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सब अनीता को देख रहे थे और अनीता सर झुअए कश्मकश में थी. कैसे वह अपने कपडे उतर कर सिर्फ ब्रा और पंतय में हो सकती थी. ऐसा कभी उसकी लाइफ में पहले कभी कोई सन नहीं बना था. ऐसे रंग कहाँ उसकी ज़िन्दगी में पहला कभी आये थे. वह बहुत ज़यादा नर्वस होने लगी थी.
दीपिका ने सबको इशारा कर दिए. अनीता सबको अपनी और बढ़ते देख कर कुछ समझ नहीं पायी.
दीपिका-- हम जानती हाँ अनीता जी. ये सब आपकी लाइफ में नया है. पहले कभी आपकी ऐसी सिचुएशन का सामना नहीं करना पड़ा. पर समय हमेशा इंसान की लाइफ में बदलाव लता रहता है. जैसे राज के आ जाने से आपकी लाइफ में चेंज आये हाँ. उसी तरह से बाकी चंगेस को भी आपको एक्सेप्ट करना होगा. नहीं करेगी तोह आपके लिए मुश्किलिलत बढ़ने लगेंगी.
अनीता सब समझ रही थी. पर हिम्मत नहीं कर प् रही थी. सब एक गिर्द आ कड़ी हुई और अनीता को स्माइल से देखते हुए उसके कपडे पर हाथ रख दिए.
अनीता अब समझ गई थी उसके साथ क्या होने जा रहा है. उसके दिल की धड़कन बांधने लगी. सर्दी में भी पसीना आने लगा. बंद कमरे में सर्दी का एहसास नहीं था. पहले उसे पसीना नहीं आया था. पर अब जैसे hi उसे अंदाज़ा हुआ, उसके बदन पर मौजूद कपडे उतरे जाने वाले han.soch कर उसके मुसमो से पसीना उगलना शुरू कर दिए था.
उसके हथु पैरों की हथेलियों ने भी पसीना से गीला होना शुरू दिए था. पसीने के बहार निकलना तब और भी ज़यादा हो गया. जब उसकी कमीज़ उसके बदन से अलग हुई. फिर सबने मिलकर अनीता के बदन पर केवल ब्रा और पंतय hi छोड़ी. अनीता का सर बहुत ज़यादा झुक गया था. बहुत शर्म आ रही थी उसे. उसका बस नहीं चल रहा था. अपने कपडे उठा कर भाग जाए. वह दूसरी होकर अपने दिख रहे बदन को छुपाने की कोशिश करने लगी.
भावना-- अरिसुन्दर.. माँ भाभी बहुत सुंदर हाँ.
आराधना-- हाँ कितनी पायरी है मेरी बहु
नंदनी-- हेहेहे.. हे मेरी होने वाली सौतन जी. अनीता जी आपकी बहु नहीं हाँ. ये तोह आपकी होने वाली सौतन हाँ. हम सबकी होने वाली सौतन हाँ. यहाँ बहु कोई भी नहीं है. देखो मेरे पेट को देखो. मैं भी आपकी सौतन hi हो. देखो आपके होने वाले पति का बच्चा मेरे पेट में है.
सब हसने लगे
दीपिका-- सब साइड हो जाएँ. मुझे अनीता जी को देखने दें.
सब साइड हुए तोह दीपिका अनीता जी को देखने लगी. दीपिका अपनी माँ और बहनो के साथ बहुत खुली हुई थी. अब तोह लेस्बियन सेक्स भी शुरू हो चूका था. अनीता जी का मस्त बदन देख कर दीपिका के बदन में सिहरन दौड़ने लगी. वह उठी और गांड गांड मटकते हुए अनीता के पास जा पोहंची.
दीपिका किसी लॉफ लड़के के जैसे अनीता के चेहरे पर उँगलियाँ फेरने लगी. आँखों में खुमारी लाते हुए अपनी उँगलियाँ निचे लाने लगी-- अनीता जी आप बहुत सुंदर हाँ. बड़ी आग भी है आपमें. हमारे बदन में भी बहुत सैलून से आग भड़की हुई है. हमारे हरामी भाई ने हमें बहुत परेशान किया है. हम सब अपने अंदर बढकने वाली आग पर कभी भी काबू नहीं प् सकीय. अब वही आग आपके अंदर भी भड़काएंगी हम. आपको भी हमारे जैसे hi जलना होगा. लेकिन पहले आपके सभी गुप्त अंगों को देखेंगी हम. छुएं गई हम. राज से भी पहले हम आपका रास टास्ते करेंगी. देखेंगी आप के बदन के अंदर की आग ने आपके रास को पका कर कितना स्वादिष्ट बना दिए है. क्यों मैंने सही कहा न.
दीपिका की बात पर सब हाँ हाँ बोलने लगी.
दीपिका के हाथ को अपने चेहरे पर प् कर अनीता के बदन के मस्ती बढ़ने लगी थी.
दीपिका की उँगलियाँ फिसलती हुई निचे आने लगी. के हाथ से दीपिका ने अपनी ब्रा को को ऊपर करके अपने चुके नंगे किये. दूसरे हाथ को अनीता की ब्रा पर लाते हुए उसकी ब्रा भी ऊपर कर दी.
दीपिका के ऐसा करने पर सबने भी अपनी अपनी ब्रा ऊपर सरका दी. सबके चुके नंगे हो गए. अनीता एक लम्बी सांस लेकर रह गई. दीपिका अपने दोनों हथु से अपने चुके थाम कर अनीता के निप्पल्स के साथ अपने निप्पल्स जोड़ने लगी. अनीता की आँखों में देखा तोह वहां भी नशा छाने लगा था.
दीपिका अपने निप्पल्स अनीता के निप्पल्स के साथ रगड़ते हुए- पहले कभी ऐसा सन बना है आपकी लाइफ में अनीता जी
अनीता मदहोश होने लगी थी. सेक्स के नशे में नहीं आई थी वह. माहौल का नशा होने लगा था उन्हें.
अनीता-- haaann...nn..nahi..pehle कभी मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ
दीपिका के होंटो पर स्माइल आ गई तोह सब भी मुस्कुरा पड़ी.. अनीता हड़बड़ा गई थी
दीपिका--- किसके साथ बना था ऐसा सन
अनीता घबरा kar--kisi के साथ नहीं
दीपिका ने अपने चुके अनीता के चुके से अलग किये और अनीता की पंतय निचे करके उसकी छूट पर हाथ फेरते हुए-- बताओ न अनीता जी. आपकी छूट पर भी कभी किसी के हाथ चलें हाँ.
अनीता अपने टांगों को हिला कर दीपिका के हाथ से होने वाली बेचैनी से बचने के लिए
अनीता-- नहीं किसी ने नहीं छुआ मुझे वहां. अनीता नज़रें चुराते हुए बोली
"ये झूट बोल रही है"
"इससे सच बुलवाना होगा"
"ज़रूर ये अपनी बेहेन के साथ मस्ती करती रही होगी"
"हाँ हाँ वही अनीता जी के लिए स्पेशल है. ज़रूर अनीता जी ने दिशा के साथ मज़े किये होंगे"
"फिर तोह जान कर खूब मज़ा मिलेगा हम सबको"
सब बारी बारी कुछ न कुछ बोलने लगी. अनीता के दोनों गाल बेपनाह लाल होने लगे. जहाँ उसे ऐसा सब सुनकर अजीब लग रहा था. शर्म से वह लाल हो रही थी. वही वह खुश भी थी, किसी ने ये नहीं कहा था, अनीता ने किसी लड़के के साथ ऐसा सब किआ होगा. कितना सब अच्छा लगने लगा था उसे. उसका परिवार ज़िंदा होता तोह सबके साथ मिलकर वह कितना एन्जॉय करती.
अनीता-- हाँ मेरी दिशा जब नयी नयी जवान हुई थी तोह बड़ी चुलबुली हो गई थी वह. मुझसे लिपट कर सोती थी वह. मैंने उसकी ज़िन्दगी बनाने के लिए खुद को बदल लिया था. पर दिशा जब जवान हुई तोह मेरे साथ छेड़ छड़ करने लगी. मेरे अंदर की सोइ हुई लड़की भी जागने लगी. दिशा की छेड़ छड़ पर मैं भी कण्ट्रोल से बहार होती चली गई.
दीपिका अनीता की छूट की फंखो में एक ऊँगली रेगुलर चला रही थी. अनीता की छूट बहुत गीली होने लगी थी. उसे बहुत मज़ा आने लगा था. धीरे धीरे वह मस्त होती चली गई
अनीता-- शुरू शुरू में मैंने उसे बहुत रोका था. पर वह नहीं रुकी थी. एक दिशा hi बची थी मेरे परिवार में. मैं उसे हर्ट नहीं कर सकती थी. मेरे अंदर भी आग लगने लगी थी. फिर मैं भी उसका साथ देने लगी. जब तक उसकी शादी नहीं हुई तब तक हम दोनों बहने मिलकर मज़े कर लिया करती थी. फिर शादी के बाद मैंने दिशा को खुद से दूर कर दिए. मुझसे कण्ट्रोल छूटने लगा था. दिशा नहीं मान रही थी. पर मेरी ख़ुशी के लिए खुद को रोक गयी. अब भी जब कभी मैं खुद पर कण्ट्रोल खोने लगती हों तोह दिशा hi मेरे काम आती है. एक मर्द से मिलने वाला मज़ा दिशा से मुझे कभी नहीं आया. पर मेरे अंदर की बेचैनी इस हद तक ज़रूर काम हो जाया करती थी. मेरा खुद कर कण्ट्रोल बनने लगता था. इतने बरस मैंने बिना एक मर्द के बिता दिए थे. फिर कैसे मैं जल्दबाज़ी से काम लेकर अपनी लाइफ को बर्बाद करती. मेरी लाइफ के साथ जुडी हुई थी मेरी जान से भी पायरी बेहेन की लाइफ. मैं खुद को ऐसे hi किसी के हवाले नहीं करना चाहती थी. मुझे राज जैसे की hi छह थी. जो अब पूरी हो चुकी है
अनीता मदहोशी में बोलती चली गई. अनीता की बेचैनी को समझते हुए दीपिका ने अपनी ब्रा और पंतय उतर दी. उसे देख कर सबने भी ब्रा और पैंतीस उतर दी. सब कमरे में नंगी हो गई थी.
दीपिका झुकी और अनीता की छूट के साथ मोह जोड़ कर अपनी जीब अनीता की छूट में घुसा गयी.
अनीता-- उम्मम्मम आज फिरसे मेरा खुद पर कण्ट्रोल तूने लगा है. बहुत दिनों की आग मेरे अंदर है. आज दिशा भी नहीं है मेरे पास. प्ल्ज़ मुझे शांत कर दो.
आराधना ने अनीता के कंधे पर हाथ रख दिए. तोह अनीता नशीली आँखों से आराधना को देखने लगी. भावना अनीता के पीछे बैठी और अनीता के दोनों चुत्तड़ खोल कर अनीता की गांड चाटने लगी.
अनीता-- आह्ह्ह्ह ये पहले कभी नहीं किया दिशा ने मेरे साथ. उम्म्म्म कितना मज़े आने लगा है मुझे. आरती ने अनीता के चेहरे को थाम कर उसके होंटो को अपने होंटो में ले लिया. अनीता ने ऑंखें खोल कर आरती को देखा तोह बेसब्री के साथ वह भी आरती के होंठ चूसने लगी. अब उसे होश hi नहीं रहा था. वह पागल होने लगी थी.
नंदनी और अंजलि ने अनीता का एक एक चुका पकड़ लिया और मसलने लगी. अनीता हर साइड से घेरे में आ गई थी. मर्द के साथ जितना मज़ा तोह उसे नहीं मिल सकता था. पर सबके एक साथ उसके शरीर के साथ खेलने पर वह मदहोशी की आखरी सीमा पर पोहंचती जा रही थी. बहुत मज़ा आने लगा था उसे. एक हाथ छूट चाट रही दीपिका के सर पर था तोह दूसरा हाथ गांड चाट रही भावना के सर पर था.
चची मस्त मूड में आते हुए आराधना के चुके को पकड़ कर दबाने लगी. आराधना चची को देख कर हसने लगी. चची भी हसने लगी.
कुछ देर में कमरे में अनीता की सिसकियाँ उरूज पर थी. देर नहीं लगी और अनीता अपनी छूट के अंदर से भल भल पानी छोड़ने लगी. वह सुस्त पड़ने लगी तोह दीपिका उठ कड़ी हुई और सबको बोल दिए. अनीता को सोफे पर बिठा दिए जाए. खुद जा कर अपनी सीट पर जा बैठी.
दीपिका -- हमारे चेहते हरामी को पेश किया जाए. भावना गई और राज को ले आई.
राज एक अंडरवियर में था. वह अंदर आया तोह बस अनीता को hi देखता रह गया. बाकि सबको तोह वह नाना देख hi चूका था. अनीता को पहली बार देख रहा था. अनीता की सुंदरता देख कर वह मोहित होने लगा. दीपिका ने इशारा किया तोह राज के पीछे कड़ी भावना ने एक कसके चांटा राज के चुत्तड़ पर मार दिए.
राज ने मुद कर भावना को देखा-- साली दीदी मुझे मार रही है
दीपिका-- भावना राज हरामी को हमारी अदालत में गाली देने पर दो चांटे और मारो
भावना राज के चुत्तड़ को लाल करने लगी तोह राज ने उसका हाथ पकड़ लिया.
राज--- साली hi तोह है मेरा. गली कहाँ दी है मैंने.
आराधना राज के सामने, सबके सामने नंगी थी तोह शर्मा रही थी. बाकि सब राज की बात पर कहि कहि करने लगी.
दीपिका-- अदालत की तौहीन मत कर हरामी
राज-- तौहीन कहाँ की है मलिका अलिअ
दीपिका-- जज साहिबा बोल हरामी... मलिका अभी नहीं बानी हों में.
अनीता की साँसे बहाल हो चुकी थी. राज के आते hi उसके सर झुक चूका था. बोहत ज़यादा शर्म उसे भी आ रही थी. हो रहे ड्रामा का भी उसे बहुत मज़ा आ रहा था. पर शर्म ज़यादा थी. सब नंगी थी, तोह उसे कुछ हौसला मिल रहा था. वर्ण उसका सर उसके घुटनो में आए जाता.
राज-- चुके और छूट नज़र आये तोह जज कैसे कह सकता हों मैं आपको. राज दीपिका के चुके और छूट को देखता हुआ बोलै तो दीपिका ग़ुस्से में आ गई.
दीपिका-- गुस्ताख़ तू एक लेडी जज के अंगो को घूर रहा है. तुझे सजा मिलेगी. भावना उतर इस हरामी का कच्चा. कर दे इसे भी नंगा
राज-- मैं खुद hi उतर देता हों. किसी आउट से कहने की क्या ज़रूरत है. राज अपने hi रंग में था. सब दबी हंसी हसने लगी थी. अनीता के होंटो पर भी स्माइल आ गई थी.
राज खुद से अंडरवियर उतरने के लिए निचे झुका तोह उसके नंगे हो चुके चुत्तड़ो पर भावना ने दीपिका के इशारा पर कसके एक थप्पड़ मार दिए.
दीपिका-- फिरसे कोई और गुस्ताखी की तोह अगली बार तेरे लौड़े पर थप्पड़ पड़ेगा.
राज-- फिर तोह मेरा काम hi हो जायेगा. खड़े लुंड पर थप्पड़ पड़ने से मेरा लुंड कई दिनों तक सेवा करने से जाएगा. कितनी hi छूट मेरे लुंड के बिना पियासी रह जाएँगी.
दीपिका-- भावना, आरती, अंजलि आगे की कार्रवाई शुरू की जाए.
अंजलि-- जज साहिबा इस हरामी ने हमारे अंदर आज लगा कर हमारे फ्यूचर को बर्बाद कर दिए है. जवान होते hi इस हरामी की छेड़ छड़ पर मचल उठी. अब हम इस कदर इस हरामी की छेड़ छाड़ की आदि हो चुकी हाँ. जब तक ये हमें छेड़े न हमें चैन नहीं मिलता. और एक भर्तीअ नारी होने के नाते, एक प्रेम करने वाला दिल होने के नाते अब हम इस हरामी से दूर भी नहीं रह सकती. हमारे शरीर इसके स्पर्श के आदि हो गए हाँ. दूसरे इसके छू लेने के बाद अब हम भी अपने शरीरो को किसी और का हाथ लगते नहीं देख सकती. अब से ये हरामी hi हम सबकी ज़िन्दगी का मालिक है. हम सबका एक सम्मान पति है. पर हम इस हरामी की माँ बहने भी हाँ. खुल कर जी नहीं सकती, खुल कर इसके बच्चू को जनम भी नहीं दे सकती. न इस हरामी के प्यार के बिना हम रह सकती हाँ. और न hi बिना बच्चू को जनम दिए. इसलिए हमें हमारा फ्यूचर खतरे में दिखाई दे रहा है. कैसे हम बहने होने के नाते अपने hi भाई की पत्नी बन सकती हाँ. कैसे हम अपने hi भाई के बच्चू को जनम दे सकती हाँ. समाज हमें ऐसा करना नहीं देगा. जब भी कभी ऐसा हुआ, जब भी हमारी हक़ीक़त समाज के सामने आयी, हमारे पास मरने के शिव कोई और ऑप्शन नहीं होगा. हमें हमारे फ्यूचर को लेके बहुत चिंता है जज साहिबा.
सब अंजलि की बात सुनकर "बिलकुल.. हमारी भी यही समम्स्या है"
अनीता तोह सब को देखती रह गई. जहाँ उसे मज़ा आ रहा था. वहीँ ऐसी समस्या के सामने ा जाने से वह सोचने लगी थी. राज के पास इसका कोई सलूशन भी होगा या नहीं. वह राज का ओपिनियन जान्ने के लिए राज को देखने लगी. राज ने उसे देखा, उसके चुके, फिर पुरे शरीर को देख कर एक फ्लाइंग किश करदी. अनीता हड़बड़ा कर सर झुका गई.
दीपिका-- भावना
भावना ने फ़ौरन hi राज की गांड लाल कर दी.
राज-- कर लो, मेरा टाइम भी आएगा. तेरे भी चुत्तड़ न सुजा दिए तोह मैं भी हरामी नहीं.
भावना दर के दीपिका को देखने लगी तोह दीपिका के होंटो पर स्माइल आ गयी थी.
दीपिका-- बाद का मैं कुछ नहीं कर सकती. इसलिए अभी से अपना हाथ हल्का रख सकती हो.
भावना-- जज साहिबा ये मेरे साथ नाइंसाफी है
दीपिका हस्ते हुए-- अदालत को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.
दीपिका-- हाँ तोह राज हरामी, अंजलि की बात पर तुम कुछ कहना चाहोगे. बताओ, मैं भी जानना चाहती हों, तुम कैसे सबसे फ्यूचर को सिक्योर कर सकते हो.
राज हरामीपन से-- अभी मेरे दिमाग में कुछ नहीं आ रहा. इतने तंदूर मेरे चरों और जल रहे हाँ. मुझे पियास लगने लगी है. सबका एक साथ पानी पियूँगा तोह दिमाग काम भी करने लगेगा. अपने लुंड को मसलते हुए.. और फिर जब जब ये खड़ा होता है. दिमाग काम नहीं करता. पहले मेरी पियास का और मेरे लुंड का इंतेज़ाम करें. फिर hi जवाब दे सकूंगा.
दीपिका-- ठीक है, बोलो कैसे अपनी पियास बुझाना चाहोगे. कैसे अपने लुंड को ढीला करना चाहोगे.
राज-- सबकी छूट का गरमा गर्म पि कर hi मेरी पियास बुझेगी. सब मिलकर मेरे लुंड को चुम कर मेरे लुंड को ढीला कर सकती हाँ.
दीपिका-- नहीं सब नहीं कर सकती. अभी जिनके फ्यूचर का मसला है. वही ये काम कर सकती हाँ. आराधना, चची, नंदनी और अनीता जी के फ्यूचर का कोई मसला नहीं है. बाकि की तीनो तुम्हारा काम कर सकती हाँ
राज-- फिर तोह मेरा दिमाग सही से काम नहीं कर पायेगा
दीपिका-- तेरे दिमाग को मैं खुद से काम लायक बना लुंगी. तुम चिंता मत करो.
राज-- आप भी आ जाएँ, आपको भी तोह अपना फ्यूचर सिक्योर बनाना है न.
दीपिका-- तीनो का बन गया तोह मेरा फ्यूचर खुद से सिक्योर हो जायेगा. और मुझे अपने फ्यूचर की कोई चिंता भी नहीं है.
दीपिका राज को डेविल स्माइल से देखने लगी. अंजलि, आरती और भावना राज के सामने जा पोहंची.
राज ने अनीता को देखा, जो फिरसे बड़े शोक के साथ राज को सबको देख रही थी. नंगी सोफे पर बैठी थी. जैसे hi राज को खुद को देखते पाया तोह दोनों हथु से अपने चुके छुपा liye,dono टाँगें जोड़ कर अपनी छूट भी छुपा गई. उसका सर झुका हुआ था. पर उसके होंटो पर मंद मंद मुस्कान थी. बड़ी शर्मीली मुस्कान थी उसके होंटो पर. बहुत पायरी दिख रही थी अनीता.
राज के लुंड ने एक झटका मारा तोह आरती ने राज के लुंड को थाम कर दबा दिए.
आरती-- हरामी कुत्ते साले. अभी हमारा टाइम है तोह पूरा फोकस हम पर बनाओ.
दीपिका-- भावना राज हरामी कहीं और देखे तोह पीछे जा कर इसकी गांड चाट लेना.
राज सुनकर ज़ोर ज़ोर से हसने laga--hahahahahaha.. वाआआअह्ह्ह क्या बात है. शेर की गांड चाटने को बोल रही हो. उम्र भर मोह खोलने लायक नहीं रहेगी.
भावना-- ंन्न. नहीं नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करुँगी. भावना दर गई थी.
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सब अनीता को देख रहे थे और अनीता सर झुअए कश्मकश में थी. कैसे वह अपने कपडे उतर कर सिर्फ ब्रा और पंतय में हो सकती थी. ऐसा कभी उसकी लाइफ में पहले कभी कोई सन नहीं बना था. ऐसे रंग कहाँ उसकी ज़िन्दगी में पहला कभी आये थे. वह बहुत ज़यादा नर्वस होने लगी थी.
दीपिका ने सबको इशारा कर दिए. अनीता सबको अपनी और बढ़ते देख कर कुछ समझ नहीं पायी.
दीपिका-- हम जानती हाँ अनीता जी. ये सब आपकी लाइफ में नया है. पहले कभी आपकी ऐसी सिचुएशन का सामना नहीं करना पड़ा. पर समय हमेशा इंसान की लाइफ में बदलाव लता रहता है. जैसे राज के आ जाने से आपकी लाइफ में चेंज आये हाँ. उसी तरह से बाकी चंगेस को भी आपको एक्सेप्ट करना होगा. नहीं करेगी तोह आपके लिए मुश्किलिलत बढ़ने लगेंगी.
अनीता सब समझ रही थी. पर हिम्मत नहीं कर प् रही थी. सब एक गिर्द आ कड़ी हुई और अनीता को स्माइल से देखते हुए उसके कपडे पर हाथ रख दिए.
अनीता अब समझ गई थी उसके साथ क्या होने जा रहा है. उसके दिल की धड़कन बांधने लगी. सर्दी में भी पसीना आने लगा. बंद कमरे में सर्दी का एहसास नहीं था. पहले उसे पसीना नहीं आया था. पर अब जैसे hi उसे अंदाज़ा हुआ, उसके बदन पर मौजूद कपडे उतरे जाने वाले han.soch कर उसके मुसमो से पसीना उगलना शुरू कर दिए था.
उसके हथु पैरों की हथेलियों ने भी पसीना से गीला होना शुरू दिए था. पसीने के बहार निकलना तब और भी ज़यादा हो गया. जब उसकी कमीज़ उसके बदन से अलग हुई. फिर सबने मिलकर अनीता के बदन पर केवल ब्रा और पंतय hi छोड़ी. अनीता का सर बहुत ज़यादा झुक गया था. बहुत शर्म आ रही थी उसे. उसका बस नहीं चल रहा था. अपने कपडे उठा कर भाग जाए. वह दूसरी होकर अपने दिख रहे बदन को छुपाने की कोशिश करने लगी.
भावना-- अरिसुन्दर.. माँ भाभी बहुत सुंदर हाँ.
आराधना-- हाँ कितनी पायरी है मेरी बहु
नंदनी-- हेहेहे.. हे मेरी होने वाली सौतन जी. अनीता जी आपकी बहु नहीं हाँ. ये तोह आपकी होने वाली सौतन हाँ. हम सबकी होने वाली सौतन हाँ. यहाँ बहु कोई भी नहीं है. देखो मेरे पेट को देखो. मैं भी आपकी सौतन hi हो. देखो आपके होने वाले पति का बच्चा मेरे पेट में है.
सब हसने लगे
दीपिका-- सब साइड हो जाएँ. मुझे अनीता जी को देखने दें.
सब साइड हुए तोह दीपिका अनीता जी को देखने लगी. दीपिका अपनी माँ और बहनो के साथ बहुत खुली हुई थी. अब तोह लेस्बियन सेक्स भी शुरू हो चूका था. अनीता जी का मस्त बदन देख कर दीपिका के बदन में सिहरन दौड़ने लगी. वह उठी और गांड गांड मटकते हुए अनीता के पास जा पोहंची.
दीपिका किसी लॉफ लड़के के जैसे अनीता के चेहरे पर उँगलियाँ फेरने लगी. आँखों में खुमारी लाते हुए अपनी उँगलियाँ निचे लाने लगी-- अनीता जी आप बहुत सुंदर हाँ. बड़ी आग भी है आपमें. हमारे बदन में भी बहुत सैलून से आग भड़की हुई है. हमारे हरामी भाई ने हमें बहुत परेशान किया है. हम सब अपने अंदर बढकने वाली आग पर कभी भी काबू नहीं प् सकीय. अब वही आग आपके अंदर भी भड़काएंगी हम. आपको भी हमारे जैसे hi जलना होगा. लेकिन पहले आपके सभी गुप्त अंगों को देखेंगी हम. छुएं गई हम. राज से भी पहले हम आपका रास टास्ते करेंगी. देखेंगी आप के बदन के अंदर की आग ने आपके रास को पका कर कितना स्वादिष्ट बना दिए है. क्यों मैंने सही कहा न.
दीपिका की बात पर सब हाँ हाँ बोलने लगी.
दीपिका के हाथ को अपने चेहरे पर प् कर अनीता के बदन के मस्ती बढ़ने लगी थी.
दीपिका की उँगलियाँ फिसलती हुई निचे आने लगी. के हाथ से दीपिका ने अपनी ब्रा को को ऊपर करके अपने चुके नंगे किये. दूसरे हाथ को अनीता की ब्रा पर लाते हुए उसकी ब्रा भी ऊपर कर दी.
दीपिका के ऐसा करने पर सबने भी अपनी अपनी ब्रा ऊपर सरका दी. सबके चुके नंगे हो गए. अनीता एक लम्बी सांस लेकर रह गई. दीपिका अपने दोनों हथु से अपने चुके थाम कर अनीता के निप्पल्स के साथ अपने निप्पल्स जोड़ने लगी. अनीता की आँखों में देखा तोह वहां भी नशा छाने लगा था.
दीपिका अपने निप्पल्स अनीता के निप्पल्स के साथ रगड़ते हुए- पहले कभी ऐसा सन बना है आपकी लाइफ में अनीता जी
अनीता मदहोश होने लगी थी. सेक्स के नशे में नहीं आई थी वह. माहौल का नशा होने लगा था उन्हें.
अनीता-- haaann...nn..nahi..pehle कभी मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ
दीपिका के होंटो पर स्माइल आ गई तोह सब भी मुस्कुरा पड़ी.. अनीता हड़बड़ा गई थी
दीपिका--- किसके साथ बना था ऐसा सन
अनीता घबरा kar--kisi के साथ नहीं
दीपिका ने अपने चुके अनीता के चुके से अलग किये और अनीता की पंतय निचे करके उसकी छूट पर हाथ फेरते हुए-- बताओ न अनीता जी. आपकी छूट पर भी कभी किसी के हाथ चलें हाँ.
अनीता अपने टांगों को हिला कर दीपिका के हाथ से होने वाली बेचैनी से बचने के लिए
अनीता-- नहीं किसी ने नहीं छुआ मुझे वहां. अनीता नज़रें चुराते हुए बोली
"ये झूट बोल रही है"
"इससे सच बुलवाना होगा"
"ज़रूर ये अपनी बेहेन के साथ मस्ती करती रही होगी"
"हाँ हाँ वही अनीता जी के लिए स्पेशल है. ज़रूर अनीता जी ने दिशा के साथ मज़े किये होंगे"
"फिर तोह जान कर खूब मज़ा मिलेगा हम सबको"
सब बारी बारी कुछ न कुछ बोलने लगी. अनीता के दोनों गाल बेपनाह लाल होने लगे. जहाँ उसे ऐसा सब सुनकर अजीब लग रहा था. शर्म से वह लाल हो रही थी. वही वह खुश भी थी, किसी ने ये नहीं कहा था, अनीता ने किसी लड़के के साथ ऐसा सब किआ होगा. कितना सब अच्छा लगने लगा था उसे. उसका परिवार ज़िंदा होता तोह सबके साथ मिलकर वह कितना एन्जॉय करती.
अनीता-- हाँ मेरी दिशा जब नयी नयी जवान हुई थी तोह बड़ी चुलबुली हो गई थी वह. मुझसे लिपट कर सोती थी वह. मैंने उसकी ज़िन्दगी बनाने के लिए खुद को बदल लिया था. पर दिशा जब जवान हुई तोह मेरे साथ छेड़ छड़ करने लगी. मेरे अंदर की सोइ हुई लड़की भी जागने लगी. दिशा की छेड़ छड़ पर मैं भी कण्ट्रोल से बहार होती चली गई.
दीपिका अनीता की छूट की फंखो में एक ऊँगली रेगुलर चला रही थी. अनीता की छूट बहुत गीली होने लगी थी. उसे बहुत मज़ा आने लगा था. धीरे धीरे वह मस्त होती चली गई
अनीता-- शुरू शुरू में मैंने उसे बहुत रोका था. पर वह नहीं रुकी थी. एक दिशा hi बची थी मेरे परिवार में. मैं उसे हर्ट नहीं कर सकती थी. मेरे अंदर भी आग लगने लगी थी. फिर मैं भी उसका साथ देने लगी. जब तक उसकी शादी नहीं हुई तब तक हम दोनों बहने मिलकर मज़े कर लिया करती थी. फिर शादी के बाद मैंने दिशा को खुद से दूर कर दिए. मुझसे कण्ट्रोल छूटने लगा था. दिशा नहीं मान रही थी. पर मेरी ख़ुशी के लिए खुद को रोक गयी. अब भी जब कभी मैं खुद पर कण्ट्रोल खोने लगती हों तोह दिशा hi मेरे काम आती है. एक मर्द से मिलने वाला मज़ा दिशा से मुझे कभी नहीं आया. पर मेरे अंदर की बेचैनी इस हद तक ज़रूर काम हो जाया करती थी. मेरा खुद कर कण्ट्रोल बनने लगता था. इतने बरस मैंने बिना एक मर्द के बिता दिए थे. फिर कैसे मैं जल्दबाज़ी से काम लेकर अपनी लाइफ को बर्बाद करती. मेरी लाइफ के साथ जुडी हुई थी मेरी जान से भी पायरी बेहेन की लाइफ. मैं खुद को ऐसे hi किसी के हवाले नहीं करना चाहती थी. मुझे राज जैसे की hi छह थी. जो अब पूरी हो चुकी है
अनीता मदहोशी में बोलती चली गई. अनीता की बेचैनी को समझते हुए दीपिका ने अपनी ब्रा और पंतय उतर दी. उसे देख कर सबने भी ब्रा और पैंतीस उतर दी. सब कमरे में नंगी हो गई थी.
दीपिका झुकी और अनीता की छूट के साथ मोह जोड़ कर अपनी जीब अनीता की छूट में घुसा गयी.
अनीता-- उम्मम्मम आज फिरसे मेरा खुद पर कण्ट्रोल तूने लगा है. बहुत दिनों की आग मेरे अंदर है. आज दिशा भी नहीं है मेरे पास. प्ल्ज़ मुझे शांत कर दो.
आराधना ने अनीता के कंधे पर हाथ रख दिए. तोह अनीता नशीली आँखों से आराधना को देखने लगी. भावना अनीता के पीछे बैठी और अनीता के दोनों चुत्तड़ खोल कर अनीता की गांड चाटने लगी.
अनीता-- आह्ह्ह्ह ये पहले कभी नहीं किया दिशा ने मेरे साथ. उम्म्म्म कितना मज़े आने लगा है मुझे. आरती ने अनीता के चेहरे को थाम कर उसके होंटो को अपने होंटो में ले लिया. अनीता ने ऑंखें खोल कर आरती को देखा तोह बेसब्री के साथ वह भी आरती के होंठ चूसने लगी. अब उसे होश hi नहीं रहा था. वह पागल होने लगी थी.
नंदनी और अंजलि ने अनीता का एक एक चुका पकड़ लिया और मसलने लगी. अनीता हर साइड से घेरे में आ गई थी. मर्द के साथ जितना मज़ा तोह उसे नहीं मिल सकता था. पर सबके एक साथ उसके शरीर के साथ खेलने पर वह मदहोशी की आखरी सीमा पर पोहंचती जा रही थी. बहुत मज़ा आने लगा था उसे. एक हाथ छूट चाट रही दीपिका के सर पर था तोह दूसरा हाथ गांड चाट रही भावना के सर पर था.
चची मस्त मूड में आते हुए आराधना के चुके को पकड़ कर दबाने लगी. आराधना चची को देख कर हसने लगी. चची भी हसने लगी.
कुछ देर में कमरे में अनीता की सिसकियाँ उरूज पर थी. देर नहीं लगी और अनीता अपनी छूट के अंदर से भल भल पानी छोड़ने लगी. वह सुस्त पड़ने लगी तोह दीपिका उठ कड़ी हुई और सबको बोल दिए. अनीता को सोफे पर बिठा दिए जाए. खुद जा कर अपनी सीट पर जा बैठी.
दीपिका -- हमारे चेहते हरामी को पेश किया जाए. भावना गई और राज को ले आई.
राज एक अंडरवियर में था. वह अंदर आया तोह बस अनीता को hi देखता रह गया. बाकि सबको तोह वह नाना देख hi चूका था. अनीता को पहली बार देख रहा था. अनीता की सुंदरता देख कर वह मोहित होने लगा. दीपिका ने इशारा किया तोह राज के पीछे कड़ी भावना ने एक कसके चांटा राज के चुत्तड़ पर मार दिए.
राज ने मुद कर भावना को देखा-- साली दीदी मुझे मार रही है
दीपिका-- भावना राज हरामी को हमारी अदालत में गाली देने पर दो चांटे और मारो
भावना राज के चुत्तड़ को लाल करने लगी तोह राज ने उसका हाथ पकड़ लिया.
राज--- साली hi तोह है मेरा. गली कहाँ दी है मैंने.
आराधना राज के सामने, सबके सामने नंगी थी तोह शर्मा रही थी. बाकि सब राज की बात पर कहि कहि करने लगी.
दीपिका-- अदालत की तौहीन मत कर हरामी
राज-- तौहीन कहाँ की है मलिका अलिअ
दीपिका-- जज साहिबा बोल हरामी... मलिका अभी नहीं बानी हों में.
अनीता की साँसे बहाल हो चुकी थी. राज के आते hi उसके सर झुक चूका था. बोहत ज़यादा शर्म उसे भी आ रही थी. हो रहे ड्रामा का भी उसे बहुत मज़ा आ रहा था. पर शर्म ज़यादा थी. सब नंगी थी, तोह उसे कुछ हौसला मिल रहा था. वर्ण उसका सर उसके घुटनो में आए जाता.
राज-- चुके और छूट नज़र आये तोह जज कैसे कह सकता हों मैं आपको. राज दीपिका के चुके और छूट को देखता हुआ बोलै तो दीपिका ग़ुस्से में आ गई.
दीपिका-- गुस्ताख़ तू एक लेडी जज के अंगो को घूर रहा है. तुझे सजा मिलेगी. भावना उतर इस हरामी का कच्चा. कर दे इसे भी नंगा
राज-- मैं खुद hi उतर देता हों. किसी आउट से कहने की क्या ज़रूरत है. राज अपने hi रंग में था. सब दबी हंसी हसने लगी थी. अनीता के होंटो पर भी स्माइल आ गई थी.
राज खुद से अंडरवियर उतरने के लिए निचे झुका तोह उसके नंगे हो चुके चुत्तड़ो पर भावना ने दीपिका के इशारा पर कसके एक थप्पड़ मार दिए.
दीपिका-- फिरसे कोई और गुस्ताखी की तोह अगली बार तेरे लौड़े पर थप्पड़ पड़ेगा.
राज-- फिर तोह मेरा काम hi हो जायेगा. खड़े लुंड पर थप्पड़ पड़ने से मेरा लुंड कई दिनों तक सेवा करने से जाएगा. कितनी hi छूट मेरे लुंड के बिना पियासी रह जाएँगी.
दीपिका-- भावना, आरती, अंजलि आगे की कार्रवाई शुरू की जाए.
अंजलि-- जज साहिबा इस हरामी ने हमारे अंदर आज लगा कर हमारे फ्यूचर को बर्बाद कर दिए है. जवान होते hi इस हरामी की छेड़ छड़ पर मचल उठी. अब हम इस कदर इस हरामी की छेड़ छाड़ की आदि हो चुकी हाँ. जब तक ये हमें छेड़े न हमें चैन नहीं मिलता. और एक भर्तीअ नारी होने के नाते, एक प्रेम करने वाला दिल होने के नाते अब हम इस हरामी से दूर भी नहीं रह सकती. हमारे शरीर इसके स्पर्श के आदि हो गए हाँ. दूसरे इसके छू लेने के बाद अब हम भी अपने शरीरो को किसी और का हाथ लगते नहीं देख सकती. अब से ये हरामी hi हम सबकी ज़िन्दगी का मालिक है. हम सबका एक सम्मान पति है. पर हम इस हरामी की माँ बहने भी हाँ. खुल कर जी नहीं सकती, खुल कर इसके बच्चू को जनम भी नहीं दे सकती. न इस हरामी के प्यार के बिना हम रह सकती हाँ. और न hi बिना बच्चू को जनम दिए. इसलिए हमें हमारा फ्यूचर खतरे में दिखाई दे रहा है. कैसे हम बहने होने के नाते अपने hi भाई की पत्नी बन सकती हाँ. कैसे हम अपने hi भाई के बच्चू को जनम दे सकती हाँ. समाज हमें ऐसा करना नहीं देगा. जब भी कभी ऐसा हुआ, जब भी हमारी हक़ीक़त समाज के सामने आयी, हमारे पास मरने के शिव कोई और ऑप्शन नहीं होगा. हमें हमारे फ्यूचर को लेके बहुत चिंता है जज साहिबा.
सब अंजलि की बात सुनकर "बिलकुल.. हमारी भी यही समम्स्या है"
अनीता तोह सब को देखती रह गई. जहाँ उसे मज़ा आ रहा था. वहीँ ऐसी समस्या के सामने ा जाने से वह सोचने लगी थी. राज के पास इसका कोई सलूशन भी होगा या नहीं. वह राज का ओपिनियन जान्ने के लिए राज को देखने लगी. राज ने उसे देखा, उसके चुके, फिर पुरे शरीर को देख कर एक फ्लाइंग किश करदी. अनीता हड़बड़ा कर सर झुका गई.
दीपिका-- भावना
भावना ने फ़ौरन hi राज की गांड लाल कर दी.
राज-- कर लो, मेरा टाइम भी आएगा. तेरे भी चुत्तड़ न सुजा दिए तोह मैं भी हरामी नहीं.
भावना दर के दीपिका को देखने लगी तोह दीपिका के होंटो पर स्माइल आ गयी थी.
दीपिका-- बाद का मैं कुछ नहीं कर सकती. इसलिए अभी से अपना हाथ हल्का रख सकती हो.
भावना-- जज साहिबा ये मेरे साथ नाइंसाफी है
दीपिका हस्ते हुए-- अदालत को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.
दीपिका-- हाँ तोह राज हरामी, अंजलि की बात पर तुम कुछ कहना चाहोगे. बताओ, मैं भी जानना चाहती हों, तुम कैसे सबसे फ्यूचर को सिक्योर कर सकते हो.
राज हरामीपन से-- अभी मेरे दिमाग में कुछ नहीं आ रहा. इतने तंदूर मेरे चरों और जल रहे हाँ. मुझे पियास लगने लगी है. सबका एक साथ पानी पियूँगा तोह दिमाग काम भी करने लगेगा. अपने लुंड को मसलते हुए.. और फिर जब जब ये खड़ा होता है. दिमाग काम नहीं करता. पहले मेरी पियास का और मेरे लुंड का इंतेज़ाम करें. फिर hi जवाब दे सकूंगा.
दीपिका-- ठीक है, बोलो कैसे अपनी पियास बुझाना चाहोगे. कैसे अपने लुंड को ढीला करना चाहोगे.
राज-- सबकी छूट का गरमा गर्म पि कर hi मेरी पियास बुझेगी. सब मिलकर मेरे लुंड को चुम कर मेरे लुंड को ढीला कर सकती हाँ.
दीपिका-- नहीं सब नहीं कर सकती. अभी जिनके फ्यूचर का मसला है. वही ये काम कर सकती हाँ. आराधना, चची, नंदनी और अनीता जी के फ्यूचर का कोई मसला नहीं है. बाकि की तीनो तुम्हारा काम कर सकती हाँ
राज-- फिर तोह मेरा दिमाग सही से काम नहीं कर पायेगा
दीपिका-- तेरे दिमाग को मैं खुद से काम लायक बना लुंगी. तुम चिंता मत करो.
राज-- आप भी आ जाएँ, आपको भी तोह अपना फ्यूचर सिक्योर बनाना है न.
दीपिका-- तीनो का बन गया तोह मेरा फ्यूचर खुद से सिक्योर हो जायेगा. और मुझे अपने फ्यूचर की कोई चिंता भी नहीं है.
दीपिका राज को डेविल स्माइल से देखने लगी. अंजलि, आरती और भावना राज के सामने जा पोहंची.
राज ने अनीता को देखा, जो फिरसे बड़े शोक के साथ राज को सबको देख रही थी. नंगी सोफे पर बैठी थी. जैसे hi राज को खुद को देखते पाया तोह दोनों हथु से अपने चुके छुपा liye,dono टाँगें जोड़ कर अपनी छूट भी छुपा गई. उसका सर झुका हुआ था. पर उसके होंटो पर मंद मंद मुस्कान थी. बड़ी शर्मीली मुस्कान थी उसके होंटो पर. बहुत पायरी दिख रही थी अनीता.
राज के लुंड ने एक झटका मारा तोह आरती ने राज के लुंड को थाम कर दबा दिए.
आरती-- हरामी कुत्ते साले. अभी हमारा टाइम है तोह पूरा फोकस हम पर बनाओ.
दीपिका-- भावना राज हरामी कहीं और देखे तोह पीछे जा कर इसकी गांड चाट लेना.
राज सुनकर ज़ोर ज़ोर से हसने laga--hahahahahaha.. वाआआअह्ह्ह क्या बात है. शेर की गांड चाटने को बोल रही हो. उम्र भर मोह खोलने लायक नहीं रहेगी.
भावना-- ंन्न. नहीं नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करुँगी. भावना दर गई थी.