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- Dec 5, 2013
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सिमरन अंधी तूफ़ान की तरह गाड़ी दौड़ती हुई कोठी जा पोह्ची. जितना ग़ुस्सा उसे आज आ रहा था. इतना ग़ुस्सा पूरी ज़िन्दगी में नहीं आया था.
ऐसा मामलो में लड़कियां रोटी पीटती हाँ. उन्हें लगता है, कोई उनके जज़्बात के साथ खेल गया है. पर सिमरन न दुखी थी, न रोइ चिल्लाई थी.
सिमरन छिलाई थी तोह ग़ुस्से की शिद्दत से. राज की हिम्मत बी किसी हुई उसकी मांग भरने की. इस दुन्या में कोई ऐसा लड़का था hi नहीं जो सिमरन की नज़रों में उतर सकता. सिमरन खुद को लड़की समझते हुए भी लड़कियों वाली लाइफ नहीं जीती थी. लड़को से उलझन थी तोह बस लव, शोवा, शादी वादी के मामलो पर थी. सिमरन कभी कसी लड़के की ऑर्डर इस एंगल से अट्रैक्टिव नहीं हो सकती थी. और न hi उसकी सोच की धरा िर दिशा में मुद सकती थी.
सिमरन खून भरी मांग के साथ कोठी पर पोहंची तोह कोठी में मौजूद घर के सभी मेंबर्स अपने अपने कमरों दे दूर बंद करके खिड़की से सिमरन को देखने लगे.
सिमरन की खून भरी मांग देख के सब के सब खुश हो गए थे. सिमरन का चेहरा ग़ुस्सा से लाल था. आँखों से आग बरस रही थी. तंतानति हुई वो कोठी में दाखिल हुई और फिरसे दोनाली उठा ली. उसके अंदर कारतूस भर के घर में राखी चीज़ों पर फायर करने लगे.
सिमरन की माँ जो अपने कमरे से निकल के स्टैर्स के पीछे छुप गई थी. अपने मोह पे हाथ रखे सिमरन को देख रही थी.
साथ hi सिमरन की छोटी बहन सान्वी भी साथ थी.
सान्वी-- मम्मी दीदी कितनी प्यारी लग रही है न खून भरी मांग के साथ. सान्वी अपनी हंसी दबाते हुए धीरे से बोली. मम्मी ने सान्वी को देखा और अपने होंठ भींच के सान्वी को देखते हुए बोली.
मम्मी-- हाँ सान्वी बेटी, मेरी बेटी आज हमेशा से सुन्दर दिख रही है. शुक्र है भगवन का मेरी बेटी शादी वाली हो गई.
सान्वी-- हेहेहे दीदी की शादी कितने रोमांटिक अंदाज़ में हुई है न. संवी सिमरन की मांग को देखती हुई बोली. तो मम्मी कुछ बोलने वाली थी. एक कार्टून उसके करीब फायर हुआ तोह मम्मी और सान्वी दोनों चीख पड़ी.. दोनों उठ कड़ी हुई.
सिमरन ने एक पल हैरत से दोनों को देखा. दोनों को खुद की और आँखों में चमक और होंटो पे दबी दबी मुस्कान लिए देखा था दोनाली उनकी और सीढ़ी क्र दी.
ऊपर छुपे घर की दूसरे मेंबर्स भी सिमरन को देखने लगे. सिमरन की चची बोली. आप दीदी को ऊपर वाला hi बचा सकता था. चची की बेटी अन्य बोली. और सान्वी को भी.
सिमरन दानली दोनों की ऑर्डर सीढ़ी की तोह सान्वी तुरंत अपनी मम्मी के पीछे हो गई. वो दरी भी थी. पर है भी रही थी. मम्मी का भी कुछ ऐसा hi हाल था. मम्मी ने भी सान्वी को बाज़ो से पकड़ा और खनेच के अपने आगे कर दिए. मम्मी अपनी छोटी बेटी के पीछे छुप के सिमरन को देखने लगी. सान्वी चीख पड़ी थी.
और सिमरन दोनों की नौटंकी देख कर और भी ज़यादा ग़ुस्से में आने लगी. एक फायर दोनों माँ बेटी के पास किया तो दोनों चीखती हुई उछाल पड़ी.
मम्मी-- sss..simran बेटी ये हमारा घर है, कोई गन शूटिंग एरिया नहीं है.
सिमरन खुनी मांग, खुनी आँखों से... अछहहहहाआ मुझे तो पता hi नहीं था. एक तोह मैं इतने ग़ुस्से में हों और दूसरा आप सब मिलके मेरे ग़ुस्से को और भी बढ़ा रहे हाँ.
उस हरामी को तोह मैं नहीं छोडूंगी. पर आप भी आज मेरे हथु से नहीं बचने वाली. सिमरन ने फिरसे डबली सीढ़ी कर ली और दूसरी और कुछ फैसले पर फायर कर दिए.
मम्मी और सब जानती थी सिमरन का ग़ुस्सा कैसा है. सिमरन फिरसे कारतूस भरने लगी.
राकेश वर्मा भी पोहंच गए.
वर्मा-- wahh..wahh क्या बात है मेरी शेरनी बेटी घर को hi मैदान इ जुंग बनाये हुए है.
सिमरन ने पलट कर दाद्दु को देखा तो दानली को उनकी और कर दिए.
सिमरन ग़ुस्से से दाद्दु को देखते हुए.. दाद्दु उस हरामी की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती थी. ज़रूर अपने hi उसे ऐसा करने को कहा होगा. आज मई आपको भी नहीं छोडूंगी. सिमरन ने दाद्दु के पैरों में फायर कर दिए. दाद्दु तो चीखते हुए उछाल पड़े.
मम्मी-- न न सिमरन बेटी, पापा को गोली लग जाएगी.
सान्वी-- सिमरन को डरते हुए.. दीदी फिर आपको पुलिस पकड़ कर ले जायेगी.
ऊपर से चची बोली.. और पुलिस वळून की मार से तोह भगवन hi बचाये सबको.
अन्य बोली. हाय, दीदी की टंगे इतनी बहार निकल आएगी जब दीदी को फँसी लगेगी.
सान्वी अपनी कोहनी पर हाथ रखते हुए बोली. और दीदी की गर्दन भी इतनी लम्बी हो जायेगी.
सिमरन-- जब को जान से मार दूंगी मैं. किसी को भी ज़िंदा नहीं छोडूंगी. सब के सब मिले हुए हाँ. सब के सब मेरा मज़ाक बना रहे हाँ. एक तो मेरे साथ उस हरामी ने इतना गलत कर दिए और ऊपर से आप सब मेरे साथ ऐसा कर रहे हाँ.
दाद्दु-- ख़बरदार जो किसी ने बी मेरी पोती बारे ऐसा सब बोलै तो..
सान्वी.. तोह दाद्दु उसे घर से निकल देंगे.
मम्मी-- नहीं नहीं मैं किसी को घर से जाते हुए नहीं देख सकुंगी. मम्मी तस्वी बहाने लगी. सान्वी मम्मी के गले लग के मम्मी को दिलासा देने.
सिमरन सबकी नातनकी देख रही थी. उसका ग़ुस्सा और भी बढ़ रहा था. घर के मच मेंबर्स कॉलेज, ऊनि में तोह कुछ ऑफिस में थे. वर्ण खूब हंगामा बढ़ता.
सिमरन एक एक की और दानली सीढ़ी कर रही थी. कभी कभी किसी की और फायर भी कर जाती थी. दोनाली से निकली फायर साइड से गुज़र कर किसी चीज़ को चकना चूर कर जाता था. पर मजाल है जो किसी के चेहरे पर भी दर के भाव आये हों. सबके सब होंठ दबाये है रहे थे. मुस्करारा रहे थे.
चची और अन्य भी निचे आ गई. दादी पहले hi निचे थी. वो छुप कर सब देख रही थी. सब एक साथ सिमरन के सामने ाँ खड़े हुए. सब सिमरन के हथु में दोनाली देख कर थार थार कंपनी का नाटक भी कर रहे थे.
सिमरन सबको बरी बरी देख रही थी.
दाद्दु-- सिमरन बेटी राज बीटा तुम्हारे लिए परफेक्ट है.
सान्वी-- क्या जीजू का नाम राज है. ववव that's ग्रेट.. क्या कपल बना है. {RAJ-SIMRAN}
मम्मी-- लेजायेंगे लेजायेंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे.
अन्य ने सान्वी का हाथ पकड़ा और डांस करने लगी. सिमरन सब को खुनी आँखों से देखने लगी. इतने ग़ुस्से में थी वह, इतने फायर भी कर दिए थे उसने, मजाल है जो किसी को फ़र्क़ भी पड़ा हो.
दाद्दु भी सबको देख के मुस्कुरा रहे थे.
मम्मी-- पापा केसा है राज बीटा.
दाद्दु राज को पलकें बंद करके देखते हुए बोले.. ऐसा जो मैंने अंदाज़ा लगाया था, उससे भी कई गुना बढ़कर. समझ लो तोह राज hi अकेला लड़का है इस दुन्या में, जो हमारी सिमरन के लिए बना है. हे इस ा परफेक्ट गाए. दाद्दु फिर ठाणे वाली और रोड वाली बात डिटेल में बताने लगे. सब शांत होक सुनने लगे. जैसे hi दाद्दु चुप हुए तोह दानली गन के साथ hi मम्मी ने सिमरन को अपनी बहन में भर लिया और चेहरा चूमने लगी.
मम्मी-- मेरी बेटी कितनी किस्मत वाली है जो उसे राज मिल गया. ुम्मम्हा..
चची-- हाय अभी पिछले महीने hi तोह मैंने अपनी भतीजी की शादी करि है. 3 महीने लगा के शॉपिंग करि थी. मैं तोह थक गई थी. सोचा था कुछ महीने रेस्ट मिल जाएगी. पर अब तोह सिमरन बेटी के लिए फिरसे महीनो माल्स के चक्कर लगाने पड़ेंगे.
अन्य-- कभी ज्वेलरी शॉप पर तोह कभी गारमेंट्स शॉप पर.
सान्वी-- कभी ये मैच नहीं कर रहा तोह कभी वो मैच नहीं कर रहा. मम्मी मैं इस बार दीदी की शॉपिंग दुबई से करुँगी. सान्वी बड़े लड़ से बोली. सिमरन सबको देख रही थी. सबकी नौटंकी ख़तम होने में hi नहीं आ रही थी.
दाद्दु पल पल बदल रहे सिमरन के भाव देख रहे थे.
सिमरन ने एकदुम्म से दोनाली की नाल दाद्दु के माथे पर लगा दी. सब चुप कर गए.
सिमरन-- आप हाँ न एक सरे खेल को रचने वाले. आपके कहने पे hi उस हरामी ने मेरी मांग भरी है न.
दाद्दु थार थार कंपनी लगे.
दाद्दु-- nn..nahi नहीं सिमरन बेटी.. मैंने कुछ नहीं कहा था उससे. सब राज ने अपनी मर्ज़ी से किया है.
मम्मी-- सिमरन बेटी मुझे राज बहुत पसंद है.
सान्वी-- और मैं तोह आज hi जीजू से मिलूंगी.
anaya--me भी तुम्हारे साथ जाऊँगी सान्वी.
चची माथे पर हाथ मरते हुए... उफ्फ्फ मुझे दो महीने की रेस्ट नहीं मिल सकती क्या.
दादी जो बड़ी देर से सबका नाटक देख रही थी. राकेश वर्मा के रहते वह कैसे न उनके जैसी होती.
दादी-- कोई ज़रूरत नहीं शॉपिंग वाप्पिंग की. अरे अब तो ज़माना बदल गया है. बीच सड़क पर उसने मेरी फूल सी पोती की मांग भरी है. शादी में खर्चा करने की क्या ज़रूरत है. पुरे शहर को पता चल गया होगा. सिमरन अब राज की पैंटी है. मैं तोह कहती हों, राज को बुलवाओ और शाम तक सिमरन की रुखसती कार्डो.
हाहाहाहाहा सब दादी की बात पर हसने लगे. सिमरन ने बंदूक दाद्दु की और से हटा के दादी की और की तो दादी चीखती मम्मी के पीछे जा छुपी..
सिमरन-- हड्डियों में जाएं नहीं रही और मेरे लिए डायलाग बोलती हाँ आप.
दादी-- ss..simran ..bb.beti मैंने तो ऐसे hi कहा था. माफ़ करदे मुझे बेटी.
सिमरन ने एक बार फिरसे सब को देखा और दोनाली फ़ेंक दी. सिमरन एकदुम्म से पुरसुकून नज़र आने लगी.
सिमरन- आप सब बहुत खुश हाँ न मेरी भरी मांग को देख के. सिमरन का लहजा जान के दाद्दु समेत सबके कान खड़े हो गए.
सिमरन-- मम्मी आपको राज बहुत पसंद आया है न.
मम्मी भी सिमरन के बदले लहजे पर अंदर से हिल गई थी. वह कभी हाँ में तोह कभी न में सर हिलने लगी.
सिमरन-- क्यों चची आप अपनी भतीजी की शादी की शोप्प्पिंग करके थक चुकी हाँ और अब मेरी शादी के लिए शॉपिंग नहीं कर पाएंगी.
चची अपने माथे पर आये पसीने को साफ़ करने लगी. गन से भी जो नहीं डरे थे, अब सिमरन के बदले रूप को देख कर डरने लगे थे. सिमरन का ये ऐसा रूप था, जब भी सिमरन पर तारी हुआ करता था. सिमरन कुछ ऐसा कर जाती थी. जिसकी चोट बहुत हुआ करती थी. और सिरमन कुछ भी कर जाया करती थी.
सिमरन-- सान्वी मेरी और राज की जोड़ी परफेक्ट जोड़ी है न. सान्वी अपनी मम्मी के पीछे छुपते हुए अपने खुश्क होने रहे होंटो पर जीब फेरने लगी.
सिरमन-- क्यों अन्य मेरी शादी की बात पर तुम्हे इतनी ख़ुशी मिली है, तुम नाचने लगी हो. अन्य भी अपनी मम्मी के पीछे हो गई. सिमरन दाद्दु की और मुड़ी तोह दाद्दु आस पास देखने लगे. वह किसके पीछे जा छूपेण. कोई नहीं मिला तोह सिमरन को देखने लगे.
सिमरन-- हे इस ा परफेक्ट गाए दाद्दु.. इस पूरी दुन्या में राज के शिव कोई भी नहीं है मेरे लायक. सिमरन आगे बढ़ी और दाद्दु के गले में बहन दाल दी. सिमरन बड़े प्यार से दाद्दु को देखने लगी.
सिमरन-- सच कहा आपने दाद्दु, मुझे भी आज तक राज के जैसा कोई मर्द नहीं मिला. उस जैसी बात किसी में भी नहीं. इतनी डरे है उसमे, बीच सड़क पर मुझे किश करता है. उसकी बाइक को थोक दिया. फिर भी मुस्कुराता हुआ उठ खड़ा हुआ और अपने खून से मेरी मांग भर कर मुझे अपनी पत्नी बना दिए, और फिरसे एक लम्बी किश मुझे सबके सामने बीच सड़क पर करदी. ी एग्रीड दाद्दु! राज बहुत ख़ास है. और मुझे उसके जैसा फिर कभी नहीं मिलेगा. और फिर अब तोह मैं न चाहते हुए भी उसकी पत्नी बन चुकी हों तोह क्या आप मुझे मेरे पति के बारे में कुछ नहीं बताएँगे.
दाद्दु भी अपने चेहरे पर आये पसीने को साफ़ करने लगे. वह जो 2 दिन से खुश थे, पुरसुकून थे, अब एकदुम्म से चिंतित हो गए थे. सिमरन कभी कभी hi ऐसे रूप में आया करती थी. और जब भी आती थी. कुछ न कुछ ऐसा कर जाती थी. जो बहुत भयंकर हुआ करता था.
सब सिमरन को ख़ौफ़ज़दा नज़रों से देख रहे थे. मम्मी ना में सर हिला कर दाद्दु को राज के बारे में बताने से मन कर रही थी. ऐसा hi हाल बाकि सबका भी था.
सिमरन-- बोलिये न दाद्दु, मुझे मेरे पतिदेव के बारे में जानना है. कहाँ मिलेंगे वह मुझे. क्या एक पत्नी को इतना जानने का हक़ भी नहीं है.
सिमरन की आँखों में मिठास और नरमी थी. पर आँखों के पीछे ऐसा भयंकर तूफ़ान थे, जिसे देख कर दाद्दु समेत सब की गोगटे खड़े हो गए थे.
दाद्दु लम्बी लम्बी साँसे लेने लगे.
सिमरन-- चलें मैं फ्रेश होक आती हों, तब तक आप सोच लें. आती हों मैं और बताना तोह आपको पड़ेगा दाद्दु. आखिर आप एक पत्नी से उसके पति की कोई भी बात कैसे छुपा सकते हाँ. सिमरन दाद्दु के गालों पर किश करके वहां से चल दी.
सब धड़ाम से पास पड़े सुफोन पर गिर पड़े और अपने अपने चेहरे पर आये पसीने को तसली से साफ़ करने लगे.
सब एक दूसरे को देख रहे थे. वह सोच भी नहीं सकते थे. सिमरन को फिरसे ऐसे रूप में भी देखना पद सकता है. सब जितने खुश थे, अब उतने hi परेशान भी थे.
ऐसा मामलो में लड़कियां रोटी पीटती हाँ. उन्हें लगता है, कोई उनके जज़्बात के साथ खेल गया है. पर सिमरन न दुखी थी, न रोइ चिल्लाई थी.
सिमरन छिलाई थी तोह ग़ुस्से की शिद्दत से. राज की हिम्मत बी किसी हुई उसकी मांग भरने की. इस दुन्या में कोई ऐसा लड़का था hi नहीं जो सिमरन की नज़रों में उतर सकता. सिमरन खुद को लड़की समझते हुए भी लड़कियों वाली लाइफ नहीं जीती थी. लड़को से उलझन थी तोह बस लव, शोवा, शादी वादी के मामलो पर थी. सिमरन कभी कसी लड़के की ऑर्डर इस एंगल से अट्रैक्टिव नहीं हो सकती थी. और न hi उसकी सोच की धरा िर दिशा में मुद सकती थी.
सिमरन खून भरी मांग के साथ कोठी पर पोहंची तोह कोठी में मौजूद घर के सभी मेंबर्स अपने अपने कमरों दे दूर बंद करके खिड़की से सिमरन को देखने लगे.
सिमरन की खून भरी मांग देख के सब के सब खुश हो गए थे. सिमरन का चेहरा ग़ुस्सा से लाल था. आँखों से आग बरस रही थी. तंतानति हुई वो कोठी में दाखिल हुई और फिरसे दोनाली उठा ली. उसके अंदर कारतूस भर के घर में राखी चीज़ों पर फायर करने लगे.
सिमरन की माँ जो अपने कमरे से निकल के स्टैर्स के पीछे छुप गई थी. अपने मोह पे हाथ रखे सिमरन को देख रही थी.
साथ hi सिमरन की छोटी बहन सान्वी भी साथ थी.
सान्वी-- मम्मी दीदी कितनी प्यारी लग रही है न खून भरी मांग के साथ. सान्वी अपनी हंसी दबाते हुए धीरे से बोली. मम्मी ने सान्वी को देखा और अपने होंठ भींच के सान्वी को देखते हुए बोली.
मम्मी-- हाँ सान्वी बेटी, मेरी बेटी आज हमेशा से सुन्दर दिख रही है. शुक्र है भगवन का मेरी बेटी शादी वाली हो गई.
सान्वी-- हेहेहे दीदी की शादी कितने रोमांटिक अंदाज़ में हुई है न. संवी सिमरन की मांग को देखती हुई बोली. तो मम्मी कुछ बोलने वाली थी. एक कार्टून उसके करीब फायर हुआ तोह मम्मी और सान्वी दोनों चीख पड़ी.. दोनों उठ कड़ी हुई.
सिमरन ने एक पल हैरत से दोनों को देखा. दोनों को खुद की और आँखों में चमक और होंटो पे दबी दबी मुस्कान लिए देखा था दोनाली उनकी और सीढ़ी क्र दी.
ऊपर छुपे घर की दूसरे मेंबर्स भी सिमरन को देखने लगे. सिमरन की चची बोली. आप दीदी को ऊपर वाला hi बचा सकता था. चची की बेटी अन्य बोली. और सान्वी को भी.
सिमरन दानली दोनों की ऑर्डर सीढ़ी की तोह सान्वी तुरंत अपनी मम्मी के पीछे हो गई. वो दरी भी थी. पर है भी रही थी. मम्मी का भी कुछ ऐसा hi हाल था. मम्मी ने भी सान्वी को बाज़ो से पकड़ा और खनेच के अपने आगे कर दिए. मम्मी अपनी छोटी बेटी के पीछे छुप के सिमरन को देखने लगी. सान्वी चीख पड़ी थी.
और सिमरन दोनों की नौटंकी देख कर और भी ज़यादा ग़ुस्से में आने लगी. एक फायर दोनों माँ बेटी के पास किया तो दोनों चीखती हुई उछाल पड़ी.
मम्मी-- sss..simran बेटी ये हमारा घर है, कोई गन शूटिंग एरिया नहीं है.
सिमरन खुनी मांग, खुनी आँखों से... अछहहहहाआ मुझे तो पता hi नहीं था. एक तोह मैं इतने ग़ुस्से में हों और दूसरा आप सब मिलके मेरे ग़ुस्से को और भी बढ़ा रहे हाँ.
उस हरामी को तोह मैं नहीं छोडूंगी. पर आप भी आज मेरे हथु से नहीं बचने वाली. सिमरन ने फिरसे डबली सीढ़ी कर ली और दूसरी और कुछ फैसले पर फायर कर दिए.
मम्मी और सब जानती थी सिमरन का ग़ुस्सा कैसा है. सिमरन फिरसे कारतूस भरने लगी.
राकेश वर्मा भी पोहंच गए.
वर्मा-- wahh..wahh क्या बात है मेरी शेरनी बेटी घर को hi मैदान इ जुंग बनाये हुए है.
सिमरन ने पलट कर दाद्दु को देखा तो दानली को उनकी और कर दिए.
सिमरन ग़ुस्से से दाद्दु को देखते हुए.. दाद्दु उस हरामी की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती थी. ज़रूर अपने hi उसे ऐसा करने को कहा होगा. आज मई आपको भी नहीं छोडूंगी. सिमरन ने दाद्दु के पैरों में फायर कर दिए. दाद्दु तो चीखते हुए उछाल पड़े.
मम्मी-- न न सिमरन बेटी, पापा को गोली लग जाएगी.
सान्वी-- सिमरन को डरते हुए.. दीदी फिर आपको पुलिस पकड़ कर ले जायेगी.
ऊपर से चची बोली.. और पुलिस वळून की मार से तोह भगवन hi बचाये सबको.
अन्य बोली. हाय, दीदी की टंगे इतनी बहार निकल आएगी जब दीदी को फँसी लगेगी.
सान्वी अपनी कोहनी पर हाथ रखते हुए बोली. और दीदी की गर्दन भी इतनी लम्बी हो जायेगी.
सिमरन-- जब को जान से मार दूंगी मैं. किसी को भी ज़िंदा नहीं छोडूंगी. सब के सब मिले हुए हाँ. सब के सब मेरा मज़ाक बना रहे हाँ. एक तो मेरे साथ उस हरामी ने इतना गलत कर दिए और ऊपर से आप सब मेरे साथ ऐसा कर रहे हाँ.
दाद्दु-- ख़बरदार जो किसी ने बी मेरी पोती बारे ऐसा सब बोलै तो..
सान्वी.. तोह दाद्दु उसे घर से निकल देंगे.
मम्मी-- नहीं नहीं मैं किसी को घर से जाते हुए नहीं देख सकुंगी. मम्मी तस्वी बहाने लगी. सान्वी मम्मी के गले लग के मम्मी को दिलासा देने.
सिमरन सबकी नातनकी देख रही थी. उसका ग़ुस्सा और भी बढ़ रहा था. घर के मच मेंबर्स कॉलेज, ऊनि में तोह कुछ ऑफिस में थे. वर्ण खूब हंगामा बढ़ता.
सिमरन एक एक की और दानली सीढ़ी कर रही थी. कभी कभी किसी की और फायर भी कर जाती थी. दोनाली से निकली फायर साइड से गुज़र कर किसी चीज़ को चकना चूर कर जाता था. पर मजाल है जो किसी के चेहरे पर भी दर के भाव आये हों. सबके सब होंठ दबाये है रहे थे. मुस्करारा रहे थे.
चची और अन्य भी निचे आ गई. दादी पहले hi निचे थी. वो छुप कर सब देख रही थी. सब एक साथ सिमरन के सामने ाँ खड़े हुए. सब सिमरन के हथु में दोनाली देख कर थार थार कंपनी का नाटक भी कर रहे थे.
सिमरन सबको बरी बरी देख रही थी.
दाद्दु-- सिमरन बेटी राज बीटा तुम्हारे लिए परफेक्ट है.
सान्वी-- क्या जीजू का नाम राज है. ववव that's ग्रेट.. क्या कपल बना है. {RAJ-SIMRAN}
मम्मी-- लेजायेंगे लेजायेंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे.
अन्य ने सान्वी का हाथ पकड़ा और डांस करने लगी. सिमरन सब को खुनी आँखों से देखने लगी. इतने ग़ुस्से में थी वह, इतने फायर भी कर दिए थे उसने, मजाल है जो किसी को फ़र्क़ भी पड़ा हो.
दाद्दु भी सबको देख के मुस्कुरा रहे थे.
मम्मी-- पापा केसा है राज बीटा.
दाद्दु राज को पलकें बंद करके देखते हुए बोले.. ऐसा जो मैंने अंदाज़ा लगाया था, उससे भी कई गुना बढ़कर. समझ लो तोह राज hi अकेला लड़का है इस दुन्या में, जो हमारी सिमरन के लिए बना है. हे इस ा परफेक्ट गाए. दाद्दु फिर ठाणे वाली और रोड वाली बात डिटेल में बताने लगे. सब शांत होक सुनने लगे. जैसे hi दाद्दु चुप हुए तोह दानली गन के साथ hi मम्मी ने सिमरन को अपनी बहन में भर लिया और चेहरा चूमने लगी.
मम्मी-- मेरी बेटी कितनी किस्मत वाली है जो उसे राज मिल गया. ुम्मम्हा..
चची-- हाय अभी पिछले महीने hi तोह मैंने अपनी भतीजी की शादी करि है. 3 महीने लगा के शॉपिंग करि थी. मैं तोह थक गई थी. सोचा था कुछ महीने रेस्ट मिल जाएगी. पर अब तोह सिमरन बेटी के लिए फिरसे महीनो माल्स के चक्कर लगाने पड़ेंगे.
अन्य-- कभी ज्वेलरी शॉप पर तोह कभी गारमेंट्स शॉप पर.
सान्वी-- कभी ये मैच नहीं कर रहा तोह कभी वो मैच नहीं कर रहा. मम्मी मैं इस बार दीदी की शॉपिंग दुबई से करुँगी. सान्वी बड़े लड़ से बोली. सिमरन सबको देख रही थी. सबकी नौटंकी ख़तम होने में hi नहीं आ रही थी.
दाद्दु पल पल बदल रहे सिमरन के भाव देख रहे थे.
सिमरन ने एकदुम्म से दोनाली की नाल दाद्दु के माथे पर लगा दी. सब चुप कर गए.
सिमरन-- आप हाँ न एक सरे खेल को रचने वाले. आपके कहने पे hi उस हरामी ने मेरी मांग भरी है न.
दाद्दु थार थार कंपनी लगे.
दाद्दु-- nn..nahi नहीं सिमरन बेटी.. मैंने कुछ नहीं कहा था उससे. सब राज ने अपनी मर्ज़ी से किया है.
मम्मी-- सिमरन बेटी मुझे राज बहुत पसंद है.
सान्वी-- और मैं तोह आज hi जीजू से मिलूंगी.
anaya--me भी तुम्हारे साथ जाऊँगी सान्वी.
चची माथे पर हाथ मरते हुए... उफ्फ्फ मुझे दो महीने की रेस्ट नहीं मिल सकती क्या.
दादी जो बड़ी देर से सबका नाटक देख रही थी. राकेश वर्मा के रहते वह कैसे न उनके जैसी होती.
दादी-- कोई ज़रूरत नहीं शॉपिंग वाप्पिंग की. अरे अब तो ज़माना बदल गया है. बीच सड़क पर उसने मेरी फूल सी पोती की मांग भरी है. शादी में खर्चा करने की क्या ज़रूरत है. पुरे शहर को पता चल गया होगा. सिमरन अब राज की पैंटी है. मैं तोह कहती हों, राज को बुलवाओ और शाम तक सिमरन की रुखसती कार्डो.
हाहाहाहाहा सब दादी की बात पर हसने लगे. सिमरन ने बंदूक दाद्दु की और से हटा के दादी की और की तो दादी चीखती मम्मी के पीछे जा छुपी..
सिमरन-- हड्डियों में जाएं नहीं रही और मेरे लिए डायलाग बोलती हाँ आप.
दादी-- ss..simran ..bb.beti मैंने तो ऐसे hi कहा था. माफ़ करदे मुझे बेटी.
सिमरन ने एक बार फिरसे सब को देखा और दोनाली फ़ेंक दी. सिमरन एकदुम्म से पुरसुकून नज़र आने लगी.
सिमरन- आप सब बहुत खुश हाँ न मेरी भरी मांग को देख के. सिमरन का लहजा जान के दाद्दु समेत सबके कान खड़े हो गए.
सिमरन-- मम्मी आपको राज बहुत पसंद आया है न.
मम्मी भी सिमरन के बदले लहजे पर अंदर से हिल गई थी. वह कभी हाँ में तोह कभी न में सर हिलने लगी.
सिमरन-- क्यों चची आप अपनी भतीजी की शादी की शोप्प्पिंग करके थक चुकी हाँ और अब मेरी शादी के लिए शॉपिंग नहीं कर पाएंगी.
चची अपने माथे पर आये पसीने को साफ़ करने लगी. गन से भी जो नहीं डरे थे, अब सिमरन के बदले रूप को देख कर डरने लगे थे. सिमरन का ये ऐसा रूप था, जब भी सिमरन पर तारी हुआ करता था. सिमरन कुछ ऐसा कर जाती थी. जिसकी चोट बहुत हुआ करती थी. और सिरमन कुछ भी कर जाया करती थी.
सिमरन-- सान्वी मेरी और राज की जोड़ी परफेक्ट जोड़ी है न. सान्वी अपनी मम्मी के पीछे छुपते हुए अपने खुश्क होने रहे होंटो पर जीब फेरने लगी.
सिरमन-- क्यों अन्य मेरी शादी की बात पर तुम्हे इतनी ख़ुशी मिली है, तुम नाचने लगी हो. अन्य भी अपनी मम्मी के पीछे हो गई. सिमरन दाद्दु की और मुड़ी तोह दाद्दु आस पास देखने लगे. वह किसके पीछे जा छूपेण. कोई नहीं मिला तोह सिमरन को देखने लगे.
सिमरन-- हे इस ा परफेक्ट गाए दाद्दु.. इस पूरी दुन्या में राज के शिव कोई भी नहीं है मेरे लायक. सिमरन आगे बढ़ी और दाद्दु के गले में बहन दाल दी. सिमरन बड़े प्यार से दाद्दु को देखने लगी.
सिमरन-- सच कहा आपने दाद्दु, मुझे भी आज तक राज के जैसा कोई मर्द नहीं मिला. उस जैसी बात किसी में भी नहीं. इतनी डरे है उसमे, बीच सड़क पर मुझे किश करता है. उसकी बाइक को थोक दिया. फिर भी मुस्कुराता हुआ उठ खड़ा हुआ और अपने खून से मेरी मांग भर कर मुझे अपनी पत्नी बना दिए, और फिरसे एक लम्बी किश मुझे सबके सामने बीच सड़क पर करदी. ी एग्रीड दाद्दु! राज बहुत ख़ास है. और मुझे उसके जैसा फिर कभी नहीं मिलेगा. और फिर अब तोह मैं न चाहते हुए भी उसकी पत्नी बन चुकी हों तोह क्या आप मुझे मेरे पति के बारे में कुछ नहीं बताएँगे.
दाद्दु भी अपने चेहरे पर आये पसीने को साफ़ करने लगे. वह जो 2 दिन से खुश थे, पुरसुकून थे, अब एकदुम्म से चिंतित हो गए थे. सिमरन कभी कभी hi ऐसे रूप में आया करती थी. और जब भी आती थी. कुछ न कुछ ऐसा कर जाती थी. जो बहुत भयंकर हुआ करता था.
सब सिमरन को ख़ौफ़ज़दा नज़रों से देख रहे थे. मम्मी ना में सर हिला कर दाद्दु को राज के बारे में बताने से मन कर रही थी. ऐसा hi हाल बाकि सबका भी था.
सिमरन-- बोलिये न दाद्दु, मुझे मेरे पतिदेव के बारे में जानना है. कहाँ मिलेंगे वह मुझे. क्या एक पत्नी को इतना जानने का हक़ भी नहीं है.
सिमरन की आँखों में मिठास और नरमी थी. पर आँखों के पीछे ऐसा भयंकर तूफ़ान थे, जिसे देख कर दाद्दु समेत सब की गोगटे खड़े हो गए थे.
दाद्दु लम्बी लम्बी साँसे लेने लगे.
सिमरन-- चलें मैं फ्रेश होक आती हों, तब तक आप सोच लें. आती हों मैं और बताना तोह आपको पड़ेगा दाद्दु. आखिर आप एक पत्नी से उसके पति की कोई भी बात कैसे छुपा सकते हाँ. सिमरन दाद्दु के गालों पर किश करके वहां से चल दी.
सब धड़ाम से पास पड़े सुफोन पर गिर पड़े और अपने अपने चेहरे पर आये पसीने को तसली से साफ़ करने लगे.
सब एक दूसरे को देख रहे थे. वह सोच भी नहीं सकते थे. सिमरन को फिरसे ऐसे रूप में भी देखना पद सकता है. सब जितने खुश थे, अब उतने hi परेशान भी थे.