Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 13 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-115

मनीषा के बाथरूम जाने के बाद मैं बिस्टेर पर तक लगाकर बैठ गया और अपने लुंड को सहलाने लगा. लगभग 10 मिनट बाद मनीषा बाथरूम से निकलकर कमरे में आ गयी और दरवाज़े पर से hi खड़े होकर मुझे लुंड सहलाते हुवे देखने लगी. मैं लुंड सहलाते हुवे बिस्टेर से उठा और मनीषा के पास चला गया. मैंने मनीषा को पकड़कर अंदर किया और दरवाज़ा बंद करके उसे दीवाल के सहारे उल्टा सटाकर खड़ा कर दिया और उसके पीछे खड़ा हो गया. मैंने अपना हाँथ से उसकी कमर को सहलाने लगा. कमर सहलाने के बाद मैंने अपना दोनो हाँथ मनीषा के बगलो से डालकर उसकी दोनों चुचायो को मुट्ठी में भर लिया और दबाने लगा. मनीषा के मुंह से सिसकी निकलने लगी.

थोड़ी देर उसकी चूचियों को दबाने के बाद मैंने मनीषा को अपनी तरफ कहिहकर अपने से चिपका लिया जिससे मेरा लुंड मनीषा की गांड में घुस गया और मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaaahhhhhhh भैया निकल गया. मैं अपने लुंड का दबाव उसकी गांड पर बनाते हुवे अपने हांथो से उसकी चुकी दबाता रहा और अपनी जीभ निकलकर मनीषा की गार्डन को चाटने लगा. मनीषा की गार्डन को चाटते हुवे मैंने मिनिषा की पीठ की तरफ आने लगा. मनीषा मस्ती में aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैईया ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया करती रहियी. थोड़ी देर उसकी पीठ चाटने के बाद मैंने अपने होंठ मनीषा के कण के पास ले जाकर उसकी दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर जोर से मसलते हुवे अपने लुंड को उसकी कमर से पीछे करके एक झटके से अपनी कमर उसकी गांड पर दे मरी मनीषा दर्द और मस्ती में चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh bhaiiiyaaaaaaaaaaaaa. क्याआआ करररररर राहीईईई होऊ. डरडडडडडड होत्ता हैईईई मुझेईई.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे वासना के कारन लाल हो गयी थी. उसकी होंठ फड़फड़ा रहे थे. कुछ देर दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते रहे. थोड़ी देर मनीषा मेरी आँखों में देखने के बाद अपनी गार्डन निचे झुका ली और शर्माने लगी. मैंने मनीषा के दोनों हाँथ पकड़कर दीवाल से सटाकर अपने एक हाँथ से उसके दोनों हांथो को पकड़ लिया. जिससे मनीषा मेरी तरफ देखने लगी. मैं मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपना उसके होंठो को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा.

उसके होंठ चूसने से साथ मैंने अपना एक हाँथ निचे ले जाकर मनीषा की छूट पर कपडे के ऊपर से रख दिया. मनीषा की छूट गीली हो गयी थी. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi मनीषा का शरीर लहराया. मैं उसकी छूट को मुट्ठी में भरकर दबाने लगा. मनीषा बस gggggggguuuuuuuuuu gggggguuuuuuuuuu कर रही थी. थोड़ी देर मैंने मनीषा का होंठ चूसने के बाद अपनी जीभ उसके होंठो पर फिरने लगा तो मनीषा ने अपना मुंह खोल दिया जिससे मेरी जीभ मनीषा के मुंह में चली गई. जिसे वो चूसने लगी. पहले उसने मेरी जीभ धीरे चूसी. उसके बाद वो जोर जोर से मेरी जीभ चूसने लगी. थोड़ी देर मनीषा ने जीभ चूसने के बाद अपनी जीभ मेरे मुंह दे घुसा दी. मैं मनीषा की जीभ चूसते हुवे उसकी छूट को मुठी में भर भर कर दबाता रहा.

थोड़ी देर तक उसकी छूट दबाने के बाद मैंने उसकी पंतय को साइड में किया और अपनी एक ऊँगली उसकी छूट के मुंह पर रख दी और उसके होंठो से अपने होंठ हटा दिए. मैंने उसकी ाअंखो में देखते हुवे अपनी ऊगली एक झटके में उसकी छूट में पेल दी. मनीषा दर्द से सिसक उठी.

मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैईयाआआआआ. निकल्ल्लूऊऊऊ अपनीइ ऊंगलीई कोऊ aaaaaaaaaahhh. मुझे दर्द हो रहा है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ उसके दोनों हांथो से हटा लिया और एक हाँथ से उसकी छूट छोड़ते हुवे दूसरा हाँथ उसकी चुकी पर रखकर दबाने लगा. और अपने होंठो से उसके पुरे चेहरे को चूमने लगा. मनीषा ने मस्ती में आकर अपना एक हाँथ मेरे लुंड पर रख दिया.

मनीषा का हाँथ लैंड पर पड़ते hi मेरे मुंह से सिसकी निकल गयी और मैंने उसकी एक चुकी को जोर से दबा दिया. जिससे मनीषा aaaahhhhhhhhhhh भैय्याअ कहकर मेरे लुंड पर अपने हाँथ फिरने लगी. मैं मनीषा के चेहरे को चूमते हुवे निचे उसकी चूचियों तक आया और उसकी चूचियों के ऊपरी भाग को चूमने लगा. एक हाँथ की ऊँगली से मैं लगातार उसकी छूट में अंदर बहार करता रहा. मनीषा एकदम गरम हो गाइट hi. और वो एक हाँथ से मेरे लुंड को सहलाते हुवे दूसरे हाँथ से अपनी एक चुकी को भी सहलाने लगी. मैंने अपना हाँथ उसकी छूट से निकलकर उसके चुकी वाले हाँथ पर रख दिया और उसके हांथो को दबाकर उसकी चुकी को दबाने लगा.

थोड़ी देर उसकी चुकी को दबाने के बाद मैंने मनीषा का हाँथ हटाकर दोनों चूचियों को मुट्ठी में भर कर जोर से मसल दिया. जिससे मनीषा की चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh भाआईईईयाआआआ. थोड़द्दआ धीयड़ी डायबाहु. मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ होता हीी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के कपडे को निचे से पकड़ा और ऊपर उठाने लगा. मनीषा भी अपना हाँथ ऊपर उठाकर अपना कपडा उतरने में सहयोग किया कपडा उतारकर मैंने उसे जमीन पर फेंक दिया. अब मनीषा के जिस्म पर सिर्फ एक पंतय बची थी.



मैं उसके संगमरमरी जिस्म को घूरने लगा इस कारन मनीषा ने शर्म से अपनी गार्डन निचे कर ली. मैं मनीषा को पकड़कर बीएड के पास ले गया और बीएड पर बैठकर मनीषा को अपनी गॉड में बैठा लिया. जिससे मेरा लुंड उसकी गांड के निचे डाब गया. मनीषा ने अपने गांड हिलाकर मेरे लुंड को एडजस्ट कर के ठीक से बैठ गयी.

मैं अपनी जीभ निकलकर मनीषा की चिकनी पीठ चाटने लगा और अपने दोनों हांथो में उसकी चूचिया भरकर मसलने लगा. मनीषा मस्ती में आआआआह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करने लगी. मनीषा थोड़ा आगे jhuk-kar अपनी पीठ चतवती रही. उसकी पीठ खूब अच्छी तरह चाटने के बाद मैं उसकी गार्डन और कंधे को चाटने लगा. मनीषा ने मदहोशी में अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया. मैंने भी उसकी एक चुकी से हाँथ हटाकर पंतय को साइड में करके उसकी छूट के ऊपर रख दिया और रब करने लगा.

मनीषा ने मस्ती में अपनी आँखे बंद कर ली और मुझे चुकी और छूट से खेलने की छूट दे दी. मैंने भी मनीषा की चुकी को मुट्ठी में भर भर कर जोर जोर से दबाते हुवे मनीषा की छूट में अपनी एक ऊँगली घुसा दी. मनीषा मस्ती में चीख पड़ी.

मनीषा- आआआअह्हह्ह्ह्ह भाइयाँआ. क्याआ काअररर्र रही होओओओओ. ढ़हिरररीई काअरररओओओओओ भईयाआआआ..

मैं उसकी चुकी को और तेज़ तेज़ दबाने लगा और छूट में तेज़ तेज़ ऊँगली करने लगा. मनीषा अपना सर मेरे कंधे पर रखे जोर जोर से साँस लेने लगी और अपने होंठो को काटने लगी. मनीषा पर वासना एकदम चरम पर पहुंच गाइट hi इसलिए वो मुझसे बोलने लगी.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैईयाआआ. भुत्तत्त अछ्हा लाजगगग रहहाआ हाइइइइइइ. Ooooooohhhhhhhhhh ऐसी होई करररटीई राहीईईए. मुझीऐ ऑररररर पयार्र्र्रर कीजीईएएए भैया. Uuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्यी.

मनीषा की मस्ती भरी बाटे सुनकर मैं उसकी चूचियों को जोर जोर से मसलते हुवे दबाते हुवे उसकी छूट में ऊँगली अंदर बहार करते हुवे उसके कण के पास मुंह ले जाकर पूछा.

मैं- तुम्हे अच्छा लग रहा है मनीषा अपनी चूचिया दबवाते और छूट में ऊँगली करवाते हुवे.

मनीषा- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाइययियाआआ. नाहीइइइइइइ एई गाण्डीय बाटत्त माअत कीजियीईइ मुझसेइ. बॉस करती रहीएई. मुझी बाहुटत अछ्हा लाजगगग रहा हैईईई भैईयाआ aaaaaaaoooooooooo ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह.

मनीषा की बात सुनकर मैं और जोर जोर से उसकी छूट पेलने लगा. थोड़ी देर तक एक बिच वाली ऊँगली उसकी छूट में डालने के बाद मैंने अपनी ऊँगली बहार निकल ली और उसकी चुकी से अपना हाँथ हटा लिया. जिससे मनीषा की मस्ती में खलल पैदा हुई और उसने आँख खोलकर मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.

मनीषा- क्या हुवा भैया. आप रुकक्क क्योंन गयी. करिये ना.

मैं- मैं कहा रुका हूँ मनीषा. और मैं क्या कर रहा था जो करू.

मनीषा- करिये न भैया. क्यों सत्ता रहे हैं मुझे.

Main-jab मुझे पता चलेगा की मुझे क्या करना है तब hi तो मैं करूँगा. और मैं तुझे क्यों सताऊंगा.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरे एक हाँथ को अपनी चुकी पर रखा और एक हाँथ को उठाकर अपनी छूट पर रख दिया, लेकिन बोली कुछ नहीं. मैं भी वैसे hi हाँथ रखे बैठा रहा तो मनीषा ने फिर कहा.

मनीषा- मुझे क्यों परेशां कर रहे हैं भैया. करिये न. अब तो मैंने आपका हाँथ भी वह पर रख दिया है.

मैं- मैं ऐसे कुछ नहीं करूँगा. तुम्हे मुझे एकदम खुलकर बताना होगा की मैं क्या करू.

Mainsha(tadapti हुई)- क्यों तड़पा रहे हैं भैया अपनी छोटी बहन को. मुझे बोलने में शर्म आ रही है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपने उसकी चूचियों को जोर से दबाकर छोड़ दिया और उसकी छूट को मुठी में भरकर दबाया और छोड़ दिया. मनीषा मस्ती में सिसकी और बोली.

मनीषा- ह्ह्हआआआआ भैईया आईईसी हीई केआरईईएई. Aaaaaaahhhhhhhhhhhh मेंनननननन याहठीीी कररणनई की लियी काअह्ह्ह राहीइ थिई. ऑर्डर करीयीए भैया मुझी बहूत्त अछ्हा लगगग रहा हैई.

मैं- पहली बात तो तुम मुझसे क्या करवाना चाहती हो वो खुलकर मुझसे कहो और दूसरी बात की मैं तुमसे जो कुछ भी पुछु उसका खुलकर सही सही जवाब तुम डौगी मुझको.

Manisha(tadapkar). मैं आपको सब बताउंगी जो भी आप पूछेंगे. ायबबब तू कॅरियई भईया.

मैं- क्या बताओगी सब कुछ. जब तुम ये नहीं बता प् रही हो की तुम मुझसे क्या करने के लिए कह रही हो

मनीषा( एकदम तड़पकर). आप बहुत हरामी हो भैया. अपनी बहनंन कोऊ भी अपनीइ तरह गांद्दी कररर रही हो ाप्प. अह्ह्ह्ह भईया मेरीए चूचियों को खूब दबाओ भैय्या. इनको मसलकर मुझी मज़ा दू. मेरीए वहा अपनी ऊंगलीई घुसाओ. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.

मणि- तुम फिर शर्मा रही हो. मैं कहाँ ऊँगली घुसौ. उसका कुछ नाम तो होगा.

Manisha(madhoshi में) आआआअह्हह्ह्ह्हह भीयाआ. मेरीए छूटत मई अपनीइ ऊंगलीई घुसकर मुझसे छोड्दुओ. मेरीए चूचियों को खूबह मसलकरर मुझी प्यार कारूओ भइया. जैसी सविता डीडीई ऑर्डर सरिताआ डीडीईई को करती हैंन आपपप.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसकी चुकी को मुठी में भार लिया और उसकी छूट के होल पर अपनी पहली दो ऊँगली रखकर चुकी को जोर से दबाते हुवे एकक झटके में दोनों ऊँगली उसकी छूट में पेल दिया. लेकिन मेरी दोनों ऊँगली अंदर नहीं जा सकीय और मनीषा की चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyy. मर्डर गाइइइइइ मैंनं. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या कर रही होओओओ बभाइया. ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैई मुझे.

मनीषा की चीख सुनकर मैंने अपनी बिच वाली ऊँगली जोर से उसकी छूट में पेल दी और जल्दी जल्दी अंदर बहार करने लगा और मनीषा की चुकी जोर जोर से दबाने लगा. मनीषा मस्ती में सिसकने लगी और अपने दोनों हाँथ मेरी गार्डन में दाल दिया. मैं अपनी ऊँगली ताबड़तोड़ उसकी छूट में पेलते जा रहा था. थोड़ी देर बाद मनीषा फिर से मस्त हो गई और बोलने लगी.

मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह भैयाआ बहुउट्ठ मज़ाआ आए रहा हीी. ऐसी ही छोड़िये मेरीए छूट कोऊ. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह भाइय्याअ. आपकी हांथोउ मई जादूओ ही भैया.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसको खड़ा कर दिया और बिस्टेर से उठकर मैं खड़ा हो गया और मनीषा को पकड़कर बिस्टेर पर लेता दिया. मनीषा के दोनों पेअर बीएड से निचे लटक रहे थे. मैंने एक तकिया लेकर मनीषा की कमर के निचे रख दिया. और मनीषा की पंतय पकड़कर उसे खींचकर उतर दिया. अब मेरी छोटी बहन एकदम नंगी मेरे सामने लेती थी. उसकी चूचिया तो सामनांए से बहुत बड़ी थी, लेकिन उसकी छूट छोटी थी. मनीषा मेरी तरफ देखकर शर्मा रही थी.

मैं उसकी तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच में बैठ गया और अपनी जीभ निकलकर उसकी दोनों जांघो को चाटने लगा. मनीषा महालने लगी. थोड़ी देर उसकी जांघो को छटने के बाद मैंने अपना मुंह उसकी छूट के ऊपर किया और एक लम्बी साँस ली, जिससे उसकी छूट से निकलने वाली स्मेल मेरी शरीर में समां गई. मैं उसकी छूट सूंघकर मनीषा से कहा.

मैं- waaaaaaaaahhhhhhhhhhh मनीषा. कितनी ाछठीई महक है तेरी छूट की. जब तेरे छूट की महककक इतनी अछि है तो तेरी छूट का पानी कितना स्वादिस्ट होगा.

मेरी बात सुनकर मनीषा बुरी तरह शर्मा गई और थोड़ा सा उठकर मेरे सर पर मार्कर वापस लेट गई और बोली.

मनीषा- सछह मी आप बहुत बेशरम हैं भैया. अपनी बहन को एकदम नंगा पर दिया आपने आपको शर्मा नहीं आती.

मैं- (उसकी छूट को फिर सूंघते हुवे)- ऐसी शानदार छूट का स्वाद चखने ने लिया hi तो मैं बेशरम बन गया हूँ. और जब बहन खुद नंगा होकर अपनी छूट का रास अपने भाई को पिलाना चाहती है तो भाई को उसकी बात का मन रखना चाहिए.

मनीषा- छ्हीईई भैया. आप कितने गंदे ho.main नंगी नहीं हुई आपने मुझे नंगा किया है. (और इसी फ्लो में बोल गई) और आपने तो अभी तक छूट का रास चखा hi नहीं तो आपको कैसे पता की मेरी छूट का रास स्वादिस्ट है.

main-(garden उठाकर उसकी आँखों में देखते हुवे) इसका मतलब तुम चाहती हो की मैं तुम्हारी छूट का रास चाटकर तुमको बताऊ की ये स्वादिस्ट है या नहीं.

मेरी बात सुनकर अब मनीषा को एहसास हुवा की वो मस्ती में क्या बोल गई है. मेरी बात सुनकर मनीषा शरमाते हुवे मुस्कुराने लगी और मदहोशी में बोली.

मनीषा- आपने मुझे धोखे से फंसकर नागि कर दिया. और अब आप मुझे परेशां कर रहे हैं. अब मैं आपसे बात नहीं करुँगी.

मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा के ऊपर लेट gaya,lekin अपना भर मैंने अपने हांथो पर hi रखा. उसके ऊपर लेटकर मैं उसके होंठो को चूसने लगा. मनीषा ने अपनी आँखे बंद कर ली और मेरे होंठो को चूसकर मेरा साथ देने लगी. मैं कुछ देर मनीषा के होंठो को चूसने के बाद उसके माथे और दोनों आँखों पर किश किया तो उसने अपनी आँखे खोल ली. मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसको आँखों लाल थी. वो फुल गरम हो चुकी थी. मैं उसकी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकलकर उसके गलो को chat-te हुए निचे की तरफ आने लगा. गलो को चाटने के बाद मैंने उसकी गार्डन को चेतना शुरू कर दिया. उसकी गार्डन को चाटने के बाद मैंने अपना मुंह उठाया और उसकी चूचियों के ऊपरी भाग पर रख दिया.

मनीषा मेरे निचे पड़ी मस्ती में मचल रही थी. मैं उसकी चूचियों के ऊपरी भाग को chat-te हुवे उसकी क्लीवेज को चाटने लगा और उसकी क्लीवेज को चाटने के बाद मैंने अपने मुंह से थूक मनीषा की दोनों चूचियों की घुंडियो पर गिरा दिया और अपनी जीभ की नोक को उसकी चूचियों की घुंडी पर फेरने लगा. मेरे ऐसा करने से मनीषा की जैसे जान hi निकल गई. उसका बदन ैथ गया. और वो मेरे सर को पकड़कर ऊपर की तरफ उठाने लगी लेकिन मैंने अपने सर ऊपर नहीं उठाया और अपनी जीभ मनीषा से निप्पल को छेड़ने लगा. मैं बरी बरी से मनीषा की घुंडियो को छेड़ रहा था. जिससे मनीषा का बदन काँप रहा था. जब मनीषा से बर्दास्त नहीं हुवा तो वो मुझसे बोली.



मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैईयाआआ बस्स्स क़रीय्यी अब्ब्ब. मुझी कुछःह होऊ रहा हैई. मैं अब्ब्ब औरर बर्दात नाहीइ कर पाउँगीीी. Oooooooooooooohhhhhhh भैइयाआ मेर्री निछ्छी कुछः होऊ रहा हीी भईया. कुछः कर्रूआ भईया.

मैं- क्या हो रहा है मनीषा और कहाँ हो रहा है. और मैं क्या करू. बोलो मनीषा.

मनीषा- (एकदम मदहोशी में)- कमीने भैयाआआ aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मेरिइइइइ चूऊउत्तत्त मई कुछः हूँ रहा हीी. जीईसी कुछःह छालललल रहा हैई ुसककके ाँदाररर. कुछः कुछः भी करूओ भैइय्या. अब्ब और ना तड़पाओ अपनी छोटी बहन नं कोऊ.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसके ऊपर से उठा और उसकी दोनों तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच बैठ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
 
अपडेट-116

मैं- क्या हो रहा है मनीषा और कहाँ हो रहा है. और मैं क्या करू. बोलो मनीषा.

मनीषा- (एकदम मदहोशी में)- कमीने भैयाआआ aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मेरिइइइइ चूऊउत्तत्त मई कुछः हूँ रहा हीी. जीईसी कुछःह छालललल रहा हैई ुसककके ाँदाररर. कुछः कुछः भी करूओ भैइय्या. अब्ब और ना तड़पाओ अपनी छोटी बहन नं कोऊ.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसके ऊपर से उठा और उसकी दोनों तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच बैठ गया.

अब आगे.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसकी चूचियों की घुंडियो से अपनी जीभ हटाई और उसकी दोनों टैंगो के बिछ आकर बैठ गया और अपने दोनों हाथो से उसकी टांड को फैला दिया. उसकी छूट की फांके आपसे में झड़ी हुई थी. जिसमे से उत्तेजना के कारन मनीषा का कार्मस निकल रहा था. मैंने अपना सर झुककर एक बार जोर की साँस लेकर उसकी छूट की सुगंध अपने अंडाल डाली और अपना होंठ उसकी छूट पर रख दिया. मेरा होंठ छूट पर पड़ते hi मनीषा के जिस्म ने झटका खाया और मनीषा की मस्ती भरी सिसकी निकल गई.

मनीषा- oooooooooooohhhhhhhhhh भैईयाआआआ. Aaaaaaahhhhhhhhhhhhh.

मैं मनीषा की छूट को अपने होंठो से चूमने laga.main उसकी पूरी छूट पर और छूट के आस पास भी चूमने लगा. थोड़ी देर छूट चूमने के बाद मैंने उसकी छूट को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. मेरे ऐसा करने से मनीषा मचलने लगी. वो मस्ती में अपने दोनों हांथो से अपनी चूचियों को सहलाने लगी. मैं मनीषा की छूट को मुंह में भर भर कर चुस्त रहा. वह मस्ती में बोली.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भीयाआ. बायस ऐसी हीईई. बहुतत्त अछहहआ लाजगगग रहा हैई भईया. खूबबब चुसोऊ मेरीए छूटत को आअह्हह्ह्ह्ह भाइय्य्या ाअप्प्प बाहुटत अच्छी haiiin.ooooohhhhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuiiiiiiiiiii मम्मीयी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने कुछ देर और उसकी छूट को मुंह में भरकर चूसा फिर मैंने अपनी जीभ निकलकर उसकी छूट को चाटने लगा. मैंने एक हाँथ बढाकर उसकी चुकी पर उसके हाँथ के ऊपर रख दिया और दुसरे हाँथ की उंगलियों से उसकी क्लीट को सहलाने लगा. इस 3 तरफ़ा हमले से मनीषा एकदम छुडासी हो गई और जोर जोर से बोलने लगी.

मनीषा- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh भीयाआ. ऑर्डर जूर्रर सीए चुऊशूऊ मेर्री िचुउत्त्त कोऊ. बाहूतट अछ्हा लाग रहहहआ हैईईई . आऍप बाहूऊउत्तत अछ्हा चुस्ती होऊ. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईयाँआ कहा जावू मेरररीई चूऊउत्तत कोऊ. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भीयाआ.

मनीषा की मस्ती भरी सिसकी सुनकर मैंने अपनी जीभ और तेज़ तेज़ उसकी छूट पर चलनी शुरू कर दी. उसकी छूट को chat-te हुवे मैं उसकी क्लीट भी और जोर जोर से मसलने लगा. उसकी क्लीट को मसलते हुवे मैं एक हाँथ से उसकी चुकी को दबाने लगा. ऐसा करने से मनीषा एकदम मस्त हो गई और अपने जिस्म को ऐंठते हुवे बड़बड़ाने लगी.



मनीषा- ooooooohhhhhhhhhhhhh भाईयईयाआ डार्लींगगगगग.. ऑर्डर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ चूसोओओओओ मेरीए छुटत कोऊ. आपपपप बहूत्त अछहहआ चुस्स्ती होऊ भईया. खायआ जावूओ मेरीए छूटत कोऊ. Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhh भाइय्याअ मुझी कुछःह हूँ रहहा हैई ऐसा लग रहा हैई कोई कुछःह निकालनी वाला ही मेरीए छुटत सीए. औरर जूरर सी चुसू भईया.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ उसकी चुकी से हटा लिया और उसकी छूट को अपने मुंह में भरकर जोर से चूसकर छोड़ दिया और अपना सर ऊपर उठा लिया. मनीषा एकदम झड़ने के करीब पहुंच चुकी थी. मेरे ऐसा करने से उसको बहुत बुरा लगा. वो अपनी गार्डन उठाकर मुझे देखने लगी. उसका चेहरा एकदम तमतमाया हुवा था. चेहरा लाल हो गया था. वो मुझसे इशारे में छूट चूसने के लिए कह रही thi,lekin जब मैंने कुछ नहीं किया तो वो बोली.

मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैईयाआ रुक्खक्क क्यूँ गयई. छातो न मेरी छूट को. मैं झाड़ने वल्लीइ होऊं.

मैं- मैं तुम्हारी छूट चाटूँगा, लेकिन उसके पहले मेरे कुछ सवालों का सही सही जवाब दो.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आपको जो भी पूछनेआए हूँ वोऊ बाअद मी पूछह लेना. लेकिननं अभी मुझी शांततः कर दोऊ. मेरीए छूट चातुओ भैया.

Main(manisha की क्लीट को सहलाते हुवे). पहले ये बताओ की तुम सविता दीदी, सरिता दीदी और मेरे बारे में क्या- क्या जानती हो.

Manisha(nashili नज़रो से देखते हुवे)- मैं कुछ नाहीइ जैंतीई भैईया. आआअह्ह्ह मेरीए चुउत्त्त. मुझी ठंडा कर दोऊ भईया.

Main(clit सहलाते हुवे)- तुम झूठ बोल रही हूँ. अभी थोड़ी देर पहले तुमने कहा था की मैं तुम्हे दोनों दीदियो की तरह प्यार करू.

मनीषा( सिसकते हुवे) वोओओओ तू माईनेई आईसीए हीईई बुल्ल्ल्ल दिया था. ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह भईया कुछ कारु.

Main(uski एक चुकी को दबाते हुवे) जब तक तुम नहीं बोलोगी तब तक मैं कुछ नहीं करूँगा.

Manisha(hatash hokar)achhhaaa थीइक हैई भईया मैंनं बाटत्तातीई हूँण. मैंन आपपप तीनूओ की बारी मई साब जानती होऊणन.

मैं- वही तो पूछह रहा हूँ की तू कैसे ये सब जानती है.

Manisha-(machalte हुवे) मैनी जब सीए अआप ाऊररर साविइयत्ता डीईई की भीछहह यी साब षुरूउउ हव्वा तब सीए जानती हूँ. मैनी पाहले दीं सीए लेकर डीई की चूड़ाए ताकक साबबब कुछः अपनी आंखों सी देखा है. लेकिंन आप लोगो कोऊ को कभी पाटा ही नाहीइ छाला की मैं आप लोगो कोऊ चुदाई करती हुवी देखहतीई हूँ. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह भैइयाआ अब्ब तू कुछः करूओ. मीरीई छूट चातुओ.

मैं- और सरिता दी के बारे में कैसे पता चला.

मनीषा- ेक्क्क दींनन मैंनं दोपफार मई सरीयता डीडीई की कमरे मई गयी थिई तू व्वू वहा नहीं थी, लेकिननं उनका मोबाइल कमेरी में होई था. मैनी जब उनका मोबाइल उठाया और उसमे कुछ करने लगी तो मुझसे गलती से फेसबुक मैसेंजर खुल गया औरर वही पररर मैनी दीदी को किसी मीरा नाम की लड़की के साथ की गई चाट को पढ़ा. शायद वो पहली चाट थी रात वालीए जिस्मी दी ने कहा था की वो आपके कमरे में गई थी आपको दूधः देने. और आपने उनकी चूचिया देखि. जिसे उन्होंने उस मीरा को बताई तो उसने कहा था की वो आपको पता कर अपनी चुड़ै करवा ले.

तभी से मैंने दीदी पर नज़र रखनी शुरू कर दी. और जब दीदी जिम और कार सिखने के लिए पापा से कहा तो मुझे पूरा विस्वाश हो गया की दीदी ने मीरा की बात मन ली है. फिर तो मैं रोज़ दीदी आपके कमरे में जिम करना सिखने जाती थी और आप दीदी को चुदाई का पथ पढ़ते थे. आआआआहहहहहहह भईया अब्ब तो मैंने आपको सब बता दिया ही अब तू मेरीए प्यास बुझा दू. चट्टू मेरी छूट को.

मैं- (उसकी छूट को चूसकर)- तो तुमने ये सब मम्मी पापा को क्यों नहीं बताया.

मनीषा- ये भी कोई बताने वाली बात थी भैया. अगर मम्मी पापा को पता चलता इस बारे में तो उन्हें कितनी तकलीफ होती. फिर या तो वो आपको घर से निकल देते. या दोनों दीदियो के साथ कुछ गलत कर देते या फिर अपने साथ कुछ गलत कर लेते. और मैं इन तीनो में से कुछ भी नहीं होने देना चाहती थी. क्योंकि मैं आप सबसे बहुत प्यार करती हूँ. अब खुस भैया. अब तो चुसो मेरी छूट.

Main-(uski छूट को चूसकर)- लेकिन जब तुम्हे शुरू से सब पता था तो तुमने हम सब को क्यों नहीं रोका. और तुम्हे ये सब देखकर बुरा नहीं लगा की हम भाई बहन आपस में चुदाई कर रहे हैं.

मनीषा- मुझे ये देखकर बहुत बुरा लगा की आप तीनो भाई बहन होकर भी चुदाई कर रहे हैं. मन तो कर रहा था की मैं कमरे में घुस जाऊ और अप्प तीनो को मर कर पुछु की आप सब को ऐसा घिनौना काम करते हुवे शर्म नहीं आती, लेकिन मैं कुछ सोचकर ऐसा नहीं कर पाई भैया.

मैं- क्या सोचकर ऐसा नहीं कर पाई तुम.

मनीषा- जाने दो भैया. मत पूछो वो बात मुझसे.

मैं- अब जब इतना सबकुछ बता दिया है तो वो बात भी बताने में कैसी शर्म.

मनीषा- वो क्या है न भैया मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ. और मेरा शुरू से hi आप पर krus(aakarshan) था. और आपने जिम में इतनी सॉलिड बॉडी बनाई हुई है की मैं जब भी आपको टॉपलेस देखती थी तो मुझे आप बहुत ज्यादा अच्छे लगते थे. मेरा मन करता था की मैं दौड़कर आपसे लिपट जाऊ. और मुझे दर था की मेरे ऐसा करने से कही आप शर्मिंदा होकर घर छोड़कर और मुझे छोड़कर न चले जाओ और मैं आपको किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहती थी. इसलिए मैंने ये बात सबसे छुपाई.

मनीषा की बात सुनकर मुझे बहुत हैरानी हुई और उसपर प्यार भी बहुत आया. मनीषा को मेरी कितनी परवाह थी. शायद उसके मन में मेरे लिए शुरू से hi कुछ था. इस बात को कन्फर्म करने के लिए मैंने मनीषा से पूछा.

मैं- तो क्या तुम बहुत पहले से hi मुझसे छुड़वाना चाहती थी.

मनीषा- कितनी गन्दी सोच है आपकी भैया. ये बस मेरा आकर्षण मात्र था. मैंने कभी भी आपके साथ ये सब करने का नहीं सोचा था.

मैं- पहले नहीं सोचा था. इसका मतलब अब ये सब करना का तुमने सोचा है.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन अपनी गार्डन दूसरी तरफ करके मुस्कुराने लगी. मैंने उसकी छूट को सहलाते हुवे पूछा.

मैं- अच्छा मनीषा एक बात सच सच बताओ. जब तुम देखती थी की मैं सरिता दीदी और सविता दीदी को छोड़ रहा हूँ ये उनको नंगा करके उनके नशीले जिस्म से खेल रहा हूँ. तो ये सब देख कर तुम्हारे मन में क्या आता था.

मनीषा- अब जाने दो न भैया. आप ने जो पूछा मैंने सब कुछ आपको सच सच बता दिया. अब तो मुझे और न तड़पाओ. कुछ तो रहम करो अपनी बहन पर.

मैं- बस यही बता दो. फिर मैं तुम्हारी तड़प mita-ta हूँ.

मनीषा- जब आप सरिता दीदी को छोड़ते थे और सविता दीदी को नंगा करके उनके बदन से खेलते थे तो ये देखकर मुझे उनसे बहुत जलन होती थी. मैं हमेशा सोचती थी की काश की दीदी की जगह मैं होती तो आप मेरे बदन से खेलते और mujhee……………………..(sharmakar चुप हो गई)

मैं- मतलब तू चाहती थी की दीदी की जगह तू होती और मैं तेरे बदन से खेलता और तुझे छोड़ता. क्या बात है मनीषा तू सच में चाहती है की मैं तुझे छोड़ू.

मनीषा- क्यों तड़पा रहे हो भैया. सब कुछ तो बता दिया है मैंने. अब और क्या बताऊ. यहाँ मेरा जिस्म जल रहा है और आपको मस्ती सूझ रही है.

मैं- नहीं तू पहले बता की तू सच में मुझसे छुड़वाना चाहती है.

Manisha(thoda नाराज़गी के साथ)- आप न भैया, कभी कभी एकदम चुटिया वाली हारकर कर देते हैं. आप दोनों दीदी को छोड़ते हैं. ये बात मैंने किसी को नहीं बताई. और मैं आप सबसे नाराज़ भी नहीं हूँ, उस दिन मौसी के यहाँ सरिता दीदी को जाना था, लेकिन उनकी जगह मैं चली गई, क्योंकि दीदी को आपसे चुदाई करवानी थी और मैंने आपको प्राइवेसी दे दी की आप दीदी को छोड़ सको. और तो और इतनी रात को मैं आपके कमरे में नंगी आपके बिस्टेर पर पड़ी हुई हूँ. फिर भी बार बार वही सवाल पूछ रहे हो की मैं आपसे छुड़वाना चाहती हूँ या नहीं. अब मैं क्या इस बात को माइक लेकर अन्नोउंस करू की मैं आपसे छुड़वाना चाहती हूँ. अरे इस बात को तो कोई चुटिया भी समझ जायेगा, लेकिन आप इतने बड़े ठरकी होकर भी ये फालतू का सवाल पूछ रहे हैं.

मनीषा की बात सुनकर मैं बहुत खुश हुआ. मैंने मनीषा के ऊपर झुककर उसके होंठो को चुम लिया और उसकी चूचियों को जोर से दबाकर कहा.

मैं- वाह्ह्ह्ह मनीषा. तुमने तो आज मुझे खुश कर दिया. तू मुझसे छुड़वाना चाहती है. ये सुनकर मुझे विस्वास नहीं हो रहा है. मैं तुझे बहुत अचे से छोडूंगा. तू एकदम छुड़वाने लायक मॉल हो गई है मनीषा. तुझे छोड़ने में बहुत मज़ा आएगा.

Manisha(kheejhkar)- ारी यार भैया. आप सच में चुटिया हो. ये सब बाद में सोच लेना. पहले मुझपर ध्यान दो. मेरी छूट जल रही है. अब मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है. मेरी प्यास बुझा दो अब. चाटो मेरी छूट को.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसकी टांको को पकड़कर फैला दी और अपनी जीभ निकल कर उसकी छूट चाटने लगा. एक हाँथ बढाकर मैंने मनीषा की चुकी को पकड़ लिया और उसे मसलने लगा. मैं मनीषा की पूरी छूट अपनी जीभ से चाट रहा था. छूट चाटने के बाद मैंने अपनी जीभ की नोक बनाई और मनीषा की छूट में घुसाने लगा. मनीषा की छूट का छेड़ अभी बहुत छोटा था तो मेरी जीभ बस कुछ सेंटीमीटर hi उसकी छूट में गई. मैं अपनी जीभ से मनीषा की छूट कुरेदने लगा और उसकी चूचियों को दबाने लगा. मनीषा मस्ती भरी सिसकारी लेती हुई बोली.

मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईया. और जोरर से भईया. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. ऊऊओह्ह्ह्हह ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. हाँ भैया ऐसे ही चुसू.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपनी जीभ हटाकर मनीषा की छूट में अपनी एक ऊँगली गुशा दी और अंदर बहार करने लगा. और मनीषा के ऊपर झुककर उसकी चुकी को मुंह में भरकर चूसने लगा. ऐसा करने से मनीषा की सिसकारी तेज़ होने लगी और वो झड़ने के करीब पहुंच गई तो मैंने अपना मुंह उसकी चुकी से हटाकर उसकी छूट पर लगा दिया और एक हाँथ से क्लीट. एक ऊँगली से छूट और मुंह से छूट के ऊपर चाटने लगा. इस 3रे हमले को मनीषा बर्दास्त नहीं कर पायी और बड़बड़ाते हुवे झड़ने लगी.

मनीषा- आआआआअह्हह्ह्ह्हह भैइयाआ. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत अच्छा भैया और जोर जोर से चूसे मेरी छूट, और अंदर तक ऊँगली घुसाओ भैया. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऊऊऊओह्ह्ह्हह आप बहुत अच्छा चूसते हो भैया. आप किसी भी लड़की की को पता सकते हो भैया. आजजज आपने अपनी छोटी बहन को भी पता लियाआआआ. Ooooooohhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyy. मैं गईइइइइइ आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मैंन आए रहीए हुन्न भैय्या. मैं आकाशःह्ह मी उड़द रहीए हूँण कोइई मुझी सम्भाललली. ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह ागररर मुझी पात्तत्ताआ हॉटटा कोई चूऊउत्तत चाटवानी मी इतना मज़ा आता हैई तू मैंनंदीदिई कूऊहटकरररर उनकीइ जगहहह खुद्द्द अपनी छूटत आपको चाटवा देत्तीय. आआआअह्हह्ह्ह्ह भईया मैंन गाइइइइइइ. मेंननननन गइईईई. Uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiii मममममीयीय.

इतना कहकर मनीषा झड़ने लगी तो उसने अपने पैरो की कैची बनाकर मेरे सर को अपनी छूट पर दबा लिया. मैं मनीषा की छूट का पूरा राश चूस चूस कर पि गया. उसकी छूट का रास बहुत स्वादिस्ट था. मेरी सभी बहनो की छूट का रास स्वादिस्ट है. थोड़ी देर तक मनीषा ऐसे hi लेती रही . फिर मैं उसकी टैंगो के बिच से उठा और मिनिषा को उठाकर जमीन पर बैठा दिया और मैं बीएड पर पािल लटककर बैठ गया और मनीषा से कहा.

मैं- जब तुमने सब कुछ देख hi लिया है तो मुझे नहीं लगता की तुम्हे कुछ बताने की जरूरत पड़ेगी. तुमको पता है की इसके बाद दोनों दिदिया क्या करती.

मेरे बैठने पर मारा लुंड एकदम टैंकर खड़ा था. मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे लुंड को पकड़ा और सहलाने लगी. थोड़ी देर लुंड सहलाने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ निकली और मेरे लुंड को चाटने लगी.



मनीषा पुरे लुंड पर अपनी जीभ चलकर उसे चाट रही थी. मैं मनीषा को सर की पकड़कर सहलाने लगा. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद मनीषा ने ढेर सारा थूक अपने मुंह से मेरे लुंड पर गिराया और अपने हांथो से उसे पुरे लुंड पर मलने lagi.lund पर थूक मलते हुवे मनीषा ने अपना सर निचे किया और मेरे pellhar(goti) को अपने मुंह में पूरा भर लिया और चूसने लगी. मेरी गोटी मनीषा के मुंह में जाते hi मैं सिसक उठा और उसका सर को हल्का सा दबाकर बोलै.



मैं- aaaaaahhhhhhhhhhhh मनीषआआआआ मेरिइइइइइइइ जानननननननन. बस ऐसे hi.

मनीषा मेरे गोटी को कुछ देर चूसने के बाद मेरी गोटी मुंह से निकल कर मुंह खोलकर मेरा 4 इंच लुंड मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. मनीषा किसी एक्सपर्ट की तरह मेरा लुंड चूस रही थी. मैं मनीषा के सर को अपने लुंड पर दबाता हुवा बोलै.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh डार्लिंग थोड़ा और अंदर लेकर चुसो मेरा लौंडा. ोुह्ह्हह्ह.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपना पूरा मुंह खोलकर जितना लुंड अंदर ले सकती थी. लेकर चूसने lagi.mujhe भी मस्ती छाने लगी. मैंने मस्ती में आकर मनीषा का सर मेरे लुंड बार दबाकर कुछ सेकंड होल्ड किया और फिर छोड़ दिया. मनीषा की आँखों में आँशु आ गए लेकिन उसने किछ कहा नहीं और फिर से मेरे लुंड को चूसने लगी. मैं अब बीएड से उठ खड़ा हुवा और मनीषा के सर को पकड़कर अपना पूरा लुंड एक झटके में उसके मुंह में पेल दिया और 10 सेकंड होल्ड करके लुंड बहार निकल लिया. मनीषा लुंड निकलने के बाद खू खू करने लगी. उसकी आँखों से आँशु बहकर उसके गलो पर आ गए थे. वो मेरे लुंड को हाथो से पकड़कर बोली.



मनीषा- दीदी सही बोलती थी. आप सच में एकदम जानवर हो. बिलकुल भी रहम नहीं करते.

इतना कहकर मनीषा ने फिर से मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैंने दोनों हांथो में मनीषा का सर पकड़ लिया और एक झटके में पूरा लुंड उसके मुंह में पेल दिया और अंदर बहार करने लगा, मनीषा के मुंह से गगगगूउउउउ गगगगूऊऊ की आवाज़ निकलने लगी मैं मस्ती में उसका मुंह तेज़ तेज़ पेलने लगा और कहने लगा.

मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा मेरीए जाननं. चू सछह मी कमाल की ही. तुणी पहली बार मी ही मेरा लुंड पुर्रा अपने मुंह मी ले लिया ही. तू बहुत अच्छा लुंड चूस रही ही बस ऐसे ही चूस अपने भाई का लुंड. और जोर से चूस जानेमन.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपना मुंह और खोल दिया और मैं और तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा. मनीषा बस गगगगुणु गगगगगगूउऊउउउ कारण्टी रही. अब मैं भी झड़ने के बिलकुल करीब आ गया था. इसलिए मैं और तेज़ तेज़ उसका मुंह छोड़ते हुवे बड़बड़ाने लगा.



मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषआआआ. मेरिइइइ जाणीमण्ण. टेरिइइइ गरम्म जवानी कोई तरहहह तेरा मुंह भी बहुत्त ग्रामं हैई. औरर तेज़्ज़ चूस मनीषा मैं आनी वाला हूँ टीरी मुँहहह मी. मैं गया मनीषा. लिए ऑर्डर अंडरर ले करररर चुसस्स मेरा लौड़ा. मैं गया. Ooooooooohhhhhhhhhh saaliiiiiiiiiii.

इतना कहकर मैं मनीषा के मुंह में झाड़ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-117

मैं भी बड़बड़ाते हुवे मनीषा के मुंह में झाड़ गया. मनीषा मेरी जांघ पर मरने लगी. तो मैंने अपना लुंड उसके मुंह से निकल लिया. लुंड निकलते hi उसने मेरे लुंड का सारा पानी जमीन पर थूक दिया. कुछ बून्द उसके होंठो के दोनों तरफ से बहकर निचे आ गया था. वीर्य जमीं पर ठोकने के बाद मनीषा ने अपना मुंह पोछा और मेरी तरफ देखने लगी. मैं झड़ने के बाद निढाल होकर बीएड पर बैठा हुवा था. जब मनीषा ने मेरी तरफ देखा तो मैंने उससे कहा.

मैं- क्यों मनीषा मज़ा आया तुमको.

मनीषा- सब कुछ तो ठीक था भैया. लेकिन आपने ये मेरे मुंह में निकलकर पूरा मज़ा ख़राब कर diya.(jameen पर पड़े मेरे वीर्य की और इशारा करके)

मैं- तुमने इस अमृत को वास्ते कर दिया मनीषा. ये लड़कोयो के लिए बहुत hi फायदेमंद होता होता है. इसको पिने से उनके चेहरे पर और निखार आता है. तुम भी तरय करना. कुछ दिन बाद तुम खुद मेरा लुंड चूस चूस कर इसका पानी पियोगी.

मनीषा मेरी बात सुनकर अपनी नज़रे निचे कर ली. थोड़ी देर ऐसे hi बैठे रहने के बाद मैं आगे बढ़कर मनीषा के होंठो को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और अपना हाँथ मनीषा की चुकी पर रखकर उसे दबाने लगा. मनीषा ने भी मेरा साथ देते हुवे मेरे होंठो को चूमते हुवे एक हाँथ से मेरा लुंड पकड़ लिया और सहलाने लगी. थोड़ी देर बाद मेरा लुंड फिर से खड़ा होने लगा तो मनीषा ने किश तोड़ते हुवे कहा.

मनीषा- ारी ये क्या भैया. ये तो फिर से खड़ा हो गया.

मैं- जब तुम्हारे जैसी गर्म जवानी एकदम नंगी होकर अपना जिस्म दिखा रही है और उसे सहला रही है. ये मेरे लुंड को पता चल गया की मनीषा एकदम छुडासी हो गई है. इसलिए ये तुम्हे छोड़ने के लिए खड़ा हो गया है.

मनीषा- चुप रहो भैया. आप हर समय गन्दी गन्दी बाटे hi बोलते रहते हैं. कभी तो सीरियस हो जाया करिये.

मैं- अच्छा ठीक है. तो ये बताओ की तुमको छोड़ने का मौका मुझे कब मिलेगा.

मनीषा- क्या यार भैया फिर वही. आप कभी नहीं सुधरोगे. मेरा शरीर तो अब आपका है और मैं भी अब आपकी हो गई हूँ. तो जब भी आपका मन करे.

मैं- मेरा तो तुझे देखकर अभी hi मन कर रहा है की आज hi तुझको छोड़ दूँ.

मनीषा- छहियी भैया. बहुत गंदे हो आप. मैं जा रही हूँ अब. बहुत रात हो गई है. मुझे नींद भी आ रही है अब.

इतना कहकर मनीषा अपना nam-matr का कपडा pahan-ne लगी. मैंने भी मनीषा को नहीं रोका, क्योंकि मैं उसे मां पापा के रहते हुवे नहीं छोड़ सकता था, इसलिए मैंने उसे नहीं रोका. वो कपडा पहनकर बहार जाने लगी. और दरवाज़े तक जाकर रुक गई और पलटकर मेरी तरफ देखने लगी. थोड़ी देर मुझे देखने के बाद वो जल्दी से मेरे पास आई और मेरे गले से लिपट गई और मेरे होंठो को चूमकर कहा.



मनीषा- ठनक यू सो मच भैया. और हाँ अब बेशर्मो की तरह नंगे मत रहो. कपडे पहन लो. मैं सोने जा रही हूँ.

इतना कहकर मनीषा ने जाते हुवे मेरे लुंड को पकड़कर दबा दिया. जिससे मेरे मुंह से आआअह्हह्ह्ह्ह निकल gai.jise सुनकर मनीषा हँसते हुवे निचे भाग gai.manisha के जाने के बाद मैं भी फ्रेश होकर सो गया. सुबह मेरी आँख समय से खुल गई तो मैंने जिम किया और थोड़ी देर आराम करने के बाद बाथरूम में जाकर फ्रेश हुवा और निचे हॉल में आ गया. वह आने के बाद मैंने सब को गम विश किया और सोफे पर बैठ गया. थोड़ी देर में नशा बन गया और सभी मिलकर नष्ट करने लगे तो पापा ने कहा.

Papa-aaj ऑफिस वाले शर्मा जी हैं न तो उनकी लड़की की शादी है. क्योंकि वो हमारे घनिस्ट मित्र हैं तो उन्होंने वह के काम की dekh-rekh के लिए मुझसे कहा है और पुरे परिवार को बुलाया है. तो जिसको चलना हो. वो शाम को तैयार रहे चलने के लिए.

इतना कहकर पापा नाश्ता करने लगे. मम्मी पापा नाश्ता करके जॉब के लिए निकल गए. मैं भी अपने कमरे में आया और तैयार होकर अपने काम पर निकल गया. वह पहुंचकर मैंने अपना काम फिनिश किया और जो काम बचा था उसे समेत कर घर वापस आ गया और अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर तक अपने कमरे में बैठकर काम करता रहा. जब पूरा काम फिनिश हो गया तो मैं निचे पानी पिने के लिए किचन में आया. वह सरिता दीदी पहले से hi मौजूद थी. मैंने दीदी को देखा और उनके पास चला गया और दीदी को बहो में भर लिया और दीदी से कहा.

मैं- कैसी हो मेरी जानेमन.

सरिता दीदी- मैं तो ठीक हूँ. लेकिन तुम ठीक नहीं लग रहे हो. क्या बात है.

मैं- हाँ दीदी. आपको देखते hi मेरी हालत ख़राब हो जाती है. अच्छा ये मनीषा है या सोल्लगे गई है.

सरिता दी- वो तो सोल्लगे गई है.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को पलटकर अपनी तरफ कर लिया और उनके होंठो को चूमने लगा दीदी भी मेरा साथ देने लगी. मैं हाँथ बढाकर दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और उन्हें दबाने लगा. थोड़ी देर उनके होंठ चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ उनके होंठो पर फेरनी शुरू कर दी. दीदी ने भी अपनी जीभ बहार निकल ली और मेरी जीभ से खेलने लगी. मैंने अपने मुंह खोलकर दीदी की जीभ अपने मुंह में ले ली और चूसने लगा. और अपना एक हाँथ बढाकर दीदी की छूट पर रख दिया. जैसे hi मेरा हाँथ दीदी की छूट पर पड़ा उन्होंने मुझे अपने से दूर किया और कहा.

सरिता दी- इतना बेश्बर मत बनो. हाफ हॉर्स बॉस कमरे में आना जो भी करना है वही करेंगे. इतना कहकर दीदी बोतल से पानी पिने लगी. तो मैं भी पानी की बोतल लेकर पिने लगा. जब दीदी पानी पीकर जाने लगी तो मैंने दीदी को फिर से पीछे से पकड़कर अपनी बहो में भर लिया और उनके कण में बोलै.

मैं- घर में कोई नहीं है जानेमन. तो क्यों न हॉल में hi अपना कार्यक्रम शुरू किया जाये.

इतना बोलकर मैंने अपने होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिया और अपने दोनों हांथो में दीदी की चूचिया भरकर बढ़ाने लगा. दीदी ने भी अपना एक हाँथ बढाकर मेरे लुंड को पकड़ लिया और उसे लोअर के ऊपर से दबाने लगी. मैं दीदी की गार्डन और कन्धा चूमते हुवे दीदी की दोनों चूचिया जोर जोर से दबाने लगा. दीदी के मुंह से आआअह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह अभी की आवाज़ निकल रही थी. थोड़ी देर तक दीदी की चूचिया दबाने के बाद मैं दीदी की t-shirt को पकड़कर ऊपर करने लगा. दीदी ने भी अपने t-shirt उतरने में मेरा सहयोग करने लगी और अपने दोनों हाँथ ऊपर कर लिए. मैंने दीदी की t-shirt उतर कर सोफे पर रख दी और दीदी की दोनों चूचियों को दबाने लगा.

दी की दोनों चूचिया खूब दबाने के बाद मैंने अपना एक हाँथ उठाकर दीदी की कंधे पर रख दिया और एक कंधे को चूमते हुवे हाँथ वह पर फिरने लगा. दीदी भी मस्ती में मेरा लुंड दबोच दबोच कर दबा रही थी. थोड़ी देर मेरा लुंड दबाने के बाद दीदी अपना हाँथ लुंड पर आगे पीछे करने लगी. मैंने दीदी का कन्धा चूमते हुवे और एक चुकी दबाते हुवे दीदी की ब्रा को कंडे पर से पकड़ा और उनके कंधे से निचे कर दिया और उनके कंधे को चूमने लगा. उसके बाद मैंने एक हाँथ से चुकी दबाते हुवे दूसरे कंधे से भी ब्रा सरककर निचे कर दिया और उनका कन्धा चूमने लगा.



फिर मैंने दोनों हांथो से दीदी की चुकी पकड़कर जोर से दबा दिया और दीदी के कंधे को काट लिया. दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh कामिनीईई. धीरीईईए दबाआ. मैंन कहीए भागीय नाहीइ जा रहियी होऊं.

दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने अपने दोनों हाँथ उनकी चूचियों से उठाकर दीदी के कंधे पर रखा और उसे सरकते हुवे दीदी की ब्रा में दाल दिया और दोनों चूचियों को हांथो में भरकर ब्रा को निचे सरका दिया. अब दीदी की नंगी चूचिया मेरे हांथो में थी. जिन्हे मैं मसल रहा था और दबा रहा था. दीदी मेरे लुंड को जोर जोर से अपने हाथो से मुट्ठ मर रही थी. मैंने दीदी की एक चुकी को मुट्ठी में भरा और एक चुकी की घुंडी को अपनी ऊँगली और अंगूठे में फंसकर दोनों को जोर से दबा दिया. दीदी की माधोसी में चीख निकल गई.



सरिता दी- ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh AAAAaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh . धीरे दबाए हरामी. एई टीरियइ बहन कोई चूचीयी हैईईई. टेरिइइइ गफ्फ कोई नाहीई जोऊ इतनीई तेज़्ज़ी सीए दबा रहाहा हीी.

मैं- अब तुममम मेरीए डीडीई कव्वाल घर आलू के सामने हो. अकेले में तुम मेरीए मासकका, मेरीए गुलाम हूँ. समझी.

फिर मैंने दीदी को पकड़कर अपनी तरफ घुमा लिया और दीदी की चूचियों को बरी बरी से मुंह में लेकर चूसने लगा. दीदी ने अभी तक मेरा लुंड नहीं छोड़ा था और वो लगातार उसे दबा रही थी. मैं दीदी की चूचियों को छोड़कर अपना हाँथ दीदी की पीठ पर लेजाकर उनकी ब्रा का हक्क खोल दिया और उसे उतारकर सोफे पर फेंक दिया और एक हाँथ दीदी की छूट पर लोअर के ऊपर से रखकर दबाने लगा. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi दीदी की aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh निकल गई. दीदी अब गरम हो चुकी थी. इसलिए मैंने दीदी को सोफे पर बैठा दिया और अपने हांथो से दीदी की लोअर पकड़कर निकलने लगा. दी ने भी अपने गांड उठाकर लोअर निकलने में मदद की अब दीदी के जिस्म पर सिर्फ एक पंतय hi रह गाइट hi.

मैंने दीदी को सोफे पर लिटा दिया और उनके ऊपर झुककर उनको किश करने लगा. थोड़ी देर दी को किश करने के बाद मैंने अपना मुंह दीदी की चूचियों पर रखकर पिने लगा और एक हाँथ से दीदी की छूट पंतय के ऊपर से मसलने लगा. दीदी अपने हाँथ मेरे सर पर रखकर बालो को सहला रही थी, थोड़ी देर दीदी की चूचियों को पिने के बाद मैं उनकी पेट को चाटने लगा. जिससे दीदी मचलने लगी और आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ssssssssssss करने लगी थोड़ी देर पेट चाटने के बाद मैं दीदी की जांघो को चूमने लगा और एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाने लगा. फिर मैंने दीदी की पंतय को अपने मुंह और हाँथ से पकड़कर उनके जिस्म से निकलकर जमीन पर फ़ेंक दिया. दीदी तो एकदम गरम हो गई थी. उनकी छूट पानी बहा रही थी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने मुंह दीदी की छूट पर रखकर चूस लिया. दीदी मस्ती में सिसकार उठी.



सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh भहाआआईइइइइइइइ. चुस्स्सस्स्स्स मेरिइइइइ चूठ्टटटटट ोुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह.

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने दीदी की छूट को एक हाँथ से फैलाया और अपनी जीभह दीदी की छूट में गुशा दी और चूसने लगा. फिर हाँथ से दीदी की क्लीट को सहलाने लगा. दीदी मस्ती में अपना सर इधर उधर करने लगी. थोड़ी देर जीभ से दीदी की छूट छोड़ने के बाद मैंने अपनी जीभह दीदी की छूट से निकल ली और एक ऊँगली दीदी की छूट में पेल दी और अंदर बहार करते हुवे दीदी की छूट के ऊपर अपनी जीभ फिरने लगा. दीदी मस्ती में बोलने लगी

सरिता di-Aaaaaaaahhhhhhhhhhhh अभीयी. मेरे भैई. कहा जाओ मेरीए छुटत को. बहुतत्त तंगगग करतीय हैई ये मुझी. Oooooooooohhhhhhhhhhh चाट कामिनी ोुरर्र जोरर जोरर सीए चाटत.

इतना बोलकर दीदी मेरे सर को एक हाँथ से पकड़कर अपनी छूट पर दबाने लगी और आह्ह्ह्हह आअह्हह्ह्ह्ह करने लगी. थोड़ी देर दीदी की छूट चाटने के बाद मैंने उनकी छूट से अपना मुंह हटा लिया और दीदी को उठाकर खड़ा कर दिया और मैं सोफे पर लेट गया और दीदी से कहा.

मैं- आआआअह्हह्ह्ह्ह सरिता डार्लिंगगग अब्ब तुम मेरे लुंड की सेवा करो. फिर देखो तुम्हे कितना मज़ा देता हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी निचे बैठ गई. और लोअर और उव दोने एक साथ निकलकर जमीन पर फेंक दी और मेर लुंड को हांथो से पकड़कर सहलाने lagi.thdi देर मेरा लुंड सहलाने के बाद दीदी ने अपनी जीभ निकलकर मेरे लुंड को चेतना शुरू कर दिया.



लुंड चाटने के बाद दीदी ने मुंह खोलकर मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. दीदी जोर जोर से मेरा लुंड चूस रही थी. मैं भी मस्ती में आआह्ह्ह्ह ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह करने लगा. थोड़ी देर दीदी लुंड चुस्ती रही फिर लुंड को अपने मुंह में रखकर उसपर जुबान फिरने लगी. मैंने दीदी का सर पकड़ लिया और कमर उठा उठाकर दीदी का मुंह छोड़ने लगा. दीदी के मुंह से गगगगगगूउऊउउउ गगगगगूउऊउउउ की आवाज़ निकल रही थी. फिर मैंने दीदी के सर को अपने लुंड पर दबाकर होल्ड किया और 10 सेकंड बाद दीदी के सर को छोड़ दिया. दीदी ने अपने मुंह ऊपर किया और हांफने लगी. दीदी के मुंह और लुंड के बिच एक हैंकि थूक की लकीर बानी हुई थी. लुंड मुंह से निकलने के बाद मैं दीदी से कहा.



मैं- सरिता डार्लिंग. आज मैं नहीं आज तुम मेरी चुदाई करो. अपनी दोनों टंगे फैलाकर मेरे ऊपर आओ और अपने हाँथ से लुंड पकड़कर अपनी छूट में डालो.

मेरी बात सुनकर दीदी अपने टंगे फैलाकर मेरी कमर के दोनों तरफ रख लिया और अपने मुंह से ढेर सारा थूक निकलकर अपनी छूट पर लगाया और झुक कर मेरे लुंड को अपने एक हाँथ से पकड़कर बैठने लगी. लुंड छूट के मुंह पर लगाकर दीदी धीरे धीरे मेरे लुंड पर बैठने लगी. मैंने मौके का फायदा उठाया और निचे से अपनी कमर जोर से ऊपर उचका दी. जिससे मेरा लुंड दीदी की छूट में एक hi बार में पूरा घुस गया. दीदी दर्द से चिल्ला ठी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh सलएएएए हरामीईईईई. मैंनं लूदडड डालल टूओ रहीए होऊणन अपनी छूटत मई तू चू क्यूओ अपनी गानंदड मरवा रहा हैई कुट्टी. उउउउउइइइइइ मम्मीयियय. मुझी कीटना दररदद्ड हुवेई ही.

Main-(kamar हल्का हल्का चलते हुवे) क्यों नखरा कर रही हो सरिता. कितनी बार तो तुम मुझसे छुड़वा चुइकी हो और चिल्ला तो ऐसे रही हो जैसे पहली बार छुड़वा रही हो.

सरिता दी- आआह्ह्ह्हह कामिनी टुन्नी अपना लुंड देखा हैई एकककदममम घड़ी जैसा लुंड हैई तेरा. भले ही मैं छुड़वा चुकी हूँ तुझसे लेकिंन तेरे गद्दे जैसे लुंड की सम्मन मेरी छूट बहुत छोटी है.

इतना बोलकर दीदी मेरे लुंड पर ऊपर निचे होने लगी. पहले धीरे धीरे फिर तेज़ तेज़ दीदी अपनी छूट को मेरे लुंड पर पटक रही थी. कुछ देर बाद मैंने दीदी की पेट में अपनी बहे डालकर दीदी को अपने ऊपर लिटाया और अपनी कमर को जोर जोर से धक्के देने लगा. मेरा लुंड सटासट अंदर बहार होने लगा. मैं हाँथ ऊपर करके दीदी की एक चुकी को हाँथ में पकड़ लिया और उसे दबाते हुवे जोर जोर से धक्का मरने लगा. दीदी को बहुत मज़ा आ रहा था. जो उनके एक्सप्रेशन से साफ़ पता चल रहा था. वो जोर जोर से बोलने लगी.



सरिता दी- Aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भाईईई. ऐसी हीई चूडड़ड मुझी. बहुत्त अछ्हा लग रहा है ooooooooooohhhhhhhh और जूर्रर सीए चूडू मुझी उउउउउउउइइइइइइ मम्मीयीय. मैं मर्डर गईई ोुह्ह्ह्हह्ह अभियई. मरररी ख़ासाममम हैं औरर जोरर सीए छोड़ सल्ल्ली हरामीई. टीरी डीडीई बहुत्त पयासीय हैई. उसकीय पास बुझा दिए मेरे चुदऊ सनमम. Oooohhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाईई.

मैं- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh सरिताआए. टूउउ बआहूतट छुडासीई हैईईई. दीखहहह कईसेई चिल्ला राहीइ हीी चूडड़नी की लिया. ऑर्डर अपनी भाईईसीए छोड़नी की लिये काह रहीए हैईईई. चू बाऊट बड़ीई चुड़कक्कड़ड लाड़कीय हीी. टुन्नी अप्पपणी भाईई कोऊ भी नाहीइ छुङा. सालीईई चुड़कक्कड़ड सरितत्ता.

इतना कहकर मैंने अपने लुंड की स्पीड काम कर दी और दीदी की दोनों चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा और उनकी गार्डन को जीभ निकलकर चूसने लगा. थोड़ी देर ऐसे hi चूचिया दबाने और छूट चुदाई से दीदी एकदम मदहोश हो गई और मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- oooooooooooohhhhhhhhhhhhhh मम्मी. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh क्या छुडाईइइइइ करता हैई चू भाईईई. तुझीऐ अच्छी सी पाटा ही की छूट कैसी चूड़ी जाती ही. औरर तेज़ छोड़ड़ड़ साली. बस्स्स इतना hi डैम हैई क्या कामिनी. डैम लगाकर छोड़ मुझी. Aaaahhhhhhhhhh uuuuuuuiiiiiiiiiii मुम्ममइय्यययययय.

मैंने दीदी की बात सुनकर दीदी की दोनों चूचिया पकड़कर मरोड़ दी और पूरा डैम लगाकर हचक हचक कर अपनी कमर उछलकर दीदी को छोड़ने लगा. दीदी झड़ने के करीब पहुंच गई और मस्ती में बड़बड़ाने लगी.



सरिता दी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह उउउउउउउइइइइइइइइइ मम्मीयिययियी. फाडड्ड डालललल्लआआआ साली हरामी नई मेरीए छूटत. हायययययय कुट्टी कैसा मुस्टंडा लौड़ा पॉलललल रखा हैई तुणीऐ. ऊऊऊऊह्ह्ह्ह बहनचूड्डड्ड. मेरीए चुउत्त्त फात गाइइइइइइइ. मैंन पहली सीए जान्तीय होउठीई कोई टीर्रा लुंदड़ बुरर्र फ़ाड़ूऊ ही तू कभी भी तुझसी नही चूडड़वाटीई साली. औरर जूर्रर सी पीएल मैंनं झाड़नी वलल्लीए होऊणन्न आआआआह्ह्ह्हह्ह मैंन ागीयी ाभीईई. संम्भालल मुझी. फुकककक मई हरदीररर. कामिनी तू मुझी शुऊररू सीए हीई छोड़ना चाहतत्ता था कुट्टी. देखहह टेर्री लौड़ी नई मेरीए चुउत्त्त पारर पूरा कब्जा कर लिया हैआईईई. मैंनं gaaiiiiiiiiii मेरी साजाननं ऊऊह्ह्ह्हह्ह.

इतना कहकर दीदी झाड़ गई और मेरे ऊपर निढाल हो कर लम्बी लम्बी साँस लेने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-118



सरिता दी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह उउउउउउउइइइइइइइइइ मम्मीयिययियी. फाडड्ड डालललल्लआआआ साली हरामी नई मेरीए छूटत. हायययययय कुट्टी कैसा मुस्टंडा लौड़ा पॉलललल रखा हैई तुणीऐ. ऊऊऊऊह्ह्ह्ह बहनचूड्डड्ड. मेरीए चुउत्त्त फात गाइइइइइइइ. मैंन पहली सीए जान्तीय होउठीई कोई टीर्रा लुंदड़ बुरर्र फ़ाड़ूऊ ही तू कभी भी तुझसी नही चूडड़वाटीई साली. औरर जूर्रर सी पीएल मैंनं झाड़नी वलल्लीए होऊणन्न आआआआह्ह्ह्हह्ह मैंन ागीयी ाभीईई. संम्भालल मुझी. फुकककक मई हरदीररर. कामिनी तू मुझी शुऊररू सीए हीई छोड़ना चाहतत्ता था कुट्टी. देखहह टेर्री लौड़ी नई मेरीए चुउत्त्त पारर पूरा कब्जा कर लिया हैआईईई. मैंनं gaaiiiiiiiiii मेरी साजाननं ऊऊह्ह्ह्हह्ह.

इतना कहकर दीदी झाड़ गई और मेरे ऊपर निढाल हो कर लम्बी लम्बी साँस लेने लगी.

अब आगे.

दीदी के झाड़ जाने के बाद वो मेरे ऊपर निढाल होकर लेती रही और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. मैं अभी भी अपने लुंड को धीरे धीरे दीदी की छूट में पेल रहा था. लगभग दीदी 5-7 मिनट मेरे ऊपर लेती रही फिर मैंने दीदी उठने के लिए कहा और दीदी के उठने के बाद मैं भी सोफे से उठकर खड़ा हो गया और दीदी को अपनी बहो में भरकर उनके होंठो को चूमने लगा. और एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाने लगा. दीदी भी मेरे होंठो को चूमने लगी और एक हाँथ बढाकर मेरे लुंड को पकड़कर सहलाने लगी थोड़ी देर दीदी को चूमने के बाद मैंने दीदी को धकेलकर दिवार के सहारे खड़ा कर दिया और एक हाँथ से उनकी छूट को मसलने लगा. दीदी फिर से गरम होने लगी.

मैं दीदी के होंठ चूसते हुवे उनकी चुकी दबाते हुवे छूट में ऊँगली करने लगा. थोड़ी देर तक ऐसे करने के बाद जब दीदी एकदम गरम हो गई तो मैंने दीदी के एक पेअर को अपने कंधे पर रखा और दीदी को किश करते हुवे अपने लुंड पर थूका लगाकर उसे दीदी की छूट के मुंह पर रख दिया और एक झटके में दीदी की छूट में पेल दिया. दीदी ने मेरे मुंह से अपने होंठ आजाद किया और मस्ती में सिसकते हुवे बोली.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh Bhaaiiiiiiiiiiiii. धीरीईई सीई. बहुतत्त अच्छा लग रहा है.

दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने दीदी को धीरे धीरे छोड़ना शुरू कर दिया. मैं एक हाँथ से दीदी की चुकी दबा रहा था और अपनी जीभ निकल कर दीदी के चेहरे और गले को चाटने लगा दीदी ssssssssssss aaaaaaaaaaaaa ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह करने लगी. थोड़ी देर दीदी की छूट छोड़ने के बाद दीदी का पांव सरककर मेरी कलाई के पास आ गया. जिसे मैंने अपना ठंठ मोड़कर कपड़ लिया और जोरदार तरीके से दीदी को छोड़ने लगा. दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh जानऊउउउउ. बहुतत्त अछ्हा छोड़ रही हूँ. औरर जोरर सी छोड़ू मुझही. फाड़ डालू मेरी छूट को. बहुत्त तड़पती है ये मुझी. आजजज िस्किई सरई तड़प मिटता दोऊ. आजजज सी चू मेरा साजन हैई. छोड़ मुझी और जोर से चुड़ड़ड़ड़ड़ भैइयाआ राजा.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को दीवाल से एकदम सत्ता दिया और और चुकी से हाँथ हटाकर दीदी की दूसरी तंग में ललकार उन्हें दीवाल के सहारे ऊपर उठा लिया. अब दीदी के दोनों पेअर मेरी कलाई में फंसे हुवे थे और मैं दीदी की छूट को ताबड़तोड़ टिके से पेल रहा था. शायद दीदी अब दीवाल के सहारे संभल नहीं प् रही थी इसलिए उन्होंने अपने दोनों हाँथ मेरी गर्दम में लप्पेट कर मुझे पकड़ लिया और स्स्स्सस्स्स्स आआह्ह्ह्हह्ह करने लगी. मैं दीदी को दीवाल में सटाकर ताबड़तोड़ धक्के मर्डर रहा था. जिससे दीदी एकदम गरम हो गई और बड़बड़ाने लगी.



सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh कामिनी और जोर से चूडड़ड मुझी पूरा अंडरर टाक डाल कर छोड़ अपना लौड़ा. जल्दी जल्द्दी छोड़ड़ड़. दाम लगाकर चूड्डड्ड साली फाडड्ड दी मेरीए छूट को. टूउउ बहुत्त अछ्हीइ चुड़ायी कर्त्ता हीी औरर जोरर सी चूडड़ड मैंन ायनी वलियी हुऊ कुट्टी. औरर डैम लगा कर चूडड़ड.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से बहार निकल लिया और दीदी की उतर कर जमीन पर खड़ा कर दिया. दीदी एकदम मस्ती में थी और छूटने वाली थी. इसलिए वो मुझसे गुस्से में बोली.

सरिता दी- आआआआहहहहह सेल कामिनी . लुंड क्यों बाहर निकाल लिया तुणी. मैं झड़ने वाली थी और तू मुझी तड़पा रहा ही. कामिनी.

मैं- अब मुझे तुम्हारी गांड मारनी है. उसके बाद hi तुमको ठंडा करूँगा.

सरिता दी- गांड मरना जरुरी है क्या. पिछली बार मैं 3 दिन ठिक्क से चल नहीं पाई थी. क्यों मेरी जान का दुसमन बना हुवा है. छूट hi छोड़ ले. मुझेकितना मज़ा आ रहा था, लेकिन तूने सारा मज़ा ख़राब कर दिया.

मैं- अच्छा ठिक्क है सरिता जैसा तुम कहोगी वैसा hi होगा.

इतना कहकर मैं दीदी को लेजाकर सोफे पर झुका कर खड़ा कर दिया और झुककर अपनी जीभ निकल कर दीदी की छूट चाटने लगा और छूट में एक ऊँगली डालकर गीला किया और उसे दीदी की गांड में पेल दिया दीदी दर्द के साथ कराह उठी.

सरिता दी- आआआहहहहहहह Abhiii.kyaa कर रहा है. वह्हा मत कार मुझी डार्दद होगा.

मैं- (ऊँगली गांड में पेलते हुवे). मैं लैंड कहा दाल रहा हूँ अंदर. बस तुम्हारी गांड है hi इतनी जबरदस्त और कातिल की मैं अपने आपको रोक hi नहीं पाया इसके साथ खेलने से.

इतना कहकर मैं दीदी की छूट चाटते हुवे दीदी की गांड में ऊँगली पेलता रहा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने ढेर सारा थूक दीदी की गांड पर गिरा दिया और उसे दीदी की गांड में डालने लगा. दीदी की गांड में जब मैंने पूरा थोक दाल दिया तो मैंने फिर से अपना ढेर सारा थूक दीदी की गांड पर गिराया और उसे दीदी की गांड में डालने लगा. इसी तरह मैंने कई बार दी की गांड पर थोक गिरता और पूरा अंदर दाल देता. अब दीदी की गांड बहुत चिकनी हो गई इसलिए मैंने मैं उठकर अपने लुंड पर थूक माला और अपना लुंड दीदी की छूट पर रखकर एक झटके से दीदी की छूट में पेल दिया. दीदी की मस्ती भरी सिसकी निकल गई.

सरिता दी- ooooooooohhhhhhhhhhh अभियई. ारररममम सी छोड़ अपनी दीदी को.

दीदी की बात सुनकर मैंने ढेर सारा थोक झुककर दीदी की गांड पर फिर गिराया और दीदी की गांड में डालने लगा तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- तू मेरी गांड के पीछे क्यों पड़ा है. मुझे तेरे इरादे ठीक नहीं लग रहे हैं.

Main-main कुछ नहीं करूँगा सरिता. बस तुम्हारी गांड को चिकना कर रहा हूँ ताकि मेरी ऊँगली आसानी से तुम्हारी गांड में घुस जाए और तुमको दर्द न हो.

इतना कहकर मैं दीदी को हचक हचक कर छोड़ने लगा. पूरा सोफे मेरी चुदाई से हिल रहा था. मैं एक हाँथ आगे बढाकर दीदी की चुकी को पकड़कर मसलते हुवे दीदी की छोड़ने लगा. दीदी मस्ती में सिसकारने लगी.

सरिता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh मेरी साजाआं. ऐसी ही छोड़ो अपनी सजनी को. और कास कास कर छोड़ू. मुझी बहुत्त अछ्हा लग ग रहा हैई. Ooooooooooohhhhhhhhhh भैई. चू छुडाआईई मई मस्टेररर ही भाआईई. और जोरर सी छोड़ मुझी. फाडड्ड डालल मेरीए छूटत को. बनाए दी इसका भोगसस्सदा. Uuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्य्यय्य.

दीदी मस्ती में बड़बड़ा रही थी. मैंने इसी मौके का फायदा उठाकर अपना लुंड दीदी की छूट से निकलकर दीदी की गांड पर रख दिया. अभी दीदी कुछ समझ पति उससे पहले hi मैंने एक करारा शॉट मर दिया. मेरी लुंड दीदी की गांड की दीवार को चीरता हुवा आधा उनकी गांड में घुस गया. दीदी दर्द से चीख पड़ी.



सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मुनमम्मीयिययीय. मर्डर गाइइइइइ मईंण. साली हरामी निक्काललललल. मुझी दररदद्ड हूँ रहःहा हैई.

मैंने दीदी की बात न सुनते हुवे लुंड को टोपे तक दीदी की गांड से निकला और पूरी तकर से अपने लुंड दीदी की गांड में थोक दिया. मेरा धक्का इतना जबरदस्त था की दीदी औंधे मुंह सोफे पर गिर पड़ी. दीदी का चेहरा सोफे के ऊपर से बहार निकल गया . दीदी के मुंह से एक भयानक चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh kamineeeeeeeeee मदरररछोड़ड़ड़ड़. मारररररररर दलाई रीई. बहार निकाल सलेटी. मेरीए गाँण्ड फाड्ड़ड़ड़ड़ डीइइइइइइ तूंबीएए. कोईई बचाऊऊऊ मुझी इस बहाननं की लौड़ी सीए. एई मेरा खूंणंन्न करनी पारर उतरुणु होऊ गया हीी. ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मीयीय अपनी सरित्ता कोऊ बाछहा लूओ नाहीइ तू तुम्हारा बेटा उसी मारर्र डालेगा. Uuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiii मम्मीयिययीय. Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh. निकालल भहाररररर बहनचोड़ड़ड़ड़ड़ड़ड़. मुझी नाहीइ छुड्वाना तुझसी. छोड़ड़ड़ दी मुझी harammiiii.jaanee दी मुज्झी. रहममममम कर अपपनी डीईई पारर भाड़वी.

मैंने दीदी की चीख की परवाह किये हुवे जोर जोर से दीदी को छोड़ता रहा. दीदी की आँखों से आँशु बहने लगे. वो मुझसे छूटने के लिए गुहारर कर रही थी. लेकिन मुझे उस समय सिर्फ और सिर्फ दीदी की गांड नज़र आ रही थी. ऐसे hi 3 मिनट दीदी की गांड छोड़ने के बाद दीदी थोड़ा नार्मल हुई, लेकिन उन्हें अभी भी दर्द हो रहा था. दीदी फिर से अपने आपको छुड़ाने के लिए मुझे गली देते हुवे बोली.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh साली कामिनी. मुझी मारर्र कररर ही दाम्म्म लेगा kyaa.baahar निकालल अपनी लुंड को हरामी. Ooooooohhhhhhhhhhhhhh डीडीईई मुझी बचावूओ इस हांथिई के लौउदी सीए. यी तुम्हारी बहन को मार देगा.. बहुत्त दररदद्ड होऊ रहा हैई मुझी. रहममम कर मुझ्पारररर औरर बाहर निकलल ली.

मैं- लिए ऑरररर अंदर तक्क leee.puraa लुंड ली अपनी गण्ड mee.aaj मैं तेरी गण्ड को फाड़ डालुंगगा. ोुरर्र सविता को कीयू बुल्ला रही हैई. वोऊ तुझी बछायेगीइ मुझसेइ. वो तू खुद्द मेरा लुंड ghot-tii ही. आगार वो आ भी गई थू मैं उसे भी तेरी साथ पटकक कर छोड़ दूंगा. ली सल्लीइ बहुत्त गण्ड मटका कर चलती थी तू न. आज तेरी गांड की साडी नस मैं छोड़ छोड़ कर ढीली कर दूंगा.

इतना कहकर मैं दीदी की गांड छोड़ने लगा. थोड़ी देर दीदी की गांड छोड़ने के बाद दीदी को भी अब अच्छा लगने लगा था. वो भी अपनी गांड पीछे उछाल उछाल कर मेरा लुंड अंदर ले रही थी. मैं दीदी की गांड मरते हुवे अपनी हथेली से दीदी की छूट मसलने लगा. दीदी भी अब मस्ती में आकर अपनी गांड मरवाने लगी. मैंने जब ऊँगली से दीदी की क्लीट मसली तो दीदी एकदम तड़पकर बोली.

सरिता दी- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभियई. अब्ब्ब मेरिइइइइ छूट की प्यास बुझा दी. मुझी ठंडी कर दी. मेरी गण्ड तुणी मार ली अब्ब मेरी छूट का भी कल्याण कर दे मेरी राजा भैइयाआ. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह प्ल्ज़्ज़ भईई.

दीदी के इतना कहने पर मैंने 4-5 जोरदार ढक्की दीदी की गांड पर मार्कर अपना लुंड दीदी की छूट से निकल लिया और दीदी को पलटकर सोफे पर लिटा दिया और उनकी टैंगो के बिच बैठार अपना लुंड छूट पर रखकर एक झटके में पूरा लुंड दीदी की छूट में पेल दिया. दीदी मस्ती में सिसक उठी.



सरिता दी- aaaaaahhhhhhhhhhhh मेरी सजाननं. आरामम सीए छोडोऊ अपनीइ सजनी को.

दीदी की बात सुनकर मैं तडडतोड़ धक्के मरने लगा. दीदी मस्त हो गई और अपनी कमर उछाल उछाल कर मुझसे छुड़वाने लगी. मैं भी दीदी को हचक हचक कर छोड़ने लगा. दीदी नशीली आवाज़ में बोली.

सरिता दी- आआह्ह्ह्ह भाईईई. छोड़ मुझी . औरर जोरर सी चूडड़ड. मैं बहुत्त तडपीई हुऊ लुंड के लिये. मेरी प्यास बुझा दी अपनी मोठे लौंडी सी. तुणी अब्ब्ब टाक अपना यी लौड़ा कहाँ छुप्पा कार्र रखा था. बड़ा मुस्टंडा लौड़ा ही तेरा भाई. और हचक हचक कर छोड़ अपनी दीदी को और मेरी छूट की आग को ठंडी कर दे.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh सरिता. बहुत्तत्त जबरदस्त माललळ ही तू. औरर कमाललळ की चुदाई करवाती ही चू. तुझी टू मैं रुजज छोड़ूँगा. तुझी प्यूरी घर्र मी दौड़ा दौड़ाकर छोडूंगा. तू ेक्क्क बार मी थांडी हूँ जानी वाली चीज्ज नाहीइ हैई. तुझीऐ तू रूजज मेरा तागड़ा लुंड ही चूड हुड्ड कर थांडी करेगा. ली सलिई मेरा लुंड पूरा अपनी छूट में.

मैंने दीदी की दोनों तंग को उनकी चूचियों से सत्ता दिया और जोर जोर से उन्हें छोड़ने लगा. मैं और दीदी दोनों अब झड़ने की कगार पर पहुंच गए. इसलिए दोनों मस्ती में बड़बड़ाते हुवे एक दूसरे को गली देने लगे.



मैं- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh सलीईई सरिताआ. बहुत्त करारा माल हैई चू. तुझी छोड़कर तू मुझी जन्नत का मज़ा मिलता है. चू बहुत्त चुड़क्कड़ ही. ले और अंदर ले मेरा लौड़ा. तू बहुत बड़ी रंडी ही सरिता. तुझीऐ तू बिछह चौराही पारर नंगीई करके पटक पटक कर छोड़ना चाहियेए. Aaaaaahhhhhhhhhhh सरिता. मेरा होनी वाला हैई. मैंन आए रहा होऊं. मुझी रास्ता दोऊ सरिता aaaaaaaaaaahhhhhhhhhh.

सरिता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh साली अभी. चू बहुत्त बड़ा ठरकी हैई. तुणीऐ अपनी बहन को भी छोड़ दिया. तुणी मुझी छोड़ कररर अपनी रांदडीई बना लिया हीी कुटीऐई. तेरा जैसी मैं कर्रे जंहा मंत्र करी औरर जब मंत्र करी तू मुझी छोड़ लिए. मैंन तेरी गुलामं हूँ गई होऊं तेरी लौड़ी की गुलामं. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh oooooooooohhhhhhh बाहँणकद्द. मैंन भी झड़ने वालीए होऊं. Aaahhhhhhhhhhh.

मैं और दीदी दोनों साथ में झाड़ गए. मैं झाड़कर दीदी के ऊपर लेट गया. हम दोनों अपनी उखड़ी हुई सांसो को दुरुस्त करने लगे. लगभग 5 मिनट बाद हमारी सांसे नार्मल हुई तो दीदी ने मुझे अपने ऊपर से उठने के लिए कहा, लेकिन मैं नहीं उठा तो दीदी ने मुझे डैम लगाकर तेल दिया जिसके कारन मैं जमीन पर गिर पड़ा. दीदी उठकर सोफे पर बैठ गई. मैंने uth-te हुवे दीदी से कहा.

मैं- ये क्या था यार सरिता.

सरिता दी- सेल तू मेरे ऊपर हठी जैसा पड़ा था. मुझे कितनी तकलीफ हो रही थी. मैंने तुझे उठने के लिए कहा. लेकिन तू मेरी बात सनटैन hi कब है.

मैं- मैंने कब तुम्हारी बात नहीं सुनी. हर बात तो मंटा हूँ तुम्हारी.

सरिता- कुत्ते कमीने हरामी सेल. मेरे मन करने के बाद भी तूने मेरी गांड इतने बेदर्दी से मरी है की इसके सरे नट बोल्ट ढीले हो गए हैं. तू बहुत बेरहम है.

मैं- सच सच बताना. तुमको मज़ा नहीं आया गांड मरवाने में.

सरिता दी- सच कहूँ तो तू जितनी बेरहमी से छोड़ता है मुझे. शुरू शुरू में तो बहुत तकलीफ होती है, लेकिन बाद में इतना मज़ा आता है की पूछो hi मत. सच में तुझसे छुड़वा कर मैं तेरी गुलाम बन गई हूँ. तू अच्छी तरह से जनता है की लड़की को कैसे खुश किया जाता है.

मैं- (आँख मरते हुवे) मैं लड़की को hi नहीं औरत को भी खुश करना जनता हूँ. तभी तो मेरी दोनों बहाने आज मुझसे छुड़वाने के लिए तड़पती रहती हैं.

सरिता दी- चल हैट सेल. मैं नहीं तड़पती वेदपति. तू hi मुझे बहकाकर ये सब करता है मेरे साथ.

मैं- चलो अच्छा है इसी बहाने तुमको भी मज़ा मिल जाता है.

मेरी इस बात पर दीदी मुस्कुराने लगी. थोड़ी दे रेज बैठे रहने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- एक बात कहूँ दीदी.

सरिता दी- हाँ बोल क्या बात है

मैं- आज शर्मा अंकल की लड़की की शादी है तो उसमे जाओगी आप

सरिता दी- नहीं मेरा कोई मन नहीं है वह जाने का. तू ये क्यों पूछ रहा है.

मैं- बात ये है दीदी की मैं सोच रहा था की आप उधर चली जाओ. और मनीषा को मैं यहाँ रोक लेता हूँ. वो अकेले रहेगी तो मैं उसको पटाने का तरय करू.

सरिता di(aankh दिखाकर) देखो कमीने को. दोनों बड़ी बहने को छोड़कर भी इसका मन नहीं भरा. कैसे छोटी बहन के लिए लार टपका रहा है. कुछ तो शर्म कर. तू सच में बहुत बड़ा ठरकी है.

मैं- क्या दीदी आप भी. अगर मैं ठरकी हूँ तो आप भी काम नहीं हो. मैं ये सब केवल अपने लिए hi नहीं कर रहा हों हम दोनों के लिए कर रहा हूँ. क्या आप नहीं चाहती की हम दोनों बिना दर के जब चाहे. एक दूसरे की प्यास बुझा सके.

सरिता दी- चाल अब ज्यादा मस्का मत मार. मुझे पता है की तेरी नियत मनीषा पर भी ख़राब हो चुकी है. मैं तो एक बहाना हूँ. तू मेरे कंधे पर बन्दुक रखकर मनीषा को निशाना बनाना चाहता है. और कह रहा है की ये मेरे लिए कर रहा है.

मैं( शरारत के साथ) तुम्हारे कंधे पर नहीं सरिता बल्कि तुम्हारी छूट में बन्दुक डालकर रोज निशाना लगाना चाहता हूँ. और इसके लिए मनीषा की छूट में एक बार मेरी बन्दुक से सही निशान लगाना बहुत जरूरी हो गया है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी हंसने लगी और हँसते हुवे बोली.

सरिता दी- तू न अभी. सच में पूरा पागल है. कहाँ की बात कहा पंहुचा देता है.

मैं- चलो दीदी अब तो चुदाई हो गई. अब जल्दी से अपने अपने कपडे पहन लो. मनीषा के आने का समय हो गया है.

फिर मैंने और दीदी ने हॉल में पड़े अपने अपने कपडे उठाये और पहनने लगे. अभी हम कपडे पहन hi रहे थे की दरवाज़े की घंटी बजी. दीदी भागकर अपने कमरे में चली गई और मैं कपडे पहनकर t.v. ों किया और दरवाज़ा खोलने चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-119

जब दरवाज़ा खोला तो सामने मनीषा कड़ी थी. मैंने उसे अंदर आने का राष्ट दिया और दरवाज़ा बंद कर लिया. मनीषा सीधे अपने कमरे में चली गई और मैं भी बाथरूम में जाकर फ्रेश हुआ और अपने कमरे में चला gaya.thodi देर बाद मम्मी पापा भी आ गए, क्योंकि आज शादी में जाना था और वो जगह घर से लगभग 25 कम दूर थी, इसलिए वो आज जल्दी आ गए थे. मैं निचे आया तो सभी लोग हॉल में बैठे थे. और जाने के बारे में डिसकस कर रहे थे.

पापा- चलो मनीषा, अभी और सरिता सभी लोग रेडी हो जाओ. शर्मा जी की बेटी की शादी में जाना है.

मनीषा- पापा मैं नहीं जाउंगी. मेरी बिलकुल इच्छा नहीं है जाने की

पापा- ये क्या बात हुई जब सब को बुलाया है तो चलने में क्या परेशानी है तुमको.

सरिता दी- रहने दो न पापा, जब उसका मन नहीं है तो क्यों फाॅर्स कर रहे हैं चलने के लिए.

पापा- इसके नहीं जाने पर किसी को यहाँ रुकना पड़ेगा फिर.

सरिता di(mujhe देखकर)- अभी रुक जायेगा मनीषा के साथ.

पापा- चलो ठीक है. अभी तुम इसके साथ hi रुकना. कही भी बहार मत जाना इसे अकेला छोड़कर.

Main(natak करते हुवे)- लेकिन पापा मैं भी चलना चाहता हूँ.

पापा- किसी एक को तो रुका है. मैं तो नहीं रुक सकता. क्योंकि मुझे तो जाना hi होगा. तुम रुक जाओ अभी. अब मनीषा को घर में अकेले भी तो नहीं छोड़ सकते हैं.

मैं( नाटक करते हुवे)- ठीक है पापा अगर आप कह रहे हैं तो ठीक है मैं रुक जाता हूँ.

इतना कहकर मैंने सरिता दीदी की तरफ देखा तो वो मुस्कुरा रही थी. मनीषा मेरी तरफ hi देख रही थी. मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा भी रही थी और शर्मा भी रही थी. तो मैं वह से उठकर अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद जब जाने का समय हुवा तो पापा ने मुझे आवाज़ दी. मैं निचे आया तो पापा ने कहा.

पापा- अच्छा सुन अभी. हो सकता है की हम कल सुबह आये. तो तुम घर को अचे से लॉक कर लेना और मनीषा का ख्याल रखना. ठीक है न.

मैं- (सरिता दीदी की तरफ देखकर) आप फ़िक्र मत कीजिये पापा. मैं उसका बहुत अच्छी तरह से ख्याल रखूँगा.

इसके बाद सभी लोग कार में बैठकर शादी के लिए निकल गए. मैं दरवाज़ा बंद करके जब अंदर आया तो मनीषा वही बैठी हुई थी. वो कभी मुस्कुरा रही थी तो कभी थोड़ा शर्मा रही थी. मैं भी उसके पास जाकर बैठ गया और उसे देखते हुवे कहा.

मैं- क्या हुवा मनीषा तू ऐसे क्यों रियेक्ट कर रही है तू.

मनीषा- कुछ नहीं भैया. बस ऐसे hi.

मैं- नर्वस हो रही हो क्या.

मनीषा( मेरी तरफ देख कर)- ऐसा तो कुछ नहीं है. मैं क्यों नर्वस होउंगी. आप भी न कुछ भी सोचते रहते हैं.

मैं- नहीं मुझे लगा इसलिए मैंने पूछा तुझसे.

मेरी बात सुनकर मनीषा अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने मनीषा से कहा.

मैं- मनीषा आज खाना थोड़ा जल्दी बना लेना.

मनीषा- क्यों भैया. कोई खास बात है क्या.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को पकड़कर अपनी गॉड में खींच लिया और उसकी एक चुकी को दबाते हुवे कहा.

मैं- हाँ मनीषा आज मेरा मन ढेर सारा और देर तक तुम्हारा दूध पिने का मन कर रहा है.

मनीषा- धत्त्त भैया. आपको बिलकुल भी शर्म नहीं आती.

इतना कहकर मनीषा मेरी गॉड से उठकर अपने कमरे में चली गई. थोड़ी देर मैं वही बैठा रहा फिर मैं भी उठकर अपने कमरे में चला गया और मनीषा की चुदाई से पहले उसके pahan-ne के लिए जो कपडे लाया था उसको लेकर मनीषा के कमरे की तरफ चल पड़ा. मैंने बिना गेट नॉक किया उसके कमरे में चला गया. कमरे में घुसते hi मैं वही पर जैम सा गया. निचे जो उसने कपडे पहने थे वो उसके जिस्म पर थे hi नहीं उसे शायद पता था की मैं उसके कमरे में आऊंगा इसलिए उसने अपने कपडे उतर दिए थे. इस समय उसके जिस्म पर एक ब्रा और कापरी थी.



दरवाज़ा खुलने के बाद उसने एक ऐडा के साथ अपने हाँथ अपनी चूचियों के निचे रख कर थोड़ा तिरछा होकर दीवाल से सत्कार कड़ी होकर मुझे देखने लगी. मैं तो बस मनीषा को hi देखे जा रहा था. मनीषा को देखकर मेरा लुंड मेरी लोअर में उव के अंदर फूल गया था. मुझे इस तरह अपनी चूचियों को घूरते हुवे मनीषा ने कहा.

मनीषा- ऐसा क्या देख रहे हो भैया.

मैं- क्या यार मनीषा. क्यों मेरी जान लेने पर तुली हुई हो.

मनीषा- मैंने ऐसा क्या किया है भैया.

मैं- अगर ऐसे कपडे पहनकर मेरे सामने तुम रहोगी तो मेरी तो जान hi किसी दिन निकल जाएगी.

मनीषा- एक बात आप भूल रहे हैं की ये मेरा कमरा है. और मुझे कोई सपना थोड़ी आया था की आप मेरे कमरे में बिना नॉक किये बेशर्मो की तरह चले आएँगे.

मैं- अब तुम्हारे कमरे में भी आने के लिए मुझे परमिशन लेनी पड़ेगी.

मनीषा- परमिशन नहीं भैया. लेकिन अगर आपने देखा की मैं अभी कपडे बदल रही हूँ. तो आपको लौट जाना चाहिए था. लेकिन आप तो किसी प्यासे कुत्ते की तरह मुझे देखकर लार टपका रहे हैं.

मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा के पास जाकर खड़ा हो गया और मनीषा की कमर में हाँथ डालकर उसे अपने साथ चिपका लिया, जिससे उसकी चूचिया मेरे साइन में धस गई. मनीषा के मुंह से sssssssssss भैया की आवाज़ आई. मैंने उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- क्या करू मनीषा. जब किसी कुत्ते को मास्स के इतने बड़े बड़े टुकड़े दिखेंगे तो कुत्ता उसे खाने के लिए अपनी लार तो टपकायेगा hi.

इतना कहकर मैंने एक हाँथ उसकी चुकी पर रखकर उसे इशारा किया. और उसकी चुकी को दबा दिया. मनीषा आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया करके मुझे अपने से दूर कर दिया और जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने कड़ी हो गई और बोली.

मनीषा- आप बहुत गंदे हो भैया. और ये कोई मास्स का टुकड़ा नहीं है मेरे शरीर है. बेशर्मी के भी हद होती है भैया.

मैं- मैं भी कोई कुत्ता नहीं हूँ. तेरा भाई हूँ और वो भी बेशरम.

मेरी बात सुनकर मनीषा मुस्कुराने लगी. उसने मुझे अब तक बहार जाने के लिए नहीं कहा था और न hi उसने अभी तक अपने कपडे पहने थे. मैं चलते हुवे जाकर ड्रेसिंग टेबल के सामने मनीषा से सात कर खड़ा हो गया और एक हाँथ उसके कंधे पर रखकर एक हाँथ उसकी गद्देदार गांड पर रख दिया और उसे सहलाने लगा. कंधे वाले हाँथ की ऊँगली से मैंने उसकी ब्रा की स्टेप को पकड़कर खींचा और छोड़ दिया. मनीषा के मुंह से सिसकी निकल गई.



मनीषा- आआआआअह्हह्ह्ह्ह भैईया. मत्तट करिये न.

मैं- (उसकी गांड को सहलाते हुवे) क्या न करू मनीषा

मनीषा- मुझे चोट लगती है कंधे पर भैया. ऐसा मत करिये.

मनीषा की बात सुनकर मैंने एक हाँथ आगे बढाकर उसकी चुकी पर रख दिया और निचे उसकी गांड एक हाँथ से दबाने लगा. मैंने ड्रेसिंग टेबल के मिरर में देखा तो मनीषा अपने होंठ को काट रही थी उसकी सांसे तेज़ तेज़ से चलने लगी थी. मैं कुछ देर उसकी चुकी और गांड दबाने के बाद अपना हाँथ उसकी गांड से हटाकर उसकी दूसरी चुकी पर रख दिया और दबाने लगा और उसके कंधे को चूमने लगा. थोड़ी देर चुकी दबाने के बाद मैंने उसकी चुकी को जोर से मसल दिया. मनीषा चीख पड़ी.

मनीषा- ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययीय. थोड़ा धीरे दबाइये भीआयाआ.

उसकी बात सुनकर मैं उसकी चुकी को दबाते हुवे पीछे से मनीषा से सत्कार खड़ा हो गया और अपना लुंड उसकी गांड पर प्रेस करने लगा. थोड़ी देर उसकी गांड पर लुंड का दबाव डालने के बाद मैंने उसकी दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर जोर से दबाया और अपनी कमर को एक झटका दिया. मनीषा दर्द और मज़े से चीखी.

मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhh भैयाआ. थोड़ा धीरे दबायी. मुझे दर्द होता है.

इतना सुनकर मैंने मनीषा की ब्रा का हुक पकड़ा जो आगे की hi तरफ था और उसे खोल दिया. जिससे ब्रा उसके दोनों कंधो पर झूल गई और मैंने उसकी नंगी चूचियों कर अपने हाँथ रख दिया और दबाने लगा. मनीषा बस ऊऊह्ह्ह्हह्ह भैयाआआआ आआह्ह भइया कर रही थी. तोड़ी देर धीरे धीरे चूचियों को दबाने के बाद मैंने उसकी दोनों चूचियों को जोर से दबा दिया. मनीषा मस्ती में बोली.



मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआआ. बस आईसीई हीई करीईई.

इतना कहकर मनीषा ने हाँथ पीछे करके मेरे लुंड को लोअर के ऊपर से पकड़ लिया और सहलाने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को सहलाने के बाद मनीषा को लुंड सहलाने में दिक्कत हो रही थी इसलिए उसने मेरे लुंड से अपना हाँथ हटा लिया. इसलिए मैंने एक हाँथ उसकी चुकी से हटाकर उसका हाँथ पकड़कर अपनी लोअर और उव के अंदर डालकर नंगे खड़े लुंड पर रख दिया. लुंड पर मनीषा का हाँथ पड़ते hi मेरे मुंह से आआआह्ह्ह्हह्ह मनीषा की आवाज़ निकल गई

मैं- आआह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषआआ मेरीए जांणण.

मनीषा मेरे लुंड को उव के अंदर सहलाने लगी और मैं मनीषा की चूचियों को दबाते उसकी ब्रा उसके कंधे से हटाकर उसके कंधे को चूमने लगा. मनीषा अब मस्ती के सागर में गोते लगा रही थी. इसलिए उसने अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया. लगभग 5 मिनट तक मैंने मनीषा की चूचिया दबाई और मनीषा ने मेरे लुंड को अच्छी तरीके से दबाया. उसके बाद मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे लाल हो गाइट hi. मनीषा वासना से भर चुकी थी.

मैं मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपना होंठ बढाकर उसके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. मनीषा ने भी मेरा पूरा साथ दिया. कुछ देर तक नार्मल किश करने के बाद मनीषा मेरे होंठो को फोरस्फुल्ली किश करने लगी.



और अपनी जीभह निकल कर मेरे मुंह में दाल दी और गोल गोल घूमने लगी. मैंने भी मनीषा की जीभ को अपने मुंह में बंद कर लिया और जोर जोर से चूसने लगा. और दोनों हाँथ निचे बढाकर उसकी गद्देदार और कातिल गांड पर रख दिया और जोर जोर से दबाने लगा. थोड़ी देर तक उसकी जीभ चूसने के बाद मैंने उसकी जीभ को छोड़ दिया और अपनी जीभ निकलकर मनीषा के चेहरे से शुरू करके उसकी चूचियों तक लगभग 5 मिनट तक खूब छठा. जिससे उतनी भाग थूक से एकदम गिला हो गया था और चमक रहा था.

फिर मैंने अपना मुंह खोलकर उसकी एक चुकी को मुंह में भर लिया और चूसने लगा. मैं एक हाँथ से मनीषा की गांड दबाने लगा और एक हाँथ को उठाकर मनीषा की चुकी पर रख दिया. इस तीन तरफ से अपने शरीर पर पड़ने वाले हमले से मनीषा एकदम मदहोश हो गई और अपने एक हाँथ मेरे सर पर रखकर बालो को सहलाते हुवे बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैइय्याहा. बहुतत्त अछ्हा लगगग रहा हीी. ऐसी होई कॅरियई. ाअप्प्प बहुत्त अछ्हा कर रही हैंन.

इतना कहकर मनीषा ने अपना हाँथ निचे बहदाकार लोअर और उव के ऑडर डालकर मेरे खड़े लुंड को पकड़ लिया और मसलने लगी मैं sssssssssssss स्स्स्सस्स्स्स करने लगा और साथ साथ मनीषा की चूचिय को पिता रहा. मैंने उसकी गांड वाला हाँथ उठाकर मनीषा की छूट पर कापरी के ऊपर से रख दिया. उसका कापरी उसके चुतरस से गिला हो गया था. शायद उसने अंदर पंतय नहीं पहनी हुई thi.thodi देर उसकी छूट को कापरी के ऊपर से दाबने के बाद मैंने अपना हाँथ उसकी कापरी के अंदर दाल दिया और उसकी नंगी छूट को सहलाने लगा. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi मनीषा के शरीर में झुरझुरी हुई और उसने मेरे लुंड को जोर से दबा दिया. मैं aaaaaaaaahhhhhhhhhh मनीषआआआ बोल पड़ा.

मैं उसकी छूट को सहलाते हुवे कभी उसकी छूट में ऊँगली दाल देता तो कभी उसकी छूट को मुठी में भरकर मसल देता. मनीषा बस ससससस ssssssssssshhhhhhhh आआअह्हह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह करके रह जाती. कुछ देर ऐसा करने के बाद मैंने ऊके निप्पल को ऊँगली और अंगूठे में पकड़कर मसल दिया और छूट को मुट्ठी में बाहरकर मसला तो मनीषा के मुंह से नशीली आवाज़ निकल गई.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii भाइयाँआ. Aaaaaaahhhhhhhhhhhh बहुत अच्छा लगगग रहा हैई. ऐसी होई कार्र्र्टी राहीईईए. औरर जोररर जोरर सीए करिये भैया. Aaaahhhhhhhhhh.

ये कहकर मनीषा के हाँथ मेरे लुंड पर तेज़ तेज़ चलने लगा. मैं मनीषा को चुकी बदलकर दूसरी चुकी को पैने लगा और चुकी वाला हाँथ उठाकर मनीषा की गांड पर रख दिया और दबाने लगा. ऊपर मैं उसकी चुकी बदल बदल कर पि रहा था. निचे उसकी गांड दबाने और छूट में ऊँगली करने से मनीषा बहुत गरम हो गई और वो झड़ने के करीब पहुंच गई और कहने लगी.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhh भैय्याअ. ाप्प बहुत्त अछ्हीई छूटत कोऊ उंगली सी छोड़ती हैंन. औरर करिये भईया. औरर पीजिये मेरीए चूचियों को. जोर जोर से चूसिये इनको. बहुतत्त भुक्खी थी अप्प दूढः की लिये. तो पीई जाइये इनका सारा दूधहहह. Aaaaahhhhhhhhhh भैया मुझी कुछः हूँ ररहठा हीी. कुछःह करूओ भैया. मैंनं मार जौऊंगीए.

मैं मनीषा को चुदाई होने तक गरम रखना चाहता था. इसलिए मनीषा की बात सुनकर मैंने उसे छोड़कर एक झटके में उससे अलग हो गया. मनीषा की हालत ऐसी हो गई जैसे उससे उसका मनपसंद खिलौना छीन लिया गया हो. वो मेरी तरफ नशीली नज़रो से देखते हुवे बोली.

मनीषा- क्या हुवा भैया. आप ऐसे दूर क्यों हो गए मुझसेइ. करिये न जो कर रहे थे.

मैं- नहीं मनीषा. ये गलत है मैं तुम्हारे साथ ये गलत काम नहीं कर सकता. तुम मेरी बहन हो.

मेरी बात सुनकर मनीषा मुंह फाडे मुझे देखने लगी. उसे बिलकुल भी विस्वास नहीं था की मैं ऐसा कुछ भी बोल सकता हूँ. मनीषा थोड़े गुस्से भरी आवाज़ में बोली.

मनीषा- ये क्या है भैया. इतने दिन से आप मेरे साथ गन्दी गन्दी हरकते कर रहे हो तब आप को या ख्याल नहीं आया की मैं आपकी बहन हूँ. और अब बोल रहे हो की आप मेरे साथ ये नहीं कर सकते.

Main-haan मनीषा. मुझे अभी अभी रीलीज़ हुवा है की मैं जो कर रहा हूँ वो गलत है.

मनीषा मेरी बात सुनकर मुझे मरने लगी और मरते हुवे बोली.

मनीषा- आप ने जब दोनों दीदियो को फंसकर छोड़ा तो ये आपको गलत नहीं लगा. लेकिन जब मैं आपसे फंस गई हूँ तो ये आपको गलत लग रहा है. आप बहुत गंदे हो भैया और कमीने भी.

मैं- क्या कहा तुमने अभी मनीषा. तुम भी मुझसे……………… मैंने ठीक से सुना नहीं.

मनीषा- हाँ भैया मैं भी आपसे फंस गई हूँ. आपने दोनों दीदियो की तरह मुझको भी फंसा लिया है.

मैं- क्या सच में मनीषा. मैंने तो दोनों दीदियो को फ़साने के बाद उनके साथ कुछ और भी किया था. अब तुम भी मुझसे फंस गई हो तो मतलब मैं तुम्हारे साथ भी कर सकता हूँ.

मनीषा मेरी बात सुनकर कुछ नहीं बोली. तो मैं उसके पास जाकर उसकी चुकी को एक हाँथ से दबाते हुवे पूछा.

मैं- बताओ मनीषा. मैं तुम्हारे साथ भी वो सब कर सकता हूँ न.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे धीरे से कहा.

मनीषा- hhhhhhhhhhhhh.

मैं- ऐसे नहीं मनीषा. पूरा बोलो किट ुम क्या चाहती हूँ.

Manisha-(nashili आँखों से देखते हुवे)- हाँ भैया जो आपने दोनों दीदियो के साथ किया है वो मेरे साथ भी कर सकते हो.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के होंठो को चुम लिया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-120

मनीषा- hhhhhhhhhhhhh.

मैं- ऐसे नहीं मनीषा. पूरा बोलो किट ुम क्या चाहती हूँ.

Manisha-(nashili आँखों से देखते हुवे)- हाँ भैया जो आपने दोनों दीदियो के साथ किया है वो मेरे साथ भी कर सकते हो.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के होंठो को चुम लिया.

अब आगे.

मनीषा की बात सुनकर मैंने उसके होंठ चुम लिए. मैंने मनीषा को खींचकर अपनी बहो में भरते हुवे उसके कण में धीरे से कहा.

मैं- मतलब तुमको भी अपने भाई का लुंड पसंद आ गया है.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपना सर झुका लिया और शर्माने लगी. मैंने मनीषा की ठुड्डी पकड़कर उसके सर को ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा भी मेरी आँखों में देखने लगी. थोड़ी देर मेरी आँखों में देखने के बाद मनीषा ने फिर शर्माकर अपनी पलके झुका ली. मैंने मनीषा के होंठो को चूमते हुवे कहा.

मैं- ऐसे मत सरमाओ मेरी जान. मेरी आँखों में देखो और मेरी बात का जवाब दो.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपनी पलके उठाकर मेरी आँखों में देखते हुवे जवाब दिया.

मनीषा- hhhhhhhhhhhhhhmmmmmmmmmmm

मैं- क्या यार मनीषा. अब अगर सबकुछ करना hi है तो शर्मा क्यों रही हो मुझसे. तुमने तो सब देखा हुवा है. कैसे दोनों दीदी बेशरम होकर मेरे साथ अपनी जवानी का मज़ा लूटा. तुम अगर शरमाओगी तो फिर कैसे काम चलेगा. अपनी ये शर्म छोड़ दो मनीषा और मेरे साथ खुलकर मज़े लो. में तुम्हे जन्नत की सैर करवाऊंगा.

मनीषा- हाँ भैया मुझे आपका लुंड पसंद है. आप मुझको भी दोनों दीदी की तरह जवानी का मज़ा दीजिये. मैं वो सब देख देख के कब से इस मज़े के लिए तरस रही हूँ.

मैं- ठीक है मेरी जान. आज रत तुम्हारी ज़िन्दगी की सबसे हसीं रत होगी. ये रत तुम कभी नहीं भूल पाओगी डार्लिंग.

इतना कहकर मैं मनीषा से अलग हुवा और अपने साथ लाया हुवा वो कपडा मनीषा को देते हुवे कहा.

मैं- रात को तुम यही कपडा pahan-na. मैं तुम्हे इन कपड़ो में देखना चाहता हूँ. बोलो पहनोगी न तुम इनको.

मनीषा- आप जो बोलेंगे. मैं वो करुँगी भैया.

मैं- तो ठीक है मनीषा. अब जल्दी से खाना बना लो. ताकि हम दोनों को ज्यादा से ज्यादा समय मिल सके. मैं अब थोड़ी देर के लिए बहार जा रहा हूँ तुम कपडे पहन लो और दरवाज़ा अंदर से बंद कर लो. मैं 1 हॉर्स में वापस आ जाउगा. फिर दोनों मिलकर खाना खाएंगे.

इतना कहकर मैं मनीषा को उसके कमरे में छोड़कर ऊपर बाथरूम में चला गया और फ्रेश होने के बाद अपने कमरे में जाकर कपडे चेंज किया और मनीषा को दरवाज़ा बंद करने के लिए कहकर बहार चला गया. मैं वह पास के एक पार्क में चला गया और बेंच पर बैठ गया. अभी थोड़ी देर hi मुझे पार्क में आए हुवे थे की मेरा मोबाइल बजने लगा. मैंने देखा तो सविता दी की कॉल थी मैंने फ़ोन पिक किया तो उधर से जीजा जी की आवाज़ सुनाई पड़ी.

मैं- प्रणाम जीजा जी.

जीजा जी- प्रणाम सेल साहिब. और कैसे हॉल चाल हैं आपके.

मैं- ठीक हूँ मैं आप कैसे हैं.

जीजा जी- मैं भी ठिक्क hi हूँ. एक काम था तुमसे.

मैं- हाँ बताइये न.

जीजा जी- बात ये है की मुझे एक ट्रेनिंग के सिलसिले में 2 हफ्ते के लिए 4 दिन बाद मुंबई जाना है तो मैं सोच रहा हूँ की तुम यहाँ पर 15 दिन के लिए अपनी दीदी के पास आ जाओ.

जीजा की बात सुनकर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. मैं खुद दीदी के पास जाने के लिए बेताब था और पापा ने भी परमिशन दे दी थी. और अब तो जीजा जी भी बुला रहे हैं. तो मैं ख़ुशी के साथ उनसे बोलै.

Main-(mazakiya लहले में) ये भी कोई कहने की बात है जीजा जी आप आदेश कीजिए बाँदा हाज़िर हो जाएगा. वैसे अगर आप बुरा न मने तो एक बात कहूँ.

जीजा जी- हाँ हाँ बोलो.

मैं- मैं सोच रहा था की आप 15 दिन के लिए जा रहे हैं तो क्यों न मैं दीदी को यहाँ ले औ. दीदी भी सबसे मिल लेंगी. मनीषा और सरिता डिब hi बोल रही थी दीदी से मिलने के लिए. जब आप आ जायेंगे तो अगर आप कहियेगा तो मैं दीदी को पंहुचा दूंगा.

जीजा जी- ले जी इसमें बुरा man-ne की क्या बात है भाई. तुम ठीक कह रहे हो. इसी बहाने सविता भी सब घरवालों से मिल लेगी.

मैं- ठीक है जीजा जी मैं आपके जाने के पहले हो वह आ जाऊंगा.

जीजा जी- ठीक है अभी. अब रखता हूँ फ़ोन. मिलकर बात कर्नेगे.

मैं- ठीक है जीजा जी. प्रणाम.

इतना कहकर मैंने फ़ोन रख दिया. थोड़ी देर पार्क में टहलने के बाद मैं अपने आपको थोड़ा तरोताज़ा महसूस करने लगा. लगभग 1 हॉर्स के बाद मैं घर चला गया. मनीषा ने गेट खोला. मैंने अंदर जाकर गेट को लॉक किया और जाकर सोफे पर बैठ गया और t.v. देखने लगा. थोड़ी देर में मनीषा ने खाने के लिए पूछा तो मैंने टाइम देखा तो 8 बज गया था. फिर हम दोनों ने मिलकर खाना खाया. खाना खाने के बाद मनीषा ने बर्तन समेटकर सिंक में रखकर उसे साफ करने लगी. तो मैं भी किचन में चला गया मनीषा को पीछे से अपनी बहो में भर लिया और उसकी चुकी को दबाते हुवे उसकी गार्डन को चूमने लगा. थोड़ी देर तक ऐसा करने से मनीषा फिर से गरम हो गई.



मनीषा गरम होकर एक हाँथ मेरी गार्डन पर लप्पेट लिया और बर्तन साफ करना बंद करके लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. थोड़ी देर बाद मैं मनीषा को छोड़कर पीछे हटा और मनीषा के कण में कहा.

मैं- मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ. जब तुम फ्री हो जाना तब मुझे बताना.

इतना कहकर मैं किचन से निकलकर अपने कमरे में चला गया.

कमरे में पहुंच कर मैंने अपनी लोअर और t-shirt उतर दी और सिरग उव में hi कमरे में बैठ गया. मैंने अपना डरोएर खोला और उसमे से कैंची निकल कर बहार रख ली और मनीषा के कॉल का इंतज़ार करने लगा. लगभग 1.5 हॉर्स बाद मनीषा ने मिस कॉल दी. मैं अपने कमरे से बहार निकला और मनीषा के कमरे की तरफ चल पड़ा. कुछ hi पल में मैं मनीषा के कमरे पास खड़ा था. मैंने कमरे का दरवाज़ा खोला और अंदर घुस गया.

कमरे में घुसते hi मरे नज़र मनीषा पर पड़ी. उसने मेरे दिए हुवे कपडे पहने थे. कपडा एकदम ट्रांसपेरेंट था. मनीषा उस कपडे में एकदम नंगी दिख रही थी. वो कपड़ा मनीषा के शरीर से पूरी तरह से चिपका था. मनीषा मेज़ के ऊपर अपना हाँथ टिकाये कड़ी हुई थी. दरवाज़ा खुलने के बाद मनीषा ने एक नज़र मेरी तरफ डाली और फिर शर्मा कर वह दूसरी तरफ देखने लगी.



मनीषा ने भले hi मुझे अपना ाधनागा या पूरा नंगा बदन दिखाकर तैसे किया था, लेकिन आज उसे पता था की मैं उसको छोड़ने आया हूँ तो मनीषा शर्मा रही थी. मैं दरवाज़े के पास खड़ा होकर मनीषा के नंगे जिस्म को देखते हुवे कहा.

मैं- वाह्ह मनीषा. क्या हुस्न है तुम्हारा. एकदम तराशा हुवा. उपरवाले ने तुम्हे बड़ी फुर्सत में बनाया है. और मुझपर बहुत बड़ा एहसान किया है की तुझे मेरी बहन बनाकर भेजा.

मेरी बात सुनकर और अपनी तारीफ सुनकर मनीषा के चेहरे पर हंसी आ गई. और वो उसी तरह कड़ी होकर मुस्कुराने लगी. मैं चलता हुवे मनीषा के पास पहुंच गया और मनीषा को अपनी तरफ घूमने के लिए कहा. मेरे कहने के बाद मनीषा शरमाते हुवे मेरी तरफ घूम गई और अपनी ड्रेस को दोनों हांथो से पकड़ कर उससे खेलने लगी. उस कपडे में मनीषा का नंगा जिस्म और उसकी जालिम चूचियों को सामने से देखकर मेरी हालत ख़राब हो गई. मैं मनीषा को देखते हुवे बोलै.



Main-Sach में मनीषा तुम्हारे हुस्न का कोई जवाब नहीं है. तुम्हारे ये दूध जैसा गोरा बदन एकदम चमक रहा है. तुम्हे देखकर देखो मेरा ये भी खड़ा हो गया है.

इतना बोलकर मैं अपने लुंड को मसलने लगा. मनीषा की नज़र भी मेरे लुंड पर चली गई और वो बोली.

मनीषा- छी भईया. आप को शर्म नहीं आती मेरे कमरे में आप उव में आये हैं.

मैं- मेरी छोडो मनीषा तुम अपने आपको देखो एकदम नंगी कड़ी हो मेरे सामने.

मेरी बात सुनकर मनीषा शर्मा गई और भागकर खिड़की के पास बिस्टेर पर बैठ गई. मैं मनीषा के भागते समय उसकी कातिल गांड को देखने लगा जो उसके भागने से इधर उधर हिल रही थी. मैं अपना लुंड मसलते हुवे मनीषा से कहा.



मैं- क्या यार मनीषा. तुम तो ऐसे शर्मा रही हो जैसे तुमने मुझे पहली बात ऐसे देखा है. देखो मनीषा अगर ज़िन्दगी का असली आनंद लेना है तो ये शर्माना छोडो और खुलकर मेरा साथ दो. मैं तुम्हे यकीन दिलाता हूँ की मैं तुम्हे निराश नहीं करूँगा.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी तरफ देखा और नज़ारे झुका ली. मैं चलता हुवा मनीषा के पास पंहुचा और उसे उठाकर खड़ा कर दिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा भी मेरी तरफ देख रही थी. इस बिच मनीषा को पता नहीं क्या हुवा उसने दोनों हांथो से मेरे सर को मजबूती से पकड़ा और जंगली बिल्ली की तरह मेरे होंठो पर टूट पड़ी और चूसने लगी. मैं भी उसके सर को पकड़कर उसका होंठ चूसै में साथ देने लगा. मनीषा पूरी वाइल्ड तरीके से मेरे होंठ चूस रही थी. लगभग 10 मिनट पूरी तल्लीनता से मेरे होंठ चूसने के बाद जब हम दोनों की सांसे भरी होने लगी तो मनीषा ने मेरे होंठ काट लिए और अपने मुंह हटा लिया. मेरी होंठो से खून निकलने लगा. मैंने मनीषा से कहा.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh क्या करती हो मनीषा. दन्त क्यों गदया.

मनीषा- क्यों भैया मज़ा नहीं आया क्या. जब आप करते हो तब तो आपको बहुत मज़ा आता है और जब मैं कर रही हूँ तो दर्द हो रहा है.

इतना बोलकर मनीषा फिर से मेरे होंठो पर टूट पड़ी और पहली बार से भी ज्यादा जोर जोर से मेरे होंठो को चूसने लगी काटने लगी. मैं तो उसकी वील्डनेस देख कर हैरान था. थोड़ी देर बाद उसने मेरे होंठो को आज़ाद किया. मेरे होंठो पर जगह जगह मनीषा ने काट लिया था. जिसके निशान बन गए थे. मैंने मनीषा की तरफ देखते हुवे कहा.

मैं- तुम एकदम जंगली बिल्ली की तरह बेहवे कर रही हो आज.

मनीषा- क्यों भैया मज़ा नहीं आ रहा है क्या मेरे इस बेहवे से.

मैं- बहुत मज़ा आ रहा है मनीषा. मुझे ऐसे hi पार्टनर चाहिए जो मेरी तरह बेशर्म होकर मेरा साथ दे.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मुझे धक्का देखर बिस्टेर पर धकेल दिया और मेरे साइन पर चढ़कर बैठ गई और अपने नाख़ून से मेरे निप्पल को कुरेदते हुवे बोली.

मनीषा- मैं क्या चीज हूँ भैया ये आपको आज पता चल जायेगा. बस मैं जो भी करूँ आप मुझे रोकना मत. फिर देखना मुझसे पहले मैं आपको जन्नत की सैर कराती हूँ.

Main(shankit नज़रो से देखते हुवे)- तुम करना क्या चाहती हो.

मनीषा- बस भैया आप देखते जाइये. आपको खुद पता चल जायेगा. मैं जो भी आपके साथ करुँगी. उसमे आपको मज़ा तो आएगा लेकिन मेरी एक शर्त है की इस दौरान आप मेरे जिस्म को टच नहीं करेंगे.

मैं- ठीक है मनीषा. जैसा तुम चलोगी वैसा hi होगा.

इतना कहकर मनीषा मेरे दोनों निप्पल को अपने दोनों हांथो से सहलाने लगी. थोड़ी देर मेरे निप्पल को सहलाने के बाद मनीषा ने अपनी एक एक ऊँगली उनपर फिरना शुरू कर दिया. मेरे मुंह से आआह्ह्ह्हह्ह ssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. मनीषा मेरे दोनों निप्पल पर ऊँगली फिरते हुवे अपना नखों मेरे निप्पल पर दबा दिया. मेरे मुंह से हलकी सी आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषा की आवाज़ निकल गई.

मेरी आवाज़ सुनकर मनीषा ने अपने नाख़ून से मेरे दोनों निप्पल को कुरेदना शुरू कर दिया. थोड़ी देर ऐसे hi निप्पल कुरेदने के बाद मनीषा ने अपने मुंह से ढेर सारा थोक मेरे दोनों निप्पल पर गिरा दिया और अपनी ऊँगली से मेरे साइन पर मलने लगी. जब मेरा सीना और निप्पल गिला हो गया तो मनीषा ने मेरे दोनों निप्पल को अपने ऊँगली और अंगूठे के बिछ लेकर जोर से मसल दिया. मेरे मुंह से जोर से आवाज़ निकल गई और मैंने मनीषा के हाँथ को पकड़ लिया.



मैं- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh मनीषआआआ. क्याआ करररर राहीईई हैईईई टूउउ. मेरिइइइ जाननं लेंना छहत्ती हैई क्या.

मनीषा- ये क्या भैया आपने मेरे शरीर को टच क्यों किया. आपको मैंने कहा था की आप मेरे शरीर को टच नहीं करेंगे. और अभी तो ये शुरुवात है भैया अभी आपको बहुत मज़ा मिलने वाला है.

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ उसके हांथो से हटा लिया मनीषा ने फिर से मेरे दोनों निप्पल को अपनी ऊँगली और अंगूठे के बिच लेकर मसल दिया. इस बार मैं मज़े और दर्द से चीख पड़ा.

मैं- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh मेररिई जायंनननननन. क्या काअररर रहियी हैई चू. कहहहा सी सिक्खा तुणी यी साबबब ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह.

मेरी बात सुनकर उसने फिर से ढेर सारा थूक मेरे दोनों निप्पल पर गिराया और जोर जोर से मेरे साइन पर मसलने लगी. साइन पर थूक मसलने के बाद मनीषा ने मेरे दोनों साइन को अपने मुठी में भर लिया और उसे आते की तरह गूंदने लगी. मेरे मैं आँखे बंद किये हुवे ooooooooohhhhhhhhhhh मनीषा आआह्ह्ह्हह्ह मनीषा करने लगा. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर मेरे साइन को गूंदने के बाद मनीषा मेरे साइन से सरककर थोड़ा पीछे हुई और झुककर मेरे साइन पर अपनी जीभ फिरने लगी. मेरी तो मज़े की इन्तहा हो गई और मैं मनीषा से बोलै.

मैं- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh डार्लिंगगगगगग. कहा सी सीखा यी साब्ब तुणीऐ. मुझी बहूत्त अच्छा लग रहा हैई. ऐसा ही करतीय राहू.

मनीषा मेरी बात इग्नोर करते हुवे मेरी साइन को लगातार चाट रही थी. थोड़ी देर मेरा सीना चाटने के बाद मनीषा ने मेरे निप्पल को अपने दांतो के बिच दबा लिया और हल्का हल्का बाईट करने लगी. मेरा तो मज़े से पूरा चेहरा लाल हो गया. मनीषा मेरे निप्पल को कभी खींचती तो कबि चबा लेती. उसके ऐसा करने से मैं मस्ती के सागर में गोते लगाने लगा. मैं मनीषा को कहने लगा.

मैं- ooooooooooohhhhhhhhhhhhhh मनीषा. ऑर्डर जूरर सी कर यार. मुझी बहुत्त अच्छा लग रहा ही. आज टाक मुझी ऐसा प्यार कीसीई नई नाहीइ किया. तुणी तू मुझी इतना मज़ा देखेर अपना गुलाम बना लिया हैई. औरर जोरर सी चुसो मनीषा. बा ऐसे ही. Aaaahhhhhhhhhh.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने लगभग 5 मिनट तक ऐसे हो मेरे निप्पल को दांतो से हल्का हल्का kat-ti चबाती रही. मैं बस आआह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा ऊऊह्ह्ह्हह्ह मनीषा करता रहा. उसके बाद मनीषा ने मेरे निप्पल को अपने मुंह से निकला और मेरे ऊपर की तरफ गार्डन और कंधे पर चूमने लगी. गार्डन को चूमने के बाद मनीषा ने गार्डन और कंधे को भी अपने दांतो से पकड़कर हल्का हल्का kat-ti हुई स्वीट बाईट करने लगी. मुझ बहुत मज़ा आ रहा था और मैं मनीषा को ऐसा करने के लिए कह रहा था.

मैं- आआह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा. तुम बहुत्त अच्छआ करररर रहियी हूँ. मुझी बहुत्त hi माज़ा आ रहा ही. ऐसे होई कर्त्तीय राहु.

मेरी बात सुनकर मनीषा छोटा छोटा लव बाईट बनाते हुवे गार्डन से निचे आने लगी. और मेरे पेट को भी चूमने के बाद अपने मुंह में भरकर दांतो से हल्का हल्का काट काट कर लव बाईट बनती रही. मैं मस्ती में बोलने लगा.

मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषआआ. टूउउ साछहः मई बहूत्त काम्म्म कोई लड़की हैई. इतना मज़ा मुझी कभी नही आया. तुणी मुझी बहुत्त मज़ाआ दिया ही.

मेरे इतना कहने के बाद मनीषा मेरे पेट पर जोर से दंड गड़ाकर मुझसे अलग होकर बैठ गई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-121

मनीषा ने मुझे लव बाईट देते हुवे मेरे पेट पर दन्त गदा दिया. जिससे मैं चीख पड़ा.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मनीषा क्या कर रही हैई. मुझे दर्द होता है.

मेरा ऐसे कहने पर मनीषा ने फिर से मेरे पेट को चूमा शुरू कर दिया और वापस चूमते हुवे मेरे साइन पर आई और मेरे एक साइन को हांथो से मसलने लगी और एक साइन को अपने मुंह में भरकर चूसने लगी. मेरा बहुत मन कर रहा था की मैं भी मनीषा के जिस्म को सहलौ उनसे खेलु, लेकिन मनीषा ने मन किया जुवे था इसलिए मैं कुछ नहीं कर प् रहा था. थोड़ी देर तक मनीषा ने मेरे साइन को मुंह में भरकर चूसा. फिर अपने मुंह में भरकर दन्त से काट लिया अब मुझसे बर्दास्त के बहार हो गया तो मैं फिर से सिसक पड़ा और मनीषा से बोलै.

मैं- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा बाससस कररर. मेरीए जान लेकारर हीईई मानेगी क्या. Ooohhhhhhhhhh aaaaahhhhhhhhhhhhhh जांणण.

इसके बाद मनीषा ने मुझको पलट कर पेट के बल लिटा दिया और मेरी पूरी पीठ पर हलके हलके काट काट कर लव बाईट बनाने लगी. मैं मस्ती में आँखे बंद किये मज़ा लेता रहा 5 मिनट बाद मनीषा ने मुझे छोड़ा और हटकर बीएड पर बैठ गई. मैं उठाकर बैठ गया और मनीषा की तरफ देखा तो वो कमुख नजरो से मेरी तरफ देख रही थी.



थोड़ी देर तक मैं भी मनीषा को hi देखता रहा उसके बाद मैंने मनीषा को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठो को चूमने लगा. उसके होंठो को चुनमे के साथ साथ मैं उसकी चुकी को भी एक हाँथ से दबाने लगा. मनीषा ने भी हाँथ बढाकर मेरे लुंड को पकड़ लिया और आगे पीछे करने लगी. थोड़ी देर किश करने के बाद मैं उसकी गार्डन और कंधे को चूमने लगा. मनीषा भी मदहोशी में मेरे सर को अपनी गार्डन पर दबाने lagi.aise ही लगभग 5 मिनट तक उसकी गार्डन और कंधे को किश करने और चुकी दबाने के बाद मैंने मनीषा को छोड़ा और बीएड से उतारकर टेबल पर से कैची को उठाकर मनीषा के पास आ गया. मनीषा ने जब मेरे हाँथ में कैची देखि तो उसने कहा.

मनीषा- इसकी क्या जरूरत है भैया. क्या करने वाले हैं आप.

मैं- बस अब तुम चुपचाप देखती जाओ और मज़ा लो.

इतना कहकर मैं मनीषा के पास आ गया और उसकी चुकी को दबाते हुवे उसके कपडे को उसकी चूचियों के ऊपर से पकड़ा और कैची कैची से kat-te हुवे निचे की तरफ आने लगा. मैंने उसके पुरे कपडे को कैची से काट दिया और कपडा गार्डन से उसके पीछे कर दिया और मनीषा की चुकी नंगी हो गई और मनीषा अपने सर को उठाकर मुझे देखने लगी.



मैंने कैची वापस राखी और मनीषा को देखते हुवे उसके होंठो पर टूट पड़ा और चूसने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने वाइल्ड किश करना शुरू कर दिया मनीषा भी मेरे होंठो को जोर से चूस रही थी. उसके होंठो को चूसते हुवे उसे अपने से सत्ता लिया जिससे मनीषा बिस्टेर पर अधलेटी अवस्था में मेरे ऊपर लग गई. मैंने कुछ देर उसके होंठो को चूमा और फिर उसको उठाकर जमीं में खड़ा कर दिया और उठकर उसके पिचई आकर खड़ा हो गया.

उसके पीछे खड़ा होने के बाद मैंने मनीषा का कपडा पकड़कर पीछे की तरफ निचे खींच दिया तो मनीषा हाँथ बढाकर अपना कपडा पकड़ने की कोशिश करने लगी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी



तब तक मैंने उसके बदन से अलग कर दिया. मनीषा अब एकदम नंगी अपने कमरे में कड़ी थी. मैंने भी अपने उव उतर दी और मनीषा से एकदम सत्कार खड़ा हो गया. मैं मनीषा की दोनों चुचायो को आगे हाँथ बढाकर पकड़ लिया और लुंड उसकी गांड में ठूसकर उसकी चुकी दबाने लगा. मनीषा मस्ती में सिसकने लगी. मैं मनीषा के कंधे गार्डन और पीठ को भी चुम और चाट रहा था.

थोड़ी देर तक धीरे धीरे उसकी चूचियों को दबाने के बाद मैंने उसकी चूचियों को जोर से मसल दिया और अपने लुंड को उसकी गांड पर एक धक्का दिया. मनीषा मस्ती में सिसकार उठी.

मनीषा- ooooooohhhhhhhhhhh भाईयाँआ. बॉस ऐसी होई धीरे धीरी दबाई इन्ही. बहुत अच्छा लग रहा है.

मनीषा की बात सुनकर मैं उसकी चूचिया खुद जोर जोर से दबाने लगा और अपनी कमर को हलके हलके उसकी गांड पर चलने laga.thodi देर ऐसा करने के बाद मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ किया और उसकी आँखों में देखने लगा. थोड़ी देर उसकी आँखों में देखने के बाद मैंने अपनी ऊँगली से उसके होंठो को मसलना शुरू कर दिया. मनीषा ने मस्ती में अपनी आँखे बंद कर ली और अपने होंठ मसलवाने लगी. थोड़ी देर उसके होंठो को मसलने के बाद मैंने मनीषा को जमीन पर बैठा दिया. मेरा खड़ा लुंड मनीषा की आँखों के सामने लहराने लगा. मनीषा ने नज़र उठाकर मेरी तरफ देखा और मेरे लुंड को अपने हांथो से पकड़ लिया.

मनीषा मेरे लुंड को पकड़कर सहलाने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को सहलाने के बाद मनीषा ने मेरे लुंड पर एक जोरदार चुम्मा जड़ दिया और जीभ निकलकर मेरे लुंड को चाटने लगी. मनीषा मेरे लुंड को बहुत hi तल्लीनता से चाट रही थी. मैंने भी अपने हाँथ मनीषा के सर के ऊपर रख दिए और सहलाने लगा. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद मनीषा ने अपना मुंह खोलकर लुंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी.



मनीषा पहले धीरे धीरे लुंड को चूस रही थी उसके बाद उसने लुंड चूसने की गति बढ़ा दी और जोर जोर से लुंड को चूसने लगी. मेरे मुंह से आअह्हह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह्हह्ह की आवाज़ निकल रही थी. और मेरी पकड़ मनीषा के सर पर तेज़ होती जाती जा रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने मनीषा के सर को पकड़ कर अपने लुंड उसके मुंह में अंदर बहार करने लगा. लुंड मनीषा ने अपने सर आगे पीछे करना बंद कर दिया और अपना पूरा मुंह खोल दिया. मैं झटके मर मर के लुंड अंदर बहार करता रहा. मनीषा के मुंह से गूऊऊऊललललल गगगगगगगूऊऊलललल की आवाज़ निकल रही थी.

थोड़ी देर तक धीरे धीरे मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपनी गति बढ़ा दी और तेज़ी से लुंड अंदर बहार करने लगा. मनीषा भी एकदम एक्सपर्ट की तरह मेरा लुंड चूस रही थी. मैंने मनीषा का सर मज़बूती से पकड़ा और एक जोर का धक्का मार्कर अपना पूरा लुंड उसके मुंह में घुसा दिया और अपनी कमर को कुछ देर रोके रखने के बाद अपना लुंड उसके मुंह से निकल लिया. मनीषा जोर जोर से खांसने लगी और साँस लेने लगी. उसने नज़र उठाकर मेरी आँखों में देखा मैंने उसके मुंह में अपना लुंड फिर दाल दिया और जोर जोर से छोड़ने लगा. मनीषा गगगगगूउऊउउउउ गगगगगूउऊउउउउउ की आवाज़ निकलने लगी. लगभग 5 मिनट बाद मैंने उसके मुंह से अपना लुंड बहार निकला और उसे उठाकर बिस्टेर पर फेंक दिया.

मनीषा को बिस्टेर पर फेंकने के बाद मैं मनीषा के दोनों पैरो के बिच जाकर बैठ गया और उसकी एक तंग को अपनी गॉड में रखकर चूमने लगा. थोड़ी देर चूमने के बाद के बाद मैंने अपनी सर मनीषा के छूट के पास किया और जीभ निकलकर मनीषा की छूट चाटने लगा. मेरा मुंह अपनी छूट पर लगते hi मनीषा के मुंह से aaaaahhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गयी. मैं एक हाँथ बढाकर उसकी एक चुकी पकड़ ली और एक हाँथ से उसकी क्लीट को सहलाने लगा. मनीषा मस्ती में पागल हो गई और बोली.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैयाआ. बहुत अचे से चाट रहे हो आप. और जोर से चाटिये भैया. मुझे स्वर्ग की सैर कराइये भैया. Aaaaaaaaahhhhhhhhhh

मनीषा की बात सुनकर मैं और तेज़ी से उसकी छूट चाटने लगा. छूट चाटने के साथ साथ मैं उसकी क्लीट और चूचियों को मसल रहा था. थोड़ी देर छूट चाटने के बाद मैंने अपनी बिच वाली ऊँगली उसकी छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगा. छूट में ऊँगली घुसाने के बाद मैंने उसकी छूट चाटने बंद नहीं की जिससे मनीषा का जिस्म कपकपाने लगा और वो बोलने लगी.

मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह भियाआआअ. बहुउट्ठ अछ्हा छुटत चाटत रही हैंन्न ाअप्प्प. मुझी मास्तत्त कार्र दिया अपनी bhaiyaaaa.aaurr जोरर सी चटियई औरर जोरर सी भैयाआ.

मैं मनीषा की छूट जोर जोर से चाटने लगा और जोर जोर से ऊँगली उसकी छूट में पेलने लगा. मनीषा की छूट पानी छोड़ने लगी. जिससे मेरी ऊँगली फच फच की आवाज़ करने लगी. थोड़ी देर ऊँगली करने पर मनीषा एकदम मस्त हो गई और मुझसे कहने लगी.

मनीषा- आआआअह्हह्ह्ह्हह bhaiyaaaaaaaaaa. क्या आएगग लगा डीई हीी अपपनी मेरीए छुटत मई. मेरीए चुउत्त्त जाल रहीए हैई भैया इसकी प्यास बुझाए दोऊ भैया छोड़ू मुझसे भैया. आआआहहहहहहह ohhhhhhhhhhhhhhhhh.

मनीषा मेरे सर को पकड़कर अपनी छूट पर दबाने लगी. मैंने अपना सर ऊपर उठाकर उससे पूछा.

मैं- हाँ मनीषा क्या करूण मैं जिससे तुम्हारी प्यास बुझ जाये.

मनीषा- आअह्ह्ह्ह भैया. अपना हथियार डालल दू मेरे अंडरर औरर मेरीए प्यास बुझा दो.

मैं (उसकी छूट सहलाते हुवे)- कौन सा हथियार और कहा दाल दूँ.

मनीषा- आआआअह्ह्ह्हह भैया. अपना लुंड मेरी छूट मी डालल दो और बुझा दो मेरी प्यास.

इतना कहकर मनीषा ने मुझे पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होंठो को चूमने लगी. मैं भी मनीषा के होंठो को चूमने लगा. थोड़ी देर मनीषा के होंठो को चूमने के बाद मैं उससे अलग हुवा और उसके एक पेअर को पकड़ कर अपने कंधे पर रखा और अपने लुंड पर थोड़ा थूक लगाकर उसको मनीषा की छूट पर रखकर उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- तुमको थोड़ा दर्द होगा मनीषा. उसको बर्दास्त कर लेना.

मनीषा- आप मेरे दर्द की परवाह मत कीजिये. मैं मैनेज कर लुंगी.

मनीषा की बात सुनकर मैंने एक हाँथ से उसका पेअर पकड़कर और एक हाँथ से अपने लुंड को पकड़कर उसकी छूट पर दबाने लगा. थोड़ी देर छूट पर लुंड दबाने के बाद मेरा लुंड खछ की आवाज़ के साथ मनीषा की छूट में लुंड का टोपा घुस गया. मनीषा के मुंह से हलकी सी आवाज़ निकल गयी.

मनीषा- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाआ. आरममम सी दर्द्द हो रहा ही.

मैं- बस मनीषा पहली बढ़ा पार हो गयी है. तुम्हे थोड़ा हिम्मत से काम लेना होगा. उसके बाद मज़े hi मज़े हैं.

इतना कहकर मैंने अपने लुंड को छोड़कर उसकी चुकी को पकड़ लिया और दबाने लगा और एक हल्का सा झटका उसकी छूट पर मारा. Jis-se मेरा लुंड उसकी छूट में 3 इंच अंदर घुस गया. मंशा दर्द से चिल्लाने लगी.

मनीषा- aaaaaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआ. बहारररर निकालल लीजीईए. मुझी बहुतत्त ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हीी.

मनीषा की आवाज़ सुनकर मैंने अपने एक हाँथ से मनीषा की चुकी दबाने शुरू कर दिया और दूसरे हाँथ से उसकी छूट को मसलने लगा. मनीषा थोड़ी देर तड़पती रही. उसके बाद उसे थोड़ा आराम मिला तो वो मुझे आँख से इशारा करके अंदर डालने के लिए कहने लगी. मैंने उसका इशारा पाकर अपना लुंड टोपे तक बहार खींचा और एक जोर का धक्का मर दिया. जिससे मेरा लुंड 5 इंच अंदर घुस गया और मनीषा के मुंह से एक जोरदार चीख निकल गई.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mummmyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh बहुतत्त ड़ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हैई मुझी. बहार निकाल लू भैया. नही तू मैंन माअररर जौंगीय. मुझी नाहीई चुंदड़वाना. मुझी बाहूऊत्त डार्दद हूँ रहा हीी.

मनीषा की चीख सुनकर मैं वही रुक गया और झुक कर मनीषा के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा. एक हाँथ से उन्स्की चुकी मसलने लगा और उसकी छूट को सहलाने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मनीषा थोड़ी नार्मल हुई तो मैं जितना लुंड उसकी छूट में था उसे अंदर बहार करने लगा. मनीषा को फिर से दर्द होने लगा और वो गूऊऊऊ हूउउउउउउउ करने लगी. मैंने उसके मुंह को नहीं छोड़ा और लगातार चुस्त रहा. 5 मिनट बाद मनीषा नार्मल हो गई और उसने भी मेरे होंठो को चूसना शुरू कर दिया. मैं मनीषा की चुकी को जोर जोर से मसलते हुवे लुंड अंदर बहार करने लगा. जब मैंने देखा की मनीषा एकदम नार्मल हो गई है तो मैं उसके मुंह को छोड़कर उसकी तंग को अचे से पकड़कर अपने लुंड को टोपे तक बहार निकला और एक जोरदार धक्का उसकी छूट पर लगा दिया.



मेरा लुंड मनीषा के कौमार्य को छोड़ते हुवे जड़ तक उसकी छूट में समां गया. मनीषा के मुंह से जोरदार दर्द भरी चीख निकल गई.

मनीषा- aaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooohhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियी. मैंनं मर्डर गयीईइ. आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैईयाआ. मुझी नाहीई चूडवाना हैई आपसी. अपना लुंदड़ बाहर निकल लूओ. राहाम्म्म करूओ मुज्झहहपर. बहुत्त डारडडडड हूँ रहा हैई मुझी. Uuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii mummyyyyyyyyyyy. मुझी बचाए लूओ आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

मनीषा की छूट में मेरे पूरा लुंड घुस चुक्का था. उसकी छूट से खून निकल रहा था. उसकी आँखों से आँशु बहने लगे. वो लगातार मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी, लकिन मैं उसे जकड़े हुवे उसकी छूट को सहला रहा था और उसकी चुकी दबा रहा था. थोड़ी देर उसकी छूट सहलाने और चुकी दबाने के बाद मैंने फिर से अपना लुंड जड़ तक बहार खींचा और फिर से उसकी छूट में पेल दिया. मनीषा को फिर से दर्द हुवा और वो चीख पड़ी.

मनीषा- aaaaahhhhhhhhhhh भैयाआ. मैं मर्डर जौंगीीी. रहामं करूऊ मेरे उपररर और अपना लुंड बहार निकाललळ लूओ. Oooooohhhhhhhhhh मुम्ममइय्ययययययय मुझी बचाए लूओ.

मनीषा की चीख सुनकर मैं अपना लुंड धीरे धीरे उसकी छूट के अंदर बहार करने लगा साथ साथ उसकी चुकी को लगातार दबाता रहा. मसलता रहा औरउसकी छूट भी मसलता raha.thodii देर बाद मनीषा को भी कुछ कुछ मज़ा आने लगा. वो भी मेरी तरफ देख रही थी. अब उसकी आँखों से आँशु निकलना बंद हो गया था. वो भी अब हल्का हल्का अपनी कमर चला रही थी. मैं अपने लुंड की स्पीड बढ़ा दी और पूरा लुंड बहार निकल कर अंदर डालने लगा. मनीषा बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- aaaahhhhhhhhhh भैईयाआआ. मुझी दररदद्ड होओओओ रहा हैई ठुड्ढ धीरे करूऊ. Ooooohhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययी. हआ ऐसी होई धीरे धीरे छोड़ू अपनी मनीषा कोऊ. आअह्हह्ह्ह्ह भैईयाआ.

मैं- ooooooooohhhhhhhhhh मनीषा मेरी जांणण. बहुत्त मसस्त्त छूट हैई तुम्हारीयी मेरा पुर्रा लुंदड़ फंसा फांसा अंडरर जा रहा हैई आआह्ह डार्लिंग.

मैं अब मनीषा की छूट में जोर जोर से धक्के लगाने लगा . थोड़ी देर धक्के लगाने के बाद मैं मनीषा के ऊपर लेट गया और उसके होंठो को चूमने लगा. मनीषा भी मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर होंठो को चूमने के बाद मैंने उसकी गार्डन को पकड़ लिया और जोर जोर से उसकी छूट पेलने लगा. मनीषा मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भीआयियियीयआ. बआहूतट अच्छआ लग रहा हैई. ऐसी होई छोडीई मुझी आअह्ह्ह्हह औरर जोरर सी भैया. पूरा लुंदड़ अंडर ड़ालकरर छोड्दिई मुझी. छोडीई अपनी मनीषा को भैया. डैम लगाकर choodiyeee.mainnn इस्सस दीं का काब सी इन्तेज़ाआररर कर रहीए थिई. ऑर्डर जोररर सी छोडीईए भाईया.

माणसीः की बात सुनकर मैं ताबड़तोड़ मनीषा को छोड़ने लगा. मैं पूरा लुंड टोपे तक उसकी छूट से बहार निकलता और एक जोर का झटका मार्कर पूरा लुंड एक hi बार में मनीषा की छूट में दाल देता. मनीषा ताल से टालल मिलकर चुदाई में मेरा साथ दे रही थी और चुदाई का आनंद उठा रही थी.

मनीषा- ooohhhhhhhhhhhh मेरे ररजाअ भैईयाआ. आआआह्ह्ह्ह मेरी बर्फ. और जोर से छोड़ो अपनी गिर्ल्फ्रेंड को. मैंन कॉब्बब सी आपसी छुडवांना चाहत्ती थीई. लेकिननननन अपनी आअज्ज्ज मुझी छोड्दा हैईईई. औरर चूडू bhaiyaa.oooohhhhhhh.

मैं- हाँ मनीषा ये ली औरर अंडरर टाक ली मेरा लौंडा अपनी छूट में. तू बहुत्त मस्स्ष्ट्ट माललळ ही मनीषा. तुझक्खकोऊ चूडड़डकरर मज़ाआ आ गाया. अब्ब्ब मैंन तुझी रुज्ज़ छोड़ूँगा. लिए मनीसा औरर अंडरर मेरा लुंड.

इतना बोलकर मैं मनीषा को और जोर जोर से छोड़ने लगा. मनीषा इस चुदाई से झड़ने के करीब पहुंच गई थी. इसलिए वो जोर जोर से छोड़ने के लिए बोलने लगी.

मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhhhh मीटीररररररररी चुदऊ भईया. आह्हः बहुउउत्तत माज़आ आए रहा हैई भइया. मुझी बहुतत्त अच्छा लग रहा हैई. औरर कास कर छोड़िये. मेरीए छूट मी कुछः होओओओ रहा हैई. छूट मी चीटियया रेंगगग रही हैई भइया. इसको अपनी लुद्द से मार दोऊ भाया. मैंन झड़ने ेवालियीहोऊणन्न aaaaaaaahhhhhhhhhhh. ऑर्डर जोररर सी भइया मैंन आआ रहीए हूँ. Ohhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyy.

ये कहकर मनीषा अपना शरीर ैठने लगी. वो भी भलभलाकर झड़ने लगी. मैं भी अब झड़ने के करीब था. इसलिए मैं मनीषा के ऊपर से उठा और मनीषा की दोनों तनड़ो को पकड़कर उसकी चुकी पर लगा दिया और हचक हचक कर मनीषा को छोड़ने लगा. मनीषा के झाड़ जाने के बाद मेरा लुंड एकदम सटासट अंदर बहार हो रहा था. मैं मनीषा को छोड़ते हुवे बड़बड़ाने लगा.



मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh मनिशांआ. मैंन भी आए रहा होऊणन्न. चू बहुत्त करारा माललळ हैई री. तुझी छोड़कर मैंन जन्नत मी पहुछः गैया होऊं. मैं तुझी रूजज अपने लुंड पर झुला झुलाऊँगा. रोज तुझे अपने लुंदड़ पारर उछलूँगा. मैं भी आ रहा हूँ मेरी रणीय. Aaaaahhhhhhhhhh oooohhhhhhhhhhhhhhh.

इतना कहकर मैं भी मनीषा की छूट में hi झाड़ा गया और उसके ऊपर लेट कर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा. मनीषा ने मुझे कसकर अपने से चिपका लिया और मेरी पीठ को सहलाने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका सर जी जो आपने मुझे इस लायक समझा।

लेकिन आप जैसे मंझे हुए रचनाकार के सामने मेरी क्या बिसात। आप एक बहुत ही उम्दा रचनाकार हैं और मैं अभी इस क्षेत्र में बिल्कुल नई हूँ। :ecs: :respekt::hinthint::what1:

आप अपनी कहानी मुझसे भी बेहतरीन तरीके से लिख सकते हैं, इसलिए आप हमारी टाँग मत खीचिए।🤣:ecs::what1::hinthint:

हमारी कहानी को आप अपने बहुमूल्य सुझाव से सहयोग कीजिए।

साथ बने रहिएगा।
 
अपडेट-122

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh मनिशांआ. मैंन भी आए रहा होऊणन्न. चू बहुत्त करारा माललळ हैई री. तुझी छोड़कर मैंन जन्नत मी पहुछः गैया होऊं. मैं तुझी रूजज अपने लुंड पर झुला झुलाऊँगा. रोज तुझे अपने लुंदड़ पारर उछलूँगा. मैं भी आ रहा हूँ मेरी रणीय. Aaaaahhhhhhhhhh oooohhhhhhhhhhhhhhh.

इतना कहकर मैं भी मनीषा की छूट में hi झाड़ा गया और उसके ऊपर लेट कर लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा. मनीषा ने मुझे कसकर अपने से चिपका लिया और मेरी पीठ को सहलाने लगी.

अब आगे.

झड़ने के बाद मैं मनीषा के ऊपर लेट गया और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगा. थोड़ी देर तक उसके ऊपर लेते रहने के बाद मनीषा ने मुझे अपने ऊपर से धकेलकर अपने बगल किया और मेरी तरफ देखने लगी. मैं भी अपनी सांसे दुरुस्त करता हुवे मनीषा की तरफ देखने लगा. थोड़ी देर उसे देखने के बाद मैंने उससे पूछा.

मैं- ऐसे क्या देख रही हो मनीषा.

manisha-dekh रही हूँ की मेरे भाई होकर कैसे तुमने मुझे छोड़ दिया. तुम्हारी बेशर्मी देख रही हूँ.

मैं- अब इसमें कौन सी बेशर्मी मेरी जान. ये सब छोडो ये बताओ की मज़ा आया या नहीं.

मनीषा- इतनी बेरहमी से छोड़ा मुझे और पूछ रहे हो की मज़ा आया की नहीं. अभी भी दर्द हो रहा है. फिर भी शुरू शुरू में नहीं लेकिन बाद में बहुत मज़ा आया.

मैं- अरे थोड़ी देर दर्द होगा उसके बाद ठीक हो जाएगा. चलो एकबार और करते हैं फिर.

मनीषा- अभी नहीं. थोड़ी देर बाद करते हैं अभी मैं फ्रेश होकर आती हूँ तब.

इतना कहकर मनीषा फ्रेश होने बाथरूम चली गई. शील टूटने के करार वो थोड़ा थोड़ा लंगड़ा कर चल रही थी. थोड़ी देर बाअद मनीषा फ्रेश होकर बीएड के पास आई तो मैंने उसे पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठो को चूमने लगा. मैं मनीषा के होंठो को दबोच दबोच कर चूस रहा था. मनीषा भी मेरे होंठो को चूसने लगी. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मनीषा ने अपनी जीभ मेरे मुंह में दाल दी. मैं उसकी जीभ चूसने laga.kuchh देर उसकी जीभ चूसने के बाद वो मेरी जीभ चूसने लगी. थोड़ी देर बाद मनीषा अलग हुई और मेरे चहरे को चूमने लगी. मेरे चेहरे को चूमते हुवे मनीषा निचे की तरफ जाने लगी वो मेरी गार्डन मेरा सीना और मेरा पेट चूमते हुवे निचे पहुंच गई और मेरे लुंड के पास जाकर रुक गई और अपनी गार्डन उठाकर मुझे देखने लगी. मैंने उसे देखते हुवे कहा.

मैं- अब देख क्या रही हो मनीषा इसे अपने शहद जैसे मुंह में लेकर प्यार करो.

मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे लुंड को जीभ निकलकर चाटने लगी. मेरे मुंह से सिसकी निकल गई. मनीषा पुरे लुंड पर अपनी जीभ घुमा रही थी. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद मनीषा ने मेरी बॉल्स को भी अपने हांथो से पकड़कर ऊपर उठाया और उस पर अपनी जीभ फिरने लगी. मेरी तो मज़े के मरे जान निकली जा रही थी और मैं बस आआआहहहहहहह मनीषा ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मनीषा करता रहा.

थोड़ी देर मेरे बॉल्स को चाटने के बाद मनीषा ने अपना मुंह खोला और मेरे बॉल्स को अपने मुंह में भरकर बड़े चाव से चूसने लगी. मैंने हाँथ बढाकर मनीषा का सर पकड़ लिया और उसके बालो को सहलाने लगा. मनीषा ने काफी देर मेरे बॉल्स को चूसा फिर मेरे बॉल्स को छोड़कर मेरे लुंड को अपने मुंह में भर लिया जो अब खड़ा हो गया था.



मुझसे भी अब ज्यादा बर्दास्त नहीं हुवा तो मैं कमर उठाकर बैठ गया और मनीषा की टैंगो को पकड़कर अपनी तरफ खींचा और फिर लेटकर उसे अपने ऊपर खींच लिया. इस दौरान भी मनीषा ने मेरे लुंड को अपने मुंह से निकलने नहीं दिया.

अब हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए था. मनीषा मेरे लुंड को चूस रही थी. मैंने भी अपने हाँथ उसकी गांड पर रख दिया और अपनी जीभ निकलकर उसकी छूट चूसने लगा. मेरा मुंह छूट पर लगते hi मनीषा ने मेरे लुंड को जोर से मुंह में दबा दिया. मैं मनीषा की छूट चाटने लगा और एक दोनों हांथो से मनीषा की गांड दबाने लगा. मनीषा बहुत जोर जोर से मेरा लुंड चूस रही थी. उसके मुंह से गगगगूउऊउउउउ गग्गूउऊउउउउ की आवाज़ निकल रही थी. थोड़ी देर उसने मेरा लुंड चूसने के बाद मेरा लुंड मुंह से निकल दिया मेरा पूरा लुंड मनीषा के थूक से भीगा हुवे था. उसने लुंड को मुंह से निकलकर उसे हाथो से मुट्ठ मरने लगी और मुझसे बोली.

मनीषा- भैया इस पोजीशन में बहुत मज़ा आ रहा है. और जोर से चूसिये मेरी छूट को.

मैं मनीषा की बात का कोई जवाब दिए बिना उसकी छूट जोर जोर से चूसने लगा. मनीषा भी मेरे लुंड को फिर से मुंह में ले लिया और चूसने लगी लगभग 5 मिनट तक एक दूसरे की छूट और लुंड चूसने के बाद हम दोनों चुदाई के लिए तड़पने लगे. इसलिए मैंने मनीषा को अपने ऊपर से उठाया और बिस्टेर के सिरहाने तक लगाकर बैठ गया और अपने पेअर को फैला दिया. मैंने मनीषा को अपने ऊपर बैठने का इशारा किया. मनीषा आकर मेरी गॉड में मेरी तरफ मुंह करके बैठने लगी. मैंने अपने लुंड को पकड़कर सीधा किया और मनीषा को बैठने का इशारा किया.

मनीषा ने अपनी छूट मेरे लुंड पर टिकाई और एक हाँथ बिस्टेर पर और एक हाँथ मेरी गार्डन पर डालकर बैठने लगी. मनीषा ने आधा लुंड अपनी छूट में ले लिया. अब उसे दर्द होने लगा था इसलिए वो रुक गई और आधा लुंड अपनी छूट के अंदर बहार करने लगी. थोड़ी देर उसने अपनी छूट में आधा लुंड अंदर बहार kiya.lekin मुझे मज़ा नहीं आ रहा था, इसलिए मैंने मनीषा का कन्धा पकड़कर उसे जोर से निचे दबाया और निचे से अपनी कमर ऊपर की तरफ उछाल दी. जिससे मेरे पूरा लुंड सरसराता हुवा मनीषा की छूट में जड़ तक घुस गया. मनीषा को मेरे इस हमले से बहुत दर्द हुवा और वो चीख पड़ी.

मनीषा- uuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्ययययययय. aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मैंन मर्डर gaaaiiiiiiiiii. बआहूतट जालीइममम होऊ तुममम भाइयाँआ. आआह्ह्हह्ह्ह्ह बहुउट्ठ डारडडड होऊ रहा हीी. आपको मेरीए कोईई फिकार्डर नाहीई हाइइइइ. मैंनं डालल तू रहीए थिई अंडर. तू ेक्क्क बार्डर मी डललनीकीय क्या जरूररततत थिई. ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

मनीषा दर्द से मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी. लेकिन मैंने उसे पूरी तरह से अपने बहो में जकड रखा था और अब हल्का हल्का धक्का लगाने लगा और मनीषा से कहा.

मैं- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा. मुझी आधी लुंड से तुम्हारी चुदैई करनी में मज़ाआनाहीइ आ रहा था. औरर तुम होऊ ही इतनी क़तील की मुझसे कोंट्रॉल्ल होई नाहीइ हुवा.

मनीषा- aaaaaahhhhhhhhhhh आपपप ापपणी माज़ी की चाक्करर मी मेरीए जाननं लेना चाहहते हईं. अआप बहुउट्ठ गंदी हैंन. अपनी ही बहाननं कोऊ छोड़ रही हैं.

मैं मनीषा की बात सुनकर निचे से अपनी कमर जोर जोर से चलने लगा. मनीषा भी अब मस्ती में अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरे लुंड पर कूद रही थी और अपनी छूट छुड़वा रही थी. उसने अपने दोनों हाँथ मेरी गार्डन में लप्पेट था. मैं मनीषा को धक्के मरते हुवे बोलै.

मैं- आआअह्ह्ह्ह मनीषा. छुड़ायी करनी सी कोइई लड़कीय मारतीयनही हीी बल्किई उसको चुदाई मी मज़ा बहुत्त आता ही. अगर चुदाई करनी से लड़किया मरने लगती तू अब तक्क तू आधी दुनिया खाली होऊ जाती.

इतना बोलकर मैंने मनीषा के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और अपने दोनों हाँथ उसकी गद्देदार गांड पर रखकर उन्हें दबाने laga.manisha मेरे होंठो को धीरे धीरे चूस रही थी. और मैं धीरे धीरे उसकी गांड दबाते हुवे मनीषा को छोड़ रहा था. थोड़ी देर धीरे धीरे चूसने के बाद मनीषा एकदम वाइल्ड हो गई और मेरे होंठो को पूरी ताकत से चूसने लगी. और चूसते चूसते उसने मेरे होंठो को काट लिया. मुझे दर्द हुवा तो मैंने उसकी गांड को जोर से दबा दिया. मनीषा को भी दर्द हुवा और वो सिसकते हुवे बोली



मनीषा- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैईयाआ. क्या कर रही होऊ. इतनी जोरर से क्यों दबा रहे हूँ.

मैं मनीषा की गांड को जोर जोर से बढ़ाते हुवे अपने मुंह निचे करके मनीषा की चूचियों पर रख दिया और उसे पिने लगा. मनीषा की छूट, गांड और चुकी तीनो पर इस समय मैं हमला कर रहा था जिससे मनीषा बहुत गरम हो गई और बोलने लगी.

मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भाइयाँआ. बहुत्त मज़ाआ आ रहा हैई. ऐसी होई करिये भैया औरर जोरर से छोड़िये अपनीइ मनीषा को. औरर जोरर से बढाइये मेरी गण्ड को. आआआआह्ह्ह्हह्ह भैया. अआप तू बहुतत्त खिलाडीई आदमी हूँ भैया. मेररीई चूचियों को पीई जाइये भइया. पुर्रा रास निचोड़ लीजीईए. बहुत्त रॉस भारा हैईईई मेरेई चूचियों मी. यी साब आपकी लिए hi हैई मेरी जानऊ.

मनीषा की बात सुनकर मैं और जोर जोर से उसकी चूचियों को पिने लगा. कभी मैं एक चुकी को मुंह में भरकर चुस्त तो कभी दूसरी को चुस्त. अब मैं मनीषा को छोड़ते हुवे उसकी गांड पर हल्का हल्का चपत भी लगाने लगा. मनीषा एकदम मस्ती में सिसक रही थी और अपनी गार्डन ऊपर करके अपनी चूचिया मुझसे चुसवा रही थी और बोल रही थी.

मनीषा- आआह्ह्ह्हह्ह भैयाआ. ाप्प बहुत्त अछ्हीई छूछी चूस रही हैई. और जोरर सी चूसिये ऑर्डर निछोड़ लीजिये इसका रस. बहुत तडपीई हैं एई आपकी मुंह मी जानी की लिये. ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह भैया.

मैं थोड़ी देर मनीषा को इसी पोज़ में पेलता रहा उसके बाद मैंने मनीषा को अपनी गॉड से उठाकर उसे डॉगी स्टाइल में खड़ा कर दिया और उसके पीछे आकर अपने लुंड को उसकी छूट पर रखकर एक झटके में पूरा लुंड उसकी छूट में पेल diya.manisha दर्द से दोहरी हो गई और चिल्लाने लगी.



manisha-uuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii मुनंमयिययियीय. बाहहारर निक्कलललल लूओ अपनी लंदड़ kooo.meriii छुटत पहाड़ डाली तुमनेई जालिम्म इंसाननं. तुमममम एक्दम्मम जंवरर होऊ. मुझी नाहीई छुड़वाना तुमसीए. aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhh.

मनीषा चीखकर आगे की तरफ भागने लगी, लेकिन मैंने उसकी कमर को मज़बूती से पकड़ रखा था इसलिए वो मुझसे छोटकर नहीं जा पाई और अपने आपको छुड़ाने की पूरी कोशिश करती रही. मैं भी उसके दर्द को देखते हुवे वैसे hi रुका रहा और एक हाँथ आगे लेजाकर उसकी चुकी को पहाड़कर दबाने लगा और एक हाँथ से उसकी छूट को सहलाने लगा. थोड़ी देर तक ऐसा करने के बाद मनीषा को भी रहत महसूस हुवी , तो उसने अपनी कमर आगे पीछे करना शुरू कर दिया.

मनीषा के कमर आगे पीछे करता देखकर मैंने भी उसकी कमर को पकड़कर उसकी छूट को हलके हलके ढकी मार्कर छोड़ने लगा. मनीषा भी चुदाई में मेरा साथ देने लगी. थोड़ी धीरे धीरे छोड़ने के बाद मैंने जोर जोर से धक्के लगाना शुरू कर दिया और एक हाँथ से मनीषा की गांड पर हलकी हलकी चपत लगाने लगा. मनीषा को भी मज़ा आने लगा और वो बोलने लगी.

मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह भैईयाआआ. ऐसे हीई धीरे धीरी स्लैप कीजिये भैया मुझी बहुत्त अच्छा लग रहा हीी. ऐसे ही मेरीए छूट को छोड़िये. आप बहुत्त अछ्हीई चुड़ायी करते हैंन बहिया. अब्ब थोड़ा और जोर जोरर से छोड़िये मुझे. बहुत अच्छा लग रहा हैई. मैंन अब्ब्ब किसी भी समाय झाड़ सकती हूँ भैया. oooooooohhhhhhhhhhhh मुनंमयिययी. तुम्हार्रा बेटा तू चूडू मास्टर हैई. तुम्हारिई 3no बेटीयून को छोड़ दिया िस्नी. aaaaaaaaaahhhhhhhhh

मनीषा की मदभरी आवाज़ सुनकर मैंने मनीषा के सर को दबाकर बिस्टेर पर कर दिया और उसकी कमर को उठा दिया. जिससे उसकी छूट और बहार की तरफ निकल गई. ऐसा करने के बाद मैंने अपने लुंड को टोपे तक बहार निकला और पूरी ताकत से उसकी छूट में पेल दिया. मनीषा aaaaaaahhhhhhhhhh भैयाआ करके चीखी और चुदाई का मज़ा लेने लगी. मैं अब बार बार अपना लुंड टोपे तक बहार निकालता और पूरी ताकत से मनीषा की छूट में पेल देता. इस चुदाई से मनीषा का बीएड हिलने लगा. लगभग 5 मिनट तक ऐसे hi ताबड़तोड़ छोड़ने के बाद मनीषा झड़ने के करीब पहुंच गई और बड़बड़ाने लगी.



मनीषा- ahhhhhhhhhhhhhhh ब्राह्ममममम भाआईईईई. कुछःह तू रहम कर. पुररी जँवाररर की तआराहः छोड़ड़ड़ रहा ही अपनी बहानंन्न kooo.aaaaahhhhhh ऑर्डर जोरर से छोडोऊ भैयाआ. मैं आनी वालीए हूँण. मेरा बाडांण हवा मी उड़द रहा ही भैया. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मैं गईई. मुझी सँभालुओ. और जोरर से पेलोऊ मेरी छूट को. पूरा लुंड अपना थूककक दू इसकी ाँदाररर. बहुतत्त खुजलियी होत्तीए हीी इसमेई. आआआआअह्ह्ह्हह भैया मैं गाइइइइइइइइ. साम्भालूओ मुझको. uuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii मम्मीयिययी.

इतना कहकर मनीषा भलभलाकर झाड़ गई और निढाल होकर बिस्टेर पर लेट गई. मैं उसके ऊपर लेट कर उसकी पीठ को किश करना लगा. जीभ निकलकर चाटने लगा. मैंने एक हाँथ बगल से डालकर उसकी चुकी को पकड़कर दबाने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मनीषा फिर से गरम होने लगी. मैंने मनीषा को उठाकर कुर्शी पर बैठा दिया और झुककर मनीषा के पैरो के निचे बैठ गया और उसकी छूट चाटने लगा. मैंने हाँथ ऊपर करके मनीषा की चूचियों को पकड़कर दबाने लगा. कुछ देर ऐसा करने के बाद मनीषा फिर से गरम होने लगी.

मनीषा ने अपने हांथो से मेरे सर को अपनी छूट पर दबाना शुरू कर दिया. मैं तेज़ तेज़ से मनीषा की छूट चाटने लगा और उसकी चूचिया मसलने laga.manisha ooooooohhhhhhhhhhh भईया आआआआअह्ह्ह्हह भैया करती रही. कुछ देर उसकी छूट चाटने के बाद मैं खड़ा हो गया और पोजीशन लेकर मनीषा की एक तंग उठाकर कुर्सी की हत्थे पर रख दिया और लुंड को उसकी छूट पर सटाकर एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लुंड उसकी छूट में पेल दिया. मनीषा के मुंह से चीख निकल गई.

manisha-ooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhh bhaiyaaaaaaaaaaaa. धीरी धीरीई डालूओ.

मैंने मनीषा की बात मणि और धीरे धीरे लुंड उसकी छूट में पेलने लगा. मैंने झुककर मनीषा के सर को ऊपर उठाया और उसके होंठो को चूमने लगा मनीषा भी चुड़ते हुवे मेरे होंठो को चूमने lagi.main हलके हलके झटके लगाकर मनीषा की छूट 5 मिनट कर पेलता रहा और होंठ चुस्त रहा. उसके बाद मैंने उसके होंठो से अपना होंठ हटाया तो मनीषा ने कहा.

मनीषा- oohhhhhhhhhhh भैयाआ. और तेज़ छोड़ो मुझी. जोर जोर से पेलो मेरी छूट को भीआयाआ.

मनीषा की बात मानकर मैंने अपने धक्को की रफ्तारर बढ़ा दी और हचक्क हाचाक्क कर मनीषा की छूट में लुंड पेलने लगा. थोड़ी देर उसको ऐसे पेलने के बाद मैंने मनीषा को पकड़कर अपनी गॉड में उठा लिया. मनीषा ने अपने बहे मेरे गले में दाल दी और मुझसे लिपट गई और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए. मैं उसे जोर जोर से अपने लुंड पर उछालने लगा. मनीषा को बहुत मस्ती में बोलने लगी.



मनीषा- aahhhhhhhhhhhhhhhhh हांण भैईया ऐसी ही छोड़दू मुझी मैंनं तुम्हारीई होऊणन आआअह्हह्ह्ह्हह. बहुतत्त अछ्हा लग रहा हैई भइया. आआआआअह्ह्ह्हह भाइययिया ऑर्डर टीज़ज़ज़ कार्रोओओओ क्यूँ तड़पा रही हूँ मुझको. प्यारररररर सी खोजज हचक हचाकक कर छोड़ो मेरे भैया. मुझी हमेशा ऐसी ही छोड़ती राहु. बना लू मुझी अपनी लुंड की रानीई. पतले राहु मेरी छूट भैया. तुम्हारा हथियार बहुतत्त मस्त हैई ooohhhhhhhhhhhh.

मनीषा की मादक सिसकारी सुनकर मैंने धक्के और तेज़ कर दिया और मनीषा से बोलै.

मैं- ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषा मेरिइइइइइइ राजनीय. ायबबब तू मैंन तुझी छोड़ी ेक्क्क दिन्नं भी नाहीइ रहहह सक्ता. देखहह तेरा भायी अपनीइ मास्ट माललळ बहन को छोड़ रहा ही तुझ जैसीई गरम्म बहाणं को छोड़ना किस्मत की बात ही मेरीए रणीय. मैं चाह्त्ता हूँ की मेरीए बहन खुशी सी सरई ज़िन्दग़गी मुझसे ऐसी ही चुदवाती रही.

इतना कहकर मैं मनीषा को लिए लिए बिस्टेर पर लेते गया और मनीषा को अपने लुंड पर बैठा लिया और निचे से धक्का लगाने लगा. अब मेरा लुंड मनीषा की बच्चेदानी में ठोकर मार रहा था. मैंने मनीषा को मोर्चा सम्बहलने के लिए कहा और आराम से बिस्टेर पर लेट गया. मनीषा ने अपने पंजो के बल बीअतकार मेरे लुंड पर उछलने लगी और बोलने लगी.



मनीषा- आह्ह्हह्ह्ह्ह भैयाआ. बहुत मज़ा आए रहा हैई. हैं मैंन बाहुटत गारम्म हूँण. लेकिननं यी गर्मी मेरे भाईई की लिये हीी. वहीइ मेरीए गरमी कोऊ थांदड़ा करेगा. मैंन पुरीई ज़िंदगीई तुमसे छुडवाऊंगीए भइया. ooooooooohhhhhhhhhh. जिसका तुममम जईसा भाईईई होओओओ. तू कौंन सीई बहाननं ऐसी भायी को मना कररर सकककटी हैई. निचे सी तुममम भी छोड़ू मुझी मेरा होनी वाला ही.

मैं- हाआआआह आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मनीषआआ मेरा भी होनी वाला हैईईई. चू भी औरर जोरर जोरर सी उछाल मेरे लौड़ी पारर. औरर पूरा ली ली अपनी अंडर औरर बुझा ली अपनीइ प्यास और थांडी कर ली अपनी गरमी.

मनीषा- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह भैयाआआ. ऑर्डर जूर्रर सी छोड़ू भैयाआ. तुममम बहुतत्त अच्छा छोड़ रही हूँ. तुमको पता हीी कोई लडकीयो को कैसी छोड़ा जाता हैई ताभ्हीइ तुमने सरिता दी और सरिता डीई को अपना गुलाममम बना कर रख्हा हुवा हैई. आजजज तुमने मुझी भी छोड़कर अपना गुलाम बना लिया ही मेरे चुड़क्कड़ भैया. aaaaaahhhhhhhhhh.

मैं निचे से कमर जोर जोर से ऊपर उचलल रहा था और मनीषा तेज़ी से मेरे लुंड पर कूद रही थी. मैं मनीषा को पेलते हुवे जोर जोर से बड़बड़ाते हुवे झड़ने लगा.

मैं- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मनीषा मेरीए रानीई. मैंन झाड़नी वाला हूँण आआआअह्ह्ह्हह लिए अपनी छुटत मी मेरा लौड़े का पनीई औरर बुझा ली अपनी छुटत की प्यास. aahhhhhhhhhh मनिशांआ मैं गया ooooohhhhhhhhhhhhh.

मेरे झड़ने के साथ साथ मनीषा का भी बदन अकड़ने लगा और वो भी जोर जोर से अपनी छूट मेरे लुंड पर पटकते हुवे झड़ने लगी और बोले लगी.

मनीषा- aaaaaahhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhh मुम्ममइय्यययय. मैंनं gaiiiiii.sambhaalooo मुझी. मैं भी झाड़ रहीए हुन्न भैया. मुझी बहूत्त माज़आ आए रहा हैई भइया. aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh मैं gaiiiiiiiiii भैइयाआआआ.

इतना कहकर मनीषा भी झाड़ गई और मेरे ऊपर लेट कर अपनी सांसे दुरुस्त करने लगी. मैंने भी अपने बांहे मनीषा के ird-gird दाल ली और उसे अपने साइन से चुपके लिया. थोड़ी देर बाद जब दोनों की सांसे नार्मल हुई तो मैंने मनीषा के होंठ चूमते हुवे पूछा.

मैं- कैसा लगा मेरी प्यारी बहन को.

मनीषा- पूछहु ही मत भैया. मज़ा आ गया. पहली बार से ज्यादा मज़ा आया इस बार.

थोड़ी देर ऐसे hi एक दूसरे के होंठ चूसने के बाद मनीषा मुझसे अलग होकर बिस्टेर से निचे उतर गई और नंगी hi बहार जाने लगी. मैं उसकी नंगी कातिल और थिरकती गांड देखने लगा. मनीषा को जैसे पता चल गया हो की मैं कहा देख रहा हूँ. उसने दरवाज़े से पलटकर मुझे देखा तो मुझे अपनी नंगी गांड को देखता पाया. तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गई और वो लगड़ाते हुवे बाथरूम चली गई. मैं भी उठकर अपने आप को साफ करने के लिए ऊपर बाथरूम में चला गया. अपने को साफ करने के बाद मैंने पैन किलर और i-pil लेकर मनीषा के कमरे में वापस आया.

मनीषा बिस्टेर पर बैठी थी. मैंने उसे पैन किलर खाने के लिए दी. उसने पैन किलर खाया और बिस्टेर पर टेल गई. मैं भी आकर मनीषा के बगल लेट गया और उसके सर को अपने कंधे पर रखकर उसके बालो में ऊँगली फिरने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने उसके माथे पर अपना होंठ रख दिया और एक प्यार भरा चुम्बन उसके माथे पर कर लिया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-123

मैं और मनीषा बिस्टेर पर एक दूसरे से चिपक कर लेते थे. मैं मनीषा के माथे को चूमकर उसके बाल को सहला रहा था. मनीषा ने मेरी तरफ देखते हुवे मुझसे कहा.

मनीषा- जब मैं बाथरूम जा रही थी तो आप क्या देख रहे थे.

मैं- मैं क्या देख रहा था. कुछ भी तो नहीं

मनीषा- मुझे पता है की आप क्या देख रहे थे. अब छुपाइये मत और बता दीजिये.

मैं- मनीषा. वो क्या है न मुझे तुम्हारी गांड बहुत पसंद है. मैं तुम्हारी गांड भी मरना छठा हूँ.

मनीषा- (मुस्कुरा kar)aap न भैया सच में बहुत कमीने हो. अपनी तीनो बहनो को पाटकर छोड़ लिया आपने और फिर भी आपका मन नहीं भरा तो मेरी गांड के पीछे पद गए हो.

मैं- सच में मनीषा. तुम्हारी गांड बहुत hi मस्त है. जब तुम चलती हो तो उसकी लचक देखकर मेरा मन करता ही की अभी तुम्हारी गांड मर लू.

मनीषा- क्यों दोनों दीदी की गांड मस्त नहीं है क्या.

मैं- मत पूछो मनीषा. मेरी तीनो बहनो की गांड एक से बढाकर एक है. और मैं तुम तीनो की गांड मरना चाहता हूँ.

मनीषा- अच्छा. तो किस किस की गांड मरी है आपने.

मैं- अभी तक तो सिर्फ सरिता दी की hi मरी है. सविता दीदी की गांड मैं आगरा जाकर मरूंगा. लेकिन अभी मुझे तुम्हारी गांड मारनी है. बोली मनीषा.

मनीषा- लेकिन मुझे बहुत दर्द होगा भैया. देखा नहीं सरिता दीदी कैसे 3 दिन ठीक से चल नहीं पायी थी. और वैसे भी आपका बहुत बड़ा है भैया.

main-tumhari गांड भी सरिता दीदी से किसी मामले में काम नहीं है. मैं बहुत प्यार से मरूंगा. तुम्हे ज्यादा दर्द नहीं होगा मनीषा.

मनीषा( थोड़ी देर सोचकर)- मैं तैयार हूँ भैया, मगर मेरी दो शर्ते हैं. अगर मानोगे तभी मैं आपकी बात मानूंगी.

मैं- अरे मुझे तेरी साडी शर्त मंजूर है मनीषा. तू बोल तो सही. तेरी इस गांड के लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ.

मनीषा- इतना ज्यादा उछालो मत भैया. पहले मेरी बात तो सुन लो. ऐसा न हो की मेरी शर्त सुनकर आपका उबाल ठंडा पद जाये और आप मेरी गांड का ख्याल भूल जाये.

मैं- तू बता तो सही पहले.

मनीषा- पहली शर्त ये है की आप मुझे आगे से भी सरिता दीदी और सविता दीदी की तरह रफ़ तरीके से छोड़िये. जैसे उन दोनों को गली देखर छोड़ते हैं वैसे hi मुझे भी छोड़ा करियेगा. मुझे उसमे और भी मज़ा आएगा.

मैं- अरे मनीषा. मैं तुम्हारे साथ रफ़ सेक्स नहीं करना चाहता था इसलिए तुमको बहुत प्यार से मैंने छोड़ा. लेकिन जब तुम खुद चाहती हो तो मैं आगे से तुमको भी रफ़ तरीके से hi छोडूंगा. ये शर्त मुझे मंजूर है. दूसरी शर्त क्या है तुम्हारी.

मनीषा- मेरी दूसरी शर्ट ये है की मुझे पता है की जब आप मेरी गांड मरोगे तो मुझे बहुत दर्द होगा. इसलिए मैं चाहती हूँ की जब आप मेरी गांड मारो तब सरिता दीदी भी साथ में हो और मेरी हेल्प करे

मैं- क्या….. क्या कहा तुमने.. दिमाग तो ठीक है न तुम्हारा, ये कैसी बात कर रही हो यार तुम, सरिता दीदी के सामने तुमको छोड़ू. ये कभी नहीं हो पायेगा मनीषा.

मनीषा- क्यों नहीं हो पायेगा भैया. जब आप मेरे सामने दोनों दीदी को छोड़ सकते हैं तो आप सरिता दीदी के सामने मुझे क्यों नहीं छोड़ सकते.

मैं- तुम पागल हो गई हो. मैंने कब तुम्हारे सामने दोनों दीदी को छोड़ा है. वो तुम छुपकर देखा करती थी. जिसका हम तीनो में से किसी को पता नहीं था. और तुम ये क्यों भूल रही हो की छहपकार देखना और सामने से देखना दोनों अलग अलग चीजे हैं. चलो मन भी लेता हूँ की मैं इसके लिए तैयार भी हो जाता हूँ. लेकिन दीदी का सोचो. उनका क्या. तुमको लगता है की हम दीदी के पास जाकर ये कहेंगे की मैं तुम दोनों को साथ में छोड़ना चाहता हूँ और वो मान जाएँगी. वो कभी नहीं मानेंगी.

मनीषा- इसका भी इलाज़ है मेरे पास. वो मैं कर लुंगी, लेकिन पहले आप तो रेडी हो जाओ इसके लिए.

main(hanskar) ठीक है मैं तैयार हूँ. मुझे एक साथ दो दो हसीनाओ को छोड़ने का मौका मिल रहा है. इससे ज्यादा मुझे क्या चाहिए.

मनीषा- मुझे पता था. आप पुरे कमीने हो. ऐसा मौका आप अपने हाँथ से थोड़े hi जाने डोज.

मनीषा की बात सुनकर मैं हंस पड़ा. मेरी बात सुनकर मनीषा भी हंस पड़ी. उसके बाद हम दोनों काफी देर इधर- उधर की बाते की और फिर एक दुसरे की बहो में नंगे hi सो गए. रात की चुदाई के कारन हम थके हुवे थे और सो hi रहे थे की दरवाज़े पर बेल्ल बजी, लेकिन आलस के कारन मैं दरवाज़ा खोलने नहीं गया. थोड़ी देर बाद मेरे मोबाइल पर सरिता दीदी की कॉल आयी की वो सब बहार खड़े हैं. दरवाज़ा खोल दूँ. मैं उठकर मनीषा को जागकर सब बता दिया और अपने कमरे में चला गया. जल्दी से मैंने लोअर और t-shirt डाली और दरवाज़ा खोलने चला गया. दरवाज़ा खोलने के बाद मां पापा और दीदी अंदर आ गए. मैंने दरवाज़ा बंद कर लिया और वापस अपने कमरे में आकर सो गया.

लगभग 8 बजे के करीब सरिता दीदी ने आकर मुझे जगाया. मैं आँख मलते हुवे उठा और फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस गया. जब मैं फ्रेश होकर बहार आया तो दीदी मेरे बिस्टेर पर बैठी थी. मैं भी जाकर वही बैठ गया तो दीदी ने मुझसे पूछा.

सरिता दी- आज इतनी देर तक क्यों सो रहे थे.

मैं- वो दीदी रात को देर से सोया था इसलिए नींद आ रही थी.

सरिता di(muskura कर) मनीषा भी सो रही है अभी तक. कही मैं जो सोच रही हूँ वो सच तो नहीं.

मैं- नहीं दी ऐसी कोई बात अभी तक नहीं हुई है. वो मनीषा और मैं देर रात तक जागकर बाते करते रहे और मैं उसपे तरय भी करता रहा. इसलिए आज इतनी देर तक सो रही है.

मैं दीदी को इसलिए कुछ नहीं बताया की बहुत hi जल्द मनीषा के प्लान इम्प्लीमेंट करने के बाद दीदी को सब पता hi चल जाना था, लेकिन मैं ये नहीं जनता था की मनीषा आज hi अपने प्लान को इम्प्लीमेंट करने वाली थी.

सरिता दी- तो बात कहा तक पहुंची अभी तक.

मैं- आप को बहुत जल्दी है jan-ne की, बस कुछ दिन में शायद काम बन जाये.

सरिता दी- सेल तू किसी पर तरय करे और वो तुझसे बच जाये ये तो नामुमकिन है. कीप आईटी उप.

दीदी इतना बोलकर बिस्टेर से उठी और मेरे होंठो को किश किया और निचे चली गई. थोड़ी देर बाद मैं नाश्ता करने के लिए निचे आया और जाकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गया. पापा मम्मी भी वही थे. कुछ देर बाद मनीषा भी वह आ गई. हम सब ने मिलकर नाश्ता किया. मम्मी पापा जॉब पर चले गए और मैं भी अपने काम पर जाने के लिए कपडे बदलने अपने कमरे में चला गया. मैं कपडा चेंज कर रहा था तो मनीषा कमरे में आ गई. आते hi उसने मुझे पीछे से हूजे किया. मैंने मनीषा से पूछा.

मैं- अब तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा है न.

मनीषा- हाँ भैया थोड़ा बहुत है अभी भी. आज सोल्लगे नहीं जोगी और आराम कर लुंगी तो सब ठीक हो जायेगा.

मैं- ठीक हैई. जैसा तुम्हे ठीक लगे.

इतना कहकर मैंने मनीषा को अपने आगे कर लिए और उसके होंठो पर किश कर लिया और अपने काम पर निकल गया. थोड़ी देर काम करने के बाद मैंने अपना सामान समेटा और बहार घर आ गया. घर आकर मैं अपने कमरे में गया और अपना पूरा काम फिनिश किया और बिस्टेर पर लेट गया. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी की कॉल आई. उन्होंने मुझ अपने कमरे में बुलाया था. मैं दीदी के कमरे में जाने लगा तो मनीषा अपने कमरे से बहार निकल रही थी. मुझे दीदी के कमरे में जाता देख वो मुस्कुराने लगी और आँख मर दी. मैं भी मुस्कुराता हुवा दीदी के कमरे का डोर क्नॉच किया. थोड़ी देर बाद दीदी ने आकर दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खोलने के बाद दीदी ने मुझे अंदर खींच लिया और दरवाज़ा लॉक कर दिया.

दरवाज़ा बंद करके जब दीदी मेरी तरफ थोड़ा सा घूमी तो मैं उन्हें देखता रह गया. दीदी आज एक टॉप और मिनी से मिनी स्कर्ट पहने हुवे थी. दीदी की चूचिया टॉप को फाड़कर बहार आने को बेताब थी. दीदी की मिनी स्कर्ट इतनी ज्यादा छोटी थी की वो दोनों उनकी गांड पर hi ख़तम हो जाती थी. शायद ये दीदी के स्कूल टाइम की मिनी स्कर्ट थी.



मैं तो दीदी को देखते hi सीधे उनके पास चला गया और उनपर टूट पड़ा. मैंने दीदी को कसकर अपने साइन से लगाया. जिससे दीदी की चूचिया मेरे साइन में धस गयी. मेरा लुंड दीदी की छूट पर जाकर ठोकर मारा. दीदी की आआआअह्हह्ह्ह्हह निकल गई. मैंने अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और अपने दोनों हाँथ बढाकर उनकी गांड पर रख दिया. मैं दीदी के होंठ चूसते हुवे उनकी गांड दबाने लगा. दीदी भी होंठ चूसने में मेरा साथ देने लगी. और अपना हाँथ बढाकर मेरा लुंड पकड़ लिया और सहलाने लगी.

मैं दीदी के होंठ चूमते हुवे अपने जीभ दीदी के होंठो पर फिरने लगा. दीदी ने भी मुंह खोलकर मेरी जीभ अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैंने एक हाँथ दीदी की गांड से उठाकर उनकी छूट पर पंतय के ऊपर से रख दिया और उनकी गांड दबाते हुवे उनकी छूट भी सहलाने गाला. थोड़ी देर तक दीदी से अपनी जीभ चुसवाने के बाद मैंने अपने हाँथ से दीदी की चुकी जोर जोर से दबाने लगा और गांड को मसलने लगा. दीदी भी मेरे लुंड को लोअर के अंदर हाँथ डालकर जोर जोर से मुठियाने लगी. मैंने अपना मुंह दीदी के मुंह से हटाया और उनकी गार्डन को चूमने लगा. मैंने दीदी की चुकी को पकड़कर जोर से बड़ा दिया. दीदी सिसक पड़ी.

सरिता दीदी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiii. dhireeeeeeeeeee सीई.

सरिता दीदी की सिसकी सुनकर मैंने हाँथ निचे कर उनकी स्कर्ट के चुके को खोल दिया. स्कर्ट दीदी के पैरो में जाकर गिर पड़ी. अब मैं दोनों हांथो से दीदी की पंतय में फांसी नंगी गांड को दबाने लगा. दीदी जोर जोर से मेरा लुंड मुठियाने लगी. थोड़ी देर दीदी की गांड दबाने के बाद मैंने दीदी को घुमाकर दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया और एक हाँथ से दीदी की चुकी दबाते हुवे दीदी की गांड पर जोर से थप्पड़ मर दिया. दीदी aaaaaaaaaahhhhhhh abhhiiiiiiiiiiiiiii करके सिसक पड़ी.



मैंने तुरंत निचे झुककर दीदी की गांड को चुम लिया. मैंने फिर से दीदी की गांड पर जोरदार थप्पड़ जमा दिया दीदी फिर से aaaaaaaaaahhhhhhhh अभियई करके सिसकी. मैं फिर से झुककर दीदी की गांड को चुम लिया. मैंने लगभग 5 मिनट तक दीदी के साथ यही किया. दीदी को भी इस दर्द भरे खेल में मज़ा आ रहा था. उसके बाद मैंने लास्ट थप्पड़ बहुत जोर से लगा दिया और तुरंत झुककर दीदी की गांड को काट लिया दीदी की चीख निकल गई.

सरिता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh कामिनीई. इतनीई ी जोररर सीए क्यूओ काअररर रहा हीी. डारडडड होता हैई मुझी.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को घुमाकर अपनी तरफ किया और उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आँखे एकदम लाल हो गई थी. दीदी अब छोड़ने के लिए एकदम तैयार थी. मैंने दीदी की टॉप को पकड़ा और ऊपर उठाने लगा. दीदी ने भी अपना हाँथ ऊपर कर लिया तो मैंने दीदी की टॉप उतर कर वही दरवाज़े के पास फेंक दिया. दीदी अब ब्रा और पंतय में मेरे सामने थी. मैंने दीदी को अपने से सटाकर कास कर गले लगा लिया.



अभी थोड़ी देर hi दीदी को गले लगाए हुवा था की दीदी ने मुझे धक्का देखर एक झटके में मुझे अपने से अलग कर दिया और मुझसे दूर कड़ी हो गई. मैंने नज़र उठाकर दी की तरफ देखा तो उनके चेहरे पर मुझे दर दिखाई दिया. मैंने दी से पूछा.

मैं- क्या हुवा दी. आपने मुझे धक्का क्यों दे दिया.

मेरी बात का दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया और वो बूत बैंकर कड़ी रही. मैंने दीदी से फिर पूछा तो दीदी ने फिर से कोई जवाब नहीं दिया. मैंने दीदी की नज़रो का पीछा किया तो दीदी खिड़की की तरफ देख रही थी. मैंने जब खिड़की की तरफ देखा तो वह पर मनीषा कड़ी हुई थी. एक बार तो मनीषा को देखकर मैं दर hi गया, लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे याद आया की मनीषा से डरने की कोई जरूरत hi नहीं है. शायद यही मनीषा का वो प्लान हो जिसके बारे में उसने कहा था. मैंने भी डरने का नाटक करते हुवे धीरे से दीदी से कहा.

मैं- अब क्या होगा didi.isne तो सब कुछ देख लिया.

सरिता दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया. उनको जैसे कोई शॉक लगा हो. मैंने दीदी के कंधे से पकड़कर हिलाया तो दीदी होश में आई. उनकी आँखों में आँशु चालक आये थे. वो मुझे देखती हुई बोली.

सरिता दी- अब क्या होगा अभी. मनीषा ने तो सब कुछ देख लिया. अब मैं उससे कैसे नज़ारे मिलाऊँगी.

मैं- कुछ नहीं होगा दी. मैं कुछ न कुछ करके मनीषा को समझा लूंगा.

सरिता दी( सिसकी लेते हुवे)- लेकिन मैं तो मनीषा की नज़रो में गिर गयी न. वो मेरे बारे में क्या सोच रही होगी.

मैंने बात करते हुवे खिड़की की तरफ देखा तो मनीषा वह नहीं थी. तभी दीदी के दूर पर दस्तक हुई और मनीषा की आवाज़ सुनाई दी.

मनीषा- दीदी दरवाज़ा खोलो. मुझे बात करनी है आप दोनों से. दरवाज़ा खोलो बहिया.

मनीषा की आवाज़ सुनकर दीदी भागकर बेडशीट अपने ऊपर लप्पेट लिया और बिस्टेर पर अपनी टंगे सिकोड़ कर उसपर अपना मुंह रखकर बैठ गई. मैंने जाकर दरवाज़ा खोला. तो मनीषा ने मुझे एक स्माइल दी. मैं भी थोड़ा सा मुस्कुरा दिया. मनीषा जल्दी से अपने चेहरे पर गुस्से वाला एक्सप्रेशन ले आयी और मुझे धक्का देते हुवे कमरे में आ गई और जाकर दीदी के सामने बीएड पर कड़ी हो गई. दीदी ने एक नज़र मनीषा को देखा फिर अपनी गार्डन झुका ली. मनीषा ने गुस्से का नाटक करते हुवे कहा.

मनीषा- या सब क्या चल रहा है दीदी आप दोनों में.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने कोई जवाब नहीं दिया. मैं भी अपने प्लान वाले करैक्टर में आ गया और डरते हुवे मनीषा के पास गया और मनीषा को समझने की कोशिश करते हुवे बोलै.

मैं- ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा तुम सोच रही हो मनीषा. वो दीदी की आँखों में कुछः चला गया था मैं वही फूंख मार कर निकल रहा था. और कोई बात नहीं है मनीषा.

मेरी बात सुनकर मनीषा बोली.

मनीषा- आप तो चुप hi रहिये भैया. आपसे तो मैं बाद में बात करुँगी. मैं कोई बच्ची नहीं हूँ जो ये न समझ सकू की अंदर क्या हो रहा था. आपको शर्म नहीं आती अपनी बहन के साथ ऐसे करते हुवे. आपने तो बेशर्मी की साडी हाडे पर कर दी.

मनीषा की बात सुनकर एक बार को तो मुझे लगा की कही सच में मनीषा सीरियस तो नहीं हो गई है. लेकिन मनीषा ने अपनी बात ख़तम होने के बाद मुझे आँख मर दी. जिससे मुझे थोड़ी तसल्ली मिली. फिर वो दीदी की तरफ मुड़ी और उनसे मुखातिब होती हुई बोली.

मनीषा- मैंने कुछ पूछा है आपसे दीदी. आपकी ख़ामोशी मुझे बहुत कुछ कह रही है. तो क्या मैं ये मनु की जो मैं आप दोनों के बारे में सोच रही हूँ. सही सोच रही हूँ.

मनीषा की बात सुनकर सरिता दीदी के हिचकियो की आवाज़ आने लगी. उन्होंने अपना चेहरा उठाया तो उनका चेहरा आंसुओ से भीगा हुवा था. वो मनीषा को देखते हुवे लाचारी के साथ बोली.

सरिता दी- मुझे माफ़ कर दे मनीषा. मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई. आगे से मैं ऐसी भूल कभी नहीं करुँगी. मैं तेरे हाँथ जोड़ती हूँ.

दीदी का रोना और माफ़ी मांगना मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा था. लेकिन मैं कुछ भी नहीं कर सकता था, क्योंकि ये पूरा प्लान मनीषा लीड कर रही थी. मैं तो अपने फायदे के लिए उसके साथ साथ चल रहा था. मनीषा ने गुस्से का नाटक करते हुवे दीदी से कहा.

मनीषा- क्या कहा माफ़ कर दूँ आपको. आप इतनी बड़ी बाल्टी करके बोल रही हैं की आपको माफ़ कर दूँ. आने दो पापा को. मैं उन्हें आप दोनों के बारे में सब बताती हूँ.

मनीषा के बात सुनकर दीदी और जोर जोर से रोने लगी. वो तुरंत बिस्टेर से उठकर मनीषा के पास आई और उसके सामने कड़ी हो गई. बिस्टेर से उठने के कारन चद्दर दीदी के जिस्म से बिस्टेर पर गिर गई. इस बात का दीदी को कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि इस समय उन्हें किसी तरह मनीषा को मानना था. दीदी मनीषा के सामने सर झुककर कड़ी थी और हिचकी ले रही थी. मैंने मनीषा से कहा.



मैं- या क्या कर रही हो मनीषा. अपनी बहन को रुला रही हो तुम. देखो ये सब पापा को बताने की क्या जरुरत है. हम बहैठ कर बात करते हैं न. मैं तुम्हारी साडी ग़लतफ़हमी दूर कर दूंगा.

मनीषा- ऐसा है भैया. आप चुप hi रहिये. नहीं तो मैं अभी फ़ोन करने जा रही हूँ पापा को. आपसे बाद में बात करुँगी. पहले दीदी से तो निपट लू. हाँ तो बताइये दीदी. इस बात का तो पापा को पता चलना hi चाहिए की उनकी लाड़ली बेटी अपने भाई के साथ क्या क्या गुल खिला रही है.

सरिता di(rote हुवे)- ऐसा मत करना मनीषा. पापा को मत बताना. नहीं तो मैं मर जाउंगी. मैं पापा को मुंह नहीं दिखा पाऊँगी. मैं सकते कर लुंगी. मैं ये कलंक लेकर नहीं जी पाऊँगी. मुझे माफ़ कर दे मनीषा. तू जॉब hi सजा देगी मुझे मंज़ूर है.

दीदी की बात सुनकर मनीषा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. उसने अपने प्लान की पहली सीधी पर कर ली थी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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