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साची के जिस कन्फ्यूजन के चेप्टर को अपस्यु अभी-अभी क्लोज करके आ रहा था, उससे पार्थ और स्वस्तिका अंदर से काफी चिढ़े हुए थे और दोनों अपस्यु से काफी खफा नजर आ रहे थे।
अचानक से आए प्लान में इस बदलाव से पार्थ और स्वस्तिका इतने नाराज हुए की दोनों ने कुछ घंटे के अंदर आपातकालीन मीटिंग की योजना बनाते हुए सबको संदेश भेज दिया। आरव और ऐमी के बीच थोड़ी सी बातचीत के बाद रात के 12.30 बजे कमरा नंबर 806 में ही बैठक का स्थान तय हुआ।
रात के 12.30 बजे सभी लोग वहां पहुंच चुके थे, वहां का सर्विलेंस और सुरक्षा के सरा इंतजामात ऐमी के जिम्मे था। ऐमी उस जगह को पूरा परखनेंके बाद मीटिंग शुरू करने का इशारा की…
पार्थ ने मीटिंग की सुरवत करते साची और अपस्यु से जुड़े आज रात की बातचीत को लेकर जहां सवाल खड़े किए, वहीं योजना को बीच में ही बदलने के लिए स्वस्तिका ने अपस्यु से अपने गुस्से का इजहार किया।
अपस्यु एक-एक करके सारे सवालों का जवाब देता, उनकी सारी चिंता और गुस्से को दूर करते हुए, नए संभावनाओं कि ओर सबका ध्यान आकर्षित करवाया। इसी दौरान विक्रम सिंह और मयलो ग्रुप की भी पूरी जानकारी साझा की गई। बातों के दौरान यह भी पता चला की इस जिंदल के बेटे के एंगेजमेंट में लगभग सभी मुख्य टारगेट एक साथ इकट्ठा होंगे, जहां विक्रम सिंह के भी आने की पूरी संभावना है।
यहीं एक वजह थी कि, जिसकी सोच के साथ अपस्यु ने आरव का एंगेजमेंट जिंदल के बेटे के साथ नहीं होने दिया, ताकि नंदनी और विक्रम आमने-सामने ना हो। हालांकि अपस्यु ने यह भी साफ कर दिया कि जो खेल विक्रम ने खेला था, उसका पूरा न्याय करने के लिए नंदनी और विक्रम जल्द ही आमने-सामने जरूर होंगे, लेकिन उससे पहले कुछ तैयारियां पूरी होनी जरूरी है।
लगभग 2 घंटे चली इस मीटिंग में नए बदलाव के साथ सभी को अपने-अपने काम मिल चुके थे। स्वस्तिका को 3 महीने का वक्त मिला था, जिसमे वो कुंजल को इतना तो तैयार कर ही दे कि, मुसीबत में वो अपनी और अपने मां कि जान बचा ले। इसी प्रकार उतना ही वक़्त पार्थ को भी मिला था, ताकि वो वीरभद्र को शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व बना दे।
2 भागों में टीम का विभाजन हो चुका था। स्वस्तिका, आरव, पार्थ और उसके साथ वीरभद्र मिलकर मायलो ग्रुप में सेंध लगाने के साथ-साथ नंदनी और कुंजल को सुरक्षित रखेंगे। वहीं अपस्यु और ऐमी का टारगेट जिंदल था। सभी को तैयारी के लिए 3 महीने के वक़्त दिया जा चुका था और सितंबर के आखिर में सब की दिल्ली वापसी तय हो चुकी थी।
लगभग 2 घंटे चली इस मीटिंग में सारे अहम फैसले लिए जा चुके थे, बस अब जरूरत थी खुद के तैयारियों को परखकर आगे बढ़ने की, जिसके लिए अपस्यु ने सबको 3 महीने का वक्त दिया था, और इसी के साथ उनकी सभा भी समाप्त हो चुकी थी।
मीटिंग के समाप्ति के बाद ही, सभी फिर से एक बार जोर से हूटिंग शुरू करने लगे और आरव को एक बार फिर सबने कल के लिए बधाई देते हुए वहां से निकल गए। रात के 2.30 बज चुके थे सब अपने-अपने कमरे में चल दिए आराम करने।
अगली सुबह, सुबह से ही कौतूहल का माहौल था, ना सिर्फ परिवारों में बल्कि पूरे होटल में भी। सुरक्षा के लिहाज से पूरे होटल के गेस्ट को एक दिन पहले ही शिफ्ट किया जा चुका था। 30 जून की सुबह से ही जैसे वहां का माहौल किसी जंग के माहौल में तब्दील हो चुका था। एंगेजमेंट में हाई प्रोफाइल गेस्ट की लिस्ट इतनी लंबी थी, उसमें भी इतने बड़े-बड़े पॉलिटीशियन आमंत्रित थे कि अमेरिका के कई सारे सुरक्षा एजेंसी के कई सारे प्रशिक्षित जवान वहां के चप्पे चप्पे की निगरानी कर रहे थे। उस होटल में रघुवंशी और मिश्रा फैमिली के लोगों को छोड़ कर केवल होटल के स्टाफ ही बचे थे।
खैर सुरक्षा के इंतजामात अपनी जगह थे और लोगों में एंगेजमेंट की उत्साह अपनी जगह, खासकर वहां मौजूद स्त्रियों में। लेकिन अभी सुबह की सबसे पहली प्रहर चल रही थी, यानी कि सुबह के 5 बज रहे थे और इतनी सुबह ऐमी के दरवाजे पर दस्तक होने लगी। 2.30 बजे सोई ही थी कुंजल ने 5 बजे जगा दिया। ऐमी आधी नींद में दरवाजा खोली और कुंजल कमरे के अंदर चली आयी।
कुंजल:- और कितना सोना है ऐमी, जाओ तुम्हें साची ने बुलाया है।
ऐमी:- कुंजल… सोने दो ना .. बाद में देखती हूं उसे।
कुंजल:- देखना तुम्हे नहीं है, देखेगी वो तुम्हे, जाओ..
ऐमी कुंजल को खींच कर बिस्तर में ले ली और उसके हाथ पाऊं जकड़ कर बोलने लगी…. "चुप चाप सो जाओ, और मुझे भी सोने दो।"
कुंजल:- ऐमी, ये सब क्या है, छोड़ो मुझे प्लीज।
"क्यों, कोई लड़का ऐसे जकड़ कर रखेगा तभी मज़ा आएगा क्या? कुंजल मेरी नींद खराब ना करो…" ऐमी अपनी बात कहती हुई कुंजल को अपने जकड़ से मुक्त कर दी। कुंजल लाख कोशिश करती रही लेकिन ऐमी अपने कानो में रुई डालकर सो गई।
थोड़े ही देर में वहां का माहौल शांत हो गया और ऐमी वापस से नींद की गहराइयों में चली गई। ऐमी नींद की गहराइयों में थी, तभी उसके गाल पर एक जोरदार तमाचा परा। अचानक से नींद में आए खलल से ऐमी चौंककर बैठ गई और अपनी ललाट चढ़ा कर आखें खोली…. "मेरी इतनी सारी नींद हराम करके खुद चैन से सो रहे मिस्टर क्रेज़ी बॉय।" … साची बिस्तर पर बैठी उसे घूरती हुई कहने लगी…
ऐमी:- साची मैं तुमसे हाथ जोड़ती हूं प्लीज़ अभी चली जाओ, सोने दो मुझे। बाद में जब आऊंगी तो जितने जी चाहे थप्पड मार लेना, लेकिन अभी प्लीज सोने दो।
ऐमी नींद के आलम में उसे कहती हुई वहीं बैठे बैठे अपनी आखें मुंदी ही थी कि तभी दूसरे गाल पर भी जोरदार तमाचा परा…. "पागल हो गई हो क्या साची, सुबह-सुबह मुझे गुस्सा मत दिलाओ।'..
"तुम्हारा लवर मुझे ताने देकर कहता है कि, क्या वर्चुअल आईडी थी तो उसका इमोशन भी वर्चुअल होगा? यहां तुम्हारी अननॉन गर्ल तुमसे मिलने आयी है और तुम्हारे ये गुस्से से भड़ा इमोशन देखने मिल रहा। कहां है तुम्हारा वो चाहत वाला इमोशन क्रेज़ी बॉय"…. साची अपनी बात खत्म करके फिर एक जोरदार थप्पड लगा दी ऐमी को…
इस बार वाकई में मज़ाक-मज़ाक में कुछ ज्यादा ही जोड़ का मार गई साची। इसका प्रमाण इस बात से भी लगाया जा सकता था कि ऐमी के दाएं गाल पर पंजे के निशान छप गए थे और मारने के बाद साची की कलाई में झटके के साथ दर्द होने लगा था।
ऐमी झुंझलाकर अपनी आखें खोली… "अरे पागल, कितना जोड़ की चिपका गई। साची स्टॉप इट प्लीज।"
साची फिर से एक थप्पड बाएं गाल में चिपकती…. "यहां साची नहीं बल्कि, अननोन गर्ल है। और इस अननोन गर्ल का क्रेज़ी बॉय कभी उससे गुस्सा नहीं हो सकता।"…
"तेरी तो"….. कहती हुई ऐमी ने साची को दबोचकर बिस्तर पर लिटाया और उसके दोनों हाथ जकड़कर उसके ऊपर चढ़ गई…. "कामिनी रुको तुम्हे अभी क्रेज़ी बॉय की चाहत भी दिखाती हूं।"…
"नहीं नहीं बस इतना ही मिलना था मुझे अपने क्रेज़ी बॉय से तुम अब सो जाओ।"… साची अपनी हालत पर हड़बड़ा कर बोलने लगी…
"तेरा क्रेज़ी बॉय तुझे थप्पड नहीं मार सकता ना, लेकिन जब उसके कमरे में आयी तो ये भी सोच कर ही आयी होगी की क्रेज़ी बॉय के अरमान क्या है।"… ऐमी, अपनी पकड़ और मजबूत बनाती हुई कहने लगी।
"अरे प्लीज, प्लीज, प्लीज, छोड़ो मुझे, अननोन गर्ल का भूत उतर गया मेरे दिमाग से।"… साची लगभग मिन्नतें करती हुई कहने कहीं..
"बेबी अब तो तुम्हे बताना ही होगा कि सुबह-सुबह बिना ब्रश के मुंह चबाने में कैसा लगता है।"… इतना कहती हुई ऐमी, साची को जबरदस्ती किस्स करने लगीं। साची नीचे से "उम्म्म, उम्म्म" करती अपने चेहरे को दाएं बाएं हिलाती रही लेकिन ऐमी आज तो पूरा मूड बना कर आयी थी, बिना ब्रश कैसे मुंह कैसे चबाते है वो दिखाने।
साची किसी तरह उसे झटका देकर उठी और गुस्से से लाल होती ऐमी को देखने लगी। साची के बाल बिखरे, आखें लाल और अजीब सा चेहरे का एक्सप्रेशन, उसकी इस हालत पड़ ऐमी जोर-जोर से हसने लगी। उसे हंसते देख साची गुस्से में उसके बाल नोचने के लिए उसपर झपटी… ऐमी पीछे हटती हुई कहने लगी… "ओह माय क्रेज़ी बॉय… आह्हः, उफ्फ.. प्रेस माय"…. "ऐमी की बच्ची चुप हो जाओ वरना।"…
ऐमी:- हीहीहीहीहीही… क्यों अपने क्रेज़ी बॉय के एरोटिक इमोशन संभल नहीं रहे…
साची भी ऐमी की बात सुनकर जोर-जोर से हंसने लगी।… "कामिनी लेस्बो".. साची हंसती हुई ऐमी से कहने लगी।
"और इसका क्रेडिट जाता है मिस साची उर्फ अननोन गर्ल को। वैसे तुझसे चैटिंग के चक्कर में मैंने अपनी उंगली बहुत घीसी है, यहां भी घिस लेंगे, आदत तो तेरी ही दिलाई हुई है।"… ऐमी, साची को आंख मारती हुई बोलने लगी..
साची:- छी, बेशर्म.. वैसे देखा जाए तो तुम दोनों ने पहल करने में इतनी देर कर दी, वरना हम अब तक मिलकर धमाल मचा सकते थे। साथ में मै इतनी परेशान भी नहीं रहती।
ऐमी:- अब तो खुश हो ना साची, या अब भी कोई गिला-शिकवा है।
साची:- नहीं बाबा बिल्कुल नहीं, तुम क्यों अपना मुंह छोटा कर रही।
ऐमी:- नहीं बस ऐसे ही। हमारे वजह से बहुत दर्द तुमने झेले है। अफसोस होता है उन गुजरे वक़्त के लिए।
साची:- कोई बात नहीं है ऐमी, इन बुरे वक़्त ने मुझे इतना तो सीखा दिया है कि आप कितने भी बुरे वक़्त से क्यों ना गुजरे हो, कुछ अच्छा आप के लिए जरूर छोड़ जाता है। मेरी इतनी उम्र में बस लावणी ही थी एक, जिसे दोस्त कह लो, बहन कह लो या पूरा संसार। लेकिन अब देखो, ऐसा लगता है एक पूरी दुनिया है मेरी फ़िक्र के लिए। तुम्हारा और अपस्यु का शुक्रिया। मुझे खुशी है कि मै ही वो बीच की कड़ी थी जो तुम्हारे मिशन के रास्ते में था।
ऐमी:- बस भी करो अब, क्यों अपस्यु बनने पर तुली हो।
साची:- अच्छा सुन ऐमी मेरी एक छोटी सी ख्वाहिश है?
ऐमी:- क्या?
साची:- मै चाहती हूं तुम दोनों आज कि रात ठीक वैसे ही मेरे एंगेजमेंट में आग लगा दो जैसा उस रात वहां डिस्को में लगाया था।
ऐमी:- अरे बुद्भू डिस्को की बात अलग है वहां तो हर कोई नाचता है, लेकिन एंगेजमेंट में वैसा नाचना मुझसे ना हो पाएगा। वैसे भी आज शाम मै शाड़ी पहनने वाली हूं।
साची:- हम्मम ! कोई बात नहीं, लेकिन ऐसा नहीं कि दोनों एंगेजमेंट अलग-अलग हॉल में है तो तुम सब आना ही नहीं।
ऐमी:- कैसी बातें कर रही हो। हम सब वहां होंगे। अब तुम जाओ और अच्छे से सजो सवरो, और प्लीज मुझे नींद पूरी कर लेने दो।
साची:- अच्छा सुन, तुम दोनों उड़ते पंछी, आज जरा कम सज संवर कर आना, वरना कहीं ऐसा ना हो कि पूरे शो का मुख्य आकर्षण तुम दोनों ही हो।
ऐमी:- हीहीहीही.. पागल, ठीक है ऐसा ही करूंगी, खुश।
दोनों कुछ देर और वहां पर बातें करती रही, उसके बाद साची वापस लौट आयी और ऐमी फिर से जाकर सो गई। दिन के करीब 2 बज रहे थे। पहला एंगेजमेंट साची और ध्रुव का था, शाम के 5 बजे से 7 बजे के बीच। कई सारे गेस्ट आने शुरू हो चुके थे, इसी बीच अपस्यु के पास मेघा का संदेश आया।
मेघा का संदेश मिलते ही अपस्यु उससे मिलने उसके स्वीट में गया, जहां सिक्यूरिटी ने उसे दरवाजे पर ही रोक लिया। अपस्यु ने जब उन्हें मेघा का संदेश दिखाया, तब जाकर कहीं उसे अंदर जाने दिया गया…