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जैसे hi मैं मनीषा के कमरे का दरवाज़ा खोलकर अंदर गया. मनीषा अपने बिस्टेर पर एक झीना सा कपडा पहन कर बैठी थी.
मैं दरवाज़े पर hi ठगा सा खड़ा रहकर उसे निहारे जा रहा था. उसने भी मुझको कमरे में आता देख लिया लेकिन उसकी तरफ से अपने बदन थकने की कोई कोशिश नहीं की गई. मैं उसकी चूचियों को देख रहा था और वो मुझे. उसकी चूचियों के देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया था. जिसको मैंने अपने हाँथ से अपने ुन्दरवरे के ऊपर से ुदजूस्ट करने लगा. वो मेरे लैंड को देखने लगी और अपने होंठ पर जीभ फिरने लगी. थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा.
मनीषा- क्या हुवा भैया. ऐसे क्या देख रहे हो.
मैं- सामने बड़ा और सुन्दर नज़ारा है उसी को देख रहा था.
मनीषा- अरे भैया दूर से अच्छा नज़ारा नहीं दिखेगा. नजदीक आकर देखिये. बहुत hi सुन्दर है.
मनीषा ने ये बात मेरे लुंड को देखते हुवे बोली थी. उसकी नज़रो में hi इतना जादू था की मेरा लुंड लोअर में hi उछलने लगा था. मनीषा की बात सुनकर मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया और उसकी चूचियों को देखने लगा. मनीषा ने भी एक ऐडा के साथ ूँगी अपने कपडे के फंसकर अपना हाँथ अपने सर पर रख लिया
वो बिस्तर पर बैठी थी इसलिए उसके आँखों के ठीक सामने मेरा कड़ा लुंड झटके मार रहा था. मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो मेरे लुंड को hi देख रही थी तो मैंने उसकी चूचियों को देखते हुवे अपने लैंड को सहलाने दिया. थोड़ी देर लुंड देखने के बाद मनीषा ने मेरे चेहरे की तरफ देखते हुवे कहा.
मनीषा- क्या हुवा भैया खुजली हो रही है क्या.
मैं- (मनीषा की आँखों में देखकर लुंड मसलते हुवे) हाँ मनीषा इतना सुन्दर नज़ारा पास से देखकर खुजली होने लगी है.
मनीषा- आप कहो तो मैं आपकी खुजली मिटा दूँ.
मैं – ये भी कोई पूछने की बात है मनीषा. जल्दी मिटा दो मेरी खुजली.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपने डरोएर से निकिल पाउडर दिया और कहा.
मनीषा- लो भैया इसको लगा लो थोड़ी देर बाद खुजली मिट जाएगी. वैसे इतना बड़ा है की खुजली होने पर आपको दिक्कत होती होगी.
मैं- क्या बड़ा है मनीषा.
मनीषा- अरे आपके लोअर का नधा. खुजली करते समय उंगलियों में फंस जाता होगा. तो आपको खुजलाने में दिक्कत होती होगी.
मनीषा की बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई और मनीषा भी मुस्कुराने लगी. थोड़ी देर बाद मनीषा ने कहा.
मनीषा- वैसे भैया. दीदी ने जो तरबूज आपको खिलाया था. वो बहुत टेस्टी रहा होगा न.
मैं- हाँ मनीषा. बहुत hi ज्यादा टेस्टी था. मुझे दीदी का तरबूज खाने में बहुत मज़ा aaya.main तो दोबारा खाना चाहता था, लेकिन दीदी ने मन कर दिया.
मनीषा- हाँ दीदी ने बताया की आप जानवरो की तरह कहते हैं. इसलिए उनको मोच आ गई है.
इतना कहकर मनीषा बीएड से उठकर ड्रेसिंग टेबल से पास जाकर कड़ी हो गई. अब नज़ारा और भी जानलेवा था. उसके खड़ा होने के बाद उसकी भरी भरकम गांड बहार की तरफ निकल आई. उसकी गांड देखकर मेरा लुंड और जोर जोर से झटके मरने लगा. मनीषा ने बिना पीछे मुझे hi मुझसे कहा.
मनीषा- भैया अब आप जाइये मुझे कपडे बदलने है.
मैं- तू कपडे बदल न मैं तुझे डिस्टर्ब थोड़ी कर रहा हूँ.
इतना कहकर मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपना हाँथ उसके कंधे पर रख दिया. मेरा हाँथ कंधे पर लगते hi मनीषा का जिस्म कैंप गया. उसने तुरंत पीछे गार्डन करके मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.
मनीषा- लेकिन मैं आपके सामने कैसे कपडे बदल सकती हूँ. मुझे शर्म आएगी.
उसकी बात सुनकर मैंने अपना मुंह आगे बढाकर मनीषा के गलो को चुम लिया और उसके कण में कहा.
मैं- तो क्या हुवा मनीषा मैं तुम्हारा बड़ा भाई hi तो हूँ. कौन से कोई गैर हूँ.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने कुछ नहीं कहा बस आगे देखने लगी और कंघी अपने हेयर में फिरने लगी. मैंने अपने होंठ उसके कंधे पर रख दिए और पीछे से एकदम सत्कार उसके साथ खड़ा हो गया. जिससे मेरा लुंड उसकी गांड में घुस गया. मेरा लुंड अपनी गांड में कपडे के ऊपर से महसूस करके उसके शरीर में झुरझुरी हुई और उसके अपने बालो पर चलते हाँथ वही रुक गए. मैं अपना हाँथ उसके कंडे से हटाकर उसके पेट पर रखा और उसके पेट को सहलाने लगा. और अपने होंठ से उसकी गार्डन को किश करते हुवे कहा.
मैं- एक बात बोलू मनीषा.
मनीषा( हलकी आवाज़ में)- बोलो भैया.
मैं- तू भी मुझे किसी दिन अपने तरबूज खिला दे. मेरा बहुत मन करता है.
मनीषा- (मेरी तरफ दर्दन घुमाकर मुझको देखते हुवे) क्यों दीदी ने अपना तरबूज आपको खिलाया था. उसे खा कर आपका मन नहीं भरा है क्या. जो मुझसे मांग रहे हो.
मैं- अभी कहा मन भरा है मेरा. उन्होंने एक hi बात खिलाया उसके बाद मन करने लगी.
इतना बोलकर मैंने अपना हाँथ उसके पेट से सहलाते हुवे उसकी चूचियों के एकदम निचे ले आया और वह सहलाने लगा और पीछे से अपने लुंड का दबाव लगातार मनीषा की गांड में देने लगा. मनीषा मुझे रोकने की कोई कोशिश नहीं कर रही थी. थोड़ी देर बाद मनीषा ने कहा.
मनीषा- मुझे नहीं खिलाना आपको तरबूज. देख नहीं रहे हैं आपको तरबूज खिलने के बाद hi दीदी लगदा कर चल रही हैं. उनको मोच आ गई है.
मैं- तुम्हे तो अपने भाई की कोई फिकर hi नहीं है. चलो ठीक है. तरबूज बाद में खिला देना. लेकिन मुझे रोज दूध पिलाओगी न मनीषा.
इतना सुनकर मनीषा की सांसे भरी होने लगी. वो तेज़ तेज़ सनस लेने लगी. मैंने भी अपना हाँथ उठाकर उसकी चूचियों पर रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा ने मेरे हाँथ के ऊपर अपना हाँथ रख दिया और हटाने की कोशिश करने लगी. लेकिन मैंने अपना हाँथ नहीं हटाया और उसकी चूचियों को सहलाता रहा. थोड़ी देर सहलाने के बाद मनीषा को भी शायद अच्छा लगने लगा था इसलिए उसने अपने हाँथ की हरकत बंद कर दी.
मैं अब मनीषा की गांड पर हल्का हल्का अपनी कमर चलने लगा. और अपने होंठ उसकी गार्डन और कंधे पर लगातार फिरने के साथ साथ उसकी चूचियों को भी धीरे धीरे दबाने लगा. जिससे मनीषा के ऊपर भी मस्ती चढ़ने लगी और उसने अपने हाँथ मेरे हांथो से हटा लिए. अब मैंने उसकी चूचियों को बहार की तरफ खींचने लगा और उससे बोलै.
मैं- बोलो मनीषा. मुझे दूध पिलाओगी न.
Manisha(madhosi में)- वो तो आपको रोज सरिता दीदी पिलाती hi हैं.
मैं- लेकिन अब सरिता दीदी को मोच गई है तो मैं ये जिम्मेदारी तुमको देता हूँ. तुम रोज मुझे दूध पीला देना.
इतना कहकर मैंने अपनी कमर पीछे कर ली और उसकी दोनों चूचियों को कसकर पकड़ लिया और जोर से दबाकर एक झटका अपनी कमर को दिया. मनीषा की सिसकारी निकल गई.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuucccccccccchhhhhhhhhhhhhhhh भैया. क्याआ कररर रहईये हैंन आपपपपपपप.
मैं- कुछ नहीं मनीषा अपनी बहन को प्यार कर रहा हूँ.
इतना बोलकर मैंने एक हाँथ से मनीषा के चेहरे को पकड़कर पीछे किया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे इस वक्त सुर्ख हो चुकी थी. चेहरा हल्का लाल हो गया था. उसकी आँखों में मुझे प्यास नज़र आ रही थी. मैंने मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपनी होंठ बढाकर मनीषा के होंठो पर रख दिया और चूमने लगा. मनीषा ने अपना मुंह घूमने की कोशिश की लेकिन मैंने उसके चेहरे को पकड़ रखा था. इसलिए वो अपनी गार्डन आगे नहीं कर पाई.
मैं मनीषा के होंठ चूमते हुवे अपने एक हाँथ से उसकी चूचिय को दबाने लगा और पीछे से लुंड उसकी गांड में पेलने लगा. मनीषा इस हमले से गरम हो गई थी. उसने भी अब किश में साथ देना शुरू कर दिया और अपने हाँथ उठाकर मेरी गार्डन में दाल दिया. ये देखकर मैं मनीषा के होंठ को चूसने लगा. मनीषा भी चुपचाप कड़ी होकर अपने होंठ चुसवा रही थी. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मैंने उसके होंठो को मुंह में भर लिया और दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर अपनी कमर को पीछे करके एक साथ तीनो हमले कर दिया. उसके होंठ को काट लिया. दोनों चूचियों को मसल दिया और अपने लुंड को उसकी गांड में पेल दिया. मनीषा दर्द और आनंद से चीख पड़ी.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhhhh bhaaiiiiiiiiiii क्याआ करररररररर राहीईई हैंन aapppppppppppp. मेंनननन बहनणननणणन होऊणन्न आपकीइ. ये गलतततततततत ही.
मैंने मनीषा की बात सुनाने के बाद उसके गलो को चाटने लगा. और दोनों चूचियों को फिर से मसलकर अपने लुंड उसकी गांड में पेल दिया. मनीषा फिर से सिसक पड़ी.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuuuucccccccccccchhhhhhhhhhhhhhhh. Ooooooooooohhhhhhhhhh भाइयाँआ. क्या कर रही हैं आपपपप. मुझे ड़ड़ड़ड़ड़ड़ हूँ रहा है.
इतना कहकर मनीषा पलटकर मेरे सामने कड़ी हो गई और मेरी आँखों में देखने लगी. मैंने भी उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.
मैं- बताओ न मनीषा. मुझे दूध पिलाओगी न अपना.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने मुझसे कहा.
मनीषा- या क्या कह रहे हैं आप मुझसे. मैं आपकी बहन हूँ और आप मुझसे ऐसी बात कर रहे हैं.
मैंने मनीषा की बात सुनकर उसे अपनी बहो में भर लिया और अपने होंठ उसके होठो पर रखकर चूसने लगा और एक हाँथ से उसकी गांड को पकड़कर दबाने लगा. मनीषा थोड़ी देर कसमसाई और फिर शांत होकर होंठ चूसै में मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर उसके होंठ चूसने और उसकी गांड दबाने के बाद कहा.
मैं- एक बात कहु मनीषा. बुरा तो नहीं मानोगी.
मेंशा( मेरी आँखों में देखते हुवे)- मेरे मन करने से आप मान जाएंगे क्या.
मैं- वह मनीषा तुम तो बहुत समझदार हो गई हो. मुझे अचे सा समझने लगी हो तुम.
मनीषा- हाँ भैया मैं 1.5 महीने पहले hi समझदार हो गाइट hi. लेकिन आपको आज पता चल रहा है. वैसे बोलिये क्या बात है.
मैं- तुमको मालूम नहीं है मनीषा किट ुम एकदम जवान हो गई हो. और तुम भी अब लेने लायक हो गई हो.
मनीषा( मेरी आँखों में घूरकर)- क्या मतलब है लेने लायक हो गई हूँ.
मैं- अरे मेरा मतलब था की तुम मुझसे कोई भी मदद लेने लायक हो गई हो.
मनीषा- अच्छा आप मेरी मदद करेंग. अगर मैं कहूँगी तो.
मैं- मैं तो तुमको कब से देना चाहता हूँ अपनी मदद.
Manisha(muskura कर)- अच्छा ठीक है. मुझे डांस सिखने है तो आप उसमे मेरी मदद करेंगे.
इतना सुनकर मैंने अपना एक हाँथ बढाकर उसकी चुकी पर रख दिया और उसको दबाने लगा. एक हाँथ से उसकी गांड को दबाने लगा और अपने होंठ उसके होंठो पर रखकर उसको किश करने लगा. मनीषा तो पहले से hi गरम पड़ी थी. उसने भी मेरा सहयोग करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद मैंने उसको होंठो को छोड़कर उसके गाल को चाटने लगा और उसके गाल को दांतो से काटकर उसकी चुकी और गांड को दबा दिया जिससे मनीषा सिसक पड़ी.
मनीषा- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh Bhaiiiiyaaaaaaaaaaa. aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh धीरीईईई seeeeeeeeeeee. Auuuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii mummyyyyyyyyyyyy.
मैं- लेकिन मुझे तो डांस आता hi नहीं है. तो मैं कैसे तुम्हारी मदद करूँगा.
मनीषा- बस आप मेरे साथ रहना. मैं डांस करुँगी तो आप ये बताना की मैंने ठीक से डांस किया या नहीं.
मैं- ठीक है मनीषा मैं तुम्हारी मैडम करूँगा. लेकिन पहले ये बताओ की तुम मुझे अपना दूध पिलाओगी या नहीं.
Manisha(meri आँखों में देखते हुवे)- ठीक है जब सबको पिलाऊंगी तो आपको भी पीला दूंगी.
मैं- (उसकी चुकी को सहलाते हुवे) लेकिन मुज्झे ताज़ा दूध पीना है.
मेरी बातो को सुनकर मनीषा ने मुझे साइन पर मारा और कहा.
मनीषा- आप बहुत गंदे हो भैया. अपनी बहन से कोई ऐसे बात करता है क्या.
मैं- दुसरो का तो पता नहीं, लेकिन मैं तो तुझसे ऐसी hi बात करूँगा. तुझे पसंद नहीं आती क्या मेरी बाटे.
मरी बात सुनकर मनीषा ने शर्माकर अपनी नज़र निचे झुका ली, लेकिन बोली कुछ नहीं. तो मैंने उसका चेहरा पकड़कर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखने लगा. उसकी आँखे शर्म से झुकी जा रही थी. मैंने उसको देखते हुवे उसको पीछे धकेलकर ड्रेसिंग टेबल से सत्ता दिया और उसकी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकली और उसकी झुककर उसकी गार्डन को चाटने लगा. मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaahhhhhhh sssssssssssss ssssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. मैं उसकी गार्डन को चाटते हुवे निचे की तरफ बढ़ने लगा और उनकी चूचियों के ऊपर पहुंच कर जब मैंने छठा तो मनीषा oooooooooohhhhhhhhhhh भैया बोली और मेरी सर को अपने हाँथ से पकड़कर ऊपर उठा लिया और मेरी आँखों में देखते हुवे अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिया और चूसने लगी.
मैं मनीषा के इस हरकत पर बहुत खुश हुवा और अपने एक हाँथ को फिर से उसकी गांड पर रखकर अपनी कमर को पीछे किया और एक हाँथ से उसकी चुकी दबाने लगा. एक हाँथ से गांड बढ़ाते हुवे मैंने अपनी कमर को आगे पुश किया. जिससे मेरा लुंड मनीषा की छूट के ऊपर लगा. मनीषा ने मेरे होंठ छोड़कर माधोसी में चीख पड़ी
मंशा- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh bhaiyyaaaaaaaaaa मत्तत्तत्त करूऊऊ aisaaaaaaaaaa. मैंनं बहनणणन हूंणंन्न आपकीइइइइइइइइ. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh धीरीईई सीएएएएएएए.
मनीषा की बात सुनकर मैंने उसको देखते हुवे कहा.
मैं- तो बोलो मुझे अपना ताज़ा दूध पिलाओगी तुम. या नहीं.
Manisha(garden झुककर शरमाते हुवे)- ठीक है भैया पीला दूंगी आपको ताज़ा दूध.
मनीषा की बात सुनकर मैंने अपने दोनों हांथो से उसकी चूचिया पकड़ी और जोरदार तरीके से मसल दिया. मनीषा चीख पड़ी और मुझे धक्का देकर बोली.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भैयाआआ. Hhhhhheyyyyyyyyyyyy mummyyyyyyyyyyyy. आपपप बिल्कूलललललल जँवारररररर हीिन्नननननन जउओ यहां सीए मैंन कुछः नाहीइ पिल्लाऊंगीए आपको.
मैंने सोचा की आज के लिए इतना बहुत हो गया. बाकि फिर बाअद में देखूंगा. इसलिए मैं कमरे से बहार जाने से पहले मनीषा अपना मुंह मनीषा के कण के पास ले गया और उसके कण के कहा.
मैं- सच में मनीषा. तुम एकदम गदरायी और तूंच मॉल बन गई हो.
और इतना बोलकर मैं मनीषा के कमरे से भाग गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
जैसे hi मैं मनीषा के कमरे का दरवाज़ा खोलकर अंदर गया. मनीषा अपने बिस्टेर पर एक झीना सा कपडा पहन कर बैठी थी.
मैं दरवाज़े पर hi ठगा सा खड़ा रहकर उसे निहारे जा रहा था. उसने भी मुझको कमरे में आता देख लिया लेकिन उसकी तरफ से अपने बदन थकने की कोई कोशिश नहीं की गई. मैं उसकी चूचियों को देख रहा था और वो मुझे. उसकी चूचियों के देखकर मेरा लुंड खड़ा हो गया था. जिसको मैंने अपने हाँथ से अपने ुन्दरवरे के ऊपर से ुदजूस्ट करने लगा. वो मेरे लैंड को देखने लगी और अपने होंठ पर जीभ फिरने लगी. थोड़ी देर बाद उसने मुझसे कहा.
मनीषा- क्या हुवा भैया. ऐसे क्या देख रहे हो.
मैं- सामने बड़ा और सुन्दर नज़ारा है उसी को देख रहा था.
मनीषा- अरे भैया दूर से अच्छा नज़ारा नहीं दिखेगा. नजदीक आकर देखिये. बहुत hi सुन्दर है.
मनीषा ने ये बात मेरे लुंड को देखते हुवे बोली थी. उसकी नज़रो में hi इतना जादू था की मेरा लुंड लोअर में hi उछलने लगा था. मनीषा की बात सुनकर मैं उसके पास जाकर खड़ा हो गया और उसकी चूचियों को देखने लगा. मनीषा ने भी एक ऐडा के साथ ूँगी अपने कपडे के फंसकर अपना हाँथ अपने सर पर रख लिया
वो बिस्तर पर बैठी थी इसलिए उसके आँखों के ठीक सामने मेरा कड़ा लुंड झटके मार रहा था. मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो मेरे लुंड को hi देख रही थी तो मैंने उसकी चूचियों को देखते हुवे अपने लैंड को सहलाने दिया. थोड़ी देर लुंड देखने के बाद मनीषा ने मेरे चेहरे की तरफ देखते हुवे कहा.
मनीषा- क्या हुवा भैया खुजली हो रही है क्या.
मैं- (मनीषा की आँखों में देखकर लुंड मसलते हुवे) हाँ मनीषा इतना सुन्दर नज़ारा पास से देखकर खुजली होने लगी है.
मनीषा- आप कहो तो मैं आपकी खुजली मिटा दूँ.
मैं – ये भी कोई पूछने की बात है मनीषा. जल्दी मिटा दो मेरी खुजली.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने अपने डरोएर से निकिल पाउडर दिया और कहा.
मनीषा- लो भैया इसको लगा लो थोड़ी देर बाद खुजली मिट जाएगी. वैसे इतना बड़ा है की खुजली होने पर आपको दिक्कत होती होगी.
मैं- क्या बड़ा है मनीषा.
मनीषा- अरे आपके लोअर का नधा. खुजली करते समय उंगलियों में फंस जाता होगा. तो आपको खुजलाने में दिक्कत होती होगी.
मनीषा की बात सुनकर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गई और मनीषा भी मुस्कुराने लगी. थोड़ी देर बाद मनीषा ने कहा.
मनीषा- वैसे भैया. दीदी ने जो तरबूज आपको खिलाया था. वो बहुत टेस्टी रहा होगा न.
मैं- हाँ मनीषा. बहुत hi ज्यादा टेस्टी था. मुझे दीदी का तरबूज खाने में बहुत मज़ा aaya.main तो दोबारा खाना चाहता था, लेकिन दीदी ने मन कर दिया.
मनीषा- हाँ दीदी ने बताया की आप जानवरो की तरह कहते हैं. इसलिए उनको मोच आ गई है.
इतना कहकर मनीषा बीएड से उठकर ड्रेसिंग टेबल से पास जाकर कड़ी हो गई. अब नज़ारा और भी जानलेवा था. उसके खड़ा होने के बाद उसकी भरी भरकम गांड बहार की तरफ निकल आई. उसकी गांड देखकर मेरा लुंड और जोर जोर से झटके मरने लगा. मनीषा ने बिना पीछे मुझे hi मुझसे कहा.
मनीषा- भैया अब आप जाइये मुझे कपडे बदलने है.
मैं- तू कपडे बदल न मैं तुझे डिस्टर्ब थोड़ी कर रहा हूँ.
इतना कहकर मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपना हाँथ उसके कंधे पर रख दिया. मेरा हाँथ कंधे पर लगते hi मनीषा का जिस्म कैंप गया. उसने तुरंत पीछे गार्डन करके मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.
मनीषा- लेकिन मैं आपके सामने कैसे कपडे बदल सकती हूँ. मुझे शर्म आएगी.
उसकी बात सुनकर मैंने अपना मुंह आगे बढाकर मनीषा के गलो को चुम लिया और उसके कण में कहा.
मैं- तो क्या हुवा मनीषा मैं तुम्हारा बड़ा भाई hi तो हूँ. कौन से कोई गैर हूँ.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने कुछ नहीं कहा बस आगे देखने लगी और कंघी अपने हेयर में फिरने लगी. मैंने अपने होंठ उसके कंधे पर रख दिए और पीछे से एकदम सत्कार उसके साथ खड़ा हो गया. जिससे मेरा लुंड उसकी गांड में घुस गया. मेरा लुंड अपनी गांड में कपडे के ऊपर से महसूस करके उसके शरीर में झुरझुरी हुई और उसके अपने बालो पर चलते हाँथ वही रुक गए. मैं अपना हाँथ उसके कंडे से हटाकर उसके पेट पर रखा और उसके पेट को सहलाने लगा. और अपने होंठ से उसकी गार्डन को किश करते हुवे कहा.
मैं- एक बात बोलू मनीषा.
मनीषा( हलकी आवाज़ में)- बोलो भैया.
मैं- तू भी मुझे किसी दिन अपने तरबूज खिला दे. मेरा बहुत मन करता है.
मनीषा- (मेरी तरफ दर्दन घुमाकर मुझको देखते हुवे) क्यों दीदी ने अपना तरबूज आपको खिलाया था. उसे खा कर आपका मन नहीं भरा है क्या. जो मुझसे मांग रहे हो.
मैं- अभी कहा मन भरा है मेरा. उन्होंने एक hi बात खिलाया उसके बाद मन करने लगी.
इतना बोलकर मैंने अपना हाँथ उसके पेट से सहलाते हुवे उसकी चूचियों के एकदम निचे ले आया और वह सहलाने लगा और पीछे से अपने लुंड का दबाव लगातार मनीषा की गांड में देने लगा. मनीषा मुझे रोकने की कोई कोशिश नहीं कर रही थी. थोड़ी देर बाद मनीषा ने कहा.
मनीषा- मुझे नहीं खिलाना आपको तरबूज. देख नहीं रहे हैं आपको तरबूज खिलने के बाद hi दीदी लगदा कर चल रही हैं. उनको मोच आ गई है.
मैं- तुम्हे तो अपने भाई की कोई फिकर hi नहीं है. चलो ठीक है. तरबूज बाद में खिला देना. लेकिन मुझे रोज दूध पिलाओगी न मनीषा.
इतना सुनकर मनीषा की सांसे भरी होने लगी. वो तेज़ तेज़ सनस लेने लगी. मैंने भी अपना हाँथ उठाकर उसकी चूचियों पर रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा ने मेरे हाँथ के ऊपर अपना हाँथ रख दिया और हटाने की कोशिश करने लगी. लेकिन मैंने अपना हाँथ नहीं हटाया और उसकी चूचियों को सहलाता रहा. थोड़ी देर सहलाने के बाद मनीषा को भी शायद अच्छा लगने लगा था इसलिए उसने अपने हाँथ की हरकत बंद कर दी.
मैं अब मनीषा की गांड पर हल्का हल्का अपनी कमर चलने लगा. और अपने होंठ उसकी गार्डन और कंधे पर लगातार फिरने के साथ साथ उसकी चूचियों को भी धीरे धीरे दबाने लगा. जिससे मनीषा के ऊपर भी मस्ती चढ़ने लगी और उसने अपने हाँथ मेरे हांथो से हटा लिए. अब मैंने उसकी चूचियों को बहार की तरफ खींचने लगा और उससे बोलै.
मैं- बोलो मनीषा. मुझे दूध पिलाओगी न.
Manisha(madhosi में)- वो तो आपको रोज सरिता दीदी पिलाती hi हैं.
मैं- लेकिन अब सरिता दीदी को मोच गई है तो मैं ये जिम्मेदारी तुमको देता हूँ. तुम रोज मुझे दूध पीला देना.
इतना कहकर मैंने अपनी कमर पीछे कर ली और उसकी दोनों चूचियों को कसकर पकड़ लिया और जोर से दबाकर एक झटका अपनी कमर को दिया. मनीषा की सिसकारी निकल गई.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuucccccccccchhhhhhhhhhhhhhhh भैया. क्याआ कररर रहईये हैंन आपपपपपपप.
मैं- कुछ नहीं मनीषा अपनी बहन को प्यार कर रहा हूँ.
इतना बोलकर मैंने एक हाँथ से मनीषा के चेहरे को पकड़कर पीछे किया और उसकी आँखों में देखने लगा. मनीषा की आँखे इस वक्त सुर्ख हो चुकी थी. चेहरा हल्का लाल हो गया था. उसकी आँखों में मुझे प्यास नज़र आ रही थी. मैंने मनीषा की आँखों में देखते हुवे अपनी होंठ बढाकर मनीषा के होंठो पर रख दिया और चूमने लगा. मनीषा ने अपना मुंह घूमने की कोशिश की लेकिन मैंने उसके चेहरे को पकड़ रखा था. इसलिए वो अपनी गार्डन आगे नहीं कर पाई.
मैं मनीषा के होंठ चूमते हुवे अपने एक हाँथ से उसकी चूचिय को दबाने लगा और पीछे से लुंड उसकी गांड में पेलने लगा. मनीषा इस हमले से गरम हो गई थी. उसने भी अब किश में साथ देना शुरू कर दिया और अपने हाँथ उठाकर मेरी गार्डन में दाल दिया. ये देखकर मैं मनीषा के होंठ को चूसने लगा. मनीषा भी चुपचाप कड़ी होकर अपने होंठ चुसवा रही थी. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मैंने उसके होंठो को मुंह में भर लिया और दोनों चूचियों को मुट्ठी में भरकर अपनी कमर को पीछे करके एक साथ तीनो हमले कर दिया. उसके होंठ को काट लिया. दोनों चूचियों को मसल दिया और अपने लुंड को उसकी गांड में पेल दिया. मनीषा दर्द और आनंद से चीख पड़ी.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhhhh bhaaiiiiiiiiiii क्याआ करररररररर राहीईई हैंन aapppppppppppp. मेंनननन बहनणननणणन होऊणन्न आपकीइ. ये गलतततततततत ही.
मैंने मनीषा की बात सुनाने के बाद उसके गलो को चाटने लगा. और दोनों चूचियों को फिर से मसलकर अपने लुंड उसकी गांड में पेल दिया. मनीषा फिर से सिसक पड़ी.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaauuuuuuuuuuuuuuuuuuucccccccccccchhhhhhhhhhhhhhhh. Ooooooooooohhhhhhhhhh भाइयाँआ. क्या कर रही हैं आपपपप. मुझे ड़ड़ड़ड़ड़ड़ हूँ रहा है.
इतना कहकर मनीषा पलटकर मेरे सामने कड़ी हो गई और मेरी आँखों में देखने लगी. मैंने भी उसकी आँखों में देखते हुवे कहा.
मैं- बताओ न मनीषा. मुझे दूध पिलाओगी न अपना.
मेरी बात सुनकर मनीषा ने मुझसे कहा.
मनीषा- या क्या कह रहे हैं आप मुझसे. मैं आपकी बहन हूँ और आप मुझसे ऐसी बात कर रहे हैं.
मैंने मनीषा की बात सुनकर उसे अपनी बहो में भर लिया और अपने होंठ उसके होठो पर रखकर चूसने लगा और एक हाँथ से उसकी गांड को पकड़कर दबाने लगा. मनीषा थोड़ी देर कसमसाई और फिर शांत होकर होंठ चूसै में मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर उसके होंठ चूसने और उसकी गांड दबाने के बाद कहा.
मैं- एक बात कहु मनीषा. बुरा तो नहीं मानोगी.
मेंशा( मेरी आँखों में देखते हुवे)- मेरे मन करने से आप मान जाएंगे क्या.
मैं- वह मनीषा तुम तो बहुत समझदार हो गई हो. मुझे अचे सा समझने लगी हो तुम.
मनीषा- हाँ भैया मैं 1.5 महीने पहले hi समझदार हो गाइट hi. लेकिन आपको आज पता चल रहा है. वैसे बोलिये क्या बात है.
मैं- तुमको मालूम नहीं है मनीषा किट ुम एकदम जवान हो गई हो. और तुम भी अब लेने लायक हो गई हो.
मनीषा( मेरी आँखों में घूरकर)- क्या मतलब है लेने लायक हो गई हूँ.
मैं- अरे मेरा मतलब था की तुम मुझसे कोई भी मदद लेने लायक हो गई हो.
मनीषा- अच्छा आप मेरी मदद करेंग. अगर मैं कहूँगी तो.
मैं- मैं तो तुमको कब से देना चाहता हूँ अपनी मदद.
Manisha(muskura कर)- अच्छा ठीक है. मुझे डांस सिखने है तो आप उसमे मेरी मदद करेंगे.
इतना सुनकर मैंने अपना एक हाँथ बढाकर उसकी चुकी पर रख दिया और उसको दबाने लगा. एक हाँथ से उसकी गांड को दबाने लगा और अपने होंठ उसके होंठो पर रखकर उसको किश करने लगा. मनीषा तो पहले से hi गरम पड़ी थी. उसने भी मेरा सहयोग करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद मैंने उसको होंठो को छोड़कर उसके गाल को चाटने लगा और उसके गाल को दांतो से काटकर उसकी चुकी और गांड को दबा दिया जिससे मनीषा सिसक पड़ी.
मनीषा- oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh Bhaiiiiyaaaaaaaaaaa. aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh धीरीईईई seeeeeeeeeeee. Auuuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiiiiiii mummyyyyyyyyyyyy.
मैं- लेकिन मुझे तो डांस आता hi नहीं है. तो मैं कैसे तुम्हारी मदद करूँगा.
मनीषा- बस आप मेरे साथ रहना. मैं डांस करुँगी तो आप ये बताना की मैंने ठीक से डांस किया या नहीं.
मैं- ठीक है मनीषा मैं तुम्हारी मैडम करूँगा. लेकिन पहले ये बताओ की तुम मुझे अपना दूध पिलाओगी या नहीं.
Manisha(meri आँखों में देखते हुवे)- ठीक है जब सबको पिलाऊंगी तो आपको भी पीला दूंगी.
मैं- (उसकी चुकी को सहलाते हुवे) लेकिन मुज्झे ताज़ा दूध पीना है.
मेरी बातो को सुनकर मनीषा ने मुझे साइन पर मारा और कहा.
मनीषा- आप बहुत गंदे हो भैया. अपनी बहन से कोई ऐसे बात करता है क्या.
मैं- दुसरो का तो पता नहीं, लेकिन मैं तो तुझसे ऐसी hi बात करूँगा. तुझे पसंद नहीं आती क्या मेरी बाटे.
मरी बात सुनकर मनीषा ने शर्माकर अपनी नज़र निचे झुका ली, लेकिन बोली कुछ नहीं. तो मैंने उसका चेहरा पकड़कर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखने लगा. उसकी आँखे शर्म से झुकी जा रही थी. मैंने उसको देखते हुवे उसको पीछे धकेलकर ड्रेसिंग टेबल से सत्ता दिया और उसकी आँखों में देखते हुवे अपनी जीभ निकली और उसकी झुककर उसकी गार्डन को चाटने लगा. मनीषा के मुंह से aaaaaaaaaaaahhhhhhh sssssssssssss ssssssssssss की आवाज़ निकलने लगी. मैं उसकी गार्डन को चाटते हुवे निचे की तरफ बढ़ने लगा और उनकी चूचियों के ऊपर पहुंच कर जब मैंने छठा तो मनीषा oooooooooohhhhhhhhhhh भैया बोली और मेरी सर को अपने हाँथ से पकड़कर ऊपर उठा लिया और मेरी आँखों में देखते हुवे अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिया और चूसने लगी.
मैं मनीषा के इस हरकत पर बहुत खुश हुवा और अपने एक हाँथ को फिर से उसकी गांड पर रखकर अपनी कमर को पीछे किया और एक हाँथ से उसकी चुकी दबाने लगा. एक हाँथ से गांड बढ़ाते हुवे मैंने अपनी कमर को आगे पुश किया. जिससे मेरा लुंड मनीषा की छूट के ऊपर लगा. मनीषा ने मेरे होंठ छोड़कर माधोसी में चीख पड़ी
मंशा- ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh bhaiyyaaaaaaaaaa मत्तत्तत्त करूऊऊ aisaaaaaaaaaa. मैंनं बहनणणन हूंणंन्न आपकीइइइइइइइइ. Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh धीरीईई सीएएएएएएए.
मनीषा की बात सुनकर मैंने उसको देखते हुवे कहा.
मैं- तो बोलो मुझे अपना ताज़ा दूध पिलाओगी तुम. या नहीं.
Manisha(garden झुककर शरमाते हुवे)- ठीक है भैया पीला दूंगी आपको ताज़ा दूध.
मनीषा की बात सुनकर मैंने अपने दोनों हांथो से उसकी चूचिया पकड़ी और जोरदार तरीके से मसल दिया. मनीषा चीख पड़ी और मुझे धक्का देकर बोली.
मनीषा- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh भैयाआआ. Hhhhhheyyyyyyyyyyyy mummyyyyyyyyyyyy. आपपप बिल्कूलललललल जँवारररररर हीिन्नननननन जउओ यहां सीए मैंन कुछः नाहीइ पिल्लाऊंगीए आपको.
मैंने सोचा की आज के लिए इतना बहुत हो गया. बाकि फिर बाअद में देखूंगा. इसलिए मैं कमरे से बहार जाने से पहले मनीषा अपना मुंह मनीषा के कण के पास ले गया और उसके कण के कहा.
मैं- सच में मनीषा. तुम एकदम गदरायी और तूंच मॉल बन गई हो.
और इतना बोलकर मैं मनीषा के कमरे से भाग गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..