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भवर सिंह और काम्य शक्ति के बारे में जान क्र hi पागल हुए जा रहे थे,
भवर सिंह- राजगुरु उस शक्ति की खोज कीजिये, जल्दी से जल्दी और अपने सबसे विश्वासपात्र लोग लगाइये, मुझेये शक्ति चाहिए, हो न हो ये वही शक्ति ह जिसके बारे में दादा जी
काम्य- महाराज हमे खुद सात्विक जी के साथ उस शक्ति को ढूँढना चाहिए,
राजगुरु- जैसा आप कहे महाराज, मैं तैयारी करता हु, आज का दिन तो निकल रहा ह, कल सुबह हम तलाश शुरू करेंगे,
ये सब शक्ति खोजने की बात कर रहे थे और सात्विक और भौमिक एक दूसरे को देख रहे थे क्योकि उन्हें पता था की यहाँ की शक्ति तो पहले hi देव के अंदर ह,
सात्विक- हमे अब आज्ञा दीजिये, मैं कुछ देर आराम करना चाहता हु बहुत लम्बा सफर तय करके आया हु,
सात्विक और भौमिक वह से निकल गए और अपने घर पहुंच गए,
पहले तो दोनों के परिवार बहुत खुश हुए, बड़े प्रेम से मिले, फिर दोनों भाई एक कमरे में बैठ गए,
भौमिक- ये सब क्या ह सात्विक तू उस शक्ति की खोज में क्यों निकला ह,
सात्विक- पहले तुम ये बताओ क्या तुम्हे पता था वो शक्ति देव के अंदर ह,
भौमिक- पहले नहीं पता था, लेकिन जब मैं साधना में गया और मेरे ज्ञान में वृद्धि हुई तब मुझे पता चला की ऐसी 3 शक्तिया हैं, और फिर अहसास हुआ की जिस रौशनी में हम गए थे वैसी hi रौशनी की बात तुमने देव को ढूढ़ते वक़्त कही थी, तो मुझे लगा कही देव भी ऐसी hi शक्ति के प्रभाव में तो नहीं आ गया, मैं महल में आया तो देव को देखा और भी इतनी ताकत के साथ, और उसने तुम्हारी छोड़ी हुई शक्ति को सेह लिया तो मुझे अहसास हुआ की उसी के अंदर वो शक्ति ह,
सात्विक- तो क्या देव के अंदर भी हमारे जैसा ज्ञान आया ह,
भौमिक- मुझे नहीं लगता, मेरे हिसाब से ये शक्ति अलग तरह से काम कर रही ह, हम दोनों के पास ज्ञान था तो उससे हमारा ज्ञान बहुत अधिक बढ़ गया ह और कुछ दिव्या शक्तिया आई हैं, मुझे लगता ह देव के पास ताकत आई ह,
सात्विक- सही कहा, क्या तुम जानते हो वो तीसरी शक्ति कहा ह,
भौमिक- नहीं अभी नहीं जनता,
सात्विक- हम दोनों भाई हैं, हमे एक दूसरे का साथ देना चाहिए, और देव तो तुम्हे गुरु मंटा ह वो तो हमारे साथ होगा hi, हम इस धरती के सबसे शक्तिशाली लोग होंगे, अगर हम साथ मिल जाये तो पूरी धरती पैर राज कर सकते हैं,
सात्विक की बातो में महेत्वकंषा दिखाई दे रही थी, भौमिक कुछ बोलने वाला था तभी राजगुरु भी वह आ गए और अपने भाइयो से लिपट गए,
राजगुरु- तुम दोनों के बिना हम कितने अकेले हो गए थे,
सात्विक- अब आप अकेले नहीं हैं, आपके सेराव शक्तिशाली भाई आपके पास हैं,
भौमिक- भैया ये भवर सिंह अपने दादा के बारे में क्या बोल रहा था, जिसे बताते हुए वो चुप हो गया,
राजगुरु- भवर सिंह के दादा बहुत शक्तिशाली और महँ राजा थे, बहुत hi दयावान और ज्ञानी थे, वो हमेशा एक बात बोलै करते थे की हमारा राजय यहाँ बसाया गया ह उसके पीछे बहुत बड़ा कारन ह, वो पूरी धरती के सभी राज्यों का इतहास लिखवाते थे और कहते थे दक्षिण और उत्तर दोनों पैर हमेशा नजर बना क्र रखना, उनके हिसाब से उनके पूर्वजो को भगवन के अवतार ने वह बसने को कहा था, महाभारत के युद्ध के बाद उन्हें यहाँ बसाया गया किसी चीज की रक्षा करने के लिए, भवर सिंह के दादा बोलते थे की हमारे वंश में एक योद्धा आएगा जो संसार का भला करेगा, जो अमरत्व को चखेगा, और उनका भरोसा था की वो भवर सिंह होगा, इसलिए भवर सिंह आज तक अमरत्व को धुंध रहा ह,
सात्विक और भौमिक समझ गए की भवर सिंह के दादा को पता था इस शक्ति के बारे में, हो सकता ह उन्हें जगह न पता हो, क्योकि वो आज तक किसी को नहीं पता,
सात्विक- मैं भवर सिंह को वो शक्ति दिला सकता हु लेकिन उसे वचन देना होगा शक्ति मिलने के बाद वो हमारा साथ देगा,
राजगुरु- वो शक्ति पाने के लिए कोई भी वचन दे देगा, कुछ भी कर जायेगा,
सात्विक मुस्कुरा दिया, लेकिन भौमिक के दिमाग में शंका उतपन्न हो गई, क्योकि सात्विक का व्यव्हार बदल चुक्का था,
रात हो चुकी थी, काम्य और भवर सिंह अपने कमरे में जश्न मन रहे थे, शराब पि रहे थे,
काम्य- आप कामयाब हो गए,
भवर सिंह- है एक बार वो शक्ति हमे मिल गई तो फिर राजवीर हमारे किसी काम का नहीं, वो दिन उसका आखरी दिन होगा, बहुत जिन्दा रख लिया उसे,
काम्य- क्या सच में मर डोज उसे,
भवर सिंह- तुम्हारे दिल में अभी भी उसके लिए कोई जगह ह क्या,
काम्य- नहीं वो ऐसी कोई बात नहीं ह,
भवर सिंह- उसे मरना hi होगा, बस एक वही ह जिसे सब कुछ पता ह, मुझे आज तक समझ नहीं आया की उसका परिवार इस सब में कैसे शामिल हो सकता ह,
काम्य- उसका परिवार हमेशा से हमारे परिवार का रक्षक रहा ह, अगर आप जल्दबाजी न करते तो वो भी हमारा रक्षक होता और उससे सब कुछ उगलवाया जा सकता था,
भवर सिंह- मैंने उसे इतना अच्छा अवसर दिया था, वो हमारे कितने करीब आ सकता था, लेकिन वो मन hi नहीं, लेकिन देखो फिर भी मुझे सब कुछ मिल गया, निहारिका भी मेरी हो गई और अब वो शक्ति भी मेरी हो जाएगी,
काम्य- उस शक्ति को मिलने के बाद मुझे मत भूल जाना,
भवर सिंह- ये कभी नहीं हो सकता,
ये दोनों अपनी बातो में लगे थे, वही भौमिक इतने समय बाद वापस आकर अपने परिवार के साथ बैठने की जगह अपने कमरे में कुछ खोज रहे थे, उन्होंने अपनी साडी किताबे फैलाई हुई थी, और खुद से hi बड़बड़ाये जा रहे थे,
भौमिक खुद से hi- मुझे इसका राज पता करना होगा, इन शक्तियों के बनने का कुछ तो कारन होगा, भगवान् ऐसे hi कुछ नहीं करते, कुछ तो कारन होगा, किसी ने कही तो जीकर किया होगा, कोई अब तक इस सबके बारे में क्यों नहीं जनता था, और महाराज सूर्यभान (भवर सिंह के दादा) को इस सब के बारे में कैसे पता, लगता ह भैया को और भी कुछ पता ह, और देव इस सब में कैसे शामिल, अगर वो शक्ति भवर सिंह को मिलनी थी तो देव को कैसे मिली, कुछ तो गड़बड़ ह, कुछ तो अधूरा ह, मुझे hi पता करना होगा, सात्विक के इरादे ठीक नहीं लग रहे, उससे पहले मुझे सब जानना होगा, भौमिक फिर से अपने काम में लग गए,
वही सूरज ज्वाला और अभिजीत बंधे हुए ठण्ड से ठिठुर रहे थे,
अभिजीत- कहा फास गए, मुझे तो चारो तरफ से अपनी मोत hi मोत दिखाई दे रही ह,
ज्वाला- तुम दोनों के चक्कर में मैं भी फास गया, वो देव हमे जिन्दा नहीं छोड़ेगा, अगर छोड़ दिया तो पिता जी मार देंगे,
सूरज- कुछ नहीं होगा, हम अभी मोत के मुँह से बहार आये हैं, अगर देव को हमे मरना होता तो कबका मर चुक्का होता, मैंने उसकी आँखों में कुछ अलग hi देखा था,
अभिजीत- लेकिन ये तीनो लड़किया तो घर जाकर सब बताएंगी, तब क्या होगा,
सूरज- हमारे पास एक hi तरीका ह, फ़िलहाल उनके पैरो में गिर क्र मांफी मांगनी होगी, और कुछ समय के लिए शांत रहना होगा, यहाँ की बात को भूलना होगा, जब तक सब शांत नहीं हो जाता,
ज्वाला- अगर उन्होंने माफ़ नहीं किया तो,
सूरज- माफ़ न भी करे बस घर जाकर न बताये तो भी हमारा काम बन जायेगा, जब सब शांत हो जायेगा उसके बाद हम सबको देव और इन तीनो के बारे में बता देंगे,
अभिजीत- अगर हम इनसे पहले hi बता दे की इन लड़कियों और देव के बिच कुछ गदद चल रही ह,
सूरज- अभी ये संभव नहीं ह, हमारे खिलाफ सबूत ज्यादा हैं, और हमसे सवाल होंगे की हम इन्हे यहाँ लेकर क्यों आये, और वो प्रताप सिंह के बेटे वो भी यहाँ आ गए थे, तो हमारे खिलाफ सबूत ज्यादा हैं, पहले सब शांत होने दो,
तीनो भाई अभी बी योजना बनाने में लगे थे, दूसरी तरफ तीनो भेने दुखी थी, सदमे की हालत में थी, दसिया खाना बना क्र ले आई थी लेकिन किसी का मन नहीं था खाने का,
तभी देव पूरा निरिक्षण करके वापस आ गया,
देव- तुम लोगो ने खाना नहीं खाया,
अमिता- हमे साँस लेने का भी मन नहीं कर रहा खाना कैसे खाया जायेगा,
देव- समय कभी किसी दर्द या तकलीफ के लिए नहीं रुकता, वो आगे बढ़ता रहता ह, ऐसे hi इंसान को बनाया गया ह, कोई दर्द या तकलीफ इंसान को नहीं रोक सकती, उसे आगे बढ़ना hi होता ह, आगे बढ़ने वालो के लिए उसकी तकलीफ hi उसकी ताकत बन जाती हैं, और बैठ क्र सोच क्र रोने वालो के लिए वही तकलीफ उनके पैरो की बेड़िया बन जाती ह,
सोमिया- तुमने और निहारिका माँ ने ये सब कैसे झेल लिया, तुम तो फिर भी मर्द हो लेकिन निहारिका माँ ने कैसे ये सब सहा होगा, उन्हें कितनी तकलीफ हुई होगी, आज हम इस बात समझ सकते हैं, हमारे सामने तो फिर भी अपने थे लेकिन उनके सामने तो पूरा राजय था,
देव- उसी तकलीफ ने उन्हें इतना मजबूत बना दिया की आज पूरा राजय भी उन्हें कमजोर नहीं कर सकता,
अक्षरा- तुम उनके साथ थे न इसलिए वो ये सब सेह गई,
देव- मैं तो तुम सबके साथ भी खड़ा हु, तो दिखाओ तुम ये सहने के लिए कितनी तैयार हो, क्या तुम इतनी कमजोर हो की ऐसे गिरे इंसानो की हरकतों से खुद को तकलीफ डौगी,
अक्षरा ने अपने आंसू पोछे,
अक्षरा- अगर तुम साथ हो तो फिर मुझे कोई दर्द दर्द नहीं दे सकता,
अमिता और सोमिया में भी जोश आ गया,
देव- तो आओ पहले खाना कहते हैं,
फिर सबने खाना खाया,
अमिता- अब उन तीनो का क्या करना ह,
देव- फिलहाल शांत रहना ह, उन्हें सही समय आने पैर सबक सिखाया जायेगा,
सोमिया- मेरा मन नहीं कर रहा उनकी शकल भी दुबारा देखु, उनके सामने जाने की हिम्मत तक नहीं होगी मेरी तो,
देव- ये झिझक उनके अंदर होनी चाहिए तुम्हारे नहीं, तुम बेझिझक उनके सामने जाना, ताकि वो शर्म से सर झुका ले,
अक्षरा- उन्हें सजा तो मिलनी चाहिए,
देव- सजा तो मैं उन्हें अब भी दे सकता हु, लेकिन फिर पूरा राजय मेरे और तुम्हारे खिलाफ खड़ा हो जायेगा, कोई इनकी गलती नहीं बताएगा, इनके किये की सजा सबके सामने दी जाएगी, और ऐसी सजा मिलेगी की इनके जैसा कोई भी इंसान ऐसी हरकत करने से पहले 100 बार सोचेगा, और सजा तो तुम सबने इन्हे दे hi दी ह,
देव की बात से तीनो शर्मा गई,
अक्षरा- वो सजा तो ये रोज भुगतेंगे, रोज देखेंगे,
देव बस मुस्कुरा दिया,
रात में चारो एक hi कमरे में एक hi बिस्टेर पैर लेट गए, और ऐसे hi सोचते सोचते सो गए, सुबह जब आँख खुली तो सब एक दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे, अमिता देव से बिलकुल चिपक क्र लेती हुई थी, और सुबह के समय मर्द का लुंड पुरे सवाब पैर खड़ा होता ह, ये सभी जानते hi हैं, वैसे hi देव का लुंड खड़ा था और अमिता की गांड पैर पूरा दबाव बना रहा था, पीछे से अक्षरा की चूचिया देव की कमर से चिपकी हुई थी, और उसका पेअर देव के पेअर पैर रखा था, अक्षरा के पीछे सोमिया थी, सबसे पहले सोमिया की आँख खुली,
उसने अक्षरा की हालत देखि तो उसे जगाया, अक्षरा के जागते hi देव की आँख भी खुल गई, और आंख खुलते hi देव को अहसास हुआ की उसका लुंड अमिता की गांड में घुसा जार है ह, और उसका हाथ अमिता के चूचियों के बिलकुल निचे ह, वो थोड़ा सा पीछे हुआ और उठा क्र बहार जाने लगा तो उसके खड़े लुंड का उभर अक्षरा और सोमिया को भी दिख गया, दोनों ने शर्मा क्र सर निचे कर लिया,
देव के बहार जाते hi अमिता एक दम उठ कर बैठ गई,
अमिता- कामिनियों कुछ देर और नहीं लेती रह सकती थी क्या, कितना मजा आ रहा था,
अक्षरा और सोमिया का मुँह खुला रह गया,
सोमिया- क्या तू उसके हथिया का मजा ले रही थी, कामिनी कही की,
अमिता- यार शरीर में इतनी गर्मी हो रही ह की ऐसा लग रहा ह की कोई बस निचोड़ दे पुरे शरीर को,
अक्षरा- ये रात से hi हो रहा ह न, जब उन कमीनो ने हमे नशे की दवाई दे दी थी,
सोमिया- हो सकता ह उन्होंने कामुकता की दवाई भी दी हो, क्योकि मेरे शरीर में भी वैसा hi हो रहा ह,
अमिता- लेकिन मजा बहुत आ रहा ह,
तभी दसिया आ गई,
दासी- राजकुमारी हमारे लिए क्या आदेश ह, अब हमे क्या करना ह,
अमिता- क्या उन्हें कोई देखने गया की वो कैसे हैं,
दासी – नहीं राजकुमारी उनके पास कोई नहीं गया, न hi उन्हें खाना दिया गया था,
सोमिया- सही किया,
अक्षरा- देव को आने दो फिर बात करते हैं, लेकिन तुम तइयारी करके रखो हम जल्दी hi यहाँ से निकलनेगे,
कुछ देर बाद देव आया और उसने सबको समझा दिया की क्या कहना ह, फिर वो तीनो भाइयो के कमरे में गए जो अभी भी बंधे पड़े थे,
सबको अपने सामने देख क्र वो माफ़ी मांगने लगे, रोने का नाटक करने लगे,
अमिता- ये नाटक बंद करो, इस नाटक से तुम्हे माफ़ी नहीं मिलने वाली, मन तो करता ह यही तुम तीनो की जान ले लू, लेकिन क्या करे तुम लोग रिश्ता भूल सकते हो हम नहीं, हो तो हमारे भाई hi,
सोमिया- हम यहाँ से जा रहे हैं, तुम लोग अगर बेशरम हो तो महल में आ जाना,
दसियो ने तीनो को खोल दिया, और वह से निकल गए, तीनो भाइयो ने भी कपडे पहने और पीछे पीछे चल दिए,
वही दूसरी तरफ प्रताप सिंह में राजय में हाहाकार मचा हुआ था, प्रताप सिंह के दो बेटे और मर चुके थे, और ये बात पुरे राजय में फ़ैल गाइट hi की केवल एक आदमी ने इतने सैनिक और दो राजकुमारों को मर दिया तो सभी में दहशत फ़ैल गई,
प्रताप सिंह- नहीं नहीं नहीं ये नहीं हो सकता, मेरे शेर जैसे बेटो को कोई नहीं मर सकता, मेरे बेटे नहीं मर सकते, मेरे बेटे नहीं मर सकते,
प्रताप सिंह पागल सा हो गया था, वो बदहवास सा कुछ भी बड़बड़ाये जा रहा था, पुरे राजय में मातम था, प्रताप सिंह का तो सब कुछ उजाड़ चुक्का था, उसके 4 बेटे मरे जा चुके थे 1 बीटा जिंदगी और मोत की लड़ाई लड़ रहा था, और उसकी बेटी लापता थी, जिसका अब तक कोई पता नहीं लगा सका था, पूरी रात महल में मातम रहा, सुबह उसके बेटो का अंतिम संस्कार किया था, संभु जब से वापस आया था वोट क कमरे में छुपा बैठा था, वो दर से कैंप रहा था, उसने अपने सामने खुद यमराज को देख लिया था,
रेणुका जो अब तक अपने उस अनजान प्रेमी को धुंध रही थी, वो अब असली दुनिया में लोट आई थी, उसकी आँखों से खून बरस रहा था, अंतिम संस्कार के बाद पुरे राजय में शोक मनाया जा रहा था,
इधर देव तीनो बहेनो और दसियो को लेकर वापस महल में आ गया, सभी के कपड़ो पैर खून hi खून था, जब वो राजधानी के दरवाजे पैर पहुंचे तो सेनिको ने दौड़ क्र दरवाजा खोला सबको खून में भीगा देख वह सभी चौंक गए थे, तभी एक सैनिक तुरंत महल की तरफ दौड़ पड़ा और उसने महल में खबर दी और बताया की राजकुमार देव और तीनो राजकुमारिया आ रहे हैं, उसने साडी बात बताई,
ये जानकारी सुनकर भवर सिंह काम्य सौमित्र और अमरावती राजगुरु सब उस तरफ दौड़ पड़े, जब सब उनके सामने पहचुहे तो उनका रूप देख क्र कैंप उठे,
भवर सिंह- मेरे बेटे कहा ह,
काम्य- मेरा बीटा कहा ह,
सौमित्र और अमरावती का भी यही सवाल था- मेरा बता कहा ह,
अपने माँ बाप के मुँह से ये सुनकर तीनो लड़को की आँखे भर आई, उन्हें अहसास हुआ की उनके माँ बाप के लिए उनकी क्या अहमियत ह,
देव- वो आ रहे हैं पीछे पीछे,
ये सुनकर सभी ने रहत की साँस ली,
तभी वह निहारिका और रीवा आ गयी,
निहारिका- ये सब क्या हुआ, तुम लोग ठीक हो न, बच्चियों तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न,
निहारिका के मुँह से अपनी फ़िक्र सुनकर तीनो लड़किया घोड़ो से उतर क्र निहारिका से लिपट गई,
तीनो एक साथ- maaaaaaaaaa
निहारिका ने भी उन्हें गले से लगा लिया, इससे काम्य अमरावती और सौमित्र जल भून गई,
राजगुरु- ये सब क्या हुआ ह राजकुमार, आप सब इस हालत में कैसे, किसी ने हुम्ला किया था क्या,
देव- जी है राजगुरु,
भवर सिंह- किसने किया हुम्ला किसकी हिम्मत हुई मेरे बच्चो की तरफ आँख उठाने की,
तभी पीछे से तीनो भाई भी आ गए, उनके आते hi उनकी माये दौड़ क्र उनसे लिपट गई,
काम्य- तू ठीक ह न बीटा, तुझे कुछ हुआ तो नहीं,
वही हाल सौमित्र और अमरावती का भी था,
भवर सिंह- किसने किया हुम्ला, किसकी हिम्मत हुई हमारे परिवार पैर हुम्ला करने की,
देव कुछ बोलने वाला था लेकिन उससे पहले सूरज ने डरते हुए बोल दिया- प्रताप सिंह के बेटो ने,
प्रताप सिंह का नाम सुनते hi सब चौंक गए,
भवर सिंह- उसकी इतनी हिम्मत,
अभिजीत- लेकिन हमने उन्हें हरा दिया,
सोमिया- किसने हराया,
सूरज- देव ने, देव ने हम सबको बचाया, और प्रताप सिंह के दो बेटो को मार दिया,
भवर सिंह मुझे साडी बात बताओ,
देव- पहले इन्हे आराम करने दो और खुद को साफ़ करने दो, इन्होने बहुत कुछ झेला ह, वह क्या हुआ मैं बता हु आप सबको,
भवर सिंह- राजगुरु सेना तैयार करो हम उस प्रताप सिंह पैर आक्रमण करेंगे,
कामय- लेकिन हमे तो वह जाना ह, वह जाना ज्यादा जरुरी ह,
भवर सिंह- ठीक ह ठीक ह, तुम सब जाओ कमरे में, आराम करो, हम आराम से बात करेनेगे, और देव तुम सभा में आओ,
सभा में सब बैठे हुए थे,
राज गुरु- अब बताओ राजकुमार क्या हुआ था,
देव- हमारे राजय में प्रताप सिंह के जासूस लगे हुए हैं, और वो इस महल के अंदर भी हैं,
भवर सिंह- ये क्या बोल रहे हो,
देव- राजकुमार और राजकुमारियों के यहाँ से निकलने की खबर प्रताप सिंह को थी, और राजकुमारों ने अपने घूमने की जगह भी बदल दी थी, उसकी जानकारी भी उन्हें थी, वो लोग उस पहाड़ो वाले महल में गए थे,
कमाया- लेकिन वह जाना तो मन ह
देव- ये बात आप उनसे पूछना वो वह क्यों गए, लेकिन प्रताप सिंह के बेटो ने हुम्ला कर दिया,
भवर सिंह- लेकिन तुम्हे कैसे पता चला,
देव- मैंने प्रताप सिंह की सेना पर नजर रखवाई हुई ह, जब उसकी सेना हमारे राजय की सीमा में घुसी तो मुझे शक हुआ इसलिए मैं वह पहुंच गया,
सौमित्र- ये तुम्हारा एक और अहसान हो गया हम पैर,
अमरावती- है देव तुमने दूसरी बार हमारे बेटो की जान बचाई ह,
देव- वह आपकी बेतिया भी थी महारानी, और वो दरिंदे उनके साथ दुराचार करने वाले थे,
भवर सिंह- तुमने सच में बहुत अच्छा काम किया, हम तुम्हे इनाम देना चाहते हैं,
देव- मैं इनाम के लिए काम नहीं करता,
इतना बोल क्र देव बहार निकल गया,
भवर सिंह- राजगुरु जल्दी जल्दी प्रताप सिंह के जासूसों की खबर निकालो,
काम्य - राजगुरु इस देव के भी जीतनेय जासूस हैं सबकी खबर निकालिये, ये जासूस रखने सिख गया ह, इसके पीछे भी जासूस लगाओ,
काम्य की ये बात अमरावती और सौमित्र को बुरी लगी, जो इंसान उनके बच्चो को बचा क्र लाया ह उसी के पीछे जासूस लगाए जा रहे थे,
देव सीधा निहारिका से मिलने चला गया था,
इधर कुछ hi देर में पुरे राजय में ये खबर आग की तरह फ़ैल गई की देव ने प्रताप सिंह के दो बेटो को और मार दिया, और उस इंसान तक खबर फ़ैल गई जिसे पता नहीं होना छाइये था, देव ने उस तरफ धयान hi नहीं दिया था, ये बात रेवती के कानो तक पहुंच गई थी, गाओं वाले आपस में चर्चा कर रहे थे की देव ने प्रताप सिंह के दो बेटो को और मार दिया,
रेवती ने जब ये सुना तो वो एक औरत के पास पहुंची,
रेवती- माँ जी ये किस प्रताप सिंह की बात हो रही ह,
औरत- बेटी तू नहीं जानती प्रताप सिंह को, हमारा पडोसी राजय का राजा प्रताप सिंह,
रेवती- उसके बेटो को किसने मार दिया,
औरत- उसके दो बेटो को तो कुछ समय पहले युद्ध में और दो को आज हमारे राजकुमार देव ने मर गिराया,
देव का नाम सुनकर रेवती का दिमाग सुन्न हो गया, और जब उसने सुना की देव ने उसके 4 भाई मार दिए तो वो और बोखला गई,
वो लड़खड़ाते पैरो से घर की तरफ चल दी, उसके पेअर कैंप रहे थे, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था उसके साथ क्या हुआ ह, उसने जो सुना ह वो सच ह या झूट, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, वो आँखों में आंसू लिए सुगंधा के सामने पहुंची, और सीधे उससे एक सवाल पूछ लिया,
रेवती- देव इस राजय का राजकुमार ह
रेवती के सवाल से सुगंधा सकपका गई,
सुगंधा- रेवती मेरी बात सुनो
रेवती- मैं जो पूछ रही हु उसका जवाब दो, क्या देव इस राजय का राजकुमार ह
सुगंधा ने सर झुका लिया और है में सर हिलाया,
रेवती- क्या उसने प्रताप सिंह के 4 बेटो को मार दिया ह
सुगंधा ने घबराते हुए रेवती को देखा, सुगंधा की आँखों में रेवती ने अपना जवाब पढ़ पढ़ लिया, रेवती के कदम पीछे हटने लगे, सुगंधा ने उसे रोकना चाहा लेकिन रेवती ने दौड़ लगा दी, वो रोटी जा रही थी और दौड़ती जा रही थी,
सुगंधा को कुछ समझ नहीं आया वो तुरंत अभेंद्र के पास पहुंची और उसे सब बताया, अभेंद्र तुरंत रेवती के पीछे दौड़ पड़ा, तब तक सुगंधा ने किसी के हाथ देव को खबर भिजवाई,
गाओं के बहार के जंगलो में रेवती भागी जा रही थी, उसे नहीं पता उसे कहा जाना था, वो कोई रास्ता जानती hi नहीं थी, और यही सबके लिए बड़ा दर tha,wo इस जगह से बिलकुल अनजान थी, वो तो अपने hi राजय से अनजान रही थी,
अभेंद्र ने उसे जंगल में पकड़ लिया, सुगंधा भी उसके पीछे दौड़ रही थी,
रेवती- छोड़ दो मुझे जाने दो मुझे,
अभेंद्र- माफ़ करना राजकुमारी मैं आपको नहीं जाने दे सकता, जब तक देव नहीं आ जाते मैं आपको कही नहीं जाने दे सकता,
रेवती- तुम सब मिले हुए हो, तुमने अपराध किया ह, मुझे फसा कर यहाँ ले आया वो देव, मेरे परिवार से मुझे अलग क्र दिया, और यहाँ कैद कर लिया, तुम्हारा राजकुमार अत्याचारी ह, दुराचारी ह, उसने मेरी माँ जैसी महारानी के साथ दुराचार किया ह, मेरे पिता उसे मोत की सजा देंगे,
तभी वह सुगंधा भी पहुंच गई,
सुगंधा- रेवती शांत हो जाओ पहले मेरी बात सुन लो,
रेवती- तुम एक लड़की होकर दूसरी लड़की को फसा रही थी, बहुत गिरी हुई लड़की हो तुम,
सुगंधा- मेरे बारे में तुहे जो समझना ह समझ सकती हो, लेकिन एक बार मेरी बात सुनलो,
रेवती- मुझे कोई बात नहीं सुन्नी, मुझे लगता ह तुम उसकी रखैल हो, इसलिए हमेशा उसके आगे पीछे रहती हो, और वो एक अय्याश राजकुमार, ची मैं उसे कैसे नहीं पहचान सकीय, मेरे पिता से युद्ध लड़ने की हिम्मत नहीं ह तो उनके परिवार की औरतो को अपनी हवस का शिकार बनाया उसने,
सुगंधा ने रेवती की गार्डन पकड़ ली,
सुगंधा- मुझे जो कहना ह कहो, मेरे बारे में जो सोचना ह सोचो, लेकिन ख़बरदार जो मेरे देव को कुछ कहा तो, तुम जानती hi क्या हो उसके बारे में, अगर उसकी ख़ुशी के लिए मुझे उसकी रखैल भी बनना पड़ा न तो मैं ख़ुशी से बन जाउंगी, तुम उसके बारे में अपने विचार बता रही हो लेकिन क्या तुम अपने परिवार के बारे में जानती हो उन्होंने क्या किया ह उसके साथ,
रेवती- मुझे कुछ नहीं सुन्ना
सुगंधा- सुन्ना पड़ेगा, सब सुनकर भी अगर तुम्हे यकीन नहीं होता तो तुम यहाँ से जा सकती हो, मैं बोल रही हु देव भी तुम्हे नहीं रोकेगा,
रेवती को एक अवसर दिखाई दिया तो वो शांत होकर कड़ी हो गई,
उसके बाद सुगंधा ने रेवती को देव के बारे में सब बता शुरू किया, कैसे बचपन से देव के साथ गलत व्यव्हार होता था, देव के साथ प्रतियोगिता में क्या हुआ, और कैसे प्रताप सिंह ने उसकी माँ के साथ दुराचार करने की कोशिश की और साजिश करके उन्हें मरवाने की कोशिश की, और कैसे प्रताप सिंह ने रेवती का सोडा कर दिया था, और कैसे हमारे राजय पैर हुम्ला किया, और देव बचने के लिए आया और उसके बेटो को मर दिया,
फिर अभेंद्र ने बताया की प्रताप सिंह के बेटो ने यहाँ की राजकुमारियों के साथ बलात्कार करने की कोशिश की इसलिए देव ने उन्हें मार दिया,
भवर सिंह और काम्य शक्ति के बारे में जान क्र hi पागल हुए जा रहे थे,
भवर सिंह- राजगुरु उस शक्ति की खोज कीजिये, जल्दी से जल्दी और अपने सबसे विश्वासपात्र लोग लगाइये, मुझेये शक्ति चाहिए, हो न हो ये वही शक्ति ह जिसके बारे में दादा जी
काम्य- महाराज हमे खुद सात्विक जी के साथ उस शक्ति को ढूँढना चाहिए,
राजगुरु- जैसा आप कहे महाराज, मैं तैयारी करता हु, आज का दिन तो निकल रहा ह, कल सुबह हम तलाश शुरू करेंगे,
ये सब शक्ति खोजने की बात कर रहे थे और सात्विक और भौमिक एक दूसरे को देख रहे थे क्योकि उन्हें पता था की यहाँ की शक्ति तो पहले hi देव के अंदर ह,
सात्विक- हमे अब आज्ञा दीजिये, मैं कुछ देर आराम करना चाहता हु बहुत लम्बा सफर तय करके आया हु,
सात्विक और भौमिक वह से निकल गए और अपने घर पहुंच गए,
पहले तो दोनों के परिवार बहुत खुश हुए, बड़े प्रेम से मिले, फिर दोनों भाई एक कमरे में बैठ गए,
भौमिक- ये सब क्या ह सात्विक तू उस शक्ति की खोज में क्यों निकला ह,
सात्विक- पहले तुम ये बताओ क्या तुम्हे पता था वो शक्ति देव के अंदर ह,
भौमिक- पहले नहीं पता था, लेकिन जब मैं साधना में गया और मेरे ज्ञान में वृद्धि हुई तब मुझे पता चला की ऐसी 3 शक्तिया हैं, और फिर अहसास हुआ की जिस रौशनी में हम गए थे वैसी hi रौशनी की बात तुमने देव को ढूढ़ते वक़्त कही थी, तो मुझे लगा कही देव भी ऐसी hi शक्ति के प्रभाव में तो नहीं आ गया, मैं महल में आया तो देव को देखा और भी इतनी ताकत के साथ, और उसने तुम्हारी छोड़ी हुई शक्ति को सेह लिया तो मुझे अहसास हुआ की उसी के अंदर वो शक्ति ह,
सात्विक- तो क्या देव के अंदर भी हमारे जैसा ज्ञान आया ह,
भौमिक- मुझे नहीं लगता, मेरे हिसाब से ये शक्ति अलग तरह से काम कर रही ह, हम दोनों के पास ज्ञान था तो उससे हमारा ज्ञान बहुत अधिक बढ़ गया ह और कुछ दिव्या शक्तिया आई हैं, मुझे लगता ह देव के पास ताकत आई ह,
सात्विक- सही कहा, क्या तुम जानते हो वो तीसरी शक्ति कहा ह,
भौमिक- नहीं अभी नहीं जनता,
सात्विक- हम दोनों भाई हैं, हमे एक दूसरे का साथ देना चाहिए, और देव तो तुम्हे गुरु मंटा ह वो तो हमारे साथ होगा hi, हम इस धरती के सबसे शक्तिशाली लोग होंगे, अगर हम साथ मिल जाये तो पूरी धरती पैर राज कर सकते हैं,
सात्विक की बातो में महेत्वकंषा दिखाई दे रही थी, भौमिक कुछ बोलने वाला था तभी राजगुरु भी वह आ गए और अपने भाइयो से लिपट गए,
राजगुरु- तुम दोनों के बिना हम कितने अकेले हो गए थे,
सात्विक- अब आप अकेले नहीं हैं, आपके सेराव शक्तिशाली भाई आपके पास हैं,
भौमिक- भैया ये भवर सिंह अपने दादा के बारे में क्या बोल रहा था, जिसे बताते हुए वो चुप हो गया,
राजगुरु- भवर सिंह के दादा बहुत शक्तिशाली और महँ राजा थे, बहुत hi दयावान और ज्ञानी थे, वो हमेशा एक बात बोलै करते थे की हमारा राजय यहाँ बसाया गया ह उसके पीछे बहुत बड़ा कारन ह, वो पूरी धरती के सभी राज्यों का इतहास लिखवाते थे और कहते थे दक्षिण और उत्तर दोनों पैर हमेशा नजर बना क्र रखना, उनके हिसाब से उनके पूर्वजो को भगवन के अवतार ने वह बसने को कहा था, महाभारत के युद्ध के बाद उन्हें यहाँ बसाया गया किसी चीज की रक्षा करने के लिए, भवर सिंह के दादा बोलते थे की हमारे वंश में एक योद्धा आएगा जो संसार का भला करेगा, जो अमरत्व को चखेगा, और उनका भरोसा था की वो भवर सिंह होगा, इसलिए भवर सिंह आज तक अमरत्व को धुंध रहा ह,
सात्विक और भौमिक समझ गए की भवर सिंह के दादा को पता था इस शक्ति के बारे में, हो सकता ह उन्हें जगह न पता हो, क्योकि वो आज तक किसी को नहीं पता,
सात्विक- मैं भवर सिंह को वो शक्ति दिला सकता हु लेकिन उसे वचन देना होगा शक्ति मिलने के बाद वो हमारा साथ देगा,
राजगुरु- वो शक्ति पाने के लिए कोई भी वचन दे देगा, कुछ भी कर जायेगा,
सात्विक मुस्कुरा दिया, लेकिन भौमिक के दिमाग में शंका उतपन्न हो गई, क्योकि सात्विक का व्यव्हार बदल चुक्का था,
रात हो चुकी थी, काम्य और भवर सिंह अपने कमरे में जश्न मन रहे थे, शराब पि रहे थे,
काम्य- आप कामयाब हो गए,
भवर सिंह- है एक बार वो शक्ति हमे मिल गई तो फिर राजवीर हमारे किसी काम का नहीं, वो दिन उसका आखरी दिन होगा, बहुत जिन्दा रख लिया उसे,
काम्य- क्या सच में मर डोज उसे,
भवर सिंह- तुम्हारे दिल में अभी भी उसके लिए कोई जगह ह क्या,
काम्य- नहीं वो ऐसी कोई बात नहीं ह,
भवर सिंह- उसे मरना hi होगा, बस एक वही ह जिसे सब कुछ पता ह, मुझे आज तक समझ नहीं आया की उसका परिवार इस सब में कैसे शामिल हो सकता ह,
काम्य- उसका परिवार हमेशा से हमारे परिवार का रक्षक रहा ह, अगर आप जल्दबाजी न करते तो वो भी हमारा रक्षक होता और उससे सब कुछ उगलवाया जा सकता था,
भवर सिंह- मैंने उसे इतना अच्छा अवसर दिया था, वो हमारे कितने करीब आ सकता था, लेकिन वो मन hi नहीं, लेकिन देखो फिर भी मुझे सब कुछ मिल गया, निहारिका भी मेरी हो गई और अब वो शक्ति भी मेरी हो जाएगी,
काम्य- उस शक्ति को मिलने के बाद मुझे मत भूल जाना,
भवर सिंह- ये कभी नहीं हो सकता,
ये दोनों अपनी बातो में लगे थे, वही भौमिक इतने समय बाद वापस आकर अपने परिवार के साथ बैठने की जगह अपने कमरे में कुछ खोज रहे थे, उन्होंने अपनी साडी किताबे फैलाई हुई थी, और खुद से hi बड़बड़ाये जा रहे थे,
भौमिक खुद से hi- मुझे इसका राज पता करना होगा, इन शक्तियों के बनने का कुछ तो कारन होगा, भगवान् ऐसे hi कुछ नहीं करते, कुछ तो कारन होगा, किसी ने कही तो जीकर किया होगा, कोई अब तक इस सबके बारे में क्यों नहीं जनता था, और महाराज सूर्यभान (भवर सिंह के दादा) को इस सब के बारे में कैसे पता, लगता ह भैया को और भी कुछ पता ह, और देव इस सब में कैसे शामिल, अगर वो शक्ति भवर सिंह को मिलनी थी तो देव को कैसे मिली, कुछ तो गड़बड़ ह, कुछ तो अधूरा ह, मुझे hi पता करना होगा, सात्विक के इरादे ठीक नहीं लग रहे, उससे पहले मुझे सब जानना होगा, भौमिक फिर से अपने काम में लग गए,
वही सूरज ज्वाला और अभिजीत बंधे हुए ठण्ड से ठिठुर रहे थे,
अभिजीत- कहा फास गए, मुझे तो चारो तरफ से अपनी मोत hi मोत दिखाई दे रही ह,
ज्वाला- तुम दोनों के चक्कर में मैं भी फास गया, वो देव हमे जिन्दा नहीं छोड़ेगा, अगर छोड़ दिया तो पिता जी मार देंगे,
सूरज- कुछ नहीं होगा, हम अभी मोत के मुँह से बहार आये हैं, अगर देव को हमे मरना होता तो कबका मर चुक्का होता, मैंने उसकी आँखों में कुछ अलग hi देखा था,
अभिजीत- लेकिन ये तीनो लड़किया तो घर जाकर सब बताएंगी, तब क्या होगा,
सूरज- हमारे पास एक hi तरीका ह, फ़िलहाल उनके पैरो में गिर क्र मांफी मांगनी होगी, और कुछ समय के लिए शांत रहना होगा, यहाँ की बात को भूलना होगा, जब तक सब शांत नहीं हो जाता,
ज्वाला- अगर उन्होंने माफ़ नहीं किया तो,
सूरज- माफ़ न भी करे बस घर जाकर न बताये तो भी हमारा काम बन जायेगा, जब सब शांत हो जायेगा उसके बाद हम सबको देव और इन तीनो के बारे में बता देंगे,
अभिजीत- अगर हम इनसे पहले hi बता दे की इन लड़कियों और देव के बिच कुछ गदद चल रही ह,
सूरज- अभी ये संभव नहीं ह, हमारे खिलाफ सबूत ज्यादा हैं, और हमसे सवाल होंगे की हम इन्हे यहाँ लेकर क्यों आये, और वो प्रताप सिंह के बेटे वो भी यहाँ आ गए थे, तो हमारे खिलाफ सबूत ज्यादा हैं, पहले सब शांत होने दो,
तीनो भाई अभी बी योजना बनाने में लगे थे, दूसरी तरफ तीनो भेने दुखी थी, सदमे की हालत में थी, दसिया खाना बना क्र ले आई थी लेकिन किसी का मन नहीं था खाने का,
तभी देव पूरा निरिक्षण करके वापस आ गया,
देव- तुम लोगो ने खाना नहीं खाया,
अमिता- हमे साँस लेने का भी मन नहीं कर रहा खाना कैसे खाया जायेगा,
देव- समय कभी किसी दर्द या तकलीफ के लिए नहीं रुकता, वो आगे बढ़ता रहता ह, ऐसे hi इंसान को बनाया गया ह, कोई दर्द या तकलीफ इंसान को नहीं रोक सकती, उसे आगे बढ़ना hi होता ह, आगे बढ़ने वालो के लिए उसकी तकलीफ hi उसकी ताकत बन जाती हैं, और बैठ क्र सोच क्र रोने वालो के लिए वही तकलीफ उनके पैरो की बेड़िया बन जाती ह,
सोमिया- तुमने और निहारिका माँ ने ये सब कैसे झेल लिया, तुम तो फिर भी मर्द हो लेकिन निहारिका माँ ने कैसे ये सब सहा होगा, उन्हें कितनी तकलीफ हुई होगी, आज हम इस बात समझ सकते हैं, हमारे सामने तो फिर भी अपने थे लेकिन उनके सामने तो पूरा राजय था,
देव- उसी तकलीफ ने उन्हें इतना मजबूत बना दिया की आज पूरा राजय भी उन्हें कमजोर नहीं कर सकता,
अक्षरा- तुम उनके साथ थे न इसलिए वो ये सब सेह गई,
देव- मैं तो तुम सबके साथ भी खड़ा हु, तो दिखाओ तुम ये सहने के लिए कितनी तैयार हो, क्या तुम इतनी कमजोर हो की ऐसे गिरे इंसानो की हरकतों से खुद को तकलीफ डौगी,
अक्षरा ने अपने आंसू पोछे,
अक्षरा- अगर तुम साथ हो तो फिर मुझे कोई दर्द दर्द नहीं दे सकता,
अमिता और सोमिया में भी जोश आ गया,
देव- तो आओ पहले खाना कहते हैं,
फिर सबने खाना खाया,
अमिता- अब उन तीनो का क्या करना ह,
देव- फिलहाल शांत रहना ह, उन्हें सही समय आने पैर सबक सिखाया जायेगा,
सोमिया- मेरा मन नहीं कर रहा उनकी शकल भी दुबारा देखु, उनके सामने जाने की हिम्मत तक नहीं होगी मेरी तो,
देव- ये झिझक उनके अंदर होनी चाहिए तुम्हारे नहीं, तुम बेझिझक उनके सामने जाना, ताकि वो शर्म से सर झुका ले,
अक्षरा- उन्हें सजा तो मिलनी चाहिए,
देव- सजा तो मैं उन्हें अब भी दे सकता हु, लेकिन फिर पूरा राजय मेरे और तुम्हारे खिलाफ खड़ा हो जायेगा, कोई इनकी गलती नहीं बताएगा, इनके किये की सजा सबके सामने दी जाएगी, और ऐसी सजा मिलेगी की इनके जैसा कोई भी इंसान ऐसी हरकत करने से पहले 100 बार सोचेगा, और सजा तो तुम सबने इन्हे दे hi दी ह,
देव की बात से तीनो शर्मा गई,
अक्षरा- वो सजा तो ये रोज भुगतेंगे, रोज देखेंगे,
देव बस मुस्कुरा दिया,
रात में चारो एक hi कमरे में एक hi बिस्टेर पैर लेट गए, और ऐसे hi सोचते सोचते सो गए, सुबह जब आँख खुली तो सब एक दूसरे से लिपटे हुए पड़े थे, अमिता देव से बिलकुल चिपक क्र लेती हुई थी, और सुबह के समय मर्द का लुंड पुरे सवाब पैर खड़ा होता ह, ये सभी जानते hi हैं, वैसे hi देव का लुंड खड़ा था और अमिता की गांड पैर पूरा दबाव बना रहा था, पीछे से अक्षरा की चूचिया देव की कमर से चिपकी हुई थी, और उसका पेअर देव के पेअर पैर रखा था, अक्षरा के पीछे सोमिया थी, सबसे पहले सोमिया की आँख खुली,
उसने अक्षरा की हालत देखि तो उसे जगाया, अक्षरा के जागते hi देव की आँख भी खुल गई, और आंख खुलते hi देव को अहसास हुआ की उसका लुंड अमिता की गांड में घुसा जार है ह, और उसका हाथ अमिता के चूचियों के बिलकुल निचे ह, वो थोड़ा सा पीछे हुआ और उठा क्र बहार जाने लगा तो उसके खड़े लुंड का उभर अक्षरा और सोमिया को भी दिख गया, दोनों ने शर्मा क्र सर निचे कर लिया,
देव के बहार जाते hi अमिता एक दम उठ कर बैठ गई,
अमिता- कामिनियों कुछ देर और नहीं लेती रह सकती थी क्या, कितना मजा आ रहा था,
अक्षरा और सोमिया का मुँह खुला रह गया,
सोमिया- क्या तू उसके हथिया का मजा ले रही थी, कामिनी कही की,
अमिता- यार शरीर में इतनी गर्मी हो रही ह की ऐसा लग रहा ह की कोई बस निचोड़ दे पुरे शरीर को,
अक्षरा- ये रात से hi हो रहा ह न, जब उन कमीनो ने हमे नशे की दवाई दे दी थी,
सोमिया- हो सकता ह उन्होंने कामुकता की दवाई भी दी हो, क्योकि मेरे शरीर में भी वैसा hi हो रहा ह,
अमिता- लेकिन मजा बहुत आ रहा ह,
तभी दसिया आ गई,
दासी- राजकुमारी हमारे लिए क्या आदेश ह, अब हमे क्या करना ह,
अमिता- क्या उन्हें कोई देखने गया की वो कैसे हैं,
दासी – नहीं राजकुमारी उनके पास कोई नहीं गया, न hi उन्हें खाना दिया गया था,
सोमिया- सही किया,
अक्षरा- देव को आने दो फिर बात करते हैं, लेकिन तुम तइयारी करके रखो हम जल्दी hi यहाँ से निकलनेगे,
कुछ देर बाद देव आया और उसने सबको समझा दिया की क्या कहना ह, फिर वो तीनो भाइयो के कमरे में गए जो अभी भी बंधे पड़े थे,
सबको अपने सामने देख क्र वो माफ़ी मांगने लगे, रोने का नाटक करने लगे,
अमिता- ये नाटक बंद करो, इस नाटक से तुम्हे माफ़ी नहीं मिलने वाली, मन तो करता ह यही तुम तीनो की जान ले लू, लेकिन क्या करे तुम लोग रिश्ता भूल सकते हो हम नहीं, हो तो हमारे भाई hi,
सोमिया- हम यहाँ से जा रहे हैं, तुम लोग अगर बेशरम हो तो महल में आ जाना,
दसियो ने तीनो को खोल दिया, और वह से निकल गए, तीनो भाइयो ने भी कपडे पहने और पीछे पीछे चल दिए,
वही दूसरी तरफ प्रताप सिंह में राजय में हाहाकार मचा हुआ था, प्रताप सिंह के दो बेटे और मर चुके थे, और ये बात पुरे राजय में फ़ैल गाइट hi की केवल एक आदमी ने इतने सैनिक और दो राजकुमारों को मर दिया तो सभी में दहशत फ़ैल गई,
प्रताप सिंह- नहीं नहीं नहीं ये नहीं हो सकता, मेरे शेर जैसे बेटो को कोई नहीं मर सकता, मेरे बेटे नहीं मर सकते, मेरे बेटे नहीं मर सकते,
प्रताप सिंह पागल सा हो गया था, वो बदहवास सा कुछ भी बड़बड़ाये जा रहा था, पुरे राजय में मातम था, प्रताप सिंह का तो सब कुछ उजाड़ चुक्का था, उसके 4 बेटे मरे जा चुके थे 1 बीटा जिंदगी और मोत की लड़ाई लड़ रहा था, और उसकी बेटी लापता थी, जिसका अब तक कोई पता नहीं लगा सका था, पूरी रात महल में मातम रहा, सुबह उसके बेटो का अंतिम संस्कार किया था, संभु जब से वापस आया था वोट क कमरे में छुपा बैठा था, वो दर से कैंप रहा था, उसने अपने सामने खुद यमराज को देख लिया था,
रेणुका जो अब तक अपने उस अनजान प्रेमी को धुंध रही थी, वो अब असली दुनिया में लोट आई थी, उसकी आँखों से खून बरस रहा था, अंतिम संस्कार के बाद पुरे राजय में शोक मनाया जा रहा था,
इधर देव तीनो बहेनो और दसियो को लेकर वापस महल में आ गया, सभी के कपड़ो पैर खून hi खून था, जब वो राजधानी के दरवाजे पैर पहुंचे तो सेनिको ने दौड़ क्र दरवाजा खोला सबको खून में भीगा देख वह सभी चौंक गए थे, तभी एक सैनिक तुरंत महल की तरफ दौड़ पड़ा और उसने महल में खबर दी और बताया की राजकुमार देव और तीनो राजकुमारिया आ रहे हैं, उसने साडी बात बताई,
ये जानकारी सुनकर भवर सिंह काम्य सौमित्र और अमरावती राजगुरु सब उस तरफ दौड़ पड़े, जब सब उनके सामने पहचुहे तो उनका रूप देख क्र कैंप उठे,
भवर सिंह- मेरे बेटे कहा ह,
काम्य- मेरा बीटा कहा ह,
सौमित्र और अमरावती का भी यही सवाल था- मेरा बता कहा ह,
अपने माँ बाप के मुँह से ये सुनकर तीनो लड़को की आँखे भर आई, उन्हें अहसास हुआ की उनके माँ बाप के लिए उनकी क्या अहमियत ह,
देव- वो आ रहे हैं पीछे पीछे,
ये सुनकर सभी ने रहत की साँस ली,
तभी वह निहारिका और रीवा आ गयी,
निहारिका- ये सब क्या हुआ, तुम लोग ठीक हो न, बच्चियों तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न,
निहारिका के मुँह से अपनी फ़िक्र सुनकर तीनो लड़किया घोड़ो से उतर क्र निहारिका से लिपट गई,
तीनो एक साथ- maaaaaaaaaa
निहारिका ने भी उन्हें गले से लगा लिया, इससे काम्य अमरावती और सौमित्र जल भून गई,
राजगुरु- ये सब क्या हुआ ह राजकुमार, आप सब इस हालत में कैसे, किसी ने हुम्ला किया था क्या,
देव- जी है राजगुरु,
भवर सिंह- किसने किया हुम्ला किसकी हिम्मत हुई मेरे बच्चो की तरफ आँख उठाने की,
तभी पीछे से तीनो भाई भी आ गए, उनके आते hi उनकी माये दौड़ क्र उनसे लिपट गई,
काम्य- तू ठीक ह न बीटा, तुझे कुछ हुआ तो नहीं,
वही हाल सौमित्र और अमरावती का भी था,
भवर सिंह- किसने किया हुम्ला, किसकी हिम्मत हुई हमारे परिवार पैर हुम्ला करने की,
देव कुछ बोलने वाला था लेकिन उससे पहले सूरज ने डरते हुए बोल दिया- प्रताप सिंह के बेटो ने,
प्रताप सिंह का नाम सुनते hi सब चौंक गए,
भवर सिंह- उसकी इतनी हिम्मत,
अभिजीत- लेकिन हमने उन्हें हरा दिया,
सोमिया- किसने हराया,
सूरज- देव ने, देव ने हम सबको बचाया, और प्रताप सिंह के दो बेटो को मार दिया,
भवर सिंह मुझे साडी बात बताओ,
देव- पहले इन्हे आराम करने दो और खुद को साफ़ करने दो, इन्होने बहुत कुछ झेला ह, वह क्या हुआ मैं बता हु आप सबको,
भवर सिंह- राजगुरु सेना तैयार करो हम उस प्रताप सिंह पैर आक्रमण करेंगे,
कामय- लेकिन हमे तो वह जाना ह, वह जाना ज्यादा जरुरी ह,
भवर सिंह- ठीक ह ठीक ह, तुम सब जाओ कमरे में, आराम करो, हम आराम से बात करेनेगे, और देव तुम सभा में आओ,
सभा में सब बैठे हुए थे,
राज गुरु- अब बताओ राजकुमार क्या हुआ था,
देव- हमारे राजय में प्रताप सिंह के जासूस लगे हुए हैं, और वो इस महल के अंदर भी हैं,
भवर सिंह- ये क्या बोल रहे हो,
देव- राजकुमार और राजकुमारियों के यहाँ से निकलने की खबर प्रताप सिंह को थी, और राजकुमारों ने अपने घूमने की जगह भी बदल दी थी, उसकी जानकारी भी उन्हें थी, वो लोग उस पहाड़ो वाले महल में गए थे,
कमाया- लेकिन वह जाना तो मन ह
देव- ये बात आप उनसे पूछना वो वह क्यों गए, लेकिन प्रताप सिंह के बेटो ने हुम्ला कर दिया,
भवर सिंह- लेकिन तुम्हे कैसे पता चला,
देव- मैंने प्रताप सिंह की सेना पर नजर रखवाई हुई ह, जब उसकी सेना हमारे राजय की सीमा में घुसी तो मुझे शक हुआ इसलिए मैं वह पहुंच गया,
सौमित्र- ये तुम्हारा एक और अहसान हो गया हम पैर,
अमरावती- है देव तुमने दूसरी बार हमारे बेटो की जान बचाई ह,
देव- वह आपकी बेतिया भी थी महारानी, और वो दरिंदे उनके साथ दुराचार करने वाले थे,
भवर सिंह- तुमने सच में बहुत अच्छा काम किया, हम तुम्हे इनाम देना चाहते हैं,
देव- मैं इनाम के लिए काम नहीं करता,
इतना बोल क्र देव बहार निकल गया,
भवर सिंह- राजगुरु जल्दी जल्दी प्रताप सिंह के जासूसों की खबर निकालो,
काम्य - राजगुरु इस देव के भी जीतनेय जासूस हैं सबकी खबर निकालिये, ये जासूस रखने सिख गया ह, इसके पीछे भी जासूस लगाओ,
काम्य की ये बात अमरावती और सौमित्र को बुरी लगी, जो इंसान उनके बच्चो को बचा क्र लाया ह उसी के पीछे जासूस लगाए जा रहे थे,
देव सीधा निहारिका से मिलने चला गया था,
इधर कुछ hi देर में पुरे राजय में ये खबर आग की तरह फ़ैल गई की देव ने प्रताप सिंह के दो बेटो को और मार दिया, और उस इंसान तक खबर फ़ैल गई जिसे पता नहीं होना छाइये था, देव ने उस तरफ धयान hi नहीं दिया था, ये बात रेवती के कानो तक पहुंच गई थी, गाओं वाले आपस में चर्चा कर रहे थे की देव ने प्रताप सिंह के दो बेटो को और मार दिया,
रेवती ने जब ये सुना तो वो एक औरत के पास पहुंची,
रेवती- माँ जी ये किस प्रताप सिंह की बात हो रही ह,
औरत- बेटी तू नहीं जानती प्रताप सिंह को, हमारा पडोसी राजय का राजा प्रताप सिंह,
रेवती- उसके बेटो को किसने मार दिया,
औरत- उसके दो बेटो को तो कुछ समय पहले युद्ध में और दो को आज हमारे राजकुमार देव ने मर गिराया,
देव का नाम सुनकर रेवती का दिमाग सुन्न हो गया, और जब उसने सुना की देव ने उसके 4 भाई मार दिए तो वो और बोखला गई,
वो लड़खड़ाते पैरो से घर की तरफ चल दी, उसके पेअर कैंप रहे थे, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था उसके साथ क्या हुआ ह, उसने जो सुना ह वो सच ह या झूट, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, वो आँखों में आंसू लिए सुगंधा के सामने पहुंची, और सीधे उससे एक सवाल पूछ लिया,
रेवती- देव इस राजय का राजकुमार ह
रेवती के सवाल से सुगंधा सकपका गई,
सुगंधा- रेवती मेरी बात सुनो
रेवती- मैं जो पूछ रही हु उसका जवाब दो, क्या देव इस राजय का राजकुमार ह
सुगंधा ने सर झुका लिया और है में सर हिलाया,
रेवती- क्या उसने प्रताप सिंह के 4 बेटो को मार दिया ह
सुगंधा ने घबराते हुए रेवती को देखा, सुगंधा की आँखों में रेवती ने अपना जवाब पढ़ पढ़ लिया, रेवती के कदम पीछे हटने लगे, सुगंधा ने उसे रोकना चाहा लेकिन रेवती ने दौड़ लगा दी, वो रोटी जा रही थी और दौड़ती जा रही थी,
सुगंधा को कुछ समझ नहीं आया वो तुरंत अभेंद्र के पास पहुंची और उसे सब बताया, अभेंद्र तुरंत रेवती के पीछे दौड़ पड़ा, तब तक सुगंधा ने किसी के हाथ देव को खबर भिजवाई,
गाओं के बहार के जंगलो में रेवती भागी जा रही थी, उसे नहीं पता उसे कहा जाना था, वो कोई रास्ता जानती hi नहीं थी, और यही सबके लिए बड़ा दर tha,wo इस जगह से बिलकुल अनजान थी, वो तो अपने hi राजय से अनजान रही थी,
अभेंद्र ने उसे जंगल में पकड़ लिया, सुगंधा भी उसके पीछे दौड़ रही थी,
रेवती- छोड़ दो मुझे जाने दो मुझे,
अभेंद्र- माफ़ करना राजकुमारी मैं आपको नहीं जाने दे सकता, जब तक देव नहीं आ जाते मैं आपको कही नहीं जाने दे सकता,
रेवती- तुम सब मिले हुए हो, तुमने अपराध किया ह, मुझे फसा कर यहाँ ले आया वो देव, मेरे परिवार से मुझे अलग क्र दिया, और यहाँ कैद कर लिया, तुम्हारा राजकुमार अत्याचारी ह, दुराचारी ह, उसने मेरी माँ जैसी महारानी के साथ दुराचार किया ह, मेरे पिता उसे मोत की सजा देंगे,
तभी वह सुगंधा भी पहुंच गई,
सुगंधा- रेवती शांत हो जाओ पहले मेरी बात सुन लो,
रेवती- तुम एक लड़की होकर दूसरी लड़की को फसा रही थी, बहुत गिरी हुई लड़की हो तुम,
सुगंधा- मेरे बारे में तुहे जो समझना ह समझ सकती हो, लेकिन एक बार मेरी बात सुनलो,
रेवती- मुझे कोई बात नहीं सुन्नी, मुझे लगता ह तुम उसकी रखैल हो, इसलिए हमेशा उसके आगे पीछे रहती हो, और वो एक अय्याश राजकुमार, ची मैं उसे कैसे नहीं पहचान सकीय, मेरे पिता से युद्ध लड़ने की हिम्मत नहीं ह तो उनके परिवार की औरतो को अपनी हवस का शिकार बनाया उसने,
सुगंधा ने रेवती की गार्डन पकड़ ली,
सुगंधा- मुझे जो कहना ह कहो, मेरे बारे में जो सोचना ह सोचो, लेकिन ख़बरदार जो मेरे देव को कुछ कहा तो, तुम जानती hi क्या हो उसके बारे में, अगर उसकी ख़ुशी के लिए मुझे उसकी रखैल भी बनना पड़ा न तो मैं ख़ुशी से बन जाउंगी, तुम उसके बारे में अपने विचार बता रही हो लेकिन क्या तुम अपने परिवार के बारे में जानती हो उन्होंने क्या किया ह उसके साथ,
रेवती- मुझे कुछ नहीं सुन्ना
सुगंधा- सुन्ना पड़ेगा, सब सुनकर भी अगर तुम्हे यकीन नहीं होता तो तुम यहाँ से जा सकती हो, मैं बोल रही हु देव भी तुम्हे नहीं रोकेगा,
रेवती को एक अवसर दिखाई दिया तो वो शांत होकर कड़ी हो गई,
उसके बाद सुगंधा ने रेवती को देव के बारे में सब बता शुरू किया, कैसे बचपन से देव के साथ गलत व्यव्हार होता था, देव के साथ प्रतियोगिता में क्या हुआ, और कैसे प्रताप सिंह ने उसकी माँ के साथ दुराचार करने की कोशिश की और साजिश करके उन्हें मरवाने की कोशिश की, और कैसे प्रताप सिंह ने रेवती का सोडा कर दिया था, और कैसे हमारे राजय पैर हुम्ला किया, और देव बचने के लिए आया और उसके बेटो को मर दिया,
फिर अभेंद्र ने बताया की प्रताप सिंह के बेटो ने यहाँ की राजकुमारियों के साथ बलात्कार करने की कोशिश की इसलिए देव ने उन्हें मार दिया,

























