Romance भंवर (पूर्ण) - Page 33 - SexBaba
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Romance भंवर (पूर्ण)

Yess aman ji ... Waise shuru se hi dikh raha tha bus thoda sa dhyan dena tha ki apasyu aur Aarav 2 mahine pahle Delhi aakar us bade se adhikari ke ghar ke samne kaise hain .. aur kaise itne bade adhikari ke ghar me itni aasani se aa ja rahe hain... Baki ab to puri open story hai... Dekhte hain aage aap ko pasand aata hai ki nahi :)

:thanks: for your appreciation, apni rai dete rahiyega :hug:
 
Nana usse nich hai ki nahi but uske barabar wale log ab bhi to jinda hain ... Kahani unhi kirdaron ke liye hai to .. sabka badla lega re tera ye Apasyu :D

:thanks: for your appreciation, apni rai dete rahiyega :hug:
 
Hahaha ... Kya hi kare .. aap logon ki demand par aise scene a ahi jata hai :D aabko ikchha thi Kabir se badla .. bahan ne le liya badla :D

:thanks: for your appreciation, apni rai dete rahiyega :hug:
 
Mujhe b laga ki ek aur baar yadi Apasyu ko hospital pahuncha diya fir to sab mujhe hi hospital me litane ki taiyari karne me jut jayenge .. isliye plan cancle karwa diya :D

Abhi to unka scene aana hai .. Apasyu aur Aimee dono nikle to hain dhruv ke ghar lekin trap ki situation to nahi honi chahiye kyonki apasyu abhi open kahan hai .. haan baki dekhiye kya hota hai...

Haan scene abhi Kabir aur kunjal ke bich bhi adhure hi hain .. wahan bhi aane wala waqt he batayega .. kisne kitna hisab kiya ... :D

:thanks: for your appreciation, apni rai dete rahiyega :hug:
 
Thanks bade bhaiya .. aap ko dekhne ke liye akhiyan pathra si gayi thi.. aap ne jo Samiksha ki hai wo kabile taruf hai .. padhkar maza aa gaya..

Iske aage kuch na bol sakta ki kaun se office wale ne chutti di hai din me waqrna bhai aaj kal garam jaldi ho jate hain :D
 
Yo sabhi riston me pyar bana rahe dua kijiyega :D .. baki aap ke comment padh kar dil khush ho gaya

:thanks: for your appreciation, apni rai dete rahiyega :hug:
 
Kunjal ko bol dunga akash se mafi mang le aur kah de ki agli baar reason ke sath marungi.. waise kunjal ko agar wahan bhej diya jaye aap ke prashikshan ke liye .. I mean .. kunjal as your madam and u r student .. mujhe lagta hai aap jaldi bahut kuch sika jayenge ..

Baki mast laga comment padhkar aise hi support karte rahne ka re baba :yo: :yo:
 
Sachi ki apni kismat hai.. maine kuch na kiya us bechari ke sath .. haan lekin mujhe b utna hi dard hai usle liye jitna aap ko :D

Nana Pallavi ki shadi ho gayi hai... Aarav ke liye Lavni hi sahi hai :D ..

Ab Apasyu ne kya kiya wo mar gaya to kya doc sahab ko hero bana dun .. ya main khud kalam chhod kar hathiyar utha lun...chalo romance to ho jayega .. par action kaun karega .. 😠

Imli ko kuch nahi kahne ka .. she is the heart of this istory :)

Maine to hint bhi diya tha bich ke update me Aimee hi crazy boy hai .. but ju r concentrated drama series ishq risk .. yahan dhyan hi nahi diya :D..

Baki... :thanks: for your appreciation, apni rai dete rahiyega :hug:
 
Update:-71

दरवाजा खुलने के आवाज़ के साथ ही लावणी कम्बल के अन्दर घुस गई और आरव करवट लेकर पलटा और नंदनी के ओर देखने लगा….

नंदनी:- मै तुम्हारे कमरे में क्यों आयी थी?

आरव:- मां अब मुझे क्या पता कि आप क्यों आयी थी?

"हां ये भी सही है।" नंदनी इतना कहती हुई पलट गई और वापस जाने लगी। इसी बीच कंबल के नीचे से लावणी ने आरव के गले पर किस्स करती हुई उस जोरों से काट ली, नंदनी अभी पीछे मुड़ी ही थी कि आरव की दर्द भरी चींख निकल गई… "क्या हुआ, तू ऐसे चिल्लाया क्यों।" नंदनी वापस पलटती हुई पूछने लगी।

आरव:- कुछ नहीं मां लगता है कम्बल में कोई खून की प्यासी कीड़े ने जोड़ का काट लिया है।

"हुंह ! खाली नाम का 5 स्टार होटल है, और अंदर ऐसे कीड़े चलते हैं। चल उठ देखूं किस कीड़े ने काटा है, कहीं जहरीली हुई तो…" नंदनी अपनी बात कहती हुई कम्बल खींचने के लिए हाथ बढ़ाई ही थी कि तभी आरव उसे रोकते हुए कहने लगा…. "नहीं, नहीं मां मत खींचो कम्बल।"

नंदनी:- हद पागल हो तुम, देखने तो दे की किस कीड़े ने काटा है।

"आय आय रे"… "जहरीली कीड़े" का बदला लेती हुई लावणी ने इस बार पीठ पर दांत काट ली… अब तो नंदनी बढ़ ही गई कम्बल हटाने के लिए… तभी एक बार फिर आरव जोड़ से चिल्लाते हुए… "नहीं मां नहीं… मत हटाओ कम्बल।"

नंदनी:- तुम इतना पागलों कि तरह चिल्लाकर क्यों माना कर रहे। कम्बल के नीचे किसी को छिपकर तो नहीं रखा?

आरव:- हां लावणी को कम्बल के नीचे छिपा रखा है, अभी आप कम्बल हटाओगी और वो फुदक कर बाहर आ जाएगी…. "आहहहह" इस कीड़े की तो.. बहुत परेशान कर रखा है।

नंदनी:- बेटा अगर कम्बल से लावणी निकली ना तब तो तेरा जुलुश मै अपने हाथों से निकालूंगी.. अभी दूध का दूध और पानी का पानी किए देती हूं…

आरव:- पागल हो गई है आप, मत छुओ कम्बल..

नंदनी:- अब यदि तूने नहीं बताया ना की मुझे क्यों रोक रहा है फिर मै तुम्हे बताती हूं।

आरव:- अरे मेरी भोली मां, मैंने अंदर कोई कपड़ा नहीं डाला.. एक भी कपड़ा नहीं।

नंदनी:- कैसा बेहूदा है रे.. अच्छा सुन है कुंजल कहां है, अपने कमरे में नहीं थी।

आरव:- कॉल लगा कर पूछो ना कहां है..

नंदनी वहीं से कुंजल को कॉल लगाती…. "कहां है मेरा बेटा।"… "मां मै वीरे जी के साथ हूं, कोई काम था क्या?"…. "नहीं कोई काम नहीं था बस ऐसे ही फोन की थी, कोई नहीं तुम वीरे के साथ घूमो। अच्छा सुन, अपस्यु को कहीं देखी है क्या?"……. "मां, भाई और ऐमी कहीं निकले है बाहर, मैंने नहीं पूछा वो कहां गए है। मै कॉल लगाकर पूछ लूं क्या?"….. "नहीं रहने दे, उसे भी घूमने दे। अच्छा सुन मै अनिरुद्ध (सिन्हा जी) जी के साथ बाहर जा रही हूं, डिनर भी बाहर ही करूंगी, तुम लोग खा लेना। ठीक है बेटा।" …… "ठीक है मां, अब मै फोन रखुं।"…

नंदनी फोन रखती हुई आरव को एक बार देखी, वो अब भी करवट लिए हुए थे…. नंदनी उसे देखकर वहां से निकल गई। उसके जाते ही आरव उठा और जाकर सबसे पहले दरवाजा बंद किया, जबतक लावणी कम्बल के बाहर आ चुकी थी… "ऐसे दरवाजा क्यों बंद कर रहे हो जी।"… लावणी थोड़ी सहमी हुई सी पूछने लगी..

आरव:- बेबी बहुत तुमने काट लिया, अब जो भी होगा इस बंद दरवाजे के अंदर ही …. ही ही.. होगा.... सुनो लव ये क्या कर रही हो। मत करो ना प्लीज।

आरव अपनी बात कहता जबतक दरवाजा बंद करके पलटा, तब तक लावणी अपना टी शर्ट उतारकर बैठी हुई थी। केवल कली ब्रा पहने वो आरव के दिल पर जैसे बिजली गिरा रही थी। आरव का गला सूखने लगा था, नजरे जो बार-बार लावणी के खुले बदन पर अटक जाती और दिमाग दरवाजे पर था कि कहीं कोई आ ना जाए…

लावणी:- क्या हुआ मेरे भोले पंछी, तुम्हारी हालत कुछ ठीक नहीं लग रही। मुझे लगा मेरी टी-शर्ट तुम्हे परेशान कर रही होगी। आओ भी बेबी, इतने दूर क्यों खड़े हो।

आरव अपना मुंह फेरते हुए पीछे दरवाजे के ओर घूम गया… "लावणी, मेरे प्राण सुख रहे है। तुम्हारा ये अवतार एक मन को बेचैन कर रहा है तो दूसरे मन को परेशान। प्लीज टी-शर्ट पहन लो, इस वक़्त कोई भी आ सकता है। मेरा पूरा खानदान भूतों का खानदान है, कोई कभी भी आ धमकेगा।"

लावणी:- अच्छा ऐसी बात है क्या? लेकिन टी-शर्ट में मैं तो तुम्हे बच्ची दिखती हूं ना, पीछे मुड़ कर चेक तो कर लो कि मैं बच्ची दिख रही हूं की पूरी जवान।

आरव:- उफ्फ, ऐसी बातें मत कहो, मेरे अंदर क्या चल रहा है तुम समझ नहीं सकती। ऐसे वक़्त में जान बूझ कर अपने लवर को टीज करना अच्छी बात नहीं।

आरव अपनी बात ख़त्म ही किया था कि उड़ती हुई स्कर्ट उसके सिर से लेकर चेहरे को ढक दी…. और लावणी खुलकर हंसती हुई कहने लगी… "उफ्फ ये तेरा शर्माना। मुझे लगा कल तुम मुझे नीचे लहंगे में देखकर ज्यादा अच्छे से जज नहीं कर पाए होगे ना। अभी पीछे मुड़ भी जाओ ना लव।"

आरव, लंबी-लंबी श्वांस खिंचते…. "लावणी, बेबी ये देखने का प्रोग्राम आज लेट नाइट रखो ना, मै पूरी विस्तृत जानकारी दूंगा।

इस बार ब्रा और पैंटी दोनों साथ उड़ते हुए आरव के सिर पर लैंड हुई…. "ऐसे लंबी श्वांस लेते और बेकाबू धड़कन के साथ पीछे क्यों मुड़े हो? अभी से जायजा करो, फिर लेट नाइट क्या सुबह तक समीक्षा करते रहना जान। अब मुड़ भी जाओ ना।"… लावणी शरारत भरी अपनी अंदाज़ से आरव को पागल बनाए जा रही थी। उसकी बातें सुनकर आरव का नियंत्रण खोता सा जा रहा था।

आरव ब्रा और पैंटी को अपने हाथ में लिए उसे देखने लगा। पीछे की कल्पना करके उसकी श्वांस चढ़ने लगी। लंबी श्वांस खींचकर उसने अपनी आंखें बंद की और अपने मचलते ख्यालों के साथ पीछे मुड़ा और अपनी आखें खोली…. "हीहीहीहीही…हीहीहीहीही…. हीहीहीहीहीहीहीहीहीही…" जोड़ जोड़ के खिलखिलाकर लावणी के हसने की आवाज गूंज रही थी और वो आरव का झुंझलाया चेहरा देखकर और भी जोड़-जोड़ से हसने लगी थी।

"अभी बताता हूं तुम्हे मैं लावणी… मेरा दिमाग तबसे घुमा कर रखी हो।.. जबतक बेचारा आरव धड़कते और मचलते अरमान के साथ पीछे मुड़ा तब तक लावणी स्लीवलेस शॉर्ट सेट पहन कर तैयार खड़ी थी।

आरव तेजी से उसके ऊपर झपटते पीछे से उसके कमर को पकड़ा.. और उसके गर्दन के नीचे अपने दांत गड़ाते हुए कहने लगा…. बहुत मस्ती चढ़ी है।.. रूको अभी बताता हूं।"…… "हीहीहीहीही…हीहीहीहीही…. हीहीहीहीहीहीहीहीहीही.. आरव, ऐसे कोई करता है क्या, तुम तो वहशी की तरह अपने दांत गड़ा रहे।"..

आरव:- हुंह ! मां के सामने ही मुझे फसा रही थी, अभी टीज कर रही थी। अब तो मै नहीं रुकने वाला..

लावणी:- हीहीहीहीही…हीहीहीहीही…. अच्छा सुनो आज रात भर मै तुम्हारे साथ ही हूं, तो अभी हम चलें कहीं घूमने, फिर आराम से मुझे रात भर बताते रहना जो भी बताना हो।

आरव, लावणी को पलट कर उसकी आखों में देखते हुए, नजरों से ही पूछने लगा… "क्या सच में ऐसा होगा"… लावणी भी अपने चेहरे पर फैली मुस्कान के साथ जब नजरे नीचे झुका ली, फिर तो उसकी स्वीकृति को समझकर आरव उसे बाहों में भरकर चूमते हुए नीचे उतरा और भागकर तैयार होने चला गया।

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इधर स्वस्तिका जब घोड़े बेचकर सो रही थी तभी उसे ऐसा लगा कि कोई उसे पाऊं से खींचकर नीचे गिरा रहा है। उसने अपनी जब आखें खोली तब पार्थ उसके पाऊं को खींच रहा था…. "पर्था, छोड़ ना जाग गई हूं।…

पार्थ:- जाग गई है तो जल्दी तैयार हो जा, बहुत दिन हुए बातें किए।

स्वस्तिका:- ठीक है रुक 2 मिनट, अभी आयी..

स्वस्तिका झटपट तैयार होकर उसके साथ निकली। दोनों पैदल चलते होटल के बाहर आ गए। दोनों खामोश चल रहे थे तभी स्वस्तिका कहने लगी…. "तू इतना खामोश मतलब तुझे फिर प्यार हुआ क्या?"..

पार्थ, स्वस्तिका के ओर घूमकर उसे देखते हुए मुकुराने लगा और हां में सर हिलाते कहने लगा… "तू तो जीनियस है नॉटी।"

स्वस्तिका:- पूछ सकती हूं तेरा आवारा दिल अब किस लड़की पर आया है…

पार्थ:- तुझपर और किसपर..

स्वस्तिका:- ठीक है मुझे मंज़ूर है। चल अब अपनी गर्लफ्रेंड को किस्स कर।

पार्थ:- रुक रुक रुक.. तू इतना फास्ट जाएगी तो कैसे काम चलेगा.. मै तो स्लो हूं ना…

स्वस्तिका:- हां तेरी स्लो नजर हम सब ने पढ़ी थी, जो सुबह कुंजल से हटा कर किसी दूसरे पर लाते हुए कई मिनट लग जाते थे।

पार्थ:- "हम सब ने" से तुम्हारा क्या मतलब.. कहीं आरव और अपस्यु ने तो भी नहीं पढ़ लिया।

स्वस्तिका:- हम सब का मतलब तुझे समझ में नहीं आती क्या?..

पार्थ:- तुम्हारा सजेशन…

स्वस्तिका:- तू मुझ से मेरी ही बहन के बारे में सजेशन मांग रहा है, एक कारन बता की मैं तेरा नाक अभी क्यों ना तोड़ दू?

पार्थ:- अरे यार, अब तुम लोग नहीं सजेस्ट करोगी तो कौन करेगी।

स्वस्तिका:- बहुत बड़े वाला केस है तू पार्थ… तुझसे अपस्यु ने कुछ कहा क्या ?

पार्थ:- नहीं।

स्वस्तिका:- तुझ से आरव या ऐमी ने कुछ कहा क्या?

पार्थ:- नहीं।

स्वस्तिका:- बात सिंपल है, हम सब एक परिवार है। तुझे यदि कुंजल पसंद है और कुंजल को तू पसंद आ गया तो इससे ज्यादा खुशी की बात हमारे लिए क्या हो सकती है। लेकिन तुम दोनों के बीच छोटी सी गलतफहमी पूरे परिवार में टेंशन का माहौल बना सकती है। इसलिए ये फैसला तुम दोनों को करना है, दोनों ही समझदार हो और दोनों के फैसले के बीच में कोई भी परिवार का सदस्य नहीं आएगा।

पार्थ:- रहने दे, ये सिचुएशन ही डार्क टाइप फील हो रही है। वैसे भी वो मुझे एकतरफा पसंद आयी है तो बात यहीं खत्म करते है।

स्वस्तिका पार्थ की बात कर हंसती हुई कहने लगी…. "बेबी तुम भाग और छिप तो सकते हो, लेकिन प्यार से बच नहीं सकते। फिलहाल पहली नजर थी तो यही मनाओ की यह मात्र एक आकर्षण हो…

पार्थ:- तू ही क्यों मिली इस बात के लिए। मुझे समझ जाना चाहिए था कि तेरे से बात करूंगा तो तू मुझे सीधे बताने के बदले कंफ्यूज करेगी। मै ऐमी से ही सलाह ले लूंगा। और ये बता ये जो तू मुझे लैक्चर सुना रही है.. तेरे और उस अहद अली के बीच क्या हुआ था.. तू तो कहती थी कि ये मेरा ट्रू लव है।

स्वस्तिका:- मै ऐसा थोड़े ना कहती थी, वो तो उसने मुझ से ऐसा कहा था.. पहली ही डेट पर फिर सभी तरह के उसके ख्यालात बदल गए…

पार्थ:- और मैडम ऐसा कैसे हो गया था..

स्वस्तिका:- मेरी इक्चा नहीं हुई की मै कोई फ़ैशन करके उसके साथ डेट पर जाऊं और बेचारे के दोस्तों ने उसे इतना छिला की उसने रोते-रोते मुझ से ब्रेकउप कर लिया।

पार्थ:- सिचुएशन की डिटेल प्लीज।

स्वस्तिका:- 3 कपल, 1 वीक, लुनावला का टूर प्लान हुआ। मै कार में बैठ ही रही थी कि उसका एक दोस्त अहद को ताने देते हुए कहने लगा.. "साला काम वाली बाई को गर्लफ्रेंड बना कर लाया है।".. ऐसी बात सुनकर ही बेचारे का छोटा सा मुंह हो गया था, मुझे बहुत दया आयी थी उसका उतरा सा छोटा चेहरा देखकर। पूरे रास्ते उसके दोस्त हमे देखते और उसपर हंसते… शाम को जब हम कमरे में थे तब उसने रोते-रोते कहा था मुझसे, ये रिश्ता नहीं टिक पाएगा, इसलिए अभी हम ब्रेकअप करते हैं। मै उसे कहीं भी ना टिके रिश्ता उसपर बाद में बात कर लेंगे लेकिन अभी हफ्ते भर है, एन्जॉय करके चलते हैं। लेकिन शायद वो अपने दोस्त और उसके गर्लफ्रेंड के ताने को सह नहीं पाया। जिस प्यार को वो मुझमें ढूंढ़ रहा था, मात्र दूसरों के ताने के कारन उसने भी रूप को तवोज्जो दिया और मुझसे ब्रेकअप कर किया। बस ऐसे हो गया हुअमार ब्रेकअप।

पार्थ:- लगे हाथ इसका परिणाम भी बता ही दो…

"हीहीहीहीहीही… परिमाण… रात को एम्बुलेंस में तीनों लड़के जा रहे थे। तोड़ने में फिर मैंने कोई रहम नहीं किया था। फिर तो मुझे उस अहद का मासूम चेहरा और आशु भी ना दिखे, जिसे मैंने सबसे पहले तोड़ा।… स्वस्तिका हंसती हुई कहने लगी…

दोनों लगभग अर्शे बाद मिल रहे थे। बीच की जितनी भी घटनाएं दोनों के जिंदगी में हुई थी दोनों उसपर बात करते रहे और एक दूसरे साथ घूमते रहे…

इधर नंदनी और सिन्हा जी की लगभग एक जैसी ही कहानी थी। दोनों ने एक ही वक़्त कर अपने सबसे अजीज को खोया था। किसी के जाने के एहसास को तो ये दोनों भी सीने मै दबाए थे। वो भी इनके ऐसे अजीज खो गए जिनके बिना दोनों ही अधूरे हो गए।

नंदनी और सिन्हा जी काफी वक़्त बाद हम उम्र के साथ वक़्त बीता रहे थे, शायद आज से पहले कभी कोई ऐसा मिला ही नहीं जिसके दर्द उनके दर्द के बराबर हो। दोनों की शाम भी बातों में कट गई। डिनर करके दोनों ही फुर्सत हुए थे और सड़कों पर पैदल ही चले आ रहे थे। तभी नंदनी जिज्ञासावश सिन्हा जी से अपने अंतरमन में उठ रहे एक तीर जैसे प्रश्न को सिन्हा जी के पास रख दी…

"माफ़ कीजियेगा अनिरुद्ध जी, मेरे बेटे ने तो मना किया था बीती किसी बात की चर्चा नहीं करने, लेकिन एक सवाल जो मेरे मन में शुरू से उठ रही है, जो कि शायद आप के जिंदगी से जुड़ी कुछ निजी सवाल है, क्या आप मुझे उसके उत्तर देने में सहज होंगे। खासकर उस खौफनाक रात की घटना से जब जुड़े सवाल हो।"… नंदनी ने बड़ी ही सरलता से अपनी दुविधा सिन्हा जी को बताकर उनके जवाब का इंतजार करने लगी।

सिन्हा जी:- उस घटना का जिक्र ही सिना चिर देने वाला है, लेकिन आप उसकी मां है जिसने मुझे और मेरी बच्ची को बेसहारा समय में सहारा दिया था। आप के मन में उठे हर शंका का जवाब मै बिना भावुक हुए देने कि कोशिश करूंगा।

"हम्मम ! बस मुझे इतना जानना था कि जब हर किसी की पहचान हो गई थी, तब उन कातिलों को आपने भरी अदालत में क्यों नहीं घेरा? उन्हें क्यों सजा नहीं दिलवा पाए, जबकि आपके पास चश्मदीद गवाह थे? आपके पास तो पैसा, पॉवर और रूतवा तीनों ही थे जिससे आप गलत को भी सच साबित कर सकते है, फिर इतने बड़े झाख्मों का हिसाब लेने में आप पीछे क्यों हट गए?
 
Isi ko to good planner kahte hain bhai ji.. waise bhi jis desh me nasha funk kar hi sare naye kaam ki surwat ho wahan planning karna kaun si badi baat hai :D.. hospital ka scene aage hi hai ji
 
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