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जब मैंने कमरे के बहार किसी के पैरो की आहात सुनी तो मैं दीदी से अल्लाह होकर तुरंद दरवाज़ा खोलकर बहार देखा तो वह कोई नहीं था. घर में इस समय मनीषा hi थी. लेकिन उसके कमरे का दरवाज़ा बंद था. तो मैंने इसे अपना वहां मानकर इग्नोर कर दिया और वापस दीदी के पास आ गया और दीदी को नींद को दवा देते हुवे बोलै.
मैं- दीदी इसको अपने पास रखो और रात को दूध में मिलकर सबको पीला देना. उसके बाद हमें कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.
सरिता दी- लेकिन ये है क्या.
मैं- ये नींद को गोलिया हैं. इसको खाने के बाद सभी आराम से सो जायेंगे. और हम दोनों मज़ा करेंगे. कोई भी हमें डिस्टर्ब करने वाला नहीं होगा.
सरिता दी- लेकिन ये गलत है.
मैं- अगर तुम्हे अपने जिस्म की प्यास बुझानी है तो तुमको ये करना hi पड़ेगा. बाकि तुम्हारी मार्गी. अब मैं जा रहा हूँ. तुम कुछ देर सो लो क्योंकि आज मैं तुम्हे पूरी रात सोने नहीं दूंगा.
मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई. और दूसरी तरफ देखने लगी. मैं भी दीदी की कमरे से निकलकर अपने कमरे में चला गया. कमरे में आने के कुछ देर बाद मुझे प्यास लगी तो मैंने जग में देखा तो उसमे पानी नहीं था तो मैंने जग उठाया और पानी लेने किचन की तरफ चल पड़ा. जैसे hi मैं किचन में पंहुचा तो मैंने देखा की मनीषा किचन में पहले से hi मौजूद है. उसने एक सफ़ेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी जो उसकी जांघो तक hi थी. जिसके अंदर उसकी पैंटी छिपी हुई थी.
मैं तो मनीषा के इस रूप को देखकर जैसे जैम सा गया. मैं किचन के दरवाज़े पर खड़ा उसे एकटक देखने लगा. उसके हाँथ में एक पानी की बोतल. जब मनीषा ने मुझे देखा तो वो पानी पिने लगी. लेकिन कुछ इस तरीके से की वो लगातार मेरी hi तरफ देख रही थी और मुंह खोलकर बोतल ऊपर कर पानी ऊपर से मुंह में दल रही थी. जिसके कारन 90% पानी उसके मुंह में न जाकर बहार निकल रहा था. और वो बहकर उसके कपडे के अंदर समां जा रहा था. तोड़ी देर में वो बोतल खली हो गई तो मनीषा ने दूसरी बोतल निकल ली और फिर से वैसे hi पिने लगी
लेकिन अब नज़ारा बिलकुल बदल चुक्का था. और उस नज़ारे को देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा. क्योंकि पानी उसकी शर्ट पर गिरकर उसे गिला कर चुके. जो उसकी चूचियों पर चिपक गए था. उसकी चूचिया हल्का हल्का दिखने लगी थी.
उसने शर्ट के निचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी जिसके कारन उसकी चूचिया पूरी नंगी hi दिख रही थी. दूसरी बोतल का पानी भी 90% बहार hi गिर रहा था जिससे उसका t-shirt और भी गिला हो गहा था और उसकी चूचिया एकदम नंगी दिखने लगी थी. इस नज़ारे को देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा.
मनीषा लगातार मेरी तरफ hi देखकर पानी पि रही थी. मैं उसके इस कामुक रूप को देखकर अपने लुंड पर हाँथ रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा भी मुझे लुंड सहलाते हुवे देख रही थी. जब दूसरी बोतल भी खली हो गई तो मनीषा ने बोतल सेल्फ पर रख दी और मुझे लुंड सहलाता हुआ देखने लगी. उसके होंठो पर हलकी सी मुस्कान थी. वो धीरे धीरे चलती हुई मेरे पास आने लगी. पहले तो मैं उससे लगभग 12 फिट की दूरी पर खड़ा होकर उसकी नंगी चूचिया देख रहा था. लेकिन जब वो चलकर मेरे करीब आ गयी तो उसकी चूचियों को इतने पास से देखते hi मेरी हालत ख़राब हो गई. मेरा गाला एकदम सुख गया. मैं अपने होंठो पर अपनी जीभ फिरने लगा. क्योंकि उसकी चूचिया एकदम नंगी दिख रही थी. मनीषा ने मेरे पास आकर मेरे लुंड को कुछ देर देखा फिर मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.
मनीषा- क्या हुवा भैया प्यास लगी है क्या.
मैं (उसकी चूचियों को देखते हुवे). हाँ बहुत ज्यादा.
Manisha-(apni चूचियों को आगे निकलकर) तो देख क्या रहे हो अपनी प्यास बुझा लो.
मैं- तू मेरी प्यास बुझाएगी न मनीषा.
मनीषा- हाँ भैया क्यों नहीं बुझाऊँगी. आप एक बार कहिये तो.
मनीषा की बात सुनकर मैं बेकाबू हो गया और अपने लुंड को सहलाना छोड़कर मनीषा को पकड़कर दीवाल से सत्ता दिया और अपने हांथो में उसकी चूचियों को पकड़कर दबाने लगा और अपने होंठो को उसके होंठो पर रखकर किश करने लगा. मनीषा मेरे इस हमले से छटपटाने लगी और अपने आप को छुड़ाने लगी. लेकिन मैंने उसको नहीं छोड़ा और दोनों हांथो में उसकी चूचिया अचे से पकड़कर पूरी ताकत के साथ मसल दिया मनीषा के मुंह से चीख निकल गई.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyy mainnnnnnnnnnnn marrrrrrrrrr gaaiiiiiiiiiiiiiiii. Hhhhhhhhhheyyyyyyyyyyy बहुत दर्द्द हूँ रहा हैईईईई.
इतना बोलकर उसने पूरी ताकत के साथ मुझे धक्का दे दिया और गुस्से से चिल्लाकर बोली.
मनीषा- ये क्या बेहूदगी है भैया. मैं तुम्हारी बहन हूँ तुम्हे शर्म नहीं आती अपनी बहन के साथ गन्दी हरकत करते हुवे. मैं तुम्हे कितना प्यार करती हूँ. और तुम मुझे हवस की नज़र से देखते हो.
मैं- सॉरी मनीषा. लेकिन मैंने ये जानबूझकर नहीं किया. आज तुम बहुत प्यारी लग रही हो तो मैं खुद को रोक नहीं पाया.
मनीषा- इसका क्या मतलब है. मैं प्यारी लग रही हूँ तो आप मेरी इज़्ज़त के साथ खेलोगे.
मैं- नहीं मनीषा तुम गलत समझ रही हो. मैं तो तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. मैं तुम्हारे बारे में कभी गलत नहीं सोच सकता.
मनीषा- प्यार तो आप दोनों दीदियो से भी बहुत करते हैं. है न.
मनीषा ने फिर दोनों दीदी का नाम लिया था. मैं फिर से सोच में डूब गया. मुझे सोचता देखकर मनीषा ने कहा.
मनीषा- अब प्यास नहीं लगी क्या भैया. जाओ जाकर पानी पि लो. और ऐसी उलटी सीधी हरकते करना बंद कर दो. नहीं तो मैं मां पापा को सब बता दूंगी. मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ. मैं बात नहीं करुँगी आपसे अब.
इतना बोलकर मनीषा अपने कमरे में चली गयी. और मैं ठगा सा वही खड़ा मनीषा को जाते हुवे देखता रहा. क्या लड़की है यार ये मनीषा. मेरी समझ से बिलकुल परे है. मैं पानी पि कर अपने कमरे में आया और कुछ देर बैठा रहा. फिर मैंने अभी के लिए मनीषा से सॉरी बोलने के लिया उसके कमरे की तरफ चल दिया.
उसके कमरे के पास पहुंचकर मैंने दरवाज़ा नॉक किया तो उसने अंदर आने के लिए कहा. जब मैं अंदर गया तो मुझे एक और झटका लगा. मैं तो मनीषा को बस देखता hi रह गया. मेरा लुंड फिर से खड़ा होकर झटके मरने लगा. अंदर मनीषा ब्रा और लोअर में कड़ी थी. मेरे अंदर जाने के बाद मनीषा मुझे देखने लगी. मैं तो बस आँखे फाडे मनीषा के इस अनुपम सौंदर्य का दीदार करने लगा. मेरा हाँथ कब मेरे लुंड पर पहुंचकर उसे सहलाने लगा. मुझे पता hi नहीं चला.
मनीषा भी मेरे लुंड को देख रही थी. उसने मेरे आने के बाद भी ब्रा के ऊपर अभी तक कुछ भ्ही नहीं पहना था. थोड़ी देर बाद मुझे थोड़ा होश आया तो मैंने मनीषा की तरफ देखा. लेकिन वो तो मेरे लुंड के सम्मोहन में खोई हुई थी. थोड़ी देर मेरे लुंड को देखकर जब उसने अपनी नज़र उठाई तो मुझे देखकर हल्का सा शरमाई और मुस्कुराने लगी. मैं चलते हुवे उसके पास पंहुचा और नज़दीक से उसकी चूचियों को देखने लगा. जब उसने मुझे अपनी चूचियों की तरफ घूरता पाया तो उसने कहा.
मनीषा- ऐसे क्या देख रहे हो भैया.
मैं- मनीषा कसम से तू बहुत खूबसूरत है. और इन कपड़ो में तू बहुत सेक्सी लगती है.
मनीषा- कुछ तो शर्म करो भैया. अपनी बहन को सेक्सी बोल रहे हो. और अगर मैं खूबसूरत होती तो अप्प दिन रात दोनों दीदियो से न चिपके रहे होते.
मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू सच में सेक्सी है. मैं तो पागल हूँ जो कभी तुम्हारी ख़ूबसूरती पर दयँ नहीं दिया. तू कितनी जवान हो गई है मनीषा.
मनीषा- भैया ये क्या बोल रहे हैं आप. अपनी बहन की जवानी पर नज़र रखते हो आप. सुधर जाओ नहीं तो पापा को बोल दूंगी मैं.
मैं- तू हमेशा पापा से बताने की धमकी क्यों देती रहती है. मैंने कौन सी बुरी हरकत की है तुम्हारे साथ.
मनीषा- तुम्हे शर्म नहीं आती भैया. मैंने अभी तक कपडे भी नहीं पहने हैं और तुम मेरे कमरे में आ गए.
मैं- लेकिन मैं नॉक करके आया था न.
मनीषा- लेकिन जब आपने देखा की मैं अभी कपडे बदल रही हु तो आपको चले जाना चाहिए था. लेकिन नहीं. बहन की जवानी देखनी थी आपको. आने दो पापा को आज मैं उन्हें सब बता दूंगी.
मैं- सॉरी मनीषा. वो तूने कहा नहीं जाने के लिए इसलिए मैं नहीं गया. लेकिन मेरा कोई गलत इंटेंसिव नहीं है तुझे लेकर.
मनीषा- मुझे पता है भैया की आपका क्या इंटेंसिव है. वैसे एक बात सच सच बताना भैया. क्या मैं सच में खूबसूरत लगती हूँ.
मैं- सच में तू बहुत hi खूबसूरत है. तुझे देखकर तो अचे अचे उठकर खड़े हो जाते हैं. (मैंने ये बात मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपने लुंड को सहलाकर बोलै था. जिसे मनीषा ने भी देख लिया. और शर्माकर दूसरी तरफ देखने लगी)
मनीषा- अच्छा भैया ये बताओ की मैं अभी ज्यादा अच्छी लग रही हूँ या किचन में ज्यादा अच्छी लग रही थी.
मैं मनीषा की बात सुनकर उसे hi देखने लगा और सोचने लगा की इसके मन में क्या चल रहा है. कभी एकदम नाराज़ हो जाती है तो कभी ऐसे सवाल पूछती है. मैंने भी अपने लुंड को मसलते हुवे कहा.
मैं- तू दोनों जगह hi खूबसूरत लग रही थी. किसी को तू अभी खूबसूरत लग रही है (फिर मनीषा की आँखों में देख कर अपने लुंड की तरफ इशारा करके) किसी को तू किचन में खूबसूरत लग रही थी.
मनीषा समझ गई की मैं क्या कहना छह रहा हूँ तो उसने थोड़ा नाराज़गी के साथ मुझे देखते हुवे कहा.
मनीषा- आप सच में बहुत कमीने हो भैया. आप की गन्दी नज़र अब मुझपर है. लेकिन मैं आपके हाँथ नहीं आने वाली. इतना याद रखिये.
मनीषा के ये कहते hi मुझे पूरा यकीं हो गया की मनीषा को दोनों दीदी और मेरे बारे में सबकुछ पता है. दोनों दीदियो के साथ होने पर मैंने ऐसा कई बार महसूस किया था की कोई आस पास है. लेकिन मैंने हमेशा इग्नोर किया था इस बात को, मनीषा कई बात बातो बातो में मुझे इशारा देती रही की उसे सब बता है. लेकिन मैं हमेशा कंफ्यूज था. लेकिन अभी उसके कहे हुवे एक शब्द से ये कन्फर्म हो गया था की उसे सब कुछ पता है.
मनीषा को कहना चाहिए था की आप की गन्दी नज़र मुझपर है लेकिन उसने कहा था की आप की गन्दी नज़र अब मुझपर है.
मतबल उसको पता है की मैं दोनों दीदी को पता चुक्का हूँ. अगर मनीषा को सब पता था तो उसने कभी मम्मी पापा को क्यों नहीं बताया. अगर मां पापा को नहीं बताया तो काम से काम दोनों दीदियो को बता देती इंदिरेक्ट्ली की उसे सब पता है. मैंने इन सब बातो पर गहन सोचविचार करके एक फैसला किया. की अब मैं मनीषा के साथ भी आगे बढूंगा वो भी खुल कर के. अगर इसे बताना होता तो ये अब तक बता चुकी होती लेकिन इसको भी इन सब में शायद मज़ा आ रहा है. इसलिए इसने अभी तक किसी को कुछ नहीं बताया. मैं अभी इसी सोच में डूबा हुवा था की मुझे मनीषा की आवाज़ सुनाई पड़ी.
मनीषा- क्या हुवा भैया. किस सोच में डूब गए.
मैं- कुछ नहीं बस तेरे बारे में कुछ सोच रहा था. तेरे भले के लिए
मनीषा- अरे वाह आप मेरे भले के लिए सोच रहे थे. क्या बात है.
मैं- तेरा भाई हूँ मैं नहीं सोचूंगा तो और कौन अच्छा सोचेगा अपनी बहन के बारे में.
मनीषा- ये तो आपने बिलकुल सही कहा. आप अपनी बहनो के बारे में बहुत अच्छा सोचते है. तो मुझे भी बताइये की आप क्या सोच रहे थे.
Main-jane दे मनीषा मैं नहीं बताने वाला हूँ कुछ भी.
मनीषा- बताओ न भैया. क्या सोच रहे थे मेरे बारे में.
मैं- मैंने कहा नहीं बताऊंगा. तू फिर से बिना मतलब के नाराज़ हो जाएगी. और में तुझे नाराज़ नहीं करना चाहता.
मनीषा- बताइये न भैया. मैं सच में नाराज़ नहीं होउंगी. प्रॉमिस.
मैं- ठीक है मनीषा मैं बता तो दे रहा हूँ लेकिन अगर तुम नाराज़ हुई तो मैं बात नहीं करूँगा तुमसे.
मनीषा- पक्का नहीं नाराज़ होगी. आप बताओ.
मैं- देख मनीषा. तू बहुत खूबसूरत है. इसमें कोई डाउट नहीं है और इन कपड़ो में तू और भी खूबसूरत नज़र आ रही है.
मनीषा (शर्माकर मुझे देखते हुवे) सच भैया थैंक यू.
मैं- तुझे देख कर लगता है की तू अब पूरी जवान हो गई है. और मुझे ऐसा लगता है की तू ज्यादा दिन अपनी जवानी के बोझ को नहीं संभल पाएगी. इसे सँभालने के लिए किसी हट्टे काटते मर्द को ढूंढकर तेरी बहुत जल्दी शादी करवानी पड़ेगी. जिससे तेरी इस मदमस्त जवानी को कोई संभाले वाला मिल जाएगा.
मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और थोड़ा बनावटी गुस्से के साथ मेरी तरफ देखा. तो मैंने मासूम सा फेस बनाकर आँख मार दी. तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई और वो बोली.
मनीषा- क्या भये कैसी बाते कर रहे हो. मन की मैं जवान हो गई हूँ. लेकिन इतनी भी नहीं हुई हूँ की आप मेरी शादी करवाने की बात करे. अभी मैं शादी के लिया बहुत छोटी हूँ.
मैं- मुझे तो नहीं लगता की तू अभी छोटी है. सब कुछ तो बड़ा बड़ा दिख रहा है.
मेरी बात सुनकर मनीषा समझ गई की मैं क्या कह रहा हूँ तो उसने मुझे घूरकर देखा और कहा.
मनीषा- भैया बहुत हो गया अब. मेरे साथ ऐसी बाते मत करिये नहीं तो मैं पापा को बोल दूंगी.
मैं- देखा इसीलिए मैं नहीं बोल रहा था. मुझे पता था की तुम नाराज़ हो जाओगी.
मनीषा- मैं नाराज़ नहीं हूँ भैया. लेकिन फिर भी सोचो मैं आपकी छोटी बहन हूँ.
मैं- बहन है तभी तो मुझे तुम्हारी इतनी फ़िक्र है. मैं चाहता हूँ की तुम अपनी लाइफ खूब अचे से इंजॉय करो.
मनीषा- भैया मैं तो आप के साथ अपनी लाइफ खूब इंजॉय करना चाहती हूँ, लेकिन आप तो दीदियो में बस्सी रहते हैं. आप मुझपर ध्यान hi नहीं देते.
मैं- अच्छा मनीषा अब मैं तुझपर पूरा ध्यान दूंगा.
और इतना बोलकर मैं उसकी चूचियों को घूरने लगा. मुझे अपनी चूचियों को घूरता पाकर वो शर्मा गई और बोली.
मनीषा- ये क्या है भैया. इतना क्यों घूर रहे हो.
मैं- तुम्ही ने तो अभी कहा की मैं तुमपर ध्यान hi नहीं देता. इसलिए अब तुमपर ध्यान दे रहा हूँ.
मेरी बात सुनकर मनीषा शर्माकर हंस पड़ी. मैं भी उसके साथ हंस दिया. थोड़ी देर बाद मैं उससे बोलै.
मैं- एक बात और बोलू मनीषा. लेकिन बुरा मत मन्ना.
मनीषा- ठीक है. मैं बुरा मानकर कर भी क्या सकती हूँ. बोल दो.
मैं- सच में तू एकदम जवान हो गई है. और एकदम मॉल लगने लगी है.
मेरी बात सुनकर मनीषा मेरे पास आई और मेरे हाँथ पर मरने लगी. और मुझे धक्का देखर दरवाज़े के पास ले आई और दरवाज़ा खोलकर मुझे बहार जाने का कहकर वापस कमरे में चली गई. मैं फिर से उसके पीछे पीछे गया और उसके कंडे को पकड़कर अपना मुंह उसके कण के पास लेजाकर उससे कहा.
मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू जवान होकर एकदम तूंच मॉल बन गई हो.
इतना कहकर मैं उसे छोड़कर बहार भगा. मेरी बात सुनकर मनीषा मुझे मरने के लिए दौड़ी लेकिन ब्रा में होने के कारन दरवाज़े पर hi रुक गई और मुझसे बोली.
मनीषा- भैया मैं आपको किसी दिन बहुत मरूंगी. आने दो पापा को मैं आज शिकायत करूंगी आपकी.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
जब मैंने कमरे के बहार किसी के पैरो की आहात सुनी तो मैं दीदी से अल्लाह होकर तुरंद दरवाज़ा खोलकर बहार देखा तो वह कोई नहीं था. घर में इस समय मनीषा hi थी. लेकिन उसके कमरे का दरवाज़ा बंद था. तो मैंने इसे अपना वहां मानकर इग्नोर कर दिया और वापस दीदी के पास आ गया और दीदी को नींद को दवा देते हुवे बोलै.
मैं- दीदी इसको अपने पास रखो और रात को दूध में मिलकर सबको पीला देना. उसके बाद हमें कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.
सरिता दी- लेकिन ये है क्या.
मैं- ये नींद को गोलिया हैं. इसको खाने के बाद सभी आराम से सो जायेंगे. और हम दोनों मज़ा करेंगे. कोई भी हमें डिस्टर्ब करने वाला नहीं होगा.
सरिता दी- लेकिन ये गलत है.
मैं- अगर तुम्हे अपने जिस्म की प्यास बुझानी है तो तुमको ये करना hi पड़ेगा. बाकि तुम्हारी मार्गी. अब मैं जा रहा हूँ. तुम कुछ देर सो लो क्योंकि आज मैं तुम्हे पूरी रात सोने नहीं दूंगा.
मेरी बात सुनकर दीदी शर्मा गई. और दूसरी तरफ देखने लगी. मैं भी दीदी की कमरे से निकलकर अपने कमरे में चला गया. कमरे में आने के कुछ देर बाद मुझे प्यास लगी तो मैंने जग में देखा तो उसमे पानी नहीं था तो मैंने जग उठाया और पानी लेने किचन की तरफ चल पड़ा. जैसे hi मैं किचन में पंहुचा तो मैंने देखा की मनीषा किचन में पहले से hi मौजूद है. उसने एक सफ़ेद रंग की शर्ट पहनी हुई थी जो उसकी जांघो तक hi थी. जिसके अंदर उसकी पैंटी छिपी हुई थी.
मैं तो मनीषा के इस रूप को देखकर जैसे जैम सा गया. मैं किचन के दरवाज़े पर खड़ा उसे एकटक देखने लगा. उसके हाँथ में एक पानी की बोतल. जब मनीषा ने मुझे देखा तो वो पानी पिने लगी. लेकिन कुछ इस तरीके से की वो लगातार मेरी hi तरफ देख रही थी और मुंह खोलकर बोतल ऊपर कर पानी ऊपर से मुंह में दल रही थी. जिसके कारन 90% पानी उसके मुंह में न जाकर बहार निकल रहा था. और वो बहकर उसके कपडे के अंदर समां जा रहा था. तोड़ी देर में वो बोतल खली हो गई तो मनीषा ने दूसरी बोतल निकल ली और फिर से वैसे hi पिने लगी
लेकिन अब नज़ारा बिलकुल बदल चुक्का था. और उस नज़ारे को देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा. क्योंकि पानी उसकी शर्ट पर गिरकर उसे गिला कर चुके. जो उसकी चूचियों पर चिपक गए था. उसकी चूचिया हल्का हल्का दिखने लगी थी.
उसने शर्ट के निचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी जिसके कारन उसकी चूचिया पूरी नंगी hi दिख रही थी. दूसरी बोतल का पानी भी 90% बहार hi गिर रहा था जिससे उसका t-shirt और भी गिला हो गहा था और उसकी चूचिया एकदम नंगी दिखने लगी थी. इस नज़ारे को देखकर मेरा लुंड झटके मरने लगा.
मनीषा लगातार मेरी तरफ hi देखकर पानी पि रही थी. मैं उसके इस कामुक रूप को देखकर अपने लुंड पर हाँथ रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा भी मुझे लुंड सहलाते हुवे देख रही थी. जब दूसरी बोतल भी खली हो गई तो मनीषा ने बोतल सेल्फ पर रख दी और मुझे लुंड सहलाता हुआ देखने लगी. उसके होंठो पर हलकी सी मुस्कान थी. वो धीरे धीरे चलती हुई मेरे पास आने लगी. पहले तो मैं उससे लगभग 12 फिट की दूरी पर खड़ा होकर उसकी नंगी चूचिया देख रहा था. लेकिन जब वो चलकर मेरे करीब आ गयी तो उसकी चूचियों को इतने पास से देखते hi मेरी हालत ख़राब हो गई. मेरा गाला एकदम सुख गया. मैं अपने होंठो पर अपनी जीभ फिरने लगा. क्योंकि उसकी चूचिया एकदम नंगी दिख रही थी. मनीषा ने मेरे पास आकर मेरे लुंड को कुछ देर देखा फिर मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.
मनीषा- क्या हुवा भैया प्यास लगी है क्या.
मैं (उसकी चूचियों को देखते हुवे). हाँ बहुत ज्यादा.
Manisha-(apni चूचियों को आगे निकलकर) तो देख क्या रहे हो अपनी प्यास बुझा लो.
मैं- तू मेरी प्यास बुझाएगी न मनीषा.
मनीषा- हाँ भैया क्यों नहीं बुझाऊँगी. आप एक बार कहिये तो.
मनीषा की बात सुनकर मैं बेकाबू हो गया और अपने लुंड को सहलाना छोड़कर मनीषा को पकड़कर दीवाल से सत्ता दिया और अपने हांथो में उसकी चूचियों को पकड़कर दबाने लगा और अपने होंठो को उसके होंठो पर रखकर किश करने लगा. मनीषा मेरे इस हमले से छटपटाने लगी और अपने आप को छुड़ाने लगी. लेकिन मैंने उसको नहीं छोड़ा और दोनों हांथो में उसकी चूचिया अचे से पकड़कर पूरी ताकत के साथ मसल दिया मनीषा के मुंह से चीख निकल गई.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyy mainnnnnnnnnnnn marrrrrrrrrr gaaiiiiiiiiiiiiiiii. Hhhhhhhhhheyyyyyyyyyyy बहुत दर्द्द हूँ रहा हैईईईई.
इतना बोलकर उसने पूरी ताकत के साथ मुझे धक्का दे दिया और गुस्से से चिल्लाकर बोली.
मनीषा- ये क्या बेहूदगी है भैया. मैं तुम्हारी बहन हूँ तुम्हे शर्म नहीं आती अपनी बहन के साथ गन्दी हरकत करते हुवे. मैं तुम्हे कितना प्यार करती हूँ. और तुम मुझे हवस की नज़र से देखते हो.
मैं- सॉरी मनीषा. लेकिन मैंने ये जानबूझकर नहीं किया. आज तुम बहुत प्यारी लग रही हो तो मैं खुद को रोक नहीं पाया.
मनीषा- इसका क्या मतलब है. मैं प्यारी लग रही हूँ तो आप मेरी इज़्ज़त के साथ खेलोगे.
मैं- नहीं मनीषा तुम गलत समझ रही हो. मैं तो तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. मैं तुम्हारे बारे में कभी गलत नहीं सोच सकता.
मनीषा- प्यार तो आप दोनों दीदियो से भी बहुत करते हैं. है न.
मनीषा ने फिर दोनों दीदी का नाम लिया था. मैं फिर से सोच में डूब गया. मुझे सोचता देखकर मनीषा ने कहा.
मनीषा- अब प्यास नहीं लगी क्या भैया. जाओ जाकर पानी पि लो. और ऐसी उलटी सीधी हरकते करना बंद कर दो. नहीं तो मैं मां पापा को सब बता दूंगी. मैं आपसे बहुत नाराज़ हूँ. मैं बात नहीं करुँगी आपसे अब.
इतना बोलकर मनीषा अपने कमरे में चली गयी. और मैं ठगा सा वही खड़ा मनीषा को जाते हुवे देखता रहा. क्या लड़की है यार ये मनीषा. मेरी समझ से बिलकुल परे है. मैं पानी पि कर अपने कमरे में आया और कुछ देर बैठा रहा. फिर मैंने अभी के लिए मनीषा से सॉरी बोलने के लिया उसके कमरे की तरफ चल दिया.
उसके कमरे के पास पहुंचकर मैंने दरवाज़ा नॉक किया तो उसने अंदर आने के लिए कहा. जब मैं अंदर गया तो मुझे एक और झटका लगा. मैं तो मनीषा को बस देखता hi रह गया. मेरा लुंड फिर से खड़ा होकर झटके मरने लगा. अंदर मनीषा ब्रा और लोअर में कड़ी थी. मेरे अंदर जाने के बाद मनीषा मुझे देखने लगी. मैं तो बस आँखे फाडे मनीषा के इस अनुपम सौंदर्य का दीदार करने लगा. मेरा हाँथ कब मेरे लुंड पर पहुंचकर उसे सहलाने लगा. मुझे पता hi नहीं चला.
मनीषा भी मेरे लुंड को देख रही थी. उसने मेरे आने के बाद भी ब्रा के ऊपर अभी तक कुछ भ्ही नहीं पहना था. थोड़ी देर बाद मुझे थोड़ा होश आया तो मैंने मनीषा की तरफ देखा. लेकिन वो तो मेरे लुंड के सम्मोहन में खोई हुई थी. थोड़ी देर मेरे लुंड को देखकर जब उसने अपनी नज़र उठाई तो मुझे देखकर हल्का सा शरमाई और मुस्कुराने लगी. मैं चलते हुवे उसके पास पंहुचा और नज़दीक से उसकी चूचियों को देखने लगा. जब उसने मुझे अपनी चूचियों की तरफ घूरता पाया तो उसने कहा.
मनीषा- ऐसे क्या देख रहे हो भैया.
मैं- मनीषा कसम से तू बहुत खूबसूरत है. और इन कपड़ो में तू बहुत सेक्सी लगती है.
मनीषा- कुछ तो शर्म करो भैया. अपनी बहन को सेक्सी बोल रहे हो. और अगर मैं खूबसूरत होती तो अप्प दिन रात दोनों दीदियो से न चिपके रहे होते.
मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू सच में सेक्सी है. मैं तो पागल हूँ जो कभी तुम्हारी ख़ूबसूरती पर दयँ नहीं दिया. तू कितनी जवान हो गई है मनीषा.
मनीषा- भैया ये क्या बोल रहे हैं आप. अपनी बहन की जवानी पर नज़र रखते हो आप. सुधर जाओ नहीं तो पापा को बोल दूंगी मैं.
मैं- तू हमेशा पापा से बताने की धमकी क्यों देती रहती है. मैंने कौन सी बुरी हरकत की है तुम्हारे साथ.
मनीषा- तुम्हे शर्म नहीं आती भैया. मैंने अभी तक कपडे भी नहीं पहने हैं और तुम मेरे कमरे में आ गए.
मैं- लेकिन मैं नॉक करके आया था न.
मनीषा- लेकिन जब आपने देखा की मैं अभी कपडे बदल रही हु तो आपको चले जाना चाहिए था. लेकिन नहीं. बहन की जवानी देखनी थी आपको. आने दो पापा को आज मैं उन्हें सब बता दूंगी.
मैं- सॉरी मनीषा. वो तूने कहा नहीं जाने के लिए इसलिए मैं नहीं गया. लेकिन मेरा कोई गलत इंटेंसिव नहीं है तुझे लेकर.
मनीषा- मुझे पता है भैया की आपका क्या इंटेंसिव है. वैसे एक बात सच सच बताना भैया. क्या मैं सच में खूबसूरत लगती हूँ.
मैं- सच में तू बहुत hi खूबसूरत है. तुझे देखकर तो अचे अचे उठकर खड़े हो जाते हैं. (मैंने ये बात मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपने लुंड को सहलाकर बोलै था. जिसे मनीषा ने भी देख लिया. और शर्माकर दूसरी तरफ देखने लगी)
मनीषा- अच्छा भैया ये बताओ की मैं अभी ज्यादा अच्छी लग रही हूँ या किचन में ज्यादा अच्छी लग रही थी.
मैं मनीषा की बात सुनकर उसे hi देखने लगा और सोचने लगा की इसके मन में क्या चल रहा है. कभी एकदम नाराज़ हो जाती है तो कभी ऐसे सवाल पूछती है. मैंने भी अपने लुंड को मसलते हुवे कहा.
मैं- तू दोनों जगह hi खूबसूरत लग रही थी. किसी को तू अभी खूबसूरत लग रही है (फिर मनीषा की आँखों में देख कर अपने लुंड की तरफ इशारा करके) किसी को तू किचन में खूबसूरत लग रही थी.
मनीषा समझ गई की मैं क्या कहना छह रहा हूँ तो उसने थोड़ा नाराज़गी के साथ मुझे देखते हुवे कहा.
मनीषा- आप सच में बहुत कमीने हो भैया. आप की गन्दी नज़र अब मुझपर है. लेकिन मैं आपके हाँथ नहीं आने वाली. इतना याद रखिये.
मनीषा के ये कहते hi मुझे पूरा यकीं हो गया की मनीषा को दोनों दीदी और मेरे बारे में सबकुछ पता है. दोनों दीदियो के साथ होने पर मैंने ऐसा कई बार महसूस किया था की कोई आस पास है. लेकिन मैंने हमेशा इग्नोर किया था इस बात को, मनीषा कई बात बातो बातो में मुझे इशारा देती रही की उसे सब बता है. लेकिन मैं हमेशा कंफ्यूज था. लेकिन अभी उसके कहे हुवे एक शब्द से ये कन्फर्म हो गया था की उसे सब कुछ पता है.
मनीषा को कहना चाहिए था की आप की गन्दी नज़र मुझपर है लेकिन उसने कहा था की आप की गन्दी नज़र अब मुझपर है.
मतबल उसको पता है की मैं दोनों दीदी को पता चुक्का हूँ. अगर मनीषा को सब पता था तो उसने कभी मम्मी पापा को क्यों नहीं बताया. अगर मां पापा को नहीं बताया तो काम से काम दोनों दीदियो को बता देती इंदिरेक्ट्ली की उसे सब पता है. मैंने इन सब बातो पर गहन सोचविचार करके एक फैसला किया. की अब मैं मनीषा के साथ भी आगे बढूंगा वो भी खुल कर के. अगर इसे बताना होता तो ये अब तक बता चुकी होती लेकिन इसको भी इन सब में शायद मज़ा आ रहा है. इसलिए इसने अभी तक किसी को कुछ नहीं बताया. मैं अभी इसी सोच में डूबा हुवा था की मुझे मनीषा की आवाज़ सुनाई पड़ी.
मनीषा- क्या हुवा भैया. किस सोच में डूब गए.
मैं- कुछ नहीं बस तेरे बारे में कुछ सोच रहा था. तेरे भले के लिए
मनीषा- अरे वाह आप मेरे भले के लिए सोच रहे थे. क्या बात है.
मैं- तेरा भाई हूँ मैं नहीं सोचूंगा तो और कौन अच्छा सोचेगा अपनी बहन के बारे में.
मनीषा- ये तो आपने बिलकुल सही कहा. आप अपनी बहनो के बारे में बहुत अच्छा सोचते है. तो मुझे भी बताइये की आप क्या सोच रहे थे.
Main-jane दे मनीषा मैं नहीं बताने वाला हूँ कुछ भी.
मनीषा- बताओ न भैया. क्या सोच रहे थे मेरे बारे में.
मैं- मैंने कहा नहीं बताऊंगा. तू फिर से बिना मतलब के नाराज़ हो जाएगी. और में तुझे नाराज़ नहीं करना चाहता.
मनीषा- बताइये न भैया. मैं सच में नाराज़ नहीं होउंगी. प्रॉमिस.
मैं- ठीक है मनीषा मैं बता तो दे रहा हूँ लेकिन अगर तुम नाराज़ हुई तो मैं बात नहीं करूँगा तुमसे.
मनीषा- पक्का नहीं नाराज़ होगी. आप बताओ.
मैं- देख मनीषा. तू बहुत खूबसूरत है. इसमें कोई डाउट नहीं है और इन कपड़ो में तू और भी खूबसूरत नज़र आ रही है.
मनीषा (शर्माकर मुझे देखते हुवे) सच भैया थैंक यू.
मैं- तुझे देख कर लगता है की तू अब पूरी जवान हो गई है. और मुझे ऐसा लगता है की तू ज्यादा दिन अपनी जवानी के बोझ को नहीं संभल पाएगी. इसे सँभालने के लिए किसी हट्टे काटते मर्द को ढूंढकर तेरी बहुत जल्दी शादी करवानी पड़ेगी. जिससे तेरी इस मदमस्त जवानी को कोई संभाले वाला मिल जाएगा.
मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और थोड़ा बनावटी गुस्से के साथ मेरी तरफ देखा. तो मैंने मासूम सा फेस बनाकर आँख मार दी. तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई और वो बोली.
मनीषा- क्या भये कैसी बाते कर रहे हो. मन की मैं जवान हो गई हूँ. लेकिन इतनी भी नहीं हुई हूँ की आप मेरी शादी करवाने की बात करे. अभी मैं शादी के लिया बहुत छोटी हूँ.
मैं- मुझे तो नहीं लगता की तू अभी छोटी है. सब कुछ तो बड़ा बड़ा दिख रहा है.
मेरी बात सुनकर मनीषा समझ गई की मैं क्या कह रहा हूँ तो उसने मुझे घूरकर देखा और कहा.
मनीषा- भैया बहुत हो गया अब. मेरे साथ ऐसी बाते मत करिये नहीं तो मैं पापा को बोल दूंगी.
मैं- देखा इसीलिए मैं नहीं बोल रहा था. मुझे पता था की तुम नाराज़ हो जाओगी.
मनीषा- मैं नाराज़ नहीं हूँ भैया. लेकिन फिर भी सोचो मैं आपकी छोटी बहन हूँ.
मैं- बहन है तभी तो मुझे तुम्हारी इतनी फ़िक्र है. मैं चाहता हूँ की तुम अपनी लाइफ खूब अचे से इंजॉय करो.
मनीषा- भैया मैं तो आप के साथ अपनी लाइफ खूब इंजॉय करना चाहती हूँ, लेकिन आप तो दीदियो में बस्सी रहते हैं. आप मुझपर ध्यान hi नहीं देते.
मैं- अच्छा मनीषा अब मैं तुझपर पूरा ध्यान दूंगा.
और इतना बोलकर मैं उसकी चूचियों को घूरने लगा. मुझे अपनी चूचियों को घूरता पाकर वो शर्मा गई और बोली.
मनीषा- ये क्या है भैया. इतना क्यों घूर रहे हो.
मैं- तुम्ही ने तो अभी कहा की मैं तुमपर ध्यान hi नहीं देता. इसलिए अब तुमपर ध्यान दे रहा हूँ.
मेरी बात सुनकर मनीषा शर्माकर हंस पड़ी. मैं भी उसके साथ हंस दिया. थोड़ी देर बाद मैं उससे बोलै.
मैं- एक बात और बोलू मनीषा. लेकिन बुरा मत मन्ना.
मनीषा- ठीक है. मैं बुरा मानकर कर भी क्या सकती हूँ. बोल दो.
मैं- सच में तू एकदम जवान हो गई है. और एकदम मॉल लगने लगी है.
मेरी बात सुनकर मनीषा मेरे पास आई और मेरे हाँथ पर मरने लगी. और मुझे धक्का देखर दरवाज़े के पास ले आई और दरवाज़ा खोलकर मुझे बहार जाने का कहकर वापस कमरे में चली गई. मैं फिर से उसके पीछे पीछे गया और उसके कंडे को पकड़कर अपना मुंह उसके कण के पास लेजाकर उससे कहा.
मैं- मैं सच कह रहा हूँ तू जवान होकर एकदम तूंच मॉल बन गई हो.
इतना कहकर मैं उसे छोड़कर बहार भगा. मेरी बात सुनकर मनीषा मुझे मरने के लिए दौड़ी लेकिन ब्रा में होने के कारन दरवाज़े पर hi रुक गई और मुझसे बोली.
मनीषा- भैया मैं आपको किसी दिन बहुत मरूंगी. आने दो पापा को मैं आज शिकायत करूंगी आपकी.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..