Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 18 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट-159

दूसरी तरफ्फ़ रामलाल का घर.....

मल्टी- बापू दरवाजा बंद कार्डो अंदर से नहीं तो ये नसेड़ी हमे भी नहीं सोने देगा

रामलाल पलट कर दरवाजा बंद करता हुआ अंदर से कुण्डी लगा देता है

इस पल रामलाल के चेहरे पर वो कमीनापन साफ़ झलक रहा था जिससे पता लगता था की उसके इरादे अपनी बेटी के साथ क्या करने के है

खैर मल्टी को पेटीकोट और ब्लाउज में देख कर hi रामलाल का लुंड खड़ा हो चूका था

जोकि अब बैठने का नाम नहीं ले रहा था

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अपना खड़ा लुंड छुपता हुआ रामलाल अपनी बेटी की और बढ़ चला था

पर उसकी धोती में जो उभर था उसे वो साहहह कर भी नहीं छुपा पाए रहा था

इधर मल्टी इस तरह लेती अपने को देख रही थी मनो कोई बीवी बिस्तर पर अपने मर्द का इन्तजार कर रही हो

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मल्टी का छोटा सा ब्लाउज उसकी विशाल चूचियों का वजन नहीं संभाल पा रहा था

उसकी आधे से ज्यादा चूचिया उसके ब्लाउज से बहार की तरफ झाक रही थी

जिन्हे देख कर खुद उसका बाप अपनी hi बेटी का शिकार करने पर उतारू हो चला था

रामलाल चुपचाप मल्टी के बगल में लेत जाता है

पर अपना लुंड छुपाने के लिए वो मल्टी की और पीठ कर के लेता था

पर शायद उसकी बेटी को यह मंजूर नहीं था

मल्टी- बापू नाराज हो क्या मुझसे

रामलाल- नहीं बेटी ऐसा नहीं है

मल्टी- तो उस तरफ मुँह करके क्यों लेते हो आपकी बेटी इतने दिनों बाद आपके पास आयी है क्या आपको कोई खुसी नहीं है जो मुझसे मुह्ह मोड़ रहे हो बापू

अब रामलाल अपनी बेटी को क्या बताता की उसके बूढ़े बाप का लुंड उसे देख कर खड़ा हो गया है और उसे छुपाने के लिए hi वो ऐसे लेता है

रामलाल - नहीं बेटी ऐसा कुछ नहीं है तू ऐसा मत सोच वो तो बस मैं ऐसे hi लेट गया था

मल्टी पीछे से हाथ डालती हुई अपने बापू से चिपक जाती है और अपना एक हाथ आगे बढ़ती हुई रामलाल की बनियान के ऊपर से hi उसकी छाती पर रख देती है

मल्टी का यु अच्चानक से चिपकना रामलाल के लिए न्य था

मल्टी की विशाल चूचिया अब उसके hi बापू की पीठ में किसी तीर की तरह सुबह रही थी

अपनी बेटी के बदन से निकल रही गर्मी को रामलाल साफ़ महसूस लार सकता था और उसका नशा तो मनो ऐसा था की रामलाल के लुंड की नशे फटने को तैयार हो चली थी

मल्टी रामलाल के इतना नजदीक थी की उसकी गरम सांसे सीधा रामलाल की गर्दन को चोट मार रही थी मल्टी की सांसे रामलाल का बदन पिघलने लगी थी

ये नजारा hi इतना मादक था की किसी भी बाप का दिमाग खराब हो जाये जब उसकी गदराई शादी शुदा बेटी उससे इस तरह चिपक जाये

मल्टी- बापू मेरी तरफ देखो ना

रामलाल की हालत तो पहले से hi खराब थी पर अब उसपर हवस हावी होना शुरू हो चुकी थी

रामलाल अच्चानक से पलटता हुआ मल्टी की तरफ घूम जाता है पर उसने अपने लुंड को पैरो के बिच दबा लिया था जिससे की मल्टी उसका लुंड न देख पाए

रामलाल और मल्टी के मुँह एक एक दूसरे के इतने करीब थे की अगर मल्टी 1 इंच और आगे बढ़ जाती तो सहयद उसके गरम होठो की तपिश भी उसका बूढ़ा बाप महसूस कर सकता था

पर रामलाल के चेहरे पर मल्टी की गरम सांसे अब सीधा पड़ रही थी जोकि रामलाल की हवस को और भी ज्यादा उचाईयो पर उठाने के लिए काफी थी

आअज पहली बार रामलाल अपनी बेटी को इस हालत में इतना करीब से देख रहा था

मनो उसकी पूरी दुनिया hi पलट गयी थी

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रामलाल अपनी hi बेटी के गदराये जिस्म पर ऊपर से निचे तक एक नजर डालता है

मल्टी की पतली सुराहीदार गर्दन से लेकर उसकी चूचियों के बिच बनी बड़ी दरार से लेकर उसकी चिकनी और चौड़ी कमर तक और अनंतत में आकर वो अपनी बेटी के होठो को देखते है उसकी आँखों में देखने लगता है

अपनी hi बेटी के अंगो को देखने का मजा आज रामलाल को समझ आया था और उसे यह भी समझ आ गया था की हरिया ने नीलम के साथ जो मजे लुटे है शायद उसे वो दुनिया में कोई और खूबसूरत औरत भी नहीं दे सकती जो उसकी बेटी ने दिए है

रामलाल अब अपनी बेटी से और दुर्र नहीं रेहह सकता था

मल्टी- बापू खा खो गई

रामलाल- कुछ नहीं बेटी बस देख रहा हु की मेरी बेटी कितनी बड़ी हो गयी है

मल्टी- बापू मैं तो आज भी वही बच्ची हु जो हमेशा से आपकी गॉड में कढ़ी रहती थी

पर बापू आप अब अपनी इस बेटी से पहले की तरह प्यार नहीं करते

रामलाल- बेटी मैं तुझसे पहले भी प्यार करता था और बल्कि अब तो उससे भी ज्यादा प्यार करता हु

मल्टी- अच्छा बापू तो क्या मेरा शरीर जैसे बढ़ा है वैसे आपका प्यार भी बढ़ गया है क्या

रामलाल- बेटी तेरा शरीर और तू कहे कितनी भी बढ़ जाओ पर तेरा ये बुद्धा बाप तुझसे हमेशा प्यार करता रहेगा

मल्टी रामलाल के हाथ को पकड़ती हुई अपने गलो पर रख देती है

मल्टी के चिकने गलो पर हाथ रखते hi रामलाल के पुरे शरीर में एक करंट सा दौड़ उठता है

मल्टी - बापू प्यार करते थे तो मिलने क्यों नहीं आते थे मुझसे

रामलाल- बेटी प्यार करता था और हमेशा करता रहूंगा पर वो तेरी ससुराल है मैं रोज रोज आऊंगा तो तेरे ससुराल वाले क्या सोचेंगे की ये बुद्धा अपनी बेटी से रोज रोज क्यों मिलता है

मल्टी- अच्छा मतलब किसी के सोचने भर से आप अपनी बेटी से मिलना बंद कर डोज

रामलाल - अरे बेटी प्यार करता हु तुझसे तभी तो तुझे यह ले आया तेरी एक आवाज पर

मल्टी- अच्छा बापू तो क्या अब आप मुझे यह प्यार करोगे

इतना बोलते हुए मल्टी दूसरी और घूम जाती है और अपनी गद्देदार गांड को पीछे करती हुई सीधा रामलाल से चिपक कर लेत जाती है

रामलाल की तो मनो सांसे hi बंद हो जाती है

मल्टी- बोलो न बापू तो क्या अब आप अपनी बेटी को यह लेकर उससे प्यार करोगे

रामलाल कुछ बोल पता उससे पहले hi मल्टी उसका हाथ पकड़ती हुई आगे की और खींचती है और सीधा अपने चिकने पेट पर रख देती है जिससे की रामलाल का शरीर एक झटका खता है और झटके के साथ hi उसकी टैंगो के बिच फसा हुआ उसका लुंड आजाद होकर सीधा मल्टी की गांड से जा टकराता है

यह टकराव इतना कामुक था की दोनों बाप बेटी की सिसक निकल जाती है

मल्टी- अह्ह्ह्हह बापू तुम्हे नहीं पता मैंने तुम्हे कितना मिस किया

रामलाल- बेटी मुझे भी तेरी बड़ी याद आती थी पर क्या कृ एक बेटी को अपने पास कितने दिनों तक्क रख सकता हु मैं

मल्टी- बापू कुछ भी हो पर इस बार मैं यह ज्यादा दिन तक रहूंगी काम से काम हरी की शादी होने तक्क तो रहूंगी hi और मुझे वचन दो की तुम मुझे वापस बेहजने की जिद्द भी नहीं करोगे

रामलाल- पर बेटी एक तो तू पहली बार अपने ससुराल गयी है और सोच वो लोग क्या कहेंगे

मल्टी- कोई कुछ नहीं कहेगा मैं मेघा दीदी से पहले hi बात करके आयी हु उन्हें कोई आपत्ति नहीं है

रामलाल- जब उन्हें दिकायत नहीं है तो मुझे अपनी बेटी को रखने में क्या दिक्कत होगी तेरा घर है और तू कहे जितने दिन रह बेटी

मल्टी रामलाल के हाथ को पकड़ कर अपने पेट पर सहलाये जा रही थी जिसकी वजह से उसका लुंड लगातार अपनी बेटी की गांड के ऊपर टक्कर मरे जा रहा था

मल्टी- चलो बापू अब सो जाओ वैसे भी आज बस के झटको से मेरा पूरा बदन टूट रहा है

बस के झटको का नाम सुनते hi रामलाल को वही बात याद आ जब्ती है की कैसे उसका लुंड उसकी बेटी की गांड में फसा हुआ था और बस के हर झटके के साथ वो और भी ज्यादा अंदर घुसता जा रहा था

मल्टी पीछे पललट कर अपने बूढ़े बाप के गाल पर एक चुम्मा देती है और दुबारा से पलट कर लेत जाती है

मल्टी- सुभ्रातृ बापू बहुत तेज नींद आ रही है

कल से मैं आपकी दिन रात सेवा करुँगी अब सो जाओ बापू

रामलाल को खा पता था की उसकी बेटी नींद का बहाना बनाते हुए उसे अपने गदराये बदन से खेलने का खुल्ला निमंत्रण दे रही है

इधर रामलाल तो अंदर hi अंदर खुस्स था आखिर कर तो वो भी यही कहता था की उसकी बेटी जल्दी सू जाये
 
अपडेट-160

मल्टी को आँखे बंद किये हुए लगभग आधा घंटा हो चूका था

इधर रामलाल का लुंड अपनी बेटी की गांड से निकल रही गर्मी के कारन बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था

और उसका हाथ अब भी अपनी बेटी के पहले हुए पेट पर था.

मल्टी आँखे बंद किये हुए hi अपने बाप के खड़े लुंड हो अपनी गांड के बिच महसूस करके पागल सी हुई जा रही थी उसको बस अब इसी बात का इन्तजार था की आगे उसका बूढ़ा बाप उसके साथ क्या क्या करता है

इधर रामलाल मल्टी के पूरी तरह से नींद में जाने का इन्तजार कर रहा था

भले hi मल्टी कुछ भी बोल रही थी पर रामलाल के अंदर कहि न कहि अब भी वो बाप जिन्दा था जोकि अपनी बेटी के सामने शर्मिंदा नहीं होना कहता था

भले hi वो नींद में उसे छोड़ दे

ऐसे hi काफी वक़्त बीत गया और लगभग 1 घंटे के बाद रामलाल अपनी उँगलियों से मल्टी के पेट पर कुछ हरकत करता है

इधर मल्टी जो उदास होकर हलकी नींद की आगोश में जा चुकी थी झट्ट से उसकी आँखे खुल जाती है

मल्टी( हो गया मेरे बापू का गन्दा खेल शुरू )

रामलाल धीरे धीरे अपनी उंगलियों को मल्टी के चिकने पेट पारर सहलाता हुआ उसकी नाभि तक्क ले जाता है और वापस से अपना हाथ ऊपर की और लेजाता है

वो पूरी तरह पक्का कर लेना कहता था की उसकी बेटी गहरी नींद में सो चुकी है

इधर मल्टी के इरादे पहले से hi मजबूत थे वो बिना हिले डुले बस यही पड़ी रहती है

रामलाल 3-4 बार यही हरकत दोहराता है और जब उसे यकीन हो जाता है की उसकी बेटी सो चुकी है वो अपनी कमर को थोड़ा आगे की और धकेलता हुआ अपनी ऊँगली को सीधा मल्टी की नाभि में घुसा देता है

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रामलाल मल्टी की नाभि को इस तरह छू रहा था मनो वो उसकी गहराई नाप रहा हो

इधर मल्टी के पुरे बदन में एक साथ हजारो चीटिया काट रही थी

यह अहसास hi उसे पागल किये जा रहा था की कलुस्का खुद का बाप उसके जिसमं के साथ खेल रहा है

अब रामलाल अपनी कमर को भी लगातार मल्टी की गांड पर रगड़े जा रहा था और उसका फुला हुआ लुंड मल्टी को पागल किये जा रहा था उसका मैं तो कर रहा था की अभी घुम्म कर अपने बापू का लुंड पकड़ ले पर वो देखना कहती थी की आखिर उसका सगा बाप उसके साथ किश हद्द तक्क जाता है

और इधर रामलाल का पूरा शरीर काँप रहा था उसे यह भी डर था की कहि मल्टी जाग न जाये

पर अबतक उसके ऊपर हवस हावी हो चुकी थी

इस बार रामलाल एक कदम और आगे बढ़ता है और अपने मुँह को कल्टी के गले तक ले जाता हुआ अपनी बेटी की सुराहीदार गर्दन को चुम लेता है

एक के बाद एक कई सरे चुम्बन वो मल्टी की गर्दन पर करता है और अपने हाथो को पेट से ऊपर की और बढ़ता हुआ सीधा मल्टी के ब्लाउज पर रख देता है

एक पल के लिए रामलाल ऐसे hi शांत पड़ जाता है उसका दिल जोरो से धड़क रहा था

रामलाल अपनी बेटी की धड़कन को साफ़ महसूस कर सकता था

इधर रामलाल के कंपते हाथो को मल्टी अपनी चूचियों पारर साफ़ महसूस कर रही थी

अब रामलाल धीते धीरे मल्टी की गर्दन को सबंता हुआ अपनी बेटी के चुचो को दबाना शुरू कर चूका था

ब्रा न होने की वजह से आज रामलाल को मल्टी की चूचिया दबाने में एक अलग hi मजा आ रहा था

उसे आज पता चला था की उसकी बेटी की गदराई चूचिया कितनी मुलायम और लचकदार है

रामलाल चूचियों को दबाता हुआ अब मल्टी की गर्दन को चाटने लगा था

और लगातार अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ अपने लुंड को रगड़ रहा था

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करीब 10-15 मिंट तक ऐसे hi वो अपनी बेटी की चूचियों को मसलता हुआ उसके शरीर की मिठास को चाटता चला जाता है और अंतत में वो अपना आप खोते हुए जोरदार तरिके से मल्टी से चिपक जाता है

रामलाल का हाथ अब मल्टी की चूचियों को निचोड़ रहा था

रामलाल जबरदस्त तरिके से अपनी कमर हिलता हुआ झड़ने लगता है

इधर मल्टी को अपनी गांड में गीलापन साफ़ महसूस हो रहा था

उसे अपने बापू पर गुस्सा भी आ रहा था की वो और आगे क्यों नहीं बढ़ा

पर अब पारंण कर चुकी थी की कल से वो अपने बापू के सामने और भी मादक हरकते करेगी ताकि रामलाल अपनी शादीशुदा बेटी का दीवाना हो जाये.....
 
अपडेट-161

रात भर अपनी दीदियो को छोड़ने के बाद रवि बड़ी hi चैन की नींद सोया हुआ था

सुबह की पहली किरण घर में आ चुकी थी और उस किरण की चमक से रेखा की आँख खुल जाती है

रेखा एक नजर मेघा दीदी और रवि पर डालती है

कमरे में मौजूद हर कोई इस वक़्त पूरी तरह से नंगा था

यह नजारा देख कर रेखा को कल रात हुई काललीला याद आ जाती है

वो कल के बारे में सोचती हुई मेघा दीदी के करीब पहुँचती है और अपनी दीदी की सूजी हुई छूट को बड़े गौर से देखने लगती है

रेखा ( हाय राम रवि ने तो दीदी की छूट एक चुदाई में hi सुजा दी आने वाले दिनों में तो ये दीदी की छूट का भी भोसड़ा बना देगा जैसे मेरी छूट का बनाया है )

रेखा अपनी छूट पर हाथ फेरते हुए बोलती है

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रेखा अपना एक हाथ आगे बढ़ती हुई मेघा दीदी की छूट पर रख देती है और बड़े प्यार से अपनी दीदी की छूट के डेन को सहलाती हुई मेघा दीदी को आवाज देती है

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मेघा दीदी की छूट में अब भी कॉमर्स जमा हुआ था

मेघा अंगड़ाई लेती हुई उठ जाती है उसकी भरी भरकम चूचिया एक अलग hi केहर ध रही थी

मेघा- अह्ह्ह्ह क्या हुआ रेखा इतनी सुबह सुबह क्यों उठा दिया ऋ तूने

रेखा- अरे मेरी प्यारी दीदी उठ कर कपडे पेहेन लो मैं हगने जा रही हु कहि पीछे से कम्मो आ गयी और आपको इसके साथ नंगी देख लिया तो न जाने क्या सोचेगी बेचारी अपनी इस दीदी के बारे में

मेघा- अह्हह्ह्ह्ह है राममम पूरा बदन टूट रहा है

रेखा इस बात पर खिलखिला कर हसने लगती है

मेघा- अच्छा तुझे हसी आ रही हसि कमीनी ये सब तेरा hi किया धरा है

रेखा- अब देखो दीदी इसमें मेरी क्या गलती है बताओ जब रात भर अपने छोटे भाई से अपनी छूट चुड़ाओगी तो बदन तो टूटेगा hi न तुम्हारा

वैसे दीदी कुछ भी खो पर कल रात तो मजा hi आ गया क्यों

मेघा- हट बदमाश लड़की कुछ भी बोलती है

रेखा- दीदी एक नजर वह तो देखो

मेघा अपनी नजर रवि की और कटी है और जैसे hi वो उसके खड़े लुंड को देखती है मनो उसकी आँखों से नींद गायब हो जाती है

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मेघा- हयईए दिया ये अब भी खड़ा है

रेखा- वही तो मैं आपको समझा रही हु दीदी कपडे पेहेन लो नहीं तो अगर ये उठ गया तो तुम्हे दुबारा से पटक पटक कर छोड़ना चालू कर देगा हहहहहहह

इतना बोलते हुए रेखा अपने कायदे पहनती हुई बहार निकल जाती है

मेघा दीदी भी अपने कपडे पेहेनते हुए रवि के नंगे बदन पर एक चादर दाल देती है

रेखा जैसे hi कमरे का दरवाजा खोलती है उसे कम्मो दिखाई देती है

रेखा- हे भगवान् बड़ी मस्त नींद आयी कल रात तो

पूरा बदन hi टूट रहा है मेरा तो

कम्मो- क्या हुआ दीदी बदन क्यों टूट रहा है जब मस्त नींद आयी तो

रेखा- अब क्या बताऊ तुझे छोटी बहना उस कमीने के आगे में रोज रात को हार जाती हु

इतना बोलते हुए रेखा एक मादक मुँह बनती हुई बहार चली जाती है संडास करने के लिए

इधर कम्मो को रेखा की साडी बाते समझ आ रही थी की वो किस कमीने के सामने हरने की बात कर रही है

थोड़ी hi देर में मेघा दीदी भी कमरे से बहार आ जाती है

मेघा- अरे कम्मो चाय बना दे तो पूरा बदन टूट रहा है मैं मुँह धो कर आती हु

मेघा दीदी की बात सुनते hi कम्मो के कान खड़े हो जाते है

उसने कल रात को रेखा दीदी और रवि की बात चित सुनी थी और तब से hi उसे पता था की आज रात जरूर कुछ होने वाला है और इधर मेघा दीदी ने भी कम्मो को बदन टूटने की बात कह डाली थी

मेघा के बहार जाते hi कम्मो अपने सकहहह को यकीन में बदलने के लिए जल्दी से कमरे में घुस जाती है और जैसे hi वो अंदर का नजारा देखती है उसकी साडी कल्पना हक़ीक़त बन जाती है

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कम्मो के छोटे भाई का विकराल लुंड एक दम सीधा खड़ा था और उसपर एक पतली सी चादर डाली हुई थी

ये नजारा देख कर तो मनो कम्मो की सांसे hi फूलने लगती है

पर कम्मो को अब भी कुछ डॉट्स थे वो उन्हें भी क्लियर करना कहती थी और इसी मकसद से वो रवि की और बढ़ती है और धीरे से रवि के नजदीक बैठते हुए उसकी चादर के एक किनारे को पकड़ कर ऊपर की और उठाने लगती है और जैसे hi वो चादर के अंदर का नजारा देखती है उसकी आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

चादर के अंदर उसका छोटा भाई एक दम नंगा था

कम्मो( हे भगवान् मतलब मेघा दीदी को भी इसने छोड़ दिया पर कैसी)

इस समय कम्मो के दिम्माग में एक साथ हजारो सवाल चल रहे थे तभी रवि आच्चंक से उसकी कलाई पकड़ लेता है

कम्मो एक झटके में अपने ख्यालो की दुनिया से बहार आ जाती है

कम्मो मचलती हुई अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है पर रवि की मजबूत पकड़ से वो छूट नहीं पति

रवि- क्या हुआ दीदी बास दुर्र से hi देखोगी एक बार पकड़ कर देखो ना

कम्मो - हॉट बदमाश छोड़ मुझे भट्ट कम् है

रवि- कल रात को भी तो आप काम hi कर रही थी भूल गयी क्या ये भी काम hi है बस इसमें मेरा और आपका काम है दीदी

रवि कम्मो के हाथ को खींचता हुआ अपने लुंड की और ले जाए रहा था

और इधर कम्मो किसी कटी पतंग की तरह अपने छोटे भाई के इशारो पर चली जा रही थी

कम्मो - मुझे पता है तूने रात को क्या किया है

रवि- पता है तो अच्छी बात है दीदी वैसे भी अगला नंबर तुम्हारा hi है

कम्मो- छी तुझे शर्म नहीं आती अपनी दोनों दीदियो को एक साथ छोड़.....

इतना बोलते हुए कम्मो अच्चानक से ृक्क जाती है

रवि- अरे बोलो न दीदी है मुझे शर्म नहीं आती अपनी दोनों गदराई दीदियो को एक साथ छोड़ते हुए मैं तो आप तीनो को एक साथ छोड़ना कहता हु पर न जाने वो दिन कब आएगा

अब तक कम्मो का हाथ रबी के लुंड तक्क पहुंच चुका था वो बिना किसी हरकत के बस वैसे hi बैठी हुई थी

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कम्मो- वो दिन कभी नहीं आएगा

इतना बोलते हुए कम्मो उठने की कोशिश करती है रवि तुरंत hi उसे अपनी एयर खींचता हुआ सीधा अपने बगल में गिरा देता है

रवि - अरे दीदी भग्ग खा रही हो पहले मेरी पूरी बात तो सुन्न लो

कम्मो की छाती इस समय पूरी रफ़्तार से ऊपर निचे हो रही थी देखने पर तो मालूम पड़ता था की उसकी मोती चूचियों की बढ़ती गोलाई को अब उसके ब्लाउज के कमजोर हक्क नहीं संभाल पाएंगे

रवि अपना चेहरा कम्मो के चेहरे के करीब लता है और एक जोरदार साँस लेता हुआ अपनी दीदी के बदन से उठ रही मादक महक को सूंघता है

रवि का कला लुंड इस समय कम्मो की जांघो पर रगड़ मार रहा था

इधर कम्मो की हालत खराब होती hi जा रही थी अब तक उसकी रसीली छूट से रह बहना शुरू भी हो चुका था पर उसे डर था की कहि मेघा दीदी अंदर न आ जाये

रवि- दीदी वो दिन आएगा और जरूर आएगा ये वडा है आपके छोटे भाई का आपसे पर उससे पहले तो मैं आपको अकेले में छोडूंगा और खूब छोडूंगा और छोड़ छोड़ कर आपके सरे छेद इतने फैला दूंगा की उस्ले बाद से बिना किसी तकलीफ के hi आप मेरे लुंड को अपने किसी भी छेद में ले सकोगी

आपने छोटे भाई के मुह्ह से ये बात सुन्न कर कम्मो का रोम रोम कांप उठा था

अपनी दीदी के बदन की कपकपी को रवि साफ़ महसूस कर सकता था

कम्मो- कौन से केहदो की बाआत्तत्त करररर रहा हैआईईई टूउउउउ

यह तक की बोलते समय कम्मो के होंठ भी कम्प रहे थे

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पर इतनी पास से रवि को अपनी दीदी के वो कंपते हुए होठ भी रसीले hi लग रहे थे

रवि- दीदी पहले तो मैं आपको इन गुदाज और गदराई चूचियों को निचोड़ निचोड़ कर इनका रस पियूँगा और फिर आपके ये रसीले होठ इनका रस पियूँगा

इतना बोलते हुए रवि अपनी एक ऊँगली को कम्मो के गरम होठो पर फिर देता है

रवि- उसके बाद आपका ये छोटा भाई आपका ये रसीला मुह्ह छोड़ेगा और फिरर आपकी यह सील पाकक छूट

इतना बोलते हुए रवि अपना हाथ आगे बढ़ा कर पेटीकोट के ऊपर से hi कम्मो की छूट को दबोच लेता है

जैसे hi रवि का हाथ कम्मो की छूट पर पड़ता है

कम्मो के पुरे बदन में एक सनसनी सी दौड़ उठती है

कम्मो उस वक़्त इतनी गर्म थी की वो अंदर hi अंदर पागल सी हुई जा रही थी उसे कुछ नहीं सूझ रहा था बस उसे अपने छोटे भाई की हरकते अच्छी लग रही थी

अभी कम्मो ये रवि कुछ बोलते उससे पहले hi बहार से मेघा दीदी की आवाज आती है

मेघा- अरे खा गयी कम्मो तू

कम्मो मेघा दीदी की आवाज सुन्न कर सकपका जाती है और आच्चंक से उठती हुई बहार की और भाग जाती है

मेघा दीदी की अव्वज सुन्न कर रवि भी कम्मो का हाथ छोड़ देता है

मेघा जब कम्मो को कमरे से निकलते हुए देखती है तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगता है

मेघा ( हे भगवान् कहि इसने रवि को नंगा तो नहीं देख लिया क्या सोचेगी ये मेरे बारे में )

मेघा- क्या करने गयी थी तू अंदर

मेघा दीदी की आवाज में गुस्सा साफ़ झलक रहा था

इधर कम्मो का गला सुख रहा था उसे समझ hi नहीं आ रहा था की अब अपनी दीदी को क्या जवाब दे

कम्मो कुछ बोल पति उससे पहले रवि अपनी धोती में बहार निकलता है

रवि- अरे दीदी क्यों गुस्सा हो रही हो आप मेरी छोटी दीदी पर ये तो मुझे उठाने आयी थी पर मैं तो पहले से hi जगा हुआ था

रवि की बात सुनकर मेघा दीदी की जान में जान आती है

मेघा- ठीक ह ठीक ह जा कम्मो जरा जल्दी से चाय बना दे तो देख रवि भी कबका उठा हुआ है

रवि एक नजर कम्मो पर डालता है कम्मो जैसे hi उससे नजरे मिलती है तुरंत hi अपनी नजरे निचे करके चाय बनाने चली जाती है

रवि भी वापस से कमरे में आकर लेत जाता है की शायद कम्मो उसे चाय देने वापस से कमरे में आये और वो दुबारा से अपनी दीदी के जिस्म से खेल सखे

रवि ( हे भगवान् क्या किस्मत दी है तूने मुझे तीन तीन दिदिया और तीनो एक से बढ़कर एक पर ये कम्मो दीदी इनके शरीर की महक सबसे अलग है न जाने कब उस महक को सूंघने का मौका मिलेगा )

इधर कम्मो चाय तो बना रही थी पर उसके छोटे भाई ने उससे जो जो बाटे कहि थी उन्हें सुनने के बाद से hi उसके मन में उथल पुथल चल रही थी अब तो वो ये भी भूल चुकी थी की रात भर रवि ने रेखा दीदी और मेघा दीदी को छोड़ा है

बस उसके मैं में अब एक hi बात चल रही थी की उसका छोटा भाई उसे छोड़ना कहता है और यही एक बात सोच सोच कर कम्मो की छूट लगातार रस चोदे जा रही थी

कम्मो चाय बना कर मेघा दीदी को देती है और रवि का कप भी वही रखती हुई बाजार निकल जाती है बाकि के काम निपटने

आज रवि ने मनो पूरी दुनिया hi जीत ली थी

रात भर उसने अपनी दोनों दीदियो को छोड़ा और सुबह होते hi उसने अपनी तीसरी दीदी के बदन से भी छेड़छाड़ की और उसे अपने दिल की बात बता दी

आज रवि बहुत खुस था उसे अब अपनी दीदियो के साथ इस गंदे खेल को खेलने में और भी ज्यादा मजा आ रहा था और बस अब कुछ hi समय में वो 3-3 रानियों का राजा बनाने वाला था.....
 
अपडेट-162

रामलाल का घर्र........

रात भर रामलाल अपनी बेटी को गांड से अपना खड़ा लुंड चिपकाये सोया रहा और जब्ब उसकी नींद खुली तो उसकी बेटी कमरे से बहार जा चुक्की थी

पर रामलाल का लुंड अब भी खड़ा था

रामलाल( कहि मल्टी ने मुझे इस हालत में तो नहीं देखा होगा नाज जाने क्या सोचेंगी अपने बाप के बारे में जो बुढ़ापे में उसके साथ इतनी गन्दी हरकते कर रहा है )

अभी रामलाल कुछ और सोचता उससे पहले मल्टी कमरे में चाय का गिलास लिए घुसती है

मल्टी- उठ गए बापू लगता है बड़ी तगड़ी नींद में सोये थे रात को जो लेत उठ रहे हो

रामलाल की नजर अच्चानक से अपनी बेटी पर पड़ती है जो अब कपडे बदल चुकी थी शायद मल्टी स्नान कर चुकी थी

मल्टी ने सिर्फ एक ब्लाउज और पेटीकोट डाला हुआ था और ब्लाउज इतना ढीला था की उसकी चूचिया झुकते के साथ hi रामलाल को नजर आ गयी

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रामलाल को अपनी बेटी की लटकती हुई चूचिया साफ़ नजर आ रही थी अगर वो थोड़ी सी और कोशिश करता तो वो अपनी बेटी के निप्पल भी देख सकता है

इधर रामलाल मनो ये नजारा देखने के बाद जम्म्म सा गया था

मल्टी अपना हाथ आगे बढ़ती हुई अपने बापू को होश में लती है

मल्टी- अरे खा खो गए बापू

रामलाल- कुछ नहीं बेटी बस कल की थकान थी इसलिए ज्यादा देर तक्क सो गया

मल्टी- मैं भी बापू कल तो आपसे चिपक कर सोने में आता hi नहीं चला की कब नींद आयी और जब नींद खुली तो सुबह हो चुकी थी

मल्टी रामलाल को चाय देते हुए उसके सामने बैठ जाती है

मल्टी कुछ इस तरह बैठी थी की रामलाल को अपनी बेटी की आधे से ज्यादा नंगी टंगे और कुछ हद्द तक जंघे भी नजर आ रही थी

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रामलाल अपनी बेटी की गुदाज जाँघि को देख कर मनो धीरे धीरे अपना आप खो रहा था

इधर मल्टी अपने बाप को उकसाने का काम बखूबी शुरू कर चुकी थी

रामलाल का सोया हुआ लुंड ान धीरे धीरे दुबारा से होश में आना शुरू हो गया था

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अपने बापू की धोती में उठते उस उभार को देख कर मल्टी के चेहरे पर एक मुस्कान आ चुकी थी

ये उसे यकीनन दिला रहा था की वो अपना काम अब बखूबी कार रही है

मल्टी- बापू तुम्हे माँ की याद नहीं आती

मल्टी अच्चानक से ऐसा सवाल पूछती है की रामलाल हक्का बक्का रह जाता है

क्योंकि आज तक मल्टी ने ऐसा सवाल नहीं पूछा था

रामलाल - आती है बिटिया पर क्या कृ यद् करके तेरी माँ वापस थोड़े hi आएगी हमारे पास

बाटे करते वक़्त भी रामलाल की नजरे अपनी बेटी के पेटीकोट में और अंदर तक झाकने का प्रयास कर रही थी जिसे देख देख कर मल्टी को और भी ज्यादा मजा आ रहा था

मल्टी- बापू रात को जयदा याद आती है या दिन में

ये सवाल सुन्न कर रामलाल अच्चानक से बोल पड़ता है

रामलाल - रात को

और अगले hi पल रामलाल को अपनी गलती का अहसास होता है और वो बात को संभालते हुए बोलता है

रामलाल - मतलब रात को जब मैं सोने की कोशिश करता हु तो तेरी माँ की याद आती है बेटी

मल्टी- कोई बात नहीं बापू तुम चिंता मैट करो माँ जैसे रुम्हारा ख्याल रखती थी तुम्हारी बेटी उससे भी अच्छा ख्याल रखेगी

इतना बोलकर मल्टी उठ जाती है और मदद कर जाने लगती है

अपनी बेटी को जाता हुआ देख कर रामलाल अपने लुंड पर हाथ रख कर उसे मसलने लगता है

मल्टी जाते वक़्त कुछ ज्यादा hi गांड मटकाकर चल रही थी और इस वक़्त उसने सिर्फ और सिर्फ एक पेटीकोट hi पहना हुआ था और वो भी आधे से ज्यादा उसकी गांड में फसा हुआ टा

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मल्टी जो सोच रही थी उसका बाऊ ठीक वही काम कर रहा था

इधर रामलाल अपनी बेटी की गद्देदार गांड को उछलता हुआ देख कर अपना लुंड मसल रहा था और इधर उसकी बेटी अपना अगला दाव चलती है

मल्टी आगे बढ़ती हुई अचानक से अपना हाथ ठीक अपनी गांड के ऊपर लती है और रूकती हुई थोड़ा सियस्क जाती है

मल्टी- ahhhhhhhhhh

रामलाल- क्या हुआ बेटी

मल्टी- अब क्या बताऊ बापू आपको शर्म आती है

रामलाल- बोल न नेति क्या बात है

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मल्टी- बापू जल्दी नहाने के चक्कर में मैं संडास जाना तो भूल hi गयी और अब तो ऐसा लग्ग रहा है की मेरी हगवास यही निकल जाएगी

मल्टी एक सदा सा मुँह बनती हुई रामलाल की तरफ देखती है

इधर रामलाल अपनी बेटी के मुँह से ऐसे सब्द सुन्न कर मनो किसी और hi दुनिया में चला गया तो और भूल hi गया था की उसका हाथ अब भी उसका लौड़ा मसल रहा है

जैसे hi रामलाल को होश आता है रामलाल तुरंत अपना हाथ लुंड से हटा लेता है पर शायद ये उसकी एक गलती थी

जैसे hi उसका हाथ हत्ता है उसका खड़ा लुंड धोती के अंदर hi एक छलांग लगता है जिसे देख कर मल्टी का रोम रोम खिल उठता है

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रामलाल तुरंत hi अपने हाथ को वापस से लुंड पर रख कर उसे छुपाने की कोशिश करता है

पर मल्टी अब भी वैसे hi खड़े खड़े अपने बूढ़े बाप को भूखी शेरनी की तरह देख रही थी

वो लगातार अपनी गांड के दोनों पतों के बिच अपने हाथ को घुसती hi जा रही थी मनो उसे उस जगह पर सच में दर्द्द हो रहा हो

रामलाल- जा बेटी तू संडास करले नहीं तो तेरा पेट खराब हो जायेगा

मल्टी- है बापू सच खा तुमने और अगर पेट खराब हो गया तो फिर मैं पुरे घर में हगति फिरंगी और तुमको hi साफ़ करना पड़ेगा

मल्टी इतना बोलती हुई 2 कदम आगे बढ़ती है और अच्चानक से ृक्क जाती है

इधर अपनी बेटी के मुह्ह से निकला हर्र सब्द्द सीधा रामलाल के लुंड पर चोट मर्डर रहा था उसका लुंड लगातार अकड़ता hi जा रहा था

मल्टी दुबारा से पीछे की एयर मुह्ह घूमती है

मल्टी- बापू एक बात तो मैं बताना भूल hi गयी

रामलाल अपने कंपते होठो से बोलता है

रामलाल- क्या बेटी

मल्टी- बापू वो बाथरूम की कुण्डी टूट गयी है उसे लगवा देना

इतना बोल कर मल्टी मुस्कुराती हुई आगे बढ़ने लगती है

कुण्डी टूटने की बात सुनते hi मानक रामलाल के चेहरे पर चमक आ जाती है

रामलाल- बेटी

मल्टी फिरसे पलट कर अपने बापू को देखती है

दोनों बाप बेटी की आँखे हवस से बाहर चुकी थी

दोनों की हवस के बिच बस एक hi दिवार थी और वो था बाप बेटी का रिश्ता जो की जल्द hi चूर चूर होने वाला था

मल्टी- क्या बापू

रामलाल- बेटी हरी खा है

मल्टी- वो तो सुबह hi निकल गया बापू बिना बताये

ये बात सुनकर रामलाल अंदर hi अंदर झूम उठता है

अपने बालू की खुसी मल्टी को उसके चेहरे पारर साफ़ झलक रही थी

मल्टी दुबारा से सदा हुआ मुँह बनती है

मल्टी- अह्ह्ह बापू मैं जाऊ मेरे यह पर ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा है लगता है अभी बहार आ जाएगी

रामलाल- क्या बेटी

मल्टी- मेरी हगवास बापू

मैं जाऊ

रामलाल- जा बेटी जल्दी से जाकर खली करले नहीं तो सच में तेरा पेट खराब हो जायेगा

मल्टी दुबारा से जाने के लिए पलट जाती है और अपनी गांड को और भी मादक अंदाज में मटकती हुई बाथरूम के गेट तक पहुँचती है और एक नजर अपने बापू पर डालती है

मल्टी- बापू

रामलाल- क्या बेटी

मल्टी- बापू हरी आये तो गेट मत खोलना बाथरूम की कुण्डी नहीं है न इसलिए

रामलाल- तू निश्चिन्त होकर संडास कर बेटी जब तक तू बाजार नहीं आएगी मैं गेट नहीं खोलूंगा तू जा

मल्टी दरवाजे के अंदर घुस जाती है

इधर अपनी बेटी को संडास घर में घुसता हुआ देख रामलाल एक शैतानी हसी के साथ अपने होठो पर जीभ फहरता है

मनो वो अभी जाकर अपनी बेटी की गांड से निकल रही हगवास का स्वाद लेने वाला है

रामलाल ( वाह रे भगवान् क्या संयोग बनाया है तूने ये कुण्डी जो टूटी है उसने तो मेरा काम hi बना दिया अब मैं अपनी बेटी को हगते हुए भी देख सकता हु )

रामलाल अंदर hi अंदर खुस होता हुआ अपनी जगह से खड़ा हो जाता है और दबे पाँव बाथरूम की एयर बढ़ने लगता है

पर रामलाल को ये नहीं पता था की जिसे वो मात्र्र संयोग समझ रहा था वो उसी की बेटी का बिछाया जाल था जिसमे अब वो फास्ट hi जा रहा था

मल्टी ने सुबह उठते hi सबसे पहले तो हरी को पैसे दिए ताकि वो दारू पिने बहार चला जाये और जैसे hi हरी बहार गया उसने बाथरूम की कुण्डी को भी तोड़ कर बहार फेक दिया

अब ये टूटी हुई कुण्डी न जाने इस घर में क्या क्या करम कांड करवाने वाली थी ......
 
अपडेट-163

मल्टी के बाथरूम में घुसते के साथ hi रामलाल भी बाथरूम की और बढ़ने लगता है

उसका दिल जोरो से धड़क रहा था

आखिर आज वो अपनी शादी शुदा बेटी को संडास करते हुए देखने जो वाला था

अपनी सगी बेटी को हगते हुए देखना कितना मादक होगा यह सोच कर hi रामलाल का लुंड जोरो के झटके मार रहा था

इधर मल्टी बाथरूम में आकर गेट की तरफ पीठ करके खड़ी हो जाती है

मनो वो अपने बापू का hi इन्तजार कर रही हो

रामलाल बहुत धीरे धीरे सरकता हुआ आखिरकार गेट तक पहुंच जाता है और जैसे hi मल्टी को ये आभास होता है की उसका बाप अब खेल देखने के लिए आ चूका है

मल्टी( अब खेल शुरू किया जाये)

इतना बोलते हुए मल्टी अच्चानक से अपने पेटीकोट को उठा देती है और एक पल के अंदर hi रामलाल की नजरो के सामने उसकी बेटी के पहाड़ जैसे चूतड़ नंगे हो जाते है

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रामलाल की आँखे जो नींद की वजह से अब तक अधखुली थी वो आच्चंक से पूरी तरह खुल जाती है और अपनी शादी शुदा बेटी के पिछवाड़े का नाप लेने लगती है

इधर मल्टी अपनी कनखियों से रामलाल को देख रही थी जिसका अंदाजा रामलाल को भी नहीं था

मल्टी अपना अगला कदम उठाते हुए अपनी गांड को बहार की और फेकती हुई निचे बैठ जाती है

और इस बार तो मनो रामलाल को सांप hi सूंघ गया हो

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मल्टी की गांड का सकरा छेद एक पल में hi खुल कर उसके बापू की आँखों के सामने आ जाता है

जिसे रामलाल बड़ी हसरत भरी नजरो से देख रहा था

इधर मल्टी के बदन में भी एक अजीब प्रकार की हलचल हो रही थी उसकी छूट खुद बा खुद hi लगतरर रस चोदे जा रही थी

यह सोच कर hi उसका बुरा हाल था की उसे हगते हुए खुद उसका बूढ़ा बाप देख रहा है

अब आलम ये था की रामलाल का लुंड पूरी तरह फूल चूका था इधर मल्टी कभी अपनी गांड के छेद को एक दम से फैला देती तो कभी उसे बिलकुल hi सिकोड़ लेती

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इधर रामलाल का खुद से मनो कण्ट्रोल hi छूटता जा रहा था

वो इतना मादक नजारा देख कर अपने आपको रोक नहीं पाया और धोती के ऊपर से hi अपने लुंड को पकड़ कर मसलने लगा

जब उसका दिल इससे भी न भरा तो अपनी धोती को साइड हटते हुए उसने अपना मुसल बहार निकल लिया और अब वो अपनी बेटी की खुली हुई गांड को देख कर लगातार अपना लुंड मसल रहा था

रामलाल के चेहरे पर इस वक़्त सिर्फ और सिर्फ हवस थी वो भी अपनी सगी बेटी के लिए

उसका दिल तो कर रहा था की अभी जाकर मल्टी की गांड के निचे मुह्ह खोल कर लेत जाये

इधर मल्टी को भी अंदाजा हो चूका था की उसका बाप अब अपना लुंड मसलना शुरू कर चूका है

मल्टी ने देर न करते हुए अपनी गांड को दोनों हाथो से पकड़ कर फैलाया

इस बार तो मनो रामलाल की सांसे hi रुक गयी जैसे hi उसकी नजर एक साथ अपनी बेटी की छूट और गांड के खुले हुए छेड़ो पारर पड़ी उसकी हाथ की स्पीड अच्छानक से बढ़ गयी

इधर मल्टी लगातार अपनी गांड के छेद को फैलाती हुई थोड़ा सा जोरर लगती है और एक जोरदार पाद मरती हुई उसकी गांड से हगवास का पहला टुकड़ा बहार की और आने लगता है

रामलाल( बेटी इतना जोर क्यों लगा रही है इधर आजा अपने बुड्ढे बाप के पास मैं चूस चूस कर तेरी गांड से सारा कचरा बहार निकल दूंगा)

रामलाल- अह्ह्ह्ह

रामलाल ने इस बार इतनी जोरो की साँस खींची मनो वो अपनी बेटी की गांड से निकली महक को महसूस करना कहता हो

रामलाल के मन में इस वक़्त एक साथ हजारो बाटे चल रही थी और साडी की साडी सिर्फ अपनी बेटी के लिए

इधर मल्टी एक के बाद एक कई सरे टुकड़ो को अपनी गांड से बहार निकलती है

लगभग 5 मिंट तक हगने के बाद वो पानी से अपनी गांड को अच्छी तरह रगड़ रगड़ कर साफ़ करती है

हर बार अपनी गांड का छेद धोते हुए वो अपनी 2 उंगलिया लगातार उसपर फिरती जाती

मनो वो उस छेद को अपने बापू को खाने के लिए परोस रही थी

इधर रामलाल की आँखे सुर्ख लाल हो चुकी थी

रामलाल ( कितना बड़ा चुटिया हु मैं इतनी मस्त बेटी घर में थी और मैं बहार जाकर रंडियो के पास अपनी प्यास बुझाता था)

रामलाल भले hi खुद को लाश रहा हो पर उसका हाथ अब भी उसके लुंड को लगातार मसले जा रहा था

अंततः में मल्टी अपना अगला दाव चलती है और गांड से उंगलिया हटते समय अपनी 2 उंगलियों को गछहः से अपनी छूट में गुस्सा देती है

मल्टी- हैए मैयाआआ ये मेरी छुटत की गर्मी न जानिए कबबब शंटटत होगी अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

मल्टी की आवाज इतनी तेज थी की उसे रामलाल के कानो तक पहुंचते देर नहीं लगती

मल्टी की बात सुनकर रामलाल को ये पता चल जाता है की उसकी बेटी भी उसकी hi तरह प्यासी है और वो तुरंत hi अपना एक पेअर उठा कर आगे की और बढ़ने लगता है

मनो वो अभी जाकर अपनी बेटी की प्यास बुझा देगा

अगले hi पल रामलाल को होश आता है और वो तुरंत hi ृक्क जाता है

इधर मल्टी 2-3 अपनी छूट में उंगलिया अंदर बहार करने के बाद अपनी दोनों उँगलियों को बहार निकलती हुई रामलाल को दिखती है

मल्टी को उंगलिया पूरी तरह उस चिपचिपे पानी से सनी हुई थी जिसे देख लार रामलाल का गला सूखने लगता है

एहि वो पानी था जो रामलाल की बरसो की प्यास बुझा सकता था

इधर मल्टी अपना खेल खतम करने को थी पर अब भी कुछ बाकि था

आखिर उसे अपने बापू का भी तो पानी निकलवाना था

मल्टी थोड़ी देर और अपनी छूट और गांड को रगड़ती रहती है

इधर रामलाल का लुंड भी अब अकड़ना शुरू हो चुका था

पछहः से उसके लुंड से विरया की मोती धार बहार निकलती है

रामलाल के चेहरे पर अब सुकून के भाव साफ़ नजर आ रहे थे

मनो ये उसकी बेटी का hi दिया कोई वरदान हो

िडजर रामलाल का लुंड करीब 2 मिंट तक लगातार लावा उगलता रहता है और जब उसे होश आता है तो वो तुरनत hi अपनी धोती को सही करता हुआ जमीन की और देखता है

जोकि पूरी तरह से वीर्य से लतपथ थी

अभी रामलाल कपडा उठा कर उसे साफ़ करने hi वाला था की मल्टी तुरंत hi खड़ी हो जाती है

मल्टी को खड़ा होता हुआ देख रामलाल तुरंत hi कमरे के अंदर भाग जाता है

उसका दिल अब जोरो से धड़क रहा था न जाने उसकी बेटी उसके वीर्य को देखने के बाद उसके बारे में क्या सोचेगी

रामलाल भले hi कमरे में था पर उसकी नजरे अब भी बहार गिरे उसके विरया पर hi तिकी हुई थी

इधर मल्टी एक मादक अंगड़ाई लेती हुई बाथरूम से बहार आती है

दरअसल वो बाथरूम के अंदर से hi अपने बापू का वीर्य देख चुकी थी और उसके चेहरे पर खुसी के भाव साफ़ दिख रहे थे आखिर उसने एक बेटी होने का फरज़ज़ जो अड्डा किया था

मल्टी बहार आते हुए सीधा रामलाल की और देखती है

रामलाल तुरंत hi अपनी आँखे दूसरी और घुमा लेती है

आगे बढ़ती हुई मल्टी अपने बापू के गिराए वीर्य तक पहुँचती है

रामलाल का दिल जोरो से धड़क रहा था और वो बागवान से यही दवा कर रहा था की कैसे भी करके उसकी बेटी उसे पार कर जाये

और होता भी यही है

जैसे hi मल्टी उस जगह से आगे निकल जाती है

रामलाल रहत की साँस लेता है

पर शायद मल्टी को यह मंजूर नहीं था

मल्टी तुरनत hi अपने कदम पीछे हटती है और जमीन पर बैठते हुए अपने बापू के विरया को अपनी 2 उंगलियों से उठती हुई उस देखने लगती है

अब तो रामलाल की गांड फैट कर गुब्बारा हो चुकी थी उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था

मल्टी अपनी दोनों उंगलियों को इस कदर घुमा रही थी की रामलाल का चिपचिपा वीर्य उसकी दोनों उंगलियों में सन्न चूका था

अच्चानक से मल्टी वो करती है जिसकी शायद रामलाल ने कल्पना भी न की होगी

मल्टी पहले तो अपनी एक ऊँगली को पूरा मुँह में घुसा लेती है और अपनी ऊँगली चाटती हुई उस बहार निकल कर एक छूटकर मरती है

मनो वो उसके स्वाद को महसूस करना कहह रही हो

यह नजारा देख कर तो रामलाल की आँखे hi बहार आ जाती है उसका पूरा बदन एक जोरदार झटका सा खता है आखिर उसकी hi बेटी उसका hi वीर्य जो चाट रही थी

अभी रामलाल कुछ और सोचता उससे पहले मल्टी अपनी दूसरी ऊँगली को भी मुह्ह में भर लेती है

रामलाल का लुंड अब दुबारा से सर उठाने लगा था

मल्टी- बापुउउउउ

रामलाल- हआ बेटीई

रामलाल जोरर से बोलता हुआ उसकी और भागता है

रामलाल- क्या हुआ बेटी

मल्टी- देखो न बापू ये

इतना बोलती हुई मल्टी अपना पूरा हाथ अपने बापू के वीर्य पर रख देती है

और उसे उठती हुई रामलाल को दिखती है

रामलाल- बेटीइ एईउएऊउउइउ ईयू.

आखिर बिचारा बोलता भी तो क्या बोलता

मल्टी- बापू इस कमीने की शादी होने वाली है पर दिन भर घर में अपना लुंड हिलता फिरता है और जगह जगह अपना माल गुरता फिरता है ये कमीना हरी

इतना बोलते hi मल्टी अपना मुँह शर्म से झुका लेती है मनो वो ये सब गलती से बोल गयी हो

इन सब्दो को सुन्न कर तो रामलाल के कान भी खड़े हो जाते है

मल्टी- मुझे माफ़ कर देना बापू मैंने इतने गंदे सब्द्द आपके सामने बोल दिए

रामलाल- कोईई बात नहीं बेटी

तुजा हाथ धो ले मैं आज उसे समझाऊंगा

रामलाल ( बाल बाल बचा बीटा रामलाल)

मल्टी जाकर हाथ धो लेती है और बचे हुए माल को भी साफ़ कर देती है

इस बिच रामलाल वही खड़ा रहता है और अपनी बेटी की हिचकोले कहती हुई जवानी का पूरा लुफ़्त्त उठता है

मल्टी- बापू आज तुम बाजार जाओगे

रामलाल- हां बेटी शाम को जाऊंगा कुछ जाना है तो बता

मल्टी - बापू वो न मेरी कच्ची और ब्रा ससुराल में hi छूट गयी है तो आप ले आना

मल्टी की बात सुनकर रामलाल का सुस्त हो चूका दिल एक बार फिर जोरो से धड़कने लगता है

मल्टी यह सब बाटे इतनी मासूमियत से बोल गयी थी मनो वो आज भी वही बच्ची हो जिसे रामलाल अपनी गॉड में खिलाया करता था

रामलाल- ठीककक है बेटी मैं ले आऊंगा

अब तो रामलाल को भी अपनी बेटी की चढ़ती जवानी को महसूस करने का मौका मिल गया था

और ऊपर से उसे यह भी पता चल चूका था की उसकी शादी शुदा बेटी की बुर्र भी प्यासी है

इतना बोलकर मल्टी रसोई की और जाने लगती है

रामलाल- बेटी साइज तो बताए दे

मल्टी पलट कर अपने बापू को अपनी कातिल नजरो से देखती है

रामलाल अपना थूक गटकते हुए बोलता है

रामलाल- बेटी वो दूकान पर बताना पड़ेगा

मल्टी- ऊपर का 34

और निचे का 36

मल्टी पलट कर दुबारा से जाने लगती है

रामलाल- बेटी कलर भी बता दे

इस बार मल्टी जाते जाते hi बोलती है

मल्टी- जो कलर आपको अच्छा लगे वो ले आना बापू

इस जवाब को सुनकर तो रामलाल का रोम रोम खिल उठता है

इधर मल्टी रसोई में जाकर नाश्ता बनाने लगती है

और इधर रामलाल बैठा बैठा यही सोच कर उत्तेजित हुआ जा रहा था की उसकी बेटी के गदराये जिस्म पर कौन सी कलर की कच्ची अच्छी लगेगी

और नतीजा ये हुआ की अब शाम का इन्तजार करना रामलाल को मंजूर नहीं था वो तुरंत उठता है और घर से बिना कुछ बोले बहार निकल जाता हसि है ......
 
अपडेट-164

रामलाल जल्द hi मार्किट पहुंच जाता है और एक अच्छी खासी उन्देर्गर्मेन्ट्स की शॉप में जाता है

रामलाल ने आज तक किसी दूकान से औरतो की कच्ची बनियान नहीं खरीदी थी

वो यह तक आ तो गया था पर अब उसे दूकान दर से बात करने में सब्कुछ हो रहा था

ओनर- क्या दिखाऊ सर

रामलाल - वो मुझे वो लेना है

ओनर- वो क्या सर आपको अंडरवियर चाहिए क्या

रामलाल- हां है वही चाहिए

दूकान दर तुरंत hi 4-5 डिज़ाइन के कच्चे निकल कर रामलाल को दिखा देता है

पर सरे के सरे कच्चे मर्दो के थे ये देख कर तो मनो रामलाल की झट hi सुलगने लगती है

रामलाल - अरे भाई ये क्या दिखा रहे हो तुम

ओन- सर आपने hi तो बोलै अंडरवियर

रामलाल- अरे भाई मुझे अपने लिए नहीं अपनी बी-----

इतना बोलते बोलते रामलाल ृक्क जाता है

ओन- अच्छा तो सर ऐसा बोलिये न की आपको अपनी बीवी के लिए चाहिए

रामलाल- है है मेरी बीवी के लिए चाहिए

ओन- सर साइज बताइये

साइज का नाम सुनते hi रामलाल की आँखों के सामने उसकी बेटी का भरा हुआ शरीर आ जाता है

रामलाल - 36

ओन- सर ये ऊपर का है या निचे का

अब रामलाल अपना शीतनी दिमाग चलता है और मल्टी के बताये हुए नंबर से निचे का नंबर बताता है

ऊपर भी 34 और निचे भी 34

अच्छा तो सर कौन सा कलर पसंद है आपको

रामलाल - क्या

ओन- अरे सर मतलब आपको अपनी बीवी पर कौन से कलर की ब्रा पेंटी अच्छी लगती है आखिर बाद में आपनो hi तो उतरनी है ना

दुकानदार की बात सुन कर रामलाल का मन खुसी से झुक उठता है

रामलाल- अरे भाई तुम अपना काम करो ना कौन किसकी उतरेगा उससे तुम्हे क्या

रामलाल की बात सुन्न कर ओनर सदा सा मुँह बनाते हुए कई सरे कोर्स की ब्रा पेंटी रामलाल को दिखता है

काफी देर तक देखने के बाद भी रामलाल को ये समझ नहीं आ रहा था की उसकी बेटी पर क्या जचेगा

दूकान दर भी दुखी हो जाता है

ओन- सर आप पसंद कीजिये कोई कलर

रामलाल 3-4 कलर की ब्रा पेंटी पसंद करता

ओन- तो सर ये सरे पैक करदु क्या

रामलाल - अरे नहीं नहीं भाई रुको मुझे इतनी साडी नहीं लेनी

ओन- तो सर कोई भी लेलो साडी की साडी अच्छी है

काफी सोच विचार करने के बाद रामलाल एक जाली दार ब्रा पेंटी चुनता है वो भी रेड कलर की

रामलाल अपने मन में hi अपनी बेटी को ये ब्रा पेंटी पहना कर चेक कर चूका था और ये वाकई उसपर जैम रही थी

ओन- कमाल की चॉइस है सर आपकी

आज तो पक्का भाभी जी आपको रात को इसका इनाम देंगी

रामलाल- इनाम के चक्कर में hi तो इतने पापड़ बेलने पद रहे है

ओन- क्या सर आपकी बीवी है जब मन करे तब झुका दो उन्हें

रामलाल ओनर को टेढ़ा टेढ़ा देखता है

ओन- सॉरी सर मैं आपका सामान पैक कर देता हु अभी

रामलाल ब्रा पेंटी लेकर दूकान से निकल जाता है

रामलाल मन hi मन बहुत खुस था

भले hi वो दूकान दर को गुस्सा दिखा रहा था पर उसकी बाटे उसे पागल सा कर रही थी

इधर रामलाल घर की एयर बढ़ hi रहा था की उसे रस्ते में दारू का ठेका दीखता है

मल्टी का नशा तो उसपर पहले से hi साधा हुआ था ऊपर से वो एक क्वाटर और लेलेता है

और पौवा साधा कर सीधा घर की और निकल जाता है ....
 
अपडेट-165

पौवा साधा कर रामलाल तेजी से अपने घर की और चल पड़ा था

उसके मैं में इस वक़्त बास एक hi बात घुम्म रही थी की उसकी खरीदी हुई कच्ची और ब्रा उसकी गदरायी बेटी के जिस्म पर कैसी लगेगी

और बस यही सोच सोच कर उसका सोया हुआ लुंड रह रह कर झटके ले रहा था

दिन ढल चूका था और शाम की सुहानी हवा मनो रामलाल को और भी नशे में डूबती चली जा रही थी

जल्द hi रामलाल घर पहुंच जाता है

जैसे hi रामलाल घर के अंदर घुसता है उसे सामने हरी बैठा हुआ दीखता है जो की नशे में धुत्त होकर खाना खा रहा था

रामलाल का इस वक़्त अपने बेटे से मनो जलन हो रही थी वो उसे टेढ़ा टेढ़ा देखता हुआ घर के अंदर दाखिल होता है

मल्टी अपने बाप को देखते hi रसोई से उठकर भगति हुई आती है

अपने बेटी के उछलती हुई जवानी को देख कर रामलाल का गुस्सा मनो एक पल में गायब हो जाता है

इधर मल्टी भगति हुई आती है और सीधा अपने बापू के गले लग जाती है

मल्टी- बापुउउउउ खा चले गए थे अपनी बेटी को बिना बताये

जैसे hi मल्टी का गरम जिस्म रामलाल से चिपटा है उसे एक जोरदार झटका लगता है और रामलाल अपने दोनों हाथो को मल्टी की पीठ पर ले जाता हुआ उसे अपने से पूरी तरह चिपका लेता है

रामलाल - बेटी कुछ काम से गया था

हरी- अरे ये बुद्धा कहि खोने वाला थोड़े hi है दीदी जो तू टेंशन ले रही है

मल्टी- चुप्प कर कमीने तुझे तो अपने बाप की कोई चिंता है नहीं दिन भर ये पेशाब पी कर गटर में गिरा रहता है

इस बिच रामलाल अपने हाथो से लगातार मल्टी की नंगी पीठ को सहलाये जा रहा था और इसका असर अब सीधा उसके लुंड पर होना शुरू हो चूका था जिसे उसकी बेटी भी महसूस कर रही थी

शायद ये सब शराब का hi खेल था जो रामलाल के अंदर से डर को अब पूरी तरह से निकल चूका था

मल्टी- बापुउउउउ आप बैठो मैं पेशाब करके आती हु

पेशाब का नाम सुनते hi रामलाल को सुबह वाला दृस्य याद आ जाता है और वो अपने होठो को मल्टी के कानो के पास ले जाता है

रामलाल- बेटी दरवाजा तो टूट गया है न और तेरा भाई भी यही है तू बोले तो मैं खड़ा हो जाऊ

दरवाजे के सामने

मल्टी- जैसी तुम्हारी मर्जी बापू अब तुम hi तो हो जिसे मेरी रक्षा करनी है मेरा शराबी भाई को अपनी दीदी की जवानी की रक्षा कर नहीं सकता तो अब तुम्हे hi करनी होगी

रामलाल का हाथ अब मल्टी की रीद की हड्डी के बीचो बिच सेहला रहा था जिससे मल्टी को एक अलग hi लेवल का नशा साधने लगा था

मल्टी रामलाल से अलग होती हुई बाथरूम की तरफ चली जाती है रामलाल एक नजर हरी पर डालता है जो अब भी खाना ठूसने में लगा हुआ था

वो चुपचाप बाथरूम की और बढ़ता है

बाथरूम तक पहुंच कर रामलाल बाथरूम की और मुँह करके खड़ा हो जाता है

मल्टी इस समय रामलाल को देख रही थी और रामलाल आज अपनी बेटी की नशीली आँखों ने देख देख कर और भी पागल सा हुआ जा रहा था

मल्टी- ऐसे क्या देख रहे हो बापू

रामलाल- देख रहा हु मेरी छोटी सी गुड़िया अब पूरी औरत बन्न गयी है

मल्टी- शहीइ बापू मैं अब भी आपकी वही बेटी हु जो दिन भर आपकी गॉड में कढ़ी रहती थी

अब उधर घूम जाओ

मुझे पेशाब लगी है जोरो की

रामलाल अब भी क्यों का त्यों hi खड़ा था वो पलटने का नाम hi नहीं ले रहा था

इधर मल्टी भी एकटक अपने बापू को hi देख रही थी

मल्टी- बापू घूम जाओ न नहीं तो ऐसे hi मेरा मुट्ठ निकल जायेगा

रामलाल- तो मुट्ठ ले न बेटी वैसे भी तू बचपन में मेरी गॉड में hi मुट्ठ दिया करती थी

मल्टी- धत्त बापू तब तो मैं बच्ची थी

रामलाल- ाचा तो अब क्या है

मल्टी- आपने hi तो खा न की अब आपकी बेटी एक औरत बन गयी है

अब थोड़े hi मैं आपकी गॉड में मुट्ठ सकती हु

अभी दोनों कुछ और बोलते उससे पहले hi हरी खाना खा कर उठ जाता है

रामलाल को न कहते हुए भी गेट से हटना पड़ता है

इधर मल्टी पेशाब करके बहार आती है

रामलाल अंदर वाले कमरे में बैठा हुआ अपनी बेटी के बारे में hi सोच रहा था

हरी बहार वाले कमरे में खाट पर बैठा बीड़ी पी रहा था

मल्टी दरवाजे से hi बोलती है

मल्टी- बापुउउउउ खाना निकल दू

रामलाल- अभी नहीं बेटी थोड़ी देर बाद

मल्टी जाने hi वाली थी की रामलाल को कुछ याद आता है

रामलाल - बेटी

मल्टी- हां बापू

रामलाल- इधर तो आ जरा कितना दूर रहेगी अपने इस बुड्ढे बाप से

मल्टी तुरंत hi रामलाल की और चल देती है

मल्टी- मैं खा दूर रहती हु वो तो आप hi बिना कुछ बताये घर से चले जाते हो जानते हो आप दिन भर कितना याद किया मैंने आपको

यह बात मल्टी ने इस तरह झुक्क कर बोली की मल्टी का पल्लू उसकी छाती से अलग हो गया और रामलाल को सीधा सीधा अपनी बेटी की मोती मोती चूचियों के बिच की घाटी के दर्शन हो गए

रामलाल एक तक्क अपनी बेटी की फूली हुई छाती को देख रहा था

आज मनो वो अपनी बेटी की इज़्ज़त लूट कर hi मानेगा

इधर मल्टी को अपने बापू में बदलाव साफ़ नजर आ रहा था

और वो अपने बापू की हरकतों से अंदर तक्क पानी पानी हुई जा रही थी

मल्टी बड़े hi प्यार से वैसे hi खूकि हुई अपने दोनों हाथो से रामलाल का चेहरा पकड़ कर अपनी ऊपर की और उठती है

Malti-bapuuuuu बाद में देख लेना अभी बताओ किश लिए बुलाया था आपने मुझे

रामलाल की आँखे इस समय वासना के नशे में पूरी तरह लाल हो चुकी थी

रामलाल - अपने बूढ़े बाप को गॉड में नहीं बैठेगी आज बेटी

मल्टी एक नजर पीछे घूमती है उसे हरी कहि नजर नहीं आता

मल्टी- आज अच्चानक से कैसे अपनी बेटी को गॉड में बैठने का ख्याल आ गया

रामलाल- बस यु समझ ले की आज तेरा बाप तुझे खुब्ब प्यार देना कहता है

मल्टी- अरे तो इसमें पूछने की क्या बात है बापू मुझ पर पूरा अधिकार है आपका

मल्टी खुद hi पलटती हुई सीधा अपने बाप के खड़े लुंड पर बैठ जाती है

मल्टी- अह्हह्ह्ह्ह shiiiiiiiiii

रामलाल मल्टी के कानो के पास मुँह ले जाता है और अपनी बेटी की गर्दन पर गरम सांसे मरता हुआ बोलता है

रामलाल- क्या हुआ बेटी

मल्टी - कुछ नहीं बापू बास पुराणी यादें तजा हो गयी अज्ज

रामलाल भी आज साडी हाडे पार कर जाना कहता था

उसका मुह्ह अब भी मल्टी की गर्दन के पास hi था और इस वक़्त वो इतनी लबी लम्बी सांसे ले रहा था की मल्टी को भी साफ़ सुनाई दे रही थी

इधर रामलाल अपनी बेटी के जिस्म से उठती मादक गंध को सूंघ कर मनो पागल सा हुआ जा रहा था

उसका दबा हुआ लुंड रह रह कर मल्टी की गांड को उछाल रहा था

रामलाल अपने हाथो को मल्टी के उठे हुए पेट पर रख देता है

मल्टी को एक और झटका लगता है

रामलाल- मेरी बेटी ने पेशाब कर लिया की नहीं

मल्टी- अभी पूरा नहीं किया बापू

रामलाल - तो कब करेगी पूरा पेशाब मेरी बेटी

मल्टी- जब्ब आप दोनों सो जाओगे तब्ब

रामलाल - अभी करले न बेटी

मल्टी- अभी खा करलु बापू

रामलाल- अपने बापू की गॉड में hi कर दे अह्ह्ह्ह मेरी बेटी

इतना बोलते हुए रामलाल अपने दोनों हाथो को मल्टी के पेट पर दबाता हुआ अपने होठो को सीधा मल्टी की गर्दन पर रखठ देता है

मल्टी- सीईई बापू तुम गंदे हो जाओगे

रामलाल- जब तू छोटी थी तब तो नहीं होता था गन्दा

मल्टी- पर अब तो माओं औरत बन गयी हु न बापू अब मेरे पेशाब में गंध भी ज्यादा आती है

रामलाल एक जोरदार साँस खींचता हुआ मल्टी की गर्दन को चुम्म लेता है

रामलाल- तो क्या अब तू अपने बाप के ऊपर नहीं मुटेगी

मल्टी- सीई बापू मुझे शर्म आती है

रामलाल- अच्छा मेरी बेटी को शर्म आ रही है

इतना बोलते हुए रामलाल मल्टी के गदराये जिस्म को थमता हुआ अपने लुंड पर दबाते हुए बोलता है

रामलाल- अपने बाप से कैसा शर्माना तुझे पता है जब तू छोटी थी तो एक बार तूने मेरे मुह्ह में hi पेशाब कर दिया था तब तो नहीं शर्मायी थी तू

रामलाल की बात सुनकर मल्टी अंदर तक्क कंपपप जाती है

कितना मादक होगा यह नजारा यही सोच कर मल्टी की छूट चिपचिपाने लगती है

मल्टी- सीई बापू तब मैं छोटी थी ना

रामलाल- अच्छा तू तब छोटी थी पर तब भी मेरी बेटी थी और आज भी मेरी बेटी है

मल्टी- तो आप क्या कहते है की मैं आज भी आपके मुह्ह में पेशाब करू

यहबात बोलते हुए मल्टी अंदर तक पानी पानी हो जाती है

रामलाल- हां बेटी मुत्तत दे अपने बाप के मुहहह में अब एक hi तुहि तो बची है जिसे देख कर मुझे थोड़ी खुसी मिलती है

अभी दोनों बाप बेटी बाप कर hi रहे थे की हरी अंदर आ जाता है

रामलाल का हाथ अब भी मल्टी के पेट को hi सेहला रहा था

हरी एक तक दोनों बाप बेटी को देखे जा रहा था

हरी- क्या बात है बापू आज बड़ा प्यार आ रहा है दीदी पर

रामलाल- तुझे तो कोई चिंता है नहीं इतने दिन बाद तेरी दीदी आयी है और दिन भर नशे में धुत्त घर से बहार रहता है

हरी- अच्छा इसीलिए मेरे हिस्से का प्यार भी आप hi दे रहे हो दीदी को कोई बात नहीं दलों दलों

अच्छा दीदी मैं कह रहा था की आप इतने दिनों बाद आयी हो तो आज हम सब साथ में सोयेंगे देखो आज मैंने दारू भी कम् पी है

इतना बोलकर हरी जाने लगता है

हरी की बायत सुन कर दोनों का चेहरा hi उतर जाता है

मल्टी- बापू आज हरी भी हमारे साथ hi सोयेगा

रामलाल- तो सोने दे न बेटी तू और मैं तो एक साथ hi सोयेंगे न

इतना बोलते हुए रामलाल पास में पड़ी थैली उठता हुआ मल्टी को देता है

मल्टी- इसमें क्या है बापू

रामलाल बिना कुछ बोलते अपने हाथो को ऊपर ले जाता हुआ सीधा अपनी बेटी की उठी हुई चूचियों पर रख देता है

रामलाल- मरी बेटी की मोती मोती चूचियों को सँभालने के लिए ब्रा

राम्लल्कि इस हरकत से मल्टी तड़प उठती है एयर वो तुरंत hi उठ कर भागने को होती है

उठना तो मल्टी भी नहीं कहती थी पर उसे अपने बापू की हरकतों से साफ़ मालूम चल गया था की अगर वो नहीं उठी तो पक्का हरी को शक हो जायेगा

रामलाल तुरंत hi मल्टी का हाथ पकड़ लेता है

मल्टी - छोड़ो बा बापू हरी घर पर hi है

रामलाल- तुझे उससे डर लग रहा है या मुझसे

मल्टी एक नजर अपने बाप की धोती में बने तम्बू पर डालती है

आपने hi बेटी द्वारा अपने लुंड को निहारता हहआ देख रामलाल मस्त हो जाता है

मल्टी- आपसे कैसा डर बापू पर एक बात बताओ जब मैं छोटी थी और आपकी गॉड में बैठा करती थी तो तब भी आपका यह ऐसे hi खड़ा हो जाया करता था क्या

इस बार मल्टी सीधा रामलाल के लुंड की बात करती है जिसे सुनकर रामलाल अंदर तक्क झुम्म उठता है

रामलाल अपने एक हाथ से अपने लुंड को धोती के ऊपर से hi पकड़ कर सेहला देता है

मल्टी अपने बापू की यह हरकत देखती hi रह जाती है

रामलाल- बेटी तब खड़ा नहीं होता था

मल्टी - तो अब क्यों हो रहा हसि अब भी तो मैं आपकी बेटी hi हु न

रामलाल- पर अब मेरी बेटी एक गदराई हुई औरत बन्न चुकी है इसलिए

मल्टी- इसे शांत करलो और खाना खा लो बापू हरी देखेगा तो क्या सोचेगा

रामलाल- देखने दे कमीने को अब मैं अपनी गदराई बेटी से प्यार कर रहा हु और मेरा उएह खड़ा हो गया तो इसमें मेरा क्या दोष है

मल्टी- शी बापू धीरे बोलो

मल्टी बहार जाने के लिए पलट जाती है

रामलाल- बेटी

मल्टी दुबारा से पलट कर अपने बाप की और डेक्टि है

मल्टी - क्या हुआ बापू

रामलाल का हाथ अब भी उसके लुंड को धोती के ऊपर से सेहला रहा था

और अपनी बेटी के देखने के बावजूद भी रामलाल रुकने का नाम नहीं ले रहा था

रामलाल- कब पिलाएगी बेटी

मल्टी भी बड़े hi मादक अंदाज में जवाब देती है

मल्टी- क्या पीना है मेरे बापू को

रामलाल - तेरा पेशाब बेटी तेरा गरमा गरम पेशाब

आपने बापू का हवस भरा उत्तर सुन कर मल्टी अंदर तक सिहर जाती है

मल्टी- सीई गांडू चुप रो कोई सुन्न लेगा

बेटी अब कोई सुने या देखे पर अब तो मैं पी कर hi रहूंगा

मल्टी- क्या पी कर रहोगे

रामलाल- अपनी बेटी की छूट से निकलता गरमा गरम पेशाब

यह सब्द मनो सीधा मल्टी की छूट पर जाकर लगते है और उसका बदन एक पल में hi कई झटके खता है

मल्टी- धत्त मेरे गांडू बेशरम बापू कोई अपनी सगी बेटी से ऐसी गन्दी बात करता है

रामलाल- किसी का तो पता नहीं पर मैं जरूर करता हु

हरी- दीदी बिस्तर लगाओ न

न कहते हुए भी मल्टी को जाना पड़ता है

इधर रामलाल अपने लुंड को समझाता हुआ सुलाने की कोशिश करता है और उठ कर बहार आ जाता है

सामने hi हरी बैठा हुआ था

और मल्टी बर्तन धो रही थी

रामलाल मल्टी के पास जाता है और उसके कान में बोलता है

रामलाल- मैं अभी आता हु बेटी बहार से

मल्टी- पर बापू इस वक़्त बहार खा जा रहे हो

रामलाल - अपनी बेटी के लिए राबड़ी लेने

मल्टी- पर मुझे राबड़ी की क्या जरूरत अभी बापू

रामलाल- क्यों नहीं है जरुरत वैसे भी अब तू जल्द hi गर्भवती होने वाली है

इतना बोलता हुआ रामलाल घर. से बहार निकल जाता है

रामलाल के यह सब्द मल्टी को सोचने पर मजबूर कर देते है की आखिर उसके बाप का इशारा किस तरफ था.....

दोस्तों कहानी अच्छी लगे तो एक लिखे भी कर दिया करो

धन्यवाद्.
 
अपडेट-166

घर से बहार जाने के बाद रामलाल थोड़ी राबड़ी लेता है और उसके बाद एक और पौवा चढ़ा कर अपने घर की और वापस चल देता है

जब रामलाल घर पहुंचा तब भी हरी जगा hi हुआ था और मल्टी से इधर उधर की बाते कर रहा था

रामलाल( ये साला हरामी मेरी आज की पूरी रात खराब करके रहेगा )

रामलाल अपने बेटे को टेढ़ा टेढ़ा देखता हुआ घर में दाखिल होता है

मल्टी- अरे बापू आ गए आप

रामलाल- ले बेटी ये तेरे लिए है

हरी- मेरे लिए भी कुछ ले आते बापू

रामलाल- है है लाया हु न तेरे लिए हरामी जब तुझे दारू पीने से फुर्सत मिल जाये तो आकर ले लियो

हरी- दीदी देखो न बापू हमेशा मुझे ऐसे hi गरियाते रहते है न जाने कब ये मुझ से अच्छे से बात करेंगे

इतना बोलता हुआ हरी मायूस हो जाता है

मल्टी हरी के पास आती हुई उसे अपने सीने से लगा लेती है

मल्टी- अरे मेरे भाई वो बापू है हमारे उनकी बातो का भी कोई बुरा मंटा है क्या

इस वक़्त हरी का सर तो मल्टी की विशाल छाती में घुसा हुआ था पर दोनों बाप बेटी एक दूसरे को hi देख रहे थे

इधर रामलाल पर दारू के नशे के साथ साथ उसकी बेटी की रसभरी जवानी का नशा भी चढ़ता जा रहा था

मल्टी- बापू खाना निकल दू

रामलाल- भूख तो नहीं लगी मेरी बच्ची पर प्यास जरूर लगी है

मल्टी- रुको मैं पानी लेकर आती हु

रामलाल- अरे ये प्यास पानी की नहीं है बेटी

मल्टी- तो क्या चाहिए आपको

इस बार रामलाल दुबारा से धोती के ऊपर से hi अपना लौड़ा मसलता हुआ मल्टी को दिखता है

अपने बापू की ये हरकत मल्टी को अंदर तक झकझोर देती है

उसकी आँखों के सामने उसका बाप अपना लुंड मसल कर उसे दिखा रहा था

मल्टी( लगता है आज सुबह मैंने बापू को कुछ ज्यादा hi दिखा दिया जो आज ये मेरे पीछे पागल हो गए है )

रामलाल- तुझे पता तो है बेटी फिर भी पूछ रही है

मल्टी अपने चेहरे पर एक बनावटी गुस्सा लती हुई रामलाल को देखती है

और हरी की और इशारा करती है

मनो वो कह रही हो की अभी हरी घर पर है बाद में पिलाऊंगी

रामलाल- अब नहीं पिलाएगी तो चल खाना hi निकल दे सोना भी है

मल्टी रामलाल को खाना दे देती है और खुद भी एक थाली में खाना निकल कर उसके सामने बैठ जाती है

रामलाल- अरे अभी तक तूने भी खाना नहीं खाया

मल्टी- नेरे बापू ने नहीं खाया तो मैं कैसे खा सकती हु

रामलाल- अच्छा मेरी बच्ची को इतनी चिंता है मेरी ृक्क आज दोनों साथ में खाएंगे

इतना बोलता हुआ रामलाल खत से उतारकर मल्टी के सामने बैठ जाता है और अपनी थाली का खाना भी मल्टी की थाली में पलट कर एक निवाला उठता हुआ अपनी बेटी की और बढ़ता है

मल्टी बड़े hi मादक अंदाज में अपना मुँह खोल कर अपने बापू की उंगलियों को आगे आने का न्योता देती है

रामलाल भी देर न करता हुआ अपने हाथ को आगे बढ़ता हुआ अपनी बेटी को निवाला खिलता है और जानबूझ कर अपनी उंगलियों को थोड़ा आगे की और सरकता हुआ अपनी बेटी के नरम होठो को अपनी उंगलियों से छू लेता है

इस पल रामलाल के तन बदन में एक करंट सा दौड़ जाता है

मल्टी को भी अपने बापू की हरकते अब और भी उकसा रही थी

मल्टी भी एक कदम आगे बढ़ती हुई एक निवाला तोड़ती है और अपने बापू को खिलने के लिए अपने हाथ को आगे बढ़ती है

रामलाल अपना मुँह खोलता हुआ अपनी बेटी की और झुकता चला जाता है

निवाला तो अंदर जा hi चूका था पर शायद रामलाल कुछ और hi कहता था वो अपनी बेटी की उंगलियों की मिठास को महसूस करना कहता था और इसीलिए वो आगे बढ़ता हुआ मल्टी की आधे से ज्यादा उंगलियों को अपने मुँह में भर लेता है

हरी इस वक़्त भी वही बैठा था

आपने बापू की इस हरकत से मल्टी का तन बदन कांप उठता है

इधर रामलाल अपने मुँह में अपनी बेटी की उंगलियों पर लगातार जीभ फिर रहा था

मनो वो उन्हें चाट कर उनकी मिठास को चाट रहा हो

अच्चानक से मल्टी को याद अत है की उसका छोटा भाई भी उनके सामने बैठा है वो तुरंत hi अपना हाथ वापस खींच लेती है

पर रामलाल को तो मनो अपने बेटे से कोई डर hi नहीं था

मल्टी के हाथ बाजार खींचने के वक़्त भी रामलाल अपने होठो को कुछ इस कदर बंद करता है की मल्टी की उंगलिया बहुत मुश्किल से उसके मुँह से बहार आ सखे

रामलाल - अह्ह्ह मजा आ गया बेटी क्या मिठास है तेरी उंगलियों में मतलब खाने जो तूने अपनी इन उँगलियों से बनाया है

इस वक़्त दोनों बाप बेटी एक दूसरे को खा जाने वाली नजरो से देख रहे थे .....
 
अपडेट-167

रवि का घर ....

रवि अपने खेतो में पहुंच कर काम करना शुरू कर चूका था

पर उसके दिमाग में एक hi बात घूम रही थी की आज कम्मो दीदी खाना लेकर आएगी या नहीं और अगर आयी तो आज वो पक्का अपनी तीसरी दीदी की छूट का स्वाद भी साख कर रहेगा

यही सब सोच कर रवि के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है

इधर घर में कम्मो की धड़कने जोरो से चल रही थी

उसे पता था की अगर वो रवि का खाना लेकर गयी तो वो उसे छोड़ेगा नहीं

पर दूसरी तरफ उसे वो सब जानना भी था की अकेले में उसका छोटा भाई किस हद्द तक जा सकता है

इधर रेखा रवि का खाना बांध देती है

और कम्मो मो खाना ले जाने का बोल कर कमरे में चली जाती है

िडजर कम्मो बैठी बैठी न जाने क्या सोच रही थी

तभी उसे मेघा दीदी टोकती है

मेघा- अरे कम्मो क्या हुआ खाना क्यों नहीं ले जा रही तू

कम्मो- नहीं नहीं कुछ नहीं दीदी बस ले जा रही हु

मेघा- तेरी तबियत खराब है तो बोल मैं रेखा को बोल देती हु

रेखा का नाम सुनते hi कम्मो फटाक से खड़ी होती हुई खाने की पोटली उठा लेती है

आखिर वो भी ये मौका नहीं छोड़ना कहती थी

कम्मो खाना लेकर खेतो की और चल देती है

इस वक़्त कम्मो के अंदर मनो एक सैलाब सा चल रहा था न जाने आगे क्या होने वाला है

उसे पता था की अब उसका छोटा भाई पहले की तरह छोटा नहीं रहा और अपनी दोनों बड़ी दीदियो को छोड़ चूका है

कम्मो इसी उधेड़ बन में खेतो तक पहुंच चुकी थी पर उसे रवि कहि दिखाई hi नहीं पड़ रहा था तभी उसे झोपडी के अंदर से कुछ आवाजे आती है और कम्मो अपने कदम झोपडी की और बढ़ाने लगती है

जैसे hi कामो झोपडी के अंदर झक्ति है मनो उसकी सांसे थम सी जाती है

अंदर रवि नीलम के ऊपर चढ़ा हुआ उसे खूब हुमच हुमच कर छोड़ रहा रहा

हर एक झटके के साथ नीलम का पूरा शरीर आगे की और झटका खता और रवि बड़ी hi बेरहमी के साथ नीलम की कमर को पकड़ता हुआ अपने लुंड की और खींचता और लगातार झटके मरे जा रहा था

नीलम- अह्ह्ह्ह रवि खा से सीखा रे कमीने तू तुझसे छोड़ने के बाद तो एक अलग hi मजा आ जाता है

रवि- साली तेरी छूट में जितने कीड़े है सरे के सरे आज मार दूंगा तुझे छोड़ छोड़ के

नीलम- है है कमीने मेरी छूट के कीड़े मार दे और अपने लुंड के कीड़े मेरी छूट में दाल दे हहहहहह

कम्मो खड़ी खड़ी भूत की तरह अंदर का नजारा देख रही थी उसकी छूट मनो पानी पानी हो गयी थी

इधर रवि एक झटके में अपना लुंड नीलम की छूट से निकलता हुआ सीधा उसकी गांड में घुसा देता है

इस हमले से नीलम बेचारी चिक्ति हुई आगे की और गिर पड़ती है

पर अगले hi पल रवि उसके बालो को पकड़ता हुआ उसकी गर्दन को अपनी और खीचता है और दूसरे हाथ से नीलम की गर्दन को दबाता हुआ उसके कान को चाटता हुआ बोलता है

रवि- क्या हुआ मेरी रंडी दर्द हो रहा है क्या तेरी गांड में या मेरा लुंड नहीं झेल पा रही तू कुटिया

नीलम- तेरे लुंड की दीवानी हो गयी हु इसी लिए तो यह अकेले में तुझसे छुड़वाने आयी हु कमीने सच में रेखा ने तुझे एक जानवर बना दिया है

रवि- और अब ये जानवर सबका शिकार करेगा बरी बरी से

नीलम - ाचा तो और किसकी गांड फाड़ने वाला है तू

रवि- फ़िलहाल तो तेरी माँ छोडूंगा साली तेरी छूट की गर्मी बहुत बढ़ गयी है जिसे तेरा भाई और बाप नहीं बुझा पते तो अपनी माँ छुड़वाने मेरे पास आयी है

नीलम- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह तो छोड़ दे न भोस्डिके पहले बेटी को hi छोड़ ले माँ तो तेरे नसीब में है नहीं वो ऊपर चली गयी

रवि- माँ तो ऊपर चली गयी पर तेरे जैसी रंडी को छोड़ गयी मेरे लिए

तुझे मैं अपनी रंडी बना कर रखूँगा ये वडा है मेरा तुझसे और तुझे बराबर इस लुंड का स्वाद मिलता रहेगा

नीलम- अच्छा भड़वे अपनी दीदियो से फुर्सत मिलेगी तब तो मुझे छोड़ेगा न तू बराबर

रवि- तू भी तो दीदी hi है न मेरी कुटिया नीलम दीदी

सच में अपनी दीदियो को छोड़ने का मजा hi अलग है न जाने राजू तेरे पुरे मजे ले पता है या नहीं

नीलम- अरे मजे तो छोड़ वो लोग बस लुंड और छूट के बारे में hi जानते है पर तू तो औरत के हर छेद को छोड़ता है

रवि- अच्छा इसीलिए तू आयी है यह ताकि तेरे सरे छेड़ो को एक साथ लुंड मिल सखे

नीलम- तूने आदत hi ऐसी धरा दी है की अब मैं तुझसे दुर्र नहीं रह पति

मेरा बास चले तो अपना घर बार छोड़ कर दिन रात तेरे लुंड की सेवा में पड़ी रहु तेरे सामने

रवि- मेरी कुटिया बन्न कर हां

नीलम- अब तेरी मर्ज़ी है तू मुझे कुटिया बना या रंडी बना बस मुझे छोड़ता रह अह्ह्ह कमीने गांड मार मार के पूरी पहाड़ देगा क्या

अभी नीलम कुछ बोलती उससे पहले hi रवि एक जोरदार थप्पड़ नीलम की गांड पर मरता हुआ अपना लुंड बहार खींच लेता है

नीलम इस तमाचे से तिलमिला जाती है

रवि अपने दोनों हाथो से जब नीलम की गांड को फैलता हुआ उसकी गांड के छेद को खोल कर देखता है तो कम्मो की आँखे फ़टी की फ़टी रह जाती है

कम्मो की आँखे ये नजारा देख कर पूरी तरह लाल हो चुकी थी उसे यक्कीं नहीं हो रहा था की उसके छोटे भाई ने नीलम जैसी औरत की गांड के छेद को छोड़ छोड़ कर इतना फैला दिया है की किसी दुबले पतले आदमी का हाथ तो उसमे बिना किसी मुश्किल के घुस जायेगा

नीलम- अह्ह्ह्ह कमीने क्या देख रहा है

रवि- देख रहा हु साली तेरी गांड तो दिन भर दिन और बड़ी होती जा रही है इसमें क्या डलवाती है जो तेरा छेद फैलता hi जा रहा है

नीलम- सेल हरामी तूने छोड़ छोड़ कर शादी के पहले hi मेरे छेड़ो का भोसड़ा बना दिया है और अब पूछता है की क्या डलवाती है इसमें

रवि- अरे नीलम दीदी ये तो है hi चमड़े की थैली जितना पेलो उतना फैली

नीलम- है है तो फैला दे कमीने तुझे तो बस छेड़ो से hi मतलब है न जाने सदी के बाद जब मेरा मर्द मुझे छोड़ेगा तो क्या होगा

रवि - होगा क्या उस हरामी को म्हणत नहीं करनी पड़ेगी उसकी लुल्ली आराम से घुस जाएगी तेरे भोसड़े में

हाहाहाःहाहा

रवि नीलम की गांड को छोड़ कर एक हाथ से अपना लुंड मसलने लगता है और दूसरे हाथ से कम्मो की गांड पर एक और जोरदार तमाचा जड़ देता है

कम्मो- अह्ह्ह कितना बेरहम है रे तू

रवि- अभी तूने देखि hi खा है मेरी बेरहमी मेरी रैंड

चल अब अपनी गांड के छेद को खोल कर मुझे दिखा

नीलम रवि की आज्ञा का पकं करती हुई अपने दोनों हाथो को पीछे ले जाती हुई अपनी गांड को फैला कर अपनी गांड का फटा हुआ छेद दुबारा से रवि के सामने खोल देती है

रवि- अब तो तुझे हगवास करने में भी कोई परेशानी नहीं होती होगी क्यों नीलम दीदी

नीलम- सब तेरी hi कृपा है कमीने

अभी तूने मेरी कृपा देखि hi खा है मेरी कुटिया दीदी

रवि अपने लुंड को मसलता हुआ नीलम की गांड के छेद तक ले जाता है और बराबर निशाना लगता हुआ कम्मो की गांड के खुले हुए छेद में पेशाब की धार मरने लगता है

न्यारा इतना मादक था की बहार खड़ी कम्मो यह नजारा देख कर एक दम से अपनी रास छोड़ती छूट को थम लेती है

इधर रवि ने ये हरकत आज पहली बार की थी जैसे hi नीलम की गांड के अंदर रवि के गरम पेशाब की धार जाती है उसका तन बदन मनो झूम सा उठता है

रवि लगातार नीलम की गांड में म्यूट जा रहा हो मनो वो कोई गांड का छेद न होकर कोई मूतने का गड्ढा हो

लुंड से निकलती धार इतनी जोरदार थी की आवाज को कम्मो भी सुन्न सकती थी और जब नीलम की गांड रवि के गरम पेशाब से भर गयी तो उसमे से झाग के साथ उसला पेहसाब बहार आने लगता रवि तुरंत hi पेशाब को रोकता हुआ अपना लुंड दुबारा से नीलम की गांड में पूरा जड़ तक पेल देता है

लुंड के अंदर घुसते hi एक झटके के साथ पूरा पेशाब बाजार आ जाता है रवि दुबारा से अपना लुंड बाजार निकलता है और इस बार नीलम को अपनी और घूमता हुआ उसके मुँह के सामने खड़ा हो जाता है

रवि - मुँह खोल मेरी रैंड

नीलम- मैं क्या तुझे कोई सनदास घर दिखती हु जो तू मेरी गांड में मुट्ठ रहा है कमीने

रवि बड़े प्यार से नीलम के मुँह के पास जाता है और ेल हाथ से नीलम के चेरे को पकड़ता हुआ दूसरे हाथ से उसके रसीले होठो को रगड़ देता है

रवि- तू मेरे लिए एक रंडी है जिसके साथ मेरा जो मन करेगा वो करूंगा तो अब बात ऐसी है की मुँह मत चला और चुप चाप अपना मुँह खोल रैंड

इतना बोलता हुआ रवि एक थप्पड़ नीलम के गाल पर जड़ देता है

तमाचा इतना जोरदार था की नीलम का पूरा चेहरा लाल हो जाता है

रवि- नहीं तो यही तेरी माँ छोड़ दूंगा साली

नीलम चुप चाप अपना मुँह खोल देती है

अगले hi पल रवि एक तेज धार सीधा नीलम के मुँह की और छोड़ता बुआ उसके मुह्ह में मूतने लगता है

नील चुप चाप अपना मुँह खोल जमीन पर बैठी रहती है और रवि अपनी पूरी टंकी को नीलम के मुह्ह में hi खली करता हुआ अंतत में नीलम के मुह्ह को अपने हाथो से धक् देता है

रवि- थुक्क मैट साली पी जा इसे ये अमृतत है तेरे लिए

नीलम बेचारी चुपचाप रवि का पेशाब पी जाती है

रवि उसे छोड़ता हुआ अपनी खत पर आकर नंगा hi लेत जाता है

इधर नीलम वही पड़ी पड़ी हाफ रही थी

रवि- एक काम कर अब निकल यह से कम्मो दीदी किसी भी वक़्त खाना लेकर ातीही होगी

नीलम- पर अभी तो तेरा माल भी नहीं निकला रवि

रवि - चुपचाप चली जा मढाडोद साली जब माल निकलना होगा तो तेरे घर आकर छोडूंगा तुझे अभी जितना बोलै है उतना कर नहीं तो यही पटक ार तेरी गांड में वो कहता गाड़ दूंगा

नीलम मन hi मन रवि को गली देती हुई अपनी सदी पहनती हुई बहार निकलने लगती है

इधर रवि अपनी धोती को वैसे hi अपने लुंड पर दाल देता है

कम्मो जब नीलम को निकलता हुआ देखती है तो फट से भाग कर झोपडी के पीछे घुस जाती है

नीलम जोड़ी से बहार निकलती हुई अपने घर की और जाने लगती है

कम्मो ध्यान से नीलम को hi देख रही थी एयर उसकी बदली हुई चल देख कर कम्मो को पता चल जाता है की उसके छोटे भाई ने तबियत से नीलम की गांड को बजाय है

इधर रवि वैसे hi पड़ा पड़ा लेता रहता है और कम्मो 10 मिंट तक और वैसे hi इन्तजार करती रहती है

उसका दिल जोरो से धड़क रहा था

आख़िरकार वो अपने कदम अंदर जाने के लिए बढ़ती है .....
 
अपडेट-168

कम्मो दरवाजे से hi झक कर झोपडी के अंदर का नजारा देखती है

रवि अपनी आँखे बंद किये लम्बी लम्बी सांसे खींच रहा था

कम्मो दबे पाँव अंदर दाखिल होती हुई खाने की पोटली को रख देती है और जैसे hi वो वापस बाजार आने के लिए अपने कदम बढ़ती है

तभी आच्चंक से उसका हाथ कोई पकड़ लेता है

कम्मो जानती थी की उसे रोकने वाला कौन है और बस यही सोच कर कम्मो की धड़कनो की रफ़्तार आस्मां चुने लगती है

रवि बड़े hi मादक अंदाज में अपनी दीदी के करीब आता हुआ उसके गर्दन से बहते पसीने की गंध को सूंघता हुआ उसके कानो में कहता है

रवि- क्या बात है दीदी बड़ी जल्दी में हो

इधर बेचारी कामो का तो मनो पूरा शरीर hi थार थार काँप रहा था

कम्मो अपनी लड़खड़ाती हुई जबान से बोलती है

कम्मो- मुझे भट्ट काम है रवि मेरा हाथ छोड़

रवि- इतनी दूर से खाना ले कर आयी हो मेरे लिए और अपने छोटे भाई को बिना खिलाये hi चली जाओगी दीदी

कम्मो- मुझे पता है तेरे इरादे क्या है

रवि- जब आप सब जानती हो तो इतना क्यों उकसा रही हो दीदी अह्ह्ह्हह्हह

इस बार रवि कम्मो के इतना करीब आ जाता है की उसका खड़ा लुंड सीधा कम्मो की जांघो में टकरा जाता है

जिसके अहसास से hi कम्मो सिहार उठती है

रवि अपनी दीदी के करीब अत हुआ इस बार उसके गले को चुम लेता है

कम्मो- रवि जाने दे मुझे दीदी ने बोलै था जल्दी आने को

रवि- अरे दीदियो को तो मैं रात भर देखता हु पर अभी आप अपने छोटे भाई को खाना तो खिला कर जाओ

कम्मो - मैं सब देख चुकी हु

रवि- क्या देखा दीदी आपने

कम्मो की दिल इतनी जोरो से धड़क रहा था की मनो अभी बहार hi आ जायेगा

कम्मो- हट बेशरम तुझे शर्म नहीं आती

अपनी दीदी से ऐसे सवाल पूछ रहा है

रवि- लो कर लो बात देखा आपने है तो आप hi बताओगी न मैं तो पूछ hi सकता हु

कम्मो- अभी जाने दे बाद में बताउंगी

रवि- दीदी अब तो बता कर hi जाना पड़ेगा

रवि अपनी पकड़ कम्मो की हथेली पर और भी कस देता है

कम्मो- अह्ह्ह्हह दर्द हो रहा है पागल छोड़ न मुझे

इस बार कम्मल दर्द से छटपटाती हुई घूम जाती है और जैसे hi उसकी नजर उसके छोटे भाई पर पड़ती है मनो उसकी सांसे hi थम्म जाती है

रवि पूरा का पूरा नंगा अपनी दीदी के सामने बिना किसी शर्म लाज के खड़ा था

रवि का झटके खता लुंड कम्मो की आँखों में अंगात उतरने के लिए काफी था और हुआ भी यही

एक पल के लिए मनो कम्मो की आँखे अपने छोटे भाई के लुंड पर hi गड्ड गयी

रवि- क्या हुआ दीदी खा खो गयी

रवि ने अब भी अपनी दीदी का हाथ नहीं छोड़ा था

कम्मो की तो मनो बोलती hi बंद हो गयी थी बेचारी को मनो साप hi सूंघ गया हो

कम्मो- मैंणी देखायआ था टूउउ कयास कर रहा था नीलम दीदी के साथ

रवि- ाचा तो मतलब आप मेरी जासूसी कर रही थी बाजार खड़ी होकर

बताओ न दीदी क्या क्या देखा

कम्मो बिना कुछ बोले बस अपने छोटे भाई कद विकराल लुंड को निहारते हुए अपने नथुने फुलाए जा रही थी

कम्मो की भरी भरकम चूचिया तेज गति के साथ ऊपर निचे हो रही थी मनो अभी उसका ब्लाउज फाड़ कर बहार आ जाएँगी

कम्मो इस बात का कोई जवाब नहीं दे पति

रवि- अच्छा दीदी मत बताओ पर आपने वो सब देखा की नहीं जब मैं नीलम दीदी की गांड में पेशाब किया और फिर उसके मुह्ह में भी मुता

कम्मो पहली बार अपना चेहरा उठा कर अपने छोटे भाई की आँखों में देखती है

रवि को अब अपनी दीदी की लाल आँखों में सिर्फ हवस hi हवस दिख रही थी वो जनता था की अपना लुंड दिखा कर उसने कम्मो दीदी के अंदर की औरत को जगा दिया है और अब उस औरत को सिर्फ और सिर्फ एक hi चीज़ चाहिए और वो है रवि का लुंड

कम्मो अपने कंपते होठो से बोलती है

कम्मो- तुझे शर्म नहीं आती अपनी दीदियो के साथ ऐसे गंदे काम करते हुए

रवि - अरे आपसे किसने खा की वो मेरी दीदी है वो साली छिनाल तो सिर्फ और सिर्फ मेरी रंडी है जिसे मैं कभी कभी टाइम पास के लिए hi छोड़ता हु बास

बाकि आपको अगर भरोषा न हो तो रेखा दीदी से और मेघा दीदी से पूछ लेना मैंने उनके मुह्ह में कभी पेशाब नहीं किया दीदी

ये बात रवि कुछ ज्यादा hi जोर देकर बोलता है

रवि- दीदी आपको मजा आया की नहीं देखने में मुझे तो उस रैंड को छोड़ने में बड़ा मजा आया

कम्मो बिना कुछ बोले बस वैसे hi खड़ी थी

रवि- और अब रात को रेखा दीदी और मेघा दीदी को भी छोडूंगा सच में दीदी जिंदगी मजे में काट रही है क्या बताऊ आपसे हर तरफ छूट hi छूट है बस एक आपकी hi बाकि है

कम्मो- तो क्या तू मुझे भी छोड़ना कहता है

रवि- अब कहि न दीदी आपने पटे की बात

पर सच बताऊ तो मैं आपको छोड़ने में कोई जल्दबाज़ी नहीं करना कहता पहले तो मुझे आपकी छूट का पानी चखना है बस एक दिन ऊँगली भर hi छठा था तब से पता नहीं क्यों बार बार मैं करता है की उस छेद को चाट चाट कर सारा पानी hi पी जाऊ

रवि की बाटे अब कम्मो की काम भावना को और भी भड़का रही थी

कम्मो- तेरा मैं नहीं भरता तेरी दोनों दीदियो से जो मुझे भी तू गन्दा करना कहता है

रवि- गन्दा तो पता नहीं दीदी पर अपनी दीदियो के साथ इस गंदे खेल में मुझे अब बहुत मजा अत है

और एक बार आप खेल कर देखो दीदी आपको भी बड़ा मजा आएगा ये भाई बेहेन का गन्दा खेल खेलने में

कम्मो- मुझे नहीं खेलना तेरा ये भाई बेहेन का गन्दा खेल

रवि- वो तो वक़्त hi बताएगा दीदी

कसम पैदा करने वाले की तुम्हारी छूट कर सारा पानी न निचोड़ दिया तो मेरा नाम भी रवि नहीं

कम्मो तो बस अब इसी इन्तजार में थी की रवि कब उसपर हमला करे और अपनी दीदी की इजात को खुद hi लूट ले

बस कम्मो पहल करने में अजीब सा महसूस कर रही थी

रवि भी अपनी दीदी के इरादे समझ चूका था

पर वो भी अब उसे और उकसाना कहता था

अच्चानक से रवि कम्मो का हाथ छोड़ता हुआ एक हाथ से अपने लुंड को थम लेता है और अपने सुपडे की चमड़ी को पीछे खींचता हुआ अपनी दीदी को अपना लाल सूपड़ा दिखने लगता है

कम्मो ये नजारा देख कर पानी पानी हुई जा रही थी

रवि- क्या हुआ दीदी अब तुम्हे दिदिया नहीं बुला रही क्या

कम्मो को मनो अच्चानक से होश अत है और वो न कहते हुए भी दरवाजे की और चल देती है

कम्मो बहार निकलने hi वाली थी की तभी रवि उसे आवाज लगता है

रवि- दीदी आज तुम्हे छोड़ दिया तो ये मत सोचना की छोडूंगा नहीं

पर आज के बाद से जब भी टीम मुझे अकेले में मिलोगी टी तुम्हारी छूट को इस हद्द तक्क गिला कर दूंगा की तुम खुद hi अपनी कुवारी छूट खोल कर अपने छोटे भाई के सामने परोस डौगी

और उस पल मैं बिना किसी संकोच के अपनी दीदी को लड़की से औरत बनाऊंगा

फिर देखना कितना मजा आएगा दीदी

और एक बात और आज रात को मेरा इन्तजार करना मेघा दीदी और रेखा दीदी को छोड़ने के बाद मैं तुम्हारी छूट का पानी निकलने आऊंगा

कम्मो रवि की बात ख़तम होता hi बिना कुछ बोले वह से निकल जाती है

कम्मो का दिल भले hi अपने छोटे भाई की बाटे सुन्न कर जोरो से धड़क रहा था पर इस पल उसके चेहरे पर एक मादक मुस्कान थी जो इस बास्त का साबुत थी की वो भी अपने छोटे भाई के साथ ये भाई बेहेन का गन्दा खेल खेलने के लिए बैचैन है .....
 
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