Romance भंवर (पूर्ण) - Page 56 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Yesssssssssssssss maze hi maze hain bus aap aise hi likhte jaeye .. apne comment

:thanks: for your mast wala feedback... Aise hi feedback dete rahiye ... :yay: :yay: :yay:
 
Kya hoga sab jante hain aur ju bhi hoga wahi :D .. bus baki chhap raha hun detail udhar hi :D

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Hahaha bemel hoga tabhi to fight ka maza hai... Daw par rakam bhi to dekh lijiye 90 million.. likhne aur bolne me kuch nahi jata hai lekin us me to 1 million ke liye katle aam ho jaye..

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Hahaha .. haan sinajori par kafi jor baat kya hai :D ... Yahan lal mirchi wali emoji na diye .. utni hot na thi kya idhar :D

Hahaha .. wo akki aur rekha wali na .. mere dimag me bhi usi movie ki fight thi .. aur kal 3 baar dekha bhi hai uss scene ko .. aage kuch na kahunga :D .. update aa raha hai..

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Hahaha .. pahle se hi mar ka andaja laga liye bhai ne .. koi na aap ki ikcha ko pahle se bhaanpte huye .. ubal kar pasine pasine hote huye ye update likh raha hun .. just wait and wathch .. lekin milega na raat ko pata hai mujhe :(

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Maine kayi baar Sunday special kiya tha.. pure din update dete raha .. but public has least intrest .. 4 gahnte ke gape me update hota aur post karne ke liye agle panne tak pahunchne ka intzar karna parta isliye chhod diya..

But now update time .. jald hi update post karta hun
 
Aap ko ki fark parna haj .. aap ke liye kahe ki waiting .. de to raha hun update :D

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Hahaha .. kabhi kisi maya memsab par je try karke last me feedback lijiyega .. reply mujhe b bata dijiyega ki dard de rahe the ya maze kar rahe the.. :D.. bus ho hi gaya chhap raha hun fight scene .. just wait for a while .. tabtak popcorn le aaeye :D

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Update:- 84 (A)

दोनों ही फाइटर एक केज के अंदर अामने-सामने थे। दोनों एक दूसरे को देख रहे थे जहां ज़िकोब अपस्यु को देखकर उसके फाइटिंग स्टाईल और उसकी स्पीड को देखकर अंदाजा लगाने की कोशिश कर रहा था कि ये कितना तेज हो सकता है और उसे कितना डामेज दे सकता है। और वहीं अपस्यु उसे देखकर बस यही सोच रहा था.. "ओवर कॉन्फिडेंस ले डूबी। बिना रोड चलाए इससे जितना संभव नहीं।"…

पूरी भीड़ हूटिंग कर रही थी। ऊपर से देखने वालों में मेघा ग्रुप थोड़े शांत और थोड़े परेशानी में, वहीं धड़कने तो थॉमस ग्रुप की भी बढ़ी हुई थी, लेकिन अंदर से एक सुनिश्चित वाली फीलिंग भी थी कहीं ना कहीं। रिंग के अंदर दोनों ही मज़े हुए खिलाड़ी थे। जहां ज़िकोब एक प्रोफेशनल अंडरग्राऊंड फाइटर था और अपनी पूरी मेहनत वो रिंग के लिए ही करता था वहीं अपस्यु भी एक प्रोफेशनल फाइटर तो था लेकिन आज उसके भी फाइटिंग की परीक्षा हो जनी थी।

बिना जाने दुश्मन के बारे में, बिना कोई राय बनाए ज़िकोब बस पहले कुछ देर तक अपस्यु के फाइट को समझने की रणनीति बना रहा था वहीं अपस्यु आंख मूंदकर पहले अपने गुरु को नमन किया.. फिर युद्ध वंदना करते हुए उसी रिंग को रण समझ कर तिलक किया।

दोनों ही फाइटर बिल्कुल खामोश और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए एक दूसरे को देख रहे थे… रेफ्री बीच स्टेज पर अाकर, दोनों फाइटर को बीच में बुलाया। फाइट के रूल समझते हुए सिर्फ इतना ही कहा कि "नो रूल और ये फाइट तब तक चलेगी जबतक कि या तो कोई एक हार ना मान ले या अचेत अवस्था में पूरा लेट ना जाए।

रूल समझाकर रेफरी बीच से हटा और रिंग के बाहर जाकर मैच शुरू करने का विसिल बजाया। विसिल बजते ही मैच का आरंभ हुआ और ज़िकोब ने अपस्यु को धक्का देकर 2 कदम पीछे हटा। दुश्मन को परखने कि एक तरकीब, जहां प्रतिद्वंदी को धक्का देकर उसे नीचा दिखाते हैं और उसके प्रतिक्रिया का इंतजार करते हैं।

अपस्यु जैसे ही धक्का खाया वो पीछे मुड़ा और खुद में गति देते हुए रिंग से जाल को दीवार की तरह इस्तमाल करते हुए, 3 फिट ऊंचा कूदकर अपने दोनों पाऊं रिंग पर जमाए और उसी गति का सहारा लेते हुए वह पीछे की ओर 6 फिट ऊंचा हवा में गया। अपस्यु ऊपर से नीचे गिरते हुए, अपने पंच से ज़िकोब की कनपटी पर निशाना साधा।

ज़िकोब अपने दुश्मन पर पूरा घात लगाए था, अपस्यु का पीछे मुड़ना और रिंग से कूद कर ऊंचाई प्राप्त करने में जितना वक्त लगा, इतने वक़्त में ज़िकोब अपनी जगह से थोड़ा सा और आगे बढ़ते हुए अपस्यु के सारे गणित को गलत साबित करते हुए उसे फसा चुका था।

जिस जगह अपस्यु का निशाना था, ज़िकोब ठीक उसके एक फिट आगे और अपस्यु कूद कर ज़िकोब के थोड़ा आगे पहुंच गया। ज़िकोब, अपस्यु के गति को उसी के खिलाफ इस्तमाल करते हुए पीछे से पीठ पर एक जोरदार लात जमा दिया। अपस्यु पहले से गति में था ऊपर से ज़िकोब का तेज प्रहार। अपस्यु सीधा जाकर केज से टकराया और इधर-उधर लुढ़कता हुआ नीचे गिरा।

इधर हवा में उड़ता हुआ अपस्यु को लात पड़ी और उधर मेघा की धड़कने तेज हो गई और इसी के साथ "येस येस" करते थोमस सेना खुशी के इजहार करने लगे। अपस्यु अपने उसी मुस्कुराहट के साथ उठकर खड़ा हुआ और ताली बजता हुआ ज़िकोब को बधाइयां देने लगा।

दोनों ही फाइटर पुनः बीच रिंग में एक दूसरे को देखते हुए, पूरा एक गोल चक्कर काट चुके थे। पब्लिक की भीड़ पीछे से "मारो ज़िकोब मारो" की हूटिंग करते हुए। और एक राउंड घूमने के बाद ज़िकोब थोड़ा आगे बढ़ते हुए हवा में लेफ्ट से एक पंच चलाया, जिसके बचाव में अपस्यु झुककर अपने सर को राईट में ले गया और पलटवार करते हुए उसने अपना जोरदार पंच पसलियों पसलियों पर दे मारा।

पूरा एक जोरदार पंच उसके पसलियों पर लगा, लेकिन शायद यह लूप जानबुझ कर छोड़ा गया था, क्योंकि जबतक अपस्यु अपना पंच उसके लेफ्ट पसलियों पर मारा, तबतक राईट साइड से ज़िकोब अपना दूसरा पंच मार चुका था। बहुत ही क्षण भर का मामला और अपस्यु अपने कनपटी के उस हिस्से को अपने दाएं हाथ से पूरा कवर किया, जिसपर ज़िकोब पंच मार चुका था।

ज़िकोब के हमले का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। ज़िकोब ने अपना एक लूप छोड़कर अपस्यु पर हमले कि वो बौछार करी, जिससे अपस्यु खुद को डिफनसिव मोड पर ले जाने के लिए मजबुर हो गया। पहले राईट कनपटी सेव किया, फिर तुरंत अपनी लेफ्ट हिस्से की पालियां और इसी बीच ज़िकोब उसपर और हावी होते हुए लगातार लेफ्ट और राईट से हमले किए जा रहा था।

उसका शरीर देखकर कोई भी धोखा खा जाए कि ज़िकोब में इतनी स्पीड भी हों सकती है। वो अपनी शरीर क्षमता और ऊर्जा का पूरा प्रदर्शन करते हुए लगातार हमला जारी रखा। ज़िकोब को बस एक छोटा सा मौका चाहिए था, हमले के बीच में एक शानदार मूव का और उसे वो मौका जल्द ही मिल गया।

हमले के क्रम में जब ज़िकोब ने बिल्कुल सेंटर से उसके चेहरे पर हमला किया तब मजबूरन अपस्यु को अपने दोनों हाथ बीच में लाकर चेहरे को सेव करना परा और अच्छा मौका देखकर ज़िकोब ने तुरंत एक लात अपस्यु के पेट पर चला दिया।

वो इतनी तेजी के साथ चलाया गया लात था, कि यदि अपस्यु उसके लात से बचने के लिए, दोनों पाऊं फैलाकर नीचे बैठते हुए उसे अपने दाएं कंधे पर नहीं झेलता तो शायद उसके पेट की आंत फट जाती। कंधे पर परे इस जोरदार प्रहार से अपस्यु झटका खाकर पीछे चीत गिर गया।

अपस्यु के पाऊं एक सीधी लाइन बनते हुए पूरे फैला था और उसपर से ये कंधे के ऊपर हुए हमले से जब अपस्यु पीछे जमीन पर गिरा, यह बिल्कुल सही अवसर बना ज़िकोब के लिए। हाथ में आए इस मौके को भुनाने और अपस्यु के कुछ सेकंड के उठने कि फर्क ने पूरे खेल को एकतरफा कर दिया।

अपस्यु किसी तरह उठकर बैठा ही था कि तबतक ज़िकोब, अपस्यु के ठीक पीछे बैठ चुका था। जैसे ही अपस्यु अपने पाऊं मोड़कर बैठा, ज़िकोब पीछे से उसके गर्दन को पकड़कर अपने मौत के सिकंजे में ले चुका था। ज़िकोब अपनी मजबूत भुजा उसकी गर्दन में फंसाकर अपस्यु को अपने ऊपर ले लिया और खुद वो नीचे लेटेते हुए, अपस्यु के दोनों पाऊं में अपना पाऊं फंसाकर, उसे पूरी तरह बेबस करने कि स्तिथि में ले जा रहा था।

इस मूव के लगते ही मेघा चौंककर खड़ी हो गई। मौत का सिकंजा अपस्यु के गले में फसा था और श्वांस मेघा की बंद होने लगी। इधर थॉमस एंड कंपनी लगभग जीत के सेलिब्रेशन में लगे थे।

अपस्यु के गिनती के हिसाब से 12 सेकंड हुए थे। अपस्यु उसकी इस मूव पर मुस्कुराया और पहली बार उसे ऐसा लगा जैसे सब पहले से पूर्वानुमान हो। वक़्त था एक छोटे से सरप्राइज का। अपस्यु अपना हाथ फरफराते हुए ऊपर गर्दन कि ओर लाया और बड़े ही शातिराना अंदाज़ में ज़िकोब के हाथ के ऊपर अपना हाथ मारते हुए उसकी छोटी उंगली ढूंढ़ने लगा। जैसे ही छोटी उंगली मिली, वक़्त था पूरे जोर से एक छानिक हमला करने का। अपस्यु ने तेजी के साथ झटका दिया और उसकी छोटी उंगली उल्टी घूम गई।

ज़िकोब को इस प्रकार के हमले कि कतई उम्मीद नहीं थी, उसे तो लग रहा था अपस्यु अपने केव्नी से उसके पेट के लेफ्ट और राईट साइड हमला करेगा। अचानक इस सरप्राइज मूव से ज़िकोब अपने हाथ खोलते हुए उंगली को झटकने लगा और इधर अपस्यु फुर्ती के साथ उठकर खड़ा हो चुका था।

ज़िकोब भी अपनी उंगली झटकते हुए खड़ा हुआ। इतना वक़्त काफी था अपस्यु में लिए और जबतक वो उंगली झटककर सामने देखता, अपस्यु थोड़ा पीछे होकर गति लेते हुए हवा में कुछ फिट ऊंचा उछला और अपना फाइनल पंच उसके कनपटी के नीचे चला दिया।

फाइनल पंच के लगते ही ज़िकोब को ऐसा झटका लगा कि उसका सर थोड़ा घूम गया। अपस्यु अपने पूरे क्षमता के साथ हमला शुरू कर चुका था। लेफ्ट और राइट दोनों ओर से तेजी के साथ प्रहर शुरू थी। ज़िकोब पहली बार उसकी गति और मारने कि क्षमता को मेहसूस कर रहा था। अपस्यु पूरे अटैकिग मोड पर चल रहा था और ज़िकोब खुद को डिफेंस कर रहा था।

ज़िकोब समझ चुका था कि यहां अपस्यु टारगेट उसका ना तो चेहरा कर रहा है और ना ही उसकी पसलियां। बल्कि वो बचने के लिए जो हाथों का कवर बना रहा था, अपस्यु उसी पर हमले कर रहा है, ताकि पलटवार के वक़्त उसके हाथों के वार की गति धीमी पर जाए। अंत में ज़िकोब खुद के चेहरे पर अपस्यु की मार झलने को तैयार हुआ और अपने हाथों का कवर खोलकर अपस्यु के 2 लेफ्ट और 2 राईट पंच उसने अपने चेहरे पर झेला।

इसी क्रम में ज़िकोब का जबड़ा भी थोड़ा टूटा और खून भी हल्के-हल्के आने शुरू हो चुके थे, लेकिन जो वो मौका तलाश रहा था उसे वो मौका मिल गया और ज़िकोब ने अपस्यु के कमर को पकड़कर तेजी के साथ दौड़ लगता हुआ, उसे लेजाकर जाल के टकरा दिया। वो तो जाल थी और टक्कर के साथ ही कुछ फोर्स जाल के पीछे धसने से कम पर गई, वरना लगभग 110 किलो का आदमी, 20-25 की रफ्तार से दौरते हुए किसी को दीवार से अपस्यु को टकरा देता तो काम लग जाने थे।

उतार चढाव के इस मैच में ज़िकोब ने इस बार पूरी बाजी मारते हुए, अपस्यु के होश उड़ा चुका था। टकराने के साथ अपस्यु हल्का बेसुध हुआ। उसके हाथों की गति कम पर गई और जबतक वो हाथों का कवर बनता तब तक लिफ्ट और राईट से उसे पंच पड़ने शुरू हो चुके थे। चेहरा पूरा लाल हो चुका था। मुंह से खून निकलना शुरू हो गया और श्वांस धीमी होकर अपस्यु बेजान पड़ने लगा था।

लगातार पंच मारते हुए ज़िकोब की श्वांस फूलने लगी थी। जब ज़िकोब, अपस्यु के पास से हटा, अपस्यु फिसलता हुआ नीचे जमीन में बैठकर मध्यम-मध्यम श्वांस ले रहा था। उसका चेहरा बिल्कुल खून में सना और कुछ भी पहचानने जैसा नजर नहीं आ रहा था। थॉमस और उसकी सेना खुशी मनाने लगे और मेघा से वह जीत कि रकम का इंतजाम करने के लिए कहने लगे।

यह मैच लगभग हाथ से निकाल चुका था और यदि अपस्यु ने हार नहीं मानी तो लगभग उसका खेल समाप्त ही था। ज़िकोब अपस्यु के ठीक विपरीत दूसरे कोने में बैठा बस यही सोच रहा था कि अब एक फाइनल मूव देना है। जिस पोजिशन में अपस्यु बैठा है, तेज दौड़ते हुए घुटने कि एक पूरी चोट उसके सीने पर और कहानी खत्म।

अपस्यु आंख मूंदे अब भी मध्यम-मध्यम श्वांस ले रहा था। वहां से ज़िकोब ने दौड़ लगा दी। पब्लिक उत्साह में चीखने लगे। अपस्यु अब भी अपनी जगह से हिल नहीं रहा था। कानो में उसके हवा का परिवर्तन समझ में आ रहा था। अपस्यु ने गहरी श्वांस ली, चोट खाए खून से लथपत चेहरे पर अब एक विजई मुस्कान जैसे आयी हो, और ज़िकोब अपनी दौड़ लगाकर गलती कर चुका था।

बिल्कुल नजदीक ज़िकोब हमले के लिए बिल्कुल बढ़ता हुआ और ठीक उसी वक़्त अपस्यु ने अपने दोनो हाथ जाल से टिकाया। हाथों के ऊपर जोर लगाकर अपस्यु ने अपने शरीर को गति प्रदान किया। लेटकर वो जमीन में फिसला और अपस्यु का पाऊं ज़िकोब के पाऊं से टकरा गया। अपस्यु ज़िकोब की गति और वजन का पूरा फायदा ले चुका था। पाऊं के टक्कर के साथ ही ज़िकोब बहुत ही बुरी तरह से जाल से जाकर टकराया। यह टक्कर अपस्यु के टक्कर से भी ज्यादा तेज और घातक थी।

श्वांस रोक मेघा जो खुद को हारती हुई देख रही थी, अचानक से उसके अंदर भी जोश पैदा हो गया। अपस्यु भी अपने अंदर की ऊर्जा को समेट कर खड़ा हुआ। और तेजी के साथ ज़िकोब के बाएं ओर कुछ दूरी पर खड़ा हो गया।

ज़िकोब जाल पकड़ कर खड़ा हो रहा था और अपस्यु उसके बाएं ओर से दौर लगाते, अपने घुटनों पर फिसलते हुए ज़िकोब के दोनों पाऊं को पकड़कर आगे तक फिसल गया। ज़िकोब सीधा मुंह के बल गिरा और अपस्यु के साथ एक फिट तक खिंचते हुए चला गया। अपस्यु तेजी दिखाते हुए उसका दायां पाऊं पकड़ा और निचले हिस्से जहां घुट्टी होती है वहां से पकड़ कर तेजी के साथ गोल घुमा दिया। जबर्दस्त मोच के साथ हड्डियों में हल्की क्रैक भी आ चुकी थी, और इसी मूव के साथ मेघा भी उछल परी।

मेघा का सुकून और अब अपस्यु पर हो रहे विश्वास को उसके चेहरे से साफ पढ़ा जा सकता था। बेटेल अब अपने आखरी मुकाम पर था। ज़िकोब पूरा भन्नाया जाल को पकड़ कर खड़ा हो गया और अपने दोनों हाथ खोलकर वो अपस्यु को मारने का खुला निमंत्रण देने लगा।

अपस्यु भी उसकी ख्वाहिश पूरी करने पहुंच गया। किसी पंचिंग बैग की तरह वो ज़िकोब को धुन्ना शुरू कर दिया। एक हाथ जाल को पकड़कर संतुलन बनाना और दूसरे हाथ से खुद को सेव करके, हमला भी करना वो भी अपस्यु जैसे तेज फाइटर के सामने असंभव सा काम था, लेकिन ज़िकोब के अंदर मार झेलने की अभूतपूर्व क्षमता थी और वो झेल रहा था।

ज़िकोब अपना दर्द बर्दास्त करते हुए खुद में संतुलन बनाया और जैसे ही उसके दोनों हाथ हमले के लिए तैयार हुए, उसने मौका देखा और अपस्यु के गले पर झपट्टा मारते हुए उसे अपने चौड़े पंजो के बीच दबोच लिया। अपस्यु को गर्दन से पकड़कर उसने हवा में उठा लिया। एक पाऊं ज़िकोब का घायल था इसलिए संतुलन बनाने के लिए वो अपस्यु को हवा में ही उठाए, जाल के ऊपर टिकाया और उसके गर्दन को अपने गिरफ्त में लेते हुए पूरे गुस्से से उसका गला घोंटने लगा।
 
Update 84 (B)

ज़िकोब अपना दर्द बर्दास्त करते हुए खुद में संतुलन बनाया और जैसे ही उसके दोनों हाथ हमले के लिए तैयार हुए, उसने मौका देखा और अपस्यु के गले पर झपट्टा मारते हुए उसे अपने चौड़े पंजो के बीच दबोच लिया। अपस्यु को गर्दन से पकड़कर उसने हवा में उठा लिया। एक पाऊं ज़िकोब का घायल था इसलिए संतुलन बनाने के लिए वो अपस्यु को हवा में ही उठाए, जाल के ऊपर टिकाया और उसके गर्दन को अपने गिरफ्त में लेते हुए पूरे गुस्से से उसका गला घोंटने लगा।

वहां खड़े सभी लोग "किल… किल… किल… किल.. " की हूटिंग लगाने लगे। एक बार फिर सबकी नजर दोनों पर। कोई भी इस वक़्त जश्न नहीं मना रहा था बल्कि श्वांस थामे अब या तो अपस्यु के हार मानने या उसके मरने कि राह देख रहे थे।

ज़िकोब मानसिक रूप से अपनी उंगली तुड़वाने के लिए तैयार था, लेकिन सरप्राइज बिल्कुल भी नहीं होने वाला था। इधर 40 सेकंड गुजर चुके थे और अपस्यु बिना हलचल के आखें मूंदे हुए था। अचानक ही अपस्यु ने अपनी आखें खोली और मुस्कुराते हुए ज़िकोब को किस्स भेजा।

एक पल के लिए तो ज़िकोब का भी दिमाग घूम गया, वो सोच में पर गया ये इंसान है या कोई भूत। ज़िकोब समझ चुका था वह अभी जिता नहीं है, उसे अभी और लड़ना होगा। मानसिक रूप से वो अपने ऊपर बड़े हमले के लिए खुद को तैयार किया लेकिन ठान चुका था कि वो गर्दन नहीं छोड़ने वाला।

ज़िकोब लेकिन भूल चुका था कि ठीक से खड़े रहने के लिए कानो के सहारे से संतुलन मिलता है। और जो खेल ही संतुलन और एकाग्रता का हो, वहां कान का बचाव सबसे जरूरी हो जाता है। बिना हिले डुले अब तक जो भी एनर्जी अपस्यु बचा कर रखा था, उसमे उसने पहले अपने दोनो पाऊं की ऐड़ियों से उसके कान को घंटी की तरह बजा दिया और बिना मौका गवाए उसी पर दोबारा अपने दोनो हाथों का प्रहार भी कर दिया।

ज़िकोब मानसिक रूप से खुद को बड़े हमले के लिए तैयार तो किए हुए था लेकिन कान पर हुए इस हमले से वो खुद पर संतुलन नहीं बना पाया, उसपर से उसका चोट खाया पाऊं। वो लड़खड़ा गया। लड़खड़ाने के साथ ही उसकी पकड़ भी छूट गई और वो खुद को संतुलित करता फिर से जाल पकड़ कर खड़ा हो गया।

अपस्यु के गर्दन कि तो बैंड बज चुकी थी। दोनों एक दूसरे से लगभग 5 फिट की दूरी पर होंगे और एक दूसरे को देखकर हंस रहे थे। दोनों को ही पता था जितने के लिए अभी और मेहनत की जरुरत है। दोनों ही गहरी श्वास लेते खुद से एक बार फिर तैयार किया। एक बार फिर ज़िकोब खुद को मारने का निमंत्रण देने लगा और जाल पकड़ कर खड़ा, अपस्यु के हमले का इंतजार करने लगा।

अपस्यु ने अपने जूते खोले, 5 फिट की दूरी को 15 फिट की दूरी बनाया। ज़िकोब समझ गया कि अपस्यु अब दौर कर उसपर हमला करेगा। वो भी पूरी रणनीति बना चुका था और इस बार वो अपस्यु के गति का प्रयोग उसी के खिलाफ इस्तमाल करने की पूरी मनसा बना चुका था।

अपस्यु तेजी से दौड़ते हुए उसपर हमला ना करते हुए उससे एक फिट दाएं से जाल के उपर चढ़ गया। सबको सरप्राइज करते हुए अपस्यु अपने पाऊं के अंगूठे को जाल में फसाया और नीचे लटककर अपने दोनों हाथ की पकड़ ज़िकोब के गर्दन पर बनाते हुए उसे हवा में उठा लिया।

मौत का पहला सीकंजा ज़िकोब के गर्दन में फंस चुका था। अपस्यु सबको चौकाते हुए पहले तो ज़िकोब को गला से पकड़ कर हवा में उठा लिया, फिर अपने एक हाथ के पंजे से वो जाल को फंसाकर पूरा संतुलन बनाया। अपस्यु के एक हाथ में झूलता वो 1 क्विंटल से ऊपर का इंसान, दूसरे हाथ से जाल को पकड़कर पूरा संतुलन बनाए हुए और पाऊं को जाल के छेद से लगाए वो एक एक करके ऊपर के ओर स्टेप लेने लगा। देखने वाले पूरी हैरानी से बिना पलकें झपकाए इस हैरतअंगेज कारनामे को अपने आखों से होते हुए देख रहे थे।

गिनती के हिसाब से 20 सेकंड गुजर चुके थे। ज़िकोब भी अपना पूरा धैर्य बनाए अपने दोनों हाथ का तेज थाप जाल पर दिया, ताकि अपस्यु की पकड़ छूट सके। लेकिन उसके पंजों की पकड़ इतनी मजबूत थी कि जाल पर लगाया छोटा सा झटका उसे नीचे नहीं गिराने वाली थी। ज़िकोब जमीन से 5 फिट ऊपर आ चुका था। हाथों का दवाब उसके श्वांस को रोक रही थी। इसी क्रम में ज़िकोब हाथ के थाप से जाल पर 2 और झटके दिए लेकिन इन झटकों का कोई असर नहीं था।

अंत में ज़िकोब ने अपना पाऊं हवा में लहराया, हाथ को फिर से झटके देने के पोजिशन में लाया और तेजी से, हाथ और पाऊं का झटका जाल पर लगाया। जाल पर तेज झटका लगा और साथ ही साथ ज़िकोब का भरी शरीर भी तेजी से आगे पीछे झूलने लगा। नतीजा दोनों ही अाकर नीचे गिरे।

लड़ने के लिए दोनों फिर से खड़े ही हुए थे कि दोनों ने वीसिल साउंड सुनकर अपनी जगह खड़े हो गए। पूरी भीड़ शांत खड़ी थी और स्क्रीन पर अपस्यु को विजेता घोषित किया जा रहा था।

हार के वो क्षण स्क्रीन डिस्प्ले पर चल रहा था… ज़िकोब का पहला थाप जाल पर और पब्लिक स्तब्ध.. उसी के साथ दूसरा और तीसरा थाप एक साथ और अपस्यु के जीत कि विसेल बज गई। अंदर के खेमे में पूरा हलचल। थॉमस को ऐसा झटका लगा मानो वो अब पागल हो जाएगा।

ज़िकोब बहुत ही सनकी फाइटर था लेकिन एक अच्छे प्रतिद्वंदी की हमेशा से इज्जत करते आया था। वो अपस्यु के पास आकर उसके जीत कि बधाई देते हुए कहने लगा… "तुम बहुत किस्मत वाले निकले दोस्त, और मुझसे आज बहुत बड़ी चूक हो गई।"

अपस्यु:- फिर भी तुम ही हारते दोस्त।

ज़िकोब:- वो तो तुम्हे भी पता है कि जीत किसकी होती, बस कुछ अनचाहे मूव्स के कारन तुम मुझपर हावी हो गए, जिसके बारे में मै सपने में भी नहीं सोच सकता था।

अपस्यु:- कमाल के हो तुम ज़िकोब, और हां शायद ये फाइट मै हार जाता लेकिन किस्मत भी बड़ी चीज है दोस्त। यह किस्मत मेरे जीत की नहीं है बल्कि इस फाइट के नतीजे में कोई 1 ही जिंदा बचता इसलिए किस्मत बीच में आ गई। ऊपरवाला भी नहीं चाहता की हम में से कोई भी मरे।

"वेल सेड फ्रैंड"… ज़िकोब हंसते हुए कहा और फिर दोनों रिंग के बाहर निकलने लगे। दोनों ही दयनीय हालत में रिंग से बाहर आ रहे थे। दोनों को कई लोगों के कंधों के सहारे उनके गाड़ियों तक छोड़ा गया। इधर थॉमस, ज़िकोब से हार की वजह सुनने के बाद सीधा मैनेजमेंट के पास पहुंच गया। ज़िकोब के जिस थाप को मैनेजमेंट सबमिशन समझ चुकी थी, उसे गलत करार देते हुए वो बचने का मात्र एक मूव बता रहा था। जो कि सही भी था।

थॉमस मैच को रद्द करने और री-मैच के लिए जोड़ देने लगा। मैनेजमेंट साफ तौर पर माना करती हुई कहने लगी… "ज़िकोब मौत की सिकांजे में था और यहां के 3 थाप को हम मैच ओवर ही मानते है। फिर मैनेजमेंट के फैसले के बीच में कोई ना ही आए तो अच्छा है।"

45 मिलियन जीत के साथ मेघा अंदर से पूरी खुश थी। लेकिन बाहर से घमंड मात्र की एक छोटी सी मुस्कान लिए बस अपने जीत को अपने पार्टनर के साथ सेलीब्रेट कर रही थी। आधे घंटे के अंदर मेघा और उसके साथ पैसे लगाने वाले को अपने मूलधन के साथ जीत के 45-45 मिलियन मिल चुके थे और मेघा जीत के लिमो पर सवार अपने गंतव्य के ओर चल दी।

अपस्यु अपनी टूटी-फूटी हालात में दर्द से थोड़ा तरप रहा था। उसका पूरा चेहरा खून में भिंगा और सुजा हुआ था। मेघा, अपस्यु के सूजे और खून लगे होटों को चूमती हुई कहने लगी… "तुमने कर दिखाया हीरो, यू आर सुपर्ब"…

"पागल पहले मुझे किसी हॉस्पिटल में एडमिट करवाओ, मेरी हालात तुम्हे समझ में नहीं आ रही।"… अपस्यु बड़ी मुश्किल से बोलते हुए अपनी हालत का संज्ञान मेघा को देने लगा।

मेघा:- चिल हीरो तुमने अभी-अभी 22.5 मिलियन पैसे बनाए है। तुम्हे हॉस्पिटल जाने की क्या जरूरत, तुम्हारे लिए पूरा मिनी हॉस्पिटल मैंने मंगवा लिया है।

वाकई अपस्यु जब जिंदल हाउस के गेस्ट हाउस में पहुंचा, वहां डॉक्टर्स की पूरी एक टीम पहले से पहुंची हुई थी, वो भी सभी इक्विपमेंट्स के साथ। अपस्यु के पूरे हालत का जायजा लिया गया। जबड़े की हड्डी गई, कंधा डिस्लोकेट, एक कलाई की हड्डी में खिंचाव और उसके साथ में शरीर पर अन्य छोटे बड़े चोट। पूरा आकलन और कम से कम 20 दिन का वक़्त रिकवर होने में।

चेहरे पर कटने या फटने के निशान ना आए, उसके लिए डॉक्टरों ने किसी लेजर टेक्नीक का इस्तमाल किया और पूरे चेहरे को ही 7 दिनों के लिए कवर कर दिया, केवल नाक मुंह और आंखो के हिस्से को छोड़कर। उसके देखभाल के लिए 2 नर्स और एक डॉक्टर को वहीं रखा गया था और उसी के साथ 2 हाउस सर्वेंट भी 24 घंटे की बंटी हुई ड्यूटी पर लग गए थे।

अगले दिन दोपहर को ही लोकेश के पैसों का भी पूरा भुगतान मेघा कर चुकी थी, लेकिन मेघा को इस बार भुगतान करते हुए ऐसा लगा जैसे उसके हिस्से की प्रॉफिट तो नहीं मिली, उल्टा घाटे के नाम पर जमा पूंजी भी उससे वसूली जा रही है। रात को ही जिंदल, मेघा और हाड़विक तीनों मीटिंग के लिए बैठे, जहां इस बात पर विचार होने लगा कि इस लोकेश को कैसे तोड़ा जाए।

सबने आखरी मुहर लगाते हुए यह फैसला लिया की… "जेम्स और उसकी टीम को अपना काम करने दिया जाए। उसके होते अगर पैसों की हेरा-फेरी में आगे कोई सेंध लगता है, तो वो जेम्स के हत्थे चढ़ जाएगा और सामने से वार करने वाला छिपा हुआ इंसान हम सब के सामने होगा।

"वहीं अपस्यु है तो पूरा एडा, लेकिन यदि उसे लोकेश के साथ भिड़ा दिया जाए तो नतीजे जरूर कुछ चौंकाने वाले मिल सकते है। इसके लिए पहले अपस्यु को प्रोजेक्ट क्लियर करने देते है। पहले ध्रुव इंडिया जाकर काम को सैटल करेगा बाद में मेघा वहां का चार्ज लेगी और फिर शुरू होगी लोकेश और अपस्यु के लड़वाने की प्रक्रिया।"

ऐसा लग रहा था जैसे अपस्यु ने पूरे जिंदल परिवार के पास सिर्फ एक ही नाम छोड़ा था, जो उसके उम्मीदों कि कसौटी पर सबसे खड़ा उतरता हो। स्वस्तिका की दूरदर्शिता और योजना को सुचारू रूप के साथ आगे बढ़ने का नतीजा दिखने लगा था। कौन किसके जाल में फसा ये तो आने वाला वक़्त तय करता लेकिन यहां हर कोई अपनी योजना में सफल दिख रहा था।

इसी की एक कड़ी अभी अभी इंडिया लैंड कर चुकी थी। एंगेजमेंट की रात मनीष और राजीव के बीच के झगड़े की वजह बनी थी मनीष का व्यंग जो उसने भरी सभा में नंदनी के लिए कहा था। राजीव को ये कतई पसंद नहीं आया और वो अकेले में अपने भाई से जवाब तलब करने गया।

वहीं पर विवाद ऐसा बढ़ा की मनीष ने राजीव को वह सब कह डाला जो उसे नहीं कहना चाहिए थे। धोखे के कमाई के हिस्से में भी धोखा ही मिल रहा था। मनीष ने वो सारे खर्च पैसे का हिसाब ले लिया जो अब तक उसने यूएस ट्रिप पर खर्च किए थे। मज़ा तो तब आ गया जब इंटरनेशनल अकाउंट केवल मनीष का था जिसपर दोनों भाई के ब्लैक मनी जमा होते थे।

राजीव ने जब ब्लैक मनी का हिसाब पूछा तो जवाब में मनीष ने उसे ठेंगा दिखाते हुए कहने लगा.. "ब्लैक मनी का कैसा हिसाब। सबके पास अपने ब्लैक मनी अकाउंट है, इसमें मै क्या हिसाब दूं। तुम अपने इंटरनेशनल अकाउंट से मेरे अकाउंट में हिसाब के पैसे ट्रांसफर कर सकते हो, मुझे कोई आपत्ती नहीं।" कमाल ही हो गया था। गम पीकर राजीव अपने सलारी अकाउंट से 22 लाख का पेमेंट किया और उसके खाते में अब 12 हजार रूपए बचे थे और होटल का फाइनल पेमेंट अभी बाकी था।

अपस्यु रात के वक़्त सुलेखा के साथ कुछ बातें करने पहुंचा था और तभी उन दोनों ने ये सब सुना। भाई के धोखे से जहां राजीव स्तब्ध था, वहीं सुलेखा बुझे मन से इतना ही कह रही थी… "लगता है कर्मा भी अपना काम कर रहा है, मुझे कोई गम नहीं की बड़े भाई ने ऐसा किया। ये तो खुद राजीव के कर्म है।"..

फ्लाइट लैंड करते ही राजीव अपने ऑन ड्यूटी पर था। हालांकि उसकी अंतरात्मा उसे धिक्कारते हुए आत्मसमरपण के लिए कह रही थी, लेकिन अपने कर्मों का फल भुगतने से पहले राजीव जितना हो सकता था उतना अपने पोस्ट का इस्तमाल करना चाहता था, ताकि उसे जेल होने से पहले इतना सुकून रहे की इस जीवन में कुछ तो अच्छा किया।

होम मिनिस्टर ऑफिस आज सुबह से अपना काम कर रही थीं। इसी क्रम में कई सारे रुके फाइल्स पर मंजूरी मिल गई, वहीं इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट के लिए जमीन अधिग्रहण मामले में हुई धांधली की कई फाइल खोली गई और 20 कंपनी को सम्मन भेजा गया। इसमें सबसे ज्यादा नोटिस मायलो ग्रुप को ही भेजा गया था, जिसपर आगे स्टे लग जाता तो कंपनी औंधे मुंह नीचे गिर जाती। जिन-जिन लैंड के लिए मायलो ग्रुप को सम्मन भेजा जा चुका था वहां मायलो ग्रुप के अब तक 40000 करोड़ खर्च कर चुकी थी, जिसमे 30000 करोड़ तो बैंक से उठाया गया था।
 
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