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अपडेट-29
रवि और रेखा की पिछली रात बहुत मजेदार गुजरी थी
दोनों दुनिया से बेखबर होकर एक दूसरे से लिपटे हुए सो रहे थे
सुबह के 8 बज चुके थे
रेखा की आंख खुल जाती है उसे सबसे पहली चीज़ रवि का विशाल लुंड हवा में सीधा तना हुआ दीखता है
हिसे देख कर रेखा के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और वो एक बार रवि की और देखती है फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर लुंड को अपने हस्थो में दबोच लेती है .
आज दोनों भाई बेहेन कुछ ज्यादा hi देर तक सो गए थे .
रेखा देर न करते हुए रवि का लुंड 2-3 बार सहलाती है और उठ कर बटिह जाती है
रेखा के लुंड सहलाने से रवि के लुंड के टोपे पर 1-2 बून्द पानी बहार आजाता है जिसे देख कर रेखा की आँखों में चमक आ जाती है और वो आगे बढ़ कर अपनी जीभ से अपने छोटे भाई का सूपड़ा चाट लेती है
1-2 बार रवि के लुंड पर जीभ फेरने के बाद रेखा उठ जाती है और अपने लपड़े यह लेती हुई और जल्दी hi रवि को भी उठा देती है
जब रवि की आंख खुलती है तो उसे अहसास होता है की उसकी दीदी की नजर उसके लुंड पर hi है जिसे वो घूरे जा रहु है
रवि जल्दी से होनी धोती उठा कर अपना लुंड पर दाल देता हाउ
पर वो पतली सी धोती रवि का लुंड नहीं छुपा प् रही थी और अब रवि की धोती में एक विशाल तम्बू बन गया था
जिसे देख कर रेखा हल्का हल्का मुस्कुरा रही थी
रेखा- चल अब उठ जा कितना सोयेगा
तुझे भी अब मेरी तरह नींद आने लगी है क्या
रवि रेखा की बात सुनकर जल्दी से उठ जाता है
रेखा - चल जल्दी चल आज बहुत लेत हो गया है
और मुझे बहुत ज़ोर से हगवास लगी है
कोई इधर न आजाये इससे ोेहले hi करलेती हु
रवि- ठीक ह दीदी चलो जल्दी
और दोनों भाई बेहेन घर से बहार निकल जाते है
रवि के हाथ में एक लोटा था जिसमे उसने अपनी दीदी की गांड धोने के लिए पानी लिया हुआ था
रेखा आगे थी और रवि उसकी मटकती हुई गांड देख कर अपनी दीदी के ोीचे ोीचे चल रहा था
अच्चानक रेखा थोड़ा लड़खड़ाती है और आगे की और गिरते हुए एक पेड़ पर अपने दोनों हाथ टिका देती है
रवि तेजी से आगे बढ़ता है और अपनी दीदी की कमर में हाथ दाल कर उसे संभालता है
. रवि - क्या हुआ दीदी
रेखा- पता नहीं भाई कैसे गुर गयी म
पर तूने मुझे संभाल लिया कितना अच्छा ह मेरा भाई
रवि रेखा के पीछे पूरी तरह से चिपका हुआ था और उसका लुंड सीधा रेखा की गांड ओर दस्तक दे रहा था
जिसे रेखा साफ़ महसूस कर सकती थी
रवि- दीदी आपको चोट तो नहीं लगी न
रेखा अब सीधा होती है और रवि से अलग हो जाती है और अपने दोनों हाथ रवि के चेहरे की तरफ करके उसे अपनी चोट दिखती है
रेखा के हाथो पर हुआ तो कुछ नहीं था बस. अच्चानक पेड़ पर लगने से वो थोड़ा लाल हो गए थे रेखा जिसका पूरा फायदा उठाने में लगी हुई थी
रेखा- देख भाई तेरी दीदी को चोट लग गयी देख
रवि रेखा के हाथो दो देखते hi पकड़ लेता है और ुनलर फुक मरने लगता है
रवि- दीदी आप कैसे चलती हो जो होने आपको संभल नहीं पायी
रेखा- तू है न मुझे सँभालने के लिए
रवि- दीदी मैं तो हु hi पर आप भी अपना ध्यान रखा करो
रेखा- नहीं भाई अब तो तू hi अपनी दीदी को हमेशा संभालेगा
बोल संभालेगा न अपनी दीदी को जिंदगी भर .
रवि- है दीदी मैं आपको जिंदगी भर सम्भालूंगा
पहले जल्दी चल के संडास करलो कोई आ गया तो क्या होगा
रेखा- कितनी फ़िक्र है भाई तुझे अपनी दीदी की
ये बोलकर रेखा रवि को अपने गले लग्स लेती है
और अब दोनों भाई बेहेन अलग होकर आगे बढ़ने लगते है
रेखा अपनी जगह पर जाकर खड़ी हो जाती है और उसके थोड़ा सा hi पीछे रवि भी खड़ा था
रेखा एक नजर रवि पर डालती है और अपना पेटीकोट उठा कर अपनी गांड तक चढ़ा लेती है और अपनी दोनों गांड को फैलते हुए अपने छोटे भाई के सामने अपनी गांड का सुराख़ खोल देती है
जिसे देख कर रवि सकपका जाता है और अपने आप hi उसका हाथ उसके लुंड पर चला जाता है
रेखा भी मादरजात रवि को उकसाने में कोई कमी नहीं छोड़ना छाती थी
आज वो अपनी गांड से हगवास काम और पाद ज्यादा निकल रही थी जिसकी आवाज सुनकर रवि का लुंड फटने को उतारू हो गया था
रवि लगातार अपनी दीदी की गांड को देख रहा था
अच्चानक से रेखा की छूट से एक मोती धार बहने लगती है और उसके साथ hi उसकी गांड से भी मोती मोती टुकड़ो में हगवास बहार आने लगती है
रवि की आँखे बिलकुल लाल सुर्ख हो गयी थी उसका मन कर रहा था की अभी जाकर अपनी दीदी को दबोच ले
पर कहि न कहि उसके मन में अब भी रेखा के प्रति एक दीदी वाली इज़्ज़त थी
रवि शांति से बैठा बैठा अपना लुंड मसले जा रहा था
और इधर रेखा अपने गांड से लगातार हज जा रही थी
रवि एक नजर रेखा की गांड से निकल रही हगवास ओर सालता है और अपने मन में सोचता है
रवि- (दीदी का पिछवाड़ा जितना बड़ा है दीदी उतना hi ज्यादा हग रही है)
रेखा एक नजर पीछे मुद कर रवि को देखती है उसकी नजरे अभी भी रेखा की गांड पर तिकी हुई थी और वो अपनी दीदी की गांड के छोटे से छेद से निकल रही मोती मोती हगवास को देख कर ोागल हो रहा था
रेखा- रवि तेरा हो गया क्या
रवि रेखा की आवाज सुनकर घबरा जाता है और जल्दी जल्दी अपनी गांड साफ़ करता है
रवि- ः दीदी हो गया
रुको म पानी लेकर आता हु
रवि अपनी गांड धो कर रेखा के पास लोटा लेकर पहुँचता है
रवि रेखा के आगे लोटा रख देता है और अपनी दीदी के बगल में खड़ा हो जाता है
रवि- लो दीदी जल्दी से धो लो
रेखा - कैसे धो भाई मेरे हाथ में लगी हुई है देख न
और ये बोलकर रेखा बैठे बैठे hi दुबारा से अपने हाथ रवि को दिखने लगती है
रवि- दीदी फिर अब क्या करोगी ऐसे hi रहोगी क्या
रवि रेखा की गांड पर एक नजर दाल कर बोलता है
रेखा- छी कितना गन्दा है तू
तेरी दीदी के हाथो पर चोट लगी है और तू उसके साथ जस वक़्त मजाक कर रहा है
रवि- तो क्या कृ दीदी बताओ न
रेखा- मैं जो बताउंगी वो करेगा तू
रवि- है दीदी आप बताओ तो पहले
रेखा- मतलब मैं तुझे जो कुछ भी बोलूंगी तू वो सब करेगा .
रवि- है दीदी मैं सब करबग अपनी दीदी की खातिर
रेखा- देख आज मेरे हाथ में चोट लगी है तो आज तुझे hi होनी दीदी की गांड पर लगी हगवास साफ़ करनी पड़ेगी बोल करेगा
रेखा की बात सुनकर रवि के चेहरे पर एक मुस्कान आ जस्ती है
जिसे रेखा भी भाप जाती है
रवि- मेरी दीदी के हाथो ने चोट लगी है
मैं अपनी दीदी के सरे काम करूंगा जब तक आपका हस्त सही नहीं होता दीदी
रेखा- तो खड़ा क्यों है धो न मेरी गांड
रवि बिना कुछ बोले रेखा के ोीचे आता है और लोटे में से पानी अपने हाथ पर लेकर सीधा रेखा की छूट रख देता है
रवि कोई भी रिस्क नहीं लेना कष्ट था क्योंकि रात में उसका काम अच्छे से चल रहा था वो ऐसा बिलकुल नहीं दिखाना कहता था की वो अपनी दीदी को जानबूझ कर छू रहा है
रेखा की छूट को पानी से धोने के बाद वो अपना हाथ रेखा की गांड की और बढ़ता है
अपनी एक ऊँगली से अच्छे से घुमा घुमा कर रेखा की गांड पर लगी टट्टी साफ़ करता है
रवि बड़े hi अच्छे से अपनी ऊँगली को रेखा की गांड पर गोल गोल घुमा रहा था और अपने नाख़ून से हल्का सा कुरेद देता है
इस हमले से रेखा सिहर जाती है और अपना हाथ आगे की और ले जाकर जमीन पर टिका देती है और अपनी गांड और पीछे की और निकल देती है
अब रेखा की गांड का सुराख़ और भी ज्यादा खुल कर बहार आ गया था जिसे रवि आँखे फाड़ फाड़ कर देखे जा रहा था
रेखा को अच्चानक मस्ती सूझती है
रेखा- क्या देख रहा है ऐसे घर घर कर जल्दी से साफ़ करना मेरी गांड देख अभी भी मेरी हगवास लगी है उधर
अब रेखा का गांड का सुराख़ और भी ज्यादा खुल कर बहार की और आ गया था
जब रवि दुबारा से अपना हाथ उसकी गांड पर लगता है तो उसकी ऊँगली अपने आप hi थोड़ी सी अंदर की और चली जाती है
जिससे रेखा अंदर hi अंदर मचल जाती है
रवि का मन तो बहुत कर रहा था की अभी अपनी पूरी ऊँगली रेखा की गांड में घुसा दे पर वो भी कोई जल्दबाज़ी नहीं करना कहता था और अपनी दीदी के सामने शर्मिंदा नहीं होना कहता था
इधर रेखा तो खुद hi कहती थी की रवि अपनी ऊँगली उसकी गांड में पेल दे
रवि अपनी ऊँगली को थोड़ा सा अंदर पुश करता है और उसका नाख़ून वाला हिस्सा रेखा की गांड में घुस जाता है
रेखा आगे की तरफ कदख रही थी और होने भाई द्वारा अपनी गांड में ऊँगली डलवाने का पूरा मजा ले रही थी
रेखा की आँखे हवस से ौरी तरह लाल हो चुकी थी
रवि पिछले 10 मिंट से अपनी दीदी की गांड धो रहा था
रवि थोड़ी hi देर में खड़ा हो जाता है और रेखा की आँखों के सामने अब उसके भाई का कला कुंड धोरी में छुपा हुआ साफ़ नजर आ रहा था
रवि- चलो दीदी धो दिया मेने आपका पिछवाड़ा
रेखा- देख ले एक बार अच्छे से साफ़ किया है न तूने मेरी हगवास को
रवि एक नजर रेखा की गांड के होल ओर मरता है
और अपनी ऊँगली दुबारा से उसकी गांड और रख देता है
और 1-2 बार अपनी ऊँगली अच्छे से रेखा की गांड पर घूमता है
और अपना हाथ वह से हटा लेता है
रवि - है दीदी ोुरा साफ़ करदिया है
रेखा- कितना अच्छा है भाई तू
तूने अपनी दीदी की कितनी मैडम की है आज तुझे नहीं पता
रवि- दीदी मैं तो हमेशा hi आपकी मदद करता रहूंगा
पर अभी घर में चलो कोई आपको हगते हुए देखेगा तो क्या होगा
रेखा- मुझे हगते हुए सिर्फ मेरा भाई देखेगा और कोई नहीं समझा
रवि रेखा की ये डबल मीनिंग बात को समझ नहीं पता और रेखा के साथ चलता हुआ घर पहुंच जाता है
अभी रवि आंगन में यदि खत ओर बैठा hi था की रेखा उसके पास आती है
रवि - क्या हुआ दीदी
रेखा रवि के बिलकुल सामने खड़ी थी
रेखा- भाई तू अपनी दीदी की एक और मदद करेगा क्या
रवि- दीदी इसमें भी लुछ्ने की बात है क्या बताओ न क्या मदद कृ म होनी दीदी की
रेखा इतना सुनते hi रवि की और अपनी गांड घुमा देती है और होना पेटीकोट ोाकद कर अपनी कमर तक उठा लेती है
अब रवि की आँखे फटी की फटी रह जाती है उसके मुँह के बिकुल सामने उसकी दीदी की चौड़ी गांड थी वो भी बिलकुल नंगी
रेखा की छूट और गांड का छेद रवि को साफ़ नजर आ रहा था
रेखा- भाई देख न मुझे मेरी गांड में कुछ सुबह रहा है
मेरे हाथ में तो चोट लगी है तू hi देख ले न भाई क्या है जो तेरी दीदी को तकलीफ दे रहा है
रवि को तो मनो कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था वो आखे फाडे अपनी दीदी की गांड को घूरता जा रहा था
रेखा- देख न भाई मेरे पैरो में दर्द हो रहा है
रवि- क्या क्या दीदी एक बार और बोलो तो
रेखा- तेरा ध्यान खा है इधर तेरी दीदी तकलीफ म है और तेरा ध्यान पता नहीं खा है
रवि- दीदी मेने सुना नहीं था आवे क्या बोलै
रेखा- देख न मेरी गांड में कुछ सुबह रहा हसि जिससे तेरी दीदी को बहुत तकलीफ हो रही है
इतना बोलकर रेखा होनी गांड को और पीछे की तरफ धकेल देती है
रवि की तो मनो लाटरी लग गयी थी अभी थोड़ी देर पहले hi उसने होनी दीदी की गांड को रगड़ रगड़ कर धोया था
और अब दुबारा से उसकी दीदी की गांड उसके सामने थी
रवि- है दीदी कुछ तो लग रहा है आपके पिसवाड़े में
रेखा- तो हटा न उसे
रवि- दीदी ये कोई छोटा कटा है और थोड़ा सा आपके अंदर घुस गया है
रेखा- अंदर मतलब खा भाई
रवि- दीदी ये तो आपकी गांड में घुसा हुआ है
रेखा- जल्दी निकल इसे कहि कोई जेह्रीला कांटा न हो मुझे दर लग रहा है
असल में रेखा की गांड में कुछ नहीं घुस रहा था
रवि ोेहले hi अपनी दीदी की गांड को रगड़ रगड़ के चिकना कर चूका था
बस अब तो दोनों भाई बेहेन एक दूसरे का चुटिया काट रहे थे
रवि- दीदी रुको म निकलता हु
रवि उतना बोलकर अपनी नाक आगे बढ़ता है और रेखा की गांड से टोहड़ी दूर रोक कर अच्छे से अपनी दीदी की गांड से आ रही मादक महक को सूंघता है
रेखा को अपनी गांड पर रवि की गरम गरम सांसे महसूस हो रही थी जिससे वो घोड़ी बने बने hi काँप रही थी और अब उसके मन में यही चल रहस्य था की रवि अब आगे क्या करेगा
रवि 2 मिंट तक रेखा की गांड को अच्छे से सूंघता है
फिर अपनी ऊँगली को अपनी दीदी की गांड पर लगा कर हल्का हल्का सहलाने लगता है
जैसे वो कोई कांटा धुंध रहा हो
रेखा- भाई निकला क्या
रवि- रुको दीदी रुको ये बहुत बारीक़ है टाइम लगेगा थोड़ा
रेखा- जल्दी निकल न
रवि- रुको दीदी निकलता हु
और रवि होनी ऊँगली का दबाव टघोड़ा सा रेखा की गांड पर बढ़ता है
उसकी ऊँगली अंदर घुसने hi वाली थी की अचानक वो रुक जाता हसि और अपना हाथ हटा लेता है
रवि की इस हरकत से रेखा किसी जंगली बिल्ली की तरह रवि को गुस्से में देखती है
उसकी आँखों से साफ़ नजर आ रहा था की वो अपने भाई से पूछ रही हसि की तूने ऊँगली क्यों हटाई
पर रवि के मन में कुछ और hi था
रेखा- निकल गया क्या
रवि- दीदी कांटा बहुत बारीक़ है हाथ से नहीं निकलेगा
रेखा- तो फिर कैसे निकलेगा भाई
रवि- दीदी आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा
रेखा- तेरा दिमाग खराब है तू क्या कहता है की डॉक्टर तेरी दीदी को नंगा करके उसकी बुर्र और गांड देखे
अब रेखा सरे हमले खुल कर कर रही थी
अब उसे जल्दी से जल्दी रवि से छोड़ना था
रवि- दीदी डॉक्टर के पास नहीं जाओगी तो कैसे निकलू
रेखा- तू कुछ ुवे लगा न
मैं जैसे तेरे सामने नंगी हो जाती हु वैसे हर किसी के सामने नंगी नहीं हो सकती भाई मैं
अपनी दीदी की मज़बूरी समझ मेरे भाई
रवि- दीदी एक रास्ता है पर आप बाद में मुझे कुछ मत बोलना
रेखा- तू कुछ भी कर पर जल्दी से कांटा निकल
रवि ठीक है रुको निकलता हु
रवि इतना बोलकर होना मुँह आगे बढ़ा कर सीधा रेखा की गांड के छेद पर रख देता है
और अपने होठो से अपनी दीदी के गांड के सुराख़ को चुम लेता है
रेखा को उम्मीद नहीं थी की उसकी बातो का रवि पर इतना जल्दी असर होगा
वो इस हमले से बैचैन हो जाती है
और उसका शरीर हल्का सा झटका लेता है
रवि अपनी धुन में मस्त अपनी दीदी की गांड पर अपने होठ फेर रहा था
रेखा- निकल गया क्या भाई
रवि- रुको दीदी ये तो होठो से भी नहीं निकल रहा
और थोड़ी म्हणत करनी पड़ेगी
रेखा चुपचाप अपना मुँह आगे घुमा लेती है और रवि के अगले हमले के लिए होने आपको तैयार करने लगती है
इस बार रवि अपना मुँह दुबारा से रेखा की गांड पर लगता है
पर इस बार वो अपनी जीभ को बहार निकल कर सीधा रेखा की गांड के होल ओर रख देता है
रेखा तो मनो मजे में उड़ रही थी उसे अब दुनिया दरी की कोई खबर नहीं थी उसकी आँखे अपने आप hi बंद हो चुकी थी
रवि बड़े मजे से रेखा की गांड को चाट रहा था
अच्चानक रवि एक और हमला करता है और होनी जीभ को थोड़ा नुकीला बना कर सीधा रेखा की गांड में घुसा देता है
रेखा इस हमले से अंदर hi अंदर पागल हुई जा रही थी उसका बैलेंस बिगड़ जाता है और वो आगे को गिरने लगती है
तभी रवि अपने मजबूत हाथो से अपनी दीदी की चौड़ी गांड पकड़ लेता है
और अपना काम चालू रखता है
रेखा के मुँह से अब हलकी हलकी सिसकारी निकल रही थी
जिसे रवि नहीं सुन पा रहा था
रवि लगातार अपनी जीभ को रेखा की गांड में अंदर बहार कर रहा था
लागबहग 10 मिंट तक ऐसे hi अपनी जीभ से रेखा की गांड चाटने के बाद वो एक बार फिरसे अपने दोनों होठ रेखा की गांड ओर लगता है और जोर लगा कर कुछ खींचने की कोशिस करता है
वो रेखा को ऐसे दिखा रहा था मनो वो उस कटे को खींच कर निकल रहा हो
पर रवि की इस हरकत से कांटा तो नहीं निकलता
उल्टा रेखा की गांड से पद निकल जाता है जो सीधा रवि के मुँह में जाता है
होनी बड़ी दीदी का पाद सूंघ कर रवि मस्त हो हटा है
और अब उसे लगता है की अगर वो और देर तक ऐसे hi अपनी दीदी की गांड को चुस्त रहा तो पक्का उसका ोानी निकल जायेगा
रवि 1-2 बार अच्छे से रेखा की गांड चाट कर साफ़ करता है और अब अपना मुँह हटा कर दुबारा से ऊँगली लगा कर घूमने लगता है
2 मिंट तक ऐसा करने के बाद वो रेखा को छोड़ देता है
रवि- दीदी निकल गया कटा
अब खड़ी हो जाओ आप
रेखा- अपना पेटीकोट सही करती है और रवि के सामने hi मटक मटक कर चलती हुई एक चक्कर मरती है और दुबारा से रवि के पास आकर बैठ जाती है
रेखा- है भाई अब मुझे नहीं महसूस हो रहा वो कटा मेरी पिसवाड़े में
तूने आज अपनी दीदी की इज्जत बचा ली
तुझे पता है अगर मैं डॉक्टर के पास जाती तो मेरी कितनी बदनामी होती.
रवि- इसलिए तो दीदी मैंने चूस चूस कर अपनी दीदी की गांड से कटा बहार निकल दिया
रेखा की नजर अभी रवि के होठो पर थी जो पूरी तरह से गीले थे
रेखा- तिझे नहीं पता तूने अपनी दीदी की कितनी मदद की है तुझे पता है गाओं का डॉक्टर कितना हरामी है
हर औरत को छोड़ने के जुगाड़ में लगा रहता है साला हरामी
क्या तू ऐसा छठा की तेरी दीदी को वो हरामी डॉक्टर नंगा देखे
रवि- दीदी मैं ऐसा नहीं चैट्स था की मेरी दीदी को कोई भी नंगा देखे इसलिए तो मेने बड़ी म्हणत करके ये कटा निकला है
रेखा- कितना ोयरा है मेरा भाई तू
और आगे बढ़ कर रेखा रवि के गलो को चुम लेती है और अपनी एक नजर रवि के लुंड पर दाल कर रसोई की और जाने लगती है
इधर रवि भी नहाने की तैयारी में बहार लगे हेण्डपम्प ओर जाने के लिए घर से बहार निकलता है
अच्चानक उसे रेखा की आवाज सुनाई देती है
रेखा- अच्छा रवि सुन तो वो कटा खा गया जो मेरी गांड में घुसा हुआ था
रेखा की बात सुनकर तो रवि के चेहरे का रंग hi उड़ जाता है
जब कोई कटा था hi नहीं तो बिचारा कटा खा से दिखता
रवि बात को सम्भल लेता है
रवि- दीदी वो तो उड़ गया
रेखा- उड़ गया वो कैसे
रवि- दीदी जब मैं आपकी गांड चूस चूस कर उस कटे को बहसर निकल रहा था तो अपने पाद मारा था वो कटा उसी के साथ उड़ गया
यही कहि गिरा होगा रुको ढूंढ़ता हु
रेखा- रखने दे भाई तू जसकार नहा ले
कटा तो निकल गया न अब उसे दूध कर क्या फायदा
रवि बहार निकल जाता है नहाने के लिए और इधर रेखा खाना पकने लगती है
रेखा आज की साडी घटना को याद करते हुए मंद मंद मुस्का रही थी अब उसे अपना काम बनता हुआ साफ़ नजर आ रहा था
थोड़ी hi देर में रवि भी ाजत है और रेखा रवि को खाना देदेती है और खुद भी खा लेती है
और रवि एक नजर अपनी दीदी के ऊपर मरता है और अपना दोपहर का भोजन लेकर खेतो की एयर निकल जाता है
रेखा घर के मैं दरवाजे से रवि को जाता हुआ देखती है
और जब रवि पलट कर देखता है तो दोनों भाई बेहेन की नजर मिलती हसि और दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है
और रेखा अपना हाथ उठा कर रवि को टाटा bye bye करती है
अब साली रेखा रवि के साथ ौरे पति ोातनि वाले मजे लूट रही थी
रवि के जाते hi रेखा मैं दरवाजा बंद करती है और भागते हुए रसोई में से एक बैगन उठती है और आंगन में यदि खत पर लेत जाती है
और अपना पेटीकोट कमर तक उठा देती है
जिससे उसकी काली छूट खुल कर बहार आ जाती है
रेखा अपने मुँह से थूक लेकर अपनी छूट को गिला करती है
और अब बैगन को ोाकद कर होनी छूट पर रगड़ती है. और थोड़ा सा अबदार दबती है
अभी बैगन उसकी छूट में घुसना चालू hi हुआ था की वो अच्चानक रुक जाती है और बैगन को वापस से छूट से निकल कर साइड में फेक देती है
और अपना पेटीकोट सही करके वैसे hi लेत जाती है
रेखा- अब तो इस छूट को सिर्फ मेरा भाई hi चुवेगा
और अगर इस के अंदर कुछ जायेगा तो वो है मेरे छोटे भाई का लुंड
अभी 1 हफ्ते पहले तक तो रेखा जोर लगा लगा कर बैगन को अपनी छूट के अंदर बहार करती थी
और अब जब रेखा को रवि का लुंड मिल गया था तो उसे अब बैगन से खा मजा मिलने वाला था
अबतो रेखा सिर्फ ये कहती थी की सिर्फ उसका भाई hi उसे चुवे और कोई नहीं यह तक की अब वो अपने हाथो से भी अपने आपको संतुस्ट नहीं करना कहती थी .....
सच खा है किसीने
सब टाइम टाइम की बास्त होती है
तो भाई लोगो स्टोरी कैसी लग रही है कमैंट्स में जरूर बताये
और अपने भाई की म्हणत को देखते हुए एक लिखे जरूर दे
धन्यवाद्....
रवि और रेखा की पिछली रात बहुत मजेदार गुजरी थी
दोनों दुनिया से बेखबर होकर एक दूसरे से लिपटे हुए सो रहे थे
सुबह के 8 बज चुके थे
रेखा की आंख खुल जाती है उसे सबसे पहली चीज़ रवि का विशाल लुंड हवा में सीधा तना हुआ दीखता है
हिसे देख कर रेखा के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और वो एक बार रवि की और देखती है फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर लुंड को अपने हस्थो में दबोच लेती है .
आज दोनों भाई बेहेन कुछ ज्यादा hi देर तक सो गए थे .
रेखा देर न करते हुए रवि का लुंड 2-3 बार सहलाती है और उठ कर बटिह जाती है
रेखा के लुंड सहलाने से रवि के लुंड के टोपे पर 1-2 बून्द पानी बहार आजाता है जिसे देख कर रेखा की आँखों में चमक आ जाती है और वो आगे बढ़ कर अपनी जीभ से अपने छोटे भाई का सूपड़ा चाट लेती है
1-2 बार रवि के लुंड पर जीभ फेरने के बाद रेखा उठ जाती है और अपने लपड़े यह लेती हुई और जल्दी hi रवि को भी उठा देती है
जब रवि की आंख खुलती है तो उसे अहसास होता है की उसकी दीदी की नजर उसके लुंड पर hi है जिसे वो घूरे जा रहु है
रवि जल्दी से होनी धोती उठा कर अपना लुंड पर दाल देता हाउ
पर वो पतली सी धोती रवि का लुंड नहीं छुपा प् रही थी और अब रवि की धोती में एक विशाल तम्बू बन गया था
जिसे देख कर रेखा हल्का हल्का मुस्कुरा रही थी
रेखा- चल अब उठ जा कितना सोयेगा
तुझे भी अब मेरी तरह नींद आने लगी है क्या
रवि रेखा की बात सुनकर जल्दी से उठ जाता है
रेखा - चल जल्दी चल आज बहुत लेत हो गया है
और मुझे बहुत ज़ोर से हगवास लगी है
कोई इधर न आजाये इससे ोेहले hi करलेती हु
रवि- ठीक ह दीदी चलो जल्दी
और दोनों भाई बेहेन घर से बहार निकल जाते है
रवि के हाथ में एक लोटा था जिसमे उसने अपनी दीदी की गांड धोने के लिए पानी लिया हुआ था
रेखा आगे थी और रवि उसकी मटकती हुई गांड देख कर अपनी दीदी के ोीचे ोीचे चल रहा था
अच्चानक रेखा थोड़ा लड़खड़ाती है और आगे की और गिरते हुए एक पेड़ पर अपने दोनों हाथ टिका देती है
रवि तेजी से आगे बढ़ता है और अपनी दीदी की कमर में हाथ दाल कर उसे संभालता है
. रवि - क्या हुआ दीदी
रेखा- पता नहीं भाई कैसे गुर गयी म
पर तूने मुझे संभाल लिया कितना अच्छा ह मेरा भाई
रवि रेखा के पीछे पूरी तरह से चिपका हुआ था और उसका लुंड सीधा रेखा की गांड ओर दस्तक दे रहा था
जिसे रेखा साफ़ महसूस कर सकती थी
रवि- दीदी आपको चोट तो नहीं लगी न
रेखा अब सीधा होती है और रवि से अलग हो जाती है और अपने दोनों हाथ रवि के चेहरे की तरफ करके उसे अपनी चोट दिखती है
रेखा के हाथो पर हुआ तो कुछ नहीं था बस. अच्चानक पेड़ पर लगने से वो थोड़ा लाल हो गए थे रेखा जिसका पूरा फायदा उठाने में लगी हुई थी
रेखा- देख भाई तेरी दीदी को चोट लग गयी देख
रवि रेखा के हाथो दो देखते hi पकड़ लेता है और ुनलर फुक मरने लगता है
रवि- दीदी आप कैसे चलती हो जो होने आपको संभल नहीं पायी
रेखा- तू है न मुझे सँभालने के लिए
रवि- दीदी मैं तो हु hi पर आप भी अपना ध्यान रखा करो
रेखा- नहीं भाई अब तो तू hi अपनी दीदी को हमेशा संभालेगा
बोल संभालेगा न अपनी दीदी को जिंदगी भर .
रवि- है दीदी मैं आपको जिंदगी भर सम्भालूंगा
पहले जल्दी चल के संडास करलो कोई आ गया तो क्या होगा
रेखा- कितनी फ़िक्र है भाई तुझे अपनी दीदी की
ये बोलकर रेखा रवि को अपने गले लग्स लेती है
और अब दोनों भाई बेहेन अलग होकर आगे बढ़ने लगते है
रेखा अपनी जगह पर जाकर खड़ी हो जाती है और उसके थोड़ा सा hi पीछे रवि भी खड़ा था
रेखा एक नजर रवि पर डालती है और अपना पेटीकोट उठा कर अपनी गांड तक चढ़ा लेती है और अपनी दोनों गांड को फैलते हुए अपने छोटे भाई के सामने अपनी गांड का सुराख़ खोल देती है
जिसे देख कर रवि सकपका जाता है और अपने आप hi उसका हाथ उसके लुंड पर चला जाता है
रेखा भी मादरजात रवि को उकसाने में कोई कमी नहीं छोड़ना छाती थी
आज वो अपनी गांड से हगवास काम और पाद ज्यादा निकल रही थी जिसकी आवाज सुनकर रवि का लुंड फटने को उतारू हो गया था
रवि लगातार अपनी दीदी की गांड को देख रहा था
अच्चानक से रेखा की छूट से एक मोती धार बहने लगती है और उसके साथ hi उसकी गांड से भी मोती मोती टुकड़ो में हगवास बहार आने लगती है
रवि की आँखे बिलकुल लाल सुर्ख हो गयी थी उसका मन कर रहा था की अभी जाकर अपनी दीदी को दबोच ले
पर कहि न कहि उसके मन में अब भी रेखा के प्रति एक दीदी वाली इज़्ज़त थी
रवि शांति से बैठा बैठा अपना लुंड मसले जा रहा था
और इधर रेखा अपने गांड से लगातार हज जा रही थी
रवि एक नजर रेखा की गांड से निकल रही हगवास ओर सालता है और अपने मन में सोचता है
रवि- (दीदी का पिछवाड़ा जितना बड़ा है दीदी उतना hi ज्यादा हग रही है)
रेखा एक नजर पीछे मुद कर रवि को देखती है उसकी नजरे अभी भी रेखा की गांड पर तिकी हुई थी और वो अपनी दीदी की गांड के छोटे से छेद से निकल रही मोती मोती हगवास को देख कर ोागल हो रहा था
रेखा- रवि तेरा हो गया क्या
रवि रेखा की आवाज सुनकर घबरा जाता है और जल्दी जल्दी अपनी गांड साफ़ करता है
रवि- ः दीदी हो गया
रुको म पानी लेकर आता हु
रवि अपनी गांड धो कर रेखा के पास लोटा लेकर पहुँचता है
रवि रेखा के आगे लोटा रख देता है और अपनी दीदी के बगल में खड़ा हो जाता है
रवि- लो दीदी जल्दी से धो लो
रेखा - कैसे धो भाई मेरे हाथ में लगी हुई है देख न
और ये बोलकर रेखा बैठे बैठे hi दुबारा से अपने हाथ रवि को दिखने लगती है
रवि- दीदी फिर अब क्या करोगी ऐसे hi रहोगी क्या
रवि रेखा की गांड पर एक नजर दाल कर बोलता है
रेखा- छी कितना गन्दा है तू
तेरी दीदी के हाथो पर चोट लगी है और तू उसके साथ जस वक़्त मजाक कर रहा है
रवि- तो क्या कृ दीदी बताओ न
रेखा- मैं जो बताउंगी वो करेगा तू
रवि- है दीदी आप बताओ तो पहले
रेखा- मतलब मैं तुझे जो कुछ भी बोलूंगी तू वो सब करेगा .
रवि- है दीदी मैं सब करबग अपनी दीदी की खातिर
रेखा- देख आज मेरे हाथ में चोट लगी है तो आज तुझे hi होनी दीदी की गांड पर लगी हगवास साफ़ करनी पड़ेगी बोल करेगा
रेखा की बात सुनकर रवि के चेहरे पर एक मुस्कान आ जस्ती है
जिसे रेखा भी भाप जाती है
रवि- मेरी दीदी के हाथो ने चोट लगी है
मैं अपनी दीदी के सरे काम करूंगा जब तक आपका हस्त सही नहीं होता दीदी
रेखा- तो खड़ा क्यों है धो न मेरी गांड
रवि बिना कुछ बोले रेखा के ोीचे आता है और लोटे में से पानी अपने हाथ पर लेकर सीधा रेखा की छूट रख देता है
रवि कोई भी रिस्क नहीं लेना कष्ट था क्योंकि रात में उसका काम अच्छे से चल रहा था वो ऐसा बिलकुल नहीं दिखाना कहता था की वो अपनी दीदी को जानबूझ कर छू रहा है
रेखा की छूट को पानी से धोने के बाद वो अपना हाथ रेखा की गांड की और बढ़ता है
अपनी एक ऊँगली से अच्छे से घुमा घुमा कर रेखा की गांड पर लगी टट्टी साफ़ करता है
रवि बड़े hi अच्छे से अपनी ऊँगली को रेखा की गांड पर गोल गोल घुमा रहा था और अपने नाख़ून से हल्का सा कुरेद देता है
इस हमले से रेखा सिहर जाती है और अपना हाथ आगे की और ले जाकर जमीन पर टिका देती है और अपनी गांड और पीछे की और निकल देती है
अब रेखा की गांड का सुराख़ और भी ज्यादा खुल कर बहार आ गया था जिसे रवि आँखे फाड़ फाड़ कर देखे जा रहा था
रेखा को अच्चानक मस्ती सूझती है
रेखा- क्या देख रहा है ऐसे घर घर कर जल्दी से साफ़ करना मेरी गांड देख अभी भी मेरी हगवास लगी है उधर
अब रेखा का गांड का सुराख़ और भी ज्यादा खुल कर बहार की और आ गया था
जब रवि दुबारा से अपना हाथ उसकी गांड पर लगता है तो उसकी ऊँगली अपने आप hi थोड़ी सी अंदर की और चली जाती है
जिससे रेखा अंदर hi अंदर मचल जाती है
रवि का मन तो बहुत कर रहा था की अभी अपनी पूरी ऊँगली रेखा की गांड में घुसा दे पर वो भी कोई जल्दबाज़ी नहीं करना कहता था और अपनी दीदी के सामने शर्मिंदा नहीं होना कहता था
इधर रेखा तो खुद hi कहती थी की रवि अपनी ऊँगली उसकी गांड में पेल दे
रवि अपनी ऊँगली को थोड़ा सा अंदर पुश करता है और उसका नाख़ून वाला हिस्सा रेखा की गांड में घुस जाता है
रेखा आगे की तरफ कदख रही थी और होने भाई द्वारा अपनी गांड में ऊँगली डलवाने का पूरा मजा ले रही थी
रेखा की आँखे हवस से ौरी तरह लाल हो चुकी थी
रवि पिछले 10 मिंट से अपनी दीदी की गांड धो रहा था
रवि थोड़ी hi देर में खड़ा हो जाता है और रेखा की आँखों के सामने अब उसके भाई का कला कुंड धोरी में छुपा हुआ साफ़ नजर आ रहा था
रवि- चलो दीदी धो दिया मेने आपका पिछवाड़ा
रेखा- देख ले एक बार अच्छे से साफ़ किया है न तूने मेरी हगवास को
रवि एक नजर रेखा की गांड के होल ओर मरता है
और अपनी ऊँगली दुबारा से उसकी गांड और रख देता है
और 1-2 बार अपनी ऊँगली अच्छे से रेखा की गांड पर घूमता है
और अपना हाथ वह से हटा लेता है
रवि - है दीदी ोुरा साफ़ करदिया है
रेखा- कितना अच्छा है भाई तू
तूने अपनी दीदी की कितनी मैडम की है आज तुझे नहीं पता
रवि- दीदी मैं तो हमेशा hi आपकी मदद करता रहूंगा
पर अभी घर में चलो कोई आपको हगते हुए देखेगा तो क्या होगा
रेखा- मुझे हगते हुए सिर्फ मेरा भाई देखेगा और कोई नहीं समझा
रवि रेखा की ये डबल मीनिंग बात को समझ नहीं पता और रेखा के साथ चलता हुआ घर पहुंच जाता है
अभी रवि आंगन में यदि खत ओर बैठा hi था की रेखा उसके पास आती है
रवि - क्या हुआ दीदी
रेखा रवि के बिलकुल सामने खड़ी थी
रेखा- भाई तू अपनी दीदी की एक और मदद करेगा क्या
रवि- दीदी इसमें भी लुछ्ने की बात है क्या बताओ न क्या मदद कृ म होनी दीदी की
रेखा इतना सुनते hi रवि की और अपनी गांड घुमा देती है और होना पेटीकोट ोाकद कर अपनी कमर तक उठा लेती है
अब रवि की आँखे फटी की फटी रह जाती है उसके मुँह के बिकुल सामने उसकी दीदी की चौड़ी गांड थी वो भी बिलकुल नंगी
रेखा की छूट और गांड का छेद रवि को साफ़ नजर आ रहा था
रेखा- भाई देख न मुझे मेरी गांड में कुछ सुबह रहा है
मेरे हाथ में तो चोट लगी है तू hi देख ले न भाई क्या है जो तेरी दीदी को तकलीफ दे रहा है
रवि को तो मनो कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था वो आखे फाडे अपनी दीदी की गांड को घूरता जा रहा था
रेखा- देख न भाई मेरे पैरो में दर्द हो रहा है
रवि- क्या क्या दीदी एक बार और बोलो तो
रेखा- तेरा ध्यान खा है इधर तेरी दीदी तकलीफ म है और तेरा ध्यान पता नहीं खा है
रवि- दीदी मेने सुना नहीं था आवे क्या बोलै
रेखा- देख न मेरी गांड में कुछ सुबह रहा हसि जिससे तेरी दीदी को बहुत तकलीफ हो रही है
इतना बोलकर रेखा होनी गांड को और पीछे की तरफ धकेल देती है
रवि की तो मनो लाटरी लग गयी थी अभी थोड़ी देर पहले hi उसने होनी दीदी की गांड को रगड़ रगड़ कर धोया था
और अब दुबारा से उसकी दीदी की गांड उसके सामने थी
रवि- है दीदी कुछ तो लग रहा है आपके पिसवाड़े में
रेखा- तो हटा न उसे
रवि- दीदी ये कोई छोटा कटा है और थोड़ा सा आपके अंदर घुस गया है
रेखा- अंदर मतलब खा भाई
रवि- दीदी ये तो आपकी गांड में घुसा हुआ है
रेखा- जल्दी निकल इसे कहि कोई जेह्रीला कांटा न हो मुझे दर लग रहा है
असल में रेखा की गांड में कुछ नहीं घुस रहा था
रवि ोेहले hi अपनी दीदी की गांड को रगड़ रगड़ के चिकना कर चूका था
बस अब तो दोनों भाई बेहेन एक दूसरे का चुटिया काट रहे थे
रवि- दीदी रुको म निकलता हु
रवि उतना बोलकर अपनी नाक आगे बढ़ता है और रेखा की गांड से टोहड़ी दूर रोक कर अच्छे से अपनी दीदी की गांड से आ रही मादक महक को सूंघता है
रेखा को अपनी गांड पर रवि की गरम गरम सांसे महसूस हो रही थी जिससे वो घोड़ी बने बने hi काँप रही थी और अब उसके मन में यही चल रहस्य था की रवि अब आगे क्या करेगा
रवि 2 मिंट तक रेखा की गांड को अच्छे से सूंघता है
फिर अपनी ऊँगली को अपनी दीदी की गांड पर लगा कर हल्का हल्का सहलाने लगता है
जैसे वो कोई कांटा धुंध रहा हो
रेखा- भाई निकला क्या
रवि- रुको दीदी रुको ये बहुत बारीक़ है टाइम लगेगा थोड़ा
रेखा- जल्दी निकल न
रवि- रुको दीदी निकलता हु
और रवि होनी ऊँगली का दबाव टघोड़ा सा रेखा की गांड पर बढ़ता है
उसकी ऊँगली अंदर घुसने hi वाली थी की अचानक वो रुक जाता हसि और अपना हाथ हटा लेता है
रवि की इस हरकत से रेखा किसी जंगली बिल्ली की तरह रवि को गुस्से में देखती है
उसकी आँखों से साफ़ नजर आ रहा था की वो अपने भाई से पूछ रही हसि की तूने ऊँगली क्यों हटाई
पर रवि के मन में कुछ और hi था
रेखा- निकल गया क्या
रवि- दीदी कांटा बहुत बारीक़ है हाथ से नहीं निकलेगा
रेखा- तो फिर कैसे निकलेगा भाई
रवि- दीदी आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा
रेखा- तेरा दिमाग खराब है तू क्या कहता है की डॉक्टर तेरी दीदी को नंगा करके उसकी बुर्र और गांड देखे
अब रेखा सरे हमले खुल कर कर रही थी
अब उसे जल्दी से जल्दी रवि से छोड़ना था
रवि- दीदी डॉक्टर के पास नहीं जाओगी तो कैसे निकलू
रेखा- तू कुछ ुवे लगा न
मैं जैसे तेरे सामने नंगी हो जाती हु वैसे हर किसी के सामने नंगी नहीं हो सकती भाई मैं
अपनी दीदी की मज़बूरी समझ मेरे भाई
रवि- दीदी एक रास्ता है पर आप बाद में मुझे कुछ मत बोलना
रेखा- तू कुछ भी कर पर जल्दी से कांटा निकल
रवि ठीक है रुको निकलता हु
रवि इतना बोलकर होना मुँह आगे बढ़ा कर सीधा रेखा की गांड के छेद पर रख देता है
और अपने होठो से अपनी दीदी के गांड के सुराख़ को चुम लेता है
रेखा को उम्मीद नहीं थी की उसकी बातो का रवि पर इतना जल्दी असर होगा
वो इस हमले से बैचैन हो जाती है
और उसका शरीर हल्का सा झटका लेता है
रवि अपनी धुन में मस्त अपनी दीदी की गांड पर अपने होठ फेर रहा था
रेखा- निकल गया क्या भाई
रवि- रुको दीदी ये तो होठो से भी नहीं निकल रहा
और थोड़ी म्हणत करनी पड़ेगी
रेखा चुपचाप अपना मुँह आगे घुमा लेती है और रवि के अगले हमले के लिए होने आपको तैयार करने लगती है
इस बार रवि अपना मुँह दुबारा से रेखा की गांड पर लगता है
पर इस बार वो अपनी जीभ को बहार निकल कर सीधा रेखा की गांड के होल ओर रख देता है
रेखा तो मनो मजे में उड़ रही थी उसे अब दुनिया दरी की कोई खबर नहीं थी उसकी आँखे अपने आप hi बंद हो चुकी थी
रवि बड़े मजे से रेखा की गांड को चाट रहा था
अच्चानक रवि एक और हमला करता है और होनी जीभ को थोड़ा नुकीला बना कर सीधा रेखा की गांड में घुसा देता है
रेखा इस हमले से अंदर hi अंदर पागल हुई जा रही थी उसका बैलेंस बिगड़ जाता है और वो आगे को गिरने लगती है
तभी रवि अपने मजबूत हाथो से अपनी दीदी की चौड़ी गांड पकड़ लेता है
और अपना काम चालू रखता है
रेखा के मुँह से अब हलकी हलकी सिसकारी निकल रही थी
जिसे रवि नहीं सुन पा रहा था
रवि लगातार अपनी जीभ को रेखा की गांड में अंदर बहार कर रहा था
लागबहग 10 मिंट तक ऐसे hi अपनी जीभ से रेखा की गांड चाटने के बाद वो एक बार फिरसे अपने दोनों होठ रेखा की गांड ओर लगता है और जोर लगा कर कुछ खींचने की कोशिस करता है
वो रेखा को ऐसे दिखा रहा था मनो वो उस कटे को खींच कर निकल रहा हो
पर रवि की इस हरकत से कांटा तो नहीं निकलता
उल्टा रेखा की गांड से पद निकल जाता है जो सीधा रवि के मुँह में जाता है
होनी बड़ी दीदी का पाद सूंघ कर रवि मस्त हो हटा है
और अब उसे लगता है की अगर वो और देर तक ऐसे hi अपनी दीदी की गांड को चुस्त रहा तो पक्का उसका ोानी निकल जायेगा
रवि 1-2 बार अच्छे से रेखा की गांड चाट कर साफ़ करता है और अब अपना मुँह हटा कर दुबारा से ऊँगली लगा कर घूमने लगता है
2 मिंट तक ऐसा करने के बाद वो रेखा को छोड़ देता है
रवि- दीदी निकल गया कटा
अब खड़ी हो जाओ आप
रेखा- अपना पेटीकोट सही करती है और रवि के सामने hi मटक मटक कर चलती हुई एक चक्कर मरती है और दुबारा से रवि के पास आकर बैठ जाती है
रेखा- है भाई अब मुझे नहीं महसूस हो रहा वो कटा मेरी पिसवाड़े में
तूने आज अपनी दीदी की इज्जत बचा ली
तुझे पता है अगर मैं डॉक्टर के पास जाती तो मेरी कितनी बदनामी होती.
रवि- इसलिए तो दीदी मैंने चूस चूस कर अपनी दीदी की गांड से कटा बहार निकल दिया
रेखा की नजर अभी रवि के होठो पर थी जो पूरी तरह से गीले थे
रेखा- तिझे नहीं पता तूने अपनी दीदी की कितनी मदद की है तुझे पता है गाओं का डॉक्टर कितना हरामी है
हर औरत को छोड़ने के जुगाड़ में लगा रहता है साला हरामी
क्या तू ऐसा छठा की तेरी दीदी को वो हरामी डॉक्टर नंगा देखे
रवि- दीदी मैं ऐसा नहीं चैट्स था की मेरी दीदी को कोई भी नंगा देखे इसलिए तो मेने बड़ी म्हणत करके ये कटा निकला है
रेखा- कितना ोयरा है मेरा भाई तू
और आगे बढ़ कर रेखा रवि के गलो को चुम लेती है और अपनी एक नजर रवि के लुंड पर दाल कर रसोई की और जाने लगती है
इधर रवि भी नहाने की तैयारी में बहार लगे हेण्डपम्प ओर जाने के लिए घर से बहार निकलता है
अच्चानक उसे रेखा की आवाज सुनाई देती है
रेखा- अच्छा रवि सुन तो वो कटा खा गया जो मेरी गांड में घुसा हुआ था
रेखा की बात सुनकर तो रवि के चेहरे का रंग hi उड़ जाता है
जब कोई कटा था hi नहीं तो बिचारा कटा खा से दिखता
रवि बात को सम्भल लेता है
रवि- दीदी वो तो उड़ गया
रेखा- उड़ गया वो कैसे
रवि- दीदी जब मैं आपकी गांड चूस चूस कर उस कटे को बहसर निकल रहा था तो अपने पाद मारा था वो कटा उसी के साथ उड़ गया
यही कहि गिरा होगा रुको ढूंढ़ता हु
रेखा- रखने दे भाई तू जसकार नहा ले
कटा तो निकल गया न अब उसे दूध कर क्या फायदा
रवि बहार निकल जाता है नहाने के लिए और इधर रेखा खाना पकने लगती है
रेखा आज की साडी घटना को याद करते हुए मंद मंद मुस्का रही थी अब उसे अपना काम बनता हुआ साफ़ नजर आ रहा था
थोड़ी hi देर में रवि भी ाजत है और रेखा रवि को खाना देदेती है और खुद भी खा लेती है
और रवि एक नजर अपनी दीदी के ऊपर मरता है और अपना दोपहर का भोजन लेकर खेतो की एयर निकल जाता है
रेखा घर के मैं दरवाजे से रवि को जाता हुआ देखती है
और जब रवि पलट कर देखता है तो दोनों भाई बेहेन की नजर मिलती हसि और दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है
और रेखा अपना हाथ उठा कर रवि को टाटा bye bye करती है
अब साली रेखा रवि के साथ ौरे पति ोातनि वाले मजे लूट रही थी
रवि के जाते hi रेखा मैं दरवाजा बंद करती है और भागते हुए रसोई में से एक बैगन उठती है और आंगन में यदि खत पर लेत जाती है
और अपना पेटीकोट कमर तक उठा देती है
जिससे उसकी काली छूट खुल कर बहार आ जाती है
रेखा अपने मुँह से थूक लेकर अपनी छूट को गिला करती है
और अब बैगन को ोाकद कर होनी छूट पर रगड़ती है. और थोड़ा सा अबदार दबती है
अभी बैगन उसकी छूट में घुसना चालू hi हुआ था की वो अच्चानक रुक जाती है और बैगन को वापस से छूट से निकल कर साइड में फेक देती है
और अपना पेटीकोट सही करके वैसे hi लेत जाती है
रेखा- अब तो इस छूट को सिर्फ मेरा भाई hi चुवेगा
और अगर इस के अंदर कुछ जायेगा तो वो है मेरे छोटे भाई का लुंड
अभी 1 हफ्ते पहले तक तो रेखा जोर लगा लगा कर बैगन को अपनी छूट के अंदर बहार करती थी
और अब जब रेखा को रवि का लुंड मिल गया था तो उसे अब बैगन से खा मजा मिलने वाला था
अबतो रेखा सिर्फ ये कहती थी की सिर्फ उसका भाई hi उसे चुवे और कोई नहीं यह तक की अब वो अपने हाथो से भी अपने आपको संतुस्ट नहीं करना कहती थी .....
सच खा है किसीने
सब टाइम टाइम की बास्त होती है
तो भाई लोगो स्टोरी कैसी लग रही है कमैंट्स में जरूर बताये
और अपने भाई की म्हणत को देखते हुए एक लिखे जरूर दे
धन्यवाद्....