Indian XXX नेहा बह के कारनामे - Page 3 - SexBaba
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Indian XXX नेहा बह के कारनामे

कुछ दिन गुजरे... उन दोनों के बीच वोही छेड़खानी, हाथ से खेलना, हग करना ऊपर-ऊपर किसेस वगैरह करना चलता रहा। कई बार प्रवींद्र ने नेहा को बाहों में भरके गरमा गरम किस किए, और नेहा ने रेस्पांड भी किए अच्छी तरह से। मगर सेक्सुअल एनकाउंटर नहीं हुए दोनों के बीच। प्रवींद्र का मन तो बहुत कर रहा था मगर अपने आप पर काबू रख रहा था और नेहा को फोर्स नहीं करना चाहता था, बल्की चाहता था की खुशी-खुशी खुद नेहा उसके साथ सेक्स के लिए तैयार हो। वैसे किस करते वक्त जब कभी भी प्रवींद्र और आगे बढ़ना चाहता तो नेहा झट से किस रोक कर उसके चंगुल से निकल जाती थी।

मगर ससुर हर रात को नेहा के साथ खूब एंजाय करता था और अक्सर प्रवींद्र उन दोनों को देखने जाता, अपने सीक्रेट जगह से और सब देखने के बाद नेहा को अपने पिता के साथ सोचकर मूठ मारता। उसने नोट किया की

नेहा बहुत ही कामुक है और अपने ससुर के साथ बहुत खुशी से एंजाय करते हुए सब करती है। तो प्रवींद्र सोचता रहता की क्यों नेहा उसको नहीं करने देती जबकी उसके पिता के साथ इतने मजे से सब करती थी। यह उम्मीद
करते हुए प्रवींद्र ने धीरज से काम लिया की आज नहीं तो कल नेहा उसको भी वो मजा देगी।

एक दिन ऐसा हुआ की प्रवींद्र को शहर किसी जरूरी काम से जाना था और एक दिन बाद वापस आना था। खेत के लिए केमिकल्स की खरीदारी की डील के लिए उसको उसके पिता ने भेजा था। दूसरे दिन जब शहर से घर वापस आ रहा था और अपने घर के गेट तक पहँचा तो उसके चाचा, उसके पिता के भाई गेट से बाहर निकल रहे थे।

प्रवींद्र ने अपने चाचा को नमस्ते किया।

चाचा ने पूछा- “कहाँ से आ रहा है?"

बड़े आदर के साथ प्रवींद्र ने चाचा को बताया की शहर गया था केमिकल्स की डील के लिए। फिर प्रवींद्र ने चाचा से पूछा- “वो इस वक्त यहाँ पर कैसे?” क्योंकी वो तो बहुत दूर खेतों के पास का रहने वाला है।

तो चाचा ने बताया- “वो एक खेत का औजार लौटने के लिए आया था जो उसने उसके पिता से लिया था.."

प्रवींद्र अंदर दाखिल हुआ तो नेहा ने मुश्कुराते हुए उसको देखा और पूछा- “क्या पिएगा और थक गया है क्या?"

प्रवींद्र ने हाँ कहा और पूछा- चाचा क्यों आए थे?

नेहा ने जवाब दिया- "पिताजी से मिलना चाहते थे इसीलिए..."

प्रवींद्र को हैरानी हुई नेहा का जवाब सुनकर। और नेहा से पूछा- “पिताजी से मिलने के लिए, और किसी चीज के लिए नहीं?"

नेहा ने आराम से मुश्कुराते हुए कहा- “नहीं... उसने पूछा क्या पिताजी देर करेंगे वापस आने में?"

तो प्रवींद्र को शंका हुई। उसने सोचा कुछ तो गड़बड़ है, या तो चाचा झूठ बोल रहे हैं या नेहा। चाचा ने कहा की औजार लौटाने आया था और नेहा बता रही है की पिताजी से मिलने के लिए आया था। कुछ देर बाद प्रवींद्र ने गंभीरता से नेहा से पूछताछ करने को निश्चय किया।

 
उसने कहा- “भाभी मुझे लगता है की आप कुछ छुपा रही हो मुझसे। गेट पर मुझसे चाचा ने कहा की वो कुछ लौटाने के लिए आया था और आप कह रही हो की वो पिताजी से मिलने को आए थे। अब इसमें सही क्या है?"

नेहा खामोश हो गई, चेहरा लाल पड़ गया उसका और प्रवींद्र के चेहरे में हैरान होकर देखने लगी।

प्रवींद्र भी बहुत हैरानी के साथ उठकर नेहा के करीब गया और उसके चेहरे में देखते हुए कहा- “क्या? क्या वो भी, चाचा भी? क्या वो भी तुम्हारे साथ? ओह माइ गाड... वाट द फक... कब... कैसे... क्यों... भाभी क्या है यह
सब? क्या हो रहा है इस घर में भला? चाचा भी तुमको चोदने को आए थे। उसने तुमको चोदा..” प्रवींद्र गुस्से से लाल हो गया था और चिल्लाकर बात कर रहा था।

पर नेहा ने आराम से अपनी हथेली को प्रवींद्र के मुँह पर लगाया और कहा- “तुमको याद है, उस दिन जब खेत की बात चली थी तो मैंने कहा था की सही वक्त आने पर खेत के बारे में कुछ बताऊँगी... तो यह सही वक्त है अब सुनो..'

नेहा ने प्रवींद्र को बैठने को कहा और वो भी उसके पास बैठी और बोलना शुरू किया- "उन दिनों तुम्हारे पिताजी ने मुझसे सब कुछ करना शुरू कर दिया था और मुझको जब भी खेत ले जाते थे तो खेत में चोदा करते थे और मुझे अच्छा भी लगता था बाहर के वातावरण में वैसे करना। आदत सी हो गई थी, कई बार कर लिया था हमने खेतों में। उस दिन रवींद्र दूर किसी और खेत में था, और जहाँ हम थे उस खेत में कोई किसान भी नहीं थे। पिताजी को पता होता था कि कौन सा खेत फ्री होता है और उस खेत में किसानों के काम खत्म हो गये थे, सब दूसरे फील्ड में चले गये थे। तो तुम्हारे पापा और मैं वहाँ थे। मेरे जिश्म पर कपड़े नहीं थे वो मेरे ऊपर थे और मेरी चूचियां चूस रहे थे की अचानक वहाँ चाचा हमारे सामने आ गया। मेरे पशीने छूट गये और मेरी समझ में नहीं आया की क्या करूँ? पिताजी ने जल्दी से पोजीशन बदला और मुझको दुपट्टे से ढक दिया."

मगर चाचा ने कहा- “कोई बात नहीं भाई लगे रहो, मजा करो यार... क्या किश्मत पाया है तुमने मेरे भाई, इतनी खूबसूरत जवान बहू मिल गई तुझे मजा करने के लिए, वाह भाई जियो यार... काश मेरी भी ऐसी बहू होती?"
उसकी बातों को सुनकर तुम्हारे पिताजी ने मेरे कान में धीरे से कहा- “उसको करने दो वरना पूरे गाँव में वो सबके कान भर देगा और मेरी इज्जत को पानी में मिला देगा...” मैं और पिताजी ने उसको जाय्न करने को कहा।

वो मेरे पास बैठा और दुपट्टे को हटाया, मेरी चूची को किस किया और पिताजी को दूसरी चूची को लेने को कहा। दोनों ससुर मेरी एक-एक चूची को चूसने लगे थे और मेरे जिश्म में जैसे आग भड़क उठी और मैं बिल्कुल बेकाबू हो गई। एकदम गीली हो गई थी मैं और मझे चदाई की बहत सख्त जरूरत महसूस हई, उसी वक़्त। दोनों को समझ में आ गया था की मेरी जरूरत क्या थी उस वक्त, और पिताजी ने एक-एक करके मेरे बाकी के कपड़े उतारे। चाचा ने साथ दिया और, और दोनों ने खूब चोदा, और सच बताऊँ तो मैंने बहुत ही एंजाय किया उस वक्त।

 
बाद में मुझे मालूम पड़ा की चाचा वहाँ अचानक नहीं आए थे, बल्की पिताजी ने सब प्लान किया हुआ था। उसी ने चाचा को वहाँ आने को कहा था क्योंकी वो मुझको अपने भाई से शेयर करना चाहता था। उस दिन के बाद तम्हारे चाचा अक्सर हमें जाय्न करते रहे चोदने के लिए। मझे भी आदत हो गई दोनों की। कई बार रात को भी वो यहाँ होता है अपने भाई के कमरे में, जब मैं पिताजी से रात को मिलने को जाती हैं और दोनों साथ करते हैं मेरे साथ...”

प्रवींद्र का लण्ड बेकाबू हो गया यह सब सुनकर और नेहा को खींचकर उसके बेडरूम में ले गया। नेहा नहीं करने दे रही थी। मगर प्रवींद्र ने जबरदस्ती किया, नेहा के कपड़े जबरदस्ती उसके जिश्म से नोंचे, उसको उसी के बिस्तर पर बिल्कुल नंगी कर दिया, नेहा के जिश्म पर चारों तरफ दाँत से काटा प्रवींद्र ने, उसको चांटा मारा उसकी गाण्ड पर और जै में अपनी भाभी को चोदने लगा।

नेहा छटपटा रही थी, स्ट्रगल कर रही थी, बिस्तर पर इधर से उधर रगड़ रही थी।

मगर प्रवींद्र का लण्ड उसकी चूत के अंदर-बाहर जैसे गुस्से में किए जा रहा था। प्रवींद्र ने नेहा के मुँह में, चूत में, गाण्ड में सभी जगहों में अपने लण्ड को ठसा। नेहा चिल्लाती गई, और प्रवींद्र चोदता गया, बिल्कल एक सांड की तरह, जोश में, जंगली जानवर की तरह कर रहा था प्रवींद्र। चोदते वक्त नेहा के जिश्म को चूस रहा था, दाँत काटते जा रहा था, कई जगह नेहा के जिश्म पर लाल-लाल धब्बे पड़ गये। जिस तरह से प्रवींद्र अपने दाँत गड़ा रहा था।, उसके कंधे पर, गले पर, चूचियां पर, जांघों पर, जहाँ-जहाँ भी प्रवींद्र का मुँह पड़ रहा था करते वक्त उन-उन जगहों पर उसने लाल धब्बे छोड़ा।

नेहा का जिश्म उन लाल धब्बों से भर गया। गले पर, छाती पर, गले के पीछे, पीठ पर, पेट पर नाभि के पास, जांघों पर, उसके गाल पर भी थूक से भिगो दिया था प्रवींद्र ने चारों तरफ नेहा को। कहीं-कहीं तो प्रवींद्र के दाँतों के निशान रह गये थे, और प्रवींद्र ने अपने वीर्य को नेहा के मुँह पर छोड़ा, उसके मुँह को जबरदस्ती खोल के कुछ वीर्य के कतरों को नेहा के मुँह के अंदर भी डाला प्रवींद्र ने। करने के बाद प्रवींद्र जोर से हँसते हए खुद हाँफते हुए नेहा के बगल में लेट गया।

नेहा भी हँसने लगी और कहा- “महा-जंगली हो तुम, जानवर हो बिल्कुल ऐसे करते हैं क्या? वाइल्ड बीस्ट.."
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अपनी भाभी नेहा के साथ उस दरिंदगी भरे एनकाउंटर के बाद प्रवींद्र को इस बात की खुशी थी की वो आखिर नेहा को चोदने में कामयाब हआ। फिर भी उसको लगा की पहला एनकाउंटर वैसा नहीं होना चाहिए था। उसको रोमांटिक, प्यार भरा एनकाउंटर पसंद था। उसको लगा जैसे उसने नेहा का रेप किया, मगर यह भी महसूस किया की नेहा ने पसंद किया।

जिस तरह से नेहा ने आखिर में हँसकर कहा था- "तुम बिल्कुल जंगली हो..” प्रवींद्र को नेहा की आँखों में उस वक्त वासना और सेक्स नजर आया था, जब उसने वह बात कही थी।
नेहा अब एक तजुर्बे वाली बन गई थी सेक्स के बारे में और प्रवींद्र को लगा की अब उसको हर रोज सेक्स की जरूरत पड़ती होगी, शायद दो या तीन बार दिन भर में, ऐसा प्रवींद्र का अनुमान था। उसने सोचा शायद इसीलिए वो अपने ससुर और ससुर के भाई दोनों से चुदवाती थी। नेहा की आँखों में कोई डर या शर्म नहीं थी जिस वक्त उसने बताया की किस तरह से प्रवींद्र के चाचा ने उसको चोदा था और किस तरह से उसके पिता ने उसको शेयर किया था अपने भाई के साथ।

प्रवींद्र का पिता देखने में बिल्कुल बूढा नहीं दिखता। वो फिजिकली बहुत मजबूत दिखता था। था तो 55 साल की उम्र का मगर दिखता 40 साल के लगभग था। किसी को यकीन नहीं था की वो 55 साल का था। उसका स्टाइल, चलने और खड़े होने की स्टाइल और बिल्कुल कड़क लुक था उसका। उसके सर के बाल भी सफेद नहीं हए थे, मतलब एकाध बाल ग्रे कलर के थे बाकी सब काले थे। 6 फीट की लंबाई थी उसकी। बहुत गलत टाइप का आदमी था और जवानी से ही औरतें उसकी कंपनी पसंद करती थीं। अपनी जवानी के दिनों में बहुत सेक्स माइंडेड और सेक्स के लिए लालच भरा इंसान था वो। अपने कई दोस्तों की बीवियों के साथ भी उसका अफेयर था और खुद अपने भाई की बीवी को भी चोदा था उसने।

उन दिनों बहत तमाशा हुआ था, तब प्रवींद्र बच्चा था। वोही भाई जिसके साथ आज वो नेहा को शेयर कर रहा है, उसी की बीवी के साथ उसका अफेयर भी था। उन दिनों जब अपने भाई की बीवी को चोद रहा था तो कुछ महीनों बाद उसके भाई को पता चल गया था और परिवार में बहत हंगामा हआ था। लड़ाई हई थी दोनों भाइयों में, पर छोटे भाई ने अपनी बीवी को नहीं छोड़ा था। तो परिवार में झगड़े के कारण प्रवींद्र के पिता ने छोटे भाई
की बीवी से मिलना बंद कर दिया और दूसरा घर बनाकर रहने चला गया (जहाँ आज वो रहता है)। 4 सालों तक अपने छोटे भाई की बीवी के साथ उसके ताल्लुकात रहे थे। तो जब दोनों भाई अलग हुए तब से 5 सालों तक दोनों में बिल्कुल बातचीत नहीं थी।

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फिर अपनी बहन की मौत के वक़्त दोनों दोबारा मिले थे और फिर से दोनों में वापस दोस्ती हुई, आखिर दोनों की रगों में एक ही खून जो दौड़ रहा था। इन दोनों भाइयों का नाम बताया मैंने.. नहीं न... हम्म... तो प्रवींद्र के पिता का नाम है, ज्ञानसिंह जिसको सब ज्ञान बुलाते हैं और छोटे भाई का नाम है श्यामलाल जिसको श्याम बुलाते हैं।

दोनों भाईयों की उम्र बिल्कुल रवींद्र और प्रवींद्र के जैसी है, एक साल का अंतर। ज्ञान 55 साल का है अब तो श्याम 54 साल का है। और जिस दिन खेत में ज्ञान ने अपनी बहू नेहा को शेयर करने का प्लान किया था। श्याम के साथ, वह बस जैसे एक भरपाई थी, क्योंकी ज्ञान ने श्याम की बीवी को जो चोदा था उतने दिनों तक, तो अपनी बहू को चुदवाकर वो अपने छोटे भाई से मामला बराबर करवा रहा था। उस दिन खेत में नेहा के साथ करने से बहुत पहले उसने अपने छोटे भाई को बता दिया था की वो अपनी बहू नेहा को चोदता है और उससे भी चुदवा सकता है। तो उसने प्लान बनाया की वह खेत में फलाँ जगह पर नेहा को चोद रहा होगा, उसको वहाँ आने को और दोनों को रंगे हाथ पकड़ लेने को।

फिर उसने नेहा को भी चुदवाया अपने छोटे भाई से और उसके बाद घर पर भी रातों को बुलाने लगा श्याम को नेहा के साथ एंजाय करने के लिए। वो इसलिए हुआ की जब श्याम ने पूछा की कैसे नेहा मिल गई उसको? तो ज्ञान के सब बताने के बाद श्याम ने कहा- “तो फिर रात को नेहा के साथ मजा करने उसके कमरे में वो भी आ सकता है..."

तो उस तरह से कभी-कभी रातों को भी अपने भाई के कमरे में नेहा से मजा करने वो भी आने लगा। जब ज्ञान ने श्याम को अपनी बहू को चोदने दिया तब से दोनों की दोस्ती बिल्कुल पहले की तरह मजबूत हो गई। अब श्याम के मन में भी वैसे खयालात थे की वो अपनी बहू को भी चोदे। मगर उसका बेटा साथ नहीं रहता था। दूसरे मकान में बिल्कुल अलग रहता था, और इसका जिक्र उसने ज्ञान से भी किया की उसने भी अपनी बहू को वैसी नजरों से देखा था मगर उसकी किश्मत में ज्ञान जैसा चान्स नहीं था शायद। पर ज्ञान ने उससे कहा की वो उसको तरीका बताएगा की कैसे वो अपनी बह के करीब जा सकता है। आखिर परिवार थे तो ज्ञान भी श्याम की बहू को जानता था और शादी में भी गया था और पूजा वगैरा में सब एकट्ठा मिलते हैं अक्सर और त्योहारों के दिन।
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इसके बारे में बाद में देखेंगे, फिलहाल नेहा की तरफ चलते हैं।
 
हाँ, ज्ञान की यह हमेशा से सबसे बड़ी फैंटेसी थी की एक औरत को दो मर्यों में मिलकर चोदने की, थ्री-सम की। और इस फैंटेसी को उसने 55 साल की उम्र में पूरा किया नेहा के साथ अपने भाई से मिलकर। अब सब लोगों

की अलग-अलग टाइप की फैंटेसीस होती हैं। अगर बाप की ऐसी फँटेसीस थीं तो क्या बेटे का नहीं होगा? प्रवींद्र की क्या फैंटेसीस हैं? क्या हो सकता है उसके मन में नेहा को लेकर? आखिर उसकी रगों में भी तो अपने बाप का खून दौड़ रहा है, चाचा का भी वोही खून है। जब प्रवींद्र को नेहा के सभी सेक्स एनकाउंटर्स के बारे में पता चल गया तो उसके मन में भी एक फैंटेसी ने जनम लिया, इससे पहले उसके मन में कभी भी ऐसे खयालात नहीं आए थे।

यह सिर्फ उसकी जिंदगी में नेहा के आने के बाद शुरू हआ। उसकी फैंटेसी यह थी की वो अब नेहा को अपने पिता और चाचा से चुदते हए देखे और फिर वो भी जायन करें उस पार्टी को... या अगर पिता और चाचा को नहीं जाय्न कर सके तो नेहा को किसी और मर्द के साथ वो भी शेयर करे। यह सब सिर्फ नेहा की बदौलत पैदा हुआ उसके मन में।

जब नेहा ने उसको बताया की कैसे उसके पिता और चाचा, दोनों उसको चोदते हैं, तो प्रवींद्र अब नेहा को लेकर वैसे खयालात पालने लगा अपने मन में। उसको यह समझ में आया की नेहा ये सब बहत एंजाय करती है सिर्फ 18 साल की उम्र में तो नेहा मौका मिलने पर आइन्दा क्या किया करेगी। तो प्रवींद्र ने सोचा की नेहा से बात करेगा इस बारे में। फिर एक दिन उसने बात किया भी।

नेहा घर के बाहर पत्थर पर कपड़े धो रही थी।

नेहा झुक कर कपड़े धो रही थी और प्रवींद्र ने उसको पीछे से उसी पोजीशन में नेहा की कमर से पकड़ा। प्रवींद्र का हाथ सीधा स्कर्ट के ऊपर से ही नेहा की चूत पर गया और उसका लण्ड नेहा की गाण्ड पर रगड़ रहा था। नेहा ने प्रवींद्र के लण्ड को अपनी गाण्ड पर रगड़ते हुए महसूस किया। उसने प्रवींद्र को हटाने की कोशिश की मगर नाकामयाब रही।

प्रवींद्र ने नेहा के सर को अपने हाथ से अपनी तरफ मोड़कर अपने लण्ड को कपड़े के अंदर से ही नेहा की गाण्ड पर रगड़ते हए उसको किस भी किए जा रहा था। नेहा की जीभ के रस का एक-एक कतरा एंजाय कर रहा था प्रवींद्र। नेहा तब तक गरम होने लगी थी क्योंकी उस वक्त प्रवींद्र का हाथ उसके ब्लाउज़ के अंदर उसकी चूचियों को भी मसल रहा था।

नेहा ने झिझकती आवाज में कहा- “हम्म... यहाँ नहीं, हम बाहर में हैं। कोई गली से गुजरेगा तो हमें देख लेगा.."

मगर प्रवींद्र ने अपनी भाभी को मसलना और चाटना जारी रखा। तब तक नेहा की ब्लाउज़ और ब्रा निकल गई थी और नेहा को प्रवींद्र ने अपनी तरफ मोड़ लिया था। प्रवींद्र ने अपने भाभी की चूचियों को चाटना, चूसना शरू जारी रखा।

उसके हाथ नेहा की स्कर्ट को ऊपर उठा रहे थे और वो नेहा की जांघों और चतरों को मसलता जा रहा था। एक साथ चूचियां चूस रहा था, जांघे दबा रहा था और उसकी गाण्ड भी मसल रहा था। और फिर धीरे-धीरे प्रवींद्र की उंगली नेहा की चूत तक पहुँची और पाया की वो बिल्कुल गीली हो चुकी है और लण्ड को लेने के लिए तैयार है।

फिर प्रवींद्र नेहा के हाथ को अपने लण्ड तक ले गया और बहुत जल्द नेहा ने उसके पैंट की जिप नीचे किया, पैंट खोली और नीचे खिसकाने लगी। नेहा ने फिर गली में बाहर की तरफ देखा की कहीं कोई नजर तो नहीं आ रहा, और फिर प्रवींद्र को कपड़े धोने वाले पत्थर की ओर और पीछे खींचा, जहाँ पर गली से नजर नहीं आता था।
 
दोनों उस वक्त खड़े पोजीशन में थे और एक दूसरे को जकड़े हए थे, कभी नेहा की बाहें प्रवींद्र के कंधे पर थीं, तो कभी उसकी कमर पर, फिर कभी उसकी गाण्ड पर, और प्रवींद्र के हाथ भी बिल्कल वैसे ही थे नेहा के जिश्म पर।

प्रवींद्र ने नेहा के कानों में फुसफुसाते हुये कहा- "भाभी, आप बेहद ही सेक्सी और कामुक हो। मैं आपको इस दुनियां में सबसे ज्यादा चाहता हूँ.."

उस दौरान उसकी 2 या 3 उंगलियां भीग गई थीं नेहा की चूत में और नेहा प्रवींद्र का गला चूस रही थी और लाल धब्बा बना दिया, जिस वक्त प्रवींद्र ने वो अल्फ़ाज कहा। और तभी प्रवींद्र ने नेहा को नीचे बैठने के लिए उसके कंधे पर जोर लगाया। नेहा समझ गई और अपने पैरों पर बैठ गई जिससे उसका चेहरा प्रवींद्र के लण्ड के सामने आ गया। बिना प्रवींद्र के कुछ कहे नेहा ने उसके लण्ड को अपने मुलायम हाथ में लिया, थोड़ा सा सहलाया और मुँह में ले लिया चूसने के लिए।

अब नेहा अपने घुटनों पर आ गई थी उसके लण्ड को चूसते हए, उसका एक हाथ प्रवींद्र की कमर पर था और एक हाथ से लण्ड थामा हुआ था और चूसती जा रही थी मजे से। फिर कुछ देर बाद नेहा ने अपनी जीभ चलाया लण्ड के ऊपरी हिस्से पर और नजरों को ऊपर उठाकर प्रवींद्र के चेहरे में देखा कि उसको कितना मजा आ रहा है, उसके वैसे करने से। प्रवींद्र की बंद आँखों को देखकर थोड़ी सी नेहा मुश्कुराई, वो जैसे किसी और दुनियां में था, अपनी भाभी की गरम जीभ को अपने लण्ड पर महसूस करते हुए। नेहा उसको देखती रह गई।

... एसस्स... हाँ हाँ
फिर प्रवींद्र ने तड़पती आवाज में कहा- “ओहह... भाभी, बहुत मजा आ रहा है उफफ्फ... इस्स्स्स भाभी, अपने मुँह के अंदर लो इसे और गहराई में और अंदर घुसने दो ना प्लीज..."

मगर नेहा अपने जीभ को गोल-गोल घुमा रही थी उसके लण्ड के छेद पर, थोड़ा मुश्कुराते हुए और उसके चेहरे पर नजरें गड़ाए। मगर अब प्रवींद्र खड़े ही पोजीशन में नेहा के सर को दोनों हाथों में थामा और अपने लण्ड को उसके मुँह में ठूसा। और अपने सर को ऊपर आसमान के तरफ उठाकर बंद आँखों से लण्ड को नेहा के मुँह में
अंदर-बाहर करने लगा।

फिरर गहराई से सब महसूस करते हुए प्रवींद्र ने कराहते हुए कुछ ऐसी आवाजें निकाली- “हम्म्म... आह्ह... भाभी,
ओहह... माई स्वीट भाभी गो अहेड, चूसो, चूसो, और चूसो मेरे आंड को..."

नेहा को प्रवींद्र को उस हालत में देखकर बहुत मजा आया और उसने प्रवींद्र को एक बहुत मजेदार ब्लो-जाब दिया। प्रवींद्र की जिंदगी की यह पहली ब्लो-जाब थी। कभी भी किसी ने उसके लण्ड को नहीं चूसा था, यह पहली बार थी। प्रवींद्र को कम ही लगा औरर काफी मिन्नतें करने के बाद नेहा खड़ी हुई और कहा- “अब तुम्हारा बारी है मेरी जान..."

तब प्रवींद्र नीचे घुटनों के बल बैठा जमीन पर। तो इस बार नेहा ने अपने सर को पीछे किया, आँखों को बंद किया और प्रवींद्र की जीभ को सिसकते हुए अपनी चूत पर महसूस करने लगी। प्रवींद्र ने पहले चूत को ऊपर से चाटा, फिर पंखुड़ियों को खोला और अपनी जीभ को उसके इर्द-गिर्द गोल-गोल घुमाया और अपनी जीभ को एक साँप की तरह चलाया, जिससे नेहा की बर्दाश्त के बाहर हो गया। फिर प्रवींद्र को उसके जीभ में वो नमकीन लज्जत आई और वो चूसने लगा अपने भाभी की चूत के रस को। और कुछ देर बाद जब प्रवींद्र फिर से स्थैडिंग

पोजीशन पर आया तो नेहा की कमर पर अपने हाथों को रखकर उसको अपने से चिपकाया जिससे उसका खड़ा लण्ड नेहा के पेट के नीचे वाले हिस्से से टकराने लगा। फिर प्रवींद्र ने नेहा के मुँह को अपने मुँह में लिया और अपने मुँह के रस को नेहा के मुँह में डाला और दोनों एक दूसरे की जीभ चूसने लगे।
 
नेहा ने प्रवींद्र को जोर से अपने बाहों में जकड़ा और उसके कान के नीचे वाले हिस्से को मुँह में लेकर चूसने लगी और प्रवींद्र का मुँह इस बार नेहा का गला चूस रहा था। फिर लगे हाथ नेहा ने प्रवींद्र के लण्ड को हाथ में ले लिया, अपने पैर की उंगलियों पर खड़ी हुई, फिर सिसकारियों के साथ नेहा ने लण्ड को अपनी चूत के अंदर ले लिया। दोनों खड़े पोजीशन में ही थे और प्रवींद्र ने जब अपने लण्ड को अपनी भाभी की गीली चूत के अंदर घुसते महसूस किया तो उसने नेहा को अपने जिश्म से और भी जोर से चिपका लिया और अपनी कमर हिलाते हए खड़े पोजीशन में ही धक्का देने लगा। प्रवींद्र ने नेहा की दोनों जांघों को अपने हाथों में जोर से थामा और नेहा ने दोनों टाँगों को प्रवींद्र की कमर पर क्रॉस कर लिया, लण्ड चूत के अंदर ही था बाहर नहीं निकला उसके वैसे करने से।

अब प्रवींद्र के दोनों हाथों ने नेहा की गाण्ड को थाम रखा था और खुद नेहा भी उछलते हुए उठक बैठक कर रही थी और साथ में प्रवींद्र खड़ा था और नेहा को भी थाम रहा था और खुद धक्का भी दे रहा था उसकी चूत के । अंदर। नेहा जैसे एक घोड़े पर बैठी हुई थी दोनों पैरों को दोनों तरफ करके। नेहा की बाहें प्रवींद्र के जिश्म पर थीं, उसके कांधों से होकर पीठ पर। और प्रवींद्र धक्का देते हुए नेहा की चूचियों को चूसते हुए अपने सर नीचे झुका कर रस पी रहा था। और कुछ देर बाद नेहा की सिसकारियां बढ़ती गई, उसकी साँसें उखड़ती गई और वो अपनी आगंजम पर पहुँचने लगी। प्रवींद्र के कंधे पर दाँत काटने लगी। फिर जोरों से साँसें लेते हुए सिसकारियों के साथ नेहा चिल्लाई- “आअहह... इस्स्स्स ..."

मगर तुरंत प्रवींद्र ने एक हाथ से उसकी आवाज को धीमी किया क्योंकी वो बाहर थे। और नेहा झड़ते हए अपने सर को प्रवींद्र की छाती पर रख दिया। उसकी चूत एकदम से गीली हो गई थी और प्रवींद्र का लण्ड आसानी से अंदर-बाहर आता जाता रहा। इसलिये प्रवींद्र को मजा नहीं आ रहा था, तो उसने लण्ड को बाहर निकाला, नेहा को खड़ा किया, उसकी पीठ को अपने तरफ किया, नेहा को दीवार से लगाया और उसकी गाण्ड में धीरे से थोड़ा थूक लगाया और थोड़ा अपने लण्ड पर भी, और उसको ठंस दिया अपनी भाभी के गाण्ड के अंदर।

नेहा ने 'उफफ्फ़' की आवाज निकाली और कहा- “धीरे-धीरे, प्लीज... धीरे-धीरे डालो, दर्द होता है हम्म्म... आहह... उइई माँ..”

फिर लण्ड घुस गया तो प्रवींद्र स्पेशल मजे का एहसास करते हुए अपने लण्ड को अंदर-बाहर करने लगा। अब क्योंकी वो छेद और तंग था तो जल्द ही प्रवींद्र कसके अपनी भाभी को बाहों में जकड़े हुए और गुर्राते हुए झड़ने लगा, उसके गले पर पीछे की चमड़ी को चूसते हुए प्रवींद्र ने अपने वीर्य को अपनी भाभी की गाण्ड के अंदर ही छोड़ा सबका सब, एक कतरा भी बाहर नहीं निकाला। फिर तड़पती आवाज में हाँफते हुए प्रवींद्र ने कहा- “ओहह... भाभी, माई डार्लिंग भाभी, आप दुनिया की सबसे बेहतरीन औरत हैं... ओऊऊऊव... सुपर्ब भाभी फँटस्टिक, बहुत ही मजा आया मुझे भाभी... मुऊआह..” और प्रवींद्र अपनी नेहा भाभी को काफी देर तक चूमता चाटता रहा।

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उस दिन उस कपड़े धोने वाले पत्थर पास के के एनकाउंटर के बाद प्रवींद्र और नेहा एक लविंग कपल की तरह दिन भर घर में रहे। लगता था दोनों पति पत्नी हैं। दोनों साथ-साथ रहते, मजाक करते, हाथों से खेलते,

छेड़खानी करते, और जब बाकी के लोग घर पर होते तो एक दूसरों से नजरें बचाते।

एक बार जब नेहा किचेन में स्टोव के पास थी तो, प्रवींद्र ने वहाँ से गुजरते वक्त अपनी हथेली को नेहा की गाण्ड पर फेरते हुए गुजरा। नेहा ने मुश्कुराते हुए चारों तरफ देखा कि किसी ने देखा तो नहीं? और जब देखा कि ससुर उधर ही कुछ पढ़ रहा है तो नेहा ने प्रवींद्र को मोटी-मोटी आँखों से देखा और इशारों में कहा- “क्यों उसने
वैसा किया? जब सब वहीं पर हैं...”

और प्रवींद्र नेहा की तरफ एक ठरक भरी स्माइल देते हए वहाँ से खिसका।

फिर वक्त हुआ टीवी देखने का और सब लाउंज में इकट्ठे थे रवींद्र के सिवा। वो हमेशा की तरह सोने चला गया था, टीवी तो कभी देखता ही नहीं था वो। एक तीन सीट वाले सोफे पर नेहा, उसके ससुर और प्रवींद्र तीनों बैठे टीवी देख रहे थे। नेहा बीच में बैठी थी और उसके दोनों बगल में एक तरफ ससुर तो एक तरफ पति का छोटा
भाई बैठा था।

 
टीवी देखते वक्त अब ससुर हमेशा उसको छूता था, इसीलिए नेहा उसके पास बैठती थी क्योंकी ऐसा ससुर ने उससे कहा था अपने पहले दिन वाले अफेयर के बाद। तभी से नेहा उसके पास बैठती है और ससुर नेहा के जिश्म पर अपने हाथों से काम करता रहता है। इस दिन से पहले प्रवींद्र कभी भी नेहा के साथ एक ही सोफे पर
ले कभी भी प्रवींद्र ने अपने पिता और नेहा के बीच कभी भी कछ भी नहीं नोटिस किया था, क्योंकी वो कभी भी अपने पिता की तरफ लाउंज में देखने की हिम्मत नहीं करता था। और टीवी देखते वक्त लाउंज में हमेशा लाइट आफ रहती थी, सिर्फ टीवी की स्क्रीन वाली लाइट होती थी।

नेहा को पहले से पता चल चुका था कि आज तो दोनों मर्द उसको छुयेंगे। वो एक ऐसी ड्रेस में थी जो उसके घुटनों तक पहुँचता था और डीप-कट वाला ड्रेस था और स्लीवलेश भी था।
उसके बैठने से ड्रेस थोड़ा सा घुटनों के ऊपर उठ गया था और उसके घुटनों के ठीक ऊपर वाला हिस्सा, जाँघ की शुरुवात दिख रही थी जो थोड़ा और गोरी थी। ड्रेस डार्क ब्लू रंग की थी जिससे उसकी जांघे कंट्रास्ट कर रही थीं उस ड्रेस में, गोरी जांघे और डार्क ब्लू ड्रेस।

वो बहुत ही आकर्षक लग रही थी। कोई भी उस वक्त उसकी जांघों की उस थोड़ी सी शुरुआत को देखकर ही अपना लण्ड नहीं संभाल पाता। प्रवींद्र नेहा के दायें में था और ससुर बायें साइड में बैठे थे। फिर भी और जगह बची थी सोफे पर, किसी को बैठने के लिए, हालांकी वो 3 सीट का ही सोफा था। प्रवींद्र की फैंटेसी उसके मन के अंदर जागी और वो सोचने लगा कि वो अपने पिता की हेल्प से नेहा की ड्रेस को ऊपर उठा रहा है। सिर्फ ऐसा सोचने से लण्ड के उठने से उसकी पैंट में तंबू होने लगा। नेहा ने उसके उभार को नोटिस किया और मुश्कुराते हुए उसपर हल्के से हथेली से मारा। नेहा हँसी और अपने होंठों को दाँतों में दबाया, प्रवींद्र के लण्ड पर मारने के बाद।

और चंद मिनटों के बाद प्रवींद्र के पिता ने नेहा के गोद में अपना हाथ रखा। नेहा खामोश रही और जानने की कोशिश किया कि क्या प्रवींद्र ने अपने पिता के हाथ को नोटिस किया कि नहीं? वैसे हर रात को पिता टीवी देखते वक्त नेहा को जी भर के सहलाता था, क्योंकी सिर्फ वह दोनों ही एक सोफे पर बैठते थे। प्रवींद्र तो हमेशा एक दूसरे सोफे पर बैठता था, वो भी उन दोनों के सामने तो कभी भी उसे कुछ नहीं दिखता था। ससुर ने धीरे से नेहा के ड्रेस को थोड़ा सा ऊपर किया और बार-बार उसकी जांघों पर नजरें मार रहा था। फिर बूढ़े ने हाथ को थोड़ा अंदर किया और नेहा की पैंटी पर हौले-हौले, ड्रेस के नीचे से उंगलियां चलाने लगा।

नेहा ने ड्रेस के ऊपर से ही अपने हाथ को उसके हाथ पर रखा, ताकी प्रवींद्र को ससुर की उंगलियों की हलचल नहीं दिख सके। मगर पिता ने जारी रखा और उसका खड़ा हो गया तो अपने लण्ड पर नेहा का हाथ रखने के लिए धीरे से खींचा। मगर नेहा प्रवींद्र की तरफ देखते हुए हिचकिचा रही थी। फिर प्रवींद्र को नजर आ ही गया तो प्रवींद्र उत्तेजित हो गया। क्योंकी अब तो उसको नेहा को चुदते हुए देखने में मजा आने लगा था। उसको उतने साल की उम्र के लोगों को नेहा को चोदते हुए देखने में पता नहीं क्यों बहुत मजा आता था। प्रवींद्र किसी और अधेड़ या बूढ़े आदमी से नेहा को चुदते हुए देखना चाहता था।

उसको लगता था कि नेहा का जवान जिश्म अधेड़ आदमियों को बहुत ही मजा देता है और खुद नेहा भी बहुत एंजाय करती है। प्रवींद्र को ऐसा क्यों लगता था पता नहीं? शायद उसने अपने पिता के साथ नेहा को आगेजम पाते और एंजाय करते देखा था और नेहा ने खुद उसके चाचा वाली बात को बताया था। इसलिए प्रवींद्र को लगता था कि नेहा अधेड़ आदमियों से चुदवाना बहत पसंद करती है। वो 18 साल की थी, ससुर 55 साल के थे
और ससुर का भाई 54 साल के। तो उसकी उम्र से तीनगुनी से ज्यादा उम्र के लोग उसे चोद रहे थे और नेहा एंजाय करती थी, कमाल है। सोचने की बात है कि जब नेहा पैदा हुई होगी तब प्रवींद्र के बाप की उम्र 36 साल
की रही होगी। मतलब तभी वो उसकी वर्तमान उम्र की दोगुनी उम्र का था, अपनी उम्र से तीनगुनी से ज्यादा उम्र में बड़े आदमी से चुदवाने में कैसा लग रहा होगा नेहा को वोही जाने। यही प्रवींद्र सोच रहा था।

अब नेहा को लेकर प्रवींद्र के फैंटेसी बढ़ती जा रही थी। वो नेहा को किसी से भी कुछ भी करते देखना चाहता था। और प्रवींद्र उस वक्त जानबूझकर लाउंज से निकल गया, अपने पिता को आसानी से नेहा के साथ एंजाय करने के लिए। अब प्रवींद्र की समझ में नहीं आ रहा था कि कहाँ से उन दोनों को देखे?
 
अब नेहा को लेकर प्रवींद्र के फैंटेसी बढ़ती जा रही थी। वो नेहा को किसी से भी कुछ भी करते देखना चाहता था। और प्रवींद्र उस वक्त जानबूझकर लाउंज से निकल गया, अपने पिता को आसानी से नेहा के साथ एंजाय करने के लिए। अब प्रवींद्र की समझ में नहीं आ रहा था कि कहाँ से उन दोनों को देखे?
उसने सोचा एक ही तरीका है उनको देखने को, वो था बाहर से। वो बाहर गया लाउंज में झाँकने के लिए मगर परदा खींचा हआ था तो कुछ भी नजर नहीं आ रहा था, तो वो फिर से अंदर आ गया, मगर उस सोफे पर नहीं बैठा, किसी दूसरी जगह बैठा जो खिड़की के पास थी, फिर उसने धीरे से पर्दे को जरा सा खींचा बस एक पतली सी झिरी बनाने के लिए ताकी उसको बाहर से अंदर दिख सके।

फिर उसने कहा कि अब वो सोने जा रहा है। तब प्रवींद्र बाहर गया और उस झिरी से लाउंज के अंदर देखना शुरू किया। अब वो अपने पिता को अपनी भाभी के साथ एंजाय करते हुए बहुत अच्छी तरह से देख सकता था, जो
छोटी सी जगह बनाया था खिड़की के पर्दे को हटाकर बिल्कुल ठीक था उन दोनों को देखने के लिए।
और लाउंज में जब पिता ने सुना कि प्रवींद्र सोने चला तो वो अपना मुँह नेहा की ड्रेस के अंदर डाल चुका था, उसके जांघों को चाटने के लिए। नेहा की नर्म, मुलायम जांघे जिसकी हल्की गर्मी से ससुर को गाल से दबाते हुए बहुत मजा आ रहा था। यही दिखा प्रवींद्र को बाहर से जब वो वहाँ पहुँचा तो। उसके पिता का सर नहीं दिख रहा था उसे, क्योंकी सर नेहा के गोद में उसके ड्रेस के नीचे था।

ये देखकर प्रवींद्र का लण्ड बिल्कुल खड़ा हो गया और उसने अपने हाथ को अपने लण्ड पर रखा अंदर का खेल देखते हुए। प्रवींद्र के पिता ने नेहा की दोनों टाँगों के थोड़ा फैलाया और उसकी चूत को, पैंटी के ऊपर से ही होंठों में दबाते हुए चूमने लगा। तब तक गरम स्पॉट पर नेहा की पैंटी पर एक भीगा हुआ धब्बा आ गया था। फिर

ससुर ने अपनी बहू की चूत को चूमते हुए, पैंटी को धीरे-धीरे नीचे करना शुरू किया। घुटनों तक पैंटी को खींच दिया था।

तो नेहा बोली- “यहीं तक रहने दो पिताजी कहीं प्रवींद्र वापस ना आ जाये। अगर आएगा तो मैं जल्दी से ऊपर खींच पाऊँगी पैंटी को..."

तो पैंटी को वहीं घुटनों तक छोड़ा और चाटते हुए ससुर उसकी चूत का रस पीने लगा। नेहा के हाथ में ससुर का मोटा लण्ड था जिस पर वो हाथ चला रही थी बिल्कुल जैसे मूठ मारते वक्त चलाते हैं। नेहा अनुभवी हो गई थी, उसको मर्दो को खुश करना आ गया था इतने दिनों में, 5 महीनों में।

ससुर जितना उसकी चूत के संवेदनशील हिस्सों को जीभ लगा रहा था उतना ही जोरों से नेहा लण्ड रगड़ रही थी अपने हाथ में। यह सब देखकर प्रवींद्र को भी मूठ मारने का मन कर रहा था, उसका जमके बिल्कुल खड़ा था। नेहा ने झुक कर ससुर के गले को चाटा और दाँत काटा। नेहा के वैसा करने से ससुर की उत्तेजना दोगुना हो गई। फिर एक पल बाद ससुर ने नेहा को अपनी गोद में बिठाया, और अपने लण्ड को उसकी चूत में डाला। आखिरकार, पैंटी निकाल दी गई और नेहा को लण्ड के ऊपर उठक बैठक करना पड़ा, जो चूत के अंदर था। ससुर ने नेहा की कमर को पकड़ा और उसकी चूचियों को चूसने के लिए उसकी चूचियों पर अपना मुँह डाला, जो ब्रा में नहीं थे, बस वैसे लटके हुए थे ड्रेस के अंदर।

ससुर नेहा की चूचियों को चाटता चूसता गया, उसका लण्ड नेहा की चूत के अंदर था, नेहा ऊपर-नीचे उछाल रही थी और ससुर उसकी चूचियों को चूसे जा रहा था। फिर ससुर भी अपने पंजे पर जोर देते हुए कमर को थोड़ा उठाकार धक्का देने लगा। नेहा के ऊपर-नीचे होने के साथ-साथ उसके धक्के, नेहा के उठक बैठक, लण्ड को रफ़्तार से अंदर-बाहर किए जा रहे थे। जिससे नेहा हाँफने लगी थी और उसकी सिसकारियां लाउंज में गूंजने लगी
थीं। नेहा को बाहों में जाने की जरूरत महसूस हुई तो उसने झट से अपनी दोनों बाहों को ससुर के कंधों पर लपेटा और ससुर के मुँह को अपने मुँह में लेकर उसको जबरदस्त गरमा गरम किस करने लगी, चूत में लण्ड को बराबर अंदर-बाहर लेते हुए। नीचे चूत और लण्ड के रस बह रहे थे और ऊपर दोनों एक दूसरे के मुँह के रस पी रहे थे।

बाहर प्रवींद्र से ये सब देखकर रहा नहीं गया, वो भी मूठ मारने लगा, नेहा को अपने बाप से चुदवाते हुए देखकर। नेहा अपने ससुर पर और जोरों से उछलती गई, लण्ड को अपने अंदर महसूस करते हुए और सिसकारी
और हाँफने से उसके साँसें भी फूलने लगीं, दिल की धड़कनें बढ़ने लगी और जिश्म पशीना-पशीना हो गया था दोनों के।

फिर होना क्या था नेहा चिल्लाई- “हाँ पताजी इस्स्स्स ... हाँ पिताजीईई, बहुत अच्छा लग रहा है... आआहह... इस्स्स्स ...” और अचानक हाँफते हुए नेहा शांत हो गई अपने गाल को ससुर की छाती से लगाए हुए, ससुर की दिल की धड़कनों को सुनती गई।

नीचे उसकी चूत ने पूरा पानी छोड़ दिया था साथ-साथ ससुर का वीर्य भी साथ मिल चुका था नेहा के पानी से। ससुर ने जोर से नेहा को बाहों में जकड़कर- “आआघग... उफफ्फ़..' किया, जब उसके लण्ड वीर्य छोड़ते हुए चूत से बाहर नेहा की गाण्ड के छेद पर रगड़ रहा था। फिर जल्दी से ससुर ने लण्ड को नेहा के हाथ में थमाया, बाकी के वीर्य के कतरों को नेहा से निकलवाने के लिए।

नेहा मुश्कुरा रही थी अपने ससुर के लण्ड से बाकी के पानी निचिड़ते हुए। एक-एक कतरा निकला तो नेहा ने खुद-बा-खुद अपनी जीभ को लण्ड के छेद पर हल्के से फेरा और नजरों को ऊपर उठाकर मुश्कुराते हुए ससुर के चेहरे में देखा, और एक लंबी सांस लेते हुए कहा- “लो अब मुरझाने लगा आपका जबरदस्त औजार पिताजी। हीहीहीही.."

ससुर ने कहा- “इसी लण्ड से तुम भी पैदा हुई हो बहू.."

नेहा ने होंठ को दाँत में दबाते हुए कहा- “हाँ पिताजी, सही है। पर आपने मुझे मेरे पापा की याद दिला दिया..”

जब नेहा ने यह कहा तो ससुर ने चिहुँकते हुए कहा- “क्या मेरे लण्ड ने तुमको अपने पिता की याद दिला दी?
क्या तुमने कभी उनक... लण्ड देखा है?"

नेहा ने मुश्कुराते हए जवाब दिया- “अरे नहीं पिताजी, मेरा मतलब वो नहीं था, मतलब यह कि जब आपने कहा कि इसी से मैं भी पैदा हुई हूँ, तो मैंने सोचा कि मेरे पिता ने भी इसी से मेरी माँ के साथ करके मुझको पैदा किया है। अजीब बात है ना पिताजी कि जिस चीज ने हमको पैदा किया आज बड़े होकर हम उसी चीज को इतना पसंद करते हैं? रिश्ता ही ऐसा है इस चीज से हमारा है, ना पिताजी?"

ससुर मुश्कुराया और नेहा को वापस उसकी पैंटी पहनाते हुए कहा- “सो तो है, अब मैं भी ऐसे ही एक चूत से निकला हूँ ना... और इसी को पसंद करता हूँ। बिल्कुल सही कह रही हो बेटी, अजीब बात है हमारा रिश्ता ही बना हुआ है इन चीज़ों से... एक मग्नेटिक अट्रॅक्सन जैसा है इनके बीच बहू..”
बाहर से प्रवींद्र भी उनकी सारे बातें सुन रहा था। प्रवींद्र को यकीन नहीं आया जो नेहा ने कहा अपने पिताजी के बारे में। कुछ तो बात होगी नेहा की अपने खुद के पिताजी के साथ जो उसकी याद आ गई ससुर का लण्ड हाथ में थामे हुए? प्रवींद्र सोच में डूब गया- “दाल में कुछ तो काला जरूर है?” प्रवींद्र ने सोचा।
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एक घंटे के बाद सब काम हो गया, प्रवींद्र सब कुछ देखने के बाद अपने कमरे में चला गया और नेहा भी ससुर को छोड़कर चली गई, क्योंकी उसने तो अपना काम पूरा कर लिया था। प्रवींद्र अपने कमरे में बेड पर लेटे सोच रहा था कि उसके पिता ने नेहा से कर लिया तो मतलब कि आज रात को नेहा उसके कमरे में नहीं जाएगी। तो प्रवींद्र ने सोचा के क्यों ना आज अपनी भाभी को अपने कमरे में लेकर आए?

उसने अपने पिता के सोने का इंतेजार किया। फिर और एक घंटे के बाद पूरे घर में बिल्कुल अंधेरा हो गया था। एक भी बत्ती किसी भी कमरे में नहीं जल रही थी। सब सो रहे थे। अपने कमरे के दरवाजे के पास खड़े होकर प्रवींद्र सुनने की कोशिश कर रहा था कि बाहर कारिडोर में कोई आवाज तो नहीं सुनाई दे रही है, (इसे पोस्ट पर 271 पेज 28 पर चेक करें स्केच में) तो कुछ नहीं सुनाई दिया तो प्रवींद्र कारिडोर में निकला और अंधेरे में दीवार को टटोलते हुए चलकर पहले अपने पिता के कमरे के पास गया। वो जानना चाहता था कि कहीं नेहा दोबारा उसके पास तो नहीं चली गई।

अपने पिता के रूम के दरवाजे पर कान लगाकर सुना, और अपने पिता के खर्राटे सुनकर उसको पता चल गया कि नेहा अपने कमरे में है। वो चलकर वापस अपनी भाभी के कमरे की तरफ गया। प्रवींद्र नंगे पाँव चल रहा था ताकी कोई आवाज नहीं आए। पहले नेहा के कमरे के दरवाजे से कान लगाकर सुनता है कि अंदर से कोई आवाज तो नहीं सुनाई दे रही? फिर बहुत सावधानी से दरवाजे के हैंडल को धीरे से खोलने की कोशिश किया और दरवाजा लाक नहीं था तो आसानी से खुल गया।

वो बहुत खुश हुआ। अंदर झाँका और धीरे से अंदर घुसा। उसका दिल बड़े जोरों से धक-धक किए जा रहा था, थूक भी नहीं था मुँह में सूखे गले को भीगोने के लिए, गला सूखा पड़ा था, थोड़ा बहुत काँप भी रहा था, बिल्कुल एक चोर लग रहा था, अपने ही घर में उस वक़्त जैसे किसी और के घर में घुसा हो, जब सब सो रहे हैं। थोड़ा डरते हए वो नेहा के बिस्तर की तरफ बढ़ा। उसका बड़ा भाई रवींद्र तो खर्राटे मार रहा था, बेड के इस तरफ रवींद्र ही सोया था और उस तरफ नेहा थी तो प्रवींद्र को और चलना पड़ा बेड के उस तरफ जाने के लिए, उसके पैर काँपने लगे।
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लगता था दिल धड़कना बंद हो जाएगा, साँसें तेज हो गई थी और उसको दरवाजे से नेहा तक पहुँचने में मीलों
का सफर तय करना जैसे लग रहा था। वो दो कदम चलकर नीचे बैठ गया। लगता था नेहा को भी नींद लग गई थी। वो खुद अपने दिल की धड़कनों को सुन पा रहा था। वो जिंदगी में कभी भी ऐसे हालात से नहीं गुजरा था। सोच रहा था कि रवींद्र को उसकी तेज साँसों या दिल की धड़कन ने जगा तो नहीं देगी। उसके दोनों कानों में 'फक-फक' के आवाजें आ रहे थीं।

खैर, कैसे भी करके हिम्मत जुटाया उसने और नेहा तक पहुँचा और उसके ऊपर से चादर को सरकाया, जो नेहा ओढ़ चुकी थी। उसकी नेहा भाभी नाइट लैंप की धीमी रोशनी में परी जैसी दिख रही थी और नींद में तो और भी बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी, बाहों में कसके भरने को मन कर रहा था उसे। मगर उसकी हालत बहुत खराब थी उस वक्त। नेहा की खूबसूरती को वहीं खड़े निहारने लगा वो। नेहा बेहद सेक्सी दिख रही थी सोते हुए, उसकी चूचियां ऊपर-नीचे उठ बैठ रही थीं उसके साँस लेने से, गहरी नींद में थी वो। प्रवींद्र देखता गया नेहा को।

फिर धीरे से उसके एक चूची को छुआ उसने, बिना ब्रा के नाइटी में थीं उसकी चूचियां और नींद में नाइटी की एक स्ट्रैप कंधे से नीचे बाजू पर सरक गई थी। प्रवींद्र ने हल्के से नाइटी को चूची से हटाया तो नेहा की पूरी गोल-गोल चूची सामने आ गई जिसको प्रवींद्र निहारने लगा, और हिम्मत करके उसने चूची को हल्के से होंठ लगाकर चूम भी लिया। डर रहा था नेहा को जगाने में। उसने सोचा उसको डिस्टर्ब ना करें, सोने दें और वापस लौट चलें।

अब प्रवींद्र इतना डरा हआ भी था कि उसने खयाल किया कि नेहा को वैसे देखने के बाद भी उसका लण्ड खड़ा नहीं हुआ था। वो हैरान हो गया और सोचने लगा कि यह क्या बात हुई? ऐसा तो नहीं होता कभी? इसलिए उसने नेहा की दूसरी चूची को भी नाइटी से आजाद किया, नेहा पीठ पर लेटी हुई थी जिससे दोनों चूचियां मस्त ऊपर छत की तरफ खड़ी नजर आ रही थीं और निपल भी कड़क मजबूती खड़े थे। प्रवींद्र ने सब देखा और अपने लण्ड पर हाथ लगया तो पाया कि लण्ड भी सो रहा है, मगर क्यों?

 
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