- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 142,963
अपडेट-10
आज की रात तो बीत चुकी थी
और जाते जाते आने वाली रातो को रंगीन बनाने की कुछ यदि छोड़ जाती ह
सेबह जैसे hi नीलम की आँख खुलती है
वो जैसे hi सो कर उठती उसकी नजर सबसे पहले अपने छोटे भाई के लुंड के ऊपर पड़ती है
नीलम की तो सांसे hi अटक जाती है
जैसे उसने सुबह सुबह कोई बहुत देख लिया हो
नीलम की चूचिया उसकी सांसो के साथ ऊपर निचे हो रही थी
और इधर रामु को यह तक होश नहीं था की उसकी धोती पूरी तरह से खुली हुई है और उसका लुंड किसी काळा नाग की तरह बहार झक रहा है
नीलम ( अरे बाप रे ये रामु लुंड कितना बड़ा है
मुझे तो लगता था की ये अभी बच्चा hi है पर ये तो पूरा सैंड हो गया है जिस पर चढ़ जाये उसकी चल बिगड़ देगा कसम से)
ये सोचते सोचते नीलम का हाथ खुद बी खुद अपनी छूट पर चला जाता है
और जैसे hi उसे इसका अहसास होता है वो अपना हाथ एक दम से अपनी छूट से हटा लेती है
नीलम( मुझे ये क्या हो रहा ह रामु छोटा भाई है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए अभी वो छोटा है )
पर वही नीलम का दिल कुछ और hi लेह रहा था
( अरे कोई बच्चा नहीं ह अब तेरा भाई उसका लुंड तो देख किसी गधे के लुंड के बराबर है
ऐसा लुंड तो आस पास के गाओं में न होगा किसीके पास
अपना पेटीकोट उठा और बैठ जा अपने छोटे भाई के लुंड पर और मिटा दे अपने अंदर की गर्मी )
यही सब सोचते सोचते नीलम का हाथ रामु के लुंड की और बढ़ने लगता है
उसका मुँह खुला हुस था और हाथ धीरे धीरे करीब जा रहा था
जैसे hi नीलम के नाजुक हाथ रामु के सख्त लुंड पर लगते है
नीलम के मुँह से लार की एक बहुत hi प्यारी सी बून्द जम्मीं पर गिरती है
नीलम एक बार टच करते hi अपना हाथ हटा देती है
और पास hi पड़ी धोती उठा कर रामु के लुंड पर दाल देरी है
और उठ कर भगति हुई आंगन में आती है और बाल्टी उठा कर बहार जाकर हेण्डपम्प चलने लगती है
अब तक हरिया भी उठ चूका था पर अभी भी बिस्तर में लेता हुआ था उसकी नजर पंप चलती नीलम पर पड़ती है
नीलम की बड़ी बड़ी विशाल चूचिया ऊपर निचे हो रही थी हरिया अपने आपको अपनी बेटी को निहारने से नहीं रोक पाया
और इसका असर हरिया के लुंड पर हुआ
और उसका लुंड उसकी धोती में पूरी तरह से खड़ा हो चूका था
और हरिया अपने हाथो से अपने लुंड को दबाये हुए लेता रहता है
अब तक नीलम अंदर जा चुकी थी
हरिया( हाय मेरी बच्ची बिलकुल अपनी माँ पर गयी है शादी के पहले hi ऐसी हो गयी है जैसे 2-3 बच्चो की माँ हो
पर बिचारि जवानी का सुख नहीं ले पायी )
यही सोचते सोचते हरिया की आँखों में आंसू आ जाते है
हरिया का लुंड भले hi अपनी बेटी की चूचिया देख क्र खड़ा हो जाता पर वो अपनी बेटी को बहुत प्यार करता था
रेखा का घर--------
रेखा बेसुध से सोई हुई थी इतने में hi उसे बहार से आवाज आती है
काम्य- अरे दीदी आज क्या हुआ आपको कब तक सोयेगी आप
रेखा की आँखे जैसे hi खुलती है उसे अपने पीछे किसी चीज़ का अहसास होता है
ये अहसास उसे उसकी गांड के बीचो बिच हो रहा था
जैसे hi उसे इस बात का अंदाजा होता एक पल के लिए रेखा की आंखे बाजार को आ जाती है
दरअसल रवि रात में सोते सोते अपनी दीदी के इतना करीब आ गया था की उसका लुंड अब इस वक़्त उसकी दीदी की गांड में फसा हुआ था
रेखा अपना हाथ पीछे लेजाकर थोड़ा सा निचे करती है और उसका हाथ सीधा रवि के लुंड पर लगता है
अब तो मनो रेखा को जो चाहिए था उसे वो मिल गया था
रेखा का हाथ जैसे hi रवि के लुंड पर पड़ता है उसकी आँखे बंद हो जाती है और रेखा एक बार अपने हाथ को रवि के लुंड पर जड़ तक ले जाती है और अपना हतेली का दबाव बनाते हुए निचे को आती है
रेखा की हरकत से ऐसा लग रहा था जैसे की ेओ अपने भ्सी का लुंड नाप रही हो
रेखा( हे भगवन ये तो बैगन से भी बड़ा है )
और जब रेखा को इसका अंदाजा होता ह की उसका छोटा भाई अपना आधा लुंड अपनी दीदी की गांड में फसा कर सोया है
रेखा अंदर hi अंदर शर्मा जाती है
रेखा न कहते हुए भी उठ जाती है और रवि का लुंड घुप्पप से बहार आ जाता है
रेखा- क्या बात है अब तो तू इतना बड़ा हो गया की अपनी दीदी की गांड में लुंड फसा कर सोता है
और रेखा रवि के गाल पर एक किश करती है और जैसे hi उठने को होती है वो रुक जाती है
रेखा अपने आप पर काबू नहीं राख प् रही थी
वो आगे बढ़ कर अपनी नाक रवि के लुंड के पास ले जाती है और बहुत hi आराम से रवि के सुपडे को सूंघने लगती है
करीब 5 मं तक ऐसा करने के बाद रेखा आगे बढ़ कर रवि के सुपडे पर एक प्यारा सा चुम्बन करती है और था कर बहार की और चली जाती है
आज की रात सबकी जिन्दगिया बदल चुकी थी
अब देखना ये था की इस रात का असर कब और खा दलहन को मिलता है ......
आज की रात तो बीत चुकी थी
और जाते जाते आने वाली रातो को रंगीन बनाने की कुछ यदि छोड़ जाती ह
सेबह जैसे hi नीलम की आँख खुलती है
वो जैसे hi सो कर उठती उसकी नजर सबसे पहले अपने छोटे भाई के लुंड के ऊपर पड़ती है
नीलम की तो सांसे hi अटक जाती है
जैसे उसने सुबह सुबह कोई बहुत देख लिया हो
नीलम की चूचिया उसकी सांसो के साथ ऊपर निचे हो रही थी
और इधर रामु को यह तक होश नहीं था की उसकी धोती पूरी तरह से खुली हुई है और उसका लुंड किसी काळा नाग की तरह बहार झक रहा है
नीलम ( अरे बाप रे ये रामु लुंड कितना बड़ा है
मुझे तो लगता था की ये अभी बच्चा hi है पर ये तो पूरा सैंड हो गया है जिस पर चढ़ जाये उसकी चल बिगड़ देगा कसम से)
ये सोचते सोचते नीलम का हाथ खुद बी खुद अपनी छूट पर चला जाता है
और जैसे hi उसे इसका अहसास होता है वो अपना हाथ एक दम से अपनी छूट से हटा लेती है
नीलम( मुझे ये क्या हो रहा ह रामु छोटा भाई है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए अभी वो छोटा है )
पर वही नीलम का दिल कुछ और hi लेह रहा था
( अरे कोई बच्चा नहीं ह अब तेरा भाई उसका लुंड तो देख किसी गधे के लुंड के बराबर है
ऐसा लुंड तो आस पास के गाओं में न होगा किसीके पास
अपना पेटीकोट उठा और बैठ जा अपने छोटे भाई के लुंड पर और मिटा दे अपने अंदर की गर्मी )
यही सब सोचते सोचते नीलम का हाथ रामु के लुंड की और बढ़ने लगता है
उसका मुँह खुला हुस था और हाथ धीरे धीरे करीब जा रहा था
जैसे hi नीलम के नाजुक हाथ रामु के सख्त लुंड पर लगते है
नीलम के मुँह से लार की एक बहुत hi प्यारी सी बून्द जम्मीं पर गिरती है
नीलम एक बार टच करते hi अपना हाथ हटा देती है
और पास hi पड़ी धोती उठा कर रामु के लुंड पर दाल देरी है
और उठ कर भगति हुई आंगन में आती है और बाल्टी उठा कर बहार जाकर हेण्डपम्प चलने लगती है
अब तक हरिया भी उठ चूका था पर अभी भी बिस्तर में लेता हुआ था उसकी नजर पंप चलती नीलम पर पड़ती है
नीलम की बड़ी बड़ी विशाल चूचिया ऊपर निचे हो रही थी हरिया अपने आपको अपनी बेटी को निहारने से नहीं रोक पाया
और इसका असर हरिया के लुंड पर हुआ
और उसका लुंड उसकी धोती में पूरी तरह से खड़ा हो चूका था
और हरिया अपने हाथो से अपने लुंड को दबाये हुए लेता रहता है
अब तक नीलम अंदर जा चुकी थी
हरिया( हाय मेरी बच्ची बिलकुल अपनी माँ पर गयी है शादी के पहले hi ऐसी हो गयी है जैसे 2-3 बच्चो की माँ हो
पर बिचारि जवानी का सुख नहीं ले पायी )
यही सोचते सोचते हरिया की आँखों में आंसू आ जाते है
हरिया का लुंड भले hi अपनी बेटी की चूचिया देख क्र खड़ा हो जाता पर वो अपनी बेटी को बहुत प्यार करता था
रेखा का घर--------
रेखा बेसुध से सोई हुई थी इतने में hi उसे बहार से आवाज आती है
काम्य- अरे दीदी आज क्या हुआ आपको कब तक सोयेगी आप
रेखा की आँखे जैसे hi खुलती है उसे अपने पीछे किसी चीज़ का अहसास होता है
ये अहसास उसे उसकी गांड के बीचो बिच हो रहा था
जैसे hi उसे इस बात का अंदाजा होता एक पल के लिए रेखा की आंखे बाजार को आ जाती है
दरअसल रवि रात में सोते सोते अपनी दीदी के इतना करीब आ गया था की उसका लुंड अब इस वक़्त उसकी दीदी की गांड में फसा हुआ था
रेखा अपना हाथ पीछे लेजाकर थोड़ा सा निचे करती है और उसका हाथ सीधा रवि के लुंड पर लगता है
अब तो मनो रेखा को जो चाहिए था उसे वो मिल गया था
रेखा का हाथ जैसे hi रवि के लुंड पर पड़ता है उसकी आँखे बंद हो जाती है और रेखा एक बार अपने हाथ को रवि के लुंड पर जड़ तक ले जाती है और अपना हतेली का दबाव बनाते हुए निचे को आती है
रेखा की हरकत से ऐसा लग रहा था जैसे की ेओ अपने भ्सी का लुंड नाप रही हो
रेखा( हे भगवन ये तो बैगन से भी बड़ा है )
और जब रेखा को इसका अंदाजा होता ह की उसका छोटा भाई अपना आधा लुंड अपनी दीदी की गांड में फसा कर सोया है
रेखा अंदर hi अंदर शर्मा जाती है
रेखा न कहते हुए भी उठ जाती है और रवि का लुंड घुप्पप से बहार आ जाता है
रेखा- क्या बात है अब तो तू इतना बड़ा हो गया की अपनी दीदी की गांड में लुंड फसा कर सोता है
और रेखा रवि के गाल पर एक किश करती है और जैसे hi उठने को होती है वो रुक जाती है
रेखा अपने आप पर काबू नहीं राख प् रही थी
वो आगे बढ़ कर अपनी नाक रवि के लुंड के पास ले जाती है और बहुत hi आराम से रवि के सुपडे को सूंघने लगती है
करीब 5 मं तक ऐसा करने के बाद रेखा आगे बढ़ कर रवि के सुपडे पर एक प्यारा सा चुम्बन करती है और था कर बहार की और चली जाती है
आज की रात सबकी जिन्दगिया बदल चुकी थी
अब देखना ये था की इस रात का असर कब और खा दलहन को मिलता है ......