Incest Katha Chodampur Ki - Page 33 - SexBaba
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Incest Katha Chodampur Ki

रिम- घर पर hi कुछ मज़ेदार करते हैं...

चंचल- मज़ेदार पर क्या?

रिम- वही तो सोचना है.

माधुरी - अरे ख़ुशी नहीं दिख रही?

चंचल - वो सो रही है मम्मी जी.

सूजन सिंह- विनीत भी गायब है?

चेतन- वो भी सो रहा है अरे ये बच्चे रात में देर तक फ़ोन चलते रहते हैं फिर लेट तक सोते हैं.

चरण सिंह - अरे कोई नहीं सोने दो यहाँ छुट्टियां मानाने आये हैं आराम करने तो करने दो, वैसे भी बारिश में क्या hi करेंगे.

पंकज- तो फिर क्या किआ जाये आज सोचो सब लोग..

बिमला- बिजली भी नहीं है जो टीवी वगेरा देख कर टाइम काट लें...

चंचल- हाँ अम्मा कुछ और hi सोचना पड़ेगा.. ऐ रिम्मी कुछ सोच न.

रिम- सोच रही हूँ जीजी पर मैं क्या सबब सोचो न... ऐ जी तुम hi सर्च करो न मोबाइल पर कुछ मिल जाये तो...

रमन- एक काम कर सकते हैं... अब आगे.


अपडेट 197

चंचल- क्या?

रमन- अंताक्षरी खेल सकते हैं.

सावित्री - न भैया न ये गण गंवाना नहीं होगा क्यों.

माधुरी- हाँ हमसे भी नहीं होगा..

रिम- अरे मज़ा आता अंताक्षरी में.

उदयवीर- तुम बच्चो का मन हो तो खेल लो अब हमें कहाँ गण याद है कोई.

Poorvi-nahi चाचाजी खेलेंगे तो सब hi...

चंचल- हाँ, खेलेंगे तो सब लोग hi.

पंकज- अरे रमन भाई वो पेन वाला खेल hi बताओ सबको,

पंकज ने रमन को आँख मरते हुए कहा, ये सुनकर जितने भी लोग ये खेल चुके थे वो चौंक गए, रमन भी..

रमन- क्या अरे वो.. वो रहने दो...

रिम- क्यों सही तो था वो hi मज़ेदार था

चेतन- हाँ हाँ वो नहीं कुछ और करते हैं.

चेतन ने रिम्मी को आँखें दिखते हुए कहा...

माधुरी- ऐसा कौनसा खेल था हमें भी बताओ.

सूजन सिंह- हाँ भाई क्या पता हम भी खेल पाएं. क्यों भाई साब.

चरण सिंह - हाँ हाँ बिलकुल. बताओ भाई.

अब रमन का चेहरा देखने लायक था फिर भी वो बातें बनता हुआ बोलै- अरे पापा बेकार सा था वो कुछ और खेलते हैं तुम सब को पसंद नहीं आएगा..

बिमला- अरे बताओ तो छोटे दामाद जी.. अब कछु नहीं तो ये hi खेल लेंगे...

चेतन- अरे तुम सब लोग समझ नहीं रहे, ये साधारण खेल नहीं है.

चेतन झुंझुला कर बोलै.

सूजन सिंह- फिर कैसा खेल है बीटा?

चेतन - एडल्ट खेल है... पंकज भैया तुमने hi धुन लगाडी तुम hi समझाओ..

उदयवीर- दुलत खेल ये कैसा नाम है.

पंकज- अरे चाचाजी, एडल्ट खेल मतलब बड़ों का खेल..

चरण सिंह - अरे तो अब और कितने बढे होंगे हम, अब तो खेल hi सकते हैं. हाहाहाहा.

चेतन और रमन बेचारे परेशां थे की अगर खेल खेला गया तो गड़बड़ हो जाएगी...

चंचल ने चेतन को शांत रहने का इशारा किआ साथ hi चेतन को धीरे से ये भी बोलै- रिस्क ले लो अगर माँ चाहिए तो..... इधर रिमझिम ने भी रमन को आँख मार कर आगे बढ़ने का इशारा किया..

रमन ने गहरी सांस ली और बोलै- तो सब लोग सच में ये खेलना चाहते हो?

सबने हामी भरदी...

चेतन- पर पहले खेल के बारे में जान लो..

माधुरी- हाँ बताओ कैसे खेलना है..

रमन ने फिर सबको खेल के नियम बताये जिस पर पेन जा सिरा रुका उसे सामने वाले के साथ जो लिखा होगा वो करना होगा.

सूजन सिंह- लग तो मज़ेदार रहा है,

बिमला- हाँ भाई साब ऐसा खेल पहले नहीं सुना हमने भी.

चरण सिंह - तो खेलते हैं न फिर.

रमन- उससे पहले मैं पहले hi सबको बता रहा हूँ की कुछ भी लिखा आ सकता है बाद में मत बोलना की ये नहीं करना वगेरा वगेरा, अगर चाहो तो अभी से मत खेलो.

उदयवीर- ये तो कुछ ज़्यादा hi गंभीर खेल लग रहा है,

सूजन सिंह- अरे तो हम भी कहाँ डरते हैं क्यों भाई साब.

चरण सिंह - और क्या जो होगा देखा जायेगा.. क्यों तुम औरतों का क्या कहना है?

माधुरी- हूँ तीनो तो तैयार हैं क्यों बिमला?

बिमला- हाँ हम तैयार हैं, बच्चों तुम लोग.

बिमला ने चंचल रिमझिम और पूर्वी की और पूछा.

रिम- हम भी तैयार हैं चची...

चंचल और पूर्वी ने भी हामी भरी.

रमन- चलो ठीक है फिर शुरू करते हैं...

रमन ने फिर सबको एक गोले में बिठा दिया जिसको जहाँ जगह मिली बैठ गए और इतने में रिम्मी एक बड़ी थाली और बेलन ले आई,

पंकज- बेलन किस लिए?

रमन- आज लोग ज़्यादा हैं तो गोला बड़ा है पेह छोटा रहेगा बेलन सही है. और बेलन को एक तरफ से धागा बांध दिए है जिस तरफ धागे वाला सिरा रुकेगा वो hi पकड़ा जायेगा.

चंचल - हाँ ये सही रहेगा,

रमन- लो पंकज भैया, अपनी ज़िम्मेदारी तुम पकड़ो,

रमन ने फ़ोन पकड़ते हुए कहा.

चरण सिंह - पंकज बीटा की ज़िम्मेदारी मतलब?

रमन- अरे किसको क्या करना है वो फ़ोन में hi लिखा है,

सूजन सिंह- ाचा अच्छा..

रमन ने थाली में रखे बेलन को घुमाया और सब ध्यान से उसे देखने लगे और बेलन सबसे पहले सबकी लाड़ली चंचल पर hi आकर रुका...

चंचल- अरे दादा इतने लोगो के बीच ये हम पर hi रुकना था.

रमन- बताओ पंकज भैया क्या लिखा है भाभी की किस्मत में,

चरण सिंह- अरे अब समझे जिस पर बेलन रुकेगा उसे जो पंकज पढ़ कर काम बताएगा वो करना होगा.

माधुरी- बड़ी जल्दी समझ गए जी..

इस पर सब हंसने लगे,

रिम- अरे जीजा पढ़ो न, देखें तो जीजी की किस्मत में क्या लिखा है.

पंकज- हाँ भाई पढ़ते हैं, तो भाभी तुम्हारे लिए लिखा है- सामने वाले खिलाडी के पसंद के गाने पर नाचना है.

चंचल- धत्त तेरी की.

रिम- मज़ेदार.

बिमला- हाय ढैय्या इसमें भी नाच गाना करना पड़ेगा का?

चेतन- हाँ अम्मा पर जिस पर आये लिखा उसे hi...

सावित्री - किस्मत की बात है फिर तो...

चंचल- पूर्वी, बताओ अपना पसंद का गण ..

चंचल ने खड़े होते हुए कहा...

पूर्वी जो की चंचल के सामने बैठी थी बोली- अरे जीजी कोई भी भोजपुरी गाने पर कमर हिलाडो..

रिम- अरे वाह क्या सही चुना है पूर्वी रुक अभी चलती हूँ एक मस्त भोजपुरी गण

रिमझिम फ़ोन में गाना ढूंढ कर चलने लगी तो सबकी नज़र चंचल पर थी जो गण चलते hi थोड़ा शरमतर हुए नाचने लगी, उसका गदराया बदन और गोरी कमर हिलते देख मर्दों के लुंड उठने लगे





वैसे तो वहां मौजूद सभी मर्दों ने सिवाए उसके बाबा के सबने उसके बदन को भोग लिए था.. पर बेटी को नाचते देख आज उदयवीर को भी एहसास हुआ की उसकी बेटी कितनी सुन्दर है...

पूर्वी और रिम्मी से किसी मामले में काम नहीं, पूर्वी का ख्याल आते hi उनके दिमाग में रात की यादें ताज़ा हो गयी, हाय कल की रात कभी नहीं भूल पाउँगा मैं, जितना मज़ा पूर्वी के बदन को भोगने में आया, वैसे चंचल बिटिया का तो बदन तो उससे भी गदराया हुआ है चंचल बिटिया के साथ और मज़ा आएगा, अरे छी छी ये क्या सोच रहे हैं हम... ये कहकर उदयवीर ने अपने दिमाग को झटका,

इतने में hi चंचल हँसते हुए जगह बदल कर बैठ गयी और खेल आगे शुरू हुआ, चंचल ने आगे आकर बेलन घुमाया जो की सूजन सिंह पर आकर रुका तो सब ताली पीटने लगे.

चंचल - अरे वाह चाचाजी..

माधुरी- अब तो समधी जी नाचेंगे.

सूजन सिंह- अरे संधान जी जो लिखा होगा वही करना है..

चरण सिंह- हाँ क्या पता क्या निकले. पंकज भाई बता तो पढ़ कर.

पंकज- हाँ चाचा पढ़ते हैं., ताऊजी तुम्हारी बरी में लिखा है- सामने वाले खिलाडी के लिए कोई गण गायें...

सूजन सिंह- अरे धत्त्त तेरी की गण कैसे हो पायेगा,

रमन - वो भी मम्मी के लिए गण है पापाजी,

रमन ने कहा तो सूजन सिंह का ध्यान गया की सामने संधान माधुरी थी...

माधुरी- ये सुन शर्माने लगी,

चंचल - गाओ न चाचाजी...

सूजन सिंह- अरे बिटिया अब हमें तो कोई गण याद hi नहीं.

ऋण- अरे पापा याद करो न..

सावित्री- अरे संधान जी तुम hi बोलो न गाने को क्या पता तुम्हारे किये गए दें.

माधुरी- गायें न समधी जी..

माधुरी ने शरमाते हुए कहा...

चरण सिंह - लो भाई अब तो संधान ने भी बोल दिया, सोचलो बेटी की सास की बात नहीं मानोगे..

इस पर सब हंसने लगे,

सूजन सिंह ने थोड़ा सोचा फिर थोड़ा झिझकते हुए बोले- कहाँ फंस गए यार, ाचा तुम लोग भी हमारा साथ देना,

थोड़ा सा झिझकते हुए सूजन सिंह ने गण शुरू किआ- आज हमारे दिल में अजब ये उलझन है... गाने बैठे गाना सामने संधान है..

ये गण सुनते hi शोर मचने लगा और सीटियां बजने lagi..sabka साथ पाकर सूजन सिंह ने यही लाइन एक दो बार और दोहराई फिर हँसते हुए हाथ जोड़ लिए...

उदयवीर- भाई साब मज़ेदार...

चरण सिंह- अरे वाह समधी जी इस प्रतिभा का नहीं पता था तुंहारी.

सूजन सिंह- अरे काहे टांग खींच रहे हैं समधी जी. चलो चलो अब आगे खेल करो रमन बीटा.

रमन- जी पापाजी...

ये कहकर रमन ने hi उनकी जगह बेलन घुमा दिया जो की थोड़ी देर घूमने के बाद बिमला पर जा कर रुका,

सब अरे वाह करके खुश हो गए वहीं बिमला थोड़ा घबरा गयी.

बिमला- हाय ढैय्या हमसे नहीं होगा नाच वगेरा.

रिम- अरे चची डरो मत पापा ने भी तो गया न.

सूजन सिंह- हाँ भाभी जी बस थोड़ी सी हिम्मत दिखानी है जैसे हमने दिखाई थी...

सूजन सिंह की बात सुनते हुए बिमला को रात के नज़ारे याद आ गैर जहाँ सूजन सिंह और विनीत ने मिलकर उसकी जबरदस्त चुदाई की थी, वो ये सोच hi शर्मा गयी और इतना hi बोली- ग भैया कोशिश करुँगी

चंचल - अरे अम्मा हो जायेगा, हम जानते हैं तुम कर लोगी,

बिमला ने अपनी बिटिया को देखा जो की उसका हौसला बढ़ा रही थी और रात के बाद अब उसे चंचल बेटी के साथ साथ एक सहेली भी लगने लगी थी,

रमन - पंकज भैया अब पढ़ो तो सही पता लगे अम्मा को क्या करना है.

पंकज- ग भैया अभी लो, हाँ तो चची तुम्हारे लिए लिखा है- सामने वाले खिलाडी के साथ मिलकर नाचना है किसी प्यारे से गाने पर.

बिमला- लो आ गया न नाचना.

रिम - पर चची अकेले थोड़े hi नाचना है, अपने दामाद के साथ नाचना है,

रिमझिम ने बताते हुए कहा क्यूंकि बिमला के सामने चेतन hi था,

पूर्वी- अरे वाह ये बानी सास और दामाद की जोड़ी.

चंचल- हाँ मज़ा आएगा...


चेतन और बिमला एक दुसरे को देख शर्माने लगे, कल जो कुछ हुआ था उसके बाद दोनों में ज़्यादा बात भी नहीं हुई थी तो दोनों hi थोड़ा असहज महसूस कर रहे थे, पर कल और रात के बाद से बिमला इतना तो खुल चुकी थी की उसने सोचलिअ वो पीछे तो नहीं हटेगी.

इसलिए खड़े होते हुए उसने बोलै - आओ दामाद जी जल्दी निपटाते हैं.

बिमला से ये सुनकर सब थोड़ा हैरान हुए और खुश भी यहाँ तक की उदयवीर भी अपनी पत्नी को खुलते देख हैरान हो गए पर साथ hi बहुत खुश भी क्यूंकि वो खुद चाहते थे उनकी पत्नी भी खुश रहे ज़्यादा सोचे न और समय का लुत्फ़ उठाये,

चेतन अपनी सास की बात सुनकर खड़ा हुआ और फिर दोनों hi एक और गए,

चेतन- पर गण कौनसा है,

रिम- अभी चलती हूँ कोई रोमांटिक सा.

बिमला- पर हमें नहीं आया तो नाचना उस गाने पर तो?

चेतन- अरे अम्मा तुम हमारा साथ देती रहना बाकि हम सब संभल लेंगे.

चेतन की ये बात सुनकर बिमला को बड़ी ख़ुशी और रहत दोनों मिली,

रिमझिम ने जल्दी hi सरक काजोल का गेरुआ गण लगा दिया और सब ताली बजने लगे,

इधर चेतन अपनी सास के हाथ पकड़ उन्हें अपने कंधे पर रखा और अपने हाथों को अपनी सास की कमर पर रखे और धीरे धीरे इधर उधर हिलने लगे, पहले तो बिमला अपनी कमर पर हाथ पाकर चौंकी पर फिर उसने खुद के दिमाग और बदन को ढीला छोड़ दिया और चेतन अपनी सास को अपने साथ नाचने लगा कभी खुद से चिपकता तो कभी घुमाकर बाहों में ले लेता,

बिमला ठहरी गाओं की नारी उसे कहाँ ऐसा रोमांस करने का मौका मिला था, पर आज अपने दामाद के साथ ये कुछ पल उसे बहुत भ रहे थे, चेतन तो अपनी सास का भरा हुआ बदन महसूस कर उत्तेजित होने लगा था साथ hi खुश भी था..

वैसे सफ़ेद सारी में बिमला के भरे बदन को झूमते देख बाकि मर्दों का मन भी उत्तेजित होने लगा था, चरण सिंह मन hi मन सोचने लगे थे की चंचल को बदन संधान से hi मिला है, उनके लुंड में भी हलचल होने लगी थी, वहीं उनके बेटे रमन का भी यही हाल था, पंकज भी लुंड थामे हुए आँखें जमा कर देख रहा था, सूजन और चेतन hi खुद को खुशनसीब मान रहे थे जिन्होने इस बदन को भोगा था, इधर उदयवीर को अपनी पत्नी को दामाद के साथ देख खुद नहीं पता क्या हो रहा था पर वो उत्तेजित महसूस कर रहे थे,

इधर गाने का अंत होते हुए चेतन ने अपनी सास को पीछे से पकड़ा और उठाते हुए घुमाकर बापिस खड़ा कर दिया,





इतने hi समय में बिमला को अपने चूतड़ों के बीच दामाद का लुंड चुभता हुआ महसूस हुआ तो वो और खुश हो गयी उसे भी नहीं पता क्यों..

खैर दोनों का नाच ख़तम होते hi सबने ताली बजा कर दोनों का स्वागत किआ,

रिम- वाह भैया और चची सच में सरक काजोल की तरह नेचर हो.

माधुरी- हाँ भाई सास दामाद की जोड़ी ने आज रंग जमा दिया.

सावित्री- अरे हम तो बिमला को देख हैरान हैं कितनी सुन्दर लग रही थी नाचते हुए और लगा hi नहीं पहली बार hi कर रही है.

चंचल - हाँ ये तो सही कहा चची मज़ा आ गया देखकर.

चरण Singh-sach में मज़ेदार था..

दोनों ने सबको धन्यवाद् किआ और जगह बदलकर बैठ गए खेल आगे शुरू हुआ और इस बार बेलन चरण सिंह पर आकर रुका,

सूजन सिंह- अब फंसे समधी जी,

चरण सिंह- हाँ यार न जाने क्या करना पड़े इस उम्र में.

पूर्वी- लो अपनी बरी आते hi चाचाजी को उम्र याद आ गयी.

माधुरी- मैं तो कह रही हूँ नाचने को आ जाये तो देखो न जाने क्या क्या याद आएगा.

चरण सिंह- अरे शुभ शुभ बोलो, पंकज बीटा पढ़ दे जल्दी.

सब उनकी नोकझोंक सुन हंसने लगे,

पंकज- चाचाजी तुम्हारी बरी में लिखा है- अपनी सुहागरात की कहानी सुनाओ..

ये सुन सब थोड़ा सा झेंप गए तो कुछ को हंसी आने लगी

चरण सिंह- अरे धत्त्त ऐसे थोड़े hi होता है.

माधुरी - और का ये भी कोई बताने वाली चीज़ है,

चेतन- इसीलिए हमने पहले hi बोलै था की कुछ भी करना पद सकता है..

रमन- हाँ एडल्ट खेल है तो ये सब तो पहले hi बताया गया था,

Savitri-waise बताने में बुराई hi क्या है?

माधुरी- धत्त्त यहाँ बच्चे हैं इनके सामने..

उदयवीर- हाँ बच्चे हैं अच्छा नहीं लगता.

रिम- बच्चे तो ऐसे बोल रहे हो हमें जैसे हम सब दूध पीते बच्चे हैं.

रिमझिम ने कहते हुए रमन को इशारा किआ की साथ दे,

रमन- हाँ अब खेल hi रहे हैं और सब शादीशुदा भी हैं.

सावित्री- हाँ समधी जी बच्चे बढे हो जाएं तो उन्हें दोस्त समझना चाहिए...

माधुरी- अरे बच्चों को ाचा नहीं लगेगा...

सूजन सिंह- अरे बच्चों से hi पूछ लेते हैं वो जैसा कहेंगे वैसा कर लेंगे, क्यों भाई साब.

Udayveer-haan ये सही रहेगा. तो बताओ बच्चों..

रिम- हम तो इंतज़ार में हैं सुनने के,

चंचल - और क्या मज़ा आएगा मम्मी जी और पापाजी के बारे में सुनकर..

रमन- मुझे भी कोई दिक्कत नहीं,

चेतन- मुझे भी नहीं और मम्मी पापा समाज के बनाये नियमो और शर्म छोडो यहाँ आराम करने और आनंद लेने आये हो परिवार के साथ तो खुलकर लो..

चेतन के ये कहने पर चंचल ने उसे छुपके एक चुम्मे का इशारा किआ ये जताते हुए की उसने बहुत सही बोलै...

पंकज- और क्या शर्म के चक्कर में या समाज के हिसाब से चलें तो क्या जो कुछ मज़े मिलते हैं वो मिल सकते...

सूजन सिंह- हाँ भाई ये तो जिंदगी में हमने जाना है की असली मज़ा थोड़ा गलत होने पर hi मिलता है,

ये बात सुनकर सबके मन में अपने अपने काण्ड चलने लगे और जल्दी hi सब लोग हामी भी भरने लगे,

चरण सिंह- ठीक है बच्चो तो सुनो,

Chanchal-je बात.

चरण सिंह ने अपनी सुहागरात के बारे में बताना शुरू किआ हालाँकि उतने अचे से नहीं फिर भी उनका बताना hi रमन और बाकि सब के लिए एक जीत था और चरण सिंह की बात सुनते हुए भी चेतन, रमन, पंकज, चंचल, रिम्मी, और पूर्वी इसे अपनी जीत मानकर मुस्कुरा रहे थे, क्यूंकि इससे आगे का रास्ता खुलता नज़र आ रहा था,

खैर चरण सिंह ने बताना जारी रखा पर बिलकुल सभ्यता के साथ जैसे छूट लुंड की जगह योनि और लिंग और चुदाई की जगह सम्भोग शब्द का प्रयोग किआ, और ये सुन माधुरी नज़रें नीचे किये शर्माए जा रही थी,

बिमला- इन्हे देखो कैसे शर्मा रही हैं नयी दुल्हिन की तरह,

रिम- अरे चची जब की बात है तब तो मम्मी जी नयी दुल्हन hi थी न.

चंचल- हो सकता है मम्मी जी को वो रात याद आ गयी हो,

माधुरी- अभी बताती हूँ तुम दोनों को, हमें छेड़ रही हो...

चंचल - ाचा मम्मी जी एक बात पूछूं?

माधुरी- पूछ...

चंचल- कितनी बार हुआ था?

माधुरी- क्या कितनी बार हुआ था?

चंचल- छुऊं,... वो ससस सम्भोग..

एक पल को तो सबकी आँखें बड़ी हो गयी थी जो चंचल बोलने वाली थी वो सुनकर फिर आखिर में चंचल ने खुद को संभाला...

माधुरी- धत्त्त पिटेगी अभी tu.dekh लो संधान अपनी बिटिया को क्या क्या पूछ रही है..

बिमला- अब तुम सास बहु की बात तुम जानो हमें कुछ नहीं पता.

बिमला का बेबाक जवाब सुन माहौल और बन गया,

रिम - क्या मम्मी जी बहुएं हम हैं शर्मा तुम रही हो ..

माधुरी- तीन बार...

माधुरी ने शरमाते हुए कहा...

इस जवाब पर एक बार फिर से शोर मचा वहीं चरण सिंह और माधुरी शर्माए हुए हंस रहे थे.

माधुरी- अब खेल भी आगे बढ़ाओ..

रमन- हाँ हाँ,

ये कह रमन ने फिर से बेलन घुमाया जो की सावित्री पर आकर रुका,

माधुरी- अब फांसी बीटा बहुत. मज़े ले ताहि थी दूसरो के.

बिमला- कोई नहीं अब हम मज़े लेंगे.

सावित्री- तो का हुआ हम डरते थोड़े hi हैं, पंकज बीटा बताओ क्या लिखा है..

चंचल- ये हुई बात चाची...

रिम- ऐसे hi जोश में खेला जाता है खेल तभी मज़ा आता है...

पंकज- सुनो तै जी तुम्हारी बरी में लिखा है- लो तुम्हे भी नाचना है एक कामुक गाने पर...

चंचल - आज सबको नाचना पद रहा है...

रिम- हाँ

माधुरी- तैयार हो संधान जी...

सावित्री- हाँ बिलकुल गण तो बजाओ कोई.

सावित्री ने खड़े होते कहा, चरण सिंह और उदयवीर उत्सुक हो गए संधान का नाच देखने के लिए...

खैर रिमझिम ने अपनी मम्मी के लिए भी एक भोजपुरी गण लगा दिया और सावित्री भी पूरे जोश में अपनी भरी चूचियां हिलाते हुए थिरकने लगी.. पल्लू तो पहले झटके में hi सरक कर उनकी चूचियों का मादक नज़ारा सबको देने लगा,





भोजपुरी गाने भी कामुकता से भरे होते हैं ये भी वैसा hi रहा तो सावित्री को अपने नाच में भी वैसी hi कामुक भाव चेहरे पर दिखने पड़े जिससे देखने वालों के भाव बदलने लगे, रमन जो की अपनी माँ और भाभी और बहन को छोड़ hi चूका था अब अपनी सास को लेकर भी उसके मन ने अरमान उठने लगे वहीं उदयवीर और चरण सिंह भी सावित्री के जलवों से बचे नहीं रहे, चेतन खुश था जी की उसने रात को इस बदन को भोग लिए है..

खैर जल्दी hi ये नज़ारा भी बंद हुआ, क्यूंकि गण ख़तम हो गया था, और सावित्री हांफती हुई जगह बदल कर बैठ गयी, सबने ताली बाज़ा कर उत्साह बढ़ाया खैर खेल आगे चला बेलन एक बार फिर से घूमा और इस बार मनो सावित्री ने कोई जादू किआ हो माधुरी पर आकर रुका...

सावित्री- अब आये मज़े,

माधुरी- कौनसा टोटका कर दिया तुमने,

रिम- अरे मम्मी जी टोटका नहीं है बेलन ने तुम्हे चुना है,

माधुरी- चुना नहीं फंसाया है.

चरण सिंह- अरे हमारी बारी में बफी खुश हो रही थी अब खुद की आई तो फंसाया है.

माधुरी- ाचा ठीक है न, पंकज बीटा क्या लिखा है पढ़ तो.

पंकज- चची तुम्हारी बरी में लिखा है- अपने सामने के खिलाडी के कहे हुए गाने पर नाचना है.

माधुरी- ले कितना नाचना नाचना आ रहा है...

सावित्री- अब आ गया तो नाचना तो पड़ेगा hi,

बिमला- और क्या हम भी तो नाचे थे.

माधुरी- तुम लोग hi बदला ले रहे हो,

पूर्वी- चलो चाचाजी नचाओ अपनी संधान को.

पूर्वी ने उदयवीर से कहा जो की माधुरी के सामने थे,

उदयवीर- अरे हम कक बताएं जो ठीक लगे करलो.

रिम- ऐसे कैसे चाचाजी इतना ाचा मौका मिला है बेटी की सास को नाचने का,

चंचल - हाँ बाबा, छोडो मत.

सबके उकसाने पर उदयवीर ने कुछ सोचा और बोले- संधान जी का नाम माधुरी है तो माधुरी दीक्षित के hi किसी गाने पर हो जाये.

रिम- अरे वाह क्या आईडिया निकला है चाचाजी.

रिम्मी ने अपने फोर में कोई गण ढूंढते हुए कहा.

इधर माधुरी सबको देख शर्मा रही थी

चंचल- तैयार हो मम्मी और शर्माना छोडो,

रमन- हाँ मम्मी शर्माओ मत खुलकर मज़े लो,.

रमन की बात से माधुरी को अपनी और बेटे की चुदाई याद आ गयी जिसे याद कर उसके अंदर की शर्म जैसे गायब हो गयी उसने सोचा जब बेटे से छुड़वा सकती हूँ तो ये क्या चीज़ है,

तभी रिम्मी ने गण भी चला दिया और गण भी धक् धक् करने लगा,

माधुरी भी माधुरी की तरह अपना सीना और बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर नीचे करते हुए कमर हिलने लगी, कुछ hi पलों में उनकक पल्लू नीचे गिर गया जिसको उठाने की माधुरी को कोई ज़रुरत नहीं दिखी और वो कमर हिला हिलाकर नाचने लगी





और उसका भरा हुआ गोरा बदन मांसल पेट और गहरी नाभि देख कर जो लुंड अब तक आधे आधे उठे थे अब पूरे उठ गए थे, रिम्मी आउट चंचल भी अपनी सास का ये रूप देख खुश थी,

चेतन तो अपनी माँ को देख सोचने लगा अभी उठ कर छोड़ दूँ सबके सामने तो वहीं दोनों संधियों का भी बुरा हल था, बस पंकज और रमन खुश थे क्यूंकि वो लोग पहले hi उसे छोड़ चुके थे...

खैर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ ये नाच भी ख़तम हुआ जिसमे उदयवीर तो अपनी संधान पर लट्टू हिहो गए,

खेल आगे बढ़ा और इस बार बिमला पर आकर रुका जो किलसते हुए बोली- अरे ये तो हमारे पीछे hi पद गया है...

माधुरी- अब ये तो बेलन और तुम्हारी दोस्ती है..

सावित्री- हाँ चलो दामाद जी बताओ पढ़ कर बिमला रानी को क्या करना है अब.

बिमला- हाँ बताओ लल्ला देखते हैं क्या होता है..

पंकज- ग चची तुम्हारी बरी में लिखा है- पसंद के गाने पर नाचना.

बिमला- अरे फिर से नाचना ये कैसा खेल है.

माधुरी- हाँ इसमें तो बस नाचना नाचना hi आ रहा है.

पंकज- हाँ भाई रमन बस सब को नचवाते hi रहोगे का आज और कुछ आ जी नहीं रहा है.

रमन- अरे सब परिवार वाले खेल रहे हैं तो हमने आसान और साधारण कामो वाला पेज खोल कर दिया है...

चरण सिंह- अरे आसान कामो वाला क्यों?

चेतन- अरे पापा अगर एडल्ट वाले काम आएंगे तो आप लोग hi चौंक जाओगे बहुत कठिन तो नहीं पर अलग काम होते हैं उसमे..

माधुरी- अलग मतलब कैसे?

रमन- ये समझ लो की जो सुहागरात की कहानी सुनाई थी न वो तो शुरुवात भी नहीं है उसकी और भी ज़्यादा कामुक और उत्तेजक काम...

उदयवीर- अरे सबके सामने करने होते हैं?

पंकज- सबके सामने और किसी के भी साथ.

बिमला- हाय ढैय्या.

कुछ देर के लिए तो सबके बीच शांति ठहर गयी हालाँकि सब के मन में यही जिज्ञासा उठ रही थी की कैसे कैसे काम करने पढ़े होंगे कितने कामुक होते होंगे कैसा लगेगा सबके सामने, पर खुल कर बोलने में भी शर्मा रहे थे, चरण सिंह जो की अपनी दोनों बहुओं को छोड़ चुके थे परिवार में खुलने का उन्हें ाचा मौका लग रहा था, सूजन सिंह तो चाहते hi यही थे, उदयवीर के मन में भी कामुकता जाग रही थी पर उनकी शर्म उन्हें रोक रही थी, माधुरी अपने बेटे से छोड़ने के बाद अब उसे तो खेलने में कोई समस्या नज़र नहीं आ रही थी, वहीं बिमला भी अब पूरी तरह से खुद को खोल चुकी थी वो जानती थी अगर आनंद लेना है तो खुलना hi पड़ेगा,

सबके मन में यही चल रहा था पर कोई भी आगे आकर बोलने को तैयार नहीं था,

रमन- तो बताओ सब क्या करना है? आगे खेलना है इसी पर या दूसरा पेज निकलना है?


इस सवाल से सब एक दुसरे को झाँकने लगे,

रिम्मी ने चंचल और पूर्वी को इशारा किआ की उन्हें hi पहल करनी होगी,

रिम- मैं तो तैयार हँ,

चंचल- मैं भी, सब परिवार वाले hi तो हैं यहाँ, क्या दिक्कत है.

पूर्वी- मैं भी तैयार हूँ.

पंकज- अगर ये लोग तैयार तो हम भी तैयार हैं.

चेतन- मैंने तो कहा hi, अगर आनंद लेना है तो शर्म और नियमो को छोड़कर hi आगे बढ़ना होगा, मैं तो तैयार हूँ.

रमन- मैं भी तैयार हूँ,

अब बच्चों ने पहल कर दी थी और अपना फैसला भी सुना दिया था अब बात बड़ों पर आ गयी थी,

सूजन सिंह- क्या कहते हो भाई साब, उदयवीर भाई साब?

उदयवीर- तुम्हारी क्या राइ है?

सूजन सिंह- हम तो तैयार हैं बच्चों के साथ मिलने के लिए.

चरण सिंह- हम भी यही सोच रहे थे बच्चों की दोस्ती पाने के लिए यही सही रहेगा,

उदयवीर- और तुम तीनो संधानो का क्या ख्याल है?

माधुरी- मैं तो खेलूंगी.

सावित्री- मैं भी तुम बताओ जल्दी बिमला रानी,

बिमला- जो चंचल के पापा सही समझें..

चरण सिंह- लो भाई संधान जी ने तो तुम पार दाल दिया सारा जिम्मा,

उदयवीर थोड़ा सोच में पद गए हालाँकि चाहते वो भी थे फिर भी झिझक रहे थे इतने में hi उनकी नज़र पूर्वी से मिली जिसने हाँ में सर हिलाकर उन्हें इशारा किआ तो अगले hi पल उदयवीर बोले- ठीक है जब सारा परिवार तैयार है तो हमें क्या समस्या होगी...

ये सुनकर सब खुश हो गए,

रमन- बहुत बढ़िया, अब सब राज़ी हैं तो पहले hi बता रहा हूँ कोई बाद में ये न कहे की मैं ये नहीं करूँगा, ंविं ये नहीं कर पाऊँगी, जो आएगा करना होगा.

चेतन- हाँ भाई शर्म को अब भूल जाओ, और हो सकता है इस खेल के बाद कुछ रिश्ते पूरी तरह बदल जाएँ और उस तरह से खुल जाएं जैसा कभी सोचा भी न हो, तो सब तैयार हैं?

सूजन सिंह- अब ओखली में सर दे hi दिया है तो क्या डरना,

चरण सिंह- हाँ बिलकुल.

उदयवीर- अब शुरू करो फिर.

रमन बेलन घूमने चला तो माधुरी ने उसे टोका- अरे बेलन क्यों घुमा रहा है, बिमला रानी पर रुका था उन्ही की बरी है,

बिमला ये सुन मुस्कुराते हुए बोली- देखो तो भूली नहीं,

रमन- हाँ सही में, अरे पंकज भैया, लाओ दूसरा पेज निकल दूँ.

रमन पंकज से फ़ोन लेकर दूसरा पेज खोल कर देता है और अब पढ़ने को कहता है,

पंकज- बिमला चची तुम्हारा नया काम है- अपने किन्ही दो कपड़ो को उतरना और सामने वाले खिलाडी को देना अगर वो चाहे तो बदले में अपना कोई एक कपडा दे सकता है वही पहनना hai.par आपके उतरे हुए कपडे कोई नहीं पहन सकता..

बिमला- हाय ढैय्या ये तो नंगा करवाने लगा,

चेतन- यही तो है कामुक खेल सासुमा.

माधुरी- अब नहीं नहीं मत करना.

बिमला- अरे हूँ कहाँ मन कर रहे हैं, हमारे सामने तो रिम्मी बिटिया है.

रिम- हाँ चची चलो दो कपडे दो मुझे, वैसे चिंता मत करो तुम्हे नंगा नहीं होने दूंगी,

रिम्मी ने खिलखिलाते हुए कहा,

बिमला- कहाँ उतरने हैं?

सावित्री- अरे कमरे में जाकर कर आओ अदला बदली,

बिमला- हाँ हाँ चल रिम्मी.

रिम्मी और बिमला कमरे में गैर बाकि सब उत्तेजित होकर इंतज़ार करने लगे,

सूजन सिंह- ये तो सच में थोड़ी खतरनाक से काम देने लगा,

चेतन- तभी तो हमने पहले hi चेता दिया था सबको..

चरण सिंह- कोई बात नहीं अब हो गया है तो कर hi लेंगे.

खैर कुछ देर बाद पहले रिम्मी बहार निकली जिसमें किसी को कोई बदलाव नहीं दिखा,

रिम- आ जाओ चची काहे शर्मा रही हो सब अपने hi लोग हैं.

रिमझिम के कहने पर बिमला झिझकते हुए बहार आई जिसे देख सबकी आँखें चौड़ी हो गयी





बिमला ने ऊपर सिर्फ एक ब्रा पहन राखी थी साड़ी के साथ वो ब्रा भी रिम्मी की थी जो की बिमला की भरी चूचियों को संभल नहीं प् रही थी, और आधे से ज़्यादा चूचियां सबको नज़र आ रही थी साथ बी गदराया पेट आउट गहरी नाभि भी जिसे देख सरे मर्दों के लोडे टनटनाने लगे,

उदयवीर तो अपनी पत्नी को ऐसे देख आहें भरने लगे- उनका लुंड भी कड़क हो गया,

पूर्वी- हाय चची क्या मस्त लग रही हो हीरोइन फ़ैल हैं.

चंचल- सही में अम्मा, बहुत कॉमिक और सुन्दर लग रही हो,

चरण सिंह अपनी संधान को यूँ देख उत्तेजित होने लगे पर अपने जज़्बातों को दबाते हुए बोले- सच में उदयवीर भाई तुमसे जलन हो रही है हमें तो,

उदयवीर सबको अपनी पत्नी को कामुक तरीके से देख बेहद उत्तेजित हो रहे थे और बोले- आरर भाई साब हम भी पहली बार देख रहे हैं ऐसे.

बिमला- अब सब बातें बंद भी करो आगे खेलते हैं.

बिमला ने जगह बदल कर बैठते हुए कहा..

रमन - हाँ हाँ चलो आगे खेलते हैं

रमन ने आगे बढ़ कर बेलन घुमाया जो की उदयवीर पर आकर रुका,

चरण सिंह- लो भाई पत्नी के बाद पति की बरी आ गयी,

रिम- चाचाजी hi बचे हुए थे बड़ी देर से,

उदयवीर- अब तो फंस गए न बिटिया,

पंकज- चाचाजी तुम्हारी बरी में लिखा है- सामने वाले खिलाडी को अपना एक कपडा दान दो.

उदयवीर- धत्त तेरे की..

सामने सावित्री थी जो की बोली - क्यों भैया क्या दान डोज?

इस पर सब हंसने लगे..

उदयवीर- जो तुम मांग लो भाभी...

सावित्री- तो फिर धोती दे दो कुरता लम्बा है तुम्हारी इज़्ज़त बचाये रखेगा,

इस पर सब हंसने लगे,

माधुरी- लो भाई बीवी का ब्लाउज गया तो पति की तो धोती hi चली गयी,

उदयवीर- देख लीजिये संधान कैसा जुल्म हो रहा है,

खैर उदयवीर ने धोती उतरके सावित्री को दे दी, उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी खेतों में अक्सर कच्चे में hi काम करते थे,

खेल दोबारा शुरू हुआ और बेलन इस बार रमन पर आकर रुका,

रमन- लो घूम फिर कर हम पर hi आगया,

चंचल- कोई नहीं भैया तुम तोह कर hi लोगे तुमने धोती भी नहीं पहनी.

ये सुनकर सब हंसने लगे,

रमन- हाँ भाभी कर तो हम कुछ भी लेंगे, बताओ पंकज भैया क्या लिखा है?

पंकज- भाई लिखा है - अपने सामबे वाले खिलाडी के बदन में जो आपका पसंदीदा हिस्सा हो उसे चूमना है दो मिनट तक,

पूर्वी- अरे बाप रे, क्या पसंद है तुम्हे जीजा?

क्यूंकि पूर्वी hi रमन के सामने थी,

रमन- तुम तो हमें पूरी पसंद हो साली जी..

रमन ने हँसते हुए कहा..

पंकज- अरे भैया पूरी ले जाओगे तो हमारा क्या होगा,

ये सुन सब हंसने लगे,

रमन- आओ साली जी बीच में आओ..

पूर्वी उठ कर आई और रमन के सामने कड़ी हो गयी,

पूर्वी- अब बताओ जीजा क्या पसंद है.

रमन- अभी पता चल जायेगा,

ये कहकर रमन नीचे बैठ गया और पूर्वी की साड़ी उसके पेट से हटाकर अगले hi पल अपने होंठ पूर्वी के पेट पर लगा दिए और जगह जगह चूमने लगा.

पूर्वी- आह्ह्ह्ह ुहममम जीजा..

पहले तो लोग ये नज़ारा देख कर उत्तेजित हुए hi पूर्वी की सिसकी ने उन्हें और उत्तेजित कर दिया, चरण सिंह तो सोचने लगे दोनों बहुएं मिल hi गयी बस पूर्वी भी मिल जाये, उदयवीर का तो लुंड तन गया ये सोच कर की रात को उन्होंने पूर्वी को ठीक से चूसा क्यों नहीं, बाकि सब तो पूर्वी को कई बार भोग hi चुके थे, उधर औरतों को भी ये देख उत्तेजना बढ़ रही थी सब तक ताकि लगाए रमन के होंठ और पूर्वी के पेट को देख रही थी, अगले hi पल रमन ने अपनी जीभ पूर्वी की नाभि में घुसड़ी तो पूर्वी के साथ साथ कई लोगो की आह्ह्ह्ह निकली...

रिम- चलो चलो समय हो गया पूरा तुम तो मेरी बहन के पेट के पीछे hi पद गए..

चेतन - वैसे गलती रमन की नहीं है पूर्वी का बदन है hi इतना सुन्दर...

माधुरी- अरे शर्म करो उसके पति के सामने hi उसके बदन के बारे में ये सब बोल रहे हो.

पंकज - अरे चची यही तो मज़ा है इस खेल का आगे देखो क्या क्या होता है...

माधुरी- लग तो रहा है बड़ा बवाल होगा..

पूर्वी- अरे अब आगे भी खेलो तभी तो पता चलेगा क्या होगा...

चरण सिंह- हाँ भाई खेलो आगे..

रमन ने बेलन घुमाया जो की चंचल पर आकर रुका

चंचल- लो भाई आ गयी हमारी बारी.

रिम- आखिर कार बताओ जीजा जी क्या लिखा है हमारी प्यारी जीजी के लिए.

पंकज- अभी बताते हैं भाभी तुम्हारे लिए लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी को चूमना है तीन मिनट तक....

पूर्वी- लो जीजी तुम्हारा भी नंबर आ गया चुम्मा छाती का...

माधुरी- हाय ढैय्या ये कैसे होगा...

चंचल के सामने बैठी माधुरी ने कहा...

सावित्री - कैसे होगा मतलब.

माधुरी- हमारी बहु और हम कैसे चूम सकते हैं एक दुसरे को.

रिम- अरे मम्मी जी सब हो जायेगा,

चंचल- हाँ मम्मी जी सब हो जायेगा तुम आओ तो सही.

पूर्वी- हाँ चची उठो तो.

माधुरी हिचकिचाते हुए उठी, और चंचल भी अपनी जगह से उठी दोनों बीच में आये,

माधुरी हिचकिचा भी रही थी पर अंदर hi अंदर उत्तेजित भी हो रही थी, हालाँकि उसने अपनी दोनों संधानो के साथ ये सब बहुत किआ था पर बहु की और सबके सामने की बात कुछ और थी,

माधुरी ने चंचल की और देखा तो वो उसे देख मुस्कुरा रही थी, और धीरे से चंचल ने अपना चेहरा आगे बढ़ाना शुरू किआ तो माधुरी भी खुद बा खुद आगे हो गयी और फिर दोनों की hi आँखें बंद हो गयी, अगले hi पल माधुरी को अपने होंठों पर अपनी बड़ी बहु के नरम रसीले होंठ महसूस हुए और उसके बदन में करंट दौड़ गया, उसके होंठ भी खुल गए और बहु के होंठों को उसने अपने होंठों में भर लिए और कुछ hi पालो ने सास बहु बहुत hi कामुक तरीके से एक दुसरे के होंठों को चूसने कागि.

और ये नज़ारा देख बाकि सब की आँखें चौड़ी हो गयी, मर्दों के लुंड तन गए तो औरतें अपनी छूट को पसीजता हुआ महसूस करने लगी, उदयवीर का बुरा हाल था अपनी बेटी को अपनी सास के साथ होंठ चूसते देखते हुए उनका लुंड पूरा अकड़ गया था,

बिमला तो बेटी के साथ ये खेल खेल चुकी थी और उसके बदन को चख चुकी थी इसलिए उसे अंदाज़ा हो रहा था की संधान को कैसा लग रहा होगा, माधुरी और चंचल दोनों hi बेहद उत्तेजित हो गयी थी आउट जब तक समय ख़त्म हुआ तब तक दोनों की छूट से पानी बहने लगा था,

समय ख़त्म होने पर दोनों अलग हुए तो दोनों के चेहरे पर hi मुस्कान थी, सबने ताली बजाकर उत्साह बढ़ाया..

सावित्री- क्यों समाधान जी कैसा लगा,

माधुरी- बड़े मीठे होंठ हैं बहु के, मज़ा आया,

माधुरी ने मुस्कुराते हुए कहा, जिससे पता चल रहा था की अब धीरे धीरे सब खुल रहे हैं क्यूंकि सबने hi इस पर सहमति जताई,

चंचल- तुम्हारे भी बहुत मीठे हैं मम्मी जी, बहुत मज़ा आया मुझे भी..

चरण सिंह- अरे सास बहु का प्यार हो गया तो खेल आगे बढ़ाएं.

Rim-dekho तो पापाजी को जलन हो रही है मम्मी से की बहु के होंठ चूसने का मौका उन्हें मिला इन्हे नहीं..

इस पर सब हंसने लगे...

सूजन सिंह - चलो खेल आगे बढ़ाओ..

रमन ने फिर से बेलन घुमाया, जो की सावित्री पर आ कर रुका,

माधुरी- चलो समाधान हो जाओ तैयार.

सावित्री- हम तो तैयार hi हैं...

पंकज- तो सुनो लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी के साथ बिना हाथों का प्रयोग किये ये बेलन लेकर पूरे कमरे का चक्कर लगाना है..

सावित्री- ये तो आसान है आ जाओ समधी जी..

सावित्री ने चरण सिंह से कहा जो उसके सामने थे,

पंकज- अरे तेजी पूरी बात तो सुन लो,

सावित्री- ाचा अभी और भी है,

माधुरी- और का बड़ी जल्दी हो रही है समधी के पास जाने की.

इस पर सब हंसने लगे.

पंकज- हाँ अब इसमें समस्या ये है की सामने वाले खिलाडी की आँखें बंद रहेंगी और तुम्हे उसे रास्ता बताते हुए आगे लेजाना है, और जितनी बार बेलन गिरेगा दोनों को hi उतने कपडे उतरने पड़ेंगे.

चरण सिंह- अरे बरी संधान की कपडे हमारे क्यों उतरेंगे,

पूर्वी- नियम तो नियम है चाचाजी और बेलन के दोनों सिरे hi खतरनाक हैं.

माधुरी- क्यों संधान हमारी बरी पर बोल रही थी हो जायेगा हो जायेगा अब करो..

सावित्री- हाँ तो कर रहे हैं मन कहाँ कर रहे हैं. आओ समधी जी.

बिमला- कितने प्यार से बुला रही हैं समधी जी को,

चरण सिंह और सावित्री दोनों एक कोने पर पहुंचे दोनों ने एक दुसरे की और मुँह किआ और बेलन के एक एक छोर को अपने अपने पेट पर टिका दिया,

रिम- पापाजी आँखें बंद.

चरण सिंह- हाँ बीटा कार्टर हैं.

चरण सिंह ने आँखें बंद कर ली..

और सावित्री ने उन्हें बताना शुरू किआ पर ऐसे काम के लिए दोनों में तालमेल होना बहुत ज़रूरी था चरण सिंह ने एक कदम आगे पहले बढ़ा दिया और बेलन गिर गया,

सावित्री- ओह्हो समधी जी साथ में रहो न..

चरण सिंह- अरे तुमने hi कहा चलने को..

सावित्री पर हमारे साथ साथ चलो न...

रिम- आज हो गया अब ये पूरा.

चंचल- हाँ..

माधुरी- सही है गिरने दो कपडे उतरेंगे अभी दोनों के..

इसी तरह गिरते गिरते तीन बार बेलन गिरा कर कैसे भी दोनों ने एक चक्कर पूरा किआ...

रमन- चलो पूरा तो हुआ आखिर.

माधुरी- अब कपडे उतरो भाई..

बिमला- तुम्हे बड़ी जल्दी है कपडे उतरवाने की.

माधुरी- अब खेल तो खेल है नियम मैंने पड़ेंगे.

चरण सिंह- कितने उतरने पड़ेंगे.

चंचल- तीन पापाजी.

चरण सिंह- अरे बच्चों दो hi उतर दें तो चलेगा क्या?

रिम- नहीं नहीं चलेगा.

चरण सिंह- अरे तीन hi तो कपडे पहने हैं हमने.

सूजन सिंह - अरे तो क्या हुआ खेल है बच्चे बुरा नहीं मानेंगे..

सावित्री- हाँ अब उतरने हैं तो उतर hi देते हैं

सावित्री अपना ब्लाउज खोलती हुई बोली तो चरण सिंह भी कुरता उतरने लगे, ब्लाउज और कुर्ते के बाद ब्रा और धोती की बरी आई दोनों ने उतर के नीचे गैर दिया तो सावित्री की बड़ी छुछियां सबके सामने नंगी थी वहीं चरण सिंह के बदन पर सिर्फ एक कच्चा था,

चरण सिंह- बच्चों सच में ये भी उतारें क्या?

सूजन सिंह - और क्या..

माधुरी- हाँ बिलकुल उतारो और सावित्री बहन तुम भी..

चरण सिंह ने बात मानते हुए कच्चा नीचे सरका दिया और पूरे नंगे हो गए, उनका कड़क लुंड सबके सामने था पूर्वी और सावित्री बिमला पहली बार देख रही थी जिन्हे लुंड देखकर कुछ हलचल हुई...

चरण सिंह पूरे नंगे होकर जाकर बैठ गए..

रिम- लो पापा जी तो हो गए नंगे अब .

बिमला- अब तुम्हारी मम्मी की बरी.

चंचल- हाँ चची उतरो न.

सावित्री ने गहरी सांस ली और बोली- लो ठीक है उतरती हूँ...

ये कहकर सावित्री ने अपनी साड़ी उतार दी, और सबके सामने पेटीकोट में आ गयी...

और फिर अपनी जगह आकर बैठ गयी, अब कोई भी बता सकता था की आंगन में माहौल गरम हो गया था, सब उत्तेजित हो रहे थे और मर्द रह रहकर सावित्री के नंगे छूछीयो और बिमला की अधनंगी चूचियों को देख रहे थे वहीं औरतें चरण सिंह के लुंड को निहार रही थी जो की उसे छुपाने की कोशिश भी नहीं कर रहे थे..

आगे खेल हुआ, और बेलन इस बार रिमझिम पर आकर रुका,

चंचल- अरे वाह रिम्मी आखिर तेरी बरी आ hi गयी,

रिम- हाँ जीजी ढूंढ hi लिए बेलन ने मुझे,

चेतन- नाचना आना चाहिए बस ये hi नहीं नाची अभी तक,

पूर्वी - तुम तो नक्च लिए जीजाजी अपनी सासु माँ के साथ,

पंकज- लो सुनो साली जी तुम्हे क्या करना है- सामने वाले खिलाडी से उसके कपडे उतरवाने के लिए मानना है, अगर सामने वाले खिलाडी को मानाने में असमर्थ होते हो तो जितने उसके बदन पर कपडे हैं उतने hi तुम्हे उतरने होंगे. सामने वाला खिलाडी मैंने के लिए कुछ बदले में कुछ भी मांग रख सकता है.

चंचल- अरे वाह थोड़ा मुश्किल काम मिला है, पर देखते हैं क्या दिमाग लगाती है रिम्मी.

पूर्वी- सामने हैं भी जेठ जी.

चेतन- हाँ और हम इतनी आसानी से नहीं मैंने वाले,

रिम- ऐसे मत करो भैया,

चेतन- ाचा बदले में हमें क्या मिलेगा..

रिम- वो तो तुम बताओ क्या मांग है तुम्हारी,

चेतन- हम तो कह hi रहे थे की नाच के दिखाओ.

पूर्वी- लो जीजा की सुई अभी तक नाच पर hi अटकी हुई है,

चंचल- अरे सही है हम सबमें सबसे ाचा नाचती है रिम्मी.

चरण सिंह- फिर तो सही मांग है,

बिमला- नाच दे रिम्मी बिटिया हम भी तो देखें..

सबकी मर्ज़ी जानकर रिम्मी कड़ी हुई और एक भोजपुरी कामुक गाने पर अपना बदन बड़ी कामुकता से चलाया की देखने वाले देखते रह जाएं..





रिम्मी का कामुक नाच देख कर उसके नंगे बैठे ससुर का लुंड फुदकने लगा चरण सिंह का मन तो हुआ अभी जाकर बहु के कपडे उतर कर छोड़ने लगें, यही हाल उदयवीर का था जो सोच रहे थे पूर्वी तो थी hi रिम्मी तो अलग hi है, हाय लुंड अकड़ गया इसे देख कर काश इसे भी छोड़ पता एक बार, बाकि सब मर्दों का भी यही हाल था..

खैर नाच ख़तम हुआ तो सबने ताली पीट कर रिम्मी का उत्साह बढ़ाया,

चंचल- क्यों जी क्या दे रहे हो, इतने अचे नाच के बदले रिम्मी को.

चेतन- अरे जो चाहे रिम्मी मांग ले अब.

रिम्मी - तो भैया सरे कपडे उतरदो अपने.

चेतन- अरे सरे? एक दो तो छोड़ दे..

रिम्मी- नहीं भैया फिर मुझे भी उतरने पड़ेंगे.

चेतन- ाचा बस कच्चा छोड़ दे बाकि उतर रहा हूँ.

पूर्वी- ये भी ठीक है रिम्मी मान जा.

रिम- ठीक है भैया..

इसके बाद चेतन ने सरे कपडे उतर दिए सिर्फ कच्चा छोड़कर जिसमे उसका लुंड खड़ा हुआ तम्बू बना रहा था और सबको दिख रहा था, माधुरी एक बेटे से छोड़ने के बाद दुसरे का लुंड देखकर उत्तेजित हो रही thi..aur सोच रही थी की चेतन का लुंड नंगा कैसा दीखता होगा,

चेतन के बाद रिमझिम ने भी अपनी साड़ी उतर दी और सबके सामने पेटीकोट और ब्लाउज में बैठ गयी, जिसे देखकर सब अपनी आँखें सेकने लगे,

खेल आगे शुरू हुआ और बेलन इस बार माधुरी पर आकर रुका,

माधुरी- लो मुआ हम पर रुक गया आकर,

सावित्री- ाचा दूसरो पर रुके तो ठीक खुद पर रुके तो मुआ,

चरण सिंह- और का अपनी बरी पर बिदक जाती हो.

बिमला- कोई नहीं अब पता तो चले संधान जी को करना क्या है,

माधुरी- बता पंकज बीटा क्या लिखा है नसीब में.

चंचल- मम्मी की बरी में मज़ा आता है.

माधुरी- तू बड़े मज़े ले रही है, बता तू पंकज..

पंकज- चची तुम्हारी बरी में लिखा है, - अपने सामने वाले खिलाडी को उसके सरे कपडे उतरने के लिए मानना है और बदले में उसे अपने बदन का उसका पसंदीदा अंग नंगा कर के दिखाना है.

माधुरी- हाय ढैय्या ये तो नंगा करने पर आ गया,

सावित्री- तो क्या हुआ हम तो कबसे अधनंगे hi बैठे हैं.

बिमला- हूँ तो उससे भी पहले.

चरण सिंह- हम तो पूरे नंगे हैं.

चेतन- मैं भी.

सावित्री- तो संधान तुम कहे इतना इत्र घबरा रही हो.

माधुरी- अरे बात हमारी नहीं है हमें सामने वाले खिलाडी को मानना है नंगा होने के लिए,


रिम- तो मनाओ न मम्मी चाचा जी को.

रिम्मी ने उदयवीर की और इशारा करते हुए कहा जो माधुरी के सामने थे, बेचारे सहमे से बैठे थे की आगे क्या होने वाला है.

पूर्वी- अब संधान समधी के कपडे उतर आएंगी..

इस पर सब हंसने लगे,

माधुरी- समधी जी उतर दीजिये न कपडे,

उदयवीर- अरे धोती तो पहले hi नहीं है अब ये hi बचा है बदन पर.

रिम- वही तो उतरवाना है चाचाजी,

माधुरी- चंचल बिटिया समझा न अपने बाबा को.

चंचल - अरे मम्मी हम क्या समझाएं तुम समधी संधान की बात है..

माधुरी- समधी जी मान जाओ न. देखो ये भी तो नंगे बैठे हैं.

उदयवीर- पर कैसे बिटिया है यहाँ उसके सामने.

रिम- अरे खेल है चचही और चंचल जीजी को भी कोई समस्या नहीं होगी.. क्यों जीजी?

चंचल- हाँ बाबा हमें कोई परेशानी नहीं है..

पूर्वी- मान जाओ चाचाजी तभी चाचीजी के बदन का एक अंग देखने को मिलेगा.

ये बात सोच उदयवीर ने कुछ सोचा फिर बोले- ठीक है अब सब hi नंगे हैं तो हम क्यों शर्माएं,

ये कह जोश में आकर उदयवीर ने अपने कपडे इतर दिए और पूरे नंगे हो कर खड़े हो गए उनका मोटा लुंड देख कर एक पल को तो माधुरी का मन हुआ की पकड़ कर देखले, फिर खुद को रोका वही. बाकि औरतें भी लुंड को निहार मन hi मन उत्तेजित होने लगी, चंचल कनखियों से अपने बाबा का लुंड देख मस्ताने लगी...

खैर उदयवीर अपने कपडे उतर बैठ गए,

पूर्वी- अब चाचाजी बताओ क्या देखना है.

चंचल - हाँ बाबा इनाम तो ले लो मम्मी जी से,

रिम- कौनसा अंग पसंद है आपको मम्मी जी का.

उदयवीर- अरे ऐसे क्या बताएं...

बिमला- अरे बताओ बताओ ऐसा मौका नहीं मिलेगा,

उदयवीर- हाँ हाँ बताते हैं.

उदयवीर ने भी सोचा की अब मौका आ hi गया है तो क्यों पीछे हैट रहा है, खुद नंगा बैठा है अब शर्म छोड़ और मज़े ले.

रिम- कहाँ खो गए चाचाजी.

माधुरी- हाँ समधी जी बताओ फिर ये निपटाएं..

उदयवीर ने थोड़ा हिचकिचाते हुए बोलै- वो संधान जी का पिछवाड़ा हमें पसंद है..

ये सुनकर सब हैरान रह गए वहीं शोर भी मचने लगे..

चरण सिंह- क्यों भाई तुम हमारी बीवी के चूतड़ों को देखते रहते हो.

चरण सिंह ने छेड़ते हुए कहा...

उदयवीर- वो मैं तो बस .

सूजन सिंह- अरे तुम्हे छेड़ रहे हैं भाई साब,

पूर्वी- तो चची क्या सोचा.

माधुरी- सोचा क्या बताओ समधी जी, सच में यही करना है.

उदयवीर- हाँ..

माधुरी- अच्छा.

माधुरी सोचने लगी .

रिम- क्या सोच रही हो मम्मी जी अब शर्माना छोडो.

माधुरी को भी ये सब करने में एक अलग उत्तेजना हो रही थी... अपने पूरे परिवार के सामने अपने चूतड़ों को नंगा करके अपने समधी को दिखाना ये सोच कर hi वो उत्तेजित हुए जा रही थी.

माधुरी - ाचा ठीक है करते हैं.

ये कहकर माधुरी उठी और एक तरफ जाकर दीवार को मुँह करके बैठ गयी...

माधुरी- देख लो समधी जी...

वैसे तो माधुरी को कहने की ज़रुरत नहीं थी वहां मौजूद सब लोगो की नज़र उसी पर तिकी हुई थी, उदयवीर के साथ साथ...

माधुरी अपने घुटनो पर आगे को झुकी और फिर अपने दोनों हाथ पीछे लेकर अपनी सारी को उठाना शुरू किआ और फिर साड़ी को अपने चूतड़ों से उठा कर अपने बड़े गोल मटोल चूतड़ उजागर कर दिए, और फिर आगे हाथ टिका कर घोड़ी बन गयी ताकि अचे से लोग उसके चूतड़ों को निहार सकें, आगे झुकने से माधुरी के चूतड़ फैल गए और उसकी गांड का छेड़ और छूट भी सबको अच्छे से दिखने लगी.





ये देख उदयवीर की तो आँखें फटी की फटी रह गयी उनका नंगा लुंड अपनी संधान की गांड देख ठुमके मरने लगा यही हाल दुसरे समधी सूजन सिंह का भी हुआ वो भी माधुरी की गांड देख अपने लुंड को सहलाने लगे, सबसे ज़्यादा बुरा हाल तो चेतन का था जो अपनी माँ को ऐसे देख सब कुछ hi भूल गया था उसका लुंड कच्चे में बिलकुल लोहे का बना हुआ था, ऐसी उत्तेजना उसने कभी महसूस नहीं की थी जैसी अभी हो रही थी अपनी माँ को ऐसे देख कर... चेतन का मन तो किआ की अभी जाकर माँ के चूतड़ों के बीच अपना मुँह घुसा कर उनकी गांड के छेड़ को छत लूँ, चेतन की तरह सब hi माधुरी की गांड के साथ कुछ न कुछ करने के सपने देख रहे थे और तभी माधुरी ने बापिस साड़ी से चूतड़ों को ढाका और सीढ़ी हो गयी..

माधुरी- अब तो हो गया न.

हालाँकि किसी का मन तो नहीं था की ये नज़ारा बंद हो पर जो मिला उसकी ख़ुशी भी बहुत थी, सब जानते थे जो हो रहा है वो किसी सभ्य साधारण परिवार में नहीं होना चाहिए पर उत्तेजना वश सब इस कदर पागल थे की कोई न रुकना चाहता था और न hi रोकना.

रिम- हो गया मम्मी अब पता चला पापाजी आज भी क्यों इतने दीवाने हैं तुम्हारे.

चंचल - ाचा क्या पता चला मुझे भी बता.

रिम- देखे नहीं जीजी, मम्मी जी के इतने गोल मटोल बड़े बड़े पतीले देख कर पापाजी क्या तुम्हारे और मेरे पापा भी दीवाने हो गए हैं.

इस पर सब हंस पड़े तो माधुरी ने शर्म से मुँह छुपा लिए वहीं उदयवीर और सूजन सिंह बगले झांकते हुए हंसने लगे ,

माधुरी- अब आगे खेलें.

रमन- हाँ भाई हाँ आगे खेलते हैं.

रमन ने फिर बेलन घुमाया जो की पंकज पर आ कर रुका,

बिमला- लो बिटुआ सब की सजा पढ़ कर सुना रहे थे अब खुद की पढ़ो.

रमन- यही तो मज़ा है यहाँ कोई नहीं बचता.

पंकज- बिलकुल भैया हम कब पीछे हैट रहे हैं.

रिम- तो पढ़ो फिर जीजा,

पंकज- हाँ पढ़ते हैं अह्ह्ह ये रहा - सामने वाले खिलाडी के साथ हस्तमैथुन प्रतिस्पर्धा करनी है, जो पहले स्खलित होगा उसे पूरा नंगा होकर दुसरे खिलाडी को स्खलित होने में जैसी वो चाहे सहायता करनी पड़ेगी...

Madhuri-ye तो कुछ ज़्यादा hi तगड़ा आ गया.

चरण सिंह- तो क्या हुआ कर लेगा पंकज बीटा,

रिम- वैसे जीजाजी मुक़ाबला आसान नहीं होने वाला सामने बिमला चची हैं,

बिमला- अरे पर ये हस्तमैथुन का मतलब का है?

उनके बगल में बैठी सावित्री ने उनके कान में बताया तो बिमला का मुँह फटा रह गया.

बिमला- हाय ढैय्या ये हम कैसे जार पाएंगे सबके सामने.

माधुरी- अरे संधान जी अब ये मत करो हम कैसे कर पाएंगे अभी थोड़ी देर पहले हमारे नंगे चूतड़ देख रही थी न तब नहीं सोचा.

इस पर सब हंस पड़े, जैसे माहौल गरम जो रहा था लोग खुल रहे थे और अब बातें और शब्द भी वैसे hi बोले जा रहे थे पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी.

सावित्री- सही बोलै रमन की मम्मी, हम भी कब से नंगे बैठे हैं सबके सामने, और समधी जी भी तो हैं.

सावित्री ने उदयवीर और चरण सिंह की और इशारा किआ जो बिलकुल नंगे होकर बैठे थे,

Rim-par होगा कैसे?

रमन- अरे दोनों लोग एक दुसरे के सामने होंगे और हस्तमैथुन करेंगे, और एक दुसरे को उत्तेजित करेंगे कुछ भी बोलकर, हाँ एक दुसरे को छूना नहीं है जब तक कोई एक झाड़ न जाये,

चरण सिंह- अरे वाह ऐसा मुक़ाबला देखने में मज़ा आएगा,

उदयवीर थोड़े झिझक रहे थे अपनी पत्नी को सबके सामने ये सब करते देखने के विचार सर पर उत्तेजित भी हो रहे थे,

खैर रमन के कहे अनुसार पंकज अपनी जगह जाकर खड़ा हो गया और फिर सबके उत्साह के साथ बिमला भी झिझकते हुए उसके सामने पहुंच गयी...

दोनों प्रतिद्वंदी एक दुसरे के सामने तैयार थे एक अनोखे मुक़ाबले के लिए...


जारी रहेगी...
 
खैर रमन के कहे अनुसार पंकज अपनी जगह जाकर खड़ा हो गया और फिर सबके उत्साह के साथ बिमला भी झिझकते हुए उसके सामने पहुंच गयी...

दोनों प्रतिद्वंदी एक दुसरे के सामने तैयार थे एक अनोखे मुक़ाबले के liye.....aage

अपडेट 198

बिमला अपने विचारों के भंवर को सर में क़ैद कर के इस मुक़ाबले के लिए बैठ तो गयी थी पर उसे समझ नहीं आ रहा था वो करेगी क्या, कैसे करेगी, ये कुछ सवाल उसे परेशां कर रहे, सबके सामने वो अपनी छूट से कैसे खेले, पर पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ था उसी की हिम्मत थी जो वो उठ कर इस काम के लिए आ कर बैठ गयी थी वार्ना कुछ डिब पहले तो वो होश खो बैठती, उसने सोचा अब शर्म से फायदा नहीं है, समधी और पति नंगे हैं, सावित्री भी आधी नंगी बैठी है तो अब शर्मा के कोई फायदा नहीं बल्कि बेशर्मी से hi सुख मिला है तो ये भी कर के देखले,

वहीं पंकज ने तो अपना पजामा नीचे खिसकाया और लुंड को बहार निकल कर उस पर थूका और अपने खड़े लुंड को बिमला को दिखा कर मुठियाने लगा, पंकज की इस हरकत से बिमला के मन की रही सही झिझक भी गायब हो गयी वो भी अपनी सारे को जांघों तक चढ़ा कर अपने हाथ को धीरे से टैंगो के बीच घुसा कर अपनी छूट से खेलने लगी,

उदयवीर ने जब ये देखा तो यकीन नहीं हुआ की उनकी संस्कारी बीवी आज सबके सामने ये सब कर रही है पर न जाने क्यों उदयवीर को ये रूप बिमला का ाचा लग रहा था, उनके मन में न जाने क्या क्या विचार आने लगा और उनका लुंड ठुमके मरने लगा, वहीं बाकि सब भी बिमला के इस कदम से खुश थे हालाँकि सरेर और हाथ को वजह से किसी को बिमला की छूट नहीं दिख रही थी पर उसकी आहें सबको उत्तेजित कर रही थी,

उधर पंकज के लिए वहां मौजूद सब औरतों में बस बिमला hi ऐसी थी जिसका स्वाद उसके लुंड ने नहीं सहा था वहीं बिमला के लिए भी पंकज का लुंड नया था और उसे देखकर उसकी छूट गीली होती जा रही थी,

Rim-are ये दोनों लोग तो अपने अपने मज़े लेने में लग गए.

चंचल- और क्या करना था.

रमन- अरे दुसरे को जल्दी स्खलित करना है.

Poorvi-haan कुछ ऐसा करो जिससे सामने वाला उत्तेजित हो और जल्दी झड़े.

चरण सिंह- पर छूने से तो मन किआ है न.

चेतन- पर बोलबतो सकते हैं न, ऐसी उत्तेजित करने वाली बातें करो.

माधुरी- या सामने वाले को कुछ ऐसा दिखाओ की समनर वाला देख कर उत्तेजित हो जाये.

ये सब बातें पंकज और बिमला सुन रहे थे, और उन पर गौर भी कर रहे थे.

पंकज ने तो बिमला का जोश बढ़ने के लिए बोलना भी शुरू कर दिया

पंकज- अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह बिमला चची ओह्ह कैसा लग रहा है सबके सामने अपनी छूट में उंगली करते हुए,

सबने ऐसे खुले शब्दों की उम्मीद तो नहीं की थी पर किसी को कोई आपत्ति भी नहीं हुई.

बिमला भी पंकज की बात पर गौर कर के गरम होने लगी की सच में कितने लोगो के सामने वो छूट में उंगली कर रही है सबकी नज़र उस पर hi है ये सोच कर hi वो और उत्तेजित होने लगी.

चंचल- अम्मा तुम भी कुछ करो पंकज भैया को जल्दी झड़ने के लिए.

रिम- हाँ चची तुम भी कुछ बोलो.

बिमला को कुछ सूझ hi नहीं रहा था क्या बोले, वो तो जितना सोच रही थी खुद hi उत्तेजित होती जा रही थी.

माधुरी- अगर कुछ सूझ hi नहीं रहा तो दिखा hi दो कुछ.

रिम- हाँ चची अपने बड़े छूछीयो दिखाओ उन्हें देखकर जीजा खुद को रोक नहीं पाएंगे.

ये सुनकर तो सबके hi कान खड़े हो गए बिमला की छूछीयो को नंगा देखने के लिए यहाँ तक की रिमझिम की बात सुनकर उसे भी थोड़ा झटका लगा पर अभी उत्तेजना इतनी थी साथ hi छूट में उंगलियां चल रही थी उसे कुछ नहीं सूझा और अगले hi पल उसने अपनी दोनों चूचियों को ब्रा के कप नीचे करके बहार निकल दिए, सब लोग बिमला की बड़ी बड़ी मस्त चूचियां देख कर होंठों पर जीभ फिरने लगे, पंकज के मुँह में भी पानी आ गया बिमला की छूछीयो को देख कर वहीं उदयवीर अपनी पत्नी की नंगी चूचियों को सबके सामने उजागर होते देख अपना लुंड मसल रहे थे,

वहीं छूछीयो को नंगा करने का उल्टा असर बिमला पर हुआ वो खुद hi इस बात से और उत्तेजित हो गयी की सबके सामने उसकी चूचियां नंगी हैं, उसके बदन में इससे और सिरहन होने लगी..

पंकज- अह्ह्ह चची तुम्हारी चूचियों को देख कर रहा नहीं जा रहा अह्ह्ह.

बिमला- ुहम्म्म्म haannn..kya करने का मन कर रहा है फिर...

पंकज- अह्ह्ह्ह मन तो बहुत कुछ कर रहा है चेचीईई अह्हह्ह्ह्ह...

पंकज ने लुंड पर हाथ चलते हुए कहा,

बिमला- बता न बेटा ओह्ह्ह्ह बता अपनी चेचीईई को...

पंकज- चची मन कर रहा है तुम्हारी चूचियों को जी भर के चूसूं, और फिर तुम्हे चाचा के सामने hi नंगा कर के खूब छोडूं...

ये सुनकर तो उदयवीर भी झड़ते झड़ते बचे अपनी पत्नी की चुदाई की बात सुनकर, उन्हें खुद समझ नहीं आ रहा था की उनके साथ क्या हो रहा था पत्नी को छोड़ने की बात सुनकर वो इतने उत्तेजित क्यों हो रहे हैं

वही उतना hi असर बिमला पर हुआ पति के सामने छोड़ने की बात पर और उसकी उंगलियां तेज़ी से उसकी छूट में अंदर बहार होने लगी...

बिमला- ुहम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह...

पंकज ने आगे बोलना जारी रखा- आह्ह्ह्हह चेचीईई चंचल भाभी की कामुकता तुमसे hi मिली है उन्हें.... अह्हह्ह्ह्ह कितना मज़ा आएगा जब तुम दोनों माँ बेटी को नंगा करके एक साथ छोड़ें तो...

पंकज की इस बात से सब थोड़े चौंके भी पर उत्तेजित भी हुए सब माँ बेटी की चुदाई एक साथ सोचने लगे, उदयवीर के लुंड ने तो दो तीन बूँदें भी छोड़ दी रास की, अपनी बेटी और पत्नी की चुदाई की बात सुनकर वो इतने उत्तेजित हो रहे थे जितने शायद hi कभी हुए हो,

इधर बिमला पर भी पंकज की बात का काफी असर हुआ और एक लम्बी आअह्ह्ह्ह के साथ बिमला की छूट ने पानी छोड़ दिया, सबको एहसास हुआ की बिमला झाड़ चुकी है तो पंकज की जीत पर ताली बजने लगे,

पंकज- अब इसका मतलब हम चची की मदद ले सकते हैं न झड़ने के लिए.

चंचल- हाँ भैया..

बस पंकज ने इतना सुना और आगे बढे और अपने लुंड को पकड़ कर सीधा बिमला के मुँह ने घुसा दिया जो की हांफ रही थी,

पंकज के इस कदम से सब हैरान रह गए और आँखें फाड़ कर देखने लगे, उदयवीर सोचने लगे रात मैंने इसकी बीवी को अकेले में छोड़ा ये सबके सामने मेरी बीवी के साथ ये सब कर रहा है, पर उदयवीर को बिलकुल बुरा नहीं लग रहा था..

इधर बिमला भी तब तक होश में आ चुकी थी पर वो अभी कुछ कर नहीं सकती थी, क्यूंकि पंकज ने उसके सर को दोनों हाथों से पकड़ रखा था और अपने लुंड को उसके मुँह में अंदर बहार कर रहा था





बिमला उसे अपना मुँह छोड़ते हुए बस देख रही थी, साथ hi जितना साथ दे सकती थी दे रही थी,

बिमला ने अपनी चूचियों को थमा हुआ था और उन्हें मसल रही थी, झड़ने के बाद एक बार फिर वो उतनी hi गरम हो चुकी थी,

बाकि सब बिमला की मुँह चुदाई देख कर आहें भर रहे थे, पंकज भी कागि उत्तेजित था और जल्द hi उसके लुंड ने बिमला के मुँह में पिचकारी छोड़नी शुरू कर दी, और सब को हैरान करते हुए बिमला वो सब गटकने लगी, पंकज गुर्राता हुआ और हांफता हुआ अपने लुंड से रास की एक एक बूँद बिमला के मुँह में निचोडणे के बाद बैठ गया,

बाकि सब बिमला को ध्यान से देख रहे थे...

रिम- अरे वाह चची मज़ा आ गया.

चंचल- हाँ अम्मा बहुत अच्छा खेला तुमने,

पूर्वी- सही में. पर अब चची तुम्हे नंगा होना पड़ेगा,

माधुरी- और क्या वैसे मज़ा तो आया बिमला.

बिमला सब की तारीफ सुन मुस्कुराई और फिर कड़ी हुई, और अपने पति की आँखों ने देखते हुए अपने कपडे उतरने लगी, उदयवीर भी लगातार अपनी पत्नी को देख रहे थे की कुछ hi दिनों में उसकी पत्नी कितनी बदल गयी है,

कुछ hi पालो में बिमला पूरी नंगी हो गयी उसका भरा हुआ कामुक बदन सबके सामने था, फैले हुए चूतड़ देखकर मर्द आहें भरने लगे तो औरतें भी होंठों पर जीभ फिरने लगी...

बिमला पूरी नंगी होने के बाद जगह बदल कर बैठ गयी...

चरण सिंह अपनी संधान के नंगे बदन को देखते हुए बोले- चलो भाई अब संधान भी हमारी तरह नंगी हो गयी हैं अब खेल आगे बढ़ाया जाये.

सावित्री - हाँ दामाद जी बढ़ाओ आगे.

रमन- जी मम्मी.

रमन ने आगे आकर बेलन घुमाया और बेलन रिमझिम पर आकर रुका...

चेतन- अरे वाह आखिर रिम्मी का नंबर आया सबसे काम इसी की बरी आई है.

रिम- तुम बड़ा जल रहे हो भैया मुझसे.

चेतन- और क्या हम नंगे बैठे हैं तेरी बरी तक नहीं आई...

चंचल- ओह्हो अब तो आ गयी न, पंकज भैया बताओ क्या लिखा है...

पंकज- हाँ पढता हूँ भाभी... लिखा है- सामने वाले खिलाडी के साथ प्रतियोगिता करनी है जो भी दुसरे के सरे कपडे पहले उतर देगा वो जीतेगा और हरने वाला जीतने वाले को मस्सगे देगा..

रिम- अरे मतलब हमारा भी नंबर आ गया नंगा होने का.

पंकज - और का कब तक बचोगी साली जी.

पूर्वी- लो साली को नंगा देखने के ख्याल से hi इनके मुँह में पानी आने लगा..

इस पर सब हंस पड़े.

चेतन- पर मज़ा आएगा देवरानी जेठानी की कुश्ती देखने में.

चंचल- क्या मज़ा आएगा बताओ हमें hi लड़ना पड़ेगा प्यारी रिम्मी से.

रिमझिम के सामने बैठी चंचल ने कहा...

चरण सिंह- तो क्या हुआ बीटा खेल hi तो है.

रिम- आ जाओ जीजी...

चंचल और रिमझिम दोनों उठ कर सबके बीच आये और फिर मुस्कुराते हुए एक दुसरे को देखने लगे...

माधुरी- देख क्या रही ho,chalo शुरू हो जाओ.

अपनी सास का आदेश पते hi दोनों एक दुसरे पर लपक पड़ी...

रिम्मी ने अपना ध्यान सबसे पहले चंचल की साड़ी पर लगाया, वहीं रिम्मी के बदन पर तो साड़ी नहीं थी इसलिए चंचल ने सीधा ध्यान रिमझिम के पेटीकोट के नारे पर लगाया, रिमझिम ने जल्दी hi चंचल की साड़ी खोल दी थी और उतर कर नीचे फेंका पर तभी उसे एहसास हुआ की. उसके पेटीकोट का नारा कमर से ढीला हुआ है और उसनर जब तक पलट कर देखा तब तक तो चंचल ने उसके पेटीकोट को उसके पैरों तक पहुंचा दिया था,

रिम- जीजी बड़ी तेज़ हो तुम..

ये कहकर रिमझिम चंचल के पेटीकोट को झुक कर खोलने लगी तो चंचल ने भी उसके झुकने का फायदा उठाया रिम्मी के ब्लाउज को पकड़ कर ऊपर उठाने लगी, रिम्मी अपनी ब्रा पहले hi बिमला को दे चुकी थी, इधर उसका ध्यान सिर्फ चंचल के पाटिकट पर था जिसके नारे की गांठ उसने जल्दी hi खोल ली और चंचल का पेटीकोट नीचे गिरा दिया और ख़ुशी से जैसे hi वो पीछे हुई उतने में hi चंचल ने उसके ब्लाउज के सिरों को पकड़ कर बनियान की तरह उसकर सर से निकल दिया जिसमे उसके ब्लाउज के कुछ हुक टूट भी गए,

सब नज़रें फाड़े देवरानी जेठानी के इस अद्भुत मुक़ाबले को देख रहे थे, रिमझिम के बदन पर सिर्फ एक कच्ची बची थी उसकी सुन्दर चूचियां और बदन सबकी आँखों के सामने था, वहीं चंचल के बदन पर कच्ची ब्लाउज और ब्रा थे,

रिमझिम ने ब्लाउज का बदला लेने के लिए चंचल का ब्लाउज पकड़ कर फाड़ दिया और उतर दिया चंचल ने इसका बदला लेने के लिए रिमझिम की कच्ची पकड़ ली वहीं रिमझिम ने भी चंचल की कच्ची पकड़ ली,

दोनों एक दुसरे की काछियों को खींचने लगी और जल्दी hi दोनों की काछियों ने दम तोड़ दिया, रिमझिम ने जैसे hi देखा की चंचल की कच्ची फटने लगी है उसनर एक हाथ चंचल की ब्रा पर लगा दिया और उसे खींचने लगी, वहीं चंचल ने दोनों हाथ रिम्मी की कच्ची पर लगाए और दोनों की hi कच्ची बिलकुल एक साथ फटी और दोनों ने hi एक साथ कच्ची को नीचे फेंका और उसी समय चंचल की ब्रा भी फैट गयी रिमझिम के खींचने से पर ब्रा के सिर्फ कप के नीचे से इलास्टिक टूटी तो ब्रा चंचल के छूछीयो के ऊपर इकठी हो गयी..

ये होते hi पूर्वी ने चिल्ला कर इशारा किआ की चंचल जीजी जीत गयी..

ये सुनकर दोनों अलग हुए.

रिम- अरे यार बस ब्रा बदन पर रह गयी जीजी के.

चंचल- हाँ ब्रा ने बचा लिए पर बेचारी खुद नहीं बच सकीय.

इस पर सब हंसने लगे अभी सबका ध्यान दोनों के नंगे बदन पर था,

उदयवीर तो अपनी बेटी को नंगा देख सब भूल गए थे उनका हाथ खुद बा खुद अपने लुंड पर चलने लगा था...

वहीं बाकि सब भी दोनों गदराई बहुओं के जलवे देख लुंड मसल रहे थे.

माधुरी- चल रिम्मी अपनी जीजी की मस्सगे कर अब.

पूर्वी- हाँ भाई अब जीजी को इनाम तो मिलना चाहिए.

रिम- हाँ हाँ करती हूँ न, ऐ जी रसोई से तेल की शीशी उठा लाओगे ज़रा.

रमन- हाँ अभी लाया,

रमन भाग कर गया और तेल की शीशी ले आया.

रिम- लेटो जीजी

चंचल रिमझिम के कहे अनुसार लेट गयी और रिमझिम उसके बदन पर तेल गिराने लगी, और फिर हाथों से उसके बदन पर तेल को लगते हुए चंचल के कामुक बदन की मस्सगे करने लगी,

वहां मौजूद सरे मर्द यही सोच रहे थे की काश ये मौका उन्हें मिलता...

चेतन भी अपनी पत्नी को यूँ देख उत्तेजित हो रहा था,

रिमझिम भी सबको उत्तेजित करने के लिए कोई कसार नहीं छोड़ रही थी और चंचल किचिचियों को मसल मसल कर तेल लगा कर दिखा रही थी, चंचल लेते लेते आँखें बंद किये हुए आहें भर रही थी, चंचल के बदन को रिमझिम तेल से अच्छे से भिगो रही थी,

वहीं आगे का बदन होने के बाद रिमझिम ने चंचल को पलट दिया और अब उसके बड़े बड़े चूतड़ों को तेल से नहलाने लगी फिर उन्हें सब को दिखते हुए मसलने लगी, उदयवीर तो अपनी बेटी का बदन देख बिलकुल सुन्न रह गए थे,

अगले कई मिनट तक रिमझिम ने चंचल की छूट और गांड पर भी खूब ध्यान देते हुए उन्हें भी अच्छे से तेल से चिकना कर दिया और फिर जाकर हटी,

चंचल उठी तो उसका पूरा बदन तेल से लबालब था और चमक रहा था,

रिम- जीजी कैसी लगी मस्सगे.

चंचल- हाय मेरी रिम्मी मज़ा आ गया..

ये कहकर चंचल ने रिम्मी को गले लगा लिए .

और फिर दोनों अलग हुए तो रिमझिम के बदन पर भी तेल लगा हुआ था.

रिम- अरे जीजी मुझ पर भी तेल लगा दिया..

चंचल- तो क्या हुआ ाचा लग रहा है ले और.

ये कहकर चंचल ने तेल की शीशी से और तेल लेकर रिमझिम के बदन को भी तेल से चिकना कर दिया और हाथ फिरकर पूरे बदन पर अच्छे से लगा दिया.

सूजन सिंह - अरे अब तो दोनों hi एक जैसी लग रही हो.

सावित्री- दोनों हैं hi एक जैसी बिलकुल बहनें हैं.

माधुरी- सच में इन दोनों का प्यार देख मुझे बड़ी ख़ुशी होती है..

चरण सिंह- बिलकुल सही कहा..

चरण सिंह अपना लुंड मुठियाते हुए बोले..

चंचल- और रिमझिम अपनी जगह बैठ गए और रिमझिम बोली- अरे अब बस बहुत हो गयी तारीफ अब आगे भी खेलो.

बिमला- हाँ भाई आगे खेलते हैं,

बिलकुल नंगी बैठी बिमला ने अपनी बिटिया के नंगे बदन को देखते हुए कहा जिसके बड़ा पर सिर्फ एक फटी हुई ब्रा एक पतली पट्टी की तरह चूचियों से ऊपर चिपकी हुई थी...

पंकज- हाँ भाई बिलकुल आगे बढ़ते हैं...

रमन- हाँ घूमता हूँ,

रमन ने बेलन फिर से घुमाया जो की इस बार चंचल पर आकर रुका.

चंचल- अरे ये क्या बात हुई अभी तो हेट हैं हम..

पंकज- भाठी ये बात बेलन को थोड़े hi पता है.

इस पर सब हंसने लगे,

रमन- भाभी वैसे भी पिछली बार रिम्मी पर आकर रुका था वो तो सामने थी तुम इस बार सीधा तुम पर रुका है.

रिम- अरे जीजी क्या पता कुछ अच्छा निकल जाये...

चंचल- देखते हैं पंकज भैया बताओ..

माधुरी- अरे बहु ाचा hi होगा कुछ घबरा मत.

पंकज- सुनो भाभी लिखा है- अपने सामने वाले खिलाडी की गॉड में बैठना है अगली बारी आने तक...

रिम- देखा कितना आसान मिला है,

चंचल- हाँ और कुछ तो नहीं करना?

पंकज- नहीं बस इतना hi लिखा है.

पूर्वी- और इससे अच्छा क्या लोगी जिनकी गॉड में बचपन से खेली हो उन्ही की गॉड में बैठना है,

पूर्वी ने उदयवीर की और इशारा किआ जो की चंचल के सामने थे.

रिम- तैयार हो चाचा अपनी बिटिया को खिलने के लिए.

उदयवीर को तो कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या बोलेन वो खुद नंगे थे ऊपर से बेटी बिलकुल नंगी थी और अब इस हालत में ऐसे उसे अपने ऊपर बिठाना..

उदयवीर- हैं हांण.

चंचल- पर ऐसे कैसे बैठूं?

रमन- कैसे बैठूं मतलब.

चंचल- अरे बचपन की बात अलग थी पर अभी मैं इतनी भरी हो गयी हूँ बाबा के पेअर दर्द करने लगेंगे ऐसे बैठेंगे तो.

माधुरी- ये तो सही कह रही है...

चेतन- अरे एक काम करो न बाबा तुम पीछे पड़े बिस्तर पर बैठ जाओ उसके बाद तो आराम से बैठ सकती हो...

उदयवीर को हैरानी हुई को उसका दामाद खुद उसकी नंगी बीवी को अपने नंगे बाप के ऊपर बैठने को बोल रहा है,

रमन - हाँ ये सही रहेगा,

चंचल- हाँ बाबा चलो बिटर पर बैठ जाओ पीछे hi है.

उदयवीर उठे और बिस्तर पर पेअर लटका कर बैठ गए और फिर चंचल आई और अपने बाबा के पैरो के दोनों और पेअर फैलाकर कर अपनी पीठ उनकी और कर के उनकी गॉड में अपने नंगे चूतड़ों को रख कर बैठ गयी,

उदयवीर को अपने सामने बिटिया के बड़े गोल मटोल तेल में चमकते चूतड़ सम्मे नज़र आये तो उनका लुंड ठुमके मरने लगा और फिर चंचल जैसे hi बैठी उदयवीर का लुंड बेटी की दोनों चूतड़ों के बीच की दरार में फंस गया जिससे एक बार तो दोनों की hi आह्ह्ह्हह निकल गयी...

रिम- अरे वाह कितनी प्यारी लग रही हो जीजी...

चंचल- हैं न, मुझे तो बचपन की याद आ गयी, जब बाबा मुझे गोदी में बैठकर खिलते थे,

ये कहकर चंचल प्यार जताते हुए थोड़ी पीछे हो अपने बाबा के बदन से टिक गयी साथ hi उनके दोनों हाथ पकड़ कर अपने नंगे चिकने पेट पर रख दिए.

उदयवीर का लुंड उसकी दरार में ठुमके मरने लगा जो चंचल ने भी महसूस किआ पर कुछ बोली नहीं पर उदयवीर से अब और खुद से संयम करना मुश्किल होता जा रहा था...

रिम- चलो फिर आगे खेलते हैं.

रमन- हाँ

ये कहकर रमन ने फिर से बेलन घुमाया जो की माधुरी पर आकर रुका.

रमन- मम्मी तुम्हारी बरी आ गयी.. बताओ जीजाजी क्या लिखा है मम्मी जी के लिए..

इधर दोनों बाप बेटी को खेल पर ध्यान लगाना मुश्किल हो रहा था, उदयवीर और चंचल दोनों का hi ध्यान अपनी टैंगो के बीच था जहाँ हलचल मची हुई थी, चंचल ने कुछ सोचा और चेहरा घुमा कर अपने बाबा की और देखा जो उसे hi देख रहे थे, चंचल अपने बाबा की आँखों में देख मुस्कुराई और फिर थोड़ा सा उनके ऊपर से उठी, और फिर उदयवीर को अपने लुंड पर चंचल का हाथ महसूस हुआ जिसे पाकर वो चौंक गए उन्हें यकीन नहीं हुआ की उनका लुंड बेटी के हाथ में है ये सोचकर hi वो बिलबिलाने लगे, अगले hi पल चंचल बापिस बैठी और उनके लुंड से अपना हाथ हटाया पर फिर जो उदयवीर को महसूस हुआ उसे शब्दों में बताना असंभव था, चंचल ने अपने बाबा के लुंड को अपनी छूट के द्वार पर लगाया और फिर नीचे बैठ गयी उसकी गरम छूट ने अपनर बाबा का लुंड निकल लिए..

उदयवीर ने अपना लुंड अपनी बेटी की गरम छूट में महसूस किआ तो वो सारा संयम और खुद पर काबू खो बैठे एक पल को तो उन्हें यकीन नहीं हुआ की उनका लुंड अपनी hi बेटी की छूट में है और जैसे hi ये एहसास हुआ की ये सच है वो सब कुछ भूल की कहाँ हैं कैसे हैं... नीचे से बेटी की छूट में धक्के लगाने लगे..

दूसरी और बाकि सब का ध्यान पंकज पर था जो माधुरी का कार्य पढ़ने वाला था पर तभी सबका ध्यान थप थप की आवाज़ों और चंचल की सिसकियों पर गया और सब उनकी और देख कर चौंक गए,

चंचल अपने बाबा का लुंड छूट में लेकर बैठी थी, और उसके बाबा नीचे से दनादन उसकी छूट में लुंड पेल रहे थे...





चंचल के मुँह से ओह्ह्ह्ह बाबा ओह्ह बाबा hi निकल रहा था, बिमला अपनी बेटी को पति से चुड़ते देख बिलकुल हैरान हो गयी थी.. वहीं बाकि सब भी ये देख बेहद उत्तेजित हो गए थे, रिम्मी ने पूर्वी को इशारा किआ और पूर्वी भी समझ गयी वहीं रिमझिम ने रमन को भी इशारा किआ, रिमझिम ने भी जल्दी से आगे बढ़ अपने पापा सूजन सिंह को पकड़ा और उनके कपडे उतर कर उन्हें भी उदयवीर के बगल में बैठा दिया और चंचल की तरह hi खुद भी अपने पापा के लुंड पर सवार हो गयी, अब दो दो बेटियां बाप से चुद रही थी,

पूर्वी आगे बढ़ी और चरण सिंह के आगे जाकर झुक गयी और उनके खड़े लुंड को मुँह में भर लिया, चरण सिंह जिनकी नज़र अपनी दोनों बहुओं पर थी जो की अपने अपने बाप के लुंड पर कूद रही थी उन्होंने लुंड पर पूर्वी का गरम मुँह महसूस किआ तो गदगद हो गए,

माधुरी बिमला और सावित्री ये सब होते देख गरम हो रही थी, अगले hi पल माधुरी को अपनी कमर पर हाथ महसूस हुए और उसने मुद कर देखा तो अपने बड़े बेटे चेतन को पाया.. वो कुछ समझ पाती इससे पहले hi उसके होंठों पर चेतन ने अपने होंठ रख दिए और अपनी माँ के होंठों को चूसने लगा, माधुरी तो बिलकुल चौंक hi गयी वहीं चेतन के हाथ ऊपर उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से मसलने लगे, माधुरी कुछ पल तो हैरान हुई फिर चेतन का साथ देने लगी, चेतन ने अपनी माँ की चूचियों से हाथ हटाया और हाथ नीचे लेजाकर उनके साड़ी और पेटीकोट को नीचे से कमर तक उठा दिया... माधुरी को बेटे के होंठ चूसते हुए अपनी गांड और छूट पर ठंडी हवा महसूस की, क्यूंकि कच्ची उसने पहनी नहीं थी... चेतन ने बिना अपनी माँ के होंठों को छोड़े hi अपना कच्चा नीचे कर अपने लुंड को बहार किआ और फिर अपनी माँ के होंठों को छोड़ा और बोलै - ओह्ह्ह्ह मम्मी...

माधुरी- हैं बेटा आह्ह्हह्ह्ह्ह.

माधुरी की इस आह्ह्हह्ह्ह्ह की भी खास वजह थी क्यूंकि चेतन ने बिना देरी के अपना लुंड अपनी मम्मी की गरम छूट में घुसा दिया पीछे से, जिससे माधुरी की आह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गयी...

अपनी बेटे का लुंड छूट में महसूस कर माधुरी सिहर उठी, और चेतन भी अपनी माँ की छूट की गर्मी पा कर कुछ देर बिलकुल स्थिर होकर उस एहसास को महसूस करने लगा...

फिर चेतन ने अगले hi पल माधुरी को बिस्तर के सहारे झुका दिया माधुरी तो बस अपने बड़े बेटे के हाथों गुड़िया सी जैसी वो छह रहा था वैसी होती जा रही थी... .चेतन ने अपनी माँ को झुकाया और फिर उसकी साड़ी और पेटीकोट को थाम कर पीछे से धक्के लगाने लगा,





चेतन अपनी माँ की छूट में धक्के लगाकर अपनी मम्मी को छूट को पेलकर मादरचोद बनने का सुख प्राप्त कर रहा था..

इधर चरण सिंह ने अपनी पत्नी को बेटे से चुड़ते हुए आँखें फाड़े देख रहे थे और और पूर्वी झुक कर उनका लुंड चूस रही थी... उन्होंने सोचा चंचल बहु जो छह रही थी वो पूरा हो गया, वहीं चरण सिंह को खुद भी एक अलग एहसास हो रहा था ये देख कर...

इधर रमन हर तरफ देख खुश हो रहा था सब तरफ चुदाई का माहौल बन रहा था, खैर वो भी आगे बढ़ा और उसने अपनी सासु माँ को पकड़ा, सावित्री तो जैसे अपने दामाद के इंतज़ार में hi थी...

सावित्री ने तुरंत अपने बचे हुए कपडे उतरे और पूरी नंगी हो गयी, वहीं रमन भी अपनी सासु माँ के भरे बदन को देख नंगा हो गया और फिर अपनी सासु माँ के पास गया, और सीधा उनकी चूचियों पर टूट पड़ा, वहीं सावित्री ने अपने दामाद के लुंड को पकड़ लिया और उसे अपनी छूट पर घिसने लगी, जिससे रमन और गरम होने लगा,

रमन ने अगले hi पल सावित्री के एक पेअर को उठाकर बगल में रखा और अपना लुंड अपनी पत्नी की माँ की छूट में घुसा दिया, अब रमन पहले से hi इतना उत्तेजित था तो शुरू से hi तगड़े धक्के लगाने लगा,





सावित्री भी दामाद के झटके पाकर ाआहें भरने लगी,

सावित्री- अह्ह्ह्हह्हह बेताहहह आह्ह्ह्हह ऐसी हीई ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह....

रमन- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मी जी आह्ह्ह्हह क्या गरम छूट है तुम्हारी अह्हह्ह्ह्ह.

सावित्री- अह्ह्ह्ह बेटी के साथ साथ माँ की छूट भी कैसी लगी दामाद जी..

रमन- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मी जी बहुत मज़ा आ रहा है अह्ह्ह यकीन नहीं हो रहा जहाँ से रिम्मी निकली आज मेरा लुंड उसी छूट में है.

सावित्री- अह्ह्ह्हह्हह बेताहहह यकीन करलो आह्हः यही सच है...

दोनों चुदाई करते हुए बातों से और उत्तेजित हो रहे थे...

इधर सब की चुदाई होते हुए बिमला देख रही थी और गरम हो रही थी... तभी उसे अपने नंगे बदन पर किसी का हाथ महसूस हुआ देखा तो वो पंकज का हाथ था, पंकज ने बिमला को पीछे खींच कर अपने ऊपर बैठा लिए...

बिमला भी मर्द का स्पर्श पाकर मस्त हो गयी... पंकज ने अपने लुंड को बिमला की छूट में घुसा दिया और बिमला की आह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गयी, पंकज पीछे से हाथ दाल कर बिमला की बड़ी बड़ी चूचियों को मसलने लगा, और बिमला भी हलके हलके कमर को उछालते हुए छोड़ने लगी..





बिमला- ahhhhhhhhhhh पंकज बेताहहह बड़ा गरम लुंड है तुम्हारा ahhhhhhhhhhh

पंकज- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह चछहई तुम्हारी छूट भी बहुत गरम है... Ahhhhhhhhhhh....

पूरे आँगन में चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था, खेल छोड़ कर अब सब चुदाई के खेल में लग गए थे...

चंचल अब घूम कर अपने बाबा की और मुँह कर के उनके लुंड पर उछाल रही थी और उसके बाबा अपनी बिटिया की बड़ी बड़ी छूछीयोंन को चूस रहे थे..

उदयवीर ने ऐसा एहसास कभी नहीं किआ था अपनी बेटी को छोड़ने जैसा सुख कभी नहीं मिला था और उसी उत्तेजना में उनके लुंड ने बेटी की छूट में अपना सारा रास छोड़ दिया पर झड़ने के बाद भी उनका लुंड ज्यों का त्यों खड़ा रहा और लगातार वो चंचल को छोड़ते रहे, चंचल भी अपने बाबा से चुड़ते हुए बेहद खुश थी... और पूरे जोश में अपने बाबा से चुद रही थी,

वहीं उदयवीर भी झड़ने के बाद भी नीचे से पूरे धक्के लगा रहे थे





चंचल- अह्ह्ह बाबाःह्ह्ह ahhhhhhhhhhh छोड़ो अपनीइ बेटीईई को...

उदयवीर- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बिटिया आह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्ह ऐसा मज़ाआहहह कभी नही आया...

चंचल- हांण बाबाःह्ह्ह ahhhhhhhhhhh मुझे भीई,

इधर पूर्वी ने अपने मुँह से चरण सिंह का लुंड निकल लिए तो चरण सिंह पूर्वी को देखने लगे जो की कड़ी होकर अपने कपडे उतरने लगी और चरण सिंह बेसबर होकर पल पल नंगे होते उसके मदमस्त बदन को देख आहें भरने लगे कुछ hi पालो में पूर्वी उनके सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी,

पूर्वी- क्यों चाचाजी मुँह मीठा करना है.

पूर्वी ने अपनी छूट पर हाथ फिरते हुए कहा अब ऐसे निमंत्रण को कौन मन कर सकता था जाहिर है चरण सिंह भी नहीं कर पाए और मुस्कुरा कर हाँ में सर हिला दिया...

पूर्वी आगे आई और उन्हें धक्का देकर सीधा लिटा दिया और खुद उनके दोनों और पेअर करके अपनी रसीली छूट को चरण सिंह के मुँह पर रख दिया....

चरण सिंह ने भी खुले मुँह से उसका स्वागत किआ और पूर्वी की छूट भूखे भेड़िये की तरह चाटने लगे,

पूर्वी- ahhhhhhhhhhh चचहहाआजीइइइइइ...

पूरे कमरे में चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था, थप थप की आवाज़ आहों और सिसकियों के साथ मिलकर एक मधुर संगीत बन रही थी...

उदयवीर अपनी बेटी को अब अपने नीचे लिटा कर उसकी छूट में लुंड पेलते हुए उसके होंठों को चूस रहे थे चंचल भी अपने बाबा का ऐसा साथ पाकर बेहद खुश थी...

उनके बगल में hi रिम्मी अपने पापा के लुंड को अपनी गांड में लेकर उछाल रही तह





सूजन सिंह को बेटी की वजह से बिलकुल म्हणत नहीं करनी पद रही थी क्यूंकि रिम्मी खुद hi अपनी गांड अपने पापा के लुंड पर उछाल उछाल कर पटक रही थी..

सूजन सिंह- ahhhhhhhhhhh बेटा ओह्ह्ह्ह ऐसी हीईई.

रिम्मी- अह्ह्ह्हह्हह पापाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह ahhhhhhhhhhh...

वहीं दूसरी और माधुरी को अब चेतन ने बिलकुल नंगा कर दिया था और अब अपनी माँ को बिस्तर पर लिटा कर खुद बिस्तर के बगल में खड़ा होकर दनादन उसकी छूट में धक्के लगा रहा था, अपनी माँ की झूलती हुई चूचियां उसे बहुत उत्तेजित कर रही थी जो उसके हर धक्के के साथ झूल रही थी....

उनके बगल में रमन अपनी सासु माँ को अपने ऊपर बिठा कर उसकी मस्त छूट के मज़े ले रहा था, बिमला अपने दामाद के लुंड पर उछाल रही थी





सावित्री- ahhhhhhhhhhh बेताहहह.

रमन- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मी जी आह्ह्हह्ह्ह्ह अपनी सास को छोड़ कर मैं तो धन्य हो गया ahhhhhhhhhhh...

सावित्री- ओह्ह्ह्ह महहहहहहहह अह्हह्ह्ह्ह...

वहीं

वहीं उनसे थोड़ी दूर और hi बिमला को पंकज ने अपने लुंड पर बिठा रखा था और अपना लुंड नीचे से उसकी छूट में दनादन पेल रहा था,

बिमला ब्बि अपनी बेटी को अपने बाप से चुड़ते हुए देख रही थी और अपनी चुदाई करवा रही थी,





पंकज- अह्ह्ह्ह कसम से बता रहे हैं चची अह्ह्ह्ह चंचल भाभी को बदन तुमसे hi मिला है अह्ह्ह..

बिमला- जब बिटिया हमारी है तो हमसे hi मिला होगा न बचुआआह्ह्ह्हह्ह...

पंकज- और कामुकता भी दोनों माँ बेटी लुंड को ऐसी भर्ती हो जैसे खाहि जाओगी .

बिमला- ahhhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह ऐसी हीई अच्छा लग रहा हीी अह्ह्ह्हह देखो बिटिया कैसे बेआबाए से छुड़वा रही है..

पंकज- हाँ चाहहीइइइइइइइ अपने बाप को बेटी छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ बनने का सुखदे रही है......

बिमला- ahhhhhhhhhhh ऐसी बेटी तो हर बाप चाहता है बेताहाहहह..

इधर इनकी चुदाई चल रही थी तो वहीं एक तरफ चरण सिंह के चेहरे पर पूर्वी अपनी छूट को घुमा घुमा कर चटवा रही थी इसी बीच चरण सिंह को अपने लुंड पर किसी का हाथ महसूस हुआ और फिर अगले hi पल उन्हें अपने लुंड पर गरम एहसास हुआ जो उनके लुंड को निगलने लगा, चरण सिंह ये महसूस कर इतना समझ गए की उनका लुंड किसी ने अपनी छूट में लिए है पर कौन है ये नहीं देख पाए क्यूंकि चेहरे पर पूर्वी बैठी थी,

कुछ hi पलों में उनके लुंड को छूट ने जो लेकर बैठी उसने उनके लुंड पर कूदना शुरू कर दिया और चरण सिंह बिलकुल मज़े में आ गए मुँह पर छूट और लुंड पर भी छूट थी, और क्या चाहिए एक मर्द को, पूर्वी ने कुछ देर अपनी छूट चरण सिंह से और चटाई और फिर उठ गयी पूर्वी के उठाते hi चरण सिंह को एक बेहद खूबसूरत बदन नंगा उनके ऊपर उछलता दिखा और फिर जैसे hi चरण सिंह की नज़रें उसके चेहरे पर पहुंची चरण सिंह की आँखें फटी की फटी रह गयी एक पल को तो उनका दिमाग सुन्न पद गया,

क्यूंकि सामने जिसका चेहरा उन्हें दिखा वो कोई और नहीं बल्कि उनकी अपनी बेटी ख़ुशी थी,

चरण सिंह कुछ देर तक तो कुछ बोल hi नहीं पाए फिर किसी तरह कुछ होश सँभालते हुए bole-beta ख़ुशी तू...

ख़ुशी- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पापाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हननननमननननन कैसी लग रही है मेरी चुत...

ख़ुशी का इतना कहना था की चरण सिंह अपनी बेटी की छूट में झड़ने लगे, ख़ुशी ने भी अपने पापा का रास अपनी छूट में भरता हुआ महसूस हुआ तो उसे भी बहुत ख़ुशी और उत्तेजना हुई...

वहीं ये नज़ारा माधुरी ने देखा जो की अपने बेटे से छुड़वा रही थी अपनी बेटी को अपने पापा से चुड़ते देख माधुरी भी खुद को संभल नहीं पाई और झड़ने लगी, माधुरी के झड़ते hi चेतन भी खुद को रोक नहीं पाया और अपनी मम्मी की चुत को अपने रास से भर दिया, इधर चंचल भी काफी देर से अपने बाबा से कबुद्धा रही थी और अब उससे भी ज़्यादा रुका नहीं गया तो वो भी झड़ने लगी, बेटी को झाड़ता देख उदयवीर भी खुद को रोक नहीं पाए और बेटी की छूट को अपने रास से भर दिया..

रास से तो सूजन सिंह ने भी अपनी बेटी को भरा पर छूट में नहीं गांड में....

रिम्मी भी पापा की ज़बरदस्त गांड मरै के सामने ढेर हो गयी,...

बिमला और पंकज ने भी एक दुसरे को स्खलित करा कर hi दम लिए, वहीं रमन ने अपनी सास की छूट में अपना रास छोड़ा,

जब सब झाड़ गए तो माधुरी ने hi सबका ध्यान अपनी और खींचा और बोली- सुनो ये कोई बताएगा ये सब क्या हो रहा है, इतना तो मैं जानती हु ये सिर्फ खेल की वजह से नहीं है,

सावित्री- हाँ सबको सब कुछ पता लग्न चाहिए.

चरण सिंह- हाँ और ख़ुशी तू कब और कैसे शामिल हो गयी इस सब में...

चेतन- ठीक सबको सब पता चलेगा अभी कुछ देर के लिए सब अपने अपने साथी से दूर हो कर एक साथ बैठ जाओ जिसके जो भी सवाल हैं जवाब हैं पहले वो निपटा लेते हैं

रमन- हाँ आ जाओ सब बीच में...

चंचल- रुको मैं चाय लेकर आती हूँ तब तक जिसे कुछ साफ़ करना हो कर ले,

चंचल ने अपने बाबा के लुंड से उठाते हुय्र कहा.

खैर 15 मिनट्स बाद सरे लोग आँगन में बैठे थे सब के हाथ में चाय थी और फिर सब एक दुसरे के सवालों का जवाब दे रहे थे जिससे सबको सब कुछ पता चल जाये,

ये बात चीत का दौर काफी लम्बा चला जिसके बाद में रिम्मी ने सबका ध्यान अपनीइ और खींचा और कहा- अब क्या करना है ये तो बताओ..

जारी रहेगी
 
खैर 15 मिनट्स बाद सरे लोग आँगन में बैठे थे सब के हाथ में चाय थी और फिर सब एक दुसरे के सवालों का जवाब दे रहे थे जिससे सबको सब कुछ पता चल जाये,

ये बात चीत का दौर काफी लम्बा चला जिसके बाद में रिम्मी ने सबका ध्यान अपनीइ और खींचा और कहा- अब क्या करना है ये तो बताओ..

अपडेट 199
Madhuri- karna kya hai batao toh mujhe to yakeen nahi ho raha yahan chuttiyan manane aaye the aur kya kya ho gaya.

Bimla- haan aisa to kuch socha nahi tha..

Madhuri- wohi to..

Itna sunkar khushi apani jagah se uthi aur apani mummy ke samne aai aur boli- kya hua mummy tumhe kuch pasand nahi aaya?

Madhuri ne apani jawan beti ke nange badan ko dekha aur boli- nahi aisa kuch nahi hai beta bas thoda hairan hun...

Khushi- tumhari hairani abhi kam karti hun Mummy waise bhaiya ne to apane nikalne ki jagah dekh li hai ab mujhe bhi dekhni hai...

Khushi apani mummy ki tango ko phailate huye boli.. madhuri ne bhi jaisa beti ne chaha waise hi apani tamge khol kar apani nangi choot beti ke samne kar di...

Apani maa ki nangi choot dekhkar Khushi muskurai aur apani maa Ki aankhon mein dekhte huye uske aage jhuk gayi aur apane muh ko mummy ki choot par laga diya to Madhuri ki aahhhhh nikal gayi....

Madhuri ke sath sath baki sab bhi khud ko sisakne se rok nahi paaye...

Madhuri-ahhhhh betaaahhhhhhh ohhhhhh aise hiii chaat apani mummy ki choot ko aahhhh..

Madhuri khushi ke sir par hath pherte huye boli.

Rim- ab baki sab Kya dekhte hi rahoge...

Pankaj- waise nazara aisa ho to dekhne mein bhi koi burai nahi hai.

Chetan- haaye ye to sahi kaha.. apani bahan ko apani mummy ki choot chatate dekh kar maza aa raha hai..

Vineet- are jeeja aise nazare to abhi aur dikhate hain tumko...

Raman- acha kaise.

Vineet- ab hum batate hain waise sab karte jao.. ab beti aur maa ki choot chatai chal rahi hai to yahi chalne do.. chanchal jeeji tum bhi bimla Chachi ki choot mein muh ghusa do..

Chanchal- are neki aur poochh poochh.. kholo apani choot amma..

Madhuri ke bagal mein hi Bimla ne apani tangein khol di aur Madhuri ki tarah hi apani beti se choot chatwane lagi...

Bimla- ohhhhh bitiyaahhhh ahhhh kha ja apani amma ki choot ko..

Vineet- tai tum bhi chachi ke bagal mein jao aur rimjhim jeeji tum tai ki choot chato...

Savitri- are waah aaja beta.. mummy ki choot chaategi?

Rim- are ye bhi koi poochhane wali baat hai...

Kuch hi palo mein teen maayein ek doosre ke bagal mein leti hui apani apani betiyon se choot chatwa rahi thi..

Udayveer- are waah Vineet beta bada sahi sameekaran banaya hai, ek sath teeno betiyan lagi hui hain

Udayveer apana lund sahlate huye bole..

Charan Singh- haan aise nazare kahan dekhne ko milte hain..

Sujan Singh- par ab aise nazare aur dekhne ko milenge roz..

Sujan Singh bhi lund sahla rahe the,

Chetan- sahi mein Vineet mast socha hai..

Raman- are main to soch raha hun ki sabko vineet hi bataye kya karna hai, kiske sath karna hai..

Poorvi- sahi upay hai Vineet mast mast tareeke sochega, ye aur Karma milkar ye sab hi karte rahte the.

Pankaj- sahi mein?

Chetan- Karma tumhare mama ka ladka?

Vineet- haan jeeja, ye samjho ki jo ho raha hai usi ki wajah se ho raha hai usi ne sab shuru kia tha.

Raman- phir to jaldi milkar use dhanyawad karna padega.

Pankaj- are bhai dhanyawad baad mein ab Vineet bata bhai aage kya karna hai tujh par zimmedari hai..

Vineet- are batata hun jeeja, are ab Tauji, chacha aur udayveer chacha apani apani betiyon ki uthi hui gand dekho aur unke peeche jakar unhe chato..

Charan Singh- are waah ye hui na baat,

Charan Singh furti mein uthe aur Khushi ke peeche baith kar apana chehra khushi ke chutadon mein ghusa diya jiska ehsaas hote hi Khushi ki siski nikli jo uski mummy ki choot mein hi ghut gayi,

Charan Singh ke sath Udayveer ne bhi Chanchal ki gand mein muh ghusa diya aur uski gand ke chhed ko jewbh se chatne lage..

Sujan Singh ne bhi yahi Rimjhim ke sath kia, ab teeno betiyan apane mummy aur papa ke beech mein thi..

Raman is nazare ko dekh bola sahi mein Vineet kya mast tigdi banai hai...

Teeno baap apani apani betiyon ki gand ko jeebh se aise chaat rahe the jaise usme se malai nikalna chahte ho, Charan Singh ki jeebh to Khushi ki gaand nein andar tak ghusi hui thi,

Udayveer bhi beti ke chuttadon ko hathon se failakar apani jeebh se uski gand ko chat rahe rhe sath hi uske chutadon ko masal rahe the,

Sujan Singh to na jane kitni baar beti ki gand ka swad chakh chuke the par abhi bhi aise chaat rahe the jaise pahli baar Mili hai,

Chetan- are Vineet apana bhi to kuch soch lund dard kar Raha hai ab..

Vineet- soch lia jeeja tum jao apani mummy ke muh mein lund do apana,

Vineet aage badh apani tai ke muh mein Lund ghusata hua bola,

Raman - are phir main aur Pankaj bhaiya aur Poorvi?

Vineet- are Jeejaji tum Bimla chachi ke muh mein lund ghusao...

Ye sun Chetan to apani mummy ke muh ke aage khade hokar uske muh mein lund ghusa chuka tha,

Pankaj ne bhi aage badh kar bimla ke muh mein lund ghusa diya..

Raman- ab main aur Poorvi hi rah gaye hain,

Vineet- jeejaji tum bhi apani mummy ke muh mein hi ghuso jakar chachi ke do bete hain dono ko sambhal sakti hain, aur Poorvi jeeji tum aa jao Tai ka sath do aur meri gand chaato,

Poorvi- kameena bhai apani bahan se apani gand chatwayega.

Vineet- haan jeeji dikhao in sabko bhai bahan ka pyar

Poorvi aage badhi aur Vineet ki gand ke peeche baith kar apani jeebh uski darar mein phirane lagi wohin, Raman ne apani mummy ki doosri or jakar apana lund mummy ke muh ke aage kar diya,

Madhuri beti se choot chatwate huye apane dono beton ke lund badal badal kar choosne lagi... Poora parivar ek sath tha maa beton ke lund choos rahi thi to beti maa ki choot chaat rahi thi wohin baap beti ki gand ko jeebh se nahla raha tha..

Teen samoohon mein chudai chal rahi thi ek sath,

Vineet- ahhhhh jeeji,

Vineet ne apani bahan ki jeebh ko apane gand par mahsus h

Karte huye kaha phir bola- uhmm Chacha, Tauji, ab betiyon ki gand ka swad chakh lia ho to ab apane apane lund ko bhi unki gand ka swad chakha do,

Apani beti ki gand marne ka soch kar hi charan singh aur udayveer to pagal se hone lage, wohin ye baat chanchal aur Khushi ne suni to wo bhi apane papa se gand marwane ka soch kar bilbilane lagi par usne apani mummy ki choot se muh nahi hataya,

Teeno adhed umar ke sandhiyon ne apani apani betiyon chuttadon ke peechhe jagah li aur phir apane lund ko pakad kar beti ki gand ke dwar par lagaya,

Udayveer ke liye to ye kisi sapne jaisa tha apani bitiya ko chodne ke baad ab uski gand bhi marne ka mauka mil raha tha,

Wohin aisa hi haal Charan Singh ka bhi tha lund maano fatne ko ho raha tha, jaldi se use pakad kar khushi ki gand ke chhed par lagaya aur phir halka sa zor lagaya aur dhyan se dekh rahe the kaise beti ki gand ka chhed dabaw ke karan khula aur phir phailte huye apane papa ke lund ke tope ko jagah de ri aur phir tope par kisi chhalle ki tarah kas gaya, Charan Singh to is ehsaas se pagal hone lage...

Charan Singh- ohhh betiiiiiii ahhhhhhh teri gaaannddddd kitiii garam hai ahhhhhh....

Ye jab Udayveer ne suna to Charan Singh ko dekha aur phir unke lund ko jo ki beti ki gand mein tha,

Udayveer ko aise laga jaise wo peechhe na chhooot jayein aur unhone bhi turant chanchal ki kamar ko thama aur ek dhakka lagakar lund jhatke se andar ghusa diya jisse chanchal apani amma ki choot mein sisak padi..

Udhar bimla jiske muh mein Pankaj ka lund tha usne bhi dekha ki uske pati beti ki gand mein jagah bana rahe hain..

Sujan Singh ne to ek baar phir se bina pareshani ke beti ki gand mein jad tak Lund ghusa diya aur sochne lage ki har baar beti ki gand marne mein pichli baar se zyada maza aata tha..

Teeno samdhi apani apani beti ki gaand mein lund chalane lage,

Chanchal apane baba se gand marwate huye ek alag tarah ka aanand aa raha aur usi anand se wo apani amma ki choot chaat rahi thi..

Wohin Charan Singh bhi apani beti ki kasi hui gand mein lund chala kar bahut khush ho rahe the, wohin Khushi bhi apane Papa se gand marate huye bhi apani Mummy ki choot ko aur utsukta se chaat rahi thi wohin uski mummy ka bura haal tha kyunki choot mein beti ki jeebh aur muh mein dono beton ke lund the jo use ek pal ki bhi fursat nahi de rahe the, Raman aur Chetan bhi pahli baar milkar apani maa ke sath aisa kuch kar rahe the aur dono hi behad garam ho rahe the sath hi apani apani patniyon ko apane apane baap se gand marwata dekh rahe the aur apani bahan ko apane papa se...

Wohin doosri or Vineet ne ab Poorvi ko Savitri ke muh par bitha diya tha aur khud apani bahan se lund chuswa raha tha, Savitri apani bhateeji ki choot chaat rahi thi to uski choot Rimjhim chat rahi thi, aur Rimjhim ki gand mein uske papa ka lund andar bahar ho raha tha...

Teesri or Bimla Pankaj ke lund ko gale tak lekar choos rahi thi aur bimla ki choot uski beti chanchal choos rahi thi aur Chanchal ki gand uske Papa Udayveer maar rahe the jo ki apani beti ki makhmali gand maar kar anandit hote huye apani patni ke muh ki chudai hote dekh rahe the..

Poore aangan mein chudai ka mahaul bana hua tha aur siskiyon aur thap thap ki awaazein goonj rahi thi, khair teeno hi samdhi apani betiyon ki gand ki garmi mein kuch der baad pighal gaye aur teeno ne hi apani apani betiyon ki gand mein apana ras bhar diya, wohin teeno samdhanein bhi apani betiyon ki jeebh ki mehnat ke aage haar gayi aur apane partiyon ke sath sath hi jhad gayi, par unka kaam abhi khatam nahi hua tha jhadne ke turant baad hi Vineet ne teeno betiyon ko apani apani maa ke chehre par baitha diya aur teeno mummiyon ko kaam mila beti ki gand se pati ka ras nikal kar chatne ka, Savitri ko to Anubhav tha to wo turant kaam par lag gayi par baki dono samdhanein bhi peeche nahi thi aur anubhav ki kami apane josh se poori kar rahi thi, Bimla chanchal ki gand mein jeebh ghusa kar apane pati ka ras chat rahi thi, to Madhuri ne bhi Khushi ki gand par apane honth laga rakhe the,

Teeno samdhi jhadnr ke baad peechhe baithkar apani beti aur biwi ka pyar dekh rahe the, par unke nazare mein thodi badha aai kyunki ab teeno hi samdhanon ki tango ke beech koi aur aaa gaya tha,

Chetan Madhuri ki tango ke beech aa kar apana lund maa ki choot mein ghusa kar chodnr laga, Raman Bimla ki tango ke beech pahunch gaya tha aur apane bhai ki saas ko chodne laga wohin Pankaj ne Savitri ki choot mein jagah li... Aur danadan apani tai saas ki choot ke maze lene laga...

Vineet ne apana lund apani hone wali biwi Khushi ke muh ke aage kia jise wo choosne lagi....

Charan Singh apani biwi ko apane bete se chudte huye aur sath hi beti ki choot chatate huye dekh rahe the wohin khushi bhi Vineet ka lund badi lagan se choos rahi thi jise dekh Charan Singh thoda alag sa mahsoos kar rahe the, apani laad pyar se pali hui beti aaj kisi aur ke sath aisa kar rahi thi to use dekh unhe samajh nahi aa raha tha kya pratikriya dein...

Khair jaldi hi Chetan ne apani mummy ko apane lund par paani chhodne par majboor kar diya, Wohin uske kuch pal baad hi khud bhi apana ras unki choot mein bhar diya aur unke upar let gaya, idhar Khushi bhi apani mummy se gand chatate huye unke muh par jhadne lagi, Chetan apani mummy ke upar se utha to Madhuri ne Khushi ko bhi uthaya, Khushi ne Vineet ka lund nikala aur apani mummy ke muh se uth gayi, Chetan aur Madhuri to peechhe hokar apane papa ki or jakar aram karne lage wohin Vineet ne Khushi ko pakad lia aur use wohin ek karwat letakar peeche se uski gand mein lund ghusa kar use chodne laga sath hi uski chuchhiyo ko masalne laga..

Idhar chanchal ne apani amma ke muh par apana pani chhoda wohin Raman ke tej jhatko ne apane sath sath apani bhabhi ki mummy ko bhi jhadne par majboor kar diya aur teeno hi kuch hi samay ke antral par jhad gaye wohin teesri or bhi yahi haal tha Pankaj ne apani tai saas ka pani apane lund par mahsus kia to gurrate huye wo bhi jhad gaya wohin Rimjhim bhi apani maa ke muh par jhadne lagi aur sab shant hokar baith gaye sirf angan mein Vineet aur Khushi ki chudai chal rahi thi,

Charan Singh- are ye dono to ruk hi nahi rahe,

Chanchal- are abhi to inke shuru hone ka samay hai papaji abhi kaise rukenge.

Bimla- haan bhai jawani ke yahi to maze hai..

Rim- sirf jawani ki wajah se nahi kuch aur bhi kaaran hai chachi.

Rimjhim ne hanste hue kaha...

Madhuri- aur kaun sa karan hai?

Charan Singh- haan bhai aur kya karan hai..

Chanchal- papaji dono ne ek doosre ko jeewan sathi ke roop mein chun lia hai,

Charan Singh chaunkate huye- are ye kab hua..

Chetan- aaj hi hua papa, aur hum log is bare mein sabse baat bhi karne wale the,

Savitri - are waah ye to badi achi khabar hai.

Rim- hai na mummy

Raman- haan papa aur humne socha bhi ki jis tarah ke rishte humare beech ban gaye hain Vineet se acha rishta ho hi nahi sakta,

Charan Singh- par ye sab achanak kaise ho gaya,

Chetan- achanak nahi papa aur sabsw badi baat ye dono hi khud se taiyar hain aur ek doosre ko pasand karte hain. Kyun Khushi aur Vineet?

Khushi- uhmm haan Papa mujhe ye pasand hai, ahhhhhh bahut pasand.

Vineet- aur haannnn mujheeeee ahhhhh mujh bhi khushi ki gaand bahut pasand hai aur usse zyada Khushi... ahhhh।

Is par sab hansne lage..

Madhuri- haan ji waise agar pasand karte hain ek doosre ko to phir harz hi kia hai..

Sujaan Singh - aur kya aur humein to Khushi bitiya bahut pasand hai ye humare ghar mein bahu bankar aayegi to humein bahut khushi hogi..

Savitri- sahi kaha ji, ye to ghar ki khushiyan badha degi...

Madhuri- tumhara kya kahna hai jee?

Madhuri ne charan singh ki or dekhte huye poochha jo ki alag soch mein doobe huye the,

Charan Singh- are mujhe koi aise dikkat nahi hai..par..

Chetan-par kya papa ab khud hi socho seedha sa kya ab jaisa hum sab ke beech rishta ban gaya hai wo bapis sadharan ho payega?

Raman- na ho payega aur na hi hum karna chahenge, aur sabse badi baat papa kya tum ab bina khushi ko chode rah paoge?

Chetan aur Raman ki baatein sunkar Charan Singh shant hokar bas kuch soch rahe the..

Madhuri- jee kuch pareshani hai kya?

Charan Singh- are humein koi pareshani nahi hai humein bhi Vineet bahut pasand hai bas hum to is soch nein pad gaye the ki bachhe kitni jaldi badh jate hain humne socha hi nahi ki khushi ke byah ka samay bhi aa gaya hai.

Khushi- uhmm papaaaaahhhhhhhhhh ohhhhhhhhh tumhare liye main chhoti hi rahungi humesha tumhari gudiyaaaahhhh..

Khushi ne gand marwate huye kaha..

Jise dekhkar Charan Singh muskurate huye bole- chalo bhai ye to Khushi ki khabar hai sab ka muh meetha karwao bahu chanchal.

Chanchal- jee papaji abhi meetha laati hun.

Ye kahkar Chanchal uthkar rasoi mein chali to Rimjhim bhi sath chali...

Rim - chalo jeeji main bhi chalti hun akhir mere bhai ke rishte ki baat ho rahi hai.

Dono uthkar rasoi mein chali gayi to wohin Poorvi bhi uthte huye boli- main bhi to dekhun Khushi mein meri bhabhi banne layak gun hain ki nahi...

Aur jakar Khushi aur Vineet ke chehre ke aage tange phailakar baith gayi aur Khushi ne jaise hi Poorvi ki choot ko apane chehre ke paas dekha turant apana muh usme ghusa diya aur apani hone wali nanad ki choot chatne lagi.

Pankaj- ise to bas bahana chahiye choot chatwane ka,

Ye sun kar sab hansne lage wohin kuch hi der mein Chanchal aur Rimjhim sabke liye meetha le aaye aur sabko diya, itne mein Vineet ne apana pani Khushi ki gand mein Chhod diya aur usse alag hokar sabke sath jakar baith gaya jahan Rimjhim ne Khushi ki gand se nikla uska lund chatkar saaf kia, idhar Khushi Poorvi ki choot ko lagatar chatati rahi jab tak Poorvi jhad nahi gayi phir Poorvi ne Khushi ke honthon ko chooma aur phir dono sabke sath shamil huye to Savitri ne Khushi ko apane paas bulakar bitha lia aur pyar se uske sir par hath pher kar boli- haaye kitni pyari hai meri bahu...

Aur phir rimjhim ke kaan mein kuch fusfusai to Rimmi bhag kar apani mummy ke kamre mein gayi aur turant bapis aai aur Savitri ke hath mein kuch diya jo ki paise the Savitri ne 2001 rs Khushi ke hath mein rakh kar bola- le beta ye meri taraf se aashirvaad hai .

Pankaj- ye pahla aur anaukha rishta ho raha hai jahan sab nange hain.

Is par sab hansne lage..

Chanchal- main to kahti hun sare rishte hi aise hone chahiye..

Itne mein Madhuri ne bhi Vineet ko apane paas bulaya aur boli- main bhi to apane damaad se mil lun...

Vineet madhuri ke paas akar baitha to Madhuri ne use apane seene se laga lia aur phir mathe ko choomte huye boli - mujhe to Vineet humesha se hi pasand hai aur ab damaad ke roop mein bhi humari khoob jamegi... hain na?

Vineet- bilkul chachi..

Madhuri- nahi beta ab se chachi nahi Mummy hi bolo..

Vineet- theek hai mummy ji,

Madhuri- are suno apana batua do to.

Charan Singh- Rimmi beta kurte se nikal kar tudena to..

Rimmi-jii papaji

Rimjhim ne batua nikal kar diya to usme se Madhuri ne 5000 rupaye nikal kar Vineet ke hath mein rakh diye.

Vineet - nahi mummy mujhe ye nahi chahiye,

Madhuri- are nahi beta ye to sagun hai lena hi padega,

Vineet - sagun to chahiye par ye nahi.kuch aur.

Madhuri - kuch aur kya chahiye batao beta?

Vineet- ye chahiye..

Vineet ne Madhuri ki gand par hath rakhkar kaha to sab hansne lage aur Madhuri bhi..

Bimla- lo dahej mein saas ki gand hi maamgli...

Madhuri- acha pahle ye rakh phir wo bhi milega,

Chanchal- waise burai kya hai ho jaye ek baar damaad aur saas ki dumdaar chudai.

Rim- haan haan haan maza aayega...

Udayveer- kaash humein bhi aisa mauka mila hota.

Bimla- tum chup raho

Is par sab hansne lage,

Khushi- haan mummy karlo na ek baar.

Poorvi- chachi check kar ke dekh lo beti ke liye jo lund chuna hai wo kaisa hai..

Is par sab hansne lage..

Madhuri- haan bhai main kab mana kar rahi hun...

Chanchal- maza aayega saas damaad ki chudai dekh kar.

Vineet - waise saas damaad ki hi chudai hone wali hai to sabhi saas damaad karenge na,

Yahan teen saas damad ke jode hain sab karte hain

Khushi- ye to aur badhiya hoga.

Charan Singh- are haan bhai ye bhi sahi rahega.

Vineet ne apani saas ka hath pakda aur unhe uthakar ek or bistar par le jate huye bola- Bimla chachi, Tai ji aa jao , Jeejaji tum dono log bhi aa jao...

Bimla, Savitri, Chetan aur Raman bhi uth kar bistar par aa gaye aur baki sab unhe dekhne lage,

Vineet ne Madhuri ko baahon mein lia aur uske honthon par apane honth rakh diye, aur choosne laga Madhuri bhi uska sath dene lagi..

Dono ki dekha dekhi baki dono jode bhi waise hi karne lage Raman apani saas ke honthon ko choosne laga to Chetan Bimla ke honthon ko chooste huye uske chuttadon se khel raha tha,

Khair inko dekhte huye baki sab bhi dheere dheere garam ho rahe the to sabse pahle Udayveer ne Rimmi ko pakad kar apane se chipka lia aur bole- bitiya apane chacha se to theek se mili hi nahi tu,

Rim- are ChaCha ab mil leti hun,

Rimjhim udayveer ke kadak lund ko pakadte huye boli,

Udayveer rimmi ke sundar chehre ko dekh khud ko rok nahi paaye aur uske honthon ko choosne lage,

Sujan Singh bhi kaise peeche rahte unhone bhi apane ghar ki hone wali bahu ki or rukh kia aur Khushi ko uthakar apani god Mein bitha lia, Khushi bhi apane hone wale Tau Sasur ki god mein baith kar unke lund ko apane chutadon ke beech mahsoos kar garam hone lagi sath hi Sujan Singh ke hath Khushi ke kamuk jawan badan par chalte huye use masalne lage, kuch hi palo mein Sujan Singh ne Khushi ke raseele Honthon ko apane honthon mein bhar lia aur khushi ise unka aashirvad samajh kar poori lagan se unka sath dene lagi...

Idhar Poorvi par to Charan Singh ki nazar na jane kab se thi to mauka milte hi Charan Singh us par toot pade aur uski chuchhiyo ko choosne lage...

Idhar Chanchal aur Pankaj hi bache the jo ki ek doosre ke honthon ko choosne lage, pankaj chanchal ke gadraye badan ko pagalon ki tarah masalne laga...

Idhar saas damad ke teeno jode Jab tak aage badh chuke the Chetan Bimla ke chutadon ke beech muh ghusakar uski gand chat raha tha jisse Bimla sisak rahi thi, wohin Raman Savitri se apani gand chatwa raha tha, Savitri bhi damaad ki gaand mein jeebh ghusa kar use ek alag sukh de rahi thi, Sabse naye saas aur damaad thoda dheere dheere aage badh rahe the aur abhi Vineet apani saasu maa ki bhari bharkam chuchhiyo ko choos raha tha wohin Madhuri apane hone wale damad ke lund ko hathon mein le kar muthiya rahi thi...

Madhuri- ohhhhhhh maaaahhh ohhhhhh betaaahhhhhhh choos lo inka sara doodh nikal lo kha jao apani saas ki chuchiyon ko..

Madhuri doosre hath se Vineet ke sir par hath pherte huye boli...

Vineet to mast hokar apani bhawi saas ki chuchhiyo ko pi Raha tha...

Bimla- ahhhhh ohhhhhhh betaaahhhhhhh ohhhhhh aiseeeeeeeeee hi ahhhhhh...

Bimla sisak sisak kar Chetan ko apani gand chatne ke liye utsahit kar rahi thi...

Raman- ohhh mummy Ahhhhh ohhhhhhhhh mazaaa aa raha hai...

Raman apani saas ko apani gand mein ghusate huye bol raha tha...

Idhar Raman ki biwi ki chuchiyon par udayveer toote Huye the aur badal badal kar choos rahe the,

Rim- aahhhhh chachaaaahhh uhmmm..

Unke bagal mein hi Charan Singh Poorvi se apana lund chuswa rahe the,

Charan Singh- ohhh betaaahhhhhhh kya garam muh hai Tera aaahhhh phhh aiseeeeeeeeee hi...

Sujan Singh to apani bhawi bahu ke poorw badan ko badi lagan se chaat rahe the abhi unki jeebh Khushi ki nabhi mein thi hath se uski dono chuchiyan masal rahe the Khushi unke neeche machal rahi thi...

Khushi- ohhhhhhh Tauji aahhhh mmm Aahhhh ohhhhh Taujiiiiiiiiiii ahhhhhhh.

Tabhi Khushi ko apani maa ki sisaki sunai padi to usne chehra ghuma kar dekha to paaya ki Vineet ne uski maa ko neeche lita kar apana lund uski choot mein ghusa diya hai jisse uski maa sisak rahi hai khushi ko ye dekh badi khushi hui aur wo aur uttezit hone lagi,

Idhar Vineet apani saas ko chodne laga uski hilti hui chuchiyon ko tham kar uski choot mein dhakke lagane laga..

Vineet- ohh mummy ahhhhh sach kahun toaahhh naa jane kab se tumhe chodna chahta tha,

Madhuri- aaj to teri ichha poori ho gayi betaaahhhhhhh aahh chod apani saas ko...

Madhuri apane bhawi damaad se chud kar behad uttejit ho rahi thi, aur apani chuchiyon ko masalte huye Vineet ka utsah badha rahi thi...





ख़ुशी की नज़र ज़्यादा देर अपनी मम्मी की चुदाई पर नहीं टिक पाई क्यूंकि सूजन सिंह ने नीचे खिसकते हुए अपना मुँह उसकी छूट पर लगा दिया जिससे ख़ुशी का सारा ध्यान बापिस अपनी छूट पर आ गया,

उदयवीर भी अब रिमझिम की छूट पर पहुँच चुके थे और उसकी छूट का स्वाद अपनी जीभ पर महसूस कर रहे थे, वहीं चरण सिंह दोनों संधियों से एक कदम आगे थे और पूर्वी को अपने लुंड पर बैठा कर उछाल रहे थे, साथ hi दोनों हाथों से पूर्वी की भरी हुई और गदराई गांड को पकड़ कर उसे उछलने में मदद कर रहे थे,

इधर पंकज ने भी काफी बढ़त बढ़ा ली थी और अभी अपना लुंड चंचल की गांड में घुसा चूका था, चेतन और रमन भी अपनी अपनी सास की छूट की गहराई नाप रहे थे और उनकी टैंगो के बीच कूद रहे थे,

एक बार फिर से घर में चुदाई का तूफ़ान पूरे चरम पर था और बिलकुल लगन से सब लोग चुदाई में लगे हुए थे, इसी तरह ये तूफ़ान तब तक चला जब तक की सरे लुंड और छूटों ने एक एक बार अपना पानी और नहीं छोड़ दिया,

चरण सिंह ने पूर्वी की छूट को भरा तो उदयवीर ने रिम्मी को अपना रास पिलाया, सूजन सिंह ने ख़ुशी की छूट में अपना रास जमा कर अपनी बहु होने का आशीर्वाद दिया, तो पंकज ने चंचल को रास पिलाया,

चंचल की अम्मा बिमला भी अपनी छूट में दामाद का रास लेकर लेती हुई थी वहीं सावित्री भी अपने दामाद का रास पि कर बैठी थी,

विनीत ने अपना रास अपनी सासु माँ की छूट में अंदर तक भर कर छोड़ दिया था,

काफी देर की मेहनत के बाद अब सब hi थक चुके थे तो सब आपस में थोड़ा आराम करने का तय करके 3-4 के समूहों में आराम करने चले गए...
 
मैं पीछे हटा hi था की एक और धार माँ को भीगने लगी जो की अनुज के लुंड से निकल रही थी... अनुज लुंड हिला हिला कर माँ के पूरे बदन को भीगा रहा था और अंत में उसने अपना लुंड माँ के मुँह में घुसा कर बचा हुआ मूट उन्हें पीला दिया और फिर वो भी हैट कर खड़ा हो गया, माँ हम दोनों के मूट में नहाकर बड़ी कामुक लग रही थी और सब उनकी तरफ देख रहे थे.

माँ- क्या हुआ ऐसे क्यों देख रहे हो सब, कभी बेटों के मूट में नहीं हुई माँ नहीं देखि?

इस पर सब हंसने लगे और फिर उठकर नहाने की तयारी करने लगे... अब आगे

अपडेट 200

चोदामपुर

रात को ये सब करने के बाद सब औरतों ने मिलकर खाना बनाया और सबने खाना खाया फिर लगातार चुदाई से थक भी गए थे तो सब जल्दी hi सो गए... हालाँकि मौसी ने मौसा की सवारी एक बार और की अपने कमरे में लेजाकर पति पत्नी ने ाचा समय बिताया...

मैं सुबह देर से उठा तो देखा बिस्तर पर अकेला था, समय देखा तो 8 बज रहे थे मतलब अनुज स्कूल जा चूका था, मैंने फ्रेश होकर बहार आंगन में जाकर देखा तो पापा चाचा मौसा, मौसी चची और माँ सब चाय पि रहे थे, मुझे देख कर मौसी ने मुझे भी चाय दी, और मैं भी सबके साथ बैठ कर चाय पीने लगा, पापा और चाचा खेती की बात कर रहे थे..

मौसा- अरे भैया सुनो यहाँ कोई ज़मीन बिकाऊ है क्या?

पापा- क्यों क्या हुआ?

मौसा- अरे अब वहां से तो सब बेच आये हैं तो घर तो बनाना hi पड़ेगा न..

पापा- क्यों ये घर तो है hi, घर की क्या ज़रुरत है..

माँ- और क्या घर रहने दो. अलग नहीं होने देंगे...

मौसा- अरे भाभी अलग कौन होने को कह रहा है, बस सोच रहे थे की शालू के नाम पर जमीन लेकर एक घर बनवा दें... अब वहां नहीं तो यहाँ तो कुछ संपत्ति शालू के नाम करना चाहते हैं

मौसी- अरे क्या ज़रुरत है इसकी.

पापा- नहीं सही कह रहे हैं शैलेश बाबू.. हम पता करते हैं आस पास कोई अछि ज़मीन.

चाचा- हाँ और ये सही भी है...

मौसी - और मैं तो कह रही थी की घर को और बनवा लेते हैं...

चची- हाँ ये सही सोचा है कुछ सालों में कर्मा अनुज का ब्याह भी होगा तो पहले से hi तयारी कर लें..

में- अरे चची मेरे ब्याह में अभी समय है.

माँ- सोच तो हम भी यही रहे थे घर को बनवाने का, तुम क्या कहते हो जी,

मौसा- हाँ बनवा hi लेते हैं, एक मंज़िल और..

चाचा - हाँ एक मंज़िल में तो आराम से काम हो जायेगा,

मौसी- और क्या बच्चे भी आराम से रह लेंगे, और हम सब भी..

में- अरे क्या फायदा इतने कमरों का जब सोना सबको साथ में hi है.

शालू- धत्त तू चुप कर मेहमान वगेरा आते हैं..

पापा- हम कुछ और सोच रहे हैं..

मौसा- क्या..

पापा- ये घर नहीं बनवाते.

चाचा- फिर?

पापा- बाघ में डेढ़ दो बीघा में बनाते हैं घर ाचा सा,

माँ- बाघ में, क्यों?

मौसा- जगह तो सही है.

चाचा- हाँ रोड के पास भी है.

मौसी- फिर जानवर कहाँ जायेंगे.

पापा- अरे देख आम की बघिया के बगल में दो बीघा खली पड़ा रहता है जिसमे झोपडी बानी है, और जानवर बंधे रहते हैं.. तो उस पूरे में दीवार लगवा कर उसके अंदर hi अपने लिए साथ साथ जानवरो के लिए भी सब अचे से बनवा देंगे..

माँ- ये सही है फिर जानवर भी साथ रहेंगे तो उनका ध्यान भी ठीक से रख लिया जायेगा..

चाचा- सही में आधे से ज़्यादा काम आसान हो जायेगा.

मौसा- और अगर एक बीघा में भी घर बनाया तो काफी बढ़ा हो जायेगा रहने के लिए...

चाचा- हाँ पर खूब अचे से बन जाएगा और देखने लायक भी..

चची- पर हमारे घर से तो दूर हो जायेगा न...

पापा- अरे यही तो तुम लोग नहीं समझे, वो घर बनाने का मतलब hi यही है की सब साथ रहे और सब का मतलब है सब जिसमे तू पल्ली और राजन भी हैं.

में- अरे वाह सच में ये तो सबसे ाचा हो जायेगा...

चाचा तो पापा की ये बात सुन बिलकुल चुप Hi हो गए और थोड़े भावुक भी.

चची- पर भाईसाब हम वहां कैसे.

माँ- कैसे मतलब.. इन्होने जो बोलै वही होगा.. समझे तुम दोनों लोग..

चची ने मुस्कुरा कर हाँ में सर हिला दिया और चाचा भी मुस्कुराने लगे..

शालू- सच में जीजी ये तो सबसे ाचा हो जायेगा... सब साथ रहेंगे तो..

माँ- और क्या मैं बड़ी हूँ तो तुम दोनों से सारा काम करवाया करुँगी.

ये सुनकर सब हंसने लगे,

मौसा- भाभी तुम्हे तो हम लोग hi इतना व्यस्त रखेंगे की खाने का समय hi नहीं मिलेगा,

इस पर सब दोबारा हंसने लगे.

में- अगर सही से बनवाना hi है तो फिर शुरू से hi अचे से पूरी योजना के साथ बनवाना चाहिए, मेरे दोस्त का भाई नक्से बनता है, उसे बुलाकर जगह दिखा देता हूँ तो वो हमारी ज़रुरत के हिसाब से नक्सा बना देगा उसी के अनुसार बनवा लेंगे.

चाचा- हाँ बिलकुल सही, हमने भी सुना है नक्से वाले अचे से घर का नक्सा बना देते हैं.

मौसी- तो ठीक ये सही रहा... बुलाले कर्मा तू..

मौसा- ाचा पर उससे पहले सब मेरी बात सुनो..

माँ- कौनसी बात?

मौसा- नए घर बनने का सारा खर्चा मेरा होगा,

पापा- ऐसा क्यों, नहीं नहीं..

मौसा- भाईसाहब इसमें मैं तुम्हारी नहीं मानूंगा, वहां से घर बेचा hi है, पैसे भी हैं मेरे पास, और रिटायरमेंट पर भी मिले हैं, अब इतना तो हक़ दो मुझे.

मौसी- हाँ जीजा जी करने दो न, हमारा भी परिवार है ये,

पापा ने माँ और चाचा की और देखा,

चाचा- वैसे तो हमें सही नहीं लगता पर शैलेश बाबू की बात भी सही है, करने दो भैया उन्हें इतना,

मौसा- अब आप लोग hi हमारा परिवार हो, अपने परिवार अपने घर में नहीं खर्च करेंगे तो क्या फायदा..

पापा- ठीक है फिर घर बनवाने की ज़िम्मेदारी तुम्हारी.

मौसा- ये हुई ना बात, अब अभी के लिए सुनो राजन भैया तुम जल्दी से नहाकर तैयार हो जाओ,

राजन- क्यों क्या हुआ,

मौसा- तुम्हे मेरे साथ चलना है है कुछ काम है,

मौसी- ऐसा क्या काम है.

मौसा- अरे पता चल जायेगा, चलो राजन भैया जल्दी उठो नहाओ.

राजन- हाँ भैया नाहा रहे हैं.

इसके बाद मौसा और चाचा नहाने चले गए वहीं हम सब सोचने लगे की ऐसा क्या काम है मौसा का जो बता नहीं रहे इसी बारे में बातें चल रही थी, जल्दी hi दोनों लोग नाहा कर तैयार थे और मौसा ने मोटरसाइकिल निकली.

माँ- भैया क्या काम है कुछ तो बताओ?

मौसा- अरे भाभी पता चल जायेगा बस थोड़ा रुको और सुनो हम लोग घंटे भर में बापिस आ जायेंगे तब तक सब लोग नहाकर तैयार हो जाना.. सबको तैयार मिलना है..

इतना कहकर मौसा चाचा को बिठाकर चले गए मैं दरवाज़ा बंद करके आया तो मौसी यही बोल रही थी न जाने इनका क्या ऐसा काम है..

माँ- अरे पता चल जायेगा न थोड़ी देर में चल तब तक नहालो सब..

चची- हाँ भाई सबको धमका कर गए हैं नहाने के लिए,

में- बाथरूम दो hi हैं नहाने वाले इतने सबसे ाचा तरीका है साथ में नाहा लेते हैं..

मौसी- बड़ा चालू बन रहा है,

में- चालू क्या? पहले भी तो मुझे नहलाती थी तुम...

चची- हाँ तो आज तुम्हारी अम्मा हु नहलाएंगी तुझे. जाओ जीजी अपने लल्ला को नहला दो..

माँ- हाँ तो क्या हुआ नहला देंगे..

में- और क्या चलो माँ...

मौसी- कर्मा को तो जीजी नहला देंगी चलो जीजा तुम्हे हम नहला दें.

पापा- ठीक है हमें कोई दिक्कत नहीं...

चची- हम भी चलते हैं..

मौसी- अरे वाह जीजा मज़े आ गए तुम्हारे एक साथ दो दो औरतें नहलाएंगी.

पापा- तुम सब के होते हुए हमारे मज़े hi हैं..

मैं तो माँ की कमर में हाथ डाले एक बाथरूम में घुस चूका था और जल्दी hi हम दोनों माँ बेटे बिलकुल नंगे थे, माँ को देख हमेशा की तरह मेरा लुंड तन गया था.. जिसे माँ ने देखा और कहा..

माँ- ले अब नहाने से पहले इसे भी शांत करना पड़ेगा..

में- ये तो तुम्हे देख कर hi तन जाता है...

माँ- अभी बताती हूँ इसे...

ये कहकर माँ नीचे बैठ गयी और मेरा लुंड मुँह में भर लिए और चूसने लगी,

में- अह्ह्ह्ह मा अह्ह्ह्हह्हह..

माँ लुंड को ऊपर से नीचे चाट कर थूक से गीला किआ और फिर जड़ तक मुँह में भर लिए....

मुझे तो बस मज़ा hi आ गया...

माँ मेरा लुंड चूसते हुए मेरे चूतड़ों को मसल रही थी...

मैं भी माँ का चेहरा पकड़ उनका मुँह छोड़ रहा था, मेरे चूतड़ों को मसलते हुए माँ मेरी गांड के छेड़ को अपनी ऊँगली से कुरेदने लगी और मेरा बदन सिहरने लगा, मेरा लुंड माँ के मुँह में फूलने लगा...

फिर अचानक से माँ ने अपनी एक उंगली मेरी गांड में घुसा दी तो मैं बिलबिलाने लगा ऐसा बस माँ hi मेरे साथ करती थी और मेरा हाल हर बार ऐसा hi होता था, मेरा लुंड तो माँ के मुँह में ठुमके मरने लगा, वहीं माँ अपनी उंगली मेरी गांड में अंदर बहार करने लगी, शुरुवात की असहजता के बाद मेरी गांड भी माँ की उंगली के लिए फैल गयी तो मैं थोड़ा शांत हुआ, एक अलग सा एहसास हो रहा था मुझे मेरा लुंड माँ के गले में जड़ तक घुसा हुआ था और माँ की उंगली मेरी गांड में घुसी हुई थी, फिर कुछ पल बाद माँ ने मेरा लुंड मुँह से निकला और अपनी उंगली मेरी गांड से और मुझे देखते हुए बोली, रुक मुझे ठीक से साफ़ करने दे तुझे,

ये कहकर माँ ने मुझे घुमा दिया और अब मेरे चूतड़ उनके सामने थे,

माँ- थोड़ा आगे झुक..

में- क्या करने वाली हो माँ?

माँ- झुक तो सही..

मैं आगे झुक गया तो माँ ने मेरे दोनों चूतड़ों को फैलाया और फिर मुझे एक अलग सा एहसास हुआ जिससे मैं बिलकुल सिहर गया, माँ ने अपनी जीभ मेरी गांड के छेड़ पर फिरै और मैं उस एहसास से पागल सा हो उठा, माँ ने मेरे चूतड़ों को और फैलाया और मेरी गांड के छेड़ को चाटने लगी, चाटते हुए माँ ने मेरे लुंड को हाथो में ले लिया और मुठियाते हुए मेरी गांड को चाटने लगी..





मेरे लिए ये बिलकुल नया एहसास था और मुझे बेहद मज़ा आ रहा था, माँ अपनी जीभ को नुकीला करके मेरी गांड में घुसाने की कोशिश कर रही थी और उनकी उंगली की वजह से जो जगह गांड में बानी थी उसे माँ की जीभ भर रही थी, और माँ तो ज़ोर लगाकर अपनी जीभ और अंदर घुसाने की कोशिश कर रही थी और फिर जीभ को अंदर बहार करने लगी, मुझे ऐसा लग रहा था माँ अपनी जीभ से मेरी गांड मार रही है, और मुझे बेहद मज़ा आ रहा था,

पहली बार ऐसा कुछ हो रहा था गुड़ गुड़ी जैसा एहसास हो रहा था, और मेरा लुंड हर पल के साथ फूलता जा रहा,

जैसे जैसे माँ की जीभ मेरी गांड में और जगह बनती जा रही थी वैसे वैसे मैं अपने चरम पर पहुँचता जा रहा था.

में- अह्ह्ह्हह्हह माहहहह मैंनं अह्हह्ह्ह्ह मेरा अह्ह्ह्हह्हह निकलने वाला हैईईईई,

ये सुनते hi माँ ने तुरंत अपनी जीभ को मेरी गांड से निकला और मुझे घुमा लिया और लुंड को मुँह में भर लिए मैं तुरंत hi माँ के मुँह में झड़ने लगा, मेरे लुंड से रास की धार माँ के मुँह में गिरने लगी जिसे माँ गटकने लगी, गुर्राते हुए मैंने सारा रास माँ के मुँह में छोड़ दिया तो शांत हुआ, वहीं माँ ने भी मेरा लुंड चाट कर साफ़ करके मुँह से निकल दिया, और मुझे देखकर बोली- माँ की छूट चाटेगा?

वहीं दुसरे बाथरूम में भी ऐसा hi कुछ हाल था, पापा मौसी और चची के बीच थे और साफ़ सफाई का दौर जारी था, पापा का लुंड चची के मुँह में था जो की चाट चाट कर उसे साफ़ कर रही थी, वहीं मौसी ने अपनी जीभ से पापा की गांड को साफ़ करने का हिम्मत उठाया हुआ था, पापा दोनों के बीच आनंद उठा रहे थे,





पापा- अह्ह्ह्हह्हह सआईईईई रंडियों अह्ह्ह्हह्हह क्या मज़ा दे रहीए हो दोनों अह्हह्ह्ह्ह..

अब दोनों के hi मुँह अभी व्यस्त थे तो जवाब में दोनों hi और तेज़ी से अपना काम करने लगी...

पापा को भी बड़ा मज़ा आ रहा था वहीं दोनों मौसी और चची पूरी तरह उत्तेजित होकर पापा की गांड और लुंड चूस रही थी,

अब दोहरे हमले का नतीजा ये हुआ की पापा ने जल्दी hi अपना रास चची के मुँह में छोड़ दिया जिस चची ने अपने मुँह में इकठा किआ और फिर अपना मुँह मौसी के मुँह से लगाकर उन्हें भी पापा के रास का स्वाद दिया दोनों hi पापा के रास को एक दुसरे के मुँह में उड़ेलते हुए खेलने लगी जिसे देख पापा सोच रहे थे की क्या किस्मत पाई है हम मर्दों ने, इधर मौसी और चची इस सबसे बेखबर होकर एक दुसरे को चूम रही थी





एक दुसरे के मुँह और चेहरे को अचे से चाटने के बाद दोनों ने अपना ध्यान बापिस पापा की और लगाया और फिर सब मिलकर नहाने लगे...

वहीं दुसरे बाथरूम में मैं माँ की छूट को बहुत लगन से चाट रहा था और सही भी चाट रहा था क्यूंकि माँ की आहें मुझे बता रही थी की मैं ाचा काम कर रहा हूँ..

मैं नीचे बाथरूम के फर्श पर लेता हुआ था और माँ मेरे चेहरे पर बैठी हुई थी, मेरे दोनों हाथ माँ के भरे हुए चूतड़ों पर थे और उन्हें मसाला रहे थे, माँ अपनी कमर घुमा घुमा कर मुझसे छूट चटज दबु थी, माँ ने मेरा चेहरा पकड़ रखा था और अपनी छूट में घुसाने की कोशिश कर रही थी,

मेरी म्हणत जल्दी hi रंग लाइ और माँ मेरी जीभ पर थरर्हरते हुए जड़ने लगी, माँ की छूट का रसीला पानी मेरे मुँह में गिरा तो मैं उसे मलाई समझ कर जातक गया, खैर झड़ने के बाद माँ शांत हुई फिर भी मेरे चेहरे पर बैठी रही कुछ देर... मैं सोचने लगा माँ और छूट चटवाने चाहती है तो मैं बिना रुके चाटने लगा की तभी माँ की छूट से एक तेज़ पानी की धार निकली जो मेरे चेहरे को भीगने लगी, मुझे समझते देर नहीं लगी माँ मूट रही है और मेरा मुँह खुद बा खुद खुल गया और धार मेरे मुँह में गिरने लगी, मैं माँ का गरम मूट पीने लगा ये पहली बार था जब मैं माँ का या किसी का भी मूट का स्वाद ले रहा था एक अलग सा एहसास मुझे हो रहा था, मैं जितना हो सके गटकने का प्रयास कर रहा था फिर भी बाकि मेरे मुँह से निकल कर मेरे चेहरे को भीगा रहा था, माँ का मूट जब हल्का होने लगा तो माँ बोली- लल्ला पीना मत मुँह में भर के रखना,

मैंने माँ के कहे अनुसार वैसा hi किआ और उनके मूट को मुँह में भर के रखा, धार रुकने के बाद माँ मेरे ऊपर से उठ गयी और मुझे भी उठने को कहा, मैं मुँह में भरे उठ गया और फिर माँ ने मेरे चेहरे के पास अपना चेहरा लाया और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख कर चूसने लगी मैंने भी अपने होंठ हलके से खोल दिए तो मेरे मुँह में भरा उनका मूट उनके मुँह में जाने लगा, हम दोनों मूट को एक दुसरे के मुँह में उड़ेलते हुए एक दुसरे को चूम रहे थे ऐसे hi मूट ख़तम हो गया तो माँ ने चेहरा अलग किआ और बोली - मज़ा आया?

में- बहुत, तुम्हे कैसा लगा अपने मूट का स्वाद?

माँ- अजीब सा पर तेरे होंठो से पीने में बड़ा मज़ा आया, सुन ये खेल हम दोनों माँ बेटे का राज रहेगा,

में- मतलब बस हम दोनों hi खेलेंगे ये?

माँ- हाँ कुछ तो अलग होना चाहिए न हमारे बीच.

में- बिलकुल माँ.

माँ- चल अब नहाते हैं तेरे मौसा आते होंगे..

में- हाँ चलो..

फिर माँ ने मुझे नहलाया और खुद नहीं मैं बस उनकी चूचियों को पीटा रहा और उनके चूतड़ों से खेलता रहा,

जब हम बहार निकले तो देखा पापा तैयार होकर बैठे थे.

पापा- बड़ी देर लगा दी दोनों ने?

माँ- अब इसे नहलाऊंगी तो समय तो लगेगा hi.

पापा हंसकर बोले - ाचा ठीक है जाओ जाकर तैयार हो जाओ.

कुछ hi देर में हूँ सब तैयार हो कर आँगन में बैठे थे की दरवाज़ा खटखट हुआ,

मैंने जाकर खोला तो सामने मौसा जी थे और उनके साथ अनुज और पल्ली भी थे स्कूल के कपड़ो में अपने अपने बास्ते के साथ

दरवाज़ा खोल उन्होंने मोटरसाइकिल अंदर की.

पापा- हो गया काम? और राजन कहाँ है? और अनुज पल्ली यहाँ कैसे.

पल्ली- अरे हमें तो मौसा hi लेकर आये स्कूल से..

पापा- क्या हुआ शैलेश बाबू? क्या काम है अब तो कुछ बतादो,

माँ- हाँ भैया बताओ हो गया काम तुम्हारा और राजन भैया कहाँ हैं?

मौसा - हाँ भाभी हो गया सब, और राजन भैया आते hi होंगे सब बहार चलो.. बस 5 मिनट्स रुको सब लोग

मौसा के कहे अनुसार हम सब बहार आ कर खड़े हो गए इतने में hi एक काले रंग की फोर्टनेर गाडी हमारे सामने आ कर रुकी और फिर उसका दरवाज़ा खुला और उसमे से राजन चाचा निकले, मौसा सबके चेहरों को देख रहे थे किसी को शुरू में समझ नहीं आया इसका क्या मतलब है तो मौसा ने सबको हैरान देखा और बोले - अरे ऐसे क्या देख रहे हो सब ये अपनी है नयी गाडी..

ये सुनते hi अनुज पल्ली और मैं तो उछाल पड़े, और भाग कर गाडी को देखने लगे बाकि सब भी पास आकर गाडी को देखने लगे,

पापा गाडी को देखते. हुए बोले- अरे ये तो बहुत महँगी होगी?

मौसा - कहीं नहीं भाई साब सबके चेहरे पर ख़ुशी है उससे तो बहुत सस्ती है,

मौसी- बड़ी है काफी जी इसमें तो हम सब आ सकते हैं एक साथ.

मौसा- इसी लिए तो ये ली है..

चाचा- ऐ पल्ली बिटिया जा जाकर पूजा का सामान ले आ और गाडी को पूजा कर,

माँ- हाँ चल पल्ली मैं थाली लगाकर देती हूँ,

माँ और पल्ली अंदर चले गए मैं और अनुज अंदर से गाडी देख रहे थे, पापा भी हर तरफ से देख रहे थे मौसी और चची भी, वहीं मौसा खड़े खड़े सबको देख खुश हो रहे थे,

इतने में नयी गाडी देख आस पड़ोस के लोग भी आने लगे और पूछ ताछ करने लगे,

माँ और पल्ली पूजा की थाली के साथ बहार आ गयी, पल्ली ने माँ ने जैसे जैसे बताया वैसे पूजा की..

मौसा- अनुज पल्ली जल्दी जाओ दोनों कपडे बदल कर आओ दो मिनट में फिर सबको मंदिर चलना है..

अनुज पल्ली ये सुनते hi भागे, और फिर तैयार होकर आ गए घर में टाला वगेरा लगाया और फिर सब लोग गाडी में बैठ मंदिर की और निकल गए, मौसा ने पापा को गाडी चलने को बोलै था, पापा रस्ते भर गाडी चलते हुए और नए नए फीचर की तारीफ़ करते जा रहे थे,

मौसी चची और माँ को भी गाडी बहुत भाई.

माँ- सच में अंदर काफी जगह है आराम से बैठ सकते हैं सब.

मौसी- हाँ और सीट भी पीछे हैं और आराम दायक हैं.

चची- और क्या मस्त ठंडी एक की हवा में गर्मी भी नहीं लग रही.

अनुज- चची देखो सीट पीछे भी हो जाती है,

चची- अरे वाह ऐसे तो सोते हुए भी जा सकते हैं.

ऐसे hi बात करते हुए हम लोग मंदिर पहुँच गए और पूजा करवाई.. गाड़ी का भी पूजन हुआ... फिर जब वहां से बापिस आने लगे तो अनुज बोलै- मौसा सही में गाडी तो मस्त है बहुत मज़ेदार है.

पल्ली- हाँ और सब लोग आराम से बैठ प् रहे हैं गद्दे भी काम महसूस हो रहे हैं.

पापा- हाँ बड़ी गाडी के फायदे तो हैं...

Palli-par मौसा अब घर जा रहे हैं का? बस इतनी सी hi दूर घुमाओगे?

अनुज- हाँ मौसा कहीं और भी चलो.

मौसा- अरे तुम सब मुझसे क्यों बोल रहे हो जो गाडी चला रहे हैं उनसे बोलो,

अनुज- पापा शहर चलो न.

पल्ली- हाँ ताऊजी चलो न.

चाचा- चलो भाई साब ले चलो.

में- और क्या नयी गाडी की दावत तो होनी hi चाहिए.

मौसी- यी बात तो सही कही..

पापा- ठीक है भाई जैसा सब लोग चाहें.

हम लोग शहर की और निकल गए दावत के लिए...

इधर चोदामपुर में नीतू रात भर अचे से सोइ थी कल की चुदाई की बाद उसकी छूट की सूजन और दर्द दोनों hi काम हो गए थे और अब उसकी छूट में एक मीठी सी प्यास हो रही थी और उसे बार बार कर्मा का कुंड नज़र आ रहा था...

वैसे ये हाल सिर्फ नीतू का नहीं था उसकी माँ रज्जो के दिमाग और छूट और गांड तीनो पर कर्मा और नीलेश के लुंड का छपा बन गया था, रात भर बेचारी लुंड की प्यास में करवट बदल बदल कर सोइ थी वहीं उसे थोड़ी उम्मीद पति से थी जो की दिन भर के सफर की वजह से बिस्तर पर पड़ते hi सो गए,

इसीलिए रज्जो का मूड सुबह से hi बदला हुआ था, इधर सरजू के तो मन में अपनी माँ के अलावा कुछ और आ hi नहीं रहा था, हर और उसे बस अपनी माँ का बदन उनकी नंगी गांड दिखती थी, और वो कर्मा के कहे अनुसार कुछ न कुछ करके जल्द से जल्द अपनी माँ को भोगना चाहता था,

सुबह उठकर वो बिस्तर पर लेता हुआ इसी बारे में सोच रहा था वो छत पर बिस्तर लगा कर सोया था उसे नीचे से अपनी मम्मी के बोलने की आवाज़ आ रही थी. उसे पता था उसकी मम्मी चाय लेकर उसे जगाने आने वाली है, तभी उसे कर्मा की बात याद आई की मम्मी को अपना तना हुआ लुंड दिखा,

और उसने तुरंत अपने खड़े लुंड को पाजामे ऐ बहार निकला और सीधा होकर लेट गया साथ hi खुद को चद्दर से ढँक liya..aur घुटने को हल्का उठा लिया ताकि चादर के ऊपर से लुंड का उभर न दिखे..

उसके अमूमन अनुसार रज्जो जल्दी hi हाथ में चाय का गिलास लिए ऊपर आई और उसमे एक दो बार सरजू को आवाज़ लगाई जिस पर सरजू ने जानकार कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और सोने का नाटक करता रहा,

दो बार आवाज़ लगाने पर भी न उठने पर रज्जो आगे बढ़ी और उसने सरजू के ऊपर से चद्दर को पकड़ कर खींच लिए, और सरजू ने जैसा सोचा था वैसा hi हुआ, चद्दर हटते hi उसका तना हुआ लुंड उसकी मम्मी की आँखों के सामने था, जिस पर अचानक से रज्जो की नज़र पड़ी तो वो हैरान रह गयी और उसने तुरंत अपना मुँह फेर लिया, पर लुंड के लिए तड़पती औरत के सामने लुंड आये और वो पलट कर देखे भी न ये कैसे मुमकिन है.

उसने एक बार नज़र फेर कर बेटे के तने हुए लुंड को देखा तो उसके बदन सिरहन दौड़ने लगी, वो ध्यान से बेटे के लुंड को देखने लगी और उसकी छूट पसीजने लगी, सरजू को भी एहसास हो रहा था की उसकी मम्मी यहीं कड़ी है तो उसके लुंड को एक बार तो ज़रूर देखा होगा

रज्जो के मन में अलग hi द्वन्द चल रहा था उसकी हवस उसे बेटे के लुंड को निहारने को बोल रही थी तो संस्कार जाने को, खैर किसी तरह से उसने खुद पर काबू किआ और चादर को बापिस सरजू पर दाल कर बापिस आ गयी और खुद की गर्मी को काबू करने के लिए खुद रसोई के काम में लग गयी, वहीं मम्मी के जाने के बाद सरजू खुश भी था और थोड़ा परेशां भी, खुश ये सोच कर की मम्मी ने मेरा लुंड देखा पर दुखी ये सोचकर की मम्मी मेरा लुंड ढँक कर चली गयी.

खैर 10-15 मिनट्स बाद वो बिस्तर से उठा और बिस्तर लेकर नीचे आया उसने बिस्तर को आँगन में रखा तो देखा की मम्मी खाना बना रही है और अभी मटर छील रही है, सरजू ने थोड़ा और मज़े लेने का सोचा और रसोई में जाकर सीधा मम्मी से चिपक गया पीछे से, और अपने हाथ अपनी मम्मी के पेट पर रख लिए,

सरजू- मम्मी आज चाय नहीं दी तुमने मुझे,

सरजू ने अपनी मम्मी के पेट पर हाथ फिरते हुए पूछा..

रज्जो अपने बेटे की हरकत से थोड़ा चिहुँकि पर फिर साधारण होकर बोली- गयी तो थी देने तू उठा hi नहीं,

ये बोलते hi रज्जो की नज़र के सामने फिर से बेटे का लुंड आ गया, और वो उत्तेजित होने लगी इधर सरजू का लुंड पहले से hi खड़ा था उसने अपना लुंड पीछे से अपनी मम्मी के पिछवाड़े पर लगा दिया जिसने रज्जो की गर्मी को और बढ़ा दिया,

रज्जो- क्या कर रहा है लल्ला, चाय निकल ले न मुझे काम करने दे.

सरजू- नहीं मम्मी तुम्हे पता है न चाय तो मैं तुम्हारे हाथो से hi लेता हूँ.

रज्जो- अरे ये कैसी ज़िद्द कर रहा है,

सरजू- ज़िद्द नहीं आदत है मम्मी तुम्हारे हाथ से मिली चाय का स्वाद hi कुछ अलग होती है, और मुझे नहीं पता जब तक नहीं डौगी मैं छोडूंगा नहीं तुम्हे ऐसे hi पकडे रहूँगा..

सरजू ने अपने हाथ मम्मी के पेट पर कस्ते हुए कहा और साथ hi खुद को पीछे से और कसकर मम्मी से चिपका दिया उसका लुंड भी मम्मी की गांड की दरार में सेट हो गया..

अब तो रज्जो की भी गर्मी बढ़ती जा रही थी और कहीं न कहीं उसे भी बेटे का स्पर्श ाचा लग रहा था,

रज्जो- तू भी न इतना बड़ा हो गया फिर भी बच्चा बना रहता है, ाचा देती हूँ चाय अब तो हैट..

सरजू- नहीं जब चाय हाथ में आएगी तब hi छोडूंगा,

रज्जो- हाय ढैय्या ये तो बिलकुल hi बावरा होता जा रहा है, रुक देती हूँ तेरी चाय,

ये कह कर वो कप उठाने एक तरफ को चली तो सरजू भी उससे चिपक कर साथ साथ चला, उसे हर कदम पर अपने लुंड पर मम्मी के चूतड़ ऊपर नीचे होते हुए महसूस हो रहे थे जो उसे बहुत ाचा लग रहा था और यही असर रज्जो पर भी हो रहा था उसे भी हर कदम पर बेटे का लुंड अपने चूतड़ों में घिसता हुआ महसूस हो रहा था,

रज्जो- ले चाय तो ठंडी हो गयी गरम करनी पड़ेगी,

सरजू- तो क्या हुआ कार्डो न...

सरजू खुश हो गया ये सोचकर की उसे और समय मिला वहीं ये योजना रज्जो की थी जिसने बिना चाय को देखे ये बोलै था और फिर उसने चाय को चूल्हे पर चढ़ा दिया, और गरम करने लगी..

अब गर्मी का मौसम था दोनों के चिपके होने और साथ hi रसोई में चूल्हे की गर्मी से दोनों hi पसीना पसीना होने लगा, सरजू ने देखा की मम्मी का ब्लाउज तो पसीने से बिलकुल गीला हो गया है, फिर भी मुझे हटने को नहीं बोल रही मतलब मैं सही राह पर हूँ, साथ hi मम्मी के पसीने की खुशबू उसे और पागल करने लगी.. और वो अपना लुंड और ज़ोर लगाकर माँ के चूतड़ों में दबाने लगा, साथ hi हाथों को पेट पर चलने लगा

वहीं रज्जो को भी अपनी गांड पर बेटे का लुंड महसूस हो रहा था, और उसकी उत्तेजना को बढ़ा रहा था, एक पल को तो उसका मन कर रहा था की अभी साड़ी उठा कर बेटे के लुंड अपनी छूट में ले ले, पर अभी भी शर्म संस्कार उसे रोक रहे थे, आखिर कैसे अपने बेटे से hi चुद जाये, हालाँकि ये सोचकर hi उसका बदन सिहरने लगा...

खैर चाय में उबाल आने पर उसका ध्यान बापिस आया और उसने चूल्हा बांध किआ और फिर चाय छान कर सरजू को दी तो सरजू को न चाहते हुए भी अपनी मम्मी से अलग होना पड़ा पर वो खुश था की आज उसने काफी तरक्की की थी,

इधर सरजू के रसोई से जाने के बाद रज्जो का बुरा हाल हो गया उसकी छूट और प्यासी हो गयी थी, उसने मटर को वहीं छोड़ा और कमरे में गयी, जहाँ नीतू पहले से लेती हुई थी,

रज्जो- तू उठेगी नहीं आज इतनी देर हो गयी है, उफ़ हो ये गर्मी और

रज्जो ने अपनी साड़ी के पल्लू से अपने चेहरे को पौंछते हुए कहा

नीतू- उठने का मन hi नहीं हो रहा मम्मी.

नीतू ने अँगड़ाते हुए कहा...

रज्जो- ाचा फिर क्या मन हो रहा है..

नीतू- मन तो कुछ और हो रहा है..

ये कहते हुए नीतू एक हाथ से अपनी छूट को सहलाने लगी साथ hi दूसरा हाथ उसकी चूचियों को टीशर्ट के ऊपर से मसलने लगा...

रज्जो- क्या करने का,

ये कहते हुए रज्जो ने नीतू को देखा तो बीच में hi रुक गयी.

रज्जो- बेशरम ये क्या कर रही है, तेरे भाई बाप घर पर hi हैं और तू है की कुछ होश hi नहीं है..

ये कहते हुए रज्जो ने तुरंत उठकर दरवाज़ा बंद कर कुण्डी लगा दी..

नीतू- अरे मम्मी तुम भी न बेकार की टेंशन लेती रहती हो, इधर बैठो..

Rajjo-kya बैठूं इतना काम पड़ा है, ऊपर से ये गर्मी लग रही है..

रज्जो ने नीतू के कहे अनुसार बैठते हुए कहा...

नीतू- ये गर्मी की वजह से नहीं है मम्मी..

रज्जो- फिर

नीतू- ये तो बदन की गर्मी की वजह से है..

Rajjo-dhatt कमीनी माँ से ऐसे बात करती है..

नीतू- अरे मम्मी अब हम माँ बेटी के साथ साथ दोस्त भी हैं, सहेली हो तुम मेरी..

रज्जो- ाचा ये कबसे हुआ..

नीतू- जबसे हम एक दुसरे के साथ लम्बे लम्बे मोठे मोठे लुंड से चूड़ी हैं तबसे..

ये सुनकर रज्जो का मुँह खुला रह गया.

रज्जो- हाय ढैय्या बेशरम तुझे ज़रा भी होश नहीं की तू क्या बोल रही है.

रज्जो ने नकली गुस्सा करते हुए कहा...

नीतू- ओह्हो मम्मी तुम भी न कितने नखरे करती हो इधर आओ..

ये कहकर नीतू ने अपनी मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनी और खींचा और रज्जो कुछ समझ पति उससे पहले तो नीतू ने उसके होंठो को मुँह में भर लिए और चूसने लगी..

रज्जो को समझ hi नहीं आया की ये हो क्या रहा है की तभी नीतू ने अपने हाथ लेजाकर अपनी मम्मी की छूट को साड़ी के ऊपर से hi मसलने लगी..

छूट पर बेटी का हाथ महसूस करते hi रज्जो सिसक पड़ी, वहीं वो भी बेटी के चुम्बन में पिघल गयी और उसका साथ देते हुए बेटी के होंठों को चूसने लगी और उसे तुरंत hi चूसने में मज़ा आने लगा, कुछ देर तक और चूमने के बाद दोनों माँ बेटी अलग हुए तो नीतू और रज्जो दोनों hi हांफ रहे थे, नीतू ने अगला हमला मम्मी के ब्लाउज पर बोलै और उसे खोलने लगी वहीं रज्जो भी अब बेटी को रोक नहीं रही थी बल्कि उत्सुकता से देख रही थी की बेटी आगे क्या करती है, जिसका जवाब उसे जल्दी hi मिला जब नीतू ने अपनी मम्मी की चुकी को नंगा कर अपने मुँह में भर लिया वहीं उसके हाथ अपनी मम्मी की साड़ी उतरने में लग गए और जल्दी hi सफल भी हो गए, सारी के बाद अगले hi पल नीतू ने अपना ध्यान रज्जो के पेटीकोट पर लगाया और फिर नाडा भी खोल दिया, रज्जो तो आँखें बंद किये अपनी चूचियों को चुसवा रही थी उसे पता hi नहीं चला की उसकी बेटी ने नंगा कर दिया है उसे पता तब चला जब नीतू का हाथ उसे अपनी नंगी छूट पर महसूस हुआ और जैसे hi उसने चेहरा नीचे करके देखा तो तब तक तो नीतू ने एक उंगली उसकी छूट में घुसा दी थी,

रज्जो- अह्ह्ह्ह बेटीईईई..

नीतू ने अपनी मम्मी की चुकी को मुँह से निकला और बोली- यही की गर्मी परेशां कर रही है न तुम्हे? मेरी मम्मी..

रज्जो- हांण बेटीईईई अह्ह्ह्हह

नीतू- ये भी ताऊजी और कर्मा भैया के मोठे लुंड को याद कर रही है न,

नीतू ने मम्मी की छूट को उंगली से छोड़ते हुए कहा साथ hi चूचियों से नीचे खिसकते हुए उसके पेट को चूमने लगी

रज्जो- अह्ह्ह्हह्हह माहहहह हांण.

नीतू- कैसे कर्मा भैया का मोटा लुंड अंदर तक घुसा था तुम्हारी छूट के अह्ह्ह्हह्हह देखो याद करके तुम्हारी छूट आंसू बहा रही है..

नीतू- अपनी मम्मी की गीली छूट को उंगली से छोड़ते हुए बोल रही थी और उत्तेजित हो रही थी,

रज्जो- हाँ रिइइइ निगोड़ी तबसे रोये hi जा रही है,

नीतू- ाचा फिर तो मुझे भी इसे वैसे hi चुप करना होगा जैसे बचपन में तुम मुझे कराती थी..

रज्जो- अह्ह्ह कैसी बिटिया आह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म

नीतू- ऐसी..

ये कहकर नीतू ने अपना मुँह अपनी मम्मी की छूट पर लगा दिया और चाटने लगी वहीं रज्जो तो बिलकुल बिलबिलाने लगी, अपनी बेटी का मुँह महसूस कर अपनी छूट पर.

नीतू जीभ निकल कर अपनी मम्मी की छूट में चला रही थी, वहीं रज्जो तो बिलकुल पागल hi हुए जा रही थी,

जल्दी hi नीतू की जीभ और रज्जो की उत्तेजना के कारन रज्जो झड़ने लगी और नीतू मम्मी का रास जातक गयी, झड़ने के बाद रज्जो थोड़ी शांत हुई,

रज्जो- हाय ढैय्या मज़ा आ गया बिटिया, हल्का हल्का हो गया बदन.

नीतू- अरे मम्मी तुम्हारा तो हो गया अब मेरा भी सोचो,

नीतू ने अपना पजामा उतर कर अपनी नंगी छूट मम्मी के सामने परोस दी तो अब रज्जो भी इतना जान गयी थी उसे क्या करना है और उसने झुक कर अपना मुँह अपनी बेटी की छूट पर लगा दिया और चाटने लगी..

इधर हम लोग अचे से घूम कर खा पि कर गाओं आ गए औरतों को घर छोड़ा और गाडी कड़ी की, अभी भी सरे मर्दों के बीच बातचीत का विषय गाडी hi था, बाघ में गाडी कड़ी करके मैं अनुज मौसा चाचा और पापा गाडी को hi देख रहे थे,

पापा- चलो अब बच्चो गाडी तो यही रहने वाली है बाकि काम भी कर लिए जाएं..

में- हाँ पापा मैं जा रहा हूँ पानी लगाने, तुम्हे फ़ोन करूँ तो तुबेल चला देना..

पापा- ठीक है,

राजन- चलो फिर हम भी थोड़ा चारा काट लेट हैं,

अनुज- मुझे तो स्कूल का काम करना है घर जाकर चल रहे हो मौसा?

मौसा- हाँ भाई चल... थोड़ा आराम कर लेते हैं..

ये कहकर सब अपने अपने काम के लिए निकल गए, वहीं निकली तो रज्जो चची और नीतू भी थी अपने घर से..

रज्जो- मुझे तो न ये सही नहीं लग रहा,

नीतू- अरे मम्मी तुम भी न डर्टी क्यों हो, अगर शांति चाहिए तो थोड़ा तो कुछ जुगाड़ करना पड़ेगा न.

Rajjo-kahin कोई गड़बड़ न हो जाये,

नीतू- कुछ नहीं होगा, अब खुद hi देखो एक दुसरे की चाट कर भी देख लिए कुछ फायदा हुआ?

रज्जो- तब तो मज़ा आया पर तबसे तो मेरी छूट और प्यासी हो गयी..

नीतू- ये प्यास अब मोठे लम्बे लुंड से hi बुझेगी.. rajjo-tune फ़ोन किआ?

नीतू- अरे बाघ में hi होंगे क्या फ़ोन karna..lo ताऊजी तो वो रहे,

बात करते करते दोनों माँ बेटी मेरे बाघ तक पहुँच गयी थी,

पापा- अरे नीतू रज्जो तुम लोग यहाँ?

नीतू- अरे वाह ताऊजी नयी गाडी वो भी इतनी बड़ी,

पापा- हाँ वो कर्मा के मौसा हैं न उन्होंने ली है,

रज्जो- बड़ी अछि है भाई साब मुबारक हो,

पापा- अरे तुम्हारी hi है,

नीतू- ताऊजी अब वो सुनो...

पापा- हाँ बोल न क्या बात है,

नीतू- वो कर्मा भैया कहाँ हैं?

पापा- वो तो मेध काटने गया है

नीतू- ाचा ठीक है..

इधर रज्जो चची भी बस इधर उधर देख रही थी, दोनों को देख कर पापा समझ गए,

पापा- नीतू बीटा तू तब तक देख बाघ में कोई आ तो नहीं रहा मैं तेरी मम्मी को गाडी दिखा दूँ अंदर से,

ये कहकर पापा ने बीच वाली सीट का दरवाज़ा खोला और रज्जो चची का हाथ पकड़ कर अंदर घुसा लिए.

नीतू शरमाते हुए बहार नज़र रखने लगी, इधर गाडी के अंदर पापा ने रज्जो चची को लिटाया तो चची की सांसें चलने लगी पापा उनके ऊपर आ गए और उनके होंठों को चूसने लगे साथ hi हाथों को नीचे कर चाची की साड़ी और पेटीकोट को भी उठा कर कमर तक कर दिया, अगले hi पल चची को अपनी छूट में पापा का लुंड घुसता महसूस हुआ और चची की सिसकी पापा के मुँह में घुटी रह गयी जल्दी hi पापा का पूरा लुंड रज्जो चची की छूट में अंदर बहार हो रहा था और चची को ऐसा लग रहा था जैसे जिस चीज़ की उन्हें कमी थी वो मिल गयी हो,





इधर मैंने मेध काट दी थी और पापा को फ़ोन लगाया पर पापा फ़ोन उठा hi नहीं रहे थे, तो मैं बापिस बाघ की और चल दिया वहां जाकर देखा तो गाडी के बहार नीतू कड़ी है और अंदर देखते हुए कपड़ो के उप्पर से hi खुद को मसल रही है,

मैं समझ गया पापा फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे होंगे, मैं नीतू के बिलकुल करीब पहुँच गया पर वो गाडी के अंदर देखने में इतनी व्यस्त थी, मैंने उसे पीछे से पकड़ा तो चौंक गयी और फिर जब मुझे देखा तो मुझ पर टूट पड़ी, मेरे होंठों को चूसने लगी मैंने उसके होंठो को चूसते हुए गाडी के अंदर नज़र मारी तो देखा चची का ब्लाउज खुला हुआ था दोनों नदी बड़ी चूचियां बहार थी और पापा उन्हें चूसते हुए सटासट उन्हें छोड़ रहे थे,

बहार नीतू तो जैसे कबसे इंतज़ार में hi थी मेरे होंठों को छोड़ वो नीचे बैठी और मेरा लुंड निकल कर मुँह में भर लिए, और कुछ पल चूसने के बाद अपनी पजामी को उतर कर वहीं ज़मीन पर लेट गयी, मुझे इससे ज़्यादा बुलावा नहीं चाहिए था मैंने भी अपना लुंड पकड़ा और नीतू की कासी हुई छूट में घुसा दिया, और सावधानी से हलके हलके धक्कों से उसे छोड़ने लगा,





नीतू मेरी चुदाई से मस्त होने लगी, एक बार फिर से माँ बेटी हम दोनों बाप बेटों से चुद रही थी, वैसे सिर्फ ये hi दोनों नहीं थी जो एक साथ चुद रही थी...

जारी रहेगी

हैप्पी नई ईयर
 
चंचल की अम्मा बिमला भी अपनी छूट में दामाद का रास लेकर लेती हुई थी वहीं सावित्री भी अपने दामाद का रास पि कर बैठी थी,

विनीत ने अपना रास अपनी सासु माँ की छूट में अंदर तक भर कर छोड़ दिया था,

काफी देर की मेहनत के बाद अब सब hi थक चुके थे तो सब आपस में थोड़ा आराम करने का तय करके 3-4 के समूहों में आराम करने चले गए... आगे


अपडेट 201

सरलपुर



रात का समय हो चूका था और सब खाना पीना खा कर बैठे थे,

पंकज- फिर अब क्या इरादा है कोई खेल खेलें या सोना है,

चंचल- अरे क्या खेल होगा भैया, अंत में एक hi खेल होगा.

रमन - कौन सा?

पूर्वी- अरे छूट और लुंड का और क्या, खेल कुछ भी शुरू हो ख़त्म चुदाई पर hi होगा,

चरण सिंह - हाँ ये तो है,

माधुरी- तो फिर अपने कमरों में जाकर सोना है क्या?

रिम- हाँ मम्मी जाना तो अपने अपने कमरों में है पर जाकर क्या करना है वो खुद पर है.

सावित्री - मतलब.

चंचल- मतलब ये चची की जोड़े बनाकर कमरों में जाओ मन हो तो चुदाई करो नहीं तो सो जाओ.

बिमला- ऐ ले, चुदाई का मन किसका नहीं करेगा. चलो जी.

पूर्वी- अरे ये किसने कहा की अपने पति या पत्नी के साथ जाना है.

माधुरी- तो?

चंचल- तो क्या किसी और के साथ जाओ रत भर एक दुसरे को अचे से जानो पहचानो.

चरण सिंह- ये भी ाचा है.

ख़ुशी- पर भाभी कौन किसके साथ जायेगा ये कैसे तय होगा...

रिम- मैं तो कहती हूँ अपनी अपनी पसंद के हिसाब से चले जाओ...

चरण सिंह- ऐसा है तो पूर्वी बिटिया तू मेरे साथ चलेगी.

पूर्वी- ठीक है चाचाजी पर ध्यान रखना सोने नहीं दूंगी.

चरण Singh-are तेरे होते हुए नींद hi नहीं आएगी....

सूजन सिंह- तो संधान जी फिर तुम हमारे साथ चलो, रिश्तेदारी थोड़ी और गहरी करेंगे.

ये सुनकर माधुरी शर्मा गयी और बोली- ठीक है समधी जी.

पंकज- अब जानना hi है तो मैं अपनी सलहज को जानना चाहूंगा, क्यूंकि ख़ुशी तैयार हो?

ख़ुशी- बिलकुल जीजाजी कोई पूछने की बात है.

उदयवीर- भाई फिर हम तो रिम्मी बिटिया को अचे से जानेंगे...

रिम- हाय मज़ा आएगा चाचाजी..

विनीत- अरे वाह चाचा रिम्मी जीजी के साथ जायेंगे तो चंचल जीजी तुम मेरे साथ चलो.

चंचल- बिलकुल मेरे प्यारे Bhai.akele में खूब छोडूंगी तुझसे.

रमन- बिमला चची तुम और हम ग़दर मचाएंगे.

बिमला- अरे छोटे दामाद जी तुम भी.

चेतन- अरे इसमें क्या मैं और चची भी तो खूब ग़दर मचाएंगे.

चेतन ने सावित्री को देख कर कहा.

सावित्री - और क्या सास और दामाद की जोड़ी हैं किसी से पीछे नहीं रहेंगे..

बस फिर सब अपने अपने चुने हुए साथी के साथ कमरों में चले गए और अचे से नज़दीकियों को बढ़ाया..

सूजन सिंह ने अपनी संधान माधुरी के तीनो छेदों की गहराई को नाप के दम लिए तो, चरण सिंह ने भी पूर्वी की गांड और छूट खूब मारी,

पंकज तो नयी नवेली ख़ुशी का बदन पकड़ जन्नत में था और पूरी रात ख़ुशी के छेदों को बदल बदल कर छोड़ता रहा ख़ुशी ने भी दिखाया की वो उनके परिवार का हिस्सा बनने के लिए कितनी तैयार है और पंकज का पूरा साथ देते हुए पूरे आनंद में उससे छुड़वाया.

इधर चंचल और विनीत ने तो रुकने का नाम hi नहीं लिए और सुबह होने तक चुदाई करते रहे, विनीत को चंचल का गदराया बदन बहुत भय और उसकी गदराई गांड ने तो विनीत को पागल कर दिया था, वहीं चंचल का भाई नहीं था तो उसने विनीत से भाई की साडी कमी को पूरा करवाया,

रमन चंचल की माँ यानि बिमला का बिस्तर पर जोश देख कर हैरान रह गया, वैसे शांत रहने वाली बिमला ने भी रमन को अपना रूप खुलकर dikhaya..aur रमन के रास को एक एक बार अपने तीनो छेदों में भर लिए.

उदयवीर तो रिम्मी का भरा बदन पकड़ खुद को नसीब वाला समझ रहे थे और रात का पूरा फायदा उठाने की फ़िराक़ में थे और उठाया भी, उन्होंने जाना की रिम्मी जितनी सुन्दर है बिस्तर पर उतनी गरम भी और उसकी गरमी शांत करने में उदयवीर ने अपना सारा दम झोंक दिया,

चेतन ने सावित्री के साथ बहुत मज़ा किआ, सावित्री बहुत खुली थी और चेतन को उसके साथ अलग तरह का मज़ा आया, जैसे चेतन का लुंड चूसते हुए सावित्री ने अपनी उंगली चेतन की गांड में घुसड़ी और उसे अंदर बहार करने लगी जो चेतन के लिए बिलकुल नया था..

अगली सुबह सब देर से उठे, क्यूंकि रात को सब hi देर से सोये थे सुबह के काम और नाश्ता निपटा कर सबने तय किआ की जो भी बचे हुए छुट्टियों के दिन बचे थे वो घर में hi बिताएंगे और कहीं घूमने की योजना नहीं बनाएंगे, और हुआ भी ऐसा hi...

अगले दो दिन तक सिर्फ चुदाई का hi दौर चला जिसमे कुछ नए तो पुराने समीकरण बने,

तीनो संधानो ने टिहरी छुड़ाई का मज़ा लिए वहीं बहुएं भी पीछे नहीं रही, चंचल, रिम्मी और पूर्वी ने भी एक साथ तीन तीन लुंड से चुदाई करवाई कई बार, पर सबसे खास पल वो रहा जब ख़ुशी ने अपने पापा और दोनों भाइयों के लुंड को एक साथ अपनी छूट गांड और मुँह में लिए





बाकि सबने देखते हुए ख़ुशी का हौसला बढ़ाया वहीं माधुरी की आँखों में तो न जाने क्यों आंसू ा गए अपने परिवार को ऐसे देखकर जबकि वो खुद विनीत सूजन सिंह और पंकज के लुंड से चुद रही थी





ऐसा नहीं था बाकि औरतें पीछे रही थी, सबने टिहरी और दोहरी चुदाई का पूरा आनंद उठाया था, बिमला ने तो एक साथ 5 लुंड संभाले थे तो चंचल ने अपनी मम्मी की प्यास अपना मूट पीला कर बुझाई थी, उदयवीर ने ख़ुशी को रात भर अपने पास रख कर उसके जवान बदन को भोगा तो सूजन सिंह ने चंचल को...

कुल मिलकर अगले दो दिन तक शायद hi कोई ऐसा पल था जब घर में चुदाई न हुई हो, हर लुंड हर छूट हर गांड से परिचित हो चूका था,

खैर भरी मन के साथ सब तीसरी सुबह निकल गए अपने अपने घर की और पर उससे पहले ये तय हुआ की सूजन सिंह और सावित्री घर जाकर विनीत के मम्मी पापा से जल्दी hi दोनों के रिश्ते के बारे में बात करेंगे और फिर मिलकर आगे कब क्या करना है उसे तय करेंगे. कुछ उदासी तो कुछ उम्मीद के साथ सब अपनी अपनी मंज़िल की और निकल गए पर सब जानते थे की इन कुछ दिनों ने उनकी ज़िन्दगी को पूरी तरह से बदल दिया है और वो अब साधारण नहीं हो सकती थी और उनमे से कोई चाहता भी नहीं था...

चोदामपुर



यहाँ मैं और पापा अपने अपने काम में लगे हुए थे और काम से मतलब क्या था ये आप लोग समझ रहे होंगे, रज्जो चची एक बार झाड़ चुकी थी तो पापा उन्हें लेकर गाडी से बहार आ गए जहाँ मैं और नीतू लगे हुए थे, पापा और चची दोनों के कपडे hi अस्त व्यस्त थे..

पापा और चची के आने के बाद भी मैं एक पल को भी नहीं रुका था और नीतू को चोदे जा रहा था.








पापा और चची ने हमें देखा फिर पापा ने अपने कपडे ठीक किये और बोले - सुनो बच्चो बाघ में अंदर की और चलो जहाँ गठर रखें हैं वो जगह घिरी हुई है यहाँ कोई देख लेगा तो गंडाड हो जाएगी,

रज्जो- हाँ बच्चो चलो अंदर हो जाओ.

मैंने सुनकर अपने धक्के हलके किये और फिर रुक गया हालाँकि ऐसे बीच में रुकना ाचा नहीं लगा पर बात मानी भी ज़रूरी थी हम दोनों ने भी कपडे समेटे और बाघ में अंदर की और चल दिए.. पापा ने गाडी का लॉक लगा दिया..

बाघ के अंदर जाकर जहाँ धान के चारे का ढेर रखे हुए थे वहां आ गए और सही में वो जगह सही भी थी और किसी के देखे जाने की आशंका काम भी थी,

मैंने वहां जाते hi नीतू को पकड़ लिए और उसके कपडे उतरने लगा और जल्दी hi उसे नंगा कर दिया साथ hi खुद भी नंगा हो गया...

Rajjo-are बच्चों सरे कपडे मत उतरो कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी...

चची ये बोल hi रही थी की पापा ने उन्हें पीछे से पकड़ लिए, और उनके कपडे उतरने लगे,

रज्जो- अरे भाई साब कपडे रहने दो न.

पापा- अरे रज्जो रानी कहे घबराती हो...

ये कहकर पापा ने चची के होंठो को चूसना शुरू कर दिया और साथ hi उनके कपडे उतरने लगे जल्दी hi दोनों माँ बेटी और हम बाप बेटे नंगे थे,

मैंने नीतू को घुमाया और झुका के पीछे से छूट में लुंड घुसा दिया और छोड़ना शुरू कर दिया..





में- अह्ह्ह्हह्हह नीतू ओह्ह्ह्हह बड़ी गरम छूट है तेरी आह्ह्ह्ह कितनी कासी हुई है...

नीतू- ओह्ह्ह्हह भैया तुम्हारा लुंड भी इतना मोटा है आह्ह्ह्हह ाराआम से...

इधर रज्जो चची पापा से अपना बदन मसलवटे हुए हमें देख कर और हमारी बातें सुन कर गरम हो रही थी

रज्जो- अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म देखो भाई साब ये बच्ची कितने ुहममम बेशरम हो गए hain...kaisi बातें करते हैं..

पापा- अरे रज्जो रानी बेशरमी में hi असली मज़ा है तुम भी बन जाओ...

पापा ने चची को खुद नीचे लेटते हुए अपने ऊपर बैठा लिए और अपने लुंड चची की गांड पर टिका दिया...

Rajjo-ohhh भाई साब तुम तो हमारे पीछे वाले छेड़ के hi पीछे पद गए हो...

रज्जो चची ने पापा का लुंड गांड में महसूस करते हुए कहा,

पापा- क्या करें रज्जो तुम्हारे मोठे चूतड़ों के बीच तुम्हारी गांड का छेड़ बड़ा मस्त लगता है बिना मरे कैसे छोड़ें.. अह्ह्ह अब ले लो इसे...

रज्जो- अह्ह्ह्हह्हह ुहममम तुम भी बच्चो को तरह कितना गन्दा बोल रहे हो भाई साब..

चची ने पापा का लुंड नीचे होते हुए अपनी गांड में घुसते हुए कहा...

नीतू- ओह्ह्ह्हह मम्मी अह्ह्ह्हह्हह गन्दा सही छोडो और खुल कर गांड मरवाओ ताऊजी से अह्ह्ह...

नीतू की बात सुनकर रज्जो चची और गरम हो गयी... साथ hi पापा का पूरा लुंड गांड में लेकर भी..

पापा- हाँ रज्जो शर्म आराम छोडो और मज़े लो चुदाई के अपनी बेटी की तरह...

रज्जो- अह्ह्ह्हह्हह ुहममम हाँ भाई साब अह्ह्ह

मारो मेरी गांड आह खुल कर मरवाउंगी अह्ह्ह

इधर चची की गांड में लुंड घुसते hi पापा नीचे से धक्के लगाकर उनकी गांड मरने लगे





पापा- अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म अह्ह्ह्हह्हह क्या गरम गांड है रज्जो रानी अह्ह्ह्हह्हह कसके लुंड जा रहा है....

नीतू- ओह्ह्ह्हह ताऊजी आह्ह्ह्ह छोड़ो मेरी माँ को आह्हः कैसे खुले में नंगी होकर बेटी के सामने गांड मरवा रही हैं अह्ह्ह्ह मेरी रैंड मम्मी...

रज्जो चची अपनी बेटी के मुँह से ऐसी बातें सुनकर और गरम हो गयी और गांड मरवाते हुए बोली- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह ुहम्म हैं बेटी अह्ह्ह्हह्हह देखहहहह अपनीई रनडीईई माहहह कोउआह्ह्ह्ह....

में- अह्ह्ह्हह्हह क्या मस्त जोड़ी हीी मा बेटीई की मैंने नीतू को छोड़ते हुए कहा और फिर उसे झुककर चची और पापा के सामने पैरों के बीच घुटनो पर झुका दिया और पीछे से छोड़ने लगा जिससे उसका चेहरा ठीक चची की छूट और गांड के सामने आ गया और वो बिलकुल करीब से पापा का लुंड अपनी माँ की गांड में अंदर बहार होता हुआ देख प् रही थी..

चची इतनी गरम हो चुकी थी की अपनी गांड मरवाते हुए अपनी बेटी को दिखते हुए अपनी छूट उँगलियों से मसल रही थी





नीतू- ओह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह मम्मी अह्ह्ह्हह तुम्हारा ये रूप देख कर मज़ा आ रहा है..

नीतू मुझसे छुड़वाते हुए बोली..

रज्जो- अह्ह्ह्हह्हह लाडुआहहहहन मुझे भी ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह..

चची अपनी बात पूरी नहीं कर पाई क्यूंकि मैंने नीतू का सर पकड़ कर और आगे कर उसकी मम्मी की छूट में घुसा दिया और नीतू ने भी बिना झिझक या देरी के अपना मुँह खोल कर अपनी मम्मी की छूट को चेतना शुरू कर दिया और चची सिसकने लगी, गांड में पापा का लुंड और छूट में नीतू की जीभ चची को पागल करने लगी, नीतू के मुँह के ठीक नीचे उसकी मम्मी की गांड से पापा का लुंड अंदर बहार हो रहा था...

अंदर बहार होते हुए पापा का लुंड अचानक से चची की गांड से निकल गया तो नीतू ने तुरंत अपनी मम्मी की छूट से मुँह हटा कर अपनी मम्मी की खुली गांड में जीभ घुसड़ी जिसे देख चची हैरान भी रह गयी साथ hi सीसीएनए भी लगी, नीतू की इस हरकत को देख मैं समझ गया ये भी हमारी hi तरह है, कुछ पल अपनी मम्मी की गांड चाटने के बाद नीतू ने पापा के लुंड को पकड़ा और उसे मुँह में भर लिए जिससे पापा भी थोड़ा सिसके, पापा के लुंड को कुछ पल अचे से चूसने चाटने के बाद उसने पापा का लुंड दोबारा अपनी मम्मी की गांड में घुसा दिया,

और ये सब करते हुए मैं लगातार उसे छोड़ रहा था, खैर पापा बापिस चची की गांड मरने लगे वहीं नीतू जो खुद की हरकतों से और मेरी चुदाई से इतनी उत्तेजित हो गयी की झड़ने लगी, झड़ते हुए मैंने उसका मुँह चची की छूट में घुसा दिया था ताकि उसकी चीख न निकले और हुआ भी ऐसे hi...khair झड़ने के बाद वो एक और गिर गयी तो मेरा लुंड उसकी छूट से निकल गया, खैर लुंड निकलते hi मैं खड़ा हुआ और मैंने लुंड चची के मुँह के आगे कर दिया जिसे चची ने तुरंत मुँह में भर लिए और चूसने लगी, अब चची हम दोनों बाप बेटे को सँभालने लगी...





चची को ऐसे देखकर मुझे बड़ी ख़ुशी हो रही थी और मुझे लगने लगा था ये की दोनों माँ बेटी हमारे छोटे से समूह में शामिल होकर चार चाँद लगा देंगी पर वो सब बाद की बात थी क्यूंकि अभी तो चची का गरम मुँह लुंड पर कमाल दिखा रहा था..

वहीं नीतू गहरी सांस लेते हुए अपनी मम्मी को दो दो लुंड सँभालते हुए मुस्कुरा कर देख रही थी,

में- अह्ह्ह्हह्हह छाछठीीी ओह्ह्ह्ह ऐसी हीईई...

पापा- अह्ह्ह्हह्हह गरम माल है तेरी माँ नीतू...

नीतू- गर्मी निकलने के लिए hi तो लेकर आई हूँ ताऊजी यहाँ...

पापा- अह्ह्ह्हह्हह साड़ी गर्मी निकल देंगे हम बाप बीटा मिलकर...

इधर मैंने चची के मुँह से लुंड निकला और फिर उनकी टैंगो के बीच आ गया और पापा को तैयार होने को कहा...

पापा भी समझ गए क्या होने वाला है पर चची को और नीतू को अभी थोड़ा संशय था जो की बड़ी जल्दी दूर हुआ जब मैंने चची के पैरों के बीच जगह ली और अपने लुंड को पकड़ कर चची की छूट पर लगाया , तो चची ये देख समझ गयी और ना में सर हिलने लगी,

रज्जो- अह्ह्ह्हह्हह बछ्ह नाहीई एक साथ नाहीई...

में- अरे कुछ नहीं होगा छाछीइ..

ये कहते हुए मैंने धक्का देकर लुंड अंदर घुसा दिया और चची का मुँह खुला का खुला रह गया..

मैंने सही समय देख कर धक्के लगाना शुरू कर दिया और चची तो एक साथ दो लुंड लेकर बिलकुल बिलबिलाने लगी और जैसे hi मेरा लुंड पूरा उनकी छूट में घुसाया तो चची झड़ने लगी... उनके झड़ने के दौरान मैंने और पापा ने हलके धक्के लगाना जारी रखा और जल्दी hi एक ले पकड़ ली... इधर चची भी झड़ने के बाद थोड़ी शांत हुई पर अभी भी दोहरी चुदाई उनके लिए नयी थी और वो मज़े लेते हुए छोड़ने लगी..





नीतू- ओह्ह्ह्हह मम्मी एक साथ ताऊजी और भैया से चुड़ते हुए तुम बड़ी मस्त लग रही हो एक दम रंडी की तरह..

Rajjo-aahhhhh हाँ हहहह अह्ह्ह्ह लाडो तेरी मम्मी रंडी hi है अह्ह्ह देख कैसे दो दो लुंड ले रही है एक saath..ahhh कर्मा, भाई साब अह्ह्ह्ह छोड़ो मुझे रैंड की तरह अह्ह्ह्हह्हह ऐसे होई..

चची अब और ज़्यादा गरम हो गयी थी और पूरी तरह खुल गयी थी और पूरा मज़ा ले रही थी,

में- हांण अह्ह्ह्हह मेरी रनडीई चेचीईई अह्ह्ह ले अह्ह्ह्हह...

पापा- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह देख कैसे एक साथ बाप बेटे से चुद रही है रंडी साली अह्ह्ह

रज्जो- हाँ छोड़ो दोनों बाप बेटे आह्हः ऐसे ही छोड़ो रंडी कुछ अह्ह्ह...

में- पापा मुझे गांड मारनी है चची की..

पापा- अह्ह्ह्हह्हह पलट ले बेटाझ..

पापा ने इतना कहा तो मैंने तुरंत चची को उठाया और पलट दिया और कुछ hi पालो में चची की छूट में पापा का लुंड था और गांड में मेरा और फिर से उसी ले में चची की दोहरी चुदाई होने लगी..





नीतू- आह्ह्ह्हह भैया ताऊजी क्या ताल मेल है तुम्हारा लगता है बहुत मज़दूर औरतों को छोड़ा है साथ में.

में- हाँ नीतू आह्हः पर चची जैसा मज़ा किसी ने नहीं दिया..

रज्जो- आह्ह्ह्ह मा अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह.. छोड़तेआहहहहह राहु अह्ह्ह..

चची एक बार फिर से बेहद उत्तेजित हो चुकी थी और झड़ने की और अगरसर थी,

मेरा और पापा का भी यही हाल था और जल्दी hi चची का बदन थर्राते हुए कंपनी लगा, और वो झड़ने लगी, चची के झड़ने के बाद मैं और पापा भी खोलूद को रोक नहीं पाए और झड़ने लगे और अपने लुंड का रास चची की गांड और छूट में भरने लगे, जल्दी hi झड़ना ख़त्म हुआ तो मैंने चची की गांड से लुंड निकला और पापा ने उन्हें बगल में घास पर लिटा दिया जहाँ लेट कर वो हांफने लगी, इधर चची से हटते hi नीतू ने मेरा लुंड मुँह में भर कर चाट कर साफ़ किआ और फिर पापा की और देख मुस्कुराई फिर उनके लुंड के साथ भी यही किया, खैर इतने में चची भी थोड़ी शांत हुई और उठ कर बैठ गयी,

में- कैसा लगा चची..

रज्जो- हाय ढैय्या तुम लोगो ने तो सच में मुझे रंडी hi बना दिया है,

Neetu-kyun मम्मी तुम्हे ाचा नहीं लगा...

नीतू उठ कर अपने कपडे पहनते हुए बोली

रज्जो- अरे बहुत ाचा लगा लाडो, ऐसा मज़ा जीवन में कभी नहीं आया, एक साथ दो लुंड लुंगी ऐसा कभी नहीं सोचा था..

चची अब भी नंगी बैठी हुई बोली

में- बेटी के सामने होने पर मज़ा दोगुना हो गया होगा न,

रज्जो- अरे तभी तो कहा की रंडी बन गयी हूँ मैं पूरी, बेटी के सामने दो- दो लुंड से चुद रही हूँ वो भी बाप बेटे के..

पापा- यही तो मज़ा है रज्जो रानी, माँ बेटी बाप बेटे से एक साथ,

में- पर चची अभी भी पूरी तरह नहीं खुली हो तुम..

रज्जो- अब क्या रह गया है लल्ला,

में- अभी बताता हूँ

वैसे तो मैं निश्चित हो गया था की अब रज्जो चची बिलकुल हमारे रंग में रंग चुकी थी फिर भी मैं कुछ देखना चाहता था इसलिए मैं अपने लुंड को थामे आगे बढ़ा और चची के सामने जा कर खड़ा हो गया चची मुझे सवालिया नज़रों से देखने लगी की मैं क्या करना चाहता हूँ, नीतू और पापा भी मुझे देख रहे थे..

तभी मेरे लुंड से मूट की धार छोटी और चची के बदन पर गिरने लगी, चची मेरा मूट बदन पर गिरता देख हैरान रह गयी और एक पल को तो उठने को हुई पर फिर न जाने क्या हुआ बापिस बैठ गयी तो मैंने धार को उनके चेहरे की और कर दिया, उनका चेहरा मेरे मूट से भीगे लगा पर तभी सबको हैरान करते हुए चची ने मुँह खोला और मेरा मूट अपने मुँह में लेने लगी, और जितना हो सके पीने भी लगी, मेरा मूट ख़तम हुआ तो चची आधी से ज़्यादा मेरे मूट में भीगी हुई थी और मुस्कुरा कर नशीली आँखों से मुझे देख रही थी, नीतू तो आँखें फाड़े देख रही थी की उसकी मम्मी को क्या हो गया है, इधर मेरे हटते hi पापा ने भी मौका मार लिए और वो भी रज्जो चची पर मूतने लगे और चची ने उनके मूट का स्वागत भी वैसे hi किआ मुँह खोल कर, और पापा का मूट भी जितना हुआ उतना जातक गयी, पापा का मूतना ख़तम हुआ तो चची अब पूरी तरह से मूट में भीगी हुई थी, पर बिलकुल खुश लग रही थी, नीतू बिलकुल हैरान और साथ hi बेहद उत्तेजित भी थी, उसने कपडे पहन लिए थे पर आगे बढ़ कर उसने अपनीपजामि को अपनी जांघों से नीचे किआ और चची को धक्का देकर पीछे लिटा दिया और उनके मुँह पर बैठ गयी और फिर अपनी माँ की आँखों में देखते हुए उनके चेहरे पर मूतने लगी, चची बेटी का मूट भी मुँह खोल कर पीने लगी जिसे देख नीतू को बड़ा मज़ा आ रहा था, साथ hi चची को भी, अपनी बेटी का मूट बड़ा स्वादिष्ट लग रहा था, जल्दी hi नीतू का मूतना ख़तम हुआ तो उसने आगे हो कर अपनी छूट को अपनी माँ के मुँह से पोंछा और चची ने भी जीभ से अचे से बेटी की छूट को चाट लिए..

खैर नीतू चची के ऊपर से हटी तो सब की नज़र चची के चेहरे पर hi थी, और चची के चेहरे पर एक मुस्कान थी.

रज्जो- अह्ह्ह्हह्हह मुझे नहीं पता की मैं सही कर रही हूँ या गलत, ये सही है गलत पर ऐसा कभी महसूस नहीं किआ मैंने .

नीतू- मम्मी तुम्हे ाचा लग रहा है तो सब सही है, और सच कहूं ऐसा एहसास मुझे भी कभी नहीं हुआ ,

में- माँ बेटी राज़ी तो कहे की टेंशन, समाज की टेंशन छोडो चची बस मज़े लो,

पापा- अरे बातें तो होती रहेगी रज्जो चलो तुबेल चला देता हूँ नाहा कर कपडे पहन लो.

रज्जो- हाँ भाई साब भले hi कितना ाचा लग रहा हो ऐसे घर नहीं जा सकते.

पापा ने उनके कपडे उठाये और उन्हें तुबेल की और ले गए, मैं और नीतू वहीं रुक गए,

में- कैसा लगा अपनी माँ के मुँह में मूट कर,

मैंने इतना पूछा की नीतू मुझ पर कूद पड़ी और मेरा लुंड तुरंत मुँह में भर कर चूसने लगी, शायद अपनी माँ के साथ ये सब देख कर बहुत उत्तेजित हो गयी थी,

कुछ देर लुंड चूसने के बाद तुरंत अपनी पजामी को थोड़ा नीचे करके उतरी और मुझे धक्का देकर मेरा लुंड अपनी छूट में लेकर उछलने लगी,

में- अह्ह्ह्हह क्या हुआ तुझे अचानक इतनी गरम हो गयी,

नीतू- ुहम्म अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह मेरी माँ को रंडी बना दिया तुमने अह्ह्ह मैंने उनके मुँह में मोटा अह्ह्ह...

में- क्या तुझे भी अपनी मम्मी जैसा बनना है नीतू..

मैंने उसकी छूट में धक्के लगते हुए कहा साथ hi मेरी नज़र उसकी गांड के छेड़ पर भी थी..

नीतू- ओह्ह्ह्हह हांण अह्ह्ह्हह भैयाहः हाँ रंडी माँ की रंडी बेटी..

ये सुनकर मैंने अपना अंगूठा अपने थूक से गीला किआ और उसकी गांड के छेड़ पर फिरने लगा तो वो और सीसीएनए लगी.

नीतू- ओह्ह्ह्हह भैया अह्ह्ह वो नाहीई आह्ह्ह्ह.

मैंने आगे बढ़ते हुए अपना अंगूठा उसकी गांड के छेड़ में घुसा दिया और वो अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह करने लगी,

नीतू- ओह्ह्ह्हह भैया ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह दर्द हो रहा है अह्ह्ह्ह,

मैंने अंगूठा नहीं निकला पर वैसे hi घुसाए हुए उसे छोड़ता रहा.

थोड़ी देर बाद उसे भी ाचा लगने लगा तो मैं अंगूठा उसकी गांड में चलते हुए छोड़ने लगा, नीतू चुड़ते हुए बड़बड़ाने लगी,

मुझे महसूस हुआ वो अपने स्खलन के करीब है और मैं इसका पूरा फायदा उठाना चाहता था, मैंने एक दो धक्के उसकी छूट में और लगाए और अपना लुंड उसकी छूट से निकल लिए जो की उसकी छूट के रास से सना हुआ था और बिना समय गंवाए मैंने अपना अंगूठा उसकी गांड से निकला और अपना लुंड उसकी गांड के छेड़ पर रख दिया,

नीतू को जैसे hi एहसास हुआ उसने चेहरा पीछे करके देखा और बोली- भैया गांड नहीं बहुत दर्द होगा तुम्हारा लुंड बहुत मोटा haiiiiiiiiahhhhhhhhhhh.

वो बोल रही थी और मैंने धक्का देकर अपना टोपा उसकी गांड में फंसा दिया..

नीतू- uhiiiiiiiiiiiiiiii मम्मी आह्हः भैयाहः अह्हह्ह्ह्ह निकालो अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहुत दर्द अह्ह्ह्हह्हह..

में- बस हो गया मेरी जान, अह्ह्ह्हह ुहममम

मैं हाथ नीचे लेजाकर उसकी छूट सहलाने लगा, वो कुछ देर यौम hi कराहती रही और क्यूंकि वो झड़ने के करीब थी तो उसकी छूट को सहलाने से वो जल्दी hi उसी उत्तेजना में आ गयी और उसका फायदा उठाते हुए उसकी छूट को सहलाते हुए मैं अपना लुंड धीरे धीरे उसकी गांड में अंदर बहार करके अंदर घुसाने लगा, जल्दी hi नीतू का बदन कंपनी लगा और वो झड़ने लगी तो मैंने उसे कास कर पकडे रखा साथ hi लुंड के धक्के लगाकर पूरा लुंड उसकी गांड में घुसा दिया..

अह्ह्ह क्या गरम एहसास था उसकी गांड का अह्ह्ह्ह बहुत गरम और कासी हुई थी उसकी गांड लग रहा था लुंड पिघल जायेगा, वहीं नीतू अब दर्द को सह रही थी पर उसे मेरा लुंड गांड में घुसा हुआ एक अलग एहसास दे रहा था,

नीतू- यह भैयाहः अह्ह्ह्हह्हह ऐसा लग रहा है मेरी गांड में बेलन घुसा हुआ हो.

में- अह्ह्ह मेरी बहन ये बेलन hi है,

नीतू- ओह्ह्ह्हह भैया माहरो अपनी बहन की गांड जैसे अभी मम्मी की मरी थी, मुझे भी मेरी रंडी माँ की तरह छोड़ो,

बस इतना सुन्ना मेरे लिए काफी था और मैं दमड़ां धक्के लगाकर नीतू की गांड मरने लगा,





नीतू हर धक्के के साथ अह्ह्ह अह्ह्ह्ह कर रही थी इतने में hi चची और पापा भी वहां आ गए चची और पापा दोनों ने कपडे पहन लिए थे..

रज्जो- हाय ढैय्या तुम लोग फिर शुरू हो गए ओह्ह्ह मैय्या नीतू तू गांड मरवा रही है का बिटिया?

नीतू- ओह्ह्ह्हह मम्मी हांण अह्हह्ह्ह्ह तुम्हारी बेटी भी तुम्हारी तरह रैंड बन रही है अह्ह्ह्ह देखो..

ये सुन न जाने क्यों चची के मुँह पर मुस्कान आ गयी, पर फिर बोली- पर लाडो काफी देर हो गयी है घर पर देख रहे होंगे..

नीतू- मम्मी अह्ह्ह तुम जाओ मैं आ जाउंगी अभी..

रज्जो- और तेरे बारे में सब पूछिए तो?

पापा- अरे बोल देना बाघ में आम खा रही है या हमारे घर है.

रज्जो- ठीक है पर जल्दी आ जाना, भाई साब ध्यान से भेज देना ये कहकर चची चली गयी और पापा हमारी और देखने लगे...

मुझे नीतू की गांड में बेहद मज़ा आ रहा था और शायद उसे भी क्यूंकि वो आँखें बंद किये सीसियते हुए अपनी गांड मुझसे मरवा रही थी..

पापा ने कुछ पल हमारी और देखा और बोले- करना बीटा मैं पानी चालू करने जा रहा हूँ तू जब निपट जाये तो खेत पर आ जइयो.

में- ठीक अह्ह्ह्हह्हह है पापा..

ये कहकर पापा चले गए और मैं नीतू की गांड में लगा रहा, मैंने उसे सीधा किआ और उसकी t-shirt उतर कर उसे दोबारा नंगा कर दिया, और खुद भी हो गया और फिर से तेज़ी से उसकी गांड मरने लगा...





मुझे नीतू की गरम गांड पिघलने पर मजबूर कर रही थी वहीं नीतू मेरे तेज़ धक्कों से अलग दुनिया में थी और जल्दी hi फिर से झड़ने लगी, पर इस बार उसके साथ मैं भी झड़ने लगा और अपना रास उसकी गांड में भर दिया, झड़ने के बाद मैंने उसकी गांड से लुंड निकला तो वो आगे होकर गिर गयी और हांफने लगी मैं भी हांफ रहा था,

में- अह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ गया,

नीतू- हाँ भैया आह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म मेरी गांड भी खोल दी तुमने तो,

में- हाय क्या किस्मत है न मेरी..

नीतू- और लुंड भी, आअह्ह्ह गांड में दर्द हो रहा है मेरी,

नीतू ने अपने पिछवाड़े को हाथ लगते हुए कहा.

में- थोड़े टाइम में हो जाएगी ठीक, चल तुझे साफ़ नहीं होना,

नीतू- कहाँ?

में- पागल तुबेल में वहीं नाहा कर कपडे पहन लिओ.

नीतू- वहां तक क्या नंगे जायेंगे?

में- और क्या

नीतू- चलो मज़ा आएगा..

वो ख़ुशी से उठाते हुए बोली हम दोनों बिलकुल नंगे बाघ में भागते हुए तुबेल पर पहुंचे जहाँ पापा पहले से थे,

पापा- अरे नंगे hi आ गए तुम दोनों.

Me-Haan नहाना तो था hi,

नीतू- सही में ताऊजी मैं कभी बिना कपड़ो के तुबेल में नहीं नहीं आज मज़ा आएगा..

पापा- ाचा फिर तो नाहा ले.

पापा ने हँसते हुए कहा मैंने जल्दी से पेअर धोये और सिर्फ कच्चा पहन कर खेत में पानी लगाने लगा, वहीं नीतू तुबेल की हौदी में नाहा रही थी पापा पास में hi खड़े हुए उसे देख रहे थे, और उनके पाजामे का उभर बता रहा था जो देख रहे थे उन्हें भ रहा था,

कुछ hi देर में नीतू हौदी से नहाकर निकली तो पापा ने अपना कुरता उतर कर उसे दिया और बोले- ले बीटा इससे पोंछले

नीतू पापा के कुर्ते से पोंछने लगी और पांच कर उसने जैसे hi कुरता बापिस पापा को देने के लिए देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी क्यूंकि सामने पापा हौदी की दीवार पर पूरे नंगे बैठे थे और अपना लुंड सहला रहे थे.

नीतू- क्या हुआ ताऊजी तुम क्यों नंगे हो गए..

पापा- बिटिया तुझे नाहटा देख ये फिर से खड़ा हो गया,

नीतू ये सुन मुस्कुराई और फिर सीधा पापा के घुटनो के बीच जाकर बैठते हुए उनका लुंड पकड़ा और मुँह में भर लिए,

जिसके साथ hi पापा की आह्ह्ह्ह निकल गयी,

नीतू पापा का लुंड चूसने लगी और मैं मेध बनाते हुए दोनों को देख रहा था,

कुछ देर चूसने के बाद नीतू कड़ी हुई और फिर पापा की आँखों में देखते हुए उनके ऊपर आकर उनका लुंड अपनी चूर में लेकर बैठ गयी,

और धीरे धीरे उछलनर लगी,

पापा को और क्या चाहिए था, माँ के बाद वो बेटी की छूट भी नीचे से धक्के लगते हुए छोड़ने लगे

नीतू- अह्ह्ह्हह्हह ताऊजी अह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi

पापा- अह्ह्ह्हह्हह माहहहह ओह्ह्ह्ह क्या कासी हुई मस्त छूट है तेरी आह्ह्ह्ह बेटाझ

नीतू- ुहममम हाँ ताऊजी छोड़ू अहहज ऐसे hi.. अह्हह्ह्ह्ह

अचानक से नीतू की चीख निकल गयी क्यूंकि पापा ने उसे छोड़ते हुए अपनी उंगली उसकी गांड में घुसा दी..





नीतू- ताऊजी वहां नहीं अब्बी भैया ने मारी है बहुत दर्द है अहहज

ये सुन पापा ने उसको गांड से उंगली निकली और उसे छोड़ने लगे..

मैं मेध बनाते हुए थोड़ा आगे तक चला गया खैर जब बापिस आया तो पापा अकेले थे.

में- गयी नीतू?

पापा- हाँ गयी बीटा पर क्या जोड़ी है माँ बेटी की...

पापा ने मुस्कुराते हुए कहा...

मैं भी ये सुनकर मुस्कुराने लगा...

जारी रहेगी...
 
मैं मेध बनाते हुए थोड़ा आगे तक चला गया खैर जब बापिस आया तो पापा अकेले थे.

में- गयी नीतू?

पापा- हाँ गयी बीटा पर क्या जोड़ी है माँ बेटी की...

पापा ने मुस्कुराते हुए कहा...

मैं भी ये सुनकर मुस्कुराने लगा... अब आगे...



अपडेट 202
घर पर अनुज अपने कमरे में पढाई कर रहा था और बीच में उसे प्यास लगी तो वो उठ कर रसोई में पानी लेने गया और रसोई में उसे जो दिखा वो उसे पढाई से थोड़ा भटकने वाला था क्यूंकि उसके मौसा और माँ रसोई में थे माँ सिर्फ कच्ची और ब्रा में थी और उसके मौसा उसकी माँ का गदराया पेट चूम चाट रहे थे,





दोनों का ध्यान अनुज पर गया पर दोनों में से hi कोई रुका नहीं,

अनुज- मौसी कहाँ है माँ?

माँ- अहम वो अह्ह्ह ममता के यहाँ गयी है, तेरी पढाई हो गयी?

अपने जीजा के होंठों को अपने पेट पर महसूस करते हुए माँ ने कहा,

अनुज- नहीं माँ अभी बाकि है...

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ठीक कर ले...

ये कहते हुए अनुज पानी पीकर बापिस अपने कमरे में चल दिया आते हुए सोचने लगा की कितना सही हो गया है न अब जिसका मन जब करे चुदाई कर सकता है घर में,

खैर अभी उसे सारा ध्यान पढाई पर ध्यान देना था, इधर पल्ली का भी यही हाल था वो भी पढाई कर रही थी अनुज की hi तरह पर उसका ध्यान लगातार बाँट रहा था क्यूंकि वो अपनी मम्मी के कमरे में पढाई कर रही थी और वहीं उसके बगल में शालू मौसी बिलकुल नंगी झुकी हुई थी और पीछे से उसके पापा मौसी को छोड़ रहे थे





मौसी- ओह्ह्ह्ह जीजा अह्ह्ह अह्ह्ह्हह और तेज़ आअह्ह्ह..

चाचा- ओह्ह्ह शालू अह्ह्ह्हह्हह सआईईईई क्या मज़ीदार छूट हैईईईई अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह

मौसी- आअह्ह्ह जीजा आह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म मेरी चूचियों को दबाओ ना..

चाचा- अह्हह्ह्ह्ह हांण ले अह्हह्ह्ह्ह साली तेरी चूचियां एक हाथ में समाती hi नहीं हैं...

पल्ली- अरे यार इतनी तेज़ आवाज़ करोगे तो मैं कैसे पढ़ पाऊँगी... मैं चली अपने कमरे में...

मौसी- ओह्ह्ह्ह अब नहीं करूउऊउउउऊँग़ीीी पल्ली पढ़ले..

पल्ली- नहीं मौसी मेरा भी मन करने लगा तुम्हे देख कर पर टेस्ट होने वाला है पढ़ना ज़रूरी है,

ये कहकर वो अपने कमरे में चली गयी किताबें लेकर इधर चाचा और मौसी की चुदाई चालू थी,

इधर खेत में पानी लगाने के बाद मैं और पापा घर लौटे तो देखा दरवाज़ा बंद था, मैं समझ गया की अंदर कुछ हो रहा होगा क्यूंकि हमने आपस में तय किआ था की ये चुदाई का कोड होगा, मैंने खटखटाने की जगह दरवाज़ा चाबी से खोल लिए और हम अंदर आये तो देखा आँगन सूनसान था हाँ माँ पापा के कमरे से आवाज़ आ रही थी मैं और पापा उनके कमरे में गए तो देखा...

मौसा बिस्तर पर पेअर लटका कर बैठे थे माँ उनकी गॉड में सर रखकर लेती थी और मौसा का लुंड माँ के मुँह में था, और माँ के पैरों के बीच अनुज था जो की माँ को तेज़ तेज़ धक्कों से छोड़ रहा था,





पापा- अरे यहाँ तो प्रोग्राम चालू है,

पापा ने नीचे बैठते हुए कहा..

मौसा- आओ भैया अरे टाइम पास के लिए कुछ तो करना hi था,

में- अनुज तुझे तो पढाई करनी थी न?

अनुज- हाँ अह्ह्ह कर अह्ह्हली मैंने भैया उसके बाद hi आया हूँ..

माँ- अरे तुम लोग बैठो, खाना लगाती हूँ अभी,

माँ ने मौसा का लुंड मुँह से निकलते हुए कहा...

अनुज- पर माँ मेरा नहीं हुआ है अभी.

अनुज और तेज़ धक्के लगते हुए बोलै...

माँ- अरे तो क्या हुआ रसोई में चल खाना गरम करते हुए छोड़ लिओ. अब ठीक..

अनुज- हाँ फिर ठीक..

मौसा- ाचा हुआ मैं तो पहले hi झाड़ गया, नहीं तो अनुज की तरह बीच में रह जाता,

पापा- अरे ऐसे कैसे शालू कहाँ है?

मौसा- वो राजन भैया के यहाँ है.

पापा- सम्भालो अपनी बीवी को देखो राजन पता न ले उसे.

पापा ने मज़ाक करते हुए कहा..

मौसा- तो क्या हुआ भैया भाभी है न हमारे लिए.

मौसा ने माँ की और इशारा करके कहा जो की रसोई की और नंगी जा रही थी और अनुज उनके पीछे पीछे...

पापा- लो तुम तो हमारे माल पर hi नज़र गड़ाए बैठे हो..

मौसा- हहहह.

खैर इसी तरह हंसी मज़ाक में खाना पीना हुआ और फिर दोपहर ऐसे hi बीती... शाम को मैं और जग्गू क्रिकेट खेलने गए जिसके बाद मैंने उसे गाडी की ख़ुशी में पार्टी दी या यूँ कहें उसने जबरदस्ती ले ली, उसके बाद उसके साथ hi मैं उसके घर गया जहाँ दरवाज़ा एक औरत ने खोला जिसे मैं नहीं पहचानता था, देखने में तो गदराई थी और तै की hi तरह बिलकुल मस्त माल थी..

मैंने जग्गू से पूछा तो उसने बताया वो प्रेमा भाभी की मम्मी हैं, मैंने उन्हें नमस्ते किआ, और अंदर जाकर जग्गू के साथ बैठ गया जहाँ ताऊ तै पहले से hi बैठे थे भग्गू भी था भाभी रसोई में थी.

तै- क्यों रे कर्मा अब काम दीखता है तू.

में- कहाँ काम दीखता हूँ तुम hi घर से नहीं निकलती अब, बेटे बहु से मस्त सेवा करवाती रहती हो..

मेरी बात सुन ताऊ थोड़ा मन hi मन शरमाई.

तै- इतनी बातें बनता है, की बातों में कोई जीत hi नहीं सकता तुझसे.

में- मैं कहाँ तै.

तै- रुक अभी बहु चाय ला रही है, अरे संधान जी कोई लड़की होती बताओ हमारे कर्मा के ब्याह के लिए.

में- मेरे लिए क्यों जग्गू बड़ा है मुझसे उसकी पहले होगी.

इधर तै की बात सुनकर भाभी की माँ ने मुझे ऊपर से नीचे देखा और मुस्कुरा के बोली- कैसी दुल्हनिया चाहिए लल्ला..

में- अरे तै मुझे नहीं चाहिए, पहले जग्गू की करवाओ..

मैंने उन्हें देखते हुए कहा और पाया की भाभी को सुंदरता और कामुकता दोनों hi अपनी माँ से मिली थी, बिलकुल गदराया बदन, बड़ी बड़ी चूचियां कैसा हुआ बदन चौड़े नितम्भ.. कुल मिलकर कहूं तो वो तै की समाधान काम बहन ज़्यादा लग रही थी क्यूंकि दोनों का बदन बिलकुल एक जैसा था,

ताऊजी- अरे दोनों की एक साथ hi करवा देंगे.

जग्गू- अरे तूने अपने साथ मुझे क्यों ले लिए.

में- रुको मैं भाभी से मिलकर आता हूँ.

मैं रसोई की और भाग कर गया और देखा की किसी की नज़र नहीं है तो भाभी को पीछे से बाँहों में भर लिए..

में- कैसी हो मेरी जान

भाभी अचानक चौंक गयी फिर मेरी बाजू पर हल्का सा मरते हुए बोली- जान की जान निकलोगे डरा hi दिया,

में- ऐसा कैसे हो सकता है तुम तो मेरी जान हो,

मैंने भाभी के नंगे पेट को मसलते हुए कहा..

भाभी- ाचा इतने दिन गायब हो जाते हो तब याद नहीं आती जान की... कोई दूसरी तो नहीं ढूंढ ली..

में- ऐसा कैसे हो सकता है भाभी, तुम hi एकलौती जान हो मेरी..

भाभी- चल झूठे, जग्गू भैया ने बताया है मुझे गैंदपुर वाली के बारे में का नाम था. हाँ अंजलि.

में- अरे वो तो भाभी ऐसे hi..

भाभी- बनो मत वैसे फोटो तो दिखाओ हम भी देखें देवरानी को

में- अरे तुम तो ज़्यादा hi आगे पहुँच गयी.

मैंने फ़ोन निकला और अंजलि की फोटो दिखाई.

भाभी- अरे वाह ये तो सच में बहुत सुन्दर है...

में- तुमसे थोड़ी सी काम.

भाभी- धत्त्त...

में- ाचा भाभी थोड़ा रास तो पिलाओ .

भाभी- कौनसा रास?

में- ये वाला....

ये कहकर मैं भाभी के होंठों को चूसने लगा.. भाभी भी मेरा साथ देने लगी, मेरे हाथ भाभी के चूतड़ों को मसल रहे थे इतने में hi मेरी पीठ पर किसी का हाथ आया मैंने और भाभी ने चौंक कर पीछे देखा तो पाया की तै थी..

तै- अरे बच्चों तुम लोगो को दीखता नहीं का, भग्गू और बहु की माँ बहार hi है आ गयी तो.

भाभी- तो क्या हुआ मम्मी जी कर्मा भैया माँ को भी इसकी सवारी करवा देंगे.

भाभी ने पाजामे के ऊपर से hi लुंड को सहलाते हुए कहा.

तै- हौव्व कैसी बेशरम हो गयी है तू बहुरिया.

इतने में बहार से ताऊजी की आवाज़ आई- अरे भाई चाय नहीं मिली अभी तक.

Bhabhi-laai पापा जी..

मैं और तै जल्दी से बहार आये और पीछे चाय लेकर भाभी भी.

खैर चाय और बातों का दौर चला, सबने गाडी के बारे में पूछा और मैंने सबको जल्दी घूमने का वादा भी किआ और फिर मैं वहां से निकला hi था घर के लिए की मेरा फ़ोन बजा और जब निकल कर देखा तो मैं खुश हो गया की स्क्रीन पर अंजलि दिखा रहा था, मैंने ख़ुशी ख़ुशी फ़ोन उठाया और बात की तो पता चला की नीतू भी उसके साथ लाइन पर थी हम तीनो ने मिलकर खूब साडी बातें की काफी देर तक फिर bye बोलकर फ़ोन रख दिया तो तुरंत hi नीतू का फ़ोन दोबारा आया,

में- क्या हुआ?

नीतू- सही रस्ते पे जा रहे हो बीटा..

में- मतलब..

नीतू- मतलब तुम्हारी हीरोइन खुद से पूछने लगी है तुम्हारे बारे में.

में- सही में क्या पूछा बता न.

नीतू- अरे देखो तो कैसे उत्सुक हो रहे हो.

में- अरे बता न.

नीतू- उसका फ़ोन आया था थोड़ी बात की फिर तुम्हारे बारे में पूछने लगी, तो मैंने बोल दिया बात hi कर ले न, तो मुझसे बोलने लगी लाइन पर लेने को, मैंने बोल दिया मैं क्यों लूँ तेरा मन है तो तू फ़ोन कर... फिर जाकर उसने किआ,

में- ाचा, ये तो सही है पर खुद से क्यों नहीं कर सकती.

नीतू- अरे लड़कियों का होता है थोड़ा, चाहती भी हैं और जाताना भी नहीं चाहती,

में- सही में लड़कियों को समझना मुश्किल है.

नीतू- अभी तुम इतना समझो की तुम्हारी गाडी सही रस्ते पर है मैं उसे जानती हूँ. उसके मन में कुछ कुछ तो है तुम्हारे लिए.

में- हाय इसी कुछ कुछ को बहुत कुछ में बदलना है मुझे....

नीतू- वैसे उसके साथ अकेले घूमने जाना है?

में- हाँ हाँ जाना है यार.

नीतू- ठीक करवाती हूँ जुगाड़, फिर अकेले जाना और खूब मज़े लेना,

में- पहले प्लान बना तो सही,

नीतू- बनती हूँ वैसे तुम्हारी हीरोइन को हमारे बारे में पता चल गया तो तुम्हारी लव स्टोरी का थे एन्ड हो जायेगा.

में- अरे ऐसे मत बोल अभी तो शुरू भी नहीं हुई है.

नीतू- तो मुझे क्या मिलेगा बदले में.

में- क्या चाहिए तुझे बता,

नीतू- सीधा सीधा बोलूं या घुमा फिरा के.

Me-seedha बोल.

नीतू- चुदाई..

में- अरे वो तो आज hi की थी अब और भी चाहिए क्या?

नीतू- देखो मैं तुम्हे अंजलि के साथ घूमने का पूरा जुगाड़ बना कर दूंगी बदले में कुछ भी करके आज रात पूरी तुम मेरे साथ रहोगे तो, अब कहाँ कैसे ये तुम्हे सोचना है.

में- रात में कैसे होगा पागल?

नीतू- अब अंजलि के प्यार के लिए इतना तो करना पड़ेगा बीटा.

में- ठीक है. करता हूँ कुछ.

ये कहकर मैंने फ़ोन रख दिया, और सोचने लगा की नीतू ने तो फंसा दिया अब इसको रात भर कैसे पास rakhun?kuch सोच कर्मा कुछ सोच.

मैंने सोचते हुए घर आ गया तब तक खाने पीने का भी समय हो चूका था, सबने मिलकर खाना खाया तब जाकर मेरे दिमाग में कुछ आया तो मैंने पल्ली को पकड़ा और उसे अपनी योजना बताई.

पल्ली- पर इसमें मेरा क्या फायदा होगा,

में- अब तुझे क्या फायदा चाहिए?

पल्ली- फिल्म दिखाओगे?

में- हाँ हाँ दिखाऊंगा अब बता करेगी?

पल्ली- अभी जाती हूँ,

पल्ली- रज्जो चची के यहाँ गयी और बोली की नीतू जीजी को आज उसके यहाँ सोने दो उसे पढाई में कुछ मदद चाहिए टेस्ट के लिए.

ये सब मैंने hi उसे समझा कर भेजा था.

इधर मैंने घर पर राजन चाचा और ममता चची को बोल दिया था की आज मैं उनके घर पर रुकूंगा और वो लोग हमारे यहाँ सो जाएं अब इसमें तो कोई दिक्कत होने वाली नहीं थी और न hi हुई.

खैर मैं चची के यहाँ जाकर बेसब्री से इंतज़ार करने लगा और कुछ देर बाद दरवाज़ा खटखट हुआ तो मैंने जाकर खोला, मेरी नज़र पल्ली पर फिर नीतू पर पड़ी तो मैं खुश हो गया पर फिर अचानक मेरे चेहरे का रंग उतर गया क्यूंकि उनके साथ लाडो भी थी, अब लाडो भी तो पल्ली और अनुज की क्लास में hi थी मैं ये भूल गया.

पल्ली- भैया जीजी मुझे और लाडो को यहीं पढ़ाएंगी...

पल्ली ने अंदर आये हुए कहा.

नीतू भी अंदर आते हुए मुझे सवालिया नज़रों से देख रही थी,

लाडो- भैया तुम भी पढ़ने आये हो क्या?

लाडो ने दांत चमकते हुए कहा.

में- हाँ मैडम तुम से hi पढूंगा.

Laado-bhaiya मैं स्टूडेंट को मरती बहुत हूँ.

में- मैं मैडम का गाला भी दबा देता हूँ.

खैर ये सब कहते हुए वो अंदर आ गए, अब मुझे टेंशन हो गयी की लाडो के रहते सब कैसे हो payega,waise सवाल तो नीतू पल्ली के बारे में भी पूछती पर मैं कैसे भी संभल लेता पर Laado...ne आकर सारा गुड़ गोबर कर दिया था...

इतने में नीतू मेरे करीब आई और फुसफुसा कर बोली- भैया ये था तुम्हारा प्लान? भूल जाओ अंजलि के साथ अकेले घूमना....

मुझे वैसे hi चिंता हो रही थी ये और बढ़ा गयी खैर मैंने कुछ सोचा और फिर अनुज को फ़ोन किआ और कुछ hi देर में वो भी किताब लेकर घर पर आ गया, मैंने उसे और पल्ली को पहले hi समझा दिया था पर उसमे कितना सफल हो सकता था वो देखने वाली बात थी,

इधर मेरे घर पर अलग hi माहौल था आज सब बड़े तीनो जोड़े अकेले थे बिना बच्चों के. सब पापा माँ के कमरे में बैठ कर बातें कर रहे थे,

मौसी- वैसे आज बिना बच्चों के अलग लग रहा है.

चची- हाँ, पर कभी कभी ऐसे भी ाचा लगता है बस हम सब बड़े हैं साथ में.

पापा- हाँ ये भी बात है भले hi हम और बच्चे कितने भी खुल गए हों पर हैं तो हम उनके माता पिता hi..

मौसा- बिलकुल सही कहा भैया तुमने

माँ- हाँ अभी अपने बड़े लोग हैं तो एक अलग hi मज़ा है इसका भी,

चाचा- हाँ ऐसा नहीं की बच्चों के साथ ाचा नहीं लगता, अरे उनके बिना तो कुछ होता hi नहीं पर कभी कभी अपनी उम्र के साथ भी ाचा लगता है.

मौसी- वैसे बातों के अलावा आज का क्या प्रोग्राम है,

चची- प्रोग्राम क्या है वही होगा छूट और लुंड का प्रोग्राम.

मौसी- हेहेहे जीजी तुम भी न हमारा मतलब साथ में या अकेले अकेले कमरों में जाना है.

चची- ये तो सब से पूछलो जैसा सब चाहें.

मौसा- साथ hi सही रहेगा, क्यों भैया.

पापा- हाँ और क्या कहाँ अकेले अकेले सोओगे.

चाचा- सोयेंगे तो नहीं पर सही में साथ में hi मज़ा आएगा,

खैर इसी तरह इनका प्रोग्राम शुरू हो गया था, वैसे प्रोग्राम तो मेरे साथ भी शुरू हो गया था पढाई का, सब लोग चाचा चची के कमरे में बैठ कर पढ़ रहे थे मैं बगल में कुर्सी पर बैठा था, नीतू उन सब को पढ़ते हुए मुझे तिरछी नज़रों से देख रही थी, और अनुज और पल्ली भी जो की रात को चुदाई का सोच रहे थे और मेरी वजह से उन्हें पढ़ना पद रहा था, मैं भी परेशां बैठा था की क्या करूँ सोचा था अनुज आएगा तो कुछ मदद हो जाएगी पर अभी तक तो साडी तिकड़म फ़ैल हो रही थी...

वहीं घर में प्रोग्राम पूरे जोश में चल रहा था, मौसी पापा के लुंड को अपनी गांड में लिए उछाल रही थी





पापा भी नीचे से धक्के लगाकर मौसी की कासी हुई गांड में लुंड पेल रहे थे, हर धक्के के साथ मौसी की बड़ी बड़ी चूचियां नाच रही थी,

मौसी- ओह्ह्ह्ह जीजा अह्हह्ह्ह्ह मारो मेरिइइइइइइइइ अहह

पापा- ओह्ह्ह्ह मार तो रहा हूँ सआईईईई अह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह क्या गांड है अह्हह्ह्ह्ह... ओह्ह्ह्हह्ह..

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह तुमहाहहहरा लुंड भी टूउवाह्ह्ह्ह बड़ा लम्बा हैईईईई जीजाहहह अह्ह्ह्ह पेट तक जा रहा है,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम देखू टूओ अह्हह्ह्ह्ह ऐसे चिल्ला रही है जैसे पहली अह्ह्ह्ह बार गांड मरवा रही हो...

माँ ने मौसी की बातें सुन कर कहा जबकि उनकी खुद की गांड में चाचा का लुंड अंदर बहार हो रहा था..

माँ के बदन पर सिर्फ पेटीकोट था वो भी कमर पर इकठा हो रखा था, चाचा ने माँ को बिस्तर पर लिटा रखा था और खुद उनके बगल में पेटकर माँ की गरम गांड मार रहे थे..





चाचा- अह्हह्ह्ह्ह भाभ्हीई तुम बहनो की गांड hi ऐसी हैआह्ह्ह्ह जब मारो ऐसा hi लगता है पहली बार मार रहे हैं...

माँ- अह्हह्ह्ह्ह भैया अह्ह्ह्हह्हह माहहहह ऐसी हैईईईई ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म हमें भीईओ पहलियी बार जित्नाहीइ मज़ाआ आता है गांड मरवाने में....

चाचा- ओह्ह्ह्हह्ह भाभ्हीई तुम्हारी गाहहहनदड़ का तो न जाने कब से दीवाना हूँ मैंनं. अह्ह्ह्हह्हह..

माँ- अह्हह्ह्ह्ह भैया अह्ह्ह्हह्हह टूउवाह्ह्ह्ह मार मार के फाड़ दोअहहह अपनीई भाभी की गांडडडड..

माँ की बात सुन चाचा और उत्तेजित होकर माँ की गांड मरने लगे...

वहीं बगल में मौसा लेते हुए थे और चची मौसा का लुंड अपनी गांड में लेकर उछाल रही थी..

या ये कहना सही होगा की मौसा उन्हें अपने लुंड पर उछाल रहे थे,.. चची गांड मरवाते हुए भी अपनी छूट को उँगलियों से मसल रही थी





चची- अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ऐसी hi भैया अह्हह्ह्ह्ह बड़ा मज़ाआ आ रहा है अह्हह्ह्ह्ह मरते रहो..

मौसा- ओह्ह्ह्ह भाभीई अह्ह्ह्ह मैं चहुँ तो भीई अह्ह्ह नहीं रुक सक्ताःह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह क्या मस्त जादू है तुम्हारी गांड में अह्हह्ह्ह्ह...

चची- अह्हह्ह्ह्ह जादू तो तुम्हारीयी छेडीईई कर रहियी है भैया आठ गांड में अह्हह्ह्ह्ह

दूसरी और मैं अब भी सोच में डूबा हुआ था की क्या किया जाये, मैंने देखा की पल्ली अनुज और लाडो अभी तीनो hi का ध्यान किताब में था और नीतू उन्हें देखते हुए कनखियों से मुझे देख रही थी,

में- अरे नीतू चल सबके लिए चाय बना देते हैं ाचा रहेगा पढ़ने के लिए,

लाडो- हाँ भैया फिर नींद भी नहीं आएगी बनालो जीजी.

में- हाँ हम दोनों आते हैं तुम लोग पढ़ो ध्यान से..

ये कहते हुए मैं चला तो अनुज और पल्ली मुझे घूर रहे थे गुस्से से...

नीतू मुझे देखकर मुस्कुराते हुए उठी और मैं भी उसके साथ चल दिया, कमरे से बहार आकर हम रसोई में आये और आते hi एक दुसरे पर टूट पड़े, मैं उसके होंठो को पागलों की तरह चूसने लगा और वो मेरे , करीब 5 मीन्स बाद हम अलग हुए तो हांफ रहे थे,

में- नीतू चाय रख दे, कोई आ गया पूछने तो गड़बड़ हो जाएगी...

नीतू- Haan..par आगे क्या करें ऐसे तो कुछ नहीं हो पायेगा भैया.

नीतू ने चाय रखते हुए कहा..

Me-yaar समझ नहीं आ रहा, सब कुछ सही था बस लाडो आ गयी तेरे साथ,

नीतू- सिर्फ लाडो अनुज और पल्ली भी तो हैं.

में- अरे उनका मैंने पहले hi सोच रखा था कुछ उनसे परेशानी नहीं होती...

नीतू- पर कुछ भी हो अभी कुछ सोचो जल्दी से मुझे ये चाहिए..

नीतू ने मेरे पाजामे के ऊपर से लुंड पर हाथ फेरते हुए कहा तो मैंने उसे बाहों में भर लिए और उसकी टीशर्ट को ऊपर उठाकर उसके गोर पेट और नाभि को चूसने चाटने लगा,

चूल्हे पर चाय उबाल रही थी और इधर मैं और नीतू...

वहीं घर पर चुदाई थमने का नाम नहीं ले रही थी

चची को मौसा और माँ को चाचा बिलकुल अगल बगल में छोड़ रहे थे,





चारो की hi सिसकियों से पता चल रहा था की चरों जल्दी hi झड़ने के करीब हैं, और अब किसी भी समय झाड़ सकते हैं,

वहीं बिस्तर पर मौसी पापा के लुंड पर उछलती हुई लगातार चिल्ला रही थी पापा भी उनकी चूचियों को थामे नीचे से लगातार धक्के लगाए जा रहे थे,

तभी इधर चाचा ने सबसे पहले माँ की गांड में पिचकारी मारनी शुरू की तो माँ भी खुद को रोक नहीं पाई और उनके साथ झड़ने लगी.

इधर इनकी देखा देखि मौसा और चची भी जैसे इंतज़ार में hi थे और मौसा ने चची की गांड में रास भर दिया वहीं चची की छूट ने भी पानी बहा दिया...

झड़ने के बाद माँ और चची ने एक दुसरे को गांड से निकले लुंड को चूसने लगी, माँ ने मौसा का लुंड मुँह में लिए तो चची ने चाचा का और फिर साफ़ करके उठ कर मौसी और पापा के पास बिस्तर पर चलो गयी जहाँ का हाल भी यही था पापा और मौसी दोनों hi उत्तेजना के शिखर थे और कभी भी नीचे लुढ़क सकते थे इधर माँ और चची बगल में बैठ कर दोनों का उत्साह बढ़ने लगे





माँ- अह्हह्ह्ह्ह शालू ऐसे hi उछाल अपने चूतड़ों को जीजा के लुंड पर.

चची- अह्हह्ह्ह्ह हांण ऐसी हीई भाई साब छोड़ो अपनी साली की गांड

चची का इतना बोलना था की मौसी थरर्हरते हुए झड़ने लगी, मौसी के झड़ते hi पापा ने भी संयम खो दिया और मौसी की गांड को भरने लगे, दोनों झाड़ कर शांत हुए तो मौसी पापा के ऊपर से हटी तो माँ ने मौसी की गांड पर अपना मुँह लगा दिया और पति का रास चूसने लगी वहीं चची ने पापा के लुंड को संभाला... यहाँ तो चुदाई का तूफ़ान थोड़ा शांत हो गया था..

पर मेरे साथ ऐसा नहीं था सबने साथ में चाय पि और फिर से वो लोग पढ़ने लगे और मैं और नीतू एक दुसरे को देख मुँह बना रहे थे, मुझसे और रहा नहीं गया तो मैं खड़ा हुआ और बोलै- अरे नीतू इन्हे पढ़ने दे चल हम लोग बहार चलते हैं... थोड़ा बतियाते हैं.

नीतू- हाँ भैया इन्हे समझा दिया है क्या पढ़ना है..

नीतू भी तुरंत उठते हुए बोली हम दोनों ये बोल कर बहार आ गए और फिर मैं उसे पल्ली वाले कमरे में लेकर गया और वहां लेजाकर हम दोनों फिर शुरू हो गए, मैं उसकी t-shirt उठाकर उसकी मस्त चूचियों को चूसने लगा तो वो मेरा सर अपनी चूचियों पर दबाते हुए सिसकने लगी,

मैं उसकी एक चुकी को पकड़ता तो दूसरी चूसता पाजामे में मेरा लुंड बिलकुल लोहे की तरह तना हुआ था जो की उसे अपनी जांघों पर महसूस हो रहा था, जिसे जल्दी hi उसने एक हाथ नीचे लेजाकर पकड़ लिए..

वहीं घर में माहौल फिर से गर्माने लगा था चची ने माँ को बिस्तर पर लिटाया हुआ था और खुद उनकी टैंगो के बीच में आकर माँ की रसीली छूट का रास चूस रही थी...





वहीं बिस्तर के नीचे मौसी घुटनो पर बैठी थी और तीनो तरफ से लुंड से घिरी हुई थी, और एक साथ तीन तीन लुंड को चूस कर आगे के लिए तैयार कर रही थी, एक लुंड को मुँह में रखती तो बाकि के दोनों को हाथों में और बदल बदल कर तीनो को बराबर सेवा दे रही थी,

इधर पापा मौसा और चाचा तीनो hi बातें करते हुए मौसी से लुंड चुसवा रहे थे..

पापा- अह्हह्ह्ह्ह कुछ भी कहो तुम्हारी पत्नी लुंड बड़ा गजब चूसती है शैलेश बाबू,

चाचा- क्या भाई साब यही बात तुमने मुझे भी बोली थी,

माँ- अरे भैया ये मुझे भी बोलते हैं की तुमसे ाचा लुंड कोई नहीं चूसता.

ये सुनकर सब हंसने लगे,

मौसा- क्या भाई साब सबको बना रहे हो एक साथ,

पापा- अरे हम तो सच बोल रहे थे अब हम क्या करें जब ये तीनो hi इतना मस्त लुंड चूसती हैं अब शालू को hi देखलो,

इधर मौसी इस बात को साबित करने में कोई कसार नहीं चौधह रही थी





मौसी की हरकतों से तीनो hi बार बार सिसक रहे थे वहीं माँ भी चची की जीभ पर आहें भर रही थी क्यूंकि चची ने अपनी जीभ माँ की गांड में घुसा दी थी और उँगलियों से छूट को कुरेद रही थी...

माँ- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम ममताहहह अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह हानंन्न...

माँ चची का सर अपनी जीभ पर दबाते हुए चिल्ला रही थी,

पापा- वैसे आगे क्या करना है अब,

मौसा- चुदाई करेंगे भैया और क्या,

Chacha-are शैलेश बाबू चुदाई में hi क्या करना है वो पूछ रहे हैं,

इस पर मौसी ने लुंड मुँह से निकलते हुए बोलै- मैं बताती हूँ क्या करना है...

दूसरी और अनुज पल्ली और लाडो कमरे में बैठे पढ़ रहे थे, अनुज का मन चुदाई का हो रहा था और सोच रहा था भैया ने फंसा दिया आज यही हाल पल्ली का था और दोनों hi लाडो से बचकर एक दुसरे से इशारे कर रहे थे.. थोड़ी देर में अनुज बोलै- भैया और नीतू जीजी को गए काफी समय हो गया,

लाडो- हाँ तो क्या हुआ तू पढाई पर ध्यान दे न, टेस्ट हमारा है या उनका...

अनुज ये सुन कर चुप हो गया फिर थोड़ी देर में बोलै- अरे मैं सुसु करके आता हूँ,

और उठकर चल दिया.. उसके कमरे से जाते hi लाडो बोली- देखा पल्ली इसका पढ़ने का मन नहीं है तो बहाने बना रहा है,

पल्ली- सच कहूं तो मन तो मेरा भी नहीं कर रहा,

लाडो- पर पढ़ना तो पड़ेगा न पल्ली..

पल्ली- हाँ पढ़ते hi हैं और क्या करेंगे,

लाडो- एक काम कर सकते हैं..

लाडो ने पल्ली की और देख मुस्कुराते हुए कहा...

इधर अनुज कमरे से निकला था सुसु का बोलकर तो पहले सुसु hi गया और पेशाब करके आंगन में आया और मन में सोचने लगा- देख तो लूँ एक बार भैया और नीतू जीजी कर क्या रहे हैं, ये सोचते हुए वो सीधा पल्ली के कमरे के दरवाज़े पर पहुंचा और उसने दरवाज़े को हल्का सा धीरे से धकेला तो वो थोड़ा सा खुल गया, कर्मा नीतू ने दरवाज़ा इसीलिए नहीं लगाया था की बेकार में किसी को शक न हो,

पर अनुज ने दरवाज़े के बीच आँख लगा कर अंदर देखा तो उसकी आँखें चौड़ी हो गयी और हो भी क्यों न अंदर नज़ारा hi ऐसा था..

उसने देखा की नीतू बिस्तर पर घोड़ी बानी हुई थी, उसकी टी शर्ट उसके चूचियों तक इकठी हो राखी थी नीतू के बड़े बड़े चूतड़ों के बीच मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा था, मैं नीतू की कमर को थामे सटासट नीतू को छोड़ रहा था..





अनुज तो ये देख कर बिलकुल सुन्न हो गया और उसकी आँखें बड़ी हो गयी, और मन hi मन सोचने लगा- इनका सही है हमें पढाई में लगा कर खुद मज़े लूट रहे हैं, यार नीतू जीजी की गांड क्या मस्त है कितना मज़ा आएगा इन्हे छोड़ने में, काश भैया की जगह मैं छोड़ रहा होता, सोचकर hi लुंड कितना कड़क हो गया है मेरा, अनुज ने अपने कड़क लुंड को पाजामे के ऊपर से hi सहलाते हुए कहा, और फिर पजामा नीचे खिसका कर लुंड बहार निकल लिए.. और अंदर देखते हुए मुठियाने लगा,

वो नीतू के चूतड़ों को देख कर अपने लुंड को मुठियाने लगा

इधर मैं अब पूरे जोश में आ चूका था इसलिए मैंने नीतू को उठाया और उसकी टीशर्ट उतर कर उसे पूरा नंगा कर दिया और खुद भी हो गया, मैंने आसान बदलते हुए नीतू को बिस्तर पर एक करवट पर लिटाया और खुद भी उसके पीछे वैसे hi लेट कर उसे छोड़ने लगा,..

वहीं दूसरी तरफ घर में कुछ अलग hi चल रहा था, जब मौसी ने ये कहा की मैं बताती हूँ तो उनका मतलब ये था जो अभी हो रहा था,

चाचा बिस्तर नीचे लेते हुए थे और माँ उनके ऊपर उनका लुंड अपनी छूट में लिए हुए बैठी थी वहीं माँ और चाचा के पैरों के बीच मौसा थे जिनका लुंड माँ की गांड में घुसा हुआ था वहीं उनके बगल में माँ और चाचा के सर की और पापा थे जिनका लुंड माँ के मुँह में था,

माँ की तीनो और से चुदाई हो रही थी...





दूसरी और मौसी और चची बैठी हुई एक दुसरे की छूट सहलाते हुए माँ की टिहरी चुदाई देख रही थी,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह राजन भैया ओह्ह्ह तुम्हारे लुंड की वजह से भाभी की गांड और कास गयी है अह्ह्ह्हह्हह...

चाचा- अह्हह्ह्ह्ह हांण शैलेश बाबू मुझे तुंहारा लुंड भाभीई की गांड में महसूस हो रहा है अह्ह्ह...

पापा- अह्हह्ह्ह्ह मेरी बीवी के मज़े ले रहे हो दोनों मेरे सामने किस्मत वाले हो...

पापा ने माँ के मुँह को छोड़ते हुए कहा..

चाचा- हांण भैया अह्हह्ह्ह्ह किस्मत वाले तो हैं जो भाभी जैसी औरत छोड़ने को मिल रही है..

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह जीजाहहह जीजी जैसा बदन होता hi छोड़ने के लिए है,

चची- और क्या इन्हे तो जितना छोड़ो जीजा का बदन उतना hi निखरता है,

मौसा- अह्हह्ह्ह्ह फिर तो मैं भाभी को छोड़ता रहूँगा हमेशा..

मौसी- अह्हह्ह्ह्ह हानंन्न ऐसी hi छोड़ो मेरी रंडी जीजी को अह्ह्ह्ह देखो रैंड को कैसे एक साथ तीन तीन लुंड ले रही है,

चची- अह्हह्ह्ह्ह अभी और लुंड होते तो वो भी समां लेती जीजी अपने अंदर,

माँ सबकी बातें सुनते हुए गरम होकर चुद रही थी वैसे भी मुँह में पापा का लुंड था तो और कुछ कर भी नहीं सकती थी,

इधर गरम बातें सुनकर मर्दों का भी वही हाल था और चाचा और मौसा दोनों hi एक ले बनके माँ की जबरदस्त तरीके से छोड़ रहे थे, जिसका नतीजा ये हुआ था की माँ को आखिर टिहरी चुदाई के आगे हारना पड़ा और माँ जल्दी hi थरर्हरते हुए झड़ने लगी, माँ के झड़ने के बाद मौसा ने उनकी गांड से लुंड निकला और फिर उन्हें उठाकर बगल में लिट् दिया जहाँ माँ गहरी गहरी सांसें लेते हुए हांफने लगी,

माँ के हटते hi अब मौसा नीचे लेट गए और ममता चची ने उनके ऊपर जगह ली और जल्दी hi चची भी तीन लुंड से एक साथ चुद रही थी,

मौसा का उनकी छूट में था, पापा का गांड में और चाचा का मुँह में, और तीनो hi काफी गहराई से चची के बदन में चलने लगे,





इधर मेरी और नीतू की चुदाई जारी थी और अनुज हमारी चुदाई को देख कर मुठिया रहा था,

अनुज- आह्हः मन तो कर रहा है अभी अंदर जाकर नीतू जीजी को छोड़ने लागूं अह्ह्ह, पल्ली लाडो के साथ है उसे भी नहीं छोड़ सकता, अह्ह्ह अनुज अपने लुंड को मुठियाते हुए ये सब सोच रहा था..

जहाँ बेटी मुझसे चुद रही थी वहीं माँ यानि रज्जो चची अलग सोच में थी घर पर,

रज्जो चची रसोई का काम निपटाते हुए सोच रही थी, की वो सही तो कर रही हैं न कर्मा और भाईसाहब के साथ ये सब करके, मुझे इनके लिए बुरा लग रहा है, अपने पति को धोखा दे रही हूँ, लाडो के पापा के लिए मुझे कुछ करना चाहिए, हाँ आज इन्हे खुश कर देती हूँ और गांड देती हूँ, इन्हे मेरी गांड मार कर बड़ी ख़ुशी मिलती है लाडो नीतू है नहीं तो आज अकेले hi सोऊंगी तो उसकी भी परेशानी ख़तम ये सोचते हुए वो जल्दी जल्दी रसोई का काम निपटने लगी,

सारा काम निपटा कर जैसे hi वो आंगन में आई उन्हें नीतू के पापा यानि दीं दयाल चाचा हाथ में डोलची और टोर्च लेकर खड़े थे कंधे पर शाल और कम्बल पड़ा हुआ था,

रज्जो- अरे क्या हुआ कहाँ जा रहे हो?

दीं दयाल- अरे गजब हो तुम्हे बताया तो था अनाज खुला पड़ा है तो खेत पर hi सोना है आज.

तो जाकर रज्जो को याद आया की हाँ उसके पति ने ऐसा कहा था,

रज्जो- अरे हाँ हमारे तो माथे से hi निकल गयी बात,

दीं दयाल- ठीक है हम निकलते हैं..

ये कहकर वो चले गए और चची मन hi मन दुखी होने लगी पर वहीं कोई था जो बहुत खुश था वो था सरजू, सरजू सोच रहा था की आज क्या मौका मिला है बहनें भी नहीं हैं, पापा भी नहीं बस विरजू है वो फ़ोन चलते हुए सो जायेगा तो इस रात का मुझे कुछ न कुछ फायदा उठाना चाहिए ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा...

चची उदास मन के साथ अपने कमरे में आई जहाँ वो और लाडो साथ में सोते थे, सरजू ने जल्दी से विरजू को देखा जो की छत पर बिस्तर में फ़ोन चला रहा था वो रात को अक्सर छत पर hi सोता था एक तो नेटवर्क अचे आते थे तो गेम अचे से खेल पता था दूसरा रात को फ़ोन चलते देख उसके मम्मी पापा उसे डांटते थे. जिससे वो बच जाता था... सरजू ने दूर से hi देखा तो विरजू कान में ईरफ़ोन लगाए गेम में व्यस्त था, सरजू ये देख खुश हो गया क्यूंकि अब घर पर सिर्फ वो और उसकी मम्मी थी, वो खुश होते हुए सोचने लगा कैसे इस रात का पूरा फायदा उठाया जाये,

इधर अनुज का लुंड मुठियाते हुए बुरा हाल हो रहा था और उसी बीच उसने बिना सोचे सहारे के लिए अपना हाथ दरवाज़े पर रखा पर ये सोचे बिना की दरवाज़ा खुला है और उसका हाथ पड़ते hi दरवाज़ा खुला और अनुज का संतुलन बिगड़ा और वो कमरे के अंदर आकर गिर गया जिससे नीतू और मैं चौंक गए, नीतू तो खुद को ढकने की कोशिश करने लगी पर मैंने जब देखा की अनुज है और उसकी हालत देखि तो मेरी हंसी छूट गयी..

अनुज का पजामा घुटनो पर था और वो हाथ में लुंड लिए नीचे पड़ा हुआ..

में- क्या कर रहा है अनुज पागल है क्या?

मैंने हँसते हुए बोलै.. साथ hi मैं नीतू की छूट में धक्के लगाने लगा, मुझे हँसता देख कर नीतू भी थोड़ी शांत हो गयी, उसने भी सोचा की जब मैं अपने पापा के साथ खुल कर चुदाई कर लेता हूँ तो भाई से क्या hi डरना.

अनुज- वो मैं भैया जीजी..

अनुज बड़बड़ाता हुआ बोलै..

में- मैं वो मत कर और दरवाज़ा बंद कर जल्दी..

अनुज जल्दी से उठा और दरवाज़ा बंद किआ इधर नीतू की नज़र अनुज के लुंड पर पड़ी तो वो बात बार उसे देखने लगी साथ hi मेरा लुंड उसकी छूट में उसकी उत्तेजना को बढ़ा रहा था,

अनुज- अब वैसे hi खड़ा खड़ा मुझे और नीतू को देखने लगा तो मैंने उसे इशारे में hi पास आने को कहा, जिसे वो तुरंत समझ गया, अनुज ने अपना पजामा नीचे से उतर दिया और हमारे पास आकर अपना लुंड पकड़ कर नीतू के चेहरे के आगे कर दिया, नीतू ने एक बार उसकी आँखों में देखा और फिर उसके लुंड को मुँह में भर लिए, अनुज के मुँह से आह्ह्ह्ह निकल गयी इधर नीतू तो बिलकुल जोश में आते हुए उसका लुंड चूसते हुए मुझसे छोड़ने लगी....





अनुज- ओह्ह्ह्हह्ह जेईजीईई अह्हह्ह्ह्ह ऐसी हीईई मज़ाआ आ रहा है...

में- अह्हह्ह्ह्ह मज़ा तो आएगा हीई अह्ह्ह पर तू यहाँ क्या कर रहा है, पल्ली और लाडो कहाँ है?

अनुज- वो पढाई कर रही हैं दोनों.

Neetu-pakka न.

नीतू ने उसका लुंड मुँह से निकल कर पूछा और फिर बापिस मुँह में भर लिए,

अनुज- हाँ ओह्ह्ह्ह जीजी पढ़ रही है अह्ह्ह दोनुवाआहहह..

हमारे यहाँ अभी काफी ज़ोरदार चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था और चची की गांड छूट और मुँह तीनो की hi अचे से चुदाई चल रही थी,

पापा तेज़ी से चची की गांड में लुंड पेल रहे थे तो मौसा उनकी छूट में, चाचा अपनी बीवी का चेहरा थामे हुए उनका मुँह छोड़ रहे थे, चची के मुँह से थूक बहार बाह रहा था,

वहीं दोनों गदराई बहनें माँ और मौसी एक दुसरे की चूचियों और छूट को सहलाते हुए चची की चुदाई का लुत्फ़ उठा रही थी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ, अनुज के पापा ऐसे hi छोड़ो इस रैंड को आह्हः छोड़ छोड़ कर इसकी छूट का भोसड़ा बना दो आह्ह्ह्ह..

मौसी- हाआनंनं जीजा आह्ह्ह्हह्ह छोड़ छोड़ कर पानी निकल दो जीजी का, अह्ह्ह्हह रैंड की तरह छोड़ो साली को..

पापा- अह्हह्ह्ह्ह साली तुम तीनो hi रैंड हो जिन्हे एक साथ तीन तीन लुंड चाहिए होते हैं,

पापा चची की गांड मरते हुए बोले..

मौसा- सही कहा भइयाझ...

चाचा- हमारी बीवियां रंडियां हैं आह्ह्ह्हह्ह जिन्हे एक साथ तीन तीन लुंड चाहिए..

इधर ममता चची के लिए तीन लुंड की मार ऊपर से ऐसी बातें ये सब कुछ ज़्यादा हो गया और वो खुद को रोक नहीं पाई और झड़ने लगी, पापा ने उनकी गांड से लुंड निकल कर उन्हें बगल में लिटा दिया, चची के हटते हो मौसी तैयार थी और चाचा के ऊपर आकर उनका लुंड अपनी गांड में लेकर बैठ गयी, जल्दी hi पापा ने अपना लुंड उनकी छूट में फंसा दिया वहीं मौसा अपनी पत्नी के गरम मुँह का आनंद उठाने लगे, माँ और चची की तरह मौसी भी टिहरी चुदाई का मज़ा लेने लगी...





माँ- अह्हह्ह्ह्ह मेरी प्यारी बहन कितनी अछि लग रही है न तीन तीन लुंड से चुड़ते हुए,

मौसा- हाँ भाभी कभी सोचा नहीं था की ये बोलूंगा पर हाँ मेरी बीवी एक दम रैंड लग रही है...

सरजू सरे घर की बत्तियां वगेरा बुझा कर और दरवाज़े का टाला लगा कर सीधा अपनी मम्मी के कमरे में गया तो देखा उसकी मम्मी बस लेटने hi जा रही थी,

रज्जो- क्या हुआ लल्ला कुछ चाहिए का?

सरजू- नहीं मम्मी वो बस देखने आया था तुम्हे तो कुछ नहीं चाहिए.

रज्जो- नहीं तो हमें नहीं चाहिए कुछ.

Sarju-are रोज़ लाडो साथ सोती है न तुम्हारे और आज अकेली हो, नीतू भी नहीं है तो सो जाओगी न आराम से,

रज्जो- हाँ सो hi जाउंगी..

रज्जो ने सोचते हुए कहा,

सरजू- कहीं तुम्हे आदत न हो अकेले सोने की और पूरी रात नींद न आये....

रज्जो- पता नहीं लल्ला ऐसा कुछ सोचा नहीं...

सरजू- अरे मम्मी होता है कभी कभी ऐसा, कहो तो मैं सो जॉन तुम्हारे साथ..

सरजू ने उसके बिस्तर पर बैठते हुए कहा.

रज्जो- ाचा तू इतना बड़ा होकर अपनी मम्मी के साथ सोयेगा,

सरजू- हाँ इसमें क्या हो गया.

Rajjo-tujhe शर्म तो नहीं आएगी.

सरजू- अरे इसमें कैसी शर्म, वैसे भी कितना भी बड़ा हो जॉन रहोगी तो तुम मेरी मम्मी जी,

रज्जो- चल ठीक है आजा सजा यहीं.

सरजू- ठीक है मम्मी

ये कहते हुए सरजू खड़ा हुआ और दरवाज़े की कुण्डी लगाडी,

रज्जो- अरे कुण्डी क्यों लगाडी हम तो ऐसे hi सोते हैं.

सरजू- ाचा पर मैं बंद करके सीता हूँ न इसलिए और सही है न कोई हमारी नींद भी नहीं बिगड़ पायेगा,

Rajjo-tu भी न, चल बत्ती बुझा दे, पर हल्का वाला बल्ब जला दियो...

Sarju-Haan मम्मी पता है तुम अँधेरे में नहीं सो पाती,

ये कहकर सरजू ने बत्ती बुझा दी और एक छोटा बल्ब जला दिए जिसकी हलकी रौशनी कमरे में फ़ैल फाई,

सरजू बिस्तर पर आकर अपनी माँ के बगल में लेट गया, रज्जो अपनी पीठ पर लेती थी वहीं सरजू अपनी मम्मी की और करवट लेकर लेता था,

रज्जो- अब सो जा न ऐसे क्यों देख रहा है मुझे.

सरजू- बस ऐसे hi अच्छा लग रहा है इतने दिनों बाद अपनी मम्मी के साथ सो रहा हूँ.

रज्जो- अरे ऐसा है तो पहले क्यों नहीं कहा बीच बीच में सोती रहती तेरे पास.

सरजू- कैसे कहता लाडो और नीतू hi नहीं छोड़ती थी तुम्हे, पर आज मुझे मौका मिला है.

ये कहते हुए वो आगे खिसक कर अपनी मम्मी से चिपक गया और साथ hi एक हाथ अपनी मम्मी के पेट पर रख लिए.

रज्जो- अरे तू भी न बिलकुल बच्चा hi है अभी,

रज्जो प्यार से सरजू के गाल पर हाथ फिरते हुए बोली...

इधर मैं अनुज और नीतू आसान बदल चुके थे अब मैं बिस्तर पर बैठा था नीतू मेरे लुंड पर बैठ कर उछाल रही थी और अनुज बगल में खड़ा हुआ उससे लुंड चुसवा रहा था इधर मैं उसे छोड़ते हुए अपनी उंगली उसकी गांड में घुसा कर उसकी गांड को भी तैयार कर रहा था..





वहीं घर पर चुदाई का तूफ़ान बिलकुल अपने चरम पर था तीनो लुंड मौसी की तूफानी चुदाई कर रहे थे , मौसा भी मौसी के मुँह को छूट की तरह छोड़ रहे थे और उसका नतीजा वही हुआ जिसकी उम्मीद सबको थी मौसी भरभराते हुए झड़ने लगी पर मौसी सिर्फ अकेले नहीं झड़ी बल्कि अपने साथ तीनो मर्दों को भी लेकर झड़ी पापा चाचा और मौसा भी संयम खो बैठे और मौसी के छेदों को अपने अपने रास से भर दिया, सब अलग हुए तो मौसी तो बेजान सी होकर लेट गयी वहीं माँ और चची ने उठकर तीनो लुंड को चूस चाट कर साफ़ किआ और फिर माँ ने अपनी बहन की छूट से अपने पति का रास छठा तो और चची गांड से अपने पति का...

खैर झड़ने के बाद अब सब पूरी तरह थक चुके थे और वैसे hi सब एक साथ सो गए,

सरजू अपनी मम्मी से बातें करते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था और धीरे धीरे अपनी अपनी मम्मी के पेट को सहला रहा था वही रज्जो को अपने बेटे से ऐसे बातें करने में बहुत मज़ा आ रहा था साथ hi उन्हें भी नहीं पता क्यों पर उन्हें अपने बेटे का हाथ अपने पेट पर चलता हुआ ाचा लग रहा था और उसका असर उसे अपनी छूट पर भी होता महसूस हो रहा था, रज्जो खुद नहीं समझ पा रही थी ऐसा क्यों हो रहा है...

वहीं सरजू को ये पल बहुत अच्छे लग रहे थे उसका लुंड भी बिलकुल टांड चूका था, वो किसी तरह अपनी कमर को पीछे किये हुए लेता था ताकि उसका लुंड उसकी मम्मी को न चुभे.

इधर मैंने भी तरक्की कर ली थी और नीतू मेरे सामने झुकी हुई थी मेरा लुंड उसकी गांड के छेड़ पर था और नीतू के मुँह में अनुज का लुंड था,

मैंने धक्का देते हुए अपने लुंड को उसकी गांड में घुसाया तो वो छटपटाने लगी और उसने अनुज का लुंड अपने मुँह से निकल दिया, इधर अनुज ने तुरंत उसका मुँह अपने हाथों से बंद किआ जिसका फायदा उठाकर मैंने एक बार फिर से उसकी कासी हुई गांड को भेद लिए, उसकी गांड की गर्मी पाकर मैं खुद को रोक नहीं पाया और उसकी गांड तेज़ी से मरने लगा इधर अनुज अपना लुंड सहलाते हुए नीतू को चीखने से रोक रहा था,





कुछ देर बाद hi नीतू भी अभ्यस्त हो गयी और मज़े लेकर गांड मरवाने लगी, वहीं मुझे अपना वीर्य अपने लुंड में भरता हुआ महसूस होने लगा, पर मैंने इस बार खुद को नहीं रोका और कुछ तगड़े धक्के लगाकर अपना रास नीतू की गांड में भर दिया, झड़ने के बाद मैंने लुंड नीतू की गांड से निकला तो वो नीचे पेटकर हांफने लगी,

मैंने भी कुछ पल अपनी सांस शांत की फिर खड़ा हुआ और अपने कपडे पहनने लगा,

टीशर्ट और पजामा पहनकर मैंने बोलै- मैं पल्ली और लाडो को देखता हूँ वो दोनों पढ़ रहे हैं की नहीं..

नीतू- ठीक है,

नीतू हांफते हुए बोली...

इतना कहकर मैं कमरे से बहार आ गया और अनुज को दरवाज़ा बंद करने को बोल दिया, मेरे जाने के बाद नीतू का हांफना जब बंद हुआ तो उसने सर उठाकर देखा तो पाया अनुज उसे देख कर मुस्कुरा रहा था था,

नीतू भी उसे देख कर मुस्कुराई...

इधर सरजू अपनी हर कोशिश कर रहा था अपनी मम्मी के करीब होने की,

सरजू- मम्मी गर्मी कितनी है न,

रज्जो- हाँ ऊपर से हम दोनों ऐसे चिपक कर लेते हैं पसीना पसीना हो रखा है..

सरजू- वो चाहे कुछ भी हो आज मैं ऐसे hi सोऊंगा तुम्हारे साथ..

रज्जो- तू भी न बच्चों की तरह ज़िद्द करता है,

सरजू- बच्चा hi तो हूँ तुम्हारा, एक मिनट..

ये कहकर सरजू उठा और उसने अपनी टी शर्ट और पजामा उतर दिया और सिर्फ कच्चे में लेट गया,

रज्जो- हाय ढैय्या ये क्या कर रहा है,

सरजू- गर्मी लग रही थी न इसलिए कपडे उतर दिए.

रज्जो- पर तू सोयेगा ऐसे चिपक कर hi?

सरजू- हाँ..

सरजू बत्तीसी दिखता हुआ बोलै, तो रज्जो को भी हंसी आ गयी,

रज्जो- कमीना, पर देख तूने तो कपडे उतर दिए पर मुझे तो गर्मी लग रही है,

सरजू- तो क्या हुआ तुम भी उतर दो न..

रज्जो- धत्त्त पागल, कोई क्या सोचेगा..

सरजू- अरे कौन देख रहा है दरवाज़ा बंद है कुण्डी लगी है कौन देख रहा है,

रज्जो ये सुनकर कुछ सोचने लगी फिर बोली- नहीं फिर भी ाचा नहीं लगता,

सरजू- क्या ाचा नहीं लगता,

रज्जो- यही अपने जवान बेटे के साथ ऐसे सोना..

सरजू- अरे मम्मी कहाँ अचे बुते में पद रही हो मैं भी तो देखो लेता हूँ ऐसे hi.

रज्जो- पर तू बच्चा है,

Sarju-kabhi जवान बताती हो कभी बच्चा, और बच्चा हूँ तो कैसी शर्म, माँ बेटे में तो सब चलता है,

रज्जो- तू भी न..

सरजू- मैं भी न क्या, सही गलत के चक्कर में पड़ोगी तो अपनी ख़ुशी का कुछ नहीं कर पाओगी,

सरजू की इस बार से रज्जो सोच में पद गयी की सरजू सही तो कह रहा है, अगर सही गलत सोचती तो भाई साब और कर्मा से चुद नहीं पाती और मेरे जीवन की सबसे अछि चुदाई नहीं मिल पाती मुझे, अगर आगे भी पड़ी रही तो न जाने क्या क्या मौके हाथ से चले जायेंगे, अब से मुझे वही करना चाहिए जो मुझे ख़ुशी दे न की सही हो...

रज्जो सोच में डूबी थी तो सरजू ने उसकी ख़ामोशी का फायदा उठाया और उसकी साड़ी को पकड़ कर खींचने लगा, अपने बेटे के उत्साह को देखकर रज्जो ने भी अपने बदन को उठाकर अपनी साड़ी उतरने में बेटे की मदद की... कुछ hi पालो में उसकी साड़ी नीचे पड़ी हुई थी, और सरजू की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, हालाँकि रज्जो को भी ाचा लग रहा था थोड़ा, सरजू के हाथ ने बापिस अपना कब्ज़ा अपनी मम्मी के पेट पर जमा लिए,

जहाँ माँ बेटे का प्यार परवान चढ़ रहा था वहीं बेटी भी चढ़ी हुई थी पर लुंड पर और अपने चूतड़ों को उछाल रही थी, नीतू अनुज के लुंड पर अपनी छूट पटक रही थी वहीं दोनों के होंठ आपस में जुड़े हुए थे, और अनुज नीतू की जीभ को चूसता हुआ उसकी चूचियों को मसल रहा था,

अनुज नीतू जैसी सुन्दर एक और नयी लड़की को छोड़कर बहुत खुश था और मन hi मन अपने भाई को धन्यवाद कर रहा था जिसके कारन आज उसका लुंड एक और गरम छूट में था,

इधर मैं कमरे से निकला और आंगन में देखते हुए बापिस चाचा चची के कमरे में पहुंचा पर वहां देख कर मैं हैरान रह गया क्यूंकि वहां कोई नहीं था न पल्ली न hi लाडो तो मैं सोचने लगा ये लोग कहाँ जा सकते हैं मैं बहार आ कर हर जगह देखने लगा घर में वो कहूं नहीं मिले बाथरूम में भी नहीं थे, अंत में मैं छत पर चढ़ा देखने के लिए क्यूंकि बस वही जगह बची थी देखने के लिए, और छत पर पहुँच कर भी मुझे पहले तो कोई नहीं दिखा पर जैसे hi मैं बापिस जाने के लिए मुड़ने वाला था तो मुझे एक आहात सी सुनाई दी मैंने आहात की और देखा तो छत के कोने में चची के यहाँ हमेशा एक खाट कड़ी रहती थी वह कड़ी थी पर उस पर एक चादर भी पड़ी हुई थी... जिससे उसके पार नहीं दिख रहा था, मैंने पास जाकर उसके दूसरी और देखा तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी, मुझे यकीन नहीं हुआ जो मैं देख रहा था उस पर,

लाडो नीचे से बिलकुल नंगी थी और उसकी जवान छूट में एक लुंड घुसा हुआ था और वो उस पर उछाल रही थी साथ hi आगे झुक कर जिससे चुद रही थी उसे चूम रही थी, वहीं पल्ली उसके पीछे बैठी अपनी छूट में उंगली करते हुए अपनी दोस्त को चुड़ते हुए देख रही थी...

सरजू अपनी मम्मी के पेट को मसलते हुए आगे की योजना बना रहा था, वहीं रज्जो भी बेटे के हाथ को महसूस करते हुए गरम हो रही थी,

सरजू- अरे मम्मी तुम्हारा तो ब्लाउज भी पूरा भीग गया है पसीने से.

सरजू ने अपनी मम्मी के कंधे पर हाथ लगते हुए उसके ब्लाउज को छूकर देखने लगा, पर साथ hi उसने इसी बहाने बड़ी चालाकी से अपने कमर के हिस्से को भी अपनी मम्मी के बदन से चिपका दिया और अपने लुंड को भी अपनी मम्मी की जांघ पर चिपका दिया, रज्जो को जैसे hi बेटे का कड़क लुंड जांघ पर चुभा वो अंदर hi अंदर सिहर गयी उसकी छूट पनियाने लगी...

सरजू- मम्मी तुम्हारा ब्लाउज भीगा है मेरी मानो तो इसे भी उतर दो,

रज्जो इसके जवाब में सिर्फ इतना कह पाई- हुन्न्न,

क्यूंकि उसका ध्यान तो बेटे के लुंड पर था जो उसकी जांघ पर चुभ रहा था,

सरजू- उतरदो मम्मी इसे,

ये कहकर सरजू ने मम्मी के जवाब का भी इंतज़ार नहीं किआ और अपने हाथ से ब्लाउज के बटन खोलने लगा, जैसे hi रज्जो का ध्यान अपने खुलते ब्लाउज पर आया तो वो बोली- लल्ला नहीं रहने दे...

सरजू- क्या रहने दे मम्मी देखो पूरा भीग गया है,

ये कहते हुए उसने ब्लाउज का एक और बटन खोल दिया वहीं रज्जो ये सोच कर झिझक रही थी की उसने ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी, है ढैय्या क्या लल्ला को नहीं दिख रहा की मैंने ब्रा नहीं पहनी है ये तो ब्लाउज खोलता hi जा रहा है, क्या करूँ रोकूं या नहीं,

रज्जो इन्ही सब सोच में थी की सरजू ने उसके ब्लाउज का आखिरी बटन भी खोल दिया और फिर दोनों पतों को जैसे hi अलग किआ उसकी आँखें बड़ी हो गयी क्यूंकि उसकी मम्मी की बड़ी बड़ी चूचियां उसके सामने आ गयी, उसने सच में नहीं सोचा था की ब्लाउज के अंदर उसकी माँ ने ब्रा नहीं पहनी होगी, अपनी मम्मी की भरी हुई चूचियों को देखकर तो उसका मुँह सूखने लगा, इधर रज्जो को भी जब एहसास हुआ की उसका ब्लाउज खुल चूका है और उसकी चूचियां बेटे के सामने हैं तो वो भी कुछ नहीं कर सकती थी, सरजू को तो अपनी किस्मत पर यकीन hi नहीं आ रहा था की आज की रात सब कुछ उसके पक्ष में जा रहा था, काफी देर तक तो वो अपनी माँ की चूचियां hi देखता रहा और फिर जब उसे ध्यान आया तो उसने सोचा की आज किस्मत अछि hi है तो पूरा फायदा उठाया जाये, ये सोचते हुए उसने साधारण होने की कोशिश करते हुए अपनी मम्मी की पीठ पर हाथ लगाकर ऊपर उठाते हुए बोलै- मम्मी ब्लाउज निकल दो बाजुओं से देखो पूरा भीगा है,

रज्जो ने जब ये सुना तो थोड़ी हैरान हुई की इसे तो फ़र्क़ hi नहीं पड़ा की मैंने ब्रा नहीं पहनी है ब्लाउज उतरने के लिए कह रहा है, पर साथ hi वो खुद इतनी उत्तेजित हो चुकी थी की उसे मन भी नहीं किआ जा रहा था और उसने सरजू की मदद करते हुए अपने ब्लाउज को बाजुओं से निकल कर बदन से अलग कर दिया जिसे सरजू ने पकड़ कर बिस्तर के बगल में रख दिया, अब कुछ पल दोनों hi शांत रहे क्यूंकि रज्जो सोच रही थी की वो अपने बेटे के बगल में सिर्फ पेटीकोट में लेती है ऊपर से बिलकुल नंगी होकर वहीं सरजू भी ये सोच रहा था की उसकी मम्मी उसके बगल में ऊपर से बिलकुल नंगी लेती है...

कमरे की चुप्पी को तोड़ते हुए सरजू बोलै- मम्मी अब कैसा लग रहा है?

रज्जो- हैं? हाँ ठीक लग रहा है,

सरजू- गर्मी से राहत मिली,

रज्जो- हाँ पहले से तो,

सरजू ने ये प्रश्न इसलिए पूछे थे ताकि वो अपनी मम्मी की प्रतिक्रिया जान सके और जब उसे लगा की मम्मी साधारण हैं और आराम से बात कर रही हैं तो वो खुश हो गया, और एक बार फिर से उससे चिपक कर लेट गया, उसका हाथ फिर से मम्मी के पेट पर था बस इस बार फ़र्क़ सिर्फ इतना सा था की उसकी मम्मी ऊपर से बिलकुल नंगी थी,

सरजू फिर से अपनी मम्मी के गदराये पेट को मसलने लगा और सहलाने लगा, उसने देखा की तभी उसके मम्मी के चेहरे पर एक मुस्कान आई.

सरजू- क्या हुआ मम्मी तुम मुस्कुरा क्यों रही हो,

रज्जो- कुछ नहीं लल्ला बस कुछ याद आ गया था.

सरजू- ाचा क्या?

रज्जो- बस पहले की बात जब तू छोटा था...

सरजू- ाचा कौनसी बात बताओ न मुझे भी.

रज्जो- अरे बस जैसे हम अभी लेते हैं न उससे hi..

सरजू- पूरी बात बताओ न,

सरजू अपनी मम्मी से चिपकते हुए बोलै उसके हाथ उसकी मम्मी के पेट को सहला रहे थे साथ hi मम्मी की गहरी नाभि से भी खेल रहा था.

रज्जो- अरे क्या था की बचपन में जब तू मेरा दूध पीटा था तब भी तुझे रात को बहुत भूख लगती थी और गर्मी में कभी कभी रात को मैं ऐसे hi ब्लाउज वगेरा उतारकर सोती थी तू ऐसे hi मुझसे चिपक कर मेरे दूध पीते हुए सो जाता था.. बस वही याद आ गया.

सरजू- अरे वाह मम्मी क्या समय होगा न वो भी..

रज्जो- हाँ अभी याद करो तो बहुत ाचा लगता है.

सरजू- काश वो समय बापिस आ जाता...

रज्जो- न बाबा न अरे अब फिर से चार बच्चे नहीं पलने mujhe.hehehe

सरजू- अरे वो नहीं मम्मी मतलब वही रात में जैसे सोते थे वैसे hi

रज्जो- ऐसे hi सोते थे

सरजू- नहीं मम्मी पूरी बताओ अचे से मुझे फिर से वही पल जीना है.

रज्जो- अरे लल्ला तू भी न तब तू छोटा था.

सरजू- तो क्या हुआ मम्मी मेरा बड़ा मन है और तुम्हे भी ाचा लगेगा अब बताओ क्या क्या कैसे कैसे होता था,

रज्जो- तू भी न बड़ा ज़िद्दी है..

सरजू- वो तो मैं हूँ चलो बताओ कैसे सुलाती थी मुझे बताओ. और मैं क्या पहनता था कैसे सोया रहता था.

रज्जो- अरे तू क्या पहनता था क्या कुछ नहीं, रात में मोटा रहता था इसलिए कुछ पहनती नहीं थी, गर्मी में.

सरजू ने इतना सुना और अपना हाथ नीचे लेजाकर कुछ करने लगा, रज्जो को भी समझ नहीं आया पर अगले hi पल रज्जो को अपनी कमर पर बेटे का नंगा लुंड छुआ तो उसके पूरे बदन में बिजली दौड़ गयी एक पल को तो वो हैरान रह गयी उसे समझ नहीं आ रहा था क्या बोले या क्या करे...

सरजू ने अपना कच्चा उतर दिया और पूरा नंगा हो गया और फिर से मम्मी से चिपकते हुए बोलै- और बताओ मम्मी.

रज्जो- हुन्न? हाँ हाँ और कभी कभी मैं ऐसे करवट लेकर सुलाती थी जिसमे तू मेरी तरफ करवट लिए हुए दूध पिता रहता था और मैंने तुझे प्यार से सहलाती रहती थी,

ये बताते हुए रज्जो बिलकुल वैसे hi हो गयी और उसने सरजू की और करवट ले ली.. उसकी भारी चूचियां सरजू के चेहरे के सामने थी,

सरजू- ऐसे मम्मी..

ये कहकर सरजू ने तुरंत बिना सोचे समझे अपनी मम्मी की एक चुकी को मुँह में भर लिए और चूसने लगा, जिसके साथ hi रज्जो के मुँह से एक अह्ह्ह्हह निकल गयी.

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम लल्ला अह्ह्ह..

रज्जो को सरजू के मुँह से तरंगे निकलती हुई महसूस हो रही थी जो की उसकी चूचियों से होकर पूरे बदन में फैल रही थी, रज्जो को बदन मचल रहा था वो किसी तरह से खुद को काबू में राखी हुई थी, उसकी छूट अब लगातार पानी बहा रही थी, अपने hi बेटे के साथ इस स्तिथि में होने से उसे एक अलग उत्तेजना महसूस हो रही थी.

इधर सरजू को तो जैसे जन्नत मिल गयी थी और अपनी मम्मी की चुकी को पागलों की तरह चूस रहा था,

रज्जो- ओह्ह्ह्ह ुहममम हाँ ऐसी होई..

सरजू ने एक पल को अपनी मम्मी की चुकी को मुँह से निकला और बोलै सही में ऐसे hi होता था न?

रज्जो- ुहं हाँ अह्हह्ह्ह्ह अहम हाँ लल्ला अह्ह्ह

सरजू दोबारा से चुकी चूसने में लग गया करीब 20 मिनट्स तक वो दोनों चूचियों को बदल बदल कर चूसता रहा और इस बीच उसे रज्जो ने बिलकुल भी नहीं रोका, वैसे वो रोकती भी क्या उनकी हालत खुद ख़राब हो रही रही..

आखिर में सरजू ने चूचियों को छोड़ा और बोलै- ऐसे hi होता था न मम्मी...

रज्जो- हाँ सब कुछ ऐसे hi होता था, कभी कभी तू मेरे ऊपर आकर मेरे पेट पर लेटकर दूध पीटा हुआ सो जाता था,

इतना सुनते hi सरजू तुरंत अपनी मम्मी के ऊपर आ गया और जैसे hi सरजू ने अपना वजन अपनी मम्मी पर डाला रज्जो की तो जान hi निकल गयी क्यूंकि सरजू का नंगा लुंड उसे अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी छूट के ऊपर टक्कर मरता महसूस हुआ सरजू ने अपना सर झुककर अपनी मम्मी के कंधे पर रख दिया और बोलै- बिलकुल ऐसे hi न मम्मी..

रज्जो- हाँ बीटा पर वजन काम दाल तू अब बहुत भरी हो गया है,

सरजू ने मुस्कुराते हुए कुछ वजन अपनी कोहनियों पर ले लिया,

सरजू- अब ठीक है..

रज्जो- हाँ ठीक है बस एक चीज़ थोड़ी अलग होती थी,

सरजू- क्या बताओ न,

रज्जो- ये..

इतना कहकर रज्जो अपने पेटीकोट का नाडा खोलने लगी...

वहीं राजन चाचा की छत पर मैं ये नज़ारा देख बिलकुल हैरान था, मुझे अब भी उसका चेहरा नहीं दिखा था जो लाडो को छोड़ रहा था, उन तीनो में से किसी ने भी अभी तक मुझे नहीं देखा था, तभी कुछ पल बाद लाडो ने उसे चूमना बंद किआ और सीढ़ी हुई तो मेरी नज़र उसके चेहरे पर गयी और उसे देखकर तो मैं बिलकुल हिल hi गया, ऐसा मैंने शायद कभी सोचा नहीं था वो हो रहा था, लाडो जिससे चुद रही थी वो और कोई नहीं बल्कि उसका छोटा भाई बिरजू था...

मैं तो बस बूत बना उन्हें देखे hi जा रहा था की तभी पल्ली ने मुझे देख लिए और उसके मुँह से निकल गया भैया?

इसके बाद बिरजू और लाडो ने भी मुझे देख लिए और दोनों को मानो सांप सूंघ गया दोनों hi ज्यों के त्यों रुक गए, लाडो फिर तुरंत अपने भाई के लुंड से उठ कड़ी हुई, और खुद को छुपाने लगी वही बिरजू भी दर से कांप रहा था, मैंने खुद के दिमाग को थोड़ा शांत किआ और जो हो रहा था उसकी कमान खुद की..

में- सब जैसे हैं वैसे hi अभी चलो नीचे कमरे में..

मेरी बात सुन कर पल्ली तो कड़ी हुई पर लाडो और बिरजू वैसे hi बैठे रहे तो मैंने फिर से कहा- लाडो बिरजू नीचे,

ये सुनकर लाडो उठी और अपनी पजामी पहनने लगी, मैंने उसके हाथ से पजामी छींटे हुए कहा- मैंने बोलै न जैसे हो वैसे hi..

मेरी दांत सुनकर उसकी आँखों में आंसू भर आये जिसे किसी तरह उसने रोका, खैर मेरे पीछे पीछे तीनो नीचे आ गए मैं उन्हें सीधा चाचा चची वाले कमरे में ले गया, कमरे की रौशनी में लाडो की गोरी टंगे और छूट देखकर मेरा मन बहकने लगा, पर अभी कुछ और ज़्यादा ज़रूरी था इसलिए मैंने सबको बिस्तर पर बिठाया और कुछ रुक कर बोलना शुरू किआ- अब शुरू से बताना शुरू करो, लाडो, कब से चल रहा है ये?

लाडो इसके जवाब में कुछ नहीं बोली और नीचे देखती रही,

में- अगर मुझे जवाब नहीं डोज फिर अपने घरवालों को देना पड़ेगा.

लाडो- भैया वो वो.

में- देख लाडो दर मत, मुझे पता है तुम लोग जवान हो और जवानी में उत्तेजना में ये सब चीज़ें हो जाती है इसी लिए तुमसे कह रहा हूँ की मुझे बताओ सब कुछ नहीं तो मैं तुम्हे किसी भी तरह नहीं बचा पाउँगा..

मेरी ये बात सुनकर लाडो और बिरजू ने एक दुसरे को देखा और फिर पल्ली को, पल्ली ने भी हाँ में इशारा किआ तो लाडो बोली- भैया शुरू से बताती हूँ पर तुम ये बात किसी से मत कहना,

में- बता..

लाडो- वो भैया पिछले साल की बात है मैं और पल्ली हमेशा साथ रहते थे तुम्हे पता hi है, तो हम दोनों को hi धीरे धीरे लड़को के बारे में और सेक्स के बारे में जानने की जिज्ञासा बढ़ने लगी इसी बीच हम को गन्दी फिल्मों के बारे में पता चला तो हम दोनों किसी के पापा का फ़ोन लेकर ब्लू फिल्म वगेरा देखने लगे, उससे हमें बहुत मज़ा आता ऐसे hi एक दिन हमने एक फिल्म देखि जिसमे दो लड़कियां एक दुसरे को चाट रही थी वहां पर चूम रही थी, तो हम दोनों ने भी एक दिन मौका मिला तो एक दुसरे के साथ वही किआ और हमें इतना मज़ा आया की फिर तो हमें जब भी मौका मिलता इसके घर या मेरे घर एक दुसरे को शांत करते.. ऐसे hi एक दिन करते हुए बिरजू ने हमें पकड़ लिए.. हम दोनों बहुत दर गए, इसने हम दोनों को बोलै की ये पापा को बता देगा तो हम बहुत दर गए हम इससे माफ़ी मांगने लगे तो इसने अंत में एक शर्त राखी की हम दोनों को एक दुसरे से अलग होना पड़ेगा और ये सब हम कभी नहीं कर सकते दोबारा हम दोनों hi तुरंत मान गए हमने एक दुसरे से मिलना जुलना भी बंद कर दिया बस स्कूल में hi मिलते और कहीं नहीं,

में- ऐसा हुआ था पल्ली?

पल्ली- हाँ भैया...

में- ठीक है इसके आगे बिरजू तू बता..

बिरजू- भैया लाडो बता तो रही है.

मैंने उसे थोड़ा घूर कर देखा तो वो शुरू हो गया,

बिरजू- मैं लाडो पर नज़र रखने लगा उसके बाद इसके कौन कौन दोस्त हैं ये सब जानने लगा, पर जबसे मैंने उसे पल्ली के साथ देखा तबसे मुझे इसे देखने का नजरिया बदल गया, इसे देख कर मेरा वो जो जाता.

में- क्या हो जाता.. खुल के बोल.

बिरजू- ये लल लुंड खड़ा हो जाता था मुझे समझ नहीं आता था क्यों, ऊपर से ये बहुत उदास भी रहने लगी तो एक दिन अकेले में मैंने इससे पूछा की तू उदास क्यों रहती है तो इसने कुछ नहीं बोलै..

कई बार पूछा ये कुछ बोलती hi नहीं थी, तो एक दिन मैंने इसे अकेले में मौका पाकर फिर से पूछा तो इसने तब भी जवाब नहीं दिया तो मैंने इससे बोलै देख अगर तुझे वो करना है जो पल्ली के साथ करती थी तो बता,

तब जाकर ये बोली- क्या मतलब.

फिर मैंने इसे समझाया की अगर तुझे ऐसे मज़े hi चाहिए तो मुझसे बोल काम से काम बहार बदनामी नहीं होगी और पल्ली जो जो करती थी मैं तेरे लिए करूँगा. थोड़ी न नुकुर के बाद ये मान गयी और मैं इसकी च छूट चाटकर इसको खुश कर देता जो की इसने hi मुझे सिखाया की कैसे चाटते हैं.

में- अह्ह्ह बड़ी गरम कहानी है तुम्हारी देखो सुन कर मेरा भी लुंड खड़ा हो गया...

ये कहकर मैंने पजामा नीचे करके अपने कड़क लुंड को बहार निकल लिए तो दोनों hi हैरान रह गए लाडो की तो जैसे नज़र hi मेरे लुंड पर जैम गयी वहीं बिरजू शायद ये सोचने लगा की उसका इतना बड़ा कब और कैसे होगा..

में- चल आगे बोल चुप क्यों हो गया.

बिरजू- हाँ हाँ भैया तो उसके बाद इसको जब भी मौका मिलता ये मुझसे छूट चटवा लेती और फिर धीरे धीरे ये मुझे मुठियाने भी लगी,

में- लाडो तू इसे कैसे मुठियाते थी ज़रा करके बता,

लाडो- जिसका ज़्यादा ध्यान मेरे लुंड पर hi था वो अपना नाम सुनकर चौंकी फिर मेरी बात सुनकर भी

पर उसने अपने हाथ से मुठियाने का इशारा करते हुए बताया ऐसे..

में- ाचा इधर आ मेरे पास बैठ..

लाडो खिसक कर मेरे पास बैठ गयी.

में- देख मुझे पता है तू मेरे लुंड को ऐसे छुप छुप कर देख रही है,

लाडो- वो नहीं तो भैया.

Me-are सुन तो सही, देख बिरजू मुझे तुम्हारी बात बता रहा है इसी बीच अगर तेरे मन में कभी भी आये तो तू मेरा लुंड चूस लेना...

मेरी ये बात सुनकर सभी हैरान रह गए यहाँ तक की बिरजू ने तो थोड़ा गुस्से में भैया भी बोलै...

में- हाँ बोल कुछ कहना है तुझे.

बिरजू- नहीं...

में- तो फिर आगे सुना..

बिरजू- हाँ फिर धीरे धीरे हम एक दुसरे को ऐसे hi मज़े देने लगे बहुत मानाने के बाद ये मेरा मुँह में लेने लगी फिर हम 69 का आसान भी करने लगे,

में- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम

बिरजू ने इतना hi बोलै था की लाडो ने मेरा लुंड में भर लिए था और चूसने भी लगी थी...

बिरजू ने अपनी बहन को ये करते देखा तो हैरान रह गया और चुप हो गया.

में- ुहममम बोलता रह.

बिरजू- फिर ऐसे hi चूसै कब चुदाई में बदल गयी हमें भी पता नहीं चला और तबसे हमें जब भी मौका मिलता है हम आपस में चुदाई करते हैं.

में- ऐसा hi है लाडो....

लाडो ने मेरा लुंड मुँह से निकला और बोली- हाँ भैया

और फिर लुंड को मुँह में भर लिए,

में- अब क्या करें तू बता पल्ली..

पल्ली- करना क्या है भैया तुम लाडो को छोड़ो और मुझे बिरजू छोड़ेगा...

में- क्यों बिरजू ये सही रहेगा?

बिरजू तो पल्ली को छोड़ने के ख्याल से hi लार टपकने लगा,

बिरजू- हाँ भैया..

में- तो मैं तेरी बहन छोड़ लूँ?

बिरजू ये सुन कर थोड़ा झिझका और बोलै- ुहँन हाँ भैया.

पल्ली- अचे से बोल न अगर मेरी चाहिए तो.

बिरजू- भैया तुम मेरी बहन लाडो को छोड़ो...

में- ये हुई न बात, लाडो तू छुड़ेगी मुझसे?

लाडो ने मेरा लुंड मुँह से निकला और कहा....



जारी रहेगी
 
में- अब क्या करें तू बता पल्ली..

पल्ली- करना क्या है भैया तुम लाडो को छोड़ो और मुझे बिरजू छोड़ेगा...

में- क्यों बिरजू ये सही रहेगा?

बिरजू तो पल्ली को छोड़ने के ख्याल से hi लार टपकने लगा,

बिरजू- हाँ भैया..

में- तो मैं तेरी बहन छोड़ लूँ?

बिरजू ये सुन कर थोड़ा झिझका और बोलै- ुहँन हाँ भैया.

पल्ली- अचे से बोल न अगर मेरी चाहिए तो.

बिरजू- भैया तुम मेरी बहन लाडो को छोड़ो...

में- ये हुई न बात, लाडो तू छुड़ेगी मुझसे?

लाडो ने मेरा लुंड मुँह से निकला और कहा....



अपडेट 203


रात गहरी हो चुकी थी हर और सन्नाटा छाया हुआ था बहुत से लोग तो एक एक नींद पूरी भी कर चुके थे पर कुछ लोग थे जिनकी आँखों से नींद पूरी तरह गायब थी,

ऐसा hi हाल कुछ मेरा और चाचा के घर में जो थे उनका था, मेरी आँखें बंद तो हो रही थी पर नींद से नहीं बल्कि आनंद से जो की मुझे लाडो के मुँह से प्राप्त हो रहा था, वो अपने भाई के साथ का सारा अनुभव मेरे लुंड पर दिखा रही थी पर क्यूंकि मेरा लुंड बिरजू के लुंड से लम्बा और मोटा भी था इसलिए उसे तकलीफ हो रही थी पर उसका जोश और हवस उसकी तकलीफ को दबा रहे थे और उसके उत्साह को देखकर hi जान पद रहा था की वो किसी भी तरह से नीतू या रज्जो चची से काम नहीं थी, पहली बार में hi वो मेरे लुंड को गले तक लेने की पूरी कोशिश कर रही थी जिसमे मैंने भी उसकी मदद की और उसके बालों को पकड़ कर अपने लुंड से उसके मुँह को छोड़ते हुए अपना लुंड जड़ तक उसके मुँह में घुसा रहा था,





उसके गले से निकलती गहहू होऊ की आवाज़, आँखों से बहते आंसू और मुँह से टपकता थूक उसकी तकलीफ बयां कर रहे थे पर फिर भी उसका न रुकना उसकी उत्तेजना और हवस दिखा रहे थे,

वहीं बगल में बिरजू अपनी बहन की उत्तेजना देखते हुए गरम हो रहा था और अभी पल्ली की टीशर्ट को उतर कर उसकी संतरे जैसी चूचियों को चूस रहा था,

ऐसा नहीं था की नींद सिर्फ इस घर में hi गायब थी, एक और कमरे में दो लोग जाग रहे थे और उनकी आँखों से भी नींद कोसों दूर थी और वो कोई और नहीं बल्कि लाडो की मम्मी और बड़ा भाई सरजू थे,

रज्जो चची और सरजू दोनों hi उसके बचपन की यादें ताज़ा कर रहे थे और उन पलों को दोबारा जीने की कोशिश कर रहे थे, और इस प्रक्रिया में आगे बढ़ते हुए रज्जो चची ने एक और कदम लिए और अपने पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया, जिसके अहसास से hi सरजू सिहर गया उसे यकीन नहीं हुआ की उसकी मम्मी ने अपना पेटीकोट का नाडा खोल दिया है वो भी उसके ऊपर होते हुए,

रज्जो- लल्ला थोड़ा ऊपर उठ,

सरजू- उठ? हैं? हाँ हाँ.

ये कहते हुए सरजू अपना भर अपनी कोहनी पर लेते हुए अपनी मम्मी के बदन से ऊपर उठा तो चची ने हाथ नीचे लेजाकर पेटीकोट को कमर से नीचे सरका दिया और फिर टैंगो से नीचे सरकते हुए निकल दिया और फिर मुस्कुराते हुए सरजू को बोली- ऐसे सोती थी मैं लल्ला..

सरजू की तो ख़ुशी और हैरानी दोनों का hi ठिकाना नहीं था उसे यकीन नहीं हुआ की उसके नीचे उसकी मम्मी नंगी लेती हुई है और वो भी पूरा नंगा है, वो बस इस पल को समझने की कोशिश कर रहा था,

रज्जो- अब उठा hi रहेगा या लगेगा भी आराम से,

सरजू को एहसास हुआ की वो तबसे अपनी कोहनियो पर hi उठा हुआ है.

सरजू- हाँ हाँ मम्मी.

ये कहते हुए सरजू बापिस अपनी मम्मी के ऊपर धीरे से लेट गया और जैसे hi लेता दोनों hi माँ बेटे की सिसकी निकल गयी, सरजू की इसलिए क्यूंकि नीचे होते hi उसका नंगा लुंड अपनी मम्मी की गरम नंगी छूट से टकराया, रज्जो की भी इसलिए hi क्यूंकि सरजू के नीचे होते hi उसे अपनी छूट पर बेटे के खड़े कड़क लुंड के घिसने का एहसास हुआ, रज्जो की छूट इस एहसास से hi रास बहाने लगी, सरजू का लुंड अब्बी ऊपर की और मुद कर दोनों के बदन के बीच दबा हुआ था और ऊपर होने से उसका पूरा लुंड उसकी मम्मी की छूट को पूरी तरह से ढँक रहा था, उसे अपने लुंड पर मम्मी की छूट की गर्मी का एहसास हो रहा था और उसके गीलेपन का भी जो उसे पागल कर रहा था, वहीं रज्जो का भी बुरा हाल था उसे यकीन नहीं हो रहा था की वो अपने बेटे के नीचे पूरी नंगी लेती है उसका लुंड उसकी छूट से सत्ता हुआ है,

सरजू- ुहममम मम्मी अह्हम्मम्मम,

सरजू न चाहते हुए भी सिसकने लगा तो रज्जो ने भी खुद की सिसकियों पर ढील दी और सिसकते हुए बोली- ुहममम लल्लाहहहह ऐसे hi सुलाआहःती थी तुझे बचपन में अह्ह्ह्हम्म.

सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितना मज़ाआ आता होगा आह्ह्ह्हह्ह अभी भी आए रहा है,

बातें करते हुए सरजू की कमर खुद बा खुद हिलने लगी और वो अपने लुंड को अपनी मम्मी की छूट पर घिसने लगा,

ये एहसास रज्जो को हुआ तो वो भी खुद को रोक नहीं पाई उसकी छूट पानी छोड़ने लगी उसके बेटे का लुंड उसकी छूट पर ऊपर नीचे घिस रहा था, अब दोनों के मुँह से सिर्फ सिसकियों के अलावा और कुछ नहीं निकल रहा था, सरजू तो जैसे जन्नत में था अपनी मम्मी के साथ ये एहसास उनकी छूट पर अपने लुंड को घिसते हुए उसके मन में आया इससे ाचा कुछ नहीं हो सकता, की तभी उसके दिमाग में कुछ कौंधा, और वो सोचने लगा क्या कर रहा है सरजू इससे ाचा भी हो सकता है और ऐसा मौका फिर कभी मिलर न मिले,

वहीं नीचे रज्जो बेटे के लुंड की घिसावट महसूस कर हर धक्के पर सिसक रही थी,

इधर सरजू ने कुछ सोच लिए था, तभी रज्जो को सरजू का लुंड लगातार घिसते हुए hi अचानक एक पल को उसकी छूट से अलग होता हुआ महसूस हुआ तो उसे समझ नहीं आया ऐसा क्यों उसे कितना ाचा लग रहा था वो ये सोच आँखें खोल कर देखने hi वाली थी की उसकी आँखें किसी और वजह से खुल गयी उसे अपनी छूट में बेटे का लुंड घुसता महसूस हुआ और फिर तुरंत hi सरजू के लुंड का टोपा उसकी छूट में था,

रज्जो- हाय ढैय्या अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह

सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मम्मी अह्हह्ह्ह्ह ुहममम मम्मी.

सरजू तो अपनी मम्मी की छूट में लुंड घुसाने के एहसास से पागल हो गया और फिर उससे रुका नहीं गया तो उसने तुरंत ज़ोर लगाया और उसका पूरा लुंड उसकी मम्मी की छूट में समां गया, इस एहसास से hi दोनों माँ बेटे बिलबिलाने लगे, अब दोनों के पास hi इस एहसास के लिए शब्द नहीं थे, सरजू कमर हिला कर अपनी मम्मी की चुदाई करने लगा तो रज्जो ने भी अपने हाथों को बेटे की पीठ पर कास लिए और सरजू मम्मी की गर्दन को चूमते चाटते हुए लम्बे लम्बे धक्कों से छोड़ने लगा...





रज्जो- अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह माहहहह ओह्ह्ह्ह लल्लाहहहह,

रज्जो के मुँह से बस ये निकल रहा था, वहीं सरजू तो शायद hi कभी उतना उत्तेजित हुआ था जीवन में जितना अभी अपनी मम्मी की छूट मरते हुए था, और इसी उत्तेजना की वजह से hi कुछ hi पलों में उसका लुंड मम्मी की छूट में झड़ने लगा, रज्जो को भी बेटे के रास का एहसास अपनी छूट में हुआ तो वो भी खुद को झड़ने से नहीं रोक पाई दोनों hi झड़ने के बाद थोड़े शांत हुए, पर अभी भी वैसे hi थे, अब भी सरजू का लुंड उसकी मम्मी की छूट में समाया हुआ था और मम्मी को छोड़ने की उत्तेजना में झड़ने के बाद भी उसका लुंड अब भी कड़क था, इधर रज्जो शांत होकर सोचने लगी थी की अभी क्या हुआ है, उसने अपने बेटे के साथ जो किआ है वो सही है या गलत,

रज्जो- ुह्ह्हह्ह्ह्हम्म्म लल्ला ये सहिई नहीं किआ हमने...

रज्जो सरजू की आँखों में देखते हुए बोली..

सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मम्मी कुछ गलत नहीं है, इतना मज़ा आ रहा है,.

ये कहकर सरजू एक बार फिर से अपनी कमर हिलने लगा, वहीं रज्जो ने फिर से बेटे का लुंड छूट में हिलता हुआ महसूस हुआ तो उसे उसके सवालों का जवाब मिलने लगा इधर उसनर आगे बढ़ कर अपनी मम्मी की आँखों में देखते हुए उसके होंठो को चूसने लगा तो रज्जो भी बेटे का पूरी तरह साथ देने लगी,

इधर अनुज और नीतू जल्दी जल्दी अपने कपडे पहन रहे थे

नीतू- अरे यार बहुत देर हो गयी ाचा हुआ कर्मा भैया ने सब को संभाले रखा है.

अनुज- कुछ भी हो जीजी मज़ा बड़ा आया तुम्हारे साथ,

नीतू- ाचा वैसे मज़ा तो मुझे भी बहुत आया, काफी प्रैक्टिस की है तूने लगता है,

अनुज- अरे वो तो बस ऐसे hi,

नीतू- अरे अब बातों में मत लग चल जल्दी,

नीतू अपने कपडे ठीक करते हुए बोली और फिर दोनों hi निकल कर दुसरे कमरे की और चल दिए,

कमरे के दरवाज़े पर जाकर नीतू ने जैसे hi अंदर का दृश्य देखा तो उसकी आँखें फटी की फटी की रह गयी साथ hi अनुज भी बिलकुल हैरान रह गया,

अंदर बिस्तर के किनारे लाडो लेती हुई थी उसके बदन पर सिर्फ एक ब्रा थी जो की नीचे हो राखी थी और उसकी चूचियों पर मेरा हाथ चल रहा था वहीं मैं बिस्तर के बगल में खड़ा हुआ था और मेरा लुंड लाडो की छूट से अंदर हो रहा था





ये सब देखकर तो नीतू और अनुज दोनों hi जैसे थे वैसे hi जैम gaye...phir नीतू की नज़र बिस्तर के दूसरी और गयी तो देखा की पल्ली भी बिलकुल लाडो की तरह hi बिस्तर के किनारे पर लेती हुई है बिलकुल नंगी होकर और उसकी टैंगो के बीच किसी का सर है जो उसकी छूट चाट रहा है, नीतू और अनुज दोनों hi ये सोच हैरान थे की ये नया कौन है क्यूंकि सिर्फ तीन hi लोग होने चाहिए थे,

लाडो- ओह्ह्ह्ह भइयाझ आह्ह्ह्हह्ह ुहममम मम्मी अह्हह्ह्ह्ह कितना badaaaahhhhhhhhhhh लुंड है तुम्हारा हैआह्ह्ह्ह ऐसी हीईई छोडो मुझे आह्ह्ह्हह्ह..

लाडो से ये सुनकर सिर्फ अनुज और नीतू hi नहीं बल्कि मैं भी हैरान था क्यूंकि सबके सामने बिलकुल संस्कारी और अछि मासूम बनकर रहने वाली लाडो का असली रूप अब सामने आ रहा था और खुलेपन में वो नीतू और पल्ली को भी पीछे छोड़ रही थी,

में- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम अह्हह्ह्ह्ह तेरई चूऊत्त भी कितनी कासी हुई है लाडुआहहह, कितनी गरम है..

लाडो- अह्ह्ह्हह्हह भैया क्यूंकि तुम्हारा लुंड नहीं मूसल है अह्हह्ह्ह्ह कैसे मेरी छूट को कूट रहा है..

मैं कुछ बोलता इससे पहले hi नीतू की आवाज़ आई- ये क्या हो रहा है,

उसकी आवाज़ सुनकर लाडो और बिरजू का ध्यान जब अपनी बड़ी बहन पर गया तो दोनों hi चौंक गए और बिरजू ने तुरंत सर उठा कर देखा तो नीतू एक बार फिर हैरान रह गयी जब उसने अपने छोटे भाई बिरजू का चेहरा पल्ली की छूट से ऊपर उठाते देखा, बिरजू तो बिलकुल दर गया था वहीं लाडो भी दरी हुई थी पर मेरा लगातार छूट से अंदर बहार होता लुंड उसे पूरी तरह उसके दर पर ध्यान नहीं लगाने दे रहा था,

नीतू- कोई बताएगा ये सब क्या हो रहा है, कर्मा भैया लाडो रुको अभी,

नीतू ने थोड़ा गुस्सा दिखते हुए कहा,

मैंने लाडो की छूट में धक्के हलके किये और रुक गया और फिर लुंड को लाडो की छूट से निकल लिए, और नीतू को अपने पास बुलाया वो सबकी और देखते हुए मेरे पास आई और उसके पीछे अनुज भी अब सबकी नज़र नीतू पर hi थी और मुझ पर भी जब नीतू मेरे पास आ गयी, उसकी नज़र कभी अपनी बहन की नंगी छूट पर तो कभी मेरे उसके रास में साणे हुए लुंड पर जाती तो कभी सबके चेहरे पर, कमरे में सबसे ज़्यादा बिरजू और लाडो डरे हुए थे अपनी बड़ी बहन के द्वारा पकडे जाने पर,

नीतू जब मेरे पास ा गयी तो मैंने उसे पकड़ा और पकड़ कर लाडो के ऊपर झुका दिया तो सब हैरानी से देखने लगे की मैं ये क्या कर रहा हूँ,

नीतू- भैया ये क्या..

नीतू इतना बोल रही थी की मैंने उसे लाडो के ऊपर लगभग लिटा hi दिया जिससे दोनों बहनो का चेहरा एक दुसरे के सामने आ गया वहीं मैंने नीतू का पजामा पीछे से उसके चूतड़ों से नीचे खिसकाया और अगले hi पल अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया..

नीतू- अह्हह्ह्ह्ह भइयाझ

नीतू का मुँह खुला का खुला रह गया वहीं उसकी आँखें अपनी छोटी बहन की आँखों से मिली हुई थी, मैं तुरंत hi नीतू की कमर थम उसे छोड़ने लगा,

बिरजू ये देख हैरान था की अभी जहाँ एक बहन चुद रही थी अब उसकी बड़ी बहन भी चुद रही थी, लाडो को भी ये एहसास हो गया था की मैं नीतू को छोड़ रहा हूँ तो वो भी हैरान रह गयी और उत्तेजित भी हुई साथ hi अपनी बहन को चुड़ते हुए उसके चेहरे को देखने लगी, नीतू भी एक बार फिर से छुड़वा कर गरम होने लगी तो अनुज और पल्ली मुस्कुराते हुए यर सब देख रहे थे,

मैंने कुछ पल नीतू को छोड़ा फिर उसकी छूट से लुंड निकल लिए और बापिस लाडो की छूट में घुसा दिया तो लाडो सिसक पड़ी, नीतू ने जब अपनी बहन के चेहरे के भाव की बदलता देखा और खुला मुँह देखा तो खुद बा खुद उसके होंठ लाडो के होंठों से जुड़ गए और उसे चूमने लगी, लाडो भी छूट में लुंड पाकर और बड़ी बहन के होंठों को पाकर खुद को रोक न सकीय और उसका साथ देने लगी, वैसे भी किसी लड़की के साथ ये उसका पहली बार तो नहीं था पल्ली के साथ उसका काफी अनुभव था और एक बार फिर से वही एहसास पाकर वो गड गड हो गयी और इस बार ये उसकी बड़ी बहन के साथ हो रहा था

इधर बिरजू ने जब अपनी दोनों बहनो को चूमते हुए देखा तो उसका लुंड झटके मरते हुए पल्ली के पेट पर झड़ने लगा, पल्ली उसका रास पेट पर पाकर बस मुस्कुराई फिर उठकर साफ़ किया इधर अनुज अपना लुंड मुठियाते हुए बैठ गया खैर करीब 5 मिनट्स की और चुदाई के बाद लाडो झड़ने लगी तो मैं रुक गया और उसकी छूट से लुंड निकल लिए तो नीतू भी लाडो के ऊपर से हटी,

में- अब सब इधर बैठो, बिरजू पल्ली इधर आओ तुम भी इधर बैठो नीतू और लाडो के साथ.

बिरजू थोड़ा हिचकिचाता हुआ और अपनी बड़ी बहन को कनखियों से देखता हुआ आगे आकर बैठ गया.

में- तो तुम सब के मन में hi कुछ सवाल चल रहे होंगे... जिनका जवाब मैं देता हूँ...

इधर सरजू और उसकी मम्मी का प्यार हर बढ़ते पल के साथ बढ़ रहा था और सरजू अपनी बहनो की स्तिथि से बेखबर होकर अपनी मम्मी की टैंगो के बीच था और ताबड़तोड़ धक्कों से उन्हें छोड़ रहा था...





रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह ुहममम अह्हह्ह्ह्ह हाय ढैय्या रे अह्हह्ह्ह्ह लल्लाहहहह ऐसे होई छोड़ ले अपनी मम्मी की चूऊत्त आह्ह्ह्ह.

सरजू- ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मम्मी अह्हह्ह्ह्ह यकीन नहीं होता इसी छूट से मैं निकला थाहाहहहह आह्ह्ह्ह इतना मज़ाआ आ रहा है..

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह तो घुसजै बापिस इसी में बेटाझ अह्ह्ह्ह ये तो तेरे इंतज़ार में थी आह्ह्ह्ह लल्ला छोड़ अपनी माँ को अह्ह्ह..

सरजू- अह्हह्ह्ह्ह मम्मी ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह इतना मज़ाआ कभी नहीं आया...

रज्जो- ओह्ह्ह्हह्ह हाय रे लल्लाहहहह मादरचोद बनने का अलग hi माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हैईईईई, अह्हह्ह्ह्ह....

और इसी तरह की ताबड़तोड़ चुदाई करते हुए दोनों माँ बेटे एक दुसरे का जोश उत्तेजित करने वाली बातें करके बढ़ा रहे थे,

माँ बेटे दोनों के लिए hi आज की रात कभी न भूलने वाली बन चुकी थी... दोनों की hi उत्तेजना और बातें दोनों को hi उत्तेजना के चरम पर ले गयी और माँ बेटे एक साथ झड़ने लगे.

सरजू ने एक बार फिर से अपनी मम्मी की छूट में अपना रास भर दिया और फिर हांफता हुआ बगल में लेट गया, रज्जो को भी बेटे का रास छूट से बहकर बहार आता हुआ महसूस हुआ तो उसे कपडे से पौंछते हुए रज्जो बोली- हाय ढैय्या लल्ला, देख तो तूने ये तीसरी बार भरा है अपना रास आज की hi रात में.

सरजू ये सुनकर खुश होता हुआ बोलै- अरे मम्मी अब तो हमेशा hi भरता रहूँगा..

ये कहकर सरजू ने फिर से मम्मी को अपनी बाहों में भर लिए, वहीं रज्जो ये सोचने लगी की अब आगे उसका जीवन कैसा होने वाला है...

वहीं राजन चाचा के घर में भी माहौल काफी बदल चूका था, मैंने सबको साडी जानकारी दे दी थी जितनी उनमे लिए ज़रूरी थी, और शुरूआती हिचकिचाहट के बाद तीनो भाई बहन एक दुसरे के सामने थोड़ा खुल भी रहे थे, और उन्हें खोलने की पूरी कोशिश मैं अनुज और पल्ली कर रहे थे,

अभी कमरे में सब नंगे hi थे और लाडो बिस्तर पर घोड़ी बानी हुई थी उसके पीछे मैं था और मेरा लुंड उसकी छूट में था वहीं अनुज और नीतू 69 के आसान में थे पर लाडो के चेहरे के ठीक सामने तो अनुज नीतू की छूट चाट रहा था वहीं लाडो और नीतू मिलकर अनुज का लुंड चूस रहे थे, वहीं बिस्तर के बगल में पल्ली बैठकर बिरजू का लुंड चूस रही थी जो की लुंड चुसवाते हुए अपनी बहनो को देख रहा था...





में- अह्ह्ह्ह लाडो ओह्ह्ह्हह्ह क्या कासी हुई छूट है टेरिइइइ..

जिसके जवाब में लाडो ने कुछ नहीं बोलै कैसे बोलती मुँह में अनुज की गोलियां जो थी, फिर मैंने देखा की मेरे और बिरजू के अलावा बाकि सब hi बोलने में अभी असमर्थ थे,

हालाँकि बिरजू ने मेरी बात सुनी और मुझे देखकर मुस्कुराते हुए बोलै- जनता हूँ भैयाहः बहुत कासी हुई और गरम भी है मेरी बहन की छूट...

उसे भी ये बोलकर एक अलग उत्तेजना हुई तो मुझे भी ाचा लगा की वो खुल रहा है, मैंने लाडो को और तेज़ छोड़ना शुरू कर दिया..

लाडो और नीतू को देखकर लग hi नहीं रहा था की उन्हें खोलने की भी कोई ज़रूरत है... दोनों hi मगन होकर अनुज का लुंड चूस रही थी और मैं लाडो की छूट का मज़ा ले रहा था... मुझे एक बहुत hi ाचा और अजीब अहसास हो रहा था की मैंने सरजू के घर की साडी छूटों को छोड़ लिए था....

हालाँकि अभी तक तक मैंने लाडो और बिरजू को चची के बारे में नहीं बताया था क्यूंकि नीतू ने इशारे से hi मन कर दिया था पर मैं जनता था वो राज भी कितने दिन छुप पायेगा...

में- ओह्ह्ह्हह्ह बिरजू अह्ह्ह्ह बड़ा नसीबवाला है तू अह्हह्ह्ह्ह छुप छुप कर इस छूट के मज़े लेता रहा...

हम सब की रात इसी तरह बीती काफी कुछ हुआ जो की पहली बार हुआ था जैसे की नीतू ने अपनी मम्मी की बराबरी करते हुए हम दोनों भाइयों से अपनी दोहरी चुदाई करवाई, तो बिरजू को पल्ली ने अपनी गांड मरने का सुख दिया वहीं लाडो ने पुराणी यादें ताज़ा करते हुए पल्ली की छूट छाती..





अनुज नीतू की गांड मार्के बहुत खुश था वहीं बिरजू भी अपनी बड़ी बहन को चुड़ते देख गरम हो रहा था,

उसके बाद अनुज ने भी लाडो की छूट का स्वाद उसे अपने लुंड बिठाकर लिए तो मैंने पल्ली को घोड़ी बनाकर छोड़ा वहीं पहली बार नीतू ने भी अपने छोटे भाई के लुंड का स्वाद लेते हुए उसके लुंड को चूस रही थी





जल्दी hi नीतू ने अपने भाई का लुंड छूट में भी लिए वहीं लाडो ने अपनी बड़ी बहन को भाई से छुड़वाते देख मुझे चौंकाते हुए मेरा लुंड अपनी गांड में लेकर मुझसे गांड मरवाई





इसके बाद तो जैसे गांड मरने और मरवाने का दौर hi चल पड़ा और जल्दी hi हम तीनो लड़को के लुंड तीनो लड़कियों की गांड में थे..

मेरा लुंड नीतू की गांड में था तो वहीं मेरे एक और अनुज लाडो की गांड मार रहा था तो दूसरी और बिरजू पल्ली की...





गांड मरै का दौर तब तक चला जब तक तीनो लुंड तीनो गांड से अच्छे से परिचित न हो गए,

खैर इतना सब होते होते सुबह होने को आई थी तब जाकर हम सब थक कर सोये, वो तो ाचा था की इनमे से किसी का स्कूल नहीं था..


जारी रहेगी
 
गांड मरै का दौर तब तक चला जब तक तीनो लुंड तीनो गांड से अच्छे से परिचित न हो गए,

खैर इतना सब होते होते सुबह होने को आई थी तब जाकर हम सब थक कर सोये, वो तो ाचा था की इनमे से किसी का स्कूल नहीं था..



अपडेट 204
अगली सुबह का सूरज चढ़ चूका था और सब देर से hi सही उठ चुके थे, मैं अनुज और पल्ली घर आये और नीतू लाडो बिरजू भी अपने घर चले गए घर पहुंचे तो तब तक चाय वगेरा तैयार थी हम चाय पीने बैठे तो मौसी रात के बारे में पूछने लगी तो अनुज ने सब कुछ बता दिया,

चची- हाय ढैय्या, लाडो और बिरजू भी?

पल्ली- हाँ मम्मी काफी समय से,

माँ- देखो तो लाडो कितनी मासूम सी लगती है, लगता hi नहीं उसे देखकर की ऐसी खुली हुई होगी.

में- पहली रात hi गांड मरवा ली और कितनी खुली होगी...

चाचा- अरे यार इन दोनों बहनो की हमें भी दिलाओ, और रज्जो भाभी की भी.

पल्ली- अरे सबर करो पापा मिल जाएगी.

मौसा- वैसे रज्जो भाभी है बड़ी गदराई हुई, और नीतू भी काम नहीं है... बिलकुल माँ पर गयी है.

पापा- हाँ ये तो है, नीतू का बदन बिलकुल उसकी माँ पर गया है...

चाचा- अरे भैया तुमने तो दोनों का hi मज़ा लूट लिए है हमें जलन हो रही है,

पल्ली- ाचा पापा मुझसे भी अछि लगती हैं क्या वो दोनों तुम्हे,

चाचा- अरे अरे नहीं बिटिया तुझसे ाचा कोई नहीं है दुनिया में.

ऐसे बातें चल रही थी तो घर का फ़ोन बजा और माँ ने उठा,

माँ- हाँ, Namaste...kaisi हो..

ये कहते हुए माँ कमरे में चली गयी बातें करने हम सब बातों में लगे थे, थोड़ी देर बाद माँ बहार आई तो थोड़ी चिंतित थी,

पापा- क्या हुआ कुछ बात है का?

माँ- अरे वो गुंजन का फ़ोन था, गाओं से.

अनुज- मामी का, तो परेशां क्यों हो माँ,

माँ- अरे वो कह रही थी की गाओं की नहर में पानी बढ़ गया है, पूरे खेत डूब गए हैं घरों तक पानी आने लगा है.

मौसी- हाय ढैय्या ये का हो गया,

माँ- हमें तो बड़ी चिंता हो रही है और ये गुंजन भी अब बता रही है,

मौसा- वो नहर उफान पर तो रहती है इस समय पर.

चाचा- हाँ सर्कार कछु करती hi नहीं, बताओ साडी फसल बर्बाद हो गयी..

माँ- फसल तो छोडो रहने की भी दुविधा हो गयी है. जानवर वगेरा कहाँ रहेंगे ऐसे में.

पापा- अरे तो परेशां क्यों होती हो, उन्हें फ़ोन करो की तैयार हो जाएं हम उन्हें लेने आ रहे हैं.

मौसी- हाँ ये सही रहेगा. यहाँ रह लेंगे कुछ दिन.

Mausa-aur क्या जब वहां ठीक हो जाये तो बापिस चले जायेंगे..

में- पर जानवर उन्हें छोड़ कर कैसे आएंगे.

पापा- हाँ ये सही कहा. उन्हें भी तो ऐसे नहीं छोड़ सकते.

में- माँ मां पर कितनी भैंसे हैं?

मौसी- दो भैंस हैं, एक बछिया..

में- एक काम करते हैं पापा एक ट्रक में इन्हे भी भरवा लेट हैं..

पापा- अरे हाँ ये तो सबसे बढ़िया हो जायेगा,

मौसी- अरे जीजी पर बाउजी मानेंगे? आने के लिए,

चाचा- क्यों नहीं मानेंगे?

माँ- अरे वो थोड़े वो करते हैं गाओं छोड़ कर जाना नहीं चाहते,

अनुज- अरे मान जायेंगे नाना, मैं बोलूंगा उनसे, उनकी और मेरी खूब बनती है.

माँ- मैं जमुना को फ़ोन कर देती हूँ और उसे तयारी करने को कह देती हूँ.

मौसी- तब तक मैं गुंजन से बात करती हूँ.

माँ और मौसी ने बात की और बोली- बात हो गयी है ले आओ उन्हें...

अनुज- अरे यार पर अगर वो सब लोग हमारे साथ रहेंगे तो हमारी चुदाई बंद हो जाएगी,

अनुज ने मुँह बनाते हुए कहा

पापा- तो क्या हुआ, अभी उनका रहना ज़रूरी है.

पापा ने सख्त होते हुए कहा..

चाचा- और बंद नहीं होगी बस उनके सामने नहीं करना, बाकि अपना घर है hi न वहां कौन देख रहा है,

माँ- और क्या चची के यहाँ चले जाया करना,

अनुज- और तुम्हे छोड़ने का मन हुआ तो माँ?

माँ- तो मैं भी तेरे साथ वहीं चल लुंगी अब खुश?

अनुज- हाँ अब ठीक है.

पापा- अरे ये सब छोडो ये बताओ कब निकलना है.

मौसी- एक डेढ़ घंटे में निकल जाओ तो समय से पहुँच भी जाओगे और बापिस भी आ जाओगे.

माँ- हाँ तब तक वो भी तैयार हो जायेंगे, वैसे मैंने बोल्दिया है बस ज़रुरत का सामान ले आएं बाकि सब यहाँ हो जायेगा...

पापा- ठीक है शैलेश बाबू तैयार हो जाओ निकलते हैं.

मौसा- हाँ भैया.

पापा- कर्मा, बीटा जानवरों को चारा डालना है,

में- अभी जाता हूँ पापा, और वो नक्सा बनाने वाला भी आने वाला है तो उसे भी जगह दिखा दूंगा,

मौसा- हाँ और क्या उसका काम भी शुरू करवाते हैं,

मैं बाघ की और निकल गया अपना काम करने के लिए जब तक काम ख़तम हुआ तब तक नक्सा बनाने वाला भी आ गया उसे जगह दिखाई और वो अपना नाप वगेरा लेकर चला गया, उसके बाद मैं घर आया मौसी ने दरवाज़ा खोला तब तक पापा और मौसा जा चुके थे,

में- माँ और अनुज कहाँ हैं मौसी?

मौसी ने रसोई में घुसते हुए कमरे की और इशारा किआ, मैंने अंदर जाकर देखा तो पाया की अनुज और माँ दोनों hi नंगे थे और अनुज माँ को नीचे लिटा कर छोड़ रहा था,





माँ अपनी छूट को मसलते हुए सिसक रही थी- अह्हह्ह्ह्ह लल्लाह..

इतने में मैं कमरे में पहुँच गया तो माँ की नज़र मुझ पर पड़ी

माँ- अह्हह्ह्ह्ह गया लल्लाहहहह.

में- हाँ , और क्यों बे तेरा रात भर से मन नहीं भरा,

माँ- अरे देख इसे तबसे यही बोलकर चोदे जा रहा है की मां वगेरा के आने पर फिर पता नहीं कब मौका मिलेगा...

में- वैसे बात तो सही कह रहा है ये माँ..

मैंने आगे आकर अपना पजामा नीचे खिसकते हुए अपना लुंड माँ के चेहरे पर घिसते हुए कहा..

माँ- तुम दोनों भी न एक जैसे हो.

ये कहकर माँ ने मेरा लुंड मुँह में भर लिए और चूसने लगी, वहीं अनुज मेरी तरफ देख कर मुस्कुराया और बोलै- देखा माँ मैंने कहा था न,

इधर मौसी ने रसोई साफ़ कर दी थी और काम निपटा कर अपनी सारे से अपना चेहरा पौंछते हुए कमरे में आई और सामने का दृश्य देखकर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

मौसी- अरे वाह यहाँ तो माँ बेटों का प्यार उमड़ रहा है,

मौसी ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा जहाँ बिस्तर के बीच में हम दोनों भाई मिलकर माँ की दोहरी चुदाई कर रहे थे, अनुज का लुंड माँ की छूट में था और मेरा माँ की गांड में,





माँ हम दोनों के बीच में कराह रही थी,

माँ- अह्हह्ह्ह्ह शालुआठ देख इन दोनुवाआहहह को बाद में मौका नहीं मिलेगा ये बोल बोलकर चोदे जा रहे हैं,

मौसी- ओह्ह्ह्ह वैसे जीजी बात तो सही है..

ये कहते हुए मौसी भी अपने कपडे उतरने लगी..

माँ ने उन्हें देखा और मुस्कुराते हुए बोली - ले बच्चे तो बच्चे तू भी शुरू हो गयी,

में- शुरू क्या हो गयी माँ जो बात सही है वो सही है... बाद में मौका मिले कब मिले इससे अच्छे अभी मौका है,

माँ- हाँ भाई समझ गयी आ जा शालू तू भी.

मौसी- अरे बच्चों सिर्फ माँ पर hi प्यार लुटाओगे सारा या मौसी के लिए भी है.

में- है न मौसी इधर आओ..

ये कह मैंने माँ की गांड से लुंड निकला और मौसी के मुँह में घुसा दिया जिसे मौसी चूसने लगी कुछ पल लुंड चुसवा कर मैंने मौसी का मुँह माँ की गांड पर लगा दिया, और मौसी भी तुरंत अपनी बहन की गांड में जीभ घुसकर चाटने लगी, इधर मैंने मौसी के पीछे आया और मैं उनकी रसीली गांड में मुँह घुसा कर चाटने लगा,

थोड़ी देर चाटने के बाद मैंने उनकी गांड से मुँह हटाया तो मौसी ने भी माँ की गांड से अपनी जीभ निकली,

माँ- आ शालू मुझे भी तेरी छूट चटनी है.

में- अरे तुम दोनों एक दुसरे के ऊपर लेट जाओ न 69 में और एक दुसरे की छूट छतो, हम दोनों गांड मरेंगे.

मौसी- हाँ ये सही रहेगा, आ जाओ जीजी.

जल्दी hi दोनों एक दुसरे के ऊपर थी माँ नीचे थी मौसी ऊपर अनुज ने माँ के पैरों के बीच आकर मौसी से पहले लुंड गीला करवाया फिर माँ की गांड में घुसा दिया ऐसे hi मैंने माँ से लुंड चुसवाया और फिर मौसी की गांड में घुसा दिया.. हम दोनों भाई दोनों बहनो की गांड मरने लगे वहीं दोनों बहनें एक दुसरे की छूट चाटने लगी,





बीच बीच में मैं मौसी की गांड से लुंड निकलता और माँ के मुँह में घुसा देता जिस पर से माँ अपनी बहन की गांड का रास मेरे लुंड से साफ़ करती और बापिस मौसी की गांड में मेरा लुंड घुसा देती , दूसरी और अनुज भी यही कर रहा था,

जल्दी hi हम दोनों तगड़े धक्कों से माँ और मौसी की गांड मरने लगे और वो दोनों भी पूरे जोश में एक दुसरे की छूट चाट रही थी, जल्दी hi दोहरे हमले का असर माँ और मौसी पर हुआ और वो दोनों झड़ने लगी, दोनों hi एक दुसरे की छूट का रास चाट गयी इधर मेरी और अनुज की गति जारी थी और लगातार माँ और मौसी की गांड मार रहे थे.

कुछ देर बाद माँ ने हम दोनों को रुकने को बोलै तो हम दोनों रुक गए...

में- क्या हुआ माँ..

माँ- अरे तुम दोनों कुछ और तरीके से झड़वाएंगे.

अनुज- माँ मज़ा आ रहा था गांड मरने में hi.

माँ- इसमें भी आएगा ला तुझे hi पहले निपटाते हैं.

मौसी- करना क्या है जीजी

माँ- अनुज तू खड़ा हो जा और शालू तू बैठ कर अनुज का लुंड चूस..

अनुज और मौसी ने वैसा hi किआ तभी माँ अनुज के पीछे गयी और उसके चूतड़ों को फैलाकर उसकी गांड पर अपनी जीभ फिरने लगी और अनुज सिहरने लगा,

अनुज- ओह्ह्ह्हह्ह माहहहह अह्हह्ह्ह्ह

मैं खड़ा होकर देख रहा था की मुझे एक मौका दिखा और मैं माँ के पीछे जाकर बैठ गया और अपना लुंड पीछे से उनकी गांड में घुसा दिया और वो झुककर अनुज की गांड चाटती रही.

अनुज- लगातार सिसक रहा था ओह्ह्ह माँ ओह्ह्ह मौसी आह्ह्ह्हह्ह बहुत ाचा लग रहा है..

इधर माँ ने उसकी गांड से अपना मुँह हटाया और फिर कुछ ऐसा किआ जिससे अनुज की चीख निकल गयी,

अनुज- maaaaaaahhhhhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह माहहह.

माँ ने अपनी एक उंगली अनुज की गांड में घुसा दी जिसे महसूस कर अनुज सिहर उठा और बिलबिलाने लगा, उसका लुंड मौसी के मुँह में झटके खाने लगा,

माँ ने उंगली बहार खींची और फिर दोबारा से गांड में घुसा दी बस इतना काफी था और अनुज मौसी के मुँह में झड़ने लगा और मौसी उसका रास गटकने लगी,

जल्दी hi अनुज नीचे बैठा हांफ रहा था,

अनुज- ओह्ह्ह माँ ऐसा तो कभी नहीं किआ...

मौसी- मज़ा आया...

अनुज- हाँ भैयाहः के साथ भी करो.

में- नहीं माँ मुझे गांड नहीं मारवणी.

माँ- आ चुपचाप खड़ा हो जा...

मैंने माँ की गांड से लुंड निकला और उनके कहे अनुसार खड़ा हो गया.. और माँ और मौसी ने बिलकुल वही जो अनुज के साथ किआ था वही मुझ पर किआ और नतीजा वही हुआ, मेरा रास मौसी के मुँह में था.

माँ- चलो अब हो गया अब नहालो सब

में- हाँ पसीना पसीना हो गए हैं.

मौसी- सब साथ में नहाते हैं.

माँ- रहने दे इन दोनों के लुंड फिर तब गए तो फिर गए काम से.

अनुज- नहीं माँ अब चुदाई नहीं करूँगा मैं तो नहाकर सोऊंगा थोड़ा.

में- मैं भी रात में काम सोया हूँ.

माँ- चलो फिर ठीक है,

खैर हम चारो लोग बाथरूम में घुस गए, घुस कर अपने कपडे धोने वाली बाल्टी में दाल दिए और अनुज दूसरी बाल्टी में पानी भरने लगा, इधर मुझे कुछ सूझा तो मैं माँ और मौसी की और घूमा और अपने अपने लुंड का निशाना उनकी और कर उन पर मूतने लगा,

माँ और मौसी भी मेरे मूट से भीगते हुए खिल खिलने लगी इधर मुझे देख अनुज भी शुरू हो गया और वो भी माँ और मौसी पर मूतने लगा, माँ और मौसी हम दोनों का मूट अपने बदन पर साथ hi एक दुसरे के बदन पर रगड़ने लगी, खैर हमारा मूतना बंद हुआ तो माँ ने कहा अब वो अनुज के मुँह में म्यूटेंगी जिसके लिए अनुज तुरंत लेट गया और माँ उसके मुँह पर बैठी और मूतने लगी तो अनुज भी माँ का जितना हो सकता था मूट जातक गया, माँ का मूतना ख़तम हुआ तो मौसी ने माँ को नीचे लिटाया और खुद अपनी छूट उनके मुँह पर रख, अपनी बड़ी बहन के मुँह में मूतने लगी .माँ भी मौसी का मूट गटकने लगी मौसी का मूट माँ का पूरा चेहरा भीगा रहा था और हम दोनों माँ को मूट में भीगते हुए देख रहे थे, खैर मौसी का मूतना बंद हुआ तो वो माँ के ऊपर से उठी, और माँ भी नीचे से उठी पर उठने के बाद माँ ने एक अलग सा काम किआ और वो था की माँ ने अपना मुँह अनुज के होंठों से लगाया और मौसी का मूट जो अपने मुँह में भर रखा था उसे उढेल दिया और अनुज के बाद मेरे साथ और फिर मौसी के साथ भी यही किआ, खैर इसके बाद हम सब रगड़ रगड़ कर नहाये और मैं और अनुज तो पद कर सो गए,

नीतू लाडो और बिरजू जब से घर आये थे थोड़ी सोच में थे, वैसे यही हाल सरजू और रज्जो चची का था जो की न जाने क्यों सबसे नज़रें बचते फिर रहे थे, वहीं माँ बेटे आपस में आँखों hi आँखों में खूब इशारे कर रहे थे, रज्जो को तो लग रहा था की वो फिर से जवान हो गयी है और उसका चक्कर चल रहा है,

इधर दीं दयाल इन सब से बेखबर होकर काम काज में लगे थे, खैर थोड़ा समय बीता और सब नाहा धो लिए तो अपनी माँ को अकेला पाकर नीतू ने उससे बात की

नीतू- मम्मी क्या बात है बड़ी चहक रही हो..

रज्जो इस पर थोड़ा सकपका गयी और खुद को सँभालते हुए बोली - ंन्न नहीं तो क्यों क्यों. ऐसा क्यों लगा तुझे,

नीतू- चहक रही हो इसीलिए लगा मम्मी. तभी पूछा क्या बात है...

रज्जो - नहीं बस ऐसे hi कोई बात नहीं है.

नीतू- ाचा सुनो मुझे तुमसे कुछ बात करनी है..

नीतू ने कमरे का दरवाज़ा बंद करते हुए कहा..

रज्जो इससे थोड़ा घबरा गयी, उसे लगा कहीं उसके और सरजू के बारे में पता तो नहीं लग गया..

रज्जो- क्या बात है और ये कुण्डी क्यों लगा रही है तू.

नीतू- बात hi कुछ ऐसी है मम्मी.

रज्जो का दिल धड़कने लगा,

नीतू ने उसे पकड़ कर सामने बैठाया और बोली- मम्मी शांति से आराम से सुन्ना ठीक है..

रज्जो- ढैय्या तो तू डरा रही है अब.

नीतू- डरा नहीं रही ाचा वो सब छोडो अब सुनो,

रज्जो - हाँ बता..

नीतू- रात मैंने वो.

इतना कहकर नीतू चुप हो गयी,

रज्जो- अरे बता न चुप क्यों हो गयी.

नीतू ने गहरी सांस ली और फिर बोली- रात मैंने बिरजू और लाडो के साथ चुदाई की, कर्मा भैया अनुज और पल्ली भी के साथ मिलकर.

नीतू एक सांस में सब बोल गयी और रज्जो की आँखें खुली की खुली रह गयी,

नीतू- अरे मम्मी बात बहुत बड़ी है मैं अचे से तुम्हे समझती हूँ, तुम गुस्सा बिना हुए सुन्ना...

रज्जो बस आँखें फाड़े नीतू को देखे जा रही थी, और नीतू उसे बताती जा रही थी, और जब तक नीतू ने पूरी बात बताई रज्जो का गुस्सा तो शांत हो गया था पर उसकी गरमी बढ़ गयी थी, उसने जल्दी से अपनी साड़ी ऊपर उठाई और नीतू का सर पकड़ कर अपनी छूट में घुसा दिया, नीतू ने भी अपनी मम्मी को खुश करने के लिए अपनी जीभ मम्मी जी की छूट में घुसा दी और पूरी लगन से तब तक छाती जब तक छूट ने उसके मुँह में पानी नहीं छोड़ दिया...

तब जाकर नीतू ने अपना मुँह उठाया तो रज्जो ने नीतू का चेहरा अपने रास से सना हुआ पाया तो वो बेटी को बिना चूमे नहीं रह पाई... खैर कुछ पल सन्नाटा रहा

नीतू- क्या हुआ मम्मी तुम गुस्सा हो क्या.

रज्जो- अरे गुस्सा होती तो तुझसे छूट चतवती, ाचा ये बता तूने मेरे या हमारे बारे में उन्दोनो को कुछ बताया?

नीतू- नहीं मम्मी उससे पहले मैं तुमसे बात करना चाहती थी...

रज्जो- बिलकुल सही किआ ाचा सुन मुझे भी तुझे कुछ बताना है..

नीतू- हाँ बोलो न मम्मी.

फिर रज्जो ने उसे अपने और सरजू के बारे में बताया और अब चौंकाने की बारी नीतू की थी,

रज्जो ने पूरी रात की कहानी नीतू को बताई और जब तक बार ख़तम होती तब तक नीतू की छूट पानी बहाने लगी थी, उसने पजामा नीचे खिसका दिया और रज्जो ने झुककर बेटी की छूट को मुँह में भर लिए..

कुछ देर बाद दोनों माँ बेटी एक दुसरे की बाहों में हांफ रही थी.

नीतू- ओह्ह्ह मम्मी तुम और सरजू सोच के hi मज़ा आ रहा है,

रज्जो- सही में मुझे लगा था तू जाने क्या सोचेगी कैसी माँ हूँ मैं जो अपने hi बेटे से चुद गयी.

नीतू- ऐसी माँ हो की हर बीटा तुम्हारे जैसी माँ चलेगा, मैं भी अपने बेटे से ज़रूर छुडवाउंगी.

रज्जो- हाय इतना आगे का सोच लिए तूने.

नीतू- और क्या,

रज्जो- ाचा अब ये बता आगे क्या करना है घर का..

नीतू- तुम बताओ, तुम क्या चाहती हो एक बेटे का लुंड तो चख लिए है दुसरे बेटे का भी स्वाद लोगी?

नीतू ने चहकते हुए पूछा...

रज्जो- नहीं .... सिर्फ बेटे का hi नहीं मुझे तो दूसरी बेटी की छूट का भी स्वाद लेना है..

नीतू- अरे वाह ये हुई ना बात मम्मी... अरे सही बताऊँ लाडो तो न हम दोनों से भी आगे है इस मामले में.

रज्जो- ाचा ऐसा कैसे.

लाडो- खुद hi सोचो पल्ली से पहले से उसका चल रहा था और तो और बिरजू से भी पिछले साल से चुद रही है और रात भी पहली बार में hi कर्मा भैया से गांड मरवाने में लगी थी.

रज्जो- हाँ सबसे छोटी है और सबसे तेज़ भी. ाचा तू बता अपने दुसरे भाई का भी स्वाद चखना चाहेगी..

नीतू- नहीं..... सिर्फ भाई का नहीं..

रज्जो- फिर और किसका..

नीतू- पापा का,

ये कहकर नीतू अपनी मम्मी को देखने लगी वहीं रज्जो ने अपनी बेटी को देखा और कहा सही में?

नीतू- हाँ मम्मी जब हम सब कर सकते हैं तो पापा क्यों नहीं.

रज्जो ने आगे बढ़ कर फिर से नीतू के होंठों को चूस लिए और बोली- हाय लल्ली तूने तो मेरी साडी परेशानी हर ली... पता है मुझे बस इनकी hi चिंता थी की इनके साथ हम गलत कर रहे हैं पर अगर ये भी इन सब में शामिल हो जाएं तो मज़े hi मज़े हैं.

नीतू- बिलकुल होंगे मम्मी बस जैसा मैं कहूं वैसे करते जाना तुम.

रज्जो- ठीक है,

नीतू- और लाडो और बिरजू का क्या करें उन्हें बताना है.

रज्जो- नहीं बता मत धीरे धीरे करके मज़े लेते हुए खोलेंगे सब को...

दोनों माँ बेटी फिर से सहेलियों की तरह हंसने लगी..

मैं तब उठा जब मौसी ने उठाया की उठ जा पापा पहुँचने वाले हैं. मैं उठा और जल्दी से मौसी के प्यारे से होंठों को चूमा और फिर हाथ मुँह धोकर निकल गया, बाघ में पहुंचा तो पीछे पीछे अनुज भी पहुंच गया था कुछ hi देर में गाडी और पीछे ट्रक आ गया तो गाडी तो पापा सीधे घर ले गए और ट्रक हमने बाघ में रुकवाया और फिर सभी जानवरो को अचे से उतरा उन्हें अपनी भैंसों के साथ बांध दिया उनके लिए चारा पानी किआ तब जाकर हम दोनों घर की और निकल गए...

घर जाकर आंगन में देखा तो सब लोग बैठे हुए थे मैंने और अनुज ने नाना के पेअर छुए और मां को नमस्ते किया..

में- अरे ममी कहाँ हैं.

मां- आ रही है तेरी मामी रसोई में हैं...

me-are आते hi बेचारी को रसोई में घुसा दिया माँ.

मौसी- देखो तो कैसे अपनी मामी की चिंता हो रही है.

मां- होगी नहीं जीजी जब हमारी शादी हुई थी तो यही बोलता था ये हमारी बहु है...

माँ- हाँ कितना रोटा था अपनी बहु के साथ सोने के लिए.

इस पर सब हंसने लगे...

(आपको नाना और उनके परिवार से मिलवा देता हूँ

नानाजी- बलराज सिंह - गाओं के तहत किसान जिनका सारा जीवन सिर्फ खेती में बीता है, इतनी उम्र होने के बाद भी शरीर बिलकुल तंदरुस्त है, सिर्फ बाल hi सफ़ेद हुए हैं. काफी सादा इंसान हैं और बाकि आपको धीरे धीरे पता चल जायेगा.. पत्नी को गुजरे हुए काफी समय हो चूका है तो कभी कभी अकेला महसूस करते हैं.

मां- जमुना सिंह- मम्मी और मौसी दोनों से hi छोटे हैं, ज़्यादा पढ़े लिखे नहीं हैं इन्होने भी बस खेती में hi ध्यान दिया हमेशा से, हंसमुख हैं, हर बात में ख़ुशी ढूंढ लेते हैं.

मामी- गुंजन- ये भी मां की तरह hi बेहद हंसमुख, हमेशा खुश रहने वाली हैं, बदन बिलकुल गदराया हुआ है साथ hi रंग भी खिला हुआ है, ये माँ की कॉपी लगती हैं बदन के हिसाब से वैसी hi चूचियां और वैसी hi गांड..

सागर- मां का लड़का, अनुज की उम्र का है, थोड़ा चुप रहता है, अपनी hi दुनिया में मगन रहता है, सुना है कुछ गलत सांगत में पद गया है तो उसका भी असर है.

किरण- सागर से एक साल छोटी है, बहुत hi सुन्दर है, बिलकुल अपनी माँ का रंग और वैसा hi बदन, चुलबुली सी लड़की है, हंसमुख है और थोड़ी बातूनी भी. बदन के मामले में पल्लू, लाडो नीतू किसी से भी काम नहीं है,)

इतना हुआ था की अचानक से किरण मेरे सीने से आकर लग गयी और बोली- ओह्हो भैया मेरे बारे में तो पूछा hi नहीं तुमने.

मैं उसे देख कर खुश हुआ और उसे गले लगते हुए बोलै- अरे तू दिखी hi नहीं कहीं, पूछने hi वाला था मैं.

मैंने उसके बालों को प्यार से सहलाते हुए कहा, मुझे उसकी संतरे के अकार की चूचियां सीने में चुभती हुई महसूस हो रही थी..

इतने में मामी हाथ में चाय लेकर रसोई से आई.. और किरण मुझसे अलग होकर बैठ गयी...

में- मामी नमस्ते.

मामी- नमस्ते बाबू... लो चाय पि लो.

मामी ने सबको चाय बनती और मुझे भी...

मौसी- पि लो बाबू अपनी दुल्हिन के हाथ की चाय..

मामी- अरे जीजी काहे की दुल्हिन, इन्हे कभी याद तो आती नहीं अपनी दुल्हिन की.

में- अरे मामी मैं तो याद करता था पर मां की सोच कर रुक जाता था.

मां- क्यों. भाई मेरी क्या सोच कर रुक जाता था.

में- यही की ममी मेरे साथ आ गयी तो तुम अकेले रह जाओगे..

इस पर सब हंसने लगा,

मामी- अरे बाबू मामा की छोडो दुल्हिन पर ध्यान दो.

में- अब से सारा ध्यान तुम पर hi दूंगा मामी.

इतने में पल्ली और चची भी आ गयी, किरण तो पल्ली को देखते hi उछाल पड़ी उन दोनों की जब भी मिलती थी खूब बनती थी, और यही हाल मामी और चची का था क्यूंकि दोनों hi खूब मज़ाकियाँ थी और एक दुसरे की खिंचाई करती रहती थी, इसलिए दोनों hi एक दुसरे की अछि सहेलियां थी..

मामी ने चची को देखा और बोली- लो अब आई हो अब तक क्या अपने...

इससे आगे कुछ बोलने वाली थी की पापा और नाना को देखकर चुप हो गयी.

इधर चची ने आगे बढ़ कर उन्हें गले से लगाया तो मामी धीरे से उनके काम में बोली- कौन सा खूंटा लेकर बैठी थी अब तक ननद रानी.

चची- तुम्हारे लिए तेल लगाकर तैयार कर रही थे खूंटे..

ऐसे hi दोनों अलग हुए पकोड़े के साथ बातों का दौर चला, हंसी मज़ाक में सबने एक दुसरे का हाल जाना साथ hi गाओं में जो बाद आई थी उसका भी, पर उस वजह से पापा ने पहले hi कह दिया था की कोई नीरस नहीं होगा, जो खेत हमें इतना कमा के देते हैं वही अगर कभी नुकसान दें तो क्या हुआ...


जारी रहेगी....
 
ऐसे hi दोनों अलग हुए पकोड़े के साथ बातों का दौर चला, हंसी मज़ाक में सबने एक दुसरे का हाल जाना साथ hi गाओं में जो बाद आई थी उसका भी, पर उस वजह से पापा ने पहले hi कह दिया था की कोई नीरस नहीं होगा, जो खेत हमें इतना कमा के देते हैं वही अगर कभी नुकसान दें तो क्या हुआ...

अपडेट 205


शाम तो बातों में यूँ hi बीत गयी, मैं अनुज और सागर सरे जानवरों को चारा खिला कर आ गए तब तक औरतों ने खाना बना लिए था सबने खाना खाया, घर भरा हुआ था सबको ाचा लग रहा था, रात को सोने की व्यवस्था कुछ ऐसी हुई की मुझे और अनुज को अपने कमरे से बहार निकलना पड़ा क्यूंकि नाना की व्यवस्था उसमे की थी, एक कमरे में माँ पापा, एक मौसी- मौसा का, एक मां ममी का और एक नाना का, किरण अपने मम्मी पापा के साथ सो रही थी, मैं अनुज और सागर भी नाना के कमरे में बिस्तर लगाकर सो रहे थे, नाना से उनकी जवानी के किस्से सुन रहे थे, नाना भी बड़े hi खुशमिज़ाज़ इंसान थे और हम तो उनके नाती थे तो खूब प्यार लुटाते थे, ऐसे hi बातें सुनते हुए हम सब सो गए,

वहीं सरजू अपने घर में बेसब्र होकर बिस्तर पर लेता था अपनी मम्मी को छोड़ने के इंतज़ार में पर आज उसके पापा घर पर थे तो आज की रात उसे सूनी hi गुजरती लग रही थी, वहीं दुसरे कमरे में नीतू ने बड़ी सावधानी से लाडो और बिरजू को अपने कमरे में घुसा लिए था और अभी बिरजू मस्त होकर अपनी दोनों मस्त बहनो का मज़ा लूट रहा था, इधर आज की रात दीनू चाचा भी जोश में थे और चची की चूचियों को मीनजह रहे थे वहीं चची भी आहें भर भर कर उनको और उत्तेजित कर रही थी, चाचा की पीठ पीछे मुझसे पापा से और फिर अपने hi बेटे से छोड़ने की ग्लानि के बदले वो अपने पति को अधिक से अधिक सुख देना चाहती थी, खैर इसी कोशिश में रज्जो चची ने पति को बिस्तर पर बैठाया और खुद उनकी टैंगो के बीच बैठ कर उनके लुंड को कुछ ऐसे चूस रही थी की चाचा को जन्नत का मज़ा मिल रहा था, लुंड को चूसने के साथ- साथ गोलियों पर भी खूब ध्यान दे रही थी, और आज दीनू चाचा भी अपनी पत्नी की उत्तेजना और जोश देख हैरान भी थे और खुश भी,

खैर जैसे hi चची को महसूस हुआ की और चूसने से चाचा झाड़ सकते हैं उन्होंने खुद को रोक लिए और फिर चाचा की आँखों में देखते हुए कामुकता से अपने कपडे उतरने लगी और जल्दी hi पूरी नंगी हो गयी,

दीनू चाचा ये देख थोड़े हैरान हुए क्यूंकि वैसे चची पूरे कपडे काम hi उतरती थी बस साड़ी या पेटीकोट उठा कर छुड़वा लेती थी पर आज खुद से ये सब कर रही थी तो चाचा भी कहाँ शिकायत कर रहे थे, वो तो बस सिसकियाँ ले रहे थे, नंगी होकर चची आगे आई और चाचा के सामने आकर घूम गयी और घूम कर आगे को झुक गयी जिससे उनकी बड़ी सी गांड चाचा के चेहरे के सामने आ गयी चची ने हाथ पीछे किये और अपने चूतड़ों को फैलाकर अपनी गांड और छूट को पति के सामने कर दिया,





चाचा अपनी बीवी की गांड का छेड़ और फूली हुई छूट देख कर होंठों पर जीभ फिरने लगे,

रज्जो- ुहममम देखते hi रहोगे नीतू के पापा?

चाचा ये सुन जैसे होश में आये और अपना मुँह दोनों चूतड़ों के बीच घुसा दिया, और जीभ निकल कर चाटने लगे,

रज्जो की भी अह्हह्ह्ह्ह निकल गयी पति की जीभ महसूस कर, कुछ देर गांड और छूट चटवाने के बाद रज्जो बोली- अह्ह्ह्हह्हह मेरे राजा अब छोड़ भी दो आह्ह्ह्हह्ह कितना चाटोगे अह्हह्ह्ह्ह घुसा दो अपना मुसल...

अपनी बीवी से ऐसी बातें सुनकर तो दीनू चाचा का जोश कई गुना बढ़ गया और तुरंत खड़े होकर उन्होंने अपना लुंड पकड़ कर चची की छूट से लगाया तो दोनों hi सिसके पर तभी रज्जो चची ने उनका लुंड पकड़ लिए और फिर खिसका कर अपनी गांड पर टिका दिया...

रज्जो- आह्ह्ह्हह्ह राजा आज गांड की खुजली मिटाओ पहले....

ये देख तो दीनू चाचा पूरे जोश में आ गए और एक धक्का देकर अपना लुंड गांड में घुसा दिया, आज सोच रहे थे न जाने क्या हुआ है जो बीवी मिन्नतें करने पर भी गांड देने में कतराती थी आज खुद hi मरवा रही थी, खैर सवालों को एक और रख उन्होंने गांड मरने पर ध्यान दिया...





जल्दी hi एक ले बना कर वो रज्जो की गांड मरने लगे,

रज्जो- ओह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह मारो मेरी गांड आह्ह्ह्हह्ह राजा अह्हह्ह्ह्ह फाड़ दो.

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह ले अह्ह्ह्हह्हह साली आह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्ह माज़आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आ रहा है...

रज्जो- हाँ राजा लो माज़ी अपनी रनडीईईई की गांड से,

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह ले रनडीई साली आह्ह्ह्ह बहुत मटका कर चलती है न अपनी गांड..

ऐसे hi उत्तेजना भरी बातों के बीच जल्दी hi दीनू चाचा ने अपना रास चची की गांड में छोड़ दिया था और अभी दोनों नंगे hi एक दुसरे की बाहों में बिस्तर पर लेते थे

दीनू- अह्हह्ह्ह्ह आज तो तुमने मज़े hi दिला दिए,

रज्जो- तुम्हे मज़ा आया?

दीनू- अरे मज़ा बहुत मज़ा आया, ऐसा तो कभी महसूस नहीं हुआ,

रज्जो- ाचा तो अब से तुम्हे ऐसे hi मज़े मिलते रहेंगे.

deenu-waise इस अचानक से बदलाव के पीछे की वजह क्या है हमें भी बताओ...

रज्जो- अरे वजह बस इतनी है की मैंने सोचा की समाज की वजह से और जिम्मेदारियों की वजह से हम लोग अपनी ख़ुशी अपने सुख अपने बदन की ज़रुरत को एक और रख देते हैं,

दीनू- हाँ ये तो सही कहा तुमने बच्चे बड़े होने पर अपने लिए समय hi कहाँ मिलता है.

रज्जो- तभी तो मैंने सोचा ऐसे तो समय निकल जायेगा तो अब से जितना भी समय है और जब तक बदन में गर्मी है खूब मज़े करेंगे, नयी नयी चीज़ें करेंगे

रज्जो ने अपने पति के लुंड को मुठियाते हुए कहा..

दीनू- हाय ये तो बिलकुल लाख रुपये की बात कही तुमने, वैसे तुमसे ये सुन कर बड़ा ाचा लग रहा है,

रज्जो- हाँ तुम्हारा अच्छा मुझे हाथ में महसूस भी हो रहा है,

इस पर दोनों हंस पड़े,

दीनू- ाचा ये बताओ अब और क्या क्या सोचा है तुमने नया करने को..

रज्जो- जो भी तुम चाहो वो सब करेंगे, तुम बताओ तुम्हे क्या क्या ाचा लगता है..

दीनू- अरे ऐसे हम क्या बताएं हमें तो सब ाचा लगता है,

रज्जो- अरे ऐसे नहीं तुम ये सोचो की मैं तुम्हारी दोस्त हूँ, दोस्तों में जैसे बताते हैं न आपस में बातें करते हैं वैसे बताओ.

दीनू- धत्त तुम भी न, ऐसे थोड़े hi होता है.

रज्जो- अगर मज़े करने हैं तो दोस्ती तो करनी पड़ेगी... वैसे मेरी दोस्ती के बहुत से फायदा हैं तुम्हारे भी और तुम्हारे इस छोटे उस्ताद के भी.

रज्जो ने लुंड को मुठियाते हुए कहा..

दीनू- ुहममम ऐसी दोस्ती तो करनी पड़ेगी...

रज्जो- हे बात, अब बताओ क्या पसंद है तुम्हे.

दीनू- यार ऐसे hi तो बताया नहीं जा रहा ऐसे सोचने पर कुछ समझ नहीं आ रहा.

रज्जो- ाचा ठीक ये बताओ किसे देख कर लुंड खड़ा हो जाता है, किसे मौका मिले तो चोदे बिना नहीं छोड़ोगे,

दीनू इस सवाल से थोड़ा हैरान हुए फिर बोले - तुम्हे..

रज्जो - हट्टो पति बनकर नहीं दोस्त बनकर जवाब दो..

दीनू- ाचा ठीक है, देखो ऐसे तो बहुत हैं जिन्हे देखकर लुंड उठने लगता है,

दीनू चाचा थोड़ा झिझकते हुए पर साथ hi उत्तेजित होते हुए बोले..

रज्जो- हैं कौन कौन...

दीनू- चोदामपुर में गदराये हुई औरतों की कहाँ कमी है, एक से बढ़कर एक माल हैं सब.

रज्जो- नाम बताओ ाचा पूरा गाओं छोडो अपने मोहल्ले में hi बताओ कौन कौन पसंद है तुम्हे.

दीनू- अपने मोहल्ले की तो साडी hi एक से बढ़कर एक हैं, मंजू भाभी के भरे हुए नितम्भ..

रज्जो- क्या नितम्भ गांड बोलो न सीधा सीधा.

दीनू- अरे आज तो तुम अलग hi मूड में हो,

रज्जो- और का.

दीनू- हाँ तो मंजू भाभी, पसंद हैं उनका भरा हुआ बदन मसलने में मज़ा आएगा, फिर इधर सभ्य भाभी हाय उनके बारे में सोच कर hi लुंड खड़ा हो जाता है, सोचता हूँ नंगी कितनी मस्त लगती होंगी..

रज्जो- हाय आज निकल रहे हैं अरमान बहार और बताओ,

दीनू- और ममता का बदन भी बिलकुल मस्त है, भरा पूरा बदन खूब उछाल उछाल कर चुदवाती होगी,

रज्जो- और

दीनू- और नीलेश भैया की साली भी मस्त है शालू,

रज्जो- क्या बात है दोनों बहनो पर मन आ गया है तुम्हारा, वैसे सबसे ज़्यादा कौन पसंद है इन सब में..

दीनू- अरे सबसे ज़्यादा... ुहम्म अरे छोडो सबसे ज़्यादा बताएँगे तो तुम भी गलत सोचोगी..

रज्जो- अरे गलत क्यों सोचेंगे, तुम भी न जब दोस्त कहा है तो दोस्त की तरह बताओ बिना झिझके बिना चिंता के.

दीनू- पक्का..

रज्जो- हाँ बताओ न,

दीनू- तो सुनो सबसे ज़्यादा न हमें शशि पसंद है,

रज्जो- अरे शशि नीलेश भाई साब की बहन,

दीनू- हाँ यार ब्याह के बाद और खासकर बच्चों के बाद तो जो उसका बदन गदराया है न क्या hi बताएं कितनी बार सोच कर हिलाया है हमने,

रज्जो- अरे दादा, ये बात है, वैसे वो तो तुम्हे भी भैया hi मानती है न.

दीनू- तभी तो कह रहे थे की तुम गलत सोचोगी, वो हमें भैया मानती है और हम उसके बारे में ये सब,

रज्जो- अरे मेरे राजा इसमें गलत क्या है, और सही में शशि गदराई हुई भी तो बहुत है उसे देख किसी का भी लुंड तन जाये, और क्या हुआ बहन है तो, बहनचोद बनने का अलग hi मज़ा है...

अपनी पत्नी से ये सुनकर तो दीनू बिलकुल हैरान और खुश दोनों हो गए,

दीनू- तुम हमें गलत नहीं समझ रही,

रज्जो- अरे इसमें क्या गलत समझना, ये तो शशि है तुम अगर रूपा को भी छोड़ना चाहो मैं तो तब भी गलत नहीं समझूंगी...

रूपा नाम सुनते hi दीनू का लुंड झटके खाने लगा पर फिर हिचकिचाते हुए बोले- अरे ये क्या कह रही हो रूपा मेरी सगी बहन है, उसके बारे में ऐसा कैसे सोच सकते हैं..

Rajjo-kyun नहीं सोच सकते, सोचो अगर शशि को सोचने में इतना मज़ा आ रहा है तो सगी बहन को छोड़ने में कितना आएगा,

ये कहते हुए रज्जो दीनू के लुंड को मुठियाने लगी साथ hi दीनू का लुंड भी उसे हाथ में फूलता हुआ महसूस हुआ जो की अपनी बहन को छोड़ने की बात सुनकर hi अंदर तक गरमा गए थे,

रज्जो- छूट तो तुम्हारी बहन के पास भी है, और वो भी शशि से काम नहीं है, सोचो वो नंगी होकर तुम्हारे बगल में ऐसी लेते तो तुम बिना चोदे छोड़ डोज,

दीनू तो बस इस कल्पना से hi आनंदित और उत्तेजित हुए जा रहे थे अपनी hi बहन के बारे में ये सब सोच कर, रज्जो भी पति को पूरी तरह से अपने काबू में करना चाहती थी, और उन्होंने नाटक को और आगे बढ़ाया,

रज्जो- सोचो क्या वो तुम्हारा कड़क लुंड ऐसे देखकर खुद की छूट में घुसाने से रोक पायेगी, वो ये सोचेगी की ये उसके भैया का लुंड है ,नहीं वो तो उसे ऐसे पकड़ेगी और फिर पकड़ कर इसे अपनी गरम रसीली छूट में ले लेगी, अह्हह्ह्ह्ह ुहममम आह्ह्ह्हह्ह...

रज्जो ने उठकर पति का लुंड अपनी छूट में लेते हुए कहा और पूरा लुंड लेकर उनके ऊपर बैठ गयी,

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह देखो ऐसे तुम्हारा कड़क लुंड पूरा तुम्हारी बहन की छूट में जड़ तक घुसा होगा, और वो ऐसे उछलेगी तुम्हारे लुंड पर, अपने भैया के लुंड पर अपनी छूट पटकेगी..

ये कहते हुए रज्जो अपने पति के लुंड पर उछलने लगी, दीनू तो जैसे जन्नत में थे बहन को सोचकर...

रज्जो- अह्हह्ह्ह्ह दादा चोदूओ अह्हह्ह्ह्ह अपनी रूपा की छूट छोड़ो आह्ह्ह्ह भैया मारो अपनी बहन की छूट,

रज्जो ने अपने पति के लुंड पर उछालते हुए ये कहा तो दीनू का सारा सही गलत बोध चला गया वो अपनी बहन की चुदाई की कल्पना में खो गए साथ hi उनका लुंड उनकी पत्नी की छूट में खो रहा था,

दीनू के मुँह से खुद बा खुद निकलने लगा- अह्ह्ह मेरी रूपा अह्हह्ह्ह्ह ले ले आह्हः अपने दादा का लुंड अपनी गरम छूट में अह्ह्ह, छुड़ेगी न अपनर दादा से,

रज्जो- हाँ दादा अह्ह्ह्ह छोड़ो न अह्ह्ह कितना तप्दी है तुमहति बहन की प्यासी छूट तुम्हारे लुंड के लिए, ाजहठ अब छोड़ो ाहहजह भेनचोद..

दीनू- आह्ह्ह्हह्ह पहहहहहह हाँ ले अह्ह्ह्हह्हह अपने भेनचोद भाई से चुद...

रज्जो आज की प्रगति से काफी खुश थी वो अपने पति को इतना खोलने में सफल हुई थी, वहीं सरजू ने काफी देर अपनी माँ का काफी देर तक इंतज़ार किआ और इंतज़ार करते करते सो गया था,

अगली सुबह हम सब लोग देरी से उठे जब मौसी खुद उठाने आई तो, उठने के बाद चाय नाश्ता हुआ और मैं अनुज सागर बाघ में निकल गए जानवरों का चारा पानी करने के लिए, इसी बीच पल्ली किरण और लाडो भी साथ में आये.

में- अरे तुम लोग कहाँ घूम रहे हो,

किरण- भैया हम बाघ में घूमने आये हैं,

पल्ली- और खूब सरे गन्ने भी खाने.

लाडो- हाँ तुम्हारे गन्ने बड़े मीठे हैं भैया और मोठे भी...

लाडो की इस बात का दो- अर्थी मतलब समझ मेरी हंसी निकल गयी जिसे मैंने किसी तरह रोका और बोलै- ठीक है खाओ खाओ,

पल्ली- बोल तो ऐसे रही है जैसे तूने बहुत चूसा है भैया का गणना,

पल्ली के जवाब से लाडो भी थोड़ा हैरान हुई पर सँभालते हुए बोली- हाँ खाया है और आज भी खाउंगी,

इधर किरण अनुज सागर भी हमारी बातें सुन रहे थे और शायद समझ भी रहे थे, किरण बात को ख़तम करते हुए बोली- अरे अब बातें hi करते रहोगे या चलोगी भी तुम दोनों..

इसके बाद वो तीनो चली गयी और मैंने मुद कर देखा तो सागर की नज़र जाते हुए तीनो की तरफ hi थी और मुस्कुरा रहा था,

में- ोये क्या घूर रहा है..

सागर- अरे भैया कुछ भी नहीं, बस ऐसे hi..

में- बीटा ऐसे तो कुछ भी नहीं होता..

अनुज- अबे मेरे और भैया में सब तरह की बातें हो जाती हैं और तू भी भाई hi है तो क्या शर्माना,

सागर- सच में?

में- हाँ, खुल के बोल वैसे भी सुनने में आया है तू बिगड़ गया है मैं भी तो देखूं कितना बिगड़ा है,

सागर ये सुन कर हंसने लगा,

सागर- अरे भैया कहीं नहीं वो तो तुम्हे पता hi है, गाओं के लड़को की बातें लड़की और सेक्स वगेरा की hi होती हैं.

अनुज- अरे घोंचू खुल के बोल न सीधा सीधा कंचुत लुंड और चुदाई की होती हैं.

सागर- अरे तू भी न अनुज, हाँ ठीक है चुदाई की होती हैं तो उनके साथ मुझे भी मज़ा आता है,

में- ये तो हर जगह है लड़के मिलेंगे तो चुदाई की hi बात करेंगे,

सागर- हाँ भैया ऐसे hi बातों के साथ साथ कुछ कुछ बीड़ी तम्बाकू भी कहते हैं तो कभी कभी मैं भी लगा लेता था ऐसे में hi गाओं की किसी औरत ने देख लिए और मम्मी को बता दिया, तगड़ी धुनाई हुई फिर.

में- सही भी हुई, अबे चुदाई की बातें खूब करो, चुदाई भी करो, पर ये नशा वगेरा नहीं ये तम्बाकू बीड़ी नहीं, इससे शरीर और ख़राब होता है,

सागर- क्या भैया तुम भी मम्मी पापा की तरह सुनाने लगे,

अनुज- तू चूतिया है..

में- अबे मम्मी पापा क्या जो भी तेरा ाचा चाहेंगे वो यही बोलेंगे की नशे से दूर रह, ाचा एक बात बता तुझे चुदाई का मौका मिले या बीड़ी पीने का क्या करेगा?

सागर- चुदाई hi karunga..beedi तो टाइम पास के लिए ऐसे hi है

में- पर ये hi टाइम पास न सब कुछ पास कर देती है, अभी से नशे करेगा तो टाइम के साथ न लुंड कमज़ोर पड़ने लगेगा खड़ा भी नहीं होगा, फिर कर लिओ चुदाई..

सागर- अरे भैया क्यों डरा रहे हो,

अनुज- सही बोल रहे हैं, देखा नहीं जिनके लुंड खड़े नहीं होते फिर उनकी बीवियां दूसरो से चुदवाती हैं, या छोड़ के चली जाती है.

सागर- नहीं यार माँ छुड़ाए बीड़ी, लुंड तो मुझे तगड़ा चाहिए.. साला अभी तक एक भी छूट नहीं मिली है,

में- और क्या अपने आस पास hi देख ले मां को पापा को मौसा को, कभी बीड़ी सिगरेट का नशा नहीं किआ तो अभी भी मस्त रहते हैं,

सागर- हाँ मम्मी भी खुश रहती हैं..

सागर बेशर्मी हंसी हँसते हुए बोलै.

अनुज- बड़ा हरामी है तू,

सागर- अरे हरामी क्या, रात को आवाज़ें सुनाई देती हैं, तो पता चल जाता है..

में- बीटा सुनाई देती हैं या तू सुनने की कोशिश करता है..

सागर- अरे एक hi बात है भैया, अब आवाज़ कान में आये या कान आवाज़ के पास जाएं.

में- ाचा तो फिर जब आवाज़ कान में जाती है तो हाथ चड्डी में भी जाता होगा..

सागर ये सुन कर झेंप गया.

अनुज- क्यों बे हो गयी बोलती बंद.

सागर- अरे वो बात नहीं है.

में- अबे कोई भी बात हो गलत थोड़े hi है, जवान है चुदाई देखेगा या सुनेगा लुंड तो परेशां करेगा hi,

सागर ये सुनकर थोड़ा समझते हुए बोलै- हाँ भैया वो hi तो कई बार छह कर भी रोक नहीं पाटा, और मुठ लग जाती है,

में- क्यों तेरे दोस्त सिर्फ बातें hi करते हैं क्या चुदाई का जुगाड़ नहीं कोई?

सागर- कहाँ भैया साले बस अपने अपने घर की औरतों पर मुठियाते हैं...

ये बोलकर सागर चुप हो गया जैसे कुछ गलत बोल गया हो और मेरी और अनुज की और देखने लगा,

में- अरे चुप क्यों हो गया,

सागर- अरे वो bhaiya..aisa.

अनुज- तुतला क्यों रहा है सीधे बोल न की अपनी माँ और बहन को सोच कर मुठियाते हैं.

ये सुनकर सागर बिलकुल हैरान रह गया और मुझे और अनुज को देखने लगा..

में- और मुझे पता है की तूने भी ममी को सोच सोच कर ज़रूर हिलाया होगा,

इस बात से तो उसके मुँह पर हवाइयन उड़ने लगी लगा वो अभी रो देगा,

अनुज ने उसके कंधे पर हाथ रखा और बोलै- अबे दर क्यों रहा है ये सब होता है, ज़्यादा तर लोग कैट हैं.

मुझे लगा यही सही मौका है इसे सही से समझने का भी और अपने साथ मिलाने का भी

में- सब क्या अरे हम ब्बि करते हैं, मैंने अनुज को इशारा करते हुए कहा.

सागर ये सुन मेरी तरफ देखने लगा.

में- हाँ और इसमें गलत क्या है, देख हम जवान है लुंड बात बात पर खड़ा हो जाता है, और मामी को देख क्या गदराया बदन है कितनी मस्त लगती हैं उन्हें तो देखकर लुंड खड़ा होगा hi,

सागर- पर भैया ये गलत नहीं है?

में- गलत समाज के लिए है, अगर हमें सही लग रहा है और किसी का नुकसान नहीं हो रहा तो क्या गलत है, मैंने और अनुज ने भी बहुत बार मुठिया है माँ को सोचकर.

ये सुनकर सागर हैरान हुआ पर साथ hi थोड़ा शांत भी,

सागर- अरे भैया तुमसे ये सुनकर न मेरी साडी चिंता hi ख़तम हो गयी, मुझे तो लगता था की मैं गलत करता हु. पर छह कर भी खुद को रोक नहीं पता..

में- कुछ गलत नहीं है बस मज़े ले बस किसी को दुःख न पहुंचे इस चीज़ का ध्यान रखना है,

सागर- पर अगर ये बात मम्मी पापा को पता चली तो?

Me-dekh मम्मी पापा होने से पहले वो भी आदमी और औरत हैं, और उन्हें भी चुदाई और चुदाई की बातें उतनी hi अछि लगती हैं जितनी हमें, तो हो सकता है उन्हें भी ाचा लगे दूसरी बात वो भी हमारी उम्र से होकर निकले हैं तो वो भी ये सब झेल के hi निकले होंगे तो वो भी समझेंगे.

सागर- सही में वो समझेंगे.

Me-haan बिलकुल और ये भी तब न जब उन्हें पता लगे जब तक पता नहीं तब तक तो कोई दिक्कत नहीं है,

सागर ये सुन तो मेरे गले से लग गया

सागर- अरे भैया तुम पहले मिले होते न तो मज़ा hi आ जाता साडी टेंशन hi दूर कर दी.

अनुज- कोई नई अब तो मिल गए अब बस जो भी मन में हो सही सही बोल दिया कर.

सागर- हाँ अब तो सब कुछ बताऊंगा..

अनुज- ाचा तो बता आखिरी मुठी कब और किसके नाम की मारी थी?

सागर- रात को सोने से पहले बाथरूम में,

अनुज- ममी की?

सागर ने ना में सर हिलाया,

अनुज- फिर किसकी?

सागर थोड़ा हिचकिचाहट के साथ बोलै- बड़ी बुआ की...

इस पर अनुज ने उसे मज़ाक में गर्दन से पकड़ लिए और बोलै- सेल मेरी माँ पर hi नज़र डालने लगा,

सागर को भी जब ये लगा अनुज मज़ाक के रहा है तो बोलै- अरे यार बुरा मत मान पर बड़ी बुआ को देखकर hi लुंड खड़ा हो रहा था कितनी मस्त लगती हैं वो, बिना मरे रहा hi नहीं गया, और तुम तो समझोगे hi क्यूंकि तुम लोग तो खुद मुठियाते हो बड़ी बुआ को सोच कर.

में- हाँ चल वो ठीक है वैसे सिर्फ ममी तक hi तेरी मुठी सीमित है या किरण को भी सोचा है.

सागर- कई बार,

अनुज- जे बात लड़के,

सागर- पर वो भी न बिलकुल अजीब तरह से बर्ताव करती है मेरे साथ,

में- मतलब.

सागर- मतलब भैया मुझे लगता है वो कुछ छुपाती है, अपना फ़ोन बिलकुल हाथ नहीं लगाने देती, कमरा बंद करके फ़ोन में लगी रहती है कई बार मैंने खुलवाने की कोशिश भी की तो बड़ी देर में चिढ़कर खोलती है और वो भी पसीना पसीना होकर...

अनुज- उसका कोई चक्कर तो नहीं चल रहा.

सागर- क्या पता, कुछ सबूत hi नहीं है, एक तो घर की लाड़ली है कुछ बोलता हूँ तो मुझ पर hi दन्त पद जाती है.

में- ाचा चल ऐसा है तो देखते हैं उसका भी,

सागर- पर इतनी चुदाई की बात कर मेरा लुंड खड़ा हो गया है, मुठी मरने का मन हो रहा है.

अनुज- धत्त्त सेल जा पेड़ के पीछे जाकर मार ले.

सागर- साथ में मरते हैं न,

में- चल तू अब हमारे यहाँ है थोड़ी खातिर करवाता हूँ तेरी,

सागर- मतलब.

में- साथ चल पता चल जाएगा, अनुज इसे पीछे वाला खेत घुमा ला..

अनुज समझ गया मैं उसे कहाँ ले जनर की बोल रहा हूँ

सागर- तुम नहीं चलोगे भैया,

में- मुझे कुछ काम है अनुज तुझे अचे से घुमा देगा

Anuj-theek है भैया

ये कहकर अनुज उसे अपने साथ ले गया दोनों ो जल्दी hi, हमारी मज़दूरन के घर के बहार पहुँच गए जो अनुज देख कर hi मुस्कुरा कर बोली- क्यों बाबू आज कैसे याद आ गयी?

अनुज- अरे ताई तुम्हारी याद तो आती रहती है, पर आज कुछ और काम से आये हैं.

मज़दूरन - क्या काम है बाबू बताओ,

अनुज- किसी को बड़ा करना है,

सागर की तरफ इशारा करके कहा, जो की कहहि अनुज तो कभी मज़दूरन जो तक ताकि लगाए देख रहा था,

मज़दूरन -ी कौन हैं बाबू?

अनुज- मां का लड़का है मेरे..

म- ाचा ाचा, आओ बाबू तुम्हे बड़े होने का भेद और छेड़ दोनों दिखते हैं,

सागर अनुज को देखने लगा तो ामूज ने उसे जाने का इशारा किआ.

म- बाबू तुम भी आ जाओ हमें भी आज खुजली ज़्यादा हो रही है थोड़ा आराम मिल जायेगा,

इस पर अनुज मुस्कुराने लगा और कुछ देर बाद मज़दूरन के घर में कुछ ऐसा दृश्य था की अनुज सागर और वो तीनो नंगे थे, उसका सर सागर की गॉड में था और वो सागर का लुंड चूस रही थी वहीं अनुज उसके पीछे लेट कर उसकी छूट मार रहा था,





इनका प्रोग्राम कुछ लम्बा चलने वाला था, इधर मैंने बाघ का सारा काम निपटाया और फिर नीतू को फ़ोन लगाया...

जारी रहेगी
 
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