Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 25 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -226

शाम होते होते हरिया अपनी बेटी का काफी रस पी चूका था

अँधेरा होने तक्क हरी भी घर आ जाता है

पहले तो अपने ससुर को देख कर उसे थोड़ी हैरानी होती है पर जब वो अपने बाप को खुश होता देखता है तो वो भी उनकी खुसियो में शरीफ हो जाता है

इधर रामलाल हरिया को इशारा करके निकल जाता हसि की वो जा रहा हसि देसी दारू लेने

हरिया अपनी बातो से अपने दामाद का दिमाग चाट डालता है

इन सब के बिच नीलम अपना रांडपाण दिखने पर उतर ावी थी

घर में 2-2 बूढ़े लुंड थे जिनमे उसने आज अपने पहनावे से आग लगा राखी थी

नीलम ने एक पुराने पेटीकोट के साथ सिर्फ एक ब्लाउज डाला हुआ था अंदर का ांडा नजारा साफ़ साफ़ दिखाई पद रहा था

हरी को अब नीलम के पहनावे से कोई फरक नहीं पड़ता था

क्योंकि नीलम ने काफी दीं पहले से hi ऐसा माहौल बना दिया था की उसका पति उसे बिलकुल भी रोका टोका नहीं करता था

हलाकि अभी तक हरी को अपने बाप और बीवी के रंगीन रिश्तो के बारे में मालूम नहीं था

इधर हरिया अपनी बेटी को देख कर अपना लुंड मसलता हुआ अपने दामाद से बात कर रहा था

थोड़ी hi देर में रामलाल एक पूरी बॉटल ले आता है

दारू देखते hi हरी के मुँह में पानी आ जाता है

उसने नीलम से यह भी वडा कर रखा था की अब वो दारू नहीं पिए

नीलम ने भी एक अच्छी पत्नी का फ़र्ज़ निभाते हुए हरी से ेल वडा किया था की वो लाभ कभी घर में दारू पी सकता है जिसपर हरी भी बहुत खुस था

तीनो लोग बैठ कर दारू के घूंट लगाने लगते है और दुनिया दरी की बाटे चलने लगती है

करीब 1 घंटे के अंदर hi हरी के तोते उड़ना शुरू हो जाते है

अब उसकी बाटे भी लड़खड़ा रही थी जिसे देख कर रामलाल अपनी बहु का हाथ पकड़ कर उसे अपनी और खींचता हुआ कहता है

रामलाल - लाए बहु तेरा गिलास भी तो ले आ

नीलम अब पहले वाली नीलम नहीं थी वो भी झट से अपना गिलास आगे बढ़ा देती है जिसमे उसका ससुर एक पटियाला पेग डालता हुआ पानी भर भर देता है

नीलम एक घूंट में hi पूरा गिलास खली कर देती है

हरिया अपनी बेटी की यह हरकत देखता रह जाता है

रामलाल बड़े प्यार से अपनी बहुरानी के सर पर हाथ फेरता है

रामलाल - कैसा लगा बहु

नीलम - मजा आ गया ससुर जी एक और डालो फिर आप लोगो को जन्नत दिखाउंगी

रामलाल एक और पेग देता गई और नीलम चरणान्त hi उसे भी पी जाती है

अब घर के अंदर का माहौल बेहद hi कामुक हो चला था दोनों बुड्ढे तो पहले hi अपनी धोती उतर कर कच्चे में बैठे हुए थे

पहले तो सब खाना कहते है

हरी भी जैसे तैसे खाना कहा लेता है

असल में तो आज उस बेचारे की किसी को फ़िक्र hi नहीं थी

नीलम अपने ससुर और बाप के बिच में टंगे फैलाये बैठी थी जब जिसका मन होता तब उसके बदन के हिस्से पर हाथ फेर लेता

खाना ख़तम होने के बाद नीलम अंदर वाले कमरे में सबका बिस्तर एक साथ लगा देती है

हरिया नीलम की यह हरकत देख कर थोड़ा अचम्भे में था

रामलाल - क्या हुआ संधि जी कुछ परेशानी है आपको

हरिया - संधि जी सब लोग एक साथ सोयेंगे क्या आज

रामलाल --हाहा अक्स इस लिए परेशां है आप

मेरे घर का एक नियम है जिस दिन भी मेरा बीटा और मैं दारू पिटे है सबका बिस्तर साथ hi लगता है और आज आप मेरे मेहमान है तो आपको भी नियम का पालन करना hi पड़ेगा हहह

हरिया - समाधी जी पर फिर हम नीलम बेटी के साथ कैसे ...

नीलम - चिंता मत करो बापू इनके सामने तो और भी मजा आता है जब इनकी बंद आँखों के सामने में इनके hi बाप से चुदवाती हु तो मेरी बुर्र में एक अलग hi तरह की चिंगारी भड़क जाती है और आज का दिन तो काफी खास है

हरिया - ठीक है बेटी जैसा तू कहे ...म
 
अपडेट -227

हरी तो पहले hi चित्त हो चूका था और उसके बाजु में hi पहले उसका बाप फिर बीवी और फिर उसका ससुर लेते हुए थे

हरिया अपनी बेटी के उठे हुए पेट पर हाथ फेरता हुआ कहता है

हरिया - कितने दिन हो गए बेटी तुझे ाचे से देखे हुए

नीलम - बापू देखे हुए या फिर अच्छे से चोदे हुए

तीनो नीलम की बात पर हसने लगते है

रामलाल - है है समधी सही सही बताइये

हाहाहाहा

हरिया - अब जो आप लोग समझो

रामलाल - इसमें समझने वाली कौन सी बात है बहु तो तैयारी करके बैठी है न जाने कबसे की जब आप आएंगे तो हम दोनों बुद्धो को एक साथ मजा देगी आपको बेटी

हरिया - हहह बेटी किसीकी है संधि जी

हरिया अपना हाथ आगे बढ़ता हुआ नीलम की मोती मोती चूचिया दबाने लगता है

रामलाल खा पीछे रहने वाला था वो भी अपना हाथ आगे बढ़ता हुआ दूसरी चुकी को पकड़ लेता है

नीलम- अह्ह्ह्ह लगता है आज पूरा निचोड़ कर hi छोड़ोगे तुम दोनों बुड्ढे मुझे

रामलाल - बेटी अभी तो सुरुवात है देख आज तू मस्ती में झूम उठेगी

नीलम- वही तो कहती हु ससुर जी मैं भी जब मेरे बाप और ससुर का लुंड एक साथ मेरी छूट और गांड में जाएगा तो खूब मजा आएगा

नीलम अपने हाथ निचे करती हुई दोनों बुद्धो की धोती के बहार से hi उनके लुंड पकड़ लेती है

हरिया - अह्ह्ह बेटी अब और बर्दास्त नहीं होता अपने बूढ़े बाप के लुंड को सहारा दे बेटी अह्ह्ह्ह

नीलम एक झटके में उठ कर बैठ जाती है

दोनों बुड्ढे भी खड़े होते हुए अपनी धोती को अलग फेक एक दम नंगे हो जयते है

अपने बाप और ससुर के लटके हुए लुंड एक साथ देख कर नीलम की आँखों में चमक आ जाती है

नीलम- हां अब मजा आएगा पापा जीई

नीलम दोनों को एक साथ पकड़ कर मुठियाते हुए अपने बापू का लुंड मुँह में भर कर चूसना शुरू कर देती है

हरिया का हाथ अपने आप hi अपनी बेटी के सर पर चला जाता है और उसे बड़े दुलार से सहलाने लगता है

हरिया - अह्ह्ह बेटी टेरर ये गरम होठ तेरा ये गीला और गरम मुहहह

तड़प गया था तेरा ये बाप तेरे साथ ये सब करने के लिये अह्ह्ह

हरिया अपना आप खोता हुआ अपनी बेटी की सर को पीछे की और से पकड़ता हुआ एक जोरदार जटखा मरता है

जिससे उस्का आधे से ज्यादा लुंड उसकी बेटी के मुँह में घुस जाता है

नीलम की आँखे इस हमले से बहार की और आ जाती है

हरिया लगातार बड़बड़ाता हुआ अपनी बेटी के मुँह को छोड़ना शुरू कर चूका था

नीलम ने अब भी दूसरे हाथ से अपने ससुर का लुंड पकड़ रखा था

जोर जोर हिलने की वजह से चूडियो को खनखनाहट भी बहुत हो रही थी

पर इस तेज आवाज का किसी को कोई डर नहीं था

इधर काफी देर तक्क अपनी बेटी का मुँह छोड़ने के बाद हरिया उसपर थोड़ा रेहम दिखता हुआ उसके सर से अपना हाथ हटाता हुआ उसके मुँह में से अपना लुंड बहार निकल लेता है

नीलम के मुँह से थुककक की एक धार जमीन और उसके शरीर पर गर्ने लगती है

अब तक रामलाल अपनी बहु का ब्लाउज उतार चूका था

नीलम अभी गहरी सांसे ले hi रही थी की तभी रामलाल अपनी बेटी समान बहु के बालो को पकड़ कर अपने लुंड की और खींचता है

रामलाल,- बेटी सिर्फ बाप की hi सेवा करेगी ससुर को भूल गयी क्या

नीलम का मुँह खुद बा खुद hi खुलता चला जाता है

और अब उसी बेहरमी के साथ रामलाल भी अपनी बहु का मुँह छोड़ने लगता है जिस बेरहमी से थोड़ी देर पहले हरिया अपनी बेटी का मुख छोडन कर रहा था

रामलाल - सच में संधि जी आपकी बेटी में एक अलग hi चिंगारी है जो हम जैसे बुद्धो को भी कुछ देर के लिए घोडा बना सकती है

नीलम- गगगगूउऊउउउउ जूउउउउउ

पूरा कमरे में आवाजे गूंज रही थी पर किसी को कोई डर नहीं था की जिसे वो छोड़ रहे है उसका पति अब भी इसी कमरे में है

हरिया अपनी बेटी को लिटाता हुआ उसका पेटीकोट निकाल कर अलग करता हुआ अपनी बेटी को पूरी नंगी कर देता है

रामलाल का लुंड अब भी उसकी बहु के मुँह में अंदर बहार हो रहा था

रामलाल अभी लुंड चूसा रहा था और इधर हरिया अपना लुंड अपनी बेटी की छूट में पेल कर उसे छोड़ना शुरू कर चुका था

रामलाल - बड़ी तेजी में है सधी जी

हरिया- अब और कण्ट्रोल नहीं होता समधी जी अह्ह्ह इसको छूट तो अब और भी नरम हो गयी है

रामलाल - नरम एयर मुलायम तो होगी hi बहुरानी की छूट रोज रोज इसपर म्हणत जो करता हु

क्यों बहु

रामलाल अपना लुंड पूरी जान से नीलम के मुँह में ठूसता हुआ कहता है

हरिया- धन्या हु मैं जो आप जैसा संधि मिला जो शादी के बाद भी मुझे अपनी बेटी का देह सुख लेने दे रहा है

अगर कोई और होता आपकी जगह तो न जाने मेरा क्या होता

रामलाल- अरे संधि जी सब किस्मत की बात है

और वैसे भी मुझे पूरा यकीन है की अगर कोई और भी होता तो भी आपकी ये बेटी उसे अपने काबू में कर लेती

हरिया लगातार झटकी मरता हुआ अपनी बेटी की चूचियों से लेकर उसके पेट और कमर की चर्बी को लगातार मसल मसल कर उसके जिस्म का मजा ले रहा था

इधर काफी देर तक्क लुंड चूसने के बाद रामलाल दूसरी साइड सीधा लेट जाता है

रामलाल - आजा बहु आजा अब तेरे ससुर के पास

नीलम 2 मिंट तक और अपने बाप से चुदवाती है और जैसे hi हरिया का लुंड उसकी छूट से निकलता है हरिया सीधा अपना मुँह अपनी बेटी की छूट और गांड पर चिपका कर उसे कहतने चूसने लगता है

करीब 2 मिंट की बुर चूसै के बाद हरिया अपनी बेटी की कमर छोड़ देता है

नीलम सीधा अपने ससुर के ऊपर जाकर उसके साथ चुमकहति करती हुई अपनी छूट उठा कर उसका लुंड भी अंदर कर लेती है और खुद hi अपनी कमर को ऊपर निचे करती हुई अपने ससुर से छुड़वाना शुरू कर देती है

इधर हरिया काफी आराम कर चूका था उसके लुब्द की नशे मनो फटने को तैयार थी

उसे अब सिर्फ अपनी बेटी की गांड नजर आ रही थी

हरिया अपनी जगह से उठ कर अपनी बेटी के पीछे जाता हुआ अपना लुंड उसकी गांड के भूरे छेद से भिड़ा देता है

हरिया अपना दबाव बढ़ता हुआ लुंड को अंदर डालने की कोशिश करता है नीलम थोड़ा सा निचे की और झुकती है और उसके बाप का लुंड सरकता हुआ एकदम से नीलम की फटी हुई गांड में पूरा अंदर चला जाता है

नीलम- अह्ह्ह्ह मजा आज्ञा बहुत दिन हो गए थे एक साथ 2-2 लुंड लिए हुए

रामलाल - बेटी तेरे ससुर और बाप अभी ज़िंदा है तू बिलकुल चिंता मत कर रोज तुझे यही सुख मिलेगा

अब आलम यह था की निचे से रामलाल अपनी बहु की छूट पेल रहा था

और निचे से हरिया अपनी बेटी की गांड छोड़ रहा था

बिच में बेचारी नीलम हर्र धक्के के साथ एक अलग hi सुख का अहसास कर कर के पागल हुई जा रही थी

सब जानते थे की नीलम के पेट में बच्चा है जो न जाने किसका था पर सबको अपना hi लगता था और सबको उस बच्चे की चिंता भी थी

जिसकी वजह से न तो रामलाल और न hi हरिया नीलम पर कोई जोर जबरदस्ती कर रहे थे

करीब 10 मिंट तक दोनों बुड्ढे ऐसे hi नीलम को ऊपर निचे से छोड़ते हुआ अपना विरया उसकी छूट और गांड में छोड़ देते है

इस बिच हरी अपनी जगह से हिलता टककक नहीं

रामलाल पेशाब करने चला जाता है

इधर हरिया और उसकी बेटी अब भी नंगे hi लेते हुए थे और हरिया अपनी बेटी के पेट और चुकी पर हाथ फिरा रहा था

हरिया - बेटी तेरा ससुर भी काम नहीं है

नीलम- अरे बड़ा हरामी है बापू ये दिन रात मेरी छूट में मुँह घुसाए पड़ा रहता है

सच कहु तो अगर इसका बस चले तो मेरे पति को एक रात भी घर न रुकने दे और रोज रास्त मेरे साथ सुहाग रात मनाये

हरिया,- कुछ भी हो बेटी पर हमारा काम तो हो गया न

हरिया अपनी बेटी के पेट को दबाता हुआ बोलता है

नीलम- बापू काम भी हो गया और शादी भी ऐसी जगह हुई है की जब तुम्हारा मन करे आओ और छोड़ो अपनी बेटी को न पति को कोई फरक पड़ेगा और ससुर तो है hi मेरा गुलाम

और बापू सबसे मजेदार बात आपको पता है

हरिया- क्या बेटी

नीलम- मेरा ससुर सोचता है की ये बच्चा उसका है

हरिया - ष्ष्स सोचने दे सेल को आखिर है तो बच्चा तेरे बाप का

सच तो यह था की नीलम को यही लगता था की यह बच्चा तब hi रुका था जब रवि ने उसे पहली बार झोपडी में छोड़ा था

बस वो अपने बाप की है में है मिला दिया करती थी

हरिया - बेटी कभी तेरे पति को शक नहीं होता तेरे ससुर पर

नीलम- लगता तो मुझे भी है की जैसे हरी को सब पता है पर न वो कुछ बोलता है और न hi हम उसपर उतना ध्यान देते है .......
 
अपडेट -228

अगली सुबह कम्मो और मल्टी उठ कर अपने कामो में लगे हुए थे

इधर रवि अब तक बुआ से चिपका सोया हुआ था

थोड़ी hi देर में केशव की आँख भी खुल जाती है

उसकी आँखे खुलते hi सबसे पहले उसकी बेहेन नजर आती हुई जो अब भी बेसुध सी सोई हुई थी

केशव की नजर अपनी बेहेन के गीले होठो से हट hi नहीं रही थी

रेखा के होठो पर हल्का पसीना था जो उसे और भी ज्यादा कामुक बना रहा था

केशव ( आज तक्क क्यों नहीं देख पाया तू केशव अपनी बेहेन की उफान मरती जवानी को )

केशव अपने हाथ को आगे बढ़ता हुआ अपनी बेहेन के निचे होठ पर फिरता हुआ उसे हवस भरी नजरो से देख रहा था

केशव का हाथ अब होठो से निचे की और सरकता हुआ अपनी बेहेन की चूचियों के बिच बनी लकीर तक्क पहुंच गया था

पसीने से लटपट रेखा केशव को कुछ ज्यादा hi लुभा रही थी

वो ये तक भूल चूका था की जिसे छू कर वो मजे लूट रहा है वो उसकी खुद की बेहेन है

केशव अभी कुछ और करता उससे पहले रेखा अचानक से आँख खोल देती है

रेखा - क्या हुआ भैय्या ऐसे क्या देख रहे हो

केशव - देख रहा हु मेरी बेहेन कितनी बड़ी हो गयी है

रेखा - अच्छा आज तक नहीं देखा

केशव - मौका hi नहीं मिला आज तक

केशव का हाथ अब तक रेखा की चुकी के ऊपर hi था

जिसे रेखा भी भाप चुकी थी पर वो भी अपने भाई को पूरा मौका देना कहती थी

रेखा - अच्छा तो अब क्या ऐसे hi देखते रहोगे

केशव - आज मौका मिला है तो जी भर कर देख लू क्या पता अब दुबारा मौका मिले न मिले

रेखा - ऐसी कोई बात नहीं भैय्या मैं कहि भाग थोड़े hi रही हु

रेखा खुद hi केशव के हाथ को पकड़ कर अपनी चुकी पर से हटा देती है

और खड़ी होती हुई एक मादक अंगड़ाई लेकर एक नजर केशव की और डालती हुई बहार चली जाती है

केशव अपनी बेहेन का ये अंदाज देख कर पागल सा हो जाता है

उसे संहह hi नहीं आ रहा था की रेखा ने उसे खुद को चुने से रोका नहीं और खुद hi उसका हाथ अपनी चूचियों से हटाया भी कहि. ऐसा तो की रेखा को खुद भी अपने भाई का चुना अच्छा लगा

आखिर थी तो वो भी एक औरत hi और ैरत की सबसे बड़ी कमजोरी है लुंड

जिसमे इतनी ताक़त है की एक घरेलु औरत को भी रंडी बना दे

केशव के दिमाग में यही उधेड़ बन चल रही थी

अच्चानक से केशव की नजर बुआ की और पड़ती है

जो अभी तक सोई हुई थी और उसके पीछे hi रवि भी सोया हुआ था

अब वो बात पुराणी हो गयी थी जब केशव को रवि को देख कर गुस्सा आता था

केशव बुआ की एक सूची को थोड़ा सा दबाता हुआ कमरे से निकल जाता है

इस बिच मल्टी और कम्मो तो खाना बनाने में लगी हुई थी और रेखा कमरे से बहार निकलते hi घर के पिछवाड़े चली गयी थी हगवास करने

केशव बहार निकल कर देखता हसि उसे उसकी बीवी और छोटी बेहेन दिखती है जो झुक कर झाड़ू लगा रही थी .

केशव - हाय राम एक के बाद एक मेरी बहने मुझे पागल कर देंगी

केशव कम्मो ओर ज्यादा ध्यान न देते हुए घर से बहार निकल जाता है पेशाब करने के लिए

और जैसे hi वो थोड़ा आगे बढ़ता है उसके पेअर वही जैम जाते है

वही थोड़ी hi दूर पर उसकी बेहेन रेखा बैठी हुई थी उसका पेटीकोट बिलकुल उसकी कमर तक्क चढ़ा हुआ था और पीछे से उसकी खुली हुई गांड खुद के भाई को ललचा रही थी

केशव की आँखे फटी की फटी रह जाती है

इधर रेखा इस बात से अनजान अपनी गांड खोले लगातार संडास निकाले जाए रही थी अपनी गांड से और यही नजारा देख कर उसका भाई अब तक अपने लुंड को मुठियाना शुरू कर चुका था

करीब 5 मिंट तक्क लुंड हिलने के बाद केशव का पानी निकल जाता है और वो वापस से घर के आगे जाकर बहार पड़ी खत पर बैठ जाता है

इधर रेखा अपनी गांड को रगड़ रगड़ कर धोने के बाद लोटा लेकर घर की और बढ़ जाती है

बहार hi केशव बैठा था

रेखा - अरे भैया तुम यहां क्यों बैठे हो

केशव अब अपनी बेहेन के साथ खुल कर बाटे करने के मुद में था क्योंकि कमरे में hi वो जान चूका था की उसकी बेहेन को भी अब एक मर्द की जरुरत है

केशव- अरे मैं तो गया था पिछवाड़े की और पर वह देखा की तू पहले से hi हैगगग रही थी तो मैं वापस आ गया

केशव के मुँह से ऐसी बात सुनते hi रेखा भी समझ जाती हसि की उसका जादू अब उसके भाई पर चल चूका है

रेखा लोटे को वही रखती हुई खत पर अपने भाई के पास बैठ जाती है

रेखा - मतलब भैया आपने मुझे संडास करते हुए देखा

केशव,- हां देखा था तभी तो वापस आ गया

रेखा - भइया ये बात किसी को मत बताना नहीं तो सब मेरी बुराई करेंगे

आप तो जानते hi होना

केशव मौके का फायदा उठता हुआ तुरंत hi रेखा का हाथ पकड़ कर अपने दोनों हाथ में ले लेता है

केशव - तू चिंता मत कर पगली और वैसे hi तुझे हगते हुए सर्फ मैंने hi तो देखा है इसमें कौनसी बड़ी बात है मैं किसी को नहीं बताऊंगा तू बिलकुल भी चिंता मत कर पगली तेरा भाई हु मैं

केशव रेखा का हाथ पकड़ कर अपने होठो तक लता है और उसे चुम लेता है

केशव को कुछ महक आती है और उसे समझते देर नहीं लगती की उसने उसी हाथ को पकड़ रखा है जिससे उसकी बेहेन अपनी गांड धो कर आयी है

केशव की आँखे अंगार से भर जाती है उसे रेखा की गांड की महक पागल कर रही थी

केशव लगातार रेखा का हाथ सूंघता हुआ उसकी और देख रहा था

रेखा भी समझ चुकी टी की उसके भाई पर कौनसा नशा हावी है

रेखा - ठीक है भैया मैं भी अंदर जा रही हु और आप भी जाकर संडास करलो

केशव - अरे रेखा मैं क्या कह रहा था की चल न आज हम दोनों खेतो पर चलते है वैसे भी बिचारा रवि क्या क्या करेगा अकेले अकेले

रेखा - ठीक है भैया आज सिर्फ हम दोनों चलेंगे खेतो पर और खूब म्हणत करवाउंगी मैं आपसे याद रखना

केशव - तेरा भाई तो कबसे तैयार बैठा है रे पगली अपनी बेहेन के साथ म्हणत करने ले लिए

रेखा - ठीक है आप जाइये मैं भी नहा लेती हु

रेखा जान बुझ कर अपनी गांड मटकती हुई घर में चली जाती है इधर केशव आपने खड़ा लुंड मसलता हुआ पिछवाड़े चला जाता है....
 
अपडेट -229

चाय नाश्ता करने के बाद केशव और रेखा खेत जा रहे है बोल कर निकलने hi वाले थे की उन्हें जानकी बुआ रोक देती है और खुद को भी साथ ले चलने का आग्रह करती है

वो दोनों जानकी बुआ को भी साथ ले लेते है और घर से निकल जाते है

असल में तो केशव और रेखा को बुआ से कोई दिक्कत थी hi नहीं क्योंकि आंधी भला क्या hi देख सकती थी

रवि भी सेहर की और निकल गया नई फसल के बीज लेने के लिए

रेखा जानकी के साथ आगे की और चल रही थी और उसके पीछे उसका भाई केशव उसकी गांड की थिरकन को देखता हुआ सांसे खींच रहा था

ना जाने कब वो पल आएगा जब केशव को यह मलाई खाने को मिलेगी

यही सोच सोच के केशव का दिमाग खराब हो रहा था की तब तक्क रेखा एक ऐसा तीर छोड़ती है की केशव की हकात खराब हो जाती है

रेखा अपना हाथ पीछे लती हुई अपनी बिचलि ऊँगली को पूरी तरह अपनी गांड में घुसा लेती है और एक बार अपना पूरा हाथ घुमा कर गांड के अंदर तक ऊँगली को पेस्टी हुई अपना हाथ बहार खींच लेती है

और फिर अपनी उस ऊँगली को सूंघते हुए बुरा सा मुँह बनाती हुई आगे की और बढ़ने लगती है

केशव जो अब तक शांति से चल रहा था अब उसका दिमाग काम करना बंद कर चूका था

ऊँगली वाली बात तो ठीक थी पर अगले hi पल जब केशव की आंखे दुबारा से अपनी बेहेन की गांड पर गयी तो उसका पुरे जिस्म में एक जोरदार झटका लगा उसका हाथ खुद बा खुद hi अपने लुंड ओर चला गया और उसे मसलता हुआ वो अपनी बेहेन द्वारा बनाये गए इस नजारे का जी भर का मजा लेने लगा

जिस तरह रेखा ने अपनी गांड में ऊँगली घुसाई थी ठीक उसी साइज का एक होल बन गया था रेखा की पेटीकोट में जो सीधा उसकी गांड के छेद तक्क जाए रहा था

यह नजारा देख कर केशव एक पल के लिए आप खो देता है और ृक्क कर उससे नजारे का मजा लेने लगता है

अगले hi पल रेखा पलट कर अपने भाई की और देखती हुई आगे चलने लगती है

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे की मनसा समझ चुके थे

अब बरी थी पहल करने की और दोनों के hi दिमाग में यही बात चल रही थी कुछ hi देर में दोनों भाई बेहेन बुआ के साथ केहतो में पहुंच जाते है

केशव झोपडी में से खटिया निकल कर बुआ और रेखा को बैठा देता है और खुद थोड़ा बहुत काम करने लगता है

िद्धारर रेखा बैठे बैठे कुछ सोच hi रही थी की बुआ उसे कहती है की उसे पेशाब जाना है

रेखा बुआ को लेकर झोपड़ी के पीछे ले जाती है और करवा कर वापस आ जाती है

तभी वह केशव भी आजाता है

रेखा - भैया मैं अभी आती हु थोड़ी देर में

केशव - अरे पर जा खा रही है तू

रेखा - छोड़ो न भैया बहुत इमरजेंसी वाले हालत है

केशव - अच्छा मतलब साडी दूकान का माल बॉर्डर तक्क पहुंच गया है हाहाहा

रेखा अपने भाई की इस द्विअर्थीया बात का मतलब साफ़ साफ़ समझ चुकी थी और अपनी हसी को दबाये अपनी गर्दन निचे किये हुए hi अपना सर है में हिला देती है

केशव - है है ठीक है जाओ कहि पता चले तुम्हारी टंकी यही लीक हो गयी हहह

रेखा अपने भाई की बात सुनते hi वह से चली जाती है

इधर केशव बुआ की और देख कर अपना लुंड मसलता हुआ उस और बढ़ जाता है

केशव - बुआ

बुआ- हां बेटा

केशव अपने पायजामे से अपना लुंड निकल कर सीधा बुआ के हाथ में पकड़ा देता है

केशव का खड़ा लुंड जैसे hi बुआ के हाथो में पड़ता है और वो हड़बड़ा कर लुंड को छोड़ कर इधर उधर देखने लगती है

केशव बुआ के बालो को सहलाता हुआ कहता है

केशव - क्या हुआ बुआ लुंड नहीं चाहिए क्या आपको

बुआ- बेटा ये गलत है तू मेरे भाई का बीटा है मैं तेरे साथ ये सब नहीं कर सकती बेटा मत कर ृक्क जा

केशव,- बुआ कर तो तुम पहले भी चुकी हो और वो भी रात भर मेरी रंडी बन कर अपने hi घर में और फिर भी आज ऐसे नाटक कर रही हो

केशव दुबारा से बुआ को अपना लुंड पकड़ा देता है

पर इस बार बुआ केशव का लुंड नहीं छोड़ती

शायद कहि न कहि तो बुआ को भी लुंड की जरुरत थी hi

बुआ- रेखा खा गयी बीटा

केशव - हगने गयी है बुआ अभी उसको टाइम लगेगा चलो अंदर चलते है झोपडी में

बुआ बिना कुछ बोले केशव के साथ झोपडी में चली गयी और अंदर घुसते hi केशव ने अनार से कुण्डी लगा दी

बुआ जैसे hi पीछे पलटी केशव ने उसे अपने बहो में भरते हुए बुआ के होठो को चूसने लगा

बुआ भी अपने भतीजे की इस हरकत से पागल सी हो गयी और अपना मुँह खोलती हुई अपनी जीभ भी अपने भांजे की जीभ पर लड़ने लगी

इधर केशव बुआ की गांड को मालस्ता हुआ बोरी जमीन पर बिछाता है और बुआ को धक्का देता हुआ जमीन पर लेता देता है

बुआ खेली खायी औरत थी

वो जमीन ओर गिरते hi अपनी सदी को कमर तक्क उठा लेती है और अपनी छूट खोलकर अपने भतीजे के सामबे पेस कर देती है

केशव - अरे वह बुआ तुम तो एक दम खिलादन निकली अभी नाटक कर रही थी और अब खुद hi सदी उठा कर अपनी छूट दिखा रही हो

जानकी- हरामी छोड़ना है तो जल्दी छोड़ अभी तेरी बेहेन आ जाएगी तो सारा काम खराब हो जाएगा

केशव - अरे मेरी प्यारी बुआ इतना भी नाराज क्यों होती हो अभी शुरू करता हु तुम्हारी चुदाई

. केशव अपना लुंड अपनी बुआ के फटे हुए भोसड़े पर रखता हुआ अंदर पेल देता है

और लुंड एक झटके में बुआ की छूट में घुस जाता है

बुआ- अह्ह्ह बीटा अब अच्छे से छोड़ अपनी इस अंधी बुआ को

इधर रेखा संडास करने के बाद वापस आती है न तो उसे केशव दीखता है एयर न hi जानकी बुआ

रेखा दोनों को ढूंढते हुए झूड़ी तक पहुंच जाती है और जैसे hi वो अंदर का नजारा देखती है उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है....
 
अपडेट -230

बुआ और केशव को चुदाई करता देख रेखा अचम्भे में आ जाती है

क्योंकि उसने कभी ऐसा सोचा भी नहीं था की केशव अपनी hi बुआ को छोड़ रहा है

रेखा 5 मिंट तक दोनों का अतरंगी मिलान देखती रहती है अंतत में केशव बुआ की छूट में hi अपना सारा पानी गिरा देता है और जैसे hi दोनों खड़े होते है

बहार से रेखा दरवाजा बजाने लगती है

बुआ- बोलै था न ये जल्दी आ जाएगी अब क्या करेगा

केशव - बास तुम शांत रहना बाकि मैं देख लूंगा

दोनों जल्दी जल्दी अपने कपडे ठीक करते है और केशव दरवाजा खोल देता है

रेखा को देख कर दोनों के hi चेहरे का रंग उदा हुआ था

रेखा - क्या हुआ भाई आप और बुआ यह झोपडी में वो भी दरवाजा बंद करके क्या कर रहे थी

केशव - अरे वो बुआ को भूख लगी थी मैंने सोचा कहि यह झोपड़ी में कुछ होगा तो खिला दूंगा

रेखा - वो तो ठीक है भाई पर दरवाजा क्यों बंद कर दिया

केशव - अरे वो मुझे अब hi सेहर वाली आदत है न की अपने घर में आकर दरवाजा बंद करने की तो इसी लिए हो गया तू बता हो गया तेरा

रेखा गन्दा सा मुँह बनती हुई - खा हो गया भैय्या अभी संडास करनी शुरू hi की थी की न जाने खा से कमीना जंगली सुवर आ गया वैसे hi पेटीकोट पकड़ कर भागना पड़ गया

केशव भी अब तक्क बहार आ जाता है बुआ अब भी वही अंदर खड़ी थी

केशव - मतलब मेरी बेहेन ठीक से हैगगग भी नहीं पायी

केशव रेखा के बालो को सहलाते हुए बोलता है

रेखा - क्या कृ भैया

केशव - चल मैं चलता हु और देखता हु की कौनसा जंगली सुवर है जो मेरी बेहेन की संडास रोके हुए है

रेखा - नहीं भैय्या रहने दो और वैसे भी में अपनी गैन.....

रेखा बोलते बोलते ृक्क जाती है

केशव मौके का फायदा उठता हुआ रेखा की कैंसर में हस्त दाल देता है

केशव - बोल ना क्या हुआ रेखा

रेखा - वो भैया गलती से मुँह से निकल गया

केशव - गलती हो या न हो बात को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए समझी

केशव अब बिना किसी शर्म लाज के अपनी बेहेन की पूरी पीठ को सेहला रहा था और इस सब में रेखा को भी मजा आता है

रेखा - भैय्या वो मैं कह रही थी की अब तो मैं अपना पिछवाड़ा भी धो चुकी हु

केशव - अरे मेरी बहना इसमें इतनी डरने की कौनसी बात है भले hi तू अपना ये पिछवारा धो चुकी है

इस बार केशव अपने हाथ को सीधा अपनी बेहेन की गांड पर रख कर घूमता हुआ एक जोरदार एक चपत लगा देता है

केशव - भले hi तू अपना ये पिछवारा धो चुकी है पर हगना तो तुझे अब भी है न मेरी बेहनाआ

रेखा - है भैया पर अब उतना परेसुरे नहीं है अब घर जाकर हगूँगी

केशव का वो हाथ अब अपनी बेहेन की नरम और गद्देदार गांड को छोड़ने को राजी नहीं था

इधर रेखा को भी यह अहसास बहुत अच्छा लग रहा था की यह खुले में खड़ा होकर उसका भाई उसकी गांड सेहला रहा है

केशव - तो चल फिर घर चलते है

रेखा - अभी नहीं भैया च्लोए साथ में थोड़ी देर बैठते है

और एक काम करो खत को झोपडी के अंदर लेलो

केशव - तू चल मैं ले कर आता हु

रेखा जोड़ी में जाते हुए अपने हाथ से अपनी गांड को दबती है मनो वो कुछ बहार आने से रोक रही है और जैसे hi वो पीछे पलट कर देखती है मुस्कुराती हुई अंदर चली जाती है

केशव अपनी बेहेन का कामुक जिस्म देख कर पूरी तरह पगला गया था

झोपडी के अंदर खत बिछाने के बाद दोनों बुआ को खत पर बैठा देते हसि और खुद उसके बाजु में रेखा बैठ जाती है

केशव अब भी निचे hi बैठा था

रेखा के मन में अब यही चल रहा था की आखिर वो क्या करे की वो अपने भाई को और भी ज्यादा उकसा पाए ......
 
अपडेट -231

बुआ- क्यों रे केशव इसकी शादी की जहि बात चल रही है या नहीं

रेखा - नहीं बुआ जी मुझे नहीं करनी शादी वाड़ी में ऐसे hi खुस हु

केशव - अरे शादी तो हर किसी को करनी पड़ती है

बुआ- शादी नहीं करेगी देख तो कैसे गदराई भैंस के जैसा शरीर हो गया है और बोलती है की शादी नहीं करनी

में तो बोलती हु की जल्दी hi इसकी और कम्मो की शादी करवा दे बीटा वैसे भी जवनन लड़कियों को ज्यादा दिन घर में नहीं बैठना चाहिए

केशव हवस भरी नजरो से रेखा की और देखता हुआ बोलता है

केशव - बुआ वैसे कह तो सही रही हो एक दम गडरा गया है अब मेरी बेहेन का जिसमं अब इसके और इसके इस गदराये जिस्म के लिए कोई हत्ता कट्टा गबरू जवान ढूंढना पड़ेगा

रेखा अपने भाई की नजरो और बातो से समझ चुकी थी की अब उसका भाई भी वही कहता है जो वो कहती है

रेखा - हां बड़े आये हत्ता कट्टा गबरू ढूंढने वाले मेरे लिए जाओ भैय्या मुझे नहीं करनी शादी वाड़ी

बुआ- अरे शादी नहीं करेगी तो क्या जिंदगी भर अपने इनदोनो भाइयो का बोझ बनी रहेगी

रेखा - भैय्या क्या मैं आपको बोझ लगती हु

रेखा मायूसी से अपने भाई की और देखती हुई कहती है

केशव मौका देखते हुए अपना एक हाथ सीधा रेखा के पेअर पर रख देता है

केशव - कोई कुछ भी बोले पर मेरी बेहेन हमेशा मेरी बेहेन hi रहेगी और तुझे जितने दिन यह रहना हो तू रह सकती है समझी

बुआ- अरे केशव मेरी बात समझ अगर जवान बेहेन को घर में यु बैठा कर रखेगा तो न जाने दुनिया वाले क्या क्या अनाप सनाप कहेंगे

रेखा अपने भ्सी की आँखों मर देखती हुई अपने पेटीकोट को खुद hi खींचती हुई अपने घुटनो तक चढ़ा देती है

केशव भी मौके पर चुका मरता हुआ अपने हाथ हो आगे की और बढ़ता हुआ सीधा रेखा की मांसल पिंडलियों पर रख देता है और उन्हें सहलाता हुआ रेखा की आँखों में देखने लगता है

बुआ बोले जा रही थी और इधर दोनों भाई बेहेन एक दूसरे को खा जाने वाली नजरो से देख रहे थे

केशव - बुआ जी वैसे एक बात है नेरी बेहेन है तो ऐसी की कोई भी लड़का एक नजर देखते hi पागल हो जाईए

रेखा - अरे है है भैय्या रहने दो मैं खा सुन्दर हु मुझ काली कलूटी को कोई भाव भी नहीं देता

केशव - तेरा रंग भले hi भगवान् ने कला दिया है बहना पर तेरे इन ाँगो की जो बनावट है न वो तो किसी बुड्ढे की भी जान निकल दे खड़े खड़े hi

बुआ-- हट बेशरम तेरी बेहेन है वो और तू ऐसे बोल रहा है

केशव - अब बुआ जो बात है वो बता रहा हु अगर आप देख सकती तो आपको भी पता चलता की मैं कितना सच बोल रहा हु

बुआ- अच्छा तो अब एक भाई खुद hi अपनों बेहेन के गदराये जिस्म की बधाई कर रहा है वह जी वह क्या जमाना आ गया है

रेखा अब तक पूरी पानी पानी हो चुकी थी

रेखा - बुआ जी वैसे भी भैय्या सच hi बोल रहे है मुझे भी कई बार लगता है की जब मैं गाओं में जाती हु तो बुड्ढे बुड्डेह लोग भी मेरे इस गदराये शरीर और मेरे ाँगो को घर घर कर देखते है

बुआ- और तेरा भाई भी देखता है ये भी तो बता

रेखा - अब्ब भाई है तो देखेंगे न बुआ जी

रेखा की यह बात सुनते hi केशव के अंदर और भी जोश आ जाता है अब वो अपने हाथ को पिंडलियों से ऊपर घटजो की और बढ़ाना शुरू कर चूका था

रेखा लगातार अपने भाई की और देख कर अपनी जांघो को रगड़े जा रही थी जो सीधा सीधा साबुत थी की हालत तो रेखा की भी खराब है

बुआ- वैसे एक बात है तुम भाई बेहेन का प्यार बहुत अटूट है

रेखा - इसे hi तो कहते है बुआ जी भाई बेहेन का प्यार कहे कुछ भी हो पर हम भाई बेहेन हमेशा एक hi रहेंगे

रेखा अब अपने भाई को सब कुछ खुल कर दिखने का फैसला कर चुकी थी

रेखा भैया आप लोग बैठो मैं अभी आती हु

केशव - अरे अब खा चल दी

रेखा अपनी छूट को ऊपर से दबती हुई बोलती है

रेखा - हां भैय्या बहुत तेज पेशाब लगी है बास अभी आती हु

रेखा तुरंत hi बहार चली जाती है

बुआ- क्यों रे कमीने केशव मुझे छोड़ कर तेना मन नहीं भरा की तू अब अपनी बेहेन के सामने भी ऐसी गन्दी गन्दी बाते कर रहा है

केशव - बुआ तुम्हे छोड़ने में बहुत मजा आया पर सच खु तो अब मेरा लुंड खुद मेरी बहनो को देख कर खड़ा होने लगा है बुआ

बुआ केशव की बात सुनते hi ाकम्भे में पड़ जाती है

बुआ- ये क्या बोल रहा है तू वो तेरी बेहेन है और तू उसे hi छोड़ना कहता है

केशव - अब क्या करे बुआ लुंड खड़ा हो गया तो छोड़ना hi पड़ेगा

और आपको एक बात पता है आज कल रेखा भी मुझसे खूब चिपक रही है

बुआ- तू सच में हरामी है वो तो बेचारी नादाँ है इतनी उम्र हो गयी अब तक शादी नहीं हुई तो जिस्म की जरुरत तो उसे भी है

केशव बुआ की एक चुकी को दबाता हुआ बोलता है

केशव - ः बुआ जिस्म की नहीं मेरी बहना को एक तगड़े लुंड की जरुरत है जो उसकी छूट को छोड़ छोड़ कर उसका पानी निकल सखे अहहहहह

बुआ अभी कुछ बोलती उससे पहले रेखा वापस आ जाती है और इस बात वो झोपडी में अंदर से कुण्डी लगा देती है और सीधा आकर केशव के सामने खड़ी हो जाती है

केशव - क्या हुआ रेखा कर आयी पेशाब

रेखा - हां भैया हो गया

केशव - अरे ये क्या हुआ

इतना बोलते hi केशव अपना हाथ बढ़ा कर सीधा रेखा की छूट के ऊपर रख देता है झा से पेटीकोट कुछ हद्द तक्क भीग गया था

केशव का हाथ इस बार सीधा उसकी बेहेन की छूट पर लगता है

रेखा - अह्ह्ह भैया वो पेशाब करते वक़्त थोड़ा बहुत पेशाब मेरे पाटिकट पर गिर गया इसी लिए ये गीला हो गया

केशव - अरे तो ढंग से बैठ कर मूतना चाहिए न तुझे

केशव अपने हाथ को लगातार उस गीले हिस्से पर घुमा रहा था

बुआ - अरे हो तो गया अब क्या वो तेरे सामने hi बैठ कर म्यूट छोड़ दे बैठने दे बेचारी को

रेखा वापस से आकर बुआ के बगल में बैठ जाती है

केशव फिर से रेखा के पैरो की और जाता है और इस बार खुद hi अपने हाथो से अपनी बेहेन के पेटीकोट को जांघो तक साधा देता है और अपना हाथ सीधा रेखा की जांघो पर रख देता है

रेखा अपने भाई की ललचाई नजरो को देख रही थी तभी केशव कुछ ऐसा करता है की रेखा अपने आप को रोक नहीं पति और अपना सब कुछ एक पल में hi अपने भ्सी के सामने खोल कर रख देती है

असल में केशव ने जो हाथ रेखा के गीले पेटीकोट पर लगाया था वो कुछ हद्द तक गीला हो चूका था

केशव उस हाथ को सूंघता हुआ अपनी ऊँगली को सीधा अपने मुँह में भर कर चूसने लगता है

रेखा ( भैया तो मुझसे भी आगे बढ़ कर खेल रहे है इनको अभी मजा सख्ती हु )

अगले hi पल रेखा अपनी दोनों टैंगो को एक दम से फैला देती है

और अगले hi पल केशव की आँखों के सामने उसकी बेहेन का बिना बालो वाला भोसड़ा एक दम से उसकी आँखों के सामने आ जाता है

केशव इस नजारे को देख कर हक्का बक्का रह जाता है

रेखा मन hi मन हस्ते हुए - क्यों भैया मजा आया हाहा

अगले hi पल रेखा अपने पैरो को दुनारा से बंद कर लेती है

रेखा- क्या हुआ भैय्या खा खो गई

बुआ- क्या हुआ रे केशव

रेखा - लगता है भैया ने बहुत देख लिया है

अब केशव क्या hi बोलता की उसने बहुत नहीं बल्कि अपनी बेहेन की छूट देख ली है

रेखा अपने पेटीकोट को छूट के ऊपर दबती हुई अपना नाडा खोल देती है

और एक बार फिर से अपने पैरो को फिआला देती है इस बार केशव देखता हुआ अपने हाथ को आगे की और बढ़ता है और सीधा अपनी बेहेन की एक जांघ पर सिकंजा कस देता है

रेखा - अह्हह्ह्ह्ह

बुआ- क्या हुआ रेखा

रेखा - बुआ लगता है की पेटीकोट में चिति घुस गयी है

इतना बोलती हुई जैसे hi रेखा खड़ी होकर अपना पेटीकोट झड़ती है उसला पेटीकोट सीधा जमीन पर गिर जाता है और एक hi पल ने वो अपने भाई की नजरो के सामने निचे से नंगी हो जाती है

केशव कभी निचे गिरे पेटीकोट को देखता तो कभी अपनी बेहेन की काली पहली हुई छूट को देखता

रेखा झूल कर पेटीकोट उठाने hi वाली थी की केशव पेटीकोट को उठा कर अपने पीछे रख लेता है रेखा अपने भाई की यह हरकत देखती hi रह जाती है

केशव के चेहरे पर मुस्कान थी मनो वो अपनी बेहेन को पूछ रहा हो की अब क्या करेगी पर केशव नहीं जनता था की उसकी बेहेन बहुत बड़ी रंडियो को भी फ़ैल कर सकती है

रेखा बिना कुछ बोले हस्ते हुए बुआ के बगल में बैठ जाती है और अपने दोनों पैरो से आती पलटी मार कर बैठ जाती है जिसकी वजह से उसकी फटी हुई छूट के लटके हुए होठ एक दम से केशव के सामने आ जाते है

बुआ- क्यों रे रेखा चिति निकली या नहीं

रेखा - बुआ पूरा पेटीकोट छान मारा कहि नहीं मिली

बुआ- भाग गयी होगी

चल अब घर चलते है

केशव - रुको न बुआ देख तो लेने दो कहि चिति मेरी बेहेन के अंदर तो नहीं घुस गयी

बुआ- क्या बकवास कर रहा है रे तू केशव पगला गया है तू जो ऎसी बाटे कर रहा है

रेखा - सच में बुआ भैय्या सच बोल रहे है मुझे भी डर लग रहा है की अगर कहि चिति अंदर घुस गयी होगी तो क्या होगा

बुआ- तुम दोनों भाई बेहेन पगला गए हो

रेखा - बुआ रुको न एक बार देख लेते है

बुआ- पर देखेगा कौन

केशव - मैं देखूंगा बुआ और कौन देखेगा

केशव एक दम से खड़ा होता हुआ रेखा के नादिकक आता है और उसकी आँखों में देखता हुआ उसके पैरो को पकड़ कर खत की दूसरी और खींचता हुआ उन्हें पकड़ कर फैला देता है और अगले hi पल झुक कर अपनी बेहेन की छत की फको को खोल कर उनमे जीभ चलने लगता है

रेखा - आह्ह्ह्हह भैया आराम से

बुआ रेखा को अपनी गॉड में पड़ा देख असमंजस में थी

बुआ- क्या हुआ रेखा

रेखा - बुआ भैया चिति निकल रहे है मेरे अंदर से

बुआ- मतलब कैसे निकल रहा है चिति वो तेरे अंदर से

रेखा - बुआ वो अपनी जीभ अह्ह्ह्हह्हह मेरी छुट्ट्ट्ट में डाल रहे है

रेखा की बाते सुनकर बुआ बदहवाश सी हो जाती है

इधर केशव लगतार अपनी बहन की छूट को चाटता हुआ निचे अपना लुंड मुठिया कर खड़ा कर रहा था

रेखा बुआ की बहो में पड़ी हुई कसमसा रही थी

बुआ- बड़ा हरामी है रे तू तो केशव अपनी hi बेहेन की छूट चूस रहा है

रेखा - भइया बहुत अच्छे है बुआ ऐसा मत बोलो उन्ही

केशव एक दम से खड़ा होता है और अपने पैजामे को पकड़ कर निचे सरकता और अपने खड़े लुंड को रेखा की छूट पर रखता हुआ अंदर की और सरका देता है जो बिना किसी तकलीफ के पूरा अंदर तक्क चला जाता है

रेखा- अह्ह्ह भैया कितना बड़ा और मोटा है आपका

बुआ- अब क्या हुआ रेखा

रेखा - बुआ भइया ने अपनी लुल्ली मेरी बुरर्र में पेल दी

अह्ह्ह्हह्हह और अब आगे पीछे कर रहे है उसे अंदर दाल कर अहह बहुत मजा आ रहा है बुआ

बुआ को यकीन नहीं हो रहा था की केशव उसके hi सामने अपनी बेहेन को छोड़ना शुरू कर चूका था और यहां रेखा भी खूब मजे ले लेकर अपने भाई का लुंड ठुकवा रही थी

बुआ- आखिर छोड़ hi दिया तूने अपनी बेहेन को भी

केशव बिना कुछ बोले लगातार अपनी सईद बढ़ता हुआ रेखा की छूट में hi झाड़ जाता है

रेखा - मजा आ गया भैया आपने तो सच में चुटी निकल दी

बुआ- अरे पगलेट लड़की उसने चिति नहीं निकली बल्कि तुझे छोड़ दिया

केशव - बुआ छोड़ा हो या चिति निकली हो कहे कुछ भी हो पर अब मैं अपनी बेहेन को रोज छोडूंगा

रेखा - अब तो और मजा आएगा भैया

तीनो लोग घर की और निकल जाते है अब तीनो एक दूसरे से पूरी तरह खुल चुके थे

पर अंदर hi अंदर केशव को एक बात खाये जा रही थी जिसके बारे में वो रेखा से पूछने में झिझक रहा था की आखिर ये रेखा की छूट इतनी ढीली क्यों थी आखिर उसकी बेहेन अपनी छूट का इस्तेमाल खा कर रही है आखिर वो कौन है जइसँने छोड़ छोड़ कर रेखा की छूट को इतना फैला दिया था की केशव के लुंड को अंदर जाने में एक पल का समय भी न लगाए

कहि न कहि केशव के दिलो दिमाग के किसी कोने में उस वयक्ति की परछाई बन रही थी जिसे देख कर उसका रोवा रोवा खड़ा हो गया था

क्योंकि वो परछाई किसी और की नहीं बल्कि उसके छोटे भाई की थी जिसके लुंड को वो पहले hi देख चूका था
 
अपडेट -232

इधर दूसरी और जैसे hi हरी की आँख खुलती है उसे उसकी बीवी अपने बाप और ससुर के बिच में सोई हुई दिखाई देती है

यह नजारा देख कर हरी को कुछ समझ नहीं आता क्योंकि उसके ससुर का हाथ अब भी नीलम के नंगे पेट पर था और एक पेअर नीलम के पैरो के ऊपर था

हरी अपनी आँखे माल्टा हुआ उठ खड़ा होता है रात को ज्यादा शराब पीने की वजह से उसके सर में काफी तेज दर्द हो रहा था

हरी- नीलम नीलम

अपने पति को आवाज पर नीलम तुरंत hi उठ जाती है और खुद को अपने बाप और ससुर के बिच में सोया हुआ पाकर उसकी हालत तीते हो जाती है

हरी- तुम व्हा क्या कर रही हो

नीलम- मतलब

हरी- बापू और ससुर जी के बिच में

नीलम उठ खड़ी होती है और अपने पति से चिपकती हुई उसकी छाती से अपना सर लगा देती है

नीलम - वो बापू बहुत दिनों बाद आये थे न तो उन्होंने hi खा की बेटी आज मेरे पास hi सजा बहुत दिन हो गए अपनी बेटी को प्यार किये हुए

हरी- अरे जवान बेटी को ऐसे कौन प्यार करता है अपने पास सुला कर

नीलम- अरे मेरे पति देव बेटी जवाब हो या बुद्धि पतली हो या मोती एक बाप के लिए वो हमेशा बेटी hi रहती है समझे

वैसे आप कल बड़ी जल्दी सो गए थे

हरी- और फिर ये बापू क्यों सोया था तुम्हारे बगल में

नीलम- अरे ससुर जी की भी तो बेटी hi हु में

क्या आप भी न कितने सवाल करते है

हरी के दिलो दिमाग में अब एक बात घर कर चुकी थी की जरूर कुछ गड़बड़ है क्योंकि वो जनता था की उसके बाप ने तो अपनी सगी बेटी का जिस्म नोच खाया तो ये बहु को खा छोड़ने वाला है

नीलम- वैसे एक बात खु

हरी- हां बोलो

नीलम- बहुत मैं कर रहा है मेरा अभी

हरी- क्या मैं कर रहा है तुम्हारा

नीलम- इसी चूसने का

हरी- किसे चूसने का

नीलम अपना हाथ निचे ले जाती हुई अपने पति का लुंड पकड़ लेती है

हरी- अरे अभी तो यही पर सब है

नीलम- अरे वो दोनों बुड्ढे तो रात से hi सू रहे है और अब तक्क नहीं उठे मुझे नहीं लगता की वो 6-7 बजे से पहले नहीं उठने वाले

हरी- अरे नहीं नहीं अभी कुछ गड़बड़ हो गयी तो

हरी अपनी बीवी का हाथ झटक कर दरवाजा खोलता हुआ बहार चला जाता है

नीलम- एक तो सेल के लुंड में जोर नहीं है ऊपर से इतना भाव खता है

इतने में दोनों बुड्ढे उठ कर बैठ जाते है और हसने लगते है

हरिया - अरे मेरी बेटी क्यों गुस्सा हो रही है दामाद जी के उपर

रामलाल- है है बहु रानी क्यों भड़क रही हो इतनी सुबह सुबह

इतना बोलता हुआ रामलाल अपनी बहु का हाथ पकड़ कर उसे दोनों के बिच में बैठा लेता है और अपना एक हाथ अपनी बहु की चुकी पर रखे हुए उसके रसीले होठो को चूसने लगता है

अब तक्क हरिया भी अपने लुंड को मसलता हुआ अपनी बेटी की दूसरी चुकी को पकड़ चुका था

रामलाल- अरे बहु बेटे क्र लुंड में जोर नहीं है तो क्या हुआ तेरा ससुर तो है न दिन रात तुझे छोड़ने के लिये

नीलम- अहह ससुर जी आप है तभी तो रुकी हुई हु घर में नहीं तो कबका अपने बापू के पास वापस चलो गयी होती

रामलाल- घर जाने की क्या बात है तो में खुद तुझे तेरे पिता के घर ले चलूँगा पर तू कभी अपने इस बूढ़े ससुर को छोड़ कर जाने की बात मत करना समझी बहु

नीलम- हहह बहु को छोड़ने के समय तो घोड़े बन जाते हो ससुर जी और वैसे खड़ को घोडा कहते हो

थोड़ी hi देर में हरी भी आ जाता है और सब बैठे बाटे करते है

इधर हरिया भी अपनी बेटी और समधी से वडा ले कर अपने गाओं की और निकल जाता है की वो जल्दी से जल्दी उसके घर आये

रामलाल भी हरिया को वडा करता है की बस थोड़े hi दिनों में वो अपनी बहु के साथ उसके घर आएगा ....
 
अपडेट -233

अगले hi दिन से रवि के घर मजदुर लग जाते है और पहले तो परिवार के लिए एक रहने लायड ईटीओ से कमरा बनते है फिर पुराने घर की तुड़ाई चालू हो जाती है

रोज रात को रवि और कमम्मो खेतो में सोने चले जाते

रात भर कम्मो अपने छोटे भाई को अपनी जवानी का रस पिलाती

इधर दूसरी और केशव को मौका तो नहीं मिल पा रहा था अपनी बुआ या अपनी बेहेन को छोड़ने का पर जब भी मौका लगता वो झट्ट से कभी रेखा की चुकी दबोच लेता तो कभी मौका पाकर पीछे से अपना पूरा पंजा अपनी बेहेन की गद्देदार गांड में घुसा देता

एक रोजज ऐसी hi मल्टी घर के बहार गयी हुई थी बुआ के होने न होने का कोई फर्क hi नहीं पड़ता था

इधर दूसरी और केशव मौके का फायदा उठाते हुए अपनी बेहेन रेखा को अंदर कमरे में पकड़ लेता है और उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को निचोड़ते हुआ अपनी बेहेन के होठ अपने दातो से चबाते हुए उसके मुँह में अपनी जुबान घुसा देता है

रेखा भी पुरे जोश में थी वो अपने दोनों हाथो से केशव की पंत खोल देती है और अपने बड़े भाई का लुंड अपने हाथो में पकड़ कर अपने भाई से अपना मुह्ह चुस्वाति रहती है

केशव को इस काम में बहुत मजा आ रहा था

दूसरी और मल्टी सामान लेकर घर की और बढ़ चुकी थी

इधर केशव रेखा के होठो को चुस्त हुआ उसके नदी को पकड़ कर एक झटके में खोल देता है

एक hi पल में दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के सामने अधनंगे खड़े थे

केशव अपना हाथ आगे बढ़ते हुए अपनी बेहेन की छूट में ऊँगली डालता है

रेखा की कट एक दम गीली और गरम थी

केशव को बर्दास्त नहीं होता और वो अपना मुँह अपनी बेहेन के मुँह से निकलते हुए उसकी आँखों में देखता हुआ उसे घोड़ी बना देता है

रेखा की छूट और गांड खुल कर केशव के सामने आ जाती है

अपने अपने होठो पर अपनी जुबान फेरता हुआ अपना मुँह सीधा अपनी बेहेन की गांड पर लगता हुआ उसमे अपनी जीभ घुसाने लगता है

रेखा - अह्ह्ह भैया अह्ह्ह चुसोऊ और घुसाओ जीभहहह अह्ह्ह मेरी गांड के छेद में

केशव बिना कुछ बोले अपनी 2 उंगलिया रेखा की छूट में घुसा देता है और अपनी बेहेन की गांड का छेद चुस्त हुआ 3 उंगलिया उसको छूट में पेश देता है

रेखा को खूब मजा आ रहा था

रेखा आगे किसी गदराई गाय की तरह खड़ी थी और पीछे से उसका भाई अपने हाथ से उसका फटा हुआ भोसड़ा छोड़ रहा था

केशव जायजा लेना कहता था की उसकी बेहेन की छूट किश हद्द तक्क फ़टी हुई है देखते hi देखते केशव अपना पूरा पंजा अपनी छोटी बेहेन की छूट में घुसा कर अपना मुट्ठा बंद करते हुए उसे अपने हाथ से hi छोड़ना शुरू कर चूका था

इधर दूसरी और मल्टी जैसे hi घर का दरवाजा अंदर की और धकेलती है दरवाजा एक दम से खुल जाता है

घर में अजीब शांति थी पर कहि न कहि कमरे के अधखुले दरवाजे से कुछ दबी हुई आवाजे आ रही थी जोकि मल्टी के कानो तक्क भी पहुंच चुकी थी

मल्टी कमरे की और बढ़ती है उसका दिल जोरो से धड़क रहा था कहि पिछली बार की तरह इस बार भी उसकी वात ना लग जाये

मल्टी जैसे hi दरवाजे से अंदर झक्ति है उसका दिल उसके साइन से बहार आ जाता है

दरवाजे के अंदर का नजारा देख कर मल्टी की सांसे रुक गयी थी उसके हाथ झोला एक दम से छूट जाता है और एक hi पल में केशव और रेखा दोनों का hi ध्यान मल्टी की और जाता है जो दरवाजे पर बूट बनी उन दोनों को hi देख रही थी

कुछ पल के लिए मनो वक़्त तेहेररर सा जाता है केशव का ागड़ा हाथ अब भी उसकी बेहेन की छूट में था और उसकी जीभ आधी उसकी बेहेन की गांड के छेद में घुसी हुई थी

अच्चानक से केशव को होश आता है और वो अपने गीले हाथ को रेखा की छूट से निकलते हुए तुरंत बहार चला जाता है

रेखा - भाभी आप थोड़ा सा और लेट आती तो शायद केशव भैय्या मेरी गांड मार रहे होते

रेखा झुक्क कर अपना पेटीकोट उठती हुई उसे फिर से बांध लेती है

जैसे hi रेखा दरवाजे पर पहुचती है मल्टी एक जोरदार छठा रेखा के गलो पर जड़ देती है

एक hi पल में रेखा का दिमाग घूम जाता है

रेखा - साली मादरचोद मुझे मरती है ृक्क बताती हु तुझे

इतना बोलना था की एक जबरदस्त कहते के साथ रेखा अपनी भाभी को गिरा देती है और अगले hi पल उसपर अपनी चप्प्पल से दे डीएनए दान बजाने लगती है

हल्ला दुल्ला सुन्न कर केशव भी आ जाता है

केशव देख रहा था और उसकी नजरो के hi सामने उसको बीवी को उसकी बेहेन चप्पलो से मार रही थी

मल्टी अपने पति को नजरो में देख रही थी पर उसे खुद के लिए कोई रेहम न दिखा और वो मायूस होकर अपनी नन्द से चप्पल की मार कहती रही ......
 
अपडेट -234

मल्टी अंदर hi अंदर उस आएग में जल रही थी जो सब कुछ जला कर खाक कर देना कहती थी

पर अब उस बेचारी के बस में था hi क्या

उसकी ननद ने उसके पति पर भी अपना जादू चला दिया और उसे भी अब मल्टी से कोई हमदर्दी नहीं रह गयी थी

शाम को रवि और कम्मो अपना खनन बांध कर खेतो की और निकल गए सोने के लिए

इधर मल्टी सबको खाना खिलाती है रेखा उसे देख देख कर हस्स रही थी और जब जब दोनों भाई बेहेन की नजरे मिलती तो दोनों hi एक दूसरे को खा जाने वाली नजरो से देखते

कुल मिला जुला कर अब केशव के अंदर अपनी बीवी का कोई भयी नहीं था अब वो भी अपनी बेहेन के साथ खुल कर अपने अरमान पुरे करना छठा था

सबके खाना खाने के बाद रेखा बिस्तर लगा देती है और एक किनारे बुआ फिर रेखा और फिर केशव और अंततः में मल्टी लेट जाते है

काफी देर तक्क लेते रहने के बाद भी केशव मल्टी की और नहीं देखता और अपनी गर्दन अपनी बेहेन की और hi घुमाये रहता है

आखिर मल्टी बीवी थी उसकी उससे भी सब्बरर नहीं होता और वो उसकी छाती की और हवथ दाल कर सहलाती हुई अपने हाथ को सीधा अपने पति के लुंड पर ले जाती है झा हाथ पहुंचते hi उसके दिल की धड़कने जोरर पकड़ लेती है

क्योंकि उसके पति का पायजामें पहले hi निचे था और उस पर पहले से hi एक हाथ चल रहा था जो किसी और का नहीं बल्कि रेखा का hi था

केशव तुरंत मल्टी के हाथ को पकड़ कर झटक देता है और अपनी बेहेन की और खिसकता हुआ अपनी बीवी के सामने hi अपनों बेहेन को किश करता हुआ अपने ऊपर पड़ी चादर भी हटा देता है ताकि उसकी बीवी सब कुछ साफ़ साफ़ देख पाए

मल्टी केशव की यह हरकत देख कर समझ गयी थी की उसकी रांड नन्द ने उसके पति को भी फसाए लिया हवस के इस नंगे नाच में

रेखा भी खा काम थी वो भी अपने ब्लाउज का एक एक बोटों खोल देती है और जैसे hi केशव के सामने उसकी बेहेन की दूधिया चूचिया नंगी होती है वो लपक कर उसे चूसना शुरू कर देता है

रेखा भी मौके का फायदा उठती हुई अपने हवथ को अपने भाई के लुंड पर फेरती हुई उठ कर बैठ जाती है और अपनी भाभी की आँखों में देख कर मुस्कुराती हुई अपने भाई का पायजामा खींच कर उसे नंगा कर देती है

केशव बिना कुछ बोले अपनी कमर को ऊपर मि और उठा देता है ताकि उसकी बेहेन को कोई दिकत न हो अपने भाई को निचे से नंगा करने में

रेखा अपने हाथ पर थूकती हुई अपने भाई का लुंड मुठियाना शुरू कर देती है

इधर केशव तड़पता हुआ अपनी बेहेन का रान्दीपना देख कर हैरान था की उसकी बेहेन उसकी दीदी के hi सामने उसका लुंड मुठिया रही है

इधर मल्टी देख देख कर अनादर hi अंदर घुटने लगी थी

उसके अंदर हिम्मत तो नहीं थी पर वो देखना कहती थी की उसका पति किश हद्द तक्क जा सकता है अपनी खुद की बेहेन के साथ

रेखा अपनी आँखे दिखती हुई अपनी भाभी को आँख मरती हुई गप्प से अपने भाई का लुंड अपने गरम मुँह में भर लेती है और अपनी जीभ को अपने भाई के टोपे पर घूमती हुई उसके लुंड को चूसना शुरू कर देती है

केशव मनो जन्नत में था

केशव - अह्ह्ह रेखा खा से सिखाए तुणी ये सबब्ब अह्ह्ह्हह

असल में केशव को आज तक ऐसी लुंड चूसै नहीं मिली थी जो उसकी बेहेन कर रही थी

केशव का हाथ खुद बा खुद hi अपनी बेहेन के सर पर चला जाता है और वो अपनी लाड़ली बेहेन के बालो को पकड़ते हुए उसका मुखछोडन शुरू कर देता है

मल्टी अपनी आँखे फाडे ये नजारा देख रही थी कैसे उसका पति अपनी hi बेहेन के गरम मुँह को छोड़ रहा है

अंतत में केशव रेखा के मुँह में hi अपना पानी गिरा देता है और रेखा भो एक अच्छी बेहेन की तरह सारा माल चाट कर जाती है और दोनों भाई बेहेन एक दूसरे से वैसे hi चिपक कर सो जाती है

और मल्टी अपना लटका हुआ मुँह लेकर अपनी जिंदगी और खुद को कोसने लगती है ...
 
अपडेट -235

दूसरे दिन सुबह मल्टी तो उठ जाती है पर इधर रेखा और केशव अब खुल कर सबको अपने इस नए रिश्ते के बारे में बता देना कहते थे

सूरज सर पर साध चूका था पर रेखा केशव से अलग होने का नाम नहीं ले रही थी

इधर थोड़ी hi देर में रवि भी घर आ जाता है कम्मो को लेकर और अब उसे दुबारा से नहा धो कर खेतो की और जाना था

रवि- भाभी रेखा दीदी खा है

मल्टी बिना रवि की और देखे हुए hi जवाब देती है

मल्टी - और खा होगी अबदार जलर देख कैसे तेरी दीदी अब पुरे रंडी पाने पर उतर आयी है

रवि को मल्टी की बात थोड़ी सी अटपटी लगती है

रवि-( तेरी माँ तो मैं बाद में छोडूंगा)

रवि जैसे hi कमरे के दरवाजे को अंदर की और धकेलता है उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है

अंदर रेखा ने केशव की छाती पर सर रखा हुआ था और केशव बड़े hi प्यार से अपनी बेहेन के बालो को सेहला रहा था

इतना hi नहीं रेखा का एक हाथ अब तक केशव के लुंड को सहलाना शुरू कर चूका था

अच्चानक से केशव की आँख रवि से मिलती है और अपनी स्थिति का अंदाजा होते hi वो तुरंत उठ कर बैठ जाता है और अपने नंगे लुंड पर दूसरी और पड़ी चादर दाल लेता है

रेखा ,- अरे रवि तू कब आया

रवि- दीदी आया तो अभी हु और अभी hi देखा भी है

रेखा उठ कर रवि का हाथ पकड़ती हुई बाजार ले जाती है

रवि- क्यों दीदी आखिर छुड़वा hi लिया न आपने भइया से

रेखा - अरे पगलू तेरे लिए hi तो सब कर रही हु मैं

रवि- अच्छा अभी मेरे लिए भइया ला लुंड सेहला रही थी तुम

दोनों भाई बेहेन बाटे करने में लगे रहते है और उन्हें भनक तक नहीं थी की उनकी बातो को कोई तीसरा भी सुन्नन रहा है जो और कोई नहीं जानकी बुआ hi थी

रेखा - अरे अब जब एक बार हो गया तो बार बार तो होगा hi न

रवि - तभी मैं बोलू की आज कल तुम्हारी छूट की खुजली कौन मिटा रहा है

रेखा - अच्छा मेरा दिख रहा है तुझे की मैं केशव से छुड़वा रही हु और तू जो रात रात भर अपनी दीदी कम्मो की छूट और गांड में अपना लुंड डेल पड़ा रहता है वो उसका कुछ नहीं

रेखा की बात सुन्न कर जानकी बुआ का मुँह खुला का खुला रह जाता है

वो सोच भी नहीं सकती थी की उसके भाई के बच्चे आपस में hi यु गुल खिला रहे है

पर इस वक़्त बुआ के चेहरे पर एक जटिल मुस्कान भी शायद वो समझ चुकी थी की अब उसकी बुर्र को ज्यादा दिन भूखे नहीं रहना पड़ेगा

रेखा - अच्छा चल ठीक है जो हुआ वो हुआ अब मेरी बात सुन्न

जब भैय्या सबके सामने मुझे चुने से नहीं कर्रा रहे तो तू मल्टी भाभी से दुरी क्यों बना रहा है

रवि- मतलब दीदी

रेखा - मतलब ये की मैं भैय्या को पूरी तरह उकसा रही हु ताकि उनके अंदर किसी का भी डर न रहे

और तू तो वैसे भी उनके सामने hi उनकी बीवी को लुंड चूसा चूका है तो अब क्या डरता है मेरे भाई

रवि- अच्छा तो मतलब की अब भैय्या के सामने ज्यादा से ज्यादा खुलना है हमे

रेखा - अब जाकर समझा तू मेरी बात मेरे भाई और हां एक बात और अपनी उस चुड़काड भाभी को भी पता ले वो भी अंदर hi अंदर घुटने लगी है

रवि- वो क्यों दीदी

रेखा - अरे 2 दिन से रोज उसके सामने hi उसके पति का लुंड चूस रही हु और उससे चिपक कर सोती हु

और तो और 2 दिन पहले तो मैंने भैय्या के hi सामने उसे मारा भी था

रवि- अरे दीदी आप तो सच में चेप्टर निकली

पर आपने भैय्या को मनाया कैसे

रेखा -. अरे मेरे यारे भाई ये जिस्म hi ऐसा है की जो एक बार देख ले बिना लुंड ठोके न रह पाए कहे वो बड़ा भाई हो या छोटा

रवि- दीदी बात तो आपकी सही है पर

रेखा - अरे पर मगर कुछ नहीं मेरे हिसाब से चल मौज कटेगा मौज समझा

रवि- तो ठीक है दीदी अब वही होगा जो तुम कहो

रेखा - ये हुई ना बात अब चल तू जा और अपनी भाभी को थोड़ा पता पता कर कमरे में लेकर आ मैं जा रही हु अपने भैय्या का लुंड चूसने

रवि दूसरी और जाने लगता है

और रेखा कमरे में जाकर सरे कपडे उतार कर अपने भाई से चिपक जाती है

केशव - अरे रेखा तू नंगी क्यों हो गयी कोई आ गया तो

रेखा - आने दो न भइया किसी को भी हम दोनों भाई बेहेन कुछ गलत थोड़े hi कर रहे है

इतना बोलती हुई रेखा केशव के लुंड पर पड़ी चादर को खींच देती है और अपने भाई के झड़े लुंड को पकड़ कर सहलाती हुई उस पर थूक देती है

अब केशव को और भी ज्यादा मजा आ रहा था एक तो रेखा के हाथो की मजबूत पकड़ और दूसरी और अपनी hi बेहेन के गरम थूक का अहसास केशव को पागल किये जा रहा था

रेखा - भइया क्या अपने भाई के लुंड से खेलना गलत बात है

केशव - नहीं रेखा तुझसे किसने खा हर भाई का फरज़ज़ होता है की वो अपनी बेहेन को अपने लुंड से खेलने की इजाजत दे

रेखा - अच्छा भैय्या लेट जाओ न मुझे बहुत मन कर रहा है आपके गरम लुंड को मुँह में भर का चूसने का

केशव अपनी बेहेन की बात सुनकर झट्ट से लेत जाता है और रेखा अपने मुँह में अपने भाई के लुंड को भर्ती हुई चूसने लगती है

केशव को इस पल बहुत मजा आ रहा था उसका हाथ खुद बा खुद hi रेखा की गांड की तरफ चला जाता है और वो अपनी बेहेन की फटी हुई क्यूट को कुरेदने लगता है

रेखा एक पल के लिए अपने मुँह से लुंड बहार निकल कर कुछ बोलती है और अगले hi पल गप्प से पूरा का पूरा लुंड अपने गले तक्क उतर लेती है

रेखा - अह्ह्ह भैय्या क्या कर रहे हो

केशव - मेरा भी तो हक़्क़ है न अपनी बेहेन की बुरर्र का पानी पिने का

इतना सुनते hi रेखा खुद hi अपनी गांड को खिसकती हुई अपने भाई की छाती के ऊपर रख देती है

केशव अपनी बेहेन की काली छूट की फटी हुई फैंको से टपक रहे रॉस को देख कर पागल हो जाता है और अपना मुँह अपनी बेहेन की छूट पर भिड़ा कर उसे चूसता हुआ अपनी जीभ घुसा देता है

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के अंगो को चूस चूस कर पानी निकल रहे थे

इधर दूसरी और रवि अपनी भाभी के पास पहुँचता है

मल्टी - क्या हुआ मिली नहीं तुझे तेरी दीदी

रवि- भाभी दीदी तो मिल गयी पर वो मुझसे अब पहले जैसे बात नहीं कर रही

मल्टी - अरे बात क्यों करेगी नया नया लुंड जो मिला है उस छिनाल को

अभी क्या कर रही थी वो

रवि- भाभी मैंने जो देखा उस पर मुझे खुद यकीन नहीं हुआ आप hi चल कर देख लो दीदी और भैया क्या कर रहे है

मल्टी काम को बिच में hi रोक कर कमरे की और जाने लगती है

कमरे के अंदर का नजारा देख कर उसके नथुने एक बार फिर से फूलने लगते है सामने केशव रेखा की छूट और गांड चूस चाट रहा था और दूसरी और रेखा केशव के लुंड को पूरी जड़ तक्क चूस रही थी

रवि भी मल्टी के पीछे पीछे दरवाजे पर पहुंच जाता है और पीछे से hi मल्टी के कानो में बोलता है

रवि- क्या हुआ भाभी

रवि की आवाज सुनकर मल्टी एक कदम पीछे की और हटती है और जैसे hi वो पीछे होती है उसके देवर का खड़ा लुंड सीधा उसकी गांड की ड्राअर में फस्स जाता है

लुंड का अहसास होते hi मल्टी का अंग्ग अंग्ग सिहर उठता है

आखिर छूट तो उसकी भी प्यासी थी कई दिनों से

पीछे से रवि पूरी तरह से अपनी भाभी से चिपक जाता है और उसकी इस हरकत से उसके लुंड का बचा कीचा हिस्सा भी सीधा मल्टी की गांड के छेद तक्क जा पहुँचता है

अच्चानक से केशव की नजर दरवाजे पर पड़ती है वो हड़बड़ाता हिअ उठने की कोशिश करता है

रेखा - ओह्हो भैय्या अब क्या हुआ कितना मजा आ रहा है चूसने में आपका लुंड

रेखा दरवाजे की और देखती है

रेखा - भैय्या अब जो है सो है और इसमें डरने की क्या बात है

रेखा दुबारा से अपना मुँह अपने भाई ले लुंड पर झुकाती हुई उसे मुँह में भर लेती है

रवि अपने भाई के hi समें उसकी पत्नी से चिपका हुआ अपने एक हाथ को उसकी कमर पर चलता हुआ आगे की और लेकर मल्टी की पेट के चर्बीदार हिस्से को कस कर पकड़ लेता है

मल्टी - अह्ह्ह

रवि- देखो न भाभी दीदी कैसे भैय्या का लुंड चूस रही है

इस वक़्त केशव की भी नजरे अपनी बीवी के hi ऊपर थी जो बड़े hi मजे से अपने देवर से अपना चर्बीदार पेट मसलवा रही थी

रवि मल्टी के पेट को मसलता हुआ उसकी गर्दन को चूमने लगता है

रवि की इस हरकत से मनो केशव के अंदर एक चिंगारी सी भड़क जाती है वो बिना देर किये अपने दोनों हाथो से एक साथ अपनी बेहेन की दोनों गांड पर चटक से मरता हुआ उसकी गांड को फैलता हुआ अपना मुँह अंदर घुसा देता है

यह नजारा देख कर एक बारफिरर से उसका दिल टूट जाता है

अचानक से उसे याद आता है की अब भी उसकी गांड के बीचो बिच एक मोटा तजा लुंड फसा हुआ है जिसे वो रेखा के खिलाफ इस लड़ाई में एक अहम् हतियार बना सकती है और साथ hi साथ अपनी अधूरी प्यास भी बुझाए सकती है

एक तीर से दो दो निशाने मल्टी अपने चेरे पर एक नुक्सान के साथ अपने पति को घूरे जा रही थी

अच्चानक से केशव अपनी फूलती सांसो को संभालते हुए अपना मुँह अपनी बेहेन की गांड से बहार निकलता है और उसी समय उसकी आँखे मल्टी से टकराती है

अपनी बीवी के चेरे पर आयी इस मुस्कान का मतलब नहीं समझ पा रहा था

क्योंकि केशव जनता था की जब से वो अपनी बेहेन के करीब आया है तब से hi उसकी बीवी उससे दूर होती चला गयी है

मल्टी अपने पति को आँखों में देखती हुई रवि के हाथ को अपने पेट के ऊपर घूमती हुई उसे और दबाने लगती है

इस घर में बुआ के आलावा हर कोई जनता था की केशव भले hi कितना भी छोड़ ले पर असली प्यास तो रवि के पसस जाने से hi बुझेगी ....
 
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