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अपडेट-143
कुछ देर तक्क मल्टी मेघा दीदी के पैरो की मालिश करती रही और जब उसे लगा की मेघा दीदी सो चुकी है तो वो एक नजर रवि की और डालती है जो उसे hi देख रहा था
रवि मल्टी को आँख मरता हुआ अपना लौड़ा पकड़ कर उसे धोती के ऊपर से hi दिखता है जोकि पूरी तरह खड़ा था
मल्टी आँखे फाड़ फाड़ कर रवि का लुंड देख रही थी
इधर मेघा और कम्मो दोनों hi सो चुकी था
रेखा की भी आँखे बंद थी शायद वो भी नींद की आगोश में जा चुकी थी
रवि मल्टी को देखता हुआ अपनी दिति सरका देता है और उसका विशाल लुंड एकाएक दिति के बहार आ जाता है
रवि का लुंड देख कर मल्टी की आँखों में एक अलग hi चमक थी
एक झटके के साथ रवि पीछे होता है और अपने लुंड को रेखा की गांड में टच करता हुआ
एक झटके में hi पेटीकोट के ऊपर से hi उसकी गांड में ठूसने लगता है
और अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर सोढा रेखा की एक चुकी पर रख देता है
यह नजारा देख कर मल्टी की छूट पनिया गयी थी अभी कुछ और होता उससे पहले hi मेघा दीदी खासते हुए रवि की तरफ करवट बदल ले लेती है
रवि अपना हाथ रेखा की चुकी से हटा लेता है पर उसका लुंड अब भी उसकी दीदी की गांड में कहि गम था
न कहते हुए भी मल्टी उठ कर बहार निकल जाती है
रवि का लुंड देखने के बाद से hi मल्टी का मन कर रहा था की उस लुंड की सवारी करे
पर अभी ुए मुमकिन नहीं था
मल्टी सीधा बहार निकल जाती है
और अपनी गर्मी शांत करने के लिए वो थोड़ा पानी पीती है
मल्टी की हालत ऐसी थी की उसके हाथ पॉव कप्प रहे थे
जिसकी वजह से आधे से ज्यादा पानी उसकी चूचियों पर गिर चूका था
पानी की वजह से मल्टी का पतला सा ब्लाउज पूरी तरह भीग गया था और उसकी बड़ी बड़ी चूचियों पर लगे उसके शानदार निप्पल साफ़ नजर आने लगे थे
पर मल्टी को इस बात का बिलकुल भी ध्यान नहीं था वो जैसे तैसे अपने आपको शांत करती हुई अपने बिस्तर तक्क पहुँचती है
झा उसका बापू पहले hi खत पर लेट चूका
मल्टी को लगा की रामलाल सो चूका है वो चुपचाप अपनी शादी को खोलती हुई अलग कर देती है
जैसे hi मल्टी शादी को निकलती है वैसे hi रामलाल उठ कर बैठ जाता है
उसकी नजर सबसे पहले अपनी बेटी की तनी हुई चूचियों पर पड़ती जोकि साफ नजर आ रही थी
मनो मल्टी ने ब्लाउज पहना hi न हो
जब मल्टी अपने बापू की नजरो का पीछा करती है तो उसकी सांसे मनो उसके गले में hi अटक जाती है
अच्चानक से रामलाल को याद आता है की जिसकी चूचियों को वो ाआँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा है वो और कोई नहीं उसकी खुद की बेटी है
अच्चानक से रामलाल अपनी नजरे हटा लेता है
पर उसका दिल तो अब भी कार्र रहा था की अपनी बेटी की रसभरी चूचियों का सारा रस निचोड़ ले
मल्टी- क्या हुआ बापू आओ सोये नहीं
रामलाल- बेटी मुझे पेशाब लगी है वही सोच रहा था की खा जाऊ
मल्टी को भी अंदाजा हो चूका था की उसके निप्पल साफ़ नजर आ रहे है और शायद उसके बापू की नजर गलती से hi उसकी चूचियों का दीदार कर गयी
मल्टी- अरे बापू इसमें सोचना क्या है बहार जाकर कहि भी मुट्ठ लो
रामलाल- बेटी मेरी बेटी की ससुराल है न इसलिए सब कुछ सोच समझ कर करना पड़ता है
मल्टी- अरे बापू इतना मैट सोचो चलो मैं ले चलती हु आपको
आगे बढ़ते हुए मल्टी रामलाल का हाथ पकड़ लेती है
आज पहली बार था जब खुद की hi बेटी के स्पर्श से रामलाल के लुंड और शरीर में एक अलग प्रकार का झटका लगा था
आगे आगे मल्टी और पीछे पीछे रामलाल दोनों घर के बहार निकल आते है
मल्टी- जाओ बापू वह मुट्ठ लो
रामलाल आगे बढ़ता हुआ अपना आधा खड़ा लुंड धोती से निकलता है और मूतने लगता है
मल्टी दूसरी तरफ मुँह घुमा कर खड़ी थी पार उसके कानो में उसके बाप की मूतने की आवाज साफ़ सुनाई दे रही थी
और पता नहीं क्यों मल्टी को भी आज ये आवाज सुनने में काफी मजा आ रहा था
कुछ देर में रामलाल मुट्ठ लेता है
और वापस से अपनी बेटी के पास आता है
रामलाल- चले बेटी हो गया मेरा
मल्टी- आप घर में चलो बापू मुझे भी भीत जोरो की पेशाब लगी है मैं भी मुट्ठ कर आती हु
रामलाल- ठीक है बेटी मैं जाता हु
रामलाल घर की और तो बढ़ता है पारर उसका बड़ा मैं था की अपनी बेटी को मूतते हुए देखे
दरवाजे के पास पहुंच कर अच्चानक से रामलाल ृक्क जाता है और जैसे hi पीछे पलट कर देकता है वो नजारा देख कर उसका लुंड मनो एक झटके के साथ hi पूरा खड़ा हो जाता है
मल्टी दूसरी तरफ मुँह घुमा कर बैठी मुट्ठ रही थी
चांदनी रौशनी की वजह से रामलाल को उसकी बेटी की गद्देदार गांड साफ़ नजर आ रही थी
पर लुंड खड़ा होने का असली कारन वी नहीं था
असल में चाँद की रौशनी में मल्टी की मुट्ठ की चमचमाती धरर भी रामलाल को साफ़ नजर आ रही थी
रामलाल का मैं तो कर रहा था की अभी जाकर अपनी के निचे बैठ जाये और जो अमृत उसकी छूट से निकल रहा है उसे सीधा अपने मुह्ह में लेकर पी जाये
अच्चानक से मल्टी उठ जाती है और रामलाल की गांड फट जाती है
वो तुरंत अंदर की और भागता है और जैसे तैसे अपनी उखड़ी हुई सांसो को काबू करता हुआ खत पर लेट जाता है
पर कम्बख्त रामलाल का लुंड उस नजारे को देखने के बाद से hi बैठने का नाम नहीं ले रहा था.....
कुछ देर तक्क मल्टी मेघा दीदी के पैरो की मालिश करती रही और जब उसे लगा की मेघा दीदी सो चुकी है तो वो एक नजर रवि की और डालती है जो उसे hi देख रहा था
रवि मल्टी को आँख मरता हुआ अपना लौड़ा पकड़ कर उसे धोती के ऊपर से hi दिखता है जोकि पूरी तरह खड़ा था
मल्टी आँखे फाड़ फाड़ कर रवि का लुंड देख रही थी
इधर मेघा और कम्मो दोनों hi सो चुकी था
रेखा की भी आँखे बंद थी शायद वो भी नींद की आगोश में जा चुकी थी
रवि मल्टी को देखता हुआ अपनी दिति सरका देता है और उसका विशाल लुंड एकाएक दिति के बहार आ जाता है
रवि का लुंड देख कर मल्टी की आँखों में एक अलग hi चमक थी
एक झटके के साथ रवि पीछे होता है और अपने लुंड को रेखा की गांड में टच करता हुआ
एक झटके में hi पेटीकोट के ऊपर से hi उसकी गांड में ठूसने लगता है
और अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर सोढा रेखा की एक चुकी पर रख देता है
यह नजारा देख कर मल्टी की छूट पनिया गयी थी अभी कुछ और होता उससे पहले hi मेघा दीदी खासते हुए रवि की तरफ करवट बदल ले लेती है
रवि अपना हाथ रेखा की चुकी से हटा लेता है पर उसका लुंड अब भी उसकी दीदी की गांड में कहि गम था
न कहते हुए भी मल्टी उठ कर बहार निकल जाती है
रवि का लुंड देखने के बाद से hi मल्टी का मन कर रहा था की उस लुंड की सवारी करे
पर अभी ुए मुमकिन नहीं था
मल्टी सीधा बहार निकल जाती है
और अपनी गर्मी शांत करने के लिए वो थोड़ा पानी पीती है
मल्टी की हालत ऐसी थी की उसके हाथ पॉव कप्प रहे थे
जिसकी वजह से आधे से ज्यादा पानी उसकी चूचियों पर गिर चूका था
पानी की वजह से मल्टी का पतला सा ब्लाउज पूरी तरह भीग गया था और उसकी बड़ी बड़ी चूचियों पर लगे उसके शानदार निप्पल साफ़ नजर आने लगे थे
पर मल्टी को इस बात का बिलकुल भी ध्यान नहीं था वो जैसे तैसे अपने आपको शांत करती हुई अपने बिस्तर तक्क पहुँचती है
झा उसका बापू पहले hi खत पर लेट चूका
मल्टी को लगा की रामलाल सो चूका है वो चुपचाप अपनी शादी को खोलती हुई अलग कर देती है
जैसे hi मल्टी शादी को निकलती है वैसे hi रामलाल उठ कर बैठ जाता है
उसकी नजर सबसे पहले अपनी बेटी की तनी हुई चूचियों पर पड़ती जोकि साफ नजर आ रही थी
मनो मल्टी ने ब्लाउज पहना hi न हो
जब मल्टी अपने बापू की नजरो का पीछा करती है तो उसकी सांसे मनो उसके गले में hi अटक जाती है
अच्चानक से रामलाल को याद आता है की जिसकी चूचियों को वो ाआँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा है वो और कोई नहीं उसकी खुद की बेटी है
अच्चानक से रामलाल अपनी नजरे हटा लेता है
पर उसका दिल तो अब भी कार्र रहा था की अपनी बेटी की रसभरी चूचियों का सारा रस निचोड़ ले
मल्टी- क्या हुआ बापू आओ सोये नहीं
रामलाल- बेटी मुझे पेशाब लगी है वही सोच रहा था की खा जाऊ
मल्टी को भी अंदाजा हो चूका था की उसके निप्पल साफ़ नजर आ रहे है और शायद उसके बापू की नजर गलती से hi उसकी चूचियों का दीदार कर गयी
मल्टी- अरे बापू इसमें सोचना क्या है बहार जाकर कहि भी मुट्ठ लो
रामलाल- बेटी मेरी बेटी की ससुराल है न इसलिए सब कुछ सोच समझ कर करना पड़ता है
मल्टी- अरे बापू इतना मैट सोचो चलो मैं ले चलती हु आपको
आगे बढ़ते हुए मल्टी रामलाल का हाथ पकड़ लेती है
आज पहली बार था जब खुद की hi बेटी के स्पर्श से रामलाल के लुंड और शरीर में एक अलग प्रकार का झटका लगा था
आगे आगे मल्टी और पीछे पीछे रामलाल दोनों घर के बहार निकल आते है
मल्टी- जाओ बापू वह मुट्ठ लो
रामलाल आगे बढ़ता हुआ अपना आधा खड़ा लुंड धोती से निकलता है और मूतने लगता है
मल्टी दूसरी तरफ मुँह घुमा कर खड़ी थी पार उसके कानो में उसके बाप की मूतने की आवाज साफ़ सुनाई दे रही थी
और पता नहीं क्यों मल्टी को भी आज ये आवाज सुनने में काफी मजा आ रहा था
कुछ देर में रामलाल मुट्ठ लेता है
और वापस से अपनी बेटी के पास आता है
रामलाल- चले बेटी हो गया मेरा
मल्टी- आप घर में चलो बापू मुझे भी भीत जोरो की पेशाब लगी है मैं भी मुट्ठ कर आती हु
रामलाल- ठीक है बेटी मैं जाता हु
रामलाल घर की और तो बढ़ता है पारर उसका बड़ा मैं था की अपनी बेटी को मूतते हुए देखे
दरवाजे के पास पहुंच कर अच्चानक से रामलाल ृक्क जाता है और जैसे hi पीछे पलट कर देकता है वो नजारा देख कर उसका लुंड मनो एक झटके के साथ hi पूरा खड़ा हो जाता है
मल्टी दूसरी तरफ मुँह घुमा कर बैठी मुट्ठ रही थी
चांदनी रौशनी की वजह से रामलाल को उसकी बेटी की गद्देदार गांड साफ़ नजर आ रही थी
पर लुंड खड़ा होने का असली कारन वी नहीं था
असल में चाँद की रौशनी में मल्टी की मुट्ठ की चमचमाती धरर भी रामलाल को साफ़ नजर आ रही थी
रामलाल का मैं तो कर रहा था की अभी जाकर अपनी के निचे बैठ जाये और जो अमृत उसकी छूट से निकल रहा है उसे सीधा अपने मुह्ह में लेकर पी जाये
अच्चानक से मल्टी उठ जाती है और रामलाल की गांड फट जाती है
वो तुरंत अंदर की और भागता है और जैसे तैसे अपनी उखड़ी हुई सांसो को काबू करता हुआ खत पर लेट जाता है
पर कम्बख्त रामलाल का लुंड उस नजारे को देखने के बाद से hi बैठने का नाम नहीं ले रहा था.....