Incest Katha Chodampur Ki - Page 42 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

महिपाल: अरे जी भर के छोडूंगा दोनों बहनो को, आह ये भी कोई पूछने की बात है.



महिपाल ने अपना कुरता उतारते हुए कहा और फिर पजामा और कच्चा उतर कर पूरा नंगा हो गया.

ये सब बातें hi चल रही थी की दरवाज़ा फिर से हल्का सा खुला और तीनो ने एक साथ दरवाज़े की तरफ देखा तो तीनो हैरान रह गए देख कर.

**अपडेट 258**

चोदम पुर में नीतू अब पूरी तरह जग्गू के मोठे लैंड पर सवार हो चुकी थी. उसकी गोरी जांघें फैली हुई थी, छूट पूरी तरह लैंड को निगल रही थी. Upar-neeche उछलते हुए उसके bhare-bhare चुके zor-zor से हिल रहे थे, निप्पल सख्त होकर खड़े थे. रज्जो उसकी माँ बगल में बैठी बेटी की छूट के दाने को मसल रही थी, तो kabhi-kabhi उसके मोठे चुके मुँह में लेकर चूस लेती.

नीतू: आह माँ... देखो न... जग्गू का मोटा लम्बा लैंड... मेरी chhoti-si छूट को पहाड़ रहा है... उफ्फ्फ... कितना गहरा घुस रहा है... और ज़ोर से ठोको जग्गू आह... हाँ... ऐसे hi... मेरी छूट का पानी निकाल दो...

रज्जो: देख रही हूँ बीटा तेरी छूट कैसे पूरा लैंड निगल रही है बेटी... अपनी माँ के सामने पूरी रंडी बन जा... जग्गू का लैंड खा रही है तेरी छूट... आह... कितना रास टपक रहा है... तेरी छूट से कितनी गीली है तेरी गरम छूट.

जग्गू: ले साली रंडी... तेरी छूट आज मेरे लैंड की गुलाम हो गयी... आह... कितनी टाइट है... चची देखो न... तुम्हारी बेटी कितनी गन्दी हो रही है... आह तुम्हारे सामने hi रंडी बन रही है.

रज्जो: हाँ बीटा... छोड़... मेरी बेटी की छूट पहाड़ दाल... मैं तो dekh-dekh के अपनी छूट में उंगलियां दाल रही हूँ... आह... नीतू... चिल्ला... चिल्ला के बता कितना मज़ा आ रहा है... आह और माँ रंडी है तो बेटी रंडी बनेगी hi न आह.

जग्गू ने नीतू की कमर पकड़ ली और नीचे से zor-zor से ठोके मारने लगा. Chap-chap... chap-chap... कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी. नीतू की आँखें ऊपर चढ़ गयी, वो ज़ोर से चीखी और पहली बार झाड़ गयी. उसकी छूट sikud-fail रही थी, गरम पानी जग्गू के लैंड पर बह रहा था. लेकिन जग्गू रुका नहीं.

इधर ममता चची के कमरे में माहौल और भी गन्दा हो चूका था. ममता अब दोनों भाइयों के बीच सैंडविच बन चुकी थी. सरजू पीछे से उसकी मोती गांड में पूरा लैंड घुसाए हुए zor-zor से थोक रहा था, जबकि बिरजू नीचे से उसकी छूट में लैंड डालकर छोड़ रहा था. ममता की bhaari-bhaari चूचियां बिरजू के चेहरे के आगे झूल रही थी.

ममता: आह... दोनों हरामियों... मेरी छूट और गांड एक साथ पहाड़ दो... उफ्फ्फ सरजू... तेरे लैंड ने मेरी गांड का छेड़ ढीला कर दिया... बिरजू... और ज़ोर से... मेरे चुके मसल... दबा... काट ले... हाँ... मैं तो आज दोनों के लैंड की रंडी बन गयी हूँ...

सरजू: चची... तुम्हारी गांड कितनी गरम है... छूट से भी टाइट... आह और गरम... पूरा लैंड अंदर खींच रही है आह... chap-chap... की आवाज़ कर रही है.

बिरजू: और मेरी चची... तुम्हारी आह छूट तो बिलकुल पानी की नदी बन चुकी है... कितना रास निकाल रही है... आह... ओह ये मोती चूचियां आह.

ममता चीख रही थी मज़े से. उसने बिरजू का लैंड पकड़कर और ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया. दोनों भाई रफ़्तार बढ़ा रहे थे. ममता दो बार झाड़ चुकी थी, उसका पूरा बदन पसीने से तर था. आखिरकार सरजू ने गांड में और बिरजू ने छूट में एक साथ रास छोड़ दिया. ममता की छूट और गांड दोनों से सफ़ेद रास बहने लगा.

ममता: आह... भर दी दोनों ने... मेरी छूट और गांड... कितना गाढ़ा रास... उफ्फ्फ... अब मैं तो उठ भी नहीं प् रही बच्चो आह... लेकिन अभी और छोड़ना है...

तीसरी तरफ गुंजन अब घुटनो के बल कड़ी थी, दीनू पीछे से उसे कुत्ते की तरह छोड़ रहा था. उसकी छूट से सफ़ेद रास टपक रहा था, जांघें चिपक गयी थी. दीनू एक हाथ से गुंजन के बाल खींचे हुए था, दुसरे से चुके मसल रहा था.

गुंजन: जीजा... मारो... ज़ोर से मारो... मेरी छूट तुम्हारी हो गयी... आह... तेरे लैंड ने मेरी छूट का बुरा हाल कर दिया... हाँ... और तेज़... मेरी गांड भी थोक दो... मैं तो आज पूरी रात छुडवाउंगी...

दीनू: ले रंडी गुंजन... तेरी छूट कितनी चिकनी है... chod-chod के लाल कर दूंगा... आह... कितने बड़े चुके हैं तेरे.. निप्पल खड़े हो गए... बोल... जीजा का लैंड पसंद है न...

गुंजन ने पीछे हाथ बढाकर दीनू के अंडो को मसलना शुरू कर दिया. दीनू की रफ़्तार और तेज़ हो गयी. कमरा चपचाप, आहों और गन्दी बातों से भर गया.

वही गुंजन का बीटा सागर और अनुज मिलकर मंजू को दोनों तरफ से बजा रहे थे, वही मंजू भी जवान लैंड का पूरा मज़ा ले रही थी. मंजू तै के कमरे में सागर और अनुज दोनों तरफ से लगे हुए थे. सागर पीछे से गांड छोड़ रहा था, अनुज नीचे से छूट में लैंड डाले हुए था. मंजू की भरी हुई देह हिल रही थी, चुके उछाल रहे थे.

मंजू: आह... दोनों हरामी... मेरी छूट और गांड एक साथ... उफ्फ्फ सागर... तेरे लैंड ने मेरी गांड पहाड़ दी... अनुज... और ज़ोर से... मेरे चुके चूस... काट... मैं तो आज तुम दोनों की रंडी बन गयी हूँ... छोड़ो... और छोड़ो... मेरी छूट तुम दोनों की है...

सागर: बुआ आह तुम तो पहले hi रंडी थी आह... तुम्हारी ओह गांड कितनी मोती और गरम है... इस गांड को छोड़ के लाल कर दूंगा...

अनुज: और तै... तुम्हारी छूट तो बिलकुल जवानी वाली hai...aah कितनी गरम और कितना रास भरा है आह... तुम्हे छोड़ कर ऐसा लगता है जैसे मैं माँ को छोड़ रहा हूँ तो माँ जैसी छोड़ रहा हूँ...

मंजू: ओह बीटा तेरी माँ और मुझमे कोई फर्क है क्या आह वो भी अभी आह कहीं टाँगे उठा के चुद रही होगी और मैं भी.

अनुज: आह तै ये तो सही कहा आह आह आह.

अनुज ने आहें भरते हुए मंजू की मोती चूचियों को चूसना शुरू कर दिया.

इधर उसी घर में दुसरे कमरे में कर्मा ने प्रेमा को अब पूरा नंगा कर लिया था और दनादन उसे छोड़ रहा था, कर्मा का लैंड प्रेमा की छूट के अंदर तक चोट कर रहा था और प्रेमा हर झटके के साथ आहें भर रही थी, उसकी उत्तेजना भी अपने चरम पर थी.

प्रेमा: आह लल्ला आह ओह ऐसे hi रुकना मत आह आह आह मैं आने वाली हूँ आह आह मादरचोद आह ऐसे hi छोड़ो ओह.

कर्मा: ओह ओह आह कुटिया आह ले अब नहीं रुकूंगा आह आह ओह.

कर्मा भी उसकी छूट में धक्के लगते हुए बढ़ बढ़ा रहा था दोनों की उत्तेजना उनके चेहरों पर साफ़ दिखाई दे रही थी.

नाना और राजपाल भी पल्ली और लाडो के जवान बदन का badal-badal कर मज़ा ले रहे थे.

जहाँ राजपाल पीछे से झुकी हुई लाडो की छूट में लैंड पेल रहे थे वही उसका सर नाना की गॉड में था और नाना का लैंड उसके मुँह में, वही उसके नीचे पल्ली थी जो नाना की गोलियों को चाट और चूस रही थी.

राजपाल: ओह ओह आह लाडो आह तेरी छूट आह कैसी कासी हुई और गरम है आह लग रहा है लैंड गाला देगी.

नाना: आह सही कहा जमाई बाबू, ओह और दोनों ऐसे चूस रही हैं मानो आह जान निकाल लेंगी लैंड के रास्ते आह बिटिया,

पल्ली: अरे ऐसे कैसे जान निकाल लेंगे, अभी तो रात भर इस लैंड से छोड़ना है हमे. क्यों लाडो?

लाडो ने बिना मुँह से लैंड निकाले आँखों से hi हां में इशारा किया,

राजपाल: ओह फिर तो हमारी जान तो निकालनी hi है बाबा, बेटियों अपने ताऊ और नाना पर तरस खाना थोड़ा.

राजपाल ने लाडो को छोड़ते हुए कहा, जिस पर पल्ली मुस्कुरायी और नाना की गोलियां चाटने में फिर से लग गयी.

जहाँ पल्ली और लाडो नाना और राजपाल की आहें निकाल रही थी वही उनकी सहेली किरण भी अपने पापा यानि जमुना मां की और राजन की आहें निकलवा रही थी, दोनों बिस्तर पर पीठ के बल लेते हुए थे apni-apni टाँगे पीछे किये और घुटनो को पीछे की तरफ मोड़ कर सर की तरफ किये हुए जिससे दोनों के चूतड़ खुले थे और उनकी गांड का छेड़ भी वही उनकी टांगो के नीचे किरण थी जो दोनों की गांड के छेड़ को उँगलियों से भेदते हुए beech-beech में जीभ से भी कुरेद रही थी.

जमुना: ओह किरण क्या कर रही है आह बहुत अजीब लग रहा है आह.

किरण: अच्छा पापा जब अपना मोटा लैंड मेरी गांड में घुसते हो तब कुछ नहीं लगता अब अजीब लग रहा है.

राजन: अरे जमुना क्या लौंडियों की तरह कराह रहा है मर्द बन देख मैं तो नहीं कराह रहा,

जमुना: अरे जीजा गांड में ऊँगली घुसायेगी तो कैसे मर्द बनेंगे.

राजन: ऐसे hi आह्ह्ह्हह ओह

जमुना: अब क्या हुआ जीजा मर्द bante-bante कैसे सीसीएनए लगे,

राजन: आह अपनी बेटी से पूछ बिना बताये एक और ऊँगली घुसा दी.

किरण: हाहाहा फूफाजी आया मज़ा.

राजन: ओह बिटिया कर ले तू अपने मन की मैं भी देख आज तेरी गांड कैसे मारता हूँ.

किरण: बिलकुल फूफाजी उसी का तो इंतज़ार है.

दूसरी तरफ गैंदापुर में जैसा आप जानते हैं माहौल थोड़ा अजीब था, महिपाल, रानी और पियूष कमरे में थे और तभी दरवाज़ा खुला था और जैसे hi तीनो की नज़र दरवाज़े पर पड़ी तीनो hi हैरान रह गए थे, दरवाज़े पर सविता दिखी पूरी नंगी मुँह खुला हुआ और बदन झटके खाता हुआ दरवाज़ा थोड़ा और खुला तो तीनो की आँखें फटी की फटी रह गयी.

सविता के पीछे शैलेश थे जो उसकी कमर को थाम कर पीछे से उसकी छूट में धक्के लगा रहे थे, अपनी पत्नी को शैलेश से छुड़वाते देख महिपाल के वही उसके saath-saath रानी और पियूष के भी होश उड़ गए जो जहाँ था वही रह गया, तीनो आँखें पहाड़ के देख रहे थे कोई कुछ बोल नहीं रहा था, दरवाज़े से अंदर आते hi शैलेश ने सविता की एक टांग उठा कर एक दीवार पर टिका दी और फिर dana-dan उसे छोड़ने लगे,

महिपाल तुरंत अपनी बहु के पास से उठ कर दूर खड़ा हो गया और पहली प्रतिक्रिया पियूष की भी कुछ ऐसी hi थी उन्हें समझ नहीं आ रहा था ये क्या हो रहा है और उस पर कैसी प्रतिक्रिया दें, रानी भी ज्यों की त्यों वैसी hi बिस्तर पर लेती हुई थी,

तभी दरवाज़े से एक और आवाज़ आयी: अरे रुक क्यों गए महिपाल भाई लगे रहो,

और फिर दरवाज़े से नीलेश अंदर आये, और आते hi सीधे रानी की तरफ बढ़ कर बिस्तर के बगल में घुटनो पर बैठ गए और इससे पहले कुछ कोई समझता नीलेश का मुँह रानी की छूट पर था, रानी की भी एक आह निकल गयी, नीलेश की जीभ को अपनी छूट पर महसूस करते hi, उधर सविता भी शैलेश के सामने बैठ कर उसका लैंड चूसने लगी, बिना पियूष और महिपाल की तरफ देखे

अब माहौल कुछ ऐसा था की नीलेश और शैलेश रानी और सविता के साथ लगे हुए थे और महिपाल और पियूष बस देख रहे थे,

कुछ पल बाद hi दरवाज़े से सभ्य और शालू भी अंदर आयी और महिपाल और पियूष की तरफ देख कर बोली: अरे तुम लोग ऐसे alag-alag क्यों खड़े हो,

नीलेश: लगता है महिपाल भाई को हमारे यूँ आने से झटका लग गया है,

नीलेश ने रानी के सामने से उठते हुए बोलै और उठ कर अपने कपडे उतारने लगे, सभ्य ने नीलेश के हटने पर रानी को नंगा लेते देख तो वो भी आगे बढ़ी और नीलेश की जगह बैठ कर अपना मुँह रानी की छूट पर लगा दिया, इधर शालू सीढ़ी आगे बढ़ी और जाकर महिपाल के सामने बैठ गयी और उसके लैंड को पकड़ कर मुँह में भर लिया, शालू के छूटे hi मानो महिपाल के बदन और दिमाग में ऊर्जा वापस आ गयी उसका दिमाग भी तेज़ी से काम करने लगा,

महिपाल: ओह आह भाभी जी, नीलेश भाई ये सब क्या हो रहा है आप सब यहाँ? ऐसे?

नीलेश: अरे महिपाल भाई सब सवालों का जवाब मिल जायेगा आराम से अभी तुम मजे लो.

शालू भी उसका लैंड मुँह से निकाल कर बोली: मैं सामने हूँ और तुम सवाल पूछ रहे हो भैया, ये तो मेरी बेइज़्ज़ती है.

ये बोल कर वो उठी और अपनी साडी खोलने लगी, और फिर साडी के saath-saath पेटीकोट को भी निकाल दिया और वापस बैठ कर उसका लैंड चूसने लगी,

महिपाल: आह नहीं शालू, ओह तुम बहुत सुन्दर हो, आह.

शालू: वो तो सुना मैंने कमरे के बहार से जब मेरी और जीजी की कितनी तारीफ कर रहे थे तुम भैया.

शालू ने लैंड चाटते हुए कहा, तो महिपाल अपनी बात पकडे जाने पर हंसने लगा,

दूसरी तरफ पियूष भी आगे बढ़ा और जाकर रानी और सभ्य के बगल में बैठ गया जहाँ सभ्य रानी की छूट चाट रही थी,

वो उन दोनों को देख कर बगल में बैठ कर अपने लैंड को हिला रहा था

रानी: ओह चची आह आह कभी सोचा नहीं था आह तुम मेरी आह ये करोगी आह बहुत अच्छा लग रहा है,

सभ्य: सब कुछ हो सकता है बहु आह तेरी छूट बहुत रसीली है. और खुल कर बोल अब.

सभ्य ने जीभ हटते हुए कहा, दूसरी तरफ सविता लगातार शैलेश से चुद रही थी, शैलेश को भी सविता की गरम छूट में बहुत मज़ा आ रहा था,

शैलेश: आह भाभी आह बहुत मस्त हो तुम ओह मज़ा hi आ गया,

सविता: मज़ा तो तुम्हारा लैंड भी बहुत दे रहा है भैया, छोड़ते रहो ऐसे hi आज मत रुको.

दूसरी तरफ शालू भी महिपाल का लैंड पूरे जोश से चूस रही थी और महिपाल के मुँह से लगातार आहें निकल रही थी. महिपाल हाथ नीचे कर के शालू की मोती चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से hi मसलते हुए आहें भर रहा था,

पियूष अपनी पत्नी की छूट को सभ्य से चतवते हुए देख गरम हो रहा था और फिर उसने रानी का सर पकड़ कर अपने लैंड पर झुका दिया, रानी ने भी तुरंत उसके लैंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगी, ये देख सभ्य भी उठी और पियूष के दूसरी तरफ बिस्तर पर आकर बैठ गयी, पियूष ने उसे देखा और फिर उसकी तरफ चेहरा बढ़ा दिया और उसके होंठों से अपने होंठों को मिला दिया और चूसने लगा, सभ्य भी पियूष का पूरा साथ देने लगी, कुछ पल बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो पियूष मुस्कुरा रहा था

पियूष: चची तुम बहुत सुन्दर हो और मस्त भी.

सभ्य: चल पागल इतनी सुन्दर बीवी के होते हुए तुझे मैं सुन्दर लग रही हूँ,

पियूष: सच में चाहो तो रानी से hi पूछ लो.

रानी ने भी तुरंत अपने मुँह से लैंड निकाला और बोली: सही में चची सच कह रहे हैं ये.

ये कह कर वो वापस लैंड चूसने लगी, सभ्य भी नीचे होकर उसका सर सहलाने लगी और उसे पियूष का लैंड चूसते हुए देखने लगी,

सभ्य का हाथ रानी के सर से होते हुए जल्दी hi पियूष की गोलियों तक पहुँच गया और वो उन्हें सहलाने लगी, रानी ने सभ्य को पास देखा तो पति का लैंड तुरंत मुँह से निकाला और सभ्य की तरफ कर दिया जिसे सभ्य ने तुरंत मुँह में भर लिया, और चूसने लगी.

रानी भी सभ्य को अपने पति का लैंड चूसते देख मस्त होने लगी, वही पियूष तो सभ्य का गरम मुँह अपने लैंड पर पाकर आहें भरने लगा,

पियूष: आह ओह मुझे तो यकीं नहीं हो रहा की कर्मा की मम्मी मेरा लैंड चूस रही है,

नीलेश ये सुन बोले: कर्मा के पापा भी यहीं है बीटा,

जिसे सुनकर पियूष के चेहरे पर हंसी आ गयी.

ये कहते हुए नीलेश ने रानी के पीछे बिस्तर पर जगह ली और अपना लैंड पीछे से उसकी छूट के द्वार पर घिसने लगे, रानी भी गरम लैंड का एहसास पाकर सिहरने लगी, और फिर नीलेश ने धक्का लगाकर लैंड अंदर घुसा दिया और रानी की आह निकल गयी, नीलेश उसके चूतड़ों को पकड़ कर छोड़ने लगे तो रानी आहें भरने लगी, वही सभ्य लगातार पियूष का लैंड चूस रही थी,

रानी: आह चाचा जी ओह आह कितना मोटा है आह आह आह तुम्हारा ओह आह मारो ऐसे hi आह धक्का,

नीलेश: आह तेरी छूट इतनी गरम और कासी हुई है बहु आह पियूष बीटा बहुत पत्नी मिली है तुझे आह,

नीलेश रानी को छोड़ते हुए बोले,

पियूष: आपको भी चाचा जी,

पियूष सभ्य का मुँह अपने लैंड पर दबाते हुए बोलै, तो दोनों हंसने लगे, उसने फिर सभ्य को अपने लैंड से ऊपर उठाया और फिर से उसके होंठों को चूसने लगा, सभ्य की चूचियों को मसलते हुए, होंठ अलग हुए तो बोलै: ओह चची इन चूचियों को तो दिखाओ बहुत मन है इन्हे नंगा देखने का.

सभ्य: अब भी चची से hi म्हणत करवाएगा बीटा, खुद खोल कर देख ले,

पियूष ये सुनते hi सभ्य के ब्लाउज को खोलने लगा,

उधर सविता की तभी एक चीख निकली क्यूंकि शैलेश ने अपना लैंड उसकी छूट से निकाल कर उसकी गांड में जो घुसा दिया था,

सविता: आह भैया आह गांड hi चीयर दी तुमने तो,

शैलेश: क्या करूँ भाभी रुका hi नहीं गया तबसे देख कर मन कर रहा था,

सविता: अब घुसा hi दिया तो अच्छे से मारो आह कूट दो अच्छे से, देखो तुम्हारी पत्नी भी कैसे इनके साथ प्यार जाता रही है,

सविता ने कमरे के दूसरी तरफ देखते हुए कहा जहाँ शालू और महिपाल एक दुसरे के होंठों को चूसने में व्यस्त थे होंठों को चूसने के बाद शालू ने महिपाल को नीचे लेटने को कहा और महिपाल तुरंत लेट गया शालू भी उसके मुँह के ऊपर अपनी छूट रख कर बैठ गयी दोनों 69 के आसान में एक दुसरे को सुख देने लगे, वही उनके बगल में पियूष ने सभ्य के कपडे उतर कर नंगा कर दिया था और सभ्य भी उसके सामने तुरंत घोड़ी बन गयी और उसे इशारा किया तो पियूष ने तुरंत अपना लैंड उसकी छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगा,

पूरे कमरे में चुदाई का खेल पूरे जोश में खेला जा रहा था

महिपाल शालू की छूट चूस रहा था तो शालू उसके लैंड को चूस रही थी, उनके बगल में पियूष सभ्य को घोड़ी बना कर छोड़ रहा था उनसे बायीं तरफ नीलेश रानी को झुका कर गहरे और लम्बे धक्के लगा रहा था और सबसे पीछे शैलेश सविता की गांड खड़े हो कर मार रहा था,

पियूष: आह आह चची आह जबसे तुम्हे पहली बार आह देखा तब सोचा था आह की तुम्हे छोड़ने में आह कितना मज़ा आएगा आह, और जितना सोचा था उससे भी ज़्यादा आ रहा है.

सभ्य: अच्छा ओह बड़ा गन्दा है तू आह अपने दोस्त की माँ के बारे में ऐसा सोचता है तू,

सविता ने उसे छेड़ते हुए कहा,

पियूष: आह जब दोस्त की माँ ऐसी हो तो सोचना पड़ता है,

सभ्य: आह तो अब सोच मत अब तो आह सच में छोड़ रहा है ओह ऐसे hi छोड़ आह और तेज़ आह.

पियूष: ओह आह हाँ चची आह आह आह आह.

नीलेश: देख बहु तेरा पति आह मेरी पत्नी को छोड़ रहा है, आह.

रानी: आह चाचाजी तो ओह तुम भी उसकी पत्नी को छोड़ो न आह और तेज़ अच्छे से ओह पहाड़ दो मेरी छूट अपने मोठे लैंड से, आह मुझे रंडी की तरह छोड़ो चाचाजी.

रानी गरम होते हुए बोली तो नीलेश भी उसकी इच्छा पूरी करने लगे.

शालू: आह भैया अब आह बहुत हो गयी चूसै आह मुझे अब लैंड अपनी छूट में चाहिए,

शालू उठते हुए बोली, और फिर पलट कर महिपाल के लैंड को पकड़ा और अपनी छूट पर लगा दिया, और हलके से अपनी कमर घूमते हुए लैंड के टोपे पर छूट घिसने लगी,

महिपाल: आह ओह अब और मत तड़पाओ शालू आह ले लो अंदर.

शालू ने भी वैसा hi किया और तुरंत नीचे होकर बैठ गयी, जिससे महिपाल की आह निकल गयी,

शालू नीचे होकर तुरंत hi महिपाल के लैंड पर कूदने लगी उसकी मोती चूचियां ब्लाउज से बहार थी और उसके saath-saath uchal-kood कर रही थी, वही शैलेश और सविता ने भी अपना आसान बदल लिया था और अभी शैलेश लेते थे और सविता उनके लैंड पर उछाल रही थी शैलेश नीचे से उसकी छूट में धक्के लगा रहे थे, नीलेश और रानी, सभ्य और पियूष अभी भी उसी आसान में थे, दोनों महिलाएं घोड़ी बन कर छुड़वा रही थी, रानी बिस्तर पर थी तो सभ्य नीचे और पियूष पीछे से उसकी छूट में अपना लैंड पेल रहा था,

पियूष: आह काश ये पहले पता होता की आप सब लोग इतने खुले ख्यालों के हो आह तो अब तक तो न जाने कितना मज़ा आह कर चुके होते हम लोग.

सभ्य: अभी जवान हो बीटा आह बहुत समय है तुम लोगों के पास मजे करने के लिए,

रानी: आह ये तो आह आह आह आराम से चाचा जी, आह सही कहा चची जी.

नीलेश: आह क्या करूँ बहु तेरी छूट रुकने hi नहीं देती आह बहुत मस्त है आह.

रानी: अब तुम्हारे सामने है आह चाचा जी जितना चाहे छोड़ लो, मेरे पति भी नहीं रोकेंगे.

रानी ने हँसते हुए कहा,

नीलेश: अरे वो कैसे रोकेगा मेरी पत्नी उसे रोकने hi नहीं देगी.

सविता: आह वैसे भी बहु ओह तू मेरी सहमति से चुद रही है कोई नहीं रोकने वाला तुझे,

महिपाल: तुम तो सहमति डौगी hi खुद जो लैंड पर उछाल रही हो,

सविता: अच्छा तुम जैसे खली बैठे हो, क्यों शालू खली हैं क्या ये,

शालू: जीजी इनका पता नहीं आह पर मेरी छूट भरी हुई है अच्छे से आह.

इस पर सब हंस पड़े, तभी एक तरफ से सविता के आहों के तेज़ होने की आवाज़ आयी और सबने उस तरफ देखा तो पाया सविता शैलेश के ऊपर झुक कर कांप रही थी उसकी कमर झटके खा रही थी, शायद पहली बार इतना खुल कर छोड़ने का असर था, झड़ने के बाद वो बेजान सी हो गयी तो शैलेश ने उसे एक तरफ लिटा दिया और खुद उठे और idhar-udhar देखने लगे और अपनी साँसों को भी दुरुस्त करने लगे, पर कुछ देर के बाद बर्दाश्त नहीं हुआ तो नीलेश से बोले: भैया बहु का स्वाद थोड़ा हमे भी चखने दो भाभी तो हार मान गयी.

नीलेश: अरे ऐसे कैसे हार मान गयी, इधर ला हम अभी चाबी भर देते हैं,

शैलेश सविता को उठा कर नीलेश की तरफ कर देते हैं तो नीलेश भी रानी को शैलेश के पास भेज देते हैं नीलेश सविता को पकड़ते हैं और अपने आगे पीठ पर लिटाते हैं और टाँगे फैला कर अपना मोटा लैंड उसकी छूट में घुसा देते हैं, जिससे सविता एक बार फिर से आहें भरने लगती है

सविता: आह ओह भाई साहब आह आह ओह ओह.

नीलेश: क्यों भाभी हार मान ली क्या तुमने?

नीलेश ने धक्के लगते हुए कहा,

सविता: आह अब चाबी भर डोज ऐसे तो आह कहाँ थकावट रह जाएगी,

नीलेश: ये हुई न बात.

दूसरी तरफ शैलेश ने एक कुर्सी खींच ली थी और उस पर बैठ गए थे रानी ने भी उनके ऊपर जगह ली और उनके लैंड पर कूदने लगी थी, इधर पियूष भी नीचे लेता था और सभ्य उसके ऊपर थी उसकी तरफ पीठ करके और पियूष नीचे से धक्के लगा रहा था सभ्य की छूट में, महिपाल ने शालू को घोड़ी बनाया हुआ था और दनादन छोड़ रहे थे.

कमरे में थापें गूँज रही थी और सब apne-apne चरम की तरफ बढ़ रहे थे, महिपाल शालू के चूतड़ों को थामे लगातार अपनी कमर को तेज़ी से घुमा रहे थे आँखें बंद थी दांत पीस रखे थे उनकी हालत देख कर कोई भी बता सकता था की वो अपने चरम की तरफ बढ़ रहे हैं, शालू भी हर झटके पर आह आह आह करके आहें भर रही थी, कुछ देर बाद महिपाल के मुँह से एक गुरर्हत निकली और फिर आह आह करते हुए दो तीन झटके कास के लगाए और फिर अपनी जाँघों को शालू के चूतड़ों से चिपका दिया और फिर गुर्राते हुए झड़ने लगे, शालू भी महिपाल को झाड़ता महसूस कर खुद को रोक नहीं पायी और खुद भी उसकी कमर झटके खाने लगी, जिससे वो आगे होकर गिर गयी वही महिपाल का लैंड उसकी छूट से निकल गया, और महिपाल के रास की पिचकारियों ने उसके चूतड़ों को रंग दिया और फिर थक कर पीछे लेट कर हांफने लगे,

शैलेश के लैंड पर बैठी रानी भी अब शैलेश के लैंड के saath-saath उत्तेजना के घोड़े पर भी सवार थी और अब उसकी कमर झटके खा रही थी वही शैलेश के लिए भी इस कमसिन बहु की गरम छूट की गर्मी और कसावट के आगे फिसलने के करीब थे और जैसे hi झड़ते हुए रानी की छूट ने उनके लैंड को कैसा वो भी खुद को रोक नहीं पाए और उसकी छूट में धार के बाद धार मारने लगे, रानी तो झड़ते हुए पीछे होकर उनके ऊपर लेट गयी शैलेश का लैंड अभी भी उसकी छूट में फंसा हुआ था और रास भर रहा था,

जहाँ पत्नी की छूट में शैलेश का रास भर रहा था तो पति यानि पियूष भी पीछे नहीं था, नीचे से दनादन सभ्य की छूट में धक्के लगा रहा था और दोनों के hi हाव भाव ये बता रहे थे की वो दोनों apne-apne चरम के कितने करीब हैं सभ्य भी अपनी साँसों को थामे आहें भर रही थी और पियूष को लगातार और तेज़ छोड़ने को कह रही थी वही पियूष के लिए भी सभ्य के कामुक बदन को भोगना हर पल के साथ और मुश्किल होता जा रहा था

और फिर एक पल आया की पियूष की कमर ऊपर उठ गयी वो सभ्य के चूतड़ों से चिपक गया और फिर झड़ने लगा, सभ्य भी उसी पल अपने चरम पर पहुंची और झड़ने लगी, एक दो पिचकारी सभ्य की छूट में मारने के बाद पियूष नीचे हो गया और उसका लैंड सभ्य की छूट से निकल गया, सभ्य भी उसके साथ नीचे उसके ऊपर लेट गयी, पियूष के रास की पिचकारियां सभ्य के चूतड़ों और जाँघों को भिगोते हुए शांत हो गयी.

सभ्य के saath-saath नीलेश का भी वही हाल था सविता की छूट में वो भी तूफानी धक्के लगा रहे थे और सविता खुद के मुँह पर हाथ रख कर खुद को चीखने से रोक रही थी, उसका बदन फिर से अकड़ रहा था और एक बार फिर से वो अपने चरम की तरफ बढ़ रही थी नीलेश ने कुछ तगड़े धक्के और लगाए और वो काफी था सविता के लिए और फिर दोनों hi एक साथ झाड़ रहे थे, नीलेश सविता के ऊपर लेट कर उसकी छूट को हाँफते हुए भर रहे थे और सविता भी अपनी छूट को और कमर को मरोड़ते हुए झाड़ रही थी,

चुदाई का तूफ़ान ठाम चूका था पूरे कमरे में अब बस हांफने की आवाज़ें आ रही थी. खैर कुछ देर बाद पियूष उठा और बोलै: कोई पानी पियेगा,

तो सब ने मुस्कुरा कर हामी भरी, पियूष ने बोतल उठायी और खुद पि कर आगे बढ़ा दी,

महिपाल: नीलेश भाई अब तो राज खोल दो की ये सब हुआ कैसे,

शैलेश: ये सब हुआ तुम्हारे मैसेज से महिपाल भाई.

महिपाल: मैसेज से कैसे? समझा नहीं?

शैलेश: शायद दोपहर में पियूष ने अपनी, भाभी की और बहु की चुदाई की वीडियो बना कर तुम्हे भेजी थी?

पियूष: हाँ भेजी तो थी.

पियूष हैरान होकर बोलै,

महिपाल: हाँ आयी थी मेरे पास.

शैलेश: तो कागज़ भेजने के saath-saath तुमने वो भी मुझे भेज दी थी और उसे देख कर hi हमे तुम्हारे इस हसीं राज के बारे में पता चल गया.

नीलेश: तो महिपाल भाई अब पता चल गया है तो ये राज भी खोल दो की ये सब शुरू कैसे हुआ और कब से चल रहा है.

महिपाल: हाँ अब तो बताना hi पड़ेगा, पर तुम्हे भी अपने राज खोलने पड़ेंगे की इतना खुला पैन जीवन में कैसे आया.

नीलेश: बिलकुल पर पहले आप.



जारी रहेगी
 
अपडेट 259
करीब एक घंटा बीत चुका था, और हवा में अभी भी वह कामुक उन्माद की महक तैर रही थी—पसीने, रस और नंगी देहों की मिली-जुली खुशबू। कुछ ने हल्के-फुल्के कपड़े पहन लिए थे, जबकि बाकी अब भी पूरी तरह नंगे पड़े थे, बेफिक्र और संतुष्ट। पहले महिपाल और उसके परिवार ने अपने गुप्त राजों को खोलकर रख दिया था, फिर नीलेश और उसके कुनबे ने। बातें इतनी गहराई से निकलीं कि हवा में एक नई तरह की अंतरंगता घुल गई। जब नीलेश ने अपनी कहानी पूरी की, तो महिपाल और उसके घरवालों के चेहरे पर हैरानी की लकीरें साफ नजर आ रही थीं—मुंह खुले, आंखें फैली हुईं।

महिपाल ने गहरी सांस ली, फिर मुस्कुराते हुए बोला, "नीलेश भाई, हम तो यही सोच रहे थे कि हम काफी आगे निकल चुके हैं, लेकिन अब पता चला कि आप तो हमसे कोसों आगे हैं।"

नीलेश ने हंसकर कंधे उचकाए, "अरे नहीं, भाई साहब। अब सब खुल ही गया है, तो सब साथ हैं। कोई आगे-पीछे नहीं।"

महिपाल ने सिर हिलाया, "ये भी बात सही कही आपने। वैसे, चोदमपुर में लोग इतने खुले होंगे, यह सोचा नहीं था।"

शालू ने बीच में टोकते हुए कहा, "अरे, सब नहीं खुले हैं भैया। बस हमारे कुछ परिवार ही।"

महिपाल ने आंखें सिकोड़ीं, "इतना भी काफी है, वैसे। बस अब तो हम सब भी तुम्हारे साथ जुड़ गए हैं।"

शैलेश ने मुस्कुराते हुए जोड़ा, "अरे बिल्कुल, जुड़ना तो है ही—रिश्तेदार जो बनने वाले हैं।"

यह सुनते ही महिपाल और पीयूष दोनों ने एक साथ हैरानी से पूछा, "रिश्तेदार? मतलब?"

रानी ने शरारती अंदाज में हंसते हुए कहा, "मतलब नहीं समझे, पापाजी? समधी बनने वाले हो तुम चाचाजी के?"

महिपाल थोड़ा असमंजस में पड़ गया, उसका चेहरा सवालों से भर गया। लेकिन पीयूष तुरंत समझ गया—उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। सविता और बाकी सब मुस्कुरा रहे थे, जैसे कोई पुराना राज अब जाहिर होने वाला हो।

पीयूष ने उत्सुकता से पूछा, "क्या सच में?"

रानी ने सिर हिलाया, "हां, तुम्हारी बहन का चक्कर चल रहा है कर्मा से।"

महिपाल ने भौंहें चढ़ाईं, "अरे, ये कब हुआ? ये सब तुम्हें कब से पता है? तुम भी जानती हो क्या?" उसने सविता की ओर देखकर पूछा।

सविता ने शांत मुस्कान के साथ कहा, "पक्का तो नहीं था, पर हां, शक पूरा था।"

सभ्या ने आगे बढ़कर बात संभाली, "शक सही था। और सच कहूं तो अंजली बिटिया तो मुझे भी बहुत पसंद है—बहुत प्यारी है। मैंने सोच लिया है, वही मेरे घर की बहू बनेगी। तुम लोग क्या कहते हो, भाई साहब और बहन जी?"

अचानक सभ्या के इस सवाल से महिपाल, जो पहले ही थोड़ा हैरान था, अब गहरी सोच में डूब गया। उसकी आंखें सवालों से भरी हुईं थीं।

पीयूष ने चिंता जताते हुए कहा, "वो सब तो ठीक है चाची, पर जिस तरह के परिवार हैं हमारे, वो रह पाएगी? और कहीं उसे सच्चाई पता चल गई तो?"

महिपाल ने सहमति में सिर हिलाया, "हां, बिल्कुल सही। यही मैं सोच रहा था। हमें तो एक हफ्ता हुआ है उससे छुपाते हुए, और बड़ी मुश्किल होती है। पर तुम लोग पूरी जिंदगी कैसे छुपा पाओगे?"

इस पर सभ्या मुस्कुराई, और बोली, "छुपाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। वो आप लोगों से पहले ही सब जानती है। कर्मा उससे प्यार करता है, और इसीलिए उसने सबसे पहले ये सच उसे बताया था।"

महिपाल की आंखें और फैल गईं, "क्या सच में?"

शालू: कर्मा उनके रिश्ते की शुरुआत झूठ से या कुछ छिपाकर नहीं करना चाहता था।

पीयूष ने हैरानी से कहा, "इतना बड़ा सच बता दिया? हिम्मत तो है कर्मा में। मैं तो कभी ऐसी बात नहीं बता पाता।"

सविता ने सहमति में कहा, "सच में, ये बात तो है। आसान नहीं होता ऐसा सच बोलना।"

महिपाल ने पूछा, "तो क्या अंजली को इस सब से कोई परेशानी नहीं है? मतलब, वो राजी है ये सब जानने के बाद भी?"

शैलेश ने शरारती अंदाज में हंसते हुए कहा, "वैसे, अगर अपनी होने वाली सास की चूत और गांड चाटते हुए होने वाले पति से चुदना अगर राजी होना होता है, तो फिर वो राजी है।"

यह सुनकर महिपाल और उसका परिवार सन्न रह गया—चेहरों पर हैरानी की लहर दौड़ गई।

महिपाल ने अविश्वास में पूछा, "ये कब हुआ? क्या ये सच है?"

शैलेश ने सभ्या की ओर देखकर कहा, "क्यों भाभी, सच है या नहीं?"

सभ्या मुस्कुराई और बोली, "सच है, और आज ही हुआ है। उसने मेरी और कर्मा की एक साथ सेवा की। इसीलिए तो थक कर जल्दी सो गई।"

सविता ने हंसते हुए कहा, "हाय दइया, इस लड़की ने तो हमें भी पीछे छोड़ दिया।"

महिपाल ने सिर पकड़ लिया, "मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा। एक साथ इतना कुछ पता चल रहा है।"

नीलेश ने हल्के से हंसते हुए कहा,

"अरे कुछ ज्यादा समझने की जरूरत नहीं। बस इतना बता दो—हमारे समधी बनने को तैयार हो न? बाकी सब हम संभाल लेंगे।"

महिपाल ने एक बार अपनी पत्नी, बेटे और बहू की तरफ देखा। फिर बड़ी मुस्कान के साथ बोला,

"बिल्कुल तैयार हूं, समधी जी।"

वो नीलेश के गले लगने के लिए आगे बढ़ा, तो नीलेश ने हंसकर रोका,

"अरे महिपाल भाई, समधी भले ही बन जाओ, लेकिन नंगे मर्द से गले नहीं मिलेंगे।"

यह सुनकर सब जोर से हंसने लगे।

सभ्या ने आगे बढ़ते हुए कहा,

"तुम मर्द मिलो या न मिलो, हम समधन तो मिलेंगी न बहन जी?"

सविता भी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ी।

कुछ पल बाद ही दोनों गले लग रहीं थी दोनों की नंगी चूचियां आपस में दब गईं,

सभ्या: बहुत बहुत बधाई हो समधन जी।

सभ्या ने सविता के चूतड़ों को मसलते हुए कहा,

सविता: तुम्हे भी मेरी प्यारी समधन,

सविता ने भी सभ्या के चूचों पर अपने पंजे गड़ा दिए,

शालू: ये क्या बस सूखी सूखी बधाई, कुछ मीठा भी होना चाहिए।

सविता: लो अभी लो मीठा,

ये कह सविता अपने होंठों को सभ्या के होंठो से जोड़ देती है और सभ्या भी तुरंत अपने होंठ खोल कर सविता के होंठों को चूसने लगती है,दोनों कामुक और गदराई समधन एक दूसरे के होंठों को चूस रही थी और दोनों को देख सब खुश थे मुस्कुरा रहे थे,





कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो दोनों के ही चेहरों पर कामुक और बड़ी मुस्कान थी, सविता झुकी और झुक कर सभ्या के चूचों पर टूट पड़ी और बारी बारी से दोनों को चूसने लगी, सभ्या आहें भरने लगी,

महिपाल: आह मेरा तो सारी बातों से ही बुरा हाल हो गया था ऊपर से ये देख कर तो अब रुका नहीं जा रहा।

महिपाल ने अपने लंड को मुठियाते हुए कहा,

पीयूष: मेरा भी यही हाल है पापा,

शैलेश: हाल सबका यही है तो रुके क्यों हो शुरू हो जाओ सब।

नीलेश: और क्या।

महिपाल: अरे समधन जी सारी खुशी सिर्फ समधन के साथ ही मना लोगी या समधी से भी मिलेगी?

महिपाल ने सभ्या की ओर देखते हुए कहा,

सभ्या: बिल्कुल मिलेंगे समधी से भी मिलेंगे, पर क्या करें समधन ही इतनी अच्छी सेवा कर रही है कि छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा,

सभ्या ने सविता के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा जो उसकी चूचियों को चूस रही थी,

महिपाल: अरे हम उससे भी अच्छी करेंगे आओ तो सही भाभी।

सविता ने सभ्या की चूची को मुंह से निकाला और बोली: जाओ पहले इन्हीं से मिल लो बहुत तड़प रहे हैं समधन से मिलने के लिए।

सभ्या मुस्कुराते हुए महिपाल की ओर बढ़ गई, वहीं सविता नीलेश की तरफ चल दी।

सभ्या महिपाल के पास गई जो बिस्तर पर पैर लटका कर नंगा बैठा था, सभ्या उसके सामने अपने घुटनों पर नीचे ही बैठ गई और उसके कड़क लंड को हाथों में लेकर मुठियाने लगी,





सभ्या: आह समधी जी ये इतना कड़क क्यों कर रखा है?

महिपाल सभ्या के हाथ को अपने लंड पर महसूस कर सिहर उठा और बोला: ये तुम्हारी वजह से ही है समधन आह तुम्हे देख कर ही तड़प रहा है ये,

सभ्या: अच्छा हमारी वजह से, तो फिर इसकी तड़प भी हमें ही मिटानी पड़ेगी,

सभ्या ने मुस्कुराते हुए कहा और उसके लंड के टोपे को जीभ से चाट लिया, महिपाल सभ्या के चाटने से बिल्कुल सिहर गया। वहीं सविता भी अपने समधी नीलेश के सामने पहुंच चुकी थी

नीलेश: आ जाओ समधन आज ये सुख भी भोग कर देख लें,

नीलेश ने सविता को अपने आप चिपका कर कहा,

उधर पीयूष भी उठ कर शालू के पास पहुंच गया था और सीधा उसकी चूचियों पर जाकर मुंह लगा दिया।

शालू: ओह तू तो बड़ा बेसब्र हो रहा है बेटा,

अपने पति को शालू के पास देख रानी भी अपनी चूचियों को सहलाते हुए उठी और शैलेश के पास पहुंच गई,

रानी: मैं तुम्हारी कुछ सेवा करूं मौसा जी?

शैलेश: बिल्कुल बहू तेरी सेवा के लिए ही तो हम यहां हैं।

रानी शैलेश के सामने घुटनों पर बैठ गई और शैलेश के कड़क लंबे लंड को पकड़ कर सहलाने लगी और फिर उसे अपने मुंह में भर लिया





शैलेश: आह बहू ओह इतना गरम है तेरा मुंह आह ओह।

शैलेश रानी के मुंह का एहसास अपने लंड पर पाकर तड़पने लगे वहीं रानी भी अपना मुंह दबा कर शैलेश के लंड को अधिक से अधिक अपने मुंह में भरने की कोशिश कर रही थी।

रानी के बदन पर सिर्फ उसकी ब्रा थी जिसमें से उसकी चूचियां बाहर झूल रही थीं जिन्हें शैलेश हाथ बढ़ा कर मसलने लगे थे,

शैलेश: आह बहू तू पूरी की पूरी मलाई है आह क्या बदन है तेरा,

रानी कुछ बोली नहीं पर उसका जवाब वो अपनी प्रतिक्रिया से दे रही थी,

पूरे कमरे में लंड चुसाई का दौर चल रहा था और नीलेश और सविता भी इस दौड़ में पीछे नहीं थे, नीलेश भी खड़े हो कर अपने सामने घुटनों पर बैठी अपनी समधन के मुंह में अपना लंबा लंड घुसाने का भरसक प्रयास कर रहे थे सविता के सिर को अपने लंड पर दबाते हुए।





सविता की हालत खराब थी आंखों से आंसू बह रहे थे नीलेश का लंड गले तक टकरा रहा था पर तकलीफ़ के बाद भी सविता अपने समधी की सेवा मे कोई कमी नहीं छोड़ रही थी, उसकी नंगी चूचियां झूल रही थी

नीलेश: ओह आह समधन आह पूरा भर लो अपने मुंह में आह अब तो रिश्तेदार बन गए हैं, आह आना जाना लगा रहेगा,

सविता: हां बिल्कुल ओह भाई साहब आह गुच्च।

सविता ने लंड मुंह निकाल कर बोला और फिर बापिस मुंह में भर लिया,

इधर तभी पीछे से शालू की आह निकली क्योंकि पीयूष जो पहले से ही काफी उत्तेजना में था और थोड़ा सा बेसब्र भी हो रहा था उसने तो शालू को बिस्तर पर घोड़ी बना दिया था और अपना मोटा लंबा लंड पीछे से शालू की चूत में घुसा दिया था और उसकी कमर को थामे अपना लंड शालू की चूत में पेलने लगा था,





शालू: आह आह आह आह बेटा आह ओह ऐसे ही चोद मौसी को ओह आह घुसा दे आह अपना हथियार मौसी की चूत में।

पीयूष: आह आह मौसीईईई ओह क्या चूत है तुम्हारी आह ओह बहुत मज़ा आ रहा है अब नहीं रुक पाऊंगा आह।

शालू: ओह बेटा मत रुक आह चोद जितना मन करे उतना चोद आह आह आह मत रुक।

पीयूष: आह मौसी अब चाह कर भी नहीं रुक पाऊंगा आह आह आह ओह आह।

अब बेटा चालू हो चुका था तो बाप भी पीछे नहीं था पर पीयूष के विपरीत महिपाल थोड़ा धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था, हर पल सभ्या के कामुक और मादक बदन का लुत्फ उठाते हुए आगे बढ़ रहा था, सभ्या के मुंह से महिपाल ने अपना लंड निकाला और सभ्या को उठाया और बिस्तर पर लिटा लिया और फिर खुद उसके ऊपर आ गया, सभ्या ने भी अपनी टांगें अपने होने वाले समधी के लिए फैला दीं, महिपाल में अपना कड़क लंड सभ्या की चूत के ऊपर रखा और फिर आगे होकर सभ्या के होंठो से अपने होंठ मिला दिए,





सभ्या भी तुरंत उसका साथ देने लगी, और दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे, साथ ही अपने आप महिपाल की कमर भी चलने लगी और उसका लंड सभ्या की चूत में समा गया, दोनों के मुंह से ही आह निकली जो एक दूसरे के मुंह में ही घुट गई,

सभ्या के होंठो को चूसते हुए महिपाल धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और सभ्या की गरम चूत में अपना लंड जड़ तक घुसा कर उसे चोदने लगा, धीरे धीरे उसकी गति बढ़ती जा रही थी पर उसके होंठ सभ्या के होंठो से लगातार जुड़े हुए थे। पर उसका लंड लगातार सभ्या की चूत में गड्ढा कर रहा था





जहां महिपाल अपनी समधन के साथ धीरे धीरे से और बड़े ही कामुक तरीके चुदाई कर रहा था वहीं उनके समधी यानि नीलेश सिंह अपने चिर परिचित अंदाज़ में अपनी समधन यानी सविता की धुंआधार चुदाई कर रहे थे,

सविता भी बिस्तर पर टेक लगाए लेटी थी, उसकी टांगें फैली हुई थी या यूं कहें कि नीलेश ने उन्हें पीछे की ओर ही मोड़ रखा था और उसकी टांगों के नीचे बैठ कर उसकी चूत में तूफानी रफ़्तार से लंड पेल रहे थे, सविता का पूरा बदन पसीने से तर था और लगातार उसके मुंह से आहें और सिसकारियां निकल रही थीं।





सविता: आह आह आह ओह मां आह समधी जी आह आज तो जान आह लेकर ही ओह मानोगे क्या आह आह।

नीलेश: आह ओह भाभी जी जान आह तो नहीं आह तुम्हारी गरम चूत ओह और कसी हुई गांड लेकर आह ज़रूर मानेंगे।

शैलेश: आह भैया तुम आह सब मत ले आह लेना हमारे लिए ओह भी छोड़ देना आह समधन को ओह,

शैलेश ने रानी को उसके ऊपर लेटकर चोदते हुए सिर उठाकर कहा,

रानी: ओह मौसा जी ओह पहले आह मुझे तो आह अच्छे से चोद लो ओह मम्मी जी आह कहां भागी जा रही हैं

रानी ने भी शैलेश के लंड पर अपनी चूत को कसते हुए कहा,

शैलेश: बिल्कुल बहू आह तुझे चोदे बिना आह तो मैं हिलने वाला आह भी नहीं हूं, आह।

रानी: ओह मौसा जी मैं जाने भी नहीं दूंगी आह बहुत मज़ा दे रहा है तुम्हारा मोटा लंड आह आह ऐसे ही,

रानी ने अपने हाथों को शैलेश की पीठ पर कसते हुए कहा, शैलेश भी कमर घुमा घुमा कर रानी की चूत में जड़ तक लंड घुसा कर चोद रहे थे।





रानी: आह मौसा लगता है तुम्हारा लंड सीधा बच्चेदानी में ही टक्कर मार रहा है,

शैलेश: बहू वो तो पता नहीं पर आह तेरी चूत आह बहुत गरम है लग रहा है लंड अंदर ही पिघला लेगी।

रानी: आह मौसा जी आह यहम्मम चोदते रहो ओह ऐसे ही

पूरे कमरे में चुदाई का तूफान एक बार फिर से चल पड़ा था, चारों ओर से आहें और सिसकियों की आवाज़ गूंज रही थी, दोनों परिवार होने वाले रिश्ते की शुरुआत के लिए एक नए तरह का जश्न मना रहे थे शायद ही इस तरह से कहीं कोई रिश्ता पक्का होता होगा पर ये ही तो खासियत थी चोदम पुर के लोगों की, इनका हर काम थोड़ा हटके ही होता था, दोनों होने वाले समधी अपनी अपनी भावी समधन के साथ लगे हुए थे और पारिवारिक मेल जोड़ बढ़ा रहे थे इसी कड़ी में शैलेश, शालू, पीयूष और रानी भी लगे हुए थे, इधर पीयूष जो शालू को लगातार तेज़ी से चोद रहा था उसे अपना रस अपने लंड में भरता हुआ महसूस हुआ और उसकी आहें निकलने लगी, शालू ने भी ये महसूस किया और तुरंत आगे हो गई और उसका लंड अपनी चूत से निकाल दिया,

पीयूष: अरे आह क्या हुआ मौसी?

पियूष ने हैरानी से हांफते हुए पूछा,

शालू: तेरा होने वाला था ना, थोड़ा आराम कर अभी तो और काफी देर करना है।

शालू ने गर्दन घुमा कर उसे बोला,

पीयूष: ये भी सही कहा मौसी तुमने, खुद को रोकना भी सीखना होगा मुझे।

ये कहते हुए पीयूष पीछे होकर बैठ गया और हांफने लगा,

शालू: बिल्कुल, इन्हें और जीजा को देख ये भी यही करते हैं, तभी तो लम्बी चुदाई का मज़ा मिलता है।

शालू ने नीलेश और शैलेश की ओर इशारा करके कहा और फिर खुद भी उठ कर अपने पति और रानी के पास चल दी, जहां शैलेश रानी को घोड़ी बना कर चोद रहे थे,





शालू भी रानी के नीचे जा कर लेट गई और उसकी चूचियों को चूमने खुशी वहीं रानी भी शालू की चूचियों को मसलने लगी, शालू साथ में खुद की भी चूत में उंगलियां अंदर बाहर कर रही थी,

शालू: तेरे पति को तो थका दिया मैने बहू, मेरे पति के साथ मज़ा आ रहा है?

रानी: आह आह ओह हां मौसी आह बहुत मज़ा आह मौसा का लंड आह अंदर तक मार रहा है। आह मैं आने वाली हूं,

शालू: आह बहुरिया खुल कर झड़ आह ले अपनी चूत में इनका मोटा लंबा लोड़ा आह, क्यों जी कैसी है बहुरिया की चूत मस्त है न?

शालू ने अपने पति से पूछा जो कि रानी को चोदने में व्यस्त थे,

शैलेश: आह पूछो मत आह यार बहुत गरम है और कसी हुई भी आह बड़ा मज़ा दे रही है आह आह आह आह।

शालू: तो और कुछ आह तगड़े धक्के लगाओ बहू झड़ने की कगार पर है उसे भी आनंद आने दो।

शैलेश ने ये सुना और रानी की कमर को थाम कर तूफानी धक्के लगाने लगे और कुछ पल बाद ही रानी का मुंह खुला का खुला रह गया और उसका बदन अकड़ने लगा कमर झटके खाने लगी और वो झड़ने लगी, झड़ते हुए वो आगे बिस्तर पर गिर गई और वैसे ही लेट कर हांफने लागू, शैलेश का लंड उसकी चूत से निकल गया, जिसे शालू उठकर तुरंत ही चूसने लगी।





रानी तो नीचे बेसुध सी हो कर लेट गई थी वहीं शालू अपने पति का लंड मस्ती में चूस रही थी, शैलेश भी रानी की चुदाई से थोड़ा आराम मिला तो अपनी पत्नी के गरम मुंह का आनंद लेने लगे,

इतने में पीयूष भी अपनी जगह से उठा और शालू के पीछे आ गया और अपने लंड को शालू के चूतड़ों में घिसने लगा,

पीयूष: मौसी तुम्हारे चूतड़ों को देख कर और रुका नहीं गया, आह क्या मस्त चूतड हैं तुम्हारी पत्नी के मौसा।

शैलेश: जानता हूं पीयूष, वैसे तेरी पत्नी भी कम नहीं है, एक दम चुदक्कड़ बहू है।

पीयूष: तुम्हे पसंद आई मौसा?

शैलेश: अरे ऐसी बहू पसंद नहीं आएगी तो कैसी आएगी? और तू क्या बातों में लगा है घुसा दे अपनी मौसी में लोड़ा और मिल कर चोदते हैं।

पीयूष ये सुन मुस्कुराया और फिर अपना लंड शालू की चूत में घुसा दिया, शालू दो तरफ से चुदने लगी मुंह में पति का लंड था तो चूत में पीयूष का,

दूसरी ओर नीलेश ने अपनी होने वाली समधन को आज अच्छे से भोगने का मन बना रखा था और उसी को जारी रखते हुए सविता को बुरी तरह चोद रहे थे, सविता के मुंह से अब तो आहें भी लगातार निकल रही थी, नीलेश ने सविता को बिस्तर पर टांगें ऊपर कर के मोड रखा था और उसके ऊपर आ कर बेदर्दी से तूफानी धक्के लगा रहे थे।





सविता: ओह आह आह आह आह आह आह आह मां मर गई आईईईई आह आह आरा आह आराम से ओह ओह ओह ओह मैं गईइई, पीयूष के पापाआअह देखो। आह पीयूष ओह आह आह आह देख तेरी आह आह मां चुद गई आह आह आह आह।

सविता चुदते हुए उत्तेजना में लगातार बढ़ बड़ा रही थी।

नीलेश: आह आह आह ओह ओह समधन आह साली कुतिया बना कर आह चोदूंगा तुझे आह आह आह रंडी है तू मेरी आह आह आह बोल क्या है तू।

सविता: ओह आह आह रंडीईईई हूं तुम्हारी आह आह मेरे आह राजा आआह। ओह ओह ओह गई मैं आह।

इतनी भयंकर चुदाई के सामने सविता टिक नहीं पाई और झड़ने लगी उसका बदन पहले तो अकड़ा और फिर ढीला पड़ गया, सविता के ढीले पड़ने पर नीलेश ने उसे छोड़ दिया और खुद भी एक ओर बैठ कर सांसें भरने लगे और बाकी लोगों की चुदाई देखने लगे, एक ओर सोफे पर शैलेश बैठे थे और शालू झुक कर उनका लंड चूस रही थी वहीं पीयूष शालू के पीछे था और उसकी कमर को थाम कर अपना लंड उसकी चूत में पेल रहा था,





पीयूष: आह आह आह सच में मौसी आह आह आह बहुत मज़ा आ रहा है ओह मुझे तो तुमसे प्यार हो गया आह आह मौसी।

शैलेश: ओ लल्ला चोद भले ही कितना लो पर प्यार व्यार मत करो यार, कहीं ये भी तुम्हारे प्यार में पड़ गईं तो हम तो रंडवा हो जाएंगे यार,

शैलेश ने मजाक करते हुए कहा, तो सब हंसने लगे,

पीयूष: अरे नहीं मौसा जी ऐसा नहीं है।

शैलेश: ऐसा ही है बेटा इस उमर में हम से कोई ब्याह भी नहीं करेगा।

इस पर शालू ने उनका लंड मुंह से निकाला और बोली: नई समधन से कर लेना, समधन के बाद जोरू भी बन जायेंगी।

शालू ने मज़ाक को आगे बढ़ाया,

सभ्या: तो फिर पीयूष तू भैया को मौसा नहीं पापा बुलाएगा।

सभ्या ने महिपाल के लंड पर उछलते हुए कहा, महिपाल नीचे पैर लटका कर बैठा था और सभ्या उसका लंड चूत में लेकर उछल रही थी,

महिपाल: अरे ऐसा न करो यार आह आह हमारा घर काहे उजाड़ रहे हो,

महिपाल ने सभ्या की चूत में धक्के लगाते हुए कहा, उन्हें देख कर नीलेश भी उठे और उनकी ओर चल दिए और जाकर दोनों के बगल में खड़े हो गए और अपना लंड सभ्या के मुंह के सामने कर दिया जिसे तुरंत सभ्या मुंह में भर के चोदने लगी।





महिपाल को थोड़ा अजीब भी लग रहा था और उत्तेजित भी हो रहा था कि वो नीलेश के साथ मिलकर उसकी पत्नी को चोद रहा है।

महिपाल: आह आह भाई साहब आह ओह कैसी लगी नई समधन ओह आह।

नीलेश: बहुत भरी हुई और मस्त तुम्हे कैसी लग रही है ?

महिपाल: आह यार क्या बताऊं आह रुकने का मन नहीं हो रहा आह मन कर रहा है ये चुदाई आह जीवन भर खत्म न हो।

नीलेश: अरे जीवन में और भी बहुत मौके आयेंगे अभी के पल का मज़ा लो,

महिपाल: आह भाभी का बदन ही ऐसा है कि बिना मज़ा लिए रहा ही नहीं जाएगा।

नीलेश: ओह ये तो बिल्कुल सही कहा तुमने आह समधी जी, हमारी पत्नी का जवाब नहीं।

महिपाल: आह भाभी थोड़ी देर उठ जाओ आह नहीं तो मेरा निकल जाएगा, आह और मैं और देर चोदना चाहता हूं तुम्हें।

महिपाल ने अपनी उत्तेजना महसूस करते हुए कहा,

नीलेश: अरे ये भी ठीक है आह आओ तब तक तुम्हारी चूत को हम चोद लें,

नीलेश ने सभ्या से कहा और उसे उठा कर घोड़ी बना लिया और पीछे से उसकी चूत में लंड घुसा कर चोदने लगे





सभ्या भी आगे को झुक कर महिपाल के लंड को पकड़ कर उसे सहलाने लगी,

महिपाल: आह आप भाभी आह आराम से।

सभ्या: चिंता मत करो भाई साहब नहीं निकलेगा आह लंड संभालने का अच्छा अनुभव है मुझे।

सभ्या ने मुस्कुराते हुए कहा,

नीलेश: सही कह रही है ये महिपाल भाई ओह हमारा तो न जाने कब से संभाल रही है।

दूसरी ओर रानी अब उठ कर बैठ चुकी थीं और थोड़ी तरोताजा लग रही थी कुछ देर के आराम के बाद, ये शैलेश ने देखा तो शालू के सामने से उठ कर उसकी ओर चल दिए,

शैलेश: आराम कर लिया न बहू?

रानी उनकी ओर देख मुस्कुराई और बोली: फिर से थकाने आए हो मौसा जी?

शैलेश: अब इसके अलावा और काम ही क्या है मेरा, आ जा थोड़ा आगे होकर लेट,

शैलेश ने उसे बिस्तर के किनारे लिटाया और खुद उसके पैरों के बीच बैठ गए और फिर उसके पैरों को मोड़ कर पीछे की ओर फैलाया जिससे उसके चूतड खुल कर उसके सामने आ गए, शैलेश ने अपना मुंह रानी की गांड के छेद पर लगा दिया और जीभ निकाल कर उसे चाटने लगे, रानी अपनी गांड के छेद पर शैलेश की खुरदरी जीभ को महसूस कर सिहरन लगी,

रानी: ओह मौसा जी आह क्या कर आह रहे हो ओह।

शैलेश अपनी जीभ से रानी की गांड में रास्ता बनाने लगे और उसमें थूक भरने लगे, रानी लगातार अपनी चूचियों को मसलते हुए आहें भर रही थी। जब शैलेश को लगा रानी की गांड का छेद अच्छे से चिकना जो चुका है तो वो उठे और अपने लंड को पकड़ कर उसके मोटे फैले हुए टोपे को रानी की गांड के छेद पर लगाया, रानी समझ तो गई क्या होने वाला है इसलिए खुद को तैयार करते हुए बोली: मौसा जी आराम से डालना।

शैलेश: चिंता मत कर बहू तुझे तकलीफ नहीं होने दूंगा,

ये कहते हुए शैलेश ने हल्का धक्का मारा और लंड का टोपा रानी की गांड को फैलाते हुए उसमें फंस गया जिससे रानी की एक और आह निकल गई, शैलेश ने कुछ पल बाद ही धक्का लगाकर अपना और लंड अंदर सरका दिया और रानी आहें भरने लगी और कुछ पल बाद ही शैलेश धीरे और लंबे धक्के लगा कर रानी की गांड में लंड अंदर बाहर कर रहे थे।





रानी गरम होते हुए अपनी चूचियों को मसल रही थी

शैलेश: आह बहू ओह मुझे तो आह लगा आह था कि तेरी चूत ही गरम है आह पर तेरी गांड तो उससे भी ज़्यादा गरम और आह मखमली है आह,

रानी: मौसा जी तुम्हारा लंड ओह गांड को पूरा आह भर रहा है आह मौसा जी

शैलेश आह तेरी गांड आह बहुत तंग है बहू आह लगता है लंड को पकड़ रही है, आह बहुत मज़ा आ रहा है।

शैलेश ने रानी की गांड में लंड चलाते हुए कहा, और धीरे धीरे गति बढ़ाने लगे,

दूसरी तरफ रानी का पति शैलेश की पत्नी को पूरे जोश से चोद रहा था अब वो उस उत्तेजना के वेग में था कि चाह कर भी रुक नहीं पा रहा था वहीं उसके झटके शालू को भी उसके चरम की नदी में धकेल रहे थे, कुछ देर बाद दोनों के मुंह से ही एक आह निकली और दोनों ही हांफते हुए गुर्राते हुए सिसकियां भरते हुए झड़ने लगे, पीयूष ने अपना रस शालू की गर्म चूत में भर दिया वहीं शालू भी झड़ने के बाद आराम से लेट गई पीयूष भी उसके बगल में लेट गया, और आंखे बंद करके हांफने लगा।

दूसरी ओर नीलेश ने सभ्या को अपने ऊपर बिठा लिया था और सभ्या भी अपनी गांड में अपने पति का लंड लेकर उनके ऊपर धीरे धीरे उछल रही थी,

महिपाल उनसे थोड़ा दूर बैठ कर अपने आप को थोड़ा शांत कर रहा था। उसकी नज़रें सभ्या और नीलेश पर ही थी खासकर सभ्या के कामुक बदन पर, तभी सभ्या की नज़रें उससे मिली तो सभ्या नीलेश के लंड पर उछलते हुए बोली: इधर आओ न समधी जी आह समधन के पास आह आओ।

सभ्या की इतनी कामुक और मादक बातें सुन कर महिपाल तुरंत उठा और उठ कर फुर्ती में सभ्या और नीलेश के पास पहुंच गया, नीलेश नीचे लेटे हुए उसकी गांड मार रहा था और अपनी पत्नियां कामुक क्रियाएं देख रहा था, सभ्या ने महिपाल के पास आते ही उछलना रोका और हाथ बढ़ा कर उसके लंड को पकड़ लिया, और उसकी आंखों में देखते हुए बोली: आह समधी जी अपना ये मोटा लंबा लंड मेरी चूत में घुसा दो, आह देखो कितनी प्यासी है मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए, आह मुझे एक साथ दो लंड चाहिए आह घुसा दो न।

महिपाल: आह भाभी ओह अभी लो।

अब सभ्या ऐसे बोले तो कौन मना कर सकता था महिपाल तुरंत उसकी और नीलेश की टांगों के बीच आया सभ्या ने उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर लगाया और फिर खुद ही पकड़ कर अंदर सरका लिया,





सभ्या: आह आह ओह देखो आह तुम्हारा लंड मेरी प्यासी और गरम चूत में घुस गया है समधी जी आह कितना मोटा है आह कैसा लग रहा है?

महिपाल: ओह भाभी जी आह समधन जी आह बहुत अच्छा आह लग रहा है लंड किसी भट्ठी में है।

सभ्या: आह तो अब चोदो समधी जी आह बुरी तरह से चोदो अपनी समधन को आह, दिखा दो आज आह अपने मोटे लंड का दम आह, अपने समधी के साथ मिलकर चोदो अपनी समधन को।

महिपाल सभ्या की बातों से उत्तेजित होकर उसकी चूत में धक्के लगाने लगा, वहीं नीलेश नीचे से दना दन उसकी गांड मार रहा था जिसमें फ़ायदा सभ्या का हो रहा था जैसे चुदाई उसे चाहिए़ थी उसकी वैसी हो रही यही और उसके मुंह से कभी सिसकिया तो कभी कामुक बातें निकल रही थीं।

दोनों समधी मिलकर उसे चोद रहे थे, और सभ्या की हालत खराब कर रहे थे





सभ्या: आह आह आह ऐसे ही आह चोदो आह ओह आह मारो आह आह रुकना मत आह नहीं तो आह गांड में आह डंडा तोड़ दूंगी।

सभ्या लगातार बड़बड़ाती हुई आहे भर रही थी और उसकी उत्तेजना बड़ती जा रही थी, वहीं यही हाल महिपाल का भी था और नीलेश का भी कुछ देर बाद सभ्या इस दोहरी चुदाई के आनंद को और संभाल नहीं पाई और झड़ने लगी, उसकी कमर थरथराते हुए झटके खाने लगी जिससे कुछ पल तो नीलेश और महिपाल ने उसे रोक कर रखा पर वो फिर फिसल गई, और दोनों के लंड उसके अंदर से निकल गए, महिपाल और नीलेश उसे देखते हुए हांफ रहे थे, नीलेश ने कुछ पल बाद महिपाल की ओर देखा और बोले,

नीलेश: महिपाल भाई देख क्या रहे हो उठाओ फिर से, अभी हमारा थोड़े ही हुआ है,

महिपाल ने ये सुन सभ्या को उठाया और नीलेश के ऊपर बिठा दिया पर इस बार सभ्या का मुंह नीलेश की ओर करके बिठाया और नीलेश का लंड सभ्या की चूत में समा गया, नीलेश तो तुरंत ही नीचे से धक्का लगाने लगे वहीं महिपाल ने भी देर न करते हुए अपने लंड को सभ्या की गांड के छेद पर रखा और अंदर घुसा दिया और तुरंत ही धक्के लगा कर सभ्या की गांड मारने लगा,





महिपाल: आह तुम्हारी गांड में तो जन्नत है समधन आह क्या मखमली गांड है आह ऐसी गांड आह, मज़ा आ अह गया ओह लो समधन आह नए समधी का आह लंड अपनी गांड में।

महिपाल सभ्या की गांड मारते हुए बड़बड़ कर रहा था,

सभ्या जो अभी अभी झड़ कर शांत हुई थी एक बार फिर से उसकी चूत और गांड में लंड घुसे हुए थे और उसकी उत्तेजना को फिर से बढ़ा रहे थे, पर ये सिल सिला ज़्यादा नहीं चल पाया और महिपाल सभ्या की गांड की गर्मी के आगे पिघल गया और गुर्राते हुए कुछ तेज धक्के लगाते हुए झड़ने लगा और सभ्या की गांड मैं पिचकारी छोड़ने लगा, झड़ने के बाद महिपाल ने सभ्या की गांड से लंड निकाला जिसके साथ उसका रस भी सभ्या की गांड से बह कर बाहर आ रहा था, महिपाल लड़खड़ाते हुए पीछे जाकर बिस्तर पर गिर गया, उसके पीछे ही सविता थी जो नीलेश की चुदाई से इतनी थक चुकी थी कि सो गई थी, महिपाल के बाद सभ्या भी नीलेश के ऊपर से उठी,

नीलेश: आओ मेरी जान अब मैं और तुम हैं

सभ्या: नहीं अब और नहीं, दिन में कर्मा फिर रात में तबसे अब मैं और नहीं झेल पाऊंगी।

नीलेश: अच्छा ठीक है तुम आराम करो सो जाओ।

सभ्या: हां पिशाब कर आऊं फिर सोऊंगी ही।

सभ्या कमरे से बाहर जाती है और पिशाब करके बापिस आती है तो कमरे का नज़ारा ऐसा था





बिस्तर पर एक ओर पीयूष एक बार फिर से उत्तेजित हो गया था और अब शालू की गांड मार रहा था दोनों बिस्तर पर एक ओर करवट लेकर लेट कर चुदाई का मज़ा ले रहे थे,

शालू: ओह ओह पीयूष बेटा आह आह आह आह आह मार मौसी की गांड आह बहुत अच्छे से मार रहा है तू आह।

पियूष: मौसी तुम्हारी गांड ही इतनी मस्त है आह कि ओह की लंड अपने आप चल रहा है आह कितनी चिकनी है आह आह मौसी ओह ओह।

शालू: मारता रह बेटा आह

शालू हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत को उंगलियों से सहलाते हुए बोली।

वहीं बिस्तर के दूसरी ओर से रानी की सिसकियां अब चीखों में बदल चुकी थी और वो लगातार चीख रही थी और चीखे भी क्यों न एक साथ दो मोटे मोटे और लंबे लंड उसके अंदर घुसे हुए थे, शैलेश नीचे थे और उनका लंड रानी की चूत में घुसा हुआ था वहीं नीलेश पीछे से अपना मोटा लंबा लंड रानी की गांड में घुसा कर मार रहे थे





रानी: ओह ओह आह आह मर गई आह चाचा जी आह मौसा जी आह लगता है आह आह आह आज मजे से आह मैं मर जाऊंगी।

नीलेश: ओह मेरी बहू आह तू नहीं मरेगी आह आह बस तेरी चूत और गांड मारेंगे हम आह आह आह क्या गांड है शैलेश इसकी।

शैलेश: सच में आह भैया, बहुत कमाल का आह बदन है बहू का आह जितना भोग लो आह मन ही नहीं भरता आह।

नीलेश: तो ओह भोगते हैं आह आज जितना आह मन करे।

शालू: अरे बेचारी को इतना भी आह मत परेशान करना आह।

रानी: आह कोई बात नहीं इईई मौसी आह आज चोद लेने दो आह बहुत मज़ा आ रहा है,

शालू: तो फिर आह मज़ा ले बहू, आह देख पीयूष तेरी पत्नी कितनी चुदक्कड़ है आह,

पीयूष: होनी भी ऐसी ही आह चाहिए न मौसी आह जो लंड देखते ही टूट पड़े, आह मम्मी की तरह तुम्हारी तरह चुदक्कड़ लंड की प्यासी।

शालू: आह फिर तो तेरी पसंद बिल्कुल आह सही है,

सभ्या तो एक ओर लेट कर आंखें बंद करके लेट कर सो भी चुकी थी आखिर थकी हुई थी काफी मेहनत जो की थी,

इधर शैलेश और नीलेश आज रानी को दिखा रहे थे चुदाई का आनंद क्या होता है रानी भी आज ऐसी उत्तेजना की नहर में तैर रही थी जिसमें उसने कभी सफर नहीं किया था वो बार बार झड़ रही थी और कुछ पल बाद फिर से वही उत्तेजना उसके अंदर जाग रही थी खैर कुछ देर बाद नीलेश और शैलेश दोनों का भी सब्र का बांध टूट गया और दोनों ने रानी की गांड और चूत में अपना रस भर दिया रानी उनके साथ एक बार और झड़ गई। झड़ने के बाद नीलेश ने अपना लंड उसकी गांड से निकाला और शैलेश ने उसे अपने ऊपर से हटा कर एक ओर लिटा दिया वो बेजान गुड़िया सी ज्यों की त्यों पड़ कर सो गई, चूत और गांड से रस बह कर जांघों और बिस्तर पर आ गया था पर वो तो बेसुध होकर सो गई,

नीलेश और शैलेश भी आंखें मूंद कर लेटे और तुरंत ही सो गए, पीयूष और शालू ही आखिरी में बचे थे कुछ देर तक पीयूष ने शालू की गांड मारी और फिर वो भी शालू की गांड में झड़ गया और दोनों चिपक कर सो गए।

अगली सुबह कुछ आवाज़ से सबसे पहले सविता उठी और उसने उठ कर सामने देखा तो हैरान रह गई धीरे धीरे एक एक करके सब उठ गए और जो उठ कर सामने देखता थोड़ा चौंक जाता, क्योंकि सामने खड़ी अंजली दरवाज़े पर हाथ मार कर सबको जगा रही थी और सब नींद भरी आंखों से उसकी ओर हैरानी से देख रहे थे, जब सब जाग गए तो अंजली ने सबकी ओर देखा और बोली: चाय ले आऊं क्या?





ये कह कर वो मुस्कुराने लगी तो बाकी सब के चेहरों पर भी मुस्कान आ गई,


जारी रहेगी।
 
अपडेट 259


करीब एक घंटा बीत चूका था, और हवा में अभी भी वह कामुक उन्माद की महक तैर रही thi—paseene, रास और नंगी देहों की mili-juli खुशबू. कुछ ने halke-phulke कपडे पहन लिए थे, जबकि बाकी अब भी पूरी तरह नंगे पड़े थे, बेफिक्र और संतुष्ट. पहले महिपाल और उसके परिवार ने अपने गुप्त राज्यों को खोल कर रख दिया था, फिर नीलेश और उसके कुनबे ने. बातें इतनी गहराई से निकली की हवा में एक नयी तरह की अंतरंगता घुल गयी. जब नीलेश ने अपनी कहानी पूरी की, तो महिपाल और उसके घरवालों के चेहरे पर हैरानी की लकीरें साफ़ नज़र आ रही thi—muh खुले, आँखें फैली हुई.

महिपाल ने गहरी सांस ली, फिर मुस्कुराते हुए बोलै, "नीलेश भाई, हम तो यही सोच रहे थे की हम काफी आगे निकल चुके हैं, लेकिन अब पता चला की आप तो हमसे कोसों आगे हैं."

नीलेश ने हंसकर कंधे उचकाए, "अरे नहीं भाई साहब. अब सब खुल hi गया है, तो सब साथ हैं. कोई aage-peeche नहीं."

महिपाल ने सर हिलाया, "ये भी बात सही कही आपने. वैसे चोदामपुर में लोग इतने खुले होंगे, ये सोचा नहीं था."

शालू ने बीच में टोकते हुए कहा, "अरे सब नहीं खुले हैं भैया. बस हमारे कुछ परिवार hi."

महिपाल ने आँखें सिकाई, "इतना भी काफी है वैसे. बस अब तो हम सब भी तुम्हारे साथ जुड़ गए हैं."

शैलेश ने मुस्कुराते हुए जोड़ा, "अरे बिलकुल, जुड़ना तो है hi—rishtedaar जो बनने वाले हैं."

ये सुनते hi महिपाल और पियूष दोनों ने एक साथ हैरानी से पुछा, "रिश्तेदार? मतलब?"

रानी ने शरारती अंदाज़ में हँसते हुए कहा, "मतलब नहीं समझे पापाजी? समधी बनने वाले हो तुम चाचाजी के?"

महिपाल थोड़ा असमंजस में पद गया, उसका चेहरा सवालों से भर गया. लेकिन पियूष तुरंत समझ gaya—uski आँखें चौड़ी हो गयी. सविता और बाकी सब मुस्कुर रहे थे, जैसे कोई पुराण राज़ अब जाहिर होने वाला हो.

पियूष ने उत्सुकता से पुछा, "क्या सच में?"

रानी ने सर हिलाया, "हाँ, तुम्हारी बहिन का चक्कर चल रहा है कर्मा से."

महिपाल ने भौहें चढ़ाई, "अरे ये कब हुआ? ये सब तुम्हे कब से पता है? तुम भी जानती हो क्या?" उसने सविता की और देखकर पुछा.

सविता ने शांत मुस्कान के साथ कहा, "पक्का तो नहीं था, पर हाँ, शक पूरा था."

सभ्य ने आगे बढ़कर बात संभाली, "शक सही था. और सच कहूँ तो अंजलि बिटिया तो मुझे भी बहुत पसंद hai—bahut प्यारी है. मैंने सोच लिया है, वही मेरे घर की बहु बनेगी. तुम लोग क्या कहते हो, भाई साहब और बहिन जी?"

अचानक सभ्य के इस सवाल से महिपाल गहरी सोच में डूब गया. उसकी आँखें सवालों से भरी थी.

पियूष ने चिंता जताते हुए कहा, "वो सब तो ठीक है चची, पर जिस तरह के परिवार हैं हमारे, वो रह पाएगी? और कहीं उसे सच्चाई पता चल गयी तो?"

महिपाल ने सहमति में सर हिलाया, "हाँ बिलकुल सही. यही मैं सोच रहा था. हमे तो एक हफ्ता हुआ है उससे छुपाते हुए, और बड़ी मुश्किल होती है. पर तुम लोग पूरी ज़िन्दगी कैसे छुपा पाओगे?"

इस पर सभ्य मुस्कुराई और बोली, "छुपाने की ज़रुरत hi नहीं पड़ेगी. वो आप लोगों से पहले hi सब जानती है. कर्मा उससे प्यार करता है, और इसीलिए उसने सबसे पहले ये सच उसे बताया था."

महिपाल की आँखें और फ़ैल गयी, "क्या सच में?"

शालू: कर्मा उनके रिश्ते की शुरुआत झूठ से या कुछ छिपा कर नहीं करना चाहता था.

पियूष ने हैरानी से कहा, "इतना बड़ा सच बता दिया? हिम्मत तो है कर्मा में. मैं तो कभी ऐसी बात नहीं बता पाटा."

सविता ने सहमति में कहा, "सच में, ये बात तो है. आसान नहीं होता ऐसा सच बोलना."

महिपाल ने पुछा, "तो क्या अंजलि को इस सब से कोई परेशानी नहीं है? मतलब वो राज़ी है ये सब जान्ने के बाद भी?"

शैलेश ने शरारती अंदाज़ में हँसते हुए कहा, "वैसे अगर अपनी होने वाली सास की छूट और गांड चाटते हुए होने वाले पति से छोड़ना अगर राज़ी होना होता है, तो फिर वो राज़ी है."

ये सुनकर महिपाल और उसका परिवार सन्न रह gaya—chehron पर हैरानी की लहार दौड़ गयी.

महिपाल ने अविश्वास में पुछा, "ये कब हुआ? क्या ये सच है?"

शैलेश ने सभ्य की और देखकर कहा, "क्यों भाभी सच है या नहीं?"

सभ्य मुस्कुराई और बोली, "सच है और आज hi हुआ है. उसने मेरी और कर्मा की एक साथ सेवा की. इसीलिए तो थक कर जल्दी सो गयी."

सविता ने हँसते हुए कहा, "है दिया इस लड़की ने तो हमें भी पीछे छोड़ दिया."

महिपाल ने सर पकड़ लिया, "मेरी तो कुछ समझ नहीं आ रहा. एक साथ इतना कुछ पता चल रहा है."

नीलेश ने हलके से हँसते हुए कहा, "अरे कुछ ज़्यादा समझने की ज़रुरत नहीं. बस इतना बता do—hamare समधी बनने को तैयार हो न? बाकी सब हम संभाल लेंगे."

महिपाल ने एक बार अपनी पत्नी, बेटे और बहु की तरफ देखा. फिर बड़ी मुस्कान के साथ बोलै, "बिलकुल तैयार हूँ समधी जी."

वो नीलेश के गले लगाने के लिए आगे बढ़ा, तो नीलेश ने हंसकर रोका, "अरे महिपाल भाई समधी भले hi बन जाओ लेकिन नंगे मर्द से गले नहीं मिलेंगे."

ये सुनकर सब जोर से हंसने लगे.

सभ्य ने आगे बढ़ते हुए कहा, "तुम मर्द मिलो या न मिलो हम संधान तो मिलेंगी न बहिन जी?"

सविता भी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ बढ़ी.

कुछ पल बाद दोनों गले लग रही थी दोनों की नंगी चूचियां आपस में डाब गयी.

सभ्य: बहुत बहुत बधाई हो संधान जी.

सभ्य ने सविता के चूतड़ों को मसलते हुए कहा.

सविता: तुम्हे भी मेरी प्यारी संधान.

सविता ने भी सभ्य के चुचों पर अपने पंजे गदा दिए.

शालू: ये क्या बस सूखी सूखी बधाई कुछ मीठा भी होना चाहिए.

सविता: लो अभी लो मीठा.

ये कह सविता अपने होंठों को सभ्य के होंठों से जोड़ देती है और सभ्य भी तुरंत अपने होंठ खोल कर सविता के होंठों को चूसने लगती है. दोनों कामुक और गदराई संधान एक दुसरे के होंठों को चूस रही थी और दोनों को देख सब खुश थे मुस्कुर रहे थे.

कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो दोनों के चेहरों पर कामुक और बड़ी मुस्कान थी. सविता झुकी और झुक कर सभ्य के चुचों पर टूट पड़ी और बारी बारी से दोनों को चूसने लगी. सभ्य आहें भरने लगी.

महिपाल: आह मेरा तो साड़ी बातों से hi बुरा हाल हो गया था ऊपर से ये देख कर तो अब रुका नहीं जा रहा.

महिपाल ने अपने लुंड को मुठियाते हुए कहा.

पियूष: मेरा भी यही हाल है पापा.

शैलेश: हाल सबका यही है तो रुके क्यों हो शुरू हो जाओ सब.

नीलेश: और क्या.

महिपाल: अरे संधान जी साड़ी ख़ुशी सिर्फ संधान के साथ hi मन लोगी या समधी से भी मिलेगी?

महिपाल ने सभ्य की और देखते हुए कहा.

सभ्य: बिलकुल मिलेंगे समधी से भी मिलेंगे पर क्या करें संधान hi इतनी अच्छी सेवा कर रही है की छोड़ने का मन hi नहीं कर रहा.

सभ्य ने सविता के सर पर हाथ फेरते हुए कहा जो उसकी चूचियों को चूस रही थी.

महिपाल: अरे हम उससे भी अच्छी करेंगे आओ तो सही भाभी.

सविता ने सभ्य की चुकी को मुँह से निकाला और बोली: जाओ पहले इन्ही से मिल लो बहुत तड़प रहे हैं संधान से मिलने के लिए.

सभ्य मुस्कुराते हुए महिपाल की और बढ़ गयी वहीँ सविता नीलेश की तरफ चल दी.

सभ्य महिपाल के पास गयी जो बिस्तर पर पेअर लटका कर नंगा बैठा था. सभ्य उसके सामने घुटनों पर नीचे hi बैठ गयी और उसके कड़क लुंड को हाथों में लेकर मुठियाने लगी.

सभ्य: आह समधी जी ये इतना कड़क क्यों कर रखा है?

महिपाल सभ्य के हाथ को अपने लुंड पर महसूस कर सिहर उठा और बोलै: ये तुम्हारी वजह से hi है संधान आह तुम्हे देख कर hi तड़प रहा है ये.

सभ्य: अच्छा हमारी वजह से तो फिर इसकी तड़प भी हमें hi मिटानी पड़ेगी.

सभ्य ने मुस्कुराते हुए कहा और उसके लुंड के टोपे को जीभ से चाट लिया. महिपाल सभ्य के चाटने से बिलकुल सिहर गया. वहीँ सविता भी अपने समधी नीलेश के सामने पहुँच चुकी थी.

नीलेश: आ जाओ संधान आज ये सुख भी भोग कर देख लें.

नीलेश ने सविता को अपने आप चिपका कर कहा.

उधर पियूष भी उठ कर शालू के पास पहुँच गया था और सीधा उसकी चूचियों पर जा कर मुँह लगा दिया.

शालू: ओह तू तो बड़ा बेसब्र हो रहा है बीटा.

अपने पति को शालू के पास देख रानी भी अपनी चूचियों को सहलाते हुए उठी और शैलेश के पास पहुँच गयी.

रानी: मैं तुम्हारी कुछ सेवा करून मौसा जी?

शैलेश: बिलकुल बहु तेरी सेवा के लिए hi तो हम यहाँ हैं.

रानी शैलेश के सामने घुटनों पर बैठ गयी और शैलेश के कड़क लम्बे लुंड को पकड़ कर सहलाने लगी और फिर उसे अपने मुँह में भर लिया.

शैलेश: आह बहु ओह इतना गरम है तेरा मुँह आह ओह.

शैलेश रानी के मुँह का एहसास अपने लुंड पर पाकर तड़पने लगे वहीँ रानी भी अपना मुँह दबा कर शैलेश के लुंड को ज़्यादा से ज़्यादा अपने मुँह में भरने की कोशिश कर रही थी.

रानी के बदन पर सिर्फ उसकी ब्रा थी जिसमें से उसकी चूचियां बाहर झूल रही थी जिन्हे शैलेश हाथ बढ़ा कर मसलने लगे थे.

शैलेश: आह बहु तू पूरी की पूरी मलाई है आह क्या बदन है तेरा.

रानी कुछ बोली नहीं पर उसका जवाब वो अपनी प्रतिक्रिया से दे रही थी.

पूरे कमरे में लुंड चूसै का दौर चल रहा था और नीलेश और सविता भी इस दौड़ में पीछे नहीं थे. नीलेश भी खड़े हो कर अपने सामने घुटनों पर बैठी अपनी संधान के मुँह में अपना लम्बा लुंड घुसाने का भरसक प्रयास कर रहे थे सविता के सर को अपने लुंड पर दबाते हुए.

सविता की हालत खराब थी आँखों से आंसू बह रहे थे नीलेश का लुंड गले तक टकरा रहा था पर तकलीफ के बाद भी सविता अपने समधी की सेवा में कोई कमी नहीं छोड़ रही थी उसकी नंगी चूचियां झूल रही थी.

नीलेश: ओह आह संधान आह पूरा भर लो अपने मुँह में आह अब तो रिश्तेदार बन गए हैं आह आना जाना लगा रहेगा.

सविता: हाँ बिलकुल ओह भाई साहब आह गुच्छ.

सविता ने लुंड मुँह से निकाल कर बोलै और फिर वापिस मुँह में भर लिया.

इधर तभी पीछे से शालू की आह निकली क्योंकि पियूष जो पहले से hi काफी उत्तेजना में था और थोड़ा बेसब्र भी हो रहा था उसने तो शालू को बिस्तर पर घोड़ी बना दिया था और अपना मोटा लम्बा लुंड पीछे से शालू की छूट में घुसा दिया था और उसकी कमर को थामे अपना लुंड शालू की छूट में पेलने लगा था.

शालू: आह आह आह बीटा आह ओह ऐसे hi छोड़ मौसी को ओह आह घुसा दे आह अपना हथियार मौसी की छूट में.

पियूष: आह आह मौसियी ओह क्या छूट है तुम्हारी आह ओह बहुत मज़ा आ रहा है अब नहीं रुक पाउँगा आह.

शालू: ओह बीटा मत रुक आह छोड़ जितना मन करे उतना छोड़ आह आह आह मत रुक.

पियूष: आह मौसी अब छह कर भी नहीं रुक पाउँगा आह आह आह ओह आह.

अब बीटा चालू हो चूका था तो बाप भी पीछे नहीं था पर पियूष के विपरीत महिपाल थोड़ा धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था हर पल सभ्य के कामुक और मादक बदन का लुत्फ़ उठाते हुए. सभ्य के मुँह से महिपाल ने अपना लुंड निकाला और सभ्य को उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया और फिर खुद उसके ऊपर आ गया. सभ्य ने भी अपनी टांगें अपने होने वाले समधी के लिए फैला दी. महिपाल ने अपना कड़क लुंड सभ्य की छूट के ऊपर रखा और फिर आगे होकर सभ्य के होंठों से अपने होंठ मिला दिए.

सभ्य भी तुरंत उसका साथ देने लगी और दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने लगे साथ hi महिपाल की कमर भी चलने लगी और उसका लुंड सभ्य की छूट में समां गया. दोनों के मुँह से hi आह निकली जो एक दुसरे के मुँह में hi घुट गयी.

सभ्य के होंठों को चूसते हुए महिपाल धीरे धीरे धक्के लगाने लगा और सभ्य की गरम छूट में अपना लुंड जड़ तक घुसा कर उसे छोड़ने लगा. धीरे धीरे उसकी गति बढ़ती जा रही थी पर उसके होंठ सभ्य के होंठों से लगातार जुड़े हुए थे. पर उसका लुंड लगातार सभ्य की छूट में गड्ढा कर रहा था.

जहाँ महिपाल अपनी संधान के साथ धीरे धीरे से और बड़े hi कामुक तरीके चुदाई कर रहा था वहीँ उनके समधी यानि नीलेश सिंह अपने चिर परिचित अंदाज़ में अपनी संधान यानि सविता की धुआंधार चुदाई कर रहे थे.

सविता भी बिस्तर पर तक लगाए लेती थी उसकी टांगें फैली हुई थी या यूँ कहें की नीलेश ने उन्हें पीछे की और hi मोड़ रखा था और उसकी टांगों के नीचे बैठ कर उसकी छूट में तूफानी रफ़्तार से लुंड पेल रहे थे. सविता का पूरा बदन पसीने से तर था और लगातार उसके मुँह से आहें और सिसकारियां निकल रही थी.

सविता: आह आह आह ओह माँ आह समधी जी आह आज तो जान आह लेकर hi ओह मानोगे क्या आह आह.

नीलेश: आह ओह भाभी जी जान आह तो नहीं आह तुम्हारी गरम छूट ओह और कासी हुई गांड लेकर आह ज़रूर मानेंगे.

शैलेश: आह भैया तुम आह सब मत ले आह लेना हमारे लिए ओह भी छोड़ देना आह संधान को ओह.

शैलेश ने रानी को उसके ऊपर लेटकर छोड़ते हुए सर उठा कर कहा.

रानी: ओह मौसा जी ओह पहले आह मुझे तो आह अच्छे से छोड़ लो ओह मम्मी जी आह कहाँ भागी जा रही हैं.

रानी ने भी शैलेश के लुंड पर अपनी छूट को कस्ते हुए कहा.

शैलेश: बिलकुल बहु आह तुझे चोदे बिना आह तो मैं हिलने वाला आह भी नहीं हूँ आह.

रानी: ओह मौसा जी मैं जाने भी नहीं दूंगी आह बहुत मज़ा दे रहा है तुम्हारा मोटा लुंड आह आह ऐसे hi.

रानी ने अपने हाथों को शैलेश की पीठ पर कस्ते हुए कहा. शैलेश भी कमर घुमा घुमा कर रानी की छूट में जड़ तक लुंड घुसा कर छोड़ रहे थे.

रानी: आह मौसा लगता है तुम्हारा लुंड सीधा बच्चेदानी में hi टक्कर मार रहा है.

शैलेश: बहु वो तो पता नहीं पर आह तेरी छूट आह बहुत गरम है लग रहा है लुंड अंदर hi पिघला लेगी.

रानी: आह मौसा जी आह येहममम छोड़ते रहो ओह ऐसे hi.

पूरे कमरे में चुदाई का तूफ़ान एक बार फिर चल पड़ा था चरों और से आहें और सिसकियों की आवाज़ गूंज रही थी. दोनों परिवार होने वाले रिश्ते की शुरुआत के लिए एक नए तरह का जश्न मन रहे थे शायद hi इस तरह से कहीं कोई रिश्ता पक्का होता होगा पर ये hi तो खासियत थी चोदामपुर के लोगों की इनका हर काम थोड़ा हटके hi होता था.

दोनों होने वाले समधी अपनी अपनी भावी संधान के साथ लगे हुए थे और पारिवारिक मेल जॉल बढ़ा रहे थे इसी कड़ी में शैलेश शालू पियूष और रानी भी लगे हुए थे. इधर पियूष जो शालू को लगातार तेज़ से छोड़ रहा था उसे अपना रास अपने लुंड में भरता हुआ महसूस हुआ और उसकी आहें निकलने लगी. शालू ने भी ये महसूस किया और तुरंत आगे हो गयी और उसका लुंड अपनी छूट से निकाल दिया.

पियूष: अरे आह क्या हुआ मौसी?

पियूष ने हैरानी से हाँफते हुए पुछा.

शालू: तेरा होने वाला था न थोड़ा आराम कर अभी तो और काफी देर करना है.

शालू ने गर्दन घुमा कर उसे बोलै.

पियूष: ये भी सही कहा मौसी तुमने खुद को रोकना भी सीखना होगा मुझे.

ये कहते हुए पियूष पीछे होकर बैठ गया और हांफने लगा.

शालू: बिलकुल इन्हे और जीजा को देख ये भी यही करते हैं तभी तो लम्बी चुदाई का मज़ा मिलता है.

शालू ने नीलेश और शैलेश की और इशारा करके कहा और फिर खुद भी उठ कर अपने पति और रानी के पास चल दी जहाँ शैलेश रानी को घोड़ी बना कर छोड़ रहे थे.

शालू भी रानी के नीचे जा कर लेट गयी और उसकी चूचियों को चूमने लगी वहीँ रानी भी शालू की चूचियों को मसलने लगी. शालू साथ में खुद की भी छूट में उँगलियाँ अंदर बाहर कर रही थी.

शालू: तेरे पति को तो थका दिया मैंने बहु मेरे पति के साथ मज़ा आ रहा है?

रानी: आह आह ओह हाँ मौसी आह बहुत मज़ा आह मौसा का लुंड आह अंदर तक मार रहा है. आह मैं आने वाली हूँ.

शालू: आह बहुरिया खुल कर झाड़ आह ले अपनी छूट में इनका मोटा लम्बा लोढ़ा आह क्यों जी कैसी है बहुरिया की छूट मस्त है न?

शालू ने अपने पति से पुछा जो की रानी को छोड़ने में व्यस्त थे.

शैलेश: आह पूछो मत आह यार बहुत गरम है और कासी हुई भी आह बड़ा मज़ा दे रही है आह आह आह आह.

शालू: तो और कुछ आह तगड़े धक्के लगाओ बहु झड़ने की कगार पर है उसे भी आनंद आने दो.

शैलेश ने ये सुना और रानी की कमर को थाम कर तूफानी धक्के लगाने लगे और कुछ पल बाद hi रानी का मुँह खुला का खुला रह गया और उसका बदन अकड़ने लगा कमर झटके खाने लगी और वो झड़ने लगी. झड़ते हुए वो आगे बिस्तर पर गिर गयी और वैसे hi लेट कर हांफने लगी. शैलेश का लुंड उसकी छूट से निकल गया जिसे शालू उठकर तुरंत hi चूसने लगी.

रानी तो नीचे बेसुध सी हो कर लेट गयी थी वहीँ शालू अपने पति का लुंड मस्ती में चूस रही थी. शैलेश भी रानी की चुदाई से थोड़ा आराम मिला तो अपनी पत्नी के गरम मुँह का आनंद लेने लगे.

इतने में पियूष भी अपनी जगह से उठा और शालू के पीछे आ गया और अपने लुंड को शालू के चूतड़ों में घिसने लगा.

पियूष: मौसी तुम्हारे चूतड़ों को देख कर और रुका नहीं गया आह क्या मस्त चूतड़ हैं तुम्हारी पत्नी के मौसा.

शैलेश: जानता हूँ पियूष वैसे तेरी पत्नी भी काम नहीं है एक डैम चुड़क्कड़ बहु है.

पियूष: तुम्हे पसंद आयी मौसा?

शैलेश: अरे ऐसी बहु पसंद नहीं आएगी तो कैसी आएगी? और तू क्या बातों में लगा है घुसा दे अपनी मौसी में लोढ़ा और मिल कर छोड़ते हैं.

पियूष ये सुन मुस्कुराया और फिर अपना लुंड शालू की छूट में घुसा दिया. शालू दो तरफ से छोड़ने लगी मुँह में पति का लुंड था तो छूट में पियूष का.

दूसरी और नीलेश ने अपनी होने वाली संधान को आज अच्छे से भोगने का मन बना रखा था और उसी को जारी रखते हुए सविता को बुरी तरह छोड़ रहे थे. सविता के मुँह से अब तो आहें भी लगातार निकल रही थी. नीलेश ने सविता को बिस्तर पर टांगें ऊपर कर के मोड़ रखा था और उसके ऊपर आ कर बेदर्दी से तूफानी धक्के लगा रहे थे.

सविता: ओह आह आह आह आह आह आह आह माँ मर गयी आईई आह आह आरा आह आराम से ओह ओह ओह ओह मैं गयी पियूष के पापाः देखो. आह पियूष ओह आह आह आह देख तेरी आह आह माँ चुद गयी आह आह आह आह.

सविता चुड़ते हुए उत्तेजना में लगातार बढ़ बढ़ रही थी.

नीलेश: आह आह आह ओह ओह संधान आह साली कुटिया बना कर आह छोडूंगा तुझे आह आह आह रंडी है तू मेरी आह आह आह बोल क्या है तू.

सविता: ओह आह आह रनडीई हूँ तुम्हारी आह आह मेरे आह राजा आआह. ओह ओह ओह गयी मैं आह.

इतनी भयंकर चुदाई के सामने सविता टिक नहीं पाई और झड़ने लगी उसका बदन पहले तो अकड़ा और फिर ढीला पद गया. सविता के ढीले पड़ने पर नीलेश ने उसे छोड़ दिया और खुद भी एक और बैठ कर सांसें भरने लगे और बाकी लोगों की चुदाई देखने लगे.

एक और सोफे पर शैलेश बैठे थे और शालू झुक कर उनका लुंड चूस रही थी वहीँ पियूष शालू के पीछे था और उसकी कमर को थाम कर अपना लुंड उसकी छूट में पेल रहा था.

पियूष: आह आह आह सच में मौसी आह आह आह बहुत मज़ा आ रहा है ओह मुझे तो तुमसे प्यार हो गया आह आह मौसी.

शैलेश: ो लल्ला छोड़ भले hi कितना लो पर प्यार व्यार मत करो यार कहीं ये भी तुम्हारे प्यार में पद गयीं तो हम तो रंडवा हो जायेंगे यार.

शैलेश ने मज़ाक करते हुए कहा तो सब हंसने लगे.

पियूष: अरे नहीं मौसा जी ऐसा नहीं है.

शैलेश: ऐसा hi है बीटा इस उम्र में हम से कोई ब्याह भी नहीं करेगा.

इस पर शालू ने उनका लुंड मुँह से निकाला और बोली: नयी संधान से कर लेना संधान के बाद जोरू भी बन जाएँगी.

शालू ने मज़ाक को आगे बढ़ाया.

सभ्य: तो फिर पियूष तू भैया को मौसा नहीं पापा बुलाएगा.

सभ्य ने महिपाल के लुंड पर उछालते हुए कहा. महिपाल नीचे पेअर लटका कर बैठा था और सभ्य उसका लुंड छूट में लेकर उछाल रही थी.

महिपाल: अरे ऐसा न करो यार आह आह हमारा घर कहे उजाड़ रहे हो.

महिपाल ने सभ्य की छूट में धक्के लगाते हुए कहा. उन्हें देख कर नीलेश भी उठे और उनकी और चल दिए और जा कर दोनों के बगल में खड़े हो गए और अपना लुंड सभ्य के मुँह के सामने कर दिया जिसे तुरंत सभ्य मुँह में भर के चूसने लगी.

महिपाल को थोड़ा अजीब भी लग रहा था और उत्तेजित भी हो रहा था की वो नीलेश के साथ मिल कर उसकी पत्नी को छोड़ रहा है.

महिपाल: आह आह भाई साहब आह ओह कैसी लगी नयी संधान ओह आह.

नीलेश: बहुत भरी हुई और मस्त तुम्हे कैसी लग रही है?

महिपाल: आह यार क्या बताऊँ आह रुकने का मन नहीं हो रहा आह मन कर रहा है ये चुदाई आह ज़िन्दगी भर ख़तम न हो.

नीलेश: अरे ज़िन्दगी में और भी बहुत मौके आएंगे अभी के पल का मज़ा लो.

महिपाल: आह भाभी का बदन hi ऐसा है की बिना मज़ा लिए रहा hi नहीं जाएगा.

नीलेश: ओह ये तो बिलकुल सही कहा तुमने आह समधी जी हमारी पत्नी का जवाब नहीं.

महिपाल: आह भाभी थोड़ी देर उठ जाओ आह नहीं तो मेरा निकल जाएगा आह और मैं और देर छोड़ना चाहता हूँ तुम्हे.

महिपाल ने अपनी उत्तेजना महसूस करते हुए कहा.

नीलेश: अरे ये भी ठीक है आह आओ तब तक तुम्हारी छूट को हम छोड़ लें.

नीलेश ने सभ्य से कहा और उसे उठा कर घोड़ी बना लिया और पीछे से उसकी छूट में लुंड घुसा कर छोड़ने लगे.

सभ्य भी आगे को झुक कर महिपाल के लुंड को पकड़ कर उसे सहलाने लगी.

महिपाल: आह आप भाभी आह आराम से.

सभ्य: चिंता मत करो भाई साहब नहीं निकलेगा आह लुंड संभालने का अच्छा अनुभव है मुझे.

सभ्य ने मुस्कुराते हुए कहा.

नीलेश: सही कह रही है ये महिपाल भाई ओह हमारा तो न जाने कब से संभाल रही है.

दूसरी और रानी अब उठ कर बैठ चुकी थी और थोड़ी तरोताज़ा लग रही थी कुछ देर के आराम के बाद. ये शैलेश ने देखा तो शालू के सामने से उठ कर उसकी और चल दिए.

शैलेश: आराम कर लिया न बहु?

रानी उनकी और देख मुस्कुराई और बोली: फिर से थकाने आये हो मौसा जी?

शैलेश: अब इसके अलावा और काम hi क्या है मेरा आ जा थोड़ा आगे होकर लेट.

शैलेश ने उसे बिस्तर के किनारे लिटाया और खुद उसके पैरों के बीच बैठ गए और फिर उसके पैरों को मोड़ कर पीछे की और फैलाया जिससे उसके चूतड़ खुल कर उसके सामने आ गए. शैलेश ने अपना मुँह रानी की गांड के छेड़ पर लगा दिया और जीभ निकाल कर उसे चाटने लगे. रानी अपनी गांड के छेड़ पर शैलेश की खुरदरी जीभ को महसूस कर सिहरन लगी.

रानी: ओह मौसा जी आह क्या कर आह रहे हो ओह.

शैलेश अपनी जीभ से रानी की गांड में रास्ता बनाने लगे और उसमें थूक भरने लगे. रानी लगातार अपनी चूचियों को मसलते हुए आहें भर रही थी. जब शैलेश को लगा रानी की गांड का छेड़ अच्छे से चिकना हो चूका है तो वो उठे और अपने लुंड को पकड़ कर उसके मोठे फैले हुए टोपे को रानी की गांड के छेड़ पर लगाया. रानी समझ तो गयी क्या होने वाला है इसलिए खुद को तैयार करते हुए बोली: मौसा जी आराम से डालना.

शैलेश: चिंता मत कर बहु तुझे तकलीफ नहीं होने दूंगा.

ये कहते हुए शैलेश ने हल्का धक्का मारा और लुंड का टोपा रानी की गांड को फैलाते हुए उसमें फंस गया जिससे रानी की एक और आह निकली. शैलेश ने कुछ पल बाद hi धक्का लगा कर अपना और लुंड अंदर सरका दिया और रानी आहें भरने लगी और कुछ पल बाद hi शैलेश धीरे और लम्बे धक्के लगा कर रानी की गांड में लुंड अंदर बाहर कर रहे थे.

रानी गरम होते हुए अपनी चूचियों को मसल रही थी.

शैलेश: आह बहु ओह मुझे तो आह लगा आह था की तेरी छूट hi गरम है आह पर तेरी गांड तो उससे भी ज़्यादा गरम और आह मखमली है आह.

रानी: मौसा जी तुम्हारा लुंड ओह गांड को पूरा आह भर रहा है आह मौसा जी.

शैलेश: आह तेरी गांड आह बहुत तंग है बहु आह लगता है लुंड को पकड़ रही है आह बहुत मज़ा आ रहा है.

शैलेश ने रानी की गांड में लुंड चलते हुए कहा और धीरे धीरे गति बढ़ाने लगे.

दूसरी तरफ रानी का पति शैलेश की पत्नी को पूरे जोश से छोड़ रहा था अब वो उस उत्तेजना के वेग में था की छह कर भी रुक नहीं प् रहा था वहीँ उसके झटके शालू को भी उसके चरम की नदी में धकेल रहे थे. कुछ देर बाद दोनों के मुँह से hi एक आह निकली और दोनों hi हाँफते हुए गुर्राते हुए सिसकियाँ भरते हुए झड़ने लगे. पियूष ने अपना रास शालू की गरम छूट में भर दिया वहीँ शालू भी झड़ने के बाद आराम से लेट गयी पियूष भी उसके बगल में लेट गया और आँखें बंद कर के हांफने लगा.

दूसरी और नीलेश ने सभ्य को अपने ऊपर बिठा लिया था और सभ्य भी अपनी गांड में अपने पति का लुंड लेकर उनके ऊपर धीरे धीरे उछाल रही थी.

महिपाल उनसे थोड़ा दूर बैठ कर अपने आप को थोड़ा शांत कर रहा था. उसकी नज़रें सभ्य और नीलेश पर hi थी खासकर सभ्य के कामुक बदन पर. तभी सभ्य की नज़रें उससे मिली तो सभ्य नीलेश के लुंड पर उछालते हुए बोली: इधर आओ न समधी जी आह संधान के पास आह आओ.

सभ्य की इतनी कामुक और मादक बातें सुन कर महिपाल तुरंत उठा और फर्टी में सभ्य और नीलेश के पास पहुँच गया. नीलेश नीचे लेते हुए उसकी गांड मार रहा था और अपनी पत्नी की कामुक क्रियाएं देख रहा था. सभ्य ने महिपाल के पास आते hi उछालना रोका और हाथ बढ़ा कर उसके लुंड को पकड़ लिया और उसकी आँखों में देखते हुए बोली: आह समधी जी अपना ये मोटा लम्बा लुंड मेरी छूट में घुसा दो आह देखो कितनी प्यासी है मेरी छूट तुम्हारे लुंड के लिए आह मुझे एक साथ दो लुंड चाहिए आह घुसा दो न.

महिपाल: आह भाभी ओह अभी लो.

अब सभ्य ऐसे बोले तो कौन मन कर सकता था महिपाल तुरंत उसकी और नीलेश की टांगों के बीच आया सभ्य ने उसका लुंड पकड़ कर अपनी छूट पर लगाया और फिर खुद hi पकड़ कर अंदर सरका लिया.

सभ्य: आह आह ओह देखो आह तुम्हारा लुंड मेरी प्यासी और गरम छूट में घुस गया है समधी जी आह कितना मोटा है आह कैसा लग रहा है?

महिपाल: ओह भाभी जी आह संधान जी आह बहुत अच्छा आह लग रहा है लुंड किसी भट्ठी में है.

सभ्य: आह तो अब छोड़ो समधी जी आह बुरी तरह से छोड़ो अपनी संधान को आह दिखा दो आज आह अपने मोठे लुंड का दम आह अपने समधी के साथ मिल कर छोड़ो अपनी संधान को.

महिपाल सभ्य की बातों से उत्तेजित होकर उसकी छूट में धक्के लगाने लगा वहीँ नीलेश नीचे से दाना दान उसकी गांड मार रहा था जिसमें फायदा सभ्य का हो रहा था जैसे चुदाई उसे चाहिए थी वैसी हो रही थी यही और उसके मुँह से कभी सिसकियाँ तो कभी कामुक बातें निकल रही थी.

दोनों समधी मिल कर उसे छोड़ रहे थे और सभ्य की हालत खराब कर रहे थे.

सभ्य: आह आह आह ऐसे hi आह छोड़ो आह ओह आह मारो आह आह रुकना मत आह नहीं तो आह गांड में आह डंडा तोड़ दूंगी.

सभ्य लगातार बड़बड़ाती हुई आहें भर रही थी और उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वहीँ यही हाल महिपाल का भी था और नीलेश का भी. कुछ देर बाद सभ्य इस दोहरी चुदाई के आनंद को और संभाल नहीं पाई और झड़ने लगी उसकी कमर थरथराते हुए झटके खाने लगी जिससे कुछ पल तो नीलेश और महिपाल ने उसे रोक कर रखा पर वो फिर फिसल गयी और दोनों के लुंड उसके अंदर से निकल गए. महिपाल और नीलेश उसे देखते हुए हांफ रहे थे. नीलेश ने कुछ पल बाद महिपाल की और देखा और बोले.

नीलेश: महिपाल भाई देख क्या रहे हो उठाओ फिर से अभी हमारा थोड़े hi हुआ है.

महिपाल ने ये सुन सभ्य को उठाया और नीलेश के ऊपर बिठा दिया पर इस बार सभ्य का मुँह नीलेश की और करके बिठाया और नीलेश का लुंड सभ्य की छूट में समां गया. नीलेश तो तुरंत hi नीचे से धक्का लगाने लगे वहीँ महिपाल ने भी देर न करते हुए अपने लुंड को सभ्य की गांड के छेड़ पर रखा और अंदर घुसा दिया और तुरंत hi धक्के लगा कर सभ्य की गांड मारने लगा.

महिपाल: आह तुम्हारी गांड में तो जन्नत है संधान आह क्या मखमली गांड है आह ऐसी गांड आह मज़ा आ गया ओह लो संधान आह नए समधी का आह लुंड अपनी गांड में.

महिपाल सभ्य की गांड मारते हुए बड़बड़ कर रहा था.

सभ्य जो अभी अभी झाड़ कर शांत हुई थी एक बार फिर से उसकी छूट और गांड में लुंड घुसे हुए थे और उसकी उत्तेजना को फिर से बढ़ा रहे थे. पर ये सिलसिला ज़्यादा नहीं चल पाया और महिपाल सभ्य की गांड की गर्मी के आगे पिघल गया और गुर्राते हुए कुछ तेज़ धक्के लगाते हुए झड़ने लगा और सभ्य की गांड में पिचकारी छोड़ने लगा. झड़ने के बाद महिपाल ने सभ्य की गांड से लुंड निकाला जिसके साथ उसका रास भी सभ्य की गांड से बह कर बाहर आ रहा था. महिपाल लड़खड़ाते हुए पीछे जा कर बिस्तर पर गिर गया. उसके पीछे hi सविता थी जो नीलेश की चुदाई से इतनी थक चुकी थी की सो गयी थी. महिपाल के बाद सभ्य भी नीलेश के ऊपर से उठी.

नीलेश: आओ मेरी जान अब मैं और तुम हैं.

सभ्य: नहीं अब और नहीं दिन में कर्मा फिर रात में तबसे अब मैं और नहीं झेल पाऊँगी.

नीलेश: अच्छा ठीक है तुम आराम करो सो जाओ.

सभ्य: हाँ पिशाब कर आऊं फिर सोऊंगी hi.

सभ्य कमरे से बाहर जाती है और पिशाब कर के वापिस आती है तो कमरे का नज़ारा ऐसा था...

बिस्तर पर एक और पियूष एक बार फिर से उत्तेजित हो गया था और अब शालू की गांड मार रहा था दोनों बिस्तर पर एक और करवट लेकर लेट कर चुदाई का मज़ा ले रहे थे.

शालू: ओह ओह पियूष बीटा आह आह आह आह आह मार मौसी की गांड आह बहुत अच्छे से मार रहा है तू आह.

पियूष: मौसी तुम्हारी गांड hi इतनी मस्त है आह की ओह लुंड अपने आप चल रहा है आह कितनी चिकनी है आह आह मौसी ओह ओह.

शालू: मारता रह बीटा आह.

शालू हाथ नीचे ले जा कर अपनी छूट को उँगलियों से सहलाते हुए बोली.

वहीँ बिस्तर के दूसरी और से रानी की सिसकियाँ अब चीखों में बदल चुकी थी और वो लगातार चीख रही थी और चीखे भी क्यों न एक साथ दो मोठे मोठे और लम्बे लुंड उसके अंदर घुसे हुए थे. शैलेश नीचे थे और उनका लुंड रानी की छूट में घुसा हुआ था वहीँ नीलेश पीछे से अपना मोटा लम्बा लुंड रानी की गांड में घुसा कर मार रहे थे.

रानी: ओह ओह आह आह मर गयी आह चाचा जी आह मौसा जी आह लगता है आह आह आह आज मज़े से आह मैं मर जाउंगी.

नीलेश: ओह मेरी बहु आह तू नहीं मारेगी आह आह बस तेरी छूट और गांड मारेंगे हम आह आह आह क्या गांड है शैलेश इसकी.

शैलेश: सच में आह भैया बहुत कमाल का आह बदन है बहु का आह जितना भोग लो आह मन hi नहीं भरता आह.

नीलेश: तो ओह भोगते हैं आह आज जितना आह मन करे.

शालू: अरे बेचारी को इतना भी आह मत परेशां करना आह.

रानी: आह कोई बात नहीं ीी मौसी आह आज छोड़ लेने दो आह बहुत मज़ा आ रहा है.

शालू: तो फिर आह मज़ा ले बहु आह देख पियूष तेरी पत्नी कितनी चुड़क्कड़ है आह.

पियूष: होनी भी ऐसी hi आह चाहिए न मौसी आह जो लुंड देखते hi टूट पड़े आह मम्मी की तरह तुम्हारी तरह चुड़क्कड़ लुंड की प्यासी.

शालू: आह फिर तो तेरी पसंद बिलकुल आह सही है.

सभ्य तो एक और लेट कर आँखें बंद कर के सो भी चुकी थी आखिर थकी हुई थी काफी म्हणत जो की थी.

इधर शैलेश और नीलेश आज रानी को दिखा रहे थे चुदाई का आनंद क्या होता है. रानी भी आज ऐसी उत्तेजना की नदी में तैर रही थी जिसमें उसने कभी सफर नहीं किया था वो बार बार झाड़ रही थी और कुछ पल बाद फिर से वही उत्तेजना उसके अंदर जाग रही थी खैर कुछ देर बाद नीलेश और शैलेश दोनों का भी सब्र का बाँध टूट गया और दोनों ने रानी की गांड और छूट में अपना रास भर दिया रानी उनके साथ एक बार और झाड़ गयी. झड़ने के बाद नीलेश ने अपना लुंड उसकी गांड से निकाला और शैलेश ने उसे अपने ऊपर से हटा कर एक और लिटा दिया वो बेजान गुड़िया सी ज्यों की त्यों पद कर सो गयी छूट और गांड से रास बह कर जाँघों और बिस्तर पर आ गया था पर वो तो बेसुध होकर सो गयी.

नीलेश और शैलेश भी आँखें मूँद कर लेते और तुरंत hi सो गए. पियूष और शालू hi आखिरी में बचे थे कुछ देर तक पियूष ने शालू की गांड मारी और फिर वो भी शालू की गांड में झाड़ गया और दोनों चिपक कर सो गए.

अगली सुबह कुछ आवाज़ से सबसे पहले सविता उठी और उसने उठ कर सामने देखा तो हैरान रह गयी धीरे धीरे एक एक कर के सब उठ गए और जो उठ कर सामने देखता थोड़ा चौंक जाता क्योंकि सामने कड़ी अंजलि दरवाज़े पर हाथ मार कर सबको जगा रही थी और सब नींद भरी आँखों से उसकी और हैरानी से देख रहे थे. जब सब जाग गए तो अंजलि ने सबकी और देखा और बोली: चाय ले आऊं क्या?

ये कह कर वो मुस्कुराने लगी तो बाकी सब के चेहरों पर भी मुस्कान आ गयी.



जारी रहेगी...
 
अगली सुबह कुछ आवाज़ से सबसे पहले सविता उठी और उसने उठ कर सामने देखा तो हैरान रह गई धीरे धीरे एक एक करके सब उठ गए और जो उठ कर सामने देखता थोड़ा चौंक जाता, क्योंकि सामने खड़ी अंजली दरवाज़े पर हाथ मार कर सबको जगा रही थी और सब नींद भरी आंखों से उसकी ओर हैरानी से देख रहे थे, जब सब जाग गए तो अंजली ने सबकी ओर देखा और बोली: चाय ले आऊं क्या? ये कह कर वो मुस्कुराने लगी तो बाकी सब के चेहरों पर भी मुस्कान आ गई.

अपडेट 260


उसी दिन दोपहर का समय था महिपाल अपने घर के आंगन में इधर से उधर टहल रहा था परेशानी के भाव उसके चेहरे पर साफ नज़र आ रहे थे,

सविता जो पास में ही कुर्सी पर बैठी थी उसके बगल में ही रानी और पीयूष भी थे, तीनों उसे ही इधर उधर टहलते हुए देख रहे थे,

महिपाल: ये सही नहीं है सविता, हमें उस से बात करनी चाहिए, उसे सब समझाना चाहिए,

सविता: अरे तुम बेकार में इतना परेशान हो रहे हो, जैसा सोच रहे हो वैसा कुछ भी नहीं है,

महिपाल: अच्छा फिर कैसा है बताओ जरा हमारी बेटी हमारे बारे में सब जानने के बाद उनके साथ चली गई है इसका और क्या मतलब हो सकता है, वो हमसे नाराज़ हो गई है भले ही उसने कहा न हो पर ऐसा ही है।

रानी: नहीं पापाजी ऐसा नहीं है वो मुझे नाराज़ तो बिलकुल भी नहीं लगी, और उसने खुद से कहा कि उसे थोड़ा समय चाहिए़ सब कुछ आराम से अपने आप को समझाने के लिए।

पीयूष: सही में पापा अब इतना बड़ा बदलाव देख कर अपने परिवार में किसी को भी थोड़ा झटका तो लगेगा ही तो मुझे भी लगता है उसे समय देना ही सही होगा।

महिपाल: पता नहीं पर मैं अपने मन को समझा नहीं पा रहा हूं।

उधर चोदम पुर में अंजली कर्मा के घर पर थी, वो उन लोगों के साथ ही चली आई थी। घर में इस समय सभी लोग मौजूद थे, नीलेश ने सबको बोल दिया था कि अंजली हमारे परिवार का हिस्सा बनने वाली है और वो चाहती है कि वो हमारे परिवार को और अच्छे से जाने तो उसके सामने आज हमें खुल कर रहना है जैसे हम रहते हैं ताकि वो भी जान सके वो किस तरह के परिवार में आ रही है। किसी को भी इस से परेशानी नहीं थी,

और अभी वो कमरे में कर्मा के कमरे में बिस्तर पर बैठी थी और कर्मा उसके बगल में टेबल पर, कुछ पल बाद ही कर्मा ने अंजली को अपनी ओर पकड़ कर खींच लिया था और दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगे, तभी पीछे से गुंजन हाथ में खाने की थाली लेकर आई और बोली: ओह लैला मजनू थोड़ा एक दूसरे को सांस लेने दो और खाना खा लो,





अंजली ये सुनकर शर्माते हुए कर्मा से अलग होकर खड़ी गई, और खड़ी हो गई,

गुंजन: अरे बिटिया शर्मा काहे रही हो और हमसे कैसी शर्म मामी से तो मजाक करते हैं शर्म नहीं, लल्ला तुम ये पकड़ो,

गुंजन ने थाली कर्मा को पकड़ा दी और अंजली को अपने पास खींच लिया और उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और चूसने लगी, अंजली भी उसका साथ देने लगी।

हालांकि ये चुंबन बस कुछ पल ही चला और फिर हट कर गुंजन बोली: अरे कर्मा बड़ी मीठी बहुरिया लाया है तू, चल बिटिया खाना खा ले।

अंजली: मामी तुम मुझसे भी मीठी हो बहुत,

अंजली ने शर्माते हुए कहा,

कर्मा: बिल्कुल सही कहा हमारी मामी बिलकुल रसमलाई हैं।

गुंजन: अरे बस बस तुम दोनों भी मेरी तारीफ़ बाद में करना पहले खाना खाओ, और खा कर बाहर आ जाना प्रोग्राम शुरू हो चुका है,

गुंजन ये कह बापिस चली गई,

अंजली: प्रोग्राम मतलब?

कर्मा: अरे तुम जानती हो इतनी भोली भी मत बनो,

अंजली ये सुन शर्मा गई,

कर्मा: अरे शर्माना छोड़ो जल्दी खा कर चलते हैं और देखते हैं क्या हो रहा है.

दोनों ही फिर साथ में खाना खाने लगे, खाना खाने के बाद दोनों कमरे से बाहर निकले बाहर आती हुई आवाज़ों को सुन कर और आंगन में खाट पर आ कर बैठ गए, आंगन में अभी ज़्यादा लोग नहीं थे पर जितने भी थे उनमें ही काफी कुछ हो रहा था एक ओर पल्ली नीचे लेटी थी और सागर उसके ऊपर था 69 के आसन में पल्ली नीचे से सागर का लंड चूस रही थी वहीं सागर का पिछवाड़ा हमारी ओर था,

अंजली: अरे वाह यहां तो सच में प्रोग्राम चालू हो चुका है।

कर्मा: और क्या मेरे भाई बहन इस काम में पीछे नहीं रहते।

अंजली: सिर्फ भाई बहन?

कर्मा: बहुत शैतान हो रही हो तुम, ये कह कर्मा अंजली के सूट में हाथ डाल कर ऊपर सरका देता है और उसके नंगे पेट को मसलने लगता है, दोनों सामने देखते हैं तभी किरन अनुज का लंड पकड़ कर उसे पल्ली और सागर के पास ले जाती है किरन के बदन पर एक समीज थी बस वहीं अनुज पूरा नंगा था किरन दोनों के पास पहुंचती है और उनके पास बैठ कर अनुज का लंड चूसने लगती है साथ ही एक हाथ से अपने भाई के चूतड़ों को मसलने लगती है, सागर पल्ली के मुंह में लंड दिए हुए आहें भरता है,

कुछ देर बाद किरन अपने मुंह से अनुज का लंड निकालती है और अपने होंठ सागर की गांड पर रख देती है और चाटने लगती है, सागर तो किरन के गर्म होठों का एहसास पाकर आहें भरने लगता है, वहीं किरन जीभ निकाल निकाल कर अपने भाई की गांड के छेद को चाटती है, ये नजारा देख कर्मा और अंजली भी गरम होने लगते हैं, कर्मा अपना हाथ अंजली का पजामे में घुसा कर उसकी चूत को सहलाने लगता है अंजली का बदन मचलने लगता है, अनुज किरन के बालों को पकड़ कर उसे सागर की गांड पर दबा रहा होता है।





कर्मा: मज़ा आ रहा है न देख कर?

कर्मा ने अंजली की चूत को सहलाते हुए कह,

अंजली: ओह हां बहुत? आह ओह कर्मा,

अंजली गरम होते हुए बोली,

उधर किरन एक पल को अनुज का लंड चूसती फिर सागर की गांड चाटती और अनुज के लंड को हाथ से सहलाती, तभी किरन ने हमारी ओर इशारा किया कि देखो क्या होने वाला है और अनुज को भी आंख मारी और फिर अपना मुंह सागर की गांड से हटाया और अनुज का लंड पकड़ कर सागर की गांड पर रख दिया, और अनुज के लंड से सागर की गांड के छेद को कुरेदने लगी, अनुज उसे मना कर रहा था, फिर सागर ने थोड़ा अलग अहसास होने पर पीछे देखा और पीछे देखता ही वो चिल्ला कर आगे कूद गया, सब उसकी प्रतिक्रिया पर ताली मारकर हंसने लगे,

सागर चिल्लाते हुए अनुज से बोला: अरे ये क्या कर रहा था तू? मैं वैसा नहीं हूं यार।

अनुज: मैं नहीं ये किरन कर रही थी, मैंने इसे मना भी किया।

सागर: किरन की बच्ची तुझे तो मैं बताता हूं रुक जरा,

ये कह सागर भागता है और किरन उसके आगे भागने लगती है। सब लोग हंस रहे होते हैं अंजली भी खूब खिल खिला कर हंसती है, इतने में कर्मा वो अंजलीे के सूट और सलवार को भी उतार देता है अंजली अब सिर्फ समीज और पैंटी में थी, कर्मा उसे खाट पर पीछे की ओर लिटा कर उसकी चूचियों को बाहर निकाल कर चूसने लगता है





अंजली: आह आह ओह उम्मम आराम से ओह,

अनुज और पल्ली भी अपनी होने वाली भाभी को अधनंगा देख उनके पास आ जाते हैं और बगल वाली खाट पर अनुज बैठ जाता है और पल्ली उसके पैरों में बैठ कर उसका लंड चूसने लगती है, इतने में पीछे से किरन और सागर भी भागते हुए आते हैं किरन भी अनुज के पास झुक कर इसका लंड चूसने लगती है,

सागर: अब तू नहीं बचेगी किरन झेल मेरा हमला,

किरन कोई जवाब नहीं देती बस उसकी तरफ अपनी गांड मटका कर दिखा देती है,

सागर आगे बढ़ता है और अपना लंड अपनी बहन की चूत में घुसा देता है और उसकी कमर को थाम कर उसे चोदने लगता है,

सागर: आह ओह आह अपनी बहन चोदने का आह मज़ा ही अलग है,

सागर किरन की चूत में धक्के लगाते हुए कहता है।





वहीं किरन अनुज के लंड को मुंह में भरे हुए थी वहीं पल्ली अनुज की गोलियों को चाट रही थी,

कर्मा अंजली की चूचियों को बदल बदल कर चूस रहा था और अंजली आह आह कर रही थी,

इतने में बाहर से नीलेश, शैलेश, राजन, जमुना और नाना के साथ साथ सभ्या, शालू और ममता घर में आते हैं,

नाना: अरे हम लोग बाग क्या गए तुम लोग तो मज़ा करने लगे,

नाना ने एक ओर बैठते हुए बोला, अंजली का ध्यान उस ओर गया तो उसने उठने की कोशिश की पर कर्मा ने उसे बापिस लिटा दिया और उसकी चूची पर दोबारा मुंह लगा दिया।

गुंजन कमरे से बाहर आई और बोली: अरे आ गए सब लोग खाना लगा दूं क्या?

नीलेश: अरे नहीं गुंजन सबका पेट भरा है।

गुंजन: पेट भरा है वो कैसे?

शालू: अरे वो मजदूरों के लिए समोसे और ब्रेड पकौड़े आए थे गलती से ज़्यादा आ गए तो सबने वही खा लिये।

सागर: अरे हमारे लिए भी लाने चाहिए थे न।

किरन: इसे देखो अपनी बहन की आह चूत में लंड घुसा रखा है और इसे समोसे की पड़ी है, चोद न भेंचोद,

किरन की बात पर सब हंस पड़े वहीं सागर किरन को मुंह चिढ़ाते हुए उसे चोदने लगा,

शैलेश: लेटी रह बिटिया इतना मत सोच यहां ये सब आम है।

शैलेश ने भी बैठते हुए कहा,

अनुज: पल्ली अब कितना चूसोगी आ ऊपर अब चोदने का मन है।

राजन: भाई बच्चों को देख कर तो अब हमारा भी मन हो गया है आ जाओ भाभी अपने देवर के पास,

राजन ने खाट पर बैठते हुए कहा और हाथ पकड़ कर सभ्या को अपने पास खींच लिया और उसे अपनी गोद में बिठा लिया सभ्या भी राजन के ऊपर चढ़ कर बैठ गई, अगले ही पल राजन के होंठ सभ्या के होंठो से मिल गए और वो सभ्या के चूतड़ों को सहलाते और मसलते हुए उसके होंठों को चूसने लगा सभ्या भी पूरा साथ दे रही थी





नाना: लो भाई बड़ी और राजन बाबू भी शुरू हो गए, नाना ने लूंगी के ऊपर से ही अपना लंड मसलते हुए कहा,

ममता: तो तुम्हारे लिए मैं हूं न बाबा चिंता क्यों करते हो,

ये कहते हुए ममता आगे बढ़ी और अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा के अपने ब्लाउज को खोल लिया और अपनी नंगी चूचियों को नाना के मुंह के आगे कर दिया जिन्हें नाना तुरंत पकड़ कर चूसने लगे,

ममता: आह बाबा ओह खा जाओ अपनी बिटिया की चूचियों को ओह आह ऐसे ही,

नाना के हाथ लगातार ममता के चूतड़ों और उसकी कमर को मसल रहे थे वहीं मुंह चूचियों पर लगा हुआ था,

कर्मा ने भी अंजली को कपड़ों से आज़ाद कर दिया था हालांकि अंजली को थोड़ा अजीब लग रहा था इतने लोगों के बीच नंगे होने में पर उसे उत्तेजना भी हो रही थी और कहीं न कहीं खुलेपन का ये एहसास अच्छा भी लग रहा था उसकी चूत अपने आस पास चल रहे खेल को देख कर गीली हो रही थी,

कर्मा: कैसा लग रहा है मेरी जान?

अंजली: बहुत अलग पर बहुत अच्छा,

अंजली ने बोलते हुए फिर से कर्मा के होंठो से अपने होंठ लगा दिए, और कुछ देर होंठों को चूमने के बाद नीचे सरक कर कर्मा के लंड को चूमने लगी, और उसके लंड को मुंह में भरने लगी वहीं कर्मा की उंगलियां अंजली की चूत को सहला रही थीं





कर्मा: आह ओह ऐसे ही मेरी जान आह कितना गरम मुंह है तुम्हारा ओह ओह आह।

अंजली के मुंह गु गु की आवाज़ आ रही थी क्योंकि कर्मा का मोटा लंबा लंड उसके गले के पीछे तक लग रहा था,

दूसरी ओर अनुज के लंड पर पल्लवी कूद रही थी और सागर के लंड पर किरन जिन्हें देखते हुए नीलेश आगे बढ़े और दोनों के बीच में जाकर बैठ गए और अपने दोनों तरफ होती चुदाई देख कर अपना लंड बाहर निकाल कर उसे सहलाने लगे,

नीलेश को बगल में बैठते देख कर सागर और अनुज दोनों ने ही आसन बदल लिए जिससे अब पल्ली और किरन दोनों का मुंह ही नीलेश के लंड के पास था, पल्ली को सागर झुका के चोद रहा था वहीं किरन एक करवट पर अनुज के आगे लेटी थी जिसे अनुज चोद रहा था, इसी बीच सागर ने तो अपना लंड निकाल कर पल्ली की गांड में भी घुसा दिया था पल्ली और किरन दोनों बदल बदल कर नीलेश का लंड चूस रही थी,





सागर: ओह पल्ली आह तेरी गांड कितनी कसी हुई है। आह आह आह कितना मज़ा आ रहा है तुझे कुतिया बना कर तेरी गांड मारने में।

किरन: आह तू कभी थोड़ा तमीज से आह नहीं बोल सकता क्या,

किरन ने अनुज से चुदवाते हुए अपने भाई को डांटा,

सागर: अरे यार आह फूफाजी देख लो इसे आह पहले ही सबने बोला है चुदाई करते हुए थोड़ा बहुत बोल सकते हैं ऐसे।

किरन: पर तू तो हमेशा ही बोलता है,

अनुज: पापा इस बहन की लोड़ी का मुंह बंद करो यार बहुत बोलती है।

अनुज ने किरन को चोदते हुए कहा,

नीलेश: अनुज, सागर ऐसे नहीं बोलते बहन है तुम्हारी, और किरन ले तू भी थोड़ी देर मुंह बंद कर,

ये कहते हुए नीलेश ने किरन के मुंह में लंड घुसा दिया जिसे किरन मुस्कुरा कर चूसने लगी, और नीलेश के मुंह से आहें निकलने लगी।

वहीं आंगन के एक ओर पड़े दीवान पर शैलेश ने अपनी सलहज को नंगा कर लिया था और गुंजन शैलेश के मुंह पर बैठ कर अपनी चूत चटवाते हुए आगे झुक कर शैलेश का लंड चूस रही थी,





दोनों के ही मुंह एक दूसरे को सुख देने में व्यस्त थे, गुंजन पूरी लगन से शैलेश का लंड चूसते हुए उसकी सेवा कर रही थी,

वहीं दोनों के पति पत्नी आपस में व्यस्त थे यानि शालू और जमुना एक दूसरे के साथ लगे हुए थे, शालू की साड़ी नीचे पड़ी थी और वो खाट को पकड़ कर झुकी हुई थी पेटीकोट कमर पर इक्ट्ठा हो रखा था जमुना अपनी बहन के फैले हुए चूतड़ों के बीच मुंह घुसाए हुए उसकी गांड चाट रहा था,

शालू: आह आह जमुना ऐसे ही आह घुसा अपनी जीभ अंदर तक अपनी बहन की गांड में आह अच्छे से कर फिर लौड़ा भी घुसा दियो देख तेरी रंडी बीवी कैसे तेरे जीजा का लंड चूस रही है आह तू भी बदला ले अपनी जीजी की गांड से।

जमुना अपनी बहन की बातों से और उत्तेजित होते हुए उसकी गांड चाट रहा था,

इधर सभ्या के बदन पर से भी अधिक तर कपड़े उतर चुके थे उसकी चूचियां नंगी लटक रही थी, उसका पेटीकोट उसकी कमर पर इकठ्ठा कर राजन ने लपेट दिया था और ब्रा को नीचे खिसका कर उसकी चूचियों को बाहर निकाल लिया था वहीं राजन के बदन पर कपड़े का रेशा भी नहीं था सभ्या राजन के सामने घुटनों पर बैठी थी और राजन का लंड सभ्या के मुंह में फंसा हुआ था और सभ्या उसे अपने मुंह में लेने का पूरा प्रयास कर रही थी





राजन: आह मेरी प्यारी भाभी आह चूसो आह ऐसे ही ओह मेरी रंडी भाभी ओह दिखाओ मुझे तुम लंड की कितनी प्यासी हो ओह आह आह आह ऐसे ही।

सभ्या के मुंह से लगातार आवाजें निकल रही थी और थूक टपक कर बाहर रिस रहा था,

इधर जहां कर्मा की मां राजन को खुश कर रही थी वहीं कर्मा की खुशी अंजली बढ़ा रही थी उसके लंड को अपनी चूत में भर कर वो अपनी कामुक कमर को घुमाते हुए उसके लंड पर अपनी चूत उछल रही थी,





कर्मा: आह ओह मां आह अंजली क्या कर रही है तू ओह आह बहुत मज़ा आ रहा है आह तेरी चूत आह।

अंजली: आह मेरे राजा तुम्हारा मोटा लोड़ा आह मेरी चूत को आह चीर रहा है आह अंदर तक, आह।

अंजली अपने आस पास हो रही चुदाई देख कर और उत्तेजित हो रही थी और उतनी गंदी बातें कर्मा से कर रही थी,

कर्मा: आह कैसा अहसास है आह परिवार में इस तरह सबके सामने ओह सबके साथ यूं खुल कर चुदवाना कैसा लग रहा है?

अंजली: आह मेरे राजा ओह ऐसा तो कभी महसूस ही नहीं किया आह इससे अच्छा आह कुछ भी नहीं हो सकता आह, उधर देखो आह हमारी माअआह ओह मां, चाचा जी का अह मोटा लंड चूस रही है, कितना मोटा ओह, मौसी आह मामा से आह गांड मरा रही है, अह मौसा मामी को चोद रहे हैं, नाना चाची को, पापा तुम्हारी बहनों से लंड चुसवा रहे हैं और तुम्हारे भाई अपनी बहनों को चोद रहे हैं आह इतना कुछ आह एक साथ हो रहा है आह इससे अच्छा और क्या हो सकता है,

अंजली पूरी तरह उत्तेजित होते हुए बोल रही थी और सब उसकी बातें सुन उत्तेजित हो रहे थे,

इधर नीलेश अनुज सागर ने फिर से पल्ली और किरन की जगह और आसन बदल दिए थे किरन अब सागर के लंड पर बैठी थी उसका लंड अपनी चूत में लेकर वहीं नीलेश का लंड किरन की गांड में था वो और सागर मिल कर किरण की दोहरी चुदाई कर रहे थे,





वहीं दूसरी ओर अनुज नीचे लेट कर एक ओर करवट लेकर पल्ली की गांड मार रहा था, पल्ली का मुंह सागर के सीने पर था और वो किरण की चूचियों को चूस रही थी

सागर: आह आह आह आह किरन ओह तेरी चूत मेरी आह प्यारी रण्डी बहन अह, फूफाजी अह कैसा लग रहा है आह मेरी बहन की गांड मार कर,

नीलेश: आह तेरी बहन होने से अह पहले वो मेरी आह बिटिया है समझा, आह और बिटिया की गांड मारने से आह बड़ा क्या सुख हो सकता है आह।

किरन: आह फूफाजी आह ओह और बिटिया कोह भी तुम्हारा लंड बहुत सुख दे रहा है, आह आह ओह दो दो लंड आह एक साथ आह चोदो मुझे।

पल्ली: ताऊ जी मुझे भी ओह दो लंड चाहिए आह किरन के बाद मेरी गांड में घुसा देना अपना मोटा लोड़ा,

नीलेश: अरे ये भी कोई कहने की बात है,

तभी दूसरी ओर से अंजली की आहों की आवाज़ आ रही थी जिसे सुनकर सबका ध्यान उस ओर गया, अंजली कर्मा के ऊपर अब भी थी पर अब अभी कर्मा का लंड धीरे धीरे उसकी गांड में समा रहा था और अंजली आहें भर रही थी,





अंजली: आह आह ओह मां आह कितना मोटा है आह हर बार और मोटा कैसे हो जाता है ये आह आह ओह।

कर्मा: लंड मोटा नहीं होता आह मेरी जान आह तेरी गांड आह और कस जाती है आह कितनी मखमली और गरम है आह।

अंजली: आह ओह लग रहा है आधा आधा चीर देगा मुझे।

सभ्या: कोई बात नहीं मेरी आह बच्ची बस कुछ पल का दर्द है फिर मज़ा ही मजा है।

सभ्या राजन के लंड को अपनी चूत में लेकर उछलते हुए बोली,

अंजली: ओह हां मां आह लूंगी मैं पूरा आह मुझे भी तुम्हारे जैसा बनना है आह कर्मा ओह मारो मेरी गांड आह।

कर्मा: ओह हां बिना मारे आह मैं रुक भी नहीं सकता,

ये कह कर्मा नीचे से तगड़े धक्के लगाने लगता है और अंजली की गांड मारने लगता है उसके चूतड़ों को थाम कर,





अंजली: आह आह आह आह आह आह ओह मां आह आह आह देखो आह कैसे आह तुम्हारी आह बिटिया की गांड चुद रही है आह आह आह सबके सामने।

अंजली सभ्या की ओर देखते हुए कहती है,

सभ्या: आह देख रही हूं बिटिया आह आह ओह देख तेरे चाचा जी भी कैसे तेरी मां को चोद रहे हैं अपने मोटे लंड पर उछाल रहे हैं आह।

राजन: ओह तुम मां बेटी ओह चीज ही ऐसी हो चुदने के लिए ही बनी हो आह क्यों चुदक्कड़ भाभी।

सभ्या: सही कहा भैया आह अंजली आह बिटिया आह चुद जी भर के चुद आह हम लोग चुदवाने के लिए ही बने हैं आह आह।

शालू: सही कहा जीजी आह आह ओह मैं तो अपने आह भाई से चुद रहीहुँ आह देखो कैसे अपना मोटा लंड मेरी गांड में घुसा कर चोद रहा है,

जमुना: ओह मेरी रंडी कुतिया जीजी आह तुम्हे कुतिया बना कर आह जब तक तुम्हारी कसी हुई गरम गांड में लंड डाल कर न चोदूं आह मज़ा ही नहीं आता।

जमुना शालू की गांड मारते हुए बोला,

गुंजन: आह आयेगा ही नहीं आह रंडी जो हैं आह तुम्हारी दोनों बहनियां आह आह आह मोटे मोटे लंड की प्यासी आह आह आह और तेज जीजा,

गुंजन खुद शैलेश के लंड पर उछलते हुए सभ्या और शालू के लिए बोली





ममता: आह देखो तो रंडी को ओह खुद ननदोई के लंड पर आह उछलते हुए अपनी अम्मा चुदा रही है और बोल दूसरों को रही है।

ममता अपनी गांड के छल्ले को नाना के मोटे लंड पर कसते हुए बोली और ऊपर नीचे होने लगी।

गुंजन: आह उछल रहीं हूं तो क्या हुआ, आह देखो सब आह दो रंडियों को बोला तीसरी को मिर्ची लग गई।

सभ्या: भईया इस दारी को ऐसे चोदो कि इसकी चीखें इसकी रंडी मां तक को सुनाई दें जो अपना भोसड़ा खोल के गांव भर मै चुदवाती फिरती है।

ननद भाभियों की नोंकझोंक सुन कर बाकी सब मुस्कुरा रहे थे अंजली के चेहरे पर भी एक मुस्कान थी,

इधर पल्ली के नीचे से अनुज निकला और उठ कर गुंजन और शैलेश के पास चला गया और बिस्तर पर चढ़ कर गुंजन के मुंह में अपना लोड़ा घुसा दिया,

अनुज: मेरी मां और मौसी और चाची को गाली दोगी मामी तो मुंह बंद कर दूंगा,

और गुंजन का मुंह थाम कर उसके मुंह में धक्के लगाने लगा, गुंजन के मुंह से उग उग घू घू की आवाज़ आने लगी,

ममता: अनुज मेरे लाल ऐसे ही सही किया रंडी का मुंह बंद करके।

शालू: और क्या रंडी को लगा आह था कि हमें बोलेगी तो हमारे बच्चे चुप रहेंगे।

सभ्या: बच्चों ने मां का दूध पिया है मां के लिए तो बोलेंगे ही,

सभ्या राजन के लंड पर उछलते हुए बोली,





राजन: आह ओह सही कहा भाभी आह ऐसे ही उछलती रहो आह।

सभ्या: ओह देवर जी आह इतना मोटा लोड़ा आह अपनी भाभी की चूत में भर रहे हो आह अपने भईया के सामने आह।

राजन: ओह भाभी आह जब भाभी तुम्हारे जैसी हो तो ओह भैया के सामने भी चोदने में कैसी आह झिझक आह भाभी।

अनुज के गुंजन के पास जाने पर पल्ली अकेली थी

पल्ली: आह ताऊ आओ मेरी गांग खाली है आह घुसा दो मोटा लोड़ा मेरी गांड में,

किरन की चूत और गांड दोनों में लंड थे इसलिए नीलेश ने किरन की गांड से लंड निकाला और बिस्तर पर सीधे होकर बैठ गए,

नीलेश: आजा बिटिया आह आजा अपने ताऊ की गोद में बैठ जा,

पल्ली तुरंत उनके ऊपर आई और उनका लंड अपनी गांड में लेकर बैठ गई,

सागर ने भी किरन को अपने ऊपर से उठाया और नीलेश के बगल में वो भी बैठ गया नीलेश की तरह ही सीधा बैठ गया

सागर: आह किरन तू भी पल्ली की तरह मेरे ऊपर आजा,

और ये सुनकर किरन उसके लंड पर सवार हो गई उसे अपनी गांड में लेकर उछलने लगी,





नीलेश और सागर नीचे से धक्के लगा लगा कर दोनों की गांड मार रहे थे, साथ ही उनकी चूचियों से भी खेल रहे थे,

सागर: आह किरन आह तेरी गांड आह कितनी गरम और कसी हुई है आह मज़ा आ रहा है आह तेरी ये बड़ी चूचियां ओह कितना मुलायम हैं।

किरन: आह तेरा लंड भी ओह मज़ा दे रहा है भाई आह ऐसे ही अपनी बहन की गांड मार आह आह।

पल्ली: आह आह देखो ताऊजी कम से कम चुदाई की वजह से ही सही आह इन दोनों के बीच प्यार से बात तो हुई,

किरन: ये सिर्फ जब तक चोदता है तब तक ही करता है बाद में फिर औकात पर आ जाता है।

सागर: ओह नहीं मेरी प्यारी बहन आह तू तो मेरी जान है आह अब से मैं तुझसे ऐसे ही बात करूंगा आह और प्यार से ही रहूंगा बस तू अपनी गांड मुझे हमेशा देती रहियो।

किरन: नौटंकी बंद कर और चुपचाप गांड मारने पर ध्यान दे,

पल्ली: और क्या कम से कम नई भाभी के होने का तो ध्यान रखो,

किरन: वैसे नई भाभी का ध्यान तो भैया रख रहे हैं अच्छे से क्यों भाभी कोई कमी तो नहीं है,

किरन ने अंजली से पूछा,

अंजली: आह नहीं किरन आह कोई कमी नहीं है आह उम्मीद से ज़्यादा मिल रहा है आह तुम्हारे भैया का लंड।

अंजली ने कर्मा के ऊपर उछलते हुए कहा, उसकी पीठ कर्मा की ओर थी वहीं कर्मा का लंड उसकी गांड में नीचे से अंदर बाहर हो रहा था,





इस आसन में बाकी लोगों की नज़र भी अंजली पर बार बार जा रही थी क्योंकि उसका पूरा बदन सामने से नंगा दिख रहा था, मर्द तो मर्द औरतें भी उसके सुन्दर बदन को देख कर अपने होंठों पर जीभ फेर रही थी, उनमें से एक अनुज भी था जो अपनी मामी का मुंह चोद रहा था उसने अपना लंड गुंजन के मुंह से निकाला और बिस्तर से उतर कर आगे बढ़ा और अपने भाई कर्मा और होने वाली भाभी अंजली के बगल में बैठ गया जाकर और उन्हें देखते हुए अपना लंड मसलने लगा, अंजली की नज़र भी उससे मिली और दोनों एक दूसरे को देख मुस्कुराए,

अनुज: भाभी तुम बहुत सुंदर हो, सच में एक दम मस्त बदन है तुम्हारा,

अनुज ने अंजली को देखते हुए कहा तो कर्मा बीच में बोला: हाथ भी मत लगा दियो नहीं तो मुंह तोड़ दूंगा,

अनुज: अरे देखो भाभी इन्हें,

अंजली उसकी ओर देख मुस्कुराई और बोली: इनकी बात मत सुनो तुम इधर आओ,

अनुज तुरंत उसकी ओर बढ़ा अंजली ने उसे पास बुलाया और उसका एक हाथ अपनी एक चूची पर रख दिया, कर्मा लगातार नीचे से उसकी गांड मार रहा था,

अनुज: अरे वाह कितनी मुलायम है भाभी।

कर्मा: हाथ हटा नहीं तो बहुत पिटेगा।

अंजली: ऐसे कैसे पिटेगा भाभी पर देवर का पूरा हक होता है,

अनुज: समझे भैया,

ये कह अनुज झुक कर चूची से मुंह लगा देता है और अंजली के मुंह से आह निकल जाती है, अनुज अंजली की चूची को पूरी लगन और जोश से चूसने लगता है, एक चूची के बाद दूसरी पर मुंह लगा देता है, अंजली की उत्तेजना भी बढ़ने लगती है पहली बार दो मर्द उसके बदन से खेल रहे थे पहली बार कर्मा के अलावा कोई दूसरा मर्द उसके बदन को छू रहा था और उसकी वजह से अंजली और उत्तेजित हो रही थी,

बाकी पूरे आंगन में भी चुदाई पूरे जोश पर चल रही थी राजन ने सभ्या को घोड़ी बनाया हुआ था और उसकी गांड में अपने मोटे काले लंड को घुसा कर तेजी से गांड मार रहा था,





सभ्या मुंह नीचे झुकाते हर झटके के साथ आहें भर रही थी और अपने पति को पुकार रही थी,

सभ्या: आह जी देखो न आह ये देवर जी आह कितनी बुरी तरह आह मार रहे हैं मेरी गांड आह तुम्हारी बीवी की गांड में अपना मोटा लौड़ा घुसा के चोद रहे हैं,

राजन: अब भाभी की गांड देवर नहीं मारेगा तो आह कौन मारेगा भाभी ओह आह क्या गांड है जितनी भी मारो मन ही नहीं भरता।

सभ्या: आह आह आह आह गांड मन भरवाने वाली चीज़ थोड़ी ही होती है आह राजा, ओह और तेज आह।

जहां राजन अपनी भाभी के बदन को खूब चाव से भोग रहा था वहीं, इधर अनुज ने अपनी होने वाली भाभी की चूचियों को जी भर के चूसा और फिर उसके पेट और नाभि को भी चाटने चूसने लगा और फिर उसने ऊपर होकर अपने होंठों को अंजली के होंठों से मिला दिया और चूसने लगा, अंजली भी पूरा साथ देने लगी,

अनुज का लंड अंजली के बदन की खुशबू और स्पर्श पाकर फड़क रहा था, कुछ पल बाद अनुज ने अंजली के होंठों को छोड़ा और मुस्कुराते हुए बोला: हाय कितनी स्वादिष्ट हो तुम भाभी!

अंजली भी मुस्कुराई और बोली: जैसा देवर वैसी भाभी।

कर्मा: देवर भाभी का प्यार हो गया तो मैं कुछ करूं?

अंजली: हां करो न,

कर्मा अंजली के पैरों को पीछे की ओर मोड़ कर हाथों में फंसा लेता है, और फिर बेरहमी से उसकी गांड मारने लगता है,





अनुज बगल में खड़े होकर देख रहा होता है और अपना लंड सहला रहा होता है,

अंजली: आह आह आह आह मां आह आह ओह आह आह

अंजली कर्मा की चुदाई से आहें भरते हुए चिल्लाती है,

अनुज: अरे आराम से भैया तुम तो भाभी को लगता है दर्द ही देकर मानोगे,

सभ्या: देखो तो कितनी फिक्र है मेरे लल्ला को अपनी भाभी की।अनुज: होगी नहीं इतनी कोमल भाभी को इतनी बुरी तरह चोद रहे हैं,

तभी एक तेज़ चीख के साथ अंजली झड़ने लगती है उसका बदन कर्मा के बदन पर कांपने लगता है, कर्मा भी अपनी गति धीमी कर लेता है और अंजली के वेग को शांत होने लगता है, अंजली झड़ते हुए कर्मा के ऊपर से एक ओर गिर जाती है,

अनुज: देखा भाभी तुमने कितने निर्दयी इंसान से प्यार किया है, बेचारी को थका दिया बिल्कुल!

सब उसकी बात सुन हंसने लगते हैं,

कर्मा: तू कुछ ज़्यादा ही नहीं बोल रहा,

अनुज: ज़्यादा नहीं सच बोल रहा हूं,

इतने में अंजली फिर से उठती है और कर्मा के आगे घोड़ी बन जाती है

अंजली: फिर से डालो।

कर्मा अपना लंड फिर से अंजली की गांड में घुसाता है और उसकी कमर पकड़ कर उसे चोदने लगता है

कर्मा: देखा जितना तू समझता है उतनी भी कोमल नहीं है ये क्यों मेरी जान? तू मुझे सिखा रहा था,

अंजली मुस्कुराती है और कहती है: अरे तो क्या हुआ एक तो उसे इतनी फिक्र है मेरी,

अंजली हंसते हुए कहती है,

कर्मा: अच्छा ठीक है भैया तुम जानो और तुम्हारा देवर जाने,

ये कहते हुए कर्मा उसकी कमर को थामे हुए उसकी गांड में लंड चलाने लगता है

अंजली: और क्या ये हम दोनों के बीच की बात है तुम अलग रहो क्यों अनुज?

अंजली अनुज की ओर देखते हुए कहती है,

अनुज: और क्या भाभी, हम दोनों की खूब जमने वाली है,

अंजली: बिल्कुल सही,

ये कहकर अंजली अपना मुंह खोल लेती है और अनुज को देखती है अनुज तुरंत समझ जाता है और अपना लंड अंजली के खुले मुंह में धीरे से घुसा देता है,





अनुज: ओह भाभी आह,

अंजली भी अनुज के लंड पर अपना मुंह कस लेती है और चूसने लगती है, कर्मा पीछे से अंजली को उसके भाई का लंड चूसते देखता है और एक शांत मुस्कान उसके चेहरे पर उभर आती है जैसे वो जानता था कि ये होने वाला है,

शालू: अरे वाह आखिर अनुज को भी अंजली का स्वाद मिल ही गया,

अनुज: आह और क्या मौसी, आखिर मेरी भाभी है,

सागर: भाभी तो मेरी भी है,

किरन: मेरी भी,

पल्ली: और मेरी भी।

गुंजन: अरे तो अब यहीं आएगी ब्याह होकर कहीं और नहीं जाने वाली जिंदगी भर यही रहना जितना प्यार जताना है तब जताना,

गुंजन: शैलेश से गांड मरवाते हुए बोली,

शैलेश: हां वैसे बहू की सेवा के लिए तो हम भी इंतजार में हैं सिर्फ बच्चे नहीं,

शालू: तुम इंतजार में रहो या न रहो पर सबसे कहे देती हूं, अंजली के पास कोई खुद से नहीं जाएगा, उसका मन जिसके साथ होगा जब होगा तब वो करेगी।

राजन: कोई बात नहीं जो तुम्हारी आज्ञा,

सभ्या: आह बिल्कुल सही कहा शालू,

ममता: और क्या नहीं तो ये सब लोग लोड़े लेकर उसके पीछे पीछे ही घूमते नजर आयेंगे।

इस पर तो अंजली को भी हंसी आ गई और वो अनुज का लंड निकाल कर हंसने लगी,

ममता: सही कह रही हूं बिटिया, तू नहीं जानती इन लोगों को,

ममता ने बिस्तर पर किरन और पल्ली के बगल में घोड़ी बने हुए कहा, जहां तीनों ही घोड़ी बनी हुई थी , और नाना ममता की, नीलेश किरन की और सागर पल्ली की गांड मार रहा था





सागर: आह आह आह मज़ा आ रहा है ऐसे आह एक साथ क्यों बाबा और फूफाजी,

नाना: आह तुझे कब मज़ा नहीं आता,

सागर: जब चुदाई नहीं कर रहा होता,

किरन: बदतमीज कहीं का किसी बात आह का ठीक से जवाब नहीं दे सकता ये,

सागर: अरे इसमें क्या गलत बोल मैने? अरे बाबा सुनो न मुझे बुआ की गांड मारने दो,

नाना: हां आजा लल्ला,

नाना और सागर जगह बदल लेते हैं नाना पल्ली की गांड मारने लगते हैं और सागर ममता की, वहीं नीलेश का लंड किरन की गांड में होता है,

इधर अंजली के लिए हर पल उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, एक ओर कर्मा का लंड गांड में चल रहा था वहीं अनुज का उसके होने वाले देवर का मुंह में था और फिर बाकी रही बची कसर आस पास का माहौल पूरी कर रहा था, वहीं अनुज और कर्मा भी अपने अपने चरम की ओर बढ़ रहे थे और कुछ पल बाद ऐसा हुआ कि तीनों ही एक साथ झड़ने लगे, अंजली के झड़ते हुए उसकी गांड कर्मा के लंड पर कस गई जो कि कर्मा के लिए काफी था और वो उसकी गांड में झड़ने लगा, इधर अनुज का लंड भी अंजली के मुंह में फूलने लगता है और फिर उसके मुंह में रस छोड़ने लगता है एक दो पिचकारी के बाद क्योंकि अंजली खुद झड़ रही थी तो अनुज का लंड उसके मुंह से निकल जाता है और बाकी का रस अंजली के चेहरे और सीने पर गिरता है, कर्मा अंजली की गांड से लंड निकाल कर लेट जाता है और अनुज भी पीछे होकर, अंजली भी लेट कर हांफते हुए आंखें बंद कर लेती है,

दूसरी ओर नीलेश, नाना और सागर भी झड़ने की कगार पर थे तभी किरन ने एक इच्छा जताई जिसका पालन तीनों ने ही तुरंत किया और कुछ देर बाद किरन का हाल कुछ ऐसा था,





उसके चेहरे और सीने से नाना, सागर और नीलेश का रस टपक रहा था, तीनों अपना अपना रस छोड़ने के बाद पीछे होकर बैठ गए, इधर राजन भी सभ्या की गांड में अपना रस छोड़ कर आराम कर रहे थे सभ्या भी एक बार झड़ चुकी थी और राजन की बाहों में लेटी थी, इधर शालू भी जमुना के लंड पर झड़ने के बाद आराम से लेटी थी वहीं गुंजन को शैलेश ने अपना रस पिलाया था, चुदाई का तूफान थम चुका था अभी दोपहर ही हुई थी, तो सब जिसको जहां सही लगा आराम करने के लिए लेट गए।

शाम हो चुकी थी मर्द लोग और बाकी सब अपने अपने काम में लग चुके थे कुछ बाहर निकल गए थे, वहीं अंजली सो कर उठने के बाद नहाने चली गई थी और नहा कर निकली उसके साथ कमरे में किरन और पल्लवी थी, तीनों लड़कियों की आपस में खूब जम रही थी, अंजली पूरी नंगी बाथरूम से निकली और उसने बिस्तर पर देखा, पल्ली भी नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थी और किरन उसकी टांगों के बीच में थी और उसकी टांगों में टांगे फंसाकर अपनी चूत उसकी चूत से घिस रही थी,





अंजली: अरे वाह तुम लोग तो फिर से शुरू हो गए,

किरन: आह आओ भाभी, इस सुख का भी मज़ा लो,

पल्ली: हां भाभी तुमने किया है कभी ये सब किसी के साथ?

अंजली: हां किया है न नीतू के साथ बहुत बार,

अंजली ने बिस्तर पर चढ़ते हुए कहा, और ऊपर आ कर वो पल्ली की मोटी चूचियों को दबाने लगी वहीं किरन उसकी चूचियों से खेलने लगी,

किरन: अरे वाह भाभी फिर तो और मज़ा आयेगा,

अंजली: हां बिल्कुल, बताओ क्या करना है।

पल्ली: मेरे मुंह पर बैठो भाभी मुझे अपनी चूत का स्वाद चखने दो,

अंजली: अभी लो,

अंजली तुरंत उठ कर पल्ली के मुंह पर बैठ गई, और पल्ली भी तुरंत अंजली की चूत को चाटने लगी, वहीं अंजली आगे झुक कर किरन के होंठो को चूसने लगती है, वहीं किरन अपनी कमर घुमा घुमा कर अपनी चूत पल्ली की चूत से घिस रही थी





तीनों आपस में जुड़ी हुई थी और एक दूसरे के साथ कामुक खेल खेल रही थी, अंजली के हाथ किरन के चूचियों को मसल रहे थे और वहीं किरन पल्ली अंजली के चूतड़ों को मसल रही थी,किरन भी अंजली की चूचियों को मसल रही थी तीनों के मुंह एक दूसरे के होंठों पर थे, पल्ली के अंजली के चूत के होंठों पर और किरन के ऊपर के होंठों पर। कुछ देर तक यूं ही घिसाई के बाद तीनों ही एक दूसरे के साथ झड़ गईं और एक दूसरे की बाहों में हांफते हुए लेट गई।

किरन: मज़ा आ गया न भाभी,

अंजली: हां सच में, पल्ली तुम तो बहुत अच्छा चाटती हो।

पल्ली: तुम्हारी है ही इतनी स्वाद की जीभ अपने आप चलते रहती है,

तभी बाहर से नीलेश की आवाज आती है: अरे बच्चों जाग रहे हो क्या थोड़ी चाय ही बना दो।



जारी रहेगी।
 
अगली सुबह कुछ आवाज़ों से सबसे पहले सविता उठी और उसने उठ कर सामने देखा तो हैरान रह गयी. Dheere-dheere ek-ek करके सब उठ गए और जो भी उठ कर सामने देखता थोड़ा चौंक जाता, क्यूंकि सामने कड़ी अंजलि दरवाज़े पर हाथ मार कर सबको जगा रही थी और सब नींद भरी आँखों से उसकी तरफ हैरानी से देख रहे थे. जब सब जाग गए तो अंजलि ने सबकी तरफ देखा और बोली: "चाय ले आऊं क्या?" यह कह कर वह मुस्कुराने लगी तो बाकी सबके चेहरों पर भी मुस्कान आ गयी.



अपडेट 260

उसी दिन दोपहर का टाइम था. महिपाल अपने घर के आँगन में इधर से उधर टहल रहा था, परेशानी के भाव उसके चेहरे पर साफ़ नज़र आ रहे थे.

सविता जो पास में hi कुर्सी पर बैठी थी, उसके बगल में hi रानी और पियूष भी थे. तीनो उसको hi idhar-udhar टहलते हुए देख रहे थे.

महिपाल: "यह सही नहीं है सविता, हमें उससे बात करनी चाहिए, उसको सब समझाना चाहिए."

सविता: "अरे तुम बेकार में इतना परेशां हो रहे हो, जैसा सोच रहे हो वैसा कुछ भी नहीं है."

महिपाल: "अच्छा फिर कैसा है बताओ ज़रा? हमारी बेटी हमारे बारे में सब जान्ने के बाद उनके साथ चली गयी है, इसका और क्या मतलब हो सकता है? वह हमसे नाराज़ हो गयी है, भले hi उसने कहा न हो पर ऐसा hi है."

रानी: "नहीं पापाजी ऐसा नहीं है, वह मुझे बिलकुल भी नाराज़ नहीं लगी, और उसने खुद से कहा की उसको थोड़ा टाइम चाहिए सब कुछ आराम से अपने आप को समझने के लिए."

पियूष: "सही में पापा, अब इतना बड़ा बदलाव देख कर अपने फॅमिली में किसी को भी थोड़ा झटका तो लगेगा hi. तो मुझे भी लगता है उसको टाइम देना hi सही होगा."

महिपाल: "पता नहीं पर मैं अपने मैं को समझा नहीं प् रहा हूँ."

उधर चोदम पुर में अंजलि कर्मा के घर पर थी, वह उन लोगों के साथ hi चली आयी थी. घर में इस टाइम सभी लोग मौजूद थे. नीलेश ने सबको बोल दिया था की अंजलि हमारे फॅमिली का हिस्सा बनने वाली है और वह चाहती है की वह हमारे फॅमिली को और अच्छे से जाने, तो उसके सामने आज हमें खुल कर रहना है जैसे हम रहते हैं ताकि वह भी जान सके वह किस तरह के फॅमिली में आ रही है. किसी को भी इससे परेशानी नहीं थी.

और अभी वह कमरे में कर्मा के कमरे में बिस्तर पर बैठी थी और कर्मा उसके बगल में टेबल पर. कुछ पल बाद hi कर्मा ने अंजलि को अपनी तरफ पकड़ कर खींच लिया था और दोनों एक दुसरे के होंठों को चूसने में लग गए. तभी पीछे से गुंजन हाथ में खाने की थाली लेकर आयी और बोली: "ोये लैला मजनू, थोड़ा एक दुसरे को सांस लेने दो और खाना खा लो."

अंजलि यह सुन कर शर्माते हुए कर्मा से अलग होकर कड़ी हो गयी.

गुंजन: "अरे बिटिया शर्मा काहे रही हो? और हमसे कैसी शर्म? मामी से तो मज़ाक करते हैं शर्म नहीं. लल्ला तुम यह पकड़ो."

गुंजन ने थाली कर्मा को पकड़ा दी और अंजलि को अपने पास खींच लिया और उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और चूसने लगी. अंजलि भी उसका साथ देने लगी.

हालांकि यह चुम्बन बस कुछ पल hi चला और फिर हैट कर गुंजन बोली: "अरे कर्मा बड़ी मीठी बहुरिया लाया है तू. चल बिटिया खाना खा ले."

अंजलि: "मामी तुम मुझसे भी मीठी हो बहुत."

अंजलि ने शर्माते हुए कहा.

कर्मा: "बिलकुल सही कहा, हमारी मामी बिलकुल रसमलाई हैं."

गुंजन: "अरे बस बस तुम दोनों भी मेरी तारीफ बाद में करना, पहले खाना खाओ, और खा कर बहार आ जाना, प्रोग्राम शुरू हो चूका है."

गुंजन यह कह कर वापस चली गयी.

अंजलि: "प्रोग्राम मतलब?"

कर्मा: "अरे तुम जानती हो, इतनी भोली भी मत बनो."

अंजलि यह सुन कर शर्मा गयी.

कर्मा: "अरे शर्माना छोड़ दो, जल्दी खा कर चलते हैं और देखते हैं क्या हो रहा है."

दोनों hi फिर साथ में खाना खाने लगे. खाना खाने के बाद दोनों कमरे से बहार निकले. बहार आती हुई आवाज़ों को सुन कर और आँगन में खाट पर आ कर बैठ गए. आँगन में अभी ज़्यादा लोग नहीं थे पर जितने भी थे उनमें hi काफी कुछ हो रहा था. एक तरफ पल्ली नीचे लेती थी और सागर उसके ऊपर था 69 के आसान में. पल्ली नीचे से सागर का लुंड चूस रही थी, वही सागर का पिछवाड़ा हमारी तरफ था.

अंजलि: "अरे वाह यहाँ तो सच में प्रोग्राम चालू हो चूका है."

कर्मा: "और क्या, मेरे bhai-behen इस काम में पीछे नहीं रहते."

अंजलि: "सिर्फ bhai-behen?"

कर्मा: "बहुत शैतान हो रही हो तुम." यह कह कर्मा अंजलि के सूट में हाथ दाल कर ऊपर सरका देता है और उसके नंगे पेट को मसलने लगता है.

दोनों सामने देखते हैं तभी किरण अनुज का लुंड पकड़ कर उसे पल्ली और सागर के पास ले जाती है. किरण के बदन पर एक समीज थी बस, वही अनुज पूरा नंगा था. किरण दोनों के पास पहुँचती है और उनके पास बैठ कर अनुज का लुंड चूसने लगी, साथ hi एक हाथ से अपने भाई के चूतड़ों को मसलने लगी. सागर पल्ली के मुँह में लुंड दिए हुए आहें भरता है.

कुछ देर बाद किरण अपने मुँह से अनुज का लुंड निकालती है और अपने होंठ सागर की गांड पर रख देती है और चाटने लगी. सागर तो किरण के गरम होंठों का एहसास पाकर आहें भरने लगता है. वही किरण जीभ निकाल निकाल कर अपने भाई की गांड के छेड़ को chaat-ti है.

यह नज़ारा देख कर्मा और अंजलि भी गरम होने लगते हैं. कर्मा अपना हाथ अंजलि के पाजामे में घुसा कर उसकी छूट को सहलाने लगता है. अंजलि का बदन मचलने लगता है. अनुज किरण के बालों को पकड़ कर उसे सागर की गांड पर दबा रहा होता है.

कर्मा: "मज़ा आ रहा है न देख कर?"

कर्मा ने अंजलि की छूट को सहलाते हुए कहा.

अंजलि: "उह हाँ बहुत? आह उह कर्मा."

अंजलि गरम होते हुए बोली.

उधर किरण एक पल को अनुज का लुंड चूसती फिर सागर की गांड chaat-ti और अनुज के लुंड को हाथ से सहलाती. तभी किरण ने हमारी तरफ इशारा किया की देखो क्या होने वाला है और अनुज को भी आँख मारी और फिर अपना मुँह सागर की गांड से हटाया और अनुज का लुंड पकड़ कर सागर की गांड पर रख दिया, और अनुज के लुंड से सागर की गांड के छेड़ को कुरेदने लगी. अनुज उसे मन कर रहा था. फिर सागर ने थोड़ा अलग एहसास होने पर पीछे देखा और पीछे देखता hi वह चिल्ला कर आगे कूद गया. सब उसकी प्रतिक्रिया पर ताली मार कर हंसने लगे.

सागर चिल्लाते हुए अनुज से बोलै: "अरे यह क्या कर रहा था तू? मैं वैसा नहीं हूँ यार."

अनुज: "मैं नहीं यह किरण कर रही थी, मैंने इसे मन भी किया."

सागर: "किरण की बच्ची तुझे तो मैं बताता हूँ रुक ज़रा."

यह कह सागर भागता है और किरण उसके आगे भागने लगी. सब लोग हंस रहे होते हैं, अंजलि भी खूब खिल खिला कर हंसती है. इतने में कर्मा वह अंजलि के सूट और सलवार को भी उतार देता है. अंजलि अब सिर्फ समीज और पंतय में थी. कर्मा उसे खाट पर पीछे की तरफ लिटाकर उसकी चूचियों को बहार निकाल कर चूसने लगता है.

अंजलि: "आह आह उह उम्म्म आराम से उह."

अनुज और पल्ली भी अपनी होने वाली भाभी को अधनंगा देख उनके पास आ जाते हैं और बगल वाली खाट पर अनुज बैठ जाता है और पल्ली उसके पैरों में बैठ कर उसका लुंड चूसने लगती है. इतने में पीछे से किरण और सागर भी भागते हुए आते हैं. किरण भी अनुज के पास झुक कर इसका लुंड चूसने लगती है.

सागर: "अब तू नहीं बचेगी किरण, झेल मेरा हमला."

किरण कोई जवाब नहीं देती बस उसकी तरफ अपनी गांड मटका कर दिखा देती है.

सागर आगे बढ़ता है और अपना लुंड अपनी बेहेन की छूट में घुसा देता है और उसकी कमर को थाम कर उसे छोड़ने लगता है.

सागर: "आह उह आह अपनी बेहेन छोड़ने का आह मज़ा hi अलग है."

सागर किरण की छूट में धक्के लगते हुए कहता है.

वही किरण अनुज के लुंड को मुँह में भरे हुए थी वही पल्ली अनुज की गोलियों को चाट रही थी.

कर्मा अंजलि की चूचियों को badal-badal कर चूस रहा था और अंजलि आह आह कर रही थी.

इतने में बहार से नीलेश, शैलेश, राजन, जमुना और नाना के साथ साथ सभ्य, शालू और ममता घर में आते हैं.

नाना: "अरे हम लोग बाग़ क्या गए तुम लोग तो मज़ा करने लगे."

नाना ने एक तरफ बैठते हुए बोलै. अंजलि का ध्यान उस तरफ गया तो उसने उठने की कोशिश की पर कर्मा ने उसे वापस लिटाया और उसकी चुकी पर दोबारा मुँह लगा दिया.

गुंजन कमरे से बहार आयी और बोली: "अरे आ गए सब लोग, खाना लगा दूँ क्या?"

नीलेश: "अरे नहीं गुंजन सबका पेट भरा है."

गुंजन: "पेट भरा है वह कैसे?"

शालू: "अरे वह मज़दूरों के लिए समोसे और ब्रेड पकोड़े आये थे गलती से ज़्यादा आ गए तो सबने वही खा लिए."

सागर: "अरे हमारे लिए भी लाने चाहिए थे न."

किरण: "इसे देखो अपनी बेहेन की आह छूट में लुंड घुसा रखा है और इसे समोसे की पड़ी है, छोड़ न भेनचोद."

किरण की बात पर सब हंस पड़े वही सागर किरण को मुँह चिढ़ाते हुए उसे छोड़ने लगा.

शैलेश: "लेती रह बिटिया इतना मत सोच यहाँ यह सब आम है."

शैलेश ने भी बैठते हुए कहा.

अनुज: "पल्ली अब कितना चूसोगी आ ऊपर अब छोड़ने का मैं है."

राजन: "भाई बच्चों को देख कर तो अब हमारा भी मैं हो गया है. आ जाओ भाभी अपने देवर के पास."

राजन ने खाट पर बैठते हुए कहा और हाथ पकड़ कर सभ्य को अपने पास खींच लिया और उसे अपनी गॉड में बिठा लिया. सभ्य भी राजन के ऊपर चढ़ कर बैठ गयी. अगले hi पल राजन के होंठ सभ्य के होंठों से मिल गए और वह सभ्य के चूतड़ों को सहलाते और मसलते हुए उसके होंठों को चूसने लगा. सभ्य भी पूरा साथ दे रही थी.

नाना: "लो भाई बड़ी और राजन बाबू भी शुरू हो गए."

नाना ने लुंगी के ऊपर से hi अपना लुंड मसलते हुए कहा.

ममता: "तो तुम्हारे लिए मैं हूँ न बाबा चिंता क्यों करते हो."

यह कहते हुए ममता आगे बढ़ी और अपनी साडी का पल्लू नीचे गिरा के अपने ब्लाउज को खोल लिया और अपनी नंगी चूचियों को नाना के मुँह के आगे कर दिया जिन्हे नाना तुरंत पकड़ कर चूसने लगे.

ममता: "आह बाबा उह खा जाओ अपनी बिटिया की चूचियों को उह आह ऐसे hi."

नाना के हाथ लगातार ममता के चूतड़ों और उसकी कमर को मसल रहे थे वही मुँह चूचियों पर लगा हुआ था.

कर्मा ने भी अंजलि को कपड़ों से आज़ाद कर दिया था हालांकि अंजलि को थोड़ा अजीब लग रहा था इतने लोगों के बीच नंगे होने में पर उसे उत्तेजना भी हो रही थी और कहीं न कहीं खुलेपन का यह एहसास अच्छा भी लग रहा था. उसकी छूट अपने आस पास चल रहे खेल को देख कर गीली हो रही थी.

कर्मा: "कैसा लग रहा है मेरी जान?"

अंजलि: "बहुत अलग पर बहुत अच्छा."

अंजलि ने बोलते हुए फिर से कर्मा के होंठों से अपने होंठ लगा दिए, और कुछ देर होंठों को चूमने के बाद नीचे सरक कर कर्मा के लुंड को चूमने लगी, और उसके लुंड को मुँह में भरने लगी वही कर्मा की उँगलियाँ अंजलि की छूट को सेहला रही थी.

कर्मा: "आह उह ऐसे hi मेरी जान आह कितना गरम मुँह है तुम्हारा उह उह आह."

अंजलि के मुँह से गु गु की आवाज़ें आ रही थी क्यूंकि कर्मा का मोटा लम्बा लुंड उसके गले के पीछे तक लग रहा था.

दूसरी तरफ अनुज के लुंड पर पल्लवी कूद रही थी और सागर के लुंड पर किरण. जिन्हे देख कर नीलेश आगे बढे और दोनों के बीच में जाकर बैठ गए और अपने दोनों तरफ होती चुदाई देख कर अपना लुंड बहार निकाल कर उसे सहलाने लगे.

नीलेश को बगल में बैठते देख कर सागर और अनुज दोनों ने hi आसान बदल लिए जिससे अब पल्ली और किरण दोनों का मुँह hi नीलेश के लुंड के पास था. पल्ली को सागर झुका के छोड़ रहा था वही किरण एक करवट पर अनुज के आगे लेती थी जिसे अनुज छोड़ रहा था. इसी बीच सागर ने तो अपना लुंड निकाल कर पल्ली की गांड में भी घुसा दिया था. पल्ली और किरण दोनों badal-badal कर नीलेश का लुंड चूस रही थी.

सागर: "उह पल्ली आह तेरी गांड कितनी कासी हुई है. आह आह आह कितना मज़ा आ रहा है तुझे कुटिया बना कर तेरी गांड मरने में."

किरण: "आह तू कभी थोड़ा तमीज से आह नहीं बोल सकता क्या?"

किरण ने अनुज से छुड़वाते हुए अपने भाई को डांटा.

सागर: "अरे यार आह फूफाजी देख लो इसे आह पहले hi सबने बोलै है चुदाई करते हुए थोड़ा बहुत बोल सकते हैं ऐसे."

किरण: "पर तू तो हमेशा hi बोलता है."

अनुज: "पापा इस बेहेन की लोदी का मुँह बंद करो यार बहुत बोलती है."

अनुज ने किरण को छोड़ते हुए कहा.

नीलेश: "अनुज, सागर ऐसे नहीं बोलते बेहेन है तुम्हारी, और किरण ले तू भी थोड़ी देर मुँह बंद कर."

यह कहते हुए नीलेश ने किरण के मुँह में लुंड घुसा दिया जिसे किरण मुस्कुराकर चूसने लगी, और नीलेश के मुँह से आहें निकलने लगी.

वही आँगन के एक तरफ पड़े दीवान पर शैलेश ने अपनी सलहज को नंगा कर लिया था और गुंजन शैलेश के मुँह पर बैठ कर अपनी छूट चटवाते हुए आगे झुक कर शैलेश का लुंड चूस रही थी.

दोनों के hi मुँह एक दुसरे को सुख देने में व्यस्त थे. गुंजन पूरी लगन से शैलेश का लुंड चूसते हुए उसकी सेवा कर रही थी.

वही दोनों के pati-patni आपस में व्यस्त थे यानि शालू और जमुना एक दुसरे के साथ लगे हुए थे. शालू की साडी नीचे पड़ी थी और वह खाट को पकड़ कर झुकी हुई थी, पेटीकोट कमर पर इकठ्ठा हो रखा था. जमुना अपनी बेहेन के फैले हुए चूतड़ों के बीच मुँह घुसाए हुए उसकी गांड चाट रहा था.

शालू: "आह आह जमुना ऐसे hi आह घुसा अपनी जीभ अंदर तक अपनी बेहेन की गांड में आह अच्छे से कर फिर लौड़ा भी घुसा दियो देखते तेरी रंडी बीवी कैसे तेरे जीजाजी का लुंड चूस रही है आह तू भी बदला ले अपनी जीजाजी की गांड से."

जमुना अपनी बेहेन की बातों से और उत्तेजित होते हुए उसकी गांड चाट रहा था.

इधर सभ्य के बदन पर से भी ज़्यादा तर कपडे उतर चुके थे उसकी चूचियां नंगी लटक रही थी, उसका पेटीकोट उसकी कमर पर इकठ्ठा कर राजन ने लपेट दिया था और ब्रा को नीचे खिसका कर उसकी चूचियों को बहार निकाल लिया था. वही राजन के बदन पर कपडे का रेशा भी नहीं था. सभ्य राजन के सामने घुटनों पर बैठी थी और राजन का लुंड सभ्य के मुँह में फंसा हुआ था और सभ्य उसे अपने मुँह में लेने का पूरा प्रयास कर रही थी.

राजन: "आह मेरी प्यारी भाभी आह चूसो आह ऐसे hi उह मेरी रंडी भाभी उह दिखाओ मुझे तुम लुंड की कितनी प्यासी हो उह आह आह आह ऐसे hi."

सभ्य के मुँह से लगातार आवाज़ें निकल रही थी और थूक टपक कर बहार रिस रहा था.

इधर जहाँ कर्मा की माँ राजन को खुश कर रही थी वही कर्मा की ख़ुशी अंजलि बढ़ा रही थी उसके लुंड को अपनी छूट में भर कर वह अपनी कामुक कमर को घूमते हुए उसके लुंड पर अपनी छूट उछाल रही थी.

कर्मा: "आह उह माँ आह अंजलि क्या कर रही है तू उह आह बहुत मज़ा आ रहा है आह तेरी छूट आह."

अंजलि: "आह मेरे राजा तुम्हारा मोटा लोढ़ा आह मेरी छूट को आह चीयर रहा है आह अंदर तक, आह."

अंजलि अपने आस पास हो रही चुदाई देख कर और उत्तेजित हो रही थी और उतनी गन्दी बातें कर्मा से कर रही थी.

कर्मा: "आह कैसा एहसास है आह फॅमिली में इस तरह सबके सामने उह सबके साथ यूँ खुल कर छुड़वाना कैसा लग रहा है?"

अंजलि: "आह मेरे राजा उह ऐसा तो कभी महसूस hi नहीं किया आह इससे अच्छा आह कुछ भी नहीं हो सकता आह. उधर देखो आह हमारी माँ उह माँ, चाचा जी का यह मोटा लुंड चूस रही है, कितना मोटा उह. मौसी आह मां से आह गांड मारा रही है, यह मौसा मामी को छोड़ रहे हैं, नाना चची को, पापा तुम्हारी बहनों से लुंड चुसवा रहे हैं और तुम्हारे भाई अपनी बहनों को छोड़ रहे हैं आह इतना कुछ आह एक साथ हो रहा है आह इससे अच्छा और क्या हो सकता है."

अंजलि पूरी तरह उत्तेजित होते हुए बोल रही थी और सब उसकी बातें सुन उत्तेजित हो रहे थे.

इधर नीलेश, अनुज, सागर ने फिर से पल्ली और किरण की जगह और आसान बदल दिए थे. किरण अब सागर के लुंड पर बैठी थी उसका लुंड अपनी छूट में लेकर वही नीलेश का लुंड किरण की गांड में था. वह और सागर मिल कर किरण की दोहरी चुदाई कर रहे थे.

वही दूसरी तरफ अनुज नीचे लेट कर एक तरफ करवट लेकर पल्ली की गांड मार रहा था. पल्ली का मुँह सागर के सीने पर था और वह किरण की चूचियों को चूस रही थी.

सागर: "आह आह आह आह किरण उह तेरी छूट मेरी आह प्यारी रंडी बेहेन यह, फूफाजी यह कैसा लग रहा है आह मेरी बेहेन की गांड मार कर."

नीलेश: "आह तेरी बेहेन होने से यह पहले वह मेरी यह बिटिया है समझा, आह और बिटिया की गांड मारने से यह बड़ा क्या सुख हो सकता है आह."

किरण: "आह फूफाजी आह उह और बिटिया को भी तुम्हारा लुंड बहुत सुख दे रहा है, आह आह उह दो दो लुंड आह एक साथ आह छोड़ो मुझे."

पल्ली: "ताऊ जी मुझे भी उह दो लुंड चाहिए आह किरण के बाद मेरी गांड में घुसा देना अपना मोटा लोढ़ा."

नीलेश: "अरे यह भी कोई कहने की बात है."

तभी दूसरी तरफ से अंजलि की आहटों की आवाज़ आ रही थी जिसे सुन कर सबका ध्यान उस तरफ गया. अंजलि कर्मा के ऊपर अब भी थी पर अब अभी कर्मा का लुंड dheere-dheere उसकी गांड में समां रहा था और अंजलि आहें भर रही थी.

अंजलि: "आह आह उह माँ आह कितना मोटा है आह हर बार और मोटा कैसे हो जाता है यह आह आह उह."

कर्मा: "लुंड मोटा नहीं होता आह मेरी जान आह तेरी गांड आह और कास जाती है आह कितनी मखमली और गरम है आह."

अंजलि: "आह उह लग रहा है आधा आधा चीयर देगा मुझे."

सभ्य: "कोई बात नहीं मेरी यह बच्ची बस कुछ पल का दर्द है फिर मज़ा hi मज़ा है."

सभ्य राजन के लुंड को अपनी छूट में लेकर उछालते हुए बोली.

अंजलि: "उह हाँ माँ आह लूंगी मैं पूरा आह मुझे भी तुम्हारे जैसा बनाना है आह कर्मा उह मारो मेरी गांड आह."

कर्मा: "उह हाँ बिना मारे आह मैं रुक भी नहीं सकता."

यह कह कर्मा नीचे से तगड़े धक्के लगाने लगता है और अंजलि की गांड मारने लगता है उसके चूतड़ों को थाम कर.

अंजलि: "आह आह आह आह आह आह उह माँ आह आह आह देखो आह कैसे आह तुम्हारी यह बिटिया की गांड चुद रही है आह आह आह सबके सामने."

अंजलि सभ्य की तरफ देखते हुए कहती है.

सभ्य: "आह देख रही हूँ बिटिया आह आह उह देख तेरे चाचा जी भी कैसे तेरी माँ को छोड़ रहे हैं अपने मोठे लुंड पर उछाल रहे हैं आह."

राजन: "उह तुम माँ बेटी उह चीज़ hi ऐसी हो छोड़ने के लिए hi बानी हो आह क्यों चुड़क्कड़ भाभी."

सभ्य: "सही कहा भैया आह अंजलि आह बिटिया आह चुद जी भर के चुद आह हम लोग छुड़वाने के लिए hi बने हैं आह आह."

शालू: "सही कहा जीजाजी आह आह उह मैं तो अपने यह भाई से चुद रही हूँ आह देखो कैसे अपना मोटा लुंड मेरी गांड में घुसा कर छोड़ रहा है."

जमुना: "उह मेरी रंडी कुटिया जीजाजी आह तुम्हे कुटिया बना कर आह जब तक तुम्हारी कासी हुई गरम गांड में लुंड दाल कर न छोड़ू आह मज़ा hi नहीं आता."

जमुना शालू की गांड मारते हुए बोलै.

गुंजन: "आह आएगा hi नहीं आह रंडी जो हैं आह तुम्हारी दोनों बहनें आह आह आह मोठे मोठे लुंड की प्यासी आह आह आह और तेज जीजाजी."

गुंजन खुद शैलेश के लुंड पर उछालते हुए सभ्य और शालू के लिए बोली.

ममता: "आह देखो तो रंडी को उह खुद ननदोई के लुंड पर आह उछालते हुए अपनी अम्मा छुड़ा रही है और बोल दूसरों को रही है."

ममता अपनी गांड के छल्ले को नाना के मोठे लुंड पर कसते हुए बोली और ऊपर नीचे होने लगी.

गुंजन: "आह उछाल रही हूँ तो क्या हुआ, आह देखो सब आह दो रंडियों को बोलै तीसरी को मिर्ची लग गयी."

सभ्य: "भैया इस दारी को ऐसे छोड़ो की इसकी चीखें इसकी रंडी माँ तक को सुनाई दें जो अपना भोसड़ा खोल के गाओं भर में चुदवाती फिरती है."

ननद भाभियों की nok-jhok सुन कर बाकी सब मुस्कुरा रहे थे. अंजलि के चेहरे पर भी एक मुस्कान थी.

इधर पल्ली के नीचे से अनुज निकला और उठ कर गुंजन और शैलेश के पास चला गया और बिस्तर पर चढ़ कर गुंजन के मुँह में अपना लोढ़ा घुसा दिया.

अनुज: "मेरी माँ और मौसी और चची को गाली डौगी मामी तो मुँह बंद कर दूंगा."

और गुंजन का मुँह थाम कर उसके मुँह में धक्के लगाने लगा. गुंजन के मुँह से उग उग घु घु की आवाज़ आने लगी.

ममता: "अनुज मेरे लाल ऐसे hi सही किया रंडी का मुँह बंद करके."

शालू: "और क्या रंडी को लगा यह था की हमें बोलेगी तो हमारे बच्चे चुप रहेंगे."

सभ्य: "बच्चों ने माँ का दूध पिया है माँ के लिए तो बोलेंगे hi."

सभ्य राजन के लुंड पर उछालते हुए बोली.

राजन: "आह उह सही कहा भाभी आह ऐसे hi उछलती रहो आह."

सभ्य: "उह देवर जी आह इतना मोटा लोढ़ा आह अपनी भाभी की छूट में भर रहे हो आह अपने भैया के सामने आह."

राजन: "उह भाभी आह जब भाभी तुम्हारे जैसी हो तो उह भैया के सामने भी छोड़ने में कैसी यह झिझक आह भाभी."

अनुज के गुंजन के पास जाने पर पल्ली अकेली थी.

पल्ली: "आह ताऊ आओ मेरी गांड खली है आह घुसा दो मोटा लोढ़ा मेरी गांड में."

किरण की छूट और गांड दोनों में लुंड थे इसलिए नीलेश ने किरण की गांड से लुंड निकाला और बिस्तर पर सीधे होकर बैठ गए.

नीलेश: "आ जा बिटिया आह आ जा अपने ताऊ की गॉड में बैठ जा."

पल्ली तुरंत उनके ऊपर आयी और उनका लुंड अपनी गांड में लेकर बैठ गयी.

सागर ने भी किरण को अपने ऊपर से उठाया और नीलेश के बगल में वह भी बैठ गया नीलेश की तरह hi सीधा बैठ गया.

सागर: "आह किरण तू भी पल्ली की तरह मेरे ऊपर आ जा."

और यह सुन कर किरण उसके लुंड पर सवार हो गयी उसे अपनी गांड में लेकर उछलने लगी.

नीलेश और सागर नीचे से धक्के लगा लगा कर दोनों की गांड मार रहे थे, साथ hi उनकी चूचियों से भी खेल रहे थे.

सागर: "आह किरण आह तेरी गांड आह कितनी गरम और कासी हुई है आह मज़ा आ रहा है आह तेरी यह बड़ी चूचियां उह कितना मुलायम हैं."

किरण: "आह तेरा लुंड भी उह मज़ा दे रहा है भाई आह ऐसे hi अपनी बेहेन की गांड मार आह आह."

पल्ली: "आह आह देखो ताऊजी काम से काम चुदाई की वजह से hi सही आह इन दोनों के बीच प्यार से बात तो हुई."

किरण: "यह सिर्फ जब तक छोड़ता है तब तक hi करता है बाद में फिर औकात पर आ जाता है."

सागर: "उह नहीं मेरी प्यारी बेहेन आह तू तो मेरी जान है आह अब से मैं तुझसे ऐसे hi बात करूँगा आह और प्यार से hi रहूँगा बस तू अपनी गांड मुझे हमेशा देती रहियो."

किरण: "नौटंकी बंद कर और चुपचाप गांड मारने पर ध्यान दे."

पल्ली: "और क्या काम से काम नयी भाभी का तो ध्यान रखो."

किरण: "वैसे नयी भाभी का ध्यान तो भैया रख रहे हैं अच्छे से क्यों भाभी कोई कमी तो नहीं है."

किरण ने अंजलि से पुछा.

अंजलि: "आह नहीं किरण आह कोई कमी नहीं है आह उम्मीद से ज़्यादा मिल रहा है आह तुम्हारे भैया का लुंड."

अंजलि ने कर्मा के ऊपर उछालते हुए कहा, उसकी पीठ कर्मा की तरफ थी वही कर्मा का लुंड उसकी गांड में नीचे से andar-bahar हो रहा था.

इस आसान में बाकी लोगों की नज़र भी अंजलि पर baar-baar जा रही थी क्यूंकि उसका पूरा बदन सामने से नंगा दिख रहा था. मर्द तो मर्द औरतें भी उसके सुन्दर बदन को देख कर अपने होंठों पर जीभ फेर रही थी. उनमें से एक अनुज भी था जो अपनी मामी का मुँह छोड़ रहा था उसने अपना लुंड गुंजन के मुँह से निकाला और बिस्तर से उतर कर आगे बढ़ा और अपने भाई कर्मा और होने वाली भाभी अंजलि के बगल में बैठ गया जाकर और उन्हें देखते हुए अपना लुंड मसलने लगा. अंजलि की नज़र भी उससे मिली और दोनों एक दुसरे को देख मुस्कुराये.

अनुज: "भाभी तुम बहुत सुन्दर हो, सच में एक डैम मस्त बदन है तुम्हारा."

अनुज ने अंजलि को देखते हुए कहा तो कर्मा बीच में बोलै: "हाथ भी मत लगा दियो नहीं तो मुँह तोड़ दूंगा."

अनुज: "अरे देखो भाभी इन्हे."

अंजलि उसकी तरफ देख मुस्कुरायी और बोली: "इनकी बात मत सुनो तुम इधर आओ."

अनुज तुरंत उसकी तरफ बढ़ा अंजलि ने उसे पास बुलाया और उसका एक हाथ अपनी एक चुकी पर रख दिया. कर्मा लगातार नीचे से उसकी गांड मार रहा था.

अनुज: "अरे वाह कितनी मुलायम है भाभी."

कर्मा: "हाथ हटा नहीं तो बहुत पिटेगा."

अंजलि: "ऐसे कैसे पिटेगा भाभी पर देवर का पूरा हक़ होता है."

अनुज: "समझे भैया."

यह कह अनुज झुक कर चुकी से मुँह लगा देता है और अंजलि के मुँह से आह निकल जाती है. अनुज अंजलि की चुकी को पूरी लगन और जोश से चूसने लगता है, एक चुकी के बाद दूसरी पर मुँह लगा देता है. अंजलि की उत्तेजना भी बढ़ने लगती है पहली बार दो मर्द उसके बदन से खेल रहे थे पहली बार कर्मा के अलावा कोई दूसरा मर्द उसके बदन को छू रहा था और उसकी वजह से अंजलि और उत्तेजित हो रही थी.

बाकी पूरे आँगन में भी चुदाई पूरे जोश पर चल रही थी. राजन ने सभ्य को घोड़ी बनाया हुआ था और उसकी गांड में अपने मोठे काले लुंड को घुसा कर तेज़ी से गांड मार रहा था.

सभ्य मुँह नीचे झुकाते हर झटके के साथ आहें भर रही थी और अपने पति को पुकार रही थी.

सभ्य: "आह जी देखो न आह यह देवर जी आह कितनी बुरी तरह आह मार रहे हैं मेरी गांड आह तुम्हारी बीवी की गांड में अपना मोटा लौड़ा घुसा के छोड़ रहे हैं."

राजन: "अब भाभी की गांड देवर नहीं मरेगा तो आह कौन मरेगा भाभी उह आह क्या गांड है जितनी भी मारो मैं hi नहीं भरता."

सभ्य: "आह आह आह आह गांड मैं भरवाने वाली चीज़ थोड़ी hi होती है आह राजा, उह और तेज आह."

जहाँ राजन अपनी भाभी के बदन को खूब चाव से भोग रहा था वही, इधर अनुज ने अपनी होने वाली भाभी की चूचियों को जी भर के चूसा और फिर उसके पेट और नाभि को भी चाटने चूसने लगा और फिर ऊपर होकर अपने होंठों को अंजलि के होंठों से मिला दिया और चूसने लगा. अंजलि भी पूरा साथ देने लगी.

अनुज का लुंड अंजलि के बदन की खुशबू और स्पर्श पाकर फड़क रहा था. कुछ पल बाद अनुज ने अंजलि के होंठों को छोड़ा और मुस्कुराते हुए बोलै: "है कितनी स्वादिष्ट हो तुम भाभी!"

अंजलि भी मुस्कुरायी और बोली: "जैसा देवर वैसी भाभी."

कर्मा: "देवर भाभी का प्यार हो गया तो मैं कुछ करूँ?"

अंजलि: "हाँ करो न."

कर्मा अंजलि के पैरों को पीछे की तरफ मोड़ कर हाथों में फंसा लेता है, और फिर बेरहमी से उसकी गांड मारने लगता है.

अनुज बगल में खड़े होकर देख रहा होता है और अपना लुंड सेहला रहा होता है.

अंजलि: "आह आह आह आह माँ आह आह उह आह आह."

अंजलि कर्मा की चुदाई से आहें भरते हुए चिल्लाती है.

अनुज: "अरे आराम से भैया तुम तो भाभी को लगता है दर्द hi देकर मानोगे."

सभ्य: "देखो तो कितनी फ़िक्र है मेरे लल्ला को अपनी भाभी की."

अनुज: "होगी नहीं इतनी कोमल भाभी को इतनी बुरी तरह छोड़ रहे हैं."

तभी एक तेज़ चीख के साथ अंजलि झड़ने लगती है उसका बदन कर्मा के बदन पर कांपने लगता है. कर्मा भी अपनी गति धीमी कर लेता है और अंजलि के वेग को शांत होने लगता है. अंजलि झड़ते हुए कर्मा के ऊपर से एक तरफ गिर जाती है.

अनुज: "देखा भाभी तुमने कितने निर्दयी इंसान से प्यार किया है, बेचारी को थका दिया बिलकुल!"

सब उसकी बात सुन हंसने लगते हैं.

कर्मा: "तू कुछ ज़्यादा hi नहीं बोल रहा."

अनुज: "ज़्यादा नहीं सच बोल रहा हूँ."

इतने में अंजलि फिर से uth-ti है और कर्मा के आगे घोड़ी बन जाती है.

अंजलि: "फिर से डालो."

कर्मा अपना लुंड फिर से अंजलि की गांड में घुसाता है और उसकी कमर पकड़ कर उसे छोड़ने लगता है.

कर्मा: "देखा जितना तू समझता है उतनी भी कोमल नहीं है यह क्यों मेरी जान? तू मुझे सीखा रहा था."

अंजलि मुस्कुराती है और कहती है: "अरे तो क्या हुआ एक तो उसे इतनी फ़िक्र है मेरी."

अंजलि हँसते हुए कहती है.

कर्मा: "अच्छा ठीक है भैया तुम जानो और तुम्हारा देवर जाने."

यह कहते हुए कर्मा उसकी कमर को थामे हुए उसकी गांड में लुंड चलाने लगता है.

अंजलि: "और क्या यह हम दोनों के बीच की बात है तुम अलग रहो क्यों अनुज?"

अंजलि अनुज की तरफ देखते हुए कहती है.

अनुज: "और क्या भाभी, हम दोनों की खूब जमने वाली है."

अंजलि: "बिलकुल सही."

यह कहकर अंजलि अपना मुँह खोल लेती है और अनुज को देखती है. अनुज तुरंत समझ जाता है और अपना लुंड अंजलि के खुले मुँह में धीरे से घुसा देता है.

अनुज: "उह भाभी आह."

अंजलि भी अनुज के लुंड पर अपना मुँह कास लेती है और चूसने लगती है. कर्मा पीछे से अंजलि को उसके भाई का लुंड चूसते देखता है और एक शांत मुस्कान उसके चेहरे पर उभर आती है जैसे वह जानता था की यह होने वाला है.

शालू: "अरे वाह आखिर अनुज को भी अंजलि का स्वाद मिल hi गया."

अनुज: "आह और क्या मौसी, आखिर मेरी भाभी है."

सागर: "भाभी तो मेरी भी है."

किरण: "मेरी भी."

पल्ली: "और मेरी भी."

गुंजन: "अरे तो अब यहीं आएगी ब्याह होकर कहीं और नहीं जाने वाली ज़िन्दगी भर यही रहना जितना प्यार जाताना है तब जाताना."

गुंजन शैलेश से गांड मरवाते हुए बोली.

शैलेश: "हाँ वैसे बहु की सेवा के लिए तो हम भी इंतज़ार में हैं सिर्फ बच्चे नहीं."

शालू: "तुम इंतज़ार में रहो या न रहो पर सबसे कह देती हूँ, अंजलि के पास कोई खुद से नहीं जाएगा, उसका मैं जिसके साथ होगा जब होगा तब वह करेगी."

राजन: "कोई बात नहीं जो तुम्हारी आज्ञा."

सभ्य: "आह बिलकुल सही कहा शालू."

ममता: "और क्या नहीं तो यह सब लोग लोडे लेकर उसके पीछे पीछे hi घुमते नज़र आएंगे."

इस पर तो अंजलि को भी हंसी आ गयी और वह अनुज का लुंड निकाल कर हंसने लगी.

ममता: "सही कह रही हूँ बिटिया, तू नहीं जानती इन लोगों को."

ममता ने बिस्तर पर किरण और पल्ली के बगल में घोड़ी बने हुए कहा, जहाँ तीनो hi घोड़ी बने हुए थे, और नाना ममता की, नीलेश किरण की और सागर पल्ली की गांड मार रहा था.

सागर: "आह आह आह मज़ा आ रहा है ऐसे आह एक साथ क्यों बाबा और फूफाजी."

नाना: "आह तुझे कब मज़ा नहीं आता."

सागर: "जब चुदाई नहीं कर रहा होता."

किरण: "बद्तमीज़ कहीं का किसी बात का ठीक से जवाब नहीं दे सकता यह."

सागर: "अरे इसमें क्या गलत बोलै मैंने? अरे बाबा सुनो न मुझे बुआ की गांड मारने दो."

नाना: "हाँ आ जा लल्ला."

नाना और सागर जगह बदल लेते हैं नाना पल्ली की गांड मारने लगते हैं और सागर ममता की, वही नीलेश का लुंड किरण की गांड में होता है.

इधर अंजलि के लिए हर पल उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. एक तरफ कर्मा का लुंड गांड में चल रहा था वही अनुज का उसके होने वाले देवर का मुँह में था और फिर बाकी रही बची कसार आस पास का माहौल पूरी कर रहा था. वही अनुज और कर्मा भी अपने अपने चरम की तरफ बढ़ रहे थे और कुछ पल बाद ऐसा हुआ की तीनो hi एक साथ झड़ने लगे. अंजलि के झड़ते हुए उसकी गांड कर्मा के लुंड पर कास गयी जो की कर्मा के लिए काफी था और वह उसकी गांड में झड़ने लगा. इधर अनुज का लुंड भी अंजलि के मुँह में फूलने लगता है और फिर उसके मुँह में रास छोड़ने लगता है एक दो पिचकारी के बाद क्यूंकि अंजलि खुद झाड़ रही थी तो अनुज का लुंड उसके मुँह से निकल जाता है और बाकी का रास अंजलि के चेहरे और सीने पर गिरता है. कर्मा अंजलि की गांड से लुंड निकाल कर लेट जाता है और अनुज भी पीछे होकर. अंजलि भी लेट कर हाँफते हुए आँखें बंद कर लेती है.

दूसरी तरफ नीलेश, नाना और सागर भी झड़ने की कगार पर थे तभी किरण ने एक इच्छा जताई जिसका पालन तीनो ने hi तुरंत किया और कुछ देर बाद किरण का हाल कुछ ऐसा था...

उसकी आँखों और सीने से नाना, सागर और नीलेश का रास टपक रहा था. तीनो अपना अपना रास छोड़ने के बाद पीछे होकर बैठ गए. इधर राजन भी सभ्य की गांड में अपना रास छोड़ कर आराम कर रहे थे. सभ्य भी एक बार झाड़ चुकी थी और राजन की बाहों में लेती थी. इधर शालू भी जमुना के लुंड पर झड़ने के बाद आराम से लेती थी वही गुंजन को शैलेश ने अपना रास पिलाया था. चुदाई का तूफ़ान थम चूका था अभी दोपहर hi हुई थी, तो सब जिसको जहाँ सही लगा आराम करने के लिए लेट गए.

शाम हो चुकी थी मर्द लोग और बाकी सब अपने अपने काम में लग चुके थे कुछ बहार निकल गए थे. वही अंजलि सो कर उठने के बाद नहाने चली गयी थी और नाहा कर निकली उसके साथ कमरे में किरण और पल्लवी थी. तीनो लड़कियों की आपस में खूब जैम रही थी. अंजलि पूरी नंगी बाथरूम से निकली और उसने बिस्तर पर देखा, पल्ली भी नंगी बिस्तर पर लेती हुई थी और किरण उसकी टांगों के बीच में थी और उसकी टांगों में टाँगे फंसाकर अपनी छूट उसकी छूट से घिस रही थी.

अंजलि: "अरे वाह तुम लोग तो फिर से शुरू हो गए."

किरण: "आह आओ भाभी, इस सुख का भी मज़ा लो."

पल्ली: "हाँ भाभी तुमने किया है कभी यह सब किसी के साथ?"

अंजलि: "हाँ किया है न नीतू के साथ बहुत बार."

अंजलि ने बिस्तर पर चढ़ते हुए कहा, और ऊपर आ कर वह पल्ली की मोती चूचियों को दबाने लगी वही किरण उसकी चूचियों से खेलने लगी.

किरण: "अरे वाह भाभी फिर तो और मज़ा आएगा."

अंजलि: "हाँ बिलकुल, बताओ क्या करना है."

पल्ली: "मेरे मुँह पर बैठो भाभी मुझे अपनी छूट का स्वाद चखने दो."

अंजलि: "अभी लो."

अंजलि तुरंत उठ कर पल्ली के मुँह पर बैठ गयी, और पल्ली भी तुरंत अंजलि की छूट को चाटने लगी. वही अंजलि आगे झुक कर किरण के होंठों को चूसने लगती है, वही किरण अपनी कमर घुमा घुमा कर अपनी छूट पल्ली की छूट से घिस रही थी.

तीनो आपस में जुडी हुई थी और एक दुसरे के साथ कामुक खेल खेल रही थी. अंजलि के हाथ किरण की चूचियों को मसल रहे थे और वही किरण पल्ली अंजलि के चूतड़ों को मसल रही थी. किरण भी अंजलि की चूचियों को मसल रही थी. तीनो के मुँह एक दुसरे के होंठों पर थे, पल्ली के अंजलि के छूट के होंठों पर और किरण के ऊपर के होंठों पर. कुछ देर तक यूँ hi घिसाई के बाद तीनो hi एक दुसरे के साथ झाड़ गयीं और एक दुसरे की बाहों में हाँफते हुए लेट गयीं.

किरण: "मज़ा आ गया न भाभी."

अंजलि: "हाँ सच में, पल्ली तुम तो बहुत अच्छा चाटती हो."

पल्ली: "तुम्हारी है hi इतनी स्वाद की जीभ अपने आप चलते रहती है."

तभी बहार से नीलेश की आवाज़ आती है: "अरे बच्चों जाग रहे हो क्या थोड़ी चाय hi बना दो."



जारी रहेगी...
 
एक दूसरे की बाहों में हांफते हुए लेट गई।

किरन: मज़ा आ गया न भाभी,

अंजली: हां सच में, पल्ली तुम तो बहुत अच्छा चाटती हो।

पल्ली: तुम्हारी है ही इतनी स्वाद की जीभ अपने आप चलते रहती है,

तभी बाहर से नीलेश की आवाज आती है: अरे बच्चों जाग रहे हो क्या थोड़ी चाय ही बना दो।


अपडेट 261


किरन: बनाती हूं फूफाजी!

तीनों फिर उठ कर रसोई में जाती हैं और किरन अंजली के हाथ में चायदान दे कर कहती है: भाभी आज अपने ससुर जी के लिए तुम बनाओ चाय।

अंजली: अरे इसमें क्या है अभी बना देती हूं।

अंजली चाय चढ़ा देती है और तीनों खूब बातें करती रहती हैं चाय बनने तक और फिर चाय बनने के बाद किरन और पल्ली अंजली को ही भेजती हैं नीलेश को चाय देने के लिए।

अंजली नीलेश को चाय देती है,

नीलेश: अरे बिटिया, बाकी दोनों कहां है किरन या पल्ली से भिजवा देती।

अंजली: अरे चाचाजी तो क्या हुआ मैं ले आई तो,

नीलेश: अरे वो तो गलत नहीं हुआ पर अब तू गलत कर रही है,

नीलेश चाय का घूंट भरते हुए कहते हैं,

अंजली: क्या हुआ चाय अच्छी नहीं बनी क्या? अंजली घबराते हुए कहती है,

नीलेश: चाय तो बहुत स्वाद बनी है बिल्कुल तेरी तरह पर तू सभ्या को मां बोलती है और मुझे चाचा? ये तो बिल्कुल गलत है न?

अंजली के चेहरे पर ये सुन मुस्कान आ जाती है,

अंजली: सौरी पापाजी अब से ये गलती नहीं होगी।

नीलेश: मेरी प्यारी बिटिया, तू बहुत प्यारी है, आ मेरे पास बैठ।

अंजली: प्यारे तो तुम हो पापा।

अंजली नीलेश के बगल में बैठते हुए कहती है





नीलेश: अरे हम कहां से प्यारे हो गए, प्यारी तो तू है सुंदर सी बिल्कुल परी की तरह।

अंजली: अरे पापा अब इतनी भी तारीफ मत करो,

अंजली नीलेश के कंधे पर सिर रखते हुए कहती है,

नीलेश: अच्छा तारीफ नहीं करता, ये बता यहां अच्छा लगता है तुझे?

अंजली: अच्छा नहीं बहुत अच्छा,

अंजली हँसते हुए कहती है,

नीलेश: अच्छा है फिर लगना भी चाहिए तुझे हमेशा यहीं तो रहना है,

अंजली: तुम्हे अच्छा लगेगा मुझे बहू बना कर?

नीलेश: नहीं बहू बना कर तो बिल्कुल अच्छा नहीं लगेगा,

ये सुन अंजली का मुंह उतरने लगता है,

नीलेश आगे बोलते हैं: क्योंकि मेरी बिटिया है तू, बहू नहीं।

ये सुन अंजली की मुस्कान बड़ी हो जाती है, और वो नीलेश के गले लग जाती है,

इतने में बाहर से अनुज की आवाज़ आती है: भाभी चलो तुम्हे छोड़ दूंगा।

नीलेश: ले भाई तेरी सवारी तैयार है।

अंजली: हां अभी तो जा रही हूं पर अब मैं कभी भी आ सकती हूं इतनी आसानी से पीछा नहीं छोडूंगी,

नीलेश: पागल है तू बिल्कुल।

अंजली जाने को होती है एक कदम आगे बढ़ा कर फिर बापिस घूम जाती है और झुक कर नीलेश के होंठों को चूमती है





और फिर भाग जाती है, नीलेश हंसते हुए उसे जाते हुए देखते रहते हैं, और सिर हिलाकर मन ही मन कहते हैं: पागल।

अनुज अंजली को घर छोड़ देता है, जब अंजली घर पहुंचती है तो महिपाल और पीयूष बाज़ार गए होते हैं, अंजली जाकर अपनी मां और भाभी से बातें करती है और वहां क्या हुआ वो सब बताती है,

रानी: अरे वो सब तो ठीक है अंजली पर पापा परेशान हैं उन्हें लगता है तू उनसे नाराज़ हो गई है ये सब पता लगने पर।

अंजली: अरे ऐसा किसने कहा।

सविता: वो ही मन में सोच के बैठे हैं। अब आ जाएं तो तू ही उन्हें समझाना।

अंजली: अरे वैसे मुझे गुस्सा होना भी चाहिए आखिर तुम सब लोग मुझसे छुपा तो रहे थे न सब।

अंजली हंसते हुए कहती है,

रानी: तो अब तू गुस्सा होगी।

अंजली: और क्या पापा को भी थोड़ी सजा तो मिलनी चाहिए।

सविता: और वो कैसे देगी तू।

अंजली: सो कर।

रानी: सो कर मतलब?

अंजली: अरे मतलब अभी पापा नहीं है, मैं थकी हुई भी हूं तो मैं सो जाती हूं तुम दोनों लोग बस उन्हें ये मत बताना जो हमारी बात हुई।

सविता: अच्छा फिर क्या बताएं उन्हें?

अंजली: अरे बस कह देना कि आकर मैने ज़्यादा बात नहीं की और सो गई।

रानी: वैसे मज़ेदार प्लान है, पापा को थोड़ा तो तड़पाने में मज़ा आयेगा,

अंजली: तो फिर तय रहा, अब मैं चलती हूं सोने।

ये कह अंजली उठती है और अपनी मां और भाभी के होंठों को बारी बारी चूमती है और अपने कमरे में चली जाती है, उसके जाने के बाद दोनों के चेहरे पर मुस्कान होती है

रानी: बहुत मीठा स्वाद है मेरी ननद का,

सविता: आखिर बेटी किसकी है,

रानी: ओहो मेरी सेक्सी सासु मां।

रानी ये कस सविता का मुंह पकड़ती है और उसके होंठों को चूसने लगती है, सविता भी अपनी बहू का साथ देती है, और कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग होते हैं

सविता: चल अब खाना भी बनाना है।

रानी: हां चलो न मेरी चुदक्कड़ मम्मी जी।

सविता: कमीनी कही की।

दोनों खाना बनाती हैं जब तक पीयूष और महिपाल भी आ जाते हैं और फिर वैसा ही होता है जैसा अंजली ने सोचा था, आते ही महिपाल अंजली के बारे में पूछते हैं और जब उन्हें पता चलता है आकर सो गई तो महिपाल का दिमाग खराब हो जाता है, बेमन से खाना खा कर वो अंजली के कमरे में झांक कर देखते हैं उसे सोता देखते हैं तो एक हल्की मुस्कान चेहरे पर आती है पर फिर अपने कमरे में जाकर सोने की कोशिश करते हैं तो काफी देर के बाद आखिर नींद आ ही जाती है,

महिपाल की नींद धीरे धीरे खुलती है उन्हें लगता है कोई उनके बदन को हिला रहा है, वो धीरे से आंखें खोलते हैं देखते हैं उनके बगल में सविता सो रही है फिर दूसरी ओर देखते हैं और अगले ही पल आँखें पूरी खुल जाती हैं, बिस्तर के बगल में अंजली खड़ी थी सिर्फ काली समीज और पैंटी पहन कर, महिपाल कुछ कहने वाले होते हैं तो अंजली उन्हें चुप का इशारा करती है और धीमी आवाज़ में कहती है पापा बाहर आओ, हॉल में।

ये कहके वो चली जाती है, महिपाल को समझ नहीं आता हो क्या रहा है, वो घड़ी की ओर देखते हैं सुबह के 5 बज रहे थे, वो बिस्तर से उठते हैं और कमरे से बाहर निकल जाते हैं, हॉल में अंजली खड़ी थी चेहरे पर मुस्कान लिए, महिपाल आगे बढ़ते हैं और अंजली उनका हाथ पकड़ लेती है।

महिपाल: ये सब क्या हो रहा है बेटा,

अंजली मुस्कुराती है और महिपाल को सोफे पर बिठा देती है,

अंजली: अब तुम्हे सज़ा मिलेगी पापा, मुझसे सच छुपाने की सज़ा।

ये कहते हुए अंजली आगे होती है और महिपाल के होंठों को हल्का सा चूम लेती है, महिपाल के तन बदन में बिजली दौड़ पड़ती है, अपनी बेटी के होंठों के स्पर्श से, उनका लंड तुरंत सिर उठाने लगता है और कड़क हो जाता है,

अंजली फिर नीचे सरकती है और सोफे पर झुक कर उनकी पैंट के ऊपर से ही उनके खड़े होते लंड को सहलाने लगती है, महिपाल की सांसें बढ़ने लगती हैं, अंजली अपने दोनों हाथों को प्रयोग करती है और पैंट की चैन को खोल देती है और उसमें से महिपाल के लंड को पकड़ कर बाहर निकाल लेती है, और उस पर हाथ चलाने लगती है। और महिपाल की आंखों में देखती है।

अंजली: ये तुमने क्यों खड़ा कर रखा है पापा, मेरे लिए अपनी बेटी के लिए।

महिपाल: हां हां तेरे लिए ही है बिटिया आह ओह आह्ह्ह्ह।

महिपाल की बात पूरी होने से पहले ही अंजली उनके लंड को मुंह में भर लेती है, महिपाल के मुंह से आह निकल जाती है ये सोच के कि उनका लंड उनकी बेटी के मुंह में है, अंजली बिना झिझक और शर्म के अपने पापा का लंड गहराई तक मुंह में लेकर चूसने लगती है,





महिपाल: ओह ओह आह्ह्ह्ह बिटिया ओह तू मेरा, लंड आह मुंह में ले रही है,

महिपाल के पास शब्द नहीं थे उस पल को बयां करने के लिए वहीं अंजली तो पूरी लगन से अपने पापा की सेवा में लगी थी, उसने लंड को मुंह में बाहर तक निकाला और पापा की ओर देख कर बोली: कैसा लग रहा है पापा.

महिपाल: आह बिटिया ओह बहुत अच्छा इतना अच्छा कि आह सपने से भी अच्छा ओह अह्ह्ह्ह

अंजली दोबारा से उसका लंड चूसने लगी। वहीं महिपाल ने तो बिना कहे अपने कपड़े उतारना भी शुरू कर दिया था, कुछ देर चूसने के बाद अंजली ने उसका लंड मुंह से निकाला और बोली: कपड़े उतार दो पापा, महिपाल ने तुरंत जवान लड़के की फुर्ती दिखाई और तुरंत नंगा हो गया, अंजली ने भी अपनी समीज को

नीचे खिसका दिया और पैंटी को भी पैरों से निकाल दिया, समीज के सरकते ही अंजली की नंगी चूचियां महिपाल के सामने थी वहीं महिपाल भी पूरा नंगा हो चुका था, एक दूसरे को इस तरह देख दोनों ही एक दूसरे पर टूट पड़े, दोनों के होंठ मिल गए और एक आक्रामक और जोश के साथ होंठो को चूसने लगे, वहीं महिपाल के हाथ जहां बेटी की चूचियों को मसलने लगे, वहीं अंजली अपनी पापा के लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी।





एक दूसरे के लिए भूख एक दूसरे के बदन को पाने की ललक दोनों की आंखों में और हरकतों में देखी जा सकती थी, महिपाल बेटी के रसीले कोमल होंठों को चूसते हुए मस्त हुए जा रहे थे ऐसा लग रहा था मानो उसके होंठों का रस उनके मुंह में पिघल रहा है हाथों में अंजली की चूचियां मक्खन की पोटलियों जैसी थी कितनी नरम कितनी कोमल, दोनों के होंठ अलग हुए तो महिपाल झुक कर बेटी की चूचियों पर टूट पड़े, एक को मुंह में भर लिया और दूसरी को हाथों से मसलना जारी रखा,

अंजली: आह आह ओह पापा पी लो आह चूसो अपनी बेटी की चूचियों को आह खा जाओ आह।

अंजली एक हाथ से महिपाल के कड़क लंड को सहलाते हुए बोल रही थी, जो उसके हाथ में झटके मार रहा था, शायद ही कभी महिपाल का लंड इतना कड़क हुआ था बिल्कुल पत्थर की तरह कठोर जो बता रहा था कि महिपाल कितना उत्तेजित है,

महिपाल ने जी भर के अंजली की चूचियों को चूसा और अंजली अपनी बातों से अपनी सिसकियों से उसका जोश बढ़ाती रही, फिर अंजली ने उसके सिर को अपनी चूचियों से हटाया और खुद नीचे बैठ गई, अपने घुटनों पर और अपने पापा की आंखों में देखते हुए उसके लंड के टोपे पर अपनी जीभ फिराई तो महिपाल की आंखें बंद हो गई, ऐसा सुख शायद ही कभी उन्हें नहीं मिला होगा, वहीं अंजली आज अपने पापा पर वो सब आजमाना चाहती थी जो उसने कर्मा के साथ सीखा था, लंड के सिर को जीभ से चाटते हुए उसने लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी,

महिपाल: आह बिटिया ओह आह्ह्ह्ह आज तू आह मेरी जान लेगी आह।

महिपाल के मुंह से सिसकियां निकल रही थी, अंजली ने उनके लंड को मुंह से निकाला और बोली, पापा आज रुको मत पूरी कसर निकाल लो मुझ पर

महिपाल ने उसका सिर पकड़ा और उसे लंड पर दबा दिया महिपाल का लंड दोबारा अंजली के मुंह में घुस गया, महिपाल अपनी कमर हिला हिला कर बेटी के मुंह को चोदने लगा और कुछ ही पल बाद उसका लंड जड़ तक अंजली के मुंह में था और वो बेटी के मुंह को अपने लंड पर दबा रहा था





कुछ पल यूं ही रोकने के बाद उसने अंजली के सिर को छोड़ा तो अंजली पीछे हो गई हांफते हुए, अंजली के होंठों से एक थूक की धार उसके लंड को जोड़ रही थी,

अंजली: आह ऐसे ही पापा आह अब मैं गुड़िया नहीं रही आह चुदक्कड़ बिटिया हूं तुम्हारी आह ऐसे ही चोदो मुझे।

अंजली गरम होते हुए बोली,

महिपाल ने उसके मुंह में दोबारा लंड घुसा दिया और बोला: आह बिटिया आह वैसे ही चोदूंगा आह आह मेरी प्यारी आह चुदक्कड़ बिटिया।

कुछ पल लंड चुसवा कर महिपाल ने अंजली को उठाया और उसे सोफे पर बिठा दिया, और खुद उसके सामने नीचे बैठ गया, अंजली ने अपनी जांघों को बंद कर लिया और बोली,

अंजली: पापा वहां क्यों बैठे हो, शर्म नहीं आती मैं नंगी हूं?

महिपाल उसकी बात सुनकर मुस्कुराते हुए बोला: अपनी बेटी की रसभरी गरम चूत देखने के लिए बैठा हूं, और बिटिया बाप के सामने नंगी हो इसमें क्या शर्म?

अंजली: मेरी चूत देखोगे पापा अपनी बिटिया की चूत?

अंजली गरम सांसों के साथ बोली।

महिपाल: हां मेरी बिटिया, तेरी चूत देखूंगा उसे प्यार करूंगा।

अंजली: आह पापा लो कर लो प्यार अपनी बिटिया की चूत से,

अंजली ने जांघों को फैला दिया और उसकी चूत उसके बाप के सामने आ गई, महिपाल की आंखें अंजली की चूत पर जम गईं वो बड़ी बड़ी आंखों से बेटी की चूत को देखने लगा उसकी सांसे अंजली को अपनी जांघों और चूत पर महसूस हो रही थी,

अंजली: कैसी है पापा तुम्हारी बिटिया की चूत?

महिपाल: बहुत प्यारी और सुंदर है बिटिया, बहुत रसीली लग रही है मेरे मुंह में पानी आ रहा है इसे देख कर,

अंजली: ओह पापा अपनी बिटिया की चूत का रस पियोगे?

महिपाल: हां बिटिया पियूंगा, जी भर के पियूंगा।

अंजली: तो चाटो न आह पी जाओ सारा रस आह बहुत बह रही है अह।

महिपाल ने भी अपना मुंह बेटी की चूत पर लगा दिया और पागलों की तरह चाटने लगा मानो कब से भूखा हो, अंजली ने अपने हाथों से अपने पापा का सिर पकड़ लिया और उसे अपनी चूत पर दबाने लगी।





अंजली: आह आह पापा ओह ऐसे ही जीभ अंदर घुसाओ आह आह कुत्ते की तरह चाटो आह अच्छे से।

महिपाल भी पूरी लगन से और जोश से बेटी की चूत को चाट रहा था उसे अंजली भी पूरा जोश दिला रही थी, जब रात को सोया था तो उसने सोचा नहीं था कि ऐसे कुछ होगा, रात को उसके मन में निराशा थी, डर था कि कहीं अंजली उससे गुस्सा तो नहीं हो गई पर सुबह की ऐसी शुरुआत हुई थी जो वो सोच नहीं सकता था, उसके मुंह में बेटी की चूत थी, उसका रस बह बहकर उसके मुंह में समा रहा था,

अंजली भी अपने बाप से अपनी चूत चटवा कर उत्तेजना के चरम पर थी, उसके मुंह से कभी आहें तो कभी कुछ भी बातें निकल रही थी, आखिर उत्तेजना हो भी क्यों न? बेटी बाप से चूत चटवा रही थी, वही बाप जिसके रस से वो बनी थी आज उसका रस चाट रहा था, और उत्तेजना हर पल के साथ इतनी बढ़ी कि अंजली का बदन कांपने लगा वो चिल्लाने लगी, उसकी आँखें ऊपर चढ़ गई और वो अपने पापा के मुंह में झड़ने लगी, महिपाल ने उसकी जांघो को कस लिया और उसकी चूत को पल भर के लिए भी अपने मुंह से अलग नहीं होने दिया और उसकी चूत से निकली रस की एक एक बूंद को गटक गया, अंजली शांत हो गई महिपाल फिर भी उसकी चूत चाट रहा था,

अंजली ने महिपाल के सिर को पकड़कर ऊपर खींचा तो महिपाल ऊपर आया और फिर से बाप-बेटी के होंठ मिल गए। अंजली को अपने पापा के होंठों पर अपनी ही चूत का मीठा-नमकीन रस महसूस हो रहा था। झड़ने के बाद भी उसकी चूत अभी भी कसमसा रही थी। दोनों के होंठ एक-दूसरे को चूस रहे थे, जीभें लिपट रही थीं, लार एक-दूसरे के मुंह में बह रही थी। दोनों के होंठ अलग हुए।

अंजली (हाँफते हुए, महिपाल के लंड को हाथ में पकड़कर):

“पापा... अब बस चाटना काफी नहीं... मुझे अपनी बिटिया की चूत में अपना मोटा लंड घुसा दो... चोद दो मुझे पापा... मैं तैयार हूँ......”

अंजली एक नशे में बोली, और अंजली ने खुद अपनी टाँगें चौड़ी कर लीं। उसकी गुलाबी, अभी भी तर चूत पूरी तरह खुली हुई थी। महिपाल उसके ऊपर चढ़ गए। उनका कड़ा, मोटा लंड अंजली की चूत के मुंह पर रगड़ रहा था।

अंजली: पापा... मत तड़पाओ... देखो मेरी चूत कितनी भूखी है... पूरा लंड एक ही झटके में घुसा दो... फाड़ दो अपनी बेटी की टाइट चूत... आह्ह्ह... डालो न पापा...

महिपाल ने लंड का सिर अंजली की चूत के छेद पर रखा और टोपे को उसकी चूत के होंठो के बीच फंसा दिया, अंजली ने खुद को जैसे आगे जो होने वाला था उसके लिए तैयार कर लिया,





महिपाल: ओह बिटिया आह कितनी गरम चूत है आह ऐसा लग रहा है मेरा लंड किसी भट्ठी के द्वार पर है आह

अंजली: आह्ह्ह पापा... तुम्हारा लंड भी बहुत कड़क और गरम है... आह पापा.. मत रुको... हाँ... और अंदर... आह्ह्ह... पूरा घुसा दो... अब और इंतजार मत करो अह्ह्ह्ह सीईईईईई ओह्ह्ह्ह।

अंजली के कहते ही महिपाल ने एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड से ज़्यादा अंजली की गीली लेकिन कसी हुई चूत में घुस गया। अंजली ने जोर से कराह मारी और पापा की पीठ पर नाखून गड़ा दिए।

अंजली: ओह आह्ह्ह्ह पापा ओह आह।

महिपाल: आह्ह्ह्ह बिटिया आह क्या कमसिन चूत है तेरी आह कितनी गरम आह्ह्ह्ह।

महिपाल ने एक धक्का और लगा कर पूरा लंड जड़ तक अंजली की चूत में घुसा दिया, बाप बेटी दोनों की आँखें इस अनोखे पल में बंद हो गईं, अंजली का मुंह खुल गया, पहले महिपाल की आंखें खुली उन्होंने नीचे देखा उनका लंड जड़ तक उनकी बेटी की चूत में समाया हुआ था, फिर उनकी नजर बेटी के सुंदर चेहरे पर गई, धीरे धीरे अंजली की आंखें खुली उसने अपनी पापा की आंखों में झांका और मुस्कुराते हुए बोली: पापाह तुमने अपनी बेटी चोद ली।

महिपाल: ओह्ह्ह्ह हां बिटिया आह ये सुख देकर तूने आह अपने बाप को सबसे खुश इंसान बना दिया है, आह तेरी ये चूत आह तेरा ये सुंदर बदन भोग कर मैं सुखी हो गया बिटिया।

महिपाल ने भावुक और उत्तेजित होकर बोला,

अंजली: ओह पापा, मेरे बदन पर आह इस चूत पर सबसे पहला हक तुम्हारा ही है और हमेशा रहेगा,

महिपाल बेटी की बात सुनकर झुके और फिर दोनों के होंठ फिर से मिल गए, महिपाल बेटी के होंठों को चूसते हुए धीरे धीरे अपना लंड उसकी चूत में चलाने लगे, और बेटी को चोदने लगे।





महिपाल की कमर धीमे धीमे ऊपर नीचे हो रही थी और उनका लंड अंजली की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, दोनों के लिए अभी यही गति काफी थी, कुछ देर बाद होंठ अलग हुए और दोनों ही उत्तेजना में बहकर जोशीले होने लगे, महिपाल अब अंजली की कमर को थाम कर और तेज धक्के लगाने लगे,

महिपाल: आह्ह्ह बिटिया... तेरी चूत तो आह जन्नत से भी बेहतर है... इतनी टाइट, इतनी गीली... पापा का लंड पूरा अपने अंदर चूस रही है... ले... ले... ले मेरी बिटिया... पापा तेरी चूत को रोज़ चोदेंगे मेरी बिटिया...

अंजली की टाँग महिपाल के कंधे पर थी, जिससे लंड और भी गहराई तक जा रहा था। हर धक्के पर अंजली की चूत से सफेद झाग बन रहा था।

अंजली: ओह... आह्ह्ह... पापा ऐसे ही और तेज चोदो... मेरी चूत फाड़ दो...” आह हां रोज चोदना आह बेटी को आह बेटीचोद।

बेटी की बातों से जोश में आते हुए महिपाल ने अंजली की दोनों टाँगें अब अपने कंधों पर रख लीं। अब चुदाई और भी गहरी हो गई थी। वो पूरी ताकत से लंड अंदर-बाहर कर रहे थे। सोफा हिल रहा था। अंजली की चूत लगातार पापा के लंड को निचोड़ रही थी।

अंजली: हाँ पापा... इसी तरह... गहरा... बहुत गहरा... आह्ह्ह... तुम्हारा लंड मेरी चूत के अंत तक पहुँच रहा है... मैं झड़ने वाली हूँ... पापा... तेज... तेज चोदो... अपनी बेटी को झाड़ दो.

महिपाल भी अब चरम पर थे। उनके धक्के और तेज हो गए। लंड जड़ तक घुस रहा था और निकल रहा था। दोनों के शरीर पसीने से तर थे। महिपाल ने अंजली के होंठ फिर चूस लिए और कान में फुसफुसाए:

महिपाल: ले बिटिया... ले... आह आज तेरा बेटीचोद बाप तेरी चूत भर देगा... आह आह आह आह अब रुकना मुश्किल हो रहा है मेरा,

अंजली: ओह आह पापा रुको मत आह आह ऐसे ही चोदते रहो आह आह आह आह पापा अह्ह्ह्ह।

अंजली का बदन अचानक काँपने लगा। उसकी चूत महिपाल के लंड को कसकर पकड़ ली। वो जोर से चीखी:

अंजली: आआआह्ह्ह पापा... मज़ाअ अह्ह्ह्ह आ गया... मैं झड़ रही हूँ... मेरी चूत बह गई... हाँ... अंदर डालो... भर दो... आह्ह्ह... पापा...”

अंजली का पूरा शरीर झड़ने के साथ काँप उठा। उसकी चूत से रस की धार निकलकर महिपाल के लंड और अंडकोष को भीगो रही थी। महिपाल भी और दो-तीन जोरदार धक्के मारकर रुक गए। उनका मोटा लंड अंजली की चूत के सबसे अंदर तक फड़फड़ाया और गरम-गरम, गाढ़े रस की मोटी-मोटी फुहारें अंजली की चूत में उड़ेलने लगा। जो अंजली के रस के साथ ही उसकी चूत से बह कर रिसने लगा।

दोनों एक-दूसरे की बाहों में लिपटे हुए जोर-जोर से हाँफ रहे थे। महिपाल का लंड अभी भी अंजली की चूत के अंदर था और धीरे-धीरे रस बाहर निकल रहा था। अंजली ने पापा के होंठों को फिर चूम लिया और हाँफते हुए बोली,

अंजली: पापा... कितना गरम और ज्यादा रस भरा है तुमने... मेरी चूत पूरी भर गई... आह्ह्ह...

महिपाल: हाँ मेरी बिटिया पर ये सब तेरी चूत का कमाल है जिसने मुझे पूरा निचोड़ लिया,

ये कहने के बाद महिपाल ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला और अंजली के ऊपर से हटकर उसके बगल में सोफे पर बैठ गए। दोनों पसीने से तर थे। महिपाल की साँसें अभी भी तेज थीं। उन्होंने अपनी बेटी को देखा — नंगी, चूचियाँ ऊपर-नीचे हिल रही थीं, चूत से रस टपक रहा था — और मुस्कुराए। अंजली भी एक ओर उनकी बाहों में सिमट गई, दोनों कुछ देर चुपचाप एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे। महिपाल अंजली की चूची को हल्के से सहला रहे थे। अंजली पापा के सीने पर सिर रखे लेटी थी। लेकिन अंजली का मन अभी शांत नहीं हुआ था। उसकी चूत फिर से कसमसा रही थी।

अंजली कुछ देर बाद मुस्कुराते हुए, पापा की छाती पर उँगलियाँ फेरते हुए बोली

अंजली: पापा... अभी काम पूरा नहीं हुआ है...

ये कहते हुए अंजली उठी और महिपाल की गोद में चढ़ गई। उसने अपनी दोनों टाँगें महिपाल के दोनों तरफ फैला दीं और सीधे उनकी गोद में बैठ गई। अपनी भारी-भारी, गोल-गोल चूचियाँ महिपाल के चेहरे पर दबा दीं। दोनों चूचियाँ पापा के मुँह और नाक पर रगड़ रही थीं।





अंजली :पापा... लो... अपनी बिटिया की चूचियाँ... चूसो इन्हें... काटो... चबाओ... मेरी चूचियों का दूध पी लो... आह्ह्ह... देखो कितनी सख्त हो गई हैं तुम्हारे लंड के लिए...”

महिपाल ने मुंह खोला और एक चूची का निप्पल मुँह में भर लिया। जोर-जोर से चूसने लगे। दूसरी चूची को हाथ से मसल रहे थे। फिर एक चूची को मुंह से निकालते हुए बोले,

महिपाल: आह्ह्ह बिटिया... तेरी चूचियाँ तो मक्खन जैसी हैं... कितनी नरम... कितनी स्वादिष्ट... आह्ह्ह... मैं इन्हें खा जाऊँगा... चूस-चूस के लाल कर दूँगा...”

अंजली सिसकते हुए, पापा के सिर को चूचियों में दबाते हुए बोली:

“हाँ पापा... और जोर से चूसो... काट लो... आह्ह्ह... मेरी चूत फिर से गीली हो रही है... तुम्हारा लंड मेरी गांड के नीचे खड़ा होने लगा है... ओह पापा... तुम्हारी जीभ कितनी गर्म है...”

महिपाल की चूसाई से उनका लंड फिर से सख्त होने लगा। अंजली ने ये महसूस किया और नीचे सरक गई। उन्होंने महिपाल के लंड को हाथ में पकड़ा — अभी भी चूत के रस और वीर्य से चिपचिपा था। अंजली ने मुस्कुराते हुए लंड का टोपा चूमा और पूरी तरह मुंह में ले लिया और फिर उसपर अपनी जीभ फिराते हुए बोली:

अंजली:आह्ह्ह पापा... तुम्हारा लंड फिर से कड़क हो रहा है... मेरे मुंह में... आह बेटी की चूत से इसका मन नहीं भरा।

उसने उसे अंदर गले तक लंड ले लिया, जीभ से चारों तरफ चाटा, अंडकोष सहलाए। महिपाल की साँसें फिर तेज हो गईं।

महिपाल हाँफते हुए बोले:

“आह्ह्ह बिटिया... तू तो मेरी जान लेगी... तेरी जीभ... ओह... कितना अच्छा चूस रही है... हाँ... ऐसे ही...

कुछ देर चूसने के बाद अंजली ने लंड को मुंह से निकाला, थूक से चमकता हुआ, पूरी तरह खड़ा और मोटा। वो फिर से महिपाल की गोद में चढ़ गई। इस बार उसने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुंह पर रख दिया। फिर धीरे-धीरे नीचे बैठ गई।

“धप्प्...”

पूरा लंड एक ही बार में अंजली की चूत में घुस गया।

अंजली: आआआह्ह्ह पापा... पूरा घुस गया... मेरी चूत फिर से भर गई तुम्हारे मोटे लंड से... अब देखो... मैं तुम्हारे लंड की सवारी करती हूँ...”

अंजली धीरे धीरे अपनी गांड ऊपर-नीचे करने लगी। महिपाल भी बेटी की कमर को थाम कर उसे अपने लंड पर उछालने, कुछ पल बाद ही तेज-तेज सवारी शुरू हो गई। हर बार वो पूरी ताकत से नीचे बैठती और लंड को जड़ तक चूसती वहीं महिपाल नीचे से बेटी की चूत में धक्का लगाते। उसकी चूचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं। महिपाल नीचे





अंजली थोड़ी देर अपने पापा के लंड पर उछलती रही और फिर जब उसकी गति धीमे पड़ने लगी तो वो अपनी कमर नचाते हुए बोली

अंजली: पापा अब पीछे से चोदो मुझे... घोड़ी बनाकर... जैसे कुत्ते कुतिया को चोदते हैं... अपनी बेटी की गांड देखकर चोदो पापा...”

महिपाल ने ये सुन सिर हिलाया और अंजली मुस्कुराई और उनके ऊपर से हटकर सोफे पर घुटनों के बल बैठ गई। उसने अपनी कमर नीचे झुका दी, छाती सोफे पर टिका दी और अपनी मोटी, गोल गांड ऊपर उठा दी। अब वो पूरी तरह घोड़ी बन चुकी थी। उसकी टाइट चूत और गुलाबी गांड का छेद महिपाल के सामने पूरी तरह खुला हुआ था।

अंजली पीछे मुड़कर पापा को देखते हुए, बहुत कामुक और शरारती आवाज में बोली:

“देखो पापा... अपनी बिटिया की गांड... कितनी मोटी और गोल है... अब आओ... पीछे से अपना मोटा लंड मेरी चूत में घुसा दो... जोर से पेलो... मैं तुम्हारी कुतिया हूँ आज... चोदो अपनी कुतिया बेटी को...”

महिपाल ने दोनों हाथों से अंजली की मोटी गांड को पकड़ लिया। उँगलियाँ गांड के नरम मांस में धंस गईं। उन्होंने लंड का टोपा अंजली की चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाव डाला।

महिपाल: आह्ह्ह बिटिया... तेरी गांड तो कितनी सुंदर है... ये चूत भी कितनी गीली हो रही है मेरे लंड के लिए... ले... तेरा बाप अब पीछे से चोदेगा है तेरी चूत को...”

एक जोरदार धक्का! और महिपाल का पूरा मोटा लंड अंजली की चूत में जड़ तक घुस गया। “धप्प्!” की आवाज हुई। अंजली का पूरा बदन आगे की तरफ झटका खा गया।

अंजली: आआआह्ह्ह पापा... पूरा घुस गया... आह्ह्ह... पीछे से कितना गहरा जा रहा है... मेरी चूत फाड़ दो... हाँ... जोर से... अपनी बेटी की चूत को पेलो... आह्ह्ह... गांड पकड़कर चोदो पापा...”

महिपाल अब पूरी रफ्तार में आ गए। उन्होंने अंजली की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और तेज-तेज धक्के मारने लगे। हर धक्के के साथ अंजली की मोटी गांड लहरा रही थी और “चप-चप-चप-चप” की आवाज हॉल में गूँज रही थी। महिपाल का लंड बार-बार जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था।





अंजली हाँफते हुए, गांड पीछे की तरफ उठाते हुए बोली:

“हाँ पापा... इसी तरह... और तेज... मेरी चूत को फाड़ दो... आह्ह्ह... तुम्हारा लंड मेरी चूत के अंदर कितना जोर से मार रहा है... मुझे बहुत मजा आ रहा है... चोदो अपनी कुतिया बेटी को... मैं तुम्हारी कुतिया हूँ पापा... जितना मन करे पेलो...”

महिपाल गांड पर थप्पड़ मारते हुए, तेज चोदते हुए बोले:

“आह्ह्ह मेरी कुतिया चुदक्कड़ बेटी... तेरी गांड कितनी मस्त हिल रही है... ले... ले... ले मेरी जान... पापा तेरी चूत का भोसड़ा बना देंगे... रोज सुबह तुझे ऐसे ही कुतिया बनाकर चोदूँगा...

अंजली की चूचियाँ सोफे पर रगड़ रही थीं। हर धक्के पर वो आगे-पीछे हो रही थी।

अंजली: पापा... और जोर से... मेरी गांड पर थप्पड़ मारो... हाँ... ऐसे... आह्ह्ह... तुम्हारा लंड मेरी चूत को पूरी तरह भर रहा है....अभी मत रुको... चोदते रहो... मेरी चूत फाड़ दो...”

महिपाल ने अंजली की कमर को और कस लिया। अब उनके धक्के और भी तेज और गहरे हो गए थे। लंड पूरी ताकत से अंदर-बाहर हो रहा था। अंजली की चूत से सफेद झाग बन रहा था जो महिपाल के लंड और अंडकोष पर लग रहा था।

महिपाल: ले बिटिया... ले... पापा तेरी चूत को आज पूरी तरह अपना बना लेंगे... रोज रात और सुबह तुझे ऐसे ही चोदूँगा... आह्ह्ह तेरी चूत

दोनों की साँसें बहुत तेज हो चुकी थीं। अंजली की चूत महिपाल के लंड को कस-कसकर निचोड़ रही थी। महिपाल अभी भी पूरी ताकत से पीछे से चोद रहे थे, अंजली की मोटी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी।

महिपाल अंजली की मोटी गांड को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए थे। उनके धक्के अब और भी तेज और बेतहाशा हो गए थे। लंड जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। अंजली की चूत पूरी तरह फूल गई थी और सफेद झाग बनाकर चारों तरफ फैल रहा था। सोफा जोर-जोर से हिल रहा था।

अंजली (गांड पीछे की तरफ उठाते हुए, हाँफते हुए बोली: आह्ह्ह पापा... और तेज... मेरी चूत फाड़ दो... हाँ... इसी तरह... मुझे लग रहा है मेरी चूत फट जाएगी... लेकिन चोदते रहो... अपनी कुतिया बेटी को आह .. आह्ह्ह... गांड पर थप्पड़ मारो पापा...

महिपाल :आह्ह्ह बिटिया... तेरी चूत तो मेरे लंड को निचोड़ रही है... बहुत कसी हुई है... पापा अब झड़ने वाला है... आह्ह्ह... तेरी चूत में ही भर दूँगा अपना गरम माल...”

अंजली ने तुरंत पीछे मुड़कर पापा को देखा। उसकी आँखों में शरारत और भूख थी। वो अभी भी घोड़ी बनी हुई थी, लेकिन आवाज बहुत कामुक हो गई थी।

अंजली हाँफते हुए, लेकिन साफ-साफ बोलते हुए: नहीं पापा... मत डालो अंदर... मैं चाहती हूँ कि तुम्हारा सारा गरम रस मेरे चेहरे पर आए... मेरी चूचियों पर आए... अपनी बेटी के मुँह और चूचियों पर झाड़ दो पापा... मुझे तुम्हारा रस चेहरे पर चाहिए... आह्ह्ह... जल्दी निकालो लंड... मैं तैयार हूँ...”

ये सुनते ही महिपाल का जोश और बढ़ गया। उन्होंने आखिरी कुछ बहुत तेज धक्के मारे, फिर अंजली की चूत से अपना मोटा, चमकदार लंड बाहर निकाल लिया। लंड पूरी तरह अंजली के चूत-रस से भीगा हुआ था और फड़फड़ा रहा था।

अंजली तुरंत घोड़ी पोजीशन से मुड़ी और सोफे पर पीठ के बल लेट गई। उसने अपनी दोनों टाँगें थोड़ी फैला दीं और दोनों हाथों से अपनी चूचियों को ऊपर की तरफ दबाकर और भी उभार दिया। चेहरा ऊपर की तरफ था, मुँह थोड़ा खुला हुआ, जीभ बाहर निकली हुई। वो पूरी तरह तैयार खड़ी थी अपने पापा के वीर्य के लिए।

अंजली नशे भरी, भूखी आवाज में, हाथों से चूचियाँ मसलते हुए बोली: आ जाओ पापा... झाड़ दो... अपनी बिटिया के चेहरे पर... मेरी चूचियों पर... सारा माल मेरे ऊपर उड़ेल दो... मैं तुम्हारी चुदक्कड़ बेटी हूँ... देखो कैसे मुँह खोलकर इंतजार कर रही हूँ... झाड़ो पापा...नहला दो मुझे अपने गरम रस से...

महिपाल घुटनों के बल अंजली के ऊपर आ गए। उन्होंने एक हाथ से अपना कड़ा लंड पकड़ा और तेजी से हिलाने लगे। लंड अंजली के चेहरे और चूचियों के ठीक ऊपर था।

महिपाल हाँफते हुए, लंड हिलाते हुए बोले:

आह्ह्ह बिटिया... ले... ले मेरी जान... तेरा बाप तेरा बेटीचोद बाप तेरे चेहरे पर झड़ रहा है... आह्ह्ह... तेरी चूचियों पर... ले...”

और फिर महिपाल के लंड से निकली पहली मोटी धार, महिपाल का गरम, गाढ़ा रस अंजली के चेहरे पर गिरा। कुछ उसके माथे पर, कुछ उसकी आँखों के पास, कुछ उसके खुले मुँह में चला गया। अंजली ने जीभ से उसे चाट लिया।





अंजली मुँह में रस लेते हुए, आह भरते हुए बोली: आह्ह्ह पापा... कितना गरम है... स्वाद तो मस्त है... और डालो... मेरी चूचियों पर भी...”

महिपाल ने लंड को थोड़ा नीचे किया और बाकी की धारें अंजली की दोनों गोरी, मोटी चूचियों पर उड़ेल दीं। सफेद, गाढ़ा वीर्य उसकी चूचियों पर फैल गया, निप्पलों पर टपकने लगा। कुछ धारें उसकी पेट पर भी गिर गईं।

अंजली अपनी चूचियों पर हाथ फेरते हुए, वीर्य को मलते हुए, बहुत संतुष्ट स्वर में बोली: आह्ह्ह... पूरा भर दिया पापा... मेरे चेहरे पर... मेरी चूचियों पर... कितना ज्यादा है... मैं अब तुम्हारे रस से सनी हुई सुंदर चुदक्कड़ बेटी हूँ... देखो कैसे तुम्हारा रस चाट रही हूँ...”

अंजली ने अपनी जीभ बाहर निकालकर होंठों पर पड़े रस को चाटा। फिर दोनों हाथों से अपनी चूचियों को मसलने लगी और रस को पूरे चूचों पर फैला दिया। महिपाल हाँफते हुए उसके ऊपर झुके रहे।

महिपाल अभी भी अंजली के ऊपर झुके हुए थे। अंजली की चूचियाँ और चेहरा पापा के गाढ़े, गरम वीर्य से सना हुआ था। अंजली मुस्कुराते हुए अपनी चूचियों पर हाथ फेर रही थी और वीर्य को अपनी उँगलियों पर लेकर चाट रही थी। तभी दोनों को पीछे से एक आवाज़ और हल्की-सी हँसी सुनाई दी।

सविता: “तो बाप-बेटी यहां ये गुल खिला रहे हैं... सुबह-सुबह ही बेटी को चोदकर उसे अपने रस से नहला दिया तुमने तो?” और अंजली तूने बड़ी अच्छी सज़ा दी है अपने पापा को।

दोनों चौंककर पीछे मुड़े। सविता हॉल में खड़ी थी। सिर्फ एक पतला, सफेद पेटीकोट पहने हुए। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ नंगी झूल रही थीं। निप्पल खड़े होकर कपड़े को उभार रहे थे। बाल खुले थे और मुस्कुरा रही थी। वो धीरे-धीरे आगे बढ़ी।





सविता अंजली के पास आकर, मुस्कुराते हुए बोली: अरे मेरी प्यारी बिटिया... पापा ने तेरे चेहरे और चूचियों को कितना सुंदर से रंग दिया है... कितना गाढ़ा और गरम रस है... माँ को भी तो चखने दे...”

सविता झुक गई और अपनी जीभ से अंजली के चेहरे पर पड़े रस को चाटने लगी। पहले माथे से, फिर गालों से, फिर होंठों पर। अंजली की आँखें बंद हो गईं। सविता ने अंजली के होंठों को चूस लिया और पति का वीर्य अपनी जीभ से बेटी के मुँह में डाल दिया।

सविता अंजली के होंठ चूसते हुए बोली:

“मम्म... स्वाद तो और अच्छा हो गया है तेरे पापा के रस का तेरे बदन के साथ मिलकर ...

सविता नीचे झुकी और अंजली की रस से सनी चूचियों को चूसने लगी। एक-एक निप्पल को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूस रही थी। रस को चाट-चाटकर निगल रही थी। अंजली सिसकारियाँ भर रही थी।

अंजली: आह्ह्ह मम्मी... चूसो... मेरी चूचियों को साफ कर दो... पापा ने बहुत भरा है... आह्ह्ह...

सविता ने अंजली की दोनों चूचियाँ अच्छे से चाट लीं। फिर नीचे सरकी। अंजली की टाँगें अभी भी फैली हुई थीं। उसकी चूत अभी भी चुदाई के बाद लाल और गीली थी। महिपाल का कुछ रस चूत से बाहर निकलकर जांघों पर बह रहा था।

सविता अंजली की जांघों को फैलाते हुए, मुस्कुराते हुए बोली:

“अब माँ अपनी बेटी की चूत भी साफ करेगी... पापा ने कितनी अच्छी तरह चोदा है तेरी चूत को... देखो कितनी फूली हुई है...”

सविता ने अपना मुँह अंजली की चूत पर रख दिया और भूखों की तरह चाटने लगी। जीभ अंदर-बाहर कर रही थी, चूत के रस और महिपाल के वीर्य को मिलाकर चूस रही थी। अंजली का बदन फिर से काँपने लगा।

अंजली अपनी माँ के सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए बोली:

आह्ह्ह मम्मी... जीभ अंदर डालो... आह्ह्ह... पापा का रस और मेरा रस... सब चूस लो... हाँ... ऐसे ही... मेरी चूत चाटो मम्मी... आह्ह्ह... मैं फिर झड़ने वाली हूँ...”

सविता ने अपनी जीभ पूरी तरह अंजली की चूत में घुसा दी और तेज-तेज चाटने लगी। एक हाथ से अंजली की चूची मसल रही थी। महिपाल बस बैठे-बैठे ये नजारा देख रहे थे, उनका लंड फिर से खड़ा होने लगा था।

अंजली का बदन काँपने लगा उसकी कमर फिर से झटके खाने लगी, वो चीखते हुए बोली: आआआह्ह्ह मम्मी... तेज... तेज चाटो... मेरी चूत बह रही है... आह्ह्ह... झड़ रही हूँ... मम्मी तुम्हारे मुंह में आह मम्मी... मैं झड़ गई...”

अंजली का पूरा शरीर जोर से काँप उठा। वो दूसरी बार बुरी तरह झड़ गई। चूत से ताज़ा रस निकला जो सविता ने चूस-चूसकर पी लिया। अंजली की साँसें बहुत तेज हो गईं। उसका बदन पूरी तरह थक गया था। आँखें बंद हो गईं और वो सोफे पर ही लेट गई। सविता ने बेटी की चूत से मुंह हटाया एक मुस्कान के साथ पति की ओर देखा और फिर उठकर महिपाल के पास पहुंची, चेहरा अंजली के रस से सना हुआ था

महिपाल: बहुत सुन्दर लग रही हो अंजली की मां.

सविता ने झुक कर अपने होंठ पति के होंठों से मिला दिए और उन्हें भी अंजली की चूत का स्वाद मिला, दोनों के होंठ अलग हुए तो सविता बोली: कितना अलग हो गया है न हमारा परिवार।

महिपाल: हां और अंजली के शामिल होने से पूरा भी।

दोनों ने अंजली की ओर देखा जो सोफे पर ही सो चुकी थी।

सविता: ये तो सो गई, इसे अंदर ले चलो ।


महिपाल ने आगे बढ़ कर अंजली को बाहों में उठाया, तो अंजली की आंखे कुछ पल के लिए खुली पर खुद को अपने पापा की बाहों में देखा तो फिर से बंद कर ली, महिपाल ने उसे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया, और सविता ने चादर ओढ़ा दी। दोनों कमरे से बाहर निकले इस एहसास के साथ की ये एक नया सवेरा हो रहा था उनके जीवन में एक नए जीवन की शुरुआत थी।

जारी रहेगी।
 
महिपाल ने आगे बढ़ कर अंजली को बाहों में उठाया, तो अंजली की आंखे कुछ पल के लिए खुली पर खुद को अपने पापा की बाहों में देखा तो फिर से बंद कर ली, महिपाल ने उसे ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया, और सविता ने चादर ओढ़ा दी। दोनों कमरे से बाहर निकले इस एहसास के साथ की ये एक नया सवेरा हो रहा था उनके जीवन में एक नए जीवन की शुरुआत थी।

अपडेट 262


चोदम पुर की एक और सुहानी सुबह थी, कर्मा के घर में अभी खामोशी थी क्योंकि अधिकतर लोग घर पर नहीं थे, आज उन सब के लिए बहुत खुशी का दिन था सब सुबह सुबह ही नहा धो कर तैयार निकल हुए थे अभी सिर्फ गुंजन और सभ्या थे, सभ्या साड़ी बांध रही थी,

सभ्या: अरे गुंजन ये पीछे पिन लगा देना, मुई लग ही नहीं रही,

गुंजन: अरे जीजी तुम्हारे पीछे पिन लगाने को तो न जाने कितने तैयार बैठे हैं आओ लगा दें।

गुंजन ने सभ्या के पिछवाड़े को मसलते हुए कहा,

सभ्या: तुझे भी न हर समय मज़ाक ही चढ़ा रहता है, चल जल्दी पिन लगा, नहीं तो सूखा बेलन घुसा दूंगी तेरी गांड में।

गुंजन: हाय दैय्या, बेरहम नंद।

गुंजन सभ्या की साड़ी में पीछे से पिन लगाते हुए बोली, इतने में बाहर से सागर की आवाज़ आई, और अगले ही पल वो कमरे में था

सागर: अरे बुआ अभी तैयार नहीं हुई तुम वहां सब लोग इंतजार कर रहे हैं।

सभ्या: अरे बस हो गई लल्ला, ये तेरी मां है न ये ही देर करवा रही है।

गुंजन: ओ हो मैं तो देर करवा ही रही हूं, खुद के पतीले इतने बड़े कर लिए हैं कि साड़ी नहीं टिकती और हमारी गलती है। गुंजन हंसते हुए बोली,

सभ्या: अब चल नहीं तो तेरे पतीले सुजा दूंगी मैं।

सागर अब जल्दी चलो यार फूफाजी का फोन आ रहा है, आओ बैठो।

सागर मोटरसाइकिल पर बैठते हुए चश्मा लगाते हुए बोला,

सभ्या: इसे देखो गांव में भी इसे पूर हीरो बनके घूमना है, बैठ गुंजन।

सागर: अरे बुआ कभी कभी तो मौका मिलता है अब तुम रोक मत लगाओ और जल्दी बैठो।

सभ्या: हां लल्ला बैठ रही हूं,

जल्दी ही सागर दोनों को बिठाकर मोटर साइकिल से गांव के बाहर की ओर चल दिया, रास्ते भर दोनों बातें करती जा रही थी,





कुछ ही देर में सागर ने मोटर साइकिल को गांव के बाहर एक खेत के पास लगा दिया जहां बाकी सब लोग पहले से मौजूद थे और इंतज़ार कर रहे थे,

सविता: अरे बड़ी देर लगा दी बहन जी।

सभ्या: अरे बहन जी जिस दिन सोचो सब जल्दी निपटा लें उसी दिन देर हो जाती है।

गुंजन: ये साड़ी तो बड़ी खिल रही है तुम पर सविता जीजी।

नीलेश: अरे अब और बातों में मत लग जाओ अब मुहूर्त निकल जाएगा।

सभ्या: हां हां भाई चलो चलो।

कर्मा: अनुज और सागर सबकी वीडियो आनी चाहिए अच्छे से।

अनुज: हां भैया,

नीलेश: चलो भाई पहले सारी लड़कियां और फिर सारी औरतें काम पर लग जाओ।

नीलेश के कहने पर अंजली, किरन, पल्ली, लाड़ो, नीतू इन सब ने एक एक ईंट उठाई और खुदी हुई नींव में लगानी शुरू कर दी। सब ने ज़ोर से ताली मारकर अपनी खुशी जाहिर की।

वहीं बगल में खड़े महिपाल और शैलेश बातें कर रहे थे,

महिपाल: शैलेश बाबू आखिर हम लोगों की मेहनत रंग लाई और स्कूल का काम शुरू हो ही गया,

शैलेश: अरे वो तो होना ही था भाई साहब, अच्छे काम के लिए कर रहे हैं ऊपर से हमारी मेहनत।

महिपाल: शैलेश भाई समझ नहीं आता, कि आपका और नीलेश भाई का कैसे धन्यवाद करूं? मेरे इस सपने में आप लोग जुड़े और आपकी वजह से ही ये आज सच हो रहा है।

इतने में पीछे से नीलेश बोले: अरे महिपाल भाई अब तो समधी होने वाले हैं अब कहां इन बातों में पड़ते हो, जो हमारा है वो तुम्हारा है।

उधर लड़कियों के बाद अब औरतें भी एक एक ईंट लगा रही थी, ये नीलेश ने ही उपाय बताया था कि सभी लड़कियों और औरतों से ईंट लगवा कर शुभ काम की शुरुआत की जाएगी। ईंट लगने के बाद पूरे गांव में मिठाई बांटी गई, वहीं अपने करीबी परिवारों की दावत भी हुई। ये सब होने के बाद नीलेश, महिपाल, शैलेश, राजन, नाना, और जमुना, राजपाल और दीनू सब बाग में बैठे बातें कर रहे थे लड़के कर्मा, पीयूष, अनुज, सागर सरजू बिरजू और जग्गू भी वहीं थे

नाना: बड़के बाबू घर का काम भी पूरा हो गया है कब का सोचा है ग्रह प्रवेश?

नाना ने नीलेश से पूछा,

नीलेश: हां बाबा तुम बताओ क्या करें अब तैयार है तो क्यों देर करें?

राजपाल: अरे तो कोई शुभ मुहूर्त देख कर लो ग्रह प्रवेश और क्या?

कर्मा: अरे मैं बताऊं सबसे अच्छा दिन?

कर्मा ने बोला तो सब उसकी ओर देखने लगे,

नीलेश: हां बता।

कर्मा: 23 मार्च को करते हैं,

महिपाल: 23 मार्च को ऐसा क्या है?

शैलेश: अरे बिल्कुल सही सोचा है कर्मा तूने, अरे 23 मार्च को भैया और भाभी की सालगिरह होती है, इससे बढ़िया दिन क्या होगा क्यों भैया?

राजन: अरे कह तो सही रही हो शैलेश बाबू।

राजपाल: तो यही तय रखो 10-12 दिन ही तो हैं

कर्मा: पर सिर्फ ग्रह प्रवेश नहीं होगा, बड़ी दावत करते हैं, सभी रिश्तेदारो को बुलाते हैं।

नीलेश: कर्मा सही कह रहा है, काफी समय हो गया कोई दावत हुई भी नहीं है घर में, पर अब सुनो ये बात औरतों में नहीं जानी चाहिए़ खास कर इसकी मम्मी तक।

कर्मा: अरे वाह पापा मां को सरप्राइज़ दोगे।

नीलेश: हां वही देंगे, जो तू बोला।

इस पर सब हंसने लगते हैं,

राजन: तो फिर कल से ही तैयारी पर जुट जाते हैं, एक खेत को सपाट करवा देते हैं टेंट वगैरह लगवाने के लिए।

नीलेश: अरे खेत नहीं, इस बार की दावत खास होगी और खास जगह होगी।

शैलेश: खास जगह कहां भैया?

इस पर नीलेश मुस्कुराते हैं।

जहां इनकी दावत की तैयारियां चल रही हैं मैं बताता हूं कि आखिरी बार जो आपने देखा कैसे अंजली ने अपने पापा से चुदवाया था उस रात को दो महीने बीत चुके थे और इन दो महीनो में दोनों परिवार काफी करीब आ चुके थे, नीलेश के और बाकी सब के परिवार को तरह ही महिपाल के परिवार में भी अब कोई पर्दा नहीं बचा था। सब खुल कर एक दूसरे के साथ मज़ा कर रहे थे, कुछ नए रिश्ते भी बने थे ज़्यादा गहराई में न जाते हुए मैं आपको झलकियों में सब दिखा देता हूं, बाकी आप लोग समझदार हैं।

अंजली ने अपने होने वाले ससुर नीलेश की सेवा पहले ही शुरू कर दी थी। वो उनके लंड को मुंह में लेकर इतना गहरा चूस देती कि नीलेश की आंखें ऊपर चढ़ जातीं —गले तक उतारकर, आंखों में आंसू और मुंह से रस टपकाते हुए।

नीलेश ने भी अपनी होने वाली बहू अंजली के तीनों छेदों — मुंह, बुर और गांड — का पूरा स्वाद चख लिया था। ऐसी जवान, कसी हुई, रसीली बहू पाकर नीलेश का लंड हमेशा फूलकर खड़ा रहता। वो अंजली को घंटों चोदते, उसके चूचे दबाते, गांड पर थप्पड़ मारते उसे सहलाते और खूब लाड़ करते





















वहीं नीलेश ने भी अपनी होने वाली बहू के तीनों छेदों का स्वाद अच्छे से चख लिया था, और ये कहना गलत नहीं होगा कि ऐसी बहू पाकर नीलेश और उनका लंड दोनों ही फूले नहीं समा रहे थे,

दूसरी ओर कर्मा भी अपनी सास सविता और सलहज रानी से मेलजोल बढ़ाने में पीछे नहीं था। वो दोनों औरतें उसके मोटे, लंबे लंड की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़तीं। रानी और सविता मिलकर कर्मा के बदन को खूब चूसती चाटती — एक उसके लंड को चूसती तो दूसरी उसके मुंह पर बैठ जाती। कभी सविता उसके लंड की सवारी करती तो कभी रानी।













रानी और सविता दोनों ही कर्मा और उसके मोटे लंड की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ती थी और छोड़ें भी कैसे आखिर होने वाला दामाद जो था, कर्मा भी दोनों औरतों को कसकर चोदता था।

बीच-बीच में महिपाल का पूरा परिवार चोदमपुर में रातें बिताने आता। अब जब सब खुल चुके थे, तो पीयूष और महिपाल ने चोदमपुर की जवान कलियों — किरन, पल्ली, नीतू और लाड़ो — का पूरा मजा लिया। ये चारों गरम-गरम लड़कियां उनके लंडों को अपनी बुर और गांड में लेकर चीख-चीखकर चुदतीं। महिपाल और पीयूष को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं होता कि इतनी सुंदर, कामुक और भरी-पूरी देह वाली लड़कियां उन्हें मिल गईं।













रानी और प्रेमा दोनों बहुएं मर्दों की सेवा में हमेशा तैयार रहतीं। दोनों की जोड़ी बहुत खतरनाक थी — एक साथ दो-दो लंड चूसतीं, गांड और बुर एक साथ चुदवातीं। कभी प्रेमा अपने ससुर और देवर के साथ रानी को बांटती तो कभी रानी अपने पति और ससुर के साथ प्रेमा को।











सभी मर्द भी दोनों बहुओं का साथ पाकर बहुत खुश रहते थे और संतुष्ट होकर ही निकलते थे।

सविता अपने समधियों के बीच सबसे लोकप्रिय हो गई थी। अकेली समधन होकर भी वो इतने सारे मर्दों को संतुष्ट करती — एक के बाद एक लंड लेकर, मुंह में, बुर में, गांड में। कभी-कभी तो सबको एक साथ सन्तुष्ट करती, उसकी चीखें अक्सर घरों में गूंजती रहती थी उसे अपनी जीवन का ये पढ़ाव बहुत भा रहा था। एक साथ जब मर्द उसके बदन को निचोड़ते तो उसे लगता वो जवान हो रही है



















वहीं अंजली अपने ससुराल में आने वाली जिम्मेदारी कैसे उठानी है और लोगों के साथ मेलजोल बढ़ाना सीख रही थी, आखिर पूरे घर को उसे ही चलाना था इसलिए वो इस बात को काफी गंभीरता से लेती थी

अंजली ससुराल की जिम्मेदारियां सीख रही थी। वो किरन के साथ लेस्बियन मस्ती करती, अपनी ननद की चूत चाटती। मौसा-ससुर या चाचा-ससुर के साथ अपनी ननद को मिलाकर चुदवाती।











उसे सब काम अच्छे से आता था, बढ़ों के साथ साथ वो जवानों का भी पूरा ख्याल रखती थी, अनुज और सागर तो ऐसी भाभी पाकर बहुत खुश थे और अपनी होने वाली भाभी के साथ खूब समय बिताते थे

अनुज और सागर अपनी भाभी को पाकर फूले नहीं समाते — कभी अकेले, कभी कर्मा के साथ मिलकर तीनों अंजली को चोदते। अंजली तीनों लंडों की सेवा करती — एक मुंह में, एक बुर में, एक गांड में। सभ्या की उत्तराधिकारी बनने के सभी गुण अंजली सीख रही थी सभ्या भी उसे बड़े प्यार से सब कुछ बताती और सिखाती थी











कभी कभी कर्मा भी अपने भाइयों के साथ मिलकर अंजली के साथ खूब खेलता और अंजली तीनों की खूब सेवा करती थी,











इसी तरह से काम और कामलीला में पिछले दो महीने बीत चुके थे इसी बीच स्कूल के भी सारे कागजात तैयार हो चुके थे और आज स्कूल की नींव भी पड़ने की शुरुआत हो चुकी थी, वहीं नीलेश और सभ्या की सालगिरह पर लोगों ने एक बड़ी दावत रखने का निर्णय लिया था और ये बात तब तक सिर्फ मर्दों में रहने वाली थी,

अगले 10-12 दिन चोदमपुर में खूबसूरत और चुदाई भरी तैयारियों में ऐसे ही गुजर गए। मर्द लोग दिन-रात एक करके सारी व्यवस्था चुपके से कर रहे थे, ताकि औरतों को भनक तक न लगे। नीलेश ने खुद फोन उठा-उठाकर सभी खास रिश्तेदारों को निमंत्रण दिया।

दावत वाले दिन सुबह सबसे पहले गृह प्रवेश की पूजा हुई। औरतों को बस इतना ही बताया गया था कि “आज घर का ग्रह प्रवेश है, दिन में पूजा होगी।” सब औरतें खुश-खुश पूजा में शामिल हुईं। सभ्या तो और भी ज्यादा खुश थी नया घर जो बन कर तैयार था, पूजा समाप्त होते ही सबने खाना-पीना किया।

कर्मा, अनुज, सागर, पीयूष और बाकी जवान लड़कों ने मिलकर नीलेश द्वारा बताई हुई उस “खास जगह” को पूरी तरह साफ-सुथरा कर दिया। वो जगह गांव से थोड़ी दूर, एक खूबसूरत बाग के बीच में बनी छोटी सी हवेली थी जो नीलेश ने सभ्या के लिए ही बनवाई थी (अपडेट 159देखें और जानकारी के लिए), जो अब पूरी तरह नई जैसी चमक रही थी। फर्श चमकाए गए, दीवारों पर रंग-बिरंगी लाइटें लगाई गईं, बीच में बड़ा-सा स्टेज बनवाया गया, चारों तरफ कुर्सियां आदि बिछाई गईं । मेहमानों के ठहरने के लिए अलग-अलग कमरे तैयार किए गए, खाने-पीने का पूरा इंतजाम — शराब कोलड्रिंक, मिठाई, फल — सब कुछ तैयार था सुबह से ही हलवाई लग गए थे और स्वादिश्ट खाना बना कर तैयार कर दिया था शैलेश एक बड़ा सा केक ले आए थे। मेहमानों को सीधा वहीं ले जाया जा रहा था,

शाम ढलते ही असली खेल शुरू होने वाला था।

कर्मा ने पहले ही अंजली, किरन और पल्ली को चुपके से बता दिया था — “शाम को कुछ बहुत खास है। सब औरतों को तैयार कर दो, खासकर मां को। उन्हें इतना सजाओ कि देखने वाला बस देखता रह जाए।

शाम का समय आ गया। सूरज ढल चुका था और हवेली की लाइटें जल उठी थीं। अंजली, किरन और पल्ली तीनों मिलकर सभ्या को सजा रही थीं। सभ्या लाल रंग की भारी साड़ी में बेहद आकर्षक लग रही थी।

अंजली सभ्या के बाल संवार रही थी, किरन उसके गले में भारी सोने का हार डाल रही थी और पल्ली उसके कान में झुमके लगा रही थी। सभ्या बार-बार पूछ रही थी,

सभ्या: “अरे बच्चों बताओ तो सही, इतना क्यों सजा रही हो मुझे? ग्रह प्रवेश तो हो गया ना? अब ये सब क्या है?”

अंजली मुस्कुराते हुए उसके गाल पर किस करते हुए बोली, “अरे मां, अपनी मां को और सुंदर बना रही हूं आप क्यों परेशान हो रही हो।

किरन ने सभ्या की कमर पर हाथ फेरते हुए शरारत से कहा, “हां बुआ, आज तुम इतनी सुंदर लगोगी की फूफाजी देखते ही शुरू हो जाएंगे।

सभ्या शर्म से लाल हो गई, लेकिन खुश भी थी। “अरे पागल लड़कियां, तुम लोगों को भी न जाने क्या हो गया है।

सब औरतें तैयार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें अभी भी सिर्फ इतना पता था कि “शाम को कुछ खास प्रोग्राम है”।



जारी रहेगी
 
महिपाल ने आगे बढ़ कर अंजलि को बाँहों में उठाया, तो अंजलि की आँखें कुछ पल के लिए खुली, पर खुद को अपने पापा की बाँहों में देख कर फिर से बंद कर ली. महिपाल ने उसको ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया, और सविता ने चादर ओढ़ा दी. दोनों कमरे से बहार निकले इस एहसास के साथ की यह एक नया सवेरा हो रहा था उनके जीवन में – एक नए जीवन की शुरुआत थी.



**अपडेट 262**


Chodampur ki ek aur suhani subah thi. Karma ke ghar mein abhi khamoshi thi kyunki zyadatar log ghar par nahi the. Aaj un sab ke liye bahut khushi ka din tha. Sab subah-subah hi naha-dho kar taiyar nikal hue the. Abhi sirf Gunjan aur Sabhya the. Sabhya sari bandh rahi thi.

Sabhya: Arre Gunjan, yeh peeche pin laga dena, mui lag hi nahi rahi.

Gunjan: Arre jeeji, tumhare peeche pin lagane ko to na jaane kitne taiyar baithe hain. Aao laga dein.

Gunjan ne Sabhya ke pichhwade ko masalte hue kaha.

Sabhya: Tujhe bhi na har samay mazak hi chadha rehta hai. Chal jaldi pin laga, nahi to sukha belan ghusa dungi teri gaand mein.

Gunjan: Hay daiyya, beraham nand.

Gunjan Sabhya ki sari mein peeche se pin lagate hue boli. Itne mein bahar se Sagar ki awaaz aayi, aur agle hi pal woh kamre mein tha.

Sagar: Arre bua, abhi taiyar nahi hui tum? Wahan sab log intezaar kar rahe hain.

Sabhya: Arre bas ho gayi lalla, yeh teri maa hai na, yahi der karwa rahi hai.

Gunjan: O ho, main to der karwa hi rahi hoon. Khud ke patile itne bade kar liye hain ki sari nahi tikti aur hamari galti hai. Gunjan hanste hue boli.

Sabhya: Ab chal, nahi to tere patile suja dungi main.

Sagar: Ab jaldi chalo yaar, fufaji ka phone aa raha hai. Aao baitho.

Sagar motorcycle par baithte hue chashma lagate hue bola.

Sabhya: Ise dekho, gaon mein bhi ise pure hero ban ke ghoomna hai. Baith Gunjan.

Sagar: Arre bua, kabhi-kabhi to mauka milta hai. Ab tum rok mat lagao aur jaldi baitho.

Sabhya: Haan lalla, baith rahi hoon.

Jaldi hi Sagar dono ko bitha kar motorcycle se gaon ke bahar ki taraf chal diya. Raste bhar dono baatein karti ja rahi thi.

Kuch hi der mein Sagar ne motorcycle ko gaon ke bahar ek khet ke paas laga diya jahan baaki sab log pehle se maujud the aur intezaar kar rahe the.

Savita: Arre badi der laga di behan ji.

Sabhya: Arre behan ji, jis din socho sab jaldi nipata len usi din der ho jati hai.

Gunjan: Yeh sari to badi khil rahi hai tum par Savita jeeji.

Neelesh: Arre ab aur baaton mein mat lag jao, ab muhurat nikal jayega.

Sabhya: Haan haan bhai, chalo chalo.

Karma: Anuj aur Sagar, sabki video aani chahiye acche se.

Anuj: Haan bhaiya.

Neelesh: Chalo bhai, pehle saari ladkiyan aur phir saari auraten kaam par lag jao.

Neelesh ke kehne par Anjali, Kiran, Palli, Lado, Neetu – in sab ne ek-ek eent uthayi aur khudi hui neev mein lagani shuru kar di. Sab ne zor se taali maar kar apni khushi zahir ki.

Wahin bagal mein khade Mahipal aur Shailesh baatein kar rahe the.

Mahipal: Shailesh babu, aakhir hum logon ki mehnat rang laayi aur school ka kaam shuru ho hi gaya.

Shailesh: Arre woh to hona hi tha bhai sahab. Acche kaam ke liye kar rahe hain, upar se humari mehnat.

Mahipal: Shailesh bhai, samajh nahi aata ki aapka aur Neelesh bhai ka kaise dhanyawad karun? Mere is sapne mein aap log jude aur aapki wajah se hi yeh aaj sach ho raha hai.

Itne mein peeche se Neelesh bole: Arre Mahipal bhai, ab to samdhi hone wale hain, ab kahan in baaton mein padte ho. Jo hamara hai woh tumhara hai.

Udhhar ladkiyon ke baad ab auraten bhi ek-ek eent laga rahi thi. Yeh Neelesh ne hi upay bataya tha ki sabhi ladkiyon aur auraton se eent lagwa kar shubh kaam ki shuruaat ki jayegi. Eent lagne ke baad pure gaon mein mithai baanti gayi. Wahin apne karibi parivaron ki dawat bhi hui. Yeh sab hone ke baad Neelesh, Mahipal, Shailesh, Rajan, Nana, aur Jamuna, Rajpal aur Deenu sab baag mein baithe baatein kar rahe the. Ladke – Karma, Piyush, Anuj, Sagar, Sarju, Birju aur Jaggu bhi wahin the.

Nana: Badke babu, ghar ka kaam bhi pura ho gaya hai. Kab ka socha hai grah pravesh?

Nana ne Neelesh se poocha.

Neelesh: Haan baba, tum batao kya karen. Ab taiyar hai to kyun der karen?

Rajpal: Arre to koi shubh muhurat dekh kar lo grah pravesh aur kya?

Karma: Arre main bataun sabse accha din?

Karma ne bola to sab uski taraf dekhne lage.

Neelesh: Haan bata.

Karma: 23 March ko karte hain.

Mahipal: 23 March ko aisa kya hai?

Shailesh: Arre bilkul sahi socha hai Karma tune. Arre 23 March ko bhaiya aur bhabhi ki saalgirah hoti hai. Isse badhiya din kya hoga kyun bhaiya?

Rajan: Arre kah to sahi rahe ho Shailesh babu.

Rajpal: To yahi tay rakh lo, 10-12 din hi to hain.

Karma: Par sirf grah pravesh nahi hoga. Badi dawat karte hain, sabhi rishtedaron ko bulate hain.

Neelesh: Karma sahi kah raha hai. Kaafi samay ho gaya koi dawat hui bhi nahi hai ghar mein. Par ab suno yeh baat auraton mein nahi jaani chahiye, khaskar iski mummy tak.

Karma: Arre wah papa, maa ko surprise doge.

Neelesh: Haan wahi denge jo tu bola.

Is par sab hansne lagte hain.

Rajan: To phir kal se hi taiyari par jut jate hain. Ek khet ko sapat karwa dete hain tent wagairah lagwane ke liye.

Neelesh: Arre khet nahi. Is baar ki dawat khas hogi aur khas jagah hogi.

Shailesh: Khas jagah kahan bhaiya?

Is par Neelesh muskuraate hain.

Jahan inki dawat ki taiyariyan chal rahi hain, main batata hoon ki aakhri baar jo aapne dekha – kaise Anjali ne apne papa se chudwaya tha – us raat ko do mahine beet chuke the. Aur in do mahinon mein dono parivar kaafi kareeb aa chuke the. Neelesh ke aur baaki sab ke parivar ki tarah hi Mahipal ke parivar mein bhi ab koi parda nahi bacha tha. Sab khul kar ek dusre ke saath maza kar rahe the. Kuch naye rishte bhi bane the. Zyada gehraai mein na jaate hue main aapko jhalakiyon mein sab dikha deta hoon. Baaki aap log samajhdar hain.

Anjali ne apne hone wale sasur Neelesh ki seva pehle hi shuru kar di thi. Woh unke lund ko muh mein lekar itna gehra chus deti ki Neelesh ki aankhein upar chadh jati – gale tak utaar kar, aankhon mein aansu aur muh se ras tapkaate hue.

Neelesh ne bhi apni hone wali bahu Anjali ke teeno chhedon – muh, bur aur gaand – ka pura swaad chakh liya tha. Aisi jawan, kasi hui, rasili bahu paakar Neelesh ka lund hamesha phool kar khada rehta. Woh Anjali ko ghanton chodte, uske chuche dabate, gaand par thappad marte, use sehlाते aur khub laad karte.

Dusri taraf Karma bhi apni saas Savita aur salhaj Rani se meljol badhane mein peeche nahi tha. Woh dono auraten uske mote, lambe lund ki seva mein koi kasar nahi chhodti. Rani aur Savita milkar Karma ke badan ko khub chusti-chaati – ek uske lund ko chusti to dusri uske muh par baith jati. Kabhi Savita uske lund ki sawari karti to kabhi Rani.

Rani aur Savita dono hi Karma aur uske mote lund ki seva mein koi kasar nahi chhodti thi aur chhoden bhi kaise – aakhir hone wala damad jo tha. Karma bhi dono auraton ko kas kar chodta tha.

Beech-beech mein Mahipal ka pura parivar Chodampur mein raatein bitane aata. Ab jab sab khul chuke the, to Piyush aur Mahipal ne Chodampur ki jawan kaliyon – Kiran, Palli, Neetu aur Lado – ka pura maza le liya. Yeh charon garam-garam ladkiyan unke lundon ko apni bur aur gaand mein lekar cheekh-cheekh kar chudti. Mahipal aur Piyush ko apni kismat par yakin nahi hota ki itni sundar, kaamuk aur bhari-puri deh wali ladkiyan unhe mil gayi.

Rani aur Prema dono bahuen mardon ki seva mein hamesha taiyar rehti. Dono ki jodi bahut khatarnaak thi – ek saath do-do lund chusti, gaand aur bur ek saath chudwati. Kabhi Prema apne sasur aur devar ke saath Rani ko baantti to kabhi Rani apne pati aur sasur ke saath Prema ko.

Sabhi mard bhi dono bahuon ka saath paakar bahut khush rehte the aur santusht hokar hi nikalte the.

Savita apne samdhiyon ke beech sabse lokpriya ho gayi thi. Akeli samdhan hokar bhi woh itne saare mardon ko santusht karti – ek ke baad ek lund lekar, muh mein, bur mein, gaand mein. Kabhi-kabhi to sabko ek saath santusht karti. Uski cheekhein aksar gharon mein gunjti rehti. Use apni zindagi ka yeh padhav bahut bha raha tha. Ek saath jab mard uske badan ko nichodte to use lagta woh jawan ho rahi hai.

Wahin Anjali apne sasural mein aane wali zimmedari kaise uthani hai aur logon ke saath meljol badhana seekh rahi thi. Aakhir pure ghar ko use hi chalana tha isliye woh is baat ko kaafi gambhirta se leti thi.

Anjali sasural ki zimmedariyan seekh rahi thi. Woh Kiran ke saath lesbian masti karti, apni nanad ki chut chaati. Mausa-sasur ya chacha-sasur ke saath apni nanad ko mila kar chudwati.

Use sab kaam acche se aata tha. Bado ke saath-saath woh jawanon ka bhi pura khayal rakhti thi. Anuj aur Sagar to aisi bhabhi paakar bahut khush the aur apni hone wali bhabhi ke saath khub samay bitate the.

Anuj aur Sagar apni bhabhi ko paakar phoole nahi samate – kabhi akele, kabhi Karma ke saath milkar teeno Anjali ko chodte. Anjali teeno lundon ki seva karti – ek muh mein, ek bur mein, ek gaand mein. Sabhya ki uttaradhikari banne ke sabhi gun Anjali seekh rahi thi. Sabhya bhi use bade pyar se sab kuch batati aur sikhati thi.

Kabhi-kabhi Karma bhi apne bhaiyon ke saath milkar Anjali ke saath khub khelta aur Anjali teeno ki khub seva karti thi.

Isi tarah se kaam aur kaamleela mein pichhle do mahine beet chuke the. Isi beech school ke bhi saare kagzaat taiyar ho chuke the aur aaj school ki neev bhi padne ki shuruaat ho chuki thi. Wahin Neelesh aur Sabhya ki saalgirah par logon ne ek badi dawat rakhne ka nirnay liya tha aur yeh baat tab tak sirf mardon mein rehne wali thi.

Agale 10-12 din Chodampur mein khubsurat aur chudai bhari taiyariyon mein aise hi guzar gaye. Mard log din-raat ek karke saari vyavastha chupke se kar rahe the, taaki auraton ko bhanak tak na lage. Neelesh ne khud phone utha-utha kar sabhi khas rishtedaron ko nimantran diya.

Dawat wale din subah sabse pehle grah pravesh ki pooja hui. Auraton ko bas itna hi bataya gaya tha ki “Aaj ghar ka grah pravesh hai, din mein pooja hogi.” Sab auraten khush-khush pooja mein shaamil hui. Sabhya to aur bhi zyada khush thi – naya ghar jo ban kar taiyar tha. Pooja samaapt hote hi sabne khana-peena kiya.

Karma, Anuj, Sagar, Piyush aur baaki jawan ladkon ne milkar Neelesh dwara batayi hui us “khas jagah” ko puri tarah saaf-suthra kar diya. Woh jagah gaon se thodi door, ek khubsurat baag ke beech mein bani chhoti si haveli thi jo Neelesh ne Sabhya ke liye hi banwayi thi. Ab woh puri tarah nayi jaisi chamak rahi thi. Farsh chamkaaye gaye, deewaron par rang-birangi lights lagayi gayi, beech mein bada-sa stage banwaya gaya, charon taraf kursiyan aadi bichhayi gayi. Mehmano ke theherne ke liye alag-alag kamre taiyar kiye gaye. Khane-peene ka pura intezaam – sharab, cold drink, mithai, phal – sab kuch taiyar tha. Subah se hi halwai lag gaye the aur swadisht khana bana kar taiyar kar diya tha. Shailesh ek bada sa cake le aaye the. Mehmano ko seedha wahin le jaya ja raha tha.

Shaam dhalte hi asli khel shuru hone wala tha.

Karma ne pehle hi Anjali, Kiran aur Palli ko chupke se bata diya tha – “Shaam ko kuch bahut khas hai. Sab auraton ko taiyar kar do, khaskar maa ko. Unhe itna sajao ki dekhne wala bas dekhta reh jaye.”

Shaam ka samay aa gaya. Suraj dhal chuka tha aur haveli ki lights jal uthi thi. Anjali, Kiran aur Palli teeno milkar Sabhya ko saja rahi thi. Sabhya laal rang ki bhari sari mein behad aakarshak lag rahi thi.

Anjali Sabhya ke baal sanwar rahi thi, Kiran uske gale mein bhari sone ka haar daal rahi thi aur Palli uske kaan mein jhumke laga rahi thi. Sabhya baar-baar poochh rahi thi,

Sabhya: “Arre bachchon, batao to sahi, itna kyun saja rahi ho mujhe? Grah pravesh to ho gaya na? Ab yeh sab kya hai?”

Anjali muskuraate hue uske gaal par kiss karte hue boli, “Arre maa, apni maa ko aur sundar bana rahi hoon. Aap kyun pareshan ho rahi ho.”

Kiran ne Sabhya ki kamar par haath ferte hue sharaarat se kaha, “Haan bua, aaj tum itni sundar lagogi ki fufaji dekhte hi shuru ho jayenge.”

Sabhya sharm se laal ho gayi, lekin khush bhi thi. “Arre pagal ladkiyan, tum logon ko bhi na jaane kya ho gaya hai.”

Sab auraten taiyar ho chuki thi, lekin unhe abhi bhi sirf itna pata tha ki “shaam ko kuch khas program hai”



जारी रहेगी
 
किरन ने सभ्या की कमर पर हाथ फेरते हुए शरारत से कहा, “हां बुआ, आज तुम इतनी सुंदर लगोगी की फूफाजी देखते ही शुरू हो जाएंगे।

सभ्या शर्म से लाल हो गई, लेकिन खुश भी थी। “अरे पागल लड़कियां, तुम लोगों को भी न जाने क्या हो गया है।

सब औरतें तैयार हो चुकी थीं, लेकिन उन्हें अभी भी सिर्फ इतना पता था कि “शाम को कुछ खास प्रोग्राम है”।



अपडेट 263


तैयार होकर सारी औरतों को दो गाड़ियों में बिठाकर, लड़कियों को मोटरसाइकिलों पर चढ़ाकर पूरा काफिला नीलेश के अब तक छिपे हुए आलीशान फार्म हाउस की ओर रवाना हो गया।

जब सभ्या गाड़ी से उतरी, तो उसके साथ थीं शालू, गुंजन, ममता, रज्जो और मंजू। ममता और पल्ली तो पहले भी यहाँ आ चुकी थीं, लेकिन आज का माहौल कुछ और ही था। चारों तरफ हरे-भरे पेड़ों से घिरा हुआ ये विशाल फार्म हाउस आज दुल्हन की तरह सजाया गया था। रोशनी की मालाएँ, फूलों के गुच्छे, और हल्की-हल्की खुशबू... सभ्या दरवाजे पर खड़ी रह गई। उसकी आँखें हैरानी और खुशी से फैल गईं।

नीलेश और बाकी सारे मर्द पहले से ही वहाँ खड़े थे। सभ्या के चेहरे पर उभरती हुई वो निश्छल खुशी देखकर उनके चेहरे गर्व से फूल गए थे।

नीलेश धीरे से आगे बढ़ा, सभ्या का नरम हाथ अपने बड़े-बड़े हाथ में ले लिया और गहरी नजरों से उसे देखते हुए बोला, “ये है तुम्हारा तोहफा, ... कैसा लगा?”

सभ्या अभी भी अपनी भावनाओं को संभाल नहीं पा रही थी। उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी, “बहुत... बहुत सुंदर है। बिल्कुल महल जैसा लग रहा है।”

नीलेश मुस्कुराया, उसकी आँखों में शैतानी चमक थी, “तो फिर इस महल की रानी... अंदर तो चलो।”

सभ्या शर्मीली मुस्कान के साथ नीलेश का हाथ मजबूती से पकड़कर आगे बढ़ गई। उसके पीछे-पीछे सारी औरतें और मर्द भी अंदर घुस गए। हर कदम पर फार्म हाउस की भव्यता उन्हें और भी हैरान कर रही थी।





अंदर पहुँचते ही सबके मुँह खुशी से खुले के खुले रह गए। पूरा हॉल दिवाली की तरह जगमगा रहा था। दीवारें फूलों और लाइटों से सजी हुईं, हवा में हल्की मीठी खुशबू, और हॉल के एक तरफ खूबसूरती से सजाया गया स्टेज... जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था — “Happy Anniversary”।

सभ्या और बाकी औरतें तो ये देखकर खुशी से पागल हो गईं। उनकी आँखें चमक रही थीं, होंठों पर अनकही मुस्कान थी।

फिर मर्दों ने बाकी सब औरतों को आराम से बैठा दिया। सभ्या को धीरे-धीरे स्टेज पर ले जाकर खड़ा कर दिया गया। नीलेश भी उसके ठीक बगल में आकर खड़ा हो गया। उसने सभ्या की ओर मुड़कर गहरी, प्यार भरी आवाज़ में कहा,

“सालगिरह की ढेर सारी शुभकामनाएँ, मेरी रानी।”

सभ्या की आँखें नम हो आईं। वो मुस्कुराते हुए बोली, “तुम्हें भी जी... आज तुमने मुझे सच में बहुत खुश कर दिया। ये तोहफा... सबसे सुंदर तोहफा था।”

नीलेश की आँखों में फिर वो शरारती चमक लौट आई। उसने धीरे से सभ्या के कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया,

“अभी तोहफा पूरा कहाँ हुआ है, रानी... अभी तो बस शुरुआत है।”

सभ्या ने हैरानी से उसकी ओर देखा, “मतलब?”

नीलेश मुस्कुराया और जोर से आवाज़ लगाई, “कर्मा... ओह कर्मा! लेके आ!”

कर्मा बगल वाले दरवाजे से बाहर निकला। कुछ पलों बाद जब वो वापस अंदर आया, तो उसके चेहरे पर चौड़ी मुस्कान थी। वो अपनी माँ सभ्या की ओर देखकर मुस्कुराया और एक तरफ खड़ा हो गया।

और फिर... उसी दरवाजे से अंदर आई — शशि।

नीलेश की वो खूबसूरत, मादक, और बेहद कामुक बहन। जैसे ही शशि ने अपनी भाभी सभ्या की ओर देखा, उसके होंठों पर शरारती हँसी खिल गई। सभ्या का मुँह भी खुशी से एकदम खुल गया।

शशि फुर्ती से भागकर स्टेज पर चढ़ गई और सभ्या की ओर लपकी। दोनों — एक तरफ मादक कामुक बदन वाली ननद, दूसरी तरफ अपनी भाभी — एक दूसरे से इतने जोर से गले मिलीं कि उनके मुलायम, भरे-भरे जिस्म एक-दूसरे से सट गए।





सभ्या: तू कब से आई हुई है यहां?

शशि: हो गया भाभी घंटा भर।

सभ्या: लो घंटा भर हो गया और अब मिल रही है मुझसे?

शशि: अरे पहले मिलती तो तुम्हारे सुंदर चेहरे पर ऐसे हैरानी और खुशी कैसे देखती।

शशि ने उसके गालों को छूते हुए कहा,

सभ्या: बच्चे कहां हैं?

इतने में पीछे से आवाज आई: हम यहां हैं मामी, ये आवाज पूर्व की थी जो उनकी ओर चलती आ रही थी उसके साथ विनीत, उसके पापा, ताऊजी और ताई जी थे, पूर्वी भी आकर उसके गले लग जाती है

पूर्वी: हैप्पी एनिवर्सरी मेरी सेक्सी मामी।

सभ्या: आ गई मेरी प्यारी बिटिया,

पूर्वी: तुम्हारी पार्टी हो हम न आएं मेरी जान ऐसे कैसे हो सकता है?

सभ्या: पागल कहीं की? अच्छा तेरे ससुराल वाले वो लोग कहां है? और पंकज?

पूर्वी: अरे उनका क्या काम यहां? उन्हें छोड़ आई।

पूर्वी हंसते हुए बोली,

सभ्या: हाय दैय्या देखो तो जीजी कैसे बोल रही है,

सभ्या सावित्री के गले लगते हुए बोलती है

सावित्री: अब हम का कहें बन्नो, तू बड़ी सुंदर लग रही है आजा।

सभ्या: तुम भी जीजी।

विनीत: मेरी प्यारी मामी,

विनीत भी गले लगते हुए कहता है,

सभ्या: अब तो मेरा प्यारा भांजा दूल्हा बनने वाला है,

विनीत: हां दुल्हन तुम बनो तो।

पूर्वी: हां मामी कर लो ब्याह फिर से दूल्हा ये रहा,

सभ्या: अपना दूल्हा तो लाई नहीं तू मेरा ब्याह करवा रही है

पूर्वी: अरे लाई हूं मामी लो नाम लिया और हाजिर।

पंकज: हैप्पी एनिवर्सरी मामी जी, ये तो हमें छोड़ आई थी पर हम फिर भी चले आए,

पंकज गिफ्ट का एक बड़ा सा डिब्बा सभ्या की ओर देते हुए कहता है, पंकज के साथ उसकी मां रेनू, बहन प्रीती और पिता प्रकाश भी थे,

सभ्या: अरे देखो तो बदमाश को कैसे मजाक करती है,

सभ्या पंकज से मिलती है और फिर रेनू भी उसके गले लगती है और कहती है: मुबारक हो बहन जी।

पूर्वी: अरे थोड़ा कस के मिलो समधन बनने वाली हो दोनों।

इस पर सब हंसने लगते हैं वहीं प्रीती पीछे खड़े खड़े शर्मा रही होती है,

रेणु: हां अच्छे से ही मिल रही हूं और समधन तो पहले से ही हैं।

सभ्या: ये भी बात बिल्कुल सही कही बहन जी।

प्रकाश: अरे समधी के लिए गले मिलने का कोई मौका नहीं है क्या?

इस पर सब हंसते हैं और रेणु कहती है: तुम जाओ पीछे खड़े हैं समधी जी उनसे मिलो।

इसी तरह हंसी मज़ाक में फिर बाकी सब भी सभ्या से मिलते हैं, उनके बाद रिमझिम और उसके ससुराल वाले मिलते हैं, सविता रानी महिपाल, पीयूष भी पहले ही आ चुके थे, अंजली भी लड़कियों के साथ आ गई थी। सबसे मेल मिलाप के बाद चंचल जो कि एक पार्टी वियर साड़ी में थी और वो साड़ी उसके भरे और कामुक बदन पर खूब जंच रही थी वो पेशाब करने के लिए जा रही थी कि तभी पीछे से कोई उसे बाहों में भर लेता है वो चौंक कर देखती है और कहती है: अरे तूने तो मुझे डरा ही दिया।

कर्मा: कैसी हो दीदी?

कर्मा उसके पेट को सहलाते हुए कहता है।





चंचल ने कर्मा की मजबूत बाहों में थोड़ा सिकुड़ते हुए, लेकिन मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अच्छी हूँ तू... तू कैसा है मेरा प्यारा भाई?”

कर्मा ने अपनी हथेली को चंचल के नाभि के नीचे थोड़ा और नीचे सरकाते हुए, गर्म साँस उसके कान में डालते हुए बोला, “मैं भी अच्छा हूँ दीदी... लेकिन हाय! आज तुम कितनी मस्त, कितनी रसीली लग रही हो। मन कर रहा है यहीं खा जाऊँ... इन भरे-भरे चूचों को, इस चिकनी कमर को, और नीचे जो कुछ छिपा है उसे चूस-चूस कर...”

चंचल शर्म से लाल हो गई, लेकिन उसकी आँखों में भी शरारत झलक रही थी। उसने हल्के से कर्मा की छाती पर थपकी मारते हुए कहा, “धत्त पागल कहीं का! पार्टी पर ध्यान दे न... पहले मुझे सुसु जाने दे। बहुत तेज लगी है। फिर भले ही खा लेना... जितना मन करे।

कर्मा ने मजबूर होकर अपनी पकड़ ढीली की और मुस्कुराते हुए बोला, “अच्छा जाओ... जल्दी आना। वैसे तुम्हारी देवरानी किधर है?”

चंचल ने पीछे मुड़कर इशारा किया, “यहीं होगी कहीं... पूर्वी के साथ थी अभी।”

ये कहकर चंचल अपनी साड़ी की पल्लू ठीक करती हुई, कमर लचकाती हुई पेशाब करने चली गई। उसके पीछे-पीछे उसकी गोल-गोल गांड हिल रही थी, जो देखकर कर्मा का लंड एक बार फिर से तन गया।

कर्मा ने गहरी साँस ली और आगे बढ़ गया। जिनसे अभी तक नहीं मिला था, उन सबसे मिलने लगा। सबसे पहले चंचल के माँ-बाप उदयवीर और बिमला से मिला। उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और आगे बढ़ गया।

फिर उसकी नजर पड़ी अपनी होने वाली भाभी खुशी पर, जो विनीत से बातें कर रही थी। खुशी आज बेहद सुंदर लग रही थी — उसकी साड़ी उसके नई-नई दुल्हनिया वाले बदन को ऐसे लपेटे हुए थी कि उसके उभरे हुए स्तन और पतली कमर साफ नजर आ रहे थे।

कर्मा सीधा उनके पास पहुँचा, विनीत को हल्के से धकेलते हुए बोला, “अरे यार, छोड़ मत देना तू बिल्कुल भी... एक पल के लिए भी नहीं!”

फिर वो खुशी को जोर से अपनी बाहों में भर लिया। खुशी का नरम, गर्म बदन उसके सीने से सट गया। उसके मोटे स्तन दब गए और एक मीठी रगड़ पैदा हुई।

खुशी ने शर्माते हुए लेकिन खुश होकर पूछा, “कैसे हो भैया?”

कर्मा ने उसे और कसकर जकड़ते हुए उसके कान में फुसफुसाया, “अच्छा हूँ भाभी... अब तो और भी अच्छा हो गया। वैसे ये विनीत तुमसे यूँ ही चिपका रहता है क्या दिन-रात?” कर्मा ने अलग होते हुए कहा,

विनीत हँसते हुए बोला, “अच्छा! जैसे तू अपनी वाली को छोड़ देता है। सब पता है मुझे तेरी और अंजली की कहानी...

खुशी ने शरमाकर हँसते हुए कहा, “अरे हाँ भैया, मुझे भी मिलाओ अंजली से... मैंने सुना है वो बहुत प्यारी और... बहुत सुंदर है।”

कर्मा मुस्कुराया। उसने तुरंत अंजली को आवाज़ दी, “अंजली... इधर आ ना!”

अंजली पास आई तो कर्मा ने दोनों को एक-दूसरे से मिलवाया। अंजली और खुशी दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर मिलीं। दोनों की साड़ियाँ और बदन एक-दूसरे से सटे और दोनों ही बातें करने लगीं।

थोड़ी दूर ही पूर्वी और रिमझिम दोनों बहनें खड़ी थीं। दोनों नई-नई साड़ियों में लिपटी हुईं, बेहद खुश और शरारती मूड में आपस में मजाक कर रही थीं।

पूर्वी की साड़ी तो ऐसे पहनी हुई थी कि उसकी गहरी नाभि साफ दिख रही थी, ब्लाउज इतना टाइट कि उसके भरे-भरे, दूधिया स्तन लगभग बाहर झाँक रहे थे। रिमझिम की साड़ी भी कम नहीं थी — उसकी मोटी, गोल गांड और पतली कमर का मेल देखकर किसी का भी मन ललचा जाए। दोनों बहनों के कामुक बदन साड़ी के कपड़े में इस कदर लिपटे हुए थे कि हर हिलने-डुलने पर उनके अंगों की लचक साफ नजर आ रही थी।





पूर्वी ने रिमझिम के सामने खड़े होकर उसकी भरी-भरी चूचियों को घूरते हुए शरारती मुस्कान के साथ कहा, “अरे यार... तेरे ये गुब्बारे हर बार बढ़ते कैसे जा रहे हैं? जब देखती हूँ, और भी बड़े, और भी भारी मिलते हैं।

पूर्वी ने अपनी उंगली से रिमझिम के चूचों की तरफ इशारा करते हुए हल्के से दबा भी दिया।

रिमझिम ने झेंपते हुए लेकिन हँसते हुए पूर्वी के अपने से भारी खरबूजे जैसे चूचों पर नजर डाली और बोली, “कुछ भी मत बोल! तेरे जितने बड़े तो मेरे हो ही नहीं सकते न... खुद तो दो-दो खरबूजे लिए घूमती है! चलते-फिरते इन्हें संभालना भी मुश्किल हो जाता होगा।”

पूर्वी ने कमर लचकाते हुए अपनी गांड को थोड़ा आगे निकालकर कहा, “तेरे चूतड़ भी तो तरबूज जैसे हैं यार! अभी देख कैसे फुदक-फुदक रहे हैं... ”

रिमझिम ने पूर्वी की कमर पर हाथ रखकर उसे अपने करीब खींच लिया, “हाय... ये नौकझोंक तेरे साथ कितनी अच्छी लगती है। मजा आ जाता है।”

पूर्वी ने पुरानी यादों में खोते हुए कहा, “अभी अच्छी लगती है... बचपन में कितना लड़ते थे हम दोनों।”

रिमझिम ने हँसते हुए पूर्वी की नाक पकड़ ली, “हाँ वो तो है... तू थी भी बड़ी कुतिया बचपन में।”

पूर्वी ने मुंह बनाते हुए नाटकीय अंदाज में बोला, “हो... देखो तो कैसे बोल रही है! मैं कुतिया थी?”

रिमझिम ने तुरंत प्यार से उसके गाल सहलाए, “अच्छा-अच्छा, मजाक में बोला... मुंह मत बना मेरी जान।”

पूर्वी ने बेशर्मी से आँख मारी और बोली, “मैं अभी भी कुतिया हूँ... बस अब बड़े थनों वाली।”

ये सुनकर दोनों बहनें जोर से हँस पड़ीं। उनकी हँसी में शैतानी और कामुकता दोनों थी।

रिमझिम ने अभी भी हँसते हुए पूछा, “कुतिया कहीं की! अच्छा, कोल्ड ड्रिंक पियेगी?”

पूर्वी ने तुरंत सहमति में सिर हिलाया, “हाँ चल... प्यास भी लगी है।”

दोनों आगे बढ़ीं। थोड़ी दूर जाकर पूर्वी ने एक कोने की तरफ इशारा करते हुए हँसते हुए कहा, “इन्हें देख दो... हंसो का जोड़ा बन गया है।”

रिमझिम ने देखा तो अनुज और प्रीती कोने में खड़े थे।

रिमझिम: अरे करने दे न मजे उन्हें तू चल,

दोनों आगे बढ़ जाती हैं उनके पीछे कोने में अनुज और प्रीती थे, अनुज प्रीति के होंठों को चूम रहा था





अनुज प्रीती के होंठों को बड़े प्यार और भूख से चूम रहा था। प्रीती लहंगे में बेहद सुंदर और सेक्सी लग रही थी — लहंगे का घेरा उसके गोल चूतड़ों को अच्छे से उभार रहा था, ब्लाउज उसके उभरे चूचों पर तना हुआ था। अनुज खुद को रोक नहीं पा रहा था, उसके हाथ प्रीती की कमर पर फिर रहे थे।

अनुज ने किस के बीच साँस लेते हुए फुसफुसाया, “बहुत सुंदर लग रही हो तुम आज... ये लहंगा तुम पर बहुत खिल रहा है। तुम्हारी ये कमर, ये होंठ ... सब कुछ नशीला लग रहा है।”

प्रीती शर्म से लाल होकर बोली, “तुम भी बहुत हैंडसम लग रहे हो...”

अनुज ने आगे होते हुए कहा, “इसी बात पर एक और किस हो जाए...”

प्रीती ने हल्के से उसे धकेलते हुए कहा, “नहीं... सब देख रहे हैं। मुझे शर्म आती है।”

अनुज ने हँसते हुए उसे और कस लिया, “अरे यहाँ सब अपने ही तो हैं... कैसी शर्म?”

प्रीती ने इधर-उधर देखते हुए फुसफुसाया, “अरे नहीं... ये खाना परोसने वाले, सर्वेंट्स सब खड़े हैं।”

इतने में ही नीलेश की गहरी, भावुक आवाज स्टेज से गूँजी। उन्होंने सभ्या का हाथ थामे हुए कहा,

“सभी को नमस्कार और हृदय से आभार... कि आप लोगों ने अपना कीमती समय हमारे एक बार कहने पर निकाला और हमें आतिथ्य करने का सौभाग्य दिया। मेरे जीवन का ये बहुत खास अवसर है। आज हमारी शादी को पूरे 25 वर्ष बीत गए।”

नीलेश ने सभ्या के हाथ को और मजबूती से दबाया, फिर उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए बोले,

“वैसे तो ये लंबा समय है... पर ऐसे हमसफर का साथ हो तो कम ही लगता है। जब से तुम मेरे जीवन में आई हो, मेरा पूरा जीवन ही बदल गया। जब अपनों से दूर हुआ, तब तुम मेरे साथ थी। जब नए रिश्ते बने और नए लोग अपने बन गए, तब भी तुम मेरे साथ थी। सोचता हूँ कि बिना तुम्हारे जो कुछ थोड़ा बहुत आज हासिल कर पाया हूँ, वो भी नहीं कर पाता। धन्यवाद, आभार... ये सब दूसरों से कहा जाता है। तुमसे क्या कहना है, ये मैं नहीं जानता... और शायद जरूरत ही नहीं पड़ती। तुम सब बिना कहे समझ जाती हो। आज भी समझ जाओगी न?”

सभ्या की आँखें भर आईं। आँसुओं के साथ वो मुस्कुराई और नीलेश के सीने से लग गई। कर्मा, अनुज और बाकी सब भी भावुक होकर उन्हें देख रहे थे। जैसे ही सभ्या नीलेश के चौड़े सीने से चिपकी, पूरा हॉल तालियों और खुशी के शोर से गूँज उठा।

पूर्वी ने तेज आवाज में चिल्लाकर कहा, “मामा-मामी... आपने तो मुझे भी रुला दिया! अगर मेरे पति ने मुझे ऐसा प्यार नहीं किया तो मैं उन्हें घर से निकाल दूँगी!”

सब जोर से हँस पड़े। पंकज ने तुरंत मजाक उड़ाया, “मतलब तुम्हें पच्चीस साल झेलना पड़ेगा!”

इस पर और भी तेज ठहाके गूँजे। माहौल और भी गर्म और खुशनुमा हो गया।

शैलेश ने स्टेज से आवाज लगाई, “अरे भाई साहब... भाभी! अब केक काटो न...”

नीलेश और सभ्या दोनों केक के सामने गए। तालियों, सीटियों और खुशी के शोर के बीच दोनों ने एक साथ केक काटा।





नीलेश ने एक टुकड़ा लिया उठाया और सभ्या को चखाया और प फिर सभ्या ने नीलेश को, इसके बाद कर्मा और अनुज ने भी अपने मां पापा को केक खिलाया, घर के बड़े यानी नाना भी आगे आए और बेटी और जमाई राजा को आशिर्वाद दिया और सभ्या ने उन्हें भी केक खिला दिया, उनके बाद धीरे धीरे बाकी लोग भी आते गए और कहीं केक खिलाने का तो कहीं मुंह पर लगाने का प्रोग्राम चलने लगा, लड़कियां आपस में बहुत मस्ती कर रही थीं, नीतू, किरन, अंजली, लाड़ो, पल्लवी और अब उनके साथ प्रीती और खुशी भी मिल गई थी सब साथ में फिल्मी गानों पर धमाल मचा रहीं थी, लड़कों का वही हाल था जो अक्सर होता है विचारे काम में इधर से उधर लगे हुए थे, किसी को खाने की व्यवस्था देखनी थी तो किसी को पीने की, स्टेज पर फोटो खिंचवाने का प्रोग्राम चल रहा था मेहमान एक एक करके आ रहे थे और सभ्या नीलेश को उपहार देते हुए उनके साथ फोटो करवा रहे थे, इसी बीच में राजन ने खोज कर कर्मा और अनुज को भी स्टेज पर चढ़ा दिया कि पूरे परिवार की साथ में एक फोटो करवा लो, दोनों अपने मां पापा के साथ खड़े हुए तो सभ्या ने अंजली को भी बुला लिया और बोली: ये भी परिवार में ही जुड़ने वाली है, अब अंजली भी अकेली नहीं गई उसने प्रीती का हाथ थामा और लेकर स्टेज पर चढ़ गई उस समय प्रीती और अनुज दोनों की हालत देखने वालीं थी दोनों के गाल शर्म से टमाटर की तरह लाल हो चले थे, अंजली ने अपने और सभ्या के बीच प्रीती को खड़ा किया तो सभ्या ने भी प्यार से अपना सिर अपनी होने वाली छोटी बहू के सिर से टिका दिया और फिर पूरे परिवार की कई फोटो ली गई।





पिक्चरों के दौर के बाद बाहर खुले में खाने की व्यवस्था की गई थी जहां खाने का प्रोग्राम चला सबने स्वदिष्ट बने खाने का लुत्फ उठाया, और जी भर के खाया, खाते हुए बातों का और नाच गाने का प्रोग्राम साथ में चल रहा था, जो लोग आपस में इतना नहीं मिले थे उन्हें भी एक दूसरे को जानने का मौका मिल रहा था, कहीं राजपाल उदयवीर और सुजान सिंह की जोड़ी बन रही थी तो कहीं चरन सिंह, नाना, दीनू और महिपाल साथ थे, एक ओर नीलेश, प्रदीप(शशि के पति), शैलेश, राजन, जमुना, चेतन, साथ में थे वहीं विनीत, पंकज, रमन आदि कर्मा, जग्गू, सरजू, और पीयूष के साथ गप्पें लड़ा रहे थे,

इसी तरह औरतों भी आपस में घुल मिल रही थीं, सावित्री और मंजू ताई की खूब जम रही थी तो रज्जो, माधुरी और ममता की, वहीं थोड़ी शर्मीली रेनू को हमारी हंसमुख गुंजन और शालू भा रही थी तो बिमला शशि और सभ्या एक साथ बैठी थीं। लड़कियां तो सारी साथ में घूम ही रही थी, नाच रही थी, फोटो खींचा रहीं थी और अब खाना भी खा रही थी, हम उम्र बहुएं और ननदें भी एक साथ थी जैसे प्रेमा, रानी, रिमझिम, पूर्वी और चंचल।

खाने के बाद फिर से एक बार नाच गाने का प्रोग्राम हुआ और इस बार सबकी फरमाइश पर नीलेश और सभ्या को भी साथ में ठुमके लगाने ही पड़े, अंदर की ओर इन सब का नाच गाना चल रहा था वहीं सारे लड़के मिल कर हलवाई का सारा ताम झाम इकठ्ठा करवा रहा रहे थे और फिर कुछ ही देर में हलवाई और उसके लोग अपना सामान लेकर निकल गए थे, पहले से ही बड़ा सा फ्रिज और चूल्हा और ज़रूरी सामान कर्मा और उसकी सेना ने लाकर रखा था ताकि हलवाई के जाने के बाद भी मेहमानों को कोई तकलीफ न हो। बाहर से दरवाज़ा आदि लगा कर लड़के भी अंदर पहुंच गए थे और नाच गाने में शामिल हो गए, अब जब सिर्फ जान पहचान के लोग ही रह गए थे तो नाच गाने के साथ साथ छेड़ छाड़ भी बढ़ रही थी,





नाच गाने के बाद थक-हार कर सब लोग बैठ गए। बड़ों के लिए कुर्सियाँ लगी थीं, छोटे लोग नीचे ही पसर गए। कोल्ड ड्रिंक के गिलास बाँटे गए। सब ठंडी-ठंडी कोलड्रिंक ड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे।

इसी बीच किरण उठी। सबका ध्यान अपनी तरफ खींचते हुए उसने मुस्कुराकर कहा,

“सब लोगों को मेरा नमस्ते... प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी, तुम दोनों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी-सी भेंट।”

नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे भाई, अब कौन-सी भेंट रह गई?”

पल्ली भी उठते हुए बोली, “बस देखते जाओ ताऊजी...”

किरण, पल्ली, लाड़ो, नीतू और अंजली सब मिलकर स्टेज पर पहुँच गईं। उनके इशारे पर सागर ने गाना चला दिया। पाँचों ने एक धमाकेदार गाने पर नाच पेश किया। पूरा हॉल तालियों से गूँज उठा। खासकर सभ्या और नीलेश ने खूब तालियाँ बजाईं।

फिर तुरंत किरण और पल्ली अंदर चली गईं। अंजली सबका ध्यान बातों में लगाए रखी। कुछ देर बाद जब किरण वापस आई, तो वो सभ्या की ही साड़ी पहने हुई थी — बिल्कुल उन्हीं की तरह तैयार, बालों में फूल, मेकअप, सब कुछ। उसे देखकर सब हँसने लगे, तालियाँ बजने लगीं। सभ्या बलाएँ ले रही थी, शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए।

दूसरी तरफ जब पल्ली नीलेश का कुर्ता-पजामा पहनकर स्टेज पर आई, तो पूरा हॉल तालियों और सीटियों से गूँज उठा। नीलेश सिर पकड़कर जोर-जोर से हँस रहे थे।

फिर गाना बज उठा...

“अरे ओ जुम्मा... मेरी जान-ए-मन... बाहर निकल... आज जुम्मा है... आज का वादा है...”

थक हार कर सब लोग बैठ गए, बढ़ों के लिए कुर्सियां रखी गई थी तो छोटे तो नीचे ही पसर गए, कोलड्रिंक के गिलास बांटे गए और सब ठंडी ठंडी कोलड्रिंक पीते हुए फिर से बातें करने लगे, इसी बीच किरन उठी और सबका ध्यान अपनी ओर करते हुए बोली: सब लोगों को मेरा नमस्ते, प्यारी बुआ और प्यारे फूफाजी तुम दोनों लोगों के लिए और आप सभी के लिए हम बच्चों की तरफ से एक छोटी सी भेंट।

नीलेश: अरे भाई अब कौन सी भेंट रह गई?

पल्ली: बस देखते जाओ ताऊजी।

पल्ली भी उठते हुए बोली, किरन भी उठ गई थी, इसके बाद किरन, पल्ली, लाड़ो नीतू और अंजली ये सब मिलकर स्टेज पर पहुंच गईं इनके इशारे पर सागर ने गाना चलाया और फिर सब ने एक गाने पर नाच पेश किया और सबने ताली बजा कर उनका खूब स्वागत किया, खासकर सभ्या और नीलेश ने, उसके बाद तुरंत ही किरन और पल्ली अंदर गईं तब तक अंजली सबका ध्यान बातों में लगाती रही और कुछ देर बाद ही किरन अपनी बुआ की साड़ी पहन कर उन्हीं की तरह तैयार हो कर स्टेज पर आई उसे देख सब हंस रहे थे ताली मार रहे थे, सभ्या बलाएं ले रही थी, वहीं शालू ने तो जाकर पैसे भी न्योछावर कर दिए, दूसरी ओर से जब पल्ली नीलेश का कुर्ता पजामा पहन कर स्टेज पर आई तो पूरा हाल तालियों सीटियों से गूंज उठा, नीलेश भी सिर पकड़ कर हंस रहे थे,

फिर गाना बजा,

अरे ओ जुम्मा मेरी जानेमन, बाहर निकल आज जुम्मा है आज का वादा है, पल्ली गाने के बोल पर पूरा अभिनय करते हुए नाचने लगी, वहीं किरन भी हीरोइन की तरह नहीं नहीं करते हुए शर्मा रही थी, गाना जब तक खत्म हुआ तब तक दोनों ने पूरा माहौल बांध दिया था और हर कोई खुशी से उनके लिए तालियां पीट रहा था, गाना खत्म होने पर सबने उनका खूब जोश बढ़ाया, शैलेश ने सभी लड़कियों को इक्कीस सौ- इक्कीस सौ का शगुन भी बांट दिया, किरन और पल्ली फिर निलेश और सभ्या को पकड़ कर स्टेज पर लाए और उन्हें खड़ा कर पल्ली बोली: वैसे इतने अच्छे गाने के बाद चुम्मा हो ही जाए क्या कहते हो आप लोग।

पूर्वी: अरे नेकी और पूछ पूछ? मामा हो जाओ शुरू।

नीलेश सबके सामने थोड़ा शर्माए और बोले: अरे क्या तुम लोग भी।

राजन: अरे भाई बच्चों का मन है तो हो ही जाए,

शशि: हां भैया भाभी हो जाए,

सबके कहने पर सभ्या और निलेश एक दूसरे की ओर मुड़े प्यार से एक दूसरे की आंखों में देखा सभ्या ने एक हाथ नीलेश के कंधे पर रख लिया तो नीलेश के हाथ सभ्या की कमर पर पहुंच गए और फिर धीरे से दोनों के होंठ मिले एक छोटे पर गरम चुंबन के लिए





एक के बाद दूसरा... फिर तीसरा... चुंबन लंबे और गहरे होते गए। आसपास की आवाजें जैसे उनके लिए कम होती गईं। कुछ पलों बाद दोनों पूरे जोश से एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे। नीलेश की जीभ सभ्या के मुँह में घुस गई थी, हाथ बदन को सहला रहे थे। जब होंठ अलग हुए तो दोनों हाँफ रहे थे। उनके गर्म चुंबन को देख पूरे हॉल में गर्मी फैलने लगी।

सबने तालियाँ बजाकर उनका स्वागत किया। दोनों शर्माते हुए सबकी ओर देख रहे थे।

इसी बीच पूर्वी स्टेज पर चढ़ गई और बोली, “देखा सबने? दोनों में आग अभी भी उतनी ही है जितनी पच्चीस साल पहले थी!”

नीलेश हँसते हुए बोले, “अरे तू भी क्या बोल रही है?”

पूर्वी ने शरारत से आँख मारी, “अरे मामा शर्माना कैसा? यहाँ सब अपने ही हैं और सबकी एक जैसी सोच भी है। तो आप सबकी तरफ से और अपनी तरफ से मैं ये कहना चाहूँगी कि चुम्मा-चाटी तो बहुत देख ली... अब कुछ और देखना है।”

नीलेश ने हैरानी से पूछा, “क्या?”

पूर्वी ने सीधे, बेशर्मी से कहा, “चुदाई!”

सभ्या शर्माकर बोली, “धत्त तू भी ना...”

पूर्वी हँसते हुए बोली, “मामी मान जाओ... नहीं तो मेरी सेना तुम पर टूट पड़ेगी!”

इधर मर्द भी नीलेश को उकसाने लगे।

राजन चिल्लाया, “अरे सालगिरह पर नहीं चोदोगे तो कब चोदोगे भैया?”

पूर्वी ने लड़कियों की तरफ इशारा किया, “अरे लड़कियों देख क्या रही हो? शुरू हो जाओ!”

पूर्वी के कहते ही तीन-तीन लड़कियाँ दोनों पर टूट पड़ीं। कुछ ही पलों में नीलेश और सभ्या के सारे कपड़े उतर चुके थे। दोनों बिल्कुल नंगे स्टेज पर खड़े थे।

नीलेश का लंड पहले से ही कड़क हो चुका था, सीधा तना हुआ, मोटा और लंबा। सभ्या को लड़कियों ने उनके सामने घुटनों पर बैठा दिया। जिन मर्दों ने अब तक सभ्या को नंगा नहीं देखा था, वो उसे देखकर आहें भर रहे थे — उसके भारी-भारी दूधिया चूचे, चिकनी कमर, और साफ-सुथरी, गुलाबी चूत देखकर उनके मुँह खुले के खुले रह गए। औरतें नीलेश के तने हुए लंड को और सभ्या के कामुक नंगे बदन को घूर रही थीं।

पूर्वी और बाकी लड़कियाँ चिल्लाने लगीं, “चूसो... चूसो... चूसो!”

सबकी आवाज सुनकर सभ्या ने आगे बढ़कर नीलेश के मोटे लंड को हाथ में पकड़ लिया। उनकी आँखों में देखते हुए वो मुस्कुराई और बोली, “सालगिरह मुबारक हो, मेरे राजा...”

और ये कहते हुए उसने पूरा लंड अपने गरम, गीले मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।





नीलेश के मुंह से आह निकल गई, “ओह आह्ह्ह्ह... मेरी रानी...”

सभ्या हाथ से लंड को सहलाते हुए, अपने मुंह का पूरा जादू चला रही थी — कभी सिर चूसती, कभी पूरी लंबाई गले तक ले जाती, कभी जीभ से लंड की नोक को चाटती। नीलेश की आँखें मजे से बंद हो गईं।

मर्दों के लंड कड़क हो गए, औरतें अपनी चूत में गर्म नमी महसूस करने लगीं। लेकिन सब चुपचाप देख रहे थे।

रिमझिम चिल्लाई, “मामा... पच्चीस साल बाद भी वही मजा है या नहीं मामी के मुंह में?”

नीलेश हाँफते हुए बोले, “ओह... ज़्यादा ही है बिटिया... बहुत ज़्यादा!”

राजन बोला, “अरे हमारी भौजी तो और गरम होती जा रही हैं!”

पूर्वी हँसते हुए बोली, “सही कहा... हमारी मामी तो शराब है, जितनी पुरानी उतनी नशीली!”

पंकज बोला, “हमारा भी मन कर रहा है शराब पीने का...”

पल्ली तुरंत शरारत से बोली, “आओ जीजा... नीचे टंकी से मुंह लगाओ, अभी पिला देती हूँ!”

सब जोर से हँस पड़े।

पंकज ने पल्ली को घूरते हुए कहा, “बिल्कुल पीएंगे साली साहिबा... तुम्हारी शराब भी पीएंगे। तुम भी कम नशीली नहीं लगती।”

किरण बोली, “अरे जीजा... सालियाँ तो इतनी नशीली हैं कि पीकर सब भूल जाओगे!”

पूर्वी ने हँसते हुए कहा, “अभी बताती हूँ तुम्हें... चुपचाप स्टेज पर देखो और कुछ सीखो!”

पंकज हँसते हुए स्टेज की ओर देखने लगा।

दृश्य अब बदल चुका था। नीलेश ने सभ्या को स्टेज पर रखी कुर्सी पर लिटा दिया, उसकी टांगें फैला दीं और अपना मोटा लंड पकड़कर उसकी चूत पर थपथपाने लगे।

नीलेश ने गहरी नजरों से पूछा, “घुसा दूँ मेरी रानी?”

सभ्या ने अपने होंठ काटते हुए कामुक आवाज में कहा, “घुसा दो ना मेरे राजा...”

नीलेश ने सबकी तरफ देखा और जोर से पूछा, “घुसा दूँ?”

सबने गर्मजोशी से “हाँ... हाँ...” करते हुए शोर मचाया।

नीलेश ने एक गहरा, जोरदार धक्का लगाया और अपना पूरा लंड सभ्या की चूत में जड़ तक घुसा दिया, और दोनों की एक साथ गहरी आह निकल गई।





सब लोग खुश होकर शोर मचाने लगे, उनका जोश बढ़ाने लगे।

नीलेश ने सभ्या की आँखों में देखा और बोले, “अभी भी वही गर्मी... वही कसावट... वही आनंद है तुम्हारी चूत में जो पच्चीस बरस पहले था।”

सभ्या हाँफते हुए बोली, “ओह जी... तुम्हारा लोड़ा जरूर पहले से भी बड़ा हो गया है... तभी तो ये चूत कसी हुई लग रही है।”

नीलेश मुस्कुराए, “तुम्हारा बदन सामने पाकर ये अपने आप बड़ा हो जाता है।”

वे आगे झुके, सभ्या के होंठ चूसने लगे और साथ ही धक्के भी लगाते रहे।

जब चुंबन टूटा तो सभ्या मुस्कुराकर बोली, “ऐसा लग रहा है जैसा पहली रात को महसूस हुआ था... आह... सुहागरात पर।”

नीलेश बोले, “आह... तो ये हमारी पहली रात ही तो है रानी... आने वाले और पच्चीस बरसों की पहली रात... या कहूँ सुहागरात।”

सभ्या हाँफते हुए बोली, “आह... आह... पर इस बार सुहागरात पर दर्शक भी हैं।”

नीलेश ने जोर से धक्का लगाते हुए कहा, “हाँ... पहली बार हम दोनों ही थे... इस बार इतने हैं... अगली बार और भी होंगे।”

सभ्या ने हैरानी से पूछा, “अगली बार और?”

नीलेश हँसते हुए बोले, “और क्या... इस बार बच्चे देख रहे हैं... अगली बार नाती-पोते देखेंगे!”

सभ्या शर्माकर बोली, “अगली बार तक हम लोग बुड्ढे हो चुके होंगे।”

नीलेश ने तेज धक्का लगाते हुए कहा, “तो क्या हुआ... बुढ़ापे में चुदाई का अलग ही मजा होगा।”

शालू चिल्लाई, “अरे प्रेमियों की क्या बातें हो रही हैं... हमें भी सुनाई देनी चाहिए!”

पल्ली ने शरारत से कहा, “और ताऊजी-ताईजी... बहुत हुआ प्यार से धीमे-धीमे... मेहमान आए हैं, इन्हें भी दिखाओ चोदमपुर की चुदाई क्या होती है!”

सभ्या हाँफते हुए बोली, “सुना जी... गाँव की इज्जत का सवाल है... मुझे ऊपर आने दो।”

नीलेश ने लंड निकाला, कुर्सी पर बैठ गए और बोले, “आ जाओ...”

सभ्या तुरंत ऊपर चढ़ गई, पति का मोटा लंड अपनी चूत में लिया और जोर-जोर से उछलने लगी। शुरू से ही कोई धीमे-धीमे नहीं — वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मार रही थी, फिर ऊपर उठ जाती। उसके नंगे बदन और उछलती-नाचती चूचियों को देखकर मर्दों के मुंह में पानी आ रहा था, लंड में तनाव बढ़ रहा था।





इस बार कोई धीमे धीमे नहीं शुरू से ही वो अपनी चूत को जड़ तक पति के लंड पर मारती है और फिर ऊपर जाती है, उसके नंगे बदन और उछलती नाचती चूचियों को देख कर मर्दों के मुंह में पानीं आने लगता है तो लंड में तनाव।

पल्ली: आह आह ये हुई न बात आह ताऊजी, ताई जी ऐसे ही मज़ा आ रहा है,

पल्ली अपनी चूत को कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ते हुए कहती है।

अंजली: बहुत बढ़िया मां पापा ऐसे ही बहुत अच्छे लग रहे हो,

अंजली भी गरम होते हुए उनका हौसला बढ़ाती है, वैसे चुदाई के लिए उन्हें कहां किसी तरह की प्रेरणा की ज़रूरत थी वो दोनों ही इस मामले में काफी खुले विचारों वाले थे,

निलेश भी सभ्या की कमर थामे नीचे से लंड उसकी चूत में ठोंक रहे थे।

अनुज और कर्मा दोनों ही उत्तेजित भी महसूस कर रहे थे और कहीं न कहीं भावुक भी, जो भी नीलेश और सभ्या से जुड़ा हुआ था उन सब के लिए ही ये खास और भावुक पल था,

कच्ची और गरम उत्तेजना की कढ़ाई में कामुकता और भावना का तड़का और लग जाए तो चुदाई की दाल बहुत स्वादिष्ट बनती है, और उसी का लुत्फ़ आज सब उठा रहे थे, चखने वाले भी और सूंघने वाले भी।

और उसी भावनात्मक चुदाई का असर कहो या इतने लोगों के सामने प्रदर्शन के कारण सभ्या अपनी पूरी जी जान लगा कर अपने पति के लंड पर उछल रही थी और फिर एक पाप ऐसा आया कि वो तेजी से चिल्लाते हुए ढीली पड़ गई, उसका बदन मचलते हुए शांत हो गया,

उसे शांत होते देख नीलेश ने वही किया जो हर पति का कर्तव्य होता है जब उसकी पत्नी ढीला महसूस करे, नीलेश ने उसे गोद में उठाया और अपने ऊपर बैठा लिया और उसके चूतड़ों को थाम कर उसे अपने ऊपर उछालने लगे,





दर्शकों में गर्मी अब खुलकर दिखने लगी थी। कोई अपनी चूचियों को मसल रहा था, कोई चूत रगड़ रहा था, कोई लंड सहला रहा था, कोई किसी के बदन को छू रहा था।

पल्ली आगे बढ़कर पंकज जीजा की गोद में बैठ गई। पंकज उसकी मोटी चूचियों को मसलते हुए उसकी गर्दन चूम रहे थे। पल्ली अपने चूतड़ उनके कड़क लंड पर घुमा रही थी।

पल्ली ने मज़ाक करते हुए कहा, “आहिस्ते जीजा... साली की चूची हैं, तुम्हारी रांड बहन की नहीं!”

पंकज मुस्कुराते हुए उसे चूमने लगा।

कर्मा और अनुज अपनी-अपनी भावी हमसफर से चिपके हुए माँ-पापा की चुदाई देख रहे थे। अंजली को कर्मा का कड़ा लंड अपने चूतड़ों पर चुभता महसूस हो रहा था। अनुज ने तो प्रीती के ब्लाउज में हाथ घुसा दिया था।

पर सबकी नजर स्टेज पर थी। नीलेश अब सभ्या को कुर्सी के सहारे झुका रहे थे। सभ्या ने अपने चूतड़ उभारकर पति और सभी दर्शकों के लिए परोस दिए। नीलेश ने लंड पकड़ा, अपनी पत्नी के गरम, कसे हुए गांड के छेद पर रखा और एक जोरदार धक्का लगाकर अंदर सरका दिया। सभ्या की मखमली गांड चीरती हुई लंड जड़ तक समा गया।

दर्शकों ने गर्मजोशी से तालियाँ और सीटियाँ बजाईं।

नीलेश ने उतनी ही गर्मी से सभ्या की गांड मारना शुरू कर दिया।





सभ्या चिल्लाई, “आह... आह... आह जी... ऐसे ही मारो... अपनी रंडी पत्नी की गांड... आह... मार-मार के फाड़ दो... ओह... ऐसे ही!”

नीलेश कस-कस के धक्के लगाते हुए बोले, “आह... साली कुतिया... आह... ले... क्या गरम गांड है... आह... आह... आह!”

महिपाल ने रज्जो को पकड़कर उसका ब्लाउज खोल दिया और चूचियों को पागलों की तरह चूसने लगा। चेतन गुंजन मामी के बदन को सहलाते हुए उनके होंठ चूस रहा था। विनीत किरण को खींचकर उसके बदन का मजा ले रहा था।

दीनू ने शशि की मोटी चूचियों के बीच मुंह घुसा रखा था। सुजान सिंह रानी को गोद में बिठाए हुए थे। प्रदीप शालू मौसी की चूचियों के दीवाने हो रहे थे।

सागर अपनी माँ का बदला लेते हुए चेतन की मां माधुरी की नाभि चाट रहा था। सरजू, कर्मा की होने वाली सास सविता को सामने बिठाकर होंठ चूस रहा था। पीयूष रिमझिम के रसीले होंठ चूस रहा था। बिरजू पूर्वी के साथ था। जमुना मामा ने रेनू को अकेले में घुसा रखा था। प्रकाश प्रेमा भाभी के साथ थे। नाना बिमला को अपना अनुभव दिखा रहे थे। राजन चाचा सावित्री को “जीजी-जीजी” कहकर मसल रहे थे। शैलेश मौसा चंचल की मोटी चूचियों को ब्लाउज से बाहर निकाल चुका था। रमन ममता चाची को पकड़ चुका था। चरन सिंह की सेवा नीतू और लाड़ो दोनों बहनें कर रही थीं। खुशी कर्मा और अंजली के पास पहुँचकर दोनों के होंठ बारी-बारी चूस रही थी।

सबका ध्यान स्टेज पर भी था, जहाँ चुदाई अब तूफानी हो चुकी थी। नीलेश कुर्सी से आगे अपनी पीठ पर लेट गए थे और सभ्या उनके ऊपर। नीचे से नीलेश का लंड सभ्या की गांड को भेद रहा था।





सभ्या अपनी मोटी, गोल चूतड़ों को नीलेश की गोद में पटक-पटक कर मार रही थी। नीलेश लेटे-लेटे नीचे से जोर-जोर से अपनी कमर उठाकर लंड ठोक रहे थे। सभ्या की गांड पूरी तरह खुल चुकी थी, नीलेश का मोटा, गाढ़ा लंड जड़ तक अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर सभ्या के चूतड़ लहरा रहे थे, उसके भारी-भारी चूचे ऊपर-नीचे उछल रहे थे और पूरा हॉल उनकी चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था — “पच... पच... पच...”

“आह... आह... मेरे राजा... ऐसे ही... तेज... तेज मारो मेरी गांड... आह... फाड़ दो आज... ओह...!” सभ्या हाँफते हुए चिल्लाई, उसके बाल बिखर गए थे, पसीना चमक रहा था।

नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और और तेज धक्के लगाने लगे, “आह... साली कुतिया... ले... ले... तेरी ये गरम मखमली गांड... आह... मेरा लंड निगल रही है... 25 साल बाद भी कितनी कसी हुई है रे... ओह...!”

कुछ देर तक यही जोरदार चुदाई चलती रही। सभ्या ऊपर-नीचे उछल रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे, दोनों की साँसें तेज़ हो गई थीं।

हॉल में माहौल अब पूरी तरह से कामुक हो चुका था, लेकिन कोई भी चुदाई नहीं कर रहा था। बस छेड़छाड़, चूमा-चाटी और चूचियों को मसलने का मज़ा चल रहा था।

पंकज ने पल्ली को अपनी गोद में बिठा रखा था पर अब पल्ली ने अपना मुंह पंकज की ओर कर रखा था और दोनों के होंठ मिले हुए थे। पंकज की दोनों हथेलियाँ पल्ली के भरे-भरे चूतड़ों पर थीं, वो जोर-जोर से मसल रहे थे। पल्ली अपनी चूत उनके कड़क लंड पर रगड़ रही थी, कपड़े के ऊपर से ही। “

कर्मा अंजली से चिपका हुआ था। उसका एक हाथ अंजली के ब्लाउज़ के अंदर घुसा हुआ था, वो उसके नरम चूचों को दबा-दबा कर सहला रहा था। अंजली उसकी गर्दन चूस रही थी और अपनी गांड उसके लंड पर घुमा रही थी। “... आह... ऐसे ही दबाओ... मेरे चूचे... ओह...

कर्मा: देख लो आह हमें भी ऐसे ही मनानी है अपनी 25वीं एनिवर्सरी।

अंजली: देखना क्या है, बिल्कुल मनायेंगे मैने तो सोच भी लिया है मैं क्या पहनूंगी।

अंजली हंसते हुए कहती है तो कर्मा भी उसके होंठ चूसने लगता है।

अनुज ने प्रीती को दीवार से सटा दिया था। उसका मुँह प्रीती के ब्लाउज में घुसा हुआ था, वो उसके एक चूचे को चूस रहा था और दूसरा हाथ से मसल रहा था। प्रीती की आँखें बंद थीं, वो कराह रही थी, “आह... अनुज... काट मत... चूस... चूस... ओह...”

महिपाल रज्जो की चूचियों को दोनों हाथों से पकड़े हुए था, उन्हें जोर से दबाता और चूमता जा रहा था। रज्जो उसकी पीठ पर नाखून गड़ाए हुए थी। चेतन गुंजन को पीछे से पकड़े हुए था, उसके चूचों को सहलाते और उसके होंठों को चूसता हुआ। विनीत किरण की कमर पर हाथ फेर रहा था और उसके चूचों को ब्लाउज के ऊपर से मसल रहा था।

पूरा हॉल चूमने, चाटने, दबाने और कराहने की आवाज़ों से भर गया था। वहीं स्टेज पर भी दृश्य बदल चुका था, सभ्या अब नीलेश की ओर पीठ करके बैठी थी, नीलेश का लंड अब भी उसकी गांड में अंदर बाहर हो रहा था, उसके घुटने दोनों तरफ फैले हुए थे, चूत पूरी तरह खुली हुई दिख रही थी, और नीलेश का मोटा लंड उसकी गांड में जड़ तक घुसा हुआ था। सभ्या ने अपने आनंद को और बढ़ाने के लिए अपनी उंगलियां भी चूत में घुसा दी थीं





“आह... जी... ऐसे... देखो सबको...तुम्हारी आह पत्नी को आह देख रहे हैं आह मेरी आह खुली चूत ओह...!” सभ्या कामुक आवाज़ में बोली।

नीलेश ने उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से थाम लिया और नीचे से जोर-जोर से लंड ठोकना शुरू कर दिया। सभ्या की गांड अब पूरी तरह खुली हुई थी, लंड हर धक्के पर जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकल रहा था। उसके चूचे तेज़ी से उछल रहे थे, पसीना चमक रहा था।

“आह... आह... मेरे राजा... फाड़ दो... पूरी गांड... आह... देखो सब... आह मेरी गांड चुद रही है... ओह...!” सभ्या चिल्लाई, उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँज रही थी।

नीलेश भी हाँफते हुए बोले, “आह... रानी... कितनी खुली है तेरी गांड... आह... ले... ले... मेरा लंड निगल... ओह... 25 साल की की सारी गर्मी.. आज मैं तेरी गांड भर दूँगा... आह...!”

गति वही तेज़ थी। सभ्या अपनी गांड को नीचे पटक-पटक कर मार रही थी, नीलेश नीचे से ठोक रहे थे। दोनों की साँसें एक हो गई थीं। हॉल में सबकी नजरें स्टेज पर थीं। छेड़छाड़ तो चल ही रही थी, लेकिन सबकी आँखें सभ्या-नीलेश की इस खुली चुदाई पर टिकी हुई थीं।

फिर नीलेश का लंड और भी फूल गया। उन्होंने सभ्या के चूतड़ों को कस लिया और जोर-जोर से धक्के लगाने लगे।

“आह... रानी... मैं झड़ने वाला हूँ... तेरी गांड में... आह... ले... ले... पूरा... ओह...!”

सभ्या भी अपनी चूत में उंगलियां चलाते हुए चिल्लाई, “आह... जी... झड़ो... मेरी गांड में भर दो... आह... मैं भी... आह... आ रही हूँ... ओह... राजा...!”

दोनों एक साथ चरम पर पहुँच गए। नीलेश का लंड सभ्या की गांड के अंदर फड़क उठा और गर्म-गर्म मोटी-मोटी धारें छोड़ने लगा। सभ्या का बदन मचल उठा, उसकी चूत से पानी की फुहार निकली और वो भी जोर से झड़ गई। दोनों की चीखें पूरे हॉल में गूँज उठीं — “आह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्ह...!”

नीलेश की सारी मलाई सभ्या की गांड में भर गई। सभ्या ढीली पड़कर उनके सीने पर गिर गई, दोनों हाँफ रहे थे, बदन पसीने से तर।

हॉल में तालियाँ और सीटियाँ बजने लगीं। सबकी आँखों में अभी भी गर्मी थी। सब जानते थे कि रात अभी बाकी थी।



जारी रहेगी।
 
अपडेट 263


Taiyar hokar saari auraton ko do gaadiyon mein bitha kar, ladkiyon ko motorcycleon par chadha kar poora kaafila Neelesh ke ab tak chhipe hue aalishaan farm house ki taraf rawana ho gaya.

Jab Sabhya gaadi se utri, to uske saath thi Shalu, Gunjan, Mamta, Rajjo aur Manju. Mamta aur Palli to pehle bhi yahan aa chuki thi, lekin aaj ka mahoul kuch aur hi tha. Charon taraf hare-bhare pedon se ghira hua ye vishaal farm house aaj dulhan ki tarah sajaya gaya tha. Roshni ki malaayein, phoolon ke guchche, aur halki-halki khushbu... Sabhya darwaje par khadi reh gayi. Uski aankhein hairani aur khushi se fail gayi.

Neelesh aur baaki saare mard pehle se hi wahan khade the. Sabhya ke chehre par ubharti hui wo nishchal khushi dekh kar unke chehre garv se phool gaye the.

Neelesh dheere se aage badha, Sabhya ka naram haath apne bade-bade haathon mein le liya aur gehri nazron se use dekhte hue bola, “Ye hai tumhara tohfa... kaisa laga?”

Sabhya abhi bhi apni bhavnaon ko sambhal nahi pa rahi thi. Uski awaaz thodi kaanp rahi thi, “Bahut... bahut sundar hai. Bilkul mahal jaisa lag raha hai.”

Neelesh muskuraaya, uski aankhon mein shaitani chamak thi, “To phir is mahal ki rani... andar to chalo.”

Sabhya sharmili muskaan ke saath Neelesh ka haath majbooti se pakad kar aage badh gayi. Uske peeche-peeche saari auratein aur mard bhi andar ghus gaye. Har kadam par farm house ki bhavyata unhe aur bhi hairaan kar rahi thi.

Andar pahunchte hi sabke muh khushi se khule ke khule reh gaye. Poora hall Diwali ki tarah jagmaga raha tha. Deewarein phoolon aur lighton se saji hui, hawa mein halki meethi khushbu, aur hall ke ek taraf khoobsurati se sajaya gaya stage... jismein bade-bade aksharon mein likha tha — “Happy Anniversary”.

Sabhya aur baaki auratein to ye dekh kar khushi se pagal ho gayi. Unki aankhein chamak rahi thi, hothon par ankahi muskaan thi.

Phir mardon ne baaki sab auraton ko aaram se baitha diya. Sabhya ko dheere-dheere stage par le ja kar khada kar diya gaya. Neelesh bhi uske theek bagal mein aa kar khada ho gaya. Usne Sabhya ki taraf mud kar gehri, pyar bhari awaaz mein kaha,

“Saalgirah ki dher saari shubhkaamnaayein, meri rani.”

Sabhya ki aankhein nam ho aayi. Wo muskuraate hue boli, “Tumhe bhi ji... aaj tumne mujhe sach mein bahut khush kar diya. Ye tohfa... sabse sundar tohfa tha.”

Neelesh ki aankhon mein phir wo shaitani chamak laut aayi. Usne dheere se Sabhya ke kaan ke paas muh le ja kar fursfusaaya,

“Abhi tohfa poora kahan hua hai, rani... abhi to bas shuruaat hai.”

Sabhya ne hairani se uski taraf dekha, “Matlab?”

Neelesh muskuraaya aur zor se awaaz lagayi, “Karma... oh Karma! Le ke aa!”

Karma bagal wale darwaje se bahar nikla. Kuch palon baad jab wo wapas andar aaya, to uske chehre par chauri muskaan thi. Wo apni maa Sabhya ki taraf dekh kar muskuraaya aur ek taraf khada ho gaya.

Aur phir... usi darwaje se andar aayi — Shashi.

Neelesh ki wo khoobsurat, maadak, aur behad kaamuk behen. Jaise hi Shashi ne apni bhabhi Sabhya ki taraf dekha, uske hothon par shaitani hansi khil gayi. Sabhya ka muh bhi khushi se ekdum khul gaya.

Shashi furti se bhaag kar stage par chadh gayi aur Sabhya ki taraf lapki. Dono — ek taraf maadak kaamuk badan wali nanad, dusri taraf apni bhabhi — ek dusre se itne zor se gale mili ki unke mulayam, bhare-bhare jism ek-dusre se sat gaye.

Sabhya: Tu kab se aayi hui hai yahan?

Shashi: Ho gaya bhabhi ghanta bhar.

Sabhya: Lo ghanta bhar ho gaya aur ab mil rahi hai mujhse?

Shashi: Are pehle milti to tumhare sundar chehre par aise hairani aur khushi kaise dekhti.

Shashi ne uske gaalon ko chhute hue kaha.

Sabhya: Bachche kahan hain?

Itne mein peeche se awaaz aayi: Hum yahan hain mami, ye awaaz Poorvi ki thi jo unki taraf chalti aa rahi thi uske saath Vineet, uske papa, tauji aur taiji the, Poorvi bhi aa kar uske gale lag jaati hai.

Poorvi: Happy Anniversary meri sexy mami.

Sabhya: Aa gayi meri pyari bitiya.

Poorvi: Tumhari party ho hum na aayein meri jaan aise kaise ho sakta hai?

Sabhya: Paagal kahin ki? Achha tere sasural wale wo log kahan hain? Aur Pankaj?

Poorvi: Are unka kya kaam yahan? Unhe chhod aayi.

Poorvi hanste hue boli.

Sabhya: Hay daiyya dekho to jeeji kaise bol rahi hai.

Sabhya Savitri ke gale lagte hue bolti hai.

Savitri: Ab hum ka kahen banno, tu badi sundar lag rahi hai aaja.

Sabhya: Tum bhi jeeji.

Vineet: Meri pyari mami.

Vineet bhi gale lagte hue kehta hai.

Sabhya: Ab to mera pyara bhanja dulha banne wala hai.

Vineet: Haan dulhan tum bano to.

Poorvi: Haan mami kar lo byaah phir se dulha ye raha.

Sabhya: Apna dulha to laayi nahi tu mera byaah karwa rahi hai.

Poorvi: Are laayi hoon mami lo naam liya aur haazir.

Pankaj: Happy Anniversary mami ji, ye to humein chhod aayi thi par hum phir bhi chale aaye.

Pankaj gift ka ek bada sa dibba Sabhya ki taraf dete hue kehta hai, Pankaj ke saath uski maa Renu, behen Preeti aur pita Prakash bhi the.

Sabhya: Are dekho to badmaash ko kaise mazak karti hai.

Sabhya Pankaj se milti hai aur phir Renu bhi uske gale lagti hai aur kehti hai: Mubarak ho behan ji.

Poorvi: Are thoda kas ke milo samdhan banne wali ho dono.

Is par sab hanste lagte hain wahi Preeti peeche khade khade sharma rahi hoti hai.

Renu: Haan achhe se hi mil rahi hoon aur samdhan to pehle se hi hain.

Sabhya: Ye bhi baat bilkul sahi kahi behan ji.

Prakash: Are samdhi ke liye gale milne ka koi mauka nahi hai kya?

Is par sab hanste hain aur Renu kehti hai: Tum jao peeche khade hain samdhi ji unse milo.

Isi tarah hansi-mazak mein phir baaki sab bhi Sabhya se milte hain, unke baad Rimjhim aur uske sasural wale milte hain, Savita Rani Mahipal, Piyush bhi pehle hi aa chuke the, Anjali bhi ladkiyon ke saath aa gayi thi. Sabse mel-milap ke baad Chanchal jo ki ek party wear saadi mein thi aur wo saadi uske bhare aur kaamuk badan par khoob janch rahi thi wo peshaab karne ke liye ja rahi thi ki tabhi peeche se koi use baahon mein bhar leta hai wo chaunk kar dekhti hai aur kehti hai: Are tune to mujhe dara hi diya.

Karma: Kaisi ho didi?

Karma uske pet ko sahlate hue kehta hai.

Chanchal ne Karma ki majboot baahon mein thoda sikudte hue, lekin muskuraate hue jawab diya, “Achhi hoon tu... tu kaisa hai mera pyara bhai?”

Karma ne apni hatheli ko Chanchal ke naabhi ke neeche thoda aur neeche sarakte hue, garm saansein uske kaan mein daalte hue bola, “Main bhi achha hoon didi... lekin haay! Aaj tum kitni mast, kitni rasili lag rahi ho. Man kar raha hai yahin kha jaaun... in bhare-bhare chuchon ko, is chikni kamar ko, aur neeche jo kuch chhipa hai use chus-chus kar...”

Chanchal sharm se laal ho gayi, lekin uski aankhon mein bhi sharat jhalak rahi thi. Usne halke se Karma ki chhati par thapki maarte hue kaha, “Dhatt paagal kahin ka! Party par dhyaan de na... pehle mujhe susu jaane de. Bahut tez lagi hai. Phir bhale hi kha lena... jitna man kare.”

Karma ne majboor hokar apni pakad dheeli ki aur muskuraate hue bola, “Achha jao... jaldi aana. Waise tumhari devrani kidhar hai?”

Chanchal ne peeche mud kar ishaara kiya, “Yahin hogi kahin... Poorvi ke saath thi abhi.”

Ye kah kar Chanchal apni saadi ki pallu theek karti hui, kamar lachkati hui peshaab karne chali gayi. Uske peeche-peeche uski gol-gol gaand hil rahi thi, jo dekh kar Karma ka lund ek baar phir se tan gaya.

Karma ne gehri saans li aur aage badh gaya. Jinse abhi tak nahi mila tha, un sabse milne laga. Sabse pehle Chanchal ke maa-baap Udayveer aur Bimla se mila. Unke pair chhu kar aashirwad liya aur aage badh gaya.

Phir uski nazar padi apni hone wali bhabhi Khushi par, jo Vineet se baatein kar rahi thi. Khushi aaj behad sundar lag rahi thi — uski saadi uske nayi-nayi dulhaniya wale badan ko aise lapete hue thi ki uske ubhre hue stan aur patli kamar saaf nazar aa rahe the.

Karma seedha unke paas pahuncha, Vineet ko halke se dhakelte hue bola, “Are yaar, chhod mat dena tu bilkul bhi... ek pal ke liye bhi nahi!”

Phir wo Khushi ko zor se apni baahon mein bhar liya. Khushi ka naram, garm badan uske seene se sat gaya. Uske mote stan dab gaye aur ek meethi ragad paida hui.

Khushi ne sharmate hue lekin khush hokar poocha, “Kaise ho bhaiya?”

Karma ne use aur kas kar jakadte hue uske kaan mein fursfusaaya, “Achha hoon bhabhi... ab to aur bhi achha ho gaya. Waise ye Vineet tumse yun hi chipka rehta hai kya din-raat?”

Vineet hanste hue bola, “Achha! Jaise tu apni wali ko chhod deta hai. Sab pata hai mujhe teri aur Anjali ki kahani...”

Khushi ne sharmakar hanste hue kaha, “Are haan bhaiya, mujhe bhi milao Anjali se... maine suna hai wo bahut pyari aur... bahut sundar hai.”

Karma muskuraaya. Usne turant Anjali ko awaaz di, “Anjali... idhar aa na!”

Anjali paas aayi to Karma ne dono ko ek-dusre se milwaya. Anjali aur Khushi dono ek-dusre ko gale lagakar mili. Dono ki saadiyan aur badan ek-dusre se sate aur dono hi baatein karne lagi.

Thodi door hi Poorvi aur Rimjhim dono behenein khadi thi. Dono nayi-nayi saadiyon mein lipti hui, behad khush aur shaitani mood mein aapas mein mazak kar rahi thi.

Poorvi ki saadi to aise pahni hui thi ki uski gehri naabhi saaf dikh rahi thi, blouse itna tight ki uske bhare-bhare, doodhiya stan lagbhag bahar jhaank rahe the. Rimjhim ki saadi bhi kam nahi thi — uski moti, gol gaand aur patli kamar ka mel dekh kar kisi ka bhi man lalcha jaaye. Dono behnon ke kaamuk badan saadi ke kapde mein is kadar lipte hue the ki har hilne-dulne par unke angon ki lachak saaf nazar aa rahi thi.

Poorvi ne Rimjhim ke saamne khade hokar uski bhari-bhari chuchiyon ko ghoorte hue shaitani muskaan ke saath kaha, “Are yaar... tere ye gubbare har baar badhte kaise ja rahe hain? Jab dekhti hoon, aur bhi bade, aur bhi bhari milte hain.”

Poorvi ne apni ungli se Rimjhim ke chuchon ki taraf ishaara karte hue halke se daba bhi diya.

Rimjhim ne jhenpte hue lekin hanste hue Poorvi ke apne se bhari kharbuje jaise chuchon par nazar daali aur boli, “Kuch bhi mat bol! Tere jitne bade to mere ho hi nahi sakte na... khud to do-do kharbuje liye ghoomti hai! Chalte-firte inhe sambhalna bhi mushkil ho jaata hoga.”

Poorvi ne kamar lachkate hue apni gaand ko thoda aage nikaal kar kaha, “Tere chootad bhi to tarbuz jaise hain yaar! Abhi dekh kaise fudak-fudak rahe hain...”

Rimjhim ne Poorvi ki kamar par haath rakh kar use apne kareeb kheench liya, “Haay... ye nauk-jhonk tere saath kitni achhi lagti hai. Maza aa jaata hai.”

Poorvi ne purani yaadon mein khote hue kaha, “Abhi achhi lagti hai... bachpan mein kitna ladte the hum dono.”

Rimjhim ne hanste hue Poorvi ki naak pakad li, “Haan wo to hai... tu thi bhi badi kutiya bachpan mein.”

Poorvi ne muh banate hue natakiya andaaz mein bola, “Ho... dekho to kaise bol rahi hai! Main kutiya thi?”

Rimjhim ne turant pyar se uske gaal sahlaaye, “Achha-achha, mazak mein bola... muh mat bana meri jaan.”

Poorvi ne besharmi se aankh maari aur boli, “Main abhi bhi kutiya hoon... bas ab bade thanon wali.”

Ye sun kar dono behenein zor se hans padi. Unki hansi mein shaitani aur kaamukta dono thi.

Rimjhim ne abhi bhi hanste hue poocha, “Kutiya kahin ki! Achha, cold drink piyegi?”

Poorvi ne turant sahmatii mein sir hilaaya, “Haan chal... pyaas bhi lagi hai.”

Dono aage badhi. Thodi door ja kar Poorvi ne ek kone ki taraf ishaara karte hue hanste hue kaha, “Inhe dekh do... hanso ka joda ban gaya hai.”

Rimjhim ne dekha to Anuj aur Preeti kone mein khade the.

Rimjhim: Are karne de na maze unhe tu chal.

Dono aage badh jaati hain unke peeche kone mein Anuj aur Preeti the, Anuj Preeti ke hothon ko chum raha tha.

Anuj Preeti ke hothon ko bade pyar aur bhookh se chum raha tha. Preeti lehenge mein behad sundar aur sexy lag rahi thi — lehenge ka ghera uske gol chootadon ko achhe se ubhaar raha tha, blouse uske ubhre chuchon par tana hua tha. Anuj khud ko rok nahi pa raha tha, uske haath Preeti ki kamar par phir rahe the.

Anuj ne kiss ke beech saansein lete hue fursfusaaya, “Bahut sundar lag rahi ho tum aaj... ye lehenga tum par bahut khil raha hai. Tumhari ye kamar, ye hoth... sab kuch nashila lag raha hai.”

Preeti sharm se laal hokar boli, “Tum bhi bahut handsome lag rahe ho...”

Anuj ne aage hote hue kaha, “Isi baat par ek aur kiss ho jaaye...”

Preeti ne halke se use dhakel te hue kaha, “Nahi... sab dekh rahe hain. Mujhe sharm aati hai.”

Anuj ne hanste hue use aur kas liya, “Are yahan sab apne hi to hain... kaisi sharm?”

Preeti ne idhar-udhar dekhte hue fursfusaaya, “Are nahi... ye khana parosne wale, servants sab khade hain.”

Itne mein hi Neelesh ki gehri, bhavuk awaaz stage se goonji. Unhone Sabhya ka haath thaame hue kaha,

“Sabhi ko namaskar aur hriday se aabhaar... ki aap logon ne apna keemti samay hamare ek baar kahne par nikaala aur hamein aatithya karne ka saubhagya diya. Mere jeevan ka ye bahut khas avsar hai. Aaj hamari shaadi ko poore 25 varsh beet gaye.”

Neelesh ne Sabhya ke haath ko aur majbooti se dabaya, phir uski aankhon mein gehraai se dekhte hue bole,

“Waise to ye lamba samay hai... par aise humsafar ka saath ho to kam hi lagta hai. Jab se tum mere jeevan mein aayi ho, mera poora jeevan hi badal gaya. Jab apnon se door hua, tab tum mere saath thi. Jab naye rishte bane aur naye log apne ban gaye, tab bhi tum mere saath thi. Sochta hoon ki bina tumhare jo kuch thoda bahut aaj haasil kar paaya hoon, wo bhi nahi kar paata. Dhanyavaad, aabhaar... ye sab dusron se kaha jaata hai. Tumse kya kahna hai, ye main nahi jaanta... aur shayad zaroorat hi nahi padti. Tum sab bina kahe samajh jaati ho. Aaj bhi samajh jaogi na?”

Sabhya ki aankhein bhar aayi. Aansuon ke saath wo muskuraayi aur Neelesh ke seene se lag gayi. Karma, Anuj aur baaki sab bhi bhavuk hokar unhe dekh rahe the. Jaise hi Sabhya Neelesh ke chaude seene se chipki, poora hall taaliyon aur khushi ke shor se goonj utha.

Poorvi ne tez awaaz mein chilla kar kaha, “Mama-mami... aapne to mujhe bhi rula diya! Agar mere pati ne mujhe aisa pyar nahi kiya to main unhe ghar se nikaal dungi!”

Sab zor se hans pade. Pankaj ne turant mazak udaya, “Matlab tumhe pachees saal jhelna padega!”

Is par aur bhi tez thahake goonje. Mahoul aur bhi garm aur khushnuma ho gaya.

Shailesh ne stage se awaaz lagayi, “Are bhai sahab... bhabhi! Ab cake kaato na...”

Neelesh aur Sabhya dono cake ke saamne gaye. Taaliyon, seetiyon aur khushi ke shor ke beech dono ne ek saath cake kaata.

Neelesh ne ek tukda liya uthaya aur Sabhya ko chakhaya aur phir Sabhya ne Neelesh ko, iske baad Karma aur Anuj ne bhi apne maa papa ko cake khilaya, ghar ke bade yani nana bhi aage aaye aur beti aur jamai raja ko aashirwad diya aur Sabhya ne unhe bhi cake khila diya, unke baad dheere dheere baaki log bhi aate gaye aur kahin cake khilane ka to kahin muh par lagane ka program chalne laga, ladkiyan aapas mein bahut masti kar rahi thi, Neetu, Kiran, Anjali, Laado, Pallavi aur ab unke saath Preeti aur Khushi bhi mil gayi thi sab saath mein filmi gaano par dhamaal macha rahi thi, ladkon ka wahi haal tha jo aksar hota hai bichare kaam mein idhar se udhar lage hue the, kisi ko khane ki vyavastha dekhni thi to kisi ko peene ki, stage par photo khinchwane ka program chal raha tha mehman ek ek karke aa rahe the aur Sabhya Neelesh ko uphaar dete hue unke saath photo karwa rahe the, isi beech mein Rajan ne khoj kar Karma aur Anuj ko bhi stage par chadha diya ki poore parivaar ki saath mein ek photo karwa lo, dono apne maa papa ke saath khade hue to Sabhya ne Anjali ko bhi bula liya aur boli: Ye bhi parivaar mein hi judne wali hai, ab Anjali bhi akeli nahi gayi usne Preeti ka haath thaama aur lekar stage par chadh gayi us samay Preeti aur Anuj dono ki halat dekhne wali thi dono ke gaal sharm se tamatar ki tarah laal ho chale the, Anjali ne apne aur Sabhya ke beech Preeti ko khada kiya to Sabhya ne bhi pyar se apna sir apni hone wali chhoti bahu ke sir se tika diya aur phir poore parivaar ki kai photo li gayi.

Pichhron ke daur ke baad bahar khule mein khane ki vyavastha ki gayi thi jahan khane ka program chala sabne swadisht bane khane ka lutf uthaya, aur ji bhar ke khaya, khaate hue baaton ka aur naach gaane ka program saath mein chal raha tha, jo log aapas mein itna nahi mile the unhe bhi ek dusre ko jaanne ka mauka mil raha tha, kahin Rajpal Udayveer aur Sujan Singh ki jodi ban rahi thi to kahin Charan Singh, nana, Deenu aur Mahipal saath the, ek or Neelesh, Pradeep (Shashi ke pati), Shailesh, Rajan, Jamuna, Chetan, saath mein the wahi Vineet, Pankaj, Raman aadi Karma, Jaggu, Sarju, aur Piyush ke saath gappen lada rahe the.

Isi tarah auraton bhi aapas mein ghul mil rahi thi, Savitri aur Manju tai ki khoob jam rahi thi to Rajjo, Madhuri aur Mamta ki, wahi thodi sharmili Renu ko hamari hansmukh Gunjan aur Shalu bha rahi thi to Bimla Shashi aur Sabhya ek saath baithi thi. Ladkiyan to saari saath mein ghoom hi rahi thi, naach rahi thi, photo khinch rahi thi aur ab khana bhi kha rahi thi, hum umar bahuein aur nanadein bhi ek saath thi jaise Prema, Rani, Rimjhim, Poorvi aur Chanchal.

Khane ke baad phir se ek baar naach gaane ka program hua aur is baar sabki farmayish par Neelesh aur Sabhya ko bhi saath mein thumke lagane hi pade, andar ki or in sab ka naach gaana chal raha tha wahi saare ladke mil kar halwai ka saara taam jhaam ikattha karwa rahe the aur phir kuch hi der mein halwai aur uske log apna saaman lekar nikal gaye the, pehle se hi bada sa fridge aur chulha aur zaruri saaman Karma aur uski sena ne la kar rakha tha taaki halwai ke jaane ke baad bhi mehmano ko koi takleef na ho. Bahar se darwaja aadi laga kar ladke bhi andar pahunch gaye the aur naach gaane mein shamil ho gaye, ab jab sirf jaan pehchaan ke log hi reh gaye the to naach gaane ke saath saath chhed chhad bhi badh rahi thi.

Naach gaane ke baad thak-haar kar sab log baith gaye. Badon ke liye kursiyaan rakhi gayi thi to chhote to neeche hi pasar gaye. Cold drink ke glass baante gaye. Sab thandi-thandi cold drink peete hue phir se baatein karne lage.

Isi beech Kiran uthi. Sabka dhyaan apni taraf kheenchte hue usne muskura kar kaha,

“Sab logon ko mera namaste... pyari bua aur pyare fufaji, tum dono ke liye aur aap sabhi ke liye hum bachchon ki taraf se ek chhoti si bhent.”

Neelesh hanste hue bole, “Are bhai ab kaun si bhent reh gayi?”

Palli bhi uthte hue boli, “Bas dekhte jao tauji...”

Kiran, Palli, Laado, Neetu aur Anjali sab milkar stage par pahunch gayi. Unke ishaare par Sagar ne gaana chala diya. Paanchon ne ek dhamakedar gaane par naach pesh kiya. Poora hall taaliyon se goonj utha. Khaaskar Sabhya aur Neelesh ne khoob taaliyan bajayi.

Phir turant Kiran aur Palli andar chali gayi. Anjali sabka dhyaan baaton mein lagaye rakhi. Kuch der baad jab Kiran wapas aayi, to wo Sabhya ki hi saadi pahne hui thi — bilkul unhi ki tarah taiyar, baalon mein phool, makeup, sab kuch. Use dekh kar sab hanste lage, taaliyan bajne lagi. Sabhya balaayein le rahi thi, Shalu ne to ja kar paise bhi nyochhavar kar diye.

Dusri taraf jab Palli Neelesh ka kurta-pajama pahen kar stage par aayi, to poora hall taaliyon aur seetiyon se goonj utha. Neelesh sir pakad kar zor-zor se hans rahe the.

Phir gaana baj utha...

“Are o Jumma... meri jaan-e-man... bahar nikal... aaj Jumma hai... aaj ka vaada hai...”

Palli gaane ke bol par poora abhinay karte hue naachne lagi, wahi Kiran bhi heroine ki tarah nahi nahi karte hue sharma rahi thi, gaana jab tak khatam hua tab tak dono ne poora mahoul baandh diya tha aur har koi khushi se unke liye taaliyan peet raha tha, gaana khatam hone par sabne unka khoob josh badhaya, Shailesh ne sabhi ladkiyon ko ikkees sau-ikkees sau ka shagun bhi baant diya, Kiran aur Palli phir Neelesh aur Sabhya ko pakad kar stage par laaye aur unhe khada kar Palli boli: Waise itne achhe gaane ke baad chumma ho hi jaaye kya kehte ho aap log.

Poorvi: Are neki aur pooch pooch? Mama ho jao shuru.

Neelesh sabke saamne thoda sharmaaye aur bole: Are kya tum log bhi.

Rajan: Are bhai bachchon ka man hai to ho hi jaaye.

Shashi: Haan bhaiya bhabhi ho jaaye.

Sabke kahne par Sabhya aur Neelesh ek dusre ki or mudhe pyar se ek dusre ki aankhon mein dekha. Sabhya ne ek haath Neelesh ke kandhe par rakh liya to Neelesh ke haath Sabhya ki kamar par pahunch gaye aur phir dheere se dono ke hoth mile ek chhote par garm chumban ke liye.

Ek ke baad dusra... phir teesra... chumban lambe aur gehre hote gaye. Aas-paas ki awaazein jaise unke liye kam hoti gayi. Kuch palon baad dono poore josh se ek-dusre ke hoth chus rahe the. Neelesh ki jeebh Sabhya ke muh mein ghus gayi thi, haath badan ko sahla rahe the. Jab hoth alag hue to dono haanph rahe the. Unke garm chumban ko dekh poore hall mein garmi failne lagi.

Sabne taaliyan baja kar unka swagat kiya. Dono sharmate hue sabki or dekh rahe the.

Isi beech Poorvi stage par chadh gayi aur boli, “Dekha sabne? Dono mein aag abhi bhi utni hi hai jitni pachees saal pehle thi!”

Neelesh hanste hue bole, “Are tu bhi kya bol rahi hai?”

Poorvi ne sharat se aankh maari, “Are mama sharmanna kaisa? Yahan sab apne hi hain aur sabki ek jaisi soch bhi hai. To aap sabki taraf se aur apni taraf se main ye kahna chahti hoon ki chumma-chati to bahut dekh li... ab kuch aur dekhna hai.”

Neelesh ne hairani se poocha, “Kya?”

Poorvi ne seedhe, besharmi se kaha, “Chudai!”

Sabhya sharmakar boli, “Dhatt tu bhi na...”

Poorvi hanste hue boli, “Mami maan jao... nahi to meri sena tum par toot padegi!”

Idhar mard bhi Neelesh ko uksaane lage.

Rajan chillaaya, “Are saalgirah par nahi chodoge to kab chodoge bhaiya?”

Poorvi ne ladkiyon ki taraf ishaara kiya, “Are ladkiyon dekh kya rahi ho? Shuru ho jao!”

Poorvi ke kahte hi teen-teen ladkiyan dono par toot padi. Kuch hi palon mein Neelesh aur Sabhya ke saare kapde utar chuke the. Dono bilkul nange stage par khade the.

Neelesh ka lund pehle se hi kadak ho chuka tha, seedha tana hua, mota aur lamba. Sabhya ko ladkiyon ne unke saamne ghutnon par baitha diya. Jin mardon ne ab tak Sabhya ko nanga nahi dekha tha, wo use dekh kar aahen bhar rahe the — uske bhari-bhari doodhiya chuche, chikni kamar, aur saaf-suthri, gulabi choot dekh kar unke muh khule ke khule reh gaye. Auratein Neelesh ke tane hue lund ko aur Sabhya ke kaamuk nange badan ko ghoor rahi thi.

Poorvi aur baaki ladkiyan chillane lagi, “Chuso... chuso... chuso!”

Sabki awaaz sun kar Sabhya ne aage badh kar Neelesh ke mote lund ko haath mein pakad liya. Unki aankhon mein dekhte hue wo muskuraayi aur boli, “Saalgirah mubarak ho, mere raja...”

Aur ye kahte hue usne poora lund apne garm, geele muh mein bhar liya aur zor-zor se chusne lagi.

Neelesh ke muh se aah nikal gayi, “Oh aahhhh... meri rani...”

Sabhya haath se lund ko sahlाते hue, apne muh ka poora jaadu chala rahi thi — kabhi sir chusti, kabhi poori lambai gale tak le jaati, kabhi jeebh se lund ki nok ko chaati. Neelesh ki aankhein maze se band ho gayi.

Mardon ke lund kadak ho gaye, auratein apni choot mein garm nami mehsoos karne lagi. Lekin sab chupchaap dekh rahe the.

Rimjhim chillaayi, “Mama... pachees saal baad bhi wahi maza hai ya nahi mami ke muh mein?”

Neelesh haanphte hue bole, “Oh... zyada hi hai bitiya... bahut zyada!”

Rajan bola, “Are hamari bhabhi to aur garm hoti ja rahi hain!”

Poorvi hanste hue boli, “Sahi kaha... hamari mami to sharaab hai, jitni purani utni nashili!”

Pankaj bola, “Hamara bhi man kar raha hai sharaab peene ka...”

Palli turant sharat se boli, “Aao jeeja... neeche tanki se muh lagao, abhi pila deti hoon!”

Sab zor se hans pade.

Pankaj ne Palli ko ghoorte hue kaha, “Bilkul piyenge sali sahiba... tumhari sharaab bhi piyenge. Tum bhi kam nashili nahi lagti.”

Kiran boli, “Are jeeja... saaliyan to itni nashili hain ki peekar sab bhool jaoge!”

Poorvi ne hanste hue kaha, “Abhi bataati hoon tumhe... chupchaap stage par dekho aur kuch seekho!”

Pankaj hanste hue stage ki or dekhne laga.

Drishya ab badal chuka tha. Neelesh ne Sabhya ko stage par rakhi kursi par lita diya, uski taangein faila di aur apna mota lund pakad kar uski choot par thapthapane lage.

Neelesh ne gehri nazron se poocha, “Ghusa doon meri rani?”

Sabhya ne apne hoth kaat te hue kaamuk awaaz mein kaha, “Ghusa do na mere raja...”

Neelesh ne sabki taraf dekha aur zor se poocha, “Ghusa doon?”

Sabne garmjoshi se “Haan... haan...” karte hue shor machaya.

Neelesh ne ek gehra, jordaar dhakka lagaya aur apna poora lund Sabhya ki choot mein jad tak ghusa diya, aur dono ki ek saath gehri aah nikal gayi.

Sab log khush hokar shor machane lage, unka josh badhane lage.

Neelesh ne Sabhya ki aankhon mein dekha aur bole, “Abhi bhi wahi garmi... wahi kasavat... wahi aanand hai tumhari choot mein jo pachees baras pehle tha.”

Sabhya haanphte hue boli, “Oh ji... tumhara loda jaroor pehle se bhi bada ho gaya hai... tabhi to ye choot kasi hui lag rahi hai.”

Neelesh muskuraaye, “Tumhara badan saamne pa kar ye apne aap bada ho jaata hai.”

Ve aage jhuke, Sabhya ke hoth chusne lage aur saath hi dhakke bhi lagate rahe.

Jab chumban toota to Sabhya muskura kar boli, “Aisa lag raha hai jaisa pehli raat ko mehsoos hua tha... aah... suhaag raat par.”

Neelesh bole, “Aah... to ye hamari pehli raat hi to hai rani... aane wale aur pachees barson ki pehli raat... ya kahoon suhaag raat.”

Sabhya haanphte hue boli, “Aah... aah... par is baar suhaag raat par darshak bhi hain.”

Neelesh ne zor se dhakka lagate hue kaha, “Haan... pehli baar hum dono hi the... is baar itne hain... agli baar aur bhi honge.”

Sabhya ne hairani se poocha, “Agli baar aur?”

Neelesh hanste hue bole, “Aur kya... is baar bachche dekh rahe hain... agli baar naati-pote dekhenge!”

Sabhya sharmakar boli, “Agli baar tak hum log buddhe ho chuke honge.”

Neelesh ne tez dhakka lagate hue kaha, “To kya hua... budhaape mein chudai ka alag hi maza hoga.”

Shalu chillaayi, “Are premiyon ki kya baatein ho rahi hain... hamein bhi sunai deni chahiye!”

Palli ne sharat se kaha, “Aur tauji-taiji... bahut hua pyar se dheeme-dheeme... mehman aaye hain, inhe bhi dikhao Chodampur ki chudai kya hoti hai!”

Sabhya haanphte hue boli, “Suna ji... gaon ki izzat ka sawal hai... mujhe upar aane do.”

Neelesh ne lund nikaala, kursi par baith gaye aur bole, “Aa jao...”

Sabhya turant upar chadh gayi, pati ka mota lund apni choot mein liya aur zor-zor se uchhalne lagi. Shuru se hi koi dheeme-dheeme nahi — wo apni choot ko jad tak pati ke lund par maar rahi thi, phir upar uth jaati. Uske nange badan aur uchhalti-naachati chuchiyon ko dekh kar mardon ke muh mein paani aa raha tha, lund mein tanav badh raha tha.

Is baar koi dheeme dheeme nahi shuru se hi wo apni choot ko jad tak pati ke lund par marti hai aur phir upar jaati hai, uske nange badan aur uchhalti naachati chuchiyon ko dekh kar mardon ke muh mein paani aane lagta hai to lund mein tanav.

Palli: Aah aah ye hui na baat aah tauji, tai ji aise hi maza aa raha hai.

Palli apni choot ko kapdon ke upar se hi ragadte hue kehti hai.

Anjali: Bahut badhiya maa papa aise hi bahut achhe lag rahe ho.

Anjali bhi garm hote hue unka housla badhati hai, waise chudai ke liye unhe kahan kisi tarah ki prerana ki zaroorat thi wo dono hi is maamle mein kaafi khule vichaaron wale the.

Neelesh bhi Sabhya ki kamar thaame neeche se lund uski choot mein thonk rahe the.

Anuj aur Karma dono hi uttejit bhi mehsoos kar rahe the aur kahin na kahin bhavuk bhi, jo bhi Neelesh aur Sabhya se juda hua tha un sab ke liye hi ye khas aur bhavuk pal tha.

Kachchi aur garm uttejna ki kadhai mein kaamukta aur bhavna ka tadka aur lag jaaye to chudai ki daal bahut swadisht banti hai, aur usi ka lutf aaj sab utha rahe the, chakhne wale bhi aur soonghne wale bhi.

Aur usi bhavnatmak chudai ka asar kaho ya itne logon ke saamne pradarshan ke kaaran Sabhya apni poori ji jaan laga kar apne pati ke lund par uchhal rahi thi aur phir ek paap aisa aaya ki wo tezi se chillate hue dheeli pad gayi, uska badan machalte hue shaant ho gaya.

Use shaant hote dekh Neelesh ne wahi kiya jo har pati ka kartavya hota hai jab uski patni dheela mehsoos kare, Neelesh ne use god mein uthaya aur apne upar baitha liya aur uske chootadon ko thaam kar use apne upar uchhalne lage.

Darshakon mein garmi ab khul kar dikhne lagi thi. Koi apni chuchiyon ko masal raha tha, koi choot ragad raha tha, koi lund sahla raha tha, koi kisi ke badan ko chhoo raha tha.

Palli aage badh kar Pankaj jeeja ki god mein baith gayi. Pankaj uski moti chuchiyon ko masalte hue uski gardan chum rahe the. Palli apni chootad unke kadak lund par ghuma rahi thi.

Palli ne mazak karte hue kaha, “Aahiste jeeja... sali ki chuchi hain, tumhari rand behan ki nahi!”

Pankaj muskuraate hue use chumne laga.

Karma aur Anuj apni-apni bhavi humsafar se chipke hue maa-papa ki chudai dekh rahe the. Anjali ko Karma ka kada lund apne chootadon par chubhta mehsoos ho raha tha. Anuj ne to Preeti ke blouse mein haath ghusa diya tha.

Par sabki nazar stage par thi. Neelesh ab Sabhya ko kursi ke sahaare jhuka rahe the. Sabhya ne apne chootad ubhaar kar pati aur sabhi darshakon ke liye paros diye. Neelesh ne lund pakda, apni patni ke garm, kase hue gaand ke chhed par rakha aur ek jordaar dhakka laga kar andar saraka diya. Sabhya ki makhmali gaand cheer ti hui lund jad tak sama gaya.

Darshakon ne garmjoshi se taaliyan aur seetiyaan bajayi.

Neelesh ne utni hi garmi se Sabhya ki gaand maarna shuru kar diya.

Sabhya chillayi, “Aah... aah... aah ji... aise hi maaro... apni randi patni ki gaand... aah... maar-maar ke faad do... oh... aise hi!”

Neelesh kas-kas ke dhakke lagate hue bole, “Aah... sali kutiya... aah... le... kya garm gaand hai... aah... aah... aah!”

Mahipal ne Rajjo ko pakad kar uska blouse khol diya aur chuchiyon ko paaglon ki tarah chusne laga. Chetan Gunjan mami ke badan ko sahlाते hue unke hoth chus raha tha. Vineet Kiran ko kheench kar uske badan ka maza le raha tha.

Deenu ne Shashi ki moti chuchiyon ke beech muh ghusa rakha tha. Sujan Singh Rani ko god mein bithaaye hue the. Pradeep Shalu mausi ki chuchiyon ke deewane ho rahe the.

Sagar apni maa ka badla lete hue Chetan ki maa Madhuri ki naabhi chaat raha tha. Sarju, Karma ki hone wali saas Savita ko saamne bitha kar hoth chus raha tha. Piyush Rimjhim ke rasile hoth chus raha tha. Birju Poorvi ke saath tha. Jamuna mama ne Renu ko akele mein ghusa rakha tha. Prakash Prema bhabhi ke saath the. Nana Bimla ko apna anubhav dikha rahe the. Rajan chacha Savitri ko “Jeeji-jeeji” kah kar masal rahe the. Shailesh mausa Chanchal ki moti chuchiyon ko blouse se bahar nikaal chuka tha. Raman Mamta chachi ko pakad chuka tha. Charan Singh ki seva Neetu aur Laado dono behenein kar rahi thi. Khushi Karma aur Anjali ke paas pahunch kar dono ke hoth baari-baari chus rahi thi.

Sabka dhyaan stage par bhi tha, jahan chudai ab toofani ho chuki thi. Neelesh kursi se aage apni peeth par let gaye the aur Sabhya unke upar. Neeche se Neelesh ka lund Sabhya ki gaand ko bhed raha tha.

Sabhya apni moti, gol chootadon ko Neelesh ki god mein patak-patak kar maar rahi thi. Neelesh lete-lete neeche se zor-zor se apni kamar utha kar lund thok rahe the. Sabhya ki gaand poori tarah khul chuki thi, Neelesh ka mota, gadha lund jad tak andar-bahar ho raha tha. Har dhakke par Sabhya ke chootad lahra rahe the, uske bhari-bhari chuche upar-neeche uchhal rahe the aur poora hall unki chudai ki awaaz se goonj raha tha — “pach... pach... pach...”

“Aah... aah... mere raja... aise hi... tez... tez maaro meri gaand... aah... faad do aaj... oh...!” Sabhya haanphte hue chillayi, uske baal bikhar gaye the, paseena chamak raha tha.

Neelesh ne uske chootadon ko dono haathon se kas kar pakad liya aur aur tez dhakke lagane lage, “Aah... sali kutiya... le... le... teri ye garm makhmali gaand... aah... mera lund nigal rahi hai... 25 saal baad bhi kitni kasi hui hai re... oh...!”

Kuch der tak yahi jordaar chudai chalti rahi. Sabhya upar-neeche uchhal rahi thi, Neelesh neeche se thok rahe the, dono ki saansein tez ho gayi thi.

Hall mein mahoul ab poori tarah se kaamuk ho chuka tha, lekin koi bhi chudai nahi kar raha tha. Bas chhed-chhad, chuma-chati aur chuchiyon ko masalne ka maza chal raha tha.

Pankaj ne Palli ko apni god mein bitha rakha tha par ab Palli ne apna muh Pankaj ki or kar rakha tha aur dono ke hoth mile hue the. Pankaj ki dono hatheliyan Palli ke bhare-bhare chootadon par thi, wo zor-zor se masal rahe the. Palli apni choot unke kadak lund par ragad rahi thi, kapde ke upar se hi.

Karma Anjali se chipka hua tha. Uska ek haath Anjali ke blouse ke andar ghusa hua tha, wo uske naram chuchon ko daba-daba kar sahla raha tha. Anjali uski gardan chus rahi thi aur apni gaand uske lund par ghuma rahi thi.

Karma: Dekh lo aah humein bhi aise hi manani hai apni 25vi anniversary.

Anjali: Dekhna kya hai, bilkul manayenge maine to soch bhi liya hai main kya pehnoongi.

Anjali hanste hue kehti hai to Karma bhi uske hoth chusne lagta hai.

Anuj ne Preeti ko deewar se sata diya tha. Uska muh Preeti ke blouse mein ghusa hua tha, wo uske ek chuuche ko chus raha tha aur dusra haath se masal raha tha. Preeti ki aankhein band thi, wo karah rahi thi, “Aah... Anuj... kaat mat... chus... chus... oh...”

Mahipal Rajjo ki chuchiyon ko dono haathon se pakde hue tha, unhe zor se dabata aur chumta ja raha tha. Rajjo uski peeth par naakhun gadaaye hue thi. Chetan Gunjan ko peeche se pakde hue tha, uske chuchon ko sahlाते aur uske hothon ko chus ta hua. Vineet Kiran ki kamar par haath pher raha tha aur uske chuchon ko blouse ke upar se masal raha tha.

Poora hall chumne, chaatne, dabane aur karahne ki awaazon se bhar gaya tha. Wahi stage par bhi drishya badal chuka tha, Sabhya ab Neelesh ki or peeth karke baithi thi, Neelesh ka lund ab bhi uski gaand mein andar bahar ho raha tha, uske ghutne dono taraf faile hue the, choot poori tarah khuli hui dikh rahi thi, aur Neelesh ka mota lund uski gaand mein jad tak ghusa hua tha. Sabhya ne apne aanand ko aur badhane ke liye apni ungliyan bhi choot mein ghusa di thi.

“Aah... ji... aise... dekho sabko... tumhari aah patni ko aah dekh rahe hain aah meri aah khuli choot oh...!” Sabhya kaamuk awaaz mein boli.

Neelesh ne uske chootadon ko dono haathon se thaam liya aur neeche se zor-zor se lund thokna shuru kar diya. Sabhya ki gaand ab poori tarah khuli hui thi, lund har dhakke par jad tak ghus raha tha aur bahar nikal raha tha. Uske chuche tezi se uchhal rahe the, paseena chamak raha tha.

“Aah... aah... mere raja... faad do... poori gaand... aah... dekho sab... aah meri gaand chud rahi hai... oh...!” Sabhya chillayi, uski awaaz poore hall mein goonj rahi thi.

Neelesh bhi haanphte hue bole, “Aah... rani... kitni khuli hai teri gaand... aah... le... le... mera lund nigal... oh... 25 saal ki saari garmi.. aaj main teri gaand bhar doonga... aah...!”

Gati wahi tez thi. Sabhya apni gaand ko neeche patak-patak kar maar rahi thi, Neelesh neeche se thok rahe the. Dono ki saansein ek ho gayi thi. Hall mein sabki nazrein stage par thi. Chhed-chhad to chal hi rahi thi, lekin sabki aankhein Sabhya-Neelesh ki is khuli chudai par tiki hui thi.

Phir Neelesh ka lund aur bhi phool gaya. Unhone Sabhya ke chootadon ko kas liya aur zor-zor se dhakke lagane lage.

“Aah... rani... main jhadne wala hoon... teri gaand mein... aah... le... le... poora... oh...!”

Sabhya bhi apni choot mein ungliyan chalate hue chillayi, “Aah... ji... jhado... meri gaand mein bhar do... aah... main bhi... aah... aa rahi hoon... oh... raja...!”

Dono ek saath charam par pahunch gaye. Neelesh ka lund Sabhya ki gaand ke andar phadak utha aur garm-garm moti-moti dhaarein chhodne laga. Sabhya ka badan machal utha, uski choot se paani ki fuhaar nikli aur wo bhi zor se jhad gayi. Dono ki cheekhein poore hall mein goonj uthi — “Aahhhh... ohhhh...!”

Neelesh ki saari malai Sabhya ki gaand mein bhar gayi. Sabhya dheeli pad kar unke seene par gir gayi, dono haanph rahe the, badan paseene se tar.



हॉल में तालियां और सीटियां बजने लगी. सबकी आँखों में अभी भी गर्मी थी. सब जानते थे की रात अभी बाकी थी.

जारी रहेगी
 
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