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मनीषा के बाथरूम जाने के बाद मैं बिस्टेर पर तक लगाकर बैठ गया और अपने लुंड को सहलाने लगा. लगभग 10 मिनट बाद मनीषा बाथरूम से निकलकर कमरे में आ गयी और दरवाज़े पर से hi खड़े होकर मुझे लुंड सहलाते हुवे देखने लगी. मैं लुंड सहलाते हुवे बिस्टेर से उठा और मनीषा के पास चला गया. मैंने मनीषा को पकड़कर अंदर किया और दरवाज़ा बंद करके उसे दीवाल के सहारे उल्टा सटाकर खड़ा कर दिया और उसके पीछे खड़ा हो गया. मैंने अपना हाँथ से उसकी कमर को सहलाने लगा. कमर सहलाने के बाद मैंने अपना दोनो हाँथ मनीषा के बगलो से डालकर उसकी दोनों चुचायो को मुट्ठी में भर लिया और दबाने लगा. मनीषा के मुंह से सिसकी निकलने लगी.
थोड़ी देर उसकी चूचियों को दबाने के बाद मैंने मनीषा को अपनी तरफ कहिहकर अपने से चिपका लिया जिससे मेरा लुंड मनीषा की गांड में घुस गया और मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaaahhhhhhh भैया निकल गया. मैं अपने लुंड का दबाव उसकी गांड पर बनाते हुवे अपने हांथो से उसकी चुकी दबाता रहा और अपनी जीभ निकलकर मनीषा की गार्डन को चाटने लगा. मनीषा की गार्डन को चाटते हुवे मैंने मिनिषा की पीठ की तरफ आने लगा. मनीषा मस्ती में aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैईया ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया करती रहियी. थोड़ी देर उसकी पीठ चाटने के बाद मैंने अपने होंठ मनीषा के कण के पास ले जाकर उसकी दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर जोर से मसलते हुवे अपने लुंड को उसकी कमर से पीछे करके एक झटके से अपनी कमर उसकी गांड पर दे मरी मनीषा दर्द और मस्ती में चीख पड़ी.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh bhaiiiyaaaaaaaaaaaaa. क्याआआ करररररर राहीईईई होऊ. डरडडडडडड होत्ता हैईईई मुझेईई.
मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे वासना के कारन लाल हो गयी थी. उसकी होंठ फड़फड़ा रहे थे. कुछ देर दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते रहे. थोड़ी देर मनीषा मेरी आँखों में देखने के बाद अपनी गार्डन निचे झुका ली और शर्माने लगी. मैंने मनीषा के दोनों हाँथ पकड़कर दीवाल से सटाकर अपने एक हाँथ से उसके दोनों हांथो को पकड़ लिया. जिससे मनीषा मेरी तरफ देखने लगी. मैं मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपना उसके होंठो को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा.
उसके होंठ चूसने से साथ मैंने अपना एक हाँथ निचे ले जाकर मनीषा की छूट पर कपडे के ऊपर से रख दिया. मनीषा की छूट गीली हो गयी थी. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi मनीषा का शरीर लहराया. मैं उसकी छूट को मुट्ठी में भरकर दबाने लगा. मनीषा बस gggggggguuuuuuuuuu gggggguuuuuuuuuu कर रही थी. थोड़ी देर मैंने मनीषा का होंठ चूसने के बाद अपनी जीभ उसके होंठो पर फिरने लगा तो मनीषा ने अपना मुंह खोल दिया जिससे मेरी जीभ मनीषा के मुंह में चली गई. जिसे वो चूसने लगी. पहले उसने मेरी जीभ धीरे चूसी. उसके बाद वो जोर जोर से मेरी जीभ चूसने लगी. थोड़ी देर मनीषा ने जीभ चूसने के बाद अपनी जीभ मेरे मुंह दे घुसा दी. मैं मनीषा की जीभ चूसते हुवे उसकी छूट को मुठी में भर भर कर दबाता रहा.
थोड़ी देर तक उसकी छूट दबाने के बाद मैंने उसकी पंतय को साइड में किया और अपनी एक ऊँगली उसकी छूट के मुंह पर रख दी और उसके होंठो से अपने होंठ हटा दिए. मैंने उसकी ाअंखो में देखते हुवे अपनी ऊगली एक झटके में उसकी छूट में पेल दी. मनीषा दर्द से सिसक उठी.
मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैईयाआआआआ. निकल्ल्लूऊऊऊ अपनीइ ऊंगलीई कोऊ aaaaaaaaaahhh. मुझे दर्द हो रहा है.
मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ उसके दोनों हांथो से हटा लिया और एक हाँथ से उसकी छूट छोड़ते हुवे दूसरा हाँथ उसकी चुकी पर रखकर दबाने लगा. और अपने होंठो से उसके पुरे चेहरे को चूमने लगा. मनीषा ने मस्ती में आकर अपना एक हाँथ मेरे लुंड पर रख दिया.
मनीषा का हाँथ लैंड पर पड़ते hi मेरे मुंह से सिसकी निकल गयी और मैंने उसकी एक चुकी को जोर से दबा दिया. जिससे मनीषा aaaahhhhhhhhhhh भैय्याअ कहकर मेरे लुंड पर अपने हाँथ फिरने लगी. मैं मनीषा के चेहरे को चूमते हुवे निचे उसकी चूचियों तक आया और उसकी चूचियों के ऊपरी भाग को चूमने लगा. एक हाँथ की ऊँगली से मैं लगातार उसकी छूट में अंदर बहार करता रहा. मनीषा एकदम गरम हो गाइट hi. और वो एक हाँथ से मेरे लुंड को सहलाते हुवे दूसरे हाँथ से अपनी एक चुकी को भी सहलाने लगी. मैंने अपना हाँथ उसकी छूट से निकलकर उसके चुकी वाले हाँथ पर रख दिया और उसके हांथो को दबाकर उसकी चुकी को दबाने लगा.
थोड़ी देर उसकी चुकी को दबाने के बाद मैंने मनीषा का हाँथ हटाकर दोनों चूचियों को मुट्ठी में भर कर जोर से मसल दिया. जिससे मनीषा की चीख निकल गई.
मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh भाआईईईयाआआआ. थोड़द्दआ धीयड़ी डायबाहु. मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ होता हीी.
मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के कपडे को निचे से पकड़ा और ऊपर उठाने लगा. मनीषा भी अपना हाँथ ऊपर उठाकर अपना कपडा उतरने में सहयोग किया कपडा उतारकर मैंने उसे जमीन पर फेंक दिया. अब मनीषा के जिस्म पर सिर्फ एक पंतय बची थी.
मैं उसके संगमरमरी जिस्म को घूरने लगा इस कारन मनीषा ने शर्म से अपनी गार्डन निचे कर ली. मैं मनीषा को पकड़कर बीएड के पास ले गया और बीएड पर बैठकर मनीषा को अपनी गॉड में बैठा लिया. जिससे मेरा लुंड उसकी गांड के निचे डाब गया. मनीषा ने अपने गांड हिलाकर मेरे लुंड को एडजस्ट कर के ठीक से बैठ गयी.
मैं अपनी जीभ निकलकर मनीषा की चिकनी पीठ चाटने लगा और अपने दोनों हांथो में उसकी चूचिया भरकर मसलने लगा. मनीषा मस्ती में आआआआह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करने लगी. मनीषा थोड़ा आगे jhuk-kar अपनी पीठ चतवती रही. उसकी पीठ खूब अच्छी तरह चाटने के बाद मैं उसकी गार्डन और कंधे को चाटने लगा. मनीषा ने मदहोशी में अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया. मैंने भी उसकी एक चुकी से हाँथ हटाकर पंतय को साइड में करके उसकी छूट के ऊपर रख दिया और रब करने लगा.
मनीषा ने मस्ती में अपनी आँखे बंद कर ली और मुझे चुकी और छूट से खेलने की छूट दे दी. मैंने भी मनीषा की चुकी को मुट्ठी में भर भर कर जोर जोर से दबाते हुवे मनीषा की छूट में अपनी एक ऊँगली घुसा दी. मनीषा मस्ती में चीख पड़ी.
मनीषा- आआआअह्हह्ह्ह्ह भाइयाँआ. क्याआ काअररर्र रही होओओओओ. ढ़हिरररीई काअरररओओओओओ भईयाआआआ..
मैं उसकी चुकी को और तेज़ तेज़ दबाने लगा और छूट में तेज़ तेज़ ऊँगली करने लगा. मनीषा अपना सर मेरे कंधे पर रखे जोर जोर से साँस लेने लगी और अपने होंठो को काटने लगी. मनीषा पर वासना एकदम चरम पर पहुंच गाइट hi इसलिए वो मुझसे बोलने लगी.
मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैईयाआआ. भुत्तत्त अछ्हा लाजगगग रहहाआ हाइइइइइइ. Ooooooohhhhhhhhhh ऐसी होई करररटीई राहीईईए. मुझीऐ ऑररररर पयार्र्र्रर कीजीईएएए भैया. Uuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्यी.
मनीषा की मस्ती भरी बाटे सुनकर मैं उसकी चूचियों को जोर जोर से मसलते हुवे दबाते हुवे उसकी छूट में ऊँगली अंदर बहार करते हुवे उसके कण के पास मुंह ले जाकर पूछा.
मैं- तुम्हे अच्छा लग रहा है मनीषा अपनी चूचिया दबवाते और छूट में ऊँगली करवाते हुवे.
मनीषा- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाइययियाआआ. नाहीइइइइइइ एई गाण्डीय बाटत्त माअत कीजियीईइ मुझसेइ. बॉस करती रहीएई. मुझी बाहुटत अछ्हा लाजगगग रहा हैईईई भैईयाआ aaaaaaaoooooooooo ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह.
मनीषा की बात सुनकर मैं और जोर जोर से उसकी छूट पेलने लगा. थोड़ी देर तक एक बिच वाली ऊँगली उसकी छूट में डालने के बाद मैंने अपनी ऊँगली बहार निकल ली और उसकी चुकी से अपना हाँथ हटा लिया. जिससे मनीषा की मस्ती में खलल पैदा हुई और उसने आँख खोलकर मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.
मनीषा- क्या हुवा भैया. आप रुकक्क क्योंन गयी. करिये ना.
मैं- मैं कहा रुका हूँ मनीषा. और मैं क्या कर रहा था जो करू.
मनीषा- करिये न भैया. क्यों सत्ता रहे हैं मुझे.
Main-jab मुझे पता चलेगा की मुझे क्या करना है तब hi तो मैं करूँगा. और मैं तुझे क्यों सताऊंगा.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरे एक हाँथ को अपनी चुकी पर रखा और एक हाँथ को उठाकर अपनी छूट पर रख दिया, लेकिन बोली कुछ नहीं. मैं भी वैसे hi हाँथ रखे बैठा रहा तो मनीषा ने फिर कहा.
मनीषा- मुझे क्यों परेशां कर रहे हैं भैया. करिये न. अब तो मैंने आपका हाँथ भी वह पर रख दिया है.
मैं- मैं ऐसे कुछ नहीं करूँगा. तुम्हे मुझे एकदम खुलकर बताना होगा की मैं क्या करू.
Mainsha(tadapti हुई)- क्यों तड़पा रहे हैं भैया अपनी छोटी बहन को. मुझे बोलने में शर्म आ रही है.
मनीषा की बात सुनकर मैंने अपने उसकी चूचियों को जोर से दबाकर छोड़ दिया और उसकी छूट को मुठी में भरकर दबाया और छोड़ दिया. मनीषा मस्ती में सिसकी और बोली.
मनीषा- ह्ह्हआआआआ भैईया आईईसी हीई केआरईईएई. Aaaaaaahhhhhhhhhhhh मेंनननननन याहठीीी कररणनई की लियी काअह्ह्ह राहीइ थिई. ऑर्डर करीयीए भैया मुझी बहूत्त अछ्हा लगगग रहा हैई.
मैं- पहली बात तो तुम मुझसे क्या करवाना चाहती हो वो खुलकर मुझसे कहो और दूसरी बात की मैं तुमसे जो कुछ भी पुछु उसका खुलकर सही सही जवाब तुम डौगी मुझको.
Manisha(tadapkar). मैं आपको सब बताउंगी जो भी आप पूछेंगे. ायबबब तू कॅरियई भईया.
मैं- क्या बताओगी सब कुछ. जब तुम ये नहीं बता प् रही हो की तुम मुझसे क्या करने के लिए कह रही हो
मनीषा( एकदम तड़पकर). आप बहुत हरामी हो भैया. अपनी बहनंन कोऊ भी अपनीइ तरह गांद्दी कररर रही हो ाप्प. अह्ह्ह्ह भईया मेरीए चूचियों को खूब दबाओ भैय्या. इनको मसलकर मुझी मज़ा दू. मेरीए वहा अपनी ऊंगलीई घुसाओ. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.
मणि- तुम फिर शर्मा रही हो. मैं कहाँ ऊँगली घुसौ. उसका कुछ नाम तो होगा.
Manisha(madhoshi में) आआआअह्हह्ह्ह्हह भीयाआ. मेरीए छूटत मई अपनीइ ऊंगलीई घुसकर मुझसे छोड्दुओ. मेरीए चूचियों को खूबह मसलकरर मुझी प्यार कारूओ भइया. जैसी सविता डीडीई ऑर्डर सरिताआ डीडीईई को करती हैंन आपपप.
मनीषा की बात सुनकर मैंने उसकी चुकी को मुठी में भार लिया और उसकी छूट के होल पर अपनी पहली दो ऊँगली रखकर चुकी को जोर से दबाते हुवे एकक झटके में दोनों ऊँगली उसकी छूट में पेल दिया. लेकिन मेरी दोनों ऊँगली अंदर नहीं जा सकीय और मनीषा की चीख निकल गई.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyy. मर्डर गाइइइइइ मैंनं. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या कर रही होओओओ बभाइया. ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैई मुझे.
मनीषा की चीख सुनकर मैंने अपनी बिच वाली ऊँगली जोर से उसकी छूट में पेल दी और जल्दी जल्दी अंदर बहार करने लगा और मनीषा की चुकी जोर जोर से दबाने लगा. मनीषा मस्ती में सिसकने लगी और अपने दोनों हाँथ मेरी गार्डन में दाल दिया. मैं अपनी ऊँगली ताबड़तोड़ उसकी छूट में पेलते जा रहा था. थोड़ी देर बाद मनीषा फिर से मस्त हो गई और बोलने लगी.
मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह भैयाआ बहुउट्ठ मज़ाआ आए रहा हीी. ऐसी ही छोड़िये मेरीए छूट कोऊ. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह भाइय्याअ. आपकी हांथोउ मई जादूओ ही भैया.
मनीषा की बात सुनकर मैंने उसको खड़ा कर दिया और बिस्टेर से उठकर मैं खड़ा हो गया और मनीषा को पकड़कर बिस्टेर पर लेता दिया. मनीषा के दोनों पेअर बीएड से निचे लटक रहे थे. मैंने एक तकिया लेकर मनीषा की कमर के निचे रख दिया. और मनीषा की पंतय पकड़कर उसे खींचकर उतर दिया. अब मेरी छोटी बहन एकदम नंगी मेरे सामने लेती थी. उसकी चूचिया तो सामनांए से बहुत बड़ी थी, लेकिन उसकी छूट छोटी थी. मनीषा मेरी तरफ देखकर शर्मा रही थी.
मैं उसकी तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच में बैठ गया और अपनी जीभ निकलकर उसकी दोनों जांघो को चाटने लगा. मनीषा महालने लगी. थोड़ी देर उसकी जांघो को छटने के बाद मैंने अपना मुंह उसकी छूट के ऊपर किया और एक लम्बी साँस ली, जिससे उसकी छूट से निकलने वाली स्मेल मेरी शरीर में समां गई. मैं उसकी छूट सूंघकर मनीषा से कहा.
मैं- waaaaaaaaahhhhhhhhhhh मनीषा. कितनी ाछठीई महक है तेरी छूट की. जब तेरे छूट की महककक इतनी अछि है तो तेरी छूट का पानी कितना स्वादिस्ट होगा.
मेरी बात सुनकर मनीषा बुरी तरह शर्मा गई और थोड़ा सा उठकर मेरे सर पर मार्कर वापस लेट गई और बोली.
मनीषा- सछह मी आप बहुत बेशरम हैं भैया. अपनी बहन को एकदम नंगा पर दिया आपने आपको शर्मा नहीं आती.
मैं- (उसकी छूट को फिर सूंघते हुवे)- ऐसी शानदार छूट का स्वाद चखने ने लिया hi तो मैं बेशरम बन गया हूँ. और जब बहन खुद नंगा होकर अपनी छूट का रास अपने भाई को पिलाना चाहती है तो भाई को उसकी बात का मन रखना चाहिए.
मनीषा- छ्हीईई भैया. आप कितने गंदे ho.main नंगी नहीं हुई आपने मुझे नंगा किया है. (और इसी फ्लो में बोल गई) और आपने तो अभी तक छूट का रास चखा hi नहीं तो आपको कैसे पता की मेरी छूट का रास स्वादिस्ट है.
main-(garden उठाकर उसकी आँखों में देखते हुवे) इसका मतलब तुम चाहती हो की मैं तुम्हारी छूट का रास चाटकर तुमको बताऊ की ये स्वादिस्ट है या नहीं.
मेरी बात सुनकर अब मनीषा को एहसास हुवा की वो मस्ती में क्या बोल गई है. मेरी बात सुनकर मनीषा शरमाते हुवे मुस्कुराने लगी और मदहोशी में बोली.
मनीषा- आपने मुझे धोखे से फंसकर नागि कर दिया. और अब आप मुझे परेशां कर रहे हैं. अब मैं आपसे बात नहीं करुँगी.
मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा के ऊपर लेट gaya,lekin अपना भर मैंने अपने हांथो पर hi रखा. उसके ऊपर लेटकर मैं उसके होंठो को चूसने लगा. मनीषा ने अपनी आँखे बंद कर ली और मेरे होंठो को चूसकर मेरा साथ देने लगी. मैं कुछ देर मनीषा के होंठो को चूसने के बाद उसके माथे और दोनों आँखों पर किश किया तो उसने अपनी आँखे खोल ली. मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसको आँखों लाल थी. वो फुल गरम हो चुकी थी. मैं उसकी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकलकर उसके गलो को chat-te हुए निचे की तरफ आने लगा. गलो को चाटने के बाद मैंने उसकी गार्डन को चेतना शुरू कर दिया. उसकी गार्डन को चाटने के बाद मैंने अपना मुंह उठाया और उसकी चूचियों के ऊपरी भाग पर रख दिया.
मनीषा मेरे निचे पड़ी मस्ती में मचल रही थी. मैं उसकी चूचियों के ऊपरी भाग को chat-te हुवे उसकी क्लीवेज को चाटने लगा और उसकी क्लीवेज को चाटने के बाद मैंने अपने मुंह से थूक मनीषा की दोनों चूचियों की घुंडियो पर गिरा दिया और अपनी जीभ की नोक को उसकी चूचियों की घुंडी पर फेरने लगा. मेरे ऐसा करने से मनीषा की जैसे जान hi निकल गई. उसका बदन ैथ गया. और वो मेरे सर को पकड़कर ऊपर की तरफ उठाने लगी लेकिन मैंने अपने सर ऊपर नहीं उठाया और अपनी जीभ मनीषा से निप्पल को छेड़ने लगा. मैं बरी बरी से मनीषा की घुंडियो को छेड़ रहा था. जिससे मनीषा का बदन काँप रहा था. जब मनीषा से बर्दास्त नहीं हुवा तो वो मुझसे बोली.
मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैईयाआआ बस्स्स क़रीय्यी अब्ब्ब. मुझी कुछःह होऊ रहा हैई. मैं अब्ब्ब औरर बर्दात नाहीइ कर पाउँगीीी. Oooooooooooooohhhhhhh भैइयाआ मेर्री निछ्छी कुछः होऊ रहा हीी भईया. कुछः कर्रूआ भईया.
मैं- क्या हो रहा है मनीषा और कहाँ हो रहा है. और मैं क्या करू. बोलो मनीषा.
मनीषा- (एकदम मदहोशी में)- कमीने भैयाआआ aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मेरिइइइइ चूऊउत्तत्त मई कुछः हूँ रहा हीी. जीईसी कुछःह छालललल रहा हैई ुसककके ाँदाररर. कुछः कुछः भी करूओ भैइय्या. अब्ब और ना तड़पाओ अपनी छोटी बहन नं कोऊ.
मनीषा की बात सुनकर मैं उसके ऊपर से उठा और उसकी दोनों तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच बैठ गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में.
मनीषा के बाथरूम जाने के बाद मैं बिस्टेर पर तक लगाकर बैठ गया और अपने लुंड को सहलाने लगा. लगभग 10 मिनट बाद मनीषा बाथरूम से निकलकर कमरे में आ गयी और दरवाज़े पर से hi खड़े होकर मुझे लुंड सहलाते हुवे देखने लगी. मैं लुंड सहलाते हुवे बिस्टेर से उठा और मनीषा के पास चला गया. मैंने मनीषा को पकड़कर अंदर किया और दरवाज़ा बंद करके उसे दीवाल के सहारे उल्टा सटाकर खड़ा कर दिया और उसके पीछे खड़ा हो गया. मैंने अपना हाँथ से उसकी कमर को सहलाने लगा. कमर सहलाने के बाद मैंने अपना दोनो हाँथ मनीषा के बगलो से डालकर उसकी दोनों चुचायो को मुट्ठी में भर लिया और दबाने लगा. मनीषा के मुंह से सिसकी निकलने लगी.
थोड़ी देर उसकी चूचियों को दबाने के बाद मैंने मनीषा को अपनी तरफ कहिहकर अपने से चिपका लिया जिससे मेरा लुंड मनीषा की गांड में घुस गया और मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaaahhhhhhh भैया निकल गया. मैं अपने लुंड का दबाव उसकी गांड पर बनाते हुवे अपने हांथो से उसकी चुकी दबाता रहा और अपनी जीभ निकलकर मनीषा की गार्डन को चाटने लगा. मनीषा की गार्डन को चाटते हुवे मैंने मिनिषा की पीठ की तरफ आने लगा. मनीषा मस्ती में aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैईया ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैया करती रहियी. थोड़ी देर उसकी पीठ चाटने के बाद मैंने अपने होंठ मनीषा के कण के पास ले जाकर उसकी दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर जोर से मसलते हुवे अपने लुंड को उसकी कमर से पीछे करके एक झटके से अपनी कमर उसकी गांड पर दे मरी मनीषा दर्द और मस्ती में चीख पड़ी.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh bhaiiiyaaaaaaaaaaaaa. क्याआआ करररररर राहीईईई होऊ. डरडडडडडड होत्ता हैईईई मुझेईई.
मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को पलटकर अपनी तरफ घुमा लिया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे वासना के कारन लाल हो गयी थी. उसकी होंठ फड़फड़ा रहे थे. कुछ देर दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते रहे. थोड़ी देर मनीषा मेरी आँखों में देखने के बाद अपनी गार्डन निचे झुका ली और शर्माने लगी. मैंने मनीषा के दोनों हाँथ पकड़कर दीवाल से सटाकर अपने एक हाँथ से उसके दोनों हांथो को पकड़ लिया. जिससे मनीषा मेरी तरफ देखने लगी. मैं मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपना उसके होंठो को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा.
उसके होंठ चूसने से साथ मैंने अपना एक हाँथ निचे ले जाकर मनीषा की छूट पर कपडे के ऊपर से रख दिया. मनीषा की छूट गीली हो गयी थी. मेरा हाँथ अपनी छूट पर लगते hi मनीषा का शरीर लहराया. मैं उसकी छूट को मुट्ठी में भरकर दबाने लगा. मनीषा बस gggggggguuuuuuuuuu gggggguuuuuuuuuu कर रही थी. थोड़ी देर मैंने मनीषा का होंठ चूसने के बाद अपनी जीभ उसके होंठो पर फिरने लगा तो मनीषा ने अपना मुंह खोल दिया जिससे मेरी जीभ मनीषा के मुंह में चली गई. जिसे वो चूसने लगी. पहले उसने मेरी जीभ धीरे चूसी. उसके बाद वो जोर जोर से मेरी जीभ चूसने लगी. थोड़ी देर मनीषा ने जीभ चूसने के बाद अपनी जीभ मेरे मुंह दे घुसा दी. मैं मनीषा की जीभ चूसते हुवे उसकी छूट को मुठी में भर भर कर दबाता रहा.
थोड़ी देर तक उसकी छूट दबाने के बाद मैंने उसकी पंतय को साइड में किया और अपनी एक ऊँगली उसकी छूट के मुंह पर रख दी और उसके होंठो से अपने होंठ हटा दिए. मैंने उसकी ाअंखो में देखते हुवे अपनी ऊगली एक झटके में उसकी छूट में पेल दी. मनीषा दर्द से सिसक उठी.
मनीषा- aaaaaaaaahhhhhhhhhhh भैईयाआआआआ. निकल्ल्लूऊऊऊ अपनीइ ऊंगलीई कोऊ aaaaaaaaaahhh. मुझे दर्द हो रहा है.
मनीषा की बात सुनकर मैंने अपना हाँथ उसके दोनों हांथो से हटा लिया और एक हाँथ से उसकी छूट छोड़ते हुवे दूसरा हाँथ उसकी चुकी पर रखकर दबाने लगा. और अपने होंठो से उसके पुरे चेहरे को चूमने लगा. मनीषा ने मस्ती में आकर अपना एक हाँथ मेरे लुंड पर रख दिया.
मनीषा का हाँथ लैंड पर पड़ते hi मेरे मुंह से सिसकी निकल गयी और मैंने उसकी एक चुकी को जोर से दबा दिया. जिससे मनीषा aaaahhhhhhhhhhh भैय्याअ कहकर मेरे लुंड पर अपने हाँथ फिरने लगी. मैं मनीषा के चेहरे को चूमते हुवे निचे उसकी चूचियों तक आया और उसकी चूचियों के ऊपरी भाग को चूमने लगा. एक हाँथ की ऊँगली से मैं लगातार उसकी छूट में अंदर बहार करता रहा. मनीषा एकदम गरम हो गाइट hi. और वो एक हाँथ से मेरे लुंड को सहलाते हुवे दूसरे हाँथ से अपनी एक चुकी को भी सहलाने लगी. मैंने अपना हाँथ उसकी छूट से निकलकर उसके चुकी वाले हाँथ पर रख दिया और उसके हांथो को दबाकर उसकी चुकी को दबाने लगा.
थोड़ी देर उसकी चुकी को दबाने के बाद मैंने मनीषा का हाँथ हटाकर दोनों चूचियों को मुट्ठी में भर कर जोर से मसल दिया. जिससे मनीषा की चीख निकल गई.
मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh भाआईईईयाआआआ. थोड़द्दआ धीयड़ी डायबाहु. मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ होता हीी.
मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा के कपडे को निचे से पकड़ा और ऊपर उठाने लगा. मनीषा भी अपना हाँथ ऊपर उठाकर अपना कपडा उतरने में सहयोग किया कपडा उतारकर मैंने उसे जमीन पर फेंक दिया. अब मनीषा के जिस्म पर सिर्फ एक पंतय बची थी.
मैं उसके संगमरमरी जिस्म को घूरने लगा इस कारन मनीषा ने शर्म से अपनी गार्डन निचे कर ली. मैं मनीषा को पकड़कर बीएड के पास ले गया और बीएड पर बैठकर मनीषा को अपनी गॉड में बैठा लिया. जिससे मेरा लुंड उसकी गांड के निचे डाब गया. मनीषा ने अपने गांड हिलाकर मेरे लुंड को एडजस्ट कर के ठीक से बैठ गयी.
मैं अपनी जीभ निकलकर मनीषा की चिकनी पीठ चाटने लगा और अपने दोनों हांथो में उसकी चूचिया भरकर मसलने लगा. मनीषा मस्ती में आआआआह्ह्ह्हह्ह ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह करने लगी. मनीषा थोड़ा आगे jhuk-kar अपनी पीठ चतवती रही. उसकी पीठ खूब अच्छी तरह चाटने के बाद मैं उसकी गार्डन और कंधे को चाटने लगा. मनीषा ने मदहोशी में अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया. मैंने भी उसकी एक चुकी से हाँथ हटाकर पंतय को साइड में करके उसकी छूट के ऊपर रख दिया और रब करने लगा.
मनीषा ने मस्ती में अपनी आँखे बंद कर ली और मुझे चुकी और छूट से खेलने की छूट दे दी. मैंने भी मनीषा की चुकी को मुट्ठी में भर भर कर जोर जोर से दबाते हुवे मनीषा की छूट में अपनी एक ऊँगली घुसा दी. मनीषा मस्ती में चीख पड़ी.
मनीषा- आआआअह्हह्ह्ह्ह भाइयाँआ. क्याआ काअररर्र रही होओओओओ. ढ़हिरररीई काअरररओओओओओ भईयाआआआ..
मैं उसकी चुकी को और तेज़ तेज़ दबाने लगा और छूट में तेज़ तेज़ ऊँगली करने लगा. मनीषा अपना सर मेरे कंधे पर रखे जोर जोर से साँस लेने लगी और अपने होंठो को काटने लगी. मनीषा पर वासना एकदम चरम पर पहुंच गाइट hi इसलिए वो मुझसे बोलने लगी.
मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भैईयाआआ. भुत्तत्त अछ्हा लाजगगग रहहाआ हाइइइइइइ. Ooooooohhhhhhhhhh ऐसी होई करररटीई राहीईईए. मुझीऐ ऑररररर पयार्र्र्रर कीजीईएएए भैया. Uuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii मुम्ममइय्य्यी.
मनीषा की मस्ती भरी बाटे सुनकर मैं उसकी चूचियों को जोर जोर से मसलते हुवे दबाते हुवे उसकी छूट में ऊँगली अंदर बहार करते हुवे उसके कण के पास मुंह ले जाकर पूछा.
मैं- तुम्हे अच्छा लग रहा है मनीषा अपनी चूचिया दबवाते और छूट में ऊँगली करवाते हुवे.
मनीषा- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाइययियाआआ. नाहीइइइइइइ एई गाण्डीय बाटत्त माअत कीजियीईइ मुझसेइ. बॉस करती रहीएई. मुझी बाहुटत अछ्हा लाजगगग रहा हैईईई भैईयाआ aaaaaaaoooooooooo ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह.
मनीषा की बात सुनकर मैं और जोर जोर से उसकी छूट पेलने लगा. थोड़ी देर तक एक बिच वाली ऊँगली उसकी छूट में डालने के बाद मैंने अपनी ऊँगली बहार निकल ली और उसकी चुकी से अपना हाँथ हटा लिया. जिससे मनीषा की मस्ती में खलल पैदा हुई और उसने आँख खोलकर मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.
मनीषा- क्या हुवा भैया. आप रुकक्क क्योंन गयी. करिये ना.
मैं- मैं कहा रुका हूँ मनीषा. और मैं क्या कर रहा था जो करू.
मनीषा- करिये न भैया. क्यों सत्ता रहे हैं मुझे.
Main-jab मुझे पता चलेगा की मुझे क्या करना है तब hi तो मैं करूँगा. और मैं तुझे क्यों सताऊंगा.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने मेरे एक हाँथ को अपनी चुकी पर रखा और एक हाँथ को उठाकर अपनी छूट पर रख दिया, लेकिन बोली कुछ नहीं. मैं भी वैसे hi हाँथ रखे बैठा रहा तो मनीषा ने फिर कहा.
मनीषा- मुझे क्यों परेशां कर रहे हैं भैया. करिये न. अब तो मैंने आपका हाँथ भी वह पर रख दिया है.
मैं- मैं ऐसे कुछ नहीं करूँगा. तुम्हे मुझे एकदम खुलकर बताना होगा की मैं क्या करू.
Mainsha(tadapti हुई)- क्यों तड़पा रहे हैं भैया अपनी छोटी बहन को. मुझे बोलने में शर्म आ रही है.
मनीषा की बात सुनकर मैंने अपने उसकी चूचियों को जोर से दबाकर छोड़ दिया और उसकी छूट को मुठी में भरकर दबाया और छोड़ दिया. मनीषा मस्ती में सिसकी और बोली.
मनीषा- ह्ह्हआआआआ भैईया आईईसी हीई केआरईईएई. Aaaaaaahhhhhhhhhhhh मेंनननननन याहठीीी कररणनई की लियी काअह्ह्ह राहीइ थिई. ऑर्डर करीयीए भैया मुझी बहूत्त अछ्हा लगगग रहा हैई.
मैं- पहली बात तो तुम मुझसे क्या करवाना चाहती हो वो खुलकर मुझसे कहो और दूसरी बात की मैं तुमसे जो कुछ भी पुछु उसका खुलकर सही सही जवाब तुम डौगी मुझको.
Manisha(tadapkar). मैं आपको सब बताउंगी जो भी आप पूछेंगे. ायबबब तू कॅरियई भईया.
मैं- क्या बताओगी सब कुछ. जब तुम ये नहीं बता प् रही हो की तुम मुझसे क्या करने के लिए कह रही हो
मनीषा( एकदम तड़पकर). आप बहुत हरामी हो भैया. अपनी बहनंन कोऊ भी अपनीइ तरह गांद्दी कररर रही हो ाप्प. अह्ह्ह्ह भईया मेरीए चूचियों को खूब दबाओ भैय्या. इनको मसलकर मुझी मज़ा दू. मेरीए वहा अपनी ऊंगलीई घुसाओ. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.
मणि- तुम फिर शर्मा रही हो. मैं कहाँ ऊँगली घुसौ. उसका कुछ नाम तो होगा.
Manisha(madhoshi में) आआआअह्हह्ह्ह्हह भीयाआ. मेरीए छूटत मई अपनीइ ऊंगलीई घुसकर मुझसे छोड्दुओ. मेरीए चूचियों को खूबह मसलकरर मुझी प्यार कारूओ भइया. जैसी सविता डीडीई ऑर्डर सरिताआ डीडीईई को करती हैंन आपपप.
मनीषा की बात सुनकर मैंने उसकी चुकी को मुठी में भार लिया और उसकी छूट के होल पर अपनी पहली दो ऊँगली रखकर चुकी को जोर से दबाते हुवे एकक झटके में दोनों ऊँगली उसकी छूट में पेल दिया. लेकिन मेरी दोनों ऊँगली अंदर नहीं जा सकीय और मनीषा की चीख निकल गई.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyyyy. मर्डर गाइइइइइ मैंनं. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या कर रही होओओओ बभाइया. ड़ड़ड़ड़ड़ होता हैई मुझे.
मनीषा की चीख सुनकर मैंने अपनी बिच वाली ऊँगली जोर से उसकी छूट में पेल दी और जल्दी जल्दी अंदर बहार करने लगा और मनीषा की चुकी जोर जोर से दबाने लगा. मनीषा मस्ती में सिसकने लगी और अपने दोनों हाँथ मेरी गार्डन में दाल दिया. मैं अपनी ऊँगली ताबड़तोड़ उसकी छूट में पेलते जा रहा था. थोड़ी देर बाद मनीषा फिर से मस्त हो गई और बोलने लगी.
मनीषा- आआअह्हह्ह्ह्हह भैयाआ बहुउट्ठ मज़ाआ आए रहा हीी. ऐसी ही छोड़िये मेरीए छूट कोऊ. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह भाइय्याअ. आपकी हांथोउ मई जादूओ ही भैया.
मनीषा की बात सुनकर मैंने उसको खड़ा कर दिया और बिस्टेर से उठकर मैं खड़ा हो गया और मनीषा को पकड़कर बिस्टेर पर लेता दिया. मनीषा के दोनों पेअर बीएड से निचे लटक रहे थे. मैंने एक तकिया लेकर मनीषा की कमर के निचे रख दिया. और मनीषा की पंतय पकड़कर उसे खींचकर उतर दिया. अब मेरी छोटी बहन एकदम नंगी मेरे सामने लेती थी. उसकी चूचिया तो सामनांए से बहुत बड़ी थी, लेकिन उसकी छूट छोटी थी. मनीषा मेरी तरफ देखकर शर्मा रही थी.
मैं उसकी तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच में बैठ गया और अपनी जीभ निकलकर उसकी दोनों जांघो को चाटने लगा. मनीषा महालने लगी. थोड़ी देर उसकी जांघो को छटने के बाद मैंने अपना मुंह उसकी छूट के ऊपर किया और एक लम्बी साँस ली, जिससे उसकी छूट से निकलने वाली स्मेल मेरी शरीर में समां गई. मैं उसकी छूट सूंघकर मनीषा से कहा.
मैं- waaaaaaaaahhhhhhhhhhh मनीषा. कितनी ाछठीई महक है तेरी छूट की. जब तेरे छूट की महककक इतनी अछि है तो तेरी छूट का पानी कितना स्वादिस्ट होगा.
मेरी बात सुनकर मनीषा बुरी तरह शर्मा गई और थोड़ा सा उठकर मेरे सर पर मार्कर वापस लेट गई और बोली.
मनीषा- सछह मी आप बहुत बेशरम हैं भैया. अपनी बहन को एकदम नंगा पर दिया आपने आपको शर्मा नहीं आती.
मैं- (उसकी छूट को फिर सूंघते हुवे)- ऐसी शानदार छूट का स्वाद चखने ने लिया hi तो मैं बेशरम बन गया हूँ. और जब बहन खुद नंगा होकर अपनी छूट का रास अपने भाई को पिलाना चाहती है तो भाई को उसकी बात का मन रखना चाहिए.
मनीषा- छ्हीईई भैया. आप कितने गंदे ho.main नंगी नहीं हुई आपने मुझे नंगा किया है. (और इसी फ्लो में बोल गई) और आपने तो अभी तक छूट का रास चखा hi नहीं तो आपको कैसे पता की मेरी छूट का रास स्वादिस्ट है.
main-(garden उठाकर उसकी आँखों में देखते हुवे) इसका मतलब तुम चाहती हो की मैं तुम्हारी छूट का रास चाटकर तुमको बताऊ की ये स्वादिस्ट है या नहीं.
मेरी बात सुनकर अब मनीषा को एहसास हुवा की वो मस्ती में क्या बोल गई है. मेरी बात सुनकर मनीषा शरमाते हुवे मुस्कुराने लगी और मदहोशी में बोली.
मनीषा- आपने मुझे धोखे से फंसकर नागि कर दिया. और अब आप मुझे परेशां कर रहे हैं. अब मैं आपसे बात नहीं करुँगी.
मनीषा की बात सुनकर मैं मनीषा के ऊपर लेट gaya,lekin अपना भर मैंने अपने हांथो पर hi रखा. उसके ऊपर लेटकर मैं उसके होंठो को चूसने लगा. मनीषा ने अपनी आँखे बंद कर ली और मेरे होंठो को चूसकर मेरा साथ देने लगी. मैं कुछ देर मनीषा के होंठो को चूसने के बाद उसके माथे और दोनों आँखों पर किश किया तो उसने अपनी आँखे खोल ली. मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसको आँखों लाल थी. वो फुल गरम हो चुकी थी. मैं उसकी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकलकर उसके गलो को chat-te हुए निचे की तरफ आने लगा. गलो को चाटने के बाद मैंने उसकी गार्डन को चेतना शुरू कर दिया. उसकी गार्डन को चाटने के बाद मैंने अपना मुंह उठाया और उसकी चूचियों के ऊपरी भाग पर रख दिया.
मनीषा मेरे निचे पड़ी मस्ती में मचल रही थी. मैं उसकी चूचियों के ऊपरी भाग को chat-te हुवे उसकी क्लीवेज को चाटने लगा और उसकी क्लीवेज को चाटने के बाद मैंने अपने मुंह से थूक मनीषा की दोनों चूचियों की घुंडियो पर गिरा दिया और अपनी जीभ की नोक को उसकी चूचियों की घुंडी पर फेरने लगा. मेरे ऐसा करने से मनीषा की जैसे जान hi निकल गई. उसका बदन ैथ गया. और वो मेरे सर को पकड़कर ऊपर की तरफ उठाने लगी लेकिन मैंने अपने सर ऊपर नहीं उठाया और अपनी जीभ मनीषा से निप्पल को छेड़ने लगा. मैं बरी बरी से मनीषा की घुंडियो को छेड़ रहा था. जिससे मनीषा का बदन काँप रहा था. जब मनीषा से बर्दास्त नहीं हुवा तो वो मुझसे बोली.
मनीषा- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भैईयाआआ बस्स्स क़रीय्यी अब्ब्ब. मुझी कुछःह होऊ रहा हैई. मैं अब्ब्ब औरर बर्दात नाहीइ कर पाउँगीीी. Oooooooooooooohhhhhhh भैइयाआ मेर्री निछ्छी कुछः होऊ रहा हीी भईया. कुछः कर्रूआ भईया.
मैं- क्या हो रहा है मनीषा और कहाँ हो रहा है. और मैं क्या करू. बोलो मनीषा.
मनीषा- (एकदम मदहोशी में)- कमीने भैयाआआ aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh मेरिइइइइ चूऊउत्तत्त मई कुछः हूँ रहा हीी. जीईसी कुछःह छालललल रहा हैई ुसककके ाँदाररर. कुछः कुछः भी करूओ भैइय्या. अब्ब और ना तड़पाओ अपनी छोटी बहन नं कोऊ.
मनीषा की बात सुनकर मैं उसके ऊपर से उठा और उसकी दोनों तंग फैलाकर उसकी टैंगो के बिच बैठ गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में.