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Part 10तो इस तरह दोनों के जोश और हिम्मत के सड़क ये मैच भी tie-breaker तक पहुँच गया और फिर कुछ ऐसा हुआ के रोहन देखता hi रह गया.
क्यूंकि जब मैच टाई ब्रेकर पर पहुंचा तो अस उसुअल रूही ने, जो के पसीने पसीने हुई पड़ी थी और उसे बहुत प्यास लगी थी, अपनी बहिन मेहुल से पानी की बोतल मांगी. मेहुल ने उसे पानी की बोतल दी और आंख मार दी. उसके आंख मरने पर रूही मुस्कुरा दी. रोहन बहुत कन्फ्यूज्ड था के ये इन दोनों लड़कियों में चल क्या रहा है.
आज रूही ने मेहुल की दी हुई एक टाइट सी वाइट कलर की शर्ट पहनी हुई थी. सुबह खेलते वक्त ये दोनों लड़कियां न hi ब्रा पहनती थी और ना hi पंतय. इस बात का रोहन को भी एहसास होता था. एक तो वैसे hi शर्ट टाइट थी और रूही के निप्पल उसमे से झांक रहे थे, जिन्होंने रोहन को मैच के दौरान बहुत परेशान किया था.
अब रूही ने दो घूंट पानी पिया और बाकि का पानी अपने ऊपर उड़ेल लिया. ऐसा करते hi जैसे क़यामत hi आ गयी. रोहन तो बेहोश होते होते बचा शायद क्यूंकि वो पतली सी शर्ट जो पानी में भीग चुकी थी अब पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट हो चुकी थी और उसमे से न सिर्फ दोनों निप्पल बल्कि स्तनों और निप्पल्स के बीच का एरिया “अरेओला” साफ़ दिखाई दे रहा था.
रोहन तो उन्हें देखकर इतना उत्तेजित हो गया के उससे अपना लुंड संभालना मुश्किल हो गया. स्तनों को देखकर उसका लुंड हिचकोले खाने लगा. उसके शरीर पर जैसे उसका काबू hi न रहा हो. वो मन hi मन सोचने laga…sala इस हालत में जीतना तो दूर खेलना hi मुश्किल होगा.
उसका मन कर रहा था अभी बाथरूम में जाकर मुठ मार कर आये. वैसे उसे खुद पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था के अपनी hi बहिन को देखकर वो किस तरह से उत्तेजित हो रहा था.
वो रूही के बूब्स को देखते हुए ये सब सोच रहा था तो उसे इस बात का ध्यान नहीं था के दोनों बहने उसे देखकर मुस्कुरा रही हैं. रूही ने उसे उसके ख्यालों से बहार लाके के लिए kaha…..kyun भाई, हार मान ली क्या? आज तुम्हारी गेम वैसे भी पहले जैसी नहीं थी.
रोहन होश में आया. होश में आते hi पहले तो उसे शर्मिंदगी हुई. क्यूंकि रूही ने जब उसे बोलै तो वो उसके बूब्स को देख रहा था जो काफी हद तक ट्रांसपेरेंट हो चुके थे. वो सोचने लगा रूही क्या सोच रही होगी भाई उसको कैसे हवसी की तरह देख रहा है.
फिर सँभालते हुए bola….kyun मैं क्यों हार मानूंगा. मैं खेलूंगा. और हर रोज़ की तरह तुम्हे हराऊंगा भी.
Ruhi…ho जाये fir…..rohan…haan हो जाये.
रोहन ये बोल तो रहा था पर उसका आत्मविश्वास आज डगमगा चूका था और उसका ध्यान बार बार उस ब्राउन कलर के घेरे की और जा रहा था जो देखने में बहुत hi सुन्दर, बहुत hi उत्तेजक लग रहा था.
इन दोनों ने जैसे hi खेल शुरू किया तो रोहन बहुत ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. थोड़ी hi देर में रूही ने खेल ख़तम कर दिया. वो उछलती हुई आयी. वो चिल्ला रही thi..maine भाई को हरा diya…heeyyyyy…maine भाई को हरा diya…pehli बार भाई को हराया.
रोहन मन hi मन सोच रहा tha…tune मुझे कहाँ हराया तेरे बूब्स ने हराया मुझे तो. उधर मेहुल मन hi मन सोचते हुए मुस्कुरा रही thi…meri चल कामयाब हो hi गयी. जिस यौवन के आगे ऋषि मुनि नहीं टिक पाए. उस यौवन के आगे मेरा भाई कहाँ टिक पाटा.
रूही को बस इतना पता था के जैसे मेहुल ने कहा वैसे उसने किया. उसे तो ये भी नहीं पता था के रोहन को उसके बूब्स ने उत्तेजित किया है. उसे लगा पानी शरीर पर डालकर उसके अंदर नयी ताजगी आ गयी, और रोहन थका हुआ था, जिस वजह से वो हार गया. मतलब बेचारी अभी सेक्सुअल एहसासों से अनजान थी. उसे इतना थोड़े पता था के उसका खुद का भाई hi उसे प्रेमियों की ताड़ता है और उसी वजह से वो ये मैच जीत पायी है.
रूही भाग कर रोहन के गले लग गयी और उसकी गलों पर चुम्मियों की बारिश hi कर दी. रोहन से अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था क्यूंकि जिन बूब्स को वो दूर से देख रहा था वो अब उसके शरीर से चिपके हुए थे, चिपके क्या धंसे हुए थे क्यूंकि रूही उससे बुरी तरह से लिपटी हुई थी. अब जब उससे बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया तो रोहन भगा अंदर की और. वो वैसे भी खुद को गलत समझ रहा था और उससे अलग होना hi चाहता था.
अब बाथरूम में जाकर उसने अपने सारे कपडे अपने शरीर से अलग कर दिए तो उसे अपना लुंड 90 डिग्री के कोण पर खड़ा नज़र आया. उसने उसे अपने हाथ में लिया और मुठ मरने लगा. न चाहते हुए भी बार बार उसे अपनी बहिन रूही के बूब्स नज़र आ रहे थे मुठ मारते वक्त.
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ऐसा नहीं था के रिशु को खाना बनाना नहीं आता था. पर वो ज्यादातर किचन में जाना पसंद नहीं करता था. इसलिए प्राची को लगता नहीं था के वो उसकी मनपसंद कड़ाही पनीर बना भी पायेगा या नहीं.
रिशु भी आज अपनी तरफ से कोई कसार नहीं छोड़ना चाहता था. आखिर उसे अपनी बहिन की और से पहला तोहफा मिलने वाला था. कुछ न कुछ तो उसे जरूर मिलना था आज. पर उसके लिए कंडीशन थी वो उसके पसंद की चीज बनता.
प्राची भी इंतज़ार में थी के उसका भाई उसके लिए कुछ बनाये और उनका प्यार का और वासना का खेल शुरू हो सके. प्राची को भी अब तक इस बात की समझ आ चुकी थी के रिशु भी उससे यही कुछ चाहता है तो वो अब अपने आप को हर चीज के लिए तैयार कर चुकी थी.
रिशु जी जान से अपनी प्यारी बहिन के लिए खाना बनाने में जूता था. उसने यूट्यूब पर भी एक दो वीडियोस देखि. वो कोई कसार नहीं छोड़ना चाहता था के कहीं कोई कमी ना रह जाए. वो हर चीज परफेक्ट तरीके से डालना चाहता था.
उसने साथ में दाल चावल और चपाती भी बनाई दोनों के लिए. प्राची बाउल्स में डालने के लिए उसकी हेल्प के लिए आयी तो रिशु ने उसे बिलकुल मन कर दिया और bola…bilkul नहीं दीदी. आज का खाना मेरी और से. प्राची को भला और क्या चाहिए था वो पीछे हैट गयी और डाइनिंग टेबल पर जाकर बैठ गयी.
खाने की खुशबु ने उसे मदहोश कर दिया था. अब उससे इंतज़ार नहीं हो रहा था. वो चाहती थी के जल्द से जल्द खाना सर्वे हो. इसके लिए उसको ज्यादा देर इंतज़ार नहीं करना पड़ा और खाना टेबल पर था.
ऑंखें बंद करके प्राची खाने की खुशबु सूंघ रही थी. वो नाक से दीर्घ सांस ले के boli…bhai खाने की खुशबु तो लाजवाब है. ये बोलते हुए उसके चेहरे पर डिवीने स्माइल थी.
रिशु ने खुद hi खाना सर्वे करने लगा. अभी इन दोनों ने खाना शुरू भी नहीं किया था के इनकी मम्मी आ गयी. अपनी मम्मी को देखते hi रिशु के चेहरे पर बारह बज गए. वो तो अपनी बहिन से अपनी की हुई म्हणत के बदले में गिफ्ट लेना चाहता था पर अब जब मम्मी आ गयी थी तो उसे ये सब कहते में पड़ता नज़र आ रहा था.
मम्मी आते hi बोली” वह क्या खुशबु है. प्राची तुम खाना बहुत अच्छा बनाने लगी हो.”
रिशु ने इतने में एक और प्लेट लगा दी उसमे भी खाना सर्वे कर दिया. मम्मी की बात सुनकर प्राची boli”mummy आज खाना मैंने नहीं रिशु ने बनाया है.”
मम्मी ने अभी सिर्फ खाने को सुंघा था उसे टास्ते नहीं किया था पर फिर भी उसे समझ आ गयी थी के खाना बहुत अच्छा बना है तो उसने उठकर अपने बेटे को गले से लगा लिया. रिशु तो पहले hi हरामी था. अपनी मम्मी के बूब्स का स्पर्श पाते hi उसे इतना सुख का एहसास हुआ के उसके लुंड ने एक झटका सा मारा.
मम्मी ने उसे जल्दी से छोड़ दिया क्यूंकि खाने की खुशबु hi इतनी अच्छी थी के उससे रुक पाना मुश्किल हो रहा था. मम्मी खाने का टास्ते करते hi बोली “तुम कब इतना टेस्टी खाना बनाने लगे रिशु.”
प्राची ने तना मारने वाले अंदाज़ में बोलै “मुम्मा आपको अपनी सहेलियों से फुर्सत कहाँ है जो आपको पता चले के आपके बचे क्या क्या करने लगे हैं.”
मम्मी ने चेहरा प्राची की और घुमाया और बड़े hi प्यार से बोली “ोोू मेरा बचा नाराज़ है क्या मुम्मा से. तुम्हे तो पता hi है पापा नहीं हैं. तो मुझे अपना टाइम पास करने के लिए अपना सर्किल चाहिए था. इसलिए मुझे जाना पड़ता है बचे.”
रिशु ने देखा के उसकी मम्मी उदास हो गयी है तो वो उनकी जांघ पर हाथ रखकर बोलै “कोई बात नहीं मुम्मा. हम दोनों समझते हैं. दीदी का वो मतलब नहीं था. हम दोनों तो आपसे बहुत प्यार करते हैं और दिन भर आपको मिस करते हैं.
Mummy…pyar से रिशु की और देखते hu…dekhte hi देखते तुम दोनों कब जवान हो गए पता hi नहीं चला और सच में तूने खाना बहुत hi लाजवाब बनाया है. है न प्राची.
Prachi…haan मुम्मा, आप सही बोल रहे हो इसने खाना वाकई बहुत लाजवाब बनाया hai…prachi ने मुस्कुराते हुए कहा और बड़े hi प्यार से अपने भाई की और देखा.
मम्मी बहुत थकी हुई थी खाना खा कर वो दोनों को गुड नाईट बोलकर सोने के लिए चली गयी. रिशु बर्तन उठाने लगा तो प्राची boli…ab इतना तो मुझे कर लेने दे यार.
रिशु को बहुत अच्छा लगा जब प्राची ने उसे भाई की जगह यार बोलै. वो मुस्कुरा दिया और अपने रूम में चला गया.
कोई एक घंटे बाद रिशु के दरवाजे पर नॉक हुआ. उसे पता था उसकी दीदी आयी होगी. तो वो bola…come इन दीदी.
प्राची अंदर आयी तो रिशु की नज़र सबसे पहले उसके छोटे छोटे कपड़ों पर पड़ी जो वो अक्सर रात को पहना करती थी. उसे देखकर रिशु खड़ा हो गया.
वो उसके एकदम करीब पहुंचकर उसके बालों पर अपना हाथ फेरते हुए boli….bolo मेरे भाई को चाहिए अपनी दीदी से.
रिशु को उसकी मुँह मांगी मुराद मिल रही थी. वो उसकी इस हरकत से इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था के उसकी बात का जवाब देने की बजाये उसने अपनी दीदी के होंठों पर होंठ भिड़ा दिए. प्राची जैसे इस हमले के लिए पहले से तैयार थी. उसने भी अपने भाई का भरपूर साथ देना शुरू कर दिया किश में.
रिशु ने अपनी बहिन के चूतड़ अपने दोनों हाथो में भर लिए. कब से वो ये सब करने को तड़प रहा था और आज वो दिन आ गया था जब वो अपनी बहिन से चिपक कर उसे स्मूच कर रहा था. प्राची के लिए भी तो ये सपना पूरा होने जैसा था. आज मेहुल की वजह से इन दोनों का मिलान संभव हो पाया था.
रिशु का मन कर रहा था के वो अपनी बहिन के बूब्स को दबाये पर अभी थोड़ी झिझक सी महसूस कर रहा था. वो उसके चूतड़ पकड़ कर उसे अपने शरीर से चिपटा रहा था. उसके ऐसा करने से प्राची को अपने भाई के लुंड की हार्डनेस का एहसास हुआ. वो और भी ज्यादा ुत्तेहित हो गयी थी.
एकदम गोरा चिट्टा चिकना शरीर, जवान बहिन उसे एक प्रेमिका की तरह प्यार कर रही थी. रिशु की ऑंखें लाल हो रही थी वासना की वजह से . पर अभी दोनों hi थोड़ा झिझक रहे थे कुछ और करने के लिए.
मम्मी की आवाज़ ने इन दोनों को किश करने से रोका. वो प्राची को आवाज़ लगा रही थी.
“बीटा प्राची तुम अपने रूम में नहीं हो. बाथरूम में भी नहीं हो. क्या रिशु के रूम में हो”
प्राची ने अंदर से आवाज़ lagayi…haan मुम्मा हम दोनों बातें कर रहे थे.
प्राची रिशु से boli…bhai मुझे अब जाना होगा. मम्मी धुंध रही है मुझे.
रिशु को उसे छोड़ना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा. रिशु सिर्फ निस्केर में था. प्राची की नज़र उसके खड़े हुए लुंड पर थी. पर वो अभी कुछ कर नहीं सकती थी. अपनी असमर्थतता दिखते हुए बोली …भाई कल मिलते हैं न. अभी के लिए इतना hi बहुत है.
रिशु ने एक बार फिर से अपनी बहिन को जफ्फी दाल के उसके होंठों पर किश कर दिया. जाते जाते जब प्राची ने उसकी और निगाह डाली तो रिशु ने निस्केर में hi अपना लुंड पकड़ा और bola…kal मुझे और चाहिए behan….prachi कुछ नहीं बोली बस मुस्कुरा कर रूम से निकल गयी.
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क्यूंकि जब मैच टाई ब्रेकर पर पहुंचा तो अस उसुअल रूही ने, जो के पसीने पसीने हुई पड़ी थी और उसे बहुत प्यास लगी थी, अपनी बहिन मेहुल से पानी की बोतल मांगी. मेहुल ने उसे पानी की बोतल दी और आंख मार दी. उसके आंख मरने पर रूही मुस्कुरा दी. रोहन बहुत कन्फ्यूज्ड था के ये इन दोनों लड़कियों में चल क्या रहा है.
आज रूही ने मेहुल की दी हुई एक टाइट सी वाइट कलर की शर्ट पहनी हुई थी. सुबह खेलते वक्त ये दोनों लड़कियां न hi ब्रा पहनती थी और ना hi पंतय. इस बात का रोहन को भी एहसास होता था. एक तो वैसे hi शर्ट टाइट थी और रूही के निप्पल उसमे से झांक रहे थे, जिन्होंने रोहन को मैच के दौरान बहुत परेशान किया था.
अब रूही ने दो घूंट पानी पिया और बाकि का पानी अपने ऊपर उड़ेल लिया. ऐसा करते hi जैसे क़यामत hi आ गयी. रोहन तो बेहोश होते होते बचा शायद क्यूंकि वो पतली सी शर्ट जो पानी में भीग चुकी थी अब पूरी तरह से ट्रांसपेरेंट हो चुकी थी और उसमे से न सिर्फ दोनों निप्पल बल्कि स्तनों और निप्पल्स के बीच का एरिया “अरेओला” साफ़ दिखाई दे रहा था.
रोहन तो उन्हें देखकर इतना उत्तेजित हो गया के उससे अपना लुंड संभालना मुश्किल हो गया. स्तनों को देखकर उसका लुंड हिचकोले खाने लगा. उसके शरीर पर जैसे उसका काबू hi न रहा हो. वो मन hi मन सोचने laga…sala इस हालत में जीतना तो दूर खेलना hi मुश्किल होगा.
उसका मन कर रहा था अभी बाथरूम में जाकर मुठ मार कर आये. वैसे उसे खुद पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था के अपनी hi बहिन को देखकर वो किस तरह से उत्तेजित हो रहा था.
वो रूही के बूब्स को देखते हुए ये सब सोच रहा था तो उसे इस बात का ध्यान नहीं था के दोनों बहने उसे देखकर मुस्कुरा रही हैं. रूही ने उसे उसके ख्यालों से बहार लाके के लिए kaha…..kyun भाई, हार मान ली क्या? आज तुम्हारी गेम वैसे भी पहले जैसी नहीं थी.
रोहन होश में आया. होश में आते hi पहले तो उसे शर्मिंदगी हुई. क्यूंकि रूही ने जब उसे बोलै तो वो उसके बूब्स को देख रहा था जो काफी हद तक ट्रांसपेरेंट हो चुके थे. वो सोचने लगा रूही क्या सोच रही होगी भाई उसको कैसे हवसी की तरह देख रहा है.
फिर सँभालते हुए bola….kyun मैं क्यों हार मानूंगा. मैं खेलूंगा. और हर रोज़ की तरह तुम्हे हराऊंगा भी.
Ruhi…ho जाये fir…..rohan…haan हो जाये.
रोहन ये बोल तो रहा था पर उसका आत्मविश्वास आज डगमगा चूका था और उसका ध्यान बार बार उस ब्राउन कलर के घेरे की और जा रहा था जो देखने में बहुत hi सुन्दर, बहुत hi उत्तेजक लग रहा था.
इन दोनों ने जैसे hi खेल शुरू किया तो रोहन बहुत ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. थोड़ी hi देर में रूही ने खेल ख़तम कर दिया. वो उछलती हुई आयी. वो चिल्ला रही thi..maine भाई को हरा diya…heeyyyyy…maine भाई को हरा diya…pehli बार भाई को हराया.
रोहन मन hi मन सोच रहा tha…tune मुझे कहाँ हराया तेरे बूब्स ने हराया मुझे तो. उधर मेहुल मन hi मन सोचते हुए मुस्कुरा रही thi…meri चल कामयाब हो hi गयी. जिस यौवन के आगे ऋषि मुनि नहीं टिक पाए. उस यौवन के आगे मेरा भाई कहाँ टिक पाटा.
रूही को बस इतना पता था के जैसे मेहुल ने कहा वैसे उसने किया. उसे तो ये भी नहीं पता था के रोहन को उसके बूब्स ने उत्तेजित किया है. उसे लगा पानी शरीर पर डालकर उसके अंदर नयी ताजगी आ गयी, और रोहन थका हुआ था, जिस वजह से वो हार गया. मतलब बेचारी अभी सेक्सुअल एहसासों से अनजान थी. उसे इतना थोड़े पता था के उसका खुद का भाई hi उसे प्रेमियों की ताड़ता है और उसी वजह से वो ये मैच जीत पायी है.
रूही भाग कर रोहन के गले लग गयी और उसकी गलों पर चुम्मियों की बारिश hi कर दी. रोहन से अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था क्यूंकि जिन बूब्स को वो दूर से देख रहा था वो अब उसके शरीर से चिपके हुए थे, चिपके क्या धंसे हुए थे क्यूंकि रूही उससे बुरी तरह से लिपटी हुई थी. अब जब उससे बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया तो रोहन भगा अंदर की और. वो वैसे भी खुद को गलत समझ रहा था और उससे अलग होना hi चाहता था.
अब बाथरूम में जाकर उसने अपने सारे कपडे अपने शरीर से अलग कर दिए तो उसे अपना लुंड 90 डिग्री के कोण पर खड़ा नज़र आया. उसने उसे अपने हाथ में लिया और मुठ मरने लगा. न चाहते हुए भी बार बार उसे अपनी बहिन रूही के बूब्स नज़र आ रहे थे मुठ मारते वक्त.
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ऐसा नहीं था के रिशु को खाना बनाना नहीं आता था. पर वो ज्यादातर किचन में जाना पसंद नहीं करता था. इसलिए प्राची को लगता नहीं था के वो उसकी मनपसंद कड़ाही पनीर बना भी पायेगा या नहीं.
रिशु भी आज अपनी तरफ से कोई कसार नहीं छोड़ना चाहता था. आखिर उसे अपनी बहिन की और से पहला तोहफा मिलने वाला था. कुछ न कुछ तो उसे जरूर मिलना था आज. पर उसके लिए कंडीशन थी वो उसके पसंद की चीज बनता.
प्राची भी इंतज़ार में थी के उसका भाई उसके लिए कुछ बनाये और उनका प्यार का और वासना का खेल शुरू हो सके. प्राची को भी अब तक इस बात की समझ आ चुकी थी के रिशु भी उससे यही कुछ चाहता है तो वो अब अपने आप को हर चीज के लिए तैयार कर चुकी थी.
रिशु जी जान से अपनी प्यारी बहिन के लिए खाना बनाने में जूता था. उसने यूट्यूब पर भी एक दो वीडियोस देखि. वो कोई कसार नहीं छोड़ना चाहता था के कहीं कोई कमी ना रह जाए. वो हर चीज परफेक्ट तरीके से डालना चाहता था.
उसने साथ में दाल चावल और चपाती भी बनाई दोनों के लिए. प्राची बाउल्स में डालने के लिए उसकी हेल्प के लिए आयी तो रिशु ने उसे बिलकुल मन कर दिया और bola…bilkul नहीं दीदी. आज का खाना मेरी और से. प्राची को भला और क्या चाहिए था वो पीछे हैट गयी और डाइनिंग टेबल पर जाकर बैठ गयी.
खाने की खुशबु ने उसे मदहोश कर दिया था. अब उससे इंतज़ार नहीं हो रहा था. वो चाहती थी के जल्द से जल्द खाना सर्वे हो. इसके लिए उसको ज्यादा देर इंतज़ार नहीं करना पड़ा और खाना टेबल पर था.
ऑंखें बंद करके प्राची खाने की खुशबु सूंघ रही थी. वो नाक से दीर्घ सांस ले के boli…bhai खाने की खुशबु तो लाजवाब है. ये बोलते हुए उसके चेहरे पर डिवीने स्माइल थी.
रिशु ने खुद hi खाना सर्वे करने लगा. अभी इन दोनों ने खाना शुरू भी नहीं किया था के इनकी मम्मी आ गयी. अपनी मम्मी को देखते hi रिशु के चेहरे पर बारह बज गए. वो तो अपनी बहिन से अपनी की हुई म्हणत के बदले में गिफ्ट लेना चाहता था पर अब जब मम्मी आ गयी थी तो उसे ये सब कहते में पड़ता नज़र आ रहा था.
मम्मी आते hi बोली” वह क्या खुशबु है. प्राची तुम खाना बहुत अच्छा बनाने लगी हो.”
रिशु ने इतने में एक और प्लेट लगा दी उसमे भी खाना सर्वे कर दिया. मम्मी की बात सुनकर प्राची boli”mummy आज खाना मैंने नहीं रिशु ने बनाया है.”
मम्मी ने अभी सिर्फ खाने को सुंघा था उसे टास्ते नहीं किया था पर फिर भी उसे समझ आ गयी थी के खाना बहुत अच्छा बना है तो उसने उठकर अपने बेटे को गले से लगा लिया. रिशु तो पहले hi हरामी था. अपनी मम्मी के बूब्स का स्पर्श पाते hi उसे इतना सुख का एहसास हुआ के उसके लुंड ने एक झटका सा मारा.
मम्मी ने उसे जल्दी से छोड़ दिया क्यूंकि खाने की खुशबु hi इतनी अच्छी थी के उससे रुक पाना मुश्किल हो रहा था. मम्मी खाने का टास्ते करते hi बोली “तुम कब इतना टेस्टी खाना बनाने लगे रिशु.”
प्राची ने तना मारने वाले अंदाज़ में बोलै “मुम्मा आपको अपनी सहेलियों से फुर्सत कहाँ है जो आपको पता चले के आपके बचे क्या क्या करने लगे हैं.”
मम्मी ने चेहरा प्राची की और घुमाया और बड़े hi प्यार से बोली “ोोू मेरा बचा नाराज़ है क्या मुम्मा से. तुम्हे तो पता hi है पापा नहीं हैं. तो मुझे अपना टाइम पास करने के लिए अपना सर्किल चाहिए था. इसलिए मुझे जाना पड़ता है बचे.”
रिशु ने देखा के उसकी मम्मी उदास हो गयी है तो वो उनकी जांघ पर हाथ रखकर बोलै “कोई बात नहीं मुम्मा. हम दोनों समझते हैं. दीदी का वो मतलब नहीं था. हम दोनों तो आपसे बहुत प्यार करते हैं और दिन भर आपको मिस करते हैं.
Mummy…pyar से रिशु की और देखते hu…dekhte hi देखते तुम दोनों कब जवान हो गए पता hi नहीं चला और सच में तूने खाना बहुत hi लाजवाब बनाया है. है न प्राची.
Prachi…haan मुम्मा, आप सही बोल रहे हो इसने खाना वाकई बहुत लाजवाब बनाया hai…prachi ने मुस्कुराते हुए कहा और बड़े hi प्यार से अपने भाई की और देखा.
मम्मी बहुत थकी हुई थी खाना खा कर वो दोनों को गुड नाईट बोलकर सोने के लिए चली गयी. रिशु बर्तन उठाने लगा तो प्राची boli…ab इतना तो मुझे कर लेने दे यार.
रिशु को बहुत अच्छा लगा जब प्राची ने उसे भाई की जगह यार बोलै. वो मुस्कुरा दिया और अपने रूम में चला गया.
कोई एक घंटे बाद रिशु के दरवाजे पर नॉक हुआ. उसे पता था उसकी दीदी आयी होगी. तो वो bola…come इन दीदी.
प्राची अंदर आयी तो रिशु की नज़र सबसे पहले उसके छोटे छोटे कपड़ों पर पड़ी जो वो अक्सर रात को पहना करती थी. उसे देखकर रिशु खड़ा हो गया.
वो उसके एकदम करीब पहुंचकर उसके बालों पर अपना हाथ फेरते हुए boli….bolo मेरे भाई को चाहिए अपनी दीदी से.
रिशु को उसकी मुँह मांगी मुराद मिल रही थी. वो उसकी इस हरकत से इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था के उसकी बात का जवाब देने की बजाये उसने अपनी दीदी के होंठों पर होंठ भिड़ा दिए. प्राची जैसे इस हमले के लिए पहले से तैयार थी. उसने भी अपने भाई का भरपूर साथ देना शुरू कर दिया किश में.
रिशु ने अपनी बहिन के चूतड़ अपने दोनों हाथो में भर लिए. कब से वो ये सब करने को तड़प रहा था और आज वो दिन आ गया था जब वो अपनी बहिन से चिपक कर उसे स्मूच कर रहा था. प्राची के लिए भी तो ये सपना पूरा होने जैसा था. आज मेहुल की वजह से इन दोनों का मिलान संभव हो पाया था.
रिशु का मन कर रहा था के वो अपनी बहिन के बूब्स को दबाये पर अभी थोड़ी झिझक सी महसूस कर रहा था. वो उसके चूतड़ पकड़ कर उसे अपने शरीर से चिपटा रहा था. उसके ऐसा करने से प्राची को अपने भाई के लुंड की हार्डनेस का एहसास हुआ. वो और भी ज्यादा ुत्तेहित हो गयी थी.
एकदम गोरा चिट्टा चिकना शरीर, जवान बहिन उसे एक प्रेमिका की तरह प्यार कर रही थी. रिशु की ऑंखें लाल हो रही थी वासना की वजह से . पर अभी दोनों hi थोड़ा झिझक रहे थे कुछ और करने के लिए.
मम्मी की आवाज़ ने इन दोनों को किश करने से रोका. वो प्राची को आवाज़ लगा रही थी.
“बीटा प्राची तुम अपने रूम में नहीं हो. बाथरूम में भी नहीं हो. क्या रिशु के रूम में हो”
प्राची ने अंदर से आवाज़ lagayi…haan मुम्मा हम दोनों बातें कर रहे थे.
प्राची रिशु से boli…bhai मुझे अब जाना होगा. मम्मी धुंध रही है मुझे.
रिशु को उसे छोड़ना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा. रिशु सिर्फ निस्केर में था. प्राची की नज़र उसके खड़े हुए लुंड पर थी. पर वो अभी कुछ कर नहीं सकती थी. अपनी असमर्थतता दिखते हुए बोली …भाई कल मिलते हैं न. अभी के लिए इतना hi बहुत है.
रिशु ने एक बार फिर से अपनी बहिन को जफ्फी दाल के उसके होंठों पर किश कर दिया. जाते जाते जब प्राची ने उसकी और निगाह डाली तो रिशु ने निस्केर में hi अपना लुंड पकड़ा और bola…kal मुझे और चाहिए behan….prachi कुछ नहीं बोली बस मुस्कुरा कर रूम से निकल गयी.
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