Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 14 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

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राज आगे बढ़ा और शिवानी के चेहरे के पास अपने फेस करते हुए फूंक मार दी.. शिवानी जैसे होश में आई.. उसे याद आया वह तोह ब्रा पंतय में बाथरूम में है. राज को अंडरवियर में देख कर वह और भी हैरान हुई. एक हाथ से अपने दोनों बूब्स तोह एक हाथ से अपनी छूट को छुपाने लगी.

राज-- क्या करती हो जाने मैं. छुपी हुई चीज को छुपाने की कोशिश बेकार है.

शिवानी ग़ुस्से से-- तुम मेरे कमरे में कैसे आये. दूर तोह लॉक था. मुझे किसी ने बताया क्यों नहीं तुम आये हुए हो..

राज-- उफ़ इतने फेयर य फेस को घुसे में बिगड़ क्यों रही हो. इतना ब्यूटीफुल तोह चूमने के लिए होता है.

राज शिवानी के गाल को चूमने के लिए आगे आगे बढ़ा तोह शिवानी दो कदम पीछे हैट गई. बाथ टब से टकरा कर गिरने को हुई तोह राज ने उसका हाथ पकड़ लिया.

राज-- वहहह क्या फ़िल्मी सन बना है. हीरोइन गिरी और हीरो ने थाम लिया.

शिवानी भी मैं में एक बार तोह राज के अंदाज़ पर है पड़ी. गिरती भी तोह पानी में hi जाती. कुछ ऐसे hi अंदाज़ में वह कड़ी थी.

फ़ौरन hi वह सोचने भी लगी. राज की और तोह वह भी बढ़ना चाहती थी. सिमरन के साथ उसकी डील जो हुई थी. शिवानी खुद पर काबू पाते हुए, अपने ग़ुस्से को ख़तम करके राज को नोर्मल्ली देखने लगी.

शिवानी-- किसी लड़की के बाथरूम में ऐसे अचानक से और बिना परमिशन के नहीं घुसना चाहिए. लड़की बिना कपड़ो के हो तोह बिलकुल भी नहीं घुसना चाहिए.. ये बाद मैनर्स होते हाँ राज. हर लड़की राह चलती नहीं हुआ करती.

राज-- तुम तोह बहुत खास हो. मैंने कब कहा तुम कोई राह चलती लड़की हो. पार्टी में hi तुम मेरे दिल में उतर गई थी..

शिवानी-- हाहाहा. कितनो को दिल में उतरोगे तुम. एक सिमरन काफी नहीं है क्या. और भी ज़रूर होंगी तुम्हारी लाइफ में. मुझे तुम सीधे नहीं लगते.

राज-- मैंने कब कहा मैं सीधा हों. मई तोह बहुत टेढ़ा hon.haan कई हाँ मेरी लाइफ में.. सिमरन स्पेशल है मेरे लिए. और तुम भी मेरे लिए बहुत स्पेसेल हो

शिवानी-- एक लड़की hi स्पेशल हुआ करती है. दूसरी लड़की भी दिल में उतरने लगे तोह उसे मोहब्बत नहीं कहते.. उसे हवस कहते हाँ.

राज-- ओह ऐसा क्या.. तोह चलो थोड़ा सा हवस का खेल भी खेल लेते हाँ.

शिवानी राज की पकड़ से निकलने लगी.. राज ने शिवानी को उठाया और बाथटब में लेकर बेथ गया..

शिवानी- राज अपनी हद पार मत करो. शिवानी का अंदाज़ सख्त नहीं था. वह भी अब इस हद तक आ जाना चाहती थी. बाद में भी तोह उसे ये काम करना hi था. राज खुद से आगे बढ़ रहा था तोह वह कैसे पीछे रह सकती थी. बेशरम नहीं थी. पर सिमरन को हाँ बोल कर बेशरम बन गई थी. कुछ पाने के लिए कुछ खोने जा रही थी. सिमरन की सदा के लिए फवौर पाने के लिए वह अपनी विर्जिनिटी राज को देने का बोल गई थी. अब पलट भी नहीं सकती थी.

दोनों हलके गर्म पानी में बैठे तोह गर्म पानी शरीर की गर्मी को और भी बढ़ने लगा.

राज का लुंड अंडरवियर में hi खड़ा हो चूका था. गरम पानी फिर गर्म शिवानी राज बहुत मस्त होने लगा. राज ने शिवानी की मर्ज़ी जान ली थी. राज शिवानी के होंटो के करीब अपने होंठ करने लगा तोह शिवानी के होंठ भड़फड़ा गए..

राज-- शिवानी तुम ख़ास हो. तुम अभी तक खुद को संभाले हुए थी. मैं तुम्हे किश करने जा रहा हों और तुमने ज़यादा नहीं रोका मुझे. इसका एक hi मतलब है तुम मेरे साथ सब कर जाना चाहती हो. कितनी अजीब बात है, एक पुलिस वाली होकर इतनी कमज़ोर.. नहीं शिवानी तुम इतनी कमज़ोर नहीं हो सकती. ज़रूर कोई तोह बात है.

शिवानी जिसकी ऑंखें बंद होने लगी थी. गरम पानी और राज के बदन की गर्मी ने सच में उसे बहकना शुरू कर दिए था. शिवानी नशे में होने लगी थी.

शिवानी-- नहीं राज, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं पुलिस वाली हों तोह क्या हुआ. एक लड़की भी तोह हों. तुम सिमरन के ho.mere नहीं हो सकते. पर हर लड़की के आइडियल ज़रूर हो तुम. सिमरन की लाइफ में ज़बरदस्ती एंट्री मार कर तुम ने कई लड़कियों के दिलों के तार हिला डेल हाँ. बहुत से दिल तुम्हारे लिए मचल चुके हाँ. उन दिलों में एक दिल मेरा भी है

राज-- सब मुझे ऐसे hi हरामी नहीं कहते. मैं बहुत दूर की सोच लेता हों. तुम सुनैना के घर क्यों गयी थी. वहां मेरे बारे में सब क्यों बोल के आई थी. क्यों मेरे बारे में सब जानना चाहती थी.. तुम सिमरन से मिल गई हो. कुछ तोह प्लान बनाया है सिमरन और तुमने मिलकर.. कुछ तोह ऐसा है जो मैं नहीं जनता. पर इतना ज़रूर जान गया था. तुम्हारे यौन खुद को मेरे सपुर्द कर देना, कुछः तोह बड़ा लोचा है.

शिवानी-- ऐसा कुछ नहीं है राज.. सब नार्मल है. मैं पुलिस वाली हों, मुझसे सिमरन मम को क्या काम हो सकता है. मुझसे भी बड़े बड़े पुलिस वाले और वालियां उसके कांटेक्ट में हाँ. सिमरन मम उनसे भी वह काम ले सकती है. जो वह मुझसे लेना चाहेंगी..

राज स्माइल करता हुआ-- ऐसा है तोह तुम जैसी लड़की क्यों इतनी जल्दी मेरी बहन में आ के पिघलने लगी.

shivani--ladki हों, तभी तोह पिघल रही हो. बरसों से जिसका था इंतज़ार वह तुम हो राज. अब मैं होने लगा है, जो दिल में उतर रहा है, उससे hi अपनी फैंटसीज पूरी कर. तुमसे शादी तोह हो नहीं सकती. कुछ अच्छे पल बिता कर कुछ अच्छी यादें hi बना लुंगी.

राज-- तोह सुनो फिर. मई वह हों, जिसके बारे में तुम सोच भी नहीं सकती. मैं वह जो सबके दिलों के दर्द को ख़तम करने आया है. मैं वोन हों, जो सबका अकेला पैन ख़तम करने आया है.

शिवानी हैरान होक.. मैं में खुश होक.. राज कुछ सीक्रेट बताने वाला है. यही तोह काम मिला था उसे सिमरन से-- क्या मतलब मैं कुछ समझी नहीं..

राज-- मैं तोह था तुम्हे बाद में batata..par तुम सिमरन के लिए खुद को मेरे हवाले कर रही हो. ऐसा मुझे लग रहा है. पहले से बता कर तुम्हारे अंदर के ऐसे विचारो को ख़तम करना है मुझे.

शिवानी और भी हैरान हुई. राज कितनी दूर की सोच लेता था. कितनी परख, कितनी समझ थी राज को.

शिवानी बेसाहिनी से राज के अगले शब्द सुन्ना चाहती थी

राज शिवानी के गाल को चूमता हुआ-- मैं तुम्हारी मौसी आराधना का बीटा राज हों.

शिवानी चीख पड़ी-- kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa..?? ुंबेलिएवेअबले.. tummmm..tummm मेरे भाई हो. मेरी मौसी के बेटे राज हो.. ओह्ह्ह्हह्ह गॉड.. मैं तोह सोच भी नहीं सकती थी. तुमसे मेरा इतना करीबी रिश्ता निकल सकता था. शिवानी सिमरन के लिए जो प्लान बनाये हुए थे. वह सारा भूल कर राज से लिपट गई..

शिवानी-- तुममम.. राज तुम मेरी मौसी के बेटे हो. फिर शिवानी दुखी हो गई. कैसी हाँ मेरी मौसी. मैंने बहुत सुना था माँ से उनके बारे में.. माँ की तरह से दोनों मौसियो ने भी बड़ी दुःख भरी ज़िन्दगी जी है राज

राज- अब कोई दुखी नहीं rahega.mai हों न सबको सुख देने वाला.

शिवानी-- हाँ. तुम मुझे बहुत खास लगे थे राज. तुम सबसे अलग थे. तुमने सिमरन जैसे लड़की को अपना बना लिया.. सिमरन जो एक शेरनी है. उसे नकेल दाल दी.. राज तुम कुछ भी कर सकते हो. शिवानी को निशा की याद आई.. पर राज तुमने आने में देर कर दी. निशा मेरी बेहेन वह.. उसकी शादी..

राज-- वह नहीं होगी. अब तोह बहुत कुछ होगा. तुम बस देखती राहु.. मैं क्या क्या करता हों.

शिवानी को कुछ और याद आया तोह थोड़े से ग़ुस्से के साथ राज के मोह पर हल्का सा थप्पड़ मार दिए-- शर्म नहीं आयी तुझे. अपनी बेहेन के साथ इतना आगे बढ़ते हुए. जब तुम सब जानते थे तोह मेरे बाथरूम में क्यों घुसे.. क्यों इतना आगे बढे..

राज-- हाहाहा.. सब कुछ अब भी करने का मैं है, इसलिए घुसा था बाथरूम में.. शिवानी की ब्रा को ऊपर करके उसके चुके को नंगा कर हथु में पकड़ liya.inka दूध पीने के लिए..

शिवानी अब शर्म गई थी.. पहले की बात और थी. अब वह जान गई थी राज उसका भाई है तोह कैसे वह अपने भाई के साथ इतना सब कर सकती थी. कैसे उसका भाई उसे नंगा करके उसके गुप्त अंगों को देख और छू सकता था..

शिवानी-- राज प्ल्ज़ अब कुछ मत करो मेरे साथ. वर्ण मैं बहुत गिलटी फील करुँगी.

राज शिवानी एक चुके प्रेस करता hua--aur जब तुम मुझे अर्चना मौसी को छोड़ते हुए देखोगे. ऋतू और निधि को भी मुझसे चुड़ते हुए देखोगी तोह कैसे रियेक्ट करोगी.

शिवानी हैरानगी se--kya मतलब माँ के साथ, ऋतू और निधि के साथ.. नहीं राज तुम ऐसा कुछ नहीं करोगे. ये सब गलत है, पाप है राज. एक भाई अपनी बहनो के साथ ऐसा सब कैसे कर सकता है.

राज-- ठीक वैसे hi, जैसे सुनैना के साथ, रुपाली के साथ, रुपाली की दादी के साथ, अपनी माँ, बहनो और चची के साथ किया है.

शिवानी पागलो जैसा मोह बना के राज को देखने लगी.

शिवानी-- rrrr..rajj..yyy..kkya बोल रहे हो तुम. tt..tum सबके साथ कर चुके हो.

राज-- खुद hi तोह कह रही थी. मैं सबसे अलग हों. तुम्हे जान कर एक और झटका लगेगा.. नानी को भी मैं छोड़ चूका हों, सिमरन की दादी और बेहेन इशिता भी लिस्ट में शामिल हाँ.

शिवानी की तोह सांस hi अटक गई थी. वह मोह फाड़े खुली आँखों से राज को देखने लगी..

शिवानी-- राज तुम कैसे लड़के हो.. कुछ देर हैरत में गम रहने के बाद शिवानी बोली तोह उसे अपनी hi आवाज़ अजनबी लगी.

रजा-- करना पड़ता है. किसी के साथ भी ज़बरदस्ती थोड़ी न करता हो. जैसे अब आपके साथ कर रहा हो. कितनी देर से आप मेरे हथु के मज़े ले रही हाँ.

शिवानी ने देखा तोह राज उसके नंगे बूब्स अब भी प्रेस कर रहा था. शिवानी को अपने पुरे शरीर में बढ़ रही मस्ती का भी खूब एहसास हो रहा था. लाइफ में पहली बार एक मर्द के हथु में उसके चुके आये थे. वह न चाहते हुए भी नशे में होने लगी थी. राज उसका भाई है, ये जान कर भी वह राज के हथु के स्पर्श पर पिघलने लगी थी.

उसका मैं तोह बहुत था राज के हथु को अपने चुचु पर से छटक दे. पर राज ने जो उसे बता दिए था. वह बड़ा हैरान कुन था. राज किन्तु के साथ सेक्स कर चूका था. इस बात ने भी शिवानी की हिम्मत ख़तम कर दी थी. वह भी राज की बहन में पानी बन जाना चाहती थी.

गर्म पानी में राज की गरमा गर्म आग़ोश प् कर वह पहले hi मचल उठी थी. रही सही हिम्मत भी टूटी तोह शिवानी अपनी ऑंखें बंद कर गयी.

राज के होंटो पर मुस्कान आ गई. राज शिवानी के होंटो पर प्रेस करता हुआ अपने होंठ शिवानी के होंटो से करीब करने लगा.
 
121

***

जैसे hi राज के तपते होंटो ने शिवानी के होंटो को छू, शिवानी सिहर उठी. उसके जिस्म दौड़ने लगा. उसकी लाइफ का पहला किश था. उसे लगा जैसे उसके होंटो पर किसी ने अंगारे रख दिए थे.

राज ने शिवानी के बूब्स छोड़े और चेहरा थाम लिया. शिवानी अध् खुली आँखों से राज को देखने लगी. उसकी अंदर की खुमार बढ़ने लगी थी. राज के किश ने उसे सब कुछ भूल जाने पर मजबूर कर दिए था. राज अपना असली खेल खेलने लगा. राज जनता था, शिवानी सिरमन के साथ मिल चुकी है. शिवानी को सिमरन के वश से बहार करने के लिए शिवानी को प्यार की हैवी दोसे देना ज़रूरी था.

राज स्मूथली शिवानी के होंटो का रास पीने लगा. शिवानी भी कुछ देर में राज के होंटो का रास काशीद करने लगी. शिवानी अपनी लाइफ के पहले अनुभव का मज़ा लेने लगी. उसे किश में इतना मज़ा आने लगा.. वह सब भूल कर बस राज के होंठ hi चुस्ती रही..

कुछ मिंटो की चली इस किश में राज तोह थम गया था, पर शिवानी नहीं थम पाई थी. शिवानी तब तक राज के होंटो को पीती रही, जब तक उसकी सांस न उखड गई.

सांस उखड़ी तोह वो अलग हुई. शिवानी की ऑंखें ऐसी हो गई थी. जैसे वह नागिन हो और राज उसके सामने बीन बजा रहा हो. राज ने शिवानी को अपने गले से लगा लिया. शिवानी ने भी अपनी दोनों बहन राज के गिर्द कस दीं. राज शिवानी की पीठ सहलाने लगा तोह शिवानी लम्बी लम्बी साँसे लेकर खुद को नार्मल करने लगी.

कुछ देर में ओह रिलैक्स हुई. पर उसके अंदर का खुमार काम नहीं हुई थी. उसी खुमार के कारण वह ज़यादा नहीं शरमाई..

शिकवणी-- raj..kyun राज तुमने मुझे इतना मज़ा क्यों दिए. क्यों मुझे अपना आदि बना रहे हो राज.. सोचा नहीं था, तुम इतने मीठे इतने खास होंगे.. राज, कहीं ऐसा न हो, फिर मई कभी किसी और की और देख भी न सकूँ.

राज-- ज़रूरत hi क्या देखने की

शिवानी-- ज़रूरत है राज. समाज में जीने के लिए भाई बेहेन के बीच के ऐसे रिश्ते को छुपा के रखना पड़ता है.

राज-- तोह हम भी छुपा लेंगे..

शिवानी-- नहीं राज. शायद मुझसे ऐसा न हो पाए. पहले मुझे सब शार्ट में बताओ. तुमने पहले जो भी कहा था..

शिवानी नशे में थी. उस नशे से बहार नहीं आना चाहती थी. पर सब कुछ एकदुम्म से भी नहीं कर गुज़रता चाहती थी. इतना होश था उसे..

राज उसे शार्ट में बताने लगा.. अपनी चुदाई की दास्ताँ को शार्ट डिटेल में शिवानी के सामने बयां करने लगा.. सुनकर शिवानी की हालत और भी ख़राब होने लगी थी.

शिवानी-- शादी.. वह भी मौसियो और बहनो से.. ओह्ह राज.. मैं पागल हो जाऊँगी. ऐसा भी होता है क्या.. जैसा तुम करते फिर रहे हो. एक भी बात खुली तोह तुम सोच भी नहीं सकते.. कितना बड़ा स्कैंडल बन सकता है.

राज-- बाद की बाद में देखि जाएगी. मुझे नहीं लगता बाद में कोई स्कैंडल भी बन सकता है.

शिवानी-- नहीं राज प्ल्ज़. तुम किसी और के साथ ऐसा मत करना.. बाकि सब ठीक है, पर यौन उम्र भर के लिए.. नहीं राज, सभी सीक्रेट्स हमेशा के लिए नहीं छुपे रह सकते.. तुम प्ल्ज़ फिरसे किसी और को लेके ऐसा मत सोचना.. जो कर चके हो, वो भी बहुत है.

राज-- मैं सब समझता हों..

राज ने कुछ देर पहले जो मौसी और सबको बोलै था. वह भी उसे बता दिए था.. सुनकर शिवानी बोली-- तुम कर जाओगे राज. तुम कुछ भी कर सकते हो.

राज-- तोह अभी का अधूरा काम भी पूरा कर सकता हों न मैं

शिवानी ाहस्ते हुए-- हेहेहे.. इस अधूरे काम को अभी अधूरा hi रहने do..ise बाद में पूरा करेंगे.. अभी तुम जाओ, मुझे नहाना है. दिइनेर भी करना है. सब वेट कर रहे होंगे..

राज-- मिलकर नहाते हाँ.. शिवानी शर्मा गई

शिवानी-- अब मुझसे ये सब नहीं होगा

राज-- करना तोह है hi. अब नहीं तोह फिर कभी.

शिवानी-- ठीक है, पर तुम अभी और आगे नहीं बढ़ोगे. मुझे आज की रात दो. खुद को मैं से रेडी करती हों. पहले की बात और थी..

दोनों फिर मिलकर नहाये.. थोड़ी सी मस्ती करि.. दोनों कपडे पहन कर एक साथ सबके बीच में पोहंचे तोह दोनों को हस्ता देख कर सब कुछ हैरान हुए..

फिर समझ भी गए.. शिवानी पर भी राज का जादू चल गया है.

शिवानी मंत्र में.. अब आप को अभी नहीं बता सकती, राज कोण है. बता दिए तोह सच में पागल हो जाओगे तुम सब भी...

डिनर सबने मज़े से किया.. राज का वहीँ रहने का मूड था.. मौसा घर पर नहीं थे तोह राज मज़े भी करना चाहता था और सबको अपने वषह में भी..

डिनर के बाद सब कुछ देर बातें करते रहे.. सब उठे और अपने अपने कमरे में जाने लगे.. राज ने बोल दिए था मौसी से कुछ बात करनी है.

मौसी ने हाँ बोल दिए था.. शिवानी ने भी राज को फ्री छोड़ दिए. अभी वह खुद भी फ्री रहना चाहती थी. राज के बदन की गर्माहट वह अभी तक अपने अंदर महसूस कर प् रही थी.. वह उसे पुरे मैं से फील करना चाहती थी. और फीलिंग्स अकेले में सही से आती.. वह अपने कमरे में पोहंची. बीएड पर जाने लगी तोह उसके पेअर खुद से hi पहले बाथरूम की और बढ़ने लगे.. शिवानी वहां पोहंची और राज को, खुद को बाथरूम में पहली वाली कंडित्यिओन में इमेजिन करने लगी.

शिवानी की छूट तब से hi नाम थी. अब सब फिरसे इमेजिन करने लगी तोह उसकी छूट ने और भी गीला होना शुरू कर दिए..

शिवानी हसने लगी-- कुछ hi देर में मुझे क्या हो गया है. एक पुलिस वाली होकर छूट का पानी नहीं संभल पा रही थी. शिवानी हस्ती हुई बीएड पर आई और लेट कर छत को तकते हुए राज को याद करने लगी..

उसके होंटो पर मुस्कान गहरी हुई तोह बदन के अंदर हीट भी बढ़ने लगी. कुछ देर वह ऐसे hi लेती रही.. शिवानी राज की यादों से बहार तब आई. जब उसके मोबाइल की रिंग बजने लगी.. शिवानी ने मोबाइल उठा कर देखा तोह सिमरन की कॉल थी..

शिवानी ने कॉल पिक करि तोह सिमरन की आवाज़ सुनाई दी-- राज तुम्हारे घर में है, तुम

ने मुझे बताया क्यों नहीं.

सिमरन कुछ ग़ुस्से में थी.

शिवानी ने एक लम्बी सांस ली और सिमरन से बोली-- सॉरी मम मैं आपसे हुई डील को कैंसिल करती हों.

सुनकर तोह सिमरन हैरान hi हो गई. उसका ग़ुस्सा भी बढ़ गया.

सिमरन-- तुम मुझे इंकार कर रही हो शिवानी.. जानती हो न मेरे बारे में..

शिवानी- हाँ जानती हों मम.. पर मुझे कोई परवा नहीं है. जो भी आप मेरे साथ करना चाहें, कर सकती है. राज मेरा भाई है तोह मई उसे चीट----

शिवानी को खुद पर बड़ा ग़ुस्सा आया. उसने आगे कुछ भी बोले बिना hi कॉल कट कर दी.. वह बताने जा रही थी सिरमन को राज उसकी मौसी का बीटा है. पर उसे याद आया था, राज ने उसे सिरमन को बोलने से मन किया था. घर में भी वह सबको खुद से बताएगा.. ऐसा राज ने बोलै था..

शिवानी एक तोह सिमरन से नर्वस थी, दूसरे वह जोश में सिमरन को वह इन्फो देने जा रही थी. जिस इन्फो के लिए उसने सिमरन के साथ हाथ मिलाया था..

शिवानी ने फ़ौरन hi राज के नंबर पर संस कर दिए.. सिमरन के साथ हुई बात भी बता दी..

राज ने संस पढ़ा तोह उसके होंटो पर मुस्कान आ गई.. राज ने रपल्य किया- वह सब समझ चुकी होगी. पर तुम चिंता न करो, मैं भी उसे देख लूंगा.. देखता हों वह आगे क्या करती है मेरे साथ. तुम कोई टेंशन मत लेना.. सिमरन को मैं हैंडल कर लूंगा..

राज का रिप्लाई देख कर शिवानी हैरान हुई. सिमरन और राज दोनों कितने तेज़ दिमाग के थे. सब फ़ौरन hi समझ जाते थे..

वहीँ सिमरन के भी कान खड़े हो गए थे. शिवानी ने कॉल कट करि तोह सिरमन को लगा बात कुछ तोह गड़बड़ है.. वह सोचने लगी.. बहुत सी इन्फो उसके पास थी राज को लेके..

राज शिवानी का भाई कैसे हो सकता है. कुछ देर लगी उसे.. पर वह सब समझ गयी..

जैसे hi सिमरन को सब समझ लगी.. वह कमीनगी से हसने लगी-- अब देखना राज, कैसे मैं तुझे तिगनी का नाच नाचती हों. देखना अब कैसा खेल मई तुम्हारे साथ खेलती हों. बच सकते हो तोह बच के रहना मेरे अगले वॉर से.. इस बार तुम भी कहोगे

ज़ोर का झटका हाय ज़ोरों से लगा.. हाहाहाहा
 
122

***

राज मौसी के साथ उसके कमरे में था. मौसी बीएड पर बैठी राज को मोबाइल में गम देख रही थी. राज शिवानी को संस कर रहा था..

संस के बाद राज ने मौसी को देखा..

अर्चना-- क्या बात है राज बीटा. कुछ कहना था क्या मुझसे.

राज मोबाइल वहीँ रखते हुए उठा और बीएड पर मौसी के बराबर जा बैठा. मौसी एक बार तोह कुछ अजीब सा फील कर गई. राज के चेहरे के भाव उसे कुछ बदले हुए से लगे.

राज बैठते hi मौसी का हाथ थाम गया. मौसी बहुत समय से पियहि थी. अंदर से बहुत जल रही थी.. राज मौसी के हथु की हीट महसूस करके मौसी को देख कर स्माइल करने लगा..

मौसी को अपने दिल की धड़कन बढ़ती हुई महसूस हुई. पहले जो वह राज को लेके इजी थी. अब अपने hi बैडरूम में अपने hi बीएड पर राज को अजीब से भाव के साथ देख कर अजीब से विचारों में उलझ गई थी.

राज भी मौसी के सामने खुलने की सोच चूका था..

राज ने मौसी के हाथ को मसला तोह मौसी ने झट से अपना हाथ राज के हाथ से छुड़ा लिया..

अर्कःनए-- राज बीटा, तुम बदले हुए क्यों दिख रहे हो.

राज एक स्माइल के साथ-- वह इस लिए क्यों मुझे आपके जिस्म की बढ़ी हुई हीट ने बदलने पर मजबूर कर दिए है. राज मौसी को अलग अंदाज़ से ट्रीट करते हुए बोलै तोह मौसी के चेहरे के रंग भी बदलने लगे..

मौसी के चेहरे पर ग़ुस्से भरे भाव आने लगे..

अर्चना-- क्या ऐसे hi तुम मेरे घर में सुख लेन का बोल रहे थे. कितनी गन्दी सोच है तुम्हारी. निकल जाओ मेरे कमरे से

राज मैं में हसने लगा तोह होंटो पर एक स्माइल लाते हुए मौसी के हाथ को फिर से पकड़ लिया..

मौसी ने अपना हाथ छुड़ाने की सोची तोह राज ने अपनी पकड़ सख्त क्र ली.. नहीं छोडूंगा जाने मैं. आप अब भी बहुत हसीं हाँ. कसम से जबसे आपको देखा है. तब से आप पर लट्टू हो गया हों. अब रहा नहीं गया तोह प्लान बना कर आपके बच्चू को भी अपने वाश में कर लिया.. हाहाहा अब आप कैसे बच पाएंगी मुझसे..

अर्चना तोह राज के रंग देख कर hi हैरान परेशान हो गई थी. जब आया था, मिला तोह ऐसा नहीं था राज. अब कैसा हो गया था. कैसे नए रंग में दिखने लगा था. वह समझ गई ये राज का असली चेहरे है.

अर्चना बेहद ग़ुस्से में.. मेरा हाथ छोडो और निकल जाओ मेरे घर से अभी के अभी..

राज ने एकदुम्म से अर्चना को बेडपर गिरा दिए.. खुद उसके ऊपर आकर उसका मोह बंद कर दिए.. अर्चना चीखने वाली थी. पर राज के उसके मोह पर हाथ रख देने से वह चीख नहीं सकीय.. वह और भी हैरानगी से राज को देखने लगी.

राज-- पहले अपने कमरे से तोह निकल कर दिखाएँ मेरी जान.. धीरे धीरे तोह मई आपके दिल में भी उतरने वाला हों. आप रोक hi नहीं पाएंगी मुझे अपने दिल में उतरने से.

अब अर्चना की हैरान होने की बरी थी. राज फिरसे एक नए रूप में सामने आ गया था. कितनी मिठास आ गई थी राज के लहजे में. कितना मैं को छू लेने वाला अंदाज़ था राज का. राज ने धीरे से अर्चना के मोह से अपना हाथ हटाया. राज के होंटो पर स्माइल थी. राज ने एक फूंक अर्चना के चेहरे पर मार दी.

अर्चना ऑंखें बंदकर गयी.

राज-- हाहाहा.. क्या हुआ अर्चना जी.. ऑंखें क्यों बंद कर ली आपने. मेरा अबका अंदाज़ पसंद आया क्या आपको.

अर्चना ने फ़ौरन ऑंखें खोली और राज को देखा. सर झटक कर वह अपने अंदर होने वाली हलचल पर काबू पाने लगी. राज एक मर्द भी था. तोह अर्चना को राज की मर्दानगी की झलक भी दिखाई पद गई थी. राज का गर्म शरीर भी अर्चना ने महसूस कर लिया था. अर्चना कैसे अपने अंदर शुरू होने वाली हलचल पर काबू प् सकती थी.

अर्चना धीमे से-- राज हटो मेरे ऊपर से.. ये सब सही नहीं है. मैं तुम्हारी माँ की उम्र की हों. मेरे साथ ऐसा मज़ाक में भी मत किया करो. पता है मैं कितना दर गई थी. मुझे लगा तुम सच में वह नहीं हो, जो पहले दिख रहे थे. पर अब तुम फिरसे पहले वाले दिखने लगे हो.

राज-- पहले जैसे तोह नहीं दिख रहा मैं. मेरा अब का अंदाज़ तो और भी बदला हुआ है. और मेरे इरादे भी पुरे बदले हुए हाँ अर्चना जी. मुझे लगा आपको भी प्यार की ज़रूरत है. आपकी आँखों में मुझे अधूरापन दिखाई पद गया है.

अर्चना-- "भी" से तुम्हारा क्या मतलब है. कोई और भी है क्या..

अर्चना सस्पेंस में आ गई थी

राज-- हाँ हाँ न आपकी दीदी सुनैना..

अर्चना हैरान हो गई

राज-- उनके चेहरे की चमक, उनके होंटो की मुस्कान नहीं देखि क्या आपने.

अर्चना को पार्टी वाली रत याद आई.. वह घोर करने लगी. उस रात सुनैना बरसों बाद

कितनी खुश कितनी फ्रेश दिख रही थी.

अर्चना-- मैं अब भी नहीं समझती.

राज-- सुनैना के घर अब महेश नहीं रहता. सुनैना अब महेश की पत्नी नहीं है. सुनैना अब मेरी पत्नी है.

अर्चना-- kyaaaaaaaaaa

राज-- हाँ मेरी जान. अब्ब से आप भी मेरी पत्नी बनोगी.. जैसे आराधना और उसकी चरों बेटियां भी मेरी पत्नी बानी हाँ..

आराधना के नाम पर अर्चना के कान खड़े हो गए.. वह मोह खोल कर राज को ताकने लगी.. राज सीधा होकर बेथ गया..

अर्चना उठ कर बैठी और राज को देखने लगी.. कितने झटके उसे आज मिल रहे थे.

archana--aa..aradhana...di...didi.. दीदी को तुम कैसे जानते हो.

राज एक स्माइल देख कर अर्चना के चेहरे को दोनों हथु से थाम कर-- मैं हों राज, आराधना का बीटा..

अर्चना के लिए बैठना मुश्किल हो गया था. राज ने उसे कास के थाम रखा था..

बड़े शॉक लग रहे थे अर्चना को. देर नहीं लगी और अर्चना की आँखों से गर्म पानी निकलने लगा.. राज उंगुठु से वो पानी साफ़ करने लगा. फिर अर्चना की आँखों को चुम कर अर्चना को गले से लगा लिया..

अर्चना राज से ऐसे मिली.. जैसे बरसों के बिछड़े मिलते हाँ. अर्चना रोने लगी. फिर उसका रोना पुरे ज़ोर से हो गया.. राज ने अर्चना को रोने से नहीं रोका. अब राज घर में भी सब को बता देना चाहता था. अब तोह सिमरन भी सब जान गई होगी. अब खेल का अंदाज़ बदल गया था.

वही हुआ जो राज ने सोचा था.. कमरे में सब आ गए.. सब अर्चना को राज से लिपट कर रट देख कर टेंशन में आ गए.. शिवानी समझ गयी. क्या बात हो सकती है..

शिवानी-- राज को तुम सब जानते हो क्या..

सब शिवानी को देखने लगे..

शिवानी नाम आँखों से.. राज आराधना मौसी का बीटा है.. वह यहाँ सबको एक करने आया है.

kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaa..??

सब सुनकर शॉकेड हो गए थे. ऋतू और निधि भाग कर राज और अर्चना से लिपट गई. वह भी अब रोने लगी थी. अनिल और राहुल खड़े एक दूसरे का मोह देख रहे थे. अब उन दोनों के चेहरों पर भी बहुत पायरी स्माइल थी. उन्हें भी आज बड़ी ख़ुशी मिली थी. उनकी माँ का एक दर्द काम करने वाला आ गया था..

ऋतू ने राज की पीठ पर धप्प मार दी- पहले क्यों नहीं बताया तुमने भाई.. ऋतू भी रट हुए बोली..

राज-- मुझे तुम दोनों के क्यूट फेस रट हुए देखने का मैं नहीं था. पर फिर भी दिख गए.

निधि ने राज के गाल चुम लिया-- ऐसे रोने के लिए तोह हम बरसों से तरस रहे थे. पता है, हमने मौसी को नहीं देखा है. पर हमने उन्हें बड़ा मिस किया है भाई. देखो मौसी की वजा से माँ की लाइफ भी बेरंग हो गई थी. फिर भी माँ सदा से मौसी को अच्छे शब्दों में याद किया करती थी.

अर्चना-- कैसी है दीदी.. मुझे उससे मिलना है. उससे बात करनी है.

राज ने फोन निकला तोह सब एक साथ हो गए... कॉल मिली तोह फिरसे दोनों साइड्स से रोना धोना शरू हो गया.. बरसों का दर्द आँखों के रस्ते बहार आने लगा..

______________________________

रात अर्चना राज को अपने साथ लिपटाये हुए बीएड पर लेती थी.

राज-- तोह आपने मैं में सोच लिया है.

अर्चना राज के गाल को चुम कर-- किस बारे में.

राज-- अपनी बहनो की सौतन बनने के बारे में.

अर्चना शर्मा भी गई और राज के एक लगा भी गयी- मैं उन दोनों के जैसे बेशरम थोड़ी न हों.

राज-- तोह बन जाइये न बेशरम. जो मज़ा बेशर्मी में है. वह किसी और चीज में कहा.. अर्चना शरमाई भी और मुस्कुराई भी.

अर्चना- मुझे तोह अब भी यकीं नहीं आ रहा. मेरी आराधना दीदी का बीटा सच में ऐसा हो सकता है.

राज-- हम्म्म यकीं करना hi पड़ेगा मुझे.. राज ने अर्चना को पलटा और उसके ऊपर आ गया..

अर्चना की साँसे भरी होने लगी. कितनी देर से राज के स्पर्श को एक मर्दनसा स्पर्श जानते हुए महसूस कर प् रही थी. साडी बात खुलने से पहले राज ने कैसे उसके अंदर हलचल मचा दी थी. अब और भी हलचल मचने लगी तोह अर्चना ऊपर से तोह हसने लगी, पर अंदर से वह कांपने लगी थी. राज कुछ भी कर जाए वह आज उसे मन नहीं करेगी.

शर्म वाली थी. पर जैसा सब सुन बैठी थी. जैसा अपने अंदर महसूस कर बैठी थी. कैसे वह राज को रोक सकती थी. कैसे वह पीछे हैट सकती थी. उसकी दोनों बहने राज की पत्नियां बन चुकी थी. वह क्यों पीछे रहती.. उसके सोये अरमान जागने लगे..

राज अर्चना की आँखों में hi देख रहा था.. सब समझ रहा था,.

राज-- सिन्दूर कहाँ रखा है मेरी जान.

सुनकर अर्चना की चुके सांस चढ़ने से ऐसे ऊपर को उठे. पहाड़ hi दिखाई देने लगे थे. राज उसे भी पत्नी बनाने का बोल रहा है. उसे भी वह सब देने वाला है. जो उसकी दोनों बहनो को दे चूका है. अर्चना अपने अंदर की हलचल पर काबू भूलने लगी.

वह होल होल कंपनी लगी. उसकी लाइफ में कभी कोई ऐसा सन भी banega.usne सोचा नहीं था..

राज अर्चना के होंटो को चूमता हुआ.. बोलै न मेरी जान, कहाँ रखा है सिन्दूर. या ऐसे hi हर हद पार कर जाऊं..

अर्चना ना में सर हिला कर राज को बिना उसे अपनी बनाये सब करने से मन करने लगी. फिर बड़ी मुश्किल से, धीमे अंदाज़ में वह बोली-- एक सिन्दूर बॉक्स अलमारी में पड़ा है. एक-- राज उठा और अलमारी से सिन्दूर बॉक्स उठा लाया.

अर्चना उठ कर बेथ गई. वह अपने दिल पर हाथ रखे अपनी धड़कनो को कण्ट्रोल में करने की कोशिश कर रही थी..

राज वापिस पलटा.. बीएड पर पोहंचा और एक चुटकी सिन्दूर की भर कर अर्चना के मांग में भर दी..

अर्चना तोह राज को देखती hi रह गयी.. राज ने बॉक्स बंदकर साइड रखा और अर्चना को अपनी बहन के घेरे में कर लिया..

अर्चना को ऐसा सुकून मिला.. उसका मैं होने लगा. ऐसे hi बैठी बैठी वह एक लम्बी नींद सो जाए. ऐसी नींद तोह उसे बरसों से नहीं आयी थी. ऐसा सकूं तोह वह भूल hi चुकी थी.
 
123

***

अर्चना की आँखों से एक बार फिरसे आंसू बहने लगे. इतनी बड़ी ख़ुशी वह सहन नहीं कर पाई थी. वह अपने असली धार्मिक पति को भूल गई थी. उसे तोह बस राज hi राज दिख रहा था.

राज ने फिरसे अर्चना के चढ़े के हथु के प्याले में भरा और निहारने लगा..

राज-- कैसा लग रहा है मेरी जान को.

अर्चना भी नाम आँखों से राज को निहारते हुए-- बहुत अच्छा. बहुत खूबसूरत.. अच्छा किया आपने जो मुझे बता दिआ.. वर्ण अपने अधूरेपन को समझते हुए भी मैं तुम्हे हर हद पार करने नहीं देती. दीदी का बता कर सारा सच बता कर आपने मुझे फिरसे जीवट कर दिए है. मेरी मांग भर का ज़िन्दगी से गीले को दूर कर दिए है. अब मुझे कोई गिला नहीं रहा, न भगवन से न अपनी किस्मत से..

राज-- अब तोह अब नाना नानी से मिलेंगी न.

अर्चना-- हाँ, अब मुझे एहसास होने लगा है. उन दोनों को कुछ ज़यादा hi सजा दे दी है मैंने. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. जैसे भी हैं, वह हमारे माता पिता है. मैं जाऊँगी अब उनसे मिलने..

राज-- अब वह वहां नहीं रहते.. राज अर्चना को बताने लगा.. सिमरन का वह जान गई थी. सिमरन की चेतावनी जान कर वह कुछ चिंतित हुई..

राज-- मैं सब देख लूंगा. अब मौसा के सामने कैसे पेश आना है. वह सब आपने समझ लिए है न.

अर्चना-- हम्म्म्म. अब मुझे उनकी कोई परवा नहीं रही. अब मुझे आप मिल गए हाँ. माँ पिता जी, दीदी भी मिल गए है. अब उनकी चिंता नहीं रही मुझे.

राज-- गुड अब ऐसे hi रहना.

राज-- तोह आप अपने पहले प्यार भरे किश के लिए रेडी हाँ

अर्चना बुरी तरह से शर्मा गई. उसका फेस रेड होने लगा..

राज हसने लगा

राज ने फिरसे अर्चना को गले से लगाया और अर्चना की गर्दन पर किश कर दी..

siiiiiiiiiii.. अर्चना सिसक उठी..

अर्चना-- अब तोह आप मेरे पति बन चुके हाँ. आपको तन मन से मान लिया है. अब मुझे आशीष की भी कोई परवा नहीं रही. अब मैं उसे अपना कुछ भी नहीं मानती. अब तोह केवल आप hi आप हाँ मेरे सब.. मेरे तन मन सबके मालिक आप हो गए हाँ. कैसे मैं आपको रोक सकती हों.

राज -- तोह चलें पहले मिलकर एक गरमा गर्म बाथ लेते हाँ.. वैसे पहले सन भी वहीँ बने तोह यादगार रहेगा..

अर्चना लाल लाल चेहरे के साथ-- जैसे आपको सही लगे.. मैं क्या बोल सकती हों. जहाँ और जैसे आपका मैं करे, आप कर सकते हाँ.

राज-- गुड तोह फिर वहीँ बाथरूम में चलते हाँ. वहीँ अपना पहला मिलान करते हाँ. वहीँ अपने प्यार को गरमा गर्म पानी में मिक्स करते हुए और भी गर्म करते हाँ. शायद इससे आपको और भी अच्छा लगे.

अर्चना राज को निहारते हुए-- मुझे तोह अब्ब आपका साथ हर पल हर दुम्म hi अच्छा लगेगा.. जिस हाल में मैं आपके साथ हुई, वह हाल मेरी लाइफ का सबसे सोहनरा हाल होगा.. राज ने अर्चना को अपनी बहन में उठाया तोह अर्चना अंदर तक खील उठी.. ऐसा प्यार उसे कब मिला था.. ऐसे hi प्यार और सम्मान के लिए तोह वह सालों से तरस रही थी.

वह राज को देखती रही और राज उसे देख कर स्माइल करने लगा. ऐसे hi बाथरूम में पोहंचे. वहां बाथ टब गर्म पानी से भरा और फिर दोनों उसमे बेथ गए..

अर्चना-- कपडे तोह उतार लेते..

राज-- अच्छा है न. अब ऐसे hi उतरेंगे.. अब उतरने में मज़ा भी खूब आएगा न

अर्चना-- हम्म्म्म करके मोह साइड कर गई.

राज का लुंड जो शिवानी के कारण मूड में था. फिरसे खड़ा होने लगा.. अर्चना को अपनी गॉड में बिठा कर राज अर्चना के कपडे उतरने लगा. अर्चना के चेहरे पर शर्म थी तोह होंटो पर मुस्कान.

पहले कमीज़ फिर ब्रा अर्चना के बदन से अलग की तोह बाथरूम में लगी लाइट एक दुम्म से मद्धम पड़ने लगी. अर्चना के गोर गोर बल्ब बाथरूम में रोशन बल्ब से बढ़कर चमक देने लगे..

राज ने अर्चना के चेहरे पर दोनों हाथ रखे और फेरता हुआ निचे लाने लगा.. एक हाथ की उँगलियाँ अर्चना के नटुरेली रेड होंटो पर फेरने के बाद निचे लाने लगा. अर्चना राज के स्पर्श पर पागल होने लगी. उसकी ऑंखें बंद होने लगी.

राज-- अर्चना जी ऑंखें बंद मत करें, मेरी आँखों में देखते हुए मुझे महसूस करें. मेरी आँखों में उतर कर मेरे दिल तक पोहचने की कोशिश करें.

अर्चना को राज का धीमे और आशिक़ाना अंदाज़ बहुत भय. उसके होंटो की मुस्कने गहरी हो गई.

राज अपने हाथ निचे लेट हुए अर्चना के गले पर फेरने लगा.. फिर निचे लाते बड़े स्टाइल से अपने दोनों हाथ अर्चना के दोनों चुचु पर रख दिए. राज ने अर्चना के 38" चुके दोनों हथु में भरे. दबाया नहीं..

अर्चना को देखते हुए अपने होंटो आगे किये. होंटो से होंठ नहीं मिलाये और अर्चना की आँखों में देखने लगा..

राज-- अर्चना जी, कभी आशिक़ी नहीं करि आपने

अर्चना दबी स्माइल के साथ-- नहीं राज जी. कभी आशिकी नहीं करि मैंने.

राज-- क्यों

अर्चना-- आशिकी करने के लिए पहले कोई मैं में उतरने वाला नहीं मिला था.

राज-- अब तोह मिला है न. तोह करिये आशिकी.. बन जाईये एक आशिक़ की माशूका.

अर्चना के होंटो पर आई मुस्कान और भी गहरी हो गई. वह अपने होंठ राज के होंटो के करीब करने लगी. पास ला के वह भी रुक गई. राज को मीठी नजरों से देखने लगी. उसे सच में बहुत मज़ा आने लगा था.

दोनों की गर्म साँसे एक दूसरे से टकराने लगी. राज ने अपनी जीब निकली और अर्चना के होंटो पर फेर दी. अर्चना मुस्कुरा उठी. फिर अर्चना ने भी अपनी जीब निकली और राज के होंटो पर चलने लगी. अर्चना को ऐसी मस्ती करने में बड़ा मज़ा आने लगा था. ऐसा उसने पहले कभी नहीं किआ था. पहले तोह बस नंगी हुई, उसके पहले वाले पति ने उसकी टाँगें खोलें और लुंड छूट में घुसा कर धामा धाम चुदाई शुरू कर देता था. अर्चना कभी झाड़ जाती तोह कभी अधूरी रह कर अपनी किस्मत को कोसने लगती थी.

पर अब ऐसा नहीं था.. अब राज के साथ वह अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करने जा रही थी. राज के साथ मस्ती करने में उसी बोहु मज़ा आने लगा था.

दोनों बरी बरी एक दूसरे के होंटो पर जीब फेरने लगे. धीरे धीरे दोनों की आँखों की चमक बढ़ने लगी..

कुछ देर बाद अर्चना खिलखिलाती हुई हसने लगी. वह राज के कंधे पर सर रख कर ज़ोर ज़ोर से हसने लगी थी.

राज उसकी नंगी पीठ सहलाने लगा..

राज-- यही ज़िन्दगी है अर्चना जी..

अर्चना-- हाँ यही ज़िन्दगी है. अपने जीवन साथी के साथ ऐसी hi ज़िन्दगी जीने की छह तोह एक पत्नी को हुआ करती है. पर

राज ने अर्चना के कंधे पकड़ कर उसे सीधा कर दिए-- "पर" अब से आपकी लाइफ में नहीं रहा.. "पर" शब्द एक केवल एक शब्द बनकर रह गया है. अब अआप अपने सरे सपने पुरे कर सकती है. आज आप अपने मैं के साडी पूरी करेंगी.

बोलो यहीं सब आप अपने मैं की पूरी करेंगी या रूम में जा के...

अर्चना की आँखों में खवाब दिखाई देने लगे..

अर्चना नींद की सी हालत में-- जहाँ भी मुझे मौका मिला, जैसे भी मुझे मौका मिला, मैं आपके साथ मिल के अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी करुँगी..

राज ने अपने होंटो अर्चना के होंटो से मिलाये और निचे वाले होंठ को थोड़ा सा चूस के छोड़ दिए.. फिर अलग होक अर्चना को देखने लगा..

अर्चना को आँखों में अब खुमारी उतर आई थी. राज की आँखों में देखती हुई अर्चना भी थोड़ा सा आगे बढ़ी और राज के एक होंठ को अपने दोनों होंटो में लिया और पुरे मैं से महसूस करते हुए ऑंखें बंद कर गयी..

अर्चना राज के होंटो की गर्मी और रास फील करते हुए आनंद में डूबने लगी.. कुछ पल ऐसे hi रहने के बाद अर्चना राज के होंठ को धीरे धीरे चूसने..

अर्चना ऐसे नशे में होने लगी. जैसे नशे में वह उम्र भर नहीं हुई थी.. इतने बरस बीत जाने के बाद प्यार शब्द का उसे पता चल रहा था. वह मिलने वाले प्यार को छोस नहीं सकती थी.. वह धीरे धीरे मदहोश होती चली थी. वह भूलने लगी, उसे तोह और भी बहुत कुछ करना है.

राज के रसीले होंटो ने उसे सब कुछ भुला दिए था.
 
124

***

किश करते करते अर्चना बहुत मदहोश हो गई थी. उसे मज़ा hi इतना आया था.

ऐसे प्यार भरा किश उसने पहले कभी नै किया था. आज किया तोह जैसे सब कुछ भूलने लगी.. वो भी ज़िंदा है, उसे पता चलने लगा..

किश के बाद वह राज के कंधे पर सर रख कर खुद को बहाल करने लगी.

कुछ देर में वह रलज़ हुई तोह राज की आँखों में देखने लगी..

राज-- अर्चना जी हमें आपकी आँखों में सब दिख रहा है.

अर्चना-- दिल को दिल से रह होती है राज जी. कैसे न आप समझ सकेंगे हमारे दिल का हाल हमारी आँखों से..

अर्चना बहुत खुश थी.

राज को लगा अब खेल को आगे बढ़ाना चाहिए..

राज-- अब आपकी क्या छह है.

अर्चना-- अब तोह छह hi छह है.

अर्चना राज के खड़े लुंड पर बैठी थी. उसकी छूट गरम पानी में पानी पानी हो रही थी. उसकी बेचैनी तोह ज़यादा नहीं बढ़ी थी. पर राज के गर्म लुंड की गर्मी बहुत अच्छे से फील कर प् रही थी. उसकी छूट और दिल दोनों खिल उठे थे..

राज ने अर्चना की कमर को पकड़ कर अपने लुंड पर हरकत दी तोह अर्चना स्माइल करने लगी.

राज-- जैसा लगा आपको आपके पता का लुंड

अर्चना धीरे से है पड़ी-- सुपर्ब..

राज- अरे वाह्ह अर्चना जी आप तोह बड़ी मस्ती में आने लगी हाँ

अर्चना-- ये मस्ती भी तोह आपकी दें है राज जी. वर्ण ऐसी मस्ती कभी किया करती थी.

राज-- ये तोह अच्छी बात है, आप का समय फिरसे लौट आया. बताएं अब आपकी क्या छह है.

अर्चना- साडी इच्छाएं सकूं से पूरी होती रहेंगी राज जी. अभी तोह आपका प्यार प् के मैं पूरी होने की छह रखती हों..

राज- तोह फिर आगे बढिये

अर्चना ने राज की आँखों में देखा.. राज अर्चाना की आँखों की ज़ुबान समझ गया. दोनों फिर एक दूसरे को पूरी कपड़ो से आज़ाद करने लगे..

कुछ hi देर में दोनों के सरे कपडे एक साइड में पड़े हुए थे. दोनों एक दूसरे की बहन में नंगे गर्म पानी और गर्म जिस्मो के मज़े ले रहे थे.

अर्चना मज़े से राज के नंगे खड़े लुंड पर अपनी छूट रखे बैठी थी.. राज अर्चना को बूब्स पर पानी डालने के बाद उन्हें चमका रहा था. अर्चना राज को निहार रही थी.

अब अर्चना की चूस का लेसदार पानी राज के लुंड को हीट पोहंचा रहा था.

राज फिर अर्चना के बूब्स चूसने लगा.. अर्चना पानी में हाथ दाल कर राज के लुंड की लम्बाई मोटाई जांचने लगी. राज की बूब्स चूसै बढ़ी तोह अर्चना मचलने लगी. उससे अब कण्ट्रोल छूटने लगा था. बड़ी देर से वह खुद पर काबू बनाये हुए थी. बड़ी गर्म औरत थी. बरसों से रादप रही थी एक प्यार भरी चुदाई के लिए..

धीरे धीरे वो लुंड को मसलने लगी. राज के लुंड की स्ट्रेंथ जान कर वह बहुत खुश हुई थी.. वह अंदर तक खिल उठी थी.. ऐसा जानदार लुंड राज का होगा, उसने सोचा नहीं था

कुछ देर में राज ने अर्चना के बूब्स चूस चूस कर पहला दिए.. निप्पल्स अकड़ गए तोह राज अर्चना को किश करने लगा..

किश के बाद राज खड़ा हुआ तोह राज का लुंड अर्चना के मोह बराबर आने लगा.. अर्चना राज के लुंड को देख कर होंटो पर जीब फेरने लगी.

राज-- अर्चना जी,, करिये अपने पति के लुंड की सेवा.. लीजिये मज़े अपने पति के लुंड के.. कर लीजिये अपनी अधूरी इच्छाएं पूरी..

अर्चना झिझकते हुए राज के लुंड को थाम गई. राज के लुंड पार्स पानी के कतरे निचे बाथटम में अभी भी गिर रही थी. अर्चना की छूट का लेसदार पानी भी राज के लुंड पर लगा हुआ था..

जिस कारण राज का लुंड चमकने लगा था.

लुंड को बहुत देर से मसल रही थी. अब उस से भी नहीं रहा जा रहा था. अर्चना झिझकते हुए राज के लुंड को थाम कर अपने मोह में भर गई.. नज़र उठा कर राज को देखा.. राज उसे hi देख रहा था. अर्चना की आँखों में शर्म और ख़ुशी दोनों दिखी राज को..

राज ने अर्चना के सर के बालों में उँगलियाँ चलनी शुरू कर दी.. अपने लुंड पर भी थोड़ा अर्चना के सर को दबा दिए.. अर्चना समझते हुए राज के लुंड को चूसने लगी.

पहले वो धीरे धीरे चूसने लगी.. कुछ देर में उसकी झिझक ख़तम जाती रही तोह वह जोश के साथ राज के लुंड को चूसने लगी.. उसकी आँखों की खुमारी देख कर राज साफ समझ रहा था. अर्चना बहुत बेचैन है.

राज के साथ पहली बार था तोह शर्मा रही थी..

राज-- अर्चना जी आप बहुत मस्त लुंड चुस्ती हाँ. आअह्ह्ह्ह थोड़ी और स्पीड बढ़ाइए..

अर्चाना ने स्पीड बढ़ा दी. कुछ देर तक वह राज को चुस्ती रही.. फिर मोह से निकल पर राज को देखने लगी..

मोह से कुछ नहीं बोली.. आँखों में बोलने लगी.. अब और वेट नहीं होता राज जी.. हमें अपना प्यार देकर शांत कर दीजिये..

राज वहीँ बैठा और अर्चना को भी अपनी गॉड में बैठने लगा.. एक हाथ से अपने लुंड को सीधा अर्चना की छूट पर सेट किया तोह अर्चना राज के लुंड को अपनी छूट के छेड़ पर जान पर बुरी तरह से शर्मा गई.. अभी भी उसकी शर्म बाकि थी..

इंडियन नारी थी. शर्म कैसे जाती.. छूट पर लुंड सेट हुआ तोह

राज-- अर्चना जी अपनी मर्ज़ी से धीरे धीरे बैठिये.. सुकून से लीजिये मेरे लुंड को अपनी छूट में.. दर्द हो रुक जाइएगा..

अर्चना ने ह्म्मम्म्म्म कहा.. और धीरे धीरे निचे होने लगी.. अर्चना की छूट भी सुनैना की छूट के हिसाब से थी. राज का बड़ा लुंड अर्चना की छूट में घुसने लगा तोह उसे दर्द होने लगा..

पर वह हिम्मत करके, अपने होंटो को भींचते हुए धीरे धीरे निचे बैठने लगी..

राज अर्चना को hi देखता रहा.. आधा लुंड अर्चना की छूट में गया तोह अर्चना बोल पड़ी-- बस.. अब मुझसे खुद से नहीं लिया जायेगा.

राज ने स्माइल करि तोह अर्चना राज के कंधे पर सर रख कर लाल पीली होने लगी..

राज को पानी में अपना लुंड दिख रहा था. राज ने भी सारा लुंड को नहीं पेला..

राज-- अर्चना जी इतने का hi मज़ा लीजिये.. देखना कैसे आप सब भूल कर सारा hi लेने पर मजबूर हो जाएँगी.

अर्चना hi फिर से हम्म्म कहा.. और ऊपर होकर लुंड को बहार करने लगी..

फिर शुरू हुआ अर्चना का खेल वह धीरे धीरे ऊपर निचे होकर राज के लुंड को अपनी टाइट छूट में लेने लगी..

कुछ देर उसे दर्द हुआ.. फिर वह जैसे राज के लुंड की आदि होने लगी. उसकी छूट में लगी आग ने अर्चना की स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी..

अर्चना ऑंखें बंद किये राज के लुंड का आनंद लेने लगी.. राज कभी अर्चना को तोह कभी अपने लुंड को देखने लगी..

अर्चना मस्ती में थी, जान hi नहीं पाई, राज का 7इंच लुंड उसकी छूट में घुस कर अंदर बहार होने लगा है..

अब आगे अर्चना खुद से नहीं ले पायेगी, ये बात राज जनता था.

राज जो अर्चना की कमर पर दोनों हाथ रख अर्चना की कमर को मसल रहा था... कसके पकड़ते हुए एकदुम्म से अर्चना को अपने लुंड पर दबा दिए..

राज ने अचानक से किआ था.. अर्चना दर्द सहन नहीं कर पाई और चीख पड़ी.

वह शिकायती नाजरीन से राज को देखने लगी..

राज हसने लगा-- अर्चना जी आपने घोर नहीं किया.. आपके पति का सारा लुंड आपकी राम प्यारी में फिर हो गया है..

सुनकर अर्चना को हैरानगी हुई.. क्याआआआआ... सच..

राज-- खुद hi देख लीजिये..

अर्चना फुल मढोढ भी थी, उसे ज़यादा दर्द नहीं हुआ. पानी भी गर्म था तोह सहन कर गई.. हाथ से राज के लुंड को चेक करने लगी.. जब उसे पता चला सारा लुंड वह उसकी छूट में उतर चूका है तोह वो बड़ी खुश हुई..

अर्चना-- हमें यकीं नहीं हुआ राज जी.. पर ख़ुशी बड़ी मिली हमें.. पहले हम बहुत दर रहे थे.. पर अब हम शांत हाँ.

राज-- यही तोह आपके पति का कमल है अर्चना..

अर्चना-- हमें अपने पति का कमल पसंद आया.

राज हस्ते हुए-- फिर तोह इस कमल पर इनाम भी मिलना चाहिए..

अर्चना अब खुद से पुरे पुरे लुंड पर ऊपर निचे होने लगी थी.. राज की बात पर वह बोली-- कैसा इनाम राज जी.

राज-- अब हमें आपका स्पेशल छेड़ भी चाहिए होगा..

अर्चना हसी भी और शरमाई भी-- मेरे हर छेड़ पर आप ने अपना हक़ बना लिया है. मैं कैसे आपको मन कर सकती हों.. जब आपका मन करे आप उसे इस्तेमाल कर सकते हाँ

राज-- हमें आपसे यही उम्मीद थी अर्चना जी. पर हम आज नहीं, फिर कभी उस बारे में सोचेंगे..

अभी हम आपको पूरी तरह से शांत करेंगे.. पूरा पूरा मज़ा और आनंद देंगे आपको

अर्चना राज की बात पर स्माइल करने लगी. अब अर्चना का एन्ड आने वाला था. बोहत देर उसकी छूट में आग लगी हुई थी. एक हिसाब से उसका फर्स्ट टाइम hi था.. ज़यादा देर वह टिक नहीं सकती थी..

अर्चना की स्पीड बढ़ने लगी. तोह राज ने भी अर्चना की कमर को पकड़ कर अर्चना की हेल्प करनी शुरू कर दी..

अर्चना ने राज के कंधे पर सर रख दिए.. अब वह और भी जोश के साथ हिलने लगी थी.. टब का पानी उछाल उछाल कर बहार गिर रहा था. पर दोनों को कोई परवा नहीं थी.. दोनों अपने मज़े में खोये हुए थे..

थोड़ी देर में अर्चना के बदन में झटके शुरू हुए.. जो धीरे धीरे बढ़ते चले गए..

अर्चना की सिसकियों की आवाज़ बाथरूम में गूंजने लगी..

देर नहीं लगी और अर्चना झड़ने लगी. उसकी छूट का पानी टब के पानी में शामिल होने लगा..

राज को ये बात पसंद नहीं आई यह अर्चना को कास के अपने लुंड को बिठा दिए.. हिलना बंद कर दिए.. अब अर्चना की छूट का रास टब के गरम पानी में शामिल होक वास्ते नहीं हो सकता था..

अर्चना राज के कंधे पर सर रखे लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी..

बाद में राज ने अर्चना को टब में बहार घोड़ी बना कर पीछे से छूट मारी. ऐसे hi 2 3 और पोजीशन बदल बदल कर अर्चना को छोड़ा.. राज जब झड़ने लगा तोह अर्चना की छूट में माल छोड़ने लगा..

जैसे राज ने सब को माँ बनाने की कसम खा राखी हो..

अर्चना सबसे छोटी थी. अभी भी वह कई बच्चू को जनम देने की हिम्मत और ताक़त रखती थी..

रात भर में राज ने तीन बार अर्चना की जैम कर चुदाई करि.. अर्चना के अंदर की साडी तड़प सारा दर्द, सारा अकेलेपन उसकी छूट का पानी बहा बहा कर ख़तम कर दिए था..

दूसरी और तीसरी चुदाई बीएड पर हुई थी.. दोनों एक दूसरे की बहन में नंगे hi सो गए थे...

_______________________________

अगले दिन 3 बजे राज एक मॉल में था.. राज को खबर मिली थी. उस मॉल में उसकी मंझली ममी रेगुलर शॉपिंग करने आया करती हाँ..

आज भी वह वहीँ पोहंची हुई थी.. साथ में निशा थी.. राज बाइक पर बैठा वहां पर मौजूद था.. कुछ दूरी पर खड़ा हुआ वह अपनी ममी को देख रहा था..

निशा की नज़र पड़ी राज पर तोह वह हाथ हिला राज को हाय बोलने लगी.. वह मोह से भी राज को hello बोलने वाली थी. पर राज ने मन कर दिए..

निशा समझ गई, राज उसकी माँ को पता नहीं लगने देना चाहता.. निशा राज को देख कर खिल उठी थी.. राज के कारण उसे काफी हौसला मिला था..
 
125

***

राज निशा को इशारे से खामोश रहने को बोल कर एक साइड में आगे बढ़ा.. निशा भी अपनी माँ से कुछ बोल कर राज के पास जा पोहंची.

जैसे hi निशा राज के पास पोहंची. राज ने उसे गले से लगा लिए.. आस पास के लोगों को देख कर निशा उनकंफर्टबले फील करने लगी

निशा-- राज मुझे ऐसे तो गले न लगाओ

राज-- डर्टी हो क्या किसी से

निशा-- पता नहीं..

निशा कुछ अलग टाइप की लड़की थी. राज ने उसे गले से अलग करके उसका हाथ पकड़ लिए.

राज-- मैं ऐसा hi हों. मेरे साथ ऐसे hi रहना. कभी खुद को ुनस्य डील मत करना. वर्ण मुझे शर्म नहीं आएगी. निशा राज को घूरने लगी.

राज हसने लगा- ऐसे मत देखो. मैं खा नै जाऊँगा तुम्हे..

निशा भी अब हसने लगी-- खा जाएँ. आप मेरे भाई हो. मुझे खाने का मैं करे तोह खा भी सकते हाँ.

राज-- एक स्वीट डिश समझ कर..

निशा-- हेहेहे.. एस्सस. मैं भी एक स्वीट डिश बन जाऊँगी अपने भाई के लिए.

राज-- और अगर मेरा मंद कुछ और बनाने का भी हुआ तोह

निशा खिखिला कर हसने लगी-- भाई आप बहुत अलग टाइप के हो..

राज-- हाँ वह तो मैं हों hi. ऐसा करो अपनी माँ को थोड़ा रिलैक्स छोड़ दो

निशा- क्या मतलब.. मैं कुछ समझी नै.

राज-- अरे यार तुम्हारी माँ के साथ मुझे फ्री होना है. बाद में तुम्हारी शादी भी तो तुड़वानी है. कुछ तोह प्लान करना पड़ेगा..

निशा खुश होक-- सच में भाई आप मेरे लिए इतना कर जायेंगे..

राज-- मैं तुम्हे अपने कारनामे बताने लागु तोह हैरत से पागल होने लगो.

निशा-- ऐसा क्या ख़ास किया है आपने..

राज-- बाद में बताऊंगा.. अभी समय नहीं है. जाओ मॉल में घूम फिर को..

निशा ok बोल कर निकल पड़ी.. राज ममी को देखने लगा.. ममी का नाम सुधा था...

राज ममी की और बढ़ने लगा.. ममी गारमेंट्स की शॉप के अंदर थी और अपने लिए कोई बढ़िया स ड्रेस देख रही थी..

राज उनके पास पोहंचा-- क्या करती हाँ आप.. ऐसा ड्रेस आप पर सुईठे नहीं करेगा.

ममी ने सर उठा कर राज को हैरत से देखा.. ममी को राज जाना पहचाना लगा. पर उसे यद् नहीं आया, राज को पहले कहाँ देखा है.

राज स्माइल करने लगा-- मुझे पहचानने की कोशिश कर रही हाँ आप.

ममी-- हाँ.. पर यद् नहीं आ रहा.. कहाँ देखा है तुम्हे.

राज-- कमल करती है आप. सुना है सुंदर नारी एक चार्मिंग मर्द को कहीं भी एक नज़र देख लें तोह कभी भूलती नहीं हाँ..

ममी के होंटो पर मुस्कान आ गई.. राज ने ममी की तारीफ करते करते अपनी भी तारीफ कर दी थी..

ममी-- याद आये न आये. पर तुम्हारा अंदाज़ मुझे बहुत पसंद आया.

राज-- और मेरे कहे शब्द.

ममी हलके से है पड़े-- वहीँ तोह ज़यादा अच्छे लगे

राज-- तोह फिर क्या ख्याल है. चलें डेट पे..

ममी मोह खोल के राज को देखने लगी.. राज बच्चू जैसा फेस बना के ममी को देखने लगी.. ममी कुछ राज को देखती रही. फिर वह खिलखिला कर हसने लगी..

ममी-- मज़ा आ गया. भगवन की कसम मज़ा आ गया. अब तुम बता hi दो तुम्हे कहाँ देखा है मैंने.. तुम्हारे जैसे कमल के लड़के को मई कैसे भूल सकती हों. कितनी बुरी बात है..

राज-- डेट पे चलेंगी तोह बता भी दूंगा..

राज उसी टोन में बोलै तोह ममी ने राज के कंधे पर हलके से धप मार दी..

ममी-- हम्म्म्म... डेट पे.. डेट पे जाने को मैं तुम्हे कोई 18 साल की लड़की दिखती हों..

ममी हस्ते हुए बोली.. राज वेल ड्रेस्ड था. वर्ण ममी जैसी घमंडी औरत ऐसे राज से बात न कर रही होती. राज नार्मल ड्रेस में होता. नार्मल पर्सनैलिट वाला लड़का होता तोह ममी कोई भाव hi न देती राज को.

पर राज हरामी था. सब समझता था. कैसी ममी जैसी औरत को बातों में उलझना है. अपने दाम में लाना है. ममी भी राज की बातों के मज़े लेती हुई, एक सुलझी हुई महिला दिखने लगी थी.

ममी सुलझी हुई थी. बस घमंड था उनमे. पैसे को लेके अपने से निचे लोगों को ऐटिटूड दिखाया करती थी. संस्कारी भी थी और कुछ लालची थी. पर वह बेशरम नहीं थी.

राज ममी को लाइन पर लाने लगा..

राज सीरियस होक-- मेरी पसंद का ड्रेस पहने फिर कहियेगा.. आप 18 की हाँ या 27 की.

ममी हैरान हो गई-- 27 की.. मम.. ममी एकदम से चुप कर गई. वह अपनी असली आगे कैसे राज को बता सकती थी. अभी राज को यद् भी नहीं कर पायी थी. राज को कहाँ देखा है. ऐसे hi तोह नहीं बिना पहचान के किसी को अपनी असली उम्र बता सकती थी. राज के 18 या 27 बोलने पे ममी अंदर से खिल उठी थी. वह साइड में लगे हुए मिरर में खुद को देखने लगी.

राज-- ये क्या.. आप को मेरे कहे पे यकीं नहीं है. राज कुछ दुखी सा होक बोलै.

ममी-- नहीं नहीं.. मैंने कब कहा तुम झूट बोल रहे हो

राज शोखी से--- तो फिर मैंने सच कहा.

ममी फिर है पड़ी

राज-- अब आप मेरी चॉइस का ड्रेस ले रही है न.

ममी राज को देखते हुए-- क्या यद् करोगे तुम भी.. करो मेरे लिए चॉइस. मैं भी तोह देखो तुम्हारी चॉइस कैसी है. और कैसी दिखती हों मैं तुम्हारी पसंद के ड्रेस में.

राज हरामी ने ममी के टाइट फिटिंग और शोख कलौद का एक ड्रेस देखा. जिसका गाला बहुत खुला था..

राज ने ममी को ड्रेस दिए..

ममी-- मैं ये कपडे पहनोगी.. इस उम्र में--

राज ने ममी को टोक दिए-- क्या आप बूढी हाँ.. मैं तोह समझा था..

ममी-- तुम नहीं मानोगे.. लाओ मैं तरय करके आती हों. तुम यहीं रुकना..

राज-- में भी साथ में चलता हों. मैं कोई ख़राब बच्चा थोड़ी न हों.

राज मासूम सा फेस बना के बोलै.. ममी हसने लगी.

ममी-- वहां तुम नहीं जा सकते..

raj--mujhe साथ ले जाएँ.. कसम से मई अपनी ऑंखें बंद कर लूंगा.. राज अपनी आँखों में आगे दोनों हथु की उँगलियाँ रखते हुए, बीच में झरि बनाते हुए बोलै तोह

ममी ज़ोर से है पड़ी.. कुछ और महिलाएं भी वहां कड़ी थी. वह देखने लगी तोह ममी अपनी हसी पर काबू पाने लगी.

ममी-- पता नहीं ये ड्रेस मुझपर सुईठे करेगा भी क नहीं करेगा.. पर तुम्हारे साथ मुझे मज़ा खूब आया..

ममी ट्रायल रूम की और बढ़ने लगी. राज की पसंद का सुईठे उनके हाथ में था.. वह अंदर घुस के अंदर से कुण्डी लगा गई. राज बाहर वेट करने लगा.

ममी राज से मिलके बहुत खुश थी.. राज के लिए कुछ और विचार उनके मैं में नहीं आये थे. राज का अणडज ममी को पसंद आया था. राज की आँखों में देख कर ममी को राज बुरा लड़का नहीं दिखा था.. ये टैलेंट था राज का. हरामी पैन की इन्तहा को पोहंचा हुआ था राज

ममी ड्रेस देखने लगी. अपने सीने पर सजा कर मिरर में खुद को देखने लगी. फिर वह बड़बड़ाने लगी.. मैं ऐसे ड्रेस में खुले में तोह नहीं घूम सकती.. मैं ऐसे ड्रेस तोह नहीं पहनती.. कितना गन्दा ड्रेस है ये तो.. इसे पहन के तोह मैं बेशरम लगूंगी..

फिर वह सोचने लगी.. ड्रेस है कितना सुंदर. पहन के एक बार देख hi लेती हों..

ममी अपनी कमीज़ उतार कर खुद को आईने में देखने लगी. फिर राज की सिलेक्टेड कमीज़ पहनने लगी.. कमीज़ पहन के खुद को देखा तोह ऊपर से कुछ हिस्सा ब्रा का नज़र का नज़र आने लगा था. कमीज़ का गाला कुछ ज़यादा hi डीप था.. ममी अपनी ब्रा को दबा कर खुद को देखने लगी. ममी के मैं में जाने क्या आया. वह कमीज़ उतर कर ब्रा भी उतर कर फिर ड्रेस पहनने लगी..

उसी समय दूर नॉक हुआ तोह ममी बोली- कोण है. ऐसे क्यों नॉक कर रहे हो. किसी दूसरे ट्रायल रूम में जा के देखो.. मैं अभी बिजी हों.

बहार राज था. वह बोलै-- हाय ब्यूटी ये कुछु िन्नेर्स भी हाँ.. इसे भी पहन लें. सूट की फिटिंग अछि रहेगी..

ममी घबरा गई. वह ऊपर से नंगी थी. बोली-- मम... मैं दूर नहीं खोल सकती

राज-- कोई बात नहीं. मैं साइड से हाथ अंदर दाल कर आपको पकड़ा देता हों. क्या मुझपे विश्वास नहीं बना आपका..

ममी दुविधा में फांसी.. फिर वह हाँ बोलते हुए साइड होक राज को हाथ अंदर बढ़ने का बोलने लगी.. दूर खुला तोह राज ने शराफत से हाथ अंदर करके ममी को िन्नेर्स पकड़ा दिए..

ममी कंफ्यूज थी. ये भी नहीं बोल पायी. वह उसके लिए िन्नेर्स कैसे ले सकता है.. दूर फिरसे बंद हुआ तोह ममी की साँस में साँस आई..

ममी शॉपर बैग खोल केर िन्नेर्स निकल कर देखने लगी..

ममी देख कर हैरान हुई.. ब्रा शामे कमीज़ के साइज का था.. ममी ने ब्रा अपने बूब्स पर रखा तो ममी के मोह से राज के लिए तारीफी वर्ड्स खुद से निकल गए..

ममी ने ये भी नहीं सोचा. राज ने उसके के लिए परफेक्ट ब्रा कैसे चूसे कर ली.. ये भी नहीं सोच सकीय, क्यों वह एक अनजान लड़के की साडी बातें मानती जा रही है.

राज हरामी की पर्सनालिटी hi ऐसी थी. किसी को भी अपना बना लेता था. मन मर्ज़ी होती तोह किसी राह चलती के साथ मज़े क्र लेता था. मैं होता हो तोह किसी को भी सेट कर के छोड़ लेता.

ममी भी राज के बेहवाविओर पर राज की होने लगी थी.

ममी ने ब्रा पहन के खुद को देखा. खुद को देख कर शरमाई भी ममी. अपने आधे बूब्स देख कर जहाँ ममी को शर्म आई. वहीँ अपने आधे गोर चित्ते, चमकदार बूब्स एक खूबसूरत ब्रा में कैद देख कर ममी मज़े से भी होने लगी..

ममी सच में खुद को एक जवान लड़की के रूप में देखने लगी.. ममी ने कमीज़ पहनी तोह वह कमीज़ इतनी फिट आई. ममी तोह खुद को देखती hi रह गई. ममी ने निचे देखा तोह पुराणी शलवार मिस मैच लगी. ममी ने शलवार उतर कर नयी शलवार पहनी.. पहली ममी ने ब्रा के साथ मैचिंग पंतय भी पहन ली थी. ममी सब ट्रांस में रहते हुए कर रही थी..

फिटिंग वाली कमीज़ के साथ फिटिंग वाली शलवार पहन कर ममी ने खुद को देखा.. तोह खुद को देख कर hi शर्मा गई..

ममी खुद को देख कर खुद की तारीफ करने लगी.. राज बहार hi था.. टाइम का आईडिया लगा के वह बोलै-- अब बहार भी आ जाएँ या खुद को hi देखती रहेंगी..

ममी राज की बात सुनकर दर गई. वह इधर उधर देखने लगी. राज कहीं से उन्हें देख तोह नहीं रहा..

पर ममी को कोई छेड़ नहीं दिखा, तोह ममी की साँस में साँस आई.

ममी-- तुम यहाँ बहार क्या कर रहे हो. जाओ तुम यहाँ से, मुझे डरा hi दिए था तुमने तो.

राज हस्ता हुआ-- दर, वह भी मुझ जैसे मासूम बच्चे से..

ममी भी हसने लगी. फिर खुद को देखते हुए वह बोली-- मैं ऐसे कपड़ो में बहार नहीं आ सकती. मैं इसे उतर क्र पहले वाले पहनने लगी हों.

राज-- अरे ये क्या कह रही हाँ आप. कसम से आप बहुत मस्त लगेंगी इस ड्रेस में.

ममी भी मैं में-- वह तोह मुझे भी दिख रहा है. पर में ऐसे कपडे पहन के खुले में तो नहीं निकल सकती. उफ्फ्फ कैसे मेरे चुके दिख रहे हाँ.. ऐसे कपडे तो आज कल की लड़कियां फैशन के तौर पर पहनती हाँ.. फिर ममी को जैसे याद आया. मेरी कई दोस्त भी ऐसे hi ड्रेस शोक से पहनती हाँ.. नहीं मैं तोह नहीं पहन सकुंगी ऐसे कपडे.

राज-- और कितनी देर लगाएंगी आप..

ममी-- मुझसे इन कपड़ो में बहार नहीं आएगा. तुम.. तुम्हारे सामने या किसी और के सामने में ऐसे कपड़ो में कैसे आ सकती हों. मेने पहले ऐसे कपडे कभी नहीं पहने.

राज-- ये तोह आज कल का फैशन है. कोई नहीं देखेगा आपको..

ममी-- कोई नहीं देखेगा तोह पहनने का क्या फायदा फिर.. फ़ौरन hi ममी ने अपनी जीब अपने डेंटन में दबा ली.. वो ये बात बोलना नहीं चाहती थी. राज की बातों में उलझी वह ये सब बोल गई थी.

राज-- किसी की नज़र आप से हटेगी hi नहीं. पुरे मॉल में चका चांद हो जाएगी. लड़कियां आपको देख कर जेएलओसी फील करने लगेंगी. मुझे तोह दर है नजाने कितने लड़के आपको देख कर डेट पर चलने के लिए बोलने लगेंगे.. ऐसा ड्रेस पहना कर तोह मैंने अपने पाऊँ पर खुद hi कुल्हाड़ी मार ली.

ममी फिरसे खिलखिला कर है पड़ी-- बस बस.. इतना भी मुझे बांस पर न चढ़ाओ..

राज-- अब आप बहार नहीं आना चाहती तोह मुझे अंदर आने दें..

ममी-- ा रही हों बाबा. तुम तोह मुझे आज पागल करदोगे..

ममी एक बार फिरसे खुद को देखती हुई, पुराण ड्रेस बैग में डालने लगी..

ममी जैसे hi कुण्डी खोलने लगी.. ममी ने के बार फिरसे खुद को मिरर में देखा और शर्मा गयी..

ममी चेहरे पर शर्म लिए दूर खोल कर बहार निकल पड़ी.. ममी राज की आँखों में नहीं देख रही थी.. ममी की नज़रें नीची थी.
 
126

***

राज-- मंद ब्लोइंग.. क्या दिख रही हाँ आप कसम से.. अतिसुंदर.. दुन्या की सबसे हसीं लड़की.

ममी-- झूट मत बोलो.. ममी नज़रें झुकाये हुए hi बोली

राज-- नज़र उठा के मेरी ऑंखें में देखें आप. यकीं ा जायेगा आपको

ममी ने नज़र उठाई तो राज की आँखों में देख के बस देखती hi रह गई

राज ने एक हाथ आगे बढ़ाया और ममी से बोलै-- चलें लाएं अपना हाथ मेरे हाथ में. फिर देखना कैसे मॉल में आग लगती है.

ममी-- तू हो न हैंडसम.. सब तुम्हे देखेंगे hi.

राज-- ाजी में कहाँ. सुंदर तो आप हाँ

ममी-- सुंदर का पता नई. पर मुझे कपड़ो में बहुत उनकफोराबले फील हो रहा है. मैं कर रहा है. वापिस से चेंज कर लूँ

राज-- नहीं. इसकी कोई ज़रूरत नई नहीं. एक आप के बदन पे बहुत सुईठे कर रहा है कसम से

ममी बिना राज के हाथ में हाथ दिए चलने लगी. ममी को बड़ी शर्म आ रही थी. कहीं कोई उनकी जानने वाली न देख ले. राज के हाथ में हाथ देख के कोई स्कैंडल hi न बना ले.

राज स्माइल से ममी के साथ चलता हुआ काउंटर पे पोहंचा और ममी के ड्रेस की पेमेंट करने लगा

ममी-- नहीं. पैसे में खुद से दूंगी.

राज ममी के कान के पास-- यहाँ मेरी चलने दें. बाद में आप अपनी कर लीजियेगा

ममी चुप कर गई..

दोनों वहां से निकले तोह सच में बहुत सी नज़रें ममी पर पड़ने लगी. ममी शर्म से दोहरी होने लगी. राज कुछ फैसला रख कर चल रहा था. ममी को राज का ऐसा करना अच्छा लगा..

कुछ दूरी पर निशा कड़ी थी. वह अपनी माँ को देख क्र हैरान रह गई. अपनी माँ को उसने कभी ऐसे कपडे में नहीं देखा था. राज की निशा पर नज़र पड़ी तोह स्माइल करने लगा. निशा तो बस अपनी माँ को hi देखती रही..

राज ने निशा को दूर hi रहने का इशारा किया.. निशा भी राज की मानते हुए दूर दूर hi रही. ममी भी जैसे निशा को भूल गई थी.

ममी ने जो जो खरीदना था. राज ममी के साथ रहा. ममी ने साडी शॉपिंग राज की मर्ज़ी से करि..

ममी भी फिर ज़यादा नहीं बोली. राज की मानते हुए एक सकी लेके पहन लिया था. अब और बचा भी क्या था..

1 घंटे में ममी ने साडी शॉपिंग करि तोह ममी को निशा की यद् आई. ममी निशा को देखने लगी. तोह राज बोलै-- उसे मैंने hi दूर रहने को बोलै था.

ममी हैरान होक-- तुमने.. पर क्यों..

राज-- एक दिन आपको भी तोह अपनी मर्ज़ी से जीने का मिलना चाहिए न डार्लिंग.

ममी-- डार्लिंग.. ममी का मोह hi खुल गया था..

राज धीरे से हस्ता हुआ-- डार्लिंग शब्द तो प्यार से ऐडा किया जाता है. ज़रूरी तो नहीं. सिर्फ प्रेमिका को hi बोलै जाये. आप लग भी तोह डार्लिंग hi रही हाँ न.

ममी-- तुम बहुत चालू लड़के हो राज.

इतनी देर में राज ने अपना नाम बता दिए था ममी को.

दोनों बहार निकले तोह निशा भी वहीँ आ गई.

निशा को पास पाया तोह ममी निशा से कुछ बोलने hi वाली थी. निशा की अपने बदन पर फिरती निगाहो को देख कर देख कर अपने होंठ भींच गई. ममी फिरसे शर्माने लगी.

राज हसने लगा तो ममी निशा से बोली-- निशा मीट राज.. राज ये निशा है.

निशा हसने लगी.. राज बोलै-- निशा को में पहले से जनता हों.

ममी -- क्या.. पर तुमने पहले मुझे नहीं बताया इस बारे में..

राज-- आप का मज़ा ख़राब हो जाता.. कहा न, आज का दिन आप का था. किसी और की बातें करना सही नहीं लगा मुझे. चलें किसी रेस्टुअरंत में चलते हाँ..

ममी इंकार करने लगी. देर हो रही थी. राज नहीं मन और पास के एक रेस्टोरेंट में गया दोनों को.. वहां कुछ खा पि कर कुछ और टाइम स्पेंड करने के बाद वह सब निकल पड़े..

ममी को सब बहुत अच्छा लग रहा था. राज था hi ऐसा. उसके रहने हर किसी को अच्छी hi लगता था. राज की नज़रों को अपने क्लीवेज पे एक बार बी नहीं पाया था ममी ने.. ये देख के ममी को लगा था. राज बुरा लड़का नहीं है..

वहां से ममी और निशा गाड़ी में बेथ के अपने घर के लिए निकल पड़ी तोह राज सुनैना के घर जा पोहंचा.

वहां कुछ देर बिता कर राज निकल पड़ा अर्चना के घर की और.. वहां पोहंचा तो ऋतू ने दूर खोला.

ऋतू-- मुझे तो लगा आज तुम नहीं आओगे.

राज-- ऐसे कैसे. अब तो आप सब के साथ hi रहूँगा कुछ दिन.

ऋतू ने राज का हाथ पकड़ लिया था. दोनों ऐसे hi अंदर दाखिल हो गए. सामने hi सब बैठे हुए थे शिवानी को छोड़ के..

अर्चना के गालों पर लाली आ गई थी. वह भी सुनैना वाली लिस्ट में शमिल हो गई थी. राज की पत्नी बन के, राज से चुद एक अर्चना के रंग बदल गए थे. ऊपर उसकी बेटियां भी उसे छेड़ रही थी. असली बात कोई नई जनता था.

राज अर्चना के पास जा बैठा. और अर्चना को बहन में भर के अर्चना के गाल को चुम लिया.. अर्चना हस्ते हुए सबको देखने लगी.

अनिल-- माँ कितना प्यारी लग रही है.. ऐसे hi खुश रहा करे..

राहुल-- भगवन का शुक्र है राज भाई आ गए. वर्ण तोह मम्मी का ऐसा चेहरे देखने की मेरी हसरत hi रह गई थी..

राज-- अब ये चेहरा अब हमेशा सब को खिला खिला दिखेंगे.. अर्चना के कान में.. और पेट पहला हुआ..

अर्चना ने बड़ी मुश्किल से अपने भाव पर काबू पाया.

राज कमीना था. मज़ा के लिए कुछ भी कर जाया करता था.

निधि-- डिनर तो नहीं कर के आये न तुम'

राज-- नहीं. पर बहार से कुछ ज़रूर खा लिया था आज.

अनिल- फिर तू तुम अभी नहीं करोगे डिनर..

राज-- साथ शामिल रहूँगा. बस थोड़ा सा ले लूंगा.

कुछ देर में सब डाइनिंग टेबल पे बैठे डिनर कर रहे थे.. आज शिवानी को देर हो गई थी.. उनसे कॉल करके बता दिए था देर से आने के लिए..

डिनर के बाद राज ऋतू के कमरे में जा समाया.. ऋतू राज को देख कर राज के हाथ को पकड़ गई

राज-- कैसा है मेरा रूम भाई.

राज-- में रूम को थोड़ी न देखने आया हों..

ऋतू -- तो.?

राज-- तुम्हे देखने आया हों. तुम इतनी सुंदर हो तोह रूम तो फिर खुद से बढ़िया होगा hi.

ऋतू खिल उठी. और राज के गले में बहन दाल दें.. उनके चुके राज के सीने में धंसे तोह राज नॉटी स्माइल से ऋतू को देखने लगा

ऋतू भी हस्ते hue--gande बहनो को ऐसी स्माइल करते.. पता है, ऐसी स्माइल का क्या मतलब बनता है.

राज-- मतलब तो मई तुम्हे समझने की कोशिश में हों. भाई तोह हम बाद में बने हाँ. पहले तू एक लड़का लड़की हाँ. तुम सुंदर लड़की और मई सुंदर लड़का.

ऋतू-- हेहेहे.. बोल तो ऐसे रहे हो. जैसे में राजकुमारी और तुम राजकुमार..

राज-- मेरा तोह पता नहीं. पर तुम ज़रूर एक राजकुमारी हो

ऋतू इठला के-- ावें इ.. लड़कियों को तो लड़के ऐसे hi बांस पे चढ़ा देते हाँ.

राज-- तुम नहीं हो सुंदर क्या.. ?

ऋतू- बिलकुल बी नहीं.

राज-- इसका मतलब है तुम्हारा कोई बर्फ भी नहीं है.

ऋतू साद होक-- हाँ नहीं है मेरा कोई भी बर्फ.. बड़े पापा बड़े घडस किसम के हाँ. जिसके पापा घडस हों, उस लड़की का कोई बर्फ नहीं होता..

राज ऋतू के गाल को चूमता हुआ.. साद क्यों होती हो मेरी जान. मई हों न तुम्हारा बर्फ बनने के लिए..

ऋतू-- तुमममममममम.. ऋतू एकदम से राज एक सीने से अलग हुई और कुछ पीछे हाकते राज को देखने लगी. हाहाहा.. तुम मेरे बर्फ बनोगे..

राज हरामी स्माइल के साथ आगे बढ़ा और ऋतू को अपनी बहन में भर लिया- किन बर्फ बनने के लिए तुम्हे मुझसे बढ़कर कोई मिलेगा क्या..

ऋतू राज के अंदाज़ पर हसने लगी..

राज नहीं जानती थी. राज का अंदाज़ hi धोका देता है.. राज के अंदाज़ पर जितनी उसे हसी आ रही थी. बाद में उतने hi शॉक लगने वाले थे उसे.. राज उसके पास आया तोह आशीष के घर लौटने से पहले कुछ तो कर गुज़ारना था उसे..

ऋतू हसने लगी और राज ऋतू को अपनी बहन में भरे उसके गालों को चूमने लगा.. ऋतू और भी खिलखिला कर हसने लगी..

राज ने एकदुम्म से अपने होंठ ऋतू के होंटो पर जमा दिए.. ऋतू की हसी hi नहीं थमी.. ऋतू के ऑंखें भी अपने साइज डबल हो गई.. ऋतू राज को हेरात से देखने लगी. और राज हरामी ऋतू की कोई भी परवा किये बिना ऋतू के शबनमी होंटो का रास पीने लगा..
 
127

***

ऋतू की लाइफ का पहला किश था. पहले उसे हैरत का झटका लगा. फिर वो जैसे राज के किश में खोने सी लगी. उसकी बड़ी ऑंखें बंद होने लगी.

उसकी सांस फूलने लगी.. किश में साथ नई दिए उसने.. बस राज के किश का आनंद लेने लगी. ऐसा एहसास उसे कबि प्राप्त बी तो नहीं हुआ था पहले कभी.

राज हरामी था. इतना बड़ा हरामी कोई सोच बी नई सकता tha..raj पल भर में hi मैदान मार लेने का आदि था..

ऐसा किश करने लगा. ऋतू सब कुछ भूलने लगी. राज का लुंड उसी पल खड़ा होने लगा.

राज के हाथ ऋतू की पीठ पे गए.. फिर सरकते हुए निचे जाने लगे. ऋतू और भी मदहोश होने लगी. ऐसी फीलिंग्स में वो वेस्ट होने लगी. जैसे पहले कभी उसने प्राप्त नहीं करि थी..

कुछ देर के चले किश में राज ऋतू की कमर को मसलता रहा.. किश तोड़ी तो ऋतू ऑंखें बंद किये लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी..

राज उसे देख कर हरामी स्माइल करने लगा.. ऋतू कुछ पल में नार्मल हुई तो राज को देखने लगी. फिर जैसे hi उसे यद् आया राज ने उसे किस करि है तोह बनावटी घुसे से राज को देख कर चीखने लगी. राज पर झपट पड़ी.. राज के सीने पर मुक्के मारने लगी.

ऋतू -- तुम्हे शर्म नहीं आई अपनी hi बहन के साथ ऐसा करते हुए. कितने गंदे हो तुम..

राज -- हाहाहा.. मज़ा लेने के बाद बोल रही हो. जब किश शुरू की था. तब बोलना था न..

राज ने फिरसे उसे बहन में भर लिए.. ऋतू को भी मज़ा आया था. वो झूठा ग़ुस्सा करने लगी. उसे नशा hi इतना हो गया था. राज पे उसे ग़ुस्सा नई आ रहा था.. वो तो अपनी लाइफ के पहले किश के कारण मदहोश थी.

ऋतू-- मुझे क्यों ऐसा गंदे काम में मज़ा आएगा.. तुझे रोका नहीं.. कहीं तुम नाराज़ न हो जाओ. इसलिए.. समझे.. कुछ और बात नई है.

राज-- अच्छा.. कोई और बात नहीं है.

ऋतू राज को ऑंखें दिखते हुए-- हैं और कोई बात नहीं है.

राज-- तो फिर मेरी पकड़ से निकल क्यों नहीं रही.

राज नॉटी अंदाज़ में बोलै तोह ऋतू राज को ग़ुस्से से देखने लगी.. ऋतू बी मस्त लड़की थी. मस्ती करने का मौका उसकी लाइफ में आया तो वो भी मस्ती करने लगी थी. शर्म से उसका चेहरा लाल भी था. पर वो राज की बहन से निकलना नहीं चाहती थी.

ऋतू-- तुम मुझे छोड़ोगे तो निकलूंगी न. तुम ठहरे मर्द. और मई एक नाज़ुक सी लड़की. कैसे तुम्हारी पकड़ से निकल सकती हों.

राज ने एकदम्म से उसे छोड़ दिए. बीएड पर जा के बेथ के वहां पड़ी एक बुक उठा के देखने लगा..

ऋतू राज को खुले मोह के साथ देखती रह गयी. पहले वो हैरान हुई. फिर वो हसने लगी. उसे राज की ऐसी मस्ती और छेद छड़ में मज़ा आने लगा था.

वह राज के पास गई और बुक राज के हाथ से लेकर साइड फ़ेंक दी. और राज को बीएड पर धक्का देकर उसके पेट पर बेथ गई.

ऋतू-- राज के बच्चे.. तुमने मुझे किस क्यों किआ..

राज-- लगता है. फिरसे करने का मैं हो रहा है तुम्हारा.

ऋतू राज के ऊपर झुकते हुए-- मई ऐसी नहीं हों समझे तुम.

राज ने ऋतू के गिर्द अपनी बहन लपेट दीं.. अच्छा तो फिर मैं गन्दा हुआ

ऋतू हस्ते हुए-- हाँ.. तुम बोहत गंदे हो.. कोई भाई अपनी बहिन को किश करता है भला.

राज-- मई गन्दा हों.

ऋतू-- हाँ बीकूल

राज-- तो गंदे लड़के तो कुछ भी कर जाया करते हाँ.

राज ने एकदुम्म से ऋतू को झुकाया और फिरसे उसे किश करने लगा.. ऋतू झूट मूट का राज से खुद को छुड़ाने लगी..

राज हरामी था. उसने सच में ऋतू को छोड़ दिए. ऋतू ऊपर होकर राज को हैरानगी से देखने लगी. उसका मैं था, राज खुल के किश करता..

राज हसने लगा तो ऋतू नाराज़ होते हुए राज के सीने पर मुक्के मारने लगी.

ऋतू-- तुमने सच में मुझे किश कर दिए.. गंदे भाई

राज और भी ज़ोर से हसने लगा..

ऋतू-- ख़बरदार जो मुझे फिरसे किश करने की कोशिश करि तो.. ऋतू फिरसे राज के ऊपर झुक गई. राज हस्ता हुआ ऋतू के गिर्द फिरसे अपनी बहन लपेट गया.. राज ने ऋतू को अपने और बी करीब किया तो ऋतू जल्दी से राज के होंटो के करीब अपने होंठ ले गई. उसके होंठ फड़फड़ाने लगे थे.. पर राज ने उसके होंटो को अपने होंटो में नहीं भरा.

ऋतू वेट करती रही. पर राज बस हस्ता hi रहा.. कुछ पल ऐसे hi रहे दोनों..

ऋतू-- राज फिरसे मुझे किश करने लगे हो. मरूंगी मई. अगर मुझे फिरसे किश करि तो.

ऋतू अपने होंटो पर जीब फेरने लगी.. उसका मैं उतावला होने लगा tha.par राज था किश hi नहीं कर रहा था..

ऋतू- छोडो मुझे राज.. मुझे किश मत करो. कोई भी भाई अपनी बहिन को किश नहीं करता.. प्ल्ज़ तुम मुझे किश मत करो.

राज ने अपनी जीब निकली और ऋतू के होंटो पर लगा दी.

ऋतू ने एक लम्बी सांस ली. उसे बड़ा आनंद मिला था.

मदहोशी भरे लहजे में बोली-- किश मत करना राज..

राज ने फिरसे जीब फेर दी.. ऐसे hi दो तीन बार और किया.. अपनी जीब से उसके होंटो को गीला किया.. फिर ऋतू को अपने ऊपर से हटा कर उठ बैठा..

ऋतू जो राज की गर्म जीब पर भी पागल हो उठी थी. राज के उसे खुद से दूर कर देने पर उसे सच में घुसा आ गया. एक तो राज उसे किश का मज़ा चखा कर किश नहीं कर रहा था. उसे तड़पा रहा था. और अब उसे खुद से दूर कर दिए था.

ऋतू ऑंखें खोल कर ग़ुस्से से राज को देखने लगी. राज हसने लगा.. तो ऋतू बी उठी और राज के सर के बाल पकड़ कर खेंचने लगी.

ऋतू : बेशरम.. बेहया. अपनी बहन को किश करता है.. माँ को बताऊँगी. वो थप्पड़ मारेंगी तुझे.. दीदी को बताऊँगी. वह हवालात में बंद कर देंगी तुझे.. भाई को बताऊँगी.. वो तेरी हड्डी पसली एक कर देंगे.. बेशरम लड़के अपनी बहन को किश नहीं करते.

राज ज़ोर ज़ोर से हसने लगा.. ऋतू अब भी असल बात नहीं बोल रही थी अब भी वह राज से नहीं खुल रही थी..

राज-- तुझे मुझे किश करनी है..

ऋतू ऑंखें दिखते हुए-- मैं क्यों तुझे किश करने लगी. मैं बेशरम लड़की थोड़ी न हों. बेशरम तो तुम हो. तुम गंदे हो. मुझे किश करते हो.

राज ने ऋतू को फिरसे अपने बहन में भर लिया.. ऋतू को और भी आनंद मिला.. उसके नए नए पक्के बूब्स राज के सीने पर धंसे तोह सुरूर की एक लहार उसके अंदर तक उतरती चली गई.

कुछ hi देर में आनंद के कितने पल उसे मिल गए थे.. ऋतू की फिरसे ऑंखें बंद होने लगी. पर अब वो ऑंखें बंद नहीं करना चाहती थी. अब वह खुली आँखों से राज को देखना चाहती थी. राज फिरसे उसे चीट न क्र दे.. ऐसा भी उसे दर लगने लगा था.

वो भूल गई थी. कुछ समय पहले तक वह कितनी शर्मीली लड़की थी. अब कितनी बदल के रह गई थी वह.

राज उसके मोह पर, होंटो पर, गर्दन कर फांकें मारने लगा.. ऋतू अंदर तक खिलती जा रही थी. ऋतू के अंदर तक मस्ती उतरती जा रही थी. ऐसा अनुभव उसे पभि पर्पट नहीं हुआ था. जब से जवानी आई थी.. सरे रंग फीके फीके hi मिले थे उसे.. बहुत स्ट्रिक्ट थे उसके फादर.. वो खुल के जी नहीं सकीय थी. राज के आने से आ गई थी उसके अंदर हिम्मत.

ऋतू ने कुछ देर वेट किया. राज ने किश नहीं करि. ऋतू का सब्र जवाब देने लगा. वो फिर साडी शर्म भूल कर राज के होंटो पर टूट पड़ी. जैसे किश उसे करनी आती थी. वैसे किश करते हुए राज के होंटो रास निचोड़ने लगी.

राज ने भी सोचा.. बड़ा परेशान कर लिया उसे. अब उसे कुछ मज़ा देना चाहिए.

राज हरामी मज़ा देता काम था.. लेता ज़यादा tha..uske हाथ ऋतू के बूब्स पर आये. जो 34 के साइज के थे.. राज ने धीरे से दोनों बूब्स को दबा दिए.. ऋतू की आँखों में चमक और कुछ नाराज़गी भी आयी.. राज को ऐसा करते देख कर.. पर वो किश के मज़े को खोना नहीं चाहती थी..

राज ने कुछ शान उसके बूब्स प्रेस किये. फिर उसकी टैंगो में हाथ दाल कर उसे अपनी गॉड में बिठा लिया.

जैसे hi ऋतू राज की गॉड में बैठी. उसकी ऑंखें बड़ी बड़ी हो गई. राज का खड़ा लुंड अब उसे फील हुआ था. राज के लुंड पर दबी थी उसकी छूट.. जो पंतय में बंद थी.

लुंड का एहसास जैसे hi उसे और उसकी छूट ने करा.. किश कर रही ऋतू के दिल की धड़कन बढ़ी तो उसकी छूट ने भी 3-4 बूँदें तकपा दीं.

एकदम से hi ऋतू की किश में मज़ा भी बढ़ गया.. ऋतू की खुली ऑंखें बंद होने लगी. राज एक हाथ ऋतू के चुके को दबाने लगा.. दूसरे हाथ से उसकी कमर और निचे वाले एरिया को दबाने लगा.. ऋतू धीरे धीरे पागल होने लगी. उसकी सांस चढ़ने लगी थी.

किश तोड़ कर वह राज को गले से लगा कर लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी. राज के नेक्स्ट स्टेप ने उसे अधमरा कर दिए था. वो राज को रोक नहीं प् रही थी. वह तोह राज के स्पर्श पर पागल होने लगी थी.

कुछ देर और गुज़री तोह ऋतू ने सहन नहीं होआ और वह अपनी गांड को हिलने लगी. जिस कारन उसकी छूट राज के लुंड पर घिसने लगी. राज ने भी दोनों हाथ ऋतू के चुत्तड़ो पर रखे और अपने लुंड पर घिसने लगा..

ऋतू ने एक बार राज को देखा. ऋतू की आँखों में नशा hi नशा था.. राज ने उसे एक किश करि.. फिर अपने लुंड पर उसकी छूट की घिसाई बढ़ा दी..

ऋतू ने फिरसे राज को अपने गले से लगा लिया.. ऋतू की आहें उभरने लगी थी.

राज का लुंड अंडरवियर भी ऋतू के लिए बड़े काम का सबत हो रहा था.

अजब ऋतू की साँसे और भी अटल पथल होने लगी.. तो राज ऋतू को बीएड पर लिटा कर

खड़ा हो गया..

ऋतू फ़ौरन उठ कर राज को देखने लगी.. उसकी आँखों में दौरे तैरने लगी थे. ऋतू राज को प्रश्न भरी नजरों से देखने लगी.

राज-- बस.. आज के लिए इतना काफी है.

राज मोह फेर कर हसने लगा. ऋतू बीएड पर कड़ी हुई और राज की पीठ पे कूद gai..uske फूल चुके बूब्स राज की पीठ पर दबने लगे.

ऋतू ऐसे पागल कभी नहीं हुई थी. राज ने उसे ऐसी स्टेज पे ला के छोड़ा था. जहाँ ऋतू कभी नहीं पोह्ची थी. वो तो सब कुछ भूल कर टूट पर चढ़ दौड़ी थी.

ऋतू-- राज तुम मुझे ऐसी स्टेज पे ला कर छोड़ जाओगे.. क्या तुम्हे अपनी बहन पर ज़रा भी तरस नहीं आता.

राज-- दर लगता है. कहीं हद क्रॉस न हो जाये.

ऋतू-- अब कोनसी हद बची है राज

राज-- बहुत कुछ बचा है अब्ब भी ऋतू..

ऋतू-- तुमने मेरा बर्फ बनने को बोलै था न राज

राज-- तो सच में बनाओगी मुझे बर्फ

ऋतू-- जितना कर लिया है तुमने मेने. जहाँ तक आगे बढ़ गए हाँ हम दोनों. गफ बर्फ तो हम बन हो गए हाँ न. तो अब पीछे क्या हटना

राज-- अभी तुम नशे में हो. बाद में तुम कहीं मुझसे नाराज़ न हो जाओ

ऋतू-- तुम तो मेरे भाई हो. मेरे बर्फ हो. तुमसे कैसे नाराज़ हो सकती हो

राज-- नहीं होगी तुम मुझसे नाराज़..

ऋतू-- बोलै न बाबा. नहीं होती में तेरे से नाराज़

राज ने ऋतू को बीएड पर पाठक दिए. ऋतू राज को देखने लगी तोह राज ऋतू की आँखों में देख के स्माइल करने लगा.

ऋतू कितनी जल्दी पैट गई थी.

पट्टी कैसे न. राज हरामी ने उसे एक hi पल में कितने रंग दिखा दिए थे. उसकी पानी पानी कर दी है. कैसे अब वह पीछे हैट सकती थी. और फिर राज उसे पीछे हटने hi कहाँ देने वाला था. वह तो बिना देरी के हर हद पार कर जाने में मास्टर था.

राज ऊपर से निचे तक ऋतू को देखने लगा.. राज की नज़र ऋतू की छूट पर आ कर अटक गई. जहाँ उसे कुछ गीला गीला दिखने लगा था. कितना पानी छोड़ने लगी थी ऋतू कुछ hi देर में..

ऋतू की नज़र में पंत में तम्बू बने राज के लुंड पर पड़ी तोह एक लम्बी सांस लेते हुए ऋतू ने नजरें फेर लीं.

राज ऋतू के ऊपर आया और उसे किश करने लगा.. इस बार ऋतू पुरे मैं से जितना उसे आता था.. राज को किश करने लगी.

किश के बाद निचे हुआ और ऋतू की गर्दन को चूमने लगा. धीरे धीरे निचे होते हुए ऋतू के क्लीवेज को चाटने लगा.

ऋतू-- राज मेरा ये फस्र्ट टाइम है. मुझे नहीं पता था. इस में इतना मज़ा भी होता है. मेरी साडी फ़िरेन्ड्स मुझसे बोलती थी. पर मुझे उसकी बातों पे विश्वास नहीं हुआ करता था. आज आने लगा है मुझे मेरी फ़िरेन्ड्स की बातों पर..

राज कुछ नहीं बोलै. निचे हुआ और ऋतू की शर्ट को ऊपर करते हुए ऋतू के नंगे पेट को चूमने लगा. राज धीरे धीरे आगे बढ़ रहा था. ऋतू पागल होने लगी. उसकी मोह से सिसकियाँ निकलने लगी.

धीरे धीरे शर्ट के साथ ब्रा भी ऊपर हुई और ऋतू के गोर बूब्स नंगे हो गए. राज ने ऋतू को देखा. जो ऑंखें बंद किये सिसक रही थी. लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. अपनी लाइफ के पहले अनुभव के मज़े ले रही थी.

राज ऋतू के एक चुके पर आया और खड़े गुलाबी निप्पल को मोह में भर लिया. ऋतू सिसक पड़ी.. राज ने मज़े से ऋतू के निप्पल को चूसने लगा. ऋतू लाइफ में पहली बार एक मर्द के मोह में अपना निप्पल प् रही थी. मोह की हीट और चूसै वो सहन नहीं कर प् रही थी. वह सर को इधर उधर पटखनी लगी.

राज एक निप्पल को निचोड़ कर दूसरे पर हुआ तोह ऋतू पागलपन की आखरी स्टेज पर थी. ऋतू के हाथ राज के सर पर आये.. वो राज के सर को अपनी चुके पर दबाने लगी.

राज कास कास के ऋतू के दूसरे निप्पल को भी चूसने लगा. ऋतू की आहें बढ़ने लगी. वो कंपनी लगी.. कुछ समय जाता वो झाड़ जाती.

राज भी बहुत जोश में आया हुआ था. वो पहले वाले चुके को दबाते हुए दूसरी चुकी चूसने लगा.

कब तक ऋतू सहन कर पति.. राज की महिराना हरकत पर वह सिहरती हुई झड़ने लगी.

राज उसके ऊपर से होकर साइड में लेट गया.. राज ऋतू को देख कर स्माइल करने लगा. कितनी जल्दी ऋतू भी उसके लिए पागल हो उठी थी.
 
128

***

ऋतू भी घायल हो गई थी. राज के लिए पागल हो गई थी.

रिलैक्स हुई तोह राज को चूमने लगी. ऋतू को अब शर्म भी आ रही थी. पर राज हरामी थी. उसके सामने कैसे कोई शर्म में ज़यादा देर रह सकती थी. राज ने धीरे धीरे ऋतू को भी बेशरम बनाना शुरू कर दिए..

ऋतू तो राज के नशे में थी. अपनी लाइफ के पहले अनुभव के नशे में थी. एक मर्द के साथ मस्ती मज़ा करते हुए पहली बार चुतरस बहाई थी.. फिर उसके साथ राज था.

राज ने ऋतू को अपने ऊपर गिरा कर उसकी शर्ट निकालनी शुरू कर दी. ऋतू फर्स्ट टाइम पे hi राज को इतना आगे बढ़ते देख कर हैरान भी थी.

पर वह राज को रोक पाने में नाकाम रही थी.. शायद ऋतू भी मन से ऐसा hi चाहती थी.

कुछ देर में राज ने ऋतू की शर्ट को उसके जिस्म से अलग कर दिए. गले में मौजूद ब्रा भी राज को अनवांटेड लगी.. ऋतू के चुके वो निचोड़ चूका था. ब्रा का अब क्या काम.

राज ने ब्रा भी अलग कर दी. ऋतू ऊपर से नंगी राज के ऊपर थी. राज उसकी आँखों में देख रहा था. ऋतू कभी राज की आँखों में देखती, कभी साइड देखने लगती. उसे अभी भी श्रम आ रही थी. किसी मर्द के सामने वो पहली बार शिरट्लेस्स हुई थी.

राज-- हाय मेरी बुलबुल शर्म आ रही है

ऋतू-- शर्म आएगी नहीं. कितने गंदे हो तुम राज.. मुझे इतनी जल्दी इस स्टेज पर ले आये

राज-- मतलब बाद में लता तो भी तुम्हे कोई ऐतराज़ नहीं होने वाला था. फिर तो तुम पक्की बेशरम हुई

ऋतू हस्ते हुए.. बेशरम भी तुम हो और गंदे भी. पता है, मुझे कितनी शर्म आ रही है.

राज-- हाहाहा.. शर्म.. इतने खूबसूरत बूब्स मुझे दिखा रही हो.. बेशरम में हो गया

ऋतू ने नॉटी अंदाज़ में राज के बाल पकड़ कर खेंच दिए-- मुझे तंग मत करो तुम समझे.

राज ने ऋतू को पलट दिए-- चल अब मुझे अपनी छूट दिखा.. दिखा तो सही. पानी छोड़ देने के बाद वो कैसे दिखती है

ऋतू के गाल लाल होने लगे.. नहीं राज इतनी जल्दी इतना आगे मत बढ़ो.

राज ऋतू की पंत को पकड़ता हुआ-- अपने बर्फ को मन करती हो..

ऋतू ने राज का हाथ पकड़ लिया.. और न में सर हिलने लगी. उसकी ऑंखें बोलल रही थी. तुझे कुछ भी करने से अब मन करने को दिल नहीं करता राज.. कर जाओ सब कुछ.. में भी तोह एक जवान, हॉट एंड सकी लड़की हों. कितने समय से अपने अरमान अपने अंदर दबाये हुए थी.. अब मुझे तुम मिले हो तो देर न करो. मुझे देखो और अपना भी सब कुछ मुझे दिखा कर मुझे ज़िन्दगी के सरे हसीं व्यू दिखा दो. हर जवान लड़की यही तोह चाहती है

राज ऋतू की आँखों की बात समझता हुआ खड़ा हुआ और खुद को पहले नंगा करने लगा.. ऋतू तो देख कर हैरान हो गई. राज कैसे उसके दिल की बात समझ सकता है

राज हरामी थी. लड़कियों के मामले में अबकड क्या हर डिग्री में मास्टर्स किया हुआ था राज ने

राज कुछ hi पल में नंगा हो गया.. राज का लुंड देख कर ऋतू का मोह खुला रह गया. वह हैरत से राज के खड़े लुंड को देखने लगी.

राज उसे स्माइल करते हुए निचे बैठा और उसकी हैरत का फायदा उठा कर उसकी पंत लूसे करके उसके पैरों से पंतय समेत निकल दी. दोनों कुछ hi देर में नंगे थे..

जैसे hi ऋतू को पता चला वह पूरी नंगी राज के सामने है.. वह उछाल कर बीएड से उतरने लगी. अपने बदन को कवर करने लगी..

राज ने उसे पकड़ लिया.. ऋतू उससे छूटने लगी-- राज प्ल्ज़ मुझे निचे ढकने दो. मुझे बड़ी शर्म आ रही है

राज-- हाहाहा.. ढकने डॉन. अब तो तुम खुद का कुछ भी नहीं धक् सकती. अब तो मुझे सब दिख hi गया है. चलो आराम से लेटो. देखो और कपड़ो मेरे लुंड को. मैं हो तोह टाँगें खोल कर अपनी छूट में भी ले सकती हो

ऋतू-- बेशरम.. कितने गंदे हो तुम.. अभी कुछ hi देर हुई है. हम गफ बर्फ बने हाँ. इतनी जल्दी सब करने जा रहे हो.. अभी कुछ टाइम मुझे मज़े करने दो.

राज ऋतू के टाँगें पकड़ कर खोलते हुए बोलै-- मैं भी तो मज़े hi करने जा रहा हों.

ऋतू-- इतने ज़यादा मज़े वह भी कुछ hi देर के बर्फ बनकर.. न बाबा न. मुझे अभी साडी हदें पार नहीं करनी हाँ.

राज-- मुझे भी अभी संजना की सील खोलनी है. शैफाली के दोनों छेड़ खोलने हाँ. निशा की सील खोलनी है. मामी को छोड़ना है. शिवानी को छोड़ना है. निधि को छोड़ना है. फिर तुम्हारा नंबर आएगा

राज हरामी उँगलियाँ पर गिनते हुए बोलै तोह ऋतू हक्की बक्की रह गई.

ऋतू-- क्या.. पागल हो तुम.. जो ित्नु को सोचे हुए हो

राज-- हाहाहा. रत तो तेरी माँ की भी मार ली मैंने. शिवानी के साथ मज़े कर लिए उसके बाथरूम में..

ऋतू-- यय.. ये क्या कह रहे हो तुम राज.. दीदी.. माँ.. दोनों के साथ कर इतना कर तुमने.. ुंबेलिवब्ले..

राज-- हाहाहा.. तुम्हे तो अभी मिला हों में इस रंग में.. थोड़ी से देर में कितना सब कर दिए मेरे तेरे साथ.. फिर भी नहीं समझी हो./

राज इतना बोल कर ऋतू की छूट पर मोह लगा कर चूसने चाटने लगा.. ऋतू छूट पर राज के मोह का मज़ा भूल कर राज की बातों पर टेंशन में आने लगी.. राज कितना अलग किसम का लड़का है. ऐसे अंदाज़ में सोचने लगी.

राज ऋतू की सेलेड छूट के लिप्स खोल कर लाल लाल छेड़ पर जीब लगाने लगा.. उसपर लगा चुतरस चाटने लगा.. ऋतू जो विचारों में व्यस्त थी. फिरसे गर्म होने लगी. छूट पर गर्म जीब का अनुभव भी उसके लिए बड़ा उत्तेजित था. वह फिरसे पागल होने लगी. दोनों कोहनियों पर उठ कर राज को देखने लगी. राज को अपनी छूट में गम देख कर वह अपने होंठ काटने लगी.

सोचने लगी. राज सच में ऐसा कर सकता है. कितनी थोड़ी सी देर में इसने मुझे पागल बना दिए. मैं जो ऐसा सिर्फ सोच सकती थी. इतना खुल कर भी एन्जॉय नहीं कर सकती थी. कैसे सुकून से राज का साथ देने लगी हों

फिर वो सिसकने लगी.. कुछ देर राज उसकी छूट छत्ता रहा.. फिर राज साइड होक लत गया. राज का लुंड छत को सलामी दे रहा था..

राज-- चलो मेरा लुंड थाम कर तुम भी लुंड के मज़े लो. चेक करो अपने बर्फ के लुंड को.. प्यार करो, छतो चुसू.. जो मैं करे करो

ऋतू की आँखों में चमक आ गई थी राज की बात सुनकर.. पर शर्म के भाव भी उसकी आँखों में थे.

राज ने ऋतू के हाथ को पकड़ा.. फिर उसके सर को पकड़ा और अपने लुंड पर झुकाने लगा.. राज जनता था, ऋतू इतनी जल्दी इतना आगे नहीं बढ़ेगी.. ऋतू का मोह राज लुंड पर लगा तोह वह लम्बी लम्बी साँसे लेने lagi.uski गर्म साँसे राज के लुंड पर पड़ने लगी. तोह राज के लुंड ने झटका मार दिए.. राज बहुत देर से बेचैन था. बहुत से अपने लुंड के कारण परेशान था. ऋतू का फर्स्ट टाइम था. कोई और होता, जिसकी छूट खुली होती.. तो राज कबका उसकी छूट में घुसा के लुंड ढीला कर चूका होता.

ऋतू को बड़ी जीजाक आ रही थी. वो लुंड पर लम्बी गर्म साँसे hi लेते रही..

कुछ देर ऐसे hi गुज़री. पर ऋतू ने मोह खोल कर राज के लुंड को मोह में नहीं लिया. न hi चूसा छठा..

तो राज ने ऋतू के पैरों को पकड़ कर उसकी छूट अपने मोह कर करते हुए उसके दोनों पेअर साइड कर दिए.

राज अपनी जीब निकल कर ऋतू की छूट चाटने लगा.. ऋतू का मोह राज के लुंड पर था.

कुछ देर गुज़री तो वह बेचैन हो उठी. उसकी छूट का पानी और भी बहने लगा tha.uski छूट की झुजलि और भी बढ़ने लगी थी. वह अब सहन नहीं कर प् रही थी. राज के लुंड को पकड़ कर महसूस करने लगी. लम्बी लम्बी सांसे छोड़ने लगी.

राज ने हाथ ऊपर से ला कर ऋतू की गांड के छेड़ को कुदरा.. तोह सिसकती हुई राज के लुंड को कसने लगी.

राज ऋतू की गांड कुरेदते हुए उसकी छूट चाटने लगा..

कब तक ऋतू सहन करती. उसकी सहन शक्ति उसकी छूट में थी.. उसकी छूट की खुजली लम्हा बा लम्हा बढ़ती जा रही थी. कुछ देर में वह शर्म और झिझक भूल कर राज के लुंड को चाटने लगी...

पहले वो जीजाक्ति रही थी.. लज्जा में थी.. फिर धीरे धीरे राज के कारण वो भी पागल होने लगी..

राज के लुंड को पागलों की तरह चाटने लगी. निचे से ऊपर से किसी स्वीट डिश की तरह चाटने लगी.. फिर मोह में भर का चूसने लगी. जितना मोह में ा रहा था.. उतना चूसने लगी..

राज ने फिरसे ऋतू की छूट में आग लगा दी थी. ऋतू अपनी टाँगें हिलने पर मजबूर हो गई थी. दबा दबा कर राज का लुंड चूसने लगी..

कभी कभी वो राज का लुंड अपने मोह से निकल कर लम्बी लम्बी साँसे लेने लगती थी. ऐसे जैसे उससे उसके अंदर की बेचैनी पर उसका कण्ट्रोल न हो रहा हो. फिर वो राज के लुंड को मोह ले के चूसने लगी..

कुछ देर में hi उसकी हिम्मत जवाब दे गई. वो राज के लुंड को मोह से निकल कर राज के लुंड पर मोह रख कर झड़ने लगी..

राज को पता चल गया ऋतू झाड़ गई है. राज ने ऋतू को साइड किया और बीएड से उतर कर ऋतू को देखने लगा..

राज-- गुड गर्ल.. आज तुम्हे भी जवानी का अच्छे से पता चल गया. अब तुम भी अपनी फ्रेंड्स के सामने सर उठा कर लुंड छूट की बातें कर सकोगी..

राज का लुंड बैठा नहीं था. वो खड़ा था. राज ने कपडे पहनने तब तक ऋतू भी रिलैक्स हो के उठ कड़ी हुई थी. ऋतू राज को किश करके बाथरूम में जा घुसी. राज कमरे से निकल पड़ा.

बहार निकला तो अर्चना के पास चला गया.. उससे प्यार करते हुए उसकी छूट में लुंड को खली कर गया.. अर्चना को और भी सुकून मिला

राज जो जैसे सबकी छूट भरने में hi लगा हुआ था...

अगले दिन राज फिरसे ममी के लिए बिजी हो गया.
 
129

****

मंझला मां परिवार..

sudha...mami

manoj...mama

अर्णव..

आरोही..

निशा..

हरीश.

निशा की जिस से सगाई हुई थी. उस स्टुपिड का नाम जगदीप था. जगदीप की माँ का नाम रूमति, पिता का नाम अभिमन्यु था.

रूपमती अपने नाम के की तरह थी. 50 के करीब थी. पर दिखने में वो 36-37 की लगती थी. अभिमन्यु की शादी की रूपमती से शादी अर्रंगे मैरिज थी. रूपमती आई तो एक विलेज से थी. पर शादी के बाद शहर में रह कर वो शहर वलियो से भी बढ़कर हो गई थी. उसे अपनी खूबसूरती पे हमेशा से hi घमंड रहा था. अभिमन्यु को उँगलियों पे नचाये हुए थे.

जगदीप भी अपनी माँ के जैसा था. सूरत में पाप के जैसा, बड़ी मूंछें पर सूरत अच्छी थी. खासा हैंडसम हटा. रूपति के कारन जगदीप थोड़ा बिगड़ गया था. जिस कारन उसे अच्छे रिश्ते नहीं मिलते थे.

निशा को देख कर जगदीप निशा के लिए पागल हो गया.. अच्छा बिज़नेस था. एक बिज़नेस डील के चलते निशा का हाथ मांग लिया.

निशा ने एक बार सख्ती से जगदीप मो मन कर दिए था शादी के लिए. एक तो वो पढ़ रही थी. दूसरे उसे जगदीप पसंद नहीं आया था. निशा की चॉइस जगदीप जैसा लड़का नहीं था.

जगदीप को निशा से hi शादी करनी थी. ये उसने अपनी माँ को बोलै तो रूपमती अपने इकलौते बेटे के लिए निशा को लेके राज़ी हो गई.

तब से बात पक्की हुई थी. जगदीप साला हर समय अपनी मोचन को hi ताओ देता रहता था. जैसे निशा को प् के उसने बहुत बड़ा कमल किआ हो.

था भी ऐसा hi.. कहाँ निशा मासूम सूरत वाली लड़की. इंटेलीजेंट और कहाँ जगदीप जैसा छिछोरा लड़का.. कैसे निशा को जगदीप पसंद आ सकता था.

उस दिन से जगदीप बहुत खुश था.

निशा परेशान थी. पर अब राज के आ जाने से निशा को एक आस भी मिल गई थी. राज की सूरत उसे अपने सपने पुरे होते हुए दिख रहे थे.

निशा कॉलेज में थी. जब जगदीप उससे मिलने आ गया.. निशा अपनी फ्रेंड्स के साथ कैंटीन में थी.

निशा की फ्रेंड्स जगदीप को देख कर निशा को टहोके देने लगी.. देखो तेरा मजनू आ रहा है. निशा ने जगदीप को देखा तो उसका मोह बिगड़ गया. उसे जगदीप अच्छा नहीं लगता था. यहाँ कॉलेज में आ के मिलना तो बिलकुल भी उसे नहीं भय था.

जगदीप पास आया तो खुद hi बिना पूछे एक चेयर घसीट के बेथ गया-- कैसी हो स्वीटी.

जगदीप आशिक़ाना अंदाज़ में बोलै. तो निशा की फ्रेंड्स हसने लगी. जगदीप अपनी मुचुन को ताओ देने लगा.

निशा-- मई थीं हों. आप कैसे आ गए आज कॉलेज में..

निशा ने खड़े होक जगदीप का सवागत नई किआ था. न hi उसकी कोई फ्रेंड कड़ी हुई थी.

जगदीप भोंडे अंदाज़ में हस्ता हुआ-- अब तो आना जाना लगा रहेगा.. क्यों मेने सही कहा न.. जगदीप निशा की फ्रेंड्स को देखते हुए बोलै.. जो पहले है रही थी. अब जगदीप के अंदाज़ को देख कर कुछ उलझन में थी. जब्ब से जगदीप आया था, बस अपनी मोचन से hi खेल रहा था.

"हाँ क्यों नहीं, अब तो निशा आपकी प्रॉपर्टी है.. जब चाहें आ ाएँ, जब चाहें निशा को अपने साथ ले जा के कहें घुमाएं फिराएं, किसी रेस्टोरेंट में ले जा के उसे चाय कॉफ़ी पिलवायें."

बात तो मस्ती के अंदाज़ में करि थी निशा की फ्रेंड्स ने.. पर शब्दों में थोड़ी सी चुभन भी थी. जिसे जगदीप जैसा घुंचू समझ नहीं सका.

जगदीप-- हाँ हाँ. इसे लिए तो आया हों.. चलो निशा चलते हाँ. मेरे दो फ़िरेन्द भी तुम से मिलना चाहते हाँ. वह गाड़ी के पास वेट कर रहे हाँ. चलो किसी रेस्टोरेंट में चलते हाँ.

निशा की एक फ्रेंड मैं में-- कमीना.. पहली बार मिलने आया है अपनी मंगेतर से. वो भी अपने दोस्तों को साथ लेके.. निशा तेरा बनेगा.. तुझे कैसा उल्लू का पट्ठा मिला है. जो अपनी मुचुन से हाथ hi नहीं हटा रहा..

निशा-- मेरा पढाई का बहुत बर्डन है. ये साल मेरे लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट है. मैं क्लास मिस नहीं कर सकती. हम फिर दिन चलेंगे.

निशा ने विनम्रता से कहा. तो जगदीप निशा को प्यार से देखने लगा

जगदीप-- अछि बात है. शादी के बाद मुझे और मेरे बिज़नेस को तुम hi देखना.. फिर हस्ते हुए.. में ज़यादा तेज़ दिमाग का नहीं हों न इसलिए..

कुछ देर और बेथ कर जगदीप वहां से चला गया. सबने मिलकर उसे कॉफ़ी कुछ स्नैक्स खिलाये.. वह खा कर जगदीप वहां से निकल पड़ा.

निशा फ्रेंड-- निशा तेरे तो मज़े हो गए यार... कितना हैंडसम पति मिलने जा रहा है तुझे.

2ंद फ्रेंड-- कमल की मूछें है जीजा जी की.. देख के लगता है. जैसे गब्बर सिंह को देख लिए हो.. वो हस्ते हुए बोली.

3रद फ्रेंड-- निशा की तो निकल पड़ी.. निशा छोड़ पढाई.. कर ले आज hi शादी. देखा कैसा मजनू मिला है तुझे. राज करेगी उम्र भर..

सब है भी रही थी और निशा पर तरस भी आ रहा था सबको.

जगदीप अपने दोस्तों के पास पोहंचा.. तो एक दोस्त बोलै... भाभी नहीं आई साथ में

jagdeep--wo फिर कभी आएगी मिलने. आज उसकी इम्पोर्टेन्ट क्लास है.

दूसरा हस्ता हुआ-- मुझे पहले hi पता tha.jesa तो उसका दीवाना बने हुआ है. ज़रूर वो आने से इंकार करेगी और तू हाँ बोल के खली हाथ लौट आएगा.

तीसरा-- जगदीप मुझे नहीं लगता.. वो तेरे साथ कभी जाना चाहेगी कहीं भी.

जगदीप-- बकवास बंद करो. शाम को जाऊँगा उसके घर.. वहां उससे मिलूंगा. वहां सब के सामने उसे अपने साथ लेजाने की बात करूँगा. नयी नयी सगाई हुई है. कुछ तो उसकी माननी पड़ेगी. आखिर वो मेरी होने वाली पत्नी है.

जगदीप फिर अपनी मोचन को ताओ देते हुए बोलै.. तीनो गाड़ी में बैठे और कॉलेज से निकल पड़े.

मंझली ममी सुधा धुप में बैठी अपनी एक नौकरानी से अपनी पैरों के नाख़ून क्लीन करवा रही थी. जबसे राज से मिली थी. ममी कुछ ज़यादा hi खुद पर धयान देने लगी थी. कुछ नई था उसके मैं में. बस कल से उसका धयान खुद पर कुछ बढ़ गया था.. घर आ कर बहुत देर तक वो राज के चूसे करे कपड़ो में खुद को देखती रही थी. ममी हर एंगल से खुद को घूम फिर कर देख रही थी. राज की सिलेक्शन उसे बहुत पसंद आई थी.

घर में भी सब उसे नई और लेटेस्ट ड्रेस में देख के बड़े हैरान हुए थे. खास कर मां का तो मोह hi खुला रह गया.. ममी हसी भी और शरमी भी.

मां ममी पर रत को टूट पड़ा. पर ममी के अंदर की मस्ती हमेशा की निस्बत बढ़ी हुई थी. मां ने ममी को खूब प्यार दिए. खूब दबा कर छोड़ा. पर पहली बार ममी को संतुष्टि नहीं मिली.. ममी पहले hi कभी कभी झड़े बिना रह जाती थी.

पर गुज़री रत ममी नहीं झड़ी थी. ममी को मां पर ग़ुस्सा तो नहीं आया. पर उनका मैं था मां रत भर उसे प्यार करे. उसे दबा दबा कर चोदे. ऐसे जैसे शादी के पहले के कुछ साल दबा दबा कर छोड़ा करते थे. पर अब ऐसा नहीं हो प् रहा था. एक तो उनकी छूट खुली हो गई थी. दूसरा मां का लुंड ढेला हो गया था. पहले जितना दम नहीं रहा था.

मां के अंदर जोश भी काम हो गया था. पर ममी का जोश के hi दिन में बहुत बढ़ गया था. रत भर ममी आग में जलती रही थी. पर एक बार भी ममी की सोच नहीं भटकी.

अब वो किसी कदर रिलैक्स मूड में नौकरानी से अपनी सेवा करवा रही थी. नौकरनी एक लकड़ी थी. वो ममी के पैरों को, नाखुनो को चमकाने में लगी हुई थी.

बड़ी बेटी आरोही जल्दी ऊनि से आ गई थी. वो अपनी माँ के पास गई. ममी उसे देख कर स्माइल करने लगी.

आरोही- क्या बात है मम्मी.. कल से देख रही हों. आप बहुत बदली हुई दिख रही हाँ. सब ठीक तो है न..

ममी हस्ती हुई-- हाँ हाँ सब ठीक है. तुम क्यों आज जल्दी आ गई.

आरोही अपनी मम्मी को किश करती हुई-- आज मैं नहीं लगा तो जल्दी चली आई.

ममी-- ओह मेरी बेटी का मैं आज पढाई का नहीं हो रहा है क्या.

आरोही-- हम्म्म.. ऐसी hi बात है..

ममी-- चलो फ्रेश होक आओ जाओ. फिर कॉफ़ी पीते हाँ..

आरोही अंदर चली गई

अजीब बात थी. निशा छोटी थी. मासूम थी. पर आरोही ममी की लाड़ली थी. आरोही की निशा से भी काम बनती थी. आरोही अपनी माँ के जैसे थी तोह निशा सबसे अलग.. मासूम और अच्छे दिल वाली.

वहीँ ममी के दोनों बेटे ार्णव और हरीश अपने अपने आवारा दोस्तों के साथ बिजी थे. हरीश कुछ इंटेलीजेंट था. ार्णव शामे जगदीप के जैसा था. आवारा लड़कों के साथ उसका उठना बैठना ज़यादा था. पढाई जैसे तैसे पूरी करि उसने.. अब दोस्तों के साथ लाइफ के मज़े ले रहा था.

हरीश कॉलेज में था.. निशा का और उसका कॉलेज अलग अलग था. हरीश अपने कॉलेज का हीरो लड़का था. पर्सनालिटी में.. पढाई में. उसके अंदर शोखी ज़यादा थी.
 
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