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जहा माधुरी नेताजी के साथ अपना हवस का गन्दा खेल खेलने चली गई. माँ आलिया को लेकर उसके घर के पास वाले खली मैदान में उसके फॅमिली की हिफाजत के लिए पहरेदारी करने लग गई. अंदर घर में शिल्पा और तपन थे. शिल्पा माँ से कभी नहीं मिली थी. पर फिर भी माँ किस पद पर हे और उसके बॉस की बॉस हे ये उसे पता था.
उसे ये भी पता था की माँ की नजर उस पर हे. लेकिन माँ शिल्पा का हर एक सच जानती थी. आलिया माँ की गॉड में सर रख कर सो रही थी. माँ की नजर माधुरी के घर पर थी. हाथ में नाईट वीगन. रत में देखने वाली दूरबीन. वो बार बार घर के आस पास सर्च करती रहती थी. तक़रीबन 1 घंटे बाद आलिया उठ गई. आलिया को माँ ने एक पानी की बोतल दी.
माँ ; अब केसा हे मेरा बचा.???
आलिया ; ठीक हु माँ वो कोण हो सकता हे??
माँ ; पता नहीं लेकिन डीके या वो चुड़ैल ेराम वो हो सकते हे.
आलिया ; दीदी ने कहा था वो एक पुलिस इंस्पेक्टर हे क्या सच हे???
माँ ; वो झूठ बोल रही हे.
आलिया ; आप को कैसे पता???
माँ ; क्यों की में माँ हु.
आलिया ; वेल.
माँ ; मेरी एक एजेंट हे जिसे दुनिया नाईट फाइटर के नाम से जनि जाती हे उसे ेराम धोका देने में कामयाब रही थी.
आलिया ; केसा धोखा.
माँ ; नाईट फाइटर उसे मरने वाली थी. उस वक्त ेराम ने उसे एक झूठी कहानी सुनाई और वो कहानी पर निघटेर ने भरोसा कर के उसे जिन्दा छोड़ दिया.
आलिया ; क्या स्टोरी सुनाई.
माँ ; उसने कहा वो एक मुंबई की पुलिस इंस्पेक्टर गाँधी हे. और रियल ेराम मर चुकी हे.
आलिया ; (सोक) क्या?? मतलब रियल ेराम कोण हे.
माँ ; पूरी बात तो सुन बीटा.
माँ ; उसने एक काल्पनिक कहानी बनाई. उसका कहना था. की रियल ेराम ने उसके बाप के कहने पर उसकी माँ को मर दिया. इस लिए ेराम की जुड़वाँ बहन जो कभी बिछड़ गई इंस्पेक्टर गाँधी उसे मरने के लिए सोमालिया गई. और उसने रियल ेराम को मर के उसकी जगह खुद ले ली. अब वो मौलवी मतलब उसके असली बाप को मरने के लिए प्लान बना रही हे.
आलिया ; तो सचाई क्या हे.
माँ ; बीटा पहले ेराम की कहानी का झूठ सुन. ेराम की कोई बहन हे hi नहीं. और इंस्पेक्टर गाँधी जो मुंबई पुलिस इंस्पेक्टर थी जो सोमालिया से मुंबई की फ़्लैट में उसका पीछा करते हुए मुंबई तक पहोची उसमे मुंबई एयरपोर्ट पे ेराम ने गाँधी का मर्डर कर दिया.
आलिया ; फिर ये सच हे???
माँ ; ये तो उस झूठ का सच था. लेकिन सच का सच ये हे की मौलवी उसका सागा बाप हे. ेराम मौलवी की नाजायज़ औलाद हे. जिसे मौलवी ने खुद ट्रेन किया हे. और मौलवी के कहने पर ेराम ने अपनी सगी माँ को मर दिया.
आलिया ; बाप रे अल्लाह से तो डर्टी जहनुम में जाए शैतान की बची.
माँ हसने लगी.
माँ ; ये दुनिया बड़ी जालिम हे. यहाँ पलने वाला इतना बेरहम होता हे की हम से अपने को hi मरवा सकता हे.
आलिया ; छोडो सब ये बताओ पापा कैसे बचे.
माँ ; अरे बस कर मेरी माँ में जग रही हु तू सजा.
आलिया ; माँ पापा की कोई फोटो तो होगी आप के पास में.
माँ ; है हर वक्त होती हे मेरे पास.
माँ ने अपने पति का फोटो आलिया को दिखाया.
आलिया ; वाओ माँ पापा बहोत हैंडसम और किते हे.
माँ ; किते नहीं बहोत बदमाश थे. पर बहोत प्यारे थे.
आलिया ; फिर कैसे बचाया उन्हें.
माँ ; िल्याज़ मुझे एक ऐसा मोहरा मिल गया था जिसे कोई भी टाला खोला जा सकता हे. नफीस गुरुर में अँधा हो गया था. लेकिन जूनियर गरीब बहोत शातिर था. उसे नफीस पर भरोसा नहीं था. इस लिए उसने अपने कुछ चमचे नफीस की जेल में छोड़ रखे थे. अब जूनियर गरीब तो मेरे प्यार में अँधा होने लगा था. उसे मेने एक ऐसा जहर दिया जिस से वो होश में तो रहे पर कुछ कर न सके.
वही मेरे पति को ऐसी जेल में डाला गया जहा से सूरज की किरणे तो क्या हवा भी न निकल सके. गुलफाम को पता था की मेरी मदद करने के बाद उसका और उसके परिवार का बचाना मुश्किल होगा. फिर भी वो अपना बदला उस मुल्क से लेने के लिए हर कुरबानी देने के लिए राज़ी हो गया. उस रत में उसकी रावलपिंडी की जेल में जाने की पूरी तयारी कर चुकी थी. सरे सामान और मेरी टीम. हर एक बाँदा अपनी जिंदगी को देव पे लगा कर वह पहोचना था. पर जूनियर गरीब की आंखे खिली हो तब तक नहीं. रत मुझे जैसे जहीरले शाप जो जहर पिलाना हो वैसा लग रहा था.
में जूनियर गरीब के पास आई और उस चूतिये ने नशे में ये भी नॉट नहीं किया उस रत बहोत दिनों के बाद मांग में सिंदूर था. वो नशे में धुत.
गरीब ; हम आप से बहोत प्यार करते हे बेगम.
माँ ; है है है इसी बात पे एक जैम हो जाए में आप के लिए एक बहेतरीन जैम बनती हु.
मेने उसके शराब में जहर मिला दिया और खुद उसके होठो पे लगा दिया था. वो खुद मेरे हाथो से जैम नहीं जहर पि रहा था. वैसे उसे जहर पिलाने में मेरे डिल को जो सुकून मिल रहा था. वो ख़ुशी में बयां नहीं कर सकती थी. उसपे कई देर हो चुकी थी. जहर का असर नहीं हो रहा था. लेकिन शराब उसके दिमाग पे हावी हो रही थी.
मेने उसे बाद पे लेटाया. वो मुझपे पसारने लगा था.
अपने मुँह से गाड़ी और बेहूदा बाटे निकलने लगी वो होश में नहीं था फिर भी मेरे साथ हमबिस्तर होना चाहता था. लेकिन मेरी छह तो उसे हमेशा के लिए सुला देने की थी.
जूनियर गरीब ; बेगम जल्दीए निकाह करररर के हम लंदन चले जाएंगी. वो नफीस कमीना
माँ ; है जनाब आप ठीक से तो लेते.
जग; आज रत उसकीई जिन्दगीइ
माँ ; उसकी जिंदगी क्या जनाब??
मेने उसे सहारा दिया वो मेरी जंगो को मशलने लगा बहोत नशा हो गया था. लेकिन मेरा दिमाग तब घुमा जब उसने नफीस का नाम लिया. मतलब नफीस के खिलाफ गरीब ने कोई प्लान जरूर बनाया था. मेरे पास अब वक्त काम बचा था. सवाल ये था कही मेरी हकीकत तो गरीब नहीं जान गया. मुझे पकडे जाने का पहेली बार दर लगा. अगर वो मेरी हकीकत नहीं जाना और सिर्फ नफीस को मरने के लिए कोई प्लान बना रहा हे तो भी मेरे लिए मुशीबत थी. अब मेरे लिए एक और नै मुशीबत सामने आ कड़ी थी.
मेने उसे सहारा दिया. और उसे जगाने की फिर कोसिस की.
माँ ; अरे जनाब इतनी खुबशुरत बीवी के होते हुए आप सो रहे हे???? कैसे सोहर हे आप.
गरीब हसने लगा.
जग ; वो नफीस कमीना तुम पर अपनी गन्दी नजर रखता हे नाहा आज उसे हम जान से मरवा देंगे. उस नामुराद की तमन्ना तुम्हे हसीलललल.
माँ ; है वो बेहूदा जानवर मुझे आप से प्यार करने से रोकना चाहता हे. आप मर दे उसे.
मेने उसे गॉड में लेकर अपने हुस्न के जलवे दिखाना सुरु किये लेकिन साला होश बार बार खोते जा रहा था.
माँ ; आप मुझसे बहोत प्यार करते हे न???
गरीब ; है बेगम है. लेकिन उस नफीस को हम जिन्दा नहीं छोड़ेंगे आज वो.
माँ ; आज वो क्या जनाब बोलो मुझे नहीं बताओगे मुझपे एतबार नहीं हे क्या???? बोलो???
गरीब ; अरे तुम पर तो मुझे जान से ज्यादा एतबार हे जान. तुम्हारे जैसा खुबशुरत नगीना सिर्फ मेरा होना चाहिए. तुम मेरी होओओओ.
माँ ; है में आप hi की बेगम हु पर नाफिआ आज रत???
गरीब ; आज रत वो जिन्दा नहीं बचेगा आज उसने किसी बाजारू औरत को बुलाया हे. पर जब वो उसके साथ हवस मिटा रहा होगा मेरे बन्दे उसका काम तममम
सुकर था वो बोलने से पहले अपने होश नहीं खोया. उसने अपना प्लान बता दिया था. में उसकी मोत का इंतजार किये ुशी के बिस्तर पे इंतजार कर रही थी.
उसके मुँह से जग निकलने लगा. यही तो में चाहती थी. में जानती थी. मेरा हुस्न संभालना उसकी ोकत नहीं हे. में उसकी तड़प देख कर उसे मरता देख कर खुश थी.
वो पसीना पसीना हो कर तड़प रहा था. वो मेरे आगे हाथ बढ़ा कर मदद की गुहार लगा रहा था. और में उसे तड़पता देख खुश हो रही थी.
माँ ; उसकी मौत के बाद में वह से निकली रत कुछ भी हो सकता था. में वह से बहार आई गुलफाम मुझे देख के सोच था.
गुलफाम ; सच बताओ मोहतरमा आप हे कोण.
मेने बड़े प्यार से स्माइल करते हुए उसे चूमना सुरु किया. उसके गलो को और फिर उसके लबो को. जब हमारे लैब मिले वो मुझसे अलग होने के लिए मुझे पीछे धकेला लेकिन कपड़ो के अंदर जंगो के पास मेरा नोकीला चाकू उसके सीने के पर हो गया.
माँ ; गद्दार तुजे क्या लगा मुझे पता नहीं चलेगा.
माँ ; वो पाकीष्टनि ख़ुफ़िया एजेंसी की एक चल थी ये मुझे पहले दिन से पता थी. उसे लगा की मुझे पता नहीं होगा लेकिन उसके रूम को मेने कई बार खंगाला था. उसके ट्रांसमीटर और गुप्त खत में कई बार पढ़ चुकी थी. मजे की बात तो ये की ुशी के मुल्क के लोग गैरीब को मरवाना चाहते थे. लेकिन में उसे मर दू उसके बाद. अब प्लान के हिसाब से आज नफीस को ये पता हो सकता हे की में इंडियन हु.
ये मेरा शक नहीं यकीं था. क्यों की वो सारा काम तो नफीस का hi था. कई सवालो के घेरे में सच तो ये था की नफीस मेरी हकीकत जनता था. दोनों hi एक दूसरे को मरवाना चाहते थे. में गरीब को मर दू उसके बाद रत नफीस मुझे भोगने के बाद वो मुझे मर देगा. यानि की मेरे पति को भी. लेकिन गुलफाम. जो मुझे दोस्त की खाल में मिला एक दुश्मन. उसे लगा वो मेरा इस्तेमाल कर रहा हे पर उल्टा में उसे इस्तेमाल कर रही थी.
में बहार आई.
िलियाज़ ; मोहतरमा गुलगाम भाई???
माँ ; वो जनाब हमर वही मिलेंगे. वो गरीब सब को ठिकाने लगाने गए हे.
हम कार में बैठे िलियाज़ को पता नहीं था धोका उसे भी हुआ हे. वो तो सिर्फ बिच का एक मोहरा था. लेकिन मौत तो उसकी भी आणि थी अगर में पकड़ी जाती. उसे दोनों में से किसी भी पार्टी का असली सच पता नहीं था. हम जेल के दवाजे पर पहोच गए. काफी बड़ी 20 फिट दीवारों से घिरा हुआ और नोकीली तर उसपे लगी हुई थी. वह से बहार निकलने का काम िलियाज़ का था. उस जेल का नक्शा तक उसे याद था.
िलिआयाज़ ; मोहतरमा काफी कड़ा पहरा हे. और ये हथियार किए अंदर.
माँ ; तुम्हारे आदमी तैयार हे न???
िलियाज़ ; जी मोहतरमा आप बस अंदर पहोचवा दीजिये बादमे काम मेरा होगा
माँ ; जी.
हमें छान बिन करने एक कमरे में लेकर गए. तबला और ढोलक सरे सामान को चेक करने वो देखने वाले थे की मेने हुशन का जल फेका क्यों की सब की नजर मुझपे hi थी. क्यों की जेल भी तो मर्दो की hi थी.
माँ ; ये का बेहूदगी हे मुझे कोई मर्द तलाशी लेगा ये ठीक नहीं हे.
सब का ध्यान मेरी तरफ गया
गार्ड ; मोहतरमा तलाशी तो लेनी होगी आप जैसी खुबशुरत ोर्टे दुश्मन भी हो सकती हु.
माँ ; (गुस्सा) ला हॉल बिला कुवैत. आप जानते नहीं हो में नफीस सब की मशूऊऊऊ.
गांड ने बाकि सब को ऐसे hi चेक किया क्यों की उनके ध्यान में अब में आ गई थी. वो मेरा गुरुर तोड़ने के चक्कर में उन्हें तलाशी ठीक से न लेने की गलती कर gae.vunhe मेरा मजाक उड़ने में ज्यादा िंत्रश आने लगा
गार्ड ; (स्माइल) है है हमें पता हे की आप नफीस शब् की माशूका और गरीब शब् की होने वाली बेगम एक पुराणी तवायफ हो पर तलाशी तो होगी hi अपने सरे कपडे उतर दीजिये और हमें दिखा दे ki,aap के पास कुछ नहीं हे.
में समाज गई आमिर जडियो से अपना बदला लेने वो उन्हें बेइज्जत करने में उन्हें मजा आता हे मुझे उन्हें अफ़सोस और लचर बन कर खुश करना होगा. मेने शर्माना और लाचारी का ढोंग करते हुए सरे कपडे उतरे सभी का हसना और मजाक बन जाना उनके गंदे गंदे कमैंट्स से गुजर कर हम अंदर पहोचे.
िलियाज़ ; मन गए मोहतरमा आप ने क्या सफाई से हमें बचाया. आज तक हम उस्ताद थे. पर हमें लगता हे की हम तो आप के शगीत हे. असली उस्ताद तो आप हे. एक सगीत का सलाम काबुल करे.
माँ ; सलाम काबुल हे. अब आगे मुझे उस हिन्दुश्तानी को छुड़वाना हे.
िलियाज़ ; वादा हे मेरा आप का आशिक आज सुबह होने से पहले आप की बहो में होगा
हम अलग हुए और सुरु हुआ मुजरा गण बजनक. मेरे अंदर का जुनून मेरा गुस्सा साफ मेरे फेस पे दिख रहा था.
लेकिन जब में घूम कर िलियाज़ तक नाचते गए पहोची तो उसने मुझे हिसारो से कहा.
मोहतरमा चहेरे से डिल का राज बया न करे. कुछ नज़ाकत से काम ले.
उसकी बाटे में समाज गई और फेस पे स्माइल और सेक्सुअल फीलिंग
नफीस को पता था मतलब की में इंडेन हु. क्यों की बिच मुजरे में वो मेरे पति को जंजीरो में जकड़े बहार ले आया. वो फाटे कपड़ो में और बड़ी दाढ़ी में बड़े बड़े बल जैसे जंगली हो. उन्हें देख कर में अपने आप को रोक नहीं आई और मेरी निगाहे उन्हें प्यार से देख बैठी.
मुजरा ख़तम हुआ और मेरा हाथ नफीस में पकड़ लिया.
नफीस ; देखो मोहतरमा ये एक हिंदुस्तानी जासूस हे कई सालो से इसने अपना मुँह नहीं खोला आज इसकी मौत होगी.
में जानती थी. उनकी ोकत नहीं की वो उनसे कुछ बुलवा ले. तकिलफो की क्या मजाल जो उन्हें मजबूर कर दे. लेकिन हिंदुस्तान का सबसे बेस्ट जासूस और उसे बचाना मेरी ड्यूटी बस उन्हें एक मौका मिल जाए वो बता देंगे वो क्या चीज हे.
नजाने कितने वक्त से उन्होंने उजाला नहीं देखा था. सरे उनकी हालत पे खुश हो रहे थे. उनकी आंखे छोडिया रही थी और वो ठीक से खड़े नहीं हो प् रहे थे. पर सिर्फ में जानती थी की वो अपने आप को उजाला देखने के लिए तैयार कर रहे हे और वो उन्हें अपनी ताकत छुपा कर उनकी आँखों में धूल जोक रहे हे. में उनके सामने थी. फिर भी मुझे वो पहचान नहीं प् रहे लेकिन में जानती थी की वो मेरी आवाज पहचान जेंगे और मेरा माक्षात भी.
माँ ; ऐसे हिंदुस्तानी तो आए दिन मरते रहेंगे नफीस सब लेकिन वक्त न जयार कीजिये. ऐसी ये हम दोनों हम बिस्तर हो कर आज जश्न मनाए कल तक गरीब शब् भी झंडा नहीं बचेंगे.
मेरी बात सुन कर वो खुश हो गया क्यों की में अब तक उसके प्लान के हिसाब से चल रही थी. वही मेरे पति ने मेरी आवाज सुन ली थी. उन्हें विस्वास हो चूका था की कोई तो हे उनके साथ लड़ाई में वो अकेले नहीं हे. बस कुछ देर उनकी रौशनी वापस आ जाए देर ुशी की थी.
वो मुझे जेल की एक कोठरी में लेकर गया जहा उजाला काम और अँधेरा ज्यादा था. जहा लाल तेन की रौशनी थी.
माँ ; उफ्फ्फ जानेमन इस गर्मी में जो मेरा जिश्म सुलग रहा हे पहले आप अपने हाथो से मुझे बेपर्दा कर दे और मुझे नहलादे तो आज की रत और रंगीन हो जाए.
नफीस ; बहोत खूब आज तो महोतरमा पुरे सबब और दिल दरिया लिए आई हो.
में जानती थी. जूनियर गरीब के भी आदमी यही छुपे होंगे जो सेक्स के वक्त hi हमला करेंगे. वो मेरे कपडे आहिस्ता आहिस्ता उतरने लगा. मुझे पूरा नंगा कर दिया. मेरे बदन पे अपने गंदे हाथो को घूमने लगा.
वो सबसे ज्यादा मेरे यौवन को hi देख रहा था. उन्हें मशलता में जानती थी उसे यही उलझाए रखना होगा ताकि मेरे पति को वक्त मिल जाए. मेने एक ताम्बे का लोटा उठाया और पानी पिने लगी. वो मेरे बूब्स पे अपने गंदे मुँह को लगा कर उसे चूसने लगा
नजर उसकी ऊपर थी. पानी मेरे मुँह से गले तक उतरता वो ये नजारा बर्दाश नहीं कर पाया. और मुझे लेता कर मेरी नाभि और जंगो को चूमने लगा.
मेने भी अपने आप को यु जाहिर किया के में उसकी हवस में ज़ूम रही हु. पर पास पड़ा उस ताम्बे के मोठे से लोटे को उठाया और उसके सर पे दे मारा. वो जख्मी हुआ और चिल्लाने गया.
अचानक उसी कोठरी से दो आदमी निकले. वो देख के हैरान हो गए. उनसे पहले मेरा हमला. मेने उनकी आँखों में देखते हुए. लोटे को उस नफीस के सर पे मर मर के उसे मर डाला.
माँ ; सिर्फ गरीब शाहब के लिए उन्होंने मुझे भेजा हे. हमला बोल दो.
नादाँ जुल्मो की एक अंदर बहोत बड़ी फौज ने पुरे जेल पे हमला बोल दिया. दोनों पार्टी की लड़ाई और दोनों के मालिक को में hi मर चुकी थी. लेकिन पाकिस्तानी फौज कभी भी आ सकती थी. मेने कालड़ी कपडे पहने और वह से निकली. मेरे पति तो उनपर कल बन कर टूर पड़े. िलियाज़ ने उन्हें आज़ाद कर दिया और हम वह से एक सुरंग से निकले. िलियाज़ के सरे बंदोबस्त तैयार थे. वो इस खेल में दुश्मनो का आदमी नहीं था. उसने वादा निभाया और वो जेल से बहार तक हमें ले आया. वह हमें उसने एक कार दी जो पुराने ज़माने की रॉयल्स कार थी.
िलियाज़ ; अल्लाह हाफिस मोहतरमा जिंदगी मिली तो दोबारा जरूर मिलेंगे.
माँ ; सुनो एक काम और मेरी एक दोस्त हे. मेरे कोठे पे सायद वो मरने वाली हे. अगर उसके बची को तुम बचा लो तो इस पते पे जरूर पहोचा देना. कीमत तुम्हारी उम्मीद से कई ज्यादा होगी.
िलियाज़ ; ये ममकिन नहीं पर सगीत हु कोसिस जरूर करूँगा.
हम वह से बहार चले गए.
आलिया ; फिर?????
माँ ; अब रत के 3 बज रहे हे सो जा अब.
उसे ये भी पता था की माँ की नजर उस पर हे. लेकिन माँ शिल्पा का हर एक सच जानती थी. आलिया माँ की गॉड में सर रख कर सो रही थी. माँ की नजर माधुरी के घर पर थी. हाथ में नाईट वीगन. रत में देखने वाली दूरबीन. वो बार बार घर के आस पास सर्च करती रहती थी. तक़रीबन 1 घंटे बाद आलिया उठ गई. आलिया को माँ ने एक पानी की बोतल दी.
माँ ; अब केसा हे मेरा बचा.???
आलिया ; ठीक हु माँ वो कोण हो सकता हे??
माँ ; पता नहीं लेकिन डीके या वो चुड़ैल ेराम वो हो सकते हे.
आलिया ; दीदी ने कहा था वो एक पुलिस इंस्पेक्टर हे क्या सच हे???
माँ ; वो झूठ बोल रही हे.
आलिया ; आप को कैसे पता???
माँ ; क्यों की में माँ हु.
आलिया ; वेल.
माँ ; मेरी एक एजेंट हे जिसे दुनिया नाईट फाइटर के नाम से जनि जाती हे उसे ेराम धोका देने में कामयाब रही थी.
आलिया ; केसा धोखा.
माँ ; नाईट फाइटर उसे मरने वाली थी. उस वक्त ेराम ने उसे एक झूठी कहानी सुनाई और वो कहानी पर निघटेर ने भरोसा कर के उसे जिन्दा छोड़ दिया.
आलिया ; क्या स्टोरी सुनाई.
माँ ; उसने कहा वो एक मुंबई की पुलिस इंस्पेक्टर गाँधी हे. और रियल ेराम मर चुकी हे.
आलिया ; (सोक) क्या?? मतलब रियल ेराम कोण हे.
माँ ; पूरी बात तो सुन बीटा.
माँ ; उसने एक काल्पनिक कहानी बनाई. उसका कहना था. की रियल ेराम ने उसके बाप के कहने पर उसकी माँ को मर दिया. इस लिए ेराम की जुड़वाँ बहन जो कभी बिछड़ गई इंस्पेक्टर गाँधी उसे मरने के लिए सोमालिया गई. और उसने रियल ेराम को मर के उसकी जगह खुद ले ली. अब वो मौलवी मतलब उसके असली बाप को मरने के लिए प्लान बना रही हे.
आलिया ; तो सचाई क्या हे.
माँ ; बीटा पहले ेराम की कहानी का झूठ सुन. ेराम की कोई बहन हे hi नहीं. और इंस्पेक्टर गाँधी जो मुंबई पुलिस इंस्पेक्टर थी जो सोमालिया से मुंबई की फ़्लैट में उसका पीछा करते हुए मुंबई तक पहोची उसमे मुंबई एयरपोर्ट पे ेराम ने गाँधी का मर्डर कर दिया.
आलिया ; फिर ये सच हे???
माँ ; ये तो उस झूठ का सच था. लेकिन सच का सच ये हे की मौलवी उसका सागा बाप हे. ेराम मौलवी की नाजायज़ औलाद हे. जिसे मौलवी ने खुद ट्रेन किया हे. और मौलवी के कहने पर ेराम ने अपनी सगी माँ को मर दिया.
आलिया ; बाप रे अल्लाह से तो डर्टी जहनुम में जाए शैतान की बची.
माँ हसने लगी.
माँ ; ये दुनिया बड़ी जालिम हे. यहाँ पलने वाला इतना बेरहम होता हे की हम से अपने को hi मरवा सकता हे.
आलिया ; छोडो सब ये बताओ पापा कैसे बचे.
माँ ; अरे बस कर मेरी माँ में जग रही हु तू सजा.
आलिया ; माँ पापा की कोई फोटो तो होगी आप के पास में.
माँ ; है हर वक्त होती हे मेरे पास.
माँ ने अपने पति का फोटो आलिया को दिखाया.
आलिया ; वाओ माँ पापा बहोत हैंडसम और किते हे.
माँ ; किते नहीं बहोत बदमाश थे. पर बहोत प्यारे थे.
आलिया ; फिर कैसे बचाया उन्हें.
माँ ; िल्याज़ मुझे एक ऐसा मोहरा मिल गया था जिसे कोई भी टाला खोला जा सकता हे. नफीस गुरुर में अँधा हो गया था. लेकिन जूनियर गरीब बहोत शातिर था. उसे नफीस पर भरोसा नहीं था. इस लिए उसने अपने कुछ चमचे नफीस की जेल में छोड़ रखे थे. अब जूनियर गरीब तो मेरे प्यार में अँधा होने लगा था. उसे मेने एक ऐसा जहर दिया जिस से वो होश में तो रहे पर कुछ कर न सके.
वही मेरे पति को ऐसी जेल में डाला गया जहा से सूरज की किरणे तो क्या हवा भी न निकल सके. गुलफाम को पता था की मेरी मदद करने के बाद उसका और उसके परिवार का बचाना मुश्किल होगा. फिर भी वो अपना बदला उस मुल्क से लेने के लिए हर कुरबानी देने के लिए राज़ी हो गया. उस रत में उसकी रावलपिंडी की जेल में जाने की पूरी तयारी कर चुकी थी. सरे सामान और मेरी टीम. हर एक बाँदा अपनी जिंदगी को देव पे लगा कर वह पहोचना था. पर जूनियर गरीब की आंखे खिली हो तब तक नहीं. रत मुझे जैसे जहीरले शाप जो जहर पिलाना हो वैसा लग रहा था.
में जूनियर गरीब के पास आई और उस चूतिये ने नशे में ये भी नॉट नहीं किया उस रत बहोत दिनों के बाद मांग में सिंदूर था. वो नशे में धुत.
गरीब ; हम आप से बहोत प्यार करते हे बेगम.
माँ ; है है है इसी बात पे एक जैम हो जाए में आप के लिए एक बहेतरीन जैम बनती हु.
मेने उसके शराब में जहर मिला दिया और खुद उसके होठो पे लगा दिया था. वो खुद मेरे हाथो से जैम नहीं जहर पि रहा था. वैसे उसे जहर पिलाने में मेरे डिल को जो सुकून मिल रहा था. वो ख़ुशी में बयां नहीं कर सकती थी. उसपे कई देर हो चुकी थी. जहर का असर नहीं हो रहा था. लेकिन शराब उसके दिमाग पे हावी हो रही थी.
मेने उसे बाद पे लेटाया. वो मुझपे पसारने लगा था.
अपने मुँह से गाड़ी और बेहूदा बाटे निकलने लगी वो होश में नहीं था फिर भी मेरे साथ हमबिस्तर होना चाहता था. लेकिन मेरी छह तो उसे हमेशा के लिए सुला देने की थी.
जूनियर गरीब ; बेगम जल्दीए निकाह करररर के हम लंदन चले जाएंगी. वो नफीस कमीना
माँ ; है जनाब आप ठीक से तो लेते.
जग; आज रत उसकीई जिन्दगीइ
माँ ; उसकी जिंदगी क्या जनाब??
मेने उसे सहारा दिया वो मेरी जंगो को मशलने लगा बहोत नशा हो गया था. लेकिन मेरा दिमाग तब घुमा जब उसने नफीस का नाम लिया. मतलब नफीस के खिलाफ गरीब ने कोई प्लान जरूर बनाया था. मेरे पास अब वक्त काम बचा था. सवाल ये था कही मेरी हकीकत तो गरीब नहीं जान गया. मुझे पकडे जाने का पहेली बार दर लगा. अगर वो मेरी हकीकत नहीं जाना और सिर्फ नफीस को मरने के लिए कोई प्लान बना रहा हे तो भी मेरे लिए मुशीबत थी. अब मेरे लिए एक और नै मुशीबत सामने आ कड़ी थी.
मेने उसे सहारा दिया. और उसे जगाने की फिर कोसिस की.
माँ ; अरे जनाब इतनी खुबशुरत बीवी के होते हुए आप सो रहे हे???? कैसे सोहर हे आप.
गरीब हसने लगा.
जग ; वो नफीस कमीना तुम पर अपनी गन्दी नजर रखता हे नाहा आज उसे हम जान से मरवा देंगे. उस नामुराद की तमन्ना तुम्हे हसीलललल.
माँ ; है वो बेहूदा जानवर मुझे आप से प्यार करने से रोकना चाहता हे. आप मर दे उसे.
मेने उसे गॉड में लेकर अपने हुस्न के जलवे दिखाना सुरु किये लेकिन साला होश बार बार खोते जा रहा था.
माँ ; आप मुझसे बहोत प्यार करते हे न???
गरीब ; है बेगम है. लेकिन उस नफीस को हम जिन्दा नहीं छोड़ेंगे आज वो.
माँ ; आज वो क्या जनाब बोलो मुझे नहीं बताओगे मुझपे एतबार नहीं हे क्या???? बोलो???
गरीब ; अरे तुम पर तो मुझे जान से ज्यादा एतबार हे जान. तुम्हारे जैसा खुबशुरत नगीना सिर्फ मेरा होना चाहिए. तुम मेरी होओओओ.
माँ ; है में आप hi की बेगम हु पर नाफिआ आज रत???
गरीब ; आज रत वो जिन्दा नहीं बचेगा आज उसने किसी बाजारू औरत को बुलाया हे. पर जब वो उसके साथ हवस मिटा रहा होगा मेरे बन्दे उसका काम तममम
सुकर था वो बोलने से पहले अपने होश नहीं खोया. उसने अपना प्लान बता दिया था. में उसकी मोत का इंतजार किये ुशी के बिस्तर पे इंतजार कर रही थी.
उसके मुँह से जग निकलने लगा. यही तो में चाहती थी. में जानती थी. मेरा हुस्न संभालना उसकी ोकत नहीं हे. में उसकी तड़प देख कर उसे मरता देख कर खुश थी.
वो पसीना पसीना हो कर तड़प रहा था. वो मेरे आगे हाथ बढ़ा कर मदद की गुहार लगा रहा था. और में उसे तड़पता देख खुश हो रही थी.
माँ ; उसकी मौत के बाद में वह से निकली रत कुछ भी हो सकता था. में वह से बहार आई गुलफाम मुझे देख के सोच था.
गुलफाम ; सच बताओ मोहतरमा आप हे कोण.
मेने बड़े प्यार से स्माइल करते हुए उसे चूमना सुरु किया. उसके गलो को और फिर उसके लबो को. जब हमारे लैब मिले वो मुझसे अलग होने के लिए मुझे पीछे धकेला लेकिन कपड़ो के अंदर जंगो के पास मेरा नोकीला चाकू उसके सीने के पर हो गया.
माँ ; गद्दार तुजे क्या लगा मुझे पता नहीं चलेगा.
माँ ; वो पाकीष्टनि ख़ुफ़िया एजेंसी की एक चल थी ये मुझे पहले दिन से पता थी. उसे लगा की मुझे पता नहीं होगा लेकिन उसके रूम को मेने कई बार खंगाला था. उसके ट्रांसमीटर और गुप्त खत में कई बार पढ़ चुकी थी. मजे की बात तो ये की ुशी के मुल्क के लोग गैरीब को मरवाना चाहते थे. लेकिन में उसे मर दू उसके बाद. अब प्लान के हिसाब से आज नफीस को ये पता हो सकता हे की में इंडियन हु.
ये मेरा शक नहीं यकीं था. क्यों की वो सारा काम तो नफीस का hi था. कई सवालो के घेरे में सच तो ये था की नफीस मेरी हकीकत जनता था. दोनों hi एक दूसरे को मरवाना चाहते थे. में गरीब को मर दू उसके बाद रत नफीस मुझे भोगने के बाद वो मुझे मर देगा. यानि की मेरे पति को भी. लेकिन गुलफाम. जो मुझे दोस्त की खाल में मिला एक दुश्मन. उसे लगा वो मेरा इस्तेमाल कर रहा हे पर उल्टा में उसे इस्तेमाल कर रही थी.
में बहार आई.
िलियाज़ ; मोहतरमा गुलगाम भाई???
माँ ; वो जनाब हमर वही मिलेंगे. वो गरीब सब को ठिकाने लगाने गए हे.
हम कार में बैठे िलियाज़ को पता नहीं था धोका उसे भी हुआ हे. वो तो सिर्फ बिच का एक मोहरा था. लेकिन मौत तो उसकी भी आणि थी अगर में पकड़ी जाती. उसे दोनों में से किसी भी पार्टी का असली सच पता नहीं था. हम जेल के दवाजे पर पहोच गए. काफी बड़ी 20 फिट दीवारों से घिरा हुआ और नोकीली तर उसपे लगी हुई थी. वह से बहार निकलने का काम िलियाज़ का था. उस जेल का नक्शा तक उसे याद था.
िलिआयाज़ ; मोहतरमा काफी कड़ा पहरा हे. और ये हथियार किए अंदर.
माँ ; तुम्हारे आदमी तैयार हे न???
िलियाज़ ; जी मोहतरमा आप बस अंदर पहोचवा दीजिये बादमे काम मेरा होगा
माँ ; जी.
हमें छान बिन करने एक कमरे में लेकर गए. तबला और ढोलक सरे सामान को चेक करने वो देखने वाले थे की मेने हुशन का जल फेका क्यों की सब की नजर मुझपे hi थी. क्यों की जेल भी तो मर्दो की hi थी.
माँ ; ये का बेहूदगी हे मुझे कोई मर्द तलाशी लेगा ये ठीक नहीं हे.
सब का ध्यान मेरी तरफ गया
गार्ड ; मोहतरमा तलाशी तो लेनी होगी आप जैसी खुबशुरत ोर्टे दुश्मन भी हो सकती हु.
माँ ; (गुस्सा) ला हॉल बिला कुवैत. आप जानते नहीं हो में नफीस सब की मशूऊऊऊ.
गांड ने बाकि सब को ऐसे hi चेक किया क्यों की उनके ध्यान में अब में आ गई थी. वो मेरा गुरुर तोड़ने के चक्कर में उन्हें तलाशी ठीक से न लेने की गलती कर gae.vunhe मेरा मजाक उड़ने में ज्यादा िंत्रश आने लगा
गार्ड ; (स्माइल) है है हमें पता हे की आप नफीस शब् की माशूका और गरीब शब् की होने वाली बेगम एक पुराणी तवायफ हो पर तलाशी तो होगी hi अपने सरे कपडे उतर दीजिये और हमें दिखा दे ki,aap के पास कुछ नहीं हे.
में समाज गई आमिर जडियो से अपना बदला लेने वो उन्हें बेइज्जत करने में उन्हें मजा आता हे मुझे उन्हें अफ़सोस और लचर बन कर खुश करना होगा. मेने शर्माना और लाचारी का ढोंग करते हुए सरे कपडे उतरे सभी का हसना और मजाक बन जाना उनके गंदे गंदे कमैंट्स से गुजर कर हम अंदर पहोचे.
िलियाज़ ; मन गए मोहतरमा आप ने क्या सफाई से हमें बचाया. आज तक हम उस्ताद थे. पर हमें लगता हे की हम तो आप के शगीत हे. असली उस्ताद तो आप हे. एक सगीत का सलाम काबुल करे.
माँ ; सलाम काबुल हे. अब आगे मुझे उस हिन्दुश्तानी को छुड़वाना हे.
िलियाज़ ; वादा हे मेरा आप का आशिक आज सुबह होने से पहले आप की बहो में होगा
हम अलग हुए और सुरु हुआ मुजरा गण बजनक. मेरे अंदर का जुनून मेरा गुस्सा साफ मेरे फेस पे दिख रहा था.
लेकिन जब में घूम कर िलियाज़ तक नाचते गए पहोची तो उसने मुझे हिसारो से कहा.
मोहतरमा चहेरे से डिल का राज बया न करे. कुछ नज़ाकत से काम ले.
उसकी बाटे में समाज गई और फेस पे स्माइल और सेक्सुअल फीलिंग
नफीस को पता था मतलब की में इंडेन हु. क्यों की बिच मुजरे में वो मेरे पति को जंजीरो में जकड़े बहार ले आया. वो फाटे कपड़ो में और बड़ी दाढ़ी में बड़े बड़े बल जैसे जंगली हो. उन्हें देख कर में अपने आप को रोक नहीं आई और मेरी निगाहे उन्हें प्यार से देख बैठी.
मुजरा ख़तम हुआ और मेरा हाथ नफीस में पकड़ लिया.
नफीस ; देखो मोहतरमा ये एक हिंदुस्तानी जासूस हे कई सालो से इसने अपना मुँह नहीं खोला आज इसकी मौत होगी.
में जानती थी. उनकी ोकत नहीं की वो उनसे कुछ बुलवा ले. तकिलफो की क्या मजाल जो उन्हें मजबूर कर दे. लेकिन हिंदुस्तान का सबसे बेस्ट जासूस और उसे बचाना मेरी ड्यूटी बस उन्हें एक मौका मिल जाए वो बता देंगे वो क्या चीज हे.
नजाने कितने वक्त से उन्होंने उजाला नहीं देखा था. सरे उनकी हालत पे खुश हो रहे थे. उनकी आंखे छोडिया रही थी और वो ठीक से खड़े नहीं हो प् रहे थे. पर सिर्फ में जानती थी की वो अपने आप को उजाला देखने के लिए तैयार कर रहे हे और वो उन्हें अपनी ताकत छुपा कर उनकी आँखों में धूल जोक रहे हे. में उनके सामने थी. फिर भी मुझे वो पहचान नहीं प् रहे लेकिन में जानती थी की वो मेरी आवाज पहचान जेंगे और मेरा माक्षात भी.
माँ ; ऐसे हिंदुस्तानी तो आए दिन मरते रहेंगे नफीस सब लेकिन वक्त न जयार कीजिये. ऐसी ये हम दोनों हम बिस्तर हो कर आज जश्न मनाए कल तक गरीब शब् भी झंडा नहीं बचेंगे.
मेरी बात सुन कर वो खुश हो गया क्यों की में अब तक उसके प्लान के हिसाब से चल रही थी. वही मेरे पति ने मेरी आवाज सुन ली थी. उन्हें विस्वास हो चूका था की कोई तो हे उनके साथ लड़ाई में वो अकेले नहीं हे. बस कुछ देर उनकी रौशनी वापस आ जाए देर ुशी की थी.
वो मुझे जेल की एक कोठरी में लेकर गया जहा उजाला काम और अँधेरा ज्यादा था. जहा लाल तेन की रौशनी थी.
माँ ; उफ्फ्फ जानेमन इस गर्मी में जो मेरा जिश्म सुलग रहा हे पहले आप अपने हाथो से मुझे बेपर्दा कर दे और मुझे नहलादे तो आज की रत और रंगीन हो जाए.
नफीस ; बहोत खूब आज तो महोतरमा पुरे सबब और दिल दरिया लिए आई हो.
में जानती थी. जूनियर गरीब के भी आदमी यही छुपे होंगे जो सेक्स के वक्त hi हमला करेंगे. वो मेरे कपडे आहिस्ता आहिस्ता उतरने लगा. मुझे पूरा नंगा कर दिया. मेरे बदन पे अपने गंदे हाथो को घूमने लगा.
वो सबसे ज्यादा मेरे यौवन को hi देख रहा था. उन्हें मशलता में जानती थी उसे यही उलझाए रखना होगा ताकि मेरे पति को वक्त मिल जाए. मेने एक ताम्बे का लोटा उठाया और पानी पिने लगी. वो मेरे बूब्स पे अपने गंदे मुँह को लगा कर उसे चूसने लगा
नजर उसकी ऊपर थी. पानी मेरे मुँह से गले तक उतरता वो ये नजारा बर्दाश नहीं कर पाया. और मुझे लेता कर मेरी नाभि और जंगो को चूमने लगा.
मेने भी अपने आप को यु जाहिर किया के में उसकी हवस में ज़ूम रही हु. पर पास पड़ा उस ताम्बे के मोठे से लोटे को उठाया और उसके सर पे दे मारा. वो जख्मी हुआ और चिल्लाने गया.
अचानक उसी कोठरी से दो आदमी निकले. वो देख के हैरान हो गए. उनसे पहले मेरा हमला. मेने उनकी आँखों में देखते हुए. लोटे को उस नफीस के सर पे मर मर के उसे मर डाला.
माँ ; सिर्फ गरीब शाहब के लिए उन्होंने मुझे भेजा हे. हमला बोल दो.
नादाँ जुल्मो की एक अंदर बहोत बड़ी फौज ने पुरे जेल पे हमला बोल दिया. दोनों पार्टी की लड़ाई और दोनों के मालिक को में hi मर चुकी थी. लेकिन पाकिस्तानी फौज कभी भी आ सकती थी. मेने कालड़ी कपडे पहने और वह से निकली. मेरे पति तो उनपर कल बन कर टूर पड़े. िलियाज़ ने उन्हें आज़ाद कर दिया और हम वह से एक सुरंग से निकले. िलियाज़ के सरे बंदोबस्त तैयार थे. वो इस खेल में दुश्मनो का आदमी नहीं था. उसने वादा निभाया और वो जेल से बहार तक हमें ले आया. वह हमें उसने एक कार दी जो पुराने ज़माने की रॉयल्स कार थी.
िलियाज़ ; अल्लाह हाफिस मोहतरमा जिंदगी मिली तो दोबारा जरूर मिलेंगे.
माँ ; सुनो एक काम और मेरी एक दोस्त हे. मेरे कोठे पे सायद वो मरने वाली हे. अगर उसके बची को तुम बचा लो तो इस पते पे जरूर पहोचा देना. कीमत तुम्हारी उम्मीद से कई ज्यादा होगी.
िलियाज़ ; ये ममकिन नहीं पर सगीत हु कोसिस जरूर करूँगा.
हम वह से बहार चले गए.
आलिया ; फिर?????
माँ ; अब रत के 3 बज रहे हे सो जा अब.