Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga - Page 5 - SexBaba
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Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga

अपडेट 41

तो अब रमेश कामयाब होगया पायल को छोड़ने में. वह बहोत खुश था. ख़ुशी ख़ुशी नहाना जारी रखा और अपने लुंड को मज़े से करेस किया और उस से बाटें भी की, के ‘तू खुशनसीब है, छोटा भाई की पत्नी को छोड़ने को मिला तुझको, 18 साल की जवान खूब सूरत, हॉट पत्नी की छूट की दर्शन किया तुमने aaj..hahaha’… उधर, जब पायल बाथरूम से निकल कर कॉरिडोर में चली जा रही थी किचन के तरफ तो धानंद की पत्नी रास्ते में मिलगई, तो उस्सने पायल से पुछा, “आरी तेरे कपडे कैसे इतना भीग गयी हैं?” पायल के चेहरे से रंग ुध गए मगर जल्दी से उस ने कहा के वाश बसीं में मुंह धो रही थी तो पानी ज़्यादा ज़ोर से खोल दिया तो छींटें पड़े…

पायल किचन में वापस गयी और काम में मसरूफ हो गयी. रह रह कर याद कर रही थी के रमेश ने किआ किआ किया उस के साथ…. कुछ अजीब लग रहा है उस्सको और कुछ कुछ खुश भी thi….khud को समझ नहीं पा रही थी के खुश क्यों थी उस एनकाउंटर से वह?!!

रमेश नहाने के बाद नौजवानों की तरह फ़िल्मी गाने ज़ोर ज़ोर से गता चला जा रहा था. खुद सोच रहा था के ठीक तरह से पायल से मज़ा नहीं उदय मगर फिर भी एक पहला एनकाउंटर के लिए चाह था उस ने सोचा…. अब किआ वह धानंद को बताएगा? किआ पता….?

देर शाम को जब राजें काम से वापस आया तो पायल नाहा चुकी थी और ड्रेस चेंज कर लिया था. एक चूड़ीदार में थी अब वह. धानंद ने जब पायल को उस ड्रेस में देखा तो रमेश से कहा, “दिन भर पिताजी के साथ और सामने थी तो घागरा चोली में थी, जिस्म दिखती थी बूढ़े को, जब उस्का मरद आगया तो चूड़ीदार में है सटी सावित्री की तरह पूरा जिस्म ढाका हुवा है अब. रमेश तो दिल hi दिल में खुश था के उस ने तो उस्सकी घागरा चोली का खूब लुत्फ़ उठाया बाथरूम mein…apne आप मुस्कुरा रहा था…. धानंद ने अचानक उस से पुछा, “कुछ चांस मिला आज तुकजको पायल के साथ?” रमेश ने भोला बनते हुवे कहा, “नहीं तो, कैसे चांस मिलेगा यार!” तो अब दोनों एक दूसरे से छुपाना शुरू किया.. कब तक एक दूसरे को अँधेरे में रखेंगे देखना है. डिनर का वक़्त आया, और ससुर हमेशा की तरह उस मौके का फायदा उठाते हुवे पायल की शूटरों पर अपना हाथ फेरा जब वो सर्वे कर रही thi…Paayal को पता था वह उस्सको चुवेगा मगर और कोई चारा नहीं था पायल को उस के पास जाकर सर्वे करना hi था नहीं तो शके की गुंजाइश थी…. तो पायल ने बूढ़े को एन्जॉय करने दिया, जहाँ जहाँ बूढ़े का हाथ गया उस ने वहां वहां पायल को चुवा, ऊँगली डाला, टटोला और दबाया… पायल भोली बानी रही ताके किसी को कुछ शके न हो…. एक बार तो पायल को निचे बैठना पड़ा कुछ उठाने के लिए और बूढ़े ने जल्दी से ऊपर देखते हुवे के कोई नहीं देखता तो पायल का हाथ पाकर कर अपने लुंड के ऊपर rakha,…Paayal नीचे बैठी हुवी सर उठाकर ऊपर टेबल पर देखा के कोई उस्सको नहीं देख रहा तो उस ने कुछ देर के लिए ससुर का लुंड हाथ से दबाया और उस्सको खुश किया तब कड़ी हो गयी…

अब खाने खाने के बाद पायल सभी बर्तनों को धो रही थी खीचें में सिंक के paas…akeli थी उस वक़्त….. बाकी के लोग लाउन्ज में टीवी देख रहे थे. सेरिअल्स का वक़्त था. धानंद को पता था के उस्सकी पत्नी सीरियल को हरगिज़ मिस नहीं करेगी तो वह किचन में गया पायल के पास. लुंगी में था वह. और हाँ राजें बहोत थका हुवा था उस्सने पायल को केहड़िया के खाने के बाद hi वह सोने चला जाएगा. सुबह सरेह पांच बजे उठ कर काम को चला जाता है, दिन भर काम के बाद ओवरटाइम करके थका मारा घर अत है तो नींद तो लगेगी hi सवेरे!! तो राजें सोगया था आलरेडी.

धानंद आहिस्ते आहिस्ते दबे पाऊँ किचन में ग़ुस्सा. पीछे से पायल के कमर के निचे से अपना हाथ दाल कर उस्सको जकरा. पायल चाहुँहकी और एक आवाज़ निकल गयी उस के मुहं से, “आईये” धानंद ने उस्सको मसलना शुरू किया अपना लुंड पायल के गांड पर दबाया कपडे समेत, पायल की मुलायम चूड़ीदार पर धानंद का लुंड फिसलता हुवा रगड़े जा रहा था और पायल एक हाथ में एक बर्तन लिए दूसरे हाथ में पानी लिए पता नहीं किआ करती, बस उस्सकी आवाज़ निकली धीरे से होली से, “उफ़! चोरए भी नाह! कोई आसक्त है, मुझको मरवाना है किआ? इस घर से निकलवाना है मुझको! किआ कर रहे हो आप, बस चोरीé भी अब ाः!! Oouuiiie…bus कीजिये भी… हे भगवान्!! मैं किआ करूँ…” धानंद एक हाथ से पायल के पथ को थमा हुवा था पीछे के तरफ खड़े हुवे, और एक हाथ से पायल के गेसुओं को हटते हुवे अपना जीब उस्सकी गले के निचे वाले हिस्से पर फेर रहा था और कमर हिलाते हुवे लुंड को रगड़ता जा रहा था उस्सकी शूटरों पर… पायल चटपटा रही थी धानंद के मज़बूत बाहों में कैद…. धानंद ने कहा, “अपनी मुंह खोलो, जीब निकल जीब…” पायल मुंह नहीं खोल रही थी… धानंद ज़बरदस्ती पायल की मुंह को अपने मुंह में ले रहा था और उस्सकी होंठों को चूस रहा था… इतने में धानंद के पिता की आवाज़ बढ़ती अति है किचन के तरफ, “बहु एक गिलास पानी देना ज़रा….” अस्सल में वह भी एक मौके की तलाश में था पायल को पानी की मगर उस्सको पता नहीं था के धानंद पायल के साथ अंदर है. अपने पिता की आवाज़ को पास आते हुवे सुनकर धानंद ने तुरंत पायल को छोरा और बाहर निकलते हुवे अपने पिता से कहा जो उस वक़्त दरवाज़े ताका ा पोंहचा था, “अरे पिताजी मैं भी पानी के लिए hi आया था, पि लिया अब आप जाईये….”

बूढ़े ने कुछ ग़लत नहीं सोचा क्यों के उस्सने बिल्कुल वैसा नहीं सोचा था अपने बेटों के बारे mein…Ab ससुर अंदर पहुंचा तो उस्सने भी पायल को जकरा अपनी बाहों में, और पायल इंकार कर रही थी.. मगर बूढ़े ने धीरे धीरे हौले हौले पायल को सहलाते हुवे, एक बचे को जैसे दुलार करते हैं वैसे करते हुवे आहिस्ते आहिस्ते बहोत प्यार से मीठी मीठी बातें करते हुवे पायल को मनवा लिया और जल्द hi पायल की बाहें ससुर के कांधों के ऊपर थे और ससुर का जीब पायल की मुंह में, इस वक़्त पायल ससुर की जीब का रस निचोड़ रही थी, और खुद अपनी बदन को ससुर के जसम पर ज़ोर से दबाये अपनी चूचियों को बूढ़े के छाती पर रागढ रही थी और उस्सकी दोनों ेंखें बिल्कुल बांध पायल एक अलग दुन्या में खो गयी थी ससुर के निचे वाला हिस्सा अपनी जिस्म पर फील करते हुवे……. बूढ़े अपने लुंगी पर पायल के हाथ लेकर रखा और पायल ने ससुर के लुंड को अपनी कोमल हाथों से सहलाने लगी किश करते हुवे hi…. बस तब hi सास ने फुकरा, “ाजी सुनते हो! देखो बेचारी हस्पताल चली गयी सीरियल में….”

पायल चाहुँहकी सास जी की आवाज़ सुनकर और किश ब्रेक किया और ससुर से कहा, “जाईये अब आप….” ससुर ने कहा, “ठीक है जी, एक प्लान करता हूँ तुम उस में पार्टिसिपेट करना… मैं अपने कमरे में से तुमको आवाज़ दूंगा के मेरे पेयर में दर्द है ज़रा दबाने को तब तुम आना जब टीवी देखने जाओगी तब. ठीक है? सब के सामने hi तुझको अपने कमरे में बुलाउंगा, किसी को पता भी नहीं चलेगा और हम अपना काम आराम से करलेंगे”…. पायल उस्सको अपने हाथों से धकेल रही थी , “हाँ ठीक है ठीक है अब जाईये आप प्लीज”

तो बे कॉन्टिनोएड………………….
 
अपडेट 42

तो फिर जो होना था वह हुवा भाइयो! कोई आधे घंटे के बाद पायल गयी लाउन्ज में टीवी देखने. ससुर अपने कमरे में चला गया बहोत पहले से hi और इंतज़ार करता रहा के कब पायल लाउन्ज में ए और वह उस्सको फुकरे. अपने कमरे में से कई बार ससुर ने झांकने की कोशिश की ये देखने को के पायल वहां आयी के नहीं और जब देखा के पायल आगयी है तो फुंकारने के लिए रेडी हुवा.

उधर लाउन्ज में पायल को पता था के बूढ़ा अभी फुकरेगा और सरजू को धानंद के गॉड से लेकर दुलार कर रही थी. क्यूंकि राजें सो गया था तो जिस सोफे पर पायल बैठी थी वह फ्री था और धानंद ने किसी बहाने से उठ कर पहले फ्रिज में से कुछ लेने गया और जब वापस आया तो पायल के पास बैठ गया. वह तो इसी मौके के इंतज़ार में था.

जिस तरह उस रात को टीवी देखते वक़्त धानंद ने पायल के जाँघों पर हाथ फेरा था उस ने सोचा आज रात को उस्सकी पंतय के अंदर ऊँगली दाल देगा और उस्का रस चखेगा….. जब धानंद पायल के पास बैठा तो तुरंत पायल ने चारों तरफ देखा के कोई नोटिस तो नहीं कर रहा… पहले पायल की नज़र सासु जी पर गयी मगर उस्सकी ेंखें तो टीवी सेट पर गाड़ी हुवी थी, फिर पायल ने धानंद की पत्नी और रमेश की पत्नी पर अपना नज़र दौड़ाई , वह दोनों भी दिलचस्पी टीवी पर दे रहे थे, तब पायल की नज़र रमेश पर गयी तो उस ने देखा के रमेश चोरी चोरी नज़रों को चुराते हुवे देखने की कोशिश कर रहा है धानंद की एक्शन्स को. पायल उस वक़्त सरजू को स्टैंडिंग पोजीशन पर दोनों हाथों से संभाले उस्सको सोफे पर खड़ा कर रही थी…. बच्चा नन्हे नन्हे पाऊँ पर खड़ा रहने की कोशिश कर रहा था….

धानंद अपना गांड खिसकते हुवे पायल के ज़्यादा करीब पोंहचा सोफे पर और अपना हाथ उस्सकी जाँघों पर रखा इस बहाने से के वह भी सरजू से खेल रहा है…. लाउन्ज में वह लोग टीवी देखते वक़्त लाइट्स ऑफ करदेते थे. तो सिर्फ टीवी के लाइट्स में से सब कुछ नज़र आना मुश्किल था, ख़ास कर जब टीवी देखकर तुरंत किसी और तरफ देखा जाये तो धुंदला सा नज़र अत है, इस वजह से धानंद को पता था के किसी को कुछ नहीं दिखेगा के उस का हाथ कहाँ जाता है अउ किआ करता है…. हर रात की तरह पायल अपनी नाईट ड्रेस पेहेन चुकी थी. निघ्त्य अंदर थी और ऊपर उस्सकी गाउन thi….Nighty तो उस्सकी जांग के ऊपर तक hi अति थी मगर ऊपर जो गाउन थी वह सब कवर करती थी, पर अब जब के वह सरजू से खेल रही थी तो जब तब वह गाउन इधर उधर हो जाती थी जिस से धानंद को पायल की खूबसूरत, गोरी जाँघों का दर्शन करने को मिलता था. और ऊपर जब भी पायल थोड़ा बहोत झुकती थी तो उस्सकी बूब्स नज़र एते थे और धानंद खूब लुत्फ़ उठता था. जब धानंद ने अपना हाथ उस्सकी जांघ पर रखा तो पायल इधर उधर देखने के बाद धानंद के हाथ पर अपनी नाख़ून गराई हलके से, और अपनी होंठों को दांतों में दबा कर धानंद के चेहरे पर देखा. यह एक इशारे से धानंद नहीं समझा के पायल खुश थी या नाखुश थी, मगर जब धानंद ने देखा के उस्सने अपनी होंठों को डेंटों में दबाया तो वह समझा के पायल यूँही मज़े ले रही है उस से. तो धीरे धीरे धानंद अपने हाथ को गाउन के खुले हिस्से से निघ्त्य के अंदर घुसाया और पायल की नरम, मुलायम जांघ को महसूस करते हुवे एक आह निकली उस्सकी ज़ुबान से जिस ने पायल को मुस्कुराया उस वक़्त….. धानंद ने ठान लिया था के इस बार तो वह अंदर अपना ऊँगली घुसायेगा hi घुसायेगा और पायल की छूट का रस ज़रूर चखेगा आज तो……

पायल इंतज़ार कर रही थी के उस्का ससुर उस्सको फुलारे इस लिए धानंद को करने दिया जो वह कर रहा था इस लिए के उस्सको पता था के अभी तो उस्सको उठ कर जाना hi है…. मगर जाने क्यों बूढ़े फुंकारने में देर लगा रहा था…. धानंद का हाथ पायल की पंतय तक पोंहचा, और उस ने अपनी उंगलियों को वहां इस तरह से फेरा जैसे के गुदगुदी कर रहा ho…Paayal खुद हंसी उस वक़्त…. अब जिस तरह से पायल बैठी थी धानंद को पोजीशन नहीं मिल रहा था अपने हाथ से ठीक तरह से काम चलाने को…. तो उस ने धीरे से पायल के कान में कहा सरजू से खेलने के बहाने, “ज़रा इस तरफ अपने पैरों को कार्डो, मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है वहां” तब पायल मुस्कुरायी और अपने सास की तरफ देख कर फिर दूसरे लोगों के तरफ देखते हुवे पायल ने हौले से अपने दोनों पैरों को धानंद के तरफ पसार दिया सोफे पर…. धानंद बहोत खुश हुवा और उस्सने नोट किया के रमेश रह रह कर उन् दोनों के तरफ देख रहा है…. रमेश सच में नज़रें चुराते हुवे एक झलक हर वक़्त देख रहा तो था मगर उस ने दिल hi दिल में कहा, “बड़े भाई तुम हाथ फेरते रहो पायल पर मैं ने मज़ा लुठ लिया नहाते वक़्त…”

पायल ने सरजू को हाटों में उठाया और ऊपर उछाल रही थी खेलते हुवे… धानंद अपने उँगलियों से उस्सकी पंतय को सरकने में कामयाब हुवा आखिर में, फिर दूसरे हाथ से उस्सने पायल की हथेली को अपने लुंगी पर रखा ठीक लुंड के ऊपर जो बिल्कुल जमके खड़ा था. पायल अपने हाथ को खिंच रही थी जो धानंद ने मज़बूत से पकड़ा था मगर इस लिए पायल ने ज़्यादा ज़ोर नहीं दिया ताके दूसरे मौजूद लोग वहां नोटिस न करें, तो पायल का हाथ धानंद के लुंड पर पहुँच hi गया और उस्सने धानंद के लुंड को ज़ोर से दबाया जैसे ग़ुस्से में हो…. पर धीरे धीरे पायल उस्सको सहलाने लगी. धानंद ने किसी तरह से पायल के हाथ को लुंगी के अंदर किया और वह रही उस्का लुंड पायल के हाथ में जो पायल ने धीरे धीरे सहलाना शुरू किया और धानंद ने धीरे से पायल के कानों में कहा, “काश तुम अपने मुंह में लेपाटी इसी वक़्त!” उस बात पर पायल ने एक मुस्कान छोड़ी. फिर धानंद ने कहा, “यार मज़ा ारः है, ज़रा ज़्यादा ज़ोर से हाथ को चलाओ तो!” तब पायल ने भी धीरे से उस्सको कहा, “मेरे हाथ कम्प रहे हैं, सब लोगों की मौजूदगी में आप भी नाह!” धानंद बोलै, “मेरी छोटी रानी, कब इस्को अपने अंदर logi…taras रहा हूँ इस्को तुम्हारे गहरायी में डालने को….!” और धानंद ने तब फील किया के उस्का ऊँगली भीग रही है पायल के छूट के शुरुवात पर जहाँ वह अपने ऊँगली को गोआल गोआल घुमा रहा था… तो धानंद ने फिर पायल के कानों में कहा, “तुम तो भीग गयी हो नीचे, तुम्हारा भी मैं कर रहा है नाह हम्म?” पायल ने धीरे से जवाब दिया, “ष्ष्सस्सस, कोई सुनलेगा, अब आप अपने ऊँगली को वहां वैसे घुमाएंगे तो भीगूँगी नहीं?” पायल ने भी अपनी ऊँगली को उस्का लुंड थामे हुवे लुंड की ऊपर वाले हिस्से पर, ठीक जहाँ छेद है वहां ऊँगली को रगड़ा, और उस ने भी फील किया के धानंद का प्रेकम निकल रहा है और फिर पायल ने उस से कहा, “मुझे तो कहरहे हो आप, और आप का किआ हाल है, प्रेकम चुत पड़ी आप की तो!” धानंद जोश में कहा, “अरे मेरी जान कैसे प्रेकम न छूटे जब तुम जैसी चीज़ इस्को अपने मुलायन हाथों में sehlaye…mera तो मैं तुमको अभी के अभी छोड़ने को कर रहा है!” पायल ने कहा, “हटो भी पागल हो किआ आप!” यह कह कर एक छोटी सी हंसी छोड़ी पायल ने, उस हंसी की वजह से धानंद की पत्नी ने एक ेंख उन् दोनों की तरफ किया और जल्दी ने पायल ने अपना हाथ धानंद के लुंड से हटाया… फिर जब धानंद की वाइफ वापस टीवी देखने लगी तो धानंद ने पायल की उसी ऊँगली हो उस के मुंह के तरफ करते हुवे कहा, “मेरे प्रेकम को चख कर तो देख जानी, प्लीज चाट लो न…” पायल ने ख़ुशी ख़ुशी उस ऊँगली को जिस पर धानंद का प्रेकम लगा हुवा था, अपने मुंह में लिया और ुंली को चुस्सने लगी…. धानंद वह देख कर कहा, “वह समझ लो के मेरा लुंड hi चूस रही हो yaar…kia स्वाद है जानेमन?” पायल ने सिर्फ एक मुस्कराहट में जवाब दिया उस बात ki…thik उसी वक़्त धानंद ने अपने दो उँगलियों को पायल की छूट में घुसाया और पायल की ‘ाः’ निकल पड़ी फिर रमेश ने पायल की नज़रों में देखा हालां के अँधेरा hi था, पायल ने देखा के रमेश की नज़र धानंद के हाथों पर है और उस्सकी जांघ भी दिख रही थी, और पायल कसमसाती गयी…..

बस धानंद अपने उँगलियों को अंदर बाहर कर hi रहा था के ससुर ने फुकरा, “पायल बहु, सुनती हो, ज़रा मेरे पेयर दबा देना बेटी बहोत दर्द हो रहा है…” और सासु जी ने पायल से कहा, “जा ऋ पायल बूढ़े के पेयर दबड़े ज़रा, उस को नींद नहीं आएगी वार्ना..” पायल ने कहा, “जी सासु माँ अभी जाती हूँ.” और पायल उठी सरजू को लिए तो सासु माँ ने कहा, “ला, सरजू को मेरे गॉड में रखदे, अजा मेले bêté अजा अजा दादी के पास.” जब पायल सरजू को अपने सास के गॉड में दे रही थी तो रमेश की पत्नी ने कहा, “जा पायल हम बच गए, सुना है तेरी हाथों में जादू है, जब तू दबती है तो दर्द ग़ायब हो जाता है! कभी हम भी ससुर जी के पेयर दबाया करते थे!!”

ससुर के कमरे के तरफ जाते वक़्त पायल सोचने लगी ‘किआ ससुर ने रमेश की पत्नी के साथ भी यह किया होगा?!.............’

तो बे कॉन्टिनोएड……………………..
 
अपडेट 43

पायल जब ससुर के कमरे में पहुंची तो बूढ़ा बिस्तर पर बैठा मुस्कुरा रहा था अपने कामयाबी पर. उस ने कहा, “देखा डार्लिंग! कैसे सब के होते हुवे तुमको अपने बिस्तर पर बुला लिया मैं ने और किसी ने रोका भी नहीं!” पायल अपनी उसुअल मुस्कराहट से ससुर को एक नटखटी ऐडा से देखते हुवे कहा, “बड़े वह हो आप भी!” सौर ने पायल का हाथ अपने हाथों में लेकर उस्सको एप करीब बिस्तर पर बिठाया और जवाब में यह कहा, “वह तो हूँ hi मेरी जान, जब तुम जैसे खूबसूरत, हॉट, बहु हो तो वह तो बनना hi पड़ता है ससुर को जानेमन!” पायल अपने अदाओं के मुताबिक, अपने होंठों को दांतों में दबाते हुवे एक हाथ से ससुर को हलके से मारती है उस के हाथ पर और अपने नाख़ून को बूढ़े के हाथ पर दबती है मुस्कुराते हुवे.

ससुर उसस्के ऊपर वाला गाउन निघ्त्य पर से उतारना चाहता है तो पायल बोली, “अगर सासु जी अचानक आगयी तो?” ससुर गाउन को निघ्त्य पर से उतारता गया यह कहते हुवे के, “मैं अछि तरह से जानती हूँ अपनी पत्नी को यार, उस्सको अगर सुसु भी लगा तो नहीं जाएगी जब तक फिलम एन्ड न हो! वह दीवानी है फिल्मों का और सेरिअल्स की. एक तरफ से तो मेरे लिए अछि बात है नाह! मौका देती है भरपूर मुझको, और तुझको भी नाह!” तो पायल अपनी बाहों को ऊपर उठाते हुवे ससुर को निघ्त्य पर से उस गाउन को निकलने देती है. फिर तो वह रे वह! पायल की जवानी, निघ्त्य की पतली पतली स्ट्रैप्स उस के कांधों पर, बाहों का नंगापन, बाहों के टेल वाले हिस्सा जो बेहद मुलायम दिखाई देता था, जाँघों पर पोह्ची हुवी निघ्त्य, गोरा कोमल रंग पायल ki…..yeh सब देखते hi ससुर का लुंड तो खड़ा hi होना था और वह पायल को ऊपर से नीचे टॉक निहारता गया जब के पायल कुछ शर्माती और कुछ झिझकती समझ नहीं पा रही थी के बिस्तर पर बैठे या खड़ा हो कर ससुर को और निहारने दें. वह कड़ी हो गयी थी जिस वक़्त उस्सकी गाउन उतरी जारही थी.

बूढ़े ने अपना हाथ अपने लुंगी में घुसाया लुंड को पोजीशन में लाने के लिए और यह देख कर पायल और लजाती जा रही थी, तो ससुर ने कहा “तू hi इस्को सीधा करदे न मेरी बहु.” मगर पायल ने कहा, “मुझे एक डर सा लग रहा है के किसी ने अचानक अंदर आना चाहा तो?” तो बूढ़े ने कहा, «चाह ठीक है जा दरवाज़ा लॉक करदे!» तब पायल ने पुछा, “अब अगर लॉक करने के बाद कोई आना चाहे और तब नहीं पूछेंगे के दरवाज़ा लॉक क्यों है?” ससुर ने कहा, “तब मैं जवाब दूंगा नाह तू फ़िक्र क्यों करती है जा लॉक कर के आ.”

पायल जिस वक़्त चल कर दरवाज़े को लॉक करने के लिए जा रही थी तो ससुर उस्सकी पीठ को और चूतड़ों को देख रहा था… निघ्त्य में पायल की आधे पीठ नंगे थे क्यों के स्ट्रैप्स कांधों से लेकर आधे पीठ तक hi जाती है, अब पायल की चलने से उस्सकी गांड की मूवमेंट्स से जो उंच नीच हो रहे थे वह देख कर बूढ़े का नियत तो और खराब होता जा रहा था… वह पायल की हर एक मूवमेंट्स को निहार रहा था और उस्सकी जिस्म की हर एक हिस्से को डिटेल्स में स्टडी कर रहा था और मैं hi मैं जाने किआ किआ सोच रहा था. पायल ने दरवाज़े को लॉक कर के वापस आने के लिए मुड़कर देखा तो पाया के ससुर की नज़र उस्सकी जिस्म को ऊपर से निचे तक हवस भरी निगाह से देख रहा है, और लुंगी में से अपना लुंड बाहर निकाल कर हाथ में लिए सेहला रहा है, पायल उसस्के मोठे लम्बे लुंड को देख कर, कुछ अपने अंदर महसूस किया जिस्का उस्सको खुद समझ नहीं थी, पता नहीं वो एक चाहत थी उस लुंड के लिए या प्यास थी सेक्सुअल इंटरकोर्स करने के लिए, मगर पायल को बहोत चाह लगा और दौड़ कर उस लुंड को थामने को और चाटने को उस्का मैं kiya…magar वह अपने आप पर काबू रख रही थी……..

ससुर पायल को चलते वापस एते देख कर उस्सकी निघ्त्य जो जाँघों के ऊपर थे, तो उन् जाघों को देख रताः था और निघ्त्य पतली होने के कारण पायल की पंतय और बूब्स साफ़ दिख रहे थे क्यों के पायल निघ्त्य पेहेन्ने के बाद ब्रा नहीं पहनती आम ाव्रतों की तरह… बूब्स के निप्पल्स, दो छोटे अंगूर के दाने की तरह उस निघ्त्य पर निखार ला रहे थे, और पायल की चलने की वजह से दोनों बूब्स ऊपर निचे हलके से उठ बैठ रहे थे जिससे देख कर ससुर और भी एक्साइट हो रहा था…. और जब पायल पास आगयी तो ससुर ने जल्दी से पायल के हाथ को अपने लुंड पर पोह्चय और बिना झिझक के पायल ने उसस्के लुंड को दोनों कोमल हाथों में लिया और बिस्तर के पास निचे ज़मीन पर बैठ गयी उस्सको मुंह में लेने के लिए…. ससुर ने कहा भी नहीं पर पायल अपने आप बैठ गयी उस के लिए…. बूढ़ा बहोत खुश हुवा और समझ गया के उस्सकी बहु समझदार है.

पायल ने ससुर का लुंड चुस्सना शुरू किया दोनों हाथों से मसलते हुवे मोटे लुंड को… बूढ़ा दीवाने की तरह सर को ऊपर के तरफ किये ऊपर देखते हुवे ‘िस्सश्हहहहह” की आवाज़ चोर रहा था….. और हंफटे हुवे टुकड़ों जैसे आवाज़ में कहा, “पायल, मेरी बहु, हाँ ससुर को खुश करदे मेरी जान, ससुर बहु का रिश्ता सब से बेहतर है सेक्स करने ko…sab से ज़्यादा मज़ा दुन्या में एक बहु hi दे सकती है ससुर को और दुन्या में कोई भी ाव्रत ऐसी मज़ा नहीं दे सकता किसी भी मर्द को जो एक बहु दे सकती hai…wah… हाँ मेरी जान अंदर ले, िस्सश्श्श हाँ और अंदर le…chaat…ahahah… ऊपरी हिस्से को चाट और चुस्ती जा…. हा …आआह्ह्ह्ह…”

पायल एकांत बार अपनी ेंखों को ऊपर उठा कर ससुर की रिएक्शंस और एक्ससिटेमेंट को देखते हुवे चुस्सी जा रही थी बूढ़े को; और पायल जैसे एक भूकी प्यासी सेक्स की पुजारन हो, एक दम मस्त तरह से वो काम कर रही thi…jeise के उस्सको कभी यह करने को मिला hi ना हो!

चूसते दौरान एक बार पायल की ज़ुबान से यह बात निकल पड़ी, “किआ आप ने अपने दूसरे दोनों बहुओं से भी यह किया है?” उस वक़्त ससुर का हाथ पायल के चूचियों को मसल रहा था निघ्त्य के स्ट्रैप्स को उसस्के बाज़ुओं से नीचे उतार कर, दोनों बूब्स लटक रहे थे, खूबसूरत, नरम गोआल चूचियां पायल की….. अचानक पायल की बात सुनकर ससुर चिहुंका और, पायल को अपने छाती तक लाते हुवे पुछा, “क्यों? तुमको कोई शक है या किसी ने कुछ कहा तुमको?” तब पायल की चूचियां ससुर के छाती पर उन् के सफ़ेद बालों पर रागढ रहे थे और पायल को वह बहोत पसंद था, तो खुद पायल अपने आप अपने दोनों चूचियों को ज़ोर से दबा कर ससुर के सफ़ेद बालों पर रगड़ती जा रही थी और कहा, “नहीं किसी ने कुछ नहीं कहा बस मेरे मैं में यह बात आयी ऐसे hi क्यों के रमेश की पत्नी ने कहा के पहले वो भी आप के पेयर दबाने को अति थी….”

ससुर ने बिना कोई जवाब दिए पायल को ऊपर बिस्तर पर लेता दिया और उस पर जा पोंछा उस्सकी चूचियों को चुस्ती, मसलते और एक हाथ से जल्दी से उस्सकी निघ्त्य के नीचे वाले हिस्से को उठाकर पायल के कमर तक पोंछाया और और उस्सकी पंतय को उतारने लगा….. पायल एक सांप की तरह बिस्तर पर रेंग रही थी और बूढ़े को जहाँ मिलता था वहां चूस रही थी और दन्त भी काट रही थी अपनी ेंखों को बंद किये हुवे….. बूढ़े ने पंतय उतारने के बाद अपने हाथ को पायल के पुरे छूट के ऊपर रखा और फील किया के एक नरम पके हुवे आम जिस में बहोत रस हो जैसे, वह पकड़ रहा है… और चूसने को मैं किया उस आम को तो बूढ़ा निचे पोंहचा पायल की दोनों जाँघों को एक तरफ करते हुवे अपनी छोटी बहु की छूट को ससुर चूसने लगा और छूट रस से टर्र थी तो बूढ़े ने पूरा रस चूसा अपनी बहु की जो उस वक़्त बेहाल हो रही थी ससुर के बिस्तर पर…..

पायल से रहा न गया और ससुर को जल्दी से अपने ऊपर खिंचा और उस के लुंड को खुद अपने हाथों से अपने छूट में डाला और बूढ़े ने कमर हिलना शुरू किया… ढाका देना शुरू किया और पायल “ाः!! ूउउउइइइ मा….. शशशशशशशशसस” जैसे आवाज़ें देती गयी लगातार हांफते हुवे जब तक ससुर ढाका देता रहा…… एक से बढ़ कर एक ढाका पायल के जाँघों के बीच बढ़ता गया और पायल की आवाज़ ऊंची होती गयी यहाँ तक के ससुर को उस के मुहं पर अपना हाथ रखना पड़ा आवाज़ को बहार नहीं जाने देने के लिए…. और आखिर में बूढ़ा चीखा, “AAGHGHGHGH…HAAANNN झाड़ रहा हूँ बहु, मुहं खोल, खोल न मेरी जान…” अपने लुंड को छूट से निकला और कसके हाथ में दबाये जब तक पायल के मुहं तक पोंहचा आधा पानी पायल के पथ पर चिरका और तब पायल ने बाकी अपनी मुंह में लिया और चूसा ससुर के रस……

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
अपडेट 44

उस के बाद पायल कुछ देर तक ससुर के बिस्तर पर hi पारी रही उस के बाहों में उसस्के छाती के सफ़ेद बालों से खेलते हुवे. पायल ने फिर वह सवाल दोहराई, “किआ पद्मिनी (रमेश की पत्नी) भी आप के पेयर दबाने के बहाने आप के कमरे में आया करती थी मुझसे पहले?” बड़े जवाब नहीं देना चाहता था और फिर से बात को ताल gaya…Paayal ने बचे की तरह कुछ नटखटी अंदाज़ में फिर से पुछा मगर ससुर ने कहा, “कहाँ तुम अब फ़ालतू के बातों को ले कर बैठी है चोर नाह Paayal…maza कर यार मज़ा तो आया नाह!!” पायल चुप होगयी मैं में यह सोचते के ज़रूर बूढ़ा ने पद्मिनी को भी छोड़ा होगा, उस ने सोचा के अब पद्मिनी से hi पूछेगी, कल पद्मिनीं का दिन है रसोई में रहने को तो वहीँ पर जाकर पूछेगी पायल ने सोचा.

अचानक किसी ने दरवाज़ा खोलने की कोशिश की और जब देखा गया के लॉक है तो जिस ने भी हैंडल ओपन करना चाहा था वह शायद चला gaya…andar से बूढ़े ने पुछा, “कौन है? अत हूँ” यह कहकर फुसफुसाया पायल को, “अपना गाउन पहले, मैं दरवाज़ा खोलता हूँ…” मगर पायल ने कहा, “नहीं आप लेट जाईये मैं hi खोलती हूँ…… “

जब पायल ने दरवाज़ा खोला तो कौन खड़ा था वहां? रोशन- धानंद का बीटा! आप सब शायद भूल गए हैं के जब पायल शादी कर के नयी आयी थी तो रोशन 16 साल का था, और अब 18 की है…. और पायल भी 18 की hi है…. तो रोशन की नज़र पायल की छाती पर सीधे gayi…usski निघ्त्य की स्ट्राप जल्दी जल्दी में पायल ने स्ट्राप डालना मिस कर दिया था तो एक स्ट्राप काँधे पर थी और एक नहीं तो एक ब्रैस्ट तक़रीबन बाहर tha…aur रोशन समझ गया के दरवाज़ा लॉक क्यों था अंदर से…..

रोशन एक खामोश किसम का लड़का था जो ऐसे मामलों से दूर hi रहता था. उस के जीवन में कोई लड़की वड़की नहीं थी, लव वोवे का चाकर कुछ नहीं था. कॉलेज जाता था, वापस अत था, होमवर्क्स करता, कुछ टीवी देखता और सैटरडे को फुटबॉल टीम में फुटबॉल खेलने को जाता. बस एहि उस का जीवन का रिज्यूमे हैं. तो जब रोशन ने अपनी छोटी चची को उस रूप में देखा और नज़र को छाछी की ब्रैस्ट पर किया तब पायल ने भी अपनी छाती पर नज़र डाली तो जल्दी से अपनी बाहों को वहां रखा कवर करने के liye…..Aur रोशन ने कहा, “चची, दादी कह रही के सरजू सो गया है उस को पालने में सुलाने को……” पायल ने जवाब दिया, “हाँ ठीक है तू चल मैं अति हूँ” और जल्दी से कमरे के अंदर फिर घुस्स्कार अपना स्ट्राप ठीक किया और बूढ़े को किश करके निकल पारी….. पायल ने बूढ़े को नहीं बताया के रोशन ने उस्सको उस हालत में देखा.

उस रात को पायल ये दो चीज़ों को सोचते soyi-ek किआ ससुर पद्मिनी के साथ सोया है, दूसरा- किआ रोशन समझ गया के ससुर पायल को छोड़ रहा था? पायल सोच रही थी के अगर रोशन पूछेगा तो किआ जवाब देगी उस्सको. वो उस्का हमउम्र था और पायल को चाह भी लगता था, मगर रोशन बहोत अलग सा लड़का tha…pata नहीं के वो ऐसे बातों को अपने तक रखेगा के किसी से कुछ boldega…yeh पायल को परेशां कर रही थी….

सपने में पायल ने देखा के रोशन उस्सको छोड़ रहा है और चची चची कह कह कर मज़ा ले रहा है…. सुबह को उठने पर पायल के दिमाग़ में वह सपना ताज़ा था और वह रोशन के बारे में सोच रही थी सिर्फ. यूँ तो किसी भी सुबह को पायल धानंद के बच्चों से नहीं मिलती थी, मगर सिर्फ रमेश के बच्चों se…par इस सुबह को पायल रोशन को देखना चाहती थी स्कूल जाने से pehle…To पायल लाउन्ज में गयी राजें के जाने के बाद, एक अछि ड्रेस पेहेन कर, और रोशन का वेट कर रही thi…..Roshan और उस्सकी छोटी बेहेन कोयल तैयार होकर घर चोर्ने वाले the…ghar से निकलने के लिए लाउन्ज से गुज़ारना था तो पायल इधर वेट कर रही थी……

जब रोशन की नज़र पायल पर पड़ा तो उस्सने कल रात वाली मंज़र को याद किया, और अपनी नज़रें झुका ली. पायल उसी की ेंखों में देखती जा रही थी और जब रोशन करीब पोंहचा तो मुस्कुराते हुवे पायल ने कहा, “बहोत स्मार्ट लगते हो रोशन इस कॉलेज की ड्रेस मैं! तुम पर लड़कियां मरते होंगेउए है नाह?” तब कोयल ने जवाब दिया, “आरी ो चची, यह बिल्कुल अपने शैल में रहता है यह किसी लड़की के तरफ देखता भी नहीं, एक दम उल्लू है यह!” पायल ने रोशन के बालों पर अपनी हाथ फेरी और पुछा, “क्यों रे रोशन यह सच है किआ?” रोशन की गाल लाल होगयी थी और उस ने हाँ में सर hilaya….aur आगे बाहरणे lage…tab पायल उसस्के पीछे पीछे चलते हुवे ाँगने में गयी और कहा, “तुम और मैं दोनों 18 साल के हैं, मैं तुम्हारे इस सिनेस्स को दूर कर सकती हूँ, तुमको मुझसे मिलते रहना चाहिए, देखना कैसे तुमको स्मार्ट बना दूंगी…” कोयल ने कहा, “हाँ चची तुम इस्को ज़रा लाइफ के बारे में सीखना एक डैम छुपी रहता है यह…”

पायल रोशन को रिजने की कोशिश कर रही थी…. पायल ये इस लिए कर रही थी क्यों के उस्सको जानना था के किआ रोशन ने कल रात को कुछ देखा या सुना…. उस से बात करके उस्सको खामोश करना था… मगर कैसे उसस्के करीब पोंछेगी यह तरीका ढूंढ रही थी पायल.

पायल आखिर में रसोई घर पोंछी पद्मिनी के पास…. बिना झिजक के झट से पायल ने पद्मिनी से पुछा, “हाँ तो आप मुझे बताएंगे आप किआ कहना चाहते थे कल रात को जब मैं ससुर जी के पाऊँ दबाने को जा रही थी?” पद्मिनी एक बर्तन को सिंक में मांझते हुवे और मुस्कुराते हुवे बोली, “क्यों तू नहीं समझती? किआ हुवा कल रात को तेरे और ससुर जी के बीच? खूब मौज किया नाह तुमने ऋ पायल? मज़ा आया न तेरे को?” पायल एकदम सूखे हुवे मुंह से ज़ोर से उस्का दिल धड़कते हुवे बोली, “इस का साफ़ मतलब है के आप भी??” पद्मिनी हंसी और बोली, “अरे हाँ पायल मैं ने भी खूब मौज किया ससुर के साथ, खूब मज़ा आया मुझको भी …..” पायल अपना हाथ मुंह पर रखते हुवे पद्मिनी के नज़रों में देखते हुवे बिल्कुल हैरान पुछा, “किआ? सच? और आप का पति? उस्सको मालूम नहीं पड़ा?” पद्मिनी ने जवाब दिया, “इस में हैरान होने वाली कोई बात नहीं, तू बोल किआ कल रात तेरे पति को पता चला? नहीं नाह, वैसे hi!” पायल बोली, तो किआ अब भी आप के साथ और मेरे साथ भी???”

पद्मिनी: “नहीं अब मेरे साथ उतना नहीं करता budha…tu जो आगयी है. उस्सको जवान माल पसंद है, उस्सको यह लटके हुवे बूब्स नहीं पसंद, उस्सको यह पथ नहीं पसंद, उस्सको तेरे जैसा फ्लैट बेल्ली पसंद है…. मैं भी तेरे hi जैसी थी, मगर धीरे धीरे उस्का मैं मुझसे से हठता गया…. मगर कभी कभी अब भी कर लेता है”

पायल: “हाय राम तो मेरा शके सही था….”

Padmini….(hanste हुवे) “शके? आरी पायल उस ने पूनम से भी खूब किया hai…teenon बहुओं से किया है रे उस्सने…. उस्का चीज़ एकदम मस्त है नाह?” पद्मिनी लुंड को ‘चीज़’ कहती है…

पायल: अआप उसस्के चीज़ को पसंद करती हो?”

पद्मिनी: “हाँ बूढ़े का चीज़ बड़ा और मोटा है, उन् के बेटों का भी वैसा नहीं है…. आखहिर सब मर्दों को दूसरों के बिवीजन ज़्यादा पसंद एते हैं…”

पायल ने सोचा ‘दूसरों की बीवियां’ और धानंद और रमेश को सोचा क्यों के उन् दोनों के लिए पायल दूसरे के बीवी थी…. फिर सोचा पद्मिनी भी तो धानंद के लिए दूसरी की बीवी है तो पुछा….

पायल: “अआप कहते को के यह सब मर्दों के दूसरे की बीवियां अच्छी लगती है तो धानंद भाई के लिए तो आप??.....”

पद्मिनी: “यार पायल घर के तीनों मर्दों के साथ सो चुकी हूँ और पूनम भी…. यार यह दोनों भाई हम दोनों को अदला बदली करते हैं आज तक किसी रात को मैं धनद के कमरे में रात को सोती हूँ और पूनम रमेश की बिस्तर par…yeh दोनों भाई स्वैपिंग करते हैं और हम को आदत हो गयी है… चेंज के लिए चाह रहता है….. मज़ा भी अत hai…..kal रात को जब ससुर ने तुम को फुकरा पेयर दबाने को तो मैं और पूनम एक दूसरे को देख कर हांसे क्यों के हम को पता था तुम को वह छोड़ेगा!! हाहाहाहा!! मज़ा आया नाह उसस्के चीज़ से तुझको?”

तो बे कॉन्टिनोएड………………………
 
अपडेट 45

अब यह सुनकर के दोनों भाई अदला बदली करते हैं अपनी पत्नियों के तो पायल दांग रेहगाई. और एक अजीब सी ख़ुशी और कशिश हुवी पायल के अंदर…. उस ने सोचा इतने सारे मर्द मिल गए उस्सको को एक hi घर में मज़ा लूटने के लिए, यह उस ने कभी सोचा hi नहीं था…. वैसे पायल अपने ख्यालों में अक्सर सोचा करती थी के कभी न कभी वह किसी ग़ैर मर्द के साथ ज़रूर सोवेगी अपने पति के इलावा, मगर कभी नहीं सोचा था के घर में hi यह सब होजाएगा! यह पायल ने तब सोचा था जीन दिनों राजें उस्सको छोड़ रहा था शादी से पहले… जब हु ** साल की उम्र में hi कुंवारी नहीं रही थी तब hi उस ने सोच लिया था के अब तो सील टूट गयी तो किसी से भी मौज कर सकती है… तब उस्सने सोचा था के अगर राजें के परिवार ने उस्सको नहीं अपनाया तो वह किसी भी मर्द के साथ मौज मस्ती करेगी उसी उम्र में…. मगर तब उस्सकी दिमाग़ उन् नौजवान लड़कियों की तरह था जो बग़ावत करते हैं उस उम्र में, और शादी हो जाने के बाद पायल एक घरेलु पत्नी बन गयी और वह सब बातों को दिल ो दिमाग़ से निकल दिया था तब तक, जब धानंद ने उस्का बूब्स छूना शुरू किया सरजू को उसस्के गॉड से लेने के वक़्त….. तब पायल के दिमाग़ में वह छह और खयालात दुबारा ए….

पायल अब भी वहीँ कड़ी थी पद्मिनी के पास और दोनों हंस हंस कर बातें कर रहे थे घर के मर्दों के बारे में. और पायल ने फिर सवाल किया, “ाचा दीदी, यह बताओ, कभी भी सासु जी को कोई शक नहीं हुवा इन् सब बातों का?” तो पद्मिनी बोली, “मेरी जान पायल, हमारा जो ससुर है न, बहोत होशियार और चालाक है बूढ़ा, उस्सकी उम्र पर मत जाना, उस्का दिमाग़ जितना चालु है उतना hi उस्का वह चीज़ बराबर काम करता है!! साला, पता नहीं किआ खाता है, अपने बेटों को तो अपने जैसा नहीं बना सका…. इन् के bête तो उस के जैसा मज़ा हमको नहीं देता kabhi…budhe में बहोत दम है, है न ऋ पायल?” पायल ने हाँ में सर हिलाया और फिर पुछा, “और राजें ने भी आप और पूनम दीदी के साथ…………….??” पद्मिनी बोली, « और नहीं तो किआ ? तू अपने पति को देवता समझती है किआ ? उस ने भी हम दोनों को छोड़ा है !! मगर बहोत कम… और वैसे वह बीएड पर ज़रा स्लो है है नाह पायल ? » पायल ने फिर से हाँ में सर हिलाया, और पद्मिनी बोली, « हाँ वह स्लो है इसी लिए तो तू मौज कर रही है अपने पति के पिता के साथ…. साला बूढ़ा ने तीन ऐसे bête पैदा किये और तीनों को अपना दम नहीं दिया ताके वो खुद तीनों बहुओं को मज़ा दे सके हाहाहाहा!! और देख पति और पिता, दोनों में यह चार लव्ज़ हैं प ी टी ा - प ा टी ी अब पति नहीं तो पिता hi सही… हहहहए”

पायल ज़ोर से हंसी इस बात को लेकर…. फिर कहा, “ससुर जी में सच में बहोत दम है जो राजें में नहीं है और उस्का ‘चीज़’ भी राजें से बड़ा और मोटा है, और उस को खूब अत है मुझको मज़ा देना और आप जानती हो उस्का एक बार करने से मैं दो बार झरर जाती हूँ और राजें करता है तो वह जरर जाता है और मैं प्यासी रह जाती हूँ!”

पद्मिनी: “एहि एक प्रॉब्लम है मर्दों में और वह नहीं समझते के हम ाव्रतों को भी मज़ा चाहिए सिर्फ अपना देखते हैं यह सेल, खुदगर्ज़ मर्द!” वैसे तुमको पता है ससुर कितना ठरकी है बूढ़ा?”

पायल: “हम्म, वो तो दीखता है नाह पद्मिनी दीदी!”

पद्मिनी: “अरे तू नहीं जानती ठहर तेरे कानों में कहती हूँ मगर किसी से मत कहना वार्ना बहोत प्रॉब्लम हो जाएगा….” पद्मिनी पायल के कांधों पर हाथ रख कर उसस्के कान के पास अपना मुहं लेजाकर धीरे से कहा “मैं ने कई बार देखा है जब बूढ़ा कोयल को अपने गॉड में बिठाता है उस के फ्रॉक को उठता है और कोयल के गांड पर अपना लौड़ा रगड़ता है, जब कोयल छोटी थी तब से hi बूढ़ा कोयल के साथ ऐसा करता hai…ek दम ठरकी है साला!!” यह सुनकर पायल ने अपने मुंह पर अपना हाथ रखा और कहा, “हाय राम!! कितनी उम्र थी कोयल की जब से ऐसा करता है ससुर जी?” पद्मिनी ने कहा, “कोयल कोई * साल की थी तब से वैसा करता है साला… अब आज तो कोयल कोई ** साल की है, अब भी उस्सको गॉड में बिठाता है और तू ज़रा वाच करना जब कोयल उस के गॉड में बैठती है तो किआ तमाशा करता है बूढ़ा…”

पायल फिर हैरान होकर कहा, “और किआ पूनम दी को पता है?”

पद्मिनी: “अरे नहीं रे, मैं ने कहा नाह यह बात किसी को मत बताना, यह मैं ने नोटिस किया हुवा है, और किसी को पता नहीं , खबरदार अगर तू ने किसी से कहा तो!”

पायल ने कहा, “नहीं दीदी मैं क्यों बताने लगी किसी को, अब तो मैं भी वाच करुँगी जब कभी कोयल बूढ़े के गॉड में बैठी तो…. ाचा दी, किआ कोयल को पता है के बूढ़ा किआ करता है उस के साथ?”

पद्मिनी: “तेरे ख़याल से उस्सको पता नहीं होता जब उतना बड़ा चीज़ उस के गांड पर रागहदा होगा? अब किआ पता और किआ किआ बूढ़ा करता है कोयल के साथ जब कभी उस के साथ अकेला होता होगा….”

पायल: “आज सुबह को hi कोयल अपने भाई के साथ कॉलेज जा रही थी तो मैं रोशन से बातें कर रही थी तब कोयल ने कहा के रोशन एक दम नादाँ है, इस का मतलब के कोयल खुद को सायानी समझती है, तो ज़रूर उस्सको सब पता है के ससुर जी उस के साथ किआ किआ करता hai…zaroor कोयल को भी मज़ा अत होगा….”

बातें करने के बाद पायल अपने कमरे में चली गयी. अपने कमरे के साफ़ सफाई करने के बाद पायल अपने बीएड पर लेते सोच रही थी सब बातों के बारे में और उस का मैं कर रहा था करने को… उस ने अपने हाथ को अपनी स्कर्ट के नीचे डाला और पंतय के ऊपर hi सहलाने लगी…… कुछ देर बाद पद्मिनी उसस्के कमरे में आयी और झट से पायल उठ बैठी पर पद्मिनी ने कहा, “क्यों उठ गयी हो रानी? चल लेथ जा मैं तुझको मज़ा दिलाती hoon…aja अजा……” पायल ने कहा, “नहीं नहीं ठीक है बस यूँही main…main…. बस…..” तब तक पद्मिनी का हाथ पायल के जांघों पर फेरता हुवा उस के पंतय तक पोहंचा और पद्मिनी की ऊँगली पायल की भीगी हुवी पंतय को उतारने लगी…. पायल कुछ शर्मा रही थी मगर पद्मिनी ने कहा, “कभी किसी ाव्रत के साथ किया है?” पायल ने ना में सर हिलाया, तो पद्मिनी ने कहा, “चल आज मैं तेरी ज़िन्दगी की पहली ाव्रत बन जाती hoon…ab आएगा मज़ा…. Hehehehe…Padmini का मुंह पायल के छूट तक पोह्ची………

तो बे कॉन्टिनोएड………………..
 
अपडेट 46

पायल को लज्जा आरही थी, कभी किसी ाव्रत ने वैसा नहीं चुवा था उस्सको…. पायल कुछ सिमटती और पद्मिनी उस्सकी की छूट को चाटने लगी दोनों हाथों से उस्सकी छूट की पंखुरियों को खोलते हुवे और पायल ने ‘ईश्श्श’ की आवाज़ दी और अपने ेंखों को बांध कर्ली और महसूस करती गयी पद्मिनी की जीभ को अपने छूट पर…. पद्मिनी जैसे एक आग की गर्मी में डूबी हुवी थी, बिल्कुल जोश में पायल को चाटती और चुस्ती गयी अपने हाथों से उस्सकी जिस्म को सहलाते और मसलते…… चाटते और चुस्ती दौरान पद्मिनी ने आहिस्ते आहिस्ते पायल के कपडे उतार दिए और अपने भी कपडे निकाल फेंकी और दोनों नंगी हो गए थे और पद्मिनी पायल के चूचियों को मसल भी रही थी….. पायल करवट बदलती गयी अंगरायों के साथ और तृप्ति आवाज़ देती गयी जिस से पद्मिनी को और भी मज़ा ारः था.

पद्मिनी को पायल की जिस्म एक छोटी लड़की की जिस्म जैसा लग रहा था और वह बहोत एन्जॉय कर रही थी, पायल की बूब्स बिल्कुल एक 16 साल की लड़की के बूब्स जैसे थे, उस्सकी बदन बिल्कुल नया, जवान, और ताज़ा था और पद्मिनी इस्सके भरपूर लुत्फ़ उठा रही थी…. कोई एक जानते तक दोनों बिस्तर पर रेंगते रहे उसी तरह…. पद्मिनी ने बहोत कुछ सिखाया पायल को और पायल झाड़ भी gayi…Padmini को तजुर्बा था, मगर पायल बिल्कुल नादान थी इस बारे में…. पद्मिनीं ने अपनी चूचियों को पायल के मुंह में चूसने को भी डाला मगर पायल शर्मा रही थी, नहीं लेना चाहती थी पद्मिनी की चूचियों को, मगर पद्मिनी ने बातों से उस्सको फुसलाया और पायल ने आखिर में पद्मिनी की चूचियों को चूसा और पद्मिनी जैसे बेहोश होगयी थी उस दौरान…. पद्मिनी को पायल की जिस्म बहोत पसंद थी और उस ने कहा के जब जब मौका मिलेगा वह भी पायल को एन्जॉय करेगी…. जब चूसने के वक़्त पायल भीग गयी थी तो पद्मिनी ने उस से कहा के, “तू भी जल्दी भीग जाती hai…mere टच से भी तू भीग गयी तो मर्दों के टच से किआ हाल होता होगा तेरा रे Paayal…sasur बूढ़ा तो बहोत hi मज़ा करता होगा रे तेरे साथ ाहः!! किआ जिस्म है रे तेरी पायल, कोई भी मर्द दीवाना hojayega…mard किआ ाव्रत भी तुझको छोड़ना चाहेगी re….meri जैसी….”

ाअखिर में पद्मिनी ने अपने दोनों जाँघों के पायल के जाँघों के बीच ो बीच डाला और दोनों ावरतें अपनी अपनी छूट एक दूसरे के छूट पर रागढ रहे the…donon बिल्कुल भीगे हुवे, दोनों के जांघ पर पानी बहती हुवी छूट पर छूट मसल रहे थे और बेहोशी की हालत में दोनों के ेंखें ऊपर निचे जैसे उलट फलतः हो रहे हों…. दोनों ावरतें, एक जवान एक आदर उम्र के, कहँरते, तड़पते, सिसकते छूट पर छूट रगड़ते एक दूसरे के मुंह को चाटते, एक दूसरे के जीभ को चुस्ती, आखहिर दोनों झाड़ गए और हँफ़्फ़ते हँफ़्फ़ते दोनों हंसने लगे अपनी कामयाबी पर….

पायल ने कहा, “बग़ैर एक लुंड के हम दोनों ने मज़ा कर लिया, मैं ने कभी सोचा भी नहीं था के एक ाव्रत के साथ भी यह मज़ा पा सकते हैं हम!” पद्मिनी ने कहा, “यह तो कुछ भी नहीं ज़ालिम, कभी मौका मिला तो तुझको सातवां आसमान दिखाउंगी….” पायल हँसते हँसते अपने कपड़े पेहेन रही थी जब पद्मिनी ने पायल के गांड को ज़ोर से अपनी हाथों में दबाया और कहा, “इस्को भी देती है तू?” पायल शर्मा कर बोली, “हम्म, कभी कभी” पद्मिनी ने फिर कहा, “हाय रे हाय तब तो बूढ़ा बेहद खुश होगा रे उस्सको गांड मारना बेहद पसंद है!” पायल ने झट से उस्सको रोकते हुवे कहा, “नहीं ससुर जी ने कभी पीछे नहीं किया hai…sirf दो बार तो किया है उस ने मेरे साथ!” पद्मिनीं बोली, “अभी तो शुरुवात है तेरा उसस्के साथ आगे आगे देखना किआ किआ दिखता है बूढ़ा tujhko…bahot ैयश करेगी तू उसस्के saath…maza कर पायल मज़ा कर… अभी तू जवान है खूब ैयश करले उम्र होगयी तो पछ्तायेगी…..”

दो घंटे के बाद पद्मिनी रसोई में व्यस्त हो गयी और पायल नाहा धोकर सरजू को खिला पिलाकर अपने कमरे में आराम कर रही थी और पद्मिनी की बातो पर ग़ौर कर रही थी. उस्सने सोचा अभी हु 18 साल की है और जवान है, और पद्मिनीं ने कहा के जब तक जवान है मज़ा karle…to पायल ने सोचा ठीक hi है, अभी एन्जॉय नहीं करेगी तो किआ जब पद्मिनी की उम्र की होगी तब करेगी! उस्सने सोच लिया के अब सभी मर्दों के साथ वह भी खूब एन्जॉय करेगी…. फिर यह भी सोचा पायल ने के पहला मर्द जो उस के करीब ारः था वो था धानंद और अभी तक उस ने कुछ नहीं किया और बाकी दो मर्दों ने उस्सकी जिस्म से मज़ा लुठ liya…phir उस्सने यह भी सोचा के धानंद को और तड़पते हैं देखते हैं वह कब तक झेल पायेगा…

शाम को हर रोज़ की तरह धानंद और रमेश काम से वापस आगये मगर राजें लास्ट अत था, याने रात को…. रमेश फिर नहाने गया तो टॉवल नहीं लिया और फुंकार कर मंगवाया, मगर इस बार उसी की पत्नी देने gayi…Paayal खूब हंस रही थी उस वक़्त क्यों के उस्सको पता था के रमेश पायल को एक्सपेक्ट कर रहा होगा बाथरूम में!

अब धानंद ने एक मौका पाया जब पायल सरजू को नेहला रही थी. पायल ज़मीन पर बैठी हुवी थी, और एक बाथ टब में सरजू उछाल रहा था गरम पानी में, पायल उस के बदन पर साबुन मॉल रही थी और धानंद धीरे से पीछे से आकर पायल को बाँहों में लिया और चूमने लगा उस्सकी गले पर पीछे के तरफ…. और एक हाथ से पायल की घागरा उठा रहा था अपने हाथ को उस्सकी घुटने से ऊपर जाँघों के तरफ सहलाते huwe…Paayal ने उस्सको रोका यह कहते, “चोरो भी, आप के पिताजी इधर आने वाला है अभी…” धानंद बोलै, “ाचा? उस्सको अपॉइंटमेंट दे रखा है तुमने? मेरा बाप तुमको छू सकता है मैं नहीं?” पायल ने कहा, «किश ने कहा वह मुझको छूटा है? चलो जाओ यहाँ से आप अब» तब तक धानंद ने अपने हाथ को पायल की पंतय तक दाल दिया था और अपने ऊँगली को वहां दबाने लगा गोआल गोआल घुमाते…. फिर बूढ़े की आवाज़ उस तरफ बहरता आया, «पायल बीटा, सरजू नाहा चूका किआ ?» तब जल्दी से धानंद उठा और झूट मूठ सरजू से खेलने लगा बाथ टब में……

तो बे कॉन्टिनोएड…………….
 
अपडेट 47

धानंद वैसे बहोत मौका मिस कर्जता था पायल का साथ पाने को. दो महीने बीत गए जिस दिन से धानंद ने पायल को अपने पिता के साथ देखा था बिस्तर पर करते हुवे, और तब से रमेश ने भी कई बार पायल को छोड़ने में कामयाब हो गया मगर धानंद को सिर्फ पायल को ऊँगली करने का मौका मिलता रहा. पायल भी खूब अच्छी तरह से जानती थी के धानंद hi पहला मर्द है जिस ने उस्सको चुहना शुरू किया था और उसी ने पायल के दिल में वैसे उमंगें जगाया था उसस्के बूब्स छह कर सरजू को गॉड में लेने के वक़्त. मगर पायल भी मज़ा ले रही थी धानंद को तर्पण में. पायल ने सोचा जितना धानंद तडपेगा उतना hi एन्जॉय करेगा जब कामयाब होगा और पायल को भी ज़्यादा मज़ा देगा इसी लिए उस्सको तड़पते जा रही थी दिन बा दिन.

अब एक रात की बात यह हुवी थी- सब लोग टीवी देख रहे थे और एक मशहूर हिट मूवी चल रही थी तो सब लोग टीवी सेट पर ेंखें गराये बैठे थे. पायल सरजू को सुला रही थी अपने कमरे में. पायल का कमरा ससुर के कमरे के बाद अत था, तो जब पायल अपने कमरे से होकर लाउन्ज में टीवी देखने को जा रही थी तो ससुर के कमरे के पास से गुज़ारना होता था. पायल जब ससुर के कमरे के पास पोह्ची तो ससुर के कमरे में हंसने की आवाज़ सुनाई दी उस्सको. पायल रुक गयी यह सोचकर के सब लोग तो टीवी देख रहे हैं, तो किश महिला की हंसी की आवाज़ सुनी ससुर के कमरे के अंदर? पायल कुछ देर ठहर गयी सुनने के लिए पर हंसी के बाद कुछ फुस्फुस की आवाज़ें सुनाई दी….. पायल की हिम्मत नहीं हुवी अंदर झाँकने की…. तो उस ने सोचा के लाउन्ज में जाकर देखती है कौन नहीं है वहां तो पता चल जाएगा….

जब वह लाउन्ज में पोह्ची तो देखा के सब लोग वहां है सिवाए कोयल के…. कोयल एक छोटी ** साल की लड़की थी और पायल को पद्मिनी की बाटें याद आयी… उस्का दिल ज़ोर से धड़का और हिम्मत करके उस ने सासु जी से पुछा, “कोयल कहाँ है?” सासु जी टीवी पर से बग़ैर ेंखों को हटाए जवाब दिया, “वह अपने दादा से होमवर्क्स करा रही है…..” पायल ने पद्मिनी को देखा और पामिनी ने एक ेंख मरी पायल को….. पायल जानना चाचती थी के किआ इस उम्र में कोयल करवाती है या कुछ और बात है…. पायल धीरे से फिर ससुर के कमरे तक गयी. कुछ देर कड़ी होकर दरवाज़े के पास कान लगा कर सुनती रही, फिर धीरे से दरवाज़े को थोड़ा सा खोला तो देखा कोयल बूढ़े के गॉड में बैठी हुवी थी और हाथों में किताब और कॉपीबुक थे मगर बूढ़े का हाथ कोयल की जाँघों पर फेर रहा था. कोयल ने एक छोटी से ड्रेस पहनी हुवी थी जिस्में उस के जांघ दिख रहे the….Paayal ने सोचा के पद्मिनी ठीक hi कह रही thi…sasur ने तो किसी भी महिला को नहीं छोरा है घर में पायल ने socha…magar यह कोयल क्यों बूढ़े को वैसा करने देती थी ? किआ उस्सको भी मज़ा अत था, किआ वह भी एन्जॉय करती थी ? पायल सोच में पर गयी…. बूढ़े ने पोजीशन लिया और कोयल को इस तरह से बिठाया अपने गॉड में के, उस्का लुंड, भले कपडे के अंदर hi हो, मगर कोयल के शूटरों पर ज़रूर रागढ रहा होगा, और हिल रहा था budha…Magar पायल यह देख कर केरान थी के कोयल ख़ुशी ख़ुशी अपना कमर हिला रही थी और खुद अपने शूटरों को रागढ रही थी बूढ़े के चीज़ पर…. हालां के दोनों ने कपडे पहने हुवे थे मगर एक्शन तो हो रहा tha….upar से ससुर जी कोयल के गालों को चाट रहा था और कोयल हंस रही थी…… पायल ने अचानक दरवाज़ा खोल दिया और झट से कोयल अपने दादा के गॉड से उतर गयी और होमवर्क पूछने का बहाना करने लगी, « दादा यह नंबर तो ठीक है नाह, यह वाला ? »

पायल ने सोचा, ‘कितनी चालु है यह लड़की, खूब जानती है के किआ कर रही थी और मुझे देखते hi नंबर पूछने की बहाना करने लगी, इस्सके मतलब है के यह खूब जानती है के जो कर रही थी अल्लोवेद नहीं hai….to यह बड़ी होकर किआ बनेगी ?’

पायल को यह देख कर गर्मी च गयी और उस्सको करने का मैं कर diya…aur ससुर को रिझाने कागि….. थी तो अपनी निघ्त्य में hi, ऊपर से गाउन पहनी हुवी थी…. कोयल को दिखने के लिए पायल जाके ससुर के गॉड में बैठ gayi….Koyal ने निचे सर झुका लिया और कुछ देर में कहा, “अचछह दादा मैं चलती हूँ….” उसस्के जाने के बाद पायल ने सीधे मुंह ससुर से पुछा, “यह किआ कोयल के साथ भी आप यह सब करते हो?” बूढ़े ने हँसते हुवे कहा, “किआ करता हूँ रे पायल?” पायल बोली, “चीः! शर्म नहीं है आप को? वह एक बच्ची है!” बूढ़ा बोलै, “बच्ची है? तुझे किआ पता वह किआ चीज़ है Paayal…kissi दिन मौके से तुमको दिखवा दूंगा के वह किआ करती है और किआ करना जानती है…..”

अब पायल को करने का बहोत मैं कर रहा था, राजें सोया हुवा था हमेशा की तरह मगर बूढ़ा झाड़ चुक्का था कोयल पर रगड़ते वक़्त, और वह अब उठ नहीं रहा tha…Paayal ने बहोत कोशिश की बूढ़े के लुंड को सहलाने की, उस से खेलने की, मुंह में लेने की मगर वह नहीं उठा….. अब बूढ़ा मेंटली तैयार था ज़्यादा जवान मॉल के लिए तो पायल के लिए बिल्कुल तैयार नहीं था उस वक़्त इसी लिए कुछ नहीं कर पारहा tha…..Paayal को ग़ुस्सा आया और कमरे से निकल आयी….

लाउन्ज में गयी तो धानंद के पास hi जगह मिली उस्सको बैठने को…. धानंद तो वेट कर hi रहा था के कब पायल आएगी इसी लिए उस्सने एक जगह खली रखा था अपने पास….. बिल्कुल देर न करते हुवे धानंद ने अपने हाथ पायल के निघ्त्य के निचे डाला और जल्दी hi उसस्के ऊँगली पायल के पंतय तक पोहोंच gayi…Dhanand ने फील किया के वह भीग गयी hai…ab क्यों न भीगे बूढ़े के साथ जो कर रही थी तो भीगेगी hi…. मगर पायल की गर्मी अब भी ताज़ा थी और खुद पायल ने अपना हाथ धानंद के लुंड पर रखा और मसलने लगी…. धानंद के खुशिओं का भण्डार भर गया उस waqt…ussne सोचा यह किआ चमत्कार है के पायल जो हमेशा मुझको ठुकराया करती थी आज अपने आप मेरे लुंड को पाकर रही है….. ाहः…” पायल हांफ रही थी धीरे धीरे और उसस्के जिस्म में आग दौर रही हो जैसे…. धीरे से पायल ने धानंद के कानों में कहा, “मैं पहले जाती हूँ मेरे कमरे में धीरे से आना मेरे जाने के बाद.” धानंद ने अपने कानों पर विश्वास न किया और पुछा, “मगर राजें?” पायल ने कहा, «आप एते हो के नहीं ?» «अत हूँ अत हूँ यार भला कैसे होसकता है के तू बुलाये और मैं न आवुन, चल तेरे पीछे आता हूँ… »

तो बे कॉन्टिनोएड……………………..
 
अपडेट 48

पायल बिल्कुल गरम हो चुकी थी, और क्यों के ससुर ने उस्सको खुश नहीं किया तो वह आज की रात धानंद को अघोष में लेने को तैयार हो गयी. हालां के उस्का पति राजें कमरे में गहरी नींद में सोया हुवा था पायल ने धानंद को कमरे में hi बुलाया. धानंद सोच hi रहा था के राजें के होते हुवे कैसे उस्सने अपने कमरे में बुलाया उस्सको, मगर वह गया उसस्के पीछे पीछे पायल के कमरे तक….. जब वह दरवाज़े तक पोंहचा तो पायल अंदर अपनी निघ्त्य पर से गाउन निकल रही थी और धानंद हैरान उस्सको देख रहा था, इशारे से पायल उस्सको अंदर अन्य के लिए कहा. धानंद ने तब इशारे से राजें के तरफ ऊँगली दिखाया, तो पायल ने दोनों कमर पर अपने हाथों को रख कर धानंद को तिरछी नज़रों से देखते हुवे अंदर अन्य के लिए सर से फिर इशारा किया.

धानंद अंदर दाखिल हुवा कुछ डरते डरते क्यूंकि उस्का छोटा भाई बिस्तर पर सो रहा था खर्राटे ज़ोर से मारते हुवे. धानंद की नज़र फिर पायल पर पड़ी, वह अपनी गुलाबी रंग के पतली स्ट्रैप्स वाली निघ्त्य में उसस्के सामने कड़ी थी, उसस्के काले लम्बे बाल खुले हुवे थे, उस्सकी बाज़ुओं का रंग गोरी गोरी उन् काले बालों से सवंर रहे थे… बहोत सेक्सी लग रही थी और धनद का लुंड एक दम तैयार खड़ा था उसस्के पंत में…. पायल मुस्कुरा रही थी, और उस्सकी नज़रों में एक जिस्म की प्यास का झलक साफ़ दिक् रहा था….. उस्सकी चूचियां उस पतली गुलाबी निघ्त्य में साफ़ नज़र आरही थी क्यूंकि उस्सने ब्रा नहीं पहनी हुवी थी, उस्सकी निप्पल उस निघ्त्य पर एकदम फॉर्म दे रही थी और धानंद से रहा नहीं गया और धीरे धीरे अपना कदम बढ़ाता गया पायल के तरफ. जब वह पायल के कुछ ज़्यादा करीब पोंहचा तो पायल के पीछे जो लाइट्स थी उस से पायल के दोनों जाँघों के बीच उस निघ्त्य के अंदर उस्सकी फॉर्म नज़र आरही थी और धनद के जिस्म में एक आग जैसे दौड़ा और वह अपने कदम को तेज़ी से बढ़ा कर पायल को जल्दी से अपने बाहों में कसके लिया और उस्सको पागलों की तरह चूमने लगा गालन पर और गले पर.

पायल ने फुस्फुस आवाज़ में धानंद के कानों में कहा, « Shshsh…ahiste आहिस्ते नहीं तो सरजू जाग जाएगा » अब पायल ने यह नहीं कहा के राजें जाग जाएगा क्यूंकि उस को पता था के एक बार जब राजें को नींद आजाती है तो वह सिर्फ सुबह को hi उठता है, सिर्फ एक बम के फटने से hi राजें की नींद तोरा जा सकता था ! धानंद के हाथ पायल की बदन पर चरों तरफ हेर रहा थाउसको किश करते huwe…aur उस्का लुंड कपडे समेत पायल की निचे वाले हिस्से पर रागढ रहा tha….Paayal भी धानंद को चुम रही थी और धानंद के कान को दन्त भी काटी उस्सने और जब धानंद ने ‘ाः’ की आवाज़ निकाली तो पायल ने एक छोटा सा थपड़ मारा उस्सको और बहोत धीरे से कहा, «चुप!»

धानंद और पायल दोनों स वक़्त खड़े हुवे थे, और दोनों के मुंह एक दूसरे के गले कोचुमते जा रे थे, और दोनों के जिस्म एक दूसरे से बिल्कुल चिपके हुवे रगड़े जा रहे the…donon के सेंसें तेज़ होते जा रहे थे और दिल की धड़कन भी… उसी पोसिटिओंमें पायल अपने बालों को चेहरे से पीछे करते हुवे धनद से पुछा, «आप ने दरवाज़ा लॉक किया ?» धानंद अचानक रुक गया और दरवाज़े के तरफ देखते हुवे कहा, «नहीं!» फिर पायल ने अपने कदम को दरवाज़े के तरफ बढाया धीरे धीरे पाऊँ के उँगलियों पर चलते हुवे और दरवाज़ा को लॉक करके वापस धनद के बाहों में आगयी.

फिर से दोनों खो गए एक दूसरे में, और पायल का हाथ अपने आप धीरे से धानंद के लुंड पर पोह्ची और उस्का ज़िप खोल कर पायल ने हाथ अंदर डालदी और ऊपर अपनी जीब से धनद का जीब चूस रही थी और धनद पायल की जीभ का रस निचोड़ रहा था और अपने हाथों से पायल के बूब्स मसलते जा रहा था….. दोनों बेहाल थे उस waqt…Dhanand को यकीन नहीं हो रहा था के वह पायल को अपने बाँहों में ले रहा है, उसस्के लिए सब एक सपना जैसा था, अपनी कल्पनओं में उस्सने कई बार ऐसे पायल को पकड़ा, चूमा और छोड़ा tha…apne पत्नी को छोड़ते वक़्त धानंद ने हज़ारों बार पायल को दिमाग़ में रखते हुवे छोड़ा है…. बल्कि अगर पायल को नहीं सोचता तो अपनी पत्नी को नहीं छोड़ पाटा woh…aur आज सच में पायल उस्सकी बाहों में थी और उस हालत में यह तो ा ड्रीम के ट्रू था उसस्के लिए…. जब पायल ने उस्का लुंड हाथों में लिया तो धानंद के मुंह से ‘श्श्श’ निकली और पायल ने उसको आवाज़ न निकलने की सज़ा यह दी के उसस्के लुंड को ज़ोरों से दबाया और एक नटखट सी मुस्कराहट छोड़ी….

धानंद दीवाना हो रहा था पायल की कोमल नाज़ुक को अपने लुंड पर मेहसूस करके, और पायल ने महसूस किया के उस्का लुंड उस्सकी पति राजें और रमेश से ज़्यादा मोटा और लम्बा है…. मगर ससुर वाला से ज़्यादा नहीं…. अब पायल को उस लुंड को देखने का मैं huwa…woh निचे बाथ कर देखना चाहती थी मगर सोचा के धानंद किआ sochega….to कड़ी hi लुंड को सहलाती रही कुछ देर तक फिर आखिर में धनद ने hi उसस्के कानों में कहा, निचे बैठ जाओ न मेरी जान, ज़रा होंठों को लगाकर तो देखो उस्का स्वाद…

पायल मुस्कुराते हुवे अपनी घुटनों पर गयी और जल्दी से लुंड को बाहर निकला और डरना करते हुवे उसको अपने जीभ से छठा ऊपर वाले हिस्से ko…Dhanand ने अपने सरको छत्त पर देखते हुवे आवाज़ छोड़ा, « shshsssssss….aaghghg अअअअअ » पायल ने रुक कर उस्सको कहा, «shshsh…khaamooooooooossh !! » और फिर धनद के लुंड के ऊपरी वाले हिस्से को चेतना जारी रखा, फिर अपने हाथों में लुंड को बड़े प्यार से सहलाती गयी और अपने सर को निचे झुककर लुंड को निचे से छठा और चाटते गयी पूरी लम्बाई तक… ऊपर निचे, दोनों तरफ, बल्कि लुंड के हर तरफ से पायल के जी जान से छाता, और आखिर में धानंद के बॉल्स को अपने जीभ से सहलाया पायल ने….. दोनों अण्डों को चमड़ी समेत अपने मुंह में लिया और chussa…Dhanand पागल होता जा रहा था ख़ुशी के maare…bahot मज़ा आरहा था उस्सको और ऐसा लगता था के अभी उसका पानी निकल जाएगा…. और अस्सल में प्रेकम तो निकल hi आया था तब तक….

पायल ने बॉल्स के चुस्सने के बाद फिर पुरे लुंड को संभाला हाथों में और जब मुहं में लेने जा रही थी चुस्सने को तो अपनी ऊँगली को लुंड की चढ़ पर रखा तो देखा के भीगा हुवा है और ऊपर सर उठाकर धानंद को देखा के हु तो ेंखों को मुंढे, जब्री को दबाये पागल होता जारहा है… धानंद अपने पैरों के उँगलियों पर खड़ा हो चुक्का था इतना पायल की चाटना उस्सको तारपा रहा था… फिर पायल ने धानंद के उस प्रेकम पर जीभ चलायी…. धनद फिर से तारपा और kampa…Paayal ने उसस्के पानी को चाटने के बाद हु नमकीन स्वाद अपने जीब पर महसूस किया और धीरे से उस लुंड के चढ़ पर अपने जीब को गोआल गोआल घूमने लगी…. धानंद तो बिल्कुल बेहाल होगया था उस पायल की एक्शन से….. और आखिर में पायल ने धीरे से लुंड को अपने मुंह में liya..pehle लुंड की ऊपर वाला हिस्सा मुंह में gaya,,,phir आधा लुंड…. फिर पायल ने अपना सर हिलना शुरू किया उस आधे लुंड के साथ अंदर बाहर उसी आधे से किये जा रही thi…magar धानंद कमर हिलने लगा और लुंड को पायल के मुंह में ज़्यादा तुस्ता gaya…Paayal को मुंह को ज़्यादा खोलना पड़ा और तक़रीबन पूरा लुंड पायल के गले को छह रही थी और पायल ने खनस्सना शुरू कर diya…magar धानंद जोश में था और हु अपना लुंड पायल के मुहं में ज़्यादा और ज़्यादा अंदर बाहर करता gaya..Yahan तक के उस्सको लगा के हु झाड़ जाएगा तब जल्दी से लुंड को निकला कण्ट्रोल करने के लिए…..

फिर पायल ने एक चादर बिछाई ज़मीन पर अपनी बिस्तर के पास जिस पर उस्का पति सोया हुवा था…. और जल्दी से अपनी निघ्त्य को बाहर निकाल फेकि और पूरी नंगी होकर लेथ गे उस चादर पर और धनद ने अपने कपडे फेक कर पाया के जाँघों को निहारता गया सहलाते हुवे…. और धानंद ने पायल की छूट पर अपने हाथ रखा तो देखा के बिल्कुल hi भीगी हुवी है और उसको चाटने को पोजीशन में liya…magar पायल ने धीरे से कहा, “अगर यह सब करोगे तो अभी वहां फिल्म ख़तम हो जाएगा और कुछ नहीं कर पावोगे, मुझे इस्सकी ज़रुरत है मेरे अंदर सीडी अंदर ाजावो, किसी और दिन को उधर का स्वाद चखना…” ….तो धानंद समझ गया के पायल को जल्दी थी लुंड खाने को और पोजीशन लिया पायल के ऊपर jaakar…Paayal ने दोनों जाँघों को खोल दिया, और उसस्के पति का सब से बड़ा भाई उस्सकी खूबसूरत सेक्सी जाँघों के बीच अपने लुंड को छूट को पहले चुवा और लुंड को अपने हाथों से उस भीगे हुवे हिस्से पर रगड़दा, और धीरे से छूट की एंट्री पर रखा तब तक पायल ने झट से अपने कमर को इस तरह से हिलाया के लुंड सीधा छूट के अंदर दाखिल होगया…. पायल के कहांरने की आवाज़ दी और दोनों हाथों से धनद को ज़ोर से पाकर लिया और खुद पायल hi अपनी कमर हिलती गयी लुंड को अंदर नाहर आने जाने ko….Dhanand बस बिना हिले पोसिटिओंमें था और पायल hi सब कुछ कर रही थी और धानंद बस महसूस कर रहा था एक हाथ से पायल के खूबसूरत चूचियों को मसलते हुवे…

आखिर में धानंद ने भी ढाका देना शुरू किया, एक से बढ़ कर एक ढाका लेती गयी पायल और धनांध को बाहों में जाकर उसस्के कांधों पर दन्त गदति गयी, वाहन चुस्ती गयी, और लुंड को महसूस करती गयी अपने जिस्म के अंदर यहाँ तक के अपनी पूरी जिस्म में एक आग की लेहेर महसूस की पायल ने और एक चीख सी छोड़ी उस्सने ठीक झड़ने के वक़्त और ज़्यादा ज़ोर से जाकर लिया धानंद को, और ज़बरदस्ती आवाज़ को बिल्कुल धीमी करती हुवी चिलायी, “आहहहहाआआ शशशशशशशशशसस बहोत मज़ाआ ारः HAI…AHYE रे HAYE….HHMHMHMHM IISHSHSHSHSHSSSSSSSSSSSSSS” उस्सने अपनी दोनों जाँघों को धानंद के कमर के ऊपर जोड़ दिया और कसके धानंद को जाकर हुवे किश किया और एक ख़ुशी की मुस्कराहट दी ussko….tab तक धानंद का झड़ने का वक़्त था और उस्सने जल्दी सलुन्द को बाहर निकाला और ये लम्बी पिचकारी छोड़ा उस्सने पायल के पथ और चूचियों पर…… और उस्सकी आवाज़ पतली हो गयी ख़ुशी और मज़ा के मरे…” आआआअह्हह्ह्ह्हह शःशशशशशश हाय रेमेरी Paayal…kia जवान जिस्म है tera…apne पति के सामने मुझसे चुडलिया तुम ने re…kitna मज़ा आया रे Paayal…haye हाय हाय…..”

तो बे कॉन्टिनोएड……………………..
 
अपडेट 49

धानंद ने कभी वैसे किसी पति के हाज़िरी में किसी ाव्रत को नहीं छोड़ा था. यह पहली बार था के उस्सने वैसे उस स्तिथि में एक ाव्रत से हमबिस्तर हुवे और एक अजीब सा मज़ा और कशिश थी उस तरह के छोड़ने में उस ने फील किया. दिमाग़ में यह सोच थी के एक इतना खूब सूरत जवान ाव्रत जिस का पति सो रहा हो, और वह ाव्रत किसी ग़ैर मर्द के साथ वह भी उस के जेठ के साथ उसी कमरे में रंगरलियां मन रहा है, यह सोच धानंद को बहोत hi एक्साइट कर रहा था छोड़ते वक़्त. बहोत hi अजीब सा मज़ा आया धानंद को और उस ने एक नया तजुर्बा का एहसास किया उस रात को. वह फुस्फुस बातें करना, अपने सेंसों को रोकना और धीरे धीरे सेंसों को थामते हुवे चूर्ण, ऊपर से चुम्मा छाती करना, पायल की जिस्म को उतना करीं जीएसम से जिसम को ragadhna…yeh सब धानंद को दीवाना कर रहा था हालां के हु झाड़ चुक्का था मगर जाने से पहले वह फिर जल्दी hi खड़ा हो गया यह सब सोचते सोचते.

पायल अपनी निघ्त्य पेहेन रही थी और फुस्फुस आवाज़ में धानंद को कहा, “ठहरये, पहले मैं दरवाज़ा खोलकर बाहर झांकती हूँ, अगर कोई नहीं दिखेगा तो आप निकल जाना..” यह सुनकर धानंद ने फिर से पायल को नीचे से जांघों के अवर पकड़ा, इस लिए के उस वक़्त पायल कड़ी होगयी थी निघ्त्य पेहेन्ने के लिए और धानंद तब तक नीचे ज़मीन पर बैठा हुवा था, तो उस ने जाँघों के बल अपने दोनों बाँहों में पायल को फिर से जकरा और उस का मुंह पायल के पथ को चूमने लगा निघ्त्य के ऊपर से hi…. और उस का हाथ उस वक़्त पीछे पायल के गांड पर दबा रहा था…. पायल ने कुछ देर धानंद को वैसा करने दिया फिर अपने उँगलियों को उस के सर के बालों में फेरती गयी और अपने नज़रों को बिस्तर पर सोये अपने पति को देख कर सरजू को देखा पायल ने फिर आहिस्ते से धानंद से पुछा, “किआ हुवा? मैं नहीं भरा किआ जी?”

धानंद पागलपन जैसे हालत में ऊपर सर उठाकर पायल की ेंखों में देखा और कहँरते हुवे कहा, “और एक बार करने दे न पायल जान!” पायल मुस्कुरायी और बहोत hi धीरे से फुस्फुस आवाज़ में धानंद के चेहरे के तरफ झुकते हुवे कहा, “अभी फिलम ख़तम होजाएगी और सब अपने अपने कमरे में जाने लगेंगे तो आप की पत्नी आप को ढूंढेगी…” मगर जैसे के पायल झुकी हुवी थी धानंद के चेहरे के तरफ तो धानंद ने हाथ ऊपर उठाकर पायल के बालों को पकड़ते हुवे उस के चेहरे को अपने मुंह तक खिंचा और उस को फिर से किश करने लगा मुंह में….. पायल आहिस्ते आहिस्ते किश को रेस्पोंद करते हुवे वह भी नीचे ज़मीन पर फिर से बैठ गयी….. बहोत प्यार से इस बार पायल ने धानंद को करेस किया और क्यों के धानंद ने एक छोटे बचे की तरह दोबारा करने की मांग की तो उस्का का चेहरा देखने लियाक tha….kissi को भी प्यार आजाता उस waqt…woh जैसे घुटनों के बल भीक मांग रहा हो पायल से…. तो इस बार हवस नहीं थी बल्कि प्यार था पायल के मैं में धानंद के लिए और धानंद भी कुछ वैसा hi फील करने लगा पायल के लिए क्यों के पायल उस वक़्त बहोत hi प्यार और ममता दिखा रही थी अपने व्योहार से….

दोनों फिर से एक लम्बे सेंसुअल किश में खोगये और किश करते करते दोनों फिर लेथ गए निचे और धानंद का हाथ पायल की जिस्म पर फेरता गया चारों तरफ और निघ्त्य दोबारा बाहर आगयी ज़मीन पर. धानंद भी बिल्कुल नंगा होगया, हालां के उस ने भी कपडा पेहेनना शुरू कर hi दिया था… बहोत प्यार और उल्फत से दोनों ने एक दूसरे के जिस्म को सहलाया और चुम्मा… इस कदर प्यार और स्नेह से के लगा के दोनों बरसों से प्रेमी हो…… पायल ने बहोत हलके से धानंद के चेहरे को अपने हाथों में लेकर किश किया और उस के ेंखों में काफी देर तक देखती रही और कहा, “आप की ेंखें बहोत खूब सूरत हैं, इन् में डूब जाने को मैं करता है जी!” तो धानंद ने कहा, “अरे यह तो मुझको कहना चाहिए पायल, ेंखें तो तुम्हारे बहोत hi ज़्यादा खूब सूरत हैं और तुम्हारी मुस्कराहट और नज़रों का जवाब नहीं, जिस तरह से तू देखती है और जिस तरह तू मुस्काती है तो मेरी जान hi निकल जाती पता है तुझे?” यह सुनने पर पायल वही मुस्कान में फिर ढलती है और थोड़ी सी शर्माती हुवी कसमसाती है और धानंद के बाहों में सिमट जाती है….. धानंद उस्सकी जिस्म को सहलाते हुवे फिर बोलता है, “इतने दिनों से मैं तुम पर मरता आरहा हूँ , यह बिना वजह तो नहीं नाह पायल, तुमको समझना चाहिए के मैं तुमको कितना चाहता हूँ, और कितने दिनों से…… रात दिन तेरे ख्यालों में रहता हूँ, अपनी पत्नी के साथ सोता हूँ तो तुझको याद करके, उस्सको चूमता हूँ तो तेरा चेहरा सामने sochkar…tune तो कोई जादू hi कर दिया है मुझपर रे पायल..”

पायल शर्माते हुवे कहती है, “अब बस भी करो जी, ज़्यादा फेंकने की ज़रुरत नहीं….” धानंद यकीन दिलाते है उस्सको के वह फेकता नहीं मगर सच में वह दीवाना है उस्का….. फिर यह भी कहता है, “काश तू मुझको राजें से पहले मिली होती, मैं तुझको उस से शादी hi नहीं करने देता….. अब बोल अगर मैं तुझसे शादी करना चाहता तो किआ तुम करती?” पायल हँसते हुवे कहती है, “आप से शादी? आप तो मुझसे कोई 20 साल बड़े है?” तो धानंद ने कहा, “प्यार में उम्र नहीं देखि जाती मेरी जान, जिस्म की गर्मी और आग की तपिश देखि जाती है, अगर तेरा जिस्म मुझसे खुश है तो उम्र का किआ वास्ता?” पायल मुस्कुराते हुवे धानंद का लुंड हाथों में लेकर अपने होंठों तक लाती है और कहती है, “हम्म यह तो सच है, मगर समझ के बंधनों में जो हम जाकर हैं वह हमको कभी भी एक दूसरे से शादी नहीं करने देती…..” और यह कहते हुवे पायल धानंद का लुंड चूसने लगती है एक सपनों की दुन्या में जाते हुवे…. और कहती है, “तो अगर आप मुझसे शादी नहीं कर पाए तो किआ हुवा मैं तो आप के अघोष में हूँ जी, और बिना शादी किये जब मैं के साथ सो रही हूँ तो क्यों के शादी जी? इस में ज़्यादा मज़ा है, चोरी चुप्पी करने में बहोत ज़्यादा मज़ा होता है जी…

धानंद अपने जिस्म में आग सा महसूस करता है और पायल का सर अपने हाथों में ज़ोर से लेकर उस्सको हिलने लगता है ताके उस्का लुंड अंदर बाहर होता रहे पायल के मुंह में….. पायल ने पूरी तरह से अपने जीब को उसस्के लुंड पर खूब फेरा, छाता और चूसा काफी देर तक और आखिर में कहा, “मेरा मुंह दुखने लगा अब कर लीजे इस से पहले के कोई अजय…”

धानंद ने पायल के दोनों जाँघों को दोनों तरफ फैलाया और बीच में घुस गया और अपने लुंड को छूट से घिस कर उस में धीरे से दाल दिया…. पायल ने ‘िष्श्षस’ की आवाज़ दी, और अपने बाहों को धानंद के कांधों पर दोनों तरफ से जाकर लिया और उसस्के गले और छाती को चूमने और चूसने लगी जब तक धानंद धक्का देता गया उस के छूट में और पायल तृप्ति गयी ख़ुशी के साथ धानंद को चूमते चाटते हुवे……. जब धानंद झड़ने को करीब था तो पायल चिलायी, “बहोत मज़ा आया आप के साथ मुझे आप बहोत अच्छे लगते हो, मुझे डर है के मुझको आप से प्यार न होजाये जेठ जी…. आआह्ह्हआआआ” और ढांड ने जल्दी से अपना लुंड बाहर निकला और झड़ना शुरू हुवा पायल के पथ पर मगर जल्दी से पायल उठी और अपने जेठ की लुंड को अपने मुंह लिया और थोड़ा सा पानी बाहर गया और बाकी सब पायल ने अपने मुंह में लिया और छाता….. धानंद तो बेहाल होगया उस पायल की हरकत से, और दीवानावार सेहलता गया पायल के चूचियों को जब तक पायल उस्का लुंड चुस्ती rahi….Paayal ने तब तक लुंड को मुंह से निकला जब तक वह नरम और छोटा साइज का होगया….. पायल ने जब निकला तो उस से खेलते हुवे हंसी और कहा, “देखलो आप का चीज़ बिलककोल एक छोटा सांप का बच्चा जैसा हो गया!! मार डाला मैं ने इस्को! थोड़ी देर पहले यह एक शेर की तरह घुर्रा रहा था अब एक भीगे हुवे बिल्ली की तरह hai….hehehehe”

धानंद भी हंसा और पायल के गालों को अपने उँगलियों से दबाया प्यार से, फिर उस्सको बाहों में लिया प्यार से बहोत प्यार से…..

उधर रोशन, धानंद का बीटा अपने बाप को ढूढ़ते हुवे पायल के कमरे तक ा चुक्का था ठीक जब धनद छोड़ रहा था तब से वह दरवाज़े के बाहर सब सुन रहा था….. और जब धानंद निकलने को था तो रोशन टॉयलेट जाने का बहाना करके उस तरफ जाने लगा….

तो बे कॉन्टिनोएड……………
 
अपडेट 50

अब रोशन तो था शर्मीला जैसे के उस दिन कोयल ने पायल को बताया था के उस्का कोई गर्लफ्रेंड कुछ भी यहीं और वह लड़कियों के तरफ देखता भी नहीं….. मगर किआ रोशन कुछ फील नहीं करता था? वह 18 साल का हो गया था तो किआ हाथ से काम नहीं चलता था? बेशके सभी नौजवानों की तरह सब करता था मगर चुप चाप अपने कोने में अकेले अकेले….. अब इस दिन को अपने बाप और जवान चची के बारे में जान कर तो वह पागल सा हो गया, टॉयलेट गया और मुठ मारा पायल चची को दिमाग़ में रखकर…. यह पहली बार था के उस्सने अपनी चची को सोचकर मस्टुर्बते किया…. मस्टुर्बते करते वक़्त वह पायल को अपने बाप के साथ चुदवाती नज़र आरही थी और रोशन अपने लुंड को हाथ में लिए मुठ मारता जा रहा था और उस के जुबां पे चची का नाम ाही गया, “ाः चची बहोत मज़ा ारः hai…chachi……chodne दो nah…aaaaaaahahahaaa” यह निकला रोशन के जुआन से जब उस्सने पिचकारी चोरी टॉयलेट में….

धानंद वापस लाउन्ज में चला गया और धीरे से पायल भी गयी जब फिल्म ख़तम होने को था….. उधर से रोशन टॉयलेट से वापस ारः था और उस्सने पायल को अजीब वासना भरी नज़रों से देखा. पायल ने नोटिस किया के रोशन उस्सको एक अजीब तरीके से देख रहा है, उस ने कभी भी वैसे उस्सको नहीं देखा था पहले कभी…. पायल खुद उस से फ़्लर्ट करना चाहती थी शुरू मैं मगर कोयल की बातों को सुनकर वह बात को भूल गयी थी….. अब पायल सोचने लगी के रोशन क्यों उस्सको उस तरह से देख रहा tha…mann hi मैं पायल ने सोचा, ‘किआ बाप के बाद बीटा भी मुझको लेगा किआ अब ?’ …यह सोचकर पायल के पूरे बदन में एक लेहेर सी दौड़ी, अउ िश निकली उस्सकी जुबां se…aur अपने दिमाग़ में पायल ने भी वासना भरी ख्यालों से रोशन को socha….socha के वह भी उस्सको छोड़ रहा है…. पायल ने एक बा एक फील किया के उसको फिर से करने को मैं कर रहा है……

खैर, फिल्म ख़तम हुवी और सब अपने अपने कमरे में गए. रोशन और कोयल एक hi कमरे में सोते थे दो अलग अलग पलंग पर. इस रात को रोशन के दिमाग़ मैं शैतान बसा हुवा था और शैतानी चीज़ भी इसी रात को नज़र आरहे थे बेचारा रोशन को. जब अपने कमरे में दाखिल हुवा तो लाइट ों करने पर उस स्की नज़र सीधा उस्सकी सोती हुवी बेहेन पर गे…. कोयल तो नींद में थी पूरी तरह से. जो ोहरना कोयल ने ोहरहि थी हु उस स्की जिस्म से खिसक गयी थी थोड़ा सा ठीक उस स्की जाँघों के पास और ऊपर छाती भी नहीं ढाका हुवा था. रोशन आहिस्ते आहिस्ते नंगे पाऊँ चल कर अपनी बेहेन के बिस्तर के पास पोंहचा और ऊपर से नीचे तक कोयल को घूरता गया……. रोशन के लुंड पूरी तरह से खड़ा होगया था फिर से हालां के कुछ देर पहले hi वह मुठ मार्के आया…. उस्सने चेक किया के कोयल नींद मैं है के नहीं और जब पूरा यकीन होगया के वोह बिल्कुल गहरी नींद में है तो रोसह ने बहोत hi धीरे से कोयल के जांघ पर से उस कम्बल को सरकाया और कोयल के चेहरे पर भी नज़र रखता गया के कहीं वह जग न जाये……. रोशन का दिल बड़े ज़ोरों से धारक रहा था, और पसीना भी चुत रहा था उसस्के माथे से. उसने कुछ देर रुक कर एक लम्बी सांस ली, फिर कोयल के जिस्म से कम्बल को हटाता गया, ऊपर और ऊपर, और upar….bahot हलके से सरकते हुवे उस्सने देखा के कोयल ने एक सफ़ेद रंग की छोटी सी निघ्त्य पहनी हुवी थी और, उस स्की जाँघों के बिल्कुल ऊपर अपने आप उठ गयी थी हु निघ्त्य, और कोयल को पता hi नहीं था….. रोशन को कोयल की जाँघों को चुने का मैं किया मगर हु डर रहा था के कहीं कोयल ेंख न खोल दे उसस्के हाथ के लगने से….

रोशन का दिल और ज़ोरों से धरकता गया और हु पसीना पसीना होता जा रहा था …. उस ने सोचा के अगर कोयल की नींद टूट गयी तो किआ जवाब dega…jawaab तैयार कर रहा था अब….. ‘किआ खाऊंगा? कोई मज़बूत बहाना चाहिए जिस से कोयल को लग ेके मैं सच कह रहा हूँ….. ‘मैं में यह बात सोची उस्सने…. और तय किया के कहेगा के उस्सको ोहरहानी के लिए उस्सकी बिस्तर तक आया है क्यों के नींद में वह बगहिर ोहरहे सो रही थी और मच्छर काट सकती थी उस्सको…. तो बहोत हिम्मत जुटाकर रोशन ने अपने कम्पटी हुवे हाथ को अपनी छोटी बेहेन की खूबसूरत नाज़ुक उभरे हुवे जाँघों पर रखा हलके से, और हथेली को बहोत हलके से, आहिस्ते आहिस्ते फेरा उन् जाँघों के ऊपर….. फिर अपने हाथ को वहीँ ठहर कर नज़रों को ऊपर के तरफ कोयल की छाती पर किया….. कोयल की दबी सेंसों के लेने की वजह से उस्सकी जवान नरम चूचियां ऊपर नीचे उठ बैठ रहे थे और निघ्त्य के अंदर से कुछ हिस्सा बाहर दिख रहे थे और निघ्त्य की पतली स्ट्रैप्स एक कंधे से सरक गयी थी और वह वाला ब्रैस्ट ज़्यादा नज़र ारः था… नाज़ुक, कोमल कोमल, कच्ची काली लग रही thi….Roshan ने एक हाथ को अपने पंत के अंदर डाला, लुंड को हाथ में लिया और हिलने लगा और एक हाथ से अपनी बेहेन की जांघ और बॉब्स हलके हलके दबाता गया, सहलाता गया……

थोड़ी देर के बाद उसस्के मैं में आया के वह उन् खूबसूरत जाँघों को चूमें…… तो फिर से कोयल के चेहरे को चेक किया के कहीं उस्सकी नींद तो नहीं टूटी…. जब देखा के वह गहरी नींद में hi थी तो आहिस्ते से अपनी बेहेन की जाँघों को चुम्मा, फिर जीब से छठा और फिर चेक किया के कहीं कोयल जग न जाये….. अब उस्का मैं और ज़्यादा कुछ करने को करता gaya…to ऊपर वाले हिस्से पर से, उस्सने कोयल की निघ्त्य की स्ट्राप को और ज़रा सा हटाया और वह रहा कोयल की छोटी सी जवान, कच्ची बूब जो एक एप्पल के जैसा था….. रोशन ने अपने एक ऊँगली को उस ब्रैस्ट पर दबाता धीरे से….. « इतना नरम होता है यह ? » रोशन ने खुद से पुछा….. फिर अपने चेहरे को उस छोटी सी बूब के करीब लेजाकर, पहले सुंघा उस्सको, और उस्सको एक बहोत hi अचछह खुशभु महका, और धीरे से चुम्मा अपनी छोटी बेहेन की चुकी को, फिर छाता और उस छोटी निप्पल को मुहं में लिया चुस्सने ko…jeise hi अपना जीब को चुवा निप्पल पर कोयल ने करवट बदली और रोशन अचानक झट से ज़मीन पर बैठ गया बिस्तर के नीचे…… उस्का का बहोत बुरा हाल था, उस ने सोचा के कोयल जाग गयी और उस्सको सब पता चल गया…. उस्का दिल तेज़ रफ़्तार से धड़क रहा tha..itna तेज़ के वह खुद अपनी धड़कनों को सुन रहा tha…..usske हाथ पेयर कांप रहे थे, लुंड छोटा होगया wapas…aur उस्सको रोने का मैं किया……

पर धीरे धीरे उस ने सर उठाकर ऊपर देखा तो कोयल उस तरफ मूढ़ कर सो रही थी…. अब उस्सकी गांड रोशन के तरफ था, और कोयल की पीठ नज़र आरही थी रोशन को, धीरे धीरे फिर उस्का लुंड पोजीशन में आगया और मुठ मारना शुरू किया रोशन ने एक हाथ से कोयल की गांड पर हाथ फेरतीए हुवे और उस्सकी लाल पंतय पर ऊँगली रगड़ते हुवे….. रोशन ने ज़ोरों से हाथ चलना शुरू किया अपने लुंड पर और ठीक जब पिचकारी चोरके को नज़दीक था तो अपने लुंड को जल्दी से कोयल की गांड पर दबा दिया और सब पानी उस्सकी पंतय और जाँघों पर चोर दिया……. उस्का पानी कुछ कोयल की पाँती पर कुछ दोनों जाँघों के बीच बहने lage…aur रोशन ‘शशःशस्सस्स ाआअह अअअअअ स्स्स्सस्स्स्शषस » करते हुवे जल्दी से एक टिश्यू लिया और जितना हो सका पोंछा अपनी बेहेन के जाँघों पर से, और पंतय पर से भी….. फिर धीरे से कोयल की छाती को चुम्मा और छाता, तब उस्सको ओढ़ाकर अपने बिस्तर पर चला गया….. बहोत खुश था वह और सोचने लगा अब तो हर रात कोयल को नींद में जाने का इंतज़ार रहेगा…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………………………
 
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