Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 4 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-29

रवि और रेखा की पिछली रात बहुत मजेदार गुजरी थी

दोनों दुनिया से बेखबर होकर एक दूसरे से लिपटे हुए सो रहे थे

सुबह के 8 बज चुके थे

रेखा की आंख खुल जाती है उसे सबसे पहली चीज़ रवि का विशाल लुंड हवा में सीधा तना हुआ दीखता है

हिसे देख कर रेखा के चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है और वो एक बार रवि की और देखती है फिर अपना हाथ आगे बढ़ा कर लुंड को अपने हस्थो में दबोच लेती है .

आज दोनों भाई बेहेन कुछ ज्यादा hi देर तक सो गए थे .

रेखा देर न करते हुए रवि का लुंड 2-3 बार सहलाती है और उठ कर बटिह जाती है

रेखा के लुंड सहलाने से रवि के लुंड के टोपे पर 1-2 बून्द पानी बहार आजाता है जिसे देख कर रेखा की आँखों में चमक आ जाती है और वो आगे बढ़ कर अपनी जीभ से अपने छोटे भाई का सूपड़ा चाट लेती है

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1-2 बार रवि के लुंड पर जीभ फेरने के बाद रेखा उठ जाती है और अपने लपड़े यह लेती हुई और जल्दी hi रवि को भी उठा देती है

जब रवि की आंख खुलती है तो उसे अहसास होता है की उसकी दीदी की नजर उसके लुंड पर hi है जिसे वो घूरे जा रहु है

रवि जल्दी से होनी धोती उठा कर अपना लुंड पर दाल देता हाउ

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पर वो पतली सी धोती रवि का लुंड नहीं छुपा प् रही थी और अब रवि की धोती में एक विशाल तम्बू बन गया था

जिसे देख कर रेखा हल्का हल्का मुस्कुरा रही थी

रेखा- चल अब उठ जा कितना सोयेगा

तुझे भी अब मेरी तरह नींद आने लगी है क्या

रवि रेखा की बात सुनकर जल्दी से उठ जाता है

रेखा - चल जल्दी चल आज बहुत लेत हो गया है

और मुझे बहुत ज़ोर से हगवास लगी है

कोई इधर न आजाये इससे ोेहले hi करलेती हु

रवि- ठीक ह दीदी चलो जल्दी

और दोनों भाई बेहेन घर से बहार निकल जाते है

रवि के हाथ में एक लोटा था जिसमे उसने अपनी दीदी की गांड धोने के लिए पानी लिया हुआ था

रेखा आगे थी और रवि उसकी मटकती हुई गांड देख कर अपनी दीदी के ोीचे ोीचे चल रहा था

अच्चानक रेखा थोड़ा लड़खड़ाती है और आगे की और गिरते हुए एक पेड़ पर अपने दोनों हाथ टिका देती है

रवि तेजी से आगे बढ़ता है और अपनी दीदी की कमर में हाथ दाल कर उसे संभालता है

. रवि - क्या हुआ दीदी

रेखा- पता नहीं भाई कैसे गुर गयी म

पर तूने मुझे संभाल लिया कितना अच्छा ह मेरा भाई

रवि रेखा के पीछे पूरी तरह से चिपका हुआ था और उसका लुंड सीधा रेखा की गांड ओर दस्तक दे रहा था

जिसे रेखा साफ़ महसूस कर सकती थी

रवि- दीदी आपको चोट तो नहीं लगी न

रेखा अब सीधा होती है और रवि से अलग हो जाती है और अपने दोनों हाथ रवि के चेहरे की तरफ करके उसे अपनी चोट दिखती है

रेखा के हाथो पर हुआ तो कुछ नहीं था बस. अच्चानक पेड़ पर लगने से वो थोड़ा लाल हो गए थे रेखा जिसका पूरा फायदा उठाने में लगी हुई थी

रेखा- देख भाई तेरी दीदी को चोट लग गयी देख

रवि रेखा के हाथो दो देखते hi पकड़ लेता है और ुनलर फुक मरने लगता है

रवि- दीदी आप कैसे चलती हो जो होने आपको संभल नहीं पायी

रेखा- तू है न मुझे सँभालने के लिए

रवि- दीदी मैं तो हु hi पर आप भी अपना ध्यान रखा करो

रेखा- नहीं भाई अब तो तू hi अपनी दीदी को हमेशा संभालेगा

बोल संभालेगा न अपनी दीदी को जिंदगी भर .

रवि- है दीदी मैं आपको जिंदगी भर सम्भालूंगा

पहले जल्दी चल के संडास करलो कोई आ गया तो क्या होगा

रेखा- कितनी फ़िक्र है भाई तुझे अपनी दीदी की

ये बोलकर रेखा रवि को अपने गले लग्स लेती है

और अब दोनों भाई बेहेन अलग होकर आगे बढ़ने लगते है

रेखा अपनी जगह पर जाकर खड़ी हो जाती है और उसके थोड़ा सा hi पीछे रवि भी खड़ा था

रेखा एक नजर रवि पर डालती है और अपना पेटीकोट उठा कर अपनी गांड तक चढ़ा लेती है और अपनी दोनों गांड को फैलते हुए अपने छोटे भाई के सामने अपनी गांड का सुराख़ खोल देती है

जिसे देख कर रवि सकपका जाता है और अपने आप hi उसका हाथ उसके लुंड पर चला जाता है

रेखा भी मादरजात रवि को उकसाने में कोई कमी नहीं छोड़ना छाती थी

आज वो अपनी गांड से हगवास काम और पाद ज्यादा निकल रही थी जिसकी आवाज सुनकर रवि का लुंड फटने को उतारू हो गया था

रवि लगातार अपनी दीदी की गांड को देख रहा था

अच्चानक से रेखा की छूट से एक मोती धार बहने लगती है और उसके साथ hi उसकी गांड से भी मोती मोती टुकड़ो में हगवास बहार आने लगती है

रवि की आँखे बिलकुल लाल सुर्ख हो गयी थी उसका मन कर रहा था की अभी जाकर अपनी दीदी को दबोच ले

पर कहि न कहि उसके मन में अब भी रेखा के प्रति एक दीदी वाली इज़्ज़त थी

रवि शांति से बैठा बैठा अपना लुंड मसले जा रहा था

और इधर रेखा अपने गांड से लगातार हज जा रही थी

रवि एक नजर रेखा की गांड से निकल रही हगवास ओर सालता है और अपने मन में सोचता है

रवि- (दीदी का पिछवाड़ा जितना बड़ा है दीदी उतना hi ज्यादा हग रही है)

रेखा एक नजर पीछे मुद कर रवि को देखती है उसकी नजरे अभी भी रेखा की गांड पर तिकी हुई थी और वो अपनी दीदी की गांड के छोटे से छेद से निकल रही मोती मोती हगवास को देख कर ोागल हो रहा था

रेखा- रवि तेरा हो गया क्या

रवि रेखा की आवाज सुनकर घबरा जाता है और जल्दी जल्दी अपनी गांड साफ़ करता है

रवि- ः दीदी हो गया

रुको म पानी लेकर आता हु

रवि अपनी गांड धो कर रेखा के पास लोटा लेकर पहुँचता है

रवि रेखा के आगे लोटा रख देता है और अपनी दीदी के बगल में खड़ा हो जाता है

रवि- लो दीदी जल्दी से धो लो

रेखा - कैसे धो भाई मेरे हाथ में लगी हुई है देख न

और ये बोलकर रेखा बैठे बैठे hi दुबारा से अपने हाथ रवि को दिखने लगती है

रवि- दीदी फिर अब क्या करोगी ऐसे hi रहोगी क्या

रवि रेखा की गांड पर एक नजर दाल कर बोलता है

रेखा- छी कितना गन्दा है तू

तेरी दीदी के हाथो पर चोट लगी है और तू उसके साथ जस वक़्त मजाक कर रहा है

रवि- तो क्या कृ दीदी बताओ न

रेखा- मैं जो बताउंगी वो करेगा तू

रवि- है दीदी आप बताओ तो पहले

रेखा- मतलब मैं तुझे जो कुछ भी बोलूंगी तू वो सब करेगा .

रवि- है दीदी मैं सब करबग अपनी दीदी की खातिर

रेखा- देख आज मेरे हाथ में चोट लगी है तो आज तुझे hi होनी दीदी की गांड पर लगी हगवास साफ़ करनी पड़ेगी बोल करेगा

रेखा की बात सुनकर रवि के चेहरे पर एक मुस्कान आ जस्ती है

जिसे रेखा भी भाप जाती है

रवि- मेरी दीदी के हाथो ने चोट लगी है

मैं अपनी दीदी के सरे काम करूंगा जब तक आपका हस्त सही नहीं होता दीदी

रेखा- तो खड़ा क्यों है धो न मेरी गांड

रवि बिना कुछ बोले रेखा के ोीचे आता है और लोटे में से पानी अपने हाथ पर लेकर सीधा रेखा की छूट रख देता है

रवि कोई भी रिस्क नहीं लेना कष्ट था क्योंकि रात में उसका काम अच्छे से चल रहा था वो ऐसा बिलकुल नहीं दिखाना कहता था की वो अपनी दीदी को जानबूझ कर छू रहा है

रेखा की छूट को पानी से धोने के बाद वो अपना हाथ रेखा की गांड की और बढ़ता है

अपनी एक ऊँगली से अच्छे से घुमा घुमा कर रेखा की गांड पर लगी टट्टी साफ़ करता है

रवि बड़े hi अच्छे से अपनी ऊँगली को रेखा की गांड पर गोल गोल घुमा रहा था और अपने नाख़ून से हल्का सा कुरेद देता है

इस हमले से रेखा सिहर जाती है और अपना हाथ आगे की और ले जाकर जमीन पर टिका देती है और अपनी गांड और पीछे की और निकल देती है

अब रेखा की गांड का सुराख़ और भी ज्यादा खुल कर बहार आ गया था जिसे रवि आँखे फाड़ फाड़ कर देखे जा रहा था

रेखा को अच्चानक मस्ती सूझती है

रेखा- क्या देख रहा है ऐसे घर घर कर जल्दी से साफ़ करना मेरी गांड देख अभी भी मेरी हगवास लगी है उधर

अब रेखा का गांड का सुराख़ और भी ज्यादा खुल कर बहार की और आ गया था

जब रवि दुबारा से अपना हाथ उसकी गांड पर लगता है तो उसकी ऊँगली अपने आप hi थोड़ी सी अंदर की और चली जाती है

जिससे रेखा अंदर hi अंदर मचल जाती है

रवि का मन तो बहुत कर रहा था की अभी अपनी पूरी ऊँगली रेखा की गांड में घुसा दे पर वो भी कोई जल्दबाज़ी नहीं करना कहता था और अपनी दीदी के सामने शर्मिंदा नहीं होना कहता था

इधर रेखा तो खुद hi कहती थी की रवि अपनी ऊँगली उसकी गांड में पेल दे

रवि अपनी ऊँगली को थोड़ा सा अंदर पुश करता है और उसका नाख़ून वाला हिस्सा रेखा की गांड में घुस जाता है

रेखा आगे की तरफ कदख रही थी और होने भाई द्वारा अपनी गांड में ऊँगली डलवाने का पूरा मजा ले रही थी

रेखा की आँखे हवस से ौरी तरह लाल हो चुकी थी

रवि पिछले 10 मिंट से अपनी दीदी की गांड धो रहा था

रवि थोड़ी hi देर में खड़ा हो जाता है और रेखा की आँखों के सामने अब उसके भाई का कला कुंड धोरी में छुपा हुआ साफ़ नजर आ रहा था

रवि- चलो दीदी धो दिया मेने आपका पिछवाड़ा

रेखा- देख ले एक बार अच्छे से साफ़ किया है न तूने मेरी हगवास को

रवि एक नजर रेखा की गांड के होल ओर मरता है

और अपनी ऊँगली दुबारा से उसकी गांड और रख देता है

और 1-2 बार अपनी ऊँगली अच्छे से रेखा की गांड पर घूमता है

और अपना हाथ वह से हटा लेता है

रवि - है दीदी ोुरा साफ़ करदिया है

रेखा- कितना अच्छा है भाई तू

तूने अपनी दीदी की कितनी मैडम की है आज तुझे नहीं पता

रवि- दीदी मैं तो हमेशा hi आपकी मदद करता रहूंगा

पर अभी घर में चलो कोई आपको हगते हुए देखेगा तो क्या होगा

रेखा- मुझे हगते हुए सिर्फ मेरा भाई देखेगा और कोई नहीं समझा

रवि रेखा की ये डबल मीनिंग बात को समझ नहीं पता और रेखा के साथ चलता हुआ घर पहुंच जाता है

अभी रवि आंगन में यदि खत ओर बैठा hi था की रेखा उसके पास आती है

रवि - क्या हुआ दीदी

रेखा रवि के बिलकुल सामने खड़ी थी

रेखा- भाई तू अपनी दीदी की एक और मदद करेगा क्या

रवि- दीदी इसमें भी लुछ्ने की बात है क्या बताओ न क्या मदद कृ म होनी दीदी की

रेखा इतना सुनते hi रवि की और अपनी गांड घुमा देती है और होना पेटीकोट ोाकद कर अपनी कमर तक उठा लेती है

अब रवि की आँखे फटी की फटी रह जाती है उसके मुँह के बिकुल सामने उसकी दीदी की चौड़ी गांड थी वो भी बिलकुल नंगी

रेखा की छूट और गांड का छेद रवि को साफ़ नजर आ रहा था

रेखा- भाई देख न मुझे मेरी गांड में कुछ सुबह रहा है

मेरे हाथ में तो चोट लगी है तू hi देख ले न भाई क्या है जो तेरी दीदी को तकलीफ दे रहा है

रवि को तो मनो कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था वो आखे फाडे अपनी दीदी की गांड को घूरता जा रहा था

रेखा- देख न भाई मेरे पैरो में दर्द हो रहा है

रवि- क्या क्या दीदी एक बार और बोलो तो

रेखा- तेरा ध्यान खा है इधर तेरी दीदी तकलीफ म है और तेरा ध्यान पता नहीं खा है

रवि- दीदी मेने सुना नहीं था आवे क्या बोलै

रेखा- देख न मेरी गांड में कुछ सुबह रहा हसि जिससे तेरी दीदी को बहुत तकलीफ हो रही है

इतना बोलकर रेखा होनी गांड को और पीछे की तरफ धकेल देती है

रवि की तो मनो लाटरी लग गयी थी अभी थोड़ी देर पहले hi उसने होनी दीदी की गांड को रगड़ रगड़ कर धोया था

और अब दुबारा से उसकी दीदी की गांड उसके सामने थी

रवि- है दीदी कुछ तो लग रहा है आपके पिसवाड़े में

रेखा- तो हटा न उसे

रवि- दीदी ये कोई छोटा कटा है और थोड़ा सा आपके अंदर घुस गया है

रेखा- अंदर मतलब खा भाई

रवि- दीदी ये तो आपकी गांड में घुसा हुआ है

रेखा- जल्दी निकल इसे कहि कोई जेह्रीला कांटा न हो मुझे दर लग रहा है

असल में रेखा की गांड में कुछ नहीं घुस रहा था

रवि ोेहले hi अपनी दीदी की गांड को रगड़ रगड़ के चिकना कर चूका था

बस अब तो दोनों भाई बेहेन एक दूसरे का चुटिया काट रहे थे

रवि- दीदी रुको म निकलता हु

रवि उतना बोलकर अपनी नाक आगे बढ़ता है और रेखा की गांड से टोहड़ी दूर रोक कर अच्छे से अपनी दीदी की गांड से आ रही मादक महक को सूंघता है

रेखा को अपनी गांड पर रवि की गरम गरम सांसे महसूस हो रही थी जिससे वो घोड़ी बने बने hi काँप रही थी और अब उसके मन में यही चल रहस्य था की रवि अब आगे क्या करेगा

रवि 2 मिंट तक रेखा की गांड को अच्छे से सूंघता है

फिर अपनी ऊँगली को अपनी दीदी की गांड पर लगा कर हल्का हल्का सहलाने लगता है

जैसे वो कोई कांटा धुंध रहा हो

रेखा- भाई निकला क्या

रवि- रुको दीदी रुको ये बहुत बारीक़ है टाइम लगेगा थोड़ा

रेखा- जल्दी निकल न

रवि- रुको दीदी निकलता हु

और रवि होनी ऊँगली का दबाव टघोड़ा सा रेखा की गांड पर बढ़ता है

उसकी ऊँगली अंदर घुसने hi वाली थी की अचानक वो रुक जाता हसि और अपना हाथ हटा लेता है

रवि की इस हरकत से रेखा किसी जंगली बिल्ली की तरह रवि को गुस्से में देखती है

उसकी आँखों से साफ़ नजर आ रहा था की वो अपने भाई से पूछ रही हसि की तूने ऊँगली क्यों हटाई

पर रवि के मन में कुछ और hi था

रेखा- निकल गया क्या

रवि- दीदी कांटा बहुत बारीक़ है हाथ से नहीं निकलेगा

रेखा- तो फिर कैसे निकलेगा भाई

रवि- दीदी आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा

रेखा- तेरा दिमाग खराब है तू क्या कहता है की डॉक्टर तेरी दीदी को नंगा करके उसकी बुर्र और गांड देखे

अब रेखा सरे हमले खुल कर कर रही थी

अब उसे जल्दी से जल्दी रवि से छोड़ना था

रवि- दीदी डॉक्टर के पास नहीं जाओगी तो कैसे निकलू

रेखा- तू कुछ ुवे लगा न

मैं जैसे तेरे सामने नंगी हो जाती हु वैसे हर किसी के सामने नंगी नहीं हो सकती भाई मैं

अपनी दीदी की मज़बूरी समझ मेरे भाई

रवि- दीदी एक रास्ता है पर आप बाद में मुझे कुछ मत बोलना

रेखा- तू कुछ भी कर पर जल्दी से कांटा निकल

रवि ठीक है रुको निकलता हु

रवि इतना बोलकर होना मुँह आगे बढ़ा कर सीधा रेखा की गांड के छेद पर रख देता है

और अपने होठो से अपनी दीदी के गांड के सुराख़ को चुम लेता है

रेखा को उम्मीद नहीं थी की उसकी बातो का रवि पर इतना जल्दी असर होगा

वो इस हमले से बैचैन हो जाती है

और उसका शरीर हल्का सा झटका लेता है

रवि अपनी धुन में मस्त अपनी दीदी की गांड पर अपने होठ फेर रहा था

रेखा- निकल गया क्या भाई

रवि- रुको दीदी ये तो होठो से भी नहीं निकल रहा

और थोड़ी म्हणत करनी पड़ेगी

रेखा चुपचाप अपना मुँह आगे घुमा लेती है और रवि के अगले हमले के लिए होने आपको तैयार करने लगती है

इस बार रवि अपना मुँह दुबारा से रेखा की गांड पर लगता है

पर इस बार वो अपनी जीभ को बहार निकल कर सीधा रेखा की गांड के होल ओर रख देता है

रेखा तो मनो मजे में उड़ रही थी उसे अब दुनिया दरी की कोई खबर नहीं थी उसकी आँखे अपने आप hi बंद हो चुकी थी

रवि बड़े मजे से रेखा की गांड को चाट रहा था

अच्चानक रवि एक और हमला करता है और होनी जीभ को थोड़ा नुकीला बना कर सीधा रेखा की गांड में घुसा देता है

रेखा इस हमले से अंदर hi अंदर पागल हुई जा रही थी उसका बैलेंस बिगड़ जाता है और वो आगे को गिरने लगती है

तभी रवि अपने मजबूत हाथो से अपनी दीदी की चौड़ी गांड पकड़ लेता है

और अपना काम चालू रखता है

रेखा के मुँह से अब हलकी हलकी सिसकारी निकल रही थी

जिसे रवि नहीं सुन पा रहा था

रवि लगातार अपनी जीभ को रेखा की गांड में अंदर बहार कर रहा था

लागबहग 10 मिंट तक ऐसे hi अपनी जीभ से रेखा की गांड चाटने के बाद वो एक बार फिरसे अपने दोनों होठ रेखा की गांड ओर लगता है और जोर लगा कर कुछ खींचने की कोशिस करता है

वो रेखा को ऐसे दिखा रहा था मनो वो उस कटे को खींच कर निकल रहा हो

पर रवि की इस हरकत से कांटा तो नहीं निकलता

उल्टा रेखा की गांड से पद निकल जाता है जो सीधा रवि के मुँह में जाता है

होनी बड़ी दीदी का पाद सूंघ कर रवि मस्त हो हटा है

और अब उसे लगता है की अगर वो और देर तक ऐसे hi अपनी दीदी की गांड को चुस्त रहा तो पक्का उसका ोानी निकल जायेगा

रवि 1-2 बार अच्छे से रेखा की गांड चाट कर साफ़ करता है और अब अपना मुँह हटा कर दुबारा से ऊँगली लगा कर घूमने लगता है

2 मिंट तक ऐसा करने के बाद वो रेखा को छोड़ देता है

रवि- दीदी निकल गया कटा

अब खड़ी हो जाओ आप

रेखा- अपना पेटीकोट सही करती है और रवि के सामने hi मटक मटक कर चलती हुई एक चक्कर मरती है और दुबारा से रवि के पास आकर बैठ जाती है

रेखा- है भाई अब मुझे नहीं महसूस हो रहा वो कटा मेरी पिसवाड़े में

तूने आज अपनी दीदी की इज्जत बचा ली

तुझे पता है अगर मैं डॉक्टर के पास जाती तो मेरी कितनी बदनामी होती.

रवि- इसलिए तो दीदी मैंने चूस चूस कर अपनी दीदी की गांड से कटा बहार निकल दिया

रेखा की नजर अभी रवि के होठो पर थी जो पूरी तरह से गीले थे

रेखा- तिझे नहीं पता तूने अपनी दीदी की कितनी मदद की है तुझे पता है गाओं का डॉक्टर कितना हरामी है

हर औरत को छोड़ने के जुगाड़ में लगा रहता है साला हरामी

क्या तू ऐसा छठा की तेरी दीदी को वो हरामी डॉक्टर नंगा देखे

रवि- दीदी मैं ऐसा नहीं चैट्स था की मेरी दीदी को कोई भी नंगा देखे इसलिए तो मेने बड़ी म्हणत करके ये कटा निकला है

रेखा- कितना ोयरा है मेरा भाई तू

और आगे बढ़ कर रेखा रवि के गलो को चुम लेती है और अपनी एक नजर रवि के लुंड पर दाल कर रसोई की और जाने लगती है

इधर रवि भी नहाने की तैयारी में बहार लगे हेण्डपम्प ओर जाने के लिए घर से बहार निकलता है

अच्चानक उसे रेखा की आवाज सुनाई देती है

रेखा- अच्छा रवि सुन तो वो कटा खा गया जो मेरी गांड में घुसा हुआ था

रेखा की बात सुनकर तो रवि के चेहरे का रंग hi उड़ जाता है

जब कोई कटा था hi नहीं तो बिचारा कटा खा से दिखता

रवि बात को सम्भल लेता है

रवि- दीदी वो तो उड़ गया

रेखा- उड़ गया वो कैसे

रवि- दीदी जब मैं आपकी गांड चूस चूस कर उस कटे को बहसर निकल रहा था तो अपने पाद मारा था वो कटा उसी के साथ उड़ गया

यही कहि गिरा होगा रुको ढूंढ़ता हु

रेखा- रखने दे भाई तू जसकार नहा ले

कटा तो निकल गया न अब उसे दूध कर क्या फायदा

रवि बहार निकल जाता है नहाने के लिए और इधर रेखा खाना पकने लगती है

रेखा आज की साडी घटना को याद करते हुए मंद मंद मुस्का रही थी अब उसे अपना काम बनता हुआ साफ़ नजर आ रहा था

थोड़ी hi देर में रवि भी ाजत है और रेखा रवि को खाना देदेती है और खुद भी खा लेती है

और रवि एक नजर अपनी दीदी के ऊपर मरता है और अपना दोपहर का भोजन लेकर खेतो की एयर निकल जाता है

रेखा घर के मैं दरवाजे से रवि को जाता हुआ देखती है

और जब रवि पलट कर देखता है तो दोनों भाई बेहेन की नजर मिलती हसि और दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा देते है

और रेखा अपना हाथ उठा कर रवि को टाटा bye bye करती है

अब साली रेखा रवि के साथ ौरे पति ोातनि वाले मजे लूट रही थी

रवि के जाते hi रेखा मैं दरवाजा बंद करती है और भागते हुए रसोई में से एक बैगन उठती है और आंगन में यदि खत पर लेत जाती है

और अपना पेटीकोट कमर तक उठा देती है

जिससे उसकी काली छूट खुल कर बहार आ जाती है

रेखा अपने मुँह से थूक लेकर अपनी छूट को गिला करती है

और अब बैगन को ोाकद कर होनी छूट पर रगड़ती है. और थोड़ा सा अबदार दबती है

अभी बैगन उसकी छूट में घुसना चालू hi हुआ था की वो अच्चानक रुक जाती है और बैगन को वापस से छूट से निकल कर साइड में फेक देती है

और अपना पेटीकोट सही करके वैसे hi लेत जाती है

रेखा- अब तो इस छूट को सिर्फ मेरा भाई hi चुवेगा

और अगर इस के अंदर कुछ जायेगा तो वो है मेरे छोटे भाई का लुंड

अभी 1 हफ्ते पहले तक तो रेखा जोर लगा लगा कर बैगन को अपनी छूट के अंदर बहार करती थी

और अब जब रेखा को रवि का लुंड मिल गया था तो उसे अब बैगन से खा मजा मिलने वाला था

अबतो रेखा सिर्फ ये कहती थी की सिर्फ उसका भाई hi उसे चुवे और कोई नहीं यह तक की अब वो अपने हाथो से भी अपने आपको संतुस्ट नहीं करना कहती थी .....

सच खा है किसीने

सब टाइम टाइम की बास्त होती है

तो भाई लोगो स्टोरी कैसी लग रही है कमैंट्स में जरूर बताये

और अपने भाई की म्हणत को देखते हुए एक लिखे जरूर दे

धन्यवाद्....
 
अपडेट-30

खेतो में काम करते करते दोपहर हो चुकी थी रवि बुरी तरह से ऊपर से निचे तक पसीने में लटपट था

वो अपना सरे औजार रख कर अपनी झोपडी में चला जाता है और अपनी दीदी को याद करते हुए खाना खाने लगता है

रवि को बार बार रेखा की गांड अपनी आँखों के सामने नजर आ रही थी

और अपनी दीदी की गांड से निकलती मादक महक को रवि कह कर भी बुला नहीं प् रहा था

आज उसका मन नहीं लग रहा था काम में

फिर भी काम तो करना hi था और आज उसके पास खेतो में काम भी बहुत सारा था रवि का मन तो नहीं था फिर भी वो खाना खाकर दुबारा से अपने काम में लग जाता है

दूर से रवि को एक आवाज आती है जब रवि पलट कर देखता है तो उसे नीलम का भाई रामु आता हुआ दीखता है

रवि अपना काम छोड़ कर रामु की और बढ़ता है

रवि- अरे रामु आज यह का रास्ता कैसे भू गया और बताओ नीलम दीदी और हरिया काका कैसे है

रामु- कुछ नहीं रवि आज मैं सेहर जा रहा हु

और तुझे तो पता है की ये रास्ता बहुत छोटा है सेहर जाने के लिए इसलिए मेने सोचा चलो इसी रस्ते से चलते है

और दीदी और बाबा भी मस्त है

तुम अपना बताओ भाई

रवि- अपना भी सब मजे म है

तुम सेहर किस काम से जा रहे हो

रामु- अब तुझसे क्या छुपाऊ रवि मैंने सेहर में एक भाभी पता ली है बस उसी को छोड़ने जा रहा हु

रामु की बात सुनकर रवि का मुँह खुला का खुला रह जाता है

असल में तो कोई भाभी थी hi नहीं ये साला रामु बस दुसरो की बहु बेटियों को ताड़ने के लिए सेहर जाता था

रामु - तू भी चलेगा क्या मेरे साथ

रवि- नहीं भाई तुम hi जाओ मैं नहीं करता ये सब काम

रामु- है तू तो बहुत शरीफ आदमी है न

रामु को खा पता था की रवि तो दिन रात अपनी गदराई दीदी की गांड में मुँह डेल पड़ा रहता है

रवि- है भाई यही समझ लो मुझे सेहर जाना अच्छा नहीं लगता

रामु- तो तू कभी चुदाई नहीं करेगा क्या

अब रवि रामु को क्या बताता की वो जल्दी hi अपनी बड़ी दीदी को छोड़ने वाला है

रवि- देखंगे भाई नसीब में होगा तो जरूर करेंगे

रामु- चल ठीक है में चलता हु मुझे लेत हो रहा है भाभी इन्तजार कर रही होगी मेरा

बड़ी मस्त छिनाल है साली

छूट गांड दोनों मरवाती है

रवि- ठीक है भाई तुम जाओ और अपनी भाभी की सेवा करो

रामु- अगर तेरा कभी भी मन करे तो तू सीधा मेरे साथ सेहर चलना वह एक से एक माल है खड़े खड़े hi पानी छोड़ देगा तू देख कर

रवि- ठीक ह भाई तुजे नहीं तो लेत हो जायेगा

रवि भी जनता था की रामु साला बहुत बड़ी बड़ी फेकता है इसलिए वो जल्दी hi रामु को तर्क कर भगा देता है

और अपने काम में लग जाता है

काम करते करते पता hi नहीं चलता कब शाम हो जाती है और रवि सारा समान समेत कर घर की और निकल जाता है

रवि जैसे hi घर के अंदर घुसता है उसकी नजर रेखा पर जाती है

रेखा वही आंगन में बैठ कर मूत रही थी

रवि को देख कर वो खड़ी नहीं होती वैसे hi पलट कर रवि को देखती है और एक मुस्कान के साथ अपना काम ख़तम करके उठ जाती है

रेखा- तू बैठ मैं चाय बना कर लती हु

रेखा ने वही छोटा वाला पेटीकोट ोेहना था और एक पुराण सा ब्लाउज डाला हुआ था जिसके ऊपर के 2, हुक टूटे हुए थे

रवि खत पर बैठे बैठे चाय का इन्तजार करने लगता है

थोड़ी देर बाद रेखा आती है और रामु को चाय पकड़ा कर निचे बैठ जाती है

अपने दोनों पेअर घुटनो से मोड़ कर

अब रवि को साफ़ साफ़ अपनी दीदी की फ़टी हुई छूट नजर आ रही थी

जिसपर हल्का हल्का चमक भी आ रही थी

रवि को समझते देर नहीं लगती की उसकी दीदी की छूट से पानी निकल रहा है

दोनों भाई बेहेन बिलकुल बेशरम बांके चाय की चुस्किया ले रहे थे

और लगातार रवि अपनी दीदी की काली छूट को निहार जा रहा था

रेखा रवि की नजर अपनी छूट पर पड़ती देख लेती है और अब उसकी छूट और भी ज्यादा पानी छोड़ना चालू कर देती है

रवि- दीदी आज रामु मिला था

रेखा- रामु अच्छा नीलम का भाई

वो होने खेतो पर कैसे आ गया आज

रवि- दीदी वो छोटे रस्ते से सेहर जा रहा था

रेखा- है आज कल वो बहुत जाता है सेहर

रवि- दीदी वो तो मुझे भी कह रहा था अपने साथ चलने के लिए

रेखा- तुझे भी जाना है क्या सेहर

रवि- नहीं दीदी मुझे तो यह आपके साथ hi अच्छा लगता है तो मैं क्यों जाऊ सेहर

रेखा- उस सेल से बच कर रहना बड़ा हरामी है मेरा पिछवाड़ा भी वो घर घर कर देखता है जैसे अभी खा जायेगा

रवि- है दीदी वो बता रहा था की उसने सेहर में कोई भाभी पता राखी है और वो उनके साथ hi सोयेगा आज रात को

रेखा- तो तुझे भी भाभी चाहिए क्या साथ सोने के लिए

रवि- नहीं दीदी मैं तो हमेशा की तरह ाओंके साथ hi सोऊंगा

रेखा- है तू मेरे साथ hi सोना और उस सेल की ज्यादा बाटे मत सुना कर वो तुझे भी अपने जैसा रंडीबाज बना देगा

रेखा की बाटे सीधा रवि के लुंड ओर चोट कर रही थी

और उसका लुंड अबतक खड़ा हो चूका था जिसे छुपाने की रवि नाकाम कोशिश कर रहा था

रेखा की नजर अब तक रवि के लुंड पर पद चुकी थी और उसे रवि की हरकतों पर थोड़ी सी हसि आ जाती है

रेखा- चल तू परेशान मत हो मैं जल्दी से खाना बनती हु

उसके बाद हम दोनों भाई बेहेन मिल कर सोयेंगे

सोने की बात सुनकर रवि का चेहरा खिल जाता है जिसे रेखा भी भाप जाती है

रेखा रसोई की और चली जाती है और रवि लोटे में पानी उठा कर घर के पीछे चला जाता है

रेखा और रामु की बातो का आज रवि के लुंड पर बहुत गहरा असर हुआ था

उसका लुंड अब बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था

रवि जल्दी जल्दी पॉटी करके घर में चला जाता है और अब तक रेखा भी खाना पका चुकी थी

रेखा दो थाली में खाना निकल कर एक थाली रवि की खत पर रखती है और दुअरी अपने सामने रख कर वही निचे बैठ जाती है

रवि- दीदी आप मुझसे गुस्सा हो क्या

रेखा - नहीं तो तू ऐसा क्यों बोल रहा है

रवि- दीदी आज अपने हम दोनों का खाना अलग अलग क्यों निकला फिर

रवि की बात सुनकर रेखा का मन अंदर तक झूम उठता है

रेखा- मैं तुझसे गुस्सा हो सकती हु क्या

सबेरे hi तूने अपनी दीदी की कितनी मैडम की और अपनी जीभ से खींच खींच कर मेरी गांड में फसा हुआ कटा निकला मैं तुझसे अब कभी गुस्सा नहीं हो सकती भाई मेरे

रवि- तो दीदी अबसे याद रखना की हम दोनों एक साथ hi खाना खाएंगे और एक hi थाली में

रेखा- ठीक है बाबा गुस्सा क्यों होता है तू अपनी दीदी पर

रवि- नहीं दीदी मैं गुस्सा नहीं हु बस जब आप अपने हाथो से खिलाती हो तो कुछ और hi मजा आता है

रेखा- अच्छा तो अब तुझे खाना खाने में भी मजा आता है वह जी वह ये तो नई बात सुनी मैंने

रवि- अरे नहीं दीदी मतलब जब आप खिलाती हो तो मैं अच्छे से पेट भर के खा पता हु

रेखा- अच्छा चल ठीक है ज्यादा दिमाग मत चला आज से अभी से और इसके बाद जिंदगी भर हम दोनों एक hi थाली में खाएंगे और एक hi साथ सोयेंगे

रवि को तो जैसे बुय 1 गेट 1 फ्री मिल रहा था

रवि- है दीदी ठीक है

आप मेरी कितनी प्यारी दीदी हो

और आहे बढ़ कर वो अपनी दीदी के गलो को चुम लेता है

और रेखा अपनी थाली का खाना रवि की थाली में दाल देती है

और ऊपर खत पर आकर बैठ जाती है

ौड दोनों भाई बेहेन एक दुआरे को निवाला खिलते वक़्त एक दूसरे के मुँह में ऊँगली डेल मजा लिए जा रहे थे

अच्चानक से रवि बोलता है

रवि- दीदी वो कटा तो निकल दिया था कहि आपको अभी भी दर्द तो नहीं हो रहा है न

रेखा को रवि की बात सुनकर हैरानी होती है

पहले तो वो रवि को उकसाती थी पर अब तो सब उल्टा हो रहा था

रवि अब रेखा का मन टटोल रहा था

रेखा- तूने अपनी जीभ से इतने अच्छे से चूस चूस कर निकला है तो तुझे लगता है की अभी भी दर्द कर रहा होगा

रवि- नहीं दीदी मैं तो बस ऐसे hi पूछ रहा था

रेखा- पहले जो दर्द हो रहा था वो भी अब ख़तम हो चूका है

पर है मेरे हाथो में बहुत दर्द हो रहा है

ये बोलकर रेखा अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर रवि को दिखती है

रेखा के हाथ तो बिलकुल सही थे फिर भी रवि रेखा की इस बात का फायदा उठता है और अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर रेख देता है

और वो बरी बरी दोनों हाथो को चुम लेता है

रवि- दीदी तुम ठीक से चलती hi नहीं हो तो बताओ चोट तो लगेगी hi न

रेखा- भाई चलने की बात तो तू सही कह रहा है पर तुहि बता मैं क्या कृ

दिन बी दिन मेरा जिस्म गदराये जा रहा है

अब मुझमे अपने बदन को संभालने की और हिम्मत नहीं बची है

इसलिए कभी कभी बैलेंस बिगड़ जाता है और तेरी दीदी ईशर उधर गिरती रहती है

रवि- तो दीदी मतलब तुम हमेशा hi ऐसे गिरती रहोगी

रेखा- नहीं भाई जब कोई हत्ता कट्टा मर्द मिल जायेगा जो मेरे जिस्म को संभाल सके उस दिन से समझ ले तेरी दीदी कभी नहीं गिरेगी

रवि- दीदी ऐसी बात है तो मैं सम्भालूंगा अपनी दीदी का शरीर

रेखा- अच्छा तो अब तू इतना बड़ा भी हो गया की अपनी दीदी को संभालेगा

रवि उठ कर खड़ा हो जाता है

रवि- दीदी आपने hi तो खा की जब कोई हत्ता कट्टा मर्द मिलेगा तब देखो मैं क्या आपको हत्ता कट्टा नहीं लगता

रवि के खड़ा होते hi उसका लुंड उसकी धोती के अंदर सीधा रेखा के आगे आ जाता है जिसे देख कर रेखा की हसि छूट जाती है

रवि- दीदी आप है क्यों रही हो

रेखा- कुछ नहीं बस ऐसे hi हसि आ गयी

ठीक है अबसे तुहि संभालना अपनी दीदी का गदराया जिस्म

ठीक है न मेरे छोटे भाई

और आगे बढ़ कर रेखा रवि के गलो को पकड़ कर खींच लेती है

और बर्तन उठा कर साफ़ सफाई में लग जाती है

इधर रवि भी कमरे में घुस जाता है और जल्दी जल्दी बिस्तर लगा कर होनी बनियान उतर देता है

और बेशब्री से अपनी दीदी के आने का इन्तजार करने लगता है ......
 
अपडेट -31

रेखा जल्दी जल्दी बर्तन धोने में लगी हुई थी

उसे अपने छोटे भाई के पास जाने की बहुत जल्दी थी

रेखा जल्दी से सरे काम निपटा कर होने कमरे में पहुंच जाती है

मैं दरवाजा तो वो पहले hi बंद कर चुकी थी

अंदर रवि अपनी आँखे बंद किये रेखा का इन्तजार कर रहा था उसे भी अपनी दीदी के साथ चिपक कर सोने की ान आदत पद गयी थी

रेखा अपनी जगह पर आकर बैठ जाती है

और एक नजर रवि के ऊपर डालती है

रवि उसे hi देख रहा था

दोनों की नजरे एक दूसरे से टकराती है और इशारो इशारो में hi दोनों भाई बेहेन की बात हो जाती है

और अगले hi पल रेखा अपने ब्लाउज के सरे हुक एक एक करके खोल देती है

जिसकी वजह से रवि के सामने उसकी दीदी की विशाल चूचिया हवा में झूलती हुई निचे की और लटक जाती है

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और अब रेखा अपना ब्लाउज अपने शरीर से अलग कर देती है

और रवि की तरफ देख कर एक मुस्कान देती है

रेखा की मुस्कान से साफ़ पता चल रहा था की वो अब अपने भाई को खुद को चुने का इनविटेशन दे रही है

अब तक रेखा अपनी गांड रवि की तरफ घुमा कर लेत जाती है

रवि भू रेखा की और मुँह घुमा कर लेत जाता है और अपनी दीदी के सोने का इंताजर करता है

और आज सुबह जबसे रवि ने अपनी दीदी की गांड में अपनी जीभ घुसाई थी तब से hi रवि रेखा के लिए पागल हो चूका था

रेखा को अभी लेते हुए 5 मिंट भी नहीं हुए थे उसकी आंखे अभी भी खुली हुई थी

रवि को अब अपनी दीदी से और ज्यादा दुरी बर्दास्त नहीं हो रही थी

वो अपना हाथ आगे बढ़ा कर रेखा की कमर पर रख देता है

रेखा रवि का हाथ महसूस करके मस्ती में झूमने लगती है और अब जो भी होने वाला था उसके लिए अपने आपको पहले से hi तैयार कर लेती है

रवि अपना हाथ रेखा की कमर पर हल्का हल्का घूमने लगता है

और बड़े hi प्यार से रेखा की कमर को सहलाता हुआ अपना हाथ आगे बढ़ा कर रेखा के पेट पर रख देता है

रेखा समझ रही थी की अब रवि पूरी तरह से उसकी तरफ आकर्षित हो चूका है

जिसका सबूत ये था की आज रवि रेखा के लेटने के 5 मिंट बाद hi अपना काम चालू कर चूका था

रेखा अपना हाथ उठा कर रवि के हाथ पर रकः देती है

रवि 1 सेकंड के लिए वैसे hi शांत पद जाता है फिर वो अपने हाथ को सरका के रेखा के हाथ के ऊपर ले जाता है और अपनी दीदी की हस्त की उंगलियों को पकड़ कर सहलाने लगता है

अब रेखा को यकीन हो चूका था की. उसका खुद का सगा छोटा भाई उसके लिए पागल हो चूका है

अब जो होगा सब भगवन भरोशे होगा

रवि अब हाथ को रेखा के हाथ से हटाता है और उसके पेट पर घूमता हुआ अपनी दीदी की चूचियों की तरफ बढ़ने लगता है

रेखा बस लेते लेते लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी

और मजे लूट रही थी

अब तक रवि का हाथ उसकी दीदी को विशाल चूचियों तक पहुंच चूका था

रवि सीधा अपनी 2 उंगलियों को रेखा के एक निप्पल ओर रखता है और उसे पकड़ कर ज़ोर से मसल देता है

रेखा इस हमले से अंदर hi अंदर कसमसा कर रह जाती है

रवि लगातार अपनी दोनों उंगलियों से रेखा के निप्पल को कुरेद रहा था

रेखा बिचारि पड़ी पड़ी अपने छोटे भाई के सब हमले चुप चाप बर्दास्त कर रही थी

रवि अपने दूसरे हाथ से अपनी धोती पकड़ कर खुश देता है और पूरी तरह से नंगा हो जाता है

और धीरे से रेखा के और करीब सरक जाता है

अब रवि के लुंड और रेखा की गांड के बिच एक पेटीकोट था

रवि अपने लुंड का दबाव रेखा की गांड पर दभाता है

जिसका असर रेखा पर भी होता है

वो अपनी गांड थोड़ी बहार की और निकल देती है जिससे अब रवि का लुंड सीधा रेखा की गांड के छेद पर आ जाता है

रवि रेखा की चुकी को लगातार मसल रहा था

रवि आज अपनी दीदी के बदन को ौरी बेरहमी से मसलने के मुद में नजर आ रहा था जिसका अंदाजा रेखा को अब तक लग चूका था

रवि अब अपने हाथ को थोड़ा ऊपर करता है और रेखा के होठो पर फिरने लगता है

और उसके दोनों होठो को खोल कर अपनी एक ऊँगली रेखा के मुँह में सरका देता है

रेखा तो मनो जमीन ओर पड़ी पड़ी किसी माँ की तरह पिघल रही थी

रवि के हमले लगातार तहज होते जा रहे थे

रवि अपना ोुरा जोर लगा कर अपना लुंड रेखा की गांड में घुसाने पर तुला हुआ था

आहार बिच में पेटीकोट नहीं होता तो पक्का अभी तक रवि का लुंड उसकी दीदी की गांड में घुस चूका होता

रेखा रवि का जोश देखकर आने वाली तबाही के बारे में सोचने लगती है

की उसके कितना मजा आएगा जब उसके छोटे भाई का विशाल लुंड उसकी छूट में जायेगा तो कितना मजा आएगा

रवि अब अपना हाथ रेखा के होठो से हटाता है

अबतक रवि को ऊँगली रेखा के थूक से अच्छी खासी गीली हो चुकी थी

वो अपनी ऊँगली को रेखा के बड़े बड़े निप्पल पर रख कर घूमने लगता है

और थोड़ी hi देर में रेखा का निप्पल उसके hi थूक से सं चूका था

अब रबी अपने हाथ को निचे की और बढ़ता है और अपनी दीदी के पेटीकोट को जांघो से ऊपर की और सरकने लगता है

रेखा को रवि का यु चुना पागल किये जा रहा था

उसका मन कर रहा था की अभी अपनी दोनों जंघे फैला कर अपने चीते भाई के सामने अपनी छूट परोस दे

पर रवि की हरकते रेखा को चुदाई से भी ज्यादा मजा दे रही थी

इधर रवि धीरे धीरे पेटीकोट को ुवार की और सरकता चला जा रहा था

आच्चंक उसके दिमाग में कुछ आता है और वो दुबारा से पेटीकोट निचे की और सरका देता है और अपना हाथ हटा कर रेखा के ोएत पर रख लेता है

रवि का यु अच्चानक रुकना रेखा को बिलकुल भी नहीं भ रहा था

पर रवि तो जैसे आज कुछ और hi सोच कर आया था

रवि रेखा के पेट को फिरसे धीरे धीरे सहलाने लगता है

और फिर अपनी ऊँगली को रेखा के मुँह में दाल कर अच्छे से गिला करता है और दुबारा से होना हाथ रेखा दीदी की पेट पर लेजाता है

और होनी ऊँगली को रेखा की गहरी नाभि में सरका देता है

रवि का लुंड अबतक उसकी दीदी की गांड में अच्छा खासा फसा हुआ था

रवि लगातार धीरे धीरे अपनी कमर को आगे पीछे कर रहा था और रेखा को अपने लुंड के विशाल रूप का अंदाजा करवा रहा था

अब रवि होना हाथ सीधा रेखा के पेटीकोट के नदी ओर ले जाता है और एक पल में hi वो अपनी दीदी के पेटीकोट का नाडा खोल देता है

रवि की इस हरकत से रेखा के चेरे पर एक गहरी मुस्कान आजाती है

रवि की इस हरकत से वो समझ जाती है

अब दिल्ली दूर नहीं .....

रवि पेटीकोट के खुलते hi अपना हाथ सरका कर थोड़ा अंदर करता है और रेखा के पेट के निचले हिस्से को दबोच लेता है

ांफिर वो अपने हाथ को और निचे लेजाने लगता है और थोड़ी hi देर में उसका हाथ अपनी दीदी की छूट के ऊपर हल्की हल्की झाटो को चुने लगता है

रवि अपनी उंगलिया होनी दीदी की झांटो पर घूमने लगता है

और अपने मुँह रेखा की गर्दन पर लगा कर अपनी दीदी की गर्दन चाटने लगता है

रेखा का पूरा बदन पसीने से भीगा हुआ था

रवि को अपनी दीदी का नमकीन पसीना किसी अमृत से काम नहीं लग रहा था

रवि लगातार रेखा को पीठ से गर्दन तक कहते जा रहा था

रेखा रवि के सामने किसी वस्तु की तरह पड़ी थी जिसका रवि जब कहे जैसे कहे वैसे इस्तमाल कर सकता था

अच्चानक से रवि उठ कर बैठ जाता है और सरकता हुआ अपनी दीदी के पैरो की तरफ बढ़ता है

अब रवि रेखा के पंजो को पकड़ कर धीरे धीरे सहलाने लगता है

और अपना मुँह निचे लेजाकर अपनी दीदी के पेअर की सबसे छोटी ऊँगली को अपने मुँह में भर लेता है

रेखा रवि के इस बर्ताव से बहुत खुस हो रही थी उसे आज अंदाजा हो गया था की उसका छोटा भाई अपनी दीदी के जिस्म के हर हिस्से को प्यार कर रहा था

रेखा अभी यह सोच hi रही थी की रवि अपना अगला हमला करता है और अपने दोनों हाथो को ऊपर की और बढ़ता हुआ अपने दोनों हाथो से रेखा का पेटीकोट पकड़ता है और धीरे से उसे खींचने की कोशिश करता है

रेखा ह्वीकत में बहुत भरी थी रवि अपनी इस हरकत में नाकाम रहता है

रेखा को जब पता चलता है की उसका भाई आज अपनी दीदी को पूरा नंगा करना कहता है वो मस्ती में अंदर hi अंदर खुस हो जाती है

रवि फिरसे एक बार पेटीकोट को पकड़ता है और इस बार थोड़ा जोर लगा कर खींचने की कोशिस करता है

रेखा अपने भाई को इतना म्हणत करता देख उसकी थोड़ी हेल्प करने की सोचती है और धीरे से अपनी कमर को ऊपर उठती है और इस बार रवि अपने काम में सससस हो जाता है

और उसकी दीदी का पेटीकोट सरकता हुआ रेखा के पैरो को आजाद कर देता है

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अब रेखा मदर जाट अपने भाई के सामने ौरी नंगी होकर लेती हुई थी

और मौके का फायदा उठाते हुए रेखा अपना एक पेअर आगे की और सरका कर अपनी गांड और छूट को होने भाई के लिए थोड़ा सा खोल देती है

रेखा को नंगा देख कर तो रवि जैसे ोागल हो चूका था वो अपना मुँह सीधा अपनी दीदी की खुली हुई गांड में घुसा देता है

और जोर लगा. लगा कर रेखा की गांड से आ रही मादक महक के मजे लूटने लगता है

अब रेखा की भी हालत खराब होने लगी थी उसकी छूट लगातार पानी छोड़ रही थी

रवि अपनी जीभ निकाल कर रेखा की गांड के छेद पर रख देता है

जिससे रेखा थोड़ा सा उछाल जाती है

पर अब रवि को कोई फरक नहीं पड़ता था वो और आगे बढ़ते हुए अपनी एक ऊँगली को रेखा की गरम और गीली छूट पर रख देता है और ऊपर से निचे की तरफ घूमते हुए अपनी दीदी की छूट का जायजा लेने लगता है

रेखा की सांसे अब ब्बडी तेज़ तेज़ चल रही थी जिसे रवि भी साफ़ सुन सकता था

ओर अब रवि के ऊपर हवस भरी पद चुकी थी और अब उसे अपनी दीदी एक गदरायी हुई मस्त छोड़ने लायक माल लग रही थी

रवि लगातार रेखा की गांड को कहते जा रहा था

रेखा को अबतक ये तो पता चल hi चूका था की उसका छोटा भाई उसकी गांड का दीवाना हो चूका है

अब रवि अपनी ऊँगली को ऊपर ले जाता है और रेखा की छूट के डेन पर लगा देता है और उसे रगंदने लगता है

रेखा तो मनो आज जैसे ोागल hi होने वाली थी उसकी छूट से जांघो तक उसकी छूट से निकला पानी फैला हुआ था

जो अब रवि के हाथो पर भी लग चूका था

अब रवि अपनी ऊँगली को छूट से हटाता है और अपना मुँह भी हटा लेता है

और बैठे बैठे hi रेखा की ऊपर वाली गांड को फैला कर अपनी दीदी की गांड का छेद देखने लगता है

उसे उस छेद में जन्नत नजर आ रही थी

रवि अब अपनी ऊँगली को रेखा की गज़न्द पर लगता है और धीरे से दबाता है

इस बार उसकी ऊँगली एक hi बार में रेखा की गांड में समै जाती है

इस हमले से रेखा थोड़ा सा हिल जाती है

और थोड़ा सा आगे की और सरक जाती है

रवि भी देखता है की कैसे उसकी दीदी हल्का हल्का हिल रही हसि

इस बार वो रुकने की बजाय ऊँगली को और भी जायदा अंदर घुसाने की कोशिस करने लगता है

रेखा को दर्द तो हो रहा था

पर उसे पता था की दर्द में hi तो असली मजा है

और ऊपर से उसे दर्द पहुंचने वाला और कोई नहीं खुद उसका छोटा भाई था

रवि अब ऊँगली को 4-5 बार अपनी दीदी की गांड में अंदर बहार करता है फिर उसे निकल कर सीधा अपने मुँह में घुसा लेता है

और अपनी दीदी की गांड से निकली होनी ऊँगली को मजे से चाटने लगता है

रवि दुबारा से रेखा की गांड फैलता है और इस बार वो अपनी 2 उंगलियों को रेखा की गांड ओर रखता है

रेखा अपनी गांड पर रवि की 2 उंगलिया मैग्सस करके सेहम जाती है और उसे पता चल जाता है की अब आगे क्या होने वाला है

रवि अब अपनी दीदी पर कोई रहें नहीं दिखाना कहता था सुबह ही चीज़ो के बाद से तो जैसे वो पागल hi हो गया था

रवि अपनी दोनों उंगलियों को थोड़ा सा रेखा की गांड ओर दबाता है पर उसकी ऊँगली अंदर नहीं जाती वो सीधा अपने हाथ को रेखा की गज़न्द से हटा कर उसके मुँह पर लेजाता है

रेखा का मुँह हल्का सा खुला हुआ था

रवि अपनी ऊँगली रेखा के होठो पर फिरा कर शैर से अंदर सरका देता है और अपनी दीदी के मुँह में घुमा घुमा कर अपनी ऊँगली को अच्छे से गीली कर लेता है

और दुबारा से रखा की गांड पर रख देता है

इस बार थोड़ा सा जोर लगते hi उसकी उँगलियाँ रेखा की गांड में सरकने लगती है

रेखा की सांसे अब उखड़ने लगती है

रवि लग्स्टर जोर लगता हुआ अपनी दोनों उंगलिया रेखा की गांड में पेल देता है

रवि अपने दूसरे हाथ से पकड़ कर रकेः की गांड को फिअलता है और अपनी दोनों उंगलिया अनादर बहार करने लगता है

रेखा को झा पहले दर्द हो रहा था वही अब उसके चेहरे पर मदहोशी साफ़ नजर आ रही थी

5-7 मं तक दोनों उंगलिया गांड में पेलने के बाद रवि उठ जाता है और और दुबारा से अपनी जगह लेत जाता है

और इस बार वो अपने लुंड को पकड़ कर सड़िहा रेखा की गांड के ऊपर रख देता है

रवि का मोटा सूपड़ा होनी गांड पर महसूस करके रेखा सिहर जाती है और वो समझ जाती है की अगर उसने कुछ नहीं किया तो थोड़ी hi देर में उसका छोटा भाई उसकी गांड की धज्जिया उदा देगा

रेखा अच्चानक से थोड़ा सा हिलती है और पलट कर बिलकुल सीधा होकर लेत जाती है

रवि पहले तो थोड़ा सा दर जाता है पर 1 मिंट बाद hi उसकी हिम्मत दुबारा से बढ़ती है और वो अपने हस्त को आगे बढ़ा कर रेखा की जांघ पर रख देता है

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रेखा अब रवि के अगले हमले के इन्तजार में चुप चाप आँखे बंद किये लम्बी लम्बी सांसे खींच रही थी

रवि आगे बढ़ता है और रेखा के होठो पर होने होठ रख देता है

और अपनी दीदी के रसीले होठो को चूसने लगता है

रवि का लुंड रेखा के पैरो पर टच हो रहा था

रेखा के मन में एक बार तो आता है की होना हाथ आगे बढ़ा कर रवि के लुंड पर रख दे पशर वो रुक जाती हसि और वैसे hi लेते लेते मजा लेने लगती है

रवि अपनी दीदी के होठो को चूसते चूसते hi अपना एक हाथ निचे ले हटा है और रेखा की एक तंग को पकड़ कर थोड़ा सा खींचता है

रेखा तो पहले से hi तैयार बैठी थी सपने भाई के सामने होनी छूट खोलने के लिए

रवि को ज्यादा जोर नहीं लगाना पड़ता और रेखा की एक तंग अब उसके पैरो में ुलर आ चुकी थी और रेखा की छूट खुल के नंगी हो जाती है

रवि देर न करते हुए होना हाथ सीधा रेखा की छूट पर लेजाता है और अपनी दीदी की छूट को दबोच लेता है

रवि के हाथ थोड़ा थोड़ा काँप रहे थे जिसका अंदाजा रेखा को भी लग चूका था

रेखा मौके की नजाकत को समझते हुए अपना मुँह थोड़ा सा खोल देती है और अपने छोटे भाई को अपनी जुबान चूसने का आमंत्रण देती है

रवि भी अब काफी शयना हो चूका था वो बिना देर किये अपनी जीभ रेखा के मुँह के अंदर दाल देता है और इधर निचे होनी एक ऊँगली को अपनी दीदी की छूट में सरका देता है

रेखा किसी जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी

जिसका अंदाजा अभी तक रवि को नहीं लग पाया था

रवि लगातार अपने हमले तेह करता जाता है और अब उससे बर्दास्त नहीं होता और वो उठ कर रेखा के दोनों पैरो को फैला देता है और अब उसकी दीदी की पहली हुई छूट उसके सामने किसी पॉ रोटी की तरह फूल कर आ जाती है

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रवि को साफ़ नजर आ रहा था की उसकी हरकतों की वजह से उसकी दीदी पहले hi बहुत सारा पानी छोड़ चुकी है

रवि देर न करते हुए अपना मुँह अलनी दीदी की रसीली छूट के पास ले जाता है और पहले तो वो होनी नाक लगा कर रेखा की छूट से आ रही मादक महक को सूंघता है

फिर अच्चानक से वो अपनी दीदी की छूट ओर टूट पड़ता है

रेखा इस हमले को जैसे तैसे करके बर्दास्त करती है और अपने पैरो को थोड़ा सा और फैला देती है

अब रवि होनी जुबान को रेखा की गरम छूट पर ऊपर से निचे की तरफ अच्छे से फेरने लगता है

और अपनी दीदी की छूट पर लगी मलाई को धीरे धीरे करके पूरी तरह से चाट कर साफ़ कर देता है

अब रवि अपनी 2 उंगलिना निचे ले जाता है और एक hi बार में उसे अपनी दीदी की छूट में घुसा देता है और दुबारा से होनी जीभ को काम पर लगा देता है

और अपनी तीसरी ऊँगली को थोड़ा निचे एडजस्ट करके रेखा की गांड में घुसा देता है

अब रेखा का छोटा भाई अपनी दीदी को एक साथ तीन चीज़ो का मजा दे रहा था

रेखा को ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ था आज पहली बार था जब कोई मर्द उसकी छूट को अपनी जुबान से चाट रहा था रेखा ज्यादा देर बर्दास्त नहीं कर ोाती और वो अपनी टैंगो को जोरसे दबोच लेती है

रवि पहले तो अपना सर हटाने की कोशिस करता है पर रेखा के पैरो की पकड़ भीत ज्यादा मजबूत थी तो वो दुबारा कोशिश नहीं करता

पर अभी तक उसने अपना काम नहीं रोका था वो लगातार होनी दीदी की छूट और गांड में ऊँगली पेले जा रहा था

थोड़ी hi देर में रेखा अपनी गरम छूट से सारा पानी अपने छोटे भाई को पीला देती है

और अब रेखा के पेअर थोड़े ढीले पड़ते है

और रवि देर न करते हुए दोनों पैरो को पकड़ कर डिबरा से फैला देता है

रेखा अब दुबारा वसे उसी पोजीशन में आजाती है

अब रवि को साफ़ साफ़ अपनी दीदी की भीगी हुई छूट नजर आ रही थी

वो देर न करते है अपनी जीभ को दुबारा से रेखा की छूट पर रख देता है और ऊपर से निचे की तरफ चलते हुए पूरा पानी चाट चाट कर साफ़ करने लगता है

रेखा मजे के मरे दुबारा से गरम होने लगती है

थोड़ी hi देर में रवि अपनी दीदी की छूट को चाट चाट कर साफ़ कर देता है और अब वो ऊपर की और बढ़ता है

रवि के होठ पूरी तरह से चिपचिपे हो चुके थे

रवि ुवार की और बढ़ता हुआ होने होठ रेखा के होठो पर रख देता है

और इस बार रवि का लुंड सीधा उसकी दीदी की छूट पर टकरा जाता है

रवि का लुंड अपनी छूट पर महसूस करके रेखा मचलने लगती है

रवि थोड़ी देर होठ चूसने के बाद अपनी दीदी की चूचियों की तरफ बढ़ता है और एक चुकी को मुँह में भर कर चूसने लगता है

वो कभी निप्पल्स को दातो से काट लेता कभी अपना मुँह बड़ा करके ज्यादा से ज्यादा चुकी को मुँह में भर लेता

और कभी अपने होठो को लगा कर किसी बच्चे की तरह होनी दीदी का दूध पिने लगता

रवि अपना एक हाथ निचे ले जाता है और अपने लुंड को पकड़ कर सीधा रेखा की छूट पर लगाडेटा है

रेखा समझ जाती है की अब वक़्त आ गया है अपने छोटे भाई का लुंड अपनी छूट में लेने का

अब रेखा होनी आँखे बंद किये हुए उस समय का इन्तजार करने लगती है की कब रवि वो झटका मरेगा जिससे उसका लुंड उसकी दीदी की कजुत में समै जायेगा

रवि अपने सुपडे को पकड़ कर रेखा की छूट पर रगड़े जा रहा था

रवि के लिए भी ये सब न्य था वो मजे के मरे होनी सईद बढ़ा देता है और जोरसे रेखा के निप्पल को काट लेता है

Rekha-ahhhhhhhhh.......mhhhhaaaaa

रेखा के मुँह से अच्चानक से एक सिसकी निकल जाती है जिसे रवि सुनते हुए भी अनसुना कर देता है

रवि थोड़ा सा होना लुंड दबाता है एयर उसका सूपड़ा थोड़ा सा रेखा की छूट में घुस जाता है

जिससे दोनों तरफ एक चिंगारी भड़क जाती है

रेखा अपनी टैंगो को ान और भी ज्यादा फैला चुकी थी

और अपने एक हाथ से वो पहले hi चादर का एक कोना पकड़ चुकी थी

और इन्तजार कर रही थी कब रवि का लुंड उसकी छूट में घुसेगा

रवि को अच्चानक से आता नहीं क्या होता है वो उठ जाता है और रेखा के सरे अरमानो पर पानी फेर देता है

रेखा अपने मन में रवि को कोसती है

Rekha-(ab कसे क्या हुआ सेल को इसकी दीदी आइल सामने अपना भोसड़ा खोले पड़ी है और इसे अभी चुदाई नहीं करनी )

असल में रवि अभी भी थोड़ा हिचकिचा रहा था की जो वो कर रहा है वो सही है या गलत

अभी तक रवि का मन साफ़ नहीं हो पाया था

रेखा को वैसे hi छोड़ कर रवि अपनी जगह लेत जाता है और अपनी गांड रेखा की तरफ घुमा देता है और कुछ सोचने लगता है

5 मिंट की ख़ामोशी के बाद रवि फिरसे उठता है और इस बार वो सीधा रेखा के चेहरे के पास आकर बैठ जाता है

और रवि के बैठते hi उसका लुंड सीधा रेखा के गलो पर टकराता है

रेखा की सांसे थम सी गयी थी उसे अब समझ नहीं आ रहा थस की रवि आगे कि करने वाला है

रवि होना हाथ आगे बढ़ता है और रेखा के होठो पर अपनी उँगलियाँ फिरने लगता है

रेखा के होठ बहुत ज्यादा मुलायम थे जिसका अहसास ओकर रवि का लुंड फुदकने लगता है

रवि अब होने लुंड को पकड़ कर रेखा के गज़लों पर मसलने लगता है और धीरे धुरे वो अपने लुंड को रेखा के माथे से लेकर गाल तक हर जगह लगा कर मसलता है

रवि आज कुछ अलग करना कहता था जिसका अंदाजा रेखा को हो गया था

पर अभी तक उसे ये समझ नहीं आ रहा था की अभी थोड़ी देर पहले रवि उसे छोड़ कर लेत गया था और 5 मिंट म hi दुबारा से उठ कर वो अपनी दीदी के चेहरे पर अपना लुंड रगड़ रहा था

खैर रेखा को इससे क्या करना था उसे तो कैसे भी कारकीओने छोटे भाई के लुंड का मजा चाहिए था जो उसे भरपूर मिल रहा था

रवि अच्चानक से होना लुंड रेखा के होठो पर फिरने लगता है

जिसका अहसास रेखा को पागल किये जा रहा था

गर्मी के कारन रेखा के होठ ौरी तरह से सुख चुके थे

रवि होने लुंड को सीधा करके रेखा के होठो के ुवार लगा कर आगे पीछे लार रहा था जिसमे उसे दिक्कत हो रही थी

रवि को एक आईडिया आता है और वो थोड़ा ोीचे होकर अपने हाथ पर बहुत सारा थूक लेता है और होने लुंड को अच्छे से गिला कर लेता है

और लुंड को दुनारा से अपनी दीदी के होठो के ऊपर रख देता है

इस बार रवि का लुंड बड़े आराम से आगे ोीचे हो रहा था

रेखा को समझते देर नहीं लगती की उसके भाई का लुंड एकदम से इतना चिपचिपा कैसे हो गया वो समझ जाती है की अब उसका भाई अपने थूक का इस्तेमाल करके अपने लुंड को होनी दीदी के होठो पर रगड़ रहा है

रेखा से बर्दास्त करना अब मुश्किल हो रहा था

वो अपने होठो को थोड़ा सा खोल देती है जिसकी वजह से अब रवि का लुंड उसके दातो के ुवार आ जाता है .

ओर रवि को तो अभी और आगे बढ़ना था वो होनी एक ऊँगली को जबरदस्ती रेखा के मुँह में घुसता है और उसे थोड़ा सा खोलने की कोशिस करता है जिसमे वो कामयाब भी हो जाता है

और अपने लुंड को दुबारा से पकड़ कर अपनी दीदी के मुँह में डालने लगता है और अपना एक हाथ रेखा की चुकी पर रख देता है

रेखा की हालत अब खराब हो चुकी थी उसे

अब बर्दास्त करना गवारा नहीं था

रेखा होने मुँह को थोड़ा सा रवि की और झुकाती है और अपना मुँह थोड़ा और ज्यादा खोल देती है

रवि बजी मौके का फायदा उठा कर अपना लुंड सीधा रेखा के मुँह में पेल देता है

ज्यादा तो नहीं पर रवि का सूपड़ा अब उसकी दीदी के मुँह में था

रवि पागलो की तरह अपने लुंड की मुठ मरे जा रहा था जबकि उसकी दीदी का खुला मुँह उसे मुखछोडन का खुला निमंत्रण दे रहा था

खैर रवि इस खेल में अभी कच्चा था

और वो अभी बच्चा था

रवि लगातार होनी दीदी के दोनों निप्पल्स को पकड़ कर बरी बरी खींच रहा था

और अपने लुंड को लगातार अपनी दीदी के मुँह में घुसाए हुए मुठिया रहा था

रेखा के मुँह की गर्मी रवि के लुंड को जैसे रवि का लुंड अब अपने मुँह में पिघलने लगी थी

रवि को अब बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था अच्चानक से वो रेखा के एक निप्पल को बहुत जोरसे पकड़ लेता है और अपना लुंड रेखा के मुँह में और जोरसे हिलने लगता है

अउ र आख़िरकार रेखा को आज डायरेक्ट उसके छोटे भाई का वीर्य उसके मुँह में गिरने का अहसास होता है

रवि अपने लुंड की आखिर बून्द तक रेखा के चेहरे पर उड़ेल देता है

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कुछ बुँदे रेखा के चेहरे पर भी गिरती है

रवि अभी भी अपना लुंड लगातार हिलाये जा रहा था और बचा कुछ माल अपनी दीदी के चेहरे पर गिराने में लगा हुआ था

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अबतक रवि रेखा के मुँह को अंदर से बहार तक अपने माल से भर चूका था

जिसे देख कर उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ जाती है

एयर अब वो अपनी जगह वॉयस से लेत जाता है

और अपनी दीदी को पकड़ कर होनी आँखे बंद कर लेता है

रेखा पहले तो दर गयी रही जब रवि उसकी छूट म बिना लुंड डेल उठ गया था

पर अब उसके चेहरे पर संतीआती का भाव साफ़ दिख रहा था आखिर आज उसके भाई ने अपनी दीदी के मुँह में अपना सारा वीर्य गिराया था

रेखा भी बहुत बड़ी चैनल थी वो अगले दिन की प्लानिंग करते हुए अपना चेहरा बिना साफ़ किये वैसे hi सो जाती है

भाई लोगो कहानी कैसी जा रही है जरूर बताये

धन्यवाद्.....
 
अपडेट-32

आजकी की रात रेखा को वो मजा मिला था जिसकी उसने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की थी

कल रत को उसने पहली बार अपने छोटे भाई का लुंड चूसा था

और जल्द hi वो उस लुंड पर चढ़ने वाली थी

सूरज सर पर चढ़ चूका था पर इधर दोनों भाई बेहेन दुनिया से बेखबर होकर नंगे एक दूसरे की बहो में पड़े हुए थे

रेखा की आँख आज रवि से पहले खुल जाती है

वो अपने भाई से पूरी तरह चिपक कर सोई थी

और उसकी मोती मोती जांघो के निचे रवि का लुंड दबा हुआ था

रेखा एक नजर रवि के ऊपर डालती है

और अपना पेअर हटा कर रवि के लुंड को आजाद कर देती है

रेखा से अब बर्दास्त करना मुश्किल था उसे कैसे भी करके अब रवि को उसकी बड़ी दीदी को छोड़ने के लिए मानना था

अब रवि का लुंड सीधा चाट की तरफ तना हुआ था

रवि के लुंड पर उभरी नशो को देख कर रेखा के मुँह में पानी आने लगता है

उसे याद आता है की कैसे रवि ने कल रात आपि दीदी को अपना लुंड चुसाया था और उसके मुँह पर hi ालना सारा वीर्य गिरा दिया था

अछनाक से रेखा अपने हाथ को होने चेहरे पर ले जाती है झा अभी तक रवि का वीर्य इकट्ठा हो रखा था

बस अब वो जेली जैसा बन गया था रात भर में सुख कर

रेखा होनी एक ऊँगली से अपने छोटे भाई के वीर्य को अपने चेहरे से उठती है और उसका जायजा लेती है

और धीरे से वो अपनी जीभ बहार निकल कर रवि का वीर्य चाट लेती है

और दुबारा से रवि का लुंड पकड़ कर सहलाने लगती है

रवि रात में hi अपनी दीदी को काफी गरम कर चूका था जिसका अंदाजा उसे बिलकुल नहीं था वो तो बस यही सोचता था की उसकी दीदी बहुत गहरी नींद में सोती है

इधर रेखा रवि का लुंड पकड़ कर बहुत धीरे धीरे उसके सुपडे की चमड़ी को ऊपर निचे कर रही थी

जब रवि की चमड़ी निचे जाती तो उसका मोटा सूपड़ा खुल कर बहार आजाता है

झा रवि का लुंड काफी कला था वही उसके सुपडे के अंदर का भाग बहुत लाल था जिसे देख कर रेखा के मुँह में ोानी आने लगता है

पर जैसे तैसे वो अपने आपको काबू म करती है .और रवि के लुंड को छोड़ कर उठ के बैठ जाती है

अब रेखा की नजरे रवि को ऊपर से निचे तक घर रही रही थी

इधर रवि बेखबर होकर सोया हुआ. था उसे क्या पता की उसकी दीदी उसके लुंड को देख. कर न जाने क्या क्या सपने देख रही है

रेखा अपना हाथ आगे बढ़ा कर रवि को उठती है

रेखा- अरे उठ जा रात को क्या ोहाड़ तोड़ रहा था जी अभी तक सोया हुआ

रेखा अभी तक बिलकुल नंगी बैठी थी और उसने होने दोनों पेअर फैला रखे थे जिसकी वजह से उसकी छूट साफ़ साफ़ नजर आ रही थी

रेखा एक दो बार रवि को हिलती है

रवि भी अब तक उठ चूका था

रवि होनी आँखे माल्टा हुआ उठ कर बैठ जाता है अच्चानक से उसका ध्यान अपने लुंड पर पड़ता है

उसका लुंड पूरी तरह से खड़ा था

इधर रेखा भी रवि को लगातार घूरे जा रही थी

रवि पास में पड़ी हुई धोती उठा कर जल्दी से अपने लुंड पर दाल लेता है

रेखा को रवि की हरकतों पर हसि आ रही थी कैसे साला उसे नंगा करके अपने आपको धक् रहा है

रेखा- रात को क्या तू पहाड़ खोदता है आज कल जो इतना लेत तक सोया रहता है

रवि की नजर अब पूरी तरह से रेखा की और जाती है और उसे सबसे पहली चीज़ अपनी दीदी की बिना बालो वाली पहली हुई काली छूट दिखाई देती है

जिसे देख कर रवि को रात को हुई साडी चीज़े याद आने लगती है

अच्चानक से रवि का दिमाग ठनकता है

उसने रात को अपनी दीदी का पेटीकोट उतरा था जो वो दुबारा से पहनना भूल गया था

रवि को अब लग रहा था की आज उसका सारा खेल ख़तम हो जायेगा

वही रेखा रवि के चेहरे ओर टेंशन साफ़ देख प् रही थी

रेखा को समझ नहीं आ रहा था की रवि को हुआ क्या है रात को भी वो उसे बस छोड़ने hi वाला था की तभी वो हैट के लेत गया था

रेखा- क्या हुआ तुझे तबियत खराब है क्या

इतना बोलकर रेखा उठ जाती है

और अपनी गांड रवि की और घुमा कर निचे झुक कर वो अपना ब्लाउज उठाने लगती है

अब रवि की आँखों के सामने उसकी सांसे ज्यादा पसंदीदा चीज़ थी

उसकी दीदी की कामुक गांड का छेद जिसे देख कर उसके चेहरे ओर एक मुसकान आ जस्ती है और साडी टेंशन भूल जाता है

रेखा अब तक अपना ब्लाउज पेहेन चुकी थी

और रवि निचे बैठा बैठा बस रेखा को देखे जा रहा था

उसने आज सुबह सुबह hi अपनी दीदी को नंगा देख लिया था जिसकी वजह से उसका लुंड और भी ज्यादा फूल चूका था

रेखा- अरे मेरा पेटीकोट खा गया रात को तो मैं पेहेन कर सोई थी

रवि रेखा की बात सुनकर सकपका जाता है और अपना चेहरा दूसरी और घुमा लेता है

रेखा भी समझदार थी वो समझ जाती है की रवि को थोड़ी देर पहले जो टेंशन थी वो किस बात की थी

रेखा- मैंने अच्छे से नाडा बंधा था तो ये साला खुल कैसे गया

रेखा नंगी खड़ी खड़ी hi साडी बाटे बोल रही थी

रवि भी अब थोड़ी हिम्मत जुटाता है

रवि- दीदी आता नहीं कैसे खुल गया रात को तो आपने पहना था मेने भी देखा था

रेखा- है भाई मुझे याद है मेने सिर्फ ब्लाउज उतरा था पेटीकोट तो पहना था

रवि- दीदी हो सकता है अपने आप खुल गया हो

रेखा- अपने आप तो नहीं खुल सकता म अपने पेटीकोट का नाडा टाइट बांधती हु

रवि- दीदी हम दोनों के अलावा तो कोई और है नहीं कमरे में तो और कोण उतरेगा

रेखा- है तू सही बोल रहा है भाई हो सालता है की रात को सोते वक़्त अपने आप खुल गया हो

वैसे भी मुझे आज कल सोने के बाद होश खा रहता है

रवि- है दीदी अपने आप hi खुल गया होगा

रेखा- चल कोई नई इतनी टेंशन किस बात की कमरे में सिर्फ मेरा छोटा भाई hi तो है

तुझसे मुझे कैसी शर्म

रवि के चेहरे पर झा थोड़ी देर पहले तक टेंशन थी अब उसका चेहरा खुसी के मरे पहला नहीं समै रहा था

रवि को हस्ता हुआ देख कर रेखा भी थोड़ी सी स्माइल करती है और दुबारा से अपने छोटे भाई के सामने होनी गांड खोल कर झुक जाती है

रवि की नजर एक बार फिरसे रेखा की गांड पर पड़ती है

रेखा जान भुज कर झुके झुके एक जोरदार पाद मरती है

जिसकी वजह से उसकी गांड का छेद थोड़ा सा खुलता है और दुबारा से बंद हो जाता है

और इस बार रेखा के पाद की हवा सीधा रवि की नाक में घुसती है जिसे सूंघ कर रवि मस्त हो जाता है

रेखा थोड़ी देर में उठ जाती है और अपना पेटीकोट पेहेन लेती है

रवि अभी भी निचे बैठा हुआ अपनी दीदी की गांड को याद कर रहा था जैसे वो अभी तक उसके सामने hi हो

रेखा- अरे अब तुझे क्या हुआ

ऐसे hi बैठा रहेगा या संडास करने भी चलेगा

रेखा की आवाज सुनक रवि अपनी सपनो की दुनिया से बहार आता है और एक दम से खड़ा हो जाता है

जिससे उसके लुंड ओर पड़ी धोती निचे गिर जाती है और अब उसका लुंड हवा में लहरा रहा था

रेखा की नजर रवि के लुंड पर पड़ती है

और इधर रवि को भी अपनी स्थिति का नडजा होता है और वो जल्दी से धोती को उठा कर अपना लुंड धक् लेता है

रेखा को इस बार बहुत जोरसे हसि आती है

और वो हस्ते हुए कमरे से बहसर निकल जाती है

रेखा- जल्दी कर मेरे प्यारे भाई अपनी दीदी को संडास करवाने ले चल

नहीं तो मैं यही हुग दूंगी फिर तुहि साफ़ करना अपनी दीदी की हगवास

रवि जल्दी hi धोती को लपेट कर बहार आजाता है और दोनों भाई बेहेन घर से निकल कर पीछे की और जाने लगते है

रेखा अपने डेली वाली जगह पर बैठ जाती है पर आज रवि रेखा के कुछ ज्यादा hi नजदीक बैठा था

रेखा तिरछी नजर से रवि को देखती है और उसे मस्ती सूझती है

वो थोड़ा सा जोर लगती है और एक के बाद एक कसी साडी हगवास उसकी गांड से बहार आने लगती है

जिसे देख कर रवि पागल हो जाता है और उसका हाथ उसके लुंड पर चला जाता है

इधर रवि आँखे फाड़ फाड़ कर अपनी दीदी की गांड से निकलती हगवास देख कर तेजी से लुंड हिला रहा था

उधर आज रेखा की हगवास रुकने का नाम नहीं ले रही थी

खैर थोड़ी hi देर में रेखापनी साडी हगवास निकल चुकी थी

रेखा- भाई तेरा हो गया तो मुझे पानी देदे

रवि को तो इसी पल का इन्तजार था वो जल्दी से पानी का लोटा उठता है और रेखा के नजदीक पहुंच कर खड़ा हो जाता है

रवि- ये लो दीदी

रेखा- रवि आज भी मेरे हाथो में दर्द हो रहा है तू अपनी दीदी की गांड को आज भी धो दे न

रवि- ठीक है दीदी कोई बात नहीं मैं हु न

रेखा- तुझे अपनी दीदी की गांड पर लगी हगवास साफ़ करने में गन्दा तो नहीं लगता न

रवि- कैसी बात कर रही हो दीदी

मुझे क्यों गन्दा लगेगा आप तो दीदी हो मेरी

रेखा- कितना अच्छा भाई है मेरा

तुझे पता है तू नहीं होता तो ये टट्टी दिन भर मेरी गांड पर लगी रहती

मेरे हाथो में जब तक चोट रहती

रवि- दीदी आप इतना मत सोचो मैं अभी धो देता हु

रवि इसी पल का इन्तजार कर रहा था वो बिना मौका गवाए रेखा के ोीचे बैठ जाता है और अपने हाथ को सीधा रेखा की गांड पर ले जाता है और अच्छे से रगड़ने लगता है

रवि ने अबतक पानी नहीं डाला था वो बस रेखा की गांड पर लगी थोड़ी बहुत हगवास को अच्छे से अपनी दीदी के गांड के छेद पर मसल रहा था

रेखा आँखे बंद किये हुए इस लम्हे का ोुरा मजा लेना कहती थी

रवि अब थोड़ा थोड़ा ोानी दाल कर अपनी दीदी की छूट और गांड को अच्छे से साफ़ करता है

रवि जब जब अपना हाथ रेखा की गांड ओर कगता उसका मन करता की वो अभी अपनी ऊँगली अंदर दाल दे

आखिर कार रवि का कण्ट्रोल खुद पर से छूट जाता है और वो गांड धोते धोते एक hi बार में अपनी ऊँगली को रेखा की गांड में पेल देता है

रेखा को इस हमले की उम्मीद नहीं थी

रेखा अच्चानक हुए हमले से सिहर जाती है

रेखा- अह्ह्ह्हह्हह मैय्याहा क्या कर रहा है भाई तू

रवि की हिम्मत भी अब थोड़ी थोड़ी बढ़ चुकी थी

रवि- दीदी ाऊंडर थोड़ी सी हगवास रह गयी है

रेखा- तो तू क्या उसे अपनी ऊँगली से निकल रहा है

रवि- है दीदी रुको बस निकल गयी

रवि धीरे धीरे अपनी बैक्जे वाली ऊँगली को अपनी दीदी की गांड में अंदर बहार किये जा रहा था

इधर रेखा आज खुली आँखों से जन्नत देख रही थी

करीब 2-3 मिंट तक एक ऊँगली पेलने के बाद

रवि अपनी ऊँगली निकाल लेता है

पॉटी करने की पोजीशन में बैठने के कारन अबतक रेखा की गांड का होल काफी खुल चूका था जिसकी वजह से रवि को अब अपनी दीदी की गांड के अंदर का एरिया भी थोड़ा थोड़ा दिख रहा था

रेखा- निकल गया क्या भाई

रवि- रुको रुको दीदी बस निकल गया

ये बोलकर रवि अपनी दो उंगलिया रेखा की गांड पर रखता है और एक hi बार में अंदर सरका देता है

इस हमले से रेखा तड़प जाती है एयर थोड़ा आगे की और झुक जाती है

अब रवि लगातार होनी दोनों उंगलियों को मध्यम स्पीड में अपनी दीदी की गांड में अंदर बहार किये जा रहा था

इधर रेखा की हालत भी खराब हो चुकी थी उसका एक हाथ अब तक उसकी चूचियों पर जा चूका था

और अब रेखा अपने निप्पल को पकड़ कर मरोड़ रही थी बेरहमी के साथ

और रेखा की छूट का क्या hi कहना

बैठे बैठे hi उसकी छूट इतना ोानी छोड़ रही थी की 3-4 सेकंड के गैप पर उसकी छूट से लगातार पानी जमीन ओर गिर रहा था

तप... तप्प्प्प्प ...तप्प्प्प्प. तप्प्प्प्प

रवि को लगता है की वो कुछ ज्यादा hi जल्दबाज़ी कर रहा है

वो अपनी दोनों उंगलियों को रेखा की गांड से अचानक से निकल लेता है

रेखा पलट कर रवि को देखती है

उसके चेहरे पर एक परशान भाव था की आखिर रवि ने अपनी ऊँगली क्यों निकली

रेखा की हालत वाकई में ख़राब हो चुकी थी

उसकी आँखे पूरी लाल हो चुकी थी चेहरा भी पूरी तरह से लाल था

सांसे फूल रही थी

रेखा- क्या हुआ रवि

रेखा की आवाज में मदहोशी साफ़ साफ़ महसूस की जा सकती थी

रवि अपनी दोनों उंगलियों को रेखा को दिखता है

रवि- दीदी चलो निकल गया

रेखा- बहुत जल्दी निकल गया

अब दोनों भाई बेहेन घर की और बढ़ने लगते है

रेखा का दिमाग अब ौरी तरह से खराब हो चूका था उसे अब बस लुंड चाहिए था अपने छोटे भाई का लुंड

रेखा घर में घुसते hi मैं दरवाजा बंद कर देती है

रवि- क्या हुआ दीदी दरवाजा क्यों बंद कर दिया

रेखा - मुझे नींद आ रही है मैं जा रही हु सोने

रवि- पर दीदी खाना भी तो बनाना है न मुझे खेतो पर जाना है

रेखा- तू अपनी दीदी की साडी बाटे मंटा है न रवि

रवि- है दीदी

रेखा- तो एक और बात मानेगा

रवि- है जरूर आप बोलो दीदी

रेखा- आज तू खेतो पर मत जा

रवि- पर क्यों दीदी

रेखा- देख तू अब सवाल जवाब मत कर

बोल मानेगा या नहीं अपनी दीदी की बात

रवि- पर दीदी करेंगे क्या हम पूरा दिन

रेखा- आज हम दिन भर सोयेंगे

सोने की बात सुनकर रवि भी थोड़ा शांत हो जाता है

रवि- दीदी नींद तो मुझे भी आ रही है पर खेतो पर भी तो काम है आज

रेखा- जा तू मेरी बात नहीं मानेगा तो जा खेतो पर

रवि- अरे दीदी मेने ऐसा तो नहीं खा की मैं खेत पर जा रहा हु

चलो आज दम दिनभर सोयेंगे

ये सुनकर रेखा का चेहरा भी खिल उठता है

रेखा- ये हुई न बात मेरे भाई

और आगे बढ़ कर रेखा रवि को अपनी बहो में मलभर लेती है

रवि को अपनी छाती पर रेखा की विशाल चूचिया साफ़ महसूस हो रही थी जिसकी वजह से उसका लुंड खड़ा होकर अपनी दीदी के पैरो में टक्कर मरने लगता है ......
 
अपडेट- 33

रेखा चल जल्दी आजा कमरे में

दोनों भाई बेहेन कमरे में आजाते है

और रेखा बिना कुछ बोले hi अपने ब्लाउज के सरे हुक खोल कर उसे अपने शरीर से अलग कर देती है

रवि भी अपनी बनियान उतर कर अब तक लेत चूका था और रेखा को उसकी धोती में हल्का सा उभर साफ़ नजर आ रहा था

अच्चानक से रेखा वो करती है जिससे रवि एक दम से पगला जाता है

रेखा अपने पेटीकोट के नदी को एक hi बार में खींच कर खोल देती है और उसका पेटीकोट उसके पैरो से सरकता हुआ सीधा निचे गिर जाता है

अब रेखा मादरजात अपने चीते भाई के सामने बिलकुल नंगी खड़ी थी

रवि अपना मुँह खोले अपनी दीदी का रान्दीपना देख रहा था

रेखा- ऐसे क्या देख रहा है जैसे तुम पहले कभी अपनी दीदी को नंगा नहीं देखा

रवि की नजर रेखा की छूट पर थी

रेखा- अच्छा तू यह सोच रहा है की मैंने आज अपना पेटीकोट क्यों उतर दिया है न बोल

रवि- है दीदी

रेखा- अब तो वैसे भी तू अपनी दीदी का सब कुछ देख hi चूका है तो अब तुझसे क्या शर्माना

और वैसे भी तू तो मेरा छोटा भाई है न तुझसे कैसी शर्म

ये बोलकर रेखा रवि की और मुँह करके लेत जाती है और रवि अभी बिलकुल सीधा लेता हुआ था

और अपनी दीदी को एक दम नंगा देख कर अब तक उसका लुंड अपनी पूरी औक़ात में आ चूका था

रेखा- तेरी दीदी तेरे सामने नंगी लेती है और तू अभी तक इस धोती को लपेटे हुए है

ये बोलकर रेखा होने हाथ से हलकी सी चपत रवि के लुंड पर लगा देती है

रेखा की इस हरकत से रवि अंदर तक हिल जाता है

रवि अभी भी चुप चाप था

रेखा- बोल न कुछ

रवि- दीदी मुझे शर्म आती है

रेखा- वह जी वह तेरी दीदी तेरे सामने अपना घोड़ी जैसा गदराया जिस्म नंगा किये पड़ी है और तुझे शर्म आ रही है

सही hi खा है किसी ने कलयुग में सब उल्टा होता है

रवि को शमराम तो काम आ रही थी पर इस वक़्त उसका लुंड ौरी तरह से खड़ा था

उसे लग रहा थस की उसकी दीदी कहि उसका लुंड देख कर बुरा न मान जाये

रवि- नहीं दीदी ऐसा नहीं है

रेखा- ऐसा नहीं है वैसा नहीं हसि तो कैसा है

रवि अभी कुछ बोलता उससे पहले hi रेखा अपना हाथ आगे बढ़ा कर रवि की धोती की गत खोल देती है और एक hi झटके में रवि की धोती खींच कर उसके लुंड को आजाद कर देती है

रेखा- ये हुई न बात अब हम दोनों के बिच कोई शर्म नहीं है

रवि चुप चाप अपनी दीदी को देख रहा था जो उसके लुंड को खा जाने वाली नजरो से देख रही थी

रवि- दीदी आप ऐसे क्या देख रही हो

रेखा- देख रही हु की मेरा छोटा भाई कितना बड़ा हो गया है

लगता है की अभी कल hi की बात है जब मैं तुझे अपनी गॉड में खिलाती थी

पर अब तो तुझे देख कर लगता है की तू अब अपनी दीदी को अपनी गॉड में खिलने लायक हो गया है

रवि को जल्दी थी की कब रेखा सजाये और वो अपना काम चालू करे

पर आज रेखा के मन में कुछ और hi था आज वो अपने बच भाई बेहेन की दिवार ौरी तरह से गिरा देना छाती थी

रवि- दीदी आपको नींद नहीं आ रही क्या

रेखा रवि की बात सुनकर समझ जाती है की उसे किस बात की जल्दी है

रेखा- रात भर सोया है अभी तुझे और सोना है

रवि- दीदी आवे hi तो खा था की आपको नींद आ रही है .

रेखा- मेने खा था की मुझे तेरे साथ सोना है समझा

रवि को रेखा की पूरी बात समझ नहीं आती पर वो दुबारा कोई सवाल नहीं करता

इधर रेखा लगातार अपने भाई का लुंड घूरे जा रही थी

रेखा की आँखे ौरी तरह से लाल हो चुकी थी उसकी छूट से पानी निकलना शुरू हो चूका था

रेखा का शरीर किसी गरम भट्टी की तरह टप्प रहा था .

रवि को अपनी दीदी के शरीर से निकल रही गर्मी साफ़ महसूस हो रही थी

रेखा अपना हाथ आहे बढ़ा कर रवि की छाती के ऊपर दाल देती है और थोड़ा सा खिसक कर रवि से चिपक जाती है

रेखा- तू तो बहुत बड़ा हो गया है रे रवि

रवि- नहीं दीदी मैं अभी भी आपका वही छोटा भाई हु

रेखा- है तो तू छोटा भाई पर अब तेरा हथियार देख कर लगता है की तू काफी बड़ा हो गया है

इस बार रवि समझ जाता है की उसकी दीदी उसके लुंड के बारे में बात कर रही है

रवि को सूझ नहीं रहा था की वो आगे क्या जवाब दे

रेखा- लगता है की अब जल्दी से तेरी शादी करनी पड़ेगी

रवि- क्यों दीदी

रेखा- तुझे अब एक औरत की जरूरत है मेरे भाई समझा इसलिए करनी पड़ेगी शादी

रवि- दीदी मुझे शादी नहीं करनी

रेखा- तो फिर तू इसका क्या करेगा ये ऐसे hi खड़ा रहेगा हमेशा

ये बोलकर रेखा होना हाथ बढ़ा कर ीवी का लुंड पकड़ लेती है

रेखा का हाथ कागते hi रवि पागल जैसा हो जाता है

और रवि का लुंड एक झटका खता है जिसे रेखा भी महसूस करती है

रवि बिकुल चुपचाप पड़ा हुआ था

आज उसकी दीदी ने खुद अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसका लुंड पकड़ा था जिसके अहसास से वो पागल सा हुआ जा रहा था

रेखा- बोल न तू क्या इस हमेशा hi ऐसे खड़ा करके घूमता रहेगा

रवि- मैं क्या कृ दीदी ये अपने आप hi खड़ा हो जाता है

रेखा- इसलिए तो ङोल रही हु तू शादी करके एक गदराई हुई औरत लिया और अपने लुंड की ोयास बुझा ले समझा मेरे बुद्धू भाई

रास्त को हुई घटना और सुबह हुई चीज़ो के बाद से रेखा भी अपना आप खो चुकी थी

और अब वो साडी बाटे सीधा सीधा बोल रही थी

रवि- नहीं दीदी मुझे नहीं करनी शादी

रेखा बाटे करते करते बड़ी hi आराम से रवि का लुंड ऊपर से लेकर निचे तक सहलाये जा रही थी

मस्ती में रवि की आँखे बंद हो चुकी थी

रेखा- मतलब तुझे औरत नहीं चाइये अपने लुंड की प्यास बुझाने के लिए

रवि- दीदी मैं हमेशा ाओंके hi साथ रहूंगा और रही बात शादी की तो मैं शादी भी नहीं करूंगा

रेखा- तो इसका क्या करेगा मेरे प्यारे छोटे भाई

ये बात बोलकर रेखा होने नाख़ून को जोरसे रवि के सुपडे पर गदा देती है

जिससे रवि मचल कर रह जाता है

रेखा अब होने हाथो की स्पीड थोड़ा बढ़ा चुकी थी और अपने भाई के लुंड को अच्छे से मुठिया रही थी

रवि- दीदी मेरे पास एक औरत तो पहले से hi है

रेखा- ाचा जी तो कोण है वो औरत

रवि- दीदी आप होना मेरी प्यारी दीदी

रेखा- अच्छा जी तो अब तुझे तेरी दीदी एक औरत लगती है चल कोई बात नहीं

पर रु हमेशा अपनी दीदी के साथ तो नहीं रह सकता न

तुझे कोई तो ऐसी औरत चाहिए जिसे तू पटक पटक कर छोड़ सके

इतना बोलकर रेखा अपने हाथ को रवि के लुंड से हटती है और ऊपर बहुत सारा थूक लेजर दुबारा से अपना हाथ अपने छोटे भाई के लुंड पर रख देती है

और अपना थूक रवि के पुरे लुंड पर मसल मसला कर लगाने लगती है

अब रेखा का हाथ बड़े प्यार से ऊपर से निचे रवि के लुंड की जड़ तक जा रहा था

रवि को ऐसा अहसास कभी नहीं हुआ था वो होनी नजर उठा कर अपने लुंड पर डालता है

कमरे में लूरि तरह से रौशनी आ रही थी

रवि को अपने लुंड ओर रेखा का थूक नजर आटा है जिसकी वजह से रवि का लुंड किसी हिरे की तरह चमक रहा था

रवि अपना सर निचे गिरा लेता है और मजे से उसकी आँखे बंद हो जाती है

रेखा अब अपनी हथेली को थोड़ा टाइट कर लेती है

और लगातार अपने हाथ को धीरे धीरे अपने छोटे भाई के लुंड पर फेरने लगती है

रेखा-. तो मतलब तू हमेषा मेरे साथ hi रहेगा शादी नहीं करेगा

रवि की आवाज तो नहीं निकल रही थी ओर जैसे तैसे वो हिम्मत जूता कर बोलता है

रवि- नहीं दीदी म कभी शादी नहीं करूंगा और हमेशा आपके साथ hi रहूंगा

रेखा- और तू हमेशा अपनी दीदी के साथ ऐसे hi नंगा सोयेगा

रवि इस बार रेखा की बात का जवाब नहीं दे पता

रेखा अब अपने अंगूठे के नाख़ून से लगातार रवि के लुंड पर चोट दे रही थी जिससे रवि और भी ज्यादा गर्म हुआ जा रहा था

रेखा- बोल न भाई

रवि- दीदी है मैं ऐसी hi ाओंके साथ हमेशा सोऊंगा

रेखा- पर तुझे एक औरत तो चाहिए न जिसको तू पसंद कार्ट्स हो

रवि- दीदी मैं तो सिर्फ आपको पसंद करता हु

रेखा- तो तू क्या अपनी दीदी से hi शादी करेगा

अब रेखा के हाथ काफी ज्यादा हद तक रवि के लुंड को अपनी गिरफ्त में ले चुके थे

रेखा एक मांजी हुई खिलाडी थी वो भले hi मुट्ठी को जोर लगाकर रवि का लुंड निचोड़ नहीं थी

पर वही दिस्री तरफ वो अपने हाथो से बहुत शैर धीरे रवि का लुंड मुठिया रही थी

जिससे रवि को काफी मजा आ रहा था

रवि- मुझे नहीं पता दीदी

रेखा- बताना तो तुझे पड़ेगा hi मेरे भाई

रवि- है दीदी मैं आपसे hi शादी करलूँगा और हमेशा अपनी दीदी के साथ hi रहूंगा

रेखा- मतलब तू अपनी दीदी से शादी करके अपनी दीदी को hi पटक पटक कर छोड़ेगा

रवि- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.... डीडीई रुक जाओ रुको न

इतना बोलते बोलते hi रवि हुए रवि का लुंड का ज्वाला मुखी फुट जाता है और उसका सारा माल धीरे धीरे रखा के हाथो पर गिरने लगता है

रेखा के हाथ लगातार चल रहे थे वो रवि के लुंड को आखिरी बून्द निकलने तक निचोड़ती रहती है

अब रवि का लुंड थोड़ा ढीला पड़ता है और रेखा भी अपना हाथ हटा लेती है पर उसका पूरा हाथ उसके छोटे भाई के वीर्य से सना हुआ था

रेखा - रवि बोल न तू अपनी दीदी से शादी करेगा क्या

रवि रेखा की और देखता है और रेखा देर न करते हुए रवि के वीर्य से शनी एक ऊँगली अपने मुँह में भर लेती है

रवि रेखा को अपना माल चाटते हुए देख कर पागल सा हो जाता है

अब उसे ौरी बात समझ में आ जाती है की उसकी दीदी भी उसे उतना hi कहती है जितना की वो अपनी दीदी को कहता है

रवि- दीदी बस मुझे अब जिंदगी भर आपके साथ रहना है कहे कुछ भी हो

रेखा- इसके लिए तो तुझे अपनी दीदी से शादी करनी पड़ेगी बोल करेगा तू अपनी hi दीदी से शादी

रवि- है दीदी मैं करूंगा आपसे शादी और हमेशा आपको अपने साथ hi रखूँगा

रवि की बात सिनकर रेखा के चेहरे पर मुस्कान आजाती है

आखिर वो अपने चीते भाई से जो बुलवाना कहती थी वो उसमे कामयाब हो चुकी थी

रेखा अब रवि को दिखती हुई दिस्री ऊँगली मुँह में दाल लेती है

रवि बस पड़े पड़े अपनी दीदी का रान्दीपना देख रहा था

रेखा- मतलब अब मेरा छोटा भाई hi मेरी मांग भरेगा

रवि- है दीदी मैं आपकी मांग भरूंगा

रेखा- मतलब तू अपनी hi दीदी से शादी करके उसे पटक पटक कर मसल कर छोड़ेगा

रेखा की बात सुनकर रवि का मुँह खुला का खुला रह जाता है

रवि को समझ नहीं आ रहा था की वो अपनी दीदीकी इस बात का क्या जवाब दे

रवि चुपचाप वैसे hi पड़ा रहता है

रेखा भी समझ प् रही थी की रवि अभी ौरी तरह नहीं खुल पाया है

आखिर था तो वो छोटा भाई hi

रेखा- चल ठीक हसि मेरी बात का जवाब मत दे पर एक चीज़ का तो तुझे जवाब देना hi पड़ेगा

रवि- बोलो दीदी

रेखा- तुझे मैं कैसी लगती हु भाई

रवि- दीदी आप तो मुझे हमेशा hi अच्छी लगती हो

रेखा- अरे बुद्धू मेरा मतलब एक औरत की नजर से मैं तुझे कैसी लगती हु

रवि- दीदी आप बहुत अच्छी लगती हो मुझे एक औरत के रूप में

आप सच में एक गदराई हुई मस्त औरत हो

रेखा की बात सुनकर रेखा का चेहरा खिल उठता है

रेखा- मतलब अब मेरा भाई अपनी दीदी से शादी करने के लिए तैयार है

रवि- दीदी पर लोग क्या कहेंगे

रेखा- तू अपनी बता लोगो की मुझ पर छोड़ दे

तेरे मन में क्या है तू अपनी दीदी के साथ जिंदगी बिताना कहता है या नहीं

रवि- है दीदी मैं आपसे शादी करूंगा और आपके साथ hi अपनी जिंदगी बिताऊंगा

रेखा रवि की बात सुनकर फटाक से खड़ी होती है और झुक कर संदूक खोलने लगती है

रवि की नजरे अब अपनी दीदी की गांड के छेद पर गड जाती है

थोड़ी hi देर में रेखा एक पोटली लेकर आती है

रवि- ये क्या है दीदी

रेखा- पहले खड़ा तो हो बुद्धू

रवि खड़ा हो जाता है उसका लुंड अबतक थोड़ा थोड़ा खड़ा हो चूका था और अपनी दीदी के सामने hi हवा में झूल रहा था

रवि- अब तो बताओ दीदी क्या है इस पोटली में

रेखा पोटली को खोलती है उसमे एक मंगल सूत्र था जो उसकी माँ ने रेखा की शादी के लिए रखा था

रेखा ले अपनी दीदी को मंगलसूत्र पहना और बना ले मुझे हमेशा हमेशा के लिए अपना

रवि होने कपट हाथो को आगे बढ़ता है और मंगलसूत्र पकड़ कर सीधा रेखा के गले में दाल देता है

अब दोनों भाई बेहेन के चेहरे पर एक मुस्कान थी

रवि- दीदी अब आप हमेशा के लिए मेरी हो गयी न अब मैं आपको कभी अपने से अलग नहीं होने दूंगा

ये बोलकर रवि रेखा के गले लग जाता है

रवि की खुलजी का ठिकाना नहीं था वो सच में रेखा को कहने लगा था

रेखा- अरे इतना उतावला मत हो मेरे बुद्धू भाई अभी हमारी सदी संपन्न नहीं हुई है

रवि रेखा से अलग होता है और एक सवालिया नजर से रेखा को देखने लगता है

रेखा- अरे बुद्धू पहले ये सिंदूर तो लगा

और भर दे अपनी दीदी की मांग में अपने नाम का सिंदूर

रवि बिना सवाल के सिंगुर की एक चुटकी लेता है और रेखा की मांग में खींचता हुआ ुवार की और भर देता है

रेखा तुरंत hi झुक कर रवि के पेअर चुटी है

अब रेखा इतनी खुस थी की वो खुसी के मरे उछलने लगती है

रवि की नजर तो अब उसकी दीदी की उछलती हुई चूचियों पारर जा गड़ी थी

रेखा की आँखों में आंसू आ गए थे

रेखा- तुझे नहीं पता मेरे प्यारे भाई आज तूने मेरे दिल से और दिमाग से कितना बड़ा बोझ काम कर दिया है

मैंने तो सोचा था की इस जनम में कभी मेरी शादी नहीं होगी

पर देख तो मुझे कितना मस्त दूल्हा मिला है

रेखा आहे बढ़ कर रवि का लुंड पकड़ लेरी है और लुंड को पकड़ कर अपनी और खींचती है

रेखा रवि को अपनी बहो में भर लेती है

दोनों भाई बहनो की आँखों में थोड़े थोड़े आंसू थे

अब दोनों एक दूसरे में समै जाना कहते थे

5मिंट तक ऐसे hi गले लगने के बाद दोनों अलग होते है

रेखा- कैसा लगा तुझे एक मस्त गदराई हुई घोड़ी से शाद्दी करके बोल भाई

रवि- दीदी बहुत अच्छा लग रहा है मुझे इस बात की खुसी है की अब मैं जिंदगी भर आपके साथ रहूंगा और दीदी अब तो हम दोनों हमेशा साथ में hi सोयेंगे न पति पत्नी की तरह

रेखा- है मेरे भाई है अब से हम जिंदगी भर साथ रहेंगे और सिर्फ मौत hi हमे जुड़ा कर सकती है

रवि - दीदी चलो खाना बना लो बहुत भूक लगी है फिर खाना खा कर दुबारा सोयेंगे साथ में

रवि को अब यु उतावला होता देख रेखा फूली नहीं समै रही थी

रेखा- अच्छा ठीक है तू रुक मैं कुछ हल्का. फुल्का बना कर लती हु

रबी ठीक है दीदी पर जल्दी बनाना

रेखा- जल्दी तुझे क्या ट्रैन पकड़नी है क्या

रवि- दीदी बस आप जल्दी से जल्दी खाना बना कर आओ

रेखा-. ठीक है प्यारे पति देव जी

ये बोलकर रेखा आहे बढ़ती है और रवि के गाल पकड़ कर खींच लेती है

और वैसे hi नंगी उठ के अपनी गांड मटकती हुई बहार को जाने लगती है

और रवि एक नजर अपनी दीदी की चौड़ी गांड ओर डालता है और वही नंगा hi लेत जाता है

रवि भी काफी खुस था उधर रेखा की खुसी. का भी ठिकाना नहीं था

अब दोनों भाई बेहेन अपने बिच की भाई बेहेन की दिवार को गिरा कर एक नए रिश्ते में बांध चुके थे ......
 
अपडेट-34

रेखा इधर नंगी hi बैठ कर होने छोटे भाई के लिए खाना बना रही थी

उसे आज वो चीज़ मिल गयी थी जिसके लिए पता नहीं कितनी hi बार रेखा ने अपनी किस्मत को कोसा था

आज इसकी शादी हो गयी थी

ज्यादा धूम धाम से तो नहीं हो पायी थी पर उसे इस बात की खुसी थी की उसके छोटे भाई ने उसकी मांग भरके उसे अपनी सुहागन बना लिया

रेखा अब रवि को हर सुख देने के लिए तैयार थी वो भी खुली आँखों से

इतने दिनों से जो सोने का नाटक वो कर रही थी अब वक़्त आ गया था उस नाटक को ख़तम करने का

रेखा जल्दी hi खाना बना लेती है

और एक थाली में खाना परोस कर नंगी hi होने छोटे भ्सी के पास पहुंच जाती है

रेखा- चल उठ जा बन गया खाना

रवि रेखा की आवाज सुनते hi फटक से उठ कर बैठ जाता है

रेखा भी थाली को निचे रखती हुई रवि के ठीक सामने आती पलटी मार के बैठ जाती है

अब रेखा की छूट खुल के रवि की नजरो के सामने आजाती है

जिसे रवि एक तक देखे जा रहा था

रेखा रवि की नजरे भाप जाती है

रेखा इस खेल में एक माहिर खिलाडी थी वो रवि को और ज्यादा गरम करना कहती थी

रेखा अच्चानक से अपने दोनों पैरो को उठा कर घुटनो से मोड़ लेती है और दोनों को पूरी तरह से खोल देती है

अब रवि की हालत खराब होना चालू हो चुकी थी

उसका लुंड जो अभी हल्का सा hi टाइट हुआ था

अपनी दीदी की खुली छूट देख कर धीरे धीरे अपना सर उठाने लगता है

रेखा मि नजरे भी लगातार रवि के लुंड को hi घर रही थी

रेखा की नजर के सामने hi रवि ला लुंड धीरे धीरे खड़ा होता हुआ एक विशाल रूप लेलेता है

जिसे देख कर एक पाक के लिए तो रेखा. का हलक सुख जाता है पर अगले hi. पल उसे इस विशाल लुंड से होने वाली चुदाई का अहसास पागल कर देता गई है

रेखा- क्या देख रहा है भाई अब तो सब तेरे नाम कर दिया तेरी दीदी ने अभी भी देखता hi रहेगा क्या

रवि- दीदी मैं आपको देख रहा हु आप बिना कपड़ो के तो और भी. ज्यादा अच्छी दिखती हो

रेखा- अच्छा तो मेरे छोटे भाई को अपनी दीदी को नंगा देखने में मजा आता है

रेखा की बात सुनकर रवि थोड़ा सा शर्मा जाता है और अपनी गर्दन निचे कर लेता है

रेखा( इसकी शर्म का कुछ करना ोडेगा जब तक ये मुझसे खुल कर बार नहीं करेगा तब तक मजा नहीं आएगा चुदाई में)

रेखा एक निवाला उठती है और रवि को खिला देती है

रवि भी अपनी दीदी को एक निवाला खिलता है जैसे hi वो होना हाथ वापस लेता है रेखा उसे अपने हाथ से पकड़ कर रवि की एक ऊँगली अपने मुँह में घुसा लेती है और बड़े hi मादक अंदाज में चूसने लगती है

थोड़ी hi देर में दोनों भाई बेहेन एक दूसरे को खाना खिला चुके थे

रेखा देर न करते हुए बर्तन बहार आंगन में रख कर वापस आ जाती है

रवि भी अबतक लेत चूका था उसका लुंड रेखा की आँखों के सामने लहरा रहा था जिसे देख कर रेखा की छूट और मुँह में पानी आ जाता है

रेखा होनी जगह पर आकर लेत जाती है

रेखा- चल अब तभी सजा .

रवि- दीदी अब तो हमारी शादी हो गयी है न

रेखा- है भाई अब हम पति पत्नी है

रवि अब तक लेत चूका था

दोनों भाई बेहेन ोइथ के बल लेते थे रेखा की नजरे रवि के लुंड से हटने का नाम नहीं ले रही थी

रवि- मतलब जैसे सबकी पत्नी होती है वैसे hi आओ भी मेरी पत्नी हो

रेखा- तुझे अभी कोई डॉट है क्या ये देख सिंदूर तेरे नाम का

रेखा होनी मांग की तरफ इशारा करके कहती है

रवि- तो दीदी अब हम आगे क्या करेंगे

रेखा- अब आगे क्या करना है शादी हो गयी अब तो बहुत सरे बच्चे. पैदा करने है बस

रेखा की बात सुनकर रवि का मुँह खुला का खुला रह जाता है

रवि- पर दीदी अगर बहार किसी को पता चला की हम भाई बेहेन ने शादी कर्ली है तो लोग क्या कहेंगे

रेखा- तू अपनी दीदी से प्यार करता है या लोगो से

रवि- अपनी दीदी से

रेखा- तो ज्यादा मत सोच जैसे मैं बोलू तू वैसे hi करना कोई दिखात नहीं होगी समझे प्यारे पति देव

रवि- ठीक है दीदी जैसा आप बोलोगी नैन वैसा hi करूंगा

रेखा- है और एक चीज़ तू हमेशा मुझे दीदी hi बोलना

तेरे मुँह से दीदी सुनकर बड़ा सुकून मिलता है

रवि - आपतो दीदी hi हो मेरी

रेखा- भूल गया मैं तेरी धर्मपत्नी भी हु

रवि- जो भी हो दीदी पर म आपको दीदी hi बोलूंगा

रेखा- कितना अच्छा भाई है तू और एक अच्छा पति भी है

रेखा- अच्छा ये छोड़ ये बता की तुझे तेरी दीदी के शरीर में सबसे अच्छा क्या लगता है

रवि- मुझे तो आपका पूरा शरीर hi अच्छा लगता है दीदी

रेखा- अरे बुद्धू मतलब मेरे जिस्म का वो कौन सा अंग है जिसे देख कर तू ोागल हो जाता है और तेरा ये गधे जैसा लुंड खड़ा हो जाता है

रवि रेखा की बात सुनकर चुप हो जाता है . रेखा - हे भगवन इसकी शर्म कब जाएगी

कुछ तो बता

रवि- दीदी मुझे नहीं पता

दरससल रवि अभी भी थोड़ा थोड़ा दर रहा था की कहि उसके मुँह से कोई ऐसी बात न निकल जाये की उसकी दीदी उससे नाराज हो जाये

रेखा- तू ऐसे नहीं मानेगा रुक मैं कुछ दिखती हु जिसके बाद शायद तेरी ये शर्म ख़तम हो जाये

रवि रेखा की बात सुनकर अपने मन में सोचने लगता है की आखिर अब उसकी दीदी क्या करने वाली है

रेखा तू होनी आँखे बंद कर पहले

रवि होनी दोनों आँखे बंद कर लेता है

रेखा धीरे से सरकती हुई रवि के बिलकुल ऊपर चली जाती है

और होने गरम होठ रवि के होठो पर रख देती है

रवि को रेखा के होठो का अहसास बहुत hi अच्छा लग रहा था

उसे ऐसा लग रहा था मनो किसी ने उसके होठो पर चीनी चिपका दी हो

अब रवि होनी आँखे बंद किये अपनी दीदी के होठो की मिठास का आनंद ले रहा था

रेखा अपनी जीभ रवि के मुँह में घुसा देती है और होना हाथ निचे लेजक सीधा होने छोटे भाई का लुंड पकड़ लेती है

रवि का लुंड पहल से hi ौरी तरह खड़ा था

रेखा का हाथ पड़ते hi रवि का लुंड झटके खाने लगता है

रेखा अपना मुँह रवि के मुँह से अलग करती है .और निचे की और सरकती हुई बिलकुल रवि के लुंड के पास आकर रूकती है

रेखा का हाथ अभी भी रवि के लुंड को मसल रहा था

रवि अपनी आँखे बंद किये हुए अपनी दीदी की हरकतों का मजा ले रहा था

रेखा- रवि आँख खोल और इधर देख

रवि आँखे खोल कर निचे की तरफ देखता है

दोनों की नजरे मिलती है

दोनों की आँखे पूरी तरह लाल थी

आग दोनों तरफ लगी थी बस जरूरत थी एक चिंगारी की

जो अब रेखा भड़काने जा रही थी

रेखा रवि की तरफ देखते हुए अपनी जीभ निकाल कर रवि का सूपड़ा बड़े hi आराम से चाट लेती है

रवि रेखा की उस हरकत से अंदर तक सिहर जाता है

रेखा 2-3 बार रवि का सूपड़ा अपनी जीभ से चाटती है और फिर अपना मुँह खोलकर सुपडे को थोड़ा अंदर लेलेती है

और किसी लॉलीपॉप की तरह चूसने लगती है

रवि कभी आनंद में अपनी आँखे बंद कर लेता कभी खोल कर अपनी दीदी को अपना लुंड चूसते हुए देखता

रेखा अब ज्यादा टाइम बर्बाद न करते हुए

अपना मुँह पूरा खोल कर एक hi बार में रवि का आधे से ज्यादा लुंड अपने मुँह में भर लेती है

रवि- अह्ह्ह्हह ह दीदी कितना अच्छा लग रहा है

रेखा लुंड को मुँह से निकलती है

रेखा- आज तुझे तेरी दीदी खुली आँखों से जन्नत दिखाए

रवि- तुझे तो आता नहीं क्या हुआ है हमेशा hi सहरमाता रहता है

देख तेरी दीदी कितनी मस्त है ऐसी किसी और की दीदी होती तो वो अबतक अपनी दीदी को छोड़ चूका होता

रवि मुँह खोले रेखा की साडी बाटे सुन रहा था

रेखा- ओर तुझे तो पता नहीं क्या हुआ है रात को भी मरी छूट में होना लुंड रगड़ कर सो गया तुझे उसी समय अपना ये गधे जैसा लुंड अपनी दीदी की छूट में घुसा देना चाहिए था

रेखा की बात सुनकर रवि की आँखे फटी की फस्ती रह जाती है

रवि- दीदी मतलब आप रात को जगी हुई थी

रेखा- म रात को hi नहीं हर रात जगी हुई थी जब तू मुझे गरम करके छोड़ देता और अपनी व्दिदी की गांड में अपना ये मुसल जैसा लुंड फसा कर सुजाता

रेखा की बाटे सुनकर रवि के चेहरे का रंग उड़ जाता है

रेखा रवि की हालत को समझ जाती है और दुबारा से मुँह खोल कर फिरसे होने छोटे भाई का लुंड मुँह में भर लेती है

झा रवि को थोड़ी देर ोेहले कस्फी टेंशन्स थी वही अब उसके. चेहरे ओर सुकून के भाव साफ़ दिख रहे थे

इधर लगातार रेखा होने मुँह को रवि के लुंड पर आगे ोीचे किउए जकरहि थी

और अपने छोटे भाई का लुंड ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की कोशिस कर रही थी

रवि- अह्ह्ह्हह्ह दीदी कितना अच्छा लग रहा है आपका मुँह की गर्मी मेरे लुंड को पिघला रही है दीदी

रेखा रवि की बात सुनकर समझ जाती है की अब उसका काम हो गया है और रवि अब खुलना चालू हो गया है

रेखा- तो छोड़ न अपनी दीदी का मुँह

किसने रोका है चखे मेरे प्यारे भाई

इसीलिए तो मैंने तुझे शादी की है ताकि तू अपनी दीदी को पटक पटक कर छोड़ सके

रवि का हाथ अबतक रेखा के सर पर जा चूका था

रेखा बिच बिच में लुंड मुँह से निकाल कर बोलती और फिर दुबारा से गपपपपप से लुंड को मुँह में भर कर चूसने लगती

रेखा मुँह से बहुत सारा थूक गिरा रही थी जो सीधा रवि के ऊपर गिर रहा था

रवि अब अपने हाथो से रेखा का सर ोाकद कर धीरे धीरे दबा रहा था और अपने लुंड को ज्यादा से ज्यादा होनी दीदी के मुँह में डालने की कोशिस कर रहा था

रेखा को अब और भी ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि रवि भी अब उसका साथ दे रहा था

रेखा- तो बता न कैसा लगा तुझे अपनी दीदी का मुँह छोड़के

रवि- दीदी आपका मुँह बहुत गरम है मुझे लग रहा है मेरा लुंड आपके मुँह में hi पिघल जायेगा

हैए दीदी कितना अच्छा से चुस्ती हो ाल

रेखा को लुंड चिस्ती चूसते करीब 15 मिंट हो चुके थे

पर रवि अपना ोानी छोड़ने का नाम नहीं ले रहा था

रेखा होना एक हस्त निचे ले जाती है और रवि के तत्तो को पकड़ कर मसलने लगती है

इस दोहरे मजे से रवि ोागल हो जाता है और रेखा के सर को पकड़ कर अपनी कमर निचे से उठता है

अब रवि के 11 इंच के लुंड में से 9 इंच तक उसकी दीदी के नूह में था

रेखा होनी सईद लगातार बढ़ती जा रही थी

आखिर कर रवि का लुंड पिघलना चालू हो जाता है और रवि रेखा के सर को पकडे पकडे hi एक जोरदार झटका मरता है और उसका पूरा लुंड रेखा के मुँह में घुस जाता है

रवि झड़ने के बेहद करीब था

वो रेखा के मुँह में लगातार झटके मार रहा था जिसके वजह से रेखा की आँखे बहार को आ गयी थी चेरा पूरा लाल होकर थूक से सं चूका था

. रवि एक के बाद एक जोरदार झटको के साथ अपनी प्यारी दीदी का मुखछोडन कर रहा था

रेखा के मुहहह से गूऊऊऊजूउउ

जूउउउउउ गगूउऊउउउउ की आवाजे आ रही थी

भले hi रेखा की हालत खराब थी पर अबदार hi अंदर वो मजे से फूली नहीं समै रही थी

रेखा हमेशा से कहती थी की उसे कोई ऐसा ोाती मिले जो उसे बिलकुल बेरहमी के साथ किसी रंडी की तरह चोदे

और आज रेखा की तलाश कहत्म हो चुकी थी

अच्चानक से रवि होने धक्को को रोक देता है और रेखा का सर ोाकद कर अपने लुंड की जड़ तक दबा देता है

अब रवि का लुंड उसकी दीदी के गले तक पहुंच चूका था

आखर कर रवि का लुंड होना पन्नी छोड़ना चालू करता है और एक के बाद एक कई साडी पिचकर मार्के वो अपनी दीदी का मुँह भर देता हाउ

आखिरी बून्द गिरने तक रवि रेखा के सर को

पकडे रहता है

और फिर वो अपने हाथो की गिरफत से अपनी दीदी का सर आजाद कर देता है

रेखा को अब थोड़ी रहत मिलती है वो लुंड को मुँह में लिए एक मिंट तक ऐसे hi पड़ी रहती है फिर अपना मुँह ऊपर को उठके अपने मुँह से अपने चीते भाई का लुंड बहार निकलती है

रवि का लुंड जैसे hi रेखा के मुँह से बहार आता है

रेखा का काफी सारा थूक सीधा रवि के लुंड के ुवार गिरता है

काफी सारा वीर्य रेखा पहले hi हजम कर चुकी थी अब थूक के साथ कुछ बचा कुछ वीर्य भी उसके मुँह से एक पतली सी धार के साथ साथ निचे गिर रहा था

रेखा लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी और रवि को देख रही थी

उसने जितना सोचा था उसके छोटे भाई ने उसे उससे कहि ज्यादा मजा दिया था

रवि अपनी आँखे खोलता है और दोनों की नजरे टकराती है

रेखा हल्का सा मुस्कुरा देती है जिसे देख कर रवि का चेहरा भी खिल जाता है

रेखा पास hi पड़ा पेटीकोट उठा के रवि के लुंड को ाचे से साफ़ करती है और अपनी जगह पर आकर लेत जाती है

रेखा- तूने तो मेरी हालत hi खराब कर दीठि भाई

कोई ऐसे अपनी दीदी का मुँह छोड़ता है क्या

मैं तेरी दीदी हु या तेरी रंडी हु

रवि- दीदी माफ़ कार्डो मुझे पता नहीं क्या हो गया था

रेखा - अब माफ़ी क्यों मांग रहव है बुद्धू

भूल गया अब हमारी शादी हो चुकी है अब तो तू जो कहे जैसे कहे कर समझा

होनी दीदी को रंडी समझना है तो समझ

अब मैं तेरी एक ऐसी चीज़ हु जिसका इस्तेमाल तू जब कहे जैसे कहे कर सकता है समझा न

आगे से कभी कुछ करने के बाद माफ़ी मत मांगना

रवि रेखा की बात सुनकर खुस हो जाता है और आगे बढ़ कर रेखा को गले लगा लेता है

रवि- दीदी आप कितनी अच्छी हो कभी किसी चीज़ का बुरा नहीं मानती

रेखा- होने भाई से कोई बुरा मंटा है क्या

रवि- अच्छा दीदी ये बताओ जब मैं रात को आपको छूटा था तो आपको गुस्सा नहीं आता था मुझ पर

रेखा- मैं तो सोचती थी की कब तू मुझे होनी बना ले और मुझे भी बहुत मजा आता था जब तू मेरे साथ रात को गंदे गंदे काम करता था तो

रेखा- अच्छा ये सब छोड़ अब ये बता की तुझे मेरे जिस्म में सबसे अच्छा कोण सा अंग लगता है

रवि- दीदी मुझे आपकी गांड का छेद बहुत प्यारा लगता है

रेखा- है मैं तो पहले hi समझ गयी थी जब तू अपनी 2 उँगलियाँ मेरी गांड में पेल रहा था

अब क्या तू अपनी दीदी की गांड भी मरेगा

रवि- पता नहीं दीदी पर जब मैं आपका वो छेद देखता हु तो मैं पागल हो जाता हु

रेखा- चल कोई बात नहीं अगर तुझे तेरी दीदी की गांड पसंद है तो उसे भी मार लेना पर थोड़ा आराम से भाई तूने देखा है न तेरी दीदी की गांड कितनी टाइट है

जब ये तेरा गधे जैसा लुंड मेरी गांड में जायेगा तो मेरी गांड फैट जाएगी बुरी तरह से

रवि अबतक रेखा से अलग हो चूका था

और उसका हाथ रेखा की चूचियों पर था

तू रात को तो बड़ी बेरहमी से मेरी चूचिया मसलता है तुझे अपनी दीदी पर थोड़ी भी दया नहीं आती

रवि- दीदी आपका बदन इतना गदराया हुआ है की मैं आपको नंगा देखने के बाद खुद पर कण्ट्रोल नहीं रख पता

रेखा- अच्छा hi तो है मत रखा कर कण्ट्रोल अपने आप पर तेरा जो मन करे वो कर अपनी दीदी के साथ

रवि- दीदी मुझे आपकी गांड देखनी है

रेखा- तुझे क्या सिर्फ मेरी गांड से hi प्यार है क्या

मेरी छूट की तरफ भी थोड़ा ध्यान दे लिया कर अपनी दीदी की छूट की तरफ भी

देख कैसे तेरा लुंड याद करके दिनभर पानी छोड़ती रहती है

इतना बोलकर रेखा अपने दोनों ोैर उठा कर सर तक ले आती है और उसकी गांड और छूट रवि के सामने खुल जाती है

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रवि अपनी दीदी के दोनों कामुक चफॉ को देख कर पागल सा हो जाता है

और सीधा अपना मुँह रेखा की गांड पर लगा देता है और पागलो की तरह अपनी दीदी की गांड चूसने लगता है

रवि पागलो की तरह रेखा की गांड पर होठ लगा कर अपनी दीदी की गांड को चूसे जा रहा था

इस अहसास से रेखा की छूट लगातार पानी चोदे जा रही थी जो बेहटा हुआ उसकी गांड पैट जा रहा था

और रवि अपनी दीदी का सारा पानी कहते जा रहा था

रेखा- अरे तू तो लग रहा है की मेरी टट्टी निकल देगा चूस चूस कर मेरी गांड

रवि बिका कुछ बोले अपने काम में लगा रहता है वो बिलकुल पागलो की तरह रेखा की गांड चाट रहा थस

अब रवि होनी जीभ को अपनी दीदी की गांड में घुसाने लगत्तै है और अपना अंगूठा ुवार लेजाकर रेखा की छूट का दाना मसलने लगता है

रेखा- है हां भाई ऐसे hi और जोरसे दबा उसे

रवि भी पागलो की तरह अपनी उंगली का दबाव रेखा की छूट ओर बढ़ा देता है

अब रवि अपना मुँह हटा लेता है और अपना मुँह ऊपर की और करके रेखा को देखता है

रवि का पूरा चेहरा थूक से और उसकी दीदी की छूट के पानी से लबालब सबा हुआ था

रेखा रवि की हालत देख कर थोड़ी सी स्माइल देती हसि और होना हाथ आहे बढ़ा कर बड़े प्यार से उसका सर पकड़ कर अपनी छूट पर दबा देती है......
 
अपडेट-35

रेखा रवि के सर को पकड़ के अपनी छूट पर लगा देती है और अपने हाथो से रवि के बालो को सहलाने लगती है

रवि भी एक आज्ञाकारी भाई की तरह अपनी जीभ रेखा की छूट पर रख देता है

रवि अब अपनी जीभ को ऊपर से निचे की तरफ घुमा रहा था और अपनी दीदी की पहली हुई बुर को चाटने लगता है

रेखा एक चुड़क्कड़ किस्म की औरत थी जिसे जितना छोड़ो उसके लिए उतना काम है

रेखा की छूट लगातार नमकीन पानी चोदे जा रही थी

जिसे रवि लगातार कहते जा रहा था

अब रवि अपनी दीद की छूट चाटते हुए अपना हाथ निचे से घुमा कर अपनी दीदी की गांड पर ले जाता है और अपना अंगूठा रेखा के गांड पर दबाने लगता है

रेखा को आज इतना मजा आ रहा था जो उसे लन्हि नहीं आया था

रेखा- है भाई खा जा मेरी छूट को खा जा अपनी दीदी की ये छूट

साली को हमेशा hi लुंड चाहिए

रवि- दीदी आपकी छूट से तो बहुत सारा पानी निकल रहा है

रेखा- तुझे अच्छा लग रहा है अपनी दीदी की छूट का पानी

रवि- है दीदी बहुत मजा आ रहा है आपकी छूट चाटने में

इतना बोलते हुए रवि अपना अंगूठा रेखा की गांड में सरका देता है

रेखा तड़प कर रह जाती है

रेखा- भाई अब बर्दास्त नहीं हो रहा दाल दे अपना लुंड अपनी दीद की छूट में और बना ले मुझे अपनी रंडी

रवि अब तक पूरी तरह से कुल चूका था

और उसे अब ये भी समझ आ गया था की उसकी दीदी भी उससे छुड़वाना कहती है

रवि- दीदी चुदाई तो मैं करूंगा hi पहले अपनी दीदी की छूट से निकल रही नदी में तो दुप्की लगा लू

अब रवि अपना अंगूठा रेखा की गांड से निकाल लेता है और अपनी जीभ को छूट से लेकर गांड तक चलने लगता है

इधर रेखा पागल हुई जा रही थी

वो मस्ती में अपने हाथ पेअर इधर उधर मार रही थी

रवि अपने दोनों हाथो से रेखा के पैरो को पकड़ कर ज़ोर लगाकर पीछे की और धकेल देता है और हाथो से होल्ड किये रहता है

अब रेखा की छूट और गांड और भी ज्यादा खुल कर रवि के सामने आ चुकी थी

रवि अपनी जीभ को रेखा की छूट में घुसा देता है और पागलो की तरह आगे पीछे करने लगता है

रवि के लगातार हमलो के कारन रेखा ज्यादा देर टिक नहीं पति और वो अपने हाथो को रवि के सर पर रख के उसे अपनी छूट पर दबा लेती है

रेखा अब झड़ने के करीब थी वो पागलो जैसी हरकत केर रही थी

रेखा- कितना अच्छा चाट रहा है तू मेरे बहीईईई ahhhhhhhhhh है ऐसे hi खाजा अपनी दीदी की छूट अह्ह्ह्हह्हह मैयाआआअ है ऐसे hi और अंदर दाल अपनी जीभहहहह अह्ह्ह्हह्हह रवि तेरी दीदी का पानी बहार आने वाला मैं जड़ने वाली हु भाई अह्हह्ह्ह्ह एआईईईई मायआ

रेखा का बदन बुरी तरह से अकड़ जाता है रेखा ने बहुत ज़ोर लगाकर रवि का सर पकड़ रखा था

रवि अपनी दीदी की साडी बाटे सिन रहा था जिससे उसे और भी ज्यादा जोश आ रहा था

रवि लगातार अपनी जीभ से अपनी दीदी की छूट को कहते जा रहा था

इधर रेखा का गदराया बदन एक के बाद एक कई जहटके खाये जा रहा था

रेखा बुरी तरह झाड़ रही थी उसका सारा सफेद पानी रवि के मुँह में जा रहा था जिसे रवि जाया न करते हुए अमृत समझ कर एक एक बून्द पिए जा रहा था

रेखा अबतक पूरी तरह से झाड़ चुकी थी वो लेते लेते लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी उसकी आंको से हल्के हल्के आंसू बह रहे थे पर उसकी आँखे अभी तक बंद थी

रवि अपनी दीदी की छूट को अच्छे से चाट चाट के साफ़ करता है और अपना मुँह ऊपर की और बढ़ाने लगता है

रवि अब रेखा के चेहरे के पास पहुंच चूका था

वो आगे बढ़ कर अपने होठ रेखा के होठो पर रख देता है

रेखा अपनी आँखे खोल क्र होने भाई को देखती है

उसके चेहरे पर देहसुख का भाव साफ़ दिख रहा था

रवि एक बार और रेखा के होठ चुस्त है

रवि- दीदी आप रो क्यों रही हो मजा नहीं आया क्या अपने छोटे भाई से अपनी छूट और गांड चुसवा के

रेखा अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर ीवी की पीठ पर दाल ददेश्य है और उसे अपने ऊपर खींच लेती है

रेखा- तुझे नहीं पता तेरी दीदी को आज कितना मजा आया और ये आंसू जो तू देख रहा है ये खुसी के आंसू है

मैं तो सोचती थी की मैं बिना लुंड के hi मर जाउंगी पर तूने अपनी दीदी की जिंदगी में एक भार भर दी है

रवि- दीदी अब तो हम जिंदगी भर ऐसे hi मजा करते रहेंगे

पर जब कम्मो दीदी आ जाएगी तो हम ये सब कैसे करेंगे

आपतो बहुत ज्यादा चिल्लाती हो

रवि की बात सुनकर रेखा को हसि आ जाती है

रेखा- वो सब तू मुझ पर छोड़ दे कम्मो का भी कुछ न कुछ करेंगे

रवि- दीदी बताओ न मैं कैसे चुस्त हु

रेखा- क्या

रवि- अपनी दीदी की छूट

रेखा- तू तो एक माहिर खिलाडी की तरह अपनी दीदी के दोनों छेड़ो को चाट रहा था

मैं तो दर रही थी की कहि तू मेरी छूट और गांड खा न जाये

रवि- दीदी आपकी गांड देखने के बाद मन तो यही करता है

रेखा- क्या मन करता है तेरा

रवि- अपनी दीदी की गांड को खा जाने का मन करता है

रेखा- छी कितना गंदा है तू अपनी दीदी की गांड खायेगा तो छूट का क्या होगा

रवि- दीदी अब तो आपकी छूट भी मेरी है और गांड भी मेरी है

रेखा- भाई अब तो मेरे सरे छेद hi तेरे है तू जब कहे जिस छेद में अपना ये गधे जैसा लुंड दाल कर अपनी दीदी को छोड़ तुझे कोई नहीं रोकेगा समझा अब मैं तेरी हु सिर्फ तेरी

रवि- है दीदी अब हम दोनों हमेशा hi ऐसे रहेंगे और नंगे hi सोयेंगे

रवि की बातो से रेखा को साफ़ पता चलता था की उसके अंदर अभी भी बचपना है

रवि की मसिमियत देख कर रेखा को अपने छोटे भाई के ऊपर और भी जायदा प्यार आता था

रेखा- अच्छा अब तुझे एक बात बतानी पड़ेगी

रवि- पूछो दीदी

रेखा- तू पहले अपनी दीदी की छूट में लुंड डालेगा या गांड में

रवि फटक से बोलता है

रवि- म तो सबसे पहले अपनी दीदी की गांड में लुंड डालूंगा

रेखा रवि की और देख कर सदा सा मुँह बनती है

रेखा- मुझे पता था की तू क्या बोलेगा

रवि- तो दीदी पूछ क्यों रही हो जब आपको पता है की आपका ये भाई आपकी गांड का दीवाना है

रेखा- इसलिए पूछ रही थी की तेरे लुंड को देख कर मुझे दर लगता है कहि तूने एक hi बार में ोुरा लुंड मेरी गांड में थुश दिया तो क्या होगा

मेरी गांड की तो धजियैया उदा देगा तू

रवि- अरे नहीं दीदी बड़े hi प्यार से डालूंगा

रेखा- हाय मेरा भाई कितना अच्छा है अपनी दीदी की हर बात मंटा है

और रेखा होने होठ रवि के होठो पर राखत देती है .............
 
अपडेट-36

थोड़ी देर चुम्मा छाती करने के बाद दोनों भाई बेहेन अलग होते है

पिछले 10 मिंट से एक दूसरे के मुँह में मुँह घुसाए दोनों की सांसे अब उखड़ने लगी थी

रेखा- चल अब बता अपनी दीदी को पहली बार कैसे छोड़ेगा

आगे से या पीछे से घीड़ी बना कर

रवि- दीदी मैं आपको पहली बार घोड़ी बना कर छोडूंगा

रवि की बात सुनकर रेखा पलट कर घीड़ी बन जाती है और उसकी गांड का छेद खुल कर रवि के सामने आ जाता है

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रेखा की गांड देख कर रवि ोअग्लो की तरह अपना मुँह रेखा की बड़ी सी गांड में घुसा देता है और अपनी नाक लगा कर अपनी दीदी की गांड सूंघने लगता है

रवि खूब जोर जोर से सांसे खींच रहा था

रेखा को एक मस्ती सूझती है वो थोड़ा सा जोर लगाकर एक पाद मार देती है जिसे सूंघ कर रवि मस्त हो जाता है और उसका लुंड झटके खाने लगता है

रेखा- अब देर मत कर कहि मेरा मुद न बदल जाये छोड़ दे अपनी दीदी की गांड

रवि बजना देर किये अपनी पोजीशन में आता है और अपना लुंड रेखा की गांड पर लगा देता है

रेखा- अरे रुक रुक

रवि- क्या हुआ दीदी

रेखा- तू क्या अपनी दीदी की जान लेना कहता है जो अपना ये गधे जैसा लुंड सूखा hi मेरी गांड में घुसा रहा है

रुक मैं तेरी मदद करती हु तेरा लुंड गिला करने में

इतना बोलकर रेखा वैसे hi घोड़ी बनी बनी घूम जाती हसि और अपना मुँह रवि के लुंड के पास ले आती है

अब रेखा के चेहरे के सामने उसके चीते भाई का लुंड हवा में झूल रहा था

रेखा अपनी जीभ निकल कर रवि का सूपड़ा चाटने लगती है

रवि का हाथ रेखा के सर के ुवार आजाता है वो अपनी दीदी का सर बड़े प्यार से सेहला रहा था

रेखा होना मुँह खोल कर रवि का लुंड अंदर लेलेती है

रवि की आँखे मजे और सुकून के कारन बंद हो जाती है

रवि अबतक अपने दोनों हाथ रेखा के सर पर रख चूका था

रेखा लगातार रवि को लुंड को अपने मुँह में लिए जा रही थी

अच्चानक से रवि रेखा का सर जोरसे पकड़ता है और एक जोरदार धक्का मरता है

जिसकी वजह से रवि का ोुरा लुंड एक hi बार में उसकी दीदी के गले तक उतर जाता है

रेखा की आंखे बहार को आने लगती है उसके मुँह से बहुत सारा थूक बेहटा हुआ निचे गिर रहा था

इधर रवि लगातार अपनी दीदी का सर पकड़ कर एक के बाद एक जोरदार झटके मरे जा रहा था

करीब 5 मं तक अपनी दीदी का मुँह बेरहमी से छोड़ने के बाद रवि को अपनी दीदी पर रेहम आजाता हाउ

और रवि अपने दोनों हाथ रेखा के सर से हटा लेता है

रेखा अपना मुँह से जैसे hi रवि का लुंड निकलती है उसके नूह से बहुत सारा थूक गर्ने लगता है

रेखा की आँखों से आंसू आ रहे थे उसका चेहरा और आँखे पूरी लाल हो चुकी थी

रवि रेखा का मुँह ोाकद कर ऊपर उठता है और अपनी दीदी के हित चूसने लगता है

रेखा भी रवि का साथ दे रही थी पूरी तरह से

अब दोनों भाई बेहेन अलग होते है और रेखा होने दोनों हाथो को आगे बढ़ा कर होने छोटे भाई के लुंड ओर रख देती है और उसपर लगा अपना थूक अच्छे से मसल मसल कर रगड़ने लगती है .

अब रेखा पूरी तरह से पागल हो चुकी थी

वो होने मुँह से रवि के लुंड पर थूक देती है और फिर अपने hi थूक को होने छोटे भाई के लुंड पर अच्छे से मसलने लगती है

रवि अपनी दीदी का रान्दीपना देख कर और ोागल हुआ जा रहा था उससे अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था

इधर रेखा लगातार रवि के लुंड पर थूक रही थी

जिससे उसके लुंड से थूक बेहटा हुआ निचे गुर रहा था

रेखा - चल अब टाइम आ गया जब तू अपनी दीदी की गांड मरेगा

इतना बोलकर रेखा डिबरा से अपनी गांड. रवि की और करके घीड़ी बन जाती है

रवि भी अब अपनी दीदी को देख कर बहुत कुछ सिख चूका था

रवि भी रेखा का देखा देखि रेखा की गांड पर थूक देता है और अपनी ऊँगली से रेखा की गांड को अच्छे से अपने थूक से नहलाने लगता है

रवि की हरकते अब रवि को ोागल किये जा रही थी उससे अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था

रेखा- अब दाल दे भाई अपना ये मुसल जैसा लुंड अपनी दीदी की गांड में

रवि भी देर न करते हुए अपनी पोजीशन संभालता है

रेखा - भाई तू धीरे से मरना मेरी गांड आज तक मैंने कुछ भी नहीं डाला है इसमें

तेरा लुंड ोेहली चीज़ है जो इसके अंदर जायेगा

रवि- दीदी आप आराम से घोड़ी बनी रो और अपने छोटे भाई पर भरोषा रखो बड़े प्यार से डालूंगा मैं अपना लुंड अपनी दीदी की गांड में

रवि का लुंड पहले से hi अपनी दीदी के थूक से सना हुआ था

रवि अपना लुंड रेखा की गांड पर टिका देता है

रवि का सूपड़ा अपनी गांड पर महसूस करके अपनी आँखे बंद कर लेती है और आने वाली तबाही के लिए अपने आपको तैयार करने लगती है

रेखा अपने सोनो हाथो को जमीन पर तिखाये हुए थी अब वो अपनी गर्दन निचे लगा देती है और अपने होने हाथो को पीछे लेकर अपनी गांड को पकड़ कर ौरी तरह से होने छोटे भाई के लिए फैला देती है

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रेखा की इस हरकत से उसका गांड का छेद और भी ज्यादा खुल कर रवि के सामने आ जाता है

रवि देर न करते हुए अपना लुंड रेखा की गांड पर टिका देता है

अब रेखा तैयार थी उस पहले जहटके के लिए जो उसकी गांड को पहाड़ कर उसकी धजियैया उड़ने वाला था

रवि थोड़ा सा दबाव बनता है अपने लुंड का पर लुंड फिसल कर ऊपर की और चला जाता है

रवि- ऐसे hi 3-4 बार तरय करता है ओर लुंड अंदर नहीं जाता

रवि- डीडीई तुम्हारी गांड का छेद बहुत टाइट है

रेखा- तेरे लिए hi तो बचा कर रखा था मेरे भाई इसे आज छोड़ छोड़ कर होनी दीदी की गांड फाड़ दे

रवि को रेखा की बात सुनकर और भी ज्यादा जोश आ जाता है

और वो बिना सोचे लुंड को दुबारा से रेखा की गांड पर रख कर एक जोरदार झटका मरता है

रवि का लुंड और रेखा की गांड पहले से hi काफी चिकनी थी

रवि के लुंड का सूपड़ा रेखा की गांड को चीरता हुआ अंदर समै जाता है

रेखा अपने हाथ को रवि के हाथ ओर रख कर दबा देती है

हक़ीक़त में रेखा मो बहुत ज्यादा दर्द होता है पर उसके मुँह से एक भी सिख नहीं निकलती

इधर रवि एक एयर झटका मरता है और इस बार उसका आधे से ज्यादा लुंड सनसनाता हुआ रेखा की गांड में घुस जाता है

रेखा - अह्ह्ह्हह मैयाआ मर डाला रे तूने अपनी दीदी को .

दर्द तो रवि को भी बहुत हो रहा था आज पहली बार वो अपना मुसल किसी इतने चीते छेद में दाल रहा था झा उसका लुंड फिट होना लगभग नामुमकिन था

रेखा- अब पूरा दाल दे एक hi बार में जितना दर्द होना है एक hi बार में अपनी दीदी को देदे सारा दर्द उसके बाद तेरी दीदी की गांड हमेशा के लिए तेरे लुंड के लिए खुल जाएगी

रवि अपनी दीदी की आज्ञा का पालन करते हुए थोड़ा सा पीछे होता है और एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा लुंड रेखा की गांड में पेल देता है

इस झटके से रेखा की आँखे बहार को आजाती है

उसका बदन अकड़ जाता है

रवि- अह्ह्ह्ह डीईडी बहुत दर्द हो रहा है मेरे लुंड में आपकी गांड बहुत टाइट है

रेखा- दर्द तो तेरी दीदी को भी हो रहा है पर देख कैसे तेरे समें तेरी दीदी घोड़ी बने अपने छोटे भाई का लुंड अपनी गांड में फसे हुई है

रवि 2 मिंट तक ऐसे hi शांत था फिर उसके लुंड का दर्द थोड़ा सा काम होता है और वो थोड़ा सा आगे ोीचे करना चालू करता है

पर इधर रेखा का दर्द जो का त्यों था उसे उस दर्द में एक अजीब सा मजा आ रहा था

रेखा- अह्ह्ह्हह भईई आराम आराम से दाल थोड़ा मेरी गांड फाड़ दी तूने अपनी दीदी की गांड में अपना घोड़े. जैसा लुंड दाल कर छोड़ रहा है तुझे थोड़ी भी शर्म नहीं आ रही अपनी दीदी की गांड मरने में

रेखा की बाटे सुनकर रवि का दर्द गायब हो जाता है और उसके अंदर अब पहले से भी ज्यादा जोश आ जाता है

रवि ऊपर से hi रेखा की गांड पर थूक देता है और अपनी स्पीड थोड़ी सी बढ़ा देता है

रेखा को अब मजे आ रहे थे अपने छोटे भाई से गांड मरवाने में

रेखा- क्या अपनी इस गदराई बेहेन को ऐसे बच्चो की तरह छोड़ेगा

मुझे दिखा की तू कितना बड़ा मर्द है और छोड़ अपनी दीदी की गांड और फाड़ दाल इसे

रवि अब आधे से ज्यादा लुंड बहार निकलता है और एक hi झटके में रेखा की गांड में पेल देता है

अब रवि का हर झटका पहले वाले से तेज़ होता जा रहा था

रवि- अह्ह्ह्हह डीडीई कितना मजा आ रहा है तुम्हारी गांड मरने में कितनी टाइट है तुम्हारी गांड का छेद दीदी

मुझे लग रहा है जैसे तुम्हारी गांड मेरे लुंड को अंदर खींच रही है डीडीईई भजत अच्छा लग रहा है डीईडीई

रेखा- अभी तो तूने असली मजा लिया hi नहीं है अपनी दीदी का

रवि लगातार झटके मरे जा रहा था

रेखा- अह्ह्ह्ह माँ और जोरसे छोड़ होनी इस रंडी दीदी को और पूरा लुंड पेल दे एक hi बार में होनी दीदी की गांड में मेरे भाई छोड़ अपनी इस रैंड को

रवि- डीइडी इतना मजा आ रहा है गांड मरने में इससे भी ज्यादा मजा आ सकता है क्या

रेखा- जब तू मेरी छूट मरेगा तब देखना तुझे कैसा मजा मिलेगा भाई असली जन्नत तो मेरी छूट के अंदर hi है

रबी पहले दीदी मैं अच्छे से आपकी गांड मरूंगा

छूट मरने के बारे में बाद में सोचेंगे

रेखा- तुझे जो मरना है मार मेरा जोन्स छेद तुझे पसंद है तू उसमे अपना लुंड दाल बस मुझे छोड़ता जा

अपने इस गदराये बदन को मैंने पता नहीं कैसे अब तक संभल के रखा था ओर अब मुझसे नहीं सम्भलता है मेरा शरीर

रवि रेखा की बातो से पूरी तरह जोश में आ गया था वो अब अपना पूरा लुंड निकाल कर एक hi बार में रेखा की गांड में पेल देता

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रेखा दर्द के मरे कराह रही थी पर उसकी मस्ती अब पूरी जोर शोर से उसके सर चढ़ चुकी थी

रवि के अंदर का जानवर भी अब बहार आ चूका था

वो अपना लुंड एक hi बार में रेखा की गांड से निकल लेता है

और अब उसे जो छेद दीखता है वो पहले वाले से काफी अलग था

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रेखा की गांड ोेहले के मुक़ाबले काफी खुल गयी थी

रवि होना लुंड दुबारा से एक hi बार में आप नई दीदी की गांड में घुसा देता है

और होने हाथ आगे बढ़ा कर रेखा के बालो को ोाकद कर होनी और खींचता है

रेखा भी होनी गर्दन को बालो के साथ उठती जस रही थी और अपने दोनों हाथो को आगे लेकर जमीन ओर टिका कर सहारा लेती है

रवि अपनी दीदी के बालो को पक्कड़ कर होनी और खींचता है और जोरदार झटके मरने लगता है

रेखा- अहहहहह भाई रुकना मत ऐसे hi छोड़ मुझे जैसे में तेरी दीदी नहीं तेरी रंडी हु

अह्ह्ह्हह मा क्या लुंड है मेरे छोटे भाई का

पहले क्यों नहीं छोड़ा तूने अपनी दीदी को

तुझे पता है कितना तदपि हु मैं एक लुंड के लिए

रवि अपना मुँह रेखा के कान के पास ले जाता है

रवि- दीदी अब आओ कभी लुंड के लिए नहीं तड़पोगी

जब ाओंका मन करे अजना मेरे पास आपको रगड़ रगड़ कर छोड़ेगा आपका ये छोटा भाई और अपनी दीदी के हर छेद का मजा लूटेगा आपका ये छोटा भाई

इतना बोलजर रवि होने मुँह रेखा के कान पर रख देता है और अपने दातो में रेखा का कान पकड़ कर सबने लगता है कभी अपनी जीभ रेखा के कान में फेरने लगता है

रेखा- तू तो मुझे ोागल कर देगा भाई अह्ह्ह्हह मर मेरी गांड और जोरसे मार

रवि रखा की बाटे जितनी सुनता उतना hi जोरदार झटका पानी दीदी की गांड में मरता

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दोनों भाई बेहेन को आधा घंटा हो चूका था चुदाई करते हुए ओर रवि का ोानी निकलने का नाम नहीं ले रहा था

इधर रेखा के हाथ ोैर भी दर्द करने लगते है वो सीधा आगे की और गिर जाती है और पेट के बल लेत जाती है

रवि का लुंड पक्क्क से बहार आजाता है

रवि बिना देर किये अपनी दीदी के ऊपर आजाता है और अपना एक पेअर जमीन पर टिका कर एक पेअर सीधा कर लेता है और एक hi झटके में अपना लुंड रेखा की गांड में पेल देता है

शता सात शता सत्ततत्तत्त रवि लगातार बेरहमी के साथ अपनी दीदी की गांड मरे जा रहा था

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रेखा की गांड अब हार मान चुकी थी वो अपना सारा कसाव खो चुकी थी

अब रेखा की गांड का ये हाल था की जब रवि अपना लुंड पूरा निकाल लेता तो उसके बाद भी उसकी गांड बंद नहीं होती और रवि के लुंड की मोटाई के बराबर खुली रहती

रेखा- तूने तो आज अपनी दीदी की गांड फाड़ कर न्य इतिहास लिख दिया मेरे भाई

रवि- दीदी मेरा वीर्य निकलने वाला है

रेखा के मुँह ओर वीर्य सिनकर चमक आ जाती है

रेखा- पूरा माल मेरी गांड में hi निकाल दे भाई

रवि अपने हाथो को आगे बढ़ा कर रेखा की गर्दन पर लपेट लेता है और उसे थोड़ा सा अपनी और खींचता है

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रेखा- अह्ह्ह मा कितना बेरहम है रे तू कोई ऐसे छोड़ता है क्या अपनी दीदी की गांड

रवि- दीदी असली मजा तो इसी में है और जब सामने आप जैसी गसडरए औरत होतो आराम से करने का मन hi नहीं करता

इतना बोलते हुए रवि की सईद थोड़ी काम हो जाती है और उसका बदन झटके खाने लगता है

रवि रेखा की गांड के अंदर अपना माल गिराए जा रहा था

रेखा को ऐसा लग रहा था जैसे की उसकी गांड के अंदर कोई ज्वाला मुखी फुट गया हो

रेखा भी अपनी गांड को और ुवार उठा देती है

रवि 5 मं तक लगातार जड़ता रहता है और होनी दीदी के ऊपर निढाल हो जाता है

5 मिंट तक रेखा के ऊपर लेते रहता है और जब दोनों की सांसे दूरिस्ट होती है तो रवि बगल में सरक जाता है जिससे उसका लुंड पकककक से होनी दीदी की गांड से बहार आजाता है

रेखा- छोड़ ली अपनी दीदी की गांड फाड़ दिया न तूने इस

रवि अभी कुछ बोल नहीं रहा था बस वो रेखा को देख रहा था

रेखा उठ कर उसके सामने hi पॉटी करने की पोजीशन में बैठ जाती है और अपने दोनों हाथ निचे लेजाकर अपनी गांड फिआला देती है

गांड तो अब पहले से ह्यदा फ़ैल hi चुकी थी

रेखा की गांड को देख कर रवि का होश उड़ जाता है और वो सरकता हुआ रेखा के और नजदीक आ जाता है

रेखा- ऐसे क्या देख रहा है देख तूने क्या हाल किया अपनी दीदी की गांड का कैसे फैट गयी मेरी ौरी गंड़द अह्ह्ह्ह

इतना बोलकर रेखा एक ऊँगली गांड में घुसा देती है और इधर उधर घूमने के बाद बहार निकलती है

ऊँगली के साथ साथ रवि का सारा वीर्य भी बून्द बून्द करके बहार आने लगता है

रेखा- देख क्या किया तूने अपनी दीदी के साथ कोई इतना बेरहमी से अपनी दीदी की गांड मरता है क्या

रवि अब ौरी तरह से खुल चूका था अपनी दीदी का रान्दीपना देख कर

रवि- दीदी आपको नंगा देखने के बाद आप पर रेहम करने का. मेरा मन नहीं करता

रवि की बात सुनकर रेखा की आँखों में एक अजीब सी चमक आ जाती है

रेखा- ठीक है मत किया कर रेहम अपनी दीदी पर ऐसे hi छोड़ा कर जैसे मैं कोई रंडी हु

रवि अपना हाथ आगे बढ़ा कर रेखा के गाल पर रख देता है

रवि- दीदी आप कोई रंडी नहीं हो आप बस मेरी रंडी हो मेरी रंडी दीदी जसिके मैं ौरे मजे लूंगा

रेखा- कूटना अच्छा भाई दिया है भगवान ने मुझे कितना ोयार करता है तू अपनी दीदी से

रेखा की नजरो के सामने रवि का लुंड हवा में झूल रहा था

40 मं की चुदाई के बाद भी वो पूरी तरह से नहीं बैठा था

रेखा लगातार उस लुंड को देख रही थी जो थोड़ी देर पहले तक उसकी गांड को फाड़ने में लगा हुआ था

रवि- दीदी ऐसे क्या देख रही हो

रेखा- देख रही हु की क्या लुंड दिया है भगवान् ने तुझे हमेशा घोड़े जैसे खड़ा hi रहता है

रवि- दीदी जब सामने आपके जैसी गदराई घोड़ी होगी तो ये कैसे बैठ सकता है

दीदी इस साफ़ करो न देखो हल्का हल्का आपकी हगवास भी लग गयी है इसपर

रवि का लुंड किसी हिरे की तरह चमक रहा था

जिसे देख कर रेखा के मुँह में पानी आ रहा था

रेखा अपना मुँह थोड़ा आगे करके बोलती है

रेखा- तू खुद hi साफ़ करले मेरी तो हालत खराब क्स्डडी तूने पहली चुदाई में hi

रवि बिना कुछ बोले होना लुंड अपनी दीदी के होठो पर फेरने लगता है

रेखा भी मजे से अपने होठो को थोड़ा सा खो देती है

और अब रवि का सूपड़ा उसके मुँह में घुस जाता है

रवि अपने हाथो को अपनी दीदी के सर ओर सेट करता है और एक hi झटके में पूरा लुंड अपनी दीदी के मुँह में पेल देता है

रवि का लुंड थोड़ा ढीला पर चूका था पर अभी भी वो 7 इंच तो था hi इस बार रेखा को इतनी दिक्कत नहीं होती

और इधर रवि लगातार अपनी दीदी का मुखछोडन किया जा रहा था

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देखते hi देखते 2 मं के अंदर रवि का लुंड दुबारा होनी पूरी औक़ात में ाजता है

और सटासट सटासट झटके मरते जा रहा था उसकी आँखों में जैसे खून उतर आया था

रेखा समझ रही थी की रवि पुरे जोश में है

पर वो इस समय का ोुरा मजा लेना कहती थी

रेखा होने हाथो से रवि का हाथ पकड़ कर दबती है

और जैसे वो कुछ इशारा करती है

रवि बजी होनी दीदी का इशारा समझ जाता है

और अपना लुंड एक झटके में रेखा के मुँह से निकाल लेता है

लुंड के साथ साथ थूक की एक मोती धार जो रेखा के गले में जमी हुई थी वो भी बहार आने लगता है

रवि बिना देर किये अपना हाथ रेखा के मुँह के निचे लेजाता है और सारा थूक होने हाथ ओर इकट्ठा करके उसे दुनारा से रेखा के मुँह ओर गिरा देता है और अपनी दीदी के पुरे फेस पर वो थूक को आ हे से लगाने लगता है

रवि की हरकते अब गन्दी होती जा रही थी जो रेखा को बहुत पसंद आ रही थी

रवि सारा थूक लगाने के बाद थोड़ा निचे जुक कर होनी दीदी के निचले होठ को होने दातो के बिच ोाकद लेता है और जोसरे काट लेता है

रेखा इस हमले से थोड़ा सिहुक जाती है

पर वो पीछे नहीं हटती

अब रवि अपनी जुबान को रेखा के फेस पर फेरने लगता है और चाट चाट कर अपनी दीदी का सारा थूक पी जाता है

रेखा- कितना मजा आया न भाई

रवि- है दीदी मैंने कभी नहीं सोचा था की मैं जो रात को आपके साथ करता था उससे भी ज्यादा मजा आपके साथ जगा के करने में है

रेखा- अभी तो तू देखता जा तेरी दीदी कितना मजा देती है तुझे

रुक मैं मुँह धोके आती हु

रवि- दीदी रहने दो न ऐसे hi आजाओ मेरे पास आप मुझे ऐसे hi पसंद हो

रेखा - तुझे अपनी दीदी को इतना गंदा तरिके से छोड़ना ोासनद है

रवि- दीदी मैं तो आपको इससे भी गंदे तरिके से छोडूंगा बस आप देखती जाओ

रेखा- भाई चुदाई तो अब तुझे मेरी जिंदगी भर करनी है

चल थोड़ा सा सो जाते है फिर रात भर चुदाई करेंगे

रवि- है दीदी रात की नींद अभी hi पूरी कर लेते है फिर रात भर मैं आपकी गांड मरूंगा

रेखा- है भगवान् तू क्या मेरी गांड को कोई गुफा बनाएगा रात भर छोड़के

रवि- अब दीदी जो भी बने पर चुदाई तो होगी hi

टेंशन मत लो अब अगला नंबर आपकी छूट का है इतना बोलकर रवि लेत जाता है

और रेखा के चेहरे पर भी एक मुसकान आ जाती है

रेखा सीधा लेती थी और रवि होना मुँह रेखा की और घुमा कर उसे hi देखे जा रहा था

रेखा- ौसे क्या देख रहा है मेरे राजा भाई

रवि- देख रहा हु मेरी रंडी कितनी प्यारी दिखती है चुदाई के बाद

रेखा अपने दोनों हाथो को ऊपर की और उठती हुई होनी बगल रवि के सामने खोल देती है

रवि की नजर अब उसकी दीदी की पसीने से भरी बगल पर थी

रेखा- मुझे पता है तुझे ये कितनी पसंद है चल आजा और सूंघ ले होनी दीदी की बगल

नींद अच्छी आएगी तुझे

रवि बिना टाइम गवाए अपनी नाक और जीभ को काम पर लगा देता है

और रेखा तड़प जाती है

रवि 5-10 मं तक अपनी दीदी की दोनों बगल चाट चाट कर साफ़ कर देता है और अपनी दीदी की चुकी पर सर रख कर आँखे बंद कर लेता है

रेखा को रवि बहुत मसल लगता था पर आज उसने उसका असली रूप देखा था जिसके बाद से अब रेखा उसे और भी ज्यादा कहने लगी थी

कहती भी क्यों न दोनों भाई बेहेन के ख्याल एक दूसरे से कूटना मिलते थे

दोनों hi एक से बढ़ कर एक पागल थे

रेखा भी अपना हाथ रवि के सर पर रख कर उसके बालो में अपनी ऊँगली घूमने लगती है

और थोड़ी hi देर में उसकी भी आंख लग जाती है

तो भाई लोग कहानी कैसी जा रही है

कमेंट करके जरूर बताये

और कहानी पढ़ने के बाद एक लिखे जरूर दे ताकि हमे और अच्छे से कहानी लिखने का सहस मिले

धन्यवाद्........
 
अपडेट no-37

आज आखिर कार रेखा को एक लुंड मिल hi गया था जिससे वो अपनी साडी अधूरी इच्छाएं पूरी कर सकती थी

भले hi वो लुंड उसके छोटे भाई का था पर आज वो उस लुंड से अपनी गांड मरवा के आज खुश हो गयी थी

दोनों भाई बेहेन एक दुआरे की बहो में बहे डेल सो रहे थे

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थोड़ी देर बाद रेखा की आँख खुलती है उसकी नजर सीधा रवि ले लुंड पर जाती है और उसके चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ जाती है .अभी तक रवि का लुंड हवा में लहरा रहा था

रेखा को थोड़ी देर पहले हुई अपनी गांड चुदाई याद आ जाती है कैसे आज उसके छोटे भाई ने उसकी गांड बड़ी बेदर्दी से मरी थी

रेखा-. (सच hi खा है भगवान् किसी ने सब्र का फल मीठा होता है

भले hi भगवन ने मुझे इतने साल एक लुंड के लिए तड़पाया पर आज देखो ऐसा लुंड दिया है जो कभी नहीं थकेगा और दिन रात मेरे छेड़ो की सेवा करेगा)

रेखा उठ कर होने कपडे पेहेन लेती है और रवि को वैसे hi नंगा छोड़ कर रात. के खाने की तैयारी करने लगती है

रवि दुनिआ से बेखबर होकर सो रहा था

लगभग 8 बजे रेखा दुबारा से कमरे में आती है और रवि को उठा देती है

रवि भी तुरंत आँखे मसलता हुआ उठ जाता है

रवि- दीदी हम कितनी देर तक सोते रहे

रेखा- रात हो गयी है और तू पूछ रहा है कितनी देर तक सोते रहे

रवि- दीदी तब तो आज खाना भी लेट हो जायेगा

रेखा- मेने बना लिया है खाना तू जा हाथ मुँह धो कर आजा

रेखा बहार चारपाई पर आकर बैठ जाती है

रवि भी होनी धोती लपेट कर बहार आ जाता है

रेखा को रवि के धोती में बना हुआ तम्बू अभी तक नजर आ रहा था

रवि मैं दरवाजे की और बढ़ता है

रेखा- अरे खा जा रहा है तू

रवि- दीदी पेशाब लगी है बहुत तेज

रेखा- तो बहार क्यों जा रहा है इतनी रात को यही आंगन में कर ले

रवि चुप चाप अपनी धोती उठा कर अपना विशाल लुंड निकल कर आंगन में hi खड़े होकर पिशाब करने लगता है

रवि का लुंड अपने पुरे अकार में था

रेखा को रवि के लुंड पर उभरी हुई नशे साफ़ नजर आ रही थी जिसे देख कर रेखा मस्त हो जाती है

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रेखा-. ( क्या hi मस्त लुंड दिया है भगवान् ने तुझे छोटे भाई तेरी दीदी तो तेरे लुंड की गुलाम बन गयी भाई )

रवि अपनी धोती सही करके खत पर आकर बैठ जाता है

और रेखा की गॉड में सर रख कर लेत जाता है

रेखा- डिबरा सोयेगा क्या तू अब

रवि- दीदी भूख लगी है

रेखा- है बड़ी म्हणत जो कृ है तूने आज

रवि- दीदी म्हणत तो अभी और करनी है

रवि की बात सुनकर रेखा के होठो पर मुस्कान आ जाती है

रेखा होना मुँह निचे करके रवि के होठ चुम लेती है

रेखा- आज मैंने तेरे लिए बैगन की सब्ज़ी बनाई है तेरी पसंदीदा है न

रवि- दीदी बैगन तो आपको भी पसंद है

रेखा- तुझे कैसे पता की मुझे बैगन पसंद है

रवि- आपने hi तो बताया था दोपहर में

रेखा रवि की बात सुनकर थोड़ा शर्मा जाती है

रेखा- पर मुझे तो कच्चा बैगन पसंद है जो थोड़ा लम्बा हो

रवि- और दीदी फिर आप उसे अपने कोनसे छेद से कहती हो

रवि अब पूरी तरह से खुल कर बात कर रहा था

रेखा- आज तक तो 2 छेड़ो से hi खाया था

पर आज तूने अपना ये कला बैगन अपनी दीदी के तीसरे छेद को भी खिला दिया

रवि को भी अपनी दीदी से खुल कर बात करने में अब पूरा मजा आ रहा था

रवि- दीदी अभी तो आप देखती जाओ आपका छोटा भाई आपको खा खा और कैसे कैसे होना ये कला बैगन खिलता है

इतना बोलकर रवि अपना हाथ से धोती में बने तम्बू को मसल देता है

रेखा भी रवि की हरकत देख लेती है

रेखा आगे बढ़ा कर रवि का लुंड पकड़ लेती है .

रेखा - भाई तेरा लुंड हमेशा hi खड़ा रहता है क्या ये कभी थकता नहीं है क्या

रवि- दीदी जब भी म तुमको देखता हु ये अपने आप खड़ा हो जाता है

और बात थकावट की रही तो आप आज रात को खुद hi आजमा लेना

रेखा की चेहरे की चमक काफी बढ़ चुकी थी

रेखा- बड़ा आया अपनी दीदी को अपने लुंड की ताक़त दिखने वाला

बीटा एक बार अगर तेरी दीदी अपनी पर आ गयी न तो तू भागता फिरेगा अपना ये मुसल धोती में बांध के

रवि- चलो दीदी देख hi लेते है की कोण भागता है और कोण भगाता है

रवि की बाटे रेखा को काफी गरम कर चुकी थी उसकी छूट से पानी बहना भी शुरू हो चूका था

रेखा- चल पहले खाना तो खले शरीर में जान रहेगी तभी तो तू अपनी दीदी को अपने लुंड की ताक़त दिखायेगा न

रेखा उठ कर खाना ले आती है और दोनों भाई बेहेन एक दूसरे को कामुक तरिके से खाना खिला देते है

रेखा उठ कर बर्तन साफ़ करने लगती है रवि वही खत पर बैठा बैठा अपनी दीदी की गांड को निहार रहा था

रवि- दीदी जल्दी जल्दी धो लो न बर्तन

रेखा- बड़ी जल्दी है तुझे अपनी दीदी को अपने निचे लगाने की

रवि- अच्छा दीदी अब तो आप मेरी पत्नी हो और दीदी भी है न

रेखा- है हु तो

रवि- तो मैं जो बोलूंगा आप वो करोगी न अपने भाई के लिए

रेखा- तू बोल के तो देख

रवि1-2 मिंट कुछ सोचता है और फिर

रवि- दीदी आपके पास कोई लिपस्टिक है क्या

रवि की बात सुनकर रेखा चंक जाती है और अपने भाई के शौख पर उसे नाज़ होता है

रेखा- है है तो पर तू क्या करेगा लगाएगा क्या

रवि- अरे दीदी पहले बताओ कोनसी कलर की है

रेखा- बिकुल लाल वाली एक दम सुराख़

रेखा की बात सुनकर रवि के मुँह में ोानी आ जाता है

रवि- अच्छा दीदी मैं कमरे में जा रहा हु तुम अपनी लिपस्टिक लेकर आना

एयर जल्दी आना

रेखा- है ठीक है चल आती हु

रेखा. ( आज ये क्या करेगा मेरे साथ हे भगवन क्या चल रहा है मेरे भाई के दिमाग में)

रेखा के चेहरे पर एक मुस्कान थी जिससे साफ़ पता चल रहा था की वो काफी खुश है

जल्दी hi रेखा काम निपटा कर अपने कमरे में जाती है

रवि- आ गयी मेरी प्यारी रंडी दीदी

रवि के मुँह से उसे अपने लिए इतना गन्दा सब्द सुन कर एक झटका लगता है और रेखा की छूट वही खड़े खड़े hi पानी छोड़ने लगती है

रवि ने पहले भी रेखा को रंडी कुटिया बोलै था पर उस समय उसके ऊपर चुदाई का बहुत सवार था पर अब तो रवि खुल कर अपनी दीदी को अपनी रंडी बोल रहा था

अपने भाई के मुँह से पाने लिए ये सब्द सुनकर रेखा का चेहरा खिल जाता है

रेखा रवि की और बढ़ती है वो पहले से hi अपनी धोती उतर कर बैठा था

रेखा- अच्छा तो अब तेरी दीदी तेरी रंडी बन गयी है

रवि- दीदी अब तो आप मेरी सब कुछ हो अगर आपको कोई दिक्कत हो तो मैं ऐसा नहीं बोलूंगा कभी

रेखा अपना हाथ रवि के मुँह पर रख देती है

रेखा- तू मुझे जो बोलना है वो बोल और सच में अब मैं तेरी रखैल हु जिसे तू जैसे कहे इस्तेमाल कर बस इस्तेमाल करता रह और निचोड़ दे अपनी इस रंडी दीदी की जिस्म को और पी जा मेरी जवानी का सारा रास मेरे छोटे भाई

रवि- दीदी रास तो मैं पिऊंगा hi और रोज पिऊंगा

पर आप बताओ पहले लिपस्टिक लायी हो या नहीं

रेखा अपना दीसरा हाथ आगे बढ़ा कर रवि को लिपस्टिक दिखती है

रवि- दीदी ये हुई न बात आप एक काम करो अच्छे से लिपस्टिक लगाओ अपने होठो पर और है बहुत गहरी लगाना जिससे आपके होठ और भी ज्यादा मीठे हो जाये

रवि की बाटे अब सीधा रेखा की छूट पर हमला कर रही थी वो अपने छोटे भाई की बाटे सुन कर निचे से पानी पानी हुई जा रही थी

रेखा- तो अब तू अपनी दीदी के होठो पर लिपस्टिक लगा कर कसेगा

तुझे अच्छा लगता है क्या लिपस्टिक होठो पर

रवि- दीदी आपके मुँह में तो पहले से hi काफी मिठास है पर ये लिपस्टिक वाली मेरी तमन्ना है बस एक बार पूरा कार्डो

रेखा- मैं तेरी हर ख्वाइस पूरी करदूंगी बस तू बताता जा अपनी इस गुलाम को समझा और देख फिर मैं कैसे तेरे सरे अरमान पुरे करती हु

रवि- दीदी आप लगाओ मैं पेशाब करके आता हु

रवि कमरे से बहार निकल जाता है और रेखा वही शीशे में देख देख कर अपने होठो पर खूब रगड़ रगड़ कर काम से काम 5-6 लैर लिपस्टिक लगती है

और लगभग आधी लिपस्टिक वो अपने होठो पर थोप लेती है

रवि 5 मं बाद कमरे में दाखिल होता है

इसबार रवि को देख कर रकेः सोच में पद जाती है की आखिर ये करना क्या कहता है

रवि बहार पड़ी खत कमरे में उठा लाया था

रेखा- अब खत क्यों ले आया तू

रवि- दीदी मैंने कुछ सोचा है

रेखा- अरे सोचा है वो तो ठीक है पर अगर तू मुझे इस खत पर लिटा कर जानवरो की तरह छोड़ेगा तो ये पक्का टूट जाएगी और तुझे पता है न की कम्मो को सिर्फ खत पर hi नींद आती है उसे क्या बताएगा तू कैसे टूट गयी खत

रवि- अरे दीदी आप कुछ ज्यादा hi चिंता करती हो

मैं आपको इस खत पर नहीं छोडूंगा ये तो किसी और काम के लिए लाया हु मैं

रेखा के चेहरे पर एक परशान भाव था वो समझ नहीं पा रही थी की रवि आखिर खत लाया किस लिए है

रवि- दीदी लिपस्टिक तो बड़ी जानदार लगाई है तुमने मेरा लुंड झटके मार रहा है तुम्हारे ये रसीले होठ देख कर

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रवि खत को पास ने hi बिछा देता है और धीरे धीरे रेखा की और बढ़ने लगता है

जैसे जैसे रवि अपनी दीदी की और बढ़ रहा था उसकी दीदी वैसे वैसे पीछे की और हटती जकरहि थी ........
 
अपडेट-38

रेखा पीछे हटती हुई दिवार से जा लगती है

और अब उसके पास पीछे हटने के लिए और रास्ता नहीं था

रवि धीमे कदमो से अपनी दीदी के पास पहुंच जाता है और अपना एक हाथ रेखा के गलो पर फेरता है

रवि- क्या हुआ दीदी मेरा लुंड देख कर दर गयी हो क्या तुम जो भाग रही हो

रेखा- तू छोड़ता hi ऐसे है मुझे बिलकुल रेहम नहीं करता तू अपनी दीदी के ऊपर

रवि- दीदी तुम्हे क्या पता तुम रेहम करने लायक चीज़ hi नहीं हो तुम्हे तो दहकते hi मन करता है की तुम्हे पूरी नंगी करदु

और यज्ञ पटक पटक कर छोड़ू पूरी बेरहमी के साथ समझी मेरी रंडी दीदी

इतना बोलकर रवि होने होठ रेखा के होठो पर रख देता है और इस बार उसे अपनी दीदी के होठो कस स्वाद बड़ा hi मस्त लग रहा तह

रेखा के मुँह में पहले से hi काफी मिठास थी पर आज उसके मोठे मोठे होठो ओर लिपस्टिक का टेस्ट रवि को पागल कर रहा था

रवि अपनी दीदी के निचले होठ को अपने दोनों होठो में लेकर अच्छे से चुस्त है कभी डाट में फसा कर अपनी दीदी के होठ चबाता है

और अपने हाथ निचे लेजाकर रेखा का पेटीकोट का नाडा खोल देता है

रेखा का पेटीकोट सरकता हुआ एक बार में hi निचे चला जाता है और अब रेखा निचे से पूरी नंगी हो चुकी थी

रेखा मस्ती में अपना मुँह खोल देती है एयर रवि अपनी जीभ अपनी दीदी के मुँह में घुसा देता है

और अपने दोनों हाथ निचे सरकता हाउ रेखा के ब्लाउज के हुक खोलने लगता है

एक एक करके वो अपनी दीदी के सरे हुक खोल देता है

रेखा के कच्चे अब रवि के सामने लटक रहे थे

रवि अपना मुँह हटाता है और रेखा की ठुड्डी पकड़ कर उसकी सहकाल ऊपर उठता है

दोनों भाई बेहेन की नजर मिलती है दोनों की नजरो में हवस थी रेखा की आँखे पूरी लाल हो चुकी थी

रवि रेखा को एकदम से धक्का देकर दिवार की तरह मुँह करके गुमा देता है

और अपनी दीदी का ब्लाउज पकड़ता हुआ पीछे से खींच निकाल देता है

अब रेखा मादरजात अपने छोटे भाई के सामने नंगी खड़ी थी

रवि अपनी दीदी से चीजक जाता है और अब उसका लुंड सिकड़ा रेखा की गांड के ऊपर ाजत है

थोड़ा सा धक्का लगाकर रवि अपना आधा लुंड रेखा की गांड में फसा देता है

रेखा रवि के इस हमले से थोड़ा लड़खड़ा जाती है फिर तुरंत hi सम्भल जाती है

रवि- क्या हुआ दीदी ज्यादा मोटा है क्या मेरा लुंड जो तुम अभी से hi गिर रही हो अभी तो पूरी रात बाकि है मेरी रंडी दीदी ताक़त बचा कर रखो आज तुम्हारा छोटा भाई तुमको ौरी तरह से निचोड़ देगा

रेखा कुछ नहीं बोल रही थी बस होनी आँखे बंद किये लम्बी लम्बी सांसे खींच रही थी

रवि अपने हाथ से रेखा का मुँह पकड़ कर अपनी तरफ घूमता है और अपनी दीदी के मुँह में अपनी जीभ दाल देता है

रवि अपने दोनों हस्त आहे की और लेजाकर रेखा के दोनों निप्पल्स पकड़ कर बेरहमी से मरोड़ देता है

रेखा के मुँह में पहले hi रवि अपनी जीभ घुसा चूका था रेखा की आवाज उसके मुँह में hi डाब जाती है

रवि- क्या हुआ दीदी दर्द हो रहा है क्या

इतना बोलकर रवि पिछली बार से भी ज्यादा बेदर्दी से रेखा के निप्पल मरोड़ देता है

रेखा- ajhhhhhhhhhh

रवि- दीदी अब इस दर्द की ाअदत दाल लो जब जब तुम्हारा छोटा भाई तुमको चुवेगा ऐसे hi चुवेगा

रेखा को जो चाहिए था उसे वो सब मिल रहा था रेखा के चेहरे पर एक चमक थी

रेखा भी होनी जीभ रवि के मुँह में दाल डटी है

इधर रवि लगातार अपनी दीदी के होठ कसने के साथ साथ उसकी चूचिया दबा रहा था और पीछे से अपनी दीदी की गांड में लुंड फसा कर धीरे धीरे झटके दे रहा था

अब रवि अपना एक हाथ निचे सरकता है और सीधा अपनी दीदी की छूट पर रख देता है और अपनी दीदी की पहली छूट अपनी मुट्ठी में भर लेता है

रेखा की सांसे अब फूल रही थी रवि एक साथ उसके कई अंगो को सेहला रहा था

रवि अब अपनी बिच वाली ऊँगली अपनी दीदी की गीली छूट में सरका डाटा है

और जैसे hi उसकी ऊँगली रेखा की छूट के डेन पर लगती है उसका बदन एक झटका खता है

रवि- दीदी तुम तो हाथ लगाने से hi पनिया गयी अभी तो ोुरा लुंड तुम्हारी छूट में जायेगा तब क्या करोगी मेरी प्यारी दीदी

रवि रेखा की पीठ की छत्ता हुआ निचे की और बढ़ रहा था अब उसके दोनों रेखा की कमर ओर थे

रेखा की गांड के ऊपर जो कमर पर मॉस वाला हिस्सा था वो कुछ ज्यादा hi गदराया हुआ था जिसे पकड़. कर रवि मस्त हो जाता है और जोरसे मसल देता हाउ

रेखा- अह्ह्ह्हह मैय्या आराम से करना तेरी दीदी भाग थोड़े hi रही है कहि

रवि- दीदी तुम्हारे जैसी गदराई घीड़ी के साथ आराम से करने का कोई फायदा नहीं ऐसा कमउम शरीर तो होता hi है खूब जोर जोर से मसलने के लिए

इतना बोलकर रवि दुबारा से खड़ा होता है और इस बार रवि वो करता है जिससे रेखा पूरी तरह से उसकी गुलाम बन जाती है

रवि उठते hi रेखा के बालो को जोरसे पादकता है और उसे थोड़ा खीचते हुए खत के पास लता है

आज रेखा पहली बार अपने छोटे भाई के अंदर का जानवर देख रही थी

जिसे महसूस करके उसका अंग अंग खिल रहा था

रवि- दीदी चलो लेत जाओ तुम खत पर

रेखा- मेरी बात मां ये खत नहीं संभाल पायेगी हमारी चुदाई का भर टूट जाएगी ये खत

रवि- अरे मेरी चुदड़ो दीदी तुमको बड़ा जल्दी है छोड़ने की अभी तो मैं और कुछ करूंगा चुदाई के लिए तो अभी पूरी रात बाकि है

रवि की बात सुन कर रेखा का हलक सूखने लगता है रेखा चुप चाप खत पर लेत जाती है

रवि रेखा के बाल पकड़ कर उसे इसरहने की तरफ से खींचता है रेखा भी सकरते हुए अपनी गर्दन को खत से बहार कर देती है

अब तक रेखा समझ चुकी थी की अब क्या होने वाला है और उसे ये भी यकीन हो चूका था की अब वो होने छोटे भाई के अंदर का जानवर जगा चुकी है जिससे उसे अब भगवान् भी नहीं बचा सकता

रेखा बड़ी उम्मीद भरी नजरो से रवि को देख रही थी

रवि रेखा की सर के पास आता है और बैठ कर अपनी दीदी के होठो की मीटर चूसने लगता है

5 मिंट तक वो रेखा के दोनों होठ खूब चुस्त है

रेखा - तू तो मेरे होठ चूस चूस कर लटका hi देगा

रवि- दीदी अब तुम चीज़ hi ऐसी हो की क्या कृ मन नहीं मनस्ता तुम्हे जितना छुवो उतना hi और चुने का मन करता है

अच्छा दीदी वो लिपस्टिक खा राखी है तुमने

रेखा- तू क्या पूरी लिपस्टिक चाट गया मेरी होठो की

रवि के होठो ओर हसि आ जाती है . रवि के होठ भी ौरी तरह से लाल हो चुके थे

रेखा- वो देख वह है अलमारी के ऊपर

रवि फटक से लिपस्टिक उठा लता है और बैठ कर उसे खोने लगता है

रेखा- अब क्या तू अपनी दीदी को लिपस्टिक लगाएगा

रवि- दीदी लगाऊंगा भी मैं और उतरूंगा भी मैं समझी

रवि खूब अच्छे से रेखा के होठो को दुबारा लाल कर देता है

और अब वो एक बार छोटी सी किश करता है और सीधा खड़ा हो जाता है

रेखा आने वाली तबाही के लिए खुद को तैयार कर रही थी उसे पता था की अब उसका छोटा भाई खतरनाक तरिके से उसका मुखछोडन करने वाला है

रेखा की आँखों के सामने उसके छोटे भाई का लुंड हवा में झूल रहा था जिसे देख कर रेखा बार बार अपने गले से थूक जातक रही थी.

रवि- दीदी दर तो नहीं लग रहा न तुमको मेरा लुंड देख कर

रेखा- अभी तू बच्चा है समझा बच्चा

रेखा होनी बातो से रवि को और उकसा रही थी वो जानती थी की उसकी बातो का क्या असर होगा ओर वो और भी ज्यादा बेदर्दी के साथ अपने छोटे भाई से छुड़वाना कहती थी

कहे वो मुँह हो गांड hi या छूट हो

रवि- अभी बताता हु साली रंडी कोण बच्चा है

इतना बोलकर रवि थोड़ा सा झुकता है और अपना लुंड अपनी दीदी के चेहरे पर रख देता है

रवि का लुंड इतना विशाल था की ुवार से hi वो रेखा के सर से गले तक नजर आ रहा था

रवि- दीदी अब देख तेरा ये बच्चा भाई कैसे तेरे नूह की चुदाई करता है

रेखा- तू बहुत बड़ा हरामी है अपनी hi दीदी का मुँह छोड़ेगा तू तुझे शर्म नहीं आएगी

रवि- जब कूद कूद कर गांड मरवा रही थी अपने छोटे भाई से तब तो तुझे शर्म नहीं आयी और साली कैसे रात को आँख बंद करके पुरे मजे लेती थी आज मैं तुझे दिखता हु कैसे होते है मजे

इतना बोलकर रवि होना लुंड पकड़ कर रेखा के होठो पर रख देता है और थोड़ा सा दबाता है

रेखा भी इशारा समझ कर थोड़ा सा मुँह खोल देती है

रवि भी बहुत बड़ा हरामी बन चूका था वो चटाक से एक छठा रेखा के गाल पर मरता है

रवि- साली रंडी नखरे करती है ोुरा मुँह खोल आज तुझे मैं लुंड का असली सुख देता हु बड़े बैगन खाये है न तूने अपने इस मुँह से आज तुझे पूरा का पूरा लुंड खिलायेगा तेरा छोटा भाई

रेखा का गाल लाल हो चूका था

पर मजा और हवस में रेखा सब भूल चुकी थी वो भी अपना मुँह पुरे साइज में खोल देती है

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रवि बिना देर किये एक जोरदार झटका मरता है जिसके साथ hi उसका आधे से ज्यादा लुंड रेखा के मुँह में समै जाता है

रेखा की तो हालत खराब हो जाती है इस झटके से रेखा की आँखों में आंसू आ जाते है

रवि बिना देर किये लुंड थोड़ा सा ोीचे खिचज कर एक और जोरदार झटके के साथ होना पूरा लुंड

अपने दीदी के मुँह में पेल देता है

इस हमले से रेखा की आँखों में आंसू आ जाते है

रवि- अह्ह्ह्हह्हह साली रअंदड्डड्डड़ कितना गरम मुँह है तेरा तेरे सरे छेद ऐसे hi हेशा पानी छोड़ते रहता है क्या दीदी

रेखा कुछ बोलने की हालत में नहीं थी क्योंकि उसके छोटे भाई का लुंड उसके गले तक फसा हुआ था

रेखा बस आँखे खोल कर रवि को देख रही थी

रवि दुबारा से थोड़ा ोीचे होता है और एक जोरदार झटके के साथ होना लुंड दुबारा से रेखा के हलक तक पंहुचा देता है

रेखा चुपचाप किसी रंडी की तरह अपना मुँह खोले पड़ी थी

अब रवि ज्यादा टाइम न लेते हुए एक के बाद एक जोरदार झटको से अपनी दीदी का मुखछोडन करने लगता है

रेखा- अहहह्क गुगुउउउउउग्घूऊऊऊजूउउउउ

रवि- क्यों साली बता कभी ऐसे बैगन खाया है क्या

रवि अपने हाथ आगे बढ़ा कर रेखा की गर्दन ोाकद लेता है और अपना एक पेअर उठा कर खत पर रख देता है और दुबारा से झटके मरने लगता है

अब वो ोेहले से भी अच्छी पोजीशन में था वो अपने हर झटके के साथ होने तत्तो को रेखा के मुँह ओर मार रहा था

उसका पूरा लुंड अपनी दीदी के मुँह में अंदर बहार हो रहा था

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रवि- बोल न साली रंडी कभी खाया है तूने होने इस छेद से ऐसे बैगन

रेखा - गिजुगुगुगुणऊगूउऊउउउ

रेखा के मुँह से थूक और उसकी लिपस्टिक बह रही थी जो उसके पुरे चेहरे पर फ़ैल चुकी थी

रवि अपना लुंड एकदम से बहार निकाल लेता हाउ और रेखा खस्ने लगती है और बहुत सारा थूक बहार फेक देती है

रवि- बोल न दीदी कबुई ऐसे खाया है तूने बैगन बोल मेरी रंडी बोल मेरी रखैल

रेखा- कितना बड़ा बहनचोद है तू सेल अपनी दीदी का मुँह छोड़ रहा है मैं तेरी दीदी हु कोई रंडी नहीं जो मेरा मुखछोडन कर रहा है तू सेल हरामी

रवि- चुप साली रंडी कितना नखरा करती है तू

वो इतना बोलकर अपना लुंड दुबारा से रेखा के मुँह में पेल देता है

रेखा की आँखे पूरी तरह से लाल हो चुकी थी उसका पूरा चेहरा थूक से सना हुआ था जिसे देख कर रवि और जोश में आ जाता है

सटासट सटासट एक के बाद एक झटको के साथ वो रेखा की मुँह चुदाई कर रहा था

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रवि अपना हाथ आगे बढ़ा कर रेखा की चुकी पर रख देता है और जोरसे मसलते हुए होने धक्को का चालू रखता है

रेखा की हालत खराब थी वो ये भी जानती थी की उसका भाई आधे घंटे से पहले नहीं झड़ने वाला

अभी तो उसकी मुँह चुदाई को 15 मं hi हुए थे

रवि- दीदी तेरी चुकी भी बड़ी मस्त है कैसे बड़ी किया तूने इनको

इतना बोलकर रवि रेखा का निप्पल पकड़ कर खुश देता है

रेखा बूस्टर पर hi तड़प कर रेख जाती है

रवि- अह्हह्ह्ह्ह दीदी कीटनाआए गरम है तेरा मुँह मझे तो लग रहा है की जैसे मैं तेरी छूट hi मार रहा हु

रवि होने हर झटके के साथ अपना लुंड रेखा के गले तक थुश रहा था

रावज दुबारा से अपना लुंड बहार निकाल लेता है और बैठ जाता है

रेखा के दोनों गाल पकड़ते हुए

वो होने होठ रेखा के होठो पर रख देता है और 5 मं तक चूसने के बाद उसके गलो को चाटने लगता है

होने छोटे भाई की गन्दी गन्दी हरकते रेखा की छूट पानी पानी कर रही थी वो कहती थी की रवि जल्दी से उसकी छूट मरे ओर रवि टाइम का ोुरा फायदा उठाने में लगा हुआ था

रवि- दीदी तू देखना तुझे ऐसा मस्त करके रगडूंगा की तू दिन भर अपनी छूट और गांड लेकर मेरे लुंड के आगे पीछे नाचेगी

रेखा- तू नाचने लायक छोड़ेगा जैसे तू छोड़ रहा है मुझे तो लगता है मैं चल भी नहीं पाऊँगी

रवि- दीदी जब तेरे सरे छेद मेरे लुंड के साइज के हो जायेंगे तब कोई दिक्कत नहीं होगी बाकि 2-3 दिन तो तुझे ऐसे hi दर्दभरी चुदाई का सामना करना पड़ेगा

अभी रेखा कुछ बोलती की रवि अपना लुंड रेखा के होठो के ऊपर रख देता है और आगे ोीचे करने लगता है

रेखा भी अपने होठो को थोड़ा सा खोल कर बिच में जगह बना देती है जिससे उसके छोटे भाई का लुंड उसके होठो पर आराम से आगे पीछे हो रहा था

रवि- हईये दीदी सच में क्या बताऊ तू क्या चीज़ है तेरा जिस्म का हर हिस्सा छोड़ने लायक है तेरे ये मोठे मोठे होठ हैए भगवान क्या दीदी दी है तूने मुझे

इतना बोलकर रवि दुबारा से अपना लुंड रेखा के गले तक उतार देता हाउ और होना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी दीदी की ढकती छूट पर रख है

छूट पर हाथ पड़ते hi रेखा अपना आप खो देती है और निचे से अपनी गर्दन उठा उठा कर अच्छे से रवि का पूरा लुंड अपने मुँह में डालने की कोशिस करती है

रवि भी अपनी दीदी की हरकत को देख कर खुश हो जाता है और अपनी 2 उंगलिया अपनी दीदी की छूट में सरका देता है और आगे पीछे करने लगता है

रवि- आह्ह्ह्ह दीदी तू बहुत बड़ी रंडी है जिसको जितना लुंड मिले उतना hi काम है अह्ह्ह्ह दीदी मेरा ोानी निल्ने वाला है अहहहहह

रवि अब अपने झटको को और तेज कर देता है और वो जब जब झटके मरता तो रेखा की आँखे बहार को आजाती

11 इनके लुंड एक hi बार में पूरा उसके गले तक उतर जाता

आखिर रवि होने चरम पर आजाता है और सीधा खड़ा होकर अपन लुंड रेखा के मुँह से बहार निकाल लेता है और पाने हाथ में पकड़ लेता है

रवि के लुंड से अभी भी रेखा का थूक निचे की और गुर रहा था जो सीधा रेखा के फेस ओर गिर रहा था

रवि होना लुंड तेजी से हिला रहा था इधर रेखा आँखे खोले होने भाई के लुंड से निकली मलाई बहार आने का इन्तजार कर रही थी

रवि होना एक हाथ निचे लेजाकर रेखा का गाल सहलाने लगता है और उसका पूरा थूक उसके चेहरे पर मलने लगता है

रवि- आह्ह्ह्हह दीदी तेरे भाई का लुंड झड़ने वाला है बोल खायेगी अपने छोटे भाई की मलाई

जब रवि की आँख रेखा की आँखो से मिलती है तो उसे अपनी दीदी की नजरो में एक आमंत्रण दीखता है जैसे उसकी दीदी आँखों से hi है कह रही है

रवि- दीदी जल्दी मुँह खो बस बहार आने वाला है . रेखा चुपचाप होना मुँह खो देती है और रवि होना लुंड उसके मुँह के पास लता है और बिलकुल चिपका कर एक के बाद एक झटके मरता हुआ पूरा माल अपनी दीदी के मुँह में भर देता है

आखिरी बून्द गिरने तक रवि अपना सूपड़ा रेखा के मुँह में घुसाए रहता है

रवि अबतक अपनी पूरी टंकी अपनी दीदी के मुँह में खली कर चूका था

रवि निचे बैठ जाता है और अपनी दीदी का मुँह अपने हाथो से पकड़ कर बंद करता है और उसके होठो को चुम लेता है

रवि- दीदी पीए जा इसे ये तेरे भाई के लुंड से निकला है जिसे तूने चूस चूस कर निकला है पी जा इसी ये अमृत है दीदी

रेखा भी बहुत बड़ी छिनाल थी

उसने 1 सेकंड की देरी न करते हुए एक hi बार में पूरा माल जातक लिया

जब रवि अपनी दीदी की गर्दन को थूक गटकते हुए देखता है तो खुस हो जाता है

रेखा अब मुँह खोले हुए हाफ रही थी खत ओर पड़ी पड़ी

रवि वही निचे hi लेत जाता है .......
 
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