएगा ही, अपनी बेटी को भी अपनी ही तरह चुदक्कड़ बना के भेजा है।

ये सुन कर महिपाल बोले: आह तभी तो बेटी भी अपने ससुर की आह आह इतने अच्छे से सेवा कर रही है ओह बहू तेरी गांड आह आज तक ऐसा कभी नहीं महसूस किया जैसा तेरी गांड करा रही है।

महिपाल रानी की गांड मारते हुए बोले, रानी बिस्तर पर लेटी थी अपनी टांगे को फैलाकर और पीछे की ओर पकड़ कर और महिपाल उसकी टांगों के बीच थे और अपना लंड उसकी गांड में चला रहे थे,





रानी: आह आह पापाजी, ऐसे ही मारो अपनी बहू की गांड आह अपनी पत्नी और बेटे के सामने आह भर दो मेरी गांड।

महिपाल: ओह बहू आह हां अब नहीं रोक पाऊंगा खुद को आह तेरी गांड।

रानी: ओह आह आह आह आह पापा जी ओह जी देखो कैसे तुम्हारे पापा मेरी गांड मार रहे हैं, तुम्हारी बीवी की गांड आह आह ।

रानी गरम होते हुए बोल रही थी,

पीयूष: आह आह वो तुम्हारी गांड मार रहे हैं आह और मैं तुम्हारी मां की और तुम्हारे पापा मेरी मां की आह।

सविता: आह आह आह ऐसे ही तो परिवार को सब एक दूसरे आह आह की सेवा कर मिल जुल ओहम कर रहते हैं।

रवि: बिल्कुल सही कहा समधन जी।

रवि नीचे से धक्के लगाते हुए बोला सविता की गांड में। पीयूष कमरे में देखते हुए सोच रहा था कि एक दिन में कितना कुछ बदल सकता है।

काम नगर में भी चुदाई अपने चरम पर थी, और अभी दोहरी चुदाई का दौर चल रहा था, पूर्वी पहले ही अपने पति और ससुर से एक साथ चुद कर झड़ चुकी थी और अभी एक ओर बैठे खुद के बदन को सहलाते हुए कमरे में चल रहे खेल को देख रही थी, जहां एक ओर प्रीती थी जो अपने पापा के लंड पर सवार थी और पीछे से उसकी गांड में उसके भैया का लंड घुसा हुआ था, वहीं उसके बगल में उसकी मां रेनू थी जो अनुज के लंड पर सवार थी और सागर का लंड उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था,

दोनों मां बेटी की एक साथ दोहरी चुदाई हो रही थी और पूरा कमरा ही उनकी आहों और थापो से गूंज रहा था,

मर्द भी अपने चरम पर ही थे और कुछ पल बाद ही अपने अपने रस को छेदों में भर रहे थे, प्रीती अपने बाप और भाई का रस अपनी चूत और गांड में लेकर वैसे ही लेट गई और वहीं सो गई वहीं रेनू भी अपने रस से भरे छेदों के साथ सागर और अनुज को अपने सीने से लिपटा कर सो गई, पूर्वी भी अपने पति के बगल में लेट गई क्योंकि अब और कुछ करने की हिम्मत किसी में नहीं थी सब बुरी तरह थक चुके थे।

जहां काम नगर में सब थके हुए थे चोदम पुर में तो अभी खेल शुरू हुआ था, दारू का नशा मर्दों को और उत्तेजित कर रहा था और वो औरतों के बदन से खुल कर खेल रहे थे,





राजन ने गुंजन के कपड़ों को उतार दिया था और अभी उसके बदन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी थी वहीं राजन के बदन पर भी सिर्फ उसका कच्छा बचा था, राजन गुंजन के पेट और मोटी चूचियों को मसल रहा था वहीं कच्छे में खड़ा उसका लंड गुंजन के मोटे चूतड़ों के बीच में चुभ रहा था जिससे गुंजन की आह निकल रही थी।

राजन: ओह गुंजन मेरी दुधारू गाय, इतनी मोटी चूचियों से तो पूरे घर का पेट भर जाए।

गुंजन: आह जीजा तो निचोड़ लो न और पी लो सारा दूध आह बस अपने गन्ने का रस पिला दो मुझे।

राजन: गन्ना तो तुम्हारे लिए ही तैयार है मेरी रानी आ जाओ चूस लो,

गुंजन ये सुन घूम कर बैठ जाती है और राजन के लंड को कच्छे से बाहर निकाल कर उस पर अपनी जीभ फिराने लगती है तो राजन के मुंह से गरम आहें निकलने लगती हैं।

वहीं राजन की पत्नी ममता भी पीछे नहीं थी बल्कि उनसे एक कदम आगे ही थी, राजपाल ने ममता की साड़ी और ब्लाउज़ को उतार दिया था, उसका पेटीकोट आगे इकट्ठा हो रखा था वहीं राजपाल ने अपना लंड कच्छे को एक ओर कर बाहर निकाल कर पीछे से ममता की चूत में घुसा दिया था और अब उसकी चूचियों को मसलते हुए पीछे से धक्के लगा कर उसे चोद रहे थे





ममता: ओह ओह ओह भाई साहब ऐसे ही आह बस ऐसे ही चोदते रहो ओह!

राजपाल: ओह आह बहू ओह तेरी चूत आह बहुत मस्त है आह कितनी गरम है आह आह आह।

ममता: आज दिन भर तो सभ्या जीजी को खून चोदा है न आह थक तो नहीं गए,

राजपाल: तुम लोगों को देख कर हो सारी थकान चली जाती है बहू ओह अभी तो बहुत चुदाई करनी है।

ममता: करते रहो भाई साहब ओह लगे रहो आह आह आह।

इधर नीलेश अभी भी रज्जो के होंठों को चूस रहे थे वहीं रज्जो की साड़ी को उठाकर उसके मोटे मोटे चूतड़ों को मसल रहे थे दोनों के होंठ और जीभ एक दूसरे से कुश्ती कर रहे थे,





कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो नीलेश ने रज्जो की साड़ी पकड़ कर खींच दी और उतार दी,

नीलेश: उतार दो सारे कपड़े रज्जो रानी तुम्हारा बदन देखने दो,

रज्जो: तुम खुद उतार दो न भाई साहब,

नीलेश: ये तो और अच्छा रहेगा,

ये कह कर नीलेश ने रज्जो के सारे कपड़े एक एक करके उतार दिए और रज्जो पूरी नंगी हो गई,

रज्जो: हमें तो नंगा कर दिया खुद कपड़े पहने हो।

नीलेश: लो ये कौन सी बड़ी बात है,

ये कह नीलेश ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और खुद भी पूरे नंगे हो गए, और फिर रज्जो की मोटी चूचियों को चूसने लगे,

उधर उनकी पत्नी का भी यही हाल था, अपने भाई और दीनू के बीच थी, बदन से ब्लाउज गायब था और साड़ी जांघों के ऊपर इकट्ठी हो रखी थी जहां जमुना उसका भाई उसके होंठों को लगातार चूसते हुए उसकी कमर को मसलते हुए अपने कड़क लंड को कच्छे के ऊपर से ही सभ्या के चूतड़ पर एक ओर से घिस रहा था वहीं दूसरी ओर दीनू अपने घुटनों पर बैठ कर सभ्या के पेट और चूतड़ों को मसलते हुए उसके पेट को चूम रहा था चाट रहा था





तीनों के मुंह एक दूसरे के साथ व्यस्त थे इसलिए बातें कम हो रही थी और काम ज़्यादा,

दीनू ने फिर सभ्या के पेट को चूमते हुए उसकी साड़ी को भी खोल दिया था और सभ्या को पूरा नंगा कर दिया, वहीं सभ्या भी अपने हाथ अपने भाई के कच्चे में डाल कर उसका लंड निकाल कर सहलाने लगी थी, दीनू ने अपनी जीभ सभ्या की नाभी में डाली तो वो जमुना के मुंह में ही आहें भरने लगी, वहीं जमुना उसकी मोटी चूचियों को लगातार मसल रहा था।

पूरे कमरे में से सिसकियों और थापें गूंज रहीं थी, सब जानते थे ये एक लंबी रात होने वाली थी।

नीलेश के घर में कर्मा के नाना अपनी पोती किरण की गांड के छेद को चाट रहे थे वहीं किरण की चूत से रस टपक रहा था वो अपने चूतड़ों को फैलाते हुए अपने दादा को और अंदर जीभ घुसाने को उकसा रही थी।

किरन: ओह बाबा और अंदर ऐसे ही चलाओ अपनी खुरदरी मोटी जीभ, आह ओह बाबा आह।

दूसरी ओर पल्ली बिरजू से अपनी गांड मरवा रही थी और उसका लंड अपनी गांड में लेकर उछल रही थी,

सरजू भी अपनी सबसे छोटी बहन लाडो की गांड में लंड जड़ तक घुसाए हुए धक्के मार रहा था और लाडो की आहें निकल रही थी।

इधर राजपाल के घर में दृश्य बदल चुके थे और अब चुम्मा चाटी का समय निकल चुका था और अब चुदाई हो रही थी। राजपाल और नीलेश एक दूसरे के बगल में लेट कर चुदाई का आनंद ले रहे थे, वहीं ममता और रज्जो उनके ऊपर बैठ कर उनके लंड अपनी चूत में लेकर उछल रही थीं





ममता: ओह रज्जो जीजी तुम्हारे ये आह आह तरबूज कितने मस्त लगते हैं उछलते हुए,

ममता ने हाथ बढ़ाकर रज्जो की चूची को पकड़ते हुए कहा।

रज्जो: मस्त तो तुम्हारे भी हैं ममता रानी देखो कैसे झूल रहे हैं।

ममता: पर तुम्हारे जितने बड़े तो नहीं है न।

राजपाल: अरे बहू तुम दोनों भी कहां तुलना करने बैठ गई आह आह तुम दोनों ही एक दम पटाका हो, आह जिसको मिल जाओ उसको धन्य करदो। क्यों नीलेश बाबू।

नीलेश: ओह बिल्कुल सही कहा भैया, ओह रज्जो, ममता तुम दोनों का आह बदन चुदने के लिए बना है असली चुदक्कड़ रंडिया हो तुम दोनों आह।

नीलेश गरम होकर नीचे से धक्का लगाते हुए बोले।

रज्जो: आह आह सही कहा भाई साहब हम सब ओह चुदक्कड़ रंडिया हैं आह तुम्हारे लंड की ओह तुम सब के लंड की आह आह आह चोदो अपनी रंडियों को ऐसे ही।

जहां दोनों अपने चूतड़ों को राजपाल और नीलेश के लंड पर पटक रही थी वहीं नीलेश की पत्नी सभ्या की भी पीछे नहीं थी क्योंकि एक साथ दो दो लंड उसके अंदर घुसे हुए थे





दीनू उसके पीछे से लेट कर उसकी चूची को थामे अपना लंड उसकी चूत में पेल रहा था वहीं जमुना अपनी बहन के सिर के पीछे था और सभ्या उसका लंड एक हाथ से हिलाते हुए चाट रही थी।

दीनू: ओह मेरी गरम भाभी आह आह आह क्या गरम चूत है तुम्हारी ओह ओह।

जमुना: ओह जीजी ओह ऐसे ही चाटो अपने भाई के लंड को ओह जीजी।

दीनू: आह आह आह आह जमुना तेरी बहन की चूत आह मज़ा आ रहा है ओह तेरी बहन चोद कर।

जमुना: आह जीजा, ऐसी बहन होती ही चोदने के लिए है, आह तुम्हारी तो भाभी है तुम्हारा तो हक बनता है।

दीनू: आह बिल्कुल साले साहब पूरा हक वसूलेंगे भाभी की चूत और आह गांड से आह क्या चुदक्कड़ माल हो तुम भाभी।

जहां जमुना अपनी बहन के साथ व्यस्त था वहीं उसकी पत्नी यानी गुंजन राजन के साथ थी, राजन ने गुंजन को झुका रखा था और पीछे से उसकी कमर को थामे दनादन उसकी चूत में धक्के लगा रहा था,





राजन: ओह ओह ओह गुंजन आह तेरी ओह चूत ओह ले साली आह आह बहुत गरम है आह आह आह आह।

गुंजन: ओह ओह ओह ओह ओह ओह अब आह आह आह आह जीजा अब ओह रुकना मत आह आह ऐसे ही अब रुकना मत आह नहीं तो गांड फाड़ दूंगी तुम्हारी ओह ऐसे ही चोदते रहो।

पूरे घर में चुदाई का खेल चल रहा था जो अब चोदम पुर की पहचान बन गया था। पूरी रात चुदाई का ये खेल चलता रहा आसन और साथी बदल बदल कर चुदाई चलती रही, चूत गांड मुंह सब चोदे गए, लंड का रस हर छेद में भरा गया, और तब तक ये चुदाई का खेल चलता रहा जब तक सब थक कर सो नहीं गए।

काम भवन में भी यही हुआ हर तरह से चुदाई करने के बाद सब थक कर सो गए थे महिपाल के परिवार को सुबह घर जल्दी पहुंचना था क्योंकि अंजली आने वाली थी, एक अनोखे दिन का अंत करके महिपाल और उसका परिवार भी नींद के साए में चला गया।

एक और दिन का अंत हो चुका था और कल फिर से नया दिन आने वाला था जो और नए किस्से लाने वाला था।



जारी रहेगी।
 
थोड़ा व्यस्त सप्ताह है और तबियत भी ठीक नहीं है तो अपडेट में थोड़ा समय लगेगा, पर समय मिलते ही जरूर लिख कर दूंगा। साथ बने रहें।

।।धन्यवाद।।
 
काम भवन में भी यही हुआ हर तरह से चुदाई करने के बाद सब थक कर सो गए थे महिपाल के परिवार को सुबह घर जल्दी पहुंचना था क्योंकि अंजली आने वाली थी, एक अनोखे दिन का अंत करके महिपाल और उसका परिवार भी नींद के साए में चला गया।

एक और दिन का अंत हो चुका था और कल फिर से नया दिन आने वाला था जो और नए किस्से लाने वाला था



अपडेट 255


गेंदापुर की एक सुहानी सुबह थी, अभी बाहर अंधेरा ही था तभी सविता की आंख खुली उसने धीरे धीरे से आंखें खोल बगल में देखा तो बेटे का सोता हुआ चेहरा दिखा, उसने पीयूष का हल्का सा हिलाया और धीमी आवाज़ में बोली: उठ बेटा सुबह होने वाली है जा अपने कमरे में जा कर सो जा,

पीयूष आंखें मलते हुए उठा और फिर बिस्तर से उठ कर खड़ा हो गया,

सविता: अरे कपड़े तो पहन ले,

ये सुन पीयूष हल्का सा मुस्कुराया, और बोला: अरे मैं तो भूल ही गया था, तुम भी पहन लो।

सविता: अभी उठने से पहले पहन लूंगी, तू जा अभी।

पीयूष ने जल्दी से कपड़े पहने और जाने लगा तो पीछे से सविता बोली: अपने पापा को भेज देना जल्दी से।

पीयूष: हां भेजता हूं अभी,

ये कह कर पीयूष कमरे से निकल जाता है और चुपके से बिना आवाज़ किए अपने कमरे के बाहर जा कर दरवाज़ा खोलता है और अंदर का नज़ारा देखता है तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है,





उसके पापा उसकी पत्नी को पीछे से पकड़ कर सो रहे थे, वहीं उसकी पत्नी भी लगभग पूरी नंगी थी उसके चूतड़ों पर एक पतली चादर थी जिसने उसके चूतड़ों और जांघों को छुपा रखा था, उसकी भरी हुई चूची उसके पापा के हाथ में थी जो उसे थामे सो रहे थे, पीयूष ने अपने पापा को पुकारा: पापा पापा उठो,

आवाज़ से महिपाल थोड़ा सा हिले पर जागे नहीं तो फिर पीयूष ने आगे जाकर उनको हिलाया तब जाकर महिपाल की नींद टूटी, उठने के बाद महिपाल ने भी जल्दी से कपड़े पहने और कमरे से बाहर निकल गए, वहीं पीयूष उनकी जगह अपनी पत्नी के पीछे उससे चिपक कर लेट गया, उसे अब नींद नहीं आ रही थी, वो सोचने लगा पिछले दिनों के बारे में, शहर में बिताई हुई उस रात को अब एक हफ्ता हो चुका था उस रात जिसने उसके परिवार का जीवन बदल दिया था, ऐसा नहीं था कि किसी के मन में उसे लेकर या इस नए बदलाव को लेकर दुख था, बल्कि इसका उल्टा ही था, अब जब भी मौका मिलता था वो अपनी मां को चोदता था और उसके पापा उसकी पत्नी को, बहुत सी नई नई चीज़ें आजमा रहे थे वो लोग, बस अंजली घर में हो तो सावधान रहना पड़ता था। ये सब सोचते सोचते उसकी आंख फिर से लग गई।

सूरज निकल चुका था और चोदम पुर में में भी सब उठ चुके थे और सुबह के काम निपटा रहे थे, कर्मा के घर में सुबह की चहल पहल थी कोई रसोई में था तो कोई अभी सो ही रहा था तो कोई सुबह के काम निपटा रहा था सभ्या सब को आवाज़ लगाते हुए हाथों में चाय की ट्रे लेकर रसोई से आ रही थी और आंगन में टेबल पर चाय लाकर रख दी,





उसने बदन पर अभी सिर्फ एक सादा धोती लपेट रखी थी जिसमें उसका पेट और बड़ी बड़ी चूचियां नंगी दिख रही थीं उसने फिर से सबको आवाज लगाई,

सभ्या: अरे कहां हो सब, आ जाओ चाय ठंडी हो जाएगी, सुबह हो गई, पर किसी को कुछ पड़ी ही नहीं है, शालू, गुंजन, ममता, बच्चों को और सबको उठा कर लाओ तो।

सभ्या आवाज लगा रही थी कि इतने में उसके पिता यानी कर्मा के नाना आंगन में आए,

नाना: अरे बिटिया क्या हुआ क्यों सुबह सुबह घर को सिर पर उठा रही है,

सभ्या: देखो न बाबा, चाय बना दी है और सब गायब हैं अभी तक, चलो तुम तो पी लो कम से कम,

नाना: अरे बिटिया तू इस हालत में सामने है तो चाय कौन पियेगा इधर आ अह बाबा के पास।

नाना सभ्या को खींच कर खुद से चिपका लेते हैं और पीछे से उसे बाहों में भर लेते हैं,

सभ्या: अरे बाबा ये सब बाद में आह कर लेना पहले चाय तो पी लो।

नाना: आह बिटिया पी लूंगा चाय भी ओह तेरा ये बदन कितना मखमली है, आह मन करता है इससे खेलता ही रहूं।

नाना ने सभ्या के पेट पर हाथ चलाते हुए कहा,





सभ्या: ओह बाबा मैं कौन सा भागी जा रही हूं जितना मन करे खेल लेना पर अभी चाय पियो,

सभ्या ने अपने पिता की बाहों से निकलते हुए कहा,

नाना: ठीक है भाई तू जैसा कहे, तेरा कहा न माने इतनी किसी में हिम्मत नहीं है।

नाना आगे जाकर एक कुर्सी पर बैठ गए और सभ्या ने उन्हें चाय दी।

सभ्या: बाबा तुम भी न बहुत बातें बनाने लगे हो।

नाना: वो सब छोड़ तू भी चाय ले और पी बैठ कर आराम से।

सभ्या: हां बाबा पी रही हूं पता नहीं ये शालू कहां रह गई, कर्मा को उठाने गई थी।

सभ्या ने चाय का घूंट भरते हुए कहा,

वहीं शालू ने कर्मा को उठा तो दिया था पर कर्मा बिस्तर से नहीं उठा था और अभी अपनी मौसी के बगल में बैठ कर उसके मखमली पेट को सहलाते हुए उसके रसीले होंठों को चूस रहा था





कुछ देर बाद शालू ने उसे धकेला और बोली: चल अब बहुत हो गया, जीजी बुला रही हैं चाय पीले नहीं तो तेरे साथ साथ मुझे भी सुनाएंगी।

कर्मा: अरे मौसी तुम्हारे होंठो के बाद चाय तो बेस्वाद लगेगी, अच्छा थोड़ी देर दूदू पुलादो।

शालू: धत्त मैं नहा चुकी हूं अब कपड़े खराब नहीं होने दूंगी, तू चल अभी।

कर्मा: थोड़ी सी देर बस,

शालू: अभी नहीं कर्मा बाहर चल, पहले चाय पी ले फिर दूदू पी लिओ।

कर्मा: पक्का न?

शालू: हां बाबा पक्का तू भी न बिल्कुल बच्चा बन जाता है कभी कभी।

ये कहते हुए शालू बिस्तर से उठी और कर्मा को भी खींच कर बाहर ले गई।

बाहर निकले तो बगल वाले कमरे से कुछ आवाज़ आ रही थी दोनों ने अंदर झांक कर देखा तो पाया अनुज ने गुंजन को बिस्तर पर लिटा रखा था और खुद उसके ऊपर चढ़ कर उसके पेट और कमर को सहलाते हुए उसके होंठों को चूम रहा था,





शालू: ओह महाशय अपनी मामी को छोड़ो और जल्दी दोनों बाहर आओ नहीं तो जीजी की डांट पड़ेगी।

अनुज ने ये सुनकर गुंजन के होंठों को छोड़ा और दरवाज़े की ओर देख कर बोला: मौसी बस थोड़ी देर में आया,

शालू: नहीं अभी चल,

इतने में ही गुंजन ने धक्का देकर अनुज को अपने ऊपर से हटा दिया और बिस्तर से उठ खड़ी हुई और अपनी साड़ी सही करने लगी।

गुंजन: अब और नहीं बाबू पहले ही बहुत देर हो चुकी, चलो चाय पियो पहले नाश्ता वगैरा करो।

अनुज: अरे मामी,

कर्मा: अरे मरे छोड़ और बाहर आ जल्दी, तुम चलो मामी।

गुंजन, शालू और कर्मा के साथ निकल गई तो अनुज भी अंगड़ाई लेता हुआ उनके पीछे पीछे निकल गया,

ये लोग आंगन में पहुंचे और सब अपनी अपनी चाय लेकर पीने लगे. तब तक बाकी लोग भी आंगन में आ चुके थे।

नीलेश: अरे ये जमुना और ममता कहां है ?

किरन: पापा और ममता बुआ तो नहाने गए हैं।

शालू: लो हो गया काम दोनों साथ गए हैं तो नहा तो नहीं रहे होंगे।

सभ्या: किरन आवाज लगा दोनों को जल्दी आने के लिए बोल।

किरन बाथरूम के बाहर से आवाज़ लगाती है

किरन: पापा, बुआ जल्दी आओ बड़ी बुआ बुला रही हैं।

जमुना: आ रहे हैं अभी,

जमुना ने ममता की पीठ की चूमते हुए कहा,





ममता के बदन पर बस ब्रा थी, उसका पेटीकोट तो आगे की ओर लटक रहा था वहीं जमुना के बदन पर उसका कच्छा था जिसमें उसका लंड तंबू बना रहा था।

ममता: आह जमुना जल्दी कर जीजी बुला रही हैं।

जमुना: ओह जीजी बुलाने दो अब बिना काम निपटाए नहीं जायेंगे,

वो ममता के चूतड़ों को मसलते हुए बोला,

ममता: तो देर क्यों कर रहा है घुसा दे न पीछे से।

जमुना: ये भी ठीक है,

ये कहते हुए जमुना ने पीछे जगह ली ममता के और अपना लंड उसकी गांड में फंसा दिया।

ममता: ओह आह आह भाई कितना मोटा है तेरा ओह।

जमुना: तुम्हारी गांड जादुई है जीजी इतना मरवाती हो फिर भी कसी हुई रहती है।

जमुना ने दो तीन धक्के लगा कर पूरा लंड ममता की गांड में घुसा दिया और उसकी कमर थाम कर कमर हिलाने लगा, ममता के मुंह से सिसकियां निकलने लगी।

सब ने चाय पी ली थी अब नाश्ते और बाकी कामों की बारी थी मर्द सब बाहर निकल गए काफी काम थे जानवरों के चारा पानी से लेकर खेत के काम साथ ही नया मकान जो बन रहा था उसके लिए सभी चीजें जुटा के रखना, इसीलिए नीलेश ने साफ कर दिया था कि अब से राजन का परिवार भी अब से वहीं उनके साथ रहेगा, सोने के लिए उनके घर का इस्तेमाल कर सकते हैं पर रसोई एक ही होगी, इसलिए सब अपने अपने काम को संभालने के लिए निकल चुके थे वहीं औरतें भी नाश्ते और घर की साफ सफाई में लग गईं। चुदाई तो इन परिवारों के जीवन का हिस्सा बन चुकी थी पर उसके साथ साथ बाकी काम के महत्व को भी सब लोग अच्छे से समझते थे, वैसे भी सारे काम निपटा कर आराम के साथ साथ चुदाई का मज़ा ही अलग होता है।

उसी काम का हिस्सा था गांव में स्कूल बनाना, और उसके लिए महिपाल, नीलेश, शैलेश अपनी हर संभव कोशिश कर रहे थे, क्योंकि ज़मीन महिपाल के पास पहले से ही थी इसलिए उनका आधा काम तो हो चुका था अब बाकी कागज़ वगैरा बनवा कर प्रशासन से परमिशन मिलते ही स्कूल बनने का काम शुरू होना था, उसी के चलते आज नीलेश, शैलेश और महिपाल साथ में शहर के लिए निकल चुके थे,

कर्मा बाकी सब के साथ बाग में होता है कि तभी उसका फोन बजता है

कर्मा: और मेरी जान तुम्हारा ही इंतज़ार था

अंजली: धत्त तुम भी न पूरे फिल्मी हो, और बताओ क्या कर रहे हो?

कर्मा: कुछ नहीं यार बस बाग में था, यहां का काम दिखवा रहा था, पापा और मौसा तो तुम्हारे पापा के साथ गए हैं।

अंजली: हां, मैं भी बोर हो रही हूं, तुमसे मिले भी कई दिन हो गए,

कर्मा: अरे अभी आ जाता हूं, तुम्हे बोर नहीं होने दूंगा।

अंजली: आ जाओ, अच्छा सुनो मुझे तुम्हारे घर आना है तुम्हारी मम्मी से मिलना है,

कर्मा: मम्मी से अचानक क्यों?

अंजली: ऐसे ही मेरा मन है।

कर्मा: ठीक है आ जाओ इसमें क्या है।

अंजली: आ क्या जाओ, लेने आओ अभी 20 मिनट में।

कर्मा: ठीक है आता हूं तुम तैयार हो जाओ तो फोन कर देना।

अंजली: ओके।

आधे घंटे बाद अंजली कर्मा के साथ उसके दरवाज़े पर खड़ी होती है किरन दरवाज़ा खोलती है।

कर्मा: अंजली ये किरन है तुम्हारी ननद और किरन ये तुम्हारी भाभी।

कर्मा की इस बात पर अंजली उसे आंखें फाड़ कर देखती है, और वहीं किरन भी,

अंजली: ये क्या बोल रहे हो,

अंजली झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहती है,

किरन: अरे दीदी अंदर आओ तुम भैया तो कुछ भी बोलते रहते हैं।

अंजली फिर अंदर जाती है, सबसे मिलती है, सभ्या भी उस पर बहुत प्यार लुटाती है, कर्मा को कुछ काम आ जाता है तो उसे वो घर पर छोड़कर चला जाता है, घर पर अंजली सबका व्यवहार और आपस का प्यार देख मन ही मन सोचती है कि जो कुछ कर्मा ने उसके परिवार के बारे में बताया देख कर लगता ही नहीं कि ये सब वैसे होंगे, पर आपस में कितना प्यार है सब में, क्या ये सब उसके कारण ही इतना करीब हैं।

अंजली के अंदर जिज्ञासा और उत्तेजना भी हो रही थी कि कैसा लगता होगा जब कर्मा अपनी मां या मौसी या मामी के साथ करता होगा, क्योंकि सब एक से बढ़कर एक हैं।

ये सब सोचते हुए अंजली कर्मा के परिवार के साथ व्यस्त थी, किरन और पल्लवी ने उसे घेर रखा था और खूब सारी बातें कर रहे थे,

सभ्या: बेटा चल खाना खा ले।

अंजली: नहीं चाची मैं खा कर आई थी,

सभ्या: ये सब नहीं चलता खाना तो पड़ेगा ही, किरन और पल्ली तुम लोग बाग में बुला कर लाओ सबको।

किरन: अभी जाते हैं बुआ।

किरन और पल्ली बाग के लिए निकल जाते हैं वहीं अंजली सभ्या के साथ उसकी मदद करने लग जाती है, पर अंजली के दिमाग़ में बार बार वही सब घूम रहा था, उसे सोच में देख सभ्या पूछती है: क्या हुआ बेटा क्या सोच रही है?

अंजली: कुछ नहीं चाची बस ऐसे ही।

सभ्या: अच्छा ठीक है।

अंजली कुछ देर चुप रहती है और फिर बोलती है: वो चाची कर्मा ने मुझे कुछ बताया है, आपके बारे में।

सभ्या: क्या बताया है?

अंजली: वो की आप, मेरा मतलब आपका परिवार, सब लोग वैसे मतलब आपस में आप लोग सब....

सभ्या मुस्कुराती है और कहती है: अब कर्मा ने जो बताया है सच हो होगा वो तुझसे झूठ थोड़े ही बोलेगा।

अंजली ये सुन हां में सिर हिलाती है तब तक कर्मा भी बापिस आ जाता है और फिर सब खाने में लग जाते हैं, अंजली भी उनके साथ खाती है,

खाने के बाद अंजली और कर्मा उसके कमरे में एक साथ बैठे होते हैं,

अंजली: सुनो।

कर्मा: हां।

अंजली: वो मैने न अभी तुम्हारी मम्मी से पूछा।

कर्मा: क्या पूछा?

अंजली: मतलब उसी सब के बारे में जो तुमने मुझे बताया था,

कर्मा: अच्छा तो क्या बोला मां ने?

अंजली: यही की तुमने बताया होगा तो सच ही बताया होगा।

कर्मा: तो फिर तुम क्यों परेशान हो?

अंजली: पता नहीं यार एक तरफ तुम्हारा वो सच और दूसरी तरफ़ देखती हूं तो तुम्हारा परिवार कितना प्यारा है, सबका आपस में कितना प्यार है।

कर्मा: हां है तो अच्छा तुमने नीतू के साथ भी किया तो ये सब सोचने में क्या दिक्कत हो रही है।

अंजली: नीतू के साथ बात अलग थी पर पता नहीं क्यों परिवार के बारे में सोच कर अजीब लगता है यकीन नहीं होता।

कर्मा कुछ कहने ही वाला होता कि तभी कमरे में सभ्या आती है,

सभ्या: पेट भर के खा लिया ना अंजली बेटा? कुछ और ला दूं?

अंजली: नहीं नहीं चाची।

कर्मा: अरे मां इधर आओ ना, इधर बैठो।

सभ्या: हां बता न क्या हुआ?

सभ्या ने उनके पास बिस्तर पर बैठते हुए कहा। इधर कर्मा ने उठ कर दरवाज़ा बंद कर दिया।

कर्मा: वो अंजली के मन में कुछ सवाल हैं हमें लेकर।

कर्मा बापिस बिस्तर पर आते हुए कहता है

अंजली ये सुनकर चौंक जाती है और उसे ना में सिर हिलाकर कहती है।

सभ्या: अंजली बेटा खुल कर बोल ना क्या बात है,

कर्मा: मां बात कुछ नहीं है तुम इधर आओ, इसके मन का संशय मिटाना है,

ये कहते हुए कर्मा सभ्या को हाथ पकड़ कर उठाता है और अपने होंठ उसके होंठों पर रख देता है और चूसने लगता है, अगले ही पल सभ्या भी बेटे का साथ देने लगती है कर्मा के हाथ सभ्या की कमर पर चलने लगते हैं, अंजली पीछे बैठे हुए मुंह फाड़े ये सब देखती है अचानक कर्मा की इस हरकत से वो हैरान रह जाती है,





कर्मा और सभ्या बिना किस हिचक के उसके सामने एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगे थे, वहीं अंजली मां बेटे का ऐसा प्यार देख हैरान थी, उसके प्रेमी और उसकी मां के बीच ये सब देखना बहुत अलग थी, पता होना अलग बात थी पर अभी वो सामने से देख रही थी एक मां और बेटे को प्रेमियों की तरह एक दूसरे को चूमते हुए।

कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो कर्मा ने और सभ्या ने उसकी ओर देखा अंजली के चेहरे पर हैरानी के भाव साफ दिख रहे थे,

कर्मा: कैसा लगा?

अंजली: वो मैं क्या, क्या कहूं समझ नहीं आ रहा,

कर्मा: समझने की ज़रूरत नहीं है, बस महसूस करो इधर आओ।

कर्मा ने उसे अपने पास बुलाया और अंजली भी हिचकिचाते हुए उठके उन दोनों के पास गई, कर्मा ने हाथ आगे कर उसे भी खुद से चिपका लिया और उसके होंठों को चूसने लगा, अंजली भी कुछ पल हिचकिचाई फिर साथ देने लगी जब दोनों के होंठ अलग हुए तो अंजली ने सभ्या की ओर देखा जो उसे मुस्कुराते हुए देख रही थी, अंजली सभ्या की आंखों में देख शर्मा गई,

सभ्या: अरे शर्मा क्यों रही है बेटा, यहां सब अपने ही हैं, खुल कर जी,

ये कहते हुए सभ्या ने अपना चेहरा आगे बढ़ाया और अंजली के होंठों को चूम लिया बस पल भर के लिए ही। पर उस पल भर के स्पर्श ने ही अंजली के बदन में सिहरन मचा दी उसे लगने लगा उसके बदन में बिजली दौड़ रही है,

इधर कर्मा ने उसके सूट और सलवार को खोलना शुरू कर दिया, अंजली ने भी अब उसे नहीं रोका और कुछ पल बाद ही अंजली मां बेटे के बीच ब्रा और पैंटी में थी और सबसे हैरानी वाली बात थी कि अंजली को अजीब नहीं लग रहा था उसे लग रहा था जैसे बिल्कुल अपने घर पर वो नंगी हो रही है,

सभ्या ने ब्रा और पैंटी में अंजली को देखा और बोली: बहुत सुंदर है तू बेटा, नज़र न लग जाए मेरी।

अंजली: तुमसे ज़्यादा नहीं हूं।

सभ्या: हट मुझ बुढ़िया से अपनी बराबरी कहां करती है,

इधर कर्मा ने तब तक अपनी शर्ट और पजामा उतार दिया था और वो भी बस एक कच्छे में था,

अंजली: अरे तुम और बुढ़िया ये किसने कहा मां?

अंजली ने अचानक कहा फिर झिझकी और बोली मैं भी तुम्हें मां बुलाऊं?

सभ्या: हां क्यों नहीं मेरी बच्ची जो तुझे अच्छा लगे वो बुला।

अंजली सभ्या के गले से लग गई और उसकी कमर और पीठ को सहलाने लगी,

इधर कर्मा ने अपनी मां के पल्लू को हटाया और नीचे बैठ कर उसके मखमली पेट को चूमने चाटने लगा,

अंजली ने ये देखा और बोली: कैसा लग रहा है मां बेटे का ऐसा प्यार?

सभ्या: बहुत अच्छा मेरी बच्ची, तू भी करेगी मुझे ऐसा प्यार।

ये सुन अंजली मुस्कुराई और फिर उसका चेहरा अपनी ओर कर उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिए और दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे।





कर्मा नीचे बैठ कर अपनी मां के पेट और नाभि को चूम रहा था उसने हाथ कभी अपनी मां की कमर को सहलाते तो कभी उसके चूतड़ों को तो कभी चूचियों को, अंजली के हाथ भी लगातार सभ्या के बदन पर चलने लगे, वहीं सभ्या भी अंजली के बदन को छू रही थी,

कर्मा अपनी मां और अपनी प्रेमिका को इस तरह प्यार जताते देख खुश भी हो रहा था उसकी उत्तेजना हर बढ़ते पल के साथ बढ़ती जा रही थी, अंजली को भी सभ्या के रसीले होंठों को चूसने में अदभुत आनंद मिल रहा था। कुछ पल बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो सभ्या हांफते हुए बोली: बड़ा मीठा स्वाद है तेरा अंजली।

अंजली: और तुम्हारा सबसे मीठा बिल्कुल रबड़ी हो मां।

अंजली ने पीछे से सभ्या से चिपकते हुए कहा,

सभ्या: अब अच्छी लग रही है खुश खुश।

अंजली: अभी तो और भी खुश होना है मुझे।

सभ्या: अच्छा वो कैसे होगी?

अंजली ने हाथ आगे बढ़ाया और सभ्या के ब्लाउज़ के बटन खोलने लगी और बोली: अपनी मां का दूध पीकर।

इस पर तीनों हंसने लगे, और सभ्या बोली: बस इतनी सी बात ये ले, अंजली ने एक ही बटन खोला था तब तक सभ्या ने तुरंत बाकी के बटन खोल दिए और फिर अपना ब्लाउज़ पकड़ कर आगे से खोल दिया और अपनी बाजुओं पर लटका लिया,





अंजली ने सभ्या की सुंदर, मोटी और बड़ी बड़ी चूचियों को देखा तो उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, कर्मा भी नीचे बैठे बैठे अपनी मां की चूचियों को नंगा होते देख रहा था, हालांकि वो रोज ही ये नजारा देखता था पर हर बार उसे उतनी ही उत्तेजना होती थी,

अंजली: हाय मां कितनी सुंदर दूदू हैं तुम्हारे और कितने बड़े बड़े भी।

सभ्या: तुझे पसंद आए?

अंजली: पसंद नहीं बहुत पसंद।

अंजली ने पीछे से ही उसके पेट को सहलाते हुए कहा,

कर्मा: अरे पागल दुदू नहीं, चूचियां बोलते हैं,

अंजली: धत्त गंदी बात ही बोलो तुम।

कर्मा: असली मज़ा ही गंदी बात में हैं

कर्मा ने अपनी मां के पेट को चूमते हुए कहा, तो अंजली ने उसके सिर को पीछे धकेल दिया, और बोली: धत्त दूर रहो मेरी मां हैं।

कर्मा: अरे?

सभ्या: और क्या दूर रह तू मैं अंजली की मां हूं।

कर्मा: मां तुम भी इसके साथ मिल गई,

अंजली: मेरी मां है मेरे साथ मिलेंगी ही,

अंजली सभ्या के पेट और उसकी चूचियों को मसलने लगी साथ ही उसके नंगे कंधे को भी चूम रही थी,





वहीं सभ्या भी उसकी हरकतों से गरम हो रही थी, कर्मा भी नीचे बैठ कर अपनी मां के पेट को सहला रहा था,

अंजली: ओह कितनी मुलायम और बड़ी बड़ी हैं मां तुम्हारी।

कर्मा: तुम्हारी क्या?

अंजली: चूचियां, अब खुश।

कर्मा: खुश तो तुम हो मां की चूचियों को मसल कर।

सभ्या: खुश तो मैं हूं बहुत मेरे दोनों बच्चे इतने प्यार से खेल रहे हैं मेरे साथ,

अंजली: ओह मां मुझे भी बहुत खुशी हो रही है तुम्हारी चूचियों से खेलने में।

इधर नीचे कर्मा ने सभ्या की साड़ी को पकड़ कर खोलना शुरू कर दिया और कुछ पल बाद ही साड़ी नीचे थी फिर कर्मा ने अपनी मां के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया और फिर पेटीकोट को नीचे सरका दिया सभ्य अब दोनों के सामने सिर्फ एक काली कच्छी में खड़ी थी कर्मा अपनी मां की जांघों को सहलाते हुए ऊपर बढ़ने लगा





अंजली भी पीछे से सभ्या की पीठ और कंधे को चूम रही थी और उसकी कमर और चूतड़ों और चूचियां को सहला रही थी,

कर्मा: कब तक खड़ा रखोगी मां को चलो बिस्तर पर।

अंजली मुस्कुराई और सभ्या की ओर देखा और बोली चलो मां,

सभ्या दोनों के साथ बिस्तर पर गई तो दोनों ने उसे बीच में लिटा दिया और खुद उसके दोनों तरफ आ गए, और फिर कर्मा ने सभ्या की एक चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगा, अंजली ने जब ये देखा तो उसकी देखा देखी अंजली ने भी सभ्या की एक चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगी। सभ्या दोनों के सिर पर हाथ फिराते हुए आहें भरने लगी, वहीं अंजली और कर्मा पूरे लगन से उसकी चूचियों को चूस रहे थे,

सभ्या के मुंह से लगातार आहें और सिसकियां निकल रही थी,

सभ्या: ओह आह बच्चों ऐसे ही आह चूसो अपनी मां की चूचियों को ओह आह खा जाओ निचोड़ लो।

अंजली ने कुछ पल बाद मुंह हटाया और फिर बोली: अब मुझे वो वाली दो,

कर्मा और अंजली ने जगह बदली और अगले ही पल दोनों फिर से बदल कर चूचियों को चूस रहे थे, और तब तक चूसते रहे जब तक मन नहीं भर गया, कर्मा ऊपर की ओर सरका और अपनी मां के होंठों को चूसने लगा वहीं अंजली भी सभ्या की गर्दन और गाल को चूमने लगी, दोनों के हाथ सभ्या के पेट और छाती पर चल रहे थे





सभ्या अपने बेटे से अपने होंठों को चुसवा रही थी वहीं अंजली थोड़ी नीचे सरकी और फिर से सभ्या की चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगी, सभ्या के होंठ कर्मा के होंठों पर कस गए,

चूचियों को बारी बारी चूसने के बाद अंजली नीचे सरकी और सभ्या के पेट को चूमने लगी चाटने लगी, पूरे पेट पर अपनी जीभ और होंठ फिराने लगी, पेट के बाद उसने अपना अगला निशाना सभ्या की नाभी को बनाया, जिसमें जीभ घुसा कर वो चूसने लगी तो सभ्या की कमर अकड़ गई और उसका पेट ऊपर उठ गया, अंजली भी सभ्या को ऐसे प्रतिक्रिया करते देख और जोश में आ गई और अच्छे से उसकी नाभि को चूसने चाटने लगी,

कर्मा का भी अब उत्तेजना से बुरा हाल हो रहा था उसका लंड बिलकुल कड़क हो कर कच्छे में तम्बू बना रहा था जिसे उसने बाहर निकाल लिया और अपनी मां के होंठों को चूसते हुए उसके हाथ में रख दिया जिसे सभ्या सहलाने लगी। अंजली ने अपनी जीभ सभ्या की नाभी से निकाली तो थोड़ा आगे कर्मा का नंगा लंड देखा जिस पर सभ्या का हाथ चल रहा था, अंजली आगे बढ़ी और उसने कर्मा के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी,

अपने लंड पर अंजली का मुंह महसूस कर कर्मा ने अपनी मां के होंठों को छोड़ा और आहें भरने लगा, वहीं सभ्या भी उठ कर बैठी और अंजली की ब्रा उसने खोल दी, साथ ही पैंटी को भी नीचे सरका दिया, अंजली ने अगले पल ही पल भर को कर्मा का लंड मुंह से निकाला और ब्रा पैंटी को अपने बदन से अलग कर फैंक दिया, अब वो बिल्कुल नंगी थी, और हाथ आगे बढ़ा कर उसने कर्मा के कच्छे को भी उसकी टांगों से नीचे सरका दिया बिना उसका लंड मुंह से निकाले।

कर्मा: ओह आह अंजली ऐसे ही मेरी जान।

कर्मा अंजली के सिर पर हाथ फिराते हुए बोला,

अब सिर्फ सभ्या के बदन पर ही पैंटी थी और ये बात शायद अंजली को भी न गंवार गुजरी, उसने कर्मा के लंड को मुंह से निकाला और सभ्या को धकेल कर फिर से पीछे उसकी पीठ पर लिटा दिया,

सभ्या: अरे जोश में है मेरी बच्ची।

अंजली: मां तुम्हे ऐसे देख जोश तो आएगा ही,

ये कहते हुए अंजली ने सभ्या की पेंटी में उंगलियों को फंसाया और फिर उसे नीचे खींच दिया और फिर उसे सभ्या की टांगों से निकालकर अलग फेंक दिया अब तीनों ही बिल्कुल नंगे थे।

अंजली ने सभ्या की नंगी गीली चूत को सामने से देखा तो नजरें गड़ाए देखती ही रह गई,

कर्मा ने भी जब अंजली को अपनी मां की चूत को ऐसे घूरते देखा तो उसे कुछ सुझा और उसने अपना हाथ अंजली के सिर पर रखा और उसके सिर को अपनी मां की चूत पर दबा दिया जिससे अंजली का मुंह सीधा सभ्या की चूत से टकराया,

अब अंजली के लिए चूत चाटना नया तो नहीं था नीतू के साथ वो ये सब कर चुकी थी, इसलिए चूत पर मुंह पड़ते ही उसने मुंह खोल दिया और अपनी जीभ सभ्या की चूत पर चलानी शुरू कर दी, और सभ्या का मुंह अचानक से खुल गया।

सभ्या: ओह आह अंजली बेटा अहम्म।

सभ्या का खुला मुंह देख कर्मा उसकी ओर सरक गया और अपना लंड उसके मुंह में घुसा दिया, जिसे सभ्या तुरंत चूसने लगी,

अब सभ्या कर्मा का लंड चूस रही थी और सभ्या की चूत अंजली चाट रही थी,

कर्मा: ओह मां ऐसे ही चूसो ओह अंजली खा जाओ मां की चूत सारा रस चाट जाओ,

अंजली भी पूरे जोश के साथ सभ्या की चूत चाट रही थी।

सभ्या के लिए भी अंजली के द्वारा चूत चाटे जाना एक अलग ही अनुभव था, और उसे उत्तेजित कर रहा था, अंजली ने मन भर के चूत चाटी फिर अपना मुंह हटाया जो कि चूत रस से सना हुआ था,

अंजली आगे बढ़ी और कर्मा का लंड पकड़ कर सभ्या के मुंह से निकाल दिया और खुद सभ्या के होंठों को चूमने लगी, वहीं कर्मा को इशारा किया मां की टांगों के बीच आने का, कर्मा के लिए क्या परेशानी थी वो तुरंत सभ्या के पैरों के बीच था और अपना लंड सभ्या की चूत पर थपथपा रहा था, अंजली ने सभ्या के होंठों को छोड़ा और उसकी आँखों में देखते हुए बोली: मां मुझे तुम्हे चुदते हुए देखना है, चुदोगी अपने बेटे से?

सभ्या समझ रही थी अंजली के लिए मां बेटे की चुदाई देखना एक बहुत ही उत्तेजित करने वाला और गरम करने वाला विचार था जिसे होते देखने के लिए वो इतनी जोश में थी,

सभ्या ने उसकी आंखों में देखते हुए सिर हिलाया और बोली: पर तुझे भी चुदना पड़ेगा मेरे साथ,

इस पर अंजली मुस्कुराई और ऊपर उठ गई और घूम कर अपने हाथों और पैरों पर आ गई उसका मुंह सभ्या की चूत के ठीक ऊपर था जिस पर कर्मा अपना लंड घिस रहा था, इधर अंजली के मुड़ने से उसकी चूत सभ्या के सिर के पास थी जिसे हाथ बढ़ा कर वो घिसने लगी।

अंजली: रुको एक मिनट,

अंजली ने कर्मा से कहा, कर्मा रुक गया तो अंजली ने सभ्या की चूत पर थूका और फिर कर्मा से बोली: अब घुसाओ





अंजली की सहमति मिलते ही कर्मा ने अपना लंड अपनी मां की चूत में घुसा दिया, वैसे तो कुछ नया नहीं था कर्मा और सभ्या के लिए वो लगभग रोज ही चुदाई करते थे, पर हर बार कर्मा को अपनी मां की चूत कुछ अलग ही सुख देती थी और पर आज अंजली के साथ होने से दोनों के लिए ही ये एक खास एहसास था, कर्मा ने धीरे धीरे से धक्के लगाना शुरू कर दिया।

सभ्या: ओह बेटा ओह घुसा दिया आह अपना मोटा लंड अपनी मां की चूत में, आह अंजली देख कैसे कर्मा का मोटा लंड मेरी चूत को चीर रहा है आह।

अंजली: हां मां आह देख रही हूं तुम्हारी चूत भी कितनी गीली और गरम है आह पूरा लंड ले रही है बेटे का ओह मां तुम कमाल हो।

अंजली गर्म होते हुए अपनी चूत को सहलाते हुए बोली, उसके सामने एक बेटा अपनी मां को चोद रहा था और ये उसके लिए एक नया और अनकहा अहसास था, जिसे देख वो गरम हो रही थी

सभ्या: ओह आह आह आह कर्मा, ऐसे ही आह अंजली देख मेरी चूत ओह।

अंजली: ऐसे ही कर्मा चोदो मां को अच्छे से तेज तेज धक्के लगाओ।

अंजली अपनी चूत सहलाते हुए कर्मा का जोश बढ़ाते हुए बोल रही थी कर्मा भी अपनी मां की चूत में तेजी से जोश में आते हुए धक्के लगा रहा था,





सभ्या: आह आह आह बेटा कर्मा आह ऐसे ही चोद अपनी मां को, अंजली आह तू भी देख अपनी मां की चुदाई आह ओह ।

अंजली: ओह मां हां देख रही हूं आह ऐसा आज तक कुछ नहीं देखा आह आह आह मां,

कर्मा: ओह मां ओह अंजली अब तो आह तुम्हारे मन के सारे संशय आह मिट गए न।

अंजली: आह सब मिट गए ओह तुम बस ऐसे ही चोदते रहो मां को।

सभ्या: ओह अंजली मेरे ऊपर आ बेटा आह आह तेरी चूत का स्वाद चखा आह अपनी मां को।

अंजली: अभी आई मां,

अंजली तुरंत सभ्या के ऊपर सरक आई। उसने अपने घुटनों के बल पर थोड़ा ऊपर उठकर अपनी चूत को सभ्या के मुंह के ठीक सामने ला दिया। सभ्या की साँसें गरम-गरम अंजली की भीगी हुई चूत पर पड़ रही थीं। अंजली ने धीरे से कमर नीचे की, अपनी चूत सभ्या के होंठों से छुआ दी।





सभ्या ने बिना एक पल गँवाए अपनी जीभ बाहर निकाली और अंजली की चूत की ऊपरी सिलाई पर हल्के से फेरा। अंजली का बदन एक झटके से काँप गया।

अंजली: आह्ह्ह… माँ… ओह्ह… कितनी नरम जीभ है तुम्हारी…

सभ्या ने अब दोनों हाथों से अंजली के चूतड़ थाम लिए, उन्हें थोड़ा फैलाया और जीभ को पूरी तरह अंदर डाल दिया। अंजली की चूत से रस टपक रहा था, जो सभ्या की जीभ पर, होंठों पर फैल रहा था। सभ्या उसे चाट रही थी जैसे कोई प्यासी औरत सालों बाद पानी पी रही हो।

नीचे कर्मा अभी भी अपनी माँ की चूत में धीरे-धीरे लेकिन गहरे धक्के मार रहा था। हर धक्के के साथ सभ्या की चूत से चपचप की आवाज़ निकल रही थी। कर्मा का लंड पूरी तरह रस से लथपथ था।

कर्मा: माँ… आह… तुम्हारी चूत आज और भी कसी हुई लग रही है… ओह… अंजली के सामने चुदवाने से इतना मज़ा आ रहा है…

सभ्या (अंजली की चूत चाटते हुए बीच-बीच में बोलती हुई): हाँ बेटा… आह… तेरी माँ को आज बहुत जोश आ रहा है… अंजली तेरी चूत का स्वाद… ओह्ह… कितना मीठा है… आह्ह…

अंजली अब खुद कमर हिलाने लगी थी। वो सभ्या के मुँह पर अपनी चूत रगड़ रही थी। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं। दोनों हाथों से वो सभ्या की बड़ी-बड़ी चूचियों को मसल रही थी, निप्पल्स को उँगलियों से दबा रही थी।

अंजली: माँ… आह… और ज़ोर से चाटो… ओह्ह… जीभ अंदर डालो… हाय… ऐसे ही… मैं… मैं झड़ जाऊँगी…

कर्मा ने अब धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। उसका पेट सभ्या की जाँघों से टकरा रहा था। हर धक्के पर सभ्या की चूत और गीली हो रही थी। कर्मा का लंड अब पूरी तरह चिकना और चमकदार हो चुका था।

कर्मा: माँ… अब तेज़… तेज़ चोदूँगा… तैयार हो जाओ… आह्ह…

सभ्या: हाँ बेटा… जोर से… अपनी माँ की चूत फाड़ दो… आह्ह… अंजली… मेरी बच्ची… तू भी झड़ जा… मेरे मुँह में… ओह्ह…

अंजली अब पूरी तरह झुक गई थी। उसकी चूत सभ्या के मुँह में दबी हुई थी। सभ्या जीभ को तेज़-तेज़ अंदर-बाहर कर रही थी। अंजली की कमर काँप रही थी। उसकी आँखें बंद हो गई थीं।

अंजली: माँ… आह्ह… बस… अब… ओह्ह्ह… आ रहा है… आह्ह्ह्ह!!!

अंजली का पहला झटका आया। उसकी चूत से गरम रस की धार निकली और सीधे सभ्या के मुँह में जा गिरी। सभ्या ने उसे पूरा पी लिया, जीभ से चाटते हुए। अंजली का बदन कई बार झटके खा रहा था। वो सिसक रही थी, लेकिन रुक नहीं रही थी।

इसी बीच कर्मा भी अपनी माँ की चूत में जोर-जोर से धक्के मार रहा था। उसका लंड अब फुल स्पीड पर था। इसका असर सभ्या की चूत पर ये हुआ कि वो भी झड़ने लगी, कर्मा ने मां को झड़ते देखा तो अपने आप को संभाला और धक्कों की गति धीमी कर दी वो इतनी जल्दी नहीं झड़ना चाह रहा था, इसलिए सभ्या के झड़ते ही उसने अपने झटके रोक दिए और कर्मा कुछ पल ऐसे ही रहा, फिर धीरे-धीरे बाहर लंड बाहर निकाला। उसके लंड से सभ्या की चूत का रस टपक रहा था। अंजली ने तुरंत आगे बढ़कर कर्मा के लंड को मुँह में ले लिया और साफ करने लगी।

अंजली: माँ… तुम्हारा और कर्मा का रस… कितना स्वादिष्ट है…

फिर वो नीचे झुकी और सभ्या की चूत से टपकते रस को जीभ से चाटने लगी। सभ्या फिर से सिहर उठी।

सभ्या: अंजली… मेरी बच्ची… ओह… कितनी प्यारी है तू…

तीनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। साँसें धीमी होने लगीं। कमरे में सिर्फ़ हल्की-हल्की सिसकियाँ और प्यार भरी आहें गूँज रही थीं।

कर्मा ने दोनों को अपनी बाहों में भर लिया।

कर्मा: अब संशय बाकी है?

अंजली (मुस्कुराते हुए, सभ्या की चूची पर सिर रखकर): अब एक भी नहीं… माँ… तुम सचमुच कमाल हो… और कर्मा तुम तुम मादरचोद हो ।

इस पर तीनों हंसने लगे,

कर्मा: अब आराम बहुत हो गया मुझे मत भूलो मेरा लंड अभी भी खड़ा है,

अंजली: अभी तो बस शुरुआत है क्यों मां,?

सभ्या: बिल्कुल अब तो जब तक तू चाहेगी तब तक चुदाई करेंगे।

कुछ देर बाद अंजली बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी और कर्मा उसकी चूत में दनादन लंड पेल रहा था सभ्या अंजली के सिर की ओर लेट कर उसका जोश बढ़ा रही थी





कर्मा अपना लंड जड़ तक अंजली की चूत में धक्के लगा कर भरने लगा।

अंजली: ओह्ह्ह… हाय… पूरा… आह… और अंदर…

कर्मा अब रुक-रुक कर धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ उसका लंड और गहराई तक जाता, और अंजली की चूत से चपचप-चपचप की आवाज़ निकलने लगी। सभ्या अंजली के सिर के पास लेटी हुई थी, एक हाथ से अंजली के बाल सहला रही थी, दूसरा हाथ अंजली की चूचियों पर था – निप्पल को उँगलियों से दबाती, मसलती, खींचती।

सभ्या: देख मेरी बच्ची… कितना जोश से चोद रहा है तुझे कर्मा… आह… तेरी चूत कितनी कसी हुई लग रही है… ले… ले उसका पूरा लंड…

अंजली ने सभ्या की ओर देखा, आँखों में शरारत और उत्तेजना थी। उसने सभ्या का हाथ पकड़ा और अपनी चूची पर और जोर से दबवाया।

अंजली: माँ… आह… तुम भी मेरे साथ खेलो ना… अपनी चूत मेरे मुँह पर दे दो… मैं चाटूँगी तुम्हें…

सभ्या मुस्कुराई। वो उठी, घुटनों के बल अंजली के चेहरे के ऊपर आ गई। अपनी चूत – जो अभी भी गीली थी – अंजली के होंठों के ठीक ऊपर ले आई। अंजली ने तुरंत जीभ निकाली और सभ्या की चूत को चाटना शुरू कर दिया। सभ्या की कमर सिहर गई।

सभ्या: ओह्ह… अंजली… मेरी बच्ची… आह… ऐसे ही… जीभ अंदर डाल… ओह्ह… कितनी अच्छी चाटती है तू…

नीचे कर्मा अब फुल स्पीड पर था। उसके धक्के तेज़ और गहरे हो गए थे। हर धक्के पर अंजली का पूरा बदन हिल रहा था। सभ्या की चूत उसके मुँह पर रगड़ रही थी, जिससे अंजली की सिसकियाँ और तेज़ हो गईं।

कर्मा: अंजली… तेरी चूत… आह… कितनी गरम है… ओह… मां ओह ओह ओह

अंजली (सभ्या की चूत चाटते हुए बीच-बीच में बोलती): हाँ… कर्मा… जोर से… आह… फाड़ दो मेरी चूत… माँ… तुम्हारी चूत… ओह… कितना रस है… पी जाऊँगी सारा…

सभ्या अब खुद कमर हिला रही थी, अंजली के मुँह पर अपनी चूत रगड़ रही थी। उसकी चूचियाँ उछल रही थीं। उसने अपने हाथों से अपनी चूचियाँ मसलनी शुरू कर दीं, निप्पल्स को खींचते हुए।

सभ्या: आह्ह… दोनों बच्चे… मेरी जान… ओह… ऐसे ही… चोदो… चुसो… मैं… मैं फिर झड़ने वाली हूँ…

वहीं कर्मा ने अब अंजली की टांगों को कंधों पर उठा लिया। इस आशन में उसका लंड और गहराई तक जा रहा था। हर धक्के पर अंजली की चूत की दीवारें सिकुड़ रही थीं, लंड को जकड़ रही थीं।

कर्मा: अंजली… मैं… आह… अब झड़ने वाला हूँ… अंदर… अंदर डालूँ?

अंजली (सभ्या की चूत से मुँह हटाकर हाँफते हुए): नहीं नहीं नहीं आह मां के मुंह में, मुझे मां के मुंह में रस देखना है तुम्हारा,

ये सुनकर सभ्या और गरम होने लगी और उस ने जोर से कमर घुमाई, अपनी चूत अंजली के जीभ पर दबा दी।

सभ्या: ले… ले मेरी बच्ची… आह्ह… झड़ रही हूँ… ओह्ह्ह!!!

सभ्या का रस अंजली के मुँह में बहने लगा। अंजली ने उसे पूरा पी लिया, जीभ से चाटते हुए। सभ्या अंजली के मुंह से सरक गई और और अपनी सांसे संभालने लगी उसी पल कर्मा ने भी आखिरी तेज़ धक्के मारे।

कर्मा: आह्ह… अंजली… ओह मां मैं… आह्ह्ह्ह!!!

ये सुनकर सभ्या तुरंत आगे आई और कर्मा ने भी अपना लंड अंजली की चूत से निकाला और अपनी मां के खुले मुंह में घुसा कर झड़ने लगा





कर्मा का लंड सभ्या के मुंह में फड़क रहा था। एक के बाद एक गरम-गरम पिचकारियाँ सभ्या के गले में जा रही थीं। सभ्या ने आँखें बंद कर लीं, दोनों गाल फुलाकर चूस रही थी, जैसे एक भी बूँद बर्बाद न होने देना चाहती हो। कुछ रस उसके होंठों के किनारों से छलककर नीचे गिर रहा था – अंजली के पेट पर, उसकी नाभि में, चूचियों के बीच में फैल रहा था।

अंजली नीचे लेटी हुई ये सब देख रही थी – कर्मा का लंड सभ्या के मुँह में अंदर-बाहर हो रहा था, सभ्या के गाल फूल-फूलकर सिकुड़ रहे थे, और उसके मुंह से निकलती चूसने की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। अंजली का बदन अभी भी झटकों से काँप रहा था, उसकी चूत से कर्मा का लंड निकलने के बाद भी रस टपक रहा था।

अंजली (हाँफते हुए, उँगली से अपने पेट पर फैला रस उठाकर चाटते हुए): ओह्ह… माँ… कितना गरम है कर्मा का रस… देखो… मेरे बदन पर भी गिर रहा है… आह… कितना स्वादिष्ट…

सभ्या ने कर्मा का लंड मुँह से निकाला, अभी भी फड़क रहा था, आखिरी बूँदें टपक रही थीं। उसने जीभ से लंड का सुपारा चाटा, साफ किया, फिर अंजली की ओर मुड़ी। उसके होंठ चमक रहे थे, ठोड़ी पर रस की लकीर थी। वो अंजली के पास आई, उसके ऊपर झुककर उसके पेट पर टपके रस को जीभ से चाटने लगी – धीरे-धीरे, जैसे कोई कीमती चीज़ हो।

सभ्या: मेरी बच्ची… तेरा बदन भी अब मेरे बेटे के रस से सना हुआ है… आह… कितना अच्छा लग रहा है…

अंजली ने सभ्या के बाल पकड़े, उसे ऊपर खींचा और उसके होंठ चूम लिए। दोनों के होंठ मिले तो रस का स्वाद दोनों के मुँह में फैल गया – कर्मा का रस, सभ्या का लार, अंजली की चूत का रस – सब मिलकर एक मीठा-नमकीन स्वाद। दोनों ने एक-दूसरे के होंठ चूसे, जीभें आपस में लिपटीं, रस को एक-दूसरे के मुँह में डालते हुए।

कर्मा बिस्तर पर घुटनों के बल बैठा ये सब देख रहा था। उसका लंड अभी भी आधा खड़ा था, धीरे-धीरे फिर से सख्त हो रहा था। वो मुस्कुराया।

कर्मा: माँ… अंजली… तुम दोनों कितनी गरम हो…।

सभ्या: क्यों अंजली अब तो खुश है तू, और कुछ तो नहीं है मन में?

अंजली: अभी भी कुछ बचा हुआ है

अंजली ने मुस्कुराते हुए कहा,

कुछ देर बाद सभ्या बिस्तर के किनारे लेट गई थी। उसने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठाईं, घुटनों को छाती की ओर मोड़ा और पीछे की ओर फैला दिया। इस मुद्रा में उसकी गांड पूरी तरह खुल गई थी – गोल, मखमली चूतड़ अलग-अलग होकर बीच में गहरा, गुलाबी छेद साफ दिख रहा था। सभ्या ने दोनों हाथों से अपने चूतड़ और फैलाए हुए थे।

अंजली तुरंत बिस्तर के नीचे फर्श पर घुटनों के बल बैठ गई। उसका चेहरा सभ्या की गांड के ठीक सामने था। उसने पहले दोनों हाथों से सभ्या के चूतड़ों को सहलाया, मसला, फिर धीरे से जीभ बाहर निकाली।

अंजली की गरम साँसें पहले सभ्या के छेद पर पड़ीं, जिससे सभ्या की कमर हल्के से सिहर गई। फिर अंजली ने जीभ का नोक सभ्या के गांड के छेद पर रखा और हल्के-हल्के गोल-गोल घुमाने लगी। धीरे-धीरे जीभ को अंदर धकेलने की कोशिश की – पहले सिर्फ सतह पर चाटा, फिर थोड़ा अंदर घुसाया।

सभ्या: आह्ह्ह… अंजली… मेरी बच्ची… ओह्ह… वहाँ… जीभ डाल… और अंदर… कितना अच्छा लग रहा है…

अंजली ने अब जीभ को और गहराई तक धकेला। वो चाट रही थी, चूस रही थी, जीभ को अंदर-बाहर कर रही थी। सभ्या की गांड की मांसपेशियाँ सिकुड़-फैल रही थीं, अंजली की जीभ को जकड़ रही थीं। अंजली का मुँह सभ्या के चूतड़ों से सटा हुआ था, दोनों गाल सभ्या की नरम त्वचा से दब रहे थे।

इधर कर्मा सभ्या के बगल में बैठ गया था। उसने सभ्या की एक बड़ी-बड़ी चूची मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा। निप्पल को दाँतों से हल्के से काटा, जीभ से घुमाया। दूसरी चूची हाथ से मसल रहा था, निप्पल को उँगलियों से दबा रहा था





कर्मा (चूसते हुए): माँ… तुम्हारी चूचियाँ… कितनी रसीली हैं… आह… अंजली तुम्हारी गांड चाट रही है… देखो कितने जोश से,

सभ्या की सिसकियाँ तेज़ हो गईं। उसने एक हाथ से अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया, उँगलियाँ चूत की लबों पर फेर रही थीं।

सभ्या: ओह्ह… अंजली… ऐसे ही… मेरी गांड चाट… जीभ पूरी अंदर डाल… आह्ह… कितनी नरम जीभ है तेरी… हाय…आह क्या लड़की है ये ओह।

अंजली ने अब और जोश में आकर सभ्या के छेद को चाटना तेज़ कर दिया। जीभ को तेज़-तेज़ अंदर-बाहर कर रही थी, कभी गोल घुमा रही, कभी चूस रही। सभ्या का पूरा बदन काँप रहा था, उसकी साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं।

सभ्या: हाँ बेटा… ओह्ह… दोनों बच्चे… मेरी जान… आह… अंजली… और ज़ोर से… जीभ अंदर… कर्मा… चूस… मेरी चूचियाँ चूस…

अंजली अब पूरी तरह डूबी हुई थी। उसकी जीभ सभ्या की गांड में गहरे तक जा रही थी, चाट रही थी, गीला कर रही थी। सभ्या की गांड अब पूरी तरह रिलैक्स हो गई थी, अंजली की जीभ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी। कमरे में सिर्फ़ चाटने की चटचट आवाज़ें, सभ्या की आहें और कर्मा की चूसने की आवाज़ें गूँज रही थीं।

सभ्या की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी, जैसे और ज्यादा चाह रही हो। अंजली ने एक हाथ बढ़ाकर सभ्या की चूत पर रख दिया, उँगलियाँ अंदर डालकर सहलाने लगी – जबकि जीभ अभी भी गांड में काम कर रही थी।

सभ्या: आह्ह्ह… दोनों आह अंजली दोनों छेदों को छेड़ मेरे आह ओह बेटा… ओह्ह… मैं… पागल हो जाऊँगी… अंजली… मेरी गांड… चाट… और चाट…

कर्मा ने सभ्या की चूची से मुंह हटाया और खड़ा हो गया कर्मा अब पूरी तरह तैयार था। उसका लंड फिर से पूरी तरह खड़ा और चिकना हो चुका था – सभ्या की चूत और अंजली की जीभ के रस से चमक रहा था। सभ्या अभी भी वही मुद्रा में थी – टांगें ऊपर, घुटने छाती से लगे, चूतड़ पूरी तरह फैले हुए, गांड का छेद अंजली की जीभ से गीला और थोड़ा खुला हुआ।

अंजली ने जीभ निकाली, सभ्या के छेद को आखिरी बार चाटा और पीछे हटी। उसने कर्मा की ओर देखा, मुस्कुराई और धीरे से बोली:

अंजली: अब जाओ कर्मा… अपनी माँ की गांड में घुसा दो… मैं सामने से देखूँगी… कैसे तुम्हारा मोटा लंड माँ की गांड को चीरता है…

कर्मा ने सभ्या के चूतड़ थाम लिए, अंगूठों से छेद को थोड़ा और फैलाया। उसने अपना लंड पकड़ा, सुपारे को सभ्या के गांड के छेद पर रखा और हल्का सा दबाव डाला। सभ्या की साँस रुक गई।

सभ्या: आह्ह… बेटा… धीरे… पहले थोड़ा अंदर… ओह्ह… मोटा है तेरा…

कर्मा ने धीरे-धीरे कमर आगे की। सुपारा पहले अंदर घुसा, फिर थोड़ा और। सभ्या की गांड की मांसपेशियाँ सिकुड़ रही थीं, लेकिन अंजली की जीभ ने पहले से ही उसे ढीला कर दिया था। कर्मा ने एक गहरा, धीमा धक्का मारा – आधा लंड अंदर चला गया।





सभ्या: आह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह… पूरा… बेटा… आह… गांड में… तेरी माँ की गांड में… घुसा दिया…

अंजली नीचे फर्श पर बैठ गई, चेहरा ठीक सभ्या की गांड और कर्मा के लंड के मिलन के सामने। उसने दोनों हाथों से सभ्या के चूतड़ और थोड़ा फैलाए और करीब से देखने लगी। कर्मा का मोटा लंड सभ्या की गांड में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर सभ्या का छेद लंड के साथ फैलता, सिकुड़ता। अंजली की आँखें चमक रही थीं।

अंजली: ओह्ह… माँ… देखो… कर्मा का लंड कितना गहरा जा रहा है… तुम्हारी गांड कितनी अच्छे से ले रही है… आह… कितना सेक्सी लग रहा है…

कर्मा अब रफ्तार बढ़ाने लगा। धक्के गहरे और तेज़ हो गए। हर धक्के पर उसकी जांघें सभ्या के चूतड़ों से थप्पड़ मार रहा था – थप-थप-थप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। सभ्या की चूत से रस बह रहा था, अंजली ने जीभ निकाली और टपकते रस को चाट लिया, फिर आगे बढ़कर कर्मा के अंडकोष को सहलाने लगी – हल्के से मसलते हुए, चूमते हुए।

कर्मा: माँ… तुम्हारी गांड… कितनी टाइट है… आह… अंदर तक… ओह्ह… अंजली… देख… कैसे पेल रहा हूँ माँ को…

सभ्या की आहें अब चीखों में बदल रही थीं। उसने दोनों हाथों से अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया, उँगलियाँ अंदर डालकर खुद को चोद रही थी।

सभ्या: आह्ह… बेटा… जोर से… अपनी माँ की गांड फाड़ दो… ओह्ह… अंजली… मेरी बच्ची… देख… कितना मज़ा आ रहा है… आह्ह… मैं… झड़ने वाली हूँ…

अंजली ने कर्मा की गोलियों को चूमते हुए कहा:

अंजली: माँ… झड़ जाओ… कर्मा… और तेज़… माँ की गांड फाड़ दो आज मार मार कर, दिखाओ कितने बड़े मादरचोद हो तुम ओह।

कर्मा ने अब फुल स्पीड पकड़ ली। उसके धक्के इतने तेज़ थे कि सभ्या का पूरा बदन हिल रहा था। उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, चूत से रस बह रहा था। अंजली ने एक हाथ बढ़ाकर सभ्या की चूत में उँगलियाँ डाल दीं – कर्मा के धक्कों के साथ-साथ अंदर-बाहर कर रही थी।

सभ्या: आह्ह्ह्ह… दोनों… ओह्ह… मैं… आ रही हूँ… गांड में… चूत में… आह्ह्ह!!! बच्चों क्या कर रहे हो तुम मेरे साथ आह आह आह।

सभ्या का बदन अकड़ गया। उसकी गांड कर्मा के लंड को जकड़ ली, चूत से रस की धार निकली। वो जोर से झडने लगी – पूरा बदन काँप रहा था। कर्मा ने आखिरी कुछ जोरदार धक्के मारे। और फिर अपना लंड बाहर खींच लिया, सभ्या बुरी तरह हांफ़ रही थी कर्मा के लंड निकालते ही वो बिस्तर पर पलट के अपने पेट के बल लेट गई और तेजी से सांसें भरने लगी,

कर्मा ने बिना समय गंवाए ही अंजली को पकड़ा और अपनी मां के ऊपर ही पेट के बल लिटा दिया और फिर उसके ऊपर आकर जगह ली अपने लंड को अंजली की गांड के छेद पर टिकाया, कर्मा ने एक हाथ से अंजली की कमर थामी, दूसरे हाथ से लंड को पकड़ा और धीरे-धीरे दबाव डाला। सुपारा अंदर घुसा – अंजली की गांड की मांसपेशियाँ सिकुड़ गईं, लेकिन वो खुद को रिलैक्स करने की कोशिश कर रही थी।

अंजली: आह्ह्ह… हाय… धीरे… ओह्ह… जल रहा है… लेकिन… मत रुकना…

कर्मा ने धीमा धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। अंजली का मुंह खुल गया, आँखें बंद हो गईं, दाँत भींच लिए। सभ्या ने नीचे से हाथ पीछे लेजाकर अंजली के पैर को सहलाया और बोली,

सभ्या: मेरी बच्ची… सह ले… बेटा धीरे कर रहा है… देख… तेरी गांड कितनी अच्छे से ले रही है… आह… कितना अच्छा लग रहा होगा…

अंजली: आह्ह… माँ… हाँ… अब बहुत अच्छा लग रहा है मैं तैयार हूं… पूरा घुसा दो कर्मा… ओह्ह… मैं… तैयार हूँ…

कर्मा ने एक और गहरा धक्का मारा – पूरा लंड अंदर चला गया। अंजली की कमर ऊपर उठ गई, एक लंबी आह निकली।

अंजली: ओह्ह्ह्ह… पूरा… अंदर… हाय… कितना भरा हुआ लग रहा है… आह… अब… मारो… बिना रहम के आह,

कर्मा अब धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। हर धक्के पर अंजली का पूरा बदन हिल रहा था, उसकी चूचियाँ सभ्या की पीठ पर रगड़ रही थीं। सभ्या ने नीचे से हाथ बढ़ाकर अंजली की चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया –





हर धक्के पर नीचे लेटी सभ्या के चूतड़ भी लहर रहे थे कर्मा लगातार तेजी से धक्के लगा रहा था

सभ्या: ले मेरी बच्ची… आह गांड मरवाने का भी मजा ले आह कर्मा आराम से मार।

अंजली की सिसकियाँ तेज़ हो गईं। वो अब खुद कमर हिला रही थी, पीछे धक्के मार रही थी। कर्मा की रफ्तार बढ़ गई – थप-थप-थप की आवाज़ फिर से कमरे में गूँजने लगी। अंजली की गांड अब लंड को अच्छे से ले रही थी, छेद फैलकर चिकना हो गया था।

अंजली: आह्ह… कर्मा… जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… ओह्ह… माँ… ऐसे ही मसल डालो मेरी चूचियों को ओह मां।

कुछ देर तक कर्मा ने अंजली की गांड को इसी तरह पीछे से पेला – तेज़, गहरे धक्के, थप-थप की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। अंजली की सिसकियाँ अब चीखों में बदल चुकी थीं, वो खुद पीछे कमर हिलाकर लंड को और गहराई तक ले रही थी। सभ्या नीचे से अंजली की चूचियाँ मसल रही थी, कभी निप्पल को खींचती, कभी चूमती।

अचानक कर्मा ने धक्के रोक दिए। उसने अंजली की कमर से हाथ हटाया, लंड धीरे से बाहर निकाला। अंजली की गांड का छेद अभी भी खुला हुआ था, रस से चमक रहा था। वो हाँफ रही थी, बदन काँप रहा था।

कर्मा ने बिस्तर पर पीठ के बल लेटते हुए कहा अंजली को इशारा किया तो वो समझ गई वो उठी, कर्मा के ऊपर आ गई। उसने पीठ कर्मा की तरफ करके घुटनों के बल बैठी, फिर धीरे से कमर नीचे की। कर्मा ने अपना लंड पकड़ा, सीधा अंजली के गांड के छेद पर टिकाया।

अंजली ने खुद कमर नीचे की – लंड फिर से अंदर सरकने लगा। इस बार वो खुद कंट्रोल कर रही थी। पूरा लंड अंदर जाने पर वो एक लंबी आह भरकर रुक गई।

अंजली: ओह्ह्ह… पूरा… फिर से अंदर… कितना गहरा जा रहा है… आह… अब… मारो मेरी गांड अब नीचे से… आह कर्मा मेरी गांड,

कर्मा ने नीचे से कमर उठानी शुरू की। धक्के ऊपर की तरफ – हर धक्के पर अंजली का पूरा बदन उछल रहा था। उसकी गांड कर्मा के लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी, चूतड़ फैलकर लंड को निगल रहे थे। थप-थप की आवाज़ अब अलग थी – गीली, गहरी।

सभ्या थोड़ी देर लेट कर दोनों का खेल देखती रही फिर उठी और तुरंत आगे आई। वो अंजली के सामने घुटनों के बल बैठ गई, अंजली की टांगों को थोड़ा फैलाया और अपना मुँह अंजली की चूत पर लगा दिया। जीभ बाहर निकालकर चूत की लबों पर फेरा, फिर क्लिट को चूसने लगी।





सभ्या: मेरी बच्ची… ले… तेरी चूत का रस…आह मेरा तो मन ही नहीं भर रहा आह आज मैं जी भर के चाटूँगी… आह बेटी मज़ा ले… तेरी गांड में कर्मा अपना मोटा लंड पेल रहा है… और चूत मेरे मुँह में…

अंजली का बदन अब दोहरे हमले में था। नीचे से कर्मा की गांड में धक्के, सामने से सभ्या की जीभ चूत पर। अंजली की दोनों हाथ सभ्या के सिर पर थे, बाल पकड़कर उसे और करीब दबा रही थी।

अंजली: आह्ह… माँ… जीभ अंदर… ओह्ह… कर्मा… नीचे से जोर से… हाय… दोनों जगह… मैं… पागल हो रही हूँ… आह्ह… ऐसा मज़ा… पहली बार…

कर्मा नीचे से तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। उसका लंड अंजली की गांड में जड़ तक जा रहा था, बाहर आते ही फिर अंदर। अंजली की गांड अब पूरी तरह खुल चुकी थी, रस से चिकनी। सभ्या जीभ को अंजली की चूत में गहराई तक डाल रही थी, कभी चूस रही, कभी क्लिट को दाँतों से हल्का काट रही।

अंजली की सिसकियाँ अब लगातार हो गईं। उसका बदन काँपने लगा, कमर खुद-ब-खुद ऊपर-नीचे हो रही थी।

अंजली: आह्ह… बस… अब… आ रहा है… ओह्ह… गांड में… चूत में… माँ… कर्मा… आह्ह्ह!!! मैं झड़ रही हूँ… ओह्ह्ह्ह!!!

अंजली का पूरा बदन अकड़ गया। चूत से रस की तेज़ धार निकली – सीधा सभ्या के मुँह में। सभ्या ने उसे पूरा पी लिया, जीभ से चाटते हुए। उसी पल अंजली की गांड की मांसपेशियाँ सिकुड़ गईं, कर्मा के लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि कर्मा भी रुक नहीं पाया।

कर्मा: अंजली… ओह्ह… तेरी गांड… जकड़ रही है… आह… मैं भी… आ रहा हूँ… ले… गांड में मेरा रस… आह्ह्ह!!!

कर्मा ने नीचे से आखिरी जोरदार धक्का मारा। उसका लंड फड़का और गरम-गरम रस की पिचकारियाँ अंजली की गांड के सबसे अंदर जा गिरीं। एक के बाद एक धार – अंजली की गांड भर गई। वो फिर से सिहर उठी, दूसरी बार झड़ते हुए। रस चूत से बहकर सभ्या के चेहरे पर गिर रहा था, गांड से टपककर कर्मा के पेट पर।

तीनों कुछ पल ऐसे ही रहे – अंजली कर्मा के लंड पर बैठी, सभ्या उसके सामने। फिर धीरे-धीरे अंजली उठी, लंड बाहर निकला। उसकी गांड से रस की सफेद धार बहने लगी – बिस्तर पर टपक रही थी।

सभ्या ने अंजली को खींचकर सीने से लगाया, उसके होंठ चूमे। कर्मा भी उठकर दोनों को बाहों में भर लिया।

अंजली (हाँफते हुए, मुस्कुराते हुए): माँ… कर्मा… ये… ये तो जिंदगी भर याद रहेगा… दोनों जगह से… इतना मज़ा… ओह…

सभ्या: अभी कुछ मत बोल बेटा, आराम से लेट जा थोड़ी देर बहुत मेहनत की है।

तीनों एक दूसरे की बाहों में लेट गए, एक नए रिश्ते की शुरुआत हो चुकी थी तीनों के बीच।

जहां अंजली कर्मा के साथ उसके घर पर नए रिश्ते बना रही थी वहीं गैंदापुर में उसकी मां और भाभी भी कुछ नया कर रही थी,





कहां और क्या करने वाली हैं दोनों सास बहू इस हालत में जानने के लिए जुड़े रहिए।



जारी रहेगी।
 
जहां अंजली कर्मा के साथ उसके घर पर नए रिश्ते बना रही थी वहीं गैंदापुर में उसकी मां और भाभी भी कुछ नया कर रही थी,

अपडेट 256


दोनों सास बहू अभी आंगन में थी और दोनों के बदन पर अभी बस एक एक। बैंगनी रंग की पेंटी थी और चेहरे पर कामुक मुस्कान और शर्म का मिश्रण था





रानी: कितना अजीब लग रहा है न मम्मी जी हम लोग ऐसे हम लोग आंगन में घूम रहे हैं।

सविता: अजीब तो है पर मज़ेदार भी, गर्मी में ऐसे ही रहना चाहिए,

सविता ने हंसते हुए कहा, और फिर दोनों हंसने लगी,

रानी: अब चलते हैं ये इंतजार कर रहे होंगे आखिर उन्हें ही हमें घर में ऐसे देखना था,

सविता: हां चल बेटा।

दोनों फिर आगे बढ़ कर पीयूष और रानी के कमरे की ओर चल दी, जहां पीयूष पहले से ही उनका इंतजार कर रहा था उसके बदन पर भी बस एक कच्छा था, दोनों ने देखा कि पीयूष बिस्तर पर लेटा हुआ था तीनों की नज़रें मिली और पीयूष के चेहरे पर मुस्कान आ गई अपनी मां और अपनी पत्नी को इस रूप में देख कर।

रानी: ऐसे क्या देख कर मुस्कुरा रहे हो तुमने ही कहा था न ऐसे ही घूमने को।

पीयूष: हां कहा था और बिल्कुल सही कहा था बहुत सुन्दर लग रही हो दोनों लोग।

रानी: हां तुम्हे तो सुंदर लगेंगे ही नंगे जो घूम रहे हैं।

रानी ने उसे छेड़ते हुए कहा और बिस्तर पर चढ़ गई,

पीयूष: अरे कपड़े तुम्हारी सुंदरता को छिपाते हैं अब असली सुंदरता तो ऐसे ही नज़र आती है, मम्मी आओ न तुम भी बैठो।

सविता: हां आई,

सविता भी आगे बढ़ कर बिस्तर पर चढ़ जाती है और बैठ जाती है।





पीयूष भी आगे होकर अपनी मां के होंठों को चूमने लगता है वहीं रानी पीछे से अपनी सास के बदन को सहलाती है फिरउसने सास की कमर पकड़ी, पीठ पर होंठ रख दिए। धीरे-धीरे जीभ से पीठ चाटने लगी – कंधे से लेकर कमर तक। सविता की साँसें तेज़ हो गईं।

रानी (सविता के कान में, जीभ फेरते हुए): सासू माँ... आपकी पीठ... कितनी नरम... कितनी गरम... मन करता है पूरा बदन चाट जाऊँ...

सविता (आह भरते हुए): बहू... तेरी जीभ... ओह... माँ की पीठ पर... कितना अच्छा लग रहा है... पीयूश... बेटा... देख... तेरी पत्नी तेरी माँ को कैसे चाट रही है... आ... तू भी आ... अपनी माँ की चूचियाँ... चूस...

पीयूश ने आगे बढ़कर सविता की एक चूची मुंह में ले ली। जोर से चूसा। निप्पल को जीभ से घुमाया, दांतों से हल्का कसा। सविता की कमर अकड़ गई। रानी ने पीछे से सविता की दूसरी चूची हाथ में ली, और उसे मसलने लगी।

रानी (चूची मसलते हुए): मम्मी जी... आपकी चूचियाँ... कितनी भरी हुई... ओह... कितनी नरम? ओह... देखो... तुम्हारी माँ का निप्पल... कितना सख्त... चूसो... पूरा निचोड़ लो...

थोड़ी देर बाद पीयूष अपनी मां की चूची को छोड़ता है और रानी के होंठों को चूसने लगता है इतने में सविता पीयूष के कच्छे की लास्टिक में उंगलियां फांसती है और उसे नीचे खिसकती है और पूरी तरह से पैरों से निकाल देती है तो पियूष का लंड उछल कर बाहर आ जाता है, जिसे सविता हाथ में लेकर प्यार से सहलाने लगती है, अपनी मां के हाथों में लंड का स्पर्श पाकर आह निकलती है और वो रानी के होंठों से अपने होंठ अलग करता है, रानी अलग होती है और उठ कर झट से अपनी पैंटी उतार कर पूरी नंगी हो जाती है उसकी देखा देखी सविता भी अपनी कच्छी उतार देती है और नंगी हो जाती है, पीयूष बिस्तर के बीच में लेट जाता है वहीं सविता और रानी उसके एक एक ओर बिस्तर पर चढ़ जाती हैं

रानी आगे झुक कर अपनी सास की चूची को मुंह में भर लेती है वहीं पीयूष रानी के बदन को सहलाने लगता है





सविता: ओह बहू आह ऐसे ही आह मज़ा आ रहा है खा जा मेरी चूचियों को।

पीयूष: आह क्या पत्नी और मां पाई है मैने आह रानी ओह।

पीयूष रानी के चूतड़ों को सहलाते हुए बोला।

रानी अपनी सास की चूचियों को बदल बदल कर चूस रही थी वहीं सविता उसके सिर को अपनी चूचियों पर दबा रही थी, वहीं पीयूष उसकी कमर और चूचियों को चूम रहा था, वहीं रानी का एक हाथ उसके पति के लंड को पकड़ कर सहला रहा था,

सविता: आह बच्चों ओह ऐसे ही आह ओह मेरे बच्चों ओह ओह।

रानी ने जी भर के अपनी सास की चूचियों को चूसा फिर जा कर छोड़ा और फिर बिना समय गंवाए, अपने पति के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी,

पीयूष के मुंह से सिसकियां निकलने लगी।

पीयूष: आह रानी अह कितना गरम मुंह है तेरा ओह मज़ा आ रहा है ऐसे ही चूसती रह।

पीयूष ने कहा और फिर हाथ बढ़ा कर अपनी मां के चूतड़ों को पकड़ लिया और उन्हें अपनी ओर खींचने लगा, सविता भी उसका इशारा समझ गई और तुरंत आगे बढ़ कर अपने बेटे के चेहरे पर बैठ गई, उसके बैठते ही पीयूष ने अपनी मां की चूत में जीभ चलाना शुरू कर दिया, और सविता अपने बेटे की जीभ के इशारों पर मचलने लगी,





सविता: ओह आह बेटा आह चाट अपनी मां की चूत को ओह आह इसी चूत से निकला था तू ओह आह आज बापिस घुसा अपनी जीभ ओह।

सविता ने गरम होते हुए बोला

पीयूष के हाथ अपनी मां की गरम बातों को सुन कर उसके चूतड़ों पर कस गए वहीं रानी तो बिना विराम लिए अपने पति के लंड को चूस रही थी,

वहीं सविता अपने बेटे से अपनी चूत चटवा रही थी उसकी चूत लगातार गीली होकर बह रही थी,

कुछ देर बाद सविता ने अपने बेटे के मुँह से धीरे से अपनी कमर ऊपर उठाई। पीयूष की जीभ अभी भी उसकी चूत से चिपकी हुई थी, जैसे छोड़ना न चाहती हो। सविता की चूत गीली, रस से चमक रही थी – बेटे की लार और अपना रस मिलकर। वो हाँफते हुए मुस्कुराई, रानी की ओर देखा जो अभी भी पीयूष के लंड को सहलाते हुए चूस रही थी।

सविता (हाँफते हुए): बहू... अब तू अकेली क्यों खेल रही है? आ... माँ-बहू मिलकर बेटे की सेवा करें... देख... कितना कड़क है... हम दोनों का इंतजार कर रहा है...

रानी ने लंड से हाथ नहीं हटाया, बल्कि सविता को अपनी ओर खींचा। सविता घुटनों के बल बिस्तर पर झुकीं, पीयूष के लंड के ठीक सामने। सविता ने पहले जीभ फेरी – लंड के सुपारे पर, धीरे-धीरे गोल-गोल। पीयूष की आह निकली। रानी ने सामने से सविता की चूची पकड़ी, मसली, और फिर अपना मुँह लंड पर रख दिया – सविता के साथ मिलकर चूसने लगी। दोनों की जीभें लंड पर टकरा रही थीं, रस चाट रही थीं, होंठ मिलाकर लंड को बीच में दबा रही थीं। तो कभी एक दूसरे को होंठों को चूस रही थी





रानी (लंड चूसते हुए, सविता से): ओह मम्मी... आपका बेटा... कितना मोटा लंड रखता है... आह... चूसने में मजा आ रहा है ना।

सविता (रानी की जीभ से टकराते हुए, आह भरकर): आह... बहू... तू भी चाट... सास बहु की जीभ एक साथ आह... बेटे के लंड पर... ओह... कितना गंदा लग रहा है... लेकिन... मजा दोगुना... पीयूष... बेटा... देख... तेरी माँ और बहू... तेरा लंड... मिलकर... चूस रही हैं... जैसे रंडियाँ... आह... तेरा लंड... कितना गरम है।

पीयूष ने दोनों के सिर पकड़े, धक्के लगाने लगा – लंड दोनों के मुँह में बारी-बारी घुसा रहा था। कमरा आहों और चूसने की चपचप आवाजों से भर गया। सविता और रानी की चूचियाँ आपस में टकरा रही थीं, निप्पल्स सख्त होकर रगड़ खा रही थीं।

पीयूष (सिसकते हुए): आह... माँ... रानी... दोनों... मेरी रंडियाँ... चूसो... पूरा गले में उतार लो... ओह... माँ... तेरी जीभ... आह मक्खन की तरह... लंड पर... कितनी गरम... मजा आ रहा है...

कुछ देर दोनों सास-बहू ने पीयूष का लंड चूसा, फिर सविता ने रानी को बगल में धकेला। वो खुद बिस्तर पर लेट गई, टांगें थोड़ी फैलाईं। पीयूष ऊपर आया, और अपना लंड सविता की चूचियों के बीच फँसा दिया। सविता ने दोनों चूचियाँ दबाकर लंड को बीच में जकड़ लिया – मोटी, नरम चूचियाँ लंड को दबा रही थीं। पीयूष ने कमर हिलानी शुरू की – लंड चूचियों के बीच अंदर-बाहर होने लगा। रानी अपनी सास की चूचियों को थाम कर उन्हें दबा रही थी और जिससे पीयूष को और गहराई मिले चूचियां चोदने में, साथ ही वो झुक कर अपनी सास के होंठों को चूस रही थी,





रानी (सविता के होंठ चूसते, चूचियाँ दबाते): सासू माँ... देखो... आपकी चूचियाँ... कितनी मोटी... लंड को अपने में समा रही हैं... आह... कितना गरम लंड है... आपकी चूचियों के बीच... ओह... मैं दबाती हूँ...

सविता (आह भरते, रानी के होंठ चूसते): आह... बहू... तेरे हाथ... माँ की चूचियों पर... ओह... कितने गरम... पीयूष... बेटा... चोद... माँ की चूचियाँ... लंड से जैसे चूत चोदता है ... आह... रानी... तेरी जीभ घुसा... माँ के मुँह में... चूस... और चूस...

पीयूष (धक्के लगाते, लंड चूचियों में घिसते): आह... माँ... तेरी चूचियाँ... कितनी नरम... लंड को दबा रही हैं... ओह... रानी... दबाओ... माँ की चूचियाँ... और जोर से... देखो... लंड बाहर आ रहा है... चाट लो... माँ की चूचियों से निकलकर...

रानी ने वैसा ही किया और झुककर लंड का सुपारा चाटा – चूचियों के बीच से। सविता की चूचियाँ लार से चमक रही थीं, रस से लथपथ। रानी की जीभ कभी लंड तो कभी चूचियों के बीच से चाट रही थीं। पीयूष की सिसकियाँ तेज़ हो गईं।

कुछ देर बाद पीयूष ने सविता की चूचियों से लंड निकाला। रानी बिस्तर पर लेट गई, टांगें फैलाईं।

रानी: आह मम्मी आओ न मेरी चूत चाटो आह बहुत देर से तड़प रही है। आओ मेरी रंडी मम्मी चाटो अपनी बहू की चूत।

सविता: आह बहू तूने मेरे मन की बात कह दी आज तेरी चूत को खा जाऊंगी।

सविता उसके ऊपर झुकी, चूत पर जीभ फेरी – धीरे-धीरे, होंठ चूसते हुए। रानी की आह निकली। पीयूष सविता के पीछे आया, अपना लंड सविता की चूत पर रगड़ने लगा,

सविता रानी की चूत में ही सिसकने लगी,

रानी: ओह जी क्यों तड़पा रहे हो मम्मी को घुसा दो न।

पीयूष ने ये सुनकर वैसा ही किया और लंड अपनी मां की चूत में घुसा दिया। सविता की कमर अकड़ गई, लेकिन वो रानी की चूत चाटती रही।

सविता (रानी की चूत चाटते, पीयूष से): आह... बेटा... तेरी माँ की चूत... भर दी... ओह... रानी... बहू... तेरी चूत... कितनी गीली कितनी स्वाद है आराम से लेट ... माँ चाट रही है... रस पी रही है... आह... पीयूष... जोर से... माँ को चोद... बहू की चूत चाटते हुए...

पीयूष सविता की कमर थाम कर धक्के लगाने लगा,





रानी अपनी सास के सिर को सहलाते हुए उसकी जीभ की हरकतों से मचल रही थी,

रानी (सिसकते हुए , सविता के बाल पकड़कर): मम्मी जी ... जीभ... अंदर... ओह... कितनी गरम... ओह जी ओह... देखो... सासू माँ मेरी चूत चाट रही हैं... आप... माँ को चोदो... जोर से... आह... मम्मी... चाटो... बहू की चूत... जैसे रंडी की चाटते हैं आह मम्मी जी।

पीयूष (धक्के लगाते): आह... माँ... तेरी चूत... कितनी कसी... ओह... रानी... देख... माँ तेरी चूत चाट रही है... जैसे प्यासी कुतिया दूध चाटती है... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ... चोदूँगा... चटवाऊँगा... रोज...

सविता की जीभ रानी की चूत में घूम रही थी, क्लिट को चूस रही थी । पीयूष के धक्कों से सविता का बदन हिल रहा था, जिससे उसकी जीभ और तेज़ चल रही थी।रानी का पूरा बदन उसकी सास की हरकतों से मचल रही थी, उसकी कमर बार बार घूम रही थी वो अपने चरम सुख की ओर बढ़ रही थी और क्यों न बढ़े उसकी सास उसकी चूत चाट रही थी, उसकी पति अपनी मां को चोद रहा था ये सब सोचते हुए रानी झड़ी – और रस सविता के मुँह में बहा दिया। सविता ने भी चटकारे लेते हुए सब चाटा, इधर पीयूष ने अपनी मां की चूत से लंड निकाल लिया तो सविता भी उसके सामने से हट गई

सविता के हटते ही पीयूष बिस्तर पर चढ़ कर आगे आया अपनी पत्नी की टांगों के बीच, रानी लेटे हुए हाफ रही थी, पीयूष ने उसकी दोनों टांगों को फैलाया और अपना कड़क लंड रानी की चूत पर घिसने लगा रानी एक बार फिर से मचलने लगी।

रानी: ओह आह हां जी घुसा दो न अपना मोटा लंड मेरी चूत में मत तड़पाओ,

पियूष ने अपने पत्नी की बात मानी और रानी की चूत में लंड घुसाया। जिससे रानी के मुंह से आह निकल गई, वहीं सविता भी रानी के बदन के ऊपर चढ़ कर रानी के मुँह पर बैठ गई – चूत रानी के होंठों पर टिका दी। रानी ने जीभ निकाली, और तुरंत सविता की चूत चाटने लगी। नीचे से पीयूष धक्के लगाने लगा।





सविता (रानी के मुँह पर रगड़ते): आह... बहू... तेरी जीभ... मम्मी की चूत में... ओह... चाट... पूरा रस पी... पीयूष... बेटा... चोद अपनी पत्नी को... माँ की चूत चटवाते हुए... चोद अपनी पत्नी को आह और तेज धक्के लगा।

पीयूष: आह... रानी... तेरी चूत... कितनी कसी हुई... ओह... मम्मी... देखो... कैसे तुम्हारी बहू तुम्हारी चूत चाट रही है... आह रानी चूस लो मम्मी की चूत का सारा रस... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ...हो तुम दोनों आह आह आह।

पीयूष रानी की चूत में धक्के लगाते हुए बोला, सविता हाथ आगे कर रानी की चूचियों को मसल रही थी और पीयूष ने एक हाथ से अपनी मां के चेहरे को पकड़ लिया और अपनी ओर खींच कर उसके होंठों को चूसने लगा, तीनों आपस में जुड़े हुए थे, पीयूष का लंड रानी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, रानी की जीभ सविता की चूत में चल रही थी वहीं सविता और पियूष एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे,

कुछ देर बाद ही सविता रानी के मुंह पर कांप रही थी और अपने चरमसुख को महसूस कर रही थी उसकी चूत रानी के मुंह में अपना रस छोड़ रही थी जिसे रानी शरबत की तरह गटक रही थी, सविता झड़ने लगी और झड़ने के बाद रानी के मुंह से हटकर एक ओर गिर गई, पीयूष ने रानी को चोदना जारी रखा, रानी लगातार आहें भर रही थी,

सविता अपनी सांसों को संभालते हुए उठी और अपने बेटे और बहू के बगल में बैठ गई, उसे कुछ सुझा तो उसने अपनी दो उंगलियों को अपने मुंह में घुसा कर गीला किया और फिर रानी के चूत के नीचे की ओर ले गई जहां पीयूष का लंड अंदर बाहर हो रहा था और फिर थोड़ा नीचे लेजाकर वो रानी के गांड के छेद को अपनी उंगली से छेड़ने लगी,रानी मचलने लगी।

कुछ पल अपनी उंगली को रानी के गांड के छेद पर घुमाने के बाद उसने एक उंगली रानी की गांड में घुसा दी और रानी के मुंह से एक आह निकल गई, चूत में पति का लंड और गांड में सास की उंगली पाकर वो गन गना उठी, एक उंगली के अच्छे से घुसते ही सविता ने दूसरी उंगली भी उसकी गांड में सरका दी और अंदर बाहर करने लगी, रानी भी मजे से पागल होने लगी उसे दोहरी चुदाई का मज़ा जो मिल रहा था,

रानी: ओह मम्मी जी ओह आह आह आह आह मज़ा आ रहा है ओह जी चोदो और तेज,

इसी बीच सविता ने दूसरे हाथ की उंगलियों को भी मुंह में घुसा कर अच्छे से गीला किया और फिर कुछ पल बाद ही पीयूष की भी एक तेज सिसकी निकली, क्योंकि उसकी मां ने अचानक से एक उंगली पीछे से उसकी गांड में घुसा दी,

पीयूष: ओह आह आह आह मां ओह ये क्या आह,

पहली बार पीयूष अपनी मां की उंगली को अपनी गांड में महसूस कर उत्तेजना से भर गया, सविता ने रानी की तरह ही पीयूष की गांड में भी दो उंगलियों को घुसा दिया और अपना हाथ आगे पीछे करने लगी,

सविता अब एक साथ अपनी बहू और बेटे की गांड से खेल रही थी और दोनों पर ही इसका बहुत असर हो रहा था, पीयूष तो और तेजी से आहें भरते हुए रानी को चोदने लगा वहीं रानी का भी पूरा बदन अकड़ रहा था, दोनों के मुंह से ही अभी बस सिर्फ आहें और सिसकियां निकल रही थी,

सविता: आह आह आह मेरे बच्चों ओह ऐसे ही करते रहो एक दूसरे के साथ तुम्हारी मम्मी तुम्हारी गांड से खेल रही है,मज़ा आ रहा है न दोनों को,

सविता को इसका जवाब जल्दी ही मिला जब रानी और पीयूष एक साथ झड़ने लगे, रानी की कमर ऊपर उठ गई तो पीयूष ने गुर्राते हुए कुछ धक्के लगाए और अपना रस रानी की चूत में भरने लगा और एक के बाद एक धक्के लगा कर पूरा रस उसकी चूत में उड़ेल दिया। दोनों के झड़ते ही सविता ने अपनी उंगलियां दोनों की गांड से निकाल ली और फिर जैसे ही पीयूष ने अपना लंड रानी की चूत से निकाला सविता उसे अपने मुंह में भर कर चाट कर साफ करने लगी।

दूसरी ओर शहर के एक छोटे लेकिन भीड़भाड़ वाले रेस्टोरेंट में महिपाल, नीलेश और शैलेश एक कोने की टेबल पर बैठे थे। सामने प्लेट में गरमागरम परांठे, दाल, सब्जी और दही। लेकिन तीनों का ध्यान खाने से ज्यादा बातों पर था। बाहर धूप तेज थी, लेकिन अंदर एसी की ठंडक और बातों का जोश दोनों थे।

शैलेश ने परांठा तोड़ा, मुंह में डाला, फिर महिपाल की ओर देखा।

शैलेश (मुँह में परांठा रखते हुए): महिपाल भाई साहब... आज का काम तो हो गया। हस्ताक्षर, फाइल जमा... अब बस इंतजार। क्या लगता है... कितने दिन में परमिशन मिल जाएगी?

महिपाल ने चम्मच से दाल उठाई, मुंह में डाली। वो थोड़ा सोच में पड़ गया।

महिपाल (धीरे से, लेकिन मुस्कुराते): शैलेश... सच कहूँ तो... अफसरों का मूड है। लेकिन हमने जो कागजात तैयार किए... सब सही हैं। जमीन हमारी है, प्रोजेक्ट अच्छा है। लगता है... दो-तीन हफ्ते में क्लियर हो जाएगा। बस... थोड़ा इन लोगों के पीछे पड़ना पड़ेगा।

नीलेश ने दही का कटोरा अपनी तरफ खींचा, चम्मच से खाया।

नीलेश (हँसते हुए): वो तो हम करेंगे भाई साहब। जबतक काम नहीं हो जाता सालों की गांड के पीछे पड़े रहेंगे।

शैलेश: वैसे सालों की गांड है तो नहीं पीछे पड़ने लायक पर कोई नहीं काम है अपना।

इस पर तीनों हंसने लगे,

महिपाल: अरे शैलेश भाई तुम भी न अलग ही बात करते हो।

शैलेश: अरे सही तो कह रहा हूं गांड के पीछे पड़ना ही है तो गांड भी वैसी होनी चाहिए कि देखने और पीछे लगने में मज़ा आए।

इसी बीच महिपाल के फोन पर व्हाट्स ऐप मैसेज आता है तो महिपाल फोन उठा कर देखने वाला ही होता है कि शैलेश उसे कहता है: अरे भाई साहब तुम्हारे पास जमीन के और सारे कागजों के फोटो तो हैं न?

महिपाल: हां सब के हैं। अभी जमा करने से पहले ही खींचे थे।

शैलेश: मुझे भेज दो कोई जान पहचान निकालता हूं अगर निकल गई तो अपना काम यूं हो जाएगा।

महिपाल: अभी भेजता हूं,

महिपाल तुरंत शैलेश को सारे फोटो भेज देता है। उसके बाद जो मैसेज आया था उसे देखता है वो पीयूष का था पहले लिखा था पापा इसे अकेले में खोलना और उसके साथ एक वीडियो था। महिपाल तुरंत सतर्क हो जाता है और दोनों से कहता है: मैं हाथ धो कर आता हूं, और फिर अकेले में आकर वो वीडियो खोल कर देखता है तो उसकी आँखें चौड़ी हो जाती हैं





वो देखता है वीडियो में उसकी बहू और पत्नी एक दूसरे के बगल में बिल्कुल नंगी होकर लेटी हैं दोनों ने अपनी टांगों को पीछे की ओर मोड़ रखा है जिससे उनकी गांड और चूतड़ पूरी तरह खुले हुए दिखाई दे रहे हैं उसकी बहू की गांड में बेटे का लंड है जिसे वो एक हाथ से पकड़ कर निकालता है क्योंकि दूसरे हाथ से उसने फोन पकड़ रखा था और वीडियो बना रहा था, वो रानी की गांड से लंड निकालता है और फिर सविता की गांड के सामने आता है और अपना लंड सविता की गांड के छेद पर रखता है और फिर अंदर घुसा देता है, महिपाल को अपनी पत्नी की गांड में अपने बेटे का लंड घुसता हुआ साफ दिखता है ये देख तो उसके बदन में भी सिहरन होने लगती है और उसका लंड कड़क होने लगता है, इतने में पीछे से उसे नीलेश बुलाते हैं तो वो फोन को बंद करके तुरंत जेब में रख लेता है और उनके पास चला जाता है।

खाने के बाद तीनों बापिस दफ्तर में जाकर फाइल जमा कराते हैं वहीं महिपाल के मन में तो वही घूम रहा था वो सोचता है कि उसका परिवार कितना अलग हो गया है इन लोगों से, बताओ ये लोग सोच भी नहीं सकते कि घर पर मेरा बेटा अपनी पत्नी और मां की गांड मार रहा होगा, उसका मन अब काम से हटकर कामसुख पर लग रहा था,

फाइल जमा करा के वो लोग बाहर निकल ही रहे थे कि एक औरत ने उन्हें रोका,

औरत: भाई साहब आपके पास पेन होगा मुझे फॉर्म पर साइन करने हैं

नीलेश: हां हां लीजिए ना।

औरत: धन्यवाद बस 5 मिनिट रुकिए अभी देती हूं।

औरत पेन लेकर थोड़ा आगे जाकर खड़ी हो कर फार्म भरने लगती है और वो लोग वहीं खड़े होकर बातें करने लगते हैं, इसी बीच उस औरत का पल्लू उसके कंधे से सरक जाता है और तीनों की नज़रें उसके ब्लाउज़ में बंद बड़ी बड़ी चूचियों और उसकी गोरी कमर पर ठहर जाती है





औरत जल्दी से ही अपने पल्लू को ठीक करती है और तीनों बापिस अपनी नज़र हटाते हैं और एक दूसरे को देखते हैं और मुस्कुराते हैं

शैलेश: हाय क्या नजारा है इसने तो मेरा पेन खड़ा कर दिया।

नीलेश: सही में यार।

महिपाल भी औरत के बदन को देख कर थोड़ा गरम हुआ था पर वो थोड़ा झिझकते हुए बोला: अरे यार आप लोग भी न क्या बोल रहे हो।

शैलेश: अरे महिपाल भाई साहब काहे इतना झिझक रहे हो अच्छा खुद ही बताओ तुम्हें नज़ारा पसंद नहीं आया?

महिपाल: अरे ऐसी बात नहीं है

शैलेश: अरे महिपाल भाई अब हम लोग दोस्त भी हैं और पार्टनर भी तो अब सब झिझक भूल जाओ, अब आपस में ही एक दूसरे के सामने खुल कर नहीं बोलेंगे तो कब बोलेंगे।

नीलेश: और क्या बिल्कुल सही कहा,

महिपाल को खुलने की बात सुनकर एक झटका सा लगा वो सोचने लगा ये लोग सही बोल रहे हैं ये ही मौका खुलने का, अब मेरा जीवन जितना खुल चुका है उतना ये लोग न खुल सकें तो न सही पर इन लोगों के साथ भी ऐसी मस्त तो कर ही सकता हूं। इतने में ही वो औरत आई और नीलेश को पेन देकर चली गई।

महिपाल: वैसे इसकी गांड के पीछे लगना पड़ता तो मज़ा आता,

महिपाल ने धीरे से बोला तो वो दोनों भी हंसने लगे,

शैलेश: ये हुई न बात महिपाल भाई साहब, अब खुल कर मन की बात कही है तुमने।

शैलेश ने आगे चलते हुए दफ्तर से बाहर आते हुए कहा, बाकी दोनों भी उसके बगल में चल रहे थे।

महिपाल: अब तुमने दोस्त मान लिया है तो दोस्तों के साथ तो खुलना ही पड़ेगा ना।

नीलेश: बिल्कुल, दोस्ती का पहला नियम तो यही कहता है।

महिपाल: अच्छा भाई साहब तो दोस्ती के और कौन से नियम हैं?

नीलेश: दोस्त हर मजा साथ में लेते हैं चाहे वो शराब का हो या शबाब का।

शैलेश: तो फिर आज करें फिर प्रोग्राम नई दोस्ती के नाम?

महिपाल: कैसा प्रोग्राम?

शैलेश: अरे समझ जाओ भाई साहब, शराब का।

नीलेश: कर सकते हैं क्यों महिपाल भाई क्या कहते हो ?

महिपाल: हां बिल्कुल पर शबाब का क्या?

शैलेश: अरे महिपाल भाई तो पूरे जोश में हैं, वैसे शराब का पहले बनाते हैं शबाब का भी मौका मिला तो जल्दी ही करेंगे।

महिपाल: ये भी ठीक है

नीलेश: शैलेश घुमाओ गाड़ी फिर ठेके की तरफ।

शैलेश: नेकी और पूछ पूछ। वैसे बैठेंगे कहां?

नीलेश: कहीं भी बैठ जाएंगे जगह की कमी थोड़ी ही है।

महिपाल: पिछली बार की तरह करते हैं आप लोग आ जाओ हमारे घर।

नीलेश: अरे पिछली बार भी तुम्हारे यहां ही बैठे थे इस बार सेवा का मौका हमें दो।

महिपाल: नहीं भाई साहब दोस्ती की शुरुआत तो मेरे यहां से ही होगी, आगे से तुम जैसा चाहो वैसे कर लिया करेंगे।

शैलेश: चलो ठीक है महिपाल भाई तुम्हारा घर हो या हमारा बात तो एक ही है।

महिपाल: वैसे शबाब का क्या करना है? तुम लोगों को शराब के बाद शबाब जरूरी लगता है।

नीलेश: हां भाई साहब नशे के बाद बिना चुदाई के नहीं रहा जाता।

शैलेश: नशे का असली मज़ा तो तभी आता है।

महिपाल: तो पिछली बार की तरह ही करते हैं न आप लोग भाभियों को लेकर आ जाना।

नीलेश: वो सब तो ठीक है पर फिर बच्चे? उनके सामने ये सब करना अच्छा नहीं लगता ना।

महिपाल: अरे कुछ नहीं होगा बच्चे नीचे सो जाएंगे हम लोग ऊपर छत पर अपना प्रोग्राम करेंगे। फिर आगे के प्रोग्राम के लिए कमरों में चले जाएंगे।

नीलेश: चलो ठीक है ऐसा ही करते हैं पहले अपनी अपनी पत्नियों को भी तो मनाना पड़ेगा।

तीनों बातें करते हुए गाड़ी में आगे बढ़ जाते हैं, आगे क्या क्या करना ह उस बारे में सोचते हुए।

इधर चोदम पुर में शाम की चाय चल रही थी, कर्मा, सभ्या और अंजली कमरे से बाहर निकल चुके थे और सबके साथ बैठ कर चाय पी रहे थे, अंजली को थोड़ी शर्म और झिझक हो रही थी क्योंकि अभी वो अंदर चुदाई कर रही थी और ऐसे अब सब के सामने बैठी थी, हालांकि सब कुछ बिल्कुल साधारण लग रहा था आपस में बातें, नौकझोंक ये सब देख उसे बहुत अच्छा लग रहा था,

किरन: भाभी बोर तो नहीं हो रही ना?

किरन ने अंजली से पूछा, तो अंजली थोड़ी शर्मा गई और बोली: अभी से भाभी?

पल्ली: अरे भाभी हो तो भाभी ही बोलेंगे न भाभी।

शालू: अरे बच्चों क्यों परेशान कर रहे हो उसे? इतनी प्यारी बच्ची है।

किरन: बुआ बड़ा प्यार आ रहा अपनी बहू पर।

शालू: तुम लोग पिटोगे अभी।

अंजली: अरे कोई बात नहीं मौसी बुलाने दो, अच्छा लगता है।

ये कह कर वो शर्मा गई तो सब हंसने लगे।

पल्ली: चलो न भाभी हमारे साथ थोड़ा घूम कर आते हैं गांव में।

किरन: हां और बहुत सी बातें भी करनी हैं तुमसे।

सागर: अरे हम लोगों को भी बातें करनी थी भाभी से।

अनुज: और क्या तुम लोग ही क्यों करेंगे।

पल्ली: ननद पहले देवर बाद में।

दोनों अंजली को लेकर चली गईं। बाकी घर में सब अपने काम में लग गए।



जारी रहेगी
 
काम शुरू होने वाला है
 
शालू: तुम लोग पिटोगे अभी।है

अंजली: अरे कोई बात नहीं मौसी बुलाने दो, अच्छा लगता है।

ये कह कर वो शर्मा गई तो सब हंसने लगे।

पल्ली: चलो न भाभी हमारे साथ थोड़ा घूम कर आते हैं गांव में।

किरन: हां और बहुत सी बातें भी करनी हैं तुमसे।

सागर: अरे हम लोगों को भी बातें करनी थी भाभी से।

अनुज: और क्या तुम लोग ही क्यों करेंगे।

पल्ली: ननद पहले देवर बाद में।

दोनों अंजली को लेकर चली गईं। बाकी घर में सब अपने काम में लग गए।


अपडेट 257


अंजली को किरन और पल्ली ने गांव में शाम तक घुमाया और फिर कर्मा उसे घर छोड़ आया, जब तक कर्मा बापिस पहुंचा तभी उसके पापा और मौसा भी आ गए, नीलेश ने फिर घर पर रात के प्रोग्राम के बारे में बताया तो वहीं सभ्या और कर्मा ने भी उनके साथ दिन में अंजली और दोनों के बीच जो हुआ उसे सांझा किया,

वहीं महिपाल भी अपने घर में आज रात के प्रोग्राम के बारे में बता रहा था अंजली और रानी रसोई में थी,

महिपाल: खाने वाने का देख लेना तुम कोई कमी नहीं रहनी चाहिए,

सविता: अरे उसकी चिंता मत करो तुम।

सविता कुछ सोचते हुए बोली,

पीयूष: पापा मैं भी बैठूं आज तुम लोगो के साथ?

महिपाल: तू वैसे मुझे तो कोई परेशानी नहीं है उन लोगों को अजीब न लगे बस।

सविता: नहीं लगेगा वो भी खुले विचारों के लोग हैं।

पीयूष: हां कर्मा ने भी बताया है उनके बारे में और पता है उसके पापा ने तो नीतू है न उसकी मम्मी को भी चोदा है।

महिपाल: सच में नीतू की मम्मी को, तुझे कैसे पता?

हैरान होते हुए महिपाल बोला,

पीयूष: मुझे कर्मा ने खुद बताया था और तो और फोटो तक दिखाया था,

महिपाल: तुझे कर्मा ने बताया मतलब उसे पता है कि उसके पापा का नीतू की मम्मी क्या नाम है उनका हां रज्जो से चक्कर है और उसे कोई परेशानी नहीं है?

सविता दोनों की बात ध्यान से सुन रही थी हालांकि वो उन दोनों से ज़्यादा जानती थी इस बारे में क्योंकि सभ्या ने खुद उसे बताया था पर इतना सब होने के बाद भी न जाने क्यों वो अपने और उनके बीच जो हुआ था उसे बताने की पहल नहीं कर पाती थी इसीलिए चुप ही रहना उसने उचित समझा।

पीयूष: अरे पापा वो तो कह रहा था कि उसकी मां को भी पता होगा इस बारे में क्योंकि उसके मां पापा आपस में कोई बात नहीं छुपाते।

महिपाल: सही है यार कमाल का परिवार है, वैसे देखते हैं क्या पता आज के प्रोग्राम में कुछ खुल कर और राज सामने आएँ,

सविता: हां हो सकता है,

इतने में पीछे से अंजली की आवाज़ आई: क्या हो सकता है मम्मी?

इसने चाय की ट्रे बीच में रखते हुए बोला।

सविता: कुछ कुछ नहीं बेटा, वो तेरे पापा कह रहे थे कि आज खाने में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए कर्मा के घर वालों के लिए।

अंजली: अरे उसकी तैयारी मैने और भाभी ने कर दी है तुम लोग चिंता मत करो और मजे से चाय पियो,

अंजली भी मन ही मन सोच रही थी आज ही उसने कर्मा और उसकी मां के साथ मिलकर चुदाई की और कुछ ही घंटों बाद फिर से वो सामने होंगी, कहीं कुछ अजीब तो नहीं लगेगा।

खैर समय बीता और सभ्या, नीलेश, शैलेश और शालू निकल गए गैंदापुर के लिए, और कुछ देर में ही वो लोग महिपाल के घर के सामने थे जहां महिपाल ने उन सबका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया, और उन्हें अंदर ले गया, शुरुआती मेल मिलाप के बाद मर्दों की टोली छत पर पहुंच गई अपने प्रोग्राम के लिए वहीं औरतें नीचे रह गईं, नाश्ते वगैरा की तैयारी चल रही थी, रानी और अंजली रसोई में व्यस्त थी तो वहीं रसोई के बाहर तीनों सभ्या, शालू और सविता बैठ कर बातें कर रही थीं।

सभ्या: चलो भाई इन लोगों का तो प्रोग्राम शुरू भी हो गया,

सविता: पता नहीं इन मर्दों को क्या मजा आता है इस दारू में इनका बस चले तो रोज लेकर बैठ जाएं।

शालू: सही कह रही हो जीजी कितना भी मना करो मानते भी नहीं हैं,

सभ्या: हर बार बस इस कर लेने दो यही सुनने को मिलता है।

रानी: चाची मैं तो कहती हूं तुम लोग भी ऊपर ही बैठो इन लोगों के साथ तभी थोड़ा सोच समझ कर पीएंगे नहीं तो इनका प्रोग्राम चलता रहेगा,

अंजली: सही में भाभी सही कह रही हैं आप लोग भी ऊपर ही बैठो मैं नाश्ता वगैरा ऊपर ही पहुंचाती हूं, आप लोग भी अपना प्रोग्राम करना।

शालू: और क्या ये भी सही है, दारू नहीं पी सकते बाकी हम भी प्रोग्राम कर सकते हैं,

अंजली: मौसी चाय पकोड़े का नशा तो कर ही सकते हो।

अंजली ने हंसते हुए कहा तो सब हंसने लगे।

सभ्या: चलो भाई आज हमारा प्रोग्राम भी हो ही जाए,

सविता: चलो चटाई ले चलती हूं मैं आराम से बैठेंगे। अंजली नाश्ता वगैरह ले आना हमारे लिए भी और उनके लिए भी।

अंजली: तुम लोग पहुंचो मम्मी मैं ले आऊंगी।

जब गैंदापुर में प्रोग्राम शुरू हो चुका था तो चोदम पुर कहां पीछे रहने वाला था बस यहां दारू का प्रोग्राम नहीं हो रहा था, किसी और तरीके का चल रहा था,





सरजू और बिरजू अभी कर्मा के यहां थे और अभी बिरजू दीवान पर पैर लटका कर बैठा हुआ था तो वहीं ममता अपनी साड़ी को ऊपर उठाकर उसका लंड चूत में लेकर उछल रही थी, ममता के बदन पर सिर्फ साड़ी थी ऊपर से बिल्कुल नंगी थी, बिरजू वहीं उनके बगल में कच्छा पहने खड़ा था और ममता की चूचियों और पेट को सहला रहा था,

बिरजू: ओह चाची बड़ी मुलायम हो तुम,

ममता: और तू बहुत कड़क है रे बिरजू,

ममता ने हाथ बढ़ाकर बिरजू के लंड को कच्छे के ऊपर से ही पकड़ते हुए कहा, और धीरे धीरे सहलाने लगी,

बिरजू: आह चाची ओह यहम्मम।

बिरजू सिसकते हुए झुका और अपने होंठों को ममता के होंठों से मिला दिया और चूसने लगा, वहीं सरजू नीचे से लगातार धक्के लगाकर ममता को चोद रहा था ममता भी बिना लय तोड़े उसके लंड पर उछल रही थी,

सरजू: आह चाची ऐसी मखमली और गरम चूत का राज क्या है आह आह लगता है लोड़ा पिघल जाएगा।

ममता कुछ बोल नहीं सकी क्योंकि उसका मुंह तो बिरजू ने बंद कर रखा था, कुछ पल बाद बिरजू ने उसके होंठों को छोड़ा भी तो उसे झुका कर अपना लंड कच्छे से निकाला और उसके मुंह में घुसा दिया जिसे ममता चूसने लगी, दोनों भाई मिलकर उसके कामुक बदन का मज़ा ले रहे थे।

वहीं उनके घर पर भी कुछ ऐसा ही प्रोग्राम चल रहा था, जहां एक कमरे में कर्मा की मामी गुंजन थी जिसके कामुक भरे बदन का लुत्फ दीनू उठा रहा था,





गुंजन: आह जीजा ऐसी क्या आग भरी है कम से कम खटिया तक तो चलते,

गुंजन खटिया के नीचे जमीन पर थी जहां दीनू उसे दबोचे हुए था और उसके कामुक बदन को अपने हाथों से मसल रहा था, एक हाथ गुंजन की कमर को मसल रहा था तो दूसरा उसकी चूचियों को, वहीं दीनू के होंठ गुंजन के गले और पीठ को चाट रहे थे चूम रहे थे, गुंजन के बदन पर सिर्फ साड़ी थी। वो भी आधी खुली पड़ी थी वहीं दीनू के बदन पर एक अंगोछा था

दीनू: ओह सलहज तुम मिल जाओ तो हर जगह ही बिस्तर है खटिया की क्या ज़रूरत है आह उम्मम।

गुंजन: आह कभी अपनी बहनिया को भी ऐसे ही लपेटे हो जीजा कि सलहज पर ही हाथ आजमा रहे हो।

गुंजन ने उसे छेड़ते हुए कहा,

दीनू: आह बहन अगर मौका दे तो उसे भी उठने ना दें गुंजन, आह किसकी याद दिला दी,

दीनू ने गुंजन की चूचियों को मसलते हुए कहा,

गुंजन: पूरे जुगाड़ में हो जीजा बहनचोद बनने के,

दीनू: बिल्कुल गुंजन रानी, ऐसी बहन नहीं चोदी तो हम काहे के भैया,

गुंजन: तो बुला लो न जीजा, रण्डी के भोसड़े में अपना हाथ से पकड़ कर डालेंगे तुम्हारा लौड़ा,

दीनू: हाय गुंजन रानी क्या बात कह दी ऐसा हो जाए तो मज़ा ही आ जायेगा।

गुंजन: उसका मज़ा बाद में लेना जीजा पहले सलहज की चूत का स्वाद तो ले लो देखो कबसे गीली होकर बह रही है,

गुंजन उठी और अपनी साड़ी खोल कर बिल्कुल नंगी होकर टांगे फैला कर खाट पर लेट गई, और अपनी गीली चूत को दिखाने लगी। जिसे देखते ही दीनू ने भी देर नहीं की और अपना मुंह उसकी टांगों के बीच घुसा दिया।

उन्हीं के घर के दूसरे कमरे में भी कुछ ऐसा ही कामुक नजारा था





जहां नीतू और उसकी मां रज्जो एक दूसरे के होंठों को चूसने में व्यस्त थी तो वहीं कर्मा का जिगड़ी यार जग्गू नीचे बैठ कर नीतू के पेट को चाट रहा था उसके हाथ नीतू के चूतड़ों को मसल रहे थे जो कि एक पतली सी पैंटी में कैद थे, नीतू के बदन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी थी वहीं उसकी मां रज्जो के बदन पर भी ब्रा थी और उसकी साड़ी को नीचे लटक रहीं थी, रज्जो अपनी बेटी के रसीले होंठों को लगातार चूस रही थी, साथ ही जग्गू की पीठ और कंधों को सहला रही थी,

तीनों के ही मुंह एक दूसरे के साथ व्यस्त थे और सिर्फ हलकी घुट्टी हुई आहों की आवाज आ रही थी, कुछ पल बाद जग्गू ने अपना मुंह नीतू के पेट से हटाया और घुमा कर रज्जो के भरे मांसल पेट को चाटने लगा चूसने लगा तो रज्जो के होंठ नीतू के होंठों पर और का गए, जग्गू ने अपना अगला निशाना रज्जो की नाभि को बनाया जिससे रज्जो पूरी तरह मचलने लगी। और फिर उसने जग्गू को बाल पकड़ कर ऊपर उठाया और अपने होंठ नीतू के होंठों से हटा कर उसके होंठों पर रख दिए, कुछ पल के चुंबन के बाद ही जग्गू ने अपने होठों को रज्जो के होंठों से हटा दिया, और बापिस मा बेटी के होंठों को मिला दिया। और खुद रज्जो के पीछे आकर अपना लंड साड़ी के ऊपर से ही उसके चूतड़ों में घिसने लगा।





जग्गू: ओह चाची अपनी चूचियों के दर्शन तो कराओ,

ये कहते हुए उसने रज्जो की ब्रा पीछे से खोल दी जिसे नीतू ने अगले ही पल उसके बदन से अलग कर दिया, और अपनी मां की नंगी और मोटी मोटी चूचियों को मसलने लगी, वहीं जग्गू भी पीछे से उसके पेट और चूतड़ों को मसल रहा था और मसलते हुए उसने रज्जो की साड़ी भी खोल दी जिससे रज्जो अब पूरी तरह नंगी हो गई, जग्गू ने भी अपना कच्छा उतार दिया और अपने नंगे लंड को रज्जो के मोटे चूतड़ों के बीच घुसाने लगा, वहीं नीतू ने भी दोनों को देख कर अपनी ब्रा और पैंटी को उतार फेंका,

जग्गू: चाची अपनी बेटी से चूत चटवाओगी,

रज्जो: आह बेटा चूत चटवाने के लिए तो मैं हमेशा तैयार हूं, अब बेटी चाटे इससे अच्छा और क्या हो सकता है,

नीतू: अरे मम्मी इसमें भी कोई कहने की बात है जिस चूत से निकली हूं उसे नहीं चाटूंगी तो क्या चाटूंगी।

नीतू ने नीचे बैठते हुए कहा और अपनी मम्मी की टांगों के बीच अपना मुंह घुसा दिया, जग्गू भी रज्जो के पीछे बैठ गया और उसके चूतड़ों को फैलाकर उसकी गांड के छेद को चाटने लगा,

रज्जो दोहरे मजे से कराहने लगी,

रज्जो: आह ओह मेरे बच्चों ऐसे ही चाटो मेरी चूत और गांड, आह नीतू घुसा अपनी जीभ अपनी मां की चूत में, इसी चूत से निकली थी तू आह अच्छे से चूस। जग्गू तू भी ऐसे ही चाट अपनी चाची के गांड के गंदे छेद को अच्छे से गीला कर दे फिर अपना मोटा लंड घुसा कर अच्छे से मार मार कर फाड़ दियो मेरी गांड आह।

रज्जो गरम होते हुए बोली,

वहीं जग्गू के घर में रौनक कम नहीं थी, प्रेमा एक खाट पर आगे झुकी हुई थी और हमारा हीरो कर्मा पीछे से दनादन उसकी गांड में लंड पेल रहा था,





प्रेमा जी साड़ी आधी खुली हुई थी और वो बिस्तर पर घुटनों और हाथों पर झुकी थी, साड़ी से पीछे से उठी हुई थी, ब्लाउज खुला हुआ था और दोनों मोटी चूचियां नंगी बाहर लटक रही थी, कर्मा का मोटा लंड प्रेमा की तंग गांड में दनादन अंदर बाहर हो रहा था जिसका असर प्रेमा पर और उसके चेहरे पर आ रहे भावों से पता चल रहा था,

प्रेमा: ओह ओह आह आह आह भैया आह आह गांड फाड़ दी ओह तुमने तो,

कर्मा: ओह भाभी की गांड तो होती ही है देवर के फाड़ने के लिए भाभी, आह तुम्हारी गांड नहीं फाडूंगा तो ओह कैसा देवर।

प्रेमा: आह बिलकुल फाड़ दो लल्ला आह रुको पर कपड़े उतार लेने दो आह नंगी कर के चुदना है आह मुझे,

कर्मा: लंड तो अब नहीं निकलेगा, आह ऐसे ही नंगी कर देता हूं भाभी ओह,

कर्मा ने साड़ी को प्रेमा के बदन से अलग करते हुए कहा, वहीं प्रेमा ने भी ब्लाउज को अपने बाजुओं से निकाल दिया और बिल्कुल नंगी हो गई, कर्मा लगातार उसकी गांड में पीछे से धक्के लगा रहा था, प्रेमा की गांड कर्मा के लंड पर कसी हुई आगे पीछे हो रही थी,

वहीं घर के दूसरे कमरे में भी कुछ ऐसा ही नज़ारा था सागर और अनुज एक साथ थे और मंजू ताई के भरे बदन से खेल रहे थे





तीनों खाट पर थे, अनुज और सागर ने अंगोछे अपनी कमर से लपेट रखे थे ऊपर से दोनों का बदन नंगा था, सागर मंजू के होंठों को शिद्दत से चूस रहा था और साथ ही उसके हाथ मंजू की नंगी चूचियों पर चल रहे थे, मंजू के ब्लाउज को दोनों ने खोल रखा था और उसकी नंगी मोटी चूचियों को बाहर निकाल रखा था, अनुज मंजू के पीछे बैठ उसकी गर्दन को चूमते हुए उसके पेट और चूचियों को मसल रहा था, सागर ने कुछ पल बाद मंजू के होंठों को छोड़ा तो अगले ही पल अनुज उन्हें चूसने लगा, दोनों भाई बारी बारी से उसके होंठों का रसपान कर रहे थे,

कुछ पल बाद दोनों ने मंजू को खाट पर पीठ के बल लिटा दिया और दोनों उसकी एक एक चूची पर टूट पड़े।

मंजू: ओह बच्चों ओह आह ऐसे ही बेटा चूसो अपनी ताई और बुआ की चूचियों को, आह खा जाओ आह खा जाओ अच्छे से।

अनुज उसकी चूचियों को चूसते हुए उसकी साड़ी को खोलने लगा और कुछ देर बाद मुंह हटा कर उसने मंजू ताई के पेटीकोट और साड़ी को खोल कर कमर से नीचे सरका कर उसकी टांगों से निकाल दिया, सागर ने भी मंजू के ब्लाउज को उसके बदन से अलग कर दिया और उसे पूरा नंगा कर दिया, मंजू नंगी होते ही जोश में आई और सागर के लंड को पकड़ कर मुंह में भर लिया और चूसने लगी, वहीं अनुज ने मंजू की टांगों के बीच जगह ली और अपना लंड उसकी गरम चूत में उतार दिया,

अनुज: आह क्या चूत है ताई ओह इतनी गरम,

अनुज उसकी कमर थाम कर धक्के लगाने लगा,

सागर: मुंह भी बहुत गरम है आह बुआ का, बिल्कुल आह रंडियों की तरह चूसती है।

सागर उसके मुंह में धक्के लगाते हुए बोला।

जहां मंजू अनुज और सागर के साथ व्यस्त थी तो उनके पति यानि कर्मा के राजपाल ताऊ भी खाली नहीं थे और अकेले भी नहीं थी, राजपाल ताऊ और कर्मा के नाना एक साथ थे वो भी नीलेश के बाग में जहां नया घर बन रहा था वहीं क्योंकि रात में किसी न किसी को वहां रुकना पड़ता था कि क्योंकि समान के चोरी होने की आशंका रहती थी, पर अभी दोनों का ध्यान सामान पर नहीं था क्योंकि दोनों ही बिल्कुल नंगे थे एक दूसरे के बगल में और अपने आगे घोड़ी बनी हुई दो कच्ची कलियों की गांड मार रहे थे,





नाना का लंड जहां लाडो की कसी हुई गांड में अंदर बाहर हो रहा था वहीं राजपाल का लंड पल्लवी की गरम गांड को अंदर तक भेद रहा था,

राजपाल: ओह आह बाबा कुछ भी कहो जो मज़ा आह गांड मारने में है आह वो किसी में नहीं,

नाना: ओह आह आह बिल्कुल सही कहा, आह बड़े जमाई बाबू, ओह और जब गांड कुंवारी कमसिन लड़की की हो तो ओह और फिर उस पर भी नातिन की हो तो मज़ा कई गुना बढ़ जाता है।

पल्ली: ओह आह कितनी बातें करते हैं आह ताऊजी और नाना, आह आह आह।

लाडो: आह सही में पल्ली, ओह अगर मेरी गांड में लंड आह नहीं होता तो आह मैं तो ओह बोर हो जाती,

इस पर दोनों हंसने लगती हैं,

राजपाल: अच्छा बिटिया ताऊ और नाना का मजाक उड़ा रही हो, बाबा जरा सबक सिखाया जाए इन्हें।

नाना: अरे नहीं बाबू बच्चियां हैं अपनी इन्हें क्या सबक सिखाना,

पल्ली: अरे नहीं नाना सिखाओ न मज़ा आयेगा,

राजपाल: तो लो अभी। ये लो आज तुम दोनों की गांड के धागे खोल देंगे,

राजपाल और तेजी से पल्ली की गांड में लंड चलाते हुए बोला, वहीं नाना भी लाडो की गांड तेजी से मारने लगे, नाना यहां लाडो की गांड मार रहे थे तो उनका बेटा यानी जमुना राजन के साथ था राजन और ममता के घर में थे और अभी राजन और जमुना मिल कर जमुना की बेटी किरन को दोनों ओर से घेरे हुए थे,





किरन बिस्तर पर लेटी हुई थी उसकी टांगें फैली हुई थी और टांगों के बीच राजन थे जिसका लंड किरन की कड़ी और गरम चूत में घुसा हुआ था और राजन किरन की टांगों को थाम कर उसकी चूत में धक्के लगा रहे थे वहीं किरन के मुंह में उसके पापा का लंड था जिसे वो पूरी लगन से चूस रही थी, उसके बदन पर सिर्फ समीज थी जिसमें से उसकी चूचियां बाहर झूल रही थी।

राजन: ओह बिटिया कितनी मस्त चूत है तेरी आह आह ओह मज़ा आ गया।

जमुना: बिटिया की चूत होती ही मस्त है जीजा आह ओह चूसती भी कितनी बढ़िया है तू किरन आह आह,

दोनों बातें कर रहे थे वहीं किरन दोनों की सेवा में लगी हुई थी। वो जानती थी आज दोनों मिल कर अच्छी तरह उसे बजाने वाले हैं।

गैंदापुर में भी दारू का प्रोग्राम तो लगभग खत्म हो चुका था, अंजली और रानी नीचे रसोई का काम निपटा रहीं थीं।

रानी: तुम नहीं गई ऊपर अंजली मैं निपटा लेती काम तो,

अंजली: नहीं भाभी वहां सब पी रहे होंगे पापा और सब, मुझे देख कर सब खुल कर पी भी नहीं पाएंगे,

रानी: मैं तो जाऊंगी, मैं भी देखूं क्या क्या होता है,

अंजली: हां तुम जाओ न, मैं वैसे भी थक गई हूं नींद आ रही है।

रानी: हां हां थक ही गई होगी ससुराल जो गई थी आज,

अंजली: भाभी धत्त तुम बहुत खराब हो, इसलिए तुम्हे बताया था कि तुम मुझे चिढ़ाओ।

रानी: अरे मेरी प्यारी ननद को नहीं चिढ़ाऊंगी तो किसे चिढ़ाऊंं, रानी ने उसे गले लगाते हुए कहा तो अंजली भी हंसने लगी और उसे गले लगा लिया,

अंजली: अब जाओ तुम तुम्हें जाना है तो बाकी मैं निपटा कर सो जाऊंगी।

रानी: पक्का?

अंजली: हां भाभी पक्का

तब तक ऊपर चारों मर्दों को अच्छा खासा शुरूर हो रहा था वहीं मर्द और औरतें अब सब साथ बैठ कर बातें कर रहे थे, रानी भी ऊपर पहुंची और एक ओर को बैठ गई, और सबकी बातें सुनने लगी।





सविता: सही में बहन जी मैं नहीं मान सकती भाई साहब ये करते होंगे!

सभ्या: अरे शादी के समय पर तो इनकी बात ही कुछ और थी, मैं कुछ कह तो दूं ये सब कर देते थे,

पीयूष: फिर भी चाची भरे सिनेमा हाल में गाना गाना ये कुछ ज़्यादा फिल्मी नहीं हो गया,

सभ्या: अरे बेटा तब तो बिल्कुल फिल्मी हीरो बनते थे ये।

नीलेश: अरे जानेमन तुम अब भी कह कर देख लो हम तो तुम्हारे लिए अब भी कुछ भी कर देंगे।

सभ्या: लो हो गए न शुरू, अब इनका हीरो बस नशे में बाहर आता है।

नीलेश: अरे नशे में कौन है, हम सच कह रहे हैं मेरी रानी तुम कहो तो अभी भी कुछ कह दो अभी कर के दिखा देंगे।

सब नीलेश और सभ्या की बातों पर हंस रहे थे, रानी को भी बहुत मज़ा आ रहा था पर वो बहू थी इसलिए कुछ बोल नहीं रही थी

शालू: अरे जीजी कुछ करने को कह ही दो न आज अच्छा मौका है,

नीलेश: हां हां कहो जो मन करे कहो,

महिपाल: आज नीलेश भाई पूरे जोश हैं।

शैलेश: अरे महिपाल भाई मर्द हमेशा जोश में ही रहता है, मर्द और घोड़ा कभी बूढ़ा नहीं होता।

महिपाल: अरे क्या बात कही है शैलेश भाई साहब बिल्कुल सही।

शालू: अरे तो सब लोग बातें ही करते रहोगे या कुछ करके भी दिखाओगे।

नीलेश: हम तो तैयार हैं तुम लोग कुछ बोलते ही नहीं।

शालू : सविता जीजी, कुछ बताओ न क्या करवाना है?

सभ्या: अरे मैं क्या बताऊं तू ही देख।

सविता: हां शालू तुम ही कुछ सोचो न,

शालू: अरे बहुरिया तुम ही कुछ सुझा दो,

शालू ने रानी की ओर देख कर कहा तो रानी उसके कान में कुछ बोली,

शालू: अच्छा तो जीजी के लिए मस्त एक बार नाच के दिखाओ हीरो की तरह।

सभ्या: धत्त ये अब अच्छे लगेंगे नाच गाना करते हुए,

पीयूष: क्यों नहीं अच्छे लगेंगे चाची मज़ा आयेगा, करने दो न।

ये लोग बात ही कर रहे थे कि इतने में नीलेश तो खड़े भी हो गए थे और फिर आवाज़ आई: मैं यमला पगला दीवाना हो रब्बा,

और फिर सब खुशी से ताली बजाने लगे,

महिपाल: जे बात,

शैलेश: जिओ भैया।

नीलेश कुछ पल नाचे और फिर रुक गए और बोले: अरे यार हीरोइन के बिना हीरो कैसे नाचे,

और पकड़ कर सभ्या को खींच लिया, सभ्या के खड़े होते ही सब ज़ोर से ताली बजाने लगे, सभ्या खड़े हुए शर्मा रही थी और हंस रही थी वहीं नीलेश पूरे जोश में नाच रहे थे,





सब ताली बजा रहे थे और गाना गा कर नीलेश का पूरा जोश बढ़ा रहे थे, रानी भी पल्लू से मुंह छुपा कर हंस रही थी वहीं सविता भी खूब हंस रही थी,

नीलेश पूरा धर्मेंद्र का जोश लेकर नाच रहे थे और सभ्या के इर्द घूम के उसे छेड़ रहे थे सभ्या भी हंसते हुए सबको देख रही थी, थोड़ी देर बाद नीलेश रुके तो सबने जोर से तालियां पीट कर उनका स्वागत किया,

नीलेश: अरे तालियां वगैरह तो ठीक है पर ये बात गलत है कि हीरो अकेला नाचे और हीरोइन खड़ी रहे, ऐसे वो थोड़ी होता है.

महिपाल: वो क्या भाई साहब?

नीलेश: अरे वो ही जो हीरो हीरोइन करते हैं,

शैलेश: गाना बजाना, नाचना यही तो करते हैं।

नीलेश: अरे नहीं यार।

पीयूष: और क्या करते हैं हीरो हीरोइन?

इतने में रानी के मुंह से निकल गया: रोमांस करते हैं।

और ये बोल कर उसने शर्मा कर मुंह छुपा लिया,

नीलेश: बिल्कुल सही बोली बहू, ये ही ऐसे ही थोड़ी होता है रोमांस,

शालू: अरे अब इस उमर में रोमांस करोगे जीजा?

शैलेश: अरे हमने क्या कहा मर्द और घोड़ा बूढ़ा नहीं होता, भईया शुरू हो जाओ आज दिखाओ कितना रोमांस भरा है तुम्हारे अंदर।

महिपाल: और क्या भाई साहब आज दिखा ही दो,

सभ्या: अरे नहीं नहीं बहुत बन लियो हीरो अब रहने दो।

सभ्या ने बापिस जाते हुए कहा तो नीलेश ने उसका हाथ पकड़ कर बापिस खींच लिया और सभ्या फिल्मों की तरह ही उसकी बाहों में समा गई नीलेश ने उसे खुद से चिपका लिया,

पीयूष: अरे वाह चाचाजी,

शैलेश: ये हुई हीरो वाली बात भईया,

महिपाल: अब हो जाए रोमांस।

सभ्या: अरे क्या कर रहे हो छोड़ो, सब देख रहे हैं।

नीलेश: अरे देख रहे हैं तो देखने दो अपनी हीरोइन को ही तो पकड़ा है, क्यों भाई कुछ गलत है क्या?

शैलेश: नहीं बिल्कुल गलत नहीं है,

नीलेश: और क्या अब अपनी हीरोइन के साथ क्या कहते हैं रोमांस करेंगे,

ये कहते हुए नीलेश सभ्या के बदन को सहलाने लगे, सभ्या उनकी पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी पर छूट नहीं पा रही थी, और फिर अचानक से नीलेश ने अपने होंठ सभ्या के होंठो से मिला दिए और जोश में चूसने लगे, बाकी सब भी हैरान रह गए सभ्या ने भी खुद को पीछे करने की कोशिश की पर नीलेश ने होने नहीं दिया और लगातार उसके होंठों को चूसने लगे कुछ पल बाद सभ्या भी उनका साथ देने लगी,





सब लोग हैरानी से आंखें फाड़े उन्हें देख रहे थे खास कर महिपाल और उसका परिवार, उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कैसे प्रतिक्रिया दें, उत्तेजित तो वो भी हो रहे थे सबको देख कर,

शैलेश: लगे रहो भैया भाभी,

शैलेश ने सीटी मारते हुए बोला

शैलेश के ये बोलने से महिपाल को भी लगा अगर खुल रहे हैं तो अच्छा ही है बाकी नशे में तो वो भी था,

महिपाल: कमाल कर दिया नीलेश भाई साहब,

सविता, रानी और शालू शर्माते हुए मुस्कुरा रही थी,

कुछ देर बाद नीलेश ने होंठों को छोड़ा तो सभ्या और नीलेश को सब देख रहे थे,

नीलेश: अरे ऐसे क्या देख रहे हो,

शैलेश: और क्या सब शादीशुदा हैं यहां पर सब करते हैं भइया,

नीलेश: और क्या, तुम लोग भी करो,

सभ्या: करेंगे सब करेंगे तुम अभी बैठो चल के,

नीलेश: बैठ जाएंगे यार लो बैठ गए,

नीलेश ने बापिस अपनी जगह बैठने को कहा,

शालू: अब किस से और क्या करवाना है।

शैलेश: कुछ भी करवालो पर ये नाच गाना मत करवाना ये नहीं होगा हमसे।

महिपाल: हां भाई हम से भी नहीं।

नीलेश: अरे भाई तुम लोग तो बड़े खराब हो हमसे करवा लिया और खुद मना कर रहे हो।

महिपाल: नीलेश भाई सब तुम्हारी तरह हीरो नहीं बन सकते न।

निलेश: वो तो हम हैं।

शैलेश: फिर क्या करना है अब,

शालू: अब क्या करना है सोना है।

सभ्या: और क्या सोते हैं देर हो गई है।

शैलेश: चलो भाई अगर सोना ही है तो सोते हैं,

सविता: चलो फिर मैं सबके बिस्तर लगवा देती हूं,

नीलेश: अरे भाभी जी, बिस्तर क्या यहीं सो जाएंगे सब चटाई है ही बस तकिए चाहिए़।

महिपाल: अरे नहीं भाई साहब यहां कहां आराम से नीचे सोते।

शैलेश: अरे सही कह रहे हैं भैया, सुहाना मौसम है सब साथ में सोएंगे।

शालू: हां ये ठीक रहेगा, और मजेदार चीज बताऊं औरतें एक साथ सोएंगी और आदमी एक साथ।

नीलेश: अरे यार ये तो गलत बात है।

सभ्या: गलत सही पता नहीं ऐसे ही सोएंगे अब तो।

सबिता: पीयूष रानी तुम लोग एक और बड़ी चटाई और तकिए और पानी वगैरह ले आओ।

रानी: अभी लाई मम्मी जी।

पीयूष और रानी नीचे चले गए,

महिपाल: मैं भी बाथरूम हो आता हूं, थोड़ी समान लाने में बच्चों की मदद भी कर दूंगा।

महिपाल भी नीचे चला जाता है, और नीचे हल्का होकर पीयूष और रानी के पास जाता है जो कपड़े निकाल रहे होते हैं,

महिपाल: निकल गए कपड़े और तकिया वगैरा?

रानी: हां पापाजी,

पीयूष: वो तो सब हो गया पर लगता है आज रात सूखा सोना पड़ेगा।

महिपाल: अरे वही तो यार सब साथ में सो रहे हैं तो सब खराब हो गया, मेरा तो बहुत मन कर रहा है।

रानी: मन तो है पापाजी पर क्या कर सकते हैं,

महिपाल: एक काम करना जब सो जाएं तो हम लोग चुप चाप नीचे आ जाएंगे और एक एक राउंड निपटा कर वापिस जा कर सो जायेंगे।

पीयूष: हां ये हो सकता है।

महिपाल: रानी अपनी मम्मी को बता देना तू ये चुप चाप।

रानी: ठीक है पापाजी।

महिपाल: चलो सब अब ऊपर चलते हैं।

कुछ देर बाद सब ऊपर थे बिस्तर बिछ चुके थे एक तरफ चारों औरतें थी, सभ्या फिर सविता उसके बगल में शालू और फिर रानी, सविता दोनों बहनों के बीच में थीं और बातें कर रही थी लेट कर, इसी तरह मर्द भी दूसरे बिस्तर पर थे, निलेश, शैलेश, महिपाल और पीयूष।

महिपाल: आराम से तो लेटे हो न भाई साहब कोई परेशानी हो तो बताना।

नीलेश: परेशानी तो एक ही है भाई साहब तुम जानते ही हो हमें क्या चाहिए होता है पीने के बाद।

शैलेश: अरे भइया आराम से पीयूष भी यही है।

महिपाल: कोई बात नहीं शैलेश बाबू, लड़का जब बड़ा हो जाए तो दोस्त बन जाता है, खुल कर बात करो।

पीयूष: किस बारे में बात हो रही है वैसे मौसा?

महिपाल: अरे तेरे मौसा और चाचा की परेशानी है कि इन्हें शराब के बाद शबाब की तलब लगती है और आज वो तलब मिट नहीं सकती इसलिए परेशान हैं।

पीयूष: अच्छा वैसे ये तलब तो सबको लगती है चाचाजी, पर क्या कर सकते हैं।

शैलेश: यार ये सबके साथ में सोने वाली बात गलत निकल गई मुंह से।

महिपाल: वहीं तो इसीलिए मैने भी मना किया था, पर अब तो औरतें मानेंगी भी नहीं।

नीलेश: हां अब सोने की कोशिश करो सब और कोई चारा नहीं है।

इधर औरतों की भी बातें जारी थी, और वो भी धीरे धीरे सोने की कोशिश करने लगीं।

रानी आंखें बंद करके सोने का नाटक करने लगी वो सविता से उस बारे में बात नहीं कर पाई थी उसने सोचा जब उठेगी तब हल्के से जगा देगी, नाटक करते हुए उसकी आंख कब लग गई उसे पता ही नहीं चला अचानक से किसी के हिलाने से उसकी आंख खुली तो उसने हल्के से आंख खोल के देखा तो उसका पति था, पीयूष ने उसे तुरंत शांत रहने का इशारा किया और उसे चुपचाप से चलने को कहा, वो भी तुरंत उठ कर पीयूष के पीछे पीछे चल दी, उसने एक नज़र पीछे मूड कर डाली तो सब सो रहे थे, पीयूष और रानी के नीचे जाने के कुछ देर बाद ही महिपाल भी अपनी जगह से उठा और चुपचाप नीचे चला गया, उसके जाने के कुछ पल बाद ही शैलेश की आंख खुली और उसने हाथ बढ़ा कर हल्का सा नीलेश को जगाया, और फुसफुसाया: मैने कहा था न भैया,

नीलेश ने आँखें खोल कर देखा तो सिर्फ वो ही लोग थे

नीलेश: आओ फिर हम क्यों सूखे सोएं,

वो भी उठे और औरतों के बिस्तर के पास पहुंचे जहां अभी सभ्या, सविता और शालू सो रही थी, नीलेश सभ्या की ओर जाकर लेट गए और शैलेश शालू की ओर, नीलेश ने धीरे से सभ्या का चेहरा अपनी ओर मोड़ा और अपने होंठों को उसके होंठों से मिला दिया, सभ्या की आंख भी तुरंत खुल गई और जब उसने नीलेश को सामने देखा तो वो भी तुरंत साथ देने लगी, निलेश भी उसकी कमर और पेट सहलाते हुए उसे चूमने लगे





यही दूसरी ओर शैलेश और शालू का प्रोग्राम भी चल रहा था दोनों के होंठों में कुश्ती हो रंही थी, पर चारों ही इस बात से अनजान थे कि सविता भी उठ गई थी और वो दोनों जोड़ों को देख रही थी और गरम हो रही थी, और उत्तेजना में अपने पेट को अनजाने में ही सहला रही थी, कुछ देर बाद निलेश और सभ्या के होंठ अलग हुए तो सभ्या ने मूड कर देखा और उसकी और सविता की नज़रें मिल गईं, न सविता ने ये जताने की कोशिश की कि वो सो रही थी न सभ्या ने अपनी आँखें हटाई, बल्कि एक मुस्कान उसके होंठों पर फैल गई,

सभ्या: उठ गई बहन जी, कुछ देखा तो नहीं?

सभ्या ने उसकी ओर मुड़कर उसकी आंखों में देखते हुए कहा,

सविता: जो देखना चाहिए था वही देखा बस,

सविता ने भी सभ्या के हाथ को सहलाते हुए कहा, और उसकी तरफ करवट ले ली,

सभ्या: पिछली बार का स्वाद भूली तो नहीं?

सविता: ये भी कोई भूलने की चीज है,

ये कहते हुए सविता ने अपना चेहरा आगे किया और सभ्या ने भी और अगले ही पल दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगी, नीलेश भी अपनी पत्नी और सविता के चुंबन देख कर गरम हो रहे थे और उत्तेजित होकर सभ्या के पेट को सहलाते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगे। वहीं दूसरी ओर से शालू झुक कर सविता की पीठ को चूमने लगी और शैलेश हाथ बढ़ा कर सविता के पेट को सहलाने लगे।





दोनों औरतें पागलों की तरह एक दूसरे के होंठों को चूस रही थी और बाकी सब भी उनके इर्द गिर्द अपने काम में लग गए थे,

शैलेश: आह भाभी बड़ा मन था तुम्हारी गांड और चूचियों को नंगा देखने का पिछली बार तो रह गई अब नहीं छोडूंगा।

शैलेश ने सविता की चूचियों को ब्लाउज़ के ऊपर से मसलते हुए कहा तो सविता की आह सभ्या के मुंह में ही घुट गईं।

नीलेश: अरे सब देख लेना शैलेश भाई, अब कहां जा रही है भाभी, महिपाल भाई लगता है हमारे लिए ही छोड़ कर गए हैं।

शालू ने भी सविता की पीठ से होंठ हटाए और बोली: पहले अपनी पत्नी पर ध्यान दो बहुत दूसरी औरतों को देखते हो,

और शैलेश को पकड़ कर चूमने लगी, शैलेश भी उसका साथ देते हुए उसे चूमते हुए भी सविता के बदन को सहलाने लगे। वहीं नीलेश उठ कर सविता और सभ्य के पीछे आ कर बैठ गए थे और एक एक हाथ से सविता और सभ्या के बदन को मसलने लगे,





कुछ पल बाद सविता और सभ्या के होंठ अलग हुए तो नीलेश ने सविता के होंठों को चूसना शुरू कर दिया, वहीं सभ्या तो सविता के ब्लाउज के हुक खोलने लगी और कुछ पल बाद हो सविता का ब्लाउज खुल चुका था और ब्रा नीचे थी और अगले ही पल सभ्या उन पर टूट पड़ी और उसकी चूचियों को चूसने लगी जबकि नीलेश उसके होंठों को चूस रहे थे, नीलेश के हटते ही शैलेश ने सविता के होंठों पर कब्ज़ा कर लिया और चूसने लगा, एक एक करके चारों उसका स्वाद चख रहे थे,

दूसरी ओर रानी और पीयूष के जाने के बाद जब महिपाल पीछे पीछे नीचे पहुंचा और उसने पीयूष और रानी के कमरे को हल्का सा खोल कर देखा तो पाया उसने जैसा सोचा था वैसा ही नज़ारा था,





अंदर बिस्तर पर उसका बेटा और बहू थे, बहू की साड़ी ऊपर उसकी जांघो तक इकट्ठी हो रखी थी वहीं उसका ब्लाउज खुला हुआ था चूचियों को पीयूष पीछे बैठ कर मसल रहा था, ये देख कर महिपाल का लंड ठुमके मारने लगा, और वो अंदर कमरे में आया,

पीयूष: कोई जागा तो नहीं पापा?

पीयूष ने रानी की चूचियों और पेट को मसलते हुए कहा,

महिपाल: नहीं तभी तो थोड़ा रुक कर आया हूं मैं। बहू तूने तेरी मम्मी से कहा था आने को?

रानी: नहीं पापाजी ओह वो चाची और मौसी ही मम्मी से बात कर रही थी लगातार इसलिए बोल ही नहीं पाई।

महिपाल: कोई बात नहीं बेटा हम तीन ही बहुत हैं, झेल लेगी न तू हम दोनों को,

महिपाल कहते हुए बिस्तर पर झुके और रानी के होंठों को चूमने लगे, वहीं पीयूष लगातार उसके पेट और चूचियों को मसल रहा था उसका कड़क लंड रानी के चूतड़ों में ठोकर मार रहा था





पीयूष: आह मेरी जान आज तुम्हारे चूतड़ों में घुसा जा रहा है मेरा लंड तो अब रहा नहीं जाता आह चूस दो न।

महिपाल ने भी रानी के होंठों को छोड़ा और बोला: सच में बहू मेरा भी यही हाल है, एक तो वैसे ही नशा ऊपर से तुम दोनों का बदन देख देख कर लंड बैठने का नाम ही नहीं लेता,

रानी: अच्छा हम दोनों का या सभ्या चाची और शालू मौसी का, उनको भी अच्छे से निहार रहे थे आप पापा।

पीयूष: अरे तो इसमें गलत क्या है जब निहारने वाली चीज होगी तो निहारेंगे ही,

महिपाल: सच में दोनों ही बिल्कुल मस्त माल हैं गांड और चूचियों को ब्लाउज़ और साड़ी में से देख कर ही लंड तन जा रहा था,

रानी: ओहो देखो तो उनके बारे में सोच कर ही तुम्हारा लंड कैसे झटके मार रहा है पापा।

रानी ने हाथ बढ़ा कर पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को सहलाते हुए कहा,

महिपाल: अब क्या ही कहूं बेटा। दोनों ही एक दम चोदने लायक हैं,

पीयूष: सोचो पापा चोदने का मौका मिलेगा तो क्या करोगे?

महिपाल: अरे जी भर के चोदूंगा दोनों बहनों को, आह ये भी कोई पूछने की बात है।

महिपाल ने अपना कुर्ता उतारते हुए कहा और फिर पजामा और कच्छा उतार कर पूरा नंगा हो गया.


ये सब बातें ही चल रही थी कि दरवाजा फिर से हल्का सा खुला और तीनों ने एक साथ दरवाज़े की ओर देखा तो तीनों हैरान रह गए देखते हुए।

जारी रहेगी
 
महिपाल: अरे जी भर के चोदूंगा दोनों बहनों को, आह ये भी कोई पूछने की बात है।

महिपाल ने अपना कुर्ता उतारते हुए कहा और फिर पजामा और कच्छा उतार कर पूरा नंगा हो गया.

ये सब बातें ही चल रही थी कि दरवाजा फिर से हल्का सा खुला और तीनों ने एक साथ दरवाज़े की ओर देखा तो तीनों हैरान रह गए देखते हुए।



अपडेट 258


चोदम पुर में नीतू अब पूरी तरह जग्गू के मोटे लंड पर सवार हो चुकी थी। उसकी गोरी जाँघें फैली हुई थीं, चूत पूरी तरह लंड को निगल रही थी। ऊपर-नीचे उछलते हुए उसके भरे-भरे चूचे जोर-जोर से हिल रहे थे, निप्पल सख्त होकर खड़े थे। रज्जो उसकी माँ बगल में बैठी बेटी की चूत के दाने को मसल रही थी, तो कभी-कभी उसके मोटे चूचों को मुँह में लेकर चूस लेती।





नीतू: आह माँ... देखो न... जग्गू का मोटा लंबा लंड... मेरी छोटी-सी चूत को फाड़ रहा है... उफ्फ... कितना गहरा घुस रहा है... और जोर से ठोको जग्गू आह ... हाँ... ऐसे ही... मेरी चूत का पानी निकाल दो...

रज्जो: देख रही हूं बेटा तेरी चूत कैसे पूरा लंड निगल रही है बेटी... अपनी माँ के सामने पूरी रंडी बन जा... जग्गू का लंड खा रही है तेरी चूत... आह... कितना रस टपक रहा है... तेरी चूत से कितनी गीली है तेरी गरम चूत।

जग्गू: ले साली रंडी... तेरी चूत आज मेरे लंड की गुलाम हो गई... आह... कितनी टाइट है... चाची देखो न... तुम्हारी बेटी कितनी गंदी हो रही है... आह तुम्हारे सामने ही रंडी बन रही है।

रज्जो: हाँ बेटा... चोद... मेरी बेटी की चूत फाड़ डाल... मैं तो देख-देख के अपनी चूत में उँगलियाँ डाल रही हूँ... आह... नीतू... चिल्ला... चिल्ला के बता कितना मज़ा आ रहा है... आह और मां रंडी है तो बेटी रंडी बनेगी ही न आह।

जग्गू ने नीतू की कमर पकड़ ली और नीचे से जोर-जोर से ठोके मारने लगा। चप-चप... चप-चप... कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी। नीतू की आँखें ऊपर चढ़ गईं, वो जोर से चीखी और पहली बार झड़ गई। उसकी चूत सिकुड़-फैल रही थी, गरम पानी जग्गू के लंड पर बह रहा था। लेकिन जग्गू रुका नहीं।

इधर ममता चाची के कमरे में माहौल और भी गंदा हो चुका था। ममता अब दोनों भाइयों के बीच सैंडविच बन चुकी थीं। सरजू पीछे से उसकी मोटी गाँड में पूरा लंड घुसाए हुए जोर-जोर से ठोक रहा था, जबकि बिरजू नीचे से उसकी चूत में लंड डालकर चोद रहा था। ममता की भारी-भारी चूचियाँ से बिरजू के चेहरे के आगे झूल रही थीं,





ममता: आह... दोनों हरामियों... मेरी चूत और गाँड एक साथ फाड़ दो... उफ्फ सरजू... तेरे लंड ने मेरी गाँड का छेद ढीला कर दिया... बिरजू... और जोर से... मेरे चूचे मसल... दबा... काट ले... हाँ... मैं तो आज दोनों के लंड की रंडी बन गई हूँ...

सरजू: चाची... तुम्हारी गाँड कितनी गरम है... चूत से भी टाइट... आह और गरम... पूरा लंड अंदर खींच रही है आह ... चप-चप... की आवाज कर रही है।

बिरजू: और मेरी चाची... तुम्हारी आह चूत तो बिल्कुल पानी की नदी बन चुकी है... कितना रस निकाल रही है... आह... ओह ये मोटी चूचियां आह।

ममता चीख रही थी मज़े से। उसने बिरजू का लंड पकड़कर और जोर से चूसना शुरू कर दिया। दोनों भाई रफ्तार बढ़ा रहे थे। ममता दो बार झड़ चुकी थी, उसका पूरा बदन पसीने से तर था। आखिरकार सरजू ने गाँड में और बिरजू ने चूत में एक साथ रस छोड़ दिया। ममता की चूत और गाँड दोनों से सफेद रस बहने लगा।

ममता: आह... भर दी दोनों ने... मेरी चूत और गाँड... कितना गाढ़ा रस... उफ्फ... अब मैं तो उठ भी नहीं पा रही बच्चों आह ... लेकिन अभी और चोदना है...

तीसरी तरफ गुंजन अब घुटनों के बल खड़ी थी, दीनू पीछे से उसे कुत्ते की तरह चोद रहा था। उसकी चूत से सफेद रस टपक रहा था, जाँघें चिपक गई थीं। दीनू एक हाथ से गुंजन के बाल खींचे हुए था, दूसरे से चूचे मसल रहा था।

गुंजन: जीजा... मारो... जोर से मारो... मेरी चूत तुम्हारी हो गई... आह... तेरे लंड ने मेरी चूत का बुरा हाल कर दिया... हाँ... और तेज़... मेरी गाँड भी ठोक दो... मैं तो आज पूरी रात चुदवाऊँगी...





दीनू: ले रंडी गुंजन... तेरी चूत कितनी चिकनी है... चोद-चोद के लाल कर दूँगा... आह... ... कितने बड़े चूचे हैं तेरे.. निप्पल खड़े हो गए... बोल... जीजा का लंड पसंद है न...

गुंजन ने पीछे हाथ बढ़ाकर दीनू के अंडों को मसलना शुरू कर दिया। दीनू की रफ्तार और तेज़ हो गई। कमरा चपचप, आहों और गंदी बातों से भर गया।

वहीं गुंजन का बेटा सागर और अनुज मिलकर मंजू को दोनों ओर से बजा रहे थे, वहीं मंजू भी जवान लंड का पूरा मजा ले रही थी मंजू ताई के कमरे में सागर और अनुज दोनों तरफ से लगे हुए थे। सागर पीछे से गाँड चोद रहा था, अनुज नीचे से चूत में लंड डाले हुए था। मंजू की भरी हुई देह हिल रही थी, चूचे उछल रहे थे।





मंजू: आह... दोनों हरामी... मेरी चूत और गाँड एक साथ... उफ्फ सागर... तेरे लंड ने मेरी गाँड फाड़ दी... अनुज... और जोर से... मेरे चूचे चूस... काट... मैं तो आज तुम दोनों की रंडी बन गई हूँ... चोदो... और चोदो... मेरी चूत तुम दोनों की है...

सागर: बुआ आह तुम तो पहले ही रंडी थी आह... तुम्हारी ओह गाँड कितनी मोटी और गरम है... इस गाँड को चोद के लाल कर दूँगा...

अनुज: और ताई... तुम्हारी चूत तो बिल्कुल जवानी वाली है...आह कितनी गरम और कितना रस भरा है आह... तुम्हे चोद कर ऐसा लगता है जैसे मैं मां को चोद रहा हूं तो माँ जैसी चोद रहा हूँ...

मंजू: ओह बेटा तेरी मां और मुझमें कोई फर्क है क्या आह वो भी अभी आह कहीं टांगे उठा के चुद रही होगी और मैं भी।

अनुज: आह ताई ये तो सही कहा आह आह आह।

अनुज ने आहें भरते हुए मंजू की मोटी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया।

इधर उसी घर में दूसरे कमरे में कर्मा ने प्रेमा को अब पूरा नंगा कर लिया था और दनादन उसे चोद रहा था, कर्मा का लंड प्रेमा की चूत के अंदर तक चोट कर रहा था और प्रेमा हर झटके के साथ आहें भर रही थी, उसकी उत्तेजना भी अपने चरम पर थी,

प्रेमा: आह लल्ला आह ओह ऐसे ही रुकना मत आह आह आह मैं आने वाली हूं आह आह मादरचोद आह ऐसे ही चोदो ओह।

कर्मा: ओह ओह आह कुतिया आह ले अब नहीं रुकूंगा आह आह ओह।

कर्मा भी उसकी चूत में धक्के लगाते हुए बढ़ बड़ा रहा था दोनों की उत्तेजना उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी,

नाना और राजपाल भी पल्ली और लाडो के जवान बदन का बदल बदल कर मज़ा ले रहे थे





जहां राजपाल पीछे से झुकी हुई लाडो की चूत में लंड पेल रहे थे वहीं उसका सिर नाना की गोद में था और नाना का लंड उसके मुंह में, वहीं उसके नीचे पल्ली थी जो नाना की गोलियों को चाट और चूस रही थी,

राजपाल: ओह ओह आह लाड़ो आह तेरी चूत आह कैसी कसी हुई और गरम है आह लग रहा है लंड गला देगी।

नाना: आह सही कहा जमाई बाबू, ओह और दोनों ऐसे चूस रही हैं मानो आह जान निकाल लेंगी लंड के रास्ते आह बिटिया,

पल्ली: अरे ऐसे कैसे जान निकाल लेंगे, अभी तो रात भर इस लंड से चुदना है हमें। क्यों लाड़ो?

लाडो ने बिना मुंह से लंड निकाले आंखों से ही हा में इशारा किया,

राजपाल: ओह फिर तो हमारी जान तो निकलनी ही है बाबा, बेटियों अपने ताऊ और नाना पर तरस खाना थोड़ा।

राजपाल ने लाडो को चोदते हुए कहा, जिस पर पल्ली मुस्कुराई और नाना की गोलियां चाटने में फिर से लग गई.

जहां पल्ली और लाडो नाना और राजपाल की आहें निकाल रही थी वहीं उनकी सहेली किरन भी अपने पापा यानि जमुना मामा की और राजन की आहें निकलवा रही थी, दोनों बिस्तर पर पीठ के बल लेते हुए थे अपनी अपनी टांगों को पीछे किए और घुटनों को पीछे की ओर मोड़ कर सिर की ओर ओर किए हुए जिससे दोनों के चूतड़ खुले थे और उनकी गांड का छेद भी वहीं उनकी टांगों के नीचे किरन थी जो दोनों की गांड के छेद को उंगलियों से भेदते हुए बीच बीच में जीभ से भी कुरेद रही थी।





जमुना: ओह किरन क्या कर रही है आह बहुत अजीब लग रहा है आह।

किरन: अच्छा पापा जब अपना मोटा लंड मेरी गांड में घुसाते हो तब कुछ नहीं लगता अब अजीब लग रहा है।

राजन: अरे जमुना क्या लौंडियों की तरह कराह रहा है मर्द बन देख मैं तो नहीं कराह रहा,

जमुना: अरे जीजा गांड में उंगली घुसाएगी तो कैसे मर्द बनेंगे।

राजन: ऐसे ही आह्ह्ह्ह ओह

जमुना: अब क्या हुआ जीजा मर्द बनते बनते कैसे सीसियाने लगे,

राजन: आह अपनी बिटिया से पूछ बिना बताए एक और उंगली घुसा दी।

किरन: हाहाहा फूफाजी आया मज़ा.

राजन: ओह बिटिया कर ले तू अपने मन की मैं भी देख आज तेरी गांड कैसे मारता हूं।

किरन: बिल्कुल फूफाजी उसी का तो इन्तजार है।

दूसरी ओर गैंदापुर में जैसा आप जानते हैं माहौल थोड़ा अजीब था, महिपाल, रानी और पीयूष कमरे में थे और तभी दरवाज़ा खुला था और जैसे ही तीनों की नज़र दरवाज़े पर पड़ी थी तीनों ही हैरान रह गए थे, दरवाजे पर सविता दिखी पूरी नंगी मुंह खुला हुआ और बदन झटके खाता हुआ दरवाज़ा थोड़ा और खुला तो तीनों की आँखें फटी की फटी रह गईं।





सविता के पीछे शैलेश थे जो उसकी कमर को थाम कर पीछे से उसकी चूत में धक्के लगा रहे थे, अपनी पत्नी को शैलेश से चुदवाते देख महिपाल के वहीं उसके साथ साथ रीना और पीयूष के भी होश उड़ गए जो जहां था वहीं रह गया, तीनों आंखें फाड़े देख रहे थे कोई कुछ बोल नहीं रहा था, दरवाज़े से अंदर आते ही शैलेश ने सविता की एक टांग उठा कर एक दीवार पर टिका दी और फिर दना दन उसे चोदने लगे,

महिपाल तुरंत अपनी बहू के पास से उठ कर दूर खड़ा हो गया और पहली प्रतिक्रिया पीयूष की भी कुछ ऐसी ही थी उन्हें समझ नहीं आ रहा था ये क्या हो रहा है और उस पर कैसी प्रतिक्रिया दें, रानी भी ज्यों की त्यों वैसी ही बिस्तर पर लेटी हुई थी,

तभी दरवाज़े से एक और आवाज़ आई: अरे रुक क्यों गए महिपाल भाई लगे रहो,

और फिर दरवाज़े से नीलेश अंदर आए, और आते ही सीधे रानी की ओर बढ़ कर बिस्तर के बगल में घुटनों पर बैठ गए और इससे पहले कुछ कोई समझता नीलेश का मुंह रानी की चूत पर था, रानी की भी एक आह निकल गई, नीलेश की जीभ को अपनी चूत पर महसूस करते ही, उधर सविता भी शैलेश के सामने बैठ कर उसका लंड चूसने लगी, बिना पीयूष और महिपाल की ओर देखे

अब माहौल कुछ ऐसा था कि नीलेश और शैलेश रानी और सविता के साथ लगे हुए थे और महिपाल और पीयूष बस देख रहे थे,





कुछ पल बाद ही दरवाज़े से सभ्या और शालू भी अंदर आई और महिपाल और पीयूष की ओर देख कर बोली: अरे तुम लोग ऐसे अलग अलग क्यों खड़े हो,

नीलेश: लगता है महिपाल भाई को हमारे यूं आने से झटका लग गया है,

नीलेश ने रानी के सामने से उठते हुए बोला और उठ कर अपने कपड़े उतारने लगे, सभ्या ने नीलेश के हटने पर रानी को नंगा लेटे देखा तो वो भी आगे बढ़ी और नीलेश की जगह बैठ कर अपना मुंह रानी की चूत पर लगा दिया, इधर शालू सीधी आगे बढ़ी और जाकर महिपाल के सामने बैठ गई और उसके लंड को पकड़ कर मुंह में भर लिया, शालू के छूते ही मानो महिपाल के बदन और दिमाग में ऊर्जा बापिस आ गई उसका दिमाग भी तेजी से काम करने लगा,

महिपाल: ओह आह भाभी जी, नीलेश भाई ये सब क्या हो रहा है आप सब यहां? ऐसे?

नीलेश: अरे महिपाल भाई सब सवालों का जवाब मिल जाएगा आराम से अभी तुम मजे लो।

शालू भी उसका लंड लंड मुंह से निकाल कर बोली: मैं सामने हूं और तुम सवाल पूछ रहे हो भैया, ये तो मेरी बेइज्जती है।

ये बोल कर वो उठी और अपनी साड़ी खोलने लगी, और फिर साड़ी के साथ साथ पेटीकोट को भी निकाल दिया और बापिस बैठ कर उसका लंड चूसने लगी,

महिपाल: आह नहीं शालू, ओह तुम बहुत सुंदर हो, आह।

शालू: वो तो सुना मैने कमरे के बाहर से जब मेरी और जीजी की कितनी तारीफ कर रहे थे तुम भैया।

शालू ने लंड चाटते हुए कहा, तो महिपाल अपनी बात पकड़े जाने पर हंसने लगा,

दूसरी ओर पीयूष भी आगे बढ़ा और जाकर रानी और सभ्या के बगल में बैठ गया जहां सभ्या रानी की चूत चाट रही थी,





वो उन दोनों को देख कर बगल में बैठ कर अपने लंड को हिला रहा था

रानी: ओह चाची आह आह कभी सोचा नहीं था आह तुम मेरी आह ये करोगी आह बहुत अच्छा लग रहा है,

सभ्या: सब कुछ हो सकता है बहू आह तेरी चूत बहुत रसीली है। और खुल कर बोल अब।

सभ्या ने जीभ हटाते हुए कहा, दूसरी ओर सविता लगातार शैलेश से चुद रही थी, शैलेश को भी सविता की गरम चूत में बहुत मज़ा आ रहा था,

शैलेश: आह भाभी आह बहुत मस्त हो तुम ओह मजा ही आ गया,

सविता: मज़ा तो तुम्हारा लंड भी बहुत दे रहा है भैया, चोदते रहो ऐसे ही आज मत रुको।

दूसरी ओर शालू भी महिपाल का लंड पूरे जोश से चूस रही थी और महिपाल के मुंह से लगातार आहें निकल रही थीं। महिपाल हाथ नीचे कर के शालू की मोटी चूचियों को ब्लाउज़ के ऊपर से ही मसलते हुए आहें भर रहा था,

पीयूष अपनी पत्नी की चूत को सभ्या से चटवाते हुए देख गरम हो रहा था और फिर उसने रानी का सिर पकड़ कर अपने लंड पर झुका दिया, रानी ने भी तुरंत उसके लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी, ये देख सभ्या भी उठी और पीयूष के दूसरी ओर बिस्तर पर आकर बैठ गई, पीयूष ने उसे देखा और फिर उसकी ओर चेहरा बढ़ा दिया और उसके होंठों से अपने होंठों को मिला दिया और चूसने लगा, सभ्या भी पियूष का पूरा साथ देने लगी, कुछ पल बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो पियूष मुस्कुरा रहा था

पीयूष: चाची तुम बहुत सुंदर हो और मस्त भी।

सभ्या: चल पागल इतनी सुंदर बीवी के होते हुए तुझे मैं सुंदर लग रही हूं,

पीयूष: सच में चाहो तो रानी से ही पूछलो।

रानी ने भी तुरंत अपने मुंह से लंड निकाला और बोली: सही में चाची सच कह रहे हैं ये।

ये कह कर वो बापिस लंड चूसने लगी, सभ्या भी नीचे होकर उसका सिर सहलाने लगी और उसे पीयूष का लंड चूसते हुए देखने लगी,





सभ्या का हाथ रानी के सिर से होते हुए जल्दी ही पीयूष की गोलियों तक पहुंच गया और वो उन्हें सहलाने लगी, रानी ने सभ्या को पास देखा तो पति का लंड तुरंत मुंह से निकाला और सभ्या की ओर कर दिया जिसे सभ्या ने तुरंत मुंह में भर लिया, और चूसने लगी।

रानी भी सभ्या को अपने पति का लंड चूसते देख मस्त होने लगी, वहीं पीयूष तो सभ्या का गरम मुंह अपने लंड पर पाकर आहें भरने लगा,

पीयूष: आह ओह मुझे तो यकीन नहीं हो रहा कि कर्मा की मम्मी मेरा लंड चूस रही है,

नीलेश ये सुन बोले: कर्मा के पापा भी यहीं है बेटा,

जिसे सुनकर पीयूष के चेहरे पर हंसी आ गई।

ये कहते हुए नीलेश ने रानी के पीछे बिस्तर पर जगह ली और अपना लंड पीछे से उसकी चूत के द्वार पर घिसने लगे, रानी भी गरम लंड का एहसास पाकर सिहरने लगी, और फिर नीलेश ने धक्का लगाकर लंड अंदर घुसा दिया और रानी की आह निकल गई, नीलेश उसके चूतड़ों को पकड़ कर चोदने लगे तो रानी आहें भरने लगी, वहीं सभ्या लगातार पियूष का लंड चूस रही थी,





रानी: आह चाचा जी ओह आह कितना मोटा है आह आह आह तुम्हारा ओह आह मारो ऐसे ही आह धक्का,

नीलेश: आह तेरी चूत इतनी गरम और कसी हुई है बहू आह पीयूष बेटा बहुत पत्नी मिली है तुझे आह,

नीलेश रानी को चोदते हुए बोले,

पीयूष: आपको भी चाचा जी,

पीयूष सभ्या का मुंह अपने लंड पर दबाते हुए बोला, तो दोनों हंसने लगे, उसने फिर सभ्या को अपने लंड से ऊपर उठाया और फिर से उसके होंठों को चूसने लगा, सभ्या की चूचियों को मसलते हुए, होंठ अलग हुए तो बोला: ओह चाची इन चूचियों को तो दिखाओ बहुत मन है इन्हें नंगा देखने का।

सभ्या: अब भी चाची से ही मेहनत करवाएगा बेटा, खुद खोल कर देख ले,

पीयूष ये सुनते ही सभ्या के ब्लाउज को खोलने लगा,

उधर सविता की तभी एक चीख निकली क्योंकि शैलेश ने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसकी गांड में जो घुसा दिया था,

सविता: आह भईया आह गांड ही चीर दी तुमने तो,

शैलेश: क्या करूं भाभी रुका ही नहीं गया तबसे देख कर मन कर रहा था,

सविता: अब घुसा ही दिया तो अच्छे से मारो आह कूट दो अच्छे से, देखो तुम्हारी पत्नी भी कैसे इनके साथ प्यार जता रही है,

सविता ने कमरे के दूसरी ओर देखते हुए कहा जहां शालू और महिपाल एक दूसरे के होंठों को चूसने में व्यस्त थे होंठों को चूसने के बाद शालू ने महिपाल को नीचे लेटने को कहा और महिपाल तुरंत लेट गया शालू भी उसके मुंह के ऊपर अपनी चूत रख कर बैठ गई दोनो 69 के आसन में एक दूसरे को सुख देने लगे, वहीं उनके बगल में पीयूष ने सभ्या के कपड़े उतार कर नंगा कर दिया था और सभ्या भी उसके सामने तुरंत घोड़ी बन गई और उसे इशारा किया तो पियूष ने तुरंत अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया और चोदने लगा,





पूरे कमरे में चुदाई का खेल पूरे जोश में खेला जा रहा था

महिपाल शालू की चूत चूस रहा था तो शालू उसके लंड को चूस रही थी, उनके बगल में पीयूष सभ्या को घोड़ी बना कर चोद रहा था उनसे बाईं ओर नीलेश रानी को झुका कर गहरे और लंबे धक्के लगा रहा था और सबसे पीछे शैलेश सविता की गांड खड़े हो कर मार रहा था,

पीयूष: आह आह चाची आह जबसे तुम्हे पहली बार आह देखा तब सोचा था आह की तुम्हे चोदने में आह कितना मज़ा आएगा आह, और जितना सोचा था उससे भी ज़्यादा आ रहा है।

सभ्या: अच्छा ओह बड़ा गंदा है तू आह अपने दोस्त की मां के बारे में ऐसा सोचता है तू,

सविता ने उसे छेड़ते हुए कहा,

पीयूष: आह जब दोस्त की मां ऐसी हो तो सोचना पड़ता है,

सभ्या: आह तो अब सोच मत अब तो आह सच में चोद रहा है ओह ऐसे ही चोद आह और तेज आह।

पीयूष: ओह आह हां चाची आह आह आह आह।

नीलेश: देख बहु तेरा पति आह मेरी पत्नी को चोद रहा है, आह।

रानी: आह चाचाजी तो ओह तुम भी उसकी पत्नी को चोदो न आह और तेज अच्छे से ओह फाड़ दो मेरी चूत अपने मोटे लंड से, आह मुझे रंडी की तरह चोदो चाचाजी।

रानी गरम होते हुए बोली तो नीलेश भी उसकी इच्छा पूरी करने लगे।

शालू: आह भैया अब आह बहुत हो गई चुसाई आह मुझे अब लंड अपनी चूत में चाहिए,

शालू उठते हुए बोली, और फिर पलट कर महिपाल के लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर लगा दिया, और हल्के से अपनी कमर घुमाते हुए लंड के टोपे पर चूत घिसने लगी,

महिपाल: आह ओह अब और मत तड़पाओ शालू आह ले लो अंदर।

शालू ने भी वैसा ही किया और तुरंत नीचे होकर बैठ गई, जिससे महिपाल की आह निकल गई,





शालू नीचे होकर तुरंत ही महिपाल के लंड पर कूदने लगी उसकी मोटी चूचियां ब्लाउज़ से बाहर थी और उसके साथ साथ उछल कूद कर रही थी, वहीं शैलेश और सविता ने भी अपना आसन बदल लिया था और अभी शैलेश लेटे थे और सविता उनके लंड पर उछल रही थी शैलेश नीचे से उसकी चूत में धक्के लगा रहे थे, नीलेश और रानी, सभ्या और पियूष अभी भी उसी आसन में थे, दोनों महिलाएं घोड़ी बन कर चुदवा रही थी, रानी बिस्तर पर थी तो सभ्या नीचे और पीयूष पीछे से उसकी चूत में अपना लंड पेल रहा था,

पीयूष: आह काश ये पहले पता होता कि आप सब लोग इतने खुले खयालों के हो आह तो अब तक तो न जाने कितना मज़ा आह कर चुके होते हम लोग।

सभ्या: अभी जवान हो बेटा आह बहुत समय है तुम लोगो के पास मजे करने के लिए,

रानी: आह ये तो आह आह आह आराम से चाचा जी, आह सही कहा चाची जी।

नीलेश: आह क्या करूं बहू तेरी चूत रुकने ही नहीं देती आह बहुत मस्त है आह।

रानी: अब तुम्हारे सामने है आह चाचा जी जितना चाहे चोद लो, मेरे पति भी नहीं रोकेंगे।

रानी ने हंसते हुए कहा,

नीलेश: अरे वो कैसे रोकेगा मेरी पत्नी उसे रोकने ही नहीं देगी।

सविता: आह वैसे भी बहू ओह तू मेरी सहमति से चुद रही है कोई नहीं रोकने वाला तुझे,

महिपाल: तुम तो सहमति दोगी ही खुद जो लंड पर उछल रही हो,

सविता: अच्छा तुम जैसे खाली बैठे हो, क्यों शालू खाली हैं क्या ये,

शालू: जीजी इनका पता नहीं आह पर मेरी चूत भरी हुई है अच्छे से आह।

इस पर सब हंस पड़े, तभी एक ओर से सविता के आहों के तेज होने की आवाज आई और सबने उस ओर देखा तो पाया सविता शैलेश के ऊपर झुक कर कांप रही थी उसकी कमर झटके खा रही थी, शायद पहली बार इतना खुल कर चुदने का असर था, झड़ने के बाद वो बेजान सी हो गई तो शैलेश ने उसे एक ओर लिटा दिया और खुद उठे और इधर उधर देखने लगे और अपनी सांसों को भी दुरुस्त करने लगे, पर कुछ देर के बाद बर्दाश नहीं हुआ तो नीलेश से बोले: भैया बहू का स्वाद थोड़ा हमें भी चखने दो भाभी तो हार मान गई।

निलेश: अरे ऐसे कैसे हार मान गई, इधर ला हम अभी चाबी भर देते हैं,

शैलेश सविता को उठा कर नीलेश की ओर कर देते हैं तो नीलेश भी रानी को शैलेस के पास भेज देते हैं नीलेश सविता को पकड़ते हैं और अपने आगे पीठ पर लिटाते हैं और टांगे फैला कर अपना मोटा लंड उसकी चूत में घुसा देते हैं, जिससे सविता एक बार फिर से आहें भरने लगती है

सविता: आह ओह भाई साहब आह आह ओह ओह।

नीलेश: क्यों भाभी हार मान ली क्या तुमने?

नीलेश ने धक्के लगाते हुए कहा,

सविता: आह अब चाबी भर दोगे ऐसे तो आह कहां थकावट रह जाएगी,

नीलेश: ये हुई न बात।

दूसरी ओर शैलेश ने एक कुर्सी खींच ली थी और उस पर बैठ गए थे रानी ने भी उनके ऊपर जगह ली और उनके लंड पर कूदने लगी थी, इधर पीयूष भी नीचे लेता था और सभ्या उसके ऊपर थी उसकी ओर पीठ करके और पीयूष नीचे से धक्के लगा रहा था सभ्या की चूत में, महीपाल ने शालू को घोड़ी बनाया हुआ था और दनादन चोद रहे थे।





कमरे में थापें गूंज रही थीं और सब अपने अपने चरम की ओर बढ़ रहे थे, महिपाल शालू के चूतड़ों को थामे लगातार अपनी कमर को तेजी से घुमा रहे थे आंखें बंद थी दांत पीस रखे थे उनकी हालत देख कर कोई भी बता सकता था कि वो अपने चरम की ओर बढ़ रहे हैं, शालू भी हर झटके पर आह आह आह करके आहें भर रही थी, कुछ देर बाद महिपाल के मुंह से एक गुर्राहट निकली और फिर आह आह करते हुए दो तीन झटके कस के लगाए और फिर अपनी जांघों को शालू के चूतड़ों से चिपका दिया और फिर गुर्राते हुए झड़ने लगे, शालू भी महिपाल को झड़ता महसूस कर खुद को नहीं रोक पाई और खुद भी उसकी कमर झटके खाने लगी, जिससे वो आगे होकर गिर गई वहीं महिपाल का लंड उसकी चूत से निकल गया, और महिपाल के रस की पिचकारियों ने उसके चूतड़ों को रंग दिया और फिर थक कर पीछे लेट कर हांफने लगे,

शैलेश के लंड पर बैठी रानी भी अब शैलेश के लंड के साथ साथ उत्तेजना के घोड़े पर भी सवार थी और अब उसकी कमर झटके खा रही थी वहीं शैलेश के लिए भी इस कमसिन बहू की गरम चूत की गर्मी और कसावट के आगे फिसलने के करीब थे और जैसे ही झड़ते हुए रानी की चूत ने उनके लंड को कसा वो भी खुद को रोक नहीं पाए और उसकी चूत में धार के बाद धार मारने लगे, रानी तो झड़ते हुए पीछे होकर उनके ऊपर लेट गई शैलेश का लंड अभी भी उसकी चूत में फंसा हुआ था और रस भर रहा था,

जहां पत्नी की चूत में शैलेश का रस भर रहा था तो पति यानि पीयूष भी पीछे नहीं था, नीचे से दनादन सभ्या की चूत में धक्के लगा रहा था और दोनों के ही हाव भाव ये बता रहे थे कि वो दोनों अपने अपने चरम के कितने करीब हैं सभ्या भी अपनी सांसों को थामे आहें भर रही थी और पीयूष को लगातार और तेज चोदने को कह रही थी वहीं पीयूष के लिए भी सभ्या के कामुक बदन को भोगना हर पल के साथ और मुश्किल होता जा रहा था





और फिर एक पल आया कि पीयूष की कमर ऊपर उठ गई वो सभ्या के चूतड़ों से चिपक गया और फिर झड़ने लगा, सभ्या भी उसी पल अपने चरम पर पहुंची और झड़ने लगी, एक दो पिचकारी सभ्या की चूत में मारने के बाद पीयूष नीचे हो गया और उसका लंड सभ्या की चूत से निकल गया, सभ्या भी उसके साथ नीचे उसके ऊपर लेट गई, पीयूष के रस की पिचकारियां सभ्या के चूतड़ों और जांघों को भिगोते हुए शांत हो गईं।

सभ्या के साथ साथ नीलेश का भी वही हाल था सविता की चूत में वो भी तूफानी धक्के लगा रहे थे और सविता खुद के मुंह पर हाथ रख कर खुद को चीखने से रोक रही थी, उसका बदन फिर से अकड़ रहा था और एक बार फिर से वो अपने चरम की ओर बढ़ रही थी नीलेश ने कुछ तगड़े धक्के और लगाए और वो काफी था सविता के लिए और फिर दोनों ही एक साथ झड़ रहे थे, नीलेश सविता के ऊपर लेट कर उसकी चूत को हांफते हुए भर रहे थे और सविता भी अपनी चूत को और कमर को मरोड़ते हुए झड़ रही थी,

चुदाई का तूफान थम चुका था पूरे कमरे में अब बस हांफने की आवाजें आ रही थीं। खैर कुछ देर बाद पीयूष उठा और बोला: कोई पानी पियेगा,

तो सब ने मुस्करा कर हामी भरी, पीयूष ने बोतल उठाई और खुद पीकर आगे बढ़ा दी,

महिपाल: नीलेश भाई अब तो राज खोल दो कि ये सब हुआ कैसे,

शैलेश: ये सब हुआ तुम्हारे मैसेज से महिपाल भाई।

महिपाल: मैसेज से कैसे? समझा नहीं?

शैलेश: शायद दोपहर में पीयूष ने अपनी, भाभी की और बहू की चुदाई की वीडियो बना कर तुम्हे भेजी थी?

पीयूष: हां भेजी तो थी।

पीयूष हैरान होकर बोला,

महिपाल: हां आई थी मेरे पास।

शैलेश: तो कागज भेजने के साथ साथ तुमने वो भी मुझे भेज दी थी और उसे देख कर ही हमें तुम्हारे इस हसीन राज के बारे में पता चल गया.

नीलेश: तो महिपाल भाई अब पता चल गया है तो ये राज भी खोल दो कि ये सब शुरू कैसे हुआ और कब से चल रहा है।

महिपाल: हां अब तो बताना ही पड़ेगा, पर तुम्हे भी अपने राज खोलने पड़ेंगे कि इतना खुला पन जीवन में कैसे आया।

नीलेश: बिल्कुल पर पहले आप।

जारी रहेगी।
 
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