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- Dec 5, 2013
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अपडेट- 14 (बी) (मेघा अपडेट)
" अरे aap........aaiye छोटे मालिक........." और रघु अपना एक हाथ बढ़ता हुआ फ़ौरन राम का हाथ थम लेता हैं और उसे अंदर लेजाकर वहीँ कुर्सी पर बैठता hain.......wahin कुछ दूर पर जीतू बैठा हुआ बीड़ी पी रहा tha.......wo कमरा पूरी तरह से बंद था जिसके कारन जीतू के मुँह से निकला बीड़ी का धुवां अभी भी उस कमरे में मौजूद tha.......jissey राम का दम घुटा हुआ सा महसूस हो रहा tha..........magar वो किसी से कुछ बोल नहीं रहा था.......
" छोटे malik...........kahin मेमसाहेब को आपके आने का पता तो नहीं चला naa........agar उन्होंने आपको यहाँ आता हुआ देख लिया तो वो न जाने क्या sochegi........ho सकता हैं वो आप पर गुस्सा भी करे........." और रघु हौले से बोल पड़ता हैं वहीँ राम जवाब में ना में अपना सर धीरे से हिला देता हैं.......
" नहीं भाभी सू रही thi.........kum से कम वो एक दो घंटे के बाद hi उठेंगी........." और राम इस बार मुस्कुराते हुए हौले से बोल पड़ता hain........wahin जीतू उसकी तरफ बड़े गौर से देखे जा रहा था.........
" मालिक मैं आपके लिए एक ख़ास चीज़ लाया hoon........isey देखने के बाद आपकी तबियत रंगीन हो jayegi............fir वो दिन दूर नहीं जब आप दिन रात अपनी भाभी के साथ चिपके rahengey..........aur एक पल के लिए भी उन्हें अपने से दूर कहीं नहीं जाने dengey............waise मेमसाहेब और आपके बीच कुछ बात बढ़ी की नहीं!!!! " इस बार रघु राम का हाथ थामे हुए हौले से बोल पड़ता हैं वहीँ राम उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं........
" हाँ kaka.........baat बढ़ी naa..........aapko मालूम हैं भाभी कल शाम को मेरे कमरे में आयी thi........aur मैंने तो उनसे दोस्ती भी कर li......dosti hi नहीं बल्कि मैंने उन्हें अपना गर्लफ्रेंड भी बना liya........unhone मेरी ख़ुशी के लिए मेरी गर्लफ्रेंड बनाना मंज़ूर कर liya.......pata हैं kyon.......bhabhi कहने लगी की तुम गर्लफ्रेंड खुद कहीं से अपने लिए ढूंढ lo........to मैंने कहा की मुझे कहाँ कोई गर्लफ्रेंड milegi........bus फिर मैंने उन्हें इसके लिए ऑफर कर di......aur उन्होंने ख़ुशी ख़ुशी मेरा ऑफर एक्सेप्ट कर liya...........meri भाभी सच में बहुत ाची हैं........" और राम भोलेपन में साडी बातें रघु और जीतू को बताता चला जाता हैं वहीँ रघु और जीतू की आँखें चमक जाती हैं...........
उन्हें अब राम के ज़रिये काव्य को छोड़ने का एक सुनेहरा मौका नज़र आने लगा tha..........wahin अब रघु काव्य के नेचर को भी बहुत ाचे से समझने लगा tha.........aab उसे ऐसा महसूस हो रहा था की अब मंज़िल ज़्यादा दूर nahin......bahut जल्द काव्य उसके नीचे hogi.........magar उसके लिए उसे राम को मोहरा बनाना padega.......aur वो राम को मोहरा भी बना रहा tha........aur राम उसकी चिकनी चुपड़ी बाटिओं में लगभग पूरा आ गया था..........
" ाचा ये तो बहुत ाची खबर हैं छोटे malik.........memsaheb आपकी गर्लफ्रेंड बन gayi........tab तो वो हर रोज़ आपकी रातें रंगीन किया karegi...........aapke हर सुख दुःख का पूरा ख्याल rakhegi.......aur हर रात आपकी बीवी बनकर आपसे रोज़ छुड़वाया करेगी........." जीतू के मुँह से ऐसे वर्ड्स सुनकर राम उसके तरफ सवाल भरे नज़रियों से देखने लगता hain......ek बार फिर से जीतू की कुछ बातें उसकी समझ में नहीं आयी thi.........wahin रघु मंद मंद मुस्कुरा रहा था........
" आप फ़िक्र कहे को करते हैं malik.......main हूँ naa........main आपको सब कुछ सीखा dunga.........magar धीरे dheere...........bus मैं जो बोलता हूँ आप वो करते jaiye......jaisa करता हूँ आप वो kijiye.......dekh लीजियेगा एक दिन आपकी भाभी खुद आपके इशारों पर nachegi........agar आप उसे खड़ा रहने को कहेंगे तो वो कड़ी rahegi.......baithney को कहेंगे तो वो baithegi........sab कुछ वो आपके एक इशारों पर karegi........magar प्यार से..........
" आपको पता हैं गर्लफ्रेंड क्या क्या कर सकती हैं अपने यार के liye.........main आपको सब कुछ सीखा dunga..........dekhtey जाइएगा फिर आपकी गर्लफ्रेंड आपको पाने के लिए हर वक़्त पागल rahegi..........ye लीजिये ये किताब इसे रात में अकेले में hi kholiyega.........isey देखने के बाद आपको पता चल जायेगा की औरत चीज़ होती क्या हैं........." और रघु एक एनवेलप बिस्टेर से निकलकर राम के हाथों में दे देता hain............ram वहीँ उस किताब को बड़ी अजीब नज़रियों से देख रहा tha.........wiase वो किताब पूरी तरह से फिलहाल पैक्ड था.........
" इसे जल्दी से अपने शर्ट के अंदर छुपा lijiye.......nahin तो मेमसाहेब को पता चल गया तो आफत आ जाएगी...." और रघु धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ राम बिना कोई सवाल जवाब किये उस किताब को अपने शर्ट के अंदर छुपा लेता हैं.......
" एक बात कहूं malik.........aapko आपकी भाभी कैसी लगती hain.......mera मतलब उनमें ऐसी क्या चीज़ ख़ास बनती हैं जो आपको अपनी तरफ हर पल आखरषित करती hain......jise उनकी बड़ी बड़ी chuchiyaan.....unki गोल गोल gand.......unki लचकती kamar........wagerah ...वगैरह......" और रघु हौले से राम के तरफ देखता हुआ बोल पड़ता hain.......wahin उसके लुंड में भी सनसनाहट होने लगी thi.........aisi बातें उसके लुंड को और भी आग लगा रही थी.........
" jeee.....mujhe उनके में सब कुछ ाचा लगता hain.......wo सर से लेकर पवन तक बहुत सूंदर हैं......" और राम के भी लुंड में थोड़ी सी अकड़न होने लगती hain.......sach तो ये था की उसे ऐसी बातें ाची लग रही thi........aisi बाटिओं को सुनने के लिए hi तो वो यहाँ आया tha...........wahin रघु और जीतू उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा देते हैं.......
" क्या कभी आपको मेमसाहेब की चूचियां दबाने का मुन्न नहीं karta.........apne दोनों हाथों से उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़कर उन्हें पूरी ताक़त से मसलने का मज़ा hi कुछ और hain..........kya आपको ऐसा कभी कुछ मुन्न नहीं karta..........kya कभी ऐसा नहीं लगता की वो कहीं कड़ी हो और पीछे से जाकर आप उनकी साड़ी के अंदर हाथ डालकर उनकी कमसिन छूट को अपनी मुट्ठी में कसकर जकड lein.......apne सख्त हाटों से उन्हें कैद कर le............aur उनकी गांड को अपने दोनों हाथों से masaley.......unki गांड के अंदर अपनी ऊँगली dale.........apne उँगलियों से उनकी छूट और गांड को ाचे से छोड़े.........." और रघु का लुंड पूरा अकड़ जाता hain...........jahan उसको ये सब बातें मज़ा दे रही थी वहीँ राम के लुंड में भी गीलापन बढ़ता जा रहा tha.......raghu की ऐसी बाटिओं को सुनकर उसकी आँखें चमक गयी thi.........hawas के लाल डोरे साफ़ उसकी आँखों से छलकने लगे थे.......
" गर्लफ्रेंड बनाने में तुम्हें ये सब फायदे मिल सकते hain......agar तुम चाहो तो......." और जीतू अपने पीले दांत दिखता हुआ हंस पड़ता हैं वहीँ राम हैरत से जीतू को तो कभी रघु को एक तुक देखे जा रहा था.......
" क्या ऐसा सच में हो सकता hain........magar मैंने अगर कोई ऐसी वैसी हरकत भाभी के साथ की to......kahin वो मुझे थप्पड़ तो नहीं मारेगी naa........ya भैया से तो नहीं kahegi........na जाने क्यों मुझे उनसे बहुत दुर्र लगता hain.........sach तो ये हैं की मुझे भी उनके साथ ये सब करने का बहुत मुन्न करता hain.......magar कभी ऐसी हिम्मत नहीं होती........." और राम के चेहरे पर थोड़ी सी मायूसी चालक पड़ती हैं वहीँ रघु अपना एक हाथ धीरे से उसके कंधे पर रख देता hain.......jaise वो उसे सांत्वना दे रहा हो..........
" अब आपको डरने की कोई ज़रुरत नहीं हैं malik............kyon की अब मेमसाहेब तो आपकी गिलफ्रेंड बन चुकी hain........aur दुनिया जानती हैं की गर्लफ्रेंड बस ाइश के लिए होती hain.......aur तो मेमसाहेब ने खुद आपको ये सुनेहरा मौका दिया tha........to वो आपको मारेगी तो बिलकुल nahin.....aur न hi वो किसी से कुछ kahegi.........haan आप इस काम में कोई भी जड़ली मुट्ठ kijiye........bus जब भी वो आपके नज़दीक आये किसी बहाने आप उनकी चूचियों को छूने की कोशिश kijiye..........unki गांड पर हाथ फेर dijiye.........unke बदन के किसी भी हिस्से को टच kijiye..........aisa कुछ कीजिये की आपकी भाभी ज़्यादा से ज़्यादा आपके पास समय de.........fir देखिएगा mailk..........malkin हर रोज़ आपसे अपनी चूचियां खुद masalwayengi.......apni गांड खुद marwayengi.........wo दिन फिर ज़्यादा दूर नहीं जब आप खुद अपनी भाभी के ऊपर hongey..........aur आपका ये लुंड उनकी छूट की गहराई नाप रहा होगा........." और रघु का लुंड और सख्त होता चला जाता hain........aaj उसे ये सब बातें करने में बहुत मज़ा आ रहा tha.........wo वहीँ कल्पना कर रहा था की वो नज़ारा कैसा होगा जब राम उसपर चढ़ा होगा.......
" ठीक हैं जैसा आप कहेंगे मैं वैसा करूँगा........" और राम हौले से मुस्कुरा देता hain.......wahin जीतू भी जवाब में हंस पड़ता हैं........
" एक बात और malik.......is किताब को अगर आपकी भाभी ने कभी देख भी लिया तो आप उनसे हमारे बारे में कभी ज़िक्र मुट्ठ kijiyega........keh दीजियेगा की आपके किसी दोस्त ने दिए hain........warna हमें तो यहाँ से बहार जाना padega.......humesha हमेशा के liye.......aur कल आप फिर से aaiyega......main कल एक और नयी किताब आपको लेकर dunga.......aur कुछ नयी बातें भी सिखाऊंगा.........
वो किताब इस किताब से कहीं ाचा और मज़ेदार hoga......tab तक आप इतने में hi काम चलाइये.........." और जीतू अपनी बात पूरी करता हैं और अपने जेब से एक सस्ती वाली बीड़ी निकलता हैं और एक ज़ोर का काश लेने लगता हैं वहीँ राम भी अपने बंगलो के तरफ चल पड़ता hain.........aab उसके चेहरे पर एक अलग hi कॉन्फिडेंस नज़र आ रहा tha.......dekhna था की आगे वक़्त कौन सा मोड़ लेकर आने वाला था..................................
कंटिन्यू........................................................................
" अरे aap........aaiye छोटे मालिक........." और रघु अपना एक हाथ बढ़ता हुआ फ़ौरन राम का हाथ थम लेता हैं और उसे अंदर लेजाकर वहीँ कुर्सी पर बैठता hain.......wahin कुछ दूर पर जीतू बैठा हुआ बीड़ी पी रहा tha.......wo कमरा पूरी तरह से बंद था जिसके कारन जीतू के मुँह से निकला बीड़ी का धुवां अभी भी उस कमरे में मौजूद tha.......jissey राम का दम घुटा हुआ सा महसूस हो रहा tha..........magar वो किसी से कुछ बोल नहीं रहा था.......
" छोटे malik...........kahin मेमसाहेब को आपके आने का पता तो नहीं चला naa........agar उन्होंने आपको यहाँ आता हुआ देख लिया तो वो न जाने क्या sochegi........ho सकता हैं वो आप पर गुस्सा भी करे........." और रघु हौले से बोल पड़ता हैं वहीँ राम जवाब में ना में अपना सर धीरे से हिला देता हैं.......
" नहीं भाभी सू रही thi.........kum से कम वो एक दो घंटे के बाद hi उठेंगी........." और राम इस बार मुस्कुराते हुए हौले से बोल पड़ता hain........wahin जीतू उसकी तरफ बड़े गौर से देखे जा रहा था.........
" मालिक मैं आपके लिए एक ख़ास चीज़ लाया hoon........isey देखने के बाद आपकी तबियत रंगीन हो jayegi............fir वो दिन दूर नहीं जब आप दिन रात अपनी भाभी के साथ चिपके rahengey..........aur एक पल के लिए भी उन्हें अपने से दूर कहीं नहीं जाने dengey............waise मेमसाहेब और आपके बीच कुछ बात बढ़ी की नहीं!!!! " इस बार रघु राम का हाथ थामे हुए हौले से बोल पड़ता हैं वहीँ राम उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं........
" हाँ kaka.........baat बढ़ी naa..........aapko मालूम हैं भाभी कल शाम को मेरे कमरे में आयी thi........aur मैंने तो उनसे दोस्ती भी कर li......dosti hi नहीं बल्कि मैंने उन्हें अपना गर्लफ्रेंड भी बना liya........unhone मेरी ख़ुशी के लिए मेरी गर्लफ्रेंड बनाना मंज़ूर कर liya.......pata हैं kyon.......bhabhi कहने लगी की तुम गर्लफ्रेंड खुद कहीं से अपने लिए ढूंढ lo........to मैंने कहा की मुझे कहाँ कोई गर्लफ्रेंड milegi........bus फिर मैंने उन्हें इसके लिए ऑफर कर di......aur उन्होंने ख़ुशी ख़ुशी मेरा ऑफर एक्सेप्ट कर liya...........meri भाभी सच में बहुत ाची हैं........" और राम भोलेपन में साडी बातें रघु और जीतू को बताता चला जाता हैं वहीँ रघु और जीतू की आँखें चमक जाती हैं...........
उन्हें अब राम के ज़रिये काव्य को छोड़ने का एक सुनेहरा मौका नज़र आने लगा tha..........wahin अब रघु काव्य के नेचर को भी बहुत ाचे से समझने लगा tha.........aab उसे ऐसा महसूस हो रहा था की अब मंज़िल ज़्यादा दूर nahin......bahut जल्द काव्य उसके नीचे hogi.........magar उसके लिए उसे राम को मोहरा बनाना padega.......aur वो राम को मोहरा भी बना रहा tha........aur राम उसकी चिकनी चुपड़ी बाटिओं में लगभग पूरा आ गया था..........
" ाचा ये तो बहुत ाची खबर हैं छोटे malik.........memsaheb आपकी गर्लफ्रेंड बन gayi........tab तो वो हर रोज़ आपकी रातें रंगीन किया karegi...........aapke हर सुख दुःख का पूरा ख्याल rakhegi.......aur हर रात आपकी बीवी बनकर आपसे रोज़ छुड़वाया करेगी........." जीतू के मुँह से ऐसे वर्ड्स सुनकर राम उसके तरफ सवाल भरे नज़रियों से देखने लगता hain......ek बार फिर से जीतू की कुछ बातें उसकी समझ में नहीं आयी thi.........wahin रघु मंद मंद मुस्कुरा रहा था........
" आप फ़िक्र कहे को करते हैं malik.......main हूँ naa........main आपको सब कुछ सीखा dunga.........magar धीरे dheere...........bus मैं जो बोलता हूँ आप वो करते jaiye......jaisa करता हूँ आप वो kijiye.......dekh लीजियेगा एक दिन आपकी भाभी खुद आपके इशारों पर nachegi........agar आप उसे खड़ा रहने को कहेंगे तो वो कड़ी rahegi.......baithney को कहेंगे तो वो baithegi........sab कुछ वो आपके एक इशारों पर karegi........magar प्यार से..........
" आपको पता हैं गर्लफ्रेंड क्या क्या कर सकती हैं अपने यार के liye.........main आपको सब कुछ सीखा dunga..........dekhtey जाइएगा फिर आपकी गर्लफ्रेंड आपको पाने के लिए हर वक़्त पागल rahegi..........ye लीजिये ये किताब इसे रात में अकेले में hi kholiyega.........isey देखने के बाद आपको पता चल जायेगा की औरत चीज़ होती क्या हैं........." और रघु एक एनवेलप बिस्टेर से निकलकर राम के हाथों में दे देता hain............ram वहीँ उस किताब को बड़ी अजीब नज़रियों से देख रहा tha.........wiase वो किताब पूरी तरह से फिलहाल पैक्ड था.........
" इसे जल्दी से अपने शर्ट के अंदर छुपा lijiye.......nahin तो मेमसाहेब को पता चल गया तो आफत आ जाएगी...." और रघु धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ राम बिना कोई सवाल जवाब किये उस किताब को अपने शर्ट के अंदर छुपा लेता हैं.......
" एक बात कहूं malik.........aapko आपकी भाभी कैसी लगती hain.......mera मतलब उनमें ऐसी क्या चीज़ ख़ास बनती हैं जो आपको अपनी तरफ हर पल आखरषित करती hain......jise उनकी बड़ी बड़ी chuchiyaan.....unki गोल गोल gand.......unki लचकती kamar........wagerah ...वगैरह......" और रघु हौले से राम के तरफ देखता हुआ बोल पड़ता hain.......wahin उसके लुंड में भी सनसनाहट होने लगी thi.........aisi बातें उसके लुंड को और भी आग लगा रही थी.........
" jeee.....mujhe उनके में सब कुछ ाचा लगता hain.......wo सर से लेकर पवन तक बहुत सूंदर हैं......" और राम के भी लुंड में थोड़ी सी अकड़न होने लगती hain.......sach तो ये था की उसे ऐसी बातें ाची लग रही thi........aisi बाटिओं को सुनने के लिए hi तो वो यहाँ आया tha...........wahin रघु और जीतू उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा देते हैं.......
" क्या कभी आपको मेमसाहेब की चूचियां दबाने का मुन्न नहीं karta.........apne दोनों हाथों से उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़कर उन्हें पूरी ताक़त से मसलने का मज़ा hi कुछ और hain..........kya आपको ऐसा कभी कुछ मुन्न नहीं karta..........kya कभी ऐसा नहीं लगता की वो कहीं कड़ी हो और पीछे से जाकर आप उनकी साड़ी के अंदर हाथ डालकर उनकी कमसिन छूट को अपनी मुट्ठी में कसकर जकड lein.......apne सख्त हाटों से उन्हें कैद कर le............aur उनकी गांड को अपने दोनों हाथों से masaley.......unki गांड के अंदर अपनी ऊँगली dale.........apne उँगलियों से उनकी छूट और गांड को ाचे से छोड़े.........." और रघु का लुंड पूरा अकड़ जाता hain...........jahan उसको ये सब बातें मज़ा दे रही थी वहीँ राम के लुंड में भी गीलापन बढ़ता जा रहा tha.......raghu की ऐसी बाटिओं को सुनकर उसकी आँखें चमक गयी thi.........hawas के लाल डोरे साफ़ उसकी आँखों से छलकने लगे थे.......
" गर्लफ्रेंड बनाने में तुम्हें ये सब फायदे मिल सकते hain......agar तुम चाहो तो......." और जीतू अपने पीले दांत दिखता हुआ हंस पड़ता हैं वहीँ राम हैरत से जीतू को तो कभी रघु को एक तुक देखे जा रहा था.......
" क्या ऐसा सच में हो सकता hain........magar मैंने अगर कोई ऐसी वैसी हरकत भाभी के साथ की to......kahin वो मुझे थप्पड़ तो नहीं मारेगी naa........ya भैया से तो नहीं kahegi........na जाने क्यों मुझे उनसे बहुत दुर्र लगता hain.........sach तो ये हैं की मुझे भी उनके साथ ये सब करने का बहुत मुन्न करता hain.......magar कभी ऐसी हिम्मत नहीं होती........." और राम के चेहरे पर थोड़ी सी मायूसी चालक पड़ती हैं वहीँ रघु अपना एक हाथ धीरे से उसके कंधे पर रख देता hain.......jaise वो उसे सांत्वना दे रहा हो..........
" अब आपको डरने की कोई ज़रुरत नहीं हैं malik............kyon की अब मेमसाहेब तो आपकी गिलफ्रेंड बन चुकी hain........aur दुनिया जानती हैं की गर्लफ्रेंड बस ाइश के लिए होती hain.......aur तो मेमसाहेब ने खुद आपको ये सुनेहरा मौका दिया tha........to वो आपको मारेगी तो बिलकुल nahin.....aur न hi वो किसी से कुछ kahegi.........haan आप इस काम में कोई भी जड़ली मुट्ठ kijiye........bus जब भी वो आपके नज़दीक आये किसी बहाने आप उनकी चूचियों को छूने की कोशिश kijiye..........unki गांड पर हाथ फेर dijiye.........unke बदन के किसी भी हिस्से को टच kijiye..........aisa कुछ कीजिये की आपकी भाभी ज़्यादा से ज़्यादा आपके पास समय de.........fir देखिएगा mailk..........malkin हर रोज़ आपसे अपनी चूचियां खुद masalwayengi.......apni गांड खुद marwayengi.........wo दिन फिर ज़्यादा दूर नहीं जब आप खुद अपनी भाभी के ऊपर hongey..........aur आपका ये लुंड उनकी छूट की गहराई नाप रहा होगा........." और रघु का लुंड और सख्त होता चला जाता hain........aaj उसे ये सब बातें करने में बहुत मज़ा आ रहा tha.........wo वहीँ कल्पना कर रहा था की वो नज़ारा कैसा होगा जब राम उसपर चढ़ा होगा.......
" ठीक हैं जैसा आप कहेंगे मैं वैसा करूँगा........" और राम हौले से मुस्कुरा देता hain.......wahin जीतू भी जवाब में हंस पड़ता हैं........
" एक बात और malik.......is किताब को अगर आपकी भाभी ने कभी देख भी लिया तो आप उनसे हमारे बारे में कभी ज़िक्र मुट्ठ kijiyega........keh दीजियेगा की आपके किसी दोस्त ने दिए hain........warna हमें तो यहाँ से बहार जाना padega.......humesha हमेशा के liye.......aur कल आप फिर से aaiyega......main कल एक और नयी किताब आपको लेकर dunga.......aur कुछ नयी बातें भी सिखाऊंगा.........
वो किताब इस किताब से कहीं ाचा और मज़ेदार hoga......tab तक आप इतने में hi काम चलाइये.........." और जीतू अपनी बात पूरी करता हैं और अपने जेब से एक सस्ती वाली बीड़ी निकलता हैं और एक ज़ोर का काश लेने लगता हैं वहीँ राम भी अपने बंगलो के तरफ चल पड़ता hain.........aab उसके चेहरे पर एक अलग hi कॉन्फिडेंस नज़र आ रहा tha.......dekhna था की आगे वक़्त कौन सा मोड़ लेकर आने वाला था..................................
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