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शाम होते होते हरिया अपनी बेटी का काफी रस पी चूका था
अँधेरा होने तक्क हरी भी घर आ जाता है
पहले तो अपने ससुर को देख कर उसे थोड़ी हैरानी होती है पर जब वो अपने बाप को खुश होता देखता है तो वो भी उनकी खुसियो में शरीफ हो जाता है
इधर रामलाल हरिया को इशारा करके निकल जाता हसि की वो जा रहा हसि देसी दारू लेने
हरिया अपनी बातो से अपने दामाद का दिमाग चाट डालता है
इन सब के बिच नीलम अपना रांडपाण दिखने पर उतर ावी थी
घर में 2-2 बूढ़े लुंड थे जिनमे उसने आज अपने पहनावे से आग लगा राखी थी
नीलम ने एक पुराने पेटीकोट के साथ सिर्फ एक ब्लाउज डाला हुआ था अंदर का ांडा नजारा साफ़ साफ़ दिखाई पद रहा था
हरी को अब नीलम के पहनावे से कोई फरक नहीं पड़ता था
क्योंकि नीलम ने काफी दीं पहले से hi ऐसा माहौल बना दिया था की उसका पति उसे बिलकुल भी रोका टोका नहीं करता था
हलाकि अभी तक हरी को अपने बाप और बीवी के रंगीन रिश्तो के बारे में मालूम नहीं था
इधर हरिया अपनी बेटी को देख कर अपना लुंड मसलता हुआ अपने दामाद से बात कर रहा था
थोड़ी hi देर में रामलाल एक पूरी बॉटल ले आता है
दारू देखते hi हरी के मुँह में पानी आ जाता है
उसने नीलम से यह भी वडा कर रखा था की अब वो दारू नहीं पिए
नीलम ने भी एक अच्छी पत्नी का फ़र्ज़ निभाते हुए हरी से ेल वडा किया था की वो लाभ कभी घर में दारू पी सकता है जिसपर हरी भी बहुत खुस था
तीनो लोग बैठ कर दारू के घूंट लगाने लगते है और दुनिया दरी की बाटे चलने लगती है
करीब 1 घंटे के अंदर hi हरी के तोते उड़ना शुरू हो जाते है
अब उसकी बाटे भी लड़खड़ा रही थी जिसे देख कर रामलाल अपनी बहु का हाथ पकड़ कर उसे अपनी और खींचता हुआ कहता है
रामलाल - लाए बहु तेरा गिलास भी तो ले आ
नीलम अब पहले वाली नीलम नहीं थी वो भी झट से अपना गिलास आगे बढ़ा देती है जिसमे उसका ससुर एक पटियाला पेग डालता हुआ पानी भर भर देता है
नीलम एक घूंट में hi पूरा गिलास खली कर देती है
हरिया अपनी बेटी की यह हरकत देखता रह जाता है
रामलाल बड़े प्यार से अपनी बहुरानी के सर पर हाथ फेरता है
रामलाल - कैसा लगा बहु
नीलम - मजा आ गया ससुर जी एक और डालो फिर आप लोगो को जन्नत दिखाउंगी
रामलाल एक और पेग देता गई और नीलम चरणान्त hi उसे भी पी जाती है
अब घर के अंदर का माहौल बेहद hi कामुक हो चला था दोनों बुड्ढे तो पहले hi अपनी धोती उतर कर कच्चे में बैठे हुए थे
पहले तो सब खाना कहते है
हरी भी जैसे तैसे खाना कहा लेता है
असल में तो आज उस बेचारे की किसी को फ़िक्र hi नहीं थी
नीलम अपने ससुर और बाप के बिच में टंगे फैलाये बैठी थी जब जिसका मन होता तब उसके बदन के हिस्से पर हाथ फेर लेता
खाना ख़तम होने के बाद नीलम अंदर वाले कमरे में सबका बिस्तर एक साथ लगा देती है
हरिया नीलम की यह हरकत देख कर थोड़ा अचम्भे में था
रामलाल - क्या हुआ संधि जी कुछ परेशानी है आपको
हरिया - संधि जी सब लोग एक साथ सोयेंगे क्या आज
रामलाल --हाहा अक्स इस लिए परेशां है आप
मेरे घर का एक नियम है जिस दिन भी मेरा बीटा और मैं दारू पिटे है सबका बिस्तर साथ hi लगता है और आज आप मेरे मेहमान है तो आपको भी नियम का पालन करना hi पड़ेगा हहह
हरिया - समाधी जी पर फिर हम नीलम बेटी के साथ कैसे ...
नीलम - चिंता मत करो बापू इनके सामने तो और भी मजा आता है जब इनकी बंद आँखों के सामने में इनके hi बाप से चुदवाती हु तो मेरी बुर्र में एक अलग hi तरह की चिंगारी भड़क जाती है और आज का दिन तो काफी खास है
हरिया - ठीक है बेटी जैसा तू कहे ...म
शाम होते होते हरिया अपनी बेटी का काफी रस पी चूका था
अँधेरा होने तक्क हरी भी घर आ जाता है
पहले तो अपने ससुर को देख कर उसे थोड़ी हैरानी होती है पर जब वो अपने बाप को खुश होता देखता है तो वो भी उनकी खुसियो में शरीफ हो जाता है
इधर रामलाल हरिया को इशारा करके निकल जाता हसि की वो जा रहा हसि देसी दारू लेने
हरिया अपनी बातो से अपने दामाद का दिमाग चाट डालता है
इन सब के बिच नीलम अपना रांडपाण दिखने पर उतर ावी थी
घर में 2-2 बूढ़े लुंड थे जिनमे उसने आज अपने पहनावे से आग लगा राखी थी
नीलम ने एक पुराने पेटीकोट के साथ सिर्फ एक ब्लाउज डाला हुआ था अंदर का ांडा नजारा साफ़ साफ़ दिखाई पद रहा था
हरी को अब नीलम के पहनावे से कोई फरक नहीं पड़ता था
क्योंकि नीलम ने काफी दीं पहले से hi ऐसा माहौल बना दिया था की उसका पति उसे बिलकुल भी रोका टोका नहीं करता था
हलाकि अभी तक हरी को अपने बाप और बीवी के रंगीन रिश्तो के बारे में मालूम नहीं था
इधर हरिया अपनी बेटी को देख कर अपना लुंड मसलता हुआ अपने दामाद से बात कर रहा था
थोड़ी hi देर में रामलाल एक पूरी बॉटल ले आता है
दारू देखते hi हरी के मुँह में पानी आ जाता है
उसने नीलम से यह भी वडा कर रखा था की अब वो दारू नहीं पिए
नीलम ने भी एक अच्छी पत्नी का फ़र्ज़ निभाते हुए हरी से ेल वडा किया था की वो लाभ कभी घर में दारू पी सकता है जिसपर हरी भी बहुत खुस था
तीनो लोग बैठ कर दारू के घूंट लगाने लगते है और दुनिया दरी की बाटे चलने लगती है
करीब 1 घंटे के अंदर hi हरी के तोते उड़ना शुरू हो जाते है
अब उसकी बाटे भी लड़खड़ा रही थी जिसे देख कर रामलाल अपनी बहु का हाथ पकड़ कर उसे अपनी और खींचता हुआ कहता है
रामलाल - लाए बहु तेरा गिलास भी तो ले आ
नीलम अब पहले वाली नीलम नहीं थी वो भी झट से अपना गिलास आगे बढ़ा देती है जिसमे उसका ससुर एक पटियाला पेग डालता हुआ पानी भर भर देता है
नीलम एक घूंट में hi पूरा गिलास खली कर देती है
हरिया अपनी बेटी की यह हरकत देखता रह जाता है
रामलाल बड़े प्यार से अपनी बहुरानी के सर पर हाथ फेरता है
रामलाल - कैसा लगा बहु
नीलम - मजा आ गया ससुर जी एक और डालो फिर आप लोगो को जन्नत दिखाउंगी
रामलाल एक और पेग देता गई और नीलम चरणान्त hi उसे भी पी जाती है
अब घर के अंदर का माहौल बेहद hi कामुक हो चला था दोनों बुड्ढे तो पहले hi अपनी धोती उतर कर कच्चे में बैठे हुए थे
पहले तो सब खाना कहते है
हरी भी जैसे तैसे खाना कहा लेता है
असल में तो आज उस बेचारे की किसी को फ़िक्र hi नहीं थी
नीलम अपने ससुर और बाप के बिच में टंगे फैलाये बैठी थी जब जिसका मन होता तब उसके बदन के हिस्से पर हाथ फेर लेता
खाना ख़तम होने के बाद नीलम अंदर वाले कमरे में सबका बिस्तर एक साथ लगा देती है
हरिया नीलम की यह हरकत देख कर थोड़ा अचम्भे में था
रामलाल - क्या हुआ संधि जी कुछ परेशानी है आपको
हरिया - संधि जी सब लोग एक साथ सोयेंगे क्या आज
रामलाल --हाहा अक्स इस लिए परेशां है आप
मेरे घर का एक नियम है जिस दिन भी मेरा बीटा और मैं दारू पिटे है सबका बिस्तर साथ hi लगता है और आज आप मेरे मेहमान है तो आपको भी नियम का पालन करना hi पड़ेगा हहह
हरिया - समाधी जी पर फिर हम नीलम बेटी के साथ कैसे ...
नीलम - चिंता मत करो बापू इनके सामने तो और भी मजा आता है जब इनकी बंद आँखों के सामने में इनके hi बाप से चुदवाती हु तो मेरी बुर्र में एक अलग hi तरह की चिंगारी भड़क जाती है और आज का दिन तो काफी खास है
हरिया - ठीक है बेटी जैसा तू कहे ...म