Incest RAKSHASH - Page 9 - SexBaba
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Incest RAKSHASH

अपडेट-28




भवर सिंह और काम्य शक्ति के बारे में जान क्र hi पागल हुए जा रहे थे,

भवर सिंह- राजगुरु उस शक्ति की खोज कीजिये, जल्दी से जल्दी और अपने सबसे विश्वासपात्र लोग लगाइये, मुझेये शक्ति चाहिए, हो न हो ये वही शक्ति ह जिसके बारे में दादा जी

काम्य- महाराज हमे खुद सात्विक जी के साथ उस शक्ति को ढूँढना चाहिए,

राजगुरु- जैसा आप कहे महाराज, मैं तैयारी करता हु, आज का दिन तो निकल रहा ह, कल सुबह हम तलाश शुरू करेंगे,

ये सब शक्ति खोजने की बात कर रहे थे और सात्विक और भौमिक एक दूसरे को देख रहे थे क्योकि उन्हें पता था की यहाँ की शक्ति तो पहले hi देव के अंदर ह,

सात्विक- हमे अब आज्ञा दीजिये, मैं कुछ देर आराम करना चाहता हु बहुत लम्बा सफर तय करके आया हु,

सात्विक और भौमिक वह से निकल गए और अपने घर पहुंच गए,

पहले तो दोनों के परिवार बहुत खुश हुए, बड़े प्रेम से मिले, फिर दोनों भाई एक कमरे में बैठ गए,

भौमिक- ये सब क्या ह सात्विक तू उस शक्ति की खोज में क्यों निकला ह,

सात्विक- पहले तुम ये बताओ क्या तुम्हे पता था वो शक्ति देव के अंदर ह,

भौमिक- पहले नहीं पता था, लेकिन जब मैं साधना में गया और मेरे ज्ञान में वृद्धि हुई तब मुझे पता चला की ऐसी 3 शक्तिया हैं, और फिर अहसास हुआ की जिस रौशनी में हम गए थे वैसी hi रौशनी की बात तुमने देव को ढूढ़ते वक़्त कही थी, तो मुझे लगा कही देव भी ऐसी hi शक्ति के प्रभाव में तो नहीं आ गया, मैं महल में आया तो देव को देखा और भी इतनी ताकत के साथ, और उसने तुम्हारी छोड़ी हुई शक्ति को सेह लिया तो मुझे अहसास हुआ की उसी के अंदर वो शक्ति ह,

सात्विक- तो क्या देव के अंदर भी हमारे जैसा ज्ञान आया ह,

भौमिक- मुझे नहीं लगता, मेरे हिसाब से ये शक्ति अलग तरह से काम कर रही ह, हम दोनों के पास ज्ञान था तो उससे हमारा ज्ञान बहुत अधिक बढ़ गया ह और कुछ दिव्या शक्तिया आई हैं, मुझे लगता ह देव के पास ताकत आई ह,

सात्विक- सही कहा, क्या तुम जानते हो वो तीसरी शक्ति कहा ह,

भौमिक- नहीं अभी नहीं जनता,

सात्विक- हम दोनों भाई हैं, हमे एक दूसरे का साथ देना चाहिए, और देव तो तुम्हे गुरु मंटा ह वो तो हमारे साथ होगा hi, हम इस धरती के सबसे शक्तिशाली लोग होंगे, अगर हम साथ मिल जाये तो पूरी धरती पैर राज कर सकते हैं,

सात्विक की बातो में महेत्वकंषा दिखाई दे रही थी, भौमिक कुछ बोलने वाला था तभी राजगुरु भी वह आ गए और अपने भाइयो से लिपट गए,

राजगुरु- तुम दोनों के बिना हम कितने अकेले हो गए थे,

सात्विक- अब आप अकेले नहीं हैं, आपके सेराव शक्तिशाली भाई आपके पास हैं,

भौमिक- भैया ये भवर सिंह अपने दादा के बारे में क्या बोल रहा था, जिसे बताते हुए वो चुप हो गया,

राजगुरु- भवर सिंह के दादा बहुत शक्तिशाली और महँ राजा थे, बहुत hi दयावान और ज्ञानी थे, वो हमेशा एक बात बोलै करते थे की हमारा राजय यहाँ बसाया गया ह उसके पीछे बहुत बड़ा कारन ह, वो पूरी धरती के सभी राज्यों का इतहास लिखवाते थे और कहते थे दक्षिण और उत्तर दोनों पैर हमेशा नजर बना क्र रखना, उनके हिसाब से उनके पूर्वजो को भगवन के अवतार ने वह बसने को कहा था, महाभारत के युद्ध के बाद उन्हें यहाँ बसाया गया किसी चीज की रक्षा करने के लिए, भवर सिंह के दादा बोलते थे की हमारे वंश में एक योद्धा आएगा जो संसार का भला करेगा, जो अमरत्व को चखेगा, और उनका भरोसा था की वो भवर सिंह होगा, इसलिए भवर सिंह आज तक अमरत्व को धुंध रहा ह,

सात्विक और भौमिक समझ गए की भवर सिंह के दादा को पता था इस शक्ति के बारे में, हो सकता ह उन्हें जगह न पता हो, क्योकि वो आज तक किसी को नहीं पता,

सात्विक- मैं भवर सिंह को वो शक्ति दिला सकता हु लेकिन उसे वचन देना होगा शक्ति मिलने के बाद वो हमारा साथ देगा,

राजगुरु- वो शक्ति पाने के लिए कोई भी वचन दे देगा, कुछ भी कर जायेगा,

सात्विक मुस्कुरा दिया, लेकिन भौमिक के दिमाग में शंका उतपन्न हो गई, क्योकि सात्विक का व्यव्हार बदल चुक्का था,

रात हो चुकी थी, काम्य और भवर सिंह अपने कमरे में जश्न मन रहे थे, शराब पि रहे थे,

काम्य- आप कामयाब हो गए,

भवर सिंह- है एक बार वो शक्ति हमे मिल गई तो फिर राजवीर हमारे किसी काम का नहीं, वो दिन उसका आखरी दिन होगा, बहुत जिन्दा रख लिया उसे,

काम्य- क्या सच में मर डोज उसे,

भवर सिंह- तुम्हारे दिल में अभी भी उसके लिए कोई जगह ह क्या,

काम्य- नहीं वो ऐसी कोई बात नहीं ह,

भवर सिंह- उसे मरना hi होगा, बस एक वही ह जिसे सब कुछ पता ह, मुझे आज तक समझ नहीं आया की उसका परिवार इस सब में कैसे शामिल हो सकता ह,

काम्य- उसका परिवार हमेशा से हमारे परिवार का रक्षक रहा ह, अगर आप जल्दबाजी न करते तो वो भी हमारा रक्षक होता और उससे सब कुछ उगलवाया जा सकता था,

भवर सिंह- मैंने उसे इतना अच्छा अवसर दिया था, वो हमारे कितने करीब आ सकता था, लेकिन वो मन hi नहीं, लेकिन देखो फिर भी मुझे सब कुछ मिल गया, निहारिका भी मेरी हो गई और अब वो शक्ति भी मेरी हो जाएगी,

काम्य- उस शक्ति को मिलने के बाद मुझे मत भूल जाना,

भवर सिंह- ये कभी नहीं हो सकता,

ये दोनों अपनी बातो में लगे थे, वही भौमिक इतने समय बाद वापस आकर अपने परिवार के साथ बैठने की जगह अपने कमरे में कुछ खोज रहे थे, उन्होंने अपनी साडी किताबे फैलाई हुई थी, और खुद से hi बड़बड़ाये जा रहे थे,

भौमिक खुद से hi- मुझे इसका राज पता करना होगा, इन शक्तियों के बनने का कुछ तो कारन होगा, भगवान् ऐसे hi कुछ नहीं करते, कुछ तो कारन होगा, किसी ने कही तो जीकर किया होगा, कोई अब तक इस सबके बारे में क्यों नहीं जनता था, और महाराज सूर्यभान (भवर सिंह के दादा) को इस सब के बारे में कैसे पता, लगता ह भैया को और भी कुछ पता ह, और देव इस सब में कैसे शामिल, अगर वो शक्ति भवर सिंह को मिलनी थी तो देव को कैसे मिली, कुछ तो गड़बड़ ह, कुछ तो अधूरा ह, मुझे hi पता करना होगा, सात्विक के इरादे ठीक नहीं लग रहे, उससे पहले मुझे सब जानना होगा, भौमिक फिर से अपने काम में लग गए,

वही सूरज ज्वाला और अभिजीत बंधे हुए ठण्ड से ठिठुर रहे थे,

अभिजीत- कहा फास गए, मुझे तो चारो तरफ से अपनी मोत hi मोत दिखाई दे रही ह,

ज्वाला- तुम दोनों के चक्कर में मैं भी फास गया, वो देव हमे जिन्दा नहीं छोड़ेगा, अगर छोड़ दिया तो पिता जी मार देंगे,

सूरज- कुछ नहीं होगा, हम अभी मोत के मुँह से बहार आये हैं, अगर देव को हमे मरना होता तो कबका मर चुक्का होता, मैंने उसकी आँखों में कुछ अलग hi देखा था,

अभिजीत- लेकिन ये तीनो लड़किया तो घर जाकर सब बताएंगी, तब क्या होगा,

सूरज- हमारे पास एक hi तरीका ह, फ़िलहाल उनके पैरो में गिर क्र मांफी मांगनी होगी, और कुछ समय के लिए शांत रहना होगा, यहाँ की बात को भूलना होगा, जब तक सब शांत नहीं हो जाता,

ज्वाला- अगर उन्होंने माफ़ नहीं किया तो,

सूरज- माफ़ न भी करे बस घर जाकर न बताये तो भी हमारा काम बन जायेगा, जब सब शांत हो जायेगा उसके बाद हम सबको देव और इन तीनो के बारे में बता देंगे,

अभिजीत- अगर हम इनसे पहले hi बता दे की इन लड़कियों और देव के बिच कुछ गदद चल रही ह,

सूरज- अभी ये संभव नहीं ह, हमारे खिलाफ सबूत ज्यादा हैं, और हमसे सवाल होंगे की हम इन्हे यहाँ लेकर क्यों आये, और वो प्रताप सिंह के बेटे वो भी यहाँ आ गए थे, तो हमारे खिलाफ सबूत ज्यादा हैं, पहले सब शांत होने दो,

तीनो भाई अभी बी योजना बनाने में लगे थे, दूसरी तरफ तीनो भेने दुखी थी, सदमे की हालत में थी, दसिया खाना बना क्र ले आई थी लेकिन किसी का मन नहीं था खाने का,

तभी देव पूरा निरिक्षण करके वापस आ गया,

देव- तुम लोगो ने खाना नहीं खाया,

अमिता- हमे साँस लेने का भी मन नहीं कर रहा खाना कैसे खाया जायेगा,

देव- समय कभी किसी दर्द या तकलीफ के लिए नहीं रुकता, वो आगे बढ़ता रहता ह, ऐसे hi इंसान को बनाया गया ह, कोई दर्द या तकलीफ इंसान को नहीं रोक सकती, उसे आगे बढ़ना hi होता ह, आगे बढ़ने वालो के लिए उसकी तकलीफ hi उसकी ताकत बन जाती हैं, और बैठ क्र सोच क्र रोने वालो के लिए वही तकलीफ उनके पैरो की बेड़िया बन जाती ह,

सोमिया- तुमने और निहारिका माँ ने ये सब कैसे झेल लिया, तुम तो फिर भी मर्द हो लेकिन निहारिका माँ ने कैसे ये सब सहा होगा, उन्हें कितनी तकलीफ हुई होगी, आज हम इस बात समझ सकते हैं, हमारे सामने तो फिर भी अपने थे लेकिन उनके सामने तो पूरा राजय था,

देव- उसी तकलीफ ने उन्हें इतना मजबूत बना दिया की आज पूरा राजय भी उन्हें कमजोर नहीं कर सकता,

अक्षरा- तुम उनके साथ थे न इसलिए वो ये सब सेह गई,

देव- मैं तो तुम सबके साथ भी खड़ा हु, तो दिखाओ तुम ये सहने के लिए कितनी तैयार हो, क्या तुम इतनी कमजोर हो की ऐसे गिरे इंसानो की हरकतों से खुद को तकलीफ डौगी,

अक्षरा ने अपने आंसू पोछे,

अक्षरा- अगर तुम साथ हो तो फिर मुझे कोई दर्द दर्द नहीं दे सकता,

अमिता और सोमिया में भी जोश आ गया,

देव- तो आओ पहले खाना कहते हैं,

फिर सबने खाना खाया,

अमिता- अब उन तीनो का क्या करना ह,

देव- फिलहाल शांत रहना ह, उन्हें सही समय आने पैर सबक सिखाया जायेगा,

सोमिया- मेरा मन नहीं कर रहा उनकी शकल भी दुबारा देखु, उनके सामने जाने की हिम्मत तक नहीं होगी मेरी तो,

देव- ये झिझक उनके अंदर होनी चाहिए तुम्हारे नहीं, तुम बेझिझक उनके सामने जाना, ताकि वो शर्म से सर झुका ले,

अक्षरा- उन्हें सजा तो मिलनी चाहिए,

देव- सजा तो मैं उन्हें अब भी दे सकता हु, लेकिन फिर पूरा राजय मेरे और तुम्हारे खिलाफ खड़ा हो जायेगा, कोई इनकी गलती नहीं बताएगा, इनके किये की सजा सबके सामने दी जाएगी, और ऐसी सजा मिलेगी की इनके जैसा कोई भी इंसान ऐसी हरकत करने से पहले 100 बार सोचेगा, और सजा तो तुम सबने इन्हे दे hi दी ह,

देव की बात से तीनो शर्मा गई,

अक्षरा- वो सजा तो ये रोज भुगतेंगे, रोज देखेंगे,

देव बस मुस्कुरा दिया,

रात में चारो एक hi कमरे में एक hi बिस्टेर पैर लेट गए, और ऐसे hi सोचते सोचते सो गए, सुबह जब आँख खुली तो सब एक दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे, अमिता देव से बिलकुल चिपक क्र लेती हुई थी, और सुबह के समय मर्द का लुंड पुरे सवाब पैर खड़ा होता ह, ये सभी जानते hi हैं, वैसे hi देव का लुंड खड़ा था और अमिता की गांड पैर पूरा दबाव बना रहा था, पीछे से अक्षरा की चूचिया देव की कमर से चिपकी हुई थी, और उसका पेअर देव के पेअर पैर रखा था, अक्षरा के पीछे सोमिया थी, सबसे पहले सोमिया की आँख खुली,

उसने अक्षरा की हालत देखि तो उसे जगाया, अक्षरा के जागते hi देव की आँख भी खुल गई, और आंख खुलते hi देव को अहसास हुआ की उसका लुंड अमिता की गांड में घुसा जार है ह, और उसका हाथ अमिता के चूचियों के बिलकुल निचे ह, वो थोड़ा सा पीछे हुआ और उठा क्र बहार जाने लगा तो उसके खड़े लुंड का उभर अक्षरा और सोमिया को भी दिख गया, दोनों ने शर्मा क्र सर निचे कर लिया,

देव के बहार जाते hi अमिता एक दम उठ कर बैठ गई,

अमिता- कामिनियों कुछ देर और नहीं लेती रह सकती थी क्या, कितना मजा आ रहा था,

अक्षरा और सोमिया का मुँह खुला रह गया,

सोमिया- क्या तू उसके हथिया का मजा ले रही थी, कामिनी कही की,

अमिता- यार शरीर में इतनी गर्मी हो रही ह की ऐसा लग रहा ह की कोई बस निचोड़ दे पुरे शरीर को,

अक्षरा- ये रात से hi हो रहा ह न, जब उन कमीनो ने हमे नशे की दवाई दे दी थी,

सोमिया- हो सकता ह उन्होंने कामुकता की दवाई भी दी हो, क्योकि मेरे शरीर में भी वैसा hi हो रहा ह,

अमिता- लेकिन मजा बहुत आ रहा ह,

तभी दसिया आ गई,

दासी- राजकुमारी हमारे लिए क्या आदेश ह, अब हमे क्या करना ह,

अमिता- क्या उन्हें कोई देखने गया की वो कैसे हैं,

दासी – नहीं राजकुमारी उनके पास कोई नहीं गया, न hi उन्हें खाना दिया गया था,

सोमिया- सही किया,

अक्षरा- देव को आने दो फिर बात करते हैं, लेकिन तुम तइयारी करके रखो हम जल्दी hi यहाँ से निकलनेगे,

कुछ देर बाद देव आया और उसने सबको समझा दिया की क्या कहना ह, फिर वो तीनो भाइयो के कमरे में गए जो अभी भी बंधे पड़े थे,

सबको अपने सामने देख क्र वो माफ़ी मांगने लगे, रोने का नाटक करने लगे,

अमिता- ये नाटक बंद करो, इस नाटक से तुम्हे माफ़ी नहीं मिलने वाली, मन तो करता ह यही तुम तीनो की जान ले लू, लेकिन क्या करे तुम लोग रिश्ता भूल सकते हो हम नहीं, हो तो हमारे भाई hi,

सोमिया- हम यहाँ से जा रहे हैं, तुम लोग अगर बेशरम हो तो महल में आ जाना,

दसियो ने तीनो को खोल दिया, और वह से निकल गए, तीनो भाइयो ने भी कपडे पहने और पीछे पीछे चल दिए,

वही दूसरी तरफ प्रताप सिंह में राजय में हाहाकार मचा हुआ था, प्रताप सिंह के दो बेटे और मर चुके थे, और ये बात पुरे राजय में फ़ैल गाइट hi की केवल एक आदमी ने इतने सैनिक और दो राजकुमारों को मर दिया तो सभी में दहशत फ़ैल गई,

प्रताप सिंह- नहीं नहीं नहीं ये नहीं हो सकता, मेरे शेर जैसे बेटो को कोई नहीं मर सकता, मेरे बेटे नहीं मर सकते, मेरे बेटे नहीं मर सकते,

प्रताप सिंह पागल सा हो गया था, वो बदहवास सा कुछ भी बड़बड़ाये जा रहा था, पुरे राजय में मातम था, प्रताप सिंह का तो सब कुछ उजाड़ चुक्का था, उसके 4 बेटे मरे जा चुके थे 1 बीटा जिंदगी और मोत की लड़ाई लड़ रहा था, और उसकी बेटी लापता थी, जिसका अब तक कोई पता नहीं लगा सका था, पूरी रात महल में मातम रहा, सुबह उसके बेटो का अंतिम संस्कार किया था, संभु जब से वापस आया था वोट क कमरे में छुपा बैठा था, वो दर से कैंप रहा था, उसने अपने सामने खुद यमराज को देख लिया था,

रेणुका जो अब तक अपने उस अनजान प्रेमी को धुंध रही थी, वो अब असली दुनिया में लोट आई थी, उसकी आँखों से खून बरस रहा था, अंतिम संस्कार के बाद पुरे राजय में शोक मनाया जा रहा था,

इधर देव तीनो बहेनो और दसियो को लेकर वापस महल में आ गया, सभी के कपड़ो पैर खून hi खून था, जब वो राजधानी के दरवाजे पैर पहुंचे तो सेनिको ने दौड़ क्र दरवाजा खोला सबको खून में भीगा देख वह सभी चौंक गए थे, तभी एक सैनिक तुरंत महल की तरफ दौड़ पड़ा और उसने महल में खबर दी और बताया की राजकुमार देव और तीनो राजकुमारिया आ रहे हैं, उसने साडी बात बताई,

ये जानकारी सुनकर भवर सिंह काम्य सौमित्र और अमरावती राजगुरु सब उस तरफ दौड़ पड़े, जब सब उनके सामने पहचुहे तो उनका रूप देख क्र कैंप उठे,

भवर सिंह- मेरे बेटे कहा ह,

काम्य- मेरा बीटा कहा ह,

सौमित्र और अमरावती का भी यही सवाल था- मेरा बता कहा ह,

अपने माँ बाप के मुँह से ये सुनकर तीनो लड़को की आँखे भर आई, उन्हें अहसास हुआ की उनके माँ बाप के लिए उनकी क्या अहमियत ह,

देव- वो आ रहे हैं पीछे पीछे,

ये सुनकर सभी ने रहत की साँस ली,

तभी वह निहारिका और रीवा आ गयी,

निहारिका- ये सब क्या हुआ, तुम लोग ठीक हो न, बच्चियों तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न,

निहारिका के मुँह से अपनी फ़िक्र सुनकर तीनो लड़किया घोड़ो से उतर क्र निहारिका से लिपट गई,

तीनो एक साथ- maaaaaaaaaa

निहारिका ने भी उन्हें गले से लगा लिया, इससे काम्य अमरावती और सौमित्र जल भून गई,

राजगुरु- ये सब क्या हुआ ह राजकुमार, आप सब इस हालत में कैसे, किसी ने हुम्ला किया था क्या,

देव- जी है राजगुरु,

भवर सिंह- किसने किया हुम्ला किसकी हिम्मत हुई मेरे बच्चो की तरफ आँख उठाने की,

तभी पीछे से तीनो भाई भी आ गए, उनके आते hi उनकी माये दौड़ क्र उनसे लिपट गई,

काम्य- तू ठीक ह न बीटा, तुझे कुछ हुआ तो नहीं,

वही हाल सौमित्र और अमरावती का भी था,

भवर सिंह- किसने किया हुम्ला, किसकी हिम्मत हुई हमारे परिवार पैर हुम्ला करने की,

देव कुछ बोलने वाला था लेकिन उससे पहले सूरज ने डरते हुए बोल दिया- प्रताप सिंह के बेटो ने,

प्रताप सिंह का नाम सुनते hi सब चौंक गए,

भवर सिंह- उसकी इतनी हिम्मत,

अभिजीत- लेकिन हमने उन्हें हरा दिया,

सोमिया- किसने हराया,

सूरज- देव ने, देव ने हम सबको बचाया, और प्रताप सिंह के दो बेटो को मार दिया,

भवर सिंह मुझे साडी बात बताओ,

देव- पहले इन्हे आराम करने दो और खुद को साफ़ करने दो, इन्होने बहुत कुछ झेला ह, वह क्या हुआ मैं बता हु आप सबको,

भवर सिंह- राजगुरु सेना तैयार करो हम उस प्रताप सिंह पैर आक्रमण करेंगे,

कामय- लेकिन हमे तो वह जाना ह, वह जाना ज्यादा जरुरी ह,

भवर सिंह- ठीक ह ठीक ह, तुम सब जाओ कमरे में, आराम करो, हम आराम से बात करेनेगे, और देव तुम सभा में आओ,

सभा में सब बैठे हुए थे,

राज गुरु- अब बताओ राजकुमार क्या हुआ था,

देव- हमारे राजय में प्रताप सिंह के जासूस लगे हुए हैं, और वो इस महल के अंदर भी हैं,

भवर सिंह- ये क्या बोल रहे हो,

देव- राजकुमार और राजकुमारियों के यहाँ से निकलने की खबर प्रताप सिंह को थी, और राजकुमारों ने अपने घूमने की जगह भी बदल दी थी, उसकी जानकारी भी उन्हें थी, वो लोग उस पहाड़ो वाले महल में गए थे,

कमाया- लेकिन वह जाना तो मन ह

देव- ये बात आप उनसे पूछना वो वह क्यों गए, लेकिन प्रताप सिंह के बेटो ने हुम्ला कर दिया,

भवर सिंह- लेकिन तुम्हे कैसे पता चला,

देव- मैंने प्रताप सिंह की सेना पर नजर रखवाई हुई ह, जब उसकी सेना हमारे राजय की सीमा में घुसी तो मुझे शक हुआ इसलिए मैं वह पहुंच गया,

सौमित्र- ये तुम्हारा एक और अहसान हो गया हम पैर,

अमरावती- है देव तुमने दूसरी बार हमारे बेटो की जान बचाई ह,

देव- वह आपकी बेतिया भी थी महारानी, और वो दरिंदे उनके साथ दुराचार करने वाले थे,

भवर सिंह- तुमने सच में बहुत अच्छा काम किया, हम तुम्हे इनाम देना चाहते हैं,

देव- मैं इनाम के लिए काम नहीं करता,

इतना बोल क्र देव बहार निकल गया,

भवर सिंह- राजगुरु जल्दी जल्दी प्रताप सिंह के जासूसों की खबर निकालो,

काम्य - राजगुरु इस देव के भी जीतनेय जासूस हैं सबकी खबर निकालिये, ये जासूस रखने सिख गया ह, इसके पीछे भी जासूस लगाओ,

काम्य की ये बात अमरावती और सौमित्र को बुरी लगी, जो इंसान उनके बच्चो को बचा क्र लाया ह उसी के पीछे जासूस लगाए जा रहे थे,

देव सीधा निहारिका से मिलने चला गया था,

इधर कुछ hi देर में पुरे राजय में ये खबर आग की तरह फ़ैल गई की देव ने प्रताप सिंह के दो बेटो को और मार दिया, और उस इंसान तक खबर फ़ैल गई जिसे पता नहीं होना छाइये था, देव ने उस तरफ धयान hi नहीं दिया था, ये बात रेवती के कानो तक पहुंच गई थी, गाओं वाले आपस में चर्चा कर रहे थे की देव ने प्रताप सिंह के दो बेटो को और मार दिया,

रेवती ने जब ये सुना तो वो एक औरत के पास पहुंची,

रेवती- माँ जी ये किस प्रताप सिंह की बात हो रही ह,

औरत- बेटी तू नहीं जानती प्रताप सिंह को, हमारा पडोसी राजय का राजा प्रताप सिंह,

रेवती- उसके बेटो को किसने मार दिया,

औरत- उसके दो बेटो को तो कुछ समय पहले युद्ध में और दो को आज हमारे राजकुमार देव ने मर गिराया,

देव का नाम सुनकर रेवती का दिमाग सुन्न हो गया, और जब उसने सुना की देव ने उसके 4 भाई मार दिए तो वो और बोखला गई,

वो लड़खड़ाते पैरो से घर की तरफ चल दी, उसके पेअर कैंप रहे थे, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था उसके साथ क्या हुआ ह, उसने जो सुना ह वो सच ह या झूट, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, वो आँखों में आंसू लिए सुगंधा के सामने पहुंची, और सीधे उससे एक सवाल पूछ लिया,

रेवती- देव इस राजय का राजकुमार ह

रेवती के सवाल से सुगंधा सकपका गई,

सुगंधा- रेवती मेरी बात सुनो

रेवती- मैं जो पूछ रही हु उसका जवाब दो, क्या देव इस राजय का राजकुमार ह

सुगंधा ने सर झुका लिया और है में सर हिलाया,

रेवती- क्या उसने प्रताप सिंह के 4 बेटो को मार दिया ह

सुगंधा ने घबराते हुए रेवती को देखा, सुगंधा की आँखों में रेवती ने अपना जवाब पढ़ पढ़ लिया, रेवती के कदम पीछे हटने लगे, सुगंधा ने उसे रोकना चाहा लेकिन रेवती ने दौड़ लगा दी, वो रोटी जा रही थी और दौड़ती जा रही थी,

सुगंधा को कुछ समझ नहीं आया वो तुरंत अभेंद्र के पास पहुंची और उसे सब बताया, अभेंद्र तुरंत रेवती के पीछे दौड़ पड़ा, तब तक सुगंधा ने किसी के हाथ देव को खबर भिजवाई,

गाओं के बहार के जंगलो में रेवती भागी जा रही थी, उसे नहीं पता उसे कहा जाना था, वो कोई रास्ता जानती hi नहीं थी, और यही सबके लिए बड़ा दर tha,wo इस जगह से बिलकुल अनजान थी, वो तो अपने hi राजय से अनजान रही थी,

अभेंद्र ने उसे जंगल में पकड़ लिया, सुगंधा भी उसके पीछे दौड़ रही थी,

रेवती- छोड़ दो मुझे जाने दो मुझे,

अभेंद्र- माफ़ करना राजकुमारी मैं आपको नहीं जाने दे सकता, जब तक देव नहीं आ जाते मैं आपको कही नहीं जाने दे सकता,

रेवती- तुम सब मिले हुए हो, तुमने अपराध किया ह, मुझे फसा कर यहाँ ले आया वो देव, मेरे परिवार से मुझे अलग क्र दिया, और यहाँ कैद कर लिया, तुम्हारा राजकुमार अत्याचारी ह, दुराचारी ह, उसने मेरी माँ जैसी महारानी के साथ दुराचार किया ह, मेरे पिता उसे मोत की सजा देंगे,

तभी वह सुगंधा भी पहुंच गई,

सुगंधा- रेवती शांत हो जाओ पहले मेरी बात सुन लो,

रेवती- तुम एक लड़की होकर दूसरी लड़की को फसा रही थी, बहुत गिरी हुई लड़की हो तुम,

सुगंधा- मेरे बारे में तुहे जो समझना ह समझ सकती हो, लेकिन एक बार मेरी बात सुनलो,

रेवती- मुझे कोई बात नहीं सुन्नी, मुझे लगता ह तुम उसकी रखैल हो, इसलिए हमेशा उसके आगे पीछे रहती हो, और वो एक अय्याश राजकुमार, ची मैं उसे कैसे नहीं पहचान सकीय, मेरे पिता से युद्ध लड़ने की हिम्मत नहीं ह तो उनके परिवार की औरतो को अपनी हवस का शिकार बनाया उसने,

सुगंधा ने रेवती की गार्डन पकड़ ली,

सुगंधा- मुझे जो कहना ह कहो, मेरे बारे में जो सोचना ह सोचो, लेकिन ख़बरदार जो मेरे देव को कुछ कहा तो, तुम जानती hi क्या हो उसके बारे में, अगर उसकी ख़ुशी के लिए मुझे उसकी रखैल भी बनना पड़ा न तो मैं ख़ुशी से बन जाउंगी, तुम उसके बारे में अपने विचार बता रही हो लेकिन क्या तुम अपने परिवार के बारे में जानती हो उन्होंने क्या किया ह उसके साथ,

रेवती- मुझे कुछ नहीं सुन्ना

सुगंधा- सुन्ना पड़ेगा, सब सुनकर भी अगर तुम्हे यकीन नहीं होता तो तुम यहाँ से जा सकती हो, मैं बोल रही हु देव भी तुम्हे नहीं रोकेगा,

रेवती को एक अवसर दिखाई दिया तो वो शांत होकर कड़ी हो गई,

उसके बाद सुगंधा ने रेवती को देव के बारे में सब बता शुरू किया, कैसे बचपन से देव के साथ गलत व्यव्हार होता था, देव के साथ प्रतियोगिता में क्या हुआ, और कैसे प्रताप सिंह ने उसकी माँ के साथ दुराचार करने की कोशिश की और साजिश करके उन्हें मरवाने की कोशिश की, और कैसे प्रताप सिंह ने रेवती का सोडा कर दिया था, और कैसे हमारे राजय पैर हुम्ला किया, और देव बचने के लिए आया और उसके बेटो को मर दिया,



फिर अभेंद्र ने बताया की प्रताप सिंह के बेटो ने यहाँ की राजकुमारियों के साथ बलात्कार करने की कोशिश की इसलिए देव ने उन्हें मार दिया,
 
अपडेट- 29




सुगंधा और अभेंद्र रेवती को सब बता रहे थे, वही देव घोड़े पैर सवार होकर भगा चला आ रहा था,

सुगंधा – ये ह देव जिसने साडी जिंदगी तकलीफे झेली फिर भी उसके अंदर इतनी इंसानियत ह, और अगर उसे कुछ गलत करना होता तो तुम्हे यहाँ नहीं लता वही तुम्हारे hi महल में तुम्हारे hi बिस्टेर में तुम्हे एक लड़की से औरत बना चुक्का होता, लेकिन उसने तुम्हे कभी ठीक से छुआ तक नहीं, तुम जबसे यहाँ आई हो वो तुम्हारे नजदीक नहीं आता सिर्फ इस वजह ताकि तुम पैर कोई दाग न लग जाये,

रेवती- दाग तो लग hi चुक्का ह, मैं इतने समय से दुश्मन के साथ हु, अब कोण मुझे अपने पास रखेगा,

तभी एक आवाज आई- मुझे माफ़ कर देना रेवती, लेकिन मेरी मंजिल कुछ और ह, मैं किसी के लिए भी रुक नहीं सकता था, मैं तुम्हारे साथ ये सब नहीं करना चाहता था,

सबने उधर देखा तो देव चला आ रहा था,

रेवती की आँखों में गुस्सा था लेकिन सुगंधा की बातो ने उसे काफी शांत क्र दिया था,

रेवती- मुझे लगता था तुम्हारे साथ मेरे महल में गलत हुआ था लेकिन वो सब तुम्हारी चल थी,

देव- नहीं वो सब सच था, और उसमे तुम्हारी माँ रेणुका भी शामिल थी, उन लोगो ने मुझे रस्ते से पकड़ा था और अपनी हवस का खिलौना बनाया था, तुम्हारी वजह से मैं वह से निकल पाया था,

रेवती- तुम झूट बोल रहे हो,

देव- मैं तुम्हारी माँ के कमरे में था, क्या उनकी मर्जी के बिना वह कोई रह सकता ह वो भी नंगा, क्या ये संभव ह

रेवती सोच में पद गई,

देव- अपनी माँ के कमरे की तलाशी लेना और उस कमरे के उतार दिशा में एक रास्ता ह उस रस्ते में एक छुपा हुआ रास्ता ह उस रस्ते से कभी अंदर जा सको तो देखना वह क्या ह, और वह क्या होता ह, तुम्हारी माँ रेणुका िन्दु और भी औरते हैं वो क्या क्या करती हैं,

देव ने रेणुका के बारे में सब बता दिया, जिसे सुनकर रेवती के पैरो के निचे से जमीन हो खिसक गई, वो वही गिर पड़ी,

देव - तुम्हारे पिता ने मेरी पूरी दुनिया उजाड़ दी, उस इंसान को मैं कभी माफ़ नहीं करूँगा, उसकी मोत मेरे हाथो होगी, तुम अपने महल चली जाओ और उनसे कहना की देव ने तुम्हे बंदी बना क्र रखा था, और उनसे कहना की वो आ रहा ह, अभी बस 4 मरे हैं और पांचवे के जिन्दा रहना या मरना एक hi सामान ह, अब उसकी बरी ह, मैं पुरे राजय की तबाह कर दूंगा,

देव की आवाज में एक गुस्सा था जिससे रेवती घबरा गई,

देव- अभेंद्र राजकुमारी को उनके राजय में सम्मान सहित छोड़ आओ, देखना इन्हे कोई तकलीफ न हो,

अभेंद्र आगे बढ़ा और रेवती को लेकर चल दिया, रेवती बार बार पलट पलट क्र देव को देखे जा रही थी, देव बस खड़ा था और सुगंधा की समझ में नहीं आ रहा था देव क्या करना चाहता ह,

रेवती के जाने के बाद,

सुगंधा – ये तुमने क्या किया उसे क्यों भेज दिया,

देव- मैं किसी लड़की की जिंदगी बर्बाद नहीं कर सकता, ये मेरा तरीका नहीं ह,

सुगंधा- लेकिन तुम्हारे बदले का क्या होगा,

देव- बदला तो जरूर होगा लेकिन किसी मासूम की जिंदगी बर्बाद करके नहीं,

सुगंधा ने देव का हाथ पकड़ लिया,

देव- मुझे कस्तूरी से मिलना ह, जरा उसके मुँह से कुछ सुन लिया जाये,

सुगंधा और देव चल दिए कस्तूरी की तरफ,

वही भवर सिंह और काम्य एक सेना की टुकड़ी के साथ तैयार थे उस शक्ति को ढूंढने के लिए, सात्विक भी आ चुक्का था, अब सात्विक को समझ नहीं आ रहा था वो ये कैसे बताये की शक्ति देव के पास आ चुकी ह, उसे कुछ समय ढूंढने का नाटक तो करना hi था, दूसरा उसके दिमाग में ये भी था की कही तीसरी शक्ति भी यही न मिल जाये,

वो सब चल दिए शक्ति की खोज में, राजगुरु महल में hi थे, तो भौमिक जी राजगुरु के पास आये,

राजगुरु- भौमिक तुम्हे भी साथ जाना चाहिए था, तुम साथ होते तो शायद जल्दी धुंध लेते,

भौमिक- मुझे उस शक्ति को खोजने की जरुरत नहीं ह, लेकिन कुछ ह जो मुझे आपसे जानना ह,

राजगुरु- क्या जानना ह

भौमिक जी- मुझे महाराज सूर्यभान के बारे में जानना ह, उनके बारे सब कुछ जानना ह,

राजगुरु- लेकिन क्यों, वो अब इस दुनिया में नहीं ह, फिर उनसे आज का क्या सम्बन्ध,

भौमिक जी- वही एक इंसान थे जिन्हे शायद सबसे ज्यादा जानकारी थी आने वाले समय की, इतनी जानकरी तो हमारे पास भी नहीं ह,

राजगुरु- हमारे पिता उनके समय में राजगुरु थे, और महाराज सूर्यभान के खास मित्र थे, वो तीन मित्र थे

भौमिक – तीन मित्र तीसरा कोण,

राजगुरु- रानी निहारिका के दादा जी, ये मित्रता पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही थी, जब तक रानी निहारिका के भाई ने राजा भवर सिंह की बहन के साथ गलत नहीं किया और भवर सिंह पैर हुम्ला किया, उसके बाद सब बदल गया,

भौमिक- कोई मित्रता पीढ़ी दर पीढ़ी नहीं चलती भैया, विचारो से चलती ह, और हर पीढ़ी में इन तीनो परिवारों के विचार कैसे मिलते रहे,

राजगुरु- हमेषा हमारे परिवार में से कोई राजगुरु बनता आया ह, और तीसरे परिवार में से सेनापति, और एक राजा

भौमिक- ये तीन पद hi ऐसे होते हैं जो पूरा राजय चलते हैं, और राजय के सरे राज इन्हे पता होते हैं, लेकिन कुछ ऐसा हुआ ह जिससे महाराज सूर्यभान के बाद सब बदल गया, इस राजय के राज आने वाली पीढ़ी को नहीं बताये गए,

भौमिक की बात से राजगुरु सोच में पद गए,

राजगुरु- एक बार हमारे पिता जी ने कहा था की जब तुम्हे लगे इस राजय में कोई ऐसा राजा गद्दी पैर बैठा ह जो देश हिट में न्याय करना जनता हो, स्वार्थ हिट में नहीं तो समाधियों को खंगालना, मैं इसका मतलब कभी समझ नहीं पाया, क्या खंगालना था समाधी में,

भौमिक जी- मैं समझ गया

राजगुरु- क्या समझ गए,

भौमिक जी- महाराज सूर्यभान को अपने बेटे में वो गन नहीं दिखाई दिए जिससे वो अपने राज आगे बता सके, और हमारे पिता जी भी इसीलिए हमे कुछ नहीं बता कर गए, शायद उन्हें अपने पोते भवर सिंह पैर भरोसा था की वो कुछ करेगा लेकिन शायद उनका भरोसा गलत था, लेकिन इस सब में देव कहा ह, वो किस तरह इस सबसे जुड़ा हुआ ह,

राजगुरु- देव hi वो कारन ह जिस वजह से ये राजय तबाह हो सकता था

भौमिक जी- लेकिन कैसे,

राजगुरु- तुम अब शक्ति शैली हो और ज्ञानी भी हो गए हो तो तुम्हे मैं ये सच बता रहा हु, भवर सिंह के जनम के कुछ वर्षो बाद महाराज सूर्यभान का जब अंतिम समय आया तो उन्होंने और हमारे पिता ने एक भविष्यवाणी की, जिसके बारे में वो जानते थे, उन्होंने कहा था की एक समय आएगा जब इस राजय की शक्ति का अंदाजा पूरी दुनिया को लगेगा, यहाँ का राजा सबसे शक्तिशाली राजा होगा, और उसके पास अमरत्व जैसी शक्ति होगी, और हमारे मित्र युद्धवीर और हमारी आने वाली पीढ़ी के मिलान से जो पुत्र पैदा होगा वो सर्वनाश लाएगा, वो इस राजय के विनाश का कारन बनेगा,

ये वही समय ह जिस समय का जीकर उन्होंने किया था, ये वही समय ह जब राजा को अमरत्व प्राप्त होगा, मैंने बहुत कोशिश की थी भवर सिंह निहिरका से शादी न करे लेकिन वो नहीं मने, फिर ये देव पैदा हुआ, और तब से इस राजय का विनाश मुझे दिख रहा ह,

भौमिक जी- कुछ तो गलत ह इस सब में, कुछ तो अधूरा ह भैया,

राजगुरु- क्या ाहदुरा ह, यही सच ह,

भौमिक जी- इस सबके बारे में कही कुछ लिखा गया ह क्या, क्योकि एक राजा के बोले गए हर शब्द को लिखा जाता ह,

राजगुरु- मैं भी आज तक ये hi ढूंढता आया हु की उस समय के ये शब्द क्यों नहीं लिखे गए, ये बस भवर सिंह के पिता ने hi सबको बताया था,

भौमिक जी ने एक पल के लिए अपनी आँखे बंद क्र ली,

भौमिक जी- मैं इस बात के जड़ तक जाकर रहूँगा, और साबित भी करूँगा की देव इस राजय का विनाशक नहीं ह,

भौमिक वह से निकल गए, राजगुरु बस भौमिक को देखते रह गए,

देव और सुगंधा कस्तूरी और उसकी माँ के सामने खड़े हुए थे, दोनों माँ बेटी को बांध क्र रखा हुआ था, कस्तूरी तो चुप चाप बैठी हुई थी लेकिन उसकी माँ बहुत ज्यादा शोर मचती रहती थी इसलिए उसके मुँह को कपडे से बंद किया हुआ था,

देव को सामने देख क्र कस्तूरी की आँखों में आंसू थे, उसने अपना सर निचे कर लिया था, वही देव की आँखों में भी एक पल के लिए वो पल याद आये जो दोनों ने जंगल में साथ बिताये थे, लेकिन उसके बाद की तकलीफे याद आते hi देव के चेरे पैर नफरत के भाव उभर आये,

सुगंधा- अब बताओगी तुम दोनों की तुमने ऐसा क्यों किया था,

कस्तूरी ने अपना सर नहीं उठाया, लेकिन उसकी माँ ने गुस्से में सुगंधा को देखा,

सुगंधा- शायद ये कुछ कहना चाहती हैं,

उसकी माँ का मुँह खोला गया, और मुँह खुलते hi उसने सुगंधा को बुरा भला कहना शुरू कर दिया,

कस्तूरी की माँ- तू पैदा होते hi मर क्यों नहीं गई, अपनी hi माँ और बहन को ऐसे बांध क्र रखती ह, तू बेटी के नाम पैर कलंक ह, हमारा साथ देने की बजाये तू ये सब कर रही ह, तू रंडी ह,

सुगंधा- मैं बताऊ रंडी कैसी होती हैं,

देव- मुँह बंद करो इनका, मुझे को बकवास नहीं सुन्नी ह, बस इतना जानना ह की तुमने ऐसा क्यों किया,

किसी ने कोई जवाब नहीं दिया, कस्तूरी ने अपना सर नहीं उठाया, वो बस ऐसे hi बैठी रही,

देव- तुम नहीं बताओगी तो तुम्हारे वो आशिक बता देगा, जिसकी बहो में तुम मेरे प्यार की धजिया उदा रही थी, पता तो मैं क्र hi लूंगा, लेकिन वो दिन तुम्हारे आशिक का आखरी दिन होगा,

कस्तूरी ने एक बार नजर उठा क्र देव को देखा और फिर अपना सर निचे कर लिया,

देव- अगर तुम दोनों जिन्दा रहना चाहती हो तो बता दो क्यों किया, कोण कोण शामिल था इसमें,

क माँ- अगर मैं बता दूंगी तो क्या तुम मुझे जाने डोज,

देव- ये तो तुम्हारे सच पैर निर्भर करता ह, तुम कितना सच बोलते हो,

क माँ- राजकुमार सूरज के कहने पैर ये सब किया था,

देव को उम्मीद तो थी hi वो लोग hi शामिल होंगे,

देव- लेकिन तुम्हारी बेटी का आशिक तो अभिजीत ह, वो तो अभिजीत की बहो में थी,

क माँ- ये तो रंडी ह ये तो तीनो भाइयो की बहो में थी,

कस्तूरी की माँ की ये बात सुनकर देव के सर पैर आसमान सा टूट पड़ा था, उसे अपने कानो पैर यकीन hi नहीं हो रहा था,

क माँ- ये तो पढ़ते समय hi उन तीनो भाइयो के साथ सो चुकी थी,

देव- बस karoooooooooo

देव की आवाज में एक दर्द था और गुस्सा, सुगंधा ने देव के कंधे पैर हाथ रखा, देव के छिलने पैर कस्तूरी ने एक बार देव को देखा और देव के चेरे को पढ़ने लगी,

क माँ- हहहहह क्या हुआ तकलीफ हुई क्या, तू अभी भी इससे प्यार करता ह क्या, लेकिन ये तेरी कभी नहीं होगी, तू ऐसे hi तड़पेगा, हाहाहाहाहा तुझे तड़पता देख मेरे दिल को बड़ा सकूं मिल रहा ह,

सुगंधा का दिमाग घूम गया था और उसने एक जोर दर थपड अपनी माँ के मुँह पैर जड़ दिया, थपड लगते hi वह सनता च गया, किसी को यकीन hi नहीं हुआ की एक बेटी ने अपनी माँ को थपड मार दिया ह,

क माँ- तूने मुझ पैर हाथ उठाया, अपनी माँ पैर हाथ उठाया

सुगंधा- मेरे जीवन में सबसे बड़ा डेग यही ह की मैं तुम्हारी बेटी हु, लेकिन तुम चाहे जो भी हो अगर देव के बारे में कुछ भी गलत बोलै तो हलक से जबान खींच लुंगी, तुम्हारा क्या बिगाड़ा ह देव ने, किस बात की नफरत करती हो इससे,

क माँ- ये मरते दम तक नहीं जान पायेगा,

सुगंधा- देव चलो यहाँ से, ये औरत पागल हो चुकी ह,

सुगंधा देव को बहार लेकर आ गई,

देव- कुछ तो ह, कुछ तो बात ह, इतनी नफरत कोई ऐसे hi नहीं करता,

सुगंधा- मैं पता लगाती हु, अगर ये कोई पुराणी बात ह तो पिता जी को जरूर पता होगी, मैं पता करती हु, लेकिन उससे पहले एक काम करो इन दोनों माँ बेटी को अलग अलग रखो, कस्तूरी खामोश ह जल्दी टूट सकती ह, लेकिन माँ उसके पास रही थी वो उसे कुछ बोलने नहीं देगी,

देव- अभेंद्र सुगंधा सही बोल रही ह, दोनों को अलग अलग रखो,

देव वह आया तो कुछ जानने था लेकिन मन में कई सवाल और दर्द लेकर वापस आ गया, आज का दिन बहुत भरी था, पहले तो रेवती चली गई और बी ये नए सवाल खड़े हो गए थे, देव के मन में बहुत हलचल थी, वो वह से सीधा भौमिक जी के पास पहुंच गया था,

भौमिक जी अपनी खोज में लगे हुए थे, वो किताबो कैद हेर में कुछ धुंध रहे थे,

देव- क्या मैं आपके चरण स्पर्श कर सकता हु गुरु जी,

देव की आवाज सुनकर भौमिक जी सब काम छोड़ क्र खड़े हो गए और देव को देख क्र उससे लिपट गए, भौमिक जी की आँखों में आंसू थे,

देव- आप रो रहे हैं,

भौमिक जी- रो लेने दे मेरे बच्चे रो लेने दे, तुझे जिन्दा देख क्र इन आँखों में जो दर्द था ो सब निकल जाने दे,

कुछ देर दोनों ऐसे hi रहे, फिर देव इ भौमिक जी को बैठाया और उनके पेअर छुए,

भौमिक जी- मैं ेतुझे कहा कहा नहीं ढूंढा, मुझे बताया गया की तुझे और रानी निहारिका को मरवा दिया गया ह,

देव- सही सुना था आपने, लेकिन शायद भगवन को अभी मेरी मोत मंजूर नहीं थी इसलिए न जाने कैसे बचा लिया,

भौमिक जी- और लगता ह बचा क्र कुछ नया रूप देकर hi भेजा ह,

देव- मैं नहीं जनता उन्होंने मुझे क्या दिया ह लेकिन अब मेरे अंदर न जाने कैसे अनंत शक्ति आ गई ह, बहुत फुर्ती आ गई ह, ऐसा लगता ह मेरी साडी विद्या सारा ज्ञान और बढ़ गया ह,

भौमिक जी- ये तो होना hi था, क्यात ुम मुझे विस्तार से बता सकते हो क्या हुआ था,

देव- जब मुझे और माँ को उस पहाड़ी से निचे गिराया गया तो हम झरने में गिर गए, बिच में hi हम किसी चीज से टकराये और एक गुफा में जग ीरे, माँ का हाथ मेरे हाथ में था और उस चीता के पेट में तलवार घुसाई हुई थी और तलवार मेरे हाथ में थी, तो हम तीनो hi उस गुफा में गिरे, माँ तो पहले hi बेसुध हो चुकी थी, और मुझे बस इतना याद ह की जैसे hi हम गुफा में गिरे तो सामने एक छोटा सा रौशनी का गोला सा था, और मैं सीधा उस गोले के बिच में गिरा, मेरा सर उस रौशनी के अंदर था, और ऐसा लगा जैसे उस रौशनी में से कुछ बुँदे गिरने लगी और मेरे सर में सामने लगी, और मैं वही बेहोश हो गया था,

और शायद 15 दिन बाद मेरी आँख खुली, मैंने चारो तरफ देखा फिर माँ को जगाया वो भी जग गई, और वो चीता भी जग गया, उसने फिर मुझ पैर हुम्ला किया, मुझे कुछ नहीं सुझा तो मैं उससे भीड़ गया, लेकिन अचानक वो रुक गया, और मेरे सामने झुक गया, जैसे वो मेरा कोई पालतू जानवर हो, हम काफी समय तक उसी गुफा में रहे, न हमे भूक लग रही थीं ा hi कोई कमजोरी थी, बल्कि एक अलग hi ताकत महसूस हो रही थी,

फिर देव ने आगे की साडी कहानी भौमिक जी को बताई,

देव- मुझे आज तक समझ नहीं आया की वो क्या हुआ था,

भौमिक जी- लेकिन मुझे पता ह वह क्या हुआ था,

देव- क्या हुआ था गुरु जी

भौमिक जी ने देव के शक्तियों से जुडी साडी कहानी सुनाई जो वो जानते थे,

देव- क्या ये संभव ह, और अगर मुझे शक्ति मिली ह तो ये कैसी शक्ति ह और क्या क्या कर सकती ह,

भौमिक जी- ये तो तुम्हे hi जानना होगा, अपनी क़ाबलियत को परखना होगा, खुद को निखारना होगा, क्योकि मुझे लगता ह तुम्हे ये शक्तिया किसी कारन से मिली हैं, इस धरती पैर जब कोई शक्ति आती ह तो वो किसी नकारात्मक शक्ति का अंत करने hi आती ह, तो तुम्हे तैयार रहना होगा, तुम्हे अब पूरी युद्ध कला सीखनी होगी, एक ऐसा योद्धा बनना होगा जिसे संसार की कोई ताकत झुका न सके, क्योकि मुझे लगता ह कोई बड़ी ताकत सामने आने वाली ह, बस सचाई का रास्ता मत छोड़ देना,

देव- मैं आपका शिष्य हु गुरु जी, कभी सचाई का साथ नहीं छोडूंगा,

उधर रेवती अपने राजय में पहुंच चुकी थी, अभेंद्र ने उसे राजधानी की सीमा में छोड़ दिया, रेवती अपनी राजधानी के दरवाजे पैर कड़ी थी, उसके पेअर जमे हुए थे वो महल में जाना चाहती थी लेकिन उसके पेअर उसका साथ नहीं दे रहे थे, वो सदमे जैसी हालत में थी, वो अपने सपनो की दुनिआ बसा बैठी थी, वो अपनी महलो की दुनिया छोड़ क्र देव के साथ गरीबी में भी जीने को तैयार थी, लेकिन एक hi झटके में उसकी पूरी दुनिया उजाड़ गाइट hi,

सेनिको ने जब रेवती को पहचाना तो दौड़ते हुए महल में खबर पहुंचे, रेवती के वापस आने की खबर मिलते hi रेणुका और महल के काफी लोग उसी तरफ दौड़ पड़े, रेवती बहुत hi धीरे धीरे अंदर आ कीतरफ चल रही थी, उसके पीछे सैनिक चल रहे थे, रेणुका दौड़ क्र आई और रेवती से लिपट गई,

रेणुका- मेरी बेटी वापस आ गई,

रेवती की आँखों में आंसू थे वो अपनी माँ से लिपट गई, तभी रेणुका ने चारो तरफ देखा तो बहुत भीड़ वह लगी हुई ह, तो रेणुका ने रेवती को बग्गी में बैठाया और महल में ले आई, और सीधे अपने कमरे में लेकर पहचुहि,

कमरे में आते hi जो रेणुका फुट फुट क्र रो रही थी उसने एक जोर दर थपड रेवती को जड़ दिया, थपड लगते hi रेवती सपनो की दुनिया से बहार आ गई, रेवती ने चौंकते हुए रेणुका को देखा,

रेणुका- हराम जड़ी कोण था वो लड़का जिसके साथ तू भागी थी,

रेवती दर से कंपनी लगी,

रेणुका- तुझे क्या लगा तू इस महल से भाग जाएगी और मुझे पता भी नहीं चलेगा,

रेवती- माँ मैं

रेणुका- मुझसे झूट बोलने की कोशिश मत करना, क्योकि जब वो लड़का हमारे सेनिको को मर क्र भगा तहत ु उसका साथ दे रही थी, शुक्र क्र उन सेनिको ने मुझे बताया अगर महाराज को पता होता तो आज महल के दरवाजे पैर तेरा सर टेंगा होता,

रेवती की आँखों से आंसू भेने लगे, वो अपने घर आई थी, एक धोखा खा कर वापस आई थी, उसे लगा उसके अपने उसका सहारा बनेंगे लेकिन वो भूल गाइट hi की वो इंसानो के बिच नहीं जानवरो के बिच रहती ह,

तभी बहार से दासी आई और उसने बताया की महाराजा ा रहे हैं,

रेणुका ने जल्दी से रेवती के गाल को शलया और शकत शब्दों में बोली- अगर जिन्दा रहना चाहती ह तो महाराज के सामने ये बात न आ जाये किट ु खुद भागी थी, उन्हें ये hi पता ह की तुझे कोई उठा क्र ले गया था, बाकि कहानी तू खुद बना क्या बोलेगी,

तभी प्रताप सिंह आ गया, और एते hi अपनी बेटी से लिपट गया,

प्रताप सिंह- मेरी बेटी वापस आ गई, मेरी किस्मत वापस आ गई, कहा चली गाइट hi तू, कोण था ो हरामखोर जिसने तुझे अगवा किया,

रेवती घबराई हुई थी उसे कुछ नहीं सूझ रहा था,

रेवती- मैं नहीं जानती पिता जी वॉक ों था,

प्रताप सिंह- सच सच बता बेटी कही वो उस भवर सिंह के परिवार में से तो कोई नहीं था,

रेवती- मुझे नहीं पता पिता जी,

प्रताप सिंह- वो तुझे कहा लेकर गया था

रेवती- मैं ये भी नहीं जानती मैंने कभी इस महल से बहार की दुनिया देखि hi नहीं तो मैं कैसे जानती वो मुझे कहा ले जार है ह, उसने मुझे एक गाओं में एक घर में बंद करके रखा था, और जैसे hi मुझे मौका मिला मैं वह से भाग आई,

प्रताप सिंह- बहुत बहुदूर ह मेरी बेटी,

प्रताप सिंह ने रेवती को बहो में भर लिया, और उसके हाथ रेवती की कमर पैर घूमने लगे,

प्रताप सिंह ने एक दम रेवती को अलग किया और उसका चेहरा पकड़ क्र बोलै- उसने तेरे साथ कुछ गलत तो नहीं किया, तू अब तक कुँअरि ह न

अपने बाप के मुँह से ऐसे शब्द सुनकर रेवती शर्म से पानी पानी हो गई, उसकी नजरे झुक गई,

प्रताप सिंह- मैं जो पूछ रहा हु उसका जवाब दे, उसने तेरे साथ कुछ किया या नहीं

रेवती- नहीं पिता जी उसने मेरे साथ कुछ नहीं किया,

रेणुका- ऐसा कैसे हो सकता ह, कोई तुझे उठा क्र ले गया और तेरे साथ कुछ किया नहीं, वो क्या तेरी आरती उतरने केलिए लेकर गया था, सच सच बता हमसे झूट मत बोलना

रेवती- नहीं माँ उसने कुछ नहीं किया,

प्रताप सिंह- तू बोल रही ह तो यकीन कर लेता हु, लेकिन ऐसा दुनिया में को नहीं जो किसी दुश्मन की बेटी को उठा क्र ले जाये और उसके साथ कुछ न करे, लड़की सही सलामत वापस आ जाये,

तभी एक दासी अंदर आई

दासी- महाराज एक सैनिक कुछ खबर लेकर आया ह आपकी परतीक्षा में बहार खड़ा ह,

भवर सिंह तुरंत बहार भगा उसके पीछे रेणुका भी थी,

भवर सिंह- क्या बात ह सैनिक, ऐसी क्या जरुरी बात थी जिसका तुम इंतजार नहीं कर सके,

सैनिक- महाराज खबर hi ऐसी ह, हमारे दुश्मन राजय के अंदर एक चमत्कारी घटना घाटी ह,

प्रताप सिंह- चमत्कारी घटना, मतलब क्या ह तुम्हारा

फिर सैनिक ने देव और सात्विक और भौमिक के बिच हुई घटना को कह सुनाया,

प्रताप सिंह- तुम सच बोल रहे हो, अगर तुम्हारी बात में जरा सा भी झूट निकला तो तुम जानते हो तुम्हारा क्याहोगा,

सैनिक- महाराज अगर मेरी बात झूट हुई तो आपकी तलवार और मेरा सर, मैं खुद अपनी आँखों से देख क्र आ रहा हु,

प्रताप सिंह- इसका मतलब कोई जादुई शक्ति ह उन लोगो के पास,

रेणुका- हमे उस शक्ति के बारे में जानना होगा, ऐसी कोनसी शक्ति ह,

प्रताप सिंह- रेणुका देखो कमल हो गया हमारी बेटी घर वापस आई और एक अच्छी खबर हमारे कानो में पड़ी,

रेणुका- सही कहा आपने

प्रताप सिंह- हमे वो शक्ति चाहिए, रेणुका अपने बेटे को बुलाओ, अब उसके आने का समय आ चुक्का ह,

रेणुका- क्या ये सही रहेगा, आपने hi उसे इस सब से दूर भेजा था, आप जानते हैं न वो कैसा ह,

प्रताप सिंह- हमने अपने सबसे ताकतवर बेटो को खो दिया ह, और जॉब अचे हैं वो दर की वजह से कुछ नहीं कर पाएंगे, अब उसे hi आना होगा, जो इन सबमे सबसे ज्यादा ताकतवर और क्रूर ह,

रेणुका- उसके अंदर इंसानियत नहीं ह,

प्रताप सिंह- वो मेरा और तुम्हारा असली रूप ह, अब वही हमारे दुश्मनो को सबक सीखा सकता ह, और शायद उसी के पास तरीका भी मिल सकता ह जिससे हम वो चमत्कारी शक्तिया प् सकते हैं, और वही हमे बता भी सकता ह की वो शक्तिया हैं क्या, क्योकि उससे ज्यादा इस चीज में किसी को जानकरी नहीं होगी,

रेणुका- ठीक ह जैसा आप ठीक समझे, मैं उसे बुवति हु, बस आप hi उसे सम्हालना,

प्रताप सिंह- उस शक्ति को पाने के लिए अगर हमे हजार दो हजार लोगो की बलि भी चढ़ानी पड़ी तो कोई फरक नहीं पड़ता, क्या ये परजा अपने राजा के लिए अपनी जान नहीं दे सकती,

वही रेवती एक अजीब hi दुविधा में कड़ी थी, उसके पिता की बात उसके दिमाग में घूम रही थी, कोई दुश्मन ये राजा की बेटी को बिना कुछ किये वापस कैसे भेज सकता ह, देव चाहता तो उसके साथ कुछ भी कर सकता था, लेकिन उसने एक पल भी करीब आने की कोशिश नहीं की, और दूसरा रेवती के माँ बाप के व्यव्हार से उसे अपने वापस आने कैफ ैस्ले पैर शंका हो रही थी, क्या उसने यहाँ आकर सही किया, वह कुछ नहीं था पैर आजादी थी, यहाँ सब कुछ ह बस आजादी hi नहीं ह, और उसकी माँ का व्यव्हार उसके लिए ऐसा था जैसे वो कोई अपराध करके आई हो, इस महल में बस उसकी माँ hi थी जिस पैर वो विश्वास कर सकती थी लेकिन आज उसकी माँ का व्यवहार किसी अजनबी जैसा था,



अजीब hi कशमश में थी रेवती, और अपने 4 बेटो को खो क्र भी प्रताप सिंह शक्ति पाने के लिए उतावला था,
 
अपडेट-30



रात का समय था देव निहारिका के पास बैठा हुआ था, आज वो उदास था,

निहारिका- क्या बात ह बीटा, आज तेरे चेरे पैर किसी चिंता के भाव हैं,

देव- माँ इस संसार में बहुत कुछ हो रहा ह, कुछ ऐसा हो रहा ह जिसे हम सोच भी नहीं प् रहे,

निहारिका- क्या बात ह, ऐसा क्या हुआ जिससे तू इतना परेशां हो गया ह,

देव- भौमिक जी ने कुछ ऐसी बाते बताई हैं जिससे ऐसा लगता ह हम किसी युद्ध का हिस्सा बन गए हैं,

निहारिका- मैं कुछ समझी नहीं,

देव- भगवान् ने कुछ शक्ति इस धरती पैर छोड़ी हुई थी, जिसमे से एक शक्ति अब मेरे अंदर ह या यु कहु हम तीनो के अंदर ह, जिस वजह हम तीनो जिन्दा हैं, मैं आप और दत्त, और सात्विक जी उन शक्तियों की खोज में निकले हुए हैं, और साथ में भवर सिंह और काम्य भी इसी शक्ति की खोज में हैं, ऐसा लगता ह कुछ बड़ा होने वाला ह, भौमिक जी ने कहा ह की मुझे खुद को तैयार करना होगा, मुझे युद्ध की सभी कलए सीखनी होंगी, न जाने कोण सी ताकत हमारे सामने आ जाये,

निहारिका- मैंने कभी इस बारे में नहीं सुना, मैंने कभी ऐसी शक्ति के बारे में नहीं सुना,

देव- क्या मां इस बारे में कुछ जानते थे,

निहारिका- मैं नहीं जानती लेकिन भाई क्या जानते थे ये मुझे नहीं पता,

देव- अब मेरा अगला कदम मां को बहार लाना ह,

निहारिका- लेकिन कैसे लाएगा, ये बात सिर्फ भवर सिंह जनता ह की वो कहा हैं,

देव- मैं भवर सिंह पैर दबाव बना क्र भी पता कर सकता हु लेकिन मुझे दर ह कही वो मां को नुकसान न पंहुचा दे, मुझे किसी तरह खुद hi पता करना होगा की मां कहा कैद हैं,

निहारिका- जो भी करना सम्हाल क्र करना,

देव- माँ एक बात और जानी थी, हमारा कोई पुराण सम्बन्ध आचार्य जी की पत्नी के साथ ह क्या, ऐसा कुछ जिसकी जानकारी हमे न हो,

निहारिका- प्रेमलता से

देव- आप जानती हैं उन्हें

निहारिका- बहुत ज्यादा तो नहीं वो हमारे पुरोहित की बेटी ह, काफी सूंदर थी, जब उसकी शादी हुई तो तेरे मां ने उसके पति को राजकुमारों का आचार्य बनवा दिया था, बस इतना hi जानती हु,

देव- कुछ तो ह जो अतीत से जुड़ा हुआ ह, आज उनकी बातो से ऐसा लगा जैसे वो किसी पुराणी बात की वजह से मुझसे नफरत करती हैं,

निहारिका- हमने तो उसका कुछ नहीं बिगाड़ा,

देव- खैर छोड़िये मैं पता कर लूंगा, लेकिन आप ये बताइये की अब इन तीनो बहेनो का क्या करना ह, ये काफी आगे बढ़ गई हैं, तीनो ने अपने भाइयो के सामने hi मेरे सामने नंगी होकर मुझे चूमा,

निहारिका- वो उन तीनो का गुस्सा था, उनके मन में क्या ह ये तभी पता चलेगा जब वो शांत मन से तेरे पास आएँगी,

देव- क्या मुझे आगे बढ़ना चाहिए,

निहारिका- तुझे रुकना नहीं ह, सिर्फ आगे बढ़ना ह, और मैं ये hi चाहती हु जब वो तेरे निचे हो तो उनके भाइयो और माँ बाप को पता होना छाइये उनके साथ क्या हुआ और उन्होंने अपनी मर्जी से करवाया,

देव- ठीक ह माँ ऐसा hi होगा, लेकिन उन तीनो से पहले मैं सौमित्र का दरवाजा खोलूंगा, इसे बहुत शोक ह न शरत लगाने का, ये दोनों रनिया मेरे पास मेरी जानकारी लेने आई थी, अब इन्हे मैं जानकारी दूंगा, मुझे रास्ता दिख गया ह माँ, मां को बहार लेन का रास्ता दिख गया ह,

देव अपने कमरे में आकर लेट गया,

आज महल में बहुत काम लोग थे, भवर सिंह और काम्य सात्विक के साथ गए हुए थे, वो अब तक वापस नहीं आये थे, वही सूरज अभिजीत और ज्वाला की जो पिटाई हुई थी और पूरी रात ठण्ड में नंगे बंधे रहने की वजह से उनकी तबियत बिगड़ी हुई थी तो वो महल से दूर एक चिकित्शलय में इलाज करवा रहे थे, और तीनो भेने रीवा के साथ उसके कमरे में थी और वह जो उनके साथ हुआ वो सब रीवा को बता रही थी,

देव अपने कमरे में बैठा आगे का विचार कर रहा था, फिर उसने सौमित्र के कमरे में जाने का फैसला किया, क्योकि उसे जल्दी hi अपनी मंजिल को पाना था,

वो उठा और चल दिया, वो जैसे hi दरवाजे पैर पंहुचा तो सामने से सौमित्र आ गई, सौमित्र को देख क्र देव के होतो पैर मुस्कान आ गयी,

देव- आप यहाँ

सौमित्र- बस दिल किया तुमसे मिलने का तो चली आई, कुछ गलत किया क्या,

देव- नहीं नहीं बहुत सही किया, मुझे लगा आप शरत से दर गई शायद अब नहीं आएँगी,

सौमित्र- मैं कभी नहीं डर्टी, और एक बार शरत लगा दी तो लगा दी,

देव- ये तो समय hi बताएगा,

सौमित्र ने देव को अंदर धकेला और दरवाजा बंद क्र लिया, फिर सौमित्र ने अपने साथ ले हुई 2 छोटी छोटी सी मटकी वह रख दी जिसमे से हलकी हलकी भाप निकल रही थी, फिर वो देव के गले लग गई,

देव- क्या हुआ

सौमित्र- पहले मैं तुम्हारा धन्यवाद तो क्र लू, जिसने मेरे बेटे और बेटी को बचाया ह उस दुश्मनो से,

देव- मैंने बस अपना इंसानियत का फर्ज निभाया ह,

सौमित्र- तुम hi ऐसा कर सकते हो, पुरे परिवार ने जो तुम्हारे साथ किया ह, उसके बाद भी तुमने उन्हें बचने के लिए अपनी जान खतरे में डाली, तुम्हारे अंदर की अच्छे कभी कोई नहीं दे सका,

देव- किसी ने देखनी नहीं चाही,

सौमित्र- क्योकि सभी अपनी साजिशो में लगे हुए थे, उन साजिशो ने आँखों पैर ऐसा पर्दा गिराया हुआ था की सामने वाले के अंदर की अच्छे दिखनी hi बंद हो चुकी थी,

देव- क्या आप यहाँ अतीत की बाते करने आई ह, वो तो तभी करना जब आप शरत जीत जाये,

सौमित्र ने मुस्कुरा कर देव को देखा और उसके सर को पकड़ क्र उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए, देव ने भी तुरंत सौमित्र के होतो को चूमना शुरू क्र दिया, दोनों एक दूसरे को चमे जार हे थे, देव के हाथ सौमित्र की कमर पैर पहचुहे और फिर निचे खिसक क्र सौमित्र की भरी गांड पैर पहुंच गए, और गांड पैर पहुंचते hi देव को अहसास हो गया की सौमित्र अंदर से बिलकुल नंगी ह,

देव ने सौमित्र की गांड को कास क्र पकड़ लिया और अपनी गॉड में उठा लिया, सौमित्र अच्छे भरे हुए शरीर की औरत थी, देव ने उसे फूल की तरह हवा में उठा लिया था,

सौमित्र- बहुत ताकत ह तुम्हारे अंदर,

देव- वो तो आज पता चलेगा कितनी ताकत ह,

देव ने सौमित्र की एक हाथ से hi पकड़ लिया और दूसरा हाथ उसके सर में दाल क्र उसके होतो पैर अपने हॉट मिल दिए, दोनों काफी देर तक ऐसे hi एक दूसरे को चूमते रहे,

फिर सौमित्र ने खुद को निचे उतरा और देव के कपडे खोलने लगी, देव का खूबसूरत कैसा हुआ शरीर सौमित्र के सामने था, फिर सौमित्र ने जैसे hi निचे वाला कपडा खोला तो देव का फनफनाता हुआ लुंड सामने आ गया,






जिसे देख सौमित्र के दिल में एक बार फिर से घबराहट हुई, लेकिन आज उसका आत्मविस्वास बहुत बढ़ा हुआ था, असल में वो पिछले दो दिन से लगातार कामोत्तेजक दवाइया खा रही थी, वो अपने अंदर इतनी गर्मी पैदा कर रही थी ताकि 10 मर्द मिलकर भी उसे शांत न कर सके, और अपनी छूट को लगातार मालिश कर रही थी ताकि वो चिकनी रहे और देव के लुंड को आराम से झेल सके,

सौमित्र ने देव को देखा और फिर उसे द्केहते हुए hi लुंड को चाटने लगी,






देव भी मुस्कुरा कर सौमित्र को देख रहा था, सौमित्र आज बाते काम कर रही थी उसका लक्ष्य बस देव से शरत जीतना था, भवर सिंह और काम्य महल से बहार गए थे, वो चाहती थी की जब वो वापस आये तो उन्हें खुशखबरी दे,

सौमित्र पुरे जोश में लुंड को चूस रही थी,






लुंड सौमित्र के मुँह में फास जाता था जिसे वो हिला हिला क्र बहार निकलती थी, उसने लुंड को उप्पेर से निचे तक छठा,





फिर वो देव के ांडो को चूसने लगी उन्हें चाटने लगी,





देव का लुंड और अकड़ता जा रहा था, काफी देर लुंड चूसने के बाद जब सौमित्र का मुँह दुखने लगा तो वो अपने हाथ से लुंड को हिलने लगी, फिर सौमित्र ने एक मटकी उठाई और उसमे से एक तरल पदार्थ देव के लुंड पैर डालना शुरू क्र दिया, वो एक तेल था जो थोड़ा गरम था,

देव- ये क्या ह सौमित्र जी,

सौमित्र- ये जड़ीबूटियों से बना हुआ तेल ह इससे तुम्हारा लुंड एक दम चिकना रहेगा,

सौमित्र ने पुरे लुंड को अच्छे से तेल में डुबो दिया, अब देव को आगे बढ़ना था, देव ने सौमित्र को उठाया और उसके शरीर पैर जो एक कपडा था उसे खोल दिया, कपडा खुलते hi जमीन पैर गिर गया, सौमित्र का चिकना और भरा हुआ शरीर देव के सामने आ गया,






सौमित्र की चूचिया पहले से बड़ी और कठोर लग रही थी, सौमित्र का पूरा शरीर hi पहले से ज्यादा कैसा हुआ लग रहा था, देव ने खड़े खड़े hi सौमित्र की गार्डन को चूमा फिर वो निचे हुआ और सौमित्र की बड़ी बड़ी चूचियों पैर अपने हॉट रख दिए, सौमित्र की सिसकी निकल गई, सौमित्र ने देव का सर अपनी चूचियों पैर दबा लिया,





देव ने भी चुकी को अपने दांतो से पकड़ लिया और दूसरी चुकी को अपनी मुट्ठी में भर क्र दबा दिया, सौमित्र अपनी जगहों को देव की जांघो से रगड़ने लगी, देव का लुंड सौमित्र की जांघो पैर रगड़ रहा था, गरम गरम लुंड का अहसास होते hi सौमित्र और कामुक होती जा रही थी, वो दो दिन से जिन जड़ी बूटियों का इस्तेमाल कर रही थी उनसे वो वैसे hi अपनी गर्मी से पागल हुई पड़ी थी,

देव ने सौमित्र को गॉड में उठाया और उसके पेट पैर अपना मुँह लगा दिया, फिर वो सौमित्र को बिस्टेर पैर ले गया और लिटा दिया, और सीधा सौमित्र की जांघो पैर पहुंच गया, देव ने सौमित्र को देखते हुए उसकी जांघो को चुम लिया, सौमित्र ने तुरंत अपनी जंघे खोल दी, देव ने अपनी उंगली सौमित्र की छूट पैर रागादि जिससे वो कमर को हिलने लगी,

सौमित्र- देव अब देर मत करो मैं बर्दास्त नहीं कर प् रही हु, आजाओ मेरे उप्पेर रूंध डालो मुझे,

देव बस मुस्कुराया, वो जनता था उसे क्या करना ह, देव ने अपने हॉट सौमित्र की छूट से थोड़ा सा उप्पेर रख दिए और अपनी उंगली से उसकी छूट को कुरेदने लगा, सौमित्र अपना सर पटकने लगी, देव ने अपनी जीभ बहार निकली और सौमित्र की छूट में घुसा दी, सौमित्र ने तुरंत अपने हाथ देव के सर पैर रखे और उसका सर अपनी छूट पैर दबाने लगी जैसे वो देव का पूरा सर hi अपनी छूट में घुसा लेना छाती हो, देव ने भी जीभ अंदर घुसा क्र उसे घूमने लगा, सौमित्र और बैचैन हो गई, देव ने एक और हुम्ला किया उसने अपने दांतो से सौमित्र की छूट के डेन को कुरेदना शुरू क्र दिया और अपने हाथ उप्पेर लेजाकर उसकी चूचियों को मसलने लगा,






सौमित्र की छूट तो वैसे hi दो दिन से पूरी गीली हुई पड़ी थी, सौमित्र की हालत ख़राब हो चुकी थी उसे इतना मजा आ रहा था की वो एक पल के लिए भी इससे दूर नहीं होना चाहती थी, वो चाहती थी की देव बस ऐसे hi उसकी छूट को चुस्त रहे,





लेकिन कुछ hi देर में उसे अहसास हो गया की अगर ऐसे hi उसकी छूट को चुस्त रहा तो वो झाड़ जाएगी, उसे मजे नहीं लेने हैं देव को शरत में हराना ह, उसका शरीर और दिल तो बेकाबू हुआ जार है था लेकिन दिमाग उसे रोक रहा था, उसने खुद को काबू करके देव के सर को पीछे धकेला, देव ने चौंकते हुए सौमित्र को देखा,

सौमित्र- अब दाल लो, मैं तुम्हारे इस मोठे हथोड़े की मार देखना छाती हु,

देव- आज रात आपको इस हथोड़े की मर hi झेलनी ह,

सौमित्र- पहले वो मटकी उठाओ और मेरी गुफा में डालो, फिर अपने हतोड़े से इस गुफा को खोलना,

देव ने वो मटकी उठाई, उसमे भी वैसा hi कुछ तेल सात है, लेकिन इसकी खुशबु कुछ अलग थी, देव ने वो गरम गरम तेल सौमित्र की छूट पैर डाला और अच्छे से अपनी हाथ से उसकी छूट की मालिश करने लगा, सौमित्र भी अपने हाथो से अपनी छूट को मसलने लगी, और अपनी उंगली से तेल को अंदर तक लगाने लगी,

जब तेल अच्छे से अंदर लग गया,

सौमित्र- अब आ जाओ, गुफा दो अपना हथोड़ा में गुफा में, मैंजनती हु तुम्हारा हथोड़ा मजबूत ह लेकिन मेरी गुफा की दीवारे भी बहुत मजबूत हैं, देखते हैं तुम इन दीवारों को तोड़ पते हो या नहीं,

देव मुस्कुराता हुआ सौमित्र की जांघो के बिच में आ गया, और अपना लुंड सौमित्र की छूट पैर रखा और रगड़ने लगा, सौमित्र अपना सर उठा क्र देव को देख रही थी, देव ने अपने लुंड को अपने हाथ में पकड़ा हुआ था, तभी उसे अहसास हुआ की उसके हाथ की उंगलियों को लुंड के चुने का अहसास सुन्न hi हो रहा ह, उसने अपने हाथ को देखा सब ठीक था, देव ने सौमित्र की जांघ पैर हाथ फिराया तो सौमित्र को तो अहसास हुआ लेकिन देव की उंगलियों को अहसास नहीं हुआ, लेकिन दूसरे हाथ की उंगलियों को अहसास पूरा अहसास था, ये वही हाथ था जिससे देव ने वो तेल सौमित्र की छूट पैर लगाया था, देव तभी समझ गया की ये तेल छूट को सुन्न करने के लिए ह ताकि सौमित्र की छूट को देव के बड़े लुंड का घुसने का अहसास न हो उसे दर्द न हो, और वो देर तक न झड़े,

देव ने भौमिक जी के पास कुछ औषधियों का ज्ञान लिया था तो वह उसने इस तेल के बारे में पढ़ा था इसका इस्तेमाल घायल सेनिको के जख्मो को सिलने के लिए किया जाता ह, ये तेल आधा घंटा के लिए शरीर के किसी भी भाग को बिलकुल सुन्न कर देता था, लेकिन ये वाला तेल ज्यादा चिकना था इसलिए देव उसे पहचान नहीं पाया, सौमित्र ने इस तेल में कुछ और मिलवा क्र इसे खूबदार और चिकना क्र लिया था जिससे छूट चिकनी भी हो जाये,

सौमित्र बहुत शातिर थी, उसे ये शरत जितनी थी, वो शातिर तो थी लेकिन वो देव को बेवकूफ समझ बैठी थी, देव तुरंत सौमित्र के उप्पेर आ गया और उसके होतो से अपने हॉट लगा दिए, सौमित्र का धयान उसने अपनी तरफ किया और एक कपडे से अपने लुंड को पॉच दिया, जो सौमित्र ने दूसरे तेल से चिकना किया था, फिर उसने अपने उस हैट से अपने लुंड को चिकना किया जिस पैर सौमित्र वाला तेल लगा हुआ था, देव के लिए इतना तेल काफी था, बाकि का तेल सौमित्र की छूट पैर से लग जाने वाला था, क्योकि सौमित्र ये भूल गाइट hi की उसकी छूट पैर लगा तेल थोड़ा बहुत देव के लुंड पैर भी लगेगा hi, और मर्द के लुंड का आगे का टोपा सुन होना छाइये बस उसके बाद लुंड को अहसास नहीं होता,

कुछ hi पालो में देव को महसूस हो गया की उसका लुंड उसके काबू में नहीं आ रहा ह वो खुद झटके खा रहा ह, देव ने सौमित्र का हाथ पकड़ा और अपने लुंड पैर रख दिया, सौमित्र ने लुंड को पकड़ क्र अपनी छूट पैर लगाया, लुंड को छूट पैर लगते hi देव ने एक जोर दर धक्का लगाया, छूट और लुंड पूरी तरह चिकने हुए पड़े थे, और धक्का इतना तेज था की एक hi बार में देव का लुंड सौमित्र की छूट को फाड़ता हुआ आधा अंदर घुस गया, सौमित्र को उम्मीद थी की उसे अहसास नहीं होगा, लेकिन वो गलत थी ये देव का लुंड था, ये किसी भी साधारण लुंड से तीन गुना मोटा था, और अगर दर्द बहुत ज्यादा हो तो वो तेल भी काम नहीं करता था, और देव के लुंड ने ऐसा दर्द दिया सौमित्र को की उसकी चीख निकल गई, उसे बड़ी हैरानी हुई, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की इतना सुन्न करने के बाद भी उसे इतना दर्द हो रहा ह,






सौमित्र ने देव की कमर को पकड़ लिया और उसे रोकने लगी, लेकिन देव को अहसा सही नहीं था उसका लुंड कितना अंदर घुस चुक्का ह, देव ने हलकी सी कमर बहार खींची और फिर एक जोर दर धक्का लगा दिया, इस बार लुंड ¾ हिस्सा छूट में घुस गया, सौमित्र की आँखों से आंसू और मुँह से दर्द बहरी चीख निकल रही थी, उसके हाथ देव की गांड पैर कैसे हुए थे, वो छह क्र भी देव को रोक नहीं प् रही थी, देव ने तुरंत एप हॉट सौमित्र के होतो पैर रख दिए और उन्हें चूसने लगा, और अपना एक हाथ सौमित्र की चुकी पैर ले गया और उसे मसलने लगा, सौमित्र को कुछ hi देर दर्द का अहसास हुआ था, फिर तेल ने अपना असर दिखाना शुरू क्र दिया था, और उसकी छूट फिर से सुन्न हो गई थी, जब सौमित्र शांत होने लगी तो देव ने अपनी कमर चलनी शुरू क्र दी, लुंड छूट में फसा हुआ था, इतनी चिकनी होने के बाद भी छूट की दीवारे फटी जा रही थी,





देव हलके हलके कमर हिलने लगा, और उसी हिलने डुलने में देव का बाकि का लुंड भी सौमित्र की छूट में घुस गया, सौमित्र के लम्भी औरत थी उसका पेट की लम्बाई भी अच्छी खासी थी, फिर भी देव का लुंड सौमित्र की बच्चे दानी से जा टकराया, जब लुंड बच्चे दानी से टकराया तो सौमित्र को असली दर्द का अहसास हुआ, उसने अपना हाथ निचे लेजाकर देव के लुंड को टटोला तो पाया की देव का लगभग पूरा लुंड उसकी छूट में घुस चुक्का ह, सौमित्र ने बड़ी आँखे करके देव को देखा,

देव- थोड़ा सा बचा ह क्या उसे भी दाल दू,

सौमित्र- नहीं नहीं मैं मर जाउंगी, इससे आगे जगह नहीं ह, ये मेरी पसलियों ताका ा चुक्का ह, मेरा कलेजा बहार आ जायेगा,

देव मुस्कुराया और लुंड बहार खींचा और हल्का सा धक्का मर क्र अंदर घुसा दिया, छूट को इतना सुन्न करने करने के बाद भी सौमित्र को देव के लुंड का पूरा अहसास हो रहा था, वो महसूस कर रही थी की जब देव का लंडबहार जाता ह तो छूट उसी के साथ बहार को खुच्ने लगती ह, और जब वापस अंदर घुसता ह तो वापस अंदर चली जाती ह,

सौमित्र को अपने फैसले पैर ख़ुशी हो रही थी की उस रात वो देव से बच गई वर्ण मर hi जाती, उस रात बचने के बाद सौमित्र ने दो दिन तक कामुकता की जड़ीबूटियां खाई और अपनी छूट की मालिश की ताकि छूट लुंड को झेल सके और वो झड़े न,

काफी समय तक देव उसकी हालत में सौमित्र को छोड़ता रहा, सौमित्र की छूट अब अंदर से पानी छोड़ने लगी थी, जिससे लुंड को आसानी होने लगी थी, देव की रफ़्तार बढ़ने लगी थी, सौमित्र अब तक झड़ी नहीं थी, देव समझ गया ये इतनी आसानी सेन्हि जहदने वाली पूरी तैयारी के साथ आई ह, देव ने लुंड बहार निकला

सौमित्र- क्या हुआ झाड़ गए क्या

देव- अभी कहा सौमित्र जी अभी तो मैंने आसान बदलने शुरू किये हैं,

देव ने सौमित्र को घोड़ी बना दिया, जिससे सौमित्र की छूट उभर क्र सामने आ गई, देव ने लुंड लगाया और एक hi झटके में अंदर घुसा दिया, सौमित्र के पेअर बांध थे जो धक्का पड़ते hi खुल गए, सौमित्र ने एक हाथ से अपनी गांड को पकड़ा और बहार को खोलने लगी, उसने अपनी जंघे खोल क्र छूट को और फैला लिया, लेकिन लुंड ने उसे अपना अहसास करवा hi दिया,






फिर देव ने अपनी कमर चलनी शुरू की और उसकी रफ़्तार अच्छी खासी थी, देव हैरान सात है की सौमित्र अब तक नहीं झाड़ रही ह, लेकिन देव के लुंड को अब सौमित्र की छूट अहसास होना शुरू हो चुक्का था, मतलब उस तेल का असर उतरने लगा था, लेकिन सौमित्र की छूट में ज्यादा तेल लगा था उसे और समय लगने वाला था, और जब तक सौमित्र की छूट लुंड को अच्छे से महसूस नहीं करेगी तब तक वो झाड़ेगी नहीं,





देव ने कुछ और विचार किया और खड़ा हो गया सौमित्र ने फिर चौंक क्र देखा तो देव ने उसका हाथ पकड़ा और अपनी गॉड में उठा लिया और लुंड निचे से उसकी छूट में डाला और उसे अपने लुंड पैर उछलने लगा,





सौमित्र को अहसास हो या न हो लेकिन देव को बहुत मजा आ रहा था, क्योकि पहेली बार कोई औरत उसका लुंड उसकी छूट में पूरा ले रही थी, दोनों की चुदाई को 45 मिनट्स से ज्यादा हो चुके थे, सौमित्र हैरान थी की कोई मर्द इतनी देर तक किसे छोड़ सकता ह, सौमित्र देव से लिपटी हुई थी उसकी छाती से चिपकी हुई रगड़ रही थी, उसने अपने हाथ देव की गार्डन में डेल हुए थे, अब सौमित्र को लुंड की रगड़ें का अहसास होने लगा था, उसे हल्का हल्का दर्द महसूस होने लगा था, दर्द महसूस होते hi सौमित्र घबराने लगी थी, उसे दर था कही वो झाड़ न जाये,

लेकिन वो दर जल्दी hi गायब हो गया क्योकि उसके दर की जगह अब मजे ने जगह ले ली थी, वो मजे में अपनी कमर को हिलने लगी, लेकिन मजे के साथ साथ दर्द भी बढ़ता जार है था, क्योकि सुन्न होने के समय जो दर्द होता ह उसका अहसास बाद में जरूर होता ह, लेकिन सौमित्र इतने मजे में आ गई थी की उसे धयान अब भी दर्द पैर नहीं गया था,

देव ने सौमित्र को निचे उतरा और दीवार से लगा क्र खड़ा क्र दिया और उसकी गांड को पूछे से बहार निकल लिया, फिर लुंड लगाया और पूरा एक बार में hi उतर दिया,

सौमित्र- ahahhhhhhhhhhh मर गई, मेरी छूट ahhhhhhhhhhhhh

देव समझ गया अब इसे अहसास होने लगा ह, देव ने तुरंत धक्के लगाने शुरू क्र दिए, देव के धक्के बहुत तेज नहीं थे क्योकि तेज धक्को से तो छूट और सुन्न हो जाती ह, देव के धक्के घेरे थे, वो पूरा लुंड बहार खींचता और अंदर घुसा देता, सौमित्र को बहुत मजा आ रहा था ो अपनी कमर को पीछे धकेल रही थी, कुछ देर बार देव ने वही खड़े खड़े सौमित्र को झुका दिया और खड़े खड़े छोड़ने लगा, फिर देव ने सौमित्र के एक पेअर उठा क्र बिस्टेर पैर रकः और छोड़ने लगा, देव लगातार सौमित्र के आसान बदल रहा था, सौमित्र भी हैरान थी की इतने आसान भी होते हैं क्या चुदाई में,






फिर देव बिस्टेर पैर लेट गया और सौमित्र को अपने उप्पेर बैठा लिया और निचे से छोड़ने लगा, देव ने सौमित्र को अपने हाथो पैर उठा रखा था और निचे से पूरी रफ़्तार से उसे छोड़ रहा था, सौमित्र से अब रुकना नामुमकिन हो गया था, वो खुद को रोकने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन ये चुदाई का मजा इतना जबरदस्त था की दुनिया की कोई औरत ऐसी हालत में खुद को नहीं रोक सकती,

सौमित्र की छूट ने जवाब दे दिया और उसने अपना साथ छोड़ दिया वो देव के उप्पेर गिर पड़ी, देव ने तुरंत सौमित्र को अपने निचे क्र लिया और अपने धक्को की रफ़्तार और तेज कर दी, सौमित्र के मुँह से सिसकारियां निकल रही थी,

Ahahhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhh फाड् दो फाड् दो मेरी छूट ahhhhhhhhhhhh देव बहुत मजा आ रहा ह, ahhhhhhhhhhhhhh है ऐसे hi ऐसे hi करते रहो, मैं सवर्ग की सेर क्र रही हु, कुछ देर में सौमित्र झाड़ क्र शांत हुई लेकिन देव रुका नहीं उसने बस अपनी रफ़्तार काम की, वो लगातार धक्के लगता रहा, और कुछ hi देर में सुमित्रा फिर से झड़ने लगी, सुमित्रा को यकीन hi नहीं हुआ वो इतनी जल्दी कैसे झाड़ सकती ह, उसकी छूट से फच फच की आवाज आ रही थी,

देव ने रफ़्तार बढ़ा दी और सौमित्र झड़ती जा रही थी, वो चीखे मार रही थी,

सौमित्र- देव देव देव मुझे क्या हो रहा ह, मेरी छूट झड़ती hi जा रही हु, aahhhhhhhhhhhhh मेरा शरीर हवा में उड़ रहा ह, ahhhhhhhhhhhhhhhh, मुझे यकीन नहीं हो रहा ह ऐसा कैसे हो सकता ह, इतना मजा मैंने जीवन में कभी नहीं लिया, uufffffffffffffff तुम कमल के हो देव aahhhhhhhhhhhhhhhh बस मन कर रहा ह ऐसे hi छोड़ते रहो,

देव बिना कुछ बोले छोड़ता रहा और सौमित्र रुक रुक क्र झड़ती रही, असल में सौमित्र ने जो खुद को रोकने की कोशिश की उसकी वजह से वो एकाधिक बार झाड़ रही थी (मुलितपाल ोर्गेसुम), अब उसकी छूट में जलन होने लगी थी, वो इतना झाड़ चुकी थी की उसकी छूट से पानी निकलना hi बंद हो गया था, दोनों की चुदाई को 1:30 घंटे से ज्यादा हो चुक्का था, लेकिन देव नहीं झाड़ रहा था, सौमित्र को तकलीफ होने लगी थी,

सौमित्र- देव रुक जाओ मैं मर जाउंगी, रुक जाओ मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा, मुझमे अब ताकत नहीं बची ह और मैं लगातार झाड़ रही हु, मैं हार गई मैं आज से तुम्हारी गुलाम हु, जैसा तुम बोलोगे मैं वैसा करुँगी, तुम hi मेरे मालिक मेरे महाराज हो, मेंहथ जोड़ती हु रुक जाओ, ahhhhhhhhhhhhh

देव ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी, और सौमित्र को अपनी बहो में भर लिया, और कुछ देर बाद जबरदस्त धक्को के साथ अपना लावा सौमित्र की छूट में भर दिया, सौमित्र भी देव के साथ फिर से झाड़ गई,
 
माफ़ करना आज कही बहार गई हुई थी, दिन हर बिलकुल समय नहीं मिला, आज का अपडेट सुबह दूंगी,

गुड नाईट स्वीट ड्रीम्स टेक केयर





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अपडेट-31




देव के कमरे में एक दम सनता था बस देव और सौमित्र की घेरि सांसो की आवाज आ रही थी, देव सौमित्र के बराबर में लेता हुआ था, उसका लुंड थोड़ा सा मुरझाया हुआ था, लेकिन फिर भी काफी खड़ा महसूस हो रहा था, सौमित्र की हालत ख़राब थी, वो बस खुद को सम्हालने की कोशिश कर रही थी, काफी देर दोनों शांत रहे,

फिर सौमित्र ने उठने की कोशिश की तो उसकी चीख निकल गई, उसकी छूट में भयानक दर्द हुआ, देव ने उसे लेते रहने का इशारा किया, फिर देव उठा और उसने सौमित्र को बहो में उठाया और साफ करने के लिए ले गया, वह उसने अपने हाथो से सौमित्र को साफ़ किया और पेशाब करवाया, सौमित्र को बहुत जलन हो रही थी, देव सौमित्र को वापस लाया और बिस्टेर पैर लिटा दिया, सौमित्र ने देव का हाथ पकड़ा और अपने उप्पेर खींच लिया और खुद से चिपका लिया,

सौमित्र ने देव के हॉट चूमे

सौमित्र- तुम सच में कमल के हो, आज जो सुख तुमने मुझे दिया ह ऐसा सुख जीवन में कभी नहीं मिला, मेरे जैसी कामुक औरत की प्यास बुझाना की मर्द के बस में नहीं ह, और जबकि मैं ऐसी कामुकता भरी दवाइया कहती हु जिस वजह से मुझे 4 मर्द भी शांत नहीं कर सकते लेकिन तुमने अकेले ने hi मुझे शांत भी कर दिया बल्कि मेरी चीखे निकलवा दी, मुझे रोकने पैर मजबूर कर दिया, आज से मैं तुम्हारी गुलाम हो गई हु, और मैं कसम कहती हु आज के बाद तुम्हारे सिवा मेरे इस शरीर पैर किसी का अधिकर नहीं होगा, मैं सिर्फ झुकूँगी तो तुम्हारे सामने

देव- तुम शरत को इतना महत्व दे रही हो,

सौमित्र- मैं अपने कहे शब्दों से कभी पीछे नहीं हठती, लेकिन अगर शरत न भी होती तब भी मैं ऐसा hi करती, तुमने मेरी आत्मा तक को तरपत कर दिया ह, आज मैं तुम्हे अपना सब कुछ मानती हु,

देव- क्या इन लोगो की साजिशो के बिच में तुम ऐसा कर पाओगी,

सौमित्र- अब कोई साजिश तुम तक नहीं आएगी, मैं तुम्हारे साथ रहूंगी, ये मैं वचन देती हु,

देव- आप मेरे पास उस साजिश की वजह से hi तो आई थी,

सौमित्र एक पल के लिए घबराई लेकिन उसने खुद को सम्हाला

सौमित्र – सही बोल रहे हो तुम, मैं तुम्हारे पास उस साजिश में शामिल होकर hi आई थी, काम्य ने मुझे भेजा था, महाराज और काम्य तुम्हारी ताकत का राज जानना चाहते हैं इसलिए काम्य ने मुझे तुम्हारे पास भेजा वो राज जानने के लिए,

देव- तो क्या तुम्हे वो राज जानना ह

सौमित्र- नहीं मुझे नहीं जानना, अब मुझे किसी शाजिश में शामिल नहीं होना, अब मुझे बस तुम्हरे साथ सुख से रहना ह,

देव ने सौमित्र को बहो में भर लिया,

देव- आप महारानी हो,

सौमित्र- महारानी का अधिकार उस काम्य ने कभी लेने hi नहीं दिया, न जाने क्या जादू किया हुआ ह उसने महाराज पैर की महाराज हमेशा उसी की बात सुनते हैं,

देव- ये तो आपको hi पता करना पड़ेगा ऐसा क्या जादू किया ह की वो अपनी पत्नी की न सुनकर अपनी बहन की सुनते हैं,

सौमित्र- मैं कैसे करुँगी

देव- अपने आँख कण खुले रख क्र, अगर आपको अपना अधिकार चाहिए तो उनके बारे में जानकरी तो रखनी होगी,

सौमित्र- मुझे बस तुम्हारे साथ रहना ह अब

देव- ये राजमहल ह यहाँ आप अपनी मर्जी का तभी कुछ कर सकती हो जब आप का अधिकार सबसे ज्यादा हो, अब आपको मजबूर करके काम्य ने मेरे पास भेज दिया ह, आगे वो फिर से मजबूर कर सकती ह,

सौमित्र- सही बोल रहे हो, मुझे अब उसके काबू में नहीं आना ह,

देव को एक अच्छी खासी जासूस मिल चुकी थी, जो अब देव की हो चुकी थी, कामुक औरत की अगर कोई अच्छे से प्यास बुझा दे तो वो हमेषा के लिए उसकी हो जाती ह,

रात काफी हो चुकी थी, महल में एक दम सनता था, सौमित्र बहुत थकी हुई थी और दर्द की वजह से उससे हिला भी नहीं जार है था तो देव ने उसे कपडे पहनाये और अपनी गॉड में उठाया और उसके कमरे की तरफ लेकर चल दिया, लेकिन दर था कही किसी सैनिक ने देख लिया तो सब गड़बड़ हो जाएगी, लेकिन कमल हो गया वह कोई नहीं था, सौमित्र पहले hi सब इंतजाम करके आई थी, उसकी दासी ने सारा रास्ता पहले hi साफ़ रखा था, देव सौमित्र को कमरे में लिटा क्र वापस अपने कमरे में आया तो सामने निहारिका कड़ी हुई मिली,

देव- माँ आप यहाँ

निहारिका- तू कमरे में नहीं आया तो मैं hi आ गई,

देव- वो मैं सौमित्र को अभी उसके कमरे में छोड़ क्र आया हु,

निहारिका- तो खोल दिए सौमित्र के सरे दरवाजे,

देव- है माँ खोल दिए अउ रेज खोले हैं वो जीवन भर कही और नहीं जाएगी, मुझे उम्मीद ह वो अब हमारे खिलाफ साजिश नहीं करेगी,

निहारिका- कभी कभी लगता ह हम उनसे बदला ले रहे हैं, लेकिन कभी कभी लगता ह हम उनसे बदला नहीं ले रहे बल्कि उन्हें मजा दे रहे हैं,

देव- माँ जिसे आप मजा समझ रही हैं, इस बात को आप ऐसे देखो की जो लोग हमारी इज्जत उतरने में लगे रहते थे आज वो अपनी इज्जत को ख़ुशी ख़ुशी हमारे नीचे बिछा रहे हैं, और असली दुश्मन ये लोग नहीं हैं, असली दुश्मन ह काम्य, जितनी जानकारी मुझे मिली ह उस हिसाब से काम्य इस सबकी सूत्रधार ह, मुझे बस इतना पता करना ह कोण कोण किस तरह से इसमें शामिल ह, क्योकि सबको पता ह काम्य अपने बेटे के लिए राजय चाहती ह, फिर ये लोग उसकी मदद क्यों क्र रहे हैं,

निहारिका- उस काम्य को ऐसा सबक सीखना की वो जिंदगी भर हमे भूल न पाए,

देव- ऐसा hi होगा माँ,

निहिरका देव के गले लग गई,

देव- माँ कल से मैं भौमिक जी के पास जाऊंगा, युद्ध की सभी कला सिखने,

फिर दोनों निहारिका के कमरे में चले गए, सुबह होने वाली थी, दोनों एक दूसरे से लिपट क्र सो गए,

वही भवर सिंह और काम्य सात्विक के साथ जंगलो में भटक रहे थे, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली थी,

भवर सिंह- सात्विक जी हमे कैसे पता चलेगा उस शक्ति के बारे में,

सात्विक- महाराज जब मैं शक्ति के करीब पहकहूंगा तो मुझे अहसास हो जायेगा,

काम्य- हम यहाँ इतने समय से खोज रहे हैं, बिना किसी जानकारी के हमे कैसे पहुंचेंगे उस शक्ति तक,

सात्विक- महाराज मेरे हिसाब से किसी को तो वो जानकरी होगी hi, कोई तो होगा इस दुनिया में जिसे ये जानकारी होगी,

भवर सिंह और काम्य ने एक दूसरे को देखा, और कुछ इशारा किया, सात्विक ने उनका इशारा देख लिया, सात्विक समझ गया इन दोनों के पास कुछ तो जानकारी ह,

सात्विक- महाराज हमे अब वापस चलना चाहिए, सुबह होने वाली ह, पूरी रात से हु धुंध रहे हैं, हमे कोई ऐसी जानकरी निकालनी होगी जिससे हम उस शक्ति तक पहुंच सके, काश कोई ऐसा मिल जाये जिसके पास इस बारे में कुछ जानकारी हो तो मैं अपनी शक्ति से उससे सब निकलवा सकता हु,

काम्य- क्या सच में आप किसी से भी राज उगलवा सकते हैं,

सात्विक- है महारानी मैं ऐसा कर सकता हु,

काम्य- महाराज क्या हम ीक बार कोशिश करनी चाहिए,

भवर सिंह ने एक पल के लिए आँखे बंद की,

भवर सिंह- पहले महल चलते हैं कुछ आराम करते हैं फिर कुछ करेंगे,

सभी महल की तरफ चल दिए, सात्विक को समझ आ गया था की कोई तो ह जो इस बारे में जनता ह, और बहवर सिंह को पता ह वो कोण ह, अब उसी के जरिये मुझे शक्ति तक पहुंचना होगा, महल में वापस आने में सवेरा हो गया था,

वही प्रताप सिंह के राजय में दर का माहौल था, पुरे राजय खबर फ़ैल गई थी की महारानी रेणुका का बीटा वापस महल में आ रहा ह, सभी ने अपनी बेटियों को छुपा दिया था, पूरा राजय की औरते घरो में घुस गाइट hi, क्योकि रेणुका के बेटे ने इतनी औरतो का बलात्कार किया था की हर दूसरे घर में उसकी की औलाद पैदा हो रही थी, और कोई रोक भी नहीं प् रहा था, उसकी हरकतों की वजह से उसे राजय से दूर भेजा गया था, अब वो वापस आ रहा था,

अभी दो दिन पहले जिस राजय में मातम चाय हुआ था अहा खुशिया मेनिया जार hi थी, रेणुका के बेटे के वापस आने की खुशिया मेनिया जार hi थी, प्रताप सिंह के बेटो के मरने से उसका राजय के लोग खुश थे लेकिनअब उतने hi डरे हुए थे,

रेणुका और प्रति सिंह सुबह सुबह अपने बेटे के स्वागत में खड़े थे, और साथ में रेवती भी कड़ी थी आरती की थाली लिए, रेवती अपने भाई को बिलकुल पसंद नहीं करती थी, क्योकि उसने अपने भाई का खूंखार रूप देखा था,

रेवती पहले से hi उदास थी और अब उसका जलाद भाई उसके सामने आ रहा था, दुनिया में उसे सबसे ज्यादा दर अपने भाई से hi लगता था,

फिर एक घोड़े पैर विशाल शरीर वाला इंसान बैठा हुआ आ रहा था उसके पीछे पीछे सैनिक चले आ रहे थे, वो उतर क्र अंदर आया, तो रेणुका ने रेवती को आगे कर दिया अपने भाई की आरती उतरने के लिए,

प्रताप सिंह- आ गया मेरा बीटा, अब मेरी ताकत वापस लोट आई ह, अब मेरे सरे दुश्मन ख़तम होंगे,

रेणुका- इसके सामने जो भी दुश्मन आएंगे वो दर क्र इसके चरणों में झुक जायेगा इसलिए इसका नाम मैंने चरण सिंह रखा ह,

ये था प्रताप सिंह का बीटा चरण सिंह जो बहुत hi शक्ति शैली और अत्याचारी था,

चरण सिंह- पिता जी मेरे भाइयो को किसने मारा, आप मुझे बस उसका नाम बता दीजिये, मैं उसे खानदान सहित उसे मार दूंगा,

प्रताप सिंह- मैं जनता हु बीटा तू ऐसा कर सकता ह, पहले अंदर चल फिर तुझे सब कुछ बताता हु,

सभी लोग अंदर आ गए,

पूरा परिवार वही बैठा हुआ था, प्रताप सिंह, रेणुका, और बाकि पत्निया, सम्भि सुरेंद्र और भानु और आज रेवती भी वही बैठी थी, आज पहेली बार उसे ऐसी सभा में बैठाया गया था,

प्रताप सिंह चरण सिंह को सब कुछ बताना शुरू किया, शुरू से लेकर अब तक की साडी कहानी सुनाई, जब से प्रताप सिंह भवर सिंह के राजय में गया और वह उसे काम्य और सूरज ने अपनी साजिश का हिस्सा बनाया और देव और निहारिका के बारे में सब बताया, देव का नाम सुनकर और अपने hi पिता के मुँह से देव की सचाई सुनकर रेवती के शरीर में सनसनी सी दौड़ गई, सुगंधा ने जो बताया था वो सब सच था, मतलब देव और उसकी माँ के साथ बहुत बुरा किया गया ह,

रेवती देव के बारे में सोच रही थी और प्रताप सिंह चरण को कहानी सुना रहा था, कहानी पूरी सुनाने के बाद

चरण- तो दो दुश्मन सबसे बड़े हैं, एक ये देव और दूसरा राक्षश, देव के बारे में हम जानते हैं की वो भवर सिंह का बीटा ह लेकिन जिन्दा कैसे बचा ये कोई नहीं जनता, और उस राक्षश के बारे में कोई कुछ नहीं जनता वो बस सबको मरता ह,

प्रताप सिंह- है बहुत hi भयानक ह वो, जब भी आता ह हाहाकार मचा देता ह,

रेणुका- मेरेहिसब से उसे युद्ध पसंद नहीं ह, इसलिए वो हमेषा युद्ध के बिच में आ जाता ह,

चरण- ऐसा नहीं ह, आपके बताये अनुसार वो जब भी आता ह उस समय भवर सिंह का परिवार खतरे में होता ह, और अगर उसे युद्ध से परेशानी होती तो पुरे भारत वर्ष में कही न कही युद्ध चल hi रहा होता ह, वाओ अहा तो नहीं गया कभी, सिर्फ इन दो राज्यों के बिच में hi क्यों आता ह,

प्रताप सिंह- ये तो हमने सोचा hi नहीं

चरण- ये कोई ऐसा ह जो हमे जीतनेय नहीं देना चाहता,

प्रताप सिंह- अगर हमे ऐसी शक्ति मिल जाये जो भवर सिंह के राजय में उस राजगुरु के भाइयो के पास थी तो हम सबको हरा देंगे,

चरण- अगर किसी के पास ऐसी शक्ति ह तो भगवन की शक्ति का राज खुल चुक्का ह,

प्रताप सिंह- भगवन की शक्ति कोनसी शक्ति

चरण- राजा भैरव की शक्ति,

रेणुका- भैरव कोण भैरव

चरण- एक योद्धा एक राजा जो अमर ह, जो मर नहीं सकता, और जो इतना शक्ति शैली ह की हठी को उठा क्र फेंक दे, उसी की शक्ति हैं ये, इसके बारे में संसार में बहुत काम लोग जानते हैं,

प्रताप सिंह- तुम कैसे जानते हो इसके बारे में,

चरण- क्योकि जब मैं महल से निकला तो मैंने संसार की लगभग सभी किताबे पढ़ी, और उनमे से 3 किताब ऐसी मिली जिसमे राजा भैरव के बारे में लिखा ह, और उसमे से एक किताब भवन पूरा में लिखी गई ह, दूसरी दक्षिण क ीक राजय में और तीसरी उतार के राजय में,

प्रताप सिंह- कैसी शक्तिया हैं ये,

चरण- 3 शक्तिया हैं, जो भगवान् के धरती पैर आने से बानी थी, और जिसके पास भी ये शक्तिया होंगी वो सर्वशक्ति शैली होगा, वो इस पूरी दुनिया पैर राज कर सकता ह, इसीलिए मैं उन शक्तियों की खोज में था,

रेणुका- लेकिन भवन पूरा का इससे क्या सम्बन्ध

चरण- अगर वह किसी के पास कोई चमत्कारी शक्ति ह तो उन्हें इस शक्ति का राज पता चल चुक्का ह,

प्रताप सिंह- हमे क्या करना चाहिए,

चरण- हमे उनके पास जाना होगा और उनसे दोस्ती करनी होगी, अउ रेज किसी को अपनी तरफ करना होगा जिसे शक्ति के बारे में पता हो,

प्रताप सिंह- क्या बोल रहे हो, उन लोगो से दोस्ती, उन्होंने मेरे बेटो को मारा ह,

चरण- जो जा चुक्का ह उसके लिए रोकर क्या करोगे पिता जी, आगे जो आने वाला ह उसके बारे में सोचो, अगर हमे वो शक्ति मिल जाती ह तो हम जब चाहे उन्हें मर सकते हैं, और सोचो क्या पता उस शक्ति ह हम अमर हो जाये,

चरण सिंह की बात से प्रताप सिंह और रेणुका की आँखों में चमक आ गई, लेकिन जो बेटे मरे गए थे उनकी माँ की आँखों में आंसू थे, क्यों बच्चो को खोकर माँ कभी अपना भला नहीं सोच सकती,

प्रताप सिंह- तो तुम hi बताओ हमे क्या करना ह

चरण- सुना ह ये रेवती इस महल से लापता थी, कहा रह क्र आई ह किसके साथ रहकर आई ह कोई नहीं जनता, अब ये पवित्र भी ह या नहीं क्या पता, इसलिए ये हमारे राजय पैर अब सिर्फ एक दाग ह तो क्यों न इसकी शादी भवर सिंह के किसी बेटे से कर दी जाये, ताकि दुश्मनी ख़तम होकर दोस्ती में बदल जाये,

चरण सिंह की बात से रेवती की आँखों ने आंसुओं की नदी भेने लगी, वो देव के पास से वापस आई थी अपने परिवार के पास लेकिन उसका परिवार उसे एक दाग समझता ह, रेवती की सांसे थम सर hi थी, उसका दम घुट रहा था,

वही प्रताप सिंह थोड़ा बैचैन हो गया था क्योकि उसके दिल में रेवती को भोगने के विचार उठे हुए थे, लेकिन उसने अपनी भावनाओ पैर काबू रखा,

प्रताप सिंह- ये शादी का खेल हम पहले भी खेल की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली,

चरण- उस समय आपने उनके हिसाब से ये खेल खेला था, अब हम अपने हिसाब से ये खेल खेलेंगे, उस समय आपने उस निहारिका को पाने के लिए ये सब किया था, लेकिन अब पूरी दुनिया पाने के लिए करेंगे, फिर वो निहारिका भी आपकी होगी, और जिन लड़कियों के लिए मेरे भाई मरे गए हैं वो लड़किया भी इस राजय की होंगी,

प्रताप सिंह- ठीक ह जैसा तुम्हे ठीक लगे, लेकिन तुम खुद इस बारे में आगे बात करना मैं वह नहीं जाना चाहता,

चरण- वो सब आप मुझ पैर छोड़ दीजिये, और अपने जासूसों को बुलाइये,

संभु- लेकिन उस देव का क्या करना ह, वो हम सबको मर देगा,

चरण- ये दर अपने दिमाग से निकालो, वानर उससे पहले मैं तुझे मार दूंगा, अब न अकोइ देव कुछ कर पायेगा न hi कोई राक्षश, जो होगा वो मैं करूँगा, जैसा मैं कहु वैसा करते जाओ, ये युद्ध ताकत का नहीं बूढी का ह,

भानु- ताकत में उससे कोई नहीं जीत सकता

चरण- मैं चहु तो पुरे बह्वानपुरा को तबाह क्र दू अपनी ताकत से लेकिन फ़िलहाल हमे उस शक्ति की खोज करनी ह,

फिर चरण प्रताप सिंह और रेणुका उठ क्र चले गए अपने जासूसों से मिलने के लिए, बाकि परिवार भी उठ क्र चला गया लेकिन रेवती वही अपनी जगह पैर बैठी रह गई, उसके लिए तो इस संसार में कही कोई जगह नहीं बची थी, उसका अपना परिवार hi उसका सबसे बड़ा दुश्मन बना हुआ था, उसे बस देव की याद आ रही थी, उसे याद आ रहा था की देव उसे इस कैद से निकल क्र ले गया था, उसने मुझे आजादी दी, एक खुली जिंदगी दी, आज उसे देव और सुगंधा की हर बात पैर यकीन हो चुक्का था, तभी उसे याद आया की देव ने कहा था उसके माँ के कमरे से जो रास्ता जाता ह, रेवती तुरंत उठी और उस तरफ चल दी,

इधर देव भौमिक जी के पास आ चुक्का था,

देव- गुरु जी बताइये मुझे क्या करना ह

भौमिक जी- देव तुम शक्तियों के बारे में जान चुके हो, और तुम ये भी जानते हो की उनमे से एक शक्ति तुम्हारे अंदर भी ह, जिस वजह से तुम बहुत शक्ति शैली हो चुके हो, लेकिन तुम्हे युद्ध भी सीखना ह, क्योकि मेरे हिसाब से ये बहवर सिंह या प्रताप सिंह असली शत्रु नहीं हैं, अगर तुम्हे और मुझे ये शक्ति मिली ह तो भगवान् की जरूर कोई योजना ह, और उसके लिए हमे तैयारी करनी होगी,

देव- गुरु जी आप जैसा कहेंगे मैं वैसा hi करूँगा, लेकिन वो शत्रु कोण हो सकता ह,

भौमिक जी- वो जो तुमसे भी कही अधिक शक्तिशाली ह, और जो अपने योद्धा तैयार क्र रहा ह,

देव- क्या मतलब

भौमिक जी- पहले मैं भविष्य की कुछ झलकियां देख पता था, लेकिन अब मुझे भविष्य का बहुत कुछ दीखता ह, लेकिन आज भी मैं तुम्हारा भविष्य नहीं देख पता, फिर भी बाकि सब का भविष्य देख क्र ये समझ आ गया ह की कुछ बहुत बुरा होने वाला ह,

देव- मुझे बताइये क्या होने वाला ह

भौमिक जी- भविष्य नहीं बताया जाता देव, बस उसके लिए तैयार हुआ जाता ह, समय से पहले कुछ मत पूछो, क्योकि सही तरह से मुझे पता भी नहीं और संसार का नियम तोड़ने की अनुमति भी नहीं ह, हमे जो शक्तिया मिली हैं वो उस बात पैर नर्भर करती ह की हमारे विचार कैसे हैं, इसलिए अपने अंदर हमेशा सच्चाई को बनाये रखना,

देव- समझ गया गुरु जी,

भौमिक जी ने देव की शिक्षा शुरू क्र दी थी, उधर भवर सिंह वापस महल में आ चुक्का था काम्य और भवर सिंह एक जगह बैठे हुए थे,

काम्य- क्या सोच रहे हो आप

भवर सिंह- क्या हमे सात्विक से राजवीर के बारे में बताना चाहिए,

काम्य- मुझे लगता ह सात्विक उससे कुछ राज उगलवा ले,

भवर सिंह- लेकिन अगर उसने बहार किसी को बता दिया तो क्या होगा,

काम्य- एक बार वो शक्ति हमे मिल गई तो फिर कोई हमारा क्या बिगड़ लेगा, और वैसे भी आप महाराज हैं, हम जो सबको बताएँगे वही सच होगा, और वैसे भी ये सात्विक हमारे साथ ह,

भवर सिंह- ठीक ह पहले सात्विक से बात करते हैं,

कुछ समय बाद भवर सिंह काम्य और सात्विक एक सभा में बैठे हुए थे, इस सभा में राजगुरु भी नहीं थे,

भवर सिंह- सात्विक जी ये सभा बहुत खास ह, यहाँ जो चर्चा होगी वो किसी भी कीमत पैर बहार नहीं जनि चाहिए,

सात्विक- आप भरोसा कर सकते हैं महाराज, हम अब एक hi नव में सवार हैं, आपको वो शक्ति चाहिए और मुझे उस शक्ति का मालिक, मतलब जिसके पास वो शक्ति होगी मैं उसकी तरफ hi रहूँगा,

काम्य- ऐसा क्यों

सात्विक- क्योकि उन शक्तियो में से एक मेरे अंदर ह, इसलिए मुझे उस शक्ति वाले का साथ देना hi ह,

भवर सिंह- हमने तुम्हे यहाँ इसलिए बुलाया ह क्योकि एक इंसान ह जिसे इन शक्तियों के बारे में बहुत कुछ पता ह,

सात्विक- जितना मुझे पता चल चुक्का ह उससे ज्यादा नहीं पता होगा,

काम्य- आपको उसके सामने कुछ भी नहीं पता, जो जानकरी उसके पास ह वो किसी के पास नहीं ह,

सात्विक की आँखों में चमक आ गई,

सात्विक- कोण ह वो और क्या जनता ह वो,

भवर सिंह- सब कुछ जनता ह वो ये शक्ति क्यों आई, और वो शक्ति कहा ह, लेकिन वो कुछ बताएगा नहीं, हम पिछले 20 साल से कोशिश कर रहे हैं उससे सब कुछ जानने की लेकिन उसने कुछ नहीं बताया,

सात्विक- 20 साल से मतलब आप पहले से जानते थे इन शक्तियों के बारे में,

भवर सिंह- हम एक शक्ति के बारे में जानते थे, ये तीन हैं इसका नहीं पता था,

सात्विक- कोण ह इंसान

भवर सिंह- राजवीर, निहारिका का भाई

सात्विक- राजवीर लेकिन वो तो मर चुक्का ह,

भवर सिंह- नहीं वो जिन्दा ह, लेकिन ये बात कोई नहीं जनता, और मैं चाहता हु ये बात किसी को पता न चले,

तभी वह कुछ गिरने की आवाज आई, भवर सिंह और काम्य घबरा गए,

भवर सिंह- कोण ह वह

कोई आवाज नहीं आई,

भवर सिंह ने सेनिको को आवाज लगाई, सैनिक दौड़े हुए अंदर आये,

भवर सिंह- इस कमरे में कोण आया था,

सैनिक- कोई नहीं आया महाराज, हम तो दरवाजे पैर hi खड़े हैं,

काम्य- कही दूसरे रस्ते से तो

भवर सिंह दौड़ क्र दूसरे रस्ते पैर गया, वह का दरवाजा खुला हुआ था,

सात्विक- महाराज आप इतना घबरा क्यों रहे हैं,

भवर सिंह- किसी ने हमारी बाते सुन ली हैं, और अगर ये बात बहार आई तो सब बर्बाद हो जायेगा,

सात्विक- ऐसा कुछ नहीं होगा, मुझ पैर भरोसा रखिये मैं पता करता हु कोण आया था यहाँ,

सात्विक ने आँखे बंद की और उस जगह पहुंच गया जहा बरतें गिरे हुए थे,

सात्विक- कोई औरत थी मर्ज, उसका चेहरा ढाका हुआ था इसलिए मैं उसका चेरा नहीं देख सकता, लेकिन उसने दसियो जैसे कपडे पहने थे,

भवर सिंह काम्य और सात्विक बहार आ गए,

काम्य- सैनिक तुरंत सभी दसियो को यहाँ बुलवाया जाये,

सात्विक- उसकी जरुरत नहीं ह महारानी वो जार hi वो दासी,

सबने उधर देखा तो एक दासी बड़े तेज तेज कदमो से महल से बहार जार hi थी,

भवर सिंह- आपको यकीन ह

सात्विक- ये वही कपड़ हैं जो मैंने देखे थे,

काम्य- सैनिक उस दासी को पकड़ो जालिद से,

सैनिक तुरंत उस तरफ दौड़ पड़े, लेकिन उस दासी को अहसास हो गया था की सैनिक उसके पीछे आ रहे हैं, उसने भी महल से बहार की तरफ दौड़ लगा दी, 4 सैनिक तेजी से दौड़ते हुए उसके करीब पहुंच गए थे, वो उसे पकड़ने hi वाले थे की एक नौजवान लड़का तेजी से घोड़े पैर दौड़ता हुआ आया और उस दासी को घोड़े पैर बैठा क्र ले गया, उसका मुँह ढाका हुआ था, सैनिक उसके पीछे दौड़े, लेकिन उसकी रफ़्तार बहुत तेज थी,

पुरे महल में हड़कंप मच गया था, वह राजगुरु भी आ गए, राजगुरु ने भवर सिंह काम्य और सात्विक को साथ में देखा तो चौंक गए,

भवर सिंह- राजगुरु ये क्या हो रहा ह हमारे महल में, अब जासूस हमारे कमरे तक पहुंच गए हैं, कैसे सुरक्षा व्यवस्था ह आपकी,

राजगुरु- माफ़ करना महाराज लेकिन महल में बहार से कोई नहीं आ सकता,

कमाया- राजगुरु वो दासी के भेस में जो औरत गई ह वो हमे किसी भी कीमत पैर चाहिए वो भी जिन्दा,

राजगुरु ने संपत्ति को तुरंत उसके पीछे लगा दिया,

भवर सिंह और काम्य घबराये हुए थे, उन्हें दर लग रहा था, और ये बात राजगुरु और सात्विक ने भी परख लिट् hi, राजगुरु के माथे पैर तो शंका के बल पद गए थे लेकिन सात्विक के चेहरे पैर एक मुस्कान थी, क्योकि उसे समझ आ गया था की भवर सिंह का एक राज अब उसे पता था, और वो भवर सिंह को अपने काबू में रख सकता था, लेकिन उसके दिमाग में एक नाम अटक गया था राजवीर उसे इस सबके बारे में कैसे पता, क्या वो तीनो शक्तियों के बारे में जनता ह, और जनता ह तो कैसे,

उधर घोड़े पैर बैठा नौजवान उस दासी को लिए जा रहा था, वो जंगल में घुस गया और सबकी आँखों से गायब हो गया, जंगल में पाहकः क्र उसने घोडा रोका और दासी को निचे उतरा, तो दासी के सर पैर से घूँघट हैट गया और सामने थी एक बहुत hi सूंदर मासूम सी लड़की,

वो नौजवान उस लड़की को देखता hi रह गया,

लड़की- कोण हो तुम,



लड़का- मेरा नाम अभेंद्र ह, तुम भाग क्यों रही थी मनीषा.
 
अपडेट-32




घोड़े पैर लड़की को भगा ले जाने वाला देव का साथी अभेंद्र था, लेकिन एक अनजान लड़के से अपना नाम सुनकर लड़की चौंक गई,

मनीषा- कोण हो तुम और मुझे कैसे जानते हो,

अभेंद्र- देव जी ने बोलै था तुम्हारा ख्याल रखने के लिए, अगर तुम्हे किसी भी संशय में देखु तो वह से बहार निकल लौ,

मनीषा- देव भैया ने बोलै था, तुम सच बोल रहे हो, नहीं नहीं मैं ऐसे किसी पैर भरोसा नहीं कर सकती,

अभेंद्र- बहुत बढ़िया मुझे भी यही सुन्ना था, मैं तुमसे कुछ नहीं पूछ रहा हु, तुम्हे जो बताना ह वो देव जी को hi बता देना,

मनीषा- लेकिन तुम मुझे कैसे जानते हो,

अभेंद्र- तुम मुखिया जी की बेटी हो न, जो कुछ hi समय पहले यहाँ आई ह, देव जी ने बताया था की तुम उनकी सहायता कर रही हो,

मनीषा- और क्या बताया उन्होंने

अभेंद्र- इससे ज्यादा की जानकारी की मुझे जरुरत नहीं होती,

मनीषा ने अपना सर निचे क्र लिया, उसे दर था कही अभेंद्र भी उसे वैसी hi गिरी हुई नजरो से देखेगा, लेकिन अभेंद्र बहुत hi शालीन इंसान था,

अभेंद्र- हमे यहाँ से निकला चाहिए, वो लोग तुम्हे खोजने के लिए निकले हैं,

मनीषा- मुझे देव भैया से मिलना ह जरुरी,

अभेंद्र- वो न जाने किस समय आएंगे लेकिन मैं उनके पास तुम्हे लेकर चलता हु,

अभेंद्र ने मनीषा को घोड़े पैर बैठाया और घोडा डोडा दिया,

उधर भवर सिंह और काम्य का बुरा हाल था, और सात्विक ने एकांत पते hi राजगुरु से बात करनी शुरू क्र दी,

सात्विक- भैया भवर सिंह और राजवीर के परिवार में कैसा रिश्ता था, सुना ह उनके पिता आपस में मित्र थे,

राजवीर का नाम सुनते hi राजगुरु के कान खड़े हो गए, राजगुरु का दिमाग बहुत तेजी से साडी कड़िया जोड़ने लगा, जैसे की भवर सिंह काम्य सात्विक के साथ एकांत में बात कर रहे थे, तो हो न हो उस शक्ति के बारे में बात होगी, और सात्विक के मुँह से राजवीर का जीकर होना, मतलब उनके बिच राजवीर को लेकर भी कोई बात हुई होगी, क्या राजवीर और उस शक्ति के बिच कोई रिश्ता ह, पिताजी ने कहा था समाधी में खोजो, क्या राजवीर की समाधी में कुछ था, नहीं नहीं उसकी मोत तो बहुत बाद में हुई थी,

सात्विक- क्या हुआ भैया आप कहा खो गए,

राजगुरु- कही नहीं सात्विक, मैं घर पैर बात करूँगा फ़िलहाल मुझे उस औरत को ढूढ़ने जाना ह,

राजगुरु तुरंत वह से निकल गए, और वो उस लड़की के पीछे न जाकर सीधे राज परिवार की समाधियों की तरफ चले गए, कुछ hi समय में वो भवर सिंह के दादा, राजवीर के दादा और राजगुरु के पिता की समाधी के सामने खड़े थे, तीनो की समाधी एक साथ बनाई गई थी, ये भवर सिंह के दादा का hi आदेश था की इन तीनो दोस्तों की समाधी एक साथ बनवाई जाये, और ये समाधी बनवाई थी राजगुरु के पिता ने,

राजगुरु समाधियों के सामने खड़े विचार क्र रहे थे,

राजगुरु खुद से hi- इस तरफ मैंने कभी सोचा क्यों नहीं, ये राजपरिवार का नियम तोड़ क्र ऐसा क्यों किया गया, ये तीनो समाधिया एक दूसरे के साथ क्यों बनाई गई, ये hi वो जगह ह जहा मंजिल मिल सकती ह, लेकिन मुझे ये बात राज रखनी होगी,

राजगुरु समधी के चारो तरफ घूमने लगे तब उनका धयान गया की राजवीर के दादा की समाधी पैर लिखे नाम का जो पत्थर लगा था वो थोड़ा हिला हुआ लगा, जब राजगुरु ने उस पत्थर को हिलाया तो लगा ये घूम जायेगा, उन्होंने पत्थर को घुमाया तो भवर सिंह के दादा की समाधी के पीछे एक रास्ता खुल गया, राजगुरु तुरंत वह पहुंचे तो देखा वह सीढिया बानी हुई हैं, राजगुरु उस रस्ते से अंदर घुस गए, बहुत hi अँधेरा था वह, राजगुरु ने कुछ देर अपनी आँखों को वह के अँधेरे से अभ्यासःथ किया, जल्दी hi उन्हें थोड़ा बहुत दिखने लगा, क्योकि हलकी हलकी रौशनी अंदर आ रही थी, राजगुरु ने चारो तरफ देखा तो उन्हें एक पत्थर पैर एक लकड़ी का बक्सा दिखाई दिया,

राजगुरु उस बक्से को बहार ले आये, और समाधी का रास्ता बंद क्र दिया, वो उस बक्से को लेकर अपने घर की तरफ तेजी से निकल गए,

उधर अभेंद्र मनीषा को लेकर देव के पास पहुंच गया, जहा देव भौमिक जी से युद्ध कला सिख रहा था,

अभेंद्र और मनीषा को ऐसे आया देख क्र देव एक पल के लिए घबरा गया, देव तुरंत उनके पास पंहुचा, भौमिक जी भी उसके पीछे आ गए,

देव- क्या हुआ मनीषा तुम ठीक हो न,

मनीषा- मैं ठीक हु भैया इन्होने मेरी जान बची,

देव- है ये तुम्हारी सुरक्षा के लिए था वह पैर,

मनीषा ने अभेंद्र को देखा, अभेंद्र ने मुस्कुरा कर सर झुकाया,

देव- क्या हुआ बताओ तुम यहाँ कैसे

अभेंद्र- ये महल से बहार की तरफ भाग रही थी और इसके पीछे सैनिक थे मुझे लगा ये खतरे में ह तो मैंने महल में से इसे भगा लाया, इसे मुझ पैर यकीन नहीं था इसलिए यहाँ लाना पड़ा,

देव- अच्छा किया,

भौमिक जी- क्या हुआ देव

देव- ये तो मनीषा hi बताएगी क्या हुआ,

मनीषा- क्या सबके सामने बता दू,

देव- है मनीषा इन लोगो से कुछ छुपाने की जरूरत नहीं ह, ये मेरे गुरु जी हैं, इनसे ज्यादा विश्वास मैं किसी पैर नहीं करता और ये मेरा भाई ह,

भाई सुनकर अभेंद्र की आँखों में आंसू आ गए,

अभेंद्र- ये तो आपका बड़प्पन ह

देव- नहीं अभेंद्र तुम मेरे एक लोटे मित्र हो,

मनीषा- पहले आप मेरी बात सुनिए,

देव- है है बोलो

मनीषा- आपने मुझे महारानी काम्य पैर नजर रखने को कहा था न, तो मैं लगातार उन्ही पैर नजर रखे हुए थी, कल वो पुरे दिन और रात महल से बहार थी महाराज के साथ, आज सुबह आई तो महाराज और वो दोनों एक कमरे चले गए फिर वो उन साधु बाबा के साथ जिन्होंने उस जानवरो का साथ दिया था, उनके साथ उस खास कमरे में गए जहा महाराज खास लोगो से बात करते हैं, मैं आपके बताये हुए रस्ते से उस कमरे में घुस गई, लेकिन जब तक मैं वह पहुंची तो उन लोगो की बात आधी ख़तम हो चुकी थी, मुझे बस इतना समझ आया की वो लोग किसी वीर वीर की बात कर रहे थे,

देव- राजवीर

मनीषा- है है राजवीर की बात कर रहे थे, ये hi नाम लिया था, बोल रहे थे की राजवीर को कुछ पता ह, उससे राज उगलवाना ह,

राजवीर का नाम सुनते hi देव की आँखे भर आई,

भौमिक जी- क्या कहा तुमने राजवीर, क्या राजवीर जिन्दा ह

मनीषा- उनकी बातो से तो ये hi लग रहा था,

देव- गुरु जी मेरे मां जिन्दा हैं,

भौमिक जी- अगर वो जिन्दा ह तो जरूर कोई खास मकसद से उसे जिन्दा रखा गया होगा, और अगर भवर सिंह सात्विक के साथ योजना बना रहा ह तो जरूर उस शक्ति के बारे में होगी, मतलब मेरा शक सही निकला,

देव- कैसा शक

भौमिक जी- हम सब सोच रहे थे की हमने इस शक्ति को खोजै ह लेकिन हमारे पूर्वज पहले से इन शक्तियों के बारे में जानते थे, उन्होंने पीढ़ी दर पीढ़ी ये राज हमे दिया लेकिन महाराज सूर्यभान और हमारे पिता जी ने ये राज आगे नहीं दिया, लेकिन राजवीर के दादा युद्धवीर जी ने ये राज अपने बच्चो को बताया होगा और वही राज राजवीर को पता होगा,

देव- मनीषा तुम्हे कुछ पता चला की उन्हें कहा रखा गया ह,

मनीषा- माफ़ करना भैया मैं इससे ज्यादा नहीं सुन पाई, मुझे वह से बहगना पड़ा,

देव- अरे कोई बात नहीं, तुमने बहुत हिम्मत का काम किया ह, अपनी जान को खतरे में दाल क्र मेरे लिए इतना बड़ा खतरा उठाया,

मनीषा- ये जान आपकी hi दी हुई ह भैया, आपके लिए ऐसी जान 100 बार न्योछावर कर सकती हु,

देव ने मनीषा के सर पैर हाथ फिराया,

देव- तुम अब महल मत जाना, तुम अभेंद्र के साथ जाओ और वह सुगंधा मिलेगी, उसके साथ रहो, और अभेंद्र मनीषा को मजबूत बनाओ, इसे खुद की रक्षा करने लायक बनाओ, ये एक पूरी योद्धा बननी चाहिए, और सुगंधा को भी शामिल करो, हमारे राजय की लड़किया भी युद्ध करना शिखेंगी,

अभेंद्र- जैसा आप कहे,

अभेंद्र माधुरी को लेकर चला गया,

देव- गुरु जी अब मुझे क्या करना चाहिए, मुझे अपने मां को बचाना ह, उन्हें भवर सिंह ने झूठे इल्जाम लगा क्र फसाया ह,

भौमिक जी- मैं समझ गया हु देव, राजवीर के पास जो जानकरी ह उसे हासिल करने के लिए hi बहवर सिंह ने ये सब किया होगा, और उसे मारा बता दिया होगा लेकिन ये राज जाने बिना वो राजवीर को मरने नहीं देगा,

देव- सात्विक जी ने अगर उनसे राज उगलवा लिया तो वो उन्हें मर देगा,

भौमिक जी- मैं कुछ करता हु, भैया को इस बारे में जरूर पता होगा, मैं उनसे मिलता हु,

देव- सात्विक जी के पास शक्ति ह उन्हें वो शक्ति क्यों चाहिए,

भौमिक जी- वो शक्ति सात्विक को अपने लिए नहीं चाहिए, क्योकि एक इंसान दो शक्तिया नहीं रख सकता ह, उसे बस वो इंसान चाहिए जिसके पास वो शक्ति होगी, और वो क्यों छाइये इसका मुझे पता करना होगा,

देव- क्या हम उस शक्ति को खोज करे

भौमिक जी- नहीं हमे उस शक्ति का कुछ नहीं करना, हमे बस आने वाले समय की तैयारी करनी ह, तुम्हे तैयार होना ह इस युद्ध के लिए, तुम महल जाओ और वह देखो क्या हो रहा ह, मैं भैया से मिलता हु और कुछ जानकारी निकलता हु,

दोनों निकल गए,

देव महल पंहुचा तो वह एक नया बखेड़ा हो चुक्का था, राजमहल में सेनिको की भीड़ लगी थी, देव जैसे hi महल में घुसा तो अक्षरा दौड़ क्र आई और उससे लिपट गई,

अक्षरा- देव देव वो लोग फिर आ गए,

देव- क्या हुआ कोण आ गया

अक्षरा- प्रताप सिंह के बेटे,

प्रताप सिंह का नाम सुनते hi देव के दन्त भींच गए,

देव- कहा ह वो

अक्षरा- राजसभा में,

देव तुरंत तेज तेज कदमो से उधर चल दिया, जैसे hi देव ने सभा में प्रवेश किया तो एक दम वह सन्नाटा च गया, और सब देव को देखने लगे, और वह बैठे संभु के मुँह से एक दम निकला देव,

देव आगे बढ़ा तो एक लम्बा छोड़ा इंसान उठ क्र आया और देव के सामने खड़ा हो गया, ये था चरण सिंह

चरण सिंह- तो तुम हो देव, सुना ह बहुत बलशाली हो,

देव की आँखों में गुस्सा था वो चरण को एक तरफ हठाता हुआ संभु की तरफ चल दिया, संभु दर से कंपनी लगा, देव को संभु की तरफ जाता देख चरण तेजी से उसके सामने आ गया,

चरण- अरे भाई हम तो यहाँ बात करने आये हैं,

देव- तू ह कोण

चरण- मैं महाराज प्रताप सिंह और महारानी रेणुका का बीटा हु, आज से पहले हमारी कभी मुलाकात नहीं हुई ह,

देव- तुम लोगो की हिम्मत कैसे हुई इस महल में आने की,

भवर सिंह- देव ये क्या तरीका ह महेमानो से बात करने का,

देव- महेमान ये लोग कैसे महेमान हो गए हैं, आप जानते हैं इन्होने क्या किया था, इनका सर काट क्र चौराहे पैर तंग देना चाहिए,

भवर सिंह- हम सब जानते हैं, ये लोग अपने किये पैर शर्मिंदा हैं, और वैसे भी तुम इन्हे सजा दे चुके हो, अब थोड़ा शांत हो जाओ,

देव गुस्से में आग बबूला हो रहा था लेकिन मोके की नजाकत को समझते हुए उसने खुद को शांत किया,

भवर सिंह- है तो चरण सिंह तुम्हे ऐसा क्यों लगता ह हमे तुम्हारी बात मान लेनी चाहिए,

चरण- महाराज हम दोनों के राजय हमेशा से एक दूसरे से लड़ते हुए आये हैं, और जब जब हमने एक दूसरे के साथ रिश्ता जोड़ना चाहा तो कुछ न कुछ ऐसा हुआ ह जिससे बात बिगड़ गई,

भवर सिंह- तुम्हारे पिता ने hi हर बार धोखा दिया ह,

चरण – महाराज उनकी तरफ से मैं माफ़ी मांगता हु, मेरे पिता अपने 4 बेटे खो चुके हैं, अब वो राजय नहीं करना चाहते, तो अब राजय की बागडोर मुझे सम्हालनी होगी, और मैं ऐसा राजय नहीं चाहता जो अपने hi पडोसी राजय का शत्रु हो, हम दोनों राजय अगर मिल जाये तो पुरे भारत वर्ष पैर राजय कर सकते हैं, इस मित्रता के बदले आप जो हमसे चाहे मांग सकते हैं, और महारानी काम्य देवी तो समझेंगी इस बात को अगर दोनों राजय मिल जाये तो कितनी अँधेरी रेट ख़तम हो जाएँगी और नया सवेरा होगा,

काम्य ने चरण सिंह को देखा, फिर भवर सिंह को देखा,

काम्य- वैसे मुझे इसमें कुछ बुराई नजर नहीं आती, अगर ये लड़ाई मित्रता से ख़तम हो सकती ह तो हमे आगे बढ़ना चाहिए, हमारा लक्ष्य आपस में लड़ना नहीं होना छाइये, बल्कि राजय की तरक्की होना छाइये,

चरण- बहुत hi उत्तम विचार हैं आपके,

भवर सिंह- तो क्या विचार लेकर आये हो तुम, जिससे ये दुश्मनी ख़तम हो सकती ह,

चरण- महाराज हमारे परिवार की वजह से आपकी बेटियों को हमेशा तकलीफ झेली हैं, और अपमान झेला ह, और मैं भली भांति जनता हु की जो अपमान उन्होंने झेला ह उससे उभारना आसान नहीं ह, और बाकि राजय भी आगे नहीं आएंगे, इसलिए मैं आपसे प्राथना करूँगा की मेरी बहन रेवती की शादी आप अपने किसी भी राजकुमार से करवा दे और आपकी चारो बेटियों की शादी हम चारो भाइयो से करवा दीजिये, इससे दोनों राज्यों में सम्बन्ध जुड़ जायेगा, और पुराणी दुश्मनी ख़तम होगी, पहले हम अपनी बहन की शादी करवाएंगे ताकि आपको भरोसा रहे, उसके बाद hi आप फैसला लेना,

देव- ये कभी नहीं होगा, मेरी बहेनो की शादी इन जानवरो से नहीं होगी,

भवर सिंह- खामोश हो जाओ देव, ये फैसला हम लेंगे, राजय के लिए क्या सही ह क्या गलत ये हम बताएँगे,

अक्षरा अमिता सोमिया और रीवा चारो hi के चेरे पैर दर और घबराहट साफ़ नजर आ रही थी, वो बिना शादी के रहने को तैयार थी लेकिन प्रताप सिंह के परिवार में जाने के लिए तैयार नहीं थी,

भवर सिंह- हमने तुम्हारी बात सुन ली ह, लेकिन कोई फैसला लेने से पहले हम विचार करना चाहते हैं, सेनापति इनका रहने का इंतजाम महेमान घर में किया जाये, और कल सुबह हम फिर से अपने विचार रखेंगे,

चरण- जैसी आपकी मर्जी महाराज, क्या मैं आपसे एक अनुमति मांग सकता हु

भवर सिंह- है बोलो

चरण- मैं आपके परिवार के सभी सदश्यो से बाते करना चाहता हु, आप कोई फैसला ले उससे पहले मैं अपने विचार उनके साथ बाटना चाहता हु,

भवर सिंह- ठीक ह, तुम जिससे भी बात करना चाहो महल के उपवन में कर सकते हो, लेकिन महल के अंदर नहीं आ सकते,

चरना- जो आज्ञा महाराज

चरण और संभु वह से चले गए,

भवर सिंह- हमारे राजगुरु कहा हैं, इतनी बड़ी बात हो रही ह और वो महल में नहीं ह,

सात्विक- महाराज वो उस जासूस को ढूंढने गए थे,

भवर सिंह- जब तक राजगुरु नहीं आते आप उनकी जगह हमे सलाह दीजिये,

सात्विक- मुझे लगता ह एक बार इन राजकुमारों के साथ अकेले में बात करनी चाहिए और इनके विचार जानने चाहिए, अगर ये कुछ गलत सोच के साथ आये हैं तो जरूर किसी के समाने कुछ गलत बोलेंगे,

भवर सिंह- अच्छा विचार ह, सभी लोग उनसे मिलिए और उनके विचार जानने की कोशिश कीजिये,

काम्य- सबसे पहले मैं मिलूंगी,

देव गुस्से में उठा और सभा से निकल गया, चारो लड़किया वह से उठ क्र देव के पीछे जाना चाहती थी लेकिन भवर सिंह के सामने हिम्मत नहीं हुई, सभा ख़तम हुई तो वो चारो तेजी से देव के पास भागी,

वही सूरज ज्वाला और अभिजीत चिंता में दुबे हुए थे, क्योकि उनके राज को जानने वाला संभु उनके महल में था, अगर उसने महाराज को कुछ बता दिया तो उनकी मोत पक्की ह, वो जल्द से जल्द चरण और संभु से मिलना चाहते थे,

देव निहारिका के कमरे में पंहुचा और गुस्से में सामान इधर उधर फेंकने लगा,

निहारिका- देव क्या हुआ बीटा तू इतना गुस्से में क्यों ह,

देव- वो समझते क्या ह खुद को, उन्हें लोगो की जिंदगी बर्बाद करने के अलावा कुछ नहीं आता,

निहारिका- हुआ क्या ह

तभी पीछे से चारो भेने डोडी हुई आ रही थी, और एते hi देव से लिपट गई,

अक्षरा- हमे बचा लो देव हमे बचा लो, हम साडी जिंदगी कुँअरि रह लेंगी लेकिन उनसे शादी नहीं करेंगी,

निहारिका- कोई मुझे भी बातयेगा क्या हो रहा ह,

रीवा- माँ वो प्रताप सिंह का बीटा आया ह और बोलता ह की हम चारो बहेनो की शादी अपने भाइयो के साथ करना चाहता ह और अपनी बहन की शादी यहाँ के राजकुमार से करना चाहता ह,

निहारिका कैद अंत भींच गए गुस्से में

निहारिका- अगर मेरी बच्चियों की तरफ नजर भी उठाई तो आँखे नोच लुंगी मैं, निहारिका ने गुस्से में ये बोलै तभी बहार बैठा दत्त( चीता) एक दम अंदर आकर जोर से दहाड़ा,

उसकी दहाड़ से चारो बहन दर गई,

देव- शांत हो जा दत्त शांत हो जा कुछ नहीं हुआ ह,

दत्त ने सबको देखा फिर बहार चला गया,

निहारिका- तुम लोग चिंता मत करो, अब वही होगा जो तुम चाहती हो,

देव- तुम चारो क्या चाहती हो,

अमिता- हम शादी नहीं करेंगी, हम और अपमान नहीं सेह सकती,

देव- एक बार और सोच लो,

सौमित्र- सोच लिया,

देव- एक बार फैसला कर लिया तो कर लिया फिर पीछे नहीं हैट सकोगी,

अक्षरा- हमने फैसला कर लिया ह,

देव- तो ठीक ह कल से तुम चारो युद्ध कला सिखोगी, तुम चारो ऐसी योद्धा बनोगी जिससे आने वाली पीढ़िया ये जान सके की लड़किया सिर्फ दो राज्यों के बिच समझौता करवाने का सामान नहीं होती, वो योद्धा भी हो सकती हैं,

चारो भेने फिर देव से लिपट गई, इस बार रीवा सबसे आगे थी, और रीवा की चूचिया देव की छाती में दबी हुई थी, पीछे से अमिता भी लिपट गई और रीवा दोनों के बिच में डाब गई, जिससे वो और देव से चिपक गई, देव के पीछे अक्षरा थी और बराबर में सोमिया,

उधर राजगुरु उस संदूक को खोलने में लगे हुए थे, जैसे तैसे करके उन्होंने संदूक खोल लिया उसमे राखी थी एक किताब, किताब पैर लिखा था हमारा राजय,

राजगुरु ने किताब को खोला तो पाया ये राजगुरु के पिता ने खुद अपने हाथो से लिखी थी,

राजगुरु खुद से hi- लगता ह ये ह वो किताब जिसमे महाराज सुरयभन और इन शक्तियों के बारे में कुछ लिखा होगा, हमारे राजय का इतहास इसी में लिखा होगा,

राजगुरु ने किताब खोल ली और पढ़ना शुरू क्र दिया, तभी भौमिक जी वह आ गए, भौमिक जी की एते hi राजगुरु ने वो किताब छुपा दी, लेकिन भोकिं जी ने परख लिया की राजगुरु ने कुछ छुपाया ह,

भौमिक जी- भैया क्या ऐसा भी कुछ ह जिसे छुपाने की जरुरत ाँ पड़ी ह,

राजगुरु- मैं इस राजय का राजगुरु हु, और इस राजय के ऐसे सभी राज जिनसे इस राजय को खतरा हो सकता ह वो मुझे छुपाने होते हैं,

भौमिक जी- तो क्या राजवीर भी उनमे से एक राज ह

राजगुरु- राजवीर, उसमे कैसा राज ह वो तो मर चुक्का ह

भौमिक जी- भैया अब मुझसे मत छुपाइये, मैं जनता हु राजवीर जिन्दा ह,

राजगुरु- कैसी बात कर रहे हो, वो राजद्रोह के जुर्म में मारा जा चुक्का ह,

भौमिक जी- भैया झूट बोलने का कोई फायदा नहीं ह

राजगुरु गुस्से में- भौमिक तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे झूठा बोलने की, हम पिता जी की कसम कहते हैं हम झूट नहीं बोल रहे,

भौमिक जी- तो फिर आपसे भी झूट बोलै गया ह,

राजगुरु – कैसा झूट

भौमिक – यही की राजवीर जिन्दा ह और उसे पिछले 20 साल से जिन्दा रखा गया ह

राजगुरु- लेकिन भवर सिंह ऐसा क्यों करेगा

भौमिक- उस शक्ति का राज जानने के लिए, क्योकि जो राज राजा सूर्यभान ने आगे नहीं बताया जो हमारे पिता जी ने आगे हमे नहीं बताया, लेकिन सेनापति युद्धवीर ने अपने बच्चो को ये सब बताया और राजवीर को ये सब पता था, इसलिए भवर सिंह ने उसे कैद क्र लिया,

भौमिक की बात सुनकर राजगुरु ने अपने सर पैर हाथ रख लिया,

राजगुरु- हे भगवान मैं कभी इस तरफ क्यों नहीं सोच सका, मेरे मन करने के बाद भी भवर सिंह निहारिका के पीछे क्यों रहा अब सब समझ आ रहा ह,

भौमिक जी- लेकिन अब राजवीर की जान को खतरा ह, सात्विक उससे राज उगलवाने वाला ह,

राजगुरु- सात्विक

भौमिक जी- है भैया सात्विक बदल चुक्का ह, उसके विचार बदल चुके हैं, वो शक्ति के पीछे पागल हुआ जार है ह, उसकी जरूर कोई बड़ी योजना ह, हमे पहले राजवीर को बचाना होगा, अगर राजवीर को कुछ हुआ तो देव पुरे राजय को तबाह क्र देगा,

राजगुरु- क्या बोल रहे हो, हम ऐसा नहीं होने देंगे, हम मिलकर रोक देंगे,

भौमिक जी- उसे कोई नहीं रोक सकता, पूरा राजय मिलकर भी उसे नहीं रोक सकता ह भैया, वो एक महासागर ह अगर उसके अंदर गुस्से की सुनामी उठती ह तो वो सब कुछ तहस नहस कर देगी,

राजगुरु- मैं आज तक ये नहीं समझ पाया की उसके अंदर ये ताकत आई कहा से, उसमे ये बदलाव आया कैसे,

भौमिक जी- आप इतने बड़े ज्ञानी हैं, अब तक समझ पाए, वप भवर सिंह तो नफरत में अँधा ह लेकिन आपको तो समझ जाना चाहिए था, की एक मासूम सा लड़का इतने हमलो के बाद इतनी उचाई से गिरने के बाद भी बच गया और वापस आया तो एक असीम ताकत के साथ,

राजगुरु- ओह्ह्ह्हह्हह तो क्या वो शक्ति

भौमिक जी- जी है वो शक्ति

राजगुरु- ये क्या हो गया ह मुझे, मेरी आँख के सामने सब कुछ था और मुझे कुछ नहीं दिख रहा था, लेकिन अगर देव के अंदर शक्ति ह तो सात्विक क्या धुंध रहा ह,

भौमिक - वो तीसरी शक्ति धुंध रहा ह, वो जनता ह देव के अंदर शक्ति ह, इसलिए वो देव से दुबारा hi टकराया,

राजगुरु- लगता ह राजा सूर्यभान की भविष्यवाणी सही होने वाली ह, लेकिन उसमे तो लिखा था शक्ति भवर सिंह को मिलेगी,

भौमिक जी- वही तो मैं भी जानना चाहता हु,

राजगुरु- अब जान जायेंगे, देखो मुझे ये किताब मिली ह, जो हमारे पिता ने लिखी थी, इस राजय का इतहास, इसमें सब कुछ लिखा होगा,

भौमिक – ये कहा मिली

राजगुरु- वही जहा पिता जी ने कहा था, जब रास्ता न मिले तो संधियों में खोजना, ये किताब समाधी के अंदर छुपाई हुई थी,

भौमिक जी- भैया इस राजय में बहुत कुछ होने वाला ह, और आने वाले समय में हमारे अपनों के सामने hi खड़ा होना पद सकता ह, आपको फैसला करना होगा आपको कहा खड़ा होना ह,

राजगुरु- मैं भवर सिंह के लिए समर्पित हु, उसके उसके खिलाफ खड़ा नहीं हो सकता, हर कीमत पैर मुझे उसका साथ देना ह,

भौमिक जी- और अगर भवर सिंह hi गलत हुआ तब क्या होगा, क्या आप गलत के साथ खड़े रहोगे,

राजगुरु- जब हमारे महाराज सूर्यहान ने अंतिम साँस ली थी तब उन्होंने मुझे बुलाया था, उस समय पिता जी की जगह मैं राजगुरु के पद पैर आ चुक्का था, तब महाराज ने कहा था की इस राजय के सच्चे राजा की रक्षा करना, अपना पूरा जीवन उसके लिए समर्पित कर देना, वो राजा जिसके पास सच्ची ताकत होगी और जो अमरत्व को पायेगा उसके लिए तुम्हे समर्पित रहना होगा, चाहे कुछ भी हो जाये उसका साथ देना, मुझे वचन दो,

मैंने उनको वचन दे दिया और तब से आज तक मेंभावर सिंह के सभी सही गलत काम में उसके साथ रहा हु,

भौमिक जी- लेकिन राजा सूर्यभान ने भवर सिंह नाम कब लिया, उन्होंने तो सिर्फ सच्चा राजा कहा था, और आपको भवर सिंह के अंदर सच्चे राजा के गन कहा से दिख गए, और क्या ये नहीं हो सकता की जिस सच्चे राजा की बात हो रही ह वो देव हो,

राजगुरु- लेकिन देव के बारे में उन्होंने कहा था की वो इस राजय का विनाश करेगा,

भौमिक जी- ये बात आपसे कही थी

राजगुरु- नहीं अपने बेटे यानि भवर सिंह के पिता से,

भौमिक – मतलब इस बात का कोई साबुत नहीं ह की ये सच कहा था या झूट,

राजगुरु सोच में पद गए,

भौमिक- इस समय देव से शक्तिशाली इंसान कोई नहीं ह यहाँ, और मुझे लगता ह भविष्वाणी के हिसाब से वो अमर भी ह,

राजगुरु- अमर क्या वो अमर ह,

भौमिक- मुझे उम्मीद तो यही लग रही ह,

राजगुरु – मुझे इस किताब को पढ़ना होगा, इसी से सारा सच सामने आएगा,

भौमिक जी- पहले आपको राजवीर का पता करना होगा, उसे कुछ नहीं होना चाहिए,

राजगुरु- लेकिन भवर सिंह मुझे क्यों बताएगा,

भौमिक जी- आप इस राजय के राजगुरु हैं, इस राजय के जो भी छुपे हुई जगह हैं उनके बारे आपको सबसे अधिक पता होगा, कोई ऐसी जगह जहा भवर सिंह अक्सर जाता हो,



राजगुरु सोचने लगे,
 
आज रक्षा बंधन ह तो आज त्यौहार ह इसलिए फॅमिली को टाइम दिया, अपडेट के लिए टाइम नहीं निकल पाई,
 
अपडेट-33




काम्य तेज कदमो से चरण सिंह के पास जा रही थी, चरण भी काम्य का hi इंतजार कर रहा था,

चरण- आइये आइये महारानी, मैं आपका hi इंतजार कर रहा था,

काम्य- तुम लोग यहाँ क्यों आये हो,

चरण- आप इतना गुस्सा क्यों हो रही हैं महारानी, हमारे पिता ने तो आपका भला hi किया ह हमेशा,

काम्य- कहना क्या चाहते हो तुम

चरण- देखिए आपके और मेरे पिता के बिच जो भी समझौता था वो अब भी कायम रह सकता ह,

काम्य- कैसा समझौता मुझे किसी समझौते के बारे में नहीं पता,

चरण- महारानी मेरे पिता ने मुझे पूरी जानकरी दी ह, किस तरह आपने मेरे पिता के साथ समझौता किया, देव को रस्ते से हटाने के लिए और अपने बेटे को युवराज बनाने के लिए,

काम्य सकपका गई वो इधर उधर देखने लगी,

चरण- घबराने की जरुरत नहीं ह, कोई नहीं सुनेगा,

काम्य- वो समझौता पूरा कहा हुआ, मेरा बीटा तो युवराज बना hi नहीं, और तुम्हारे पिता ने धोखा दिया,

चरण- धोखा तो आपने भी दिया, उन्हें निहारिका मिलनी चाहिए थी, लेकिन नहीं मिली, और दूसरी बार बिच में वो राक्षश आ गया था, आप hi थी वो जिसकी वजह से हमारी सेना इस महल के अंदर आई थी उस शादी में, ये आपकी hi योजना थी न की हम इस महल पैर कब्ज़ा कर ले और आप प्राथना करे बचने की तो हम अपनी बहन की शादी आपके बेटे से करवा दे और उसे यहाँ का राजा बना दे, हम वैसा hi तो कर रहे थे,

काम्य- लेकिन तुम्हारे पिता ने मुझ पैर हाथ उठाया,

चरण- वो सबके सामने दिखावा था,

खैर अब वो बीत चुक्का ह लेकिन समझौता अभी भी वैसा hi ह अगर आप चाहे तो, हमारी बहन की शादी आपके बेटे से हो सकती ह और यहाँ की चारो राजकुमारियों की शादी हम भाइयो से, उसके बाद हमारा पलड़ा भरी होगा तो हम आपके बेटे को राजा बनवा सकते हैं, और ये राज हमारे बिच hi रहेगा,

काम्य ने चरण को देखा, काम्य के दिमाग में उलझन थी लेकिन सोडा बुरा नहीं लग रहा था, उसे किसी भी तरह से अभिजीत को राजा बनाना था,

काम्य मैं सोच क्र बताउंगी, काम्य वह से चली गई, कुछ देर बाद तीनो भाई सूरज ज्वाला और अभिजीत वह आ गए,

चरण- आओ आओ इस राजय के होनहार राजकुमारों,

सूरज- हमे संभु से बात करनी ह,

चरण- मुझसे बात कर रहे हो समझो पुरे प्रतापगढ़ से बात क्र रहे हो,

सूरज- हमारी कुछ आपसी बात ह

चरण- यही न की तुमने जो किया ह वो बात किसी को न बताई जाये, ऐसा hi होगा,

तीनो भाई घबरा गए, वो समझ गए की चरण को सब पता ह,

सूरज- तुम हमे यहाँ डरने आये हो,

चरण- बिलकुल नहीं, मैं तो तुम्हारे फायदे के लिए hi आया हु, अगर तुम्हारी बहनो की शादी हमसे हो जाती ह तो तुम्हे उप्पेर जो लांछन लग सकता ह वो हमेशा के लिए ख़तम हो सकता ह, और हमारे जैसा ताकतवर राजय आपके साथ हो जायेगा जिससे आपका शत्रु हमारा शत्रु हो जायेगा और हम उसे रस्ते से हटाने में आपका साथ देंगे,

सूरज- हमारा शत्रु तुम्हारा भी शत्रु ह

चरण- ये तो और भी अच्छी बात ह, फिर एक साथ मिलकर उससे लड़ेंगे, इसमें तुम्हारा कोई नुकसान नहीं ह,

ज्वाला- लेकिन तुम ऐसा क्यों चाहते हो, तुम हमारी बहेनो से शादी क्यों करना चाहते हो,

चरण- हम इन दोनों राज्यों को मजबूत करना छाते हैं, हम एक होंगे तो कोई राक्षश कोई देव हमे नहीं हरा पायेगा,

तीनो भाइयो का असली दुश्मन देव था, देव से दुश्मनी की वजह से तीनो ने चरण से हाथ मिला लिया,

तीनो भाई वह से चले गए, फिर अमरावती भी मिलने आई, वो तो बस एक गुलाम की तरह मिलने आई और हल चल पूछ क्र चली गई, किसी तरह सौमित्र भी उनके पास आई और उसने बहुत से सवाल किये जैसे एक लड़की की माँ होने वाले दामादो से करती ह, फिर रात में आया सात्विक,

चरण- आइये आइये गुरु सात्विक, मैं तब से आपका hi इंतजार कर रहा था,

सात्विक- मैं तुम्हारा गुरु नहीं हु, और हमारे राजगुरु अभी कही व्यस्त हैं तो इसलिए मैं आया हु

चरण- मुझे आपसे hi बात करनी थी, मैं यहाँ आपके लिए hi आया हु,

सात्विक- मेरे लिए मतलब

चरण- आपके पास जो शक्ति ह, और जिस शक्ति को आप धुंध रहे हैं उसलिए मैं यहाँ आया हु,

चरण की बात से सात्विक चौंक गया,

सात्विक- शक्ति तुम शक्ति के बारे में क्या जानते हो,

चरण- वही जो आप भी जानते हैं, और शायद आपने किसी को बताया नहीं,

सात्विक- क्या नहीं बताया,

चरण- राजा भैरव के बारे में, तीनो शक्तियों के बारे में शायद उनमे से 2 शक्तियों में से एक आपके पास और एक आपके भाई भौमिक के पास ह, और आप उस तिश्री शक्ति की तलाश में हैं, जब तक वो शक्ति नहीं मिलेगी राजा भैरव नहीं जागेंगे,

सात्विक- तुम जरुरत से कुछ ज्यादा hi जानते हो,

चरण- ज्ञान केवल आपके पास hi नहीं ह गुरु सात्विक,

सात्विक- मैं तुम्हारा गुरु नहीं हु

चरण- तो बन जाइये न, इस संसार में आपसे बड़ा गुरु कोई नहीं ह, जिसके पास ये शक्ति ह उससे महँ कोई नहीं ह, मैं आपका शिष्य बनना चाहता हु,

सात्विक- लेकिन मैं तुम्हे अपना शिष्य क्यों बनाऊ

चरण- आपको कोई ऐसा चाहिए जो सिर्फ आपके इशारो पैर चल सके, और मैं वो इंसान हु जिसकी आपको तलाश ह,

सात्विक- मैं जिसको वो शक्ति दूंगा वही मेरी बात मानेगा,

चरण- आपका भाई तो आपकी बात मंटा नहीं ह, और आपको क्या लगता ह जिन लोगो के लिए आप वो शक्ति धुंध रहे हैं वो आपका साथ देंगे,

सात्विक चुप हो गया, वो जनता था चरण सही बोल रहा ह, अगर शक्ति भवर सिंह के पास आती ह वो आगे चल कर उससे बगावत कर सकता ह,

सात्विक- लेकिन तुम पैर यकीन कैसे करू, तुम शत्रु के बेटे हो,

चरण- एक शत्रु इन इंसानो की सोच ह गुरु जी, हम जिन शक्तियों की बात कर रहे हैं वो हमे इंसानो से कही उप्पेर उठा देंगी, और जब राजा बहिराव आएंगे तो हम उनके दो हाथ होंगे, फिर ये पूरा संसार हमारे आगे झुक जायेगा, फिर कैसी शत्रुता रहेगी, और आप महाज्ञानी ह आप के समाने मेरी शक्ति छोटी hi रहेगी,

सात्विक सोच में पद गया

सात्विक- तो तुम क्या जानते हो शक्ति के बारे में,

चरण- पहले आप फैसला कर लीजिये की आप मुझे अपने साथ रखेंगे या नहीं, उसके बाद मैं आपको बताऊंगा,

सात्विक सोचता हुआ वह से चला गया,

वही राजगुरु ने कुछ खास जगहों के बारे में भौमिक को बताया, वो ऐसी जगहे थी जहा केवल राजा hi जा सकता था, इनके बारे में महल में किसी को नहीं पता था, भौमिक जी तुरनत उन जगहों पैर निकल गए अकेले hi, और राजगुरु उस किताब को पढ़ने लगे,

वही रात में देव अपने कमरे में लेता हुआ था, वो काफी बैचैन हो रहा था, वो जितना अधिक सम्भोग कर रहा था उसकी जरुरत उतनी hi अधिक बढ़ती जा रही थी, उसे ऐसा महसूस होता था की उसे दिन रात सम्भोग करना चाहिए, वो निहारिका के पास जाने में शर्माने लगा था, क्यों की वह वो नंगा होता था और उसका लुंड हमेशा खड़ा रहता था, वही निहारिका के पास आज रीवा लेती हुई थी,

रीवा- माँ क्या होगा हमारी जिंदगी का, क्या ये लोग हमारी शादी करवा देंगे,

निहारिका- मेरे और देव के रहते ऐसा नहीं होगा,

रीवा- माँ मैं उन तीनो की तरह कुँअरि नहीं रहना चाहती,

निहारिका- तू क्यों कुँअरि रहेगी,

रीवा- लेकिन मैं किसी से शादी भी नहीं करना चाहती, मैंने आज तक किसी की शादी खुशहाल नहीं देखि,

निहारिका- ये क्या बात हुई, दोनों चीजे कैसे हो सकती हैं,

रीवा- मैं उसके साथ रहना छाती हु जिससे मैं प्यार करती हु

निहारिका- तू किसी से प्यार करती ह क्या,

रीवा- मुझे नहीं पता, मैं प्यार को समझ नहीं प् रही हु, सही गलत अच्छा बुरा कुछ समझ नहीं आ रहा, लेकिन कोई ह जिसके बिना मैं रहना नहीं चाहती,

निहारिका ने रीवा को देखा, उसकी आँखों में आंसू थे,

निहारिका- रीवा मैं तेरे साथ हु बेटी, जो तुझे पसंद ह तू हमेशा उसके साथ रहेगी,

रीवा निहारिका से लिपट गई,

वही दूसरी तरफ अमिता और सोमिया दबे पाव देव के कमरे में घुस रही थी, उन्हें लगा देव सो रहा होगा लेकिन देव अपने खयालो में खोया हुआ बैठा था,

देव- आप दोनों यहाँ

देव को सामने जगा हुआ देख दोनों एक दम घबरा गई,

अमिता- वो हम वो बात करने आये थे,

देव- बात इस समय, आओ आओ कुछ हुआ ह क्या,

सोमिया- नहीं कुछ खास नहीं बस वो शादी के बारे में बात करनी थी,

दोनों भेने देव के बराबर में बैठ गई,

देव- मैंने बोल दिया ह न कोई जबरदस्ती आप लोगो की शादी नहीं करवा सकता,

अमिता और सोमिया ने देव के हाथो को पकड़ क्र अपनी बहो में भर लिया, देव के हाथ दोनों की चूचियों के बिच में आ गए थे, देव को उन दोनों की चिचियो का अहसास हो रहा था, देव का लुंड तो पहले hi औकात से बहार हो रहा था, अब दो दो लड़कियों की चूचिया देव को और गरम कर रही थी,

देव- अब जाकर सो जाओ, बहुत रात हो गई ह,

अमिता और सोमिया ने एक दूसरे को देखा जैसे कुछ कहना छाती हो, लेकिन शर्मा रही थी,

देव- कुछ कहना ह क्या,

सोमिया- हम एक बात पूछना चाहती थी,

देव- बेझिझक पूछो,

सोमिया- उस दिन हमारे बिच जो हुआ उसके बाद उस बारे में हमारी कोई बात नहीं हुई थी, उस दिन हमे जो किया, तुम उस बारे में क्या सोचते हो,

इतना बोल क्र सोमिया ने सर निचे कर लिया,

देव- ये आप पैर निर्भर करता ह आप क्या सोचते हो, मैं हर कदम पैर आप लोगो के साथ हु, मेरे हिसाब से आप लोगो ने गुस्से और जोश में आकर वो कदम उठाया था, इसलिए आप सबने दुबारा उस बारे में कोई बात नहीं की,

अमिता- ये सच ह की हम उस समय बहुत गुस्से में थे, और उन लोगो ने हमे कामुकता बढ़ने की दवाई दी थी जिस वजह से हमारे अंदर वासना उभर रही थी, और उसी जोश में हम वो कदम उठा गए थे,

देव- तो आपको अब पास्चतवा हो रहा ह,

सोमिया- बिलकुल नहीं, हमे कोई पास्चतवा नहीं ह, बल्कि हम खुश हैं हमने वो किया, अगर होश में होते तो शायद कभी नहीं कर पते,

देव- तो आप क्या चाहती हो,

अमिता- हम तुम्हारे मन में क्या ह वो जानना चाहते हैं, हमने फैसला कर लिया ह की हम शादी नहीं करेंगे, और ये भी सच ह की ये परिवार हमे यहाँ रहने नहीं देगा, वो अपनी इजात और झूठी शान के लिए हमारे साथ कुछ भी कर सकते हैं, हमे मरने से दर नहीं लगता, लेकिन हम जीवन को अधूरा जी क्र मरना नहीं चाहती, हम अपनी जिंदगी को खुल क्र जीना चाहती हैं, हम दो राज्यों के बिच समझौते के लिए सतरंज के प्यादे नहीं बनना चाहती,

देव- अब आप मेरी सुरक्षा में हैं, कोई आप लोगो को कुछ नहीं कर सकता, और रही मेरे विचारो की बात तो मैं आपके साथ हु हर कदम पैर, जो आपको छाइये मैं वो लेकर दूंगा,

सोमिया- हमारे रिश्ते के बारे में क्या सोचते हो तुम

देव- सच कहु तो जिस देवदूत से आपका रिश्ता था वो तो कब का मर गया ह, अब आपके सामने देव ह जो किसी के साथ गलत नहीं होने देता, ये देव अपने नए रिश्ते बना रहा ह, इसके लिए पुराने सब रिश्ते ख़तम हो चुके हैं, न कोई पिता ह न कोई बहन ह, बस सामने इंसान हैं, और सामने वाला इंसान जिस रिश्ते में मेरे पास आएगा वही रिश्ता मेरा होगा, आप सब मेरे पास दुःख और माफ़ी लेकर आई थी इसलिए आप मेरे करीब आ गई, लेकिन रिश्ता क्या रखना ह ये आप खुद तय कीजिये, अब मेरे लिए पुराने किसी रिश्ते का महत्व नहीं ह,

अमिता- हमारे लिए भी उस रिश्ते का कोई महत्व नहीं ह, उन रिश्तो ने हमरे अंदर सिर्फ नफरत एक दूसरे का अपमान करना hi सिखाया ह, हम उन रिश्तो में नहीं बांधना चाहते, हम आज कुछ फैसला करके hi यहाँ आये हैं, और अब तुम पैर निर्भर करता ह तुम हमारे फैसले में हमारा कितना साथ देते हो,

देव- आप बोल क्र देखो

अमिता- सोमिया तू बोल न

सोमिया- देव हम यहाँ कोई रिश्ता लेकर नहीं आये हैं, फिर ये सोच क्र आये हैं की हम लड़किया हैं और तुम लड़के, हमारे बिच बस एक दूसरे को जानने के अलावा कोई रिश्ता नहीं ह, हम आज एक नया रिश्ता बनाना आये हैं,

देव- साफ़ साफ बोलिये,

अमिता- हम तुमसे प्यार करते हैं, और चाहते हैं हम पूरी जिंदगी तुम्हारे साथ बिताये,

इतना बोल क्र दोनों बहेनो ने सर निचे कर लिया, देव भी कुछ पालो के लिए खामोश हो गया,

देव- क्या आप सोच समझ क्र आई हैं,

सोमिया- है हम अच्छे से सोच क्र आये हैं, कल न जाने क्या फैसला हो, लेकिन हमने फैसला कर लिया ह की हम तुम्हारी हैं और तुम्हारे सिवा हमे कोई नहीं छू सकता,

देव- समाज के सामने आप मेरी नहीं हो पाओगी, समाज ये रिश्ता कभी नहीं अपनाएगा

अमिता- हम बार बार जनम लेंगी तुम्हारी होने के लिए, लेकिन हम सिर्फ तुम्हारे होंगे,

देव- ये बहुत बड़ा फैसला ह लेकिन उससे बड़ी बात ये ह की आप दोनों एक hi इंसान से प्यार कैसे कर सकती हैं,

अमिता- हमने अब तक की जिंदगी में बस इतना जाना ह की इस दुनिया में सच्ची सोच का इंसान ढूँढना नामुमकिन ह, सिर्फ एक तुम हो जिसे हम उन विचारो में खरा पते हैं, इसलिए हमारे दिल में तुम्हारे लिए प्रेम पैदा हुआ ह, और रही बात दोनों की तो इस राजपरिवार ने हमे हमेशा सिखाया ह की एक राजा की बहुत सी रनिया होती हैं, हम भी ऐसे hi किसी की अनेको रानियों में से एक बन सकती हैं, इसलिए बचपन से hi हमे अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ बताने की शिक्षा दी गई ह, और यहाँ तो हमारा प्यार हमे मिल रहा ह, वो भी हमे बहेनो के बिच hi बाटना ह, तो हमे उसमे कोई ऐतराज नहीं ह,

सोमिया- यहाँ हम दोनों आई हैं लेकिन हमने अक्षरा की आँखों में भी तुम्हारे लिए प्यार देखा ह, और हम सबसे ज्यादा देखा ह, मेरे हिसाब से तो वो तुम्हे तब से प्यार करती आ रही ह जब बाकि सब नफरत करते थे,

देव कुछ पालो तक सोच में दुब गया, उसके दिमाग में बड़ी हलचल थी, उसका मन बैचैन था, क्योकि उसकी योजना थी इन लड़कियों के साथ सम्भोग करने की लेकिन ये तो देव से प्यार कर बैठी हैं, और प्यार में धोखा देना उसे गवारा नहीं हो रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे, माँ से बात करना चाहता था लेकिन इस समय कैसे जाये,

सोमिया- क्या हुआ क्या सोचने लगे,

अमिता- तुम परेशां न हो, अगर तुम्हे ये रिश्ता पसंद नहीं ह तो हम चली जाएँगी, हम तुम्हे खोना नहीं चाहती, बस तुम साथ होने चाहिए चाहे किसी भी रिश्ते में रहो,

देव- ऐसा नहीं ह, मैं बस कोई धोखा नहीं करना चाहता,

सोमिया- धोखा कैसा धोखा

देव- जीवन में मेरा रिश्ता सिर्फ तुम लोगो तक सिमित नहीं रह सकता, मेरी जिंदगी में और भी लड़किया आ सकती हैं, और पहले भी आ चुकी हैं, और मेरी मंजिल बहुत अलग ह, मेरे अंदर अब प्रेम के लिए जगह नहीं बची ह, लेकिन मैं किसी और के प्रेम का अपमान नहीं कर सकता,

सोमिया- हम खुद तुम्हारे पास आये हैं, हम जानते हैं समाज में हमारे रिश्ते का कोई महत्व नहीं ह, लेकिन हमारे लिए उस रिश्ते का बहुत महत्व ह, हम उस रिश्ते के साथ जीना चाहते हैं, चाहे ये जिंदगी कुछ hi समय की क्यों न हो,

देव- मेरे साथ होने का मतलब तुम्हे अपनों के खिलाफ hi खड़ा होना पद सकता ह, क्योकि इस महल में मेरा अपना कोई नहीं ह सब मुझे दुश्मन समझते हैं, और सच भी यही ह अब मैं उन सबका दुश्मन hi हु, मैं तुम्हे धोखा नहीं देना चाहता इसलिए बता रहा हु मैं यहाँ पुरे परिवार को तबाह करने hi वापस आया हु, मेरे लिए न hi भवर सिंह कोई मायने रखता ह, और न hi कोई रानी न hi कोई भाई, मैं उन सबको तबाह क्र दूंगा, और जो अपमान मेरी माँ और मैंने सहा ह उसका बदला लूंगा, क्या तुम अपने परिवार को बर्बाद होते देख पाओगी,

दोनों बहने कुछ पालो के लिए खामोश हो गई,

अमिता- कोनसे परिवार की बात कर रहे हो तुम, वो भाई जो हमारी इज्जत लूटना चाहते थे, या वो माँ जिन्हे अपनी बेटियों से ज्यादा अपने बेटो की परवाह ह, और बाकि अपनी हवस मिटने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं, या वो पिता जो हर बार हमारा सोडा करने को तैयार रहता ह, इस महल में हमारे लिए कोई रिश्ता नहीं बचा ह, और थोड़ा बहुत जो खून का रिश्ता था वो उस दिन ख़तम हो गया जब उन हैवानो ने हमारी इज्जत पैर हाथ डाला था,

देव- मैं तुम्हारी भावनाओ को समझ सकता हु, ये सब मैं बचपन से झेलता आ रहा हु, लेकिन तुम ये जानना नहीं चाहोगी की मैं इस परिवार से बदला कैसे लेना चाहता हु,

सोमिया- हम ये जानना नहीं चाहते, लेकिन तुम जो भी करना चाहते हो हम उसमे तुम्हारे साथ हैं, हमने जो तुम्हारे साथ किया हम उसकी सजा भी भुगते को त्यार हैं और तुम्हारे साथ मिलकर इस परिवार को सजा देने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन हमे खुद से दूर मत करना, हम जी नहीं पाएंगे,

देव को उनकी आँखों में असीम प्यार दिखाई दिया, ऐसा प्यार जिसमे कोई चल कपट नहीं था, तभी देव को कस्तूरी की आँखे याद आ गई, उसकी आँखों में भी यही प्यार था, लेकिन उसने धोखा दे दिया, देव एक दम खड़ा हो गया,

अमिता- क्या हुआ,

देव- इस प्यार से दर लगता ह, एक बार इस प्यार ने hi मुझे बर्बाद कर दिया, उसकी आँखों में भी यही प्यार था, लेकिन फिर भी वो धोखा दे गई,

सोमिया- तुम कस्तूरी की बात कर रहे हो,

देव ने सर झुका लिया,

देव- जानती हो उसके सम्बन्ध इन तीनो भाइयो से थे, और वो मुझसे प्यार का नाटक क्र रही थी,

अमिता- हम उसके बारे में तो कुछ नहीं बोल पाएंगे लेकिन हम आज उस परमात्मा को शाक्षी मान क्र वचन देते हैं की इस जनम में आने वाले सभी जन्मो में सिर्फ तुम्हारे रहेंगे, तुम अपनाओ या न अपनाओ हमारे उप्पेर सिर्फ तुम्हारा अधिकार होगा,

तभी पीछे से आवाज आई, मेरा भी यही वचन ह, सबने उधर देखा तो अक्षरा कड़ी थी, वो न जाने कब वह आ गई,

देव- अक्षरा तुम कब आई,

अक्षरा- नींद नहीं आ रही थी, मन बैचैन था सोचा तुम्हारे पास आ जाऊ लेकिन देखा तो ये दोनों भेने पहले hi यहाँ आ चुकी थी, फिर मैं चुप क्र बाते सुनने लगी, और जो ये बोल रही थी, वही हाल मेरा था, तो तुम्हारी हां का इंतजार कर रही थी, तुम एक बार इन्हे हां बोलो तो मैं अपनी बात भी तुमसे करू, लेकिन जो वचन इन्होने दिया ह उस वचन को मैं भी निभाने को तैयार हु, अक्षरा ने एक चुरा उठाया और अपने हाथ से थोड़ा खून निकला और एक जलती हुई मशाल उठाई और उस पैर अपना खून गिरा क्र कसम खाई की मैं अपने सभी जनम सिर्फ तुम्हारे नाम करती हु, मेरे जीवन में तुम्हरे सिवा कोई नहीं आएगा, किसी भी जनम में हमारा कोई भी रिश्ता हो लेकिन मैं सिर्फ तुम्हारी रहूंगी, चाहे सगी बहन बांके भी पैदा हुई तब भी तुम्हारी रहूंगी,

अमिता और सोमिया ने भी तुरंत वैसा hi किया,

देव- ये तुम लोगो ने क्या किया, ऐसी कस्मे नहीं कहानी चाहिए, अगर निभा नहीं पाए तो नरख में भी जगह नहीं मिल पायेगी,

अक्षरा- हमारा सवर्ग तुम्हारे पास ह तो हमे नरख जाना hi क्यों ह, और रही बात बदले की तो हम तुम्हारे साथ हैं अब ऐसा बदला होगा की ये पूरा राजमहल देखेगा, कुछ बात मैं भी जानती हु, कोण क्या साजिश कर रहा ह, मेरी माँ काम्य इस साजिश की सबसे बड़ी सूत्रधार ह, और वो उसकी कुछ हरकते ऐसी हैं जो मुझे उनसे नफरत करने पैर मजबूर कर रही हैं, उनसे सबसे बड़ा बदला यही ह की हम तुमसे छोड़ेंगी वो भी उनके सामने, उन्हें पता होगा की उनकी बेतिया उस देव के निचे अपने आप को न्योछावर कर रही हैं जिसे वो मार देना चाहते थे,

देव को यकीन hi नहीं हो रहा था की ये सब क्या हुआ, जिन लड़कियों को फसा क्र वो छोड़ना चाहता था, ताकि उनके माँ बाप को निचे दिखा सके, यहाँ तो खुद लड़किया उसके पास आ रही थी, वो खुद उसकी योजना को आगे बढ़ा रही थी, देव काफी देर तक खड़ा रह गया,

देव- क्या तुम सब ऐसा कर पाओगी,

सोमिया- तुम कहो तो आज hi हम उस प्रताप सिंह के बेटो के सामने और अपने माँ बाप के सामने उसी राजसभा में तुम्हारे निचे नंगी हो जाएँगी,

देव ने तीनो बहेनो को अपनी बहो में भर लिया, अक्षरा ने चारंट अपने हॉट देव के होतो पैर रख दिए,

सोमिया- देखो इसे इतनी महेनत हमने की देव को मानाने के लिए और ये आई और पहले hi देव मर गई,

अमिता- अगर हमे देव से प्रेम करना ह तो एक दूसरे से भी उतना hi प्रेम करना होगा, अगर हम एक दूसरे से प्रेम नहीं कर पाई तो देव के प्रेम के साथ इंसाफ नहीं क्र पाएंगे,

चारो एक दूसरे के गले लगे हुए थे,

वही राजगुरु उस किताब को पढ़ने में लगे हुए थे, उसमे बहुत सी बात थी जिन्हे वो जानते थे, लेकिन उनका मकसद उस राज को जानने में था जिसके लिए ये सब लड़ाई हो रही थी, और राजगुरु को बहुत सी बाते पता भी चल रही थी, इस राजय की नीव hi उस शक्ति की वजह से राखी गई थी, इस किताब में राजा भैरव के बारे में भी बहुत कुछ लिखा हुआ था, राजगुरु बिना कुछ खाये पिए किताब पढ़ने में लगे हुए थे,

उधर भौमिक जी राजगुरु की बताई हुई जगह पैर जाँच क्र रहे थे, भौमिक जी की रफ़्तार बहुत तेज थी, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में अधिक समय नहीं लगता था, वो पैदल hi साडी जगहों को धुंध रहे थे, लेकिन सावधानी से किसी को ये जानकरी न लगे की इन छुपी हुई जगहों पैर भौमिक जी आये हैं,

उन्होंने तीन जगह ऐसी चुनी जहा उन्हें लगा की राजवीर को यहाँ छुपाया हुआ हो सकता ह, उन तीनो जगहों पैर फेरा बहुत अधिक लगा, और सभी सैनिक हथिय्रो के साथ चौकन्ने थे, भौमिक अंदर घुस सकते थे लेकिन उन्हें दर था अगर राजवीर यहाँ नहीं मिला और भवर सिंह को खबर लग गई तो राजवीर को खतरा हो सकता ह, वो अपनी शक्ति से उस जगह को जांचने लगे,

इधर महल में भवर सिंह काम्य और सात्विक तीनो अभी तक जग रहे थे, तीनो एक साथ बैठे हुए थे और चरण सिंह की बात पैर चर्चा कर रहे थे,

भवर सिंह- तो तुम दोनों को लगता ह चरण सिंह की बात मान लेनी चाहिए,

काम्य- है महाराज इसमें हमारा भी भला ह

सात्विक- हम उनके राजय का इस्तेमाल कर सकते हैं,

भवर सिंह- लेकिन हमारे राजय के लोग इसका विरोध क्र सकते हैं,

सात्विक- परजा के पास वो अधिकार नहीं होता की वो राजा की बात का विरोध कर सके,

भवर सिंह- आपकी सोच अच्छी ह सात्विक जी, लेकिन राजगुरु अब तक नहीं आये हैं, और उस जासूस का भी कुछ पता नहीं चला, हम राजगुरु की सलाह के बिना फैसला नहीं ले सकते,



सात्विक- आप इस राजय के महाराज हैं, आपको किसी की सलाह की जरुरत नहीं ह, आप जो चाहे कर सकते हैं, आपके भविष्य में महँ राजा बनना लिखा ह, उसके लिए आपको कुछ बड़े फैसले तो लेने hi पड़ेंगे, आप हमेशा राजगुरु के फेसलो का इंतजार नहीं कर सकते, उनके फैसले आपसे ज्यादा राजय के भले के लिए होते हैं, लेकिन इस समय आपको अपना भला देखना होगा, और प्रताप सिंह का राजय हमारे लिए जरुरी ह, जैसा मुझे पता चला ह की कोई राक्षश ह यहाँ पैर, तो उससे लड़ने के लिए आपको और प्रताप सिंह को एक होना होगा, जब तक आपके पास शक्ति नहीं आ जाती,
 
अपडेट- 34






सात्विक भवर सिंह को अपने भाई राजगुरु के खिलाफ hi तैयार कर रहा था, सात्विक पूरी तरह से राजा भैरव के साथ जुड़ चुक्का था, उसे खुद पता नहीं चला वो कब अपनों से hi दूर होता चला गया, उस शक्ति ने उसे इतना भरष्ट क्र दिया की वो बस किसी भी कीमत पैर जीतना चाहता था, चाहे उसके लिए पूरा राजय hi तबाह क्यों न हो जाये, वही भवर सिंह के दिमाग में बस शक्ति पाने की इच्छा थी, उसे उम्मीद थी की शक्ति पाने के बाद वो पूरी दुनिया पैर राज करेगा,

वही चरण सिंह ने एक hi बार में hi भवर सिंह के पुरे परिवार में हलचल मचा दी थी, उसने ऐसा देव खेला की हर कोई उसके सिकंजे में फास्ट चला गया,

उधर रेवती की सांसे उखड़ी हुई थी, वो बैचेन सी अपने कमरे में इधर उधर टहल रही थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करे, वो इस कैद से भाग तो गई थी लेकिन देव के धोखे की वजह से वापस आ गई लेकिन अब उसे अहसास हो रहा था की उसने वापस आकर कितनी बड़ी गलती की, उसे समझ नहीं आ रहा था किस पैर भरोसा करे, किस पैर नहीं, उसे सुगंधा और देव ने जो बाते बताई थी वही बाते उसने अपने पिता के मुँह से भी सुनी थी, मतलब देव सच बोल रहा था, लेकिन उसकी आखरी बात की उसकी माँ ने hi उसे अपनी वासना बुझाने के लिए अपने कमरे में रखा था, ये उसे हजम नहीं हो रही थी, रेवती को पता था उसकी माँ थोड़ी अजीब ह लेकिन ये सब कर सकती ह उस पैर यकीन नहीं था, इसलिए रेवती ने सच जानने का फैसला किया और अपने कमरे से बहार निकल गई, वो सीधे अपनी माँ के कमरे में पहुंची, उस कमरे में रेणुका के अलावा सिर्फ रेवती जाती थी, कमरा खली था रेवती ने पुरे कमरे का मुआयना किया फिर वो देव के बताये हुए रस्ते पैर निकल गई, वो छुपते हुए वह जा रही थी, वो देव के बताये हुई जगह पैर पहुंच गई, वह एक कमरा था, रेवती धीरे से कमरे तक पहुंच गई, आज वह कोई सैनिक नहीं था, जबकि देव ने कहा था वह काफी सुरक्षा होती ह, कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, रेवती धीरे से उसमे घुस गई, रात काफी हो राखी थी, चारो तरफ अँधेरा था, लेकिन कमरे के अंदर मशाले जलने से दिखाई दे रहा था, कमरा बहुत बड़ा था, कमरे में घुसते hi रेवती को किसी औरत के चीखने की आवाज आने लगी, रेवती घबरा गई वो धीरे से आवाज की तरफ बढ़ने लगी, और जैसे hi वो नजदीक पहुंची तो देखा दो आदमी एक औरत को छोड़ रहे हैं, ये औरत उसकी माँ की दासी थी, और दोनों मर्द किसी पहलवान से काम नहीं थे, एक मर्द निचे लेता हुआ था उसके उप्पेर वो औरत थी और दूर मर्द उस औरत के उप्पेर था, वो दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे, रेवती ने धयान दिया तो पाया की दोनों मर्दो के लुंड औरत के अंदर हैं, और शायद एक लुंड औरत की गांड में ह, ये देख क्र रेवती के पुरे शरीर में सनसनी सी दौड़ गई, उसे यकीन hi नहीं हुआ ये सब क्या हो रहा ह, उसने इससे पहले बस देव और अपनी सौतेली माँ मल्टी की चुदाई देखि थी,






रेवती कुछ देर वह खड़ी रही अब तक उसकी आँखे पुरे कमरे को अच्छे से देख प् रही थी तभी उसका धयान गया की उससे कुछ दुरी पैर बिस्टेर लगे हुए हैं जिस पैर कोई लेता ह, रेवती अपने घुटनो पैर बैठ गई और उसी तरह उस बिस्टेर के नजदीक पहुंच क्र उसके पीछे चिप गई, वह जाकर उसे पता चला की वह उसकी माँ रेणुका और पिता प्रताप सिंह बिस्टेर पैर नंगे लेते हुए हैं, उन दोनों का धयान सामने चल रही चुदाई लीला पैर था, और उस औरत की चीखो की वजह से कमरे में होने वाली हलकी आहात का उन्हें अहसास hi नहीं था,





रेवती को यकीन नहीं हुआ की उसके माँ बाप ऐसे नंगे बैठ क्र दुसरो की चुदाई देख रहे हैं, तभी रेणुका बोलने लगी, रेवती चुप क्र उनकी बाते सुनने लगी,

रेणुका- मजा आ रहा ह न

परताप सिंह- परिवार में इतना कुछ हो गया ह की अब ये चीजे मजा नहीं दे रही,

रेणुका- किसी की मोत से आपको कब से तकलीफ होने लगी,

प्रताप सिंह- वो मेरे बेटे थे,

रेणुका- ऐसे न जाने कितने बेटे घूम रहे हैं आपके, और आगे भी न जाने कितने घूमेंगे, ये जो सामने चुदाई चल रही ह वो लड़की जो चुद रही ह वो भी आपकी hi बेटी ह, आपने दसियो को भी नहीं बक्शा ह, और जो मर्द छोड़ रहे हैं वो भी आपके hi बेटे हैं, देखो आपके बेटे आपकी hi बेटी को छोड़ रहे हैं,

प्रताप सिंह- ये तो कभी कभी नशे में किसी के साथ रंगरलिया मन ली उसी का नतीजा ह, लेकिन तुमने कमल क्र दिया मेरे hi नाजायज बेटो से मेरी hi नाजायज बेटी को छुड़वा दिया ह, ये सुनकर मजा आया,

रेणुका- मजा तो उस दिन आएगा जब आप अपनी hi बेटी को छोड़ोगे,

अपनी माँ के मुँह से अपने लिए इतनी गिरी हुई बात सुनकर रेवती सदमे सी में चली गई, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था उसकी माँ उसके लिए ऐसा बोल सकती ह,

परतप सिंह- हे उसके लिए तो मैं कब से मारा जा रहा हु, लेकिन उस हरामजादी को कोई उठा क्र ले गया, न जाने उसके साथ क्या किया होगा, उसकी छूट अब तक कुरै ह भी या फड़वा ली उसने,

रेणुका- मुझे यकीन ह वो कुँअरि hi ह अभी,

प्रताप सिंह- लेकिन चरण ने उसकी शादी उस भवर सिंह के बेटे से करने को कहा ह,

रेणुका- तो क्या हुआ, उन मादरचोदो को हम कुँअरि लड़की देंगे क्या, रेवती की छूट का दरवाजा तो आपका ये लुंड hi खोलेगा, देखो कैसे उछाल रहा ह,






प्रताप सिंह- तो जल्दी खुलवाओ न, इतनी तकलीफो में कुछ तो अच्छा काम हो,

रेणुका- बहुत जल्द खुलवाउंगी, और मैं यहाँ बैठ क्र उसकी चुदाई का नजारा देखूंगी, अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितना मजा आएगा जब आप अपनी hi बेटी को यहाँ इसी जगह छोड़ेंगे, मैंने कामशाष्त्र में बहुत से आसान सीखे हैं उसी हिसाब से यहाँ पैर बहुत सी बिस्टेर बनाये हैं, अलग अलग आसान के लिए, उसकी चुदाई हर आसान में करना,

प्रताप सिंह- जैसा तुम कहो मेरी जान, तुमने मेरी जिंदगी में सवरग बना दिया ह, न जाने कितनी कुँअरि लड़किया छुड़वा दी मुझसे,

रेणुका- न जाने कितनी hi बेतिया थी उनमे आपकी,

प्रताप सिंह- तुमने मेरे अंदर चुदाई का ऐसा जानूं जगाया ह की मेरे लिए कोई रिश्ता मायने नहीं रखता, जिस दिन रेवती को छोडूंगा तुम्हे भी साथ छोडूंगा, दोनों माँ बेटी को एक साथ छोडूंगा,

रेणुका- आपने भी तो मेरी हर ख़ुशी का ख्याल रखा ह, इसलिए मेरा भी कर्त्तव्य बनता ह आपको खुश राखु,

प्रताप सिंह- बस एक कसक रह गई दिल में

रेणुका- मुझे बताइये मैं पूरा करुँगी

प्रताप सिंह- निहारिका, वो मुझे नहीं मिली,

रेणुका- आप फ़िक्र मत कीजिये, भवर सिंह के परिवार की चारो लड़किया यही आएँगी शादी करके, सबको आपसे छुडवाउंगी और फिर उस निहारिका को आपके निचे जरूर लाऊंगी,

प्रताप सिंह जोश में आ गया और उसने रेणुका को अपने निचे किया और एक hi झटके में अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, रेणुका की छूट देव के लुंड से पूरी तरह फैट चुकी थी अब उसे प्रताप सिंह के लुंड के घुसने का अहसास तक नहीं हो रहा था, लेकिन फिर भी उसने दर्द का नाटक किया और जोर जोर से चीखने लगी,






रेणुका की चीखो की आवाज आते hi सामने हो रही चुदाई रुक गई और वो तुरंत वह से बहार निकल गए,

रेणुका अपनी आँखों में आंसू लिए छुपी बैठी थी, उसके सर पैर तो जैसे आसमान टूट पड़ा था, उसके लिए पूरी दुनिया ख़तम हो चुकी थी, वो धीरे से उठी और वह से चल दी, उसके पेअर कैंप रहे थे, वो जैसे तैसे अपने कमरे में पहुंची, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था उसका बाप उसकी इज्जत लूटना चाहता ह और उसकी माँ उसकी इज्जत लुटवाने के मजे लेना चाहती ह, रेवती आँखे खोले बेसुध सी अपने बिस्टेर पैर पड़ी थी, ये रात उसके लिए कुछ ज्यादा hi लम्बी हो चुकी थी, उसके मन में बस यही ख्याल आ रहे थे की वो आत्महत्या क्र ले, इस दुनिया में उसका कोई अपना नहीं ह, जिसे वो अपना समझ क्र यहाँ से भागी थी वो शत्रु निकला और उस शत्रु के पास से वापस अपनों के पास आई तो अहसास हुआ की वो शत्रु इन अपनों से ज्यादा अच्छा था, उसने झूट बोलै लेकिन उसने उसका फायदा नहीं उठाया, जबकि उसके परिवार ने उसके साथ कितना गलत किया,

रेवती को देव की अच्छे दिख रही थी, उसे बस ये hi दिख रहा था की इस दुनिया में अगर उसका कोई अपना हो सकता ह तो वो देव ह, अगर उसकी जगह उसका परिवार होता और ऐसे शत्रु की बेटी इनके कब्जे में होती तो ये न जाने क्या क्या करते, जबकि देव ने उसे छुआ तक नहीं, लेकिन अब वो क्या करे वो वापस कैसे जाये, वो तो देव को छोड़ क्र यहाँ भाग आई, पहले देव उसे बचा क्र ले गया था लेकिन अब कोण बचाएगा,

यहाँ रेवती अपने आंसू बहा रही थी वही देव अपनी तीनो बहेनो के साथ बहो में बहे डेल खड़ा था,

देव- अब क्या इरादा ह रात हो चुकी ह सोना नहीं ह क्या,

अक्षरा- इरादा तो नहीं ह सोने का लेकिन ये दोनों यहाँ आई हुई ह इसलिए मजबूर हो रही हु,

सोमिया- हमारे होने से मजबूर, या यु कहो तेरे होने से हम मजबूर हो गई हैं,

देव- कैसी मज़बूरी

अक्षरा- इन दोनों को भेज दो फिर बताती हु,

अमिता- तू चली जा हम दोनों बता देंगी,

अक्षरा- क्या मतलब आप दोनों एक साथ, नहीं नहीं क्या बात कर रही हो,

अमिता और सोमिया शर्मा गई,

इन तीनो की बाते देव को अच्छे से समझ आ रही थी, इससे उसका लुंड पुरे तनाव में खड़ा था और उसके सामने थी अक्षरा जिससे उसका लुंड सीधे अक्षरा की नाभि के निचे चुभ रहा था, और जब लुंड झटका मरता तो अक्षरा को उसका अहसास होता,

अक्षरा- आप दोनों तो बहुत आगे वाली निकली, ऐसा कोण करता ह,

सोमिया- अमिता ने अभी बोलै था न की अगर हमे देव से प्यार करना ह तो उससे पहले एक दूसरे से प्यार करना होगा, और किसी लड़की के लिए सबसे मुश्किल होता ह आने प्यार को बाटना या अपने पति को किसी और औरत के साथ देखना तो हम दोनों फैसला किया था की सबसेपहले हम अपने मन के इसी दर को मरनेगे इसलिए दोनों एक साथ यह आये थे, और एक साथ hi,

इतना बोल क्र सोमिया चुप हो गई,

अक्षरा- बहुत hi कमल का विचार ह, अब मुझे चलना चाहिए, आप दोनों जरा देव को सम्हालो वर्ण इसका हथियार मेरे पेट में hi छेद क्र देगा, बहुत उफान रहा ह, मैं तो इसे अकेले hi लेना चाहूंगी,

अक्षरा पीछे हटी और देव के लुंड को मुट्ठी में पकड़ लिया और कास कर भींच दिया, अक्षरा की इस हरकत से देव चौंक गया, वही सोमिया और अमिता शर्म से पानी पानी हो गई,

अक्षरा हस्ती हुई बहार को चली गई,

अक्षरा- अब ज्यादा शर्माना मत, रात निकलती जा रही ह और तुम दो हो,

अमिता- कितनी बेशरम ह ये

सोमिया- सही तो बोल गई वो,

देव- क्या ये सब कुछ जल्दी नहीं हो रहा,

अमिता- हम नहीं जानती कल क्या फैसला होगा, आज रात हम खुल क्र अपनी जिंदगी जीना चाहती हैं,

सोमिया- उनका जो भी फैसला लो, लेकिन हमने फैसला किया हुआ ह और बी हम किसी से शादी नहीं करेंगी,

देव- वो तो नहीं होगी ये मैं वडा करता हु,

सोमिया ने तुरंत देव के होतो से अपने हॉट जोड़ दिए, अमिता ललचाई हुई नजरो से सोमिया को देख रही थी,

देव कुछ पल तो शांत रहा लेकिन उसके अंदर भी वासना का उफान उठ रहा था, उसने भी सोमिया का साथ देना शुरू क्र दिया, फिर देव ने एक हाथ बढ़ा क्र अमिता की कमर में डाला और अपनी तरफ खींच लिया, अमिता ख़ुशी से उसकी तरफ खींची चली आई, देव ने सोमिया को चूमना छोड़ा और अमिता के होतो पैर हॉट मिला दिए, अमिता पुरे जोश में देव के हॉट चूमने लगी, फिर देव ने सोमिया को चूमा देव ऐसे hi कभी अमिता को चूमता कभी सोमिया को चूमता, ये देव के लिए भी जोश बढ़ने वाला पल था, दो दो हुसैन की परिया उसकी बहो में उसके होतो को चुम रही थी,






अमिता ने देव के कपडे खोलने शुरू क्र दिए, उसने देव के उप्पेर के कपडे उतर दिए, और उसकी नंगी छाती को चूमने लगी, वही सोमिया निचे बैठ गयी, और देव के निचे के कपडे उतरने लगी, और देव जैसे hi निचे से नंगा हुआ तो उसका खड़ा लुंड सोमिया के सामने आया, उसकी आँखे फटी रह गई, उसने नजर उप्पेर करके देखा तो वह देव और अमिता एक दूसरे को चुम रहे थे, देव के हाथ अमिता की चूचियों पैर रखे थे, वो अमिता की चूचिया दबा रहा था, सोमिया आँखे फाडे लुंड को देखती रही, फिर उसने कांपते हुए हाथो से लुंड को पकड़ लिया, लुंड को पकड़ते hi उसके मुँह से सिसकी निकल गई,

समिया- ये इतना बड़ा कैसे ह, क्या खिलते हो इसे

सोमिया की बात सुनकर अमिता ने उधर देखा तो उसकी भी आँखे फटी रह गई, वो तुरंत देव से अलग हुई और निचे बैठ गई और लुंड को देखने लगी,

देव- अब ऐसे hi देखती रहोगी,

अमिता- ये जान ले लेगा हमारी,

देव- ये बस प्यार देता ह, जान लेने का काम इसका नहीं ह,

सोमिया- जब ये हमारी फाड़ेगा जान तो तब जाएगी,

देव- वो तो डलवा क्र hi पता चलेगा,

अमिता तुरंत कड़ी हुई और अपने कपडे खोलने लगी, सुने अपने कपडे उतर क्र अलग रखे, देव के सामने अजंता की मूरत कड़ी थी, शरीर का एक एक अंग बड़ा खूबसूरती से सांचे में ढला हुआ था,

अमिता- आज मैं अपनी जान तक देने को तैयार हु,

अमिता बलखाती हुई आई और देव से लिपट गई, दोनों के नंगे शरीर एक दूसरे से चिपक गए, अमिता की चूचिया देव की छाती से चिपक गई, उसकी नंगी जंघे सोमिया के मुँह के सामने आ गई, सोमिया ने उप्पेर देखा तो देव के हाथ अमिता की नंगी गांड पैर घूम रहे थे, सोमिया भी जल्दी से उठी और अपने कपडे खोलने लगी, वो नंगी होकर तुरंत देव के दूसरी तरफ आ गई और उससे चिपक गई,

देव ने दूसरा हाथ सोमिया की गांड पैर रख दिया, दो दो जवान और यौवन से भरपूर लड़किया देव के नंगे शरीर से अपना शरीर रगड़ रही थी, देव का लुंड झटके मर रहा था, सोमिया और अमिता दोनों ने एक साथ देव का लुंड पकड़ लिया, लुंड उनकी मुट्ठी में भी नहीं आ रहा था, दोनों हलके हलके लुंड को हिलने लगी,






in the bleak midwinter poem

देव बरी बरी से उनकी चूचिया चूस रहा था, वो दोनों सिसकिया भर रही थी,

फिर दोनों सोमिया निचे बैठ गई, और देव के लुंड को अपने दोनों हाथो में लेकर हिलने लगी, वही अमिता देव का सर अपनी चूचियों पैर दबाने लगी,






सोमिया ने अपनी जीभ निकली और लुंड को चेतना शुरू क्र दिया,

देव थोड़ा सा परेशां था, उसके दिमाग में थोड़ी उलझन थी, वो ये नहीं सोच प् रहा था की दोनों लड़कियों को ये बात बताये या नहीं की उसने उनकी माओ को पहले hi छोड़ दिया ह,

वही अमिता भी निचे बैठ गई और सोमिया के साथ लुंड को पकड़ लिया, दोनों बहेनो ने एक साथ लुंड को पकड़ रखा था,

अमिता- सोमिया ये सब लग तो बहुत अजीब रहा ह लेकिन मजा भी उतना hi आ रहा ह, बहुत hi अनोखा आनंद मिल रहा ह,

सोमिया- सच में यार पहेली बार किसी लुंड को हाथ में पकड़ा ह, देखा तो पहले भी ह लेकिन आज इतने करीब से वो भी हाथ में पकड़ क्र एक अलग hi खुमारी भर रहा ह ये शरीर में,

अमिता- मैं भी चुम क्र देखु

सोमिया- ख़ुशी से

अमिता ने अपने हॉट लुंड पैर रख दिए, दोनों लुंड चूसने में अभी अनादि थी लेकिन उन्हें इतना ज्ञान जरूर था की लुंड को चूसा जाता ह, क्योकि राजमहल की हर लड़की और दासी को कोई शिक्षा दी जाये या न दी जाये लेकिन काम शाश्त्र की शिक्षा जरूर दी जाती थी, ताकि वो राजाओ को खुश रख सके, वही शिक्षा अमिता और सोमिया को भी मिली थी, तो उन्हें इतना ज्ञान था की मर्द को खुश करने के लिए लुंड को चूसा जाता ह लेकिन कैसे चूसा जाता ह ये ज्ञान तो चूसने के बाद hi सिख सकती थी,






कुछ देर दोनों लुंड के साथ लहेल्ती रही, देव समझ गया की दोनों चूसने में अनादि हैं, उसने दोनों को उठाया और बिस्टेर पैर लिटा दिया, देव उनकेऊपर आ गया और एक बार अमिता की गार्डन चूमता तो एक बार सोमिया की, फिर निचे जाते ुए उनकी चूचियों को चूसने लगा, एक की चुकी चुस्त तो दूसरी को चुकी को अपने हाथो से मसलता, फिर देव निचे आता चला गया और अपने दोनों हाथ दोनों की छूट पैर एक साथ रख दिए, दोनों लड़कियों के मुँह से सिसकिया फूटने लगी थी, वो मजे में अपनी कमर हिलने लगी थी, देव ने अमिता के पेअर खोले और अपने हॉट उसकी छूट पैर रख दिए,





छूट पैर मुँह लगते hi अमिता उछाल सी पड़ी, उसे इतना पता था की छूट चूसी जाती ह लेकिन इतना मजा आता ह इसका अहसास उसे नहीं था, अमिता की कुँअरि छूट जिस पैर हल्का हल्का सुनहरा रोया आया हुआ था, देव ने अपनी जीभ से अमिता की छूट को घेरे तक चाट लिया था, जिससे अमिता मस्ती में अपना सर इधर उधर पटकने लगी थी, सोमिया उसे देख क्र मचल रही थी, वो तो छूट चूसै देख क्र अपनी चूचिया मसलने लगी थी,

देव- क्या इरादा ह पहले कोण करना चाहेगी,

सोमिया- अमिता बड़ी ह तो उसका अधिकार भी मुझसे पहले ह,

अमिता- नहीं सोमिया यहाँ हम दोनों एक सामान हैं,

सोमिया- फिर ये hi समझो की ये मेरी भी इच्छा ह की पहले तुम करो,

अमिता- जैसा तुम चाहो,

अमिता भी यही चाहती थी लेकिन बहन के प्यार में खुद कीइच्छा को न्योछावर कर रही थी,

देव- तो तैयार हो जाओ, क्योकि अब बहुत तकलीफ होने वाली ह, और अभी बता देता हु शायद अगले कुछ दिनों तक आप ठीक से चल भी न पाए,

अमिता- जो होगा देखा जायेगा,

देव को याद आया की जब सौमित्र आई थी तो अपने साथ तेल की मटकी ले थी, उसे वो मटकी ढूंढी अमिता के पैरो के बिच में आ गया, फिर उसमे से थोड़ा सात ेल अपने लुंड पैर लगाया और थोड़ा सात ेल अमिता की छूट पैर, तेल काम था तो थोड़ा सा hi इस्तेमाल क्र सकता था,

देव ने अमिता की छूट पैर अपना लुंड रखा और रगड़ने लगा, लुंड के टोपे के निचे पूरी छूट धक् गाइट hi,

सोमिया- ये बहुत बड़ा लग रहा ह छूट के सामने, ये अंदर कैसे जायेगा,

तभी देव ने लुंड पैर दबाव बनाया और पुक्क की आवाज के साथ लुंड का टोपा अंदर घुस गया, सोमिया ने लुंड को अंदर घुसते देखा तो उसकी आँखे बड़ी हो गई, वही अमिता का मुँह खुला रह गया और आँखे फटी रह गई, उसकी साँस अटक गई थी, दर्द इतना ज्यादा था की वो दर्द में चीख भी नहीं पाई,

देव- सोमिया इनकी चूचियों को शिलाओं, वर्ण ये सेह नहीं पाएंगी,

सोमिया ने झिझकते हुए अमिता की चूचियों पैर हाथ रख दिए और उन्हें मसलने लगी, देव ने बिना रुके और दबाव बनाया और लुंड थोड़ा सा अंदर और घुसा दिया,






अमिता की आँखों से आंसू बह रहे थे, वो चीखना चाहती थी लेकिन देव ने उसके मुँह पैर हाथ रख दिया, अमिता की चीख देव के हाथ में डाब क्र रह गई, अमिता ने तुरंत एक तकिया उठाया और अपने मुँह पैर रख लिया और जोर से दबा क्र चीखने लगी, जिससे उसकी आवाज उस तकिये में तब गई,

देव को अहसास था की एक बार में जितना लुंड अंदर गया उतने में hi रुकना पड़ेगा उसके बाद लुंड अंदर नहीं जा पायेगा, देव ें थोड़ा दबाव और बनाया और लुंड छूट को फाड़ता हुआ और अंदर घुस गया, अमिता जोर से चिक पड़ी- बस और नहीं और नहीं मैं मर जाउंगी,

देव रुक गया, उसने हलके हलके अमिता की छूट के उप्पेर के हिस्से को अपने अंगूठे से मसलना शुरू क्र दिया, सोमिया उसकी चूचिया मसल रही थी, अमिता घेरि घेरि सांसे ले रही थी, उसकी छूट से खून निकलने लगा था, छूट फैट चुकी थी, जिस वजह से चतु एक दम सुन्न हो गई थी, कुछ देर में अमिता को अहसास hi होना बंद हो गया था की वह क्या हो रहा ह,

कुछ देर बाद जब अमिता सामान्य होने लगी तो देव ने हलकी सी कमर हिलाई, अब असली दर्द महसूस हुआ अमिता को, उसे महसूस हुआ जैसे उसकी छूट में जखम ह और वह जलन होने लगी थी,

अमिता- नहीं देव बहुत दर्द हो रहा ह,

देव- कुछ देर सेना पड़ेगा तभी सफलता मिलेगी, आज रुक गई तो फिर दुबारा नहीं कर पाओगी,

अमिता ने अपनी आँखे बंद क्र ली,

अमिता- तो फिर करो जो करना ह, अब मत रुकना

देव ने हलकी हलकी कमर हिलाई, अमिता को दर्द हो रहा था उसने दर्द की वजह से सोमिया की कलाई पकड़ ली, और इतनी जोर से कास ली की सोमिया को दर्द होने लगा, सोमिया समझ गई की अमिता कितनी मुश्किल से बर्दास्त कर रही ह, लेकिन छूटे क ऐसी जगह ह जहा प्यार से कितना भी बड़ा लुंड घुसा दो उसी के आकर की बन जाती ह, थोड़ी देर में अमिता की छूट को रहत होने लगी थी, और रहत मिलते hi छूट ने पानी छोड़ना शुरू क्र दिया था, जिससे लुंड हाका हल्का अंदर बहार हो रहा था, अब लुंड छूट को चिर नहीं रहा था बल्कि चिकनाहट पैर हल्का हल्का फीस रहा था, हलाकि छूट अभी भी पूरी लुंड पैर कासी हुई थी, देव लुंड को बहुत hi हल्का सा बहार करता और फिर अंदर कर देता,

अमिता- सोमिया मैंने देव का लुंड अंदर ले hi लिया, मेरी छूट का दरवाजा खुल hi गया, मैंने कितने सपने देखे थे इस दिन के, न जाने किस किस से इस छूट को फड़वाने के सपने देखती थी, लेकिन जिससे सबसे ज्यादा नफरत थी आज उसी को इस पैर अधिकार मिला, और मैंख़ुश हु की इस छूट को देव के लुंड ने फाड़ा ह,

अमिता अपना धयान भटका रही थी, जिससे उसे दर्द का अहसास काम हो, उसकीतरकीब कामभी कर रही थी, डार्क ऍम हुआ तो उसकी वासना फिर से उभरने लगी और वो वासना के सागर में गोते खाने लगी, और कुछ hi देर में झड़ने लगी,

देव- आप और झेल पाएंगी क्या,

अमिता- हिम्मत नहीं ह लेकिन तुम करना चाहो तो मैं रोकूंगी नहीं,

देव- नहीं पहेली बार इतना काफी ह, जब दुबारा कभी कोरंगा तो अच्छे से करूँगा, फिर भी एक बार और बनता ह,

देव ने सोमिया को अपने सामने खड़ा किया, सोमिया अमिता के उप्पेर दोनों पेअर इधर उधर रख क्र कड़ी हो गई, सोमिया की छूट देव के मुँह के सामने आ गई,

देव- जब तक अमिता शांत होती ह तब तक मैं आपको गरम कर देता हु,

देव ने सोमिया की छूट पैर अपने हॉट रकः दिए, सोमिया ने उसका सर अपनी छूट पैर दबा लिया, देव दोनों छूटो का मजा एक साथ ले रहा था और उन्ह ीक साथ मजा दे भी रहा था,

ये सब देख क्र अमिता और गरम हो गई, और कुछ hi देर में फिर से झड़ने लगी,

अमिता- aahhhhhhhhhhh देव मैं फिर झाड़ रही हु, आज तुमने मुझे लड़की से औरत बना hi दिया ह, आज मैं पूरी हो गई हु, अब चाहे मर भी जाऊ तो कोई गम नहीं ह,

देव- आपको बहुत जीना ह,

अमिता चीखती हुई अपना सर पटकती हुई झाड़ गई, वो झाड़ क्र निढाल होकर लेट गई, देव ने जैसे hi अपनालूंड बहार निकला तो अमिता की चीख निकल गई, उसकी छूट से खून भेने लगा,

सोमिया- ये तो बंद hi नहीं हो रही ह, ऐसा लगता ह जैसे गुफा बन गई ह

अमिता- जब तेरी गुफा बनेगी तब पता चलेगा,

देव ने पानी लिया और वही अपने लुंड को धोया और बचा हुआ तेल अपने लुंड पैर लगा लिया, तब तक सोमिया अपने पेअर फैला क्र लेट गई,

देव ने उसकी छूट पैर तेल लगाया और लुंड को लगा क्र दबाव बनाया तो तेल की चिकनाहट की वजह से लुंड अंदर घुस गया, सोमिया ने पहले hi तकिया लिया हुआ था उसने अपना मुँह उसमे दबा लिया, देव हल्का हल्का दबाव बनता चला गया, देव हैरान था की सोमिया की अब तक कोई आवाज नहीं आई थी, देव का काफी लुंड छूट में घुस चुक्का था, जब सोमिया की कोई आवाज नहीं आई तो देव ने उसके मुँह पैर से तकिया हटाया तो देखा की सोमिया बेहोश हो गई ह, देव दर गया, उसने सोमिया को हिलाया लेकिन वो कुछ नहीं बोली, देव ने लुंड बहार खींचना शुर किया तो सोमिया की दर्द की वजह से आँख खुल गई,

सोमिया- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh रुक जाओ हिलो मत

देव- तुम ठीक हो न

सोमिया- है मैं ठीक हु, वो दर्द को रोकने की कोशिश कर रही थी,

देव को हैरत हुई की सोमिया दर्द को शेह्ते हुए बेहोश हो गई, लेकिन अपने मुँह से ऊऊफफफफफ तक नहीं की, देव को सोमिया पैर बहतु प्यार आया,

देव- तुम्हे तकलीफ हो रही ह हम रुक जाते हैं,

सोमिया- नहीं रुकना नहीं, ये पल दुबारा नहीं आएगा, मुझे इस पल को अभी जीना ह, तुम करते जाओ जो कर रहे हो, मैं सेह लुंगी,

देव ने हलकी हलकी कमर हिलनी शुरू की, सोमिया ने आँखे बंद क्र ली लेकिन उसके चेरे से उसका दर्द महसूस हो रहा था, देव कोई जल्दबाजी नहीं कर रहा था, वो बहुत प्यार से सोमिया को छोड़ रहा था, सोमिया अमिता से ज्यादा हिम्मत वाली थी, थोड़ी देर में छूट में पानी छोड़ना शुरू क्र दिया और सोमिया को रहत होने लगी थी, उसे नहीं पता था उसकी छूट पानी से झाड़ा खून छोड़ रही ह, जिससे छूट चिकनी हो गई थी, देव बहुत धीरे धीरे छोड़ता था, कुछ देर में सोमिया झड़ने लगी, वो पुरे जोश में अपनी कमर चलना चाहती थी लेकिन हल्का सा हिलते hi छूट में दर्द होने लगता था,

सोमिया- देव तुम कब झाड़ोगे,

देव- मुझ ेझाड़ने के लिए इतने से काम नहीं चलेगा, लेकिन फिलहाल आप मेरी चिंता मत कीजिये, बस इस पल का मजा लीजिये,

सोमिया ने देव को बहो में भर लिया, और उसके होतो को चूमने लगी,

सोमिया- मैं धन्य हो गई, मेरा जीवन सफल हो गया तुम्हे प् क्र,

देव भी उसपर पूरा प्यार लुटा रहा था, सोमिया एक बार फिर से झड़ने लगी, दो बार झाड़ क्र सोमिया शांत हो गई, देव ने ज्यादा करना सही नहीं समझा, उसने लुंड बहार निकल लिया, उसकी छूट से भी बहुत खून निकल रहा था,

सोमिया- अमिता अब देख क्र बताओ की मेरी छूट कैसी हो गई ह

लेकिन अमिता की कोई आवाज नहीं आई, सोमिया और देव ने अमिता को देखा तो पाया की वो अपने टंगे फैलाये बेसुध सोइ पड़ी ह, वो चुदाई और दर्द से इतना थक गई की वही सो गई,

देव- ये तो सो गई,

सोमिअ- हिमत तो मुझमे भी नहीं ह हिलने की,

देव- आप ऐसे hi लेती रहो,



देव उठा और अपने लुंड को धोकर कपडे पहने लगा, उसने सोमिया और अमिता के उप्पेर चादर दाल दी, कुछ hi देर में सोमिया भी सो गई, देव एक कुर्सी पैर बैठ गया, सुबह होने वाली थी, अब सोने का कोई फायदा नहीं था, देव ने दोनों बहेनो को छोड़ दिया था लेकिन वो शांत नहीं हुआ था, उसके अंदर गरमी जोर मर रही थी, उसकी बस यही इच्छा थी की वो किसी तरह खुद को शांत क्र ले,
 
अपडेट- 35




सुबह को उठ क्र देव कमरे से बहार आया और दत्त को समझा दिया की उसके कमरे में कोई अंदर न जाये, फिर देव निहारिका के कमरे में गया तो पाया की रीवा निहारिका से लिपटी हुई सो रही ह, आज पहेली बार निहारिका और रीवा एक साथ ऐसे सो रही थी, देव उन्हें बिना परेशां किये बहार निकल गया, वो महल के बगीचे में गया तो देखा चरण सिंह और संभु बगीचे में टहल रहे हैं,

देव को देख क्र संभु घबरा गया, वो चरण के पीछे चिप गया,

चरण- कैसे हो राजकुमार

देव- मेरे हलचल पूछने का अधिकार मैं सबको नहीं देता, लेकिन कभी कभी सलाह जरूर दे देता हु, अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो इस राजय को छोड़ क्र चले जाओ, और दुबारा इधर मत आना, मैं इतनी जल्दी प्रताप सिंह को नया सदमा नहीं देना चाहता, अगले सदमे में अभी समय ह, और एक बात और मैं राजमहल में चुप हो गया था इसका ये मतलब मत समझना की मुझे कोई रोक सकता ह, अगर कोई गलत हरकत की तो राजा महाराजा क्या दोनों राजय मिलकर भी मुझे रोकना चाहेंगे तो भी नहीं रोक पाएंगे,

चरण- अरे तुम तो धमका रहे हो, महेमानो को कोण धमकाता ह,

देव- तुम्हारी इतनी औकात नहीं ह की तुम यहाँ के महेमान बन सको,

चरण- मैं यहाँ बस दोनों राज्यों को एक करने आया हु, लेकिन तुम्हे अपनी ताकत पैर कुछ ज्यादा hi घमंड हो गया ह, अगर कभी मेरा और तुम्हारा आमान सामना हुआ तो तुम्हारी ये गलतफहमी दूर कर दूंगा मैं,

देव- अभी आजमा ले,

तभी वह भवर सिंह और सात्विक आ गए,

भवर सिंह- ये क्या हो रहा ह, महेमानो से ऐसे कोण बात करता ह,

देव- मेरी बहेनो की जिंदगी का फैसला करने का अधिकार आपके पास नहीं ह अब, और अब ऐसी कोई गलती मत करना की मुझे ये भी भूलना पद जाये की आपसे मेरा कोई रिश्ता बचा ह,

भवर सिंह- तुम मुझे धमका रहे हो, अपने राजा को डरा रहे हो,

देव- मैं किसी राजा को नहीं मंटा, जिस राजा को मैं मंटा था उसने मुझे बहुत पहले मरवा दिया ह, अब मेरे लिए आप सिर्फ एक इंसान हैं, और मुझसे जुड़े लोगो के जीवन का फैसला करना बंद क्र दीजिये, कल सभा में मैं चुप रहा ताकि परजा के सामने इस राजय के राजा का अपमान न हो,

सात्विक- देव शांत हो जाओ, ये राजय की बाते हैं जोश में नहीं की जाती, भविष्य सोच क्र की जाती हैं,

देव- आप कबसे राजा के सलाहकार बन गए, क्या राजगुरु का पद आपने ले लिया ह,

सात्विक- नहीं बीटा भैया कही व्यस्थ हैं इसलिए मैं यहाँ हु,

देव- मतलब आप कोई नहीं ह, तो मुझे सलाह मत दीजिये,

देव चरण को गुस्से वाली नजरो से देखता हुआ निकल गया, वो महल से बहार निकल गया जहा अभेंद्र उसका इंतजार क्र रहा था,

अभेंद्र- देव गुरु जी आपका इंतजार कर रहे हैं, वो सुबह से दो बार खबर भिजवा चुके हैं,

देव तुरंत भौमिक जी की तरफ चल दिया,

वह पंहुचा तो देखा मनीषा और सुगंधा युद्ध कला का अभ्यास क्र रही थी, उन्हें देख क्र देव को ख़ुशी हुई,

भौमिक जी- देव तुम आ गए, मुझे बहुत जरुरी बात करनी थी,

देव- जी गुरु जी बोलिये क्या हुआ,

भौमिक जी- मुझे उम्मीद ह मैंने पता कर लिया ह की राजवीर को कहा रखा हो सकता ह,

देव ख़ुशी से झूम उठा- कहा गुरु जी जल्दी बताइये कहा,

भौमिक जी ने देव को कल की साडी घटना कह सुनाई,

देव- लेकिन हमने तीनो जगह एक साथ हुम्ला किया तो भवर सिंह समझ जायेगा की ये राजवीर को बचने के लिए किया ह, और वो ये भी समझ जायेगा की ये सब मैं hi कर सकता हु,

भौमिक जी- नहीं ऐसा नहीं होना चाहिए, तुम्हे अभी उसका सामना नहीं करना ह, अभी सही समय नहीं आया ह, एक जगह तो मैं अपनी शक्तियों से आराम से घुस सकता हु, किसी को पता नहीं चलेगा, अगर राजवीर वह हुआ तो मैं बहार ला सकता हु, लेकिन भवर सिंह को पता चल जायेगा, फिर एक युद्ध शुरू हो सकता ह,

अभेंद्र- अगर हम ऐसा कुछ करे की जैसे खुद राजवीर जी अंदर से सुरक्षा तोड़ क्र भाग गए हैं, तो कैसा रहेगा,

भौमिक जी- बहुत अच्छा विचार ह, इससे किसी पैर शक भी नहीं जायेगा,

देव- गुरु जी मेरा क्रोध बढ़ रहा ह, मेरा मन कर रहा ह मैं सबकुछ तबाह करके मां को छुड़वा लौ,

भौमिक जी- अभी वो समय नहीं आया ह जिसमे तुम्हारी असली ताकत या शक्ति का पता चले, मुझे तो इसी बात क्र दर ह कही सात्विक ने भवर सिंह को बता दिया की तुम्हारे पास शक्ति ह तो शंश्य कड़ी हो सकती ह,

देव- फिर आप hi बताइये क्या करे,

भौमिक जी- तुम्हे कुछ नहीं करना ह, मैं उन जगहों पैर जाऊंगा और राजवीर को ढूंढूंगा, तुम लोग बहार इंतजार करोगे, और कुछ गड़बड़ होती ह तो सम्हालोगे, अगर राजवीर अंदर मिलता ह तो मैं उसे बहार लाऊंगा इस तरह से जैसे अंदर से राजवीर हुम्ला करके खुद भाग गया हो,

देव- जैसा आपको ठीक लगे,

भौमिक जी- तो चलो,

भौमिक जी देव और अभेंद्र चल दिए राजवीर की तलाश में, इस सब में देव ये भूल गया की आज महल में लड़कियों की शादी का फैसला होना था, उसके दिमाग में बस राजवीर घूम रहा था,

वही रेवती पूरी रात जगती रही और सोचती रही आखिर में उसने फैसला क्र लिया की उसे क्या करना ह, वो उठी और एक चिट्ठी लिखने बैठ गई, फिर उसने अपनी सबसे खास दासी को बुलवाया, बस यही एक दासी थी जिसपर वो भरोसा कर सकती थी, क्योकि वो बचपन से उसके साथ थी,

रेवती- सरिता मैं तुम्हे एक काम दे रही हु, और ये समझ लो की अगर ये काम नहीं हुआ तो मैं जिन्दा नहीं रहूंगी, लेकिन इस काम को करने में तुम्हे भी खतरा हो सकता ह,

सरिता- राजकुमारी ऐसा क्यों बोल रही हो, आप काम बताइये मैं अपनी जान देकर भी वो काम करुँगी,

रेवती- मैं तुम पैर भरोसा क्र रही हु और अपनी जान को तुम्हारे हवाले कर रही हु,

सरिता- राजकुमारी मैं जान दे दूंगी लेकिन आपका भरोसा नहीं टूटने दूंगी,

रेवती- ये लो चिट्ठी और इस चिट्ठी को तुम्हे भवनपुरा के **** गाओं में अभेंद्र नाम के आदमी को देना ह, ख्याल रहे ये चिट्ठी किसी और के हाथ में न पद जाये, ये चिट्ठी उस तक पहुचनी जरुरी ह, और उससे बोलना की उनके पास आने वाली अवश्य तक का समय ह,

सरिता ने चिट्ठी ली- राजकुमारी वो तो हमारा दुश्मन राजय ह,

रेवती- अब ये hi मेरा रक्षक बन सकता h,warna मेरा अंतिम समय आ गया ह,

सरिता- ऐसा मत कहिये राजकुमारी मैं अभी निकलती हु वह के लिए,

रेवती ने सरिता को कुछ सोने के सिक्के दिए, सरिता तुरंत वह से निकल गई,

उधर भवर सिंह के महल में सभा बैठ चुकी थी, भवर सिंह ने सभी को सभा में आने का आदेश दिया, लेकिन राजगुरु अब भी वह नहीं आये थे, अब भवर सिंह को चिंता होने लगी, इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था, भवर सिंह ने तुरंत सेनिको को राजगुरु के घर भेजा पता करने के लिए, सात्विक बार बार कोशिश में था की राजगुरु इस सभा में न आये, वो चाहता था की राजगुरु के आने से पहले भवर सिंह अपना फैसला ले ले, क्योकि उसे उम्मीद थी की राजगुरु ये शादी अब नहीं होने देंगे,

उधर देव महल में था नहीं, अमिता और सोमिया देव के कमरे में नंगी बेसुध सोइ पड़ी थी, अक्षरा और रीवा तैयार होकर सभा में पहुंच गई, बाकि सभी लोग आ चुके थे, अक्षरा ने देखा की अमिता और सोमिया नहीं आई हैं, उसे याद आया की वो देव के पास थी, वो तुरंत उन्हें ढूढ़ने के लिए निकल गई,

अक्षरा जब देव के कमरे के बहार पहुंची तो वह दूत बैठा हुआ था, अक्षरा अंदर जाने लगी तो दूत उसकी तरफ गुरया, अक्षरा दर क्र पीछे हाथ गई, दत्त की आवाज सुनकर निहिरका अपने कमरे से बहार आई, उसने देखा की दूत देव के कमरे बहार खड़ा ह और अक्षरा को अंदर नहीं जाने दे रहा, निहारिका को अजीब लगा, वो तुरंत अक्षरा के पास आई,

निहारिका- अक्षरा क्या हुआ

अक्षरा- छोटी माँ देखो दत्त अंदर नहीं जाने दे रहा,

निहारिका ने दत्त के सर पैर हाथ फिराया, निहारिका समझ गई की दत्त देव का आदेश का पालन क्र रहा ह,

निहारिका- रुक मैं अंदर होकर आती हु,

अब अक्षरा घबरा गई, उसे दर था अगर अमिता और सोमिया इस समय देव के कमरे में मिली तो गड़बड़ हो जाएगी,

अक्षरा- नहीं छोटी माँ कोई बात नहीं मैं बाद में आ जाउंगी, आप रहने दीजिये,

निहारिका- अरे तू क्यों चिंता करती ह मैं आती हु,

निहारिका अंदर चली गई, अंदर जाते hi निहारिका ने जो नजारा देखा उसे देख क्र उसके होतो पैर मुस्कान आ गई, क्योकि सामने अमिता और सोमिया बिलकुल नंगी पेअर फैलाये बिस्टेर पैर बेसुध पड़ी हुई थी, निहारिका समझ गई देव ने दत्त को ये आदेश क्यों दिया था, लेकिन देव वह नहीं था, निहारिका ने दोनों के उप्पेर चादर ुधई और बहार आ गई,

अक्षरा वह से भाग गई थी, उसे दर था अब उससे सवाल होंगे, अक्षरा के वह से जाने से निहारिका समझ गई की अक्षरा को सब पता ह,

निहारिका मन में hi- देव ने अपनी मंजिल लगभग प् hi ली ह,

अक्षरा सभा में आकर बैठ गई,

रीवा- अक्षरा अमिता और सोमिया कहा ह, महाराज सबको बुला रहे हैं,

अक्षरा- मुझे नहीं पता,

सभा शुरू हो गई, चरण और संभु भी सभा में आकर बैठ गए,

भवर सिंह- सभा शुरू की जाये,

सात्विक खड़ा हुआ,

सात्विक- महाराज कल जो चरण सिंह ने सभा में प्रस्ताव रखा था, उस पैर काफी विचार करने के बाद मेरा मन्ना ह की हमे उसकी बात मान लेनी छाइये, इससे दोनों राज्यों के बिच की दुश्मनी भी ख़तम हो जाएगी और व्यापर भी बढ़ेगा जिससे दोनों राज्यों की परजा का भला होगा,

काम्य- मैं सात्विक जी की बात से सहमत हु,

सात्विक और काम्य की बात सुनकर रीवा और अक्षरा की साँस अटक गई, वो बस देव का इंतजार कर रही थी, लेकिन देव का कोई आता पता नहीं था,

सूरज- मुझे भी ये प्रस्ताव ठीक लगा महाराज, राजा महाराजा पुराणी बातो को याद करके राजय के भविष्य को बर्बाद नहीं करना चाहेंगे,

ज्वाला- मैं सूरज की बात से सहमत हु,

अभिजीत- मैं भी,

अमरावती- मेरी बेटियों की शादी हो मुझे इससे ज्यादा और क्या चाहिए,

तभी सौमित्र ने जो बोल दिया उससे सब चौंक गए,

सौमित्र- यहाँ देव नहीं ह, क्या उसका फैसला मायने नहीं रखता, उसे इस शादी से ऐतराज था तो उसका फैसला जानना भी जरुरी ह,

सौमित्र की बात से सभी के चेहरे पैर गुस्से के भाव थे, भवर सिंह और काम्य ने गुस्से में जलती हुई आँखों से सौमित्र को देखा, सौमित्र समझ ै गलत समय पैर गलत बात बोल दी ह, वो चुप चाप निचे बैठ गई,

भवर सिंह- मतलब पूरा परिवार सहमत ह तो मुझे भी कोई ऐतराज नहीं ह, लेकिन पहले प्रताप सिंह की बेटी की शादी हमारे परिवार के किसी लड़के से होगी,

चरण- हमे मंजूर ह, आप जिससे कहेंगे हम उससे शादी करवा देंगे,

भवर सिंह- उसके बाद हमारी चारो बेटियों की शादी तुम चारो भाइयो से करवा दी जाएगी, तुम अपने परिवार के साथ यहाँ आओ और खुद फैसला कर लो कोनसा भाई हमारी किस बेटी से शादी करेगा,

रीवा और अक्षरा की आँखों में आंसू भेने लगे थे, देव की रह देखते देखते उन दोनों की हिम्मत टूटने लगी थी,

लेकिन तभी एक जोर दर आवाज गूंज गई,

ये शादी बिना मेरी मर्जी के नहीं होगी, और मैं इस शादी से इंकार करती हु,

रीवा और अक्षरा ने उम्मीद भरी नजरो से सभा के दरवाजे पैर देखा तो वह से निहारिका चली आ रही थी और साथ में था दत्त, निहारिका की चल किसी बाघिन से काम नहीं थी, उसका रूप पूरी सभा को चकाचोंध कर रहा था, जब चरण किन अजर निहारिका पैर पड़ी तो वो उसे देखता hi रह गया, उसकी समझ में आ गया उसके पिता प्रताप सिंह निहारिका के लिए इतने पागल क्यों ह, चरण सिंह के मन भी वही भाव उभर रहे थे,

चरण सिंह मन में- इस औरत को पाने के लिए तो कोई भी इंसान संसार के किसी भी राजय को ठोकर मर सकता ह,

भवर सिंह- ये हमारा फैसला ह, और राजा का फैसला कोई नहीं बदल सकता,

निहारिका- ये मेरी बेटियों की जिंदगी का फैसला ह, और मैं ये अधिकार किसी को नहीं देती की वो मेरी बेटियों की जिंदगी का फैसला अपने सवर्थ के लिए करे, देव इस समय यहाँ नहीं ह लेकिन उसकी माँ यहाँ कड़ी ह,

काम्य- तुम्हारी सिर्फ एक बेटी ह बाकि तीनो हमारी बेतिया हैं,

निहारिका- अब वो मेरी बेतिया हैं, और उनकी जिंदगी का फैसला वो करेंगी या मैं करुँगी,

भवर सिंह- तुम होती कोण हो मेरे आदेश का उलंघन करने वाली,

भवर सिंह ये बात चीख क्र बोलै, भवर सिंह जितनी जोर से चीखा था उसे ज्यादा जोर से दत्त ने दहाड़ मरी, दत्त की दहाड़ से पूरी सभा कैंप उठी,

निहारिका ने दत्त के सर पैर हाथ फिराया,

निहारिका- तुम लोगो के स्वार्थ के लिए मेरी बेटियों की बलि नहीं दी जाएगी,

चरण- महाराज ये कैसा राजय ह जहा राजा की बात कोई नहीं सुनता, जहा औरते भी महाराज की बात का उलंघन करती है, ऐसा राजय हमारे साथ मिलकर अपने शत्रुओ से कैसे लड़ेगा,

निहारिका- जहा औरत कोई बोलने का अधिकार नहीं दिया जाता वो जगह नरक बन जाती ह, और तेरा राजय एक नरख hi ह, उस नरख में मेरी बेतिया नहीं जाएँगी,

निहारिका ने रीवा और अक्षरा को उठने का इशारा किया, वो दोनों तुरंत उठी और निहारिका के पीछे चल दी,

निहारिका के जाते hi भवर सिंह गुस्से में आग बबूला हो गया,

भवर सिंह- मैं इसे जान से मार दूंगा, इसे राजय में लाना hi नहीं चाहिए था, ये औरत इस राजय का नाश कर देगी,

काम्य- इसने राजा का अपमान किया ह इसे सजा मिलनी चाहिए,

चरण- महाराज वैसे तो अपमान हमारा भी हुआ ह लेकिन फिर भी मैं आपसे अकेले में कुछ बात करना चाहूंगा,

सात्विक ने भवर सिंह का है में गार्डन हिलाई,

भवर सिंह ने तुरनत सभा ख़तम कर दी और एक कमरे में आ गया, उसके साथ काम्य चरण संभु और सात्विक थे,

भवर सिंह- आज सभा में जो हुआ वो ठीक नहीं हुआ ह, मैं इन दोनों माँ बेटो को राजय से बहार क्र दूंगा लेकिन शादी वही होगी,

चरण- महाराज मुझे लगता ह देव और रानी निहारिका इस राजय के लिए बड़ा खतरा ह, और मैंने सुना ह देव बहुत ताकतवर भी ह, अगर वो लड़ने पैर आया तो बहुत नुकसान करेगा,

भवर सिंह- हमने उसे उस राक्षश से लड़ने के लिए यहाँ वापस बुलवाया ह, लेकिन तबसे वो राक्षश आया hi नहीं ह,

चरण- महाराज मेरी जानकारी के हिसाब से वो राक्षश तभी आता ह जब कोई युद्ध हो और खास क्र भवनपुरा और प्रतापगढ़ के बिच युद्ध हो रहा हो, जब तक ऐसे हालत नहीं बनते तो राक्षश आएगा hi नहीं, और अगर राक्षश आएगा hi नहीं तो आपको देव की जरुरत hi क्या ह, अगर हम लाडे hi नहीं तो राक्षश यहाँ नहीं आएगा,

काम्य- सही कहा ये तो हमने सोचा hi नहीं था, वो राक्षश तभी आया ह जब दोनों राज्यों की सेना आपस में लड़ रही होती ह,

भवर सिंह- लेकिन अब हम उसे वापस ले आये हैं, अब हम उसे कैसे बहार निकालेंगे,

चरण- साथ मिलकर,

सात्विक- अब ये इतना आसान नहीं ह,

चरण- क्यों नहीं आसान, आप इतने शक्ति शैली हैं, आप चाहे तो कुछ भी कर सकते हैं, और बी मैं आ गया हु,

सात्विक- तुम उसका कुछ नहीं बिगड़ सकते,

चरण- आपको मेरी ताकत का अंदाजा नहीं ह,

सात्विक- तुम्हे उसकी शक्ति का अंदाजा नहीं ह, उसके पास ऐसी ताकत ह की हम सब मिलकर भी उसका कुछ नहीं बिगड़ सकते,

भवर सिंह- आप कहना क्या चाहते हैं, साफ़ साफ़ बोलिये,

सात्विक- वो अब पहले वाला देव नहीं ह जिसे कोई भी मर सकता था, अब उसके पास वो

काम्य- क्या सात्विक जी,

सात्विक- उसके पास वो शक्ति ह जिसे आप खोज रहे हैं,

सात्विक की बात सुनते hi भवर सिंह कमाया चरण और संभु की आँखे फटी रह गई मुँह खुला रह गया, वो सभी अचम्भे से सात्विक को देखते रह गए,

भवर सिंह- ये क्या कह रहे हो आप,

सात्विक- मैं सही बोल रहा हु, तीन शक्तियों में से एक शक्ति इस समय देव के अंदर ह, और अगर हमे उसे रोकना ह तो हमे वो तीसरी शक्ति खोजनी होगी, वर्ण हम उसका कुछ नहीं बिगड़ सकते, वो अकेला नहीं ह भौमिक उसके साथ ह, और भौमिक के अंदर भी मेरे जितनी शक्ति ह, सिर्फ मैं देव को रोक सकता हु लेकिन भौमिक मुझे रोक लेगा, और आप सब मिलकर भी देव को नहीं रोक पाएंगे,

काम्य और भवर सिंह अपने सर पैर हाथ रख क्र बैठ गए, उनकी तो पूरी दुनिया hi ख़तम सी हो गाइट hi, जिस शक्ति की तलाश में उन्होंने पूरा जीवन निकल दिया वो शक्ति देव के पास चली गई थी, भवर सिंह अपनी कुर्सी से गिर पड़ा,

काम्य ने उसे सम्हाला,

सात्विक- महाराज निराश न हो, अभी तीसरी शक्ति बची हुई ह हमे जल्दी से उसे ढूँढना होगा,

तभी भवर सिंह के वो सैनिक वापस आ गए जो राजगुरु को खोजने गए थे, जिसकी खबर बहार खड़े सैनिक ने भवर सिंह को आकर दी, भवर सिंह ने तुरंत उन सेनिको को अंदर बुलवाया,

भवर सिंह- क्या पता चला, कहा ह राजगुरु,

सैनिक- महाराज राजगुरु अपने घर में नहीं हैं, और किसी को नहीं पता वो कहा गए हैं, उनके परिवार से पता चला की वो रात में एक किताब पढ़ रहे थे और और पूरी रात किताब को पढ़ते रहे, फिर वो सुबह होने से पहले hi चले गए बिना किसी को बताये हुए,

सैनिक की बात सुनकर भवर सिंह और सात्विक चौंक गए,

सात्विक- कोनसी किताब पढ़ रहे थे, कहा ह वो किताब

सैनिक- नहीं पता शायद उन्ही के पास ह,

सात्विक- महाराज हमे भैया को ढूँढना होगा,

भवर सिंह- क्या हुआ, कुछ गड़बड़ ह क्या,

सात्विक- मुझे थोड़ा समय चाहिए,

सात्विक तुरंत जमीन पैर बैठ गया और आँखे बंद क्र ली, भवर सिंह काम्य और चरण उसके पास में खड़े हो गए,

सात्विक ने धयान लगाना शुरू क्र दिया, अब उसकी शक्ति इतनी बढ़ चुकी थी की उसे किसी के बारे में पता करने के लिए हवन करने की जरुरत नहीं पड़ती थी, वो धयान लगा क्र भी पता कर लेता था, सात्विक ने राजगुरु को एक घोड़े पैर जाते हुए देखा,

सात्विक- भैया घोड़े पैर कही जा रहे हैं, और वो उत्तर दिशा की तरफ जा रहे हैं,

सात्विक ने और धयान लगाया

सात्विक- वो रात में एक किताब पढ़ रहे थे जिसका नाम था हमारा राजय और ये किताब महाराज सूर्यभान जी ने लिखवाई थी, हमारे पिताजी से,

भवर सिंह- उत्तर दिशा की तरफ बिना मुझे बताये हुए, राजगुरु ऐसा कभी नहीं करते, वह ऐसा क्या हुआ ह जिस वजह से राजगुरु ने अपना नियम तोड़ दिया ह,

सात्विक ने आँखे खोल दी,

सात्विक- उत्तर दिशा, और वो किताब हमारा राजय, उन्हें पता चल गया ह, हमे उत्तर दिशा की तरफ निकलना होगा,

भवर सिंह- क्या पता चल गया ह,

सात्विक- उस शक्ति

काम्य- बस ये सभा फ़िलहाल यही ख़तम होती ह, चरण सिंह हम इस बारे में बाद में बात करेंगे, फ़िलहाल तुम अपने राजय लोट जाओ, हम अपने परिवार को समझा क्र खुद तुम्हारे राजय में आएंगे,

चरण सिंह- ठीक ह रानी, हमे आज्ञा दीजिये, हम अपने राजय की तरफ निकल जाते हैं,

चरण और संभु तुरंत वह से निकल गए,

काम्य- आप लोग किसी के सामने भी सब बोलने लगते हैं,

सात्विक- माफ़ करना महारानी लेकिन बात hi ऐसी ह मैं खुद को रोक नहीं पाया,

भवर सिंह- अब बताइये क्या हुआ,

सात्विक- भैया के हाथ में जो किताब थी उसमे इस राजय का इतहास ह, मतलब आपके और मेरे पूर्वजो की लिखी हुई किताब ह, और उस किताब में जरूर इन शक्तियों का जीकर होगा, क्योकि हमारे पूर्वजो को इन शक्तियों के बारे में पता था,

भवर सिंह- है पता था, मेरे दादा जी को पता था,

सात्विक- भैया उत्तर दिशा की तरफ जार हे हैं तो लगता ह उन्हें तीसरी शक्ति का पता चल चुक्का ह, हो न हो वो शक्ति उत्तर दिशा में ह, ओह्ह मैं ये कभी सोच क्यों नहीं पाया की एक शक्ति दक्षिण दिशा में मिली दुश्री हमारे राजय में मतलब मध्य में तो तीसरी शक्ति उत्तर दिशा में हो सकती ह,

भवर सिंह- ोुह्ह्ह्ह इसीलिए दादा जी ने कहा था उत्तर और दक्षिण पैर नजर रखना, और मैं मूरख अपने उत्तर और दक्षिण के राज्यों से दुश्मनी करके बैठा हुआ हु, इसी वजह से आज तक प्रतापगढ़ से दुश्मनी की हुई थी, लेकिन दादा जी उत्तर और दक्षिण की शक्तियों का जीकर क्र रहे थे,

काम्य- हमे निकलना छाइये तुरंत,

भवर सिंह ने तुरंत सेनिको को बुलाया और अपने सबसे तेज दौड़ने वाले घोड़े तैयार करवाए और अपने 100 सेनिको के साथ काम्य और सात्विक को लेकर तुरंत उत्तर दिशा की तरफ निकल गया,

वही चरण ने बहार निकलते hi अपना एक सैनिक अपने राजय में भेजा और प्रताप सिंह से एक सेना लेकर उत्तर दिशा में जाली पहुंचने को बोलै, और खुद संभु और साथ में आये सेनिको के साथ उत्तर दिशा की तरफ दौड़ पड़ा,

अगले कुछ hi घंटो में ये सब हो गया, इधर भौमिक जी अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके कुछ पालो के लिए अदृश्य होकर उस जगह पहुंच गए, पहेली दोनों जगह उन्हें कुछ नहीं मिला लेकिन तीसरी जगह उन्हें कामयाबी मिल गई, जमीन के निचे बने एक गुप्त जगह थी जहा पैर राजवीर को रखा हुआ था, उसकी सुरक्षा में बहुत से सैनिक थे, जो हमेशा वही रहते थे, वो कभी उस जगह से बहार नहीं निकलते थे, उनका परिवार भी वही रहता था, वो लोग सैनिक बनकर नहीं बालकर आदिवासी बनकर उस जगह रहते थे, उन्होंने उस जमीन के उप्पेर अपने झोड़े डेल हुए थे, भौमिक जी अंदर घुस गए, लेकिन जब उन्होंने राजवीर की हालत देखि तो वो सहम गए, क्योकि इतना बड़ा योद्धा आज एक सूखे पत्ते की तरह हो चुक्का था, अधमरा सा बेसुध बेहाल पड़ा था ो होश में भी नहीं था, भौमिक जी चाहते थे की राजवीर सबको मरता हुआ बहार निकलेगा तो ऐसा लगेगा की राजवीर खुद भाग गया लेकिन ये संभव नहीं था, लेकिन राजवीर को बहार भी निकलना था,

तो भौमिक जी वापस बहार आ गए,

देव- क्या हुआ गुरु जी

भौमिक जी- राजवीर मिल गया ह लेकिन उसकी ऐसी हालत नहीं ह की वो किसी को मर क्र बहार आ सके,

देव- तो आप सबको मर क्र बहार आ जाते,

भौमिक जी- नहीं देव मैं किसी की हत्या नहीं कर सकता, चाहे मेरे प्राण hi क्यों न जार हे हो, मेरा करम लोगो को ठीक करना ह उन्हें मरना नहीं, और मैंने खुद से और उप्पेर वाले से वचन बढ़ हु, मैं किसी की हत्या नहीं करूँगा,

देव- फिर तो एक hi रास्ता बचा ह,

अभनेड़रा- तो शुरू करे

देव- गुरु जी आप किसी को नहीं दिखने चाहिए और अभेंद्र हम ऐसे जायेंगे की कोई हमे पहचान न सके,

दोनों ने खुद को एक लुटेरे के भेस में तैयार किया,

फिर देव और अभेंद्र ने अपने हथियार उठा लिए और चल दिए, और देव की ताकत और अभेंद्र का हथियार चलना, जॉब hi सामने आता रहा वो उसे मरते चले गए, लेकिन औरतो और बच्चो को उन्होंने नहीं मारा, भौमिक जी सबसे पहले राजवीर के पास चले गए थे, उन्हें डार्ट है कही अपनेआदमियो को मरता देख अंदर वाले सैनिक राजवीर को न मर दे,

कुछ hi समय में देव और अभेंद्र सबको मरते हुए अंदर घुस गए और राजवीर को आजाद क्र दिया, देव ने राजवीर को अपने कंधे पैर उठाया और वह से निकल गए, पीछे छोड़ गए खून और लाशे और उन पैर रोटी हुई औरते,

राजवीर को लेकर वो सीधे अपने गुप्त स्थान पैर पहचुहे, वह भौमिक जी ने संबसे पहले राजवीर का निरिक्षण किया, राजवीर को अच्छे से देखने के बाद,



भौमिक जी- इसकी हालत बहुत ख़राब ह, इसके अंदर बस जान रुकी हुई ह, खून की बहुत hi कमी हो चुकी ह, ऐसा लगता है जिसे इसे महीनो से कुछ खाने के लिए नहीं दिया गया, इसके शरीर में पानी की भी कमी हो गई ह, ये भूक प्यास और मार की वजह से एक अचेत निंद्रा में चला गया ह, इसका उपचार करना होगा इसमें हमे समय लग सकता ह,
 
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