Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste) - Page 34 - SexBaba
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Incest Sex Story - Ghar (ulajhte riste)

अपडेट -311

अब तक्क गिरजा भी नहा चुकी थी वो बहार से hi अपनी बहु को आवाज देती है जो की अब भी अपने छोटे भाई की बहो में लेती हुई थी

गिरजा- अरे बहु खा हो

कामो - अह्ह्ह रवि छोड़ मुझे सासु माँ बुला रही है

रवि - दीदी छोड़ो न सासु माँ को कितना ाचा लग रहा है ऐसे

कम्मो- हट बदमाश कहींका में जा रही हु

कम्मो उठ खड़ी होती है पकककककक की आवाज के साथ रवि का लुंड कामो की गांड से बहार आ जाता है जो अब भी पूरी तरह से खड़ा था

कामो एक नजर अपने भाई और उसके लौड़े पर डालती हुई नंगी hi बहार निकल जाती है मनो उसे अपनी सास से अब कोई पर्दा करने की जरुरत hi नहीं थी

गिरजा- अरे बहु ये क्या तू अब तक्क इसी हाल में है

कम्मो अपने चेहरे पर मासूमियत लती हुई अपनी सास से बोलती है

कम्मो- अब आप hi बताये सासुमा में क्या कृ वो कमीना आप के जाने के बाद से hi मेरी गांड में अपना लुंड ठुसे पड़ा था अगर आप आवाज न देती तो आज दिन भर वो मेरी गांड में hi अपना लौड़ा घुसाए रहता

गिरजा-- चल कोई बात नहीं उसका क्या है वो तो बच्चा है अब जल्दी से नहा धो कर तैयार हो जा बहुत काम है घर में

कम्मो अपनी सास के पास अति हुई उसके कान में कहती है

कम्मो- वैसे सासु माँ उस बच्चे से छुड़वा कर मजा तो खूब आया न आपको

गिरजा अपनी बहु के ऐसे सब्द सीधा सीधा सुन कर एक बार फिर शर्मा जाती है

कम्मो- अरे बोलो न मम्मी जी मजा आया तभी तो सुबह सुबह hi अपनी बुर्र पेलवा रही थी मेरे छोटे भाई से

गिरजा-- हआ हां बहुत मजा आया अब खुस अब जल्दी तैयार हो जा कहि कोई आ गया तो गजब हो जायेगा

गिरजा घर के बहार चली जाती है कुछ सामान इत्यादि लेने इधर कामो भी बाथरूम में घुस जाती है

काफी देर बाद कम्मो एक सुशिल और संस्कारी बहु की तरह सज धज कर बाथरूम से बहार निकलती है और एक नजर अपने भाई पर डालती हुई सीधा अपनी सास के कमरे में घुस जाती है झा पहले से hi उसका ससुर लेता हुआ था
 
अपडेट -312

पायल की आवाज सुनते hi सुखिया की आँखे खुल जाती है अगले hi पल उसके सामने उसकी बहु खड़ी थी जिसकी आँखों में वो देख रहा था

कामो - क्या बात है ससुर जी आप अभी जगे है क्या

बाकि मर्दो की तरह सुखिया का लुंड भी उसकी धोती में खड़ा था जिसकी और इशारा करती हुई कम्मो बोलती है

कामो- रुकिए में आपकी मदद करती हु

सुखिया तो मनो कबसे अपनी संस्कारी बहु का इन्तजार कर रहा था भले hi वो बोल चल नहीं सकता था पर था तो आखिर एक मर्द hi न

कामो आगे बढ़ती हुई उसके पेअर चुटी है और अगले hi पल उसकी धोती की गत खोलती हुई उसका लुंड दबोच कर मुठियाने लगती है

कामो इतनी तेजी से लुंड मुठिया रही थी की पुरे कमरे में उसकी चूडियो की खनक गूंज रही थी

इधर सुखिया को भी काफी मजा आ रहा था उसके बदन में मनो फिर से जान लौट आयी थी वो अपनी गर्दन को इधर उधर घुमा रहा था

दूसरी और गिरजा अब तक घर वापस आ गयी थी खननन खननन की आवाज का पीछा करती हुई वो सीधा अपने कमरे की और जाती है झा से उसे वो आवाज आ रही थी

अपनी बहु को अपना काम करते देख गिरजा की आँखे फ़ाइल जाती है उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की उसकी बहु अपने hi ससुर का लुंड तेजी से मुठिया रही थी

तभी कामो एक कदम और बढ़ती हुई अपना मुँह लुंड से सताती हुई एक hi बार में पूरा लुंड मुँह में भर कर चूसने लगती है

इधर गिरजा की छूट एक बार फिर पानी पानी हो चुकी थी

वो एक नजर घर के मैं दरवाजे पर डालती है जिसे उसने पहले से hi अंदर से बंद कर दिया था

कम्मो अपनी पूरी रफ़्तार में सुखिया का लुंड चूस रही थी आज उसका भी ये महसूस हो रहा था की उसके ससुर का लुंड पहले से काफी मोटा हो चूका है

और इतनी देर तक चूसने के बाद भी वो नहीं झडा

गिरजा धीरे धीरे अपनी छूट को सदी के ऊपर से hi सेहला रही थी तभी एक दम से कुछ ऐसा होता है की वो सन्न रह जाती है

अच्चानक से रवि गिरजा के पीछे आ जाता है और उससे पूरी तरह चिपक जाता है

रवि का खड़ा लुंड सदी के ऊपर से hi गिरजा की गांड की ड्राअर को फ़ैलाने लगता है

रवि - क्या हुआ मेरी गिरजा रानी क्या देख रही है अकेले अकेले

रवि अंदर झांकता है झा उसकी दीदी अपने ससुर की सेवा कर रही थी

रवि - हाहाहा अच्छा तो ये बात है तेरी बहु तेरे पति को hi सुख दे रही है ये देख कर तू गरम हो रही है चल कोई बात नहीं में तेरी गर्मी अभी शांत कर देता हु

गिरजा कुछ बोल पति इससे पहले रवि उसका हाथ पकड़ कर कमरे में ले जाता है झा कामो पहले से hi अपने काम में लगी हुई थी

कामो एक नजर अपनी सास और भाई पर डालती है पर अपना काम लगातार जारी रखती है

दूसरी और सुखिया की गांड फट जाती है अपनी बीवी को देख कर वो तुरंत अपनी आँखे बंद कर लेता है मनो वो सो रहा हो

रवि - देख रही हो मम्मी जी कैसे दीदी के ससुर जी पूरा मजा ले रहे है अपनी बहु के रास भरे मुँह का

रवि एक बा एक गिरजा को बिस्तर पर झुकता हुआ उसकी सदी को कमर तक उठा कर एक hi झटके में पूरा लुंड उसकी बुर्र में पेलता हुआ उसे छोड़ना चालू कर देता है

गिरजा के मुँह से अब तक सिसकिया निकलना शुरू हो गयी थी

girja--ahhhh आराम से बेटा अह्ह्ह्ह बहु समझा इसे रात भरररर अह्हह्ह्ह्ह कैसी करता है री तू शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआआईआआए मार डाला रे

अपनी बीवी की गरमा गरम सिसकिया सुन सुखिया अपनी आँख खोले बिना नहीं रह पता

और जैसे hi वो आँखे खोलता है उसे अपनी बीवी झुकी हुई नजर आती है जिसके पीछे से लगातार झटके लग रहे थे

सुखिया को समझते देर नहीं लगती की ये आखिर हो क्या रहा है और वो समझ जाता है की उसकी बहु के भाई ने आज अपना वडा पूरा कर दिया और उसके hi सामने उसकी बीवी की जवानी को लूट रहा है

कामो अपनी रफ़्तार लगातार बढ़ा रही थी इधर रवि छूट को पानी पानी कर चूका था अब निशाना था तो गांड का छेद

रवि जनता था की अगर वो गिरजा को पूछेगा तो वो पक्का इस बार को ताल देगी

पर मौका तो अभी अच्छा था

वो बिना देर किये एक झटके में अपना गिला लुंड उसकी गांड पर रखता हुआ तेजी से एक झटका मरता हुआ गिरजा की गांड में घुसा देता है

गिरजा इस हमले से दर्द के मरे तड़प उठती है

गिरजा-- अह्ह्ह्हह रविइइइ अह्ह्ह हरामी मार डाला रे तूने तो मेरी गांड hi फाड़ दी हरामीई खिनकाआ अह्ह्ह्ह माईयाँआ निकल रे अपना लौड़ा मेरी गांड से

गांड तो सुखिया ने भी किसी ज़माने में मरी थी गिरजा की पर उस बात को काफी समय बीत चूका था जिसकी वजह से गिरजा की गांड की सील भले hi टूटी हुई थी पर उसकी घेरे का राष्ट अब भी काफी संकरा था

गिरजा को भी अब मजा आने लगा था इधर रवि काफी देर से गिरजा की गांड मार रहा था

कभी छूट में तो कभी गांड में वो काफी देर तक गिरजा को ऐसे hi छोड़ता रहता है

दूसरी और कामो अब तक्क अपने ससुर का लुंड चूस चूस कर उसको चरम सिमा तक ले आयी थी और अब सारा का सारा वीर्य सीधा उसके गले में उतर रहा था

दूसरी और रवि अपना वीर्य गिरजा की गांड में छोड़ने लगता है

मनो गिरजा की गांड क्र भीतर को ज्वाला मुखी फट गया हो जिसके अंदर से गरमा गरम लावा निकल रहा था वो मस्त हो जाती है

कुछ पल बाद रवि अपना लुंड बहार निकल कर गिरजा को चूमता हुआ अपनी दीदी को छोड़ने लगता है

ये सिलसिला रोज का हो गया था पर गिरजा ने अपनी बहु को ससुर को ज्यादा गरम न करने का बोल दिया था ताकि उसकी कमजोरी हावी न हो पाए

हफ्ते में 2 बार तो कम्मो अपने ससुर का लुंड चूस hi लिया करती थी

लगभग एक महीने तक ऐसे hi चला रवि सास बहु को एक साथ छोड़ा करता वो भी 2-2 घरो में जब मन करता तब लैली और सलमा को छोड़ आता और रात तो खैर उसकी गिरजा और कम्मो के hi नाक थी

काफी दिनों बाद रक्षाबंधन आ गया था

रात भर हुई चुदाई के बाद कामो सुबह उठ कर अपने प्यारे भाई को राखी बांधती है और उससे जीवन भर हु hi देख सुख पाने का वडा लेती है

अब रक्षाबंधन था तो रवि अपनी सबसे पसंदीदा दीदी को कैसे भूल सकता था

अच्चानक रवि सबको जाने का बोलता है और कामो को उसे रीज़न भी बताया है

गिरजा तो यही कहती थी की रवि यही रहे पर काममो जानती थी की रेखा आज के दिन उसका इन्तजार कर रही होगी और अगर उसकी वजह से रवि नहीं गया तो रेखा कभी उसे माफ़ नहीं करेगी

गिरजा से फिर आने का वडा ले कर रवि अपनी गाओं की और निकल जाता है

दूसरी और गिरजा की आँखे नाम थी पर उसे अपनी बहु की बात समझ आ गयी थी और अब तो दोनों सास बहु भी सहेलियों की तरह हो गयी थी.....
 
अपडेट -313

बस से उतर कर रवि अपनी गाओं की सिमा में दाखिल हो जाता है

रवि ( पता नहीं रेखा दीदी क्या कहेंगी 10 दिन का बोल कर गया था और आ रहा हु 1 महीने पर जरूर आज तो दीदी मेरी सुताई कर देगी )

भले hi रवि सबसे ज्यादा प्यार और चुदाई अपनी रेखा दीदी से hi करता था पर ये बात भी सही थी की वो डरता भी सबसे ज्यादा रेखा से hi था

सुबह का समय था तो गाओं में कोई इतनी सहेल कदमी थी नहीं चलते चलते रवि नीलम के घर के आगे से गुजरत्रा है

नीलम - अरे खा जमीन में सर गड़े जा रहा है भूल गया क्या तू तेरी एक दीदी इधर भी रहती है

रवि तुरंत hi पलट कर देखता है

रवि - अरे नहीं दीदी कामो दीदी के घर गया था वही से आ रहा हु

नीलम - है है जानती हु में तू खा गया था बता रही थी रेखा मुझे

रवि - ठीक है दीदी में आपसे बाद में मिलता हु

रवि पलट कर जाने hi वाला था की नीलम दौड़ कर उसका हाथ पकड़ लेती है

नीलम - भूल गया तू आज रक्षा बंधन है में तो तुझे ऐसे नहीं जाने दूंगी

राखी तो नहीं लायी में पर हां तेरा मुँह जरूर मीठा करवा कर hi भेजूंगी

रवि - अरे दीदी जाने दो रेखा दीदी भी इन्तजार कर रही होगी

नीलम झूठा गुस्सा करती हुई रवि का हाथ छोड़ देती है

नीलम - हां हां जा अपनी सगी दीदी के पास वैसे भी में हु hi कौन तेरी जो तेरे पास मेरे लिए समय होगा

रवि - दीदी गुस्सा मत हो न आप में आऊंगा न आपके पास भी पर पहले रेखा दीदी से मिल लू

नीलम - जैसी तेरी मर्ज़ी मेरा कोई हक़्क़ थोड़े hi है तुझे पर जो में तुझे रोकू

नीलम का रुवासा चेहरा देख कर रवि का दिल पसीज जाता है

रवि( थोड़ी देर की hi बात है देख लेता हु क्या कह रही है ये फिर घर चला जाऊंगा)

रवि - अच्छा ठीक है दीदी बताओ आप क्या कह रही थी

रवि की बात सुनकर नीलम खुस हो जाती है वो उसका हाथ पकड़ कर घर के भीतर ले जाती

नीलम- तू बैठ यह में कुछ लती हु तेरा मुँह मीठा करने के लिए कुछ लती हु

नीलम अपनी भरी गांड मटकती हुई रसोई में चली जाती है

कुछ hi देर बाद नीलम हाथ में पानी का गिलास और स्टोरी में बर्फी के पीज लेकर आती हुई रवि को देदेती है

रवि बर्फी कहते हुए नीलम के बढे हुए पेट को घर कर देख रहा था

रवि - कौनसा महीना है दीदी

नीलम अपना पेट सहलाती हुई कहती है

नीलम - छठा महीना चालू हो गया है रवि जल्दी hi एक न्य सदस्य हमारे परिवार का हिस्सा बनेगा

रवि - दीदी वैसे ये सदस्य है किसका

रवि की बात सुनकर नीलम एक बार को तो शर्मा जाती है पर अगले hi पल अपनी बेशर्मी को उजागर करती हुई जवाब देती है

नीलम - ये तो इसके बहार आने के बाद hi मालूम पड़ेगा की इसका ेहरा किससे मिलता है

रबी- मतलब आपको अभी तक नहीं पता की ये बच्चा किसका है

नीलम - कैसे पता होगा रे तू तो जनता hi है की मेरे खेत की जुताई कितनो ने की है क्या पता तेरा hi हो ये बच्चा

नीलम की बात सुनकर रवि की आँखे फैजल जाती है

नीलम - हहहह दर मत में तो बस बता रही हु ...
 
अपडेट -314

जैसे hi रवि घर के भीतर दाखिल होता है

रेखा भगति हुई उसके गले लग जाती है

रवि अपनी दीदी को अपनी बहो में कसता हुआ उसके प्यार को महसूस करने लगता है

दोनों भाई बेहेन एक दूसरे से इस कदर चिपका हुए थे मनो जन्मो जनम के बिछड़े आज मिल रहे हो

रेखा - क्यों रे तुजे क्या मेरी याद नहीं आती थी

रवि - मत पूछो दीदी कितनी याद आती थी मुझे तुम्हारी

रेखा - अच्छा इसी लिए एक hi बार का गया हुआ डेढ़ महीने बाद आए रहा है

रवि - दीदी में तो आना कहता था वो तो कम्मो दीदी hi नहीं आने दे रही थी

रेखा - है है रहने दे में सब जानती हु तुम दोनों के बारे में न तो वो तुझे छुड़वाने में पीछे हटेगी और न hi तू उसे छोड़ने से पीछे हटेगा वैसे उसकी सास ने देखा नहीं तुम दोनों को चोदम पट्टी मचाते हुए

रवि - दीदी अब क्या बताऊ आपको बस अआप ये समझ लो की दोनों सास बहु को एक hi बिस्तर पर छोड़ता था रात भर

रेखा रवि को छोड़ कर थोड़ा पीछे हटती हुई एक नजर उसको देखती है

रेखा - मान गयी मेरे राजा भाई तुझे

तूने तो कमाल hi कर दिया अपनी बेहेन की ससुराल गया और उसकी सास को भी छोड़ आया

रवि - आखिर भाई किसका हु में

रेखा - रेखा का भाई है तू रेखा का और मेरे राजा भैय्या का लौड़ा हो औरत एक बार देख लेगी वो इस अपनी छूट में डलवाते बिना नहीं रह पायेगी

तुझे साडी कहानिया सुननूगी में पर पहले चल देख मेने साडी तैयारी करके राखी है

रवि - किस चीज़ की तैयारी दीदी

रेखा जज्हुथा गुस्सा दिखती हुई रवि की छाती पर मुक्के मरती ुइ उसके साइन से लग जाती है

रेखा - तू भूल गया आज राखी है

रेखा रवि को अपने साथ कमरे में ले जाती है

और साथ hi घर का मैं दरवाजा भी बंद कर देती है

कमरे में रेखा ने पहले से थाली में राखी टिका और मिठाई तैयार करके राखहि थी

रवि - दीदी आपको क्या पता था की में आज आ जाऊंगा

रेखा - पता नहीं था बल्कि पूरा भरोषा था की तू आज आएगा hi आएगा

रवि - दीदी सच कहु तो आपके बिना मुझे भी अच्छा नहीं लगता था

रेखा - तो तुझे क्या लगता है मेरा जी लग रहा था क्या तेरे बिना

रवि - इसी लिए तो में भी सबको छोड़ चढ़ के आपके पास आ गया दीदी

रेखा - चल अब समय बर्बाद मत कर आ इधर बैठ मुझे अपने छोटे भाई को राखी बांधने दे

रवि खत पर बैठ जाता है रेखा पुरे विधि विधान से रवि को राखी बांधती है और उसकी आरती उतरती हुई उसे रकहि बांधती है

अंतत में रवि उठ कर रेखा के पेअर छूटा है

रेखा अपने भाई को आशीर्वाद देती है

रवि अपनी जेब से 50 का नोट निकल कर रेखा को देता है

रेखा नोट को साइड में रख देती है और थाली में से लड्डू उठती हुई रवि के मुँह की और बढ़ती है

रवि हल्का सा काट कर लड्डू खता है

रेखा - क्या हुआ तूने पूरा नहीं खाया

रवि - दीदी मुझे जितनी मिठास चाहिए वो नहीं है इसमें

रेखा अपने छोटे भाई का इशारा समझ जाती है आखिर उसे भी तो अपना इनाम hi चाहिए था

रेखा आधा लड्डू अपने मुँह में दाल लेती है

उसके लाल सूखा होतो पर अब भी लड्डू के डेन चिपका हुए थे

रेखा - अच्छा तो अब आजा तुझे जितनी मिठास चाहिए तेरी दीदी देगी वो सब मिठास

रवि बिना कुछ बोले अपने दीदी में होठो को चाटता हुआ अपना मुँह उसके मुँह से मिला देता है

दोनों भाई बेहेन पागलो की तरह एक दूसरे का मुँह चूस थे थे

रेखा अपने मुँह के अंदर का लड्डू रवि के मुँह में दाल देती है जिसे रवि मजे से चबा चबा कर खा रहा था और बाकि का वो दुबारा से रेखा में मुँह में और भी मीठा करने के लिए वापस दाल देता

दोनों को देख कर कोई कह hi नहीं सकता था की थोड़ी देर पहले ये दोनों उस रिवाज को निंजा थे थे जो शायद एक भाई बेहेन में लिए दुनिया का सबसे बड़ा रिवाज है

रेखा - अब तो मिली न तुझे मिठास मेरे भाई

रवि - अभी खा दीदी असली मीठी चीज़ चखना तो अभी बाकि है

रवि रेखा को बिस्तर पर धक्का देता हुआ उसकी सदी उठता हुआ अपना मुँह रेखा की गरम और गीली छूट पर रख देता है

काफी समय बाद रेखा की छूट पर उसकी छोटे भाई की जीभ चल रही थी

रेखा तड़प उठती है अपने दोनों हाथो से रवि के बालो को नोचते हुए वो उसका सर अपनी छूट पर दबाने लगती है

रवि भी पागलो की तरह अपनी दीदी की छूट को मजे से चाट रहा था उसके अंदर से निकलता गरम चिपचिपा नमकीन पानी उसे असली मिठास का अहसास करा रहा था जिसकी उसे उम्मीद थी

इधर रेखा काफी दिनों से प्यासी थी वो ज्यादा देर तक अपने भाई के हमलो को रोक नहीं पति और अपनी कमर उठती हुई अपने छोटे भाई के मुँह पर hi झड़ने लगती है

रवि एक बून्द भी जाया न करते हुए अपनी दीदी की छूट से निकला सारा अमृत फैट फैट कर पी जाता है

अंतत में रेखा ढीली पद जाती है

रवि छूट को अचे से चाट चाट कर साफ़ करने के बाद उठ खड़ा होता है और अपनी दीदी की आँखों में देखता हुआ एक एक कर अपने सरे कपडे उतरने लगता है

इस बिच रेखा लगातार अपने छोटे भाई को प्यासी नजरो से देख रही थी

रवि का लुंड उसकी आँखों में सामने झूल रहा था जिसको देखने के लिए वो काफी समय से तड़प रही थी उसे बर्दास्त कर पाना अब मुश्किल था

वो खुद hi आगे बढ़ती हुई लुंड को चूमने चाटने लगती है रवि भी प्यार से अपनी दीदी की बालो को सहलाता हुआ उसे पूरा प्यार दे रहा था

ाकाहिर में रेखा अपना बडासा गिला गरम मुँह खोलती हुई एक hi बार में पूरा का पूरा लुंड अपने मुँह में उतरती हुई अपनी सिरको अपने भाई के लुंड के आखिर चोर तक दबाने लगती है

रवि अपनी दीदी की इस हरकत से मनो पागल हो गया था वो बिना देर किये उसके बालो को बेरहमी के साथ पकड़ता हुआ उसके मुँह को छोड़ना चालू कर देता है

रेखा को तो यही चाहिए था वो अपने शरीर को ढीला छोड़ देती है और अपने भाई को उसका काम करने देती है

उसकी आँखों से भले hi आंसू गिर रहे थे जो की उसकी आँखों के काजल को निचे भ थे थे पर शायद ये खुसी के hi आंसू थे जिनके बहार निकलने का इन्तजार वो कबसे कर रही थी

इधर रवि बदस्तूर अपनी दीदी का मुख चोदम जाती रखता है

काफी देर अपना मुँह छुड़वाने के बाद भी रेखा पीछे नहीं हटी थी

इधर रवि अपने लुंड को अब अपनी दीदी की बहतती में डालने को पागल हुआ जाकरः था वो रेखा का मुँह छोड़ उसे सीधा लिटाता हुआ उसके ऊपर आ जाता है और एक hi झटके में अपना लुंड अपनी दीदी की छूट में डालता हुआ उसे छोड़ना शुरू कर देता है

और अपने मुँह से अपनी दीदी के मुँह की मिठास चाटने लगता है

रवि के धक्के काफी दमदार थे जो लगातार बढ़ते हु जा रहे थे चारपाई चर्र चर्र कर रही थी

दूसरी और रेखा की छूट इतना पानी छोड़ चुकी थी की पुरे कमरे में पहछह पहछह की आवाजे गूंज रही थी

उसकी छूट से सफ़ेद चिपचिपा पानी निकल रहा था जो की इस चुदाई को और भी मादक और आनंदित कर रहा था

काफी देर तक अपनी दीदी को इसी अंदाज़ में छोड़ने में बाद रवि उसे घोड़ी बनता हुआ एक बार फिरसे अपनी दीदी की छूट और गांड चाटने लगता है

वो अपने दोनों हाथो से फैला फैला कर रेखा की गांड के छेद को अंदर तक चाट रहा था बिच बिच में रेखा अपने छोटे भाई के मुँह पर पाद भी रहिकती जिससे की उसका जोश दोगुना हो गया था

ाकाहिर में रवि अपनी पोजीशन में आता हुआ अपना गिला चिपचिपा लुंड अपनी दीदी के गांड के छेद पर रखता हुआ एक hi बार में अंदर पेल देता है

गांड तो पहले hi रवि बर्बाद कर चूका था पानी दीदी की जिस कारन लौड़ा अंदर जाने में कोई दिक्कत नहीं होती और hi झटके में पूरा का पूरा लुंड रेखा को गांड में समा जाता है

रवि अपनी दीदी के बालो को उसकी लगाम की तरह इस्तेमाल करता हुआ उसकी गांड मार रहा था

दूसरी और रेखा भी आज इस खाना पर पर अपने भाई से चुदाई का पूरा लुफ्त उठा रही थी

काफी देर चली चुदाई के बाद रवि अपनी दीदी की गांड में hi झाड़ जाता है

रवि - क्यों दीदी मजा आया न

रेखा - पूछ मत कितना मजा आया मेरे भाई तरस गयी थी तेरी ये दीदी तेरा ये प्यार पाने के लिए

रवि - तुम टेंशन न लो दीदी अब तो में आ गया हु न देखना कैसे दिन रात तुम्हे प्यार देता हु

दोनों एक बार फिर चुदाई में लग जाते है

ये चुदाई का सिलसिला यु hi जारी रहता है रोज रात दिन रवि कभी अपनी दीदी को हगते हुए छोड़ता तो कभी खाना बनाते हुए कभी खेतो में बिच में तो कभी बंद कमरे में

मिला जुला कर उसने जो वडा किया था वो उसे निभाता गया और अपनी दीदी को जी भर कर शारीरक और मंज़िल प्यार दिया जिसकी रेखा हक़दार भी थी

क्योंकि अगर रेखा न होती तो शायद वो साडी औरते प्यासी hi रह जाती जिन जिन को रवि ने अब तक संतुस्ट किया था

वो रेखा hi थी जिसमे रवि को असली मर्द बनाया था

वो रेखा hi थी जिसमे रवि को औरत के जिस्म का असली इस्तेमाल करना सिखाया था

वो रेखा hi थी जिसमे रवि को औरत को खुस करना सिखाया था

ये सिलसिला यु hi जारी रहता है

काफी समय बाद नीलम एक बच्चे को जनम देती है जिसका नाप कौन था ये किसी को मालूम नहीं था सब उसे अपना बच्चा hi समझते थे

हरिया सोचता था की ये उसका बच्चा है

उधर रामलाल और हरी भी यही सोचते थे

पर जिस दिन नीलम ने अपने बच्चे की आँखे दिल्ली थी वो उसी दिन समझ गयी थी की ये बच्चा रवि का hi है

वो इस बार से खुश भी थी की उसका बीटा भी अपने नाप की hi तरह दमदार होगा

इस बिच मल्टी और मेघा को भी बच्चे होते है

मल्टी और लड़की को जनम देती है और मेघा लड़के को

सब तरफ खुसी का माहौल था

उसके बाद hi कामो भी जनम देती है अपने भाई और अपने प्यार की निशानी को उसके घर ेल खूबसूरत बच्ची का जनम होता है जिसे देख कर गिरजा भी काफी खुस थी

बात करे लेले और सलमा की तो उन्हें भी कुछ समय बाद वो मिल hi जाता है जिसकी वो उम्मीद में थे

लेले एक लड़के को जनम देती है जिसे देखते hi सलमा के चेहरे का नूर वापस लौट आता है

लेले भी अपने बच्चे को पकड़ काफी खुस थी आखिर होती भी क्यों न ाअखिर उसे भी औरो की hi तरह रवि से प्यार जो हो गया था

अब ये प्यार था या हवस वो मालूम नहीं पर जो भी था अब उसकी निशानी लेले के पास थी जिसे पाकर वो काफी खुश थी

दूसरी और अब तक रेखा को कुछ नहीं हुआ था एक बार वो मल्टी के साथ हॉस्पिटल भी जाती है

डॉक्टर उसे बताता है की वो कभी माँ नहीं बन पायेगी क्योंकि उसकी बच्चेदानी में कोई परेशानी है

ये खबर सुनकर रेखा दिखी होने की जगह खुश ज्यादा होती है क्योंकि अब वो बिना किसी दर के रोज रात अपनी छूट चुदवाती हुई अपने भाई का वीर्य सीधा अपने ालदार डलवाती जिससे उसे काफी खुसी मिलती

सबने एक बार रवि की शादी की बात शुरू की तो रवि ने साफ़ कह दिया की उसे शादी नहीं करनी और अब वो अपनी आगे की साडी जिंदगी अपनी रेखा दीदी के साथ hi बताएगा

कुछ लोगो को उसका फैसला गलत लगा पर अंतत में सब मान गए

केशव और मल्टी जानकी बुआ के साथ सेहर में रहने लगेवथे झा जानकी बुआ की आँखों का इलाज भी चल रहा था

केशव रोज रात को अपनी बीवी और अंधी बुआ को एक hi बिस्तर पर छोड़ता था

दूसरी और बिच बिच में कामो आती जाती रहती थी पर रवि कभी भी उसकी ससुराल नहीं गया शायद रेखा में hi उसे जाने नहीं दिया क्योंकि अब वो रवि फैसला के बाद से उसपर अपना पूरा अधिकार जताती थी एक बीवी की तरह

तो दोस्तों कुल मिला जुला कर यही थी एक घर की कहानी झा रिश्ते इतने उलझते की कब वो प्यार से हवस में बदल गए जिससे घर का कोई भी सदस्य बच नहीं पाया ......

बाकि मेरी इस छोटी इस कहानी को खूब सारा प्यार देने में लिए आप सबका दिल से शुक्रिया ...

थे एन्ड....
 
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