Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 2 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-10

आज की रात तो बीत चुकी थी

और जाते जाते आने वाली रातो को रंगीन बनाने की कुछ यदि छोड़ जाती ह

सेबह जैसे hi नीलम की आँख खुलती है

वो जैसे hi सो कर उठती उसकी नजर सबसे पहले अपने छोटे भाई के लुंड के ऊपर पड़ती है

नीलम की तो सांसे hi अटक जाती है

जैसे उसने सुबह सुबह कोई बहुत देख लिया हो

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नीलम की चूचिया उसकी सांसो के साथ ऊपर निचे हो रही थी

और इधर रामु को यह तक होश नहीं था की उसकी धोती पूरी तरह से खुली हुई है और उसका लुंड किसी काळा नाग की तरह बहार झक रहा है

नीलम ( अरे बाप रे ये रामु लुंड कितना बड़ा है

मुझे तो लगता था की ये अभी बच्चा hi है पर ये तो पूरा सैंड हो गया है जिस पर चढ़ जाये उसकी चल बिगड़ देगा कसम से)

ये सोचते सोचते नीलम का हाथ खुद बी खुद अपनी छूट पर चला जाता है

और जैसे hi उसे इसका अहसास होता है वो अपना हाथ एक दम से अपनी छूट से हटा लेती है

नीलम( मुझे ये क्या हो रहा ह रामु छोटा भाई है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए अभी वो छोटा है )

पर वही नीलम का दिल कुछ और hi लेह रहा था

( अरे कोई बच्चा नहीं ह अब तेरा भाई उसका लुंड तो देख किसी गधे के लुंड के बराबर है

ऐसा लुंड तो आस पास के गाओं में न होगा किसीके पास

अपना पेटीकोट उठा और बैठ जा अपने छोटे भाई के लुंड पर और मिटा दे अपने अंदर की गर्मी )

यही सब सोचते सोचते नीलम का हाथ रामु के लुंड की और बढ़ने लगता है

उसका मुँह खुला हुस था और हाथ धीरे धीरे करीब जा रहा था

जैसे hi नीलम के नाजुक हाथ रामु के सख्त लुंड पर लगते है

नीलम के मुँह से लार की एक बहुत hi प्यारी सी बून्द जम्मीं पर गिरती है

नीलम एक बार टच करते hi अपना हाथ हटा देती है

और पास hi पड़ी धोती उठा कर रामु के लुंड पर दाल देरी है

और उठ कर भगति हुई आंगन में आती है और बाल्टी उठा कर बहार जाकर हेण्डपम्प चलने लगती है

अब तक हरिया भी उठ चूका था पर अभी भी बिस्तर में लेता हुआ था उसकी नजर पंप चलती नीलम पर पड़ती है

नीलम की बड़ी बड़ी विशाल चूचिया ऊपर निचे हो रही थी हरिया अपने आपको अपनी बेटी को निहारने से नहीं रोक पाया

और इसका असर हरिया के लुंड पर हुआ

और उसका लुंड उसकी धोती में पूरी तरह से खड़ा हो चूका था

और हरिया अपने हाथो से अपने लुंड को दबाये हुए लेता रहता है

अब तक नीलम अंदर जा चुकी थी

हरिया( हाय मेरी बच्ची बिलकुल अपनी माँ पर गयी है शादी के पहले hi ऐसी हो गयी है जैसे 2-3 बच्चो की माँ हो

पर बिचारि जवानी का सुख नहीं ले पायी )

यही सोचते सोचते हरिया की आँखों में आंसू आ जाते है

हरिया का लुंड भले hi अपनी बेटी की चूचिया देख क्र खड़ा हो जाता पर वो अपनी बेटी को बहुत प्यार करता था

रेखा का घर--------

रेखा बेसुध से सोई हुई थी इतने में hi उसे बहार से आवाज आती है

काम्य- अरे दीदी आज क्या हुआ आपको कब तक सोयेगी आप

रेखा की आँखे जैसे hi खुलती है उसे अपने पीछे किसी चीज़ का अहसास होता है

ये अहसास उसे उसकी गांड के बीचो बिच हो रहा था

जैसे hi उसे इस बात का अंदाजा होता एक पल के लिए रेखा की आंखे बाजार को आ जाती है

दरअसल रवि रात में सोते सोते अपनी दीदी के इतना करीब आ गया था की उसका लुंड अब इस वक़्त उसकी दीदी की गांड में फसा हुआ था

रेखा अपना हाथ पीछे लेजाकर थोड़ा सा निचे करती है और उसका हाथ सीधा रवि के लुंड पर लगता है

अब तो मनो रेखा को जो चाहिए था उसे वो मिल गया था

रेखा का हाथ जैसे hi रवि के लुंड पर पड़ता है उसकी आँखे बंद हो जाती है और रेखा एक बार अपने हाथ को रवि के लुंड पर जड़ तक ले जाती है और अपना हतेली का दबाव बनाते हुए निचे को आती है

रेखा की हरकत से ऐसा लग रहा था जैसे की ेओ अपने भ्सी का लुंड नाप रही हो

रेखा( हे भगवन ये तो बैगन से भी बड़ा है )

और जब रेखा को इसका अंदाजा होता ह की उसका छोटा भाई अपना आधा लुंड अपनी दीदी की गांड में फसा कर सोया है

रेखा अंदर hi अंदर शर्मा जाती है

रेखा न कहते हुए भी उठ जाती है और रवि का लुंड घुप्पप से बहार आ जाता है

रेखा- क्या बात है अब तो तू इतना बड़ा हो गया की अपनी दीदी की गांड में लुंड फसा कर सोता है

और रेखा रवि के गाल पर एक किश करती है और जैसे hi उठने को होती है वो रुक जाती है

रेखा अपने आप पर काबू नहीं राख प् रही थी

वो आगे बढ़ कर अपनी नाक रवि के लुंड के पास ले जाती है और बहुत hi आराम से रवि के सुपडे को सूंघने लगती है

करीब 5 मं तक ऐसा करने के बाद रेखा आगे बढ़ कर रवि के सुपडे पर एक प्यारा सा चुम्बन करती है और था कर बहार की और चली जाती है

आज की रात सबकी जिन्दगिया बदल चुकी थी

अब देखना ये था की इस रात का असर कब और खा दलहन को मिलता है ......
 
अपडेट-11

सूरज सर पर आ चूका था ऊपर से सदी गर्मी का मौसम और उससे भी ज्यादा लोगो के जिस्म की गर्मी जिसे बर्दास्त करना अब किसी के बस की बात नहीं थी

खैर दोपहर हो चुकी थी

रेखा- अरे काम्य जा रवि को खाना तो देकर आ

बिचारा मेरा भाई इतनी दोपहर में काम कर रहा है

भूखा होगा जा जल्दी उसका खाना लेजर जा

काम्य- दीदी वो मेरा भी भाई है आपको क्या लगता है की सिर्फ आप hi रवि से प्यार करती है

मैं भी रवि को बहुत मानती हु

काम्य मन में सोचती है ( अबतो वैसे भी मेरा भाई hi मेरा सहारा है और जल्दी hi म उसे अपनी बुर दिखा कर अपने काबू में करलूँगी)

रेखा अब तक खाना बांध चुकी थी

और थोड़ी hi देर में काम्य खाना लेकर अपनी मंजिल की और निकल जाती है

काम्य के जाते hi रेखा जल्दी से दरवाजे के पास आती है और दरवाजा बंद का देती है और वापस तेजी से अपने कमरे के अंदर चली जाती है

दरअसल आज रेखा ने जो सुबह देखा था उसके बाद से सुबह से hi ुस्लि बुर का बुरा हॉल था

रेखा की छूट अपने छोटे भाई का लुंड याद करके बार बार पनिया रही थी

रेखा पास hi पड़ा एक बैगन उठती है

और अपने पेटीकोट को अपनी जांघो से खींचते हुए अपनी कमर तक चढ़ा लेती है

अब रेखा मादरजात कमर के निचे बिलकुल नंगी थी

रेखा जैसे hi अपनी छूट और टैंगो को देखती है

और उसे अपने hi ऊपर शमराम आने लगती है

दरअसल आज रेखा की छूट कुछ जयादा hi पानी छोड़ रही थी जिसकी वजह से उसकी दोनों जंघे भी बिलकुल गीली हो चुकी थी

नीलम जल्दी से पास पड़ा बैगन उठती है और उसे अपनी छूट के ऊपर रगड़ने लगती है

आज रेखा को अपने ऊपर काबू करना मुश्किल हो रहा था

वो जल्द से जल्द अपना पानी अपनी गर्मी के साथ छूट से बहार निकलना छाती थी

रेखा थोड़ा सा अपने हाथ का जोर लगती है और बैगन फिसलता हुआ उसकी छूट में समै जाता है जिसका अहसास आज रेखा को बहुत hi अच्छा लग रहा था

रेखा का एक हाथ उसकी चुकी पर चला जाता है और वो तेजी के साथ अपने निप्पल को ब्लाउज के ऊपर से hi मरोड़ने लगती है

रेखा का हाथ अब तेजी से बैगन को अंदर बहार कर रहा था

रेखा - अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह..........

ये गरमी अब बर्दाश्त नहीं होती भाई तेरी दीदी से अब तुहि मेरा सहारा है

तेरा लुंड मैंने जबसे देखा है देख मेरी छूट कैसे पनिया रही है बार बार

रेखा अब अपने चरम पर थी वो जितनी तेजी से हाथ चला रही थी उतनी hi तेजी से निचे से अपनी गांड को उठा उठा कर बैगन पर मार रही थी

रेखा- अह्हह्ह्ह्ह ममअअअ मर. Gyiiiiiiiiiii

संभाल ले भाई अपनी डीईईडी को नहीं तो मैं कहि मर न जाऊउउउउ इस गर्मीी सीर्रे

रेखा ऐसे hi बड़बड़ा रही थी और अपनी छूट में दाहकके दिए जा रही थी

रेखा की स्पीड इतनी थी की पुरे कमरे में फतछछःह फतछछःह की आवाजे गूंज रही थी

अब रेखा से बर्दास्त करना मुश्किल था और थोड़ी hi देर में ुस्लि छूट अमृत छोड़ने लगती है और रेखा शांत हो जाती है

अब रेखा उस बैगन को अपनी छूट से निकलती है

और अपने मुँह के करीब लेकर आती है

रेखा की सांसे अभी भी उखड़ी उखड़ी सी थी

बैगन पूरी तरह से छूट के पानी से सना हुआ था और घर में आ रही रौशनी के कारन उसमे एक अजीब सी चमक थी

रेलः को उस बैगन में रवि का विशाल लंग नजर आ रहा था

हलाकि बैगन की औक़ात रवि के लुंड के आगे कुछ नहीं थी

पर इस वक़्त का माहौल ऐसा hi था

रेखा बैगन को देखती है उसे साफ़ नजर आ रहा था की उसकी छूट का पानी पुरे बैगन पर लगा है

रेखा- एक दिन रवि का लुंड भी ऐसे hi अपनी दीदी के कॉमर्स से भीगा हुआ होगा

फिर रेखा धीरे से अपना मुँह खोलती है और जीभ बहार निकल कर बैगन पर लगी साडी मलाई चाट चाट कर साफ़ करने लगती है

रेखा बैगन को ऐसे चाट रही थी की जैसे वो अपनी चुदाई के बाद अपने छोटे भाई का लुंड चाट कर साफ़ कर रही थी

थोड़ी देर और अपने जिस्म से खेलने के बाद रेखा नींद की आगोश में चली जाती है ......
 
भाई लोगो मैंने एक डिसीसिव लिया है

फ़िलहाल के लिए हम अपना पूरा फोकस रेखा के परिवार पर करेंगे और बिच बिच में नीलम का भी जीकर आता रहेगा

और हीरो एक hi रहेगा रवि

मतलब रेखा की स्टोरी तेजी से चलेगी

और नीलम की कहानी थोड़ी धीरे धीरे आगे बढ़ेगी

बाकि आप लोग अपना सुग्गेस्टिव देते रहे

और कमैंट्स जरूर करे
 
अपडेट-12

इधर काव्य भी अबतक खाना लेकर रवि के पास खेतो में पहुंच चुकी थी

रवि काम्य दो दूर से hi खेत में काम करता हुआ दिख जाता है

काम्य खेत में जाकर गुमटी के बहार पड़ी खत पर अपने दोनों पेअर फैला कर बैठ जाती है

रवि को भी दिल्ह जाता है की उसकी दीदी खाना लेकर आ गयी है

काव्य- आजा रवि खाना खले कितना काम करेगा तू

रवि- बस 2 मिंट में आया दीदी

काम्य रवि को लगातार घूरे जा रही थी

दरअसल बहुत ज्यादा म्हणत करने के कारन रवि का जिस्म बहुत hi ज्यादा निखार गया था मनो जैसे की वो कोई जिम जाता हो डोले सोले बहुत सॉलिड थे

ऊपर से गर्मी के कारन उसका पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था

रवि का पूरा शरीर पसीने में तर बटर था

जोकि काम्य को अंदर hi अंदर बैचैन कर रहा था और काम्य खा जाने वाली नजरो से अपने भाई को डेल्ह रही थी

थोड़ी hi देर में रवि काम्य के पास आ जाता है

रवि- लाओ दीदी देदो खाना

काम्य जल्दी से झोपडी में से बर्तन लती है और रवि को वही खत के पास खाना परोस देती है

रवि वही निचे बैठ कर खाना खाने लगता है

काम्य- क्या बात है आज कल बड़ी म्हणत कर रहा है तू

रवि,- दीदी म्हणत करेंगे तभी तो अच्छी फसल होगी न

काम्य- पर भाई जब तक जो जमीन में अच्छी नेसल का बीज नहीं डालेगा तब तक फसल कैसे होगी

काम्य की नजरे रवि की धोती पर तिकी हुई थी अब वो रवि को उलझना कहती थी उसे पता था की रवि अब एक जानदार मर्द बन चूका है

बस काम्य को थोड़ी सी म्हणत करनी पड़ेगी और रवि उसका हो जायेगा

काम्य जो अबतक बैठी हुई थी अब उल्टा होकर छाती के बल लेत जाती है अपना मुँह रवि की तरफ करके

जिस वजह से काम्य की भरी भरकम चूचिया आधे से ज्यादा ब्लाउज के बहार आ जाती है

रवि को अंदाजा नहीं था की उसकी दीदी किश पोजीशन में लेती हुई है

रवि खाना कहते हुए- दीदी पहले खेत को अच्छे से जोतना पड़ता है हल चलना पड़ता है खेत में और जब मिटटी उस लायक हो जाती है तो उसमे बीज डालते है

काम्य- मेरी जमीन तो कबसे तैयार है भाई तू hi बीज नहीं डालता

कमाया क्या बोल गयी उसे भी इसका अंदाजा थोड़ी देर बाद हुआ

रवि अच्चानक से काम्य की बात सुनकर उसकी तरफ नजर करता है और रवि का मुँह खुला का खुला रह जाता है

असल में काम्य इतनी उत्तेजित थी की वो अपने ब्लाउज का एक बोटों भी खोल चुकी थी जिस कारन उसकी आधे से ज्यादा चूचिया रवि के सामने नंगी थी

रवि ने आजसे पहले कभी किसी औरत को इस हालत में नहीं देखा था

जिसका सीधा असर रवि के लुंड पर होने लगता है

काम्य रवि की एयर देल्हती है और समझ जाती है की उसका भाई उस्ले जाल में फसना शुरू हो गया है

काम्य अपना दुपट्टा उठती है और अपनी दोनों चुकियो के बिच बानी घाटी में दाल कर पसीना पोछने लगती है

काम्य- देख न भाई कितनी गर्मी है

रवि की हालत ऐसी थी की उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की उसे क्या हो रहा है अब तक उसकी धोती में तम्बू बन चूका था

जो साफ़ साफ़ काम्य को नजर आ रहा था

पर काम्य कोई जल्द बजी नहीं करना कहती थी

उसे पता था की रवि अभी कच्चा खिलाडी है उसकी एक गलती उसका सारा का सारा पालन बिगड़ देगी

काम्य- क्या हुआ भाई खा खो गया

रवि का ध्यान काम्य की बात सुनकर उसकी मुँह की तरफ जाता है

रवि- दीदी क्या कह रही थी आप मैंने सुना नहीं

Kamya-dhyaan खा है तेरा जो मेरी बाते तुझे सुनाई नहीं दे रही

रवि अभी भी काम्य को hi देख रहा था

और काम्य बार बार रवि को उकसाने के लिए अपने पल्लू से अपनी चूचियों पर पसीना पोछे जा रही थी

या आप लोग यु कह सकते है की वो अपने छोटे भाई के सामने अपनी चूचियों को धीरे धीरे दबा रही थी

अबतक तो काम्य की छूट ने पानी छोड़ना चालू कस्र दिया था

रवि की हालत अब खराब हो रही थी वो अपने एक हाथ को अपनी धोती के ऊपर रैहता है और वह से उठ कर झोपडी के पास जाकर मूतने लगता है

काम्य को साफ़ नजर आ रहा था की कैसे उसके भाई विशाल लुंड हवा में झूल रहा है

रवि पेशाब करके वापस अत है अब तक रवि का लुंड थोड़ा ढीला पद चूका था

काम्य जब रवि को वापस आता देखती है तो वो सीधा होकर लेत जाती है और अपना पेटीकोट अपने घुटनो तक चढ़ा लेती है
 
अपडेट-13

रवि अब पेशाब करके अपनी दीदी की और बढ़ता है

रवि के पहुंचने से पहले hi काम्य अपना अगला देव खेल चुकी थी

रवि के पहुंचने से पहले hi काम्य अपनी पेटीकोट को घुटनो तक चढ़ा लेती है और दोनों टंगे फैला कर लेत जाती है

रवि जब खत के पास पहुँचता है तो उसकी नजर सबसे पहले उसकी दीदी की गोरी पिंडलियों पर पड़ती है

काम्य की टंगे तो उससे भी ज्यादा गोरी थी

रवि एक नजर अपनी दीदी के पैरो को देखता है और फिर आकर खत पर बैठ जाता है

काम्य - क्या हुआ रवि तुझे भी आराम करना है क्या

रवि- नहीं दीदी अभी खा आराम अभी तो बहुत काम है खेत में

काम्य- अरे भाई दिन भर ये खेत hi जोतता रहेगा चल आजा मेरे पास लेत जा थोड़ा आराम करले

रवि- नहीं दीदी अभी बहुत काम है

काम्य- है तू मेरे पास क्यों लेटेगा तुझे तो सिर्फ रेखा दीदी hi अच्छी लगती है

रवि- अरे दीदी ऐसी बात नहीं है

काम्य- मुझे तो ऐसा hi लगता है क्योंकि न तो तू मुझसे अच्छे से बात करता है न hi लब्धि मेरे पास रत को सोता है

रवि- अब दीदी म क्या कृ आप hi बताओ

काम्य- चुप चाप आकर लेत जा और थोड़ा आराम करले मैं खा थोड़े hi जाउंगी तुझे

रवि बिचारा समझ नहीं प् रहा था की उसकी दीदी क्या कहना कहती है वो चुप चाप अपनी दीदी के बगल में लेत जाता है

अब काम्य अपना अगला देव खेलती है

वो रवि की तरफ पलट कर लेत जाती है जिस वजह से उसकी आधी नंगी चूचिया सीधा रवि की नजरो के सामने आ जाती है

रवि बिचारे का लुंड दुबारा से अपनी औक़ात में आने लगता है

और रवि अपना एक हाथ अपनी धोती के ऊपर रख कर उसे अपनी दीदी की नजरो से छुपाने लगता है

पर उसे खा पता था की उसकी दीदी यही तो कहती हसि

काम्य- रवि तुझे गर्मी लगती है तो तू क्या करता है

रवि- दीदी मैं तो नहा लेता है तुबेल पर

काम्य- मुझे भी बहुत गरमी लग रही है बता मैं क्या कृ

रवि- दीदी आप भी नहा लो

काम्य- पर मेरी ये गर्मी पानी शांत नहीं कर सालता मेरे प्यारे भाई

इतना बोलकर काम्य बड़े hi प्यार से रवि के गलो के ऊपर अपना हाथ रख कर सेहला देती है

रवि- दीदी सच बताऊ तो मुझे आपकी बाटे कभी कभी समझ नहीं आती

काम्य- समझ जायेगा भाई अगर तू अपनी दीदी का ख्याल रखेगा तो

रवि- म तो हमेशा hi आपका ख्याल रखता हु दीदी

काम्य- मुझे तो नहीं लगता

रवि- तो दीदी आप बताओ कैसे आपका ख्याल राखु

काम्य इतनी शातिर थी की वो जो कहती थी वो रवि के मुँह से वही बुलवा रही थी

काम्य रवि की बात सुनकर अपना दुपट्टा अपनी छाती से अलग करते हुए रवि को पकड़ा देती है

रवि के सामने अब काम्य मादरजात आधी नंगी चूचियों के साथ लेती हुई थी रवि के मन में हजारो चीज़े एक साथ चल रही थी उसका लुंड फटने को तैयार था पर उसे अभी तक समझ नहीं आ रहा था की ये उसके साथ क्या हो रहा है

रवि- क्या हुआ दीदी मैं आपके दुप्पटे का क्या कृ

काम्य- देख मेने खा था न की तू मेरा बिलकुल ख्याल नहीं रखता

रवि- दीदी बताओ न

काम्य अपनी छाती को थोड़ा सा आगे करती है

जब काम्य ऐसा करती है तो ऐसा लगता है की अभी बचे कूचे हुक भी टूट जायेंगे

काम्य की चूचिया इस वक़्त कुछ ज्यादा hi फूल गयी थी

काम्य- चल तू बस एक काम करदे मेरा पसीना पॉच दे

रवि- पर खा दीदी

काम्य रवि को अपनी ब्लाउज की और इशारा करके बोलती है - देख न भाई मेरी चोली कितनी गीली हो गयी है मैं तो सुबह से पसीना पॉच पॉच के थक गयी हु अब तू hi है जो मेरी गरमी थोड़ी काम कर सकता है

रवि- ठीक ह दीदी

और रवि अपने हाथो को आगे बढ़ता है काम्य की चुकियो की तरफ

अब तक रवि के मन में कोई गलत ख्याल नहीं था

रवि पहले तो काम्य की गरदन को अच्छे से साफ़ करता है और ब्लाउज के ऊपर के थोड़े से हिस्से को भी अच्छे से साफ करता है

रवि- दीदी देखो हो गया न

काम्य मुँह बनाते हुए - अभी खा हो गया भाई तूने बहार तो साफ़ कर दिया पर अंदर तो डेल्ह अभी भी पूरा गिला है

रवि बिना सोचे अपना हाथ काम्य की चुकियो की तरफ बढ़ता है

और जैसे hi उसका हाथ काम्य की चूचियों पर लगता है दोनों भाई बेहेन के अंदर एक अजीब सी चिंगारी भड़क जाती है

काम्य - भाई अच्छे से साफ़ कर में यह पूरी रात थोड़े hi रुकूंगी जल्दी कर

काम्य को दर था की कहि उसे कोई देख न ले इसलिए वो कोई भी रिस्क नहीं लेना कहती थी

रवि अब धीरे धीरे अपना हाथ अपनी दीदी की चुकियो की गहराई में उतरने लगता है

रवि पहले तो नार्मल था पर अब जब उसने अपनी दीदी की मुलायम गदराई चुकी छू ली थी अब उसके हाथ हल्का हल्का कपङा चालू हो गए थे

काम्य को ये अहसास बहुत hi अच्छा लग रहा था और अब तक वो अपनी आँखे बंद कर चुकी थी

रवि को भी अब थोड़ा थोड़ा मजा आ रहा था उसे आज ऐसे लग रहा की उसकी दीदी के चुके दुनिया की सबसे मखमली चीज़ है

रवि का लुंड अब ौरी तरह से खड़ा हो चूका था जिसे काम्य भी डेल्ह चुकी थी पर अभी वो रवि को आने वाले मस्ती भरे दिनों के लिए तैयार कर रही थी

रवि का हाथ अब आखरी बंद हुक तक पहुंच चूका था

रवि ज्यादा अंदर हाथ नहीं डालना कहता था क्योंकि उसे भी पता था की सामने जो लेती है वो उसकी दीदी है

पर काम्य तो आज कुछ और hi सोच कर आयी थी

काम्य - क्या हुआ रवि रुक क्यों गया

रवि- दीदी सारा पसीना साफ़ हो गया

काम्य अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी ेल चुकी को पकड़ कर ऊपर की और खींचती है

जिस वजह से रवि को उसकी दीदी की चुकियो के बिच की गहराई साफ़ दिखने लगती है

काम्य- देख यह अंदर कितना गिला है और तू कहता है की सारा पसीना साफ़ हो गया

रवि बिचारा किसी गुलाम की तरह काम्य की साडी बात मान रहा था

ब्लाउज खींचने की वजह से काम्य की ऊपर वाली चुकी का निप्पल्स वाला कला एरिया भी थोड़ा थोड़ा दिख रहा था जिसे देख कर रवि के अंदर एक अजीब सी बैचनी पैदा हो रही थी

रवि चुपचाप अपना हाथ में दुप्पट्टा फसा कर सीधा अपना हाथ दोनों चुकियो के बिच दाल देता है

जैसे hi काम्य को रवि का हाथ अपनी चुकी के बिच में महसूस होता है उसके मुँह से एक प्यारी सी ahhhhhhhhhhhhh निकल जाती है

जिसे रवि भी सुनता है पर ांडना कर देता है

रवि अपने हाथ को घुमा घुमा कर अच्छे से दोनों चूचियों के बिच की सफाई करता है

अब काम्य को लगता है की रवि अपना हाथ हटाने वाला है

अब वो अपना अगला देव खेलती है

अभी तक काम्य ने अपनी एक चुकी को ऊपर की तरफ खींच रखा था अब वो उसे छोड़ देती है और रवि का हाथ दोनों चूचियों के बिच फास जाता है

काम्य की चूचिया भी काफी बड़ी थी

जिस वजह से रवि को उनका सारा भर होने हाथो पर साफ़ महसूस हो रहा था

कुल मिला जुला कर रवि का हाथ उआकी दीदी की चूचियों के बिच फास गया था

रवि थोड़ा जोर लगाकर अपना हाथ खींचने की कोशिश करता है

काम्य- आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाई क्या कर रहा है मुझे दर्द हो रहा है

रवि- दीदी मेरा हाथ फास गया है आपके दोनों दूध के बिच में

काम्य- तो निकल ले न बस मुझे चोट मत लगा दियो तू

रवि- दीदी नहीं निकल रहा

काम्य- चल इसे पकड़ कर ऊपर खींच

ये बोलकर काम्य अपनी चुकी की तरफ इशारा करती है

रवि एक सेकंड के लिए सोच म पद जाता है

पर आखिर था तो वो भी मर्द और तो और उसे भी अब इस खेल में मजा आ रहा था

रवि अपना दूसरा हाथ आगे बढ़ा कर काम्य की आधी चुकी को पकड़ कर ऊपर की और उठता है और अपना हाथ खींच लेता है

काम्य को जब अहसास होता है की उसके भाई ने आज पहले बार उसकी चुकी छुई है उसके शरीर में चीटिया काटने लगती है

खैर अब तक रवि अपना हाथ निकल चूका था

काम्य- भाई मेरा पसीना साफ़ करते करते तू खुद hi भीग गया देख तो

काम्य की बात सही थी एक्ससिटेमेंट के कारन रवि पूरी तरह पसीने से भीग चूका था

काम्य आगे बढ़ कर रवि का वही हाथ दुबारा से पकड़ लेती है जो उसके पसीने से ौरी तरह भीग्गा हुआ था

और अपने मुँह के पास लेकर उसके हाथ को चुम लेती है और अपनी नाक आगे बढ़ा कर वो एक जोरदार सास अंदर की और खींचती है

रवि ये सब डेल्ह रहा था पर उसे समझ नहीं आ रहा था की दीदी आखिर क्या कर रही है

जब काम्य रवि का हाथ सूंघ रही थी तो उस्ले चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी जो रवि साफ देख सकता था

अब काम्य रवि का हाथ छोड़ देती है और अपनी गांड रवि की और घुमा कर लेट जाती है

पर अपनी तिरछी नजरो से अभी भी काम्य रवि को hi देख रही थी

रवि का हाथ अब आजाद हो चूका था

पर उसे ये समझ नहीं आया की काम्य ने उसके हाथ को क्यों सुंघा था

रवि अब काम्य के बनाये मायाजाल में फास चूका था उसका दिमाग अब उसका साथ देना बंद कर चूका था

रवि अपने उसी हाथ को अपनी नाक के पास लता है और धीरे से सूंघता है

वो पता करना कहता था की उसकी दीदी क्या सूंघ रही थी

जब काम्य को पता चलता है की रवि का हाथ उसकी नाक पर है उस्ले चेहरे पर एक रहस्यमयी

मुस्कान आ जाती है

अब आगे का रास्ता काम्य को साफ़ नजर आ रहा थस वो अपने मिशन में कामयाब हो रही थी

रवि को पहले तो अपनी दीदी के पसीने की बदबू थोड़ी अजीब. लगती है पर 1-2 बार सूंघने के बाअद उसे बहुत अच्छा लगने लगता है

और अब रवि लगातार उस हाथ की सुगंध लिए जा रहा था

रवि का दूसरा हाथ अब तक उसके लुंड पर जा चूका था

पर ये बायत काम्य को नहीं पता थी वो ऐसे लेती थी की अपनी तिरछी नजरो से वो सिर्फ रवि का फेस hi देख सकती थी

रवि एक दो बार अपना लुंड मसलता है और फिर खड़ा होकर खेत में जाकर काम करने लगता है

काम्य लेते लेते रवि को देखती रहती है

काम्य को रवि के चेहरे पर एक मुसक्कन दिखी जो आज से पहले उसने लब्धि नहीं देखि थी

उसे समझते देर नहीं लगती की अब उसका छोटा भाई उस्ले जाल में फास चूका है

अब काम्य रवि को अपना गुलाम बनाना कहती थी

जो हमेशा काम्य की सेवा में हाजिर रहे

पर किसको पता आने वाला समय क्या खेल खेलेगा

खैर अब तक अँधेरा हो चूका था और दोनों भाई बेहेन घर की और चल देता है

काम्य आगे आगे चल रही थी और रवि पीछे से अपनी दीदी की चूड़ी गांड देख कर आगे की तरफ बढ़ रहा था

रवि- दीदी अआप चलो म आता हु

काम्य- क्या हुआ भाई

रवि- दीदी मुझे पेशाब लगा है

काम्य- पेशाब तो मुझे भी लगी है भाई

रवि- दीदी आप एक काम करो आप उधर जाओ म इधर जाता हु

काम्य- अरे भाई ऐसे अकेले मत जा आज कल बहुत सरे साप है गाओं में कहि कोई ज़हरीला साप हमे मिल गया तो

रवि- बात तो सही ह दीदी मैंने सुबह hi गुमटी में एक साप मारा था आज कल साप गर्मी की वजह से बहार hi रहते ह बिल से

काम्य- चल हम दोनों एक hi तरफ चलते है

ये बोलकर काम्य आगे झाड़ियों की तरफ बढ़ती है और रवि उसके पीछे पीछे चल देता है

काम्य को पता था की रवि उसके ठीक पीछे ह

काम्य अच्चानक से अपना पेटीकोट पकड़ कर ऊपर उठती है और बैठ जाती है

अब तक काम्य की गांड रवि की नजरो के सामने थी

रवि घर घर कर काम्य की चौड़ी गांड डेल्ह रहा था और अब उसे एक बहुत hi मीठी मधुर संगीत उसके कानो म गुजने लगता है जैसे कोई सीटी बजा रहा हो

ये आवाज कमाया की छूट से निकल रही पेशाब की थी

रवि का लुंड अब तक खड़ा हो चूका था दुबारा से

काम्य साडी स्थिति समझ जाती है

काम्य- भाई देखता hi रहेगा या पेशाब भी करेगा

जल्दी कर कहि साप मेरे बिल में न घुस जाये

रवि काम्य की बात को समझ नहीं पता

की उसकी दीदी इंदिरेक्ट अपनी छूट के बारे म बात कर रही है

रवि अभी तक वैसे hi खड़ा था

अब काम्य उठ जाती है

पर उठते समय उसने अपना पेटीकोट नहीं छोड़ा और जब वो खड़ी हुई तो उस समय भी उसने अपने पेटीकोट को कमर तक चढ़ा रखा था

और अब काम्य अपना तुरुक का इक्का खेलने वाली थी

काम्य पेटीकोट हाथ में पकडे पकडे रवि की तरफ घूम जाती है

और जैसे hi रवि की नजर अपनी दीदी की छूट पर पड़ती है

वो अपना पेटीकोट गिरा देती है

जो दिखाना था वो काम्य दिखा चुकी थी अब रवि के अंदर एक सैलाब आ गया था उसके मन में हजारो सवाल चल रहे थे

बिचारे ने आजसे पहले कभी किसी लड़की को कमर के निचे नंगा नहीं देखा था

काम्य को समझते देर नहीं लगती की रवि अब क्या सोच रहा होगा

काम्य- खा खो गया भाई तू जल्दी पेशाब कर और चल

रवि- दीदी आप चलो म आता हु

काम्य- अरे तू पागल है देख मेने साप के दर से तेरे सामने hi पेशाब किया

ताकि साप आ जाये तो मेरा भाई मुझे उससे बचा ले और तू कह रहा ह की मैं तुझे अकेले छोड़ दू यह मूतने के लिए

रवि- दीदी आपकी बात सही है पर मुझे शर्म आती है

काम्य- वह जी वह दीदी नहीं शर्मा रही पर मेरा छोटा भाई मुझसे शर्मा रहा ह

तुझे पता ह जब तू छोटा था तो मैं hi तुझे नहलाती थी तेरा ख्याल रखती थी

लगता ह तू भूल गया ह

रवि- अरे नहीं दीदी मुझे सब याद ह आप मेरा कितना ख्याल रखती थी

काम्य- तभी तो अब थोड़ा सा बड़ा हो गया तो अपनी दीदी को आर्डर दे रहा है

काम्य अपना मुँह हल्का सा फुला लेती है जैसे की उसे गुस्सा आ रहा हो

रवि बिचारा इस दलदल में फास्ट जा रहा था

रवि चुपचाप आगे बढ़ कर काम्य से थोड़ा सा आगे जाता है और अपनी धोती निचे से उठा कर अपना विशाल लुंड बहार निकल लेता है

काम्य को रवि का लुंड साफ़ दिख रहा था

रवि के लुंड पर उभरी हुई नशे काम्य के अंदर का जानवर जगा रही थी पर वो जैसे तैसे अपने आप पर काबू कर रही थी

थोड़ी देर में रवि भी पेशाव कर लेता है और अपनी चमड़ी को पकड़ कर पीछे खींचता है

और उसका सूपड़ा फूल कर बहार आ जाता है

.रवि का लुंड जितना कला था उसका सूपड़ा उतना hi लाल था जिसे देख कर काम्य के मुँह में पानी ा जाता है

अगर काम्य का बस चलता तो अभी अपने छोटे भाई का लुंड अपने मुँह में थुश लेती पर वो रवि को पूरी तरह से अपना गुलाम बनाना कहती थी .

जिसके लिए उसे बहुत म्हणत करनी थी बिना काम खराब किया

थोड़ी hi देर में दोनों भाई बेहेन घर की और निकल जाते है

इस बार भी काम्य आगे थी और रवि पीछे

पर इस बार कुछ अलग था

काम्य इस बार अपनी गांड कुछ ज्यादा hi मटका मटका कर चल रही थी और रवि की नजर न कहते हुए भी बार बार अपनी दीदी की गांड. पर जा रही थी

एयर रवि का लुंड महराज आज बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था

खैर थोड़ी देर में दोनों घर पहुंच जाते है ..........

दोस्तों कमेंट करके जरूर बताना अगर कुछ कमी हो तो स्टोरी म
 
अपडेट-14

अब तक खाना पानी हो चूका था और सब अपनी अपनी जगह सोने की तैयारी कर रहे थे

काम्य आंगन में पड़ी खा पर लेती हुई आसमान को देख रही थी और आज जो कुछ हुआ पुरे दिन वही सब सोच कर उसकी छूट लगातार पानी छोड़ रही थी

रवि अभी बहार गया हुआ था और रेखा कमरे में बिस्तर लगा रही थी

रवि बहार से घर के अंदर आता है और मैं गेट बंद कर देता है

रवि अपने कमरे में जा hi रहा था

की उसे पीछे से काम्य की आवाज आती है

काम्य- अरे रवि इतनी जल्दी सोने जा रहा ह क्या तू

रवि- है दीदी अब खाना हो गया ह तो सोना hi है

काम्य ( अब कैसे समझौ तुझे मेरे बुद्धू भाई खाना खाने के बाद जब तक चुदाई न हो खाना नहीं पचता और तुझे बस सोने की hi पड़ी रहती है )

अच्छा ठीक ह सो जाना पर थोड़ी देर तो बैठ जा अपनी दीदी के पास

रवि आकर काम्य के पैरो के पास बैठ जाता है

चांदनी रौशनी में निम्मो की पिण्डलिया चमक रही थी जिसे रवि बड़े गौर से देख रहा था

काम्य- सुन एक काम कर जा देख कर आ रेखा दीदी सो गयी या जगी है

और अगर सोइ गई हो तो उनको जगा मत देना

रवि जाकर अंदर देखता है काम्य अपनी बड़ी सी गांड गेट की तरफ करके सोइ हुई थी

जिसे देख कर रवि को अंदाजा हो जाता है की उसकी बड़ी दीदी सो गयी है

रवि रेखा को डेल्ह कर बहार आ जाता है और दुबारा से काम्य के पैरो के पास बैठ जाता है

रवि- दीदी तो कब की सो गयी है लगता है ज्यादा hi थक गयी है आज

काम्य- पर मुझे तो नींद नहीं आ रही अभी तुझे आ रही ह क्या

रवि- नहीं दीदी म थोड़ी देर बाद सोऊंगा अभी नींद नहीं आ रही

इतना सुनते hi काम्य अपना एक पेअर उठा कर रवि की गॉड में ररख देती है

अब काम्य का पेअर सीधा रवि के लुंड के ऊपर था

काम्य के पेअर का अहसास होते hi रवि का लुंड दुबारा से अपनी औक़ात में आने लगता है

काम्य को भी समझते देर नहीं लगती की उसका पेअर सीधा रवि के लुंड पर पद गया है पर अब वो पीछे नहीं हटना कहती थी

काम्य एक मांझी हुई खिलाडी थी वो अपना पेअर ऐसे हिला रही थी उसके असर से रवि का लुंड फुलना स्टार्ट हो गया था

भाई ये काम्य नाम थोड़ा दिक्कत दे रहा है और लहनि में फिट भी नहीं बैठ रहा है इसलिए अब से

काम्य का नाम होगा कम्मो

कम्मो- भाई मेरे पेअर में बहुत दर्द हो रहा है

रवि- क्यों दीदी ऐसा क्यों

कम्मो- आज कीच ज्यासा hi चल ली हु मैं इस लिए ऐसा हो रहा है

तू दबा दे मेरा पेअर थोड़ा

और इतना बोलकर कम्मो अपना दूसरा पेअर भी रवि की गॉड में रख देती है

अब रवि का लुंड उसकी दीदी के पैरो के निचे दबा हुआ था

कम्मो को पता था की रेखा दीदी कभी भी उठ सालती है इस लिए वो ज्यादा टाइम बर्बाद नहीं करना कहती थी

कम्मो- भाई तू अपनी दीदी की थोड़ी मदद करना

रवि- बताओ न दीदी क्या मदद कृ आपकी

कम्मो इतना कहकर अपना पेटीकोट थोड़ा ऊपर की और खींचती है और उसका पेटीकोट उसकी आधी जांघो तक चढ़ जाता है

ये नजारा देख कर रवि की आँखे बहार को आने लगती है

क्या hi मुलायम और मोती मोती जंघे थी कम्मो की

कम्मो- थोड़ा सा मेरा पेअर की मालिश करदे भाई बस और कुछ मत कर बहुत दर्द हो रहा ह

रवि तो अब जैसे कम्मो का हर हुकुम मान रहा था

रवि अपने हाथ को आगे बढ़ा कर कम्मो के पेअर पर रख देता है और थोड़ा थोड़ा अपने हाथ को प्रेस करने लगता है

.

कम्मो- क्या हुआ तूने खाना नहीं खाया क्या

रवि- अभी तो खाया ह दीदी

कम्मो- तो फिर ये मरियल लोगो की तरह क्या सेहला रहा है मेरे पेअर को मर्द बन भाई मर्द

रवि- दीदी ज्यादा जोर से दबा दिया तो आप मरने लगोगी मुझे

कम्मो- मैं तो तुझे खुद hi न्योता दे रही हु की अपनी दीदी के पैरो को जोर लगा कर दबा

रवि ने इतनी बात सुनी और वो एक अच्छे भाई की तरह थोड़ा दबाव बढ़ा कर कम्मो के पैरो को दबाने लगता है

रवि का लुंड पूरी तरह से खड़ा हो चूका था

और जब रवि पेअर दबाता तो कम्मो अपने पैरो को ऐसे चलती मनो वो अपने पेअर से अपने भाई को ओर्गास्म दे रही हो

रवि को जब अहसास हुआ की उसकी दीदी का पेअर उसके लुंड के ठीक ऊपर है उसकी भी हालत खराब होनी चालू हो चुकी थी

रवि को अब पसीना आना चालू हो चूका था

कम्मो का भी यही हाल था

रवि जैसे जैसे कम्मो के घुटनो तक बढ़ रहा था उसे उसकी दीदी के ोैर और भी मुलायम लग रहे थे

एक तो गर्मी का मौसम ऊपर से नई नई जवानी

और उसके बाद से जब अपनी hi दीदी सामने मादरजात ऐसी स्थिति में लेती हो तो कोई भी कण्ट्रोल करना भूल जाये यही रवि के साथ भी हुआ

कम्मो के पेअर अब रवि को जन्नत का मजा दे रहे थे ुस्लि आँखे बंद हो चुकी थी

कम्मो लगातार होने पैरो से अपने भाई का लुंड सेहला रही थी

जिसे रवि बर्दास्त नहीं कर पाया और आखिर वो ज्वाला मुखी फैट hi गया

रवि के शरीर ने 1-2 झटके खाये और उसका सारा माल उसकी. धोती में hi गिर गया

धोती बहुत पतली थी जिस वजह से कुछ माल कम्मो के पैरो पर भी लग गया जिसका अहसास होता hi कम्मो समझ गयी की उसके भाई का काम हो चूका है

रवि तो मनो आज सातवे आसमान पर था आज जो हुआ था आज से पहले कभी नहीं हुआ था

अभी रवि लम्बी लम्बी सांसे ले रहा था और उसकी आँखे बंद थी

कम्मो- )क्या हुआ भाई तुझे हदफ़ क्यों रहा है

कम्मो की बात सुनते hi रवि को अप्पनइ स्थिति का अंदाजा होता है

उसे कुछ समझ नहीं आया की ये क्या हुआ

रवि- दीदी मुझे नींद आ रही है

और इतना कहकर रवि कम्मो के दोनों पेअर पकड़ कर उठता है और जल्दी से भाग कर अपने रूम में घुस जाता है

कम्मो के चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी जैसे की आज उसने कुछ हासिल कर लिया था

कम्मो अपना हाथ अपनी पिंडलियों पर ले जाती है

अभी भी उसका पेअर कुछ गिला था रवि के माल से

पहले तो कम्मो अपनी एक ऊँगली से हल्का सा माल उठा कर अपनी नाक पर लती है और अपने भाई का अमृत अच्छे से सूंघती है और अपनी उस ऊँगली को धीरे से मुँह में दाल कर चूस लेती है

कम्मो को रवि का माल बहुत hi स्वादिस्ट लगा

कम्मो फिर से अपनी ऊँगली पेअर पर ले जाती है और बचा कुछ पानी ऊँगली पर लगा कर ऊँगली सीधा अपनी छूट पर ले जाती है

और रवि के माल से सनी हुई ऊँगली को अपनी छूट में घुसा लेती है

कम्मो( ले बन गया अब तू अपनी दीदी की छूट का गुलाम अब बहुत hi जल्द तेरा ये मुसल मेरी छूट में होगा भाई )

कम्मो को थोड़ी देर में नींद आ जाती है

रवि अंदर जाकर अपने धोती में हाथ दाल कर देखता है बहुत सारा माल अभी भी उसके लुंड पर लगा हुआ था और धोती पूरी तरह से गीली हो चुकी थी

रवि जल्दी से एक दूसरी धोती उठता है और पुराणी धोती से लुंड को अच्छे से साफ़ करता है और उसे कोने में फेक देता है और दूसरी धोती पेहेन कर लेत जाता है

जैसे hi रवि की नजर रेखा पर पड़ती है उसका लुंड फिर से खड़ा होने लगता है

दरअसल रेखा सो चुकी थी पर वो ऐसे सोइ थी की किसी का भी ईमान दोल जाये उसे देख कर

रेखा पीठ के बल लेती हुई थी

और अपने एक हाथ को मोड़ कर उसने अपने सर के निचे लगा रखा था जिसकी वजह से रेखा की बगल साफ़ साफ़ रवि को दिख रही थी

रवि न कहते हुए भी अपनी दीदी की तरफ खींचा जा रहा था

रवि अपनी नाक को रेखा की बगल के करूब ले जाता है

क्योंकि उसकी नाक में अभी तक कम्मो की पसीने की महक थी वो दलहन कहता था की रेखा दीदी की पसीने की महक कैसी है

रेखा एक दम गदराई घोड़ी थी उसे पसीना भी काफी आता था

बलोसुए तो भीगा hi हुआ थस पहले से

देल्हते hi देल्हते रवि अपनी नाक को रेखा की बगल में घुसा देता है और जोर लगाकर एक सास लेता है

जैसे hi रवि की नाक म रेखा की पसीने की महक जाती है उसका लुंड धोती में उछलने लगता है

रेखा की महक तो कम्मो की पसीने की महक से भी ज्यादा मजेदार और नमकीन थी रवि थोड़ी देर ऐसे hi रेखा की बगल में नाक डेल सूंघता रहता है और पता नहीं कब. वो उसी पोजीशन में सो जाता है ....
 
अपडेट-15

आज की रात सबके लिए काफी लम्बी थी पर अँधेरे के बाद उजाला तो आता hi है

सुबह हो चुकी थी लगभग 5 बजे होंगे

रेलः की आँख कुल्टी है

पर जैसे hi उसे अपनी स्थिति का अंदाजा होता है वो एक दम से अंदर तक सिहर जाती है

दरअसल रवि का मुँह अभी तक रेखा की बगल में hi घुसा हुआ था

और रवि ने अपना एक हाथ रेखा के नंगे के पेट पर रखा हुआथा

और रवि का लुंड जो बिलकुल टाइट था वो सीधा रेखा की जांघो में घुसा हुआ था जो रेखा को साफ़ महसूस हो रहा था

रेखा जब अपनी एक नजर रवि के लुंड पर डालती है तो वो अंदर तक हिल जाती है

आज तक रेखा ने जितने बैगन अपनी छूट में डेल थे वो सब इस लुंड के आगे कुछ नहीं थे

अगर धोती न होती तो रेखा को साफ़ दिख जाता की उसका छोटा भाई अब उसे छोड़ने लायक हो गया है

रेखा की छूट अब तक पानी छोड़ना चालू कर चुकी थी

रेखा अपनी एक तंग थोड़ी फैला कर अपना हाथ सीधा अपनी छूट पर ले जाती है

और दूसरे हाथ से रवि के लुंड को थोड़ा सा टच करती हसि और पहला हाथ अपनी छूट पर रख कर अपने डेन को कुरेद देती है

रेखा सेक्स के मामले में बिलकुल पागल थी मतलब उसे वाइल्ड सेक्स पसंद था

जैसे तैसे रेखा न अपना हाथ काबू में किया क्योंकि वो रवि के सामने शर्मिंदा भी होना कहती थी

आखिर वो उसका छोटा भाई जो था

रेखा अपने आप पर काबू करती है और होना हाथ वह से हटा देती है

पर रवि के इतने पास होने के अहसास से वो अंदर तक पिघल रही थी वो अभी उठना नहीं छाती थी

पर इतने में hi बाजार से कम्मो की आवाज आती है

कम्मो- दीदी उठ जाओ भोर हो गयी है कब तक सोयेगी

रेखा मन hi मन कम्मो को गली देती हुई बहार आ जाती है और अपने काम धंधो में लग जाती है

थोड़ी देर बाद रवि भी उठ जाता है और बहार आकर देखता है की उसकी रेखा दीदी चूल्हे के पास बैठ कर चाय बना रही है

पर कम्मो उसे कहि नहीं दिलहटी वो समझ जाता है की कम्मो जरीर हगने गयी होगी

रवि- दीदी कम्मो दीदी खा गयी

रेखा- और खा जाएगी 8 बज रहे है पर महरानी अब हगने गयी है

रवि- दीदी आप इतने गुस्से में क्यों हो सुबह सुबह

रेखा एक नजर रवि को देखती है

रेखा- भाई ये गर्मी अब मुझसे बर्दास्त नहीं होती

रवि- दीदी आप नहा लो न थोड़ा आराम मिलेगा गर्मी से

रेखा - ये सब छोड़ ये ले चाय पी और आज तुझे खेत पर जल्दी जाना है न

रवि- है दीदी जाना है आज मैं थोड़ा लेत हो गया

पता नहीं ससज मुझे इतनी देर तक कैसे आँख लग गयी

रेखा अपने मन में सोचती है( अरे भाई रात भर जब तू अपनी दीदी की बगल सूंघता रहेगा तो नींद तो अच्छी आएगी hi न )

रेखा- कोई बात नहीं ले चाय पी ले

ये बोलकर रेखा अपनी और रवि की चाय गिलास में निकल लेती है और एक गिलास रवि को पकड़ा कर एक खुद लेकर रवि की तरफ घूम जाती है

रवि की नजर जैसे hi सामने बैठी उसकी दीदी पर जाती है उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है

असल में आज कम्मो ने जो ब्लाउज पहना था उसके बिछे के 2 हुक टूटे हुए थे और कम्मो की चूचियों के बिच की गहराई साफ़ नजर आ रही थी

अगर कोई ऊपर वाला एक हुक खोल देता तो रेखा मादरजात ऊपर से पूरी नंगी हो जाती

रवि को अब इस खेल में मजा आने लगा था

वो चोरी चोरी रेखा की चूचियों को घर रहा था

और अपना एक हाथ से अपने लुंड का उभर छुपा रहा था

पर रेखा भी पुराणी चावल थी

वो समझ जाती है की रवि की नजर खा है

रेखा अब और भी बेफिक्र होकर बैठ जाती है

अभी तक वो आती पलटी मर के बैठी थी पर अब जब उसे पता चल गया था की उसका छोटा भाई उसकी चूचिया घर रहा है तो अब वो भी अपने भाई के सामने अपने बदन की नुमाइस करना कहती थी

रेखा अब अपना एक पेअर उठा कर थोड़ा आगे रखती है और अपना पेटीकोट थोड़ा ऊपर को खींच कर घुटनो तक चढ़ा लेती है

जिस वजह से रवि को अब साफ़ साफ़ रेखा की मांसल गदराई हुई जंघे दिख रही थी

अब रवि की हालत खराब होने लगती है उसके लुंड पर मनो किसी ने कोई प्रहार कर दिया हो

आखिर धोती म कोई कितनी देर इतना बड़ा सम्मान छुपा सकता है

रेखा समझ जाती है की उसका भाई अब बैचैन हो रहा है

अभी कुछ और होता इस से पहले hi कम्मो घर के अंदर घुसती है

और रेखा उसे डेल्ह कर अपने दोनों पेअर दुबारा से सही कर के बैठ जाती है

रवि ने आज जो देखा था वो पहली दफा था की उसने किसी औरत की पैरो को नंगा देखा था वो भी दोनों टैंगो की जड़ तक

रवि जल्द बजी में खड़ा होता है

उसे अंदाजा नहीं था की उसका लुंड भी ताल खड़ा है

जैसे hi रवि खड़ा होता है उसका लुंड सीधा रेखा की आँखों के सामने आ जाता है

रेखा की तो आँखे फटी की फटी रह जाती है और जब रवि को पता चलता है की उसकी दीदी के चेरे का भाव उसका लुंड देख कर बदला है वो जल्दी से बहार की और भागता है

रवि- दीदी मैं खेत पर जा रहा हु खाना भिजवा देना

रेखा तो मनो अब. कुछ बोलने की हालत में नहीं थी

कम्मो- तू चल भाई म खाना लेकर आउंगी तेरा

और रवि घर से बहार निकल जाता है और अपने खेतो की तरफ चल देता है

रवि के मन में हजारो सवाल चल रहे थे क्योंकि कल रात से अभी तक जो हुआ उससे रवि को भी अबतक पता चल चूका था की एक औरत के करीब आने पर कितना मजा आता है और औरत का पसीना सूंघने में कितना मजा मिलता है

और अगर वो औरत खुद की दीदी हो तो मजा और भी दोगुना हो जाता है

असल में अब रवि को भी मजा आने लगा था ......
 
अपडेट-16

खेतो में काम करते करते दोपहर हो चली थी

रवि बिचारा आज थोड़ा थका हुआ महसूस. कर रहा था तो वो अपनी खत पर आकर बैठ जाता है

थोड़ी hi देर में उसे कम्मो आती हुई दिखाई देती है कम्मो ने रोज की तरह ब्लाउज पेटीकोट पहना था और अपनी चूचियों को एक पतले दुपट्टे से धक् रखा था

कम्मो- क्या हुआ भाई आज तो तू बड़ी जल्दी थक गया

रवि- दीदी लग रहा है की तबियत सही नहीं है

कम्मो- तू पागल है तबियत खराब है फिर भी यह खेतो में काम करने आ गया

रवि- नहीं दीदी बस थोड़ी थकान है आप खाना निकालो अभी सही हो जायेगा

कम्मो रवि को खाना निकल कर देती है और वही रवि के पास निचे बैठ जाती है

रवि जल्द hi खाना ख़तम कर देता है

रवि- दीदी खाना तो मस्त था अब बस मुझे थोड़ा आराम करना है

कम्मो- भाई आराम तो मुझे भी करना है पर देख तो कैसी गरम हवा चल रही है

तू एक काम कर आज खत जोड़ी के अंदर लेकर चल नहीं तो यह पक्का तबियत खराब हो जाएगी

रवि को भी कम्मो की बात सही लगती है और वो खत उठा कर झोपडी की और चल देता है और कम्मो भी ोीचे पीछे चल देती है

रवि खत बिछा कर लेत जाता है और पहले hi वो अपनी दीदी के लिए जगह बना देता है

खत ज्यादा बड़ी नहीं थी जैसे तैसे 2 लोग एडजस्ट हो जाते थे

कम्मो भी देर न करते हुए अपने दुपट्टे को अपनी छाती से अलग करती है और रवि की तरफ मुँह करके लेत जाती है

और रवि के माथे पर हाथ रख कर उसकी तबियत देखने लगती है

उसे रवि ठीक लगता है बुखार तो नहीं था

कम्मो - अब कैसी है तेरी तबीयर रवि

रवि- अब तो ठीक ह दीदी

कम्मो- चल आराम करले ठीक हो जायेगा

रवि- दीदी आज आपको गर्मी नहीं लग रही क्या

रवि के मुँह से ये बात सुनकर कम्मो थोड़ा खुश होती है

असल में रवि बड़ी जल्दी सिख रहा था

कम्मो- गसरमी तो लग रही है भाई पर मेरी गर्मी कोण शांत करेगा

रवि- मैं हु न दीदी मैं शांत करूंगा आपकी गर्मी

कम्मो- अच्छा चखे पता है की किसी औरत की गर्मी कैसे शांत करते है

कम्मो की बात सुनकर रवि कम्मो के सिरहाने पड़े दुपट्टे को उठा लेता है

रवि- है दीदी पता हसि न कल hi तो शांत की थी आपकी गर्मी

कम्मो- अच्छा भाई तू इतना बड़ा हो गया की अब रोज रोज अपनी दीदी की गर्मी शांत करेगा

रवि- दीदी आपको जब भी गर्मी लगे बस आप इशारा कर देना

मैं आजाऊंगा आपकी गर्मी शांत करने

रवि को नहीं पता था की कम्मो डबल मीनिंग बाटे कर रही है

वो तो बस कैसे भी करके कम्मो की चूचियों को चुना कहता था

कम्मो अपनी चूचियों को आगे की और धकेल कर बोलती है

कम्मो- तो आज रोका किसने है मेरे भाई को

रवि बड़ी hi मासूमियत के साथ कम्मो की चूचियों को हल्का हल्का दुपट्टे से पोछने लगता है

कम्मो की आँखे मजे के मरे बंद हो चुकी थी

कम्मो- भाई तू खा से सिल्हा ये सब

रवि- दीदी कल hi तो आपने सिखाया था

कम्मो- बड़ी जल्दी सिख गया तू तो भाई

ऐसा बोलकर कम्मो अपनी. ब्लाउज का एक और बोटों खोल देती है

कम्मो- रवि ठीक से अंदर हाथ दाल कर साफ़ करना देख कितनी गीली हो रही है तेरी दीदी

गीलेपन की वजह से कम्मो के काळा काळा जमुन जैसे निप्पल्स भी ब्लाउज के अंदर से साफ़ नजर आ रहे थे

रवि भी आज पुरे मुद में आ चूका था

वो बिना कुछ बोले अपना दूसरा हाथ भी आगे बढ़ता है और ऊपर वाली चुकी को पकड़ ऊपर की और उठता है और अपना दूसरा हाथ दुपट्टे समेत अपनी दीदी की चूँची में घुसा देता है

आज रवि को थोड़ी दिक्कत हो रही थी

रवि- दीदी आज आपका ब्लाउज कीच ज्यादा hi टाइट लग रहा है

कम्मो- भाई ब्लाउज तो मेरे सरे शामे साइज के है

रवि- तो फिर आज मेरा हाथ इतना टाइट क्यों जा रहा है दीदी

कम्मो- भाई अब मैं दिन बी दिन बड़ी हो रही हु न

रवि- तो इस बात से ब्लाउज का क्या लेना देना

कम्मो- मैं बड़ी हो रही हु तो मेरे साथ मेरे दूध भी तो बड़े हो रहे है न देख

और कम्मो अपने एक हाथ से अपनी एक चुकी पकड़ कर दबा देती है

कम्मो भले hi रवि को सब समझा रही थी पर उसकी टैंगो के बिच सुनामी आ चुकी थी

रवि का हाथ ब्लाउज के अंदर लगातार चल रहा था

अचानक से रवि की एक ऊँगली कम्मो की चुकी पर टच होती है जिस वजह से कम्मो का शरीर एक झटका खता है

पर रवि को अब इस खेल में मजा आ रहा था अब वो और अंदर ताल अपना हाथ ले जाना कहता था

Ravi-didi मैं सही से आपका पसीना नहीं पॉच प् रहा आपकी दूध कुक्सह ज्यादा hi बड़े हो गए ह

कम्मो- अच्छा अब तुझे अपनी दीदी के दूध का साइज भी पता चल गया

रवि- दीदी एक हुक और खोल दो न

कम्मो- हाय राम तू तो मुझे नंगा करना कहता है

रवि- अरे नहीं दीदी देखो अभी तो 2 हुक बाकि है

कम्मो- अच्छा अब तू हुक भी गईं रहा है

मुझे तो लगता है की तू मेरा पूरा ब्लाउज hi उतरना छठा है

कम्मो असल में रवि को उकसा रही थी पर रवि इतनी जल्दी काबू आने वालो में से नहीं था

रवि - नहीं दीदी सिर्फ एक हुक खोल दो मेरा हाथ दर्द होने लगा है

कम्मो भी बिना कुछ बोले 1 और हुक खोल देती है

अब रवि को अपना हाथ और अंदर तक ले जाने में आसानी हो रही थी

अब रवि कम्मो की पूरी की पूरी एक चुकी को दबोच कर उसे दुपट्टे से साफ़ कर रहा था

कम्मो की चुकी और रवि के हाथ के बिच में सिर्फ साला एक दुपट्टा hi था

अब रवि सफाई काम और अपनी दीदी के चुके मसल ज्यादा रहा था

जिसका असर सीधा कम्मो की छूट पर हो रहा था

कम्मो के शरीर में मनो एक साथ हजारो चित्य रेंग रही हो

उसके पेअर इधर उधर हो रहे थे

अब कम्मो ज्यादा देर अपने आपको नहीं रोक पायी और 2-3 झटको के साथ लम्बी लम्बी सांसे लेते हुए झड़ने लगी

कम्मो की सांसे अभी भी तेजी से चल रही थी और रवि का हाथ भी अब खुल के मजा लूट रहा था

रवि- दीदी क्या हुआ आपको

कम्मो- कुक्छःह हीई हुआ भाई आज तूने सच में मेरी गर्मी निकल दी साडी की साडी

कम्मो का पेटीकोट कमर के निचे भीग चूका था

कम्मो- एक कामम कर आज के लिए इतना काफी है तू आराम करले मैं भी थोड़ा आराम कर लेती हु

इतना सुनते hi रवि ने न कहते हुए भी अपना हाथ अपनी दीदी की ब्लाउज के अंदर से बहार निकल लिया

और कम्मो अपनी गांड रवि की तरफ घुमा कर लेत गगयी

रवि की नजर जब कम्मो की गांड पर गयी तो उसने देखा की दोनों टैंगो के ठीक सेण्टर में पेटीकोट भीगा हुआ है

रवि ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और उसके हाथ में जो दुपट्टा था उसे अपने मुँह पर रख कर उसे अच्छे से सूंघने लगा

रवि को कम्मो की पसीने की महक बहुत अच्छी लग रही थी पर ये रेखा के सामने कुछ भी नहीं थी

थोड़ी देर आराम करने के बाद रवि खेत में काम करने लगता है और कम्मो वही लेती लेती सो जाती हसि

सोती भी क्यों न आज कितने दिनों बाद उसकी टंकी खली हुई थी

खेतो में काम करते करते शाम हो चुकी थी

रवि सारा काम निपटा कर झोपडी में आता है

रवि- दीदी उठ जाओ घर नहीं चलना क्या आपको

रवि की आवाज सुनकर कम्मो उठ कर बैठ जाती हसि

रवि की नजर जैसी hi कम्मो की चूचियों पर पड़ती है उसका लुंड फिरसे टाइट होने लगता है

असल में सिर्फ एक लास्ट हुक लगा हुआ था बाकि सरे हुक अभी तक खुले हुए थे

और कम्मो कहरनि को तो जैसे कोई फरक hi नहीं पड़ता था की उसकी मोती मोती चुकी उसका छोटा भाई देखा रहा है

कम्मो- आज तो मैं कुछ जयादा hi देर तक सो गयी भाई चल जल्दी घर चल खाना भी बनाना है

और कम्मो उसी हालत में उठ कर चलने लगती है

रवि- अरे दीदी ब्लाउज तो ठीक करलो अभी तक आपके दूध दिख रहे है

कम्मो रवि की बात सुनकर अपनी छाती की एयर देखती है और शर्मा कर अपने हुक बंद कर लेती है और दुपट्टा से धक् लेती है

कम्मो रवि के पास आती है

और उसके गाल को बड़े hi प्यार से चुम लेती है

कम्मो- भाई दूध तो लड़कियों के होते है मेरी जैसी औरत के तो चुके होते है समझा बुद्धू

और हल्का सा रवि को थोक कर बहार की और निकल जाती है

रवि आधी बात समझ जाता है और आधी नहीं समझ पता फिर दोनों भ्सी बेहेन घर की और रवाना हो जस्ते है ........
 
अपडेट-17

अब तक दोनों भाई बेहेन घर पहुंच चुके थे

रवि को रेखा बहार हेण्डपम्प पर hi मिल जाती है और कम्मो पहले hi घर में जा चुकी थी

रेखा- आ गया मेरा भाई खेतो से

रवि की नजर सीधा रेखा की ब्लाउज पर जाती है झा से उसकी बड़ी बड़ी चूचिया झक रही थी

रवि- है दीदी आ गया

रवि अपने मन में सोचता है की रेखा दीदी की चुकी तो कम्मो से भी बड़ी है

इन्हे दबाने में कितना मजा आएगा

रेखा झुक कर कुछ कपडे धो रही थी जिस कारन उसकी आधे से ज्यादा चूचिया ब्लाउज से बहार निकली हुई थी

रेखा की नजर जब रवि की धोती पर पड़ती है तो वो अंदर तक सिहर जाती है

कैसे उसका भाई का लुंड उसकी चूचिया देख कर खड़ा हो रहा ह

रेखा- लगता है आज कुछ ज्यादा hi म्हणत की तूने खेत में

रवि- दीदी म्हणत तो रोज hi करनी होती है

रेखा- लगता है अब मेरा भाई पूरा मर्द बन गया है जो दिन भर अपने खेतो पर hi काम करता रहता है

रवि- दीदी मर्द तो मई हु hi

और खेतो पर काम भी तो करना hi पड़ेगा

रेखा - इतना भी ध्यान न दे खेतो पर की अपनी दीदी का hi ख्याल न रख पाए तू

रवि- अच्छा दीदी ये सब छोड़ो मेघा दीदी कब आएगी हमारे पास अब तो बहुत दिन हो गए है

रेखा- पता नहीं रवि उसके घर में भी बहुत टेंशन चल रही है

रवि- क्यों दीदी

रेखा- अब तुझे क्या बताऊ भाई तेरी दीदी की शादी को 7 सल्ल हो गए ह पर अभी तक उसने किसी बच्चे को जनम नहीं दिया

इसी वजह से उसके घर में डेली झगड़ा होता है

रवि- है वो अब पहले जैसे खुस भी नहीं रहती हमेशा उदास रहती है

रेखा- यही सब सोच सोच क्र मुझे भी टेंशन होती है की आखिर हम लोगो का क्या होगा

बोलते ब्लोटे रेखा की आँखों में आंसू आ जाये है

रवि बिना वक़्त गवाए आगे बढ़ता है और अपनी दीदी के अंशु अपने हाथो से पोछने लगता है

रवि- आप क्यों रोटी हो दीदी

देखना एक दिन म सब कुछ सही कर दूंगा

रेखा- है भाई अब एक तू hi तो सहारा है हमारा

और रेखा आगे बढ़ कर रवि को गले लगा लेती है

जैसे hi रेखा की छाती रवि की छाती से टकराती है रवि को सीधा सीधा अपनी दीदी की चूचियों का अहसास अपनी छाती पर होता है

रवि अपने दोनों हाथ रेखा के पीठ पर ले जाता है और उसे और जबरदस्त तरिके से अपने से चिपका लेता है

रेखा अब जब भी सास लेती तो उसकी चूचिया पहले से भी ज्यादा फूल कर रवि की छाती को और जोर से दूर धकेलती

रवि को ये अहसास बहुत hi अच्छा लग रहा था उसका मन नहीं कर रहा था रेखा को छोड़ने का

रवि कभी अपने हाथो से रेखा की पीठ सहलाता और कभी कभी अपना हाथ उसकी कमर पर ले जाता

असल में रेखा कम्मो से भी ज्यादा गदरायी हुई थी इसलिए रेखा को चुने का मजा hi अलग था ..

रेखा- तू कितना ख्याल रखता है अपनी दीदी का

रवि अब रेखा को छोड़ कर उसके चेहरे को पकड़ कर ऊपर उठता है

रवि- दीदी मेरे होते हुए आप कबुई दुबारा मत रोना नहीं तो में भी रोने लगूंगा

और ये ब्लोकर रवि अपने होठ रेखा के गलो पर लगा देता गई और फिर एक बार माथे को चुम कर खड़ा हो जाता है

जैसे hi रवि खड़ा होता है रेखा की आँखों के सामने रवि का लुंड धोती के अंदर लहराता हुआ दिखाई देता है

जिसे देख कर रेखा का गला सूखने लगता है

अगर वो थोड़ी सी और आगे होती तो सीधा उसके भाई का लुंड उसके मुँह में होता

रवि- दीदी जल्दी से काम करके अंदर ाजाओ

रेखा- ठीक ह जा देख तो कम्मो खाना बना रही ह या नहीं म आती हु

रवि वह से चला जाता है और रेखा वही बैठी बैठी अपने भाई के लुंड के बारे में सोचने लगती है

रेखा- है राम कितना बड़ा लुंड है इसका ये तो मेरी छूट की साडी गर्मी एक बार में hi शांत कर देगा

अब तक रेखा की छूट पानी छोड़ना चालू कर चुकी थी

रेखा- देखो कैसे ये साली अपने भाई का लुंड देख कर पनिया रही है

सब्र कर थोड़ा तुझे भी केला खाने को मिलने वाला है वो भी अपने भाई का

रवि घर के अंदर पहुँचता है तो उसे सामने कम्मो खाना बनती हुई दिखाई पड़ती है

कम्मो की पीठ रवि की तरफ थी और वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में बैठी थी

रवि का लुंड भी अभी तक खड़ा था

रवि बिना कुछ बोले कम्मो के पास जाता है और उसके पीछे बैठ जाता गई है

रवि- दीदी क्या बना रही हो

कम्मो पीछे मुद कर देखती है और वापस से आगे देखने लगती है

कम्मो- और क्या बनाउंगी तेरी दीदी को बैगन के अलावा कुछ और अच्छा hi नहीं लगता आज भी बैगन hi बन रहे ह

रवि पीछे से कम्मो की गर्दन पर हाथ फेरता है

रवि - दीदी आपको कितना पसीना आ रहा ह देखो तो आप फिर से भीग गयी हो

कम्मो को रवि के हाथो का अहसास बहुत hi अच्छा लगता है

कम्मो- क्या बताऊ भाई ये गर्मी तो शांत होने का नाम hi नहीं लेती डेल्ह तूने अभी दोपहर में hi मेरा पसीना साफ़ किया था और अब देख मेरा बलोसुए फिर से गिला हो गया ह

रवि बिना कुछ बोले थोड़ा आगे सरकता है और कम्मो के पीछे से चिपक जाता है

रवि को नहीं पता था की वो जाने अनजाने में क्या कर रहा है पर अब उसे औरत को चुने में मजा आने लगा था जिसे अब वो हरपाल लूटना कहता था

रवि का लुंड सीधा कम्मो की कमर से टकराता है

कम्मो- आअह्ह्ह्हह भाई क्या कर रहा है

रवि- देख रहा हु की मेरी दीदी को इतना जल्दी जल्दी पसीना कैसे आ जाता है

रवि अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर कम्मो की छाती की और ले जाता है और जैसे hi कामो की चुकी के ऊपर हाथ रखता है बहार से रेखा के आने की आवाज आती है और कम्मो अपने आप को सँभालते हुए रवि के पीछे की और धक्का देकर अपने से अलग कर देती है

और मन hi मन रेखा को गली देने लगती है

कम्मो-( इस साली रैंड को भी अभी आना था हमेशा मेरा काम बिगड़ती है कहि यही साली मुझसे पहले रवि का लुंड अपनी छूट में न लेले जल्दी hi कुछ करना पड़ेगा)

रवि रेखा को देख कर अपने कमरे में चला जाता है

और कम्मो और रेखा मिल कर खाना बनाने लगती है और तीनो भाई बेहेन खाना पीना खा कर जल्दी. Hi अपना अपना बिस्तर लगाने लगते है

रवि अंदर कामे में रेखा के बगल में लेता हुआ था और कम्मो अपनी जगह पर बहार लेता हुआ था

लेते लेते लगभग 1 घंटा हो गया था कम्मो तो सो चुकी थी पर रेखा की आँखों से नींद गायब थी

रेखा रवि की और देखती है वो अभी भी जगा हुआ था

रवि असल में जो कुछ उसके साथ हो रहा था उसी के बारे में सोच रहा था अब उसे अपनी दीदियो के बदन को चुने में मजा आने लग्स था

रेखा - क्या हुआ रवि नींद नहीं आ रही क्या तुझे

रवि- नहीं दीदी आज नींद नहीं आ रही

रेखा- एक काम कर तू मेरी पीठ पर थोड़ा तेल लगा दे मुझे 2-3 दिन से बहुत दर्द हो रहा ह वह

रवि- ठीक ह दीदी रुको म सरसो का तेल लेकर ास्ता हु

और रवि पसस hi पड़ी कटोरी में थोड़ा तेल लेकर वापस से रेखा के पास आता है

रेखा अब तक उलटी होकर लेत चुकी थी

रवि थोड़ा तेल अपने हस्त में लेता है और रेखा की पीठ पर अच्छे से तेल लगाने लगता है

रेखा की आँखे अबतक बंद हो चुकी थी रवि धीरे धीरे अपने मजबूत हाथो से अपनी दीदी की कमर को लगातार सेहला रहा था

रेखा भाई कमर की मालिश कर पीठ की नहीं

रवि अपना हाथ थोड़ा निचे ले जाता है और रेखा की कमर को अपने हाथो में दबोच लेता है

रेखा रवि के इस हमले के लिए तैय्यार नहीं थी वो अंदर hi अंदर सिहर जाती है और उसकी छूट पानी छोड़ना चालू कर चुकी थी

रवि दीदी आपका पेटीकोट बार बार मुझे हाथ पर लग रहा है इसे थोड़ा निचे करो न

रेखा - नहीं अक्स hi लगा दे जितना लगता है

रवि मन मार्के कमर को ऊपर ऊपर थोड़ा देर मसलता है और 10-15 ंजन बाद उसे रेखा सोने का बोल कर होनी गांड रवि की तरफ घुमा क्र लेट जाती है

असल में रेखा को रवि की पेटीकोट वाली बात हजम नहीं हो रही थी उसे भी रवि का लुंड चाहिए था पर रवि इतना तेजी ले साथ आगे बढ़ेगा ये उसे उम्मीद नहीं थी

क्योंकि आज सुबह से रवि 2 बार अपना लुंड अपनी दीदी को दिखा चूका था

रेखा लेते लेते यही सोच रही थी की क्या रवि भी उसे छोड़ना छठा है या ये उसकी ग़लतफ़हमी है

रेखा को लेते लेते 10-15 मं हो गए थे पर उसे अभी भी नींद नहीं आ रही थी

इधर रवि सोचता है की उसकी दीदी सो गयी है वो धीरे से अपनी दीदी की और सरकता है और पीछे से रेखा से ौरी तरह चिपक जाता है

रवि के अच्चानक चिपकने से रवि का लुंड सीधा रेखा की गांड में पेटीकोट के ऊपर अंदर घुस जाता है

रवि का लुंड सीधा रेखा की गांड के छेद पर था अगर बिच में पेटीकोट नहीं होता तो पक्का रवि का लुंड अब तक अपनी दीदी की गांड में घुस चूका होता

रवि अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर रेखा के पेट पर रख देता हसि

रेखा अच्चानक हुए इस हमले के लिए तैयार नहीं थी पर वो देखना कहती थी की आखिर रवि का इरादा क्या है

रेखा वैसे hi लेती हुई रवि का लुंड अपनी गांड के बिच महसूस करके पागल हुई जा रही थी उसकी छूट लगातार पानी छोड़ रही थी

रवि अपने हाथ को रेखा के पेट पर थोड़ा टाइट करता है और उसके बाद वो और भी ज्यादा रेखा से चिपक जाता है

रवि के लिए यही अहसास काफी था वो ऐसे hi लेते लेटते अपनी दीदी की पसीने की बदबू सूंघते हुए अपना लुंड रेखा की गांड में फसाये सो जाता है

आधा घंटा हो चूका था रवि उसी पोजीशन में पड़ा पड़ा नाक बजा रहा था रेखा को यकीन हो जाता है की रवि अब गहरी नींद में सो चूका है

रेखा पहले तो अपनी एक तंग को ऊपर उठती है और फिर से उसे निचे करलेती है

ऐसा करने से रवि का लुंड और भी अंदर तक रेखा की गांड के सुराख़ पर चला जाता है

गांड की गर्मी की वजह से रवि का लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था और इधर रेखा की हालत खराब होती जा रही थी अब उसे अपने ऊपर काबू करना मुश्किल हो रहा था

आखिर रेखा अपनी हवस के सामने हार जाती है और अपनी गांड को थोड़ा पीछे की और धकेलती है

रवि की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं आता अब रेखा लगातार अपनी गांड को थोड़ा थोड़ा पीछे की तरफ धकेल रही थी और अपने एक हाथ से अब तक वो अपना ब्लाउज खोल चुकी थी और उसकी दोनों चूचिया आजाद हो चुकी थी

रेखा कभी अपने निप्पल को पकड़ कर खिचती कभी अपने होठो पर जीभ फेरती कभी अपनी चुकी को मुट्ठी में भर कर जोर से दबती

कुल मिलकर रेखा रवि के लुंड का अहसास पाकर पागल हो चुकी थी

रेखा अब तेजी के साथ अपनी गांड आगे पीछे कर रही थी

उसका मन तो कर रहा था की अभी अपना पेटीकोट उठा कर रवि का लुंड अपनी छूट में लेले पर ये जितना आसान लग रहा था उतना आसान नहीं था आखिर वो उसका छोटा भाई जो था

लगातार झटको की वजह से रवि का लुंड भी जयादा देर बर्दास्त नहीं कर पाया और थोड़ी hi देर में रवि का लुंड लावा उगलने लगता है

लुंड और गांड के बिच सिर्फ एक पेटीकोट था रेखा की गांड का सुराख़ पूरी तरह से अपने भाई के माल से गिला हो चूका था

रखा अब हिलना बंद कर चुकी थी

उसे भी पता चल चूका था की उसका भाई अपना पानी उसकी गांड पर निकल चूका है

पर ताज्जुब की बात थी की रवि का लुंड अभी तक उसी अकार में रेखा की गांड में फसा हुआ था

जो रेखा को और भी ज्यादा गरम कर रहा था पर जब आराम से काम बन रहा ह तो रिस्क क्यों लेना यही सोच कर रेखा भी उसी पोजीशन में लेती लेती कब नींद की आगोश में चली जाती है उसे पत्स नहीं चलता

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे से लिपटे एक दूसरे की बदन की गर्मी का अंदाजा लगा रहे थे

अब ये आग भड़क चुकी थी जिसे सिर्फ और सिर्फ चुदाई hi शांत कर सकती थी .....
 
अपडेट-18

रात के करीब 4 बजे होंगे

रवि की आँख खुलती है और उसे अपनी स्थिति का अंदाजा होता है वो देखता है की कैसे वो रात को अपनी दीदी की गांड में लुंड फसा कर सो गया है

रवि के लुंड में थोड़ा दर्द हो रहा था और उसका लुंड अभी तक खड़ा रेखा की गांड में फसा हुआ था

रवि को अपनी धोती गीली महसूस होती है उसे समझते देर नहीं लगता की रात को उसका पानी खुद बी खुद hi निकल गया होगा

पर उसे खा पता था की उसके लुंड का पानी निकलने में रेखा ने कितनी म्हणत की थी

रवि थोड़ा पीछे को होता है और अपना लुंड रेखा की गांड से निकलने की कोशिश करता है पर रेखा पहले से hi रवि के लुंड को अपनी दोनों गांड के बिच अच्छे से फसा चुकी थी इसलिए लुंड निकलना बहुत मुश्किल था रवि दुबारा से वैसे hi लेत जाता है

उसे पता था की अभी भी दीदी सो रही ह एयर अभी बहुत टाइम ह उठने म

रवि अपना हाथ आगे की और बढ़ता है और रेखा के पेट पर रख देता है

रेखा बेसुध घोड़े बेच कर अपने भाई के सामने अधनंगी सोई हुई थी

रवि अपना हाथ रेखा के पेट पर सेहला रहा था और थोड़ी देर सहलाते-2 उसका हाथ रेखा की चूचियों की तरफ बढ़ने लगता हसि

अच्चानक से रवि को जहतका लगता है

क्योंकि रेखा की चूचिया बिलकुल नंगी थी

उसे ये तो पता था की उसके ज्यादा चिपकने की वजह से उसका लुंड उसकी दीदी की गांड में फसा ह पर उसकी ब्लाउज कैसे खुला

.खैर इतना सोचने का कोई फायदा नहीं था और ये बात रवि भी समझता था

रवि बिना सम्मय गवाए अपना हाथ ऊपर चूचियों की और लेजाने लगता है और जब उसके हाथ में उसकी दीदी की पूरी की पूरी नंगी चुकी एस्टी है तो उसका लुंड रेखा की गांड में hi जटके खाने लगता है

.अब रवि धीरे -2 रेखा की चुकी सेहला रहा था और

.

कल सुबह hi रवि ने अपनी दीदी कम्मो की चुकी सेहले थी पर वो ब्लाउज के अंदर थी और यह तो रेखा मादरजात पूरी नंगी करके अपनी छुछिया रवि के सामने परोस कर सोई हुई थी

रवि ने आज पहले बार किसी औरत की नंगी चुकी छुई थी अब उसके अंदर छुपा मर्द जाग चूका था

रवि का हाथ लगातार रेखा की चूचियों पर चल रहा था वो कभी एक चुकी को पकड़ कर दबाता कभी दूसरी

रेखा के निप्पल्स पेरी तरह से किसी जामुन की तरह तन गए थे जब रवि चुकी दबाता तो उसका हाथ बार बार रेखा के निप्पल पर लगता जिस वजह से रेखा के निप्पल पूरी तरह कड़क हो गए थे

रवि का मन अब रुकने को नहीं कर रहा था अब वो और आगे बढ़ना कहता था

अब उसपर भी अपनी दीदी के गदराये जिस्म का नशा हावी होने लगा था

रवि अब चुकी को छोड़ कर रेखा के एक निप्पल हल्का सा मरोड़ देता है जिससे रेखा कसमसा कर एक अह्ह्ह भर्ती है

रवि रेखा की अहह सुनके अपना हाथ वापिस पीछे खींच लेता है

थोड़ी देर ऐसे hi रुकने के बाद वो दुबारा से हाथ आगे बढ़ा कर रेखा की चुकी पर रख देता हाउ

और धीरे धीरे दुबारा से चुकी सहलाने लगता है उसका लुंड अभी तक रेखा की गांड में फसा पड़ा था जिससे दोनों भाई बहनो को कोई फरक नहीं पद रहा था

रवि कभी चुकी सहलाता कभी निप्पल्स को पकड़ कर खींच देता ऐसे hi करते करते पता नहीं चला कब भोर हो गयी

रेखा अच्चानक से हिलती है और रवि को सम्भलने का मौका नहीं मिलता और वो उसी पोजीशन में शांत हो जाता है

असल में रवि ने अपनी 2 उंगलियों से रेखा का एक निप्पल पकड़ा हुस था अब तक रेखा की आंख खुल चुकी थी और ये बात रवि भी जनता था

िर अब रवि की गांड फ़टी पड़ी थी वो नहीं छठा था की उसकी दीदी सोचे की रवि कितना बुरा इंसान है

रेखा की आँखे खुलती है तो उसे सबसे पहली चीज़ रवि का हाथ दीखता है जिससे वो रेखा का एक निप्पल पकडे हुए था

रेखा की आंखे पीटीआई की फ़टी रह जाती है क्योंकि उसे अब भी अपनी गांड में रवि का विशाल लुंड महसूस हो रहा था

पर सुबह हो चुकी थी किसी भी वक़्त कम्मो कमरे में आ सकती थी

रेखा होने हाथ को रवि के हाथ ओर रखती है और उसका हाथ न कहते हुए भी हटा देती है

और फिर अपना एक हाथ पीछे करके रवि के लुंड को जड़ से पकड़ कर धीरे से अपनी गांड पीछे की और खींच लेती हसि और अब रवि का लुंड आजाद थस

रवि रेखा के उठने की वजह से घबरा गया था फिर भी वो आँखे बंद किये लेटस हुआ था

अब तक रेखा खड़ी हो चुकी थी और रवि के नंगे लुंड को निहार रही थी जिसे रवि भी देख रहा था और अंदर hi अंदर शर्मा रहा थस हालत सीसी थी की वो अपना लुंड भी नहीं छुपा सकता था ऊपर से रेखा के दोनों चुके अभी तक नंगे थे जिसे वो चोरी चोरी देख रहा था

रेखा देर न करते हुए रवि का लुंड देखते देखते अपना बलोसुए बंद करती है और निचे झुक कर रवि के लुंड को हाथ में पकड़ कर ऊपर से निचे की तरफ एक बार सेहला कर पास पड़ी धोती उठा के रवि के लुंड पर दाल देती है और कमरे से बहार की तरफ आ जाती है

जब रेखा ने रवि का लुंड सहलाया तो रवि अंदर तक पिघल गैस उसे समझ नहीं आया की क्या हुआ ओर उसे बहुत सच्चा लगा

रेखा बहार आकर देखती है की कम्मो हगवास करके आ चुकी है और अब नाश्ता बनाने की तैयारी कर रही है

रेखा भी डब्बा लेकर घर के पीछे हगने चली जाती है

जब रेखा घर के पीछे पहुँचती है तो एक और पानी का डिब्बा रख कर होना पेटीकोट पेट तक उठा लेती है और अपनी एक ऊँगली को अपनी गांड के छेद ओर अच्छे से फिरती है और अपने छोटे भाई का माल जो उसकी गांड ओर अभी तक चिपचिपा लगा हुआ था उसे इकट्ठा करके ऊँगली अपने मुँह में दाल लेती है और मस्त मस्ती में उसकी गांड से मोती मोती हगवास बहार आने लगती है

रेखा निचे झुक कर अपनी टट्टी देखती है तो काफी मोती थी उसे देख कर वो अपने मन में सोचती है की जब इतनी मोती चीज़ बहार निकल सकती है इस छेद से तो इस छेद में मेरे भाई का लुंड भी आसानी से चला जाता है

और हगते हगते hi रेखा एक दो बार अपनी छूट में ऊँगली डालती है और पानी से अपनी गांड को अच्छे से धोकर घर की और चल देती है

अब तक सबका नाश्ता हो चूका था

रवि खेतो पर जाने की तैयारी में hi था की तब तक घर के दरवाजे पर दस्तक होती है

सबकी नजर दरवाजे की और जाती है वह और कोई नहीं मेघा दीदी का चिटा देवर राजू खड़ा था जो लगभग 14-15 सल्ल जा था

रेखा- अरे राजू आज कैसे हमारे घर पधारे आप

राजू- दीदी वो मेघा भाभी की तबियत खराब ह तो घर के काम नहीं कर प् रही है इसलिए उन्होंने मुझे यह भेजा है

रेखा- म समझी नहीं

राजू- मतलब आप दोनों म से कोई एक मेरे साथ चलो

राजू रेखा और कम्मो की तरफ देखकर इशारा करता है

रेखा- पहले तू बता तो क्या हुआ मेघा दीदी को

रवि- है राजू भाई बताओ तो क्या हुआ ह मेघा दीदी को

Raju-are भइया ज्यादा चोट नहीं ह बस भाभी का पेअर मुद गया ह और उन्हें अंदर बहार होने म दिक्कत हो रही ह आपको तो पता ह की कोई भी औरत नहीं है घर में उनके अल्वा तो इसीलिए म आप लोगो में से किसी को लेने आया हु

रेखा- कम्मो एक काम कर तू चली जा मेघा दीदी के घर

रेखा की बात सुनकर कम्मो का मुँह उतर गया पर वो करती भी क्या आखिर म भी उसको hi जाना पड़ता क्योंकि वो छोटी थी

राजू- कम्मो दीदी जल्दी करना म किसी की बाइक लेजर आया हु

और उस आदमी को कहि जाना ह हमे अभी hi निकलना पड़ेगा

रेखा- कम्मो जल्दी से अपने कपडे रख ले और जा तू दीदी के पास

कम्मो सदा सा मुँह बनके रूम के अंदर चली जाती है और अपने कपड़े रखने लगती है और एक सूट सलवार पेहेन कर बहार आजाती है

कम्मो- चलो राजू मैं तैयार हु

राजू- ठीक ह रेखा दीदी अब हम निकलते ह

रेखा- अरे जल्दी hi कम्मो को छोड़ भी जाना

राजू- आप चिंता मत करो म खुद hi कम्मो दीदी को छोड़ जाऊंगा

ये बोलकर राजू कम्मो को अपनी बाइक पर बैठा कर अपने गाओं की तरफ निकल जाता है

और रवि भी थोड़ी देर में अपने खेतो की तरफ निकल जाता है ....
 
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