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अपडेट-159
दूसरी तरफ्फ़ रामलाल का घर.....
मल्टी- बापू दरवाजा बंद कार्डो अंदर से नहीं तो ये नसेड़ी हमे भी नहीं सोने देगा
रामलाल पलट कर दरवाजा बंद करता हुआ अंदर से कुण्डी लगा देता है
इस पल रामलाल के चेहरे पर वो कमीनापन साफ़ झलक रहा था जिससे पता लगता था की उसके इरादे अपनी बेटी के साथ क्या करने के है
खैर मल्टी को पेटीकोट और ब्लाउज में देख कर hi रामलाल का लुंड खड़ा हो चूका था
जोकि अब बैठने का नाम नहीं ले रहा था
अपना खड़ा लुंड छुपता हुआ रामलाल अपनी बेटी की और बढ़ चला था
पर उसकी धोती में जो उभर था उसे वो साहहह कर भी नहीं छुपा पाए रहा था
इधर मल्टी इस तरह लेती अपने को देख रही थी मनो कोई बीवी बिस्तर पर अपने मर्द का इन्तजार कर रही हो
मल्टी का छोटा सा ब्लाउज उसकी विशाल चूचियों का वजन नहीं संभाल पा रहा था
उसकी आधे से ज्यादा चूचिया उसके ब्लाउज से बहार की तरफ झाक रही थी
जिन्हे देख कर खुद उसका बाप अपनी hi बेटी का शिकार करने पर उतारू हो चला था
रामलाल चुपचाप मल्टी के बगल में लेत जाता है
पर अपना लुंड छुपाने के लिए वो मल्टी की और पीठ कर के लेता था
पर शायद उसकी बेटी को यह मंजूर नहीं था
मल्टी- बापू नाराज हो क्या मुझसे
रामलाल- नहीं बेटी ऐसा नहीं है
मल्टी- तो उस तरफ मुँह करके क्यों लेते हो आपकी बेटी इतने दिनों बाद आपके पास आयी है क्या आपको कोई खुसी नहीं है जो मुझसे मुह्ह मोड़ रहे हो बापू
अब रामलाल अपनी बेटी को क्या बताता की उसके बूढ़े बाप का लुंड उसे देख कर खड़ा हो गया है और उसे छुपाने के लिए hi वो ऐसे लेता है
रामलाल - नहीं बेटी ऐसा कुछ नहीं है तू ऐसा मत सोच वो तो बस मैं ऐसे hi लेट गया था
मल्टी पीछे से हाथ डालती हुई अपने बापू से चिपक जाती है और अपना एक हाथ आगे बढ़ती हुई रामलाल की बनियान के ऊपर से hi उसकी छाती पर रख देती है
मल्टी का यु अच्चानक से चिपकना रामलाल के लिए न्य था
मल्टी की विशाल चूचिया अब उसके hi बापू की पीठ में किसी तीर की तरह सुबह रही थी
अपनी बेटी के बदन से निकल रही गर्मी को रामलाल साफ़ महसूस लार सकता था और उसका नशा तो मनो ऐसा था की रामलाल के लुंड की नशे फटने को तैयार हो चली थी
मल्टी रामलाल के इतना नजदीक थी की उसकी गरम सांसे सीधा रामलाल की गर्दन को चोट मार रही थी मल्टी की सांसे रामलाल का बदन पिघलने लगी थी
ये नजारा hi इतना मादक था की किसी भी बाप का दिमाग खराब हो जाये जब उसकी गदराई शादी शुदा बेटी उससे इस तरह चिपक जाये
मल्टी- बापू मेरी तरफ देखो ना
रामलाल की हालत तो पहले से hi खराब थी पर अब उसपर हवस हावी होना शुरू हो चुकी थी
रामलाल अच्चानक से पलटता हुआ मल्टी की तरफ घूम जाता है पर उसने अपने लुंड को पैरो के बिच दबा लिया था जिससे की मल्टी उसका लुंड न देख पाए
रामलाल और मल्टी के मुँह एक एक दूसरे के इतने करीब थे की अगर मल्टी 1 इंच और आगे बढ़ जाती तो सहयद उसके गरम होठो की तपिश भी उसका बूढ़ा बाप महसूस कर सकता था
पर रामलाल के चेहरे पर मल्टी की गरम सांसे अब सीधा पड़ रही थी जोकि रामलाल की हवस को और भी ज्यादा उचाईयो पर उठाने के लिए काफी थी
आअज पहली बार रामलाल अपनी बेटी को इस हालत में इतना करीब से देख रहा था
मनो उसकी पूरी दुनिया hi पलट गयी थी
रामलाल अपनी hi बेटी के गदराये जिस्म पर ऊपर से निचे तक एक नजर डालता है
मल्टी की पतली सुराहीदार गर्दन से लेकर उसकी चूचियों के बिच बनी बड़ी दरार से लेकर उसकी चिकनी और चौड़ी कमर तक और अनंतत में आकर वो अपनी बेटी के होठो को देखते है उसकी आँखों में देखने लगता है
अपनी hi बेटी के अंगो को देखने का मजा आज रामलाल को समझ आया था और उसे यह भी समझ आ गया था की हरिया ने नीलम के साथ जो मजे लुटे है शायद उसे वो दुनिया में कोई और खूबसूरत औरत भी नहीं दे सकती जो उसकी बेटी ने दिए है
रामलाल अब अपनी बेटी से और दुर्र नहीं रेहह सकता था
मल्टी- बापू खा खो गई
रामलाल- कुछ नहीं बेटी बस देख रहा हु की मेरी बेटी कितनी बड़ी हो गयी है
मल्टी- बापू मैं तो आज भी वही बच्ची हु जो हमेशा से आपकी गॉड में कढ़ी रहती थी
पर बापू आप अब अपनी इस बेटी से पहले की तरह प्यार नहीं करते
रामलाल- बेटी मैं तुझसे पहले भी प्यार करता था और बल्कि अब तो उससे भी ज्यादा प्यार करता हु
मल्टी- अच्छा बापू तो क्या मेरा शरीर जैसे बढ़ा है वैसे आपका प्यार भी बढ़ गया है क्या
रामलाल- बेटी तेरा शरीर और तू कहे कितनी भी बढ़ जाओ पर तेरा ये बुद्धा बाप तुझसे हमेशा प्यार करता रहेगा
मल्टी रामलाल के हाथ को पकड़ती हुई अपने गलो पर रख देती है
मल्टी के चिकने गलो पर हाथ रखते hi रामलाल के पुरे शरीर में एक करंट सा दौड़ उठता है
मल्टी - बापू प्यार करते थे तो मिलने क्यों नहीं आते थे मुझसे
रामलाल- बेटी प्यार करता था और हमेशा करता रहूंगा पर वो तेरी ससुराल है मैं रोज रोज आऊंगा तो तेरे ससुराल वाले क्या सोचेंगे की ये बुद्धा अपनी बेटी से रोज रोज क्यों मिलता है
मल्टी- अच्छा मतलब किसी के सोचने भर से आप अपनी बेटी से मिलना बंद कर डोज
रामलाल - अरे बेटी प्यार करता हु तुझसे तभी तो तुझे यह ले आया तेरी एक आवाज पर
मल्टी- अच्छा बापू तो क्या अब आप मुझे यह प्यार करोगे
इतना बोलते हुए मल्टी दूसरी और घूम जाती है और अपनी गद्देदार गांड को पीछे करती हुई सीधा रामलाल से चिपक कर लेत जाती है
रामलाल की तो मनो सांसे hi बंद हो जाती है
मल्टी- बोलो न बापू तो क्या अब आप अपनी बेटी को यह लेकर उससे प्यार करोगे
रामलाल कुछ बोल पता उससे पहले hi मल्टी उसका हाथ पकड़ती हुई आगे की और खींचती है और सीधा अपने चिकने पेट पर रख देती है जिससे की रामलाल का शरीर एक झटका खता है और झटके के साथ hi उसकी टैंगो के बिच फसा हुआ उसका लुंड आजाद होकर सीधा मल्टी की गांड से जा टकराता है
यह टकराव इतना कामुक था की दोनों बाप बेटी की सिसक निकल जाती है
मल्टी- अह्ह्ह्हह बापू तुम्हे नहीं पता मैंने तुम्हे कितना मिस किया
रामलाल- बेटी मुझे भी तेरी बड़ी याद आती थी पर क्या कृ एक बेटी को अपने पास कितने दिनों तक्क रख सकता हु मैं
मल्टी- बापू कुछ भी हो पर इस बार मैं यह ज्यादा दिन तक रहूंगी काम से काम हरी की शादी होने तक्क तो रहूंगी hi और मुझे वचन दो की तुम मुझे वापस बेहजने की जिद्द भी नहीं करोगे
रामलाल- पर बेटी एक तो तू पहली बार अपने ससुराल गयी है और सोच वो लोग क्या कहेंगे
मल्टी- कोई कुछ नहीं कहेगा मैं मेघा दीदी से पहले hi बात करके आयी हु उन्हें कोई आपत्ति नहीं है
रामलाल- जब उन्हें दिकायत नहीं है तो मुझे अपनी बेटी को रखने में क्या दिक्कत होगी तेरा घर है और तू कहे जितने दिन रह बेटी
मल्टी रामलाल के हाथ को पकड़ कर अपने पेट पर सहलाये जा रही थी जिसकी वजह से उसका लुंड लगातार अपनी बेटी की गांड के ऊपर टक्कर मरे जा रहा था
मल्टी- चलो बापू अब सो जाओ वैसे भी आज बस के झटको से मेरा पूरा बदन टूट रहा है
बस के झटको का नाम सुनते hi रामलाल को वही बात याद आ जब्ती है की कैसे उसका लुंड उसकी बेटी की गांड में फसा हुआ था और बस के हर झटके के साथ वो और भी ज्यादा अंदर घुसता जा रहा था
मल्टी पीछे पललट कर अपने बूढ़े बाप के गाल पर एक चुम्मा देती है और दुबारा से पलट कर लेत जाती है
मल्टी- सुभ्रातृ बापू बहुत तेज नींद आ रही है
कल से मैं आपकी दिन रात सेवा करुँगी अब सो जाओ बापू
रामलाल को खा पता था की उसकी बेटी नींद का बहाना बनाते हुए उसे अपने गदराये बदन से खेलने का खुल्ला निमंत्रण दे रही है
इधर रामलाल तो अंदर hi अंदर खुस्स था आखिर कर तो वो भी यही कहता था की उसकी बेटी जल्दी सू जाये
दूसरी तरफ्फ़ रामलाल का घर.....
मल्टी- बापू दरवाजा बंद कार्डो अंदर से नहीं तो ये नसेड़ी हमे भी नहीं सोने देगा
रामलाल पलट कर दरवाजा बंद करता हुआ अंदर से कुण्डी लगा देता है
इस पल रामलाल के चेहरे पर वो कमीनापन साफ़ झलक रहा था जिससे पता लगता था की उसके इरादे अपनी बेटी के साथ क्या करने के है
खैर मल्टी को पेटीकोट और ब्लाउज में देख कर hi रामलाल का लुंड खड़ा हो चूका था
जोकि अब बैठने का नाम नहीं ले रहा था
अपना खड़ा लुंड छुपता हुआ रामलाल अपनी बेटी की और बढ़ चला था
पर उसकी धोती में जो उभर था उसे वो साहहह कर भी नहीं छुपा पाए रहा था
इधर मल्टी इस तरह लेती अपने को देख रही थी मनो कोई बीवी बिस्तर पर अपने मर्द का इन्तजार कर रही हो
मल्टी का छोटा सा ब्लाउज उसकी विशाल चूचियों का वजन नहीं संभाल पा रहा था
उसकी आधे से ज्यादा चूचिया उसके ब्लाउज से बहार की तरफ झाक रही थी
जिन्हे देख कर खुद उसका बाप अपनी hi बेटी का शिकार करने पर उतारू हो चला था
रामलाल चुपचाप मल्टी के बगल में लेत जाता है
पर अपना लुंड छुपाने के लिए वो मल्टी की और पीठ कर के लेता था
पर शायद उसकी बेटी को यह मंजूर नहीं था
मल्टी- बापू नाराज हो क्या मुझसे
रामलाल- नहीं बेटी ऐसा नहीं है
मल्टी- तो उस तरफ मुँह करके क्यों लेते हो आपकी बेटी इतने दिनों बाद आपके पास आयी है क्या आपको कोई खुसी नहीं है जो मुझसे मुह्ह मोड़ रहे हो बापू
अब रामलाल अपनी बेटी को क्या बताता की उसके बूढ़े बाप का लुंड उसे देख कर खड़ा हो गया है और उसे छुपाने के लिए hi वो ऐसे लेता है
रामलाल - नहीं बेटी ऐसा कुछ नहीं है तू ऐसा मत सोच वो तो बस मैं ऐसे hi लेट गया था
मल्टी पीछे से हाथ डालती हुई अपने बापू से चिपक जाती है और अपना एक हाथ आगे बढ़ती हुई रामलाल की बनियान के ऊपर से hi उसकी छाती पर रख देती है
मल्टी का यु अच्चानक से चिपकना रामलाल के लिए न्य था
मल्टी की विशाल चूचिया अब उसके hi बापू की पीठ में किसी तीर की तरह सुबह रही थी
अपनी बेटी के बदन से निकल रही गर्मी को रामलाल साफ़ महसूस लार सकता था और उसका नशा तो मनो ऐसा था की रामलाल के लुंड की नशे फटने को तैयार हो चली थी
मल्टी रामलाल के इतना नजदीक थी की उसकी गरम सांसे सीधा रामलाल की गर्दन को चोट मार रही थी मल्टी की सांसे रामलाल का बदन पिघलने लगी थी
ये नजारा hi इतना मादक था की किसी भी बाप का दिमाग खराब हो जाये जब उसकी गदराई शादी शुदा बेटी उससे इस तरह चिपक जाये
मल्टी- बापू मेरी तरफ देखो ना
रामलाल की हालत तो पहले से hi खराब थी पर अब उसपर हवस हावी होना शुरू हो चुकी थी
रामलाल अच्चानक से पलटता हुआ मल्टी की तरफ घूम जाता है पर उसने अपने लुंड को पैरो के बिच दबा लिया था जिससे की मल्टी उसका लुंड न देख पाए
रामलाल और मल्टी के मुँह एक एक दूसरे के इतने करीब थे की अगर मल्टी 1 इंच और आगे बढ़ जाती तो सहयद उसके गरम होठो की तपिश भी उसका बूढ़ा बाप महसूस कर सकता था
पर रामलाल के चेहरे पर मल्टी की गरम सांसे अब सीधा पड़ रही थी जोकि रामलाल की हवस को और भी ज्यादा उचाईयो पर उठाने के लिए काफी थी
आअज पहली बार रामलाल अपनी बेटी को इस हालत में इतना करीब से देख रहा था
मनो उसकी पूरी दुनिया hi पलट गयी थी
रामलाल अपनी hi बेटी के गदराये जिस्म पर ऊपर से निचे तक एक नजर डालता है
मल्टी की पतली सुराहीदार गर्दन से लेकर उसकी चूचियों के बिच बनी बड़ी दरार से लेकर उसकी चिकनी और चौड़ी कमर तक और अनंतत में आकर वो अपनी बेटी के होठो को देखते है उसकी आँखों में देखने लगता है
अपनी hi बेटी के अंगो को देखने का मजा आज रामलाल को समझ आया था और उसे यह भी समझ आ गया था की हरिया ने नीलम के साथ जो मजे लुटे है शायद उसे वो दुनिया में कोई और खूबसूरत औरत भी नहीं दे सकती जो उसकी बेटी ने दिए है
रामलाल अब अपनी बेटी से और दुर्र नहीं रेहह सकता था
मल्टी- बापू खा खो गई
रामलाल- कुछ नहीं बेटी बस देख रहा हु की मेरी बेटी कितनी बड़ी हो गयी है
मल्टी- बापू मैं तो आज भी वही बच्ची हु जो हमेशा से आपकी गॉड में कढ़ी रहती थी
पर बापू आप अब अपनी इस बेटी से पहले की तरह प्यार नहीं करते
रामलाल- बेटी मैं तुझसे पहले भी प्यार करता था और बल्कि अब तो उससे भी ज्यादा प्यार करता हु
मल्टी- अच्छा बापू तो क्या मेरा शरीर जैसे बढ़ा है वैसे आपका प्यार भी बढ़ गया है क्या
रामलाल- बेटी तेरा शरीर और तू कहे कितनी भी बढ़ जाओ पर तेरा ये बुद्धा बाप तुझसे हमेशा प्यार करता रहेगा
मल्टी रामलाल के हाथ को पकड़ती हुई अपने गलो पर रख देती है
मल्टी के चिकने गलो पर हाथ रखते hi रामलाल के पुरे शरीर में एक करंट सा दौड़ उठता है
मल्टी - बापू प्यार करते थे तो मिलने क्यों नहीं आते थे मुझसे
रामलाल- बेटी प्यार करता था और हमेशा करता रहूंगा पर वो तेरी ससुराल है मैं रोज रोज आऊंगा तो तेरे ससुराल वाले क्या सोचेंगे की ये बुद्धा अपनी बेटी से रोज रोज क्यों मिलता है
मल्टी- अच्छा मतलब किसी के सोचने भर से आप अपनी बेटी से मिलना बंद कर डोज
रामलाल - अरे बेटी प्यार करता हु तुझसे तभी तो तुझे यह ले आया तेरी एक आवाज पर
मल्टी- अच्छा बापू तो क्या अब आप मुझे यह प्यार करोगे
इतना बोलते हुए मल्टी दूसरी और घूम जाती है और अपनी गद्देदार गांड को पीछे करती हुई सीधा रामलाल से चिपक कर लेत जाती है
रामलाल की तो मनो सांसे hi बंद हो जाती है
मल्टी- बोलो न बापू तो क्या अब आप अपनी बेटी को यह लेकर उससे प्यार करोगे
रामलाल कुछ बोल पता उससे पहले hi मल्टी उसका हाथ पकड़ती हुई आगे की और खींचती है और सीधा अपने चिकने पेट पर रख देती है जिससे की रामलाल का शरीर एक झटका खता है और झटके के साथ hi उसकी टैंगो के बिच फसा हुआ उसका लुंड आजाद होकर सीधा मल्टी की गांड से जा टकराता है
यह टकराव इतना कामुक था की दोनों बाप बेटी की सिसक निकल जाती है
मल्टी- अह्ह्ह्हह बापू तुम्हे नहीं पता मैंने तुम्हे कितना मिस किया
रामलाल- बेटी मुझे भी तेरी बड़ी याद आती थी पर क्या कृ एक बेटी को अपने पास कितने दिनों तक्क रख सकता हु मैं
मल्टी- बापू कुछ भी हो पर इस बार मैं यह ज्यादा दिन तक रहूंगी काम से काम हरी की शादी होने तक्क तो रहूंगी hi और मुझे वचन दो की तुम मुझे वापस बेहजने की जिद्द भी नहीं करोगे
रामलाल- पर बेटी एक तो तू पहली बार अपने ससुराल गयी है और सोच वो लोग क्या कहेंगे
मल्टी- कोई कुछ नहीं कहेगा मैं मेघा दीदी से पहले hi बात करके आयी हु उन्हें कोई आपत्ति नहीं है
रामलाल- जब उन्हें दिकायत नहीं है तो मुझे अपनी बेटी को रखने में क्या दिक्कत होगी तेरा घर है और तू कहे जितने दिन रह बेटी
मल्टी रामलाल के हाथ को पकड़ कर अपने पेट पर सहलाये जा रही थी जिसकी वजह से उसका लुंड लगातार अपनी बेटी की गांड के ऊपर टक्कर मरे जा रहा था
मल्टी- चलो बापू अब सो जाओ वैसे भी आज बस के झटको से मेरा पूरा बदन टूट रहा है
बस के झटको का नाम सुनते hi रामलाल को वही बात याद आ जब्ती है की कैसे उसका लुंड उसकी बेटी की गांड में फसा हुआ था और बस के हर झटके के साथ वो और भी ज्यादा अंदर घुसता जा रहा था
मल्टी पीछे पललट कर अपने बूढ़े बाप के गाल पर एक चुम्मा देती है और दुबारा से पलट कर लेत जाती है
मल्टी- सुभ्रातृ बापू बहुत तेज नींद आ रही है
कल से मैं आपकी दिन रात सेवा करुँगी अब सो जाओ बापू
रामलाल को खा पता था की उसकी बेटी नींद का बहाना बनाते हुए उसे अपने गदराये बदन से खेलने का खुल्ला निमंत्रण दे रही है
इधर रामलाल तो अंदर hi अंदर खुस्स था आखिर कर तो वो भी यही कहता था की उसकी बेटी जल्दी सू जाये