अपडेट 187
सरलपुर
जहाँ चोदामपुर में सब बातें कर रहे थे वहीं यहाँ माहौल थोड़ा अलग था, लोग बातों से ज़्यादा कुछ कर रहे थे, थाली और पेन एक तरफ पड़ा हुआ था, कपडे भी इधर उधर पड़े फैले हुए पड़े थे, बिस्तर पूरा भरा हुआ था , हो भी क्यों न तीन जोड़े बिस्तर पर अपना कब्ज़ा जमाये हुए थे,
घर की बड़ी संस्कारी बहु चंचल बिलकुल नंगी होकर अपनी पीठ के बल लेती थी और उसकी टैंगो के बीच उसका देवर रमन था जो की अपने लुंड को अपनी भाभी की रसीली छूट में दाल सटासट छोड़ रहा था, वहीं चंचल की देवरानी अपने जीजाजी के आगे झुकी हुई थी और उनसे घोड़ी बनकर अपनी छूट की कुटाई करवा रही थी, वहीं बिस्तर के आखिर में घर के बड़े बेटे चेतन सिरहाने से टिक कर बैठे हुए थे और उनके लुंड पर पूर्वी उछाल रही थी... कुल मिलकर कमरे में चुदाई का तूफ़ान आया हुआ था, पूरे कमरे में थापों की आवाज़ गूँज रही थी.
चंचल- अह्ह्ह्हह बहुत मज़ाआठ आ रहा है भैयाहहह आह्हः काश पहले से hi छुड़वा लेती तुमसे अह्ह्ह्हह..
रमन- अह्ह्ह्ह भाभी यही तो दुःख है की अब तक क्यों नहीं छोड़आहहहहहह तुम्हे इतना समय बेकार कर दियाहहहहह
चेतन- तो क्या हुआहहह भाई अब जी भर के छोड़ अपनी भाभी को मेरी तरफ से खुली छहोऊत है अह्ह्ह
चंचल- तुम्हारी तरफ से तो छुट होगी hi दो नयी नयी छूटें जो मिल रही हैं तुम्हे.
रिम- तो क्या हुआअह्ह्ह्ह जीजी तुम भी तो नए नए लुंड खा रही होऊ.
चंचल- अह्हह्ह्ह्ह अभी तो कुछ नाहीई खाये ऋ रिम्मीईई अह्ह्ह्ह अब खाउंगी जिसका मिलेगा अपनी छूट में लेकर निचोड़ दूंगी अह्ह्ह्ह..
पूर्वी- देखो जीजा तुम्हारी बीवी को लुंड का चस्का लग गया है..
पूर्वी ने चेतन के लुंड पर उछालते हुए कहा,
चेतन- अह्ह्ह्हह कोइई बात नाहीईई अभह जब तक बात घर में है तो क्या दिक्कत है.
चंचल- अह्ह्ह्हह्हह पाटीई हो तो तुम्हारे जैसी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह,
वहीं रिमझिम ने पंकज से चुड़ते हुए उसके कान में जाकर कुछ फुसफुसाया जिस पर पंकज मुस्कुराने लगा और हाँ में सर हिला दिया,
इसकर बाद रिमझिम ने अपना सर एक और की और आगे बढ़ाया और बगल में अपनी भाभी को छोड़ते हुए अपने पति के पास किआ और उसे चूमने लगी पर चूमने के बाद उसके कान में भी कुछ कह दिया, जिससे उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी और उसने भी सर हिलाकर हामी भरी,
इसके बाद रिमझिम आगे होकर पंकज के लुंड से हैट गयी वहीं पंकज पीठ के बल बिस्तर पर लेट गया, वहीं रमन ने भी चंचल के ऊपर से हटते हुए अपना लुंड उसकी छूट से निकल लिए जो की कुछ पल के लिए भी चंचल को ाचा नहीं लगा, पर तभी पंकज ने चंचल को पकड़ कर अपनी और खींच लिया और अपने ऊपर ला कर अपने लुंड पर बिठा दिया जिससे चंचल की छूट का सूनापन फिर से भर गया...
चंचल- अह्ह्ह्ह पंकज भैया तुम्हे मेरी छूट बहुत भ रही है न तो इसे अचे से छोड़ो और छोड़ छोड़ के इसकी साडी खुजली मिटा दो..
पंज- हाँ भाभी तुम्हारी छूट का स्वाद मेरे लुंड को भ गया है. अह्ह्ह्ह.
ये कह पंकज ने चंचल को अपनी और झुका लिए और उसके होंठों को चूसने लगा, वहीं नीचे से सटासट धक्के लगाकर छोड़ने लगा...
वहीं बगल में रिमझिम अपने पति का लुंड चूसने लगी और अगले 5 मीन्स तक उसने लुंड को चूस चूस कर अपने थूक से सना दिया. इधर चेतन लगातार पूर्वी को नीचे से धक्के लगलगा कर छोड़ रहा था.
वहीं बगल में पंकज उसकी पत्नी चंचल को अपने ऊपर झुकाये हुए उसके रसीले होंठों को चूसते हुए हाथों से दोनों चूतड़ों को मसलते हुए उसकी छूट में दनादन लुंड पेल रहा था,
दूसरी और रिमझिम ने रमन का लुंड अपने मुँह से निकला और उसके ऊपर से हटी तो रमन भी उठा और उठकर पंकज की टैंगो के बीच आया जहाँ उसे अपनी भाभी की छूट में पंकज का लुंड अंदर बहार होता साफ़ दिख रहा था, और उसके ऊपर hi भाभी की गांड का भूरा छेड़ था, अपनी पत्नी रिम्मी की योजना पर उसे बहुत उत्साह हो रहा था उत्तेजना में उसका लुंड फूल रहा था क्यूंकि इससे पहले उसने कभी ऐसा कुछ नहीं किआ था,
वहीं पंकज ने जब रमन को जगह पर देखा तो उसने अपनी गति थोड़ी धीमी कर्ली साथ hi चंचल को अपनी बाहों में कास खुद से चिपका लिए, चंचल को तो कोई खबर नहीं थी की उसके पीछे क्या योजना बन चुकी है वो तो बस चुदाई के आनंद में खोई हुई थी, रिम्मी ने रमन को आगे बढ़ने का इशारा दिया वहीं चेतन और पूर्वी भी कनखियों से ये सब देख रहे थे,
रमन थोड़ा और आगे खिसका और अपने लुंड को पकड़ टोपे पर और थूक लगाया और फिर अपने लुंड के टोपे को अपनी भाभी की गांड के छेड़ पर टिकाया और बिना देरी के एक धक्का लगाकर टोपे को अंदर प्रवेश करा दिया, ये सब इतनी जल्दी हुआ की चंचल को कुछ पता hi नहीं चला और अचानक से उसे अपनी गांड के खुलने और लुंड घुसने का एहसास हुआ जिससे वो चीखती ज़रूर पर उसके होंठों को पंकज ने जकड रखा था जिससे उसकी चीख घुट कर रह गयी,
चेतन पूर्वी रिम्मी सब रुक कर ये नज़ारा देख रहे थे चंचल के दोनों छेदों में एक एक लुंड था, चेतन तो अपनी पत्नी को ऐसे देख एक अजीब उत्तेजना में था और पूर्वी की छूट में उसका लुंड फूल रहा था,
वहीं चंचल दोनों लुंड के बीच मचल रही थी, उसे शांत देख पंकज ने उसके होंठों को छोड़ा तो वो सिसकने लहि,
चंचल- अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ढैय्याहहहहह आह्ह्ह्हह मादरचोद देवरजी इतना hi गांड मरने का शौक है तो अपनी बहन की मारो न या अपनी माँ की मोती गांड मारो आह्ह्ह्ह.
चेतन के मुँह से गालियां सुन सब मुस्कुराने लगे..
रिम- शांत हो जाओ जीजी अब तो घुस गया न,
चंचल- अह्हह्ह्ह्ह पर काम से काम बता तो देते डालने से पहले अह्ह्ह्ह कितना भरा भरा लग रहा है दो दो लुंड एक साथ.
रमन- भाभी तुम मुझे गलियां दे रही हो पर ये साडी योजना रिम्मी की hi थी.
चंचल- अह्ह्ह रंडी रिम्मी तुझे बताउंगी मैं देख तेरी गांड में बेलन घुसङ्गी मैं.
रिम- तुम जो घुसाओ जीजी मंज़ूर है मैं तो बस तुम्हे चुदाई का असली सुख देना छह रही थी.
इधर बात करते हुए रमन ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू कर दिए और हर धक्के के साथ उसका लुंड उसकी भाभी की मखमली गांड में सरकने लगा, वहीं पंकज ने भी धीरे धीरे नीचे से चंचल की छूट में धक्के लगाने शुरू कर दिए, वहीं चंचल को भी शुरूआती असुविधा के बाद अब दोनों लुंड को उसके छेदों ने समायोजित कर लिया था, उसको अपने दोनों छेदों के भरा होने का एहसास ाचा लगने लगा था,
पंकज और रमन धीरे धीरे से ले बनाते हुए उसकी छूट और गांड को छोड़ने लगे, जिसपर चंचल की सिसकियाँ निकलने लगी.
चंचल- अह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अम्मम्माह्ह्ह्हह्ह कितना अजीब एहसास है ये अह्ह्ह्ह भरा भरा लग रहा है...
रिमझिम उठके उसके पास आती है और चंचल के होंठों को चूसती है और कहती है- देखती जाओ जीजी मज़ा hi मज़ा आएगा अभी तो.
चंचल- ये सब तेरी वजह से है देख, आज दो दो लुंड मेरे अंदर हैं..
रिम- मेरी जीजी हो प्यारी इतना तो सोचना hi पड़ेगा तुम्हारे बारे में..
रमन- अह्ह्ह्ह भाभीई किटमि गरम और कासी हुई गांड है तुम्हारी आह्हः मज़ा आ रहा है.
चंचल- हाँ भैयाहहह अह्ह्ह्ह मारो अपनी भाभी की गांड आह्हः तुम्हारा तो हक़ बनता है... अह्ह्ह..
उधर रिमझिम ने पूर्वी को चेतन के ऊपर से हटने को कहा.
पूर्वी के हटते hi रिमझिम ने चेतन को उठने के इशारा किआ जिसे देख चेतन उठा वो भी जानना छह रहा था की रिम्मी के शैतान दिमाग में अब क्या है, चेतन घुटनो के बल हुआ तो रिमझिम ने उसे आगे खिसका कर चंचल और पंकज के चेहरे के पास कर दिया और वहीं चंचल के चेहरे को भी उसकी और घुमा दिया और बोली- भैया अपना लुंड जीजी के मुँह में डालो बहुत बोलती है ये.
चेतन ने अपना लुंड पकड़ कर अपनी पत्नी के होंठों पर लुंड को घिसा तो चंचल ने होंठों को खोलकर उसका लुंड अपने मुँह में घुसा लिए..
रिम- अब बानी जीजी असली रैंड देखो कैसे एक साथ तीन तीन लुंड लिए हुए हैं..

चेतन- आह्ह्ह्हह सब तेरे साथ के कारन है रिम्मी मेरी भोली भली बीवी को लुंड की प्यासी रंडी बना दिया तूने.
रिमझिम ने चेहरा आगे किआ और चेतन के होंठों को पहले चूसा और फिर अलग होकर बोली- सच बताऊँ भैया तो रंडी तो वो पहले से थी बस मैंने उस रंडी को बहार निकला है जो संस्कारों के अंदर दबी हुई थी..
चंचल छह कर भी कुछ नहीं बोल सकती थी बेचारी के तीनो छेदों में एक एक कड़क लुंड जो घुसा हुआ था पर वो ये भी मान रही थी की ऐसा उसने आज तक महसूस नहीं किआ था, लुंड से इतना भरा होने का एहसास एक साथ कई और से उसकर बदन में तरंगे उठ रही थी और उसे समझ नहीं आ रहा था किस तरंग पर ध्यान दे उसका पूरा बदन hi ुस्व लग रहा था आनंद की लहार में बहता जा रहा है..
चेतन- ुह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह तेरी बातें भी ना..
पूर्वी- इतनी आसानी से नहीं समझोगे जीजा हमारी बातें अभी तो अपनी बीवी पर ध्यान दो..
रमन - हाँ भैयाहहह आह्ह्ह्ह बड़े भाग्यशाली हो तुम जो अब तक भाभी की इस गरम गांड के अकेले मज़े उठाते आ रहे थे,
रमन अपने लुंड को चंचल की कासी गांड में अंदर बहार करते हुए बोलै,
पंकज- सही कहा भाई चंचल भाभी जैसी औरत तो मिल बाँट कर भोगने को होती है..
पंकज ने भी नीचे से उसकी छूट में धक्के लगते हुए कहा.
चेतन- अरे तो अब तो मिल बाँट कर hi भोग रहे हैं न जो बीत गया उसे छोडो. और जी भर के छोड़ो मेरी रंडी बीवी को.
चेतन को ऐसे बोलने में अजीब सा एहसास हो रहा था पर उत्तेजना भी हो रही थी.
चंचल अपने बारे में अपने पति और देवर साथ hi पंकज से सुन एक अलग प्रकार की उत्तेजना महसूस कर रही थी, एक तो उसको तीनो मिलकर रंडी की तरह छोड़ रहे थे दूसरा तीनो उसके बारे में ऐसे बात कर रहे थे जैसे वो कोई रंडी हो जो लुंड की प्यासी है ये hi सोच सोच कर साथ hi टिहरी चुदाई का सुख वो ज़्यादा देर नहीं सह पाई और उसका बदन अकड़ने लगा पर बेचारी को पंकज और रमन ने जकड़ा हुआ था ओहिज सर पकड़ कर पति ने अपना लुंड गले तक फंसा रखा था, तो कांपते हुए भी वो ज़्यादा हिल नहीं पाई पर उसकी छूट ने पंकज के लुंड पर पानी छोड़ दिया,..
चंचल भर भरा कर झड़ने लगी और शायद इतने वेग से वो कभी झड़ी होगी, क्यूंकि एक पल को तो पंकज और रमन को उसे थामे रहना मुश्किल हो गया, झड़ने के बाद चंचल बेजान सी पंकज के ऊपर गिर गयी जब पंकज ने ये देखा तो उसने रमन से हटने को कहा तो रमन ने भी उसकी गांड से लुंड निकल लिया और उधर चेतन ने मुँह से तो पंकज ने चंचल को बगल में लिटा दिया इधर चंचल के अलग होते hi पूर्वी ने चेतन को पकड़ कर बिस्तर पर गिरा लिए एयर खुद उसके ऊपर बैठ ते हुए उसका लुंड पकड़ अपनी गांड पर लगाया और बैठ गयी.. चेतन का लुंड जो की चंचल के थूक से गीला था सरसराता हुआ पूर्वी की गांड में घुस गया
पूर्वी- अह्ह्ह्ह बहुत देर से इंतज़ार कर रही थी जीजा आह्हः गांड में लुंड लेने का.
चेतन - अह्ह्ह्ह क्या गांड है रे पूर्वी आअह्ह्ह इतनी गरम अह्ह्ह्हह,
Poorvi-Ohhh रमन जीजा क्या अपनी भाभी की गांड से hi मन भर गया इधर आओ ज़रा हमें भी तो दो दो लुंड का सुख लेने दो.
पूर्वी ने पीछे लेटकर अपने पेअर खोलकर अपनी छूट दिखते हुए कहा.. अब ऐसे निमंत्रण को कौन hi ताल सकता था रमन ने तुरंत पूर्वी के और अपने भैया के पैरों में जगह ली और अपना लुंड पूर्वी की फूली हुई छूट में घुसा दिया,
पूर्वी- अह्ह्ह्ह मादरचोद जीजाहहह आह्ह्ह्ह अब छोड़ो दोनों भाई मिलकर..
पूर्वी से गली सुनकर दोनों भाइयों ने अपने अपने लुंड पूर्वी की छेदों में अंदर बहार करना शुरू किआ और जल्दी hi दोनों ने धीमी सही पर ले पकड़ ली...
ये पल दोनों के लिए खास था क्यूंकि दोनों भाई मिलकर पहली बार किसी एक औरत को छोड़ रहे थे, इस तरह से वो पहली बार खुले थे, हालाँकि उनकी वैसे अछि बनती थी कभी लड़ाई नहीं हुई पर इस तरह से वो कभी एक साथ नहीं जुड़े थे जैसे आज जुड़ रहे थे पूर्वी की छूट और गांड के कारन,
रमन- अह्ह्ह भैया तुम्हारे साथ छोड़ने में मज़ा आ रहा है काश ये सब हमने पहले किआ होता..
चेतन- सही कहा रमन इस तरह से एक साथ चुदाई करने का और खुलने का मौका पहले मिला होता तो बात hi क्या थी.
पूर्वी- अह्ह्ह तो दोनों भाई मिलकर आह्हः छोड़ लेते न अपनी माँ को, आह्हः बन जाते मादरचोद..
पूर्वी की इस बात को सुनकर दोनों को hi झटका लगा पर वहीं उनके लुंड ने भी झटका खाया अपनी माँ को छोड़ने के ख्याल से hi, वो भी एक साथ, हालाँकि दोनों ने इस बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी पर मन में ज़रूर दोनों के ये चल रहा था,
इतने में पंकज उनके पास आये और अपनी बीवी के मुँह में लुंड घुसा दिया और बोले- ले साली रंडी बहुत बोलती है न, अपने मुँह का सही उपयोग कर.. ये कह वो उसके मुँह में लुंड अंदर बहार करने लगे..
चंचल की तरह अब पूर्वी को भी तीन तीन लुंड एक साथ छोड़ रहे थे, वही रिमझिम अपनी छूट सहलाते हुए इस नज़ारे को देख रही थी, वहीं चंचल भी अब झड़ने के खुमार से बहार आ चुकी थी और पूर्वी को तीन लुंड लेते हुए आँखें खोल कर देख रही थी,

चंचल- छोड़ो तीनो मिलकर रंडी को आह्हः बुझादो आज इसकी छूट की प्यास.
रमन- हाँ भाभी आज रंडी की सारी खुजली मिटा देंगे,
चेतन - अह्ह्ह्हह साली की गांड बड़ी गरम है ओह्ह्ह्हह्ह मज़ा दे रही है. अह्ह्ह पंकज भाई तुम भी काम नसीब वाले नहीं हो.
चेतन ने भी बातों में शामिल होते हुए कहा..
पंकज- ुहममम यही सुख होता है मिल बाँट कर खाने का चेतन भाई, अपने नसीब के साथ साथ दुसरे का नसीब का भी मिल जाता है.
चंचल भी रिमझिम के बगल में बैठ कर उसकी छूट में अपनी उंगलियां चलते हुए बोली- आह्ह्ह्ह ये तो हम औरतों के लिए भी ाचा है एक लुंड से तीन लुंड हमेशा भले होते हैं.
रिम- हव्वा देखो चेतन भैया तुम बोल रहे थे न मेरी संस्कारी भोली भली बीवी ये देखो उनके बोल.
चंचल- तूने hi तो कहा न की संस्कार तो पर्दा था अंदर से हम सब यही हैं और जब अब पर्दा हैट चूका है तो क्या शर्माना.
चेतन- सही कहा अब हममें से अह्ह्ह्हह्हह कोई चाहता भी नहीं की ये परदे दोबारा पड़ें ..
चेतन पूर्वी की गांड में नीचे से धक्का लगते हुए बोले,
रमन- आज मेरा भी रिश्ता पूरा हो गया कहते हैं न साली आधी घरवाली होती है आज पूर्वी को छोड़ कर घरवाली बना दिया.
इस पर सब हंसने लगे,
रिम- अरे साली ज़रूर है पर काम वो सब बीवी वाले करने को तैयार है,
चंचल- बीवी वाले नहीं रंडी वाले देख नहीं रही तीन तीन को संभल रही है एक साथ,
रिम- हाँ जीजी जैसे थोड़ी देर पहले तुम संभल रही थी..
वहीं चेतन और रमन ने जबसे अपनी माँ के बारे में सुना था तबसे दोनों के hi मन में उथल पुथल चल रही थी, रमन जो की बहन को भोग चूका था वो कल्पना करने लगा अपनी माँ के साथ चुदाई की वहीं चेतन भी ये सोचने लगा क्या ऐसा भी हो सकता है, कैसा लगता अगर मैं मम्मी को छोड़ता तो, इन सब खयालो का असर दोनों के लुंड और उनकी पूर्वी को छोड़ने की गति पर दिख रहा था, चेतन और तेज़ी से नीचे से धक्के लगाकर पूर्वी की गांड मरने लगा, वहीं रमन भी पूर्वी की छूट में दनादन धक्के लगा रहा था, ऊपर पंकज भी अपनी पत्नी को दोनों भाइयों के साथ बाँट कर उत्तेजित थे और पूर्वी के मुँह को ज़ोरदार तरीके से छोड़ रहे थे...
तीनो और की घमासान चुदाई से पूर्वी उत्तेजना की चरण सीमा पर तैर रही थी, उसके बदन में रह रह कर उत्तेजना की सरसराहट दौड़ रही थी और जल्दी hi इस सरसराहट ने इतना तीव्र रूप बना लिए की पूर्वी उसे संभल नहीं पाई और झड़ने लगी, उसका बदन भी तीनो के बीच कंपनी लगा और फिर स्थिर हो गया...
मर्द समझ गए की पूर्वी झाड़ चुकी है, और उसके झड़ते hi पंकज ने उसके मुँह से लुंड निकला तो रमन ने उसकी छूट से और साथ hi लुंड निकलने के बाद रमन ने पूर्वी को चेतन के ऊपर से उठाकर एक तरफ लिटा दिया, जैसे hi पूर्वी को उठाकर रमन चेतन के आगे से हटा hi था बिजली की गति से रिम्मी चेतन पर कूदि और अगले hi पल चेतन का लुंड अपनी गांड में लेकर बैठ गयी उसकी उत्सुकता और बेचैनी देख चंचल कुर बाकि सब हंस पड़े.
चंचल- देखो तो रंडी को कितनी जल्दी है छोड़ने की...
रिमझिम ने अपनी गांड में जेठ के लुंड को लेकर हल्का हल्का उछालना शुरू किआ और बोली- ाचा खुद तो अपनी खुजली मिटवाली तीन तीन लुंड से अब मुझे रंडी बोल रही हो.
चंचल- ये योजना भी तो तेरी थी तीन तीन वाली.
उधर चेतन मस्त हो गया था पहले पूर्वी की मस्त गांड और फिर अब मैडम रिमझिम की कासी हुई गांड को अपने लुंड पर महसूस कर, आज की रात ने उसे कितना कुछ नया दिया था और न जाने इस रात की वजह से उसके जीवन में क्या क्या बदलाव आने वाले हैं...
खैर अभी तो चेतन ने अपना पूरा ध्यान रिमझिम की मखमली गांड पर लगाया अह्ह्ह्हह्हह क्या एहसास था ऐसा लग रहा था उसका लुंड माखन के बीच है, वो इस एहसास को आँखें बंद कर महसूस कर hi रहा था की उसे रिमझिम की गांड और कस्ती हुई महसूस हुई साथ hi लुंड पर एक गर्शन सा हुआ तो उसने आँखें खोल कर देखा तो पाया की पंकज उसकी और रिमझिम की टैंगो के बीच था और उसने अपना लुंड रिमझिम की खली छूट में घुसा दिया था,
पंकज- ओह्ह्ह चेतन भैया ज़रा हमारे साथ भी ले बनाओ.
चेतन- हनन हाँ भाई बिलकुल आह्ह्ह्ह क्या कासी हुई और गरम गांड है रिमझिम...
रिमझिम कुछ जवान देती उससे पहले hi रमन ने अपना लुंड उसके मुँह में भर दिया और उसे भी वही सेवा मिलने लगी जो की अभी चंचल और पूर्वी को मिली थी,

चंचल- हाँ तुम्हे तो गांड मस्त लगेगी hi छोटे भाई की बीवी की, अरे तुम लोगो को पता है मुझे छोड़ते हुए ये रिमझिम का नाम लेते थे कभी कभी.
पंकज- तो क्या हुआ भाभी मैंने भी कई बार पूर्वी को तुम्हे सोचकर छोड़ा है,
रमन- मैंने भी भाभी,
चंचल- हाय दिया तुम सब मर्द एक जैसे हो,
पूर्वी- यही तो बात है जीजी मर्द अपने लुंड से सोचते हैं अगर तुमने उसे खुश कर लिया तो मर्द खुश...
इधर दोनों की ज्ञान भरी बातें चल रही थी थी तो दूसरी और तीनो मर्द मिलके रिमझिम की धुआंधार चुदाई कर रहे थे और यही रिमझिम को पसंद भी था, वो मुँह में लुंड होने के कारन कुछ कह नहीं प् रही थी पर उसके बदन में उठ रही तरंगो का आनंद उसके पूरे बदन को मिल रहा था जो की उसे तीनो लुँडो से मिल रही थी,
चेतन- अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह कुछ भी कहो हमने ऐसी बीवियां नसीब से पाई हैं अह्ह्ह एक से बढ़कर एक हैं.
पंकज- ये तो सही बात की भैयाहहह आह्ह्ह्ह जितना छोड़ लो मन hi नहीं भरता.
रमन- अरे मन भर जाये ये तो इनके बदन का अपमान होगा...
रिमझिम की चुदाई देखते हुए चंचल और पूर्वी अपनी अपनी छूट और चूचियों को सहला रही थी..
इधर मर्द काफी देर से चुदाई कर रहे थे पहले चंचल फिर पूर्वी और अब रिमझिम तो तीनो hi अपनी छमता और उत्तेजना के आखिरी पड़ाव पर थे और उनके धक्के भी वैसे hi तेज़ और दुमदार थे जो की पूर्वी के छेदों का पुर्ज़ा पुर्ज़ा हिला दे रहे थे, और जिसका नतीजा ये हुआ की वो भी खुद को ज़्यादा देर संभल नहीं पाई और उत्तेजना के वेग में बहती चली गयी और झड़ने लगी, रिमझिम के झड़ने का एहसास जैसे hi मर्दों को हुआ तो वो जैसे इसी इंतज़ार में बैठे थे और एक के बाद एक झड़ने लगे,
रमन ने अपनी पत्नी के मुँह क्या गले को अपने रास से भर दिया वहीं पंकज ने अपनी साली की छूट को अपने रास से सराबोर किआ तो चेतन उसकी गांड में अपने लुंड की पिचकारी खली की और फिर सब आपस में अलग हुए और रिमझिम को बिस्तर पर लिटा दिया..
मर्दों के हटते hi पूर्वी फुर्ती में उठी और रिमझिम को उठा कर उसकी छूट अपने मुँह पर रख ली और उसकी छूट से अपने पति का रास चाटने लगी जब ये चंचल ने देखा तो उसे भी उत्सुकता और उत्तेजना हुई वो भी तुरंत उठ कर आई और उसने अपना मुँह रिमझिम की गांड से लगा दिया और वो भी अपने पति का रास रिमझिम की गांड में जीभ घुसा घुसा कर चाटने लगी...

चेतन और रमन ने जब ये देखा तो उनके लुंड हल्का हल्का सर उठाने लगे फिर से, नज़ारा hi कुछ ऐसा था.. खैर लगातार दो बार झड़ने की थकावट में अभी उन्होंने बस देखने भर से संतोष किआ, उधर जब चंचल और पूर्वी भी संतुष्ट हो गयी तो उन्होंने रिमझिम के छेदों को छोड़ा पर तब तक दोनों के चाटने की वजह से रिमझिम के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी, और उसनर दोनों को होंठों पर एक एक प्यारा सा चुम्बन दिया जैसे धन्यवाद् बोल रही हो.
खैर अब सब शांत होकर बैठे थे...
पंकज- भाई रमन ऐसा खेल तो मैंने कभी नहीं खेला... मज़ा hi आ गया
चेतन- हाँ भाई क्या खेल था.
रमन- यही तो चाहिए था की हम लोग आपस में मज़े कर पाएं.
चंचल- पर अब क्या करना है देर भी काफी हो गयी है.
पूर्वी- हाँ अब अपने अपने कमरों में चलते हैं कहीं सबको न पता चल जाये हमारे खेल के बारे में.
रिम- तो क्या हुआ फिर सबके साथ खेलेंगे.
चंचल- धत्त कुछ भी बोलती है.
पंकज- वैसे सही रहेगा अपने अपने कमरों में चलते हैं अपनी अपनी बीवियों के साथ,
पंकज ने हँसते हुए कहा,
पूर्वी- नहीं सही भी है एक रात में इतना कुछ हुआ है तो आपस में कुछ बातें करनी होंगी इसलिए यही सही रहेगा..
सबके बीच यही राइ बानी और सब एक दुसरे को शुभरात्रि कहकर अपने अपने कमरों में चले गए,
चंचल और चेतन बिस्तर पर बैठे थे सोने को तैयार चेतन जो भी हुआ उसके बारे में सोच रहा था और मुस्कुरा रहा था,
चेतन- बताओ यार मन हमने ये सब पहले सोचा था पर ऐसे होगा ये नहीं सोचा था, पर कुछ भी कहो मज़ा आ गया. क्यों?
चंचल- हम्म हाँ,
चेतन ने देखा की चंचल किसी सोच में डूबी हुई है जब से कमरे में आई है वो समझ गया उसके मन में कोई बात चल रही है.
चेतन- क्या हुआ तुम किस सोच में डूबी हुई हो, क्या जो भी हुआ वो तुम्हे पसंद नहीं आया?
चंचल- वो बात नहीं है जी.
चेतन- फिर क्या बात है?
चंचल- मुझे तुम्हे कुछ बताना है,
चेतन- क्या बताना है बताओ.
चंचल- मैंने तुमसे एक बात छुपाई है और वो मुझे मन hi मन कचोट रही है.
चेतन आगे खिसका और चंचल को बाहों में भर के बोलै- अरे ऐसी क्या बात है जो मेरी प्यारी रानी को परेशां कर रही है.
चंचल- जी बात ये है की....
और फिर चंचल ने अपने और अपने ससुर यानि चेतन के पिता के बीच की साडी सच्चाई चेतन को बतादि, जिसे चेतन चुप होकर सुनता रहा.
चंचल- यही सब था जो मैंने तुमसे छुपाया, मैं बताना चाहती थी पर हिम्मत hi नहीं जूता पति थी, पता नहीं था तुम्हारी क्या प्रतिक्रिया होगी...
चेतन कुछ नहीं बोलै और चुपचाप कुछ सोचता रहा,
चंचल चेतन की ख़ामोशी से घबराने लगी
चंचल- जी चुप क्यों हो अगर मुझसे गुस्सा हो तो बताओ, गुस्सा करो चिल्लाओ मुझ पर.
ये कहते हुए चंचल का गाला भर आया और उसकी आँखें छलक पड़ी,
चेतन ने जब ये देखा तो उसे बाहों में भर लिए और उसे पुचकारते हुए चुप करने लगा...
चेतन- ऐ चुप चुप बस चुप हो जाओ. ऐ पागक
चंचल- हमने तुम्हारे साथ धोखा किआ है...
चेतन- पहले चुप एक दम चुप और हमारी बात सुनो, देखो अगर हम आम पति पत्नी होते और फिर ये होता तो शायद हमें गुस्सा आता भी पर आज जो कुछ हुआ, उससे पहले जो हम लोग बातें कर चुके थे, यहाँ तक की तुमने मुझे रिमझिम के साथ और मैंने तुम्हे रमन के साथ चुदाई करने की मंजूरी भी दे दी थी.. साथ hi आज तुम रमन से चूड़ी, पंकज से चूड़ी तो इसके बाद इसका क्या बुरा लग्न..
चंचल- हाँ पर पापाजी के साथ तो नहीं बोलै था न.
चेतन - तो क्या हुआ पहली बात पापा ने hi शुरुआत की उन्होंने hi उकसाया तो िस्मर तुम्हारी गलती कैसे हुई, और दूसरी बात मुझे बुरा नहीं लग रहा इस बात का बिलकुल भी और यकीन न आये तो मेरे लुंड को देखो,
चंचल ने उसके लुंड की और नज़र डाली जो की बिलकुल सख्त हो कर खड़ा था,
चेतन- देखा तुम्हारे और पापा की चुदाई की बात सुनकर मेरा ये हाल हो गया है, ये तो रमन से तुम्हे चुड़ते देखने से भी ज़्यादा उत्तेजित करने वाला था, ससुर बहु की चुदाई.
चंचल- तुम भी न. बड़े वो हो, बोल नहीं रहे थे मैं तो दर गयी थी.
चेतन- अरे वो तो मैं चुप इसलिए था की मैं कप्लना करने लगा था.
चंचल- सच में जी तुम्हे मुझे और पापाजी की बात सुनकर इतनी उत्तेजना हुई..
चंचल ने चेतन के लुंड को मुठियाते हुए कहा..
चेतन- और क्या तुम खुद hi महसूस कर रही हो.
चंचल- अभी कहाँ महसूस तो अब करुँगी.
ये कहकर चंचल उठी और चेतन के ऊपर आकर उसके लुंड को गांड के छेड़ पर लगाया और धीरे धीरे पूरा अंदर ले लिए और हलके हलके उछाल कर अपनी गांड मरवाने लगी.
चेतन- उह्ह्ह अह्ह्ह्ह लगता है अभी मन नहीं भरा तुम्हारा.
चंचल- तुम्हारे खड़े लुंड को क्यों बेकार जाने दूँ, इससे ाचा मेरी गांड की खुजली मिटाये.
चेतन- अह्ह्ह्ह तुम्हारी गांड कितनी भी मारो मन नहीं भरता..
चंचल- स्स्स्सह्हह्हहग जी सुनो मुझसे एक वडा करूऊ.
चेतन- कैसा वादा?
चंचल- यही की तुम्हे मौका मिला तो तुम किसी को भी छोड़ने से पीछे नहीं हटोगे चाहे वो कोई भी हो..
चेतन- तुम्हे ये क्यों लगता है की मैं छोड़ने का मौका छोड़ दूंगा.
चंचल- नहीं वडा करो, की अगर मौका मिले तो तुम छोड़ोगे ज़रूर चाहे वो तुम्हारी माँ hi क्यों न हो.
माँ का ज़िक़र सुनकर चेतन को एक बार फिर से वही सिरहन हुई,
चंचल- बोलो..
चेतन- वादा,
चेतन ने मुस्कुराते हुए कहा,
चंचल- और एक बात और.
चेतन - क्या?
चेतन ने नीचे से झटके उसकी गांड में मरते हुए पुछा?
चंचल- मैं चाहती हूँ तुम मेरी अम्मा को छोड़ो,
चेतन ये सुन कर चौंक गया..
चेतन- ये क्या बोल रही हो तुम? होश में तो हो?
चंचल उसके लुंड को गांड में लिए हुए रुक गयी.
चंचल- हाँ, मैं बिलकुल होश में हूँ और अगर मैं अपने ससुर से छुड़वा सकती हूँ तो तुम अपनी सास को क्यों नहीं छोड़ सकते हिसाब बराबर तभी होगा.
चेतन- अरे पर ऐसा नहीं है हिसाब बराबर करने की ज़रुरत hi नहीं है.
चंचल- ाचा तुम्हे मेरी अम्मा पसंद नहीं है क्या? उनका बदन ाचा नहीं लगता?
चेतन अब रिमझिम की बातों को सुन अपनी सास के बारे में सोचने लगा और ये भी वो मंटा था की चंचल को अपना कामुक बदन अपनी माँ से विरासत में मिला है, और सच में उसकी सास बड़ी कामुक दिखती थी और अगर उसे छोड़ने को मिले तो कौन hi इंकार करेगा
चेतन- ाचा लगता है फिर भी..
चंचल- तुम नहीं चाहते तुम्हारा लुंड मेरी अम्मा की गांड में हो, तुम उस छूट को छोड़ो जिसमे से मैं निकली हूँ, उनके मुँह में अपना लुंड घुसकर छोड़ो, उनकी चूचियों को चूसो, उन्हें नंगा कर उनके चूतड़ों को मसलते हुए उनकी गांड मारो..
बस इतना बहुत था चेतन के लिए
चेतन- अह्ह्ह बस अह्ह्ह्ह तुम्हे हो क्या गया है आज,
चंचल- बताओ छोड़ोगे अपनी सास को?
चंचल ने अपनी गांड मरवाते हुए कहा..
चेतन मुस्कुराया और बोलै- बिलकुल ऐसा लगता है तुम्हारा hi थोड़ा भरा रूप हैं वो कौन नहीं छोड़ना चाहेगा. पर इसका मतलब ये तो नहीं न की वो मुझसे छुड़वा hi लें. वो इसके लिए कभी नहीं मानेगी.
चंचल- क्यों नहीं मानेगी हम दोनों मिलकर कोशिश करेंगे तो उन्हें मन्ना पड़ेगा,
चेतन- ाचा ठीक है.
चेतन भी अपनी सास के बारे में सोच अब उत्सुक हो चूका था.
चंचल- और न माने तो जबरदस्ती झुका के पेल देना रंडी को..
चंचल ने उछालते हुए कहा.
चेतन चंचल से उसकी माँ के लिए रंडी शब्द सुन कर बेहद उत्तेजित हो गया उसने उसी उत्तेजना वश चंचल को पकड़ कर अपने ऊपर से उठाया और पलट कर घोड़ी बना दिया और फिर से उसकी गांड में लुंड घुसा कर तेज़ी से मरने लगा

चेतन- ले साली रंडी ऐसे hi तेरी माँ की मोती गांड भी मरूंगा..
चंचल- अह्ह्ह्ह मारो न अह्ह्ह्ह एयर तेज़.
चेतन- साली रंडी माँ की रंडी बेटी.... अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह...
चेतन तेज़ी से पत्नी की गांड मरता हुआ बड़बड़ा रहा था और चंचल अपनी गांड मरवाते हुए उसकी बातें सुन और आगे के बारे में सोच मुस्कुरा रही थी...
इधर रिमझिम रमन अपने कमरे में आये और ख़ुशी को सोता पाया तो उसके चेहरे को देख मुस्कराहट आ गयी पर फिर खुद भी बिस्तर पर लेट गए सोने के लिए.
रमन- यार मैं बहुत खुश हूँ जैसा सोचा था उससे भी ाचा हुआ सब.
रिम- हाँ मुझे तो यकीन नहीं हुआ की जीजी और भैया इतनी आराम से मान गए और कितनी उत्सुकता से और ख़ुशी से उन्होंने सब किआ.
रमन- हाँ यार मज़ा hi आ गया.
रिम- मज़ा तो आना hi था न तुम्हे अपनी साली और भाभी की एक साथ मिल गयी.
रमन- ाचा तुम्हे भी तो दो दो मिले एक साथ या कहूं तीन तीन, मज़ा तो तुमने भी खूब लूटा.
रिम- अरे मैं सोच रही हूँ चेतन भैया इतनी जल्दी मान गए तो हमें उनके लिए कुछ और भी करना चाहिए.
रमन- हाँ करना चाहिए पर क्या? सब तो दे चुकी हो गांड छूट अब और क्या डौगी?
रिम - मेरी गांड और छूट से भी ज़्यादा मज़ेदार कुछ.
रिमझिम ने मुस्कुराते हुए कहा..
रमन- तुम्हारे शैतानी मुस्कान देख कर लग रहा है कुछ खतरनाक hi सोचा है तुमने..
रिमझिम इस बात पर मुस्कुरा दी...
चोदामपुर
जहाँ सरलपुर में सब शांत होकर सोने चले थे वहीं चोदामपुर में नीलेश का परिवार सोने की सोच भी नहीं रहा था, और आज तो इस घर के नज़ारे hi कुछ और थे,
शालू बिस्तर के बगल में पड़ी कुर्सी पर बिलकुल नंगी बैठी थी और अपनी टंगे फैलाकर अपनी छूट में दो उंगलियां अंदर बहार कर रही थी, पर उसकी निगाहें सामने के दृश्य पर सम्मोहित सी ठहरी हुई थी, और सम्मोहित हो भी क्यों न सामने का दृश्य hi कुछ ऐसा था साथ hi जो भी हो रहा था ये उसी की इच्छा थी देखने की..
बिस्तर का दृश्य कुछ ऐसा था की अनुज सबसे नीचे था उसके ऊपर उसकी रसीली कामुक माँ सभ्य थी और अनुज का लुंड अपनी गांड में लिए हुए थी वहीं माँ की और अनुज की टैंगो के बीच कर्मा था जिसका लुंड माँ की छूट में था और दोनों भाइयों के लुंड ले में माँ की छूट से अंदर बहार हो रहे थे, वहीं बगल में बिस्तर के नीलेश खड़े थे जिनका मोटा लुंड सभ्य के मुँह में था और वो अपने दोनों बेटों को अपनी पत्नी को छोड़ता हुआ देख उससे लुंड चुसवा रहे थे सभ्य के तीनो छेड़ उसके परिवार के तीनो मर्दों से भरे हुए थे और तीनो मिलकर सभ्य को टिहरी चुदाई का सुख दे रहे थे

दरअसल ये इच्छा शालू की थी जो की अपनी जीजी को तीनो से एक साथ चुड़ते हुए देखना चाहती थी और जो अभी अपनी इच्छा को पूरी होते देख सिसकियाँ भर रही थी साथ hi सबको प्रोत्साहित भी कर रही थी,
वैस्व तो सभ्य को छोड़ने के लिए किसी को भी प्रोत्साहन की ज़रुरत नहीं थी.
अनुज नीचे से माँ की कासी हुई गरम गांड में धक्के लगते हुए सिसक रहा था उसे माँ की छूट में अपने भाई का लुंड घिसता हुआ महसूस हो रहा था जो की उसकी उत्तेजना और बढ़ा रहा था.
अनुज- हांण अह्हह्ह्ह्ह माआहहह किटमि बार भीईई गांड मारलू तुम्हारी अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हर बार पिछली बार से ज़्यादा मज़ा आता है..
नीलेश- सही कह रहा है बेताआहःहः हम तो ये सालों से महसूस कर रहे हैं जब तुम पैदा भी नहीं हुए थे तबसे.
कर्मा- आह्हः जहाँ से पैदा हुआ था, जिस भोसड़े से निकला था आज उसी को छोड़ रहा हूँ वो भी तुम्हारे साथ मिलकर पापा आह्हः मज़ा आ रहा है.
उधर से शालू भी बोली- अह्ह्ह्हह यही तो मैं देखना चाहती थी जीजी को एक साथ तीन तरफ से चुड़ते हुए देखना अह्ह्ह्हह छोड़ो अपनी रैंड माँ को बच्चों और तेज़...
सभ्य की सिसकियाँ नीलेश के लुंड पर घुट रही थी, साथ hi उसकी छूट और गांड में लगातार उसके बेटों के लम्बे लुंड उसे आनंद की एक अलग धरा में बहा रहे थे.
नीलेश- सही कहें आह्हः बच्चों तो हमने भी कई बार सोचा था की कैसा लगेगा अगर ऐसा हो तो की तुम दोनों और हम मिलकर एक साथ तुम्हारी माँ को छोड़ें तो.. और सच बताएं तो जैसा सोचा था उससे भी ज़्यादा मज़ा आ रहा है...
कर्मा- हानंन्न पापा मैं भी बहुत सोचता था पर ऐसेआह्ह्हह्ह्ह्ह मज़ाआह्ह्ह्हह्ह कभी नहीं आया,
अनुज- हांण अह्हह्ह्ह्ह माआहहह ओह्ह्ह्हह्ह माँ जी की गांड जैसाः कुछ नाहीई..
शालू- अब बातें काम करो और माँ की ऐसी चुदाई करो जैसी उसे पसंद है.
शालू की बात तीनो ने मानी और फिर सभ्य की जो भयंकर चुदाई तीनो ने मिलकर की उसे देख कर शालू भी एक बार झाड़ गयी वहीं सभ्य तो कई बार झड़ी पर बच्चे थे रुकना hi नहीं छह रहे थे और तब जाकर रुके जब उनके लुंड ने अपनी पिचकारियां अपनी माँ की छूट और गांड में छोड़ दी वहीं नीलेश ने भी सभ्य को अपना रास पीला दिया,
ऐसी चुदाई के बाद सभ्य तो ढेर हो गयी वहीं शालू उसके छेदों को चाटने चूमने में लग गयी.. और अपने भांजो के रास को उसके छेदों से निकल कर चाटने लगी,
खैर शाम हो चली थी तो और सब काफी देर से चुदाई कर रहे थे इसलिए इस दौर को अभी रोका गया क्यूंकि जानवरो को खाना पीना देना था, तो सभ्य को आराम करता छोड़ शालू घर के काम में लग गयी वहीं तीनो मर्द बहार के काम निपटने चले गए,
खेत के काम निपटा कर कर्मा लौट hi रहा था की उसका फ़ोन बजा...
जारी रहेगी...