Kamina Bhai (Completed) - Page 9 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Kamina Bhai (Completed)

अपडेट 78

सुबह का 9 बज चुके थे, राजेश बैठा नास्ता कर रहा था.

राजेश: अरे भाई, मेरी पारी नहीं उठी है क्या अब तक.

राजेश नास्ता करते हुए अंजलि से कहता है.

अंजलि: पता नहीं, म जाकर देखती हु. वो अब तक उठी है या नहीं.



अंजलि ऊपर आर्यन के रूम मई आती है बकज़ अब तो उस रूम मई आशु सोती थी. वो आकर देखती है की आशु चादर ताने हुए पड़ी थी.

अंजलि: Ashu....Ashu...utha जा, तुझे तेरे पापा बुला रहे है.

अंजलि उसे आवाज़ देती है, लेकिन आशु कोई रिस्पांस नहीं करती. तब अंजलि उसकी चादर हटती है तो वो देखती है की आशु का पूरा चेहरा लाल पद गया था. वो उसका माथा पकड़कर देखती है तो उसे बहुत तेज़ फीवर था.

अंजलि: हे भगवन! इसे तो बहुत तेज़ बुखार हो रहा है.

वो जल्दी से जाकर राजेश को बताती है, कुछ देर बाद डॉ आता है.

डॉ: इनकी ये हालत कमजोरी की वजह से है, और इनका बप भी बहुत लॉ है शायद किसी स्ट्रेस की वजह से.

ये बोलकर वो कुछ दवाइया देता है और चला जाता है.

निर्मला: कमज़ोरी तो होगी hi, जब पूरा दिन ये भूखी hi रहती है.

निर्मला उसके पास बैठती हुई बोली.

राजेश: व्हाट?? क्यों.. ये भूखी क्यों रहती है.. और तुम बच्चो का ध्यान भी तो रखा करो.

राजेश अंजलि से खीजता हुआ कहता है.

अंजलि: म ध्यान रखती तो हु, माजी से पूछो दिन मई कितनी बार इसे खाने के लिए कहती हु लेकिन ये सुने तब न.

अंजलि आशु के सर पर पत्तिया भिगो कर रखती हुई बोली.

राजेश: पता नहीं मेरी प्यारी सी बेटी को किसकी नजर लग गयी है, देखो चेहरा भी केसा पीला पद गया है.

राजेश को आशु की हालत देख बहुत दुःख हो रहा था.

अंजलि: आप ऑफिस जाइये, हम है यहाँ.

अंजलि राजेश को अपनी घडी देखते हुए बोली.

राजेश: ठीक है, तुम इसका ध्यान रखना और इसे खाना खिलाओ.

ये बोलकर वो ऑफिस के लिए निकल जाता है.

-----

खन्ना: तुम बहुत बड़ी गलती कर रहे हो आर्यन.

खन्ना आर्यन के सामने बंधा हुआ बैठा था.

आर्यन: गलती मई नहीं तुम कर रहे हो. मुझे पता है तुम ज़ोर के किये गए हर गुनाह मई बराबर के हिस्सेदार हो. उसकी तो मौत निश्चित है आज नहीं तो कल. लेकिन अगर तुम चाहो तो तुम एक नयी लाइफ शुरू कर सकते हो. बस तुम्हे मुझे ज़ोर के प्लान के बारे मई बताना होगा.

आर्यन उसकी आँखों मई आँख डालकर पूछता है.

खन्ना: तुम अभी बच्चे हो आर्यन, तुम्हे लगता है म तुम्हे ज़ोर के बारे मई बता दूंगा.

खन्ना एक कुटिल मुस्कराहट के साथ बोलै.

आर्यन: नहीं मुझे नहीं लगता.

आर्यन उस से थोड़ा पीछे होकर बोलता है.

खन्ना: और उसके बाद भी तुम मुझसे पूछ रहे हो.

आर्यन: तुम इस देश से तो प्यार नहीं करते, लेकिन अपनी बेटी से करते हो क्या.

आर्यन की बात सुनकर खन्ना को झटका से लगता है.

खन्ना: क्या मतलब है तुम्हारा.

आर्यन: मेने सुना है की ज़ोर उर्फ़ अविनाश सिन्हा उर्फ़ मंत्री जी को कुंवारी लड़किया बहुत पसंद है.

आर्यन उसकी और देखकर एक कामिनी हसी हस्ता है.

खन्ना: Tum...tum कहना क्या चाहते हो, कहा है मेरी बेटी.

खन्ना डरते हुए कहता है.

आर्यन: cool..mr. खन्ना, तुम्हारी बेटी अभी सेफ है. लेकिन अगर तुमने ज़ोर के बारे मई सब कुछ नहीं बताया तो तुम्हारी बेटी शिल्पा आज ज़ोर के बिस्तर पर होगी.

खन्ना: nahi..nhi तुम मेरी बेटी को कुछ नहीं करोगे, उसकी इन सब मई कोई गलती नहीं है. और वो तो तुमसे बहुत प्यार करती है.

आर्यन: pyaar..my फुट. माना इन सबमे तुम्हारी बेटी की कोई गलती नहीं है, लेकिन उन मासूम लोगो की क्या गलती थी जिनको ज़ोर ने मारा है. और अब फिरसे पता नहीं कितने बेगुनाहो को मारने जा रहा है.

आर्यन: मुझे चुपचाप उसके प्लान के बारे मई बता वर्ण तुझे यही पर शिल्पा की सुहागरात दिखाऊंगा वो भी लाइव.

आर्यन दांत पीसते हुए बोलै.

खन्ना: म कुछ नहीं जानता उसके प्लान के बारे मई. बस मेने उसका रड़क्स सिटी मई एंटर कराया है.

आर्यन : वो क्या करने वाला है उस रड़क्स का.

खन्ना: इसके बारे मई म ज्यादा नहीं जनता. अभी कुछ दिन पहले जो अंडरवर्ल्ड डॉन मारा गया था, ये प्लान उसके भाई और ज़ोर का है. वो यहाँ बम ब्लास्ट करना चाहते है.

आर्यन: कहा और कब??.

आर्यन उसके सामने खड़े होकर कहता है.

खन्ना: इस बारे मई किसी को कुछ नहीं पता. इसके बारे मई ज़ोर के सिवा सिर्फ एक और आदमी को पता है, जोकि उसका बहुत ख़ास आदमी है कपाली.

आर्यन ये सुनकर सोच मई पद जाता है.

आर्यन: कपाली.. ये उसका असली नाम नहीं हो सकता.. उसका असली नाम बोल.

खन्ना: वो ज़ोर का छोटा भाई अनिरुद्ध सिन्हा है.

आर्यन: तुम झूट बोल रहे हो.

खन्ना: nahi..nahi म बिलकुल सच बोलै रहा हु, बस मेरी बेटी को कुछ मत करना.

खन्ना आर्यन के सामने गिड़गिड़ाने लगता है.

आर्यन: तेरी बेटी ने जो मेरे साथ किया था, मन तो करता है है की... लेकिन वो एक लड़की है इसलय इस बार माफ़ कर दिया.

ये बोल आर्यन वह से निकल जाता है. वो वुल्फ को कॉल लगता है.

आर्यन: वुल्फ, मुझे जल्द से जल्द Zora..mera मतलब अविनाश सिन्हा के भाई की इन्फो चाहिए.. जल्द से जल्द.

वुल्फ: ठीक है.

-----

अंजलि: आशु.. बीटा ले खाना खा ले.

जब आशु को थोड़ी रहत महसूस होती है तो अंजलि उसके रूम मई खाना लेकर आती है.

आशु: मुझे नहीं खाना.

आशु दूसरी तरफ मुंह करते हुए बोलती है. उसके इस बर्ताव से अंजलि को हर्ट होता है.

अंजलि: आशु इस तरह भूखा रहने से कुछ हासिल नहीं होने वाला है, वो कोई बहार का लड़का नहीं है की तुम खाना नहीं खाओगी और मई तुम दोनों के रिश्ते के लिए मान जाउंगी. वो तेरा सागा भाई है ये मत भूल तू.

अंजलि गुस्से से बोलती है.

आशु: वो मेरा भाई है म ये भूल गयी थी, लेकिन आपने याद दिला दिया. लेकिन उसके बाद भी मुझे इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता की वो मेरा भाई है, मेने सिर्फ उससे hi प्यार किया है और हमेशा उससे hi करती रहूंगी.

आशु ये बात अंजलि की आँखों मई देखकर बोलती है, ये सुनकर अंजलि की आँखे गुस्से से लाल हो जाती है. वो अपना हाथ आशु को मारने को उठती है लेकिन रुक जाती है.

अंजलि: कितनी बेशर्म और बद्तमीज़ हो गयी है न तू, और म तुझ पर इतना फ़क़्र महसूस करती थी.

अंजलि की आँखों से आँशु चालक जाते है. ये देख आशु को भी फील होता है.

आशु: सॉरी मम्मी.. मुझे पता है मेने गलती की है, लेकिन अब चाहकर भी हम मई से कोई भी उस गलती को सही नहीं कर सकता. लेकिन आप फ़िक्र मत करे मम्मी, मेने आपसे वादा किया है न की म आर्यन से अब बहिन के रिश्ते के सिवा कोई और रिस्ता नहीं रखूंगी. लेकिन आप भी मुझे मेरे हाल पर छोड़ दे प्ल्ज़.

आशु की आँखे भी ये कहते हुए नाम हो गयी थी.

अंजलि: एक तरफ तू कहती है की तुझे आर्यन से ज्यादा हमसे प्यार है, और एक तरफ तू कहती है की हम तुझे तेरे हाल पर चूड दे. तुझे पता है हमें कितना दुःख होता है जब तुझे इस हाल मई देखते है. तेरे पापा भी तेरे लिए कितना परेशां थे. अगर तू हमसे इतना प्यार करती तो तू हमें इतना दुःख नहीं पहुंचती. शायद हमारी परवरिश मई hi कोई कमी रह गयी थी जिसकी वजह से आज हमें ये दिन देखना पद रहा है.

अंजलि ये कहते हुए रोने लगती है और कमरे से बहार चली जाती है. कुछ देर बाद आशु नीचे आती है.

आशु: मम्मी मुझे एक रोटी और देना.

ये कहकर वो निर्मला के पास बेथ जाती है.

अंजलि: अभी लाती हु.

अंजलि खुश होते हुए बोली. वो रोटियां लेकर आशु को देती है.

आशु: दादी मुझे लगता है, मेरे हिस्से का खाना आप खा रही हो. देखो न आप कितनी मोती हो गयी हो.

ये सुनकर निर्मला और अंजलि हसने लगती है. निर्मला उठकर आशु का माथा चूम लेती है.

निर्मला: मेरी बच्ची, तू ऐसे hi मुस्कुराती हुई रहा कर बहुत अच्छी लगती है, तेरे ऐसे रहने से ये घर भी बिलकुल सूना हो गया था.

कुछ देर आशु बैठकर उनसे बात करती है, और फिर ऊपर आ जाती है.

निर्मला: क्या कर रही है मेरी बेटी.

निर्मला उसके रूम मई आते हुए बोली.

आशु: कुछ नहीं दादी, आइये.

आशु उठते हुए कहती है. निर्मला आकर उसके पास बैठती है.

निर्मला: अब किसी तबियत है बीटा तेरी.

निर्मला उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली.

आशु: ठीक हु दादी.

निर्मला: बीटा कभी कभी जो चीज़ हम चाहते है, वो चीज़ हमारी किस्मत से भी बहुत दूर होती है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं की हम उस चीज़ को पाने की वजह से अपने आस पास के प्यार करने वालो से भी अलग हो जाए.

आशु को ये बात सुनकर थोड़ा अजीब सा लगा.

आशु: दादी म समझी नहीं.

निमला: बीटा तू इतनी भी नासमझ नहीं है की मेरी बात न समझे. तुझे आर्यन की बहुत याद आ रही है न.

अब आशु को लगने लगा की दाल मई कुछ काला है.

आशु: दादी.. apko..kese... मेरा मतलब.

निर्मला: मुझे सब पता है बच्चे, की तुम दोनों भाई बहिन एक दूसरे को कितना प्यार करते हो. लेकिन बीटा ये है तो गलत hi न.

आशु को कुछ समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे या केसा रियेक्ट करे.

आशु: दादी आपको कैसे.. मेरा मतलब कब.

निर्मला: जिस दिन अंजलि की तबियत ख़राब थी, और तुम दोनों उसके रूम मई थे. म पड़ोस मई गयी हुई थी लेकिन जब मई वापस आयी तो मेने अंजलि के रूम से कुछ आवाज़े सुनी. जब मेने बाते सुनी तो मेने सोचा की इस वक़्त मेरा अंदर जाना सही नहीं है. म तुम दोनों से बाद में बात करुँगी. लेकिन उस दिन से या तो तेरी तबियत खरब रहती है या फिर तू रोटी रहती है.

आशु ये सुनकर अपना सर झुका लेती है.

निर्मला: मुझे पता है आशु के तू आर्यन को बहुत चाहती है. लेकिन बीटा ये सब बहुत गलत है. म तुझे सुना नहीं रही हु बीटा बल्कि तुझसे उम्मीद करती हु की तू समझदारी से काम ले. बीटा ये उम्र है hi ऐसी, इस उम्र मई पता hi नहीं चलता की क्या सही है और क्या गलत. लेकिन जब हमें ये समझ आता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. बस म चाहती हु की तू देर होने से पहले hi समझ जाए. म अब चलती हु तू आराम कर.

निर्मला ये बोलकर चली जाती है जबकि आशु उसकी बातो को समझने का प्रयास करने लगती है. कुछ देर बाद उसका फ़ोन बीप होता है. वो देखती है की कॉल आर्यन का था. वो रिसीव करने hi वाली होती है की पता नहीं क्या सोचकर वो खुद को रोक लेती है. आर्यन बहुत बार तरय करता है लेकिन आशु उसका कॉल रिसीव hi नहीं करती.
 
अपडेट 79

सुबह हो चुकी थी, आशु सोकर उठती है. वो अपना मोबाइल चेक करती है तो पाती है की आर्यन की बहुत कॉल्स और मेस्सगेस आये होते है. वो मश्ग पढ़ने लगती है तो उसकी आँखों से आँशु छलक आते है.

आशु: सॉरी Aaru,m बहुत ज्यादा मजबूर हु.

आशु खुद से बोलती है और फ्रेश होकर नीचे आ जाती है.

आशु: गम पापा.

आशु अपने पापा के पास बैठती हुई कहती है.

राजेश: गम बीटा, किसी है अब तू.

राजेश उसके चेहरे को पुचकारता हुआ कहता है.

आशु: म ठीक हु पापा.

राजेश: लेकिन तेरी आँखे तो कुछ और hi कह रही है, तू रात मई सोई नहीं न.

राजेश उसकी लाल आँखे देखकर कहती है.

आशु: wo...m...wo पापा रात नींद hi नहीं आयी मुझे, शयद दवाइयों की वजह से ऐसा हुआ हो.

आशु नजरे झुककर कहती है.

उनकी बात अंजलि और निर्मला दोनों सुन रही थी. उन्हें तो पता hi था की क्या वजह है जो आशु सो नहीं पा रही है. निर्मला उनके पास hi आकर बेथ जाती है.

आशु: ये देखो पापा, दादी हमारी बाते सुनने आ गयी की कही हम इनकी बुराई तो नहीं कर रहे है.

ये बोलकर आशु हस्ती है और निर्मला jhoot-moooth मई उसको मारने आगे बढ़ती है.

निर्मला: बहुत बोलने लगी है tu,ruk..abhi बताती हु तुझे.

अंजलि किचन से उन्हें हसी ठिठोली करते देख रही थी. उसके चेहरे पर भी मुस्कराहट थी.

अंजलि: हे भगवान् तेरा laakh-laakh शुक्र है की आशु के चेहरे पर दोबारा से मुस्कराहट आ गयी है. मेरी बच्ची तो मानो हसना hi भूल गयी थी, उसके बिना तो ये घर भी khaali-khaali सा हो गया था. वैसे मेरी बेटी बहुत hi समझदार है, उसने कभी भी मुझे कोई शिकायत का मौका नहीं दिया. लेकिन उसने प्यार किया भी तो किस se,apne hi सेज भाई से. आर्यन से अलावा चाहे वो किसी से भी प्यार करती, म आशु की ख़ुशी की खातिर उसकी शादी उससे hi करा देती. शायद अब हमें जल्द से जल्द आशु की शादी करनी होगी ताकि ये आर्यन के साथ अपने रिश्ते को पूरी तरह से भूल जाए.

अंजलि काम करती हुई सोचे जा रही थी.

-----

आर्यन अपने केबिन मई बिजी था जब सिंह वह आता है.

सिंह: क्यों भाई मेने सुना है की रात भी तुम ऑफिस से बहुत लेट गए थे और अब भी सुबह से hi यहाँ हो.

सिंह उसको कॉफ़ी का एक कप देते हुए बोलै.

आर्यन: सर अकेले वह मन नहीं लगता, काम से काम यहाँ काम मई मन तो लगा रहता है.

आर्यन एक सिप लेते हुए बोलै.

सिंह: रात कितने घंटे सोये थे तुम.

सिंह उसकी लाल आंखे देखकर पूछता है.

आर्यन: 2 या 3 घंटे.

सिंह: आर्यन ऐसे टेंशन लेने से कुछ नहीं होगा, बल्कि तुम अपनी सेहत को hi नुक्सान पहुंचा रहे हो.

सिंह उसे समझते हुए बोलै.

आर्यन: सर म क्या करू, म कभी भी आशु के बिना एक भी पल नहीं रहा हु. और आज उसे देखे उस से बात किये हुए 2 दिन हो गए है. मुझे ऐसा लग रहा है जैसे की उसके बिना म मर hi जाऊंगा.

ये कहते हुए आर्यन की आँखों से आँशु की एक बूँद टपक जाती है.

सिंह: यार तुम तो इतनी जल्दी हिम्मत छोड़ रहे हो, अपने प्यार पर भरोसा रखो सब ठीक हो जाएगा. और वैसे भी तुम तो ध्यान डाइवर्ट करने के लिए काम करने लगते हो, आशु के बारे मई तो सोचो. वो भी तो तुम्हे कितना मिस कर रही होगी.

सिंह उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोलै और आर्यन सोचने लगता है. सिंह वह से चला जाता है और आर्यन फिर से बिजी हो जाता है. तभी वुल्फ का कॉल आता है.

आर्यन: कुछ पता चला वुल्फ.

वुल्फ: है एजेंट, अनिरुद्ध सिन्हा वैसे तो प्रॉपर्टी डीलर का काम करता है. लेकिन उसकी आड़ मई वो अपने भाई के सारे काले धंधे चलता है. ये ज़ोर के किये गए हर गुनाह मई बराबर का भागीदार है.

आर्यन: उसे उठाया जा सकता है.

वुल्फ: एजेंट उसे उठाना बहुत मुश्किल है, उसके साथ हर वक़्त बॉडीगार्ड होते है.

आर्यन: तो फिर पता कैसे चलेगा की ये अपने काम को कब और कैसे अंजाम देने वाले है.

आर्यन अपना सर पकड़ कर कहता है.

वुल्फ: तुम बताओ अब कैसे करना है.

आर्यन: एक काम करो, ज़ोर के प् के बच्चे को उठा लाओ.

वुल्फ: क्या??? सर बच्चे ko....lekin.

वुल्फ बच्चे का नाम सुनकर झिझक सा गया था.

आर्यन: वुल्फ मुझे पता है हमें बच्चे का सहारा नहीं लेना चाहिए, लेकिन ये हजारो निर्दोष जिन्दगियो का सवाल है. हमारे पास और कोई चारा भी नहीं है ये पता लगाने का की क्या होने वाला है.

वुल्फ: ठीक है सर.

ये कहकर वुल्फ कॉल कट कर देता है.

देर रात तक आर्यन ऑफिस मई काम मई hi लगा रहा. वो ज़ोर और उसके भाई के हर कदम पर निगरानी रखे हुए tha,unke फ़ोन टेप किये हुए था. लेकिन उसे कुछ भी ऐसा नहीं मिल रहा था, जिस से वो किसी नतीजे पर पहुंचे.

------

रात को डिनर के बाद आशु ऊपर चली गयी थी.

अंजलि: सुनो जी, मुझे लगता है की अब आशु की शादी कर देनी चाहिए. पराया धन है, जितनी जल्दी अपने घर चली जाए उतना अच्छा है.

अंजलि राजेश को कहती है.

राजेश: अंजलि इतनी जल्दी क्या है शादी की, अभी तो वो बच्ची है. और वैसे भी उसने कहा तो था की वो अभी शादी नहीं करना चाहती है.

अंजलि: वो बच्ची नहीं है अब, पुरे 23 साल की हो गयी है. और उसके मन करने से क्या होता है, लड़किया तो हमेशा से hi मन करती है अपने माँ बाप का घर छोड़कर जाने से.

अंजलि किसी भी तरह से राजेश को कन्विंस करना चाहती थी.

निर्मला: लेकिन बीटा, एक बार आशु से इस बारे मई तो पूछ लेना चाहिए हमें.

राजेश: है माँ बिलकुल ठीक कह रही है.

राजेश अपनी माँ की बात से सहमत होते हुए बोलै.

अंजलि: आप उस से पूछेंगे और वो फिरसे मन करेगी. और म कोई उसकी दुश्मन थोड़े hi है, म भी तो उसकी ख़ुशी और भला hi चाहती हु.

अंजलि मुँह चढ़ाते हुए बोली.

राजेश: लेकिन..

अंजलि: लेकिन क्या, चलो ठीक है अभी उसकी सगाई कर देते है.. शादी का बाद मई देख लेंगे.

राजेश: ठीक hai,.lekin लड़का भी तो देखना पड़ेगा न पहल.

अंजलि: लड़का है तो सही.

निर्मला: कोण है?.

अंजलि: जो आपके दोस्त है उनका लड़का.

राजेश: लेकिन आशु तो उस रिश्ते के लिए पहले hi मन कर चुकी है.

अंजलि: आप उन्हें कल बुलाओ तो सही, म आशु से बात कर लुंगी.

निर्मला अंजलि की बात से बिलकुल भी खुश नहीं थी. वो चाहती थी की एक बार आशु की राय लेनी जरूरी है.

निर्मला: अंजलि ऐसा न हो की हम उन लोगो को बुला ले, और आशु फिर से मन करदे.

राजेश: माँ सही कह रही है अंजलि, हमें एक बार उस से बात करनी चाहिए.

अंजलि: ठीक है म उस से बात करती हु जाकर.

अंजलि उठते हुए बोलती है. वो ऊपर जाने लगती है. वो जब आशु के रूम मई आती है तो आशु अपने मोबाइल मई आर्यन की एक फोटो को निहार रही थी. अपनी मम्मी को देखते hi वो मोबाइल ऑफ कर लेती है.

आशु: मम्मी आप, आइये.

आशु उसे बीएड पर बैठने को कहती है.

अंजलि: तू इतनी जल्दी क्यों चली आयी निचे से.

अंजलि उसके पास बैठते हु बोली.

आशु: मम्मी वो मुझे नींद आ रही थी.

अंजलि: आशु म बहुत उम्मीद लेकर तुझसे कुछ मांगने आयी हु, प्ल्ज़ मन मत करना.

आशु: मम्मी प्ल्ज़ आप ऐसा मत कहिये, आप बोले तो सही.

अंजलि: मुझे पता है मेरी बेटी हमसे बहुत प्यार करती है, लेकिन बस मेरी एक बात और मान ले तू. उसके बाद म तुझसे कभी भी कुछ नहीं मांगूंगी.

अंजलि की बात सुनकर आशु को भी थोड़ी गब्रहत से होने लगी थी.

आशु: मम्मी आप क्या कहना चाहती हो, प्ल्ज़ साफ़ साफ़ बोलिये न.

अंजलि: बीटा तेरे पापा और म चाहते है की अब तेरी शादी कर देनी चाहिए.

ये सुनते hi आशु को जैसे करंट लगता है, वो बीएड से तुरंत कड़ी हो जाती है.

आशु: मम्मी आप ये क्या बोल रही हो.

आशु भी अब थोड़े सपाट लहज़े मई कहती है.

अंजलि: बेटी म तेरी कोई दुश्मन नहीं हु, म भी तो तेरा भला hi चाहती हु. शादी के बाद धीरे धीरे तू सब कुछ भूल जायेगी.

अंजलि उसका हाथ अपने हाथो मई लेकर कहती है.

आशु: मम्मी आप मुझसे चाहे तो मेरी जान मांग ले, म देने से पीछे नहीं हटूंगी. लेकिन मुझसे शादी के लिए मत कहिये.

आशु अपना हाथ छुड़ाकर कहती है.

अंजलि: देख आशु होश से काम ले, जो तू चाहती है वो कभी भी नहीं हो सकता. तो अच्छा है की तू इन सब बातो को भूलकर आगे बढे.

अंजलि भी कड़ी होते हुए गुस्से से बोलती है.

आशु: मम्मी म आप लोगो से सबसे ज्यादा प्यार करती हु, आप लोग जो बोलेगे मई वो सब करुँगी, लेकिन शादी बिलकुल नहीं.

आशु अपनी मम्मी की और देखते हुए कहती है.

अंजलि: अगर तू हमसे प्यार करती तो ये पाप करने से पहले हज़ार बार सोचती.

आशु: मम्मी ये पाप नहीं है, मेने सच्चा प्यार किया है.

आशु चिल्लाकर कहती है, ये देख अंजलि को गुस्सा आ जाता है और वो गुस्से मई उसको एक तमाचा लगा देती है.

छ्हःताककककककक

अंजलि: कितनी बेशर्म हो गयी है तू, मुझे तुझसे ऐसी उम्मीद बिलकुल भी नहीं थी. तू शादी के लिए हां कहेगी या नहीं.

अंजलि उसे ऊँगली दुखाकर कहती है.

आशु: मम्मी मेने आपके कहने पर आर्यन से अपने हर रिश्ते को खत्म कर लिया है, लेकिन म शादी बिलकुल नहीं करुँगी. मेरे दिल मई उसकी जगह कोई नहीं ले sakta..koi भी नहीं... प्ल्ज़ मम्मी म आपके आगे हाथ जोड़ती हु.

आशु अपनी मम्मी के सामने हाथ जोड़ते हुए कहती है, उसकी आँखों मई आँशु आ गए थे.

अंजलि: म भी देखती तू शादी कैसे नहीं करेगी, कल hi म तेरी सगाई कर दूंगी.

अंजलि ये कहती हुई वह से निकल जाती है, और आशु धड़ाम से निचे गिर जाती है.

अंजलि नीचे आकर राजेश से झूट बोल देती है की आशु ने सगाई के लिए हां कर दी है. अंजलि के सर पर तो मानो आशु की शादी करने का भूत सवार था. कुछ देर बाद निर्मला जब ऊपर जाती है तो पाती है की आशु फर्श पर बैठी आँशु बहाये जा रही थी.

निर्मला भागकर उसके पास आती है.

निर्मला: Ashu..beta..kya हो गया hai..tu रो क्यों रही है.

निर्मला उसे संभालते हुए बोली.

आशु: dadi..m शादी नहीं करुँगी.. म उसे धोखा नहीं दे सकती...

आशु रट हुए बोले जा रही थी.

निर्मला: आशु होश मई आ बीटा, तुझे शादी करने को कोण बोल रहा है. जब तेरा मन करे तब करना, फ़िलहाल तेरी सगाई...

आशु: mene..kaha न दादी.. मुझे शादी नहीं करनी है.

आशु उसकी बात काटे ते हुए बोली.

निर्मला: अच्छा ठीक है तू रोना बंद कर, म सुबह अंजलि से बात करुँगी. ठीक है.

निर्मला आशु के आँशु पूंछते हुए कहती है. तो आशु भी गर्दन है मई हिला देती है.

निर्मला: चल अब कड़ी हो, बीएड पर लेत जा... तू फ़िक्र मत कर म बात करुँगी सुबह.

फिर आशु उठकर बीएड पर लेत जाती है, पता नहीं कब तक वो यूँही आँशु बहती रही.
 
अपडेट 80

सुबह के वक़्त आर्यन सोकर उठता है. वो अपना मोबाइल देखता है और निराश होकर बीएड पर पटक देता है.

आर्यन: आशु काम से काम मुझसे बात तो कर, भले hi भाई के रिश्ते से hi सही. मुझे समझ नहीं आ रहा म क्या करू, तुझे देखने ko,milne ko,baat करने को बहुत ज्यादा मन हो रहा है. तू तो कहती थी की तू मुझे खुद से भी ज्यादा प्यार करती है, तो फिर अब क्यों ये सब???

आर्यन खुद से बोले जा रहा था. फिर वो be-man सा उठता है और फ्रेश होने चला जाता है.

वो ऑफिस के लिए निकलने hi वाला था की उसका फ़ोन बजता है.

आर्यन: है वुल्फ.

वुल्फ: काम हो गया है.

आर्यन: ठीक है म आता हु.

आर्यन तुरंत सेफ हाउस पहुँचता है, वो देखता है की वह एक 10-12 साल का बच्चा रो रहा है. उसे खुद पर बहुत गुस्सा आया की इन सब म इस मासूम बच्चे का क्या कसूर है. वो उस बच्चे के पास आता है.

आर्यन: क्या हुआ बीटा, आप रो क्यों रहे हो.

आर्यन उसके आँशु पूंछते हुए कहता है.

बच्चा: ये अंकल मुझे यहाँ लेकर आये hai,meri मम्मी बोलती थी की किसी भी अनजान आदमी के साथ कही नहीं जाना, मुझे अपने घर जाना है.

ये कहते हुए बच्चा फिर से रोने लगा.

आर्यन: बीटा हम अनजान नहीं है, हमें आपके पापा ने भेजा है. वो भी कुछ देर मई आने hi वाले होंगे. लो, तब तक तुम ये चॉकलेट खाओ.

आर्यन उसे चॉकलेट देते हुए बोलै.

बच्चा: आप सच बोल रहे हो अंकल.

वो बच्चा आँशु साफ़ करते हुए बोलै.

आर्यन: है बिलकुल सच, अच्छा बताओ आपका नाम क्या है.

बच्चा: मेरा नाम अर्जुन है.

आर्यन: आपका तो बहुत प्यारा नाम है, अच्छा अब आप थोड़ी देर यही betho,m आपके पापा को कॉल करता हु.

ये बोल आर्यन वह से दूसरी और आता है, और कॉल करने लगता है.

आर्यन: hello, मर अतुल.

अतुल: जी है, बोल रहा हु.

आर्यन: दरअसल बात ये है की आपका बीटा मेरे पास है.

अतुल: क्या?? तुम को......

इस से पहले वो कुछ कहता आर्यन उसकी बात बीच मैं hi काट देता है.

आर्यन: चिल्लाने या किसी को बताने की कोई जरुतत नहीं है, अगर तुमने किसी को बताया तो समझो तुम्हारा बीटा खत्म.

अतुल: नहीं प्ल्ज़ मेरे बेटे को कुछ मत करना, तुम चाहते क्या हो.

अतुल गिड़गिड़ाते हुए बोलै.

आर्यन: कुछ ख़ास नहीं, बस तुमसे बात करनी है.

अतुल: ठीक है म आता hu,bolo कहा आना है.

आर्यन: किसी को बताये बीने, अकेले hi ___ जगह पहुंचो, वह तुम्हे मेरा आदमी मिलेगा, वो तुम्हे ले आएगा.

अतुल: लेकिन म उसे पहचानूंगा कैसे.

आर्यन: वो तुम्हे खुद पहचान लेगा, लेकिन अगर तुमने होशियारी की तो समझो.

अतुल: nahi..nahi म आता हु.

आर्यन वह बैठकर उस बच्चे से बात करने लगता है. तभी उसका फ़ोन बजता है वो देखता है तो पाटा है की कॉल राजेश की थी. आर्यन रिसीव करता है, उनके बीच hi,hello होती है.

राजेश: तू तो वह जाकर अपने माँ बाप को भूल hi गया है, न तो तू खुद कॉल करता है और न hi अपनी मम्मी की कॉल उठता है. वो कल शिकायत कर रही थी मुझसे.

आर्यन: वो पापा बस थोड़ा बिजी था.

राजेश: अच्छा.. तुम दोपहर म घर आजा.

आर्यन: क्यों क्या हुआ.

राजेश: वो तेरी बहिन की इंगेजमेंट है.

ये सुनते hi आर्यन की जैसे साँसे hi रुक गयी, उसके शरीर कमज़ोर पड़ने लगा.

आर्यन: आशू रररेअद्य हैई ीिस्क्के लिए.

आर्यन ने अटकते हुए किसी तरह अपने शब्द पुरे किये.

राजेश: है वो तैयार है, ले अपनी माँ से बात कर.

ये सुनते hi आर्यन के हाथ से मोबाइल छूट जाता है. और उसके आँख से आँशु बहने लगते है. ये सब वह खड़ा वुल्फ देख रहा था.

वुल्फ: क्या हुआ devil..devilll.

जब वुल्फ उसे पकड़ कर हिलता hai,tab जाकर वो होश मई आता है.

आर्यन: kuuu..kuch नहीं.. कुछ भी nahi...tum पैंथर को कॉल लगाओ.

कुछ देर बाद पैंथर और हॉक अतुल को लेकर वह आ जाता है. वह आकर वो उसकी आँख से पट्टी उतारते है. अब आर्यन उन्हें नार्मल होने का दिखावा करने लगा, जबकि वो अंदर से पूरी तरह से टूट चूका tha..wo बचा अपने पापा को देख उस से लिपट गया.

अतुल: कोण हो तुम लोग, मेरे बेटे को क्यों लाये हो यहाँ.

आर्यन: यहाँ बैठो, तुमसे बात करनी है.

आर्यन उसे बैठने के लिए कहता है.

आर्यन: तुम्हारा इकलौता बीटा है न ये.

अतुल: है.

अतुल उसे अपनी बाहो मई समेत ता हुआ बोलै.

आर्यन: मान लो, ऊपर वाला न करे ऐसा हो. अगर तुम्हारे बेटे को कुछ हो गया तो तुम क्या करोगे.

अतुल: हम जीते जी मर जाएंगे, ये hi तो हमारी जिंदगी है.

आर्यन: तो जिस आदमी के साथ तुम काम करते हो, वो पता है कितने ऐसी hi मासूम जिन्दगियो के साथ खेलता है.

ये सुनकर अतुल अपना चेहरा झुका लेता है.

अतुल: मुझे पता है, लेकिन अपना पेट तो पलना hi है हमें.

आर्यन: तुम्हे पता hai,wo यहाँ बम ब्लास्ट करने वाला है. अगर ऐसा हो गया तो तुम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते की कितने बेगुनाहो की बलि चढ़ जायेगी. म चाहता हु की तुम हमारी मदद करो, भगवन हर किसी को एक मौका जरूर देता है कुछ अच्छा करने का.

अतुल: अगर मेने तुम्हारी हेल्प की तो मंत्री जी मुझे जान से मार देंगे.

आर्यन: अगर तुमने हमारी हेल्प नहीं की तो ये बाँदा तुम्हारे बच्चे को..

आर्यन ने उसके बेटे की और इशारा करते हुए कहा.

आर्यन: तुम यकीन करो, तुम्हारे बारे मई किसी को कुछ पता नहीं चलेगा.

अतुल: लेकिन तुम लोग हो कोण.

आर्यन: तुम्हारे उस मंत्री जेसो के बाप है हम. प्ल्ज़ बता दो, नहीं तो यहाँ बहुत सी जिन्दगिया देव पर लगी हुई है.

अतुल: इस बारे मई म ज्यादा तो कुछ नहीं जनता, लेकिन वो लोग परसो कुछ बड़ा करने की तैयारी मई है.

आर्यन: परसो.. तुम सच बोल रहे हो न.

अतुल: मुझे मेरे बच्चे की kasam,m बिलकुल सच बोल रहा हु.

आर्यन: अच्छा, ये अनिरुद्ध अकेला भी कही जाता है, या हमेशा बोडीगार्ड्स के साथ hi रहता है.

अतुल: नहीं वो हमेशा सिक्योरिटी मई रहता है, लेकिन उसकी एक गफ है जहा वो सिर्फ अपने 2 पर्सनल बॉडीगार्ड के साथ hi जाता है.

आर्यन: कब जाता है वो वह.

अतुल: जब उसका मूड होता है.

आर्यन: और वो उसकी गफ कोण है.

उसके बाद अतुल उसे सब बता देता है, आर्यन पैंथर से उन्हें छोड़ कर आने को बोलता है. उनके जाने के बाद वुल्फ उस से कहता है.

वुल्फ: डेविल तुम्हे क्या लगता है, ये सच बोल रहा है.

आर्यन: है, क्योंकि वो मंत्री hi ज़ोर है ये कोई नहीं जानता, ये भी नहीं.

-----

राजेश: लो भाई, आर्यन को भी बोल दिया है.

अंजलि: ठीक है, म आपके लिए नास्ता लाती हु.

ये बोल अंजलि किचन मई चली जाती है. निर्मला भी उसके पीछे hi आ जाती है.

अंजलि: माँ जी, कुछ चाहिए आपको.

अंजलि उसे किचन मई आया देख पूछती है.

निर्मला: तुझसे कुछ बात करनी है.

अंजलि: है कहिये.

अंजलि: तू ये ठीक नहीं कर रही है, जब आशु अभी इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं है तो फिर क्यों तू जबरदस्ती कर रही है.

ये सुन अंजलि काम करते हुए रुक जाती है.

अंजलि: माँ ji,wo लड़की है, वो खुद से तो कभी नहीं कहेगी न की उसे शादी करनी है. और इसमें गलत hi क्या है, उसकी शादी की उम्र तो हो hi रही है न. और जरूरी नहीं है की हर फैसले उसकी मर्ज़ी से hi होंगे.

निर्मला: ये तू नहीं तेरी ज़िद बोल रही है, कही ऐसा न हो की तू अपने इस फैसले पर पूरी ज़िन्दगी पछताए.

निर्मला ये कहकर चलती बानी जबकि अंजलि को कुछ समझ नहीं आया.

कुछ देर बाद अंजलि ऊपर आती है. वो देखती है की आशु लेती हुई छत को घूर रही है.

अंजलि: तुझे नास्ता नहीं करना है क्या.

आशु उसकी और देखकर फिर से मुँह फेर लेती है.

अंजलि: ठीक है तेरी मर्ज़ी है, लेकिन तैयार हो जा मेहमान आने hi वाले होंगे.

आशु: मम्मी मेने एक बार कह दिया है न की म कोई sagai-wagai नहीं करुँगी.

आशु गुस्से से उठते हुए बोली.

अंजलि: देख आशु तू मुझे गुस्सा मत दिला.

अंजलि उसे ऊँगली दिखाकर कहती है.

आशु: तो फिर आप समझती क्यों नहीं हो. आप जो बोलोगी मई करने को तैयार हु, लेकिन म ये नहीं कर सकती.

आशु गिड़गिड़ाते हुए बोली.

अंजलि: म भी देखती हु तू कैसे नहीं मानेगी.

ये बोल अंजलि वह से चली जाती है और आशु फफक फफक कर रोने लगती है. तब आशु को पता नहीं क्या सूझा और उसने वह रखा कांच का गिलास फर्श पर दे मारा. उसने एक टुकड़ा उठाया और अपनी कलाई पर फेर दिया. वो अपनी नस काट चुकी थी, उसकी कलातलई से खून का फावड़ा छूट चूका था.

आशु: i'm सॉरी आर्यन, लेकिन म तेरे सिवा किसी और की नहीं हो सकती.

और ये कहते - कहते उसकी आँखे बंद होने लगी, और कुछ देर बाद वो धड़ाम से फर्श पर गिर गयी.
 
अपडेट 81

आर्यन अपने केबिन मई बैठा हुआ अपनी आगे की प्लानिंग कर रहा था, तभी उसका फ़ोन बजता है. वो देखता है तो कॉल हॉक की थी.

हॉक: डेविल, तुम्हारे घर से abhi-abhi पूरी फॅमिली भर गयी है.

आर्यन: क्या... सब लेकिन सब क्यों??

आर्यन सोचते हुए कहता है.

हॉक: शायद तुम्हारी बहिन को कुछ प्रोब हुई है.

ये सुनते hi आर्यन की हार्टबीट एकदम से बढ़ गयी. उसने तुरंत कॉल कट की और अपने पापा को फ़ोन लगा दिया.

आर्यन: hello, पापा क्या हुआ है.

आर्यन घबराते हुए बोलै.

राजेश: बीटा वो आशु... उसने अपनी नस काट ली है.

ये सुनते hi आर्यन की साँसे मानो रुकने लगी थी.

आर्यन: kkk..kis हहोस्पिटल मई है.

उसने किसी तरह अपने शब्द पुरे किये.

राजेश ने उसे बता दिया, आर्यन की आँखों से आंसू बहने लगे. वो तुरंत बहार की और भगा और अपनी बाइक उठा, हॉस्पिटल की और दौड़ा ली.

कुछ देर बाद आर्यन हॉस्पिटल पहुँचता है. वो रिसेप्शन पर आकर पता करता है. जैसे hi वो इमरजेंसी रूम के बहार आता है तो वह अंजलि और निर्मला कड़ी हुई होती है, राजेश शायद फॉर्मेलिटी पूरी करने गया हुआ था. अंजलि उसे देखकर उसकी और बढ़ती है मगर आर्यन उसे इग्नोर करता हुआ अपनी दादी के पास आता है

आर्यन: दादी क्या हुआ आशु को, उसने ऐसा क्यों किया.

आर्यन अपनी दादी के गले लगता हुआ भीगी हुई पलकों से पूछता है.

निर्मला: पता नहीं उसने ऐसा क्यों किया, जब म ऊपर पहुंची तो मेने पाया की आशु फर्श पर ढेर हुई पड़ी है और उसके हाथ से खून बह रहा है. उसके बाद उसे लेकर हम तुरंत यहाँ आ गए.

निर्मला सच्चाई बताकर अभी यहाँ कोई बखेड़ा खड़ा नहीं करना चाहती थी.

आर्यन: मुझे पता है उसने ऐसा क्यों किया, लेकिन एक बात ध्यान रखियेगा आप लोग की अगर उसे कुछ हो गया na,to इस घर से एक साथ 2 ार्थिया उठेगी.

आर्यन अपनी मम्मी की और देखता हुआ ये सब कहता है.

ये सुनकर अंजलि का कलेजा देहल जाता है. वो कुछ कहने hi वाली होती है की तभी रूम से डॉ बहार आता है.

आर्यन: डॉ किसी है वो?

डॉ: देखिये अभी हम कुछ नहीं कह सकते है, उनका खून बहुत ज्यादा बह चूका है, और आप उन्हें यहाँ लेट लेकर आये है. आप जल्दी से ब्लड का अरेंजमेंट कीजिये. उनका जो ब्लड ग्रुप है, वो हमारे यहाँ खत्म हो गया है.

आर्यन: डॉ उसका और मेरा ब्लड ग्रुप शामे hi है, आप मेरा खून ले लीजिये.

डॉ: ये तो अच्छी बात है, आप जल्दी से अंदर आइये.

डॉ आर्यन को अंदर लेकर जाता है, और उसके कुछ जरूरी टेस्ट करके उसे बीएड पर लेता देता है. आर्यन पास मई पड़ी आशु को देखता है. उसका चेहरा बिलकुल पीला पद चूका था, उसकी आँखों के नीचे आंशुओ के निशाँ बने हुए थे, जैसे की वो खूब रोई हो. आर्यन उसका एक हाथ अपने हाथ मई लेता है.

आर्यन: तूने ऐसा क्यों किया हनी, तूने एक बार भी मेरे बारे मई नहीं सोचा. अगर तुझे कुछ हो गया तो म तो जीते जी मर जाऊंगा न.

आर्यन उसका हाथ पकडे हुए उससे कह रहा था, वो डॉ आर्यन को hi देख रहा था.

डॉ: वैसे ये आपकी कोण लगती है.

आर्यन: ये मेरी ज़िन्दगी है.

आर्यन उसे बिना देखे hi कहता है.

फिर डॉ ड्रिप लगाकर बहार चला जाता है. थोड़ी देर बाद उसकी पूरी फॅमिली अंदर आती है. निर्मला आशु के पास बैठकर उसके सर पर हाथ फेरने लगती है.

निर्मला: क्या हालत बना ली है तूने मेरी बच्ची, तूने एक बार भी हमारे बारे मई नहीं सोचा.

निर्मला की आँखों मई आँशु थे. जबकि अंजलि एक और कड़ी हुई एक तक आशु को देखे जा रही थी.

राजेश: मेरी बेटी ऐसी नहीं है की इतनी सी बात पर अपनी जान देने का सोचे, जरूर कोई बड़ी बात है.

राजेश अपनी बीवी की और देखते हुए कहता है.

आर्यन के ब्लड देने के बाद डॉ उनसे कहता है.

डॉ: देखिये, ज्यादा कमजोरी की वजह से वो बेहोशी मई है. आप बस दुआ कीजिये की उन्हें शाम तक होश आ जाए.

ये बोलकर डॉ वह से चला जाता है. आर्यन को ऐसे लग रहा था जैसे की उसकी जिंदगी उस से दूर हो रही है. वो बहुत ज़ोर से रोना चाहता था, लेकिन वह उसकी फॅमिली थी. तब आर्यन बहार आकर एक बेंच पर अपने आँशु बहाने लगता है. तब उसे याद आता है की उसने हॉस्पिटल के पास एक मंदिर देखा था, वो उठकर वह जाने लगता है. मंदिर मई पहुंचकर वो भगवान् के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो जाता है.

आर्यन: भगवान् जी मेने आज तक आपसे अपने लिए कभी कुछ भी नहीं माँगा है, लेकिन आज आखिरी बार आपसे कुछ मांग रहा हु. प्ल्ज़ मेरी आशु को ठीक कर दीजिये, उसको होश मई लाए दीजिये. अगर उसे कुछ हो गया तो म भी नहीं जी पाउँगा.

ये कहते हुए आर्यन के आँशु बहने लगते है. तभी वह पुजारी जी आते है.

पुजारी: बीटा सच्चे दिल से मांगी हुई दुआ हमेशा पूरी होती है, और तुम्हारी सच्चाई आंशुओ से साफ़ झलक रही है. ये लो प्रसाद सब ठीक हो जियेगा.

आर्यन प्रसाद लेकर वापस हॉस्पिटल मई आटा है.

आर्यन: पापा आप लोग घर चले जाओ, म यही हु.

राजेश: नहीं मुझे अपनी बेटी के पास hi रहना है.

आर्यन: पापा आप खाना खा aayiye,tab तक म हु न यहाँ.

राजेश: अगर हम एक दिन खाना नहीं खाएंगे तो मर नहीं जाएंगे.

राजेश अपनी बेटी का हाथ अपने हाथो मई लेकर कहता है.

आर्यन आशु के पास आता है, और थोड़ा से प्रसाद लेकर आशु के मुँह मई दाल देता है.

निर्मला: ये क्या है आर्यन.

आर्यन: ये भगवन का प्रसाद है दादी.

निर्मला को उसे देखकर यकीन हो गया थस की इन दोनों का प्यार कितना गहरा है.

ऐसे hi दोपहर से शाम हो जाती है. आर्यन उसका हाथ अपने हाथो मई लेकर एक तरफ बैठा हुआ था, जबकि दूसरी तरफ अंजलि बैठी हुई उसके सर को सेहला रही थी. राजेश और निर्मला एक तरफ बैठे हुए थे. तभी अचानक आर्यन को आशु के हाथ मई हलचल फील होती है, वो उसके हाथ को अपने हाथो मई जकड लेता है.

आर्यन: Ashu..aankhe खोल न प्ल्ज़.

और आशु धीरे धीरे आँखे खोलने लगती है, जैसे hi वो अपनी आँखों के सामने आर्यन को बैठे हुए देखती है तो झट से उसे गले लगाने के लिए उठती है.

आशु: आहहहहहहह mummyyyyyyyyyy.

दरअसल जैसे hi वो गले लगाने को हाथ ऊपर करती है तो उसके एक हाथ मई ड्रिप लगी हुई होने की वजह से उसे पैन होता है.

आर्यन: क्या हुआ ाशुऊ.. तू प्ल्ज़ आराम से लेती रह न.

आर्यन उसे वापस लेता कर कहता है. उसे होश मई आया देख सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. कुछ देर बाद डॉ आकर उसे चेक करता है.

निर्मला: तूने तो हमारी जान hi निकाल दी थी आशु, तू ठीक होजा तुझे मार लगूंगी म.

निर्मला उसका माथा सहलाकर मुस्कुराकर कहती है.

आशु: सॉरी दादी..

राजेश: केसा है अब मेरा बच्चा.

आशु: ठीक हु पापा.

फिर ऐसे hi रात होने लगती है.

निर्मला: एक काम करो, तुम सब घर जाओ म यही आशु के पास रूकती हु.

आर्यन: नहीं दादी, आप सब जाओ म हु यहाँ पर.

फिर वो तीनो आर्यन को वह छोड़कर वापस घर आ जाते है. उनके जाने के बाद आर्यन उसकी और मुड़ता है.

आर्यन: तेरा दिमाग तो सही है आशु, तुझे पता भी है तूने क्या किया है. काम से काम एक बार मेरे बारे मई तो सोच लेती. अगर तुझे कुछ हो जाता तो.

आर्यन उसे नाम आँखों के साथ गुस्से मई डांटे जा रहा था.

आशु: आह कितना गन्दा है तू, म यहाँ बीमार पड़ी हु और तू मुझे दांत रहा है.

आशु छोटे बच्चो की तरह मुँह फूलते हुए कमज़ोरी भरी आवाज़ मई बोली. आर्यन उसके पास आकर बैठता है और उसका हाथ अपने हाथो मई लेता है.

आर्यन: हनी, तुझे पता भी है मेरी क्या हालत हुई है तुझे इस तरह से देख कर, मुझे तो समझ भी नहीं आ रहा था म क्या करू. हर एक पल भगवान से दुआ करता रहा की तू ठीक हो जाए, अगर तुझे कुछ हो जाता तो म भी मर जाता.

ये कहते हुए आर्यन की आँखों से अंशु टपक जाता है.

आशु: मुझे माफ़ करदे आर्यन, लेकिन मेरे पास और कोई चारा भी तो नहीं था न. मम्मी मेरी शादी करने के पीछे पड़ी हुई थी, और मेरी लाइफ मई तेरे सिवा अब कोई और नहीं आ सकता.

आशु उसका हाथ लेकर चूमती है.

आर्यन: लेकिन तूने इतना भी नहीं सोचा की अगर तुझे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा.

आर्यन उसे सपाट लहज़े मई कहता है.

आशु: प्ल्ज़, इस बार माफ़ करदे मुझे. लेकिन तू hi बता म और क्या करती.

तभी वह नर्स आ जाती है.

नर्स: प्ल्ज़ आप इनसे अभी ज्यादा बाते न करे, ये अभी बेहद कमज़ोर hai.aur आप इन्हे जूस वगैरह देते रहे.

आर्यन: ok सिस्टर.

नर्स: वैसे ये आपसे बहुत प्यार करते है, सुबह से एक पल के लिए भी आपके पास से नहीं हिले ये.

नर्स आर्यन की और इशारा करते हुए आशु से कहती है और वह से चली जाती है. तभी आर्यन को कॉल आता है.

आर्यन: है वुल्फ.

वुल्फ: डेविल, प्लान क्या है.

उसके बाद आर्यन वुल्फ को अपनी प्लानिंग बताने लगता है.

आर्यन: आज रात वो हमारे कब्ज़े मई होना चाहिए.

वोल्फ: ok.

फिर आर्यन जूस और फ्रूट्स लेकर आशु के पास आता है.

आर्यन: अब केसा फील कर रही है तू.

आशु: बहुत कमज़ोरी महसूस हो रही है.

आर्यन: ले ये जूस पी.

आर्यन उसे जूस पिलाता है, और फ्रूट्स खिलता है. वो मन करती रही लेकिन वो जबरदस्ती खिलने लगता है.

उसके बाद डॉ उसे इंजेक्शन देते है, जिसकी वजह से वो नींद मई चली जाती hai.Phir ऐसे hi रात काफी होने लगती है. आर्यन एक तरफ बैठकर मोबाइल मई कुछ करने लगता है. वो ऐसे hi पूरी रात काट देता है.

------

यहाँ आर्यन की फॅमिली ने बेमन सा खाना खाया और लाउन्ज मई आकर बेथ गए.

राजेश: क्या हाल हो गया है मेरी पारी बेटी का, ये सब तुम्हारी वजह से हो रहा है.

राजेश अंजलि की और इशारा करते हुए कहता है.

राजेश: मुझे सच सच बताओ क्या बात है, जिसकी वजह से आशु ने ऐसा कदम उठाया है.

अंजलि: मुझे नहीं मालूम.

अंजलि जवाब देती है.

राजेश: जब वो शादी नहीं करना चाहती थी तब भी तुम जबरदस्ती उसकी शादी करने के पीछे पड़ी हुई थी. आखिर ऐसा क्या हुआ की तुम्हारे सर पर तुरंत उसकी शादी करने का भूत सवार हो गया था.

राजेश गुस्से से अंजलि को कहता है जबकि अंजलि सर नीचे किये हुए बैठी रही.

राजेश: तुम्हे देखकर तो लगता है की तुम्हे आशु की इस हालत का जरा भी अफसोस नहीं है.

ये सुनकर अंजलि बिफर जाती है.

अंजलि: किसे अफ़सोस नहीं है मुझे.. मेरी जान निकल रही है अपनी फूल सी बेटी को इस हालत मई देख कर. आपको तो मालूम भी नहीं होगा की एक माँ के दिल पर क्या बीतती है जब उसकी औलाद इस हालत मई होती है.

अंजलि ये कहते हुए रोने लगती है.

राजेश: तो फिर क्यों तुमने उसकी शादी करने की ठानी हुई थी, वो भी उसकी मर्ज़ी के खिलाफ.

अंजलि: क्योंकि म नहीं चाहती थी की आने वाले टाइम मई हमारे साथ इस से भी बुरा हो.

राजेश: क्या मतलब है तुम्हरा.

अंजलि: कुछ नहीं.

राजेश अपनी जगह से खड़ा होता है और अंजलि का हाथ अपने सर पर रखकर कहता है.

राजेश: तुम्हे मेरी कसम है अंजलि, सच सच बताओ क्या बात है.

अब अंजलि मजबूर हो गयी थी, वो सब कुछ उसे बताती चली गयी. जबकि राजेश की आंके सुनते हुए बड़ी होती चली गयी.
 
अपडेट 82

राजेश किसी स्टेचू की तरह बैठा था और उसकी आँख से आँशु बह रहे थे. तब निर्मला उसके पास आकर उसे आवाज़ देती है, लेकिन वो तो कोई रियेक्ट hi नहीं कर रहा था. तब वो उसे काँधे से पकड़ कर हिलती है.

निर्मला: राजेश क्या हुआ बीटा, हिम्मत से काम ले.

राजेश: माँ, मुझे समझ नहीं आ रहा है की म क्या करू. दिमाग कहता है म उन्हें इस हरकत के लिए जान से मार्डू, तो वही दिल कहता है की फिर म उनके बिना कैसे जीऊंगा. वो दोनों hi तो हमारी उम्र भर की दौलत है.

राजेश होश मई आते हुए बोलै.

निर्मला: बीटा जो होना था वो तो हम बदल नहीं सकते, लेकिन अब आगे क्या करना है ये सोचना है.

राजेश: म समझाऊंगा उन्हें, वो मेरी बात जरूर मानेंगे.

अंजलि: म उन्हें समझा कर देख चुकी हु, वो नहीं मानेंगे.

अंजलि भी भीगी हुई आँखों के साथ बोली.

राजेश: तुमने मुझे पहले इस बारे मई क्यों नहीं बताया अंजलि. आर्यन को घर से दूर भेजने से तो ये मसला हल नहीं होने वाला था न.

अंजलि: बस म नहीं चाहती थी की आप टेंशन ले, मुझे दर था की कही आप उनके साथ कुछ...

अंजलि डरते डरते उस से कहती है.

राजेश: अंजलि वो मेरे भी बच्चे है, जितना प्यार तुम उनसे करती हो उतना hi म भी करता हु. और वैसे भी गुस्से से बात बनती नहीं है, बिगड़ती है. ये तो तुम देख hi चुकी हो.

राजेश उसकी और देखते हुए बोलै. कुछ देर बाद वो सब सोने के लिए चले गए.

------

सुबह आशु की आँख खुलती है तो वो पाती है की आर्यन बेंच पर बैठे हुए hi सो रहा था. आशु के चेहरे पर ये देख स्माइल आ जाती है, वैसे भी वो उसे काफी दिनों बाद इस तरह देख रही थी. तब आर्यन कसमसाकर उठने से लगता है.

आशु: गम.

आर्यन: गम, तू कब की जाग रही है.

आर्यन अपनी आँखे मलते हुए बोलै.

आशु: काफी देर हो गयी है.

फिर नर्स आकर आशु का check-up करती है. आर्यन उठकर उसके लिए नास्ते का इंतज़ाम करता है. दोनों साथ मई नास्ता करने लगे. आर्यन के पेरेंट्स भी कुछ देर बाद वह आ जाते है. कुछ देर बाद डॉ आकर आशु को दोबारा चेक करता है, और फिर उसकी छुट्टी कर देता है.

दोपहर तक वो आशु को लेकर घर आ जाते है. आर्यन उसे घर छोड़कर ऑफिस चला जाता है, जहा वुल्फ उसका वेट कर रहा था.


आर्यन: कैसे हो तुम.

वुल्फ: म ठीक हु, तुम बताओ.

आर्यन: म भी ठीक हु, बस थोड़ा बिजी था कल.

वुल्फ: अब क्या करे हम, कल वो बम ब्लास्ट करने वाला है और हम लोग अभी तक कुछ पता नहीं लगा पाए.

वुल्फ टेबल पर हाथ मारते हुए बोलै.

आर्यन: फ़िक्र मत करो सब हो जाएगा.

वुल्फ: एक तो कल हमने उसका पूरी रात वेट किया, लेकिन अनिरुद्ध वह नहीं आया. कही ऐसा तो नहीं है की अतुल हमसे झूट बोल रहा हो.

आर्यन: लगता तो नहीं है, लेकिन आज हमें अपने तरीके से hi ये सब करना पड़ेगा. तुमने उस औरत की इन्फो निकली.

वुल्फ: है उसकी साड़ी जन्म कुंडली हमारे पास है.

फिर उसे आर्यन आगे का प्लान बताने लगा. शाम के वक़्त आर्यन का मोबाइल बजता है.

आर्यन: है पापा.

राजेश: कहा हो तुम.

आर्यन: ऑफिस मई हु, क्यों क्या हुआ?

राजेश: कुछ नहीं, घर कब तक आ रहे हो.

आर्यन: वो.. papa..m..

आर्यन को समझ नहीं आ रहा था वो क्या जवाब दे.

राजेश: शाम को घर आ जाना.

राजेश उसका जवाब सुने बिना hi कॉल कट कर देता है.

----

आर्यन और उसकी फॅमिली साथ मई खाना खा रही थी. आशु भी उनके साथ hi धीरे धीरे खाना खा रही थी.

खाना खाने के बाद सब लाउन्ज मई बैठे थे. सब बिलकुल चुप चाप थे, पता नहीं ये तूफान के आने के पहले की शांति थी या कुछ और.

राजेश: आशु तू अब ठीक है.

कुछ देर बाद राजेश खुद hi सुरुवात करता है.

आशु: है पापा, म अब ठीक हु.

राजेश: तो अब तो मेरे दोनों बच्चे काफी बड़े हो गए है, सब डिसिशन खुद hi लेने लगे है. हमारा तो तुम पर अब कोई भी हक़ है hi नहीं न.

राजेश की आँखे ये कहते हुए नाम हो गयी थी.

आशु: पापा आप ऐसा क्यों कह रहे हो, हम पर आपका पूरा पूरा हक़ है.

आशु उठकर अपने पापा के पेरो के पास बैठते हुए बोली.

राजेश: तो फिर तूने ये क्यों नहीं सोचा की अगर तुझे कुछ हो गया तो हम कैसे जियेंगे.

ऐसी क्या बात थी की जो तूने अपनी जान लेना hi सही समझा, ये सोचे समझे बगैर की कोई और भी है जिनकी साँसे तेरी साँसों के साथ hi चलती है.

राजेश उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहता है.

आशु: पापा मुझे माफ़ कर दीजिये, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है. लेकिन आगे से म कभी ऐसा कुछ नहीं करूँगा.

आशु रट हुए कहती है, माहोल अब काफी ग़मगीन हो गया था. तब राजेश उसे उठाकर अपने पास बैठता है.

राजेश: मुझे अंजलि ने सब बता दिया है की तूने ऐसा क्यों किया.

ये सुनकर आशु और आर्यन को थोड़ा शॉक लगता है, लेकिन वो शायद अब पूरी तरह से तैयार थे.

राजेश: बच्चो dekho..samaz के, नेचर के कुछ अपने नियम कायदे होते है. जिनसे हम चाहकर भी मुँह नहीं मोड़ सकते. और बच्चो जो तुमने किया है, ये समाज के विरुद्ध है. ये बात तुम्हे अब समझ नहीं आएगी, लेकिन आगे चलकर तुम शायद पछताओगे. अगर किसी को पता भी चल गया तो हमारा सर उठाकर चलना भी दूभर हो जाएगा, लोग हिकारत की नजरो से हमें देखेंगे, समाज भाई बहिन के रिस्तो को भी शक की नजरो से देखने लगेगा. हमारा क्या है, हमारी तो जिंदगी काट चुकी है, थोड़ी और काट जायेगी. लेकिन तुम अपना सोचो, तुम्हारी ज़िन्दगी तो अभी शुरू hi हुई है.

राजेश सांस लेने के लिए रुकता है.

राजेश: मुझे नहीं पता तुम दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ की तुम दोनों अपने रिश्ते को hi भूल गए, और उस रिश्ते को जन्म दे बैठे- जिसे हमारे समाज मई पाप समझा जाता है, जिसकी कोई भी माफ़ी नहीं है. म तो बस इतना चाहता हु की मेरे बच्चे हमेशा अपना सर उठाकर चले. इसलिए तुम अच्छी तरह से अपने इस प्यार से ऊपर उठकर इस दुनिया के नजरिये को देखने की कोसिस करो.

राजेश अपनी बात कहकर चुप हो जाता है. आर्यन एक बार आशु की और देखता है, और कहता है.

आर्यन: पापा हमें पता है हम दोनों ने जो किया है उसे आपका समाज गलत मानता है, लेकिन ये भी सच है की हम एक दूसरे के बिना नहीं जी सकते. लेकिन आप जैसा चाहते है हम वैसा hi करेंगे.

आशु: है पापा, हम आपकी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ भी नहीं करेंगे.

आशु भी आर्यन की है मई है मिलते हुए कहती है.

राजेश: देखा अंजलि, मेने कहा था न की मेरे बच्चे बहुत hi समझदार है, वो हमारी मर्ज़ी के खिलाफ नहीं जाएंगे.

अंजलि: है म जानती हु.

तभी आर्यन वह से उठकर जाने लगता है.

राजेश: तुम कहा जा रहे हो अब.

आर्यन: म अपने फ्लैट पर जा रहा हु.

राजेश: क्यों, अब तो साड़ी बात क्लियर हो गयी है न.

आर्यन: है पापा क्लियर हो गयी है, लेकिन म यहाँ रहते हुए आशु के साथ अपने इस रिश्ते को कभी नहीं भूल पाउँगा.

आर्यन ये कहते हुए वह से निकल जाता है, जबकि राजेश उसे आवाज़ मारते हुए रह जाता है.

राजेश: अभी जवान खून है, एक बार इनकी शादी हो जाए तो सब ठीक हो जाएगा.

आशु: पापा मुझे आर्यन का तो नहीं पता, लेकिन म आपकी हर एक बात मानूंगी सिवा एक बात के.

आशु उसकी बात सुनते हुए कहती है जबकि राजेश उसे सवालिया निगाहो से देखता रहता है.

अंजलि: क्या??

अब अंजलि भी उनकी इस बातचीत मई कूद जाती है.

आशु: आपको पता है मम्मी.

ये बोलकर वो भी अपने कमरे की और चली जाती है.

राजेश: किस एक बात के लिए कह रही थी वो.

अंजलि: यही की वो किसी से भी शादी नहीं करेगी.

अंजलि उसे जाते हुए देखकर कहती है.

राजेश: क्या?? ये तो फिर वो hi बात हो गयी न की हम जहा से चले थे वापस वही आ गए.

राजेश सर पकड़कर बेथ जाता है.

निर्मला: देखो बीटा, मेने दुनिया देखि है और मुझे नहीं लगता की ये दोनों किसी और से शादी करेंगे. है, इस बात का मुझे पूरा यकीन है की वो तुम्हारे फैसले के खिलाफ नहीं जाएंगे. लेकिन ये भी पूरा यकीन है की वो एक दूसरे के बिना नहीं जी पाएंगे. वो इस समाज, दुनियादारी से बहुत दूर निकल आये है. बाकि तुम्हारी मर्ज़ी है, तुम क्या फैसला लेते हो. ये तो तुम देख hi चुके हो की अगर हमने इन पर जोर जबरदस्ती की तो ये कुछ भी कर गुज़र जाएंगे.

निर्मला ये कहते हुए वह से उठती है और चली जाती है.

राजेश: मुझे समझ नहीं आ रहा है की म क्या करू, और क्या न करू.

अंजलि: हमने पिछले जन्म मई जरूर कुछ गलत किया होगा जिसकी सजा हमें मिल रही है.

अंजलि भी आँशु बहते हुए बोली.

राजेश: लेकिन अब हम क्या करे अंजलि, हम न hi उनकी शादी करा सकते है और न hi उन्हें ऐसा रहने दे सकते है.

अंजलि: आप टेंसन मत लीजिये, ये सब वक़्त पर छोड़ दीजिये.

------

रात के 8 बजे the,Ek माकन मई 2 बच्चे एक रूम मई सो रहे थे, और दूसरे कमरे मई एक औरत बीएड पर बैठी हुई थी. उसके सामने 3 आदमी खड़े हुए थे, जिन्होंने मास्क लगा रेक थे. ये आर्यन और उसकी टीम थी.

औरत: aa...aaappp कोण हो.

आर्यन: हम कोण है ये तुम्हे जान्ने की जरुरत नहीं है, लेकिन तुम कोण हो ये म तुम्हे बताता हु.

आर्यन उसकी और देखकर कहता है जबकि वुल्फ ने उस पर गन तानी हुई थी.

आर्यन: तुम्हारा नाम ऋतू गोयल है,___ सलग से माँ किया है, सलग मई तुम्हारे 2 बर्फ थे जिनका नाम निखिल और अरुण था. फिर तुम्हारी शादी हो गयी, तुम्हारे पति बिज़नेस के काम से बहार रहते है और यहाँ उनकी कमी अनिरुद्ध पूरी करता है.

ये सुनकर उस औरत के पसीने छूटने लगे.

ऋतू: tttuuu..mmm कोण हो, यययी सब कैसे जानते हो.

आर्यन: मेने तुम्हे पहले भी कहा है की इस से तुम्हे कोई मतलब नहीं है, बस हमें तुमसे एक काम है.

ऋतू: क्या.

आर्यन: हमें अनिरुद्ध यहाँ चाहिए अभी, वर्ण तुम्हारे बच्चे और तुम..

आर्यन अपने गले पर हाथ रखकर इशारा करते है.

ऋतू: nahi..nahi प्ल्ज़ ऐसा मत करो.

आर्यन: चलो तो कॉल करो उसे और अभी बुलाओ, और इस तरह बात करना की उसे शक न हो.

वो डरते डरते कॉल लगाती है.

अनिरुद्ध: है जानेमन, किसी है.

ऋतू को बहुत ज्यादा शर्म आ रही थी उनके सामने बात करते हुए.

ऋतू: कहा हो तुम, कितने दिन हो गए तुम्हे आये हुए. मेरा बहुत मन हो रहा है तुमसे मिलने को.

अनिरुद्ध: मेरी जान बस थोड़ा सा बिजी था, कल मिलता हु तुमसे.

ऋतू: नहीं कल नहीं, प्ल्ज़ आज आ जाओ वैसे भी मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है.

अनिरुद्ध: समझा करो यार, म नहीं आ सकता.

ये सुनकर आर्यन को अपना प्लान फ़ैल होता दिखाई दिया तो वो ऋतू को जान से मारने का इशारा करता है.

ऋतू: कल नहीं मुझे आज hi बात करनी है, चाहे तुम 5 मं के लिए hi आ जाओ.

अनिरुद्ध: चलो ठीक है म 5 मं के लिए आता हु.
 
अपडेट 83

सुबह के वक़्त अनिरुद्ध की जब आँखे खुलती है तो वो एक डैम से चौंकता है, उसके हाथ पेअर बंधे हुए थे. उसके सामने आर्यन बैठा हुआ था.

अनिरुद्ध: हरामज़ादे, खोल मुझे. बता म यहाँ कैसे आया.

अनिरुद्ध हाथ पेअर मारते हुए बोलै.

आर्यन: तू यहाँ कैसे आया, सोच रात मई तेरे साथ क्या हुआ था.

अनिरुद्ध याद करने लगता है की जब रात मई वो ऋतू के घर पहुँचता है तो उसे किसी ने क्लोरोफॉर्म सुंघाया था.

अनिरुद्ध: हराम के पिल्लै, म तुझे छोडूंगा नहीं.

आर्यन: ये कोसिस तो तुम दोनों भाई पता नहीं कब से कर रहे हो.

आर्यन मुस्कुराता हुआ कहता है.

अनिरुद्ध: मुझे एक बार खोल तो सही, तेरी लाश यही बिछा दूंगा.

अनिरुद्ध दांत पीसते हुए बोलै.

आर्यन: चलो किसी और दिन तेरी ये ख्वाइश भी पूरी कर दूंगा, फ़िलहाल तो मुझे तुझसे ये जान न है की- तुम लोग कल क्या करने वाले हो.

ये सुनकर अनिरुद्ध हसने लगता है.

अनिरुद्ध: अच्छा तो तुझे ये जान न है, और तुझे लगता है म तुझे बताऊंगा. चल कोई नहीं, म बता hi देता हु. कल यहाँ चारो तरफ सिर्फ लाशें hi लाशें नजर आएगी. ये शहर कल कब्रिस्तान बन जाएगा.

आर्यन: तुम जैसे लोग भी न, पता नहीं किसी किसी खवाइश पालते हो.

अनिरुद्ध: ये ख्वाइश है या सच है, ये तो तुझे कल पता चल जाएगा.

आर्यन: है वो तो है, कल पता चल जाएगा. लेकिन मुझे नहीं तुम दोनों भाइयो को, की अब तुम दोनों का गेम ओवर होने का वक़्त आ गया है.

अनिरुद्ध: तू कुछ नहीं कर सकता, कुछ भी नहीं.

आर्यन: तुम लोग अपने देश की साथ कैसे गद्दारी करते हो यार, जहा रहते हो, खाते हो उस से hi गद्दारी. लगता है तुम दोनों भाई हराम की नस्ल हो.

अनिरुद्ध: अपनी जुबान संभाल कर बात कर.

अनिरुद्ध गुस्से से दहाड़ता है.


आर्यन: क्यों सच कड़वा लगता है न. चल अब बोल कल तुम लोग कहा कहा ब्लास्ट करने वाले हो.

अनिरुद्ध कुछ नहीं बोलता और चुप रहता है. तब आर्यन वह से उठकर एक परदे के पास आकर कहता है.

आर्यन: यहाँ कुछ तेरे जैसे hi लोग थे, जो मुँह नहीं खोल रहे थे. लेकिन उन्हें नहीं पता था की यहाँ आकर गंगा भी बोलने लगता है.

इतना कहकर आर्यन पर्दा हटा देता है, और शीशे के दूसरी और का नजारा देख अनिरुद्ध चौंक जाता है.

अनिरुद्ध: ye...ye यहाँ क्या कर रहे है, ये तो बहा....

अनिरुद्ध खाना और यादव को दूसरी और बंधे हुए देखता है.

आर्यन: ये लोग भी तेरी तरह hi मन करते थे, जब भी म उनसे कोई सवाल पूछता था. लेकिन फिर मेने उन्हें दिखाया की म कोण हु.

अनिरुद्ध: t..tu ये सब कैसे... तू अकेला नहीं है, तू कोण है.

आर्यन: म वो हु जिसने तेरे भाई की सल्तनत तबाह कर दी है, मेने hi तुम्हारे उन सभी आदमियों को मारा था.

ये सुनकर अनिरुद्ध को चेहरा लाल होने लगता है.

अनिरुद्ध: क्या.. वो तू था. कुत्ते, अब तू नहीं बचेगा. तुझे ज़ोर जान से मार देगा.

आर्यन: कमाल है, तुम खुद मौत के मुँह मई हो और मेरी जान लेने की बात करते हो. चल अब जल्दी कर, मेरे पास टाइम नहीं है. सब कुछ बताना शुरू कर.

अनिरुद्ध: म मर जाऊंगा, पर अपनी जबान नहीं खोलूंगा.

अनिरुद्ध अकड़ता हुआ बोलै.

आर्यन: चल ठीक hai,tu अपनी जबान पर कायम रहना.

ये कहकर आर्यन उठकर एक टूलबॉक्स लाता है. उसमे बहुत से तरह के औज़ार थे.

वो उसमे से एक पिलास उठता है.

आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

अनिरुद्ध की जोरदार चीख निकलती है नाखून खींचने की वजह से.

आर्यन: अभी इतना मत चीखो यार, अभी तो तुम्हारे हाथ पेअर की सभी उंगलियों के नाख़ून एक एक कर खींचूंगा. फिर तुम्हारी एक एक कर ऊँगली काटूंगा, फिर कान काटूंगा और फिर...

आर्यन उसकी ज़िप की और इशारा करता हुआ कहता है.

अनिरुद्ध: तू कुछ भी करले, म तुझे कुछ नहीं बताऊंगा.

तब आर्यन उसके 2 नाख़ून और निकलता है और अनिरुद्ध की चीखे निकलने लगती है. अब आर्यन को लगा की वो शायद ऐसे कुछ नहीं बताएगा.

आर्यन: देखता हु तेरा मुँह कब तक नहीं खुलेगा.

अनिरुद्ध: तुझे जो करना है करले.

अनिरुद्ध भारी आवाज़ मई कहता है.

आर्यन: ये बात है तो ठीक है.

ये कहकर आर्यन एक चाकू उठता है और उसकी कमर से उसकी शर्ट हटाकर एक कट लगा देता है. वह से खून रिसने लगता है, जबकि अनिरुद्ध बहुत दर्द मई था.

आर्यन: अब तक बहुत लोगो को मारा है न तुम लोगो ने, बहुत को तडफाया है. अब ये सब तेरे साथ हो रहा है.

आर्यन वह से जाता है, जब वो वापस आता है तो उसके हाथ मई एक पॉट होता है. उसमे बहुत साड़ी जोंक तैर रही होती है.

आर्यन: ये जानता है न क्या है, ये जोंक है. अगर ये इंसान के शरीर पर चिपक जाए तो ये उसका सारा खून निचोड़ लेती है. लेकिन सोच मेने तो तुझे कट लगाया है, जब म ये जोंक तेरे इस कट पर rakhunga,tab ये तेरे शरीर मई घुस जायेगी. और तुझे आधे घंटे मई hi नरक के दरवाज़े पर छोड़ आएगी.

आर्यन उसे अपनी बातो से hi पूरी तरह डरा देता है. आर्यन एक जोंक को एक स्टिक से उठता है और उसकी और बढ़ने लगता है.

अनिरुद्ध: nahi...nahi प्ल्ज़ ऐसा मत करो nahi..nahi... ठीक है म बताता हु.

आर्यन: क्या कहा तूने.

अनिरुद्ध: म बताता हु.. सब कुछ बताता हु.

आर्यन: बकना शुरू कर.

अनिरुद्ध: जब तूने हमारे सभी आदमियों को मारा था, उनमे एक अंडरवर्ल्ड डॉन भी था. जब उसके भाई को ये पता चला तो आग बबूला हो गया. उसने हमें उन सबका पता लगाने को कहा जिसने उन्हें मारा था. हमने अपनी पूरी पावर लगा दी, लेकिन तब भी ये नहीं पता चल पाया की ये काम किसका है. हमें अपने आदमियों का बदला लेना था, किसी भी tarah,kisi भी कीमत पर. हमने डीडे किया की हम मौत का बदला बहुत साडी मौतों से लेंगे और नतीजा ये निकला की हम बम ब्लास्ट करेंगे.

आर्यन: कहा और कैसे.

अनिरुद्ध: हम 4 ब्लास्ट करने वाले है, एक तो सिटी के माल मई hoga,dusra मैं मार्किट मई होगा, तीसरा सिटी हॉस्पिटल मई होगा.

आर्यन: और चौथा.

अनिरुद्ध: तेरे घर के सामने.

आर्यन: क्या???

आर्यन को ये सुनकर झटका लगा.

अनिरुद्ध: तू क्या समझा था की ज़ोर तुझे भूल गया है, नहीं वो अपने दुश्मनो को कभी माफ़ नहीं करता. और उसे तो ये भी नहीं पता की अभी हमारे इतने आदमी मारे गए थे, वो तूने मारे है. नहीं तो वो तुझे ऐसी मौत देता की तेरी रूह तक काँप जाती.

अनिरुद्ध की आँखों से पैन की वजह से पानी बह रहा था.

आर्यन: मेरा तो पता नहीं, लेकिन तेरा भाई मेरे हाथो से hi मरेगा. चल अब बता बम कहा है.

अनिरुद्ध: मुझे नहीं पता कहा है.

ये सुनकर आर्यन एक जोंक को उठा उसकी कमर पर दाल देता है.

अनिरुद्ध: nahi..nahi हटा इसे.. म बताता हु.

आर्यन उसे हटा लेता है.

आर्यन: इस बार तूने सही सही नहीं बताया न तो ये साडी की साडी तेरे अंदर उतार दूंगा, चल अब बता.

अनिरुद्ध: हमने कोई बम नहीं लगाए है.

आर्यन: तो फिर ब्लास्ट कैसे होगा.

अनिरुद्ध: ह्यूमन बम.

आर्यन: व्हाट??

अनिरुद्ध: कल 12 बजे चारो जगह पर एक साथ ब्लास्ट होगा.

ये सुनकर आर्यन देहल सा जाता है.

आर्यन: वो ह्यूमन बम कहा है, बता जल्दी.

आर्यन गुस्से से उसका गाला दबा देता है.

अनिरुद्ध: म सच कह रहा हु मुझे इस बारे मई कुछ नहीं पता की वो ह्यूमन बम कोण है, और कहा है.

अनिरुद्ध गाला दबने की वजह से लड़खड़ाती आवाज़ मई कहता है. आर्यन उसका गाला छोड़कर कहता है.

आर्यन: ऐसे कैसे हो सकता है की तुझे इस बारे मई कुछ नहीं पता.

अनिरुद्ध: ज़ोर अपनी परछाई पर hi भरोषा नहीं करता, म तो उसका भाई हु. वो ह्यूमन बम कब और कैसे aayenge,ye सब उसे hi पता है. लेकिन उनमे ठीक 12 बजे का टाइमर लगा दिया है.

आर्यन एक नमक का बॉक्स उठता है और उसके झकम पर दाल देता है. अनिरुद्ध की चींखे गूंजने लगी.

आर्यन: sach..sach बता, वो ह्यूमन बम कहा है.

अनिरुद्ध: म कसम खता हु मुझे इस बारे मई कुछ नहीं पता.

अनिरुद्ध रट हुए बोलै. अब आर्यन को यकीन हो गया था की वो सच बोल रहा है.

शाम तक आर्यन इस उदधबुम मई लगा रहा, उसने अपनी टीम को इस बारे मई इन्फॉर्म कर दिया. उसने उन्हें अपनी प्लानिंग भी क्लियर करदी.

----

यहाँ आशु अपना मोबाइल उठाकर बार बार देख रही थी.

आशु: कितना कमीना भाई है मेरा, म यहाँ उसके लिए मरते मरते बची हु और उसे मेरी कोई फ़िक्र hi नहीं है. काम से काम एक बार कॉल करके मेरा पता भी तो ले सकता था न वो. म hi पागल हु जो उसके लिए सबको दुःख दे रही हु.

आशु खुद hi दांत पीसते गुस्से मई बोले जा रही थी.

----

काम से फारिग हो जब आर्यन अपने फ्लैट पर आया तो उसे आशु की याद आयी. तब वो अपने माथे पर हाथ मरता हु खुद से hi बोलै.

आर्यन: ो तेरी की, म आशु को तो भूल hi गया की कल उसके साथ क्या हुआ था.

ये बोलकर वो उसे कॉल कर देता है, लेकिन वो उठा hi नहीं रही तुई. तीसरी बार करने पर वो उठा लेती है.

आर्यन: Hello आशु, किसी है तू.

आशु: ज़िंदा हु अभी तक.

आशु सपाट लहज़े मई कहती है.

आर्यन: ऐसा क्यों बोल रही है तू, तू ठीक तो है न.

आशु: तुझे क्या फर्क पड़ता है मेरे ठीक होने या न होने से.

आर्यन: तुझे हुआ क्या है, ये तो बता.

आशु: मेने तेरे लिए इतना सब कुछ किया, और तूने मुझसे एक बार भी कॉल करके ये पूछना सही नहीं समझा की म अब ठीक हु भी या नहीं.

आर्यन: अच्छा तो तू इसलिए गुस्सा है, लेकिन तूने hi तो मुझे तेरे पास कॉल करने से मन किया था.

आशु: मेने तो तुझे प्यार करने से भी मन किया था, फिर भी तूने किया न.

आर्यन: तो अब तू hi बता करने का की नहीं करने का.

आर्यन उसकी भावनाये समझता हुआ बोलै.

आशु: मत कर, तू भाड़ मई जा.

ये कहकर आशु गुस्से से कॉल कट कर देती है, आर्यन मुस्कुराते हुए उसे दोबारा से कॉल कर देता है.

आशु: अब क्या है.

आर्यन: सॉरी हनी, आज बहुत ज्यादा बिजी था.

आशु: है, अब हर किसी की इम्पोर्टेंस मुझसे ज्यादा हो गयी है तेरे लिए.

आर्यन: हनी किसी बाते कर रही है तू.

आशु: मेरा नाम आशु है, हनी नहीं.

आर्यन: शयद तुझे मेरा कॉल करना पसंद नहीं आया.

आशु: अगर तू मेरे सामने होता न तो अभी तुझे कास कर थप्पड़ लगाती, म सुबह से तेरे कॉल का वेट कर रही hu,m तो पागल हु न.

अब आशु की आवाज़ भारी होने लगी थी, जो आर्यन साफ़ महसूस कर सकता था.

आशु: ारु अब मुझसे और बर्दास्त नहीं होता, मेरा मन करता है की म सब कुछ छोड़ कर तेरे पास आ जाऊ. मुझे बस तू चाहिए, तेरे बगैर म मर जाउंगी ारु.

आशु रट हुए ये सब बोल गयी जबकि आर्यन इतने दिनों बाद उसके मुँह से ारु शब्द सुनकर बहुत खुश हो गया.

आर्यन: सबसे पहले तो तू रोना बंद कर, और अब क्यों रो रही है ये तेरा hi तो फैसला था.

आशु: तू अपनी बकवास बंद कर, मुझे थोड़े hi पता था की म तुझे शायद माँ डैड से भी बढ़कर चाहने लगी हु. पता है इतने दिनों तक हमने बाते नहीं की मुझे केसा लग रहा था.

आर्यन: तो तू क्या चाहती है म तुझे भगा कर ले जाऊ.

आशु: मुझे नहीं पता, लेकिन मुझे तेरे साथ hi रहना है. ी लव ु सो मच ारु.

आर्यन: ी लव ु तो हनी.

और पता नहीं देर रात कब तक वो दोनों एक दूसरे को अपने मन की बात बताते रहे.
 
अपडेट 84

आर्यन आज सुबह से hi अपने केबिन मई बैठा हुआ था, उसने अपने hi केबिन मई मिनी कण्ट्रोल रूम बना लिया था. उसने उस हॉस्पिटल, मॉल के सभी कमरे अपने सिस्टम पर डाइवर्ट किये हुए थे. उसने वुल्फ को मार्किट मई डेप्लॉय किया था, पैंथर को अपने घर के पास, हॉक को हॉस्पिटल, और ईगल को मॉल मई. वो सभी आपस मई कनेक्ट थे.

आर्यन: बॉयज, हमें नहीं पता की हम इस मिशन को सक्सेस्स्फुल्ली ैकपलिश करेंगे भी या नहीं, लेकिन हम हिम्मत नहीं हारेंगे. तुम सब बिलकुल चोक्कना रहोगे, हर एक इंसान पर नजर रखोगे फिर चाहे वो मर्द ho,aurat हो, या फिर कोई छोटा बच्चा. जो सबसे मुश्किल काम होगा, वो होगा वुल्फ का. क्योंकि हम मार्किट मई हर किसी पर नजर नहीं रख सकते है. और यही सोचकर ज़ोर ने सभी बम इस सिटी की सबसे क्राउडेड प्लेस पर ब्लास्ट करने का सोचा है. लेकिन हम उसे दिखा देंगे की हम उसके भी बाप है, समझ गए तुम सब.

आल: यस डेविल.

आर्यन: पैंथर तुम मेरे इलाके मई हर किसी अनजान आदमी पर नजर रखोगे, फिर चाहे वो कोई बग्गर हो या फ़्रुइटसेल्लेर.

पैंथर: ok एजेंट.

आर्यन: हॉक तुम हॉस्पिटल मई आने वाले हर आदमी पर नजर रखना, चाहे वो कोई नया आया पेशेंट हो या उसके रिस्तेदार.

हॉक: ok डेविल.

आर्यन: ईगल तुम मॉल के अंदर मौजूद हर कस्टमर पर ध्यान रखना.


ईगल: ok एजेंट.

आर्यन: और हमें ये नहीं सोचना है की ब्लास्ट 12 बजे hi hoga,kya मालूम अनिरुद्ध हमसे झूट बोल रहा हो. इसलय हमें हर एक पल चोक्कना रहना है.

आल: वे र बिवेयर सर.

आर्यन: मुझे तुम सब पर पूरा भरोसा है.

उसके बाद आर्यन आशु को कॉल करता है.

आर्यन: किसी है तू.

आशु: म ठीक हु.

आर्यन: तुझे एक काम करना है.

आशु: क्या.

आर्यन: मम्मी और दादी को किसी भी तरह 2 बजे तक बहार लेकर चली जा.

आशु: लेकिन क्यों.

आर्यन: प्ल्ज़ हनी, म बाद मई बताता हु.

आशु: ok, उसके बदले मुझे क्या मिलेगा.

आर्यन: जो भी तुझे चाहिए.

आशु: मुझे तेरे साथ टाइम स्पेंड करना है.

आर्यन: ok हनी, म बाद मई बात करता हु.

बिना उसकी कोई बात सुने वो कॉल कट कर देता है, क्योंकि वो अपना सारा कंसन्ट्रेट इस मिशन पर रखना चाहता है. धीरे धीरे टाइम बीतने लगा. आर्यन हर एक प्लेस पर बहुत पैनी नजर रखे हुए था.

करीब 11 बजे का टाइम हुआ था.

वुल्फ: डेविल, लगता है ब्लास्ट का वक़्त 12 बजे hi है.

आर्यन: है, बस एक बात ध्यान रखना. जो भी ह्यूमन बम होगा, उसकी आँखों मई मौत का भय होगा. और हमें बस ये hi पता लगाना है.

पैंथर: सर मुझे एक आदमी पर डाउट हो रहा है.

कुछ देर बाद पैंथर कहता है.

आर्यन: किसपर.

आर्यन चोक्कना होकर अपनी नजर स्क्रीन पर गदा देता है.

पैंथर: सर वो जो सब्ज़ी बेचने वाला है, वो बार बार अपनी घडी देख रहा है. और न hi वो कोई सब्ज़ी बेच रहा है.

आर्यन: ok म उसपर नजर रखता हु.

ारायण उसे ऑब्सेर्वे करने लगा. आर्यन को उसकी आँखों मई दर साफ़ झलक रहा था. वो बेचैनी मई इधर उधर टहलता फिर रहा था.

आर्यन: पैंथर कैच हिम.

पैंथर: सूरे.

आर्यन: 100%.



फिर पैंथर अपनी जगह से उठता है. वो उसके पास जाकर किसी तरह से उसे चोलोरोफॉर्म डालकर बेहोश कर देता है.

पैंथर: ी हैवे दोने आईटी, सर. बूत एक प्रॉब्लम है.

आर्यन: क्या.

पैंथर: सर ये टाइमर बम नहीं है, इसका रिमोट इन लोगो के पास hi है. .

आर्यन: ok, तो मतलब अब हमें और भी चौक्कना होना पड़ेगा. क्योंकि अगर उन्हें शक भी हुआ तो वो टाइम से पहले hi खुद को उदा देंगे.

पैंथर: ु र राइट सर.

आर्यन: तुम एक काम काम करो इसे लेकर अपने अड्डे पर जाओ.

पैंथर: ok सर.

अब उन्होंने एक लेवल तो पार कर लिया था.

आर्यन: बॉयज, ध्यान रखो.

आर्यन हॉस्पिटल मई एक पेशेंट पर नजर रख रहा था जो की अभी कुछ देर पहले hi आया था. वो बार बार अपनी घडी देख रहा था.

आर्यन: हॉक रूम no. 12, नया पेशेंट है.

हॉक ये सुनकर एक डॉ की ड्रेस मई अंदर चला गया, उसने अपना चेहरा पूरी तरह से ढाका हुआ था. वो उसे क्लोरोफॉर्म देने hi वाला था की उस पेशेंट की नजर उसकी गन पर पद गयी. और उसने उसे पीछे की और धक्का दे दिया. और वो पेशेंट अपनी जेब मई हाथ डालने hi वाला होता है की एक फायर होता है जोकि सीधा उसके सर मई जाकर लगता है. सीलेंसर लगा होने की वजह से आवाज़ नहीं होती. हॉक पास जाकर देखता है तो उसने बम जैकेट पहनी हुई थी.

हॉक: सर ये वही था.

आर्यन: ok,tum वह से तुरंत निकलो. बिना किसी के सामने आये. और जल्दी से वुल्फ के पास पहुंचो, पुलिस आने hi वाली होगी.

अभी आर्यन ने इतना hi कहा था की उसने देखा की मॉल के अंदर एक आदमी को गोली लगी है.

आर्यन: ईगल ये.

ईगल: सर म बहुत देर से इस आदमी की हरकत नोटिस कर रहा था.

आर्यन: लेकिन ईगल, हमें पक्का नहीं पता न.

तभी आर्यन देखता है की जो भीड़ उस टारगेट की लाश के पास जमा हो गयी थी वो एक hi झटके से अलग हो गयी है. आर्यन देखता है तो पाटा है की उसकी शर्ट से बम दिख रहा था.

आर्यन: ईगल ये hi है, तुम निकलो वह से.

सबको थोड़ी रहत फील हुई. अब सिर्फ एक लेवल और पार करना था और गेम ओवर. हॉक और पैंथर भी मार्किट पहुंच चुके थे. धीरे धीरे 12 बजने वाले थे. सबकी जान हलक मक अटकी पड़ी थी.

आर्यन: dhoodho..dhoondo एजेंट्स. 5 मिंट रह गयी है 12 बजने मई. और यहाँ तो आज काफी भीड़ है संडे होने की वजह से.

सबकी धड़कने बढ़ी हुई थी, बढ़ते टाइम की वजह से उनका दिल बहुत ज़ोरो से धड़क रहा था. तभी आर्यन एक कमरे को ज़ूम करता है.

आर्यन: omg, ये यहाँ क्या कर रहे है.

आर्यन अपना माथा पकड़कर कहता है, उसकी स्क्रीन पर इस वक़्त आशु, उसकी मम्मी और दादी दिखाई दे रहे थे.

आर्यन आशु को कॉल करता है लेकिन वो कॉल नहीं उठा रही थी. तभी आर्यन की नजर एक औरत पर पड़ती है, वो सड़क किनारे एक कम्बल ओढ़े हुए बैठी थी. उसके सामने एक कपड़ा बिछा हुआ था जिसपर कुछ रूपीस पड़े हुए थे. वो बार बार अपनी घडी देख रही थी, आर्यन को ये देख बहुत हेरात हुयी. वो कुछ और सोचता की उस औरत ने अपनी ब्रा के अंदर हाथ डाला, और एक छोटा सा रिमोट निकला.

आर्यन: हॉक तेरे सामने सड़क पार जो औरत बैठी है उसे शूट कर जल्दी.

हॉक: पर.

आर्यन: मेने कहा न शूट.

वो औरत रिमोट के बटन पर एक ऊँगली रखती है की तभी उसके सर पर गोली लगती है. ये देख वह भगदड़ सी मच जाती है. ये देख आर्यन अपना सर अपनी चेयर पर टिका लेता है.

आर्यन: थैंक ु भगवन, मिशन इस ओवर, वेल दोने बॉयज. सब तुरंत वापस आ जाओ.

सबके चेहरों पर स्माइल आ चुकी थी, वो अब रिलैक्स फील कर रहे थे. आर्यन सबसे दिअकंनेक्ट होता है और आशु को कॉल करता है. 2 बार रिंग होने पर वो कॉल पिक करती है.

आर्यन: तेरा दिमाग ठीक तो है न, मेरा फ़ोन क्यों नहीं उठा रही थी तू.

आर्यन गुस्से से कहता है.

आशु: तूने hi तो बोलै था की म मम्मी और दादी को बहार लेकर औ, तो उनके सामने मुझे तुझसे बात करने मई थोड़ी हैजिटेशन फील हो रही थी. अब भी उनसे अलग होकर तुझे कॉल की है. पता नहीं यहाँ क्या हुआ अचानक से भाग धड़ सी मच गयी है.

आर्यन: तुम लोग ठीक हो न.

आशु: है हम ठीक है, हम एक शॉप मई थे उस वक़्त.

आर्यन: ठीक है, अब तू उन्हें लेकर घर जा.

आशु: लेकिन बात क्या थी ये तो बता.

आर्यन: मिलकर बताऊंगा.

आशु: लेकिन कब.

आर्यन: 4 बजे मिलते है उस पार्क मई.

आशु: ok, म आ जाउंगी.

आशु खुश होते हुए बोली.

अभी थोड़ी देर hi बीती थी की सिंह दनदनाता हुआ उसके केबिन मई आता है.

सिंह: ये सब क्या हो रहा है आर्यन.

आर्यन: क्या हुआ सर.

सिंह: ये.

सिंह टीवी चलकर न्यूज़ पर लगा देता है.

रिपोर्टर: इस वक़्त की बड़ी खबर, इस शहर को दहलाने की साज़िश नाकाम. आज दोपहर सिटी की 3 क्राउडेड जगह पर ह्यूमन बम मृत हालत मई पाए गए. अगर ये ब्लास्ट हो जाते तो पता नहीं कितने मासूम लोगो की जान चली जाती. लाशो को पुलिस ने अपने कब्ज़े मई ले लिया है. लेकिन अब तक ये नहीं पता की ये मिशन किसने अंजाम दिया है, लेकिन चाहे किसने भी दिया हो जनता उसका दिल खोलकर स्वागत कर रही है.

सिंह: अब कुछ बताओगे, ये सब क्या हो रहा है.

आर्यन: सर i'm सॉरी, ये सब हमें कल hi पता चला. हमें आपको बताने का मौका hi नहीं मिला. सुबह भी म जब ऑफिस आया तो आप तब तक नहीं आये थे, और फिर म बिजी हो गया.

सिंह: ये सब किया कैसे तुमने.

और उसके बाद आर्यन उसे सब कुछ बता देता है.

सिंह: क्या बात है भाई, तुम तो बहुत बड़ी चीज़ हो. इतनी बड़ी प्लानिंग की तुमने की ज़ोर कल के एजेंट से मात खा गया.

सिंह हस्ता हुआ उसकी टांग खींचता है. फिर वो और बाते करते रहे.

आशु टाइम से पहले hi पार्क मई आकर बेथ गयी थी, वो बड़ी उत्सुकता से उसका वेट कर रही थी. कुछ देर बाद आर्यन वह आता है, आशु उसे देख उठकर उसकी और देखकर बाहे फैलते हुए रुक जाती है. आर्यन समझ जाता है की वो कसमकस मई है. और आर्यन खुद आगे बढ़कर उसे अपनी बाहो मई भर लेता है.

आर्यन: अब किसी है तू.

आर्यन उसे अपने से अलग करते हुए कहता है.

आशु: म बिलकुल ठीक हु, देखो.

आशु उसके सामने खड़े होकर उसे खुद को दिखते हुए कहती है.

आर्यन: मुझे नहीं लगता तू ठीक है, देख तेरा चेहरा भी उतरा सा लग रहा है.

आशु: है, वो इसलय बकज़ तू मेरे साथ नहीं था न.

आर्यन: क्योंकि तूने खुद मुझसे दूर होने का फैसला किया था.

ये सुनकर आशु थोड़ा उदास हो जाती है.

आशु: ारु मेने तुझसे दूर होने का फैसला नहीं, फॅमिली के पास आने का फैसला किया था. लेकिन म उसके भी कामयाब नहीं हो पायी, क्योंकि म तेरे बिना नहीं रह सकती ारु.

ये कहते हुए आशु की आँख से आँशु टपक आते है.

आर्यन: अब इसमें उदास होने की क्या बात है.

आशु: अच्छा मुझे ये बता की तूने हमें बहार क्यों भेजा था.

फिर आर्यन उसे सब कुछ बताने लगता है.



 
अपडेट 85

आर्यन के फ्लैट पर इस वक़्त सक्सेस पार्टी चल रही थी, जहा उसकी टीम के अलावा सिंह भी मौजूद था.

सिंह: भाई तुम सबने तो कमाल hi कर दिया है, जिस आदमी के बारे मई आज तक बड़ी बड़ी ख़ुफ़िया एजेंसीज भी पता नहीं लगा पायी, उसके बारे मई तुमने न सिर्फ पता लगाया बल्कि उसके घुटने तक तोड़ दिए है.

सिंह अपनी ड्रिंक से एक सिप मरता हुआ बोलै.

वुल्फ: सर ये सब काम डेविल ने किया है.

वुल्फ आर्यन की और इशारा करते हुए बोलै.

आर्यन: नहीं एजेंट्स, ये काम मेने नहीं हम सबने मिलकर किया है. अगर मुझे तुम सबका साथ नहीं मिला होता तो शायद hi म ये काम कर पाता.

आर्यन उन सबका शुक्रिया ऐडा करता हुआ कहता है.

सिंह: सबसे बड़ी बात है बिना किसी ज्यादा एक्सपीरियंस के तुमने इस मिशन को अंजाम दिया, वेल दन माय बॉयज.

आल: थैंक सर.

सिंह: अरे यर डेविल, तुम्हारी पार्टी है और तुम hi ड्रिंक नहीं ले रहे हो.

आर्यन: सर म पीटा नहीं हु, म सॉफ्ट ड्रिंक ले लेता हु.

-----

ज़ोर अपने घर पर बैठा हुआ गुस्से से आग बबूला हो रहा था.

ज़ोर: आखिर हो क्या रहा है ये, मेरे सारे प्लान की माँ चुद gayi..kese...

वो अपने पास बैठे 2 ख़ास आदमियों की और गुर्राते हुए बोलै. तब उसका एक राइट हैंड आदमी काली बोलै.

काली: बॉस, आपके प्लान के बारे मई तो हम भी नहीं जानते थे तो फिर किसी और को कैसे पता चल गया.

ज़ोर: ये बात hi तो मुझे समझ नहीं आ रही है, ऊपर से उस्मान के भाई ने मेरी गांड मई डंडा कर रखा है.

ज़ोर एक कुर्सी पर बैठकर बोलै.

ज़ोर: साला जिस दिन से उस आर्यन के साथ पन्गा हुआ है, उस दिन से hi अपने सर पर शनि कुंडली मारे बैठा है.

बल्लू: बॉस म तो कहता हु पहले उस पिल्लै को hi टपका देते है.

ज़ोर का दूसरा आदमी बोलता है.

ज़ोर: नहीं अभी फ़िलहाल उसके बारे मई छोडो, ये देखो कपाली कहा है, उसका कल से कुछ पता hi नहीं है.

काली: पता नहीं बॉस, उनका no. भी नहीं मिल रहा है.

वो अभी इस बारे मई सोच hi रहा था की तभी उसका एक गार्ड वह आता है.

गार्ड: सर आपसे कोई आदमी मिलने आया है.

ज़ोर: कोण है.

गार्ड: पता नहीं बोलता है की आपको hi बताएगा.

ज़ोर: चल भेज उसे.

तब वह एक आदमी आता है, ज़ोर उसे बैठने के लिए बोलता है.

ज़ोर: है जी कहिये, म आपके लिए क्या कर सकता हु.

आदमी: कुछ नहीं मंत्रीजी, म तो बस आपकी मदद करने के लिए आया हु.

ज़ोर: मेरी मदद??

ज़ोर हैरान होकर उसकी और देखता है.

आदमी: मुझे पता है आप इस वक़्त बहुत टेंशन मई हो.

ज़ोर: क्यों मेरे माथे पर लिखा हुआ है क्या, चल बता यहाँ किसलिए आया है तू.

ज़ोर थोड़ा सख्ती से बोलै.

आदमी: आपको तो पता hi होगा कल किसी ने इस शहर को दहलाने की प्लानिंग कर राखी थी लेकिन किसी ने उसके प्लान पर पानी फेर दिया.

वो आदमी मुस्कुराते हुए कहता है जबकि ज़ोर की गांड सुलग जाती है, वो खुद को कण्ट्रोल करते हुए बोलै.

ज़ोर: तो मुझे इस बारे मई क्यों बता रहा है, साफ़ साफ़ बोल तू क्या कहना चाहता है.

ज़ोर अपने दांत पीसते हुए बोलै.

आदमी: मुझे लगता है ज़ोर सर को गुस्स आ रहा है.

वो आदमी कामिनी मुस्कान के साथ कहता है, जबकि ज़ोर को एक झटका लगता है.

ज़ोर: ये क्या बकवास कर रहा है तू, तुझे पता भी है तू किस से बायत कर रहा है.

ज़ोर उसे गुस्सा दिखते हुए बोलै.

आदमी: मुझे पता है मंत्री जी म किस से बात कर रहा हु, और ये भी पता है आप hi ज़ोर हो.

उसकी बात सुन ज़ोर सोच मई पद जाता है.

आदमी: सर आप फ़िक्र मत कीजिये म किसी से कुछ नहीं कहूंगा.

उसे सोच मई डूबा देख वो कहता है.

ज़ोर: तू मेरा कुछ कर भी नहीं सकता, म तुझे यही मर के गाड़ सकता hu,kisi को कुछ पता भी नहीं चलेगा. और अगर मेने तुझे छोड़ भी दिया तब भी तेरा कोई भरोसा नहीं करेगा.

ज़ोर फुँकारते हुए कहता है.

आदमी: सर मुझे इस बारे मई न तो किसी को बताना है और न hi म आपको ब्लैकमेल करना चाहता हु.

ज़ोर: तो फिर तू मुझे यहाँ ये तो बताने बिलकुल नहीं आया है की म hi ज़ोर हु.

आदमी: जी है आपने बिलकुल सही कहा.

ज़ोर: तो अपना मुँह खोल और बकना स्टार्ट कर.

आदमी: सर मुझे पता है इस वक़्त आपका बहुत भारी नुक्सान हो रहा है, आपका माल पकड़ा गया है, आपके बहुत से आदमी भी मारे गए है, और आपके कुछ आदमी किसी ने किडनैप करके रखे है जिनमे से एक आपका भाई भी है.

ज़ोर: क्या बकवास कर रहा है तू.

ये सुनकर ज़ोर गुस्से से उसकी नैक पकड़ लेता है.

आदमी: सर गुस्से पर कण्ट्रोल करिये, अगर म मर गया तो आपको कभी भी कुछ पता नहीं चल पायेगा.

ये सुनकर ज़ोर अपने हाथ हटा लेता है.

ज़ोर: किसने किडनैप किया है उसे.

आदमी: सर म आपको आपके हर एक सवाल का जवाब दूंगा, लेकिन इसकी आपको कीमत देनी होगी.

वो आदमी इशारो से करता हुआ बोलै.

ज़ोर: बोल क्या चाहिए.

आदमी: 5 करोड़ रूपीस और मेरा प्रमोशन.

ज़ोर: 5 करोड़ तेरा दिमाग तो ठीक है न.

आदमी: क्यों सर आपको ये कीमत ज्यादा लगती है, क्या आपके भाई की जान की कीमत इस से भी काम है, या आपकी जान की कीमत इस से काम है. या जो बाँदा आपके पीछे पड़ा हुआ है उसकी जानकारी देने के लिए ये कीमत ज्यादा है.

ये सुनकर ज़ोर की आँखे बड़ी हो जाती है.

ज़ोर: कोण है वो कुत्ता जो ये सब कर रहा है, तू जानता है उसे.

आदमी: है म उसके बारे मई सब कुछ जानता हु.

ज़ोर: तो मुझे उसके बारे मई बता, चल तुझे दिए 5 करोड़.

आदमी: और प्रमोशन.

ज़ोर: किस चीज़ का प्रमोशन.

आदमी: मेरा.. म सीबीआई मई एसएसपी हु, नाम है रवि.

ज़ोर: तू सीबीआई से है.

आदमी: जी है, लेकिन आज से आपका आदमी हु.

ज़ोर: ठीक है तेरा प्रमोशन भी हो जाएगा, अब बता कोण है वो.

और रवि उसे सब कुछ बताने लगता है, ज़ोर की आँखे उसकी बात सुनते हुए फैलती जा रही थी.

ज़ोर: क्या इन सब के पीछे वो कुत्ते का बच्चा आर्यन है.

रवि: जी है वही है.

ज़ोर: मेने hi उसे बच्चा समझकर भूल करदी थी, वर्ण उसे उस वक़्त hi जान से मार देता तो मुझे ये दिन नहीं देखना पड़ता.

ज़ोर गुस्से से टेबल पर हाथ मरता हुआ कहता है.

ज़ोर: काली उस हरामजादे को परिवार समेत यहाँ खींच कर ले आओ.

रवि: सर होश से काम लीजिये, उसके पास आपका bhai,khanna, और यादव है. और उसने उन्हें कहा रखा है ये मुझे भी नहीं पता है. और उसकी फॅमिली तक पहुंचना इतना आसान नहीं है, उसने उन्हें प्रोटेक्शन दे राखी है. और अगर तब भी आप मार देते है तब भी आपकी मुस्किले काम नहीं होगी, क्योंकि उसने आपके खिलाफ बहुत सारे सबूत इकठे किये हुए है, जिनसे ये साबित होता है की आप hi ज़ोर हो.

ये सुनकर ज़ोर का चेहरा उतर सा जाता है.

ज़ोर: तो तू ये पता लगा की मेरा भाई और मेरे आदमी कहा है.

रवि: ठीक है म पता लगता हु, आप बस उसकी कीमत तैयार रखिये.

ये बोलकर रवि वह से चला जाता है.

काली: बॉस इसे कपाली के बारे मई पता चलते hi उदा दालु क्या.

ज़ोर: सोच तो म भी ये hi रहा था, लेकिन अभी इसे कुछ मत करना क्योंकि ये hi हमें वो सबूत लाकर देगा जो उस हरामजादे ने इकठ्टे करके रखे है.
 
अपडेट 86

शाम के वक़्त आशु ऊपर से नीचे आ रही थी, राजेश भी घर आ चूका तव. जैसे hi वो नीचे उतर रही थी अचानक उसे चक्कर सा आया, जैसे hi राजेश ने उसे देखा वो भाग कर उस तक पहुंचा, आशु को अपनी बाहो मई थामते hi वो बेहोश हो गयी. अंजलि और निर्मला भी भागी हुई वह आयी, राजेश उसे उठाकर अपने कमरे मई ले गया और डॉ को कॉल करने लगा.

राजेश: डॉ साहब, क्या हुआ है मेरी बच्ची को.

डॉ के चेकउप करने के बाद राजेश उस से पूछता है.

डॉ: देखिये ये ज्यादा स्ट्रेस लेने की वजह से बेहोश हुयी है, इनकी हालत क्रिटिकल है, अगर ऐसे hi चलता रहा तो इनके दिमाग की नस भी फैट सकती है. ये म कुछ दवाई लिख देता हु, आप ये टाइम से देते रहिये. लेकिन जब तक ये स्ट्रेस लेना बंद नहीं करेगी, कोई भी दवा इनपर असर नहीं करेगी.

डॉ उन्हें हिदायत देता हुआ वह से चला गया. उन तीनो को hi पता था की आशु को किस बात के टेंशन है.


--------

नेक्स्ट डे निर्मला, राजेश और अंजलि के साथ बैठी हुई थी.

अंजलि: पता नहीं हमारे इस हस्ते खेलते घर को किसकी नजर लग गयी है, ये तो अब मानो खाने को दौड़ता है.

राजेश: मेरी समझ मई तो कुछ नहीं आ रहा है म क्या करू, शायद कभी किसी माँ बाप को ऐसी सिचुएशन से नहीं गुज़ारना पड़ा होगा जैसी सिचुएशन से हम गुज़र रहे है. आशु दिन भर अपने कमरे मई पड़ी रोटी रहती है, अब तो उसकी तबियत भी ज्यादा खराब रहने लगी है, उधर आर्यन हमसे बात भी नहीं करना चाहता है.

राजेश अपने सर को पकड़ता हुआ बोलै.

अंजलि: हम और कर भी क्या सकते है, जो गुनाह उन दोनों ने किया है, मन तो करता है उन्हें जान से मारदे लेकिन उसके बाद हम उनके बिना कैसे जियेंगे, ये सोच कर खुद को समझा लेती हु.

अंजलि अपनी आँखों मई आये आंशुओ को साफ़ करते हुए बोली.

राजेश: जवानी मई अक्सर सबसे ऐसी गलती हो जाय करती है, लेकिन अपने hi bhai-behan के saath...kese..

अंजलि: पता नहीं हमारे प्यार मई hi कोई कमी रह गयी होगी जो हमें ऐसे दिन देखने पद रहे है.

राजेश: ये दोनों चाहे किसी भी लड़के या लड़की को अपने लिए पसंद कर lete,ham उनकी ख़ुशी की खातिर इनकी शादी उनसे करा देते, लेकिन इन दोनों ने तो भाई बहिन के रिश्ते को hi कलंकित कर डाला.

राजेश की आँखों मई भी आँशु आ चुके थे.

अंजलि: हम तो बस अब सिर्फ भगवन से दुआ hi कर सकते है की इन दोनों के दिल से इस प्यार को खत्म करदे.

निर्मला: मेने बहुत दुनिया देखि है बीटा, और मुझे नहीं लगता की ये दोनों अब पीछे हैट पाएंगे. हमारी आशु इस जनरेशन की और लड़कियों से काफी इंटेलिजेंट है, तो तुम्हे नहीं लगता की उसने जो किया है वो काफी सोच समझकर किया होगा, और वो इस रिश्ते को लेकर किस्तनी सीरियस है ये तो तुम लोग देख hi चुके हो.

निर्मला उन्हें अपने फीलिंग्स बताते हुए कहती है.

राजेश: आपकी बात ठीक है माँ, लेकिन अब हम क्या करे, मुझसे तो अपने बच्चे इस हाल मई देखे नहीं जाते. आप तो देख रही है न आशु ने अपना हाल कैसे बना रखा है, न उसे खाने की फ़िक्र न सोने की, हर वक़्त अपने कमरे मई hi पड़ी रहती है. हर वक़्त उसकी आँखे सूजी हुयी और लाल रहती है. और अब तो डॉ ने भी बोलै है की....

राजेश अपनी आँखों मई आये हुए आँशु साफ़ करते हुए बोलै.

अंजलि: तो हम क्या करे इस समाज के खिलाफ जाकर उन दोनों को एक करदे.

अंजलि थोड़ा तिनक कर बोलती है.

राजेश: मुझे नहीं पता हमें क्या करना चाहिए, लेकिन म अपने बच्चो की ऐसी हालत देखने से पहले मरना पसंद करूँगा.

राजेश की ये बात सुन उन दोनों को झटका सा लगता है.

निर्मला: ये किसी बाते कर रहा है तू राजेश, होश से काम ले.

राजेश: होश hi तो नहीं है माँ, आप hi बता दो म क्या करू.

राजेश अपनी माँ के पेअर पकड़ता हुआ बोलै.

निर्मला: म क्या कहु, फैसला तुम दोनों को करना है. म तो बस ये जानती हु की उन दोनों ने जो कहा है वो बिलकुल वैसा hi करेनेगे. वो हमारी ख़ुशी की खातिर एक दूसरे से alag-alag तो रह लेंगे, लेकिन किसी और को अपनी लाइफ मई नहीं आने देंगे. और ऐसे alag-alag रहने से किसी दिन उन दोनों की हिम्मत टूट गयी तो उनके पास अपनी जान देने से अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा. और वैसे भी तुम दोनों तो जानते hi हो की वो दोनों कितने जिद्दी है.

निर्मला की एक एक बात उन दोनों के दिल मई उतरती चली गयी.

अंजलि: आपने बिलकुल सच कहा माँ जी, लेकिन हम कैसे इस समाज के नियम के खिलाफ हो जाए.

राजेश: मेने फैसला कर लिया है, मुझे अपने बच्चो की ख़ुशी से ज्यादा न तो ये समाज प्यारा है और न hi इस परकृति के नियम.

राजेश गहरी सोच मई डूबा हुआ बोलै.

अंजलि: आपका matt..tt..labbb.

अंजलि को अपने कानो पर मानो यकीन नहीं हो रहा था.

राजेश: तुम बिलकुल सही समझ रही हो अंजलि, अरे हर माँ बाप की ख़ुशी अपने बच्चो मई hi तो होती है तो फिर क्यों हम इस समाज का हवाला देकर उनसे मुँह मोड़ ले. क्या ये अच्छा रहेगा की वो दोनों ऐसे hi tadap-tadap कर हमारी आँखों के सामने मर जाए.

अंजलि को तो समझ नहीं आ रहा था की वो क्या कहे, उसे राजेश की बात भी सही लगती लेकिन दूसरे hi पल उसे ये गुनाह लगता. ऐसा नहीं था की वो उन दोनों से प्यार नहीं करती थी, वो तो वैसे भी एक माँ थी, वो तो उन दोनों को खुद से भी ज्यादा प्यार करती थी लेकिन वो इस बात को नहीं झुटला पा रही थी की वो दोनों आखिर मई सेज भाई बहिन है.

राजेश: माँ आपका इस बारे मई क्या फैसला है.

निर्मला: म भी अपने बच्चो को ऐसे तड़पते हुए नहीं देख सकती, लेकिन है तो ये गुनाह hi न. लेकिन हमारे पास और कोई उपाए भी तो नहीं है. सिवाए इसके की या तो उन दोनों को जान से मार दे, या उन दोनों को ऐसे hi अलग अलग करके रखा जाए, अब नहीं तो आने वाले टाइम मई जब एहि समाज हमसे पूछेगा की क्यों हम आशु की शादी नहीं कर रहे है तब हम क्या जवाब देंगे, और वैसे भी मुझे नहीं लगता की वो दोनों एक दूसरे के बिना अब ज़िंदा रहेंगे.

उसकी बात सुन कुछ देर वह सन्नाटा छ जाता है.

राजेश: Maa,apne बच्चो की ख़ुशी के लिए तो पेरेंट्स हर गुनाह कर गुज़रते है तो फिर एक और सही, तुम्हारा क्या फैसला है अंजलि.

अंजलि: मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है, कैसे हम अपने hi बच्चो को मिया- बीवी.... मुझे तो कहते हुए भी शर्म आ रही है.

राजेश: तो ठीक है, जिस दिन तुम्हारी बेटी मर जायेगी और उसके बाद तुम्हारा बीटा, तब ये शर्म किस काम आएगी.

ये सोचकर अंजलि का दिल काँप सा जाता है.

अंजलि: आप ऐसा क्यों कह रहे है, कुछ नहीं होगा उन्हें.

अंजलि नाम आँखों से कहती है.

राजेश: तो उन्हें कुछ न ho,iske लिए तो उन्हें एक करना पड़ेगा hi न.

अंजलि: कैसे हम अपनी hi बेटी को अपनी बहु के रूप मई, कैसे अपने बेटे को hi दामाद.....

अंजलि से आगे बोलै hi नहीं गया और वो रोने लगती है.

राजेश: अंजलि जितना दुःख तुम्हे हो रहा है, उतना hi मुझे भी हो रहा है. मुझे तो इसके सिवा और कोई रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है, और अगर कोई रास्ता है भी तो हम अपने दोनों बच्चो को खो देंगे.

कुछ देर बाद वह सन्नाटा छ जाता है.

अंजलि: ठीक है आपको जो भी ठीक लगे, म आपके साथ हु.

काफी देर soch-vichaarkar अंजलि कहती है.

राजेश: अंजलि प्ल्ज़ अब तुम स्ट्रेस मत लेना, जो भी होगा सब उपरवाले के हवाले कर देते है. और वैसे भी कहते है न जोडिया तो ऊपर से बनकर आती है तो फिर ये hi सही, अगर उनके नसीब मई ये hi लिखा है तो.



अंजलि: लेकिन फिर ये समाज, हमारे रिस्तेदार.

राजेश: मेने कहा न अंजलि सब कुछ ऊपर वाले पर छोड़ देते है.

फिर soch-vichar के बाद राजेश आर्यन को कॉल कर देता है, दूसरी बार मई वो उठा लेता है.

आर्यन: पापा नमस्ते.

राजेश: नमस्ते बीटा, केसा है तू.

आर्यन: जी ठीक हु, आप कैसे है, dadi,mummy.

राजेश: सब ठीक है. आर्यन घर वापस आजा बीटा.

आर्यन: क्या हुआ पापा.

राजेश: कुछ नहीं आर्यन, शाम तक तू मुझे घर चाहिए.

आर्यन: लेकिन पापा.

राजेश: मेने कहा न, तू घर ाज़ा. जैसा तुम चाहते हो वैसा hi होगा.

ये कहकर राजेश कॉल कट कर देता है जबकि आर्यन उसकी बातो का अर्थ समझने की कोसिस कर रहा था.

------

जिस वक़्त आर्यन के पास राजेश को कॉल आता है उस वक़्त वो अपने पुरे स्टाफ के साथ टीवी देखने मई व्यस्त था, क्योंकि टीवी की हैडलाइन थी.

"आखिरकार ज़ोर का पर्दाफाश".

आर्यन ने कॉल कट की और टीवी देखने लगा.

रिपोर्टर: और जो काम किसी से नहीं हुआ, वो काम सीबीआई ने कर दिखाया. लगभग 2 दसक से ज्यादा वक़्त से पुरे देश मई आतंक का दूसरा नाम बन चुके ज़ोर का खेल खत्म हो चूका है. अब ये पूरा देश जान चूका है की ज़ोर और कोई नहीं बल्कि कैबिनेट मिनिस्टर अविनाश सिन्हा है. जोकि अपने देश मई hi रहकर उस से गद्दारी कर रहा था, उस से जुड़े हर तमाम सबूत रक्षा मंत्री को सौंप दिए है. यहाँ तक की सीबीआई द्वारा किये गए एक स्टिंग ऑपरेशन मई अविनाश सिन्हा ने खुद माना है की वो hi ज़ोर है. ये देखिये उनका ये वीडियो........ तो देखा आपने, कैसे इस मिनिस्टर ने अपने हर जुर्म का इक़बाल किया है. देश के हर बाशिंदे ने सीबीआई को धन्यवाद किया है. अविनाश सिन्हा को गिरफ्तार कर लिया है, और उस से जुड़े हर एक आदमी को भी फिर चाहे वो उसका भाई हो, या ैप खन्ना. और जानकारी के लिए जुड़े रहिये हमारे साथ.

Singh:aur इस मिशन को जिसने लीड किया था वो है आर्यन.

सिंह उनके बीच खड़े होकर कहता है, और उसके बाद वह तालियों की तड़तड़ाहट गूंजने लगी.

आर्यन: ठंकु, लेकिन ये सब मेने अकेले नहीं किया है इन सबमे मेरी टीम, सिंह सर, और रवि सर का भी बहुत बड़ा हाथ है. और ये स्टिंग ऑपरेशन रवि सर ने अकेले किया है.

और उसके बाद सब रवि की और देखकर क्लैप करने लगे.

सिंह: ये इसका बड़प्पन hai,lekin सच तो ये है की इसने इस मिशन को अकेले hi सोल्वे kiya,mujhe तो ये भी नहीं पता इन्होने कब क्या किया. मुझे तो सब कुछ आखिर मई hi पता चलता था.

सिंह मुस्कुराते हुए कहता है.

सिंह: मुझे तो अब तक ये भी नहीं पता की इस मिशन मई रवि भी शामिल है, अब बताओ भाई कैसे.

सिंह आर्यन की और देखकर कहता है.

आर्यन: सर, रवि सर बहुत पहले से हमारे साथ थे. ये hi थे जो सेफ हाउस मई हमारे लिए काम आसान कर रहे थे, जिन्होंने हमें उस मंत्री के हर आदमियों की डिटेल्स दी.

रवि: मुझे आर्यन के साथ काम करके बहुत अच्छा लगा, मुझे कभी भी ऐसा नहीं लगा की ये इसका पहला मिशन है. ये बहुत ज्यादा टैलेंटेड बाँदा है.

और वह एक बार फिर से सब आर्यन की प्रशंसा करने लगे



 
अपडेट 87

शाम के वक़्त आर्यन अपने घर आता है, वह उसे अपनी पूरी फॅमिली दिखती है सिवाए आशु के. फिर वो सब डिनर करने लगते है, जैसे hi आशु नीचे आती है, उसे आर्यन को देख एक झटका सा लगता है. उसने एक्सपेक्ट hi नहीं किया था की वो घर पर है. वो आकर डाइनिंग टेबल पर बेथ जाती है, फिर सब चुप चाप खाना खाते है. डिनर करने के बाद अंजलि और आशु किचन का काम निबटाती है. अपना काम निबटाने के बाद आशु ऊपर जाने लगती है.

राजेश: आशु यहाँ आओ बीटा, तुमसे कुछ बाते करनी है.

आशु वापस आकर लाउन्ज मई पड़े सोफे पर बेथ जाती है, जहा उसकी दादी और मम्मी भी बैठी हुई थी. उसे समझ hi नहीं आ रहा था की उन्हें अब क्या बात करनी है.

राजेश: बीटा, म चाहता हु तुम दोनों एक बार फिर अपने रिश्ते के बारे मई अच्छे से सोचलो, जिस तरह तुम दोनों अपनी जिंदगी बिताना चाहते हो, ऐसा होना बहुत तकलीफदेह होगा, हमारे लिए भी और तुम्हारे लिए भी.

उसकी बात सुनकर दोनों समझ जाते है की उन्हें क्या बात करनी है.

आर्यन: पापा प्ल्ज़, आप बार बार ये बात करके हमें शर्मिंदा न करे. हमारे बीच कोई अट्रैक्शन या लस्ट नहीं है जो हम इस बारे मई दोबारा सोचे. हम एक दूसरे से बहुत प्यार करते है, और हमने काफी सोच समझकर hi ये फैसला लिया है.

आर्यन अपने पापा की और देखता हुआ कहता है.

राजेश: ok, चलो हमने मान लिया की तुम एक दूसरे से बहुत प्यार करते हो, लेकिन आगे क्या???

आर्यन: पापा हम आपकी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ नहीं करेंगे, लेकिन अगर कभी आप लोग मान जाते है तो हम दोनों शादी कर लेंगे.

आर्यन बिना किसी झिझक के बोलता है, जबकि आशु उनकी बाते सर झुकाये हुए सुन रही थी.

अंजलि: तुम दोनों ने ये भी सोचा है की अगर तुम दोनों शादी कर भी लेते हो तो ये समाज, ये लोग क्या करेंगे तुम्हारे साथ.

आर्यन: मम्मी, मुझे किसी से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, मेरे लिए सिर्फ आप लोग अहमियत रखते हो. अगर आप लोग हमारे प्यार को समझ जाते हो तो हमें किसी और को कुछ भी समझने की जरुरत नहीं नहीं है.

राजेश: लेकिन बीटा समाज, रिस्तेदारो के बिना किसी का काम नहीं चल सकता है.

कुछ देर वह ख़ामोशी छ जाती है.

राजेश: तू क्या चाहती है आशु.

राजेश अब आशु से भी आखिरी बार पूछ लेना चाहता था.

आशु: पापा जो आर्यन ने कहा है, म भी वैसा hi चाहती हु.

आशु नजरे झुककर कहती है.

राजेश: तो क्या तुम्हारे प्यार के आगे हमारी इज्जत की कोई अहमियत नहीं है.

राजेश की बात सुनकर आशु तुरंत उठकर अपने पापा के पास आकर बेथ जाती है, वो उसका हाथ अपने हाथो मई लेकर कहती है.

आशु: पापा प्ल्ज़ ऐसा मत बोलिये, हम आपसे बहुत प्यार करते है. लेकिन हम क्या करे, हम एक दूसरे के बिना भी तो जिन्दा नहीं रह पाएंगे. लेकिन हम ये नहीं चाहते की आप हमारे इस रिश्ते के लिए जबरदस्ती राज़ी हो, अगर आप चाहोगे तो न hi हम कभी मिलेंगे, न hi एक दूसरे की कभी शक्ल देखेंगे.

उसकी बात सुनकर राजेश को उस पर प्राउड फील होता है.

राजेश: तो बीटा मेरे कहने से तू शादी करले, जिस लड़के से तू चाहेगी म तेरी शादी उस से hi करा दूंगा.

राजेश आखिरी बार उन्हें समझने की कोसिस कर रहा tha,ye सुनकर आशु अपने पापा का हाथ छोड़ देती है.

आशु: पापा अगर आप मेरी जान भी मांगेंगे न तो म उफ़ तक नहीं करुँगी, लेकिन मेरी लाइफ मई आर्यन की जगह कोई और नहीं ले सकता, कभी भी नहीं.

आशु पूरी दृढ़ता के साथ बोलती है. वह बैठे तीनो शख्स उनके प्यार को समझ रहे थे, कुछ देर बाद वह थोड़ी ख़ामोशी छै रहती है.

राजेश: ok, और अगर हमने तुम्हारे प्यार को कभी भी एक्सेप्ट नहीं किया तो..

राजेश एक बार और कन्फर्म कर लेना चाहता था.

आशु: तो हम हमेशा ऐसे hi rahenge,jese अब तक रह रहे है.

आशु भारी सी आवाज़ मई कहती है.

राजेश: ठीक है भाई, आज के बाद जैसा तुम चाहो, वैसा hi करो.

उसकी बात सुनकर दोनों को उसका मतलब समझ नहीं आया.

आर्यन: मतलब.

राजेश: मतलब ये की हम अपने बच्चो को इस तरह से टिल टिल मरता नहीं देख सकते, तुम दोनों hi तो हमारे जीवन भर की पूंजी हो. तुम दोनों यहाँ से कही दूर चले जाओ, जहा तुम्हे कोई जान्ने वाला न हो. वह जाकर तुम शादी करलो और अपनी लाइफ जियो.

राजेश ने कहने को तो कह दिया लेकिन उसकी आँखों से ये कहते हुए आँशु टपक आये.

आशु: पापा, ऐसा कभी नहीं हो सकता की हम आप लोगो को छोड़ कर जाए. हमने जो गलती की है, उसकी सजा आपको हमसे अलग रहकर क्यों मिले. आप माने या न माने म आपको छोड़ कर कही नहीं जाने वाली.

आशु अपने पापा के गले लगते हुए कहती है. उसकी आँखों मई भी आँशु आ जाते है, अब माहौल काफी ग़मगीन हो चूका था.

राजेश: तो बच्चो, तुम यहाँ साथ रहकर इस दुनिया का सामना नहीं कर पाओगे. तुम्हारी भलाई इसी मई है की तुम यहाँ से दूर चले जाओ.

आशु: पापा आपने हमें पाला है पोसा है, इतना बड़ा किया है, हमारी हर एक इच्छा पूरी की है और जब हमारी बारी आपकी सेवा करने की आयी है तब हम आप सबको छोड़ कर चले जाए, नहीं पापा.

अंजलि: तो तुम दोनों यहाँ रहकर एक दूसरे के कभी नहीं हो पाओगे.

अंजलि भी अपनी आँखे साफ़ करते हुए कहती है.

आर्यन: पापा हम अपनी खुशियों की खातिर, अपनी फॅमिली का त्याग नहीं कर सकते. जिस तरह हम एक दूसरे के बिना नहीं जी सकते उसी तरह हम आप सबके बिना भी नहीं रह सकते है.

आर्यन भी उठकर अपने पापा के पेरो के पास बेथ जाता है. उनके मन मई अपने लिए इतना प्यार देख, वो सब बहुत प्राउड फील कर रहे थे.

राजेश: तो बीटा इसके सिवा कोई और रास्ता भी तो नहीं है तुम दोनों को एक करने का.

आर्यन: पापा अगर आप लोग हमारे साथ है तो हम पूरी दुनिया से लड़ सकते है.

अंजलि: माँ बाप तो हमेशा अपने बचो के साथ hi होते है.

निर्मला: मतलब तुम दोनों को इनका ये नया रिस्ता मंजूर है न.

बहुत देर से चुप बैठी निर्मला अब बात क्लियर करना चाहती है, तब दोनों एक साथ है कह देते है. उनके मुँह से है सुनकर आशु और आर्यन की ख़ुशी का तो कोई ठिकाना hi नहीं रहा. उन्दोनो ने उन सबको गले लगा लिया.

Ashu,Aryan: थैंक्स मम्मी, papa,dadi.

निर्मला: बस बस अब मस्का मत लगाओ.

निर्मला: राजेश क्या सोच रहा है बीटा.

राजेश को कुछ सोचता पाकर देख वो पूछती है.

राजेश: कुछ नहीं माँ, बस सोच रहा हु की ये दुनिया कैसे रियेक्ट करेगी की..

राजेश कहता कहता रुक गया.

निर्मला: राजेश तू टेंसन न ले, भगवन जरूर कोई न कोई रास्ता जरूर दिखायेगा. ये सब आने वाले वक़्त पर छोड़ दो.

राजेश: आप सही कह रही हो माँ.

फिर कुछ देर बाद आर्यन उठता हुआ बोलै.

आर्यन: ok मम्मी, म चलता हु.

अंजलि: कहा.

आर्यन: अपने फ्लैट पर.

राजेश: जब तेरी बात नहीं मानी तब भी तू हमसे दूर था और अब मान ली है तब भी तू वही जा रहा है.

राजेश उसकी बात सुनकर थोड़ा लॉडली कहता है.

आर्यन: matttt...matlb.

राजेश: मतलब ये की मेरे दोनों बच्चे अब हमारे पास hi रहेंगे.

उसकी बात सुन दोनों भाई बहिन के चेहरे खिल जाते है.

अंजलि: ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं है, तुम दोनों तब तक अलग hi रहोगे जब तक की कोई सलूशन नहीं निकल जाता.

अंजलि उन्हें देख हस्ती हुयी कहती है, जबकि वो दोनों शर्म से पानी पानी हो जाते है.

अंजलि: देखो तो अब कैसे शर्मा रहे है दोनों, पहले तो शर्म आयी नहीं..

निर्मला: चलो भाई अब सोने जाते है, बहुत देर हो गयी है.

निर्मला खड़े होते हुए बोली, जबकि उसकी साथ साथ आशु भी कड़ी हो गयी. सब सोने चले गए थे, आर्यन अपने रूम मई आता है तो पाटा है की वो कमरा अब आशु की चीज़ो से भरा पड़ा है. उसे पता तो था hi की आशु अब उसके रूम मई रहती है. आर्यन बीएड पर लेत कर आज के बारे मई सोचने लगता है. आज वो बहुत ज्यादा खुश था. धीरे धीरे रात बीतने लगी, आशु अपनी दादी के रूम मई लेती हुयी थी.

आशु: ठंकु दादी, आपने हमारे लिए इतना सैक्रिफाइस किया.

निरमला: माँ बाप का फ़र्ज़ तो बच्चो के लिए सैक्रिफाइस करना hi है बीटा.

निर्मला उसके माथे को चूमते हुए कहती है.

निर्मला: वैसे अगर तू चाहे तो आर्यन के साथ hi सो सकती है.

उसकी बात सुन आशु शर्म से नजरे झुका लेती है.

निर्मला: जा.. चली जा..

उसकी बात सुनकर आशु न मई सर हिलती है.

निर्मला: इसका मतलब जब मई सो जाउंगी तब जाएगी तू, पहले की तरह.

निर्मला मुस्कुराते हुए कहती है.

आशु: नहीं dadi..wo..

निर्मला: जा चली जा, तेरी मम्मी को नहीं बताउंगी.

निर्मला उसका सर पूछकर कर कहती है, और आशु उसे तिघ्टलय हुग करती हुई वह से आर्यन के रूम मई चली जाती है.
 
Back
Top