Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 26 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -236

उस दिन रवि खेतो में hi पूरा दिन गुजरता है और रेखा hi उसे खाना देने जाती है और झोपडी में अपनी दीदी की चुदाई करते हुए रवि अपनी दीदी के साथ आगे का प्लान बनता है

और उसी रात खाने के बाद रेखा प्लान के मुताबिक सबको एक साथ सोने के लिए बोलती है

रेखा की इस बात से कम्मो को थोड़ा सा दुःख होता है की आज रात वो अपने भाई का लुंड नहीं ले पायेगी

रवि को तो सब बाटे पहले से hi मालूम थी

सब प्लान के साथ साथ चल रहा था

बिस्तर लगते hi रेखा टपक से केशव के बगल में लेट जाती है

रेखा - अब तो मैं भैय्या के साथ hi सोया करुँगी कहे कुछ भी हो क्यों भैय्या

केशव अपनी बेहेन के बालो को सहलाता हुआ बोलता है

केशव - तुझे मना किया है क्या किसीने मेरे पास सोने से झा तेरी मर्ज़ी हो वह सो जाना बेहेन समझी

मल्टी केशव के दूसरी और लेट जाती है और बड़े hi मादक अंदाज में अपने देवर को आवाज लगती है

मल्टी - देवर जी अरे ोू देवरर जी

रवि - हां भाभी बोलो

मल्टी - देखो आपकी बेहेन अपने भैय्या के पास सो रही है तो क्यों न आज आप मेरे साथ सो जाओ

इतना बोलती हुई मल्टी केशव की और देखती है और इतराती हुई हलकी सी मुस्कान देती है

केशव इतना भी भोला नहीं था वो अपनी बीवी के इरादे भाप चूका था पर अब इन सब बातो से उसे कोई फरक नहीं पड़ता था कहे जो भी हो

रेखा - अरे रवि इतनी प्यार से बुला रही है तेरी भाभी तुझे जा सजा आज उनके साथ hi

रवि मल्टी की दूसरी और जाकर लेत जाता है

रेखा तो अब तक अपने भाई से चिपक चुकी थी

रेखा के बगल में बुआ और फिर लास्ट में कम्मो थी

मल्टी रेखा की हरकतों को देख कर अंदर hi अंदर उसे गालिया दे एही थी

मल्टी होना हाथ पीछे ले जाती हुई अपने देवर का हाथ पकड़ कर खुद hi अपने पेट पर रख देती है

रवि को तो बस इशारे का इन्तजार था जैसे hi मल्टी उसला हाथ आगे की और खींचती है वो अपने पुरे शरीर को आगे की और सरका देता है और देखते hi देखते रवि का खड़ा लुंड मल्टी की गांड में घुसने लगता है

अभी मल्टी ने सिर्फ एक पेटीकोट और ब्लाउज hi पहना हुआ था और रेखा का भी वही पहनावा था

लेते हुए अभी 5 मिंट hi हुए होंगे तब तक रेखा ने केशव का पायजामा निचे सरका दिया

काममो तो अपनी आदत के मुताबिक लेटते hi नींद में चली गयी थी

बुआ लेती लेती यही सोच रही थी की शायद आज रेखा और केशव के बिच कुछ नहीं होगा पर जल्द hi बुआ की सोच गलत साबित होने वाली थी ....

आगे की कहानी जल्दी hi
 
अपडेट -237

रेखा की नजर रवि की नजरो से मिल चुकी थी

मनो दोनों भाई बेहेन ने इरादा कर लिया था की आज वो इस गंदे खेल में उसके बड़े भाई को भी शामिल कर लेंगे

रेखा - भैय्या लगता है की आज इन दोनों को दिखाना hi पड़ेगा की हम दोनों कितने खुश है एक साथ

केशव बिना कुछ बोले अपनी बेहेन की है में है मिला देता है

इतने में रेखा उठ कर बैठ जाती है

रेखा - ारी ू कम्मो सो गयी क्या

कम्मो - नहीं दीदी जगी हुई हु अभी

रेखा - तो जा एक काम कर नए घर में जाकर सजा रात में खुले सांड़ आकर उसमे हग्ग जाते है

काममो - ठीक है दीदी क्या मैं रवि को भी ले जाऊ साथ में

रेखा - नहीं बिलकुल नहीं आज रवि यही रहेगा तू जा जैसा खा वो कर समझी

कम्मो - ठीक है दीदी

बुआ- अरे क्यों डाट रही है बच्ची को चल री कम्मो मैं चलती हु तेरे साथ

इतना बोलती हुई दोनों बहार चली गयी और रेखा चरणान्त hi उठ कर अंदर से दरवाजा लगा देती है

बुआ को तो भले hi कोई शक़्क़क़ नहीं था पर अपनी दीदी की बाटे सुनकर कम्मो को जरूर यकीन हो गया था की आज की रात जरूर कुछ न कुछ होने वाला है

खैर दोनों जाकर नए बन रहे घर में पड़ी खत पर एक कम्बल ओढ़ कर लेट जाते है और शुरू हो जाती है बुआ भतीजी की बाटे

इधर दूसरी तरफ जैसे hi रेखा दरवाजा बंद कर पलटती है

अपनी भाई की आँखों में देखते हुए अपने ब्लाउज के एक एक गुक्क को खोल देती है

और एक झटके में अपना ब्लाउज अपने जिस्म से अलग करती हुई अपने भाई को दिखती हुई अपने निप्पल्स को ऊपर की और खींचती है

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केशव एक नजर अपनी बीवी पर डालता है जो बगल में hi लेती हुई अपनी ननद की इन कामुक हरकतों को देख रही थी

रवि का हाथ अब भी उसकी भाभी के ोएत पर था उसकी उंगलिया लगातार मल्टी को गरम कर रही थी

केशव उठ कर बैठ जाता है

रेखा मनो इसी इन्तजार में खड़ी थी अगले hi पल वो एक झटके में अपने पेटीकोट का नाडा खोल देती है और देखते hi देखते वो इस कमरे में सबके सामने पूरी नंगी हो जाती है

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रेखा - चाहिए भैय्या आपको ये

केशव - है बहना देदे अपने भाई को अह्ह्ह

केशव लपक कर रेखा के पेअर को पकड़ लेता है

रेखा जान बुझ कर नाटक करती हुई गिरती है और अगले hi पल जमीन पर अपने दोनों पेअर खोले पड़ी हुई थी

उसका फटा हुआ भोसड़ा साफ़ साफ़ नजर आ रहा था जो खुद के hi भाई को देख कर लार टपका रहा था

केशव को अपनी छोटी भें की भीगी हुई छूट मनो सवर्ग में जाने का रास्ता लाग्ग रही थी

रेखा तुरंत hi अपनी छूट को ढकती हुई अपने भाई की आँखों में देखती है जो इस समय पूरी लाल हो चुकी थी

रेखा - नहीं भैय्या नहीं ऐसी न देखो अपनी छोटी बेहेन की फटी हुई बुर्र को मुझे शर्म आती है भैय्या

रेखा की बुर्र फटी हुई क्या भोसड़ा बनी हुई थी जिसका अंदाजा केशव को पहले दिन से hi था

केशव आगे बढ़ता हुआ अपनों बेहेन का हाथ हटा देता है और उसकी छूट को बड़े गौर से देखता है

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केशव - मुझे मत शर्म्मा मेरी बेहेन तू मुझे ये बता तेरी सुत्त का ये हाल किसने किया

रेखा - और कौन करेगा भैय्या जब घर में hi संध घूम रहा हो तो गयी कब तक बचती फिरेगी

केशव को यकीन नहीं होता की रवि ने रेखा जैसी मांसल औरत और खुद की बेहेन के साथ इतना घिनोना काम किया

जैसे hi केशव की नजर रवि की और जाती है उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती है

मल्टी पूरी नंगी थी और घंटो कद बल बैठ अपने देवरर का लुंड अपने मुँह में पेलवा रही थिई

केशव को यह नजारा देख कर मनो 440 वाल्ट का झटका लगता है

केशव तुरंत अपना मुँह घूमता हुआ सीधा अपनी बेहेन की छूट में घुसा देता है

रेखा - अह्ह्ह भैय्या अह्ह्ह्हह ऐसी hi अहह और अंदर पेलो जीभ को

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रेखा की छूट से निकल रहा सफ़ेद पानी चाट कर केशव को ऐसा लग रहा था मनो वो अमृत को चाट रहा हो जो सचेत उसकी छोटी बेहेन की कामुक छूट से बह रहा था

रेखा रवि की एयर देखती हुई कुछ इशारा करती है

रवि समझ चूका था की अब नाटक बहुत हो चूका और अब वक़्त है उसकी दीदी की कसम को पूरा करने का जो उसने खायी थी

रवि पकककक से अपनी भाभी के नूह से अपने लुंड को निकल लेता है

मल्टी उसे अचम्भे से देखती रह जाती है

असल में तो मल्टी अब तक लुंड को बड़े प्यार से अपनी मन मर्जी से चूस रही थी रवि भी माहौल बनाने के लिए शांत था पर अब जब रेखा का इशारा मिल चूका था अब वो इस खेल को अपने तृक्व से खेलना कहता था

रवि अपनी भाभी के गीले और चिपचिपे होठो पर अपनी उंगलिया फिरते हुए उन्हें एक चमाट मरता है और अगले hi पल उसके बालो को पकड़ कर खींचता हुआ दरवाजे के पास ले आता है

केशव यह नजारा देख कर और भी उत्तेजित हो रहा था मनो उसे भी अब लगने लगा था की इस घर में उसकी बीवी की औक़ात सिर्फ एक वास्तु की है जिसे आज उसका छोटा भाई इस्तेमाल करने वाला है और न जाने क्यों अब अपनी बीवी की यह हालत देखने में उसे भी मजा आ रहा था ....
 
अपडेट -238

रवि की इस हरकत को देख कर झा रेखा के होठो पर मुस्कान थी तो वही मल्टी को समझ नहीं आ रहा था की अचानक से रवि को क्या हो गया

रवि अपने लुंड को मल्टी के गलो पर रगड़ता हुआ उसके रसीले और गीले होठो पर रगड़ने लगा

अपने देवर के लुंड की गर्माहट को महसूस करते hi मल्टी के होठ खुद बा खुद hi खुलने लगे और अपने देवर को अपने गीले और गरम मुँह में आने का न्योता देने लगे

रवि एक जोरदार झटके के साथ अपना पूरा का पूरा लुंड भाभी मल्टी के मुँह में पेल देता है

इस झटके के साथ hi मल्टी का मुँह खुद बा खुद hi खुलने लगता है और रवि का विकराल लुंड बिना किसी तकलीफ के पूरा का पूरा अपनी भाभी की गर्दन तक्क उतर जाता है

मल्टी की आँखों से ासु आ चुके थे

पर मनो किसी को कोई डम्फरक hi न पड़ रहा हो

केशव की एक नजर अपनी बीवी पर hi थी वो देख रहा था की कैसे उसके छोटे भाई ने उसकी hi बीवी को दिवार के शेयर टिका रखा है और दे डीएनए दान उसकी मुहचुड़ै कर रहा है

अच्चानक से रेखा पलट कर केशव के पायजामे को उतर देती है और उसके लुंड को पूरी तरह अपने मुँह में भर्र्ती हुई चूसना शुरू कर देती है

रेखा - अहह भैय्या कितनी मस्त छत्त रहे हो आप मेरी छूट अह्ह्ह बहीय्या ऐसे hi और अंदर घुसाओ अपनी जीभह अह्हह्ह्ह्ह

इधर दूसरी तरफ अपनी भाभी के मुँह को ताबड़तोड़ छोड़ने के बाद रवि अपने गीले लुंड को बहार खींच लेता है

मल्टी की हालत तो ऐसे hi खराब हो चुकी थी

अभी वो संभल पति उससे पहले रवि उसे पकड़ कर घुमा देता है और अपने भाई की और उसकी गांड करता हुआ उसे घोड़ी बना देता है

केशव एक पल के लिए ृक्क जाता है और अपनी बीवी के कहके हुए छेड़ो को गौर से देखने लगता है जो उसे काफी बड़े लग रहे थे

रवि अपने भाई की और देखता हुआ अपनी पोजीशन लेता है और भाभी के पीछे आता हुआ अपने लुंड को मालस्ता हुआ सीधा मल्टी की गांड के छेद पर रख देता है

अपने छोटे भाई की इस हरकत को देख सेहम सा जाता है वो खुले मुँह के साथ अपनी बीवी की गांड को hi देख रहा था जिसके ऊपर इस समय उसके छोटे भाई लुंड सेट हुआ पड़ा था जो किसी भी समय झटके के साथ अंदर घुसने को बाइकें था

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केशव की आँखों के सामने उसके छोटे भाई का लुंड पूरा का पूरा उसकी बीवी की गांड के अंदर गायब हो चूका था

यह नजारा देख कर केशव मनो और भी जोश में आ जाता है और अपना मुँह रेखा के भोसड़े पर रखता हुआ उसे दबरदस्त तरिके से चूसने लगता है

थोड़ी से hi और मुहचुड़ै के बाद केशव अपना सारा वीर्य अपनी चिति बेहेन के रसीले मुँह में गिरा देता है

रेखा आखिरी बून्द तक्क पी जाती है और जैसे hi पलट कर पीछे चल रहा क्रायक्रम देखती है उसकी हसी निकल जाती है

केशव कबुई अपनी बेहेन की और देखता तो कभी अपने भाई और बीवी की चुदाई देखता

केशव - क्या हुआ रेखा हस्स क्यों रही है

रेखा - अरे भैय्या एक हम दोनों है की मुँह चूसै में hi झाड़ गए और उधर उस गधे को देखो कैसे तुम्हारी बीवी का मुँह छोड़ने के बाद अब उस बेचारी की गांड छोड़ रहा है

केशव - अब खा की बेचारी है ये अब तो गधे जैसे लुंड से अपने सरे छेद छुड़वाने लगी है अब खा की बेचारी

मल्टी - अह्ह्ह्ह रवि आरममम से छोड़ देख तेरे भैय्या क्या कह रहे है मुझे

रवि- चुप साली मादरचोद रंडी ठीक hi तो कह रहे है भैय्या तू खा बेचारी है तू तो साली एक नंबर की चिन्नार है जिस दिन से आयी है उस दिन से hi हमारे घर को तोड़ने में लगी हुई है और तू साली खुद को सटी सावित्री समझती है रद्द

रेखा - भैय्या देखा रवि भले hi उसे छोड़ रहा है पर बाटे तो अपने घर वाली hi कर रहा है

केशव - मुझे पता है रेखा हमारा भाई हमारा अपना खून है वो कभी हमे धोका नहीं दे सकता मुझे पता है उस बच्चे पर इसी रंडी ने कोई जादू किया होगा जो आअज वो उसकी गांड छोड़ रहा है

रवि- आज तुझे ऐसा छोडूंगा ऐसा छोडूंगा की कभी मेरा नाम सुन्न कर भी तेरी छूट और गांड पानी टपकने लगेगी

रवि एक के बाद एक जोरदार झटको से मल्टी की गांड छोड़ रहा था और इधर दूसरी तरफ रेखा अपने भाई की छाती पर सर रखे उसके hi साथ देवर भाभी की ी चुदाई देख रही थी और उसका हाथ लगातार अपने बड़े भाई के मुर्झाहये हुए लुंड को खड़ा करने की कोशिश कर रहा था

केशव भी खा पीछे रहने वाला था उसका एक हाथ रेखा के एक निप्पल को मरोड़ने में लगा हुआ था

रवि एक झटके से अपना लुंड निकल लेता है और मल्टी की गांड को फैलता हुआ अपने भाई और दीदी को दिखता है और दुबारा से पूरा का पूरा लुंड एक झटके में गांड में थुश देता है

मल्टी की चीखे पुरे कमरे में बड़े hi मादक अंदाज में गूंज रही थी

इधर दूसरी और केशव का लुंड अब दुबारा से खड़ा हो चूका था

रेखा - भैय्या अब इस साली को आप भी छोड़ो हुए मंर बना दो इसे हमारे घर की रंडी

रेखा की बाटे सुनते hi रवि हरकत में आता है और खुद लेटता हुआ अपने भाभी को अपने ऊपर लिटाता हुआ उसकी छूट में लुंड पेल देता है

केशव - सही खा तूने इसे इसकी औक़ात दिखानी पड़ेगी

केशव तुरनत उठ कर सीधा मल्टी की गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मरता है मल्टी दर्द से बिलख उठती है

रवि निचे से अपना काम जारी रखता है

इधर केशव अपना लहबड़ मल्टी की गांड पर रखता हुआ अंदर की और दबाता है और पक्क्क से उसका लुंड पूरा का पूरा मल्टी की गांड में चला जाता है

निचे से देवर और ऊपर से पति

एक साथ दो दो लुब्द पाकर मल्टी धन्य हो गयी थी उसके मजे की कोई सीमा नहीं थी

इधर दूर बैठी रेखा को भी अब कहि न कहि इच्छा जग चुकी थी की इसके दोनों भाई एक साथ उसके दोनों छेड़ो को भी चोदे ताकि वो😘 भी अपनी जिंदगी में इस पल को जी कर देख सके

फ़िलहाल तो बरी मल्टी की थी

दोनों भाई लगातार उस औरत को चोदे जा रहे थे जो एक की भाभी और दूसरे की बीवी थी

इस सब में मल्टी की हालत मनो उस सैंडविच वाली हो गयी थी

दोनों भाई पसीने से तर बतर हो चुके थे और दोनों का hi पसीना मल्टी के नंगे जिस्म को और भी मादक बना रहता

करीब 10 मिंट तक्क ऐसे hi छोड़ने के बाद केशव अपना पानी मल्टी की गांड में निकल देता है और कुछ hi पल में रवि भी अपना वीर्य उसकी छूट में निकल देता है

रवि अभी खड़ा hi हुआ था की रखा उसके सामने घोड़ी बन जाती है

रवि एक नजर अपने भैय्या को देखता है जो रेखा की और hi देख रहा था

रवि एक दम से टूट पड़ता है और अपनी रेखा दीदी की छूट और गांड को खा जाने वाले अंदाज में चूसने लगता है

रेखा केशव को अपने करीब बुलाती है और उसका मुरझाया हुआ लुंड चूसना शुरू कर देती है

इस बिच मल्टी जमीन पर बेजान सी पड़ी हाफ रही थी

इधर केशव का लुंड चूसते हुए रेखा जमीन पर बैठ जाती है रवि भी अपना खड़ा होता लुंड अपनी दीदीकेँ चेहरे के आगे लेकर खड़ा हो जाता है

रेखा भैय्या के लुंड को मुँह से निकल कर छोटे भाई का नंबर लगती है

जैसे hi रेखा रवि के सुपडे को अंदर लेती है रवि का हाथ खुद बा खुद hi अपनी दीदी के सर के पीछे चला जाता है

रवि- केशव भैय्या एक जादू दिखाऊ

केशव - दिखा भाई क्या जादू दिखायेगा

रवि अपने लुंड का टप्पा रेखा के मुँह से बहार निकलता है और सिर्फ हल्का सा उसे अपनी दीदी के होठो के बिछे फसा देता है और अपने दोनों हाथो से रेखा के सर को पीछे से पकड़ लेता है

केशव अब तक अपने छोटे भाई का जादू नहीं समझ पाया था पर वो उसका गधे जैसा 10" का लुंड देख कर जरूर सेहम सा गया था

अगले hi पल रे रवि एक जोरदार झटकी के साथ अपना पूरा का पूरा लुब्द रेखा के मुँह में उतर देता है

झटका इतना जोरदार था की रखा का रोवा रोवा कराहः उठता है

रवि लगातार झटके के साथ रेखा दीदी का मुँह छोड़ना शुरू कर देता है

करीब 5 मिंट रवि अपना लुंड बहार निकल कर रेखा दीदी के बालो को पकड़ते हुए उसका चेहरा केशव भैय्या की एयर करदेता है

मनो केशव अब हर पल अपने भाई बेहेन से इस गंदे खेल के नियम सिखने में लगा था

केशव द्र सेहमा सा अपनी बेहेन का सर वैसे hi पकड़ लेता है जैसे की थोड़ी देर पहले उसके छोटे भाई ने पकड़ा था

और अपने लुंड को रेखा के गीले होठो पर रखता हुआ अपनी बेहेन की आँखों में देखता है जो की उसे देखती हुई अपना मुँह खोल देती है मनो वो बोल रही हो कोदो भैय्या मेरा मुह्ह छोड़ो

केशव भी अपने छोटे भाई के नखसो कदम पर चलता हुआ अपनी बेहेन का मुँह छोड़ने लगता है

कुछ hi देर में केशव का लुंड पूरा खड़ा हो चूका था

रेखा देर न करते हुए केशव को लिटा कर उसका लुंड अपनी छूट में घुसा लेती है और पीछे से अपना गांड को छेद दिखा कर अपने चीते भाई को ललचाती हुई अपने पास बुलाती है

रवि समझ चूका था की आज उसकी दीदी का भी मन है एक साथ 2-2. लुंड लेने का

आगे बढ़ता हुआ रवि अपनी दीदी के छेद को चूमता हुआ अपना लुंड उसपर टिका कर अंदर की और पेलने लगता है

कुछ hi देर में उसका पूरा का पूरा लुंड रेखा की गांड में फिट हो जाता है

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दोनों भाई पूरी ताक़त से अपनी बेहेन को छोड़ने में लगे हुए थे केशव का लुंड छोटा भले hi था पर 2 बार झड़ने के बाद तो वो भी पत्थर सा मजबूत हो चला था

रेखा - अहह भैय्या इतना मजा तो खभी नहीं आया मुझे कितनी भाग्यशाली हु मन जो मेरे दोनों छेड़ो में एक साथ मेरे hi दोनों भाइयो का लहंद घुस क्र मुझे छोड़ रहा ही आह्ह्ह्हह मैं करता है हमेशा अपने भाइयो का लुंड अपनी छूट और गांड में hi घुसाए राखु

केशव - तू चिंता क्यों करती है बहना तेरे दोनों भाई अब हमेशा तेरी ऐसे hi सेवा करेंगे

रवि जठ कर रेखा दीदी को खड़े होने को कहता है और उसे अपनी गॉड में तंग कर उसकी छूट छोड़ने लगता है और अपने दोनों हाथो को पीछे ले जाता हुआ रेखा दीदी की गांड फैला कर अपने भाई को दिखता है जिसे दकह आकर केशव चरणान्त hi रेखा के पीछे आ जाता है और बेहेन से चिपकता हुआ अपना लुंड उसकी गांड में पेल देता है

रात भर दोनों भाई कभी मल्टी तो कभी रेखा को छोड़ते रहे

अगले दिन सब जल्दी उठ कर तैयार हो गए थे

रेखा आज बिना किसी शर्म लाज के अपने दोनों भाइयो से चिपका रही थी मल्टी भी अब खुस थी भले hi उसे इस घर की रंडी बन कर रहना पड़े पर पति का साथ अब उसे वापस मिल चुका था

आज खास बात यह थी की कम्मो को देखने के लिए लड़के वाले आने वाले थे जो आये और शादी पक्की कर के चले भी गए मोहरत निकला 5 दिन बाद का .....
 
अपडेट -239

कम्मो की शादी तय हो चुकी थी

इस बिच दोनों भाई रोज रात भर मल्टी और रेखा की चुदाई करते

कम्मो रोज रवि को खाना देने जाती और दिन भर अपने छोटे भाई से खेतो पर चुदवाती

अब तक्क बुआ को भी शक़्क़क़ हो चूका था की जरूर कुछ न कुछ तो गड़बड़ है इस घर में

एक रोज की घटना है

शादी को करीब 2 दिन बचे थे केशव तो रोज सेहर हे जा रहा था कभी कुछ सामान लाना होता तो कभी कुछ

रेखा और मल्टी गाओं की औरतो को न्योता देने गयी हुई थी

तभी बुआ के कानो में कुछ आवाज आती है और बुआ उस आवाज का पीछा करती हुई कमरे के करीब पहुंच जाती है

काममो - अह्ह्ह रवि कैसे रहूंगी में तेरे बिना भैय्या जबरदस्ती मेरी शादी करवा रहे है

रवि- दीदी रह तो में भी नहीं पाऊंगा पर क्या क्रू कुछ कर भी तो नहीं सकता

काममो - अह्ह्ह तेरा क्या है कमीने तू तो रोज रात को भैय्या के साथ मिल कर भाभी और दीदी को छोड़ रहा है

कममक की बात सुनकर बुआ का मुँह खुला का कुल रह जाता है

उसे समझ hi नहीं आ रहा था कैसे 2 भाई मिल कर अपनी hi बीवी और बेहेन को एक साथ छोड़ सकते है

रवि- क्या कृ दीदी ये लुंड चीज़ hi ऐसी है एक बार खड़ा होने के बाद सिर्फ छूट या गांड hi इसे बैठा सकती है

और तुम्हारे छेड़ो का तो कोई जवाब hi नहीं है

मेरा तो मंत्र करता है की दिन भर तुम्हारी गांड में लुंड डेल पड़ा रहु

कम्मो - मन तो मेरा भी करता है भाई पर क्या करू रात को तो तू भैय्या के साथ उनकी बीवी को छोड़ता है और में बुआ के साथ बहार चली जाती हु

रवि- तो तुम्हारा मंत्र क्या करता है दीदी

काममो - मेरा तो मैं करता है की रात भर तुझसे अपनी छूट और गांड छुड़वाओ

Ravi-accha रात भर और कहि बुआ उठ गयी तो

कम्मो - उठ गयी तो छोड़ दियो बुआ को भी वो भी तो औरत hi है और तेरा लुंड अगर एक बार बुआ ने देख लिया तो सच कह रही हु खुद hi तेरे सामने वो टंगे खोल देगी

रवि - दीदी पर बुआ तो अंधी है ना कैसे देखेगी वो अपने भतीजे का लुंड

दोनों भाई बेहेन हसने लगते है

कम्मो - तो क्या तुझे बुआ को भी छोड़ना है

रवि- दीदी एक नयो छूट मिले तो कौन मनाए करेगा

कम्मो - तो ठीक है आज की रात में तेरा काम बनवा दूंगी पर बदले में तू मुझे क्या देगा

रवि- जो आप बोलो

कम्मो - ठीक है तो सुन्न शादी के बाद थोड़े थोड़े दिनों के लिए तू मेरे घर आ जाया करना वैसे भी तेरे जीजा दिल्ली में काम करते है मुझे लगता है वो शादी के बाद फिर चले जायेंगे और रही बात मेरी बिद्धि सास की तो अगर उससे कोई दिक्कत हुई तो उसे भी छोड़ देना साली को

रवि- सच में दीदी हो तो तुम्हारे जैसी

काममो - तेरे जैसा भाई हो तो मेरी जैसी दीदी बनना hi पड़ेगा मेरे छोड़ू भाई कमीना आगे से भी पेलता है और पीछे से भी

रवि- ठीक है दीदी तो तैय रहा आप मेरा काम बनवाओ और में आपके छेड़ो को जिंदगी भर खुला hi रखूंगा

कम्मो - वो तो ठीक है पर अभी मेरी गांड मरने पररर ध्यान दे अहह और हां अब तो तू मेरे अंदर अपना बीज भी गिराए सकता है में कहती हु की मेरे पहले बच्चे का बाप मेरा छोटा भाई hi बनी

अंदर चल रही बातो को सुनकर बुआ की छूट पनो पानी हो गयी थी अब उसे भी अपने छोटे भतीजे के लुंड का स्वाद चखना था

कुछ देर और चुदाई के बाद रवि अपना पानी कम्मो की छूट में गिरा देता है

बुआ भी बहार आ कर बैठ जाती है

कुछ देर बाद कम्मो और रवि भी बाजार आते है

कम्मो - बुआ आज रवि भी हम दोनों के साथ सोयेगा

कम्मो की बाटे सुनकर बुआ अंदर hi अंदर खुश थी

बुआ- ठीक है बेटी इसमें क्या है

तभी मल्टी और रेखा भी घर आ जाते है

काममो - रेखा दीदी आज रात रवि मेरे और बुआ के साथ सोयेगा

रेखा - अच्छा ऐसा क्या खास होने वाला है आज की रात

रेखा और मल्टी दोनों हसने लगती है

काममो - दीदी आप कुछ भी बोलो आज रात रवि मेरे साथ hi सोयेगा

इतना बोलती हुई कम्मो मुँह पहला कर कमरे में चली जाती है

रेखा - देखा भाभी भाई बेहेन का प्यार 2 दिन बचे है शादी को पर दोनों एक दूसरे से अलग होने को राजी नहीं है

मल्टी - हार रात देखती हु ये भाई बेहेन का प्यार

वही बुआ भी बैठी थी पर इन दोनों रंडियो को कोई फरक नहीं पड़ता वो दोनों खुल कर बाटे कर कर के हस्स रही थी

बुआ- ऐसा क्या है इसके लुंड में जो इसको दोनों बहने hi इसके पीछे पड़ी है

ये तो रवि का लुंड अंदर लेने के बाद hi पता चलेगा .....
 
अपडेट -240

रात के खाने के बाद कम्मो रवि का हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ बहार ले जाती है

केशव - अरे इसे क्या हुआ

रेखा - अरे भैय्या 2 दिन बाद शादी है न उसकी इसी लिए वो अब अपना सारा समय अपने छोटे भाई के साथ बिताना कहती है

केशव - अच्छा मतलब आज की रात मुझे hi बड़ा संभालना पड़ेगा

मल्टी - अरे वो तो आप रोज hi संभालते है

केशव - चलो कोई बात नहीं पर बुआ खा सोयेंगी आज

बुआ पास में hi बैठी थी वो झट से बोल पड़ती है

बुआ- अरे में खा सोऊंगी मतलब

रोज झा सोती हु वही सोऊंगी

केशव - अरे बुआ मेरा मतलब कहि 3-3 लोगो को दिक्कत न हो इसी लिए कह रहा था

बुआ- नहीं हमे कोई दिक्कत नहीं होगी

रेखा धीरे से केशव के कान में बोलती है

रेखा - भैय्या लगता है आज की रात बुआ भी हमारे छोटे भाई के निचे आने वाली है

केशव रेखा की बात सुनकर हस्ता हुआ उन्हें खुद hi बाजार लेजाकर कम्मो के पास छोड़ आता है

केशव को सब पता था उसे पता था की उसकी पीठ पीछे रवि अपनों तीनो दीदियो को छोड़ चूका है पर न जाने क्यों उसे सिर्फ अपनी एक hi बेहेन में इंट्रेस्ट था जो थी रेखा उसके अलावा उसने न तो कभी कम्मो के विषय में गलत सोचा और न hi मेघा दीदी के बारे में

कम्मो पहले hi तीन लोगो का बिस्तर लगा चुकी थी

रवि बिच में और बुआ और कम्मो उस्ले आजु बाजु सोये हुए थे

काफी देर तक दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के ाँगो को सहलाते है

रवि काफी देर तक अपनी दीदी की छूट में ऊँगली करता रहता है जिससे की निचे का बिस्तर तक भीग चूका था

पाछह पाछह की आवाज सुनकर बुआ भी समझ चुकी थी की अब इन दोनों भाई बेहेन का खेल शुरू हो चूका है

जानकी बुआ की सांसे अब भरी होने लगी थी वो भले hi देख न सकती हो पर समझ चुकी थी की उसके hi बगल में लेते उसके भतीजा और भतीजी कामुक खेल खेल रहे है

काफी देर तक दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के मुँह को चूसते रहे

रवि तो मनो कम्मो के होठो को चबाने में इतना मसगुल था की आधे घंटे तक उसने अपने मुँह को कम्मो के मुँह से अलग नहीं किया

आलम ये था की कम्मो का चेहरा पूरी तरह थूक से लटपट था

पर इन सब चीज़ो के बौजूव दोनों भाई बेहेन एक दूसरे के मुँह में मुँह घुसाए एक दूसरे का मुँह चीस रहे था

इधर जानकी बुआ की छूट से पानी का फवारा छूटना शुरू हो चूका था

बगल में चल रही उथल पुथल से जानकी की सांसे भी अब तक उखड़ना शुरू हो चुकी थी

वो खुद के hi शरीर के साथ खेलना शुरू कर चुकी थी

बुआ का एक हाथ ब्लाउज के ऊपर से hi अपने निप्पल को मसल रहा था

इधर कम्मो से अब और बर्दास्त कर पाना मुश्किल था छूट का हल तो उसकी भी बुरा था ऊपर से उसके छोटे भाई का लोगे जैसा सख्त लुंड बार बार उसकी जांघो से रगड़ खा रहा था

मनो इस प्रकिरिया से कम्मो के तन बदन में एक चिंगारी भड़का रही थी जिसे अब सिर्फ उसका छोटा भाई hi शांत कर सकता था

कम्मो बिना देर किये रवि को धकेल देती है

शायद ये जरूरी भी था नहीं तो आज रात भर रवि अपनी दीदी का रसीला मुँह चूसने में hi गुजार देता

दोनों भाई बेहेन हफ्ते हुए एक दूसरे की हवस भरी आँखों में देख रहे थे

कम्मो फटाफट अपना ब्लाउज और पेटीकोट उतर पूरी नंगी हो जाती है और एक झटके के साथ अपने छोटे भाई की धोती को भी खोल देती है जिससे की उसका फनफनाता हुआ लुंड उसकी आँखों के सामने आ जाता है

रवि कम्मो का हाथ पकड़ कर उसे अपनी और खींचता है

रवि के इस हले से कम्मो सुधा उसके ऊपर आ जयति है और उसकी दोनों गदरायी जांघो के बिच रवि का लुंड गायब सा हो जाता है

दोनों बुआ से बिलकुल चिपके हुए थे जिसकी वजह से दोनों भाई बेहेन की बेसब्री को बुआ भी भाप चुकी थी

इधर रवि अब तक दुबारा से अपनी दीदी के मुँह के अंदर जीभ घुसा कर अपनी दीदी की जीभ से खेलना शुरू कर चूका था

दोनों एक दम पागल हो चुके थे मनो बगल में कोई और भी है इसकी उन्हें कोई परवाह hi नहीं थी

करीब 5 मिंट बाद कम्मो खुद hi जबरदस्ती करती हुई अपने भाई के चंगुल से आजाद हो जाती है

रवि- दीदी

रवि इतबा hi बोलता गई और तुरंत hi अपनी दीदी को कमर को पकड़ कर अपने मुँह के ऊपर खींच लेता है

कम्मो - अह्ह्ह्हह भईई

कम्मो की छूट के अंदर उसके भाई की जीभ थी

जो अंदर से छूट का पानी खींच खींच कर रवि के मुँह में पहुंचा रही थी

कम्मो बुरी तरह से कसमसा रही थी मनो उसे भी कुछ चाहिए था

काममो भी तुरंत एक्शन में आती है और अपने छोटे भाई के मुँह पर बैठे बैठे hi घूम जाती है

और अगले hi पल झुकती हुई अपने भाई के लुंड को किसी लोल्लिपोप की तरह चाटने और चूसने लगती है

अपनी दीदी की इस हरकत से रवि के बदन में एक अजीब सा झटका लगता है

रवि अपनी कमर को निचे से उठा कर अपने लुंड को और अंदर तक्क डालने का पर्याड करता है

कम्मो भी अपने छोटे भाई की इच्छा को पूरा करती हुई अपना पूरा मुँह खोल देती है और अब रवि का आधे से ज्यादा लुंड कम्मो के मुँह में था

जिसे वो खुद hi अपनी कमर उठा उठा कर छोड़ना चालू कर चूका था

खत अब बुरी तरह से चर्रर्र चर्रर्र कर रही थी

इधर बुआ इसी इन्तजार में थी की कब दोनों अपना अपना पानी निकल कर शांत हो जाये और अपनी कहि बात के मुताबिक कममक बुआ को रवि से छुड़वाए

क्योंकि पिछले 2 घंटे से चल रहे कामुक खेल से जानकी को पता चल चूका था की उस्ले छोटे भतीजे के हथियार के साथ साथ वो लम्बी रेस का घोडा भी है जिसकी सवारी करने में एक अलग hi मजा आयेगा

रवि अपने दोनों हाथो से कम्मो की गांड को फैलता हुआ कभी अपना मुँह अपनी दीदी की गांड के छेद पर रख देता तो कभी उसकी फटी हुई छूट के लाटपके बड़े बड़े होठो को अपने मुँह में भर कर चूसने लगता तो कभी उन्हें अपने दातो से चबाने लगता

जिससे की कम्मो कसमसा जाती और अपने भाई के चल रहे निरंतर हमलो का जवाब खुद का मुँह उसके लुंड पर दबती हुई देती है

दोनों के जिस्म में मनो खून बिजली की रफ़्तार से दौड़ रहा था जिस वजह से दोनों के दोनों कुछ hi देर में एक दूसरे के मुँह के अंदर hi अपना अपना माल गिरा देते है जिसकी एक बून्द भी कोई जाया नहीं जाने देता.....
 
भाई में आपकी बात से बिलकुल सहमत हु और

अपनी खुद की कहानी शुरू करने से पहले तक मेरा भी यही मानना था की वरिटेरस को डेली उपदटेस देने चाहिए ताकि रीडर्स को कहानी का पूरा मजा मिले

पर क्या करे हर राइटर एक जैसा नहीं होता

कैसे कैसे तो समय मिल पता है

आपको पता है एक अपडेट लिखने के लिए कितना कुछ सोचना पड़ता है

ऐसा नहीं होता की जब 5 मिंट मिले तो फ़ोन निकला और कहानी टाइप कर दी

ऐसा नहीं होता

मेरा यकीन मानिये अगर वरिटेरस ठन्डे दिमाग से कहानी न लिखे तो आपलोगो को पढ़ने में ढेले भर का मजा नहीं आएगा

उम्मीद करता हु आप सब मेरी बात से सहमत रहे

धन्यवाद....
 
अपडेट -241

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे को अपने जिस्म से निकला अमृत पीला चुके थे और लाफ़ी देर तक्क उसी अवस्था में एक दूसरे के ऊपर लेते रहे

इधर जानकी बुआ की बेचैनी बढ़ती hi जा रही थी उसे अब इन्तजार था तो बस अपनी बरी का

कम्मो रवि के ऊपर से उतर कर दुबारा से उसके बाजु में लेट जाती है

उसकी नजर जानकी बुआ पर पड़ती है और अपनी बुआ की हरकत को देख कर उसके चेहरे पर मंद मंद मुस्कान चा जाती है

असाल में बुआ का एक हाथ तो अब भी उसके निप्पल को मरोड़े रहा था पर दूसरा हाथ अब पेटीकोट के ऊपर से hi अपनी छूट को सेहला रहा था जिसकी वजह से बुआ का पेटीकोट भी बुरी तरह गिला हो चूका था

कम्मो रवि को हिलती हुई बुआ की और इशारा करती है दोनों भाई बेहेन मुस्कुराते हुए बुआ की काम क्रीड़ा देखने लगते है

बुआ का जोश अब बढ़ता hi जा रहा था वो चरमसुख से बस थोड़ा hi दूर थी उसे भनक भी नहीं थी की उसके भतीजा भतीजी उसे hi देख रहे है

आख़िरकार बुआ का शरीर अकडने लगा और कुछ hi पल के बाद बुआ ने भी अपना सारा पानी वही निकल दिया और अपना मुँह खोले लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी

कम्मो - रवि तेरा हो गया क्या

कम्मो की आवाज सुनते hi बुआ के हाथ पॉ ठन्डे पद जाते है वो तुरंत hi ऐसा दिखती है मनो वो सो गयी हो

रवि भी अपनी दीदी की आँखों में देख कर जवाब देता है

रवि- अभी खा दीदी अभी तो पूरी रात बाकि है

काममो - अच्छा तो तू क्या रात भर मुझसे यही सब करवाएगा

रवि- यही सब क्या दीदी

कम्मो और रवि दोनों hi अब बुआ के सामने बेशर्मी दिखाना कहते थे वो दोनों hi कहते थे की बुआ खुद hi उठ कर उनसे इस खेल में शामिल होने की विनती करे

जिसके लिए उन्हें पहले माहौल में बेशर्मी फैलानी होगी

कम्मो- यही सब मतलब तू की रात भर मेरे मुँह में अपना लुंड घुसा कर मेरा मुह्ह छोड़ेगा

रवि- क्या कृ दीदी तुम्हारा मुँह तो तुम्हारी बुरर्र से भी ज्यादा मजा देता है

कम्मो- है राममम तू क्या मेरे मुँह को मेरी बुरर्र समझ कर छोड़ रहा था अहह कितना दुःख रहा है

रवि- दीदी मजा तो दर्द में भी है और वैसे तुम भी तो अपनी बुर्र मेरे मुँह पर ऐसे दबा रही थी मनो मेरा पूरा सर hi अंदर लेलेगी

कम्मो- तूने छोड़ छोड़ कर मेरी बुरर्र को इतना फैला दिया है की अब तो लगता है हठी का लुंड भी एक बार में निगल जाएगी ये कलमुही

रवि- कुछ भी हो दीदी पर तुम्हारे तीनो छेड़ो का मजा hi अलग है सब एक से बढ़ कर एक है

जानकी बुआ जिसका पानी अभी कुछ देर पहले hi निकला था इन दोनों भाई बेहेन की बात सुनकर वो अब दुबारा से गरम होने लगी थी

जिसकी गवाही उसकी भरी होती सबसे दे रही थी

कम्मो- अच्छा तो ये बात है अच्छा भाई ये तो बता तुझे मेरा कोनसा छेद सबसे ज्यादा पसंद है

रवि- मुझे तो सरे छेद पसंद है दीदी

तुम्हारे इस रसीले मुँह की मिठास और बुरर्र से निकलता झरना और गांड तुम्हारी गांड का तो क्या hi कहना दीदी

कम्मो- फिर भी बता तो तुझे तेरी दीदी का कोनसा छेद सबसे ज्यादा पसंद है

रवि- तुम्हारी मदमस्त गांड दीदी मुझे सबसे ज्यादा एही पसंद है और शायद वही एक चीज़ ऐसी है जिसे देखने के बाद मेरी नियत खराब हुई और मैंने कैसे कैसे करके तुम्हे पटाया

कम्मो- हम्म्म पहले दीदी को पटाया और फिर दीदी की गांड मार ली

दोनों भाई बेहेन खूब मजे ले लेकर बात कर रहे थे

इधर उनकी बातो का असर अब सीधा सीधा जानकी बुआ की छूट पर होने लगा था उसे अब बस यही इन्तजार था की कब उसका छोटा भतीजा उस्ले तीनो छेड़ो को छोड़ेगा

कम्मो- अच्छा चल ये भी बता दे की तुझे किसके साथ ज्यादा मजा आता है मेरे साथ या रेखा दीदी के साथ

रवि- दीदी ये भी कोई पूछने वाली बात है मेरी तो तीनो बहने hi एक से बढ़ कर एक है

पर सच खु तो आपको छोड़ने में जितना मजा आया उतना कभी न तो रेखा दीदी को छोड़ने में आया और न hi मेघा दीदी को

रवि की बात सुनकर जानकी का कलेजा मुँह को आ जाता है वो सोच भी नहीं सकती थी की कैसे रवि ने अपनी hi तीनो दीदियो को पता कर छोड़ दिया

कम्मो और रेखा का तो तब भी समझ सकती थी पर मेघा उस्ले बारे में कभी उसने ऐसा सोचा भी नहीं था

रवि- और दीदी एक खास बात ये भी है की जिस दिन मैंने आपको और रेखा दीदी को एक साथ छोड़ा था वो दिन मेरी जिंदगी का सबसे खास दिन था और शायद hi लाबी ऐसा दिन मेरी जिंदगी में वापस आएगा

कम्मो- अरे बुद्धू तुझे तो जिंदगी भर ये सुख मिलने वाला है और अब तो वैसे भी मेरी कोख में तेरा बीज पड़ चूका है

रवि- दीदी धीरे बोलो बगल में hi बुआ सोई है कहि उन्होंने सुन्न लिया तो गजब हो जायेगा

कम्मो- अरे इसमें बुआ क्या करेंगी वो तो मेरा सोभाग्या है जो में अपने hi भाई के बच्चे की माँ बनूँगी

रवि- फिर भी दीदी अगर किसी को पता लग गया तो

कम्मो- अरे तू बस मेरी शादी हो जाने दे में तो अपने पति को पहली रात hi बता दूंगी की में अपने छोटे भाई के लुंड की दीवानी हु और रोज रात मुझे अपने भाई का लुंड अपनी गांड और छूट में घुसाए बिना नींद नहीं आती

रवि- अरे दीदी ऐसा न करना

कहि जीजाजी ने आपको घर से निकल दिया तो

कम्मो- में तो खुद यही कहती हु मेरे छोड़ू भाई की तेरा जीजा मुझे निकल दे और फिर में जिंदगी भर यही तेरे साथ रहु

तुझे पता है शादी तो बस नाम की है ताकि बच्चा होने के बाद कोई भी मुझ पर या तुझ पर ऊँगली न उठा सखे

रवि- बड़ा तगड़ा दिमाग लगाया है दीदी आपने तो

कम्मो- अरे मेरा बस चले तो उस चूतिये के सामने hi तुझे छुड़वाओ

रवि- अब ये तो शादी के बाद hi पता चलेगा दीदी

कम्मो- चल अब बात ज्यादा मत कररर और आजा मेरी छूट या गांड में अपना लुंड घुसा और पूरी बेरहमी के साथ मुझे छोड़ वैसे भी 2 दिन hi है हमारे पास फिर न जाने कब समय मिलेगा तू तो रोज रेखा दीदी और मल्टी भाभी को छोड़ कर अपना लुंड शांत कर लेगा पता नहीं तेरा जीजा में कितनी जान है

रवि अपनी दीदी के गीले होठो का रसपान करना चालू कर देता है और बार बार पानी कोहनी को बुआ की चुकी पर चुवाता हुआ रगड़ देता है जिससे कामाग्नि में जल रही जानकी और भी ज्यादा तड़पने लगती है ....
 
अपडेट -242

रवि अपनी दीदी के गीले होठो को चुस्त हुआ बार बार अपनी कोहनी को जानबूझ कर जानकी बुआ की चूचियों पर रगड़ रहा था

जिससे जानकी अब और भी छुडासी हो चुकी थी उसे तो अब मन कर रहा था की अभी उठ कर अपने भतीजे का लौड़ा पकड़ ले

पर कहते है न रिश्ते जब तक मर्यादा में रहते है पर्दा तब तक का hi होता है एक बार जो मर्यादा टूटी तो फिर ये रिश्तो की डोर भी हाथो से फिसलने लगती है

यही सब अब जानकी के साथ भी हो रहा था

खा वो सोच कर आयी थी की बुढ़ापे के बचे कुछ दिन अपने भाई के बच्चो के साथ कटेगी

पर यह तो उसका स्वागत hi लुंड से हुआ था

कम्मो रवि को एक दम से पलट कर खुद उसके ऊपर आ जाती है मनो वो कोई जंगली बिल्ली बेम गयी हो

और अपने भाई के लुंड को अपनी भरी गांड के निचे दबती हुई उस पर बैठ जाती है

लुंड अब भी बहार hi था पर अपनी दीदी की छूट के फैले हुए होठो के निचे दबा हुआ था

छूट तो पहले से hi चिचिपै हुए थी जिसका पूरा फायदा कम्मो उठा रही थी

कम्मो रवि के लुंड को अपनी बुरर्र के निचे दबती hi लगयार आगे पीछे हो रही थी जिससे की दोनों hi भाई बेहेन को चुदाई से भी ाधभट्ट मजा मिल रहा था

इधर बुआ की हालत अब्ब खराब से भी खराब हो चुकी थी उसक्का हाथ अब उसकी छूट को रगड़ता हुआ अपना पेटीकोट को ऊपर खींच रहा था और कुछ hi पल में बुआ का पेटीकोट पूरी तरह से उसकी कमर तक्क पहुंच जाता है

अब जानकी भी बेपरवाह हो चली थी वो भी अपने भतीजा भतीजी की कामुक आवाजे सुनकर अपनी नंगी छूट को पागलो की तरह मसल रही थी

कम्मो - अरे रवि देख तो जरा

रवि अपनी गर्दन उठा कर अपनी बुआ की और देखता है जिसका हाथ तो अब भी छूट पर था पर कम्मो की आवाज सुनकर वो उसे सहलाना बंद कर चुकी थी

रवि- दीदी लगता है हम दोनों भाई बेहेन का ये खेल देख कर बुआ की छूट भी पानी पानी हुई जा रही है

कम्मो- अच्छा ये बात है तो बुआ को खुद hi कहना चाहिए न तेरे पास तो इस पानी पानी हुई बुरर्र का इलाज भी है

रवि- तो क्या दीदी में बुआ को भी छोड़ सकता हु

तभी बुआ उठ कर बैठ जाती है

बुआ - क्यों रे हरामी जब तू अपनी तीनो दीदियो को छोड़ सकता है तो अपने बाप की दीदी को छोड़ने के क्या हर्ज़्ज़ है तुझे

बुआ का जोश देख कर दोनों भाई बेहेन मुस्कुराने लगते है

रवि - पर बुआ आप तो पिताजी की बेहेन है में आपकी छूट में कैसे अपना लुंड घुसा कर आपको छोड़ सकता हु

जानकी का जोश अब सातवे आस्मां पर था उसे अब बस अपनी छूट को भरना था वो भी खुद के भतीजे के लुंड से

जानकी - अरे हरामी तेरी दीदी और तेरी इन बातो को अगर तेरी माँ भी सुन्न लेती न तो वो भी तेरे सामने अपना भोसड़ा खोल देती ताकि तू उसकी गर्मी भी उतार सखी

कम्मो- हहहहह बुआ बात तो सही है पर माँ तो अब है नहीं पर मुझे पक्का यकीन है आपकी बात पर अगर माँ जिन्दा होती तो ये कमीना उन्हें भी अपने लुंड के निचे ले आता

रवि- क्या कृ दीदी छूट चीज़ hi ऐसी है जबसे रेखा दीदी ने स्वाद चखाया है तबसे बिना चुदाई के नींद hi नहीं आती

बुआ- तेरा कसूर नहीं है बीटा ये छूट और लुंड का रिश्ता hi ऐसा है जब एक बार अपनी पर आ जॉब तो बिना पानी निकले शांत hi नहीं होता

कहे सामने भाई का लुंड हो या दीदी की छूट मिलान होना तो पक्का है

रवि- तो क्या बुआ में आपको भी दीदी की तरह छोड़ सकता हु

रवि की बात सुनकर बुआ अपना ब्लाउज खोलने लगती है और उसके बाद एक झटके में अपने पेटीकोट को नाडा खोल कर उसे भी उतार देती है

बुआ अब एक दम नंगी बैठी थी ठीक रवि और कामो की तरह

कम्मो- अब पूछ मत और छोड़ दे बुआ को भी

रवि- दीदी वो तो ठीक है पर कहि अगर किसी को पता चल गया की में अपनी बुआ को छोड़ता हु तो

बुआ- इसे hi कहते है बीटा 900 कहे खा कर बिल्ली हज को चली

अपनी 3no दीदियो और भाभी को छोड़ चूका है खिड़ के बड़े भाई के साथ मिल कर और जब इस अंधी बुआ की बरी आयी तो सच्चा साधु बन रहा है वह जी वह

कम्मो- चल छोड़ रवि जब बुआ का खुद का मैं है तो तुझे क्या तकलीफ है

रवि- दीदी तकलीफ क्या होगी मुझे तो एक नई छूट मिल जाएगी छोड़ने के लिए पर आपको तो पता है न में अपनी हर्र रंडी का उद्धघाटन एक अनोखे अंदाज में करता हु

रंडी सब्द सुनकर बुआ का जोश और भी बढ़ जाता है

बुआ- तो बोल न हरामी कैसे उद्घाटन करना कहता है तू अपनी बुआ की चुदाई का

रवि- बुआ जो में बोलू उसे मन्ना मत करना बस

बुआ- अरे तू बोल तो फिर देख तेरी ये अंधी बुआ तुझे कैसा देहसुख देती है

रवि- तो ठीक है बुआ सबसे पहले में आपकी गांड छोड़ना कहता हु

रवि को नहीं मालूम था की बुआ पहले से hi खेली खायी है और न जाने उसके जैसे कितने hi लुंड वो निगल चुकी है

बुआ- बस इतनी सी बात ये ले आजा मार ले अपनी बुआ की गांड

इतना बोलते हुए बुआ पलट कर घोड़ी बन जाती है और अपनी गांड को और भो ज्यादा पीछे की और फैलाती हुई अपनी गांड का छेद खोल देती है

रवि और कम्मो दोनों hi उठ कर बैठ जाते है और अपनी आंधी बुआ की गांड और छूट को देखने लगते है

बुआ के छेड़ो को देख कर दोनों hi हैरान थे खास कर की बुआ की गांड का छेद देख कर

दोनों hi भाई बेहेन कभी एक दूसरे की शकल देखते तो कभी बुआ की गांड ...
 
अपडेट -243

जानकी के दोनों छेड़ो को देख कर रवि और कम्मो दोनों को hi पता चल गया था की बुआ एक नंबर की चुड़क्कड़ औरत है

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रवि- दीदी लगता है बुआ तो सच में इस खेल मि बड़ी खिलादन है

कम्मो- हां रे जरा देख तो बुआ की गांड का छेद कैसे पूरा खुल गया है

जानकी- अरे बच्चो तुम क्या जानो मेने कितने hi लौड़े अपनी गांड और छूट से निगल लिए

रवि- वो तो ठीक है बुआ पर आज तुम्हारी फटी हुई गांड की धज्जिया न उड़ा दी तो कहना

जानकी को भी अब अपने भाई के बच्चो से गन्दी बाटे करने में मजा आ रहा था

जानकी- अरे तू लय मुझे अपनी दिदिया समझता है क्या जो तेरे इस लौड़े से डर जाउंगी

कम्मो- अरे बुआ एक बार पकड़ कर देख लो मेरे भाई का लुंड फिर गांड मरवाने की सोचना कहि आपका इरादा न बदल जाये

जानकी - अब तो में इसका लौड़ा सीधा अपनी गांड में hi महसूस करना कहती हु

कम्मो - देखना बुआ जी कहि महसूस करने के चक्कर में अपनी गांड को hi न फतवा बैठो

जानकी- अरे मेरे बच्चो तुम क्या जानो मेने तो अपनी जवानी में hi अपनी गांड फड़वा ले थी और न जाने कितने hi लुंड इस गांड के अंदर जाकर विलुप्त हो गए

कम्मो - भाई अब तो मुझे पक्का यकीन हो गया की हमारी बुआ खानदानी रंडी है

रवि- सही कह रही हो दीदी

रवि अपना लुंड मसलता हुआ जानकी बुआ के फ़टे हुए गांड के छेद को hi देख रहा था जिसकी सुंदरता उसका मन मोह रही थी

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जानकी- अच्छा तू मुझे रंडी बोल रही है और तेरा क्या तू जो अपने कुंवारे पैन से hi अपने छोटे भाई से अपनी छूट और गांड छुड़वा रही है तू क्या किसी रंडी से कम् है

कम्मो- अरे बुआ में तो फ़ख़्र्र के साथ कहती हु है में हु अपने छोटे भाई की रंडी और में hi क्यों मेरी दोनों दिदिया भी इसकी रंडी है और एक बार जब तुम इससे छुड़वा लोगी तो देखना तुम भी इसलि रद्द hi कहलाओगी

जानकी- अच्छा चल देखते है कितना दम है तेरे इस भाई के लौड़े में

कम्मो- रबी अब तो छोड़ hi दे बहुत बड़ी बड़ी बात कर रही है बुआ अब दिखा दे इन्हे भी तेरी रंडी बनना भी कोई आसान काम नहीं है

इतना बोलती हुई कम्मो अपने हाथ पर थूक गिरती हुई रवि के लुंड को मसल कर गिला करती है और अपने दोनों हाथो से बुआ की गांड पकड़ कर फैलाती हुई रवि को लुंड घुसाने का इशारा करती है

रवि तो मनो इसी इन्तजार में था वो तुरंत hi अपना लुंड जानकी बुआ की गांड पर रखता हुआ एक जोरदार और करारा झटका मरता है गांड तो पहले से hi काफी फटी हुई थी एक hi झटके में आधे से ज्यादा लुंड फनफनाता हुआ जानकी की गांड में घुस जाता है

जानकी- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हैय्येई राममम एक hi बार में पूरा घुसा दिया हरामी अपनी दीदी समझ लार छोड़ रहा है क्या

कम्मो- अरे बुआ शुक्र करो दीदी समझ कर नहीं छोड़ रहा नहीं तो अब तक तो तुम अपनी गांड पर हाथ रख कर भाग रही होती हहहह

और है अभी पूरा नहीं गया है अभी तो मेरे भाई ने आधा लुंड hi घुसाया है तुम्हारी गांड में

अब तक बुआ को भी अहसास हो गया था की आज उसका जिस लुंड से पला पड़ा है वैसा लुंड उसने जिंदगी में कभी नहीं लिया

बुआ दर्द से कराह रही थी पर रवि उसके संभालने से पहले hi ेल और जोरदार झटका मरता है और पूरा का पूरा लुंड बुआ की गनद में पेल देता है

जानकी आगे की और गिरने hi वाली थी की तभी कम्मो उसे पकड़ लेती है

कम्मो- अरे अरे बुआ जी अभी खा तुम गिरने लगी अभी तो पूरी रात छोड़ेगा मेरा भाई तुम्हे

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रवि अब बिना रुके झटके मार रहा था मनो उसे अब बुआ की गांड का फता हुआ छेद छोड़ने में और भी ज्यादा मजा आ रहा था

रवि की रफ़्तार और उसके विशाल लुंड से अब जानकी की गांड में भी तेज़ दर्द होना शुरू हो गया था पर वो भी इस खेल की पुराणी खिलाडी रह चुकी थी

कम्मो- क्यों बुआ जी मजा आ रहा है ना मेरे भैय्या के लुंड को गांड में महसूस करके

जानकी - है रे कमीनी कम्मो मजा तो इतना आ रहा है की पूछ मत आखिर मेरे भतीज्जी का लुंड जो है

रवि- बहुत बात करती है साली रण्डी बुआ तेरी तो आज गांड hi फाड़ कर छोडूंगा

जानकी - है है मेरे बच्चे फाड़ दे अपनी बुआ की गांड और बना ले अपनी बुआ को भी अपनी रंडी जैसे तूने अपनी दीदियो को बनाया है

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इधर कम्मो को अपने भाई के ताकतवर लुंड पर अब और भी गुमान हो चला था वो खुद की छूट को मसलती हुई रवि के मुँह से मुँह शता देती है

अपनी दीदी का रसीला थूक मुँह में आते hi रवि की रफ़्तार अब और भी खतरनाक ढंग से बढ़ने लगी थी जिसका खामियाज़ा अब जानकी को उठाना था

रवि अपना लुंड एक बार खींच लेता तो अगले hi पल उसे एक झटके में जानकी की बुर्र में घुसा देता तो अगले hi पल अपना लुंड खींच कर दुबारा से जानकी की गांड में घुसा देता

करीब 10 मिंट तक रवि अपनी दीदी के मुँह में मुँह डेल जानकी को इसी तरह छोड़ता रहा और अंतत में उसकी छूट में अपना विरया उड़ेल दिया

अपनी छूट में अपने hi भतीजे का गरमा गरम विरया महसूस करते hi जानकी का तन बदन खिल उठा मनो उसकी जवानी के दिन लौट आये हो

करीब 2 मिंट रवि बुआ की छूट से लुब्द बहार निकलता है जो पूरी तरह से सफेद पानी से सना हुआ था

कम्मो- क्यों बुआ मजा आया

जानकी- बहुत मजा आया बेटी कम्मो तूने सही खा था अब तो में भी खुसी खुसी इसकी रंडी बनने के लिए तैयार हु

रवि- अच्छा तो चल अब इसे चाट कर साफ़ कर मेरी रंडी बुआ

रवि बुआ को एक झटके में पलट देता है और अपना लुंड जानकी के हाथो पर मसलता हुआ उसे अंदर घुसाने लगता है

अबतक उसका लुंड कुछ हद्द तक्क सिकुड़ चूका था पर अब भी काफी हद्द तक्क टाइट था

रवि अब जानकी के मुँह को छोड़ना शुरू कर चूका था

इधर कम्मो अपने भाई के मुँह से मुँह हटाने को तैयार hi नहीं थी दोनों भाई भें की सांसे उखड रही थी फिर भी दोनों एक दूसरे के मुँह में मुँह घुसाए ेल दूसरे का गरम और रसीला थूक पी रहे थी

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रवि की रफ़्तार बहुत तेज़ थी आलम ये था की लुंड पर लगा हुआ सफेद विरया अब जानकी के मुँह से बाहर आना शुरू हो चूका था

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रवि- बड़ा hi गरम मुँह है बुआ तुम्हारा मन तो करता है की ऐसे hi रात भर तुम्हारा मुँह छोड़ता रहु

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काफी देर तक रवि अपने सिकुड़े है लुंड से hi जानकी बुआ का मुँह छोड़ता रहा और रात भर न जाने कितनी hi बार उसने अपनी बुआ और अपनी दीदी की बच्चेदानी में अपना विरया गिराया

कभी बुआ कम्मो की सबूत और गांड चाटती हुई चुदवाती तो कभी कम्मो बुआ के फ़टे हुए छेड़ो को चाटती हुई अपने छोटे भाई से चुदवाती

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अपडेट -244

सुबह रवि कम्मो और बुआ एक दम नंगे थे

शायद रात भर चली चुदाई का hi नतीजा था जो सब एक दूसरे से लिपटे सोये हुए थे

कम्मो और जानकी बुआ के जिस्म पर जगह जगह रवि का विरया लगा हुआ था

सुबह करीब 5 बजे रेखा आती है और तीनो को देख कर मुस्कुराती हुई आवाज देती है

रवि - क्या हुआ दीदी अभी तो दिन भी नहीं उगा

रेखा - अच्छा दिन नहीं ऊगा के बच्चे अभी क्या और छोड़ेगा तू इन दोनों को

बुआ और कम्मो भी अब तक उठ गयी थी

बुआ - अरे भतीजा है तो छोड़ेगा hi न तुझे भी तो छोड़ता है न

रेखा - अरे मेरी रंडी बुआ में छोड़ने छुड़वाने के लिए मना नहीं कर रही हु

में तो बताने आयी हु की केशव भैया ने तुझे बोलै है की जाकर मल्टी भाभी के बापू और नीलम को ले आ शादी के लिए

कम्मो - दीदी आज रवि कहि नहीं जायेगा ये मेरे साथ hi रहेगा सिर्फ 2 hi दिन तो बचे है और उसमे भी आप लोग इसे मुझसे दूर भेजना कहते हो

रेखा - अच्छा महरानी तो क्या तू 2 दिन लगातार इसके साथ hi पड़ी रहेगी

कम्मो- हां 2 hi दिन में इतना छुड़वा लुंगी की कोई कसार बाकि न रहे

रवि- दीदी आप कैसे भी करके बहिया को hi बोल दो न जाने के लिए

रेखा - अरे में समझती हु पर केशव भैय्या तो खुद मेघा दीदी को लेने जा रहे है अब ज्यादा नाटक मत करो जल्दी निकलेगा तो शाम तक्क आ जाएगा और फिर छोड़ लेना इसे रात भर

रवि न चाहते हुए भी उठ कर फ्रेश होने चला जाता है और थोड़ी hi देर में वो निकलने वाला होता है तभी मल्टी भी सज धज कर उसके सामने आ जाती है

मल्टी - देवर जी में भी चलूंगी आपके साथ

रवि- भाभी जल्दी आना है

मल्टी - अरे में कौनसा लेट करूंगी मुझे मेरे कुछ पुराने कपडे और गहने लेने है गहने तो कम्मो को hi देने है न

Ravi-thik है चलो आप भी

रवि और मल्टी सबसे विदा लेकर निकल जाते है

रवि मल्टी की गांड पर हाथ फहरता हुआ

रवि- वैसे भाभी आपके चलने का मकसद कुछ और तो नहीं है न

मल्टी - मतलब

रवि- अरे कहि आप अपने बूढ़े बाप की सेवा करने तो नहीं जाए रही न

रवि की बात सुनकर मल्टी शर्मा जाती है

रवि - में जनता हु भाभी आखिर हर पिता का सपना होता है अपनी बेटी को भोगना

वैसे एक और बाप है जिसे हमारे साथ चलने की इच्छा होगी

मल्टी - वो कौन

रवि- अरे तुम्हारी भाभी के पिता हरिया काका

क्यों क्या कहती हो भाभी उसे भी साथ ले लेते है और सब साथ मिलकर मजा करेंगे तुम्हारे घर

मल्टी - तुम तो कह रहे थे जल्दी आना है

रवि- अरे तो जयदा से ज्यादा कितना टाइम लगेगा 1 घंटा और सही

मल्टी - देख लो तुम्हारी मर्ज़ी पर वह तो हरी भी होगा न

रवि- तो उसे भी शामिल कर लेंगे और वैसे भी जब तुम्हारी जैसी बेहेन हो तो कौन भाई मना कर सकता है उसके साथ खेलने में

मल्टी - कुछ भी बोलते हो तुम

रवि- करता भी तो हु न भाभी जी

आप यही रुको में हरिया काका को लेकर आता हु

रवि कुछ hi देर में हरिया काका को लेकर आ जाता है और मल्टी एक सभ्या बहु की तरह अपने सर पर पल्लू दाल लेती है मनो कितनी सुशिल हो

बस स्टैंड तक पहुंचते पहुंचते न जाने कितनी hi बार रवि सदी के ऊपर से hi अपनी भाभी की गांड में ऊँगली डालने का पर्याड करता है

जिसे हरिया भी देख रहा था

हरिया - आज तो मजा hi आ जायेगा बेटी के साथ साथ इसे भी छोडूंगा साली मस्त माल है रामलाल की बेटी

असल में रवि ने पहले से hi हरिया को प्लान बता दिया था जिसे सोच सोच कर hi जरिया के लुंड की नशे टूट रही थी

जल्द hi तीनो बस स्टैंड पहुंच जाते है और कुछ hi देर में बस भी मिल जाती है

बस में तीन सीट वाली सीट पर तीनो बैठे थे

विंडो साइड मल्टी बिच में रवि और लास्ट में हरिया काका

रवि अपने दोनों हाथो को ऊपर की और बांधता हुआ एक हाथ अपनी भाभी के पल्लू में घुसा कर उसकी चूचिया मसलना शुरू कर देता है

मल्टी भी सफर का पूरा मजा ले रही थी

पुराणी बायतत्त.......

एक रात रामलाल अपनी हवस में चुर्र अपनी बहु नीलम को खूब हुमच हुमच कर छोड़ रहा था

तभी अंदर वाले कमरे का दरवाजा धड़ाम से खुलता है और सामने हरी गुस्से से लाल पीला खड़ा था

नीलम और रामलाल एक पल के लिए डर जाते है

पर नीलम जानती थी की उसका पति कुछ नहीं करेगा न तो वो नीलम को संतुस्ट कर पता था और न hi उसके अंदर इतनी हिम्मत थी की वो उसे झगड़ा करे

हरी - बहुत अच्छे बापू बहुत अच्छे पहले दीदी को छोड़ते थे और जब वो चली गयी तो अपनी बहु को hi बजाना चालू कर दिया

रामलाल - तू गलत समझ रहा है बीटा ऐसा नहीं है

हरी - कैसा नहीं है देखो कैसे तुम्हारा लुंड मेरी बीवी की छूट में घुसा हुआ है

नीलम जो घोड़ी बनी हुई अपने ससुर से छुड़वा रही थी वो अपनी कमर को आगे पीछे करना शुरू कर देती है और अपने पति की और मुस्कुराती हुई देख कर फिरसे छोड़ना शुरू हो जाती है

हरी - इसका तो समझ आता है जवान है प्यासी है पर तुम बापू तुम तुम तो इसके बाप समान हो तुम ऐसा कैसे कर सकते हो

नीलम - अरे पतिदेव जब आपके पिताजी ने अपनी बेटी को नहीं छोड़ा तो मुझे कैसे छोड़ देते ये तो शादी के पहले से hi मेरे पीछे पड़े हुए थे मौका देख कर मेरा भी ईमान दोल गया

रामलाल भी अब अपनी बहु की कमर को दोनों हाथो से पकड़ कर छोड़ना चालू कर चूका था

रामलाल - अब तू कुछ भी कह बीटा मर्द और औरत का रिश्ता hi ऐसा है की एक बार जब ये अपनी पर आ जाये तो न जाट देखता है और न hi रिश्ता

नीलम - छः हां पति देव फिर चाहे सामने बीवी हो बेटी हो या बेहेन

हरी - बेहेन मतलब तुम कहना क्या छाती हो

नीलम - देख न ससुरजी मेने आपको बताया था न इन्हे कुछ याद नहीं रहता पीने के बाद

हरी - जो कहना है खुल कर खो

नीलम - कई बार जब आप दारू पी कर आते और मुझे छोड़ते तो अपनी मल्टी दीदी का ना ले ले कर मेरी छूट और गांड मरते में तभी समझ गयी थी की आपको भी अपनी दीदी की जवानी का रस कहना है

हरी - ये क्या बकवास कर रही हो तुम

नीलम- अरे इसमें बकवास है hi खा अपनी दीदी को छोड़ना कोई गलत काम थोड़े hi है मुझे hi देख लो शादी के पहले से hi अपने बाप और भाई का बिस्तर गरम करती आ रही हु

और किस्मत देखो मायके में बाप छूटा तो ससुराल में ससुर मिल गया अह्ह्ह्ह खूब छोड़ते है ससुर जी

रामलाल - ये सही कह रही है बीटा और वैसे भी एक बात जान ले तेरी ये बीवी इतनी चुड़क्कड़ है की अगर इसे दिन भर कोई कहते से बांध कर भी चिड़े न तो इसके लिए काम hi है रंडी है साली एक नंबर की

पर मजा पूरा देती है

नीलम - इसी लिए तो कहती हु पतिदेव जी एक बार अपनी दीदी की छूट का रस पे कर देखो माँ कसम बीवी को भूल जाओगे

हरी - पर ये होगा कैसे

हरी की बात सुनकर नीलम और रामलाल एक दूसरे को देख कर मुस्कुराते हुए एक दूसरे का मुँह चूसने लगते है

दोनों एक दम बेशर्मी के साथ हरी के सामने चुदाई कर रहे थे और बिचारा हरी सब खड़ा खड़ा देख रहा था

अंतत में रामलाल तेज झटके मरता हुआ अपनों बहु की छूट में hi झाड़ जाता है और उसके ऊपर hi गिर जाता है

नीलम- तो ठीक है ससुर जी और में आपकी मदद करेंगे मल्टी दीदी को छोड़ने में

हरी- पर कब

हरी अपना खड़ा लुंड मसलता हुआ बोलता है

रामलाल - अगली बार जब वो घर आएगी तब

तब तक के लिए जा जा कर सजा

हरी अपने कपडे उतर देता है

हरी - वो तो ठीक है पर अगर मेरी बीवी इतनी hi बड़ी चुड़क्कड़ है तो क्यों न दोनों बाप बीटा साथ मिलकर इसके रान्दीपने का इलाज करे

नीलम- ये हुई न बात एक साथ 2-2 लुंड वो भी बाप बेटे का पुराणी यदि तजा हो जाएँगी तब मेरा बाप और भाई एक साथ मुझे छोड़ते थे

उस दिन के बस से रामलाल और हरी दिन रात नीलम को छोड़ते वो भी एक साथ उसे घर में कहते से बांध कर रखते एक दम नंगा नीलम कभी कभार hi पकडे पहना करती थी वर्ण तो अधिकतर समय वो घर में नंगी hi रहती और अपने पति और ससुर के आगे अपनी टंगे खोले पड़ी रहती ....
 
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