अपडेट-116
मैं- क्या हो रहा है मनीषा और कहाँ हो रहा है. और मैं क्या करू. बोलो मनीषा.
मनीषा- (एकदम मदहोशी में)- कमीने भैयाआआ aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मेरिइइइइ चूऊउत्तत्त मई कुछः हूँ रहा हीी. जीईसी कुछःह छालललल रहा हैई ुसककके ाँदाररर. कुछः कुछः भी करूओ भैइय्या. अब्ब और ना तड़पाओ अपनी छोटी बहन नं कोऊ.
मनीषा की बात सुनकर मैं उसके ऊपर से उठा और उसकी दोनों तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच बैठ गया.
अब आगे.
मनीषा की बात सुनकर मैं उसकी चूचियों की घुंडियो से अपनी जीभ हटाई और उसकी दोनों टैंगो के बिछ आकर बैठ गया और अपने दोनों हाथो से उसकी टांड को फैला दिया. उसकी छूट की फांके आपसे में झड़ी हुई थी. जिसमे से उत्तेजना के कारन मनीषा का कार्मस निकल रहा था. मैंने अपना सर झुककर एक बार जोर की साँस लेकर उसकी छूट की सुगंध अपने अंडाल डाली और अपना होंठ उसकी छूट पर रख दिया. मेरा होंठ छूट पर पड़ते hi मनीषा के जिस्म ने झटका खाया और मनीषा की मस्ती भरी सिसकी निकल गई.
मनीषा- oooooooooooohhhhhhhhhh भैईयाआआआ. Aaaaaaahhhhhhhhhhhhh.
मैं मनीषा की छूट को अपने होंठो से चूमने laga.main उसकी पूरी छूट पर और छूट के आस पास भी चूमने लगा. थोड़ी देर छूट चूमने के बाद मैंने उसकी छूट को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. मेरे ऐसा करने से मनीषा मचलने लगी. वो मस्ती में अपने दोनों हांथो से अपनी चूचियों को सहलाने लगी. मैं मनीषा की छूट को मुंह में भर भर कर चुस्त रहा. वह मस्ती में बोली.
मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भीयाआ. बायस ऐसी हीईई. बहुतत्त अछहहआ लाजगगग रहा हैई भईया. खूबबब चुसोऊ मेरीए छूटत को आअह्हह्ह्ह्ह भाइय्य्या ाअप्प्प बाहुटत अच्छी haiiin.ooooohhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuiiiiiiiiiii मम्मीयी.
मनीषा की बात सुनकर मैंने कुछ देर और उसकी छूट को मुंह में भरकर चूसा फिर मैंने अपनी जीभ निकलकर उसकी छूट को चाटने लगा. मैंने एक हाँथ बढाकर उसकी चुकी पर उसके हाँथ के ऊपर रख दिया और दुसरे हाँथ की उंगलियों से उसकी क्लीट को सहलाने लगा. इस 3 तरफ़ा हमले से मनीषा एकदम छुडासी हो गई और जोर जोर से बोलने लगी.
मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh भीयाआ. ऑर्डर जूर्रर सीए चुऊशूऊ मेर्री िचुउत्त्त कोऊ. बाहूतट अछ्हा लाग रहहहआ हैईईई . आऍप बाहूऊउत्तत अछ्हा चुस्ती होऊ. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईयाँआ कहा जावू मेरररीई चूऊउत्तत कोऊ. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भीयाआ.
मनीषा की मस्ती भरी सिसकी सुनकर मैंने अपनी जीभ और तेज़ तेज़ उसकी छूट पर चलनी शुरू कर दी. उसकी छूट को chat-te हुवे मैं उसकी क्लीट भी और जोर जोर से मसलने लगा. उसकी क्लीट को मसलते हुवे मैं एक हाँथ से उसकी चुकी को दबाने लगा. ऐसा करने से मनीषा एकदम मस्त हो गई और अपने जिस्म को ऐंठते हुवे बड़बड़ाने लगी.
मनीषा- ooooooohhhhhhhhhhhhh भाईयईयाआ डार्लींगगगगग.. ऑर्डर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ चूसोओओओओ मेरीए छुटत कोऊ. आपपपप बहूत्त अछहहआ चुस्स्ती होऊ भईया. खायआ जावूओ मेरीए छूटत कोऊ. Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh भाइय्याअ मुझी कुछःह हूँ रहहा हैई ऐसा लग रहा हैई कोई कुछःह निकालनी वाला ही मेरीए छुटत सीए. औरर जूरर सी चुसू भईया.
मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ उसकी चुकी से हटा लिया और उसकी छूट को अपने मुंह में भरकर जोर से चूसकर छोड़ दिया और अपना सर ऊपर उठा लिया. मनीषा एकदम झड़ने के करीब पहुंच चुकी थी. मेरे ऐसा करने से उसको बहुत बुरा लगा. वो अपनी गार्डन उठाकर मुझे देखने लगी. उसका चेहरा एकदम तमतमाया हुवा था. चेहरा लाल हो गया था. वो मुझसे इशारे में छूट चूसने के लिए कह रही thi,lekin जब मैंने कुछ नहीं किया तो वो बोली.
मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैईयाआ रुक्खक्क क्यूँ गयई. छातो न मेरी छूट को. मैं झाड़ने वल्लीइ होऊं.
मैं- मैं तुम्हारी छूट चाटूँगा, लेकिन उसके पहले मेरे कुछ सवालों का सही सही जवाब दो.
मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आपको जो भी पूछनेआए हूँ वोऊ बाअद मी पूछह लेना. लेकिननं अभी मुझी शांततः कर दोऊ. मेरीए छूट चातुओ भैया.
Main(manisha की क्लीट को सहलाते हुवे). पहले ये बताओ की तुम सविता दीदी, सरिता दीदी और मेरे बारे में क्या- क्या जानती हो.
Manisha(nashili नज़रो से देखते हुवे)- मैं कुछ नाहीइ जैंतीई भैईया. आआअह्ह्ह मेरीए चुउत्त्त. मुझी ठंडा कर दोऊ भईया.
Main(clit सहलाते हुवे)- तुम झूठ बोल रही हूँ. अभी थोड़ी देर पहले तुमने कहा था की मैं तुम्हे दोनों दीदियो की तरह प्यार करू.
मनीषा( सिसकते हुवे) वोओओओ तू माईनेई आईसीए हीईई बुल्ल्ल्ल दिया था. ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह भईया कुछ कारु.
Main(uski एक चुकी को दबाते हुवे) जब तक तुम नहीं बोलोगी तब तक मैं कुछ नहीं करूँगा.
Manisha(hatash hokar)achhhaaa थीइक हैई भईया मैंनं बाटत्तातीई हूँण. मैंन आपपप तीनूओ की बारी मई साब जानती होऊणन.
मैं- वही तो पूछह रहा हूँ की तू कैसे ये सब जानती है.
Manisha-(machalte हुवे) मैनी जब सीए अआप ाऊररर साविइयत्ता डीईई की भीछहह यी साब षुरूउउ हव्वा तब सीए जानती हूँ. मैनी पाहले दीं सीए लेकर डीई की चूड़ाए ताकक साबबब कुछः अपनी आंखों सी देखा है. लेकिंन आप लोगो कोऊ को कभी पाटा ही नाहीइ छाला की मैं आप लोगो कोऊ चुदाई करती हुवी देखहतीई हूँ. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह भैइयाआ अब्ब तू कुछः करूओ. मीरीई छूट चातुओ.
मैं- और सरिता दी के बारे में कैसे पता चला.
मनीषा- ेक्क्क दींनन मैंनं दोपफार मई सरीयता डीडीई की कमरे मई गयी थिई तू व्वू वहा नहीं थी, लेकिननं उनका मोबाइल कमेरी में होई था. मैनी जब उनका मोबाइल उठाया और उसमे कुछ करने लगी तो मुझसे गलती से फेसबुक मैसेंजर खुल गया औरर वही पररर मैनी दीदी को किसी मीरा नाम की लड़की के साथ की गई चाट को पढ़ा. शायद वो पहली चाट थी रात वालीए जिस्मी दी ने कहा था की वो आपके कमरे में गई थी आपको दूधः देने. और आपने उनकी चूचिया देखि. जिसे उन्होंने उस मीरा को बताई तो उसने कहा था की वो आपको पता कर अपनी चुड़ै करवा ले.
तभी से मैंने दीदी पर नज़र रखनी शुरू कर दी. और जब दीदी जिम और कार सिखने के लिए पापा से कहा तो मुझे पूरा विस्वाश हो गया की दीदी ने मीरा की बात मन ली है. फिर तो मैं रोज़ दीदी आपके कमरे में जिम करना सिखने जाती थी और आप दीदी को चुदाई का पथ पढ़ते थे. आआआआहहहहहहह भईया अब्ब तो मैंने आपको सब बता दिया ही अब तू मेरीए प्यास बुझा दू. चट्टू मेरी छूट को.
मैं- (उसकी छूट को चूसकर)- तो तुमने ये सब मम्मी पापा को क्यों नहीं बताया.
मनीषा- ये भी कोई बताने वाली बात थी भैया. अगर मम्मी पापा को पता चलता इस बारे में तो उन्हें कितनी तकलीफ होती. फिर या तो वो आपको घर से निकल देते. या दोनों दीदियो के साथ कुछ गलत कर देते या फिर अपने साथ कुछ गलत कर लेते. और मैं इन तीनो में से कुछ भी नहीं होने देना चाहती थी. क्योंकि मैं आप सबसे बहुत प्यार करती हूँ. अब खुस भैया. अब तो चुसो मेरी छूट.
Main-(uski छूट को चूसकर)- लेकिन जब तुम्हे शुरू से सब पता था तो तुमने हम सब को क्यों नहीं रोका. और तुम्हे ये सब देखकर बुरा नहीं लगा की हम भाई बहन आपस में चुदाई कर रहे हैं.
मनीषा- मुझे ये देखकर बहुत बुरा लगा की आप तीनो भाई बहन होकर भी चुदाई कर रहे हैं. मन तो कर रहा था की मैं कमरे में घुस जाऊ और अप्प तीनो को मर कर पुछु की आप सब को ऐसा घिनौना काम करते हुवे शर्म नहीं आती, लेकिन मैं कुछ सोचकर ऐसा नहीं कर पाई भैया.
मैं- क्या सोचकर ऐसा नहीं कर पाई तुम.
मनीषा- जाने दो भैया. मत पूछो वो बात मुझसे.
मैं- अब जब इतना सबकुछ बता दिया है तो वो बात भी बताने में कैसी शर्म.
मनीषा- वो क्या है न भैया मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ. और मेरा शुरू से hi आप पर krus(aakarshan) था. और आपने जिम में इतनी सॉलिड बॉडी बनाई हुई है की मैं जब भी आपको टॉपलेस देखती थी तो मुझे आप बहुत ज्यादा अच्छे लगते थे. मेरा मन करता था की मैं दौड़कर आपसे लिपट जाऊ. और मुझे दर था की मेरे ऐसा करने से कही आप शर्मिंदा होकर घर छोड़कर और मुझे छोड़कर न चले जाओ और मैं आपको किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती थी. इसलिए मैंने ये बात सबसे छुपाई.
मनीषा की बात सुनकर मुझे बहुत हैरानी हुई और उसपर प्यार भी बहुत आया. मनीषा को मेरी कितनी परवाह थी. शायद उसके मन में मेरे लिए शुरू से hi कुछ था. इस बात को कन्फर्म करने के लिए मैंने मनीषा से पूछा.
मैं- तो क्या तुम बहुत पहले से hi मुझसे छुड़वाना चाहती थी.
मनीषा- कितनी गन्दी सोच है आपकी भैया. ये बस मेरा आकर्षण मात्र था. मैंने कभी भी आपके साथ ये सब करने का नहीं सोचा था.
मैं- पहले नहीं सोचा था. इसका मतलब अब ये सब करना का तुमने सोचा है.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन अपनी गार्डन दूसरी तरफ करके मुस्कुराने लगी. मैंने उसकी छूट को सहलाते हुवे पूछा.
मैं- अच्छा मनीषा एक बात सच सच बताओ. जब तुम देखती थी की मैं सरिता दीदी और सविता दीदी को छोड़ रहा हूँ ये उनको नंगा करके उनके नशीले जिस्म से खेल रहा हूँ. तो ये सब देख कर तुम्हारे मन में क्या आता था.
मनीषा- अब जाने दो न भैया. आप ने जो पूछा मैंने सब कुछ आपको सच सच बता दिया. अब तो मुझे और न तड़पाओ. कुछ तो रहम करो अपनी बहन पर.
मैं- बस यही बता दो. फिर मैं तुम्हारी तड़प mita-ta हूँ.
मनीषा- जब आप सरिता दीदी को छोड़ते थे और सविता दीदी को नंगा करके उनके बदन से खेलते थे तो ये देखकर मुझे उनसे बहुत जलन होती थी. मैं हमेशा सोचती थी की काश की दीदी की जगह मैं होती तो आप मेरे बदन से खेलते और mujhee……………………..(sharmakar चुप हो गई)
मैं- मतलब तू चाहती थी की दीदी की जगह तू होती और मैं तेरे बदन से खेलता और तुझे छोड़ता. क्या बात है मनीषा तू सच में चाहती है की मैं तुझे छोड़ू.
मनीषा- क्यों तड़पा रहे हो भैया. सब कुछ तो बता दिया है मैंने. अब और क्या बताऊ. यहाँ मेरा जिस्म जल रहा है और आपको मस्ती सूझ रही है.
मैं- नहीं तू पहले बता की तू सच में मुझसे छुड़वाना चाहती है.
Manisha(thoda नाराज़गी के साथ)- आप न भैया, कभी कभी एकदम चुटिया वाली हारकर कर देते हैं. आप दोनों दीदी को छोड़ते हैं. ये बात मैंने किसी को नहीं बताई. और मैं आप सबसे नाराज़ भी नहीं हूँ, उस दिन मौसी के यहाँ सरिता दीदी को जाना था, लेकिन उनकी जगह मैं चली गई, क्योंकि दीदी को आपसे चुदाई करवानी थी और मैंने आपको प्राइवेसी दे दी की आप दीदी को छोड़ सको. और तो और इतनी रात को मैं आपके कमरे में नंगी आपके बिस्टेर पर पड़ी हुई हूँ. फिर भी बार बार वही सवाल पूछ रहे हो की मैं आपसे छुड़वाना चाहती हूँ या नहीं. अब मैं क्या इस बात को माइक लेकर अन्नोउंस करू की मैं आपसे छुड़वाना चाहती हूँ. अरे इस बात को तो कोई चुटिया भी समझ जायेगा, लेकिन आप इतने बड़े ठरकी होकर भी ये फालतू का सवाल पूछ रहे हैं.
मनीषा की बात सुनकर मैं बहुत खुश हुआ. मैंने मनीषा के ऊपर झुककर उसके होंठो को चुम लिया और उसकी चूचियों को जोर से दबाकर कहा.
मैं- वाह्ह्ह्ह मनीषा. तुमने तो आज मुझे खुश कर दिया. तू मुझसे छुड़वाना चाहती है. ये सुनकर मुझे विस्वास नहीं हो रहा है. मैं तुझे बहुत अचे से छोडूंगा. तू एकदम छुड़वाने लायक मॉल हो गई है मनीषा. तुझे छोड़ने में बहुत मज़ा आएगा.
Manisha(kheejhkar)- ारी यार भैया. आप सच में चुटिया हो. ये सब बाद में सोच लेना. पहले मुझपर ध्यान दो. मेरी छूट जल रही है. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है. मेरी प्यास बुझा दो अब. चाटो मेरी छूट को.
मनीषा की बात सुनकर मैंने उसकी टांको को पकड़कर फैला दी और अपनी जीभ निकल कर उसकी छूट चाटने लगा. एक हाँथ बढाकर मैंने मनीषा की चुकी को पकड़ लिया और उसे मसलने लगा. मैं मनीषा की पूरी छूट अपनी जीभ से चाट रहा था. छूट चाटने के बाद मैंने अपनी जीभ की नोक बनाई और मनीषा की छूट में घुसाने लगा. मनीषा की छूट का छेड़ अभी बहुत छोटा था तो मेरी जीभ बस कुछ सेंटीमीटर hi उसकी छूट में गई. मैं अपनी जीभ से मनीषा की छूट कुरेदने लगा और उसकी चूचियों को दबाने लगा. मनीषा मस्ती भरी सिसकारी लेती हुई बोली.
मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईया. और जोरर से भईया. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. ऊऊओह्ह्ह्हह ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. हाँ भैया ऐसे ही चुसू.
मनीषा की बात सुनकर मैंने अपनी जीभ हटाकर मनीषा की छूट में अपनी एक ऊँगली गुशा दी और अंदर बहार करने लगा. और मनीषा के ऊपर झुककर उसकी चुकी को मुंह में भरकर चूसने लगा. ऐसा करने से मनीषा की सिसकारी तेज़ होने लगी और वो झड़ने के करीब पहुंच गई तो मैंने अपना मुंह उसकी चुकी से हटाकर उसकी छूट पर लगा दिया और एक हाँथ से क्लीट. एक ऊँगली से छूट और मुंह से छूट के ऊपर चाटने लगा. इस 3रे हमले को मनीषा बर्दास्त नहीं कर पायी और बड़बड़ाते हुवे झड़ने लगी.
मनीषा- आआआआअह्हह्ह्ह्हह भैइयाआ. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत अच्छा भैया और जोर जोर से चूसे मेरी छूट, और अंदर तक ऊँगली घुसाओ भैया. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऊऊऊओह्ह्ह्हह आप बहुत अच्छा चूसते हो भैया. आप किसी भी लड़की की को पता सकते हो भैया. आजजज आपने अपनी छोटी बहन को भी पता लियाआआआ. Ooooooohhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyy. मैं गईइइइइइ आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मैंन आए रहीए हुन्न भैय्या. मैं आकाशःह्ह मी उड़द रहीए हूँण कोइई मुझी सम्भाललली. ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह ागररर मुझी पात्तत्ताआ हॉटटा कोई चूऊउत्तत चाटवानी मी इतना मज़ा आता हैई तू मैंनंदीदिई कूऊहटकरररर उनकीइ जगहहह खुद्द्द अपनी छूटत आपको चाटवा देत्तीय. आआआअह्हह्ह्ह्ह भईया मैंन गाइइइइइइ. मेंननननन गइईईई. Uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiii मममममीयीय.
इतना कहकर मनीषा झड़ने लगी तो उसने अपने पैरो की कैची बनाकर मेरे सर को अपनी छूट पर दबा लिया. मैं मनीषा की छूट का पूरा राश चूस चूस कर पि गया. उसकी छूट का रास बहुत स्वादिस्ट था. मेरी सभी बहनो की छूट का रास स्वादिस्ट है. थोड़ी देर तक मनीषा ऐसे hi लेती रही . फिर मैं उसकी टैंगो के बिच से उठा और मिनिषा को उठाकर जमीन पर बैठा दिया और मैं बीएड पर पािल लटककर बैठ गया और मनीषा से कहा.
मैं- जब तुमने सब कुछ देख hi लिया है तो मुझे नहीं लगता की तुम्हे कुछ बताने की जरूरत पड़ेगी. तुमको पता है की इसके बाद दोनों दिदिया क्या करती.
मेरे बैठने पर मारा लुंड एकदम टैंकर खड़ा था. मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे लुंड को पकड़ा और सहलाने लगी. थोड़ी देर लुंड सहलाने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ निकली और मेरे लुंड को चाटने लगी.
मनीषा पुरे लुंड पर अपनी जीभ चलकर उसे चाट रही थी. मैं मनीषा को सर की पकड़कर सहलाने लगा. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद मनीषा ने ढेर सारा थूक अपने मुंह से मेरे लुंड पर गिराया और अपने हांथो से उसे पुरे लुंड पर मलने lagi.lund पर थूक मलते हुवे मनीषा ने अपना सर निचे किया और मेरे pellhar(goti) को अपने मुंह में पूरा भर लिया और चूसने लगी. मेरी गोटी मनीषा के मुंह में जाते hi मैं सिसक उठा और उसका सर को हल्का सा दबाकर बोलै.
मैं- aaaaaahhhhhhhhhhhh मनीषआआआआ मेरिइइइइइइइ जानननननननन. बस ऐसे hi.
मनीषा मेरे गोटी को कुछ देर चूसने के बाद मेरी गोटी मुंह से निकल कर मुंह खोलकर मेरा 4 इंच लुंड मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. मनीषा किसी एक्सपर्ट की तरह मेरा लुंड चूस रही थी. मैं मनीषा के सर को अपने लुंड पर दबाता हुवा बोलै.
मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh डार्लिंग थोड़ा और अंदर लेकर चुसो मेरा लौंडा. ोुह्ह्हह्ह.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपना पूरा मुंह खोलकर जितना लुंड अंदर ले सकती थी. लेकर चूसने lagi.mujhe भी मस्ती छाने लगी. मैंने मस्ती में आकर मनीषा का सर मेरे लुंड बार दबाकर कुछ सेकंड होल्ड किया और फिर छोड़ दिया. मनीषा की आँखों में आँशु आ गए लेकिन उसने किछ कहा नहीं और फिर से मेरे लुंड को चूसने लगी. मैं अब बीएड से उठ खड़ा हुवा और मनीषा के सर को पकड़कर अपना पूरा लुंड एक झटके में उसके मुंह में पेल दिया और 10 सेकंड होल्ड करके लुंड बहार निकल लिया. मनीषा लुंड निकलने के बाद खू खू करने लगी. उसकी आँखों से आँशु बहकर उसके गलो पर आ गए थे. वो मेरे लुंड को हाथो से पकड़कर बोली.
मनीषा- दीदी सही बोलती थी. आप सच में एकदम जानवर हो. बिलकुल भी रहम नहीं करते.
इतना कहकर मनीषा ने फिर से मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैंने दोनों हांथो में मनीषा का सर पकड़ लिया और एक झटके में पूरा लुंड उसके मुंह में पेल दिया और अंदर बहार करने लगा, मनीषा के मुंह से गगगगूउउउउ गगगगूऊऊ की आवाज़ निकलने लगी मैं मस्ती में उसका मुंह तेज़ तेज़ पेलने लगा और कहने लगा.
मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा मेरीए जाननं. चू सछह मी कमाल की ही. तुणी पहली बार मी ही मेरा लुंड पुर्रा अपने मुंह मी ले लिया ही. तू बहुत अच्छा लुंड चूस रही ही बस ऐसे ही चूस अपने भाई का लुंड. और जोर से चूस जानेमन.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपना मुंह और खोल दिया और मैं और तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा. मनीषा बस गगगगुणु गगगगगगूउऊउउउ कारण्टी रही. अब मैं भी झड़ने के बिलकुल करीब आ गया था. इसलिए मैं और तेज़ तेज़ उसका मुंह छोड़ते हुवे बड़बड़ाने लगा.
मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषआआआ. मेरिइइइ जाणीमण्ण. टेरिइइइ गरम्म जवानी कोई तरहहह तेरा मुंह भी बहुत्त ग्रामं हैई. औरर तेज़्ज़ चूस मनीषा मैं आनी वाला हूँ टीरी मुँहहह मी. मैं गया मनीषा. लिए ऑर्डर अंडरर ले करररर चुसस्स मेरा लौड़ा. मैं गया. Ooooooooohhhhhhhhhh saaliiiiiiiiiii.
इतना कहकर मैं मनीषा के मुंह में झाड़ गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..