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- Dec 5, 2013
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अपडेट-85
मैं- सरिता अब मैं तुम्हारे हाँथ के सहारे अपने जिस्म को कमर से ऊपर उठाऊंगा तो तुम अपने आप को संभालना.
सरिता दी- ठीक है.
दीदी की हाँ सुनकर मैंने दीदी के हाँथ को पकड़कर अपने जिस्म को जोर देखर आधा शरीर कमर से ऊपर उठाया जिससे मरे लुंड सीधा दीदी की गांड से टकरा गया. 2 सेकंड तक लुंड गांड पर टच करने के बाद मैं नीचे वापस आ गया. मैं लगभग 3 मिनट तक ये एक्सेरसीज़े करने के बाद उठकर खड़ा हो गया. अब दीदी एकदम बेशर्म बैंकर मेरे नंगे लुंड को घोर घोर कर देख रही थी.
अब आगे.
फिर मैं नंगा hi जिम स्ट्रेचर पर लेट गया और दीदी से वाइट उठाने में हेल्प मांगी. दीदी ने मेरी हेल्प की वाइट उठाने में. कुछ देर एक्सेरसीज़े करने के बाद मैंने दीदी से कहा.
मैं- सरिता अब मुझे कमजोरी महसूस हो रही है.
सरिता दी- तो अब एक्सेरसीज़े बंद कर दो और आराम करो.
मैं- लेकिन मैं और कसरत करना चाहता हूँ. तुम मेरी हेल्प कर दो.
सरिता di-ab इसमें मैं तुम्हारी क्या मैडम कर सकता हूँ.
मैं- मुझे दूध पीला दो तो मुझे ताकत आ जाएगी.
सरिता दी- लेकिन अभी तो दूधवाले के आने में बहुत समय है. अभी कहा से तुझको दूध दू.
मैं- सरिता तुम्हे दूध के लिए दूधवाले का इंतज़ार करने की जरुरत नहीं है (उनकी चुकी को घोरकर) दूध तो तुम्हारे पास hi है मैं इसी से काम चला लूंगा.
मेरी बात सुनकर सरिता दी ने शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगी और बोली.
सरिता दी- हाट बेशरम. बहन का ढूढ़ पीना चाहता है. तुझे शर्म नहीं आती.
मैं- कैसी शर्म सरिता. यहाँ मुझे कमजोरी हो रही है और तुम्हे शर्म की पड़ी है.
सरिता दी- लेकिन मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैं नहीं पिलाऊंगी अपने दूध.
लेकिन मैं दीदी को इतने आसानी से छोड़ने वाला नहीं था. उनकी बातो से लग रहा था की वो तैयार हैं लेकिन लड़की ठहरी तो थोड़ा नखरा लाज़िमी बनता है करना. मैं दीदी से लगातार कहता रहा तो दीदी ने कहा.
सरिता दी- लो गई ये भी कोई बात हुई की कसरत करने औ तो तुम्हे दूध पुलाव.
मैं- तो क्या हुवा सरिता. भाई हूँ तुम्हारा और अपनी बहनो के दूध पर भाइयो का भी हक़ होता है.
सरिता दी- अच्छा ऐसा हक़ तो मैं पहली बार सुन रही हूँ.
मैं- लेकिन मैंने तो पहली बार नहीं सुना है ऐसा. बहुत से भाई हैं जो अपनी बहनो का दूध पिटे हैं सीधे चूचियों में मुंह लगाकर. और तुम्हारी चूचियों को देखकर लगता है की मुझे बहुत जल्दी ताकत आ जाएगी तुम्हारे दूध पीकर.
सरिता दी- (शर्माकर) ऐसा क्या है मेरे दूध में जो तू इन्हे पीना चाहता है.
मैं- अभी तो तुमने मुझे अपना दूध पिलाया hi नहीं है तो कैसे बता सकता हूँ, लेकिन मुझे ऐसा लगता है की तुम्हारा दूध बहुत मीठा है. एकदम रसीला है. थोड़ा पीला दो न.
हम दोनों ऐसे हॉट कन्वर्सेशन के कारन बहुत गरम हो गए थे. दीदी की चूचिया हवस के कारन एकदम तन गई थी जिससे उनके निप्पल t-shirt के ऊपर से hi नज़र आ रहे थे. और मेरा लुंड तो झटके मार रहा था जिसे मैं अपने हांथो से पकडे हुवे था और दीदी मेरे लुंड को hi देख रही थी.
सरिता di-(thoda न नुकुर करते हुवे) ठीक है. लेकिन मैं कपडे नहीं उतरूंगी. अगर कपडे के ऊपर से पीना चाहो तो पि सकते हो.
मैं- कपडे के ऊपर से पिने में क्या मज़ा आएगा.
इतना कहकर मैं दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया और उनके कंधे को चूमने लगा और हाँथ आगे बढ़ा कर उनकी दोनों चूचियों को दबाने लगा और लुंड को उनकी गांड की दरार में घुसेड़ दिया. दीदी तो पहले hi गरम थी. मेरे ऐसा करने से और भी गरम हो gai.main उनकी चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा जिससे दीदी ssssssssssssshhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhh करने लगी और अपने दोनों हाथ उठाकर मेरी गार्डन में लप्पेट लिया मैं अपनी जीब निकलकर उनके कण को चाटने लगा और दीदी से कहा.
मैं- सरिता मुझे कमजोरी हो रही है. अपना दूध पिलाओ न.
Didi(Madhosi में) थोड़ी देर रुक जाए अभी. दूधवाला आता hi होगा.
मैं- नहीं सरिता मुझे दूधवाले का दूध नहीं पीना. मुझे दो दूधवाली का मीठा मीता और ताज़ा गरम दूध पीना है. पिलाओगी न मुझे अपना दूध.
इतना बोलकर मैंने दोनों हाँथ से दीदी की चूचियों को कसकर पकड़ लिया और कमर को थोड़ा पीछे करके खड़ा हो गया. कुछ सेकंड ऐसा खड़ा रहने के बाद मैंने उनकी चूचियों को कसकर मसलते हुवे अपने कमर को झटका दिया. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड की दरार में समां गया. दीदी की आनंद से आँख बंद हो गई और एक सिसकी उनके मुंह से निकली.
सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियीय धीरीईईए सीईई. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheeeyyyyyyy.
मैंने फिर से दीदी के कण और गार्डन चाटते हुवे दीदी से कहा.
मैं- सरिता अब तो मुझे भूख भी लग रही है. अपना दूध पिलाओगी अपने इस भूखे भाई को.
मेरी बात सुनकर दीदी ने गार्डन घुमाकर मेरी आँखों में देखा उनकी आँखे एकदम लाल हो गई थी. दोनों गाल गुलाबी हो गए थे. होंठ कैंप रहे थे. जब दीदी मेरी आँखों में देख रही थी तो मैंने उनकी चूचियों को जोर से दबाया. तो दीदी ने ssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhh की सिसकी ली और अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. और मेरे होंठो को चूसने लगी.
मैं भी दीदी का साथ देने लगा और उनकी चूचियों को दबाते हुवे निचे से अपनी कमर को हल्का हल्का धक्का देता रहा. थोड़ी देर धीरे धीरे चूचियों को मसलने के बाद मैंने उनकी चूचियों को जोर से मसल दिया. दीदी फिर से सिसक पड़ी.
सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मरीईई भाईईईईई. धीरीई से ooooooooohhhhhhhhhhhhhhh धारड़ड़ड़ड़ होताआ हिअआअ.
मैं- अपना दूध पिलाओ सरिता मैं तुम्हारे सरे दर्द दूर कर दूंगा. पि लू तुम्हारा दूध.
सरिता दी- hhhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmm
दीदी की बात सुनकर मैं उनको छोड़कर पीछे हैट गया और चेस्ट स्टैंड पर जाकर बैठ गया. मैं अभी भी नंगा hi था. स्टैंड पर बैठने से मेरा लुंड ऊपर की तरफ तम्बू बनाकर खड़ा हो गया. दीदी मेरे लुंड को हवस भरी नज़रो से देखने लगी. मैंने दीदी की तरफ देखते हुवे कहा.
मैं- सरिता यहाँ आओ और मेरी गॉड में बैठो.
Main-Aise कैसे. अपनी लोअर तो पहन लो.
मैं- नहीं सरिता मुझे तुम्हारा दूध ऐसे hi पीना है. कुछ नहीं होता यार आओ मेरी गॉड में बैठो.
दीदी भी अब पूरी गरम हो hi गाइट hi. मेरी बातो को सुनकर दीदी मेरे लुंड को देखती रही कुछ देर लुंड को देखने के बाद दीदी मेरे पास आई और आराम से अपनी गांड मेरे लुंड पर रखकर बैठ गई. मेरा लुंड दीदी की गांड के निचे डाब गया तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- मैं ऐसे कैसे तुम्हारा दूध पि पाउँगा सरिता.
सरिता दी- तुम खुद hi कह रहे हो मेरी गॉड में बैठो.
मैं- हाँ सरिता लेकिन मेरी तरफ मुंह करके बैठो तभी तो पिऊंगा.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी कड़ी हो गई और अपने दोनों टंगे फैलाकर अपनी मोती मोती और गद्देदार गांड मेरी जांधो पर राखी और अपनी छूट से मेरा लुंड फसकर आगे की तरफ खिसक आगि. अब सेतुएशन ये थी की अगर कोई हमें देख लेता तो उसको यही लगता की हम दोनों चुदाई कर रहे हैं. मैंने दीदी की नशीली और हवस भरी आँखों में देखते हुवे कहा.
मैं- तो बताओ सरिता रानी. अपने भाई को अपने दूध कैसे पिलाना पसंद करेंगी.
सरिता di(meri आँखों में देखकर) पीना तो तुझको है जैसे तुझे पीना हो वैसे पि ले.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की t-shirt निचे से पकड़ ली और उसे ऊपर खिसकने लगा. दीदी ने भी अपने हाँथ ऊपर कर t-shirt उतरने में मेरी मदद की. अब दीदी के मखमली शरीर पर ऊपर ब्रा थी. दीदी की ब्रा उनकी दोनों चूचियों को संभल पाने में असमर्थ थी.
तभी तो दीदी की चूचिया आधे से ज्यादा ब्रा से बहार झांक रही थी. दीदी तो दिखने में वैसे भी बहुत सेक्सी थी. लेकिन ब्रा में दीदी की जिस्म और भी जानलेवा था.
मैंने दीदी की तरफ देखते हुवे अपना मुंह निचे झेककर उनकी चूचियों की घाटियों में घुसा दिया और उसकी नर्माहट का मज़ा लेने लगा. मेरे होंठ अपनी क्लीवेज पर लगते hi दीदी की मुंह से ssssssssssssssaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ssssssssshhhhhhhhhh की आवाज़ निकली और दीदी ने अपनी गोरी और मखमली बहे मेरे गले में दाल दी और मेरे सर को अपनी ृषभरी चूचियों पर बढ़ाने लगी. दीदी के जिस्म से निकलती पसीने की दुर्गंद और दीदी के गदराये जिस्म की सुगंद दोनों मिलकर मेरे शरीर में एक नया रोमांच पैदा कर रही थी
मैंने अपना हाँथ दीदी की गांड से थोड़ा ऊपर रखकर सहलाने लगा और दीदी की चूचियों के बिच अपने चेहरे को रगड़ने लगा. कुछ देर अपना चेहरा रगड़ने के बाद मैंने जीभ निकली और उनकी चूचियों की घाटी को चाटने लगा. और निचे से अपनी कमर को मूवमेंट देकर अपना लुंड दीदी की छूट पर घिसने लगा. दीदी तो मज़े के सातवे आसमान में उड़ रही थी.
मेरे छूट पर लुंड रगड़ने से दीदी भी मस्ती में अपनी छूट का प्रेसर मेरे लुंड पर बढ़ने लगी और मेरी जीभ को अपनी चूचियों के इर्द गिर्द महसूस करके sssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhh आआआआअह्हह्ह्ह्ह करने लगी. मैंने भी अब दीदी की चूचियों की घाटी से मुंह उठाकर ब्रा में कैद दीदी की चूचियों को चाटने लगा. थोड़ी देर उनकी चूचियों को चाटने के बाद मैं अपने हाँथ ऊपर की तरफ सरकने लगा और ब्रा के हुक में फसकर ब्रा का हुक खोल दिया. जिससे दीदी की चूचिया किसी बॉल की तरह ब्रा से निकलकर बहार आ गयी. और मेरी आँखों के सामने थिरकने लगे. मैं तो दीदी की चूचिया देखकर जैसे खो सा गया. और दीदी से बोलै.
मैं- वह सरिता क्या नशीला हुस्न है तेरा. ये तेरी भरी भरी और बड़ी बड़ी चूचिया एकदम तानी हुई हैं. तनिक भी ढीलापन नहीं है इनमे. और तुम्हारी चूचियों में बहुत रास भरा है जिसे पिने में बहुत मज़ा आएगा.
इतना कहकर मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने होंठ दीदी के छुडास से लाल हो चुके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. और अपने हाँथ से दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी भी मेरा होंठ चूसने में साथ देने लगी. लगभग 3 मिनट तक एक दूसरे के होंठ चूसने और उनकी चूचिया दबाने के बाद हम दोनों अलग हुवे. थोड़ी देर बाद मैंने अपने होंठो से दीदी की नंगी चूचिया चूमने लगा. चूचिया चूमते चूमते मैंने दीदी के एक निप्पल को मुंह में भर लिया और चूसने लगाई. निप्पल मुंह में लेते hi दीदी की मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ssssssssssssss sssssssssssssss की आवाज़ निकल गई और दीदी ने अपना हाँथ मेरे सर पर रखकर मेरे बालो को सहलाने लगी.
मैं दीदी के निप्पल को दबा दबा के चूस रहा था और निचे से अपने लुंड का झटका दीदी की छूट पर मार रहा था. मैंने कभी देर एक निप्पल को चूसा फिर उसे छोड़कर दूसरे निप्पल को चूसने लगा. मैं पूरा मुंह खोलकर दीदी की चूचियों को जितना हो सकता था मुंह में लेकर चूस रहा था. जिससे दीदी को भी बहुत मज़ा आने लगा था और वो कहने लगी.
सरिता दी- Aaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii. बहुत्तट्ठ माज़आआआ आए राहाआआ हैआईई. ऐसे हीई चूऊउउउउसस्स्सस्स मेरी भाआआअआइई अपनीईई सरिता कीईई छूछीयोओओओओओ कोऊ.
मैं दीदी की बात सुनकर और जोर जोर से दीदी की चूचियों को चूसने लगा. दीदी की चूचियों में जैसे एक नशा सा था. जिसको चूसने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं चूचियों को चूसकर जैसे पागल सा हो गया और दीदी भी अपनी चूचिया चूसा चूसा कर पागल हो रही थी, तभी तो मस्ती में दीदी अपनी छूट को मेरे लुंड पर तेज़ तेज़ घिस रही थी. मैं दीदी की चूचियों को चूसते चूसते दीदी की अपने गॉड में उठाकर खड़ा हो गया और और निचे से अपना लुंड उनकी गांड में सटाकर दीदी को उसपर बैठा दिया जिससे दीदी की गांड की दरार में मेरा लुंड घुसकर सीधे उनके ासशोले पर लगा. दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaasssssssss sssssssssss की आवाज़ निकल गई.
थोड़ी देर दीदी को अपनी गॉड में उठाकर अपने लुंड पर बैठने के बाद मैं दीदी को अपनी गॉड में ऊपर निचे करने लगा और दीदी की चूचियों को चूसने लगा. ऐसा लग रहा था की मैं दीदी को छोड़ रहा हूँ. मेरे लुंड की ठोकर अपनी छूट पर पड़ते hi दीदी कैंप जाती थी. दीदी की लोअर पूरी गीली हो गई थी. मैंने दीदी की छूट पर अपने लुंड की एक तेज़ ठोकर मरी और दीदी की चूचियों को काट लिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.
सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii क्याआआआआ कारररररररर रहा हैईईई. दांत्तत्ततत्तत क्योनंन्नं गाडायआ राहाआआआआ हैईईईई. कीसीईईईइनी देख लियाआआ तो क्याआ जाआआआआआब दूंणणणगीीीी. धीरीईए चूस्स्स्सस्स्स्स मेरेईईईई bhaaiiiiiiiiii. बहुत्तट्ठ अच्छाआ लगगगगगगगग राहाआआआ हैईईई.
मैंने कुछ देर दीदी को गॉड में उठाये उनकी छूट पर लुंड रगड़ते और उनकी चूचिया पिटे खड़ा रहा. फिर मैंने दीदी को चेस्ट स्टैंड पर लिटा दिया और दीदी की चूचिया पिटे हुवे दीदी के ऊपर लेट गया और अपना लुंड उनकी छूट पर लोअर के ऊपर से रगड़ने लगा. दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.
सरिता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheyyyyyyyyyyyyy Abhhiiiiiiiiiiiii Aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh तू कीटनाआआआ ाआअच्छाआ haiiiiiiiiii. तू मेराआआआआ कीटनाआआआ ख्याहाल रखता हीी. मुझेईईई कुछःह होओओओ रहहाआआ हिअआआअ भीआइइइइइइइइइ मेरी ाण्ड्डड्डड्डड़ररररररर जैईईईसीएएएएएएए चीटीईईईई रेंगगगगगगगग राहीईई हाईंण्णन मेंनननननननन बहुत्तत्त pyaasiiiiiiiiii होऊणणन्न अभीइइइइइइ मेरीए अछ्हीईईईई भाईईईईई मेरिइइइइइइइ प्याआआस्स्सस्स्स्स बुझायआ दी.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
मैं- सरिता अब मैं तुम्हारे हाँथ के सहारे अपने जिस्म को कमर से ऊपर उठाऊंगा तो तुम अपने आप को संभालना.
सरिता दी- ठीक है.
दीदी की हाँ सुनकर मैंने दीदी के हाँथ को पकड़कर अपने जिस्म को जोर देखर आधा शरीर कमर से ऊपर उठाया जिससे मरे लुंड सीधा दीदी की गांड से टकरा गया. 2 सेकंड तक लुंड गांड पर टच करने के बाद मैं नीचे वापस आ गया. मैं लगभग 3 मिनट तक ये एक्सेरसीज़े करने के बाद उठकर खड़ा हो गया. अब दीदी एकदम बेशर्म बैंकर मेरे नंगे लुंड को घोर घोर कर देख रही थी.
अब आगे.
फिर मैं नंगा hi जिम स्ट्रेचर पर लेट गया और दीदी से वाइट उठाने में हेल्प मांगी. दीदी ने मेरी हेल्प की वाइट उठाने में. कुछ देर एक्सेरसीज़े करने के बाद मैंने दीदी से कहा.
मैं- सरिता अब मुझे कमजोरी महसूस हो रही है.
सरिता दी- तो अब एक्सेरसीज़े बंद कर दो और आराम करो.
मैं- लेकिन मैं और कसरत करना चाहता हूँ. तुम मेरी हेल्प कर दो.
सरिता di-ab इसमें मैं तुम्हारी क्या मैडम कर सकता हूँ.
मैं- मुझे दूध पीला दो तो मुझे ताकत आ जाएगी.
सरिता दी- लेकिन अभी तो दूधवाले के आने में बहुत समय है. अभी कहा से तुझको दूध दू.
मैं- सरिता तुम्हे दूध के लिए दूधवाले का इंतज़ार करने की जरुरत नहीं है (उनकी चुकी को घोरकर) दूध तो तुम्हारे पास hi है मैं इसी से काम चला लूंगा.
मेरी बात सुनकर सरिता दी ने शर्मा कर दूसरी तरफ देखने लगी और बोली.
सरिता दी- हाट बेशरम. बहन का ढूढ़ पीना चाहता है. तुझे शर्म नहीं आती.
मैं- कैसी शर्म सरिता. यहाँ मुझे कमजोरी हो रही है और तुम्हे शर्म की पड़ी है.
सरिता दी- लेकिन मुझे बहुत शर्म आ रही है. मैं नहीं पिलाऊंगी अपने दूध.
लेकिन मैं दीदी को इतने आसानी से छोड़ने वाला नहीं था. उनकी बातो से लग रहा था की वो तैयार हैं लेकिन लड़की ठहरी तो थोड़ा नखरा लाज़िमी बनता है करना. मैं दीदी से लगातार कहता रहा तो दीदी ने कहा.
सरिता दी- लो गई ये भी कोई बात हुई की कसरत करने औ तो तुम्हे दूध पुलाव.
मैं- तो क्या हुवा सरिता. भाई हूँ तुम्हारा और अपनी बहनो के दूध पर भाइयो का भी हक़ होता है.
सरिता दी- अच्छा ऐसा हक़ तो मैं पहली बार सुन रही हूँ.
मैं- लेकिन मैंने तो पहली बार नहीं सुना है ऐसा. बहुत से भाई हैं जो अपनी बहनो का दूध पिटे हैं सीधे चूचियों में मुंह लगाकर. और तुम्हारी चूचियों को देखकर लगता है की मुझे बहुत जल्दी ताकत आ जाएगी तुम्हारे दूध पीकर.
सरिता दी- (शर्माकर) ऐसा क्या है मेरे दूध में जो तू इन्हे पीना चाहता है.
मैं- अभी तो तुमने मुझे अपना दूध पिलाया hi नहीं है तो कैसे बता सकता हूँ, लेकिन मुझे ऐसा लगता है की तुम्हारा दूध बहुत मीठा है. एकदम रसीला है. थोड़ा पीला दो न.
हम दोनों ऐसे हॉट कन्वर्सेशन के कारन बहुत गरम हो गए थे. दीदी की चूचिया हवस के कारन एकदम तन गई थी जिससे उनके निप्पल t-shirt के ऊपर से hi नज़र आ रहे थे. और मेरा लुंड तो झटके मार रहा था जिसे मैं अपने हांथो से पकडे हुवे था और दीदी मेरे लुंड को hi देख रही थी.
सरिता di-(thoda न नुकुर करते हुवे) ठीक है. लेकिन मैं कपडे नहीं उतरूंगी. अगर कपडे के ऊपर से पीना चाहो तो पि सकते हो.
मैं- कपडे के ऊपर से पिने में क्या मज़ा आएगा.
इतना कहकर मैं दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया और उनके कंधे को चूमने लगा और हाँथ आगे बढ़ा कर उनकी दोनों चूचियों को दबाने लगा और लुंड को उनकी गांड की दरार में घुसेड़ दिया. दीदी तो पहले hi गरम थी. मेरे ऐसा करने से और भी गरम हो gai.main उनकी चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा जिससे दीदी ssssssssssssshhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhhhhhhh करने लगी और अपने दोनों हाथ उठाकर मेरी गार्डन में लप्पेट लिया मैं अपनी जीब निकलकर उनके कण को चाटने लगा और दीदी से कहा.
मैं- सरिता मुझे कमजोरी हो रही है. अपना दूध पिलाओ न.
Didi(Madhosi में) थोड़ी देर रुक जाए अभी. दूधवाला आता hi होगा.
मैं- नहीं सरिता मुझे दूधवाले का दूध नहीं पीना. मुझे दो दूधवाली का मीठा मीता और ताज़ा गरम दूध पीना है. पिलाओगी न मुझे अपना दूध.
इतना बोलकर मैंने दोनों हाँथ से दीदी की चूचियों को कसकर पकड़ लिया और कमर को थोड़ा पीछे करके खड़ा हो गया. कुछ सेकंड ऐसा खड़ा रहने के बाद मैंने उनकी चूचियों को कसकर मसलते हुवे अपने कमर को झटका दिया. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड की दरार में समां गया. दीदी की आनंद से आँख बंद हो गई और एक सिसकी उनके मुंह से निकली.
सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियीय धीरीईईए सीईई. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheeeyyyyyyy.
मैंने फिर से दीदी के कण और गार्डन चाटते हुवे दीदी से कहा.
मैं- सरिता अब तो मुझे भूख भी लग रही है. अपना दूध पिलाओगी अपने इस भूखे भाई को.
मेरी बात सुनकर दीदी ने गार्डन घुमाकर मेरी आँखों में देखा उनकी आँखे एकदम लाल हो गई थी. दोनों गाल गुलाबी हो गए थे. होंठ कैंप रहे थे. जब दीदी मेरी आँखों में देख रही थी तो मैंने उनकी चूचियों को जोर से दबाया. तो दीदी ने ssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhh की सिसकी ली और अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. और मेरे होंठो को चूसने लगी.
मैं भी दीदी का साथ देने लगा और उनकी चूचियों को दबाते हुवे निचे से अपनी कमर को हल्का हल्का धक्का देता रहा. थोड़ी देर धीरे धीरे चूचियों को मसलने के बाद मैंने उनकी चूचियों को जोर से मसल दिया. दीदी फिर से सिसक पड़ी.
सरिता di-aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मरीईई भाईईईईई. धीरीई से ooooooooohhhhhhhhhhhhhhh धारड़ड़ड़ड़ होताआ हिअआअ.
मैं- अपना दूध पिलाओ सरिता मैं तुम्हारे सरे दर्द दूर कर दूंगा. पि लू तुम्हारा दूध.
सरिता दी- hhhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmm
दीदी की बात सुनकर मैं उनको छोड़कर पीछे हैट गया और चेस्ट स्टैंड पर जाकर बैठ गया. मैं अभी भी नंगा hi था. स्टैंड पर बैठने से मेरा लुंड ऊपर की तरफ तम्बू बनाकर खड़ा हो गया. दीदी मेरे लुंड को हवस भरी नज़रो से देखने लगी. मैंने दीदी की तरफ देखते हुवे कहा.
मैं- सरिता यहाँ आओ और मेरी गॉड में बैठो.
Main-Aise कैसे. अपनी लोअर तो पहन लो.
मैं- नहीं सरिता मुझे तुम्हारा दूध ऐसे hi पीना है. कुछ नहीं होता यार आओ मेरी गॉड में बैठो.
दीदी भी अब पूरी गरम हो hi गाइट hi. मेरी बातो को सुनकर दीदी मेरे लुंड को देखती रही कुछ देर लुंड को देखने के बाद दीदी मेरे पास आई और आराम से अपनी गांड मेरे लुंड पर रखकर बैठ गई. मेरा लुंड दीदी की गांड के निचे डाब गया तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- मैं ऐसे कैसे तुम्हारा दूध पि पाउँगा सरिता.
सरिता दी- तुम खुद hi कह रहे हो मेरी गॉड में बैठो.
मैं- हाँ सरिता लेकिन मेरी तरफ मुंह करके बैठो तभी तो पिऊंगा.
मेरी बात सुनकर सरिता दीदी कड़ी हो गई और अपने दोनों टंगे फैलाकर अपनी मोती मोती और गद्देदार गांड मेरी जांधो पर राखी और अपनी छूट से मेरा लुंड फसकर आगे की तरफ खिसक आगि. अब सेतुएशन ये थी की अगर कोई हमें देख लेता तो उसको यही लगता की हम दोनों चुदाई कर रहे हैं. मैंने दीदी की नशीली और हवस भरी आँखों में देखते हुवे कहा.
मैं- तो बताओ सरिता रानी. अपने भाई को अपने दूध कैसे पिलाना पसंद करेंगी.
सरिता di(meri आँखों में देखकर) पीना तो तुझको है जैसे तुझे पीना हो वैसे पि ले.
दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की t-shirt निचे से पकड़ ली और उसे ऊपर खिसकने लगा. दीदी ने भी अपने हाँथ ऊपर कर t-shirt उतरने में मेरी मदद की. अब दीदी के मखमली शरीर पर ऊपर ब्रा थी. दीदी की ब्रा उनकी दोनों चूचियों को संभल पाने में असमर्थ थी.
तभी तो दीदी की चूचिया आधे से ज्यादा ब्रा से बहार झांक रही थी. दीदी तो दिखने में वैसे भी बहुत सेक्सी थी. लेकिन ब्रा में दीदी की जिस्म और भी जानलेवा था.
मैंने दीदी की तरफ देखते हुवे अपना मुंह निचे झेककर उनकी चूचियों की घाटियों में घुसा दिया और उसकी नर्माहट का मज़ा लेने लगा. मेरे होंठ अपनी क्लीवेज पर लगते hi दीदी की मुंह से ssssssssssssssaaaaaaaaahhhhhhhhhhh ssssssssshhhhhhhhhh की आवाज़ निकली और दीदी ने अपनी गोरी और मखमली बहे मेरे गले में दाल दी और मेरे सर को अपनी ृषभरी चूचियों पर बढ़ाने लगी. दीदी के जिस्म से निकलती पसीने की दुर्गंद और दीदी के गदराये जिस्म की सुगंद दोनों मिलकर मेरे शरीर में एक नया रोमांच पैदा कर रही थी
मैंने अपना हाँथ दीदी की गांड से थोड़ा ऊपर रखकर सहलाने लगा और दीदी की चूचियों के बिच अपने चेहरे को रगड़ने लगा. कुछ देर अपना चेहरा रगड़ने के बाद मैंने जीभ निकली और उनकी चूचियों की घाटी को चाटने लगा. और निचे से अपनी कमर को मूवमेंट देकर अपना लुंड दीदी की छूट पर घिसने लगा. दीदी तो मज़े के सातवे आसमान में उड़ रही थी.
मेरे छूट पर लुंड रगड़ने से दीदी भी मस्ती में अपनी छूट का प्रेसर मेरे लुंड पर बढ़ने लगी और मेरी जीभ को अपनी चूचियों के इर्द गिर्द महसूस करके sssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhh आआआआअह्हह्ह्ह्ह करने लगी. मैंने भी अब दीदी की चूचियों की घाटी से मुंह उठाकर ब्रा में कैद दीदी की चूचियों को चाटने लगा. थोड़ी देर उनकी चूचियों को चाटने के बाद मैं अपने हाँथ ऊपर की तरफ सरकने लगा और ब्रा के हुक में फसकर ब्रा का हुक खोल दिया. जिससे दीदी की चूचिया किसी बॉल की तरह ब्रा से निकलकर बहार आ गयी. और मेरी आँखों के सामने थिरकने लगे. मैं तो दीदी की चूचिया देखकर जैसे खो सा गया. और दीदी से बोलै.
मैं- वह सरिता क्या नशीला हुस्न है तेरा. ये तेरी भरी भरी और बड़ी बड़ी चूचिया एकदम तानी हुई हैं. तनिक भी ढीलापन नहीं है इनमे. और तुम्हारी चूचियों में बहुत रास भरा है जिसे पिने में बहुत मज़ा आएगा.
इतना कहकर मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने होंठ दीदी के छुडास से लाल हो चुके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. और अपने हाँथ से दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी भी मेरा होंठ चूसने में साथ देने लगी. लगभग 3 मिनट तक एक दूसरे के होंठ चूसने और उनकी चूचिया दबाने के बाद हम दोनों अलग हुवे. थोड़ी देर बाद मैंने अपने होंठो से दीदी की नंगी चूचिया चूमने लगा. चूचिया चूमते चूमते मैंने दीदी के एक निप्पल को मुंह में भर लिया और चूसने लगाई. निप्पल मुंह में लेते hi दीदी की मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ssssssssssssss sssssssssssssss की आवाज़ निकल गई और दीदी ने अपना हाँथ मेरे सर पर रखकर मेरे बालो को सहलाने लगी.
मैं दीदी के निप्पल को दबा दबा के चूस रहा था और निचे से अपने लुंड का झटका दीदी की छूट पर मार रहा था. मैंने कभी देर एक निप्पल को चूसा फिर उसे छोड़कर दूसरे निप्पल को चूसने लगा. मैं पूरा मुंह खोलकर दीदी की चूचियों को जितना हो सकता था मुंह में लेकर चूस रहा था. जिससे दीदी को भी बहुत मज़ा आने लगा था और वो कहने लगी.
सरिता दी- Aaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhh Abhiiiiiiiiiii. बहुत्तट्ठ माज़आआआ आए राहाआआ हैआईई. ऐसे हीई चूऊउउउउसस्स्सस्स मेरी भाआआअआइई अपनीईई सरिता कीईई छूछीयोओओओओओ कोऊ.
मैं दीदी की बात सुनकर और जोर जोर से दीदी की चूचियों को चूसने लगा. दीदी की चूचियों में जैसे एक नशा सा था. जिसको चूसने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं चूचियों को चूसकर जैसे पागल सा हो गया और दीदी भी अपनी चूचिया चूसा चूसा कर पागल हो रही थी, तभी तो मस्ती में दीदी अपनी छूट को मेरे लुंड पर तेज़ तेज़ घिस रही थी. मैं दीदी की चूचियों को चूसते चूसते दीदी की अपने गॉड में उठाकर खड़ा हो गया और और निचे से अपना लुंड उनकी गांड में सटाकर दीदी को उसपर बैठा दिया जिससे दीदी की गांड की दरार में मेरा लुंड घुसकर सीधे उनके ासशोले पर लगा. दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaaaaasssssssss sssssssssss की आवाज़ निकल गई.
थोड़ी देर दीदी को अपनी गॉड में उठाकर अपने लुंड पर बैठने के बाद मैं दीदी को अपनी गॉड में ऊपर निचे करने लगा और दीदी की चूचियों को चूसने लगा. ऐसा लग रहा था की मैं दीदी को छोड़ रहा हूँ. मेरे लुंड की ठोकर अपनी छूट पर पड़ते hi दीदी कैंप जाती थी. दीदी की लोअर पूरी गीली हो गई थी. मैंने दीदी की छूट पर अपने लुंड की एक तेज़ ठोकर मरी और दीदी की चूचियों को काट लिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.
सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii क्याआआआआ कारररररररर रहा हैईईई. दांत्तत्ततत्तत क्योनंन्नं गाडायआ राहाआआआआ हैईईईई. कीसीईईईइनी देख लियाआआ तो क्याआ जाआआआआआब दूंणणणगीीीी. धीरीईए चूस्स्स्सस्स्स्स मेरेईईईई bhaaiiiiiiiiii. बहुत्तट्ठ अच्छाआ लगगगगगगगग राहाआआआ हैईईई.
मैंने कुछ देर दीदी को गॉड में उठाये उनकी छूट पर लुंड रगड़ते और उनकी चूचिया पिटे खड़ा रहा. फिर मैंने दीदी को चेस्ट स्टैंड पर लिटा दिया और दीदी की चूचिया पिटे हुवे दीदी के ऊपर लेट गया और अपना लुंड उनकी छूट पर लोअर के ऊपर से रगड़ने लगा. दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.
सरिता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhheyyyyyyyyyyyyy Abhhiiiiiiiiiiiii Aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh तू कीटनाआआआ ाआअच्छाआ haiiiiiiiiii. तू मेराआआआआ कीटनाआआआ ख्याहाल रखता हीी. मुझेईईई कुछःह होओओओ रहहाआआ हिअआआअ भीआइइइइइइइइइ मेरी ाण्ड्डड्डड्डड़ररररररर जैईईईसीएएएएएएए चीटीईईईई रेंगगगगगगगग राहीईई हाईंण्णन मेंनननननननन बहुत्तत्त pyaasiiiiiiiiii होऊणणन्न अभीइइइइइइ मेरीए अछ्हीईईईई भाईईईईई मेरिइइइइइइइ प्याआआस्स्सस्स्स्स बुझायआ दी.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..