Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga - Page 6 - SexBaba
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Sarjoo ki Incest Story - A family Incest Saga

अपडेट 51

सुबह को रोशन मामूल तौर से स्कूल के लिए तैयार हुवा मगर वह कोयल को दबे ेंखों देख रहा था हर वक़्त के कहीं कोयल को कल रात वाली बात का पता तो नहीं…. वह सोच रहा था अगर कोयल ने अपनी पंतय पर उस्सकी पानी का दाग देखि होगी तो कुछ समझ sakegi…issi बात का फ़िक्र था रोशन को मगर कोयल बिक्लुल नार्मल था और हर रोज़ की तरह दोनों स्कूल के लिए एक साथ निकले.

मगर रोशन चुपचाप किसम का लड़का था और कोयल हमेशा बकबक किया करती थी और रोशन की टांगें खिंचा करती थी aksar…ab इस दिन को रोशन कुछ ज़्यादा hi बातें कर रहा था कोयल से तो कोयल ने पुछा, “आज सूरज पश्चिम से निकला है किआ?...... » इस बात पर रोशन सिर्फ मुस्कुराया….. अब तो उस्सकी नज़र कोयल की जिस्म पर thi….woh वैसे कभी अपनी छोटी बेहेन को नहीं देखता था, ामगर जो कल रात को हुवा तो अब तो उस्सकी नज़रें कोयल को नंगी कर रहे थे…. अपनी यूनिफार्म में कोयल हॉट दिखती थी, चलते वक़्त कभी कभी हवा की तेज़ रफ़्तार कोयल की स्कर्ट उठा देती और रोशन की ेंखें उस्सकी घुटनों के ऊपर जल्दी से जाते और कोयल की खूबसूरत कुंवारी जांघ का दीदार करते….. कोयल की ब्लाउज कुछ तंग थी और उस्सकी चूचियां उभरे हुवे नज़र आते उस तंग ब्लाउज के ऊपर वह भी रोशन अब निहारता गया….. कोयल ने कुछ ऐसा वैसा नहीं नोटिस किया रोशन की नज़रों के बारे में……

उधर घर में पायल सुबह सुबह राजें के जाने के बाद जल्दी से धानंद की राह में थी….. ऐसा लगता था वह उस्सकी दीवानी है, प्यार जो कर बैठी अपने जेठ को….. धानंद को डर था के कहीं उस्सकी पत्नी न देखेहले के वह पायल से बातें कर रहा है काम पर जाने से pehley….Paayal मुख्या दरवाज़े के बाहर वेट कर रही थी अपने जेठ जी को….. हाथ में कुछ लिए कड़ी थी पायल, जब धानंद निकला तो झट से उसस्के सामने आयी और उस्सको एक छोटा सा पार्सल दिया और कहा, “यह मेरी तरफ से दिन में खाना तो मेरी याद आएगी दिन भर” यह कहकर पायल ने अंदर झांकी के कोई दिख तो नहीं रहा, और क्यों के कोई नहीं था जल्दी के धानंद के गालों पर किश किया मुस्कुराते हुवे और उस्सको ‘bye’ कहकर दौड़ते हुवे वापस अंदर चली गयी अपने बालों को हाथों में झुलाते…..

एकदम छनकहल दिख रही थी इस सुबह को अपनी Paayal…..aur ससुर की नज़र उस पर पड़ी, उस्सको दाल में कुछ कला लग रहा था क्यों के पायल कुछ ज़्यादा hi चंचल लग रही थी….. अब क्यूंकि पिछले रात को बूढ़े ने पायल को खुश नहीं किया था पायल नाराज़ सी थी उस के साथ और ससुर जी उस्सको वह ख़ुशी देना चाहता था जो रात को नहीं दे पाया!.

इस दिन को धानंद की पत्नी का रसोई में रहने का दिन था. पद्मिनी फ्री थी और सरजू उस वक़्त उस्सकी के साथ थी उसस्के कमरे में. सासु जी मंदिर गयी हुवी थी… पायल अपने कमरे को साफ़ करने गयी तो बूढ़े ने सोचा चाह मौका है. आहिस्ते से पायल के कमरे में दाखिल हुवा, पायल झुकी हुवी दरवाज़े से पीठ किये झाड़ू लगा रही थी. उस ने एक छोटा सा चोली और एक लेहंगा पहना हुवा था, चोली में से तो झुकने से आधा बूब्स बाहर निकलना चाहते थे, और गांड तो उस लहंगे में बड़ा मस्त नज़ारा दे रहा था, बूढ़ा देखते hi खड़ा होगया और जल्दी से पीछे से hi पायल को जकरा बाहों में और अपने लुंड को कपडे समेत दबाया पायल के खूबसूरत गांड par…Paayal क्यूंकि ग़ुस्सा थी कल रात वाली बात से, नहीं देना चाहती थी बूढ़े को और नीचे बैठ गयी और बूढ़े का लुंड तो बेचारा उस गांड को दबा न सका, तो बूढ़ा बोलै, “ आरी पायल चाह मौका है ऋ, सासु तेरी मंदिर गयी है और सरजू पद्मिनी के पास है, हम दोनों अकेले है, वक़्त कम है चल थोड़ा मज़ा करलें यार”

मगर पायल ने कहा थोड़ा घुसे में, “नहीं, जब मेरा मैं कर रहा था तब तो आप नहीं कर पाए अब क्यों करने दूँ आप को? बड़े मतलबी हो आप, सिर्फ अपने मतलब से काम रखते हो जी, जाओ यहाँ से कुछ नहीं मिलेगा….” मगर ससुर का तो बहोत मैं कर रहा उस्सको छोड़ने को, और जिस ड्रेस में वह थी उस वक़्त सिर्फ छुड़वाने की तरह ड्रेस हुवी थी, उस वक़्त कोई भी मर्द अगर उस कमरे में ग़ुस्ता तो उस्सको छोड़ना चाहता…. कुछ देर तक छोटा सा बेहेज़ जैसे हुवा दोनों mein….phir बूढ़े ने झपट कर पायल को ज़बरदस्ती से पकड़ा और ताकत इस्तेमाल करते हुवे उस्सको उठाकर उस्सकी बिस्तर पर pakta…..Paayal हैरान होगयी के यह किआ कर रहा है बूढ़ा?!!

पायल ने कहा, “देखो आप ऐसे ज़बरदस्ती नहीं कर सकते यह ठीक नहीं ….” बूढ़ा पायल को नहीं सुन रहा था पर अपना पंत उतार रहा tha…Paayal खुले मुंह उस्सको देखती रही और सोचा, “यह बूढ़ा तो मेरा रपे करने जा रहा है!!” पायल बिस्तर से उठ hi रही थी के ससुर ने उस्सकी टांगें पाकर कर ज़ोर से खिंचा और ताकत से उस्सकी लेहंगा को ऊपर उठाया…… पायल की बड़ी बड़ी मोती मोती गोरी गोरी जांघें ससुर को दिखा और उस्सने तेज़ी के साथ अपने सर्र लहंगे के नीचे घुसाया और पायल की जाँघों को चाटने लगा….. पायल अब भी उस्सको ढाका दे रही थी और वापस जाने को कह रही थी….. उस्सकी जाँघों को चाटते वक़्त बूढ़े ने अपने हाथों को उस्सकी चोली के ऊपर से hi उस्सकी चूचियों को मसलना शुरू kiya…phir हौले हौले चोली उतर गयी और लेहंगा भी ज़मीन पर पायी गयी…. पायल न न करते करते हाँ हाँ करने लगी…… ससुर इतना मज़ा दे रहा था उस्सको के पायल और मांग करने lagi…uss वक़्त ससुर उस्सकी छूट का रस निचोड़ रहा था और दोनों चूचियों को दीवानों की तरह मसलता जा रहा tha…aur पायल बिस्तर पर एक सांप की तरह रेंग रही थी तड़पते huwe…usski ेंखें जैसे शराब पी राखी है, उस्सकी होंठ लरज़ते हुवे पैमानों की तरह और ससुर का मुंह ने छूट चोर कर उन् होंठों को चाटना और चुस्सना शुरू किया, जब के पायल ने ेंख मुंध ली और अपने बाहों को ससुर के जिस्म को दोनों तरफ से जाकर लिया और अपने नाख़ून को उसस्के पीठ पर गर्ने लगी कसमसाती हुवी…… ससुर ने आहिस्ते आहिस्ते पायल की गालों को चाटते हुवे उस्सकी गले के तरफ बढे और पायल ने अपना सर पीछे के तरफ करदी अपनी लम्बे घने गेसुओं को झटकते हुवे और उस्सकी पूरा छाती बूढ़े के सामने थे तो उस्का मुंह गले के शुरू से चूमते चाटते चूचियों तक गए और एक एक करके दोनों बूब्स और निप्पल्स को उस ने चूसा जब के पायल पागलों की तरह तृप्ति और रैगंटी गयी ससुर के बाहों में….

ाअखिर में बूढ़े ने पायल को गॉड में लिया बिस्तर पर बैठकर, पायल की दोनों जाँघों को दोनों तरफ करके उस्सको अपने लुंड पर बिठाया, छूट लुंड के ऊपर, लुंड को भीगा रही थी और पायल ने अपने दोनों हाथों को ससुर के कांधों पर सपोर्ट के लिए रख कर खुद वही अपना गार्डन हिलने लगी ससुर के लुंड पर और छूट रगड़ती गयी ुसस्स मोठे लौड़े पर यहाँ तक के उस्सने खुद अपने हाथों से लुंड को अपनी छूट में घुसाया और ऊपर निचे उठने बैठने लगी जल्दी जल्दी हम्प्टी हुवे….. बहोत तेज़ी के साथ पायल ससुर के लुंड पर उठक बैठक करती गयी फिर बूढ़े ने भी ज़ोर लगाना शुरू किया और पायल ने महसूस किया के उस्का लुंड उसस्के छूट के अंदर और मोटा होता जा रहा है और लम्बा भी…. पायल को बहोत मज़ा अन्य लगा और वह उछलती गयी मस्ती में उस लौड़े पर जो एक पिस्टन की तरह अंदर बाहर हो रही थी पायल की भीगे हुवे छूट में…… दोनों एक दूसरे को अपने बाहों में जाकर हुवे थे और पायल की छाती ससुर के छाती से रागढ खा रही थी, उस्सकी चूचियां ससुर के सफ़ेद छाती के बालों पर रगड़ते हुवे पायल को दुगना मज़ा दे रही थी…… ऊपर से ससुर के जीब उस्सकी गले और गालों को चाटते जा रहे थे तो पायल ने भी अपने जीब से ससुर के गले और कांधों को छाता और दन्त भी काटे जमके…. आखिरकार ऐसे मज़े ज़्यादा देर तो नहीं theherte…to दोनों एक साथ अपने मंज़िल तक पोंछे और एक साथ hi दोनों झड़ने लगे पायल आवाज़ के साथ “आहहहाआअह श्श्श्शस्स्सस्स्स्सस्स हाआआआ बहोत मज़ाआआ आआरहा haiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii ोूउउउइइइइ maaaaaaaaaa मैं मर gayiiiiiiiiiii” और बूढ़ा भी दबाए आवाज़ में एक बूढ़े शेर की तरह गहराया, “आआगघघघघघघहहहहह हाआआ shshshssssssss”…aur हुवी दोनों की ख्वाहिश पूरी सासु के आने से पहले……. उधर से पद्मिनी सरजू को वापस करने आरही थी दरवाज़े के पास उस्सने दोनों को मज़ा का इन्तहा पर पोहोचते सुना तो दबे पाऊँ वापस सरजू को अपने hi कमरे में लगाई फिर से…….

तो बे कॉन्टिनोएड……………………..
 
अपडेट 52

स्कूल में रोशन ब्रेक में सिर्फ कोयल को ढूंढ़ता फिरता था. पलहे तो वह अपने मेल दोस्तों के साथ रहा करता था पर अब सिर्फ कोयल की तलाश किया करता रहता. क्यूंकि कोयल छोटी थी, उन् के साथी भी उसी के क्लास की थीं सो, सब उम्र में रोशन से छोटे थे. तो रोशन के दोस्तों को अजीब लगा के क्यों अब वह छोटी लड़कियों के ग्रुप में रहने लगा.

अगर कोई लड़का कोयल से बात करता तो रोशन ग़ुस्सा करता. वैसे इस से पहले कोयल कई बड़े लड़कों के साथ बातें किया करती थी पर अब जब भी वह किसी से बात करती हँसते हुवे या मुस्कुराकर तो रोशन कोयल को डांटता के क्यों उस्सने बात की उस लड़के के साथ और क्यों मुस्कुरायी उस से.

घर आकर एक दिन जब पायल से बातें कर रही तो कोयल ने पायल को कहा, “आज कल रोशन वह सेहमी सेहमी सा लड़का नहीं रहा chachi…woh मुझपर नज़र रखता है स्कूल में और मैं जब किसी लड़के से बात करती हूँ तो मुझपे घुस्स्सा होता है वह, पता नहीं कैसे यह चेंज आया उस mein…woh तो मेरे तरफ देखता भी नहीं था kabhi…kissi भी लड़की के तरफ नहीं देखता था, दूर भागता था लड़कियों से मगर अब मेरे साथ और मेरे सहेलियों के साथ रहता है हर ब्रेक में….. सभी लड़कियां उस्सको पसंद करते hein…aur वह अजीब सा बेहवे करता hai…mere कांधों पर हाथ रखता है, जो पहले कभी नहीं करता था, चलते वक़्त मेरा हाथ थाम लेता है, बस में मेरे hi साथ सीट ढूंढ कर बैठता है, मुझको किसी लड़के के पास नहीं बैठने देता…..”

तो पायल ने कोयल को कहा, “तू तो उस से ज़्यादा सायानी थी और अब वह तोहसे ज़्यादा सायना लगने लगा है, किआ किया तुमने ऐसा के वह तुझपर नज़र रखने लगा है? अच्छा यह बता सिर्फ स्कूल में hi वैसा बेहवे करता है या घर में भी?” कोयल ने जवाब दिया, “आरी नहीं चची सिर्फ स्कूल में hi नहीं घर में भी अजीब बेहवे करता है…. मुझसे ज़्यादा बातें करता है, मेरे साथ साथ रहता है, जब मैं दादू के कमरे में जाती हूँ तो पीछे पीछे चला अत hai…aur जब दादू मुझसे प्यार करता है तो वह मुझको टेडी नज़रों से देखता है और जब मैं वापस कमरे में जाती हूँ तो कहता है क्यों मैं दादू से मीठी मीठी बातें करती हूँ….”

तब पायल ने कोयल से धीरे से कहा, “मैं भी जानती हूँ तू अपने दादू के साथ किआ किआ करती है…!” कोयल लाल हो गयी और शर्मा कर वहां से भाग गयी. पायल सोचने लगी के किआ किआ करती होगी अपने दादू के साथ यह लड़की…. ससुर जी ने कहा था जब पायल को पता चलेगा किआ किआ करना जानती है यह कोयल इस छोटी सी उम्र में तो हैरान हो जाएगी…. तो पायल की इंटरेस्ट बाहरणे लगी अब जानने के लिए के कोयल किआ किआ करती है दादू के साथ अपने…. और पायल यह भी सोचने लगी के रोशन को कहीं पता नहीं कोयल और उस के दादू के बारे में या उस ने कुछ देखा तो नहीं जैसे पायल ने देखि और सुनी थी…..

कैसे भी करके, पायल ने कोयल को फिर से अपने पास बुलाया और फिर से उसी सब्जेक्ट को चेर्रा…… पायल ने कहा, “देख तू फ़िक्र मत कर यह बातें सिर्फ हम दोनों के बीच hi रहेगी, मैं किसी को कुछ नहीं बताउंगी, मैं समझती हूँ तुझे, आखिर मैं भी तो लड़की हूँ नाह, तू मुझसे बेफिक्र सब बतादे…..” कोयल नादाँ बनते हुवे पुछा, «किआ बतादूँ चची ? » और मुस्कुराने लगी यह कहकर….. तब पायल ने कहा, « देख कोयल तू बड़ी हो गयी है, उम्र में रोशन से छोटी ज़रूर है मगर देख तेरी जिस्म कितनी उभरी हुवी है, तेरा यह छाती देख,» कोयल की बूब्स पर पायल ने अपने हाथों को फेरते हुवे यह कहा, और कोयल शर्माती, लाल चेहरे के साथ अपने जवान चची के हाथों पर झूट मूठ के मारा…. तब पायल ने धीरे से कहा, «देख मैं भी जानती हूँ तेरे और तेरे दादू के बारे में, उस रात को जब मैं तेरे दादू के कमरे में आयी थी और तू होमवर्क्स के बहाने अपने दादू की गॉड में बैठी थी तो वह किआ कर रहा था तेरे साथ मुझको सब पता है…. » कोयल लज्जा से और बहोत हैरानी से अपने हाथ को खुले हुवे मुंह पर दबाती हुवी कहती है, «हाय चची…. किआ आप ने देखा था ? हाय मैं मर गयी !!» पायल ने कहा, «उस रात को जब तू होमवर्क के बहाने अपने दादू के गॉड में बैठी थी उस छोटी ड्रेस में और उस का हाथ तेरे जाँघों पर फेर रहे थे और तू कितना मज़ा ले रही थी और उस्सको सब करने दे रही थी !! हम्म? बोल बोल पकरि गयी नाह ? मैं ने सब देखा था, उस्का वह मोटा चीज़ तेरे नीचे रागढ रहा था और तुझको मज़ा ारः था नाह? तू भी तो ख़ुशी ख़ुशी अपने शूटरों को रागढ रही थी उस के उस मोठे चीज़ पर, और वह तुझको चाट रहा था तेरे मुहं और गालों को फिर तू करने देती थी और हंस रही thi….Sab लोग फिलम देख रहे थे लाउन्ज में और तू दादू के साथ मज़ा कर रही थी….. अब बोल ऋ कोयल!!»

कोयल यह सब सुनकर पानी पानी होगयी और अपने लाल चेहरे को हाथों में छुपा लिया. पायल अपने चची से नज़रें नहीं मिला पा रही थी. तो पायल hi बोली, «अब किआ पता के रोशन ने भी तुझको देखा हो जैसे मैं ने देखा हो इसी लिए वह तुझपर नज़र रखता हो?» कोयल और फ़िक्र करने लगी और कहा, «नहीं चची ऐसा मत कहो न प्लीज मैं कैसे भाई को मुंह दिखाउंगी अगर यह बात हो तो? मुझे बहोत शर्म आएगी भाई को यह सब बातें अगर पता हो तो!!” यहाँ कोयल को कुछ पता नहीं के रोशन ने किआ किया था उसस्के साथ जब वह नींद में थी….. और कोयल वहां से उठकर भाग गयी अपने कमरे में पायल से नज़रें चुराते हुवे….

पायल सोचने लगी किआ किआ करती होगी बूढ़े के साथ और कब मौका मिलता होगा उन् दोनों को……

रात को टीवी देखते वक़्त कोयल अपने पापा (धानंद) के पास बैठी थी. और अपने पापा से दुलार कर रही थी…. कोयल एक बार उठी कुछ लाने के लिए और वापस आयी तो अपने पापा के सीट के पीछे से खड़ा हो कर अपने पापा के गले में अपने बाहों का हार डालकर झूलने की कोशिश कर रही thi…..Dhanand उस्सकी बाज़ुओं को अपने छाती पर संभाल कर पकड़ा हुवा था कहीं वह वैसे झूलते वक़्त गिर न पड़े…… धानंद ने कभी भी ऐसा वैसा नहीं सोचा था अपनी प्यारी बेटी कोयल के बारे में….. उस्का लाड़ली थी वह…. मगर इस वक़्त जब कोयल वैसा कर रही थी तो धानंद ने कोयल की बूब्स को अपने पीठ पर महसूस किया…. उस वक़्त पायल लाउन्ज में नहीं थी और ससुर भी ग़ैर मौजूद था…… कोयल की दादी और एक चची थी वहां, और क्यों के कोयल अपने पिता से हमेशा वैसे लाड दुलार करती है तो किसी ने कुछ एब्नार्मल नहीं देखा या समझा….. धानंद ने कोयल को संभालते हुवे अपने गॉड में लिया….. कोयल एक छोटी बची की तरह नटखट कर रही थी और पापा के साथ खेल रही थी….. एक छोटी सी ड्रेस पहनी थी जो हर रात को पहनती है…… यह पहली बार था जब धानंद ने कोयल के प्रति एक एक्ससिटेमेंट महसूस किया और उस्सकी जिस्म उस्सको पायल की जिस्म जैसी लगी…. धानंद ने धीरे से, हलके से अपने हाथों के कोयल के जांघ पर रखा और आहिस्ते से सहलाया….. यह करते वक़्त धानंद की नज़र कोयल की चची और कोयल की माँ पर गयी, यह देखने के वह लोग कहीं उस्सको देख तो नहीं रहे…. अब क्यूंकि लाइट्स ऑफ थे और सिर्फ टीवी के लाइट्स में सब नज़र तो नहीं एते थे तो धानंद ने धीरे धीरे अपने हाथ को कोयल की ड्रेस के नीचे डालता गया और कोयल ख़याल नहीं कर रही थी और अपने बालों से खेल रही thi…Dhanand ने देखना चाहा के कोयल छोहकेगी या चुप रहेगी….. जब देखा के कोयल चुप है और अपनी दोनों टांगें हिला रही जो ज़मीन पर रागढ रहे थे, तो धानंद ने आहिस्ते से अपने गालों को कोयल के गालों से लगाया दुलार के बहाने तब कोयल ने अपनी बाहों को अपने पापा के दोनों कांधों के दोनों अवर फैलाते हुवे ज़ोरों से उस्सको गले लगते हुवे उस्सको गालों पर किश किया….. और धानंद का एक हाथ उस वक़्त कोयल की तक़रीबन पंतय तक जा चूका था…

धानंद सोच रहा था के कोयल कुछ ख़याल नहीं कर रही है मगर उस्सको खूब पता था के उस्का पापा किआ कर रहा है क्यों के दादा तो यह कर चूका था उस के साथ, मगर पापा यह पहली बार कर रहा था…. धानंद ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था के खुद अपनी लाड़ली बेटी कोयल से भी वह एक्साइट होगा एक दिन…. उस्का लुंड एक दम जमके खड़ा हो चूका था उस वक़्त और कोयल उस लुंड पर बैठ गयी और जान बूझ कर हिल रही थी अपने पापा के मोठे खड़े हुवे लुंड पर….. अब कोयल को सिर्फ एक डर थी के कहीं रोशन ने देख लिया तो ग़ज़ब हो जाएगा जैसे के पायल ने कहा के शायद वह नज़र रख रहा हो ुसस्पर …… धानंद को बहोत मज़ा ारः था और उस्सने धीरे से कोयल के कानो में कहा, «चलो पापा के बीएड पर बहोत प्यार करूँगा अपनी गद्य को…. » कोयल ने सिसकियों के साथ जवाब दिया, «मगर पापा, भाई अभी यहाँ आएगा और मुझको नहीं देखा तो धुनते हुवे आप के बीएड तक आजायेगा, यहीं ठीक है नाह… » और एक आह निकली कोयल की गले से………

तो बे कॉन्टिनोएड……………………..
 
अपडेट 53

धानंद एक दम दीवाना होरहा था अपनी लाड़ली की उस वक़्त…. जब धानंद की ऊँगली कोयल की पंतय को चुवा तो कोयल ने अपनी जिस्म को पूरी तरह से अपने पापा के जिस्म पर दबाया और अपने पापा के गले के पीछे वाले हिसे पर हलके से दन्त कटा, जब कोयल ने ऐसा किया तो धानंद ने मैं hi मैं सोचा, ‘इस्को तो गर्मी है इतनी सी उम्र में भी, यह तो एक्साइट हो रही है मेरी तरह…. मेरा लुंड इतना मोटा खड़ा है और यह अपने चुतरों को रागढ रही है उस पर, किआ इस्को पता है यह किआ कर रही है और मैं किआ कर सकता हूँ इस्सके साथ?’

धानंद की ऊँगली जब कोयल की पंतय को चुवा तो धानंद ने बहोत नरम और मुलायम महसूस किया उस part को जहाँ कोयल को पुसी थी…. उस ने सोचा के कोयल उस्सकी हाथ को वहां से हटाएगी, मगर कोयल ऐसा बेहवे कर रही थी जैसे उस के पापा का हाथ वहां नहीं hai……apne पापा के साथ वह जिस तरह से हमेशा दुलार करती है वैसे hi किये जा रही थी जैसे के कुछ ज़्यादा नहीं हुवा हो……. तो आहिस्ते आहिस्ते धानंद अपने मुंह को कोयल के गालों पर फेरते हुवे उस के होंठों तक अपने होंठों को लगाया और अपने जीब मुंह से निकाल कर हलके से कोयल के नाक पर phera…..Koyal को हंसी आयी इस लिए के नाक पर अपने पापा का जीब फेल किया फिर अपने शूटरों के दोनों हिस्सों के बीच अपने पापा के लौड़े को फील करती जा रही थी तब धानंद ने धीरे से उस्सकी ड्रेस को ज़रा ऊपर उठाया, वह इस लिए के कोयल की पंतय डायरेक्ट उसस्के लुंड पर रगड़े ना के ड्रेस के ऊपर से….. कोयल को समझ में नहीं आरही थी के के पापा किआ करना छठा था तो उस ने पुछा, “किआ??” तब धानंद ने धीरे से कोयल के कान में कहा, “ज़रा उठ नाह अपनी ड्रेस को ऊपर उठा कर बैठ” कोयल ने फिर पुछा, “क्यों?” वह वैसे hi रागढ़ी जारही थी उस के लौड़े के ऊपर….. धानंद के फिर उसस्के कानों में उस के गालों को चाटते हुवे कहा, “बिटिया मेरी, पापा को ज़्यादा मज़ा आएगा अगर तेरी ड्रेस ज़रा ऊपर होगी तो, थोड़ा सा ऊपर उठ न ऋ……” तो शरारती तौर पे कोयल ने अपने छात्रों को ज़रा सा उठाया तब धानंद ने जल्दी से अपने लुंड को बाहर निकल कर कोयल की ड्रेस ऊपर करते हुवे उस्सको उस पर बिठा दिया…. कोयल जब बैठी तो खूब अछि तरह अपने पापा के मोठे लम्बे लुंड को अपने जाँघों के बीच फील कर रही thi….aur बात तो यह के जिस तरह से कोयल बैठी थी उसस्के पापा के लुंड अब उस के चुतरर के नीचे नहीं था बल्कि उस के दो जाँघों के बीच ठीक चुतरों के नज़दीक…..

तो कोयल अब अपने पापा के लुंड को देख और छह भी सकती थी, लुंड ठीक उस के सामने था उस के दोनों जाँघों के बीच….. कोयल ने बिना पापा के कहे अपने हाथों को लुंड के ऊपरी वाले हिस्से पर रख दिया हलके से…. धानंद ने ‘िसशश्श’ किया जब अपनी कमसिन, नादान छोटी बेटी की हाटों को अपने लुंड पर फील किया…. कोयल मुस्कुराते हुवे अपने होंठों को डेंटन में दबाये अपने पापा के चेहरे पर देखते हुवे उसस्के लुंड को दोनों हाथों से रागढ रही थी और अपने दोनों जाँघों को भी हिला रही थी उस पर बैठे हुवे….. धानंद को बहोत मज़ा ारः था और उस्सने कोयल से कहा, “अपनी हाटों में थोड़ा सा थूक लगाकर ुसस्पर रागढ नाह…” कोयल ने वही किया, थूक लगने से कोयल के हाथ पापा के लुंड पर जल्दी जल्दी रागढ रहे थे और धानंद ने अपने कमर को हिलना शुरू किया आहिस्ते आहिस्ते ताके लाउन्ज में बैठे बाकी लोगों को पता न चले के बाप बेटी किआ कर रहे हैं……

अब जब के धानंद भी ढाका दे रहा था कोयल के जाँघों के बीच उसस्के थूक से भीगे हुवे हाथों में तो उस रागढ से थूक सुख गए और रागढ मुश्किल हो गया…. तब कोयल ने धीरे से कहा पापा के कानों में, “सुख गया, किआ और थूक लगावूं पापा?” धानंद ने कहा, “ठहर, मैं hi लगता हूँ,” उस्सने अपने थूक को अपने लुंड के चारों तरफ लगाया और कोयल के हाथों को अपने हाथों में लेकर जिस तरह से मुठ मारते हैं उस तरीके से कोयल के हाथों को अपने लुंड पर chalaya…aur उस के हाथ चोर कर कोयल को कहा, “वैसे hi ज़ोर से जल्दी जल्दी करता जा तेज़ी से, पुरे लुंड पर…..” कोयल मुस्कुरायी और अपने पापा को मस्टुर्बते करती गयी दोनों हाथों में उसस्के लुंड को पीसलाते, और अपने जाँघों के बीच बाकी के नीचे वाले लुंड के हिस्से को दबाते……

तब तक धानंद के होंठ कोयल के पीठ पर, पीछे वाले गले के हिस्से पर फेर रहा था और अपने दोनों हाथों से पीछे के तरफ से कोयल की कमर पर से हाथों को फेरते हुवे उस्सकी छोटी छोटी चूचियों को मसलना शुरू किया, जिस से कोयल को बहोत अचछह लगने लगा और वह अपनी जिस्म को अपने पापा से और रागढ खाने के लिए दबती गयी और उसस्के लुंड को अपने हाथों से रगड़ती गयी जल्दी जल्दी…….

धानंद ‘िष’ ‘ाः’ ‘उठ’ करता गया धीरे धीरे जिस को सुनकर कोयल को मज़ा ारः था और धानंद अपनी बेटी को ज़ोर से जाकर हुवे अपने लुंड को उस के गांड के बीच रगड़ने लगा .. लुंड एक दम मोटा खड़ा था और कोयल की पंतय को जैसे फार्ने वाला था, धानंद पागलों की तरह लुंड को उस पंतय पर तुस्टी hi जा रहा था कोयल को अपने बाहों में जाकर उस का मुंह कोयल के गालों को चुस्ती, उस का हाथ कोयल के जाँघों के बीच मसलते फिर चूचियों को दबाते धानंद ने लुंड की रागढ की रफ़्तार को डंगना किया और हम्प्टी हुवे कश्मसाते हुवे अपनी बेटी की पंतय के बीच अपनी पिचकारी छोड़ी उसस्के और बीच में कोयल के हाथों को फिर से लुंड पर रखा ठीक जब उस्का पानी निकल रहा था और कोयल ने उस पानी निकलते हुवे लुंड पर अपने हाथों को फेरा, और आहिस्ते आहिस्ते लुंड की पानी से भीगे हुवे हाथों को मसलती गयी अपने पापा के मुंह को अपनी मुंह में लिए हुवे उस का जीभ चूस्ते हुवे……..

धानंद का लुंड तब तक कोयल के हाथों में रही जब तक वह छोटा होगया और कोयल उस से खेलती rahi…aur अपने उँगलियों के बीच वह स्टिकी पानी जो लुंड से निकला था कोयल अपने उँगलियों को मिला रही थी और सेपरेट कर राइ थी जैसे के किसी ग्लू से खेल रही हो…….

फिर धीरे धीरे धानंद ने अपने अंडरवियर और पंत को ऊपर खिंचा और कोयल को कहा के वह बाथरूम जाकर अपने आप को साफ़ करे…. कोयल ने जाने से पहले अपने पापा को फिर मुहं में किश किया और धानंद ने उस्सकी जीभ को चूसा एक लम्बी सेक्सी किश में……..

तो बे कॉन्टिनोएड…………………….
 
अपडेट 54

उस रात को जब कोयल अपनी कमरे में गयी सोने को तो रोशन उस्का इंतज़ार कर रहा था. कोयल ने सोचा कहीं रोशन ने कुछ देखा तो नहीं नाह जब वह अपने पापा के साथ सोफे पर मज़ा ले रही थी…… रोशन ने poocha,“Homeworks कर लिया तुमने?” कोयल बोली, “हाँ मुझको नींद आरही है मैं सोने जा रही हूँ.” उस्सने अलमारी के पीछे जाकर अपनी निघ्त्य में चेंज की और अपनी बिस्तर पर चली गयी सोने को. रोशन अपने बिस्तर पर से कोयल को घुर्र रहा था. जब कोयल ने अपने ऊपर कम्बल खिचलि तो रोशन उठ कर कोयल की बिस्तर पर गया चेर कहानी करने उसस्के साथ. कोयल ने बच्चों जैसी तृप्ति आवाज़ में बिनती की, “भाई मुझे नींद आरही है मुझको तंग मत करो जाओ अपने बिस्तर पर तुम…” तब तक रोशन ने कोयल की कम्बल आधा नीचे खींच दिया था और कोयल की ऊपर वाले हिस्सा ओपन था, रोशन उस्सकी निघ्त्य की पतली स्ट्रैप्स उस्सकी कांधों पर देख रहा था और उस्सको गुदगुदी कर रहा था उस्सकी पथ पर और कोयल उस गुदगुदी से बचने के लिए अपने दोनों पैरों को ऊपर उठा लिया था और पैरों के उठने से निचे वाला कम्बल भी हट गया था और उस्सकी जांघ भी नज़र आरहे थे…..

रोशन वह मंज़र देख कर बहोत खुश था और मौके का फायदा उठाते हुवे उस्सने जल्दी से पथ की गुदगुदी चोर कर कोयल की जाँघों पर अपने उँगलियों को फेरने लगा जैसे के गुदगुदी hi कर रहा हो उस्सको……. कोयल कुछ हंस रही थी और कुछ झूट मूठ का ग़ुस्सा भी कर रही थी और अपने दोनों हाथों से रोशन को ढाका भी दे रही थी उस्सको बिस्तर के हटाने को…. तब रोशन ने कोयल के दोनों हाथों को अपने हाथों में ज़ोर से पकड़े और कहा, “चलो देखते हैं कौन ज़्यादा ताकतवर हैं तुम मुझको पुश करो मैं तुमको, अगर तुम जीत गयी तो मैं उतर जावूंगा तुम्हारे बिस्तर से और अगर मैं जीता तो जितना देर चहुँ यहीं रहूँगा तो स्टार्ट करें, 1, 2, 3 जो!!” कोयल घुटनों पर आगयी और रोशन भी उसी पोजीशन पर था बीएड पर अपोजिट अपनी छोटी बेहेन की और दोनों ने एक दूसरे के पंजे को अपने अपने पंजे में जाकर एक दूसरे को पुश कर रहे थे……

कोयल ने अपनी पूरी ताक़त लगाकर ज़ोर से जितना हो सका रोशन को पुश करती गयी, कुछ लम्हे के लिए तो रोशन को लगा के वह बीएड से गिरने hi वाला था मगर वह ठहरा बड़ा और लड़का और कोयल उस से बहोत छोटी और नाज़ुक लड़की तो कैसे गिरा सकती थी अपने बड़े भाई को, आखिर रोशन ने अपना ज़ोर लगाया और कोयल को ज़ोर से ढाका दिया अपने बाज़ुओं से और कोयल गिर पड़ी अपनी बीएड पर और रोशन उस के ऊपर…… रोशन ने एक शार्ट पहना हुवा था और एक स्लीवलेस टीशर्ट. जब कोयल लेती तो हम्प रही थी हँसते हुवे और उस वक़्त उस ने ख्याल नहीं किया के रोशन उस के पुरे जिस्म के ऊपर लेता हुवा था….. और रोशन तो खड़ा होगया था अपनी शार्ट में और उस्का मोटा लौड़ा ठीक कोयल की पुसी पर निघ्त्य के ऊपर था….. रोशन ने हलके से दबाया अपने कॉक को अपनी बेहेन की पुलस्य पर तब कोयल ने फील किया के उस्का लौड़ा उस के छूट पर डाब रहा है….. तो झट से कोयल ने उस्सको ढाका देकर अपने ऊपर से हटाया और कम्बल खिंचा अपने ऊपर जल्दी से और उस्सको डांटा, “जाओ यहाँ से वार्ना मैं मां पापा को बुलाती हूँ!!”

रोशन यह सुनकर जल्दी से उतर गया और भीगे बिल्ली की तरह चुप चाप अपने बिस्तर पर चला गया. अब अपनी बिस्तर पर उस ने अपने लुल्ली को हाथों में लेकर उस्सको सहलाता गया और कोयल की जिस्म को अपने दिमाग़ में हर उस हिस्से को सोचता गया जो उस्सको एक्साइट करता है…. उस्सने सोचा किश तरह अभी अभी उस्सने कोयल की खूबसूरत जाँघों को देखा, और उस्सकी कांधों पर वह पतली स्ट्रैप्स और उस हिस्से को जहाँ उस्सकी ब्रा के मार्क्स थे जो ज़्यादा गोरी थी और ब्रा के स्ट्रैप्स के marks…yeh सब सोचने से उस्का लुल्ली ज़्यादा खड़ा होता गया और वह मुठ मारने को शुरू hi करने वाला था जब कोयल बोली, «लाइट्स को ऑफ करो न मुझको सोना है अब. » कोयल को कुछ नज़र नहीं ारः था जो कुछ रोशन कर रहा था अपने लुल्ली से क्यूंकि रोशन ने पीठ किया हुवा था उस्सकी बीएड से…… तो रोशन उठकर लाइट को ऑफ किया और अपनी होमवर्क करने वाले डेस्क की लाइट धीमी सी ों चोर दिया….. अब वह कोयल को नींद में अन्य का इंतज़ार करने laga…socha के उस रात की तरह उस्सको नींद में ऊपर ऊपर छोड़ेगा और अपने पानी से उस्सकी पंतय को भीगोवेगा…….

बहोत धीरज धार के रोशन इंतज़ार करता गया कोई तक़रीबन एक घाटी तक और आखिर धीरे से उठ कर कोयल के बिस्तर के तरफ बढ़ा. अपने डेस्क लाइट को फुल कर दिया और उस से बीएड और कोयल दोनों साफ़ नज़र आरहे थे. दरवाज़ा को भी अंदर से लॉक कर diya…apna शार्ट निकल फेका और टीशर्ट भी, पूरा नंगा होकर बीएड पर पोंहचा….. दबी सेंसों में धीरे धीरे कोयल की कम्बल को हटाता गया जब तक के उस्सको पूरा नीचे ज़मीन पर फेंका…. कोयल एक सफ़ेद रंग के निघ्त्य में थी और नींद में वह कुछ ऐसे करवट बदली थी के निघ्त्य की एक स्ट्राप कांधो के नीचे था और नीचे निघ्त्य जाँघों के बिल्कुल ऊपर था और उस्सकी पंतय साफ़ दिख रही थी….. वही पंतय थी जिस पर कुछ देर पहले धानंद ने पिचकारी छोड़ा था अपना…..

रोशन ने पहले वही से शुरू किया, अपनी बेहेन की गांड hi पसंद आया उस्सको अपना काम तमाम करने को क्यों के उस रात को उस्सने वहीँ पर अपना पानी छोड़ा tha…bahot मज़ा आया था उस रात उस्सको….. मगर वह खुश नहीं था उस नज़ारे से तो मैं बल्ब को स्विच ों कर दिया जिस की लाइट पार्टी hi कोयल ने एक अंगराई ली और एक डिस्टर्बेंस के आवाज़ छोड़ी नींद में hi….. रोशन ने अपने मोठे लुंड को हाथ में लिए बीएड पर घुटनों के बल लुंड को कोयल की पंतय पर चुने की कोशिश में लगा था….. सब आहिस्ते आहिस्ते करना था कहीं कोयल जग न जाये….. तो जिस डैम उस्का लुंड कोयल की पंतय पर पीछे के तरफ चुवा, रोशन को ठंढ महसूस हुवी…… फिर अपने लुंड को हटाकर उस्सको देखता है के कहीं उस्का पानी तो निकलना शुरू न होगया, तो वैसा नहीं था तो उस्सने फिर से अपने लौड़े को पूरा कोयल के गांड पर दबाया रगड़ने के लिए और उस्सको कोयल की पंतय भीगी हुवी लगी….. तब रोशन हैरान होकर एक टोर्च लेकर वह अत है और टोर्च की लाइट कोयल की पंतय पर मारता है देखने को कैसे भीगी हुवी है वह हिस्सा ठीक जहाँ उस्का लुंड रगड़ने जा रहा है…..

पहले तो उस ने सोचा के कहीं कोयल की मेंस्ट्रुएशन तो नहीं शुरू होगयी, और कहीं खून न लग जाये बिस्तर पर इस लिए सावधानी बरकना चाहिए था रोशन को…. तो इस बार टोर्च मरते हुवे रोशन ने अपने हाथ से छह कर देखा क्यों भीगा हुवा है वहां….. कोयल ने रोशन के चुने पर एक और अंगराई ली और करवट बदली, उस से उस्सकी पंतय का वह हिस्सा और भी सामने आगये, और रोशन ने एक्सामिने करना शुरू किया तो पक्का समझ गया वह के किसी एक मर्द ने अपना पानी छोड़ा है उस्सकी पंतय पर ठीक जैसे उस ने छोरा था उस रात को….. अब रोशन सोचने लगा, के कौन हो सकता है उसस्के दादा के इलावा…. उस्सने सोचा दादा hi ने यह कारनामा किया होगा, वह भी जब कोयल बिल्कुल जाएगी और होश में thi…to रोशन ने सोचा जब किसी और मर्द को करने देती है तो क्यों नखरा दिखती है जब वह करना चाहता है तो….

कोयल पथ के बल सो रही थी उस वक़्त, निघ्त्य ऊपर उठा दिया रोशन ने उस्सकी कमर तक, और धीरे से उस्सकी जाँघों को छाता, कमर पर भी अपने होठ फेरे और जीभ भी….. और लुंड को भी फेरा उन् जगावों पर…. कोयल नींद में कसमसा रही थी…. और इस बार तो रोशन ने थोड़ा सा अपनी बेहेन की पंतय को नीचे भी उतरा, उस्सकी गांड की शुरुवात में, दोनों तरफ के उभरे ऊंचाई के बीच में जो कैनाल है उस में अपने लुंड को रखा और धीरे धीरे रगड़ता gaya…apne दोनों हाथों को बिस्तर पर कोयल के दोनों तरफ इस तरह से रखा था अपने बदन को सपोर्ट करने के लिए जैसे के कोई प्रेस उप करता हो…. नीचे के तरफ अपने पाऊँ पर सपोर्ट था ऊपर हाथों पर और सिर्फ लुंड बेहेन के गांड पर रागढ रहा था कमर हिलाते हुवे….

अब क्यूंकि जवान गरम खून था वह तो कोई 8 10 रागढ खाने के बाद hi पानी चुत जाता है, तो उस्सको ज़्यादा म्हणत नहीं करनी पड़ी…. बहोत जल्द hi वह झड़ने लगा और कोयल की कमर तक उस्का पानी गया प्रेशर की वजह से….. रोशन हम्प रहा था, सेंसें मुश्किल से ले पा रहा था क्यों के कोयल को नहीं जगाना चाहता था, पर उस्सने थक कर अपने हाथों को बीएड पर चोर दिया और उस्का लुंड पूरा कोयल के गांड पर डाब गया और उस्का पूरा जिस्म कोयल के जिस्म पर चोर दिया रोशन ने एक्ससिटेमेंट की वजा से और कोयल की गालों को चाटने लगा और उस्का लुंड चोदे हुवे पानी की वजा से आसानी से उस्सकी बेहेन की गांड पर फिसल रहा था….. और अचानक कोयल ने ेंखें खोली और देखा के रोशन नंगा उस पर लेता हुवा है और उस्का लुंड उस के गांड पर बीच में फिसल रहा है, तो कोयल ेंख मसलते हुवे कहती है, हत्तो मुझपर से, भारी हो तुम bhai…..kia…kia कर रहे हो??”………………………..

तो बे कॉन्टिनोएड…………………………
 
अपडेट 55

कोयल ने आश्चर्य जनक रोशन को देखा और अपनी गांड पर हाथ फेर कर देखा के रोशन ने उस पर अपना पानी छोड़ा है तो उस्सको एक थपड़ मार कर उस्सको बिस्तर से ढाका दिया…… रोशन अब बग़ावत पर उतर आया उस ने कहा, “क्यों ऋ, तू अपने आप को सटी सावित्री समझती है किआ? तेरे पंतय गांड पर भीगा हुवा था तू ने दादा का लुंड खूब उस पर रागढ़वाया था, उस के साथ तो बड़ा ऐश करती है और मुझको थपड़ मारती है” यह कहकर उस्सने भी कोयल के बाल खींचते हुवे उस्सको दो थपड़ मारा और बिस्तर से नंगा उतर कर अपना कपडा पेहेन्ने लगा. रोशन सोच रहा था के उस के दादा ने कोयल की गांड पर अपना पानी छोरा था उस को यह बिल्कुल पता नहीं ता खुद उसस्के बाप ने कोयल के साथ वह किया था.

कोयल बिस्तर पर अपनी पंतय ठीक करते हुवे बैठ कर रोने लगी. और रोशन अपने बिस्तर पर कम्बल ोहरः कर सोगया लाइट्स ऑफ करके. कुछ देर बाद जब कोयल चुप होगयी तो अँधेरे में hi रोशन ने पुछा, “दादा का लुंड मोटा है नाह?” कोयल ने जवाब नहीं दिया. रोशन ने फिर कहा, “उसस्के साथ तुझको ज़्यादा मज़ा अत है किआ? तुमको जवान आदमी पसंद नहीं? तुमको बूढ़े लोग पसंद है? दादा के साथ मैं ने तुझको कई बार देखा है, तेरी स्कर्ट ऊपर उठे हुवे और उस का हाथ तेरी जाँघों को सहलाते हुवे और तुझको अपनी गांड को उस के लुंड पर रगड़ते हुवे, मैं सब जानता हूँ…..” कोयल ने कहा, “चुप कर बदमाश! मैं तेरी छोटी बेहेन हूँ मेरे साथ तू यह सब नहीं कर सकता!” रोशन ने जवाब दिया, “क्यों नहीं कर सकता जब दादा कर सकता है?” कोयल ने कुछ नहीं कहा और दोनों को धीरे धीरे नींद आगयी.

सुबह को पायल धानंद का वेट कर रही थी पिछले दिन की तरह. धानंद क्यूंकि अपनी बेटी के तरफ अब खिंचा जा रहा था तो पायल को फिलहाल भाव नहीं दे रहा था फिर भी उस्सको खेल खेलना था तो जल्दी से पायल को गेट के बाहर अपनी बाहों में लेकर उस्सकी जिस्म पर अपने हाथों को फेरते हुवे किश किया और bye वेव करते हुवे काम पर चला गया.

रोशन और कोयल तैयार हुवे स्कूल जाने को तब दोनों एक दूसरे से खींचे हुवे थे. कोयल रोशन को नहीं देख रही थी. मगर रोशन हर वक़्त सिर्फ उसी को देख रहा था….. किआ खूबसूरत लगती है कोयल अपनी स्कूल की यूनिफार्म में… एक सफ़ेद ब्लाउज और नीली स्कर्ट थी और स्कर्ट ठीक उस्सकी घुटनों तक अति थी…. रास्ते में चलते वक़्त रोशन हमेशा इस इंतज़ार में रहता के हवा का झोंका उस्सकी स्कर्ट को ऊपर उठाये और वह कोयल की खूबसूरत सेक्सी जाँघों पर अपना नज़र डाले.. दोनों साथ साथ चल रहे तो थे मगर दो अजनबियों की तरह, हर रोज़ जिस प्यार से दोनों चलते थे और रहा करते थे वह नज़र नहीं अत था…. कोई भी यह कह सकता था के यह दोनों भाई बेहेन का झगड़ा हुवा है…..

जब बस में गए तो कोयल जल्दी से एक ओक्कुपेद सीट पर बैठ गयी ताके रोशन उसस्के पास नहीं बैठे, वार्ना हर रोज़ दोनों खाली सीट ढूंढ़ते थे जहाँ एक साथ बैठ सके. रोशन को एक सीट पीछे मिला बैठने को. अब बस का सफर आधे घंटे का था, तो पीछे से रोशन कोयल की बालों को खींचता तो कभी उस्सकी गर्दन पर अपना हाथ फेरता उस्सको तंग करने ko…aur कोयल उस्सको मारती रहती….

जिस सीट पर कोयल बैठी थी वहां एक आदमी था जिस को 10 मिनट्स के बाद उतरना था, जब वह उतर गया तो जल्दी से रोशन उठकर कोयल के पास बैठने को गया…. कोयल को पता था के वह वहां बैठने आएगा और मुस्कुरा रही थी… रोशन कोयल से बिल्कुल सत् कर बैठा और धीरे से अपना हाथ उस्सकी स्कर्ट पर rakha…Koyal ने उस के हाथ पर ज़ोर से मारा…. दोबारा रोशन ने हाथ रखा, फिर कोयल ने उसस्के हाथ पर मारा…. फिर रोशन उस्सको तंग करता गया कभी उस्सकी बालों को नोचता तो कभी गुड़गिड़ी करता…… कोयल कभी हंसती तो कभी ग़ुस्सा होती…. पीछे वाले सीट पर से एक उम्र वाली ाव्रत ने कहा, “तुम दोनों क्यों लड़ रहे हो बचो? आपस में प्यार से रहो, ऐसा झगड़ा करना अछि बात नहीं है.” उस्सको सुनकर कोयल ज़ोर से हंसी अपने मुंह को अपनी हाथों में दबा कर, तब रोशन ने कोयल को कहा, “सुना न तुमने? प्यार से रहो मुझसे, प्यार se…main तुमको कितना प्यार करता हूँ पता है tumko…hmm, माय कुटी पाई…” यह कहकर रोशन ने कोयल के गालों को किश किया और कोयल ने उस्सको तिरछी नज़रों से देखा. आखिर में रोशन ने कोयल का हाथ अपने हाथों में लिया जैसे हर रोज़ लिया करता था, तब कोयल ने अपने हाथ को उस्सकी हाथ में रहने दिया और रोशन ने पाँचों उँगलियों को खोल कर कोयल की सभी उँगलियों को अपने उँगलियों में जाकर कर उस का हाथ अपने गॉड में ले लिया…… बस स्कूल तक पहुंचने hi वाला था…. और धीरे धीरे रोशन ने कोयल के हाथ को अपने लुंड पर दबाया…. जब कोयल ने फील किया के उस का लुंड फूला हुवा है तो अपने हाथ हो खींचने की कोशिश की मगर रोशन ज़्यादा ताकतवर था तो उस का हाथ नहीं छोरा और अपने लुंड पर उस्सको दबाता गया और “ाः आआह बड़ा मज़ा ारः है, रात को ठीक से इस्को सहलाना okay?” तब तक बस रुका और दोनों को उतरना था, कोयल उस्सको मोती मोती ेंखों से देख रही थी बस से उतारते वक़्त……

स्कूल में सब ठीक गुज़रा और लंच ब्रेक में दोनों एक साथ खाना खाया करते थे मगर इस दिन को कोयल किसी लड़कियों के ग्रुप में चली गयी जान बूझ कर…. रोशन तो कभी लड़कियों के बीच रहना पसंद नहीं करता था तो अकेले पद गया बेचारा…… फिर भी उस्सने कोशिश की उन् लड़कियों के बीच जाने ki…jab उन् लोगों के बीच गया तो सभी लड़कियां उस को छेड़ने लगे…. कोयल सर झुकाये हंस रही थी…. और एक लड़की ने कहा, “आरी कोयल आज तू अपने भाई के साथ क्यों नहीं खा रही है? बेचारा अकेला hai….kitna सोना है ऋ तेरा भाई, इस्सके कोई गर्लफ्रेंड है किआ? मैं इस्सके गर्लफ्रेंड बन जावून किआ?” कोयल ने उस लड़की को मारा, फिर दूसरी लड़कियां भी रोशन के तारीफ़ करने लगे और रोशन लाल हो गया था, क्यों के उस्सको आदत नहीं थी उन् लड़कियों से….. कई लड़कियों ने उस्सकी गर्लफ्रेंड बनने की िचाः किया मगर कोयल ने मन किया…. रोशन को लगा के कोयल जल रही तो तो जान बुझ कर उस्सने उन् लड़कियों से दोस्ती की… और कोयल नाराज़ होने लगी फिर उस्सने रोशन का हाथ पाकर कर कहा, “चलो यहाँ से, सब गंदे हैं यह लड़कियां!” दूसरे लड़कियां हंससनेय लगे जब देखा के कोयल कितनी पोस्सेसिफ है अपने भाई को लेकर..

वहां से कोयल रोशन को खींचते हुवे एक पेयर के पास गयी और रोशन से कहा, “किआ था यह सब? किआ दिखाना चाहते हो तुम?” रोशन मैं hi मैं खुश हो रहा था के कोयल जल रही है क्यों के उस ने लड़कियों से बात की…. और रोशन ने हलके से कोयल को ढाका देकर उस पेयर से लगाया और उस्सकी मुहं पर अपना मुंह रख कर होंठों को किश करने लगा…. कोयल उसस्के छाती पर घूंसे मार रही थी मगर रोशन ने अपने जीभ निकल कर कोयल की सुर्ख होंठों की पंखुरियों को चुस्सना शुरू किया और उस्का एक हाथ कोयल की छाती पर था और एक हाथ उस्सकी स्कर्ट उठा रहा था कोयल की जाँघों पर फेरते हुवे….. कोयल ने मुश्किल से अपना मुंह उस के मुहं से निकला और उस्सको मारते हुवे कहा, “हम स्कूल में है, किसी ने देख लिया तो पता है तुमको किआ होगा? चलो हत्तो जाओ यहाँ से अब, जुहले कहीं का!!” रोशन हँसते हुवे एक तरफ जाने लगा और कहा, “आज रात को बाकी के पूरा कर लेंगे ठीक है?”

उधर पायल धानंद का इंतज़ार कर रही थी शाम को काम से लौटने का, आज वह उस्सको टॉवल सर्वे करने वाली थी बाथरूम में जैसे रमेश को किया था उस दिन, यह पद्मिनी से तय हो गया था

तो बे कॉन्टिनोएड…………………..
 
अपडेट 56 पद्मिनी:

दोस्तों इस कहानी में जैसे के आप सभी ने देखा के यह एक फॅमिली इन्सेस्ट सागा है. तो इस से पहले के हम रोशन, कोयल और पायल वग़ैरा के बारे में आगे देखें, चलो देखते हैं के पामिनी कैसे इस घर में बहु बनकर आयी थी. तो अभी के लिए मतलब साफ़ है के कुछ उपदटेस तक हम पायल और कोयल से दूर रहेंगे क्यों के अभी पद्मिनी की बारी है.

पद्मिनी 18 साल की थी जब उस्सकी बात चली थी रमेश से शादी की. वह एक दूर गाओं की लड़की थी मगर पढ़ी लिखी थी कॉलेज जा चुकी थी. बहोत कमसीन और खींची खींची सी रहती थी. मर्दों से बात तक नहीं करती थी. अपने घर में सिर्फ घरवालों से घुल मिलके रहती थी वार्ना पराये लोगों से तो बिल्कुल दूर रहती थी.

जब जवान होगयी 16 साल की हुवी तब से दिल में हर जवान लड़कियों की तरह दिल में उमंगें जाएगी एक सपनों के राजा के लिए उस के मैं में भी. वह भी चाहती थी के उस्सकी ज़िन्दगी में कोई ए और वह भी दुल्हन बनकर किसी के घर जाये. अब यह कमसीन लड़की कैसे वह बानी जो आज है, वह पद्मिनी जो पायल को नंगी करके उसस्के साथ भी शारीरिक सम्बन्ध जोरी… कैसे वह ऐसी हॉट और सेंसुअल होगयी. चलो सब मिलकर पद्मिनी के अतीत में जाते हैं.

रमेश का बाप एक दिन उस गाओं में गया था किसी ज़मीन की खरीदारी के सिलसिले में. पद्मिनी को देखा उस्सने झूला झूलते हुवे एक आम की पेयर पर. पद्मिनी तब 18 साल की थी और दिल में दिल का राजा के सपनों सजाई हुवी थी उन् दिनों. एक गीत गुनगुना रही थी वह, फ़िल्मी गीत…. “कहीं करता होगा वह मेरा इंतज़ार, जिस्सकी तमनाः में रहती हूँ बार बार….” वह आम का पेयर उस ज़मीन में परता था जिस्सको रमेश का बाप खरीदने वाला था. वैसे पद्मिनी ग़ैरों से बात तो नहीं करती थी मगर उस वक़्त क्यों के वह अपनी मोहाली में थी और अपने घर के बिल्कुल पास और खुश मिज़ाज थी तो बात की थी उस ने उस वक़्त रमेश के पिता se.Ramesh का बाप, नाम है उस्का सर्वानंद, पद्मिनी को काफी देर से देख रहा था और उस्सको निहार रहा था…. वह तब 50 साल का था मगर दिल जवान था एकदम और आशिक होगया पद्मिनी का. वैसी वह ठरकी तो था hi और पद्मिनी उस वक़्त एक चोली और छोटी से स्कर्ट में थी जो गाओं में लड़कियां पहना करते हैं…

अब जब के वह झूल रही थी तो हवा से उस्का वह स्कर्ट ऊपर उठ रहा था और सर्वानंद पद्मिनी की घुटनों के ऊपर, स्कर्ट के नीचे उस्सकी गोरी खूबसूरत जाँघों पर नज़र गड़ाए हुवे था…… पद्मिनी को उस वक़्त पता नहीं था के कोई उस को देख रहा है… वह बेधड़क गुनगुनाये जा रही थी झूलते हुवे, और रमेश का बाप उस्सको अदमीरे करते जा रहा था उस्सकी जिस्म को….. पद्मिनी की पूरा कमर दिख रहा था और उस तंग छोटी सी चोली में उस्सकी क्लीवेज की तो बात न करो….. लगता था उस्सकी कुंवारी चूचियां चोली के बाहर निकल आएंगे…. उस्सकी झूलने से हर एक मूवमेंट पर उस्सकी जिस्म की हर अंग की मूवमेंट से सर्वानंद की जिस्म की गर्मी उस के रगों में तेज़ रफ़्तार से दौड़ रहा था और उस ने अपने लुंड पर अपना हाथ रखते हुवे खुद से कहा, “वह! किआ मस्त चीज़ है बाप! अगर ऐसी लड़की बिस्तर पर लेटने को मिलजाए तो किस्मत खुल जाएगी यार!!”

सर्वानंद धीरे धीरे झूले के पास बहरता गया पद्मिनी के जिस्म को निहारते हुवे, जितना करीब बाहर रहा था उतना उस्सको पद्मिनी को अपनी बाहों में जकरने को मैं कर रहा tha…lagta था के वह एक सपना देख रहा हो और अभी ेंख खुल जाएगा….. चलते वक़्त उस्का पेयर एक सुखी डाली पार पर्ने से जो शोर हुवा उस से पद्मिनी को पता चला के कोई आरहा है और सर उठाकर देखा एक पराया मर्द उस के तरफ ारः है तो झट से झूले से उतारकर जाने लगी….. जिस वक़्त वह झूले से उत्तरी तो उस्सकी स्कर्ट ज़्यादा ऊपर उठ गयी और तक़रीबन पूरा जांघ बाहर नज़र आया, और सर्वानंद को तुरंत छोड़ने का मैं kiya…udhar पद्मिनी ने जब देखा के उस्सकी पूरी जांघ दिख गयी तो शर्म से लाल होगयी और भागने hi वाली थी के सर्वानंद के कहा, “ज़रा सुनो तो मैं अजनबी हूँ यहाँ ज़रा मदद करोगी प्लीज!”

पद्मिनी सर्वानंद से पीठ किये हुवे रुक गयी अपने छाती पर अपने दोनों हाथों को दबाये हुवे क्यों के उस्का दिल बहोत ज़ोरों से धड़क रहा था, कुछ डर से कुछ शर्म से क्यूंकि उस्सको पता था के उस ग़ैर आदमी ने उस्सकी जांघ को तक़रीबन नंगी देखा. जब के वह रुकी हुवी थी तब तक सर्वानंद उसस्के करीब आ पोंहचा, और पद्मिनी के पीछे hi खड़ा उस्सकी कमर और गांड का नाप देख रहा था और बोलै, “किआ मदद कर सकती हो?” धीमी आवाज़ में पद्मिनी ने सर झुकाये हुवे कहा, “जी” तो सर्वानंद ने कहा, “देखो मैं ने इस ज़मीन को ख़रीदा दो दिन पहले और आज इस का दौड़ करने आया मगर जिस आदमी से ज़मीन ख़रीदा वह शहर गया हुवा है, तो मैं समझ नहीं पा रहा हूँ के कहाँ तक इस ज़मीन का अंत है और दूसरे लोग का ज़मीन कहाँ से शुरू होता है किआ तुमको पता है?”

पद्मिनी मूढ़ कर सर्वानंद के चेहरे में देखते हुवे पूछती है, “ओह आप ने सोभे चाचा से ज़मीन ख़रीदा हैं?” जिस वक़्त पद्मिनी ने मूढ़ कर जवाब दिया सर्वानंद ऊंचा था तो उस्सकी नज़र पद्मिनी की बूब्स पर गड़े थे क्यों के आधा से ज़्यादा चूचियों का नज़ारा देखने को मिलरहा था, ऊपर से पद्मिनी की तेज़ सेंसें उन् चूचियों को ऊपर नीचे उठक बैठक करवा रहे थे… सर्वानंद बस दीवाना हो बैठा पद्मिनी का…… उस ने कहा, “हाँ शायद एहि नाम है….” तब पद्मिनी ने ज़रा खुल के बात किया रमेश के पिता से, “हाँ जानती हूँ सोभे चाचा की ज़मीन कहाँ तक है आप आईये मैं दिखती हूँ.” चलते चलते दोनों बातें करने लगे और सर्वानंद ने पुछा, “तुम यहीं रहती हो?” पद्मिनी ने अपनी ऊँगली से इशारा करते हुवे दिखाया उस का घर वहीँ था उस ज़मीन के बस कुछ 50 मेट्रेस की दूरी पर. अब जब उस्सने अपने हाथ को ऊपर उठायी घर दिखने के लिए तब भी सर्वानंद की नज़र उस्सकी की दूसरे अंगों की मूवमेंट्स को देख रहा था, उस्सकी उठी हुवी हाथ, कमर पर से ज़रा ज़्यादा उठते हुवे चोली, बाज़ू के निचे पसीने से भीगी हुवी निशान, सब सर्वानंद ऑब्सेर्वे कर रहा था……. और एक्साइट होता जा रहा था अपने लुंड को पोजीशन में करते हुवे अपने पंत मैं….

सर्वानंद का आशिका मिज़ाज ने उस्सको फ़्लर्ट करने पर मजबूर किया इस कुंवारी भोली भली खूबसूरत गाओं की लड़की के साथ. उस्सने शुरू किया, «अकेली ऐसे हर रोज़ यहाँ झूलने आती हो ?» पद्मिनी ने कहा, «जी आया करती हूँ अक्सर मगर अब तो यह ज़मीन सोभे चाचा की नहीं रही, आप की है तो नहीं ावुंगी” तब सर्वानंद ने कहा, “आरी क्यों नहीं आओगी बिल्कुल आते रहना मैं ने कहाँ मन किया है…. » कुछ देर साथ आगे चलने के बाद पद्मिनी ने कहा, «यह रहा, इस पीपल के पेयर तक आप की ज़मीन है और उस तरफ से एक ऊंचा पत्थर है वहां तक यह ज़मीन है सब आप की है.» सर्वानंद ने थैंक्स किया और पद्मिनी बोली, «चाह तो मैं चलती हूँ, नमस्ते» रमेश का बाप ने कहा, “आरी सुनों तो, क्यों इतनी जल्दी है, ज़रा इस बात का खुलासा करती जाओ नाह, वह गण जो गए रही थी तुम, ‘कहीं करता होगा वो मेरा इंतज़ार….’ हम्म्म किआ किसी बॉयफ्रेंड के लिए tha…usska इंतज़ार है किआ?” पद्मिनी शर्म से सर झुकाते अपने लाल चेहरे को हाथों में छुपाये दौड़ती हुवी निकल चली….. सर्वानंद ने उस के पीठ पीछे एक हाथ ऊपर उठाये ज़ोर से कहता रहा, “आरी सुनों तो, ज़रा सुनों नाह, कल आओगी किआ यहाँ मैं इसी वक़्त कल तुम्हारी राह देखूंगा, आना ज़रूर….”

पद्मिनी घर पोंछी तो उस्का दिल ज़ोरों से धड़क रहा था और अपने आप को आईने के सामने देखती रही और अपने स्कर्ट जाँघों के ऊपर उठा कर खुद की जांघ को देखती गयी यह सोचते हुवे के ‘उस आदमी ने इतना देखा,’ फिर कुछ ज़्यादा उठायी और कहा ‘नहीं इतना देखा,’ फिर और ऊपर उठायी कहते हुवे ‘नहीं इतना देखा होगा…’ कहकर खुद बोली अपने चेहरे को हाथों में छुपाते हुवे, “हाय राम उस्सने मेरी जिस्म की उस हिस्से को देखा जो किसी मर्द ने आज तक नहीं देखा…” फिर पद्मिनी खुद अपनी छाती के ऊपर वाले हिस्से को देखना शुरू किया आईने में और अपनी चोली को उँगलियों से ज़रा नीचे खींचते हुवे खुद से बोली, “और यहाँ? यहाँ भी उस्सने खूब देखा मुझसे ज़्यादा ऊंचा था, तो कितना देखा होगा…. किआ किआ नज़र आया होगा उस्सको…….?” फिर पद्मिनी सोचती gayi….”Kyun फिर कल अन्य को कहा उस्सने? मुझको फिर देखना चाहता है वह आदमी… किआ देखना चाहता है, मेरे जिस्म को या मुझको? मगर क्यों??....”

पद्मिनी उसस्के बारे में सोचती रही साड़ी रात…. उधर सर्वानंद भी बहोत इंटरेस्टेड था उस्सको दोबारा देखने को और उस के साथ रहने को….. एक अजीब सी कशिश था जो दोनों को एक दूसरे के तरफ खींचता था……

तो बे कॉन्टिनोएड…………………..
 
अपडेट 57

दूसरे दिन सर्वानंद सवेरे hi वहां पोहोंच गया क्यों के रात भर वह पद्मिनीं के बारे में सोचता रहा, उस्का एवं उस्सकी चाबी सर्वानंद के ेंखों के सामने रहे रातों को ख्यालों में और सपने में भी वह उस्सको सताती रही. सर्वानंद 100 किलोमीटर्स शहर से ड्राइव करके उस ज़मीन पर पोहोंच गया सवेरे सवेरे पद्मिनी से मिलने के लिए. उस गाओं का माहौल कुछ और hi था शहर के भीड़ भर से दूर. बहोत आराम और सुकून था ख़ास कर उस ज़मीन पर जिस्सको उस्सने ख़रीदा था. उस आम के पेयर के नीचे जहाँ एक झूला बहधा हुवा था बैठ गया पद्मिनी के इंतज़ार में.

50 साल का सर्वानंद देखने में 50 का बिल्कुल नहीं लगता था और कोई भी यकीन न करता के उस्सकी उम्र इतना है. देखने में वह कोई 35/38 तक लगता था. एक जीन और टीशर्ट में ड्रेस्ड, सनग्लास ेंखों पर, पेर्फुमेस लगाए हुवे, एक दम मस्त मातुरे लगता था. वैसे हर कोई जो उस्सको जानता था अक्सर कहा करते थे के वह ज़्यादा hi जवान लगता है अब भी. हालां के दो बड़े बेटों का बाप था और उस वक़्त धानंद की शादी भी हो चुकी थी, याने एक बहु थी घर में आलरेडी और पद्मिनी तब उस घर में नहीं आयी थी.

ाचा तो पद्मिनी का वेट किया जा रहा था….. उधर पद्मिनी भी अछि तरह से रात नहीं काट पायी, अब वह ठहरी एक गाओं की भोली भली मासूम सी लड़की और एक मर्द चमक उस्सकी ज़िन्दगी में उस मोड़ पर आजाता है जब उस्सको एक सपनों का राजा का इंतज़ार हो, तो अजीब सी कश्मकश में पर गयी थी वह और खुद को समझ नहीं पा रही थी के क्यों उस अजनबी की तरफ उस का मैं खिंचा जा रहा था….. ख़ास कर पद्मिनी अपनी जिस्म की छुपे हुवे हिस्सों को सोच रही थी जो उस आदमी ने देखा था….. और पद्मिनी के मैं में अजीब सी लेहेर दौड़ रही थी उस बात को लेकर बल्कि यूँ कहना चाहिए के पद्मिनी ज़्यादा सेक्स के अवर ध्यान दे रही थी उस आदमी को सोच kar…ek डर भी थी उसस्के मैं मैं क्यों के किसी पराया मर्द ने कभी उस्सको चुवा नहीं था….

सर्वानंद उस झूले पर बैठ गया इंतज़ार में पद्मिनी की….. मगर पद्मिनी को उधर थोड़ा hi पता था के वह आगया होगा, वह तो आराम से घर की काम काज लिप्त रही थी, पनघट पर पानी भरने को गयी तब किसी सहेली ने उस्सको कहा के कोई आदमी तेरे झूले पर झूल रहा है जा कर भगा उस्सको! पद्मिनी यह सुनकर घबरा सी गयी और उस्का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा और जितना जल्दी हो सका वापस घर गयी पानी की गगरा चोर कर तैयार हुवी, एक दूसरी वैसी hi चोली और स्कर्ट पहली यह जानते हुवे के उस में फिर उस्सकी जांघ और चूचियां दिख रही है….. वह चाहती थी के वह आदमी उस्सकी उन् हिस्सों को देखे मगर उस्सको पता नहीं था अंजाम किआ होगा मगर पता नहीं क्यों पद्मिनी के दिल में वैसी उमंगें उभर रहे थे…… शायद उम्र का तकाज़ा था और जिस्म की गर्मी…. और पद्मिनी घर से निकली उस अजनबी से मिलने के लिए…..

जब उस बग़ीचे में पद्मिनी पोंछी झूले के पास तो झूले पर तो कोई भी नहीं था और पद्मिनी चारों तरफ देखने लगी के कहीं चुप तो नहीं रहा वह अजनबी….. जब कहीं कोई नज़र नहीं आया तो बैठ गयी वह अपनी झूले par…jeise hi बैठी तो उस्सको एक बहोत अचछह खुशभू आयी उस झूले के चारों तरफ से…. वह सेंट जो सर्वानंद ने लगाया था उस्सकी खुशभू झूले के इर्द गिर्द फैला हुवा था और पद्मिनीं को वह खुशभू बेहद पसंद aayi…aur ेंखें बांध करके झूलने लगी वह उस खुशभू को गहरी सेंसों में बसाये हुवे….

सर्वानंद अपने 4क्ष4 में गया था अपने कैमरा लेने जो वह भूल गया था, और 4क्ष4 कोई 100 मेट्रेस के दूरी पर पार्क करना पारा था क्यों के झूले तक उस्सको लाना नामुमकिन था और 4क्ष4 के लिए रास्ता भी नहीं था. तो जब वह वापस ारः था झूले के तरफ तो उस्सको पद्मिनी दिख गयी झूलते huwe…aur सर्वानंद एक पेयर के पीछे चुप गया आराम से उस्सको निहारने के लिए….. जब जब झूला आगे बाहर रहा था पद्मिनी की स्कर्ट ऊपर उठ रहा था और दोनों जाँघों के बीच वाला नरम कोमल हिस्सा सर्वनाड़ के लुंड को उसस्के पंत में खड़ा होकर डिस्टर्ब कर रहा था….. पद्मिनी ने दोनों हाथों से झूले के दोनों रस्सियों को पकरि हुवी थी तो उस्सकी छाती पर से चोली की उंच नीच तो हो hi रही थी और सर्वानंद को बूब्स का नज़ारा भी ाचा मिल रहा था और एकदम पागल हो रहा था वह….. फिर उस्सको आईडिया आया के पद्मिनी की फोटो ली जाये….. और कैमरा ों किया उस ने और बहोत सारे फोटोज लिए उस्सने हर पोज़ की… जाँघों की, दोनों जाँघों के बीच की, छाती की, फैले हुवे बालों की, हरे क मूवमेंट्स पर उस ने कोई 50 फोटोज लिए पद्मिनी की उस झूले पर झूलते हुवे…..

जब सर्वानंद आखिर में उसस्के पास पोंहचा तो जल्दी से पद्मिनी झूले से उतर गयी और सर झुकाये हुवे उस्सकी जूतों को देख रही थी…. सर्वानंद ने उसस्के करीब जाते हुवे कहा, “Hi, किसी हो तुम?” बिना सर को ऊपर उठाये पद्मिनी ने कहा , “जी ठीक hoon….aap…aap कहाँ रहते हैं?” सर्वानंद ने समझाया के 100 किलोमीटर्स दूर की शहर में….. तब झट से पद्मिनी ने सर उठाते हुवे, उस्सकी नज़रों में देखते हुवे कहा, “अरे बाप रे आप इतने दूर से यहाँ ज़मीन खरीदने ए हैं? क्यों?” सर्वानंद को बहोत अच्छा लगा उस्सकी इस तरह से चॉहोंकना और उस्सकी ेंखों में देख कर बातें करना….. फिर पद्मिनी ने कैमरा देखा उसस्के हाथ में तो कहा, “किआ आप फोटोज ले रहे हैं इस बड़े बग़ीचे का?” सर्वानंद ने कहा, “ नहीं मैं तुम्हारी तसवीरें ले रहा था जब तुम झूल रही तब…” फिर से पद्मिनी चूंकि हुवी उसस्के ज़्यादा करीब होकर उस के हाथ को थामते हुवे कहा, “किआ मेरे तस्वीर? आप ने खींची ? दिखावो मुझको ! » सर्वानंद सोच रहा था के उस्सने इतने सारे सेक्सी पिक्स लिए उस्सकी किआ वह देखने पर नाराज़ नहीं होगी….. फिर उस ने कहा, «ठीक है दिखता हूँ, चलो उस पत्थर पर बैठते हैं और मिलकर फोटोज देखेंगे.»

पद्मिनी राज़ी हुवी और दोनों एक बड़े से पत्थर पर बैठ gaye…pehle पद्मिनी बैठी, और सर्वानंद उस्सको देख रहा था, हाय रे हाय किआ कहना, किआ नज़ारा था, जब वह बैठी तो उस्सकी स्कर्ट बिल्कुल ऊपर उठ गयी और जाँघों का नज़ारा देखने लायक था और क्यों के वह बैठी थी और सर्वानंद खड़ा था तो उस्सकी छाती का नज़ारा तो एक दम जान लेवा था yaaro….Sarvanand अपना लुंड को पंत में सीधा करने लगा और पद्मिनी ने वह नोटिस भी कर लिया और सर झुकाली अपना…..

आखिर में सर्वानंद भी बैठा उसस्के बिल्कुल नज़दीक और अपने कैमरा में पिक्टुरेस के भाग को खोला और पद्मिनी की एक एक तस्वीर दिखने lage…pehla hi तस्वीर में झूला ऊपर पोंहचा हुवा था और उस्सकी स्कर्ट आधा से ज़्यादा जाँघों को नहीं धक् रही थी, और वह खुद अच्छी तरह से दिख रहा था…. सर्वानंद ने पद्मिनी की रिएक्शंस देखना चाहा उस तस्वीर को देख कर …जब पद्मिनी ने सिर्फ अपने होंठों को डेंटन में दबाते हुवे हँसते हुवे कहा, चलो दूसरा dikhawo….phir तीसरा फिर chawtha…ek एक कर के सब तसवीरें देखती गयी और झूम रही थी ख़ुशी se….aur सर्वानंद को अजीब लगा के इतने सारे सेक्सी पिक्टुरेस देखने पर भी वह इतनी खुश थी, कोई और होता तो डिलीट करने को कहती….. मगर यह तो खुश थी…..

जब एक बार सर्वनाड़ ने उस्सकी बूब्स वाली फोटो को ज़ूम कर के उस्सको दिखाया तब पद्मिनी ने नज़रें झुकाली और एक तरफ देखने लगी….. तब सर्वानंद ने अपना एक हाथ को उसस्के काँधे पर रखते हुवे कहा, «तुम बेहद खूब सूरत हो और तुझ में कुछ है जो मुझको तुम्हारे तरफ खींचता है… » पद्मिनी को अजीब लगा एक ग़ैर आदमी का हाथ अपने काँधे पर लगते हुवे और उस्का दिल ज़ोरों से धड़कना शुरू हुवा और वह उठ कड़ी हुवी….. जैसे hi वह कड़ी हुवी सर्वानंद ने झट से उस्सकी हाथ पाकर कर खिंचा और वह सर्वानंद की गॉड में गिर बैठी….. ज़ोरों से हम्प रही थी और सर्वानंद ने अपना मुहं उस्सकी छाती पर फेरते हुवे उस्सकी होंठों तक गया और एक लम्बी किश किया पद्मिनी को उस्सकी जीभ का रस निचोड़ते हुवे और जब के वह किश कर रहा था उस्का एक हाथ पद्मिनी की जाँघों पर गया और धीरे धीरे उस्सकी स्कर्ट के नीचे पोंहच्का और ऊपर उस्सकी पंतय के अवर बढ़ने लगा….. पद्मिनी किश तो कर रही थी उस्सको मगर जब उस ने फील किया के उस्का हाथ उस्सकी पंतय की तरफ बाहर रहा है तो जल्दी से किश को रोकते हुवे उसस्के गॉड से निकल पड़ी और कड़ी होकर कहने लगी, «आप पहले मर्द hi जिस ने मुझको किश किया….. »

आग दोनों तरफ लगी हुवी thi…Sarvanand अपने आप को रोक नहीं पाया और खड़े होकर पद्मिनी को फिर से बाहों में लिया और खड़े खड़े फिर किश करने लगा पद्मिनी को उस्सकी जिस्म पर अपने हाथों को फेरते हुवे…. उस्का हाथ पद्मिनी की चोली पर गया और उस्सने उस्सकी चूचियों को दबाया, तो पद्मिनी की एक ‘आह’ निकली और धीरे से धीमी आवाज़ में उस ने कहा, « मुझे किसी ने वहां भी कभी नहीं चुवा है जी !!» सर्वानंद कुछ नहीं सुन रहा था और उस्का हाथ पद्मिनी की चोली के अंदर पोहोंच गया और उस्सकी नरम मुलायन कुंवारी बूब्स को अपने हाथ में मसलता हुवा अपने मुहं को उस्सकी होंठ से हटा कर उस्सकी चूचियों तक लगाया और चाटना शुरू किया पद्मिनी को एक हाथ से संभाले हुवे….. पद्मिनी « इससष, आआह, बस करो नाह, अब तो बस करो जी… » कहती जा रही थी…..

पर सर्वनाड़ रुकने वाला नहीं था….. उस्सने अपना एक हाथ को पद्मिनी की गांड पर रख कर उस्सको अपने जिस्म से लगाया और उस्का लुंड पंत के अंदर hi से पद्मिनी के पथ के निचे रगड़ा, और पद्मिन उस्सकी बाहों में कैद इधर उधर देख रही थी के कोई देख तो नहीं रहा…. फिर उस्सने कहा, “आप अब छोड़ए मुझको जी, किसी ने देख लिया तो क़यामत आजाएगी, मैं किसी को मुहं दिखने की लायक नहीं रहूंगी, छोड़ए नाह मुझको please….mujhko अब जाना है, बस भी करो, अब कल अजना ji…mujhe चोरडो प्लीज, aaah…isshshshs बस करो नाह…..” सर्वानंद का हाँथ उस्सकी स्कर्ट के नीचे उस्सकी पंतय पर पोहोंच गया था और उस्सकी उँगलियाँ गोआल गोआल घुमा रहा था ठीक उस्सकी पुसी पर, और पद्मिनी उस्सकी बाहों में सांप की तरह रेंग रही थी तृप्ति हुवी धीमी धीमी आवाज़ में इंकार कर रही थी मगर उस्सकी जिस्म इकरार कर रहा था….. ठीक उसी वक़्त एक आवाज़ सुनाई दी दूर से चिलाती हुवे….. “आरी ो ोोोू पद्मिनी , कहाँ है तू? मैं खेत के लिए निकल रहा हूँ गाये के लिए पानी डालना मत भूलना, घर खुला है वापस अजा जल्दी से…….” यह आवाज़ सुनकर सर्वानंद ने खुद चोर दिया पद्मिनी को…. और पद्मिनी ने चिलाती हुवे जवाब दिया, “AAAAATIIIIIIIIIIIIIIII हूऊऊओन baaaaaapuuuuuuuuuuuuu!!” यह कहकर वह दौड़ती हुवी जाने लगी और कुछ दूर पोहोंच कर मूढ़ कर सर्वनाड़ को देखती है और अपनी दोनों ठेंगा हिलाते हुवे और जीब मुंह से निकालते हुवे सर्वनाड़ को चिररहते हुवे, फिर हँस्ते हुवे चली जाती है…… सर्वानंद अपने लुंड पर हाथ रख कर उस्सको दिखाता है पर पद्मिनी उस्सको चरते हुवे चली जाती है….. और सर्वानंद कहता है, “कल यहीं फिर इंतज़ार karunga…ana ज़रूर…”

कौन कहेगा यह उस्सकी होने वाली बहु है??

तो बे कॉन्टिनोएड…………………… (1892 वर्ड्स)
 
अपडेट 58

तीसरे दिन फिर सर्वानंद 100 किलोमीटर्स ड्राइव कर के सवेरे सवेरे उस बग़ीचे में आ पोंचो. झूले के पास खड़ा पद्मिनी का िनेज़ार कर रहा था. अपना कैमरा हाथ में लिए बग़ीचे में कुछ पेयर पौधों की तसवीरें भी लिए.

और उधर आज पद्मिनी भी जल्द तैयार होगयी और इस बार भी उस्सने वैसे hi ड्रेस पहनी तंग छोटी सी चोली और छोटी सी स्कर्ट, इस बार स्कर्ट और भी छोटी थी, बहोत hi हॉट दिख रही थी और कोई भी दीवाना हो जाता sex-wise. पद्मिनी के दिल में सेक्सी खयालात भी डोमिनाते कर रही थी उस्सको और वह खुद अपने आप को समझ नहीं पा रही थी के क्यों उस का मैं उस अवर ज़िदा भाग रही है…. जिस्म की आग उस से कण्ट्रोल नहीं हो पा रही थी, रात भर उस ने सर्वानंद की बाहों की गर्मी महसूस की और उस्सकी जिस्म की रागढ अब भी वह फील कर सकती थी और जब भी वह पाकर याद करती थी उस का मैं उस से फिर से मिलने को मचल जाता था. पद्मिनी को सर्वानंद की लुंड की रागढ उस के पथ के निचे अब भी महसूस हो रही थी, कभी कभी तो बैठे बैठे चाहोंक उठत्ती थी जैसे वह सर्वानंद की बाहों में हो…. तो आलम यह था के उस के साथ मिलने की बेचैनी थी और तरप भी.

अब पद्मिनी के पिता जो एक मामूली खेत का मज़दूर था, उस्सको खबर मिली के किसी शहरी साहिब ने उस ज़मीन को ख़रीदा है तो इस बारे में उस ने पद्मिनी से बात की और कहा के अब उस बग़ीचे में टहलने के लिए न जाये क्यों के शहर के लोगों ने ज़मीन को खरीद लिया है. तो पद्मिनी ने अपने बापू को जवाब दिया के वह उस शहर के बाबू से मिल चुकी हैं और वह भला आदमी है, और उस्सने झूले को वहीँ रहने के लिए कहा और जब भी मैं करे जाकर झूलने को भी कहा. तब पद्मिनी के बूढ़ा बाप ने कहा, “मैं भी मिलना चाहूंगा उस शहरी साहिब से क्यों के हमारा भी ज़मीन है पहाड़ी के तरफ जो अब बेच देना चाहिए, तो उस से पूछता अगर कोई शहर से खरीदने वाला है, शहर के लोग दाम देंगे ज़मीन की यहाँ के लोग तो सस्ते में मांगेंगे उस ज़मीन को!” तो पद्मिनी ने कहा, “चाह आज अगर वह आदमी मिला तो उस से कहदूंगी के वह आप से मिले.”

पद्मिनी ने इंतज़ार की अपने पिता को खेत जाने को और जैसे hi वह चला गया वह दावती गयी सर्वानंद की ज़मीन की तरफ….. वहां पोहोचते hi रुक गयी उस्सको झूले पर बैठा देख कर और हम्प्टी हुवी सर्वनाड़ की ेंखों में देखती रही उस के सामने कड़ी. सर्वानंद ने उस्सको हम्प्टी हुवे देखा और उस्सकी चोली में उस्सकी चूचियां ऊपर निचे हो रहे थे हांपने की वजह से और सर्वानंद को उस्सकी छाती एक्साइट कर रहा tha…uss ने कैमरा लिया और खड़ा हो कर उस्सकी छाती को ज़ूम कर एकांत तसवीरें li….Uss वक़्त पद्मिनी ने अपना चेहरा हाथों में छुपा लिया तब सर्वानंद उसस्के पास जाकर उसस्के हाथों को चेहरे से हटते हुवे उस्सको अपनी बाहों में लिया और पद्मिनी ने ज़ोरों से अपनी नाज़ुक बाज़ुओं को सर्वानंद के जिस्म से लपेटा…… सर्वानंद का लुंड एक दम खड़ा होगया था और पद्मिनी की जिस्म पर पंत के अंदर से hi रागढ रहा था और पद्मिनी उस्सको अछि तरह से फील कर रही और उस्सको पता था के सर्वानंद खड़ा हुवा है…… पद्मिनी जैसे बेहोश हो रही थी उसस्के बाहों में और खुद को सर्वानंद के आग़ोश में घुलने diya…dhire धीरे सर्वानंद ने अपने हाथों को उस्सकी छोटी सी तंग चोली पर पोंछाया और सीडी उस्सकी चूचियों को सहलाते हुवे उस्सको दबाया हलके से और पद्मिनी की फिर से ‘आह’ निकली और उस ने अपनी ेंखें बांध कर्ली….. आहिस्ते आहिस्ते सर्वानंद के होंठ पद्मिनी के छाती पर गया और उस्सने पद्मिनी की बूब्स की ऊपरी वाले हिस्से को चूमना शुरू kiya…Padmini की जिस्म कम्प रही थी उस के अघोष में उस्सकी होंठ भी थरथरा रहे थे, सर्वानंद पहला मर्द था जो यह सब कर रहा था उस के साथ और पद्मिनी का मैं गहरायिओं तक जाने को उतावला हो रहा था…… पद्मिनी उस वक़्त सब एक्सपीरियंस करना चाहती thi….woh बिल्कुल तैयार थी सेक्स के लिए उस ने अपने मैं में सोच लिया था चाहे कुछ भी हो वह इश्क की गेहराई को चख कर रहेगी……

मगर सर्वानंद किआ सब करने को तैयार था? उस्सको पता था के पद्मिनी एक गाओं की भोली भाली लड़की है और वह उस का फायदा खूब उठा सकता था मगर यह सिर्फ सर्वानंद को पता था के वह शादी शुदा और दो बड़े बेटों का बाप है, पद्मिनी को यह सब पता नहीं था…. तो किआ सर्वानंद उस्सकी जवान जिस्म की आग को बुझाता? सर्वानंद कश्मकश में था…. करने को बहोत hi मैं कर रहा था मगर अपने पत्नी और बेटों के बारे में भी सोच रहा था और पुलिस केस को भी सोच रहा था सब करते वक़्त…. कहीं बात बाहर गयी और इस लड़की ने पुलिस केस कर दिया तो?? यह सब सोचते सोचते सर्वानंद का लुंड नरम हो गया और अचानक उस ने पद्मिनी को चोर दिया….. पद्मिनी को जब छोरा तो पद्मिनी हैरान होकर पूछ पड़ी, “किआ हुवा जी? मुझसे कोई ग़लती हुवी किआ?” सर्वानंद ने अपने पेशानी को अपने हाथों में लेते हुवे पद्मिनी के चेहरे में देखते हुवे कहा, “नहीं तुम से कोई ग़लती नहीं हुवी… मगर मुझसे ग़लत हो रहा hai….pehle मुझको तुम्हें अपने बारे में बता देना चाहिए तब अगर तुम राज़ी हो तो हम आगे बाहर सकते हैं….”

पद्मिनी नखरें करते हुवे कहा, “मुझे कुछ भी नहीं जानना है आप के बारे में आप मेरे सामने हो और मुझको बहोत अच्छे लगते हो बस मैं इतना hi जानती हूँ और कुछ नहीं जाने की ज़रुरत है mujhko..aap मेरे सपनों के राजा हो जी…” सर्वानंद ने सर हिलाते हुवे कहा, “बहोत भोली हो तुम, किआ नाम है हाँ पद्मिनी तुम्हारे बापू ने फुकरा था कल, हाँ तो पद्मिनी तुम एकदम भोली हो….” पद्मिनी मुस्कुराते हुवे बोली, “इतनी भी भोली मत समझना मुझको पहरहि लिखी हूँ, ी कैन टॉक एंड व्रिठे वैरी गुड इंग्लिश एंड ी बेट यू विल फ़ैल िफ़ ी व्रिठे ान एस्से टाइप लेटर…” सर्वानंद सच में चाहोंक गया उस को इंग्लिश में बात करते हुवे सुनकर…… तब पद्मिनी से पूछने पर उस्सने समझाया के उस ने बा तक पहरहि है मगर फ़ैल हो गयी थी तो उसस्के पिता ने घर पर रहने को कहा…..

सर्वानंद ने सोचा एक बा तक पढ़ी हुवी लड़की तो बहोत कुछ जानती होगी, और हो भी सकता है के किसी और मर्द के साथ सो चुकी है…. तब उस के मैं में सवाल जागे और उस ने सवाल किया डायरेक्टली पद्मिनी से….. “तुम ने कहा था के मैं पहला मर्द हूँ जो तुमको किश किया वग़ैरा वग़ैरा किआ यह सच है?” पद्मिनी बोली, “कॉलेज गयी हूँ इस्सके यह तो मतलब नहीं नाह के किसी मर्द के साथ गयी हूँ!!” सर्वानंद ने फिर भी और पुछा, “तुम कुंवारी हो बिल्कुल?” पद्मिनी ने जवाब दिया, « हाँ जी कुंवारी हूँ और किसी मर्द ने मुझको चुवा तक नहीं आप से पहले ! »

सर्वानंद : चाह तुम ने कभी सोचा के मेरा उम्र किआ होगा ?

पद्मिनी : मुझे इस से कोई लेना देना नहीं जी.

सर्वानंद : और अगर मैं शादी शुदा हुवा तो ?

पद्मिनी: वह तो लगता है जी के आप शादी शुदा हो, बचे भी होंगे है नाह?

सर्वानंद को हैरानी हुवी के उस्सको पता है के वह शादी शुदा है फिर भी वह उसस्के साथ इश्क के चाकर में पद रही है, और सेक्स केलिए तैयार है यह कुछ समझ में नहीं आया सर्वानंद को तो उस ने फिर पुछा…….

“चाह तुमको यह अनुमान है के मैं शादी शुदा हूँ फिर भी तुम मुझसे….”

पद्मिनी: तो इस में किआ है जी, आप मुझको पसंद आये और गाओं में तो कई लड़कियों ने शादी शुदा मर्द के साथ शादी की हुवी है!

यह सुनकर सर्वानंद का सर चक्र सा गया और उस ने सोचा के पद्मिनी तो शादी की सोच रही है उसस्के साथ यानि के एक दूसरी पत्नी बनेगी वह सर्वनाड़ की और सर्वनाड़ को पता है के उस्सकी पत्नी धमाल मचा देगी इस बात को लेकर अगर यह हुवा तो और फिर शहर में जो स्टेटस है सर्वनाड़ की सब ख़राब हो सकता है अगर उस्सने दूसरी शादी की तो क्यों के उसस्के पत्नी की जायदात मैं से उसस्के ससुर ने आधा से भी ज़्यादा उस्सको दिया है बिज़नेस पार्टनर बना कर तो अगर वह दूसरी शादी करेगा तो सब लुठ जाएगा यह सोचकर सर्वनाड़ का दिमाग़ हिल गया…..

और पद्मिनी खुद सर्वनाड़ के हाथों को पकड़े उस्सको उस पत्थर के तरफ खींचती लगाई और वहां पोंछे तो वह सर्वनाड़ के गॉड में बैठ गयी जैसे कल बैठी थी और दोनों किश करने लगे…… उस्सकी छोटी सी स्कर्ट बिल्कुल ऊपर थी जाँघों पर और सर्वानंद का हाथ वहां पद्मिनी ने खुद अपने हाथों से उस्का हाथ अपने जाँघों पर रखा और अपने नाखूनों को सर्वानंद के पीठ पर गरती गयी किश में डूबे हुवे…. किश करते दौरान पद्मिनी ने खुद अपने हाथ को सर्वानंद के पंत के ऊपर उसस्के लुंड पर रखा और सहलाने लगी और सर्वानंद ने उस्सको ज़ोरों से जाकर कर कुछ इस तरह पद्मिनी को लपेटा के उस्सकी जांघ ठीक उसस्के लुंड पर पद गया और पद्मिनी ने दोनों जाँघों को दोनों तरफ किया ताके सर्वानंद की लुंड की रागढ जाँघों के बीच से होकर उस्सकी छूट तक पोंहचे…. ऊपर मुंह में मुंह थे और दोनों एक दूसरे के जीब का रस निचोड़ रहे थे और दोनों के हाथ एक दूसरे के जिस्म पर फेर रहे थे….. सर्वानंद ने इस बार धीरे से उस्सकी चोली खोल डाला और बग़ैर ब्रा के वह नरम, मुलायम कुंवारी चूचियां उसस्के ेंखों के सामने सर्वानंद को दीवाना बना रहे थे….. उस्सने बिल्कुल हलके से पूरा ख़याल करते हुवे, एकदम सावधानी बरकते हुवे उन् चूचियों को अपने हाथों से चुवा, सहलाया, हाथ फेरा, फिर बहोत हलके से अपने होंठो से चुवा, होंठों को हलके से फेरा, निप्पल को आराम से एक मुलायम चीज़ को जैसे बिल्कुल सावधानी से संभाला जाता है उस तरह से संभालते हुवे उस्सको जीब से चुवा फिर आहिस्ते आहिस्ते चूमने के बाद चुस्सना शुरू किया…..

यह सब जिस वक़्त सर्वनाड़ कर रहा था, पद्मिनी तरप रही थी सिसकियों के साथ और उस्सकी जिस्म करवट लेना छह रही थी मगर कैद थी सर्वनाड़ की बाहों में…. उस्सकी जुबां से ‘ीिशशषस, ऊऊफफफफ, आआअह्ह्ह’ की आवाज़ें निकल रही थी मगर धीमी धीमी आवाज़ में….. सर्वानंद ने अपनी पंत की ज़िप को खोला और लुंड को बाहर निकलते हुवे पद्मिनी की हाथ को उस पर rakha….Padmini शर्माते हुवे उस्सकी लुंड को हाथों में लिया मगर ेंखों को बांध कर ली….. सर्वानंद पद्मिनी के हाथ में अपने लुंड को रगड़ता गया कमर को हिलाते हुवे, फिर लुंड को उस्सकी खूबसूरत उभरे हुवे जाँघों के बीच रगड़ा… और पद्मिनी ने दोनों जाँघों को फैलादी ताके सर्वानंद को आसानी हो करने के लिए……

तब सर्वनाड़ ने उठकर उस्सकी स्कर्ट को और ज़्यादा ऊपर उठाया कमर तक और उस्सकी छूट को चूमना शुरू किया पंतय के ऊपर hi, तो देखा के पंतय एकदम भीगी हुवी थी ठीक छूट की जगह par…Sarvanand ने हलके से, धीरे धीरे पंतय को उतारना शुरू किया …पद्मिनी दीवानी की तरह उस पत्थर पर लेते, आम की पेयर की चयन में अपनी जिस्म को रेंगती गयी ‘िस्ष्ह ाः उफ़’ की आवाज़ निकलते हुवे….. आखिर में सर्वानंद का मुहं पद्मिनी की छूट तक गया और उस्सको चाटने लगा धीरे धीरे…. पद्मिनी ने सर्वनाड़ के सर के बालों को अपने उँगलियों में ज़ोर से जकरते हुवे अपने तरफ खींचने लगी तब तक सर्वनाड़ उस्सकी छूट का रस चाट रहा था…..

ाअखिर में सर्वनाड़ ने सर ऊपर उठाकर चारों तरफ देख कर अपने लुंड को पद्मिनी की छूट के ऊपर रगड़ना शुरू किया….. पद्मिनी अंदर लेना चाहती थी उसस्के लुंड को मगर सर्वनाड़ ने कहा, “नहीं तुम कुंवारी हो, वर्जिन HO…TO वर्जिन रहो मैं तुमको भी और अपने आप को भी खुश कर लूंगा ऐसे HI…….” और एक्सपीरियंस तो था hi ussko…uss ने कुछ इस तरह से किया अपने रागढ को के पद्मिनी जड़ गयी उस से पहले और उस्का पिचकारी भी छूटा पद्मिनी के पथ के ऊपर जिस पर पद्मिनी ने अपने हथेली को रगड़ते हुवे मसला उस्सकी वीर्य को…… फिर दोनों ने एक दूसरे को बाहों में लिए देर तक किश करते गए और आखिर में पद्मिनी ने कहा के उस्का बापू उस से मिलना चाहता है ज़मीन बेचने के बारे में……

यह रहा एक बाप, bête से पहले उस्सकी पत्नी की छूट को चाट चुक्का था अपने लुंड को रागढ चुक्का था और अपना पानी छोड़ चुक्का था उस कुंवारी जिस्म पर…..

तो बे कॉन्टिनोएड……………… (2100 टोटल ऑफ़ 5000 फ्रॉम बोथ उपदटेस वर्ड्स)
 
अपडेट 59

दोनों का मिलने का सिलसिला जारी रहा तक़रीबन एक 20 दिनों तक. हर रोज़ एक या दो बार सेक्स करते थे दोनों मगर बिना पेनेट्रेशन के. पद्मिनी उसस्के बिना अब रह नहीं पा रही थी और न hi सर्वानंद रह सकता था उस से मिले बिना. सर्वानंद ने पद्मिनी की जिस्म की हर एक कोने को तराश चुक्का था, उस्सकी गरम जिस्म को सर से पाऊँ तक जान चुक्का था, कहाँ टिल है, कहाँ पैदाइशी निशान है सब कुछ जान चुक्का tha…..Usski चूचियां और जांघ बेहद पसंद था सर्वनाड़ को और तारीफ़ किया करता था इन दोनों पार्ट्स के.

सर्वानंद ने एक मोबाइल खरीद कर गिफ्ट दिया पद्मिनी को और जब वो वापस चला जाता था तो दोनों संस किया करते थे एक दूसरे ko…kabhi कभी तो रात भर संस करते थे और सर्वनाड़ अपनी पत्नी से चुप कर पद्मिनी से कांटेक्ट रखता था. और अक्सर रातों को सेक्स भी होता था संस द्वारा….. पद्मिनी तरप जाती थी और उस्सकी छूट भीग जाती थी सिर्फ सर्वनाड़ की संस से और बड़ी बेचैनी के साथ पद्मिनी दूसरे दिन का इंतज़ार करती रहती प्यास बुझाने को उसस्के साथ. कहना यह चाहिए के रातों को अपने घर से सर्वनाड़ पद्मिनी को तैयार करता था संस से, और दूसरे दिन उन् तैयारियों का फायदा उठता था.

सर्वानंद ने बहोत सारे दूसरे तोहफे भी दिए पद्मिनी को …हर रोज़ कुछ न कुछ लाया करता था उस के लिए. कभी नए कपडे, तो कभी पेर्फुमेस, या मेक उप के सामान. पद्मिनी दीवानी हो चुकी थी उस के.

अब क्यों के पद्मिनी का बाप सर्वानंद से मिलना चाहता था अपने ज़मीन के बारे में तो एक रोज़ बग़ीचे में सेक्स के बाद सर्वानंद पद्मिनी के घर गया उस के पिता से मिलने के लिए.

पद्मिनी का बाप कोई 55/58 का अधेड़ आदमी था और उस घर में सिर्फ पद्मिनी और वो रहते थे, उस्सकी पत्नी का देहांत हो चुक्का था 7 साल पहले hi. और कोई अवलाद नहीं थी. खेतों की कड़ी धुप में मज़दूरी करने की वजह से उस के चमड़ी का रंग झुलस गया था और सेंकरों झुर्रियां नज़र आ रहे थे उस के चेहरे पर और बाज़ुओं पर भी. सर्वानंद को ताजुब हुवा के वैसे आदमी के यहाँ पद्मिनी जैसे अप्सरा स्वरुप बेटी है. कोई नहीं यकीन करेगा के पद्मिनी उस मज़दूर की बेटी है. ज़मीन आसमान का फर्क था बाप बेटी में. कहाँ पद्मिनी की कोमल गोरी रंग और उस आदमी के धुप में काळा पड़े रंग….. सर्वानंद ने सोचा के अगर पद्मिनी भी खेतों को जाती तो शायद उस्का रंग भी वैसी हो जाती या अपने आप को सोच रहा था के वो भी अगर 10 बीस साल तक खेत में काम करेगा तो वो भी वैसा hi हो जाएगा….. दिल hi दिल में उस ने सभी खेतों में काम करने वालों को सलूट मादा!

दोनों बातें करने लगे. ज़मीन की बातें हो गयी तो अचानक पद्मिनी का बाप ने सर्वानंद से कहा, «अब बस एक चिंता है मुझको भाई ! बस इस पद्मिनी की शादी हो जाये तो मैं आराम से बाकी के दिन जी लूंगा. कोई अच्छा सा लड़का नहीं है नज़र में भाई?” पद्मिनी एक कोने में कड़ी उन् के बातें सुन रही थी सर्वनाड़ को एक गिलास पानी देने के बाद. जब उस्सकी शादी की बात चेदि गयी तो सर्वानंद के चेहरे से रंग उड़गया और पद्मिनी एक दरवाज़े के पीछे कड़ी सर्वनाड़ को झांक रही थी मुस्कुराते हुवे…..

सर्वनाड़ ने बूढ़े से कहा, “धन्य हो आप जैसे पिता. खुद धुप में झुलस कर अपनी एक लौटी बेटी को पाल पास कर इतनी बड़ी कर गए मगर उस पर एक आंच भी नहीं अन्य दिया, धुप का एक किरण भी नहीं छू पाए आप की बेटी को, कितना नाज़ों से पाला होगा आप ने इस्को… धन्य हो आप, मेरा प्रणाम है आप को.” सर्वानंद बहोत इम्प्रेस हुवा बाप बेटी की फिजिकल अप्पेअरनेस को देख कर……

अब जब उस आदमी ने किसी लड़के को देखने की बात की पद्मिनी के लिए तो सर्वानंद के दिमाग़ में अपने bête रमेश की याद आयी और मतलबी तो वो था hi उस ने बूढ़े की ज़मीन को सोचा और सोच लिया के अगर रमेश की शादी हो गयी पद्मिनी से तो ज़मीन भी मिलजाएगा और पद्मिनी भी…… तो उस ने बूढ़े से कहा के वो ज़रूर एक अचछह लड़का देखेगा पद्मिनी के लिए…..

पद्मिनी के पिता से वार्तालाब के बाद सर्वानंद जब वापस जाने लगा तो पद्मिनी उसस्के साथ गयी बग़ीचे तक चोर्ने को उससे…. जब दोनों अकेले होगये तो पद्मिनी उसस्के छाती पर हलके हलके घूंसे मारते हुवे झूट मूठ के ग़ुस्सा करते हुवे कहा, “किआ लड़का देखोगे मेरे लिए आप? क्यों मुझसे मैं भर गया किआ ab?”…Sarvanand ने कहा, “नहीं मैं सीरियसली तुम्हारे लिए एक लड़का देखूंगा….” पद्मिनी थोड़ा नाराज़ जैसे होकर कहा, “नहीं चाहिए कोई लड़का वङ्का मेरे लिए, आप बस ठीक हो मेरे लिए….”

सर्वानंद: “ ज़रा सोचो, अगर एक ऐसा लड़का मिलगया जिसके साथ तुम्हारी शादी हो जाये और फिर भी तुम मेरे ेंखों से सामने रहो तो कैसा रहेगा?”

पद्मिनी: “ किआ मतलब? मैं नहीं समझी.”

सर्वानंद: “देखो स्वीटहार्ट, हम दोनों के शादी के लिए न तो तुम्हारा बाप मानेगा, न hi मेरी पत्नी, और हम दोनों को किश चीज़ से मतलब है? हम बस एक दूसरे से प्यार कर सके, एहि नाह, तो अगर ऐसे हो गया के जहाँ तुम्हारी शादी हो मेरा वहां आना जाना नार्मल तरीके से हो तब तो हम दोनों फिर भी मिलते raheinguey…hai नाह?”

पद्मिनी: “ आप किआ कह रहे हो जी मेरे कुछ समझ में नहीं ारः है, मुझे तो बस आप के साथ रहना है हाँ!”

सर्वानंद: “वही तो!! तुम मेरे साथ hi रहोगी किसी और से शादी करने पर भी!”

पद्मिनी: “यह कैसे हो सकता है जी? यह तो नामुमकिन है!”

सर्वानंद: “बिल्कुल मुमकिन होसकता है अगर तुम राज़ी हुवी तो!”

पद्मिनी: “कैसे? किआ करना होगा मुझको?”

सर्वानंद ने उस्सको बाहों में लेकर किश करते हुवे, और उसस्के गर्दन पर अपने होंठों को फेरते हुवे कहा, “देखो मैं तुम्हारी शादी अपने bête से करवा देता हूँ, फिर तो तुम मेरे घर में hi मेरे hi साथ रहोगी नाह!!”

पद्मिनी उसस्के बाहों से निकलते हुवे कहती है, “चीः!! यह किआ बात हुवी !! हरगिज़ नहीं !»

सर्वानंद ने बहोत फुसलाकर समझा बुझा कर अपने प्यार का वास्ता देते हुवे कहा के अगर वो हमेशा उसस्के साथ रहना चाहती है तो बस एहि एक तरीका है….

पद्मिनी ने कहा दो मर्दों के साथ शारीरिक सम्बन्ध उस्सको बिल्कुल ठीक नै लग रही है, वो भी उसस्के अपने bête के साथ याने के दोनों बाप और बेटे के साथ शारीरिक सम्बन्ध ग़लत बात है…… फिर भी सर्वानंद ने बहोत समझाया और ज़िन्दगी भर की आराम मिलेगी उस्सको और बहोत साडी सुभिधाएँ प्राप्त होगी वग़ैरा वग़ैरा कहकर सर्वानंद ने पद्मिनी को बहोत अपने जाल में फंसने की कोशिश की…… मगर पद्मिनी का मैं तैयार नहीं था इस बात से और एक छोटी सी झगड़ा कर बैठी सर्वानंद के साथ और वो ग़ुस्सा होकर अपने 4क्ष4 को स्टार्ट करके शहर वापस चला गया…… पद्मिनी फुंकारती रही मगर वो नहीं रुका…..

उसस्के जाने के बाद पद्मिनी रोने lagi….yeh उस्सकी ज़िन्दगी में पहली बार थी के कोई उस से रूठा हुवा था….. उस ने बहोत सारे संस सेंड किये मगर सर्वानंद ने एक भी रिप्लाई न kiya….balke जान बुझ कर उस्सने अपने मोबाइल में से सिम कार्ड hi निकल डाला….. पद्मिनी को तड़पने के लिए……

तो बे कॉन्टिनोएड…………
 
अपडेट 60

अब पद्मिनी का बहोत बुरा हाल हुवा सर्वानंद से जुड़ा होकर. रातों वह सो नहीं पाती, दिन में बस मोबाइल का मुंह तकती रहती और संस पर संस भेजती रहती उस्सको. पागल जैसे होती जा रही थी, न खाना खाती न किसी से बात करती, सिर्फ सर्वानंद की याद में उस झूले पर बैठ कर रोटी रहती और उस्सको याद करती और उस्सकी राह देखती.

सर्वानंद ने जान बुझ कर वैसा किया क्यों के उस्सको पता था के पद्मिनी उस्सको बहोत चाहती है और जब के वह उस से दूर रहेगा तो वह तडपेगी और उस के बातों को मानेगी. मगर सर्वानंद अब एकदम सेक्सी सेक्सी बातें सोच रहा था उस के दिमाग़ में बहोत हलचल मची थी यह सोचकर के पद्मिनी की शादी वह अपने bête रमेश से करवाड़ेगा और खुद पद्मिनी को छोड़ेगा, उस्का लुंड सिर्फ खड़ा hi रहता यह सोच सोच कर और उस के मैं में पद्मिनी को बंहतने का सोच उस्सको और ज़्यादा hi एक्साइट कर रहा था…. सोचता था के रमेश से शादी करवा देने के बाद जब पद्मिनी को लुंड का मज़ा आजाएगा तब एक दिन पद्मिनी को किसी एक दोस्त के साथ भी बंटेगा बिस्तर पर…. उसस्के खयालात सिर्फ पद्मिनी के जिस्म से मज़ा लूटने का था…. उस्सको पद्मिनी एक बहोत hi हॉट, सेक्सी माल लग रहा tha…pyar तो पद्मिनी कर बैठी थी सर्वानंद से मगर सर्वानंद के दिल और मैं में सिर्फ वासना था पद्मिनी के लिए.

पद्मिनी हर रोज़ उस बग़ीचे में उस्का इंतज़ार करती और रोटी, जब सेल को डायल करती तो कभी रिस्पांस hi नहीं आती….. फिर भी पद्मिनी को यकीन था के सर्वनाड़ ज़रूर आएगा…. इंतज़ार में 7 दिन बीत गए…. पद्मिनी का रंग उतारर गया और उस का मैं किसी काम में नहीं लग रहा था, खाना पकती तो नमक कम या ज़्यादा दाल देती उस्का बापू पूछता रहता के किआ बात है क्यों इतनी उदास रहने लगी है तू तो चेहेक्ति थी हमेशा…. मगर पद्मिनी के पास कोई जवाब नहीं था देने को.

एक रात , सातवें दिन के रात को सर्वानंद ने अपने सिमकार्ड को मोबाइल में डाला तो देखा कोई 100 से ज़्यादा मेस्सगेस हैं पद्मिनी के तरफ से… सभी मेस्सगेस में पद्मिनी ने माफ़ी मांगी और उस्सको वापस आने को कहा है मगर एक संस में यह लिखा हुवा था- “ मैं तैयार हूँ सब वह करने को जा आप चाहते हो, आप के bête से शादी के लिए तैयार हूँ, करलूँगी शादी उसस्के साथ, मेरे लिए यह काफी होगी के आप मेरे नज़रों के सामने रहे और मैं आप से प्यार करती rahun….bus आप वापस आजाये, मैं हर रोज़ बग़ीचे में झूले पर बैठ कर रोटी हूँ, आप की बहोत याद सताती है, आप को बाहों में लेने के लिए तृप्ति हूँ आप अभी ाजावो नाह…. भगवान् के लिए मुझको इतना न satawo…jaldi से ाजावो नहीं तो मैं अपनी जान दे दूंगी. आप की मोबाइल क्यों स्विच ऑफ है? किआ इतना नाराज़गी मुझसे…….?”

तब सर्वनाड़ ने उस मैसेज को रिप्लाई किया रात को बारह बजे. उस ने लिखा, “मुझे बहोत ख़ुशी है के तुम तैयार हो मेरे bête से शादी के लिए, कल मैं तुमसे मिलने को ारः हूँ अब खुश?” पद्मिनी सोई नहीं थी वह तो हर लम्हा मोबाइल के साथ इंतज़ार में रहती थी 7 दिनों से, जब उस्सकी संस का टोन बजा तो ख़ुशी से उस्सने मोबाइल को हाथ में लेते हुवे सर्वानंद का मैसेज देख कर खिल uthi…usska दिल ज़ोरों से मचलने लगा और उस ने रीड किया के कल उस का आशिक वापस ारः है तो ख़ुशी से वह फूली न समायी……. ख़ुशी के ेंसू के साथ उस्सने रिप्लाई किया, “जिस पत्थर पर हम प्यार करते हैं उस के 100 कदम पीछे में एक छोटा सा झील है उस के बगल में एक झरना है वहां आना मैं आप का इंतज़ार बेसब्री से करुँगी, जल्दी आना, सवेरे आना मेरी जान.”

दूसरे दिन उस झरने के पास पद्मिनी भीगी हुवी, जिस्म के आग को ठंडी करती हुई कुछ ऐसे दिख रही थी जब सर्वनाड़ उसस्के पास पोंहचा, जैसे इस तस्वीर में…. बिल्कुल वैसी hi लिबास में थी….

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अब सर्वानंद भला कैसे चुप देख सकता था ऐसी मस्त पानी में भीगी हुवी सेक्सी जवान लड़की को…. वह भी गया पानी में पद्मिनी के पास और दोनों तरफ से आग लगी हुवी थी और उस आग को बुझाने के लिए पानी की ज़रुरत तो थी मगर जब दोनों मिले उस पानी में खुद जैसे आग लग गयी दोनों के गर्मी से…. सर्वनाड़ ने पद्मिनी की जिस्म को धीरे धीरे हौले हौले एक एक अंग को तराशता गया अपने उँगलियों को हर एक हिस्से पर फेरते हुए….. कुछ ऐसा मंज़र था यारो जैसे इन् तस्वीरों में है…..

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पद्मिनी की चूचियां साफ़ दिख रहे थे भीगे हुवे चोली में और सर्वानंद का बुरा हाल हो रहा था जिस डैम उस का जिस्म पद्मिनी की जिस्म से chuwa….usska लुंड एकदम मज़बूत खड़ा हुवा पद्मिनी के गांड पर छह रहा था और सर्वनाड़ रागढ रहा था हलके हलके, और ऊपर सर्वनाड़ के होंठ फेर रहे थे उस्सकी कांधों से लेकर धीरे धीरे चूचियों तक जाते huwe…Padmini ने अपना सर पीछे के तरफ किये हुवे थे गर्दन को उस तरफ झुकाये और सर्वानंद की करेस का मज़ा ले रही थी…. 7 दिनों तक उस से दूर रहकर आज पूरा भड़ास निकलना था….

आहिस्ते आहिस्ते दोनों के जिस्म की गर्मी ने एक दूसरे को इन्तहा तक जाने को मजबूर किया मगर सर्वानंद होश में था के पद्मिनी की कुंवारापन को बचाना चाहिए रमेश के लिए फिर तो मज़ा hi मज़ा है उसस्के लिए…. सर्वनाड़ ने अपने आप को बिल्कुल नंगा करते हुवे पामिनी के सामने आया और उस्सको अपने लुंड को पकड़ने को कहा…. पद्मिनी बैठ गयी निचे ज़मीन पर उस्का मोटा लम्बा तन्ना हुवा लुंड को अपने हाथों में लिए और सर्वानंद ने पद्मिनी के सर को हाथों में लिए उस्का मुंह अपने लुंड तक legaya…Padmini समझ गयी और अपने जीभ निकालते हुवे उसस्के लुंड के शुरुवात पर जीब को हलके से फेरा…. सर्वानंद उस्सकी सर को हाथों में दबाये अपने गर्दन को पीछे किये हुवे आवाज़ निकाली, “aaghghgh…shshshssss हाँ अंदर मुंह में लेलो nah….sssssss!” पद्मिनी मुस्कुराते हुवे अपनी ेंखों को ऊपर उठा कर सर्वनाड़ के चेहरों को देखते हुवे लुंड के पहले हिस्से को मुंह में लेती है जब के सर्वनाड़ कहँरते हुवे, “ोुह्ह्ह्ह aaaaah….issshshshsh” करता जाता है… अपने पैरों की उँगलियों पर खड़ा हो जाता है पद्मिनी की उस जीभ की रागढ की वजह से….. और फिर धीरे धीरे पद्मिनी उसस्के लुंड को और मुंह में अंदर लेती गयी और सर्वानंद पागल होता गया मज़े से…… जब पद्मिनी ने चुस्सना शुरू किया तो सर्वानंद का बुरा हाल था वह एक बाकी की तरह आवाज़ देता गया, “ाः ooooh…aaiiiiiie……” सर्वानंद की आवाज़ ाव्रत की आवाज़ जैसी होगयी वैसे चिलाती वक़्त जिस दम पद्मिनी उस्का लुंड चूस रहा था…. कोई 10 मिनट्स तक पद्मिनी ने उस्का लुंड नहीं छोरा, चूसती गयी और अपने मुंह में अंदर बाहर करती गयी उस लुंड को अपने दोनों हाथों में थामे और उस्सको एक केक की तरह टेस्टी लजतदार चाटते और चुस्ती हुवे…. फिर कुछ देर बाद पद्मिनी ने लुंड को शुरू से आखिर तक ुसस्पर अपना जीभ फेरा, सर्वनाड़ के बॉल्स तक पोह्ची और बॉल को होंठों से पाकर कर कुछ खिंचा फिर छोरा… सर्वानंद दीवाना होता जा रहा था और उस के दोनों पेयर कम्प रहे थे ….

पद्मिनी ऊपर उसस्के चेहरे पर देख भी रही थी और काम करती जा रही thi…usska मक़सद था सर्वनाड़ को बहोत खुश करना और मज़ा देना क्यों के 7 दिनों तक व्रत जो थे दोनों के!! आखिर में पद्मिनी का जीभ उस हिस्से पर पोंछा जहाँ गांड का छेद और लुंड की बॉल्स का अंत tha…wahan पर पद्मिनी ने अपना जीभ को कुछ इस तरह चलाया जैसे एक सांप अपनी जीभ चलाती hai…uss जीभ की रागढ से सर्वनाड़ की आवाज़ एकदम जानना होगया कहँरते हुवे……

बाद में आहिस्ते आहिस्ते पद्मिनी सर्वनाड़ के पथ से लेकर ऊपर तक चाटते हुवे ऊपर पोहंची उसस्के मुहं तक और सर्वनाड़ ने उस्का मुहं अपने मुहं में लेकर उस्सकी जीभ को चुस्सने लगा पद्मिनी को ज़ोरों से बाहों में जाकर और अपने लुंड को उस्सकी पथ ने नीचे रगड़ते हुवे…. कुछ देर बाद वैसे hi पोजीशन में रहने के बाद सर्वानंद ने पद्मिनी को घुमाया, उस्सकी पीठ को अपने आगे किया और पामिनी को झुकने को kaha….Padmini सब करने को तैयार थी उसस्के लिए….. सर्वनाड़ निचे बैठा और हौले के उस्सकी पंतय निकला और पद्मिनी के दोनों जाँघों के बीच चाटने लगा करीब उस्सकी गांड के….. फिर धीरे धीरे छूट के पास उस्का जीब पोंछा और पद्मिनी की भीगी हुवी छूट में से निकलती रस को छाता उस्सने और वह नमकीन लाज़त उसस्के चीभ को टर्र कर गया…. पद्मिनी ने ेंखें बांध कर्ली सर्वनाड़ की जीभ को अपने छूट पर फील करते हुवे और अपने जिस्म को रेंगती गयी सर्वानंद के अघोष में…..

आखिर में वह सब के बाद सर्वनाड़ ने अपने लुंड को पीछे, से hi क्यों के पद्मिनी उस वक़्त भी उस से पीठ किये हुवे झुकी हुवी थी एक भीगे पत्थर को पकड़े हुवे, उस ने लुंड को पद्मिन के गांड की छेद पर रद्दा और लुंड की हेड को उस छेद पर थूक से भीगा कर masla…jab के पद्मिनी ‘ूफ, ाः, आयी “ करती गयी, सर्वानंद को ज़्यादा मज़ा आरहा था पद्मिनी की धीमी धीमी आवाज़ से और फिर सर्वनाड़ गांड और दोनों गांड की ऊँचाई के बीच अपने लुंड को रगड़ता गया हाटों को सीधे करके पद्मिनी की चूचियों को मसलते हुवे ढाका देता गया बिना पेनेट्रेशन के और बहोत जल्द hi झड़ने भी लगा एक बूढ़े शेर की दहाड़ की तरह आवाज़ करते हुवे….. पद्मिनी के पीठ पर पूरा पानी गया और गांड के दोनों हिस्सों के बीच चुने लगा…. सर्वानंद ने पद्मिनी को जाकर कर पीछे से hi उस्सकी गर्दन पर अपनी डेंटन को गड़ता गया और लाल लाल मार्क्स चोर गया पद्मिनी के कन्धों और गर्दन पर पीछे के तरफ…..

दोनों हम्प्टी हुवे पानी से निकले और पद्मिनी अपने सारे कपडे निकाल कर निचोड़ रही थी फिर बाद में पेहेन भी लिए वही भीगे हुवे कपडे…. और दोनों उस पत्थर पर गए एक दूसरे को बाहों में लिए, प्यार में डूबे बिना कोई बात किये वहां लेते रहे घंटों तक जैसे के दो आशिक प्यार में डूबे हो…..

तो बे कॉन्टिनोएड…………… (1683 वर्ड्स)
 
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